PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

Punjab State Board PSEB 9th Class Home Science Book Solutions Chapter 5 घर का सामान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Home Science Chapter 5 घर का सामान

PSEB 9th Class Home Science Guide घर का सामान Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
किसी भी उपकरण को खरीदते समय पारिवारिक बजट को ध्यान में रखना क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
कोई उपकरण खरीदने से पहले यह देख लेना चाहिए कि क्या परिवार का बजट इतना है कि इसे खरीदा जा सके। यदि गृहिणी के पास समय तथा शक्ति हो तो उसको कम खर्च वाले उपकरण खरीद लेने चाहिएं। यदि आवश्यकता से अधिक खर्च कर लिया जाए तो घर के अन्य कार्य छूट सकते हैं।

प्रश्न 2.
दो ऐसे उपकरणों के नाम लिखो जिनसे समय और शक्ति की बचत हो सके।
उत्तर-
कपड़े धोने वाली मशीन, कुकिंग रेंज, टोस्टर, बिजली की मिक्सी, माइक्रोवेव ओवन आदि।

प्रश्न 3.
घरेलू उपकरणों की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर-
आज के युग में मानवीय उद्देश्य तथा ज़रूरतें बढ़ गई हैं। इसलिए समय तथा शक्ति बचाने के लिए उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उपकरणों की मदद से कम समय में कार्य किया जा सकता है।

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प्रश्न 4.
घर में रैफ्रिजरेटर की ज़रूरत क्यों होती है ?
उत्तर-
यह खाने वाले पदार्थों को ठण्डा रखने के काम आता है। इसमें फल तथा सब्जियां ताज़े रहते हैं। भोजन मिट्टी तथा धूल से बचा रहता है तथा इसका स्वाद तथा शक्ल ठीक रहती है। सब्जियां तथा फल एक बार लाये जा सकते हैं तथा बार-बार बाज़ार नहीं जाना पड़ता।

प्रश्न 5.
कपड़े धोने वाली मशीनें कौन-कौन सी हो सकती हैं ?
उत्तर-
ये मशीनें दो तरह की हो सकती हैं (i) ऑटोमैटिक (ii) नॉन-आटोमौटिक। ऑटोमैटिक मशीनें अपने आप कपड़ों को धोती, खंगालती तथा निचोड़ती हैं। नॉनऑटोमैटिक मशीनें केवल कपड़े धोती हैं।

प्रश्न 6.
कपड़े धोने वाली ऑटोमैटिक मशीन के दो लाभ लिखें ?
उत्तर-
ऑटोमैटिक मशीनें कपड़ों को धोती, खंगालती तथा निचोड़ती हैं। मशीन के प्रयोग से साबुन तथा समय दोनों की बचत होती है तथा मेहनत की भी बचत हो जाती है। अधिक वर्षा वाले इलाकों अथवा जहां कपड़ों को बाहर सुखाने का इन्तजाम नहीं हो सकता वहां ऑटोमैटिक कपड़े धोने वाली मशीन काफ़ी लाभदायक सिद्ध हुई है क्योंकि कपड़े मशीन में ही सूख जाते हैं।

प्रश्न 7.
बिजली की प्रैस घर में क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
मनुष्य का व्यक्तित्व उस द्वारा पहने हुए बढ़िया कपड़ों के कारण बढ़िया तथा बुरे कपड़ों के कारण बुरा लगता है। प्रैस से कपड़ों में से सिलवटें आदि निकल जाती हैं तथा यह पहने हए सन्दर लगते हैं। घर में प्रैस हो तो समय तथा शक्ति बचाई जा सकती
प्रैसें दो तरह की हो सकती हैं-ऑटोमैटिक तथा नॉन-ऑटोमैटिक। ऑटोमैटिक प्रैसें भाप वाली भी हो सकती हैं तथा कइयों में रेग्यूलेटर भी लगा होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 8.
बायोगैस के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
बायोगैस जानवरों के मल-मूत्र से तैयार होती है। बायोगैस में लगभग 60% मीथेन गैस होती है जो ज्वलनशील गैस है। इसको नालियों द्वारा गांवों के घरों में भेजा जाता है। इसका प्रयोग भोजन पकाने में किया जाता है। बायोगैस को सिलिण्डरों में नहीं भरा जा सकता। बचा हुआ मल-मूत्र खाद के रूप में खेतों में प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
टोस्टर किस काम आता है और यह कैसा होता है ?
उत्तर-
टोस्टर-टोस्टर डबलरोटी के टुकड़ों को सीधे सेक से सेंकने तथा कुरकुरा करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग साधारणत: प्रत्येक घर में किया जाता है। यह तीन तरह के होते हैं- (i) ऑटोमैटिक (ii) नॉन-ऑटोमोटिक (iii) सेमी-ऑटोमैटिक।
ऑटोमैटिक टोस्टर में ताप कण्ट्रोल, समय सूचक के रंग सूचक यन्त्र लगे होते हैं । यह भी तीन तरह के होते हैं-कुएं के आकार के-इसमें डबलरोटी तथा स्लाइस डाले जाते हैं। जब यह सेंके जाते हैं तो अपने आप बाहर आ जाते हैं। इसमें डबलरोटी के बुरादे के लिए ट्रे भी लगी होती है। भट्ठी के आकार वाले टोस्टर में बन्द तथा रोल भी गर्म किए जाते हैं। इसमें बाहर निकालने के लिए ट्रे की भी व्यवस्था होती है। तीसरा कुएं तथा भट्ठी के मिश्रण वाले टोस्टर में डबल रोटी, केक, रोल्स सेंकने के लिए कम तापमान वाला भाग बना होता है।

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प्रश्न 10.
मिक्सी आजकल हर घर में ज़रूरी समझी जाती है। क्यों ?
उत्तर-
इस उपकरण में गीले तथा सूखे भोजन पदार्थ पीसे जाते हैं । हाथ से कूटने तथा पीसने से समय तथा शक्ति दोनों ही अधिक लगते हैं। परन्तु मिक्सी में कूटने पीसने अथवा पीठी बनाना आदि के लिए प्रयोग करने से गृहिणी की शक्ति तथा समय दोनों की ही बचत हो जाती है। इसलिए समय तथा शक्ति बचाने के लिए मिक्सी आजकल हर घर में आवश्यक हो गई है।

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प्रश्न 11.
यदि बिजली की मिक्सी घर में न हो तो उसके स्थान पर किस उपकरण का प्रयोग किया जाता हैं और कैसे ?
उत्तर-
यदि घर में बिजली की मिक्सी न हो तो हाथ से चलाने वाले ग्राइंडर का प्रयोग किया जाता है। इससे मसाला आदि पीसने का कार्य किया जाता है। यह लोहे का बना हुआ होता है। इसको एक पेंच की मदद से फिट किया जाता है। मसाला डालने के लिए इसके ऊपर एक मुंह सा बना होता है। इस में गीला अथवा सूखा मसाला डालकर इसको हत्थी से घुमाया जाता है। पीसा हुआ मसाला आगे नाली के रास्ते से बाहर आ जाता है। हाथ से चलाने वाली इस तरह की ही कीमा बनाने तथा जूस निकालने वाली मशीनें भी मिल जाती हैं।

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प्रश्न 12.
प्रैशर कुक्कर के क्या लाभ हैं और यह किस धातु का बना हुआ होता है ?
उत्तर-
प्रैशर कुक्कर में खाना शीघ्र पक जाता है विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में तो इसका काफ़ी महत्त्व है। क्योंकि इससे भाप बाहर नहीं निकलती, खाने के पौष्टिक तत्त्व खराब नहीं होते। खाना एक पतीले से 1/3 समय में पक जाता है। इससे मेहनत, समय तथा पैसे की भी बचत होती है। सब्जियों का स्वाद तथा रंग भी ठीक रहता है।
प्रैशर कुक्कर एल्यूमीनियम, प्रैस्ड एल्यूमीनियम अथवा स्टेनलेस स्टील का बना हो सकता है।

प्रश्न 13.
गैस के चूल्हे के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
गैस का चूल्हा—गैस से खाना बनाने का काम आसान तथा सफ़ाई से होता है। क्योंकि गैस से बर्तन काले नहीं होते। गैस के चूल्हे एक, दो तथा तीन बर्नरों वाले भी मिलते हैं। गैसे के चूल्हे को रबड़ की नाली से सिलिण्डर से जोड़ा जाता है। बर्नरों के आगे रेग्यूलेटर लगे होते हैं जो सेक को अधिक, कम करने तथा चूल्हा वाल्व बन्द करने का कार्य करते हैं। सिलिण्डर पर भी रेग्यूलेटर लगा होता है जो सिलिण्डर से गैस को चूल्हे तक पहुँचाता है।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (4)

कुकिंग रेंज-कुकिंग रेंज से भोजन पकाने के लिए बहुत कम समय लगता है। इसमें बेकिंग तथा ग्रिलिंग भी की जाती है। कुकिंग रेंज गैस से चलने वाले तथा बिजली से चलने वाले भी होते हैं। इसकी बॉडी स्टील की अथवा लोहे की बनी होती है। इसके ऊपर चार चूल्हे होते हैं, उसके नीचे ग्रिल, फिर ओवन होता है। गैस पावर प्लग में लगाई जाती है तथा बिजली वाले की तार पावर प्लग में लगाई जाती है। कई कुकिंग रेंज में ओवन के नीचे एक और डिब्बा बना होता है जिसमें भोजन पकाकर रख दो तो काफ़ी समय गर्म रहता है। इसके सामने वाली तरफ चूल्हों के नीचे रेग्यूलेटर लगे होते हैं जो तापमान को कण्ट्रोल करते हैं।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (5)

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प्रश्न 14.
अन्य ईंधनों की अपेक्षा सौर कुक्कर कैसे लाभदायक है?
उत्तर-
सौर कुक्कर सूर्य की ऊर्जा से कार्य करता है। सूर्य की किरणें सौर कुक्कर के पैराबोलिक परावर्तक यन्त्र की सतह पर पड़ती हैं तथा ताप ऊर्जा पैदा करती हैं। इस ऊर्जा का प्रयोग भोजन पकाने में होता है।

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सौर कुक्कर निम्नलिखित कारणों से लाभदायक हैं –

  1. भारत एक गर्म देश है। यहां सारा वर्ष सूर्य की रोश नी तथा गर्मी उपलब्ध रहती है। सोलर कुक्कर क्योंकि सूर्य की किरणों से ऊर्जा प्राप्त करता है इसलिए यहां यह कुक्कर बहुत कामयाब है। इस तरह सौर कुक्कर ऊर्जा पैदा करने का एक सस्ता साधन है।
  2. सौर कुक्कर में खाना पकाने को 3 से 7 घण्टे का समय लगता है।
  3. सौर कुक्कर में खाना पकाने से कोई भी बाई-प्रोडक्ट नहीं पैदा होता। इसलिए वातावरण में प्रदूषण पैदा नहीं करता।

प्रश्न 15.
ओवन किस काम आता है?
उत्तर-
विद्युत् ओवन-यह गोल आकार का अथवा चौकोर डिब्बे के आकार का यन्त्र होता है। यह केक, बिस्कुट, डबलरोटी, पीज़ा, तथा सब्जियां आदि बेक करने के काम आता है। गोल ओवन साधारणतः एल्यूमीनियम का बना होता है तथा चौकोर किसी जंग रहित धातु अथवा एल्यूमीनियम का होता है। इसके दो भाग होते हैं – तल तथा ढक्कन। निचले भाग में एलीमेन्ट लगा होता है। इस गोल चैम्बर के बाहर की ओर एक स्थान पर नियन्त्रण बॉक्स लगा होता है जिस पर थर्मोस्टेट, इण्डीकेटर तथा एक सॉकेट लगी होती है। थर्मोस्टेट से जितना तापमान चाहिए, कर लिया जाता है। जब ओवन इच्छित तापमान पर पहुंच जाता है तो विद्युत् प्रवाह आरभ हो जाता है। यह सिस्टम ऑटोमैटिक ओवन में ही होता है। बाजार में रेग्यूलेटर के बिना भी ओवन मिलते हैं परन्तु यह कम लाभदायक होते हैं। इनमें तापमान बहुत बढ़ने से भोजन जल जाता है।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (7)

बेकिंग करते समय इसका ढक्कन निचले भाग पर फिट किया जाता है। ढक्कन के दोनों तरफ प्लास्टिक के हैण्डल लगे होते हैं। जिससे ढक्कन को उतारना तथा चढ़ाना आसान होता है। ढक्कन के ऊपरी तरफ बीच में कांच की खिड़की बनी होती है यहां से भोजन की स्थिति का अन्दाज़ा लगाया जा सकता है। कांच के आस-पास दो छिद्र होते हैं जिसमें कोई सूई अथवा सिलाई डालकर भोजन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। ओवन के साथ एक गोल बर्तन तथा एक प्लेट (Base Plate) मिलती है। कोई भोजन बनाते समय यह प्लेट नीचे रखकर ऊपर गोल भोजन वाला बर्तन रखा जाता है, यह प्लेट एक सहारे का काम करती है।

प्रश्न 16.
माइक्रो ओवन किस काम आता है ?
उत्तर-
यह बिजली से चलने वाला भोजन पकाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला उपकरण है। सूक्ष्म-तरंग अथवा माइक्रोवेव में विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें पैदा करने के लिए एक चुम्बकीय यन्त्र मेग्नेट्रॉन लगा होता है। भोजन इन सूक्ष्म तरंगों को चूस लेता है जिससे भोजन अणु 24500 लाख प्रति सैकिण्ड की गति से कांपते हैं। इस तरह भोजन के अणु आपस में इतनी तेज़ी से रगड़ खाते हैं तथा इस तरह बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है तथा मिनटों में ही भोजन पक कर तैयार हो जाता है। माइक्रोवेव में भोजन अपने में पाई जाने वाली नमी के अनुसार ही भोजन पकने के दौरान पैदा हुई विद्युत् चुम्बकीय ऊर्जा को सोखता है। इस तरह भोजन को एक सार पकाने में मुश्किल आती है।

प्रश्न 17.
स्टोव कितनी प्रकार के हो सकते हैं और कौन-कौन से ?
उत्तर-
स्टोव मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव दो तरह के होते हैं-हवा भरने वाले तथा बत्तियों वाले।PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान (8)

बत्तियों वाला स्टोव बत्तियों वाले स्टोव की टंकी में जब तेल डाला जाता है तो बत्तियां तेल चूस कर जलती हैं तथा पम्प वाले स्टोव में टंकी में तेल भरने के पश्चात् इसका तेल वाला मुंह अच्छी तरह बन्द करके हवा भरने से तेल बर्नर पर आ जाता है, फिर आग से इसको जलाया जाता है।

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प्रश्न 18.
रसोई के बर्तन कौन-कौन सी धातुओं से बने होते हैं ?
उत्तर-
रसोई के बर्तन पीतल, तांबा, एल्यूमीनियम तथा नॉन स्टिक, चांदी, लोहा तथा स्टील आदि धातुओं तथा मिश्रित धातुओं के बने होते हैं। आजकल स्टेनलेस स्टील से बने हुए बर्तन काफ़ी प्रचलित हैं। इसका कारण है कि यह एक चमकीली धातु होने के कारण इसको बार-बार पॉलिश करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इस पर तेज़ाब तथा क्षार का प्रभाव भी नहीं होता तथा इसको जंग भी नहीं लगता।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 19.
घर के सामान का चयन करते समय किन बातों को ध्यान में रखोगे ?
उत्तर-
घर के सामान के चुनाव के समय निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिएं –
(i) कीमत, (ii) डिज़ाइन, (iii) स्तर, (iv) सम्भाल तथा रख-रखाव, (v) उपयोगिता, सेवा सुविधाएं तथा गारण्टी।
(i) कीमत-कोई भी उपकरण खरीदते समय उसकी उपयोगिता के साथ-साथ उसकी कीमत को भी ध्यान में रखना बहुत ज़रूरी है। उदाहरणत: यदि मिक्सी की खरीद करनी है तो यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि वह काटने, पीसने, जूस निकालने तथा आटा गूंथना आदि सभी काम करती हो न कि विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न मशीनों को खरीदना पड़े। इसलिए ऐसी स्थिति में फूड प्रोसैसर ही ठीक रहता है। दूसरी बात यह आवश्यक नहीं कि महंगे उपकरण ही अच्छे होते हैं। कई बार स्थानिक (local) अच्छी कम्पनियां भी अपनी मशहरी के लिए कम कीमत रखती हैं। इसलिए विभिन्न स्थानों से कीमत की तुलना करनी बहुत आवश्यक है।

(ii) डिज़ाइन किसी भी उपकरण की खरीददारी के समय उसका डिज़ाइन एक महत्त्वपूर्ण विषय है। डिज़ाइन उपकरण के आकार, भार, सन्तुलन तथा पकड़ने की सुविधाओं आदि से सम्बन्धित है। उपकरण का आकार परिवार के सदस्यों की संख्या पर निर्भर करता है। डिज़ाइन हमेशा साधारण होना चाहिए ताकि साफ़ सफ़ाई करना आसान हो। भार तथा सन्तुलन ठीक होना चाहिए ताकि उपकरण को चलाते समय वह ठीक से टिका रहे। यदि उपकरण हिलता-जुलता होगा, भार सन्तुलन ठीक नहीं होगा तो उपकरण के गिरने का खतरा रहता है। उपकरण को पकड़ने के लिए कोई हैण्डल अथवा ऐसी जगह बनी हो जहां से आसानी से तथा पूरी जकड़ से पकड़ा जा सके।

(iii) स्तर–उपकरणों की खरीद हमेशा विश्वसनीय, बढ़िया तथा स्टैंडर्ड अर्थात् राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों से करनी चाहिए जैसे कि विद्वान् कहते हैं कि “महंगा रोए एक बार, सस्ता रोए बार-बार” अर्थात् बहुत बार हम कीमत कम होने के कारण वस्तु खरीद लेते हैं जो कि थोड़े समय में ही खराब हो जाती है जबकि महंगी तथा विश्वसनीय कम्पनी की चीज़ बढ़िया तथा टिकाऊ होती है।
यह समान खरीदते समय आई० एस० आई० (ISI) के मार्के का भी ध्यान रखना चाहिए। जिन कम्पनियों की वस्तुएं आई० एस० आई० (Indian Standard Institute) द्वारा प्रमाणित हों वही खरीदनी चाहिए।

(iv) सम्भाल तथा रख-रखाव-बर्तनों अथवा उपकरणों को खरीदते समय उनकी सम्भाल तथा रख-रखाव का भी बहुत महत्त्व है। यदि खरीदे गए बर्तन अथवा उपकरण की सम्भाल अधिक है तो वह गृहिणी के कार्य को आसान करने की बजाए और भी बढ़ा देता है। जैसे कि पीतल के बर्तनों की सम्भाल, स्टील के बर्तनों से अधिक है। इस तरह है बजाए कि पूरे उपकरण की सफ़ाई के। इसलिए अलग-अलग होने वाले पुों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

(v) उपयोगिता—किसी वस्तु की खरीद के समय परिवार तथा परिवार के सदस्यों के लिए उसकी उपयोगिता का ध्यान रखना चाहिए। किसी उपकरण को सामाजिक स्तर की निशानी के रूप में नहीं खरीदना चाहिए अपितु परिवार तथा गृहिणी के लिए उसकी महत्ता तथा उपयोगिता को ध्यान में रखकर ही खरीददारी करनी चाहिए। वस्तुओं के प्रयोग का सही ढंग, प्रयोग के लिए दी सावधानियां इनकी उपयोगिता को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। बिजली अथवा गैस से चलने वाले उपकरणों को बिजली तथा गैस की उपलब्धि को ध्यान में रखकर ही प्रयोग करना चाहिए।

(vi) सेवा सुविधाएं तथा गारण्टी-बहुत सारे उपकरणों में प्रयोग करते-करते कोईन-कोई खराबी पड़ जाती है जिससे उसके पुर्जे तथा विशेषज्ञ मकैनिकों की आवश्यकता होती है। कई स्टैण्डर्ड की कम्पनियां ये सुविधाएं बढ़िया प्रदान करती हैं, इसलिए जो कम्पनी ये सुविधाएं प्रदान कर सके उनके उपकरणों को खरीदने को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसी मरम्मत की सुविधा तथा पुर्जे न मिलने से उपकरण व्यर्थ हो जाता है। इसी तरह खरीददारी दौरान उपकरण का गारण्टी का समय तथा गारण्टी समय में किस-किस तरह की सुविधा मिल सकती है, इस बारे जानकारी भी लेना बहुत आवश्यक है। बहुतसी कम्पनियां गारण्टी समय में मुफ्त मरम्मत करती हैं तथा कई परिस्थितियों में उपकरण को बदल भी देते हैं।

प्रश्न 20.
रेफ्रिजरेटर और कपड़े धोने वाली मशीन के क्या-क्या कार्य हैं ?
उत्तर-
फ्रिज के कार्य-फ्रिज का प्रयोग खाने वाली वस्तुओं को ठण्डा करके स्टोर करने के लिए किया जाता है। इसमें कुछ दिनों के लिए सब्जियां तथा फल स्टोर किए जा सकते हैं, इस तरह बार-बार बाज़ार जाकर समय नष्ट नहीं होता। अन्य भी खाने वाली वस्तुएं इसमें रखी जा सकती हैं।
फ्रिज की सफ़ाई तथा देखभाल

  1. हर महीने फ्रिज की पूरी सफ़ाई करनी चाहिए। सफ़ाई करने के लिए सबसे पहले इसका विद्युत् स्विच बन्द करके तार निकाल लेनी चाहिए। फिर सभी शैल्फों, चिल ट्रे, किस्प ट्रे तथा उससे ऊपर वाला कांच आदि बाहर निकाल लेने चाहिएं। कैबिनेट का आन्तरिक हिस्सा तथा दरवाज़े की गास्टक रबड़ की लाइनिंग को साबुन वाले गर्म पानी से साफ़ करो। इसके पश्चात् इस को अच्छी तरह धोकर सुखाओ तथा कपड़े से पोंछ दें। कैबिनेट के बाहरी हिस्से को बड़े ध्यान से सोडे के गुनगुने घोल (एक बड़ा चम्मच सोडा एक लिटर पानी में ) साफ़ करो तथा धोकर सुखा दो। इसके पश्चात् इसको नर्म सूखे कपड़े से रगड़ कर चमकाया जा सकता है। इस सारी सफ़ाई को डीफ्रास्टिंग के समय करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। फ्रिज की मोटर से धूल मिट्टी उतारने के लिए लम्बे हैण्डल वाला ब्रुश प्रयोग करना चाहिए।
  2. भोजन को ठीक तापमान वाले खाने में ही रखना चाहिए जैसे कि मीट तथा मछली को पॉलीथीन के लिफ़ाफों में अच्छी तरह बन्द करके फ्रीज़र में रखना चाहिए। मक्खन तथा अण्डे आदि दरवाज़े में बनी जगह पर रखने चाहिएं।
  3. भोजन पदार्थों को ढक कर रखना चाहिए।
  4. फ्रिज को कभी भी बहुत ज्यादा न भरो क्योंकि इससे चैम्बर में हवा का प्रवाह ठीक तरह नहीं होता।
  5. दरवाज़े को बार-बार नहीं खोलना चाहिए।
  6. फ्रिज के इर्द-गिर्द हवा के प्रवाह के लिए कम-से-कम दीवार से 20 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। परन्तु आजकल ऐसे फ्रिज आ रहे हैं जिनके लिए बहुत थोड़ी दूरी (10 सें० मी०) भी रखी जा सकती है।
  7. बर्फ को कभी भी चाकू अथवा किसी तेज़ धार वाली चीज़ से नहीं खरोंचना चाहिए।
  8. फ्रिज को कभी भी ऐसे स्थान पर नहीं रखना चाहिए जहां सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हों।
  9. फ्रिज को हमेशा समतल फ़र्श पर रखना चाहिए नहीं तो कण्डैन्सर की मोटर ठीक तरह से कार्य नहीं करेगी तथा दरवाज़ा ठीक तरह से बन्द नहीं हो सकेगा।
  10. थर्मोस्टेट के डायल को इस स्थिति में रखना चाहिए कि जहां फ्रीज़र लगभग 18°C तापमान बनाए रखे।

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कपड़े धोने वाली मशीन-यह भी बिजली से चलने वाला उपकरण है। इसमें कपड़े धोने, खंगालने तथा निचोड़ने जैसे सभी कार्य हो जाते हैं।
सफ़ाई तथा देखभाल –

  1. मशीन खरीदते समय इसके साथ एक छोटी-सी किताब मिलती है जिसमें इसका प्रयोग तथा सम्भाल बारे आवश्यक निर्देश दिए होते हैं। इस किताब को अच्छी तरह पढ़कर मशीन का प्रयोग करना चाहिए।
  2. मशीन में कभी भी मशीन की क्षमता से अधिक कपड़े नहीं डालने चाहिएं।
  3. धुलाई समाप्त होते ही ‘वाश-टब’ तथा कपड़े सुखाने वाले टब को खाली कर देना चाहिए। फिर वाश टब में साफ़ पानी डालकर तथा मशीन चलाकर इसको अच्छी तरह धोकर रखना चाहिए। महीने में एक बार विलोडक को बाहर निकालकर साफ़ करके सुखाकर अगली बार प्रयोग के लिए अलग करके रख लेना चाहिए।
  4. कभी भी टब को साफ़ करने के लिए कोई सख्त ब्रुश अथवा डिटरजेंट न प्रयोग करें। टब की सफ़ाई के लिए कभी-कभी सिरके के घोल में कपड़ा भिगोकर साफ़ किया जाता है।
  5. मशीन का ढक्कन थोड़ा सा खुला रहने दें ताकि मशीन में से गन्दी बदबू न आए।
  6. पानी निकालने वाली नाली को नीचे करके सारे पानी को निकाल देना चाहिए नहीं तो धीरे-धीरे यह रबड़ की नाली खराब हो जाएगी।
  7. टब में पानी हमेशा टब में बने निशान तक ही डालना चाहिए।
  8. यदि कभी आवश्यकता हो तो मशीन की मरम्मत हमेशा किसी विश्वासपात्र दुकानदार से ही करवानी चाहिए।

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प्रश्न 21.
रसोई में काम आने वाले बिजली के दो उपकरणों के कार्य और देखभाल के बारे में बताओ।
उत्तर-
रसोई में काम आने वाले बिजली के यन्त्रों में मिक्सी तथा फ्रिज आते हैं। मिक्सी के कार्य-इस उपकरण में गीले तथा सूखे भोजन पदार्थ पीसे जाते हैं। इसमें कूटने, पीसने अथवा पीठी बनाना आदि कार्य किये जाते हैं। इससे समय तथा शक्ति की बचत हो जाती है।
सफ़ाई तथा देखभाल –

  1. चलती हुई मोटर पर कभी भी मिक्सी को उतारने अथवा लगाने की कोशिश न करें।
  2. जग को बहुत ज्यादा नहीं भरना चाहिए तथा कम-से-कम इतना पदार्थ अवश्य हो कि ब्लेड पदार्थ में डूबे हों।
  3. तैयार चीज़ को जग से निकालने से पहले स्विच बन्द कर देना चाहिए तथा सामान हमेशा लकड़ी की चम्मच अथवा स्पेचूला से ही निकालना चाहिए।
  4. इसको साफ़ करने के लिए गीले कपड़े से साफ़ करके फिर सूखे कपड़े से पोंछ दो। जग तथा ब्लेड को साबुन तथा गुनगुने पानी के घोल से साफ़ करके पानी से धो लें। फिर सूखे कपड़े से सुखा कर रखो।
  5. मोटर को लगातार अधिक समय के लिए न चलाएं नहीं तो गर्म होकर मोटर सड़ सकती है।
  6. सुरक्षा के तौर पर हमेशा पहले प्लग को स्विच में से निकाल देना चाहिए तथा उसके पश्चात् जग को मोटर से अलग करना चाहिए।
    नोट-फ्रिज के कार्य तथा देखभाल के लिए देखो प्रश्न नं० 20।

प्रश्न 22.
रसोई में बिजली के बिना चलने वाले दो उपकरणों के कार्य और देखभाल के बारे में बताओ।
उत्तर-
प्रैशर कुक्कर तथा गैस का चूल्हा बिजली के बगैर चलने वाले उपकरण हैं।
प्रैशर कुक्कर का कार्य-प्रैशर कुक्कर खाना पकाने के काम आता है तथा इसमें खाना जल्दी पक जाता है। इससे खाने के पौष्टिक तत्त्व भी खराब नहीं होते।
प्रैशर कुक्कर सफ़ाई तथा देखभाल –

  1. कुक्कर को प्रयोग से पहले उसकी भाप नली साफ़ कर लेनी चाहिए।
  2. प्रयोग से पहले इसका सेफ्टी वाल्व चैक कर लेना चाहिए।
  3. कुक्कर को कभी भी पूरा ऊपर तक नहीं भरना चाहिए, केवल दो तिहाई हिस्सा ही भरना चाहिए।
  4. कुक्कर को बहुत समय तक आग पर नहीं रखना चाहिए।
  5. इसमें कोई भी भोजन पानी के बिना नहीं डालना चाहिए।
  6. कुक्कर को साफ़ करने के पश्चात् ढक्कन खोलकर रखना चाहिए।
  7. समय-समय पर इसकी रबड़ चैक करते रहना चाहिए।
  8. कुक्कर को कभी भी सोडे से साफ़ नहीं करना चाहिए।
  9. कुक्कर के ढक्कन को न तो आग पर ले जाना चाहिए तथा न ही आग के नज़दीक।

गैस चूल्हे का कार्य-इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें सेक को अधिक, कम करने के लिए रेग्यूलेटर लगे होते हैं।
गैस चूल्हे की देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. हमेशा गैस खोलने से पहले माचिस जलानी चाहिए।
  2. इसकी लौ बर्तन से बाहर नहीं होनी चाहिए।
  3. जब काम हो जाए तो पहले सिलिण्डर से गैस बन्द करो तथा फिर चूल्हे के स्विच से। इस तरह करने से पाइप की गैस प्रयोग हो जाती है।
  4. रबड़ की नाली को समय-समय पर चैक करते रहना चाहिए नहीं तो गैस लीक होने का डर रहता है।
  5. गैस सिलिण्डर को आग वाले बर्तनों पर नहीं रखना चाहिए नहीं तो आग लगने का डर रहता है।
  6. प्रयोग के पश्चात् गैस स्टोव को अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  7. बर्तनों को साफ़ करने के लिए कभी-कभी सोडे के पानी में उबाल लेना चाहिए।

प्रश्न 23.
आजकल गैस के चूल्हे का प्रयोग क्यों बढ़ रहा है ? यह कैसा होता है और इसकी देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
गैस का चूल्हा खाना पकाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक साफ़सुथरा तथा आसान साधन है। इसको जलाना तथा बुझाना बहुत ही असान होता है। इससे बर्तन भी काले नहीं होते। इसलिए इसका प्रयोग बढ़ रहा है।
शेष उत्तर के लिए देखें प्रश्न 13 तथा 22।

प्रश्न 24.
नॉन स्टिक बर्तन कैसे होते हैं ? किस काम आते हैं और इनकी देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
नॉन स्टिक बर्तन एल्यूमीनियम के होते हैं जिनके अन्दर टेफ्लोन की परत चढी होती है। इनमें खाने वाली चीज़ चिपकती नहीं इसलिए घी का प्रयोग बहुत कम मात्रा में करके चीज़ों को पकाया जा सकता है। इसमें खाने को हिलाने के लिए धातु का चम्मच अथवा कांटे के स्थान पर लकड़ी का चम्मच प्रयोग किया जाता है ताकि टेफ्लोन की परत उतर न जाए। फ्राइपैन आदि के हैण्डल लकड़ी अथवा एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक के होते हैं जोकि गर्म नहीं होते। हैण्डल की लम्बाई इस तरह होती है कि उसके भार से पैन उलट न जाए।
सम्भाल –

  1. गर्म बर्तन में पानी नहीं डालना चाहिए, इस तरह करने से धातु खराब हो जाती है।
  2. इस बर्तन में स्टील के चम्मच, कड़छी अथवा कांटे का प्रयोग न करके लकड़ी के चम्मच का प्रयोग करो।
  3. कोई खाने की चीज़ पैन में सड़ गई हो तो पैन में पानी तथा सोडा डालकर धीरे-धीरे गर्म करना चाहिए ताकि जला हुआ खाना जल्दी तथा बिना खरोंचे उतर जाए। इन बर्तनों को प्लास्टिक के फूंदे से साबुन वाले गुनगुने पानी से साफ़ करना चाहिए। अधिक कठोर फूंदे से इस पर खरोंचें पड़ सकती हैं तथा कोटिंग भी खराब हो सकती है।

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प्रश्न 25.
रसोई के बर्तनों की देखभाल कैसे करोगे ? क्या भिन्न-भिन्न धातुओं के बर्तनों की देखभाल भी अलग-अलग की जाती है ?
उत्तर-
विभिन्न किस्मों की धातुओं की सफ़ाई

बर्तनों की किस्म विशेषताएं सफाई तथा देखभाल विशेष सावधानी सफाई के लिए चीजें
1. स्टेनलेस स्टील स्टील, लोहे तथा कार्बन के मिश्रण से बनता है । यह एक मज़बूत धातु है। इससे भोजन पकाने, परोसने तथा भोजन पदार्थ सम्भालने वाले बर्तन बनते हैं। स्टील के बर्तनों को साफ़ करना आसान होता है। किसी साबुन अथवा डिटर्जेंट तथा गर्म पानी से साफ़ करके, साफ़ पानी में धो लें। साफ़ तथा सूखे कपड़े से पोंछ कर सुखा लो। बर्तन में से जले हुए दाग उतारने के लिए स्टील वूल प्रयोग की जा सकती है। चिकनाई उतारने के लिए अखबार का प्रयोग करना चाहिए। स्टील के बर्तनों को अधिक सेंक नहीं लगाना चाहिए नहीं तो काले निशान पड़ जाते हैं। कुछ मसाले भी स्टील को पीला कर देते हैं। यह दाग कच्चे आलू से उतारे जा सकते है। 1. साबुन तथा डिटर्जेंट

2. रोएं-रहित साफ़ कपड़ा

3. स्टील वूल

4. स्पंज/स्क्रबर

5. कच्चा आलू

2. पीतल यह तांबे तथा जिंक का मिश्रण है। इससे बर्तन तथा सजावट का सामान बनाया जाता है। यह भी एक मजबूत धातु है। पीतल के बर्तनों को विम अथवा राख से साफ़ करके पानी से धोएं, फिर सूखे कपड़े से पोंछ कर सुखाएं। यदि दाग हों तो नींबू का रस अथवा इमली तथा नमक से रगड़ें। सजावट की चीजों के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग किया जा सकता है। खाने वाले बर्तनों की बाहर से सिरका तथा नमक के मिश्रण से पॉलिश की जा सकती है। यह बर्तन के अन्दर प्रयोग नहीं करना चाहिए। सजावट के सामान पर ब्रासो की”पॉलिश प्रयोग की जा सकती है। 1. गर्म पानी, विम, राख तथा सोडा आदि।

2. नींबू, सिरका, इमली तथा नमक आदि।

3. नर्म कपड़ा

4. ब्रासो पॉलिश

3. एल्यूमीनियम यह एक हल्की धातु होती है। इस पर ऑक्सीकरण का कोई प्रभाव नहीं होता। यह धातु हल्की तथा नर्म होती है। गर्म पानी तथा कोई नर्म डिटर्जेंट अथवा साबुन के घोल से साफ़ करना चाहिए। तेल तथा डिटर्जेंट इसका रंग खराब कर देते हैं। भोजन के सड़ने अथवा दागों को उतारने के लिए गर्म पानी में भिगो कर रख दो, फिर लकड़ी के चम्मच अथवा प्लास्टिक के स्क्रबर से साफ़ करो। लोहे की तारों वाला, स्क्रबर एल्यूमीनियम में लाइनें बना देता है। यदि एल्यूमीनियम का बर्तन काला हो जाये तो कच्चे टमाटर बर्तन में पकाओ अथवा एक गिलास में पानी, 1 चम्मच सिरका डालकर तब तक गर्म करो जब तक कालापन दूर न हो जाये। उस के पश्चात् स्टील वूल तथा साबुन से साफ़ करो। 1. गर्म पानी

2. नर्म साबुन

3. टमाटर, सिरका

4. स्टील वूल

4. लोहा लोहे को यदि पहले गर्म न किया जाए तो ऑक्सीकरण से इस पर जंग लग जाता है। यह धातु भारी तथा कठोर होती है, परन्तु गिरने पर टूट जाती है। गर्म, साबुन वाले पानी में धोना चाहिए, फिर साफ़ पानी में धोकर पोंछ कर सुखा लो अथवा फिर गर्म करके सुखाओ। जले हुए भोजन को उतारने के लिए गर्म पानी में भिगोकर लकड़ी के चम्मच से खरोंचें। जरूरत पड़ने पर बेकिंग पाऊडर छिड़क कर साफ़ किया जा सकता है अथवा फिर छनी हुई रेत से भी रगड़ा जा सकता है। कास्ट आयरन के बर्तनों की सीज़निंग आवश्यक होती है नहीं तो जंग लग जाता है तथा भोजन बर्तन के नीचे लगने लगता है। इसलिए घी अथवा रेत को धीमी आंच पर बर्तन में डालकर काफ़ी देर तक गर्म करो। यह बर्तन कुछ ते” चूस जायेगा। बचा हुआ तेल अथवा घी निकालकर अखबार से पोंछ कर साबुन वाले गर्म पानी से धो लें। लोहे पर किसी प्रकार की पॉलिश की ज़रूरत नहीं। यदि जंग के दाग हों तो मिट्टी के तेल तथा स्टील वूल से साफ़ किए जा सकते हैं। 1. साबुन

2. तारों वाला ब्रुश

3. रेत तथा स्टील वूल

4. बेकिंग सोडा

5. तेल / घी

6. मिट्टी का तेल

5. चांदी यह सफेद रंग की चमकदार धातु होती है। इस पर नमक का हानिकारक प्रभाव होता है। हवा, भोजन तथा धुएं में पाई जाने वाली गन्धक से काले धब्बे पड़ जाते हैं। इस लिए इसकी विशेष देखभाल तथा सम्भाल करनी पड़ती है। इसके गहने, बर्तन तथा सजावट की चीजें बनती हैं। साबुन वाले गर्म पानी में थोड़ा-सा सोडा मिलाकर धोना चाहिए। फिर साफ़ पानी से निकालकर अच्छी तरह पोंछकर सुखाएं। चांदी के बर्तनों में कभी भी बचा हुआ भोजन नहीं रहने देना चाहिए। उसी समय साफ़ कर देना चाहिए। यह बर्तन अधिक समय तक पानी में भी नहीं रहना चाहिए। पोंछ कर सुखाकर टिशू पेपर अथवा फलालेन के कपड़े में लपेट कर रखो। यदि लम्बे समय तक सम्भालना हो तो थोड़ी-सी वैसलीन अथवा तेल मलकर टिशू पेपर में लपेटकर फलालेन की गुथली में रखना चाहिए। पॉलिश लगाने के पश्चात् चीज़ को धीरे से लपेटना चाहिए नहीं तो उस पर उंगलियों के निशान पड़ जाते हैं। पॉलिश करने के लिए सिल्वो का प्रयोग किया जाता है। साफ़ तथा नर्म कपड़े पर लगा कर अच्छी तर चमकाना चाहिए। चांदी की पॉलिश घर में भी बनाई जा सकती है।

सूखी पॉलिश

सामान- सफेदी–8 हिस्से, जौहरी की लाली 1 हिस्सा।

विधि-दोनों चीज़ों को अच्छी तरह मिलाकर एक डिब्बे में डालकर रख लो।तरल पॉलिश सामान-(1) साबुन के टुकड़े 15 ग्राम

(2) जौहरी की लाली-8 हिस्से

(3) मैथिलेटिड स्प्रिट-2 बड़े चम्मच

(4) सफेदी-80 ग्राम

(5) अमोनिया-1 बड़ा चम्मच

(6) उबलता हुआ पानी–250

ग्राम

विधि-साबुन को गर्म पानी में घोल लें तथा ठण्डा होने को रखें। बाकी सारा सूखा सामान एक चौड़े मुंह वाली शीशी में डाल दो, इस पर साबुन का घोल डालो। बाद में अमोनिया तथा स्प्रिट डालकर बोतल का ढक्कन बन्द कर दो। प्रयोग से पहले बोतल को अच्छी तरह हिला लो।

1. साबुन

2. नर्म तथा मुलायम कपड़ा

3. पॉलिश

6. कांच तथा चीनी मिट्टी साधारणतः यह भोजन परोसने वाले बर्तन ही होते हैं पर आजकल कांच के बर्तन ताप निरोधक भी हैं जिनको गैस अथवा ओवन में प्रयोग किया जाता है। गर्म बर्तनों को ठण्डे पानी में नहीं डालना चाहिए। इन बर्तनों को गर्म, साबुन वाले पानी से धोना चाहिए। पानी में थोड़ा-सा बेकिंग सोडा डालने से जमा हुआ भोजन आसानी से उतर जाता है। यदि फ़िर भी बर्तन साफ़ न हों तो लकड़ी का चम्मच अथवा प्लास्टिक का ब्रुश प्रयोग किया जा सकता है। इन बर्तनों को रात भर गन्दे नहीं रहने देना चाहिए। इससे दाल सब्जियों के दाग़ पड़ जाते हैं। साफ़ करके सूखे कपड़े से पोंछ कर सुखा कर रखें। इन बर्तनों के लिए किसी पॉलिश की ज़रूरत नहीं होती। प्रयोग से पहले यदि थोड़ा-सा घी अथवा तेल बर्तन को लगाया जाए तो भोजन नहीं चिपकता। 1. साबुन

2. बेकिंग सोडा

3. नर्म कपड़ा

7. प्लास्टिक प्लास्टिक के बर्तन भोजन परोसने तथा खाद्य पदार्थ सम्भालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। यह बर्तन अधिक ताप सहन नहीं कर सकते, पिघल जाते हैं। धूप में इनका रंग भी खराब हो जाला है। गुनगुने साबुन वाले घोल में स्पंज से साफ़ करने चाहिएं। झरियों आदि में फंसी गन्दगी को साफ़ करने के लिए दांतों वाले ब्रुश का प्रयोग करो। यदि गन्दगी बहुत अधिक जमी है तो मिट्टी के तेल से साफ़ किये जा सकते हैं। धोने के पश्चात् अच्छी तरह सुखा कर पोंछ कर रखो। इन पर किसी पॉलिश की ज़रूरत नहीं। 1. नर्म साबुन

2. मिट्टी का तेल

3. नर्म कपड़ा

प्रश्न 26.
प्रैशर कुक्कर के कार्य और बनावट के बारे में बताओ।
उत्तर-
1. प्रैशर कुक्कर—यह एक बन्द प्रकार का पतीला है, जिसमें बनने वाली भाप का दबाव भोजन को थोड़े समय में पका देता है। इसमें बने भोजन की पौष्टिकता भी बनी रहती है। साथ ही गृहिणी के समय तथा शक्ति का भी बचाव होता है। इस बर्तन को प्रैशर कुक्कर कहा जाता है। यह दबाये अथवा ढाले हुए एल्यूमीनियम अथवा स्टेनलैस स्टील की चादर से बनाये जाते हैं। यह एक गहरे तल वाला बर्तन होता है, जिसकी एक तरफ हैण्डल लगा होता है। इसके ऊपर एक ढक्कन होता है, इस ढक्कन पर दबाव नली वाल्व, वेट तथा सुरक्षित वाल्व लगा होता है। ढक्कन के साथ एक रबड़ का छल्ला होता है, जो इसे अच्छी तरह बन्द करता है। यह साधारणतः दो तरह के होते हैं। पहली किस्म के कुक्कर में एक ढक्कन होता है जो निचले बर्तन (पतीले जैसे) के ऊपरी घेरे के अन्दर सरक जाता है तथा इसका हुक हैण्डल से लगाने के पश्चात् यह कुक्कर की हवा निकलने से रोक देता है (हॉकिन्स तथा यूनाइटिड प्रेशर कुक्कर आदि) दूसरी किस्म के कुक्कर में इसका ढक्कन निचले बर्तन के किनारे से बाहर की ओर लगता है। ढक्कन तथा बर्तन पर बने तीर के निशान ढक्कन बन्द करने तथा खोलने का ढंग बताते हैं। इसमें भी रबड़ का छल्ला एक मज़बूत सील का काम करता है। इसमें पकाने वाले प्रत्येक भोजन के लिए अलग-अलग समय होता है। किसी के लिए दो मिनट, किसी के लिए पांच मिनट आदि। समय पूरा होने पर कुक्कर को आग से उतार लो तथा ठण्डा करने के पश्चात् खोलना चाहिए।

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PSEB 9th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर का सामान

प्रश्न 27.
पीतल और चांदी के सजावटी सामान को कैसे साफ़ और पॉलिश करोगे ?

Home Science Guide for Class 9 PSEB घर का सामान Important Questions and Answers

रिक्त स्थान भरो

  1. कुकिंग रेंज साधारणतः …………………. चूल्हों वाले होते हैं।
  2. ………… डबलरोटी के टुकड़ों को सीधा सेंकने के लिए प्रयोग होता है।
  3. फ्रिज के बर्फ वाले खाने में तापमान …………………. °C होता है।
  4. मिक्सी को ………………. भाग से अधिक न भरें।
  5. सौर कुक्कर में खाना पकाने में …………………. घंटे का समय लगता है।

उत्तर-

  1. चार
  2. टोस्टर
  3. 7
  4. 2/3
  5. 3 से 7।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
गैस सिलेण्डर में कितनी गैस होती है ?
उत्तर-
लगभग 15 कि०ग्रा०।

प्रश्न 2.
स्टेनलेस स्टील की खोज कब की गई ?
उत्तर-
1912 में।

प्रश्न 3.
माइक्रोवेव ओवन में भोजन के अणुओं के कांपने की गति बताएं।
उत्तर-
24500 लाख प्रति सेकंड।

प्रश्न 4.
प्रैशर कुक्कर में पतीले की अपेक्षा कितने समय में खाना पक जाता
उत्तर-
एक तिहाई समय।

प्रश्न 5.
हमें कौन-सी मोहर लगी प्रेस खरीदनी चाहिए ?
उत्तर-
आई०एस०आई० मोहर लगी।

ठीक/ग़लत बताएं

  1. उपकरण खरीदते समय परिवार के बजट की चिन्ता न करें।
  2. फ्रीज़ के बर्फ वाले भाग का तापमान -7°C होता है।
  3. मिक्सी को पूरा भर कर चलाएं।
  4. कुकिंग रेंज प्रायः चार चूल्हों वाले होते हैं।
  5. माइक्रोवेव ओवन में सूक्ष्म तरंगों से गर्मी पैदा होती है।
  6. माइक्रोवेव में भोजन के अणु 24500 लाख प्रति सैकंड की गति से कांपते

उत्तर-

  1. ग़लत
  2. ठीक
  3. ग़लत
  4. ठीक
  5. ठीक
  6. ठीक।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
घर के सामान का चयन कौन-सी बातों को ध्यान में रखकर करोगे ?
(A) कीमत
(B) स्तर
(C) उपयोगिक
(D) सभी।
उत्तर-
(D) सभी।

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प्रश्न 2.
ठीक तथ्य हैं –
(A) माइक्रोवेव बिजली से चलने वाला भोजन पकाने के लिए प्रयोग होने वाला उपकरण है।
(B) मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव दो तरह के होते हैं।
(C) स्टोव की टंकी सदा दो तिहाई ही भरनी चाहिए।
(D) सभी ठीक।
उत्तर-
(D) सभी ठीक।

प्रश्न 3.
माइक्रोवेव में भोजन के अणुयों की कंपन गति है –
(A) 20000 लाख प्रति सैकंड
(B) 24500 लाख प्रति सैकंड
(C) 50000 लाख प्रति सैकंड
(D) 10000 लाख प्रति सैकंड।
उत्तर-
(B) 24500 लाख प्रति सैकंड

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
घरेलू उपकरण नज़दीक की दुकान से क्यों खरीदने चाहिएं ?
उत्तर-
कई बार जब उपकरण में कोई त्रुटि आ जाती है तो नज़दीक के दुकानदार से इसकी मरम्मत करवाना आसान रहता है।

प्रश्न 2.
घरेलू उपकरण कैसे दुकानदार से खरीदने चाहिएं ?
उत्तर-
इनको ऐसे दुकानदार से खरीदो जो कि ग्राहक को महत्ता देते हों तथा जिनके पास कम्पनी की चीज़ बेचने का लाइसैंस हो।

प्रश्न 3.
प्रैशर कुक्कर को प्रयोग करते समय कौन-सी बातों को ध्यान में रखोगे ?
उत्तर-

  1. यदि दो वस्तुएं इकट्ठी अर्थात् एक समय में ही पकानी चाहें तो इस बात का ध्यान रखने की ज़रूरत है कि जो वस्तुएं पकाना चाहते हो, उन्हें पकाने के लिए लगभग एक-सा समय लगे।
  2. ढक्कन बन्द करते समय यह देखना ज़रूरी है कि कहीं रबड़ का छल्ला न निकला हो।
  3. भोजन पकाते समय पानी हमेशा आवश्यक मात्रा में ही हो।
  4. जब भाप निकास नली से निकलती दिखाई दे तो दबाव को ठीक कर देना चाहिए अर्थात् सेक कम कर दो।
  5. भोजन पकाने के पश्चात् कुक्कर को कभी भी नहीं खोलना चाहिए, ऐसा करने से भाप तुरन्त तेज़ी से बाहर निकलती है तथा इससे मुंह की चमड़ी जलने का भय रहता है।

प्रश्न 4.
स्टोव की देखभाल तथा सफ़ाई के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. बत्तियों वाले स्टोव की बत्तियां ऊपर से काटते रहना चाहिए।
  2. स्टोव की टंकी हमेशा दो तिहाई ही भरनी चाहिए।
  3. रोज़ाना स्टोव को गीले कपड़े से बाहर से अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  4. जलते हुए स्टोव में कभी भी तेल नहीं डालना चाहिए।
  5. हवा वाले स्टोव में अधिक हवा भरने से स्टोव फट सकता है।

प्रश्न 5.
टोस्टर की देखभाल तथा सफ़ाई कैसे की जाती है ?
उत्तर-
देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. टोस्ट को निकालने के लिए कभी भी चाकू अथवा कांटे का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे ऐलीमेण्ट की तार को नुकसान हो सकता है।
  2. हर बार टोस्टर को प्रयोग के पश्चात् टोस्टर को उल्टा करके डबलरोटी के टुकड़ों को निकालने के लिए टोस्टर को हाथ से हल्का थपथपा दो।
  3. प्रयोग के समय हमेशा टोस्टर को तापरोधक तथा बिजली के कुचालक स्थान पर ही रखना चाहिए।
  4. काम खत्म करके टोस्टर को बिजली के सम्पर्क से अलग करके ठण्डा होने दें, फिर तार को इसके आस-पास लपेट कर रख दो।

प्रश्न 6.
कपड़े धोने वाली मशीन का चुनाव करते समय कौन-सी बातें ध्यान में रखनी चाहिएं ?
उत्तर-

  1. मशीन की लागत तथा उसे चलाते समय होने वाले खर्च की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
  2. मशीन की गारण्टी बारे जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
  3. मशीन में कोई तीखी चीज़ न हो जिससे अटक कर कपड़ों के फटने का डर हो।
  4. मशीन की तारें ताप रोकने वाली हों।
  5. मशीन पर एनेमल की परत होनी चाहिए। एल्यूमीनियम की मशीन शीघ्र खराब हो जाती है तथा स्टैनलैस स्टील की मशीन की लागत अधिक होती है।

प्रश्न 7.
उपकरण अच्छी कम्पनी का ही खरीदना चाहिए ? क्यों ?
उत्तर-
कोई भी उपकरण अच्छी कम्पनी का इसलिए खरीदना चाहिए क्योंकि अच्छी कम्पनियां अपने उपकरणों पर गारण्टी देती हैं। यदि यह खराब हो जाएं तो कम्पनी वाले उपकरण को मुफ्त ठीक कर देते हैं।

प्रश्न 8.
उपकरण ज़रूरत के अनुसार खरीदना चाहिए न कि सजावट के लिए । क्यों ?
उत्तर-
उपकरणों का प्रयोग तथा खरीद इसलिए किया जाता है ताकि समय तथा शक्ति बच जाए। इसलिए इन्हें आवश्यकतानुसार खरीदना चाहिए न कि सजावट के लिए।

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प्रश्न 9.
रैफ्रिजरेटर की देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
खाने वाली चीज़ों को ठीक तापमान के अनुसार शैल्फ में रखो जैसे मांस तथा मछली को बर्फ़ वाले खाने (freezer) में तथा सब्जियों को निचली तरफ रखो। सारे फ्रिज में बदबू न फैले इसलिए मांस मछली को प्लास्टिक के लिफ़ाफे में डालकर रखो । फ्रिज में खाना हमेशा ढककर रखो। 15 दिन बाद फ्रिज की सफ़ाई अवश्य करो ताकि फालतू बर्फ़ तथा जमा हुआ पानी साफ़ हो जाए। इससे फ्रिज़ की कार्यकुशलता बढ़ती है। फ्रिज का दरवाज़ा बार-बार नहीं खोलना चाहिए। इससे फ्रिज का तापमान घटता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कपड़े धोने वाली मशीन के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
कपड़े धोने वाली मशीन-विशेषतः काम-काजी गृहणियों के लिए यह मशीन बहुत लाभदायक है। यह कपड़े धोने के कार्य को बहुत आसान कर देती है। आजकल दो तरह की कपड़े धोने की मशीनें मिलती हैं। एक विलोडक किस्म तथा दूसरी बेलनाकार। यह विलोडक मोटर के चलने से घूमता है। इसके इर्द-गिर्द ब्लेड लगे होते हैं। इन ब्लेडों की संख्या, आकार तथा बनावट अलग-अलग होती है।

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इसके अतिरिक्त ये मशीनें स्वैचालित तथा अर्द्ध-स्वैचालित भी होती हैं। फुली ऑटोमैटिक मशीनों में एक ही टब होता है। इसकी पानी लेने वाली नाली की पक्की फिटिंग पानी वाली टूटी से की जाती है जहां से मशीन चलाने पर यह अपने आप पानी लेकर, सर्फ लेकर, धोकर तथा सुखा कर ही बन्द होती है। जबकि सेमी-ऑटोमैटिक मशीन में दो टब होते हैं। एक कपड़े धोने के लिए तथा दूसरा कपड़े खंगालने तथा सुखाने के लिए। इसमें कपड़े धोने के पश्चात् कपड़ों को निकाल कर दूसरे टब में डाला जाता है तथा पानी का रुख भी दूसरे टब में करना पड़ता है। फिर यहां कपड़े खंगालने के पश्चात् पानी बन्द कर दिया जाता है तथा कपड़े अपने आप सूख जाते हैं।

प्रश्न 2.
विद्युत् प्रैस बारे आप क्या जानते हैं ? इसकी देखभाल तथा सफ़ाई बारे आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
विद्युत् प्रैस कपड़ों की सिलवटें निकालने तथा चमक लाने के लिए प्रैस का प्रयोग किया जाता है। प्रैसें भी कई तरह की होती हैं, जैसे-शुष्क प्रैस; वाष्प तथा शुष्क प्रैस : छिड़काव, वाष्प तथा शुष्क प्रैस। शुष्क प्रैसें सिंथैटिक कपड़ों के लिए ठीक होती हैं जबकि सूती तथा ऊनी कपड़ों के लिए छिड़काव तथा वाष्य प्रैसे बढ़िया रहती हैं। ऐसी प्रैस से कपड़े भी अच्छे प्रैस होते हैं तथा समय और शक्ति भी कम लगते हैं। इन पैसों में एक थर्मोस्टेट होता है जो तापमान को कण्ट्रोल करता है। इसके ऊपर ही विभिन्न कपड़ों के नाम भी लिखे होते हैं जैसे-सती, ऊनी, रेशमी आदि। जिस तरह के कपडे प्रेस करने हों, थर्मोस्टेट को वहां सैट किया जाता है। इन प्रैसों में पानी डालने के लिए सामने एक रास्ता बना होता है। प्रेस के साथ ही एक कप भी मिलता है जिससे पानी डाला जाता है। प्रेस के सामने हैण्डल से एक यन्त्र होता है जिसको दबाने से सामने से पानी का छिड़काव हो जाता है। इसी तरह भाप के लिए प्रैस के तल पर छिद्र होते हैं जिनके द्वारा भाप निकलती है। प्रैस के तल की प्लेट जंग रहित धातु की बनी होती है। बिजली की तार प्रेस के पीछे लगी होती है।
देखभाल तथा सफ़ाई –

1. प्रेस के प्रयोग के पश्चात् इसका प्लग स्विच से निकाल देना चाहिए।
2. प्रयोग के बाद ठण्डी होने पर तार हैण्डल के इर्द-गिर्द लपेट कर अच्छी तरह से खड़ी करके रखनी चाहिए।
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3. वाष्प तथा छिड़काव वाली प्रैस में हमेशा डिसटिल्ड पानी ही डालना चाहिए।
4. दाग लगने पर तल को खरोंचना नहीं चाहिए अपितु प्रैस को पूरा गर्म करके अखबार पर नमक डालकर उस पर फेरना चाहिए, दाग साफ़ हो जाएंगे।
5. अधिक गन्दी प्रैस को पैराफिन मोम से साफ़ किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
कुकिंग रेंज की देखभाल तथा सफ़ाई बारे क्या जानते हो ?
उत्तर-
देखभाल तथा सफ़ाई –

  1. बिजली से चलने वाले कुकिंग रेंज को लकड़ी के फट्टे पर रखना चाहिए।
  2. कुकिंग रेंज को प्रयोग के पश्चात् ठण्डा होने पर साफ़ करना चाहिए।
  3. इसकी सफ़ाई के लिए पानी तथा साबुन का प्रयोग करना चाहिए तथा बाद में सूखे कपड़े से पोंछना चाहिए। यदि फिर भी सफ़ाई ठीक न हो तो सोडे का प्रयोग किया जा सकता है, पर यदि कुकिंग रेंज एल्यूमीनियम का है तो फिर सोडा प्रयोग न करें।
  4. बर्तनों की सफ़ाई के लिए कभी-कभी इन्हें सोडे के पानी में उबाल देना चाहिए। फिर ब्रुश से साफ़ करके पानी से धोकर धूप में सुखा लें।
  5. ओवन तथा ग्रिल से भोजन निकालने के पश्चात् थोड़ी देर उसके दरवाजे खुले रहने देने चाहिएं क्योंकि भोजन पकने के दौरान भाप से अन्दर नमी हो जाती है, दरवाजा खुला रखने से यह सूख जाएगी नहीं तो जंग लग सकता है।

प्रश्न 4.
घरेलू उपकरणों के सुरक्षित प्रयोग के लिए कुछ ध्यान रखने योग्य बातें बताओ।
उत्तर-

  1. जब कोई भी उपकरण खरीदते हैं तो उसके साथ एक छोटी-सी किताब मिलती है जिसमें उपकरण की बनावट तथा प्रयोग बारे जानकारी दी होती है, उसको अच्छी तरह पढ़कर उसमें दिये निर्देशों के अनुसार इनका प्रयोग करना चाहिए।
  2. बिजली वाले यन्त्रों को प्लग लगाते समय दो पिनों वाले प्लग के स्थान पर तीन पिनों वाले प्लग को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि इसमें तीसरी तार अर्थ वाली होती है। यदि कभी शार्ट सर्किट हो जाए तो उपकरण जलने से बच जाता है।
  3. बिजली वाले यन्त्रों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।
  4. बिजली वाले यन्त्रों को कभी भी चलते समय गीले हाथ नहीं लगाने चाहिएं।
  5. प्रयोग के पश्चात् साफ़ करते समय यन्त्र की मोटर में पानी नहीं पड़ना चाहिए। उसे केवल गीले कपड़े से ही साफ़ करना चाहिए।
  6. बिजली के यन्त्र की कभी भी सीधी तारें नहीं लगानी चाहिएं। विद्युत् टेस्ट पैन तथा विद्युत् निरोधक टेप घर में अवश्य रखने चाहिएं।
  7. प्रयोग के पश्चात् पहले यन्त्र का बटन बन्द करना चाहिए तथा फिर प्लग में से शू निकालना चाहिए।
  8. गैस के चूल्हों को साफ़ रखना चाहिए। गैस वाली नाली की समय-समय पर परख करते रहना चाहिए ताकि गलने अथवा टूटने से गैस लीक न हो। हो सके तो हर छः मास पश्चात् पाइप बदल लेनी चाहिए।
  9. गैस के प्रयोग के पश्चात् इसको रेग्यूलेटर से बन्द करो तथा फिर चूल्हे के स्विच बन्द करो।
  10. गैस का सिलिण्डर बदलते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए। सिलिण्डर बदलने के पश्चात् साबुन वाला घोल अथवा गैस टैस्ट करने वाला तरल लगाकर टैस्ट कर लेना चाहिए कि गैस लीक तो नहीं कर रही। लीक करता हुआ सिलिण्डर नहीं लगाना चाहिए।
  11. बत्तियों वाले स्टोव की बत्तियां हमेशा साफ़ रखनी चाहिएं ताकि स्टोव धुआं न दें। कभी भी जलते स्टोव में तेल नहीं डालना चाहिए।

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घर का सामान PSEB 9th Class Home Science Notes

  • घरेलू उपकरणों के प्रयोग से समय तथा शक्ति दोनों की बचत हो जाती है।
  • बाज़ार में सर्वेक्षण करने के पश्चात् ही सामान खरीदना चाहिए।
  • सामान ऐसे दुकानदार से खरीदो जो कम्पनी की ओर से नियत डीलर हो तथा ग्राहक को महत्ता देता हो।
  • उपकरण अच्छी कम्पनी के ही खरीदने चाहिएं।
  • उपकरण खरीदते समय पारिवारिक बजट का ध्यान रखना चाहिए।
  • फ्रिज खाने वाले पदार्थों को ठण्डा रखने के काम आता है।
  • फ्रिज बिजली से चलता है तथा इसमें 4-5 °C से भी कम तापमान होता है।
  • फ्रिज के बर्फ वाले खाने में तापमान – 7°C होता है।
  • कपड़े धोने वाली मशीन बिजली से चलती है तथा इससे कपड़े धोने का काम आसान हो जाता है।
  • यह मशीन दो तरह की होती है, ऑटोमैटिक तथा सेमी-ऑटोमैटिक।
  • ऑटोमैटिक मशीनें कपड़ों को धोती, खंगालती तथा निचोड़ती हैं।
  • बिजली से चलने वाली प्रैसें दो तरह की होती हैं: ऑटोमैटिक तथा सेमी ऑटोमैटिक।
  • प्रैस का जो हिस्सा कपड़े को छूता है उसे तला कहते हैं।
  • टोस्टर का प्रयोग डबलरोटी के टुकड़ों को सेंकने के लिए किया जाता है।
  • मिक्सी से मसाले पीसना, रगड़ना तथा मिलाने का काम आसानी से हो जाता
  • इससे मिल्क शेक, जूस, सूप, आदि बनाए जाते हैं।
  • विभिन्न कामों के लिए मिक्सी में अलग-अलग ब्लेड लगे होते हैं।
  • मिक्सी को 2/3 हिस्से से अधिक नहीं भरना चाहिए तथा उपरि ढक्कन बन्द करके रखना चाहिए।
  • बिजली की मिक्सी महंगी होने के कारण कुछ लोग हाथ से चलने वाला ग्राइंडर प्रयोग करते हैं। इसमें गीला अथवा सूखा मसाला डालकर पीसा जाता है।
  • प्रेशर कुक्कर दालें, सब्जियां बनाने के काम आता है। यह एल्यूमीनियम अथवा स्टील का बना होता है।
  • प्रैशर कुक्कर का ढक्कन बन्द करके इस पर एक भार लगाया जाता है, यह ध्यान रखें कि इस भार वाला सुराख खुला होना चाहिए।
  • कुक्कर में खाना पकने को एक तिहाई समय लग जाता है।
  • प्रैशर कुक्कर में भोजन के पौष्टिक तत्त्व खराब नहीं होते।
  • खाना पकाने का कार्य गैस के चूल्हे पर किया जाता है।
  • मुम्बई, कोलकाता आदि जैसे शहरों में गैस पानी की तरह पाइपों द्वारा घरों में जाती है।
  • गैस का चूल्हा खाना पकाने का एक साफ़-सुथरा तथा आसान साधन है।
  • कुकिंग रेंज साधारणतः चार चूल्हों वाले होते हैं।
  • इनके साथ भूनने, सेंकने तथा उबालने अथवा तलने का कार्य किया जा सकता है। इस तरह समय की बचत हो जाती है।
  • यदि गैस चूल्हे अथवा गैस लीकेज में समस्या आए तो विशेषज्ञ से ही खुलवाएं।
  • मिट्टी के तेल से चलने वाले स्टोव दो तरह के होते हैं, पम्म वाले तथा बत्तियों वाले।
  • रसोई के बर्तन कई धातुओं के बने हो सकते हैं। जैसे, पीतल, तांबा, चांदी, एल्यूमीनियम, लोहा तथा स्टील आदि।
  • बायोगैस प्लांट में जानवरों के मलमूत्र से गैस बनाई जाती है जिसे गोबर गैस कहते हैं।
  • सोलर कुक्कर. ऐसा उपकरण है जोकि सौर ऊर्जा का प्रयोग करके खाना पकाने के काम आता है।
  • ओवन बिजली अथवा गैस पर काम करने वाला उपकरण है। इसमें भोजन बेक किया जाता है तथा सेंका जाता है।
  • माइक्रोवेव ओवन एक विशेष प्रकार का ओवन होता है। इसमें विद्युत् चुम्बकीय तरंगें पैदा करने वाला चुम्बकीय यन्त्र लगा होता है। यह सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेवस) पैदा करता है।
  • सूक्ष्म तरंगों को चूसने पर गर्मी पैदा होती है। भोजन के अणु 24500 लाख प्रति सैकिण्ड की गति से कांपते हैं। अणुओं को इतना तेज़ी से रगड़ने पर बहुत गर्मी पैदा होती है।
  • स्टील की सफ़ाई साबुन अथवा विम तथा पानी से की जाती है।
  • काँच के बर्तनों को गिलास, कप, प्लेट आदि को विम आदि से साफ़ किया जाता है।
  • मेल्मोवेयर नई तरह का कठोर प्लास्टिक होता है। इसकी सफ़ाई साबुन वाले पानी अथवा डिटर्जेंट के घोल में कपड़ा भिगोकर की जाती है। अधिक गन्दा होने की सूरत में सोडे का पानी (सोडा बाइकार्बोनेट) का प्रयोग किया जा सकता है।

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