PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पौधों तथा जंतुओं से प्राप्त होने वाले भोजन पदार्थों का वर्णन करो।
उत्तर-
पौधों से प्राप्त होने वाले भोजन – पौधों से हमें गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जियां, फल तथा शर्करा आदि प्राप्त होते हैं। पौधे से प्राप्त होने वाले भोजन पदार्थों को निम्नलिखित चार भागों में बांटा जा सकता है-

  1. दालें (Pulses) – उदाहरण : मटर, चना, अरहर आदि।
  2. अन्न (Cereals) – उदाहरण : मक्का, गेहूँ, चावल, बाजरा तथा ज्वार आदि।
  3. आयल सीड्स (Oil Seeds) – उदाहरण : सूरजमुखी, मूंगफली तथा सरसों आदि।
  4. फल तथा सब्ज़ियाँ (Fruits and Vegetables) – उदाहरण : केला, नींबू, संतरा, आलू, प्याज, बैंगन, बंदगोभी, फूलगोभी, गाजर, भिंडी, मौसमी, शलगम, आम, सेब तथा अनानास आदि।

जंतुओं से प्राप्त होने वाले भोजन – जंतुओं से हमें मांस, मछली, अंडे, दूध, रेशे आदि प्राप्त होते हैं। जंतुओं से प्राप्त होने वाले भोजन पदार्थों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है-

  1. मछलियाँ (Fishes) – ये उच्च ऊर्जायुक्त भोजन है। उदाहरण : मृदुजल तथा समुद्री मछलियाँ जैसे कतला, रोहू, प्रोम्फेट, सारडीन।
  2. अंडे (Eggs) – बत्तखें तथा मुर्गी।
  3. मांस (Meat) – मुर्गी, गाय, भैंस, पशु, भेड़, बकरी आदि।
  4. दूध (Milk) – गाय, भैंस, बकरी आदि।

प्रश्न 2.
खाद को तैयार करने की विधि का वर्णन करो।
उत्तर-
खाद को तैयार करने की विधि (सर्दी व गर्मी में)-खाद को तैयार करने के लिए एक 4 मीटर लंबा, 5 मीटर चौड़ा तथा 1.5 मीटर गहरा गड्ढा बनाया जाता है। इस गड्ढे में वनस्पति पदार्थों जैसे सूखी पत्तियाँ, हरे खरपतवार, घास-फूस, पौधे या फ़सल का बचे हुए भाग की लगभग 15 सेमी० मोटी पर्त बनाई जाती है। इस तह पर एक पतली पर्त (5 सेमी० मोटी) गोबर की तथा 2 सेमी० पर्त मल-मूत्र से सनी मिट्टी, राख आदि की डाली जाती है। इस पर्त के ऊपर 15 सेमी० मोटी वनस्पति पदार्थों की एक तह लगाई जाती है। इस क्रिया को तब तक किया जाता है जब तक गड्ढा लगभग 20-25 सेमी० खाली रह जाए। गोबर आदि की पर्त पर प्रत्येक बार पानी छिड़का जाता है।

इसके पश्चात् भरे हुए गड्ढों में अब मिट्टी की तह लगा कर ढक दिया जाता है। मिट्टी की तह आस-पास की भूमि से थोड़ी ऊँची तथा ढलवी बनाई जाती है। इसका अभिप्रायः यह होता है कि अधिक पानी और वायु इसके अंदर न जा सके। ऐसा करने पर धूप का प्रभाव भी इस पर नहीं पड़ेगा। इसे 4-5 मास के लिए इसी अवस्था में पड़ा रहने दिया जाता है। 4-5 मास के पश्चात् गड्ढे के अंदर खाद तैयार हो जाती है।

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प्रश्न 3.
खाद उर्वरक से कैसे भिन्न है ?
उत्तर-
खाद तथा उर्वरक में अंतर-खाद तथा उर्वरक में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं-

खाद (Manure) उर्वरक (Fertilizer)
(1) ये गोबर तथा गले सड़े पौधों जैसे प्राकृतिक पदार्थों से बनती हैं। (1) ये कृत्रिम पदार्थ हैं जो कारखानों में तैयार किए जाते हैं।
(2) ये मुख्यत: कार्बनिक पदार्थ हैं। (2) ये मुख्यतः अकार्बनिक पदार्थ हैं।
(3) ये अधिक स्थान घेरते हैं। इसलिए इनका स्थानांतरण तथा भंडारण असुविधाजनक है। (3) ये कम स्थान घेरते हैं। इसलिए इनका स्थानांतरण तथा भंडारण सुविधाजनक है।
(4) ये नमी के अवशोषण से खराब नहीं होते। (4) ये नमी का अवशोषण करके खराब हो जाते हैं।
(5) इनमें पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम जैसे पोषक तत्व अधिक मात्रा में नहीं होते। (5) इनमें पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम जैसे पोषक तत्व बहुत अधिक मात्रा में होते हैं।
(6) खादें पोषक विशेष नहीं होतीं। ये केवल मिट्टी के सामान्य प्रभाव को पूरा कर सकती हैं। (6) उर्वरक पोषक विशेष होते हैं नाइट्रोजन युक्त, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम युक्त उर्वरक मिट्टी में मिला देने से कोई भी वांछित पोषक तत्व प्राप्त किया जा सकता है।
(7) खादें मिट्टी को ह्यूमस प्रदान करती हैं। (7) उर्वरक मिट्टी को ह्यूमस प्रदान नहीं करते।
(8) खादें मिट्टी के गठन को प्रभावित करती हैं जिससे मिट्टी में पौधों को थामे रखने की क्षमता प्रदान करा देती हैं। (8) उर्वरक मिट्टी के गठन (Texture) को प्रभावित नहीं करते।
(9) खादें जल में अघुलनशील होती हैं जिससे फसली पौधों द्वारा इनका अवशोषण धीरे-धीरे होता है। (9) उर्वरक जल में घुलनशील होने के कारण फसली पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिए जाते हैं।

प्रश्न 4.
मिश्रित फसली क्या है ? इसे उगाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-
मिश्रित फसली – एक ही खेत में एक ही मौसम में दो या दो से अधिक फसलों को उगाना मिश्रित फसल कहलाता है। मिश्रित फसल उगाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  1. साथ-साथ उगाई जाने वाली फसलों के मूल तंत्र भिन्न प्रकार के होने चाहिएँ।
  2. मिश्रित फसल के लिए चुनी गई फसलों में पोषक तत्वों, प्रकाश तथा नमी के लिए संघर्ष नहीं होना चाहिए।
  3. मिश्रित फसलों की सिंचाई, निराई, गुड़ाई, उर्वरक आदि प्रयोग करने में असुविधा नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
गायों की विभिन्न जातियों को कार्य के आधार पर कितने भागों में वर्गीकरण किया गया है ? गाय की विदेशी नस्लों के नाम बताओ।
उत्तर-
भारतवर्ष में गायों की लगभग 20 जातियाँ पाई जाती हैं। कार्यों के आधार पर इन्हें निम्नलिखित तीन भागों में बांटा जा सकता है-

  1. दुधारू नस्लें – ये वे नस्लें हैं जो अधिक दूध देती हैं परंतु इनके बछड़े कृषि कार्यों के लिए उपयोगी नहीं होते।
  2. भारवाही नस्लें – ये वे नस्लें हैं जो दूध बहुत कम देती हैं परंतु इनके बछड़े अधिक शक्तिशाली, सुदृढ़ तथा तेज़ चलने वाले होते हैं। ये कृषि कार्यों तथा बोझ ढोने के काम आते हैं।
  3. द्वि-उद्देशीय नस्लें-ये वे नस्लें हैं जो दूध भी अधिक देती हैं और इनके बछड़े कृषि कार्य तथा भार ढोने के काम आते हैं।

गाय की उच्च दुग्ध उत्पादन वाली देशी नस्लें-

  1. रैड सिंधी – यह गाय मध्यम आकार की होती है तथा इसका रंग गहरा तथा हल्का लाल होता है।
  2. साहीवाल – इसका आकार बड़ा होता है तथा यह अधिक दूध देती हैं।
  3. गिर गाय – यह गुजरात के गिर के जंगलों में पाई जाती है। यह मध्यम आकार की होती है तथा अधिक दूध देती है।

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गाय की उच्च दुग्ध उत्पादन वाली विदेशी नस्लें-

  1. जरसी की नस्ल (यू०एस०ए०)
  2. होल्सटीन फ्रिजीयन (हालैंड में)
  3. ब्राऊन स्विस (स्विट्ज़रलैंड में)।

प्रश्न 6.
अच्छे पशु आवास व्यवस्था की क्या विशेषताएं हैं ?
उत्तर-
अच्छे पशु आवास की विशेषताएँ-

  1. पशु आवास में प्रकाश पर्याप्त मात्रा में होना चाहिए।
  2. पशु आवास खुला तथा हवादार होना चाहिए।
  3. आवास में जल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  4. आवास में से पशुओं के मल-मूत्र को विसर्जित करने का ठीक प्रबंध होना चाहिए जिससे कि आवास में सफ़ाई रह सके तथा पशुओं को कष्ट कम हो जिससे ऊर्जा हानि कम होती है।
  5. पशुओं के आवास में उनके आहार के लिए ठीक ढंग से व्यवस्था होनी चाहिए जिससे प्रत्येक मवेशी को आहार उपलब्ध हो सके।
  6. पशु आवास में पीने के साफ़ पानी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  7. पशु आवास ऐसा होना चाहिए जो उन्हें सर्दी, गर्मी तथा वर्षा से बचा सके।

प्रश्न 7.
पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल किस प्रकार की जाती है ?
उत्तर-
पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल – खाद्य के लिए पाले गए पशुओं को प्रतिकूल मौसम से तथा शत्रुओं से बचाना अति आवश्यक है। उन्हें संक्रामक रोगों से बचाना भी अति आवश्यक है। पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उनके आहार तथा आवास को विशेष स्थान दिया जाता है, परंतु उससे अधिक ध्यान उन्हें रोगों से बचाने पर दिया जाना चाहिए। यदि कोई पशु रोगग्रस्त हो जाए तो पशु निष्क्रिय हो जाता है ; भोजन ग्रहण करना बंद कर देता है जिसका परिणाम यह होता है कि दुग्ध उत्पादन, अंडे देने की क्षमता तथा कार्य करने की दक्षता में कमी आ जाती है। उपयुक्त स्वच्छता का प्रबंध, आहार नियंत्रण तथा पूर्ण विश्राम से रोगी पशु शीघ्र ठीक हो सकता है। पशु के रोगों के निदान तथा उपचार के लिए पशु स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा संबंधी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हैं। पशुओं को संक्रमण से सुरक्षा के लिए उन्हें टीके लगवाना चाहिए। उसी पशु का स्वास्थ्य ठीक रहेगा जिसको उचित आहार, उचित आवास तथा उचित चिकित्सा प्राप्त होगी।

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प्रश्न 8.
कुक्कुट की नस्लों में सुधार कैसे किया गया है ? कुछ नस्लों के नाम लिखो जिनको संकरण द्वारा उत्पन्न किया गया है। संकरण द्वारा उत्पन्न कुक्कुट के लाभ लिखिए।
उत्तर-
कुक्कुट की अच्छी नस्ल से अभिप्रायः होता है कि अंडे, मांस अधिक प्राप्त हों तथा आहार कम देना पड़े। अतः संकरण विधि द्वारा ही उत्तम किस्म की नस्लें प्राप्त की जाती हैं। हमारी देशी मुर्गियों की दो नस्लें असील तथा बसारा हैं । यह छोटी, कम वृद्धि दर वाली परंतु पुष्ट होती हैं तथा इनमें रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। अतः संकरण के लिए केवल वही पक्षी लिए जाते हैं जो उत्पादन कम करते हो परंतु संकरण के पुष्ट हों।

व्हाइट लैंगहार्न तथा रोड आलैंड रैड उच्च उत्पादन वाली विदेशी मुर्गियों का देशी नस्ल की मुर्गियों के साथ संकरण करके उत्पन्न किया गया। इस प्रकार प्राप्त नई नस्ल दोनों में नस्लों के लक्षण हैं।
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उदाहरण – ILS-82 तथा B-77 नस्ल की क्षमता लगभग 200 अंडे प्रति पक्षी प्रति वर्ष है तथा इनका आहार भी अपेक्षाकृत कम है। 12 अंडे उत्पन्न करने के लिए इन्हें 2 किलोग्राम आहार की आवश्यकता होती है जबकि इतने ही अंडे उत्पन्न करने के लिए देशी पक्षी को 6 किलोग्राम आहार की आवश्यकता होती है।

देशी पक्षियों का मांस उत्पादन भी कम होता है। उनको 1 किलोग्राम मांस उत्पन्न करने के लिए 5-6 किलोग्राम आहार देना पड़ता है जबकि उन्नत नस्लों को उतने ही मांस उत्पादन के लिए केवल 2-3 किलोग्राम आहार की आवश्यकता होती है।

उन्नत नस्लों के लाभ-

  1. इनसे कम आहार द्वारा अधिक (अंडों की संख्या) प्राप्त होती है।
  2. इनके द्वारा कम आहार लेने पर भी मांस का उत्पादन अधिक होता है।
  3. ये उन्नत किस्म की नस्लें हैं तथा इनमें प्राकृतिक रूप से रोगों से लड़ने की क्षमता होती है।
  4. इनका आहार ऊर्जा युक्त खाद्य पदार्थों से बनता है इसलिए इनसे प्राप्त उत्पादन भी प्रोटीन ऊर्जा युक्त होते हैं।

प्रश्न 9.
खाद्य उत्पाद प्राप्त करने हेतु पशु-पालन में आवश्यक पद्धतियों को क्रमबद्ध कीजिए।
उत्तर-
पालतू पशुओं से खाद्य उत्पाद प्राप्त करने के लिए पशु-पालन में आवश्यक पद्धतियां निम्नलिखित क्रम में अपनायी जाती हैं-

(i) भरण (Feeding) – पशुओं से अधिक मांस, अंडे तथा दूध आदि खाद्य उत्पाद प्राप्त करने के लिए उनको आवश्यकतानुसार उपयुक्त भोजन, हरा चारा, भूसा, सांद्रित आहार (खल, बिनौला, चना आदि) या विशेष तत्व युक्त भोजन दिया जाता है। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने के लिए साफ़ पानी दिया जाता है।

(i) आवास व्यवस्था (Shelter) – गर्मी, सर्दी और वर्षा से उन्हें बचाने, सुविधापूर्वक उठने-बैठने तथा शत्रुओं से सुरक्षा के लिए उचित आवास की व्यवस्था की जाती है। उसमें वायु का संवहन तथा प्रकाश का उचित प्रबंध होना चाहिए। उनके बैठने तथा खड़ा होने का स्थान खुला, सूखा एवं आरामदेय होना चाहिए।

(iii) रोगों से सुरक्षा (Protection from Diseases) – पशुओं को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए टीके लगवाए जाते हैं और रोग होने पर उचित इलाज करवाया जाता है। पशुओं को अन्तः तथा बाह्य परजीवियों से बचाया जाता है।

(iv) देखभाल (General Care) – कुछ पशुओं की कुछ विशेष आवश्यकताएं होती हैं। उनकी आवश्यकतानुसार देखभाल की जाती है जैसे भैंस को नहलाना, गाय या बैल की त्वचा पर खुरदरा ब्रुश फेरना, व्यायाम के तौर पर घुमाना आदि।

(v) प्रजनन (Breeding) – संकरण, कृत्रिम गर्भाधान, भ्रूण प्रतिरोपण जैसी आधुनिक विधियां अपनाकर ऐच्छिक गुणों वाले पशुओं का जनन तथा नस्लों का सुधार खाद्य उत्पादन वृद्धि के लिए आवश्यक है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
हमारे भोजन के विभिन्न स्रोतों के नाम बताओ।
उत्तर-
पौधे तथा जंतु हमारे भोजन के विभिन्न स्रोत हैं।

  1. पौधों से प्राप्त भोजन – चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा, मक्का, दालें, ऑयलसीड, फल, सब्जियां तथा शर्करा आदि हमें पौधों से प्राप्त होती हैं।
  2. जंतुओं से प्राप्त भोजन – दूध, अंडा, मक्खन, मांस, मछली आदि हमें जंतुओं से प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 2.
पौधों के पोषक तत्वों के विभिन्न स्त्रोतों की व्याख्या करें।
उत्तर-
वायु, जल तथा मिट्टी से पौधों के विभिन्न पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। इनके स्रोत निम्न सारणी अनुसार हैं-

वायु जल मिट्टी
कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, (i) वृहत् पोषक – नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, गंधक।
मैंग्नीज़, बोरॉन, ऑक्सीजन (ii) सूक्ष्मपोषण – लौह, जस्ता, तांबा, मालिब्डिनम और क्लोरीन।

प्रश्न 3.
खाद प्रयोग करने के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-खाद प्रयोग करने के लाभ-

  1. मिट्टी में अपघटन के द्वारा कार्बनिक खाद ह्यूमस में परिवर्तित हो जाती है।
  2. खाद में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ जाती है।
  3. पौधों को वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।
  4. कार्बनिक खादें मृदा की नमी को संरक्षित करने में सहायक होती हैं।
  5. खादों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण कम होता है।

प्रश्न 4.
भारत में कौन-कौन सी सिंचाई प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं ?
उत्तर-
भारतवर्ष में अपनाई जाने वाली विभिन्न सिंचाई प्रणालियां निम्नलिखित हैं-

  1. नहर प्रणाली
  2. तालाब
  3. कुएं तथा ट्यूबवैल
  4. नदी घाटी प्रणाली
  5. नदी जल उठाव प्रणाली।

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प्रश्न 5.
पीडककीट फसलों पर किस प्रकार प्रकोप करते हैं ?
उत्तर-
पीड़ककीट फसलों पर निम्नलिखित प्रकार से प्रकोप करते हैं-

  1. ये फसलों की जड़, तना तथा पत्ती को काटते हैं।
  2. ये फसलों की जड़ तथा तने में छेद करते हैं।
  3. ये पौधों से उनका रस चूसते हैं।

प्रश्न 6.
फसलों पर रोग किस प्रकार फैलते हैं ?
उत्तर-
फसलों पर रोग निम्नलिखित ढंगों द्वारा फैलते हैं-

  1. बीजों द्वारा – ये तना तथा मूल पर आक्रमण से होता है।
  2. मिट्टी द्वारा – ये तना तथा जड़ पर आक्रमण से होता है।
  3. जड़ द्वारा – ये पौधे के तने तथा जड़ पर आक्रमण से होता है।
  4. वायु द्वारा – यह पत्ती, पुष्प तथा फसलों पर आक्रमण द्वारा होता है।

प्रश्न 7.
भंडारण में अनाज की क्षति किन कारणों से होती है ?
उत्तर-
भंडारित दानों के ह्रास के लिए जैविक तथा अजैविक कारक उत्तरदायी हैं-
जैविक कारक – कवक, चूहा, कीट, साइटस तथा जीवाणु जैविक कारक हैं।
अजैविक कारक – ताप तथा नमी अजैविक कारक हैं।

प्रश्न 8.
खरपतवार फसलों को कैसे क्षति पहुँचाते हैं ?
उत्तर-
खेतों में स्वयं उगने वाले अवांछनीय पौधों को खरपतवार कहते हैं । ये भूमि से जल तथा पोषक तत्व आदि ले लेते हैं तथा इस प्रकार फसली पौधों को जल तथा पोषक तत्व न मिलने के कारण उनकी वृद्धि कम हो जाती है और वे नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 9.
खरपतवार नियंत्रण के विभिन्न उपायों की सूची बनाएँ।
उत्तर-
खरपतवार नियंत्रण के विभिन्न उपाय निम्नलिखित हैं-

  1. हाथों द्वारा – खरपतवारों को हाथों द्वारा निकाल कर उखाड़ दिया जाता है।
  2. खुरपे द्वारा – इनको खुरपे द्वारा या पल्टे द्वारा निकाला जाता है। कुछ खरपतवार तो हल चलाते समय ही नष्ट हो जाते हैं। इनको जड़ सहित ही निकालना चाहिए।
  3. खरपतवार नाशकों द्वारा – आजकल इनको नष्ट करने के लिए खरपतवार नाशकों का छिड़काव किया जाता है। आइसोप्रोटरोन, ऐटेजीन तथा 2-4-डी० मुख्य खरपतवारनाशक हैं।

प्रश्न 10.
खाद की परिभाषा लिखिए। विभिन्न खादें कौन-कौन सी होती हैं और ये मिट्टी को किस प्रकार प्रभावित करती हैं ?
उत्तर-
खाद (Manure) – यह प्राकृतिक पदार्थ है। यह कार्बनिक पदार्थों जैसे कि पौधों के विभिन्न भागों, मृत पदार्थों, जीव जंतुओं आदि के विभिन्न उत्सर्जी अथवा मृत भागों के जीवाणुओं आदि से बनती हैं।

खादें निम्नलिखित प्रकार की होती हैं-
(1) गोबर की खाद (Farm Yard Manure) – इसे एफ० वाई० एम० भी कहते हैं । यह पशुओं के गोबर और मूत्र, उनके नीचे के बिछावन तथा उनके खाने से बचे व्यर्थ चारे आदि जैविक पदार्थों से बनती है। यह सभी खादों में श्रेष्ठ मानी जाती है। इसमें सभी पोषक तत्व होते हैं। यह मिट्टी में पौधे के लिए आवश्यक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के अतिरिक्त मिट्टी की भौतिक, जैविक तथा रासायनिक दशा को भी सुधारती है। इसमें 0.5% नाइट्रोजन, 0.2% फॉस्फोरस तथा 0.05% पोटाश होती है।

(2) कंपोस्ट खाद (Compost Manure) – यह खाद पौधे और उनके अवशेष पदार्थों, कूड़े-कर्कट, पशुओं के गोबर, मनुष्य के मल-मूत्र आदि कार्बनिक पदार्थों के जीवाणु तथा कवकों की क्रिया द्वारा तैयार की जाती है। यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति को स्थिर रखने, बढ़ाने तथा पुनः प्राप्त करने के लिए उपयोगी है।

(3) हरी खाद (Green Manure) – फसलों को उगाकर उन्हें फूल आने से पहले ही हरी अवस्था में खेत में जोतकर सड़ा देने को हरी खाद कहते हैं। यह भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। हरी खाद के लिए दलहनी फसलें अधिक उपयोगी हैं। दलहनी फसलों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु होते हैं जो भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ाते हैं।

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प्रश्न 11.
हरी खाद क्या होती है ? हरी खाद के लिए उपयुक्त फसलों के नाम बताइए।
उत्तर-
हरी खाद (Green Manure) – फसलों को उगाकर उन्हें फूल आने से पूर्व ही हरी अवस्था में खेत में जोतकर सड़ा देने को हरी खाद कहते हैं। यह मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। इसके लिए दलहनी फसलें अधिक उपयोगी हैं। इन फसलों की जड़ों में पाई जाने वाली ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु पाए जाते हैं। इनसे भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा में वृद्धि होती है तथा जैविक पदार्थ भी मिल जाते हैं जो भूमि के गठन में सुधार करते हैं।
उदाहरण – सनई, लैंचा, ग्वार, बरसीम, मूंग, लोबिया आदि मुख्य हरी खाद की फसलें हैं।

प्रश्न 12.
उर्वरक क्या होते हैं ? उर्वरकों को उपयुक्त उदाहरण देकर वर्गीकृत करिए।
उत्तर-
उर्वरक (Fertilizers) – ऐसी कृत्रिम रासायनिक खाद जो मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करती है, उसे उर्वरक कहते हैं।

उर्वरक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

  1. नाइट्रोजन देने वाले उर्वरक – ये उर्वरक भूमि को नाइट्रोजन देते हैं। यूरिया, अमोनियम सल्फेट, कैल्शियम, अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रोजन देने वाले उर्वरक हैं।
  2. फॉस्फोरस देने वाले उर्वरक – ये उर्वरक भूमि को फॉस्फोरस देने का मुख्य स्रोत हैं। सुपर फॉस्फेट, ट्रिपल सुपर फॉस्फेट और डाइकैल्शियम फॉस्फेट फॉस्फोरस देने वाले उर्वरक हैं।
  3. पोटैशियम देने वाले उर्वरक – ये उर्वरक भूमि को पोटैशियम देते हैं। पोटैशियम सल्फेट तथा पोटैशियम क्लोरेट पोटैशियम देने वाले उर्वरक हैं।
  4. मिश्रित उर्वरक – ये उर्वरक, भूमि को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम देते हैं। नाइट्रोफॉस्फेट, अमोनियम फॉस्फेट तथा यूरिया महत्त्वपूर्ण मिश्रित उर्वरक हैं।

प्रश्न 13.
भारत में विभिन्न सिंचाई प्रणाली क्या है ? खेत में दिए गए जल की क्षमता कैसे बढ़ाई जाती है ?
उत्तर-
भारत में सिंचाई की प्रणालियां – फसलों को कृत्रिम रूप से पानी देने की क्रिया को सिंचाई करना कहते हैं। भारत में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग वर्षा होती है। अनियमित वर्षा होने के कारण फसलों को कृत्रिम रूप से जल देना अति आवश्यक है। भारत में सिंचाई की मुख्य प्रणालियां निम्नलिखित हैं-

(1) नहर प्रणाली (Canal System) – इस प्रणाली में नदियों से जल नहरों में डाला जाता है । इनको फिर छोटी माइनरों में बांट दिया जाता है । इसके पश्चात् समयानुसार जल को खेतों में बांट दिया जाता है। नहर द्वारा सिंचाई वाले क्षेत्रों में चक्र प्रणाली का भी प्रयोग किया जाता है ताकि सभी खेतों को सिंचाई के लिए ठीक मात्रा में जल उपलब्ध हो सके।

(2) तालाब (Tanks) – वर्षा के जल को छोटे-छोटे भंडारों में भर लिया जाता है। छोटे-छोटे बांध भी बनाए जाते हैं। इन में से जल के बाहर निकलने को रोकने का प्रबंध भी किया जाता है। तालाबों में एकत्रित जल को नियमानुसार खेतों में दिया जाता है।

(3) कुएं तथा नलकूप (Wells and Tubewells) – कुएं तथा नलकूप भूमिगत जल को निकालते हैं। कुएं दो प्रकार के होते हैं-डिग कुआं तथा ट्यूबवैल। डिग कुओं में से बैलों द्वारा भूमिगत जल को खींचकर निकाला जाता है। ट्यूबवैल विद्युत् की सहायता से चलते हैं।

(4) नदी घाटी प्रणाली (River Valley System) – जिन स्थानों पर जल की मात्रा अधिक होती है, वहां पर इस विधि का प्रयोग किया जाता है। पश्चिमी घाट कर्नाटक में जहां वर्षा बहुत अधिक होती है। यहां पर जल घाटियों में भर जाता है। इस जल में खेतों से आवश्यकतानुसार सिंचाई की जाती है।

(5) जल उठाव प्रणाली (River Lift System) – इस प्रणाली में नदियों से जल निकाला जाता है। इस जल से खेतों में सिंचाई की जाती है।
कृषि में प्रयोग होने वाले जल की क्षमता को जल का सही तथा समयानुसार ठीक ढंग से प्रयोग करके बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 14.
फसल उत्पादन में कौन-कौन से पीड़क जीव होते हैं ? पीड़क जीवों के उन्मूलन के उपाय बताइए।
उत्तर-
पीड़क (Pests) – फसलों को हानि पहुँचाने वाले तथा खाने वाली वस्तुओं को नष्ट करने वाले जीवों को पीड़क कहते हैं। हमारे देश में कुल उत्पादन का लगभग 20% प्रतिवर्ष पीड़कों द्वारा नष्ट कर दिया जाता है।

पीड़कों के उन्मूलन के उपाय – पीड़कों के उन्मूलन के लिए निम्नलिखित उपाय ध्यान में रखने चाहिएं-

  1. पीड़क रोधी फसलें उगानी चाहिएं।
  2. रबी की फसलें अधिक उगानी चाहिएं।
  3. जैविक नियंत्रण तथा खरीफ की फसलें कम उगानी चाहिएं।
  4. टैप फसलों की स्वच्छ कृषि करनी चाहिए।
  5. फसल चक्र अपनाना चाहिए।

प्रश्न 15.
रबी और खरीफ फसलें क्या होती हैं ?
उत्तर-
फसलें ऋतुओं के अनुसार दो प्रकार की होती हैं-
(1) रबी फसलें
(2) खरीफ फसलें।

(1) रबी फसलें – कुछ फसलें जो शीत ऋतु में उगाई जाती हैं जो नवंबर से अप्रैल मास तक होती हैं ? इन फसलों को रबी फसलें कहते हैं। उदाहरण-गेहूँ, चना, मटर, सरसों तथा अलसी इत्यादि।

(2) खरीफ फसलें – कुछ फसलें जो वर्षा ऋतु में उगाई जाती हैं जो जून से आरंभ होकर अक्तूबर मास तक होती हैं । इन फसलों को खरीफ फसलें कहते हैं। उदाहरण-धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का, मूंग तथा उड़द इत्यादि।

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प्रश्न 16.
कार्बनिक खेती क्या होती है ?
उत्तर-
कार्बनिक खेती – यह खेती करने की वह पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी इत्यादि का उपयोग बहुत कम होता है। इस पद्धति में अधिक-से-अधिक कार्बनिक खाद कृषि अपशिष्ट का पुनर्चक्रण, जैविक कारक जैसे कि नील-हरित शैवाल का संवर्धन, जैविक उर्वरक बनाने में उपयोग किया जाता है। नीम की पत्तियों तथा हल्दी से जैव कीटनाशकों के रूप में खाद्य संग्रहण में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 17.
भंडारण में अनाज को क्षति पहुँचाने वाले कारकों का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर-
अनाज के भंडारण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-

  1. जैविक कारक (Biotic Factors) – इसमें चूहे, पक्षी, पशु, कीट, सूक्ष्मजीव आदि आते हैं। ये सभी अनाज तथा भंडारित खाद्य पदार्थों को नष्ट करते हैं।
  2. अजैविक कारक (Abiotic Factors) – प्राकृतिक या निर्जीव घटक कृषि तथा भोजन को प्रभावित करते हैं।

निम्नलिखित अजैविक कारक भंडारण काल में खाद्य पदार्थों को खराब करते हैं-

  1. तापमान
  2. हवा में नमी
  3. खाद्य पदार्थों में नमी
  4. बर्तन का पदार्थ।
    ताप, आर्द्रता, नमी आदि अजैविक घटक फलों तथा सब्जियों को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 18.
पौधों की वृद्धि के लिए उन पोषक तत्वों को लिखिए जिनकी उन्हें अत्यधिक तथा अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है।
उत्तर-
हरे पौधों को 16 वनस्पति तत्वों की आवश्यकता होती है जिनको पोषक तत्व कहते हैं। इनको हम दो वर्गों में विभाजित करते हैं-

  • वृहत पोषक तत्व (Macronutrients) – जिन तत्वों की आवश्यकता बहुत अधिक होती है उन्हें वृहत् पोषक तत्व कहते हैं । वृहत पोषक तत्वों के नाम कार्बन, नाइट्रोजन, कैल्शियम, हाइड्रोजन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, ऑक्सीजन, पोटैशियम, सल्फर।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) – जिन तत्वों की थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है उन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं। उनके नाम हैं-लोहा, जिंक, क्लोरीन, मैंगनीज़, बोरान, तांबा, मोलिबिडेनम।

प्रश्न 19.
नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर-
आवश्यकता से अधिक नाइट्रोजन का उपयोग मृदा तथा जल में नाइट्रेट का सांद्रण बढ़ा देता है। नाइट्रेट युक्त जल पीने योग्य नहीं होता। जब यह तालाबों, नदियों, झीलों जैसे जल भंडारों में पहुंचता है तो शैवाल की वृद्धि की दर बढ़ जाती है जिससे जल में घुली ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। परिणामस्वरूप जलीय जीवन की मृत्यु हो जाती है। इस प्रकार तालाबों अथवा झीलों में ऑक्सीजन की मात्रा का कम होना पर्यावरण को विषैला बनाता है। इस प्रक्रिया को सुपोषण (Eutrophication) कहते हैं।

प्रश्न 20.
अधिक सिंचाई से होने वाली हानियां लिखिए।
उत्तर-
अधिक सिंचाई से होने वाली हानियां-

  1. अधिक सिंचाई से बीजों का अंकुरण ठीक नहीं होता।
  2. अधिक सिंचाई से खेत में पानी के खड़े रहने से मिट्टी में वायु संचार की कमी होती है जिससे पौधों की वृद्धि ठीक प्रकार से नहीं होती।
  3. अधिक सिंचाई से फसल नष्ट होती है, पैदावार कम होती है तथा अमूल्य पानी भी बेकार जाता है।

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प्रश्न 21.
सिंचाई मिट्टी की प्रकृति पर किस प्रकार निर्भर करती है ? उदाहरण देकर लिखिए।
उत्तर-
सिंचाई की आवश्यकता मिट्टी की प्रकृति पर भी निर्भर करती है। जैसे-चिकनी मिट्टी की पारगम्यता कम होती है अर्थात् चिकनी मिट्टी में पानी अधिक देर तक खड़ा रह सकता है। इसलिए चिकनी मिट्टी में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। रेतीली मिट्टी की उच्च पारगम्यता के कारण इसमें पानी रोकने की क्षमता कम होती है। अतः इस प्रकार की मिट्टी की सिंचाई की आवश्यकता अधिक होती है।

प्रश्न 22.
कृषि में पानी की उपलब्धि बढ़ाने के लिए क्या किया जाता है ?
उत्तर-
इसके लिए आधुनिक विधियों का जैसे वर्षा के पानी का संग्रहण तथा जल विभाजन का उचित प्रबंधन द्वारा उपयोग किया जाता है। इसके लिए छोटे बाँध बनाए जाते हैं जिससे कि भूमि के नीचे जलस्तर बढ़ जाए। ये छोटे बांध वर्षा के पानी को बहने से रोकते हैं तथा मृदा अपरदन को भी कम करते है।

प्रश्न 23.
खरपतवार किसे कहते हैं ? इसके कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
खरपतवार- ऐसे अवांछनीय पौधे जो फसलों के साथ स्वयं उग आते हैं उन्हें खरपतवार कहते हैं। इनकी प्रमुख किस्में हैं-जंगली ओट, जावी, घास, चौलाई, बथुआ तथा हिरन खुरी। चौलाई एक ऐसी खरपतवार है जो लगभग सभी फसलों के साथ उगती है। कई ऐसे खरपतवार भी हैं जिन्हें बार-बार निकालने पर भी उनका नाश नहीं होता है।

प्रश्न 24.
खरपतवार से क्या हानियां होती हैं ? इन्हें नियंत्रण में करने के उपाय लिखिए।
उत्तर-
खरपतवार की हानियां-

  1. खरपतवार स्वयं बढ़ने के लिए मिट्टी से पोषक तत्वों को ले लेते हैं जिसके परिणामस्वरूप फसलों को पूर्ण रूप से पोषक तत्व प्राप्त नहीं होते, अतः पैदावार कम होती है।
  2. ये खरपतवार कम समय में ही बहुत अधिक बढ़ जाते हैं जिससे फसल कम होती है।
  3. इनको निकालने और नष्ट करने में समय भी व्यर्थ जाता है।

खरपतवार को नियंत्रित करने के उपाय-

  1. इन को खुरपे या पल्टे द्वारा निकाला जाता है। कुछ तो हल चलाते समय नष्ट हो जाते हैं। इनको सदैव जड़ सहित ही निकालना चाहिए।
  2. आजकल खरपतवार नाशकों (Weedicides) का छिड़काव करते हैं जो फसलों को तो प्रभावित नहीं करते परंतु खरपतवार को आसानी से नष्ट कर देते हैं।

प्रश्न 25.
पीड़कनाशियों का प्रयोग करते समय सावधानी रखना आवश्यक है, क्यों ?
उत्तर-
पीड़कनाशियों का हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पीड़कनाशियों का त्वचा, श्वसन संस्थान पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि पीड़कनाशियों का अपघटन सरल तथा हानि रहित पदार्थों में न हो तो यह मिट्टी तथा पानी मिल जाता है जिससे पौधे उन्हें ग्रहण करते हैं जिनका उपयोग मानव और जंतुओं द्वारा करने पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इनका छिड़काव करते समय हाथों पर रबड़ के दस्ताने पहनने चाहिए तथा चेहरे और नाक पर कपड़ा अवश्य बांधना चाहिए।

प्रश्न 26.
हरित क्रांति के लाभ और हानियां लिखिए।
उत्तर-
हरित क्रांति के लाभ-

  1. इससे देश अन्न उत्पादन में आत्म-निर्भर हो गया है।
  2. इससे अनाज का पर्याप्त सुरक्षित भंडार एकत्रित हो गया।
  3. भंडार से प्राकृतिक विपदाएं आने की स्थितियों का सामना आसानी से कई बार किया जा चुका है।
  4. इसने किसान की जीवन-पद्धति तथा आर्थिक स्तर को बदल दिया।
  5. इसने कृषि को उद्योग का रूप दिया जिससे अनेक क्षेत्रों को विकास के लिए आधार प्राप्त हुआ।

हरित क्रांति की हानियाँ-

  1. हरित क्रांति से किसान की उर्वरकों पर निर्भरता बढ़ गई।
  2. अधिक जल आवश्यकता के कारण प्राकृतिक जल संपदा का कृत्रिम तरीकों से दोहन किया गया है।
  3. इससे पीड़कनाशकों पर निर्भरता बढ़ गई।
  4. उर्वरकों, पीड़कनाशकों के अधिक उपयोग ने मानव तथा पशु के स्वास्थ्य को सीधा प्रभावित किया है।

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प्रश्न 27.
भंडारण के दौरान अजैविक कारकों से खाद्यान्नों को किस प्रकार क्षति पहंचती है ?
उत्तर-
खाद्यान्नों का भंडारण करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि दाने में नमी की मात्रा 14% से अधिक न हो। नमी की अधिक मात्रा से खाद्यान्नों का आकार बढ़ जाता है। जिसमें इनमें रासायनिक एवं भौतिक परिवर्तनों की दर बढ़ जाती है जो उनमें उपस्थित सूक्ष्म जीवों एवं एंजाइमों की अभिक्रियाओं द्वारा होती है। नमी की मात्रा में वृद्धि से कीटों, जीवाणुओं तथा अन्य सूक्ष्म जीवों की संख्या तथा उनकी सक्रियता की दर भी तीव्र गति से बढ़ती है। इन्हीं कीटों के श्वसन द्वारा उत्पन्न ऊष्मा खाद्यान्नों का ताप बढ़ा देती है।

नमी की अधिक मात्रा तथा उच्च ताप से फफूंदी की दर बढ़ जाती है। खाद्यान्नों में नमी की मात्रा 14% से बढ़कर 18% हो जाती है। इन नमतापन या आर्द्र अन्नतापन से बीजों के आगामी अंकुरण पर प्रभाव पड़ता है तथा खाद्यान्नों के गुण भी कम हो जाते हैं।

प्रश्न 28.
उन प्रमुख कीटों के नाम लिखो जो भंडारित खाद्य पदार्थों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह भी लिखिए कि वे कैसे नुकसान पहुँचाते हैं ?
उत्तर-
खाद्य पदार्थ कीट, कृमि तथा सूक्ष्म जीवों द्वारा खराब हो जाते हैं । इन जीवों के द्वारा हुए आक्रमण को ग्रसन (infestation) कहते हैं। इनका आकार अत्यंत छोटा होता है। इनमें घुन, ग्रेनबोरर, रेडफ्लोर बीटल, एलमोंड, मोथ-सी, टोथैड बीटल आदि प्रमुख हैं। यह खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों को नष्ट कर देते हैं तथा उनको जालों, ककून तथा मृत शरीर द्वारा दूषित करते हैं।

प्रश्न 29.
भविष्य में खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति हम कैसे कर सकते हैं ? ।
उत्तर-
भविष्य में खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति की एक ही विधि है कि हम अपने उत्पादन को बढ़ाएं। इसके लिए हमें फसल चक्र, बहु-फसलीय खेती, मिश्रित खेती, फसलों तथा जंतुओं की उच्च उपजी किस्मों का प्रयोग करना चाहिए। हमें पीड़कनाशकों, कीटनाशकों तथा कवकनाशकों आदि का प्रयोग करना चाहिए। हमें अधिक उपज लेने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 30.
अंतर्फसली की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
अंतर्फसली (Inter Cropping) – किन्हीं दो फसलों को निश्चित ढंग से पंक्तियों में उगाने की विधि को अंतर्फसली कहते हैं। इनका उद्देश्य उत्पादन को बढ़ाना तथा समय की बचत करना है।

प्रश्न 31.
फसल चक्र क्यों अपनाना चाहिए ?
उत्तर-
फसल चक्र – एक ही खेत में प्रतिवर्ष अनाज तथा फलीदार पौधों को अदल-बदल कर एक के बाद एक फसल को उगाने की विधि को फसल चक्र कहते हैं । हमें फसल चक्र को निम्नलिखित कारणों से अपनाना चाहिए-

  1. खेत में एक ही फसल बार-बार उगाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति कम हो जाती है। इसे बनाए रखने के लिए फसलों को अदल बदल कर बोना चाहिए।
  2. फसल चक्र से उत्पादन बढ़ जाता है।
  3. फसल चक्र पौधों की बीमारियों को नियंत्रित करता है।

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प्रश्न 32.
मिश्रित फसली किसे कहते हैं ? मिश्रित फसली के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
मिश्रित फसली (Mixed Cropping) – एक ही खेत में एक ही मौसम में दो या दो से अधिक फसलों को उगाने की विधि को मिश्रित फसली कहते हैं। मिश्रित फसली के लाभ-

  1. इसमें किसान के समय तथा परिश्रम की बचत होती है।
  2. इसमें उत्पादन व्यय कम होता है क्योंकि एक ही फसल को उर्वरक, पानी आदि देने पर सभी फसलों को मिल जाता है।
  3. फसलों के भिन्न-भिन्न समय पर पकने के कारण किसान अपना कार्य स्वयं कर लेता है।
  4. फसलों की जड़ें मिट्टी को ऊपर तक बांधकर रखती हैं जिससे भूमि अपरदन नहीं होता।
  5. भूमि में पाए जाने वाले पोषक तत्वों का ठीक ढंग से उपयोग होता है।
  6. सीमित भूमि से अधिक आय होती है।

प्रश्न 33.
मिश्रित फसली के उद्देश्य बताइए।
उत्तर-
मिश्रित फसली के उददेश्य-मिश्रित फसली के उद्देश्य निम्नलिखित हैं –

  1. फसल के नष्ट होने की अवस्था में जोखिम को कम करना।
  2. फसल पर आने वाले व्यय को कम करना।
  3. किसान तथा उसके परिवार को संतुलित आहार देना।

प्रश्न 34.
अंतर्फसली क्या है ? यह मिश्रित फसली से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर-
अंतर्फसली (Inter Cropping) – एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलों को एक विशेष पंक्ति पैटर्न में उगाने की विधि को अंतर्फसली कहते हैं।

अंतर्फसली तथा मिश्रित फसली में अंतर

अंतर्फसली (Inter Cropping) मिश्रित फसली (Mixed Cropping)
(1) यह खेत की उत्पादकता में वृद्धि करती है। (1) यह खेत में फसल की हानि को कम करती है।
(2) इसमें पीड़कनाशियों का प्रयोग आसान है। (2) इसमें पीड़कनाशियों का प्रयोग कठिन होता है।
(3) इसमें पंक्तियां निश्चित क्रम में होती हैं। (3) इसमें पंक्तियां निश्चित क्रम में नहीं होती।
(4) इसमें बीजों को बोने से पहले नहीं मिलाया जाता। (4) इसमें बीजों को बोने से पहले मिलाया जाता है।
(5) फसल की कटाई तथा थैशिंग आसानी से हो जाती है। (5) फसल की कटाई तथा थैशिंग कठिन होती है।
(6) फसल उत्पाद अलग-अलग एकत्रित किए जाते हैं। (6) फसल के उत्पाद मिश्रण के रूप में प्राप्त होते
(7) उर्वरकों का आवश्यकतानुसार प्रयोग होता है। (7) उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 35.
कुछ मुख्य मिश्रित फसली क्रियाओं के उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
कुछ मुख्य मिश्रित फसली क्रियाएं निम्नलिखित अनुसार हैं-

  1. गेहूँ + सरसों
  2. मक्का + उड़द
  3. अरहर + मूंगबीन
  4. मूंगफली + सूर्यमुखी
  5. ज्वार + अरहर
  6. गेहूँ + चना
  7. जौ + चना
  8. सोयाबीन + अरहर।

प्रश्न 36.
संकरण के लाभ बताओ।
उत्तर-
संकरण के लाभ-

  1. ये पौधे पर्यावरण के प्रति अनुकूलित होते हैं।
  2. ये छोटे होते हैं। इसलिए इन पर तेज़ हवाओं का कोई प्रभाव नहीं होता।
  3. इन पौधों में वांछित लक्षण पाए जाते हैं।
  4. इन पौधों से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है अर्थात् ये अच्छी उपज देते हैं।

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प्रश्न 37.
उच्च उपजी किस्मों की तीन हानियां बताओ।
उत्तर-
उच्च उपजी किस्मों की हानियां-

  1. ये बहुत कम मात्रा में चारा देती हैं।
  2. इन्हें जल्दी-जल्दी खरपतवारनाशकों तथा पीड़कनाशकों की आवश्यकता होती है।
  3. इससे मिलने वाले पदार्थ उच्च प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 38.
कुक्कट की नई किस्में क्यों विकसित की जाती हैं ?
उत्तर-
निम्नलिखित गुणों के कारण कुक्कट की नई किस्में विकसित की जाती हैं-

  1. चूजों की संख्या और गुणवता।
  2. छोटे कद के ब्रोलर माता-पिता द्वारा चूजों के व्यावसायिक उत्पादन हेतु।
  3. गर्मी अनुकूलन क्षमता उच्च तापमान को सहने की क्षमता।
  4. देखभाल में कम खर्च की आवश्यकता।
  5. अंडे देने वाले तथा ऐसी क्षमता वाले पक्षी जो कृषि के उपोत्पाद से प्राप्त सस्ते, रेशेदार आहार का उपभोग कर सकें।

प्रश्न 39.
किन्हीं दो भारतीय नस्लों के नाम लिखिए-
(i) गाय तथा
(ii) भैंस।
उत्तर-
गाय की भारतीय नस्लें – रैड सिंधी, गिर, साहीवाल।
भैंस की भारतीय नस्लें – मुर्रा, मेहसाना, सूरती।

प्रश्न 40.
विदेशज नस्ल की दो गायों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. इंग्लैंड की जर्सी
  2. स्विट्जरलैंड की ब्राऊन स्विस।

प्रश्न 41.
गाय की उन्नत संकर नस्लों के नाम लिखो।
उत्तर-

  1. करण स्विस
  2. करण फ्राइज
  3. फ्रीशियन साहीवाल।

प्रश्न 42.
गाय, मुर्गी तथा मछलियों के दो-दो संक्रामक रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-

जंतु संक्रामक रोग
(i) गाय (i) एंथैक्स तथा (ii) मुँह और खुर के रोग।
(ii) पोल्ट्री (मुर्गी) (i) फाउल पॉक्स, (ii) एस्परजीलोसिस।
(iii) मछली (i) वायरल हिर्मोहिजीक सेप्टीसेमिया (ii) संचारी पैंक्रियाटिक नेरकोसिस

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प्रश्न 43.
पशुओं में संकरण किस प्रकार उपयोगी है ?
उत्तर-

  1. इनसे पशुओं में दूध देने की मात्रा में वृद्धि होती है।
  2. इनसे पशुओं के दूध देने के काल में वृद्धि होती है।
  3. क्रास संकरण से उत्पन्न होने वाले पशु अधिक चुस्त तथा फुर्तीले होते हैं।

प्रश्न 44.
दो प्रकार की भारतीय मछलियों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. समुद्री मछली – प्रोस्फेट तथा जालमन।
  2. मृदु जल मछली – रोहू तथा कतला।

प्रश्न 45.
मछलियों के अतिरिक्त अन्य समुद्री खाद्य के नाम लिखिए।
उत्तर-
लोबस्टर, केंकड़े, थ्रिरपस, आयस्टर तथा झींगा मछली कुछ मुख्य समुद्रीय भोजन हैं।

प्रश्न 46.
जानवरों में होने वाले रोगों की रोकथाम हेतु कुछ उपाय बताइए।
उत्तर-
जानवरों में होने वाले रोगों की रोकथाम हेतु उपाय-

  1. पशुओं को अच्छे, स्वच्छ तथा वायुवीय स्थान पर रखना चाहिए।
  2. पोषक भोजन तथा स्वच्छ जल देना चाहिए।
  3. पशुओं को नियमित रूप से नहलाना चाहिए।
  4. पशुओं का नियमित रूप से टीकाकरण करना चाहिए।
  5. पशुओं के आश्रय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए।

प्रश्न 47.
किन उपायों द्वारा देश में जंतु स्त्रोत से प्राप्त खाद्य उत्पाद को बढ़ाया जा सकता है ?
उत्तर-
देश में जंतु स्रोत से प्राप्त खाद्य उत्पादों को निम्नलिखित उपायों द्वारा बढ़ाया जा सकता है-

  1. पशुओं को हवादार, सुरक्षित तथा साफ़-सुथरे आश्रय स्थलों में रखना चाहिए।
  2. पशुओं को अच्छा तथा संतुलित आहार देना चाहिए जिसमें सभी पोषक तत्व ठीक अनुपात में हों।
  3. पशुओं में संकरण, वीर्य सेचन, भ्रूण स्थानांतरण आदि की विधियों को अपनाना चाहिए ताकि इनमें मिलने वाली दूध की मात्रा अधिक हो।
  4. पशुओं को नियमित रूप से नहलाना चाहिए तथा टीकाकरण करना चाहिए।
  5. पशुओं के मल-मूत्र का ठीक प्रकार से विसर्जन करना चाहिए।

प्रश्न 48.
पशु-पालन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
पशु-पालन – पशुओं के पालन-पोषण की विभिन्न पद्धतियां मिल जुलकर पशु-पालन कहलाती हैं। खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने वाले जंतुओं को पालने के लिए अनेक विधियां अपनाई जाती हैं। इन पद्धतियों में मुख्य रूप से खाना-पिलाना (feeding), पालन-पोषण तथा प्रजनन आता है। विभिन्न विधियों द्वारा पालतू जानवरों की उपयोगिता बढ़ाई जाती है। पशु-पालन में मुख्य रूप से दूध देने वाले, मांस, मछली, अंडे देने वाले, घर या खेतों में कार्य करने वाले जानवर आते हैं । जंतु स्वयं भोजन का निर्माण नहीं कर सकते, इसलिए इनके भोजन की व्यवस्था, आवास तथा स्वास्थ्य की व्यवस्था करना आदि पशु-पालन की पद्धतियां हैं।

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प्रश्न 49.
कार्योपयोगी पशु किन्हें कहते हैं ? किन्हीं दो के नाम बताइए।
उत्तर-
कार्योपयोगी पशु – जिन पशुओं का उपयोग सवारी, भार ढोने तथा खेतों की प्रक्रियाओं को करने के लिए किया जाता है उन्हें कार्योपयोगी पशु कहते हैं जैसे-घोड़ा, बैल, ऊंट, खच्चर, कुत्ता आदि मुख्य कार्योपयोगी पशु हैं । बैल खेतों में हल जोतने के काम आता है। घोड़े, बैल, ऊंट का उपयोग लोगों तथा सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने-ले जाने के लिए किया जाता है। गधा तथा खच्चर भार ढोने के काम आते हैं। कुत्ता हमारे घरों तथा खेतों की रखवाली करता है।

प्रश्न 50.
रुक्षांश किसे कहते हैं ? पशु इसे कैसे प्राप्त करते हैं ?
उत्तर-
रुक्षांश (Roughage) – पशुओं के आहार में उपस्थित रेशायुक्त खुरदरी तथा कम पोषण वाली घास-फूस को रुक्षांश कहते हैं। पशु इन्हें सूखे भूसे, घास आदि के रूप में प्राप्त कर लेते हैं। घास, हरा चारा तथा रेशायुक्त पदार्थों में भी रुक्षांश प्राप्त होते हैं। एक गाय को औसतन 15-20 किलो हरा चारा तथा सूखी घास देने से रुक्षांश की मात्रा उपलब्ध हो जाती है।

प्रश्न 51.
दुग्धधारी पशुओं में आहार उनके उत्पादन को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर-
पशुओं के आहार की आवश्यकता उनकी आंतरिक संरचनाओं तथा प्रथम अमाशय की कार्य क्षमता के आधार पर की जाती है। किसी पशु का दुग्ध उत्पादन मुख्यतः उसको दिए गए आहार के गुणों पर निर्भर करता है। अपुष्ट अथवा अल्पपुष्ट पशु आहार पशुओं में कम दूध के कारण होते हैं। हमारे देश में पशुओं द्वारा कम मात्रा में दूध देने का कारण यही है कि उन्हें आहार उचित मात्रा में प्राप्त नहीं होता। एक दूध देने वाली गाय को प्रतिदिन 15-20 किलोग्राम हरा चारा, सूखी घास तथा लगभग 4-5 किलोग्राम दाना आदि आवश्यक होता है। इसके साथ-साथ 32 लिटर पानी प्रतिदिन की आवश्यकता होती है। पशुओं में दूध की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है यदि उन्हें रूक्ष-अंश के अतिरिक्त कुछ सांद्र पदार्थ जैसे बिनौले, तिलहन, खल तथा कुछ अन्न-चना, बाजरा आदि प्रतिदिन दिया जाए। इन सांद्र पदार्थों में एकसे-अधिक पोषक तत्व होते हैं जिनसे दुग्ध उत्पादन बढ़ता है तथा उसका गुण भी बढ़ता है। अच्छी नस्ल के पशुओं को अच्छा आहार देकर उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।

प्रश्न 52.
पशु स्वास्थ्य की देखभाल के लिए किन तीन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-

  • भरण – पशुओं का भोजन उनकी आंतरिक संरचनाओं तथा प्रथम अमाशय की कार्यक्षमता तथा उनके आहार एवं चारे के पोषण संबंधी गुणों के आधार पर करना चाहिए।
  • आवास – पशु आवास व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें पर्याप्त प्रकाश, हवा तथा जल उपलब्ध हो तथा सफ़ाई का विशेष प्रबंध हो।
  • रोगों से बचाव – पशुओं पर परजीवियों या रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं से रोग उत्पन्न हो जाते हैं विशेषकर जीवाणु, विषाणु तथा फफूंद। पशुओं को इनसे बचाने के लिए टीके लगाए जाने चाहिएं।

प्रश्न 53.
उन विदेशी मुर्गियों के नाम लिखो जिनका भारतीय नस्लों के साथ संकरण किया गया है। भारतीय मुर्गियों की दो नस्लों के नाम लिखो।
उत्तर-
भारतीय या देशी मुर्गियों की दो नस्लें असील तथा बसारा हैं जो छोटी, कम अंडे देने वाली परंतु पुष्ट होने के साथ-साथ रोगों से लड़ने की भी क्षमता रखती हैं। इनका संकरण विदेशी नई नस्लों व्हाइट लैंगहार्न तथा रोडेआलैंड रैड (उच्च उत्पादन वाली) के साथ किया गया है। इस प्रकार प्राप्त नस्ल में दोनों वांछनीय गुण होते हैं।

प्रश्न 54.
कुक्कुट आहार के रूप में प्रयोग होने वाले खादयान्नों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कुक्कुट आहार के रूप में मुख्यतः पिसा हुआ अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, गेहूं, मक्का, चावल की भूसी तथा मूंगफली की खल होते हैं।

प्रश्न 55.
पशु संकरण के लिए किन-किन विशेषताओं को ध्यान में रखना चाहिए ?
उत्तर-
पशु-प्रजनन या पशु संकरण के लिए हमें नर तथा मादा पशुओं की अग्रलिखित विशेषताओं या लक्षणों को ध्यान में रखना चाहिए-

  1. संकरण से पहले नस्लों का अध्ययन करना चाहिए।
  2. वांछित गुणों का अध्ययन किया जाए।
  3. दुग्ध स्रावण अवधि, प्रजनन अवधि, पोषण संबंधी आवश्यकताएँ जाननी चाहिएं।
  4. जलवायु परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता, रोगों से लड़ने की क्षमता तथा उत्पादन का ज्ञान होना चाहिए।
  5. संकरण कराए जाने वाले पशुओं का संभोग मंदकाल (heat period) जानना आवश्यक है।
  6. स्वस्थ एवं पुष्ट जीवों का ही चयन संकरण के लिए किया जाए।
  7. संचित वीर्य की जाँच के बाद ही संकरण कराया जाना चाहिए।

प्रश्न 56.
उत्पादन में वृद्धि हेतु पशु प्रजनन में क्या सुधार आवश्यक हैं ?
उत्तर-

  1. पशुओं का चयनात्मक प्रजनन जिनमें आवश्यक वांछनीय लक्षण हो।
  2. दो विभिन्न नस्लों के संकरण से ऐसी नस्ल तैयार करना जिसमें दोनों नस्लों के गुण विद्यमान हों।
  3. पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए विकसित पशुपालन पद्धतियों को अपनाया जाना चाहिए।

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प्रश्न 57.
ऑपरेशन फ्लड तथा सिल्वर रिवोल्यूशन कार्यक्रम किस प्रयोजनाओं से संबंध रखते हैं ? उनका उद्देश्य क्या है ?
उत्तर-
ऑपरेशन फ्लड (Operation flood) तथा सिल्वर रिवोल्यूशन (Silver revolution) कार्यक्रम दूध तथा अंडों के उत्पादन से संबंध रखते हैं। इन योजनाओं द्वारा दूध तथा अंडों के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि लाना, इनका उद्देश्य है।

प्रश्न 58.
मछली किस प्रकार खाद्य पदार्थ के रूप में ठीक समझी जाती है ? .
उत्तर-
मछली तथा समुद्र से प्राप्त अन्य पदार्थ प्रोटीन युक्त होते हैं। इनमें वसा, तेल, आयोडीन आदि पोषक पदार्थ होते हैं। मत्स्य उत्पादन में भारत का विश्व में आठवां नंबर है। हिंद महासागर के तटीय क्षेत्र में मत्स्य भंडार के 45% भाग का दोहन होता है। आजकल मत्स्य पालन भी एक व्यवसाय बन चुका है।

प्रश्न 59.
खारे जल तथा मीठे जल की मछलियों की दो किस्मों के नाम बताइए।
उत्तर-
खारे जल (समुद्र) की मछलियाँ – हिल्सा, केटलफिश, रिब्बनफिश।
मीठे जल (तालाब, झील) की मछलियाँ – कतला, रोहू, टीरीका आदि।

प्रश्न 60.
मिश्रित मछली संवर्धन में निहित समस्याओं को लिखिए।
उत्तर-
मिश्रित मछली संवर्धन में एक समस्या यह है कि इनमें से अनेक मछलियां केवल गर्म ऋतु में ही जनन करती हैं। यदि मत्स्य डिंभ देशी नस्ल से लिए जाएं तो अन्य वे स्पीशीज के साथ मिलाए जा सकते हैं। इस मछली संवर्धन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले डिंभ नहीं मिल पाते। इस समस्या के समाधान के लिए ऐसी विधियां खोजी जा रही हैं जिससे तालाब में इन मछलियों का संवर्धन हार्मोन के उपयोग से किया जा सके। इससे ऐच्छिक मात्रा में शुद्ध मछली के डिंभ प्राप्त रहेंगे।

प्रश्न 61.
मछली संवर्धन की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर-
मछली संवर्धन धान की फसल के साथ किया जा सकता है। अधिक मछली संवर्धन मिश्रित मछली संवर्धन तंत्र से किया जा सकता है। इस तंत्र में देशी तथा विदेशी प्रकार की मछलियों का उपयोग किया जाता है। ऐसे तंत्रों में एक अकेले तालाब में 5 अथवा 6 मछली की स्पीशीज का उपयोग किया जाता है। इनमें ऐसी मछलियों का चयन किया जाता है जिसमें आहार के लिए प्रतिस्पर्धा न हो तथा उनके आहार की आदत अलग-अलग हो। इससे तालाब के हर भाग में स्थित प्राप्त आहार का उपयोग हो जाता है। जैसे कटला मछली पानी की सतह से अपना भोजन लेती है। रोहु मछली तालाब के मध्य क्षेत्र से अपना भोजन लेती है। मृगल तथा कॉमन कार्प तालाब की तली से भोजन लेती हैं। ग्रास कार्प खर-पतवार खाती हैं। इस प्रकार ये सभी मछलियां साथ-साथ रहते हुए भी स्पर्धा के अपना-अपना आहार लेती हैं। इससे तालाब से मछली के उत्पादन में वृद्धि होती है।

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प्रश्न 62.
हमारे देश में मछली उत्पादन की कौन-कौन सी विधियाँ अपनाई जाती हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
हमारे देश में मछली उत्पादन की प्रमुख रूप से दो विधियाँ हैं-

(I) प्राकृतिक स्त्रोत – मछलियों को समुद्री जल तथा ताज़ा जल (अलवणीय जल) से पकड़ा जाता है। हमारे देश का समुद्री मछली संसाधन क्षेत्र 7500 किमी० समुद्री तट तथा इसके अतिरिक्त समुद्र की गहराई तक है। सैटेलाइट तथा प्रतिध्वनि गंभीरता मापी से खुले समुद्र के मछलियों के बड़े समूह का पता लगा कर मछलियों का उत्पादन बढ़ाया गया है। इस तरीके से पॉमफ्रेट, मैकर्ल, टुना, सारडाइन, बांबेडक आदि मछलियाँ प्राप्त की जाती हैं।

(II) मछली संवर्धन – समुद्री जल में आर्थिक महत्त्व वाली कुछ जातियों का संवर्धन किया जाता है। इसे मेरी कल्चर कहते हैं। इस विधि से जिन प्रजातियों को पकड़ा जाता है, वे हैं-मुलेट, भेटकी, पर्ल स्पॉट (पंखयुक्त मछलियाँ), कवचीय मछलियाँ जैसे झींगा (Prawn), मस्सल, ऑएस्टर आदि। ऑएस्टर के संवर्धन से मोतियों को भी प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 63.
अंत:स्थली मात्स्यकी क्या है ?
उत्तर-
नदी मुख (एस्चुरी) तथा लैगून महत्त्वपूर्ण मत्स्य-भंडार हैं। जहाँ समुद्री जल और ताजा जल मिलते हैं, वहाँ मछलियों को प्राप्त किया जाता है, लेकिन ऐसे अंत:स्थली स्रोतों पर मछली उत्पादन अधिक नहीं होता।

प्रश्न 64.
पशु उत्पादों का पोषक में तत्वों (प्रतिशत मात्रा में) सारणी बद्ध कीजिए।
उत्तर-
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प्रश्न 65.
शहद क्या है ? शहद की शुद्धता की जांच किस प्रकार की जा सकती है ?
उत्तर-
शहद एक गाढ़ा, मीठा तरल पदार्थ है जो मधुमक्खियों द्वारा अपने छत्तों में इकट्ठा किया जाता है। शहद के मुख्य संघटक जल, शर्करा (चीनी), खनिज तथा पराग कण हैं।

शुद्ध शहद की जांच-

  1. एक कांच के गिलास को ऊपर तक पानी में भरकर इसमें शहद की बूंदे मिलाने पर शुद्ध शहद पानी में एक पतली तार बनाएगा जबकि मिलावटी शहद पानी में घुल जाएगा।
  2. सूक्ष्मदर्शी से देखने पर शुद्ध शहद में अनेक प्रकिण्व या एंजाइम दिखाई देते हैं, अशुद्ध में नहीं।

प्रश्न 66.
शहद के मुख्य गुण तथा उपयोग बताओ।
उत्तर-
शहद के मुख्य गुण-शहद स्वाद में मीठा तथा पानी में घुलनशील होता है। यदि शहद को खुला रखा जाए तो यह वायुमंडल की नमी सोख लेता है तथा इसका किण्वन हो जाता है।

उपयोग–यह सहज ही पाचक और एंटीसेप्टिक होता है। इसलिए अनेक प्रकार की औषधियों में प्रयोग होता है।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भोजन की आवश्यकता किनको होती है ?
उत्तर-
सभी जीवधारियों को भोजन की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
भोजन से हमें क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर-
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण।

प्रश्न 3.
मानव के भोजन के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
पौधे और जंतु।

प्रश्न 4.
अधिकांश भोज्य पदार्थ हमें कहां से प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-
कृषि तथा पशुपालन से।

प्रश्न 5.
हमारे देश को प्रति वर्ष कितने उत्पादन की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
लगभग एक चौथाई बिलियन टन की।

प्रश्न 6.
हमने किस क्रांति से फसल उत्पादन में वृद्धि की है ?
उत्तर-
हरित क्रांति से।

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प्रश्न 7.
दूध का उत्पादन किस प्रकार बढ़ाया गया है ?
उत्तर-
श्वेत क्रांति से।

प्रश्न 8.
क्रांतियों के कारण हमारे प्राकृतिक संतुलन के बिगड़ने का खतरा क्यों बढ़ गया है ?
उत्तर-
प्राकृतिक संपदा की हानि के कारण।

प्रश्न 9.
कृषि और पशु पालन के लिए किन प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है ?
उत्तर-
संपूषणीय प्रणालियों की।

प्रश्न 10.
कार्बोहाइड्रेट किन-किन फसलों से प्राप्त होता है ?
उत्तर-
गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा और ज्वार ।

प्रश्न 11.
प्रोटीन किन-किन फसलों से प्राप्त होती है ?
उत्तर-
चना, मटर, उड़द, मूंग, अरहर और मसूर।

प्रश्न 12.
तेल देने वाले बीजों के नाम लिखिए।
उत्तर-
सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरंड, सरसों, अलसी तथा सूरजमुखी।

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प्रश्न 13.
चारा देने वाली फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर-
बरसीम, जई।

प्रश्न 14.
फसलों की उचित वृद्धि के लिए किन-किन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
जलवायवीय परिस्थितियां, तापमान तथा दीप्तिकाल ।

प्रश्न 15.
दीप्तिकाल का संबंध किस से है ?
उत्तर-
सूर्य प्रकाश के काल से संबंधित है।

प्रश्न 16.
पौधों में पुष्पन और वृद्धि किस पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
सूर्य प्रकाश पर।

प्रश्न 17.
पौधे किस प्रक्रिया से अपना भोजन तैयार करते हैं ?
उत्तर-
प्रकाश संश्लेषण।

प्रश्न 18.
वर्षा ऋतु में उगाई जाने वाली फसलें किस नाम से जानी जाती हैं ?
उत्तर-
खरीफ की फसलें।

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प्रश्न 19.
खरीफ फसलों का समय क्या है ?
उत्तर-
जून मास से आरंभ होकर अक्तूबर मास तक।

प्रश्न 20.
शीत ऋतु में उगाई जाने वाली फसलें किस नाम से जानी जाती हैं ?
उत्तर-
रबी की फसलें।

प्रश्न 21.
रबी की फसलों का समय क्या है ?
उत्तर-
नवंबर से अप्रैल तक।

प्रश्न 22.
खरीफ फसलों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का, कपास, मूंग तथा उड़द।

प्रश्न 23.
रबी फसलों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
गेहूँ, चना, मटर, सरसों तथा अलसी।

प्रश्न 24.
भारत में 1960 से 2004 तक कृषि भूमि तथा अन्न की पैदावार में कितनी वृद्धि हुई है ?
उत्तर-
25% कृषि भूमि में तथा अन्न की चार गुणा पैदावार में वृद्धि हुई है।

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प्रश्न 25.
कृषि प्रणालियों को किन तीन चरणों में बांटा जाता है ?
उत्तर-

  1. बीज का चुनना,
  2. फसल की देखभाल,
  3. सुरक्षा तथा कटी हुई फसल को हानि से बचाना।

प्रश्न 26.
संकरण किन-किन में हो सकता है ?
उत्तर-
अंतराकिस्मीय (विभिन्न किस्मों में), अंतरास्पीशीज (एक ही जीनस की दो विभिन्न स्पीशीज में) अथवा अंतरावंशीय (विभिन्न जेनरा में)।

प्रश्न 27.
उच्च उत्पादन क्या है ?
उत्तर-
प्रति एकड़ फसल का उत्पादन बढ़ाना ।

प्रश्न 28.
व्यापक अनुकूलता क्या है ?
उत्तर-
एक ही किस्म की विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न जलवायु में उगाना व्यापक अनुकूलता है।

प्रश्न 29.
उत्पादन प्रणालियां किन तीन प्रकारों की होती हैं ?
उत्तर-
खर्च रहित उत्पादन, कम खर्च उत्पादन तथा अधिक खर्च उत्पादन प्रणालियां ।

प्रश्न 30.
पौधे अपने पोषण के लिए पोषक तत्व कहां से प्राप्त करते हैं ?
उत्तर-
पौधे हवा से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पानी से हाइड्रोजन तथा मिट्टी से 13 पोषक प्राप्त करते हैं।

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प्रश्न 31.
पौधों को कितने वृहत् पोषकों की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
छः पोषक तत्वों की।

प्रश्न 32.
पौधों को कितने सूक्ष्म पोषकों की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
7 पोषक तत्वों की।

प्रश्न 33.
खाद में किसकी अधिकता होती है ?
उत्तर-
कार्बनिक पदार्थों की।

प्रश्न 34.
खाद को किससे तैयार किया जाता है ?
उत्तर-
खाद को जंतु के अपशिष्ट तथा पौधे के कचरे के अपघटन से तैयार किया जाता है।

प्रश्न 35.
खाद का चिकनी मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
चिकनी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा में पानी को निकालने में सहायता मिलती है जिससे पानी एकत्रित नहीं होता।

प्रश्न 36.
कंपोस्ट को किस प्रकार बनाते हैं ?
उत्तर-
कंपोस्ट को कृषि अपशिष्ट, जंतु अपशिष्ट, घरेलू कचरे, खरपतवार आदि को गड्ढों में अपघटित करके बनाते हैं।

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प्रश्न 37.
वर्मीकंपोस्ट क्या है ?
उत्तर-
केचुएं के उपयोग से तैयार कंपोस्ट को वर्मीकंपोस्ट कहते हैं। इससे अपशिष्ट पदार्थों का शीघ्र निस्तीकरण हो जाता है।

प्रश्न 38.
हरी खाद क्या है ?
उत्तर-
फसल उगाने से पहले पटसन, मूंग, ज्वार आदि को उगा कर उन्हें हल की सहायता से मिट्टी में मिला देने से हरे पौधे हरी खाद में बदल जाते हैं।

प्रश्न 39.
हरी खाद में कौन-से दो तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं ?
उत्तर-
नाइट्रोजन और फॉस्फोरस।

प्रश्न 40.
सूखा किस कारण होता है ?
उत्तर-
पानी की कमी अथवा वर्षा की अनियमितता के कारण।

प्रश्न 41.
सिंचाई के लिए चार जल स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कुएं, नहरें, नदियां, तालाब।

प्रश्न 42.
कुएं किस-किस प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
खुदे हुए कुएं, ट्यूबवैल।

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प्रश्न 43.
नदी लिफ्ट पंप क्या है ?
उत्तर-
नदियों के किनारे स्थित खेतों में सिंचाई करने के लिए नदियों से सीधे ही पानी निकालना ‘नदी लिफ्ट पंप’ कहलाता है।

प्रश्न 44.
मिश्रित फसल क्या है ?
उत्तर-
मिश्रित फसल दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ खेतों में उगाना है।

प्रश्न 45.
मिश्रित फसल के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर-

  1. गेहूँ + सरसों,
  2. मूंगफली + सूर्यमूखी।

प्रश्न 46.
अंतरा फसलीकरण क्या है ?
उत्तर-
अंतरा फसलीकरण दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ एक ही खेत में निर्दिष्ट पैटर्न पर उगाना है जिसमें कुछ पंक्तियां में एक प्रकार की फसल तथा उसके एकांतर दूसरी पंक्तियों में दूसरी प्रकार की फसल उगाना है।

प्रश्न 47.
अंतरा फसलीकरण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-

  1. सोयाबीन + मक्का,
  2. बाजरा + लोबिया।

प्रश्न 48.
फसलों को कौन-कौन हानि पहुंचाते हैं ?
उत्तर-
खरपतवार, कीट, पीड़क तथा रोग।

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प्रश्न 49.
खरपतवार के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
गोखरू (जैंथियम), गाजर घास (पारथेनियम), मोथा (साइटेनस रोटेंडस)।

प्रश्न 50.
खरपतवार किसके लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं ?
उत्तर-
भोजन, स्थान तथा प्रवास के लिए।

प्रश्न 51.
खरपतवार के कारण फसलों की अच्छी पैदावार क्यों नहीं होती ?
उत्तर-
खरपतवार अपनी वृद्धि के लिए मिट्टी से पोषक तत्व ले लेते हैं।

प्रश्न 52.
कीटनाशक पौधों पर कहां-कहां आक्रमण करते हैं ?
उत्तर-
ये पौधों के मूल, तने, पत्तियों पर आक्रमण करते हैं तथा उनके विभिन्न भागों से कोशिकीय रस चूस लेते हैं। वे तने और फलों में छिद्र कर देते हैं।

प्रश्न 53.
पौधों में रोग किन कारकों से होते हैं ?
उत्तर-
बैक्टीरिया, कवक और वायरस से।

प्रश्न 54.
खरपतवारों को किस प्रकार नष्ट किया जाता है ?
उत्तर-
खरपतवारनाशियों तथा यांत्रिकी विधि से।

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प्रश्न 55.
पीड़कों पर नियंत्रण पाने के लिए निरोधक विधियां कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर-
प्रतिरोध क्षमता वाली किस्मों का उपयोग तथा ग्रीष्मकाल में हल से जुताई।

प्रश्न 56.
पीड़कों को नष्ट करने के लिए क्या किया जाता है ?
उत्तर-
गर्मी के मौसम में गहराई तक हल चलाया जाता है।।

प्रश्न 57.
कौन-से जैविक कारक कृषि उत्पाद के भंडारण में हानि पहुंचाते हैं ?
उत्तर-
कीट, कुंतक, कवक, चिंचडी तथा जीवाण।

प्रश्न 58.
कौन-से अजैविक कारक कृषि उत्पाद के भंडारण को हानि पहुंचाते हैं ?
उत्तर-
नमी और ताप।

प्रश्न 59.
हानिकारक कारक अनाज को क्या हानि पहुंचाते हैं ?
उत्तर-
अनाज की गुणवत्ता खराब करते हैं, वजन कम कर देते हैं, अंकुरण करने की क्षमता कम करते हैं तथा बदरंग करते हैं।

प्रश्न 60.
भंडारण से पहले उत्पाद को क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
पहले सूर्य की धूप में और फिर छाया में सुखाना तथा धूमन का प्रयोग।

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प्रश्न 61.
पशुपालन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं।

प्रश्न 62.
पशुपालन के अंतर्गत क्या कार्य किए जाते हैं ?
उत्तर-
भोजन देना, प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना।

प्रश्न 63.
पशुपालन के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर-
खाद्य (दूध, अंडे, माँस) प्राप्त करना तथा कृषि कार्य (हल चलाना, सिंचाई तथा माल ढोना)।

प्रश्न 64.
पालतु पशुओं की प्रमुख कौन-सी स्पीशीज़ हैं ?
उत्तर-
गाय और भैंस।

प्रश्न 65.
दुधारू पशु किसे कहते हैं ?
उत्तर-
दूध देने वाली मादाओं को दुधारू पशु कहते हैं।

प्रश्न 66.
ड्राफ्ट पशु किसे कहते हैं ?
उत्तर-
बोझा ढोने वाले पशुओं को ड्राफ्ट पशु कहते हैं।

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प्रश्न 67.
लंबे समय तक दुग्ध स्रावण काल के लिए विदेशी नस्लें कौन-सी हैं ?
उत्तर-
जर्सी, ब्राउन, स्विस।

प्रश्न 68.
किन देसी नस्लों में रोगों के लिए प्रतिरोधिकता अधिक है ?
उत्तर-
रेडसिंधी, साहीवाल।

प्रश्न 69.
पशुओं के आवास का फर्श कैसा होना चाहिए ?
उत्तर-
ढलवां, साफ और सखा।

प्रश्न 70.
पशु आहार किन दो प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
मोटा चारा (रुक्षांश) तथा सांद्र (कम रेशे वाला)।

प्रश्न 71.
‘ओं ने अमाशय तथा आंत में कौन-से कृमि हो जाते हैं ?
उत्तर-
संतः परजाची।

प्रश्न 72.
पशुओं के यकृत को कौन परजीवी प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-
पर्ण कमि (फलक वर्म)।

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प्रश्न 73.
कुक्कट पालन में किन मुर्गियों को पाला जाता है ?
उत्तर-
अंडों के लिए लेअर तथा माँस के लिए ब्रोलर।

प्रश्न 74.
नई किस्मों के लिए किन कुक्कटों का संकरण कराया जाता है ?
उत्तर-
देशी एसिल तथा विदेशी लेगहार्न नस्लों का।

प्रश्न 75.
ब्रौलर का आहार किससे परिपूर्ण होता है ?
उत्तर-
प्रोटीन तथा वसा से।

प्रश्न 76.
मुर्गियों में किस कारण कई तरह के रोग हो जाते हैं ?
उत्तर-
जीवाणु, विषाणु, कवक, परजीवी तथा पोषण हीनता के कारण।

प्रश्न 77.
मछलियां किन दो तरीकों से प्राप्त की जाती हैं ?
उत्तर-

  1. प्राकृतिक स्रोत से (मछली पकड़ना),
  2. मछली संवर्धन।

प्रश्न 78.
भारत का समुद्री संसाधन क्षेत्र कितना है ?
उत्तर-
यह 7500 कि० मी० समुद्री तट तथा इसके बाद समुद्र की गहराई तक।

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प्रश्न 79.
सर्वाधिक प्रचलित पांच समुद्री मछलियों के नाम लिखिए।
उत्तर-
पॉमफेट, मैकर्ल, टूना, सारडाइन, कंबेडक।

प्रश्न 80.
मछलियों के बड़े समूह का पता किस प्रकार लगाया जाता है ?
उत्तर-
सैटेलाइट तथा प्रतिध्वनि गंभीरता मापी से।

प्रश्न 81.
समुद्री जल में संवर्धित मछलियों के नाम लिखिए।
उत्तर-
मुलेट, भेटकी, पर्लस्पॉट (पंख युक्त मछलियां)।

प्रश्न 82.
मोतियों की प्राप्ति के लिए किस का संवर्धन किया जाता है ?
उत्तर-
ऑएस्टर।

प्रश्न 83.
समुद्री संवर्धन (येरी कल्चर) क्या है ?
उत्तर-
समुद्री मछलियों का स्टॉक भविष्य में जब कम होगा तो मछली की मांग की पूर्ति संवर्धन से होगी। इस प्रणाली को समुद्री संवर्धन कहते हैं।

प्रश्न 84.
एस्चुरी क्या है ?
उत्तर-
ताजे पानी और समुद्री खारे पानी के मिश्रण को एस्चुरी कहते हैं।

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प्रश्न 85.
किस फसल के साथ मछली संवर्धन किया जा सकता है ?
उत्तर-
धान की फसल के साथ। प्रश्न 86. तालाब के किस-किस भाग से कौन-कौन सी मछलियां अपना भोजन लेती हैं ?
उत्तर-
कटला पनी की सतह से, रोहु तालाब के मध्य से, मृगल और कॉयन कार्प तली से भोजन लेती हैं।

प्रश्न 87.
मधुमक्खी क्या बनाती है ?
उत्तर-
मधुमक्खी शहद और मोम तैयार करती है।

प्रश्न 88.
व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए किस देसी मक्खी का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
ऐपिस संरना इंडिया (सामान्य भारतीय मक्खी), ऐपिस जोरसेटा (एक शैल मक्खी) तथा ऐपिस फ्लोरी (लिटिल मक्खी)।

प्रश्न 89.
किस मक्खी की सहायता से मधु उत्पादन बढ़ाया जा रहा है ?
उत्तर-
इटेलियन मक्खी ऐपिस येलीफेरा।

प्रश्न 90.
मधु की गुणवत्ता किस पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
मधुमक्खी को उपलब्ध फूलों पर।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 14 प्राकृतिक संपदा

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 14 प्राकृतिक संपदा Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 14 प्राकृतिक संपदा

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मृदा निर्माण में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न चरणों का वर्णन करें।
उत्तर-
प्रकृति को मृदा निर्माण में लाखों वर्ष लगे हैं। यह चट्टानों से बनी है। अब भी मृदा के ठीक नीचे कठोर चट्टानों को सतह विद्यमान है। भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं से चट्टानें टूटती-फूटती हैं। ज्वालामुखी के फटने से ये चट्टानें छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं। मिट्टी का निर्माण चट्टानों के टूटने से शुरू होता है। टूटने की यह प्रक्रिया वर्षा, बर्फ, हवा, ग्लेशियर तथा बहते पानी के कारण निरंतर चलती रहती है। मृदा निर्माण मुख्य तीन कारणों से हुआ है-

  1. रासायनिक कारण – नमी और वायु रासायनिक कारण के आधार हैं। यह मरुस्थलों में प्रभावपूर्ण नहीं होते क्योंकि वहाँ पानी की कमी होती है। विभिन्न रासायनिक यौगिक पानी में घुल कर रासायनिक क्रियाएं करते हैं जिससे चट्टानें मिट्टी में परिवर्तित हो जाती हैं।
  2. भौतिक कारण – तापमान, पानी, बर्फ, गुरुत्व और वायु के भिन्न भौतिक कारण हैं जो अपने गुणों से चट्टानों के संकुचन और फैलाव से उन्हें तोड़ डालते हैं। वही बाद में टूट-फूट से मिट्टी में बदल जाते हैं।
  3. जीव वैज्ञानिक कारण – सूक्ष्म जीव, फफूंदियां, लाइकेन, मॉस आदि के जैविक आधार हैं जो खनिजीय संरचना को बदल देते हैं। इनसे चट्टानों की भौतिक संरचना पर प्रभाव पड़ता है और वे मृदा निर्माण में सहायक बन जाते हैं।

मृदा निर्माण में सहायक साधन-

  1. तापमान – तापमान में परिवर्तन चट्टानों को फैलने और सिकुड़ने में सहायता देता है। चट्टानों का ऊपरी तल नीचे के तल की अपेक्षा अधिक प्रभावित होता है। इससे चट्टानों में दरारें उत्पन्न हो जाती हैं जो टूट कर मिट्टी में बदल जाती हैं।
  2. जल – वर्षा का जल चट्टानों की दरारों में प्रवेश कर नीचे चला जाता है जो चट्टानों को तोड़ कर मिट्टी में बदल देता है। कम तापमान से जल जमकर बर्फ बन जाता है। उससे उत्पन्न दबाव से चट्टानें टूट जाती हैं।
  3. वायु – तेज़ गति से चलने वाली वायु और आंधियां चट्टानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लुढ़काती और तोड़ती हैं।
  4. पेड़-पौधे – पेड़-पौधों की जड़ें चट्टानों में फैल कर उन्हें तोड़ देती हैं। लाइकेन तथा कुछ अन्य पौधे चट्टानों में रहकर अम्ल का उत्पादन करते हैं जो मिट्टी के निर्माण में सहायक बनते हैं। कई जीवाणु भी इस प्रक्रिया में सहायक बनते हैं।
  5. जीव-जंतु – अनेक जीव-जंतु चट्टानों में छेद कर अपने रहने का स्थान बनाते हैं। चींटियां, दीमक, मकौड़े तथा अनेक कीट मिट्टी बनाने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 2.
मृदा अपरदन के मुख्य कारण क्या-क्या हैं ?
उत्तर-
मृदा अपरदन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

  • जंगलों की कटाई – मृदा अपरदन के प्रमुख कारणों में से जंगलों की अंधाधुंध कटाई सर्वप्रमुख है। पेड़ों को जड़ें मिट्टी को बांधने का काम करती हैं। इससे मृदा अपने स्थान से आगे नहीं बहती। इनसे मिट्टी नम रहती है। जंगलों की कटाई से बाढ़ों का आना बढ़ गया है जिस कारण मृदा अपरदन होता है।
  • अनियंत्रित पशुओं को चराना – पशुओं को पहाड़ों की ढलानों पर अनियंत्रित रूप से चराया जाता है। इससे मृदा नंगी हो जाती है और वर्षा या आंधियों से वह वहां से हट जाती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस प्रकार का मृदा अपरदन प्रायः दिखाई देता है।
  • कृषि के अवैज्ञानिक तरीके – कई बार किसान खेतों में एक ही फसल बार-बार उगाते हैं जो उस फसल की उपज के लिए हानिकारक तो है ही पर साथ ही इस मृदा में ह्यूमस कम हो जाते है । गलत ढंग से जुताई, सिंचाई, कम उर्वरक प्रयोग आदि मृदा अपरदन को बढ़ाते हैं।
  • बाढ़ और आंधियां – नदियों पर बांधों के न बने होने के कारण उन में बाढ़ आती है जिससे उपजाऊ मृदा बह जाती है। भूमि पर घास और झाड़ियों की कमी से भी मृदा आंधियों के द्वारा अपने स्थान से हट जाती है जिससे मृदा अपरदन हो जाता है।
  • वनों में आग लगने से – अनेक कारणों से वनों में आग लग जाती है। पेड़-पौधे तथा घास नष्ट हो जाने के कारण मृदा नंगी हो जाती है जो तेज़ हवाओं से उड़ जाती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 14 प्राकृतिक संपदा

प्रश्न 3.
मृदा की संरचना किन मूल अवयवों से हुई है ? संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
भिन्न प्रकार की मृदा की संरचना भिन्न प्रकार की होती है पर उन में मूल अवयव समान ही होते हैं। वे निम्नलिखित होते हैं-

(i) खनिज कण – मृदा में बजरी, रेत और चिकनी मृदा के कण विद्यमान होते हैं । ये मृदा को गठन और बनावट प्रदान करते हैं। मिट्टी में कणों का आकार उसे भिन्न प्रकार के गुण प्रदान करता है।

(ii) अकार्बनिक पदार्थ – मृदा में अनेक प्रकार के अकार्बनिक पदार्थ होते हैं जैसे-पोटाशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, लोहा, नाइट्रेट, सल्फेट, फास्फेट, कार्बोनेट आदि। जिन चट्टानों से मृदा मूल रूप से बनती है ये अकार्बनिक पदार्थ इसमें मिल जाते हैं।

(iii) कार्बनिक पदार्थ – पौधों तथा जीव-जंतुओं की क्रियाओं से अनेक कार्बनिक पदार्थ मृदा में मिल जाते हैं। उनके मरने, नष्ट होने और गलने से कार्बनिक पदार्थ बढ़ते रहते हैं। जीव-जंतुओं की उत्सर्जन क्रिया से भी ऐसे पदार्थ मृदा में मिलते हैं। इनमें से ह्यूमस बनते हैं जो मृदा की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाते हैं। इन से मृदा में सूक्ष्म जीवों को पनपने और बढ़ने में भी सहायता मिलती है।

(iv) सूक्ष्मजीवी एवं अन्य प्राणियों की उत्सर्जन क्रियाएं – अनेक प्रकार के अति छोटे जीव मृदा में रहते हैं : बैक्टीरिया, फफूंदियां, काई आदि मृदा से जीवन प्राप्त करते हैं। चींटियां, दीमक, टिड्डे, केंचुए आदि मृदा में रहते हैं। चूहे, खरगोश आदि भी मृदा में अपना घर बनाते हैं। इनकी उत्सर्जित गंदगी से मृदा की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। इससे मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।

(v) जल – लगभग सभी प्रकार की मृदा में जल होता है। यह जल अणुओं के बीच विद्यमान होता है। यह पेड़पौधों के पोषण के लिए आवश्यक है। मृदा का यह गुण है कि वह पानी का अवशोषण करे।

(vi) वायु – मृदा के कणों के बीच वायु उपस्थित होती है। यह पेड़-पौधों तथा अन्य जीव-जंतुओं के श्वसन के लिए उपयोगी होती है। प्रत्येक मृदा की किस्म में वायु को रोकने की क्षमता अलग-अलग होती है।

प्रश्न 4.
मृदा का संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है ?
उत्तर-
मृदा अपरदन के कारण भूमि की ऊपरी सतह से उपजाऊ मृदा हट जाती है जिस कारण वह अनउपजाऊ बन जाती है। वायु और जल के वेग पर नियंत्रण पा कर मृदा का संरक्षण किया जा सकता है। इससे मृदा को निरंतर होने वाली क्षति नहीं सहनी पड़ती। मिट्टी का संरक्षण निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है-

(i) पेड़-पौधे और घास लगा कर – पहाड़ी ढलानों पर बहुत अधिक मात्रा में पेड़-पौधे, झाड़ियां और घास लगाकर मृदा के बहाव को रोका जा सकता है। मृदा को जड़ें बांध लेती हैं। पानी और वायु के कारण वह मृदा अपने स्थान से दूर हट नहीं पाती। हमारे देश में वन महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत नये पेड़-पौधे इसीलिए लगाए जाते हैं : पेड़ों को काटने से रोकने के लिए ‘चिपको आंदोलन’ भी चलाया गया है।

(ii) सीढ़ीदार खेती – पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों से मृदा को नीचे बहने से रोकने के लिए सीढ़ीदार खेती की जाती है। वर्षा का पानी ढलानों पर बहुत तेजी से नीचे बहता है और अपने साथ उपजाऊ मृदा को बहा ले जाता है। मृदा को रोकने के लिए ढलान के साथ-साथ सीढ़ियां बनाई जाती हैं जिससे पानी का बहाव कमज़ोर पड़ जाता है और ढलान से बहुत कम मृदा बह कर नीचे जाती है।

(iii) बांध और किनारे बनाने से – हर वर्ष मानसून आने पर नदियों के किनारों की मृदा बह जाती है। यदि नदियों के वे किनारे अच्छी तरह से बना दिए जाएं जहां पानी वेग से टकराता है तो मृदा बहने से बच जाए। इसी प्रकार बांध बनाने से बाढ़ पर नियंत्रण किया जा सकता है। नदियों के किनारों पर चट्टानें और बड़े-बड़े पत्थर लगा कर मृदा को बहने से रोका जाना चाहिए।

(iv) अतिचारण के प्रतिबंधित करने से – पशुओं के लिए चरागाह बनाए जाने चाहिए ताकि वे पहाड़ों की ढलानों पर न चरें। उनके अतिचारण से मृदा घास से रहित हो जाती है जो तेज़ वर्षा और आंधी से उड़ जाती है।

(v) खाद और उर्वरकों के प्रयोग से – मृदा में खाद और उर्वरकों का उचित प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि फसरों पर्याप्त मात्रा में हों, भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़े। वनस्पतियों की अधिकता से मृदा का संरक्षण किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
वायु प्रदूषण के विभिन्न कारणों को लिखिए। वायु प्रदूषण को रोकने में हमारा क्या योगदान हो सकता है ?
उत्तर-
वायु के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में अनचाहे परिवर्तनों के कारण वायु प्रदूषण होता है। वायु प्रदूषण कच्चे पदार्थों, औद्योगिक प्रक्रियाओं, आवास स्थानों आदि को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण प्राकृतिक प्रक्रियाओं या मानव क्रियाओं के कारण होता है।

वायु प्रदूषण ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान बाहर निकले लावा के साथ विभिन्न गैसों तथा कणिकीय पदार्थों की आंधी तथा उड़ती हुई धूल, धुआं तथा कोहरा आदि के कारण होता है।

इसके अलावा दलदल से उत्पन्न मिथेन गैस, पेड़-पौधे तथा जीव-जंतुओं के अवशेषों के अपघटन से भी वायु प्रदूषण होता है। वह प्रदूषण का प्रमुख कारण विभिन्न स्रोतों-कोयला तथा अन्य ईंधन के दहन से, रेल इंजन, वाहन तथा वायुयान आदि से उत्पन्न धुआं कालिख, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड है। उद्योगों के कारण कुछ प्रमुख स्थानों पर क्लोरीन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, अमोनिया, बैंजीन, सल्फर के ऑक्साइड आदि गैसें भी वायु प्रदूषण करती हैं।

उद्योग-धंधों तथा कारखानों की चिमनियों से निरंतर धुआं निकलता है। तापीय ऊर्जा संयंत्रों से फ्लाइ ऐश निकलती है। तंबाकू का प्रयोग करने वाले किसी की भी परवाह न करते हुए धुआं उड़ाते रहते हैं। लंबित कणीय द्रव्य (SPM), क्लोरो फ्लोरो कार्बन (CFCs), नाइट्रोजन के ऑक्साइड, ओज़ोन तथा लेड वायु को प्रदूषित करते हैं। इन से स्वास्थ्य संबंधी अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।

वायु प्रदूषण पर अनेक विधियों से नियंत्रण पाया जा सकता है-

  1. पेड़-पौधों को अधिक मात्रा में उगाया जाना चाहिए।
  2. उद्योग-धंधों को नगरीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए।
  3. कारखानों की चिमनियां बहुत ऊंची होनी चाहिए।
  4. वाहनों में सीसा-रहित पेट्रोल प्रयुक्त करना चाहिए।
  5. धुआं रहित ऊर्जा के स्रोतों का प्रयोग करना चाहिए।
  6. धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर रोक लगा देनी चाहिए।

प्रश्न 6.
जैव रसायन चक्र क्या होता है ?
उत्तर-
जैव रसायन चक्र-पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया CO2 को वायमंडल से प्राप्त करते हैं तथा पौधे द्वारा मिट्टी में से पानी के साथ खनिज ग्रहण किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में C, N, O, S, P तथा जल आदि भाग लेते हैं। ये पदार्थ या तत्व पारिस्थितिक तंत्र के उत्पादक स्तर में प्रवेश करने के पश्चात् दूसरे स्तर पर स्थानांतरित कर दिए जाते हैं। इनका स्थानांतरण एवं परिवहन, मिट्टी, वायु, जल तथा जैव जीवों के द्वारा होता है। इन रसायनों की पारिस्थितिक तंत्र या जीवमंडल में पुनः प्रवेश करना जैव रसायन चक्र कहलाता है। ऊर्जा की तरह ये रसायन भी नष्ट नहीं होते। पौधों एवं जंतुओं के मृत शरीरों को अपघटकों द्वारा अपघटित किए जाने पर ये पदार्थ फिर से पोषण भंडार में मुक्त कर दिए जाते हैं जिन्हें फिर पौधों द्वारा अवशोषित किया जाता है। इन पदार्थों के पुनः चक्रण में अपघटकों की मुख्य भूमिका है।

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प्रश्न 7.
प्रकृति में जल-चक्र को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रकृति में जल-चक्र-
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  • सूर्य की गर्मी से नदियों, झीलों, समुद्रों के पानी का वाष्पन होता रहता है और वह जल-वाष्प में बदलता रहता है।
  • जल-वाष्प हल्की होने के कारण वायु में में ऊपर जाती है। वायु द्वारा जल-वाष्प को पर्वतों की ओर ले जाया जाता है। पहाड़ों से टकराने के पश्चात् वह और ऊपर जाती है। इससे जल-वाष्प बादलों का रूप ले लेती है।
  • जब बादलों की जल-वाष्प ठंडी होती है तब वह फिर जल के रूप में वापस आ जाती है और वर्षा होने लगती है।
  • पृथ्वी की सतह पर गिरने वाला वर्षा का कुछ जल मृदा में से रिसकर नीचे जाता है। अंतत: यह जल किसी कठोर चट्टान द्वारा रोक लिया जाता है और वहाँ एकत्रित हो जाता है। यही भूमिगत जल हमें कुएं खोदने पर प्राप्त होता है।
  • नदियों तथा समुद्रों के पानी का वाष्पन होता है और बाद में फिर नदियों, समुद्रों में पहुँच जाता है। यही जलचक्र कहलाता है।

प्रश्न 8.
प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र किस प्रकार चलता है, विस्तार से लिखिए।
उत्तर-
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नाइट्रोजन चक्र – वायुमंडल में वायुमंडल में नाइट्रोजन लगभग 78% होती है जो अपने आण्विक रूप N, में पाई जाती है। जल भंडारों में भी नाइट्रोजन होती है। इसके अतिरिक्त जैव स्थिरीकरण जीवों के ऊतकों, प्रोटीनों, एमीनो अम्लों तथा न्यूक्लिक अम्लों का एक घटक नाइट्रोजन होती है। नाइट्रोजन का उपयोग न तो पौधे न ही जंतु इसके तत्त्व के रूप में कर सकते हैं। इसके उपयोग के लिए इसे नाइट्रेट के रूप में बदलना पड़ता है। कुछ विशेष जीवाणु वायुमंडल की नाइट्रोजन को स्थिरीकरण या स्वांगीकरण द्वारा नाइट्रेट या नाइट्राइट्स में परिवर्तित कर देते हैं।

नाइट्रोजन का स्थिरीकरण-कुछ विशेष जीवाणु ही नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल सकते हैं परंतु नील-हरित शैवाल भी नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने में सक्षम होते हैं। नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु फलीदार फसल के पौधों की जड़ों की गांठों में पाए जाते हैं। जीवाणुओं तथा शैवाल द्वारा किए गए नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नाइट्रेट्स या नाइट्राइट्स के रूप में होता है जिसका फिर सूक्ष्मजीवों द्वारा अमोनीकरण किया जाता है।

मिट्टी में स्थित नाइट्रेट पौधों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। अमोनिया के यौगिकों को नाइट्राइट में बदला जाता है जिनमें NO
2 होती है। ये यौगिक घुलनशील होते हैं। इसी प्रकार नाइट्रोबेक्टर जीवाणु इन नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलते हैं जिन्हें पौधों की जड़ें अवशोषित कर लेती हैं।

एक अन्य प्रकार के सूक्ष्मजीव इन नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स को अपघटित करके नाइट्रोजन को मुक्त करते हैं। सूक्ष्मजीव डीनाइट्रीकरण प्रक्रिया द्वारा पौधों तथा जंतुओं के मृत शरीरों को अपघटित करके नाइट्रोजन के रूप में मुक्त करते हैं जो वायुमंडल में फिर से मिल जाती है। इस प्रकार नाइट्रोजन चक्र चलता रहता है।

प्रश्न 9.
प्रकृति में ऑक्सीजन चक्र का विवरण लिखिए।
उत्तर-
प्रकृति में ऑक्सीजन चक्र-वायुमंडल के गैसीय घटकों में ऑक्सीजन की लगभग 21% मात्रा है। जल भंडारों में ऑक्सीजन पानी में घुली हुई स्थिति में होती है जिस पर जलीय जीव जीवित रहता है। जीवमंडल के सारे जीव, पौधे, जंतु तथा अपघटक श्वसन हेतु वायुमंडल में ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं तथा इस क्रिया में CO2 मुक्त होती है। कोयला, लकड़ी तथा अन्य ईंधनों के दहन में ऑक्सीजन प्रयुक्त होती है। इन सभी प्रक्रियाओं में वायुमंडल की ऑक्सीजन निरंतर CO2 में परिवर्तित होती रहती है।

ऑक्सीजन का लगातार सांस लेने में उपयोग CO2 की मात्रा बढ़ाता है। परंतु हरे पौधे दिन में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा वायुमंडल की CO, को भोजन तैयार करने हेतु उपयोग करते हैं तथा ऑक्सीजन को मुक्त करते हैं। इस प्रकार ऑक्सीजन की मात्रा कम नहीं होती तथा CO2 की मात्रा में वृद्धि नहीं होती। ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्सइड अभूतपूर्व संतुलन बनाए रखने में तथा इन दोनों चक्रों में जीव प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
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प्रश्न 10.
जीवमंडल में कार्बन चक्र किस प्रकार संपन्न होता है ? विवरण दीजिए।
उत्तर-
जीवमंडल में कार्बन चक्र-जीवमंडल में सभी प्राणियों का मूल घटक कार्बन है जो कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्लों के रूप मे होता है। गैसीय रूप में कार्बन का भंडार वायुमंडल है। कार्बन वायु में कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में प्राप्त होता है जो लगभग (0.03.- 0.04 % है। कार्बन का स्थानांतरण आहार श्रृंखला के माध्यम से होता है। वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड को हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट के रूप में इकट्ठा करते हैं। पोषण रीति से यह शाकाहारी जंतुओं से मांसाहारी जंतुओं में खाद्य पदार्थ के रूप में बदलता रहता है। जंतुओं के अपघटकों द्वारा यह फिर वायुमंडल एवं जल भंडारों में वापिस चला जाता है। वायुमंडल एवं जल भंडारों के मध्य CO2 का विनिमय लगातार चलता रहता है। ज्वालामुखी पर्वतों से भी वायुमंडल को कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है।
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विभिन्न प्रकार के पदार्थों के गलने, सड़ने तथा जलने से कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में मिलती रहती है। कार्बनिक यौगिकों से अनेक प्रकार के पदार्थ प्राप्त होते हैं जिनके जलाने से CO उत्पन्न होती है जैसे- पेट्रोलियम आदि। वानस्पतिक कार्बनिक यौगकों से कोयला भी प्राप्त होता है जो जल कर कार्बन को CO2 के रूप में मिला देता है। इस प्रकार लगातार CO2 की मात्रा बढ़ती जाती है जिसका उपयोग हरे पौधे तथा सागर करते हैं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वायुमंडल की रचना कैसे होती है ?
उत्तर-
वायुमंडल की रचना अनेक गैसों के मिश्रण से होती है। वायु एक विलयन है जिसमें कुछ गैसें अधिक मात्रा में तो कुछ कम मात्रा में विद्यमान हैं।

  1. मुख्य गैसें-नाइट्रोजन और ऑक्सीजन।
  2. सूक्ष्म मात्रा में गैसें-आर्गान, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प।
  3. अति सूक्ष्म मात्रा में गैसें-हीलियम, निऑन, क्रिप्टॉन, जीनॉन। हमारा वायुमंडल पृथ्वी से लगभग 120 km ऊँचाई तक फैला हुआ है। वायु की संघटना ताप तथा ऊँचाई के साथ बदलती रहती है।

प्रश्न 2.
हमारे दैनिक जीवन में मौसम की भविष्यवाणी का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
हमारे दैनिक जीवन में मौसम की भविष्यवाणी बहुत महत्त्वपूर्ण है। बादलों के बनने, वर्षा होने, हिमपात, आंधी व तूफान आदि में वायुमंडल का महत्त्वपूर्ण योगदान है। वायुमंडल के अध्ययन से मौसम संबंधी अनेक बातों की भविष्यवाणी की जा सकती है जिस से विनाश के प्रबंधन में सहायता मिल जाती है। मूसलाधार वर्षा, बादलों के फटने, चक्रवात, समुद्री हलचलों, सूखा आदि की पूर्व जानकारी मिल जाने से जन-जीवन की सुरक्षा का प्रबंध किया जा सकता है। इससे जनजीवन, पशु और फसलों को बचाने के प्रयत्नों में सफलता मिलती है। सूखे और बाढ़ से निपटने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 3.
ओजोन परत पर संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
वायुमंडल के मध्य मंडल में ओजोन परत पाई जाती है जिसमें मुख्यतः ओजोन (O3) होती है। पृथ्वी से 16 km की ऊंचाई पर सूर्य की किरणें वहां उपस्थित ऑक्सीजन (O2) को ओजोन (O2) में परिवर्तित कर देती है। 23 km की ऊंचाई तक ओजोन का घनत्व अधिकतम होता है।

प्रश्न 4.
ओज़ोन परत का महत्त्व क्या है ?
उत्तर-
पृथ्वी से लगभग 16 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओज़ोन की एक परत आरंभ होती है जो समस्त जीवों के लिए अति महत्त्वपूर्ण है। यह परत सूर्य से आ रही हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों (U-V Rays) को सोख लेती है जिसमें पराबैंगनी विकिरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पातीं। पराबैंगनी विकिरणों की तरंगदैर्ध्य कम होती है तथा यह हमारे शरीर में बहुत गहराई तक प्रवेश कर सकती हैं जो जैव शरीर के विभिन्न ऊतकों को नष्ट कर सकती है तथा त्वचा के कैंसर का कारण भी बन सकती है। ओजोन परत पराबैंगनी विकिरणों के कुप्रभाव से मनुष्य को बचाती है। इस परत की सबसे अधिक सघनता 23 कि०मी० ऊपर है।

प्रश्न 5.
वायु प्रदूषण क्या है ? कुछ वायु प्रदूषकों के नाम बताओ।
उत्तर-
वायु प्रदूषण – धूलकण, धुआं. तथा कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी विषैली गैसों की उपस्थिति द्वारा वायु का गंदा होना वायु प्रदूषण कहलाता है।

वायु प्रदूषक – कुछ प्रमुख वायु प्रदूषक हैं कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओज़ोन, धूलकण. तथा धुआं आदि।

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प्रश्न 6.
कार्बन डाइऑक्साइड का जीवों पर क्या कुप्रभाव पड़ता है ? .
उत्तर-
वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड का जीवों पर निम्नलिखित कुंप्रभाव पड़ता है-

  1. वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा द्वारा सूर्य की किरणों का अवशोषण करके अत्यधिक ताप पैदा करता है। यह ताप ग्लेशियर को पिघला देता है जिससे समुद्रीय तटों के निचले भागों में बाढ़ आ जाती है।
  2. अधिक ताप फसलों को नष्ट करके कृषि पैदावार को कम कर देता है।
  3. वायुमंडल के अधिक ताप के कारण जीवन असुविधाजनक हो जाता है जिससे काम करने की क्षमता कम हो जाती है।

प्रश्न 7.
वायुमंडल में पौधों की भूमिका स्पष्ट करो।
उत्तर-
पौधे प्रकाश-संश्लेषण तथा श्वसन प्रक्रियाओं के द्वारा वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) तथा ऑक्सीजन (O2) के स्तर को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीव-जंतु श्वसन क्रिया द्वारा वायुमंडल में से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। इसके विपरीत पौधे, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करके ऑक्सीजन गैस छोड़ते हैं।

प्रश्न 8.
पौधे वायुमंडल के ताप को किस प्रकार कम करते हैं ?
उत्तर-
पौधे अपनी सतह से लगातार वाष्पोत्सर्जन से जल वाष्पित करते हैं। इस प्रक्रिया में निकली जल वाष्प वायुमंडल में आ जाती है। ये जलवाष्प अपनी वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा वायुमंडल से लेते हैं। अतः इस प्रक्रिया से वायुमंडल का ताप कम होने लगता है।

प्रश्न 9.
लंबित कणीय द्रव्य क्या हैं ? इनसे क्या क्षति पहुँचती है ?
उत्तर-
लंबित कणीय द्रव्य – ये वायु में उपस्थित ठोस कण हैं जो धूल, धुएं और वाष्पों के रूप में विद्यमान रहते हैं। शीत ऋतु में धुंध के कारण यहीं बनते हैं। महानगरों में वाहनों तथा उद्योगों की अधिकता के कारण इसकी उपस्थिति वहाँ अधिक होती है। इनके कारण श्वसन में कठिनाई होती है। अधिक सूक्ष्म सांस के रास्ते फेफड़ों में प्रवेश कर उन्हें खराब कर सकते हैं या श्वसन संबंधी बीमारियां प्रदान कर सकते हैं।

प्रश्न 10.
क्लोरो फ्लुओरो कार्बन (CFC) किस प्रकार ओज़ोन-परत को क्षति पहुँचाते हैं ?
उत्तर-
क्लोरो फ्लुओरो कार्बन (CFC) वातानुकूलन तथा शीतलन संयंत्रों में प्रयुक्त किए जाते हैं। जब ये समताप मंडल में चले जाते हैं तो विसरित हो कर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से विखंडित हो जाते हैं और फिर ओज़ोन परत को क्षति पहुंचाते हैं। ओजोन परत ही सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती
है।

प्रश्न 11.
धूम कुहरा (Smog) किस प्रकार बनता है ? इससे क्या हानि होती है ?
उत्तर-
धूम कुहरा (धूम + कोहरा) वायु में नाइट्रोजन के ऑक्साइडों के कारण छा जाता है। यह अम्लीय वर्षा का कारण भी बनता है। यह जीवाश्मी ईंधन के दहन से उत्पन्न होता है। इससे साँस की बीमारियाँ हो जाती हैं। बच्चे इससे अधिक प्रभावित होते हैं।

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प्रश्न 12.
भूमंडलीय ऊष्णता को नियंत्रित करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं ?
उत्तर-
सारे विश्व में भू-मंडलीय ऊष्णता को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रीन हाऊस गैसों के सांद्रण को नियंत्रित करके ऐसा किया जा सकता है। इस प्रयत्न में पूरी सफलता तब पूरी मिलेगी जब प्राकृतिक गैस और जीवाश्म ईंधनों के ज्वलन को कम कर दिया जाएगा।

प्रश्न 13.
नाइट्रोजन के जैविक स्थिरीकरण में पौधों की मूल या जड़ ग्रंथियों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
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चना, मटर, सेम जैसे फलीदार पौधों की जड़ों में ग्रंथियां होती हैं। इन ग्रंथियों में नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणु उपस्थित रहते हैं। वे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर सकते हैं।

प्रश्न 14.
पृथ्वी की ऊपरी सतह का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
पृथ्वी की ऊपरी सतह मृदा से ढकी हुई है जो जीवन के लिए अति उपयोगी है। यद्यपि इस पर मृदा की मोटाई कुछ मि० मी० से लेकर 3-4 मीटर तक ही होती है पर यह जीवन के लिए परमावश्यक पौधों की वृद्धि एवं विकास की आधार है। इसी से खनिज एवं लवण प्राप्त होते हैं। भूमिगत जल इसी के नीचे चट्टानों पर इकट्ठा होता है।

प्रश्न 15.
चट्टानों के कण प्रकृति द्वारा किस प्रकार अपघटित होते हैं ?
उत्तर-
ऑक्सीकरण, अपचयन, कार्बोनेटीकरण, जल–अपघटन, जलभंजन आदि से चट्टानों के कण प्रकृति द्वारा अपघटित होते हैं। कुछ खनिज पानी में घुल कर वर्षा के पानी के साथ रिसते हुए नीचे पहुँच जाते हैं। लाइकेन जैसे कुछ पौधे चट्टानों पर रह कर अम्लों को बनाते हैं जो मिट्टी की रचना में सहायता देते हैं। कुछ जीवाणु भी इसमें सहायता प्रदान करते हैं।

प्रश्न 16.
मृदा अपरदन विश्व के लिए चिंता का कारण क्यों है ?
उत्तर-
मृदा अपरदन से पृथ्वी की ऊपरी उपजाऊ सतह पानी में बह जाती है या तेज़ वायु से उड़ जाती है। इससे हमारे संसाधन का आधार नष्ट हो रहा है। मिट्टी के उपजाऊ न रहने से फसलों से पूरी मेहनत का फल नहीं मिलेगा।

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प्रश्न 17.
मृदा अपरदन से मृदा के नष्ट होने के अतिरिक्त अन्य नुकसान लिखिए।
उत्तर-
मृदा अपरदन मिट्टी को नष्ट करने के अतिरिक्त और भी अधिक नुकसान पहुंचाता है। अवनलिकाओं के बनने से सड़क तथा इमारतों को नुकसान पहुँचता है। हवा तथा बाढ़ के द्वारा बहाकर लाई गई मृदा तालाबों, झीलों तथा नदियों में जमा हो जाती है। यह जल को पंकिल बना देता है। इससे तालाबों, झीलों तथा नदियों की गहराई कम हो जाती है। गाद के कारण उनके स्तर से जलीय प्राणियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसके अतिरिक्त यह क्षेत्र बाढ़ के प्रकोप का क्षेत्र बन जाता है। जिसके फलस्वरूप स्थानीय जलवायु तथा पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।

प्रश्न 18.
मृदा की संरचना में जैविक अपघटकों का योगदान लिखिए।
उत्तर-
मृदा की संरचना में कीड़े-मकौड़ों और पेड़-पौधों का बहुत बड़ा योगदान होता है। मॉस तथा लाइकेन जैसे पौधे चट्टानों पर उगते हैं। इससे उत्पन्न अम्लों से चट्टानों पर रासायनिक क्रिया होती है जिस कारण वे टूटती हैं और मिट्टी के कण बनते हैं। पेड़ों की जड़ें चट्टानों के छिद्रों में उग कर उन पर दबाव डालती हैं जिससे वे टूटती हैं और मृदा में बदल जाती हैं। चींटियां तथा तरह-तरह के कीड़े-मकौड़े मृदा को बनाने में सहयोग देते हैं।

प्रश्न 19.
मिट्टी में ह्यूमस की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर-
मिट्टी में ह्यूमस की उपयोगिता-

  1. मिट्टी के कणों को परस्पर जोड़ कर उनकी प्रकृति में सुधार करता है।
  2. कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ा कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाता है।
  3. वर्षा के कारण खनिजों को होने वाले नुकसान को रोकता है।
  4. मिट्टी में पानी को संरक्षित करता है।
  5. रेतली मिट्टी की संरचना में परिवर्तन कर उसे उपजाऊ बनाता है।
  6. कीटों, केंचुओं, सूक्ष्म जीवों आदि को भोजन प्रदान करता है।

प्रश्न 20.
मिट्टी में विभिन्न जीवों की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर-
मिट्टी में विभिन्न जीवों की उपयोगिता-

  1. जीवाणु ह्यूमस को बढ़ाते हैं।
  2. केंचुए मिट्टी को मुलायम बनाते हैं।
  3. राइजोबियम जैसे जीवाणु फलीदार पौधों की जड़ों की सहायता से वायु में उपस्थित नाइट्रोजन को पानी में घुलनशील नाइट्रेट में बदल कर उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।
  4. कुछ जीव मिट्टी में छिद्र करते हैं जिससे पौधों को बढ़ने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 21.
दो ऐसी क्रियाएं बताइए जो वायुमंडल में से ऑक्सीजन का उपभोग करती हैं तथा एक ऐसी प्रक्रिया जो वायुमंडल को ऑक्सीजन प्रदान करती है।
उत्तर-

  1. वायुमंडल में से ऑक्सीजन का प्रयोग करने वाली दो क्रियाओं के नाम हैं-
    (a) पौधों, जंतुओं तथा अपघटकों जैसे जीवों के द्वारा सांस लेना।
    (b) ईंधनों का दहन।
  2. वायुमंडल को ऑक्सीजन प्रदान करने वाली एक प्रमुख प्रक्रिया का नाम है-हरे पौधों द्वारा किया गया प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)।

प्रश्न 22.
उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
उर्वरक मिट्टी और पानी प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इस प्रदूषण से मिट्टी में पाए जाने वाले लाभदायक जीव और जल में पाई जाने वाली मछलियाँ प्रभावित होती हैं । उर्वरकों के कारण शैवालों (Algae) की वृद्धि दर बढ़ जाती है और ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है जिससे पानी में रहने वाले जीवों को भारी क्षति पहुंचती है। यह जल पीने योग्य नहीं रहता।

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प्रश्न 23.
वनों के कटने से क्या हानि होती है ?
उत्तर-
यदि वृक्षों के कटने की दर उनकी वृद्धि दर से अधिक हो तो वृक्षों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाएगी। वृक्ष वाष्पन की क्रिया से बड़ी मात्रा में जल मुक्त करते हैं। इससे वर्षा वाले बादल आसानी से बनते हैं। जब वन कम हो जाते हैं तब उस क्षेत्र में वर्षा कम होती है। इससे वृक्ष कम संख्या में उग पाते हैं। इस प्रकार एक दुष्चक्र आरंभ हो जाता है और वह क्षेत्र रेगिस्तान भी बन सकता है। वृक्षों के बहुत अधिक मात्रा में कटने से जैव पदार्थों में समृद्ध मिट्टी की सबसे ऊपरी परत वर्षा के पानी के साथ बहकर लुप्त होने लगती है।

प्रश्न 24.
भारी उद्योगों के स्थापित होने से स्थानीय जलवायु पर होने वाले कोई दो प्रभाव लिखिए।
उत्तर-

  1. भारी उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं से CO2 के द्वारा प्रदूषण होता है तथा वायुमंडल के तापमान में वृद्धि हो जाती है।
  2. आर्द्रता कम हो जाने से पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है।

प्रश्न 25.
किसी व्यस्त चौराहे से प्रतिपल अनेक मोटर वाहन गुजरते हैं। चौराहे के निकट वायुमंडल में किन गैसों का सांद्रण अधिक होगा ?
उत्तर-
किसी व्यस्त चौराहे से प्रतिपल अनेक मोटर वाहन गुज़रने से चौराहे के निकट वायुमंडल में

  1. कार्बन मोनोऑक्साइड,
  2. कार्बन डाइऑक्साइड,
  3. सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसों का सांद्रण होगा।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
हमारे ज्ञान के आधार पर किस ग्रह पर जीवन मौजूद है ?
उत्तर-
पृथ्वी पर।

प्रश्न 2.
जीवन के लिए किस-किस की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
परिवेश, ताप, पानी और भोजन।

प्रश्न 3.
सभी जीवों की मूल आवश्यकता किसके द्वारा पूरी की जाती है ?
उत्तर-
सूर्य से ऊर्जा और पृथ्वी पर उपलब्ध संपदा द्वारा।

प्रश्न 4.
पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
स्थलमंडल।

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प्रश्न 5.
पृथ्वी पर कितने प्रतिशत पानी है ?
उत्तर-
75% (लगभग)।

प्रश्न 6.
हवा पृथ्वी को किस प्रकार ढांपे हुए है ?
उत्तर-
एक कंबल के समान।

प्रश्न 7.
जीवमंडल क्या है ?
उत्तर-
जीवन को आश्रय देने वाला पृथ्वी का वह घेरा जहां वायुमंडल, स्थलमंडल और जलमंडल एक-दूसरे से मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं उसे जीवमंडल कहते हैं।

प्रश्न 8.
जीवमंडल के जैविक घटक कौन-से हैं ?
उत्तर-
सभी सजीव।

प्रश्न 9.
जीवमंडल के निर्जीव घटक कौन-से हैं ?
उत्तर-
हवा, जल और मिट्टी।

प्रश्न 10.
वायु किन गैसों का मिश्रण है ?
उत्तर-
नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प।

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प्रश्न 11.
शुक्र और मंगल ग्रहों पर मुख्य रूप से कौन-सी गैस है ?
उत्तर-
95 से 97% तक CO2 गैस।

प्रश्न 12.
यूकेरियोटिक और प्रोकेरियोटिक कोशिकाओं को ग्लूकोज़ अणुओं को तोड़ने और ऊर्जा पाने के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
ऑक्सीजन गैस की।

प्रश्न 13.
दहन क्रिया क्या है ?
उत्तर-
वह क्रिया जिसमें O2 की खपत और CO2 का उत्पादन होता है उसे दहन क्रिया कहते हैं।

प्रश्न 14.
CO2 किन दो विधियों से स्थिर होती है ?
उत्तर-

  1. हरे पेड़- पौधे के द्वारा CO2 को कार्बोहाइड्रेट्स में बदलने में।
  2. समुद्री जल में घुले कार्बोनेट से कवच बनाने में।

प्रश्न 15.
पृथ्वी के औसत तापमान को वर्ष-भर कौन नियत रखता है ?
उत्तर-
वायुमंडल।

प्रश्न 16.
चंद्रमा की सतह पर अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना होता है ?
उत्तर-
न्यूनतम तापमान = -190°C
अधिकतम तापमान = 110°C.

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प्रश्न 17.
गर्म होने से वायु में कौन-सी धाराएं उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर-
संवहन धाराएं।

प्रश्न 18.
जल और स्थल के विकिरण से गर्म होकर वायु किस तरफ उठती है ?
उत्तर-
ऊपर की ओर।

प्रश्न 19.
कौन-सी वायु अधिक गर्म होती है-जल के ऊपर या स्थल के ऊपर ?
उत्तर-
स्थल के ऊपर।

प्रश्न 20.
दिन के समय वायु किस दिशा से किस दिशा की ओर प्रस्थान करती है ?
उत्तर-
समुद्र से स्थल की ओर।

प्रश्न 21.
रात के समय वायु किस दिशा से किस दिशा की ओर बढ़ती है ?
उत्तर-
स्थल से समुद्र की ओर।

प्रश्न 22.
वायु की गतियां किसका परिणाम हैं ?
उत्तर-
वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का परिणाम।

प्रश्न 23.
हवाओं को कौन-से दो कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-
पृथ्वी की घूर्णन गति तथा पर्वत श्रृंखलाएं।

प्रश्न 24.
बादल कैसे बनते हैं ?
उत्तर-
गर्म वायु के साथ जलवाष्प ऊपर उठकर संघनित हो जाते हैं और हवा में उपस्थित कणों के चारों ओर जमा होकर बूंदों में बदल कर बादलों का रूप ले लेते हैं।

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प्रश्न 25.
ओले कब गिरते हैं ?
उत्तर-
जब हवा का तापमान कम हो जाता है तब वर्षा की बूंदें ओलों के रूप में गिरती हैं।

प्रश्न 26.
वर्षा का पैटर्न किस पैटर्न पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
पवन के पैटर्न पर।

प्रश्न 27.
भारत के बड़े भू-भाग पर किस कारण वर्षा होती है ?
उत्तर-
दक्षिण पश्चिम या उत्तर पूर्वी मानसून के कारण।

प्रश्न 28.
वायु की गुणवत्ता में कमी क्यों आई है ?
उत्तर-
नाइट्रोजन और सल्फर के जलने के कारण।

प्रश्न 29.
धूम कोहरा किससे बनता है ?
उत्तर-
सर्दी के मौसम में पानी के साथ हवा में संघनन से।

प्रश्न 30.
धूम कोहरा किसकी ओर संकेत करता है ?
उत्तर-
वायु प्रदूषण की ओर।

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प्रश्न 31.
शुद्ध रूप में जल कहाँ विद्यमान है ?
उत्तर-
ध्रुवों पर बर्फ के रूप में, भूमिगत जल, नदियों, झीलों, तालाबों के रूप में।

प्रश्न 32.
स्थलीय प्राणी खारे पानी का प्रयोग क्यों नहीं कर पाते ?
उत्तर-
उनका शरीर खारे पानी में नमक की अधिक मात्रा को सहज नहीं कर पाता।

प्रश्न 33.
पानी की उपलब्धता स्पीशीज़ के वर्ग को किस-किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर-

  1. संख्या
  2. जीवन में विविधता।

प्रश्न 34.
जलाशयों में प्राय: क्या मिल जाता है ?
उत्तर-
पीड़कनाशी, उर्वरक, विषैले पदार्थ, जीवाणु तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ ।

प्रश्न 35.
जलीय जीव प्रदूषण से कब प्रभावित होते हैं ?
उत्तर-
जब जलीय ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

प्रश्न 36.
जलाशय का तापमान बढ़ने से क्या दुष्परिणाम होते हैं ?
उत्तर-
जीवों का प्रजनन प्रभावित होता है क्योंकि विभिन्न प्रकार के जंतुओं के अंडे और लारवा तापमान परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं।

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प्रश्न 37.
मिट्टी की सबसे बाहरी परत को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
भूपृष्ठ।

प्रश्न 38.
भूपृष्ठ में उपस्थित खनिज किस कार्य में सहायक होते हैं ?
उत्तर-
जीवों के पालन-पोषण में।

प्रश्न 39.
पत्थर टूट कर मिट्टी में किन प्रक्रमों से बदलते हैं ?
उत्तर-
भौतिक, रासायनिक और कुछ जैव प्रक्रमों से।

प्रश्न 40.
मिट्टी क्या है ?
उत्तर-
चट्टानों के टूटने के बाद अंत में बचे महीन कण मिट्टी कहलाते हैं।

प्रश्न 41.
कौन-से पौधे मिट्टी बनाने में सहायक होते हैं ?
उत्तर-
लिचन, मॉस तथा अन्य छोटे-बड़े पेड़-पौधे।

प्रश्न 42.
ह्यूमस किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मिट्टी में गले-सड़े जीवों के अवशेष ह्यूमस कहलाते हैं।

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प्रश्न 43.
मिट्टी के गुण किस-किस के कारण होते हैं ?
उत्तर-
यूमस की मात्रा तथा सूक्ष्म जीवों के कारण।

प्रश्न 44.
मिट्टी के पोषक तत्व किस पर निर्भर करते हैं ?
उत्तर-
उन चट्टानों पर जिनसे टूट कर वह मिट्टी बनी थी।

प्रश्न 45.
मिट्टी की संरचना को किसने बर्बाद किया है ?
उत्तर-
पीड़कनाशकों तथा उर्वरकों के अधिक प्रयोग ने।

प्रश्न 46.
पीड़कनाशकों और उर्वरकों ने मिट्टी में किसे नष्ट कर दिया है ?
उत्तर-
सूक्ष्मजीवों तथा केंचुओं को।

प्रश्न 47.
किस प्रकार की खेती न करने से मिट्टी जल्दी बंजर बन जाती है ?
उत्तर-
संपूषशीय खेती।

प्रश्न 48.
मिट्टी में स्थित जैविक विविधता किस प्रकार नष्ट होती है ?
उत्तर-
उपयोगी घटकों का मिट्टी से हटना तथा दूसरे हानिकारक पदार्थों के मिट्टी में मिलने से।

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प्रश्न 49.
मिट्टी का अपरदन किन स्थानों पर त्वरित होता है ?
उत्तर-
पहाड़ी और पर्वतों वाले भागों में।

प्रश्न 50.
जलीय चक्र के दौरान पानी को क्या होता है ?
उत्तर-
अनेक घुलनशील पदार्थ पानी में घुल कर नदियों के माध्यम से समुद्र में चले जाते हैं। इससे मिट्टी के पोषक तत्व भी समुद्र में चले जाते हैं जिनका उपयोग समुद्री जीव-जंतु करते हैं।

प्रश्न 51.
वायुमंडल में नाइट्रोजन कितने प्रतिशत है ?
उत्तर-
78% (लगभग)।

प्रश्न 52.
नाइट्रोजन का उपयोग जीवन के लिए किस रूप से है ?
उत्तर-
प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, DNA, RNA और विटामिन रूप से।

प्रश्न 53.
अन्य जैविक यौगिकों में नाइट्रोजन किस रूप में विद्यमान है ?
उत्तर-
ऐल्केलॉइड तथा यूरिया।

प्रश्न 54.
नाइट्रोजन को स्थिरीकरण करने वाले कौन-से पौधे होते हैं ?
उत्तर-
द्विबीज पत्री पौधे।

प्रश्न 55.
नाइट्रोजन को स्थिर करने वाले बैक्टीरिया कहाँ होते हैं ?
उत्तर-
फलीदार पौधों की जड़ों की मूल ग्रंथिका में।

प्रश्न 56.
बादलों में चमकने वाली बिजली नाइट्रोजन को क्या करती है ?
उत्तर-
नाइट्रोजन को ऑक्साइड में बदल देती है।

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प्रश्न 57.
सामान्यतः पौधे नाइट्रेटस और नाइट्राइट्स को किस में बदल देते हैं ?
उत्तर-
अमीनो अम्ल में।

प्रश्न 58.
विभिन्न खनिजों में कार्बन किस रूप में मिलता है ?
उत्तर-
कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट के रूप में।

प्रश्न 59.
जीवन में कार्बन आधारित अणुओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, न्यूक्लिक अम्ल, विटामिन।

प्रश्न 60.
वायुमंडल में कितने प्रतिशत ऑक्सीजन गैस है ?
उत्तर-
21% (लगभग)।

प्रश्न 61.
ऑक्सीजन का उपयोग किन तीन प्रक्रियाओं में होता है ?
उत्तर-
श्वसन, दहन और नाइट्रोजन ऑक्साइड के निर्माण में।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित स्थितियों में से किन स्थितियों में संबद्ध संख्याओं की सूची A.P. है और क्यों ?
(i) प्रत्येक किलो मीटर के बाद का टैक्सी का किराया जबकि प्रथम किलो मीटर के लिए किराया ₹ 15 है और प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए किराया ₹ 8 है।

(ii) किसी बेलन (cylinder) में उपस्थित हवा की मात्रा, जबकि वायु निकालने वाला पंप प्रत्येक बार बेलन की शेष हवा का \(\frac{1}{4}\) भाग बाहर निकाल देता है।

(iii) प्रत्येक मीटर की खुदाई के बाद, एक कुआँ खोदने में आई लागत, जबकि प्रथम मीटर खुदाई की लागत ₹ 150 है और बाद में प्रत्येक मीटर की खुदाई की लागत ₹ 50 बढ़ती जाती है।

(iv) खाते में प्रत्येक वर्षका मिश्रधन,जबकि ₹ 10000 की राशि8%वार्षिक की दर से चक्रवृद्धि ब्याज पर जमा की जाती है।
हल :
(i) मान लीजिए टैक्सी का n वें कि मी का किराया Tn से व्यक्त किया जाता है।
प्रश्न के अनुसार,
T1 = 15 km ; T2 = 15 + 8 = 23 ;
T3 = 23 + 8 = 31 ……….
अब, T3 – T2 = 31 – 23 = 8
T2 – T1 = 23 – 15 = 8
यहाँ T3 – T2 = T2 – T1 = 8
∴ दी गई स्थिति A.P. के रूप की है।

(ii) मान लीजिए एक बेलन में उपस्थित हवा की मात्रा को Tn से व्यक्त करते हैं।
प्रश्न के अनुसार,

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

यहाँ T3 – T2 ≠ T2 – T1
∴ दी गई स्थिति A.P. का रूप नहीं है

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

(iii) मान लीजिए एक कुआँ खोदने के nवें मीटर की लागत को Tn से व्यक्त करते हैं। प्रश्न के अनुसार,
T1 = ₹ 150
T2 = ₹ (150 +50) = ₹ 200
T3 = ₹ (200 + 50) = ₹ 250
और आगे भी अब T3 – T2 = ₹ (250 – 200) = ₹ 50
T2 – T1 = ₹ (200 – 150) = ₹ 50
यहाँ T3 – T2 = T2 – T1 = 50
∴ दी गई स्थिति A.P. का ही रूप है।

(iv) मान लीजिए nवें वर्ष के मिश्रधन को Tn से व्यक्त किया जाता है। प्रश्न के अनुसार,
T1 = ₹ 10,000

T2 = ₹ 10,000 + ₹ \(\left[\frac{10,000 \times 8 \times 1}{100}\right]\)
= ₹ 10,000 + 800 = ₹ 10,800
T3 = ₹ 10,800 + \(\left[\frac{10,000 \times 8 \times 1}{100}\right]\)
= ₹ 10,800 + 864
= 11,640 रु और इसी तरह आगे भी
अब T3 – T2 = ₹ (11,640 – 10,800) = ₹ 840
T – T = ₹ (10,800 – 10,000) = ₹ 800
यहाँ T3 – T2 # T2 – T1
∴ दी गई स्थिति A.P. के रूप की नहीं है।

प्रश्न 2.
दी हुई A.P. के प्रथम चार पद लिखिए, जबकि प्रथम पद और सार्व अंतर d निम्नलिखित हैं:
(i) a = 10, d= 10
(ii) a = – 2, d = 0
(iii) a = 4, d = – 3
(iv) a = – 1, d = 7
(iv) a = – 1.25, d = -0.25
हल :
(i) दिया है कि प्रथम पद = a = 10
और सार्व अंतर = d = 10
∴ T1 = a = 10;
T2 = a + d
= 10+ 10 = 20;
T3 = a + 2d = 10 + 2 × 10
= 10 + 20 = 30;
T4 = a + 3d = 10 + 3 × 10
= 10 + 30 = 40
अतः, A.P. के प्रथम चार पद हैं : 10, 20, 30, 40………

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(ii) दिया है कि प्रथम पद = a = – 2
और सार्व अंतर = d = 0
∴ T1 = a = – 2;
T2 = a + d = – 2 + 0 = – 2
T3 = a + 2d = – 2 + 2 × 0 = – 2
T = a + 3d
= – 2 + 3 × 0 = – 2
अतः, A.P. के प्रथम चार पद हैं : – 2, – 2, – 2, – 2,…………

(iii) दिया है कि प्रथम पद = a = 4
और सार्व अंतर = d = – 3
∴ T1 = a = 4 ;
T2 = a + d
= 4 – 3 = 1
T3 = a + 2d
= 4 + 2 (- 3) = 4 – 6 = – 2
T4 = a + 3d
= 4 + 3 (- 3) = 4 – 9 = – 5
अतः, A.P. के प्रथम चार पद हैं :
4, 1, – 2, – 5,………..

(iv) दिया है कि प्रथम पद = a = – 1
और सार्व अंतर = d = \(\frac{1}{2}\)
∴ T1 = a = – 1;
T2 = a + d
= – 1 + \(\frac{1}{2}\) = – \(\frac{1}{2}\)
T3 = a + 2d
= – 1 + 2(\(\frac{1}{2}\))
= – 1 + 1 = 0
T4 = a + 3d
= – 1 + 3 (\(\frac{1}{2}\))
= \(\frac{-2+3}{2}=\frac{1}{2}\).
अतः, A.P. के प्रथम चार पद हैं :
– 1, – \(\frac{1}{2}\), 0, \(\frac{1}{2}\), ……………..

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(v) दिया है कि प्रथम पद = a = – 1.25
और सार्व अंतर = d = – 0.25
∴ T1 = a = – 1.25;
T2 = a +d = – 1.25 – 0.25 = – 1.50
T3 = a+2d = – 1.25 + 2 (- 0.25)
= – 1.25 – 0.50 = – 1.75
T4 = a + 3d = – 1.25 + 3 (- 0.25)
= – 1.25 – 0.75 = – 2
अतः, A.P. के प्रथम चार पद हैं :
– 1.25, – 1.50, – 1.75, – 2,

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से प्रत्येक A.P.के लिए प्रथम पद तथा सार्व अंतर लिखिए :
(i) 3, 1, – 1, – 3, ………
(ii) – 5, – 1, 3, 7, ………..
(iii) \(\frac{1}{3}, \frac{5}{3}, \frac{9}{3}, \frac{13}{3}, \ldots\)
(iv) 0.6, 1.7, 2.8, 3.9, ……….
हल :
(i) दी गई A.P, है : 3, 1, – 1, – 3, …………..
यहाँ T1 = 3, T2 = 1;
T3 = – 1, T4 = – 3, ………
प्रथम पद = T1 = 3
अब, T2 – T1 = 1 – 3 = – 2
T3 – T2 = – 1 – 1 = – 2
T4 – T3 = – 3 + 1 = – 2
∴ T2 – T2 = T3 – T2 = T4 – T3 = – 2
अतः, सार्व अंतर = – 2 और प्रथम पद = 3

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(ii) दी गई A.P. है : – 5, – 1, 3, 7, …
T1 = – 5,
T2 = -1,
T3 = 3,
T4 = 7
प्रथम पद = T1 = 5
अब,
T2 – T1 = – 1 + 5 = 4
T3 – T2 = 3 + 1 = 4
T4 – T3 = 7 – 3 = 4
T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3 = 4
अतः, सार्व अंतर = 4
और प्रथम पद = – 5

(iii) दी गई A.P. है \(\frac{1}{3}, \frac{5}{3}, \frac{9}{3}, \frac{13}{3}, \ldots\)
यहाँ T1 = \(\frac{1}{3}\)

T2 = \(\frac{5}{3}\)

T3 = \(\frac{9}{3}\)

T4 = \(\frac{15}{3}\)

प्रथम पद = T1 = \(\frac{1}{3}\)
अब T2 – T1 = \(\frac{5}{3}-\frac{1}{3}=\frac{5-1}{3}=\frac{4}{3}\)

T3 – T2 = \(\frac{9}{3}-\frac{5}{3}=\frac{9-5}{3}=\frac{4}{3}\)

T4 – T3 = \(\frac{13}{3}-\frac{9}{3}=\frac{13-9}{3}=\frac{4}{3}\)

∴ T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T2 = \(\frac{4}{3}\)
अतः, सार्व अंतर = \(\frac{4}{3}\) और प्रथम पद = \(\frac{1}{3}\)

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(iv) दी गई A.P. है 0.6, 1.7, 2.8, 3.9, ………….
यहाँ T1 = 0.6, T2 = 1.7,
T3 = 2.8, T4 = 3.9
प्रथम पद = T1 = 0.6
अब, T2 – T1 = 1.7 – 0.6 = 1.1
T3 – T2 = 2.8 – 1.7 = 1.1
T4 – T3 = 3.9 – 2.8 = 1.1
अतः, सार्व अंतर = 1.1 और प्रथम पद = 0.6

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-कौन सी A.P. है ? यदि कोई A.P है, तो इसका सार्व अंतर ज्ञात कीजिए और इनके तीन और पद लिखिए :
(i) 2, 4, 8, 16
(ii) 2, \(\frac{5}{2}\), 3, \(\frac{7}{2}\), ………..
(iii) – 1.2, – 3.2, – 5.2, – 7.2 , …….
(iv) – 10, -6, – 2, 2,………
(v) 3, 3+ 2, 3 + 202,3+ 3/2,………..
(vi) 0.2, 0.22, 0.222, 0.2222, ………
(vii) 0, – 4, – 8, – 12, ………….
(viii) – \(\frac{1}{2}\), – \(\frac{1}{2}\), – \(\frac{1}{2}\), – \(\frac{1}{2}\), ……….
(ix) 1, 3, 9, 27, ……………
(x) a, 2a, 3a, 4a, …………….
(xi) a, a2, a3, a4, …………….
(xii) √2, √8, √18, √32, …………
(xiii) 13, 16, 19, 112, …………..
(xiv) 12, 32, 52, 72, ………….
(xv) 12, 32, 72, 73, …………..
हल :
(i) दिए गए पद हैं : 2, 4, 8, 16 ………
यहाँ T1 = 2, T2 = 4, T3 = 8, T4 = 16
T2 – T1 = 4 – 2 = 2
T3 – T2 = 8 – 4 = 4
∵ T2 – T2 ≠ T3 – T2
अत:, दी गई संख्याओं की सूची एक A.P. नहीं है।

(ii) दिए गए पद हैं : 2, \(\frac{5}{2}\), 3, \(\frac{7}{2}\), ……….
यहाँ T1 = 2, T2 = \(\frac{5}{2}\) = T3 = 3, T4 = \(\frac{7}{2}\)
T2 – T1 = \(\frac{5}{2}\) – 2
= \(\frac{5-4}{2}=\frac{1}{2}\)

T3 – T2 = 3 – \(\frac{5}{2}\)
= \(\frac{6-5}{2}=\frac{1}{2}\)

T4 – T3 = \(\frac{7}{2}\) – 3
= \(\frac{7-6}{2}=\frac{1}{2}\)

∵ T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3
∴ सार्व अंतर = d = \(\frac{1}{2}\)
अब, T5 = a + 4d
= 2 + 4 (\(\frac{1}{2}\)) = 4

T6 = a + 5d
= 2 + 5 (\(\frac{4}{4}\))
= \(\frac{4+5}{2}=\frac{9}{2}\)

T7 = a + 6d
= 2 + 6 (\(\frac{4}{4}\))
= 2 + 3 = 5

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

(iii) दिए गए पद हैं : – 1.2, – 3.2, -5.2, -7.2, …
यहाँ T1 = – 1.2, T2 = – 3.2,
T3 = -5.2, T4 = -7.2
T2 – T1 = — 3.2 + 1.2 = -2
T3 – T2 = – 5.2 + 3.2 = – 2
T4 – T3 = – 7.2 + 5.2 = -2
T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3 = – 2.
सार्व अंतर = d = -2
अब, T5 = a + 4d
= – 1.2 + 4 (- 2)
= – 1.2 – 8 = – 9.2

T6 = a + 5d
= – 1.2 + 5 (- 2)
= – 1.2 – 10 = – 11.2

T7 = a + 6d
= – 1.2 + 6 (- 2)
= – 1.2 – 12 = – 13.2

(iv) दिए गए पद हैं :- 10, – 6, – 2, 2,
यहाँ T1 = – 10, T2 = – 6,
T3 = – 2, T4 = 2
T2 – T1 = – 6 + 10 = 4
T3 – T2x x = – 2 + 6 =4
T4 – T3 = 2 + 2 = 4
∵ T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3 = 4
∴ सार्व अंतर = d = 4
अब, T5 = a + 4d
= – 10 + 4 (4)
= 10 + 16 = 6
T6 = a + 5d
= 10 + 5 (4)
= 10 + 20 = 10
T7 = a + 6d
= – 10 + 6(4)
= – 10 + 24 = 14

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

(v) दिए गए पद हैं : 3, 3 + √2, 3 + 2√2 , 3 + 3√2, ………….
यहाँ T1 = 3, T2 = 3 + √2,
T3 = 3 + 2√2, T4 = 3 + 3√2
T2 – T1 = 3 + √2 – 3 = √2
T3 – T2 = 3 + 2√2 – (3 + √2)
= 3 + 2√2 – 3 – √2 = √2
T4 – T3 = 3 + 3/2 – (3 + 2√2)
= 3 + 3√2 – 3 – 2√2 = √2
∵ T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3 = √2
∴ सार्व अंतर = d = √2
अब, T5 = a + 4d = 3 + 4 (√2)
= 3 + 4√2
T6 = a + 5d = 3 + 5√2
T7 = a + 6d = 3 + 6√2

(vi) दिए गए पद हैं :
0.2, 0.22, 0.222, 0.2222, ………..
यहाँ, T1 = 0.2,
T2 = 0.22,
T3 = 0.222,
T4 = 0.2222.
T2 – T1 = 0.22 – 0.2 = 0.02
T3 – T2 = 0.222 – 0.22 = 0.002
∵ T – T ≠ T – T
∴ दिए गए पद एक A.P. नहीं हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

(vii) दिए गए पद हैं : 0, – 4, – 8, – 12, ….
यहाँ T1 = 0, T2 = – 4,
T3 = – 8, T4 = – 12
T2 – T1 = – 4 – 0 = – 4
T3 – T2 = – 8 + 4 = – 4
T4 – T3 = – 12 + 8 = – 4.
∵ T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3
सार्व अंतर = d = – 4
अब, T4 = a + 4d = 0 + 4 (- 4) = – 16
T5 = a + 5d = 0 + 5 (- 4) = – 20
T6 = a + 6d = 0 + 6 (- 4) = – 24

(viii) दिए गए पद हैं :- – \(\frac{1}{2}\), – \(\frac{1}{2}\), – \(\frac{1}{2}\), – \(\frac{1}{2}\)
यहाँ T1 = – \(\frac{1}{2}\),
T2 = – \(\frac{1}{2}\)
T3 = – \(\frac{1}{2}\),
T4 = – \(\frac{1}{2}\)
T2 – T1 = – \(\frac{1}{2}\) + \(\frac{1}{2}\) = 0

T3 – T2 = – \(\frac{1}{2}\) + \(\frac{1}{2}\) = 0

T4 – T3 = – \(\frac{1}{2}\) + \(\frac{1}{2}\) = 0
∴ सार्व अंतर = d = 0
अब, T5 = T6 = T7 = – \(\frac{1}{2}\)
[∵ a = – \(\frac{1}{2}\), d = 0]

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

(ix) दिए गए पद हैं : 1, 3, 9, 2, 7
T1 = 1, T2 = 3, T3 = 9, T4 = 27
T2 – T1 = 3 – 1 = 2
T3 – T2 = 9 – 3 = 6
T2 – T1 ≠ T3 – T2
∴ दिए गए पद एक A.P. नहीं हैं।

(x) दिए गए पद हैं : a, 2a, 3a, 4a, …
T1 = a, T2 = 2a, T3 = 3a, T4 = 4a
T2 – T1 = 2a – a = a
T3 – T2 = 3a – 2a = a
T4 – T3 = 4a – 3a = a
∴ T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3 = a
∴ सार्व अंतर = d = a
अब, T5 = a + 4d = a + 4 (a) = a + 4a
T6 = a + 5d = a + 5a
T7 = a + 6d = a + 6a

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

(xi) दिए गए पद हैं : a, a2, a3, a4, ………..
T1 = a, T2 = a2, T3 = a3, T4 = a4
T2 – T1 = a2-a
T3 – T2 = a – a
∵ T2 – T1 ≠ T3 – T2
∴ दिए गए पद एक A.P. नहीं हैं।

(xii) दिए गए पद हैं : √2, √8, √18, √32, …….
यहाँ T1 = √2, T2 = √8,
T3 = √8, T4 = √32
या T1 = √2 , T = √2,
T3 = 3√2 , T4 = 4√2
T2 – T1 = 2√2 – √2 = √2
T3 – T2 = 3√2 – 2√2 = √2
T4 – T3 = 4√2 – 3√2 = √2
∵ T – T = T – T = T – T = √2
∴ सार्व अंतर = d = √2
अब, T5 = a + 4d = √2 + 4√2 = 5√2
T6 = a + 5d = √2 + 5√2 = 6√2
T7 = a + 6d = √2 + 6√2 = 7√2.

(xiii) दिए गए पद हैं : √3, √6, √9, √12, ………..
यहाँ T1 = √3 , T2 = √6,
T3 = √9, T4 = √2
या T1 = √3, T2 = √6
T3 = 3, T4 = 2√3
T2 – T1 = √6 – √3
अतः, T3 – T2 = 3 – √6
∴ दिए गए पद एक A.P. नहीं हैं।

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(xiv) दिए गए पद हैं: 12, 32, 52, 72 …………..
T1 = 12, T2 = 32, T3 = 52, T4 = 72
या T1 = 1, T2 = 9, T3 = 25, T4 = 49
T2 – T1 = 9 – 1 =8
T3 – T2 = 25 – 9 = 16
T2 – T1 ≠ T3 – T2
∴ दिए गए पद एक A.P. नहीं हैं।

(xv) दिए गए पद हैं : 12, 52, 72, 73, ….
T1 = 12, T2 = 52, T3 = 72, T4 = 73 .
या T1 = 1, T2 = 25, T3 = 49, T4 = 73
T2 – T1 = 25 – 1 = 24
T3 – T2 = 49 – 25 = 24
T4 – T3 = 73 – 49 = 24
:: T2 – T1 = T3 – T2 = T4 – T3 = 24
∴ सार्व अंतर = d = 24
T5 = a + 4d = 1 + 4 (24) = 1 + 96 = 97
T6 = a + 5d = 1 + 5 (24) = 1 + 120 = 121
T7 = a + 6d = 1 +6 (24) = 1 + 144 = 145

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
संचरणीय तथा असंचरणीय रोग किन्हें कहते हैं ? संचरणीय रोग किस प्रकार फैलते हैं ? वर्णन करो।
उत्तर-
संचरणीय रोग – ये ऐसे रोग हैं जो सूक्ष्मजीवों, विषाणुओं, जीवाणुओं, कवकों तथा प्रोटोजोआ द्वारा उत्पन्न होते हैं । इन रोगों के रोगाणु वायु, जल, भोजन, संपर्क तथा कीटों द्वारा संचारित होते हैं । ये रोग बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में संचारित होते हैं। इसलिए इन्हें संचरणीय रोग कहते हैं।

असंचरणीय रोग – ये रोग बीमार व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैलते। इसलिए इन्हें असंचरणीय रोग कहते हैं। डायबिटीज़, कैंसर, एनीमिया, क्वाशियोरकार आदि असंचरणीय रोग हैं।

संचरणीय रोग के फैलाव की विधि – संचरणीय रोग रोगी मनुष्य से स्वस्थ मनुष्य में दो प्रकार से फैलते हैं-
(i) प्रत्यक्ष स्थानांतरण
(i) अप्रत्यक्ष स्थानांतरण।

(i) प्रत्यक्ष स्थानांतरण – यह निम्नलिखित ढंगों द्वारा होता है-

  1. यह रोगी व्यक्ति के खांसने, छींकने तथा बात करने आदि से होता है। इसे ड्रोपलेट संक्रमण भी कहते हैं।
  2. यह संक्रमित व्यक्ति के स्वस्थ व्यक्ति से संपर्क द्वारा होता है।
  3. यह व्यक्ति के भूमि के साथ संपर्क द्वारा होता है।
  4. यह जंतुओं के काटने से होता है।
  5. यह रक्त द्वारा संचारित होता है।

(ii) अप्रत्यक्ष स्थानांतरण – यह निम्नलिखित ढंगों द्वारा होता है-

  1. यह कीटों तथा अन्य जंतुओं द्वारा होता है।
  2. यह संक्रमित जल, भोजन तथा वायु द्वारा होता है।
  3. यह धुआं तथा धूल आदि द्वारा होता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 2.
यदि आपका घर स्वच्छ है किंतु पास-पड़ोस स्वस्थ नहीं है तो आप स्वस्थ रह सकते हैं ? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर-
हमारे स्वास्थ्य पर वातावरण का प्रभाव अवश्य पड़ता है। यदि हमारा वातावरण दूषित है तो यह निश्चित है कि उसका विपरीत प्रभाव हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। यदि हमारा घर स्वच्छ हो, परंतु यदि पड़ोस का वातावरण अस्वच्छ है तो निश्चित रूप से हम स्वच्छ नहीं रह सकते। पड़ोस के लोगों की अस्वच्छ व्यक्तिगत आदतों के कारण वातावरण को स्वच्छ रखना कठिन होता है। यदि पड़ोस में रहने वाले लोग अपने अपशिष्ट पदार्थों का विसर्जन खुले में करें, गंद, गोबर गली में फेंके या नालियों द्वारा मल-मूत्र बाहर निकालें तो वातावरण किस प्रकार स्वच्छ रहेगा?

इन्हीं अपशिष्ट पदार्थों तथा गंदगी के ढेरों में रोगों को फैलाने वाले अनेक सूक्ष्म जीव तथा रोगाणु पलते हैं, जिनको मच्छर तथा मक्खियां हमारे भोजन पर लाकर छोड़ देती हैं। यही प्रदूषित भोजन हमारे स्वास्थ्य को खराब करता है। अतः अपना और पड़ोस का वातावरण शुद्ध रखना अत्यंत आवश्यक होगा।

प्रश्न 3.
मक्खी किस प्रकार संक्रमण फैलाती है?
उत्तर-
घरेलू मक्खियां संक्रमण फैलाने वाले जीवों के लिए सामान्य वाहक हैं। मक्खियों को प्रवृत्ति सदा कूड़े-कर्कट, मानव मल-मूत्र तथा भोजन की ओर आकृष्ट होने की रहती है। जब वे मल-मूत्र या सड़े-गले पदार्थों पर बैठती हैं तो असंख्य सूक्ष्म जीव उनकी टांगों, बालों तथा शरीर के अन्य भागों में चिपक जाते हैं। जब ये मक्खियां हमारे खाद्य-पदार्थों पर बैठती हैं तो वे सूक्ष्मजीव उन पदार्थों पर छोड़ जाती हैं। जब मनुष्य इन सूक्ष्म जीवों वाले खाद्य-पदार्थों का सेवन करता है तो वे सूक्ष्म जीव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। शरीर में उचित वातावरण पाकर इनकी संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हो जाती है जिस कारण हम रोगग्रस्त हो जाते हैं। इन मक्खियों द्वारा टायफाइड, हैज़ा आदि रोगाणु हम तक पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त मक्खियां घार, आँखों तथा त्वचा को भी संक्रमित करती हैं।

प्रश्न 4.
अच्छा स्वास्थ्य रखने में शिक्षा किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
स्वास्थ्य शिक्षा का ज्ञान ही मनुष्यों तथा समुदायों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य संबंधी सामान्य ज्ञान हो तो वह अपने तथा समुदाय के स्वास्थ्य को ठीक रखने में सहायता कर सकता है। स्वास्थ्य शिक्षा से हमें यह पता चलता है कि संतुलित आहार के लिए किस-किस पदार्थ का सेवन करना चाहिए जिससे सभी पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। संतुलित आहार मनुष्य के शरीर में ऊर्जा तथा प्रतिरक्षक प्रदान करता है। इस प्रकार विभिन्न रोगों के फैलने के कारण तथा उनकी रोकथाम के उपाय पता हों तो स्वयं तथा अन्य व्यक्तियों को समय से पहले ही रोग से प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। इस प्रकार का ज्ञान प्राप्त करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना होनी चाहिए।

कुछ सामान्य बातों का ज्ञान सभी के लिए आवश्यक होना चाहिए जैसे कि मलेरिया मच्छरों द्वारा फैलता है जो खड़े पानी में, तालाबों आदि में पलते हैं; मक्खियां गंदगो पर बैठकर हमारे भोजन पर करोड़ों को संख्या में कीटाणु छोड़ जाती हैं जिनसे हैजा, पेचिश, उल्टियां आदि लग सकती हैं। अतः स्वस्थ शिक्षा का ज्ञान होने से मक्खी, मच्छरों को मारा जा सकता है या इनसे बचाव किया जा सकता है। यदि इस प्रकार का ज्ञान प्राप्त हो तो सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण को नियंत्रण में रखा जा सकता है। इस प्रकार की शिक्षा का प्रसार हम सबको करना चाहिए ताकि सभी को स्वास्थ्य संबंधी मूलभूत विषयों की जानकारी तथा उचित प्रशिक्षण प्राप्त हो।

गांवों में सफाई का विशेष ध्यान रखने की विधियां, स्वच्छ पानी की व्यवस्था आदि का ज्ञान सभी को हो जाए तो कई रोगों से बचा जा सकता है। शिशु को कौन-से टीके किस आयु में लगवाने हैं-इस प्रकार की जानकारी सभी को उपलब्ध हो तो शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य शिक्षा से अनेक प्रकार की असुविधाओं से सभी को सुरक्षित रखा जा सकता है।

प्रश्न 5.
रोगों को रोकने या उनको फैलने से रोकने के लिए कुछ उपाय लिखिए।
उत्तर-
रोगों को रोकने या उनको फैलने से रोकने के उपाय-

  1. शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए तथा साफ़ वस्त्र पहनने चाहिए।
  2. आहार संतुलित होना चाहिए ताकि शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा ठीक बनी रहे।
  3. खाद्य पदार्थों को मक्खियों, मच्छरों, धूल-कण आदि से बचा कर सुरक्षित रखना चाहिए।
  4. घर तथा अड़ोस-पड़ोस में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि मच्छर वहां पर वृद्धि न कर सकें।
  5. सीवर व्यवस्था बहुत अच्छी होनी चाहिए ताकि जल-मल का विसर्जन ठीक हो।
  6. मानव के मल-मूत्र एवं घरेलू अपशिष्ट का निपटान ठीक प्रकार से होना चाहिए।
  7. खुले स्थानों पर मल त्यागने से पर्यावरण दूषित होता है तथा नदी-नालों का जल भी दूषित हो जाता है। इसलिए कम लागत वाले ढके पाखानों का निर्माण करना चाहिए।
  8. धूम्रपान, शराब या संवेदना मंदक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।
  9. यौन संबंध द्वारा फैलने वाले सिफ़लिस, गोनोरिया, एड्स जैसे रोगों की रोकथाम संयमित तथा स्वच्छ जीवन पद्धति द्वारा की जा सकती है।
  10. व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्तर पर पर्यावरण को साफ़ रखना चाहिए।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 6.
अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक मूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक जीवन क्षमता की सामान्य स्थिति होता है। अच्छा स्वास्थ्य होने पर भी हम व्यक्ति के रूप में, एक समाज के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में, अपनी क्षमता का उपयोग कर सकते हैं। अस्वस्थता तथा रोगों से मुक्ति अच्छे स्वास्थ्य के लक्षण हैं। चिंताओं तथा सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक तनावों से स्वतंत्र होना एक अच्छा स्वास्थ्य प्रदर्शित करता है। अत: अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अनलिखित मूल परिस्थितियां होती हैं-

1. उपयुक्त आहार – अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार आवश्यक होता है क्योंकि संतुलित आहार से ही हमें पोषक तत्व मिलते हैं जो शरीर को संक्रमण से बचाते हैं तथा प्रतिरक्षण प्रदान करते हैं।

2. व्यक्तिगत एवं घरेलू स्वास्थ्य विज्ञान – स्वास्थ्य व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्तर पर ठीक होना चाहिए। व्यक्तिगत स्तर पर शरीर स्वच्छ रखना, साफ़-सुथरे कपड़े पहनना, संतुलित आहार लेना तथा मादक एवं संवेदनामंदक पदार्थों से दूर रहना आदि बातों का ध्यान रखना होता है। घरेलू स्वास्थ्य के अंतर्गत, घरेलू अपशिष्ट पदार्थों का निपटान, मल-मूत्र त्यागने और विसर्जन का ठीक से निपटान तथा खाद्य पदार्थों को जीवाणुओं तथा रोगाणुओं से सुरक्षित रखना आदि प्रबंधन आते हैं। सूक्ष्म जीव ही हमारे भोजन को संक्रमित करके खराब करते हैं । इसलिए घरों में खाद्य पदार्थों को जालीदार अलमारी में रखने से मक्खियों तथा कीटों से बचाया जा सकता है। मल-मूत्र त्यागने के पश्चात् तथा भोजन से पहले हाथों को ठीक प्रकार से साबुन तथा पानी से धोने से सूक्ष्मजीवों से कुछ सीमा तक छुटकारा पाया जा सकता है।

3. स्वच्छ भोजन, जल एवं वायु – बाज़ार से फल, सब्जियां आदि लाने पर उन्हें स्वच्छ पानी से धोना चाहिए, जिसे पीड़कनाशक या धूल आदि जो बाहरी आवरण पर चिपके होते हैं, वे उतर जाते हैं और फल तथा सब्जियां सूक्ष्म जीव, कृमि आदि के प्रभाव से बच जाती हैं। इन सब्जियों को साफ़, ठंडे तथा मक्खी रहित स्थान पर भंडारित करना चाहिए।

पानी को उबाल कर छान कर पीने से पानी कीटाणु रहित हो जाता है। बीमारी वाले दिनों में तो अवश्य ही पानी को उबाल कर ही उपयोग में लाना चाहिए, ऐसा करने से पानी जीवाणुओं से मुक्त हो जाता है। बर्तन धोने, खाना पकाने तथा पीने आदि के लिए कभी भी तालाब या नदी का पानी प्रयोग नहीं करना चाहिए।

जिस प्रकार स्वच्छ भोजन और जल जीवन के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार शुद्ध, स्वच्छ तथा ताजी वायु भी स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण है। यही शुद्ध वायु शरीर में भोजन का दहन करके शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। प्रदूषित वायु में सांस लेने से श्वसन रोग हो जाते हैं। तंबाकू का प्रयोग करने वालों में कैंसर तथा हृदय रोगों की संभावना अधिक रहती है। धुएं रहित चूल्हों का उपयोग करने से उसके हानिकारक प्रभावों से महिलाओं को बचाया जा सकता है।

4. व्यायाम, विश्राम तथा व्यसन – नियमित व्यायाम शरीर तथा मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है। समय पर व्यायाम, विश्राम एवं सोना शारीरिक प्रक्रियाओं को दक्षतापूर्ण कार्य करने में सहायक है। अच्छा स्वास्थ्य होने पर भी यदि हमें किसी व्यसन की आदत पड़ जाए तो शरीर में मानसिक तथा शारीरिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। तंबाकू के प्रयोग से मुख और फेफड़ों का कैंसर हो जाता है। शराब मस्तिष्क की जागरूकता को कम करती है तथा इसका अधिक सेवन यकृत में विकार उत्पन्न करता है। अतः इन मादक और नशीले पदार्थों के व्यसन से बचना चाहिए।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य किसे कहते हैं ?
उत्तर-
स्वास्थ्य – स्वास्थ्य मानव शरीर के सभी अंगों तथा तंत्रों के ठीक से कार्य करने की स्थिति है। किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक जीवन क्षमता की सामान्य स्थिति है। उद्देश्यपूर्ण जीवन व्यतीत करने के लिए अच्छा स्वास्थ्य आवश्यक है। अस्वस्थता तथा रोगों से मुक्ति अच्छे स्वास्थ्य के लक्षण हैं किंतु स्वास्थ्य में चिंताओं तथा सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक तनावों से स्वतंत्रता भी इसमें सम्मिलित है। स्वास्थ्य अच्छा होने पर हम व्यक्ति, समाज तथा एक राष्ट्र के रूप में अपनी क्षमता का सर्वोत्तम उपयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना किस प्रकार कठिन हो गया है ?
उत्तर-
बढ़ती जनसंख्या तथा घनी आबादी के क्षेत्रों में रहन-सहन के कारण अपशिष्ट पदार्थों की अधिकता वायु तथा जल को प्रदूषित करती है। कारखानों और विकिरणों के कारण उत्पन्न प्रदूषण आदि ऐसी समस्याएं हैं जो पर्यावरण को अधिक मात्रा में प्रदूषित करती हैं। व्यक्तिगत आदतें सारे समुदाय के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं। वाहनों से निकला धुआं, चिमनियों से निकला धुआं तथा सह-उत्पाद सभी मिलकर वायु तथा जल को अर्थात् पर्यावरण को लगातार प्रदूषित करते रहते हैं। इसके अतिरिक्त घरेलू तथा सामुदायिक अस्वस्थ परंपराएं भी पर्यावरण पर कुप्रभाव डालती हैं।

प्रश्न 3.
व्यक्तिगत स्तर पर ठीक स्वास्थ्य के लिए हमारे क्या कर्तव्य हो सकते हैं?
उत्तर-
व्यक्तिगत स्तर पर शरीर को प्रतिदिन साफ़ पानी से धोना चाहिए ताकि उस पर चिपकी धूल आदि हट जाए। त्वचा साफ़ हो तो दुर्गंध नहीं आती तथा चर्म रोग आदि के लगने की संभावना कम होती है। हमारे कपड़े स्वच्छ होने चाहिएं। बर्तनों तथा खाद्य पदार्थों को मक्खियों तथा कीटों से बचा कर जालीदार अलमारी में रखना चाहिए। मल-मूत्र त्यागने के पश्चात् तथा भोजन से पहले हाथों को साबुन से तथा पानी से अच्छी तरह धो लेने से वे रोगाणु मुक्त हो जाते हैं। पानी को उबाल कर पीना लाभप्रद होगा।

प्रश्न 4.
संचरणीय तथा असंचरणीय रोगों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
संचरणीय तथा असंचरणीय रोगों में अंतर-

संचरणीय रोग असंचरणीय रोग
(1) यह रोग शरीर में रोगाणुओं के प्रवेश कर जाने के कारण होता है। (1) ये रोग अन्य कारणों से उत्पन्न होते हैं-जैसे उपापचय, संतुलित भोजन न मिलने से, शरीर के किसी भाग में अनियंत्रित कोशिका विभाजन इत्यादि से।
(2) रोग का फैलाव वायु, पानी, दूध, भोजन तथा माता के प्लेसैंटा से भ्रूण में हो सकता है। (2) इनके फैलाव के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
(3) ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संपर्क द्वारा फैलते हैं। (3) ये रोग शरीर में उत्पन्न होते हैं। संपर्क द्वारा नहीं फैलते।

प्रश्न 5.
सूक्ष्मजीव हमारे शरीर में किन-किन साधनों से प्रवेश करते हैं ? प्रत्येक का उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
सूक्ष्मजीव हमारे शरीर में वायु, जल तथा भोजन द्वारा, त्वचीय स्पर्श द्वारा प्रवेश करते हैं। सामान्य सर्दी या जुकाम में वायरस वायु द्वारा फैलते हैं। हैजा, जठरांत्र शोथ तथा मियादी बुखार के जीवाणु भोजन तथा जल के माध्यम से फैलते या शरीर में प्रवेश करते हैं। रिंगवर्म एक प्रकार की फंगस का संक्रमण है। यह त्वचा के स्पर्श द्वारा फैलती है। सिफलिस, गोनोरिया जैसे यौन रोग जीवाणुओं से फैलते हैं और एड्स वायरस से फैलता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 6.
उन दो स्थितियों को बताइए जिसके कारण हमारे देश में स्वास्थ्य समस्याओं का उन्मूलन अभी तक संभव नहीं हो सका।
उत्तर-

  • चिकित्सा सुविधाओं के अत्यधिक प्रसार के बाद भी इन सुविधाओं की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं है।
  • इन रोगों को जड़ से समाप्त कर देने के लिए सामाजिक स्तर पर आवश्यक परिस्थितियों का अभाव है। मलमूत्र के सुरक्षित विसर्जन के लिए उपयुक्त व्यवस्था का न होना तथा जनता में शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान के कारण अभाव के प्रत्येक नागरिक इस दिशा में सक्रिय योगदान प्रदान नहीं कर पाता।

प्रश्न 7.
डायरिया क्या है ? इससे बच्चे को बचाने की विधि लिखिए।
उत्तर-
डायरिया के कारण बच्चे को उल्टी तथा दस्त लगते हैं जिसके परिणाम में उनमें निर्जलीकरण की संभावना बढ जाती है। निर्जलीकरण से बचाने के लिए बच्चे को निम्नलिखित विधि से तैयार किया घोल एक दिन में 5-6 बार दिया जाना चाहिए। एक गिलास स्वच्छ पानी में तीन चम्मच चीनी, एक चौथाई चम्मच नमक, एक चुटकी खाने का सोडा तथा कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त सूप, दाल, चावल का पानी तथा छाछ भी पानी की कमी को पूरा करते हैं।

प्रश्न 8.
एक वर्ष तक के बच्चे को लगने वाले टीके लिखिए।
उत्तर-

  1. B.C.G. – यह टीका शुरू में ही क्षय रोग से बचाने के लिए लगाया जाता है।
  2. खसरा का टीका – यह छोटी माता या खसरा से बचने के लिए लगाया जाता है।
  3. पोलियो – इसकी दवाई मुंह द्वारा दी जाती है। प्रत्येक मास के अंतर पर इसे तीन बार दिया जाना चाहिए।
  4. D.P.T. के तीन टीके एक-एक मास के अंतर पर दिये जाते हैं। इनसे बच्चा डिप्थीरिया, कुकुर खांसी तथा टिटनेस से सुरक्षित रहता है।

प्रश्न्र 9.
क्षय रोग कौन-से अंग को प्रभावित करता है? यह कैसे फैलता है ? इससे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर-
क्षय रोग मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, परंतु बाद में लिंफनोड, मस्तिष्क, अस्थियां तथा आंत भी प्रधावित हो जाते हैं।
गोग थक दवारा फैलता है।
इससे बचने के लिए बी० सी० जी० (B.C.G.) के टीके लगवाने चाहिए।

प्रश्न 10.
यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट जाए तो क्या उपाय करना चाहिए?
उत्तर-
कुत्ते के काटने से बने घाव को साबुन तथा साफ़ पानी से धोकर रोगाणुनाशक दवाई लगानी चाहिए। जब काटने वाला कुत्ता पागल हो तो काटे गए व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह पर एंटीरेबीज़ टीके अवश्य लगवाने चाहिएं।

प्रश्न 11.
कारणात्मक जीव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
प्राय: संक्रामक बीमारियां एक प्राणी से दूसरे प्राणियों तक वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, कवक और कृमियों के द्वारा पहुंचती हैं। हैजा, क्षय रोग तथा टायफाइड को बैक्टीरिया फैलाते हैं। चेचक, छोटी माता, पोलियो, रेबीज़, जुकाम आदि वायरस से फैलते हैं। दस्त और पेचिश आंतरिक गड़बड़ियों से फैलते हैं। बीमारी फैलाने में सहायक इन जीवों को कारणात्मक जीव कहते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 12.
टीके पर तापमान और समय सीमा का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
टोके पर तापमान का प्रभाव पड़ता है। उसे कम तापमान में रखना चाहिए क्योंकि उच्च तापमान पर वे नष्ट हो जाते हैं। उनका संरक्षण समय सीमित होता है। अधिक समय तक उनका प्रयोग न होने पर उनकी शक्ति का प्रभाव नष्ट हो जाता है जिसे पुनः हासिल नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 13.
वाहक (Vector) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
वाहक (Vector) – बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्म जीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले जीवों को वाहक कहते हैं। घरेलू मक्खी हैजे, पेचिश आदि के कीटाणुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है तो मादा एनाफ्लीज़ मच्छर मलेरिया को फैलाते हैं। ऐडीज मच्छर डेंगू को फैलाता है।

प्रश्न 14.
एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) किसे कहते हैं ? ये किस प्रकार अपना कार्य करते हैं ?
उतर-
ये वे पदार्थ हैं जो सूक्ष्म जीवों से उत्पन्न किए जाते हैं और ये सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकते हैं। पैनिसीलिन ऐसा पहला प्रति जैविक पदार्थ है जो मनुष्य द्वारा उपयोग के लिए तैयार किया गया है। एंटीबायोटिक सामान्य रूप से बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं। अनेक बैक्टीरिया अपनी रक्षा के लिए एक कोशिका भित्ति बना लेते हैं पर एंटीबायोटिक उनकी कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं जिस कारण वे सरलता से मर जाते हैं।

प्रश्न 15.
कुछ सामान्य बीमारियों को वर्गीकृत करें जो कारणात्मक जीवों के द्वारा होती हैं ?
उत्तर-
(क) जीवाणुओं द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो बीमारियां जीवाणुओं के द्वारा फैलाई जाती हैं उन्हें बैक्टीरियल कहते हैं, जैसे-क्षय रोग, हैजा, टायफाइड, दस्त, टैटनस, डिप्थीरिया आदि।

(ख) विषाणुओं द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो बीमारियां वायरस के द्वारा फैलती हैं उन्हें वायरल बीमारियां कहते हैं, जैसे-पोलियो, चिकन पाक्स, रेबीज़, जुकाम, खसरा, एडस आदि।

(ग) प्रोटोजोआ द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो बीमारियां प्रोटोजोआ के द्वारा फैलाई जाती हैं उन्हें प्रोटोजाअन कहते हैं, जैसे-डायरिया, गैस्ट्रोइटाइटिस, मलेरिया आदि।

(घ) कवक द्वारा फैलाये जाने वाले रोग – जो रोग कवकों के द्वारा फैलाये जाते हैं उन्हें कवकीय रोग कहते हैं। जैसे—दाद, त्वचा रोग आदि।

प्रश्न 16.
जुकाम से बचना कठिन है, इस पर विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर-
जुकाम ऐसी बीमारी है जो शायद विश्व के सभी लोगों को कभी न कभी संक्रमित कर चुकी है। इसके लिए अनेक वायरस ज़िम्मेदार होते हैं जिनसे पूरी तरह बचाव बहुत कठिन है। इनके प्रभाव से श्वसन नलिका की ऊपरी श्लेष्मा झिल्ली, नाक और गला संक्रमित होते हैं जिस कारण नाक और आंखों से तरल पदार्थ निकलता है। शरीर के संक्रमित भाग पर जलन होती है। कुछ विशेष औषधियों से इनको कुछ सीमा तक कम करने में सहायता मिलती है। विटामिन-सी इसके लिए उपयोगी है।

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प्रश्न 17.
टीकाकरण क्या है?
उत्तर-
टीकाकरण – वर्तमान युग में रोगों से बचने या उनके उपचार के लिए टीकाकरण की बहुत अधिक सहायता ली जाती है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पदार्थ का संरोपण एक स्वस्थ व्यक्ति में किया जाता है ताकि उसमें विशेष बीमारी के प्रति प्रतिरक्षित पैदा हो जाए। प्रतिरक्षण पॉस्क के बाध्य बीमारी को पहचानने, समाप्त करने और उसे पूरी तरह उखाड़ फेंकने में सहायता मिलती है। टीकाकरण प्रक्रिया में किसी सूक्ष्मजीव की जीवित या मृत कुछ मात्रा को व्यक्ति के शरीर में पहुंचाया जाता है जो बीमारी के विपरीत प्रतिरक्षा करते हुए हानिकारक बाह्य सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देते हैं। टीके में रोग वाहक सूक्ष्म जीव कम सांद्रित अवस्था में होते हैं।

प्रश्न 18.
सामुदायिक स्वास्थ्य की देखभाल के विभिन्न तत्व बताओ।
उत्तर-
सामुदायिक स्वास्थ्य की देखभाल के विभिन्न तत्व निम्नलिखित हैं-

  1. जनता के लिए सुरक्षित स्वच्छ पीने का जल।
  2. बच्चों को अल्पपोषण तथा कुपोषण से बचाने के लिए पौष्टिक भोजन तथा दूध ।
  3. स्वास्थ्य शिक्षा।
  4. चिकित्सा सहायता तथा इलाज।
  5. बच्चों को पोलियो, टी० बी०, टेटनस, डिप्थीरिया, हिपेटिटिस आदि का टीका लगाना।
  6. परिवार नियोजन तथा सलाह।

प्रश्न 19.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रसन्न रहना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
स्वस्थ रहने के लिए हमें प्रसन्न रहना आवश्यक है। यदि किसी से हमारा व्यवहार ठीक नहीं है और हम एक-दूसरे से डरते हैं तो हम प्रसन्न तथा स्वस्थ नहीं रह सकते। व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सामाजिक समानता बहुत ज़रूरी है। अनेक सामुदायिक और व्यक्तिगत समस्याएँ हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम हर अवस्था में प्रसन्न रहने का प्रयत्न करें।

प्रश्न 20.
तीव्र तथा दीर्घकालिक रोग में अंतर लिखिए।
उत्तर-
तीव्र तथा दीर्घकालिक रोग में अंतर-

तीव्र (प्रचंड) रोग दीर्घकालिक रोग
1. तीव्र रोगों की अवधि बहुत लंबो नहीं होती। 1. दीर्घकालिक रोगों की अवधि बहुत लंबी होती है।
2. ये रोग जीवन भर नहीं रहते। 2. ये रोग जीवन भर रह सकते हैं।
3. इन से शरीर को क्षति बहुत गंभीर नहीं होती। उदाहरण – खांसी, जुकाम। 3. इनकी शरीर को क्षति बहुत गंभीर हो सकती है। ये मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं।
उदाहरण – क्षय रोग।

प्रश्न 21.
पेप्टिक व्रण का संबंध किससे माना जाता था ? इसका वास्तविक कारण और उपचार क्या है ?
उत्तर-
अनेक वर्षों से माना जाता था कि पेप्टिक व्रण का संबंध ग्रहणी में ऐसिटिडी (Acidity) से है। परेशानी और चिंता से आमाशय में एसिड का स्राव होता है जिस कारण पेप्टिक व्रण हो जाता है पर ऑस्ट्रेलिया के डॉ० रॉबिन वॉरेन तथा बैरी मॉर्शल ने पता लगाया है कि यह रोग हेलीको बैक्टर पायलोरी नामक एक बैक्टीरिया से होता है जो आमाशय के निचले भाग में इकट्ठे हो जाते हैं। अब इस रोग का उपचार बड़ी सरलता से प्रतिजैविक के प्रयोग से किया जाता है।

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प्रश्न 22.
बैक्टीरिया को एंटिबायोटिक प्रभावित करते हैं पर मानव को नहीं। क्यों ?
उत्तर-
एंटिबायोटिक सामान्यतः बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं। अनेक बैक्टीरिया अपनी रक्षा के लिए कोशिका भित्ति बना लेते हैं। पैनिसिलीन एंटिबॉयोटिक बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को बाधित कर देती है। जिस कारण बैक्टीरिया कोशिका भित्ति नहीं बना सकते हैं और वे सरलता से मर जाते हैं। मानव की कोशिकाएं कोशिका भित्ति नहीं बना सकती इसलिए पेनिसिलीन का प्रभाव हम पर नहीं होता। पेनिसिलीन ऐसे सभी बैक्टीरिया को प्रभावित करते हैं जिनमें कोशिका भित्ति बनाने की प्रक्रिया होती है। इसलिए अनेक एंटिबायोटिक बैक्टीरिया की अनेक स्पीशीज़ को प्रभावित करते हैं न कि केवल एक स्पीशीज़ को।

प्रश्न 23.
वाइरस पर एंटिबायोटिक का प्रभाव क्यों नहीं दिखाई देता ?
उत्तर-
वाइरस की जैव प्रक्रियाएं बैक्टीरिया से भिन्न होती हैं। वे मेजबानों की कोशिकाओं में रहते हैं। इनमें ऐसा मार्ग नहीं होता जैसा कि बैक्टीरिया में होता और यही कारण है कि कोई भी एंटिबायोटिक बैक्टीरिया संक्रमण पर प्रभावकारी नहीं है। यदि हम खांसी-जुकाम से ग्रस्त हैं तो एंटिबायोटिक लेने से रोग की तीव्रता अथवा उसकी समय विधि कम नहीं होती।

प्रश्न 24.
शोथ के कारण शरीर पर कुछ स्थानीय सामान्य प्रभाव क्या पड़ते हैं और क्यों ? ।
उत्तर-
संक्रामक रोगों के ऊतक-विशिष्ट प्रभाव के अतिरिक्त उनके अन्य सामान्य प्रभाव भी होते हैं। अधिकांश सामान्य प्रभाव इस पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र क्रियाशील हो जाएँ। एक सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र प्रभावित ऊतक के चारों ओर रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए अनेकों कोशिकाएं बना देता है। नई कोशिकाओं के बनने के प्रक्रम को शोथ कहते हैं। इस प्रक्रम के अंतर्गत स्थानीय प्रभाव जैसे फूलना तथा दर्द होना और सामान्य प्रभाव जैसे बुखार होते हैं।

प्रश्न 25.
एड्स (AIDS) क्या है ? इसके संक्रमण के क्या कारण हैं ? इससे सुरक्षा के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
एड्स (AIDS) एक अति भयानक संक्रामक रोग है जिसका उपचार आज तक वैज्ञानिकों के द्वारा नहीं खोजा जा सका है। इसका पूरा नाम उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता सिंड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) है जो HIV (Human Immuno Virus) नामक विषाणु से फैलता है। यह विषाणु मानव शरीर में पहुँच कर प्रतिरक्षा तंत्र को नष्ट कर देता है जिसके परिणामस्वरूप शरीर की प्रतिरोध क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है और व्यक्ति किसी संक्रमण से पीडित हो कर मर जाता है।

संक्रमण के कारण – एड्स का संक्रमण निम्नलिखित कारणों से होता है-

  1. एड्स रोग से संक्रमित व्यक्ति के साथ लैंगिक संबंध ।
  2. एड्स से ग्रसित व्यक्ति से रक्त स्थानांतरण के द्वारा।
  3. समलैंगिक संभोग।
  4. एड्स-पीड़ित माता से शिशु जन्म।
  5. संक्रमित सूई के प्रयोग से।
  6. एड्स से ग्रसित माता के द्वारा शिशु के स्तनपान द्वारा। रोग की जाँच-एड्स की जांच ELISA विधि से की जाती है।

बचाव-

  1. रक्त स्थानांतरण से पहले सुनिश्चित कर लिया जाना चाहिए कि रक्त HIV मुक्त होगा।
  2. लैंगिक संबंध अति सावधानीपूर्वक बनाए जाने चाहिए।
  3. टीके की सूई का इस्तेमाल केवल एक ही बार किया जाना चाहिए।

एड्स संक्रमण किससे नहीं होता – हाथ मिलाने से, गले मिलने से, खेलकूद जैसे कुश्ती और कोई अन्य विधि जिससे हम सामाजिक-संपर्क में आते हैं।

प्रश्न 26.
HIV-AIDS रोगी की मृत्यु का कारण किस लिए बन जाता है ?
उत्तर-
संक्रमण के विशिष्ट ऊतक कई बार अति सामान्य प्रभाव को लक्षित करते हैं। HIV संक्रमण में वाइरस प्रतिरक्षा तंत्र में जाते हैं और इसके कार्य को नष्ट कर देते हैं। HIV-AIDS से अनेक प्रभाव इसलिए होते हैं क्योंकि हमारा शरीर प्रतिदिन होने वाले छोटे संक्रमणों का मुकाबला नहीं कर पाता। हल्के-खांसी-जुकाम से भी निमोनिया हो सकता है तथा आहार नाल के संक्रमण से रुधिरयुक्त प्रवाहिका हो सकता है। ऐसे छोटे-छोटे अन्य संक्रमण ही HIV-AIDS के रोगी की मृत्यु का कारण बनते हैं।

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प्रश्न 27.
किसी रोग की तीव्रता किस बात पर निर्भर करती है ?
उत्तर-
रोग की तीव्रता की अभिव्यक्ति शरीर में स्थित सूक्ष्मजीवों की संख्या पर निर्भर करती है। यदि सूक्ष्मजीव की संख्या बहुत कम है तो रोग की अभिव्यक्ति भी कम होगी। यदि उसी सूक्ष्मजीव की संख्या अधिक होगी तो रोग की अभिव्यक्ति इतनी तीव्र होगी कि जीवन को भी खतरा हो सकता है।

प्रश्न 28.
एंटी वाइरल औषधि बनाना एंटी बैक्टीरियल औषधि बनाने से कठिन क्यों है ?
उत्तर-
एंटी वाइरल औषधि का बनाना एंटीबैक्टीरियल औषधि के बनाने की अपेक्षा कठिन होता है। इसका कारण है कि बैक्टीरिया में अपनी जैव रासायनिक प्रणाली होती है जबकि वाइरस में अपनी जैव रासायनिक प्रणाली बहुत कम होती है। वाइरस हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और अपनी जीवन प्रक्रिया के लिए हमारी मशीनरी का उपयोग करते हैं। इसका अर्थ यह है कि आक्रमण करने के लिए अपेक्षाकृत कम वाइरस विशिष्ट लक्ष्य होते हैं।

प्रश्न 29.
यदि एक बार किसी को चेचक हो जाए तो दुबारा उसे कभी चेचक नहीं हो सकती। क्यों ?
उत्तर-
यदि कोई व्यक्ति एक बार चेचक से ग्रसित हो जाए तो उसे दुबारा यह रोग कभी नहीं हो सकता क्योंकि जब रोगाणु प्रतिरक्षा तंत्र पर पहली बार आक्रमण करते हैं तो प्रतिरक्षा तंत्र रोगाणुओं से इसके प्रति क्रिया करता है और फिर इसका विशिष्ट रूप से स्मरण कर लेता है। इस प्रकार जब वहीं रोगाणु या उससे मिलता-जुलता रोगाणु संपर्क में आता है तो पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है। इससे पहले संक्रमण की अपेक्षा दूसरा संक्रमण शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। यह प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार है।

प्रश्न 30.
टीकाकरण से प्रतिरक्षा तंत्र को ‘मूर्ख’ बनाना क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
टीकाकरण का सामान्य नियम है कि शरीर में विशिष्ट संक्रमण प्रविष्ट कराकर प्रतिरक्षा तंत्र को ‘मूर्ख’ बनाना। वह उन रोगाणुओं की नकल करता है जो टीके के द्वारा शरीर में पहुंचे हैं। यह वास्तव में रोग पैदा नहीं करते लेकिन यह वास्तव में रोग पैदा करने वाले रोगाणुओं को उसके बाद रोग पैदा करने से रोकता है।

प्रश्न 31.
हमारे देश में छोटे बच्चे हिपेटाइटिस ‘A’ के प्रति किस प्रकार प्रतिरक्षी हो चुके हैं ?
उत्तर-
हिपेटाइटिस के कुछ वाइरस जिससे पीलिया होता है, पानी द्वारा संचारित होता है। हिपेटाइटिस ‘A’ के लिए टीका उपलब्ध है। पर हमारे देश के अधिकांश भागों में जब बच्चे की आयु पांच वर्ष होती है तब तक वह हिपेटाइटस ‘A’ के प्रति प्रतिरक्षी हो चुका होता है। इसका कारण यह है कि वह पानी के द्वारा वाइरस के प्रभाव में आ चुका हो।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य एवं रोग किस समुदाय में एक जटिल समस्या है ?
उत्तर-
मानव समुदाय में।

प्रश्न 2.
मानवीय अंगों में चलने वाली चार विशिष्ट क्रियाएं लिखिए।
उत्तर-
हृदय का धड़कना, फेफड़ों का साँस लेना, वृक्क में निस्पंदन द्वारा मूत्र बनना, मस्तिष्क का सोचना।

प्रश्न 3.
वृक्क में निस्पंदन न होने से शरीर में क्या होगा ?
उत्तर-
शरीर में विषैले पदार्थ एकत्रित हो जाएंगे।

प्रश्न 4.
मानवीय शरीर को भोजन की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर-
कोशिकाओं तथा ऊतकों को कार्य करने के लिए।

प्रश्न 5.
स्वास्थ्य क्या है ?
उत्तर-
स्वास्थ्य वह अवस्था है जिस के अंतर्गत शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कार्य समुचित क्षमता से उचित प्रकार किया जा सके।

प्रश्न 6.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए किस-किस बात की आवश्यकता है ?
उत्तर-
सामुदायिक स्वच्छता, भोजन, अच्छी आर्थिक स्थिति।

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प्रश्न 7.
‘बोधित आराम’ और ‘असुविधा’ क्या है ?
उत्तर-
रोग का दूसरा नाम।

प्रश्न 8.
शरीर की क्रियाओं में बदलाव क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर-
रोग के लक्षण।

प्रश्न 9.
किन्हीं चार लक्षणों को लिखिए जिनसे रोग का पता लगता है ?
उत्तर-
सिरदर्द, खांसी, दस्त, किसी घाव में मवाद।

प्रश्न 10.
लक्षण किसी चिकित्सक को किस बात के संकेत देते हैं ?
उत्तर-
किसी रोग के बारे सुनिश्चित संकेत देते हैं।

प्रश्न 11.
जिन रोगों की अवधि कम होती है उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर-
तीव्र रोग अथवा प्रचंड रोग।

प्रश्न 12.
लंबी अवधि तक या जीवनपर्यंत रहने वाले रोगों को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
दीर्घकालिक रोग।

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प्रश्न 13.
तीव्र रोग का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
खांसी-जुकाम।

प्रश्न 14.
दीर्घकालिक रोग का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
एलिफेनटाइसिस अथवा पील पांव रोग।

प्रश्न 15.
स्वास्थ्य को अधिक क्षति किस प्रकार के रोग से होती है ?
उत्तर-
दीर्घकालिक रोग से।

प्रश्न 16.
पतले दस्त लगने का कारण क्या है ?
उत्तर-
दूषित भोजन और गंदे पानी का प्रयोग।

प्रश्न 17.
संक्रमण रोग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वे रोग जिन के तात्कालिक कारक सूक्ष्मजीव होते हैं उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं। ये सूक्ष्मजीव समुदाय में रोग फैला देते हैं।

प्रश्न 18.
कैंसर रोग का क्या कारण है ?
उत्तर-
आनुवांशिक असामान्यता।

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प्रश्न 19.
ऐसिडिटी और पेप्टिक व्रण का कारण क्या माना जाता था ?
उत्तर-
परेशानी भरी सोच और चिंता।

प्रश्न 20.
पेप्टिक व्रण किस कारण होता है ?
उत्तर-
हेलीको बैक्टर पायलोरी नामक बैक्टीरिया द्वारा।

प्रश्न 21.
किन दो वैज्ञानिकों ने पैप्टिक व्रण के कारक बैक्टीरिया का पता लगाया ?
उत्तर-
ऑस्ट्रेलिया के रोग विज्ञानी रॉबिन वॉरेन तथा बैरी मार्शल ने।

प्रश्न 22.
पैप्टिक व्रण का उपचार अब किस से हो जाता है ?
उत्तर-
प्रतिजैविक के प्रयोग से।

प्रश्न 23.
वॉरेन और मार्शल को पैप्टिक व्रण के उपचार को खोजने के लिए कब नोबेल पुरस्कार दिया गया ?
उत्तर-
सन् 2005 में।

प्रश्न 24.
वायरस से होने वाले चार रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-
खांसी-जुकाम, इंफ्लुएंजा, डेंगु बुखार तथा AIDSI

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प्रश्न 25.
बैक्टीरिया से फैलने वाले चार रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-
टायफॉयड, हैज़ा, क्षय रोग, एंथ्रेक्स।

प्रश्न 26.
प्रोटोजोआ से कौन-से दो रोग फैलते हैं ?
उत्तर-
मलेरिया तथा कालाजार।

प्रश्न 27.
सामान्य त्वचा रोग किससे फैलते हैं ?
उत्तर-
विभिन्न प्रकार की फंजाई से। प्रश्न 28. रोग फैलाने वाले किस कारक का गुणन अपेक्षाकृत धीमा होता है ?
उत्तर-
कृमि का गुणन।

प्रश्न 29.
रोग की अवस्था में एंटिबायोटिक क्या करते हैं ?
उत्तर-
एंटिबायोटिक बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं।

प्रश्न 30.
पैनिसिलीन एंटिबायोटिक मूल रूप से क्या करता है ?
उत्तर-
बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को पैनिसिलीन बाधित कर देती है। मानव की कोशिकाएं कोशिका भित्ति नहीं बना सकतीं। इसलिए पैनिसिलीन का प्रभाव हम पर न होकर बैक्टीरिया पर होता है।

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प्रश्न 31.
किस कारण एक एंटिबायोटिक बैक्टीरिया की अनेक स्पीशीज़ को प्रभावित करता है ?
उत्तर-
जो एंटिबायोटिक किसी भी बैक्टीरिया के जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर कोशिका भित्ति बनाने की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है वह उन सब को प्रभावित करता है।

प्रश्न 32.
एंटिबायोटिक का प्रभाव रोग फैलाने वाले किस कारक को प्रभावित नहीं करता ?
उत्तर-
वाइरस को।

प्रश्न 33.
सामान्य खांसी-जुकाम पर एंटिबायोटिक प्रभाव क्यों नहीं दिखा पाते ?
उत्तर-
सामान्य खांसी-जुकाम वाइरस से होता है और एंटिबायोटिक वाइरस को प्रभावित नहीं कर पाते।

प्रश्न 34.
जल से संक्रमण कैसे होता है ?
उत्तर-
जब संक्रमणीय रोग से ग्रसित रोगी के अपशिष्ट पेयजल में मिल कर स्वस्थ व्यक्ति के द्वारा जानेअनजाने पी लिया जाता है तो रोग का संक्रमण हो जाता है।

प्रश्न 35.
लैंगिक संपर्क से फैलने वाले दो रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर-
सिफलिस, AIDS ।

प्रश्न 36.
लैंगिक संचारी रोग किस प्रकार नहीं फैलते ?
उत्तर-
हाथ मिलाने, गले मिलने, खेल-कूद, कुश्ती आदि से।

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प्रश्न 37.
किसी सामान्य रोग वाहक का नाम लिखिए।
उत्तर-
मच्छर।

प्रश्न 38.
मच्छर समतापी प्राणियों का रक्त क्यों पीता है ?
उत्तर-
अत्यधिक पोषण के लिए ताकि परिपक्व अंडे दे सके।

प्रश्न 39.
यदि सूक्ष्मजीवी हवा से नाक द्वारा शरीर में प्रवेश करें तो वे कहां जाएंगे ?
उत्तर-
फेफड़ों में।

प्रश्न 40.
आहार नाल से शरीर में प्रवेश करने वाले सूक्ष्मजीवी कहां रहेंगे ?
उत्तर-
आहार नाल या यकृत में।

प्रश्न 41.
पीलिया का कारक कौन है ?
उत्तर-
हिपेटाइटिस बैक्टीरिया।

प्रश्न 42.
क्षय रोग की अवस्था में बैक्टीरिया फेफड़ों में कहां से प्रवेश करते हैं ?
उत्तर-
नाक से।

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प्रश्न 43.
टायफायड के बैक्टीरिया किस रास्ते से शरीर में प्रवेश करते हैं ?
उत्तर-
मुँह से।

प्रश्न 44.
HIV कहां फैलते हैं ?
उत्तर-
लसीका ग्रंथियों में।

प्रश्न 45.
जापानी बुखार (ऐंसेफेलाइटिस) किस अंग को प्रभावित करता है ?
उत्तर-
मस्तिष्क को।

प्रश्न 46.
मस्तिष्क पर सूक्ष्मजीवों के आक्रमणों के क्या लक्षण हैं ?
उत्तर-
सिरदर्द, उल्टी आना, चक्कर या बेहोशी आना।

प्रश्न 47.
शोथ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र क्रियाशील होकर प्रभावित ऊतक के चारों ओर एक सक्रिय प्रतिरक्षा तंत्र बना देता है जिससे रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए अनेक कोशिकाएं बन जाती हैं। नई कोशिकाओं के बनने के प्रक्रम को शोथ कहते हैं।

प्रश्न 48.
शोथ प्रक्रम के सामान्य प्रभाव क्या हैं ?
उत्तर-
फूलना, दर्द होना, बुखार।

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प्रश्न 49.
HIV-AIDS से व्यक्ति की मृत्यु प्रायः किस कारण होती है ? .
उत्तर-
HIV-AIDS संक्रमण से प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य नष्ट हो जाते हैं। प्रतिदिन होने वाले छोटे-छोटे संक्रमणों का मुकाबला भी व्यक्ति नहीं कर पाता और यही रोगी की मृत्यु के कारण बन जाते हैं।

प्रश्न 50.
एंटी वाइरल औषधि बनाना क्यों कठिन है ?
उत्तर-
वाइरस की अपनी जैव रासायनिक प्रणाली बहुत कम होती है। वे हमारे शरीर में प्रवेश कर अपनी जीवन प्रक्रिया के लिए हमारी मशीनरी का प्रयोग करते हैं इसलिए एंटी वाइरल औषधि बनाना कठिन है।

प्रश्न 51.
कौन-सी एंटीवाइरल औषधि अब उपलब्ध है ?
उत्तर-
HIV संक्रमण को नियंत्रित करने की औषधि।

प्रश्न 52.
कौन-सा रोग विश्व से मिटाया जा चुका है ?
उत्तर-
चेचक।

प्रश्न 53.
कौन-सा रोग ऐसा है जो एक बार हो जाने के बाद दोबारा कभी नहीं होता ?
उत्तर-
चेचक।

प्रश्न 54.
प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार क्या है ?
उत्तर-
जब रोगाणु प्रतिरक्षा तंत्र पर दूसरी बार आक्रमण करता है तो स्मृति के आधार पर प्रतिरक्षा तंत्र अपनी पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 55.
हिपेटाइटिस की किस प्रकार के लिए टीका उपलब्ध है ?
उत्तर-
हिपेटाइटिस ‘A’ ।

प्रश्न 56.
कितने वर्ष की अवस्था तक देश के अधिकांश बच्चे हिपेटाइटिस ‘A’ के प्रति प्रतिरक्षी हो चुके होते हैं ?
उत्तर-
पांच वर्ष की आयु तक।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
तरंग गति से आप क्या समझते हो ? यह कैसे बनती है ? विस्तारपूर्वक वर्णन करो।
उत्तर-
तरंग गति (Wave Motion) – यह एक प्रकार की हलचल है जो किसी माध्यम के कण की दोहराई जाने वाली आवर्ती गति के कारण होती है। यह गति एक कण से दूसरे कण में स्थानांतरित होती है।

तरंग गति का बनना – नीचे दी गई उदाहरण से तरंग का बनना अच्छी तरह समझा जा सकता है-
लालाब के खड़े पानी में एक पत्थर फेंको। संकेंद्रीय छल्लों के रूप में पानी के तल पर वृत्ताकार जल तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन छोटी तरंगों को लघु तरंगें या रिएल भी कहते हैं। बढ़ते अर्धाव्यास वाली ये तरंगें बाहर की ओर चल पड़ती हैं तथा लगभग पानी की समस्त सतह पर फैल जाती हैं। यह तरंगें तालाब के किनारों पर जाकर समाप्त होती हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 1

ऐसा महसूस होता है कि तालाब का वह पानी जहाँ पत्थर फेंका गया था, बाहर की ओर चलना शुरू कर देता है, परन्तु ऐसा नहीं होता है। पानी तो अपनी जगह पर स्थिर रहता है।

व्याख्या – जिस बिंदु पर पत्थर फेंका गया था, पानी के कुछ अणु अपनी साम्य अवस्था से नीचे दब जाते हैं तथा स्थितिज ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं। क्योंकि पानी एक लचीला पदार्थ है इसलिए पानी के अणु बराबर मात्रा में गतिज ऊर्जा से फिर अपनी मूल अवस्था में वापिस आ जाते हैं। इस तरह यह साम्य अवस्था से आगे चले जाते. हैं। यह क्रिया लगातार चलती रहती है। यह अणु एक कंपन पूरा करने के बाद अपनी ऊर्जा साथ वाले अणु को देते हैं। यह क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक तालाब का किनारा नहीं आ जाता। इस ऊर्जा को हलचल कहा जाता है, जो एक अणु से दूसरे अणु तक प्रत्येक तरफ से बाहर की ओर चलती रहती है तथा तरंग के रूप में दिखाई देती है।

यह भी सिद्ध किया जा सकता है कि पानी के अणु गति नहीं करते। वे केवल अपनी संतुलन अवस्था के इर्द गिर्द ऊपर नीचे गतिशील होते हैं। आप इन लघु तरंगों पर कार्क रखो। आप देखोगे कि कार्क आगे नहीं जाता अपितु उसी जगह ऊपर-नीचे होता रहता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 2.
(क) दो तरह की तरंगों के नाम लिखो।
(ख) अनुप्रस्थ तरंगों की रचना समझाने के लिए एक प्रयोग बताओ।
(ग) अनुप्रस्थ तरंगों की परिभाषा दो।
(घ) अनुप्रस्थ तंरगों की उत्पत्ति के लिए क्या परिस्थितियां होनी चाहिए ?
(ङ) अनुप्रस्थ तरंग की उदाहरण दें।
(च) शीर्ष और गर्त की परिभाषा दें।
उत्तर-
(क) तरंग की किस्में – कणों के दोलन की दिशा के अनुरूप तरंगों का वर्गीकरण किया जाता है। यह दोलन तरंग गति के समानांतर या लंबात्मक दिशा में हो सकता है। इस तरह तरंगें दो प्रकार की होती हैं-

  1. अनुदैर्ध्य तरंगें
  2. अनुप्रस्थ तरंगें।

(ख) अनुप्रस्थ तरंगों की रचना – अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse Waves) की रचना को समझने के लिए दीवार से लगी एक हुक के साथ धागे या तार का एक सिरा बांधो तथा दूसरे सिरे को अपने हाथ में पकड़ लो। चित्र में दिखाए अनुसार सारे धागे पर बराबर-बराबर 10-10 सें० मी० लंबे रंगदार धागे के टुकड़े बांधो। अब हाथ में
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 2

पकड़े सिरे को झटका दो। एक स्पंदन (Pulse) के रूप में धागे की लंबाई के साथ-साथ एक हलचल चल पड़ेगी। अर्थात् धागे के कण तरंग गति अर्थात् हलचल गति की दिशा में लंबात्मक दिशा में कंपन करते हैं। यदि आप थोड़ी-थोड़ी देर बाद झटका देना जारी रखें तो आप देखोगे कि रंगदार धागे उन बिंदुओं के आस-पास जहाँ वे प्रमुख धाग के साथ बंधे हुए हैं ऊपर-नीचे की ओर कंपन करते हैं। ऐसी हलचल एक तरंग है जिसे अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं।
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इसलिए एक अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण ऊपर-नीचे की ओर कंपन करते हैं जबकि हलचल क्षैतिज दिशा में चलती है।
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(ग) अनुप्रस्थ तरंगें – अनुदैर्ध्य तरंगों में प्रत्येक कण तरंग-संचार की दिशा के लंबात्मक दिशा में दोलन करता है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। ऊर्जा कणों की हिल-जुल की दिशा में स्थानांतरित होती है।

(घ) अनुप्रस्थ तरंग बनाने के लिए आवश्यक परिस्थितियां-

  1. माध्यम में जड़त्व का गुण होना चाहिए।
  2. माध्यम तन्य होना चाहिए ताकि स्थानांतरण के बाद कण अपनी वास्तविक स्थिति अपना सके।
  3. माध्यम के विभिन्न कणों में विरोध बहुत कम होना चाहिए ताकि कण काफ़ी देर तक दोलन करते रहें।

(ङ) अनुप्रस्थ तरंगों के उदाहरण-

  1. धागे में या ढीले स्प्रिंग में यदि हाथ को निरंतर स्प्रिंग में लंबात्मक दिशा में ऊपर-नीचे किया जाये तो अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती है।
  2. पानी की सतह पर तरंग-यदि एक पत्थर जौहड़ के पानी में फेंका जाए तो जल की सतह पर जल-तरंगें उत्पन्न होती हैं। पानी की सतह पर तैर रहा कॉर्क केवल ऊपर-नीचे दोलित होता है, यह तरंगों के साथ विस्थापित नहीं होता। ये तरंगें अनुप्रस्थ हैं।

प्रश्न 3.
(क) अनुदैर्ध्य तरंग की रचना समझाने के लिए एक प्रयोग का संयोजन करो।
(ख) अनुदैर्ध्य तरंग की परिभाषा लिखो।
(ग) अनुदैर्ध्य तरंग के संदर्भ में संपीडन तथा विरलन को परिभाषित करो।
उत्तर-
अनुदैर्ध्य तरंग की रचना-
प्रयोग – ट्यूनिंग फोर्क की एक भुजा A1 को धीरे से टकराओ। यह अपनी साम्य स्थिति के आस-पास बाईं तथा दाईं ओर कंपन करती है।
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जैसे ही फोर्क की भुजा A1 दाईं तरफ स्थिति E1 पर पहुंचती है तो अपने संपर्क में आये हुए वायु के अणुओं को दबा देती है। संपीडित हुए यह अणु अगले अणुओं को दबा देते हैं। इस तरह दाईं तरफ एक संपीडन की श्रृंखला चल पड़ती है। अब जब वही भुजा A1बाईं तरफ स्थिति E2 की ओर जाती है तो संपीडित वायु विरली हो जाती है। इस तरह एक विरलन उत्पन्न हो जाता है। फैले हुए यह अणु पड़ोसी अणुओं को और विरला कर देते हैं। इस तरह विरलनों की एक श्रृंखला बन जाती है।

यह बारी-बारी संपीडन तथा विरलन दाईं ओर चल पड़ती है जिस कारण अनुदैर्ध्य तरंग बनती है।
अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) – अनुदैर्ध्य तरंगें वे हैं जिनमें कणों का दोलन स्थानांतरण के समानांतर सरल रेखीय दिशा में होता है। ऊर्जा उसी दिशा में स्थानांतरित होती है, जिसमें माध्यम के कण दोलन करते हैं।
अनुदैर्ध्य तरंगें बनने के लिए आवश्यक परिस्थितियां वहीं हैं जो अनुप्रस्थ तरंगों के लिए आवश्यक हैं।

(ग) अनुदैर्ध्य तरंग के संपीडन और विरलन – अनुदैर्ध्य तरंग माध्यम में से संपीडन और विरलन के रूप में चलती है। संपीडन की परिभाषा इस प्रकार है-
संपीडन माध्यम का वह क्षेत्र है जिसमें कण परस्पर निकट आ जाते हैं अर्थात् कण सामान्य स्थिति की अपेक्षा कम दूरी पर होते हैं।
अनुदैर्ध्य तरंग के संचार के समय संपीडन पर माध्यम के कणों के आयतन में अस्थायी रूप से कमी आ जाती है। इसके परिणामस्वरूप माध्यम के इस क्षेत्र में घनत्व बढ़ जाता है।
विरलन माध्यम का वह क्षेत्र है जिसमें कण अपनी सामान्य दूरी से थोड़ा दूर-दूर हो जाते हैं।
तरंग के संचार के समय विरलन पर माध्यम के कणों का आयतन अस्थायी रूप से अधिक हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप माध्यम के इस क्षेत्र में दबाव कम हो जाता है।

प्रश्न 4.
आवर्ती तरंग के लिए तरंग वेग, आवृत्ति और तरंग-लंबाई में संबंध स्थापित करें।
उत्तर-
मान लो
v = तरंग का वेग
v = तरंग की आवृत्ति (अर्थात् माध्यम के कणों के दोलन की आवृत्ति)
λ = तरंग की तरंग-लंबाई
T = किसी कण के एक दोलन का दोलन-काल (माध्यम के किसी एक कण द्वारा एक दोलन पूरा करने में लगा समय)
हम जानते हैं कि तरंग लंबाई माध्यम के किसी कण द्वारा एक दोलन पूरा करने में लगे समय में तय दूरी है।
∴ T समय में तरंग द्वारा तय दूरी = λ
इकाई समय में तरंग द्वारा तय दूरी = \(\frac{\lambda}{\mathrm{T}}\)
किंतु इकाई समय में तय दूरी तरंग वेग है अर्थात्
v = \(\frac{\lambda}{\mathrm{T}}\)
या v = vλ (∴ \(\frac{1}{T}\) = v)
तरंग-वेग = आवृत्ति × तरंग लंबाई
यह संबंध अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य दोनों तरंगों के लिए सत्य है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 5.
ध्वनि और प्रकाश तरंगों में क्या अंतर है ?
उत्तर-
ध्वनि और प्रकाश तरंगों में अंतर

ध्वनि तरंग प्रकाश तरंग
(1) ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें हैं। (1) प्रकाश तरंगें विदयुत्-चुंबकीय तरंगें होती हैं।
(2) ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें हैं जिनमें दोलन तरंग की दिशा में समानांतर होता है। (2) प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें हैं जिनमें दोलन तरंग की दिशा में लंबात्मक होता है।
(3) ध्वनि तरंगें निर्वात में से नहीं गुज़र सकतीं। इनको संचार के लिए किसी ठोस, द्रव या गैस जैसे भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है। (3) प्रकाश तरंगें निर्वात से भी गुज़र सकती हैं।
(4) ध्वनि तरंगों की वायु में चाल 340 m s-1 के लगभग बराबर होती है। (4) वायु में प्रकाश तरंगों की गति बहुत अधिक होती है। यह 3 × 10s8 m s-1 है।
(5) ध्वनि तरंगें संबंधित माध्यम के कणों के दोलन के कारण उत्पन्न होती हैं। (5) प्रकाश किरणें विद्युतीय या चुंबकीय क्षेत्रों में परिवर्तन पर निर्भर करती हैं ।
(6) ध्वनि तरंगों की आवृत्ति कम तथा तरंग-लंबाई अधिक होती है। (6) प्रकाश तरंगों की आवृत्ति बहुत अधिक तथा तरंग लंबाई कम होती है।
(7) ध्वनि तरंगों को ध्रुवित नहीं किया जा सकता। (7) प्रकाश तरंगों को ध्रुवित किया जा सकता है।
(8) ध्वनि तरंगें हमारे कानों को प्रभावित करती हैं। (8) प्रकाश तरंगें हमारी आँखों को प्रभावित करती हैं।
(9) ध्वनि तरंगें प्रक्षेपक नहीं होती। (9) प्रकाश तरंगें प्रक्षेपक हो सकती हैं।
(10) इन तरंगों का वेग तरंग-लंबाई से स्वतंत्र होता है। (10) इन तरंगों का वेग तरंग-लंबाई पर निर्भर करता है।

प्रश्न 6.
किसी माध्यम में ध्वनि तंरग की गति को घनत्व तथा दाब परिवर्तन को दर्शाते हुए संपीडन तथा विरलन समझाएं।
उत्तर-
जब ध्वनि तंरग किसी माध्यम में गति करती है तो घनत्व तथा दाब में परिवर्तन होता है। किसी निश्चित समय पर माध्यम का घनत्व तथा दाब दोनों ही उनके औसत मान से ऊपर और नीचे दूरी के साथ परिवर्तित होते हैं। चित्र (a) तथा चित्र (b) प्रदर्शित करते हैं कि जब ध्वनि तरंग माध्यम में संचरित होती है तो घनत्व तथा दाब में कैसे उतार-चढ़ाव होते हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 6

संपीड़न वह क्षेत्र है जहाँ कण पास-पास आ जाते हैं, इन्हें वक्र के ऊपरी भाग में दिखाया गया है। चित्र (c)। शिखर अधिकतम संपीडन के क्षेत्र को प्रदर्शित करता है। इस प्रकार संपीड़न वह क्षेत्र है जहाँ घनत्व तथा दाब दोनों ही अधिक होते हैं । विरलन निम्न दाब के क्षेत्र हैं जहाँ कण दूर-दूर हो जाते हैं और उन्हें घाटी के रूप में प्रदर्शित करते हैं। इन्हें वक्र के निम्न भाग से दिखाया गया है। शिखर को तरंग का शृंग तथा घाटी को गर्त कहा जाता है।

प्रश्न 7.
ध्वनि तंरगों का आवृत्ति परास के आधार पर वर्गीकरण करके समझाओ।
उत्तर-

  • श्रव्य तंरगें – वे ध्वनि तरंगें जिन्हें मानव कान सुन सकता है श्रव्य तंरगे कहलाती हैं। मानव में ध्वनि की श्रव्य सीमा 20 H से 20000 HZ तक है। ज्यों-ज्यों व्यक्ति की आयु बढ़ती है। उसके कान उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि के लिए कम संवेदनशील हो जाते हैं। ये तंरगें वायु स्तंभ के कंपन, द्विभुज स्वरित्र तथा वायलिन में उत्पन्न होती हैं।
  • पराश्रव्य तरंगों – 20 KHz (अर्थात् 20000 Hz) से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तंरगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं। कुछ प्रजातियों के कीट पराश्रव्य तंरगें सुन सकते हैं। चमगादड़, डालफिन तथा पर पाईज़ मछली पराश्रव्य तंरगें उत्पन्न करते हैं।
  • अवश्रव्य तरंगें – वे तरंगें जिनकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है अवश्रव्य तंरगें कहलाती हैं । व्हेल तथा हाथी अवश्रव्य ध्वनि तरंगें उत्पन्न करते हैं। भूचाल की मुख्य आवृत्ति वाली तरंगें के आने से पूर्व अवश्रव्य ध्वनि तरंगें पैदा होती हैं जिन्हें सुनकर कुछ जीव-जंतु परेशान हो जाते हैं। संभवतः यह उन्हें सचेत करने के लिए होता है।

प्रश्न 8.
परश्रव्य ध्वनि तरंगों का चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्र में क्या उपयोग है ? ..
उत्तर-
पराश्रव्य तंरगों ने आधुनिक चिकित्सा तथा मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया है। इससे शरीर के आंतरिक अंगों की जानकारी प्राप्त की जा रही है जो इस प्रकार हैं :
(i) ECG – पराध्वनि तंरगों को हृदय के विभिन्न भागों से परावर्तित करा कर हृदय का प्रतिबिंब बनाया जाता है। इस तकनीक को “इकोकार्डियोग्राफ़ी” (ECG) कहा जाता है।

(ii) सोनोग्राफी – पराध्वनि संसूचक एक ऐसा यंत्र है जो पराध्वनि तरंगों का उपयोग करके मानव शरीर के आंतरिक अंगों का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए काम में लाया जाता है। इस संसूचक से रोगी के अंगों ; जैसे-यकृत, पित्ताशय, गर्भाशय, गुर्दे आदि का प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सकता है। यह संसूचक को शरीर की असमान्यताएँ, जैसे पित्ताशय तथा गुर्दे में पथरी तथा विभिन्न अंगों में अर्बुद (ट्यूमर) का पता लगाने में सहायता करता है। इस तकनीक में पराध्वनि तरंगें शरीर के ऊतकों में गमन करती हैं तथा उस स्थान से परावर्तित हो जाती है जहाँ ऊतक के घनत्व में परिवर्तन होता है। इसके पश्चात् इन तरंगों को विद्युत् संकेतों में परिवर्तित किया जाता है जिससे कि उस अंग का प्रतिबिंब बना लिया जाए। इन प्रतिबिंबों को मॉनीटर पर प्रदर्शित किया जाता है। इस तकनीक को अल्ट्रासोनोग्राफी कहते हैं। अल्ट्रासोनोग्राफ़ी का उपयोग गर्भ काल में भ्रूण की जाँच तथा उनके जन्मजात दोषों तथा उसकी वृद्धि की अनियमितताओं का पता लगाने में भी किया जाता है।

(ii) लिँथोट्रिप्सी-पराध्वनि का उपयोग गुर्दे की छोटी पथरी को बारीक कणों को तोड़ने के लिए भी किया जा सकता है। ये कण बाद में मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 9.
ध्वनि परावर्तन के नियम क्या हैं ? एक प्रयोग द्वारा आप इन नियमों को कैसे सिद्ध करोगे ?
उत्तर-
प्रकाश की भांति ध्वनि भी परावर्तन के उन नियमों का पालन करती है।

  1. परावर्तित सतह पर आपतन बिंदु पर खींचा गया लंब के साथ ध्वनि की आपतित होने की दिशा तथा परावर्तन होने की दिशा के बीच बने कोण सदैव आपस में बराबर होते हैं।
  2. तीनों-आपतित ध्वनि की दिशा, परावर्तित ध्वनि की दिशा तथा लंब एक ही तल में होते हैं।

प्रयोग – चित्र के अनुसार एक समान पेपर के दो पाइप लें। इन्हें दीवार के निकट किसी मेज़ पर रखें। अब एक पाइप के खुले सिरे के पास घड़ी रखो। आप दूसरे पाइप के खुले सिरे में से घड़ी की आवाज़ सुनने की कोशिश करें। दोनों पाइपों की स्थिति इस प्रकार करें कि आपको घड़ी की आवाज़ स्पष्ट सुनाई दे। उन पाइपों की दिशाओं तथा लंब के बीच के कोण मापो। आप देखोगो कि स्पष्ट आवाज़ सुनाई देने की स्थिति में दोनों कोण परस्पर बराबर हैं जो पहले
नियम को सत्यापित करता है। क्योंकि दोनों पाइप तथा लंब एक ही मेज़ (तल) की सतह में हैं जो दूसरे नियम की सत्यता को प्रमाणित करता है।
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लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
आवर्ती गति किसे कहते हैं ? इस गति की तीन उदाहरण भी दें।
उत्तर-
आवर्ती गति (Periodic Motions) – वस्तु की वह गति जो किसी निश्चितं समय अंतरालों में बारबार होती रहती है, आवर्ती गति कहलाती है। ऐसी गति को दोलन गति या कंपन गति भी कहते हैं।

उदाहरण-

  1. पृथ्वी की सूर्य के इर्द-गिर्द गति ।
  2. एक झूले की गति जो इधर-उधर (अर्थात् दाएं-बाएं) अपनी मध्य स्थिति के इर्द-गिर्द गति करता रहता है।
  3. एक सरल लोलक की गति ।

प्रश्न 2.
सरल लोलक क्या होता है ? सरल लोलक के एक दोलन तथा एक कंपन क्या है ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 8
सरल लोलक – ऐसा प्रबंध जिसमें एक डोरी (धागा) जिसका एक सिरा दृढ़ आधार से बंधा हो तथा दूसरे सिरे पर भार लटका हो तथा जो स्वतंत्रतापूर्वक दोलन कर सके, सरल लोलक कहलाता है।

यह एक पीतल या तांबे का बहुत ही छोटा गोलक का बना होता है जिसको 80-120 cm लंबे धागे के साथ बांधा होता है। इसको चित्र में दिखाए अनुसार एक दृढ़ आधार से लटकाया जाता है
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 9

गोलक बहुत ही छोटा परंतु अधिक द्रव्यमान वाला होता है।

मान लो सरल लोलक की लंबाई ‘L’ है, जिसको दृढ़ आधार पर ‘m’ पुंज वाली एक गोलक के साथ लटकाया गया। जब गोलक गति की स्थिति में नहीं है तो यह माध्य स्थिति ‘0’ पर होता है। इसको संतुलन स्थिति में भी कहा जाता है।

गोलक की दोलन गति – गोलक को हाथ से पकड़ कर दाईं तरफ शिखर स्थिति ‘E1‘ तक ले जाकर छोड़ दो। गोलक स्थिति ‘E1‘ से बाईं तरफ शिखर स्थिति ‘E2‘ पर तथा फिर वापिस संतुलन स्थिति ‘O’ पर आ जाती है। इस तरह गोलक दोलन करना जारी रखता है।

दोलन्द – गोलक की एक दूरतम सिरे से दूसरे दूरतम सिरे तथा वापिस पहले सिरे तक तय की गई दूरी को दोलन कहते हैं।

कंपन – गोलक की संतुलन स्थिति O से शिखर स्थिति E1 तथा फिर संतुलन बिंदु O में से गुज़र कर दूसरी शिखर स्थिति E2 तक तथा वापिस संतुलन स्थिति ‘O’ तक तय किए गए पथ को एक कंपन कहा जाता है।

प्रश्न 3.
तरंग गति की परिभाषा दो तथा बताओ कि किसी माध्यम में तरंग के संचार के लिए कौन-कौन सी शर्ते आवश्यक हैं ?
उत्तर-
तरंग गति (Wave Motion) – यह एक प्रकार की हलचल है जो किसी माध्यम के कणों की दोहराई जाने वाली आवर्ती गति के कारण होती है। यह गति एक कण से दूसरे कण में स्थानांतरण होती है।

माध्यम में तरंग संचार के लिए आवश्यक शर्ते-

  1. माध्यम लचकीला होना चाहिए। यदि माध्यम लचकीला नहीं होगा तो अणुओं की ऊर्जा पड़ोसी अणुओं को नहीं दी जा सकेगी।
  2. माध्यम में जड़त्व का होना आवश्यक है।

वे तरंगें जो केवल एक पदार्थिक माध्यम में उत्पन होती हैं, लचकीली या यांत्रिक तरंगें कहलाती हैं।
वे तरंगें जिनके संचार के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं, उन्हें गैर-यांत्रिक तरंगें कहते हैं। प्रकाशीय तथा विद्युत् तरंगें इस प्रकार की होती हैं।

प्रश्न 4.
अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों में क्या अंतर है ?
उत्तर-
अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों में निम्नलिखित अंतर हैं-

अनुप्रस्थ तरंग अनुदैर्ध्य तरंग
(1) अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण तरंग की दिशा के लंबात्मक दोलन करते हैं। (1) अनुदैर्ध्य तरंग में माध्यम के कण तरंग की दिशा के समानांतर दोलन करते हैं।
(2) अनुप्रस्थ तरंग शृंगों और गर्मों से बनती है। (2) अनुदैर्ध्य तरंग संपीडनों और विरलनों से बनती है।
(3) आकार की तन्यता का उपयोग होता है। (3) आयतन की तन्यता का उपयोग होता है।
(4) अनुप्रस्थ तरंगें ठोस में से या द्रव के तल के ऊपर से गुज़र सकती हैं। अनुप्रस्थ तरंगें गैसों से बिल्कुल नहीं गुजर सकतीं। । (4) अनुदैर्ध्य तरंग ठोस, द्रव और गैसों में से गज़र सकती है।
(5) अनुप्रस्थ तरंग का ध्रुवण हो सकता है। (5) अनुदैर्ध्य तरंग का ध्रुवण नहीं हो सकता।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 5.
तरंग संचार के लिए माध्यम का लचकीला होना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
ठोस, द्रव तथा गैस माध्यम अणुओं के बने होते हैं जिनका व्यास 10-9 मीटर होता है। उनकी आण्विक रेंज, जहां तक हलचल के समय अणु जा सकते हैं, लगभग 10-8 मीटर तक होती है। इसके अंदर-अंदर ये बेतरतीब गति करते हैं। इस सीमा के अंदर-अंदर गति कर रहा अणु पड़ोसी अणुओं द्वारा आकर्षित होता रहता है। उन्हें अपनी

मूल स्थिति में वापिस आने में सहायक होता है। अणुओं का यह व्यवहार माध्यम को लचकीला बनाता है क्योंकि माध्यम करोड़ों अणुओं का बना होता है, इसलिए तरंग-संचार के लिए माध्यम का लचकीला होना बहुत ही आवश्यक

प्रश्न 6.
ध्वनि का संचार कैसे होता है ? क्या इसका संचार निर्वात में हो सकता है ? ठोस, द्रव तथा गैसों में से किस माध्यम में ध्वनि का वेग अधिकतम तथा किसमें न्यूनतम होता है ?
उत्तर-
ध्वनि का संचार अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में होता है इसलिए ध्वनि तरंगों मे संपीडन तथा विरलन होती है। ध्वनि का स्रोत सदैव ही कंपन स्थिति में होता है। कंपन कर रहे एक स्रोत से उत्पन्न ध्वनि एक माध्यम द्वारा ही आगे संचार की जा सकती है।

ध्वनि तरंगों का संचार निर्वात में कभी नहीं हो सकता। अनुप्रस्थ तरंगें प्रत्येक किस्म के माध्यम, ठोस, द्रव और गैस में संचरित हो सकती हैं। यह माध्यम के लचकीलेपन के कारण हैं। ठोस, द्रवों से और द्रव, गैसों से अधिक लचकीले होते हैं।
प्रयोगों से सिद्ध हो चुका है कि ध्वनि तरंगों की चाल ठोस में अधिकतम होती है जब कि गैसों में चाल न्यूनतम होती है।

प्रश्न 7.
पराश्रव्य तरंगें क्या होती हैं ? इनके उपयोग लिखो।
उत्तर-
पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic Sound) – 20000 कंपन प्रति सैकेंड से अधिक की आवृत्ति को ध्वनि पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic Sound) कहते हैं। यह ध्वनि हमें सुनाई नहीं देती, परंतु कुछ पशुओं जैसे कुत्तों में पराश्रव्य कंपन को सुनने की क्षमता होती है। चमगादड़ों में पराश्रव्य ध्वनि को पैदा करने तथा सुनने की क्षमता होती है। इन्हीं कंपनों के कारण चमगादड़ों को अपने गमन-पथ का आभास होता है। इसी सिद्धांत के अनुसार राडार का
आविष्कार किया गया है।

पराश्रव्य तरंगों के उपयोग-

  1. SONAR में पनडुब्बियों की गहराई मापने में इनकी सहायता ली जाती है।
  2. बैक्टिरिया को नष्ट करने और दूध की जीवाणु रहित बनाने के लिए उपयोग होती हैं।
  3. ठोस वस्तुओं में छिद्र और दरारें ढूंढ़ने के लिए।
  4. पराश्रव्य तरंगों का प्रयोग शरीर के भीतर पनपने वाले कैंसर तथा माँस पिंडों को जाँचने में किया जाता है।
  5. पराश्रव्य तरंगों से गुर्दो की पत्थरी की जाँच होती है।
  6. इन तरंगों से भ्रूण की जाँच की जा सकती है।
  7. माँसपेशियों की दर्द तथा जोड़ों के दर्द के निवारण में इनकी सहायता ली जाती है।
  8. हवाई जहाज़ों, रेलवे लाइनों तथा पाइपों के दोषों को इनकी सहायता से ढूँढा जाता है।
  9. समुद्रों की गहराई मापी जाती है।
  10. ये फोटोग्राफी फिल्मों को बनाने में सहायक होती हैं।

प्रश्न 8.
तरंग-गति के क्या गण हैं ?
उत्तर-
तरंग-गति के गुण-

  1. यह एक हिल-जुल है, जो माध्यम में से गुज़रती है। तरंग गति के साथ कोई भी द्रव्यमान स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
  2. माध्यम के कण अपने मध्य स्थिति के इर्द-गिर्द दोलन करते हैं।
  3. किसी कण का दोलन उससे पहले वाले कण से कुछ देर बाद शुरू होता है। क्रमिक स्थितियों में निरंतर फेज़-अन्तर होता है।
  4. दोलन के दौरान कणों का वेग विभिन्न स्थितियों में विभिन्न होता है। यह मध्य स्थिति पर अधिक तथा उच्चतम स्थितियों पर शून्य होता है।
  5. किसी माध्यम में तरंग का वेग अचर होता है।
  6. माध्यम के बिना किसी वास्तविक स्थानांतरण के हिल-जुल के साथ ऊर्जा भी स्थानांतरित हो जाती है।
  7. यांत्रिक तरंग गति के स्थानांतरण के लिए भौतिक माध्यम आवश्यक है। इस माध्यम में तन्यता और जड़त्व के गुण होने चाहिएं तथा माध्यम के कणों में घर्षण बल लघुतम होना चाहिए।

प्रश्न 9.
ध्वनि क्या है ? संक्षेप में बताओ।
उत्तर-
ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमारे कानों में सुनने की संवेदना उत्पन्न करती है। यह एक प्रकार की कणों में हलचल (Disturbance) है जो बाहरी कारणों से उत्पन्न होती है।

हम कई प्रकार की ध्वनियां सुनते हैं, जैसे-बच्चे का रोना, वायु का तेज़ चलना, कुत्ते का भौंकना, बिजली का गर्जना, रेल के इंजन की सीटी, वायुयान की गड़गड़ाहट आदि। हर प्रकार की ध्वनि पैदा करने वाली वस्तु कंपन कर रही होती है।

प्रश्न 10.
एक तंग कमरे में प्रतिध्वनि सुनाई नहीं देती। व्याख्या करो, क्यों ?
उत्तर-
तंग कमरे में प्रतिध्वनि – हमारे कान में सुनने की संवेदना का प्रभाव 0.1 सैकेंड तक रहता है यद्यपि ध्वनि का स्रोत कंपन करना बंद कर दे। इसलिए गूंज सुनने के लिए परावर्तित ध्वनि हमारे कानों में मूल ध्वनि के पहुंचने से 0.1 सैकेंड बाद आनी चाहिए। अर्थात् ध्वनि द्वारा दोनों ओर से तय की गई कुल दूरी 344 × 0.1 = 34.4 मीटर होनी चाहिए। इसलिए यह स्पष्ट है कि गूंज उत्पन्न करने के लिए स्रोत तथा परावर्तक तक ध्वनि को 34.4 मी० का आधा अर्थात् 17.2 मीटर की दूरी तक करनी चाहिए। यदि ध्वनि स्रोत तथा परावर्तक के बीच की दृरी 17.2 मी० से कम होगी तो प्रतिध्वनि सुनाई नहीं देगी। इसलिए तंग कमरे की दीवारों की दूरी 17.2 मी० से कम होती है इसलिए प्रतिध्वनि नहीं देती।

प्रश्न 11.
कंपन गति से ध्वनि उत्पन्न होती है, फिर कंपन कर रहा एक लोलक ध्वनि उत्पन्न क्यों नहीं करता ?
उत्तर-
दोलन या कंपन कर रहा लोलक ध्वनि इसलिए उत्पन्न नहीं करता क्योंकि इससे उत्पन्न हुई दोलन तरंगें वायु के माध्यम में बिखर जाती हैं। यदि निर्वात में लोलक का कंपन हो तो ध्वनि सुनाई देगी।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 12.
दूर बज रहे सायरन के साथ हम अपनी घड़ी सैट करते हैं ? क्या वह तेज़ चलेगी या धीमी ? व्याख्या करो।
उत्तर-
सायरन से उत्पन्न हुई ध्वनि को हम तक पहुंचने के लिए कुछ समय लगेगा। अर्थात् जब सायरन बजा तथा जब ध्वनि हम तक पहुंची है उसमें कुछ समय लगता है। इसलिए सायरन के साथ सैट की हुई घड़ी वास्तविक समय से पीछे रह जाएगी अर्थात् धीमी चलेगी।

प्रश्न 13.
एक संपीडन तथा एक विरलन क्या होते हैं ?
उत्तर-
अनुदैर्ध्य तरंग के संपीडन और विरलन – अनुदैर्ध्य तरंग माध्यम में से संपीडन और विरलन के रूप में चलती है।

संपीडन की परिभाषा – संपीडन माध्यम का वह क्षेत्र है जिसमें कण परस्पर निकट आ जाते हैं अर्थात् कण सामान्य परिस्थिति की अपेक्षा कम दूरी पर होते हैं।

अनुदैर्ध्य तरंग के संचार के समय संपीडन पर माध्यम के कणों के आयतन में अस्थायी रूप से कमी आ जाती है। इसके परिणामस्वरूप माध्यम के इस क्षेत्र में घनत्व बढ़ जाता है।

विरलन की परिभाषा – विरलन माध्यम का वह क्षेत्र है जिसमें कण अपनी सामान्य दूरी से थोड़ा परे-परे हो जाते हैं।

तरंग के संचार के समय विरलन पर माध्यम के कणों का आयतन अस्थायी रूप से अधिक हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप माध्यम के इस क्षेत्र में दबाव कम हो जाता है। क्योंकि माध्यम के दबाव में कमी होती है, इसलिए इन तरंगों को दबाव तरंगें भी कहते हैं।

ध्वनि तरंगें भी अनुदैर्ध्य होती हैं जो माध्यम में से गुजरते समय संपीडन और विरलन की श्रृंखला से युक्त होती हैं। जब ध्वनि तरंग वायु में गुजरती है, तो वायु के कण आगे नहीं बढ़ते परंतु उसी दिशा में दोलित होते हैं, जिसमें ध्वनि तरंग गतिशील होती है।

जब माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगें चलती हैं तो माध्यम की घनता में परिवर्तन चित्र में दिखाये अनुसार होता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 10

प्रश्न 14.
श्रृंग और गर्त में अंतर बतलाओ।
उत्तर-
श्रृंग (शीर्ष) (Crest) – अनुप्रस्थ तरंगों में दोलन कर रहे कणों की संतुलन स्थिति में धनात्मक दिशा की ओर अधिकतम विस्थापन वाले सबसे ऊंचे बिंदु को शीर्ष कहते हैं।

गर्त (ट्रफ) (Trough) – अनुप्रस्थ तरंगों में दोलन कर रहे कणों की संतुलन स्थिति से ऋणात्मक दिशा की ओर अधिकतम विस्थापन वाले सबसे निम्न बिंदु को गर्त कहते हैं।

अनुप्रस्थ तरंग के शीर्ष और गर्त – अनुप्रस्थ तरंग हिल-जुल रेखा के शून्य बिंदु से ऊपर उठने तथा नीचे बैठने के रूप में बनती है। माध्य के उठान को शीर्ष कहते हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 11

प्रश्न 15.
क्या आप ध्वनि की सहायता से एक प्रकाश के धब्बे को नृत्य करा सकते हैं ? कैसे ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
एक टिन का डिब्बा लो। इसके दोनों सिरों को काट कर खोखला बेलन बना लो। एक गुब्बारे को इस प्रकार काटो कि उसकी एक झिल्ली बन जाए। इस झिल्ली को खींच कर डिब्बे के एक खुले सिरे के ऊपर तान दो। गुब्बारे के चारों ओर एक रबड़ का छल्ला लपेट दो। समतल दर्पण का एक छोटा टुकड़ा लेकर इसे गोंद की सहायता से गुब्बारे से इस प्रकार चिपकाओ कि उसकी चमकदार सतह ऊपर की ओर हो।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 12

एक झिरों से आने वाले प्रकाश को दर्पण पर पड़ने दो। परावर्तन के पश्चात् प्रकाश का धब्बा दीवार पर पहुँचाता है। डिब्बे के खुले भाग में सीधे ही बात करो या ज़ोर से चिल्लाओ। आप दीवार पर प्रकाश के धब्बे को नाचते हुए देखोगे।

प्रश्न 16.
ध्वनि बूम से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
ध्वनि बूम (Sonic boom) – जब कोई ध्वनि स्रोत वायु में, ध्वनि की चाल से अधिक चाल से चलता है तो वह वायु में प्रघाती तंरगें उत्पन्न करता है जिनमें बहुत अधिक ऊर्जा होती है। इन तंरगों के कारण वायुदाब में परिवर्तन से एक तेज़ और प्रबल ध्वनि उत्पन्न होती है जिसे ध्वनि बूम कहते हैं। पराध्वनिक यान से उत्पन्न ध्वनि बूम में इतनी ऊर्जा होती है कि आस-पास के मकानों की खिड़कियाँ के काँच झनझना उठती हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 17.
ध्वनि पट्ट (बोर्ड) क्या होता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
ध्वनि-पट्ट – ध्वनि पट्ट एक अवतल पृष्ठ होता है जिसे बड़े हॉलों इत्यादि में स्पीकर के पीछे रख देते हैं। इसका प्रयोग ध्वनि को पूरे हॉल में समान रूप से फैलाने में किया जाता है। वक्ता S चित्र अनुसार ध्वनि-पट्ट को चित्रानुसार ध्वनि-पट्ट के फोकस पर अवस्थित है। अवतल परावर्तक ध्वनि पट्टों को चित्रानुसार वक्ता (स्पीकर) के पीछे रखते हैं जिससे ध्वनि विभिन्न दिशाओं में फैलने से रुकती है। ध्वनि पट्ट फोकस पर स्थित वक्ता की ध्वनि की तंरगों को श्रोताओं की ओर परावर्तित करता है, इनसे दूर बैठे श्रोतागण भी वक्ता का भाषण स्पष्ट सुन पाते हैं। अतः ध्वनि पट्ट की कार्यविधि ध्वनि के परावर्तन पर आधारित है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 13

प्रश्न 18.
ध्वनि परावर्तन से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
ध्वनि का परावर्तन – प्रकाश की भाँति ध्वनि भी अपनी दिशा बदल सकती है तथा परावर्तित हो सकती है। ध्वनि का दीवारों से टकराकर वापस लौटना ध्वनि का परावर्तन कहलाता है ; जैसे-ध्वनि तंरगें धातु की चादर, लकड़ी इत्यादि से परावर्तित हो जाती हैं। प्रकाश परावर्तन के नियम ध्वनि के लिए भी लागू होते हैं, परंतु ध्वनि के परावर्तन के लिए किसी चिकनी तथा चमकीली सतह की आवश्यकता नहीं होती है। ध्वनि तरंगों के परावर्तन के लिए बड़े आकार के अवरोधों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 19.
क्या कारण है कि दूर से आने वाली रेलगाड़ी की ध्वनि सुनाई नहीं देता परंतु पटरी पर कान रखकर हम उसकी आवाज़ सुन सकते हैं ?
उत्तर-
ध्वनि वायु की अपेक्षा धातुओं आदि में एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुगमता से तीव्र चाल से चलती है। अत: रेलगाडी की आवाज़ पटरी में से होकर हमारे कानों तक पहुंच जाती है।

प्रश्न 20.
क्या कारण है कि औरतों की आवाज़ पतली व पुरुषों की आवाज़ मोटी होती है ?
उत्तर-
ध्वनि का मोटा अथवा पतला होना ध्वनि के तारत्व पर निर्भर करता है, क्योंकि औरतों की ध्वनि का तारत्व अधिक होता है, अत: आवाज़ पतली होती है। इसके विपरीत पुरुषों की ध्वनि का तारत्व कम होता है अत: आवाज़ मोटी होती है।

प्रश्न 21.
क्या कारण है कि हम भूकंप से उत्पन्न तरंगों को नहीं सुन पाते जबकि चमगादड़ या कुत्ते सुन सकते हैं ?
उत्तर-
हमारा कान 20 हर्ट्ज़ से 20,000 हर्ट्ज़ तक की आवृत्तियों वाली तरंगों को सुन सकते हैं। आवृत्ति का यह परास श्रवण परास कहलाता है। भूचाल द्वारा पैदा हुई तरंगों की आवृत्ति इस परास में नहीं होती। इसलिए हम इन तरंगों को नहीं सुन सकते परंतु चमगादड़ और कुत्ते के कान भूचाल द्वारा पैदा हुई तरंगों के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसलिए चमगादड़ और कुत्ते आसानी से इन तरंगों को सुन सकते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 22.
मच्छर की आवाज़ तथा शेर की आवाज़ में क्या अंतर है ?
उत्तर-
मच्छर की आवाज़ की प्रबलता कम होती है परंतु आवृत्ति अधिक होती है। दूसरी तरफ शेर की आवाज़ की प्रबलता अधिक होती है परंतु आवृत्ति कम होती है, इसलिए मच्छर की आवाज़ शेर की आवाज़ से तीखी होती है।

प्रश्न 23.
श्रवण सहायक युक्ति क्या है और यह किस प्रकार कार्य करती है ?
उत्तर-
श्रवण सहायक युक्ति – जिन व्यक्तियों को कम सुनाई देता है उन्हें इस युक्ति की आवश्यकता होती हैं। यह बैट्री से चलने वाली एक इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है। इसमें एक छोटा-सा माइकोफोन, एक एंप्लीफायर व स्पीकर होता है। जब ध्वनि माइक्रोफोन पर पड़ती है तो वह ध्वनि तरंगों को विद्युत् संकेतों में परिवर्तित कर देता है।

एंप्लीफायर इन विद्युत् संक्तों को प्रवर्धित कर देता है। ये संकेत स्पीकर द्वारा ध्वनि की तरंगों में परिवर्तित कर दिए जाते हैं। ये ध्वनि तरंगें कान के डायफ्राम पर आपतित होती हैं तथा व्यक्ति को ध्वनि साफ़ सुनाई देती है।

महत्त्वपूर्ण सूत्र (Important Formulae)

1. तरंग का वेग, (v) = v × λ
2. आवृत्ति (v) = \(\)
3. तरंग लंबाई (λ) = V × T
4. कुल दूरी = वेग × समय

संख्यात्मक प्रश्न (Numerical Problems)

प्रश्न 1.
मोहन के हृदय की आवृत्ति कितनी है, जब वह 1 मिंट में 75 बार धड़क रहा हो ?
हल :
75 बार हृदय के धड़कने को लगा समय = 1 मिनट = 60 सैकेंड
1 बार हृदय के धड़कने को लगा समय = \(\frac{60}{75}\) सैकेंड
= 0.80 सैकेंड
∴ आवर्त काल (T) = 0.80 सैकेंड
हम जानते हैं, कि आवृत्ति (v) = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 14
v = \(\frac{1}{0.80}\)
= 1.25 हज़ उत्तर

प्रश्न 2.
एक नाव समुद्र की तरंगों से टकरा गई है, जिसकी क्रमागत श्रृंग 100 मी० की दूरी पर है। श्रृंग की तरंग-वेग 20 मी०सै० है। नाव की तरंगों से टकराने की आवृत्ति कितनी है ?
हल :
तरंगदैर्ध्य, (λ) = 100 m
तरंग वेग, (v) = 20 m/s
आवृत्ति, (v) = ?
हम जानते हैं, v = v × λ
20 = v × 100
v = \(\frac{20}{100}\)
= 0.2 हज़ = 0.16

प्रश्न 3.
तरंग का एक स्रोत 0.4 सैकेंड में 40 श्रृंग और 40 गर्त उत्पन्न करता है। तरंग की आवृत्ति ज्ञात करो।
उत्तर-
एक तरंग साइकिल में एक श्रृंग तथा एक गर्त होता है। क्योंकि दिया हुआ स्रोत 40 श्रृंग उत्पन्न करता है, अत: यह 0.4s में 40 तरंग साइकिल उत्पन्न करता है। इसलिए,
0.4s में तरंग साइकिल उत्पन्न होती है = 40
1s में तरंग साइकिल उत्पन्न होगी = \(\frac{40 \times 1 \mathrm{~s}}{0.4 \mathrm{~s}}\)
= 100
∴ तरंग की आवृत्ति (υ) = 100 Hz

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 4.
एक तार पर एक तरंग प्लस 8 मीटर की दूरी 0.05 सैकेंड में तय करती है। तरंग वेग कितना है ? यदि तार की आवृत्ति 200 हर्ट्ज़ है तो तरंग की लंबाई कितनी होगी ?
हल :
तरंग का वेग, υ = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 15
υ = \(\frac{8}{0.05}\)
= 160 मी०/सै०
हम जानते हैं कि, v = υλ
λ = \(\frac{v}{v}\)
λ = \(\frac{160}{200}\)
λ = 0.8 मीटर उत्तर

प्रश्न 5.
ध्वनि तरंगों का वेग 330 m/s है। यदि ध्वनि तरंग की आवृत्ति 550 Hz हो, तो उसकी तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल :
υ = 550 Hz, v = 330 ms-1, λ = ?
υ = vλ
या, λ = \(\frac{v}{v}=\frac{330}{550}\) = 0.6 m

प्रश्न 6.
एक स्रोत द्वारा उत्पन्न ध्वनि की तरंग-लंबाई 1.7 × 10-2m है। यदि इसका वेग 343.4 ms-1 हो, तो ध्वनि की आवृत्ति ज्ञात करें।
हल :
वेग υ = 343.4 ms-1, आवृत्ति υ = ? तरंग-लंबाई = 1.7 × 10-2 m
υ = vλ
या v = \(\frac{v}{\lambda}\)
या v = \(\frac{343.4}{1.7 \times 10^{-2}}\)
= 2.02 × 104 Hz.

प्रश्न 7.
उस तंरंग की आवृत्ति क्या होगी जिसका आवर्तकाल 0.05 s है ?
हल :
आवर्तकाल T = 0.05 s, आवृत्ति, v = ?
आवृत्ति v = \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)
या v = \(\frac{1}{0.05}=\frac{100}{5}\) = 20 Hz.

प्रश्न 8.
एक चमगादड़ 120 KH2. तक की आवृत्ति की ध्वनि को सुन सकता है। इस आवृत्ति के लिए, वायु में ध्वनि की तरंगदैर्ध्य क्या होगी ? वायु में ध्वनि का वेग 344 m/s लीजिए।
हल:
आवृत्ति (v) = 120 कि० हर्ट्ज़ = 120 × 1000 हर्ट्स
= 120,000 हज़
ध्वनि का वेग = V= 344 मी०/सै०
तरंगदैर्ध्य, λ = ?
V = vλ
λ = \(\frac{\mathrm{V}}{v}\)
= \(\frac{344}{120,000}\)m
= \(\frac{344 \times 100}{120,000}\)m
= 0.28 m

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प्रश्न 9.
वकीय तरंग, जिसका आवर्तकाल 10 सैकेंड 15 मी०/सै० के वेग से चल रही है। उसकी तरंग लंबाई ज्ञात करो। एक तरंग शीर्ष तथा अगली तरंग गर्त के मध्य क्षैतिज दूरी बताओ।
हल:
आवर्तकाल, T = 10 sec.
v = \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)
= \(\frac{1}{10}\) = 0.1 हलज़
वेग, V = 15 m/s
हम जानते हैं, V = vλ
λ = \(\frac{\mathrm{V}}{v}\)
= \(\frac{15}{0.1}\)
= 150 मी०
एक तरंगशीर्ष तथा अगली तरंग गर्त के बीच दूरी = \(\frac{\lambda}{2}\)
= \(\frac{150}{2}\)
= 75 मी०

प्रश्न 10.
चित्र में किस क्षण एक आवर्त तरंग का दूरी विस्थापन का ग्राफ दिखाया गया है, यदि तरंग का वेग 320 m/s हो, तो ज्ञात कीजिए-
(a) तरंगदैर्ध्य
(b) आवृत्ति।
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 16

(a) तरंगदैर्ध्य = दो शृंगों के बीच की दूरी
= 50 – 10 = 40 cm
= \(\frac{40}{100}\)m = 0.4 m

(b) तरंग का वेग υ = 320 m/s, v = ?, λ = 0.4
υ = vλ
v = \(\frac{v}{\lambda}=\frac{320}{0.4}\) = 800Hz .
दूरी (सें मील) -1 2. 0.4
∴ आवृत्ति v = 800 Hz

प्रश्न 11.
किसी स्प्रिंग (Spring) पर कोई अनुदैर्ध्य तरंग उत्पन्न की जाती है। यह तरंग 3th cm/s वेग से चलती है और इसकी आवृत्ति 20 Hz है। स्प्रिंग के दो क्रमागत संपीडनों के बीच न्यूनतम दूरी कितनी है ?
हल :
V = 30 cm/s = 0.30 m/s, आवृत्ति v = 20 Hz, λ = ?
V = vλ
0.30 = 20 Hz × λ
λ = \(\frac{.30}{20}\)
= .015 मीटर
= 1.5 सेमी०

प्रश्न 12.
एक रिपल तालाब (Ripple tank) में प्रति सैकेंड 10 पूरी लहरें उत्पन्न होती हैं। पड़ोसी गर्त और शिखरों में दूरी 12 cm है। आवृत्ति, तरंग-लंबाई और तरंग का वेग ज्ञात करें।
हल :
चूँकि 10 लहरें प्रति सैकेंड की दर से उत्पन्न होती हैं। इसलिए आवृत्ति 10 Hz है। चूँकि तरंग-लंबाई पड़ोसी गर्त और शिखर की दूरी की दुगुनी है, इसलिए तरंग-लंबाई है
λ = 2 × 12 = 24 cm
V = v × λ = 10 × 24 = 240 ms-1

प्रश्न 13.
एक प्रेषक चट्टान के सामने 200 मीटर दूर खड़ा होता है। वह सीटी बजाता है। अगर ध्वनि हवा में 332 m/s के वेग से चलती हो तो यह सीटी की प्रति ध्वनि कितनी देर बाद सुन सकेगा ?
हल :
ध्वनि का वेग = 332 मीटर प्रति सै०
ध्वनि वापस आने के लिए चली गई दूरी = 200 मी० + 200 मी० = 400 मी०
332 मी० ध्वनि चलने के लिए लिया गया समय = 1 सैकेंड
1 मी० ध्वनि चलने के लिए लिया गया समय = \(\frac{1}{332}\) सैकेंड
400 मी० ध्वनि चलने के लिए लिया गया सभय = \(\frac{1}{332}\) × 400
= \(\frac{100}{83}\) से०
= 1.2 सैकेंड उत्तर

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 14.
एक नाव में एक ध्वनि संकेत भेजा गया। यह संकेत समुद्र की तली से परावर्तन होने के 0.8 सैकेंड के बाद नाव पर लौट आया। समुद्र की गहराई ज्ञात करो यदि पानी में ध्वनि का वेग 1500 मीटर प्रति सैकेंड हो।
हल :
ध्वनि का वेग = 1500 मी० प्रति सैकेंड
लगा समय = 0.8 सैकेंड
ध्वनि द्वारा कुल तय दूरी = ध्वनि का वेग × समय
= 1500 × 0.8
= 1500 × \(\frac{8}{10}\)
= 1200 मी०
समुद्र की गहराई = \(\frac{1200}{2}\) = 600 मी०

प्रश्न 15.
कोई बच्चा किसी शक्तिशाली पटाखे के फटने के 4 सैकेंड बाद उसकी किसी खड़ी चट्टान के कारण प्रतिध्वनि सुनता है। बच्चे से चट्टान की दूरी क्या है ? हल :
ध्वनि द्वारा जाने तथा फिर वापिस आने में तय की गई कुल दूरी = 2d
V = \(\frac{2 d}{t}\)
d = \(\frac{\mathrm{V} \times t}{2}\)
d = \(\frac{344 \times 4}{2}\)
= 688 मीटर उत्तर

प्रश्न 16.
एक स्वरित्र की आवृत्ति 400 हर्ट्ज़ है। इसका आवर्तकाल कितना होगा ?
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 17

प्रश्न 17.
एक स्वरित्र का दोलनकाल 1/10 सेकंड है। स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 18
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 19
∴ υ = 40 हर्ट्ज़।

प्रश्न 17.
एक तरंग की चाल 100 मीटर/सेकंड तथा तरंग-दैर्ध्य 50 सेमी है। तरंग की आवृत्ति ज्ञात कीजिए :
हल :
दिया है, तरंग की चाल (v) = 1000 मीटर/सेकंड, तरंग दैर्ध्य (λ) 50 सेमी = 50 × 10-2 मीटर, आवृत्ति (v) = ?
सूत्र υ = vλ से
तरंग की आवृत्ति v = \(\frac{v}{\lambda}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 20
= 200 हर्ट्ज़

प्रश्न 18.
ध्वनि वायु में 330 मीटर/सेकंड की चाल से चलती है। एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 550 हर्ट्स है। इस तरंग की तरंग-दैर्ध्य क्या होगी ?
हल :
दिया है : तरंग वेग (υ) = 330 मीटर/सेकंड, आवृत्ति (v) = 550 हर्टज
सूत्र υ = v × λ = से,
तरंग-दैर्ध्य λ = \(\frac{v}{v}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 21
= \(\frac{3}{5}\) मीटर = 0.6 मीटर

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 19.
एक रेडियो प्रसारण केंद्र से 40 मेगा ह आवृत्ति की विद्युत्-चुंबकीय तरंगें प्रसारित होती हैं। यदि विदयुत्-चुंबकीय तरंग की चाल 3.0 × 108 मीटर/सेकंड हो तो इन तरंगों की तरंग-दैर्ध्य क्या होगी?
हल :
दिया है : आवृत्ति (v) = 40 मेगा हर्ट्ज़ = 40 × 106 हज़, चाल (v) = 3.0 × 106 मीटर/सेकंड, तरंगदैर्ध्य (λ) = ?
सूत्र v = vλ
तरंग-दैर्ध्य λ = \(\frac{v}{v}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 22
= 7.5 मीटर

प्रश्न 20.
किसी (खड़ी नाव) से जल तरंगें लगातार टकरा रही हैं। यदि इन तरंगों के दो क्रमागत श्रृंगों के बीच की दूरी 100 मीटर तथा जल में तरंगों का वेग 20 मीटर/सेकंड है तो तरगों के नाव से टकराने की आवृत्ति क्या है ?
हल :
दिया है : जल में तरंगों का वेग (υ) = 20 मीटर/सेकंड
क्रमागत शृंगों के बीच की दूरी = 100 मीटर, तरंगों की आवृत्ति (v) = ?
∵ दो क्रमागत शृंगों के बीच की दूरी = तरंग्ध्य (λ)
∴ तरंग-दैर्ध्य λ = 100 मीटर
सूत्र = v × λ से,
आवृत्ति v = \(\frac{v}{\lambda}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 23
= 0.2 हज़

प्रश्न 21.
एक स्रोत वायु में 1.2 मीटर तरंग-दैर्ध्य की तरंगें उत्पन्न कर रहा है। यही स्रोत जल में 5.4 मीटर तरंग-दैर्ध्व की तरंगें उत्पन्न करता है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 330 मीटर/सेकंड हो तो तरंग की जल में चाल ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : वायु में तरंग दैर्ध्य (λ1) = 1.2 मीटर तथा तरंग वेग (υ1) = 330 मीटर/सेकंड
∴ तरंग की आवृत्ति (v) = \(\frac{v_{1}}{\lambda_{1}}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 24
= 275 हज़
दोनों तरंगें एक ही स्रोत से उत्पन्न हो रही हैं क्योंकि दोनों की आवृत्तियाँ समान हैं
जल में तरंग-दैर्ध्य (λ2) = 5.2 मीटर
∴ जल में तरंग की चाल (υ2) = v × λ2
= 275 हज़ × 5.4 मीटर
= 1485 मीटर/सेकंड

प्रश्न 22.
सोनार द्वारा पानी के पृष्ठ पर ध्वनि स्पंद उत्सर्जित किए जाते हैं। ये स्पंद पानी की तली से परावर्तन के पश्चात् संसूचित किए जाते हैं। यदि उत्सर्जित होने व संसूचन के बीच समय अंतराल 2 सेकंड है तो पानी की गहराई कितनी है ? (पानी में ध्वनि की गति = 1498 मीटर/सेकंड)
हल :
दिया है, उत्सर्जन व संसूचन के मध्य समयांतराल (t) = 2 सेकंड
पानी में ध्वनि की चाल (v) = 1498 मीटर/सेकंड
मान लो पानी की गहराई = S = ?
प्रश्नानुसार, ध्वनि तरंगें (t) = 2 सेकंड में 25 दूरी तय करती है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 25
अतः पानी की गहराई S = \(\frac {1}{2}\)υt
= \(\frac {1}{2}\) × (1498 मीटर/सेकंड) × 2 सेकंड
= 1498 मीटर

प्रश्न 23.
एक पत्थर 44.1 मीटर गहरे कुएँ में गिराया जाता है। यदि पत्थर के पानी से टकराने की ध्वनि, पत्थर गिराने के 3.13 सेकंड बाद सुनाई देती है तो वायु में ध्वनि का वेग ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, कुएँ की गहराई (h) = 44.1 मीटर, गुरुत्वीय त्वरण (g) = 9.8 मीटर/सेकंड2
पत्थर को जल के तल तक जाने में तथा ध्वनि को ऊपर तक आने में लगा समय 1 = 3.13 सेकंड
मान लो पत्थर को जल के तल तक जाने में t1 समय लगता है तो
समीकरण S = ut + \(\frac {1}{2}\)gt2 से,
44.1 मीटर = 0 × t1 + \(\frac {1}{2}\) × (9.8 मीटर/सेकंड2) × t12
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 26
= 3.0 सेकंड
∴ ध्वनि को कुएँ के शिखर तक पहुँचने में लगा समय t2 = t – t1
= (3.13 – 3.0) सेकंड
= 0.13 सेकंड
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 27
= 339.2 मीटर/सेकंड

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 24.
प्रतिध्वनि सुनने के लिए किसी कमरे की न्यूनतम लंबाई कितनी होनी चाहिए ? वायु में ध्वनि की चाल 320 मीटर/सेकंड है।
हल :
मानव कान पर ध्वनि का प्रभाव t = 0.1 सेकंड तक बना रहता है,
∴ प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक है, ध्वनि को श्रोता से चलकर दीवार से टकराने तथा वापस श्रोता तक पहुँचने में न्यूनतम 0.1 सेकंड का समय लगना चाहिए।
मान लो कमरे की न्यूनतम लंबाई = (S)
तब ध्वनि 0.1 सेकंड में 2S दूरी तय करेगी।
तय हुई दूरी (2S) = चाल × समय
2S = 320 मीटर/सेकंड × 0.1 सेकंड
या 2S = 32 मीटर
S = 16 मीटर
इसलिए कमरे की न्यूनतम लंबाई 16 मीटर होनी चाहिए।

प्रश्न 25.
किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति 2kHz और उसकी तरंगदैर्ध्य 35cm है। यह 1.5 km दूरी चलने में कितना समय लेगी ?
हल :
दिया हुआ है,
आवृत्ति (v) = 2 kHz
= 2000 Hz
तरंगदै- (λ) = 35 cm
= 0.35 m
हम जानते हैं, तरंग वेग (υ) = तरंगदैर्ध्य × आवृत्ति
υ = λ × v
= 0.35m × 2000 Hz
= 700 m/s
समय (t) = \(\frac{d}{v}=\frac{1.5 \times 1000 \mathrm{~m}}{700 \mathrm{~ms}^{-1}}\)
= \(\frac{15}{7}\)s
= 2.1s
∴ ध्वनि 1.5 km दूरी तय करने में 2.1 s समय लेगी।

प्रश्न 26.
एक मनुष्य किसी खड़ी चट्टान के पाम ताली बजाता है और उसकी प्रतिध्वनि 5s के पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 346 ms-1 ली जाए, तो चट्टान तथा मनुष्य के बीच की दूरी कितनी होगी ?
हल :
ध्वनि की चाल (υ) = 346 ms-1
प्रतिध्वनि सुनने में लिया गया समय t = 5s
ध्वनि द्वारा चली गई दूरी (S) = υ × t = 346 ms-1 × 5 s
= 1730 m
5 s में ध्वनि ने चट्टान तथा मनुष्य के बीच की दोगुनी दूरी तय की।
1730 चट्टान तथा मनुष्य के बीच की दूरी = \(\frac{1730}{2}\)m
= 865 m

प्रश्न 27.
एक जहाज पराध्वनि उत्पर्जित करता है जो समुद्र तल से परावर्तित होकर 3.42 s के पश्चात् संसूचित की जाती है। यदि समुद्र जल में पराध्वनि की चाल 1531 m/s हो, तो समुद्र तल से जहाज़ की कितनी दूरी होगी ?
हल :
प्रेषण तथा संसूचन के बीच लगा समय t = 3.42 s
समुद्र जल में पराश्वनि की चाल (υ) = 1531 m/s
पराध्वनि द्वारा चली गई दूरी = 2d. जहाँ d = समुद्र की गहराई
∴ 2d = ध्वनि की चाल – समय = 1531 m/s × 3.42s
= 5236 m
d = \(\frac{5236}{2}\)m
= 2618 m
∴ जहाज़ से समुद्र तल की दूरी 2618 m = 2.62 km है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
ध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है जो कंपन द्वारा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
ध्वनि की गति गैसों में अधिक होती है अथवा ठोस में ?
उत्तर-
ठोस में अधिक होती है।

प्रश्न 3.
ध्वनि की गति की द्रवों और ठोसों में तुलना करो।
उत्तर-
ध्वनि की गति द्रवों में कम होती है परंतु ठोसों में अधिक होती है।

प्रश्न 4.
मानव कान किस आवृत्ति वाली ध्वनि को सुन सकता है ?
उत्तर-
मानव कान 20 हर्टज़ से 20,000 हर्ट्ज़ वाली ध्वनि सुन सकता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 5.
क्या ध्वनि निर्वात में चल सकती है?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 6.
ध्वनि की प्रकृति अनुप्रस्थ तरंग है या अनुदैर्ध्य तरंग ?
उत्तर-
अनुदैर्ध्य तरंग।

प्रश्न 7.
तरंग उत्पन्न करने के लिए माध्यम के क्या गुण होने चाहिए ?
उत्तर-
माध्यम में जड़त्व तथा आकार में लचकीलापन का गुण होना चाहिए।

प्रश्न 8.
तरंग उत्पन्न करने के लिए माध्यम के क्या गुण होने चाहिएं ?
उत्तर-
माध्यम में जड़त्व तथा आयतन में लचकीलापन अवश्य होना चाहिए।

प्रश्न 9.
बताएँ कि निम्नलिखित अनुप्रस्थ तरंगें हैं या अनुदैर्ध्य तरंगें
(i) प्रकाश-तरंग,
(ii) जल में लहरें,
(ii) ध्वनि तरंगें।
उत्तर-
(i) अनुप्रस्थ तरंग,
(ii) अनुप्रस्थ तरंग,
(iii) अनुदैर्ध्य तरंग।

प्रश्न 10.
आवृत्ति, तरंग-लंबाई और तरंग-वेग में क्या संबंध है ?
उत्तर-
तरंग वेग = आवृत्ति × तरंग-लंबाई।

प्रश्न 11.
आवृत्ति की इकाई क्या है ?
उत्तर-
हज़।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 12.
आवृत्ति (v) और आवर्तकाल (T) में क्या संबंध है ?
उत्तर-
v = \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)

प्रश्न 13.
पराश्रव्य ध्वनि कौन सुन सकते हैं ?
उत्तर-
चमगादड़ तथा कुत्ते।

प्रश्न 14.
प्रतिध्वनि के लिए वस्तु ध्वनि के स्रोत से कितने मीटर से अधिक दूरी पर होनी चाहिए ?
उत्तर-
17.2 मीटर।

प्रश्न 15.
रडार किस सिदधांत पर कार्य करता है ?
उत्तर-
पराश्रव्य ध्वनि के सिद्धांत पर।

प्रश्न 16.
कान पर प्रतिध्वनि का प्रभाव कब तक रहता है ?
उत्तर-
कान पर ध्वनि का प्रभाव \(\frac {1}{10}\) सेकंड तक रहता है।

प्रश्न 17.
छोटे कमरों में प्रतिध्वनि सुनाई क्यों नहीं देती ?
उत्तर-
छोटे कमरों की लंबाई 17.2 मीटर से कम होती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 18.
ध्वनि तरंगों के संचारण के लिए माध्यम में कौन-से दो गुण होने चाहिए ?
उत्तर-

  1. प्रत्यास्थता तथा
  2. जड़त्व।

प्रश्न 19.
किस प्रकार की तरंगों के संचरण के लिए द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती ?
उत्तर-
विट्दत मंजकीय तरंगों के लिए।

प्रश्न 20.
एक यांत्रिक तरंग क्षैतिज दिशा में गति कर रही है। माध्यम के कण किस दिशा में कंपन करेंगे, यदि तरंग
(i) अनुप्रस्थ है,
(ii) अनदैर्ध्य है ?
उत्तर-
(i) ऊर्ध्वाधर दिशा में,
(ii) क्षैतिज दिशा में।

प्रश्न 21.
दो ऐसी युक्ग्यिों के नाम बताइए जो
(i) ध्वनि ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में तथा
(ii) विद्युत् ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में बदलती है ?
उत्तर-
(i) ध्वनि ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति माइक्रोफोन,
(ii) विद्युत् ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति लाउडस्पीकर ।

प्रश्न 22.
आवृत्ति का मात्रक क्या है ?
उत्तर-
आवृत्ति का मात्रक ह है।

प्रश्न 23.
आवर्तकाल तथा आवृत्ति में क्या संबंध है ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 28

प्रश्न 24.
तरंग-दैर्ध्य का S.I. मात्रक क्या है ?
उत्तर-
मीटर।

प्रश्न 25.
यदि किसी तरंग के किसी बिंदु पर श्रृंग बन रहा है तो कितने समय पश्चात् उस पर गर्त बनेगा ?
उत्तर-
\(\frac{\mathrm{T}}{2}\) समय पश्चात् गर्त बनेगा, जहाँ T तरंग का आवर्तकाल है।

प्रश्न 26.
तरंग-दैर्ध्य, आवृत्ति तथा तरंग वेग के बीच संबंध लिखिए।
उत्तर-
तरंग वेग (υ) = आवृत्ति (v) × तरंग-दैर्ध्य (λ)।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 27.
श्रव्य तरंगों का आवृत्ति परास बताइए।
उत्तर-
श्रव्य तरंगों का आवृत्ति परास–20 हर्ट्स से 20 किलोह तक है।

प्रश्न 28.
हम चंद्रमा पर होने वाले विस्फोट की आवाज पृथ्वी पर क्यों नहीं सुन पाते ?
उत्तर-
पृथ्वी व चंद्रमा के बीच द्रव्यात्मक माध्यम न होने के कारण।

प्रश्न 29.
उन कारकों के नाम बताइए जो किसी माध्यम में ध्वनि की चाल को प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-
माध्यम का

  1. ताप,
  2. घनत्व तथा
  3. आर्द्रता।

प्रश्न 30.
वायु में ध्वनि की चाल पर ताप पर का प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
ताप बढ़ने पर वायु में ध्वनि की चाल बढ़ती है।

प्रश्न 31.
ठोसों, द्रवों तथा गैसों में ध्वनि की चाल किसमें सबसे अधिक तथा किसमें सबसे कम होती है ?
उत्तर-
ठोसों में सबसे अधिक गैसों में सबसे कम होती है।

प्रश्न 32.
हमारे कान में ध्वनि की संवेदना कितने समय तक बनती रहती है ?
उत्तर-
0.1 सेकंड तक।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 33.
अनुप्रस्थ तरंगें किस प्रकार के माध्यम में उत्पन्न की जा सकती हैं ?
उत्तर-
ठोसों में तथा द्रवों की सतह पर, जिनमें दृढ़ता होती है।

प्रश्न 34.
अनुदैर्ध्य तरंगें किस प्रकार के माध्यम में उत्पन्न की जा सकती हैं ?
उत्तर-
ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में।

प्रश्न 35.
जल में पत्थर फेंकने से जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें किस प्रकार की होती हैं ?
उत्तर-
अनुप्रस्थ तरंग।

प्रश्न 36.
लोहे में उत्पन्न ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं ?
उत्तर-
अनुदै गयो।

प्रश्न 37.
वायु में उत्पन्न दनि ता किस प्रकार की होती हैं ?
उत्तर-
अनुदैर्ध्य तरंगें।

प्रश्न 38.
किसी तार को दो खूटियों के बीच तानकर लंबाई के लंबवत् खींचकर छोड़ दिया जाता है तो तार में उत्पन्न तरंग का नाम बताइए।
उत्तर-
अनुप्रस्थ तरंगें।

प्रश्न 39.
उन दो जानवरों के नाम बताओ जो 20,000 हर्ट्ज़ से उच्च आवृत्ति की तरंगों के प्रति संवेदनशील
उत्तर-
कुत्ता तथा चमगादड़।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 40.
SONAR का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर-
SONAR का पूरा नाम Sound Navigation and Ranging है।

प्रश्न 41.
SONAR के दो उपयोग बताइए।
उत्तर-

  1. समुद्र की गहराई ज्ञात करना,
  2. शत्रु पनडुब्बी की स्थिति ज्ञात करना।

प्रश्न 42.
पराध्वनि तरंगों के दो उपयोग बताइए।
उत्तर-

  1. मनुष्य के पेट में किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी प्राप्त करना।
  2. धातु के ब्लॉक में दरारों का पता लगाना।

प्रश्न 43.
सेस्मोग्राफ क्या है ?
उत्तर-
सेस्मोग्राफ भूकंप की तीव्रता नापने वाला उपकरण है।

प्रश्न 44.
भूकंप की तीव्रता के मापन के लिए कौन-सा पैमाना प्रायोग किया जाता है?
उत्तर-
रिक्टर पैमाना प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 45.
रिक्टर पैमाने पर कितनी तीव्रता तक का भूकंप सुरक्षित माना जाता है ?
उत्तर-
रिक्टर पैमाने पर 5 तीव्रता तक का भूकंप सुरक्षित माना जाता है।

प्रश्न 46.
बादलों की चमक तथा गड़गड़ाहट में से कौन-सी ऊर्जा हम तक पहले पहुँचेगी ?
उत्तर-
चमक पहले पहुँचेगी क्योंकि प्रकाश का वेग ध्वनि की अपेक्षा अधिक है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 47.
चमगादड़ अंधेरे में भली प्रकार अपना रास्ता मालूम कर सकता है, क्यों ?
उत्तर-
चमगादड़ अंधेरे में पराश्रव्य तरंगों के उत्सर्जन व संसूचन के कारण भली प्रकार अपना रास्ता मालूम कर सकता है।

प्रश्न 48.
किसी तरंग की ऊर्जा तथा उसके आयाम में क्या संबंध है ?
उत्तर-
ऊर्जा ∝ आयाम2

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

प्रश्न 1.
निम्न द्विघात समीकरणों के मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए। यदि मूलों का अस्तित्व हो, तो उन्हें ज्ञात कीजिए :
(i) 2x2 – 3x + 5 = 0
(ii) 3x2 – 4√3x + 4= 0
(iii) 2x2 – 6x + 3 = 0
हल :
(i) दी गई द्विघात समीकरण है
2x- – 3x + 5 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = – 3, c = 5
D = b2 – 4ac
= (- 3)2 – 4 × 2 × 5
= 9 – 40
= – 31 < 0
अत: दी गई द्विघात समीकरण का कोई वास्तविक मूल नहीं है।

(ii) दी गई द्विघात समीकरण है : 3x2 – 4√3x + 4 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 3, b = – 4√3 , c = 4
D = b2 – 4ac
= (- 4√3x) – 4 × 3 × 4
= 48 – 48 = 0
अतः दी गई समीकरण के वास्तविक और बराबर मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.4 1

अतः दी गई द्विघात समीकरण के मूल \(\frac{2}{\sqrt{3}}\) और \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

(iii) दी गई द्विघात समीकरण हैं
2x2 – 6x + 3 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = – 6, c = 3
D = b2 – 4ac
= (- 6)2 – 4 × 2 × 3
= 36 – 24
= 12 > 0
∴ दी गई द्विघात समीकरण के वास्तविक और भिन्न मूल हैं।
अब,

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.4 2

अतः दी गई द्विघात समीकरण के मूल \(\frac{3+\sqrt{3}}{2}\) और \(\frac{3-\sqrt{3}}{2}\) हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

प्रश्न 2.
निम्न प्रत्येक द्विघात समीकरण में k का ऐसा मान ज्ञात कीजिए कि उसको दो बराबर मूल हों।
(i) 2x2 + kx + 3 = 0
(ii) kx (x – 2) + 6 = 0
हल :
(i) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 + kx + 3 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 2, b = k, c = 3
∵ दी गई द्विघात समीकरण के मूल बराबर हैं।
∴ D = 0
b2 – 4ac = 0
या (k)2 – 4 × 2 × 3 = 0
k2 – 24 = 0
k2 = 24
k = ± √24
k = ± 2√6

(ii) दी गई द्विघात समीकरण हैं
kx (x – 2) + 6 = 0
या x2 – 2kx + 6 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = k, b = – 2k, c = 6
∴ दी गई द्विघात समीकरण के मूल बराबर हैं।
D = 0
b2 – 4ac = 0
या (- 2k)2 – 4 × k × 6 = 0
या 4k2 – 24k = 0
4k [k – 6] = 0 अर्थात् 4k = 0
k – 6 = 0 या k = 0
या k = 6 या k = 0, 6.

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

प्रश्न 3.
क्या एक ऐसी आम की बगिया बनाना संभव है जिसकी लंबाई, चौड़ाई से दुगुनी हो और उसका क्षेत्रफल 800 m हो ? यदि है, तो उसकी लंबाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए आयताकार बगिया की लम्बाई = x m
और आयताकार की चौडाई = 2x m
आयताकार बगिया का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौडाई
= [x × 2x] m2
= 2x2 m2
प्रश्न के अनुसार,
2x2 = 800
x2 = 800 = 400
x = ± √ 400
x = ± 20
∵ आयताकार की लंबाई ऋणात्मक नहीं हो सकती इसलिए हम x = – 20 को छोड़ देते हैं
∴ x = 20
∴ आयताकार बगिया की चौड़ाई = 20 m और आयताकार बगिया की लंबाई
= (2 × 20) m
= 40 m

प्रश्न 4.
क्या निम्न स्थिति संभव है ? यदि है तो उनकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए। दो मित्रों की आयु का योग 20 वर्ष है। चार वर्ष पूर्व उनकी आयु (वर्षों में) का गुणनफल 48 था।
हल :
मान लीजिए पहले मित्र की आयु = x वर्ष
और दूसरे मित्र की आयु = (20 – x) वर्ष
चार वर्ष पूर्व, पहले मित्र की आयु = (x – 4) वर्ष
और दूसरे मित्र की आयु = (20 – x – 4) वर्ष
= (16 – x) वर्ष
∴ उनका गुणनफल = (x – 4) (16-x)
= 16x – x2 – 64 + 4x
= – x2 + 20x – 64 प्रश्न के अनुसार,
= – x2 + 20x – 64 = 48
या – x2 + 20x – 64 – 48 = 0
या – x2 + 20x – 112 = 0
या x2 – 20x + 112 = 0 …….(1)
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = – 20, c = 112
D = b2 – 4ac
= (- 20)2 – 4 × 1 × 112
= 400 – 448
= – 48 < 0
∴ मूल वास्तविक नहीं हैं।
इसलिए, x का कोई मान द्विघात समीकरण (1) को संतुष्ट नहीं कर सकता।
अतः दी गई स्थिति संभव नहीं हैं।

प्रश्न 5.
क्या परिमाप 80 m तथा क्षेत्रफल 400 m2 के एक पार्क को बनाना संभव है ? यदि है, तो उसकी लंबाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए आयताकार पार्क की लंबाई = x m
आयताकार पार्क की चौड़ाई = y m
∴ आयताकार पार्क का परिमाप = 2 (x + y) m
और आयताकार पार्क का क्षेत्रफल = xy m2
पहली शर्त के अनुसार,
2 (x + y) = 80
x + y = \(\frac{80}{2}\) = 40
y = 40 – x …………..(1)
दूसरी शर्त के अनुसार,
xy = 400
x (40 -x) = 400
[(1) का प्रयोग करने पर] |
या 40x – x2 = 400
या 40x – x2 – 400 = 0
या x2 – 40x + 400 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = – 40, c = 400
D = b2 – 4ac
= (- 40)2 – 4 × 1 × 400
= 1600 – 1600 = 0
x = \(\frac{-b \pm \sqrt{\mathrm{D}}}{2 a}\)

= \(\frac{-(-40) \pm \sqrt{0}}{2 \times 1}\)

= \(\frac{40}{2}\) = 20
x = 20, तो (1) से
y = 40 – 20 = 20
∴ आयताकार पार्क की लंबाई और चौड़ाई का माप 20 m के बराबर है।
अंत: दी गई आयताकार पार्क का अस्तित्व संभव है और यह एक वर्ग है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 1.
यदि निम्नलिखित द्विघात समीकरणों के मूलों का अस्तित्व हो, तो इन्हें पूर्ण वर्ग बनाने की विधि द्वारा ज्ञात कीजिए :
(i) 2x2 – 7x + 3 = 0
(ii) 2x2 + x – 4 = 0
(iii) 4x2 + 4√3x + 3 = 0
(iv) 2x2 + x + 4 = 0
हल :
(i) दी गई द्विघात समीकरण है
2x2 – 7x + 3 = 0
या 2x2 – 7x = – 3

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 1

स्थिति I:
x – \(\frac{7}{4}\) = \(\frac{5}{4}\)

x = \(\frac{5}{4}+\frac{7}{4}=\frac{5+7}{4}\)

x = \(\frac{12}{4}\) = 3

स्थिति II:

जब x – \(\frac{7}{4}\) = – \(\frac{5}{4}\)

या x = \(\frac{-5}{4}+\frac{7}{4}=\frac{-5+7}{4}\)

या x = \(\frac{2}{4}=\frac{1}{2}\)

अतः, दी गई द्विघात समीकरण के मूल है

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

(ii) दी गई द्विघात समीकरण है
2x2 + x – 4 = 0
या 2x2 + x = 4
या x2 + \(\frac{1}{2}\) x = \(\frac{4}{2}\)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 2

स्थिति I.
जब x + \(\frac{1}{4}\) = \(\frac{\sqrt{33}}{4}\)

x = \(\frac{\sqrt{33}}{4}-\frac{1}{4}\)

x = \(\frac{\sqrt{33}-1}{4}\)

स्थिति II.
जब x + \(\frac{1}{4}\) = – \(\frac{\sqrt{33}}{4}\)

या x = \(-\frac{\sqrt{33}}{4}-\frac{1}{4}\)

या x = \(\frac{-\sqrt{33}-1}{4}\)
अतः, दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं : \(\frac{-1+\sqrt{33}}{4}\) और \(\frac{-1-\sqrt{33}}{4}\).

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

(iii) दी गई द्विघात समीकरण है :
4x2 + 4√3x + 3 = 0
या 4x2 + 4√3x = – 3
या x2 + \(\frac{4 \sqrt{3}}{4} x=\frac{-3}{4}\)

या x2 + √3x = \(\frac{-3}{4}\)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 3

या x = \(\)

अतः दी गई समीकरण के मूल \(\) और \(\) हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

(iv) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 + x + 4 = 0
या 2x2 + x = – 4
या x2 + (\(\frac{1}{2}\)) x = – \(\frac{4}{2}\)
या \(x^{2}+\frac{1}{2} x+\left(\frac{1}{4}\right)^{2}=-2+\left(\frac{1}{4}\right)^{2}\)

या \(\left(x+\frac{1}{4}\right)^{2}=-2+\frac{1}{16}\)

या \(\left(x+\frac{1}{4}\right)^{2}=\frac{-32+1}{16}\)

या \(\left(x+\frac{1}{4}\right)^{2}=\frac{-31}{16}\) < 0

∵ किसी संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता।
इसलिए, (x + \(\frac{4}{4}\))2, के किसी भी वास्तविक मान के लिए ऋणात्मक नहीं हो सकता।
∴ यहाँ x का कोई भी वास्तविक मान नहीं है जो दी गई द्विघात समीकरण को संतुष्ट करता हो।
अतः, दिए गए समीकरण के कोई वास्तविक मूल नहीं हैं।

प्रश्न 2.
उपर्युक्त प्रश्न 1 में दिए गए द्विघात समीकरणों के मूल, द्विघाती सूत्र का उपयोग करके ज्ञात कीजिए।
हल :
(i) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 – 7x + 3 = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
∴ a = 2, b = – 7, c = 3
अब, b2 – 4ac
= (- 7)2 – 4 × 2 × 3
= 49 – 24 = 25 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 4

अतः, 3 और \(\frac{1}{2}\) दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

(ii) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 + x – 4 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = 1, c = – 4
अब, b2 – 4ac = (1)2 – 4 × 2 × (- 4)
= 1 + 32
= 33 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 5

अतः, \(\frac{-1+\sqrt{33}}{4}\) और \(\frac{-1-\sqrt{33}}{4}\)दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

(iii) दी गई द्विघात समीकरण है :
4x2 + 4√ 3 + 3 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 4, b = 4√ 3, c = 3
अब, b2 – 4ac = (4√ 3) – 4 × 4 × 3
= 48 – 48 = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 6

अतः, – \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) और – \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

(iv) दी गई द्विघात समीकरण है : .
2x2 + x + 4 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 2, b = 1, c = 4
अब, b2 – 4ac
= (1)2 – 4 × 2 × 4
= 1 – 32
= – 31 < 0
परंतु x = \(\frac{-b \pm \sqrt{b^{2}-4 a c}}{2 a}\)
क्योंकि एक वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता। इसलिए x का कोई वास्तविक मान नहीं होगा। अतः दिए गए समीकरण के कोई वास्तविक मूल नहीं हैं।

उपरोक्त दो प्रश्नों में, हमने द्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने के लिए दोनों विधियों का प्रयोग किया है। हम देखते हैं कि द्विघात सूत्र का प्रयोग, पूर्ण वर्ग बनाने की विधि की अपेक्षा अधिक आसान है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 3.
निम्न समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए :
x – \(\frac{1}{x}\) = 3, x ≠ 0
(ii) \(\frac{1}{x+4}-\frac{1}{x-7}=\frac{11}{30}\), x ≠ – 4, 7
हल :
(i) दी गई समीकरण हैं :
x – \(\frac{1}{x}\) = 3

या \(\frac{x^{2}-1}{x}\) = 3

या x2 – 1 = 3x
या x2 – 3x – 1 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = – 3, c = – 1
अब, b2 – 4ac = (- 3)2 – 4. 1. (- 1)
= 9 + 4 = 13 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 7

अत:, \(\frac{3+\sqrt{13}}{2}\) और \(\frac{3-\sqrt{13}}{2}\) दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

(ii) दी गई समीकरण है :

\(\frac{1}{x+4}-\frac{1}{x-7}=\frac{11}{30}\)

या \(\frac{(x-7)-(x+4)}{(x+4)(x-7)}=\frac{11}{30}\)

या \(\frac{\not x-7-\not x-4}{x^{2}-7 x+4 x-28}=\frac{11}{30}\)

या \(\frac{-11}{x^{2}-3 x-28}=\frac{11}{30}\)

या – 11 x 30 = 11 (x2 – 3x – 28)
– 30 = x2 – 3x – 28
या x2 – 3x – 28 + 30 = 0
या x2 – 3x + 2 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर :
∴ a = 1, b = – 3, c = 2
अब, b2 – 4ac = (- 3)2 – 4 × 1 × 2
= 9 – 8 = 1 > 0
∴ x = \(\frac{-b \pm \sqrt{b^{2}-4 a c}}{2 a}\)

= \(\frac{-(-3) \pm \sqrt{1}}{2 \times 1}=\frac{3 \pm 1}{2}\)

= \(\frac{3+1}{2}\) और \(\frac{3-1}{2}\)

= \(\frac{4}{2}\) और \(\frac{2}{2}\)
= 2 और 1
अतः, 2 और 1 दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 4.
3 वर्ष पूर्व रहमान की आयु (वर्षों में) का व्युत्क्रम और अब से 5 वर्ष पश्चात् आयु के व्युत्क्रम का योग है। उसकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए रहमान की वर्तमान आयु = x वर्ष
3 वर्ष पूर्व रहमान की आयु = (x – 3) वर्ष
अब से 5 वर्ष पश्चात् रहमान की आयु = (x+5) वर्ष
प्रश्न अनुसार
\(\frac{1}{x-3}+\frac{1}{x+5}=\frac{1}{3}\)

या \(\frac{x+5+x-3}{(x-3)(x+5)}=\frac{1}{3}\)

या \(\frac{2 x+2}{x^{2}+5 x-3 x-15}=\frac{1}{3}\)

या \(\frac{2 x+2}{x^{2}+2 x-15}=\frac{1}{3}\)

या 6x + 6 = x2 + 2x – 15
या x2 + 2x – 15 – 6x -6 = 0
या x2 – 4x – 21 = 0,
जोकि x में द्विघात है।
इसलिए इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = – 4, c = – 21
अब, b2 – 4ac = (- 4)2 – 4 × 1 × (- 21)
= 16 + 84
= 100 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 8

∴ आयु ऋणात्मक नहीं हो सकती। इसलिए हम x = – 3 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 7
अतः, रहमान की वर्तमान आयु = 7 वर्ष।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 5.
एक क्लास टेस्ट में शेफाली के गणित और अंग्रेजी में प्राप्त किए गए अंकों का योग 30 है। यदि उसको गणित में 2 अंक अधिक और अंग्रेजी में 3 अंक कम मिले होते, तो उनके अंकों का गुणनफल 210 होता। उसके द्वारा दोनों विषयों में प्राप्त किए अंक ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए शेफाली के गणित में प्राप्त अंक = x
∴ शेफाली के अंग्रेजी में अंक = 30 – x
पहली शर्त के अनुसार,
शेफाली के गणित में अंक = x + 2
और शेफाली के अंग्रेजी में अंक द्विघात है। = 30 – x – 3
= 27 – x
उनका गुणनफल= (x + 2) (27 – x)
= 27x – x2 + 54 – 2x
= – x2 + 25x + 54
प्रश्न की दूसरी शर्त अनुसार,
– x2 + 25x + 54 = 210
या – x2 + 25x + 54 – 210 = 0
या – x2 + 25x – 156 = 0
या x2 – 25x + 156 = 0 .
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = – 25, c = 156
अब, b2 – 4ac = (- 25)2 – 4 × 1 × 156
= 625 – 624
= 1 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 9

स्थिति I.
जब x = 13
तब शेफाली के गणित में अंक = 13
शेफाली के अंग्रेज़ी में अंक = 30 – 13 = 17

स्थिति II.
जब x = 12
तब शेफाली के गणित में अंक = 12
शेफाली के अंग्रेज़ी में अंक = 30 – 12 = 18
अतः, शेफाली के दो विषयों में अंक हैं : 13 और 17 या 12 और 18.

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 6.
एक आयताकार खेत का विकर्ण उसकी छोटी भुजा से 60 मी अधिक लंबा है। यदि बड़ी भुजा छोटी भुजा से 30 मी अधिक हो, तो खेत की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
हल :

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 10

मान लीजिए आयताकर खेत की छोटी भुजा = AD = x m
आयताकार खेत की लंबी भुजा = AB = (x + 30) m
और आयताकार खेत का विकर्ण = DB = (x + 60) m
एक आयत में लंबाई और चौड़ाई के बीच का कोण समकोण होता है।
∴ ∠DAB = 90°
अब समकोण त्रिभुज DAB में, पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग करने पर,
(DB)2 = (AD)2 + (AB)2
(x + 60)2 = (x)2 + (x + 30)2
या x2 + 3600 + 120x = x2 + x2 + 900 + 60x
या x2 + 3600 + 120x – 2x2 – 900 – 60x = 0
– x2 + 60x + 2700 = 0
x2 – 60x – 2700 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = – 60, c = – 2700 और
b2 – 4ac = (- 60)2 – 4 . 1 . (- 2700)
= 3600 + 10800
= 14400 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 11

∵ किसी भी भुजा की लंबाई ऋणात्मक नहीं होती।
इसलिए हम x = – 30 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 90
अतः आयताकार खेत की सबसे छोटी भुजा = 90 m
आयताकार खेत की सबसे लंबी भुजा = (90 + 30) m
= 120 m

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 7.
दो संख्याओं के वर्गों का अंतर 180 है। छोटी संख्या का वर्ग बड़ी संख्या का आठ गुना है। दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए बड़ी संख्या =x
छोटी संख्या = y
प्रश्न की पहली शर्त अनुसार,
x2 – y2 = 180 ………….(1)
प्रश्न की दूसरी शर्त अनुसार
y2 = 8x …………..(2)
(1) और (2) से हम प्राप्त करते हैं,
x2 – 8x = 180
या x2 – 8x – 180 = 0.
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = – 8, c = – 180
और b2 – 4ac = (- 8)2 – 4 × 1 × (- 180)
= 64 + 720
= 784 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 12

जब x = – 10 तो, (2) से y2= 8 (- 10) = – 80, जोकि संभव नहीं है।
इसलिए हम x = – 10 को छोड़ देते हैं।
जब x = 18, तो (2) से,
y2 = 8 (18) = 144
या y = ± √144
या y = ± 12
अतः अभीष्ट संख्याएं 18 और 12 या 18 और – 12 हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 8.
एक रेलगाड़ी एक समान चाल से 360 km की | दूरी तय करती है। यदि यह चाल 5 km/h अधिक होती, तो वह उसी यात्रा में 1 घंटा कम समय लेती।। रेलगाड़ी की चाल ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए रेलगाड़ी की समान चाल = x km/h
रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = 360 km

रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = दूरी / चाल (∵ चाल = दूरी / समय )
= \(\frac{360}{x}\) घंटे
रेलगाड़ी की बड़ी हुई चाल = (x + 5) km/hour
∴ बढ़ी हुई चाल से रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = \(\frac{360}{x+5}\) घंटे
प्रश्न अनुसार,
\(\frac{360}{x}\) – \(\frac{360}{x+5}\) = 1

या \(\frac{360(x+5)-360 x}{x(x+5)}\) = 1

या \(\frac{360 x+1800-360 x}{x^{2}+5 x}\) = 1
या 1800 = x2 + 5x
या x2 + 5x – 1800 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर, :
a = 1, b = 5, c = – 1800
और b2 – 4ac = (5)2 – 4 × 1 × (- 1800)
= 25 + 7200
= 7225 >0
∴ x = \(\frac{-b \pm \sqrt{b^{2}-4 a c}}{2 a}\)

= \(\frac{-5 \pm \sqrt{7225}}{2 \times 1}\)

= \(\frac{-5+85}{2}\) और \(\frac{-5-85}{2}\)

= \(\frac{80}{2\) और \(\frac{-90}{2\)

= 40 और – 45

∴ किसी रेलगाड़ी की चाल ऋणात्मक नहीं हो सकती।
इसलिए हम x = — 45 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 40
अतः रेलगाड़ी की चाल = 40 km/hour

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 9.
दो पानी के नल एक-साथ एक हौज घंटों में भर सकते हैं। बड़े व्यास वाला नल हौज को भरने में, कम व्यास वाले नल से 10 घंटे कम समय लेता है। प्रत्येक द्वारा अलग से हौज को भरने के समय ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए बड़े व्यास वाले नल द्वारा हौज को भरने में लिया समय = x
घंटे छोटे नल द्वारा हौज भरने में लिया समय = (x + 10) घंटे
एक घंटे की स्थिति में,
बड़ा नल हौज भर सकता है = \(\frac{1}{x}\)
छोटा नल हौज भर सकता है = \(\frac{1}{x+10}\)
∴ बड़ा और छोटा दोनों नल हौज को भरते हैं = \(\frac{1}{x}\) + \(\frac{1}{x+10}\) ……………..(1)
परंतु दोनों नल एक साथ हौज भरने में समय लेते हैं = 9\(\frac{3}{8}\) घंटे
= \(\frac{75}{8}\) घंटे
अब, दोनों नल एक साथ एक घंटे में हौज भर सकते हैं = \(\frac{8}{75}\) घंटे ……………(2)
(1) और (2) से हम प्राप्त करते हैं,
\(\frac{1}{x}+\frac{1}{x+10}=\frac{8}{75}\)

या \(\frac{x+10+x}{x(x+10)}=\frac{8}{75}\)

या \(\frac{2 x+10}{x^{2}+10 x}=\frac{8}{75}\)

या 75 (2x + 10) = 8 (x2 + 10x)
या 150x + 750 = 8x2 + 80x
या 8x2 + 80x – 150x – 750 = 0
या 8x2 – 70x – 750 = 0
या 4x2 – 35x – 375 = 0
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर, ..
∴ a = 4, b = – 35, c = – 375
और b2 – 4ac = (- 35)2 – 4 × 4 × (- 375)
= 1225 + 6000
= 7225 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 13

∵ समय ऋणात्मक नहीं हो सकता। इसलिए, हम x = – \(\frac{25}{4}\) छोड़ देते हैं :
∴ x = 15
अतः बड़े नल द्वारा हौज भरने का समय = 15 घंटे
और छोटे नल द्वारा हौज भरने का समय = (15 + 10) घंटे = 25 घंटे

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 10.
मैसूर और बैंगलोर के बीच के 132 km यात्रा करने में एक एक्सप्रेस रेलगाड़ी, सवारी गाड़ी से 1 घंटा समय कम लेती है (मध्य के स्टेशनों पर ठहरने का समय ध्यान में न लिया जाएं)। यदि एक्सप्रेस रेलगाडी की औसत चाल, सवारी गाड़ी की औसत चाल से 11 km/h अधिक हो, तो दोनों रेलगाड़ियों की औसत चाल ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए सवारी गाड़ी का औसत चाल = x km/hour
एक्सप्रेस रेलगाड़ी की औसत चाल = (x + 11) km/hour
मैसूर और बैंगलोर के बीच की दूरी = 132 km
सवारी गाड़ी द्वारा लिया गया समय = \(\frac{132}{x}\) घंटे
[∵ चाल = दूरी / समय]
एक्सप्रेस रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = \(\frac{132}{x+11}\) घटे
प्रश्न अनुसार,
\(\frac{132}{x}-\frac{132}{x+11}=1\)

या \(\frac{132(x+11)-132 x}{x(x+11)}=1\)

या \(\frac{132 x+1452-132 x}{x^{2}+11 x}=1\)

या 1452 = x2 + 11

या x2 + 11x – 1452 = 0

इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = 11, c = – 1452
और b2 – 4ac = (11)2 – 4 × 1 × (- 1452)
= 121 + 5808
= 5929 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 14

∵ रेलगाड़ी की चाल ऋणात्मक नहीं हो सकती
∴ x = 33
अतः, सवारी गाड़ी की औसत चाल = 33 km/hour
और एक्सप्रेस रेलगाड़ी की औसत चाल = (33 + 11) km/hour
= 44 km/hour

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 11.
दो वर्गों के क्षेत्रफलों का योग 468 m है। यदि उनके परिमापों का अंतर 24 m हो, तो दोनों वर्गों की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
हल :
पहले बड़े वर्ग की स्थिति में मान लीजिए वर्ग की प्रत्येक भुजा की लंबाई = x m
वर्ग का क्षेत्रफल = x2 m2
वर्ग का परिमाप = 4x m
छोटे वर्ग की स्थिति में
मान लीजिए वर्ग की प्रत्येक भुजा की लंबाई = y m
वर्ग का क्षेत्रफल = y2 m2
वर्ग का परिणाप = 4y m
पहली की पहली शर्त के अनुसार,
x2 + y2 = 468 …………..(1)
दूसरी शर्त के अनुसार,
4x – 4y = 24
या 4 (x – y) = 24
या x – y = 6
या x = 6 + y ………….(2)
(1) और (2) से हम प्राप्त करते हैं,
(6 + y)2 + y2 = 468
या 36 + y2 + 12y + y2 = 468
या 2y2 + 12y + 36 – 468 = 0
या 2y2 + 12y – 432 = 0
या y2 + 6y – 216 = 0
इसकी तुलना ay2 + by + c = 0 से करने पर,
∴ a = 1, b = 6, c = – 216
और b2 – 4ac = (6)2 – 4 × 1 × (- 216)
= 36 + 864
= 900 > 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 4.3 15

∵ वर्ग की भुजा की लंबाई ऋणात्मक नहीं हो सकती।
इसलिए हम y = – 18 को छोड़ देते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्थितिज ऊर्जा किसे कहते हैं ? स्थितिज ऊर्जा के लिए गणितीय सूत्र स्थापित करो तथा इस ऊर्जा की व्यावहारिक उदाहरणें भी दो।
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) – ” यह किसी वस्तु में उसके आकार या उसकी पृथ्वी की सतह से ऊपर या नीचे स्थिति के कारण धारण की हुई ऊर्जा होती है।”

गणितीय सूत्र – मान लो ‘m’ द्रव्यमान वाला पत्थर पृथ्वी की सतह से ऊँचाई ‘h’ तक ऊपर तक उठाया जाता है। ऐसा करने के लिए पृथ्वी के गुरुत्व के विरुद्ध पत्थर पर कार्य करना पड़ता है।
∴ किया गया कार्य = बल × ऊँचाई
W = F × h
परंतु F, = पत्थर का भार = mg
पत्थर पर किया गया यह कार्य उस पत्थर में स्थितिज ऊर्जा (P. E.) के रूप में स्टोर हो जाता है।
∴ स्थितिज ऊर्जा (P.E.) = mgh
इस समीकरण से स्पष्ट है कि जितनी अधिक ऊँचाई होगी उतनी ही अधिक पत्थर में स्थितिज ऊर्जा स्टोर होगी।

व्यावहारिक उदाहरणें-
(i) पुराने जमाने की घड़ियां डिजिटल नहीं होती थीं और उन्हें चलाने के लिए चाबी भरनी पड़ती थी। जब इसकी कमानी पूरी तरह खुली होती है तो घड़ी नहीं चलती। परंतु जब हम इसकी कमानी की चाबी भरते हैं, तो हम कुछ कार्य करते हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 1

चित्र (ख) में दिखाए अनुसार चाबी घुमाने से कमानी सिकुड़ती जाती है जिस कारण इसमें स्थितिज ऊर्जा स्टोर होती जाती है। स्टोर की हुई यह स्थितिज ऊर्जा घड़ी की सुइयों को डायल पर चलाने में सहायता करती है।

(ii) अपने दोनों हाथों से एक कमानी को खोलने की कोशिश करो। आपके हाथों द्वारा कार्य हो रहा है। ऐसा करने से कसी हुई कमानी की लंबाई बढ़ती है तथा इस तरह इसमें स्थितिज ऊर्जा स्टोर हो जाती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 2.
गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं ? गतिज ऊर्जा के लिए गणितीय सूत्र स्थापित करो तथा इस ऊर्जा की व्यावहारिक उदाहरणें भी दो।
उत्तर-
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) – “किसी वस्तु में किसी भी प्रकार की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा गतिज ऊर्जा कहलाती है।” यदि वस्तु गतिशील नहीं है तो इसमें गतिज ऊर्जा नहीं है।

गणितीय सूत्र-मान लो ‘m’ द्रव्यमान वाली एक फुटबाल जो विराम अवस्था में है, पर बल F लगाया जाता है। इस बल के कारण फुटबाल ‘t’ समय में S दूरी तय करता हुआ वेग v प्राप्त कर लेता है। इसलिए इसमें प्रवेग ‘a’ उत्पन्न होता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 2

फुटबाल पर किया गया कार्य W = F × S …………… (1)
न्यूटन की गति के दूसरे नियम अनुसार, F = m × a ……………… (2)
हम जानते हैं गति का एक रेखीय समीकरण
S = ut + \(\frac {1}{2}\)at2 …………….. (3)
तथा v = u + at ……………. (4)
फुटबाल विराम अवस्था से चली है;
u = 0
अब (3) तथा (4) समीकरणों में u = 0 भरने पर
S = \(\frac {1}{2}\)at2 ………………. (5)
तथा v = at …………… (6)
सभीकरण (1) में समीकरण (2), (5) तथा (6) का मान रखने पर
W = (m . a)(\(\frac {1}{2}\)at2)
W = \(\frac {1}{2}\)ma2t2
W = \(\frac {1}{2}\) m at2 ………….. (7)
समीकरण (6) को (7) में भरने से
W = \(\frac {1}{2}\)mv2 ……………. (8)
समीकरण (8) सिद्ध करती है कि फुटबाल पर किया गया कार्य उसके अंदर गतिज रूप में स्टोर हो जाता है।
∴ किया गया कार्य = स्टोर की गई गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\)mv2
गतिज ऊर्जा की इकाई जूल (J) है।
समीकरण (8) से यह सिद्ध हो गया है कि गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा-
(i) वस्तु के पुंज के समानुपाती होती है अर्थात् भारी वस्तुओं में हल्की वस्तुओं की अपेक्षा अधिक गतिज ऊर्जा होती है।
(ii) वस्तु के वेग के वर्ग के समानुपाती होती है अर्थात् जितनी वस्तु की चाल अधिक होगी उतनी ही अधिक उस वस्तु की गतिज ऊर्जा होगी।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 3

उदाहरण – आओ एक तीर तथा कमान के बारे में विचार करो। साधारण अवस्था में तीर तथा कमान में कोई भी ऊर्जा नहीं होती। जब हम तीर को कमान में रखते हैं तो हम उस पर कार्य करते हैं। यह कार्य तीर-कमान प्रणाली में स्थितिज ऊर्जा के रूप में स्टोर हो जाता है। अब जब तीर को कमान से छोड़ा जाता है तो स्टोर की गई स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।

प्रश्न 3.
ऊर्जा संरक्षण नियम क्या है ? एक उदाहरण के साथ इस नियम की व्याख्या करो तथा इस वास्तविकता को सिद्ध करो।
उत्तर-
ऊर्जा संरक्षण नियम – इस नियम के अनुसार ऊर्जा की मात्रा सदैव ही अचर रहती है अर्थात् कुल ऊस सदैव उतनी ही रहती है। यद्यपि ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है. इसकी मात्रा नहीं बदला जा सकता।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 4

उदाहरण सहित व्याख्या – पृथ्वी की सतह से गेंद को ऊपर की ओर | अधिकतम गतिज ऊर्जा फेंको। आप गेंद पर कार्य करते हो। यह कार्य गेंद में स्थितिज ऊर्जा के रूप में स्टोर हो जाता है। इसे गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा भी कहते हैं। गेंद ज्योंज्यों ऊपर की ओर जाती है, यह दूरी तय करती है, परंतु कम वेग के साथ। इस तरह स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाती है तथा गतिज ऊर्जा कम होती जाती है। गेंद द्वारा उच्चतम ऊँचाई तक पहुँच कर इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम तथा गतिज ऊर्जा न्यूनतम (शून्य) हो जाती है। हम गणितीय रूप से सिद्ध कर सकते हैं कि गेंद की गति के पथ पर किसी भी बिंदु पर इसकी स्थितिज तथा गतिज ऊर्जा का कुल जोड़ हमेशा स्थिर रहता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 5

गणितीय रूप द्वारा ऊर्जा संरक्षण नियम की पुष्टि
मान लो 10 kg पुंज वाली एक गेंद फर्श से 30 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक बिंदु A से नीचे की ओर फेंकी जाती है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

बिंदु A पर-
गेंद की स्थितिज ऊर्जा (P.E.) = m × g × h
= 10 × 10 × 30
= 3000J
गेंद क्योंकि आरंभ में विराम अवस्था में है इसलिए बिंदु A पर इसकी गतिज ऊर्जा (K.E.) = 0
∴ गेंद की कुल यांत्रिक ऊर्जा = P.E. + K.E.
= 3000 + 0 = 3000 J ……………. (i)

बिन्दु B पर-
गेंद अब 20 मीटर की ऊंचाई पर है।
स्थितिज ऊर्जा (P.E.) = m × g × h
= 10 × 10 × 20
= 2000J
समीकरण υ2 – u2 = 2gh की सहायता से
υ2 = u2 + 2gh
υ2 = 0 + 2 × 10 × 10
∴ υ2 = 200
∴ बिंदु B पर गेंद की गतिज ऊर्जा (K.E.) = \(\frac {1}{2}\)mv2
= \(\frac {1}{2}\) × 10 × (200)
= 1000 J
∴ बिंदु B पर गेंद की कुल यांत्रिक ऊर्जा = स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा
= 2000 + 1000
= 3000 J …………….. (ii)
इसी तरह C तथा D बिंदुओं पर भी कुल यांत्रिक ऊर्जा 3000 J ही होगी।
इन समीकरणों से सिद्ध होता है कि कुल ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।

प्रश्न 4.
यदि किसी वस्तु पर लग रहा बल गति की दिशा में न लगे तो किए गये कार्य की परिकल्पना कैसे करोगे ? उदाहरण देकर स्पष्ट करो तथा यह भी बताओ कि कार्य कब न्यूनतम तथा कब अधिकतम होता है ?
उत्तर-
जब वस्तु पर लग रहा बल गति की दिशा में नहीं होता-एक माली घास काटने वाली मशीन को लान में आगे की ओर चलाता है। वह मशीन की ओर अपना मुँह करके ग्राऊंड पर खड़े होकर मशीन के हैंडल HH1 पर F बल लगाता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 6

जैसा कि चित्र में स्पष्ट है; माली क्षैतिज दिशा में बल नहीं लगा रहा अपितु कोण बनाई दिशा की ओर बल लगाता है। ऐसी स्थिति में मशीन पर लगने वाला बल जो इसे स्थिति A से B की ओर क्षैतिज दिशा की ओर चलाता है F नहीं अपितु इसका क्षैतिज घटक = F cos θ होता है।

यहां विस्थापन घटक; F sin θ घास काटने वाली मशीन को संतुलित करता है।
∴ मशीन द्वारा किया गया कार्य, (W) = बल घटक × विस्थापन
= F cos θ × S

(i) जब बल वस्तु की दिशा में कार्य करता है तो θ = 0° तथा cos θ = 1
W = F cos θ × S
W = F × 1 × S
W = F × S
यह कार्य (W) का अधिकतम मान है।

(ii) जब बलं वस्तु की लंबात्मक दिशा पर लगता है तो θ = 90° तथा cos 90° = 0
∴ W = F cos 90° × S
W = F × 0 × S
W = 0
यह कार्य (W) का न्यूनतम मान है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कार्य किसे कहते हैं ? इसकी गणना कैसे की जाती है ? कार्य की इकाई भी लिखो।
उत्तर-
कार्य (Work) – “किसी बल द्वारा किया गया कार्य या किसी वस्तु द्वारा किया गया कार्य वस्तु पर लग रहे बल तथा बल की दिशा में उस द्वारा उत्पन्न विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है।”
यदि
F = वस्तु पर लग रहा बल है
S = वस्तु द्वारा बल की दिशा में हुआ विस्थापन है।
तो बल द्वारा किया गया कार्य, W = F × S ……….. (i)
हम जानते हैं कि वस्तु पर कोई बल लगता है, तो वस्तु में प्रवेग उत्पन्न होता है इसलिए यदि m = वस्तु का द्रव्यमान
a = वस्तु में उत्पन्न हुआ त्वरण हो
तो न्यूटन के दूसरे गति नियम अनुसार,
F = [m × a] …………….. (ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से
W = m × a × S ………….. (iii)
कार्य की इकाई (Unit of Work) – जब बल न्यूटन (N) तथा दूरी मीटरों (m) हो, तो
कार्य = न्यूटन × मीटर
W = N × m
W = जूल (J)
∴ कार्य की S.I. इकाई जूल (J) तथा C.G.S. इकाई अर्ग (erg) है।
1 जूल = 107 अर्ग।

प्रश्न 2.
एक उदाहरण देकर समझाओ कि यदि किसी वस्तु पर लग रहा बल वस्तु में विस्थापन उत्पन्न नहीं करता तो किया गया कार्य शून्य (0) होगा।
उत्तर-
इस कथन को निम्नलिखित उदाहरण देकर समझाया जा सकता है-
यदि एक बच्चा अधिक-से-अधिक बल लगा कर एक कार को धक्का लगाने की कोशिश करता है, परंतु यदि कार एक सैंटीमीटर तक नहीं हिलती तथा बच्चा पूरी तरह थक जाता है, तो हम भौतिक विज्ञान की भाषा में यह कहेंगे कि उसने कोई कार्य नहीं किया।

इस स्थिति में मान लो बच्चे ने F बल लगाया तथा विस्थापन S = 0 है तो
कार्य, W = F × S
W = F × 0
W = 0

प्रश्न 3.
एक पत्थर को धागे के साथ बाँधकर चक्कर में घुमाया गया है। बताओ इस वक्रीय गति में अभिकेंद्री जल कितना कार्य करता है ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 7
एक पत्थर को चित्र में दर्शाए अनुसार गोल चक्कर में घुमाया जाता है तो जिस उंगली से आपने धागे को पकड़ा हुआ है, उस पर आप कुछ बल लग रहा अनुभव करोगे! घूम रहे पत्थर पर लग रहे बल को अभिकेंद्री बल (Centripetal force) कहते हैं।

यह बल वक्रीय पथ के अर्धव्यास के साथ केंद्र की ओर लगता है। यदि ऐसी स्थिति में धागा पत्थर से खुल जाए तो पत्थर AT या BT स्पर्श रेखा के साथ बाहर की ओर गतिशील हो जाएगा जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। अब क्योंकि अभिकेंद्री बस पत्थर की गति के लंबात्मक दिशा में लग रहा है। इसलिए अभिकेंद्री बल द्वारा कोई भी कार्य नहीं हो रहा है।

प्रश्न 4.
ऊर्जा की परिभाषा दो। आप उदाहरण देकर कैसे समझाओगे कि ऊर्जा तथा कार्य एक-दूसरे में एरिवर्तनशील हैं ?
उत्तर-
ऊर्जा (Energy) – “किसी वस्तु की किसी भी रूप में कार्य करने की क्षमता को, ऊर्जा कहते हैं।” ऊर्जा तथा कार्य दोनों ही दिशाहीन हैं।

ऊर्जा और कार्य की आपस में परिवर्तनशीलता – निम्नलिखित उदाहरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि ऊर्जा तथा कार्य आपस में परिवर्तनशील हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 8

यदि आप गेंद को पृथ्वी से ऊपर की ओर फेंकते हो, तो आप ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कोई कार्य किया है। ज्यों-ज्यों गेंद ऊपर की ओर जाती है तो गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊर्जा प्राप्त करती है। यह गेंद द्वारा प्राप्त वह ऊर्जा है जो गेंद को अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने के बाद पृथ्वी की ओर नीचे फेंकने में सहायता करती है।

जब गेंद स्थिति A से उच्चतम बिंदु B तक पहुंचती है, तो गेंद पर किया गया कार्य गेंद के अंदर स्टोर हो जाता है। जब गेंद पथ BC द्वारा पृथ्वी पर वापिस गिरता है, तो गेंद में स्टोर हुआ कार्य अब गेंद द्वारा किया जाता है।
यही कारण है कि हम कहते हैं कि ऊर्जा तथा कार्य परस्पर परिवर्तनशील हैं।

प्रश्न 5.
शक्ति से आप क्या समझते हैं ? इसकी SI इकाई भी लिखो।
उत्तर-
शक्ति (Power ) – हरीश तथा करण 60-60 आम तोड़ने के लिए एक वृक्ष पर चढ़े। दोनों ने एक ही समय चढ़ना शुरू किया। हरीश ने 60 आम 30 मिनटों में तथा करण ने 60 आम 60 मिनटों में तोड़े। इसका अर्थ है कि करण ने एक जैसा कार्य करने के लिए अधिक समय लगाया। दोनों ने एक जैसा कार्य किया, दोनों में एक जितना सामर्थ्य अर्थात् ऊर्जा थी परंतु उनकी शक्ति बराबर नहीं है अर्थात् हरीश की शक्ति, करण से अधिक है।

शक्ति – “किसी वस्तु या मशीन की शक्ति उस द्वारा कार्य करने की दर होती है।” अर्थात् कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 9
यदि कार्य जूल तथा समय सैकेंड में मापा जाए तो शक्ति ‘वॉट’ में मापी जाती है।
∴ 1 वॉट = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 10
शक्ति की व्यापारिक इकाई ‘किलोवाट’ है।
1 किलोवाट = 1000 वाट = 1000 जूलासेकेंड

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प्रश्न 6.
ऊर्जा रूपांतरण से आप क्या समझते हो ? स्थितिज ऊर्जा का गतिज ऊर्जा में रूपांतरण समझाने के लिए एक उदाहरण दो।
उत्तर-
ऊर्जा रूपांतरण (Energy Transformation) – ऊर्जा रूपांतरण नियमानुसार “ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। इसको केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।” इसको ऊर्जा रूपांतरण कहते हैं।

उदाहरण – जब हम कमान में तीर खींचते हैं तो कमान की आकृति बदल जाती है। कमान पर किया गया कार्य तीरकमान प्रणाली में स्थितिज ऊर्जा के रूप में स्टोर हो जाता है। जब तीर छोड़ा जाता है तो इस स्थितिज ऊर्जा का कुछ भाग तीर की गतिज ऊर्जा में बदल जाता है। जब तीर निशाने पर धंस जाता है तो यह कुछ कार्य करता है। अर्थात् तीर की गतिज ऊर्जा, कार्य में बदल जाती है। इस कार्य का कुछ हिस्सा निशाने अंदर ऊष्मा उत्पन्न करता है अर्थात् ऊष्मीय ऊर्जा में बदल जाता है तथा शेष बचा कार्य आवाज़ पैदा करता है अर्थात् ध्वनि ऊर्जा में रूपांतरित हो जाता है।

प्रश्न 7.
पानी द्वारा विद्युत् कैसे उत्पन्न होती है ?
अथवा
पन्न विद्युत् केंद्रों से विद्युत् कैसे उत्पन्न होती है ?
उत्तर-
बाँधों में पृथ्वी की सतह से काफ़ी ऊँचाई पर बहुत अधिक मात्रा में पानी एकत्रित करके रखा जाता है। बाँध कर यह रखा पानी जब नियंत्रित ढंग से छोड़ा जाता है तो स्टोर की गई यह स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। यह गतिज ऊर्जा जनरेटर की शॉफ्ट को चलाती है जिससे यह विद्युत् ऊर्जा में बदल जाती है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 11

प्रश्न 8.
एक प्रयोग द्वारा सिद्ध करो कि यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में बदला जा सकता है।
अथवा
जब हम लकड़ी के किसी तख्ते में हथौड़े से कील गाड़ते हैं तो कील गर्म हो जाती है। क्यों ?
उत्तर-
एक लकड़ी का तख्ता लेकर उस पर एक कील रखकर हथौड़े से मारो तो कील लकड़ी में कुछ अंश तक धंस जाती है परंतु जब कील पूरी तरह तख्ते में धंस जाती है तो फिर हथौड़े से मारने पर कील, हथौड़ा तथा तख्ता गर्म हो जाते हैं। इसका कारण इस प्रकार है। जब हथौड़ा ऊपर उठाया जाता है, तो उसमें उसकी स्थिति के कारण स्थितिज ऊर्जा होती है। जब यह कील पर गिरता है तो इसकी सारी ऊर्जा कील में स्थानांतरित हो जाती है जिससे कील को कुछ गतिज ऊर्जा मिलती है और वह लकड़ी के अंदर धंस जाता है। जब कील पूर्ण रूप से धंस जाता है तो हथौड़े की यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा में बदलकर कील, तख्ने तथा हथौडे को गर्म कर देती है अर्थात यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है।

प्रश्न 9.
कार्य, ऊर्जा और शक्ति में अंतर बताइए। इनमें प्रत्येक राशि का SI मात्रक लिखिए।
उत्तर-

क्रम कार्य (Work) ऊर्जा (Energy) शक्ति (Power)
1. बल लगाकर किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करना, कार्य कहलाता है। कार्य करने की क्षमता ऊर्जा कहलाती है। जिस दर से ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए या खर्च की जाए उसे शक्ति कहते हैं।
2 इसका मात्रक जूल है। इसका मात्रक जूल है। इसका मात्रक वाट या किलोवाट है।

प्रश्न 10.
स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा के बीच अंतर बताइए।
उत्तर-
गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा में अंतर-

गतिज ऊर्जा (P.E.) स्थितिज ऊर्जा (K.E.)
(1) किसी पिंड की गतिज ऊर्जा उसकी गति के कारण होती है। (1) किसी पिंड की स्थितिज ऊर्जा उस पिंड की स्थिति एवं आकार पर निर्भर करती है।
(2) गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\) mυ2 (2) स्थितिज ऊर्जा = mgh
(3) किसी पिंड की गतिज ऊर्जा उस पिंड की चाल द्वारा मापी जाती है। (3) स्थितिज ऊर्जा पिंड की ऊंचाई या गहराई जो कि पृथ्वी की सतह से मापी जाती है, पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 11.
एक घोड़ा तथा एक कुत्ता समान चाल से दौड़ रहे हैं। यदि घोड़े का भार कुत्ते के भार से दस गुणा हो तो उसकी गतिज ऊर्जा का क्या अनुपात होगा ?
उत्तर-
मान लो कुत्ते का द्रव्यमान m है।
∴ घोड़े का द्रव्यमान = 10 m
घोड़े का वेग = कुत्ते का वेग = υ (मान लो)
∴ घोड़े की गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\) × (10 m) × υ2
∴ कुत्ते की गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\) × m × υ2
घोड़े की गतिज ऊर्जा : कुत्ते की गतिज ऊर्जा = (\(\frac {1}{2}\) × 10m × υ2) : (\(\frac {1}{2}\) × m × υ2)
= \(\frac{\frac{1}{2} \times 10 m \times v^{2}}{\frac{1}{2} \times m \times v^{2}}\)
= \(\frac{10}{1}\)
= 10 : 1

प्रश्न 12.
(i) यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान तीन गुणा कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा ?
(ii) यदि वस्तु की गति को तीन गुणा कर दिया जाये तो उसकी गतिज ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर-
(i) ∴ KE = \(\frac {1}{2}\)mυ2
यदि υ परिवर्तित न हो, तो KE ∝ m
इसलिए द्रव्यमान को तीन गुणा करने पर, गतिज ऊर्जा भी तीन गुणा हो जायेगी।

(ii) ∵
KE = \(\frac {1}{2}\)mυ2 और द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है इसलिए K.E. ∝ υ2 यदि वेग तीन गुणा कर दिया जाए तो वस्तु की गतिज ऊर्जा 9 गुणा हो जाएगी।

प्रश्न 13.
बराबर द्रव्यमान के दो पिंड को तथा 2h की ऊँचाइयों पर रखा गया है। बताओ उनकी स्थितिज ऊर्जा में क्या अनुपात है ?
उत्तर-
माना दोनों पिंड A तथा B का बराबर द्रव्यमान m है जोकि क्रमशः h और 2h ऊँचाइयों पर हैं।
पिंड A की स्थितिज ऊर्जा, (ΦA) = mgh ……………. (i)
पिंड B की स्थितिज ऊर्जा, (ΦB) = mg × 2h ……………. (ii)
समीकरण (i) को (ii) से भाग देने पर,
\(\frac{\phi \mathrm{A}}{\phi \mathrm{B}}\) = \(\frac{m g h}{m g \times 2 h}\) = \(\frac{1}{2}\)
अर्थात् स्थितिज ऊर्जाओं में अनुपात = 1 : 2

प्रश्न 14.
बराबर द्रव्यमान के दो पिंड v तथा 2v वेग से चल रहे हैं। उनकी गतिज ऊर्जा का अनुपात मालूम कीजिए।
उत्तर-
माना पिंड A एवं B का बराबर द्रव्यमान m है और वेग क्रमशः v एवं 2v हैं।
∴ A की गतिज ऊर्जा, KA = \(\frac {1}{2}\)m(v)2
= \(\frac {1}{2}\)mv2 ……………… (i)
B की गतिज ऊर्जा, KB = \(\frac {1}{2}\)m (2v)2
= \(\frac {4}{2}\)mv2 ……………. (ii)
= 2mv2
समीकरण (i) को (ii) से भाग देने पर,
\(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{K}_{\mathrm{B}}}=\frac{\frac{1}{2} m \mathrm{v}^{2}}{2 m \mathrm{v}^{2}}\)
\(\frac {1}{4}\)
∴ गतिज ऊर्जाओं में अनुपात = 1 : 4

प्रश्न 15.
किन-किन परिस्थितियों में मानव की शारीरिक कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है ?
उत्तर-
बीमारी तथा बुढ़ापे की परिस्थितियों में मानव की शारीरिक कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है क्योंकि उसके शरीर की मांसपेशियों की ऊर्जा कम होती जाती है।

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प्रश्न 16.
ऊपर से मुक्त रूप से गिरती हुई एक रबड़ की गेंद भूमि से टकरा कर ऊपर उछलती है। इस प्रक्रिया में क्या कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है ? यदि हां तो वह किस-किस रूप में बदलती होगी, जब वह भूमि से टकराती है ?
उत्तर-
ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत के अनुसार गेंद की कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है। भूमि से टकराने के पश्चात् इसकी ऊर्जा निम्नलिखित रूपों में रूपांतरित हो जाती है-

  1. ऊष्मीय ऊर्जा तथा ध्वनि ऊर्जा में
  2. गतिज ऊर्जा में
  3. स्थितिज ऊर्जा में।

प्रश्न 17.
किसी वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। इसके वेग में लगातार कमी होती जाती है। जब इसका वेग शून्य हो जाता है तब गतिज ऊर्जा का क्या होता है ?
उत्तर-
हम जानते हैं गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\)mv2
जब वेग υ = 0 तो इसकी गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\) × m × (0)2
अर्थात् वस्तु की गतिज ऊर्जा = 0

प्रश्न 18.
जब एक वस्तु को v वेग से ऊर्ध्वाधर रूप में ऊपर फेंका जाता है तो उसकी ऊर्जा किस प्रकार रूपांतरित होती है ?
उत्तर-
जब एक वस्तु को v वेग से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका जाता है तब इसमें =mvगतिज ऊर्जा होती है। जैसे-जैसे पत्थर ऊपर जाता है वैसे-वैसे उसकी गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है। अधिकतम ऊँचाई पर पहुंचकर उसका वेग शून्य हो जाता है। अतः गतिज ऊर्जा भी शून्य हो जाती है। स्पष्टतः इस स्थिति में समस्त गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, mgh में परिवर्तित हो जाती है। इस ऊँचाई से जैसे ही पत्थर नीचे गिरने लगता है, उसकी स्थितिज ऊर्जा का परिवर्तन गतिज ऊर्जा में होने लगता है और जैसे ही यह पृथ्वी के धरातल पर पहुँचती है तो इसकी सारी स्थितिज ऊर्जा का गतिज ऊर्जा में परिवर्तन हो जाता है।

प्रश्न 19.
एक व्यक्ति एक सूटकेस उठाए खड़ा है, क्या वह कोई कार्य कर रहा है ?
उत्तर-
हम जानते हैं कि वस्तु द्वारा किया गया कार्य उस वस्तु पर लग रहे बल तथा बल की दिशा में उत्पन्न विस्थापन के गुणनफल के बराबर बल होता है। इस स्थिति में व्यक्ति द्वारा उठाए गए सूटकेस पर गुरुत्वीय बल के बराबर बल क्रिया कर रहा है परंतु इस बल द्वारा सूटकेस में विस्थापन उत्पन्न नहीं हुआ है। इसलिए व्यक्ति ने कोई कार्य नहीं किया है।
यहाँ F = mg
विस्थापन S = 0
हम जानते हैं कि, W = F × S
= m × g × S
= mg × 0
W = 0
अर्थात् सूटकेस उठाए हुआ खड़ा व्यक्ति कोई कार्य नहीं करता।

प्रश्न 20.
नाव चला रहा व्यक्ति नदी के किनारे के सापेक्ष विराम अवस्था में है। क्या वह कोई कार्य कर रहा
उत्तर-
क्योंकि किश्ती चला रहा व्यक्ति नदी के किनारे के सापेक्ष विराम अवस्था में है अर्थात् कोई विस्थापन नहीं हो रहा है। इसलिए वह कोई कार्य नहीं कर रहा है।

प्रश्न 21.
पानी की एक बाल्टी उठाए एक व्यक्ति एक समतल सड़क पर एकसमान वेग से चल रहा है। वह कितना कार्य कर रहा है ?
उत्तर-
जब पानी की बाल्टी उठाए व्यक्ति एक समतल सड़क पर एक समान वेग से चलता है तो उस समय उस व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल बाल्टी के भार के बराबर ऊपर की तरफ होता है। इस अवस्था में बल तथा विस्थापन की दिशा के मध्य कोण 90° का होता है अर्थात् बल विस्थापन दिशा के लंबवत् होता है।
हम जानते हैं कि यदि बल तथा विस्थापन दिशा के मध्य कोण θ हो, तो
बल द्वारा किया गया कार्य W = F Cos θ × S
W = mg Cos θ × S
W = mg × o × S
W = 0
∴ किया गया कार्य शून्य है।

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प्रश्न 22.
क्या एक वस्तु को गति देने के लिए किया गया कार्य इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु कितनी तेज़ चल रही है ?
उत्तर-
किसी वस्तु को गति प्रदान करने के लिए किया गया कार्य उसमें गतिज ऊर्जा उत्पन्न करता है जो वस्तु के वेग के समानुपाती होता है।

प्रश्न 23.
क्या पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल सुरक्षित है ?
उत्तर-
हाँ, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल सुरक्षित रहता है क्योंकि बल द्वारा किया गया कार्य वस्तु में जमा रहता है। इसलिए गुरुत्वाकर्षण बल कंजरवेटिव (सुरक्षित) बल है।

प्रश्न 24.
कलाई की एक घड़ी के स्प्रिंग में ऊर्जा का कौन-सा रूप उपयोग में आता है ?
उत्तर-
जब घड़ी की कमानी पूरी तरह खुली होती है तो घड़ी नहीं चलती जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। जब इसकी कमानी की चाबी को भरते हैं तो इसकी कमानी को बंद करने के लिए हम कुछ कार्य करते हैं। यह किया गया कार्य घड़ी की कमानी में स्थितिज ऊर्जा के रूप में स्टोर (जमा) हो जाता है। यह स्टोर की हुई स्थितिज ऊर्जा घड़ी की सूइयों को डायल पर चलाने में सहायता करती है। इस तरह स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 12

प्रश्न 25.
क्या किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो सकती है ?
उत्तर-
नहीं, किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा ऋणात्मक नहीं हो सकती क्योंकि गतिज ऊर्जा, द्रव्यमान तथा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है।

प्रश्न 26.
वह स्थिति बतलाएं जब एक बल द्वारा कोई कार्य नहीं होता है ?
उत्तर-
स्थितियाँ जब बल द्वारा कोई कार्य नहीं होता
(i) यदि वस्तु पर लग रहा बल वस्तु को विस्थापन करने में असफल रहता है तो वस्तु पर उस बल द्वारा कोई कार्य किया हुआ नहीं माना जाता।

(ii) यदि वस्तु पर लग रहा बल वस्तु में हुए विस्थापन के लंब रूप में हो तो बल द्वारा कोई कार्य नहीं होता।
क्योंकि इस स्थिति में θ = 90°
बल द्वारा किया गया कार्य W = F Cos θ × S
= F Cos 90° × S
= F × o × S
W = 0

प्रश्न 27.
कार्य, स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और शक्ति के S.I. मात्रक बतलाएं।
उत्तर-
कार्य की S.I. इकाई-कार्य की S.I. इकाई जूल (J) (न्यूटन मीटर) है।। स्थितिज तथा गतिज ऊर्जा की S.I. इकाई-जूल (J) शक्ति की S.I. इकाई-वाट।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 28.
जब कोई वस्तु क्षैतिज दिशा में चलती है तो गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं हो रहा, क्यों ?
उत्तर-
जब कोई वस्तु क्षैतिज दिशा में चलती है, तो उस अवस्था में गुरुत्वाकर्षण बल जो नीचे पृथ्वी की ओर लगता है विस्थापन के दिशा में लंबात्मक रूप में होता है।
∴ θ = 90° तथा Cos θ = Cos 90° = 0
कार्य, W = F Cos θ × S
W = F × o × S
W = 0
अर्थात् कोई कार्य नहीं किया जाता है।

प्रश्न 29.
जब एक गेंद को ऊपर की ओर फेंका जाता है, किस बिंदु पर स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है ?
उत्तर-
जब एक गेंद को ऊपर की ओर फेंका जाता है, तो आरंभ में इसका वेग अधिकतम होता है जिस कारण इसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी जबकि स्थितिज ऊर्जा कम। गेंद ज्यों-ज्यों ऊपर की ओर जाती है, वस्तु कम वेग से दूरी तय करती है। इसलिए समय के साथ स्थितिज ऊर्जा अधिक और गतिज ऊर्जा कम होती जाती है। गेंद द्वारा अधिकतम ऊँचाई पर पहुंच कर वेग शून्य हो जाता है इसलिए वहां गतिज ऊर्जा सबसे कम (शून्य) तथा स्थितिज ऊर्जा सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 30.
वह स्थिति बताएं जब किसी वस्तु द्वारा किया गया कार्य शून्य हो परंतु उस पर बल लग रहा हो।
उत्तर-
ऐसा दो स्थितियों में संभव है कि वस्तु पर बल तो लग रहा है परंतु किया गया कार्य शून्य होता है।
(i) जब वस्तु पर लग रहा बल तथा बल द्वारा वस्तु में उत्पन्न हुआ विस्थापन एक-दूसरे के लंबात्मक हो।
ऐसी स्थिति में कोण θ = 90°
∴ cos 90° = 0
वस्तु द्वारा किया गया कार्य (W) = F cos θ × विस्थापन
= 0 × विस्थापन
अर्थात् W = 0

(ii) यदि वस्तु पर लग रहा बल वस्तु में थोड़ा-सा भी विस्थापन न करे।
बल = F
विस्थापन (S) = 0
कार्य (W) = F × S
= F × 0
अर्थात्, W = 0

प्रश्न 31.
बताएं कि समय, ऊर्जा में या शक्ति में शामिल होता है ?
उत्तर-
बल द्वारा किए गए कार्य (ऊर्जा) की गणना, W = F × S से की जाती है। इस समीकरण में समय शामिल नहीं है। अब, शक्ति की परिभाषा अनुसार, “शक्ति कार्य करने की दर है।”
अर्थात् शक्ति (P) = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 13

इस समीकरण में समय शामिल है अर्थात् शक्ति समय पर निर्भर करती है।
इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि समय शक्ति में शामिल होता है न कि ऊर्जा में।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 32.
किसी वस्तु द्वारा किए गए कार्य तथा किसी वस्तु पर किए गए कार्य का अंतर उदाहरण देकर समझाओ।
उत्तर-
जब वस्तु का विस्थापन लगाए गए बाह्य बल की दिशा में होता है तो वस्तु पर कार्य किया जाता है। परंतु जब वस्तु का विस्थापन बल की विपरीत दिशा में होता है तो कार्य वस्तु द्वारा किया जाता है।

उदाहरण-यदि किसी बर्तन में भरी गैस को बल द्वारा दबाएँ तो कार्य गैस पर किया गया। अब यदि बर्तन की गैस फैलती है तो यह वायुमंडलीय दाब के विरुद्ध गैस द्वारा किया गया कार्य है।

प्रश्न 33.
एक पिंड पर बल लगाकर उसे विस्थापित किया जाता है, बताइए-
(i) पिंड पर किस दिशा में बल लगाने पर अधिकतर कार्य होगा ?
(ii) पिंड पर किस दिशा में बल लगाने पर कार्य शून्य होगा?
उत्तर-
पिंड पर किए गए कार्य W = F × S cos θ से,
(i) जब θ = 0° तो cos 0° = 1 जो कि cos θ का अधिकतम मान है।
W = F × S × cos o°
W = F × S × 1
अतः W (अधिकतम) = F × S
अतः यदि पिंड का विस्थापन लगाए गए बल की दिशा में है, (अर्थात् θ = 0°) तो किया गया कार्य अधिकतम होगा।

(ii) जब θ = 90° तो cos 90° = 0 जो कि cos θ का न्यूनतम मान है।
W = F × S × cos 90°
W = F × S × 0
अतः W (न्यूनतम) = 0
अत: यदि पिंड का विस्थापन लगाए गए बल के लंबवत् है, (अर्थात् e = 90°) तो किया गया कार्य शून्य (न्यूनतम) होगा।

प्रश्न 34.
इलेक्ट्रॉन को किसी वृत्तीय कक्षा में घूमते हुए एक चक्कर लगाने में कितना कार्य करना पड़ता
उत्तर-
वृत्तीय कक्षा में गति करते समय इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाला अभिकेंद्र आकर्षण बल गति की दिशा के लंबवत् होता है अर्थात् बल और विस्थापन के बीच 90° का कोण होता है,
इसलिए कार्य (W) = F × S cos θ
= F × S cos 90°
= 0 (शून्य) होगा।

इस प्रकार, वृत्तीय गति में इलेक्ट्रॉन द्वारा एक या अधिक चक्कर लगाने में किया गया कार्य शून्य होता है।

प्रश्न 35.
ऊर्जा तथा सामर्थ्य में अंतर उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
ऊर्जा तथा सामर्थ्य में अंतर – ऊर्जा द्वारा किए जा सकने वाले कार्य के कुल परिमाण है, इसका समय से कोई संबंध नहीं है।
सामर्थ्य-यह कार्य करने की दर है। इसका कार्य के कुल परिमाण से कोई संबंध नहीं है।

उदाहरण – एक मजदूर किसी कार्य को पूरा करने में 1 घंटा लगता है, जबकि दूसरा मज़दूर उसी काम को करने में 2 घंटे लगाता है। इस दशा में दोनों मजदूरों ने बराबर कार्य किया अर्थात् दोनों की बराबर ऊर्जा व्यय हुई, परंतु पहले मजदूर ने कार्य आधे समय में किया, इसलिए पहले मज़दूर का दूसरे मजदूर की अपेक्षा दोगुना सामर्थ्य है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 36.
दो प्रोटॉनों को एक-दूसरे के समीप लाने पर स्थितिज ऊर्जा में वदधि होगी अथवा कमी ?
उत्तर-
प्रोटॉनों को एक-दूसरे के समीप लाने पर, प्रतिकर्षण बल बढ़ने से अधिक कार्य करना पड़ेगा। यह कार्य उनमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होगा। इसलिए प्रोटॉनों को एक-दूसरे के समीप लाने में स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होगी।

प्रश्न 37.
एक घोड़ा, बल F लगाकर एक तांगे को सड़क पर नियत वेग υ से खींच रहा है। घोड़े की शक्ति के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
मान लो घोड़ा t समय में ताँगे को S दूरी तक खींचता है।
क्योंकि घोड़े तथा ताँगे का वेग v नियत है, इसलिए t समय में ताँगे का विस्थापन S = υt ………..(1) [∵ त्वरण = 0]
∴ घोड़े द्वारा + समय में, ताँगे को खींचने में किया गया कार्य W = F × s
समीकरण (1) का प्रयोग करके,
या W = F × vt
घोड़े की शक्ति (P) = \(\frac{W}{t}=\frac{F \times v t}{t}\)
∴ P = F × v

प्रश्न 38.
व्यायाम करते समय एक बालक 10 मिनट तक बार-बार उठता बैठता है। समय के साथ उसके शरीर की स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन को दर्शाने के लिए ग्राफ बनाइए।
उत्तर-
प्रत्येक बार उठने पर बालक की स्थितिज ऊर्जा बढ़ेगी तथा प्रत्येक बार बैठने पर स्थितिज ऊर्जा कम होगी। इसके ग्राफ प्रदर्शित चित्र के अनुरूप होगा।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 14

महत्त्वपूर्ण सूत्र (Important Formulae)

1. गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\)mυ2
2. स्थितिज ऊर्जा = mgh
यहाँ m = वस्तु का द्रव्यमान; g = गुरुत्वीय त्वरण तथा h = ऊँचाई
3. कार्य (W) = बल (F) × विस्थापन (S) शक्ति
4. शक्ति (P) = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 15
या शक्ति (P) = \(\frac{\mathrm{F} \times \mathrm{S}}{t}\)
= F × υ
5. 1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर
6. 1 जूल = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 16
7. एक अश्व शक्ति (Horse Power) = 746 वॉट
8. 1 किलोवाट-घंटा = 36,00,000 जूल = 3.6 × 106 जूल
9. 1 वाट घंटा = 3600 जूल

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

संख्यात्मक प्रश्न (Numerical Problems)

प्रश्न 1.
0.5 किलोग्राम द्रव्यमान वाले एक बक्से को उठाने के लिए 1 जूल ऊर्जा लगाई गई, तो यह कितना ऊँचा उठेगा ?
हल :
स्थितिज ऊर्जा, (P.E.) = 1 जूल
द्रव्यमान, (m) = 0.5 कि० ग्रा०
गुरुत्वीय प्रवेग, (g) = 10 m/s2
ऊँचाई, (h) = ?
हम जानते हैं कि, स्थितिज ऊर्जा P.E. = m × g × h
1 = 0.5 × 10 × h
1 = 5h
या h = \(\frac{1}{5}\) = 0.2
∴ बक्सा जितना ऊँचा उठेगा = 0.2 m

प्रश्न 2.
एक स्त्री 10 m गहरे कुएँ से 5 किलोग्राम भारी पानी की बाल्टी 10 सैकेंड में खींच लेती है। उसकी शक्ति कितनी है ?
हल :
पानी से भरी बाल्टी का द्रव्यमान, (m) = 5 कि० ग्रा०
कुएँ की गहराई, (h) = 10 मीटर
g = 10 मीटर / सै०2
महिला द्वारा किया गया कार्य = mgh
= 5 × 10 × 10
= 500 जूल
समय = 10 सैकेंड
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 17
= 50 जूल/सै० या वॉट उत्तर

प्रश्न 3.
200 न्यूटन बल से एक दीवार को दबा रहा एक व्यक्ति कितना कार्य कर रहा है ?
हल :
यहां, व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल (f) = 200 N
बल की दिशा में उत्पन्न हुआ विस्थापन (S) = 0
[∵ व्यक्ति द्वारा लगाये गए बल से दीवार में कोई विस्थापन नहीं हुआ है।]
∴ व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य (W) = F × S
= 200 N × 0
= 0
अर्थात् व्यक्ति ने 200N बल लगाने पर भी कोई कार्य नहीं किया है।

प्रश्न 4.
100 वॉट वाला बिजली का एक बल्ब कितनी विद्युत् ऊर्जा की खपत करेगा, यदि वह दो घंटों तक जलता रहे ?
हल:
बल्ब की शक्ति (P) = 100 वॉट
समय (t) = 2 घंटे
= 2 × 60 × 60 = 7200 सैकेंड
खपत की गई ऊर्जा की मात्रा (E) = ?
हम जानते हैं कि, p = \(\frac{\mathrm{W}}{t}\)
⇒ p = \(\frac{\mathrm{E}}{t}\)
या E = P × t
E = 100 वाट × 7200 सैकेंड
E = 7,20,000 जूल
E = 7.2 × 105 जूल उत्तर

प्रश्न 5.
25 km की ऊँचाई से एक रॉकेट को 1 km/s के वेग से ऊपर की ओर दागा गया। यदि रॉकेट का द्रव्यमान 3 × 106 हो, तो इसकी स्थितिज और गतिज ऊर्जा की गणना करो। (g = 10 m/s2)
हल :
रॉकेट का द्रव्यमान, (m) = 3 × 106 कि० ग्रा०
वेग, (υ) = 1 km/s = 1000 मीटर / सै०
ऊँचाई, (h) = 25 km
= 25 × 1000 मीटर
= 25,000

(i) मीटर रॉकेट की स्थितिज ऊर्जा = m × g × h
= 3 × 106 × 10 × 25000
= 75 × 1010 जूल

(ii) रॉकेट की गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\)mυ2
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × 106 × (1000)2
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × 106 × 106
= 1.5 × 1012 जूल उत्तर

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 6.
शिमला में विशेष प्रकार के रिक्शा होते हैं, जिनमें साइकिल वाली चैन नहीं होती और वह पेट्रोल के बिना ही चलते हैं, परंतु लोग ही उनको खींचते हैं। एक व्यक्ति ऐसे एक रिक्शे को 300 न्यूटन के बल से खींचकर सड़क पर उसमें 18 Km/h का वेग उत्पन्न कर रहा है। उस व्यक्ति की शक्ति की परिकलना करो।
हल :
व्यक्ति दवारा रिक्शा खींचने में लगाया गया बल, (F) = 300 N
रिक्शे में उत्पन्न हुआ वेग, (υ) = 18 Km/h
υ = \(\frac{18 \times 1000}{60 \times 60}\) m/s
υ = 5 m/s
व्यक्ति की शक्ति (P) = \(\frac{\mathrm{W}}{\mathrm{t}}\)
= \(\frac{\mathrm{F} \times \mathrm{S}}{\mathrm{t}}\) [∵ W = F × S]
= F × \(\frac{S}{t}\)
= F × υ (∵ υ = \(\frac{S}{t}\))
= 300 υ 5
= 1500 वॉट उत्तर

प्रश्न 7.
एक व्यक्ति 30 किलोग्राम भारी बक्सा सिर पर उठाकर-
(i) ऊपर की ओर
(ii) क्षैतिज दिशा में 10 मी० की दूरी चलता है। उसने कितना कार्य किया ?
हल :
बक्से का द्रव्यमान, (m) = 30 Kg
विस्थापन, (S) = 10 m
गुरुत्वीय प्रवेग (g) = 9.8 m/s2

(i) ऊपर की ओर व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य, (W) = F × S
W = m × g × s
= 30 × 9.8 × 10
= 2940 जूल उत्तर

(ii) क्षैतिज दिशा में किया गया कार्य-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 18
कार्य, W = F cos θ × S
= (30 × 9.8) × cos 90° × 10
= 30 × 9.8 × 0 × 10 [∵ cos 90° = 0]
= 0 (शून्य) उत्तर

प्रश्न 8.
1000 kg की 30 m/s की चाल से चल रही कार ब्रेक लगाने पर एक समान त्वरण से 50 मीटर की दूरी पर रुक जाती है। ब्रेक द्वारा कार पर लगे बल तथा कृत कार्य को ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ, = 30 ms-1
υ = 0
S = 50 m
अत्र υ2 – u2 = 2aS
(0)2 – (30)2 = 2 × a × 50
– (30 × 30) = 100 × a
a = \(\frac{-900}{100}\)
= -9m/s2
बल, F = m × a
= 1000 × 9 = 9000 न्यूटन
ब्रेक द्वारा किया कार्य = F × S
= 9000 × 50
= 45 × 10000
= 4.5 × 105 J

प्रश्न 9.
एक मजदर 10 कि०ग्रा० भारी टोकरी अपने सिर पर रखकर समतल सड़क पर 100 मीटर क्षैतिज दिशा में चल रहा है। उसके द्वास गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किया गया कार्य ज्ञात करो। (g = 9.8 मी०/सै०2 )
हल :
टोकरी का भार = mg = 10 × 9.8
= 98 N
गुरुत्वीय बल की दिशा (नीचे) में विस्थापन = 0
∴ कार्य = बल × विस्थापन
= 98 × 0
= 0

प्रश्न 10.
एक बच्चा समतल क्षैतिज फर्श पर अपनी खिलौना गाड़ी को 10 मीटर की दूरी तक खींचता है। खिलौना गाड़ी से बंधी हुई डोरी क्षैतिज समतल के साथ 60° का कोण बनाती है। यदि बच्चे के द्वारा लगाया गया बल 5 N हो तो उसके द्वारा किए गए कार्य की गणना कीजिए।
हल :
यहाँ,
F = 5 N, θ = 60°, S = 10 मी०
बच्चे द्वारा किया गया कार्य (W) = F cos θ × S
= 5 cos 60° × 10
= 5 × \(\frac {1}{2}\) = × 10 [cos 60° = [∵ latex]\frac {1}{2}[/latex]
= 25 जूल उत्तर

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 11.
पानी के पंप की विद्युत् शक्ति की गणना करो जो 100 kg पानी को 30 m ऊँची टैंकी में 30 सैकेंड में फेंकने का सामर्थ्य रखता है। (g = 10 m/s2)
हल :
यहाँ, m = 100 kg
S = 30 m
g = 10m/s2
t = 30s
गुरुत्व विरुद्ध पंप द्वारा किया गया कार्य, W = mgs
W = 100 × 10 × 30
W = 30000 J जूल
पंप की शक्ति (P) = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 19
P = \(\frac{30000 \mathrm{~J}}{30 s}\)
30s P = 1000 J/s या वाट
P = 1 किलोवाट उत्तर

प्रश्न 12.
एक मशीन 240 सैकेंड में 1960 जूल कार्य करती है। मशीन की शक्ति क्या है ?
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 20
= 8.17 जूल/सैकेंड
= 8.17 वाट उत्तर

प्रश्न 13.
5 मीटर की ऊँचाई पर रखे 10 ग्राम वजन वाले पत्थर की ऊर्जा बताओ।( दिया है, g = 9.8 मी०/सै०2)
हल:
पत्थर का द्रव्यमान (m) = 10 ग्राम
\(\frac{10}{1000}\)
= .01 किलोग्राम
ऊँचाई (h) = 5 मीटर
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 9.8 मी०/सै०2
पत्थर में उपस्थित ऊर्जा (P.E.) = mgh
= .01 × 5 × 9.8
= 0.49 जूल उत्तर

प्रश्न 14.
50 कि० ग्रा० द्रव्यमान का कोई व्यक्ति 30 सीढ़ियां 30 सैकेंड में चढ़ जाता है। यदि प्रत्येक सीढ़ी 20 सै० मी. ऊँची हो तो उस व्यक्ति द्वारा सीढ़ियां चढ़ने में प्रयुक्त शक्ति का परिकलन कीजिए।
हल :
m = 50 कि० ग्रा०, समय t = 30 सै०
सीढ़ियों की संख्या = 30
एक सीढ़ी की ऊँचाई = 20 सै०मी०
∴ 30 सीढ़ियों की कुल ऊँचाई = 30 × 20
= 600 सै०मी०
= 6 मीटर
किया गया कुल कार्य, (P.E.) = mgh
= 50 × 10 × 6
= 3000 जूल
शक्ति (P) = \(\frac{\text { P.E }}{t}\)
= \(\frac{3000}{30}\) = 100 वाट उत्तर

प्रश्न 15.
60 kg द्रव्यमान वाला व्यक्ति 30 सीढ़ियों वाली ऊँचाई को 40s में चढ़ जाता है। यदि प्रत्येक सीढ़ी 20 cm ऊँची हो तो किया गया कार्य ज्ञात करो।
हल:
तय कुल ऊँचाई = सीढ़ियों की संख्या × प्रत्येक सीढ़ी की ऊँचाई
= \(\frac{30 \times 20}{100}\)
= 6m
m = 60 kg, 8 = 10 ms-2, h = 6m
किया गया कार्य = स्थितिज ऊर्जा, (P.E.) = mgh
= 60 × 10 × 6
= 3600 J

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 16.
एक मनुष्य का भार 50 किलोग्राम है। यह 20 सैकेंड में एक पहाड़ी पर ऊर्ध्वारतः 10 मीटर चढ़ जाता है। उसकी शक्ति मालूम करें। (दिया है : g = 9.8 मी०/सै०2)
हल:
द्रव्यमान (m) = 50 kg
गुरुत्व त्वरण (g) = 9.8 मी०/सै०2
समय (t) = 20 सैकेंड
ऊँचाई (h) = 10 m
कार्य (W) = स्थितिज ऊर्जा
= mgh
= 50 × 9.8 × 10J
= 4900J
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 21
= \([\frac{4900 \mathrm{~J}}{20 \mathrm{~s}}/latex]
= 45 जूल/सैकेंड
= 45 वाट उत्तर

प्रश्न 17.
रोडवेज की एक बस 72 Km/h की चाल से पूर्व दिशा की ओर जा रही है। राकेश तथा मुकेश जिनका क्रमशः द्रव्यमान 50 kg तथा 55 kg है; बस में सफर कर रहे हैं। क्या उनकी गतिज ऊर्जा बराबर है ?
हल :
राकेश का वेग = बस का वेग = मुकेश का वेग
= 72 km/h
= [latex]\frac{72 \times 1000}{60 \times 60}\) m/s
v = 20 m/s
∴ राकेश की गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\)m (राकेश का वेग)2
= \(\frac {1}{2}\) × 50 × (20)2
= \(\frac {1}{2}\) 50 × 20 × 20
10,000 J. …………….. (i)
मुकेश की गतिज ऊर्जा = \(\frac {1}{2}\)m (मुकेश का वेग)2
= \(\frac {1}{2}\) × 55 × 20 × 20
= 11,000 J. ……………. (ii)
:. मुकेश की गतिज ऊर्जा, राकेश की गतिज ऊर्जा से अधिक है।

प्रश्न 18.
मुक्त रूप से गिरता हुआ 1 kg द्रव्यमान का कोई हथौड़ा लकड़ी के टुकड़े पर लगी किसी कील पर गिरता है। यदि हथौड़ा 1 m ऊँचाई से गिरता है, तो कील से टकराने से ठीक पहले गतिज ऊर्जा कितनी होगी?
(g = 10 m/s2)
हल :
हथौड़े का द्रव्यमान, (m) = 1 kg
हथौड़े की ऊंचाई, (h) = 1 m
υ2 – u2 = 2gS
υ2 – 0 = 2 × 10 × 1
υ2 = 20
हथौड़े की गतिज ऊर्जा (K.E.) = \(\frac {1}{2}\) × m × υ2
= \(\frac {1}{2}\) × 1 × 20
= 10 जूल उत्तर

प्रश्न 19.
एक कार 54 कि०मी०/घंटा वेग से चल रही है। इसमें बैठे 40 कि० ग्रा० के लड़के की गतिज ऊर्जा क्या होगी ?
हल:
लड़के का वेग = कार का वेग
= 54 कि०मी०/ घंटा
= \(\frac{54 \times 1000}{60 \times 60}\)
= 15 m/s
लड़के का द्रव्यमान, (m) = 40 kg
लड़के की गतिज ऊर्जा (K.E.) = \(\frac {1}{2}\)mυ2
= \(\frac {1}{2}\) × 40 × (15)2
= 4500 जूल उत्तर

प्रश्न 20.
कोई वस्तु 5 सैकेंड में 50 जूल कार्य करती है। इसकी शक्ति क्या है ?
हल:
किया गया कार्य, (W) = 50 जूल
लगाया गया समय, (t) = 5 सैकेंड शक्ति
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 22
= 10 जूल/सैकेंड
= 10 वाट उत्तर

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 21.
एक पंप का बल ज्ञात करो जो 19 मीटर ऊँची टंकी में 100 कि० ग्रा० पानी 25 सैकेंड में पहँचा सकता है। (g = 10 मी०/सै०2 )
हल :
यहाँ, m = 100 कि०ग्रा०
h = 19 m
g = 10 मी०/सै०2
t = 25 सै०
कार्य, (W) = mgh
= 100 × 10 × 19
= 19000 जूल
शक्ति, (P) = \(\frac{\mathbf{W}}{t}\)
= \(\frac{19000}{25}\)
= 760 वॉट उत्तर

प्रश्न 22.
हृदय द्वारा एक धड़कन के लिए 1 जूल ऊर्जा व्यय होती है। हृदय की शक्ति का परिकलन कीजिए यदि यह एक मिनट में 72 बार धड़कता है।
हल :
हृदय की एक धड़कन द्वारा किया गया कार्य = 1 जूल
72 धड़कनों में किया गया कार्य = 72 × 1
= 72 जूल
समय = 1 मिनट
= 60 सैकेंड
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 23
\(\frac{72}{60}\)
= 1.2 J/s
= 1.2 वॉट उत्तर

प्रश्न 23.
कोई व्यक्ति 100 W का बल्ब प्रतिदिन 10 घंटे जलाता है। 30 दिन में वह कितने यूनिट विदयुत् ऊर्जा की खपत करेगा ?
हल :
बल्ब की शक्ति (P) = 100 W
जितने समय तक बल्ब जला (t) = 10 × 30 घंटे
खपत हुई ऊर्जा (E) = P × t
= 100 × 10 × 30
= 30000 वाट घंटा
= \(\frac{30000}{1000}\) kWh
= 30 kWh
= 30 यूनिट उत्तर

प्रश्न 24.
एक घर में 500 वाट का विद्युत् चूल्हा 10 घंटे प्रतिदिन कार्य करता है। 30 दिन में उस घर की व्यय होने वाली ऊर्जा की यूनिट (kWh) में गणना करो।
हल :
चूल्हे की शक्ति = 500 वाट
जितने समय के लिए प्रयोग किया गया = 10 × 30 = 300 घंटे
30 दिनों में खर्च हुई ऊर्जा = 500 वाट × 300 घंटे
= 150000 वाट घंटा
= \(\frac{150000}{1000}\)
= 150 किलोवाट घंटा
= 150 यूनिट उत्तर

प्रश्न 25.
10 kg द्रव्यमान के पिंड को 5 m/s2 के त्वरण के अधीन 2m की दूरी से विस्थापित किया जाता है। पिंड पर किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
हल :
यहां पिंड का द्रव्यमान (m) = 10 kg
पिंड का त्वरण (a) = 5 m/s2
पिंड में विस्थापन (S) = 2 m
हम जानते हैं, कार्य (W) = F × S
= m × a × S (परंतु F = m × a)
= 10 × 5 × 2
= 100 J

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 26.
10 kg द्रव्यमान की एक वस्तु को कुछ ऊँचाई तक ऊपर उठाने में 490 J कार्य किया गया। जितनी ऊँचाई में से वस्तु को ऊपर उठाया गया मालूम कीजिए। गुरुत्वीय त्वरण g = 9.8m/2
हल :
यहाँ वस्तु का द्रव्यमान (m) = 10 kg
किया गया कार्य (W) = 490J
गुरुत्वीय त्वरण (g) = + 9.8 m/s2
मान लो वस्तु को h ऊँचाई में से ऊपर उठाया गया है, तो वस्तु पर किया गया कार्य
= वस्तु की स्थितिज ऊर्जा
W = mgh
490 = 10 × 9.8 × h
या h = \(\frac{490}{10 \times 9.8}\)
= \(\frac{490}{98}\)
ऊँचाई, h = 5m

प्रश्न 27.
एक वस्तु पर 20 N का बल लगाकर उसे 10 cm की दूरी में से विस्थापित करने में 1J का कार्य करना पड़ा। बल तथा विस्थापन के बीच का कोण ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ बल (F) = 20 N
विस्थापन (S) = 10 cm = \(\frac{10}{100}\)m
= 0.1 m
वस्तु पर किया गया कार्य (W) = 1.0 J
बल की दिशा तथा विस्थापन के मध्य कोण = θ (मान लो)
अब W = FS cos θ
1 = 20 × 0.1 × cos θ
1 = 2 cos θ
cos θ = \(\frac {1}{2}\)
∴ θ = 60°

प्रश्न 28.
दो समान द्रव्यमान वाले पिंड क्रमशः एक समान वेग υ तथा 3υ से गति कर रहे हैं। इन पिंडों की गतिज ऊर्जाओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लो प्रत्येक पिंड का द्रव्यमान m है।
पहले पिंड की गतिज ऊर्जा (EK1) = \(\frac {1}{2}\)mυ2 …………… (1)
दूसरे पिंड की गतिज ऊर्जा (EK2) = \(\frac {1}{2}\)m(3υ)2
= \(\frac {1}{2}\)m(9υ)2
= 9 × \(\frac {1}{2}\)mυ2 (2)
दोनों पिंडों का गतिज ऊर्जाओं का अनुपात = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{K}_{1}}}{\mathrm{E}_{\mathrm{K}_{2}}}\)
= \(\frac{\frac{1}{2} mv^{2}}{9 \times \frac{1}{2} m v^{2}}\)
= \(\frac {1}{9}\) = 1 : 9

प्रश्न 29.
एक 2 kg द्रव्यमान वाली वस्तु विरामावस्था से धरती पर गिरती है। गिरने के 2 बाद वस्तु की गतिज ऊर्जा कितनी होगी।g का मान 10 m/s2 लें।
हल:
यहां द्रव्यमान (m) = 2 kg
प्रारंभिक वेग (u) = 0 (विरामावस्था)
समय (t) = 2s
अंतिम वेग (υ) = ?
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 10 m/s2
υ = u + gt का प्रयोग करने पर
υ = 0 + 10 × 2
∴ υ = 20 m/s
अब 2 सेकंड के बाद वस्तु की गतिज ऊर्जा (EK)
= \(\frac {1}{2}\)mυ2
= \(\frac {1}{2}\) × 2 × (20)2
= \(\frac {1}{2}\) × 2 × 20 × 20J
= 400 J

प्रश्न 30.
एक समतल सड़क पर स्कूटर चालक ब्रेक लगा कर स्कूटर की चाल 36 km/h से कम करके 18 km/h कर देता है। बताओ ब्रेक द्वारा कितना कार्य किया गया यदि खाली स्कूटर का द्रव्यमान 86 kg और चालक तथा पेट्रोल का द्रव्यमान 64 kg हो।
हल:
कुल द्रव्यमान (m) = स्कूटर का द्रव्यमान + चालक तथा पेट्रोल का द्रव्यमान
= m1 + m2
= 86 kg + 64 kg
= 150 kg
प्रारम्भिक वेग (u) 36 km/h
= 36 × \(\frac {5}{18}\)m/s
= 10 m/s
अंतिम वेग (υ) = 18 km/h
= 18 × \(\frac {5}{18}\) m/s
= 5 m/s
ब्रेक द्वारा किया गया कार्य = स्कूटर द्वारा गतिज ऊर्जा की हानि
= प्रारंम्भिक गतिज ऊर्जा – अतिम गतिज ऊर्जा
= \(\frac {1}{2}\)mu2 – \(\frac {1}{2}\)mυ2
= = \(\frac {1}{2}\)m (u2 – υ2)
= \(\frac {1}{2}\)m (u + υ) (u – υ)
= \(\frac {1}{2}\) × 150 × (10 + 5) (10 – 5)
= \(\frac {1}{2}\) × 150 × 15 × 5
= 75 × 75
= 5625

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 31.
एक कार एक समान वेग से गतिशील है। 18 km/h, 36 km/h, 54 km/h तथा 72 km/h कुछ अंतरालों पर कार में बैठे 40 kg द्रव्यमान वाले लड़के की इन वेगों पर गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए तथा गतिज ऊर्जा और वेग के मध्य ग्राफ भी बनायें और बताइए कि ग्राफ की प्रकृति कैसी है?
उत्तर-
यहाँ, m = 40 Kg
υ1 = 18 km/h = 18 × \(\frac{5}{18}\)m/s
= 5 m/s
υ2 = 36 km/h – 10 m/s
υ3 = 54 km/h = 15 m/s
υ4 = 72 km/h = 20 m/s

K1 = \(\frac{1}{2} \mathrm{~m} v_{1}^{2}\) = \(\frac {1}{2}\) × 40 × (5)2
= 500J

K2 = \(\frac{1}{2} m v_{2}^{2}\)
\(\frac {1}{2}\) × 40 × (10)2
= 2000 J

K3 = \(\frac{1}{2} m v_{3}^{2}\)
\(\frac {1}{2}\) × 40 × (15)2
= 4500 J

K4 = \(\frac{1}{2} m v_{4}^{2}\)
\(\frac {1}{2}\) × 40 × (20)2
= 8000 J
चित्र में दर्शाए गए अनुसार गतिज ऊर्जा और वेग के मध्य ग्राफ परवलयाकार (पैराबोला) है क्योंकि गतिज ऊर्जा ∝ υ2
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 24

प्रश्न 32.
मान लो आपके हाथ में 1 kg द्रव्यमान की वस्तु है। आप इसे कितनी ऊँचाई तक ऊपर उठाएँगे ताकि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा 1J प्राप्त कर लें। (g = 10 ms-2)
हल :
यहाँ स्थितिज ऊर्जा (p) = 1J
द्रव्यमान (n) = 1 kg
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 10 ms-2
हम जानते हैं, स्थितिज ऊर्जा (P) = mgh
1 = 1 × 10 × h
∴ h = \(\frac{1}{10}\)m
= 0.1 m = 10 cm

प्रश्न 33.
एक 1000 W विद्युत् हीटर प्रतिदिन 2 घंटे चलाया जाता है। 28 दिन के महीना भर चलाने में ऊर्जा का क्या खर्च आयेगा जबकि ऊर्जा की दर 3.00 ₹ प्रति यूनिट हो।
हल:
हीटर की शक्ति (P) = 1000 W = 1 kW
कुल समय (t) = 2 × 28 = 56h
ऊर्जा की खपत (E) = P × t
= 1 kW × 56h
= 56 kWh
= 56 यूनिट
ऊर्जा की दर = 3.00 ₹ प्रति यूनिट
∴ कुल खर्च = 56 × 3.00 ₹
= 168.00 ₹

प्रश्न 34.
मुक्त रूप से गिरता हुआ 1 किग्रा द्रव्यमान का एक हथौड़ा लकड़ी के टुकड़े पर लगी किसी कील पर गिरता है। यदि हथौड़ा 1 मीटर ऊँचाई से गिरता है तो कील से टकराने से पहले गतिज ऊर्जा कितनी होगी ? (g = 10 ms-2)
हल :
दिया है : हथौड़े का द्रव्यमान (m) = 1 किग्रा.
हथौड़े की प्रारंभिक ऊँचाई (h) = 1 मीटर,
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 10 ms-2
कील से टकराने से पूर्व हथौड़े की गतिज ऊर्जा = ?
हथौड़े का प्रारंभिक वेग (u) = 0
मान लो हथौड़ा υ वेग से कोल से टकराता है, तो
समीकरण υ2 = u2 + 2gh से,
υ2 = 02 + 2 × 10 × 1
= 20
υ = \(\sqrt{20}\) ms-1
अतः कील से टकराने से पूर्व हथौड़े की गतिज ऊर्जा
EK = \(\frac {1}{2}\)mυ2
= \(\frac {1}{2}\) × 1 × किग्रा × 20
= 10 जूल उसर

प्रश्न 35.
10kg का कोई पिण्ड 50 cm ऊँचाई से गिराया जाता है। पृथ्वी की सतह से टकराते समय ज्ञात कीजिए
(i) इसकी गतिज ऊर्जा,
(ii) इसका वेग,
(iii) स्पष्ट कीजिए कि वेग पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है?
हल :
दिया है, पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 10 kg, प्रारंभिक ऊँचाई (h) = 50 cm = 0.5 m
प्रारंभिक वेग (u) = 0,
मान लो पृथ्वी की सतह से टकराते समय पिण्ड का वेग = υ है
समीकरण
υ2 = u2 + 2g h से,
υ2 = 02 + 2 × (10) × (0.5)
= 10
∴ υ = \(\sqrt{10 \mathrm{~ms}^{-1}}\)
= 3.16 ms-1

(i) सूत्र गतिज ऊर्जा EK = \(\frac {1}{2}\)mυ2
पृथ्वी की सतह से टकराते समय पिण्ड की गतिज ऊर्जा = (EK)
= \(\frac {1}{2}\) × 10 kg × 10 m2s-2
= 50 जूल उत्तर

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 36.
दो वस्तुओं के द्रव्यमानों में 5 : 6 का अनुपात है। यदि उनके वेग परस्पर बराबर हों तो उनकी गतिज ऊर्जाओं का अनुपात क्या होगा ?
हल :
मान लो पहली वस्तु का द्रव्यमान m1 वेग, υ1 तथा गतिज ऊर्जा (EK1) और दूसरी वस्तु का द्रव्यमान m2 वेग υ2 तथा गतिज ऊर्जा (EK2) है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 25
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 26
गतिज ऊर्जाओं का अनुपात 5 : 6 होगा।

प्रश्न 37.
1 किलोग्राम के पिण्ड की गतिज ऊर्जा 1 जूल है। इसकी चाल कितनी होगी ?
हल :
दिया है, पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 1 किलोग्राम, पिण्ड की गतिज ऊर्जा (EK) = 1 जूल, वेग (υ) = ?
गतिज ऊर्जा (EK) = \(\frac {1}{2}\)mυ2 से,
1 = \(\frac {1}{2}\) × 1 × υ2
υ2 = 2
चाल (υ) = √2
= 1.414 ms-1/sup>

प्रश्न 38.
एक गतिमान पिण्ड की गतिज ऊर्जा 400 जूल है। पिंड पर उसकी गति के विरुद्ध 25 N का औसत बल लगाने से पिण्ड कितनी दूर जाकर रुक जाएगा ?
हल :
दिया है, पिण्ड की गतिज ऊर्जा = 400 जूल, औसत बल = 25 न्यूटन
∴ पिण्ड की गतिज ऊर्जा = पिण्ड द्वारा रुकने तक किया गया कार्य
= बल × पिण्ड द्वारा चली गई दूरी
अथवा 400 जूल = 25 न्यूटन × पिण्ड द्वारा चली गई दूरी
अत: रुकने से पूर्व पिण्ड द्वारा चली गई दूरी = \(\frac{400}{25}\) = 16 मीटर

प्रश्न 39.
एक कार का इंजन 1000 N का बल लगाकर कार को 72 km/h की एक समान चाल से समतल सड़क पर खींच रहा है। इंजन की शक्ति का परिकलन किलोवाट में कीजिए।
हल :
दिया है, इंजन का बल (F) = 1000 N
कार का वेग (υ) = 72 Km/h
= 72 × \(\frac {5}{18}\) = 20 m/s
∴ इंजन की शक्ति (P) = F × υ
= 1000 N × 20 m/s
= 20000 W
= \(\frac{20000}{1000}\) KW
= 20 KW .

प्रश्न 40.
50 kg द्रव्यमान का एक लड़का दौड़कर 45 सीढ़ियां 9s में चढ़ता है। यदि प्रत्येक सीढ़ी की ऊंचाई 15 cm हो तो उसकी शक्ति का परिकलन कीजिए।g का मान 10 ms-2 लीजिए।
हल :
लड़के का भार = mg = 50 kg × 10 m/s2
= 500 N
कुल ऊँचाई (h) = सीढ़ियों की संख्या × एक सीढ़ी की ऊँचाई
= 45 × 15 cm
= 675 cm
= 6.75 m
लगा समय t = 9s
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 27
= \(\frac{m g h}{t}\)
= \(\frac{500 \mathrm{~N} \times 6.75 \mathrm{~m}}{9 \mathrm{~s}}\)
= 375 W

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 41.
0.05 किलोग्राम द्रव्यमान की एक वस्तु धरती से 1000 मीटर ऊँचाई से गुरुत्वीय त्वरण के अंतर्गत स्वतंत्रतापूर्वक नीचे गिरता है। इसका धरती पर पहुंचने पर वेग एवं कुल ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
(g = 9.8 मीटर/सेकंड2)
हल :
दिया है, u = 0, h = 1000 मीटर, g = 9.8 मीटर/सेकंड2, υ = ?
υ2 = u2 + 2gh से,
υ2 = (0)2 + 2 × 9.8 × 1000
= 19600 मीटर2/सैकेंडर2
∴ वस्तु का धरती पर पहुँचने का वेग (υ) = 140 मीटर/सेकंड।
धरती पर पहुंचने पर कुल ऊर्जा = स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा
= 0 + \(\frac {1}{2}\)mυ2
= \(\frac {1}{2}\)mυ2
\(\frac {1}{2}\) × 0.05 × (140)2
= 490 जूल

प्रश्न 42.
एक पंप प्रति सेकंड 100 kg जल 5 m की ऊँचाई तक उठाता है। पंप की सामर्थ्य की गणना कीजिए। (g = 10 ms-2)
हल :
दिया है, समय (t) = 1 s, जल का द्रव्यमान (m) = 100 kg, ऊँचाई h = 5m
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 28
= 5000 W

प्रश्न 43.
40 वाट का एक बल्ब प्रतिदिन 10 घंटे जलाया जाता है। यदि 1 यूनिट की कीमत 2.50 ₹ है तो 30 दिन के महीने में उपभोग की गई विद्युत् ऊर्जा की कीमत ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, बल्ब की शक्ति = 40 वाट,
समय = 10 घंटे, दिनों की संख्या = 30 दिन
1 यूनिट की कीमत = 2.50 ₹
एक माह में व्यय विद्युत् ऊर्जा = बल्ब को शक्ति × समय × दिनों की संख्या
= 40 वाट × 10 घंटे × 30 घंटे
= (\(\frac{40}{1000}\)) किलोवाट × 10 × 30 घंटे
= \(\frac{40 \times 10 \times 30}{1000}\) किलोवाट-घंटा
= 12 यूनिट
∴ विद्युत् ऊर्जा की कीमत = यूनिटों की संख्या × 1 यूनिट की कीमत
= 12 यूनिट × (2.50 ₹/प्रति यूनिट)
= 30₹

प्रश्न 44.
एक कुली 10 kg का बोझ धरती से 1.5 m ऊपर ऊठाकर अपने सिर पर रखता है। उसके द्वारा बोझे पर किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
हल :
बोझ का द्रव्यमान (m) = 10 kg तथा
विस्थापन (S) = 1.5 m
किया गया कार्य (V) = F × S
= mg × s
= 10 kg × 10 ms-2 × 1.5 m
= 150 Nm = 225 J

प्रश्न 45.
यदि किसी कार का द्रव्यमान 1500 kg है तो उसके वेग को 30 km h-1 से 60 km h-1 तक बढ़ाने में कितना कार्य करना पड़ेगा ?
हल :
कार का द्रव्यमान (m) = 1500 kg
कार का प्रारंभिक वेग (u) = 30 km h-1
= \(\frac{30 \times 1000 \mathrm{~m}}{100 \times 60 \mathrm{~s}}\)
= 8.33 m s-1
कार का अंतिम वेग (υ) = 60 km h-1 = 16.66 m s-1

इसलिए कार की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (Ekf ) = \(\frac {1}{2}\)mu2
\(\frac {1}{2}\) × 1500 kg × (8.33 ms-1)2
= 52041.68 J
कार की अंतिम गतिज ऊर्जा (Eki = \(\frac {1}{2}\) × 1500 kg × (16.66 m s-‘)
= 208416.68J
अतः किया गया कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
= Ekf – Eki
= 156375 J

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 46.
15 kg द्रव्यमान की एक वस्तु 4 ms-1 के एक समान वेग से गतिशील है। वस्तु की गतिज ऊर्जा कितनी होगी ?
हल:
वस्तु का द्रव्यमान (m) = 15 kg
वस्तु का वेग (υ) = 4 ms-1
वस्तु की गतिज ऊर्जा (Ek) = \(\frac {1}{2}\) mυ2 से
= \(\frac {1}{2}\) × 15 kg × 4 m s-1 × 4 ms-1
= 120J

प्रश्न 47.
दो लड़कियाँ जिनमें से प्रत्येक का भार 200 N है एक रस्से पर 8 m की ऊँचाई तक चढ़ती हैं। हम एक लड़की का नाम A रखते हैं तथा दूसरी का BIइस कार्य को पूरा करने में लड़की A,20s का समय लेती है जबकि लकड़ी B, 50 s का समय लेती है। प्रत्येक लड़की द्वारा व्यय की गई शक्ति का परिकलन कीजिए।
हल :
(i) लड़की A द्वारा व्यय की गई शक्ति :
लड़की का भार (mg) = 200 N
विस्थापन (ऊँचाई) (h) = 8 m
लिया गया समय (t) = 20 s
किया गया कार्य शक्ति (P) = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 29
= \(\frac{m g h}{t}\)
= \(\frac{m g h}{t}\)
= 80 W

(ii) लड़की B द्वारा व्यय की गई शक्ति :
लड़की का भार (mg) = 200 N
विस्थापन ऊँचाई (h) = 8 m
लिया गया समय (t) = 50s शक्ति (P) = \(\frac{m g h}{t}\)
= \(\frac{200 \mathrm{~N} \times 8 \mathrm{~m}}{50 \mathrm{~s}}\)
= 32 W

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कार्य का SI मात्रक लिखो।
उत्तर-
कार्य का SI मात्रक जूल (J) है।

प्रश्न 2.
एक किलोग्राम पत्थर के किसी टुकड़े को एक मीटर ऊँचाई तक उठाने में कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी ?
उत्तर-
9.8 जूल। [∵ W = mgh = 1 × 9.8 × 1 = 9.8 जूल]

प्रश्न 3.
किसी पिंड के वेग में क्या परिवर्तन करना चाहिए जिससे कि पिंड का द्रव्यमान चार गुणा बढ़ाने पर भी उसकी गतिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन न हो ?
उत्तर-
वेग आधा करना पड़ेगा।

प्रश्न 4.
यांत्रिक ऊर्जा के दो प्रकार बताओ।
उत्तर-

  1. स्थितिज ऊर्जा
  2. गतिज ऊर्जा।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 5.
ऊर्जा की SI इकाई क्या है ?
उत्तर-
जूल।

प्रश्न 6.
शक्ति की SI इकाई क्या है ?
उत्तर-
वाट।

प्रश्न 7.
यदि एक 5 किलोवाट शक्ति के किसी स्रोत को 3 घंटे तक उपयोग किया जाए तो ऊर्जा आपूर्ति कितनी होगी ?
उत्तर-
15 किलोवाट घंटा (kWh)।

प्रश्न 8.
व्यापारिक स्तर पर ऊर्जा के मात्रक का नाम लिखकर उसकी परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
व्यापारिक स्तर पर ऊर्जा का मात्रक किलोवाट-घंटा है।
किलोवाट-घंटा – यदि एक किलोवाट शक्ति का 1 घंटा उपयोग किया जाये तो ऊर्जा की आपूर्ति एक किलोवाटघंटा (kWh) के बराबर होती है।

प्रश्न 9.
चाबी द्वारा खिलौना चलाने से कौन-सी ऊर्जा किस ऊर्जा में परिवर्तित होती है ?
उत्तर-
खिलौने की आकृति के कारण स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।

प्रश्न 10.
हथेलियों के परस्पर रगड़ने से वे गर्म क्यों हो जाती हैं ?
उत्तर-
हथेलियों की गतिज ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा में रूपांतरित होती है।

प्रश्न 11.
पनचक्की द्वारा ऊर्जा का कौन-सा रूप कार्य में परिवर्तित होता है ?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा।

प्रश्न 12.
शक्ति, ऊर्जा तथा समय का परस्पर संबंध बताओ।
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 30

प्रश्न 13.
वे कौन-से दो कारक हैं जिन पर स्थितिज ऊर्जा निर्भर करती है ?
उत्तर-

  1. द्रव्यमान और
  2. वेग।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 14.
बाँध के एकत्रित पानी में कौन-सी ऊर्जा होती है ?
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा।

प्रश्न 15.
जब हम सीढ़ियां चढ़ते हैं तो कौन-सी ऊर्जा का प्रयोग करते हैं ?
उत्तर-
मांसपेशियों की ऊर्जा।

प्रश्न 16.
तेज़ आंधी वाले दिन कई मकानों की छतें क्यों उड़ जाती हैं ?
उत्तर-
तेज़ आंधी की गतिज ऊर्जा के कारण।

प्रश्न 17.
एक किलोवाट शक्ति का कोई इंजन एक घंटे में कितनी ऊर्जा की आपूर्ति करेगा ?
उत्तर-
ऊर्जा = 1 किलोवाट × 1 घंटा = 1 किलोवाट घंटा।

प्रश्न 18.
एक इंजन एक मिनट में 6000 जूल ऊर्जा पैदा करता है। उसकी शक्ति कितनी है ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा 31
= 100 जूल/सेकंड
= 100 वाट

प्रश्न 19.
एक किलोग्राम पानी को 5 मीटर ऊपर उठाने में कितना कार्य करना पड़ेगा ?
उत्तर-
पानी उठाने में किया गया कार्य = स्थितिज ऊर्जा
= m × g × h
= 1 × 10 × 5
= 50 जूल

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 20.
अगर किसी वस्तु का वेग तीन गुना बढ़ा दिया जाए तो उसकी गतिज ऊर्जा पर क्या असर होगा ?
उत्तर-
∵ K.E. ∝ v2
∴ यह 9 गुना हो जायेगी।

प्रश्न 21.
5 किलोग्राम भार को 20 मीटर ऊँचाई तक उठाने के लिए लगभग कितनी ऊर्जा की आवश्यकता
होती है ?
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा = 5 × 10 × 20 = 1000 जूल।

प्रश्न 22.
यदि किसी वस्तु को गर्म किया जाये तो उसके कणों को गतिज ऊर्जा के साथ क्या होगा ?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा में वृद्धि हो जाएगी।

प्रश्न 23.
गुलेल के खिंचे हुए रबड़ में ऊर्जा का कौन-सा रूप है ?
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा।

प्रश्न 24.
अधिकतम तथा न्यूनतम मात्रा में कार्य करने के लिए बल तथा विस्थापन के मध्य कितने अंश का कोण होना चाहिए ?
उत्तर-
अधिकतम कार्य के लिए θ = 0°
न्यूनतम कार्य के लिए θ = 90°

प्रश्न 25.
एक कुली सूटकेस को सिर पर उठाए हुए प्लेटफार्म पर आधे घंटे से खड़ा हुआ है। बताओ उसने कितना कार्य किया है ?
उत्तर-
शून्य, क्योंकि भार में कोई विस्थापन नहीं है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 26.
एक व्यक्ति कठोर दीवार को 500 N बल से दबा रहा है। बताओ उसने कितना कार्य किया ?
उत्तर-
शून्य

प्रश्न 27.
एक कृत्रिम उपग्रह कितना कार्य करता है जब वह धरती के गिर्द घूमता है?
उत्तर-
शून्य क्योंकि धरती का गुरुत्व बल उपग्रह की गति की दिशा के लम्बवत् क्रिया करता है।

प्रश्न 28.
एक कार का वेग 4 गुना करने से उसकी गतिज ऊर्जा को कैसे प्रभावित करेगा ?
उत्तर-
कार की गतिज ऊर्जा पहले से 16 गुना बढ़ जाएगी क्योंकि गतिज ऊर्जा ∝ (वेग)2

प्रश्न 29.
गतिज ऊर्जा पर किसका अधिक प्रभाव होगा-द्रव्यमान या वेग दो गुणा करने पर ?
उत्तर-
वेग का प्रभाव अधिक होगा।
गतिज ऊर्जा ∝ द्रव्यमान
तथा गतिज ऊर्जा ∝ (वेग)2

प्रश्न 30.
स्थिति परिवर्तन के कारण उत्पन्न हुई स्थितिज ऊर्जा का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
बाँध के पीछे एकत्रित पानी में स्थितिज ऊर्जा होती है।

प्रश्न 31.
स्प्रिंग को दबाने से उसमें किस किस्म की ऊर्जा होती है।
उत्तर-
स्थितिज ऊर्जा।

प्रश्न 32.
एक ऐसा उदाहरण दें जब वस्तु में गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा उपस्थित हो।
उत्तर-
ऊँचाई पर उड़ रहे जहाज़ में दोनों स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा होती हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 33.
एक ऐसा उदाहरण दें जब वस्तु की आकृति में हुए परिवर्तन के कारण स्थितिज ऊर्जा हो।
उत्तर-
खिंचे हुए कमान में आकृति परिवर्तन के फलस्वरूप स्थितिज ऊर्जा होती है।

प्रश्न 34.
क्या चलती हुई कार के ऊपर खड़े व्यक्ति में गतिज ऊर्जा होगी ?
उत्तर-
हाँ, उसमें गतिज ऊर्जा होगी क्योंकि वह कार के साथ कार की गति बाँट रहा है।

प्रश्न 35.
क्या गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो सकती है ?
उत्तर-
नहीं, क्योंकि दोनों m तथा 02 धनात्मक हैं।

प्रश्न 36.
क्या ऐसी परिस्थिति हो सकती है कि वस्तु में संवेग हो परंतु ऊर्जा न हो ?
उत्तर-
नहीं, यदि वस्तु में संवेग है तो वह वस्तु अवश्य गतिशील होगा और फिर उसमें गतिज ऊर्जा होगी।

प्रश्न 37.
ऊर्जा संरक्षण नियम क्या है ?
उत्तर-
ऊर्जा संरक्षण नियम – “ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित की जा सकती है।” अर्थात् ऊर्जा रूपांतरण के दौरान निकाय की कुल ऊर्जा नियत रहती है।

प्रश्न 38.
कौन-सी युक्ति विद्युत् ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित करती है ?
उत्तर-
विद्युत् मोटर।

प्रश्न 39.
विद्युत् पंखे में कौन-सी ऊर्जा किस ऊर्जा में रूपांतरित होती है ?
उत्तर-
विद्युत् ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है।

प्रश्न 40
हाइड्रो इलैक्ट्रिक पावर स्टेशन पर किस प्रकार की ऊर्जा का रूपांतरण होता है ?
उत्तर-
गिरते हुए पानी की स्थितिज ऊर्जा का रूपांतरण गतिज ऊर्जा में और फिर विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तन।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 41.
वाट तथा किलोवाट में क्या संबंध है ?
उत्तर-
1 किलोवाट = 1000 वाट।

प्रश्न 42.
ऊर्जा के S.I. मात्रक तथा 1 kWh में संबंध बताओ।
उत्तर-
ऊर्जा का S.I. मात्रक जूल है-
1 kWh = 3.6 × 106 जूल

प्रश्न 43.
जब हम किसी गेंद को फेंकते हैं तो किस प्रकार का ऊर्जा रूपांतरण होता है ?
उत्तर-
भोजन से रासायनिक क्रिया द्वारा हमारे शरीर को पेशीय ऊर्जा प्राप्त होती जिसका प्रयोग हम गेंद को फेंकने में करते हैं। यह पेशीय ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।

प्रश्न 44.
बंदूक से निकली गोली लक्ष्य से टकरा कर रुक गई। बताइए गोली की गतिज ऊर्जा किन रूपों में रूपांतरित हुई।
उत्तर-
गोली की गतिज ऊर्जा लक्ष्य से टकराकर प्रकाश ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा तथा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपांतरित हो गई।

प्रश्न 45.
ऊर्जा अदिश राशि है अथवा सदिश राशि ?
उत्तर-
ऊर्जा एक अदिश राशि है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 46.
किन दशाओं में किसी पिंड पर बल लगाने से बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा ?
उत्तर-
जब बल पिंड की गति के लंबवत् हो अथवा पिण्ड का विस्थापन शून्य हो।

प्रश्न 47.
कलाई घड़ी में ऊर्जा का स्रोत क्या होता है ?
उत्तर-
कमानी में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

PSEB 10th Class Science Guide मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Textbook Questions and Answers

1. मानव नेत्र अभिनेत्र लैंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है –
(a) ज़रा-दूरदृष्टिता
(b) समंजन
(c) निकट-दृष्टि
(d) दीर्घ-दृष्टि।
उत्तर-
(b) समंजन।

2. मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनाते हैं, वह है
(a) कार्निया
(b) परितारिका
(c) पुतली
(d) दृष्टिपटल।
उत्तर-
(d) दृष्टिपटल।

3. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है लगभग
(a) 25 m
(b) 2.5 cm
(c) 25 cm
(d) 2.5 m.
उत्तर-
(c) 25 cm.

4. अभिनेत्र लैंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है
(a) पुतली द्वारा
(b) दृष्टिपटल द्वारा
(c) पक्ष्माभी द्वारा
(d) परितारिका द्वारा।
उत्तर-
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए -5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लैंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लैंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की फोकस दूरी क्या होगी
(i) दूर की दृष्टि के लिए
(ii) निकट की दृष्टि के लिए ?
हल :
(i) दिया है : दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए दूर दृष्टि को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता (P) = – 5.5 D .
लैंस की क्षमता सूत्र से P = \(\frac{1}{f(\text { in } m)}\)
या f = \(\frac{1}{\mathrm{P}}\)
∴ फोकस दूरी (f) = \(\frac{1}{-5.5}\)
= \(-\frac{100}{5.5}\) cm
= \(\frac{-200}{11}\) cm

(ii) दिया है : निकट पड़ी वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए निकट दृष्टि संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता (P) = + 1.5 D
लैंस के क्षमता सूत्र से (P) = \(\frac{1}{F(\text { in } m)}\)
या फोकस दूरी (f) = \(\frac{1}{P}\) : (in m)
= \(\frac{1}{+1.5} \) cm
= \(\frac{10}{15}\) cm
= \(\frac{1000}{15}\) cm
= \(\frac{200}{3}\) cm

प्रश्न 6.
किसी निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु नेत्र के सामने 80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी ?
हल : क्योंकि निकट दृष्टि दोष से ग्रसित व्यक्ति का दूर बिंदु 80 cm की दूरी पर है, इसलिए उस व्यक्ति को एक ऐसे लैंस की आवश्यकता है जो अनंत पर पड़ी वस्तु का प्रतिबिंब आँख के सामने 80 cm की दूरी पर बना सके।
∴ वस्तु की दूरी (u) = – α
प्रतिबिंब की नेत्र लैंस से दूरी (v) = –80 cm .
लैंस की फोकस दूरी (f) = ?
लैंस सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{-80}-\frac{1}{-\infty}=\frac{1}{f}\)
\(-\frac{1}{80}+\frac{1}{\propto}=\frac{1}{f}\)
∵ \(\frac{1}{\alpha}\) = 0

या \(-\frac{1}{80}=\frac{1}{f}\)
∴ फोकस दूरी (1)
= –80 cm
= – 0.8 m
लैंस की क्षमता (P) = \(\frac{1}{f}\)
= \(\frac{1}{-0.8} \mathrm{D}\)
= \(-\frac{1}{0.8} \mathrm{D}\)
= -1.25 D चूँकि लैंस की क्षमता ऋणात्मक है, इसलिए अभीष्ट लैंस की प्रकृति अवतल (अपसारी) है जिसकी क्षमता -1.25 D है।

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है। एक दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिंदु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लैंस की क्षमता क्या होगी ? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है।
उत्तर-
दीर्घ दृष्टि (दूरदृष्टि) दोष से ग्रसित व्यक्ति का निकट बिंदु सामान्य दृष्टि वाली आँख की तुलना में थोडा दूर खिसक जाता है जिसके फलस्वरूप व्यक्ति समीप पड़ी वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है। इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लैंस (अभिसारी लैंस) प्रयोग किया जाता है जैसा कि निम्न चित्र में दर्शाया गया है :
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 1
(c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन प्रश्नानुसार, सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है जो नेत्र दोष के कारण खिसक कर 1 m (= 100 cm) दूर पहुँच गया है। इसलिए दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को एक ऐसे लैंस की आवश्यकता है जो 25 cm पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब 1 m अर्थात् 100 cm पर बनाए।
अतः u = – 25 cm
v = – 100 cm
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 2
∴ f = \(\frac{100}{3}\) cm
या f = \(\frac{1}{3}\) m
∴ अभीष्ट लैंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f}(\text { in m) }\)
= \(\frac{1}{1 / 3}\)
= + 3D
अतः दृष्टि दोष के निवारण हेतु +3D क्षमता के उत्तल लैंस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तर-
जब वस्तु सामान्य नेत्र से 25 cm की दूरी पर रखी होती है तो नेत्र अपनी संपूर्ण समंजन क्षमता का प्रयोग करके वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बना देती है जिससे वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। यदि उसी वस्तु को 25 cm से कम दूरी पर रखा जाता है तो नेत्र लैंस द्वारा उस वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बन पाता है जिससे वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं दे पाती है।

प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिंब दूरी का क्या होता है ?
उत्तर-
सामान्य दृष्टि वाले मनुष्य के लिए वस्तु की नेत्र से दूरी बढ़ाने पर भी नेत्र दवारा बने प्रतिबिंब की दूरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि नेत्र लैंस वस्तु की प्रत्येक स्थिति तारे की के लिए समंजन क्षमता का उपयोग करके वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर आभासी स्थिति ही बनाता है।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?
उत्तर-
तारों का टिमटिमाना-तारों का टिमटिमाना प्रतीत होना तारों के प्रकाश का वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है। वायुमंडल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के तल तक पहुँचने तक तारे का प्रकाश वायुमंडलीय माध्यम के क्रमिक बढ़ते हुए अपवर्तनांक द्वारा अपवर्तन होता है जिससे प्रकाश को अभिलंब की तरफ झुका देता है। क्षितिज के निकट देखने पर तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक ऊचाई पर प्रतात हाता हा वायुमडल का भातिक चित्र-वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण अवस्थाएँ स्थायी न होने के कारण यह आभासी स्थिति निरंतर थोड़ी तारे की आभासी स्थिति बदलती रहती है तथा आँखों में प्रवेश करने वाले तारों के प्रकाश की मात्रा बदलती रहती है जिस कारण कोई तारा कभी चमकीला और कभी धुंधला प्रतीत होता है जोकि टिमटिमाने का प्रभाव है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 3

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते।
उत्तर-
ग्रह तारों की अपेक्षा पृथ्वी के बहुत निकट होते हैं तथा इन्हें विस्तृत स्रोत माना जा सकता है। यदि ग्रहों को बिंदु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो प्रत्येक बिंदु स्रोत का प्रकाश हमारी आँखों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत शून्य मान होगा जिससे ग्रहों की आभासी स्थिति स्थिर रहेगी और टिमटिमाने का प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ दिखाई देना-सूर्योदय (या सूर्यास्त) के समय सूर्य से आने वाले प्रकाश को हमारे नेत्रों में पहुंचने से पहले वायु मंडल की वायु
नीले प्रकाश का कम की मोटी परतों में से गुज़रता है। यहाँ धूलकणों प्रकीर्ण होने से सूर्य प्रकीर्णन तथा जलकणों की वायुमंडल में उपस्थिति के रक्ताभ प्रतीत होना कारण कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग (जैसे नीला, बैंगनी आदि) का प्रकीर्णन हो जाता है तथा केवल लंबी तरंगदैर्ध्य वाली प्रकाश तरंगें जैसे | क्षितिज के कि लाल सीधी हमारे नेत्रों तक पहुँचती हैं। निकट सूर्य – इस प्रकार सूर्योदय (या सूर्यास्त) के समय चित्र-सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ प्रतीत सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार 4

प्रश्न 13.
किसी अंतरिक्षयात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
अत्याधिक ऊँचाई पर उड़ते समय अंतरिक्ष यात्री के लिए कोई भी वायुमंडल नहीं होता है। इसलिए वायु के अणुओं या अन्य सूक्ष्म कणों की अनुपस्थिति के कारण प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता है जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को आकाश काला दिखाई देता है।

Science Guide for Class 10 PSEB मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नेत्र की समंजन क्षमता-अभिनेत्र लेंस रेशेदार जेलीवत पदार्थ का बना होता है। इसकी वक्रता में कुछ सीमाओं तक पक्ष्माभी पेशियों (ciliary muscles) द्वारा रूपांतरण किया जा सकता है। अभिनेत्र लेंस की वक्रता में परिवर्तन होने पर इसकी फोकस दूरी भी परिवर्तित हो जाती है। जब पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं तो अभिनेत्र लेंस पतला हो जाता है तथा इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है। इस स्थिति में हम दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट देख पाने में समर्थ होते हैं। जब आप निकट पड़ी वस्तुओं को देखते हैं तब पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। इससे अभिनेत्र लेंस की वक्रता बढ़ जाती है और अभिनेत्र लेंस मोटा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी कम हो जाती है जिससे आप निकट पड़ी वस्तु को स्पष्ट देख सकते हैं। अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण लेंस अपनी फोकस दूरी को समयोजित कर लेता है समंजन कहलाती है।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिए ?
उत्तर-निकट दृष्टि दोषयुक्त नेत्र 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को नहीं देख सकता क्योंकि वस्तुओं का प्रतिबिंब दृष्टिपटल (रेटिना) पर न बनकर रेटिना के सामने बनता है। इस दोष को उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस (अपसारी लेंस) के उपयोग द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिंदु तथा निकट बिंदु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं ?
उत्तर-
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए निकट बिंदु की नेत्र से दूरी 25 cm और दूर बिंदु की नेत्र से दूरी अनंत होती है अर्थात् नीरोग मानव आँख 25 cm और अनंत के बीच कहीं भी स्थित वस्तु को साफ़-साफ़ देख सकती है।

प्रश्न 4.
अंतिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है ? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है ?
उत्तर-
विद्यार्थी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है जिसे उपयुक्त क्षमता के अवतल लैंस द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

PSEB 10th Class Science Guide प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता ?
(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी।
उत्तर-
(d) मिट्टी।

प्रश्न 2.
किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए ?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
(b) वक्रता केंद्र पर
(c) वक्रता केंद्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।

प्रश्न 3.
किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज़ का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें ?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।

प्रश्न 4.
किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः है
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल।
उत्तर-
(b) दोनों उत्तल।

प्रश्न 5.
किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।
उत्तर-
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।।

प्रश्न 6.
किसी शब्द कोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे ?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस।
उत्तर-
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।
.
प्रश्न 7.
15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (Range) क्या होना चाहिए ? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है ? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा। इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर-
अवतल दर्पण से वस्तु का सीधा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच रखना चाहिए। इसलिए वस्तु को ध्रुव से दूरी 0 cm से अधिक तथा 15 cm से कम होनी चाहिए। ऐसा करने से वस्तु का प्रतिबिंब काल्पनिक सीधा तथा आकार में वस्तु से बड़ा होगा।
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प्रश्न 8.
निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए
(a) किसी कार का अग्र-दीप ( हैडलाइट)
(b) किस वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
(a) कार के हैडलाइट (अग्रदीप) में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। बल्ब को अवतल दर्पण के मुख्य फोकस पर रखा जाता है। बल्ब से निकलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् समानांतर हो जाती हैं। इससे एक शक्तिशाली समानांतर प्रकाश किरण पंज प्राप्त होता है।

(b) वाहनों में पार्श्व दर्पण (या पश्च दृश्य दर्पण) के रूप में उत्तल दर्पण को वरीयता दी जाती है क्योंकि उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा तथा वस्तु की अपेक्षा छोटे आकार क प्रतिबिंब बनाता है जिससे इसका दृष्टि-क्षेत्र बढ़ जाता है। ऐसा करने से वाहन चालक छोटे से दर्पण में ही संपूर्ण क्षेत्र को देख पाता है।

(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। गर्म किये जाने वाले बर्तन को दर्पण के मुख्य फोकस पर रखा जाता है। सूर्य से आ रही समांतर किरणें दर्पण से परावर्तन होने के पश्चात् फोकस पर रखे बर्तन पर संपूर्ण उष्मीय ऊर्जा को केंद्रित कर देती हैं।

प्रश्न 9.
किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बन पाएगा ? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
हाँ, यह लेंस वस्तु (बिंब) का पूरा प्रतिबिंब बनाएगा। प्रायोगिक जाँचविधि-

  • एक प्रकाशिक बैंच पर एक स्टैंड में उत्तल लेंस लगाओ।
  • एक स्टैंड में जलती हुई मोमबत्ती लगाकर लेंस की फोकस दूरी से थोड़ा अधिक दूरी पर प्रकाशिक बैंच पर रखो।
  • अब लेंस के दूसरी तरफ प्रकाशिक बैंच पर स्टैंड में पर्दा लगाकर उस को आगे-पीछे सरका कर ऐसी स्थिति में रखें कि उस पर मोमबत्ती का तीखा तथा उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त हो जाए।
  • अब लेंस के निचले आधे भाग को काला कागज़ चिपका कर ढक दें ताकि लेंस के ऊपरी आधे भाग से प्रकाश का अपवर्तन होने से प्रतिबिंब बनें। इस स्थिति में आप देखेंगे कि मोमबत्ती का पूर्ववत् पूरा प्रतिबिंब प्राप्त होगा परंतु इसकी तीव्रता पहले प्रतिबिंब की तुलना में कम हो जाती है।

व्याख्या-मोमबत्ती के किसे बिंदु से चलने वाली प्रकाश किरणें लेंस के विभिन्न भागों से अपवर्तित होकर एक बिंदु पर मिलेंगी। लेंस के निचले आधे भाग को काला कर देने पर भी उस बिंदु पर प्रकाश की किरणें आएँगी जिससे मोमबत्ती का प्रतिबिंब पूरा प्रतिबिंब प्राप्त होगा, परंतु किरणों की काला कागज़ संख्या कम होने के कारण प्रतिबिंब की तीव्रता कम हो जाएगी।
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प्रश्न 10.
5 cm लंबा कोई बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : यहाँ वस्तु की अभिसारी लेंस से दूरी (u) = -25 cm
अभिसारी लेंस की फोकस दूरी (f) = + 10 cm
अभिसारी लेंस से प्रतिबिंब की दूरी (v) = ?
वस्तु (बिंब) की लंबाई (O) = + 5 cm
प्रतिबिंब की लंबाई (साइज़) (I) = ?
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लेंस सूत्र से,
\(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
या \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}+\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{10}+\frac{1}{-25}\)
= \(\frac{1}{10}-\frac{1}{25}\)
= \(\frac{5-2}{50}\)
= \(\frac{3}{50}\)
∴ u = \(+\frac{50}{3}\) cm

अर्थात् प्रतिबिंब लेंस के दूसरी तरफ लेंस से \(\frac{50}{3}\) cm की दूरी पर बनेगा।
हम जानते हैं लेंस का आवर्धन (m) = \(\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\) से
\(\frac{I}{5}=\frac{\frac{50}{3}}{-25}\)
\(\frac{I}{5}=\frac{50}{3 \times(-25)}\)
∴ I = \(\frac{5 \times 50}{3 \times 25}\)
= \(-\frac{10}{3}\) cm
अर्थात् प्रतिबिंब की लंबाई (साइज़) = \(\frac{10}{3}\) cm होगी। ऋण चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिंब मुख्य अक्ष के नीचे होगा जोकि वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 11.
15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है ? किरण आरेख खींचिए।
हल : दिया है, अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) = -15 cm
क्योंकि अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी होता है, और लेंस के सामने उसी ओर बनता है जिस तरफ वस्तु होती है।
∴ υ = -10 cm
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 4
अब लेंस सूत्र से .
\(\frac{1}{v}-\frac{\mathrm{I}}{u}=\frac{1}{f}\)
.या \(\frac{\mathrm{I}}{u}=\frac{1}{v}-\frac{\mathrm{I}}{f}\)
= \(\frac{1}{-10}-\frac{1}{-15}\)
= \(-\frac{1}{10}+\frac{1}{15}\)
= \(\frac{-3+2}{30}=-\frac{1}{30}\)
u = – 30 cm
अर्थात् वस्तु (बिंब) लेंस के सम्मुख 30 cm की दूरी पर है।

प्रश्न 12.
15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है, उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (1) = + 15 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी (u) = – 10 cm
दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{15}-\frac{1}{-10}\)
= \(\frac{1}{15}+\frac{1}{10}\)
= \(\frac{2+3}{30}\)
= \(\frac{5}{30}\)
= \(\frac{1}{6}\)
∴ υ = + 6 cm उत्तर धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm की दूरी पर बनेगा। धनात्मक चिह्न यह भी दर्शाता है कि यह प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी है।

प्रश्न 13.
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन + 1 है। इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन m = +1 यह दर्शाता है कि दर्पण द्वारा बनाए गए प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है तथा धनात्मक चिह्न (+) यह प्रदर्शित करता है कि समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बन रहा है तथा यह आभासी और सीधा है।

प्रश्न 14.
5.0 cm लंबाई का कोई बिंब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर पर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज़ ज्ञात कजिए।
हल- दिया है, वस्तु की उत्तल दर्पण से दूरी (u) = -20 cm
उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = + 30 cm
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{+30}{2}\) cm
= 15 cm
वस्तु की लंबाई (O) = +5.0 cm
दर्पण सूत्र
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
\(\frac{1}{15}-\frac{1}{-20}\)
= \(\frac{4+3}{60}=\frac{7}{60}\)
∴ υ = \(+\frac{60}{7}\) cm
∴ प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = \(+\frac{60}{7}\) cm उत्तर

अर्थात् धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के दूसरी ओर \(\frac{60}{7}\) cm की दूरी पर बनेगा। यदि प्रतिबिंब की ऊँचाई (साइज़) I’ है तो आवर्धन सूत्र द्वारा
m = – \(\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}} \) से
\(-\frac{60}{7}-20=\frac{1}{5}\)
\(\frac{60}{7 \times 20}=\frac{I}{5}\)
∴ I = \(+\frac{15}{7}\) cm उत्तर
धनात्मक चिह्न (+) यह स्पष्ट करता है कि प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी होगा तथा दर्पण के पीछे \(\frac{15}{7}\) cm की दूरी पर बनेगा।

प्रश्न 15.
7.0 cm साइज़ का कोई बिंब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सके। प्रतिबिंब का साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है, वस्तु (बिंब) का आकार (साइज़) (O) = + 7.0 cm
अवतल दर्पण की फोकस दूरी (f) = -18 cm
वस्तु की दर्पण से दूरी (u) = -27 cm
प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = ?
प्रतिबिंब का साइज़ (I) = ?

दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{-18}-\frac{1}{-27}\)
= \(-\frac{1}{18}+\frac{1}{27}\)
= \(\frac{-3+2}{54}\)
= \(-\frac{1}{54} \)
v = -54 cm
ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर बनेगा। इसलिए पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए। उत्तर

अब दर्पण के आवर्धन सूत्र से,
m = \(-\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\)
\(-\frac{(-54)}{(-27)}=\frac{I}{7}\)
\(-\frac{54}{27}=\frac{I}{7}\)
या I = \(-\frac{54 \times 7}{27}\)
I = -14 cm उत्तर
अर्थात् प्रतिबिंब का साइज़ (ऊँचाई) 14 cm होगा। ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस
हल : दिया है,
लेंस की क्षमता (P) = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
हम जानते हैं,
लस का क्षमता (P) = img
प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी (v) = ?
प्रतिबिंब का साइज़ (I) = ?
दर्पण सूत्र \(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}\)
V = -54 cm ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर बनेगा। इसलिए पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना चाहिए। उत्तर

अब दर्पण के आवर्धन सूत्र से,
m = \(-\frac{v}{u}=\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\)
\(-\frac{(-54)}{(-27)}=\frac{I}{7}\)
\(-\frac{54}{27}=\frac{I}{7} \)
या I = \(\frac{54 \times 7}{27}\)
∴ I = -14 cm उत्तर
अर्थात् प्रतिबिंब का साइज़ (ऊँचाई) 14 cm होगा। ऋणात्मक चिह्न (-) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है ?
हल : दिया है, लेंस की क्षमता (P) = -2.0 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
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-2 = \(\frac{100}{f}\)
∴ f = \(\frac{-100}{2}\)
= -50 cm उत्तर
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि लेंस अवतल लेंस है।

प्रश्न 17.
कोई डॉक्टर + 1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी ?
हल : दिया है, लेंस की क्षमता (P) = + 1.5 D
लेंस की फोकस दूरी (f) = ?
लेंस की क्षमता सूत्र से P = \(\frac{1}{f}\)
1.5 = \(\frac{1}{1.5}\)
∴ f = \(\frac{10}{15}\)
= \(\frac{2}{3}\)
f = + 67 cm
धनात्मक चिह्न (+) यह दर्शाता है कि लेंस अभिसारी लेंस उत्तल लेंस है। उत्तर

Science Guide for Class 10 PSEB प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
अवतल दर्पण का मुख्य फोकस- यह मुख्य अक्ष पर वह बिंदु है जहाँ अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित किरणें दर्पण से परावर्तन होने के पश्चात् मिलती हैं।

प्रश्न 2.
एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी ?
हल-दिया है-
गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = 20 cm
∴ गोलीय दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
= \(\frac{20}{2}\) cm
= 10 cm

प्रश्न 3.
उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सके।
उत्तर-
अवतल दर्पण बिंब (वस्तु) का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है जब बिंब को दर्पण के फोकस तथा ध्रुव के मध्य रखा जाता है।

प्रश्न 4.
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं ?
उत्तर-
वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता-उत्तल दर्पण को पश्य-दृश्य के रूप में वरीयता देने के निम्नलिखित कारण हैं

  • उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
  • उत्तल दर्पण वस्तु की अपेक्षा छोटा प्रतिबिंब बनाता है जिससे दृष्टि क्षेत्र बढ़ जाता है और वाहन चालक ट्रैफिक वाले लगभग संपूर्ण क्षेत्र को देख पाता है।

प्रश्न 5.
उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
हल :
दिया है, उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) = + 32 cm
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (1) = ?
हम जानते हैं f = \(\frac{\mathrm{R}}{2} \)
∴ उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (f) = \(\frac{+32}{2}\)
= + 16 cm उत्तर

प्रश्न 6.
कोई अवतल दर्पण आपके सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है ?
हल-
दिया है, बिंब (वस्तु) की अवतल दर्पण से दूरी (u) = –10 cm
प्रतिबिंब का आवर्धन (m) = \(\frac{-v}{u}\) = -3
या \(\frac{v}{u}\) =3
या υ =3×4 =
= 3x -10
∴ υ = -30 cm उत्तर अर्थात् प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी 30 cm है। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने बिंब की ओर ही बनेगा।

प्रश्न 7.
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी ? बताइए क्यों ?
उत्तर-
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जब जल में तिरछी प्रवेश करेगी तो यह किरण अभिलंब की ओर झुकेगी क्योंकि जल, वायु की अपेक्षा सघन माध्यम है और जल में प्रकाश की चाल में कमी आ जाएगी।

प्रश्न 8.
प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनाँक की काँच की पलेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है ? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 x 10 m/s है।
हल : दिया है, काँच का अपवर्तनाँक (aug) = 1.50
निर्वात (वायु) में प्रकाश की चाल (c) = 3 x 108 m/s
काँच में प्रकाश की चाल (Vg) = ?
वायु में प्रकाश की चाल
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 7

प्रश्न 9.
पाठ्य-पुस्तक की सारणी 10:3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
सारणी 10-3 से स्पष्ट है कि हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है जोकि सबसे अधिक है तथा वायु का अपवर्तनांक 1.0003 है जोकि सबसे कम है। अतः हीरे का प्रकाशिक घनत्व अधिकतम तथा वायु का घनत्व न्यूनतम है।

प्रश्न 10.
आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है ? सारणी 10.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।
उत्तर-
हम जानते हैं कि अधिक अपवर्तनांक वाला माध्यम प्रकाशिक सघन माध्यम होता है जिसमें प्रकाश की चाल कम होती है तथा कम अपवर्तनांक वाले माध्यम प्रकाशिक विरल माध्यम होता है जिसमें प्रकाश की चाल कम होती है। सारणी 10-3 से स्पष्ट है कि किरोसिन का अपवर्तनांक 1.44, तारपीन के तेल का अपवर्तनाँक 1-47 तथा जल का अपवर्तनांक 1.33 है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि जल का अपवर्तनांक न्यूनतम है, इसलिए जल में प्रकाश सबसे तीव्र गति से चलता है।

प्रश्न 11.
हीरे का अपवर्तनांक 2-42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का अभिप्राय यह है कि हीरे में प्रकाश की चाल, निर्वात में प्रकाश की चाल की अपेक्षा \(\frac{1}{2.42}\) गुना है।

प्रश्न 12.
किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर (= 100 सेंटीमीटर) हो। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक मानी जाती है।

प्रश्न 13.
कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उलटा प्रतिबिंब उस लेंस से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिंब उसी साइज़ का बन रहा है जिस साइज़ का बिंब है ? लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल-दिया है, उत्तल लेंस से प्रतिबिंब की दूरी (ν) = + 50 cm
[ν का चिह्न + है क्योंकि प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है।]
प्रतिबिंब का साइज़ अथवा ऊँचाई (I) = बिंब (वस्तु) का साइज़ (O)
∴ आवर्धन (m) = \(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{O}}\) =-1
[वास्तविक प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ऋणात्मक होता है।]

परंतु लेंस के लिए m = \(\frac{v}{u}\)
∴ \(\frac{v}{u}\) = -1
या v = υ
या u = – υ
u = – υ
∴ u = (-50) cm
= 50 cm
अत: सूई (बिंब) उत्तल लेंस के सामने 50 cm की दूरी पर रखी है।
लेंस सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) से
\(\frac{1}{50}-\frac{1}{-50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{50}+\frac{1}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1+1}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{2}{50}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{25}=\frac{1}{f}\)
∴ f = 25 cm = 0.25 cm
∴ लेंस की क्षमता (P) = \(\frac{1}{f(\text { in metres })}\)
= \(\frac{1}{0.25}\) D
लेंस की क्षमता (P) = + 4 D उत्तर

प्रश्न 14.
2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, अवतल लेंस की फोकस दूरी (f) = -2 m
[अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक मानी जाती है।] अवतल लेंस की क्षमता (P) = ?
हम जानते हैं,
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 9
= \(\frac{1}{-2}\) D
= \(\frac{1}{-2}\) D
अवतल लेंस की क्षमता (P) = -0.5 D उत्तर