PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 3 कम्प्यूटर के आधारभूत कार्य

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PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 3 कम्प्यूटर के आधारभूत कार्य

जान-पहचान (Introduction)
कम्प्यूटर के कार्य के लिए सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। जब हम कम्प्यूटर शुरू करते हैं तो उस पर कई आबजैक्ट दिखाई देते हैं। यह सारे आपरेटिंग सिस्टम के अन्तर्गत आते हैं। आपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर को चलाने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है।

आपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
आपरेटिंग सिस्टम वह सिस्टम सॉफ्टवेयर होता है जो कम्प्यूटर हार्डवेयर के साथ संपर्क करने तथा आपरेट करने के योग्य बनाता है। यह कम्प्यूटर तथा उसमें पड़े सॉफ्टवेयर को चलाता है। यह कम्प्यूटर से संबंधित महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। यह अनधिकृत पहुंच को भी रोकता है।

आपरेटिंग सिस्टम की परिभाषा (Definition of Operating System)
आपरेटिंग सिस्टम वह सॉफ्टवेयर होता है जो कम्प्यूटर हार्डवेयर को सॉफ्टवेयर के साथ संपर्क करने तथा अपडेट करने के योग्य बनाता है।

विंडोज़ (Windows)
विंडोज़ एक महत्त्वपूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह GUI (ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस) किस्म का होता है। विंडोज़ की मदद से हम कम्प्यूटर का प्रोग्राम चला सकते हैं। कम्प्यूटर पर हम जब कोई प्रोग्राम खोलते हैं, तो वो एक फ्रेम में नज़र आता है। इस फ्रेम को विंडोज़ कहते हैं। विंडोज़ माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी का उत्पादन है। इसी कारण इसको माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ भी कहा जाता है। इनके कई वर्जन भी हैं, जैसे कि-

  • विंडोज़ 2000
  • विंडोज़ XP
  • विंडोज़ Me
  • विंडोज़ 7
  • विंडोज़ 8, 10 आदि।

इसमें माऊस की सहायता से आसानी से काम किया जा सकता है। इसमें हम कई प्रोग्राम चला सकते हैं। इसमें प्रत्येक प्रोग्राम एक विंडोज में खुलता है जिस कारण इसका नाम विंडोज़ पड़ा।

डॉस (DOS)
डॉस का पूरा नाम डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा तैयार किया गया था। यह एक करैक्टर आधारित इंटरफ़ेस प्रदान करता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम ज्यादा शक्तिशाली ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं था। इसमें कार्य करना भी आसान नहीं था। इसमें कार्य करने के लिए यूज़र को विभिन्न कमांड टाइप करनी पड़ती थी तथा उसे इन कमांड को याद भी रखना पड़ता था। यह ऑपरेटिंग सिस्टम छोटी मशीनों जिनमें कम मेमोरी तथा कम स्पीड होती थी उनके लिए बनाया गया था। इस ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य कार्य डिस्क पर फाइलों को संभालना होता था। आजकल यह ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग में नहीं लाया जाता।

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एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम (Android Operating System)
एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम एक मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम गूगल कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्य रूप से यंत्रों के लिए तैयार किया गया है जिनमें टचस्क्रीन का प्रयोग होता है जैसे कि स्मार्टफोन तथा टेबलेट। इस ऑपरेटिंग सिस्टम में अपनी उंगली का प्रयोग करके विभिन्न कमांडों तथा अन्य विकल्प का चुनाव कर सकता है। आजकल ज्यादातर मोबाइल फोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का ही प्रयोग होता है। आजकल एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम आधारित टेलीविज़न, कार तथा घड़ियां भी आ रही हैं। प्रत्येक प्रकार के यंत्र में एक विभिन्न इंटरफ़ेस होता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम चलाने में काफी आसान होता है। इसमें आइकन तथा बहुत बढ़िया विकल्प भी दिए गए हैं।

कम्प्यूटर शुरू करना (Starting Computer System)
पावर बटन ऑन करना (Switch on the Power Button) कम्प्यूटर को शुरू करने के पग निम्नलिखित अनुसार हैं-
कम्प्यूटर के सी०पी०यू० तथा मॉनीटर पर लगा पावर बटन दबाएं। कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर लगी एक लाइट बलिंक करेगी और कम्प्यूटर के मॉनीटर पर कुछ टैक्सट लिखा नज़र आएगा। अब कम्प्यूटर में आपरेटिंग सिस्टम लोड होना शुरू हो जाएगा। इस प्रक्रिया (Process) को बूटिंग (Booting) कहा जाता है। जब तक बुटिंग प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इन्तजार करें।
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बूटिंग प्रक्रिया पूरी होने पर हमें नीचे दिखाये अनुसार स्क्रीन नज़र आएगी।
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उपरोक्त स्क्रीन में दिखाए अनुसार कम्प्यूटर को लॉग ऑन करने के लिए हमें अपने कम्प्यूटर के कीबोर्ड पर लगी Ctrl (कंट्रोल) Alt (आल्ट) तथा Delete (डिलीट) कीज़ को दबाना पड़ेगा। ऐसा करने के बाद हमें चित्र में दिखाए अनुसार लॉग ऑन स्क्रीन दिखाई
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कम्प्यूटर लॉग ऑन करना (Loging on Computer)
अगर हमारे स्कूल में सर्वर बेसड “एन कम्प्यूटिंग” (N-Computing) कम्प्यूटर लैब है, तो हमें सिर्फ सर्वर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर लॉग ऑन करने के लिए अपने कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर लगी Ctrl (कंट्रोल), Alt (आल्ट) तथा Delete (डिलीट) कीज़ को दबाने की ज़रूरत पड़ेगी। ऐसा करने के बाद हमें कम्प्यूटर पर लॉग ऑन स्क्रीन दिखाई देगी। इसके बाद की-बोर्ड से एंटर की दबाएं। इसी तरह क्लाइंट कम्प्यूटर को लॉग ऑन करने के लिए हम अपनी सिटिंग पोजीशन अनुसार यूज़र नेम बाक्स में क्रमवार यूज़र 1, यूज़र 2, यूज़र 3, यूज़र 4, और यूज़र 5 टाइप करेंगे। यह याद रखा जाए कि अलग-अलग कम्प्यूटर्ज़ पर निर्धारित यूज़र खाते को लॉग ऑन किया जाए।

अगर हमारे स्कूल में सर्वर बेसड “एन-कम्प्यूटिंग” (N-computing) लैब नहीं है, तो हमें प्रत्येक कम्प्यूटर पर दिखाए अनुसार स्क्रीन दिखाई देगी। कम्प्यूटर को लॉग ऑन करने के लिए अग्रलिखित अनुसार कार्य करें-

  1. अपने कम्प्यूटर की-बोर्ड पर लगी Ctrl (कंट्रोल), Alt (आलट) तथा Delete (डिलीट) कीज़ को दबाएं, इस तरह हमें लॉग ऑन स्क्रीन दिखाई देगी।
  2. इस कम्प्यूटर पर 2 या 3 यूज़र हो सकते हैं। इसलिए हम अपनी ज़रूरत अनुसार किसी भी यूज़र को लॉग इन कर सकते हैं। किसी यूज़र को लॉग ऑन करने के लिए माऊस की मदद से यूज़र नेम बाक्स में क्लिक करें तथा निर्धारित यूज़र अकाऊंट (जैसे कि “स्कूल”, यूज़र) आदि टाइप करो तथा पासवर्ड टाइप करो।
  3. एंटर कीअ दबाएं। कम्प्यूटर को लॉग इन करने के बाद हमें निम्न चित्र अनुसार स्क्रीन दिखाई देगी जिस पर हमें कुछ छोटी-छोटी तस्वीरें तथा स्क्रीन के नीचे की ओर एक लम्बी बार (टास्क बार) नज़र आएगी। इस स्क्रीन को डैस्कटाप कहा जाता है।

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डैस्कटाप तथा इसके भाग (Desktop and its Components)
बूटिंग तथा लॉग-इन के बाद जो पहली स्क्रीन नज़र आती है। उसको डैस्कटाप कहते हैं। डैस्कटाप तथा टास्कबार, आइकन तथा शार्टकट बटन होता है।
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डैस्कटॉप डैस्कटाप के निम्नलिखित तीन भाग होते हैं।

  1. आइकन्ज़ (Icons)
  2. टास्कबार (Taskbar)
  3. शार्टकट (Shortcut)
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आइकन (Icon)
डैस्कटॉप पर नज़र आने वाली छोटी तस्वीरों को आइक, कहते हैं। ये बटन की तरह काम करते हैं। आइकन फाइल तथा फोल्डर दिखाते हैं इन पर डबल क्लिक करके सम्बन्धित प्रोग्राम चल पड़ता है।
डेस्कटॉप पर निम्न आइकन होते हैं-
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1. My Computer
2. Network
3. User’s Files
4. Recycle Bin

  1. माई कम्प्यूटर (My Computer)-माई कम्प्यूटर की मदद से हम अपने कम्प्यूटर की सभी चीजें देख सकते हैं। इनमें फाइल, फोल्डर तथा ड्राइव होते हैं।
  2. नैटवर्क (Network)-इस आइकन की मदद से हम अपने कम्प्यूटर से जुड़े बाकी कम्प्यूटर को देख सकते हैं।
  3. यूज़र फाइल (User’s Files)-इस फोल्डर में यूज़र द्वारा तैयार तथा डाऊनलोड की गई फाइलें दिखाई देती हैं।
  4. रीसाईकिल बिन (Recycle Bin)-यूज़र द्वारा डिलीट की गई फाईलें री साईकिल बिन में जाती हैं। जब हम फाइलें डिलीट करते हैं तो वो पक्के तौर पर डिलीट नहीं होतीं।

पक्के तौर पर डिलीट करने के लिए इन्हें रीसाईकिल बिन से भी डिलीट करना पड़ता है। गलती से डिलीट की गई फाइलों को वापिस लाया जा सकता है। इसे रीस्टोर कहते हैं। इसके लिए रीसाईकिल बिन खोल कर उस फाइल को रीस्टोर करना पड़ता है।

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शार्टकट (Shortcut)
शार्टकट एक आइकॉन होता है जो असल में किसी फाइल को न दर्शा कर उस तक पहुंचने के लिंक को दर्शाता है। इस शार्टकट पर डबल क्लिक करके उस फाइल या फोल्डर को खोला जा सकता है। अगर शार्टकट डिलीट कर दिया जाए तो असली फाइल डिलीट नहीं होती। इसकी पहचान आम आइकॉन पर शार्टकट एक तीर के साथ होती है।
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वॉलपेपर (Wallpaper) – वॉलपेपर एक तस्वीर होती है जो कि कंप्यूटर के 10 टॉप पर दिखाई देती है। इस वॉलपेपर को डेस्कटॉप बैकग्राउंड भी कहा जाता है। यह आमतौर पर एक पिक्चर रंग या कोई पैटर्न होता है। यूज़र अपनी व्यक्तिगत इच्छा अनुसार इस का चुनाव कर सकता है। कंप्यूटर में कई प्रकार के पहले से ही वॉलपेपर दिए होते हैं। यूज़र इनमें से किसी का चुनाव कर सकता है या फिर वह कोई अपनी तैयार की हुई, खींची हुई फोटो भी लगा सकता है वॉलपेपर को बदलने के नियम निम्न अनुसार होते हैं –

  1. डेस्कटॉप पर खाली स्थान पर माऊस द्वारा राइट क्लिक करें।
  2. एक मीनू दिखाई देगा उस में से Personalise का चुनाव करें।
  3. एक विंडो सामने दिखाई देगी।
  4. विंडो में से अपनी आवश्यकतानुसार किसी टीम का चुनाव करें।

इसके अलावा हम डेस्कटॉप वॉलपेपर का चुनाव भी कर सकते हैं तथा उसमें अपनी पसंद का वॉलपेपर की फाइल चुनकर उसको भी वॉलपेपर के रूप में सेट कर सकते हैं। .

टास्कबार (Taskbar)
टास्कबार डैस्कटॉप के सबसे नीचे वाले हिस्से पर होती है। यह एक लम्बी पट्टी की तरह होती है। इसके बायें हाथ पर स्टार्ट बटन होता है और दायें हाथ पर टाइम नज़र आता है। जब कोई प्रोग्राम चलता है तो उसका एक बटन इस पर बन जाता है। इसके अलावा भी इस पर कुछ और बटन होते हैं और Quick Launch bar भी होता है।
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टास्कबार स्टार्ट बटन की मदद से हम किसी प्रोग्राम को चला सकते हैं। टास्क बार के दाएं तरफ सिस्टम ट्रेअ बटन, नोटिफिकेशन एरिया, कम्प्यूटर नैटवर्क आइकन, सिस्टम साऊंड आइकन तथा तिथि और समय दिखाई देता है। टास्क बार के एक और क्षेत्र जिसको आसानी के साथ नज़र-अंदाज़ (overlook) किया जाता है-वह है शो डैस्कटाप (show desktop) बटन। ऊपर दिखाई तस्वीर में हम टास्क बार में डेट एंड कम्प्यूटर के आधारभूत कार्य टाईम के साथ दाएं साइड एक तंग आयताकार आकार की आकृति देख सकते हैं। इसको क्लिक करने पर हम सारे खुले हुए प्रोग्रामज़ को मिनीमाइज़ कर सकते हैं तथा डैस्कटाप तक पहुंच सकते है । टास्क बार में उपरोक्त सभी भागों का अपना-अपना कार्य होता है –

  1. स्टार्ट बटन (Start Button)-स्टार्ट बटन की मदद से किसी भी प्रोग्राम को चलाया जा सकता है। यह टास्क बार के ऊपर सबसे पहले स्थित होता है। इसका आइकन होता है। इसके ऊपर विंडो को लोगो बना होता है।
  2. क्विक लांच आइकॉन (Quick Launch Bar)-किसी भी प्रोग्राम को जल्दी चलाने के लिए यहां रखा जा सकता है।
  3. सिस्टम ट्रेअ (System Tray)-यह टास्क बार के दाएं तरफ होती है। इसके ऊपर एक छोटा आइकन लगा होता है जो कि हमें आसानी से कार्य करने में जैसे-फैक्स, माडम, आवाज़ आदि तक पहुंचने में मदद करता है।
  4. नोटीफिकेशन एरिया(Notification Area)-इसमें सारे नोटीफिकेशन दिखाई देते हैं।
  5. डेट एण्ड टाइम (Date and Clock)-यहां पर समय तथा तारीख दिखाई देती है।
  6. एक्टिव प्रोग्राम (Active Programs)-टास्क बार के इस भाग में सभी चल रहे प्रोग्राम नज़र आते हैं तथा हम इनमें से किसी भी प्रोग्राम तक पहुंच कर सकते हैं।

विंडो एप्लीकेशन के साथ कार्य करना (Working with Window Applications)-
माइक्रोसॉफ्ट विंडो 7 हमें बहुत ही पहले से तैयार की गई एप्लीकेशन प्रदान करता है। यह एप्लीकेशन विंडो इंस्टॉल करने के साथ ही कंप्यूटर पर इंस्टॉल हो जाती हैं। यह सभी एप्लीकेशन मूल रूप से साधारण प्रोग्राम होते हैं जिनको यूज़र अपनी आवश्यकतानुसार प्रयोग कर सकता है। प्रत्येक एप्लीकेशन विभिन्न प्रकार की होती है तथा हमारी कुछ आधारभूत ज़रूरतों को पूरा करती है।

नोटपैड (Notepad)
नोटपैड माइक्रोसॉफ्ट विंडो का एक साधारण टेक्स्ट एडिटर प्रोग्राम है। इसका मुख्य प्रयोग अक्षरों पर आधारित डाटा टाइप करने तथा ऐडिट करने के लिए किया जाता है। यह अक्षरों का डाटा दूर करने के लिए सबसे साधारण एप्लीकेशन है। इस प्रोग्राम का प्रयोग विभिन्न प्रकार की प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे कि एचटीएमएल जावा आदि की कोड पहले तैयार करने के लिए भी किया जाता है।

नोटपैड को चलाना (Running Note Pad) नोटपैड को चलाने के पग नीचे दिए गए हैं-

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करके ऑल प्रोग्राम पर क्लिक करें।
  2. ऑल प्रोग्राम में आगे Accessories कमांड पर क्लिक करें।
  3. इस ग्रुप में नोट पैड पर क्लिक करें।

अथवा

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करें।
  2. सर्च बार में नोटपैड टाइप करें।
  3. ऊपर आने वाले आइकन में से नोटपैड एप्लीकेशन आइकन पर क्लिक करें या एंटर की दबाएं।

वर्डपैड (Wordpad)
यह एक रिच टेक्स्ट फॉरमैट वाला वर्ड प्रोसेसर है। हम इसका प्रयोग किसी भी प्रकार का फॉर्मेटिंग सहित डॉक्यूमैंट तैयार करने में कर सकते हैं। इसका प्रयोग केवल टेक्स्ट आधारित डॉक्यूमैंट तैयार करने में ही किया जाता है। इस टेक्सट को अपनी आवश्यकतानुसार फॉर्मेट किया जा सकता है। वर्डपैड के किसी भी डॉक्यूमैंट में हम किसी प्रकार का ग्राफिक जैसे चार्ट, पिक्चर, क्लिप, आर्ट आदि दाखिल नहीं कर सकते।

वर्डपैड को चलाना (Running Wordpad)- वर्डपैड को चलाने के पग नीचे दिए गए हैं –

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करके ऑल प्रोग्राम पर क्लिक करें।
  2. ऑल प्रोग्राम में आगे Accessories कमांड पर क्लिक करें।
  3. इस ग्रुप में वर्डपैड पर क्लिक करें।

अथवा

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करें।
  2. सर्च बार में वर्डपैड टाइप करें।
  3. ऊपर आने वाले आइकन में से वर्डपैड एप्लीकेशन आइकन पर क्लिक करें या एंटर की दबाएं।

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पेंट (Paint)
पेट माइक्रोसॉफ्ट विंडो द्वारा प्रदान की जाने वाली एक ग्राफिक एप्लीकेशन है। इस एप्लीकेशन का प्रयोग ड्राइंग तथा साधारण प्रकार के ग्राफिक ऑब्जेक्ट बनाने के लिए किया जाता है। इसमें बहुत सारे ड्राइंग टूल तथा रंग भरने के टूल्स उपलब्ध हैं। हम इस एप्लीकेशन द्वारा पहले से बनी हुईं तस्वीरों में बदलाव भी कर सकते हैं। पेंट को चलाना (Running Paint)-पेंट को चलाने के लिए निम्न स्टैप होते हैं-

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करके ऑल प्रोग्राम पर क्लिक करें।
  2. ऑल प्रोग्राम में आगे Accessories कमांड पर क्लिक करें।
  3. इस ग्रुप में पेंट पर क्लिक करें। .

अथवा

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करें।
  2. सर्च बार में पेंट टाइप करें।
  3. ऊपर आने वाले आइकन में से पेंट एप्लीकेशन पर आइकन पर क्लिक करें या एंटर की दबाएं।

कैलकुलेटर (Calculator)-
माइक्रोसॉफ्ट विंडो की इस एप्लीकेशन का प्रयोग गणना करने के लिए किया जाता है। इस एप्लीकेशन की बनावट तथा बटनों की स्थिति वास्तविक कैलकुलेटर की तरह ही होती है। इस कैलकुलेटर में वास्तविक कैलकुलेटर के अलावा और बहुत सारे विकल्प प्रदान किए जाते हैं। हम इस एप्लीकेशन में 16 अंकों तक की गणनाएं कर सकते हैं।

कैलकुलेटर को चलाना (Running Calculator)

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करके ऑल प्रोग्राम पर क्लिक करें।
  2. ऑल प्रोग्राम में आगे Accessories कमांड पर क्लिक करें।
  3. इस ग्रुप में कैलकुलेटर पर क्लिक करें।

अथवा

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करें।
  2. सर्च बार में कैलकुलेटर टाइप करें।
  3. ऊपर आने वाले आइकन में से कैलकुलेटर एप्लीकेशन आइकन पर क्लिक करें या एंटर की दबाएं।

रन बॉक्स का प्रयोग करना (Using Run Box)
रन बॉक्स का प्रयोग किसी भी प्रोग्राम को उसके नाम की सहायता से खोलने के लिए किया जाता है। विंडो के ऑप्शन की मदद से हम किसी भी प्रोग्राम को आसानी से खोल सकते हैं। पूरा स्टार्ट मेन्यू में बारबार जाकर प्रोग्राम को चलाने के बजाय हम सीधा ही प्रोग्राम को चला सकते हैं। हमें इनबॉक्स में प्रोग्राम की फाइल का सही नाम टाइप करना पड़ता है। किसी भी एप्लीकेशन का नाम टाइप करके उसको खोला जा सकता है-
माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ में रन बॉक्स का प्रयोग करना
माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ में रन बॉक्स का प्रयोग करने के स्टेप नीचे दिए गए हैं :-
विंडोज़ PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 3 कम्प्यूटर के आधारभूत कार्य 9 बटन तथा R इकट्ठे दबाएं।
अथवा

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करें।
  2. सर्च बॉक्स में रन टाइप करें।
  3. ऊपर प्रकट हुई लिस्ट में से संबंधित आइकन पर क्लिक करें तथा एंड ट्रक की दबाएं।

स्टार्ट मेन्यू का सर्च बॉक्स (Search Box of Start Menu)
हम माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ 7 के सर्च बॉक्स की मदद से अपने कम्प्यूटर में प्रोग्राम या फाइलें ढूंढ सकते हैं। सर्च बॉक्स विंडो के स्टार्ट मेन्यू में सबसे नीचे दिया गया होता है। पूनम राम अगर बॉक्स स्टार्ट मेन्यू में न हो तो हम इसको कंट्रोल पैनल में से दोबारा ला सकते हैं।
अगर स्टार्ट मेन्यू में सर्च बॉक्स मौजूद न हो तो निम्न स्टेप का प्रयोग करके उसे दोबारा लाया जा सकता है सर्च बॉक्स को दिखाने के कदम (Steps to show “Search Box”)

  1. स्टार्ट में खोलो तथा कंट्रोल पैनल पर क्लिक करो।
  2. प्रोग्राम में से अनइनस्टॉल ए प्रोग्राम पर क्लिक करो।
  3. Turn Windows features on or off पर क्लिक करो।
  4. window search नाम की चेक बॉक्स पर क्लिक करो।
  5. Ok बटन पर क्लिक करके अपने बदलाव को सेव करो।

अपने कम्प्यूटर को दोबारा स्टार्ट करो। स्टार्ट मेन्यू में सर्च बॉक्स आ जाएगा।

कम्प्यूटर को बन्द करना (Shutting Down Computer System) –
कम्प्यूटर को बन्द करने से पहले खुले प्रोग्रामों को बन्द करें।

  1. स्टार्ट बटन पर क्लिक करो। स्टार्ट मेन्यू खुलेगा।
  2. स्टार्ट मेन्यू पर शट डाऊन पर क्लिक करो। शट डाऊन डाइलाग बॉक्स खुलेगा।
  3. अब एक और बॉक्स खुलेगा। इसमें से शट डाऊन पर क्लिक करो।
  4. OK पर क्लिक करो। कुछ ही देर के बाद कम्प्यूटर अपने आप बन्द हो जाएगा।

स्लीप (Sleep)
जब कम्प्यूटर को स्लीप मोड में डाला जाता है तब इसकी पावर सप्लाई को चालू रखा जाता है। इस मोड़ के दौरान कम्प्यूटर की पावर लाइट टिमटिमाती रहती है। यह टिमटिमाती लाइट दर्शाती है कि कम्प्यूटर स्लीप मोड में है तथा यूज़र पावर बटन दबाकर कम्प्यूटर दोबारा शुरू कर सकते हैं।

शट डाउन (Shut Down)
शट डाउन विकल्प का प्रयोग तब किया जाता है जब कम्प्यूटर के सारे भाग बंद करने होते हैं। इसमें किसी भी भाग की पावर सप्लाई नहीं चल रही होती। कम्प्यूटर को शट डाउन करने के बाद हम कम्प्यूटर की मेन पावर सप्लाई बंद कर सकते हैं। इस प्रोसेस को पूरा होने में कुछ समय लग जाता है तथा इस दौरान यूज़र को इंतज़ार करना पड़ता है।

लॉग ऑफ (Log Off)
कई बार एक कम्प्यूटर पर कई यूज़र कार्य करते हैं। हम अपना डाटा बाकी दूसरों से सुरक्षित रख सकते हैं। जब हम अपना कार्य कर लेते हैं तथा कम्प्यूटर को छोड़ना चाहते हैं पर साथ ही अन्य दूसरों के लिए उसे चालू ही रहने देना चाहते हैं तब हम अपने कम्प्यूटर को चालू कर सकते हैं। इस स्थिति में लॉग इन करने वाली क्रीज़ कम्प्यूटर पर दिखाई देने लगती है।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 3 कम्प्यूटर के आधारभूत कार्य

रीस्टार्ट (Restart)
रीस्टार्ट का प्रयोग कम्प्यूटर को बंद करके दोबारा शुरू करने के लिए किया जाता है। इस विकल्प का प्रयोग तब किया जाता है जब हम अपने कंप्यूटर पर कोई प्रोग्राम इंस्टॉल करते हैं तथा वह प्रोग्राम शुरू होने के लिए कम्प्यूटर को दोबारा शुरू करने को कहता है। इसका प्रयोग तब भी किया जाता है जब सिस्टम में कोई बदलाव किया जाता है। रीस्टार्ट विकल्प पर क्लिक करने के बाद कम्प्यूटर बंद हो जाता है तथा फिर से ही शुरू हो जाता है।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

Punjab State Board PSEB 7th Class Science Book Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Science Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

PSEB 7th Class Science Guide भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Textbook Questions and Answers

1. खाली स्थानों की पूर्ति कीजिए :-

(i) वे परिवर्तन जिसमें भौतिक गुण परिवर्तित होते हैं, उन्हें …………………. परिवर्तन कहा जाता है।
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन

(ii) परिवर्तन, जिनसे नया पदार्थ बनता है, को ……………………… परिवर्तन कहा जाता है।
उत्तर-
रासायनिक

(iii) कार्बन एवं कार्बन ईंधन जलने के उपरान्त …………………… गैस उत्पन्न करते हैं।
उत्तर-
कार्बन-डाइऑक्साइड

(iv) जब CO2 गैस को चूने के पानी में से प्रवाहित किया जाता है तो इसका रंग ……………………. हो जाता है।
उत्तर-
सफेद (या दुधिया)

(v) ………………….. ढंग से लोहे की वस्तुओं को जंग लगने से रोका जा सकता है।
उत्तर-
गैल्वेनाइज़ेशन।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

2. कॉलम ‘क’ के शब्दों का कॉलम ‘ख’ के शब्दों के साथ मिलान कीजिए :-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) भौतिक परिवर्तन (क) गैल्वीनीकरण
(ii) रासायनिक परिवर्तन (ख) एक नये पदार्थ का बनना
(iii) जंग लगने से बचाव (ग) सिरका एवं बेकिंग सोडा को मिलाना
(iv) CO2 का निकलना । (घ) उत्क्रमणीय परिवर्तन

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) भौतिक परिवर्तन (घ) उत्क्रमणीय परिवर्तन
(ii) रासायनिक परिवर्तन (ख) एक नये पदार्थ का बनना
(iii) जंग लगने से बचाव (क) गैल्वीनीकरण
(iv) CO2 का निकलना । (ग) सिरका एवं बेकिंग सोडा को मिलाना

3. सही उत्तर चुनिए :-

प्रश्न (i)
रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है :-
(क) ज्वालामुखी का फटना
(ख) मोमबत्ती का जलना
(ग) खाना पकाना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न (ii)
जब ऐसिटिक अम्ल को बेकिंग सोडा के साथ मिलाया जाता है तो यह गैस उत्पन्न होती है :-
(क) हाइड्रोजन
(ख) ऑक्सीजन
(ग) कार्बन-डाइऑक्साइड
(घ) कार्बन मोनोऑक्साइड।
उत्तर-
(ग) कार्बन-डाइऑक्साइड।

प्रश्न (iii)
लोहे की बनी वस्तुओं को जंग लगने के लिए आवश्यकता क्या है ?
(क) हवा (ऑक्सीजन)
(ख) नमी (पानी)
(ग) लोहे की वस्तु की खुली सतह
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न (iv)
जंग की रोकथाम के लिए हम प्रयोग करते हैं-
(क) तेल या ग्रीस लगाकर
(ख) पेंट
(ग) गैल्वेनाइजेशन
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न (v)
जंग का रासायनिक फार्मूला ……………………..
(क) Fe2O3
(ख) FeCO3
(ग) Fe2O3 × H2O
3 (8) FeCO3 × H2O.
उत्तर-
(ग) Fe2O3 × H2O

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

4. सही/गलत :-

(i) लकड़ी के टुकड़े को भागों में बाँटना एक रासायनिक परिवर्तन है। (सही/गलत)
उत्तर-
सही

(ii) पत्तियों से खाद का बनना एक भौतिक परिवर्तन है। (सही/गलत)
उत्तर-
गलत

(iii) लोहे की पाइपों पर जिंक (जिस्त) की परत चढ़ाने से इन्हें आसानी से जंग नहीं लगता। (सही/गलत)
उत्तर-
सही

(iv) लोहा और जंग एक ही प्रकार के पदार्थ हैं। (सही/गलत)
उत्तर-
गलत

(v) भाप का संघनन रासायनिक परिवर्तन नहीं है। (सही/गलत)
उत्तर-
सही।

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :-

प्रश्न (i)
जंग लगना क्या है ? इसका रासायनिक सूत्र लिखें।
उत्तर-
जंग लगना – ये वह परिवर्तन है जो पर्यावरण के संपर्क में आने से लोहे तथा लोहे से बनी वस्तुएँ प्रभावित करता है। वस्तुओं पर पर्यावरण में मौजूद ऑक्सीजन (हवा) तथा नमी द्वारा हमला किया जाता है। लोहे तथा लोहे के बने उत्पादों की सतह पर लाल, भूरे या संतरी रंग की परत बन जाती है। इस परत को जंग कहा जाता है। इस प्रक्रिया को जंग लगना कहा जाता है।
जंग का रासायनिक सूत्र – Fe2O3 × H2O

प्रश्न (ii)
लोहे को जंग लगने के लिए आवश्यक शर्ते लिखें।
उत्तर-
लोहे को जंग लगने के लिए आवश्यक शर्ते-

  1. लोहे की वस्तु की खुली सतह।
  2. हवा (ऑक्सीजन) की उपस्थिति।
  3. नमी (पानी) की उपस्थिति।

प्रश्न (iii)
लोहे की वस्तुओं को अक्सर पेंट क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
लोहे की वस्तुओं पर पेंट करके सतह को हवा तथा पानी के संपर्क में नहीं आने दिया जाता। ऐसे करने से लोहे की वस्तु की सतह पर जंग लगने से रोका जाता है।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न (iv)
गैल्वीनीकरण क्या है ?
उत्तर-
गैल्वीनीकरण किसी अक्रियाशील धातु जैसे एल्युमीनियम या जिंक की एक परत लोहे की वस्तुओं की सतह पर चढ़ाने की प्रक्रिया को मुलंमाकरण कहा जाता है।

प्रश्न (v)
दो धातुओं का नाम बताइए जो गैल्वीनीकरण की प्रक्रिया के दौरान वस्तुओं की सतह पर जमा होती
उत्तर-
धातुओं की गैल्वीनीकरण प्रक्रिया के दौरान लोहे की वस्तुओं की सतह पर जमा की जाती है-

  1. क्रोमीयम,
  2. निक्कल।

प्रश्न (vi)
मोमबत्ती जलाना किस प्रकार का उदाहरण है-भौतिक परिवर्तन या रासायनिक परिवर्तन ? कारण बताइए।
उत्तर-
मोमबत्ती का जलना एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि मोमबत्ती, कार्बन तथा हाइड्रोजन से बनी है।

मोमबत्ती जलने पर ऑक्सीजन से क्रिया करके कार्बन-डाइऑक्साइड तथा पानी बनता है, जो पर्यावरण में प्रवेश करता है। इसलिए मोमननी की मोम पिघल जाती है जिसके फलस्वरूप उसकी लंबाई कम हो जाती है।

प्रश्न (vii)
आतिशबाजी का आनंद लेना हानिकारक कैसे है ?
उत्तर-
आतिशबाजी का विस्फोट रासायनिक परिवर्तन है। ऐसे विस्फोट में ताप, प्रकाश, ध्वनि तथा ज़हरीली गैसें पैदा होती हैं, जो पर्यावरण, वायुमंडल को दूषित करती हैं। इसलिए आतिशबाजी के विस्फोट का आनंद नुकसानदेह है, इसलिए पटाखे न चलाने की सलाह दी जाती है।

प्रश्न (viii)
क्रिस्टलीकरण क्या है ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण – किसी पदार्थ के शुद्ध तथा बड़े आकार के रवे उनके घोल से प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण (रवे बनाना) कहलाती है।

6. छोटे उत्तर वाले प्रश्न :-

प्रश्न (i)
मीठे सोडे और सिरके का मिलाना एक रासायनिक परिवर्तन है या भौतिक परिवर्तन, चर्चा करो।
उत्तर-
सिरका (ऐसीटिक ऐसिड) और मीठे सोडे (सोडियम कार्बोनेट) से मिलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, सोडियम ऐसीटेट तथा पानी बनता है। इन उत्पादों की संरचना तथा गुण मूल पदार्थ सिरका तथा मीठे सोडे से बिल्कुल अलग है तथा नए गुण वाले नए पदार्थ बने हैं। इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन है।

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प्रश्न (ii)
व्याख्या करें कि लकड़ी का कटना तथा जलना अलग प्रकार के परिवर्तन कैसे हैं।
उत्तर-
लकड़ी का कटना एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि कोई नये गुणों वाला नया पदार्थ नहीं बना है। दूसरी ओर लकड़ी का जलना रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि लकड़ी के जलने के बाद दोबारा लकड़ी प्राप्त नहीं कर सकते।

प्रश्न (iii)
चूने के पानी में से कार्बन-डाइऑक्साइड को गुजारने से क्या होगा ?
उत्तर-
जब कार्बन-डाइऑक्साइड को चूने के पानी में से गुजारा जाता है तो चूने का पानी कैल्शियम कार्बोनेट बनने पर दुधिया हो जाता है।

प्रश्न (iv)
लोहे की कीलें डालने में कॉपर सल्फेट (Cuso.) के घोल (विलयन) का रंग क्यों बदल जाता है ? रासायनिक समीकरण भी लिखें।
उत्तर-
लोहे की कीलें कॉपर सल्फेट के घोल में डालने पर कॉपर सल्फेट घोल का रंग नीले से हरे रंग में बदल जाता है। कुछ समय पड़ा रहने पर ही लोहे की कीलों पर भूरी परत जमा हो जाएगी। लोहे तथा कॉपर सल्फेट के बीच निम्नलिखित रासायनिक क्रिया होती है
रासायनिक समीकरण :
PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन 1
इस क्रिया में आयरन सल्फेट तथा कॉपर (तांबा) बनता है। यह एक रासायनिक क्रिया है।

प्रश्न (v)
मैग्नीशियम रिब्बन (फीते) को जलाने से पैदा हुई भस्म को जल में घोला जाता है। अब निम्नलिखित के उत्तर दें-
(i) मैग्नीशियम के जलने का समीकरण लिखें।
(ii) क्या होगा जब राख तथा पानी के घोल को निम्नलिखित में मिलाया जाता है
(a) नीला लिटमस घोल (b) लाल लिटमस घोल।
(iii) राख तथा जल के घोल से कौन सा उत्पाद बनता है ? यह तेज़ाबी है या क्षारीय।
उत्तर-
(i) 2Mg + O2 → 2MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड)

(ii) जब मैग्नीशियम राख तथा पानी के घोल में नीला लिटमस डालने से रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है। परन्तु लाल लिटमस डालने से लिटमस का रंग नीला हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि मैग्नीशियम ऑक्साइड का विलयन क्षारीय होने के कारण लाल लिटमस नीला हो जाता है।

(iii) मैग्नीशियम ऑक्साइड की राख तथा पानी का घोल क्षारीय होता है।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

7. बड़े उत्तर वाले प्रश्न :-

प्रश्न (i)
रासायनिक तथा भौतिक परिवर्तन क्या होते हैं ? रासायनिक तथा भौतिक परिवर्तनों में अन्तर लिखें।
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन – वे अस्थायी परिवर्तन, जिसमें किसी पदार्थ के केवल भौतिक गुणों (रंग, आकार, लंबाई आदि) में परिवर्तन होता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। भौतिक परिवर्तन सामान्यतः उत्क्रमणीय होता है। अर्थात् परिस्थितियों के उलटने से मूल पदार्थ प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
उदाहरण – मोम का पिघलना, पानी का जमना, लोहे की चुम्बकीयता।
रासायनिक परिवर्तन – वे परिवर्तन जिसमें एक या अधिक नये गुणों वाले नये पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। रासायनिक परिवर्तन अनुत्क्रमणीय परिवर्तन होता है।
उदाहरण-कोयले का जलना, दूध से दही बनना, उदासीनीकरण, मैग्नीशियम के रिबन का जलना, भोजन सामग्री का गल-सड़ जाना आदि।

भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन में अन्तर-

भौतिक परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन
1. यह एक अस्थायी परिवर्तन है। 1. यह एक स्थायी परिवर्तन है।
2. इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता। 2. इसमें नये गुणों वाले नये पदार्थ उत्पन्न होते हैं।
3. उत्पादों को साधारण विधि द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है। 3. उत्पादों को साधारण विधि का परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
4. पदार्थ की बनावट में कोई अन्तर नहीं होता। 4. पदार्थों की बनावट में बहुत अन्तर आता है।
5. कोई ऊर्जा परिवर्तन नहीं होता है। 5. ऊर्जा परिवर्तन होता है।

प्रश्न (ii)
लोहे को जंग लगने से क्या अर्थ है ? लोहे की वस्तुओं को जंग लगने की आवश्यक परिस्थितियां (शर्ते) कौन-सी हैं ? लोहे और लोहे की वस्तुओं को जंग लगने से कैसे बचाया जा सकता है ?
उत्तर-
लोहे को जंग लगना – यह एक ऐसा परिवर्तन है जिसमें लोहे तथा लोहे से बनी वस्तुओं का पर्यावरण की वायु (ऑक्सीजन) तथा नमी (पानी) के संपर्क में आने से हमला होता है। जिसके परिणाम में लोहे की सतह के ऊपर एक लाल भूरी परत बन जाती है जो लोहे की मजबूती को कमजोर कर देती है। इसे लोहे को जंग लगना कहते हैं। लोहे की इस लाल परत को जंग कहते हैं।

लोहे को जंग लगने की शर्ते-

  1. लोहे की वस्तु की खुली सतह
  2. हवा की उपस्थिति
  3. नमी की उपस्थिति।

लोहे को जंग लगने से बचाने के उपाय – लोहे की वस्तुओं को ऑक्सीजन, पानी के संपर्क में आने से रोककर हम लोहे को जंग लगने की प्रक्रिया को रोक सकते हैं या कम कर सकते हैं। निम्नलिखित उपायों से लोहे को जंग लगने से रोका जा सकता है- .

  1. ग्रीस या तेल की परत चढ़ा कर – लोहे की वस्तु की सतह पर ग्रीस या तेल की परत-चढ़ाकर जंग लगने से रोका जा सकता है।
  2. पेंट करके – सतह के ऊपर एक समान तथा निरंतर पेंट की परत चढ़ाकर जंग लगने से रोका जा सकता है।
  3. गैल्वेनीकरण करके – किसी अक्रियशील धातु की लोहे की सतह पर परत जमा कर के लोहे की सतह को हवा तथा नमी के संपर्क में आने से रोका जा सकता है। इस प्रक्रम को गैल्वेनीकरण कहते हैं। लोहे के गैल्वेनीकरण के लिए आमतौर पर एल्युमीनियम तथा जिंक (जिस्त) धातुओं का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न (iii)
कॉपर सल्फेट (CusO4) के क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनाने की विधि-
PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन 2
एक बीकर \(\frac{2}{3}\) पानी से भरो। अब इसमें हल्के सल्फ्यूरिक ऐसिड की कुछ बूंदें डालो। इसे सैप्टिक लैंप पर गर्म करो। जब यह पानी उबलना आरंभ हो तब उसमें कॉपर सल्फेट का पाउडर मिलाओ तथा घोल को लगातार हिलाते रहो। कॉपर सल्फेट के धुल जाने पर और कॉपर सल्फेट मिलाओ ताकि – और अधिक पाउडर घोलना संभव न हो। यह चित्र-कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनाना कॉपर सल्फेट का संतृप्त घोल है। अब इस घोल को ठंडा होने के लिए रख दो। कुछ समय बाद आप इसमें कॉपर सल्फेट (रवे) बने देखोगे। इसे फिल्टर कर लो तथा क्रिस्टलों को सूखने को रख दें।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

Science Guide for Class 7 PSEB भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Intext Questions and Answers

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 58)

प्रश्न 1.
बताएं कि कागज़ को काटना उत्क्रमणीय परिवर्तन है या अनुत्क्रमणीय।
उत्तर-
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन।

प्रश्न 2.
क्या कागज़ को काटना भौतिक परिवर्तन है, या रासायनिक परिवर्तन ?
उत्तर-
कागज़ को काट कर टुकड़ों में बाँटने से इसके आकार में परिवर्तन होता है, परन्तु कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। इसलिए स्पष्ट तौर पर यह एक भौतिक परिवर्तन है।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 58)

प्रश्न 1.
क्या आप चॉक पाउडर से चॉक प्राप्त कर सकते हैं ?
उत्तर-
हाँ, हम चॉक पाउडर से चॉक प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए चॉक पाउडर में पानी मिला कर पेस्ट बना लें फिर इसे बेलकर चॉक के आकार का बनाकर सुखा लें।

प्रश्न 2.
क्या चॉक पाउडर जल में घुल जाता है ?
उत्तर-
नहीं, चॉक पाउडर जल में घुलता नहीं है।

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प्रश्न 3.
उपरोक्त परिवर्तन की स्थिति भौतिक है या रासायनिक ?
उत्तर-
चॉक पाऊडर से चॉक बनाया जा सकता है, भाव आप मूल पदार्थ (चाक पाऊडर) को उसके मूल आकार में प्राप्त कर सकते हो जिसके गुण पहले वाले हैं, परन्तु उसकी शकल तथा आकार में परिवर्तन हुआ है। इसे पीस कर दोबारा चाक पाऊडर बनाया जा सकता है। इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन है।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 59)

प्रश्न 1.
तापमान के ……………………… से बर्फ पिघल कर पानी बन जाती है ?
उत्तर-
बढ़ने।

प्रश्न 2.
तापमान के …………………… से जल बर्फ के रूप में जम जाता है ?
उत्तर-
घटने।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 60 )

प्रश्न 1.
वाष्पीकरण की परिभाषा दें।
उत्तर-
वाष्पीकरण – यह वह प्रक्रिया है जिसमें तरल एक निश्चित तापमान तक गर्म करने से गैसें के रूप में बदल जाता है।

प्रश्न 2.
संघनन की परिभाषा दें।
उत्तर-
संघनन – यह वह प्रक्रिया है जिसमें वाष्प को ठंडा करने से तरल रूप में बदला जाता है। यह वाष्पीकरण से उल्ट प्रक्रिया है।
इसी तरह अगर भाप को ठंडा किया जाए तो यह पानी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रश्न 3.
तापमान के ………………….. से जल तरल से गैसीय अवस्था में बदल जाता है।
उत्तर-
बढ़ने।

प्रश्न 4.
तापमान के ………………………. से जल गैसीय से तरल अवस्था में बदल जाता है।
उत्तर-
घटने।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 60)

प्रश्न 1.
गर्म करने पर ब्लेड के अगले स्वतन्त्र भाग के रंग में आपने क्या परिवर्तन देखा ?
उत्तर-
गर्म होने पर ब्लेड का अगला भाग लाल रंग का हो जाता है और जब उसे आग से हटाकर ठंडा किया जाता है तो यह पहले वाले मूल रंग में वापिस आ जाता है।

प्रश्न 2.
यह परिवर्तन उत्क्रमणीय है या अनुत्क्रमणीय ?
उत्तर-
यह उत्क्रमणीय परिवर्तन है क्योंकि परिवर्तन में कोई नये गुण नहीं बदले हैं तथा परिस्थितियां उल्टाने से यह वापिस मूल रूप में आ जाता है।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 61)

प्रश्न 1.
भौतिक परिवर्तन की परिभाषा लिखो।
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन – यह एक अस्थायी परिवर्तन है जिसमें थोड़े समय के लिए वस्तु के गुणों जैसे आकार, रंग, लंबाई, अवस्था में परिवर्तन होता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।

प्रश्न 2.
क्या कोई नया पदार्थ भौतिक परिवर्तन के दौरान बनता है?
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन के दौरान कोई नये गुणों वाला पदार्थ नहीं बनता।

प्रश्न 3.
अपने आस-पास से भौतिक परिवर्तनों की दो उदाहरण बताइए।
उत्तर-

  1. मोम का पिघलना,
  2. बर्फ का पिघलना,
  3. पानी का जमना,
  4. पानी में चीनी का घुलना।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 62)

प्रश्न 1.
मैग्नीशियम की पट्टी जलने पर किस प्रकार की धातु ऑक्साइड बनाती है ?
उत्तर-
मैग्नीशियम रिबन जलते समय हवा में ऑक्सीजन से मिल कर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।

प्रश्न 2.
उपरोक्त क्रियाकलाप में बने मैग्नीशियम ऑक्साइड का रंग क्या है ?
उत्तर-
मैग्नीशियम रिबन जलने के बाद मैग्नीशियम ऑक्साइड का सफेद रंग का पाउडर बनाता है।

प्रश्न 3.
आप विलयन की अम्लीय या क्षारीय रूप की जाँच करने के लिए किस पत्र का प्रयोग करते हैं ?
उत्तर-
मैग्नीशियम ऑक्साइड के पानी में घोल की जाँच करने के लिए लाल लिटमस पेपर का प्रयोग किया जाता है जिसे यह घोल नीले रंग का कर देता है क्योंकि यह घोल क्षारीय प्रकृति का होता है।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 63)

प्रश्न 1.
तांबे के सल्फेट (कॉपर सल्फेट) का सामान्य नाम क्या है ?
उत्तर-
तांबे के सल्फेट का साधारण नाम ‘नीला थोथा’ है।

प्रश्न 2.
फैरस सल्फेट का रंग और रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर-
आयरन सल्फेट का रंग-हरा। आयरन सल्फेट का रासायनिक मूत्र (फार्मूला)-FeSO4

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सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 64)

प्रश्न 1.
चूने का फार्मूला क्या है ?
उत्तर-
चूने का रासायनिक सूत्र : Ca(OH)2

प्रश्न 2.
उपरोक्त क्रिया में CO2 गैस की उपस्थिति का पता कैसे लगाया जा सकता है ?
उत्तर-
जब कार्बन डाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी में से गुजारा जाता है तो कैल्शियम कार्बोनेट बनने से चूने का पानी दुधिया हो जाता है।
PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन 3

(दुधियापन) सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 66)

प्रश्न 1.
रासायनिक परिवर्तन क्या है ?
उत्तर-
रासायनिक परिवर्तन – वे परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक नये पदार्थ बनते हैं जिनकी संरचना तथा गुण पहले क्रिया करने वाले पदार्थों से भिन्न हैं, को रासायनिक परिवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 2.
रासायनिक परिवर्तन को देखने के लिए दो निरीक्षण लिखें।
उत्तर-

  1. नये गुणों वाले पदार्थ का बनना।
  2. रासायनिक संरचना में तबदीली।

प्रश्न 3.
चूने का पानी क्या है ?
उत्तर-
चूने का पानी कैल्शियम हाइड्रोक्साइड का घोल।

प्रश्न 4.
जब कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी से प्रवाहित होता है तो क्या होता है ?
उत्तर-
जब कार्बन डाइऑक्साइड गैस चूने के पानी में से गुज़रती है तो कैल्शियम कार्बोनेट बनने के कारण पानी दुधिया हो जाता है।
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प्रश्न 5.
जब एसिटिक एसिड (सिरका) बेकिंग सोडा के साथ प्रतिक्रिया करता है, तो कौन-सी गैस उत्पन्न होती है ?
उत्तर-
जब सिरका (ऐसीटिक ऐसिड) बेकिंग सोडा (मीठा सोडा) से प्रतिक्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस पैदा होती है।
PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन 5

प्रश्न 6.
कॉपर सल्फेट का रंग और सूत्र क्या है ?
उत्तर-
कॉपर सल्फेट का रंग : नीला। कॉपर सल्फेट का रासायनिक सूत्र : Cuso4

प्रश्न 7.
रासायनिक क्रियाओं के परिणामस्वरूप बने कुछ यौगिकों के नाम बताएँ।
उत्तर-
रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप बने कुछ यौगिकों के नाम-

  1. कैल्शियम कार्बोनेट,
  2. सोडियम क्लोराइड
  3. सोडियम नाइट्रेट,
  4. कॉपर सल्फेट,
  5. पानी,
  6. कार्बन डाइऑक्साइड,
  7. मैग्नीशियम ऑक्साइड।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 8.
अध्याय 5 में आपने अम्ल और क्षारक को परस्पर मिलाकर उदासीन किया था ? क्या उदासीनीकरण की अभिक्रिया रासायनिक परिवर्तन है ?
उत्तर-
उदासीनीकरण एक रासायनिक परिवर्तन हैं क्योंकि अम्ल तथा क्षारक को आपस में मिलाने से नमक तथा पानी उत्पाद बनते हैं। नमक की संरचना तथा गुण बिल्कुल भिन्न हैं जो न तो वे अम्ल से मिलते हैं तथा न ही क्षारक से। अर्थात् इस प्रतिक्रिया के दौरान नये गुणों वाला तथा नयी संरचना वाला पदार्थ नमक बनता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि उदासीनीकरण रासायनिक परिवर्तन है।

सोचें तथा उत्तर दें :-(पेज 68)

प्रश्न 1.
क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया का अंतिम उत्पाद क्या होता है ?,
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया के दौरान अवस्था में परिवर्तन होता है। इस प्रतिक्रिया में साफ तथा शुद्ध क्रिस्टल (रवे) बनते हैं। इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन है।

प्रश्न 2.
आप गर्म पानी में कॉपर सल्फेट पाउडर घोलना कब बंद करोगे ?
उत्तर-
कॉपर सल्फेट के पाउडर को तब तक गर्म पानी में घोलना जारी रखेंगे। जब तक उसमें और कॉपर सल्फेट घोलना संभव न हो। इस अवस्था को संतृप्त अवस्था कहते हैं तथा घोल को संतृप्त घोल कहते हैं। जब अधिक कॉपर सल्फेट घुल न सके तथा कॉपर सल्फेट घोलना बंद कर दो तथा घोल को ठंडा होने के लिए रख दो।

PSEB Solutions for Class 7 Science भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों में रिक्त स्थानों को भरिए-

(क) जब कार्बन-डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो यह ……………….. के बनने के कारण दूधिया हो जाता है।
उत्तर-
कैल्शियम कार्बोनेट

(ख) खाने के सोडे का रासायनिक नाम ………………………. है।
उत्तर-
सोडियम बाइकार्बोनेट

(ग) ऐसी दो विधियाँ, जिनके द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है ……………… और …………………. हैं।
उत्तर-
पेंट करना, गैल्वेनीकरण

(घ) ऐसे परिवर्तन भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं, जिनमें किसी पदार्थ के केवल ………………………… गुणों में परिवर्तन
होता है।
उत्तर-
भौतिक

(ङ) ऐसे परिवर्तन जिनमें नए पदार्थ बनते हैं, ………………………. परिवर्तन कहलाते हैं।
उत्तर-
रासायनिक।

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प्रश्न 2.
कॉलम A में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम B के शब्दों से कीजिए-

कॉलम ‘A’ कालम ‘B’
(i) कार्बनडाइऑक्साइड (क) अस्थायी परिवर्तन
(ii) रासायनिक परिवर्तन (ख) चूने के पानी को दुधिया
(iii) मैग्नीशीयम की तार का हवा में जलना (ग) वाष्पीकरण
(iv) भौतिक परिवर्तन (घ) रासायनिक परिवर्तन
(v) पानी का भाप बनना (ङ) नये गुणों वाला नया पदार्थ बनना

उत्तर-

कॉलम ‘A’ कालम ‘B’
(i) कार्बनडाइऑक्साइड (ख) चूने के पानी को दुधिया
(ii) रासायनिक परिवर्तन (ङ) नये गुणों वाला नया पदार्थ बनना
(iii) मैग्नीशीयम की तार का हवा में जलना (घ) रासायनिक परिवर्तन
(iv) भौतिक परिवर्तन (क) अस्थायी परिवर्तन
(v) पानी का भाप बनना (ग) वाष्पीकरण

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनें-

(i) जंग है-
(क) कार्बनडाइऑक्साइड
(ख) आयरन
(ग) ऑक्सीजन
(घ) आयरन ऑक्साइड
उत्तर-
(घ) आयरन ऑक्साइड।

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिक परिवर्तन नहीं है ?
(क) लोहे को जंग लगना
(ख) बर्फ का पिघलना
(ग) बर्फ का जमना
(घ) चीनी को पानी में घोलना।
उत्तर-
(क) लोहे को जंग लगना।

(iii) ………………….. एक भौतिक परिवर्तन है ।
(क) लोहे को जंग लगना
(ख) मैग्नीशीयम रिबन का जलना
(ग) बिजली बल्ब का जलना
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) बिजली बल्ब का जलना।

(iv) किसके क्रिस्टल (रवे) नहीं प्राप्त किए जा सकते ?
(क) सोडियम क्लोराइड
(ख) कार्बन (ग) कॉपर सल्फेट
(घ) आयरन सल्फेट।
उत्तर-
(ख) कार्बन।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

(v) अम्ल तथा क्षारक की आपसी क्रिया है-
(क) उदासीनीकरण
(ख) मिश्रित धातु
(ग) गैलवेनीकरण
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) उदासीनीकरण।

(vi) लोहे की शीट पर जिस्त की पर्त चढ़ाने की विधि है-
(क) मिश्रित धातु बनाना
(ख) गैल्वेनीकरण
(ग) किस्टलीकरण
(घ) उदासीनीकरण
उत्तर-
(ख) गैल्वेनीकरण।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों में से ठीक अथवा गलत बताएं।

(क) लकड़ी के लट्ठे को टुकड़ों में काटना एक रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर-
ग़लत

(ख) पत्तियों से खाद का बनना एक भौतिक परिवर्तन है।
उत्तर-
ग़लत

(ग) जस्ते (जिंक) लेपित लोहे के पाइपों में आसानी से जंग नहीं लगती है।
उत्तर-
ठीक

(घ) लोहा और जंग एक ही पदार्थ हैं।
उत्तर-
ग़लत

(च) भाप का संघनन रासायनिक परिवर्तन नहीं है।
उत्तर-
ठीक।

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अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जब रबड़ को खींचा जाता है, तो यह किस प्रकार का परिवर्तन होता है ?
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन।

प्रश्न 2.
हवा से संबंधित किसी भौतिक परिवर्तन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
गुब्बारे को फुलाना।

प्रश्न 3.
रासायनिक परिवर्तन से क्या होता है ?
उत्तर-
नए पदार्थ बनते हैं।

प्रश्न 4.
जंग क्या है ?
उत्तर-
जंग-लोहे की वस्तुओं पर गहरे लाल भूरे रंग की परत जंग कहलाती है।

प्रश्न 5.
जंग लगने के लिए कौन-सी दो परिस्थितियाँ आवश्यक हैं ?
उत्तर-

  1. जल,
  2. ऑक्सीजन अथवा वायु।

प्रश्न 6.
मैग्नीशियम फीता जलाने से जो राख मिलती है, उसे पानी में घोलने से क्या होता है ?
उत्तर-
मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बनता है।

प्रश्न 7.
लिटमस कागज़ के परीक्षण से मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड की प्रकृति क्या है ?
उत्तर-
क्षारकीय।

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प्रश्न 8.
कॉपर सल्फेट विलयन का रंग क्या है ?
उत्तर-
नीला।

प्रश्न 9.
कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की कील डुबोने से क्या होता है ?
उत्तर-
विलयन का नीला रंग हरा हो जाता है।

प्रश्न 10.
जब बेकिंग सोडे में सिरका मिलाया जाता है तो कौन-सी गैस उत्पन्न होती है ?
उत्तर-
कार्बन डाइऑक्साइड।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को भौतिक अथवा रासायनिक परिवर्तनों में वर्गीकृत करो-
(क) काँच का पिघलना
(ख) अगरबत्ती का जलना
(ग) कपड़े का फाड़ना
(घ) फूल से बीज का बनना
(च) खाने का पकना
(छ) बादल का बनना।
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन – काँच का पिघलना, कपड़े का फाड़ना, बादल का बनना। रासायनिक परिवर्तन अगरबत्ती का जलना, फूल से बीज बनना, खाने का पकना।

प्रश्न 2.
भौतिक परिवर्तनों की विशेषताएं लिखो
उत्तर-
भौतिक परिवर्तनों की विशेषताएं

  1. अंतिम उत्पाद अभिकारकों से मिलते-जुलते हैं।
  2. कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
  3. परिवर्तन उत्कर्मणीय होते हैं।
  4. एक अस्थायी परिवर्तन है।
  5. ऊर्जा बहुत कम खर्च होती है।
  6. अभिकारकों और उत्पादों का कुल पुँज समान रहता है।

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प्रश्न 3.
रासायनिक परिवर्तनों के गुण लिखो।
उत्तर-
रासायनिक परिवर्तनों के गुण-

  1. एक या दो नए उत्पादन उत्पन्न होते हैं।
  2. एक स्थाई परिवर्तन है और आसानी से उत्क्रमित नहीं हो सकता।
  3. रासायनिक क्रिया में ऊर्जा परिवर्तन काफ़ी अधिक होता है।
  4. अभिकारकों और उत्पादों का कुल पुँज क्रिया दौरान स्थिर रहता है।

प्रश्न 4.
मैग्नीशियम का जलना एक रासायनिक परिवर्तन क्यों है ?
उत्तर-
मैग्नीशियम फीते का जलना-जब मैग्नीशियम फीते को वायु में जलाया जाता है, तो यह चमकीला प्रकाश देता है और राख उत्पन्न करता है। क्योंकि राख (मैग्नीशियम ऑक्साइड) एक नया पदार्थ है, इसलिए मैग्नीशियम फीते का जलना एक रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 5.
पानी में शक्कर घोलना एक भौतिक परिवर्तन है। क्यों ?
उत्तर-
जब शक्कर के दाने पानी में घोले जाते हैं, तब एक साफ विलयन प्राप्त होता है। इस परिवर्तन के भौतिक होने के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
  2. शक्कर क्रिस्टलीकरण द्वारा वापिस प्राप्त की जा सकती है।
  3. परिवर्तन में कोई ऊष्मा की ज़रूरत नहीं है।
  4. शक्कर विलयन का कुल पुँज, जल और शक्कर के दानों के पुँज के समान है।

प्रश्न 6.
जब नींबू के रस में खाने का सोडा मिलाया जाता है, तो बुलबुले बनते हैं और गैस निकलती है। यह किस प्रकार का परिवर्तन है ? समझाइए।
उत्तर-
जब खाने का सोडा (क्षारक) नींबू के रस (तनु सिट्रिक अम्ल) में मिलाया जाता है तो कार्बन-डाइऑक्साइड पैदा होती है जो बुलबुलों के रूप में बाहर निकलती है। यह एक रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है।

प्रश्न 7.
समझाइए कि लकड़ी के जलने और उसे छोटे टुकड़ों में काटने को दो भिन्न प्रकार के परिवर्तन क्यों माना जाता है।
उत्तर-
लकड़ी का जलना – एक रासायनिक परिवर्तन है, क्योंकि लकड़ी जल कर राख और गैस उत्पन्न करती है। टुकड़ों में काटना-एक भौतिक परिवर्तन है, क्योंकि लकड़ी के टुकड़ों और लकड़ी के भौतिक गुण समान हैं।

PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 8.
समझाइए कि लोहे के गेट को पेंट करने से उसका जंग लगने से बचाव किस कारण से होता है।
उत्तर-
पेंट द्वारा जंग लगने से बचाव-जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक हैं। यदि लोहे के गेट को पेंट कर दिया जाता है, तो इसका संपर्क वायु से टूट जाता है जिसके फलस्वरूप जंग नहीं लगता।

प्रश्न 9.
समझाइए कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अपेक्षा समुद्रतटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में जंग अधिक क्यों लगती है।
उत्तर-
समुद्रतटीय क्षेत्रों में जंग लगने की तीव्र गति का कारण – समुद्रतटीय क्षेत्रों की हवा नमी से भरी होती है जो जंग लगने की दर को बढ़ाती है। परंतु रेगिस्तान के क्षेत्रों में हवा में नमी नहीं होती इसलिए वहाँ जंग लगने की दर कम है।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रिस्टलीकरण क्या है ? फिटकरी के क्रिस्टल कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण-किसी पदार्थ के शुद्ध तथा बड़ी आमाप के क्रिस्टल, उनके विलयन से प्राप्त करने की विधि को क्रिस्टलीकरण कहते हैं। यह प्रक्रम अक्सर शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए अपनाया जाता है।
PSEB 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन 6
क्रिस्टल बनाना फिटकरी के क्रिस्टल बनाना – एक बीकर में आसुत जल लें। इसमें फिटकरी पाऊडर घोलें। विलयन को गर्म करें और फिटकरी पाउडर तब तक मिलाएं जब तक फिटकरी का घुलना संभव हो। गर्म विलयन को छान लें और ठंडा होने के लिए रख दें। फिटकरी के बड़े क्रिस्टल बन जाएंगे।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

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PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

कम्प्यूटर सिस्टम के मुख्य भागों की जान-पहचान (Introduction to Computer of Computer System)-
कम्प्यूटर डाटा, तस्वीरें, आवाज़ तथा ग्राफिक्स को प्रोसैस कर सकता है। यह जटिल समस्याओं को तेजी से शुद्धता के साथ प्रोसैस करता है। मुख्य तौर पर कम्प्यूटर निम्न पांच आधारभूत कार्य करता है

  1. यह इनपुट में डाटा तथा निर्देश स्वीकार करता है।
  2. यह डाटा को स्टोर करता है।
  3. यह यूज़र की आवश्यकता अनुसार डाटा प्रोसैस करता है।
  4. यह आऊटपुट के रूप में नतीजा देता है।
  5. यह कम्प्यूटर की अंदरूनी गतिविधियों को नियंत्रित करता है।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 1

कम्प्यूटर कैसे कार्य करता है ? (How does Computer Work ?)
कम्प्यूटर इस प्रकार के मूल कार्य करता है
1. इनपुट लेना (Input) कम्प्यूटर का पहला कार्य इनपुट लेना है। यह इनपुट डाटा तथा निर्देशों के रूप में हो सकती है। इसके सभी कार्य इनपुट पर ही निर्भर करते हैं। इस इनपुट के बगैर कम्प्यूटर कार्य नहीं कर सकता।
2. प्रोसैस करना (Processing)-प्रोसैस करने का अर्थ है दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करना। इस क्रिया में डाटा को जानकारी में बदला जाता है।
3. आऊटपुट देना (Output)-आऊटपुट का मतलब है जानकारी मनुष्य को देना। प्रोसैसिंग के बाद जो भी जानकारी तैयार होती है उसे मनुष्य तक पहुंचाया जाता है। यह जानकारी दिए गए निर्देशों के अनुसार ही प्रदान की जाती है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 2
स्टोरेज कम्प्यूटर अपने सभी कार्यों पर नियन्त्रण भी करता है। यह अपने साथ लगाए यंत्रों पर भी नियन्त्रण करता है।
4. भंडारण करना (Storage)-कम्प्यूटर अपने कार्य में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुएं संभाल कर रखता है। इनका प्रयोग वह प्रोसैस करने या आऊटपट प्रदान करने में करता है। वह अपने नतीजे भविष्य के लिए भी संभाल कर रखता है।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

सी०पी०यू० का ब्लाक डायाग्राम (Block Diagram of C.P.U.)
सी०पी०यू० का पूरा नाम सैंट्रल प्रोसैसिंग यूनिट है। यह कम्प्यूटर का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। जैसे कि हमने पढ़ा है कि हम कम्प्यूटर सिस्टम को सब से पहले इनपुट देते हैं, इसके बाद डाटा प्रोसैस होता है और अन्त में हम आऊटपुट प्राप्त करते हैं। ब्लाक डायाग्राम वह चित्र है जों कम्प्यूटर के काम करने के ढंग को दर्शाता है। इसमें तीन भाग दर्शाए जाते हैं।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 3

सेंट्रल प्रोसैसिंग के भाग (Parts of Central Processing)
ब्लाक डायाग्राम वह चित्र है जो कम्प्यूटर के कार्य करने के ढंग को दर्शाता है। इसमें तीन भाग दिखाये जाते हैं।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 4
1. मेमोरी यूनिट (Memory unit)- यह यूनिट डाटा तथा निर्देश स्टोर करने का कार्य करता है। यह सी०पी०यू० से नजदीकी सम्बन्ध रखता है पर यह उससे अलग होता है। सी०पी०यू० से सम्बन्धित मेमोरी को प्राइमरी मेमोरी भी कहते हैं। हम जो भी सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में इंस्टाल करते हैं वह पहले प्राइमरी मेमोरी में स्टोर होता है। इसमें दो प्रकार की मेमोरी होती है-

  • प्राइमरी मेमोरी
  • सैकेण्डरी मेमोरी।

2. कंट्रोल यूनिट (Control Unit)-कंट्रोल यूनिट कम्प्यूटर के सारे कार्यों को कंट्रोल करता है। यह कम्प्यूटर के विभिन्न भागों को दिशा-निर्देश देता है जैसे कि इनपुट लेना, प्रोसैसिंग के लिए डाटा स्टोर करना, नतीजे पैदा करना। यह प्रोग्राम की हिदायत को एक-एक करके पढ़ता है, उसका अनुवाद करता है तथा एक क्रम में दूसरे भागों को कंट्रोल करता है। इसके कार्य निम्नलिखित अनुसार होते हैं –

  • निर्देश के लिए कोड पढ़ना
  • कोड का अनुवाद करना
  • ए०एल०यू० को ज़रूरी डाटा प्रदान करना।

3. अर्थमैटिक तथा लॉजिकल यूनिट (Arithmetic and Logic Unit) कम्प्यूटर का यह भाग गणित सम्बन्धी कार्य करता है। इसको कम्प्यूटर के सी०पी०यू० का बिल्डिंग ब्लॉक भी कहा जाता है। यह निम्न प्रकार के कार्य करता है –

  • पूर्ण अंक अर्थमैटिक फंक्शन (जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग)।
  • बिटवाईज लॉजिक फंक्शन (से कम, से ज्यादा, बराबर)।

कम्प्यूटर मेमोरी की किस्में (Types of Computer Memories)
कम्प्यूटर मेमोरी मुख्य रूप से दो प्रकार में विभाजित की जाती है।
(i) प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
(ii) सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory)|
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 5
(i) प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)-प्राइमरी मेमोरी को मुख्य मेमोरी भी कहा जाता है। यह मेमोरी माइक्रोप्रोसेसर द्वारा सीधे प्रयोग की जा सकती है। कम्प्यूटर जिस भी डाटा तथा निर्देश पर काम करता है वह पहले इसी मेमोरी में स्टोर की जाती हैं । इस मेमोरी को कम्प्यूटर की मुख्य मेमोरी भी कहा जाता है। यह एक वोलेटाइल प्रकार की मेमोरी होती है। बिजली के जाने के साथ ही इसमें रखा सारा डाटा तथा निर्देश खत्म हो जाते हैं। प्राइमरी मेमोरी दो प्रकार की होती है :
(a) रैंडम एक्सेस मेमोरी
(b) रीड ओनली मेमोरी।
(a) रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM)-इस मेमोरी को रैम भी कहते हैं। यह मेमोरी कम्प्यूटर की मुख्य मेमोरी में से एक है। यह मैमरी काफ़ी तेज़ होती है। सभी डाटा तथा निर्देश इसी में स्टोर किए जाते हैं। यह मेमोरी वोलेटाइल प्रकार की मैमरी होती है तथा बिजली के जाने के बाद या जब हम कम्प्यूटर को बंद कर देते हैं तब इसमें रखा सारा डाटा नष्ट हो जाता है। इसे डाटा संभालने के लिए नहीं बनाया गया है जो कम्प्यूटर के लिए ज़रूरी है।

(b) रीड ओनली मेमोरी (ROM)-इस मेमोरी को रखा जाता है। इस मेमोरी में रखा गया डाटा तथा निर्देशक के तौर पर ज़रूर होते हैं। इस मैमरी में रखे डाटे को कोई भी व्यक्ति बदल नहीं सकता। इस मेमोरी में रखा डाटा सिर्फ इसको बनाने वाले द्वारा ही रखा जाता है। इसके अलावा इसके डाटा को कोई भी व्यक्ति बदल नहीं सकता। यह मेमोरी नॉन्वोलेटाइल प्रकार की मेमोरी होती है । इस मेमोरी में मुख्यतः कम्प्यूटर को शुरू करने के निर्देश संभाले जाते हैं। यह मदरबोर्ड में एक चिप के रूप में लगी होती है।

(ii) सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory)-सेकेंडरी मेमोरी को auxilary मेमोरी भी कहते हैं। इसका प्रयोग डाटा तथा निर्देशों के तौर पर संभालने के लिए किया जाता है। यह मेमोरी मुख्य मेमोरी से धीमी गति पर कार्य करती है परंतु इसमें दूर करने की क्षमता मुख्य मेमोरी से काफ़ी ज्यादा होती है। कम्प्यूटर को प्रयोग करने वाला व्यक्ति इसकी क्षमता को अपनी ज़रूरत अनुसार बढ़ा भी सकता है। सेकेंडरी मेमोरी कई प्रकार की होती है इस मेमोरी का प्रयोग सीपीयू सीधे तौर पर नहीं कर सकता। इस मेमोरी में कुछ डाटा ज्ञान प्राप्त करने के लिए पहले उन्हें मुख्य मेमोरी में लाया जाता है। सेकेंडरी मेमोरी का प्रयोग विभिन्न यंत्रों के रूप में किया जाता है। हार्ड डिस्क, सीडी, डी वी डी या पेन ड्राइव इसकी उदाहरणें हैं।

प्राइमरी मेमोरी और सैकेण्डरी मेमोरी में अंतर (Difference between Primary and Secondary Memory)

प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) सैकेण्डरी मेमोरी (Secondary Memory)
(i) यह CPU द्वारा सीधे Access की जा सकती है। (i) यह CPU द्वारा सीधे Access नहीं की जा सकती है।
(ii) इसकी स्टोरेज करने की समर्था कम है। (ii) इसकी स्टोर करने की ताकत अधिक है।
(iii) Access स्पीड बहुत तेज़ है। (iii) Access स्पीड धीमी है।
(iv) कम्प्यूटर RAM तथा ROM के अतिरिक्त काम नहीं कर सकता। (iv) कम्प्यूटर केवल एक मेमोरी के साथ काम कर सकता है। जैसे-Floppy Disk या हार्ड डिस्क आदि।
(v) आम मेमोरी से यह मेमोरी सस्ती होती है। (v) यह महंगी होती है।
(vi) आमतौर पर इसमें बाहरी यंत्र जुड़े होते हैं। (vi) कोई भी बाहरी यंत्र प्रयोग के लिए
नहीं जुड़ा होता।
(vii) यह Random Access Type की होती है। (vii) यह Random या Sequence Access दोनों तरह की होती है।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

कम्प्यूटर की किस्में (Categories of Computer)
कम्प्यूटर को उद्देश्य (Objective), कार्य प्रणाली (Functioning) तथा आकार के आधार पर विभाजित किया जाता है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 6
कम्प्यूटर को माइक्रो, मिनी, मेनफ्रेम तथा सुपर कम्प्यूटर के तौर पर विभाजित किया जाता है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 7

माइक्रो कम्प्यूटर (परस्नल कम्प्यूटर) [Micro Computer (Personal Computer)]
माइक्रो कम्प्यूटर सबसे छोटे तथा कम गति के कम्प्यूटर होते हैं। इनके छोटे आकार तथा प्रोसैसर के कारण इन्हें माइक्रो कम्प्यूटर कहा जाता है। इनके प्रोसैसर को माइक्रो प्रोसैसर कहते हैं। इसे CPU भी कहा जाता है जिसका कार्य कंट्रोल तथा गणना करना होता है। इसके मुख्य भाग ROM, RAM, इनपुट, आऊटपुट यन्त्र आदि मुख्य भाग होते हैं।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 8

मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)
यह मल्टी-यूज़र की श्रेणी से सम्बन्धित है। इसमें आम बड़े कम्प्यूटर वाली खूबियां होती हैं। यह आकार में माइक्रो कम्प्यूटर से बड़ा होता है। इसका प्रयोग वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाता है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 9

मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Main-frame Computer)
यह कम्प्यूटर काफी ज्यादा मात्रा में तथा तेज़ी से प्रोसैस करने लायक होते हैं। यह मिनी कम्प्यूटर से बड़े तथा सुपर कम्प्यूटर से छोटे होते हैं। इनका प्रयोग सरकारी बैंकों तथा बड़ी कंपनियों में होता है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 10

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

सुपर कम्प्यूटर (Super Computer)
यह सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर होता है। इसकी गति तथा प्रोसैसिंग बहुत तेज़ होती है। इसकी स्टोरेज क्षमता बहुत ज्यादा होती है। इसका प्रयोग बड़ी कंपनियों में बहुत अधिक कार्यों में किया जाता है। इसकी कीमत काफी ज्यादा होती है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 11

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान

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PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान

कम्प्यूटर से जान-पहचान (Introduction to Computer)

आजकल कम्प्यूटर बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह किसी भी काम को आसानी तथा तेज़ी से करता है। हमारी रोज़ाना की कई क्रियाएं इसी पर आधारित हैं। कम्प्यूटर का प्रयोग स्कूल, बैंक, अस्पताल, दुकानों, रेलवे तथा हवाई सेवाओं, शिक्षा तथा मनोरंजन के लिए किया जाता है।

कम्प्यूटर (Computer)-
कम्प्यूटर शब्द लेटिन भाषा के शब्द ‘कम्प्यूटरे’ से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘गणना करना’। बिना निर्देश कम्प्यूटर कोई भी कार्य नहीं कर सकता। कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक यन्त्र है जो इनपुट के तौर पर डाटा प्राप्त करता है, उसे प्रोसैस करता है तथा नतीजा दिखाता है। यह यूजर से डाटा तथा निर्देश प्राप्त करता है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान 1

  • कम्प्यूटर को निर्देश तथा डाटा देने की प्रक्रिया को इनपुट कहा जाता है।
  • कम्प्यूटर इनपुट को प्रोसैस करता है।
  • प्रोसैसिंग के बाद हमें जो नतीजा प्राप्त होता है उसे आऊटपुट कहा जाता है।

कम्प्यूटर की परिभाषा (Definition of Computer)
“कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक मशीन है जो इनपुट के तौर पर यूजर से डाटा प्राप्त करती है तथा इस इनपुट किये डाटा को निर्देश अनुसार प्रोसैस करता है तथा नतीजा (आऊटपुट) प्रदान करता है। कम्प्यूटर इस आऊटपुट को भविष्य के लिए संभाल कर भी रखता है। यह नुमैरीकल (Numerical) और नान-नुमैरीकल (Non-Numerical) गणनाओं को प्रोसेस कर सकता है।”

कम्यूटर का प्रयोग (Use of Computer) हम कम्प्यूटर पर गणित की गणनाएँ, स्पैल चैक, गेम, तस्वीर बनाना, गाने सुनना, छपाई करना, टिकटें बुक करना, मौसम की जानकारी प्राप्त करना तथा नतीजे प्राप्त करना आदि कार्य कर सकते हैं।

हम कम्प्यूटर पर निम्न कार्य कर सकते हैं-

  1. गणितिक गणनाएं।
  2. टैक्सट के स्पैल चैक
  3. गेम खेलना
  4. तस्वीर बनाना।
  5. फिल्म देखना तथा गाने सुनना।
  6. किताबें तथा अखबारें छापना
  7. टिकट बुक करना।
  8. रेलगाड़ी, बसों तथा जहाज़ों के आने-जाने का पता करना।
  9. मौसम की जानकारी प्राप्त करना।
  10. स्कूल रिपोर्ट, नतीजा तथा समय सारणी तैयार करना।
  11. रेलवे, बस तथा हवाई जहाज़ में सफर करने के लिए टिकट बुक कराना।
  12. किसी जगह पहुँचने के लिए रास्ता पता करना।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान

कम्प्यू टर के उपयोग (Application of Computer)
कम्प्यूटर का प्रयोग, शिक्षा, सेहत, दुकानों, व्यापार, बैंकों, मनोरंजन, सरकारी सैक्टर, खेलों आदि क्षेत्रों में किया जाता है।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान 2

आजकल कम्प्यूटर विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है जिनका वर्णन नीचे किया गया है-
1. शिक्षा के क्षेत्र में (In Education Field)-शिक्षा में कम्प्यूटर का प्रयोग हाज़री लगाने, मार्कशीट बनाने, पेपर बनाने आदि में किया जाता है। लाइब्रेरी में भी कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है। इसकी सहायता से रिज़ल्टस बनाए जाते हैं। कम्प्यूटर का प्रयोग कक्षा में पढ़ाने के लिए भी किया जाता है। प्रयोगशालाओं में भी कम्प्यूटर का प्रयोग होता है।

2. सेहत तथा दवाइयों के क्षेत्र में (In Health and Medicine field)-आजकल कम्प्यूटर का प्रयोग अस्पतालों में किया जाता है जहां डॉक्टर इसका प्रयोग मरीज की जांच करने के लिए करते हैं। इनकी सहायता से मरीज को दवाई दी जाती है तथा उनके आपरेशन भी किए जाते हैं।

3. दुकानों में (In Shops) कम्प्यूटर का प्रयोग एक दुकानदार दुकानों में अपने सामान का उपलब्ध रिकार्ड रखने में करता है। वह दुकान में हुई खरीद-बिक्री तथा टैक्स का रिकार्ड कम्प्यूटर में रख सकता है। आजकल कम्प्यूटर पर बिक्री के बिल भी तैयार किए जाते हैं।

4. व्यापार में (Trade Use)-कम्प्यूटर का प्रयोग व्यापार में हिसाब-किताब रखने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से खरीददारी भी की जाती है। हम घर बैठे कम्प्यूटर की सहायता से दुनिया में कहीं से भी खरीददारी कर सकते हैं। इनके प्रयोग से बिलों का भुगतान किया जा सकता है। आजकल बड़े-बड़े माल तथा शोपिंग सैंटरों में इसी का प्रयोग होता है।

5. बैंकों में (In Banks)-आजकल सभी बैंक कम्प्यूटर की सहायता से चलते हैं। ATM मशीन अपने आप में एक कम्प्यूटर है जिससे हम कभी भी पैसे निकाल सकते हैं। हम इंटरनैट की सहायता से कहीं से भी अपना पैसा कहीं भी भेज सकते हैं।

6. मनोरंजन के क्षेत्र में (In field of Entertainment) मनोरंजन क्षेत्र में भी कम्प्यूटर का प्रयोग हो रहा है। कार्टून फिल्में इसी की सहायता से बनती हैं जिन्हें बच्चे बहुत पसंद करते हैं। वीडियो गेम भी कम्प्यूटर की सहायता से चलती है। आजकल तो कई प्रकार की फिल्में भी इसी के प्रयोग से बनती हैं।

7. विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में (In different Government Fields)-सरकार के कई विभाग कम्प्यूटर का प्रयोग अपनी योजना, नियंत्रण तथा कानून को प्रभावशाली बनाने के लिए करते हैं। कम्प्यूटर का प्रयोग ट्रैफिक, सैर-सपाटा, सूचना, शिक्षा, सेना, हवाबाज़ी तथा अन्य कई क्षेत्रों में होता है।

8. खेलों में (In Sports)- कम्प्यूटर का प्रयोग खेलों में भी होता है। क्रिकेट में आजकल बहुत प्रभावशाली स्कोर बोर्ड होते हैं। इनमें जैसे ही सूचना दाखिल की जाती है यह उसी समय दर्शकों को नतीजा दिखाता है।

9. संचार (Communication)-कम्प्यूटर का प्रयोग संचार के लिए किया जाता है । इसके द्वारा हम नए माध्यम जैसे कि वीडियो कॉल आदि का प्रयोग कर संचार कर सकते हैं।

कई तरह के – नए संचार माध्यम : जैसे-ई-मेल, चैट आदि कम्प्यूटर की ही देन है। इसका प्रयोग किसी भी स्मार्ट फोन, टेबलेट, कम्प्यूटर, लैपटाप या डैस्कटाप आदि से किया जाता है।

PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान

कम्प्यू टर की विशेषताएं (Characteristics of Computer)
गति, शुद्धता, एकसारता, बहुगणता, आटोमेशन तथा भण्डारण आदि कम्प्यूटर की विशेषताएं हैं।
PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान 3

1. गति (Speed)-कम्प्यूटर काफी तेज काम करता है। जिन गणनाओं में हम कई घंटे लगाते हैं, उन्हें यह कुछ सैकेंड में कर सकता है। कम्प्यूटर एक सैकेंड में कई लाख गणनाएं कर सकता है। आप को यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि एक कम्प्यूटर एक सैकेण्ड में कई लाखों हिदायतों पर अमल कर सकता है।

2. शुद्धता (Accuracy)-कम्प्यूटर पर काम करने पर शुद्धता का स्तर बहुत ऊंचा होता है। कम्प्यूटर हमेशा सही कार्य करता है। अगर कोई गलती होती है तो वह इनपुट या निर्देश की होती है। जिस तरह के निर्देश या हिदायत कम्प्यूटर को दी जाती है यह वैसा ही नतीजा देता है।

3. एकसारता (Consistency)-कम्प्यूटर को कोई थकावट, ध्यान भटकना तथा काम का बोझ महसूस नहीं होता। यह बगैर ग़लती किए कई घंटों तक काम कर सकता है।

4. बहुगुणता (Versatility)-इसका अर्थ है एक समय पर विभिन्न कार्य करना। जब हम कम्प्यूटर पर गणनाएं करते हैं, ठीक उसी समय हम वस्तुओं का रिकार्ड बनाने तथा खरीद बिक्री के लिए भी इसका प्रयोग कर सकते हैं तथा साथ में हम गाने भी सुन सकते हैं।

5. आटोमेशन (Automation)-यदि एक बार कम्प्यूटर को कोई निर्देश दिया जाए, तो यह मनुष्य के हस्तक्षेप के बिना उस निर्देश पर काम करता रहता है। यह निर्देश की पूर्ति होने तक काम करता है। जब इस निर्देश को समाप्त करने के लिए कोई लॉजिकल (तार्किक) निर्देश दिया जाता है तो यह उस प्रोग्राम को समाप्त कर देता है।

6. भंडारण (Storage)-कम्प्यूटर की अपनी मैमरी होती है जिसमें वह डाटा स्टोर कर सकता है। इस डाटा को आवश्यकता अनुसार स्टोरेज उपकरण जैसे कि सी०डी०, डी०वी०डी०, यू०एस०वी० तथा पैन ड्राइव का प्रयोग करके किसी अन्य कम्प्यूटर पर भी ले जाया जा सकता है।

पोर्टेबल कम्प्यूटिंग यंत्र (Portable Computing Devices)

पोर्टेबल कम्प्यूटिंग यंत्रों से हमारा अभिप्राय यंत्रों से है, जिनको प्रयोग करने के लिए हम आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकते हैं। यह यंत्र आकार में छोटा होता है। इनका भार भी कम होता है। आजकल हम कई प्रकार के पोर्टेबल कम्प्यूटिंग यंत्रों का प्रयोग कर रहे हैं। तीन प्रकार के कम्प्यूटिंग यंत्रों की व्याख्या नीचे की गई है-
1. मोबाइल फोन/स्मार्टफोन (Mobile/Smart Phone)-मोबाइल फोन या स्मार्टफोन आजकल प्रयोग में आने वाला सबसे आम पोर्टेबल कम्प्यूटिंग यंत्र है। यहां लगभग सभी लोगों के पास पाया जाता है। इसमें हम अपने सभी कार्य कर सकते हैं जिसको करने के लिए हमें एक नॉर्मल कम्प्यूटर की जरूरत पड़ती है। आजकल के मोबाइल फोन में हम गाने सुन सकते हैं। फिल्में देख सकते हैं, डॉक्यूमैंट तैयार कर सकते हैं तथा सोशल नेटवर्किंग के जरिए अपने दोस्तों तथा मित्रों से भी संपर्क बना सकते हैं। आजकल के मोबाइल फोन काफ़ी तीव्र गति से काम करते हैं तथा भंडारण के लिए भी काफी ज्यादा स्थान प्रदान करते हैं। इन मोबाइल फोनों में इंटरनेट का प्रयोग भी किया जाता है। मोबाइल फोन का प्रयोग शिक्षा व्यापार वाणिज्य मनोरंजन तथा गेम खेलने के लिए किया जा सकता है।
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2. टैबलेट (Tablet)-टैबलेट कम्प्यूटर एक पतला तथा पोर्टेबल कम्प्यूटर होता है जो कि एक बैटरी की सहायता से चलता है। इस कम्प्यूटर पर टचस्क्रीन लगी होती है। इसको चलाने के लिए हमें अलग कीबोर्ड या माऊस की ज़रूरत नहीं होती। स्क्रीन को अपनी उंगली से ही चलाया जा सकता है। इस कम्प्यूटर का प्रयोग विभिन्न मंत्रों के लिए किया जा सकता है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग उन कार्यों में होता है जहां टाइपिंग की ज्यादा जरूरत नहीं होती। टैबलेट कम्प्यूटर का अधिकतर प्रयोग शॉपिंग मॉल रेस्टोरेंट तथा शिक्षा में विद्यार्थियों द्वारा देखा जाता है।
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3. पामटोप (Palmtop) यह एक छोटे प्रकार का कम्प्यूटर होता है जिसमें एक छोटी स्क्रीन लगी होती है तथा इसके साथ इसमें एक छोटा सा कीबोर्ड भी होता है। यह कम्प्यूटर में एक मोबाइल फोन की तरह लगता है। आजकल इस कम्प्यूटर का प्रयोग ज्यादा नहीं किया जाता क्योंकि इसका प्रयोग कुछ सीमित कार्यों को करने के लिए ही किया जाता है।
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4. लैपटॉप (Laptop)-लैपटॉप कम्प्यूटर आजकल सभी जगह प्रयोग हो रहे हैं। यह एक छोटे आकार का तथा हल्का कम्प्यूटर होता है जिसकी बड़ी स्क्रीन होती है। इसमें एक कीबोर्ड भी लगा होता है तथा साथ में माउस चलाने के लिए एक टचपैड भी होता है। लैपटॉप कम्प्यूटर को हम अपनी गोद में रख कर आसानी से काम कर सकते हैं। अंग्रेज़ी भाषा में गोद को Lap कहते हैं। इसी कारण इस कम्प्यूटर का नाम लैपटॉप कम्प्यूटर पड़ा। यह कम्प्यूटर एक टैस्ट ऑफ कम्प्यूटर के जितना ही शक्तिशाली होता है तथा उसी प्रकार हमारे सभी कार्य कर सकता है।
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5. नोट-बुक (Note-Book)-यह एक पोर्टेबल कम्प्यूटर होता है परंतु आकार में एक लैपटॉप से भी छोटा होता है। लैपटॉप कम्प्यूटर की तरह ही यह वज़न में हल्का होता है। एक नोट-बुक की अपनी बैटरी होती है जिसे आवश्यकता पड़ने पर चार्ज भी किया जाता है। एक व्यक्ति सफर के दौरान इसको साथ लेकर जा सकता है।
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PSEB 6th Class Computer Notes Chapter 1 कम्प्यूटर से जान-पहचान

कम्प्यूटर की सीमाएं (Limitations of Computer)

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समझ न आना, स्वयं कार्य करने के योग्य न होना, भावना और तजुर्बाहीन होना आदि कम्प्यूटर की सीमाएं हैं। कम्प्यूटर की निम्नलिखित सीमाएं हैं –

  1. यह सिर्फ मानवीय निर्देशों पर कार्य करता है।
  2. इसमें अपनी सोचने-समझने की कोई शक्ति नहीं है।
  3. यह अपना ध्यान नहीं रख सकता।
  4. कम्प्यूटर की मैमरी मनुष्य की तुलना में सीमित कार्य कर सकती है।
  5. कम्प्यूटर में कोई भावना नहीं होती है।
  6. कम्प्यूटर में दूरदर्शिता की कमी होती है।
  7. यह सिर्फ तर्क आधारित कार्य ही कर सकते हैं।
  8. कम्प्यूटर हार्डवेयर में एक स्वरूपता की कमी है। विभिन्न कम्पनियों के अलग-अलग हार्डवेयर यंत्र होते हैं।
  9. कम्प्यूटर को कार्य करने के लिए खास वातावरण की ज़रूरत होती है। ये तापमान, नमी आदि से काफ़ी प्रभावित होते हैं।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 17 ਚਾਲੂਕਿਆ ਅਤੇ ਪੱਲਵ

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions History Chapter 17 ਚਾਲੂਕਿਆ ਅਤੇ ਪੱਲਵ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 17 ਚਾਲੂਕਿਆ ਅਤੇ ਪੱਲਵ

SST Guide for Class 6 PSEB ਚਾਲੂਕਿਆ ਅਤੇ ਪੱਲਵ Textbook Questions and Answers

ਅਭਿਆਸ ਦੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ
I. ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਦੇ ਉੱਤਰ ਲਿਖੋ :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਦੇ ਚਾਲੂਕਿਆਂ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ? .
ਉੱਤਰ-
ਸਾਤਵਾਹਨ ਸ਼ਾਸਕਾਂ ਦੇ ਪਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਰਾਜ ਹੋਂਦ ਵਿੱਚ ਆ ਗਏ । ਵਾਕਾਟਕਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਰਾਜ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਯਤਨ ਕੀਤਾ ਪਰ ਉਹ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਾਂ ਟਿਕ ਨਾ ਸਕਿਆ । ਉਸੇ ਸਮੇਂ 6ਵੀਂ ਸਦੀ ਵਿੱਚ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸ਼ਕਤੀ ਚਾਲੂਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਦੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਆ ਗਈ । ਇਹਨਾਂ ਨੇ ਬੀਜਾਪੁਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਵਿੱਚ ਵਾਤਾਪੀ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਬਣਾਇਆ । ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਪਹਿਲਾ, ਕੀਰਤੀਵਰਮਨ ਅਤੇ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜਾ ਆਦਿ ਇਸ ਵੰਸ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸ਼ਾਸਕ ਸਨ | ਪਰ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜਾ ਇਸ ਵੰਸ਼ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਸ਼ਾਸਕ ਸੀ । ਉਸਨੇ ਨਰਮਦਾ ਨਦੀ ਦੇ ਤੱਟ ‘ਤੇ ਹਰਸ਼ਵਰਧਨ ਨੂੰ ਬੁਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਰਾਇਆ ਸੀ । ਉਸਨੇ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਜਿੱਤਿਆ ਸੀ ਅਤੇ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਦੇ ਪੱਲਵਾਂ ਨੂੰ ਹਰਾਇਆ ਸੀ । ਪਰ ਉਹ ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਤੋਂ ਹਾਰ ਗਿਆ ਅਤੇ 642 ਈ: ਵਿੱਚ ਉਸ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ । ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦੇ ਉੱਤਰਾਧਿਕਾਰੀ ਅਯੋਗ ਸਨ । ਇਸ ਲਈ 8ਵੀਂ ਸਦੀ ਦੇ ਮੱਧ ਵਿੱਚ ਰਾਸ਼ਟਰਕੂਟਾਂ ਨੇ ਚਾਲੂਕਿਆਂ ਨੂੰ ਹਰਾ ਕੇ ਚਾਲੁਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਦਾ ਅੰਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਚਾਲੂਕਿਆ ਮੰਦਰਾਂ ਬਾਰੇ ਇੱਕ ਨੋਟ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਾਲੂਕਿਆਂ ਸ਼ਾਸਕਾਂ ਨੂੰ ਮੰਦਰ-ਨਿਰਮਾਣ ਨਾਲ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪਿਆਰ ਸੀ । ਇਸ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਏਹੋਲ, ਵਾਤਾਪੀ ਅਤੇ ਪਟੱਕਲ ਵਿੱਚ ਅਨੇਕਾਂ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਰਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ
ਕਰਵਾਇਆ । ਵੀਰੂਪਾਕੱਸ਼ ਅਤੇ ਪੰਪਨਾਥ ਦੇ ਮੰਦਰ ਬਹੁਤ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਹਨ । ਚਾਲੂਕਿਆਂ ਨੇ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਬ੍ਰਹਮਾ, ਵਿਸ਼ਨੂੰ ਅਤੇ ਸ਼ਿਵ ਦੀ ਪੂਜਾ ਲਈ ਮੰਦਰ ਬਣਵਾਏ । ਇਹਨਾਂ ਮੰਦਰਾਂ ਦੀਆਂ ਦੀਵਾਰਾਂ ‘ਤੇ ਰਮਾਇਣ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸੁੰਦਰ ਢੰਗ ਨਾਲ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਚਾਲੁਕਿਆਂ ਨੇ ਵਾਤਾਪੀ ਵਿੱਚ ਗੁਫ਼ਾ-ਮੰਦਰਾਂ ਦਾ ਵੀ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਵਾਇਆ, ਜੋ ਆਪਣੀਆਂ ਕਲਾਤਮਕ ਮੁਰਤੀਆਂ ਲਈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪੱਲਵਾਂ ਦੇ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕ ਤਮਿਲਨਾਡੂ ਅਤੇ ਆਂਧਰਾ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਈ ਭਾਗਾਂ ‘ਤੇ ਸ਼ਾਸਨ ਕਰਦੇ ਸਨ । ਪਹਿਲਾਂ ਉਹ ਸਾਤਵਾਹਨਾਂ ਦੇ ਅਧੀਨ ਸਨ । ਪਰੰਤੂ ਸਾਤਵਾਹਨਾਂ ਦੇ ਪਤਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਸੁਤੰਤਰ ਸੱਤਾ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰ ਲਈ ।

6ਵੀਂ ਸਦੀ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਨੇ ਇੱਕ ਨਵੇਂ ਪੱਲਵ ਵੰਸ਼ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਕੀਤੀ । ਮਹਿੰਦਰ ਵਰਮਨ ਪਹਿਲਾ, ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਪਹਿਲਾ ਅਤੇ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਦੂਜਾ ਇਸ ਵੰਸ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਸ਼ਾਸਕ ਸਨ । ਮਹਿੰਦਰ ਵਰਮਨ ਚਾਲੁਕਿਆ ਸ਼ਾਸਕ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਲੜਦਾ ਰਿਹਾ। ਉਹ ਚਿੱਤਰਕਲਾ ਅਤੇ ਨਾਚ-ਗਾਣੇ ਦਾ ਬਹੁਤ ਸ਼ੁਕੀਨ ਸੀ । ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਪਹਿਲੇ ਨੇ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਯੁੱਧ ਵਿੱਚ ਹਰਾਇਆ ਸੀ । ਉਸਨੇ ਸ੍ਰੀਲੰਕਾ ‘ਤੇ ਵੀ ਦੋ ਵਾਰ ਸਫਲ ਹਮਲੇ ਕੀਤੇ ਸਨ । 9ਵੀਂ ਸਦੀ ਵਿੱਚ ਪੱਲਵ ਚੋਲ ਰਾਜਿਆਂ ਤੋਂ ਹਾਰ ਗਏ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਰਾਜ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਗਿਆ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪੱਲਵਾਂ ਦੀ ਕਲਾ ਅਤੇ ਭਵਨ-ਨਿਰਮਾਣ ਕਲਾ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕ ਕਲਾ ਅਤੇ ਭਵਨ-ਨਿਰਮਾਣ ਦੇ ਮਹਾਨ ਪ੍ਰੇਮੀ ਅਤੇ ਸਰਪ੍ਰਸਤ ਸਨ । ਇਹਨਾਂ ਨੇ ਅਨੇਕਾਂ ਮੰਦਰਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਵਾਇਆ । ਇਹਨਾਂ ਨੇ ਮਹਾਂਬਲੀਪਰਮ ਵਿੱਚ ਸਮੁੰਦਰ ਦੇ ਤੱਟ ‘ਤੇ ਕਈ ਗੁਫ਼ਾ-ਮੰਦਰ ਬਣਵਾਏ । ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁਝ ਮੰਦਰਾਂ ਨੂੰ ਰੱਥ-ਮੰਦਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਮਹਾਂਭਾਰਤ ਦੇ ਪਾਂਡਵਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ‘ਤੇ ਰੱਖੇ ਗਏ ਹਨ | ਪੱਲਵਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਕਾਂਚੀਪੁਰਮ ਵਿੱਚ ਕੈਲਾਸ਼ਨਾਥ ਨਾਮਕ ਇੱਕ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਰ ਬਣਵਾਇਆ ਸੀ । ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਮੰਦਰਾਂ ਵਿੱਚ ਦੇਵੀ-ਦੇਵਤਿਆਂ ਦੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪੱਲਵ ਰਾਜੇ-ਰਾਣੀਆਂ ਦੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਵੀ ਸਥਾਪਤ ਸਨ ।

II. ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਵਾਕਾਂ ਵਿਚ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ :

(1) ਚਾਲੁਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਦੇ ………………………. ਅਤੇ ……………….. ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਰਾਜੇ ਸਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਪਹਿਲਾ, ਕੀਰਤੀਵਰਮਨ

(2) ਚਾਲੁਕਿਆ ਰਾਜੇ ………………………… ਦੇ ਮਹਾਨ ਸਰਪ੍ਰਸਤ ਸਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਲਾ

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(3) ………………………… ਨੇ ਪੱਲਵ ਵੰਸ਼ ਦੀ ਨੀਂਹ ਰੱਖੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਂਚੀਪੁਰਮ

(4) ਪੱਲਵਾਂ ਦੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਵਿਚ ਚੇਨੱਈ ਦੇ ਕੋਲ ……………………….. ਸੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੂਰਤੀ ਕਲਾ

(5) ਪੱਲਵ ……………………….. ਅਤੇ ………………………… ਕਲਾ ਦੇ ਪ੍ਰੇਮੀ ਅਤੇ ਸਰਪ੍ਰਸਤ ਸਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੂਰਤੀਕਲਾ, ਭਵਨ ਨਿਰਮਾਣ ਕਲਾ

(6) ਪੱਲਵ ਰਾਜੇ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ………………………… ਅਤੇ ………………………… ਧਰਮ ਨੂੰ ਮੰਨਦੇ ਸਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੈਨ, ਸ਼ੈਵ

III. ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਵਾਕਾਂ ਦੇ ਸਹੀ ਜੋੜੇ ਬਣਾਓ :

(1) ਈਰਾਨੀ ਰਾਜਦੂਤ (ਉ) ਚਾਲੂਕਿਆ ਮੰਦਰ
(2) ਵੀਰੂਪਾਕੱਸ਼ (ਅ) ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜਾ
(3) ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ (ੲ) ਪੱਲਵ ਰਾਜਾ
(4) ਮਹਿੰਦਰ ਵਰਮਨ (ਸ) ਰੱਥ ਮੰਦਰ

ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ ਜੋੜੇ-

(1) ਈਰਾਨੀ ਰਾਜਦੂਤ (ਅ) ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜਾ
(2) ਵੀਰੂਪਾਕੰਸ਼ (ਉ) ਚਾਲੁਕਿਆ ਮੰਦਰ
(3) ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ (ਸ) ਰੱਥ ਮੰਦਰ
(4) ਮਹਿੰਦਰ ਵਰਮਨ (ੲ) ਪੱਲਵ ਰਾਜਾ

IV. ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਵਾਕਾਂ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਸਹੀ (√) ਜਾਂ ਗ਼ਲਤ (×) ਦਾ ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਗਾਓ :

(1) ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦਾ ਹਰਸ਼ਵਰਧਨ ਨਾਲ ਯੁੱਧ ਹੋਇਆ ।
(2) ਏਹੋਲ ਅਤੇ ਪਟੰਦਲ ਸਮੁੰਦਰ ਤੱਟ ਲਈ ਮਸ਼ਹੂਰ ਹਨ ।
(3) ਕਾਂਚੀਪੁਰਮ ਚਾਲੂਕਿਆਂ ਦੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਸੀ ।
(4) ਕੈਲਾਸ਼ਨਾਥ ਮੰਦਰ ਪੱਲਵਾਂ ਨੇ ਬਣਵਾਇਆ ਸੀ ।
ਉੱਤਰ-
(1) (√)
(2) (×)
(3) (×)
(4) (√)

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PSEB 6th Class Social Science Guide ਚਾਲੂਕਿਆ ਅਤੇ ਪੱਲਵ Important Questions and Answers

ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ
ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿਚ ਉੱਤਰ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਚਾਲੂਕਿਆਂ ਦੱਖਣੀ ਦੱਕਨ ਦੇ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਰਾਜਾ (ਛੇਵੀਂ ਸ਼ਤਾਬਦੀ ਈ: ਸਨ) ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਾਤਾਪੀ (ਬਾਦਾਮੀ) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਚਾਲੂਕਿਆ ਦੁਆਰਾ ਬਣਵਾਏ ਗਏ ਦੋ ਸਭ ਤੋਂ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਿਰਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵੀਰੂਪਾਕੱਸ਼ ਅਤੇ ਪੰਪਨਾਥ ਮੰਦਿਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕਾਂਚੀ ਦਾ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ‘ਕੈਲਾਸ਼ਨਾਥ ਮੰਦਿਰ’ ਕਿਹੜੇ ਰਾਜਵੰਸ਼ ਦੇ ਸ਼ਾਸਕਾਂ ਨੇ ਬਣਵਾਇਆ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੱਲਵ ।

ਬਹੁ-ਵਿਕਲਪੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਚਾਲੂਕਿਆ ਨੇ ਕਿਹੜੇ ਧਰਮ ਨੂੰ ਸੰਰੱਖਿਅਣ ਦਿੱਤਾ ?
(ਉ) ਹਿੰਦੂ ਧਰਮ
(ਅ) ਜੈਨ ਧਰਮ
(ੲ) ਇਸਲਾਮ ਧਰਮ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਜੈਨ ਧਰਮ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਮੰਦਿਰ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਿਹੜੇ ਵੰਸ਼ ਦੇ ਸ਼ਾਸਕਾਂ ਨੇ ਕਰਵਾਇਆ ?
PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 17 ਚਾਲੂਕਿਆ ਅਤੇ ਪੱਲਵ 1
(ਉ) ਪੱਲਵ
(ਅ) ਚਾਲੂਕਿਆ
(ੲ) ਗੁਪਤ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਪੱਲਵ

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਕਈ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਯਾਤਰੀ ਭਾਰਤ ਆਏ ।ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੁਝ ਚੀਨੀ ਯਾਤਰੀ ਵੀ ਸ਼ਾਮਿਲ ਸਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਯਾਤਰੀ 641 ਈ: ਵਿਚ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦੇ ਰਾਜ ਵਿਚ ਆਇਆ ਸੀ ?
(ਉ) ਫਾਹਯਾਨ
(ਅ) ਹਿਊਨਸਾਂਗ
(ੲ) ਇਤਿਸੰਗ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਹਿਊਨਸਾਂਗ

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦੇ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜਾ ਯਾਤਰੀ ਭਾਰਤ ਆਇਆ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦੇ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਚੀਨੀ ਯਾਤਰੀ ਹਿਊਨਸਾਂਗ ਭਾਰਤ ਆਇਆ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਚਾਲੂਕਿਆ ਰਾਜਿਆਂ ਨੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਨਗਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਰ ਬਣਵਾਏ ?
ਉੱਤਰ-
ਚਾਲੂਕਿਆ ਰਾਜਿਆਂ ਨੇ ਏਹੋਲ, ਵਾਤਾਪੀ ਅਤੇ ਪਟੱਕਲ ਵਿੱਚ ਕਈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਰ ਬਣਵਾਏ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪੱਲਵ ਵੰਸ਼ ਦਾ ਰਾਜ-ਵਿਸਤਾਰ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੱਲਵ ਵੰਸ਼ ਦਾ ਰਾਜ-ਵਿਸਤਾਰ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਅਤੇ ਆਂਧਰਾ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਈ ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਗੁਪਤ ਸਮਰਾਟ ਸਮੁਦਰ ਗੁਪਤ ਨੇ ਕਿਹੜੇ ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕ ਨੂੰ ਹਰਾਇਆ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਗੁਪਤ ਸਮਰਾਟ ਸਮੁਦਰ ਗੁਪਤ ਨੇ ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕ ਗੋਪਵਰਮਨ ਨੂੰ ਹਰਾਇਆ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ ਦੇ ਰੱਥ ਮੰਦਰਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਕਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਂਵਾਂ ‘ਤੇ ਰੱਖੇ ਗਏ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ ਦੇ ਰੱਥ ਮੰਦਰਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਮਹਾਂਭਾਰਤ ਦੇ ਪਾਂਡਵਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ‘ਤੇ ਰੱਖੇ ਗਏ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਕਾਂਚੀਪੁਰਮ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਇੱਕ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਰ ਦਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ । ਇਹ ਕਿਸਨੇ ਬਣਵਾਇਆ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਂਚੀਪੁਰਮ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਇੱਕ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਮੰਦਰ ‘ਕੈਲਾਸ਼ਨਾਥ’ ਹੈ । ਇਹ ਮੰਦਰ ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕਾਂ ਨੇ ਬਣਵਾਇਆ ਸੀ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਚਾਲੁਕਿਆ ਰਾਜ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ‘ਤੇ ਇੱਕ ਨੋਟ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਰੀ ਮਹਾਂਰਾਸ਼ਟਰ ਅਤੇ ਬਰਾਰ (ਵਿਦਰਭਾ) ਵਿੱਚ ਸਾਤਵਾਹਨਾਂ ਦੇ ਪਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵਾਕਾਟਕਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਰਾਜ ਦੀ ਨੀਂਹ ਰੱਖਣ ਦਾ ਯਤਨ ਕੀਤਾ ਪਰ ਉਹ ਆਪਣੇ ਯਤਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸਫਲ ਨਾ ਹੋ ਸਕੇ । ਫਿਰ ਚਾਲੁਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਨੇ ਛੇਵੀਂ ਸਦੀ ਦੇ ਆਰੰਭ ਵਿੱਚ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਦੇ ਪੱਛਮ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਰਾਜ ਸਥਾਪਤ ਕਰ ਲਿਆ । ਇਸ ਵੰਸ਼ ਦੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਵਾਤਾਪੀ ਸੀ । ਇਸ ਵੰਸ਼ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਦਾ ਸਿਹਰਾ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਪਹਿਲੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕੀਰਤੀਵਰਮਨ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੀਰਤੀਵਰਮਨ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਪਹਿਲੇ ਦਾ ਪੁੱਤਰ ਸੀ ਜੋ ਉਸਦੀ ਮੌਤ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਚਾਲੁਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਦਾ ਰਾਜਾ ਬਣਿਆ । ਕੀਰਤੀਵਰਮਨ ਕਾਫ਼ੀ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਰਾਜਾ ਸੀ ।ਉਸਨੇ ਉੱਤਰੀ ਕੋਂਕਣ ਅਤੇ ਕੰਨੜ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਜਿੱਤ ਕੇ ਆਪਣੇ ਸਾਮਰਾਜ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਲਿਆ । ਉਸਨੂੰ ਭਵਨ-ਨਿਰਮਾਣ ਦਾ ਬਹੁਤ ਸ਼ੌਕ ਸੀ । ਉਸਨੇ ਵਾਤਾਪੀ ਵਿੱਚ ਅਨੇਕਾਂ ਸੁੰਦਰ ਅਤੇ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਇਮਾਰਤਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਵਾਇਆ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪੱਲਵ ਰਾਜਾ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਇੱਕ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਪੱਲਵ ਰਾਜਾ ਸੀ । ਪੱਲਵਾਂ ਦਾ ਚਾਲੁਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਨਾਲ ਸੰਘਰਸ਼ ਚੱਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ । ਚਾਲੁਕਿਆ ਰਾਜਾ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਨੇ ਮਹਿੰਦਰ ਵਰਮਨ ਨੂੰ ਹਰਾਇਆ ਸੀ । ਪਰ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਨੇ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਹਰਾ ਦਿੱਤਾ ਅਤੇ ਉਸਨੂੰ ਮਾਰ ਦਿੱਤਾ । ਇਸ ਨੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਈ ਜਿੱਤਾਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀਆਂ ਤੇ ਆਪਣੇ ਰਾਜ ਦਾ ਵਿਸਤਾਰ ਕੀਤਾ । ਇਸ ਨੇ ਪਾਂਡਯ, ਚੇਰ ਅਤੇ ਚੋਲ ਰਾਜਿਆਂ ਨਾਲ ਯੁੱਧ ਕੀਤੇ ।

ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜਾ ਚਾਲੂਕਿਆ ਵੰਸ਼ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਰਾਜਾ ਸੀ । ਉਸਨੇ ਆਪਣੇ 33 ਸਾਲਾਂ ਦੇ ਸ਼ਾਸਨ ਕਾਲ ਵਿੱਚ ਅਨੇਕਾਂ ਯੁੱਧ ਕਰਕੇ ਆਪਣੀ ਸੈਨਿਕ ਯੋਗਤਾ ਨੂੰ ਸਿੱਧ ਕੀਤਾ । ਉਸਨੇ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਪਣੇ ਚਾਚੇ ਨੂੰ ਹਰਾ ਕੇ ਉਸ ਕੋਲੋਂ ਆਪਣਾ ਰਾਜ ਵਾਪਸ ਲਿਆ । ਉਸਨੇ ਰਾਸ਼ਟਰਕੂਟਾਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦਾ ਸਫਲਤਾਪੂਰਵਕ ਸਾਹਮਣਾ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਕਾਦੰਬਾਂ ‘ਤੇ ਹਮਲਾ ਕਰਕੇ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਬਨਵਾਸੀ ਨੂੰ ਲੁੱਟਿਆ । ਉਸਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋ ਕੇ ਗੰਗਵਾਦੀ ਦੇ ਰੰਗਾਂ ਅਤੇ ਮਾਲਾਬਾਰ ਦੇ ਅਲੂਪਾਂ ਨੇ ਉਸਦੀ ਅਧੀਨਤਾ ਮੰਨ ਲਈ । ਉਸਨੇ ਉੱਤਰੀ ਕੌਂਕਣ ਦੇ ਮੌਰੀਆ ਰਾਜੇ ਨੂੰ ਵੀ ਹਰਾਇਆ 1 ਦੱਖਣੀ ਗੁਜਰਾਤ ਦੇ ਲਾਟਾਂ, ਮਾਲਵਿਆਂ ਅਤੇ ਗੁੱਜਰਾਂ ਨੇ ਵੀ ਉਸਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ ਸਵੀਕਾਰ ਕਰ ਲਿਆ ਸੀ । ਉਸ ਦੀਆਂ ਸੈਨਿਕ ਸਫਲਤਾਵਾਂ ਤੋਂ ਡਰ ਕੇ ਚੋਲ, ਚੇਰ ਅਤੇ ਪਾਂਡਯ ਦੇ ਰਾਜਿਆਂ ਨੇ ਵੀ ਉਸ ਦੀ ਅਧੀਨਤਾ ਮੰਨ ਲਈ ਸੀ । ਇੱਥੋਂ ਤੱਕ ਕਿ ਉਸਨੇ ਹਰਸ਼ ਵਰਧਨ ਨੂੰ ਵੀ ਯੁੱਧ ਵਿੱਚ ਹਰਾ ਕੇ ਪਿੱਛੇ ਹਟਣ ਲਈ ਮਜਬੂਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ।

ਪੁਲਕੇਨ ਦੂਜਾ ਇੱਕ ਮਹਾਨ ਜੇਤੂ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸਗੋਂ ਉੱਚ-ਕੋਟੀ ਦਾ ਸਿਆਸਤਦਾਨ ਵੀ ਸੀ । ਉਸਨੇ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਰਾਜਿਆਂ ਨਾਲ ਕੂਟਨੀਤਿਕ ਸੰਬੰਧ ਕਾਇਮ ਕੀਤੇ । ਉਸਨੇ ਫਾਰਸ ਦੇ ਰਾਜੇ ਖੁਸਰੂ ਦੂਜੇ ਕੋਲ ਆਪਣਾ ਰਾਜਦੂਤ ਵੀ ਭੇਜਿਆ ।

ਪਰ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦੇ ਆਖ਼ਰੀ ਦਿਨ ਬੜੇ ਕਸ਼ਟਮਈ ਸਨ । ਪੱਲਵਾਂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਸ਼ਾਸਕ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਵਿੱਚ ਚਾਲੁਕਿਆ ਰਾਜ ‘ਤੇ ਕਈ ਵਾਰ ਸਫਲ ਹਮਲੇ ਕੀਤੇ ਅਤੇ ਉਸ ਦੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਵਾਤਾਪੀ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿੱਤਾ । 642 ਈ: ਵਿੱਚ ਪੁਲਕੇਸ਼ਿਨ ਦੂਜੇ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ ਦੇ ਮੰਦਰਾਂ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ ਦੇ ਮੰਦਰ ਚੇਨੱਈ ਤੋਂ 69 ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਦੂਰ ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਹਨ । ਇਹ ਮੰਦਰ ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕਾਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤੌਰ ਤੇ ਮਹਿੰਦਰ ਵਰਮਨ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਪੁੱਤਰ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਦੁਆਰਾ ਸੱਤਵੀਂ ਸਦੀ ਵਿੱਚ ਬਣਵਾਏ ਗਏ ਸਨ । ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁਝ ਮੰਦਰਾਂ ਨੂੰ ਰੱਥ ਮੰਦਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਥੋੜ੍ਹੀ ਦੂਰ ਤੋਂ ਦੇਖਣ ਤੋਂ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਰੱਬ ਵਰਗਾ ਹੀ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਰੱਥ ਮੰਦਰਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਪਾਂਡਵਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ‘ਤੇ ਜ਼ੋਪਦੀ ਰੱਥ, ਧਰਮਰਾਜ ਰੱਥ, ਭੀਮ ਰੱਥ, ਅਰਜੁਨ ਰੱਥ ਆਦਿ ਰੱਖੇ ਗਏ ਹਨ । ਇਹ ਮੰਦਰ ਇੱਕ ਹੀ ਚੱਟਾਨ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਬਣਾਏ ਗਏ ਹਨ ਤੇ ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਵੀ ਜੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਮੰਦਰਾਂ ਵਿੱਚ ਜਿਹੜੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਰੱਖੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ, ਉਹ ਵੀ ਇੱਕ ਚੱਟਾਨ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਬਣਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ । ਇਹ ਮੂਰਤੀਆਂ ਬਹੁਤ ਸੁੰਦਰ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਹਨ । ਇਹ ਸਾਰੇ ਮੰਦਰ ਸ਼ੈਵ ਮੰਦਰ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਮੰਦਰਾਂ ਦੇ ਮੁੱਖ ਦਰਵਾਜ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਜਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਮੰਦਰਾਂ ਦੀਆਂ ਦੀਵਾਰਾਂ ‘ਤੇ ਦੇਵੀ-ਦੇਵਤਿਆਂ ਦੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪੱਲਵ ਰਾਜੇ-ਰਾਣੀਆਂ ਦੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਵੀ ਹਨ । ਮਹਾਂਬਲੀਪੁਰਮ ਵਿੱਚ ਹੀ ਪੱਲਵ ਸ਼ਾਸਕ ਨਰਸਿੰਘ ਵਰਮਨ ਦੁਆਰਾ ਸਮੁੰਦਰ ਤੱਟ ‘ਤੇ ਬਣਵਾਏ ਕਈ ਗੁਫ਼ਾ-ਮੰਦਰ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਨੂੰ, ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਨਾਲ ਸਜਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।