Punjab State Board PSEB 10th Class Social Science Book Solutions History Chapter 6 बन्दा बहादुर तथा सिक्ख मिसलें Textbook Exercise Questions and Answers.
PSEB Solutions for Class 10 Social Science History Chapter 6 बन्दा बहादुर तथा सिक्ख मिसलें
SST Guide for Class 10 PSEB बन्दा बहादुर तथा सिक्ख मिसलें Textbook Questions and Answers
(क) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर एक शब्द/एक पंक्ति (1-15 शब्दों) में लिखें
प्रश्न 1.
हुक्मनामे में गुरु (गोबिन्द सिंह) जी ने पंजाब के सिक्खों को क्या आदेश दिए?
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर उनका राजनीतिक नेता होगा तथा वे मुग़लों के विरुद्ध धर्मयुद्ध में बंदे का साथ दें।
प्रश्न 2.
बंदा सिंह बहादुर दक्षिण से पंजाब की तरफ क्यों आया?
उत्तर-
मुगलों के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करने के लिए।
प्रश्न 3.
समाना पर बंदा सिंह बहादुर ने आक्रमण क्यों किया?
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर ने सिक्ख गुरुओं पर अत्याचार करने वाले जल्लादों को दण्ड देने के लिए समाना पर आक्रमण किया।
प्रश्न 4.
बंदा सिंह बहादुर की तरफ से भूणा गांव पर आक्रमण करने का क्या कारण था?
उत्तर-
अपनी सैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन प्राप्त करने के लिए।
प्रश्न 5.
बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा पर क्यों आक्रमण किया?
उत्तर-
सढौरा के अत्याचारी शासक उसमान खान को दण्ड देने के लिए।
प्रश्न 6.
बंदा सिंह बहादुर ने चप्पड़-चिड़ी तथा सरहिन्द पर क्यों आक्रमण किए?
उत्तर-
सरहिन्द के अत्याचारी सूबेदार वज़ीर खान को दण्ड देने के लिए।
प्रश्न 7.
सहों के युद्ध के क्या कारण थे?
उत्तर-
जालन्धर दोआबे के सिक्खों ने वहां के फ़ौजदार शम्स खां के विरुद्ध शस्त्र उठा लिए।
प्रश्न 8.
बजीर खां कहां का सूबेदार था? उसका बंदा सिंह बहादुर के साथ किस स्थान पर युद्ध हुआ?
उत्तर-
बज़ीर खां सरहिन्द का सुबेदार था। चप्पड़-चिड़ी में।
प्रश्न 9.
बंदा सिंह बहादुर की शहादत के बारे में लिखिए।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर को 1716 ई० को उसके साथियों सहित दिल्ली में शहीद कर दिया गया।
प्रश्न 10.
‘करोड़सिंघिया’ मिसल का नाम कैसे पड़ा?
उत्तर-
करोड़सिंघिया मिसल का नाम इसके संस्थापक करोड़सिंह के नाम पर पड़ा।
प्रश्न 11.
सदा कौर कौन थी?
उत्तर-
सदा कौर महाराजा रणजीत सिंह की सास थी।
(ख) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-50 शब्दों में लिखो
प्रश्न 1.
बंदा सिंह बहादुर तथा गुरु गोबिंद सिंह जी की मुलाकात का वर्णन करो।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर का आरम्भिक नाम माधोदास था। वह एक बैरागी था। 1708 ई० में गुरु गोबिन्द सिंह जी मुग़ल सम्राट् बहादुरशाह के साथ दक्षिण में गए। वहां माधोदास उनके सम्पर्क में आया। गुरु जी के आकर्षक व्यक्तित्व ने उसे इतना अधिक प्रभावित किया कि वह शीघ्र ही उनका शिष्य बन गया। गुरु जी ने उसे सिक्ख बनाया और उसे पंजाब में ‘सिक्खों’ का नेतृत्व करने के लिए भेजा। पंजाब में वह ‘बंदा सिंह बहादुर’ के नाम से विख्यात हुआ।
प्रश्न 2.
बंदा सिंह बहादुर की समाना की विजय पर एक नोट लिखिए।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर ने 26 नवम्बर, 1709 ई० को समाना पर आक्रमण किया। इसका कारण यह था कि गुरु गोबिन्द सिंह जी के दो साहिबजादों को शहीद करने वाले जल्लाद समाना के थे। समाना की गलियों में कई घण्टों तक लड़ाई होती रही। सिक्खों ने लगभग 10,000 मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया और नगर के कई सुन्दर भवनों को नष्ट कर दिया। हत्यारे जल्लाद परिवारों का सफाया कर दिया गया। इस विजय से बंदा सिंह बहादुर को बहुत-सा धन भी प्राप्त हुआ।
प्रश्न 3.
चप्पड़-चिड़ी तथा सरहिन्द की लड़ाई का वर्णन करो।
उत्तर-
सरहिन्द के सूबेदार वज़ीर खान ने गुरु गोबिन्द सिंह जी को जीवन भर तंग किया था। इसके अतिरिक्त उसने गुरु साहिब के दो साहिबजादों को सरहिन्द में ही दीवार में चिनवा दिया था। इसलिए बंदा सिंह बहादुर इसका बदला लेना चाहता था। जैसे ही वह सरहिन्द की ओर बढ़ा, हजारों लोग उसके झण्डे तले एकत्रित हो गए। सरहिन्द के कर्मचारी, सुच्चा नंद का भतीजा भी 1,000 सैनिकों के साथ बंदा की सेना से जा मिला। परन्तु बाद में उसने धोखा दिया। दूसरी ओर वज़ीर खान के पास लगभग 20,000 सैनिक थे। सरहिन्द से लगभग 16 किलोमीटर पूर्व में चप्पड़चिड़ी के स्थान पर 22 मई, 1710 ई० को दोनों सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ। वज़ीर खान को मौत के घाट उतार दिया गया। शत्रु के सैनिक बड़ी संख्या में सिक्खों की तलवारों के शिकार हुए। वज़ीर खान की लाश को एक पेड़ पर टांग दिया गया, । सुच्चा नंद जिसने सिक्खों पर अत्याचार करवाये थे, की नाक में नकेल डाल कर नगर में उसका जुलूस निकाला गया।
प्रश्न 4.
गुरदास नंगल के युद्ध का वर्णन करो।
उत्तर-
मुग़ल बंदा सिंह बहादुर की निरन्तर विजयों से आग-बबूला हो उठे थे। अत: 1715 ई० में एक विशाल मुग़ल सेना ने बंदा सिंह बहादुर पर आक्रमण कर दिया। इस सेना का नेतृत्व अब्दुस्समद खां कर रहा था। सिक्खों ने इस सेना का वीरता से सामना किया, परन्तु उन्हें गुरदास नंगल (गुरदासपुर से 6 कि० मी० दूर पश्चिम में) की ओर हटना पड़ा। वहां उन्होंने बंदा सिंह बहादुर सहित दुनीचन्द की हवेली में शरण ली। शत्रु को दूर रखने के लिए उन्होंने हवेली के चारों ओर खाई खोद कर उसमें पानी भर दिया। अप्रैल, 1715 ई० में मुग़ल सेना ने भाई दुनी चन्द की हवेली को घेर लिया। सिक्ख बड़े साहस और वीरता से मुग़लों का सामना करते रहे। आठ मास के लम्बे युद्ध के कारण उनकी खाद्य सामग्री समाप्त हो गई। विवश होकर उन्हें पराजय स्वीकार करनी पड़ी। बंदा सिंह बहादुर तथा उसके 200 साथी बन्दी बना लिए गए।
प्रश्न 5.
सबसे पहली मिसल कौन-सी थी? उसका वर्णन करो।
उत्तर-
सबसे पहली मिसल फैज़लपुरिया मिसल थी। इसका संस्थापक नवाब कपूर सिंह था। उसने सबसे पहले अमृतसर के निकट फैजलपुर नामक गांव पर अधिकार किया और इसका नाम ‘सिंहपुर’ रखा। इसलिए इस मिसल को ‘सिंहपुरिया मिसल’ भी कहते हैं। 1753 ई० में नवाब कपूर सिंह की मृत्यु हो गई और उसका भतीजा खुशहाल सिंह इस मिसल का नेता बना। उसके काल में सिक्खों का प्रभुत्व काफ़ी बढ़ गया और सिंहपुरिया मिसल का अधिकार क्षेत्र दूर-दूर तक फैल गया। 1795 ई० में उसके पुत्र बुद्ध सिंह ने इस मिसल की बागडोर सम्भाली। वह अपने पिता के समान वीर तथा योग्य न था। 1819 ई० में महाराजा रणजीत सिंह ने इस मिसल को अपने राज्य में मिला लिया।
(ग) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 100-120 शब्दों में लिखो
प्रश्न 1.
बंदा सिंह बहादुर की प्रारम्भिक विजयों का वर्णन करो।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर अपने युग का महान् सेनानायक था। गुरु साहिब का आदेश पाकर वह दिल्ली पहुंचा। उसने मालवा, दोआबा तथा माझा के सिक्खों के नाम गुरु गोबिन्द सिह जी के हुक्मनामे भेजे। शीघ्र ही हज़ारों की संख्या में सिक्ख उसके नेतृत्व में इकट्ठे हो गए। सेना का संगठन करने के पश्चात् बंदा सिंह बहादुर बड़े उत्साह से अत्याचारी मुग़लों के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करने के लिए पंजाब की ओर चल पड़ा।
यहां से उसका विजय अभियान आरम्भ हुआ।
- सोनीपत पर आक्रमण-बंदा सिंह बहादुर ने सबसे पहले सोनीपत पर आक्रमण किया। उस समय उसके साथ केवल 500 सिक्ख ही थे। परन्तु वहाँ का फ़ौजदार सिक्खों की वीरता के बारे में सुन कर अपने सैनिकों सहित शहर छोड़ कर भाग गया।
- भूणा (कैथल) के शाही खज़ाने की लूट-सोनीपत से बंदा सिंह बहादुर कैथल के पास पहुँचा। उसे पता चला कि कुछ मुग़ल सैनिक भूमिकर इकट्ठा करके भूना गांव में ठहरे हुए हैं। अत: बंदा सिंह बहादुर ने भूना पर धावा बोल दिया। कैथल के फ़ौजदार ने उसका सामना किया, परन्तु पराजित हुआ। बंदा बहादुर ने मुग़लों से सारा धन छीन लिया।
- समाना की विजय-भूणा के पश्चात् बंदा सिंह बहादुर समाना की ओर बढ़ा। गुरु तेग़ बहादुर जी को शहीद करने वाला जल्लाद सय्यद जलालुद्दीन वहीं का रहने वाला था। सरहिन्द में गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबजादों (जोरावर सिंह तथा फतेह सिंह) को शहीद करने वाले जल्लाद शासल बेग तथा बाशल बेग भी समाना के ही थे। उन्हें दण्ड देने के लिए 26 नवम्बर,1709 ई० को बंदा सिंह बहादुर ने समाना पर आक्रमण कर दिया। लगभग 10,000 मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया गया। सय्यद जलालुद्दीन, शासल बेग तथा बाशल बेग के परिवारों का सफाया कर दिया गया।
- घुड़ाम की विजय-लगभग एक सप्ताह पश्चात् बंदा सिंह बहादुर ने घुड़ाम पर धावा बोल दिया। वहां के पठानों ने सिक्खों का विरोध किया, परन्तु अन्त में उन्हें भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। घुड़ाम से भी सिक्खों को बहुतसा धन मिला।
- कपूरी पर आक्रमण-घुड़ाम के बाद बंदा सिंह बहादुर कपूरी पहुँचा। वहाँ का शासक कतमऊद्दीन हिन्दुओं पर बहुत अत्याचार करता था। बंदा सिंह बहादुर ने उसे पराजित करके मौत के घाट उतार दिया। उसकी हवेली को जला कर राख कर दिया गया।
- सढौरा की विजय-सढौरे का शासक उसमान खान भी हिन्दुओं पर अत्याचार करता था। भंगानी के युद्ध में गुरु जी की सहायता करने के कारण उसने पीर बुद्ध शाह को कत्ल करवा दिया था। इन अत्याचारों का बदला लेने के लिए बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा पर आक्रमण किया और उसमान खान को पराजित करके शहर को खूब लूटा ।
- मुखलिसपुर की जीत-अब बंदा सिंह बहादुर ने मुखलिसपुर पर धावा बोला और बहुत ही आसानी से वहां अधिकार जमा लिया। वहां के किले का नाम बदल कर लोहगढ़’ रख दिया । बाद में यही नगर बंदा सिंह बहादुर की राजधानी बना।
- चप्पड़-चिड़ी की लड़ाई तथा सरहिन्द की जीत-बंदा सिंह बहादुर का वास्तविक निशाना सरहिन्द था। यहाँ के सूबेदार वज़ीर खान ने गुरु गोबिन्द सिंह जी को जीवन भर तंग किया था। इसके अतिरिक्त उसने गुरु साहिब के दो छोटे साहिबजादों को सरहिन्द में ही दीवार में चिनवा दिया था। इसका बदला लेने के लिए बंदा ने सरहिंद पर आक्रमण कर दिया। सरहिन्द से लगभग 16 किलोमीटर पूर्व में चप्पड़-चिड़ी के स्थान पर 22 मई, 1710 ई० को दोनों सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ। सिक्ख बड़े उत्साह से लड़े और उन्होंने वज़ीर खान को मौत के घाट उतार दिया। उसकी लाश को एक पेड़ पर टांग दिया गया। सुच्चानंद जिसने सिक्खों पर अत्याचार करवाये थे, की नाक में नकेल डाल कर नगर में उसका जुलूस निकाला गया। सिक्ख सैनिकों ने शहर में भारी लूट-मार की।
- सहारनपुर तथा जलालाबाद पर आक्रमण-इसी समय बंदा सिंह बहादुर को पता चला कि जलालाबाद का गवर्नर जलाल खां अपनी हिन्दू प्रजा पर घोर अत्याचार कर रहा है। अतः वह जलालाबाद की ओर बढ़ा। मार्ग में उसने सहारनपुर पर विजय प्राप्त की। परन्तु उसे जलालाबाद को विजय किए बिना ही वापस लौटना पड़ा।
- जालन्धर दोआब पर अधिकार-बंदा सिंह बहादुर की विजयों से उत्साहित होकर जालंधर दोआब के सिक्खों ने वहां के फ़ौजदार शम्स खां के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और बंदा सिंह बहादुर को सहायता के लिए बुलाया। शम्स खां ने एक विशाल सेना सिक्खों के विरुद्ध भेजी। राहों के स्थान पर दोनों सेनाओं में एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें सिक्ख विजयी रहे।
- अमृतसर, बटाला, कलानौर तथा पठानकोट पर अधिकार-बंदा सिंह बहादुर की सफलता से उत्साहित होकर लगभग आठ हज़ार सिक्खों ने मुसलमान शासकों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। शीघ्र ही उन्होंने अमृतसर, बटाला, कलानौर तथा पठानकोट को अपने अधिकार में ले लिया। कुछ समय पश्चात् लाहौर भी उनके अधिकार में आ गया।
प्रश्न 2.
बहादुर शाह ने बंदा बहादुर के विरुद्ध जो युद्ध लड़े, उनका वर्णन करो।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर ने पंजाब के मुग़ल शासकों में हड़कंप मचा रखा था। जब यह समाचार मुग़ल सम्राट बहादुरशाह तक पहुंचा, तो वह क्रोधित हो उठा। उसने अपना सारा ध्यान पंजाब पर केन्द्रित कर दिया । 27 जून, 1710 ई० को वह अजमेर से पंजाब की ओर चल पड़ा। उसने दिल्ली तथा अवध के सूबेदारों तथा मुरादाबाद तथा इलाहाबाद के निज़ामों तथा फ़ौजदारों को आदेश दिया कि वे अपनी-अपनी सेनाओं सहित पंजाब में पहुंचे।
- अमीनाबाद की लड़ाई-बंदा सिंह बहादुर की शक्ति को कुचलने के लिए बहादुर शाह ने सर्वप्रथम फिरोज़ खान मेवाती तथा महावत खान के अधीन सिक्खों के विरुद्ध एक विशाल सेना भेजी। इस सेना का सामना बिनोद सिंह तथा राम सिंह ने 26 अक्तूबर, 1710 ई० को अमीनाबाद (बनेसर तथा तरावड़ी के बीच) में किया । उन्होंने महावत खान को एक बार तो पीछे धकेल दिया, परन्तु शत्रु की संख्या बहुत अधिक होने के कारण सिक्खों को अन्त में पराजय का मुंह देखना पड़ा।
- सढौरा की लड़ाई-जब बंदा सिंह बहादुर को सिक्खों की पराजय का समाचार मिला तो उसने अपने सैनिकों सहित शत्रु पर चढ़ाई कर दी। उस समय मुग़लों की विशाल सेना सढौरा में पड़ाव डाले हुए थी। 4 दिसम्बर, 1710 ई० को शत्र की सेना किसी उचित ठिकाने की खोज में निकली। अवसर का लाभ उठाकर सिक्खों ने उस पर धावा बोल दिया। उन्होंने शत्रु को बहुत क्षति पहुंचाई, परन्तु शाम को बहुत बड़ी संख्या में शाही सेना शत्रु की सेना से आ मिली। अतः सिक्खों ने लड़ाई छोड़ कर ‘लोहगढ़’ में शरण ली।।
- लोहगढ़ का युद्ध-अब बहादुर शाह ने स्वयं बंदा सिंह बहादुर के विरुद्ध कार्यवाही करने का निर्णय किया। उसने सिक्खों की शक्ति का पता लगाने के लिए वज़ीर मुनीम खान को किले की ओर बढ़ने का आदेश दिया। परन्तु उसने 10 दिसम्बर,1710 ई० को लोहगढ़ के किले पर आक्रमण कर दिया। उसे देखकर अन्य मुगल सरदारों ने भी किले पर धावा बोल दिया। सिक्खों ने शत्रु का डट कर सामना किया, परन्तु किले में खाद्य-सामग्री की कमी के कारण सिक्खों को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंत में बंदा सिंह बहादुर अपने सिक्खों सहित नाहन की पहाड़ियों की ओर निकल गया। ___ 11 दिसम्बर, 1710 ई० को मुनीम खान ने फिर से किले पर धावा बोल दिया और किले पर अधिकार कर लिया। अत: बहादुर शाह ने बंदा सिंह बहादुर का पीछा करने के लिए हमीद खान को नाहन की ओर भेजा। वह स्वयं सढौरा, बडौली, रोपड़, होशियारपुर, कलानौर आदि स्थानों से होता हुआ लाहौर जा पहुँचा।
- पहाड़ी प्रदेश में बंदा सिंह बहादुर की गतिविधियां-पहाड़ों में जाकर बंदा सिंह बहादुर ने सिक्खों के नाम हुक्मनामा भेजे। थोड़े समय में ही एक बड़ी संख्या में सिक्ख कीरतपुर में एकत्रित हो गए।
- सबसे पहले बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिन्द सिंह जी के पुराने शत्रु बिलासपुर के शासक भीमचन्द को एक ‘परवाना’ भेजा और उसे अधीनता स्वीकार करने के लिए कहा। उसके न करने पर बंदा ने बिलासपुर पर आक्रमण कर दिया। एक घमासान युद्ध हुआ जिसमें भीमचन्द तथा 1300 सैनिक मारे गए। सिक्खों को शानदार विजय प्राप्त हुई।
- बंदा सिंह बहादुर की विजय से शेष पहाड़ी राजा भयभीत हो गए। उनमें से कइयों ने बंदा सिंह बहादुर को नज़राना देना स्वीकार कर लिया। मण्डी के राजा सिद्ध सेन ने यह घोषणा कर दी कि वह सिक्ख गुरु साहिबान का अनुयायी है।
- मण्डी से बंदा सिंह बहादुर कुल्लू की ओर बढ़ा। वहाँ के शासक मान सिंह ने चालाकी से उसे कैद कर लिया, परन्तु जल्दी ही बंदा सिंह बहादुर वहां से बच निकलने में सफल हो गया।
- कुल्लू से बंदा सिंह बहादुर चम्बा रियासत की ओर बढ़ा। वहाँ के राजा उदय सिंह ने उसका हार्दिक स्वागत किया। उसने अपने परिवार में से एक लड़की का विवाह भी उसके साथ कर दिया। 1711 ई० के अन्त में बंदा के यहाँ एक पुत्र पैदा हुआ। उसका नाम अजय सिंह रखा गया।
- बहिरामपुर की लड़ाई-अब बंदा सिंह बहादुर रायपुर तथा बहिरामपुर के पहाड़ों से निकल कर मैदानी प्रदेश में आ गया। वहां जम्मू के फ़ौजदार बायजीद खां खेशगी ने उस पर आक्रमण कर दिया। 4 जून, 1711 ई० को बहिरामपुर के निकट लड़ाई हुई। इस लड़ाई में बाज़ सिंह तथा फतेह सिंह ने अपनी वीरता के जौहर दिखाए और सिक्खों को विजय दिलाई।
बहिरामपुर की विजय के पश्चात् बंदा सिंह बहादुर ने रायपुर, कलानौर तथा बटाला पर आक्रमण किए और इन स्थानों को अपने अधिकार में ले लिया, परन्तु उसकी ये विजयें चिर-स्थायी सिद्ध न हुईं। उसने फिर से पहाड़ों में शरण ली। परन्तु बहादुर शाह के अधीन मुग़ल सरकार उसकी शक्ति को कुचलने में असफल रही।
प्रश्न 3.
बंदा सिंह बहादुर की गंगा-यमुना के इलाके में लड़ी गई लड़ाइयों का वर्णन करो।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर की विजयों से जन साधारण में उत्साह की लहर दौड़ गई। लोगों को विश्वास हो गया कि बंदा ही उन्हें मुग़लों के अत्याचारों से मुक्ति दिला सकता है। बस फिर क्या था। देखते ही देखते बहुत-से हिन्दू तथा मुसलमान सिक्ख बनने लगे। उनारसा गाँव के निवासी भी सिक्ख बन गए। जलालाबाद का फ़ौजदार जलाल खां इसे सहन न कर सका। उसने वहाँ के बहुत-से सिक्खों को कैद कर लिया। उन सिक्खों को छुड़ाने के लिए बंदा सिंह बहादुर अपने सैनिकों को लेकर उनारसा की ओर चल पड़ा।
- सहारनपुर पर आक्रमण-यमुना नदी को पार करके सिक्खों ने पहले सहारनपुर पर आक्रमण किया। वहाँ का फ़ौजदार अली हामिद खान दिल्ली की ओर भाग गया। उसके कर्मचारियों ने सिक्खों का सामना किया, परन्तु वे परास्त हुए। नगर के अधिकतर भाग पर सिक्खों का अधिकार हो गया। उन्होंने सहारनपुर का नाम बदल कर भाग नगर’ रख दिया।
- बेहात की लड़ाई-सहारनपुर से बंदा सिंह बहादुर ने बेहात की ओर कूच किया। वहाँ के पीरज़ादे हिन्दुओं पर अत्याचार कर रहे थे। वे खुले तौर पर बाज़ारों तथा गलियों में गौ हत्या करते थे। बंदा सिंह बहादुर ने अनेक पीरज़ादों को मौत के घाट उतार दिया। कहते हैं कि उनमें से केवल एक पीरज़ादा ही जीवित बच सका जोकि बुलंद शहर गया हुआ था।
- अम्बेता पर आक्रमण-बेहात के उपरान्त बंदा सिंह बहादुर ने अम्बेता पर आक्रमण किया। वहाँ के पठान बड़े धनी थे। उन्होंने सिक्खों का कोई विरोध न किया। सिक्खों को वहाँ से बहुत-सा धन मिला।
- नानौता पर आक्रमण-21 जुलाई, 1710 ई० को सिक्खों ने नानौता पर आक्रमण किया। वहाँ के शेखज़ादे तीर चलाने में बड़े निपुण थे। वे सिक्खों के सामने डट गए। नानौता की गलियों तथा बाजारों में घमासान युद्ध हुआ। लगभग 300 शेखज़ादे युद्ध में मारे गए और सिक्खों को विजय प्राप्त हुई।
- उनारसा पर आक्रमण- यहाँ से बंदा सिंह बहादुर ने अपने मुख्य शत्रु अर्थात् उनारसा के जलाल खां की ओर ध्यान दिया। अपने दूत द्वारा उसने जलाल खां के पास एक पत्र भेजा। उसने लिखा कि वह कैदी सिक्खों को छोड़ दे तथा उसकी अधीनता स्वीकार कर ले। परन्तु जलाल खां ने बंदा सिंह बहादुर की इस मांग को ठुकरा दिया। उसने दूत का निरादर भी किया। परिणामस्वरूप बंदा सिंह बहादुर ने उनारसा पर भयंकर धावा बोल दिया। एक घमासान युद्ध हुआ जिसमें सिक्खों को विजय प्राप्त हुई। इस युद्ध में जलाल खां के दो भतीजे जमाल खां तथा पीर खां भी मारे गए।
प्रश्न 4.
पंजाब की तीन प्रसिद्ध मिसलों का वर्णन करो।
उत्तर-
मिसल अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है-एक समान। 1767 से 1799 ई० तक पंजाब में जितने भी सिक्ख जत्थे बने उनमें मौलिक समानता पाई जाती थी। इसलिए उन्हें मिसल कहा जाने लगा। प्रत्येक मिसल का सरदार अपने जत्थे के अन्य सदस्यों के साथ समानता का व्यवहार करता था। इसके अतिरिक्त एक मिसल का जत्थेदार तथा उसके सैनिक दूसरी मिसल के जत्थेदार तथा सैनिकों से भी भाई-चारे का नाता रखते थे। सिक्ख मिसलों की कल संख्या 12 थी। इनमें से तीन प्रसिद्ध मिसलों का वर्णन इस प्रकार है —
- फैजलपुरिया मिसल-फैजलपुरिया मिसल सबसे पहली मिसल थी। इस मिसल का संस्थापक नवाब कपूर सिंह था। उसने अमृतसर के पास फैजलपुर नामक गाँव पर कब्जा करके उसका नाम ‘सिंहपुर’ रखा। इसीलिए इस मिसल को ‘सिंहपुरिया’ मिसल भी कहा जाता है।
1753 ई० में नवाब कपूर सिंह की मौत हो गई और उसका भतीजा खुशहार सिंह फैजलपुरिया मिसल का नेता बना। उसने अपनी मिसल का विस्तार किया। उसके अधीन फैजलपुरिया मिसल में जालन्धर, नूरपुर, बहरामपुर, पट्टी आदि प्रदेश शामिल थे। खुशहाल सिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र बुध सिंह फैजलपुरिया मिसल का सरदार बना। वह अपने पिता की तरह वीर तथा साहसी नहीं था। रणजीत सिंह ने उसे हरा कर उसकी मिसल को अपने राज्य में मिला लिया। - भंगी मिसल- भंगी मिसल सतलुज दरिया के उत्तर-पश्चिम में स्थित थी। इस मिसल के क्षेत्र में लाहौर, अमृतसर, गुजरात तथा सियालकोट जैसे महत्त्वपूर्ण शहर शामिल थे।
रणजीत सिंह के मिसलदार बनने के समय भंगी मिसल पहले जैसी शक्तिशाली नहीं थी। इस मिसल के सरदार गुलाब सिंह तथा साहिब सिंह अयोग्य तथा व्यभिचारी थी। वे भांग व शराब पीने में ही अपना सारा समय बिता देते थे। वे अपनी मिसल के राजप्रबन्ध में बहुत रुचि नहीं लेते थे। अतः मिसल के लोग उनसे तंग आए हुए थे। - आहलूवालिया मिसल-जस्सा सिंह अहलूवालिया के समय वह मिसल बड़ी शक्तिशाली थी। इस मिसल का सुलतानपुर लोधी, कपूरथला, होशियारपुर, नूरमहल आदि प्रदेशों पर अधिकार था। 1783 ई० में इस मिसल के सबसे शक्तिशाली सरदार जस्सासिंह अहलूवालिया की मृत्यु हो गई। 1783 से 1801 ई० तक इस मिसल का नेता भागसिंह रहा। उसके बाद फतह सिंह आहलूवालिया उसका उत्तराधिकारी बना। रणजीत सिंह ने समझदारी से काम लेते हुए उससे मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित कर लिए और उसकी ताकत तथा सेवाओं का प्रयोग अपने राज्य विस्तार के लिए किया।
प्रश्न 5.
पंजाब में दिए गए मानचित्र पर बंदा सिंह बहादुर द्वारा किए गए युद्धों के स्थानों को दर्शाओ।
उत्तर-
विद्यार्थी अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।
PSEB 10th Class Social Science Guide बन्दा बहादुर तथा सिक्ख मिसलें Important Questions and Answers
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)
I. उत्तर एक शब्द अथवा एक लाइन में
प्रश्न 1.
गुरदास नंगल के युद्ध में सिक्ख क्यों हारे?
उत्तर-
गुरदास नंगल के युद्ध में सिक्ख खाद्य सामग्री समाप्त हो जाने के कारण हारे।
प्रश्न 2.
पंजाब में एक सिक्ख राज्य की स्थापना में बंदा सिंह बहादुर की असफलता का एक प्रमुख कारण बताएं।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर अपने साधु स्वभाव को छोड़ कर राजसी ठाठ-बाठ से रहने लगा था।
प्रश्न 3.
नवाब कपूर सिंह ने सिक्खों को 1734 ई० में किन दो दलों में बांटा?
उत्तर-
1734 ई० में नवाब कपूर सिंह ने सिक्खों को दो दलों में बांट दिया-‘बुड्ढा दल’ तथा ‘तरुण दल’।
प्रश्न 4.
सिक्ख मिसलों की कुल संख्या कितनी थी?
उत्तर-
सिक्ख मिसलों की कुल संख्या 12 थी।
प्रश्न 5.
फैज़लपुरिया, आहलूवालिया, भंगी तथा रामगढ़िया मिसल के संस्थापक कौन थे?
उत्तर-
नवाब कपूर सिंह, जस्सा सिंह आहलूवालिया, हरि सिंह तथा जस्सा सिंह रामगढ़िया ने क्रमश: फैजलपुरिया, आहलूवालिया, भंगी तथा रामगढ़िया मिसल की स्थापना की।
प्रश्न 6.
जय सिंह, सरदार चढ़त सिंह, चौधरी फूल सिंह तथा गुलाब सिंह ने क्रमशः किन-किन मिसलों की स्थापना की?
उत्तर-
जय सिंह, सरदार चढ़त सिंह, चौधरी फूल सिंह तथा गुलाब सिंह ने क्रमशः कन्हैया, शुकरचकिया, फुल्कियां तथा डल्लेवालिया मिसल की स्थापना की।
प्रश्न 7.
निशानवालिया, करोड़सिंघिया, शहीद अथवा निहंग तथा नक्कई मिसलों के संस्थापक कौन थे?
उत्तर-
रणजीत सिंह तथा मोहर सिंह, करोड़ सिंह, सुधा सिंह तथा हीरा सिंह ने क्रमशः निशानवालिया, करोड़सिंघिया, शहीद अथवा निहंग तथा नक्कई मिसलों की स्थापना की।
प्रश्न 8.
बंदा सिंह बहादुर को पंजाब में किसने भेजा था?
उत्तर-
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने।
प्रश्न 9.
माधोदास (बंदा सिंह बहादुर) के साथ गुरु गोबिन्द सिंह जी की मुलाकात कहां हुई थी?
उत्तर-
नंदेड़ में।
प्रश्न 10.
गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी को शहीद करने वाला जल्लाद कौन था?
उत्तर-
सैय्यद जलालुद्दीन।
प्रश्न 11.
सैय्यद जलालुद्दीन कहां का रहने वाला था?
उत्तर-
समाना का।
प्रश्न 12.
बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा में किस शासक को हराया था?
उत्तर-
उसमान खां को।
प्रश्न 13.
सढौरा में स्थित पीर बुद्ध शाह की हवेली आजकल किस नाम से जानी जाती है?
उत्तर-
कत्लगढ़ी।
प्रश्न 14.
बंदा सिंह बहादुर ने किस स्थान के किले को ‘लोहगढ़’ का नाम दिया?
उत्तर-
मुखलिसपुर।
प्रश्न 15.
गुरु गोबिन्द सिंह साहिब के दो छोटे साहिबजादों को दीवार में कहां चिनवाया गया था?
उत्तर-
सरहिन्द में।
प्रश्न 16.
बंदा द्वारा सुच्चानन्द की नाक में नकेल डाले जुलूस कहां निकाला गया था?
उत्तर-
सरहिन्द में।
प्रश्न 17.
बंदा सिंह बहादुर ने सरहिन्द विजय के बाद वहां का शासक किसे नियुक्त किया?
उत्तर-
बाज़ सिंह को।
प्रश्न 18.
बंदा सिंह बहादुर ने किस स्थान को अपनी राजधानी बनाया?
उत्तर-
मुखलिसपुर को।
प्रश्न 19.
सहारनपुर का नाम ‘भाग नगर’ किसने रखा था?
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर ने।
प्रश्न 20.
बंदा सिंह बहादुर की सिक्ख सेना को पहली बड़ी हार का सामना कब और कहां करना पड़ा?
उत्तर-
अक्तूबर 1710 में अमीनाबाद में।
प्रश्न 21.
मुग़ल सम्राट् बहादुर शाह की मृत्यु कब हुई?
उत्तर-
18 फरवरी, 1712 को।
प्रश्न 22.
बहादुर शाह के बाद मुग़ल राजगद्दी पर कौन बैठा?
उत्तर-
जहांदार शाह।
प्रश्न 23.
जहांदार शाह के बाद मुग़ल सम्राट् कौन बना?
उत्तर-
फरुख़सीयर।
प्रश्न 24.
अब्दुससमद खां ने सढौरा तथा लोहगढ़ के किलों पर कब विजय प्राप्त की?
उत्तर-
अक्तूबर 1713 में।
प्रश्न 25.
गुरदास नंगल में सिक्खों ने मुगलों के विरुद्ध कहां शरण ली?
उत्तर-
दुनीचंद की हवेली में।
प्रश्न 26.
दुनीचन्द की हवेली में बंदा सिंह बहादुर का साथ किसने छोड़ा?
उत्तर-
विनोद सिंह तथा उसके साथियों ने।
प्रश्न 27.
बंदा सिंह बहादुर को उसके 200 साथियों सहित कब गिरफ्तार किया गया?
उत्तर-
7 दिसम्बर, 1715 को।
प्रश्न 28.
बंदा सिंह बहादुर की शहीदी कब हुई?
उत्तर-
19 जून, 1716 को।
प्रश्न 29.
दल खालसा की स्थापना कब और कहां हुई?
उत्तर-
दल खालसा की स्थापना 1748 में अमृतसर में हुई।
प्रश्न 30.
महाराजा रणजीत सिंह का सम्बन्ध किस मिसल से था?
उत्तर-
शुकरचकिया मिसल से।
प्रश्न 31.
महाराजा रणजीत सिंह शुकरचकिया मिसल का सरदार कब बना?
उत्तर-
1797 ई० में।
प्रश्न 32.
करोड़सिंघिया मिसल का दूसरा नाम क्या था?
उत्तर-
पंजगढ़िया मिसल।
II. रिक्त स्थानों की पर्ति
- बंदा सिंह बहादुर ने उसमान खान को दण्ड देने के लिए …………. पर आक्रमण किया।
- बंदा सिंह बहादुर को उसके 200 साथियों सहित …………… ई० को गिरफ्तार किया गया।
- गुरु गोबिन्द सिंह साहिब के दो छोटे. साहिबजादों को दीवार में ……….. में चिनवाया गया था।
- बंदा सिंह बहादुर ने ……………. की नाक में नकेल डालकर सरहिंद में जुलूस निकाला।
- बंदा सिंह बहादुर ने सहारनपुर का नाम ………….. रखा।।
- गुरदास नंगल में सिक्खों ने मुग़लों के विरुद्ध ………….. की हवेली में शरण ली।
- दल ख़ालसा की स्थापना ………. ई० में हुई।
- बंदा सिंह बहादुर की शहीदी 1716 में …………. में हुई।
उत्तर-
- सढौरा,
- 7 दिसंबर, 1715,
- सरहिंद,
- सुच्चानन्द,
- भाग नगर,
- दुनीचंद,
- 1748,
- दिल्ली।
III. बहविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पंजाब में सिखों का नेतृत्व करने के लिए किसे भेजा?
(A) वज़ीर खां को
(B) जस्सा सिंह को
(C) बंदा सिंह बहादुर को
(D) सरदार राजेंद्र सिंह को।
उत्तर-
(C) बंदा सिंह बहादुर को
प्रश्न 2.
वजीर खां और बंदा सिंह बहादुर का युद्ध किस स्थान पर हुआ?
(A) चप्पड़-चिड़ी
(B) सरहिन्द
(C) सढौरा
(D) समाना।
उत्तर-
(A) चप्पड़-चिड़ी
प्रश्न 3.
बंदा सिंह बहादुर की शहीदी कब हुई?
(A) 1761 ई० में
(B) 1716 ई० में
(C) 1750 ई० में
(D) 1756 ई० में।
उत्तर-
(B) 1716 ई० में
प्रश्न 4.
भंगी मिसल के सरदारों के अधीन इलाके थे
(A) लाहौर
(B) गुजरात
(C) सियालकोट
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(D) उपरोक्त सभी।
प्रश्न 5.
आहलूवालिया मिसल का संस्थापक था
(A) करोड़ सिंह
(B) रणजीत सिंह
(C) जस्सा सिंह
(D) महा सिंह।
उत्तर-
(C) जस्सा सिंह
IV. सत्य-असत्य कथन
प्रश्न-सत्य/सही कथनों पर (✓) तथा असत्य/गलत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं
- बंदा सिंह बहादुर की शहीदी 1716 में दिल्ली में हुई।
- सदा कौर महाराजा रणजीत सिंह की माता थी।
- फैजलपुरिया मिसल को सिंहपुरिया मिसल भी कहा जाता है।
- बंदा सिंह बहादुर ने गुरु-पुत्रों पर अत्याचार का बदला लेने के लिए सरहिन्द पर आक्रमण किया।
- दल खालसा की स्थापना आनंदपुर साहिब में हुई।
उत्तर-
- (✓),
- (✗),
- (✓),
- (✓),
- (✗).
V. उचित मिलान
- नवाब कपूर सिंह – भंगी मिसल
- जस्सा सिंह आहलूवालिया – फैजलपुरिया मिसल
- हरि सिंह – रामगढ़िया मिसल
- जरसा सिंह रामगढ़िया – आहलूवालिया मिसल
उत्तर-
- नवाब कपूर सिंह-फ़ैज़लपुरिया मिसल,
- जस्सा सिंह आहलूवालिया-आहलूवालिया मिसल,
- हरि सिंह-भंगी मिसल,
- जस्सा सिंह रामगढ़िया-रामगढ़िया मिसल।
छोटे उत्तर वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1.
बंदा सिंह बहादुर के किन्हीं चार सैनिक कारनामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
बंदा सिंह बहादुर के सैनिक कारनामों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है —
- समाना और कपूरी की लूटमार-बंदा सिंह बहादुर ने सबसे पहले समाना पर आक्रमण किया और वहां भारी लूटमार की। तत्पश्चात् वह कपूरी पहुंचा। इस नगर को भी उसने बुरी तरह लटा।
- सढौरा पर आक्रमण-सढौरा का शासक उस्मान खां हिन्दुओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता था। उसे दण्ड देने के लिए बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा पर धावा बोल दिया। इस नगर में इतने मुसलमानों की हत्या की गई कि उस स्थान का नाम ही ‘कत्लगढ़ी’ पड़ गया।
- सरहिन्द की विजय-सरहिन्द में गुरु जी के दो छोटे पुत्रों को दीवार में जीवित चिनवा दिया गया था। इस अत्याचार का बदला लेने के लिए बंदा सिंह बहादुर ने यहाँ भी मुसलमानों का बड़ी निर्दयता से वध किया। सरहिन्द का शासक नवाब वजीर खां भी युद्ध में मारा गया।
- जालन्धर दोआब पर अधिकार-बंदा सिंह बहादुर की विजयों ने जालन्धर दोआब के सिक्खों में उत्साह भर दिया। उन्होंने वहां के फ़ौजदार शम्स खां के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और बंदा सिंह बहादुर को सहायता के लिए बुलाया। राहों नामक स्थान पर दोनों सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में सिक्ख विजयी रहे। इस प्रकार जालन्धर और होशियारपुर के क्षेत्र सिक्खों के अधिकार में आ गए।
प्रश्न 2.
बंदा सिंह बहादुर की शहीदी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
गुरदास नंगल के युद्ध में बंदा सिंह बहादुर तथा उसके सभी साथियों को बन्दी बना लिया गया था। उन्हें पहले लाहौर और फिर दिल्ली ले जाया गया। दिल्ली के बाजारों में उनका जुलूस निकाला गया और उनका अपमान किया गया। बाद में बंदा सिंह बहादुर तथा उसके 740 साथियों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने को कहा गया। उनके इन्कार करने पर बंदा सिंह बहादुर के सभी साथियों की हत्या कर दी गई। अन्त में 19 जून, 1716 ई० में मुग़ल सरकार ने बंदा सिंह बहादुर के वध का भी फरमान जारी कर दिया। उनके वध से पहले उन पर अनेक अत्याचार किए गए। उनकी आंखों के सामने उनके शिशु पुत्र के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। लोहे की गर्म सलाखों से बंदा सिंह बहादुर का मांस नोचा गया। इस प्रकार बंदा सिंह बहादुर शहीदी को प्राप्त हुआ।
प्रश्न 3.
पंजाब में एक स्थायी सिक्ख राज्य की स्थापना में बंदा सिंह बहादुर की असफलता के कोई चार कारण बताओ।
उत्तर-
संक्षेप में, बंदा सिंह बहादुर द्वारा पंजाब में स्थायी सिक्ख राज्य की स्थापना करने में असफलता के कारण निम्नलिखित थे —
- बंदा सिंह बहादुर के शाही रंग-ढंग-बंदा सिंह बहादुर साधुपन को छोड़ राजसी ठाठ-बाठ से रहने लगा था। इसलिए समाज में उनका सम्मान कम हो गया।
- अन्धाधुन्ध हत्याएं-लाला दौलत राम के अनुसार बंदा सिंह बहादुर ने अपने अभियानों में पंजाबवासियों की अन्धाधुन्ध हत्याएं की और उन्होंने क्रूर मुसलमानों तथा निर्दोष हिन्दुओं में कोई भेद नहीं समझा। इस रक्तपात के कारण वह हिन्दू और सिक्खों का सहयोग खो बैठा।
- शक्तिशाली मुग़ल साम्राज्य-मुग़ल साम्राज्य अभी इतना क्षीण नहीं हुआ था कि बंदा सिंह बहादुर और उसके कुछ हज़ार साथियों के विद्रोह को न दबा पाता।
- बंदा सिंह बहादुर के सीमित साधन-अपने सीमित साधनों के कारण भी बंदा सिंह बहादुर पंजाब में स्थायी सिक्ख राज्य की स्थापना न कर सका। मुग़लों की शक्ति का सामना करने के लिए सिक्खों के पास अच्छे साधन नहीं थे।
प्रश्न 4.
आहलूवालिया मिसल का संस्थापक कौन था? उसने इस मिसल की शक्ति को कैसे बढ़ाया?
उत्तर-
आहलूवालिया मिसल का संस्थापक जस्सा सिंह आहलूवालिया था।
- 1748 से 1753 ई० तक जस्सा सिंह ने मीर मन्नू के अत्याचारों का सफलतापूर्वक सामना किया। अन्त में मीर मन्नू ने जस्सा सिंह के साथ सन्धि कर ली।
- 1761 ई० में जस्सा सिंह ने लाहौर पर आक्रमण किया और वहां के सूबेदार ख्वाजा आबेद को पराजित किया। लाहौर पर सिक्खों का अधिकार हो गया।
- 1762 ई० में अहमदशाह अब्दाली ने पंजाब पर आक्रमण किया। कुप्पर हीड़ा नामक स्थान पर जस्सा सिंह को पराजय का मुंह देखना पड़ा, परन्तु वह शीघ्र ही सम्भल गया। अगले ही वर्ष सिक्खों ने उसके नेतृत्व में कसूर तथा सरहिन्द को खूब लूटा।
- 1764 ई० में जस्सा सिंह ने दिल्ली पर आक्रमण किया और वहां खूब लूट-मार की।
प्रश्न 5.
रणजीत सिंह के उत्थान के समय मराठों की स्थिति कैसी थी?
उत्तर-
अहमदशाह अब्दाली ने मराठों को पानीपत के तीसरे युद्ध (1761) में हरा कर पंजाब से निकाल दिया था। परन्तु 18वीं शताब्दी के अन्त में वे फिर से पंजाब की ओर बढ़ने लगे।
मराठा सरदार दौलत राव सिंधिया ने दिल्ली पर अपना अधिकार जमा लिया था। उसने यमुना तथा सतलुज के मध्य के प्रदेशों पर भी आक्रमण करने आरम्भ कर दिए थे। परन्तु शीघ्र ही अंग्रेजों ने पंजाब की ओर उनके बढ़ते कदमों को रोक दिया।
प्रश्न 6.
महाराजा रणजीत सिंह के उत्थान के समय भारत में अंग्रेजी राज्य का वर्णन करो।
उत्तर-
1773 ई० से 1785 ई० तक वारेन हेस्टिंग्ज़ भारत में अंग्रेज़ी राज्य का गवर्नर-जनरल रहा। उसने मराठों को पंजाब की ओर बढ़ने से रोका। परन्तु उसके उत्तराधिकारियों लॉर्ड कार्नवालिस (1786 ई० से 1793 ई०) तथा जॉन शोर (1793 ई० से 1798 ई० तक) ने ब्रिटिश राज्य की बढ़ौत्तरी के लिए कोई महत्त्वपूर्ण योगदान न दिया। 1798 ई० में लॉर्ड वैलज़ली गवर्नर-जनरल बना। उसने अपने राज्य में हैदराबाद, मैसूर, कर्नाटक, तंजौर, अवध आदि देसी रियासतों को मिलाया। वह मराठों के विरुद्ध भी लड़ता रहा। इसलिए वह पंजाब की ओर ध्यान न दे सका। 1803 ई० में अंग्रेजों ने दौलत राव सिंधिया को हरा कर दिल्ली पर अधिकार कर लिया।
बड़े उत्तर वाला प्रश्न (Long Answer Type Question)
प्रश्न
निम्नलिखित मिसलों की संक्षिप्त जानकारी दो
- फुल्कियां
- डल्लेवालिया
- निशानवालिया
- करोड़सिंघिया तथा
- शहीद मिसल।
उत्तर-
दी गई मिसलों के इतिहास का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है —
- फुल्कियां मिसल — फुल्कियां मिसल की नींव एक सन्धु जाट चौधरी फूल सिंह ने रखी थी, परन्तु इसका वास्तविक संगठन बाबा आला सिंह ने किया। उसने सबसे पहले बरनाला के आस-पास के प्रदेशों को विजय किया। 1762 ई० में अब्दाली ने उसे मालवा क्षेत्र का नायब बना दिया। 1764 ई० में उसने सरहिन्द के गवर्नर जैन खां को पराजित किया। 1765 ई० में आला सिंह की मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के पश्चात् अमर सिंह ने फुल्कियां मिसल की बागडोर सम्भाली। उसने अपनी मिसल में भठिण्डा, रोहतक तथा हांसी को भी मिला लिया। अहमद शाह ने उसे ‘राजाए रजगाने’ की उपाधि प्रदान की। अमर सिंह की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र साहिब सिंह मिसल का सरदार बना। वह बड़ा कमज़ोर शासक था। अन्त में 1809 ई० में एक सन्धि के अनुसार अंग्रेजों ने इस मिसल को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया।
- डल्लेवालिया मिसल — इस मिसल की स्थापना गुलाब सिंह ने की थी। वह रावी के तट पर स्थित ‘डल्लेवाल’ गांव का निवासी था। इसी कारण इस मिसल को डल्लेवालिया के नाम से पुकारा जाने लगा। इस मिसल का सबसे प्रसिद्ध तथा शक्तिशाली सरदार तारा सिंह घेबा था। उसके अधीन 7,500 सैनिक थे। वह अपार धन-दौलत का स्वामी था। जब तक वह जीवित रहा रणजीत सिंह उसका मित्र बना रहा, परन्तु उसकी मृत्यु के पश्चात् रणजीत सिंह ने इस मिसल को अपने राज्य में मिला लिया। तारा सिंह की पत्नी ने उसका विरोध किया, परन्तु उसकी एक न चली।।
- निशानवालिया मिसल — इस मिसल की नींव रणजीत सिंह तथा मोहर सिंह ने रखी थी। ये दोनों कभी खालसा दल का झण्डा (निशान) उठाया करते थे। इसलिए उनके द्वारा स्थापित मिसल को ‘निशानवालिया मिसल’ कहा जाने लगा। इस मिसल में अम्बाला तथा शाहबाद के प्रदेश सम्मिलित थे। राजनीतिक दृष्टि से इस मिसल का कोई विशेष महत्त्व नहीं था।
- करोड़सिंघिया मिसल — इस मिसल की नींव करोड़ सिंह ने रखी थी। बघेल सिंह इस मिसल का पहला प्रसिद्ध सरदार था। उसने नवांशहर, बंगा आदि प्रदेशों को जीता। उसकी गतिविधियों का केन्द्र करनाल से बीस मील की दूरी पर था। उसकी सेना में 12,000 सैनिक थे। सरहिन्द के गवर्नर जैन खां की मृत्यु के पश्चात् उसने सतलुज नदी के उत्तर की ओर के प्रदेशों पर अधिकार करना आरम्भ कर दिया। बघेल सिंह के पश्चात् जोध सिंह उसका उत्तराधिकारी बना। जोध सिंह ने मालवा के बहुत सारे प्रदेशों पर विजय प्राप्त की तथा उन्हें अपनी मिसल में मिला लिया। अन्त में इस मिसल का कुछ भाग कलसिया रियासत का अंग बन गया और शेष भाग महाराजा रणजीत सिंह ने अपने राज्य में मिला लिया।
- शहीद अथवा निहंग मिसल — इस मिसल की नींव सुधा सिंह ने रखी थी। वह मुसलमान शासकों के विरुद्ध लड़ता हुआ शहीद हो गया था। अतः उसके द्वारा स्थापित मिसल का नाम शहीद मिसल रखा गया। उसके पश्चात् इस मिसल के प्रसिद्ध नेता बाबा दीप सिंह, करम सिंह, गुरुबख्श सिंह आदि हुए। इस मिसल के अधिकांश सिक्ख अकाली अथवा निहंग थे। इस कारण इस मिसल को निहंग मिसल भी कहा जाता है। यहां निहंगों की संख्या लगभग दो हज़ार थी। इस मिसल का मुख्य कार्य अन्य मिसलों को संकट के समय सहायता देना था।