PSEB 8th Class Science Notes Chapter 9 जंतुओं में जनन

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 9 जंतुओं में जनन

→ जनन का एक विशेष महत्त्व है क्योंकि यह एक जैसे जीवों में पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतरता बनाए रखना सुनिश्चित करता है।

→ सभी सजीव अपने जैसे जीव पैदा करते हैं। इस प्रक्रम को जनन कहते हैं।

→ जनन की दो विधियाँ हैं-

  1. लैंगिक जनन
  2. अलैंगिक जनन।

→ अलैंगिक जनन में, नया जीव एक ही जनक से उत्पन्न होता है।

→ सजीव अलैंगिक जनन में पाँच विधियों द्वारा जनन करते हैं-
(क) द्विखंडन
(ख) मुकुलन
(ग) बीजाणु बनना
(घ) कायिक जनन।
(ङ) पुनर्जनन (Regeneration)-

→ लैंगिक जनन में, दोनों नर और मादा की आवश्यकता होती है। नर जनक, नर युग्मक पैदा करते हैं और मादा, मादा युग्मक पैदा करते हैं। नर और मादा युग्मक के संलयन को निषेचन (fertilization) कहते हैं।

→ कुछ ऐसे जीव हैं, जिसमें दोनों जननांग ही पाए जाते हैं, उभयलिंगी (Hermaphrodite) कहलाते हैं।

→ निषेचन, किसी जीव में बाह्य और किसी जीव में आंतरिक होता है।

→ पौधों में वृद्धि अनियमित होती है जबकि पशुओं में सीमित होती है।

→ वह प्रक्रम जिसमें विशेष आकार और आकृतियां बनती हैं विकास और वृद्धि कहलाता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 9 जंतुओं में जनन

→ अंगों की वृद्धि में आकृति, आकार और संघटकों की संख्या में परिवर्तन आता है।

→ बीज, युग्मनज या शरीर के अन्य भाग से नए जीव के बनने को विकास कहते हैं। विभिन्न जंतुओं में विकास के विभिन्न ढंग हैं।

→ लैंगिक जनन अधिकतर प्रयुक्त होता है।

→ मादा जननांगों में एक जोड़ी, अंडाशय, अंडवाहिनी तथा गर्भाशय होता है।

→ नर जनन अंगों में एक जोड़ा वृषण, दो शुक्राणु नलिका तथा एक शिश्न होता है।

→ वीर्य Semen, एक दूध जैसा द्रव्य है जिसमें शुक्राणु होते हैं।

→ शिश्न नर में मूत्र और शुक्राणु को उत्सर्जन करने का काम करता है।

→ शुक्राणु (Spermatozoan) सूक्ष्म नर युग्मक है। एक शुक्राणु में एक सिर, मध्य भाग और एक पूंछ होती है।

→ क्लोनिंग में समरूप कोशिका या अन्य जीवित भाग अथवा संपूर्ण जीव को कृत्रिम रूप से उत्पन्न किया जाता है। क्लोन वाले जंतुओं में अक्सर जन्म के समय अनेक विकृतियाँ होती हैं।

→ लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)-एक ऐसा प्रक्रम जिसमें नर और मादा के संलयन से निषेचन होता है।

→ अंडाणु (Egg)-मादा युग्मक जिसे मादा अंडाशय उत्पन्न करता है।

→ शुक्राणु (Sperm)-नर युग्मक जिन्हें नर वृषण पैदा करते हैं।

→ निषेचन (Fertilization)-नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) का संलयन निषेचन कहलाता है।

→ युग्मनज (Zygote)-एक कोशिक संरचना जो शुक्राण और अंडाणु के संलयन से बनती है।

→ आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization)-मादा के शरीर के अंदर होने वाला निषेचन ।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 9 जंतुओं में जनन

→ जतु में जनन बाह्य निषेचन (External Fertilization)-मादा के शरीर के बाहर होने वाला निषेचन।

→ भ्रूण (Embryo)-युग्मनज विभाजनों से बनी संरचना भ्रूण कहलाती है।

→ गर्भ (Foetus) भ्रूण की अवस्था जिसमें सभी शारीरिक भाग विकसित होकर पहचानने योग्य हो जाते हैं।

→ जरायुज जंतु (Viviparous Animals)-जंतु जो शिशु को जन्म देते हैं।

→ अंडप्रजनक जंतु (Oviparous Animals)-जंतु जो अंडे देते हैं।

→ कायांतरण (Metamorphosis)-लारवा के कुछ उग्र-परिवर्तनों द्वारा वयस्क जंतु में बदलने की प्रक्रिया।

→ अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)-जनन का वह प्रकार जिसमें केवल एक ही जीव भाग लेता है।

→ मुकुलन (Budding)-ऐसा अलैंगिक जनन जिसमें नया जीव मुकुल (Bud) से उत्पन्न होता है।

→ विखंडन (Binary Fission)-ऐसा अलैंगिक जनन जिसमें जीव दो भागों में विभाजित होकर संतति उत्पन्न करता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 8 कोशिका – संरचना एवं प्रकार्य

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 8 कोशिका – संरचना एवं प्रकार्य

→ सभी सजीव कुछ मूलभूत कार्य संपादित करते हैं।

→ जड़ें, तने, पत्ते और फूल पौधे के अंग हैं।

→ जानवरों के भी अंग जैसे हाथ, पाँव, टाँगें आदि होती हैं।

→ शरीर के छिद्र बिना आवर्धक लेंस (Magnifying Lens) नहीं देखे जा सकते।

→ सभी सजीव भोजन खाते और पचाते हैं, साँस लेते हैं और उत्सर्जन करते हैं।

→ प्रत्येक जीव अपने जैसे जीवों का प्रतिनिधित्व करता है।

→ सजीवों में कोशिकाओं की संरचना भवन में ईंटों की तुलना में अधिक जटिल है।

→ सजीवों में पाई जाने वाली कोशिकाओं के विभिन्न आकार, रंग और संख्या होती है।

→ एक कोशिका जीव जैसे अमीबा, पैरामिशियम और जीवाणु एक कोशिय जीव कहलाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 8 कोशिका – संरचना एवं प्रकार्य

→ बहकोशिय सजीवों (पादप और जन्तु ) में कोशिकाएँ विभिन्न आकार की होती हैं। अधिकतर कोशिकाएँ गोल आकार की होती हैं।

→ अंडे का पीला भाग योक (Yolk) कहलाता है। इसके इर्द सफेद एल्ब्यूमिन का आवरण होता है। पीला भाग एकल कोशिका को दर्शाता है।

→ सभी कोशिकाएँ एक आवरण से आबद्ध होती हैं जिसे कोशिका झिल्ली कहते हैं।

→ कोशिका झिल्ली के अंदर कोशिका द्रव्य होता है। पौधे कोशिका में कोशिका भित्ति होती है, जो सैलूलोज़ की बनी होती है। दोनों कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति कोशिका को आकार देती है।

→ शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी कोशिका का रूप है जिसे नंगी आँख से देखा जा सकता है।

→ प्रत्येक कोशिका के छोटे अवयव कोशिकांग हैं।

→ कोशिकाएँ विभाजन करके बहुकोशिक जीव बनाती हैं जो आकार में वृद्धि करते हैं।

→ विभिन्न कोशिकाओं के समूह विभिन्न कार्य करते हैं।

→ कोशिकाओं की कम संख्या, छोटे जीवों के कार्यों को प्रभावित नहीं करती।

→ मानव रक्त में श्वेत रक्तकोशिका (W.B.C.) भी एक कोशिका है।

→ एक समान कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissue) कहते हैं।

→ प्रत्येक अंग (Organs) कई ऊतकों को मिल कर बनता है।

→ अंग (Organ)-सजीवों के छोटे भाग हैं। प्रत्येक अंग कई ऊतकों के मिलने से बनता है।

→ ऊतक (Tissue)-कोशिकाओं का समूह, जो एक ही प्रकार के कार्य करता है।

→ कोशिका-सजीव की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई।

→ एक कोशीय (Uni-Cellular)-कुछ जीव एक ही कोशिका से बने होते हैं जिसमें जीवन की सभी क्रियाएँ होती हैं। इन्हें एक कोशीय जीव कहते हैं।

→ बहुकोशीय (Multicellular)- सभी सजीव कई कोशिकाओं के मिलने से बनते हैं। इन जीवों में विभिन्न कोशिकाएँ विभिन्न कार्य करती हैं। इन्हें बहुकोशीय कहते हैं।

→ आभासी पाँव (Psendopodia)- यह अमीबा की अंगुलियों जैसे असमान आभासी संरचनाएँ हैं।

→ श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC)-यह एक कोशिक है और रक्त के घटकों में से एक हैं। यह हानिकारक पदार्थों का पोषण करती हैं।

→ कोशिका झिल्ली (Cell Membrane)-यह कोशिका की बाहरी पतली आवरण है, जो इसे आकार देती है।

→ जीव द्रव्य (Protoplasm)-कोशिका झिल्ली और केंद्रक के बीच पाया जाने वाला द्रव्य, जीव द्रव्य कहलाता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 8 कोशिका – संरचना एवं प्रकार्य

→ अंगक (Organelles)- यह सूक्ष्म संरचनाएँ जीव द्रव्य में पाई जाती हैं।

→ कोशिका भित्ति (Cell Wall)- यह पादप कोशिका में कोशिका झिल्ली के बाहर अतिरिक्त आवरण है, जो कोशिका को मज़बूत और दृढ़ बनाती है।

→ केंद्रक (Nucleus)- यह केंद्रक का भाग है, जो गाढ़ा और गोल आकार का है।

→ केंद्रक झिल्ली (Nuclear Membrane)-केंद्रक जीव द्रव्य से एक झिल्ली द्वारा पृथक् होता है, जिसे केंद्रक झिल्ली कहते हैं।

→ असीम केंद्री कोशिकाएँ (Prokaryotic)-जिन कोशिकाओं में केंद्रक स्पष्ट नहीं होता अर्थात् केंद्रक झिल्ली नहीं होती।

→ समीम केंद्री कोशिकाएँ (Eukaryotic)-जिन कोशिकाओं में केंद्रक स्पष्ट और केंद्रक झिल्ली द्वारा घिरा होता है।

→ घानी (Vacuole)-द्रव्य से भरे अंगक।

→ वर्णक (Plastids)-छोटी रंगदार संरचनाएँ जो केवल पौधों में पाई जाती हैं।

→ हरित वर्णक (Chloroplast) जो हरे वर्णक पौधों में पाए जाते हैं।

→ जीन (Gene)- क्रोमोसोम पर उपस्थित बिंदु जैसी इकाइयाँ जो गुणों की आनुवंशिकता की उत्तरदायी हैं।

→ गुणसूत्र (Chromosomes)-कोशिका के केंद्रक में धागे जैसी संरचनाएँ, गुणसूत्र हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 7 पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 7 पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण

→ आजकल वनों को काटकर उस भूमि का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

→ दावानल एवं भीषण सूखा भी वनोन्मूलन (deforestation) के प्राकृतिक कारक हैं।

→ वनोन्मूलन से पृथ्वी पर ताप एवं प्रदूषण के स्तर में वृद्धि होती है।

→ वनोन्मूलन से विश्व ऊष्मण, मृदा के गुणों में परिवर्तन, मृदा अपरदन का कारण, मृदा की जलधारण क्षमता में कमी आती है।

→ सरकार द्वारा वनों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु नियम, विधियाँ और नीतियाँ बनाई गई हैं।

→ जैवमंडल पृथ्वी का वह भाग है जिसमें सजीव पाए जाते हैं अथवा जो जीवनयापन के योग्य हैं।

→ जैव विविधता से अभिप्राय है, पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न जीवों की प्रजातियाँ, उनके पारस्परिक संबंध एवं पारस्परिक पर्यावरण से संबंध ।

→ जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र विविधताओं के संरक्षण के लिए बनाए गए क्षेत्र हैं।

→ किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के ‘वनस्पतिजात’ एवं जीव-जंतु ‘प्राणिजात’ कहलाते हैं।

→ स्पीशीज़ सजीवों की समष्टि का वह समूह है, जो एक-दूसरे से अंतर्जनन करने में सक्षम होते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 7 पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण

→ वे क्षेत्र जहाँ वन्य प्राणी (जंतु) सुरक्षित एवं संरक्षित रहते हैं, वन्यप्राणी अभ्यारण्य (Wild Life Sanctuaries) कहलाते हैं। यहाँ वन्य प्राणियों को सुरक्षा और रहने की उचित परिस्थितियाँ उपलब्ध करवाई जाती हैं।

→ कई सुरक्षित वन भी सुरक्षित नहीं रहे क्योंकि आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वनों का अतिक्रमण कर उन्हें नष्ट कर देते हैं।

→ राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) उस क्षेत्र के वनस्पतिजाति, प्राणिजात, दृश्यभूमि तथा ऐतिहासिक वस्तुओं का संरक्षण करते हैं।

→ सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में सर्वोत्तम किस्म की टीक (सागौन) मिलती है।

→ 1 अप्रैल, 1973 में भारत सरकार द्वारा ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ कानून बाघों के संरक्षण हेतु लागू हुआ।

→ संकटापन्न जंतु (Endangered Animals) वे जंतु हैं, जिनकी संख्या विलुप्त हो रही है।

→ पारितंत्र में सभी पौधे, जीव एवं सूक्ष्मजीव और अजैव घटक आते हैं।

→ ‘रेड डाटा पुस्तक’ एक ऐसी किताब है, जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज़ का रिकार्ड रखा जाता है।

→ जलवायु में परिवर्तन के कारण प्रवासी पक्षी प्रत्येक वर्ष सुदूर क्षेत्रों से एक निश्चित समय पर उड़कर आते हैं।

→ कागज़ एक महत्त्वपूर्ण उत्पाद है, जो वनों से प्राप्त होता है अतः हमें कागज़ की बचत करनी चाहिए।

→ पुनर्वनरोपण (Reforestation) में काटे गए वृक्षों की कमी पूरी करने के उद्देश्य से नए वृक्षों का रोपण करना है।

→ जैव विविधता (Biodiversity)-पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न जीवों की प्रजातियाँ, उनके पारस्परिक संबंध एवं पर्यावरण से संबंध से है।

→ वनोन्मूलन (Deforestration)-वनों का काटना।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 7 पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण

→ मरुस्थलीकरण (Desertification)-उर्वर- भूमि का मृदा अपरदन के कारण अनउपजाऊ होना।

→ पारितंत्र (Ecosystem)-इसमें सभी पौधे, जीव एवं सूक्ष्मजीव और अजैव घटक आते हैं।

→ पुनर्वनरोपण (Reforestation)-पौधों का रोपण करना।

→ संकटापन्न स्पीशीज़ (Endangered Species)-वे जंतु हैं, जिनकी संख्या विलुप्त हो रही है।

→ प्राणिजात (Fauna)-किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव-जंतु प्राणिजात कहलाते हैं।

→ रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book)-ऐसी किताब जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकार्ड रखा जाता है।

→ विशेष क्षेत्री प्रजाति (Endemic Species)-जीवों की वह स्पीशीज जो किसी विशेष क्षेत्र में पाई जाती है।

→ वनस्पतिजात (Flora)-किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधे।

→ विलुप्त (Extinct)-वे जीव जो पृथ्वी से विलुप्त हो चुके हैं या जिनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है।

→ प्रवास (Migration)-जीवनयापन हेतु कुछ स्पीशीज़ द्वारा अपने आवास से किसी निश्चित समय में बहुत दूर जाना।

→ अभ्यारण्य (Sanctuary)-वे क्षेत्र जहाँ वन्य प्राणी (जंतु) सुरक्षित एवं संरक्षित रहते हैं।

→ राष्ट्रीय उद्यान (National Park)-उस क्षेत्र के वनस्पतिजात, प्राणिजात, दृश्यभूमि तथा ऐतिहासिक वस्तुओं का संरक्षण करते हैं।

→ जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve Area)-ये विविधताओं के संरक्षण के लिए बनाए क्षेत्र हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 6 दहन और ज्वाला

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 6 दहन और ज्वाला

→ विविध प्रयोजनों के लिए, विभिन्न प्रकार के ईंधनों का उपयोग होता है।

→ घरों में, उद्योगों में तथा वाहनों में विभिन्न प्रकार का ईंधन उपयोग होता है।

→ गोबर, लकड़ी, कोयला, काष्ठ कोयला, पेट्रोल, डीज़ल, प्राकृतिक गैस, एल० पी० जी० आदि विभिन्न ईंधन हैं।

→ कुछ पदार्थ ज्वाला के साथ जलते हैं और कुछ नहीं।

→ दहन, एक रासायनिक प्रक्रम है, जिसमें पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर ऊष्मा देते हैं।

→ ईंधन, वह पदार्थ है, जो जलने पर प्रकाश और ऊष्मा देता है।

→ भोजन, शरीर का ईंधन है।

→ ईंधनों को ठोस, तरल और गैसों में वर्गीकृत किया जाता है।

→ वे पदार्थ, जो जलने पर प्रकाश और ऊष्मा देते हैं, दाह्य पदार्थ कहलाते हैं।

→ वे पदार्थ, जो जलने पर ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं कर सकते और न ही प्रकाश और ऊष्मा देते हैं। उन्हें अदाह्य पदार्थ (Non-combustible substances) कहते हैं।

→ लकड़ी, कागज़, मिट्टी का तेल, काष्ठ कोयला, माचिस की तीलियाँ, सब दाह्य पदार्थ (Combustible substance) हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 6 दहन और ज्वाला

→ लोहे की कीलें, पत्थर के टुकड़े, काँच आदि अदाह्य पदार्थ हैं।

→ वह न्यूनतम ताप, जिस पर कोई पदार्थ जलने लगता है, उसका ज्वलन-ताप कहलाता है।

→ विभिन्न दाह्य पदार्थों को जलने के लिए विभिन्न ताप की आवश्यकता होती है।

→ ज्वलनशील पदार्थ वे पदार्थ हैं, जिनका ज्वलन-ताप बहुत कम होता है और जो ज्वाला के साथ जल्दी से आग पकड़ लेते हैं।

→ पेट्रोल, डीज़ल, एल० पी० जी०, एल्कोहल कुछ ज्वलनशील पदार्थों के उदाहरण हैं।

→ जंगल की आग बहुत खतरनाक होती है।

→ दहन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है।

→ आग उत्पन्न करने के लिए तीन आवश्यक परिस्थितियाँ हैं-

  1. ऑक्सीजन की उपस्थिति
  2. दहन पदार्थ की उपस्थिति
  3. पदार्थ का निम्न ज्वलन ताप।

→ आग बुझाने के लिए इनमें से किसी एक आवश्यकता को दूर करना है।

→ आग बुझाने के लिए प्रायः जल का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह ज्वलन-ताप को कम कर देता है।

→ तेल और पेट्रोल में लगी आग बुझाने हेतु जल का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि जल तेल से भारी होता है। यह तेल के नीचे चला जाता है और तेल ऊपर जलता रहता है।

→ जल विद्युत् का सुचालक है, इसलिए इसका उपयोग विद्युत् उपकरणों में लगी आग बुझाने हेतु नहीं किया जा सकता।

→ तरल ईंधनों अथवा विद्युत् से लगी आग बुझाने के लिए रेत/मिट्टी का उपयोग किया जाता है।

→ आग बुझाने के लिए, वायु का प्रवाह काटना या ईंधन का ताप कम करना अथवा दहन पदार्थ को दूर हटाना है।

→ विभिन्न प्रकार के अग्निशामक इस्तेमाल किए जाते हैं।

→ दहन की कई किस्में हैं, जैसे तीव्र दहन, स्वतः दहन और विस्फोट ।

→ ज्वाला, दहन के समय दहन पदार्थ से उत्पन्न वाष्पों से बनती है।

→ ज्वाला का नीला अदीप्त क्षेत्र का ताप सबसे अधिक है।

→ ज्वाला के दीप्त क्षेत्र में बिना जले कार्बन कण होते हैं।

→ ईंधन का उष्मीयमान 1 किलोग्राम के पूर्ण दहन से प्राप्त ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा है।

→ उष्मीयमान की इकाई किलोजूल प्रति किलोग्राम है।

→ कोई भी ईंधन आदर्श ईंधन नहीं है।

→ ईंधनों के जलने से वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याएँ, विश्व उष्मण, अम्लीय वर्षा आदि होते हैं।

→ पृथ्वी के वायुमंडल के ताप में धीमी वृद्धि विश्व उष्णन है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 6 दहन और ज्वाला

→ सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड वर्षा में घुल कर अम्लीय वर्षा बनाते हैं। यह ऑक्साइड जीवाश्म ईंधन के जलने से उत्पन्न होते हैं।

→ अम्ल वर्षा उपजों, भवनों और मृदा के लिए हानिकारक है।

→ सी० एन० जी० एक साफ ईंधन है, क्योंकि यह वायु प्रदूषण नहीं फैलाते।

→ दहन (Combustion)-एक रासायनिक प्रक्रम है, जिसमें पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर ऊष्मा देते हैं।

→ दाहृय पदार्थ (Combustible Substance)-वे पदार्थ, जो जलने पर प्रकाश और ऊष्मा देते हैं, दाहय पदार्थ कहलाते हैं।

→ अदाह्य पदार्थ (Non Combustible Substance)-वे पदार्थ, जो जलने पर ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं कर सकते और न ही प्रकाश और ऊष्मा देते हैं, उन्हें अदाह्य पदार्थ कहते हैं।

→ ज्वलन-ताप (Ignition Temperature)-वह न्यूनतम ताप, जिस पर कोई पदार्थ जलने लगता है।

→ ज्वलनशील पदार्थ (Combustible Substance)-वे पदार्थ, जिनका ज्वलन-ताप बहुत कम होता है और जल्दी से आग पकड़ लेते हैं।

→ अग्निशामक (Fire Extinguisher)-आग बुझाने का एक यंत्र।

→ ऊष्मीय मान (Calorific Value)-1 किलोग्राम पदार्थ के पूर्ण दहन के बाद प्राप्त ऊर्जा की मात्रा।

→ विश्व उष्णन (Global Warming)-पृथ्वी के वातावरण में धीमी ताप की वृद्धि।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 5 कोयला और पेट्रोलियम

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 5 कोयला और पेट्रोलियम

→ मूलभूत आवश्यकताओं के लिए विभिन्न पदार्थ उपयोग में लाए जाते हैं।

→ दैनिक उपयोग में आने वाले पदार्थों का वर्गीकरण, प्राकृतिक और मानव-निर्मित में किया जाता है।

→ प्रकृति से मिले पदार्थों को प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) कहते हैं।

→ मृदा, जल, खनिज, पौधे और वन प्राकृतिक संसाधन हैं।

→ प्रकृति में उपलब्धता के आधार पर इन्हें अक्षय प्राकृतिक संसाधन (Inexhaustible Natural Resources) और समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधन (Exhaustible Natural Resources) में किया गया है।

→ पदार्थ, जिनकी उपलब्धता प्रकृति में सीमित है और जो मनुष्य के क्रिया-क्लापों द्वारा खत्म किए जा सकते हैं, उन्हें समाप्त होने वाले संसाधन कहते हैं। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस समाप्त होने वाले संसाधन हैं।

→ सजीवों के अवशेषों से बने जीवाश्म ईंधनों में कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सम्मिलित हैं।

→ कोयला ठोस, काले रंग का पदार्थ ईंधन के रूप में उपयोग में आता है।

→ कोयला जलकर कार्बन डाइऑक्साइड पैदा करता है।

→ कोयले के भुनना प्रक्रमण से कोक, कोलतार और कोयला गैस उत्पन्न होती है।

→ कोक, एक कठोर, सरंध्र और काला पदार्थ है। यह कार्बन का शुद्ध रूप है।

→ कोलतार लगभग 200 पदार्थों का मिश्रण है। यह एक अप्रिय गंध वाला काला गाढ़ा द्रव है।

→ कोलतार, संश्लेषित रंग, औषधि, विस्फोटक, प्लास्टिक, सुगंध, पेंट, फोटोग्राफिक सामग्री, छत-निर्माण सामग्री, नैफ्थलीन की गोलियाँ आदि के लिए प्रारंभिक पदार्थ के रूप में काम आता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 5 कोयला और पेट्रोलियम

→ पेट्रोलियम, गहरे रंग का तेलीय द्रव है। इसकी अप्रिय-सी गंध है। यह कई विभिन्न संघटकों का मिश्रण है।

→ पेट्रोलियम के संघटकों में LPG, पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन, स्नेहक तेल, पैराफिन मोम, बिट्मन आदि होते हैं।

→ पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों को पृथक् करने का प्रक्रम परिष्करण (Refining) कहलाता है।

→ कोयले और पेट्रोलियम की मात्रा प्रकृति में सीमित है। इसलिए इनका न्यायोचित उपयोग करना चाहिए।

→ एल० पी० जी० (LPG) पेट्रोलियम गैस का तरल रूप है।

→ ईंधन (Fuel)-जलने पर ऊष्मा तथा प्रकाश ऊर्जा पैदा करने वाले पदार्थ।

→ जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel)-कुछ ज्वलनशील पदार्थ, जिनका निर्माण सजीवों के मृत अवशेषों से लाखों वर्ष पूर्व हुआ था।

→ कार्बनीकरण (Carbonisation)-मृत वनस्पति जो मृदा के नीचे दबी हुई है, उच्च ताप और दाब के कारण, धीमे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तित होने के क्रम कार्बनीकरण कहते हैं।

→ कोयले का प्रक्रमण (Destructive Distillation of Coal)-कोयले को 1000°C ताप से अधिक पर गर्म करने के प्रक्रम को कोयले का प्रक्रमण कहते हैं।

→ परिष्करण (Refining)-पेट्रोलियम से विभिन्न प्रभाजों को पृथक् करने और अशुद्धियों को दूर करने के प्रक्रम को परिष्करण कहते हैं।

→ समाप्त होने वाले संसाधन (Exhaustible Resources)-वे संसाधन, जो मानव क्रिया-कलापों द्वारा धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं, समाप्त होने वाले संसाधन अथवा सीमित प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि।

→ अक्षय प्राकृतिक संसाधन (Inexhaustible Resources)-वे संसाधन जो मानव क्रिया-कलापों द्वारा समाप्त नहीं हो सकते, उन्हें अक्षय प्राकृतिक संसाधन अथवा असीमित प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। उदाहरण-वायु, जल और सूर्य का प्रकाश आदि।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 4 पदार्थ : धातु और अधातु

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 4 पदार्थ : धातु और अधातु

→ पदार्थ को धातु या अधातु दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

→ धातुएँ, अधातुओं से भौतिक और रासायनिक गुणों में भिन्न होते हैं।

→ धातु सामान्यतः चमकीले, कठोर, अधात्विक, आघातवर्धनीय और तन्य होते हैं। ये विदयुत् और ऊष्मा के चालक होते हैं। ये कक्ष ताप पर ठोस होते हैं। केवल पारा (Mercury) हो कक्ष ताप पर तरल है।

→ अधातु निष्प्रभ (बिना चमक) वाले होते हैं। ये विद्युत् और ऊष्मा के कुचालक, बिना आवाज़ वाले और भुरभुरे होते हैं। ये कक्ष ताप पर ठोस, तरल और गैसीय अवस्था में पाए जाते हैं। इनके गलनांक निम्न होते हैं।

→ धातुएँ ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके क्षारीय ऑक्साइड बनाती है।

→ अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके अम्लीय ऑक्साइड बनाती है।

→ लोहा, पानी और वायु से क्रिया करके जंग लगाता है।

→ कुछ धातुएँ पानी के साथ अभिक्रिया करती हैं। सोडियम तीव्रता से ठंडे पानी के साथ अभिक्रिया करके सोडियम हाइड्रोऑक्साइड और हाइड्रोजन उत्पन्न करता है। सोना की भाप से भी अभिक्रिया नहीं होती।

→ सोडियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है।

→ फास्फोरस जल में रखा जाता है, क्योंकि यह वायु के साथ सक्रिय है।

→ अधातु पानी के साथ अभिक्रिया नहीं करते।

→ कुछ धातु अम्लों (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं। सोना, तांबा और चांदी पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का कोई प्रभाव नहीं होता।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 4 पदार्थ : धातु और अधातु

→ धातुओं की जल, वायु और अम्लों के साथ अभिक्रिया क्षमता के कारण अभिक्रियाशील श्रृंखला है-सोना, चांदी, तांबा, लोहा, जिंक, एल्यूमीनियम, मैग्नीशियम, और सोडियम।

→ अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु का उसके धात्विक यौगिकों के जलीय विलयन में विस्थापित कर देती है।

→ हाइड्रोजन गैस ‘पॉप’ ध्वनि में जलती है।

→ धातुओं का उपयोग रसोई घर की वस्तुएँ में व्यापक रूप में होता है।

→ अधातुएँ भी काफ़ी उपयोग में आती हैं।

→ ऑक्सीजन जीवन के लिए अति आवश्यक है।

→ नाइट्रोजन का उपयोग उर्वरकों और पटाखों के निर्माण में होता है।

→ मानव शरीर को लोहा, मैग्नीशियम तथा सोडियम आदि की आवश्यकता रहती है।

→ आघातवर्धनीयता (Malleability)-धातुओं का गुण, जिसके कारण उन्हें हथौड़े से पीटकर शीट (चादर) में परिवर्तित किया जाता है।

→ तन्यता (Ductility)-धातुओं का वह गुण, जिससे उन्हें खींचकर तारों में परिवर्तित किया जा सकता है।

→ ध्वानिक (Sonorus)-धातुओं को टकराने पर उत्पन्न निनाद ध्वनि का गुण।

→ चमकीलापन (Lustre)-पदार्थों में चमकती सतह का गुण।

→ चालकता (Canductance)-धातुओं का गुण जिसके द्वारा विद्युत् या उष्मा एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचती है।

→ अम्लीय ऑक्साइड (Acidic Oxide)-अधातुओं के ऑक्साइड, जिन्हें जल में घोलकर अम्ल बनाते हैं।

→ क्षारीय ऑक्साइड (Basic Oxide)-धातुओं के ऑक्साइड, जो जल में घुलकर क्षार बनाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

→ रेशों से कपड़े बनते हैं।

→ तागों के मिलने से रेशे बनते हैं।

→ तागे कृत्रिम अथवा प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त हो सकते हैं।

→ संश्लेषित रेशों को मानव निर्मित अथवा कृत्रिम रेशे भी कहते हैं।

→ संश्लेषित अथवा कृत्रिम रेशे छोटी इकाइयों को जोड़कर बनायी गई एक लंबी श्रृंखला है। बहुत बड़ी शृंखला को बहुलक (पालीमर) कहते हैं।

→ सेलुलोज़ एक प्राकृतिक बहुलक है।

→ रेयॉन, नाइलॉन, पॉलिएस्टर अथवा ऐक्रिलिक मानव निर्मित रेशे हैं।

→ प्राकृतिक रेशों (कपास, रेशम आदि) के स्रोत पौधे और जंतु हैं।

→ कृत्रिम रेशों के स्रोत पौधे (लकड़ी) या जीवाश्म ईंधन (कोयला आदि) हैं।

→ नाइलॉन पहला पूर्ण संश्लेषित रेशा था।

→ विभिन्न रेशे अपनी प्रबलता, जल अवशोषण क्षमता, दहन प्रकृति, मूल्य, चिरस्थायित्व, उपलब्धता और रख-रखाव परिस्थितियों से पहचाने जाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

→ प्लास्टिक एक बहुलक है, जिसमें छोटी इकाइयाँ विभिन्न आकारों से जुड़ी हैं।

→ प्लास्टिक दो किस्म के हैं

  1. थर्मोप्लास्टिक,
  2. थर्मोसेटिंग प्लास्टिक।

→ पॉलिथीन भी एक प्रकार का प्लास्टिक है।

→ प्लास्टिक हल्का, मज़बूत, चिरस्थायी, जंगरहित, उष्मा और विद्युत् का रोधक है।

→ प्लास्टिक अपशिष्ट पर्यावरण हितैषी नहीं है। यह जैव अनिम्नीकरण प्रकृति का है। जलने पर यह विषैली गैसें उत्पन्न करता है, जो बदबू फैलाती हैं। भूमि पर डालने से, भूमि बंजर हो जाती है, क्योंकि इसका अपघटन जल्दी नहीं होता।

→ संश्लेषित अपशिष्ट के निस्तारण को 4R सिद्धांत (Reduce. Reuse. Recycle. Recover) को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

→ मानव-निर्मित रेशे (Man made fibres)- मानव द्वारा बनाए गए रेशों को मानव निर्मित रेशे कहते हैं।

→ पॉलिमर (Polymer)-रसायने पदार्थों की एक जैसी छोटी इकाइयों से मिलकर बनी एक लंबी श्रृंखला अथवा एक जैसी छोटी इकाइयों से बनी बड़ी शृंखला।

→ रेयॉन (Rayon)-कृत्रिम रेशा जिसकी प्रकृति रेशम जैसी होती है इसे कृत्रिम रेशम भी कहते हैं।

→ पेट (PET)-पालिएस्टर की एक विशेष किस्म जिससे बोतलें, फिल्में, तारें, बर्तन आदि बनाए जाते हैं।

→ थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastic)-प्लास्टिक की किस्म, जो गर्म होने पर अपना आकार बदल लेती है और आसानी से मुड़ सकती है, थर्मोप्लास्टिक कहलाती है।

→ थर्मोसैटिंग प्लास्टिक (Thermo Setting Plastic)-प्लास्टिक की किस्म, जो गर्म करने पर नर्म नहीं होती, थर्मोसैटिंग प्लास्टिक कहलाती है। इसे केवल एक ही बार साँचे में डाला जा सकता है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 2 सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 2 सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु

→ सुक्ष्मजीव बहुत ही छोटे जीव हैं, जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी (Microscope) द्वारा ही देखा जा सकता है।

→ सूक्ष्मजीव सभी प्रकार की परिस्थितियों में जीवित रह सकते हैं जैसे गर्म स्रोतों, बर्फीय जल, लवणीय जल, रेगिस्तानी मिट्टी और दलदली मिट्टी (marshy land)

→ सूक्ष्मजीवों का वर्गीकरण जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ, शैवाल और विषाणुओं में किया जाता है।

→ सूक्ष्मजीव सभी प्रकार के आवासों में पाए जाते हैं। प्रायः यह एक कोशिक होते हैं, पर कभी-कभी श्रृंखला अथवा समूह में भी पाए जाते हैं।

→ सूक्ष्मजीवों का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है।

→ जीवाणु हर जगह पाए जाते हैं और बहुत छोटे होते हैं।

→ जीवाणु के व्यास का आकार एक मिलीमीटर के एक हज़ारवें भाग का 1.25 गुणन है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 2 सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु

→ जीवाणु की तीन किस्में

  1. छड़ नुमा,
  2. गोल और
  3. कुंडलीनुमा है।

→ जीवाणु, स्वपोषी अथवा परपोषी हो सकते हैं।

→ जीवाणु, कोशिका विखंडन अथवा विविखंडन से प्रजनन करते हैं।

→ शैवाल और जीवाणुओं में कई समानताएँ हैं।

→ साइनोबैक्टीरिया वातावरणी नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाते हैं।

→ डायटम एक सूक्ष्म शैवाल है, जो झरनों, तलछटी और समुद्र में पाया जाता है।

→ कवक परजीवी तथा मृतजीवी होते हैं।

→ कुछ कवक खाद्य पदार्थ, चमड़ा, कागज़ और कपड़े को नष्ट करते हैं तो कुछ फसल और जानवरों के लिए घातक होते हैं।

→ खमीर (Yeast) एक कोशिक और परजीवी कवक है, जिसका उपयोग किण्वन (Fermentation) द्वारा बियर, शराब और दूसरे पेयजल बनाने में किया जाता है।

→ विषाणु (Virus) एक कोशिक मृतजीवी है जो कोशिका में गुणन करने की क्षमता रखता है।

→ प्रोटोज़ोआ (Protozoa) एक कोशीय सूक्ष्मजीव है जो पेचिश और मलेरिया जैसे रोग फैलाते हैं।

→ भोजन विषाक्तता (Food Poisoning) सूक्ष्मजीवों द्वारा नष्ट किए भोजन खाने से होती है।

→ भोजन पर वृद्धि करने वाले सूक्ष्मजीव विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं।

→ भोजन के संरक्षण के मुख्य तरीके-रासायनिक तरीका जिसमें नमक मिलाना, चीनी मिलाना, तेल और सिरका मिलाना, गर्म और ठंडा करने की विधियाँ अपनाई जाती हैं।

→ प्रोटोज़ोआ (Protozoa)- यह एक कोशिक (Unicellular) सूक्ष्मजीव है, जो पेचिश और मलेरिया जैसे रोग फैलाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 2 सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु

→ कवक (Fungi)-कवक सूक्ष्मजीव पादप हैं जो हरे नहीं होते और खाद्य पदार्थों को संदूषित करते हैं।

→ विषाणु (Virus)-यह सूक्ष्मजीव सजीव और निर्जीव की सीमा रेखा पर है।

→ यह केवल पोषी (host) के शरीर में ही प्रजनन करते हैं।

→ जीवाणु (Bacteria)-यह सूक्ष्मजीव हर व्यापक जगह पर पाए जाते हैं और आकार में बहुत छोटे होते हैं। यह पोषण के आधार पर स्वपोषी और परपोषी हो सकते हैं।

→ खमीर (Yeast) खमीर एक कोशिक कवक है जो किण्वन द्वारा बियर, शराब और दूसरे पेय पदार्थ बनाने के काम आता है।

→ राइजोबियम (Rhizobium)-यह एक जीवाणु है जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होता है। यह फलीदार पौधों की जड़ ग्रंथियों में पाया जाता है।

→ मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility)- मिट्टी में नाइट्रोजन पोषक तत्त्व की आपूर्ति ही मिट्टी की उर्वरता है। यह जीवाणु और नीले हरे शैवाल द्वारा होती है।

→ सूक्ष्मजीव (Microorganism)- बहुत छोटे जीव जिन्हें नंगी आँख द्वारा नहीं देखा जा सकता। इन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी द्वारा ही देखा जा सकता है। यह सभी प्रकार के आवास में रहते हैं।

→ लैक्टोबेसिलस (Lactobacillus)-दूध में पाए जाने वाले जीवाणु, जो दही जमाने में सहायक होते हैं, लैक्टोबेसिलस कहलाते हैं।

→ वाहक (Carriers)-वाहक वे कीट या दूसरे जीव हैं जो रोग फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों का संचारण करते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 2 सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु

→ प्रतिरक्षी (Antibodies)-जब रोगाणु शरीर में प्रवेश करते हैं तो शरीर रोगाणुओं से लड़ने के लिए प्रतिरक्षी उत्पन्न करता है।

→ टीका (Vaccine)-यह मृत अथवा कमज़ोर सूक्ष्मजीव है जिन्हें स्वस्थ शरीर में प्रवेश कराया जाता है।

→ रोगाणु (Pathogen)-रोग फैलाने वाले सूक्ष्मजीव रोगाणु कहलाते हैं।

→ किण्वन (Fermentation)-चीनी को एल्कोहल में सूक्ष्मजीव खमीर द्वारा परिवर्तित करने की क्रिया किण्वन कहलाती है।

→ नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Fixation of Nitrogen)-सूक्ष्मजीवों द्वारा वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्राइट और नाइट्रेट में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहते हैं। यह राइजोबियम जीवाणुओं द्वारा संभव होता है।

→ नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)-वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण, नाइट्रीफिकेशन, डीनाइट्रीफिकेशन, आदि प्रक्रियाओं के बाद वापस नाइट्रोजन के रूप में वायुमंडल में प्रवेश करना ही नाइट्रोजन चक्र है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध

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PSEB 8th Class Science Notes Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध

→ खेत में पौधों को उगाना और देखभाल करना कृषि उत्पादन (Crop Yield) कहलाता है।

→ धन कमाने के लिए जो फसल उगाई जाती है, उसे नकदी फसल (Cash Crop) कहते हैं।

→ फसल के अतिरिक्त, सब्जियां, फल और फूल भी उगाए जाते हैं। यह हार्टीक्लचर (Horticulture) में आते हैं।

→ पौधों की उचित वृद्धि के लिए जल, ऑक्सीजन, सूर्य का प्रकाश और पोषक तत्त्व आवश्यक हैं।

→ कृषि उत्पादन में कुछ पद्धतियों का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग होता है।

→ भूमि को नर्म और समतल करना मिट्टी तैयार करना अथवा जुताई कहलाता है। इससे जड़ें आसानी से मिट्टी में नीचे तक बढ़ती हैं।

→ पौधों को समय-समय पर पानी देने की विधि सिंचाई कहलाती है।

→ सिंचाई के साधन हैं-कुएं, ट्यूबवेल, तालाब, झीलें, नदियां, बाँध और नहरें।

→ सिंचाई की आधुनिक विधियां हैं-छिड़काव तंत्र और ड्रिप तंत्र।

→ बीज खेतों में हाथों द्वारा तथा सीड-ड्रिल द्वारा बोए जाते हैं।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध

→ पौध (Seedling) एक छोटा पौधा है। पौध को पौधशाला (नर्सरी) से खेत में रोपने को रोपण विधि कहते हैं।

→ ह्यूमस कार्बनिक पदार्थ से बनी मिट्टी की ऊपरी सतह है जो पौधों और पशुओं के अपशिष्ट के अपघटन से बनती है।

→ खाद पौधों और पशुओं के अपशिष्ट से तैयार की जाती है। उर्वरक एक रासायनिक मिश्रण है जिसमें पोटाशियम, नाइट्रोजन और फास्फोरस भरपूर उचित मात्रा में होते हैं। खाद और उर्वरक मिट्टी में पोषक तत्त्वों की पूर्ति करते हैं।

→ फसल के साथ उगने वाले अवांछित पौधे, खरपतवार कहलाते हैं। इन्हें खरपतवारनाशी छिड़क कर दूर किया जाता है।

→ कीट फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इन पर कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है।

→ ऋतुओं के आधार पर फसलों के दो वर्ग हैं

  1. रबी (Rabi) और
  2. खरीफ (Kharif) ।

→ कटाई करते समय फसल को निकाला जाता है या काटा जाता है।

→ दानों को भूसे से अलग करने की विधि को थ्रेशिंग कहते हैं। फटकने (Winnowing) से दाने भूसे से अलग हो जाते हैं।

→ मिश्रित कृषि में दो या तीन फसलें एक ही खेत में इकट्ठी उगाई जाती हैं।

→ गाय, भैंस, पोल्टरी पक्षी और मछली का पालन माँस, अंडे और दूध जैसे खाद्य पदार्थों की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

→ पालतू पशुओं को उचित भोजन, आवास एवं देखभाल की आवश्यकता होती है।

→ कटाई ऋतु के साथ कुछ विशेष पर्व जैसे पोंगल, वैसाखी, होली, दीवाली, नबान्या और बीहू जुड़े हुए हैं।

→ कृषि पद्धतियां (Agricultural Practices)- फसल उगाने के लिए किसान द्वारा सामयिक अवधि में अपनाए कई क्रिया-कलापों को कृषि पद्धतियां कहते हैं।

→ मिट्टी की तैयारी (Preparation of Soil)-फसल उगाने से पहले मिट्टी को पलटना, पोला बनाना और समतल करना पड़ता है। इसे जुताई कहते हैं।

→ बुआई (Sowing)-मिट्टी में बीज बोने की विधि को बुआई कहते हैं।

→ खाद और उर्वरक (Manures and Fertilizers)-वे कार्बनिक और रासायनिक पदार्थ जो फसल की अच्छी वृद्धि के लिए पोषकों के रूप में मिट्टी में मिलाए जाते हैं, खाद और उर्वरक कहलाते हैं।

→ सिंचाई (Irrigation)-पौधों की वृद्धि के लिए समय-समय पर पानी देने की विधि, सिंचाई कहलाती है।

PSEB 8th Class Science Notes Chapter 1 फसल उत्पादन एवं प्रबंध

→ कटाई (Harvesting)-पकने पर फसल काटने की विधि कटाई कहलाती है।

→ भंडारण (Storage)- फसल के दानों का बड़े-बड़े भंडार गृहों में भंडारण किया जाता है।

→ निराई (Weeding)-खरपतवार को खेत से बाहर निकालने की विधि निराई कहलाती है।

→ पशुपालन (Animal Husbandry)- पशुओं के उचित भोजन, आवास और देखभाल को पशुपालन कहते हैं।

→ साइलो (Silos)-बीजों का बड़े पैमाने पर भंडारण करने के लिए प्रयुक्त होने वाले बड़े पात्र, साइलो कहलाते हैं।

→ भंडार गृह (Granaries)-बड़े-बड़े खुले कमरे जहां अनाज के दानों को बड़े पैमाने पर सुरक्षित संभाल कर रखा जाता है।

→ थ्रेशिंग (Threshing)- भूसे से अनाज के दानों को पृथक् करने की विधि को थ्रेशिंग कहते हैं।

→ खरपतवार (Weeds)- अवांछित पौधे जो खेतों में अपने आप उग आते हैं, खरपतवार कहलाते हैं।

→ खरपतवारनाशी(Weedicides)-वे रसायन जो खरपतवारों को नष्ट करते हैं, खरपतवारनाशी कहलाते हैं।

PSEB 7th Class Science Notes Chapter 18 अपशिष्ट जल की कहानी

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PSEB 7th Class Science Notes Chapter 18 अपशिष्ट जल की कहानी

→ मल प्रवाह (वाहित मल) अपशिष्ट जल है जिसमें घुली हुई तथा लटकती ठोस अशुद्धियाँ मौजूद होती हैं, जिन्हें प्रदूषक कहते हैं।

→ धरती के नीचे बिछी हुई पाइपों का जाल जो घर से व्यर्थ पानी के निपटारे वाली स्थान तक पहुँचती है, को विसर्जन प्रणाली कहते हैं।

→ मल प्रवाह/वाहित मल को बन्द पाइपों के द्वारा अपशिष्ट जल-शोधक प्रणाली तक लाया जाता है जहाँ इसमें से दूषकों को अलग करके शोध लिया जाता है तथा फिर नदियों, समुद्रों में बहा दिया जाता है।

→ अपशिष्ट जल शोध दौरान उपस्थित दूषकों को भौतिक, रासायनिक तथा जैविक विधियों के द्वारा अलग किया जाता है।

→ गार वह ठोस पदार्थ है जो जल शुद्धिकरण के दौरान नीचे बैठ जाता है।

→ अपशिष्ट जल शोध के सह-उत्पाद, आपंक (गार) और बायोगैस हैं।

→ मैनहोल ढक्कन से ढका हुआ वह स्थान होता है जिस रास्ते से व्यक्ति अन्दर जाकर वाहित मल/मल प्रवाह प्रणाली चैक कर सकता है।

→ खुला मल प्रवाह मक्खियों, मच्छरों तथा अन्य कीटों का प्रजनन-स्थल होता है। जो कई बीमारियां पैदा करते है।

PSEB 7th Class Science Notes Chapter 18 अपशिष्ट जल की कहानी

→ तेल, घी, ग्रीस आदि को ड्रेन या खुले में न फेंके। ऐसा करने से ड्रेन बन्द (चोक) हो जाएगा।

→ कूड़े को केवल कूड़ेदान में ही फेंकें।

→ प्रदूषक : गन्दे जल में घुली हुईं तथा लटकती हुई अशुद्धियों (निलंबित अपद्रव्य) को प्रदूषक कहते हैं।

→ सीवर : छोटे तथा बड़े पाइपों के जाल जो अपशिष्ट जल को निकासी के स्थान तक लेकर जाता है।

→ मेनहोल : विसर्जन प्रणाली के हर 50-60 मीटर की दूरी पर जहाँ दिशा बदलती है वहाँ खले मुँह वाले बड़े सुराख बनाए जाते हैं। जिनके अन्दर दाखिल होकर व्यक्ति जल मल निकासी समस्या की जाँच कर सके।

→ जल शोधक प्रणाली : ऐसी जगह अथवा स्थान जहाँ अपशिष्ट जल में से अशुद्धियों को अलग किया जाता है।

→ जल शोधन : अपशिष्ट जल में से अशुद्धियों को अलग करने की प्रक्रिया को जल साफ़ करना या जल शोधन या उपचार कहते हैं।

→ आपंक अथवा गार : जल शुद्धिकरण टैंक में बैठ गया ठोस पदार्थ ही आपंक अथवा गार है।

→ सैप्टिक टैंक : यह मल-प्रवाह शोध की ऐसी छोटी-सी प्रणाली होती है जिसमें ऑक्सीजन रहित जीवाणु होते हैं जो अपशिष्ट पदार्थों को अपघटित करते हैं। इसका मुख्य मल विसर्जन पाइपों से कोई सम्बन्ध नहीं होता।