PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण: सन्तुलन कीमत Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

PSEB 11th Class Economics पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
सन्तुलन कीमत की परिभाषा दीजिए।
अथवा
सन्तुलन कीमत का अर्थ बताओ।
उत्तर-
जहां बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति एक-दूसरे के समान होते हैं; उस कीमत को सन्तुलन कीमत कहा जाता

प्रश्न 2.
वस्तु की अधिक मांग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
बाज़ार में एक निश्चित कीमत के स्तर पर वस्तु की मांग, वस्तु की पूर्ति से अधिक होती है तो इसको अधिक मांग (Excess Demand) की स्थिति कहा जाता है।

प्रश्न 3.
वस्तु की अधिक पूर्ति का अर्थ बताओ।
उत्तर-
वस्तु की अधिक पूर्ति उस स्थिति को कहा जाता है, जब निश्चित कीमत पर वस्तु की पूर्ति, वस्तु की मांग से अधिक होती है।

प्रश्न 4.
बाज़ार सन्तुलन (Market Equilibrium) को स्पष्ट करो।
उत्तर-
बाज़ार सन्तुलन उत्पादन के उस स्तर को कहा जाता है, जहां कि वस्तु की मांग तथा वस्तु की पूर्ति एक-दूसरे के समान होती है। इस स्थिति में अधिक मांग शून्य तथा अधिक पूर्ति शून्य की स्थिति पाई जाती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

प्रश्न 5.
सन्तुलन की धारणा को बाज़ार मांग तथा पूर्ति अनुसूची द्वारा स्पष्ट करो।
उत्तर-
सन्तुलन कीमत बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति द्वारा निर्धारित होती हैसूची पत्र अनुसार ₹ 3 सन्तुलन कीमत है, जो कि बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति द्वारा निर्धारण होती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 1

प्रश्न 6.
सन्तुलन कीमत कैसे निर्धारित होती है ?
अथवा
पूर्ण प्रतियोगिता के बाज़ार में वस्तु की कीमत कैसे निर्धारित होती है? रेखाचित्र द्वारा दिखाओ।
उत्तर-
जिस स्थान पर मांग तथा पूर्ति द्वारा सन्तुलन प्राप्त होता है। इसको बाज़ार सन्तुलन (Market Equilibrium). कहा जाता है। कीमत निश्चित होती है, इसको सन्तुलन कीमत कहा जाता है। इस प्रकार पूर्ण प्रतियोगिता के बाज़ार में वस्तु की कीमत निर्धारित होती है।

प्रश्न 7.
केन्द्र के बजट 2002-03 में चाय पर उत्पादन कर (Excise Duty) ₹ 2 रु० प्रति किलो से घटाकर ₹ 1 प्रति किलोग्राम किया गया। शेष बातें समान रहें, इसका चाय की कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
जब चाय पर उत्पादन (Excise Duty) ₹ 2 से घटाकर ₹ 1 प्रति किलो की जाती है तथा शेष बातें समान रहती हैं। इससे चाय की पूर्ति में वृद्धि होगी तथा चाय की कीमत कम हो जाएगी।

प्रश्न 8.
कीमत यन्त्र पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप तथा अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप को उदाहरण द्वारा स्पष्ट करो।
उत्तर-

  1. प्रत्यक्ष हस्तक्षेप (Direct Intervention)-जब सरकार वस्तुओं की कम-से-कम कीमत अथवा न्यूनतम उत्साहित कीमत निर्धारित करती है तो कीमत यन्त्र पर इसको प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कहा जाता है।
  2. अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप (Indirect Intervention)-जब सरकार वस्तु के उत्पादन पर कर (Excise Duty) लगा देती है तो इसको कीमत यन्त्र पर अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप कहा जाता है।

प्रश्न 9.
इससे आपका क्या अभिप्राय है? (a) कीमत नियन्त्रण (b) न्यूनतम उत्साहित कीमत।
उत्तर-

  • कीमत नियन्त्रण (Control Price) जब वस्तु की कीमत सन्तुलन कीमत से कम निर्धारित की जाती है ताकि निर्धन वर्ग के लोग भी अनिवार्य वस्तुएं गेहूं, चावल इत्यादि की खरीद कर सकें तो इसको कीमत नियन्त्रण कहते हैं।
  • न्यूनतम उत्साहित कीमत (Support Price)-जब वस्तु की कीमत सन्तुलन कीमत से अधिक निर्धारित की जाती है ताकि फसल आने पर गेहूं, चावल की पूर्ति बढ़ने के कारण कीमत कम न हो जाएं तो उस कीमत को न्यूनतम उत्साहित कीमत (Support Price) कहा जाता है।

प्रश्न 10.
मान लो चीनी पर कीमत नियन्त्रण समाप्त किया जाता है, शेष बातें समान रहें। इसका चीनी की कीमत तथा उपभोग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
जब चीनी पर कीमत नियन्त्रण समाप्त किया जाता है तो शेष बातें समान रहें, चीनी की कीमत में वृद्धि होगी तथा कीमत नियन्त्रण से जो पहले कीमत थी, उसके समान कीमत हो जाएगी परन्तु इससे चीनी के उपभोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रश्न 11.
मांग में वृद्धि अथवा कमी से सन्तुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
सन्तुलन कीमत मांग तथा पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। जब वस्तु की मांग में वृद्धि होती है तो सन्तुलन कीमत बढ़ जाती है। इसके विपरीत जब मांग में कमी होती है तो कीमत कम हो जाती है।

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प्रश्न 12.
पूर्ति में वृद्धि अथवा कमी से कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
वस्तु की मांग तथा पूर्ति द्वारा बाज़ार सन्तुलन स्थापित होता है तो सन्तुलन कीमत निर्धारित हो जाती है। जब पूर्ति में वृद्धि होती है तो वस्तु की कीमत कम हो जाती है तथा पूर्ति में कमी होने से वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है।

प्रश्न 13.
किसी वस्तु की कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है; जब वस्तु की मांग में वृद्धि, पूर्ति में वृद्धि से अधिक होती है?
उत्तर-
वस्तु की कीमत मांग तथा पूर्ति में समानता द्वारा निर्धारित होती है। जब मांग में वृद्धि, पूर्ति में वृद्धि से अधिक होती है तो उस स्थिति में कीमत में वृद्धि होगी, परन्तु अन्य बातें समान रहनी चाहिए।

प्रश्न 14.
किसी वस्तु की कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है, जब वस्तु की मांग में वृद्धि पूर्ति में वृद्धि से कम होती है?
उत्तर-
दूसरी बातें समान रहें तो वस्तु की मांग में वृद्धि जब पूर्ति में वृद्धि से कम होती है तो पूर्ति अधिक बढ़ने के कारण वस्तु की कीमत घटने की प्रवृत्ति रखती है।

प्रश्न 15.
जब मांग तथा पूर्ति समान अनुपात में अधिक अथवा कम हो जाती है तो कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
जब मांग तथा पूर्ति समान अनुपात पर बढ़ जाती है अथवा समान अनुपात पर कम हो जाती है तो ऐसी स्थिति में वस्तु की कीमत समान रहती है।

प्रश्न 16.
सन्तुलन कीमत में समय के महत्त्व से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
प्रो० मार्शल ने सन्तुलन कीमत में मांग तथा पूर्ति में कौन-सा महत्त्वपूर्ण तत्त्व होता है, इसको स्पष्ट करने के लिए समय के महत्त्व को स्पष्ट किया है। उन्होंने समय को तीन भागों में विभाजित किया-

  • बाज़ार समय
  • अल्पकाल
  • दीर्घकाल।

प्रश्न 17.
बाज़ार समय क्या है?
उत्तर-
बाज़ार समय बहुत कम-सा समय होता है, जिसमें वस्तु की पूर्ति में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता, मांग बढ़ जाए तो कीमत बढ़ जाती है तथा मांग कम हो जाए तो कीमत कम हो जाती है। पूर्ति स्थिर रहती है।

प्रश्न 18.
अल्पकाल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
अल्पकाल इतना कम समय होता है, जिसमें नई फ़र्ने उद्योग में शामिल नहीं हो सकतीं तथा न ही पुरानी फ़र्मे उद्योग को छोड़ सकती हैं। इसी समय में पुरानी मशीनों से अधिक समय लेकर पूर्ति में वृद्धि की जा सकती है।

प्रश्न 19.
दीर्घकाल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
दीर्घकाल इतना लम्बा समय होता है, जिसमें नई फ़मैं उद्योग में शामिल हो सकती हैं तथा वस्तु की पूर्ति को साधनों में परिवर्तन से बढ़ाया जा सकता है अथवा घटाया जा सकता है। इस प्रकार पूर्ति का योगदान अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 20.
उद्योग का आर्थिक व्यावहारिक (Viable) होने से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
उद्योग के आर्थिक व्यावहारिक होने से अभिप्राय है कि वस्तु की मांग तथा पूर्ति एक दूसरे को किसी-नकिसी बिन्दु पर अवश्य काटती हैं तथा सन्तुलन की स्थिति स्थापित हो जाती है।

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प्रश्न 21.
उद्योग के आर्थिक अव्यावहारिक (Nonviable) होने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
उद्योग के आर्थिक तौर पर अव्यावहारिक होने से अभिप्राय है कि पूर्ति मांग से ऊपर होती है तथा यह दोनों एक-दूसरे को काटती नहीं हैं।

प्रश्न 22.
जब स्थानापन्न वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है तो इससे उपभोग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
किसी वस्तु X के स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ जाती है तो इस स्थिति में X वस्तु की मांग में वृद्धि हो जाएगी तथा मांग वक्र दाईं ओर को खिसक जाएगा।

प्रश्न 23.
जब पूरक वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है तो इससे वस्तु के उपभोग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
जब पूरक वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है, जैसे कि कार की कीमत में वृद्धि होती है तो पूरक वस्तु पेट्रोल की मांग कम हो जाती है।

प्रश्न 24.
जब आगतें (Inputs) की कीमत बढ़ जाती है तो वस्तु की खरीद मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
जब आगतें (Inputs) कीमत बढ़ जाती है तो वस्तु की लागत में वृद्धि होती है। लागत के बढ़ने से कीमत बढ़ जाती है। इसलिए खरीदी गई मात्रा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा कम मात्रा खरीदी जाती है।

प्रश्न 25.
जब लागत घटाने वाली तकनीक का प्रयोग होता है, इससे बाज़ार कीमत तथा मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
जब लागत घटाने वाली तकनीक का प्रयोग होता है तो लागत घटने से कीमत कम हो जाती है तथा वस्तु की खरीदी गई मात्रा में वृद्धि होती है

प्रश्न 26.
जब उत्पादन कर में वृद्धि होती है तो बाज़ार कीमत तथा मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
जब उत्पादन कर लगता है अथवा बढ़ाया जाता है तो वस्तु की कीमत बढ़ जाती है, इससे वस्तु की खरीदी गई मात्रा कम हो जाएगी।

प्रश्न 27.
मांग में वृद्धि से कीमत में वृद्धि कब होती है, जब वस्तु की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता?
उत्तर-
जब पूर्ति पूर्ण अलोचशील अर्थात् OY के समानांतर होती है तो मांग में वृद्धि होने से कीमत में वृद्धि होगी, परन्तु वस्तु की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता।

प्रश्न 28.
नियन्त्रण कीमत तथा सन्तुलन कीमत में क्या संबंध होता है?
उत्तर-
सरकार द्वारा नियन्त्रण कीमत आवश्यक वस्तुओं की स्थिति में निर्धारित की जाती है जो कि सन्तुलन कीमत से कम होती है। इस कीमत पर निर्धन लोग सरलता से आवश्यक वस्तुएं खरीद सकते हैं।

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प्रश्न 29.
न्यूनतम समर्थन कीमत तथा सन्तुलन कीमत में क्या संबंध है?
उत्तर-
न्यूनतम समर्थन कीमत वह कीमत है जो कि किसानों की उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए निर्धारित की जाती है, जो कि सन्तुलन कीमत से अधिक होती है।

प्रश्न 30.
समर्थन कीमत से अधिक पूर्ति की समस्या क्यों उत्पन्न होती है?
उत्तर-
समर्थन कीमत हमेशा सन्तुलन कीमत से ऊपर निश्चित की जाती है। इस स्थिति में वस्तु की पूर्ति मांग से अधिक होती है। इसलिए अधिक पूर्ति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 31.
जब पूर्ति बढ़ती अथवा कम होती है तो किस स्थिति में कीमत स्थिर रहेगी ?
उत्तर-
जब पूर्ति और माँग एक ही अनुपात में बढ़ जाती है अथवा कम होती है तो कीमत स्थिर रहेगी।

प्रश्न 32.
किस स्थिति में कीमत स्थिर रहेगी जब माँग घटती अथवा बढ़ती है ?
उत्तर-
जब माँग बढ़ती अथवा कम होती है और पूर्ति भी उस अनुपात में बढ़ जाती है अथवा कम होती है तो कीमत स्थिर रहेगी।

प्रश्न 33.
सन्तुलन कीमत ………. द्वारा निर्धारण होती है।
(a) फ़र्म
(b) उद्योग
(c) भाईवाली फ़र्म
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) उद्योग।

प्रश्न 34.
जब माँग अधिक होती है तो कीमत में …….. आएगा।
(a) कमी
(b) उछाल
(c) स्थिरता
(d) इनमें से कोई भी नहीं।
उत्तर-
(b) उछाल।

प्रश्न 35.
यदि वस्तु की माँग घटती है तो सन्तुलन कीमत ………. है।
(a) घटती
(b) बढ़ती
(c) सामान्य रहती
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) घटती।

प्रश्न 36.
जब पूर्ति वक्र माँग वक्र के ऊपर होता है और वह एक दूसरे को नहीं काटते तो इसको ….. उद्योग कहा जाता है।
उत्तर-
अव्यावहारिक।

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प्रश्न 37.
जब पूर्ति पूर्ण लोचदार होती है माँग के बढ़ने या घटने से सन्तुलन कीमत …….. ।
(a) बढ़ जाती है
(b) घट जाती है
(c) सामान्य रहती है
(d) कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उत्तर-
(d) कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 38.
जब वस्तु की पूर्ति पूर्ण बेलोचशील होती है माँग के बढ़ने तथा कम होने से सन्तुलन कीमत
(a) बढ़ जाती है अथवा कम होती है
(b) घट जाती है
(c) सामान्य रहती है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) सामान्य रहती है।

प्रश्न 39.
पूर्ति सामान्य रहती है और माँग के बढ़ने अथवा घटने से कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उत्तर-
कीमत बढ़ अथवा घट जाती है।

प्रश्न 40.
वस्तु की माँग सामान्य रहती है पूर्ति के बढ़ने तथा कम होने से सन्तुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
पूर्ति के बढ़ने से कीमत कम हो जाएगी अथवा पूर्ति के बढ़ने से कीमत कम हो जाती है।

प्रश्न 41.
पूर्ति पूर्ण लोचदार है परन्तु माँग के बढ़ने तथा कम होने से कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उत्तर-
कीमत स्थिर रहती है।

प्रश्न 42.
जब माँग पूर्ण बेलोचदार है और पूर्ति में परिवर्तन से कीमत –
(a) बढ़ जाएगी
(b) कम हो जाएगी।
(c) घट अथवा बढ़ जाएगी
(d) कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उत्तर-
(c) घट अथवा बढ़ जाएगी।

प्रश्न 43.
जब माँग पूर्ति की तुलना में अधिक बढ़ जाती है तो सन्तुलन कीमत तथा मात्रा में ……. होती है।
(a) वृद्धि
(b) कमी
(c) सामान्य
(d) कोई प्रभाव नहीं।
उत्तर-
(a) वृद्धि।

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प्रश्न 44.
जब माँग तथा पूर्ति में वृद्धि सामान्य अनुपात में होती है तो कीमत स्थिर होती है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 45.
जब माँग में वृद्धि पूर्ति के वृद्धि की तुलना में अधिक होती है तो कीमत कम होती है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 46. जब पूर्ति में वृद्धि माँग की वृद्धि की तुलना अधिक होती है तो सन्तुलन कीमत घट जाती है।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सन्तुलन कीमत की परिभाषा दीजिए।
अथवा
सन्तुलन कीमत का अर्थ बताओ।
उत्तर-
जहां बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति एक-दूसरे के समान होते हैं; उस कीमत को सन्तुलन कीमत कहा जाता है। पूर्ण प्रतियोगिता में यह कीमत मांग तथा पूर्ति द्वारा स्थापित होती है।

प्रश्न 2.
सन्तुलन कीमत कैसे निर्धारित होती है ?
अथवा
पूर्ण प्रतियोगिता के बाज़ार में वस्तु की कीमत कैसे निर्धारित होती है? रेखाचित्र द्वारा दिखाओ।
उत्तर-
रेखाचित्र 1 में मांग DD तथा पूर्ति SS द्वारा सन्तुलन E बिन्दु पर होता है। इसको बाज़ार सन्तुलन (Market Equilibrium) कहा जाता है। OP कीमत निश्चित होती है, इसको सन्तुलन कीमत कहा जाता है। इस प्रकार पूर्ण प्रतियोगिता के बाज़ार में वस्तु की कीमत निर्धारित होती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 2

प्रश्न 3.
बाज़ार समय क्या है?
उत्तर-
बाज़ार समय बहुत कम-सा समय होता है, जिसमें वस्तु की पूर्ति में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता, मांग बढ़ जाए तो कीमत बढ़ जाती है तथा मांग कम हो जाए तो कीमत कम हो जाती है। पूर्ति स्थिर रहती है। .

प्रश्न 4.
अल्पकाल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
अल्पकाल इतना कम समय होता है, जिसमें नई फ़र्मे उद्योग में शामिल नहीं हो सकतीं तथा न ही पुरानी फ़र्मे उद्योग को छोड़ सकती हैं। इसी समय में पुरानी मशीनों से अधिक समय लेकर पूर्ति में वृद्धि की जा सकती है।

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प्रश्न 5.
दीर्घकाल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
दीर्घकाल इतना लम्बा समय होता है, जिसमें नई फ़र्ने उद्योग में शामिल हो सकती हैं तथा वस्तु की पूर्ति को साधनों में परिवर्तन से बढ़ाया जा सकता है अथवा घटाया जा सकता है। इस प्रकार पूर्ति का योगदान अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 6.
उद्योग का आर्थिक व्यावहारिक (Viable) होने से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
उद्योग के आर्थिक व्यावहारिक होने से अभिप्राय है कि वस्तु की मांग तथा पूर्ति एक दूसरे को किसी-नकिसी बिन्दु पर अवश्य काटती हैं तथा सन्तुलन की स्थिति स्थापित हो जाती है।

प्रश्न 7.
उद्योग के आर्थिक अव्यावहारिक (Nonviable) होने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
उद्योग के आर्थिक तौर पर अव्यावहारिक होने से अभिप्राय है कि पूर्ति मांग से ऊपर होती है तथा यह दोनों एक-दूसरे को काटती नहीं हैं।
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III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सन्तुलन कीमत से क्या अभिप्राय है? बाज़ार सन्तुलन को मांग तथा पूर्ति सूची तथा रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करो
उत्तर-
सन्तुलन कीमत वह कीमत है, जहां कि बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति एक-दूसरे के समान होते हैं। बाज़ार सन्तुलन की स्थिति को सूची पत्र तथा रेखाचित्र 3 द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 3

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 4
सूची पत्र में कीमत तथा मांग का विपरीत सम्बन्ध है, जबकि कीमत तथा पूर्ति का सीधा सम्बन्ध है। जहां बाज़ार मांग = बाजार पूर्ति (3 = 3) हैं, इसको बाज़ार सन्तुलन कहा जाता है, जैसे कि रेखाचित्र 3 में E बिन्दु द्वारा दिखाया गया है। इससे ₹ 3 कीमत निर्धारण हो जाती है, इसको सन्तुलन कीमत (Equilibrium Price) कहते हैं।

प्रश्न 2.
आर्थिक तौर पर व्यावहारिक (Viable) तथा अव्यावहारिक (Non-viable) उद्योगों में क्या अन्तर है? रेखाचित्रों द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर-
1. व्यावहारिक उद्योग (Viable Industries)व्यावहारिक उद्योग वह उद्योग होते हैं, जिनमें वस्तुओं की मांग तथा पूर्ति एक-दूसरे को किसी निश्चित बिन्दु पर काटती है, उस बिन्दु को बाज़ार सन्तुलन कहते हैं। जहां कि रेखाचित्र 4 में साधारण तौर पर बाजार में उपलब्ध वस्तुओं की कीमत मांग तथा पूर्ति द्वारा सन्तुलन से स्थापित हो जाती है। इन उद्योगों की मांग वक्र पर पूर्ति वक्र एक-दूसरे को किसी बिन्दु पर अवश्य काटती है।

2. अव्यावहारिक उद्योग (Nonviable Industries)जब किसी उद्योग की पूर्ति वक्र, मांग वक्र को नहीं काटती, बल्कि पूर्ति वक्र मांग वक्र से ऊपर होती है तो ऐसी वस्तु का उत्पादन उस अर्थव्यवस्था में नहीं किया जाता। जैसे कि निजी हवाई जहाज़ों की पूर्ति भारत जैसे देशों में ऊंची है तथा मांग कम है। इसलिए निजी | D हवाई जहाज़ों का उद्योग भारत जैसे देशों में अव्यावहारिक है। जब पूर्ति वक्र मांग वक्र से ऊंची होती है तो इस उद्योग को अव्यावहारिक उद्योग कहा जाता है। जैसा कि रेखाचित्र 5 में दिखाया गया है।

प्रश्न 3.
सन्तुलन कीमत कैसे निर्धारित होती है? एक वस्तु की मांग में परिवर्तन का इस पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
सन्तुलन कीमत वह कीमत है, जोकि बाज़ार मांग तथा बाजार पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। जैसे कि रेखाचित्र 6 में DD मांग तथा SS पूर्ति द्वारा सन्तुलन E बिन्दु पर E स्थापित होता है। इसलिए OP कीमत निर्धारण हो जाती है। इसको सन्तुलन कीमत कहा जाता है। यदि शेष बातें समान रहती हैं, वस्तु की मांग बढ़ने से | सन्तुलन कीमत बढ़ जाती है तथा मांग घटने से सन्तुलन कीमत कम हो जाती है, जैसे कि रेखाचित्र 6 में मांग DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है। सन्तुलन कीमत OP से बढ़कर OP2 हो तो सन्तुलन कीमत OP2 रह जाएगी। इस प्रकार मांग की वृद्धि से कीमत बढ़ जाती है तथा मांग की कमी से कीमत कम हो जाती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 5

प्रश्न 4.
सन्तुलन कीमत तथा पूर्ति में परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है ? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करो।
उत्तर-
सन्तुलन कीमत वह कीमत है जो बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। शेष बातें समान रहें, जब वस्तु की पूर्ति में वृद्धि होती है तो सन्तुलन कीमत कम हो जाती है तथा जब वस्तु की पूर्ति में कमी होती है तो सन्तुलन कीमत में वृद्धि होती है। रेखाचित्र 7 में DD मांग तथा SS पूर्ति से सन्तुलन कीमत OP निर्धारित हो जाती है। जब पूर्ति SS से बढ़कर S1S1 हो जाती है तो कीमत OP से कम होकर OP1 हो जाएगी। इसके विपरीत जब पूर्ति SS से कम होकर S2S2 हो जाती है तो सन्तुलन कीमत OP से बढ़कर OP2 हो जाएगी।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 6

प्रश्न 5.
बाज़ार कीमत तथा विनिमय मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जब
(a) मांग वक्र दाईं ओर खिसक जाती है।
(b) मांग वक्र पूर्ण लोचशील होती है, परन्तु पूर्ति वक्र खिसक जाता है।
(c) जब मांग तथा पूर्ति समान अनुपात में घट जाती है।
उत्तर-
(a) जब मांग वक्र दाईं ओर खिसक जाती है तो इससे वस्तु की. बाज़ार कीमत तथा मात्रा में वृद्धि होती है जैसे कि रेखाचित्र 8 में पूर्ति समान रहती है परन्तु मांग वक्र DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है। इससे कीमत OP से बढ़कर OP1 तथा मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो जाएगी।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 7

(b) जब मांग वक्र पूर्ण लोचशील होता है तथा पूर्ति में परिवर्तन होता है तो कीमत OP समान रहेगी, परन्तु पूर्ति SS से बढ़कर S1S1 होती है तो वस्तु की मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो जाती है तथा पूर्ति S2S2 कम हो जाती है तो मात्रा OQ2 रह जाएगी। जैसा कि रेखाचित्र 9 में दिखाया गया है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 8

(c) जब मांग तथा पूर्ति समान अनुपात में कम हो जाते हैं तो कीमत OP समान रहती है, परन्तु वस्तु की मात्रा OQ से कम होकर OQ1 रह जाती है। जैसा कि रेखाचित्र 10 में दिखाया गया है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 9

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

प्रश्न 6.
सन्तुलन कीमत से क्या अभिप्राय है? यह स्पष्ट करो कि जब मांग तथा पूर्ति दोनों में वृद्धि समान अनुपात में होती है तो सन्तुलन कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता। . उत्तर-
सन्तुलन कीमत वह कीमत है जो बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति द्वारा निर्धारण होती है, जैसे कि रेखाचित्र 11 में DD मांग तथा SS पूर्ति द्वारा सन्तुलन कीमत OP निर्धारित हो जाती है। यदि मांग तथा पूर्ति में वृद्धि समान अनुपात में दिखाया गया है। मांग DD से बढ़कर D1D1 तथा पूर्ति SS से बढ़कर S1S1 हो जाती है तो सन्तुलन कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता, परन्तु मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो जाएगी।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 10

प्रश्न 7.
जब मांग पूर्ण लोचशील अथवा पूर्ण अलोचशील होती है तो पूर्ति में परिवर्तन का सन्तुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है ? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करो।
उत्तर
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 11
1. रेखाचित्र 12 (i) में मांग पूर्ण लोचशील DD दिखाई गई है जो कि ox के समानान्तर है। पूर्ति SS से बढ़कर S1S1 हो जाती है अथवा कम होकर S2S2 रह जाती है तो सन्तुलन कीमत OP स्थिर रहती है, जबकि मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 अथवा घटकर OQ2 रह जाती है।
2. रेखाचित्र 12.(ii) में मांग पूर्ण लोचशील दिखाई गई है, यदि पूर्ति SS से बढ़कर S1S1 हो जाती है तो सन्तुलन कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाती है तथा यदि पूर्ति SS से घटकर S2S2 हो जाती है तो सन्तुलन कीमत बढ़कर OP से OP2 हो जाएगी।

प्रश्न 8.
जब पूर्ति पूर्ण लोचशील अथवा पूर्ण अलोचशील होती है तथा मांग में परिवर्तन होता है तो इसका सन्तुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
जब पूर्ति लोचशील अथवा पूर्ण अलोचशील होती है तथा मांग में परिवर्तन से सन्तुलन कीमत पर प्रभाव को रेखाचित्र 13 द्वारा स्पष्ट करते हैं-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 12
1. रेखाचित्र 13 (i) में पूर्ति SS पूर्ण लोचशील है। मांग DD से बढ़कर D1D1 अथवा कम होकर D2D2 रह जाती है तो सन्तुलन कीमत OP स्थिर रहती है।
2. रेखाचित्र 13 (ii) में पूर्ति SS पूर्ण अलोचशील है। मांग DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है तो सन्तुलन कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाएगी। यदि मांग कम होकर D2D2 रह जाती है तो सन्तुलन कीमत OP2 रह जाती है।

प्रश्न 9.
आय में वृद्धि से वस्तु की सन्तुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करें।
अथवा
जब किसी वस्तु की माँग पूर्ति से अधिक होती है तो कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
जब आय में वृद्धि होती है तो मांग में वृद्धि हो जाएगी। यदि पूर्ति समान रहती है तो सन्तुलन कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाएगी। ऐसा साधारण वस्तुओं की स्थिति में होता है, जैसा कि रेखाचित्र 14 में दिखाया गया है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 13

प्रश्न 10.
भयानक अकाल के परिणामस्वरूप गेहूं का उत्पादन बहुत घट जाता है। इससे बाज़ार में गेहं की कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर-
जब भयानक अकाल के कारण गेहूं का उत्पादन बहुत कम हो जाता है तो इससे अभिप्राय है कि गेहूं की पूर्ति कम हो जाती है, जब कि मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता। इससे गेंहू की कीमत में वृद्धि होगी। जैसे कि रेखाचित्र 15 में कीमत OP से बढ़कर OP1 दिखाई गई है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 14

प्रश्न 11.
मान लो जीनज़ पैंटों की मांग बढ़ जाती है, परन्तु कपास की कीमत में वृद्धि होने से उसी समय जीनज़ पैंटों की पूर्ति कम हो जाती है। इसका जीनज़ की कीमत तथा बेची गई मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर-
जीनज़ पैंटों की मांग में वृद्धि होती है, परन्तु जीनज़ पैंटों की पूर्ति कम हो जाती है तो इससे जीनज़ की कीमत में बहुत वृद्धि होगी, जैसे कि मांग बढ़कर DD से D1D1 होती है, परन्तु पूर्ति SS से कम होकर S1S1 रह जाती है, इससे कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाए, जबकि जीनज़ की मात्रा OQ से कम होकर OQ1 रह जाती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 15

प्रश्न 12.
चीन टेलीफोन के यन्त्र बनाने वाला बड़ा निर्माता है। यह हाल ही में विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बन गया है। इससे अभिप्राय है कि यह अपनी वस्तुएं भारत जैसे देशों को बेच सकता है। मान लो यह भारत को टेलीफोन यन्त्र निर्यात करने लगता है
(a) इससे भारत में टेलीफोन कीमत तथा बेची गई मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(b) मान लो टेलीफोन वस्तुओं की मांग अधिक लोचशील है तो इससे भारत के कुल व्यय पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
(a) जब चीन भारत को टेलीफोन यन्त्र (Telephone instruments) बड़ी मात्रा में निर्यात करेगा तो इसका प्रभाव यह पड़ेगा कि टेलीफोन यन्त्रों की कीमत भारत में घट जाएगी। इससे टेलीफोन यन्त्रों की बेची गई मात्रा में बहुत अधिक वृद्धि होगी।

(b) भारत में यदि टेलीफोन से सम्बन्धित वस्तुओं की मांग अधिक लोचशील है तो कीमत में कमी होने के कारण इनकी मांग में बहुत वृद्धि होगी तथा भारत का कुल व्यय टेलीफोन यन्त्रों पर बहुत बढ़ जाएगा।

प्रश्न 13.
श्रीमती रामगोपाल अनुसार अर्थशास्त्री विपरीत बातें करते हैं, जब कीमत घटती है तो मांग बढ़ती है, परन्तु जब मांग बढ़ती है तो कीमत बढ़ती है। ठीक अथवा गलत सिद्ध करो। रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर-
श्रीमती रामगोपाल के कथन के दो भाग हैं।
1. जब कीमत घटती है तो मांग में वृद्धि होती हैप्रथम कथन में कहा गया है कि जब कीमत कम हो जाती है तो मांग में वृद्धि होती है। इस स्थिति में एक मांग वक्र पर मांग बढ़ जाती है। जब किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है रेखाचित्र 17 में जब कीमत OP से मांग OQ है। कीमत कम होकर OP1 हो जाती है तो मांग बढ़कर OQ2 हो जाती है। इसको मांग का विस्तार (Extension in Demand) कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 16
2. मांग में वृद्धि होती है, जब कीमत बढ़ जाती हैकथन का दूसरा भाग भी ठीक है, जब भी मांग में वृद्धि होती है तो कीमत में वृद्धि हो जाती है। जैसे कि रेखाचित्र 18 अनुसार जब कीमत OP है तो मांग OQ मात्रा की जाती है। मांग DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है तो कीमत में वृद्धि होगी, जैसे कि मांग OQ से बढ़कर OQ1 होती है तो कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाती है। इसको मांग की वृद्धि (Increase in Demand) कहा जाता है।
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मांग वक्र पर परिवर्तन अथवा मांग वक्र में परिवर्तन के रूप में दीजिए।
(a) सन् 2001 में सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने पर पाबन्दी लगाई थी। इसका सिगरेट की औसत कीमत तथा बेची गई मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ने की सम्भावना है?
(b) नई खोजों से पेट्रोल तथा डीजल की कीमत घटने की सम्भावना है। इसका नई कारों के बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
(c) वातावरण सम्बन्धी नए नियमों अनुसार दवाइयां बनाने के उद्योगों को वातावरण अनुकूल तकनीक का प्रयोग करने के लिए कहा जाता है। जिससे पहले से कम रसायन वातावरण में शामिल होते हैं। इससे दवाइयों की कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
(a) सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने की पाबन्दी लगाने से सिगरेट की मांग में कमी होगी। इससे सिगरेट की औसत कीमत कम हो जाएगी तथा मांग की मात्रा भी कम हो जाएगी।
(b) जब नई खोजों से पेट्रोल तथा डीजल की कीमत में कमी होती है तो इससे कारों की मांग बढ़ जाएगी, क्योंकि पेट्रोल तथा डीज़ल सस्ते हो जाते हैं।
(c) जब दवाइयों के निर्माण में महंगी तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिससे वातावरण प्रदूषित न हो तो दवाइयों की कीमत बढ़ जाएगी, क्योंकि दवाइयों की पूर्ति कम हो जाएगी।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

प्रश्न 15.
रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करो कि कीमत नियन्त्रण प्रणाली में राशन तथा काले बाज़ार कैसे उत्पन्न हो . जाते हैं?
उत्तर-
जब सरकार कीमत नियन्त्रण प्रणाली का प्रयोग करके सन्तुलन कीमत से कीमत कम निर्धारण कर देती है तो इस स्थिति में वस्तु की मांग अधिक हो जाती है तथा पूर्ति कम होती है। जैसे कि रेखाचित्र 19 में मांग DD तथा पूर्ति SS द्वारा सन्तुलन कीमत OP है। यदि सरकार नियन्त्रित कीमत OP1 निर्धारण कर देती है तो इस कीमत पर P1S1 = OQ1 सन्तुलन कीमत पूर्ति है, परन्तु मांग P1d1 = OQ1 है। इस स्थिति में सरकार को अधिक मांग की पूर्ति के लिए राशन नीति की सहायता नियन्त्रित कीमत लेनी पड़ती है। परन्तु सन्तुलन कीमत बहुत अधिक होने के कारण वह वस्तु काले बाज़ार (Black market) में अधिक मूल्य पर बेची जाती है। इस प्रकार राशन तथा काला बाजार, नियन्त्रित कीमत के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 18

प्रश्न 16.
अकाल के ‘खाद्य उपलब्धता घटने’ (Food Availability Decline) सिद्धान्त को स्पष्ट करो। रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर-
मांग तथा पूर्ति के सिद्धान्त को व्यावहारिक रूप देने के लिए प्रो० ए० के० सेन खाद्य उपलब्धता घटने (FAD) सिद्धान्त दिया। प्रो० सेन अनुसार प्राकृतिक आपदाओं के कारण चावल का उत्पादन किसी क्षेत्र में बहुत कम हो जाता है। दूसरे क्षेत्रों में से चावल लाने से यातायात के साधनों की लागत अधिक होने के कारण, चावल की कीमत बहुत बढ़ जाती है तथा उस कीमत पर लोग चावल खरीद नहीं सकते। इसलिए अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है तथा भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस सिद्धान्त को रेखाचित्र 20 द्वारा स्पष्ट कर सकते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 19

रेखाचित्र 20 में A, B तथा C तीन परिवारों की मांग को दिखाया है। तीन परिवारों A + B + C की मांग को चौथे भाग में दिखाया है। परिवार A बहुत गरीब है, B परिवार C से गरीब है तथा C परिवार अमीर है। जब कीमत OP1 है तो केवल C परिवार ही चावल खरीद सकता है। OP1 कीमत पर B तथा C परिवार अनाज खरीद सकते हैं परन्तु A परिवार नहीं खरीद सकता। यदि कीमत OP2 निश्चित होती है तो परिवार A तथा B अनाज नहीं खरीद सकते तथा भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसको खाद्य उपलब्धता घटने का सिद्धान्त कहा जाता है।

प्रश्न 17.
कीमत प्रणाली के गुण तथा दोष बताओ।
अथवा
प्रतियोगी बाज़ार में उपभोक्ता तथा उत्पादकों के निर्णयों में तालमेल कैसे होता है?
उत्तर–
प्रतियोगी बाज़ार में उपभोक्ता तथा उत्पादकों में निर्णयों के तालमेल के कारण कीमत निर्धारण होती है। कीमत प्रणाली के गुण तथा दोष निम्नलिखित हैं-
गुण (Merits)-

  1. कीमत प्रणाली द्वारा उपभोक्ताओं तथा उत्पादकताओं में तालमेल होने के उपरान्त एक सन्तुलन कीमत स्थापित होती हैं जहां दोनों ही अपने आपको सन्तुष्ट महसूस करते हैं।
  2. कीमत प्रणाली द्वारा एक अर्थव्यवस्था की मुख्य समस्याएं क्या, कैसे तथा किस लिए उत्पादन किया जाए, इसका हल किया जाता है।

दोष (Demerits)-

  1. कीमत प्रणाली द्वारा सामाजिक कल्याण प्राप्त नहीं किया जा सकता, जैसे कि प्रो० ए० के० सेन ने अनाज उपलब्धता घटने के सिद्धान्त द्वारा अकाल की स्थिति का वर्णन किया है।
  2. कीमत प्रणाली में किसी देश में वातावरण के सुधार की ओर कोई ध्यान नहीं देता। अधिक लागत से उत्पादन नहीं किया जाता।
  3. कीमत प्रणाली द्वारा अमीर तथा गरीब में अन्तर बढ़ जाता है।

प्रश्न 18.
पूर्ति में वृद्धि और माँग में कमी का कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
जब किसी वस्तु की पूर्ति में वृद्धि हो जाती है और उस वस्तु की माँग में कमी हो जाती है तो इससे वस्तु की कीमत बहुत कम हो जाती है। रेखा चित्र 21 में मौलिक माँग DD और पूर्ति SS द्वारा की कीमत OP निर्धारण होती है। पूर्ति बढ़ कर S1S1 और माँग कम हो कर D1D1 रह जाती है तो नया सन्तुलन E द्वारा OP1 निर्धारण हो जाती है जो कि OP से बहुत कम है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 23

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सन्तुलन कीमत क्या है ? पूर्ण प्रतियोगिता में सन्तुलन कीमत कैसे निधारित होती है? (What is Equilibrium Price ? How is Equilibrium Price determined ?)
अथवा
बाज़ार के सन्तुलन को मांग तथा पूर्ति अनुसूची तथा रेखाचित्र द्वारा दिखाओ। (Show the determination of market equilibrium with the help of demand and supply schedules & diagram.)
उत्तर–
सन्तुलन कीमत (Equilibrium Price) वह कीमत होती है, जिस पर बाज़ार में वस्तु की मांग, वस्तु की पूर्ति के समान होती है। (The Equilibrium price is the price at which the quantity demanded is equal to quantity supplied) सन्तुलन कीमत पर सभी खरीददार अपनी मांग को पूरा कर लेते हैं तथा बेचने वाले वस्तु की उतनी मात्रा बेचने में सफल हो जाते हैं, जितनी वह बेचना चाहते हैं तो इस स्थिति को बाजार सन्तुलन (Market Equilibrium) कहा जाता है।

सन्तुलन कीमत का निर्माण (Determination of Equilibrium Price)-पूर्ण प्रतियोगिता एक ऐसा बाज़ार होता है, जिसमें-

  • खरीददारों तथा बेचने वालों की बड़ी संख्या होती है।
  • समरूप वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।
  • फ़र्मों के प्रवेश तथा छोड़ने की स्वतन्त्रता होती है।
  • उत्पादन के साधनों में पूर्ण गतिशीलता पाई जाती है।
  • सभी बाज़ार में वस्तु की एक कीमत निर्धारित होती है।

ऐसे बाज़ार में कीमत निर्धारण को स्पष्ट करते हुए प्रो० मार्शल ने कहा, “जैसे कैंची के दो ब्लेड कागज़ काटने के लिए आवश्यक होते हैं, उसी तरह मांग तथा पूर्ति दोनों सन्तुलन कीमत निर्धारण करने के लिए अनिवार्य है।”

  • बाज़ार मांग (Market Demand)-बाज़ार मांग से अभिप्राय मांग की उस मात्रा से होता है, जो कि बाज़ार में सभी खरीददारों द्वारा की जाती है। वस्तु की कीमत तथा बाज़ार मांग का परस्पर विपरीत सम्बन्ध होता है।
  • बाज़ार पूर्ति (Market Supply) किसी वस्तु की वह मात्रा जो कि बाज़ार में सभी फ़र्मे बेचने के लिए तैयार होती हैं, उसको बाजार पूर्ति कहा जाता है। वस्तु की कीमत तथा बाजार पूर्ति का परस्पर में सीधा सम्बन्ध होता है।

बाजार अनुसूची तथा रेखाचित्र द्वारा सन्तुलन कीमत की व्याख्या–पूर्ण प्रतियोगिता में बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति के सन्तुलन द्वारा सन्तुलन कीमत निर्धारित होती है। जिस बिन्दु पर बाज़ार मांग तथा बाज़ार पूर्ति एक-दूसरे के समान हो जाते हैं तो उससे सन्तुलन कीमत निर्धारण हो जाती है, इसको बाज़ार अनुसूची द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 24

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 25
बाज़ार मांग तथा पूर्ति अनुसूची में स्पष्ट किया है कि जब रसगुल्ले की कीमत ₹ 5 प्रति है तो मांग रसगुल्ले की, की जाती है, जब कीमत में कमी होती है तो रसगुल्ले की मांग बढ़ती जाती है। दूसरी ओर पूर्ति तथा कीमत का सीधा सम्बन्ध है। जब रसगुल्ले की कीमत घटती है तो पूर्ति में कमी होती है। मांग तथा पूर्ति का सन्तुलन ₹ 3 की स्थिति में होता है। इसकी कीमत पर 3, 3 रसगुल्लों की मांग तथा पूर्ति समान है। इसलिए ₹ 3 को सन्तुलन कीमत कहा जाता है। 3, 3 मांग तथा पूर्ति को बाज़ार सन्तुलन कहते हैं। रेखाचित्र 22 में DD मांग तथा SS पूर्ति वक्र दिखाए गए हैं। E बिन्दु पर रसगुल्ले की मांग तथा पूर्ति समान है। इसलिए ₹ 3 को सन्तुलन कीमत कहा जाता है।

अधिक पूर्ति (Excess Supply)-जब कीमत ₹ 4 है तो खरीददार रसगुल्लों की कम मांग करते हैं तथा बेचने वाले अधिक रसगुल्ले बेचने को तैयार हैं। इसलिए AB अधिक पूर्ति की स्थिति है। पूर्ण प्रतियोगिता के कारण बेचने वाले रसगुल्ले की कीमत घटाकर लेने के लिए तैयार हो जाते हैं तथा कीमत कम (↓) हो जाएगी।

अधिक मांग (Excess Demand) यदि कीमत ₹ 3 से कम है, जैसे कि ₹ 2 प्रति रसगुल्ला है तो मांग अधिक होगी तथा बेचने वाले कम रसगुल्ले बेचने को तैयार होंगे। इसलिए खरीददारों में मुकाबला होगा तथा खरीददार अधिक कीमत देने के लिए तैयार हो जाते हैं तथा कीमत बढ़ (↑) जाती हैं। इस प्रकार सभी बाज़ार में उद्योग द्वारा वस्तु की मांग तथा पूर्ति द्वारा कीमत निर्धारित होती है। यह कीमत एक फ़र्म द्वारा निर्धारण नहीं होती, जो कीमत उद्योग में निर्धारण होती है, उसको प्रत्येक फ़र्मे स्वीकार करती हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

प्रश्न 2.
मांग तथा पूर्ति में खिसकाव (परिवर्तन) द्वारा सन्तुलन कीमत पर प्रभाव को रेखाचित्रों द्वारा स्पष्ट करो। (Explain the effects of shifts in demand and supply on Equilibrium Price.)
अथवा
मांग तथा पूर्ति के खिसकने से सन्तुलन कीमत तथा उत्पादन पर प्रभाव को स्पष्ट करो। (Explain the effect shifts in demand and supply on Equilibrium Price and Production.)
उत्तर-
पूर्ण प्रतियोगिता में किसी वस्तु की सन्तुलन कीमत, मांग तथा पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। जहां बाज़ार मांग तथा बाजार पूर्ति समान होते हैं, उससे सन्तुलन कीमत निश्चित हो जाती है। अब हम मांग तथा पूर्ति में परिवर्तन (खिसकाव) द्वारा सन्तुलन कीमत पर पड़ने वाले प्रभाव को तीन भागों में विभाजित कर स्पष्ट करते हैं-

  1. मांग का खिसकाव (Shifts in demand)
  2. पूर्ति का खिसकाव (Shifts in supply)
  3. मांग तथा पूर्ति का साथ-साथ खिसकाव (Simultaneous shifts in demand & supply)

1. मांग का खिसकाव (Shifts in demand) अथवा मांग की वृद्धि अथवा कमी (Increase or decrease in demand)-मांग का खिसकाव (Shifting) दो तरह से हो सकता है-
(i) मांग में वृद्धि (Increase in demand)-मांग का दाईं ओर खिसकाव) यदि पूर्ति SS स्थिर रहती है तथा मांग DD से सन्तुलन E बिन्दु पर स्थापित होता है तो OP सन्तुलन कीमत है। यदि मांग DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है तो कीमत OP1 निर्धारित हो जाएगी तथा वस्तु की मात्रा OQ1 खरीदी जाएगी। इस प्रकार मांग की वृद्धि से कीमत तथा मात्रा दोनों ही बढ़ जाते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 26

(ii) मांग में कमी (Decrease in demand)-(मांग का बाईं ओर खिसकाव) यदि मांग DD से घटकर D2D2 रह जाती है तथा पूर्ति SS समान रहती है तो सन्तुलन E से बदलकर E2 पर हो जाएगा तथा कीमत घटकर OP2 हो जाएगी। इस स्थिति में वस्तु की मांग कम होकर OQ2 रह जाती है। इस प्रकार मांग की कमी से कीमत तथा मात्रा दोनों कम हो जाते हैं।
.
2. पूर्ति का खिसकाव (Shifts in Supply) अथवा पूर्ति की वृद्धि अथवा कमी (Increase or decrease in supply)-पूर्ति का खिसकाव (Shifting) दो प्रकार का हो सकता है-
(i) पूर्ति में वृद्धि (Increase in Supply)-(पूर्ति का दाईं ओर खिसकाव) यदि मांग DD स्थिर रहती है, पूर्ति SS होने की स्थिति में सन्तुलन E बिन्दु द्वारा सन्तुलन कीमत OP निर्धारित होती है। यदि पूर्ति की वृद्धि होती है तो पूर्ति वक्र S1S1 हो जाती है, इससे वस्तु की मात्रा OQ से OQ1 बढ़ जाएगी परन्तु कीमत OP से OP1 कम हो जाती है। इस प्रकार पूर्ति तथा मात्रा का सीधा सम्बन्ध तथा पूर्ति तथा कीमत का विपरीत प्रभाव पड़ता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 27

(ii) पूर्ति में कमी (Decrease in supply) (पूर्ति का बाईं ओर खिसकाव) यदि मांग में परिवर्तन नहीं होता, परन्तु पूर्ति SS से कम होकर S1S1 हो जाती है तो पूर्ति की कमी से वस्तु की मात्रा OQ से घटकर OQ2 रह जाती है, परन्तु कीमत OP से बढ़कर OP2 हो जाएगी। इस प्रकार पूर्ति के बढ़ने से वस्तु की अधिक मात्रा बेची जाती है. परन्त पूर्ति बढ़ने से कीमत पर विपरीत प्रभाव होता है अर्थात् कीमत घट जाती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण : सन्तुलन कीमत

(iii) मांग तथा पूर्ति में साथ-साथ परिवर्तन (Simultaneous shifts in Demand & Supply)-मांग तथा पूर्ति में साथ-साथ परिवर्तन तीन तरह से हो सकता है(a) मांग तथा पूर्ति में समान अनुपात में वृद्धि (Increase in demand & supply in the same proportion)—यदि मांग तथा पूर्ति दोनों दाईं ओर एक ही अनुपात में खिसक जाती है तो इस स्थिति में कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता, परन्तु वस्तु की मात्रा में वृद्धि हो जाएगी, जैसे कि रेखाचित्र 25 में दिखाया है कि मांग DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है तथा पूर्ति SS से बढ़कर S1S1 हो जाती है। मांग तथा पूर्ति में वृद्धि समान अनुपात पर होती है तो सन्तुलन कीमत OP स्थिर रहती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 28

(b) यदि मांग में वृद्धि अधिक अनुपात में होती है (If demand increases in a larger proportion)-
मान लो मांग तथा पूर्ति दोनों में वृद्धि होती है, परन्तु पूर्ति की तुलना मांग में वृद्धि का अनुपात अधिक है तो इस स्थिति में कीमत के बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। रेखाचित्र 26 में मांग में वृद्धि DD से D1D1 अधिक मात्रा में होती है, पूर्ति में वृद्धि SS से S1S1 मांग की तुलना में कम है। इसलिए सन्तुलन कीमत OP से OP1 निर्धारित हो जाती
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 29
(c) यदि पूर्ति में वृद्धि अधिक अनुपात में होती है (If supply increases in a larger proportion) यदि मांग तथा पूर्ति दोनों में वृद्धि होती है, परन्तु मांग में वृद्धि से पूर्ति में वृद्धि का अनुपात अधिक है तो इस स्थिति में कीमत घटने की प्रवृत्ति होगी। रेखाचित्र 27 में मांग तथा पूर्ति द्वारा सन्तुलन कीमत OP निर्धारित होती है तथा बाज़ार सन्तुलन E बिन्दु पर दिखाया गया है। मांग DD से D1D1 कम अनुपात में बढ़ती है, परन्तु पूर्ति SS से S1S1 अधिक अनुपात पर बढ़ती है। इससे कीमत OP1 हो जाएगी अर्थात् कीमत घटने की प्रवृत्ति होगी।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 13 पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत निर्धारण सन्तुलन कीमत 30

यदि मांग तथा पूर्ति कम हो जाते हैं तथा ऊपर दी व्याख्या के विपरीत परिवर्तन होता है-

  • मांग तथा पूर्ति में समान अनुपात में कमी होने से सन्तुलन, कीमत समान रहती है।
  • मांग में कमी, पूर्ति की कमी से अधिक अनुपात पर होती है तो सन्तुलन कीमत घटने की प्रवृत्ति रखती है।
  • पूर्ति में कमी मांग की कमी से अधिक अनुपात पर होती है तो सन्तुलन कीमत बढ़ने की प्रवृत्ति रखती है।

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

Punjab State Board PSEB 3rd Class Maths Book Solutions Chapter 7 Patterns Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Maths Chapter 7 Patterns

PAGE 152:

Do you remember ?

See carefully and fill in the blanks :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 1

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 2

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

PAGE 154:
Let’s do:

Observe the patterns and complete them:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 3

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 4

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 5

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

Make some beautiful patterns with your thumb:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 6

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 7

As first pattern is given below, mark the next pattern:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 8

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 9

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

PAGE 157:
Let’s do:

Question 1.
Observe the patterns and complete the following:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 11

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 10

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

Question 2.
Add the odd numbers and complete the following patterns:
Solution.
(a) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 = 6 × 6

(b) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 = 7 × 7

(c) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 = _____
Solution.
8 × 8

(d) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 + 17 = _____
Solution.
9 × 9

Question 3.
Add the even numbers and complete the following patterns :
(a) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 = 5 × 6

(b) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 + 12 = 6 × 7

(c) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 + 12 + 14 = _____
Solution.
7 × 8

(d) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 + 12 + 14 + 16 = _____
Solution.
8 × 9

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

Question 4.
Observe the pattern carefully and complete it:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 12

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 13

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns

Multiple Choice Questions:

Question 1.
Complete the pattern:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 14

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 15

Question 2.
Naman has proud on his particular name. He says that if his name is read inversely it will remain the same. Find this pattern in the following names ? Harsh, Daksh, Amar, Kanak, Aman.
(a) Harsh
(b) Daksh
(c) Amar
(d) Kanak.
Solution.
(d) Kanak.

Question 3.
Complete the Pattern :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 17

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 7 Patterns 16

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

ਵੱਡੇ ਉੱਚਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ-
(i) ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਅਤੇ ਜੀਵੋਮ ਜਾਂ ਬਾਇਓਮ
(ii) ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਅਤੇ ਭੋਜਨ-ਜਾਲ
(iii) ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਅਤੇ ਸਰਬ-ਆਹਾਰੀ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਅਤੇ ਜੀਵੋਮ ਜਾਂ ਬਾਇਓਮ-

ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ (Ecosystem) ਜੀਵੋਮ ਜਾਂ ਬਾਇਓਮ (Biome)
(1) ਇਹ ਜੈਵ ਜਗਤ ਦੀ ਸਵੈ-ਧਾਰੀ (Self sus-taining) ਇਕਾਈ ਹੈ । (1) ਇਹ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧਾਂ ਦਾ ਸਮੂਹ ਹੈ ।
(2) ਇਹ ਜੈਵ ਜੀਵਾਂ ਅਤੇ ਅਜੈਵ ਵਾਤਾਵਰਨ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਬਣਿਆ ਹੈ । (2) ਇਸ ਵਿਚ ਸਮਾਨ ਜਲਵਾਯੂ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਭੂਗੋਲਿਕ ਖੇਤਰ ਦੇ ਕਈ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
(3) ਇਹ ਜੈਵ ਜਗਤ ਵੀ ਬਾਕੀਆਂ ਨਾਲੋਂ ਛੋਟੀ ਇਕਾਈ ਹੈ । (3) ਇਹ ਜੈਵ ਜਗਤ ਦੀ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਹੈ ।

(ii) ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਅਤੇ ਭੋਜਨ-ਜਾਲ-

ਭੋਜਨ-ਲੜੀ (Food Chain) ਭੋਜਨ-ਜਾਲ (Food web)
(1) ਇਹ ਕਿਸੇ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵਿਚ ਭੋਜਨ ਅਤੇ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ । (1) ਇਸ ਵਿਚ ਆਹਾਰ ਪੱਧਰ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
(2) ਇਹ ਭੋਜਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੀ ਕ੍ਰਮਵਾਰ ਆਹਾਰ ਲੜੀ ਹੈ । (2) ਇਸ ਵਿਚ ਇਕ ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਦੇ ਜੀਵ ਕਿਸੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਪੋਸ਼ਣ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੋਰ ਭੋਜਨ-ਲੜੀਆਂ ਨਾਲ ਜੁੜ ਕੇ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ ਦਾ ਜਾਲ ਜਿਹਾ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ।
(3) ਇਸ ਵਿਚ ਆਹਾਰੀ ਪੱਧਰ ਸੀਮਿਤ ਹੈ । (3) ਇਸ ਵਿਚ ਆਹਾਰੀ ਪੱਧਰ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਕੁਦਰਤੀ ਸੰਤੁਲਨ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
(4) ਇਹ ਸੀਮਿਤ ਅਤੇ ਛੋਟੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ 1
(4) ਇਹ ਕਈ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ ਦਾ ਜਾਲ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ 2

(ਉ) ਜੰਗਲ ਵਿਚ (ਅ) ਘਾਹ ਦੇ ਮੈਦਾਨ ਵਿੱਚ (ੲ) ਤਾਲਾਬ ਵਿੱਚ ।

(iii) ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਅਤੇ ਸਰਬ-ਆਹਾਰੀ-

ਮਾਸਾਹਾਰੀ (Carnivore) ਸਰਬ-ਆਹਾਰੀ (Omnivore)
(1) ਇਹ ਦੂਜੇ ਜੀਵ-ਜੰਤੂਆਂ ਦਾ ਮਾਸ ਹੀ ਖਾਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ- ਸ਼ੇਰ, ਚੀਤਾ ਆਦਿ । (1) ਇਹ ਜੀਵ-ਜੰਤੂਆਂ ਦਾ ਮਾਸ ਅਤੇ ਪੇੜ-ਪੌਦੇ ਦੋਵਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਭੋਜਨ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਮਨੁੱਖ, ਦਿਲ ਆਦਿ ।
(2) ਇਹ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਦੇ ਤੀਸਰੇ ਜਾਂ ਉਸਦੇ ਅਗਲੇ ਸਾਰੇ ਪੱਧਰਾਂ ਤੇ ਮਿਲਦੇ ਹਨ । (2) ਇਹ ਅਕਸਰ ਦੂਸਰੇ ਆਹਾਰੀ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
(3) ਇਹ ਅਕਸਰ ਜੰਗਲਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । (3) ਇਹ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਥਾਨ ਤੇ ਰਹਿ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
(4) ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੱਟਣ ਵਾਲੇ ਦੰਦ ਘੱਟ ਵਿਕਸਿਤ ਅਤੇ ਕਿੱਲ ਦੰਦ ਅਤੇ ਨਹੀ ਵਧੇਰੇ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । (4) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਦੋਵੇਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦੰਦ ਅਤੇ ਨਹੁੰ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਛੋਟੀ ਕਿਵੇਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਊਰਜਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਇਕ ਹੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸਦਾ ਕਈ ਚਰਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸਥਾਨਾਂਤਰਨ ਹੁੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਉਰਜਾ ਦੇ ਹਰ ਸਥਾਨਾਂਤਰਨ ਤੇ ਉਰਜਾ ਦਾ 1% ਭਾਗ ਰਹਿ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਵਿਚ ਵੱਧ ਚਰਨ ਹੋਣ ਤਾਂ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵਧੇਰੇ ਮਾਤਰਾ ਵਿਅਰਥ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ । ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਕੁਦਰਤ ਵਿਚ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ ਛੋਟੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਵਿਚ ਉਰਜਾ ਸਥਾਨਾਂਤਰਨ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਉਤਪਾਦਕ ਪੱਧਰ ਤੇ ਵੱਧ ਉਰਜਾ ਉਪਲੱਬਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਵਿਚ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਵੱਲ ਜਾਣ ਤੇ ਉਰਜਾ ਦੀ ਉਪਲੱਬਧਤਾ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਉਦਾਹਰਨ – ਘਾਹ → ਟਿੱਡਾ → ਡੱਡੂ → ਸੱਪ → ਮੋਰ
ਜੇ ਇਸ ਲੜੀ ਵਿਚ ਡੱਡੂ ਨੂੰ ਸਮਾਪਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਲੜੀ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਬਦਲਾਓ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣਗੇ-

  1. ਟਿੱਡਿਆਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗੀ ।
  2. ਡੱਡੂ ਨਾ ਮਿਲਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਸੱਪਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ।
  3. ਸੱਪਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਦਾ ਮੋਰਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਵੇਗਾ ।

ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਕਈ ਬੇਲੋੜੇ ਕੰਮਾਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਛੋਟੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਨਾਲ ਕੁਦਰਤ ਵਿਚ ਅਸੰਤੁਲਨ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੀ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਵਿਚ ਛੇ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪੱਧਰ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ? ਜੇ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕਿਉਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਹਰ ਚਰਨ ਵਿਚ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸਥਾਨਾਂਤਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਰਜਾ ਵਿਚ ਲਗਾਤਾਰ ਕਮੀ ਹੁੰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਤਿੰਨ ਜਾਂ ਚਾਰ ਚਰਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਊਰਜਾ ਸਿਰਫ ਨਾਂ-ਮਾਤਰ ਹੀ ਰਹਿ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਸੰਸ਼ਲੇਸ਼ਣ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਦੁਆਰਾ ਹਰੇ ਪੌਦੇ ਸੌਰ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸਿਰਫ 1% ਭਾਗ ਹੀ ਅੰਤਰਹਿਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਹੀ ਵਿਅਰਥ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਦੂਸਰੇ ਚਰਨ ਵਿੱਚ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਖਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਸਿਰਫ਼ 10% ਹੀ ਊਰਜਾ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜੇ ਅਸੀਂ ਸੌਰ ਊਰਜਾ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ 1000 ਮੰਨ ਲਈਏ ਤਾਂ ਪੌਦੇ ਸਿਰਫ 10J ਊਰਜਾ ਪਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਸਿਰਫ 1J ਉਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜਦੋਂ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਨੂੰ ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਖਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਸਿਰਫ 0.01J ਉਰਜਾ ਹੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਵੇਗੀ । ਇਸ ਲਈ ਜਿਵੇਂ-ਜਿਵੇਂ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਦੇ ਚਰਨ ਵੱਧਦੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਉਵੇਂ-ਉਵੇਂ ਹੀ ਉਪਲੱਬਧ ਉਰਜਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵੀ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਇਹ ਨਤੀਜਾ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਵਿਚ ਛੇ ਜਾਂ ਵੱਧ ਚਰਨ ਸੰਭਵ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉਤਪਾਦਕ ਪੱਧਰ ਤੇ ਉਰਜਾ ਵਧੇਰੇ ਉਪਲੱਬਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਲਗਾਤਾਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਆਖਿਰੀ ਪੱਧਰ ਤੇ ਉਰਜਾ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਵਾਤਾਵਰਨ ਨੂੰ ਪਰਿਭਾਸ਼ਿਤ ਕਰੋ। ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਘਟਕਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਲਿਖੋ।
ਜਾਂ
ਵਾਤਾਵਰਨ ਪੱਧਤੀ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਇਸਦੇ ਕਿੰਨੇ ਭਾਗ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਾਤਾਵਰਨ ਉਹ ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਜੈਵਿਕ ਸੰਸਾਰ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਸਾਰੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਾਂ । ਇਸਦੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਘਟਕ ਜੈਵ ਅਤੇ ਅਜੈਵ ਹਨ !
ਜੀਵ ਘਟਕ – ਸਾਰੇ ਜੀਵ-ਜੰਤੂ, ਪੌਦੇ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ ਜੀਵ ਘਟਕ ਦੇ ਵਰਗ ਵਿਚ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ।
ਅਜੀਵ ਘਟਕ – ਭੌਤਿਕ ਜਾਂ ਅਜੀਵ ਘਟਕਾਂ ਵਿੱਚ ਹਵਾ, ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਥਲ ਹਨ । ਹਵਾ ਤੋਂ ਸਾਹ ਕਿਰਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਪੀਂਦੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਥਲ ਤੇ ਸਾਡਾ ਨਿਵਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਮੌਸਮ ਸੰਬੰਧੀ ਘਟਕ ਹਨ-ਸੌਰ ਊਰਜਾ, ਤਾਪ, ਪ੍ਰਕਾਸ਼, ਵਰਖਾ, ਨਮੀ, ਹਨੇਰੀ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਜੈਵ ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਅਤੇ ਜੈਵ ਅਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਦੱਸੋ। ਹਰੇਕ ਦਾ ਉੱਚਿਤ ਉਦਾਹਰਨ ਵੀ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-

ਜੈਵ ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਜੈਵ ਅਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ
(1) ਇਹ ਉਹ ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਪਦਾਰਥ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਹਾਨੀ ਰਹਿਤ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ- ਗੋਬਰ, ਘਾਹ ਆਦਿ । (1) ਇਹ ਉਹ ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਪਦਾਰਥ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਹਾਨੀ ਰਹਿਤ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਤੋੜਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ । ਜਿਵੇਂ-ਡੀ.ਡੀ.ਟੀ., ਪਲਾਸਟਿਕ ਆਦਿ ।
(2) ਇਹ ਪਦਾਰਥ ਜੀਵਾਣੂਆਂ, ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਦੁਆਰਾ ਅਪਘਟਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਸੰਤੁਲਨ ਬਣਾਈ ਰੱਖਦੇ ਹਨ । (2) ਇਹ ਪਦਾਰਥ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਵਰਗੇ ਜੀਵਾਣੂਆਂ ਦੁਆਰਾ ਅਪਘਟਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੀਵ-ਮੰਡਲ (Biosphere) – ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ‘‘ਜੀਵ ਦਾ ਖੇਤਰ` । ਧਰਤੀ ਤੇ ਸਥਲ, ਜਲ ਅਤੇ ਹਵਾ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਜੋ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦਾ ਜੀਵਨ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਧਰਤੀ ਤੇ ਜੀਵਨ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਵਾਲੇ ਇਹ ਖੇਤਰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਮਿਲ ਕੇ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਧਰਤੀ ਤੇ ਸਥਲ-ਮੰਡਲ, ਜਲਮੰਡਲ ਅਤੇ ਵਾਯੂ-ਮੰਡਲ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ (Biosphere) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ (Ecosystem) ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ? ਇਸਦਾ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਨਾਲ ਕੀ ਸੰਬੰਧ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ – ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਵਿਚ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਜੈਵ ਅਤੇ ਅਜੈਵ ਘਟਕਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਲਗਾਤਾਰ ਹੁੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨੂੰ ਹੀ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਤਾਲਾਬ, ਝੀਲ, ਜੰਗਲ, ਖੇਤ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਜੀਵ ਸ਼ਾਲਾ ਵਿੱਚ ਜੈਵ ਅਤੇ ਅਜੈਵ ਘਟਕ ਆਪਸ ਵਿਚ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਕਰਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ਜੋ । ਇਕ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਜੈਵ ਸੰਖਿਆ, ਜੈਵ ਅਤੇ ਅਜੈਵ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੇ ਘਟਕ ਹਨ, ਜੋ ਇਸ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਨੂੰ ਸੰਰਚਨਾ ਅਤੇ ਗਤੀਸ਼ੀਲਤਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਕੋਈ ਤਾਲਾਬ, ਜੰਗਲ ਜਾਂ ਘਾਹ ਦਾ ਮੈਦਾਨ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਹਨ ।

ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦਾ ਹਰ ਘਟਕ ਆਪਣਾ ਖ਼ਾਸ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੁੱਝ ਕਾਰਨਾਂ ਦਾ ਸਾਰਾ ਯੋਗ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਨੂੰ ਸਥਿਰਤਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਸੇ ਭੂਗੋਲਿਕ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਇਕੱਠੇ ਮਿਲ ਕੇ ਬਾਇਓਮ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਬਾਇਓਮ ਮਿਲ ਕੇ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦਾ ਇੱਕ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਘਟਕ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਹੈ ਜੋ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਨੂੰ ਗਤੀਸ਼ੀਲਤਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਉਤਪਾਦਕ ਅਤੇ ਖਪਤਕਾਰ ਵਿਚ ਅੰਤਰ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-

ਉਤਪਾਦਕ (Producer) ਖਪਤਕਾਰ (Consumer)
(1) ਅਜਿਹੇ ਜੀਵ ਜੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਸੰਸ਼ਲੇਸ਼ਣ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਤੋਂ ਆਪਣਾ ਭੋਜਨ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉਤਪਾਦਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । (1) ਅਜਿਹੇ ਜੀਵ ਜੋ ਆਪਣੇ ਭੋਜਨ ਲਈ ਦੂਸਰੇ ਜੀਵਾਂ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਖਪਤਕਾਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
(2) ਹਰੇ ਪੌਦੇ ਉਤਪਾਦਕ ਜੀਵ ਕਹਾਉਂਦੇ ਹਨ । (2) ਸਾਰੇ ਜੰਤੂ ਉਪਭੋਗਤਾ ਕਹਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਅਪਘਟਕ ਕੀ ਹਨ ? ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਵਿੱਚ ਅਪਘਟਕਾਂ ਦਾ ਕੀ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਮੁੜ ਚਕਰਨ ਵਿਚ ਅਪਘਟਕਾਂ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ।
ਉੱਤਰ-
ਅਪਘਟਕ – ਅਪਘਟਕ ਉਹ ਸੂਖ਼ਮ ਜੀਵ ਹਨ ਜੋ ਮਿਤ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਕਾਰਬਨਿਕ ਯੌਗਿਕਾਂ ਦਾ ਅਪਘਟਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਰਲ ਯੌਗਿਕਾਂ ਅਤੇ ਤੱਤਾਂ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਦਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਸਰਲ ਯੌਗਿਕ ਅਤੇ ਤੱਤ ਧਰਤੀ ਦੇ ਪੋਸ਼ਣ ਭੰਡਾਰ ਵਿੱਚ ਵਾਪਸ ਚਲੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਵਿੱਚ ਅਪਘਟਕਾਂ ਦਾ ਮਹੱਤਵ – ਅਪਘਟਕ ਜੀਵ ਮ੍ਰਿਤ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਮ੍ਰਿਤ ਸਰੀਰਾਂ ਦੇ ਅਪਘਟਨ ਵਿਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਵਾਤਾਵਰਨ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਰੱਖਣ ਦਾ ਕਾਰਜ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਅਪਘਟਕ ਜੀਵ ਮ੍ਰਿਤ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਮ੍ਰਿਤ ਸਰੀਰਾਂ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਫਿਰ ਤੋਂ ਧਰਤੀ ਦੇ ਪੋਸ਼ਣ ਭੰਡਾਰ ਵਿੱਚ ਵਾਪਿਸ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦਾ ਕਾਰਜ ਵੀ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਮੁੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਜਾਣ ਤਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਬਣੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਮਿੱਟੀ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਫਸਲਾਂ ਦਾ ਪੋਸ਼ਣ ਕਰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਊਰਜਾ ਦੀ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਤੋਂ ਕਿਹੜਾ ਵਿਅਕਤੀ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਜਾਂ ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਵਧੇਰੇ ਲਾਭ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ? ਕਿਉਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਰਜਾ ਦੀ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਤੋਂ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਵਿਅਕਤੀ ਵਧੇਰੇ ਲਾਭ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
ਕਾਰਨ-ਪੌਦੇ ਪਹਿਲੇ ਆਹਾਰ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹਨ । ਇੱਕ ਆਹਾਰ ਪੱਧਰ ਤੋਂ ਅਗਲੇ ਆਹਾਰ ਪੱਧਰ ਨੂੰ ਆਮ ਕਰਕੇ ਲਗਭਗ 10% ਘੱਟ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸਥਾਨਾਂਤਰਨ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੈ ਕਿ ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਸੰਤੁਲਨ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤ ਵਿੱਚ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ ਜੁੜੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਕਈ ਵਾਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਇੱਕ ਦੀ ਕੋਈ ਕੁੜੀ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਸਮਾਪਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਉਦੋਂ ਉਸ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਦਾ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਲੜੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਜੁੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਅਤੇ ਊਰਜਾ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਦਾ ਸੰਤੁਲਨ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਜੇ ਅਜਿਹੇ ਕਿਸੇ ਜੰਗਲ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਹਿਰਨ ਸਮਾਪਤ ਹੋ ਜਾਣ ਤਾਂ ਇਸਦੀ ਪੂਰਤੀ ਕਰਨ ਲਈ ਜੰਗਲ ਦਾ ਸ਼ੇਰ ਕਿਸੇ ਜੰਗਲੀ ਜਾਨਵਰ ਨੂੰ ਮਾਰ ਕੇ ਕੁੜੀ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਸੰਤੁਲਨ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕਿਹੜੇ ਰਸਾਇਣ ਓਜ਼ੋਨ ਛੇਦ ਦੇ ਲਈ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਕਾਰਨ ਬਣੇ ਹੋਏ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਓਜ਼ੋਨ ਛੇਦ ਦੇ ਮੁੱਖ ਕਾਰਨ-

  1. ਐਰੋਸੋਲ ਦਹਿਣ
  2. ਆਧੁਨਿਕ ਅੱਗ ਬੁਝਾਊ ਯੰਤਰ
  3. ਪਰਮਾਣੂ ਵਿਸਫੋਟ
  4. ਹੋਲੋਜਨ
  5. ਸਲਫੇਟ ਐਰੋਸੋਲ
  6. CFCs (ਕਲੋਰੋਫਲੋਰੋ ਕਾਰਬਨ), CBC (ਕਲੋਰੋ ਬੋਮੋਕਾਰਬਨ ਆਦਿ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰੈਫਰੀਜਰੇਟਰਾਂ ਅਤੇ ਏਅਰ ਕੰਡੀਸ਼ਨਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਵਿੱਚ ਪੋਸ਼ਣ ਰੀਤੀ ਦੀ ਸੰਰਚਨਾ ਨੂੰ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪੋਸ਼ੀ ਪੱਧਰਾਂ ਦਾ ਗਾਫੀਕਲ ਨਿਰੂਪਣ (graphical representation) ਕਰਦੇ ਹਨ । ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪੋਸ਼ੀ ਪੱਧਰਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਦਾ ‘ਆਧਾਰ’ ਉਤਪਾਦਕ ਜੀਵਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ 3
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਦੇ ਆਧਾਰ (Base) ਤੋਂ ਜਿਵੇਂ-ਜਿਵੇਂ ਉੱਪਰ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ, ਪਿਰਾਮਿਡ ਆਕਾਰ ਪਤਲਾ ਹੁੰਦਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਪੋਸ਼ੀ ਪੱਧਰਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪਿਰਾਮਿਡ ਦੀ ਚੋਟੀ ਸਰਬ-ਉੱਚ ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਜੀਵਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਵਾਯੂ-ਮੰਡਲ ਵਿੱਚ ਓਜ਼ੋਨ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਣਦੀ ਹੈ ? ਇਸਦੇ ਰਿਕਤੀਕਰਨ ਨੂੰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ।
ਉੱਤਰ-
ਆਕਸੀਜਨ ਦੇ ਤਿੰਨ ਪਰਮਾਣੂਆਂ ਤੋਂ ਓਜ਼ੋਨ (O3) ਦੇ ਅਣੂ ਬਣਦੇ ਹਨ । ਆਮ ਆਕਸੀਜਨ ਦੇ ਅਣੂ ਵਿੱਚ ਦੋ ਪਰਮਾਣੂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਆਕਸੀਜਨ ਸਾਰੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ । ਪਰ ਓਜ਼ੋਨ ਇੱਕ ਘਾਤਕ ਜ਼ਹਿਰ ਹੈ । ਵਾਯੁਮੰਡਲ ਦੇ ਓਪਰੀ ਪੱਧਰ ਵਿੱਚ ਓਜ਼ੋਨ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਕਾਰਜ ਪੂਰਾ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਸੂਰਜ ਤੋਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪਰਾਬੈਂਗਣੀ ਵਿਕਿਰਣਾਂ ਤੋਂ ਧਰਤੀ ਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਸੁਰੱਖਿਆ ਕਵਚ ਤਿਆਰ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਪਰਾਬੈਂਗਣੀ ਕਿਰਣ ਧਰਤੀ ਤੇ ਰਹਿਣ ਵਾਲੇ ਜੀਵਾਂ ਦੇ ਲਈ ਬਹੁਤ ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਹਨ । ਇਹ ਵਿਕਿਰਣਾਂ ਚਮੜੀ ਦਾ ਕੈਂਸਰ ਪੈਦਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਵਾਯੂ-ਮੰਡਲ ਦੇ ਉੱਤਰ ਪੱਧਰ ਤੇ ਪਰਾਬੈਂਗਣੀ (UV) ਵਿਕਿਰਣ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਾਲ ਆਕਸੀਜਨ (O2) ਅਣੂਆਂ ਤੋਂ ਓਜ਼ੋਨ ਬਣਦੀ ਹੈ । ਉੱਚ ਊਰਜਾ ਵਾਲੇ ਪਰਾਬੈਂਗਣੀ (UV) ਵਿਕਿਰਣ ਆਕਸੀਜਨ ਅਣੂਆਂ (O2) ਨੂੰ ਵਿਘਟਿਤ ਕਰ ਆਜ਼ਾਦ ਆਕਸੀਜਨ (O) ਪਰਮਾਣੂ ਬਣਾਉਂਦੀ ਹੈ। ਆਕਸੀਜਨ ਦੇ ਇਹ ਸੁਤੰਤਰ ਪਰਮਾਣੂ ਸੰਯੁਕਤ ਹੋ ਕੇ ਓਜ਼ੋਨ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਭੋਜਨ ਲੜੀ – ਉਤਪਾਦਕ, ਖਪਤਕਾਰ ਅਤੇ ਅਪਘਟਕ ਤੋਂ ਮਿਲ ਕੇ ਬਣਨ ਵਾਲੀ ਲੜੀ, ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਕਹਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ-ਘਾਹ → ਟਿੱਡਾ → ਡੱਡੂ → ਸੱਪ → ਮੋਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਨਿਖੇੜਕ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਪ੍ਰਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਨਿਖੇੜਕ ਦੀ ਕੀ ਭੂਮਿਕਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਿਖੇੜਕ – ਜੀਵਾਣੂ ਅਤੇ ਉੱਲੀ ਜਿਹੇ ਸੂਖਮਜੀਵ ਮਰੇ ਜੀਵਾਂ ਦੇ ਅਵਸ਼ੇਸ਼ਾਂ ਦਾ ਵਿਘਟਨ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਪਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਨਿਖੇੜਕ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ – ਨਿਖੇੜਕ ਰੀਝਲਦਾਰ ਕਾਰਬਨਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸਰਲ ਅਕਾਰਬਨਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਰਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੁਆਰਾ ਮੁੜ ਉਪਯੋਗ ਵਿੱਚ ਲਿਆਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਜੈਵ ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਪਦਾਰਥ ਜੋ ਜੈਵਿਕ ਪ੍ਰਮਾਂ ਦੁਆਰਾ ਅਪਘਟਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਜੈਵ ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕੋਈ ਚਾਰ ਜੈਵ ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਬਜ਼ੀ-ਫਲਾਂ ਦੇ ਛਿੱਲਕੇ, ਕਾਗਜ਼, ਭੂਸਾ, ਚਾਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਜੈਵ ਅਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਪਦਾਰਥ ਜੋ ਜੈਵਿਕ ਪ੍ਰਮਾਂ ਦੁਆਰਾ ਅਪਘਟਿਤ ਨਹੀਂ ਹੋ ਪਾਉਂਦੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਜੈਵ ਅਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਜੈਵ ਅਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਦੋ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਪਲਾਸਟਿਕ
  2. ਕੱਚ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੇ ਅਜੈਵ ਕਾਰਕਾਂ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਤਾਪ, ਵਰਖਾ, ਹਵਾ, ਮਿੱਟੀ, ਖਣਿਜ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਕੁਦਰਤੀ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੰਗਲ, ਤਾਲਾਬ, ਝੀਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਉਤਪਾਦਕ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਤਪਾਦਕ – ਜੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਸੰਸ਼ਲੇਸ਼ਣ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਸੂਰਜ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਤੇ ਕਲੋਰੋਫਿਲ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿਚ ਅਕਾਰਬਨਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਕਾਰਬਨਿਕ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉਤਪਾਦਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਖਪਤਕਾਰ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੋ ਜੀਵ ਭੋਜਨ ਦੇ ਲਈ ਸਿੱਧੇ ਜਾਂ ਅਸਿੱਧੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਉਤਪਾਦਨਾਂ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਖਪਤਕਾਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਖਪਤਕਾਰ ਦੇ ਚਾਰ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਮਨੁੱਖ
  2. ਸ਼ੇਰ
  3. ਬਾਂਦਰ
  4. ਚਿੜੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਸੂਖਮਜੀਵਾਂ ਨੂੰ ਅਪਮਾਜਕ ਜਾਂ ਨਿਖੇੜਕ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਖ਼ਮਜੀਵ ਗੁੰਝਲਦਾਰ ਕਾਰਬਨਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸਰਲ ਅਕਾਰਬਨਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿਚ ਬਦਲ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਚਲੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮੁੜ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਰਤੀ ਤੇ ਮਿਲਨ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤਰ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਜੀਵ ਜੰਤੂ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਮਿਲ ਕੇ ਮੰਡਲ ਕਹਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਘਟਕ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੀਵ ਘਟਕ ਅਤੇ ਅਜੀਵ ਘਟਕ ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਦੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਘਟਕ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਸਰਬ-ਆਹਾਰੀ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਜੀਵ ਜੋ ਭੋਜਨ ਦੇ ਲਈ ਪੌਦੇ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੋਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਰਬ-ਆਹਾਰੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਮਨੁੱਖ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਕਿਸੇ ਜਲੀ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਦਾ ਉਦਾਹਰਨ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਈ ਜਾਂ ਸ਼ੈਵਾਲ → ਛੋਟੇ ਜੰਤੂ → ਮੱਛੀ → ਵੱਡੀ ਮੱਛੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਕਿਸ ਨੂੰ ਵਧੇਰੇ ਊਰਜਾ ਉਪਲੱਬਧ ਹੋਵੇਗੀ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਨੂੰ ਜਾਂ ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਨੂੰ ?
ਉੱਤਰ-
ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ ਨੂੰ ਮਾਸਾਹਾਰੀ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵਧੇਰੇ ਊਰਜਾ ਉਪਲੱਬਧ ਹੋਵੇਗੀ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਜੈਵ ਯੌਗਿਕੀਕਰਨ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੀਵਾਣੂਆਂ ਅਤੇ ਸ਼ੈਵਾਲ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੇ ਗਏ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਸਥਿਰੀਕਰਨ ਨੂੰ ਜੈਵ ਯੌਗਿਕੀਕਰਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਜੈਵ-ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਫੋਕਟ ਪਦਾਰਥ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੈਵ-ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਫੋਕਟ ਪਦਾਰਥ-ਅਜਿਹਾ ਫੋਕਟ ਪਦਾਰਥ ਜਿਹੜਾ ਜੈਵਿਕ ਪ੍ਰਮਾ ਦੁਆਰਾ ਅਪਘਟਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਅਜਿਹਾ ਫੋਕਟ ਪਦਾਰਥ ਜੀਵਾਣੁਆਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਜੀਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਐਂਜ਼ਾਈਮਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਸਮੇਂ ਦੇ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਆਪ ਅਪਘਟਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Objective Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜੇ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਕੇਵਲ ਜੈਵ-ਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਹਨ-
(a) ਘਾਹ, ਫੁੱਲ ਅਤੇ ਚਮੜਾ
(b) ਘਾਹ, ਲੱਕੜੀ ਅਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ
(c) ਫਲਾਂ ਦੇ ਛਿੱਲੜ, ਕੇਕ ਅਤੇ ਨਿੰਬੂ ਦਾ ਰਸ
(d) ਕੇਕ, ਲੱਕੜੀ ਅਤੇ ਘਾਹ ।
ਉੱਤਰ-
(a), (c) ਅਤੇ (d) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਹੇਠ ਦਿੱਤਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜੇ ਭੋਜਨ-ਲੜੀ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ-
(a) ਘਾਹ, ਕਣਕ ਅਤੇ ਅੰਬ
(b) ਘਾਹ, ਬੱਕਰੀ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ
(c) ਬੱਕਰੀ, ਗਾਂ ਅਤੇ ਹਾਥੀ
(d) ਘਾਹ, ਮੱਛੀ ਅਤੇ ਬੱਕਰੀ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਘਾਹ, ਬੱਕਰੀ ਅਤੇ ਮੁਨੱਖ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਬਲੀ ਪਰਿਸਥਿਤਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਉਤਪਾਦਕ ਹੈ –
(a) ਘਾਹ
(b) ਟਿੱਡਾ
(c) ਡੱਡੂ
(d) ਸੱਪ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਘਾਹ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਜੈਵ-ਅਵਿਘਟਨਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਹੈ-
(a) ਕਾਗਜ਼
(b) ਮਿਤ ਪੌਦੇ
(c) ਪਾਲੀਥੀਨ
(d) ਕੱਚੇ ਫਲ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਪਾਲੀਥੀਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਵਿਚ ਊਰਜਾ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਹੈ-
(a) ਹਵਾ
(b) ਸੂਰਜ
(c) ਪੌਦੇ
(d) ਪਰਮਾਣੂ ਊਰਜਾ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਸੂਰਜ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਜੀਵ-ਮੰਡਲ ਵਿਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੈ-
(a) ਵਾਯੂਮੰਡਲ
(b) ਥਲਮੰਡਲ
(c) ਜਲਮੰਡਲ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਵਾਯੂਮੰਡਲੀ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਦਾ ਸਥਿਰੀਕਰਨ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਹੈ-
(a) ਰਾਈਜ਼ੋਬੀਅਮ
(b) ਈ. ਕੋਲਾਈ
(c) ਨਾਈਟਰੋਸੋਮੋਨਾਸ
(d) ਨੀਲੇ ਹਰੇ ਸ਼ੈਵਾਲ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਈ. ਕੋਲਾਈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 15 ਸਾਡਾ ਵਾਤਾਵਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਕਲੋਰੋ-ਫਲੋਰੋ ਕਾਰਬਨਜ਼ (CFCs) ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(a) ਰੇਫਰੀਜਰੇਟਰ ਵਿੱਚ
(b) ਏਅਰ ਕੰਡੀਸ਼ਨਰ ਵਿੱਚ
(c) ਗੱਦੇਦਾਰ ਫੋਮ ਵਿੱਚ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ।

ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰਨਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ-ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ :

(i) ……………… ਜੈਵ ਅਤੇ ਅਜੈਵ ਘਟਕਾਂ ਦੇ ਪੁਰਨ ਤਾਲਮੇਲ ਨਾਲ ਬਣੀ ਵਿਵਸਥਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੀਵ ਮੰਡਲ

(ii) ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ………………….. ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਸਾਰੇ ਜੀਵ ਖਪਤਕਾਰ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਤਪਾਦਕ

(iii) ਕਿਸੇ ਵੀ ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪਹਿਲਾ ਪੋਸ਼ੀ ਸਤਰ ………………. ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਹਰੇ ਪੌਦੇ

(iv) ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਭੋਜਨ ਲੜੀਆਂ …………………. ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੌਦਿਆਂ

(v) ……………… ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਮ੍ਰਿਤ ਜੀਵਾਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਨੂੰ ਸਰਲ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਤੋੜ ਕੇ ਅਪਣਾ ਭੋਜਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਪਘਟਕ ।

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

Punjab State Board PSEB 3rd Class Maths Book Solutions Chapter 6 Shapes Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Maths Chapter 6 Shapes

PAGE 137:

Do you remember?

Question 1.
A joker is given below. Colour it according to given guidelines and count the figures:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 1

Solution.
Do yourself.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

See the picture and write:

Question 1.
Number of triangles = ____
Solution.
7

Question 2.
Number of rectangles = ____
Solution.
5

Question 3.
Number of squares = ____
Solution.
4

Question 4.
Number of circles = ____
Solution.
13

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

PAGE 138:

Question 2.
Count and write faces, vertices and edges of the figure gIven below:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 2

Solution.
Faces = 6
Vertices = 8
Edges = 12

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

Question 3.
Name the shapes of the different figures:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 3

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 4

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

Question 4.
Count the triangles:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 5

Solution.
10

PAGE 141:

Question 1.
Form shapes by joining the dots of the dot grid given below:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 6

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 7

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

Question 2.
Join the counting and make the shape:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 8

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 9

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

PAGE 143:
Let’s do:

Question 1.
Write the sides and vertices of the following 2-D shapes:

(a)
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 10

Solution.
Sides = 4
Vertices = 4

(b)
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 11

Solution.
Sides = 5
Vertices = 5

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

(c)
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 12

Solution.
Sides = 7
Vertices = 7

(d)
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 13

Solution.
Sides = 10
Vertices = 10

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

Question 2.
Draw the diagonals in the following figures:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 14

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 15

PAGE 145:
Let’s do:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 16

Question 1.
How many triangles are there in your tangram?
Solution.
There are five triangles in my tangram.

Question 2.
Make the following shapes by using pieces of tangram.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 17

Solution.
Draw the following figures by using your tangram.

Question 3.
Try to know that which edge is equal in piece number 2 and 4.
Solution.
Left side of piece number (2) and base of piece number (4) are equal.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

PAGE 147:

Question 1.
Here, we have two tiles. There are two designs infront of them. Match the design with tile from which it was made.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 18

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 19

PAGE 148:

Question 2.
Cover the following area with shown tiles and colour them.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 20

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 21

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes

Multiple Choice Questions:

Question 1.
Name the figure PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 22
(a) Cube
(b) Cuboid
(c) Cone
(d) Cylinder
Solution.
(b) Cuboid.

Question 2.
In the given figure DC is a _______

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 6 Shapes 23

(a) Ray
(b) Line
(c) Point
(d) Line Segment.
Solution.
(d) Line Segment.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Punjab State Board PSEB 3rd Class Maths Book Solutions Chapter 5 Money (Currency) Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Maths Chapter 5 Money (Currency)

PAGE 120:

Do you remember?

Question 1.
Add the amount of coins :

(a)
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 1

Solution.
17

(b)
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 2

Solution.
25

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Question 2.
Convert the given amount into coins.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 3

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 4

PAGE 125:
Let’s do:

Question 1.
Mark > or < between two coins:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 5

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 6

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

PAGE 126:
Let’s do:

Prepare coins:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 7

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 8

PAGE 128:
Let’s do:

Make currency flotes or coins for the given article:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 9

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 10

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 11

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

PAGE 131:
Let’s do:

Addition of Money:

Question 1.
Kamal bought balloons for ₹ 40. Lovepreet bought balloons for ₹ 33. How much amount did they spend together to buy these balloons ?

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 12

Solution.
Kamal spent on balloons for = ₹ 40
Lovepreet spent on.balloons for = ₹ 33
Total amount of money spent = ₹ 40

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 13

Therefore, amount they spent on balloon = ₹ 73

Question 2.
Honey had ₹ 36 in his money bank. He put ₹ 23 more into it. How much amount is in Honey’s money bank now?

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 15

Solution.
Amount in Honey’s money bank = ₹ 36 9
More amount Honey put in money bank = ₹ 23
Total amount of money in Honey’s money bank = ₹ 59

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 14
Thus amount in Honey’s money bank = ₹ 59

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

PAGE 132:
Let’s do:

Subtraction of Money:

Question 1.
Meena had ₹ 85. She bought a geometry box for ₹ 35. How much money is left with her ?
Solution.
Amount of money Meena has = ₹ 85
Cost of geometry box = ₹ 35
Amount of money left with Meena = ₹ 50

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 16

Therefore, ₹ 50 left with Meena.

Question 2.
Jagveer had ₹ 77. He bought a chocolate for ₹ 15. How much money is left with him ?
Solution.
Money Jagveer had = 177
Cost of a chocolate = ₹ 15
Amount of money left with Jagveer = ₹ 62

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 17

Therefore, ₹ 62 left with Jagveer.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Question 3.
Nazia had ₹ 66. She bought a pen for ₹ 12. How much money does she have now ?
Solution.
Amount of money Nazia had = ₹ 66
Cost of a pen = ₹ 12
Amount of money, left with Nazia = ₹ 54

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 18

Therefore Nazia has ₹ 54 now.

PAGE 133:
Let’s Learn:

Bill amount of cash memo:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 19

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Let’s see how much she paid the bill ?

Let’s do:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 20

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 21

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

PAGE 134:

Worksheet:

Question 1.
Convert rupees into paise :
(a) ₹ 9 = ________
Solution.
900 paise

(b) ₹ 6 = ________
Solution.
600 paise

(c) ₹ 2 = ________
Solution.
200 paise

d) ₹ 8 = ________
Solution.
800 paise

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Question 2.
Add:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 24

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 22

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Question 3.
Sutract:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 23

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 25

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Question 4.
Count and write :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 26

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 27

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Multiple Choice Questions:

Question 1.
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 28 = ________ paise.
(a) 100
(b) 200
(c) 400
(d) 500
Solution.
(d) 500

Question 2.
PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 29 = ________ paise
(a) 100
(b) 200
(c) 300
(d) 400
Solution.
(b) 200

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency)

Question 3.
Add the values of coins:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 5 Money (Currency) 30

(a) 10
(b) 15
(c) 17
(d) 20
Solution.
(c) 17

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 6 कीमत मांग की लोच

PSEB 11th Class Economics कीमत मांग की लोच Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
माँग की कीमत लोच से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
वस्तु की कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप उसकी माँग में आने वाले परिवर्तन के अनुपात को माँग की कीमत लोच कहते हैं।
अथवा
कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा माँग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के माप को माँग की कीमत लोच कहते हैं।

प्रश्न 2.
माँग की लोच से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
माँग को प्रभावित करने वाले संख्यात्मक तत्वों में परिवर्तन के फलस्वरूप माँग की मात्रा में आने वाले परिवर्तन के माप को माँग की लोच कहते हैं।

प्रश्न 3.
कीमत माँग की लोच इकाई के बराबर कब होती है ?
उत्तर-
जब माँग तथा कीमत में समान अनुपात से परिवर्तन होता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 4.
पूर्णतः लोचदार माँग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
पूर्णतः लोचदार माँग में प्रचलित कीमतों पर माँग अनन्त होती है।

प्रश्न 5.
पूर्णतः लोचदार माँग वक्र बनाएँ।
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 1

प्रश्न 6.
पूर्णतः बेलोचदार माँग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
पूर्णतः बेलोचदार माँग में कीमत में परिवर्तन होने पर माँग में कोई परिवर्तन नहीं होता।

प्रश्न 7.
पूर्णतः बेलोचदार माँग वक्र बनाएँ।
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 2

प्रश्न 8.
पूर्णतः लोचदार माँग कब होती है ?
उत्तर-
पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति में एक फ़र्म की माँग पूर्णतः लोचदार होती है।

प्रश्न 9.
इकाई लोचदार माँग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के बराबर माँग में प्रतिशत परिवर्तन हो तो इस स्थिति को इकाई लोचदार माँग कहते हैं।

प्रश्न 10.
जिन वस्तुओं की हम को आदत पड़ जाती है, उन वस्तुओं की लोच कैसी होती है ?
उत्तर-
इन वस्तुओं की माँग की लोच इकाई से कम होती है।

प्रश्न 11.
माँग की कीमत लोच के माप के सूत्रों के नाम लिखो।
उत्तर-

  • आनुपातिक विधि
  • कुल व्यय विधि
  • ज्यामितिक विधि अथवा बिंदु लोच विधि।

प्रश्न 12.
आनुपातिक विधि का सूत्र लिखें।
उत्तर-
\(\Sigma d=(-) \frac{\mathrm{P}}{\mathrm{Q}} \times \frac{\Delta \mathrm{Q}}{\Delta \mathrm{P}}\)

प्रश्न 13.
किसी वस्तु की कीमत ₹ 10 से बढ़कर ₹ 20 हो जाती है, परन्तु उस वस्तु की माँग में कोई परिवर्तन नहीं होता, तो इस वस्तु की माँग की लोच किस प्रकार की है ?
उत्तर-
माँग की लोच इकाई से कम है (Σd < 1).

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 14.
कीमत मांग की लोच (ed) = ………..
उत्तर-
कीमत मांग की लोच (ed) = (-) \(\frac{\Delta D}{\Delta P} \times \frac{P}{D}\)

प्रश्न 15.
प्रतिशत विधि अनुसार कीमत मांग की लोच (ed) = ……
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 3

प्रश्न 16.
वस्तु की मांग तथा कीमत में होने वाले आनुपातिक परिवर्तन को आय मांग की लोच कहते हैं।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 17.
कीमत में परिवर्तन होने पर मांग में उन्नत परिवर्तन हो जाता है तो इस को ……………. कहते है।
(a) पूर्ण लोचदार मांग
(b) पूर्ण बेलोचदार मांग
(c) इकाई लोचदार मांग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) पूर्ण लोचदार मांग।

प्रश्न 18.
कीमत में परिवर्तन होने से मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता तो इसको ……… कहते हैं।
(a) पूर्ण लोचदार मांग
(b) पूर्ण बेलोचदार मांग
(c) इकाई से कम लोचदार मांग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) पूर्ण बेलोचदार मांग।

प्रश्न 19.
कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के बराबर मांग में प्रतिशत परिवर्तन हो तो इस को …… कहते हैं।
(a) पूर्ण लोचदार मांग
(b) इकाई से अधिक लोचदार मांग
(c) इकाई से कम लोचदार मांग
(d) इकाई लोचदार मांग।
उत्तर-
(d) इकाई लोचदार मांग।

प्रश्न 20.
कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन की अपेक्षा मांग में प्रतिशत परिवर्तन अधिक होता है तो इसको …….. कहते हैं।
(a) इकाई से अधिक लोचदार मांग
(b) पूर्ण लोचदार मांग
(c) इकाई से कम लोचदार मांग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) इकाई से अधिक लोचदार मांग।

प्रश्न 21.
कीमत में वृद्धि तथा कमी होने पर मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता तो इसको शून्य मांग की कीमत लोच कहते हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 22.
जब वस्तु की कीमत में थोड़ी सी वृद्धि होने पर उसकी मांग शून्य हो जाती है तो इसको इकाई मांग की लोच कहा जाता है।
उत्तर-
गलत।

प्रश्न 23.
वस्तु की कीमत लोच वह माप है जो वस्तु की कीमत में होने वाले % परिवर्तन के फलस्वरूप मांग में होने वाले % परिवर्तन को प्रकट करता है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 24.
किसी वस्तु की मांग के विभिन्न तत्वों में से किसी में भी % परिवर्तन होने के फलस्वरूप वस्तु की मांग में होने वाले % परिवर्तन को कीमत मांग की लोच कहा जाता है।
उत्तर-
ग़लत।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 25.
किसी वस्तु की मांग के विभिन्न तत्वों में से किसी में भी प्रतिशत परिवर्तन होने के फलस्वरूप वस्तु की मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन को मांग की लोच कहा जाता है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 26.
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 4
उत्तर-
कीमत मांग की लोच। ।

प्रश्न 27.
किसी वस्तु की कीमत में 50% परिवर्तन होने से मांग में 25% परिवर्तन हो जाता है। कीमत मांग की लोच ज्ञात करें।
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 5
= \(\frac{25 \%}{50 \%}=\frac{1}{2}\)
∴ Ed < 1

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कीमत मांग की लोच का अर्थ बताओ।
उत्तर-
कीमत मांग की लोच, कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात होता है। मांग की लोच में कीमत तथा मांग के बीच वाले सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है। जब किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होता है तो मांग जिस दर पर परिवर्तित होती है, उस दर को मांग की लोच कहा जाता है।

प्रश्न 2.
पूर्ण लोचशील मांग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
पूर्ण लोचशील मांग-जब कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता, परन्तु मांग में परिवर्तन बहुत अधिक होता है अर्थात् मांग असीमित गुणा बढ़ जाती है अथवा कई गुणा कम हो जाती है तो इस स्थिति में मांग को पूर्ण लोचशील कहा जाता है। रेखाचित्र 3 में कीमत OP रहती है, जिस पर मांग शून्य की जाती है अथवा OM अथवा OM1 की जाती है अर्थात् इस कीमत पर मांग में कई गुणा (α) वृद्धि हो जाती है। इसको पूर्ण लोचशील मांग कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 6

प्रश्न 3.
अधिक लोचशील मांग का अर्थ स्पष्ट करो।
उत्तर-
किसी वस्तु की मांग को अधिक लोचशील कहा जाता है, जब कीमत में थोड़ा-सा परिवर्तन होता है, परन्तु मांग में परिवर्तन बहुत अधिक हो जाता है। जैसे कि कीमत में परिवर्तन 1% होता है तथा मांग में परिवर्तन 5% हो जाए तो इसको अधिक लोचशील मांग कहा जाता है। रेखाचित्र में इकाई के समान लोचशील मांग दिखाई गई है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 7

प्रश्न 4.
पूर्ण अलोचशील मांग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मांग की लोच को पूर्ण अलोचशील कहा जाता है, जब कीमत में परिवर्तन जितना मर्जी हो जाए, परन्तु मांग में कोई परिवर्तन न हो। जब कीमत शून्य (0) होती है तो भी मांग उतनी ही की जाती है तथा कीमत के बढ़ने से मांग समान रहती है। इसको पूर्ण अलोचशील मांग कहते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 8

प्रश्न 5.
प्रतिशत विधि द्वारा मांग की लोच का मापने का सूत्र बताएं।
उत्तर-
प्रतिशत विधि द्वारा मांग की लोच का निम्नलिखित सूत्र द्वारा माप किया जाता हैकीमत मांग की लोच (Ed) =- \(\left(\frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q}\right)\)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 9

प्रश्न 6.
एक उपभोगी ₹ 5 प्रति इकाई कीमत पर वस्तु की 20 इकाइयों की मांग करता है, जब कीमत में 50% कमी हो जाती है, तो मांग बढ़ कर 40 इकाइयां हो जाती हैं। कीमत मांग की लोच ज्ञात करें।
उत्तर-
मौलिक मांग = 20
इकाइयां कीमत कम होने पर मांग = 40 इकाइयां
कीमत कम होने पर मांग में परिवर्तन = 40 – 20 = 20 इकाइयां
20 इकाइयों पर वृद्धि = 20
1 इकाई पर वृद्धि = \(\frac{20}{20}\)
100 इकाइयों पर वृद्धि = \(\frac{20}{20} \times 100\) = 100%
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 10
Ed => 1.

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 7.
कीमत मांग की लोच 2 है कीमत में प्रतिशत परिवर्तन 10% है मांग की मात्रा में परिवर्तन ज्ञात करें।
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 11
∴ मांग में प्रतिशत परिवर्तन = 2 × = 10% = 20% उत्तर

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कीमत मांग की लोच के महत्त्व को स्पष्ट करो। (Explain the Importance of Elasticity of Demand.)
उत्तर-
कीमत मांग की लोच के महत्त्व को निम्नलिखित अनुसार स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. कर नीति-वित्त मंत्री कर नीति निश्चित करते समय उस वस्तु की मांग की लोच को ध्यान में रखते हैं। जिस वस्तु की मांग की लोच इकाई से कम होगी, उस वस्तु पर कर की मात्रा कम लगाई जाती है।
  2. जनतक सेवाएं-जो वस्तुएं राष्ट्र के लोगों के लिए अनिवार्य होती हैं, उनकी मांग की लोच इकाई से कम होती है। जैसे कि पानी, बिजली, खाना बनाने वाली गैस इत्यादि वस्तुओं की कीमतें कम निश्चित की जाती हैं, क्योंकि यह वस्तुएं लोगों की भलाई में वृद्धि करती हैं। यदि जनतक सेवाओं की कीमत बहुत अधिक बढ़ा दी जाती है तो मांग में ज्यादा कमी नहीं होती।
  3. उत्पादन के साधनों का मेहनताना-मांग की लोच उत्पादन के साधनों को दिए जाने वाले मुआवजे की मात्रा निश्चित करने में भी सहायक होती है। यदि किसी उद्योग में मशीनों का प्रयोग नहीं किया जा सकता, ऐसी स्थिति में मज़दूरों का महत्त्व अधिक होगा। मजदूरों की मांग लोच इकाई से कम होगी, इस कारण उद्यमी मज़दूरों को अधिक मज़दूरी देने के लिए तैयार होंगे।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्त्व-मांग की लोच द्वारा विभिन्न राष्ट्रों के बीच अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की शर्ते निश्चित की जाती हैं, जैसे कि दुनिया में अरब के देशों में पेट्रोल प्राप्त होता है। यह देश-विदेशों को पेट्रोल अथवा मिट्टी का तेल निर्यात करते हैं। एकाधिकार होने के कारण तेल तथा पेट्रोल की मनमानी कीमत ली जाती है। इन वस्तुओं की मांग की लोच इकाई से कम होती है।

प्रश्न 2.
मांग की लोच का माप करने के लिए आनुपातिक विधि की व्याख्या करो।
उत्तर-
आनुपातिक विधि-मांग की लोच का माप करने के लिए इस विधि का निर्माण मार्शल (Marshal) द्वारा किया गया था। उन्होंने मांग की लोच का माप करने के लिए निम्नलिखित सूत्र दिया-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 12
यहां ΔQ = 1; Q = 4, ΔP = -2, P=4
E = Ed = \(\frac{\frac{-1}{4}}{\frac{-2}{4}}=\frac{-1}{4} \times \frac{4}{-2}=\frac{1}{2} \mathrm{Ed}<1\)
जहां जवाब एक से कम बचता है तो मांग की लोच इकाई से कम होती है। यदि जवाब एक बचता हो तो मांग की लोच इकाई के समान तथा यदि एक से अधिक बचता हो तो मांग की लोच इकाई से अधिक होगी।

प्रश्न 3.
रेखाचित्र की सहायता से मांग की मान्यताओं को स्पष्ट करो।
उत्तर-
रेखाचित्र 6 अनुसार, मांग की मान्यताएं निम्नलिखित हैं :
1. पूर्ण लोचशील मांग-मांग पूर्ण लोचशील होती है, जब कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता, परन्तु मांग बहुत अधिक अथवा कम हो जाती है। इस स्थिति में मांग की लोच (Ed = α) अनन्त होती है, जैसे DD1 द्वारा दिखाया है।
2. अधिक लोचशील मांग-कीमत में कम परिवर्तन होता है, परन्तु मांग में अधिक मात्रा में परिवर्तन हो जाता है तो इसको अधिक लोचशील मांग (Ed > 1) कहा जाता है, जैसे D2 द्वारा दिखाया है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 13
3. इकाई लोचशील मांग-कीमत में परिवर्तन तथा मांग में परिवर्तन एक समान होता है तो मांग की लोच इकाई के समान (Ed = 1) होती है, जैसे D3 द्वारा दिखाया है।
4. कम लोचशील मांग-कीमत में अधिक परिवर्तन होने के साथ-साथ मांग में कम दर पर परिवर्तन होता है तो मांग की लोच (Ed < 1) इकाई से कम होती है, जैसे D4 द्वारा दिखाया है।
5. पूर्ण अलोचशील मांग-कीमत में परिवर्तन होने के साथ मांग में कोई परिवर्तन न हो तो मांग पूर्ण बेलोचशील (Ed = 0) होती है। जैसे D5 द्वारा दिखाया है।

प्रश्न 4.
कीमत मांग की लोच
(a) शून्य (0)
(b) इकाई (1)
(c) अनन्त (α) को रेखाचित्रों द्वारा स्पष्ट करो।
उत्तर
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 14

  • रेखाचित्र 7 (a) में मांग पूर्ण अलोचशील है। इसलिए Ed = 0
  • रेखाचित्र 7 (b) में मांग रैकटेंगुलर हाइपर बोला है। इसके प्रत्येक बिन्दु पर Ed = 1 होती है।
  • रेखाचित्र 7 (c) में मांग पूर्ण अलोचशील है, इसलिए मांग की लोच (Ed = α) अनन्त होगी।

प्रश्न 5.
जब दो मांग वक्र एक-दूसरे को काटते हैं तो काटने वाले बिन्दु पर जो मांग वक्र अधिक चपटी होगी, उतनी ही उस वक्र पर मांग की लोच अधिक होगी। रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करो।
उत्तर-
जब दो मांग वक्र D1D1 तथा D2D2 एक दूसरे को A बिन्दु पर काटते हैं तो OP कीमत पर मांग OQ हो जाती है। अब मान लो कीमत PP1 कम हो जाती है तो इस कीमत पर D1D1 द्वारा मांग OQ1 हो जाती है, जबकि D2D2 पर मांग OQ2 की जाती है :
D1D1 पर मांग की लोच –
Ed = \(\frac{\frac{\mathrm{QQ}_{1}}{\mathrm{OQ}}}{\frac{\mathrm{PP}_{1}}{\mathrm{OP}}}\)
D2D2 पर मांग की लोच
Ed = \(\frac{\frac{\mathrm{QQ}_{2}}{\mathrm{OQ}}}{\frac{\mathrm{PP}_{1}}{\mathrm{OP}}}\)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 15
कीमत में परिवर्तन PP1 मौलिक कीमत OP1 मौलिक मांग OQ दोनों स्थितियों में समान है, परन्तु मांग में परिवर्तन QQ2 जोकि D2D 2 पर है, QQ1 के परिवर्तन से अधिक है। इसलिए D2D2, पर D1D1 से मांग की लोच अधिक है। स्पष्ट है कि जो मांग वक्र चपटी होगी, उस पर मांग की लोच अधिक होगी।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कीमत मांग की लोच से क्या अभिप्राय है ? कीमत मांग की लोच के माप की प्रतिशत विधि माप स्पष्ट करो ।
उत्तर-
कीमत मांग की लोच (Price Elasticity of Demand)-प्रो० मार्शल अनुसार, “कीमत मांग की लोच, कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन की अनुपात होती है।” (“Price Elasticity of Demand is the ratio of percentage change in quantity demanded to a percentage change in Price.” – Marshall)

मांग की लोच से यह ज्ञात होता है कि वस्तु की प्रतिशत कीमत बढ़ने से मांग में कितने प्रतिशत कमी होगी। मांग की लोच से परिवर्तन की दर का पता चलता है, जबकि मांग का नियम कीमत तथा मांग की दिशा का ज्ञान होता है।
कीमत मांग की लोच का माप (Measurement of Price Elasticity of Demand)-मांग की लोच के माप की प्रतिशत विधि इस प्रकार है –
प्रतिशत विधि (Percentage Method)
अथवा
आनुपातिक विधि (Proportionate Method)-मांग की लोच का माप प्रतिशत अथवा आनुपातिक विधि द्वारा किया जा सकता है। इसको स्पष्ट करने के लिए मार्शल ने निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 16
= (-) \(\frac{\Delta \mathrm{Q}}{\mathrm{Q}} \times \frac{\mathrm{P}}{\Delta \mathrm{P}}=(-) \frac{\Delta \mathrm{Q}}{\Delta \mathrm{P}} \times \frac{\mathrm{P}}{\mathrm{Q}}\)
उदाहरणस्वरूप :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 17
इसमें
ΔQ = 4-3 = 1 Q = 4 .
ΔP = 4-8 = -4
P = 4
Ed = –\( \) ==
मांग की लोच इकाई से कम है।
आवश्यक नोट-मांग की लोच के सूत्र के आगे (-) चिह्न लगाया जाता है। इसका कारण यह होता है कि कीमत अथवा मांग में से एक मद ऋणात्मक होती है। जब आगे ऋणात्मक चिह्न लगाया जाता है तो मांग की लोच धनात्मक हो जाती है।

प्रश्न 2.
मांग की कीमत लोच का अर्थ बताओ। कीमत मांग की लोच की मात्राएं स्पष्ट करो।
(Explain the meaning of Elasticity of demand. Discuss the degrees of Elasticity of demand.)
उत्तर-
मांग की लोच (Elasticity of Demand) परिभाषाएं- प्रो० मार्शल के अनुसार, “कीमत मांग की लोच, कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात होता है।” (“Price Elasticity of Demand is the ratio or percentage change into quantity demanded to a percentage change in price.” – Marshall)

बोल्डिंग के अनुसार, “मांग की लोच वस्तु की कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप मांग में होने वाले परिवर्तन का अनुपात होता है।” इन परिभाषाओं के अध्ययन से हम यह कह सकते हैं कि कीमत मांग की लोच के अधीन कीमत तथा मांग में मात्रा वाले सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। कीमत में परिवर्तन के कारण मांग में जिस दर से परिवर्तन होता है, उस दर को कीमत मांग की लोच कहा जाता है।

कीमत मांग की लोच की मात्राएं (Degrees of Price Elasticity of Demand)-मांग की लोच की पूर्ण लोचशील मांग पाँच मात्राएं होती हैं :
1. पूर्ण लोचशील मांग-जब कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता, परन्तु मांग में परिवर्तन बहुत अधिक होता है अर्थात् मांग असीमित गुणा बढ़ जाती है अथवा कई गुणा कम हो जाती है तो इस स्थिति में मांग को पूर्ण लोचशील कहा जाता है।
रेखाचित्र 9 में कीमत OP रहती है, जिस पर मांग शून्य की जाती है अथवा OM अथवा OM1 की जाती है अर्थात् इस कीमत पर मांग में कई गुणा (α) वृद्धि हो जाती है। इसको पूर्ण लोचशील मांग कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 18

2. पूर्ण बेलोचशील मांग-मांग को पूर्ण बेलोचशील कहा जाता है, जब कीमत बहुत अधिक कम हो जाती है अथवा बहुत अधिक बढ़ जाती है, परन्तु वस्तु की मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता। रेखाचित्र 10 में दिखाया है कि मांग रेखा DM पूर्ण बेलोचशील है अर्थात् जब कीमत OP से बढ़कर OP1 अथवा घटकर OP2 होती है तो मांग OM में कोई परिवर्तन नहीं होता। इस स्थिति को पूर्ण बेलोचशील मांग कहा जाता है तथा कीमत मांग की लोच शून्य (Zero) होती
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 19

3. अधिक लोचशील मांग-जब कीमत में थोड़ेसे परिवर्तन से मांग में परिवर्तन अधिक दर पर होता है तो इसको अधिक लोचशील मांग कहा जाता है। उदाहरण स्वरूप कीमत में परिवर्तन 10% होता है तथा मांग में परिवर्तन 50% हो जाए तो कीमत में परिवर्तन की दर से मांग में परिवर्तन की दर अधिक है। इसको अधिक लोचशील मांग कहा जाता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 21
रेखाचित्र 11 में दिखाया गया है कि जब कीमत में परिवर्तन PP1, 10% होता है तो मांग में परिवर्तन MM, 50% हो जाता है।
MM1 > PP1
मांग में परिवर्तन MM1 कीमत में परिवर्तन PP1 से अधिक है। इस स्थिति में मांग वक्र DD को अधिक लोचशील कहा जाता है।

4. समान लोचशील मांग-मांग की लोच इकाई के समान होती है, जब कीमत में परिवर्तन से मांग में परिवर्तन उसी दर पर हो जाता है, जैसे कि कीमत में 10% परिवर्तन होता है तथा मांग में भी 10% परिवर्तन हो जाता है तो इसको मांग की लोच इकाई के समान कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 22
E= \(\frac{10 \%}{10 \%}\) = 1
E = 1 रेखाचित्र 12 में दिखाया गया है कि कीमत में परिवर्तन PP, 10% मांग में परिवर्तन MM, के समान है तो इस स्थिति को मांग की लोच इकाई के समान कहा जाता है।
कम लोचशील मांग MM1 = PP1
मांग में परिवर्तन MM,, कीमत में परिवर्तन PP, के समान है। इसको मांग की लोच इकाई के समान कहा जाता है।

5. कम लोचशील मांग-जिस समय मांग में परिवर्तन की दर, कीमत में परिवर्तन से कम होती है, इसको कम लोचशील मांग कहा जाता है। उदाहरण स्वरूप कीमत में 50% कमी हो जाती है, परन्तु मांग में वृद्धि होती है। इसको इकाई से कम लोचशील मांग कहा जाता है। MM1 < PP1 रेखाचित्र 13 मांग में परिवर्तन MM1 कीमत में परिवर्तन PP1 से कम है। इसलिए मांग कम लोचशील हैं। जैसा कि रेखाचित्र 13 में दिखाया गया है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 23

6. रैकटेंगुलर हाइपरबोला-यह एक विशेष तरह की स्थिति होती है, जब मांग वक्र के सभी बिन्दुओं पर मांग की लोच इकाई के समान होती है। इस स्थिति में प्रत्येक बिन्दु पर चतुर्भुज का क्षेत्र एक-दूसरे के समान होता है। रेखाचित्र 14 में D1D1 मांग वक्र पर A, B, C, D बिन्दुओं पर सभी चतुर्भुजों का क्षेत्रफल एक-दूसरे के समान है। इसलिए D1D1 मांग वक्र के प्रत्येक बिन्दु पर मांग की लोच इकाई के समान है। इसलिए D1D1 वक्र को रैकटेंगुलर हाइपरबोला (Rectangular Hyperbola) कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 24

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 3.
कीमत मांग की लोच के निर्धारक तत्त्व बताओ। (Explain the determinants of Price Elasticity of Demand.)
अथवा
कीमत मांग की लोच को प्रभावित करने वाले तत्त्वों की व्याख्या करो। (Describe the factors affecting the magnitude of Price Elasticity of Demand.)
उत्तर-
मांग की लोच को प्रभावित करने वाले आर्थिक तथा अनआर्थिक तत्त्व होते हैं, परन्तु हम केवल आर्थिक तत्त्वों का ही अध्ययन करते हैं : –
1. वस्तु की प्रकृति-किसी वस्तु की मांग की लोच वस्तु की प्रकृति पर निर्भर करती है। अनिवार्य वस्तुओं की स्थिति की मांग की लोच इकाई से कम होगी। जैसे कि अनाज, कपड़ा, माचिस, अखबार इत्यादि अनिवार्य वस्तुओं की कीमत बहुत अधिक बढ़ जाए तो मांग में ज्यादा परिवर्तन नहीं होता। इसी तरह विलासिता वस्तुएं जैसे कि कार, हीरे, कीमती फर्नीचर इत्यादि वस्तुओं की स्थिति में भी मांग की लोच इकाई से कम होती है।

2. स्थानापन्न वस्तुओं का भाव-यदि वस्तु का स्थानापन्न हो तो वस्तु की मांग की लोच इकाई से अधिक होगी। इसके विपरीत यदि वस्तु का स्थानापन्न न हो तो मांग की लोच इकाई से कम होगी। जिन वस्तुओं का स्थानापन्न नहीं होता, जैसे कि पेट्रोल, शराब, अफीम, बिजली इत्यादि उन वस्तुओं की मांग कम लोचशील होती है।

3. वस्तु के कई प्रयोग-यदि वस्तु के एक से अधिक प्रयोग हों तो उस वस्तु की मांग की लोच इकाई से अधिक होगी। उदाहरणस्वरूप दूध के एक से अधिक प्रयोग हो सकते हैं। दूध की कीमत थोड़ी-सी घटने से इसकी मांग बहुत बढ़ जाती है। क्योंकि लोग दूध का प्रयोग दही, पनीर, मक्खन, खीर, मिठाई इत्यादि वस्तुओं के लिए करने लगते हैं।

4. उपभोग का स्थगन-कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं, जिनके उपभोग को स्थगित किया जा सकता है अर्थात् आगे पाया जा सकता है। जैसे कि घड़ी, टेलीविज़न, जूते इत्यादि। ऐसी वस्तुओं की स्थिति में मांग कम लोचशील होती है।

5. आदतें-कुछ वस्तुएं उपभोक्ता की आदत बन जाती हैं। उन वस्तुओं की मांग इकाई से कम लोचशील होती है। जैसे कि शराब, अफीम, चाय, सिगरेट इत्यादि वस्तुओं की स्थिति में मांग कम लोचशील होगी। यदि इन वस्तुओं की कीमत बहुत बढ़ जाती है तो मांग में अधिक कमी नहीं होती।

6. कीमत का स्तर-जिन वस्तुओं की कीमत बहुत ऊंची अथवा बहुत नीची होती है तो कीमत में परिवर्तन होने से मांग में परिवर्तन अधिक नहीं होता। जैसे कि हीरे की कीमत ₹ 1 करोड़ है। यदि हीरे की कीमत बढ़कर ₹ 2 करोड़ हो जाए तो मांग में बहुत कमी नहीं होती, क्योंकि हीरा सिर्फ अमीर लोगों द्वारा ही खरीदा जाता है।

7. आय-जिन वस्तुओं का प्रयोग अमीर मनुष्य करते हैं, उन वस्तुओं की कीमत घटने से मांग में अधिक परिवर्तन नहीं होता। यदि अमीर लोगों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं की कीमत बहुत बढ़ जाती है तो मांग में अधिक कमी नहीं होती।

8. दिखावे की वस्तुएं-दिखावे की वस्तुओं की मांग की लोच इकाई से कम होती है, जैसे कि महंगी कार, महंगे कालीन, महंगे टेलीविज़न इत्यादि वस्तुओं की खरीद साधारण तौर पर अमीर ही करते हैं। यदि इन वस्तुओं की कीमत बढ़ जाए तो भी इन वस्तुओं की मांग में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता।

9. समय-समय भी मांग की लोच को निर्धारित करता है। अल्पकाल में साधारण तौर पर वस्तुओं की मांग की लोच इकाई से कम होती है। इसके विपरीत दीर्घकाल में मांग की लोच इकाई से अधिक होती है। क्योंकि दीर्घकाल में उपभोग वस्तु के प्रति अपनी आदत को परिवर्तित कर लेता है तथा वस्तु का नया स्थानापन्न ढूंढ़ा जा सकता है।

10. संयुक्त मांग-जिन वस्तुओं की मांग दूसरी वस्तुओं की मांग से सम्बन्धित होती है, उन वस्तुओं की मांग लोच साधारण तौर पर इकाई से कम होती है, जैसे कि कार की कीमत घटने से कार की मांग में बहुत वृद्धि नहीं होगी, यदि पेट्रोल की कीमत में कोई परिवर्तन न हो।

V. संरव्यात्मक प्रश्न (Numericals)

प्रश्न 1.
प्रतिशत विधि द्वारा मांग की लोच का सूत्र लिखो। मांग की लोच इकाई से अधिक, समान तथा कम की उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
प्रतिशत विधि द्वारा मांग की लोच का सूत्र निम्नलिखित अनुसार है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 25
= –\(\left\{\frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q}\right\}\)
उदाहरण :
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 26

प्रश्न 2.
आरम्भ में वस्तु की कीमत ₹ 10 थी तथा 1000 वस्तुओं की मांग थी। वस्तु की कीमत बदलकर ₹ 14 की गई तो वस्तु की मांग घटकर 500 वस्तुएं ही रह गईं। कीमत मांग की लोच का माप करो।
उत्तर-
Ed = (-) \(\frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q}\)
P = 10, Q = 1000, P1 = 14, Q1 = 500
ΔP = 14-10 = 4, ΔQ = 500-1000 = – 500
फार्मूले में रकमें भरने से Ed = (-) \(\frac{-500}{4} \times \frac{10}{1000}=-(-125) \times \frac{1}{100}=\frac{125}{100} \)
= 1.25 Ed > 1

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 3.
एक वस्तु की कीमत ₹8 प्रति इकाई पर मांग 600 इकाइयां की जाती हैं। इसकी कीमत 25% कम हो जाती है तथा मांग में वृद्धि 120 इकाइयां हो जाती है। मांग की लोच का माप करो।
उत्तर –
मौलिक कीमत = ₹8 (P = 8)
कीमत में कमी = 25%
∴ 8 x \(\frac{25}{100}\) = ₹ 2 (ΔP = -2)
नई कीमत = 8 – 2 = ₹ 6
मौलिक मांग = 600 इकाइयां (Q = 600)
मांग में परिवर्तन = 120 इकाइयां (ΔQ = 120)
Ed = –\(\frac{\Delta \mathrm{Q}}{\Delta \mathrm{P}} \times \frac{\mathrm{P}}{\mathrm{d}}\)
= – \(\frac{120}{-2} \times \frac{8}{600}\) = 0.8
∴ Ed <1

प्रश्न 4.
एक वस्तु की कीमत ₹ 15 प्रति वस्तु है तथा मांग 500 वस्तुओं की, की जाती है। जब कीमत 20% कम हो जाती है तो मांग 80 इकाइयां बढ़ जाती हैं। कीमत मांग की लोच का माप करो। क्या मांग कम लोचशील है ? उत्तर की पुष्टि करो।
उत्तर-
मांग की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन = \(\frac{80}{500}\) x 100 =16%
कीमत में प्रतिशत परिवर्तन = 20%
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 27
= \(\frac{16 \%}{20 \%}\) = 0.8
Ed < 1
उत्तर की पुष्टि- मांग की लोच को कम लोचशील कहा जाता है। यदि मांग की लोच इकाई (1) से कम होती है।

प्रश्न 5.
जब वस्तु की कीमत ₹ 20 प्रति इकाई से घटकर ₹ 16 प्रति इकाई हो जाती है तो इसकी मांग 1000 इकाइयों से बढ़कर 1160 इकाइयां हो जाती हैं। कीमत मांग की लोच का माप करो तथा उत्तर की पुष्टि करो।
उत्तर
Ed = (-) \(\frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q}\)
ΔQ = 1160-1000 = 160 ; ΔP = 16 – 20 = -4; Q = 1000 ; P = 20.
Ed = (-) \(\frac{160}{-4} \times \frac{20}{1000}\) = 0.8
Ed <1
उत्तर की पुष्टि-मांग की लोच इकाई से कम है, क्योंकि मांग की लोच इकाई (1) से कम है। .

प्रश्न 6.
वस्तु की कीमत ₹ 5 है तथा उपभोक्ता वस्तु की 10 इकाइयों की खरीद करता है। कीमत मांग की लोच = 2 है। यदि वस्तु की कीमत ₹ 4 प्रति वस्तु रह जाती है तो उपभोक्ता एक कीमत पर वस्तु की कितनी इकाइयों की खरीद करेगा ?
उत्तर-
Ed = \(\frac{(-) \Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q} \) अथवा \(\frac{Q_{1}-Q}{P_{1}-P} \times \frac{P}{Q}\)
दिया है : Ed = 2; Q1 = ? ; Q = 10 ; P = 5, P1 = 4
फार्मूले में मूल्य भरने पर :
2 = \(\frac{(-) Q_{1}-10}{4-5} \times \frac{5}{10}\)
2 = \(\frac{(-) Q_{1}-10}{-1} \times \frac{1}{2}=(-) \frac{Q_{1}-10}{2}\)
4 = – Q1 + 10
Q1 = 10 + 4 = 14 Units

प्रश्न 7.
कीमत मांग की लोच 2 है। कीमत में प्रतिशत परिवर्तन 5 है। मांग में प्रतिशत परिवर्तन का माप करो।
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 28

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच 29
मांग में प्रतिशत परिवर्तन = 2×5% = 10%

प्रश्न 8.
निम्नलिखित मांग वक्र पर कीमत मांग की लोच कितनी होगी?
(i) सीधी रेखा OX के समान्तर।
(ii) सीधी रेखा OY के समान्तर।
(iii) सीधी रेखा बाईं ओर से दाईं ओर नीचे की ओर जाती के मध्य बिन्दु पर।
उत्तर-
(i) Ed = α
(ii) Ed = 0
(iii) Ed = 1.

प्रश्न 9.
निम्नलिखित तालिका से कीमत मांग की लोच ज्ञात कीजिए।

प्रति इकाई कीमत (₹) मांगी गई मात्रा
10 200
8 150

उत्तर –

प्रति इकाई कीमत (₹) मांगी गई मात्रा कुल व्यय
8 200 1600
10 150 1500

∴ Ed>1 उत्तर

प्रश्न 10.
₹ 8 प्रति इकाई वस्तु की कीमत होने पर एक उपभोक्ता वस्तु की 40 इकाइयां क्रय करता है। मांग की कीमत लचक (-) 1 है । किस कीमत पर उपभोक्ता वस्तुओं की 60 इकाइयों का क्रय करेगा ?
हल P = 8, P1 = ? Q= 40, Q1 = 60, Ed = (-)।
Ed = \(\frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q}\) (-)1
= \(\frac{\mathrm{Q}_{1}-\mathrm{Q}}{\mathrm{P}_{1}-\mathrm{P}} \times \frac{\mathrm{P}}{\mathrm{Q}}=-1\)
= \(\frac{60-40}{P_{1}-8} \times \frac{8}{40}=-1\)
= \(\frac{20}{P_{1}-8} \times \frac{8}{40}=-1\)
= \(\frac{4}{P_{1}-8}=-1\)
= 4 = -1 (P1-8)
= 4 = – P1+8
= 4 – 8 = -P1
= -4 = -P1
= P1 = 4

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 6 कीमत मांग की लोच

प्रश्न 11.
₹ 6 प्रति इकाई वस्तु की कीमत होने पर एक उपभोक्ता एक वस्तु की 50 इकाइयों का क्रय करता है। मांग की कीमत लोच (-) 2 है । किस कीमत पर उपभोक्ता वस्तुओं की 100 इकाइयों का क्रय करेगा ?
हल
P= 6 P1 = ? Q = 50 Q1 = 100 Ed = (-) 2
Ed = \(\frac{Q_{1}-Q}{P_{1}-P} \times \frac{P}{Q}\) = -2
= \(\frac{100-50}{P_{1}-6} \times \frac{6}{50}\) = -2
= \(\frac{50}{P_{1}-6} \times \frac{6}{50}\) = -2
= \(\frac{6}{P_{1}-6}\) = -2
= 6 = – 2(P1 -6)
= 6 = -2P1+12
= 6 -12 = -2P1
= 2P1 = 6
=P1 = 3 Ans.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਵੱਡੇ ਉੱਚਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਚਿੱਤਰ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਾਕਸਨੁਮਾ ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਦੀ ਬਨਾਵਟ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਸੁਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ, ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਅੰਕਿਤ ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਬਾਕਸਨੁਮਾ ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਦੀ ਬਨਾਵਟ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਦਾ ਇੱਕ ਸਾਫ਼ ਅਤੇ ਲੇਬਲ ਕੀਤਾ ਹੋਇਆ ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਸੂਰਜੀ ਪਰਾਵਰਤਕ ਅਤੇ ਸੂਰਜੀ ਸੰਕੇਂਦਰਿਕ ਕੀ ਹਨ ? ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਿੱਥੇ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਇੱਕ ਬਾਕਸਨੁਮਾ ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਦੀ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਪਰਾਵਰਤਕ – ਇਹ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਸੂਰਜੀ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਪਰਾਵਰਤਕ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਪਰਾਵਰਤਕਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਉਨ੍ਹਾਂ ਯੰਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਮੱਧਮ ਤਾਪਮਾਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇੱਥੇ ਸੂਰਜੀ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਦਾ ਪਰਾਵਰਤਨ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣਾਂ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਬਰਤਨ ਦੇ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਕਾਲੀ ਸਤਹਿ ਵਾਲੇ ਬਰਤਨ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਸੋਖ ਕੇ ਗਰਮ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਅਯੋਜਨ ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰਾਂ ਅਤੇ ਸੂਰਜੀ ਹੀਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਸਰਜੀ ਸੰਕੇਂਦਰਿਕ – ਇਹ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਅਭਿਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਜਾਂ ਦਰਪਣ ਹੈ ਜਿਸ ਦੁਆਰਾ ਸਰਜੀ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਕੇਂਦਰਿਤ ਕਰਕੇ ਉੱਚ ਤਾਪ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸੂਰਜੀ ਸੰਕੇਂਦਰ ਕੁੱਕਰਾਂ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਬੇਕ ਕਰਨਾ ਜਾਂ ਤਲਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਪੈਰਾਬੋਲਿਕ ਪਰਾਵਰਤਕ ਸਤਹਿ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਊਰਜਾ ਇਕ ਵੱਡੇ ਖੇਤਰ ਤੋਂ ਛੋਟੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਸੰਕੇਂਦਰਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ 1000 ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਰਸੋਈ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਫ਼ ਉਤਪਾਦਨ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਸਿਧਾਂਤ – ਕਾਲੀ ਸਤਹਿ ਵਧੇਰੇ ਤਾਪ ਦਾ ਸੋਖਣ ਕਰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਪਿੱਛੋਂ ਕਾਲੀ ਸਤਹਿ ਇਸ ਸੋਖਿਤ ਤਾਪ ਦਾ ਵਿਕਿਰਨ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਤਾਪ ਦੀ ਇਸ ਹਾਨੀ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਕਾਲੀ ਪੱਟੀ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਤਾਪ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਬਕਸੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਬਕਸੇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਦੀਆਂ ਦੀਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਨਾਲ ਪੇਂਟ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਤਾਪ ਦਾ ਸੋਖਣ ਹੋ ਸਕੇ ਅਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੁਆਰਾ ਤਾਪ ਦੀ ਹਾਨੀ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋ ਸਕੇ ।

ਬਨਾਵਟ – ਆਮਤੌਰ ਤੇ ਇਹ ਇੱਕ ਲੱਕੜ ਦਾ ਬਕਸਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਬਾਹਰੀ ਬਕਸਾ ਵੀ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਬਕਸੇ ਅੰਦਰ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਜਾਂ ਲੋਹੇ ਦਾ ਬਣਿਆ ਇੱਕ ਹੋਰ ਬਕਸਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸਨੂੰ ਅੰਦਰਲਾ ਬਕਸਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਅੰਦਰਲੇ ਬਕਸੇ ਦੀਆਂ ਦੀਵਾਰਾਂ ਅਤੇ ਹੇਠਾਂ ਵਾਲੀ ਸਤਹਿ ਕਾਲੀ ਪੇਂਟ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਸੂਰਜੀ ਉਰਜਾ ਦਾ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਸੋਖਣ ਹੋ ਸਕੇ ਅਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੁਆਰਾ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹਾਨੀ ਹੋਵੇ ।

ਅੰਦਰਲੇ ਅਤੇ ਬਾਹਰਲੇ ਬਕਸੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂ ਨੂੰ ਥਰਮੋਕੋਲ ਜਾਂ ਕੱਚ ਦੀ ਰੂੰ ਨਾਲ ਭਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਦੀ ਊਸ਼ਮਾ ਬਾਹਰ ਨਾ ਜਾ ਸਕੇ । ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਦੇ ਬਕਸੇ ਉੱਪਰ ਇੱਕ ਮੋਟੇ ਕੱਚ ਦੀ ਸ਼ੀਟ ਦਾ ਢੱਕਣ ਲੱਗਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਸ੍ਰੀਨ ਹਾਊਸ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਸਮਤਲ
ਚਿੱਤਰ-ਬਾਕਸਨੁਮਾ ਸੋਲਰ ਕੁੱਕਰ ਦਰਪਣ ਵੀ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਪਰਾਵਰਤਕ ਤਲ ਵਜੋਂ ਕਾਰਜ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 1

ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ – ਪਕਾਉਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਸਟੀਲ ਜਾਂ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਦੇ ਬਰਤਨ ਜਿਸ ਦੀ ਬਾਹਰਲੀ ਸਤਹਿ ਨੂੰ ਕਾਲੀ ਪੇਂਟ ਕੀਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਾ ਕੇ ਬਕਸੇ ਅੰਦਰ ਰੱਖ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ । ਹੁਣ ਇਸ ਨੂੰ ਕੱਚ ਦੇ ਢੱਕਣ ਨਾਲ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਰਾਵਰਤਕ ਸਤਹਿ M ਅਰਥਾਤ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਏ ਅਨੁਸਾਰ ਖੜ੍ਹਾ ਕਰਕੇ ਕੁੱਕਰ ਨੂੰ ਧੁੱਪ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਸੂਰਜ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਪਰਾਵਰਤਕ ਤਲ ਤੇ ਆਪਾਤੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਤਾਂ ਪਰਾਵਰਤਕ ਤਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤੀਬਰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪੁੰਜ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕੁੱਕਰ ਦੇ ਕੱਚ ਦੀ ਸ਼ੀਟ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਬਰਤਨ ਉੱਪਰ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਕਾਲੀ ਸੜ੍ਹਾਵਾਂ ਸੂਰਜੀ ਤਾਪ ਨੂੰ ਸੋਖਿਤ ਕਰ ਲੈਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਹੁਣ ਇਹ ਸੜਾਵਾਂ ਤਾਪ ਦੀਆਂ ਪਰਾ-ਵੈਂਗਣੀ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਨਿਕਾਸ ਕਰਨ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ, ਪਰ ਉੱਪਰਲੀ ਸਤਹਿ ਉੱਤੇ ਸਥਾਪਿਤ ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਨਹੀਂ ਜਾਣ ਦਿੰਦੀ । ਇਸ ਲਈ ਬਕਸੇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਦਾ ਤਾਪ ਅੰਦਰ ਹੀ ਰਹਿ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਇਸ ਕੁੱਕਰ ਦਾ ਅੰਦਰਲਾ ਤਾਪਮਾਨ 2-3 ਘੰਟੇ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ 100°C ਤੋਂ 140°C ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਗਰਮੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਵਿੱਚ ਸੌਖੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪਕਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਇੱਕ ਅੰਕਿਤ ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਸੋਲਰ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਦੀ ਸੰਰਚਨਾ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਇਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰ ਕੇ ਪਾਣੀ ਗਰਮ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੋਲਰ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਦਾ ਅੰਕਿਤ ਚਿੱਤਰ ਹੇਠਾਂ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 2

ਸੂਰਜੀ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਪਰੋਧੀ ਬਕਸਾ B ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਹੜਾ ਅੰਦਰੋਂ ਕਾਲਾ ਪੇਂਟ ਕੀਤਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਨਾਲ ਪੇਂਟ ਕੀਤੀ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਟਿਉਬ T ਇੱਕ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਦਾ ਬਕਸਾ ਅਤੇ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਟਿਊਬ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਇਸ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਅਧਿਕ ਸਮਰੱਥਾ ਨਾਲ ਸੂਰਜ ਦੀਆਂ ਤਾਪਨ ਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਸੋਖਤ ਕਰ ਸਕੇ । ਸੰਵਹਨ ਅਤੇ ਵਿਕਿਰਨ ਦੁਆਰਾ ਤਾਪ ਦੀ ਹਾਨੀ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਬਕਸੇ ਦੇ ਉੱਪਰ ਸ਼ੀਸ਼ੇ ਦਾ ਢੱਕਣ ਲੱਗਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਦੀ ਤਾਂਬੇ ਦੀਆਂ ਟਿਊਬਾਂ ਦੇ ਦੋਵੇਂ ਸਿਰੇ ਪਾਣੀ ਭੰਡਾਰ ਟੈਂਕ D ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਸੂਰਜੀ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਦੇ ਭੰਡਾਰਨ ਟੈਂਕ ਨੂੰ ਮਕਾਨ ਦੀ ਛੱਤ ਦੇ ਉੱਪਰ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਸੂਰਜ ਦੀ ਰੌਸ਼ਨੀ ਸਾਰਾ ਦਿਨ ਮਿਲ ਸਕੇ ।

ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ – ਠੰਢਾ ਪਾਣੀ ਪਾਈਪ P ਦੇ ਰਸਤੇ ਭੰਡਾਰਨ ਟੈਂਕ D ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਾਈਪ Q ਦੁਆਰਾ ਪਾਣੀ ਤਾਪਨ B ਦੀ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਟਿਉਬ 1 ਵਿੱਚ ਚਲਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਟਿਉਬ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸੋਖ ਕਰਕੇ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਠੰਡਾ ਪਾਣੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਗਰਮ ਤਾਂਬੇ ਦੀਆਂ ਟਿਊਬਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਟਿਊਬ ਦੇ ਦੂਜੇ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਨਿਕਲ ਕੇ ਪਾਈਪ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾ ਭੰਡਾਰਨ ਟੈਂਕ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਭਾਗ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਾਈਪ S ਦੁਆਰਾ ਵਰਤੋਂ ਲਈ ਬਾਹਰ ਕੱਢਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੌਰ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ ਦੇ ਭੰਡਾਰਨ ਟੈਂਕ ਦਾ ਸਾਰਾ ਪਾਣੀ ਕਾਫ਼ੀ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
(i) ਅੰਕਿਤ ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਗੁੰਬਦ ਆਕਾਰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਦੀ ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਸਮਝਾਓ ।
(ii) ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਤੈਰਦੇ ਹੋਏ ਗੈਸ ਹੋਲਡਰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਦੀ ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਸਮਝਾਓ ।
ਜਾਂ
ਜੀਵ-ਅਪਸ਼ਿਸਟ ਤੋਂ ਜੀਵ ਗੈਸ (ਬਾਇਓ ਗੈਸ) ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਦਾ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਵਰਣਨ ਕਰੋ । ਇਸ ਗੈਸ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੇ ਕੋਈ ਦੋ ਲਾਭ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੀਵ ਗੈਸ (ਬਾਇਓ ਗੈਸ) ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ – ਜੀਵ ਗੈਸ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਗੈਸਾਂ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਨ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਗੈਰ-ਹਾਜ਼ਰੀ ਵਿੱਚ ਜੈਵ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਅਪਘਟਨ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਘਟਕ ਮੀਥੇਨ (CH4) ਗੈਸ ਹੈ ਜੋ ਇੱਕ ਆਦਰਸ਼ ਬਾਲਣ ਹੈ । ਜੀਵ ਗੈਸ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਗੋਬਰ, ਮਲ-ਮੂਤਰ, ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਫਲ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਤੇ ਆਧਾਰਿਤ ਉਦਯੋਗਾਂ ਦੇ ਅਪਸ਼ਿਸ਼ਟ ਆਦਿ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜੀਵ ਗੈਸ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਲਾਂਟ ਉਪਯੋਗ ਵਿੱਚ ਲਿਆਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
(i) ਸਥਿਰ ਗੁੰਬਦ ਕਿਸਮ ਦਾ ਪਲਾਂਟ
(ii) ਤੈਰਦਾ ਹੋਇਆ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ।

(i) ਸਥਿਰ ਗੁੰਬਦ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਦੀ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ – ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਬਰਾਬਰ ਮਾਤਰਾ ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ M ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਉਸ ਦਾ ਘੋਲ ਬਣਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਇਸ ਘੋਲ ਦਾ ਪਵੇਸ਼ ਚੈਂਬਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੋਂ ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ T ਵਿੱਚ ਭੇਜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ ਦਾ ਕਾਫ਼ੀ ਭਾਗ ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਨ ਨਾਲ ਭਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰੰਤੂ ਉਸ ਦੇ ਉੱਪਰ ਦਾ ਗੁੰਬਦ D ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਇਕੱਠੀ ਕਰਨ ਲਈ ਖ਼ਾਲੀ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਨ ਨੂੰ 50-60 ਦਿਨ ਰੱਖੇ ਰਹਿਣ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਗੋਬਰ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਅਨਆਸੀ ਸੂਖ਼ਮ ਜੀਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਨਿਮਨੀਕਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਬਣਨ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਪਾਈਆਂ ਦੁਆਰਾ ਗੁੰਬਦਨੁਮਾ ਟੈਂਕੀ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠੀ ਹੁੰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਗੁੰਬਦ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠੀ ਹੋਈ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਨੂੰ ਗੈਸ ਨਿਕਾਸ S ਦੁਆਰਾ ਘਰਾਂ ਤਕ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦੀ ਉਪਲੱਬਧਤਾ ਲਗਾਤਾਰ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਲਈ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਨਿਯਮਿਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ ਵਿੱਚ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਬਣਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬਾਕੀ ਬਚਿਆ ਗੋਬਰ ਦਾ ਘੋਲ ਨਿਕਾਸ ਚੈਂਬਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਟੈਂਕ Fਵਿੱਚ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਟੈਂਕ ਤੋਂ ਗੋਬਰ ਦੇ ਬਚੇ-ਖੁਚੇ ਘੋਲ ਜਾਂ ਸਲਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਜੋਂ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 3

(ii) ਤੈਰਦੇ ਹੋਏ ਗੈਸ ਹੋਲਡਰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਦੀ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ – ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਜਾਂ ਜੈਵ ਗੈਸ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪਦਾਰਥ ਹੈ-ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ । ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਬਰਾਬਰ ਮਾਤਰਾ ਟੈਂਕ M ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਗੋਬਰ ਦਾ ਪਤਲਾ ਘੋਲ ਜਾਂ ਸਲਰੀ (Slurry) ਬਣਾ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ । ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਪਾਈਪ I ਦੁਆਰਾ ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ T ਵਿੱਚ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਕ ਨੂੰ ਗੋਬਰ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਨ ਨਾਲ ਭਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਰੰਤੂ ਉਸ ਦੇ ਉੱਪਰ ਤੈਰਦੀ ਹੋਈ ਟੈਂਕੀ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਇਕੱਠੀ ਕਰਨ ਲਈ ਖ਼ਾਲੀ ਛੱਡ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 4

ਗੋਬਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਘੋਲ ਨੂੰ ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ ਵਿੱਚ ਲਗਭਗ 60 ਦਿਨ ਲਈ ਰੱਖਿਆ ਰਹਿਣ ਦਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਗੋਬਰ ਜਾਂ ਪਾਣੀ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਅਨਆਕਸੀ ਸੂਖ਼ਮ ਜੀਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਨਿਮਨੀਕਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਨਾਲ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਬਣਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਤੈਰਦੀ ਹੋਈ ਟੈਂਕੀ H ਵਿੱਚ ਇਕੱਠੀ ਹੁੰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ। ਤੈਰਦੀ ਹੋਈ ਗੈਸ ਟੈਂਕੀ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠੀ ਹੋਈ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਨੂੰ ਨਿਕਾਸ S ਵਿੱਚੋਂ ਪਾਇਪਾਂ ਦੁਆਰਾ ਘਰਾਂ ਤਕ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦੀ ਉਪਲੱਬਧਤਾ ਲਗਾਤਾਰ ਬਣਾਏ ਰੱਖਣ ਲਈ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਨਿਯਮਿਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਤੇ ਗੋਬਰ ਦਾ ਘੋਲ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਟੈਂਕ T ਵਿੱਚੋਂ ਬਾਈਓ ਗੈਸ ਬਣਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਬਚੀ ਹੋਈ ਸਲਰੀ ਨਿਕਾਸ ਪਾਈਪ O ਦੇ ਰਸਤੇ ਟੈਂਕ F ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਟੈਂਕ F ਤੋਂ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਜਾਂ ਸਲਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਲਿਜਾ ਕੇ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦੇ ਲਾਭ – ਇਹ ਇੱਕ ਵਧੀਆ ਬਾਲਣ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਧੂੰਆਂ ਰਹਿਤ ਬਲਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਨਾਲ ਕੋਈ ਸੁਆਹ ਵਰਗਾ ਅਵਸ਼ੇਸ਼ ਨਹੀਂ ਬਚਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹ ਇੱਕ ਪਰਿਆਵਰਣ ਦਾ ਹਿਮਾਇਤੀ ਬਾਲਣ ਹੈ । ਡਾਇਜੈਸਟਰ ਤੋਂ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਹੋਈ ਸਲਰੀ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਧ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਯੌਗਿਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਨਾ ਕੇਵਲ ਵਧੀਆ ਬਾਲਣ ਹੀ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਪਰੰਤੂ ਖਾਦ ਵੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਰਿਆਵਰਣ ਵੀ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬੱਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਅਨਾਕਸੀ-ਅਪਘਟਨ – ਡਾਈਜੈਸਟਰ ਵਿੱਚ ਉਪਸਥਿਤ ਅਨਾਕਸੀ ਸੂਖ਼ਮਜੀਵਾਂ ਨੂੰ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਗੈਰ-ਹਾਜ਼ਰੀ ਵਿੱਚ ਸਲਰੀ ਦਾ ਅਪਘਟਨ ਕਰਦੇ ਹੈ । ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਗੈਰ-ਹਾਜ਼ਰੀ ਵਿੱਚ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਅਪਘਟਨ ਅਨਾਕਸੀ ਅਪਘਟਨ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦਾ ਕਾਰਜ ਸਿਧਾਂਤ ਕੀ ਹੈ ? ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦਾ ਵਰਣਨ ਚਿੱਤਰ ਸਹਿਤ ਸਮਝਾਓ ।
ਜਾਂ
ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੇ ਕਾਰਜ ਸਿਧਾਂਤ ਨੂੰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਚੱਕੀ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ, ਰਚਨਾ ਦਾ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਚਿੱਤਰ ਸਹਿਤ ਸਮਝਾਓ। ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੇ ਮੁੱਖ ਉਪਯੋਗ ਅਤੇ ਹਾਨੀਆਂ ਵੀ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ ਚੱਕੀ- ਇਹ ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪੰਣ ਦੀ ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਨੂੰ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਦੁਆਰਾ ਯੰਤਰਿਕ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 5

ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੀ ਰਚਨਾ – ਜਦੋਂ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਘੁੰਮਣ ਵਾਲੀ ਸ਼ਾਫਟ ਵਗਦੀ ਹੋਈ ਪੌਣ, ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਂਦੀ ਹੈ ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਇਕ ਬਲ ਲਗਾਉਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੌਣ ਚੱਕੀਆਂ ਦੇ ਬਲੇਡ ਘੁੰਮਣ ਲਗਦੇ ਹਨ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੇ ਘੁੰਮਣ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਉਸ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਬਣਤਰ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਪੱਖੇ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਦੇ ਸਮਾਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਨੂੰ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਪੱਖਾ ਸਮਝਿਆ। ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ । ਕਿਉਂਕਿ ਜਦੋਂ ਪੱਖੇ ਦੇ ਬਲੇਡ ਘੁੰਮਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਪੌਣ ਵੱਗਦੀ ਹੈ, ਪਰੰਤ ਜਦੋਂ ਪੌਣ ਵੱਗਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੇ ਬਲੇਡ ਘੁੰਮਦੇ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 6

ਘੁੰਮਦੇ ਹੋਏ ਬਲੇਡਾਂ ਦੀ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਕਾਰਨ ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਨਾਲ ਕਣਕ ਪੀਸਣ ਵਾਲੀ ਚੱਕੀ ਦਾ ਚਲਾਉਣਾ, ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਦਾ ਚਲਾਉਣਾ, ਘੁਮਿਆਰ ਦਾ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਬਰਤਨਾਂ ਦਾ ਚੱਕਾ ਘੁੰਮਾਉਣਾ ਆਦਿ ਕਾਰਜ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਅਜਿਹੇ ਹੀ ਸਥਾਨ ਤੇ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਹਵਾ ਵੀ ਲਗਭਗ ਪੂਰਾ ਸਾਲ ਤੀਬਰ ਵੇਗ ਨਾਲ ਚਲਦੀ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੁਆਰਾ ਪਾਣੀ ਖਿੱਚਣ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੀ ਬੈਂਕ ਇੱਕ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਦੇ ਪਿਸਟਨ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਹਵਾ ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੇ ਬਲੇਡ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਚੱਕੀ ਦਾ ਪਹੀਆ ਘੁੰਮਣ ਲਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਧੁਰਾ ਘੁੰਮਣ ਲਗਦਾ ਹੈ । ਧੁਰੇ ਦੀ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬੈਂਕ ਉੱਪਰ-ਹੇਠਾਂ ਹੋਣ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਪੰਪ ਦੀ ਪਿਸਟਨ ਛੜ ਉੱਪਰ-ਹੇਠਾਂ ਗਤੀ ਕਰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਣ ਲਗਦਾ ਹੈ ।

ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੇ ਉਪਯੋਗ – ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੇ ਕਈ ਉਪਯੋਗ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕਿ-

  1. ਪੌਣ ਕਿਸ਼ਤੀਆਂ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ।
  2. ਪੌਣ ਚੱਕੀਆਂ ਨਾਲ ਆਟਾ ਚੱਕੀਆਂ ਤੇ ਜਲ ਪੰਪ ਆਦਿ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ।
  3. ਹਵਾਈ ਜਹਾਜ਼ਾਂ ਦੁਆਰਾ ਉਡਾਨ ਭਰਨ ਲਈ ।
  4. ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਲਈ ।

ਪੌਣ ਉਰਜਾ ਦੀਆਂ ਹਾਨੀਆਂ – ਭਾਵੇਂ ਪੌਣ ਉਰਜਾ ਦੇ ਕਈ ਲਾਭ ਹਨ ਪਰੰਤ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਈ ਹਾਨੀਆਂ ਵੀ ਹਨ। ਕਈ ਕਮੀਆਂ ਵੀ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਮੰਨ ਲਓ ਜਦੋਂ ਸਾਨੂੰ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਸਮੇਂ ਪੌਣ ਦਾ ਵਹਾਓ ਨਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸ ਸਮੇਂ ਪੌਣ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਨਾ ਵਗਦੀ ਹੋਵੇ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਨੂੰ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਖੁੱਲਾ ਖੇਤਰ ਵੀ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਕ ਹੋਰ ਕਮੀ ਇਹ ਵੀ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਨੂੰ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਨਿਰਮਾਣ ਲਾਗਤ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੀ ਉਪਯੋਗ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀ ਬਣਤਰ ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ । ਕੋਈ ਚਾਰ ਉਪਯੋਗ ਲਿਖੋ ।
ਜਾਂ
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਕੀ ਹੈ ? ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਉਪਯੋਗ ਤੇ ਟਿੱਪਣੀ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ – ਇਹ ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ (ਯੰਤਰ) ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਸਿੱਧੇ ਹੀ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ । ਕਿਉਂਕਿ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਊਰਜਾ ਵੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਵੀ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਵਿੱਚ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ (ਜਾਂ ਯੰਤਰ) ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ।

ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਵਿੱਚ ਅਰਧਚਾਲਕਾਂ ਜਿਵੇਂ ਸਿਲੀਕਾਨ ਅਤੇ ਗੇਲੀਅਮ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਕੁੱਝ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ (ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਆਰਸਨਿਕ, ਬੋਰੋਨ, ਇੰਡਿਅਮ ਆਦਿ) ਮਿਲਾ ਦੇਣ ਨਾਲ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਚਾਲਕਤਾ ਵਧਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਅਰਧਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਚਾਲਕਤਾ ਤਾਪਮਾਨ ਵਧਾਉਣ ਨਾਲ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਦਾ ਵਿਕਾਸ – ਅੱਜ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 100 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹ ਖੋਜ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਸੀ ਕਿ ਸਲੇਨੀਅਮ ਦੀ ਪਤਲੀ ਪਰਤ ਨੂੰ ਸੂਰਜੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਵੀ ਪਤਾ ਸੀ ਕਿ ਸਲੇਨੀਅਮ ਦੇ ਕਿਸੇ ਟੁਕੜੇ ਤੇ ਆਪਾਤੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸਿਰਫ਼ 0.8% ਭਾਗ ਹੀ ਬਿਜਲੀ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਕਿਉਂਕਿ ਅਜਿਹੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਸੀ ਇਸ ਲਈ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਲਈ ਇਸ ਪਰਿਘਟਨਾ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਦੀ ਕੋਈ ਅੱਗੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ।

ਪਹਿਲਾਂ ਵਿਹਾਰਿਕ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਸੰਨ 1954 ਵਿੱਚ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ । ਇਹ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਲਗਭਗ 10% ਸੂਰਜੀ ਉਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਉਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕੀਤਾ ਪੁਲਾੜ ਕਾਰਜਾਂ ਦੀ ਵੱਧਦੀ ਮੰਗ ਦੇ ਕਾਰਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਰੱਥਾ ਵਾਲੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਨੂੰ ਵਿਕਸਿਤ ਕਰਨ ਦੀ ਦਰ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧੀ । ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਲਈ ਅਰਧਚਾਲਕਾਂ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਨਾਲ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੱਧ ਗਈ ਹੈ । ਸਿਲੀਕਾਂਨ, ਗੈਲੀਅਮ ਅਤੇ ਜਰਮੇਨੀਅਮ ਜਿਹੇ ਅਰਧ-ਚਾਲਕਾਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਹੋਏ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ 10% ਤੋਂ 18% ਤੱਕ ਹੈ । ਸਲੇਨੀਅਮ ਤੋਂ ਬਣੇ ਆਧੁਨਿਕ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ 25% ਤੱਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 7

ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਉਪਯੋਗ-

  1. ਪੁਲਾੜ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ – ਬਣਾਉਟੀ ਉਪਗ੍ਰਹਿਆਂ ਅਤੇ ਪੁਲਾੜ ਵਿੱਚ ਭੇਜੇ ਗਏ ਖੋਜ ਦੇ ਯੰਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਪ੍ਰਯੋਜਨ ਕਰਨ ਲਈ ।
  2. ਪੇਂਡੂ ਬਿਜਲੀਕਰਨ – ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਸੰਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਕੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੇਂਡੂ ਖੇਤਰਾਂ ਨੂੰ 24 ਘੰਟੇ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
  3. ਗਲੀਆਂ ਨੂੰ ਰੌਸ਼ਨ ਕਰਨਾ – ਛੋਟੇ ਸੁਰਜੀ ਪੈਨਲਾਂ ਅਤੇ ਸਟੋਰੇਜ ਬੈਟਰੀ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਥਾਂਵਾਂ ਤੇ ਸਟਰੀਟ ਲਾਈਟ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਸਮੁੰਦਰ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸਤੰਭਾਂ (Light house) ਵਿੱਚ ਵੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ !
  4. ਪਾਣੀ ਖਿੱਚਣਾ – ਖੇਤੀ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਧਰਤੀ ਤੋਂ ਜਲ ਪੰਪ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਖਿੱਚਣ ਲਈ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  5. ਪਾਣੀ ਦਾ ਖਾਰਾਪਨ ਦੂਰ ਕਰਨ/ਸ਼ੁੱਧ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਯੰਤਰ – ਕਈ ਥਾਂਵਾਂ ਤੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਸ਼ੋਧਨ ਕਰਨ ਲਈ ਉਦਯੋਗ ਲਗਾਏ ਗਏ ਹਨ ।
  6. ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਉਤਪਾਦਨ – ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਦਾ ਬਿਜਲੀ ਅਪਘਟਨ ਕਰਕੇ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਬਾਲਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  7. ਸ਼ਕਤੀ ਫਾਰਮ – ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਵੱਡੇ ਪੈਨਲਾਂ ਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਜੋੜ ਕੇ ਅਧਿਕ ਸ਼ਕਤੀ ਉਪਲੱਬਧ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਉੱਚਿਤ ਵੈਗਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਨੂੰ ਦਿਸ਼ਟ ਧਾਰਾ (D.C.) ਅਤੇ ਪਰਤਵੀ ਧਾਰਾ (A.C.) ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫਿਰ ਲੱਗੇ ਸ਼ਕਤੀ ਗਿੱਡ ਨਾਲ ਜੋੜ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  8. ਹੋਰ ਉਪਯੋਗ – ਉੱਚ ਸੁਯੋਗਤਾ ਵਾਲੇ ਸੈੱਲ ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨੀ ਘੜੀਆਂ ਜਾਂ ਕੈਲਕੂਲੇਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲਾਂ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਬਲਾਕ ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ – ਇਹ ਪੈਨਲ ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਤੋਂ ਬਣਾਈ ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਕੇ ਉਪਯੋਗੀ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਬਣਾਵਟ – ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ਕਈ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਸਮੂਹਿਕ ਰੂਪ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦੀ ਯੋਗਤਾ ਤੇ ਆਧਾਰਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਕਈ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤਰਤੀਬ ਦੇ ਕੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨੂੰ ਅਜਿਹੀ ਥਾਂ ਤੇ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਕਾਫ਼ੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਧੁੱਪ ਆਉਂਦੀ ਹੋਵੇ। ਪੈਨਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨੂੰ ਬਦਲਣ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ – ਸਿਲੀਕਾਨ ਅਤੇ ਗੈਲੀਅਮ ਵਰਗੇ ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਣਾਏ ਗਏ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਪੈਨਲ ਤੇ ਜਦੋਂ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਅਰਧ ਚਾਲਕ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਾਰ ਵਰਗ ਸੈਂ.ਮੀ. ਦੇ ਇਕ ਸਰਜੀ ਸੈੱਲ ਨਾਲ 60 ਮਿ.ਲੀ. ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ
ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲ ਤੋਂ ਡੀ.ਸੀ.ਆਉਟਪੁਟ ਲਗਪਗ 0.4 – 0.5 ਵੋਲਟ ਤੇ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਘੱਟ ਜਾਂ ਵੱਧ ਗਿਣਤੀ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਘੱਟ ਜਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉਪਯੋਗ-

  1. ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
  2. ਬਣਾਉਟੀ ਵਿੱਚ ਉਪਗ੍ਰਹਿ ਅਤੇ ਪੁਲਾੜ ਖੋਜ ਯਾਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤਾ । ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਨਿਊਕਲੀ (ਨਾਭਿਕੀ) ਵਿਖੰਡਨ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ? ਨਿਊਕਲੀ (ਨਾਭਿਕੀ) ਵਿਖੰਡਨ ਦਾ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਜਾਂ
ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਇਸ ਨੂੰ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਕੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ-ਇਹ ਉਹ ਕਿਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਭਾਰੀ ਪਰਮਾਣੂ (ਜਿਵੇਂ ਯੂਰੇਨੀਅਮ, ਪਲੂਟੋਨੀਅਮ ਜਾਂ ਥੋਰੀਅਮ) ਦੇ ਨਾਭਿਕ ਨੂੰ ਘੱਟ ਊਰਜਾ ਵਾਲੇ ਨਿਊਨ ਨਾਲ ਬੰਬਾਰੀ ਕਰਾ ਕੇ ਹਲਕੇ ਨਾਭਿਕਾਂ ਵਿੱਚ ਤੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਬਹੁਤ ਵਿਸ਼ਾਲ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਮੁਕਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਥੋੜ੍ਹੇ ਜਿਹੇ ਪੁੰਜ (mass) ਦੀ ਹਾਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਅਤਿ ਅਧਿਕ ਊਰਜਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਗਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਮੁਲ ਨਾਭਿਕ ਅਤੇ ਉਪਜੇ ਨਾਭਿਕਾਂ ਦੇ ਪੁੰਜਾਂ ਦਾ Δm, ਉਰਜਾ E ਵਿੱਚੋਂ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜਾ E = mc2 ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਕੰਟਰੋਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਥੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਨਿਰਵਾਯੂ (ਖਲਾਅ ਵਿੱਚ ਚਾਲ ਹੈ । ਨਿਊਕਲੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਇਲੈਕਟ੍ਰਾਨ ਵੋਲਟ ਦੇ ਨਾਭਿਕ ਨਾਲ ਪ੍ਰਗਟਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
1 ev = 1.602 × 10-19 J

ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਦੀ ਉਦਾਹਰਨ – ਯੂਰੇਨੀਅਮ-235 ਵਿੱਚ ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਧੀਮੀ ਗਤੀ ਵਾਲੇ ਨਿਊਾਨਾਂ ਦੀ ਬੰਬਾਰੀ ਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਯੂਰੇਨੀਅਮ-235 ਪਰਮਾਣੁਆਂ ਤੇ ਧੀਮੀ ਗਤੀ ਵਾਲੇ ਨਿਊਵਾਨਾਂ ਦੀ ਬੰਬਾਰੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਯੂਰੇਨੀਅਮ ਦਾ ਭਾਰੀ ਨਾਭਿਕ ਟੁੱਟ ਕੇ ਦੋ ਮੱਧਮ ਭਾਰ ਵਾਲੇ ਪਰਮਾਣੂ ਬੇਰੀਅਮ-139 ਅਤੇ ਕ੍ਰਿਪਾਨ94 ਬਣਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਤਿੰਨ ਨਿਉਟਾਂਨ ਉਤਸਰਜਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਖੰਡਨ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਦੌਰਾਨ ਯੂਰੇਨੀਅਮ ਦੇ ਕੁੱਝ ਪੁੰਜ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਬਦਲੇ ਵਿੱਚ ਵਿਸ਼ਾਲ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 8

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਕੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਲਯਨ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ? ਇਸ ਦਾ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ – ਇਹ ਉਹ ਕਿਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਦੋ ਹਲਕੇ ਨਿਊਕਲੀਅਸ ਪਰਸਪਰ ਸੰਯੋਗ ਕਰਕੇ ਇੱਕ ਭਾਰੀ ਨਿਉਕਲੀਅਸ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਰਜਾ ਦੀ ਵਿਸ਼ਾਲ ਮਾਤਰਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਥੋੜੇ ਜਿਹੇ ਪੁੰਜ ਦੀ ਹਾਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਊਰਜਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਗਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਉਦਾਹਰਨ – ਭਾਰੀ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਜਿਸਨੂੰ ਡਿਊਟੀਰੀਅਮ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਤੱਤ ਦਾ ਇੱਕ ਆਈਸੋਟੋਪ ਹੈ ਜਿਸਨੂੰ \({ }_{1}^{2} \mathrm{H}\) ਸੰਕੇਤ ਨਾਲ ਟਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਡਿਊਟੀਰੀਅਮ ਦੇ ਪਰਮਾਣੂ ਨੂੰ ਉੱਚੇ ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਗਰਮ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਡਿਉਟੀਰੀਅਮ ਦੇ ਦੋ ਨਾਭਿਕ (ਨਿਊਕਲੀਅਸ) ਪਰਸਪਰ ਸੰਯੋਗ ਕਰਕੇ ਹੀਲੀਅਮ ਦਾ ਭਾਰੀ ਨਾਭਿਕ ਬਣਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵਿਸ਼ਾਲ ਮਾਤਰਾ ਮੁਕਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਹੇਠ ਲਿਖੀ ਸਮੀਕਰਨ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 9
ਸੂਰਜ ਅੰਦਰ ਭਾਰੀ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਦਾ ਹੀਲੀਅਮ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ ਦਾ ਉਦਾਹਰਨ ਹੈ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਅਤੇ ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਨਾਭਿਕੀ ਵਿਖੰਡਨ ਅਤੇ ਨਾਭਿਕੀ ਸੰਯਨ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਅਤੇ ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-

ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ (Nuclear Fission) ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ (Nuclear Fusion)
(1) ਭਾਰੀ ਨਾਭਿਕ ਹਲਕੇ ਨਾਭਿਕ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । (1) ਹਲਕੇ ਨਾਭਿਕ ਭਾਰੀ ਨਾਭਿਕਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
(2) ਇਸ ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਦੇ ਪੂਰਾ ਹੋਣ ਲਈ ਤਾਪ ਦੀ ਲੋੜ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । (2) ਇਸ ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਹੋਣ ਲਈ ਤਾਪ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(3) ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਦੀਆਂ ਉਪਜਾਂ ਆਮਤੌਰ ਤੇ ਰੇਡੀਓ ਐਕਟਿਵ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਿਪਟਾਨ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । (3) ਨਿਊਕਲੀ ਸੰਯਨ ਦੀ ਉਪਜ ਰੇਡੀਓ ਐਕਟਿਵ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਨਿਪਟਾਉਣ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(4) ਇਹ ਇੱਕ ਨਿਯੰਤ੍ਰਿਤ ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਹੈ । (4) ਇਹ ਇੱਕ ਅਨਿਯੰਤ੍ਰਿਤ ਅਭਿਕਿਰਿਆ ਹੈ ।
(5) ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਊਰਜਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । (5) ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਵਿਸ਼ਾਲ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(6) ਇਹ ਪਰਮਾਣੂ ਬੰਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਆਧਾਰ ਹੈ । (6) ਇਹ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਬੰਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਆਧਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(7) ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਵਿਖੰਡਨ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਬਾਲਣ ਬਹੁਤ ਮਹਿੰਗਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । (7) ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਪਦਾਰਥ ਸਸਤੇ ਅਤੇ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਥਰਾਟ ਕਿਸ ਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਥਰਾਟ ਜਾਂ ਫਾਂਸਿਲ – ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਕਠੋਰ ਭਾਗ ਜਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਚੱਟਾਨਾਂ ਤੇ ਬਣੇ ਕੁੱਝ ਪੁਰਾਣੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਜਿਹੜੇ ਸਾਨੂੰ ਚੱਟਾਨਾਂ ਦੀ ਖੁਦਾਈ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਮਿਲਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਥਰਾਟ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਫਾਂਸਿਲ ਲਾਤੀਨੀ (Latin) ਭਾਸ਼ਾ ਦਾ ਸ਼ਬਦ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਅਰਥ ‘ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੱਢੀ ਗਈ ਵਸਤੂ’’ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀਆਂ ਹੱਡੀਆਂ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਿੰਜਰ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪੈਰ ਦੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਪੰਜੇ ਜਾਂ ਪੰਜਿਆਂ ਦੇ ਛਪੇ ਹੋਏ ਨਿਸ਼ਾਨ ਸਾਰੇ ਪਥਰਾਟ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਜੀਵ ਵਿਕਾਸ ਬਾਰੇ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਇਸ ਦੀਆਂ ਢੁੱਕਵੀਆਂ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਓ । ਉਰਜਾ ਸੰਕਟ ਨਾਲ ਨਿਪਟਣ ਲਈ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਲਈ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੋ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ-ਜੀਵ – ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਜੋ ਧਰਤੀ ਹੇਠਾਂ ਦੱਬੇ ਰਹੇ ਅਤੇ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਅਣਹੋਂਦ ਵਿੱਚ ਅਪਘਟਿਤ ਹੋ ਕੇ ਬਣੇ ਬਾਲਣ, ਨੂੰ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਉਦਾਹਰਨ-ਕੋਲਾ, ਪੈਟਰੋਲੀਅਮ ।
ਊਰਜਾ ਸੰਕਟ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ-
ਊਰਜਾ ਸੋਮੇ ਜਿਵੇਂ ਕੋਲਾ, ਤੇਲ ਅਤੇ ਕੁਦਰਤੀ ਗੈਸ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ) ਦੇ ਖ਼ਤਮ ਹੋਣ ਦੇ ਡਰ ਤੋਂ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਢੰਗਾਂ ਰਾਹੀਂ ਬਚਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ-

  1. ਸਾਨੂੰ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਬਹੁਤ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕੇਵਲ ਉਸ ਸਮੇਂ ਇਸ ਬਾਲਣ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਨਵਿਆਉਣਯੋਗ ਸਰੋਤ ਨਾ ਮਿਲੇ ।
  2. ਸਾਨੂੰ ਨਵੀਂ ਟੈਕਨਾਲੋਜੀ ਪਤਾ ਲਰਵਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਅਸੀਂ ਊਰਜਾ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਨਵੇਂ ਊਰਜਾ ਸਰੋਤ ਜਿਵੇਂ-ਜੈਵ ਪੁੰਜ (ਬਾਇਓਮਾਸ) ਜਾਂ ਸੂਰ ਆਦਿ ਤੋਂ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕੀਏ ।
  3. ਸਾਨੂੰ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਵਿਅਰਥ ਨਸ਼ਟ ਨਹੀਂ ਹੋਣ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਬਹੁਤ ਅਧਿਕ ਤੇਜ਼ ਦਰ ਨਾਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਉਸ ਦਾ ਸਿੱਟਾ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ? ਕਾਰਨ ਸਹਿਤ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਧਰਤੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਹੁਤ ਧੀਮੀ ਗਤੀ ਨਾਲ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਅਸਾਧਾਰਨ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਦੁਆਰਾ ਬਣੇ ਹਨ । ਵੱਖ ਹੋਏ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਤੋਂ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਬਣਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਕਰੋੜਾਂ ਸਾਲ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੇ ਜਿਹੜੇ ਫਾਂਸਿਲ ਬਾਲਣ ਅਸੀਂ ਅੱਜ-ਕੱਲ੍ਹ ਧਰਤੀ ਵਿੱਚੋਂ ਖੋਦ ਕੇ ਕੱਢ ਰਹੇ ਹਾਂ ਉਹ ਕਰੋੜਾਂ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਧਰਤੀ ਵਿੱਚ ਦੱਬੇ ਜੀਵ-ਜੰਤੂਆਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕਰਾਂਗੇ ਤਾਂ ਉਹ ਛੇਤੀ ਹੀ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
L.P.G. ਨੂੰ ਇੱਕ ਆਦਰਸ਼ ਬਾਲਣ ਕਿਉਂ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
L.P.G, ਇੱਕ ਆਦਰਸ਼ ਬਾਲਣ-L.P.G. ਨੂੰ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਕਰਕੇ ਆਦਰਸ਼ ਬਾਲਣ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ-

  1. L.P.G. ਦਾ ਕੈਲੋਰੀ ਮੁੱਲ ਵੱਧ ਹੈ ।
  2. L.P.G. ਦਾ ਪ੍ਰਚਲਨ ਤਾਪਮਾਨ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  3. LP.G. ਦੇ ਬਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਹਿਰੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਉਤਪੱਤੀ ਘੱਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
  4. L.P.G. ਦੀ ਬਲਣ ਦਰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  5. L.P.G. ਵਿੱਚ ਅਜਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਕਿਸੇ ਚੰਗੇ ਬਾਲਣ ਦੀਆਂ ਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ? (ਮਾਂਡਲ ਪੇਪਰ)
ਜਾਂ
ਚੰਗੇ ਬਾਲਣ ਦੀਆਂ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 6 ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਲਿਖੋ ।
ਜਾਂ
ਚੰਗੇ ਬਾਲਣ ਦੇ ਗੁਣ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੰਗੇ (ਆਦਰਸ਼ ਬਾਲਣ ਦੇ ਗੁਣ-

  1. ਇਸ ਦਾ ਕੈਲੋਰੀ-ਮੁੱਲ ਵੱਧ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  2. ਬਾਲਣ ਦਾ ਪ੍ਰਜਲਣ ਤਾਪਮਾਨ ਉੱਚਿਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  3. ਬਾਲਣ ਦੀ ਬਲਣ ਦਰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।
  4. ਬਾਲਣ ਵਿੱਚ ਅਜਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜਿੰਨੀ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਓਨਾ ਹੀ ਚੰਗਾ ਹੈ ।
  5. ਬਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਹਿਰੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਉਤਪੱਤੀ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।
  6. ਬਾਲਣ ਦੀ ਉਪਲੱਬਧਤਾ ਸੁਖਾਲੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।
  7. ਬਾਲਣ ਸਸਤਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  8. ਬਾਲਣ ਨੂੰ ਸਟੋਰ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਲਿਜਾਣਾ ਸੌਖਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਪਣ-ਬਿਜਲੀ ਕਿਵੇਂ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੇ ਕੀ ਲਾਭ ਅਤੇ ਹਾਨੀਆਂ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਹਾਈਡਲ (ਪਣ) ਪਾਵਰ ਪਲਾਂਟ ਵਿਚ ਬਿਜਲੀ ਕਿਵੇਂ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਸਮਝਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਣ-ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਦਾ ਬੁਨਿਆਦੀ ਸਿਧਾਂਤ – ਨਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵਹਿੰਦੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬੰਨ੍ਹ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਇਕੱਠਾ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹੁਣ ਬੰਧ ਪੱਧਰ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਤਲ ਦੇ ਨੇੜੇ ਲਗਾਏ ਗਏ ਬਿਜਲੀ ਜੈਨਰੇਟਰ ਤੇ ਸੁੱਟਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਥਿਤਿਜ ਊਰਜਾ ਡਿੱਗਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਗਤਿਜ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਪਾਣੀ ਟਰਬਾਈਨਾਂ ਨੂੰ ਘੁੰਮਾਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਸਿੱਟੇ ਵਜੋਂ ਬਿਜਲੀ ਜੈਨਰੇਟਰ ਦੇ ਆਰਮੇਚਰ ਨੂੰ ਘੁੰਮਾਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 10
ਲਾਭ-

  1. ਵਾਯੂਮੰਡਲ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਬਾਲਣ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਫਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ |
  2. ਪਣ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਨਹਿਰਾਂ ਤੋਂ ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਹਾਨੀਆਂ-

  1. ਵਾਤਾਵਰਨ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਕਈ ਪਰਿਸਥਿਤੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਜੀਵ ਜੰਤੂਆਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਕੁਦਰਤੀ ਵਾਤਾਵਰਨ ਨਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  2. ਸਮਾਜਿਕ ਜੀਵਨ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਲੋਕ ਆਪਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਤੋਂ ਵਾਂਝੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਜੈਵ ਪੁੰਜ ਜਾਂ ਬਾਇਓ ਮਾਸ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੈਵ ਪੰਜ – ਪੌਦਿਆਂ (ਜਾਂ ਬਨਸਪਤੀਆਂ) ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਜੈਵ ਪੁੰਜ ਜਾਂ ਬਾਇਓਮਾਸ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੇ ਕੋਈ ਚਾਰ ਲਾਭ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਾਇਓ ਗੈਸ – ਜੰਤੂਆਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਦੀ ਪਾਣੀ ਦੀ ਹੋਂਦ ਅਤੇ ਆਕਸਜੀਨ ਦੀ ਗੈਰਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਸੂਖ਼ਮ ਜੀਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਲਘੂਕਰਨ ਨਿਮਨੀਕਰਨ) ਦੌਰਾਨ ਮੀਥੇਨ (CH4) ਕਾਰਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ (CO2), ਹਾਈਡਰੋਜਨ (H2) ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ (N2) ਗੈਸਾਂ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਮੀਥੇਨ ਹਨ ।

ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਅਤੇ ਸੰਘਟਨ
ਮੀਥੇਨ = 50% ਤੋਂ 70%
ਕਾਰਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ = 30% ਤੋਂ 40
ਹਾਈਡਰੋਜਨ = 5% ਤੋਂ 10%
ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ = 1% ਤੋਂ 25%
ਅਤੇ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਸਲਫਾਈਡ = ਥੋੜ੍ਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ

ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦੇ ਲਾਭ-

  1. ਇਹ ਖਾਣਾ ਪਕਾਉਣ ਲਈ ਬਾਲਣ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
  2. ਇਹ ਇੰਜਣ ਚਲਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਬਾਲਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । (iii) ਇਹ ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਰੌਸ਼ਨੀ ਕਰਨ ਲਈ ਵੀ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਦੇ ਕੋਈ ਦੋ ਕਾਰਨ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਦੇ ਕਾਰਨ-

  • ਗੋਬਰ ਨੂੰ ਸਿੱਧੇ ਹੀ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਜਲਾਉਣ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਵਰਗੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਨਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਨਾਲ ਸਾਫ-ਸੁਥਰਾ ਬਾਲਣ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਾਲਤੂ ਸਲਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  • ਗੋਬਰ ਨੂੰ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਜਲਾਉਣ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਧੂੰਆਂ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਹਵਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਬਣਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਹਵਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਕਾਰਨ ਦੱਸੋਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਵਰਦਾਨ ਸਮਝੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਧੁਨਿਕ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਦਰਅਸਲ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੈ । ਇਸ ਪਲਾਂਟ ਦੁਆਰਾ ਜੰਤੂਆਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਨੂੰ ਸੌਖ ਨਾਲ ਆਕਸੀ-ਸੂਖ਼ਮ ਜੀਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪਾਣੀ ਦੀ ਹੋਂਦ ਵਿੱਚ ਤੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਮੀਥੇਨ, CO2, H2, H2S ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਨ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਹੜੀ ਕਿ ਇਕ ਬਹੁਤ ਲਾਭਦਾਇਕ ਧੂੰਆਂ ਰਹਿਤ ਬਾਲਣ ਹੈ । ਇਸ ਬਾਲਣ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਗੈਸ ਸਟੋਵ ਵਿੱਚ ਤਾਪ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਛੁੱਟ ਜਿਹੜਾ ਘੋਲ ਬਾਕੀ ਬਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਉਸ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਹੜੀ ਕਿ ਇਕ ਵਧੀਆ ਅਜੈਵਿਕ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਸਾਰੀ ਕਿਰਿਆ ਦੌਰਾਨ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵੀ ਦੂਸ਼ਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਕੇ ਕਿਸਾਨ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਸਿੰਜਾਈ ਕਰਨ ਲਈ ਪੰਪ ਸੈਟ ਤੇ ਇੰਜਣ ਚਲਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਡੀਜ਼ਲ ਨਾਲੋਂ ਸਸਤਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਉਪਯੋਗਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਵਰਦਾਨ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਸਮੂਹਿਕ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਲਗਾਉਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਕਾਰਨ ਕੀ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਮਿਲ ਕੇ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਸਮੂਹਿਕ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਲਾਂਟ ਅੱਗੇ ਲਿਖੇ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਲਗਾਏ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ-

  1. ਕਈ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਲਾਂਟ ਨੂੰ ਕਿਰਿਆਸ਼ੀਲ ਰੱਖਣ ਲਈ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਪਸ਼ੂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ।
  2. ਪਰਿਵਾਰ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਖ਼ਰਚੇ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਅਸਮਰੱਥ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  3. ਕਈ ਪਲਾਂਟ ਲਗਾਉਣ ਦੀ ਥਾਂ ਇਕ ਹੀ ਪਲਾਂਟ ਲਗਾਉਣਾ ਸਸਤਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ (ਜੀਵ ਗੈਸ) ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਦੇ ਕੋਈ ਦੋ ਕਾਰਨ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੀਵ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਦੇ ਕਾਰਨ-

  • ਗੋਬਰ ਨੂੰ ਸਿੱਧਾ ਹੀ ਕੰਢਿਆਂ (ਪਾਥੀਆਂ) ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਾਲਣ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿੱਚ ਉਪਸਥਿਤ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਜਿਹੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਨਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਜੀਵ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਨਾਲ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰਾ ਬਾਲਣ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਵਸ਼ੇਸ਼ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਸਲਰੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਖਾਦ ਵਜੋਂ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  • ਗੋਬਰ ਨੂੰ ਕੰਢਿਆਂ (ਪਾਥੀਆਂ) ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਾਲਣ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਵੱਧ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਧੂੰਆਂ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਹਵਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
    ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਜੀਵ ਗੈਸ ਬਣਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਹਵਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਭੋਜਨ ਪਕਾਉਣ ਲਈ ਕੰਢਿਆਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਦੀ ਥਾਂ ਤੇ ਗੋਬਰ ਨੂੰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨਾ ਕਿਉਂ ਚੰਗਾ ਹੈ ? ਇਸ ਦੇ ਤਿੰਨ ਕਾਰਨ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਗੋਬਰ ਜਲਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਵੱਧ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਧੂੰਆਂ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਤੋਂ ਹਵਾ ਦਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਗੋਬਰ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਕਰਨ ਨਾਲ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਕਾਰਨ ਇਸ ਨੂੰ ਚੰਗਾ ਸਮਝਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ।

  1. ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਧੂੰਆਂ ਰਹਿਤ ਬਲਦੀ ਹੈ ।
  2. ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਕਾਫੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਉਸ਼ਮਾ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ।
  3. ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਬਚਿਆ ਹੋਇਆ ਬੇਲੋੜਾ ਪਦਾਰਥ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਯੌਗਿਕਾਂ ਨਾਲ ਭਰਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਜੋਂ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਸੂਰਜ ਦੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸੋਮਾ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜ ਦੀ ਕੋਰ ਵਿੱਚ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਦੇ ਨਿਊਕਲੀਅਸ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ ਚਾਲ ਨਾਲ ਗਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਜਦੋਂ ਇਹ ਨਿਊਕਲੀਅਸ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਟਕਰਾਉਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਸੰਯੋਜਿਤ ਹੋ ਕੇ ਵੱਧ ਪੁੰਜ ਵਾਲੇ ਭਾਰੀ ਤੱਤਾਂ ਦੇ ਨਿਊਕਲੀਅਸ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਨਿਉਕਲੀ ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਸੂਰਜ ਦੇ ਕੋਰ ਵਿੱਚ ਲਗਭਗ 1.4 × 107K ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਦਕਿ ਬਾਹਰ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ 6000 K ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਾਪਮਾਨ ਦੇ ਅੰਤਰ ਕਾਰਨ 4 × 1026 ਵਾਟ (ਜੁਲ ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਕਿੰਡ) ਉਰਜਾ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਰੰਤੁ ਇਸ ਕਾਰਨ ਸੂਰਜ ਠੰਢਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਊਰਜਾ ਦੇ ਵਿਕਿਰਿਤ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਪੁੰਜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਊਰਜਾ ਸਾਨੂੰ ਉਸ ਸਮੇਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਧਰਤੀ ਸੂਰਜ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਸੂਰਜ ਵਿਚਲੇ ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਦੇ ਭਾਰੇ ਆਈਸੋਟੋਪ ਡਿਊਟੀਰੀਅਮ ਨਿਊਕਲੀਅਸ ਸੂਰਜ ਅੰਦਰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਟਕਰਾ ਕੇ ਹੀਲੀਅਮ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਊਰਜਾ ਵੀ ਨਿਕਲਦੀ ਹੈ । ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਦੇ ਸੰਯੋਜਨ ਲਈ ਨਿਊਕਲੀਅਸਾਂ ਦਾ ਅਧਿਕ ਚਾਲ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਣਾ ਤਾਂ ਹੀ ਸੰਭਵ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਸੂਰਜ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ 4000000°C ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਸੂਰਜ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਉਰਜਾ ਸੰਯੋਜਨ ਕਿਰਿਆ ਦਾ ਸਿੱਟਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਜੇਕਰ ਸੂਰਜ ਊਰਜਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾਲ ਸੋਮਾ ਹੈ ਫਿਰ ਵੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਕੇਵਲ ਸੀਮਿਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਵਿੱਚ ਕਿਉਂ ਲਿਆਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜ ਸਾਡੀ ਧਰਤੀ ਤੇ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵਿਸ਼ਾਲ ਸਰੋਤ ਹੈ । ਇਹ ਊਰਜਾ ਸਾਡੇ ਤਕ ਬਹੁਤ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚਦੀ ਹੈ । ਧਰਤੀ ਦੇ ਵਾਯੂਮੰਡਲ ਦੇ ਓਪਰੀ ਭਾਗ ਦੇ ਹਰੇਕ ਵਰਗ ਮੀਟਰ ਦੁਆਰਾ 136kJ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਕਿੰਡ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ 47% ਭਾਗ ਧਰਤੀ ਤਲ ਦੇ ਹਰੇਕ ਵਰਗ ਮੀਟਰ ਤਕ ਇਕ ਸੈਕਿੰਡ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚਦਾ ਹੈ । ਉਰਜਾ ਦੀ ਇਹ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵੀ ਸਮਾਨ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉਪਲੱਬਧ ਨਹੀਂ ਹੈ । ਇਹੀ ਕਾਰਨ ਹੈ ਕਿ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਕੇਵਲ ਸੀਮਿਤ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਕੰਮਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਪਰੰਪਰਾਗਤ ਉਪਯੋਗ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦੇ ਚਾਰ ਦੈਨਿਕ ਉਪਯੋਗ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਪਰੰਪਰਾਗਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ।

  1. ਕੱਪੜੇ ਸੁਕਾਉਣ ਲਈ
  2. ਸਮੁੰਦਰੀ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਲੂਣ ਬਣਾਉਣ ਲਈ
  3. ਫ਼ਸਲ ਕੱਟਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਨਾਜ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਘੱਟ ਕਰਨ ਲਈ
  4. ਸਬਜ਼ੀਆਂ, ਫਲ ਅਤੇ ਮੱਛੀ ਸੁਕਾਉਣ ਲਈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸਿੱਧੇ ਜਾਂ ਅਸਿੱਧੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਤਾਪ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠਾ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਬਿਜਲੀ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਰਸਾਇਣਿਕ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸਮੁੰਦਰੀ ਲਹਿਰਾਂ ਤੋਂ ਊਰਜਾ ਦਾ ਦੋਹਨ ਕਰਕੇ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਅਸਿੱਧੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਵਿੱਚ ਲਿਆਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਸੂਰਜੀ ਤਾਪਨ ਜੁਗਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਦਾ ਕੀ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਤਾਪਨ ਜੁਗਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਦਾ ਮਹੱਤਵ-ਤਾਪ ਰੋਧੀ ਬਕਸੇ ਵਿੱਚ ਕਾਲੀ ਪੱਟੀ ਦੀ ਉੱਪਰਲੀ ਸਤਹਿ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਦਾ ਇਹ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਗੁਣ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਸੂਰਜੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਇਨਫਰਾਰੈਡ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰ ਲੰਘਣ ਦਿੰਦੀ ਹੈ । ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸ ਦੀ ਤਰੰਗ ਲੰਬਾਈ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਕੱਚ ਦੀ ਪੱਟੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਇਨਫਰਾਰੈੱਡ ਵਿਕਿਰਨਾਂ ਲਈ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਤਰੰਗ ਲੰਬਾਈ ਅਧਿਕ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਉਤਸਰਜਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਸਤੂਆਂ ਤੋਂ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਤੁਲਨਾਤਮਕ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਤਾਪ ਤੇ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਸੂਰਜੀ ਤਾਪਨ ਜੁਗਤਾਂ ਦੀਆਂ ਕੋਈ ਦੋ ਪਰਿਸੀਮਾਵਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਤਾਪਨ ਜੁਗਤਾਂ ਦੀਆਂ ਪਰਿਸੀਮਾਵਾਂ-

  • ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਸੂਰਜੀ ਉਰਜਾ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਉੱਚ ਤਾਪ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਜੁਗਤਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਇਲਾਵਾ ਇਕ ਹੀ ਸਥਾਨ ਤੇ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਸਮਾਨ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਬਲਕਿ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਬਦਲਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਜੁਗਤ ਮੀਂਹ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਅਸਮਰੱਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਸਾਰੇ ਸੂਰਜੀ ਤਾਪਨ ਜੁਗਤਾਂ ਨੂੰ ਸੂਰਜ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਲਗਾਤਾਰ ਬਦਲਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਧੁੱਪ ਸਿੱਧੀ ਪਵੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਸਾਡੀ ਊਰਜਾ ਦੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੀ ਅਪੂਰਤੀ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਨਾਲ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ ? ਦੋ ਕਾਰਨ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੇਕਰ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਫੈਲਾਉਂਦੇ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਬਹੁਤ ਸੁਵਿਧਾਜਨਕ ਹੈ ਪਰ ਫਿਰ ਵੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਅਸੀਂ ਆਪਣੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਸੰਬੰਧਿਤ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ । ਇਸ ਦੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਕਾਰਨ ਹਨ-

  1. ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਕਾਰਜ ਸਮਰੱਥਾ ਕੇਵਲ 20% ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  2. ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਰਾਤ ਨੂੰ ਆਕਾਸ਼ ਵਿੱਚ ਜਾਂ ਬੱਦਲ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ।
  3. ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਬਹੁਤ ਮਹਿੰਗਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਉਨ੍ਹਾਂ ਚਾਰ ਖੇਤਰਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ਜਿੱਥੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਨੂੰ ਊਰਜਾ ਸਰੋਤ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਉਪਯੋਗ-

  1. ਬਣਾਉਟੀ ਭੂ-ਉਪਹਿ ਅਤੇ ਪੁਲਾੜ ਖੋਜ ਵਿੱਚ ।
  2. ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨਿਕ ਉਪਕਰਨਾਂ ਵਿੱਚ ।
  3. ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿਵਸਥਾ ਅਤੇ ਦੂਰਦਰਾਜ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਟੈਲੀਵਿਜ਼ਨ ਕਾਰਜਕੂਮਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਸਾਰਿਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ।
  4. ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸਤੰਭਾਂ (Light House) ਅਤੇ ਪੈਟਰੋਲੀਅਮ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਥਾਂਵਾਂ ਤੇ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਇਹ ਸਮਝਾਓ ਕਿ ਪਿਛਲੇ ਕੁਝ ਦਹਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ਕਿਉਂ ਵੱਧ ਗਿਆ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਤੱਤ ਅਧਿਕ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਕੀਮਤ ਵਿੱਚ ਉਪਲੱਬਧ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਅਧਿਕ ਸਮਰੱਥਾ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਤੋਂ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਬਣਾਉਟੀ ਉਪਗ੍ਰਹਿਆਂ, ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲਾਂ ਵਿਗਿਆਨਿਕ ਉਪਕਰਨਾਂ, ਦੂਰ ਸੰਚਾਰ ਸਾਧਨਾਂ ਆਦਿ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਸਰਲਤਾ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਸੋਲਰ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ਪਿਛਲੇ ਦਹਾਕੇ ਵਿੱਚ ਵੱਧ ਗਿਆ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਫਾਰਮ ਕੇਵਲ ਕੁੱਝ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਕਿਉਂ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ? ਕਾਰਨ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਸਾਰੇ ਸਥਾਨਾਂ ਤੇ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ ਇਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਥਾਨਾਂ ਤੇ ਸੰਭਵ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਇਸ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਪਰਿਸਥਿਤੀਆਂ ਹੋਣ । ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਲਈ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ-

  1. ਪੌਣ ਦੀ ਗਤੀ 15 ਕਿ.ਮੀ. /ਘੰਟਾ ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।
  2. ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਪੌਣ ਨੂੰ ਇਸੇ ਗਤੀ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀਦਿਨ 12 ਘੰਟੇ ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਅਧਿਕ ਸਮੇਂ ਲਈ ਵਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਇਹ ਸ਼ਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਤਾਂ ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਫਾਰਮ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਅਰਧ ਚਾਲਕ ਕੀ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਰਧ ਚਾਲਕ-ਉਹ ਪਦਾਰਥ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਬਿਜਲੀ ਚਾਲਕ ਚਾਲਕਾਂ ਨਾਲੋਂ ਘੱਟ ਪਰੰਤੂ ਰੋਧਕਾਂ ਨਾਲੋਂ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਅਰਧ ਚਾਲਕ ਪਦਾਰਥ ਜਰਮੇਨੀਅਮ ਅਤੇ ਸਿਲੀਕਾਂਨ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਪੌਣ-ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਪੌਣ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਚੱਲਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ-ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਹਵਾ ਨੂੰ ਪੌਣ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਪੌਣ ਦਾ ਚਲਨਾ – ਧਰੁਵੀ ਖੇਤਰਾਂ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਭੂ-ਮੱਧ ਰੇਖੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸੂਰਜ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਤੀਬਰਤਾ ਅਧਿਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਫਲਸਰੂਪ ਭੂਮੱਧ ਰੇਖੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਧਰਤੀ ਦੇ ਤਲ ਦੇ ਨੇੜੇ ਹਵਾ ਛੇਤੀ ਹੀ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉੱਪਰ ਵਲ ਨੂੰ ਉੱਠਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਖਾਲੀ ਹੋਈ ਥਾਂ ਨੂੰ ਭਰਨ ਲਈ ਧਰੁਵੀ ਖੇਤਰਾਂ ਦੀ ਠੰਢੀ ਹਵਾ ਭੂ-ਮੱਧ ਖੇਤਰਾਂ ਵੱਲ ਵਹਿਣ ਲਗਦੀ ਹੈ । ਹਵਾ ਦੇ ਇਸ ਬਹਾਓ ਨੂੰ ਧਰਤੀ ਦਾ ਘੁੰਮਣਾ ਲਗਾਤਾਰ ਰੁਕਾਵਟ ਪਾਉਂਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਅਜਿਹੇ ਤਿੰਨ ਕਾਰਨ ਦੱਸੋ ਜਿਹੜੇ ਪੌਣ ਨੂੰ ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਹੋਣ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ ਨੂੰ ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਕਰਨ ਲਈ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਕਾਰਨ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਹਨ-

  1. ਸੂਰਜ ਦੀ ਸਥਿਤੀ
  2. ਹਵਾ ਦੇ ਤਾਪਮਾਨ ਦਾ ਅੰਤਰ
  3. ਹਵਾ ਦੇ ਦਬਾਓ ਦਾ ਅੰਤਰ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਕਿਸੇ ਬੰਨ੍ਹ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਕੀਤੀ ਗਈ ਪਣ-ਬਿਜਲੀ ਨੂੰ ਸੋਲਰ ਊਰਜਾ ਦਾ ਹੀ ਹੋਰ ਰੂਪ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਹਿੰਦੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਉਤਪੰਨ ਬਿਜਲੀ ਨੂੰ ਪਣ-ਬਿਜਲੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਸੂਰਜੀ ਸੋਲਰ ਊਰਜਾ ਦੀ ਊਸ਼ਮਾ ਨੂੰ ਸਮੁੰਦਰ, ਦਰੱਖ਼ਤਾਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਅਤੇ ਧਰਤੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ਤੇ ਉਪਸਥਿਤ ਜਲ ਸਰੋਤਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਜਲ ਦਾ ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ ਕਰਨ ਲਈ ਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਤਪਾਦਿਤ ਜਲਵਾਸ਼ਪ ਵਾਯੂਮੰਡਲ ਵਿੱਚ ਉੱਪਰ ਵਲ ਉੱਠਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਜਲਵਾਸ਼ਪ ਠੰਢੇ ਹੋ ਕੇ ਵਾਪਸ ਮੀਂਹ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੇਠਾਂ ਡਿੱਗਦੇ ਹਨ । ਮੀਂਹ ਦਾ ਪਾਣੀ ਜਾਂ ਫਿਰ ਬਰਫ਼ ਦੇ ਪਿਘਲਣ ਤੋਂ ਬਣਿਆ ਪਾਣੀ ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠਾ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੁਰਜੀ ਉਰਜਾ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਥਿਤਿਜ ਉਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਇਕੱਠੇ ਕੀਤੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਤੀਬਰ ਗਤੀ ਨਾਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਸਥਿਤਿਜ ਉਰਜਾ ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਹੁਣ ਇਹ ਤੀਬਰ ਗਤੀ ਦਾ ਪਾਣੀ ਟਰਬਾਈਨ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਯੰਤਿਕ ਉਰਜਾ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬਿਜਲੀ ਉਰਜਾ ਰੂਪਾਂਤਰਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਪਣਬਿਜਲੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦਾ ਇਕ ਹੋਰ ਰੂਪ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਪਣ-ਊਰਜਾ ਦਾ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਪ੍ਰਤਿਬੰਧ ਦੱਸੋ । ਇਸ ਦਾ ਲਾਭ ਵੀ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਣ – ਊਰਜਾ ਦਾ ਇਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਪ੍ਰਤਿਬੰਧ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਪਣ-ਚੱਕੀ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ਵਹਿ ਰਿਹਾ ਜਲ ਹਰੇਕ ਥਾਂ ਤੇ ਵੱਧ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਉਪਲੱਬਧ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਕਾਰਜ ਕਰਨ ਲਈ ਪਣ-ਉਰਜਾ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੇਵਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਥਾਂਵਾਂ ਤੇ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਵਹਿੰਦੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਅਧਿਕ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਉਪਲੱਬਧ ਹੋਵੇ । ਪਣ-ਊਰਜਾ ਦਾ ਇਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਲਾਭ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਨਾਲ ਪਰਿਆਵਰਣ ਦਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ (Ocean Thermal Energy) – ਸਮੁੰਦਰ, ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦੇ ਵੱਡੇ ਭੰਡਾਰ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਉਰਜਾ ਦੇ ਇਸ ਸੋਮੇ ਨੂੰ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆਂਦਾ ਜਾ ਸਕੇ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਬਹੁਤ ਅਧਿਕ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਉਰਜਾ ਉਪਲੱਬਧ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ । ਸਮੁੰਦਰ ਦੀ ਸਤਹਿ ਤੇ ਇਸ ਦੀ ਲਗਭਗ 1000 m ਡੂੰਘਾਈ ਵਿਚਕਾਰ ਤਾਪਮਾਨ ਅੰਤਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਮੁੰਦਰ ਵਿੱਚ ਕਈ ਥਾਂਵਾਂ ‘ਤੇ ਤਾਂ ਤਾਪ ਵਿੱਚ ਇਹ ਅੰਤਰ 20°C ਤਕ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਮੁੰਦਰ ਦੀ ਸਤਹਿ ਤੇ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਡੂੰਘਾਈ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਤਾਪ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਦੇ ਕਾਰਨ ਉਪਲੱਬਧ ਉਰਜਾ ਨੂੰ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਉਰਜਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜੇ ਦੋ ਰੂਪਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਗਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  • ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਾਲ ਪੌਣਾਂ ਚਲਦੀਆਂ ਹਨ । ਸਮੁੰਦਰ ਤਲ ਤੇ ਵਹਿਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੌਣਾਂ ਜਲ ਤਰੰਗਾਂ ਨੂੰ ਪੈਦਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤਟਾਂ ਨਾਲ ਲਗਾਤਾਰ ਵਹਿਣ ਲਈ ਗਤੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਦੀ ਗਤਿਜ ਊਰਜਾ ਉਪਯੋਗੀ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਕਰਵਾਉਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਕ ਬਣਦੀ ਹੈ ।
  • ਸ਼ਰਜ ਦੀ ਗਰਮੀ ਤੋਂ ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਦਾ ਪਾਣੀ ਗਰਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਦੀਆਂ ਲਹਿਰਾਂ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਬਦਲਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ (OTE) ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 31.
ਸਮੁੰਦਰ ਊਰਜਾ ਦੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਭੰਡਾਰ ਹਨ । ਇਸ ਕਥਨ ਨੂੰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮੁੰਦਰ ਊਰਜਾ ਦੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਭੰਡਾਰ-ਸਮੁੰਦਰ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਉਰਜਾ ਦੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਭੰਡਾਰ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੁਆਰਾ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਉਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਉਰਜਾ ਉਤਪੱਤੀ ਦੇ ਆਧਾਰ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਹਨ-

  1. ਸਮੁੰਦਰ ਦੀਆਂ ਲਹਿਰਾਂ ਗਤਿਜ ਊਰਜਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ।
  2. ਸਮੁੰਦਰ ਦੀ ਵਿਭਿੰਨ ਸੜਾਵਾਂ ਦੇ ਤਾਪ ਦੇ ਅੰਤਰ ਤੋਂ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਦੀ ਉਤਪੱਤੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  3. ਚੰਨ ਅਤੇ ਸੂਰਜ ਦੇ ਆਕਰਸ਼ਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੈਦਾ ਜਵਾਰ ਭਾਟਾ ਤੋਂ ਟਰਬਾਈਨ ਘੁੰਮਾ ਕੇ ਟਰਬਾਈਨਾਂ ਦੁਆਰਾ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਸਾਗਰ ਤੱਟਾਂ ਤੇ ਰਹਿਣ ਵਾਲਿਆਂ ਲਈ ਵਰਦਾਨ ਬਣ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  4. ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਦੇ ਵਿਭਿੰਨ ਸਥਾਨਾਂ ਤੇ ਲੂਣਾਂ ਦੀ ਸੰਘਣਤਾ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹੋਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  5. ਸਮੁੰਦਰੀ ਜੀਵਨ ਨੂੰ ਬਾਲਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਕਾਫ਼ੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 32.
ਭੂ-ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਲਾਭ ਕੀ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਭੂ-ਤਾਪ ਊਰਜਾ (Geothermal Energy) – ਧਰਤੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ਦੇ ਹੇਠਲੇ ਗਰਮ ਚੱਟਾਨਾਂ ਦੇ ਸੋਮੇ ਨੂੰ ਭੂ-ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਭੂ-ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਦੀ ਹੋਂਦ ਧਰਤੀ ਦੇ ਮੱਧ ਭਾਗ ਦੇ ਬਹੁਤ ਗਰਮ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਹੈ । ਇਹ ਸਿੱਧੇ ਜਾਂ ਅਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸੂਰਜ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਨਹੀਂ ਹੈ । ਧਰਤੀ ਦੇ ਹੇਠਲੀਆਂ ਪਿਘਲੀਆਂ ਚੱਟਾਨਾਂ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮੈਗਮਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਭੂ-ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਦਾ ਸੋਮਾ ਹਨ ।

ਜਦੋਂ ਮੈਗਮਾ ਕੁੱਝ ਧਰਤੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ਦੇ ਨੇੜੇ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਗਰਮ ਸਥਾਨ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲਾ ਪਾਣੀ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਭਾਫ਼ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਭਾਫ਼ ਚੱਟਾਨਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਫਸ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਉੱਚੇ ਦਬਾਅ ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਜ਼ਮੀਨ ਅੰਦਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਗਰਮ ਸਥਾਨਾਂ ਤਕ ਪਾਈਪ ਖੋਭੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਭਾਫ਼ ਬਹੁਤ ਅਧਿਕ ਦਬਾਅ ਨਾਲ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਭਾਫ਼ ਟਰਬਾਈਨਾਂ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਟਰਬਾਈਨਾਂ ਦੇ ਚਲਣ ਨਾਲ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਲਾਭ-

  1. ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਪ੍ਰਤੀਦਿਨ 24 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  2. ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਬਾਲਣ ਨਹੀਂ ਜਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਪੈਦਾ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ।
  3. ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਲਾਗਤ ਵੀ ਘੱਟ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 33.
ਵਿਖੰਡਨ ਅਤੇ ਸੰਯਨ ਵਿੱਚ ਉਤਪੰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਉਰਜਾ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਖੰਡਨ ਅਤੇ ਸੰਯਨ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਅੰਤਰ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਇਕ ਗ੍ਰਾਮ ਯੂਰੇਨੀਅਮ ਨੂੰ ਵਿਖੰਡਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਲਗਭਗ 6.2 × 1010 ਊਰਜਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਰੰਤੂ ਜਦੋਂ 1 ਗ੍ਰਾਮ ਡਿਊਟੇਰੀਅਮ ਨੂੰ ਸੰਧਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 2.3 × 1012J ਊਰਜਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਰਮਾਣੂ ਵਿਖੰਡਨ ਨੂੰ ਸੰਯਨ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਅਧਿਕ ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਵਿਖੰਡਨ ਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਰੇਡੀਓ ਸਭਿਅਤਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਪਰਿਣਾਮਸਰੂਪ ਗੁਣ ਸੂਤਰਾਂ ਅਤੇ ਜੀਨਸ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਬਲੱਡ ਕੈਂਸਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜੈਵਿਕ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਕਈ ਦੋਸ਼ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 34.
ਊਰਜਾ ਦੇ ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਅਤੇ ਅਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਊਰਜਾ ਦੇ ਨਵੀਨੀਕਰਨ ਅਤੇ ਅਨਵੀਨੀਕਰਨ ਸਾਧਨਾਂ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਮੁੱਖ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਰਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਊਰਜਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪੁਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ-ਉਰਜਾ ਦੇ ਉਹ ਸੋਮੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਖ਼ਪਤ ਹੋ ਜਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਦੁਬਾਰਾ ਉਤਪਾਦਿਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ, ਊਰਜਾ ਦੇ ਅਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਖਾਣਾ ਪਕਾਉਣ ਲਈ ਅਸੀਂ ਕੋਲਾ, ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਤੇਲ, ਐਲ. ਪੀ. ਜੀ. ਆਦਿ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਦੇ ਹਾਂ । ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਕੜੀ ਦਾ ਕੋਲਾ ਵੀ ਗਰਮੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਬਾਲਦੇ ਹਨ । ਇਕ ਵਾਰ ਵਰਤੇ ਜਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੁਬਾਰਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ । ਦਰੱਖ਼ਤਾਂ-ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਲੱਕੜੀ ਵੀ ਇਸੇ ਸੋਮੇ ਅਧੀਨ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਸੀਮਿਤ ਹਨ । ਇਹ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਫੈਲਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

ਪੂਰਤੀਯੋਗ ਸੋਮੇ – ਉਰਜਾ ਦੇ ਉਹ ਸੋਮੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਪੁਨਰ-ਉਤਪਾਦਨ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਉਰਜਾ ਦੇ ਪੁਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਸੂਰਜ, ਹਵਾ, ਪਾਣੀ, ਮਿੱਟੀ ਆਦਿ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਨ ਨਾਲ ਇਹ ਦੁਬਾਰਾ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਤੋਂ ਕੋਈ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਫੈਲਦਾ । ਇਹ ਅਸੀਮ ਅਤੇ ਸਾਫ਼ ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 35.
ਕੀ ਊਰਜਾ ਦੇ ਸਾਰੇ ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਪੈਦਾ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ? ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਊਰਜਾ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਕਰਕੇ ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ ਲਗਭਗ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਊਰਜਾ ਦੇ ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਸੂਰਜ, ਹਵਾ, ਪਾਣੀ, ਖੇਤੀ ਦਾ ਕੂੜਾ-ਕਰਕਟ, ਲੱਕੜੀ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਗੋਬਰ ਆਦਿ । ਸੂਰਜ, ਊਰਜਾ ਦਾ ਸੋਮਾ ਹੈ । ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਜੈਵ ਮਾਤਰਾ (ਜਲਾਉਣ ਵਾਲੀ ਲੱਕੜੀ, ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਗੋਬਰ, ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਪਲੱਬਧ ਵਿਘਟਨਕਾਰੀ ਫਾਲਤੂ ਪਦਾਰਥ, ਫ਼ਸਲਾਂ ਦਾ ਕੂੜਾ-ਕਰਕਟ ਆਦਿ) ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਤੇ ਇਹ ਊਰਜਾ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਤਸਰਜਿਤ ਹੋਇਆ ਧੂਆਂ ਹਵਾ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 36.
ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੇ ਲਾਭ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ ਚੱਕੀ- ਇਹ ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪੰਣ ਦੀ ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਨੂੰ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਦੁਆਰਾ ਯੰਤਰਿਕ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 5

ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੀ ਰਚਨਾ – ਜਦੋਂ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਘੁੰਮਣ ਵਾਲੀ ਸ਼ਾਫਟ ਵਗਦੀ ਹੋਈ ਪੌਣ, ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਂਦੀ ਹੈ ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਇਕ ਬਲ ਲਗਾਉਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੌਣ ਚੱਕੀਆਂ ਦੇ ਬਲੇਡ ਘੁੰਮਣ ਲਗਦੇ ਹਨ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੇ ਘੁੰਮਣ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਉਸ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਬਣਤਰ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਪੱਖੇ ਦੇ ਬਲੇਡਾਂ ਦੇ ਸਮਾਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਨੂੰ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਪੱਖਾ ਸਮਝਿਆ। ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ । ਕਿਉਂਕਿ ਜਦੋਂ ਪੱਖੇ ਦੇ ਬਲੇਡ ਘੁੰਮਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਪੌਣ ਵੱਗਦੀ ਹੈ, ਪਰੰਤ ਜਦੋਂ ਪੌਣ ਵੱਗਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਦੇ ਬਲੇਡ ਘੁੰਮਦੇ ਹਨ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 6

ਘੁੰਮਦੇ ਹੋਏ ਬਲੇਡਾਂ ਦੀ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਕਾਰਨ ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਨਾਲ ਕਣਕ ਪੀਸਣ ਵਾਲੀ ਚੱਕੀ ਦਾ ਚਲਾਉਣਾ, ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਦਾ ਚਲਾਉਣਾ, ਘੁਮਿਆਰ ਦਾ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਬਰਤਨਾਂ ਦਾ ਚੱਕਾ ਘੁੰਮਾਉਣਾ ਆਦਿ ਕਾਰਜ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਅਜਿਹੇ ਹੀ ਸਥਾਨ ਤੇ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਹਵਾ ਵੀ ਲਗਭਗ ਪੂਰਾ ਸਾਲ ਤੀਬਰ ਵੇਗ ਨਾਲ ਚਲਦੀ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੁਆਰਾ ਪਾਣੀ ਖਿੱਚਣ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੀ ਬੈਂਕ ਇੱਕ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਦੇ ਪਿਸਟਨ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਹਵਾ ਪੌਣ-ਚੱਕੀ ਦੇ ਬਲੇਡ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਚੱਕੀ ਦਾ ਪਹੀਆ ਘੁੰਮਣ ਲਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਧੁਰਾ ਘੁੰਮਣ ਲਗਦਾ ਹੈ । ਧੁਰੇ ਦੀ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬੈਂਕ ਉੱਪਰ-ਹੇਠਾਂ ਹੋਣ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਪੰਪ ਦੀ ਪਿਸਟਨ ਛੜ ਉੱਪਰ-ਹੇਠਾਂ ਗਤੀ ਕਰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਣ ਲਗਦਾ ਹੈ ।

ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੇ ਉਪਯੋਗ – ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੇ ਕਈ ਉਪਯੋਗ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕਿ-

  1. ਪੌਣ ਕਿਸ਼ਤੀਆਂ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ।
  2. ਪੌਣ ਚੱਕੀਆਂ ਨਾਲ ਆਟਾ ਚੱਕੀਆਂ ਤੇ ਜਲ ਪੰਪ ਆਦਿ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ।
  3. ਹਵਾਈ ਜਹਾਜ਼ਾਂ ਦੁਆਰਾ ਉਡਾਨ ਭਰਨ ਲਈ ।
  4. ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਲਈ ।

ਪੌਣ ਉਰਜਾ ਦੀਆਂ ਹਾਨੀਆਂ – ਭਾਵੇਂ ਪੌਣ ਉਰਜਾ ਦੇ ਕਈ ਲਾਭ ਹਨ ਪਰੰਤ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਈ ਹਾਨੀਆਂ ਵੀ ਹਨ। ਕਈ ਕਮੀਆਂ ਵੀ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਮੰਨ ਲਓ ਜਦੋਂ ਸਾਨੂੰ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਸਮੇਂ ਪੌਣ ਦਾ ਵਹਾਓ ਨਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸ ਸਮੇਂ ਪੌਣ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਨਾ ਵਗਦੀ ਹੋਵੇ । ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਨੂੰ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਖੁੱਲਾ ਖੇਤਰ ਵੀ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਕ ਹੋਰ ਕਮੀ ਇਹ ਵੀ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਨੂੰ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਨਿਰਮਾਣ ਲਾਗਤ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 37.
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ਕਿਵੇਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ – ਇਹ ਪੈਨਲ ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਤੋਂ ਬਣਾਈ ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਕੇ ਉਪਯੋਗੀ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਬਣਾਵਟ – ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ਕਈ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਸਮੂਹਿਕ ਰੂਪ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦੀ ਯੋਗਤਾ ਤੇ ਆਧਾਰਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਕਈ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤਰਤੀਬ ਦੇ ਕੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨੂੰ ਅਜਿਹੀ ਥਾਂ ਤੇ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਕਾਫ਼ੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਧੁੱਪ ਆਉਂਦੀ ਹੋਵੇ। ਪੈਨਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨੂੰ ਬਦਲਣ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ – ਸਿਲੀਕਾਨ ਅਤੇ ਗੈਲੀਅਮ ਵਰਗੇ ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਣਾਏ ਗਏ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਪੈਨਲ ਤੇ ਜਦੋਂ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਅਰਧ ਚਾਲਕ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਾਰ ਵਰਗ ਸੈਂ.ਮੀ. ਦੇ ਇਕ ਸਰਜੀ ਸੈੱਲ ਨਾਲ 60 ਮਿ.ਲੀ. ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ
ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲ ਤੋਂ ਡੀ.ਸੀ.ਆਉਟਪੁਟ ਲਗਪਗ 0.4 – 0.5 ਵੋਲਟ ਤੇ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਘੱਟ ਜਾਂ ਵੱਧ ਗਿਣਤੀ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਘੱਟ ਜਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉਪਯੋਗ-

  1. ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
  2. ਬਣਾਉਟੀ ਵਿੱਚ ਉਪਗ੍ਰਹਿ ਅਤੇ ਪੁਲਾੜ ਖੋਜ ਯਾਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤਾ । ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਊਰਜਾ ਦਾ ਅਨੰਤ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਕਿਹੜਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿੰਨੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜ ਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਨੂੰ ਦੋ ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ-

  1. ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਊਰਜਾ ਸੋਮੇ ਅਤੇ
  2. ਪੂਰਤੀ ਅਯੋਗ ਊਰਜਾ ਸੋਮੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦੇ ਤੱਤ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ-CH4, CO2 ਅਤੇ H2S ਹਨ । ਇਸ ਵਿੱਚ ਮੀਥੇਨ 65% ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਕਿਸੇ ਦੋ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਕੋਲਾ,
  2. ਪੈਟਰੋਲੀਅਮ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਇਕ ਕਾਰਨ ਦੱਸੋ ਜਿਸ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਅਸੀਂ ਇਹ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਇੱਕ ਚੰਗਾ ਬਾਲਣ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਇਸ ਦਾ ਵਧੇਰੇ ਹਿੱਸਾ ਮੀਥੇਨ ਹੈ ਜੋ ਇਕ ਚੰਗਾ ਬਾਲਣ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਵਰਦਾਨ ਕਿਉਂ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਗੈਸੀ ਬਾਲਣ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸਲਰੀ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਖਾਦ ਵੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
L.P.G ਦੇ ਤੱਤ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਈਥੇਨ, ਪੇਨ ਅਤੇ ਬਿਊਟੇਨ । L.P.G. ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੰਘਟਕ ਬਿਊਟੇਨ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਉੱਚ ਦਬਾਅ ਹੇਠ ਤਰਲ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਗੈਰ-ਨਵਿਆਉਣਯੋਗ ਬਾਲਣ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੋਲਾ, ਪੈਟਰੋਲੀਅਮ ਅਤੇ ਕੁਦਰਤੀ ਗੈਸ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕੋਲ ਗੈਸ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਹਾਈਡਰੋਜਨ, ਮੀਥੇਨ ਅਤੇ ਕਾਰਬਨ ਮੋਨੋਆਕਸਾਈਡ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਨ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਜੈਵ-ਪੁੰਜ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੈਵ-ਪੰਜ – ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਸਮੱਗਰੀ ਨੂੰ ਜੈਵ-ਪੁੰਜ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ ਊਰਜਾ (Wind Energy) – ਹਵਾ ਦੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਪੁੰਜ ਦੀ ਗਤੀਸ਼ੀਲਤਾ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਗਤੀ ਊਰਜਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਬਾਲਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਗੋਹੇ ਦੀਆਂ ਪਾਥੀਆਂ ਦੀਆਂ ਕੋਈ ਦੋ ਹਾਨੀਆਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦਿਨ, ਅਪੂਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਧੂੰਆਂ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  2. ਗੋਹੇ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਲਾਭਦਾਇਕ ਤੱਤ ਬਰਬਾਦ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਗੋਬਰ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਬਾਲਣ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਇਕ ਉਪਯੋਗ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਸੜਕਾਂ ‘ਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ ਕਿਹੜੀ-ਕਿਹੜੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-

  1. ਸਥਾਈ ਗੁੰਬਦ ਪਲਾਂਟ
  2. ਤੈਰਦੀ ਗੈਸ ਟੈਂਕੀ ਪਲਾਂਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲ – ਇਹ ਅਰਧਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਣਾਈ ਗਈ ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਸੋਲਰ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਕੇ ਉਪਯੋਗੀ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਕੋਈ ਚਾਰ ਅਰਧਚਾਲਕਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
ਜਾਂ
ਅਜਿਹੇ ਦੋ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ਜੋ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲੀਕਾਂਨ, ਗੇਲੀਅਮ, ਸੇਲੀਨਿਅਮ, ਜਰੇਨਿਅਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਨਾਲ ਬਣਨ ਵਾਲੇ ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਕਿੰਨੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
10%-18%.

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਉਪਯੋਗੀ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਚਾਲਕਤਾ ਨੂੰ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਰਧ ਚਾਲਕਾਂ ਦੀ ਚਾਲਕਤਾ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪਦਾਰਥ (ਅਸ਼ੁੱਧੀ) ਮਿਲਾ ਕੇ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਪਰੰਪਰਾਗਤ ਰੂਪ ਨਾਲ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਦੇ ਦੋ ਉਪਯੋਗ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਕੱਪੜੇ ਸੁਚਾਉਣ ਵਿੱਚ
  2. ਸਮੁੰਦਰ ਦੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਲੂਣ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲਾਂ ਦੇ ਦੋ ਲਾਭ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਰਨਾ
  2. ਜਲ-ਪੰਪ ਚਲਾਉਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਬਣਾਉਟੀ ਉਪਗ੍ਰਹਿ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਕਿਹੜੇ ਸਾਧਨ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਪੈਨਲਾਂ ਤੋਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ-ਜੀਵ – ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਧਰਤੀ ਹੇਠ ਦੱਬੇ ਰਹੇ ਅਤੇ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਅਣਹੋਂਦ ਵਿੱਚ ਅਪਘਟਿਤ ਹੋ ਕੇ ਬਾਲਣ ਬਣ ਗਿਆ ਜਿਸ ਨੂੰ ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਨ – ਕੋਲਾ, ਪੈਟਰੋਲੀਅਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਅਨਵੀਨੀਕਰਨ ਸਾਧਨਾਂ ਦੀਆਂ ਤਿੰਨ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਓ :
ਉੱਤਰ-

  1. ਕੋਲਾ
  2. ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਤੇਲ
  3. L.P.G.

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਕਿਸੇ ਦੋ ਪੂਰਤੀ ਯੋਗ ਸੋਮਿਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੂਰਤੀਯੋਗ ਸੋਮਿਆਂ ਦੇ ਨਾਂ-

  1. ਪਾਣੀ
  2. ਹਵਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਕਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੰਤੂਆਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਦੀ ਪਾਣੀ ਦੀ ਹੋਂਦ ਅਤੇ ਆਕਸੀਜਨ ਦੀ ਗੈਰ-ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਸੂਖ਼ਮ ਜੀਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਲਘੂਕਰਨ ਦੌਰਾਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ – ਸਮੁੰਦਰ ਦੀ ਸਤਹਿ ਦੇ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਡੂੰਘਾਈ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਤਾਪਮਾਨ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਕਾਰਨ ਉਪਲੱਬਧ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਾਪ ਊਰਜਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
ਸਰੀਰਿਕ ਕਾਰਜਾਂ ਦੇ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸ ਊਰਜਾ ਦੀ ਲੋੜ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੱਠਿਆਂ ਦੀ ਉਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਕਿਸ ਬਾਲਣ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਨੇ ਉਦਯੋਗਿਕ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਨੂੰ ਸੰਭਵ ਬਣਾਇਆ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੋਲੇ ਦੇ ਉਪਯੋਗ ਨੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 31.
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ ਊਰਜਾ ਦੇ ਕਿਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੂਰਤੀਅਯੋਗ ਸਰੋਤ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 32.
ਬਿਜਲਈ ਉਪਕਰਨਾਂ ਵਿੱਚ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਕਿਸ ਬਾਲਣ ਨੂੰ ਜਲਾ ਕੇ ਭਾਫ਼ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਥਰਾਟ ਬਾਲਣ (ਫਾਸਿਲ ਬਾਲਣ) ਕੋਲਾ ਜਲਾ ਕੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 33.
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਬਾਲਣ ਨੂੰ ਜਲਾ ਕੇ ਊਸ਼ਮਾ ਊਰਜਾ ਉਤਪੰਨ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਤਾਪ ਬਿਜਲੀ ਪਲਾਂਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 34.
ਪਣ-ਬਿਜਲੀ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤਿਜ ਊਰਜਾ ਦਾ ਪਰਿਵਰਤਨ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਤੋਂ ਬਿਜਲੀ ਉਰਜਾ ਵਿੱਚ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 35.
ਪੌਣ ਊਰਜਾ ਫਾਰਮ ਕਿਸਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਪਣ-ਚੱਕੀਆਂ ਲਗਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਤਾਂ ਉਸ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਪੌਣ-ਊਰਜਾ ਫਾਰਮ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 36.
ਕਿਸ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਪੌਣਾਂ ਦਾ ਦੇਸ਼ ਕਿਹਾ ਗਿਆ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਡੈਨਮਾਰਕ ਨੂੰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 37.
ਪੌਣ ਉਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਪੌਣਾਂ ਦੀ ਚਾਲ ਕਿੰਨੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
15 km/h ਤੋਂ ਵੱਧ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 38.
ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ਵਿੱਚ ਕੱਚ ਦੀ ਸ਼ੀਟ ਦਾ ਕਵਰ ਕਿਉਂ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸ਼੍ਰੀਨ ਹਾਊਸ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਲਈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 39.
ਸੋਲਰ ਸੈੱਲ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਕਿਸ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 40.
ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦਾ ਲੇਵਲ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਚੜ੍ਹਦਾ ਅਤੇ ਡਿੱਗਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਚੰਨ ਦੇ ਗੁਰੂਤਾ ਆਕਰਸ਼ਣ ਕਾਰਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 41.
ਨਿਊਕਲੀ ਊਰਜਾ ਕਿਸ ਕਾਰਨ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਿਉਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਕਾਰਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 42.
ਭਾਰੀ ਨਿਉਕਲੀ ਤੱਤਾਂ ਦੇ ਤਿੰਨ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਯੂਰੇਨੀਅਮ,
  2. ਪਲੂਟੋਨੀਅਮ,
  3. ਥੋਰੀਅਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 43.
ਅਲਬਰਟ ਦਾ ਨਿਊਕਲੀ ਵਿਖੰਡਨ ਸੰਬੰਧੀ ਸੂਤਰ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
E = Δmc2

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 44.
ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਬਿਜਲਈ ਰੀਐਕਟਰ ਕਿੱਥੇ-ਕਿੱਥੇ ਸਥਿਤ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਡਾਰਾਪੁਰ (ਮਹਾਂਰਾਸ਼ਟਰ), ਰਾਣਾ ਪ੍ਰਤਾਪ ਸਾਗਰ (ਰਾਜਸਥਾਨ) ਕਲਾਕਮ (ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ), ਨਰੋਗ (ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼), ਕੈਗਾ (ਕਰਨਾਟਕ) ਅਤੇ ਕਟਰਾਪੁਰ (ਗੁਜਰਾਤ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 45.
CNG ਦਾ ਪੂਰਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੰਪੀੜਤ ਕੁਦਰਤੀ ਗੈਸ (Compressed Natural Gas) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 46.
ਊਰਜਾ ਦਾ ਵਾਸਤਵ ਵਿੱਚ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਕਿਹੜਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 47.
ਸੋਲਰ ਸੈੱਲ ਕਿਹੜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜੀ ਉਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 48.
ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸ ਊਰਜਾ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਨ ਨਾਲ ਪਰਿਵਆਵਰਣ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? .
ਉੱਤਰ-
ਪੌਣ ਉਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 49.
ਸੋਲਰ ਸੈੱਲ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੋਲਰ ਸੈੱਲ-ਇੱਕ ਅਜਿਹੀ ਜੁਗਤ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 50.
ਬਣਾਉਟੀ ਉਪਗ੍ਰਹਿ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਕਿਸ ਸਾਧਨ ਨਾਲ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੋਲਰ ਪੈਨਲ ਤੋਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 51.
ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਦਰਸਾਏ ਗਏ ਯੰਤਰ ਵਿਚ ਕਿਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਦਰਪਣ ਵਧੇਰੇ ਢੁੱਕਵਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 11

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 52.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਏ ਯੰਤਰ ਦਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ । ਇਸ ਵਿੱਚ ਕੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 12
ਉੱਤਰ-
ਯੰਤਰ ਦਾ ਨਾਂ – ਸਥਿਰ ਗੁੰਬਦ ਕਿਸਮ ਦਾ ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਪਲਾਂਟ । ਇਸ ਯੰਤਰ ਵਿੱਚ ਬਾਇਓ ਗੈਸ (ਜੈਵ ਗੈਸ) ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 53.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 13 ਨੂੰ ਅੰਕਿਤ ਕਰੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ 14
ਉੱਤਰ-

  1. ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ
  2. ਬਾਹਰੀ ਲੱਕੜ ਦਾ ਬਕਸਾ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Objective Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਨਾ-ਨਵਿਆਉਣ ਯੋਗ ਸ੍ਰੋਤ ਹੈ-
(a) ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ
(b) ਪੌਣ ਊਰਜਾ
(c) ਕੁਦਰਤੀ ਗੈਸ
(d) ਪਾਣੀ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਕੁਦਰਤੀ ਗੈਸ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪਣ-ਬਿਜਲੀ ਸੰਯੰਤਰ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ-
(a) ਪੌਣ ਉਰਜਾ
(b) ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਪਾਣੀ ਦੀ ਉਰਜਾ
(c) ਕੋਲੇ ਦੇ ਜਲਣ ਤੋਂ ਉਤਪੰਨ ਹੋਈ ਉਰਜਾ
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਪਾਣੀ ਦੀ ਊਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਇੱਕ ਤਾਪ ਬਿਜਲੀ ਯੰਤਰ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ-
(a) ਪੌਣ ਊਰਜਾ
(b) ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਪਾਣੀ ਦੀ ਊਰਜਾ
(c) ਫਾਂਸਿਲ ਈਂਧਨ ਦੇ ਜਲਣ ਤੋਂ ਉਤਪੰਨ ਹੋਈ ਊਰਜਾ
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਫਾਂਸਿਲ ਈਂਧਨ ਦੇ ਜਲਣ ਤੋਂ ਉਤਪੰਨ ਹੋਈ ਊਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਇੱਕ ਬਕਸਾਨੁਮਾ ਸੋਲਰ ਕੁੱਕਰ ਨੂੰ 2-3 ਘੰਟੇ ਸੂਰਜ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਉਸਦਾ ਤਾਪ ਰੇਂਜ ਹੋਵੇਗਾ-
(a) 60°C ਤੋਂ 80°C
(b) 80°C ਤੋਂ 100°C
(c) 100°C ਤੋਂ 140°C
(d) 140°C ਤੋਂ 180°C.
ਉੱਤਰ-
(c) 100°C ਤੋਂ 140°C.

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲਦਾ ਹੈ-
(a) ਸੋਲਰ ਪਾਣੀ ਹੀਟਰ
(b) ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ
(c) ਸੌਰ ਭੱਟੀ
(d) ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਪੈਨਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ-
(a) ਕਾਰਬਨ
(b) ਸਿਲੀਕਾਨ
(c) ਸੋਡੀਅਮ
(d) ਕੋਬਾਲਟ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਸਿਲੀਕਾਨ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਉਹ ਉਪਕਰਨ ਜੋ ਊਰਜਾ ਦੇ ਇੱਕ ਰੂਪ ਨੂੰ ਯੰਤ੍ਰਿਕ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲਦਾ ਹੈ, ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ –
(a) ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ
(b) ਸੂਰਜੀ ਸੈੱਲ
(c) ਇੰਜਨ
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਇੰਜਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਜੈਵ ਮਾਤਰਾ ਉਰਜਾ ਸੋਤ ਦਾ ਉਦਾਹਰਨ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
(a) ਲੱਕੜ
(b) ਗੋਬਰ ਗੈਸ
(c) ਕੋਲਾ
(d) ਨਿਊਕਲੀ ਊਰਜਾ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਨਿਊਕਲੀ ਊਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਠੋਸ ਈਂਧਨ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
(a) ਕੋਲਾ
(b) ਲੱਕੜ
(c) ਕੋਕ
(d) ਕਿਰੋਸੀਨ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਕਿਰੋਸੀਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਨਾ-ਨਵਿਆਣਯੋਗ ਊਰਜਾ ਸ੍ਰੋਤ ਹੈ ?
(a) ਪੌਣ ਊਰਜਾ ।
(b) ਸੂਰਜੀ ਊਰਜਾ ।
(c) ਫਾਂਸਿਲ ਈਧਨ
(d) ਪਣ ਊਰਜਾ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਫਾਂਸਿਲ ਧਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਊਰਜਾ ਦਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਇੱਕੋ ਹੀ ਸ੍ਰੋਤ ਕੀ ਹੈ ?
(a) ਸੂਰਜ
(b) ਪਾਣੀ
(c) ਯੂਰੇਨੀਅਮ
(d) ਫਾਂਸਿਲ ਈਂਧਨ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸੂਰਜ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 14 ਊਰਜਾ ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਬਾਇਓ ਗੈਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਘਟਕ ਹੈ-
(a) CO2
(b) CH4
(c) H2
(d) H2S.
ਉੱਤਰ-
(b) CH4

ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰਨਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ-ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ :

(i) ਸੂਰਜੀ ਕੁੱਕਰ ……………… ਊਰਜਾ ਨੂੰ ……………… ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਰੂਪਾਂਤਰਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼, ਤਾਪ

(ii) ਟਾਰਚ ਦਾ ਜਗਣਾ ……………… ਊਰਜਾ ਦਾ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਰੂਪਾਂਤਰਨ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਰਸਾਇਣਿਕ

(iii) ……………… ਗੈਸ, ਬਾਇਓਗੈਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਘਟਕ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੀਥੇਨ

(iv) ਪੌਣ ਚੱਕੀ ਵਿੱਚ ਪੌਣ ਦੀ ……………… ਊਰਜਾ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਯੰਤ੍ਰਿਕ ਕਾਰਜਾਂ ਦੇ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਤਿਜ

(v) ਹਾਈਇਲੈੱਕਟ੍ਰਿਕ ਜਨਰੇਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉੱਚਾਈ ਤੋਂ ਡਿੱਗਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ . ……………. ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਰੂਪਾਂਤਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਥਿਤਿਜ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਵੱਡੇ ਉੱਚਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ ਲੋਹੇ ਦੀ ਕੋਰ ਤੇ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਹੈ ? ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਵਿੱਚ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਬਨਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਉਪਾਅ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੋਲੀਨਾਇਡ – ਇਹ ਇੱਕ ਕੁੰਡਲੀ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਦੀ ਤਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਰੋਧਕ ਚਾਲਕ ਤਾਰ ਦੇ ਕਈ ਲਪੇਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕੁੰਡਲੀ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਕੋਰ (core) ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਲਪੇਟਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਇਸ ਸੋਲਨਾਇਡ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਚੁੰਬਕੀ ਗੁਣ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਨ ਲਗਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 1
ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਲੋਹਾ ਕੋਰ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ-
ਜਦੋਂ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੇ ਅੰਦਰ ਲੋਹੇ ਦੀ ਕੋਰ ਰੱਖ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਵੇਲੇ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੀ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਕਾਫ਼ੀ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਚੁੰਬਕ ਖੇਤਰ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਪਤਾ ਚੁੰਬਕੀ ਸੁਈ ਵਿੱਚ ਹੋਏ ਵਿਖੇਪਣ ਤੋਂ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਕਾਰਨ ਚੁੰਬਕ ਬਣਨ ਵਾਲੀ ਲੋਹਾ ਕੋਰ ਨਾਲ ਯੁਕਤ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਨੂੰ ਹੀ ਬਿਜਲਈ ਚੁੰਬਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਯਾਦ ਰਹੇ ਕਿ ਨਰਮ ਲੋਹੇ ਦੇ ਕੋਰ ਨਾਲ ਬਣਿਆ ਹੋਇਆ ਚੁੰਬਕ ਸਟੀਲ ਕੋਰ ਵਾਲੇ ਚੁੰਬਕ ਨਾਲੋਂ ਵੱਧ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 2

ਇੱਕ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਪ੍ਰਬਲ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਕਾਰਕਾਂ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ-

  1. ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੇ ਲਪੇਟਾਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ – ਜੇਕਰ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੇ ਲਪੇਟਾਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਵੇਗੀ ਤਾਂ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਪ੍ਰਬਲਤਾ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗੀ ।
  2. ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ – ਜੇਕਰ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਧਿਕ ਹੋਵੇਗੀ ਤਾਂ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਪ੍ਰਬਲਤਾ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗੀ ।
  3. ਕੋਰ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਜਿਸ ਉੱਪਰ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਲਪੇਟੀ ਹੋਈ ਹੈ – ਜੇਕਰ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਅੰਦਰ ਰੱਖੇ ਹੋਏ ਨਰਮ ਲੋਹੇ ਦੀ ਛੜ ਹੈ ਤਾਂ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵੱਧ ਪ੍ਰਬਲ ਹੋਵੇਗਾ ।

ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ-

  • ਇੱਕ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਹੋਏ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਪ੍ਰਬਲਤਾ ਲਪੇਟਾਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ, ਉਸ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਕੋਰ ਪਦਾਰਥ ਦੇ ਸੁਭਾਅ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।
  • ਕਾਰਖ਼ਾਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰੀ ਵਜ਼ਨ ਚੁੱਕਣ ਲਈ ਕੁੰਨ ਦੇ ਬਿਜਲਈ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਉਪਯੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਛੋਟ ਬਿਜਲੀ ਘੰਟੀ ਟੈਲੀਗ੍ਰਾਫ਼ ਅਤੇ ਮੋਟਰ ਆਦਿ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਉਪਯੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਇਸਦਾ ਉਪਯੋਗ ਲੋਹੇ ਨੂੰ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਚੁੰਬਕ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਅਪਰਤਵੀਂ (ਡੀ. ਸੀ.) ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਜੈਨਰੇਟਰ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ, ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਚਿੱਤਰ ਸਹਿਤ ਸੰਖੇਪ ਵਿੱਚ ਵਰਣਨ ਕਰੋ !
ਜਾਂ
ਬਿਜਲਈ ਜੈਨਰੇਟਰ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ, ਬਣਤਰ ਅਤੇ ਕਾਰਜਵਿਧੀ ਦਾ ਚਿੱਤਰ ਸਹਿਤ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਜੈਨਰੇਟਰ – ਜੈਨਰੇਟਰ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਯੰਤਰ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਯੰਤਰਿਕ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਕੇਵਲ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਇੱਕ ਰੂਪ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਜੈਨਰੇਟਰ ਵਿੱਚ ਯੰਤਰਿਕ ਊਰਜਾ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਸਿਧਾਂਤ – ਜੈਨਰੇਟਰ ਇਸ ਸਿਧਾਂਤ ਤੇ ਆਧਾਰਿਤ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਚਾਲਕ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਕੱਟਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਫੈਰਾਡੇ ਦੇ ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰੇਰਣ ਕਾਰਨ ਇਸ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਚਾਲਕ ਬਲ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਚਾਲਕ ਸਰਕਟ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਬਨਾਵਟ-ਅਪਰਤਵੀ ਧਾਰਾ ਜੈਨਰੇਟਰ ਦੇ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਮੁੱਖ ਭਾਗ ਹਨ-

  • ਆਰਮੇਚਰ (Armature) – ਇਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਆਇਤਾਕਾਰ ਕੁੰਡਲੀ ABCD ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਸਿਲੰਡਰ ਨੂੰ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਨਰਮ ਲੋਹੇ ਦੇ ਰੋਧੀ ਤਾਰ ਦੀ ਵੱਡੀ ਸੰਖਿਆ ਵਿੱਚ ਲਪੇਟ ਦਿੱਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸਨੂੰ ਆਰਮੇਚਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨੂੰ ਇੱਕ ਧੁਰੇ ਤੇ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸਨੂੰ ਭਾਫ ਜਾਂ ਵਹਿੰਦੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਘੁਮਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਖੇਤਰ ਚੁੰਬਕ (Field Magnets) – ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਦੋ ਚੁੰਬਕੀ ਧਰੁਵਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਕੁੰਡਲੀ ਨੂੰ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਛੋਟੇ ਜੈਨਰੇਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਥਾਈ ਚੁੰਬਕਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰੰਤੂ ਵੱਡੇ ਜੈਨਰੇਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਸਪਲਿਟ ਰਿੰਗ ਜਾਂ ਵਿਭਾਜਿਤ ਛੱਲੇ (Split Rings) – ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਦੋਨਾਂ ਸਿਰਿਆਂ ਤੇ ਤਾਂਬੇ ਦੇ ਬਣੇ ਹੋਏ ਅੱਧੇ ਰਿੰਗ R1 ਅਤੇ R2 ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਕੰਮਿਊਟੇਟਰ ਵਜੋਂ ਕਾਰਜ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
  • ਕਾਰਬਨ ਬੁਰਸ਼ (Carbon Brush) – ਕਾਰਬਨ ਦੇ ਦੋ ਬਰੁੱਸ਼ B1 ਅਤੇ B2 ਦੋਨੋਂ ਅੱਧੇ ਰਿੰਗਜ਼ਾਂ R1 ਅਤੇ R2 ਦੇ ਨਾਲ ਛੂੰਹਦੇ ਹਨ । ਜਦੋਂ ਕੁੰਡਲੀ ਘੁੰਮਦੀ ਹੈ ਤਾਂ R1 ਅਤੇ R2 ਵਾਰੀ-ਵਾਰੀ B1 ਅਤੇ B2 ਨੂੰ ਛੂੰਹਦੇ ਹਨ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪਾਦਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਲੋਡ (Load) – ਬਰੁੱਸ਼ B1 ਅਤੇ B2 ਰਾਹੀਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਨੂੰ ਲੋਡ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਲੋਡ ਦੀ ਥਾਂ ਤੇ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਲਗਾ ਕੇ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।

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ਕਾਰਜ ਵਿਧੀ (Working) – ਜਦੋਂ ਕੁੰਡਲੀ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਧੁਰੇ ਤੇ ਘੁਮਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਭੁਜਾਵਾਂ AB ਅਤੇ CD ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਬਲ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜਾ ਹੱਥ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ਪੇਰਿਤ ਬਿਜਲਈ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਮੰਨ ਲਓ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਕੁੰਡਲੀ ਲੰਬਾਕਾਰ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਹੈ । ਇਸਦੀ ਭੁਜਾ AB ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਅਤੇ ਭੁਜਾ CD ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਕੁੰਡਲੀ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਧੁਰੇ ਦੇ ਦੁਆਲੇ ਘੁਮਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪਹਿਲੇ ਅੱਧੇ ਚੱਕਰ ਦੌਰਾਨ ਭੁਜਾ AB ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਅਤੇ ਭੁਜਾਂ CD ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਗਤੀ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਪੇਰਿਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਭੁਜਾ AB ਵਿੱਚ ਤੋਂ 8 ਵੱਲ ਅਤੇ ਭੁਜਾ CD ਵਿੱਚ Cਤੋਂ CD ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਗਤੀ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੇਗੀ । ਇਸ ਲਈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਭੁਜਾਵਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵੀ ਵਿਪਰੀਤ ਹੋਵੇਗੀ । ਲੋਡ (load) ਵਿੱਚ ਧਾਰਾ ਦੀ ਉਹੀ ਦਿਸ਼ਾ ਰੱਖਣ ਲਈ ਵਿਭਾਜਿਤ ਛੱਲਿਆਂ (Split Rings) ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਦੂਜੇ ਅੱਧ ਚੱਕਰ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਦਾ ਸਿਰਾ ਵਿਭਾਜਿਤ ਛੱਲੇ R, ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਸਿਰਾ D ਵਿਭਾਜਿਤ ਛੱਲੇ R, ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਲੋਡ ਵਿੱਚ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਉਹੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਇੱਕ ਪ੍ਰਯੋਗ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਓ ਕਿ ਇੱਕ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਰੱਖੇ ਹੋਏ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਤੇ ਇੱਕ ਬਲ ਕਿਰਿਆ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਨਿਯਮ ਵੀ ਦੱਸੋ ਜਿਸ ਦੁਆਰਾ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਯੋਗ – ਕਿਸੇ ਸਥਿਰ ਸਹਾਰੇ ਖੜਵੀਂ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸਪਰਿੰਗ ਲੱਗੀ ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਦੀ ਇੱਕ ਛੱੜ ਘੋੜੇ ਦੀ ਨਾਲ ਰੂਪੀ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਦੋਨਾਂ ਧਰੁਵਾਂ ਵਿੱਚ ਲਟਕਾਓ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਹੁਣ ਕੁੰਜੀ K ਦੁਆਰਾ ਛੜ ਨੂੰ ਬੈਟਰੀ ਨਾਲ ਜੋੜੋ । ਹੁਣ ਕੁੰਜੀ K ਨੂੰ ਦਬਾ ਕੇ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਓ ।
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AB ਕਾਗਜ਼ ਦੇ ਤਲ ਦੇ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ (N ਤੋਂ S ਵੱਲ ਹੈ) ਦੇ ਅਭਿਲੰਬ ਹੈ । ਛੜ AB ਵਿੱਚ ਧਾਰਾ A ਤੋਂ B ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੀ
ਗਤੀ (ਬਲ) ਹੈ । ਜਿਉਂ ਹੀ ਛੜ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਵੇਗੀ ਛੜ ਇੱਕ ਬਲ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰੇਗੀ ਅਤੇ ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਹੋਵੇਗੀ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਛੜ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਖਿੱਚੀ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ ਸਪਰਿੰਗ ਲੰਬੇ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 5

ਜੇਕਰ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਬਦਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਬਲ ਵਿਪਰੀਤ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਕਿਰਿਆ ਕਰੇਗਾ । ਚੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਰੱਖੇ ਗਏ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਤੇ ਕਿਰਿਆ ਕਰ ਰਹੇ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਨਿਯਮ । ਦੁਆਰਾ ਪਤਾ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਫਲੇਮਿੰਗ ਦਾ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦਾ ਨਿਯਮ – ਇਸ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਆਪਣੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਉਂਗਲੀ, ਦੂਜੀ ਉਂਗਲੀ ਅਤੇ ਅੰਗੂਠੇ ਨੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਫੈਲਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਇਹ ਤਿੰਨੋਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਤੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੋਣ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਹੁਣ ਆਪਣੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਨੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਹਿਲੀ ਉਂਗਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸੰਕੇਤ ਕਰੇ N ਤੋਂ S ਵੱਲ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਉਂਗਲੀ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਅੰਗੂਠੇ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਪਤਾ ਲੱਗ ਜਾਵੇਗੀ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਇੱਕ ਕਿਰਿਆ-ਕਲਾਪ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਕਰੋ ਜਿਸ ਤੋਂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੋਵੇ ਕਿ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਡਰ-
ਇੱਕ ਕੁੰਡਲੀ XY ਲਓ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲਪੇਟ ਹੋਣ । ਇਸ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਜੋੜੋ । ਇਸ ਆਯੋਜਨ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਕੋਈ ਸਰੋਤ ਨਹੀਂ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 6

ਹੁਣ ਚਿੱਤਰ (a) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇੱਕ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਨੇੜੇ ਲਿਆਓ, ਪਰੰਤੂ ਚੁੰਬਕ ਕੁੰਡਲੀ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਛੂਹਣਾ ਚਾਹੀਦਾ । ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਦੀ ਸੂਈ ਦਾ ਵਿਖੇਪਣ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਜੋ ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਸਬੂਤ ਹੈ ਕਿ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ । ਸੂਈ ਵਿੱਚ ਹੋਏ ਵਿਖੇਪਣ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨੋਟ ਕਰੋ । ਹੁਣ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਕੁੰਡਲੀ ਤੋਂ ਪਰ੍ਹਾਂ ਲਿਜਾਓ । ਤੁਸੀਂ ਵੇਖੋਗੇ ਕਿ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਵਿੱਚ ਫਿਰ ਵਿਖੇਪਣ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਪਰੰਤੂ ਹੁਣ ਪਹਿਲੇ ਵਿਖੇਪਣ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾਂ ਤੋਂ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਹੈ [ਚਿੱਤਰ (b)] । ਜਦੋਂ ਚੁੰਬਕ ਇੱਕ ਥਾਂ ਤੇ ਸਥਿਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਦੀ ਸੂਈ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਵਿਖੇਪਣ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਤੋਂ ਇਹ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਚੁੰਬਕ ਅਤੇ ਕੁੰਡਲੀ ਦੀ ਸਾਪੇਖ ਗਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਧਾਰਾ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹੜੀਆਂ-ਕਿਹੜੀਆਂ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ ਵਰਤੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ-

  1. ਸਾਰੇ ਜੋੜ ਬਿਜਲੀ ਰੋਧਕ ਟੇਪ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਢੱਕੇ ਹੋਏ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ।
  2. ਭੋ-ਸੰਪਰਕ ਤਾਰ ਦਾ ਜ਼ਰੂਰ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  3. ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਫਿਉਜ਼ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  4. ਸਾਰੇ ਪੇਚ ਜਾਂ ਟਰਮੀਨਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੱਸੇ ਹੋਏ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ।
  5. ਸਰਕਟ ਦੀ ਮੁਰੰਮਤ ਕਰਨ ਵੇਲੇ ਰਬੜ ਦੇ ਦਸਤਾਨੇ ਅਤੇ ਜੁੱਤੇ ਪਾਏ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ।
  6. ਜਦੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਕਿਸੇ ਉਪਕਰਨ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹ ਕਰ ਰਹੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਸਮੇਂ ਉਪਕਰਨ ਦੇ ਧਾਤਵੀਂ ਖੋਲ ਜਾਂ ਫਰੇਮ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਛੂਹਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ।
  7. ਪੇਚਕਸ, ਪਲਾਸ, ਟੈਸਟਰ ਆਦਿ ਉੱਪਰ ਬਿਜਲੀ ਰੋਧਕ ਕਵਰ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  8. ਖ਼ਰਾਬ ਸਵਿੱਚ ਨੂੰ ਛੇਤੀ ਬਦਲ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  9. ਅੱਗ ਲੱਗਣ ਜਾਂ ਦੁਰਘਟਨਾ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਸਰਕਟ ਦਾ ਸਵਿੱਚ ਛੇਤੀ ਹੀ ਬੰਦ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  10. ਪਰਵੀਂ ਧਾਰਾ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਫਿਊਜ਼ ਅਤੇ ਸਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਵਾਹਕੀ ਤਾਰ ਵਿੱਚ ਜ਼ਰੂਰ ਲਗਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
  11. ਉੱਚਿਤ ਸਮਰੱਥਾ ਵਾਲਾ ਫਿਊਜ਼ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਤੁਸੀਂ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਿੱਧ ਕਰੋਗੇ ਕਿ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਦਾ ਕਰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਇੱਕ ਮੋਟੀ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਲੰਘਾਉਣ ਨਾਲ ਤਾਰ ਦੇ ਨੇੜੇ ਪਈ ਦਿਸ਼ਾ ਸੂਚਕ ਦੀ ਸੂਈ ਵਿਖੇਪਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਤੋਂ ਇਹ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ? ਇਸ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨੂੰ ਸਮਝਾਉਣ ਲਈ ਉਸਟੈਡ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ – ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ (ਤਾਰ) ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦੇ ਚਹੁੰ ਪਾਸੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਊਰਸਟੈਡ ਨੇ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕੀਤਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਚੁੰਬਕੀ ਸੂਈ ਉੱਪਰ ਰੱਖੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੂਈ ਦਾ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਵਿਖੇਪਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਬਦਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਦੁਸਰੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ਵਿਖੇਪਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਬਦਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਦੂਸਰੀ (ਉਲਟ) ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ਵਿਖੇਪਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਸੂਈ ਤਾਰ ਦੇ ਉੱਪਰ ਰੱਖੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਦੀ ਵਿਖੇਪਣ ਦਿਸ਼ਾ SNOW ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ਯਾਦ ਰੱਖੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 7

ਨੋਟ – SNOW ਨਿਯਮ ਇਹ ਦੱਸਦਾ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਧਾਰਾ 5 ਤੋਂN ਵੱਲ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਸੂਈ, ਤਾਰ ਦੇ ਉੱਪਰ ਰੱਖੀ ਹੋਈ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਦੱਖਣ ਵੱਲ ਵਿਖੇਪਿਤ ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਅਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਗੁਣ . ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ (Magnetic Field) – ਕਿਸੇ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦਾ ਉਹ ਖੇਤਰ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਚੁੰਬਕ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਆਕਰਸ਼ਣ ਜਾਂ ਤਿਕਰਸ਼ਣ ਬਲ) ਅਨੁਭਵ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਚੁੰਬਕੀ ਰੇਖਾਵਾਂ (Magnetic lines of forces) – ਜਦੋਂ ਇਕਾਈ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਗਤੀ ਕਰਨ ਲਈ ਸੁਤੰਤਰ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਜਿਸ ਪੱਥ ਤੇ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਗਤੀ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਗੁਣ-

  1. ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
  2. ਕੋਈ ਵੀ ਦੋ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਕੱਟਦੀਆਂ ਹਨ। ਜੇਕਰ ਕੱਟਦੀਆਂ ਹੋਣ ਤਾਂ ਇਸ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਕਿ ਉਸ ਬਿੰਦੁ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀਆਂ ਦੋ ਦਿਸ਼ਾਵਾਂ ਹੋਣਗੀਆਂ ਜੋ ਸੰਭਵ ਨਹੀਂ ਹੈ ।
  3. ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾ ਦੀ ਸਪੱਰਸ਼ ਰੇਖਾ (ਟੇਜੈਂਟ) ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਤੁਸੀਂ ਸਮਾਨ ਅਤੇ ਅਸਮਾਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਸਮਾਨ ਦਰੀ ਵਾਲੀਆਂ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਸਮਾਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਭਿੰਨ-ਭਿੰਨ ਦੁਰੀਆਂ ਵਾਲੀ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਨਾਲ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਦਰਸਾਏ ਗਏ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦੀਆਂ ਰੇਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਕੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੋਈ ਦੋ ਗੁਣ ਵੀ ਦੱਸੋ ।
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ਉੱਤਰ-
ਰੇਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੇ ਗੁਣ-

  1. ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਬਾਹਰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਵੱਲ ਅਤੇ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਅੰਦਰ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਵੱਲ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।
  2. ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਬਲ ਰੇਖਾ ਦੇ ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਖਿੱਚੀ ਗਈ ਸਪੱਰਸ਼ ਰੇਖਾ (ਟੇਜੇਂਟ) ਉਸ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦਰਸਾਉਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਤੁਸੀਂ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਹੋਈਆਂ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕਿਵੇਂ ਗਿਆਤ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਮੈਕਸਵੈਲ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਪਤਾ ਲਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ
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ਕਰਨ ਲਈ ਚਾਲਕ ਨੂੰ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਵਿਖਾਏ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪਕੜੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਡਾ ਅੰਗੂਠਾ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ਸੰਕੇਤ ਕਰੇ ਤਾਂ ਤੁਹਾਡੀਆਂ ਉਂਗਲੀਆਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਚਾਲਕ ਦੇ ਚਹੁੰ ਪਾਸੇ ਉਤਪੰਨ ਹੋਏ ਖੇਤਰੀ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦਰਸਾਏਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਮੈਕਸਵੈਲ ਦਾ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦਾ ਅੰਗੂਠਾ ਨਿਯਮ ਕੀ ਹੈ ? ਉਸ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਿਸ ਉਦੇਸ਼ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੈਕਸਵੈਲ ਦਾ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦਾ ਅੰਗੂਠਾ ਨਿਯਮ – ਇਸ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਸਿੱਧੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਜੇਕਰ ਚਾਲਕ ਨੂੰ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪਕੜਿਆ ਜਾਏ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ ਅੰਗਨਾ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੀਆਂ ਉਂਗਲੀਆਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ, ਚਾਲਕ ਦੇ ਦੁਆਲੇ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕ ਖੇਤਰ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦਰਸਾਏਗੀ । ਇਸ ਨਿਯਮ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਦੁਆਰਾ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਚੁੰਬਕ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਕੀ ਹਨ ? ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਇੱਕ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਆਕਰਸ਼ਣ ਜਾਂ ਪ੍ਰਤਿਕਰਸ਼ਣ ਬਲ ਨੂੰ ਅਨੁਭਵ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।ਉਹ ਪੱਥ ਜਿਸ ਉੱਪਰ ਚੁੰਬਕ ਦਾ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਮੁਕਤ ਅਵਸਥਾ ਹੋਣ ਤੇ ਗਤੀ ਕਰੇਗਾ ਉਸਨੂੰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ! ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਵਿਧੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

(1) ਲੋਹ ਚੂਰਨ ਦੁਆਰਾ – ਇੱਕ ਕਾਰਡ ਬੋਰਡ ਉੱਤੇ ਇੱਕ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਰੱਖੋ । ਹੁਣ ਉਸ ਕਾਰਡ ਬੋਰਡ ਤੇ ਲੋਹ-ਚੂਰਨ ਛਿੜਕ ਕੇ ਕਾਰਡ ਬੋਰਡ ਨੂੰ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਥਪਥਪਾਓ । ਲੋਹ ਚੂਰਨ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦੇ ਅਨੁਰੂਪ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਏ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਸਥਿਤ ਹੋ ਜਾਏਗਾ ।
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(2) ਇੱਕ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਖਿੱਚਣਾ-
ਕਿਰਿਆ ਕਲਾਪ-ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਦੇ ਨੇੜੇ ਇੱਕ ਚੁੰਬਕੀ ਦਿਸ਼ਾ ਸੂਚਕ ਰੱਖੋ । ਹੁਣ ਇੱਕ ਨੁਕੀਲੀ ਪੈਂਨਸਿਲ ਨਾਲ ਦਿਸ਼ਾ ਸੂਚਕ ਦੇ ਧਰੁਵਾਂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਅੰਕਿਤ ਕਰੋ । ਹੁਣ ਦਿਸ਼ਾ ਸੂਚਕ ਨੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅੱਗੇ ਚਲਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਇਸਦਾ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਉਸੇ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇ ਜਿੱਥੇ ਪਹਿਲੇ ਇਸਦਾ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਸੀ । ਇਸ ਸਥਿਤੀ ਨੂੰ ਅੰਕਿਤ ਕਰੋ। ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਦੁਹਰਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚ ਜਾਓ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਬਿੰਦੂਆਂ ਨੂੰ ਵਕਰ ਰੇਖਾ ਦੁਆਰਾ ਮਿਲਾਓ ਜੋ ਇੱਕ ਬਲ ਰੇਖਾ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਨੇੜੇ ਚੁੰਬਕੀ ਦਿਸ਼ਾ ਸੂਚਕ ਦੀਆਂ ਸਥਿਤੀਆਂ ਅੰਕਿਤ ਕਰੋ : ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਨਮੂਨਾ ਪੈਟਰਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਪ੍ਰਯੋਗ ਦੁਆਰਾ ਸਿੱਧ ਕਰੋ ਕਿ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰਨ ਨਾਲ ਉਸ ਦੇ ਚਹੁ ਪਾਸੇ ਚੰਬੜੀ ਖੇਤਰ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਲੰਘਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਚਾਲਕ ਦੇ ਚਹੁੰ ਤਰਫ ਇੱਕ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਯੋਗ – ਇੱਕ ਕਾਰਡ ਬੋਰਡ ਦਾ ਸਮਤਲ ਟੁਕੜਾ ਲਓ । ਇਸ ਤੇ ਇੱਕ ਚਿੱਟਾ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਲਗਾ ਕੇ ਉਸਨੂੰ ਸਟੈਂਡ ਵਿੱਚ ਖਿਤਿਜ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਲਓ। ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ-ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਤਾਰ ਲੰਘਾਓ ! ਤਾਰ ਨੂੰ ਇੱਕ ਸੈੱਲ ਕੁੰਜੀ K ਨਾਲ ਜੋੜ ਕੇ ਸਰਕਟ ਪੂਰਾ ਕਰੋ : ਹੁਣ ਕੁੰਜੀ X ਨੂੰ ਦਬਾ ਕੇ ਤਾਰ XY ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਲੰਘਾਓ । ਤਾਰ ਦੇ ਨੇੜੇ ਇੱਕ
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ਚੁੰਬਕੀ ਸੂਈ ਲਓ । ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਸੂਈ ਇੱਕ ਖ਼ਾਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਆ ਕੇ ਰੁਕਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਸ ਪ੍ਰਯੋਗ ਤੋਂ ਇਹ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਗੁਜ਼ਾਰਨ ਨਾਲ ਇਸਦੇ ਚਹੁੰ ਪਾਸੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ-ਜਿਵੇਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਵੇਂ-ਉਵੇਂ ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੁ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਪਰਿਮਾਣ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਇੱਕ ਚੱਕਰੀ ਕੁੰਡਲੀ ਕਾਰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਰੂਪ-ਰੇਖਾ ਖਿੱਚੋ ।
ਉੱਤਰ-
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ਚੱਕਰੀ ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਕਾਰਨ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ – ਚੱਕਰੀ ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਕਾਰਨ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦਾ ਅਧਿਐਨ ਕਰਨ ਲਈ ਹੇਠ ਲਿਖਿਆ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਯੋਗ – ਇੱਕ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਮੁੜੇ ਹੋਏ ਤਾਰ ਦੇ ਟੁੱਕੜੇ ਨੂੰ ਇੱਕ ਖਿਤਿਜੀ ਗੱਤੇ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਾਓ । ਹੁਣ ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚੋਂ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰੋ ਅਤੇ ਗੱਤੇ ਤੇ ਲੋਹ ਚੂਰਨ ਖਿਲਾਰ ਕੇ ਥਪਥਪਾਓ ! ਤੁਸੀਂ ਵੇਖੋਗੇ ਕਿ ਲੋਹ ਚੂਰਨ ਇੱਕ ਨਿਸਚਿਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਵਿਵਸਥਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਕੁੰਡਲੀ ਕਾਰਨ ਉਤਪੰਨ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਜਿਉਂ-ਜਿਉਂ ਕੁੰਡਲੀ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਦੂਰ ਜਾਵੋਗੇ ਓਨਾ ਤੀ ਰੇਖਾਵਾਂ ਦਾ ਅਰਧ ਵਿਆਸ ਵੱਧਦਾ ਜਾਵੇਗਾ । ਜਦੋਂ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਖੇਤਰੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਪ੍ਰਬਲਤਾ ਵਧਾਉਣ ਦੇ ਕਾਰਕ-

  1. ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਲਪੇਟਾਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ ਵਧਾਉਣ ਨਾਲ ।
  2. ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਕਰਨ ਨਾਲ ।
  3. ਕੁੰਡਲੀਆਂ ਦਾ ਅਰਧ ਵਿਆਸ ਘਟਾ ਕੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰੇਰਣ ਕਿਸਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ? ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚ ਉਤਪੰਨ ਹਿਤ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਅਧਿਕਤਮ ਕਦੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਣ (Electromagnetic Induction) – ਕਿਸੇ ਸਰਕਟ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਤ ਚੁੰਬਕੀ ਬਲ ਰੇਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਕੇ ਬਿਜਲੀ ਵਾਹਕ ਬਲ ਉਤਪੰਨ ਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰੇਰਣ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਤਪੰਨ ਹੋਏ ਬਿਜਲੀ ਵਾਹਕ ਬਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਬਲ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਇਸਨੂੰ ਕਿਸੇ ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੇਮ੍ਰਿਤ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਜਾਂ ਤਾਂ ਕਿਸੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਗਤੀ ਕਰਵਾ ਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਉਸ ਦੇ ਚਹੁੰ ਤਰਫ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਕੇ ਉਤਪੰਨ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ । ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਕੁੰਡਲੀ ਦੀ ਗਤੀ ਕਰਾ ਕੇ ਮ੍ਰਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਉਤਪੰਨ ਕਰਨਾ ਬਹੁਤ ਸੌਖਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਕੁੰਡਲੀ ਦੀ ਗਤੀ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕੁੰਡਲੀ ਵਿੱਚ ਉਤਪੰਨ ਪ੍ਰੇਮ੍ਰਿਤ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਅਧਿਕਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਅਸੀ ਕਦੀ-ਕਦੀ ਵੇਖਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਅਚਾਨਕ ਬਿਜਲੀ ਬਲਬ ਸਾਧਾਰਨ ਨਾਲੋਂ ਘੱਟ ਜਾਂ ਵੱਧ ਤੀਬਰਤਾ ਨਾਲ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਕੀ ਕਾਰਨ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਪਲਾਈ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ 220 ਵੋਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਕਈ ਵਾਰ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਕਾਰਨ ਬਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸਾਧਾਰਨ ਨਾਲੋਂ ਅਧਿਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਕਦੀ ਇਸ ਦੀ ਵੋਲਟਤਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਬਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸਾਧਾਰਨ ਨਾਲੋਂ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਤਾਰ ਦੀ ਕੁੰਡਲੀ ਕਿਸ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਹੋਣੀ ਹੈ । ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਛੜ ਚੁੰਬਕ-
(i) ਦਾ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਲਿਜਾਇਆ ਜਾਵੇ ।
(ii) ਨੂੰ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸਥਿਰ ਰੱਖਿਆ ਜਾਵੇ ।
(iii) ਨੂੰ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਅੰਦਰੋਂ ਬਾਹਰ ਵੱਲ ਖਿੱਚ ਲਿਆ ਜਾਵੇ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਦੀ ਸਈ ਵਿਖੇਪਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਹੋਂਦ ਦਾ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਤੀਬਰਤਾ ਨਾਲ ਗਤੀਮਾਨ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਵਿਖੇਪਨ ਹੋਰ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ।

(ii) ਜੇਕਰ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਕੁੰਡਲੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸਥਿਰ ਰੱਖਿਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਦੀ ਸੂਈ ਕੋਈ ਵਿਖੇਪਨ ਨਹੀਂ ਦਰਸਾਏਗੀ ।

(iii) ਜੇਕਰ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਕੁੰਡਲੀ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਵੱਲ ਖਿੱਚਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਤਾਂ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਦੀ ਸੂਈ ਵਿੱਚ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿਖੇਪਨ ਵੱਲ ਹੋਵੇਗਾ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਕੁੱਝ ਅਜਿਹੇ ਬਿਜਲਈ ਉਪਕਰਨਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਮੋਟਰ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੋਵੇ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਮੋਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਉਹ ਸਾਰੇ ਉਪਕਰਨ ਕਾਰਜ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਘੁੰਮਣ ਗਤੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ-ਬਿਜਲੀ ਪੱਖਾ, ਟੇਪ ਰਿਕਾਰਡਰ, ਮਿਕਸਰ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਪਰਤਵੀਂ ਧਾਰਾ ਅਤੇ ਅਪਰਤਵੀਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਰਤਵੀਂ ਧਾਰਾ ਅਤੇ ਅਪਰਤਵੀਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-

ਪਤਵੀਂ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ (Alternating Current) ਅਪਰਤਵੀਂ ਜਾਂ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ (Direct Current)
(1) ਇਹ ਧਾਰਾ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । (1) ਇਹ ਧਾਰਾ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(2) ਇਸ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪਰਿਮਾਣ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਵੱਧਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । (2) ਇਸ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪਰਿਮਾਣ ਹਮੇਸ਼ਾ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਹੀ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ।
(3) ਇਸ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਮਾਂ ਅੰਤਰਾਲ ਦੇ ਬਾਅਦ ਬਦਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । (3) ਇਸ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨਹੀਂ ਬਦਲਦੀ ਹੈ ।
(4) ਇਸ ਧਾਰਾ ਦਾ ਗਰਾਫ਼ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਨਾ ਹੋ ਕੇ ਲਪੇਟੇਦਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । (4) ਇਸ ਧਾਰਾ ਦਾ ਗਰਾਫ਼ ਇੱਕ ਸਿੱਧੀ ਰੇਖਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਫਿਉਜ਼ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸਦੇ ਕੀ ਲਾਭ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਫਿਊਜ਼ – ਇਹ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਉਪਕਰਨ ਹੈ ਜੋ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਿਹੜਾ ਬਿਜਲੀ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੁਰਘਟਨਾਵਾਂ ਤੋਂ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਲੱਗੇ ਹੋਰ ਉਪਕਰਨਾਂ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਰੱਖਦਾ ਹੈ : ਵਿਉਜ਼ ਤਾਰ ਜਿਸ ਧਾਤੂ ਦੀ ਬਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਸਦਾ ਪਿਘਲਾਓ ਦਰਜਾ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਲਾਭ – ਜੇਕਰ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਨਿਯਤ ਮਾਤਰਾ ਤੋਂ ਵੱਧ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਫਿਊਜ਼ ਦੀ ਤਾਰ ਪਿਘਲ ਕੇ ਸਰਕਟ ਨੂੰ ਤੋੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਦੁਰਘਟਨਾ ਤੋਂ ਬਚਾਓ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਫਿਉਜ਼ ਦੀ ਤਾਰ ਉੱਚ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਤੇ ਘੱਟ ਪਿਘਲਾਓ ਦਰਜੇ ਵਾਲੀ ਕਿਉਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਿਊਜ਼ ਦੀ ਤਾਰ ਉੱਚ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਤੇ ਘੱਟ ਪਿਘਲਾਓ ਦਰਜੇ ਵਾਲੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਜਦੋਂ ਇਸਨੂੰ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੂਮ ਵਿੱਚ ਵਿਵਸਥਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਅਧਿਕ ਮਾਤਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਹ ਤਾਰ ਪਿਘਲ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਬਿਜਲੀ ਤੋਂ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਹਾਨੀ ਤੋਂ ਬਚਾਓ ਹੋ ਜਾਵੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਾਂਕ (ਝੱਟਕਾ) ਕਿਸ ਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਾਂਕ (Electric shock) – ਜਦੋਂ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦਾ ਕੋਈ ਅੰਗ ਬਿਜਲੀ ਲਿਜਾ ਰਹੀ ਨੰਗੀ ਤਾਰ ਨੂੰ ਛੂਹ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਅਤੇ ਧਰਤੀ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਸਥਾਪਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਤੋਂ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚੋਂ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਅਜਿਹਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਸਾਨੂੰ ਝੱਟਕਾ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਝੱਟਕੇ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਸ਼ੱਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਕਈ ਵਾਰ ਅਜਿਹੇ ਝੱਟਕੇ ਨਾਲ ਆਦਮੀ ਦੀ ਮੌਤ ਵੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਓਵਰਲੋਡਿੰਗ ਅਤੇ ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਓਵਰਲੋਡਿੰਗ (Over loading) – ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਇਸ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਹੋਏ ਉਪਕਰਨਾਂ ਦੀ ਬਿਜਲਈ ਸਮਰੱਥਾ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਤਾਰਾਂ ਦੀ ਚੋਣ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਅਧਿਕਤਮ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਸਾਰੇ ਉਪਕਰਨਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਸੀਮਾ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਪਕਰਨ ਆਪਣੀ ਸਮਰੱਥਾ ਤੋਂ ਵੱਧ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਖਿੱਚਦੇ ਹਨ ਜਿਸਨੂੰ ਓਵਰਲੋਡਿੰਗ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ (Short Circuit) – ਕਈ ਵਾਰ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਤਾਰ ਅਤੇ ਉਦਾਸੀਨ ਤਾਰ (ਨਿਊਟਰਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਪਰਸਪਰ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਅਜਿਹਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਸਰਕਟ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਸਿਫਰ (ਜ਼ੀਰੋ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਸਿੱਟੇ ਵਜੋਂ ਬਹੁਤ ਅਧਿਕ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਰਤਾਰੇ ਨੂੰ ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ ਹੋਣ ਸਮੇਂ ਤਾਰ ਬਹੁਤ ਅਧਿਕ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਉਪਕਰਨ ਨੂੰ ਹਾਨੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਸੰਕਟ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ? ਇਨ੍ਹਾਂ ਸੰਕਟਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਓ ਦੇ ਉਪਾਅ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਸੰਕਟ ਅਤੇ ਬਚਾਓ ਦੇ ਉਪਾਅ-

  1. ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਝੱਟਕਾ ਲੱਗਣ ਕਾਰਨ ਸਰੀਰ ਦੇ ਸੈੱਲ ਨਸ਼ਟ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
  2. ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਾਂਕ ਲੱਗਣ ਕਾਰਨ ਦਿਲ ਦੇ ਪੱਠਿਆਂ ਤੇ ਬੁਰਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  3. ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਾਂਕ ਕਾਰਨ ਸਰੀਰ ਦੇ ਪੱਠਿਆਂ ਤੇ ਭੈੜਾ ਅਸਰ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਹਿਲ-ਜੁਲ ਘੱਟ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  4. ਜੇਕਰ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਮੋਟੀ ਫਿਉਜ਼ ਦੀ ਤਾਰ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਅਧਿਕ ਤੀਬਰ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪਵਾਹ ਹੋਣ ਤੇ ਇਹ ਤਾਰ ਨਹੀਂ ਪਿਘਲੇਗੀ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਅੱਗ ਲੱਗ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਿਜਲਈ ਉਪਕਰਨ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਬਚਾਓ ਲਈ ਉਪਾਅ
ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਾਂਕ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ-

  1. ਜਿਸ ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਉਸ ਨੂੰ ਗਿੱਲੇ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਛੂਹਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ।
  2. ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਉਪਕਰਨ ਵਧੀਆ ਕੁਆਲਟੀ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਆਈ. ਐੱਸ. ਆਈ. ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਮਾਣਿਤ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ।
  3. ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵਰਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਬਿਜਲਈ ਉਪਕਰਨਾਂ ਨਾਲ ਭੋ-ਸੰਪਰਕ ਤਾਰ ਜ਼ਰੂਰ ਲੱਗੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।
  4. ਖ਼ਰਾਬ ਪਲੱਗਾਂ ਅਤੇ ਸਵਿੱਚਾਂ ਨੂੰ ਫੌਰਨ ਬਦਲ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਧਾਰਾਵਾਹੀ (ਲਾਇਵ), ਉਦਾਸੀਨ ਅਤੇ ਭੋ-ਸੰਪਰਕ ਜੋੜਕ ਤਾਰਾਂ ਨੂੰ ਆਮਤੌਰ ਤੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਰੰਗ ਦੇ ਤਾਰ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੁਰਾਣੀ ਮਾਨਤਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਲਈ ਲਾਲ, ਉਦਾਸੀਨ ਲਈ ਕਾਲੀ ਅਤੇ ਭੋ-ਸੰਪਰਕਿਤ ਲਈ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਤਾਰ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਅੰਤਰ-ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਤਰ ਤੇ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਮਾਨਤਾ ਅਨੁਸਾਰ ਲਾਇਵ ਤਾਰ ਲਈ ਭੁਰੀ, ਉਦਾਸੀਨ ਲਈ ਹਲਕੀ ਨੀਲੀ ਅਤੇ ਭੋ-ਸੰਪਰਕਿਤ ਤਾਰ ਲਈ ਹਰੀ ਜਾਂ ਹਰੀ-ਪੀਲੀ ਤਾਰ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਭੋ-ਸੰਪਰਕਿਤ ਤਾਰ ਮੋਟੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਇਹ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਧਾਰਾ ਨੂੰ ਸਹਿ ਸਕੇ । ਹੋਰ ਤਾਰਾਂ ਦੀ ਮੋਟਾਈ ਉਪਕਰਨ ਦੀ ਦਰ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਹਰੇਕ ਤਾਰ ਧਾਰਾ ਦੀ ਸੀਮਿਤ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਸਹਿ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਧਾਰਾ ਇਸ ਸੀਮਾ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਵੱਧ ਤਾਪਨ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਸਨੂੰ ਅੱਗ ਲਗ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ 220V ਦੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਲਈ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦਕਿ ਅਮਰੀਕਾ ਜਿਹੇ ਵਿਕਸਿਤ ਅਤੇ ਅਮੀਰ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਇਹ 110V ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਕਿਉਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਵਿਅਕਤੀ 220V ਦੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਤਾਰ ਨੂੰ ਛੂੰਹਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਫਿਰ ਉਹ ਬੁਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਝੁਲਸ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰੰਤੁ 110V ਤੇ ਇਹ ਖ਼ਤਰਨਾਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ । ਘੱਟ ਵੋਲਟਤਾ ਤੇ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਵਿੱਚ ਸੰਚਾਰਣ ਨੁਕਸਾਨ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਛੁੱਟ ਇਸਦੇ ਸੰਚਾਰ ਲਈ ਵੱਡੀ ਸੰਖਿਆ ਵਿੱਚ ਟ੍ਰਾਂਸਫਾਰਮਰ ਲਗਾਉਣੇ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਆਰਥਿਕ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਤੋਂ ਅਵਿਕਾਸਸ਼ੀਲ ਦੇਸ਼ਾਂ ਲਈ ਔਖਾ ਕੰਮ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਧਰਤੀ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਚੁੰਬਕ ਵਾਂਗ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਰਤੀ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡੇ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕਾਰਜ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਇਸਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਧਰਤੀ ਸਤਹਿ ਤੋਂ 3 × 104 ਕਿ.ਮੀ. ਦੀ ਉੱਚਾਈ ਤੇ ਅਨੁਭਵ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਧਰਤੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਕੋਈ ਚੁੰਬਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ।

ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਅੱਗੇ ਲਿਖੇ ਕਾਰਨ ਮੰਨੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ-

  1. ਧਰਤੀ ਹੇਠਾਂ ਪਿਘਲੀ ਹੋਈ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਧਾਤਵੀ ਵ ਲਗਾਤਾਰ ਘੁੰਮਦੇ ਹੋਏ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਚੁੰਬਕ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
  2. ਧਰਤੀ ਆਪਣੇ ਧੁਰੇ ਦੁਆਲੇ ਘੁੰਮਣ ਕਾਰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਗੁਣ ਪ੍ਰਗਟਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
  3. ਧਰਤੀ ਦੇ ਕੇਂਦਰ ਦੀ ਰਚਨਾ ਲੋਹੇ ਅਤੇ ਨਿਕਲ ਨਾਲ ਹੋਈ ਹੈ । ਧਰਤੀ ਦੇ ਘੁੰਮਣ ਕਾਰਨ ਇਸ ਦਾ ਚੁੰਬਕੀ ਵਿਵਹਾਰ ਪ੍ਰਗਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਧਰਤੀ ਇੱਕ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਰਤੀ ਦਾ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਅਜਿਹਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਇਸਦੇ ਅੰਦਰ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਚੁੰਬਕ ਮੌਜੂਦ ਹੈ। ਇਸਦਾ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਕੈਨੇਡਾ ਦੇ ਉੱਤਰੀ ਅਰਧ ਗੋਲੇ ਵਿੱਚ 70.5 ਉੱਤਰੀ ਅਕਸ਼ਾਂਸ਼ ਅਤੇ 96° ਪੱਛਮੀ ਰੇਖਾਵਾਂ ਤੇ ਸਥਿਤ ਹੈ । ਇਹ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 1600 ਕਿ. ਮੀ. ਦੂਰ ਹੈ । ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘ ਰਿਹਾ ਖਿਤਿਜ ਤਲ ਭੂਗੋਲਿਕ ਮੀਰੀਡਿਅਨ ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ।ਉੱਤਰ ਅਤੇ ਦੱਖਣ ‘ਚੋਂ ਲੰਘ ਰਿਹਾ ਤਲ ਚੁੰਬਕੀ ਮੀਰੀਡਿਅਨ ਦੇ ਨਾਂ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ। ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 16

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਕਿਸ ਨਿਯਮ ਨੂੰ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ? ਨਿਯਮ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਇਸ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਿਸ ਯੰਤਰ ਵਿਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 17
ਉੱਤਰ-
ਫਲੇਮਿੰਗ ਦਾ ਖੱਬਾ ਹੱਥ ਨਿਯਮ – ਇਸ ਨਿਯਮ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ‘‘ਆਪਣੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਉਂਗਲੀ, ਵਿਚਕਾਰਲੀ ਉਂਗਲੀ ਅਤੇ ਅੰਗੂਠੇ ਨੂੰ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਫੈਲਾਓ ਕਿ ਇਹ ਤਿੰਨੋਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਪਰਸਪਰ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੋਣ, ਜੇਕਰ ਪਹਿਲੀ ਉਂਗਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ, ਵਿਚਕਾਰਲੀ ਉਂਗਲੀ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸੰਕੇਤ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਅੰਗੂਠਾ ਚਾਲਕ ਦੀ ਗਤੀ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਜਾਂ ਚਾਲਕ ਉੱਤੇ ਲੱਗ ਰਹੇ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ਸੰਕੇਤ ਕਰੇਗਾ ।”
ਇਸ ਨਿਯਮ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਬਿਜਲੀ ਮੋਟਰ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।”

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਏ ਨਿਯਮ ਦਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ । ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 18 ਨੂੰ ਅੰਕਿਤ ਕਰੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 19
ਉੱਤਰ-
ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਫਲੇਮਿੰਗ ਦਾ ਸੱਜਾ ਹੱਥ ਨਿਯਮ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 20 ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 21 ਮ੍ਰਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜਾ ਨਿਯਮ ਦਰਸਾਇਆ ਹੈ ? ਇਸ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 18 ਨੂੰ ਅੰਕਿਤ ਕਰੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 22
ਉੱਤਰ-
ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਫਲੇਮਿੰਗ ਦਾ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦਾ ਨਿਯਮ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 20 ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 21 ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ।

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਧਰਤੀ ਇੱਕ ਬੜਾ ਵੱਡਾ ਚੁੰਬਕ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਚੁੰਬਕੀ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਕਿਸ ਪਾਸੇ ਸਥਿਤ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਭੂਗੋਲਿਕ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਵੱਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਤਿੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕੀ ਪਦਾਰਥ-

  1. ਲੋਹਾ
  2. ਕੋਬਾਲਟ
  3. ਨਿਕਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਕਿਸ ਭਾਗ ਵਿੱਚ ਆਕਰਸ਼ਣ ਸ਼ਕਤੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਬਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਿਰਿਆਂ ਤੇ (ਅਰਥਾਤ ਧਰੁਵਾਂ ਤੇ) ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚੁੰਬਕ ਨੂੰ ਸੁਤੰਤਰ ਪੂਰਵਕ ਲਟਕਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸੰਕੇਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਰ-ਦੱਖਣ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਮੁਕਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਲਟਕਾਏ ਗਏ ਚੁੰਬਕ ਦਾ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਕਿਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸੰਕੇਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਭੂਗੋਲਿਕ ਉੱਤਰ ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਫਿਉਜ਼ ਦੀ ਤਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਧਿਕ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਤਾਂ ਜੋ ਗਰਮ ਹੋ ਕੇ ਪਿਘਲ ਸਕੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਿਹੜੀ ਦਿਸ਼ਾ ਉਸ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਰੱਖੀ ਕੰਪਾਸ ਸੂਈ ਦੇ ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਵੱਲ ਖਿੱਚੀ ਗਈ ਰੇਖਾ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਜੇਕਰ ਸੁਤੰਤਰਤਾ ਪੂਰਵਕ ਲਟਕ ਰਹੀ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਬਦਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਬਦਲਣ ਨਾਲ ਸੋਲੀਨਾਇਡ 180° ਘੁੰਮ ਜਾਵੇਗੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਉਦਾਸੀਨ ਬਿੰਦੁ ਤੇ ਨੇਟ ਚੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਤੀਬਰਤਾ ਦਾ ਮਾਨ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਦਾਸੀਨ ਬਿੰਦੁ ਤੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਤੀਬਤਾ ਦਾ ਮਾਨ ਜ਼ੀਰੋ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਧਾਰਾ ਵਾਹੀ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੇ ਨੇੜੇ ਚੁੰਬਕੀ ਸੁਈ ਲਿਆਉਣ ਨਾਲ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕੀ ਸੂਈ ਵਿਖੇਤ ਹੋ ਕੇ ਸੁਈ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਠਹਿਰੇਗੀ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਬਿਜਲੀ ਮੋਟਰ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਜੈਨਰੇਟਰ ਵਿੱਚ ਸਿਧਾਂਤਕ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਕੀ ਅੰਤਰ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਮੋਟਰ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਯੰਤਿਕ ਉਰਜਾ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਬਿਜਲਈ ਜੈਨਰੇਟਰ ਵਿੱਚ ਯੰਤਿਕ ਉਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਜੇਕਰ ਛੜ ਚੁੰਬਕ ਦੇ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ ਨੂੰ ਸੋਲੀਨਾਇਡ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਦੂਰ ਲਿਜਾਇਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਸਿਰੇ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜਾ ਧਰੁਵ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੱਖਣੀ ਧਰੁਵ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਖੱਬਾ ਹੱਥ ਅੰਗੂਠਾ ਨਿਯਮ ਕਿਸ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਵਿੱਚ ਅੰਗੂਠਾ ਕਿਸ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਤੇ ਲੱਗ ਰਹੇ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਨੂੰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਗਤੀਮਾਨ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਕ੍ਰਿਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕਿਸ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ਪਤਾ ਕੀਤੀ। ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰੇਰਣ ਦੀ ਘਟਨਾ ਦੀ ਖੋਜ ਕਿਸ ਵਿਗਿਆਨਿਕ ਨੇ ਕੀਤੀ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਮਾਇਕਲ ਫੈਰਾਡੇ ਨੇ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਸਾਡੇ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਪਲੱਬਧ ਮੇਨਜ਼ ਬਿਜਲੀ ਸਪਲਾਈ ਦੀ ਵੋਲਟਤਾ ਕਿੰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
220 ਵੋਲਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਘਰੇਲੂ ਸਰਕਟ ਨੂੰ ਓਵਰਲੋਡਿੰਗ ਅਤੇ ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹੜੀ ਜੁਗਤ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਿਉਜ਼ ਤਾਰ ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਭੋ-ਸੰਪਰਕ ਤਾਰ ਦਾ ਕਿਹੜਾ ਰੰਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਹਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਧਾਤਵੀ ਫਰੇਮ ਵਾਲੇ ਬਿਜਲੀ ਉਪਕਰਨਾਂ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਸ਼ੱਕ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਕੀ ਸਾਵਧਾਨੀ ਵਰਤਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਰੇਮ ਨੂੰ ਭੋ-ਸੰਪਰਕਿਤ ਕਰੋ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਚਾਲਕ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕਿਸ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ਪਤਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਅੰਗੁਠਾ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਯੰਤ੍ਰਿਕ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਰੂਪਾਂਤਰਿਤ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਯੰਤਰ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਮੋਟਰ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
MRI ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਪੂਰਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੰਬਕੀ ਅਨੁਨਾਦ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬਨ (Magnetic Resonance Imaging) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਯੰਤਰਿਕ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲਣ ਵਾਲੇ ਯੰਤਰ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਜੈਨਰੇਟਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਡਾਇਨਮੋ ਕਿਹੜੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਯੰਤਰਿਕ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਡਾਇਨਮੋ ਵਿੱਚ ਉਤਪੰਨ ਹੋਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕਿਸ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ਗਿਆਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
50 ਸਾਈਕਲ ਦੀ ਪਰਤਵੀਂ ਧਾਰਾ ਦਾ ਦੋਲਨ ਕਾਲ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
1/50 ਸੈਕਿੰਡ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਇੱਕ ਪਰਤਵੀਂ ਧਾਰਾ ਦੀ ਆਕ੍ਰਿਤੀ 50 ਹਰਟਜ਼ (Hz) ਹੈ । ਦੱਸੋ ਇੱਕ ਸੈਕਿੰਡ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਕਿੰਨੀ ਵਾਰੀ ਬਦਲੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
100 ਵਾਰ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
ਦਰਸਾਏ ਗਏ ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਅੰਗੂਠਾ ਕਿਸ ਗੱਲ ਦਾ ਸੰਕੇਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 23
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਕਿਹੜੀ ਬਿਜਲਈ ਕਿਰਿਆ ਕਾਰਨ ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ ਦੀ ਸੂਈ ਵਿਖਪਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 24
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰੇਰਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 31.
ਦੋ ਚੁੰਬਕਾਂ ਦੀਆਂ ਚੁੰਬਕੀ ਰੇਖਾਵਾਂ ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਦਿੱਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਚੁੰਬਕਾਂ ਦੇ ਆਹਮਣੇਸਾਹਮਣੇ ਵਾਲੇ ਧਰੁੱਵਾਂ ਦਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 25
ਉੱਤਰ-
ਦੋਵੇਂ ਉੱਤਰੀ ਧਰੁਵ (N) ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 32.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਲੋਹਚੂਨ ਇਕ ਖ਼ਾਸ ਪੈਟਰਨ ਵਿਚ ਸੈੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪੈਟਰਨ ਕੀ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 26
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਰੇਖਾਵਾਂ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 33.
ਸਾਧਾਰਨ ਬਿਜਲੀ ਮੋਟਰ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ P ਅਤੇ Q ਕੀ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ 27
ਉੱਤਰ-
ਸਪਲਿਟ ਰਿੰਗ ।

ਵਸਤੁਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Objective Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰਨ ਤੋਂ ਉਤਪੰਨ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ-
(a) ਮੈਕਸਵੈਲ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ
(b) ਫਲੈਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ
(c) ਫਲੈਮਿੰਗ ਦੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ
(d) ਫੈਰਾਡੇ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਮੈਕਸਵੈਲ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕਿਸੇ ਤੀਬਰ ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਧਾਰਾਵਾਹੀ ਕੁੰਡਲੀ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਉਤਪੰਨ ਹੋਏ ਬਲ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ-
(a) ਮੈਕਸਵੈਲ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ
(b) ਫਲੈਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਨਾਲ
(c) ਫਲੈਮਿੰਗ ਦੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਨਾਲ
(d) ਫੈਰਾਡੇ ਦੇ ਨਿਯਮ ਨਾਲ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਫਲੈਮਿੰਗ ਦੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਨਾਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਘਰੇਲੂ ਪਰਿਪੱਥ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤੀ ਗਈ ਉਦਾਸੀਨ ਤਾਰ ਦਾ ਰੰਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(a) ਕਾਲਾ
(b) ਲਾਲ
(c) ਹਰਾ
(d) ਕੋਈ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਕਾਲਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਜਦੋਂ ਬਿਜਲੀ ਲਿਜਾਣ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਉਦਾਸੀਨ ਤਾਰ ਆਪਸੀ ਸੰਪਰਕ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਵੱਧ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸੇ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਕੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
(a) ਓਵਰਲੋਡ
(b) ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ
(c) ਭੋ-ਸੰਪਰਕ
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਉੱਚ-ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਲੇ ਬਿਜਲੀ ਉਪਕਰਨਾਂ ਦੇ ਧਾਤਵੀਂ ਫਰੇਮ ਨੂੰ ਘਰੇਲੂ ਪਰਿਪਥ ਦੀ ਝੋ-ਤਾਰ ਨਾਲ ਜੋੜਨਾ ਕੀ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਓਵਰਲੋਡਿੰਗ
(b) ਸ਼ਾਰਟ ਸਰਕਟ
(c) ਭੋ-ਸੰਪਰਕ
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਭੋ-ਸੰਪਰਕ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਸ੍ਰੋਤ ਹੈ ?
(a) ਖ਼ੁਸ਼ਕ ਸੈੱਲ
(b) ਬਟਨ ਸੈੱਲ
(c) ਲੈਡ ਬੈਟਰੀ
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਸਾਰੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਉਤਪੰਨ ਕਰਨ ਦੀ ਜੁਗਤ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ-
(a) ਜਨਰੇਟਰ
(b) ਗੈਲਵੈਨੋਮੀਟਰ
(c) ਮੀਟਰ
(d) ਐਮਮੀਟਰ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਜਨਰੇਟਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਸਮਾਨ ਚੁੰਬਕੀ ਧਰੁਵਾਂ ਦਾ ਆਪਸੀ ਕੀ ਸੰਬੰਧ ਹੈ ?
(a) ਅਪਕਰਸ਼ਣ
(b) ਆਕਰਸ਼ਣ
(c) ਦੋਨੋਂ ਅਪਕਰਸ਼ਣ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਣ
(d) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਅਪਕਰਸ਼ਣ ।

ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰਨਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ-ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ :

(i) ਉਹ ਜੁਗਤ ਜਿਹੜੀ ਯੰਤ੍ਰਿਕ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ …………………………. ਅਖਵਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਨਰੇਟਰ

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 13 ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੁੰਬਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ

(ii) ਫਲੇਮਿੰਗ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੁਆਰਾ ……………… ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰੇਮ੍ਰਿਤ ਧਾਰਾ

(iii) ਮੈਕਸਵੈਲ ਦੇ ਸੱਜੇ ਹੱਥ ਦੇ ਨਿਯਮ ਨਾਲ ……………… ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਗਿਆਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ

(iv) ……………… ਦੀ ਕੂਡ ਨਾਲ ਅਧਿਕ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਬਿਜਲਈ ਚੁੰਬਕ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਰਮ ਲੋਹੇ

(v) ਧਰਤੀ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ……………… ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੁੰਬਕ ।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 5 मांग Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 5 मांग

PSEB 11th Class Economics उपभोगी का सन्तुलन Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
माँग का अर्थ बताएँ।
उत्तर-
किसी वस्तु की वह मात्रा जो निश्चित समय, निश्चित स्थान पर वस्तु की विशेष कीमत पर खरीदी जाती है, वह वस्तु की माँग होती है।

प्रश्न 2.
माँग के कोई दो निर्धारक तत्व बताएँ।
उत्तर-

  • वस्तु की कीमत
  • उपभोक्ता की आय।

प्रश्न 3.
माँग का नियम क्या है ?
उत्तर-
माँग का नियम वस्तु की कीमत तथा इसकी माँगी गई मात्रा के बीच विपरीत सम्बन्ध को व्यक्त करता है यदि अन्य बातें समान रहें।

प्रश्न 4.
माँग तालिका क्या होती है ?
उत्तर-
किसी निश्चित समय पर, किसी वस्तु की विभिन्न कीमतों पर माँग की गई मात्रा की तालिका को माँग तालिका कहते हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 5.
उपभोक्ता की आय तथा उसके द्वारा उपभोग की गई वस्तु में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर-
आय में वृद्धि की स्थिति में एक सामान्य वस्तु की माँग में वृद्धि होती है और आय में कमी से माँग में कमी होती है।

प्रश्न 6.
माँग वक्र की ढलान कैसी होती है ?
उत्तर-
माँग वक्र की ढलान ऋणात्मक होती है।

प्रश्न 7.
घटिया वस्तु की परिभाषा दें।
उत्तर-
उन वस्तुओं को घटिया वस्तु कहते हैं जिनकी माँग आय के बढ़ने पर घटती है।

प्रश्न 8.
सामान्य वस्तु की परिभाषा दें।
उत्तर-
उन वस्तुओं को सामान्य वस्तु कहते हैं जिनकी माँग आय के बढ़ने से बढ़ती है और आय के कम होने से घटती है।

प्रश्न 9.
माँग के विस्तार का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की कीमत में कमी होने के कारण उसकी माँग बढ़ जाती है तो इसको माँग का विस्तार कहा जाता है।

प्रश्न 10.
माँग के संकुचन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की कीमत में वस्तु होने के कारण उसकी माँग कम हो जाती है तो इसको माँग में संकुचन कहा जाता है।

प्रश्न 11.
माँग में वृद्धि की परिभाषा दें।
उत्तर-
वर्तमान प्रचलित कीमत आय के बढ़ने से किसी वस्तु की अधिक मात्रा खरीदी जाती है तो इसको माँग में वृद्धि कहते हैं।

प्रश्न 12.
माँग में कमी की परिभाषा दें।
उत्तर-
वर्तमान प्रचलित कीमत पर आय की कमी के कारण किसी वस्तु की कम मात्रा खरीदी जाती है तो इसको माँग की कमी कहते हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 13.
पूरक वस्तुओं से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
पूरक वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जोकि संयुक्त रूप से किसी आवश्यकता को सन्तुष्ट करती हैं जैसे कार और पेट्रोल।

प्रश्न 14.
स्थानापन्न वस्तुओं से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जो वस्तुएँ एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग की जा सकती हैं, उसको स्थानापन्न वस्तुएँ कहा जाता है। जैसे कोका-कोला और पैप्सी कोला।

प्रश्न 15.
सम्बन्धित वस्तुओं से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
पूरक तथा स्थानापन्न वस्तुओं को सम्बन्धित वस्तुएँ कहा जाता है।

प्रश्न 16.
किसी वस्तु की माँग का कीमत से अलग कोई एक निर्धारक तत्त्व बताएँ।
उत्तर-
उपभोक्ता की आय।

प्रश्न 17.
निश्चित कीमत पर एक उपभोक्ता वस्तु की अधिक मात्रा कब खरीदेंगे ?
उत्तर-
आय में वृद्धि होने पर।

प्रश्न 18.
निश्चित कीमत पर एक उपभोक्ता वस्तु की कम मात्रा कब खरीदेगा ?
उत्तर-
आय में कमी होने पर।

प्रश्न 19.
कोई दो कारण बताएं जिसमें वस्तु की कीमत बढ़ने पर एक उपभोक्ता वस्तु की अधिक मात्रा की खरीद करता है।
उत्तर-

  • क्रेताओं की संख्या में वृद्धि
  • उपभोक्ता की आय में वृद्धि।

प्रश्न 20.
यदि एक परिवार की आय में वृद्धि होने से x वस्तु की माँग कम हो जाती है तो वस्तु x किस प्रकार की वस्तु है ?
उत्तर-
घटिया वस्तु।

प्रश्न 21.
वस्तु X की कीमत में वृद्धि से यदि वस्तु Y की माँग बढ़ जाती है तो दोनों वस्तुओं में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर-
X तथा Y स्थानापन्न वस्तुएँ हैं।

प्रश्न 22.
किसी वस्तु की कीमत घटने/बढ़ने से उसकी स्थानापन्न वस्तु की माँग पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
किसी वस्तु की कीमत घटने/बढ़ने से स्थानापन्न वस्तु की माँग विपरीत दिशा में बदल जाती है।

प्रश्न 23.
काफी की कीमत बढ़ने का चाय की माँग पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
चाय की माँग बढ़ जाएगी।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 24.
पेन की कीमत में वृद्धि होने का स्याही की माँग पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
स्याही की माँग कम हो जाएगी।

प्रश्न 25.
माँग वक्र का खिसकाव क्या प्रकट करता है ?
उत्तर-
माँग में वृद्धि अथवा माँग में कमी।

प्रश्न 26.
माँग वक्र पर संचालन क्या प्रकट करता है ?
उत्तर-
माँग का विस्तार तथा माँग का. संकुचन।

प्रश्न 27.
बाज़ार माँग की परिभाषा दें।
उत्तर-
बाजार मांग किसी वस्तु की विभिन्न मात्राओं को दिखाती है, जिन्हें-बाज़ार में सभी उपभोक्ता एक निश्चित समय पर वस्तु की विभिन्न कीमतों पर खरीदने के लिए तैयार होते हैं।

प्रश्न 28.
व्यक्तिगत माँग तालिका से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
एक व्यक्ति किसी निश्चित समय पर, किसी वस्तु की विभिन्न कीमतों पर उसकी जितनी मात्रा की माँग करता है, उसकी सूची को व्यक्तिगत माँग तालिका कहा जाता है।

प्रश्न 29.
व्यक्तिगत माँग वक्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
वह वक्र जो किसी वस्तु की विभिन्न कीमतों पर उपभोक्ता द्वारा की गई माँग को वक्र द्वारा प्रकट करता है, उसे व्यक्तिगत माँग वक्र कहा जाता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 30.
घटिया वस्तु तथा सामान्य वस्तु का माँग वक्र कैसा होता है ?
उत्तर-
घटिया वस्तु तथा सामान्य वस्तु का माँग वक्र ऋणात्मक ढलान वाला होता है।

प्रश्न 31.
गिफ्फन वस्तुओं की मांग वक्र का ढलान कैसा होता है ?
उत्तर-
धनात्मक ढलान।

प्रश्न 32.
वस्तुओं की मांग ………. पर निर्भर करती है।
(a) आय
(b) वस्तु की कीमत |
(c) सम्बन्धित वस्तुओं की कीमत
(d) उपरोक्त सभी पर।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी पर।

प्रश्न 33.
मांग सूची के रेखाचित्र को …… कहते हैं।
(a) व्यक्तिगत माँग
(b) माँग वक्र
(c) बाज़ार माँग
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) माँग वक्र।

प्रश्न 34.
माँग का नियम निम्नलिखित में से किस पर लागू होता है ?
(a) निम्न कोटि वस्तुएँ
(b) साधारण वस्तुएँ
(c) विलास वस्तुएँ
(d) उपरोक्त सभी पर ।
उत्तर-
(b) साधारण वस्तुएँ।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 35.
साधारण तौर पर माँग वक्र की ढलान कैसी होती है ?
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) गोलाकार
(d) उपरोक्त सभी प्रकार की।
उत्तर-
(b) ऋणात्मक।

प्रश्न 36.
जो वस्तुएँ एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग की जा सकती हैं उनको कहा जाता है –
(a) पूरक वस्तुएँ
(b) स्थानापन्न वस्तुएँ
(c) निम्न कोटि वस्तुएँ
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) स्थानापन्न वस्तुएँ।

प्रश्न 37.
पूरक वस्तु की कीमत कम होने से दूसरी पूरक वस्तु की मांग …. .
(a) बढ़ जाएगी।
(b) कम हो जाएगी
(c) सामान्य रहेगी
(d) इनमें कोई परिवर्तन नहीं होता।
उत्तर-
(a) बढ़ जाएगी।

प्रश्न 38.
अन्य बातें सामान्य रहने पर किसी वस्तु की कीमत में कमी होने पर जब वस्तु की मांग बढ़ जाती है तो इसको ………….. कहा जाता है।
(a) माँग में वृद्धि
(b) माँग का विस्तार
(c) मांग में कमी
(d) मांग में संकुचन।
उत्तर-
(b) माँग का विस्तार ।

प्रश्न 39.
जो वस्तुएं एक-दूसरे के बिना प्रयोग नहीं की जाती हैं उनको ……… कहते हैं।
(a) पूरक वस्तुएं
(b) स्थानापन्न वस्तुएं
(c) घटिया वस्तुएं
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) पूरक वस्तुएं।

प्रश्न 40.
यदि एक परिवार की आय में वृद्धि होने से वस्तु की मांग कम हो जाती है तो इस को घटिया वस्तु कहते हैं।
उत्तर-
सही।

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प्रश्न 41.
किसी वस्तु की वह मात्रा जो निश्चित समय और निश्चित स्थान पर वस्तु की विशेष कीमत पर खरीदी जाती है उसको मांग कहते हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 42.
वह वस्तु जिसकी मांग, आय में वृद्धि कम हो जाती है उसको निम्न कोटि (घटिया) वस्तु कहते
उत्तर-
सही।

प्रश्न 43.
वह वस्तु जो संयुक्त रूप में मांग की पूर्ति करती है उसको स्थानापन्न वस्तु कहते हैं।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 44.
जो वस्तु एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग की जाती है उसको स्थानापन्न वस्तु कहते हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 45.
निम्न कोटि (घटिया) वस्तु वक्र वस्तु है जिसकी मांग, आय के बढ़ने से बढ़ जाती है। .
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 46.
घटिया वस्तु को गिफ्फन वस्तु क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
घटिया वस्तुओं की व्याख्या सबसे पहले प्रो० गिफ्फन ने की थी इसलिए बटिया वस्तुओं को गिफ्फन वस्तुएं भी कहा जाता है।

प्रश्न 47.
माँग का नियम ………….. दर्शाता है।
(a) उपयोगिता और कीमत में सम्बन्ध
(b) वस्तु की माँग की गई मात्रा और कीमत में विपरीत सम्बन्ध
(c) आय तथा माँग में विपरीत सम्बन्ध
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(b) वस्तु की माँग की गई मात्रा और कीमत में विपरीत सम्बन्ध ।

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II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मांग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मांग का अर्थ एक निश्चित समय निश्चित कीमत पर वस्तु की जो मात्रा खरीदी जाती है, उसको मांग कहा जाता है। मांग का सम्बन्ध वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा, इच्छा को पूरा करने के लिए धन का होना, धन व्यय करने के लिए तैयार होना, निश्चित कीमत पर निश्चित समय, जब वस्तु खरीदी जाती है तो इसको मांग कहा जाता है।

प्रश्न 2.
कीमत के बगैर मांग के तीन निर्धारक बताओ।
अथवा
वह तत्त्व बताओ जो मांग में परिवर्तन पैदा करते हैं।
उत्तर-
कीमत के बगैर मांग के मुख्य निर्धारक निम्नलिखित हैं-

  1. सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतें (स्थानापन्न तथा पूरक वस्तुओं की कीमतें)
  2. उपभोगी का स्वाद, आदतें, फैशनं इत्यादि में परिवर्तन।
  3. उपभोगी की आय में परिवर्तन।

प्रश्न 3.
व्यक्तिगत मांग सूची का अर्थ बताओ।
उत्तर-
यदि एक सूची में एक मनुष्य द्वारा विभिन्न कीमतों पर खरीदी जाने वाली वस्तु की विभिन्न मात्रा को दिखाया जाता है तो इसको व्यक्तिगत मांग सूची कहा जाता है।

प्रश्न 4.
बाज़ार मांग सूची से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
बाज़ार में वस्तु की विभिन्न कीमत पर विभिन्न उपभोगियों द्वारा दी गई मांग की मात्रा के जोड़ को बाज़ार मांग सूची कहा जाता है। बाज़ार में वस्तु के बहुत से खरीददार होते हैं। यदि बाज़ार में सभी ग्राहकों.की मांग को जोड़कर मांग सूची बनाई जाए तो इसको बाज़ार मांग सूची कहा जाता है।

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प्रश्न 5.
मांग का नियम क्या है ?
उत्तर-
मांग का नियम मनुष्य की मनोवैज्ञानिक स्थिति को प्रकट करता है। इस नियम के अनुसार, “शेष बातें समान रहती हैं, जब एक वस्तु की कीमत कम हो जाती है तो उस वस्तु की मांग में वृद्धि होती है।”

प्रश्न 6.
स्थानापन्न वस्तुओं तथा पूरक वस्तुओं से क्या अभिप्राय है ? इनको उदाहरणों द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर-
स्थानापन्न वस्तुएं-स्थानापन्न वस्तुएं वह वस्तुएं हैं, जो एक-दूसरे की जगह पर प्रयोग हो सकती हैं। जैसे कि चाय तथा कॉफी, लस्सी तथा सकजवीं। पूरक वस्तुएं-पूरक वस्तुएं वह वस्तुएं हैं जो एक-दूसरे के बगैर प्रयोग नहीं की जा सकती। जैसे कि कार तथा पेट्रोल, पैन तथा स्याही।

प्रश्न 7.
साधारण वस्तुएं तथा घटिया अथवा गिफ्फन वस्तुओं से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
साधारण वस्तुएं-साधारण वस्तुएं वह वस्तुएं हैं, जिनकी मांग, आय के बढ़ने से बढ़ जाती है तथा आय के घटने से कम हो जाती है। जैसे कि गेहूँ, चावल, चीनी इत्यादि। घटिया अथवा गिफ्फन वस्तुएं-घटिया वस्तुओं को गिफ्फन वस्तुएं भी कहा जाता है। घटिया वस्तुएं वह हैं, जिनकी मांग आय के बढ़ने से कम हो जाती है। इसमें आय प्रभाव ऋणात्मक होता है। जैसे कि गले-सड़े केले, घुन लगा हुआ अनाज इत्यादि।

प्रश्न 8.
(i) जब स्थानापन्न वस्तु की कीमत कम हो जाती है तो वस्तु की मांग पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
(ii) जब पूरक वस्तु की कीमत कम हो जाती है तो वस्तु की मांग पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
(i) जब स्थानापन्न वस्तु की कीमत कम हो जाती है तो वस्तु की मांग कम हो जाएगी तथा मांग वक्र बाईं ओर खिसक जाता है।
(ii) जब पूरक वस्तु की कीमत कम हो जाती है तो वस्तु की मांग बढ़ जाएगी तथा मांग वक्र दाईं ओर खिसक जाता है।

प्रश्न 9.
जब एक मनुष्य की आय बढ़ जाती है तथा X वस्तु की मांग कम हो जाती है तो x वस्तु को क्या कहा जाता है ?
उत्तर-
जब मनुष्य की आय बढ़ जाती है तथा X वस्तु की कम मांग की जाती है तो X वस्तु को गिफ्फन वस्तु अथवा घटिया वस्तु कहा जाता है।

प्रश्न 10.
मांग का फैलना तथा मांग का संकुचन क्या होता है ?
उत्तर-
मांग का फैलना-जब एक वस्तु की कीमत के घटने से मांग में वृद्धि होती है तो इसको मांग का फैलना कहा जाता है। मांग का संकुचन-जब एक वस्तु की कीमत के बढ़ने से मांग में कमी होती है तो इसको मांग का संकुचन कहा जाता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 11.
मांग की वृद्धि तथा मांग की कमी से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मांग की वृद्धि-जब मांग में वृद्धि कीमत के बिना अन्य तत्त्वों के कारण होती है, जैसे कि-

  • सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतें
  • उपभोगी की आय
  • स्वाद इत्यादि के कारण मांग बढ़ जाती है तो इसको मांग की वृद्धि कहा जाता है।

मांग की कमी-जब मांग में कमी कीमत के बिना अन्य तत्त्वों-

  • सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतें
  • आय
  • स्वाद इत्यादि कारण होती है तो इसको मांग की कमी कहते हैं।

प्रश्न 12.
(i) एक मांग वक्र पर परिवर्तन से क्या अभिप्राय है ?
(ii) मांग वक्र में परिवर्तन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
(i) एक मांग वक्र पर परिवर्तन का अर्थ है मांग का विस्तार अथवा मांग का संकुचन।
(ii) मांग में परिवर्तन का अर्थ है मांग की वृद्धि अथवा मांग की कमी।

प्रश्न 13.
क्या मांग वक्र धनात्मक ढलान वाली हो सकती है ? |
उत्तर-
मांग वक्र की धनात्मक ढलान (Positive Slope of Demand Curve)-मांग के नियम के अपवादों के कारण मांग, मांग वक्र 1 की ढलान धनात्मक हो सकती है। इसके मुख्य अपवाद हैं-

  1. मान प्रतिष्ठा वाली वस्तुओं की स्थिति में।
  2. उपभोगी की अज्ञानता कारण।
  3. घटिया अथवा गिफ्फन वस्तुओं की स्थिति में मांग वक्र रेखाचित्र 1 की तरह ढलान धनात्मक हो सकती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 1

प्रश्न 14.
मांग के नियम के अपवाद बताइए।
उत्तर-
मांग के नियम के अपवाद इस प्रकार हैं-
1. घटिया वस्तुएं-यह नियम घटियाँ वस्तुओं पर लागू नहीं होता। जब घटिया वस्तु की कीमत घटती है तो इसकी मांग कम हो जाती है। (गले हुए केले)
2. मान प्रतिष्ठा वस्तुएं-हीरे-जवाहरात की कीमत बढ़ने से इनकी मांग बढ़ जाती है और नियम लागू नहीं होता। 3. उपभोक्ता की अज्ञानता- उपभोक्ता की अज्ञानता के कारण भी यह नियम लागू नहीं होता।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मांग की परिभाषा दीजिए, एक उपभोगी की मांग को प्रभावित करने वाले तत्त्व बताओ।
उत्तर-
मांग का अर्थ-

  • वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा
  • उस इच्छा को पूरा करने के लिए धन होना
  • धन व्यय करने के लिए तैयार होना होता है।
  • मांग का सम्बन्ध कीमत
  • तथा समय से भी होता है।

मांग को प्रभावित करने वाले तत्त्व (Factors Affecting Demand)-

  1. वस्तु की कीमत-वस्तु की कीमत तथा मांग का विपरीत सम्बन्ध होता है।
  2. सम्बन्धित वस्तुओं की कीमत-स्थानापन्न वस्तुएं जैसे कि चाय की कीमत बढ़ जाए तो कॉफी की मांग बढ़ जाती है तथा पूरक वस्तुएं जैसे कि कार की कीमत बढ़ जाए तो पेट्रोल की मांग घट जाती है। इसी तरह सम्बन्धित वस्तुओं की कीमत मांग को प्रभावित करती है।
  3. उपभोगी का स्वाद-किसी वस्तु के स्वाद में वृद्धि होने से मांग बढ़ जाती है।
  4. आय-आय में वृद्धि से साधारण वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है तथा घटिया वस्तुओं की मांग घट जाती है।
  5. सम्भावित कीमत- भविष्य में कीमत बढ़ने की सम्भावना हो तो वर्तमान में मांग बढ़ जाती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 2.
सम्बन्धित वस्तुओं की कीमत में परिवर्तन से वस्तु की मांग में परिवर्तन कैसे होता है ? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करो।
अथवा
स्थानापन्न वस्तुओं तथा पूरक वस्तुओं में अन्तर बताओ। इनका मांग पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
अथवा
तिरछे कीमत प्रभाव से क्या अभिप्राय है ?
इसको स्पष्ट जब स्थानापन्न वस्तु (कॉफी) करने के लिए दो उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
सम्बन्धित वस्तुओं में स्थानापन्न तथा पूरक वस्तुओं को | शामिल किया जाता है। सम्बन्धित तथा पूरक वस्तुओं की कीमत में परिवर्तन से मांग में परिवर्तन को तिरछा कीमत प्रभाव कहते हैं।

स्थानापन्न वस्तुएं (Substitute Goods)-चाय तथा कॉफी को स्थानापन्न वस्तुएं कहा जाता है। जब स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ जाती है तो वस्तु की मांग बढ़ जाएगी तथा मांग वक्र दाईं ओर खिसक जाता है। OP कीमत पर चाय की मांग OK है। यदि कॉफी की कीमत अधिक हो जाए तथा चाय की कीमत समान रहती रेखाचित्र 2 है तो चाय की मांग OK1 हो जाएगी तथा मांग वक्र DD से D1D1 पर चला जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 2

पूरक वस्तुएं (Complementary Goods)-कारें तथा पेट्रोल पूरक वस्तुएं हैं। यदि कार की कीमत बढ़ जाती है तो पेट्रोल | की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता परन्तु इसकी मांग कम हो जाएगी। रेखाचित्र 3 में पेट्रोल की मांग DD पर OP कीमत पर OK है। जब कार की कीमत बढ़ जाती है परन्तु पेट्रोल की कीमत में परिवर्तन नहीं होता तो पेट्रोल की मांग OK से कम होकर OK1 हो जाएगी।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 3

प्रश्न 3.
स्पष्ट करो कि वस्तु की कीमत तथा मांग की गई मात्रा में विपरीत सम्बन्ध होता है।
अथवा
मांग अनुसूची तथा रेखाचित्र द्वारा मांग के नियम की व्याख्या करो।
उत्तर-

मांग का नियम (Law of Demand)-मांग का नियम यह बताता है कि वस्तु की कीमत तथा मांग में क्या सम्बन्ध है। वस्तु की कीमत में परिवर्तन आने से वस्तु की मांग में परिवर्तन हो जाता है। यदि दसरी बातें समान रहें तो कीमत घटने से मांग बढ़ जाती है तथा कीमत बढ़ने से मांग कम हो जाती है अर्थात् कीमत तथा मांग में विपरीत सम्बन्ध होता है। कीमत में परिवर्तन होना मुख्य कारण है। मांग में परिवर्तन होना प्रभाव (effect) है। इस कारण कीमत तथा मांग के विपरीत सम्बन्ध को स्पष्ट करने वाले नियम को मांग का नियम कहा जाता है।

परिभाषाएं (Definitions)- प्रो० मार्शल के अनुसार, “यदि बाकी बातें समान रहें तो कीमत घटने से मांग बढ़ती है तथा कीमत बढ़ने से मांग घटती है।” प्रो० सैम्यूलसन के अनुसार, “मांग का नियम यह बताता है कि बाकी बातें समान रहें तो लोग कम कीमत पर अधिक खरीदेंगे तथा अधिक कीमत पर कम खरीदेंगे।” (“The Law of Demand states that other things remaining the same, people will buy more at lower prices and buy less at higher price.” -Samuelson)

मान्यताएं (Assumptions)-मांग का नियम ‘बाकी बातें समान रहें’ की स्थिति में ही लागू होता है। बाकी बातों का अर्थ कीमत के बिना उन तत्त्वों से होता है जोकि मांग को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन तत्त्वों में परिवर्तन नहीं होना चाहिए जिनको अर्थशास्त्री मांग के नियम की मान्यताएं कहते हैं। मांग के नियम की मुख्य मान्यताएं अनलिखित हैं-

  1. उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन नहीं आता।
  2. आदतें, फैशन तथा रीति-रिवाज़ों में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  3. स्थानापन्न वस्तुओं की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  4. पूरक वस्तुओं की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  5. भविष्य में वस्तु की कीमत में परिवर्तन की सम्भावना नहीं होती।
  6. वस्तु साधारण होनी चाहिए।

नियम की व्याख्या (Explanation of the Law)-मांग के नियम की व्याख्या एक उदाहरण द्वारा की जा सकती है। एक उपभोक्ता कुलफी खरीदना चाहता है।कुलफी की विभिन्न कीमत पर उपभोक्ता कुलफियों की कितनी-कितनी मात्रा की खरीद की जाती है। इसको मांग सूची द्वारा दिखाया जा सकता है
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 14
मांग सूची तथा मांग वक्र 14 द्वारा मांग के नियम को स्पष्ट किया गया है। जैसे-जैसे कीमत ₹ 5, 4, 3, 2, 1 घटती है, मांग 1, 2, 3, 4, 5 वस्तुओं की बढ़ती जाती है। इससे DD मांग वक्र बनती है, जोकि ऋणात्मक ढलान वाली है। यह नियम साधारण वस्तुओं (Normal Goods) पर लागू है।

नियम के अपवाद (Exceptions of the Law)-यह नियम निम्नलिखित स्थितियों में लागू नहीं होता-

  1. घटिया वस्तुएं (Inferior Goods)-घटिया वस्तु (गले हुए केले) की कीमत घटती है तो इनकी मांग कम हो जाती है।
  2. मान प्रतिष्ठा वस्तुएं (Articles of Distinction) हीरे-जवाहरात की कीमत बढ़ने से इनकी मांग बढ़ती है।
  3. उपभोक्ता की अज्ञानता (Ignorance of Consumer)-जब उपभोक्ता अज्ञानी होता है तो नियम लागू नहीं होता।

नियम का महत्त्व (Importance of the Law)-

  1. मानवीय व्यवहार का ज्ञान (Knowledge of human behaviour)-इस नियम द्वारा मानवीय व्यवहार सम्बन्धी ज्ञान प्राप्त होता है कि वह बाज़ार में वस्तुओं की खरीद कैसे करता है।
  2. उत्पादक द्वारा कीमत निर्धारण (Price Determination by Producers)-इस नियम को ध्यान में रखकर उत्पादक वस्तु की कीमत निर्धारण करते हैं, जिससे उसको अधिकतम लाभ प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
मांग के नियम की मान्यताएं बताओ। मान्यताओं में परिवर्तन से मांग वक्र पर क्या प्रभाव पड़ता
उत्तर-
मांग के नियम की मान्यताएं (Assumptions)-

  1. आय-उपभोगी की आय में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  2. सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतें-सम्बन्धित वस्तुओं (स्थानापन्न वस्तुएं तथा पूरक वस्तुएं) की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  3. सम्भावनाएं- भविष्य में वस्तु की कीमत के बढ़ने अथवा घटने की कोई सम्भावना नहीं है।
  4. स्वाद, फैशन, आदतें-उपभोगी की आदतें, फैशन, स्वाद तथा श्रेष्ठता में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  5. साधारण वस्तु-वस्तु साधारण होनी चाहिए। घटिया वस्तुओं पर नियम लागू नहीं होता।

यदि इन मान्यताओं में परिवर्तन पैदा हो जाता है तो मांग वक्र आगे अथवा पीछे खिसक जाएगा। मांग वक्र आगे खिसकने का अर्थ है, समान कीमत पर अधिक मांग की जाएगी तथा पीछे खिसकने का अर्थ है, समान कीमत पर कम मांग की जाएगी।

प्रश्न 5.
‘मांग में परिवर्तन’ तथा ‘मांग की मात्रा में परिवर्तन’ में अन्तर स्पष्ट करो।
अथवा
मांग की वृद्धि तथा कमी तथा मांग के विस्तार तथा संकुचन में अन्तर बताओ।
उत्तर-
1. मांग में परिवर्तन (Change in Demand)- मांग में परिवर्तन का अर्थ है मांग में वृद्धि अथवा कमी (Increase or Decrease in Demand)। जब वस्तु की कीमत समान रहती है तथा उपभोगी की आय बढ़ जाती है तो मांग में वृद्धि होगी। यदि आय कम हो जाती है तो मांग में कमी होगी। इसको मांग में परिवर्तन कहा जाता है, जैसे कि रेखाचित्र 4 में दिखाया गया है। OA से OB तक मांग की वृद्धि है, जिस कारण मांग वक्र DD से बदलकर D1D1 बन जाता है तथा यदि मांग वक्र DD से D,D, बन जाता है तो मांग OA से OC तक कम हो जाती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 4

2. मांग की मात्रा में परिवर्तन (Change in Quantity Demanded)-मांग की मात्रा में परिवर्तन रेखाचित्र 4 का अर्थ है मांग का विरार अथवा संकुचन (Extension or Contraction in Dernand) कहा जाता है। जब वस्तु की कीमत घटने से मांग बढ़ जाती है तो इसको मांग का विस्तार कहते हैं तथा कीमत के बढ़ने से मांग कम हो जाती है तो इसको मांग का संकुचन कहते हैं। रेखाचित्र 5 के अनुसार कीमत PP1 कम हो जाती है तो मांग बढ़ जाती है। इसलिए A तथा B तक मांग का विस्तार है तथा कीमत PP2 बढ़ जाती है तो मांग KK2 कम हो जाती है, इसको मांग का संकुचन कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 5

प्रश्न 6.
एक उपभोगी की आय में परिवर्तन से साधारण वस्तुओं तथा घटिया वस्तुओं अथवा गिफ्फन वस्तुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
उपभोगी की आय में परिवर्तन का प्रभाव साधारण वस्तुओं तथा घटिया वस्तुओं पर भिन्न-भिन्न प्रभाव डालता है।
1. साधारण वस्तुएं (Normal Goods)-साधारण वस्तुएं जैसे कि दूध, घी, फल, सब्जियों इत्यादि की कीमत समान रहे, परन्तु उपभोगी की आय बढ़ जाए तो वस्तुओं की मांग बढ़ जाएगी। मांग वक्र DD से बदल कर D1D1 हो जाएगा। मांग में वृद्धि KK1 है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 6
2. घटिया वस्तुएं (Inferior Goods)-घटिया वस्तुओं को गिफ्फन वस्तुएं (Giffen Goods) भी कहा जाता है। जैसे कि बासी सब्जी, गले हुए फल, बहुत सस्ता कपड़ा इत्यादि वस्तुओं की कीमत समान रहे परन्तु उपभोगी की आय बढ़ जाती है तो वस्तुओं की मांग कम हो जाएगी। जैसे कि OP कीमत पर मांग OK थी। परन्तु आय बढ़ने के पश्चात् OK1 हो जाएगी। मांग वक्र DD से बदलकर D1D1 हो जाएगा।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 7

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 7.
व्यक्तिगत मांग वक्र तथा बाज़ार मांग वक्र में अन्तर स्पष्ट करो।
अथवा
व्यक्तिगत मांग वक्र द्वारा बाज़ार मांग वक्र का निर्माण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
1. व्यक्तिगत मांग वक्र-एक उपभोगी वस्तु की कीमत के घटने से वस्तु की कितनी-कितनी मात्रा अधिक खरीदता है इससे प्राप्त मांग वक्र को व्यक्तिगत मांग वक्र कहते हैं जैसे कि मनुष्य A की मांग वक्र DDA को रेखाचित्र 8 में दिखाया गया है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 8
2. बाज़ार मांग वक्र-मान लो बाज़ार में A तथा B दो व्यक्ति हैं। इन दोनों की मांग के जोड़ को बाज़ार मांग वक्र कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 9
मनुष्य A तथा मनुष्य B की मांग के जोड़ से Dm Dm बाज़ार मांग वक्र बन जाता है। व्यक्ति मांग वक्र DDA, DDB के जोड़ से बाज़ार मांग वक्र Dm Dm बन जाता है। इस प्रकार व्यक्तिगत मांग वक्र द्वारा बाज़ार मांग वक्र का निर्माण किया जा सकता है।

प्रश्न 8.
स्पष्ट करो कि निम्नलिखित परिवर्तनों का खिसकना वस्तु की बाजार मांग वक्र पर क्या प्रभाव डालेगा ?
(a) झारखण्ड में एक नया स्टील प्लांट स्थापित होता है। जो लोग पहले बेरोज़गार थे, अब रोज़गार पर लग जाएंगे। इससे सफ़ेद तथा काले तथा रंगीन टेलीविज़नों की मांग पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
(b) गोआ में सैर-सपाटे को उत्साहित करने के लिए सरकार का सुझाव है कि बड़े चार नगरों चेन्नई, कोलकत्ता (कोलकाता), मुम्बई तथा नई दिल्ली से गोआ तक इंडियन एयरलाइन का किराया घटा दिया जाए। इससे गोआ को जाने वाली हवाई यात्रा की बाज़ार मांग पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
(c) दिल्ली तथा जयपुर के बीच रेल तथा बस यातायात सुविधा है, यदि रेल किराया घटा दिया जाए तो इसका मांग वक्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर-
(a) लोहा तथा स्टील के प्लांट स्थापित होने से लोगों की आय बढ़ जाएगी तथा बाज़ार मांग वक्र ऊपर की ओर खिसक (Shift) जाएगा तथा मांग की वृद्धि (Increase in demand) होगी।
(b) हवाई किराया घटने से गोआ जाने वाली मांग का विस्तार होगा। उसी मांग वक्र पर किराए घटने के कारण मांग फैल (Expansion) जाएगी।
(c) बस किराए की तुलना में रेल किराए घटने से, बस यात्रा पर बुरा प्रभाव पड़ेगा तथा मांग वक्र पीछे की ओर खिसक जाएगा। समान कीमत पर मांग कम हो जाएगी।

प्रश्न 9.
रेखाचित्र तथा सूची-पत्र द्वारा, मांग के विस्तार तथा मांग की वृद्धि में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर-
(A) मांग का विस्तार-वस्तु की कीमत घटने से मांग बढ़ जाती है तो इसको मांग का विस्तार कहा जाता है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 10
कीमत ₹ 2 पर मांग पाँच वस्तुओं तथा एक रु० पर 10 वस्तुएं हैं। A से B तक मांग का विस्तार है। मांग की वृद्धि-वस्तु की कीमत समान रहती है, परन्तु आय के बढ़ने के कारण मांग बढ़ जाती है तो इसको मांग की वृद्धि कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 11
सूची-पत्र तथा रेखाचित्र 11 में ₹ 2 कीमत पर मांग 5 वस्तुओं की है। आय बढ़ने के कारण ₹ 2 कीमत पर मांग 10 वस्तुओं की जाती है। मांग वक्र DD से बदलकर D1D1 बन जाएगी। A से B तक वृद्धि को मांग की वृद्धि कहा जाता है।

प्रश्न 10.
मांग का संकुचन तथा मांग की कमी में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर-
मांग का संकुचन-शेष बातें समान रहें, जब वस्तु की कीमत बढ़ जाती है तथा मांग कम हो जाती है तो इसको मांग का संकचन कहते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 12
कीमत ₹ 1 पर 10 वस्तुओं की मांग है तथा ₹ 2 पर 5 वस्तुओं की मांग है। इसको मांग का संकुचन कहते हैं, जिसको A तथा B तक दिखाया गया है। मांग की कमी-जब कीमत समान रहती है, परन्तु अन्य तत्त्वों आय, जनसंख्या, आदतें, स्वाद में परिवर्तन के कारण मांग कम हो जाती है तो इसको मांग की कमी कहते हैं।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 13
सूची-पत्र तथा रेखाचित्र 13 में कीमत ₹ 1. पर मांग 10 वस्तुओं की है। मनुष्य की आय घटने से मांग 5 वस्तुओं की रह जाती है तो इसको मांग की कमी कहते हैं, जिसको A से B तक दिखाया गया है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 11.
वह कारण बताओ जो वस्तु की मांग वक्र को दाईं ओर खिसका देते हैं ?
अथवा
मांग की वृद्धि से क्या अभिप्राय है ? मांग की वृद्धि कौन-से कारणों पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
जब वस्तुओं की मांग प्रचलित कीमत पर अधिक की जाती है, जिसका मुख्य कारण आय, जनसंख्या इत्यादि में वृद्धि करना होता है तो इसको मांग की वृद्धि कहा जाता है।
मांग की वृद्धि के कारण-

  1. उपभोक्ता की आय में वृद्धि हो जाती है।
  2. देश में जनसंख्या पहले से बढ़ जाती है।
  3. भविष्य में वस्तु की कीमत बढ़ने की सम्भावना होती है।
  4. स्थानापन्न वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।
  5. पूरक वस्तुओं की कीमतें कम हो जाती हैं।
  6. उपभोगी के स्वाद, फैशन, आदतें बदल जाती हैं।

प्रश्न 12.
वह कारण बताओ जो वस्तु की मांग वक्र को बाईं ओर धकेल देते हैं ?
अथवा
मांग की कमी से क्या अभिप्राय है ? मांग की कमी कौन-से कारणों पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
जब वस्तु की मांग प्रचलित कीमत पर कम हो जाती है, जिसका कारण आय, जनसंख्या इत्यादि में कमी होती है तो इसको मांग की कमी कहा जाता है।
मांग की कमी के कारण-

  1. उपभोक्ता की आय कम हो जाती है।
  2. जनसंख्या कम हो जाती है।
  3. भविष्य में वस्तु की कीमत कम होने की सम्भावना है।
  4. स्थानापन्न वस्तुओं की कीमतें कम हो जाती हैं।
  5. पूरक वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।
  6. उपभोक्ता के स्वाद, फैशन, आदतों में परिवर्तन हो जाता है।

प्रश्न 13.
मांग के संकुचन तथा विस्तार, वृद्धि तथा कमी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मांग के संकुचन तथा विस्तार, वृद्धि तथा कमी में अन्तर –

अन्तर का आधार मांग का संकुचन तथा विस्तार मांग की वृद्धि तथा कमी
(1) कीमत में परिवर्तन इसमें परिवर्तन का मुख्य कारण कीमत में परिवर्तन होता है। मांग में वृद्धि अथवा कमी का सम्बन्ध कीमत में परिवर्तन से नहीं होता।
(2) दूसरे तत्त्वों का प्रभाव इसमें दूसरे तत्त्वों जैसे कि आय, फैशन, स्वाद इत्यादि को स्थिर माना जाता है अर्थात् दूसरे तत्त्वों में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसमें दूसरे तत्त्वों के प्रभाव के कारण ही मांग में वृद्धि अथवा कमी होती है अर्थात् आय, जनसंख्या, फैशन इत्यादि में परिवर्तन का मुख्य कारण होते हैं।
(3) मांग वक्र की स्थिति इसमें उस मांग रेखा पर उपभोक्ता रहता है और उपभोक्ता का चलन (movement) एक ही मांग रेखा पर होता है। इसमें मांग रेखा खिसक (shift) जाती है। मांग बढ़ने से मांग वक्र ऊपर चला जाता है तथा मांग घटने से मांग वक्र नीचे खिसक जाता है।

प्रश्न 14.
वस्तु की मांग पर आय के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
वस्तु की मांग पर आय का प्रभाव निम्नलिखित अनुसार होता है

  1. जब उपभोगी की आय बढ़ जाती है तो सामान्य वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है और आय कम होने से सामान्य वस्तुओं की मांग कम हो जाती है।
  2. जब उपभोगी की आय बढ़ जाती है तो घटिया वस्तुओं की मांग कम हो जाती है और आय कम होने से घटिया वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मांग के नियम को स्पष्ट करो। इस नियम के अपवाद तथा महत्त्व की व्याख्या करो। (Explain the Law of Demand. Discuss its Exceptions & Importance.)
उत्तर-
मांग का नियम (Law of Demand)-मांग का नियम यह बताता है कि वस्तु की कीमत तथा मांग में क्या सम्बन्ध है। वस्तु की कीमत में परिवर्तन आने से वस्तु की मांग में परिवर्तन हो जाता है। यदि दसरी बातें समान रहें तो कीमत घटने से मांग बढ़ जाती है तथा कीमत बढ़ने से मांग कम हो जाती है अर्थात् कीमत तथा मांग में विपरीत सम्बन्ध होता है। कीमत में परिवर्तन होना मुख्य कारण है। मांग में परिवर्तन होना प्रभाव (effect) है। इस कारण कीमत तथा मांग के विपरीत सम्बन्ध को स्पष्ट करने वाले नियम को मांग का नियम कहा जाता है।

परिभाषाएं (Definitions)- प्रो० मार्शल के अनुसार, “यदि बाकी बातें समान रहें तो कीमत घटने से मांग बढ़ती है तथा कीमत बढ़ने से मांग घटती है।” प्रो० सैम्यूलसन के अनुसार, “मांग का नियम यह बताता है कि बाकी बातें समान रहें तो लोग कम कीमत पर अधिक खरीदेंगे तथा अधिक कीमत पर कम खरीदेंगे।” (“The Law of Demand states that other things remaining the same, people will buy more at lower prices and buy less at higher price.” -Samuelson)

मान्यताएं (Assumptions)-मांग का नियम ‘बाकी बातें समान रहें’ की स्थिति में ही लागू होता है। बाकी बातों का अर्थ कीमत के बिना उन तत्त्वों से होता है जोकि मांग को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन तत्त्वों में परिवर्तन नहीं होना चाहिए जिनको अर्थशास्त्री मांग के नियम की मान्यताएं कहते हैं। मांग के नियम की मुख्य मान्यताएं अनलिखित हैं-

  1. उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन नहीं आता।
  2. आदतें, फैशन तथा रीति-रिवाज़ों में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  3. स्थानापन्न वस्तुओं की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  4. पूरक वस्तुओं की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  5. भविष्य में वस्तु की कीमत में परिवर्तन की सम्भावना नहीं होती।
  6. वस्तु साधारण होनी चाहिए।

नियम की व्याख्या (Explanation of the Law)-मांग के नियम की व्याख्या एक उदाहरण द्वारा की जा सकती है। एक उपभोक्ता कुलफी खरीदना चाहता है।कुलफी की विभिन्न कीमत पर उपभोक्ता कुलफियों की कितनी-कितनी मात्रा की खरीद की जाती है। इसको मांग सूची द्वारा दिखाया जा सकता है
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 14
मांग सूची तथा मांग वक्र 14 द्वारा मांग के नियम को स्पष्ट किया गया है। जैसे-जैसे कीमत ₹ 5, 4, 3, 2, 1 घटती है, मांग 1, 2, 3, 4, 5 वस्तुओं की बढ़ती जाती है। इससे DD मांग वक्र बनती है, जोकि ऋणात्मक ढलान वाली है। यह नियम साधारण वस्तुओं (Normal Goods) पर लागू है।

नियम के अपवाद (Exceptions of the Law)-यह नियम निम्नलिखित स्थितियों में लागू नहीं होता-

  1. घटिया वस्तुएं (Inferior Goods)-घटिया वस्तु (गले हुए केले) की कीमत घटती है तो इनकी मांग कम हो जाती है।
  2. मान प्रतिष्ठा वस्तुएं (Articles of Distinction) हीरे-जवाहरात की कीमत बढ़ने से इनकी मांग बढ़ती है।
  3. उपभोक्ता की अज्ञानता (Ignorance of Consumer)-जब उपभोक्ता अज्ञानी होता है तो नियम लागू नहीं होता।

नियम का महत्त्व (Importance of the Law)-

  1. मानवीय व्यवहार का ज्ञान (Knowledge of human behaviour)-इस नियम द्वारा मानवीय व्यवहार सम्बन्धी ज्ञान प्राप्त होता है कि वह बाज़ार में वस्तुओं की खरीद कैसे करता है।
  2. उत्पादक द्वारा कीमत निर्धारण (Price Determination by Producers)-इस नियम को ध्यान में रखकर उत्पादक वस्तु की कीमत निर्धारण करते हैं, जिससे उसको अधिकतम लाभ प्राप्त होता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 2.
मांग वक्र का निर्माण मांग सूची से कैसे किया जाता है ? मांग के निर्धारक तत्त्वों की व्याख्या करो।
(How is Demand Curve Derived From Demand Schedule ? Explain the determinants of Demand.)
उत्तर-
मांग सूची का अर्थ (Meaning of Demand Schedule)-एक सूची जिसमें कीमत तथा मांग के सम्बन्ध को स्पष्ट किया जाता है, उसको मांग सूची कहा जाता है। यदि बाकी बातें समान रहें, वस्तु की कीमत घटने से मांग अधिक की जाती है तथा वस्तु की कीमत बढ़ने से मांग कम की जाती है। कीमत तथा मांग के परस्पर सम्बन्ध को प्रकट करने वाली सूची अथवा मांग सारणी कहा जाता है। प्रो० सैम्यूलसन के शब्दों में, “वह सूची जिसमें कीमत तथा खरीदी गई मात्रा का सम्बन्ध वर्णन किया जाए, मांग सूची कहलाती है।” (“A Table relating demand and price is called demand schedule.’ – Samuelson)

मांग सूची की किस्में (Types of Demand Schedule) मांग सूची मुख्य तौर पर दो प्रकार की होती है –
1. व्यक्तिगत मांग सूची तथा वक्र (Individual Demand Schedule & Curve)
2. बाज़ार मांग सूची तथा वक्र (Market Demand Schedule and Curve)

1. व्यक्तिगत मांग सूची (Individual Demand Schedule) यदि एक सूची में एक मनुष्य द्वारा विभिन्न कीमतों पर खरीदी जाने वाली वस्तु की विभिन्न मात्रा को दिखाया जाता है तो इसको व्यक्तिगत मांग सूची कहा जाता है। इसको उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है। विभिन्न कीमत पर कुलफी की गई मांग की मात्रा को निम्नलिखित सूची-पत्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 15
सूची-पत्र के अनुसार जब कुलफी की कीमत ₹ 5 है तो उपभोक्ता केवल एक कुलफी की मांग करता है। जैसेजैसे कुलफी की कीमत घटकर ₹ 4, 3, 2, 1 हो जाती है तो उपभोक्ता 2, 3, 4, 5 कुलफियों की मांग करता है। इस सूचीपत्र को व्यक्तिगत सूची-पत्र कहा जाता है। रेखाचित्र 15 में दिखाया है कि जैसे-जैसे कुलफियों की कीमत घटती है, मांग में वृद्धि होती है। इससे DD मांग वक्र बन जाती है, इसको व्यक्तिगत मांग वक्र कहा जाता है।

2. बाज़ार मांग सूची (Market Demand Schedule) – बाज़ार में वस्तु के बहुत से खरीददार होते हैं। यदि बाज़ार में सभी ग्राहकों की मांग को जोड़कर मांग सूची बनाई जाए तो इसको बाज़ार मांग सूची कहा जाता है। मान लो बाज़ार में लोग कुलफी की खरीद करते हैं, जिसकी विभिन्न कीमत पर मनुष्य A तथा मनुष्य B द्वारा की गई मांग इस प्रकार है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 16
सूची-पत्र में A मनुष्य तथा मनुष्य B की मांग के जोड़ से बाज़ार मांग दिखाई गई है। इसको रेखाचित्र द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 17
रेखाचित्र 16 में DDA मनुष्य A की मांग वक्र है। जब कीमत ₹ 5 है तो मनुष्य A एक कुलफी की मांग करता है तथा एक रु० कीमत पर 5 कुलफियों की मांग की जाती है। DAD मनुष्य B की मांग वक्र है, ₹ 5 कीमत पर 2 कुलफियों की मांग तथा एक रु० कीमत पर 6 कुलफियों की मांग है। A + B द्वारा बाज़ार मांग वक्र बन जाती है। ₹5 कीमत पर 3 कुलफियों की मांग तथा एक रु० पर 11 कुलफियों की मांग है, इसको बाज़ार मांग वक्र Dm Dm द्वारा दिखाया है।

मांग के निर्धारक तत्व (Determinants of Demand)-

  1. वस्तु की कीमत-वस्तु की मांग उस वस्तु की अपनी कीमत द्वारा निर्धारण होती है। कीमत तथा मांग का विपरीत सम्बन्ध होता है।
  2. सम्बन्धित वस्तुओं की कीमत-स्थानापन्न वस्तुओं की स्थिति में जब स्थानापन्न वस्तुओं की कीमत कम हो जाती है तो इस वस्तु की मांग कम हो जाएगी। पूरक वस्तुओं की स्थिति में इस वस्तु की मांग कम हो जाएगी, यदि पूरक वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है।
  3. 3. आय-जब उपभोक्ता की आय बढ़ जाती है तो वस्तुओं की मांग बढ़ जाएगी।
  4. 4. स्वाद, आदतें, फैशन-जब उपभोक्ता के स्वाद, आदतें तथा फैशन में परिवर्तन होता है तो मांग में परिवर्तन हो जाता है।
  5. 5. जनसंख्या-जनसंख्या के आकार में वृद्धि हो जाए तो मांग में वृद्धि हो जाती है।
  6. 6. आय का वितरण-देश में समान आय का वितरण हो तो मांग बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
मांग वक्र की ढलान नीचे की ओर क्यों होती है ? क्या मांग वक्र की ढलान धनात्मक हो सकती (Why does Demand curves slopes downwards ? Can Demand Curve slope positively ?)
अथवा
मांग का नियम क्यों लागू होता है ? स्पष्ट करो। (Why does the Law of Demand operate ? Explain.)
उत्तर-
मांग के नियम में इस बात का अध्ययन किया जाता है कि कीमत बढ़ने से मांग कम हो जाती है तथा घटने से मांग में वृद्धि होती है अर्थात् कीमत तथा मांग में विपरीत सम्बन्ध होता है। ऐसे सम्बन्ध से ही मांग रेखा की ऋणात्मक ढलान होती है। कीमत तथा मांग में विपरीत सम्बन्ध के निम्नलिखित कारण होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मांग वक्र 17 की ढलान बाएं से दाएं ओर नीचे की ओर चली जाती है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 18
1. घटते सीमान्त उपयोगिता का नियम (Law of Diminishing Marginal Utility)-मांग का नियम, घटते सीमान्त उपयोगिता के नियम पर निर्भर करता है। घटते सीमान्त उपयोगिता के नियम अनुसार, जैसे-जैसे एक उपभोगी वस्तु का अधिक उपभोग करता है, उसका सीमान्त उपयोगिता निरन्तर घटती जाती है। उपभोगी की अधिकसे-अधिक सन्तुष्टि उस स्थिति में होती है, जहां वस्तु की कीमत, उस वस्तु से प्राप्त होने वाले सीमान्त उपयोगिता के समान हो जाती है। वस्तु की अधिक मात्रा खरीदने से सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है। इसलिए वस्तुओं की अधिक मात्रा तो ही खरीदी जाएगी, यदि कीमत कम हो जाती है। इसलिए घटते सीमान्त उपयोगिता का नियम स्पष्ट करता है कि कम कीमत पर वस्तु की अधिक मात्रा तथा अधिक वस्तु पर वस्तु की कम मात्रा क्यों खरीदी जाती है।

2. आय प्रभाव (Income Effect) – मांग का नियम लागू होने का दूसरा कारण आय प्रभाव है। किसी वस्तु . की कीमत घटने से उपभोगी की वास्तविक आय (Real Income) बढ़ जाती है। जब वास्तविक आय में वृद्धि होती है तो उस वस्तु की अधिक मात्रा की खरीद की जाएगी। उदाहरणस्वरूप दूध की कीमत ₹ 10 प्रति किलोग्राम है। परिवार में 10 किलोग्राम दूध का प्रयोग किया जाता है। इससे 10 x 10 = ₹ 100 व्यय किए जाते हैं। यदि दूध की कीमत ₹ 8 प्रति किलोग्राम हो जाए तथा उपभोगी पहले वाली मात्रा 10 किलोग्राम दूध की खरीद करता है तो उसको 8 x 10 = ₹ 80 व्यय करने पड़ेंगे। इस प्रकार उपभोगी की आय ₹ 20 बढ़ जाती है, जिस कारण दूध की अधिक मात्रा खरीदी जाती है।

3. स्थानापन्न प्रभाव (Substitution Effect)-स्थानापन्न वस्तुएं चाय तथा कॉफी हैं। यदि चाय की कीमत कम हो जाती है, परन्तु कॉफी की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता तो लोग कॉफी की जगह पर चाय अधिक मात्रा में खरीदने लगते हैं। चाय की जितनी मात्रा अधिक खरीदी जाएगी. उसको स्थानापन्न प्रभाव कहा जाता है। इस प्रकार जब दो स्थानापन्न वस्तुओं में से किसी एक वस्तु की कीमत कम हो जाती है तथा उस वस्तु की अधिक मात्रा इस कारण की जाती है कि लोग दूसरी स्थानापन्न वस्तु की जगह पर तथा इस वस्तु की अधिक मांग करते हैं, जिसकी कीमत कम हो गई है। इस कारण मांग वक्र ऋणात्मक ढलान वाला बनता है तथा मांग का नियम लागू होता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

4. नए उपभोगी (New Consumers)-जब एक वस्तु की कीमत कम हो जाती है जो उपभोगी इस वस्तु की पहले खरीद नहीं कर सकते हैं, अब इस वस्तु को खरीदने लग जाते हैं, जैसे कि मटरों की कीमत ₹ 40 प्रति किलो है तो बहुत कम लोग मटरों की खरीद करते हैं। जब मटरों की कीमत ₹ 10 प्रति किलोग्राम हो जाती है तो बहुत से नए उपभोगी मटर खरीदने लगते हैं तथा पुराने उपभोगी अधिक मात्रा खरीदने लग जाते हैं। इस कारण मांग में बहुत वृद्धि हो जाती है तथा मांग वक्र ऋणात्मक ढलान वाली बनती है।

5. विभिन्न प्रयोग (Different Uses)-बहुत-सी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। दूध का प्रयोग चाय, दही, पनीर, मिठाई इत्यादि विभिन्न प्रयोगों में किया जा सकता है। यदि दूध की कीमत बहुत अधिक हो तो इसका प्रयोग केवल चाय के लिए किया जाता है। यदि दूध की कीमत कम हो जाती है तो दूध का प्रयोग दही, मक्खन, पनीर, खीर इत्यादि के लिए भी होने लगता है। इसीलिए ऐसी वस्तुओं की कीमत घटने से मांग में वृद्धि होती है तथा मांग वक्र की ढलान बाईं ओर से दाईं और नीचे की ओर झुकी होती है।

मांग वक्र की धनात्मक ढलान (Positive Slope of Demand Curve)-मांग के नियम के अपवादों के कारण मांग, मांग वक्र 18 की ढलान धनात्मक हो सकती है। इसके मुख्य अपवाद हैं-

  1. मान प्रतिष्ठा वाली वस्तुओं की स्थिति में जैसा कि हीरे आदि।
  2. उपभोगी की अज्ञानता कारण।
  3. घटिया अथवा गिफ्फन वस्तुओं की स्थिति में मांग वक्र 18 की तरह ढलान धनात्मक हो सकती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 19

प्रश्न 4.
मांगी गई मात्रा में परिवर्तन तथा मांग में परिवर्तन में अन्तर बताओ। (Explain the difference between change in quantity demanded and change in demand.)
अथवा
मांग की रेखा तथा संचालन तथा मांग की रेखा में परिवर्तन में अन्तर बताओ। (Explain the difference between movement along demand curve and shift in Demand Curve.)
अथवा
मांग के विस्तार तथा संकुचन तथा मांग में वृद्धि तथा कमी के अन्तर को स्पष्ट करो। (Distinguish between Extension and Contraction in Demand & Increase and decrease in demand.)
उत्तर-
मांग में परिवर्तन को मांग की रेखा द्वारा दो तरह से स्पष्ट किया जाता है-
1. एक ही मांग रेखा पर संचालन (Movement Alongwith a Demand)-जब किसी वस्तु की मांग में परिवर्तन केवल कीमत में परिवर्तन कारण होता है तो मांग में परिवर्तन को एक मांग रेखा पर प्रकट किया जाता है। इसको मांग की मात्रा में परिवर्तन कहा जाता है। एक वस्तु की कीमत में कमी होने से मांग में वृद्धि को मांग का विस्तार (Extension in Demand) कहा जाता है। इसके विपरीत जब कीमत में वृद्धि हो जाती है तथा मांग में कमी उत्पन्न होती है तो मांग में इस घाटे को मांग का संकुचन (Contraction in Demand) कहा जाता है। इसको मांगी गई मात्रा में परिवर्तन भी कहा जाता है।

2. मांग वक्र का खिसकना (Shifting in Demand Curve)-जब मांग में परिवर्तन कीमत में परिवर्तन कारण नहीं, बल्कि किसी अन्य तत्त्वों जैसे कि आय, फैशन, स्वाद, जनसंख्या इत्यादि कारण होता है तो इसको मांग का खिसकना कहा जाता है। इस स्थिति में मांग वक्र प्राथमिक मांग वक्र के ऊपर की ओर अथवा नीचे की ओर खिसक कर नई मांग वक्र बन जाती है। यदि मांग वक्र की ओर खिसक जाती है तो इसको मांग की वृद्धि (Increase in Demand) कहा जाता है तथा यदि मांग वक्र नीचे की ओर खिसक जाती है तो इसको मांग का घाटा (Decrease in Demand) कहा जाता है। इसको मांग में परिवर्तन भी कहा जाता है।
(i) मांग का विस्तार तथा संकुचन (Extension and Contraction in Demand)-मांग में परिवर्तन का मुख्य कारण केवल कीमत में परिवर्तन हो तो इसको मांग का विस्तार अथवा संकुचन भी कहा जाता है।
1. मांग का विस्तार (Extension in Demand)- बाकी बातें समान रहें, वस्तु की कीमत में कमी होने से मांग में वृद्धि हो जाती है। इसको मांग का विस्तार कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 20
सूची-पत्र में जब एक कुलफी की कीमत ₹ 5 दी है तो उपभोगी एक कुलफी की खरीद करता है, यदि कुलफी की कीमत घटकर एक रुपया हो जाती है तथा मांग 5 कुलफियों की जाती है तो इसको मांग का विस्तार कहा जाता है। रेखाचित्र 19 में मांग वक्र पर a बिन्दु से b बिन्दु तक परिवर्तन को मांग का विस्तार कहा जाता है।
(ii) मांग का संकुचन (Contraction in Demand) बाकी बातें समान रहें अर्थात् आय, फैशन, मौसम में कोई परिवर्तन न हो, वस्तु की कीमत बढ़ने से मांग घट जाती है तो इसको मांग का संकुचन कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 22
सूची-पत्र अनुसार जब कुलफी की कीमत एक रुपया है तो उपभोगी 5 कुलफियों की खरीद करता है। कीमत बढ़कर ₹ 5 प्रति कुलफी हो जाती है तो बाकी बातें समान रहें तो कुलफियों की मांग घटकर एक कुलफी रह जाएगी। इस मांग की कमी को मांग का संकुचन कहा जाता है। इसमें a से b तक परिवर्तन को मांग का संकुचन कहा जाता है।

2. मांग में वृद्धि तथा कमी (Increase and Decrease in Demand)-मांग में परिवर्तन, वस्तु की कीमत के बिना अन्य कारण आय, फैशन, स्वाद इत्यादि करके होती है तो मांग में इस परिवर्तन को मांग की वृद्धि अथवा कमी कहा जाता है। . .
(i) मांग की वृद्धि (Increase in Demand)-मांग की वृद्धि को दो तरह से स्पष्ट किया जा सकता है।
(क) समान कीमत पर अधिक मांग (Same Price More Demand) वस्तु की कीमत समान रहती है, परन्तु उपभोगी की आय ₹ 10,000 प्रति माह से बढ़कर ₹ 20,000 प्रति माह हो जाती है तो उपभोगी द्वारा वस्तु की अधिक मांग की जाएगी, इसको मांग की वृद्धि कहा जाता है।
(ख) अधिक कीमत पर समान मांग (More Price Same Demand) वस्तु की कीमत बढ़ जाती है, परन्तु उपभोगी पहले जितनी वस्तु की मांग करता है, क्योंकि उसकी आय में वृद्धि हो जाती है तो इसको भी मांग की वृद्धि कहा जाता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 24
सूची-पत्र अनुसार कीमत ₹ 5 समान रहती है, परन्तु आय बढ़ने के कारण मांग 2 कुलफियों की जगह पर 4 कुलफियों की हो जाती है तो इसको मांग की वृद्धि कहा जाता है।सूची-पत्र के भाग (2) में कीमत ₹ 5 से बढ़कर ₹ 7 हो जाती है, परन्तु मांग 2 कुलफियों की समान रहती है, क्योंकि उपभोगी की आय बढ़ गई है। इसको भी मांग की वृद्धि कहा जाता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

2. मांग की कमी (Decrease in Demand)-मांग की कमी को भी दो तरह से स्पष्ट किया जा सकता है।

  • समान कीमत कम मांग (Same Price Less Demand)-वस्तु की मांग में कमी का मुख्य कारण कीमत से कम होकर ₹ 5,000 प्रति माह रह जाती है तो कीमत समान रहे तो भी मांग कम हो जाएगी, इसको मांग की कमी कहा जाएगा।
  • कम कीमत समान मांग (Less Price Same Demand)-मान लो उपभोगी की आय कम हो जाती है। वस्तु की कीमत में कमी आ जाने के कारण भी उपभोगी पहले जितनी वस्तु की खरीद करता है, इस स्थिति को मांग की कमी कहा जाता है।
    PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 26

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 27
सूची-पत्र अनुसार कीमत ₹ 5 समान रहती है, परन्तु मांग दो कुलफियों से कम होकर एक कुलफी ही रह जाती है अथवा कुलफी की कीमत ₹ 5 से कम होकर ₹ 3 रह जाती है तथा मांग 2 कुलफियों की समान रहती है तो इसको मांग की कमी कहा जाता है।

V. संरख्यात्मक प्रश्न (Numericals)

प्रश्न 1.
तीन उपभोक्ताओं राम, शाम तथा सोहन की मांग अनुसूची में दी हुई है। बाज़ार मांग अनुसूची का निर्माण कीजिए।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 28
उत्तर-
बाज़ार मांग अनुसूची कीमत –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 29

प्रश्न 2.
सूची-पत्र प्रश्न 1 में यदि सोहन को छोड़ दिया जाए तो नई बाज़ार अनुसूची क्या होगी ?
उत्तर –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 30

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग

प्रश्न 3.
मुस्कराहट (Smile) नाम के फल के चार उपभोगी हैं। यह उपभोगी ईशा, एफराह, ईला, ईबीमा हैं। मुस्कराहट फल की मांग सूची निम्नलिखित अनुसार है। बाजार मांग वक्र का निर्माण करो।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 31
उत्तर-
बाज़ार मांग सूची का निर्माण –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 32

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अनुसूची में C मनुष्य की मांग अनुसूची ज्ञात करो।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 34
उत्तर-
मनुष्य C की मांग अनुसूची –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 5 मांग 35

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਵੱਡੇ ਉੱਚਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
(ਕ) ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਦੇ ਤਾਪੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਸੰਬੰਧੀ ਲਿਖੋ ।
(ਖ) ਬਿਜਲੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ। ਇਸ ਦੀ ਇਕਾਈ ਵਾਟ ਦੀ ਵੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ।
(ਗ) ਬਿਜਲੀ ਉਰਜਾ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਇਕਾਈਆਂ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
(ਕ) ਤਾਪੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਦੇ ਨਿਯਮ – ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿਚੋਂ ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਲੰਘਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੱਥ ਦਾ ਅਧਿਐਨ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜੁਲ ਨੇ ਕੀਤਾ। ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਜੁਲ ਦਾ ਤਾਪਨ ਨਿਯਮ (Joule’s heating effect) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਨਿਯਮ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਜਦੋਂ ਚਾਲਕ ਵਿਚੋਂ ਕਰੰਟ ਲੰਘਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਪੈਦਾ ਹੋਇਆ ਤਾਪ :
(i) ਕਰੰਟ ਦੇ ਵਰਗ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
H ∝ I2 (ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R, ਸਮਾਂ t ਹੋਣ)
(ii) ਚਾਲਕ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੈ ।
H ∝ R (ਜਦੋਂ ਧਾਰਾ I, ਸਮਾਂ ਵੀ t ਹੋਣ)
(iii) ਸਮੇਂ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿੰਨੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਕਰੰਟ ਲੰਘਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
H ∝ t (ਜਦੋਂ ਤਿਰੋਧ R ਅਤੇ ਕਰੰਟ I ਹੋਣ)
(i), (ii) ਅਤੇ (iii) ਤੋਂ
H ∝ I2 Rt
ਸਮਾਨੁਪਾਤੀ ਨਿਯੰਤਰਕ ਦਾ ਮਾਨ ਮਾਤਕਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ। S.I. ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਮਾਨ 1 ਹੈ ।
∴ H = I2 Rt (ਜੂਲ ਵਿੱਚ)

(ਖ) ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ – ਬਿਜਲੀ ਦੁਆਰਾ ਕਾਰਜ ਕਰਨ ਦੀ ਦਰ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਮੰਨ ਲਓ ਕਿ ਆਪਣੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਪਾਰ V ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਵਾਲੇ ਚਾਲਕ ਵਿਚੋਂ ਸਮੇਂ t ਦੇ ਲਈ ਧਾਰਾ I ਲੰਘਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਕਾਰਜ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੋਵੇਗਾ-
W = VIt
ਪਰ ਸਰਕਟ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 1
= \(\frac{\mathrm{W}}{t}\)
= \(\frac{\mathrm{VI} t}{t}\)
= VI
ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ
I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
∴ P = V × I
= \(\frac{V^{2}}{R}\)
ਅਤੇ P = I2R
ਬਿਜਲ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਇਕਾਈ – ਜੇ v ਨੂੰ ਵੋਲਟ ਅਤੇ I ਨੂੰ ਐਮਪੀਅਰ ਵਿੱਚ ਮਾਪਿਆ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਟ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇਗੀ।
ਵਾਟ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ – ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਟ ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ ਉਦੋਂ ਕਹੀ ਜਾਵੇਗੀ ਜਦੋਂ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵੋਲਟ ਦੇ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੋਣ ਤੇ ਵਗਦਾ ਹੈ ।
1 ਵਾਟ = 1 ਵੋਲਟ × ਐਮਪੀਅਰ
ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਕਿਲੋਵਾਟ (KW) ਹੈ ।
1 ਕਿਲੋਵਾਟ = 1000 ਜੂਲ

(ਗ) ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ – ਕਿਸੇ ਨਿਸਚਿਤ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਕਰੰਟ ਦੁਆਰਾ ਕੁੱਲ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕਾਰਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ, ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਕਹਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
ਮੰਨ ਲਓ, ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ 1 ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ ਸਮੇਂ ਲਈ ਲੰਘਦਾ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਦੋਂ ਵਰਤੀ ਗਈ ਉਰਜਾ ਜਾਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਕਾਰਜ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ-
W = VIt
ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਇਕਾਈ ਜੂਲ ਜਾਂ ਵਾਟ ਸੈਕਿੰਡ ਹੈ। ਪਰ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੀ ਇਕਾਈ ਹੈ। ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਵਾਟ ਘੰਟਾ ਹੈ ।

ਵਾਟ ਘੰਟੇ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ – ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਇੱਕ ਵਾਟ ਘੰਟਾ ਕਹੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਚਾਲਕ ਵਿਚੋਂ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ ਇੱਕ ਘੰਟੇ ਲਈ ਲੰਘਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਇੱਕ ਵੋਲਟ ਦਾ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
1 ਵਾਟ ਘੰਟਾ = 1 ਵਾਟ × 1 ਘੰਟਾ
= 1 ਵੋਲਟ × 1 ਐਮਪੀਅਰ × 1 ਘੰਟਾ
1 ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ = 1000 ਵਾਟ ਘੰਟਾ
ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿਨ੍ਹਾਂ ਕਾਰਕਾਂ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ? (ਮਾਡਲ ਪੇਪਰੇ)
ਉੱਤਰ-
ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ – ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਨੂੰ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਜੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ vਹੋਵੇ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘ ਰਹੀ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 1 ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R)
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ (V) ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R)
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 12

ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ-S.I. ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਓਹਮ ਹੈ ਜਦਕਿ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਵੋਲਟ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਕਰੰਟ ਨੂੰ ਐਮਪੀਅਰ ਵਿੱਚ ਮਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਓਹਮ (Ohn) – ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਇੱਕ ਓਹਮ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇ ਉਸਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਇੱਕ ਵਲਟ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘ ਰਹੇ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਹੋਵੇ ।

ਚਾਲਕ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੀ ਨਿਰਭਰਤਾ – ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਕਾਰਕਾਂ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ-
(i) ਚਾਲਕ ਦੀ ਲੰਬਾਈ (l)-ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਚਾਲਕ ਦੀ ਲੰਬਾਈ (l) ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਅਰਥਾਤ R ∝ l ………(1)

(ii) ਚਾਲਕ ਦੀ ਪਰਿਖੇਤਰ ਕਾਟ ਦਾ ਖੇਤਰਫਲ (A)-ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਉਸਦੀ ਪਰਿਖੇਤਰ ਕਾਟ (A) ਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਦਾ ਉਲਟ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਅਰਥਾਤ R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\) ………(2)

(iii) ਚਾਲਕ ਦੇ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ-ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਉਸ ਚਾਲਕ ਦੇ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ।
ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਕਾਰਕਾਂ ਨੂੰ ਜੋੜਨ (ਸੰਯੋਜਿਤ) ਨਾਲ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ :
R ∝ \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
ਜਾਂ R = ρ × \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\) ਜਿੱਥੇ ਏ ਅਨੁਪਾਤੀ ਸਥਿਰ ਅੰਕ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪ੍ਰਯੋਗ ਦੁਆਰਾ ਗਿਆਤ ਕਰੋ ਕਿ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ ਮਾਨ ਕਿਨ੍ਹਾਂ-ਕਿਨ੍ਹਾਂ ਕਾਰਕਾਂ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 2
ਕਿਸੇ ਧਾਤੂ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕਾਰਕਾਂ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਉਹ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ :
ਪ੍ਰਯੋਗ – ਇੱਕ ਬੈਟਰੀ, ਐਮਮੀਟਰ, ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕ ਤਾਰ ਅਤੇ ਸਵਿੱਚ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਬਣਾਓ। ਸਵਿੱਚ ਨੂੰ ਦਬਾ ਕੇ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰੋ । ਐਮਮੀਟਰ ਨਾਲ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਮਾਨ ਨੋਟ ਐਮੀਟਰ ਕਰੋ । ਹੁਣ ਇਸ ਤਾਰ ਦੀ ਥਾਂ ਤੇ ਉਸੇ ਲੰਬਾਈ ਅਤੇ ਮੋਟਾਈ ਦੀ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਧਾਤੂ ਦੀ ਤਾਰ ਦੁਆਰਾ ਜੋੜੋ ਅਤੇ ਐਮਮੀਟਰ ਦੁਆਰਾ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਮਾਨ ਨੋਟ ਕਰੋ । ਤਾਰ ਤੁਸੀਂ ਵੇਖਦੇ ਹੋ ਕਿ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਮਾਨ ਬਦਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਯੋਗ ਤੋਂ ਇਹ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਉਸ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਰਥਾਤ ਇੱਕ ਹੀ ਤਾਪ ਤੇ ਸਮਾਨ ਲੰਬਾਈ ਅਤੇ ਮੋਟਾਈ ਵਾਲੇ ਭਿੰਨਭਿੰਨ ਧਾਤੂਆਂ ਦੇ ਚਾਲਕਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਭਿੰਨ-ਭਿੰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਹੁਣ ਪਹਿਲੇ ਤਾਰ ਦੇ ਵਿਆਸ ਬਰਾਬਰ ਅਤੇ ਉਸ ਧਾਤੂ ਤੋਂ ਬਣੀ ਹੋਈ ਇੱਕ ਤਾਰ ਲਓ ਜਿਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਪਹਿਲੀ ਤਾਰ ਨਾਲੋਂ ਦੁੱਗਣੀ ਹੋਵੇ। ਇਸ ਤਾਰ ਨੂੰ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਜੋੜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰੋ। ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਧਾਰਾ ਦਾ ਇਹ ਮਾਪ ਪਹਿਲੇ ਮਾਪ ਤੋਂ ਅੱਧਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਜਾਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੁੱਗਣਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤਿਰੋਧ ਲੰਬਾਈ ਦੇ ਸਮਾਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R ਅਤੇ ਤਾਰ ਦੀ ਲੰਬਾਈ l ਹੋਵੇ ਤਾਂ
R ∝ l ………..(1)

ਹੁਣ ਇੱਕ ਧਾਤੂ ਦੀਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਦੋ ਤਾਰਾਂ ਲਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਹੋਵੇ, ਪਰੰਤੂ ਕਾਟ ਦਾ ਖੇਤਰਫਲ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹੋਵੇ। ਪਹਿਲਾਂ ਘੱਟ ਕਾਟ ਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਵਾਲੀ ਤਾਰ ਨੂੰ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਜੋੜੋ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਵੱਧ ਕਾਟ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਫਲ ਦੀ ਤਾਰ ਨੂੰ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਜੋੜੋ। ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਤਾਰ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਮਾਨ ਪਹਿਲਾਂ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਅਧਿਕ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਦੂਸਰੇ ਤਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਪਹਿਲੇ ਤਾਰ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਉਸਦੇ ਕਾਟ ਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਦੇ ਵਿਲੋਮ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ R ਅਤੇ ਤਾਰ ਦੀ ਕਾਟ ਦਾ ਖੇਤਰਫਲ A ਹੈ, ਤਾਂ
R ∝ \(\frac{1}{A}\) …………….. (2)
(1) ਅਤੇ (2) ਨੂੰ ਜੋੜਨ ਨਾਲ, R ∝ \(\frac{l}{\mathrm{~A}}[latex]
ਜਾਂ R = ρ × [latex]\frac{l}{a}\)

ਜਿੱਥੇ ρ ਸਥਿਰ ਅੰਕ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਚਾਲਕ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਦਾ ਮਾਨ ਚਾਲਕ ਦੇ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਕਿਰਤੀ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਕੀ ਹੈ ? ਤੁਸੀਂ ਪ੍ਰਯੋਗਸ਼ਾਲਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਕਿਵੇਂ ਪੁਸ਼ਟੀ ਕਰੋਗੇ ?
ਜਾਂ
ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਲਿਖੋ । ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਸਮਝਾਓ ਕਿ ਇਸ ਦੀ ਪ੍ਰਯੋਗਸ਼ਾਲਾ ਵਿਚ ਵਿਆਖਿਆ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਲਿਖੋ । ਇਸ ਨੂੰ ਪ੍ਰਯੋਗਸ਼ਾਲਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗਾਤਮਕ ਤੌਰ ਤੇ ਸਿੱਧ ਕਰਨ ਲਈ ਸਰਕਟ ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 3
ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ (Ohm’s Law) – ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ “ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਰy ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 1 ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਸਦਾ ਸਥਿਰ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਸ਼ਰਤ ਚਾਲਕ ਦੀਆਂ ਭੌਤਿਕ ਹਾਲਤਾਂ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਦਬਾਅ ਆਦਿ ਨਾ ਬਦਲਣ ।”
ਜਾਂ = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\) = ਸਥਿਤ ਅੰਕ (R)
ਇਸ ਸਥਿਰ ਅੰਕ (R) ਨੂੰ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ-ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਚਾਲਕ PQ ਨੂੰ ਬੈਟਰੀ (B), ਇੱਕ ਕਰੰਟ ਨਿਯੰਤਰਕ (Rh), ਇੱਕ ਐਮਮੀਟਰ (A) ਅਤੇ ਇਕ ਕੁੰਜੀ (K) ਨੂੰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ । ਚਾਲਕ PQ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਵੋਲਟ ਮੀਟਰ V ਲਗਾਓ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਵਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।

ਹੁਣ ਕੁੰਜੀ ਵਿੱਚ ਪਲੱਗ ਲਗਾ ਕੇ ਚਾਲਕ PQ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਕਰੰਟ ਦੀ ਪੜ੍ਹਤ ਐਮਮੀਟਰ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਚਾਲਕ
ਕਰੋ ।

ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਦਾ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V ਵੋਲਟਮੀਟਰ ਵਿੱਚ ਨੋਟ ਕਰੋ। ਹੁਣ V ਅਤੇ I ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ (\(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\)) ਪਤਾ ਕਰੋ ।

ਹੁਣ ਨਿਯੰਤਰਕ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਕਰੰਟ ਦਾ ਮੁੱਲ ਬਦਲੋ ਅਤੇ ਵੋਲਟਮੀਟਰ ਅਤੇ ਐਮਮੀਟਰ ਦੀ ਨਵੀਂ ਪੜ੍ਹਤ ਨੋਟ ਕਰੋ। ਫਿਰ ਤੋਂ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਅਤੇ ਧਾਰਾ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ (\(\frac{V_{1}}{I_{1}}\)) ਦਾ ਮੁੱਲ ਪਤਾ ਕਰੋ । ਕਰੰਟ ਨਿਯੰਤਰਕ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਬਦਲ ਕੇ ਇਸ ਯੋਗ ਨੂੰ ਦੁਹਰਾਓ। ਮੰਨ ਲਓ ਇਸ ਵਾਰ ਐਮੀਟਰ ਦੀ ਪੜ੍ਹਤ I2 ਅਤੇ ਵੋਲਟਮੀਟਰ ਦੀ ਪੜ੍ਹਤ V2 ਹੈ । ਹੁਣ ਫਿਰ \(\frac{V_{2}}{I_{2}}\) ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਕੱਢੋ। ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਹਰ ਵਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਅਤੇ ਧਾਰਾ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਸਥਿਰ ਹੈ ।
ਅਰਥਾਤ \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}=\frac{\mathrm{V}_{1}}{\mathrm{I}_{1}}=\frac{\mathrm{V}_{2}}{\mathrm{I}_{2}}\) = ….R (ਸਥਿਰ ਅੰਕ)
ਇਸ ਸਥਿਰ ਅੰਕ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਓਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਹੁਣ ਚਾਲਕ PQ ਦੇ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਮੁੱਲਾਂ ਅਤੇ ਇਸ ਅਨੁਸਾਰ ਕਰੰਟ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਮਾਨ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਗਰਾਫ਼ ਖਿੱਚੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 4

ਗਰਾਫ਼ ਇਕ ਸਿੱਧੀ ਰੇਖਾ ਹੈ, ਇਹ ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਗਰਾਫ਼ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ ਕਿ, ਜਿਵੇਂ-ਜਿਵੇਂ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਵੱਧਦਾ ਹੈ, ਕਰੰਟ ਵਿੱਚ ਰੇਖੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜੋ ਕਿ ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਕਈ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਦਾ ਡੁੱਲ-ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿੰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸ ਲਈ ਇੱਕ ਸੰਬੰਧ ਦਾ ਵਿਉਂਤਪਤ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਕਈ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧਾਂ ਦਾ ਤੁੱਲ-ਪ੍ਰਤੀਰੋਧ ਕਿੰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਸੰਬੰਧ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਨੂੰ ਲੜੀ ਵਿਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਸੰਯੋਜਨ ਦਾ ਤੁੱਲ-ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਇਕੱਲੇ-ਇਕੱਲੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਦੇ ਜੋੜ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 5
ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਡੁੱਲ – ਤਿਰੋਧਾਂ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਦਾ ਵਿਉਂਤਪੱਤ-ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੁੜੇ ਹਿੱਸੇ ਤਿੰਨ ਵਿਰੋਧਾਂ r1,r2 ਅਤੇ r3 ਤੇ ਵਿਚਾਰ ਕਰੋ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ। ਮੰਨ ਲਓ, ਹਰੇਕ ਵਿੱਚ ਕਰੰਟ I ਲੰਘ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਇਸਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੇ ਸਮਾਨੁਪਾਤੀ ਹੈ ।
ਮੰਨ ਲਓ,
V1 = r1 ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ
V2 = r2 ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ
V3 = r3 ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ
V = V1 + V2 + V3
ਮੰਨ ਲਓ, RS ਪੂਰੀ ਲੜੀ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਹੈ ।
ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ,
V = IRS
ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ
V1 = Ir1
V2 = Ir2
V2 = Ir3

(i) ਵਿੱਚ ਮਾਨ ਰੱਖਣ ਤੇ
IRS = Ir1 + Ir2 + Ir3
ਇਸ ਲਈ ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਦੇ ਜੋੜਾਂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਜਦੋਂ ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜ ਕੇ ਇੱਕ ਬੈਟਰੀ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੱਲਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੇ ਲਈ ਇਕ ਸੰਬੰਧ ਮਾਲੂਮ ਕਰੋ।
ਜਾਂ
ਸਮਾਨਾਂਤਰਬੱਧ ਜੋੜੇ ਗਏ ਕੁੱਝ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧਾਂ ਦਾ ਡੁੱਲ-ਪ੍ਰਤੀਰੋਧ ਕਿੰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਸੰਬੰਧ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰੋ।
ਜਾਂ ਬਿਜਲੀ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਜਦ ਦੋ ਜਾਂ ਵੱਧ ਤਿਰੋਧਾਂ (R1, R2, R3, ………) ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪਰਿਣਾਮੀ ਤਿਰੋਧ (R) ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V ਅਤੇ ਬਿਜਲੀਧਾਰਾ (I) ਲਈ ਸੰਬੰਧ/ਸੂਤਰ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰੋ । ਅੰਕਿਤ ਚਿੱਤਰ ਵੀ ਬਣਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ – ਮੰਨ ਲਓ, ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R1, R2, R3, ਬਿੰਦੁ A ਅਤੇ B ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਹਨ। ਹੁਣ ਜੇ ਬਿੰਦੁ A ਅਤੇ B ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਲਗਾਉਣ ਤੇ ਮੁੱਖ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਕਰੰਟ I ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਿੰਦੁ A ਤੇ ਇਹ ਬਿਜਲੀ ਕਰੰਟ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਮੰਨ ਲਓ ਤਿਰੋਧ R1, R2, ਅਤੇ R3, ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਣ ਵਾਲਾ ਕਰੰਟ I1, I2, I3 ਹੈ ।
ਤਾਂ
I = I1 + I2 + I3

ਜੇ ਦੋਵੇਂ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ v ਹੈ, ਤਾਂ ਓਹਮ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ,
I1 = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}_{1}}\)
I2 = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}_{2}}\)
I3 = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}_{3}}\)
I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) , ਜਿੱਥੇ ਕਿ ਸੰਯੋਜਨ ਦਾ ਡੁੱਲ-ਤਿਰੋਧ ਹੈ ।
(1) ਵਿੱਚ ਮਾਨ ਰੱਖਣ ਤੇ
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 6
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 7

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਬਿਜਲਈ-ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਬਿਜਲਈ-ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਾੜਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ। ਇਸ ਦੀ ਇਕਾਈ ਵਾਟ ਦੀ ਵੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ – ਕਾਰਜ ਕਰਨ ਦੀ ਦਰ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਮੰਨ ਲਓ, ਇਕ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ V ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਲਗਾਇਆ ਹੈ ਅਤੇ I ਕਰੰਟ ਲੰਘਦਾ ਹੈ । t ਸਮੇਂ ਦੇ ਲਈ I ਕਰੰਟ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਕਾਰਜ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹੋਵੇਗਾ-
W = VIt
ਪਰ ਸਰਕਟ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਪ੍ਰਗਟ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 8
= \(\frac{\mathrm{W}}{t}\)
= \(\frac{\mathrm{VI} t}{t}\)
= VI
P = VI
ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ,
P = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\) [∵ I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)]
ਅਤੇ P = I2R [ ∵ V = IR]
ਬਿਜਲਈ-ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਇਕਾਈ-
∵ P = V × I

ਜੇ V ਨੂੰ ਵੋਲਟ ਵਿੱਚ ਅਤੇ I ਨੂੰ ਐਮਪੀਅਰ ਵਿੱਚ ਮਾਪਿਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਟ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇਗੀ ।
ਵਾਟ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ – ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਟ ਬਿਜਲਈ-ਸ਼ਕਤੀ ਤਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਇੱਕ ਵੋਲਟ ਦਾ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚੋਂ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ ਲੰਘ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ।
1 ਵਾਟ = 1 ਵੋਲਟੋ × 1 ਐਮਪੀਅਰ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਕਿਲੋਵਾਟ (kw) ਹੈ ।
1 ਕਿਲੋਵਾਟ = 1000 ਵਾਟ
ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ – ਕਿਸੇ ਨਿਸਚਿਤ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਧਾਰਾ ਦੁਆਰਾ ਕੁੱਲ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕਾਰਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ, ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਕਹਾਉਂਦੀ ਹੈ ।
1 ਕਿਲੋਵਾਟ = 1000 ਵਾਟ
ਮੰਨ ਲਓ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿਚੋਂ I ਐਮਪੀਅਰ ਧਾਰਾ t ਸਮੇਂ ਲੰਘਦੀ ਹੈ, ਜਦਕਿ ਇਸ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ V ਵੋਲਟ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਵਰਤੀ ਗਈ ਉਰਜਾ ਜਾਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਕਾਰਜ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਗਟ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ-
W = QV
W = VIt ਹੁਣ, ਓਹਮ ਨਿਯਮ ਤੋਂ
V = IR
W = I2Rt
ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਿਜਲ-ਊਰਜਾ (W) ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ-
(i) ਕਰੰਟ ਦਾ ਵਰਗ (I2)
(ii) ਤਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R)
(iii) ਸਮਾਂ (1) ਜਿਸ ਲਈ ਕਰੰਟ ਤਾਰ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘਦਾ ਹੈ ।
ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਮਾਣਕ ਇਕਾਈ ਜੂਲ ਜਾਂ ਵਾਟ ਸੈਕਿੰਡ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਇੱਕ-ਛੋਟੀ ਇਕਾਈ ਹੈ। ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਵਾਟ ਘੰਟਾ ਹੈ ।

ਵਾਟ ਘੰਟਾ – ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਇੱਕ ਵਾਟ ਘੰਟਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਚਾਲਕ ਵਿਚੋਂ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ ਇੱਕ ਘੰਟੇ ਲਈ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਇੱਕ ਵੋਲਟ ਦਾ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੋਵੇ।
1 ਵਾਟ ਘੰਟਾ = 1 ਵਾਟ × 1 ਘੰਟਾ
= 1 ਵੋਲਟ × 1 ਐਮਪੀਅਰ × 1 ਘੰਟਾ
ਬਿਜਲ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਨੂੰ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ (kWh) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
1 ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ = 1000 ਵਾਟ ਘੰਟਾ
ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਇਕਾਈ ਵਪਾਰਕ ਬੋਰਡ ਵਲੋਂ ਮਾਨਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ B.O.T. ਇਕਾਈ ਵੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਘਰੇਲੂ ਉਪਯੋਗ ਲਈ ਇਹ ਬਿਜਲ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵਪਾਰਕ ਇਕਾਈ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ (ਤਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਚਾਰਜ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਲਈ ਇਲੈਂਨਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ।
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸੇ ਧਾਤਵੀਂ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਪਰਮਾਣੂ ਵਿਰਾਮ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਉਪਸਥਿਤ ਸੁਤੰਤਰ ਇਲੈੱਕਟੁਨ ਸਾਰੀਆਂ ਦਿਸ਼ਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਗਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਭਿੰਨ-ਭਿੰਨ ਦਿਸ਼ਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਗਤੀ ਕਰਨ ਦੇ ਕਾਰਨ ਇਲੈੱਕਵਾਂਨਾਂ ਦਾ ਬਹਾਓ ਕਿਸੇ ਨਿਸਚਿਤ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਕਿਸੇ ਚਾਰਜ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨਹੀਂ
ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 9

ਜਦੋਂ ਇਸ ਚਾਲਕ (ਤਾਰ) ਨੂੰ ਬੈਟਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਜੋੜ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਚਾਲਕ ਦਾ ਇੱਕ ਸਿਰਾ ਧਨ ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਸਿਰਾ ਰਿਣ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਨ ਧਨ ਖੇਤਰ ਵੱਲ ਖਿੱਚੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਿਸਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਉਹ ਖੱਬੇ ਪਾਸੇ ਵੱਲ ਨੂੰ ਗਤੀਸ਼ੀਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨਾਂ ਦੀ ਗਤੀ ਸੱਜੇ ਤੋਂ ਖੱਬੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਚਾਰਜ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਸੱਜੇ ਤੋਂ ਖੱਬੇ ਦਿਸ਼ਾ ਵੱਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਵਰਤਾਰੇ ਨੂੰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਸਾਡੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਕੀ ਰੋਲ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਸਾਡੇ ਜੀਵਨ ਵਿਚ ਰੋਲ-ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਸਾਡੇ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਯੋਗਦਾਨ ਹੈ। ਇਸ ਨਾਲ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਕਈ ਸਹੂਲਤਾਂ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ ਰਾਤ ਨੂੰ ਹਨੇਰਾ ਦੂਰ ਕਰਨ ਲਈ ਇਸਦਾ ਉਪਯੋਗ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਬੱਲਬ ਅਤੇ ਟਿਊਬ ਲਾਈਟ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਡੇਜ਼ਰਟ ਕੂਲਰ, ਏਅਰ ਕੰਡੀਸ਼ਨਰ ਆਦਿ ਨਾਲ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰ ਕੇ ਘਰਾਂ ਨੂੰ ਠੰਡਾ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਹੀਟਰ ਆਦਿ ਨਾਲ ਗਰਮ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਛੁੱਟ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਕੇ ਟੈਲੀਵਿਜ਼ਨ, ਰੇਡੀਓ, ਸਿਨੇਮਾ ਅਤੇ ਸੰਗੀਤ ਆਦਿ ਦੁਆਰਾ ਮਨੋਰੰਜਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਖੇਤੀ, ਆਵਾਜਾਈ ਅਤੇ ਉਦਯੋਗਾਂ ਵਿੱਚ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ਵੀ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਇਲੈਕਟ੍ਰੋਸਟੈਟਿਕਸ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਲੈੱਕਟ੍ਰੋਸਟੈਟਿਕਸ (Electrostatics) – ਜਦੋਂ ਦੋ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਰਗੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੋਨਾਂ ਵਿੱਚ ਛੋਟੀਆਂ-ਛੋਟੀਆਂ ਅਤੇ ਹਲਕੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਵੱਲ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਕਰਨ ਦਾ ਗੁਣ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅਜਿਹਾ ਰਗੜ ਦੁਆਰਾ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਰਗੜ ਬਿਜਲੀ ਜਾਂ ਸਥਿਰ ਬਿਜਲੀ ਵੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਸਥਿਰ ਚਾਰਜਾਂ ਦੇ ਅਧਿਐਨ ਨੂੰ ‘ਇਲੈੱਕਟ੍ਰੋਸਟੈਟਿਕਸ’ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਉਦਾਰਹਨ-ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਪੈਂਨ ਨੂੰ ਸੁੱਕੇ ਵਾਲਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਰਗੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਵੱਲ ਖਿੱਚ ਲੈਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਰਗੜ ਦੁਆਰਾ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਸੰਭਵ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਧਨ ਅਤੇ ਰਿਣ ਚਾਰਜ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਹ ਕਿਵੇਂ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਨ ਚਾਰਜ (Positive Charge) – ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਨਾਲ ਰਗੜਨ ਤੇ ਕੱਚ ਦੀ ਛੜ ਤੇ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਧਨ ਚਾਰਜ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਰਿਣ ਚਾਰਜ (Negative Charge) – ਬਿੱਲੀ ਦੀ ਖੱਲ ਨਾਲ ਰਗੜਨ ਤੇ ਆਬਨੂਸ (ਐਨਾਈਟ ਦੀ ਛੜ ’ਤੇ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਰਿਣ ਚਾਰਜ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਚਾਲਕਾਂ ਅਤੇ ਰੋਧਕਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ।
ਜਾਂ
ਚਾਲਕ ਅਤੇ ਰੋਧਕ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਾਲਕ ਅਤੇ ਰੋਧਕ (Conductors and insulators)-
ਚਾਲਕ-ਚਾਲਕਾਂ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਸੁਤੰਤਰ ਇਲੈੱਕਵਾਂਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਅਧੀਨ ਗਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਜਦੋਂ ਚਾਲਕ ਨੂੰ ਬੈਟਰੀ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਇਲੈੱਕਟਾਂ ਇਸ ਦੇ ਧਨ ਟਰਮੀਨਲ ਵੱਲ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਰਿਣ ਟਰਮੀਨਲ ਤੋਂ ਪ੍ਰਤਿਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਲਈ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨਾਂ ਦੀ ਗਤੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਚਾਰਜ ਦਾ ਸਥਾਨਾਂਤਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਚਾਲਕ ਅਜਿਹੇ ਪਦਾਰਥ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਲੰਘਦਾ ਹੈ।
ਉਦਾਹਰਨ – ਤਾਂਬਾ, ਚਾਂਦੀ, ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਆਦਿ ।

ਰੋਧਕ – ਅਜਿਹੇ ਪਦਾਰਥ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਤੰਤਰ ਇਲੈੱਕਵਾਂਨ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਇਲੈੱਕਟਾਂਨ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਗਤੀ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ ਅਰਥਾਤ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਨਹੀਂ ਲੰਘਦਾ ਉਹ ਰੋਧਕ ਕਹਾਉਂਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਨ-ਰਬੜ, ਕੱਚ, ਪਲਾਸਟਿਕ ਆਦਿ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਬਿਜਲਈ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਦਾ ਕੀ ਅਰਥ ਹੈ ? ਧਨ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅਤੇ ਰਿਣ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਟੈਂਸ਼ਲ – ਇਹ ਚਾਲਕ ਦੀ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਬਿਜਲਈ ਅਵਸਥਾ ਹੈ ਜੋ ਸਾਨੂੰ ਇਹ ਦੱਸਦੀ ਹੈ ਕਿ ਕਿਸੇ ਦੂਸਰੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਨਾਲ ਬਿਜਲਈ ਚਾਰਜ ਦਾ ਬਹਾਓ ਕਿਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇਗਾ। ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਧਰਤੀ ਦੇ ਸਾਪੇਖ ਮਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਧਨ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ – ਜੇਕਰ ਧਨ ਚਾਰਜ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਧਰਤੀ ਵੱਲ ਵਹਿੰਦਾ ਜਾਂ ਇਲੈਕਟ੍ਰਾਨ ਧਰਤੀ ਤੋਂ ਵਸਤੂ ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਣ ਤਾਂ ਉਸ ਵਸਤੂ ਦੇ ਟੈਂਸ਼ਲ ਨੂੰ ਧਨ ਟੈਸ਼ਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਕਿਸੇ ਸੈੱਲ ਦੇ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਬਲ ਦਾ ਕੀ ਅਰਥ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੈੱਲ ਦਾ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਬਲ – ਇਕਾਈ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਪੂਰੇ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰਾਉਣ ਵਿੱਚ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਸੈੱਲ ਦੁਆਰਾ ਖ਼ਰਚ ਕੀਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਸੈੱਲ ਦਾ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਬਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਨੂੰ E ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਬਲ ਦੀ S.I ਇਕਾਈ ਵੋਲਟ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਇਲੈੱਕਟ੍ਰੋਸਟੈਟਿਕਸ ਵਿੱਚ ਕੂਲਾਂਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਬਿਆਨ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਜਾਂ
ਸਥਿਰ ਬਿਜਲਈ ਵਿੱਚ ਕੂਲਾਂਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਜਾਂ
ਸਥਿਰ ਬਿਜਲਈ ਵਿੱਚ ਕੂਲਾਂਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਬਿਆਨ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਇਲੈੱਕਟ੍ਰੋਸਟੈਟਿਕਸ ਵਿੱਚ ਕੂਲਾਮ ਦਾ ਨਿਯਮ – ਕੂਲਾਂਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਦੋ ਸਮਜਾਤੀ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਚਾਰਜਿਤ ਵਸਤੁਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਅਪਕਰਸ਼ਨ ਬਲ ਜਾਂ ਦੋ ਅਸਮਜਾਤੀ ਚਾਰਜ ਵਾਲੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਆਕਰਸ਼ਣ ਬਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਚਾਰਜਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਦੂਰੀ ਦੇ ਵਰਗ ਦੇ ਉਲਟ ਸਮਾਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 10

ਮੰਨ ਲਓ ਦੋ ਬਿੰਦੂਆਂ ਤੇ ਚਾਰਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ q1 ਅਤੇ q2 ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਦੂਰੀ ‘d’ ਹੈ। ਜੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਕਿਰਿਆ ਕਰ ਰਿਹਾ ਬਲ F ਹੋਵੇ, ਤਾਂ
F ∝ q1q2 ……….(i)
ਅਤੇ
F ∝ \(\frac{1}{d^{2}}\) ………(ii)
ਸਮੀਕਰਨ (1) ਅਤੇ (ii) ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ,
F ∝ \(\frac{q_{1} q_{2}}{d^{2}}\)
ਜਾਂ
F = \(\frac{q_{1} q_{2}}{d^{2}}\)
ਜਿੱਥੇ K ਅਨੁਪਾਤ ਅੰਕ ਹੈ ਜਿਸਦਾ ਮੁੱਲ ਚਾਰਜਾਂ ਦੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਚਾਰਜਾਂ ਨੂੰ ਕੂਲਾਂਮ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਦੂਰੀ ਨੂੰ ਮੀਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਹਵਾ ਜਾਂ ਨਿਰਵਾਯੂ ਲਈ K = 9 × 109 ਹੈ ।
F = 9 × 109 × \(\) ਨਿਊਟਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਕਿਸਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ? ਇਸ ਦੀ ਇਕਾਈ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ-ਇੱਕ ਬਿਜਲੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਦੋ ਬਿੰਦੂਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਉਸ ਖੇਤਰ ਕਾਰਨ ਸਥਿਰ ਬਿਜਲੀ ਦਲ ਦੇ ਉਲਟ ਇੱਕ ਇਕਾਈ ਧਨ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਇੱਕ ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਬਿੰਦੂ ਤਕ ਲੈ ਜਾਣ ਲਈ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕਾਰਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਹੈ । ਪੁਟੈਂਥਲ ਅੰਤਰ ਦੀ ਇਕਾਈ ਵੋਲਟ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਵੋਲਟ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ। ਇਹ ਕਿਸ ਦੀ ਇਕਾਈ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵੋਲਟ-ਬਿਜਲੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਦੋ ਬਿੰਦੂਆਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਇੱਕ ਵੋਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਇੱਕ ਕੂਲਾਮ ਦੇ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਇਕ ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਬਿੰਦੂ ਤਕ ਲੈ ਜਾਣ ਵਿੱਚ 1 ਜੂਲ ਕਾਰਜ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੋਵੇ
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 11
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਦੀ ਇਕਾਈ ਵੋਲਟ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਅਸੀਂ ਕਿਵੇਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਚਾਰਜ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੇ ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਚਾਰਜਿਤ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀ ਨੂੰ ਤਾਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਅਣਚਾਰਜਿਤ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀ ਦੇ ਨਾਲ ਜੋੜੀਏ, ਤਾਂ ਚਾਰਜ ਚਾਰਜਿਤ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀ ਤੋਂ ਅਣਚਾਰਜਿਤ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀ ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਵੇਗਾ। ਇਸ ਨਾਲ ਅਸਚਾਰਜਿਤ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀ ਦੇ ਪੱਤਰੇ ਵਧੇਰੇ ਫੈਲ ਕੇ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਤੋਂ ਵੱਖ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ਅਤੇ ਖੁੱਲ੍ਹ ਜਾਣਗੇ। ਕਰੰਟ ਦਾ ਇਹ ਵਾਹ ਓਨੀ ਦੇਰ ਤਕ ਚਲਦਾ ਰਹੇਗਾ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਕਿ ਦੋਵੇਂ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀਆਂ ਦੇ ਪੱਤਰੇ ਇੱਕ ਨਹੀਂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ। ਬਰਾਬਰੀ ਆਉਣ ‘ਤੇ ਬਿਜਲਦਰਸ਼ੀ ਤੇ ਪੱਤਰੇ ਇੱਕ ਸਾਰ ਖੁੱਲ੍ਹਣਗੇ। ਚਾਰਜ ਦੇ ਇਸ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨੂੰ ਹੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਕੀ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲ ਕਰੰਟ (Electric Current) – ਜਦੋਂ ਦੋ ਬਿੰਦੂ, ਜੋ ਕਿ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਟੈਂਸ਼ਲਾਂ ਤੇ ਹੋਣ, ਨੂੰ ਇੱਕ ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਤਾਰ ਦੁਆਰਾ ਜੋੜ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਚਾਰਜ ਵੱਧ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਤੋਂ ਘੱਟ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਵਾਲੇ ਚਾਲਕ ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਕਿਰਿਆ ਉਦੋਂ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਤਕ ਕਿ ਦੋਨੋਂ ਬਿੰਦੂਆਂ ਦਾ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਬਰਾਬਰ ਨਹੀਂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ । ਜੇ ਦੋਨਾਂ ਬਿੰਦੂਆਂ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਬਣਿਆ ਰਹੇ, ਤਾਂ ਚਾਰਜ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਜਾਰੀ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਚਾਰਜ ਦੇ ਲਗਾਤਾਰ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨੂੰ ਕਰੰਟ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਕਿਵੇਂ ਊਸ਼ਮਾ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸੇ ਧਾਤਵੀ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸੰਖਿਆ ਵਿੱਚ ਮੁਕਤ ਇਲੈੱਕਵਾਂਨ ਗਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਜਦੋਂ ਚਾਲਕ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਸਰੋਤ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਮੁਕਤ ਇਲੈੱਕਫੁੱਟ ਉੱਚੇ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਤੋਂ ਨੀਵੇਂ ਟੈਂਸ਼ਲ ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਤੋਂ ਇਲੈਂਕਨ ਪਰਮਾਣੂਆਂ ਨਾਲ ਟਕਰਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਟਕਰਾਓ ਕਾਰਨ ਮੁਕਤ ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨਾਂ ਦੀ ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਚਾਲਕ ਦੇ ਪਰਮਾਣੁਆਂ ਵਿੱਚ ਸਥਾਨਾਂਤਰਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਪਰਮਾਣੂਆਂ ਦੀ ਗਤਿਜ ਉਰਜਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਚਾਲਕ ਦੇ ਤਾਪ ਦੀ ਧੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਊਸ਼ਮਾ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਤੋਂ ਉਤਪੰਨ ਹੋਈ ਊਸ਼ਮਾ ਦਾ ਸੰਬੰਧ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਅਤੇ ਊਸ਼ਮਾ ਵਿਚਕਾਰ ਸੰਬੰਧ – ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਲੰਘਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜੂਲ ਨਾਂ ਦੇ ਵਿਗਿਆਨਿਕ ਨੇ ਸਾਨੂੰ ਇਹ ਦੱਸਿਆ ਸੀ । ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਜੂਲ ਦਾ ਤਾਪਨ ਪ੍ਰਭਾਵ ਦਾ ਨਿਯਮ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਕਿਉਂਕਿ ਚਾਲਕ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਲਗਾਤਾਰ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਹੋਣ ਵਿੱਚ ਕਾਰਜ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਉਸ਼ਮਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਗਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਮੰਨ ਲਓ ਕਿਸੇ R ਤਿਰੋਧ ਵਾਲੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ t ਸੈਕਿੰਡ ਤੱਕ I ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ, V ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਤੇ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ t ਸਮਾਂ ਲਈ I ਧਾਰਾ Q ਚਾਰਜ ਕਾਰਨ ਹੋਵੇ ਤਾਂ,
I = \(\frac{\mathrm{Q}}{t}\)
ਜਾਂ Q = I × t
Q ਚਾਰਜ ਲਈ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਕਾਰਜ W = Q × V
= It × V
= It × I × R
= I2 Rt (∵ V = I × R)
ਜੇਕਰ ਉਤਸਰਜਿਤ ਊਰਜਾ ਨੂੰ ਮ ਨਾਲ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ
H = W
∴ H = I2Rt ਜੂਲ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਚਾਲਕ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਇਸ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਚਾਲਕ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਇਸ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ – ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਨੂੰ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਜੇ ਚਾਲਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ vਹੋਵੇ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘ ਰਹੀ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 1 ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R)
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ (V) ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R)
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 12

ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ-S.I. ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਓਹਮ ਹੈ ਜਦਕਿ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਵੋਲਟ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਕਰੰਟ ਨੂੰ ਐਮਪੀਅਰ ਵਿੱਚ ਮਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਓਹਮ (Ohn) – ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਤਿਰੋਧ ਇੱਕ ਓਹਮ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇ ਉਸਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਇੱਕ ਵਲਟ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚੋਂ ਲੰਘ ਰਹੇ ਕਰੰਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਹੋਵੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਇਸ ਦਾ S.I. ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਲਿਖ ਕੇ ਮਹੱਤਤਾ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ – ਕਿਸੇ ਇਕਾਈ ਲੰਬਾਈ ਅਤੇ ਇਕਾਈ ਪਰਿਖੇਤਰਫਲ ਵਾਲੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਉਸ ਚਾਲਕ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਕਹਾਉਂਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਦਾ S.I. ਮਾਤ੍ਰਿਕ Ω m (ਓਹਮ-ਮੀਟਰ ਹੈ ।
ਮਹੱਤਤਾ-

  1. ਇਹ ਤਾਪਮਾਨ ਦੇ ਨਾਲ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  2. ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਹ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਕੁਚਾਲਕ ਜਾਂ ਘੱਟ ਚਾਲਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  3. ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਉਹ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਚੰਗੇ ਚਾਲਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਜਿਵੇਂ-ਧਾਤਾਂ, ਮਿਸ਼ਰਧਾਤਾਂ ਆਦਿ ।
  4. ਕਿਸੇ ਮਿਸ਼ਰਧਾਤੂ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਉਸਦੀਆਂ ਘਟਕ ਧਾਤਾਂ ਤੋਂ ਅਧਿਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਤਾਪੀ ਉਪਕਰਨਾਂ ਵਿੱਚ ਧਾਤਾਂ ਅਤੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਧਾਤਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਿਸ ਕਾਰਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਚ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਦੇ ਗੁਣਾਂ ਵਾਲੀਆਂ ਧਾਤਾਂ ਅਤੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਧਾਤਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਤਾਪਨ ਉਪਕਰਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ-

  1. ਇਹ ਉੱਚੇ ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਆਕਸੀਕ੍ਰਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  2. ਇਹ ਅਧਿਕ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
  3. ਇਹ ਉੱਚੇ ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਨਹੀਂ ਜਲਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਬਿਜਲ ਸਰਕਟ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਇੱਕ ਬੰਦ ਸਰਕਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਲੰਘਦੇ ਹਨ। ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਨੂੰ ਬੈਟਰੀ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਲੈੱਕਟਾਂਨ ਰਿਣ ਟਰਮੀਨਲ ਤੋਂ ਧਨ ਟਰਮੀਨਲ ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹਨ। ਪਰ ਕਰੰਟ (I) ਦੀ ਪਰੰਪਰਿਕ ਦਿਸ਼ਾ ਇਲੈਂਕਨ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਤੋਂ ਉਲਟ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਬਿਜਲਈ ਕਰੰਟ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਮਾਤ੍ਰਿਕਾਂ ਦੱਸੋ।
ਜਾਂ
ਬਿਜਲਈ ਕਰੰਟ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸਦੀ S.I. ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿੱਚ ਇਕਾਈ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਕਰੰਟ (Current) – ਜੇ ਦੋ ਚਾਰਜਿਤ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਚਾਲਕ ਦੁਆਰਾ ਜੋੜਿਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਲੈੱਕਵਾਂਨ ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਦੂਜੀ ਵਸਤੂ ਵੱਲ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਇਲੈਂਕਟਾਂਨਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਵਾਹ ਦੀ ਦਰ ਨੂੰ ਬਿਜਲ ਈਧਾਰਾ (I) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਦੂਜੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿੱਚ, ਇਕਾਈ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਬਿਜਲਈ ਕਰੰਟ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 13
= 6.25 × 1018 ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨ

ਐਮਪੀਅਰ (Ampere) – ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਸੈਕਿੰਡ ਲਈ ਇੱਕ ਕੂਲਾਂ ਚਾਰਜ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਇੱਕ ਐਮਪੀਅਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
ਕਰੰਟ ਦੀ ਛੋਟੀ ਇਕਾਈ ਮਿਲੀ-ਐਮਪੀਅਰ ਹੈ ।
1 ਮਿਲੀ-ਐਮਪੀਅਰ = \(\frac{1}{1000}\) ਐਮਪੀਅਰ
= 10-3 ਐਮਪੀਅਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਕਰੰਟ ਮਾਪਣ ਲਈ ਕਿਸ ਯੰਤਰ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਇਸ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰੰਟ ਨੂੰ ਮਾਪਣ ਲਈ ਐਮਮੀਟਰ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਹਮੇਸ਼ਾ ਇਸ ਢੰਗ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸੰਪੂਰਨ ਕਰੰਟ ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਵੇ ਅਰਥਾਤ ਲੜੀਵਾਰ ਕੂਮ ਵਿਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਐਮਮੀਟਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 14

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਦੀ ਇਕਾਈ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ।
ਜਾਂ
ਇਕ ਵਾਟ = ਘੰਟਾ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਉੱਤਰ-ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਦੀ ਇਕਾਈ ਜੂਲ/ਵਾਟ-ਸੈਕਿੰਡ/ਵਾਟ-ਘੰਟਾ ਹੈ।
ਵਾਟ-ਘੰਟਾ-ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਇੱਕ ਵਾਟ-ਘੰਟਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇ ਇਕ ਐਮਪੀਅਰ ਕਰੰਟ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਘੰਟੇ ਲਈ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਉਸਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵੋਲਟ ਦਾ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੋਵੇ !
1 ਵਾਟ ਘੰਟਾ = 1 ਵਾਟ × 1 ਘੰਟਾ
= 1 ਵੋਲਟ × 1 ਐਮਪੀਅਰ × 1 ਘੰਟਾ
ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਨੂੰ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
1 ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ = 1000 ਵਾਟ ਘੰਟਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਇਕ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਜੂਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਜਾਂ
ਇਕ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਨੂੰ ਪਰਿਭਾਸ਼ਿਤ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ – ਜੇਕਰ ਇੱਕ ਕਿਲੋਵਾਟ ਬਿਜਲਈ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ 1 ਘੰਟੇ ਤਕ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਖਪਤ ਹੋਈ ਊਰਜਾ ਇੱਕ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ (kWh) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
∴ 1 kWh = 1 kW × 1 ਘੰਟਾ
= 1000 ਵਾਟ × 3600 ਸੈਕਿੰਡ
= 1000 PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 15 × 3600 ਸੈਕਿੰਡ
∴ 1 ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ (1 kWh) = 36 × 105 ਜੂਲ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਕੀ ਕਾਰਨ ਹੈ ਕਿ ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਤਾਪਮਾਨ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਦਕਿ ਬਿਜਲਈ ਬੱਲਬ ਦੇ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਵਿੱਚ ਉੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਵਾਹਕ ਤਾਰਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਬਿਜਲਈ ਬੱਲਬ ਦੇ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ, ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਕਰਨ ਤੇ ਬਿਜਲਈ ਬੱਲਬ ਦੇ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਵਿੱਚ ਵਧੇਰਾ ਉੱਚਾ ਉਤਪੰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਪਰੰਤੂ ਬਿਲਜਈ ਵਾਹਕ ਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ :-
(i) ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਐਮਮੀਟਰ ਨੂੰ ਸਮਾਨੰਤਰ ਕ੍ਰਮ ਵਿੱਚ ਸੰਯੋਜਿਤ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਐਮਮੀਟਰ ਕਿਉਂ ਸੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(ii) ਇੱਕ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਤਾਪ ਤੋਂ ਕੁੱਝ ਹੇਠਾਂ ਕੁੱਝ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਘੱਟ ਕੇ ਜ਼ੀਰੋ ਕਿਉਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
(i) ਸਰਕਟ ਦੇ ਹੋਰ ਉਪਕਰਨਾਂ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਐਮਮੀਟਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਨਾ ਹੋਣ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਐਮਮੀਟਰ ਨੂੰ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਸਮਾਨੰਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਸਰਕਟ ਦਾ ਕੁੱਲ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਐਮਮੀਟਰ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕਾਰਜ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਐਮਮੀਟਰ ਵਿੱਚ ਉੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਕਾਰਨ ਵਧੇਰੇ ਤਾਪ ਦੇ ਉਤਪੰਨ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਐਮਮੀਟਰ ਸੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

(ii) ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਤਾਪ ਭਾਂਤਿਕ ਤਾਪ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪਦਾਰਥ ਅਤਿਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਉਸਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਚਾਨਕ ਜ਼ੀਰੋ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਬਿਜਲਈ ਉਪਕਰਨਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕ੍ਰਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜਨਾ ਕਿਉਂ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਸੰਯੋਜਨ ਦੇ ਲਾਭ-

  1. ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜਨ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਵੀ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚ ਸਵਿੱਚ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਸੁਤੰਤਰਤਾ ਪੂਰਵਕ ਭੇਜੀ ਜਾਂ ਰੋਕੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।
  2. ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ਨਾਲ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਸ਼ਾਖ਼ਾਵਾਂ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਬੱਲਬ, ਬਿਜਲਈ ਐੱਸ, ਰੈਫ਼ਰੀਜ਼ੇਟਰ, ਰੇਡੀਓ ਅਤੇ ਟੈਲੀਵਿਜ਼ਨ ਆਦਿ ਨੂੰ ਇੱਕ ਹੀ ਟੈਂਸ਼ਲ ਤੇ ਚੱਲਣ ਯੋਗ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25
ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਤੇ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ-
(i) ਤਾਰ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਵਧਾ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ।
(ii) ਪਰਿਖੇਤਰਫਲ ਵਧਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ, ਤਾਰ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਸਮਾਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਤਾਰ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਵਧਾਉਣ ਨਾਲ ‘ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਧਿਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

(ii) ਮੋਟੇ ਤਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਬਾਰੀਕ ਤਾਰ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਤਾਰ ਦੀ ਮੋਟਾਈ ਕਾਰਨ ਉਸ ਦਾ ਪਰਿਖੇਤਰਫਲ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਸੰਯੋਜਕ ਤਾਰਾਂ ਤਾਂਬੇ ਦੀਆਂ ਹੀ ਕਿਉਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ? ਇਹ ਤਾਰਾਂ ਮੋਟੀਆਂ ਕਿਉਂ ਹੁੰਦੀਆਂ
ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਚਾਂਦੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤਾਂਬਾ (ਕਾਪਰ) ਹੀ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਵਧੀਆ ਚਾਲਕ ਹੈ। ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਘੱਟ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪ੍ਰਵਾਹ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਸੰਯੋਜਕ ਤਾਰਾਂ (ਬਿਜਲੀ ਵਾਹਕ ਤਾਰਾਂ) ਮੋਟੀਆਂ ਰੱਖੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਕਿਉਂਕਿ ਕਿਸੇ ਤਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਉਸਦੀ ਮੋਟਾਈ ਦੇ ਉਲਟ (ਵਿਲੋਮ) ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਜਿਹੜੀ ਤਾਰ ਜਿੰਨੀ ਮੋਟੀ ਹੋਵੇਗੀ ਓਨਾ ਹੀ ਉਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗਾ। ਇਸ ਦੇ ਸਿੱਟੇ ਵਜੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਸਕੇਗੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਚਾਲਕ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਦੋ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਚਾਲਕ-ਅਜਿਹੇ ਪਦਾਰਥ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਸੌਖਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਚਾਲਕ ਅਖਵਾਉਂਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਣ-

  1. ਤਾਂਬਾ
  2. ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ
  3. ਤੇਜ਼ਾਬ ਯੁਕਤ ਪਾਣੀ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਸੰਖਿਆਤਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Numerical Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਦੋ ਛੋਟੇ ਚਾਰਜਿਤ ਗੋਲਿਆਂ ਤੇ 2 × 10-7 ਕੂਲਾਂਮ ਅਤੇ 3 × 10-7 ਕੂਲਾਂਮ ਦੇ ਚਾਰਜ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹ ਹਵਾ ਵਿੱਚ 30 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਰੱਖੇ ਗਏ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਬਲ ਮਾਲੂਮ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਪਹਿਲੇ ਗੋਲੇ ਦਾ ਚਾਰਜ q1 × 10-7 ਕੂਲਾਂਮ
ਦੂਜੇ ਗੋਲੇ ਦਾ ਚਾਰਜ q2 = 3 × 10-7 ਕੂਲਾਂਮ
ਗੋਲਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਦੂਰੀ d = 30 cm
= \(\frac{30}{100}\)m
= 0.30 cm
ਹਵਾ ਮਾਧਿਅਮ ਲਈ K = 9 × 109
ਦੋਨੋਂ ਗੋਲਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਬਿਜਲੀ ਬਲ F = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 16

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਇੱਕ ਚਾਲਕ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 3.0 m, ਪਰਿਖੇਤਰਫਲ 0.02 mm2 ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ 2 ਓਹਮ ਹੈ। ਇਸ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਮਾਲੂਮ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਚਾਲਕ ਦੀ ਲੰਬਾਈ (l) = 3.0 m
ਚਾਲਕ ਦਾ ਪਰਿਖੇਤਰਫਲ (a) = 0.02 m2
= \(\frac{0.02}{10^{6}}\)m2
ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R) = 2 ਓਹਮ
ਚਾਲਕ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ (ρ) = ?
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ, R = ρ × \(\frac{l}{a}\)
2 = ρ × \(\frac{3}{0.02 \times 10^{-6}}\)
∴ ρ = \(\frac{2 \times 0.02 \times 10^{-6}}{3}\)
ρ = \(\frac{2 \times 2}{3 \times 10^{2}}\) × 10-6
= \(\frac{4}{3}\) × 10-8
= 1.33 × 10-8 ਓਹਮ-ਮੀਟਰ ਉੱਤਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
30 Ω, 50 Ω ਅਤੇ 80 Ω, ਦੇ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਤਿੰਨ ਤਿਰੋਧਕਾਂ ਦਾ ਤੱਲ-ਤਿਰੋਧ ਮਾਲੂਮ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਇੱਥੇ r1 = 30 Ω
r2 = 50 Ω
r3 = 80 Ω
ਹੁਣ, ਕਿਉਂਕਿ ਤਿੰਨਾਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ r1, r2, r3 ਨੂੰ ਲੜੀਬੱਧ ਜੋੜਿਆ ਗਿਆ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਡੁੱਲ-ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ (R) ਤਿੰਨਾਂ ਦੇ ਜੋੜ ਬਰਾਬਰ ਹੈ ।
R = r1 + r2 + r3 )
= 30 Ω + 50 Ω + 80 Ω
R = 160 Ω

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
40 Ω, 60 Ω, ਅਤੇ 90 Ω ਦੇ ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰਬੱਧ ਵਿੱਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਸੰਯੋਜਨ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿੰਨਾ ਹੈ ?
ਹੱਲ :
ਇੱਥੇ r1 = 40 Ω
r2 = 60 Ω
r3 = 90 Ω
ਮੰਨ ਲਓ ਤਿੰਨਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R ਹੈ
ਕਿਉਂਕਿ ਤਿੰਨਾਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਵਿੱਚ ਸੰਯੋਜਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ
\(\frac{1}{R}\) = \(\frac{1}{r_{1}}+\frac{1}{r_{2}}+\frac{1}{r_{3}}\)
= \(\frac{1}{40}+\frac{1}{60}+\frac{1}{90}\)
\(\frac{1}{R}\) = \(\frac{9+6+4}{360}\)
\(\frac{1}{R}\) = \(\frac{19}{360}\)
∴ R = \(\frac{360}{19}\) = 18.95 Ω

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
6 Ω, 8 Ω, ਅਤੇ 10 Ω ਦੇ ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਲੜੀ ਬੱਧ ਜੋੜੇ ਗਏ ਹਨ । ਪਰਿਪੱਖ ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ,
R1 = 6 Ω , R2 = 8 Ω, R3 = 10 Ω
ਮੰਨ ਲਓ ਪਰਿਪੱਖ ਦਾ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R ਹੈ, ਤਾਂ
ਲੜੀ ਬੱਧ ਸੰਯੋਜਨ ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ, R = R1 + R2 + R3
= 6Ω + 8Ω + 10Ω
= 24Ω

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
5 Ω, 8 Ω, ਅਤੇ 12 Ω ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਵਾਲੇ ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਲੜੀਵਾਰ ਕੌਮ ਵਿਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਹਨ । ਪਰਿਪੱਖ ਦਾ ਪਰਿਣਾਮੀ ਤਿਰੋਧ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ,
R1 = 5 Ω, R2 = 8 Ω , R3 = 12 Ω
ਮੰਨ ਲਓ ਪਰਿਪੱਖ ਦਾ ਪਰਿਣਾਮੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R ਹੈ, ਤਾਂ
ਲੜੀਵਾਰ ਕੂਮ ਵਿਚ ਜੋੜੇ ਗਏ ਤਿਰੋਧਾਂ ਦਾ ਪਰਿਣਾਮੀ ਤਿਰੋਧ, R = R1 + R2 + R3
= 5Ω + 8Ω + 12Ω
= 25Ω

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
4 Ω, 8 Ω, 12 Ω ਅਤੇ 24 Ω ਕਿਸ ਤਰਤੀਬ ਵਿਚ ਜੋੜੇ ਜਾਣ ਤਾਂ ਜੋ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਵੇਗਾ ? ਪਰਿਣਾਮੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਵੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ : ਦਿੱਤਾ ਹੈ,
R1 = 4 Ω , R2 = 8 Ω , R3 = 12 Ω , R4 = 24 Ω
ਮੰਨ ਲਓ ਪਰਿਣਾਮੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R ਹੈ,
ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਚਹੁੰ ਤਿਰੋਧਾਂ ਨੂੰ ਲੜੀਕੂਮ ਵਿਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਏਗਾ ਤਾਂ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਵੇਗਾ । ਪਰਿਣਾਮੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ, R = R1 + R2 + R3 + R4.
= 4Ω + 8Ω + 12Ω + 24Ω
= 48Ω

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
4 Ω, 8 Ω, 10 Ω ਅਤੇ 20 Ωਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦੀਆਂ ਚਾਰ ਕੁੰਡਲੀਆਂ ਨੂੰ ਜੋੜਨ ਤੇ (1) ਅਧਿਕਤਮ (2) ਨਿਊਨਤਮ ਤਿਰੋਧ ਕਿੰਨਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ? (ਮਾਂਡਲ ਪੇਪਰ)
ਹੱਲ :
1. ਅਧਿਕਤਮ ਤਿਰੋਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸੰਯੋਜਨ – ਇਨ੍ਹਾਂ ਚਹੁੰ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਨੂੰ ਲੜੀਮ ਵਿਚ ਜੋੜਨ ਨਾਲ ਅਧਿਕਤਮ ਪਰਿਣਾਮੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਵੇਗਾ ।
∴ RS = R1 + R2 + R3 + R4
= 4Ω + 8Ω + 10Ω + 20Ω
= 42Ω

2. ਨਿਊਨਤਮ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸੰਯੋਜਨ-ਜੇਕਰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਤਿਰੋਧਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਤਾਂ ਪਰਿਣਾਮੀ ਤਿਰੋਧ ਨਿਊਨਤਮ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਹੋਵੇਗਾ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਪੰਜ ਬੱਲਬਾਂ ਨੂੰ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਹਰੇਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ 400 ਓਹਮ ਹੈ, 220 V ਦੀ ਸਪਲਾਈ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। (ੳ) ਹੋਰ ਲੈਂਪ ਦੀ ਵੋਲਟੇਜ (ਅ) ਜੇ ਬੱਲਬਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀਦਿਨ 5 ਘੰਟੇ ਲਈ 30 ਦਿਨਾਂ ਵਾਸਤੇ ਜਲਾਇਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਖ਼ਪਤ ਬਿਲ ਮਾਲੂਮ ਕਰੋ, ਜਦੋਂ ਕਿ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਦਾ ਮੁੱਲ 3 ਰੁਪਏ ਹੋਵੇ।
ਹੱਲ :
ਹਰ ਬੱਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ= 440 ਓਹਮ
5 ਬੱਲਬ ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਜੋੜੇ ਗਏ ਹਨ ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਡੁੱਲ-ਤਿਰੋਧ R ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 18
= 88 ਓਹਮ
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V = 220 V
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ, P = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{220 \times 220}{88}\)
= \(\frac{5 \times 220}{2}\) = 550 W
ਹਰੇਕ ਲੈਂਪ ਦੀ ਵਾਟੇਜ (ਸ਼ਕਤੀ) = \(\frac{550}{5}\) = 110 ਵਾਟ
ਸਮਾਂ = 30 × 5 ਘੰਟੇ
= 150 ਘੰਟੇ
ਊਰਜਾ ਦੀ ਖ਼ਪਤ (E) = p × t
= 550 ਘੰਟੇ × 150 ਘੰਟੇ
= 82500 ਵਾਟ-ਘੰਟੇ
= \(\frac{82500}{1000}\) ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟੇ
= \(\frac{825}{10}\) ਯੂਨਿਟ
ਊਰਜਾ ਸਪਲਾਈ ਦੀ ਦਰ = 3 ਰੁ: ਪ੍ਰਤੀ ਯੂਨਿਟ
ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਬਿੱਲ ਦੀ ਰਕਮ =\(\frac{825}{10}\) × 3
= 247.50 ਰੁਪਏ ਉੱਤਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਦੋ ਤਾਰਾਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਬੱਧ ਜੋੜਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ 12 Ω ਹੈ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜਨ ਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ 50 Ω , ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਾਂ ਦਾ ਮੁੱਲ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਮੰਨ ਲਓ ਕਿ ਦੋ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R1 ਅਤੇ , ਹਨ
ਜਦੋਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ-
RS = R1 + R2 = 50 Ω ……….(i)
ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਬੱਧ ਵਿੱਚ ਜੋੜਨ ‘ਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸਮੂਚਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ-
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 19
(i) ਅਤੇ (ii) ਤੋਂ ਅਸੀਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ
R1 + \(\) = 50

ਜਾਂ R12 – 50 R1 + 600 = 0
ਜਾਂ R12 – 30 R1 – 20 R1 + 600 = 0
ਜਾਂ R1(R1 – 30) – 20 (R1 – 30) = 0
ਜਾਂ (R1 – 30) (R1 – 20) = 0
∴ R1 – 30 = 0 ਜਾਂ R1 – 20 = 0
∴ ਅਰਥਾਤ R1 = 30 Ω ਅਤੇ R1 = 20 Ω
ਇਸ ਲਈ ਪਹਿਲਾ ਤਿਰੋਧ R2 = 30 Ω
ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਤਿਰੋਧ R2 = 20 Ω
ਇਸ ਲਈ ਪਹਿਲਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R1 = 20 ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਤਿਰੋਧ R2 = 30 Ω ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਇੱਕ ਸਰਕਟ A ਆਕਾਰ ਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਓਹਮ ਪ੍ਰਤਿ ਸਮ ਦੇ ਪੰਜ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਜੁੜੇ ਹੋਏ ਹਨ। ਇਸ ਦੀਆਂ ਦੋ ਭੁਜਾਵਾਂ 20 ਸਮ ਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਵਿੱਚ ਵਾਲੀ ਲੰਬਾਈ 10 ਸਮ ਹੈ ਜਦਕਿ ਸ਼ੀਰਸ਼ ਕੋਣ 60° ਹੈ। ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਗਿਆਤ ਕਰੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 20
ਹੱਲ :
ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਵਿੱਚ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਸੰਯੋਜਨ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 21
DA ਅਤੇ AE ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੁੜੇ ਹਨ
∴ DA ਅਤੇ AE ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ = 10 + 10
= 20 Ω
ਹੁਣ DE ਅਤੇ AE ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ 20 Ω DE ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ
DAED ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ \(\frac{1}{r}\) = \(\frac{1}{10}+\frac{1}{20}\)
= \(\frac{2+1}{20}\)
∴ r = \(\frac{20}{3}\)Ω
ਹੁਣ BD, DAED ਅਤੇ EC ਲੜੀਕੂਮ ਵਿਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਸੰਯੋਜਿਤ ਹਨ
∴ B ਅਤੇ C ਦੇ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ = 10 + \(\frac{20}{3}\) + 10
= \(\frac{30+20+30}{3}\)
= \(\frac{80}{3}\)
= 26.67 Ω

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਇੱਕ ਬੱਲਬ 200 v ਅਤੇ 100 wਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ? ਇਹ ਬੱਲਬ 4 ਘੰਟੇ ਲਈ ਦੀਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਨੇ ਕਿੰਨੀ ਊਰਜਾ ਖਪਤ ਕੀਤੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦਾ 2.50 ਰੁ: ਪ੍ਰਤਿ ਯੂਨਿਟ ਦੀ ਦਰ ਨਾਲ ਖ਼ਰਚ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
P = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}}\)
ਜਾਂ R = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{P}}\)
∴ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧ R = \(\frac{(200)^{2}}{100}\)
= \(\frac{200 \times 200}{100}\)
= 400 Ω
ਖ਼ਪਤ ਹੋਈ ਊਰਜਾ E = \(\frac{100 \times 4}{1000}\)
= 0.4 Kwh
ਕੁੱਲ ਖ਼ਰਚਾ = 0.4 × 2.50
= 1 ਰੁਪਏ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
220 V ਦੇ ਬਿਜਲਈ ਸਰੋਤ ਨੂੰ ਚਾਰ 40 W, 220 V ਦੇ ਬੱਲਦਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ੇਣੀਬੱਧ ਵਿਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਸੰਯੋਜਿਤ ਕਰਨ ਤੇ ਹਰੇਕ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਧਾਰਾ ਦਾ ਮਾਨ ਪਤਾ ਕਰੋ। ਜੇਕਰ ਇੱਕ ਬੱਲਬ ਫਿਊਜ਼ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ 220 v ਸਰੋਤ ਤੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਧਾਰਾ ਤੇ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਏਗਾ ?
ਹੱਲ :
40 ਵਾਟ ਦੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{P}}\)
= \(\frac{(220)^{2}}{40}\)
40 ਵਾਟ ਦੇ ਚਾਰ ਬੱਲਬਾਂ ਦਾ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ = \(\frac{4 \times(220)^{2}}{40}\)
= 4840 Ω
ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਧਾਰਾ I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{220}{4840}\)
= 0.045A
ਇੱਕ ਬੱਲਬ ਦੇ ਫਿਊਜ਼ ਹੋਣ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿੱਚ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
12V ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਦੇ ਦੋ ਬਿੰਦੂਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ 20 ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਲਿਜਾਣ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨਾ ਕਾਰਜ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਹੱਲ :
ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ (V) = 12 ਵੋਲਟ ਦੇ ਦੋ ਬਿੰਦੂਆਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਚਾਰਜ ਦਾ ਮਾਨ Q = 2 ਕੂਲਾਂਮ ।
ਇਸ ਲਈ ਚਾਰਜ ਨੂੰ ਸਥਾਨੰਤਰਿਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਕਾਰਜ W = V × Q
= 12 V × 2 C
= 24 J (ਜੂਲ) ਉੱਤਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਇੱਕ 20 Ω ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਬਿਜਲਈ ਬੱਲਬ ਅਤੇ ਇੱਕ 4 Ω ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ ਚਾਲਕ 6V ਦੀ ਬੈਟਰੀ ਨਾਲ ਚਿੱਤਰ ਅਨੁਸਾਰ ਜੁੜੇ ਹਨ । ਗਣਨਾ ਕਰੋ : (a) ਸਰਕਟ ਦਾਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ (b) ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਧਾਰਾ।
ਹੱਲ :
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 22
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਬੱਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R1 = 20 Ω
ਅਤੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R2 = 4 Ω
ਬੈਟਰੀ ਦਾ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V = 6 V
(a) ∵ ਦੋਨੋਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੁੜੇ ਹਨ,
∴ ਸਰਕਟ ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ R = R1 + R2
= 20Ω + 4Ω
= 24Ω

(b) ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਲੱਗਿਆ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V = 6 V
ਕੁੱਲ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R = 24 Ω
∴ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਧਾਰਾ I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{6 \mathrm{~V}}{24 \Omega}\)
= 0.25 A

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਇੱਕ 4 Ω ਦੇ ਤਿਰੋਧਕ ਵਿੱਚ 100.J ਊਸ਼ਮਾ ਪ੍ਰਤਿ ਸੈਕਿੰਡ ਦੀ ਦਰ ਨਾਲ ਉਤਪੰਨ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ। ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਗਿਆਤ ਕਰੋ। ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਊਸ਼ਮਾ H = 100 J
ਸਮਾਂ t = 1s
ਤਿਰੋਧ R = 4 Ω
ਸੂਤਰ H = I2 Rt ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਤੇ
ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ I = \(\sqrt{\frac{\mathrm{H}}{\mathrm{R} t}}\)
= \(\sqrt{\frac{100 \mathrm{~J}}{4 \Omega \times 1 \mathrm{~s}}}\)
= 5A
ਪਰੰਤੂ V = I × R
∴ ਤਿਰੋਧਕ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਾਲੇ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V = 5 A × 4 Ω
= 20 V

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਨਾਲ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ R1 = 10 Ω, R2 = 40 Ω, R3 = 30 Ω, R4 = 20 Ω ਅਤੇ Rs = 60 ਹੈ ਅਤੇ 12 v ਦੀ ਬੈਟਰੀ ਇਸ ਸੰਯੋਜਨ ਵਿੱਚ ਜੁੜੀ ਹੋਈ ਹੈ। ਪਰਿਕਲਨ ਕਰੋ : – (a) ਸਰਕਟ ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ ਅਤੇ (b) ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਧਾਰਾ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 23
ਹੱਲ :
(a) ਮੰਨ ਲਓ R1 ਅਤੇ R2 ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਾਂ ਦਾ ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਬੱਧ ਸੰਯੋਜਨ ਦਾ ਡੁੱਲ-ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R’ ਹੈ, ਤਾਂ
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 24
∴ R’ = 8 Ω
ਹੁਣ R3, R4 ਅਤੇ R5 ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਸੰਯੋਜਨ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R” ਹੈ, ਤਾਂ
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 25
∴ R” = 10 Ω

ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੈ ਕਿ R’ ਅਤੇ R” ਨੂੰ ਸ਼੍ਰੇਣੀਬੱਧ ਵਿੱਚ ਸੰਯੋਜਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੁੱਲ ਤਿਰੋਧ R ਹੈ, ਤਾਂ
R = R’ + R”
= 8 Ω + 10 Ω
∴ R = 18 Ω

(b)ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V = 12 V
ਸਰਕਟ ਦਾ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R = 18 Ω
∴ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
= \(\frac{12 \mathrm{~V}}{18 \Omega}\)
= 0.67 A

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਜਦੋਂ ਇੱਕ ਬਿਜਲਈ ਹੀਟਰ ਕਿਸੇ ਸਰੋਤ ਤੋਂ 4A ਦੀ ਧਾਰਾ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚ 60 y ਦਾ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਨੂੰ ਵਧਾ ਕੇ 120 V ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਹੀਟਰ ਕਿੰਨੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰੇਗਾ ?
ਹੱਲ :
ਪਹਿਲੀ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਬਿਜਲਈ ਹੀਟਰ ਦੁਆਰਾ ਲਈ ਗਈ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ I1 = 4 A
ਬਿਜਲਈ ਹੀਟਰ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V1 = 60 V
ਬਿਜਲਈ ਹੀਟਰ ਦੀ ਕੁੰਡਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R = \(\frac{\mathrm{V}_{1}}{\mathrm{I}_{1}}\)
= \(\frac{60 \mathrm{~V}}{4 \mathrm{~A}}\)
= 15 Ω
ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀਟਰ ਦੀ ਕੁੰਡਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R ਸਥਿਰ ਰਹੇਗਾ ।
ਦੂਜੀ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ
ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ V2 = 120 V
ਕੁੰਡਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R = 15 Ω
∴ ਬਿਜਲਈ ਹੀਟਰ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਧਾਰਾ I2 = \(\frac{V_{2}}{R}\)
= \(\frac{120 \mathrm{~V}}{15 \Omega}\)
= 8 A

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਬਿਜਲ ਟੈਂਸ਼ਲ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਕਾਈ ਚਾਰਜ ਅਨੰਤ ਤੋਂ ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੂ ਤਕ ਲੈ ਜਾਣ ਵਿੱਚ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕਾਰਜ ਨੂੰ ਉਸ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਬਿਜਲ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
W = QV
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 26
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਨੂੰ ਵੋਲਟ ਵਿੱਚ ਮਾਪਦੇ ਹਨ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਬਿਜਲਈ ਚੁੰਬਕ ਦੀ ਧਰੁਵਤਾ ਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲੀ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਚੁੰਬਕ ਦੀ ਧਰੁਵਤਾ ਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਬਦਲ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕਿਹੜੇ ਚਾਰਜ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਆਕਰਸ਼ਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਕਿਹੜੇ ਅਪਕਰਸ਼ਣ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਨ ਚਾਰਜ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਕਰਸ਼ਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਅਸਮਾਨ ਚਾਰਜ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਆਕਰਸ਼ਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਕਿਹੜੀਆਂ-ਕਿਹੜੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਚਾਲਕ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ-

  1. ਲੰਬਾਈ ਦੇ ਸਿੱਧਾ ਅਨੁਪਾਤੀ ।
  2. ਖੇਤਰਫਲ ਦੇ ਉਲਟ ਅਨੁਪਾਤੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਕਿਸਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਘੱਟ ਹੈ-100 w ਦੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ਜਾਂ 60 w ਦੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ?
ਉੱਤਰ-
P = \(\frac{V^{2}}{R}\)
ਕਿਉਂਕਿ P ∝ \(\frac{1}{R}\)
∴ ਵਧੇਰੇ ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਲੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗਾ ।
ਇਸ ਲਈ 100 W ਵਾਲੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਜੇ ਤਾਰ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਦੁੱਗਣੀ ਅਤੇ ਖੇਤਰਫਲ ਅੱਧਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ‘ਤੇ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਵੇਗਾ ?
ਹੱਲ :
R1 = ρ\(\frac{l_{1}}{\mathrm{~A}_{1}}\), R2 = ρ\(\frac{l_{2}}{\mathrm{~A}_{2}}\)
R2 = \(\frac{\frac{\rho 2 l_{1}}{\mathrm{~A}_{1}}}{2}\)
= \(\frac{2 \times 2 \times \rho \times l_{1}}{\mathrm{~A}_{1}}\)
= 4 R1
ਇਸ ਲਈ ਤਿਰੋਧ ਚਾਰ ਗੁਣਾ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਬਿਜਲ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਦੀ ਇਕਾਈ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵੋਲਟ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਤਿਰੋਧ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਓਹਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਬਿਜਲ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਇਕਾਈ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਾਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
40 W ਅਤੇ 100 w ਦੇ ਦੋ ਬੱਲਬਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਸ ਬੱਲਬ ਦੇ ਤੰਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਵੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
40 W ਬੱਲਬ ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਇੱਕ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਜੂਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
1 ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ (Kwh) = 3.6 × 106 ਜੂਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਸਾਡੇ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਸਪਲਾਈ ਕਿੰਨੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
220V – 230V.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ ਲਿਖੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਗਣਿਤਿਕ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰੋ।
ਉੱਤਰ-
ਓਹਮ ਦਾ ਨਿਯਮ-ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ (I) ਉਸ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ (V) ਦੇ ਸਮਾਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਗਣਿਤਿਕ ਰੂਪ ਵਿੱਚ, V ∝ I
ਜਾਂ \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\) = R (ਚਾਲਕ ਲਈ ਸਥਿਰ ਅੰਕ)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਚਾਂਦੀ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ 1.6 × 10-8 Ωm ਹੈ । ਇਸ ਕਥਨ ਦਾ ਕੀ ਅਰਥ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਸ ਕਥਨ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਕਿ 1m ਲੰਬੇ ਅਤੇ 1m2-ਕਾਟ ਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਵਾਲੇ ਚਾਂਦੀ ਦੇ ਤਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ 1.6 × 10-8 Ω ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਐਮਮੀਟਰ ਨੂੰ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਕਿਵੇਂ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਰਕਟ ਦੇ ਜਿਸ ਘਟਕ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਮਾਪ ਲੈਣਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਐਮਮੀਟਰ ਨੂੰ ਉਸ ਘਟਕ ਨਾਲ ਸ਼ੇਣੀਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਕਿਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਧਿਕ ਹੋਵੇਗਾ – 50 w ਦੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ਜਾਂ 25 w ਦੇ ਬੱਲਬ ਦਾ ਅਤੇ ਕਿੰਨੇ ਗੁਣਾ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੰਨ ਲਓ ਬੱਲਦਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ R1 ਅਤੇ R2 ਹਨ ਅਤੇ ਲੱਗਿਆ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ V ਹੈ, ਤਾਂ
P1 = 50 = \(\frac{V^{2}}{R_{1}}\)
ਅਤੇ p2 = 25 = \(\frac{\mathrm{V}^{2}}{\mathrm{R}_{2}}\)
∴ \(\frac{P_{1}}{P_{2}}\) = \(\frac{50}{25}=\frac{V^{2}}{R_{1}} \times \frac{R_{2}}{V^{2}}\)
⇒ 2 = \(\frac{\mathrm{R}_{2}}{\mathrm{R}_{1}}\)
⇒ R2 = 2 × R1

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਕਿਸੇ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਚਾਬੀ ਜਾਂ ਸਵਿੱਚ (Plug) ਦੇ ਚਿੰਨ੍ਹ ਦੱਸੋ ਜਦੋਂ ਸਰਕਟ
(i) ਖੁੱਲ੍ਹਾ ਹੋਵੇ
(ii) ਬੰਦ ਹੋਵੇ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਚਾਬੀ ਜਾਂ ਸਵਿੱਚ-()-
(ii) ਬੰਦ ਬਿਜਲਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਚਾਬੀ ਜਾਂ ਸਵਿੱਚ-(.)-

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਦੋ ਬਿਜਲਈ ਸੁਚਾਲਕਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਕਾਪਰ
  2. ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ – ਕਿਸੇ ਨਿਸਚਿਤ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਧਾਰਾ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੇ ਗਏ ਕਾਰਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਊਰਜਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਬਿਲਜਈ ਸਰਕਟ ਵਿੱਚ ਵੋਲਟਮੀਟਰ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਕੁਮ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਕਰੰਟ ਦੀ ਇਕਾਈ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਐਮਪੀਅਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਬਿਜਲਈ ਸਮਰੱਥਾ (ਸ਼ਕਤੀ) ਦੀ ਵੱਡੀ ਇਕਾਈ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਲੋਵਾਟ (kw) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਧਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦਾ ਪ੍ਰਵਾਹ ਕਿਸ ਪਰਮਾਣੂ ਕਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਲੈੱਕਟਾਂਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਇੱਕ ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨ ਤੇ ਕਿੰਨੇ ਕੂਲਾਂਮ ਚਾਰਜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
1.6 × 10-19C

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਇੱਕ ਕੂਲਾਂਮ ਚਾਰਜ ਕਿੰਨੇ ਇਲੈੱਕਨਾਂ ਦੇ ਚਾਰਜ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
6.25 × 1018 ਇਲੈੱਕਟ੍ਰਾਨਾਂ ਦੇ ਚਾਰਜ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਬਿਜਲਈ ਚਾਲਕ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਾਂਦੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਤਾਂਬੇ ਅਤੇ ਲੋਹੇ ਵਿੱਚੋਂ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਕਿਹੜਾ ਚੰਗਾ ਚਾਲਕ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਤਾਂਬਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਬਿਜਲਈ ਬੱਲਬ ਦਾ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਕਿਸ ਧਾਤੂ ਦਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਟੰਗਸਟਨ ਧਾਤ ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
ਬਿਜਲਈ ਐੱਸ ਅਤੇ ਟੋਸਟਰ ਦੇ ਫਿਲਾਮੈਂਟ ਕਿਸ ਧਾਤੂ ਦੇ ਬਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਾਈਟ੍ਰੋਮ ਮਿਸ਼ਰਤ ਧਾਤੂ ਦੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਬਿਜਲਈ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਦਾ S.I. ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਐਮਪੀਅਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 31.
ਬਿਜਲਈ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਦਾ S.I. ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਓਹਮ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 32.
ਕਿਸੇ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧਕਤਾ ਦਾ S.I. ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਓਹਮ-ਮੀਟਰ (Ωm) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 33.
ਬਿਜਲਈ ਚਾਰਜ ਦਾ S.I. ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੂਲਾਂਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 34.
ਤਿਰੋਧ ਦੇ ਸ਼੍ਰੇਣੀ ਸੰਯੋਜਨ ਅਤੇ ਸਮਾਨ ਅੰਤਰ ਸੰਯੋਜਨ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸਦਾ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਧਿਕਤਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿਸਦਾ ਨਿਊਨਤਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸ਼੍ਰੇਣੀ ਸੰਯੋਜਨ ਦਾ ਅਧਿਕਤਮ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਤੇ ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਦਾ ਨਿਊਨਤਮ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 35.
ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ (kwh) ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਵਪਾਰਕ ਇਕਾਈ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 36.
1kwh ਕਿੰਨੇ ਜੂਲ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
1kwh = 3.6 × 106 ਜੂਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 37.
ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਉਪਕਰਨ ਕਿਸ ਵਿਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਜੁੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਨਅੰਤਰ ਸੰਯੋਜਨ ਵਿਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 38.
ਇੱਕ ਦਿਸ਼ਾਈ (D.C.) ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੇ ਸਰੋਤ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਸੈੱਲ ਜਾਂ ਬੈਟਰੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 39.
ਬਿਜਲੀ ਸੈੱਲ ਅਤੇ ਬਿਨਾਂ ਜੋੜ ਤੋਂ ਤਾਰ ਕਰਾਸਿੰਗ ਲਈ ਸੰਕੇਤ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਸੈੱਲ ਦਾ ਸੰਕੇਤ : PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 27
ਬਿਨਾਂ ਜੋੜ ਤੋਂ ਤਾਰ ਕਰਾਸਿੰਗ ਲਈ ਸੰਕੇਤ : PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 28

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 40.
(i) ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਅਤੇ
(ii) ਐਮਮੀਟਰ ਲਈ ਸੰਕੇਤ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਲਈ ਸੰਕੇਤ : PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 29
(ii) ਐਮਮੀਟਰ ਲਈ ਸੰਕੇਤ : PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 30

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 41.
ਬਿਜਲੀ ਲਈ ਬੈਟਰੀ ਜਾਂ ਸੈੱਲਾਂ ਦਾ ਸੰਯੋਜਨ ਅਤੇ ਤਾਰ ਜੋੜ ਦੇ ਸੰਕੇਤ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲੀ ਲਈ ਬੈਟਰੀ ਜਾਂ ਸੈੱਲਾਂ ਦੇ ਸੰਯੋਜਨ ਲਈ ਸੰਕੇਤ :PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 31
ਤਾਰ ਜੋੜ ਦਾ ਸੰਕੇਤ : PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 12 ਬਿਜਲੀ 32

ਵਸਤੂਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Objective Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
V ∝ I ਦਾ ਨਿਯਮ ਪ੍ਰਤਿਪਾਦਿਤ ਕੀਤਾ ਹੈ-
(a) ਫੈਰਾਡੇ ਨੇ
(b) ਵਾਟ ਨੇ
(c) ਓਹਮ ਨੇ
(d) ਕੂਲਾਂਮ ਨੇ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਓਹਮ ਨੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਦਾ ਮਾਤਕ ਹੈ-
(a) ਐਮਪੀਅਰ
(b) ਵੋਲਟ
(c) ਓਹਮ
(d) ਵਾਟ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਵੋਲਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਬਿਜਲੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ ਮਾਕ ਹੈ-
(a) ਐਮਪੀਅਰ
(b) ਵੋਲਟ
(c) ਓਹਮ
(d) ਵਾਟ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਵਾਟ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
\(\frac {1}{3}\) Ω ਦੇ ਤਿੰਨ ਤਿਰੋਧਕਾਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੰਯੋਜਿਤ ਕਰਕੇ ਕਿੰਨਾ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
(a) \(\frac {1}{3}\) Ω
(b) 1 Ω
(c) \(\frac {1}{9}\) Ω
(d) 3 Ω
ਉੱਤਰ-
(b) 1 Ω

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਫਿਊਜ਼ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਯੁਕਤੀ ਨਾਲ ਕਿਸ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੁਮ
(b) ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੂਮ
(c) ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਅਤੇ ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੂਮ ਦੋਨਾਂ ਵਿੱਚ
(d) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੁਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਬਿਜਲਈ ਚਾਰਜ ਦਾ SI ਮਾਕ ਹੈ-
(a) ਵਾਟ
(b) ਕਿਲੋਵਾਟ
(c) ਕੂਲਾਂਮ
(d) ਐਮਪੀਅਰ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਕੂਲਾਂਮ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਨੂੰ ਕਿਸ ਮਾਕ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਕੂਲਾਮ
(b) ਐਮਪੀਅਰ
(c) ਵਾਟ
(d) ਕਿਲੋਵਾਟ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਐਮਪੀਅਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪਰਿਪੱਬਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵਾਹਿਤ ਹੋ ਰਹੀ ਬਿਜਲੀ ਧਾਰਾ ਨੂੰ ਕਿਸ ਯੰਤਰ ਦੁਆਰਾ ਮਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਐਮਮੀਟਰ
(b) ਵੋਲਟਮੀਟਰ
(c) ਗੈਲਵੇਨੋਮੀਟਰ
(d) ਬਿਜਲੀ ਮੀਟਰ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਐਮਮੀਟਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਐਮਮੀਟਰ ਨੂੰ ਪਰਿਪੱਬ ਵਿੱਚ ਕਿਵੇਂ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਸ਼੍ਰੇਣੀਕ੍ਰਮ ਵਿੱਚ
(b) ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ
(c) ਸ਼੍ਰੇਣੀਕੂਮ ਅਤੇ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਦੋਨਾਂ ਵਿੱਚ
(d) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸ਼੍ਰੇਣੀਕ੍ਰਮ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਨੂੰ ਕਿਸ ਯੰਤਰ ਨਾਲ ਮਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਐਮਮੀਟਰ
(b) ਵੋਲਟਮੀਟਰ
(c) ਗੈਲਵੇਨੋਮੀਟਰ
(d) ਬਿਜਲੀ ਮੀਟਰ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਵੋਲਟਮੀਟਰ ।

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ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰਨਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ-ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ :

(i) ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਕੂਮ ਵਿੱਚ ਸੰਯੋਜਿਤ ਹਰੇਕ ਤਿਰੋਧਕ ਵਿੱਚ ਵਹਿ ਰਹੀ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਦੀ ਮਾਤਰਾ …………………….. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਵੱਖ-ਵੱਖ

(ii) ਓਹਮ ਦੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਕਿਸੇ ਚਾਲਕ ਤਾਰ ਦੇ ਲਈ V ਅਤੇ I ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਦਾ ਸੰਬੰਧ …………………….. ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
R

(iii) ਕਿਸੇ ਬਿਜਲਈ ਪਰਿਪੱਖ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਪੁਟੈਂਸ਼ਲ ਅੰਤਰ ਦਾ ਮਾਪ ………………………….. ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਵੋਲਟਮੀਟਰ

(iv) ਇੱਕ ਕਿਲੋਵਾਟ ਘੰਟਾ (Kwh) ………………………….. ਦਾ ਮਾਤਕ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲਈ ਊਰਜਾ

(v) ਕਿਸੇ ਬਿਜਲਈ ਪਰਿਪੱਥ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲਈ ਧਾਰਾ ਨੂੰ ਮਾਪਣ ਵਾਲਾ ਯੰਤਰ …………………….. ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਐਮਮੀਟਰ ।