PSEB 9th Class Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

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PSEB 9th Class Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ किसी शुद्ध पदार्थ में एक ही प्रकार के कण होते हैं।

→ मिश्रण एक या एक से अधिक शुद्ध तत्वों या यौगिकों के मिलने से बनता है।

→ किसी तत्व को दूसरे पदार्थ से भौतिक प्रक्रम से पृथक् नहीं किया जा सकता।

→ पदार्थ का स्रोत कोई भी हो उसके अभिलाक्षणिक गुण एक समान होते हैं।

→ मिश्रण अनेक प्रकार के होते हैं। समांगी मिश्रण पृथक्-पृथक् संघटन रख सकते हैं। जिन मिश्रणों के अंश भौतिक दृष्टि से पृथक होते हैं उन्हें विषमांगी मिश्रण कहते हैं।

→ विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है।

→ मिश्र धातु, ठोस विलयन है जो वायु गैसीय विलयन है।

→ मिश्र धातुएं धातुओं के समांगी मिश्रण हैं जिन्हें भौतिक क्रियाओं से अवयवों में पृथक् नहीं किया जा सकता।

→ विलयन को विलायक और विलेय में बांटा जाता है।

→ विलयन का एक घटक जो दूसरे घटक को विलयन में मिलाता है उसे विलायक कहते हैं। इसकी मात्रा दूसरे से अधिक होती है।

→ विलयन का वह घटक जो विलायक में घुला होता है उसे विलेय कहते हैं। यह प्रायः कम मात्रा में होता है।

→ वायु गैसों का विलयन है। चीनी और जल एवं तरल घोल में ठोस का उदाहरण है। आयोडीन और एलकोहल की विलयन टिंक्चर आयोडीन है।

PSEB 9th Class Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ वात युक्त पेय पदार्थ तरल विलयन में गैस के रूप में हैं।

→ विलयन समांगी मिश्रण हैं जिनके कण व्यास में 1nm (10-9m) से भी छोटे होते हैं।

→ विलयन में मौजूद विलेय पदार्थ की मात्रा के आधार पर इसे तनु, सांद्र या संतृप्त घोल कहते हैं।

→ किसी निश्चित तापमान पर पृथक्-पृथक् पदार्थों की विलयन क्षमता पृथक्-पृथक् होती है।

→ निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय पदार्थ कण घुलते नहीं बल्कि माध्यम की समृष्टि में निलंबित रहते हैं।

→ निलंबित कण 100 nm (10-7m) से बड़े होते हैं। कोलाइड के कण विलयन में समान रूप से फैले होते हैं।

→ प्रकाश की किरण का फैलाना टिंडल प्रभाव कहलाता है।

→ कोलाइड के कणों का आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है जो आंखों से दिखाई नहीं देते।

→ यह छानने से अलग नहीं किए जा सकते पर अपकेंद्रीकरण तकनीक से अलग-अलग किए जा सकते हैं।

→ विलायक से विलय पदार्थ को वाष्पीकरण विधि से पृथक् कर सकते हैं।

→ दूध में से क्रीम का पृथक्करण अपकेंद्रीय यंत्र से करते हैं।

→ अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नेपथालीन और एंथ्रासीन आदि को ऊर्ध्व पातित किया जा सकता है।

→ मिश्रण से घटकों को पृथक् करने की विधि को क्रोमैटोग्राफ़ी कहते हैं।

→ आसवन का प्रयोग ऐसे मिश्रण को पृथक करने में किया जाता है जिसमें घटकों के क्वथनांकों के बीच काफ़ी अंतर होता है।

→ वायु से विभिन्न गैसों तथा पेट्रोलियम उत्पादों से उनके विभिन्न घटकों का पृथक्करण प्रभाजी आसवन से क्रिस्टलीकरण विधि का प्रयोग ठोस पदार्थों को शुद्ध करने में किया जाता है।

→ किस्टलीकरण विधि साधारण वाष्पीकरण विधि से अच्छी होती है।

→ रंग, कठोरता, दृढ़ता, बहाव, घनत्व, द्रवनांक और क्वथनांक को भौतिक गुण कहा जाता है।

→ अंत: रूपांतरण की अवस्था एक भौतिक परिवर्तन है।

→ रासायनिक परिवर्तन पदार्थ के रासायनिक गुणधर्मों में परिवर्तन लाता है।

→ रॉबर्ट बायल ने सबसे पहले 1661 में तत्व शब्द का प्रयोग किया था।

→ तत्व पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक प्रतिक्रिया से छोटे पदार्थों के टुकड़ों में बांटा नहीं जा सकता।

→ तत्वों को धातु, अधातु और उपधातु भागों में बांटा जाता है।

→ पारा धातु होते हुए भी कमरे के तापमान पर द्रव है।

→ उपधातु, सदा धातु और अधातु के बीच गुणों को प्रकट करते हैं।

PSEB 9th Class Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ शुद्ध पदार्थ तत्व या यौगिक हो सकते हैं।

→ शुद्ध पदार्थ (Pure Substance)-वह पदार्थ जिसमें एक ही प्रकार के अणु उपस्थित हों, उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं; जैसे-सोना, चांदी आदि।

→ मिश्रण (Mixture)-वह पदार्थ जिसमें एक से अधिक संघटक उपस्थित हों, उसे मिश्रण कहते हैं। इन पदार्थों का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है।

→ पृथक्करण (Separation)-मिश्रण के भिन्न-भिन्न अवयवों (अंशों) को अलग करने की विधि को पृथक्करण कहते हैं।

→ हाथ से बीनना (Hand Picking)-अनाज तथा दालों में से पत्थर तथा कंकड़ आदि निकालने की विधि को हाथ से बीनना कहा जाता है।

→ निथारना (Decantation)-तलछटीकरण और विलायक को अलग करने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली विधि को निथारना कहते हैं। इस विधि द्वारा विलायक को धीरे से अलग कर लिया जाता है।

→ पृथक्कारी कीप (Separating funnel)-दो द्रवों के मिश्रण को अलग करने के लिए जिस कीप का प्रयोग किया जाता है, उसे पृथक्कारी कीप कहते हैं।

→ क्रिस्टल (Crystal)-ठोस पदार्थ के कण जोकि ज्यामितीय आकार के हों, उन्हें क्रिस्टल कहते हैं।

→ आसवन (Distillation)-यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी सहायता से किसी विलयन में से शुद्ध पदार्थ प्राप्त किया जाता है।

→ ऊर्ध्वपातन (Sublimation)-वह प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस गर्म करने पर द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना सीधे ही वाष्पों में परिवर्तित हो जाए, उसे ऊर्ध्वपातन कहते हैं।

→ यौगिक (Compound)-एक से अधिक प्रकार के परमाणुओं के परस्पर संयोग से बने पदार्थों को यौगिक कहते हैं।

→ विलायक (Solvent)-वह पदार्थ जो किसी अन्य पदार्थ (विलेय) को अपने में घोलता है, विलायक कहलाता है। विलयन में इसकी अधिक मात्रा होती है।

→ विलेय (Solute)-वह पदार्थ जो विलायक में घुलता है, विलेय कहलाता है।

→ विलयन (Solution)-दो या दो से अधिक पदार्थों का समरूप मिश्रण विलयन कहलाता है।

→ संतृप्त विलयन (Saturated Solution)-वह विलयन जिसमें एक निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय पदार्थ नहीं घुल सकता, संतृप्त विलयन कहलाता है।

→ असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution)-वह विलयन जिसमें एक निश्चित तापमान पर और अधिक विलयन घुल सकता है, असंतृप्त विलयन कहलाता है।

PSEB 9th Class Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ निलंबन (Suspension)-यह वह विषम मिश्रण है जिसमें ठोस पदार्थ के कण पूरे विलायक में बिना घुले फैले हुए होते हैं।

→ कोलायड (Colloid)-कोलायड वह विलयन है जिसमें विलेय के पदार्थों के कणों का आकार 10-7 सें०मी० और 10-5 सें०मी० के बीच होता है।

→ विलेयता (Solubility)-किसी विशेष ताप तथा दाब पर किसी भी विलायक की 100 ग्राम मात्रा में अधिक से अधिक जितना विलेय घोला जा सके, उसे उस विलेय की उस विलेय में दिए गए ताप तथा दाब पर विलेयता (घुलनशीलता) कहते हैं।

→ समांगी (Homogeneous) मिश्रण-वह मिश्रण जिसके गुण तथा संरचना प्रत्येक अवस्था में समरूप हो उसे समांगी कहते हैं।

→ विषमांगी (Heterogeneous)-वह मिश्रण जिसके अंशों के गुण एक-दूसरे से भिन्न हों, उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं।

→ टिंडल प्रभाव (Tyndal Effect)-कोलाइडल द्रवों से प्रकाश की किरणों का पार गुजरते समय बिखर जाना टिंडल प्रभाव कहलाता है।

→ मिश्र धातु (Alloy)-धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं, जिसे भौतिक क्रिया द्वारा अवयवों में पृथक् नहीं किया जा सकता।

→ क्रोमैटोग्राफ़ी (Chromatography)-यह एक ऐसी विधि है जिसका प्रयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक् करने में होता है जो एक ही तरह के विलायक में घुले होते हैं।

→ क्रिस्टलीकरण (Crystalisation)-क्रिस्टलीकरण वह विधि है जिसके द्वारा क्रिस्टल के रूप में शुद्ध ठोस को विलयन से पृथक् किया जाता है।

PSEB 9th Class Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

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PSEB 9th Class Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

→ संपूर्ण विश्व की ये सभी वस्तुएँ, जो स्थान घेरती हैं, अर्थात् जिनमें आयतन तथा द्रव्यमान होता है, पदार्थ कहलाती हैं।

→ भारतीय दार्शनिकों ने पदार्थ को पाँच मूल तत्वों में बांटा था। इन्हें पंचतत्व कहा गया। ये हैं-वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश।

→ आधुनिक वैज्ञानिक पदार्थ को भौतिक और रासायनिक प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

→ पदार्थ बहुत छोटे कणों से बनते हैं। पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होते हैं।

→ पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं। उनमें गतिज ऊर्जा होती है।

→ तापमान बढ़ने से कणों की गति तेज़ हो जाती है।

→ पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना विसरण कहलाता है।

→ पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

PSEB 9th Class Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

→ पदार्थ की तीन अवस्थाएँ हैं-ठोस, द्रव और गैस हैं।

→ ठोस का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएं और स्थिर आयतन होता है।

→ द्रव का आयतन निश्चित होता है पर आकार नहीं। ये दृढ़ नहीं होते परंतु तरल होते हैं। इसके कण स्वतंत्र अवस्था में गति करते हैं।

→ ठोस और द्रव की तुलना में गैसों की संपीड्यता काफ़ी अधिक होती है। LPG और CNG को इसी गुण के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान तक सिलैंडरों में संपीडित कर भेजा जाता है।

→ गैसों में विसरण बहुत तीव्रता से होता है।

→ गैसीय अवस्था में कणों की गति अनियमित और अत्यधिक तीव्र होती है जिस कारण गैस का दबाव बनता है।

→ जिस तापमान पर ठोस पिघल कर द्रव बन जाता है उसे उसका गलनांक कहते हैं।

→ वायुमंडलीय दाब पर एक किलो ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए जितनी उष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा कहते हैं।

→ वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है उसे क्वथनांक कहते हैं।

→ क्वथनांक समष्टि गुण है जिसमें सभी कणों को इतनी ऊर्जा मिल जाती है कि वे वाष्पकणों में बदल सकें।

→ जल का क्वथनांक 373K (100°C = 273 + 100 = 373 K) है।

→ तापमान बदल कर पदार्थ को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदल सकते हैं।

→ द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस और वापस ठोस में बदलने की क्रिया ऊर्ध्वपातन कहलाती है।

→ दाब के बढ़ने और तापमान के घटने से गैस द्रव में बदल सकती है।

→ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड को शुष्क बर्फ (Dry Ice) कहते हैं।

→ समुद्र की सतह पर वायुमंडलीय दाब एक ऐटमॉसफीयर होता है। इसे सामान्य दाब कहते हैं।

→ क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव को वाष्प में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।

→ सतह बढ़ाने, तापमान में वृद्धि, आर्द्रता की कमी और हवा की गति में वृद्धि से वाष्पन की दर प्रभावित वाष्पीकरण से ठंडक पैदा होती है।

→ पदार्थ (Matter)-विश्व की प्रत्येक वस्तु जिस भी सामग्री से बनती है, जो स्थान घेरती है और जिस का द्रव्यमान होता है उसे पदार्थ कहते हैं।

→ पंचतत्व (Panch Tatva)-भारत के प्राचीन दार्शनिकों ने जिन पाँच तत्वों से पदार्थ को निर्मित माना है उसे पंचतत्व कहते हैं। ये पंचतत्व हैं : वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल और आकाश।

→ विसरण (Diffusion)-दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः मिला विसरण कहलाता है।

→ ठोस (Solid)-वे पदार्थ जिन का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमा, स्थिर आयतन होता है, उन्हें ठोस कहते हैं। बल लगाने पर ये टूट सकते हैं पर इनका आकार नहीं बदलता।

→ द्रव (Liquid)-वे तरल पदार्थ जिनका निश्चित आयतन होता है पर कोई निश्चित आकार नहीं होता और उसी बर्तन का आकार ले लेते हैं जिसमें रखे जाते हैं, उन्हें द्रव कहते हैं।

→ गैस (Gas)-अति दबाव को सहन कर सकने वाला वह पदार्थ है जो किसी भी आकार के बर्तन में उसी रूप को प्राप्त कर सकता है।

→ घनत्व (Density)-किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैं।

→ गलनांक (Melting Point)-जिस तापमान पर ठोस पिघल कर द्रव बन जाता है, वह इसका गलनांक कहलाता है।

→ संगलन (Fusion)-ठोस से ‘द्रव अवस्था में परिवर्तन को संगलन कहते हैं।

PSEB 9th Class Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

→ जमना (Solidification/Freezing)-द्रव अवस्था से ठोस अवस्था में परिवर्तन को जमना कहते हैं।

→ उर्ध्वपातन (Sublimation)-जब कोई ठोस पदार्थ द्रव में परिवर्तित हुए बिना गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है या गैसीय अवस्था से ठोस में आ जाता है, तो उसे उर्ध्वपातन कहते हैं।

→ गुप्त गलन ऊर्जा (Latent Heat of Melting)-ऊष्मा की वह मात्रा है जो पदार्थ के पुंज को बिना ताप वृद्धि के ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में बदलने के लिए अभीष्ट होती है। बर्फ़ भी गुप्त ऊष्मा 80 Cal g-1 या 80 k Cal kg-1 होती है।

→ गुप्त वाष्पन ऊष्मा (Latent Heat of vaporisation)-किसी पदार्थ की गुप्त वाष्पन ऊष्मा, ऊष्मा की वह मात्रा है जो पदार्थ की इकाई पुंज को बिना ताप वृद्धि के द्रव अवस्था से गैस अवस्था में बदलने के लिए अभीष्ट होती है। भाप की गुप्त ऊष्मा 540 Cal/g या 540 k Cal / kg है।

→ संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion)-वायुमंडलीय दाब पर 1 किलो ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए जितनी ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा कहते

→ क्वथनांक (Boiling Point)-वायुमंडलीय दाब पर वह निश्चित तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है, उसे उसका क्वथनांक कहते हैं।

→ वाष्पीकरण (Evaporation)-हर ताप पर किसी द्रव का खुली सतह से वाष्प में बदलना वाष्पीकरण कहलाता है।

→ शुष्क बर्फ (Dry Ice)-ठोस कार्बन डाइऑक्साइड के शुष्क रूप को शुष्क बर्फ कहते हैं।

→ हिमांक (Freezing Point)-जिस निश्चित तापमान पर कोई द्रव अपनी अवस्था को ठोस में बदलना आरंभ करता है उसे हिमांक कहते हैं।

→ द्रवित पेट्रोलियम गैस (Liquified Petroleum Gas, L.P.G.)-उच्च दाब पर ब्यूटेन को संपीडित करके ईंधन के रूप में प्रयुक्त की जाने वाली गैस को द्रवित पेट्रोलियम गैस कहते हैं।

→ संपीड़ित प्राकृतिक गैस (Compressed Natural Gas, CNG)-उच्च दाब पर प्राकृतिक गैस को संपीडित करके वाहनों को चलाने हेतु ईंधन के रूप में प्राप्त की जाने वाली गैस को संपीडित प्राकृतिक गैस कहते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

→ वायु, पानी और मृदा में जैविक, भौतिक, रासायनिक लक्ष्णों में अवांछित परिवर्तनों को प्रदूषण (Pollution) कहते हैं।

→ वे पदार्थ जो वायु, पानी और मृदा का प्रदूषण फैलाने में उत्तरदायी हैं, प्रदूषक (Pollutants) कहलाते हैं।

→ प्रदूषण की किस्में वायु प्रदूषण, जल-संदूषण, मृदा-प्रदूषण।

→ वायु प्रदूषण-वायु में ठोस कणों, गैसों और अन्य प्रदूषकों की उपस्थिति, जिससे मानव, जीव-जंतु, वनस्पति, इमारतों और अन्य दूसरी वस्तुओं को नुकसान पहुँचे वायु प्रदूषण (Air Pollution) कहलाता है।

→ जल संदूषण-जल में जैविक, अजैविक, रासायनिक पदार्थ अथवा जल की गर्मी कारण जल की गुणवत्ता कम होने से स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने को जल संदूषण (Water Pollution) कहते हैं।

→ भारत में, विशेषकर गाँवों में संदूषित जल गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न करने में उत्तरदायी है।

→ ओज़ोन ह्रास (Ozone depletion) से UV विकिरणें पृथ्वी पर पहुँच कर त्वचा कैंसर, आँखों की क्षति और प्रतिरक्षी तंत्र को नुकसान पहुँचा रही हैं।

→ अम्ल वर्षा, वायु प्रदूषण के कारण होती है।

→ विश्व उष्णन, वायुमंडल में CO2 की मात्रा में हुई वृद्धि कारण पृथ्वी के तापमान में धीमी वृद्धि है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

→ विश्व उष्णन (Global Warming) को ईंधनों के जलाने को कम करके और अधिक वन लगाकर नियंत्रित किया जा सकता है।

→ उद्योग प्रदूषण फैलाते हैं, परंतु इस प्रदूषण का उपचार और नियंत्रण किया जा सकता है।

→ वायुमंडल का CO2 द्वारा गर्मी को शोषित करने से गर्म होना, पौधा-घर प्रभाव (Green House Effect) कहलाता है।

→ वायुमंडल की मुख्य गैसें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन हैं।

→ वायु में विभिन्न गैसें-नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन, हीलियम, क्रिपटॉन और जीनॉन, जल वाष्प हैं।

→ वायु में 78% नाइट्रोजन और 21% ऑक्सीजन है।

→ वायु प्रदूषण (Air Pollution)- वातावरण में उन पदार्थों का मिलना, जिनसे मानव के स्वास्थ्य और जीवन पर दुष्प्रभाव पड़े, वायु प्रदूषण कहलाता है । वायु प्रदूषण पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव डालता है।

→ मिलावट (Contamination)-ज़हरीले पदार्थों और सूक्ष्म जीवों की उपस्थिति, जिससे मानव में रोग और असुविधा उत्पन्न होती है।

→ प्रदूषक (Pollutants)-वायु, जल, भूमि में अवांछनीय पदार्थों के मिलने से, वातावरण की गुणवत्ता में परिवर्तन लाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 16 प्रकाश

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 16 प्रकाश

→ प्रकाश, ऊर्जा का एक रूप है।

→ प्रकाश, सरल रेखा में गमन करता है।

→ प्रकाश हमें वस्तुएँ देखने में सहायक है।

→ जब वस्तुओं से परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों में पड़ता है तो हम वस्तुएँ देख पाते हैं।

→ जो पिंड स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, दीप्त (Luminous) पिंड कहलाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 16 प्रकाश

→ जो पिंड स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते, परंतु दूसरी वस्तुओं के प्रकाश में चमकते हैं, अदीप्त पिंड (Non-luminous) कहलाते हैं।

→ पॉलिश किया हुआ अथवा चमकदार पृष्ठ प्रकाश परावर्तित करता है।

→ एक दर्पण अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश की दिशा को परावर्तित कर देता है।

→ प्रकाश परावर्तन में आपतित कोण, सदैव परावर्तित कोण के बराबर होता है।

→ आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण, सभी एक तल में होते हैं।

→ एक-दूसरे से किसी कोण पर रखे दर्पण द्वारा अनेक प्रतिबिंब प्राप्त किए जा सकते हैं।

→ जब प्रकाश किरण प्रिज्म में से गुज़रती है, तो विक्षेपित होती है और फलस्वरूप सफेद प्रकाश किरण सात रंगों में विभाजित हो जाती है।

→ सूर्य के प्रकाश के स्पैक्ट्रम में सात रंग-बैंगनी, नील, नीला, हरा, पीला, केसरी और लाल हैं। इन्हें अंग्रेजी शब्द VIBGYOR से स्मरण किया जा सकता है। VIBGYOR (Violet. Indigo. Blue. Green, Yellow, Orange, Red).

→ इंद्रधनुष, विक्षेपण को दर्शाने वाली एक प्राकृतिक परिघटना है !

→ मानव नेत्र, एक ज्ञानेंद्री है, जो वस्तुओं को देखने में सहायक है।

→ मानव नेत्र में एक उत्तल लेंस होता है, जिसकी फोकस दूरी सिलियरी पेशियों द्वारा नियंत्रित की जाती है।

→ परावर्तन, नियमित तथा विसरित हो सकता है।

→ अंध-बिंदु में दो प्रकार की तंत्रिका कोशिकाएँ शंकु (cones) और शलाकाएँ (rods) पाई जाती हैं।

→ चाक्षुणी अक्षमता से पीड़ितों के लिए दो प्रकार के संसाधन होते हैं-अप्रकाशिक (Non-optical) और प्रकाशिक (Optical)।

→ ब्रैल पद्धति, चाक्षुष विकृति युक्त व्यक्तियों के लिए, एक सर्वाधिक लोकप्रिय और महत्त्वपूर्ण साधन है।

→ प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)-जब प्रकाश किरण किसी दर्पण अथवा पॉलिश की हुई सतह पर पड़ती है, तो वह माध्यम के परिवर्तन हुए बिना उसी माध्यम में किसी विशेष दिशा में वापिस आ जाती है। प्रकाश के मार्ग में आए परिवर्तन की क्रिया को प्रकाश का परावर्तन कहा जाता है।

→ पर्दा (Screen)-श्वेत शीट अथवा पृष्ठ, जिस पर प्रतिबिंब बनता है।

→ नियमित परावर्तन (Regular Reflection)-पॉलिश पृष्ठ से हुआ परावर्तन ।

→ प्रकाश का फैलना (Scattering of Light)-प्रकाश किरणों का सभी दिशाओं में परावर्तन।

→ विसरित परावर्तन (Diffused Reflection)-प्रकाश किरणों का खुरदरे पृष्ठ से परावर्तन।

→ आपतित किरण (Incident Ray)-प्रकाश के स्रोत से दर्पण पृष्ठ पर गिरने वाली प्रकाश किरण।

→ केलाइडोस्कोप (Kaleiodeoscope)-बहुमुखी परावर्तन पर आधारित यंत्र, जिससे विभिन्न डिज़ाइन बनाए जाते हैं।

→ दर्पण (Mirror)-समतल और पॉलिश पृष्ठ।

→ अभिलंब (Normal) आपतन बिंदु पर लंबवत् रूप में खींची रेखा।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 16 प्रकाश

→ प्रकाश का स्रोत (Source of Light)-एक ऐसा पिंड, जो प्रकाश उत्सर्जित करता है।

→ वास्तविक प्रतिबिंब (Red Image)-प्रतिबिंब, जो आपतित किरणों का परावर्तन के बाद वास्तव रूप से मिलने से बनता है।

→ आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image)-प्रतिबिंब, जिसमें आपतित किरणें परावर्तन के बाद मिलती नहीं, परंतु मिलती हुई प्रतीत होती हैं।

→ आपतन कोण (Angle of Incidence)-आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।

→ परिवर्तित कोण (Angle of Reflection)-परिवर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।

→ अनुकूलन शक्ति (Power of Accomodation)-हमारी आँख सभी दूर और निकट पड़ी वस्तुओं को देख सकती है। आँख की इस विशेषता को जिसके द्वारा आँख अपने लेंस की शक्ति को परिवर्तित करके भिन्न-भिन्न दूरी पर पड़ी वस्तुओं को देख सकती है, अनुकूलन शक्ति कहा जाता है।

→ दृष्टि की न्यूनतम दूरी (Least Distance of Distinct Vision)-दूरस्थ बिंदु और निकट बिंदु के मध्य के ऐसा बिंदु जहां पर वस्तु को रखने से वस्तु बिलकुल स्पष्ट दिखाई देती है, स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कहा जाता है। सामान्य दृष्टि के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेमी० है।

→ दृष्टि-स्थिरता (Persistence of Vision)-जब किसी वस्तु का आँख के रेटिना पर प्रतिबिंब बनता है, तो वस्तु को हटा देने के बाद इस प्रतिबिंब का प्रभाव कुछ समय के लिए बना रहता है। इस प्रभाव को दृष्टि स्थिरता कहा जाता है।

→ दूर-दृष्टि दोष (Long Sightedness or Hypermotropia)-इस दोष के व्यक्ति को दूर स्थित वस्तुएं तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, परंतु समीप की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। इसका कारण यह है कि समीप स्थित वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। इसे उत्तल लेंस से ठीक किया जाता है।

→ प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion of Light)-प्रकाश किरण का सात रंगों में विभाजित होना।

→ निकट दृष्टि दोष (Near Sightedness or Myopia)-इस दोष के व्यक्ति को निकट स्थित वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, परंतु दूर स्थित वस्तुएँ नहीं दिखाई देतीं, क्योंकि दूरस्थ वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है। इसे अवतल लेंस से ठीक किया जाता है।

→ रंगों की पहचान (Perception of Colour)-मानव नेत्र में शंकु और शल्काएँ हैं, जो प्रकाश संवेदी हैं। शंकु रंगों के प्रति संवेदक होते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ

→ प्राचीन काल में आकाश में उत्पन्न हुई चिंगारियों को भगवान् का क्रोध समझा जाता था।

→ सन् 1752 में बैंजामिन फ्रेंकलिन ने दर्शाया, कि तड़ित और वस्त्रों से उत्पन्न चिंगारी वास्तव में एक ही परिघटना है।

→ आकाश में तड़ित अथवा चिंगारियों के लिए विद्युत् उत्तरदायी है।

→ कुछ पदार्थों में रगड़ के द्वारा आवेशन होता है।

→ किसी पदार्थ से, समान पदार्थों को रगड़ने से उन पर उत्पन्न हुआ आवेश भी समान ही होता है।

→ सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

→ विभिन्न पदार्थों पर आवेश भी विभिन्न होते हैं, जब उन्हें समान या विभिन्न पदार्थों से रगड़ा जाता है।

→ विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

→ आवेश दो प्रकार के हैं-

  1. धनावेश और
  2. ऋणावेश।

→ रगड़ने पर उत्पन्न विद्युत् आवेश स्थैतिक होते हैं।

→ स्थैतिक आवेश स्थिर रहते हैं अर्थात् गति नहीं करते।

→ गति कर रहे आवेश को विद्युत् धारा कहते हैं।

→ भूसंपर्कण विधि द्वारा आवेशित वस्तु में उपस्थित आवेश को पृथ्वी में भेजा जाता है।

→ विद्युत् विसर्जन होता है, जब

  1. दो बादल एक दूसरे के निकट आते हैं
  2. बादल, पृथ्वी के निकट आते हैं
  3. बादल और मानव शरीर निकट आते हैं।

→ बादल पर ऋण आवेश होते हैं। जब यह धन आवेशित बादलों के समीप आते हैं तो प्रकाश की चमकीली धारियों और ध्वनि के रूप में ऊर्जा की बड़ी मात्रा विसर्जित होती है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ

→ तड़ित एवं झंझा (Thunder Storm) के समय मकान, भवन और एक बंद वाहन सुरक्षित स्थान है।

→ भवनों को तड़ित से सुरक्षित रखने वाला यंत्र तड़ित चालक (Lightning Conductor) है।

→ तूफान, तड़ित झंझा, चक्रवात, कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ हैं. जिनसे जनजीवन और संपत्ति को क्षति होती है।

→ भूकंप भी एक प्राकृतिक परिघटना है।

→ तड़ित झंझा, चक्रवात आदि की भविष्यवाणी हो सकती है, परंतु भूकंपों के बारे में भविष्यवाणी नहीं हो सकती।

→ भूकंप, पृथ्वी का झटका है।

→ भूकंप से बाढ़, भूस्खलन, सुनामी आते हैं।

→ भूकंपलेखी उपकरण से भूकंपी तरंगें रिकार्ड की जाती हैं।

→ भूकंप की प्रबलता रिक्टर पैमाने पर व्यक्त की जाती है।

→ भूकंपी क्षेत्रों में मिट्टी और लकड़ी से बने नियमित भवन बनाने चाहिएं।

→ स्थैतिक विद्युत् (Static Electricity)-रगड़ने (घर्षण) से उत्पन्न हुए आवेश को स्थैतिक विद्युत् कहते हैं।

→ भूसंपर्कण (Earthing)-मानव शरीर द्वारा आवेशों को पृथ्वी में पहुंचाना भूसंपर्कण कहलाता है।

→ विद्युत् विसर्जन (Electric Discharge)-बादलों द्वारा प्रकाश और ध्वनि उत्पन्न करने की प्रक्रिया विद्युत् विसर्जन कहलाती है।

→ तड़ित झंझा (Thunder Storm)-वर्षा के दिन, आकाश में एक ऊँची ध्वनि का सुनाई देना, तड़ित झंझा कहलाता है।

→ तड़ित (Lightning)-दो बादलों अथवा बादलों और पृथ्वी के बीच घर्षण के कारण उत्पन्न उज्ज्वल चिंगारी, जो आकाश में फैलती है, तड़ित कहलाती है।

→ भूकंप (Earthquake)-पृथ्वी की ऊपरी सतह में गहराई की गड़बड़ के कारण आए भूस्पंदों को भूकंप कहते हैं।

→ तड़ित चालक (Electric Conductor)-एक युक्ति, जो भवनों को तड़ित से सुरक्षा प्रदान करती है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

→ कुछ पदार्थ अपने में से विद्युत् धारा को प्रवाहित होने देते हैं और कुछ पदार्थ विद्युत् धारा को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते, क्रमशः सुचालक और कुचालक कहलाते हैं।

→ कुछ द्रव विद्युत् धारा को अपने से प्रवाहित होने देते हैं, उन्हें इलेक्ट्रोलाइट कहते हैं।

→ इलेक्ट्रोलाइट में से विद्युत् धारा प्रवाहित होने से बल्ब प्रकाशमान हो जाता है।

→ सपरीक्षित में जब विद्युत् धारा दुर्बल होती है, तो एल० ई० डी० (LED) (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) का उपयोग किया जाता है।

→ शुद्ध वायु, विद्युत्हीन चालक होती है।

→ नल का जल, नमकीन जल, समुद्र अथवा तालाब का जल, सभी विद्युत के सुचालक हैं, क्योंकि इनमें अशुद्धियाँ और लवण उपस्थित होते हैं।

→ अम्ल, क्षार और लवणों के विलयन विद्युत् सुचालक हैं।

→ शुद्ध आसुत जल, विद्युत्हीन चालक है।

→ चालक द्रव (Electrolyte) में से विद्युत् धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं।

→ गैसों का उत्सर्जन, विलयन के रंग में बदलाव, इलेक्ट्रोडों की सतह पर धातु की परत का जमा होना आदि कुछ विद्युत् धारा के रासायनिक प्रभाव हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 14 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

→ फल और सब्जियाँ भी विद्युत् चालन करती हैं।

→ अम्लयुक्त जल में विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बुलबुले क्रमशः धन (+Ve) और ऋण (-Ve) टर्मिनलों (Terminals) पर उत्पन्न होते हैं।

→ विद्युत् लेपन, विद्युत् धारा के रासायनिक प्रभाव का एक सर्वाधिक सामान्य उपयोग है।

→ विद्युत् लेपन, एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी धातु की वस्तु पर किसी दूसरी मनचाही उत्तम धातु की पतली परत विलोपित करते हैं।

→ विद्युत् लेपन अति उपयोगी है, क्योंकि इस द्वारा वस्तुएँ चिरस्थायी, चमकदार, संक्षरण रहित प्राप्त होती हैं। इस विधि द्वारा सस्ते धातु को महँगे धातु की परत से रोपित किया जाता है।

→ विद्युत् चालक (Conductor)-पदार्थ, जो अपने में से विद्युत् धारा को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं, विद्युत् चालक कहलाते हैं।

→ विद्युत्हीन चालक (Insulators)-पदार्थ, जो अपने में से विद्युत् धारा को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते, विद्युत्हीन चालक (कुचालक) कहलाते हैं।

→ विद्युत् अपघटक (Electrolysis)-वह प्रक्रम, जिसमें विद्युत् चालक द्रव में से विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर द्रव संघटकों में अपघटित होता है।

→ एनोड (Anode)-इलेक्ट्रोड, जो बैटरी के +ve सिरे (धन टर्मिनल) से जुड़ा हो, एनोड कहलाता है।

→ कैथोड (Cathode)-इलेक्ट्रोड, जो बैटरी के –ve सिरे (ऋण टर्मिनल) से जुड़ा हो, कैथोड कहलाता है।

→ विद्युत् चालन द्रव (Electrolyte)-जल में कुछ बूंदें सल्फ्यूरिक अम्ल डालने से जल विद्युत् चालन बन जाता है। यह अम्ल युक्त जल विद्युत् चालक द्रव कहलाता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 13 ध्वनि

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 13 ध्वनि

→ कंपित वस्तु द्वारा ध्वनि, उत्पन्न होती है।

→ किसी वस्तु द्वारा अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर, आगे-पीछे या ऊपर-नीचे की दिशा में तय की गई अधिकतम दूरी, कंपन का आयाम (amplitude) कहलाती है।

→ एक कंपन को पूरा करने में लगे समय को आवर्तकाल (time period) कहते हैं।

→ एक सेकंड में कंपनों की संख्या, कंपन की आवृत्ति (frequency) कहलाती है।

→ आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।

→ कंपन का आयाम जितना अधिक होता है, ध्वनि उतनी ही प्रबल होती है।

→ कंपन की आवृत्ति अधिक होने पर तारत्व अधिक होता है और ध्वनि अधिक तीक्ष्ण होती है।

→ मानव कान के लिए, आवृत्ति की सीमा 20Hz to 20,000 Hz है।

→ ध्वनि को संचारण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। यह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।

→ प्रकाश, ध्वनि की अपेक्षा बहुत तेज़ चलता है।

→ ध्वनि किसी बाधा से परावर्तित हो सकती है। इस परावर्तित ध्वनि को प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं।

→ कुछ सतहें दूसरी सतहों की अपेक्षा ध्वनि को अधिक परावर्तित करती हैं।

→ प्रिय ध्वनि संगीत (music) और अप्रिय ध्वनि शोर (noise) कहलाती है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 13 ध्वनि

→ मानवों में वाक्-तंतुओं के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।

→ आयाम (Amplitude)-दोलन करती वस्तु द्वारा माध्य स्थिति से तय की गई अधिकतम दूरी आयाम कहलाती है।

→ प्रतिध्वनि (Echo)-बाधा जैसे कि इमारत और पहाड़ से परावर्तित हुई ध्वनि ।

→ आवृत्ति (Frequency)-दोलित वस्तु द्वारा एक सेकंड में कंपनों की संख्या।

→ हर्ट्ज (Hertz)-आवृत्ति का मात्रक।

→ स्वर यंत्र (Larynx)-मानव में ध्वनि का अंग।

→ तीक्ष्णता (Loudness)-ध्वनि का गुण जो दोलन/कंपन के आयाम और आवृत्ति पर निर्भर करता है।

→ संगीत (Musical Sound)-वह ध्वनि, जो कानों पर मधुर प्रभाव डालती है।

→ शोर (Noise)-कानों को अप्रिय लगने वाली ध्वनि।

→ पराश्रव्य (Ultrasonic)-20,000 Hz से ऊपर आवृत्ति वाले कंपन।

→ दोलन (Vibrating Body)-एक वस्तु, जो मध्य स्थिति के इधर-उधर अथवा आगे-पीछे गति करती है।

→ कंपन (Vibration)-इधर-उधर या आगे-पीछे की गति।

→ वाक्-तंतु (Vocal cords)-स्वर यंत्र में दो युग्म पेशीय तंतु।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 12 घर्षण

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 12 घर्षण

→ घर्षण बल, गति का विरोध करता है।

→ घर्षण बल, दो संपर्क कर रही सतहों के बीच लगता है।

→ घर्षण बल, सतह की प्रकृति और चिकनेपन पर निर्भर करता है।

→ घर्षण बल, सतह की अनियमितताओं के कारण होता है।

→ दाब से घर्षण बढ़ता है।

→ सी घर्षण, स्थैतिक घर्षण से कम होता है।

→ घर्षण, मित्र भी है और शत्रु भी।

→ घर्षण, हानिकारक है परंतु अनिवार्य भी है।

→ घर्षण को आवश्यकता के अनुसार कम या अधिक किया जा सकता है।

→ पहिया अथवा बेलन घर्षण को कम करते हैं।

→ स्नेहक, ऐसे पदार्थ हैं जो घर्षण को कम करते हैं।

→ द्रवों (तरलों) द्वारा उत्पन्न घर्षण, कर्षण कहलाता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 12 घर्षण

→ द्रवों (तरलों) में उत्पन्न घर्षण वस्तु की प्रकृति, आकृति और गति पर निर्भर करती है।

→ मछली, की विशिष्ट आकृति द्रवों में कम घर्षण उत्पन्न करती है।

→ घर्षण (Friction)-संपर्क में रखे दो पृष्ठों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करने वाला बल, घर्षण बल कहलाता है।

→ स्थैतिक घर्षण (Static Friction)-किसी रुकी हुई वस्तु की विराम अवस्था में लगा बल, स्थैतिक घर्षण कहलाता है।

→ सी घर्षण (Sliding Friction)-एक वस्तु का दूसरे वस्तु पर सरकने से उत्पन्न प्रतिरोध बल को सी घर्षण कहते हैं।

→ लोटनिक घर्षण (Rolling Friction)-दो वस्तुओं के परस्पर पृष्ठों पर लोटने से गति के प्रतिरोध बल को लोटनिक घर्षण कहते हैं।

→ तरल घर्षण (Fluid Friction)-तरल में डूबी वस्तुओं पर तरल द्वारा लगाया गया बल।

→ धारा रेखीय (Streamline)-एक विशिष्ट आकृति जिससे वायु और जल में घर्षण कम होता है।

→ तरल (Fluids)-द्रवों और गैसों का एक नाम।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 11 बल तथा दाब

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 11 बल तथा दाब

→ बल, एक धक्का या खिंचाव है, जो वस्तु की स्थिति बदलने में सहायक है।

→ बल का प्रभाव केवल बल के परिमाण पर निर्भर नहीं करता, अपितु क्षेत्रफल पर भी निर्भर करता है।

→ बल, वस्तु की गति, गति की दिशा और वस्तु की आकृति बदल सकता है।

→ बल कई प्रकार के होते हैं जैसे-पेशीय, चुंबकीय बल, घर्षणीय बल, गुरुत्वीय बल और स्थिर वैद्युतीय बल।

→ प्रति क्षेत्रफल पर लगाया गया बल, दाब कहलाता है।

→ द्रव बर्तन की दीवारों पर दाब लगाते हैं।

→ वातावरण भी दाब लगाता है, जिसे वायुमंडलीय दाब कहते हैं।

→ द्रव, बर्तन की दीवारों पर समान गहराई पर समान दाब डालते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 11 बल तथा दाब

→ किसी बर्तन में द्रव के स्तंभ की ऊँचाई पर दाब निर्भर करता है। जितनी ऊँचाई अधिक होगी, दाब उतना ही अधिक होगा।

→ गैसें सभी दिशाओं में दाब डालती हैं।

→ बल (Force)-कोई भी बाह्य कारण, जो वस्तु की विराम अवस्था और गतिशील अवस्था में परिवर्तन लाये, या लाने का प्रयत्न करे उसे बल कहते हैं। यह एक सदिश राशि है।

→ परिणामी ( नेट ) बल (Resultant Force)-जब दो या दो से अधिक बल किसी वस्तु पर एक ही समय लगते हैं, तो वस्तु पर लगा रहा कुल बल का प्रभाव परिणामी बल कहलाता है।

→ घर्षणीय बल (Force of Friction)-दो सतहों के बीच लगने वाला बल जो वस्तु गति के विपरीत लगता है, घर्षणीय बल कहलाता है।

→ गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)-विश्व में प्रत्येक दो वस्तुओं के बीच लग रहे आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण कहते हैं।

→ भार (Weight)-जिस बल द्वारा कोई वस्तु धरती की ओर आकर्षित होती है। दाब (Pressure)-प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगाया गया बल।

→वायुमंडलीय दाब (Atmospheric Pressure)-धरती पर स्थित सभी वस्तुओं पर वातावरण द्वारा लगाया गया बल।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 10 किशोरावस्था की ओर

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 10 किशोरावस्था की ओर

→ मानव एवं अधिकांश जंतु एक निश्चित आयु तक पहुँचने के बाद ही जनन कर सकते हैं।

→ 10 या 11 वर्ष की आयु के बाद वृद्धि में तीव्रता आती है।

→ वृद्धि एक प्राकृतिक प्रक्रम है।

→ जीवनकाल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था (Adolescence) कहलाती है।

→ किशोरावस्था लगभग 11 वर्ष की आयु से प्रारंभ होकर 18 अथवा 19 वर्ष की आयु तक रहती है।

→ किशोरों को ‘टीनेजर्स’ (Teenagers) भी कहा जाता है।

→ किशोरावस्था के दौरान मनुष्य के शरीर में अनेक परिवर्तन आते हैं। यह परिवर्तन यौवनारंभ (Puberty) का संकेत है।

→ लंबाई में यकायक वृद्धि यौवनारंभ के दौरान होने वाला सबसे अधिक दृष्टिगोचर परिवर्तन है।

→ शरीर के सभी अंग समान दर से वृद्धि नहीं करते।

→ लंबाई, माता-पिता से प्राप्त जींस (Genes) पर निर्भर करती है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 10 किशोरावस्था की ओर

→ यौवनारंभ (Puberty) में ‘स्वरयंत्र’ में वृद्धि का प्रारंभ होता है। सामान्यत: लड़कियों का स्वर उच्च तारत्व वाला होता है जबकि लड़कों का स्वर गहरा होता है।

→ किशोरावस्था में स्वेद एवं तैल-ग्रंथियों का स्राव बढ़ जाता है।

→ अत:स्त्रावी ग्रंथियाँ हार्मोनों को सीधे रुधिर प्रवाह में निर्मोचित करती हैं।

→ किशोरावस्था व्यक्ति के सोचने के ढंग में परिवर्तन की अवधि भी है।

→ गौण लैंगिक लक्षण लड़कियों को लड़कों से पहचानने में सहायता करते हैं।

→ किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं। हार्मोन रासायनिक पदार्थ हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्त्रावित किए जाते हैं।

→ पिट्यूटरी, एड्रीनल, थायराइड और जनन अंत:स्त्रावी ग्रंथियां हैं।

→ अंतःस्त्रावी ग्रंथि में नली नहीं होती इसलिए इसे नलिका रहित ग्रंथि (Ductless Gland) भी कहते हैं।

→ कीट हार्मोन कीटों में पाए जाते हैं।

→ नलिका रहित और अंत:स्रावी ग्रंथि अपने स्त्राव रुधिर प्रवाह में स्रावित करती है ताकि वे अपने लक्ष्य पर पहुँच सके।

→ अंतःस्त्रावी ग्रंथियों का स्राव हार्मोन (Hormone) कहलाता है।

→ वृषण अथवा नर जननांग मिश्रित अंग हैं जो शुक्राणु और पौरुष हार्मोन उत्पन्न करते हैं (जैसे टेस्टोस्टरॉन, एंड्रोस्टेरॉन)।

→ अंडाशय एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्ट्रान स्त्राव करता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 10 किशोरावस्था की ओर

→ मादा मानव में 28 से 30 दिन में जनन चक्र में परिवर्तन दौरान एक बार रक्त स्त्राव होने को ऋतु स्त्राव (menstrual cycle) कहते हैं।

→ लगभग 45 से 50 वर्ष की आयु में मादा में ऋतु स्त्राव होना रुक जाता है। इस क्रिया को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं।

→ मानव कोशिका में 22 जोड़ी सामान्य गुणसूत्र और 1. जोड़ी लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं।

→ मनुष्य की प्रत्येक जनन कोशिका में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं।

→ लारवा से वयस्क में परिवर्तन कायांतरण (Metamorphosis) कहलाता है। यह परिवर्तन भी हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं।

→ व्यक्ति का कायिक एवं मानसिक विसंगति मुक्त होना उस व्यक्ति का स्वास्थ्य कहलाता है।

→ किसी भी किशोर को आहार नियोजन अत्यंत सावधानीपूर्वक करना चाहिए क्योंकि यह तीव्र वृद्धि एवं विकास की अवस्था है।

→ किशोरों के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता अति आवश्यक है क्योंकि स्वेद ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता के कारण शरीर से गंध आने लगती है।

→ सभी युवा/किशोरों को टहलना, व्यायाम करना एवं बाहर खेलना चाहिए।

→ किशोरावस्था (Adolescence)-11 या 12 वर्ष की आयु से 18 या 19 वर्ष तक की अवधि किशोरावस्था कहलाती है। ___

→ यौवनारंभ (Puberty)-11 से 18 वर्ष की अवस्था जब जनन क्षमता का विकास होता है अथवा जनन चक्र का आरंभ होता है।

→ स्वरयंत्र (Voice Box)-मनुष्य के गले में उपास्थि (cartilage) से बना बॉक्स, जो आवाज़ पैदा करता है।

→ ऐडम्स ऐपल (कंठमणि) (Adam’s Apple)-लड़कों में बढ़ता हुआ स्वरयंत्र गले के सामने की ओर सुस्पष्ट उभरे भाग के रूप में दिखाई देता है, जिसे कंठमणि कहते हैं।

→ गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters)-लड़के और लड़कियों में कुछ ऐसे गुण जिनसे उन्हें पहचाना जाता है और भिन्न किया जाता है, गौण लैंगिक लक्षण कहलाते हैं।

→ हार्मोन (Hormones)-शरीर की क्रियात्मक क्रियाओं को नियंत्रित करने वाले विशेष रासायनिक पदार्थ।

→ अतःस्त्रावी ग्रंथियां (Endocrine Glands)-नलिका रहित ग्रंथियाँ जो हार्मोन उत्पन्न करती हैं और इन्हें सीधा रक्त में बहा देती हैं।

→ लक्ष्य स्थल (Target Site)-शरीर का वह भाग, जहाँ अत: स्रावी ग्रंथियों द्वारा स्त्रावित हार्मोन, रक्त प्रवाह दवारा पहुँचते हैं।

→ पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)-यह मस्तिष्क में उपस्थित मास्टर ग्रंथि है।

→ टेस्टोस्टरॉन (Testosterone)-यौवनारंभ में वृषण द्वारा स्त्रावित नर हार्मोन।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 10 किशोरावस्था की ओर

→ एक्स्ट्रोजन (Estrogen)-यौवनारंभ में अंडाशय द्वारा स्त्रावित मादा हार्मोन. जो स्तनों में विकास करता है।

→ लिंग गुणसूत्र (Sex chromosomes)-मानव शरीर में 23 जोड़े गुणसूत्र हैं उनमें से एक (23वां जोड़ा) लिंग गुणसूत्र है।

→ थाइराक्सिन (Thyroxin)-गले में स्थित थायराइड ग्रंथि द्वारा स्त्रावित हार्मोन।

→ इंसुलिन (Insulin)-अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा स्त्रावित हार्मोन जो रक्त में शक्कर के स्तर को नियंत्रित करता है।

→ एड्रिनेलिन (Adrenalin)-रक्त में लवण मात्रा के संतुलन के लिए एड्रीनल ग्रंथि का स्त्राव।

→ संतुलित आहार (Balanced diet)-वह आहार जिसमें सभी पोषक (कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, प्रोटीन, लवण, विटामिन आदि) उचित अनुपात में हो।

→ स्वास्थ्य (Health)-व्यक्ति का कायिक एवं मानसिक विसंगतिमुक्त होना।