PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम की परिभाषा लिखो तथा गणितीय दृष्टि से दो वस्तुओं के मध्य लग रहे आकर्षण बल का सूत्र स्थापित करो।
उत्तर-
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम ((Newton’s Universal Law of Gravitation) – इस ब्रह्मांड में विद्यमान प्रत्येक कण को एक बल के साथ आकर्षित करता है जो
(i) दोनों के पुंजों के गुणनफल के समानुपाती होता है और
(ii) दोनों के केंद्र के बीच दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल सदैव ही उन वस्तुओं के केंद्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।
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गणितीय दृष्टि से – ऊपर दर्शाए चित्र अनुसार मान लो हमारे पास दो गेंदें A तथा B हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः m1 तथा m2 हैं। इनके केंद्रों के मध्य की दूरी ‘r’ है।

न्यूटन के अनुसार गेंद A, गेंद B पर गुरुत्वाकर्षण बल FBA लगाएगी तथा FAB बल गेंद A पर गेंद B द्वारा लगेगा। इन दोनों बलों की मात्रा समान है परंतु एक-दूसरे के विपरीत दिशा में लग रहे हैं।
FAB = – FBA
मान लो FAB = – FBA = F
तो न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम अनुसार
F ∝ m1 m2 ……………. (i)
तथा F ∝ \(\frac{1}{r^{2}}\) …………..(ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से
F ∝ \(\frac{m_{1} \times m_{2}}{r^{2}}\)
या F = G\(\frac{m_{1} \times m_{2}}{r^{2}}\)
यहां ‘G’ को सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक कहा जाता है। इसको यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि समस्त ब्रह्मांड में इसका संख्यात्मक मान एक ही रहता है तथा यह सूत्र न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम है।
G का मान, G = 6.67 × 10-11 N – m2/Kg2 है।

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प्रश्न 2.
ग्रहों की गति के संदर्भ में केप्लर के नियम लिखिए।
उत्तर-
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ग्रहों की गति के संदर्भ में केप्लर के नियम – सोलहवीं शताब्दी तक अनेक खगोलशास्त्रियों ने ग्रहों की गति से संबंधित बहुत से आँकड़े एकत्रित कर लिए थे। जोहांस केप्लर ने इन आँकड़ों के आधार पर तीन नियम व्युत्पन्न किए। इन्हें केप्लर के नियम कहा जाता है। ये नियम इस प्रकार हैं :

1. कक्षा का नियम (प्रथम नियम) – प्रत्येक ग्रह की कक्षा एक दीर्घवृत्त होती है और सूर्य इस दीर्घवृत्त के एक फोकस पर होता है जैसा कि निम्न चित्र में दिखाया गया है। इस चित्र में सूर्य की स्थिति को O से दर्शाया गया है।

2. क्षेत्रफल का नियम (दूसरा नियम) – सूर्य तथा ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है। इस प्रकार यदि A से B तक गति करने में लगा समय C से D तक गति करने में लगे समय के बराबर हो तो क्षेत्रफल OAB तथा क्षेत्रफल OCD बराबर होंगे।

3. परिक्रमण काल का नियम (तीसरा नियम) – सूर्य से किसी ग्रह की औसत दूरी (r) का धन उस ग्रह के सूर्य के परितः परिक्रमण काल T के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है।
अथवा T2 ∝ r3
कैप्लर ने कोई सिद्धांत प्रस्तुत न कर सका जो ग्रहों की गति की व्याख्या कर सके।
न्यूटन ने यह दिखाया कि ग्रहों की गति के कारण गुरुत्वाकर्षण वह बल ही है जो सूर्य उन पर लगाता है।
अथवा r3/T2 = स्थिरांक।

प्रश्न 3.
राबर्ट बॉयल ने प्रयोग द्वारा कैसे सिद्ध किया कि निर्वात में सभी वस्तुएं एक ही दर से नीचे गिरती हैं ?
उत्तर-
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बॉयल प्रयोग – राबर्ट बॉयल ने एक लंबी काँच की ट्यूब ली जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। एक सिक्का और कागज़ का टुकड़ा ट्यूब के भीतर रखा गया। ट्यूब के सिरों को बंद कर दिया गया। ट्यूब में से वायु को निर्वात पंप द्वारा निष्कासित कर दिया गया। जब ट्यूब को शीघ्रता से उल्टा किया गया तो यह देखने में आया कि सिक्का तथा कागज़ का टुकड़ा एक साथ ट्यूब की तली में पहुँचे । अब फिर इस प्रयोग को दोहराया गया जब ट्यूब के भीतर वायु थी। इस बार देखा गया कि कागज़ का टुकड़ा धीरे-धीरे नीचे गिरता है जबकि सिक्का शीघ्र ही ट्यूब की तली पर पहुँच गया। इस प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि निर्वात में सभी वस्तुएं हल्की तथा भारी एक ही त्वरण से पृथ्वी निर्वात पंप की ओर गति करती हैं।

प्रश्न 4.
एक वस्तु का भार पृथ्वी की सतह पर 90 कि०ग्रा० (Kg) है। चंद्रमा की सतह पर इसका भार कितना होगा, जिसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का \(\frac {1}{9}\) और त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या का \(\frac {1}{2}\) है।
हल :
वस्तु का पृथ्वी की सतह पर भार = 90 Kg
मान लो पृथ्वी का द्रव्यमान (Me) = M
मान लो पृथ्वी का अर्धव्यास (Re) = R
अब चंद्रमा का द्रव्यमान (Mm) = \(\frac {1}{9}\) × पृथ्वी का द्रव्यमान
= \(\frac {1}{9}\) × M
या Mm = \(\frac{\mathrm{M}}{9}\)
चंद्रमा का अर्धव्यास (Rm) = \(\frac {1}{2}\) × पृथ्वी का अर्धव्यास
= \(\frac {1}{2}\) × R
Rm = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
हम जानते हैं कि
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= \(\frac {1}{9}\) × 4
= \(\frac {4}{9}\)
क्योंकि द्रव्यमान एक स्थिर राशि है
∴ = \(\frac {4}{9}\)
या वस्तु का चंद्रमा की सतह पर भार \(\frac {4}{9}\) × वस्तु का पृथ्वी की सतह पर भार
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= 40 कि०ग्रा० उत्तर।

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प्रश्न 5.
(क) सिद्ध करो कि गुरुत्वीय त्वरण का मान वस्तु के द्रव्यमान के मान से स्वतंत्र होता है।
(ख) ‘g’ का मान ज्ञात करो।
उत्तर-
(क) जैसा कि दिखाया गया है पृथ्वी तल पर m द्रव्यमान वाली एक वस्तु पर विचार करो। मान लो M और R क्रमशः पृथ्वी के द्रव्यमान और अर्धव्यास हैं।
मानो वस्तु पर क्रिया कर रहा गुरुत्व बल F है।
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इस समीकरण में वस्तु का द्रव्यमान ‘m’ नहीं है। इससे पता चलता है कि गुरुत्व बल के कारण किसी वस्तु द्वारा प्राप्त त्वरण इसके द्रव्यमान से स्वतंत्र होता है। अतः हम कहते हैं कि सभी आकार और द्रव्यमान वाली वस्तुएं किसी स्थान पर समान त्वरण से गिरती हैं।

(ख) ‘g’ का मान ज्ञात करना-
G = 6.67 × 10-11 Nm2 Kg-2
पृथ्वी का अर्ध-व्यास, R = 6400 Km
= 6400 × 1000 m
= 6.4 × 106 m
पृथ्वी का द्रव्यमान, M = 6 × 1024 Kg
या g = \(\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}^{2}}\)
g = \(\frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6 \times 10^{24}}{\left(6.4 \times 10^{6}\right)^{2}}\)
g = 9.8 m s-2

प्रश्न 6.
(क) स्वतंत्र गिर रही वस्तुओं के समीकरण की परिभाषा दें।
(ख) स्वतंत्र गिर रही वस्तुओं के गति समीकरण में परिवर्तन कैसे होता है ?
(ग) जब वस्तु को बिल्कुल सीधे ऊपर फेंका जाता है तो उसके द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊंचाई ज्ञात करने के लिए समीकरण लिखो।
(घ) सिद्ध करो कि गिरने का समय और ऊपर जाने का समय समान होता है।
उत्तर-
(क) गुरुत्व के अधीन क्रिया करने वाले गति समीकरण स्वतंत्र गिर रही वस्तुओं के समीकरण कहलाते है।

(ख) उन्हें एक समान गति वाली समीकरणों में a के स्थान पर g का विस्थापन करके प्राप्त किया जा सकता है। स्वतंत्र गिरावट के निम्नलिखित समीकरण होंगे-
(i) v = u + gt
(ii) h = ut + \(\frac {1}{2}\)gt2
(iii) v2 – u2 = 2gh
यहां पर से प्रारंभिक वेग, v अंतिम वेग, h प्राप्त ऊँचाई तथा t समय है।
जब वस्तु को छोड़ा जाता है तो वस्तु का प्रारंभिक वेग शून्य होता है अर्थात् u = 0

(ग) अधिकतम ऊंचाई के लिए व्यंजक – आओ आरंभिक वेग ५ वाली किसी वस्तु को ऊपर फेंके जाने पर प्राप्त अधिकतम ऊंचाई के लिए व्यंजक ज्ञात करें।
उच्चतम बिंदु पर अंतिम वेग शून्य होगा। गुरुत्व-वेग g ऋण होगा। यदि h अधिकतम ऊंचाई है तो,
v2 – u2 = 2gh
या 02 – u2 = 2(-g) h
∴ h = \(\frac{u^{2}}{2 g}\)

(घ) ऊपर जाने तथा नीचे आने का समय अर्थात् अवरोहण तथा आरोहण समय-
उच्चतम बिंदु तक पहुंचने में लगा समय अवरोहण समय है। अधिकतम ऊंचाई से नीचे वापिस आने में लगा समय आरोहण समय है।
अवरोहणयहां-
υ = 0, a = -g
υ = u + at
0 = u – gt
t = \(\frac{u}{g}\)
आरोहण समय-अब, उच्चतम बिंदु पर वेग u है।
∴ u = 0
और h = \(\frac{u^{2}}{2 g}\)
h = ut + \(\frac {1}{2}\)gt2 से = h = \(\frac {1}{2}\)gt2
∴ \(\frac{u^{2}}{2 \mathrm{~g}}\) = \(\frac {1}{2}\)gt2
∴ \(\frac{u^{2}}{2 \mathrm{~g}}\) = gt2
t = \(\frac{u}{g}\)
∴ आरोहण समय अवरोहण समय के बराबर है।

प्रश्न 7.
उन कारकों का वर्णन करो जिनके फलस्वरूप गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ के मान में अंतर आता है।
उत्तर-
गुरुत्वीय त्वरण के मान में अंतर निम्नलिखित कारणों से होता है-
(i) पृथ्वी की ऊँचाई कारण ‘g’ में अंतर (Variation ing with altitude)-‘g’ का मान पृथ्वी की सतह पर अधिकतम होता है। जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर जाते हैं तो ‘g’ का मान कम होता जाता है। पृथ्वी की सतह से ऊपर किसी भी ऊँचाई पर ‘g’ के मान की गणना हम एक निश्चित गणितीय सूत्र की सहायता से निकाल सकते हैं
यदि
ge = पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण
gh = पृथ्वी की ऊँचाई h पर गुरुत्वीय त्वरण
R = पृथ्वी का अर्ध-व्यास
हम जानते हैं कि
gh = ge[latex]\frac{\mathrm{R}^{2}}{(\mathrm{R}+h)^{2}}[/latex]
‘h’ का मान पता होने पर gh का मान निकाला जा सकता है।
विशेष अवस्था (Special Case) – पृथ्वी के अर्ध-व्यास से आधी ऊँचाई h पर अर्थात् है पर अर्थात् h = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\) पर सूत्र से
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gh = 4.36 m/s2
एक और रोचक बात यह है कि पृथ्वी के केंद्र पर ‘g’ का मान शून्य होगा।

(ii) पृथ्वी की आकृति कारण ‘g’ में अंतर (Variation in g due to shape of earth) – पृथ्वी पूरी तरह से गोल नहीं है। इसकी आकृति अंडाकार है। यह ध्रुवों के पास थोड़ी-सी समतल तथा भूमध्य रेखा के पास थोड़ीसी बाहर की ओर उभरी हुई होती है। जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है।

ऊपर दिखाए गए चित्र अनुसार पृथ्वी का भूमध्य रेखीय अर्ध-व्यास 6378 कि०मी० तथा ध्रुवीय अर्ध-व्यास 6357 कि०मी० है। इसलिए पृथ्वी (ध्रुवों पर) का अधिकतम ‘g’ का मान gp = 9.831 m/s2 तथा कम-से-कम (भूमध्य रेखा पर) मान ge = 9.782 m/s2 है। हम जो ‘g’ का मान लेते हैं वह gp तथा ge का मध्यमान होता है।

(iii) गहराई का प्रभाव (Effect of depth) – यदि हम नीचे गुफा में या खानों में चले जाएं तो ‘g’ का मान कम हो जाता है अर्थात् गहराई के साथ ‘g’ का मान कम होता जाता है। पृथ्वी के केंद्र पर इसका मान शून्य हो जाता है।
\(\frac{\mathrm{W}_{d}}{\mathrm{~W}_{e}}\) = \(\frac{g_{d}}{g_{e}}\) = [1 – \(\frac{d}{R}\)]

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प्रश्न 8.
किसी वस्तु के चंद्रमा तथा पृथ्वी के भारों की तुलना करो।
उत्तर-
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पृथ्वी तथा चंद्रमा पर वस्तु के भार की तुलना-
प्रत्येक ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान उसके द्रव्यमान तथा उसके अर्ध-व्यास पर निर्भर करता है। इसी कारण से चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार, उसके पृथ्वी पर भार का \(\frac {1}{6}\) गुणा होता है।

माना वस्तु का द्रव्यमान ‘m’ है। यदि Me पृथ्वी का द्रव्यमान तथा Re पृथ्वी की त्रिज्या हो तो पृथ्वी पर वस्तु का भार (Fe)
Fe = \(\frac{\mathrm{GM}_{e} \times m}{\mathrm{R}_{e}^{2}}[latex] …………… (i)
इसी प्रकार यदि Mm चंद्रमा का द्रव्यमान तथा Rm चंद्रमा की त्रिज्या हो तो चंद्रमा पर वस्तु का भार (Fm)
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∴ पृथ्वी का द्रव्यमान चंद्रमा के द्रव्यमान से लगभग 100 गुणा अधिक है तथा अर्ध-व्यास चार गुणा अधिक है।
∴ Me = 100 Mm तथा
Re = 4 Rm
Me तथा Re का मान लगाने पर
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= 6 लगभग
अतः Fe = 6 × Fm
अत: यह स्पष्ट हो गया है कि चंद्रमा पर वस्तु का द्रव्यमान ‘m’ ही रहता है, परंतु उसका भार चंद्रमा की अपेक्षा पृथ्वी पर 6 गुणा अधिक होता है।

प्रश्न 9.
‘g’ तथा ‘G’ के मध्य संबंध स्थापित करो।
उत्तर-
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‘g’ तथा ‘G’ के मध्य संबंध (Relation betweeng and G) – मान लो ‘m’ द्रव्यमान तथा ‘d’ अर्ध-व्यास वाली एक गेंद पृथ्वी की सतह पर पड़ी है जिसका द्रव्यमान M तथा अर्ध-व्यास R है।
मान लो पृथ्वी तथा गेंद के केंद्रों की बीच की दूरी, r है भाव है,
r = d + R
पृथ्वी गेंद को अपने केंद्र की ओर F बल से आकर्षित करती है।
∴ F = G[latex]\frac{\mathrm{M} \times m}{\mathrm{R}^{2}}\) ……………. (i)
∴ F = m × गेंद में पृथ्वी द्वारा उत्पन्न त्वरण
F = m × g ……………… (ii)
यहां ‘g’ का पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं तथा पृथ्वी की सतह पर इसका अधिकतम मान 9.81 m/s2 है। समीकरण (i) तथा (ii) की तुलना करने पर
m × g = G\(\frac{\mathrm{M} \times m}{r^{2}}\)
या g = \(\frac{\mathrm{GM}}{r^{2}}\) ………..(iii)
अब क्योंकि गेंद का अर्ध-व्यास, पृथ्वी के अर्ध-व्यास की तुलना में बहुत कम है।
अर्थात् r = R
∴ g = G\(\frac{\mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\) …………… (iv)
समीकरण (iv) g तथा G में संबंध दर्शाती है।

प्रश्न 10.
एक व्यक्ति पृथ्वी तल की तुलना में चंद्रमा की सतह पर अधिक ऊँची छलांग लगा सकता है, क्यों ? व्याख्या करें।
उत्तर-
मान लो ‘m’ द्रव्यमान वाला व्यक्ति M द्रव्यमान वाली पृथ्वी जिसका अर्ध-व्यास ‘R’ है की सतह पर खड़ा है। पृथ्वी उस व्यक्ति को अपने केंद्र की ओर गुरुत्वाकर्षण बल लगाकर आकर्षित करती है।
F = व्यक्ति का द्रव्यमान × व्यक्ति में पृथ्वी द्वारा उत्पन्न त्वरण
F = m × g ………….. (i)
यहां ‘g’ को पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।
हम जानते हैं कि
F = G.\(\frac{m \times \mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\)
m × g = G.\(\frac{m \times \mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\)
या g = \(\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}^{2}}\) …………. (ii)
यदि समीकरण (ii) में चंद्रमा का द्रव्यमान तथा अर्ध-व्यास भरे जाएं तो चंद्रमा पर g का मान gm कहलाता है।
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∴ चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण = \(\frac{1}{6}\) x पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण। अब क्योंकि चंद्रमा की सतह पर लग रहा गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की सतह पर लग रहे गुरुत्वीय त्वरण का \(\frac{1}{6}\) वां भाग है, इसलिए व्यक्ति पृथ्वी की सतह से चंद्रमा की सतह पर 6 गुणा ऊँची छलांग लगा सकता है।

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प्रश्न 11.
आर्किमीडीज़ का सिद्धांत क्या है ? प्रायोगिक क्रिया द्वारा इसको सत्यापित कीजिए।
उत्तर-
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आर्किमीडीज़ का सिद्धांत – “जब किसी ठोस वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है तो वह ऊपर की दिशा में एक बल को अनुभव करती है जो वस्तु द्वारा हटाए गए। तरल के भार के बराबर होता है।”

प्रायोगिक पड़ताल – एक पत्थर का टुकड़ा लीजिए और इसे कमानीदार तुला (Spring balance) के हुक्क से बाँधिए । तुला को स्टैंड से अथवा हाथ से पकड़ कर पत्थर को लटकाइए जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। पत्थर का भार कमानीदार तुला का पाठ्याँक नोट कर ज्ञात कीजिए। अब बीकर को पूरा पानी से भरकर पत्थर को बीकर में रखे पानी में धीरे से डुबोइए जैसा चित्र (b) में दर्शाया गया है। आप देखेंगे कि जब पत्थर पानी में डूब जाता है तो कमानीदार तुला का पाठ्याँक कम हो जाता है अर्थात् पानी में डुबोने पर पत्थर के भार में कमी आ गई है। पहले पाठयाँक में से दूसरे पाठ्याँक को घटा कर पत्थर के भार में हुई कमी ज्ञात कर सकते हैं। जैसे ही पत्थर को डुबोया जाएगा, पत्थर के आयतन के बराबर पानी विस्थापित होगा। इस विस्थापित पानी को दूसरे बीकर में इकट्ठा कर भार कर लें। यह पानी का भार पत्थर के भार में हुई कमी के बराबर होगा। इस प्रकार आर्किमीडीज़ का नियम सत्यापित हो जाता है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
इनमें से कौन-सा अधिक है-1 Kg लोहे पर पृथ्वी द्वारा लग रहा गुरुत्वाकर्षण बल या पृथ्वी पर 1 Kg लोहे द्वारा लग रहा गुरुत्वाकर्षण बल और क्यों ?
उत्तर-
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण-बल के नियम अनुसार दो वस्तुओं के बीच परस्पर आकर्षण बल होता है। इसलिए न तो लोहा पृथ्वी पर तथा न ही पृथ्वी लोहे पर अधिक बल लगाती है। परंतु क्योंकि लोहे का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान से कम है, इसलिए पृथ्वी, 1 Kg लोहे के टुकड़े को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है जिसकी गति यह दर्शाती है कि पृथ्वी 1 Kg लोहे के टुकड़े पर अधिक बल लगाती है।

प्रश्न 2.
G को सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक क्यों कहते हैं ? .
उत्तर-
G को सार्वत्रिक स्थिरांक इसलिए कहा जाता है कि समस्त ब्राह्मांड में इसका संख्यात्मक मान एक ही रहता है जिसका मान है, G = 6.67 × 10-11 Nm2/Kg2

प्रश्न 3.
क्या ‘g’ का मान एक ज्ञात स्थान पर भिन्न-भिन्न वस्तुओं के लिए समान होता है या भिन्न ?
उत्तर-
पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण (g) तथा सार्वत्रिक गुरुत्वीय G के मध्य सम्बन्ध से हम जानते हैं कि
g = \(\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}^{2}}\)
इसी समीकरण से यह पता चलता है कि ‘g’ का मान वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। इसलिए हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि किसी ज्ञात स्थिति पर भिन्न-भिन्न वस्तुओं के लिए ‘g’ का मान बराबर है।

प्रश्न 4.
एक वस्तु का भार भूमध्य रेखा पर ध्रुवों पर अधिक कहां होता है ?
उत्तर-
पृथ्वी की आकृति पूरी तरह से गोल नहीं होती, परंतु थोड़ी-सी अंडाकार है। यह ध्रुवों के पास समतल (चपटी) है जबकि भूमध्य रेखा के पास थोड़ी सी बाहर की ओर उभरी हुई होती है।
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भूमध्य रेखीय अर्ध-व्यास लगभग 6378 Km है जबकि ध्रुवीय अर्ध-व्यास 6357 Km है। भूमध्य रेखीय अर्ध-व्यास, ध्रुवीय अर्ध-व्यास से 21 Km अधिक है।
हम जानते हैं कि g = \(\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}^{2}}[latex] अर्थात् ‘g’ का मान R के व्युत्क्रमानुपाती। g α = ([latex]\frac{1}{R^{2}}\)) होता है इसलिए भूमध्य रेखा पर ‘g’ का मान कम होगा तथा ध्रुवों पर ‘g’ का मान अधिक होगा।

प्रश्न 5.
एक वस्तु पृथ्वी के केंद्र पर भारविहीन क्यों हो जाती है ?
उत्तर-
पृथ्वी के केंद्र पर वस्तु का भारहीन होना – हम जानते हैं कि पृथ्वी से नीचे जाते समय ‘g’ का मान कम होता है तथा पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वीय त्वरण (g) = 0 होता है। इसलिए कोई वस्तु जिसका द्रव्यमान m है,
वस्तु का भार = m × o
= 0 शून्य है।
अर्थात् वस्तु भारहीन होती है।

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प्रश्न 6.
टेनिस की गेंद मैदानों से पर्वतों पर अधिक उछलती है। व्याख्या करें।
उत्तर-
ज्यों-ज्यों ऊँचाई पर जाते हैं तो गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान कम होता जाता है जिसके कारण गेंद का गुरुत्वाकर्षण बल पहाड़ों पर कम होता है जिसके फलस्वरूप गेंद पहाड़ों पर मैदानी इलाकों की अपेक्षा अधिक उछलती है।

प्रश्न 7.
पृथ्वी-तल पर एक वस्तु का भार लगभग 9.8 N है। इस कथन की पुष्टि करें।
उत्तर-
हम जानते हैं कि पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान 9.8 m/s2 है तथा वस्तु के भार के लिए संबंध है-
w = m × g
9.8 = m × 9.8
m = \(\frac{9.8}{9.8}\)
m = 1 किलोग्राम
दिए गए कथन का अर्थ है कि पृथ्वी की सतह पर वस्तु का द्रव्यमान 1 किलोग्राम है।

प्रश्न 8.
गुरुत्व अधीन स्वतंत्र रूप से गिर रही वस्तु की गति कैसी होगी ?
उत्तर-
गुरुत्व अधीन स्वतंत्र गिर रही वस्तु एक समान गति से नीचे गिरेगी। यदि भिन्न-भिन्न द्रव्यमान तथा आकार की वस्तुओं को निर्वात में से पृथ्वी की ओर नीचे गिरने दिया जाए तो उनमें एक समान गुरुत्वीय त्वरण होगा।

प्रश्न 9.
एक पदार्थ का आवश्यक विशेष गुण कौन-सा है, द्रव्यमान अथवा भार ?
उत्तर-
किसी पदार्थ का आवश्यक गुण द्रव्यमान होता है न कि उसका भार क्योंकि कोई ऐसा स्थान नहीं जहां पर पदार्थ का द्रव्यमान न हो। पृथ्वी के केंद्र पर वस्तु का भार शून्य हो सकता है परंतु द्रव्यमान नहीं। इसके अतिरिक्त कोई भी वस्तु जिसका द्रव्यमान होता है तथा जो स्थान घेरती है वह पदार्थ होता है जोकि पदार्थ की परिभाषा है। इसलिए पदार्थ का आवश्यक गुण उसका द्रव्यमान है न कि उसका भार।

प्रश्न 10.
एक विद्यार्थी विपिन, जो कहता है कि वह 52 Kg का है, के द्रव्यमान और भार के गुणों की तुलना करो।
उत्तर-
विपिन 52 कि० ग्रा० का है, से भाव है कि उसका द्रव्यमान 52 कि० ग्रा० है अर्थात् यह उसके शरीर का निर्माण करने वाले रुधिर, हड्डियाँ तथा त्वचा आदि की मात्रा को दर्शाता है। विपिन का भार वह आकर्षण बल है जिससे पृथ्वी उसको अपनी ओर आकर्षित करती है। यदि विपिन पृथ्वी से ऊपर किसी भी बिंदु पर चला जाएगा तो उसका द्रव्यमान 52 कि० ग्रा० ही रहेगा जबकि उसका भार प्रत्येक बिंदु पर भिन्न-भिन्न होगा। ऊँचाई पर जाने से विपिन का भार कम हो जाएगा। द्रव्यमान एक दिशाहीन राशि है जबकि भार एक बल है इसलिए सदिश राशि है। द्रव्यमान को किलोग्राम में मापते हैं तथा भार को न्यूटन (N) में मापा जाता है।

प्रश्न 11.
गुरुत्वाकर्षण बल के गुण लिखो जिनके कारण इसका दैनिक जीवन में महत्त्व है।
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण बल के गुण निम्नलिखित हैं जिनके कारण इनका दैनिक जीवन में महत्त्व है-

  1. यह एक परस्पर बल है अर्थात् दो वस्तुएं एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं।
  2. यह बल वस्तुओं के द्रव्यमानों के सीधे तौर पर निर्भर करता है।
  3. यह बल तात्कालिक तथा समकालिक है अर्थात् दोनों ही वस्तुएं एक ही समय एक-दूसरे को आकर्षित करती
  4. यह बल सदैव आकर्षण करता है न कि प्रतिकर्षण
  5. यह बल वस्तुओं के आकार तथा आकृति पर निर्भर नहीं करता।
  6. यह उस माध्यम के स्वभाव पर भी निर्भर नहीं करता जहां पर एक जैसा आकर्षण-बल हो।

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प्रश्न 12.
निम्नलिखित में अंतर बताओ
(i) गुरुत्वीय त्वरण (g) तथा (G) सार्वत्रिक स्थिरांक
(ii) भार तथा द्रव्यमान
(iii) द्रव्यमान केंद्र तथा गुरुत्व केंद्र।
उत्तर-
(i) g तथा (G) में अंतर-

‘g’ ‘G’
(1) यह गुरुत्वीय त्वरण को प्रदर्शित करता है। (1) यह गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक को प्रदर्शित करता है।
(2) इसका मान भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है। (2) इसका मान सभी स्थानों पर समान है। इसलिए इसे सार्वत्रिक स्थिरांक भी कहते हैं।
(3) इसका पृथ्वी पर मान 9.8 m/s2 है। (3) इसका मान 9.67 × 10-11 N-m2 Kg-2 है।

(ii) भार तथा द्रव्यमान में अंतर-

भार (Weight) द्रव्यमान (Mass)
(1) भार वह बल है जिससे वस्तु पृथ्वी के केंद्र की ओर आकर्षित होती है। (1) द्रव्यमान वस्तु में विद्यमान पदार्थ की मात्रा है।
(2) भार एक सदिश राशि है। (2) द्रव्यमान एक अदिश राशि है।
(3) यह अचर राशि नहीं, अपितु एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलती रहती है। (3) यह एक अचर राशि है।
(4) भार को स्प्रिंग तुला से मापा जाता है। (4) द्रव्यमान को दंड तुला से मापा जाता है।
(5) वस्तु का भार पृथ्वी के केंद्र पर शून्य हो सकता है। (अर्थात् = 0)। (5) वस्तु का द्रव्यमान कभी भी शून्य नहीं हो सकता।
(6) इसे न्यूटन या किलोग्राम भार में मापा जाता है। (6) इसे किलोग्राम में मापा जाता है।

(iii) द्रव्यमान केंद्र तथा गुरुत्व केंद्र में अंतर – पृथ्वी की सतह पर या उसके पास का वह बिंदु जहां गुरुत्वीय बल स्थिर होता है, उसे द्रव्यमान कहते हैं। द्रव्यमान केंद्र ही वह बिंदु है जहां वास्तव में वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण बल अनुभव किया जाता है। जबकि वस्तु का गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जहाँ गुरुत्व बल संपूर्ण वस्तु पर क्रिया करता हुआ माना जा सकता है।

प्रश्न 13.
आप विषुवत् रेखा ( भूमध्य ) पर स्थित किसी स्थान पर से W भार की चीनी खरीदते हैं और उसे अंटार्कटिका ले जाते हैं। क्या वहाँ उसका भार वही रहेगा ? यदि नहीं, तो यह कम होगा या अधिक ?
उत्तर-
अंटार्कटिका पर ‘g’ का मान वह नहीं होता जो भूमध्य रेखा पर होता है । अंटार्कटिका में ‘g’ का मूल्य बढ़ता है इसलिए जब चीनी का बैग भूमध्य रेखा पर स्थित किसी स्थान से खरीद कर वहाँ ले जाया जाएगा तो उस का भार बढ़ जाएगा परंतु द्रव्यमान में कोई अंतर नहीं आएगा क्योंकि द्रव्यमान एक स्थिर राशि है।

प्रश्न 14.
हम सभी सितारों को हिलाए-डुलाए बगैर अपनी अंगुली भी नहीं हिला सकते। टिप्पणी करो।
उत्तर-
जब हम अपनी अंगुली हिलाते हैं, तो अंगुली और इस ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं की दूरी बदल जाने के कारण गुरुत्वाकर्षण बल बदल जाता है। अतः सभी वस्तुएं हिल-डुल जाती हैं, भले ही यह हिल-डुल बहुत नगण्य क्यों न हो।

प्रश्न 15.
जब कोई वस्तु भूमि पर गिरती है तो उसे मिलने के लिए पृथ्वी ऊपर की ओर गति करती है । पृथ्वी की गति दिखाई क्यों नहीं देती ?
उत्तर-
क्योंकि पृथ्वी का द्रव्यमान वस्तु के द्रव्यमान की अपेक्षा बहुत अधिक होता है। इसलिए इसमें उत्पन त्वरण नगण्य होता है। इसलिए इसकी गति दिखाई नहीं देती।
.
प्रश्न 16.
गुरुत्वाकर्षण और गुरुत्व की परिभाषा दो।
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण – यह इस ब्रह्मांड की किन्हीं दो वस्तुओं के मध्य आकर्षण बल है।
गुरुत्व – यह पृथ्वी (या ग्रह) द्वारा इसके तल या इसके निकट स्थित सभी वस्तुओं पर लगाया गया आकर्षण बल है। गुरुत्व गुरुत्वाकर्षण का एक विशेष उदाहरण है- जब दो वस्तुओं में से एक वस्तु पृथ्वी हो।

प्रश्न 17.
सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति का क्या कारण है ?
उत्तर-
सभी ग्रह अपने-अपने परिपथ में सूर्य के चारों ओर उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण घूमते हैं। यह गति भी बिल्कुल उसी प्रकार है जिस प्रकार चंद्रमा गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 18

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 18.
गुरुत्वाकर्षण बल प्रायः नगण्य क्यों होता है ?
उत्तर-
सामान्य द्रव्यमान के लिए गुरुत्वाकर्षण बल इतना कम होता है कि इसे अति संवेदनशील उपकरण के द्वारा ही ज्ञात किया जा सकता है।
यदि आप और आपका मित्र 1 मीटर दूर खड़े हों और आप दोनों का भार चालीस-चालीस कि० ग्रा० हो तो
F = G\(\frac{m_{1} m_{2}}{r^{2}}\)
= \(\frac{6.67 \times 10^{-11} \times 40 \times 40}{(1)^{2}}\)
F = 1.0672 × 10-7N
यह मान अत्यधिक कम है अर्थात् यह नगण्य है।

प्रश्न 19.
गुरुत्वाकर्षण बल का प्रयोग जिन व्यावहारिक क्रियाओं से होता है, उनके कुछ उदाहरण दो।
उत्तर-
गुरुत्वाकर्षण बल पर आधारित व्यावहारिक क्रियाएँ-

  1. सूर्य और पृथ्वी में क्रिया कर रहे गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही पृथ्वी, सूर्य के गिर्द अपनी वर्तुल गति को कायम रखती है।
  2. सौर मंडल का अस्तित्व गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही होता है।
  3. ग्रह के तल पर वायुमंडल भी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही होता है।
  4. समुद्र में उठने वाला ज्वार-भाटा सूर्य और चांद के पानी पर क्रिया करने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही होता है।
  5. हम गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही पृथ्वी पर पक्की तरह खड़े रह सकते हैं।
  6. कृत्रिम उपग्रह के चक्कर लगाने का बल भी गुरुत्वाकर्षण बल ही है।

प्रश्न 20.
द्रव्यमान के अभिलक्षण लिखिए।
उत्तर-
द्रव्यमान – किसी वस्तु में उपस्थित द्रव्य की मात्रा को द्रव्यमान कहते हैं जिसके प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित होते हैं-

  1. यह एक अदिश राशि है।
  2. यह प्रत्येक स्थान पर समान रहता है।
  3. इसे भौतिक तुला से मापा जाता है।

प्रश्न 21.
भार के अभिलक्षण लिखिए।
उत्तर-
भार – किसी वस्तु का भार वह बल है, जिससे पृथ्वी उसे अपनी ओर खींचती है। इसके प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित होते हैं-

  1. यह एक सदिश राशि है।
  2. इसे कमानीदार तुला से मापा जाता है।
  3. यह स्थान-स्थान पर बदलता रहता है। ।
  4. यह द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 22.
जब हम पृथ्वी तल से ऊपर जाते हैं तो हमारे भार पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
किसी वस्तु का भार वस्तु के द्रव्यमान (m) तथा गुरुत्वीय त्वरण (g) का गुणनफल होता है। गुरुत्वीय त्वरण का मान वस्तु की केंद्र से दूरी पर निर्भर करता है।
क्योंकि g = \(\frac{\mathrm{GM}_{e}}{\mathrm{R}^{2}}\)

गुरुत्वीय त्वरण वस्तु की पृथ्वी के केंद्र से दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अतः भार भी वस्तु की पृथ्वी के केंद्र से दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होगा। अर्थात् ज्यों-ज्यों हम पृथ्वी तल से ऊपर जाते हैं तो हमारी पृथ्वी के केंद्र से दूरी बढ़ जाती है जिसके कारण हमारा भार भी कम होता जाता है। यदि हम पृथ्वी तल से पृथ्वी के अर्ध-व्यास के बराबर ऊपर चले जाएं तो वस्तु का भार पृथ्वी के भार की अपेक्षा \(\frac{1}{4}\) गुणा रह जाएगा।

प्रश्न 23.
जब किसी वस्तु को ऊपर की ओर फेंका जाता है तो वस्तु की गति पर क्या प्रभाव पड़ता है ? उसका त्वरण कितना होता है ?
उत्तर-
जब किसी वस्तु को ऊपर की ओर फेंका जाता है तो पृथ्वी उसे अपने गुरुत्व बल के कारण नीचे की और आकर्षित करती है। गुरुत्व बल वस्तु की गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है अतः वस्तु का वेग कम होता जाता है। ऊपर की ओर फेंकी गई वस्तु का त्वरण नीचे की ओर गिरती हुई वस्तु के त्वरण के बराबर होता है परंतु ऋणात्मक होता है।

ऊपर फेंकी गई वस्तु का त्वरण = -9.8m/s2 है। इसलिए जब वस्तु ऊपर की ओर फेंकी जाती है उसका वेग 9.8m/s2 की दर से घटता जाता है। वेग तब तक घटता जाता है जब तक वह शून्य नहीं हो जाता। अधिकतम ऊँचाई पर पहुँच कर वेग शून्य हो जाता है।

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प्रश्न 24.
चंद्रमा पृथ्वी की ओर गिरता रहता है, इसका तात्पर्य क्या है ? यह पृथ्वी तल पर गिर क्यों नहीं जाता ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 19
चंद्रमा अपने अक्ष के चारों ओर घूमता हुआ पृथ्वी की ओर गिरता है, पर अपकेंद्रण बल के कारण अपने ही कक्ष में रहता है। यह अपकेंद्रण बल पृथ्वी और चंद्रमा के बीच आकर्षण बल के कारण उत्पन्न होता है। इस बल के अभाव में चंद्रमा अपने पथ से दूर हट जाता है।

यदि चंद्रमा हमारी पृथ्वी से h ऊँचाई पर है तो गुरुत्वाकर्षण बल को इस प्रकार प्रकट किया जा सकता है-
\(\frac{\mathrm{G} m \mathrm{M}}{(\mathrm{R}+h)^{2}}\) = \(\frac{m v_{0}^{2}}{(\mathrm{R}+h)}\)
\(\frac{\mathrm{GM}}{(\mathrm{R}+h)}\) = \(v_{0}^{2}\)
∴ υ0 = \(\sqrt{\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}+h}}\)
α\(\frac{1}{d^{2}}\)
पृथ्वी
जहाँ υ0 कक्षीय वेग (orbital velocity) है।
अतः υ0 वेग से घूमता चंद्रमा अपने कक्ष में घूमता रहेगा। यह पृथ्वी की ओर गिरता रहेगा पर हर बार गिरने से चूकता भी रहेगा।

प्रश्न 25.
पृथ्वी सेब को आकर्षित करती है तो सेब भी पृथ्वी को आकर्षित करता है ? यदि हाँ, तो पृथ्वी सेब की ओर गति क्यों नहीं करती ?
उत्तर-
सेब निश्चित रूप से पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है, पर सेब का द्रव्यमान बहुत कम है और उसकी तुलना से पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक है। सेब और पृथ्वी के बीच का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर बहर कम पर सेब पर बहुत अधिक त्वरण उत्पन्न करता है जिस कारण वह पृथ्वी की ओर गिरता है। पृथ्वी में उत्पन्न त्वमा इतना कम होता है कि वह सेब की ओर गति नहीं करती। पृथ्वी का विस्थापन बल लगभग शून्य ही होता है।

प्रश्न 26.
यदि किसी कारणवश गुरुत्वीय बल लुप्त हो जाए तो हम पृथ्वी से अंतरिक्ष में क्यों फेंक दिए जाएंगे ?
उत्तर-
हाँ, हम वास्तव में ही अंतरिक्ष में उड़ने लगेंगे यदि गुरुत्व बल को समाप्त कर दिया जाए। हर अंतरिक्ष में अपकेंद्रण बल के कारण उड़ने लगेंगे।

प्रश्न 27.
मान लीजिए पृथ्वी का द्रव्यमान एकाएक 10% बढ जाए, किंतु उसके आकार में कोई परिवर्तन न हो, तब आपके भार में क्या परिवर्तन होगा ? यदि पृथ्वी की त्रिज्या उसकी वर्तमान त्रिज्या की दुगुनी हो जाए, किंतु उसका द्रव्यमान वही रहे तो आपके भार में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर-
(i) पृथ्वी के आकार में बिना परिवर्तन किए हुए यदि इसका द्रव्यमान 10% बढ़ जाए तो (g) का मान भी बढ़ जाएगा जिसके परिणामस्वरूप हमारा भार भी 10% बढ़ जाएगा।
∵ g = \(\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}^{2}}\) तथा W = mg
‘g’ का मान ‘M’ के समानुपाती होता है और उसकी दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

(ii) यदि पृथ्वी का अर्ध-व्यास वर्तमान व्यवस्था से दुगुना हो जाए और इसके द्रव्यमान में कोई अंतर न किया जाए तो (g) का मान कम हो जाएगा और हमारा भार \(\sqrt{2}\) गुणा कम हो जाएगा।

प्रश्न 28.
अंतरिक्ष में किसी स्थान पर 1Kg पुंज पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल 5 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करता है। यदि उसकी जगह 3Kg का द्रव्यमान हो तो कितना त्वरण उत्पन्न होगा ?
उत्तर-
किसी स्थान पर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न त्वरण किसी वस्तु के द्रव्यमान से स्वतंत्र होता है, इसलिए 3Kg द्रव्यमान वाली वस्तु का उसी स्थान पर त्वरण उतना ही अर्थात् 5m/s2 होगा।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 29.
सिद्ध कीजिए यदि दो वस्तुओं पर पृथ्वी द्वारा आरोपित गुरुत्वीय बल बराबर हैं तो उन दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान भी बराबर होंगे।
उत्तर-
मान लो दो वस्तुओं के द्रव्यमान क्रमशः m1 तथा m2 हैं तथा ये दोनों वस्तुएँ पृथ्वी के केंद्र से समान दूरी R पर रखी हैं । पृथ्वी के द्रव्यमान M तथा वस्तु के द्रव्यमान m1 के बीच आकर्षण बल F1 है।
∴ F1 = \(\frac{\mathrm{GM} \times m_{1}}{R^{2}}\)
इसी प्रकार, पृथ्वी के द्रव्यमान M तथा वस्तु के द्रव्यमान m2 के बीच आकर्षण बल F2 है।
F2 = \(\frac{\mathrm{GM} \times m_{2}}{R^{2}}\)
परंत दिया गया है : F1 = F2
\(\frac{\mathrm{GM} \times m_{1}}{R^{2}}\) = \(\frac{\mathrm{GM} \times m_{2}}{R^{2}}\)
अतः m1 = m2
अर्थात् दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान बराबर हैं।

प्रश्न 30.
उत्प्लावन बल तथा उत्प्लावन केंद्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उत्प्लावन बल तथा उत्प्लावन केंद्र – प्रत्येक द्रव अपने अंदर पूर्ण अथवा आंशिक रूप से डुबोई गई वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावन बल (उत्क्षेप) कहते हैं। यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के गुरुत्व-केंद्र पर कार्य करता है, जिसे उत्प्लावन केंद्र कहते हैं।

प्रश्न 31.
नदियों पर बनाए गए बाँधों की दीवारें नीचे मोटी व ऊपर पतली क्यों बनाई जाती हैं ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 20
बाँध की दीवारों का नीचे मोटी व ऊपर पतली होना-बाँधों की गहराई बहुत अधिक होती है तथा द्रव के अंदर किसी बिंदु पर दाब, उस बिंदु की मुक्त तल से गहराई के अनुक्रमानुपाती होता है। इसलिए बांध की तली में जल का दाब अधिकतम होता है। अतः बाँध की दीवार पर सबसे अधिक दाब नीचे होता है ; जैसे-जैसे ऊपर आते हैं दाब भी कम होता जाता है। अत: बाँध की दीवार नीचे से मोटी बनाई जाती है, जिससे वह अधिक दाव-बल को सहन कर सके।

प्रश्न 32.
रेलगाड़ी की पटरियों के नीचे लकड़ी अथवा लोहे के चौड़े स्लीपर क्यों लगाए जाते हैं ?
उत्तर-
यदि रेलगाड़ी की पटरियों के नीचे चौड़े स्लीपर न लगाए जाएँ तो रेल की पटरियाँ अधिक दबाव के कारण पृथ्वी में फँस सकती हैं। पटरियों के नीचे स्लीपर लगाने से क्षेत्रफल अधिक हो जाता है, जिससे दाब कम पड़ता है और रेल की पटरियाँ पृथ्वी में नहीं धंस सकतीं।

प्रश्न 33.
एक तख्ते पर कुछ पुस्तकें फैलाकर रखने की अपेक्षा वही पुस्तकें एक जगह पर ऊपर-नीचे रखने पर तख्ता अधिक नीचे की ओर झुक जाता है, ऐसा क्यों ?
उत्तर-
हम जानते हैं कि दाब तथा क्षेत्रफल व्युत्क्रमानुपाती होते हैं अर्थात् P ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\) इसलिए तो पर पुस्तकों को फैलाकर रखने से, उनके द्वारा घिरा क्षेत्रफल (A) अधिक होगा, जिसके कारण तख्ते पर दाव (P = F/A) कम लगेगा। इन्हीं पुस्तकों को ऊपर नीचे रखने से उनके द्वारा घिरा क्षेत्रफल (A) कम होगा जिससे तख्ते पर दाब बढ़ जाएगा और तख्ता नीचे की ओर झुक जाएगा।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 34.
भारी वाहनों के पहियों के टायर काफी चौड़ें क्यों बनाए जाते हैं।
उत्तर-
भारी वाहनों के टायर काफी चौड़े बनाना – भारी वाहनों के टायर चौड़े होने से क्षेत्रफल A अधिक हो जाता है तथा परिणामस्वरूप सड़क अथवा पृथ्वी पर लगने वाला दाब कम हो जाता है। इसीलिए वाहन के पहिये कम दाब के कारण सड़क में धंसने से बच जाते हैं।

प्रश्न 35.
नदी के जल की अपेक्षा समुद्र के जल में तैरना क्यों अधिक सुगम होता है ? ।
उत्तर-
नदी की अपेक्षा समुद्र में तैरना सुगम – नदी के जल का घनत्व, समुद्र (नमक घुला होने के कारण) के जल के घनत्व से कम होता है, इसलिए मनुष्य को समुद्र में तैरने के लिए जल का कम आयतन हटाना पड़ेगा (अर्थात् शरीर का कम भाग जल में डूबेगा) ; अत: मनुष्य का नदी के जल की अपेक्षा समुद्र के जल में तैरना अधिक सुगम होता है।

प्रश्न 36.
कएँ से जल खींचते समय जल से भरी बाल्टी जल की सतह से ऊपर आने पर धीरे-धीरे भारी क्यों प्रतीत होने लगती है ?
उत्तर-
जब बाल्टी जल में डूबी होती है, तब उस पर उसके द्वारा हटाए गए जल के भार के बराबर उत्प्लावन बल लगता है जिस कारण बाल्टी वास्तविक भार की अपेक्षा कम भारी प्रतीत होती है। जैसे-जैसे बाल्टी को जल से बाहर निकालते हैं, उस पर लगने वाले उत्प्लावन बल कम होने लगता है और बाल्टी भारी लगने लगती है।

प्रश्न 37.
समान बल लगाने से मोटी कील की अपेक्षा नुकीली कील, दीवार में शीघ्र क्यों घुस जाती है ?
उत्तर-
मोटी तथा नुकीली कीलों पर दाब – नुकीली कील के सिरे का क्षेत्रफल, मोटी कील के सिरे के क्षेत्रफल की अपेक्षा बहुत कम होता है। अतः दोनों कीलों पर एक-समान बल लगाने से नुकीली कील द्वारा दीवार पर मोटी कील की अपेक्षा अधिक दाब (P = F / A) लगाता है, जिससे नुकीली कील दीवार में आसानी से घुस जाती है।

महत्त्वपूर्ण सूत्र (Important Formulae)

1. F = G\(\frac{\mathrm{Mm}}{\mathrm{R}^{2}}\)
2. F = mg
3. g = G\(\frac{\mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\)
4. v = u + gt
5. v2 = u2 + 2gh
6. h = ut + \(\frac {1}{2}\)gt2
7. gm = \(\frac {1}{6}\)ge
(gm = चंद्रमा पर त्वरण, ge = पृथ्वी पर त्वरण)

आवश्यक आंकड़े-
पृथ्वी
द्रव्यमान = 6 × 1024 Kg
अर्ध-व्यास = 6.4 × 106 m (6400 Km)
सूर्य से दूरी = 1.5 × 1011 m
चंद्रमा
द्रव्यमान = 7.3 × 1022 Kg

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संख्यात्मक प्रश्न (Numerical Problems)

प्रश्न 1.
1 Kg द्रव्यमान वाले दो गोलों में दूरी 3m है। उनमें गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करो। ज्ञात है G = 6.67 × 10-11 Nm2/Kg2.
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 21
यहाँ m1 = m2 = 1 Kg
दोनों गोलों के बीच दूरी, (r) = 3m
सार्वत्रिक स्थिरांक, (G) = 6.67 × 10-11 Nm2/Kg2
हम जानते हैं कि F = G.\(\frac{m_{1} \times m_{2}}{r^{2}}\)
F = \(\frac{6.67 \times 10^{-11} \times 1 \times 1}{(3)^{2}}\)
= \(\frac{6.67 \times 10^{-11}}{9}\)N
F = 0.741 × 10-11 N
F = 7.41 × 10-12 N (लगभग)

प्रश्न 2.
बृहस्पति ग्रह का द्रव्यमान 1.9 × 1027 Kg और सूर्य का 1.99 × 1030 Kg है। दोनों के केंद्रों में 7.8 × 1011m दूरी है। सूर्य द्वारा बृहस्पति पर लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल कितना होगा?
हल :
बृहस्पति का द्रव्यमान, (m1) = 1.9 × 1027 Kg
सूर्य का द्रव्यमान, (m2) = 1.99 × 1030 Kg
बृहस्पति तथा सूर्य के बीच दूरी (r) = 7.8 × 1011 m
G = 6.67 × 10-11 N – m2/Kg2
हम जानते हैं कि F = G.\(\frac{m_{1} \cdot m_{2}}{r^{2}}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 22
= 4.1446 × 1024 N

प्रश्न 3.
चंद्रमा की त्रिज्या 1.7 × 106 m और इसका द्रव्यमान 7.35 × 1022 Kg है। चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय-स्वरण कितना है ? (ज्ञात है कि G = 6.67 × 10-11 N – m2/Kg2) .
हल :
चंद्रमा की त्रिज्या, (R) = 1.7 × 106 m
चंद्रमा का द्रव्यमान, (M) = 7.35 × 1022 Kg
G = 6.67 × 10-11 N-m2/Kg2
हम जानते हैं कि, चंद्रमा पर गुरुत्वीय-त्वरण
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 23
= 1.69m/s2 (लगभग)
= 1.70m/s2

प्रश्न 4.
वस्तु के भार में प्रतिशत परिवर्तन बताएं जब इसको भू-मध्य रेखा से ध्रुवों तक ले जाया जाता है। ध्रुव त्रिज्या 6357 कि०मी० है और भू-मध्य रेखीय त्रिज्या 6378 कि०मी० है।
हल :
ध्रुवीय अर्ध-व्यास , (r) = 6357 Km
भूमध्य रेखीय अर्ध-व्यास, (R) = 6378 Km
∴ h = R – r
⇒ h = 6378 – 6357
h = 21 Km
R = 6400 Km (लगभग)
हम जानते हैं कि
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 24
= \(\frac{2 h}{\mathrm{R}}\) x 100
= \(\frac{2 \times 21 \times 100}{6400}\)
= \(\frac{42}{64}\)
= 0.656
= 0.7% (लगभग)

प्रश्न 5.
पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा द्वारा लग रहे गुरुत्वाकर्षण बलों की तुलना करो। कौन अधिक बल लगाता है और कितना ?
हल :
पृथ्वी का द्रव्यमान, (Me) = 6 × 1024 Kg
चंद्रमा का द्रव्यमान, (Mm) = 7.3 × 1022 Kg
सूर्य का द्रव्यमान, (Ms) = 2 × 1030 Kg
पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी (Rem) = 3.84 × 108 m
पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी (Res) = 1.5 × 1011 m
पृथ्वी और चंद्रमा के बीच गुरुत्वीय बल Fem = G\(\frac{\mathrm{M} e \times \mathrm{M}_{s}}{\mathrm{R}_{e m}^{2}}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 25
= 179.97
= 180 (लगभग)
∴ सूर्य पर अधिक गुरुत्वीय बल लगता है जो लगभग 180 गुणा अधिक होता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 6.
पृथ्वी की सतह से कितनी ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण का मान सतह ऊपर इसके मान से आधा होगा ? पृथ्वी की त्रिज्या ‘R’ मान लीजिए।
हल :
मान लो ‘h’ ऊंचाई है जो पृथ्वी की सतह से ऊपर है जहाँ g’ = \(\frac{g}{2}\) है, तो
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 26
√2 R = R + h
h = √2 R – R
h = R (√2 – 1)
= R (1.414- 1)
= R (0.414)
= (0.414 R

प्रश्न 7.
एक गेंद 40 मी० ऊँचे मीनार के शीर्ष-बिंदु से फेंकी जाती है। 20 मी० की दूरी तय करने के पश्चात् इसका वेग कितना होगा ? पृथ्वी से टकराने पर इसका वेग कितना होगा ?
हल :
(i) यहां (h) = 40 m
आरंभिक वेग, (u) = 0
गुरुत्वीय त्वरण (a) = g = 10m/s2
तय की गई दूरी (S) = 20m
हम जानते हैं कि υ2 – u2 = 2aS
υ2 – 0 = 2 × 10 × 20
υ2 = 400
υ = 20 m/s

(ii) यहां u = 0
a = g = 10
तय की गई दूरी (S) = 40 km
हम जानते हैं कि υ2 – u2 = 2aS
υ2 – 0 = 2 × 10 × 40
υ2 = 800
υ = \(\sqrt{800}\)
= \(\sqrt{400 \times 2}\)
υ = 20√2
अर्थात् पृथ्वी पर टकराते समय वेग = 20√2 m/s

प्रश्न 8.
पृथ्वी की सतह से कितनी ऊंचाई पर ‘g’ का मान पृथ्वी की सतह पर मान का 4% रह जाएगा? पृथ्वी की त्रिज्या = 6400 कि० मी० (Km) दी गई है।
हल :
मान लो पृथ्वी की सतह से ‘h’ दूरी पर (ऊँचाई) ‘g’ का मान पृथ्वी की सतह के मान का 4% हो जाता है।
अर्थात्
g’ = g का 4%
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 27
h = 4 R
h = 4 × 6400 Km [यहां R = 6400 Km]
h = 25600 Km

प्रश्न 9.
पृथ्वी के तल से कितनी ऊँचाई पर ‘g’ मान पृथ्वी के तल पर इसके मान का 50% होगा ? पृथ्वी की त्रिज्या 6400 कि० मी० (Km) दी गई है।
हल :
मान लो पृथ्वी की सतह से ‘h’ ऊँचाई पर ‘g’ का मान पृथ्वी की सतह के मान का 50% रह जाता है।
∴ g’ = g का 50%
g’ = \(\frac{50}{100}\) × g
= \(\frac {1}{2}\)g
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 28
R × 0.414 = h
6400 × 0.414 = h
h = 2649.6 Km

प्रश्न 10.
10 कि० ग्रा० और 25 कि० ग्राम के दो गोलों के केंद्रों के बीच की दूरी 5 मी० है। दोनों गोलों के बीच लगा गुरुत्वाकर्षण बल ज्ञात करो जबकि G = 6.7 × 10-11 Nm2/Kg2.
हल :
M1 = 10 कि० ग्रा०, M2 = 25 कि० ग्रा०
r = 5 मी०, G = 6.7 × 10-11 Nm2/Kg2
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम अनुसार
F = G\(\frac{\mathrm{M}_{1} \mathrm{M}_{2}}{r^{2}}\)
= \(\frac{6.7 \times 10^{-11} \times 10 \times 25}{(5)^{2}}\)N
F = 6.7 × 10-10N

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 11.
कल्पना कीजिए कि आप और आपके मित्र, प्रत्येक का द्रव्यमान 50 Kg है। मान लीजिए कि आप इस प्रकार खड़े हैं कि आप दोनों के गुरुत्व केंद्रों के बीच की दूरी 1 m है। अपने और अपने मित्र के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल की गणना कीजिए।
हल :
(i) आप और आपके मित्र का अलग-अलग द्रव्यमान M1 = M2 = 50 कि० ग्रा०
गुरुत्व केंद्रों के मध्य दूरी (r) = 1 मी०
G = 6.67 × 10-11 N – m2/kg2
F = ?
हम जानते हैं कि,
F = G\(\frac{\mathrm{M}_{1} \mathrm{M}_{2}}{r^{2}}\)
= \(\frac{6.7 \times 10^{-11} \times 50 \times 50}{(1)^{2}}\)
= 16.625 × 10-9N

प्रश्न 12.
यदि किसी वस्तु का भार 49N है तो इसका द्रव्यमान क्या होगा ?
हल :
वस्तु का भार, W = 49 N
g = 9.8ms-2
भार = द्रव्यमान × गुरुत्वीय त्वरण
W = m × g
49 = m × 9.8
m = \(\frac{49}{9.8}\)
= 5 Kg

प्रश्न 13.
एक वस्तु 50 m/s के वेग से लंबात्मक दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई। वस्तु कितने समय बाद अधिकतम ऊँचाई प्राप्त कर लेगी।
हल :
आरंभिक वेग. (u) == 50 m/s
गुरुत्वीय त्वरण (g) = -10m/s2
अधिकतम ऊँचाई पर अंतिम वेग, (υ) = 0
समय, (t) = ?
हम जानते हैं कि,
υ = u + gt
0 = 50 – 10 × t
10t = 50
t = \(\frac{50}{10}\)
t = 5s
इस तरह 5 सैकेंड बाद वस्तु अधिकतम ऊँचाई प्राप्त कर लेगी।

प्रश्न 14.
किसी पत्थर को छत के किनारे से गिराया गया। यदि वह 2m ऊँची खिड़की को 0.1 सैकेंड में पार करे तो खिड़की के ऊपरी किनारे से छत कितनी ऊपर है ?
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 29
खिड़की पार करने में तय हुई दूरी (S) = 2m
g = 9.8ms-2; t = 0.1s
अब पत्थर खिड़की के ऊपरी किनारे A तक पहुंचता है तो उसका वेग υ है
अब, S = ut + \(\frac {1}{2}\)gt2
2 = v × 0.1 × \(\frac {1}{2}\) × 9.8 × (0.1)2
2 = 0.1υ + 0.049
0.1υ = 1.951
υ = 1.951 × 10
= 19.51ms-1
यहां प्रारंभिक वेग u = 0
यह वेग पथ OA के लिए अंतिम वेग है।
इसलिए υ2 – u2 = 2gs
(19.51)2 – 02 = 2 × 9.8 × S
S = \(\frac{19.51 \times 19.51}{2 \times 9.8}\)
= 19.42m

प्रश्न 15.
यदि पृथ्वी पर आपका भार 60 Kg हो तो आपको पृथ्वी के केंद्र से कितनी दूर जाना पड़ेगा ताकि आपका भार 30 Kg रह जाए ?
हल :
मान लो पृथ्वी तल से h दूरी पर भार 30 Kg होता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 30
R + h = √2 R
h = √2 R – R
= ( √2 – 1) R
= (1.414- 1) R
= 0.414 × 6400 (∴ R = 6400 Km)
= 2649.9 Km

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 16.
70 kg द्रव्यमान के किसी मनुष्य का चन्द्रमा पर भार क्या होगा ? उसका पृथ्वी तथा चन्द्रमा पर द्रव्यमान क्या होगा ?
हल :
द्रव्यमान एक अचर राशि है, इसलिए मनुष्य का पृथ्वी तथा चांद दोनों पर द्रव्यमान समान होगा।
पृथ्वी पर मनुष्य का द्रव्यमान = 70 kg
चंद्रमा पर मनुष्य का द्रव्यमान = 70 kg
पृथ्वी पर मनुष्य का भार (W1) = ?
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण g = 9.8 m/s2
मनुष्य का चंद्रमा पर भार (W2) = ?
हम जानते हैं
= W1 = mg
= 70 × 9.8 = 686 N
अत: पृथ्वी पर मनुष्य का भार = 686 N
चंद्रमा पर मनुष्य का भार (W2) = \(\frac{1}{6}\) × पृथ्वी पर मनुष्य का भार
= \(\frac{W_{1}}{6}\)
= \(\frac{686 N}{6}\)
= 114.33 N

प्रश्न 17.
चंद्रमा के तल पर गुरुत्व प्रवेग का मान ज्ञात करो।
चंद्रमा का द्रव्यमान = 7.4 × 1022 kg
चंद्रमा का अर्ध-व्यास = 1740 km
और G = 6.673 × 10-11 Nm2 kg-2
हल : यहां G = 6.673 × 10-11 Nm2 kg-2
चंद्रमा का द्रव्यमान M = 7.4 × 1022 kg
चंद्रमा का अर्ध-व्यास, R = 1740000 m
g = \(\frac{\mathrm{GM}}{\mathrm{R}^{2}}\)
= \(\frac{6.673 \times 10^{-11} \times 7.4 \times 10^{22}}{1740000 \times 1740000}\)
= 1.63 मी० सै०-2

प्रश्न 18.
एक व्यक्ति का पृथ्वी पर भार 600 न्यूटन है। चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण, पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण का 1/6 है। यदि पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण 10 m/s2 है, तो चंद्रमा पर व्यक्ति का द्रव्यमान और भार क्या होंगे ?
हल :
मान लो व्यक्ति का द्रव्यमान m कि०ग्रा० है।
w = mg = 600 न्यूटन
m = \(\frac{600}{g}\)
= \(\frac{600}{10}\) = 60 किग्रा०
∴ वस्तुओं के द्रव्यमान गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ पर निर्भर नहीं करते। इसलिए पृथ्वी तथा चंद्रमा पर दोनों जगह व्यक्ति का द्रव्यमान 60 किग्रा होगा।
चंद्रमा पर व्यक्ति का भार w1 = \(\frac{1}{6}\) × mg
\(\frac{m g}{6}\)
\(\frac{1}{6}\) mg
= \(\frac{1}{6}\) × 60 × 10
= 100 न्यूटन उत्तर

प्रश्न 19.
पृथ्वी का द्रव्यमान 6 × 1024 kg है तथा चंद्रमा का द्रव्यमान 7.4 × 1022 kg है। यदि पृथ्वी तथा चंद्रमा के बीच की दूरी 3.84 × 105 km है तो पृथ्वी द्वारा चंद्रमा पर लगाए गए बल का परिकलन कीजिए।
G = 6.7 × 10-11 Nm2kg2
हल :
पृथ्वी का द्रव्यमान (M) = 6 × 1024 kg
चंद्रमा का द्रव्यमान (m) = 7.4 × 1022 kg
पृथ्वी तथा चंद्रमा के बीच की दूरी,
(d) = 3.84 × 105 km
= 3.84 × 105 × 1000 m
= 3.84 × 108 m
G = 6.7 × 10-11 N m2 kg-2
पर लगाया गया बल,
F = G\(\frac{\mathrm{M} \times m}{d^{2}}\)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 31
= 2.01 × 1020 N.
अतः पृथ्वी द्वारा चंद्रमा पर लगाया गया बल 2.01 × 1020 N है।

प्रश्न 20.
एक कार किसी कगार से गिर कर 0.5s में धरती पर आ गिरती है। परिकलन में सरलता के लिए g का मान 10 ms-2 लीजिए।
(i) धरती पर टकराते समय कार की चाल क्या होगी ?
(ii) 0.5s के दौरान इसकी औसत चाल क्या होगी ?
(ii) धरती से कगार कितनी ऊँचाई पर है ?
हल:
समय, t = 0.5 s
प्रारंभिक वेग, u = 0 m s-1
गुरुत्वीय त्वरण, g = 10 m s-2
कार का त्वरण, a = + 10 m s-2 (अधोमुखी दिशा)

(i) चाल υ = at
υ = 10 m s-2 × 0.5 s
= 5 m s-1

(ii) औसत चाल = \(\frac{u+v}{2}\)
= (0 ms-1 + 5ms-1)
= 2
= 2.5 ms-1

(iii) तय की गई दूरी S = 1/2 at2
= 1/2 × 10 ms-2 × (1/2 s)2
= 1/2 × 10 ms-2 × 1/4 s2
= 1.2 m
अतः
(i) धरती पर टकराते समय कार की चाल = 5 ms-1
(ii) 1/2 सेकंड के दौरान इसकी औसत चाल = 2.5 ms-1
(iii) धरती की सतह से कगार की ऊँचाई = 1.25 m

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 21.
एक वस्तु को ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका जाता है और यह 10 m की ऊँचाई तक पहुँचती है। परिकलन कीजिए
(i) वस्तु कितने वेग से ऊपर फेंकी गई तथा
(ii) वस्तु द्वारा उच्चतम बिंदु तक पहुंचने में लिया गया समय।
हल :
चली गई दूरी (S) = 10 m
अंतिम वेग (υ) = 0 ms-1
गुरुत्वीय त्वरण (g) = 9.8 ms-2
वस्तु का त्वरण (a) = – 9.8 ms-2 (ऊर्ध्वमुखी दिशा में फेंकने के कारण)

(i) υ2 = u2 + 2as
0 = u2 + 2 × (-9.8 ms-2) × 10 m
-u2 = – 2 × 9.8 × 10 m2s-2
u = \(\sqrt{196}\) ms-1
= 14 ms-1

(ii) υ = u + at
0 = 14 ms-1 – 9.8 ms-2 × t
t = 1.43 s.

प्रश्न 22.
पृथ्वी की सतह पर मापने पर एक वस्तु का भार 10 N आता है। चंद्रमा की सतह पर मापने पर इसका भार कितना होगा ?
उत्तर-
हमें ज्ञात है-
चंद्रमा पर वस्तु का भार=(1/6) × पृथ्वी पर इसका भार
अर्थात्,
Wm = \(\frac{\mathrm{W}_{e}}{6}\)
= \(\frac{10}{6}\)N
= 1.67 N.
अतएव चंद्रमा की सतह पर वस्तु का भार 1.67 N होगा।

प्रश्न 23.
एक लकड़ी का गुटका मेज़ पर रखा है। लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान 5 kg है तथा इसकी विमाएँ 40 cm × 20 cm × 10 cm हैं। लकड़ी के टुकड़े द्वारा मेज पर लगने वाले दाब को ज्ञात कीजिए, यदि इसकी निम्न विमाओं की सतह मेज़ पर रखी जाती हैं। (a) 20 cm × 10 cm और (b) 40 cm × 20 cm।
हल:
(i) लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान = 5 kg
विमाएं = 40 cm × 20 cm × 10 cm
यहाँ लकड़ी के गुटके का भार मेज़ की सतह पर प्रणोद लगाता है। चित्र (a)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 32
अर्थात्, प्रणोद (F’) = m × g
= 5 kg × 9.8 ms-2
= 49 N
सतह का क्षेत्रफल = लंबाई चौड़ाई
= 20 cm × 10 cm
= 200 cm2 = 0.02 cm2
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 33
= 2450 Nm-2

(ii) जब गुटके को 40 cm × 20 cm विमाओं की सतह चित्र (b) मेज़ पर रखी जाती है, यह मेज़ की सतह पर पहले जितना ही प्रणोद लगता है।
क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई
= 40 cm × 20 cm
= 800 cm2 = 0.08 m2
बल = PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 34 = \(\frac{49 \mathrm{~N}}{0.08 m^{2}}\) = 612.5 Nm-2
प्रश्न 24.
50 cm3 आयतन के लोहे के एक टुकड़े को कमानीदार तुला से लटकाकर जल में डुबोया जाता है। लोहे के टुकड़े द्वारा कमानी पर लगाए गए खिंचाव बल का मान न्यूटन में ज्ञात कीजिए।(लोहे का घनत्व = 7.6 × 103 kg/m3, जल का घनत्व = 1 × 103 kg/m3)
हल :
लोहे के टुकड़े का आयतन = 50 cm3
= 50 × 10-6 m3
लोहे के टुकड़े का द्रव्यमान = लोहे का घनत्व × आयतन
= (7.6 × 103 kg/m3) × (50 × 10-6 m3)
= 0.38 kg
अतः लोहे के टुकड़े का वायु में भार= 0.38 kg
मान लो जल में डुबोने पर लोहे के टुकड़े का भार = W Kg
∴ जल में डुबोने पर लोहे के टुकड़े के भार में कमी = (0.38 – W) kg
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 35
= 0.05
= 0.38 – W = 0.05
या W = 0.38 – 0.05 = 0.33 kg wt.
अतः लोहे के टुकड़े द्वारा कमानी पर लगाया गया खिंचाव बल
= 0.33 × g
= 0.33 × 10 = 3:3N

प्रश्न 25.
पानी में तैरते हुए किसी ठोस वस्तु का 4/5 भाग डूबा रहता है। वस्तु का घनत्व ज्ञात कीजिए। (पानी का घनत्व = 1000 kg/m3 है)
हल :
मान लो ठोस वस्तु का आयतन V तथा घनत्व d kg/m3 है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 36
∴ ठोस वस्तु का घनत्व (d) = \(\frac{4}{5}[latex] × 1000 = 800 kg/m3

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 26.
जल में किसी वस्तु के आयतन का 4/5 भाग डूब जाता है। उसी वस्तु को यदि 1.6 आपेक्षिक घनत्व वाले द्रव में तैराया जाए तो वस्तु का कितना भाग डूबेगा ?
हल :
मान लो वस्तु का आयतन V तथा घनत्व d है।
जल में तैराने पर, वस्तु द्वारा हटाए गए जल का भार = वस्तु का भार
[latex]\frac{4}{5}\)V × 1 × g = V × d × g …………. (1)
मान लो द्रव में वस्तु के आयतन का x भाग डूबता है; अत:
वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव का भार = वस्तु का भार
x V × 1.6 × g = V × d × g
समीकरण (1) तथा समीकरण (2) से,
\(\frac{4}{5}\)V × 1 × g = × V × 16 × g …………. (2)
अथवा x = \(\frac{4}{5 \times 1.6}=\frac{1}{2}\)
अतः द्रव में वस्तु के आयतन का आधा (\(\frac{1}{2}\)) भाग डूबेगा।

प्रश्न 27.
लकड़ी के एक टुकड़े का कुल भार 6 kg है। पानी में तैरते समय इसका 1/3 भाग पानी के भीतर रहता है। इस टुकड़े पर कितना भार रखने से वह पूरा डूबकर तैरेगा ?
हल :
मान लो लकड़ी के टुकड़े पर W भार रखने पर वह पानी में पूरा डूब जाता है। मान लो इसका आयतन V है। चूंकि तैरते समय टुकड़े के आयतन का 1/3 भाग पानी के भीतर रहता है, अत:
लकड़ी के टुकड़े का कुल भार = टुकड़े द्वारा हटाए गए जल का भार
अथवा
6 = \(\frac {1}{3}\)V × d × g …………… (1)
W kg भार और रख देने पर टुकड़ा पूरी तरह डूब जाता है, अत:
6 + W = V × d × g ……………… (2)
समीकरण (2) को समीकरण (1) से भाग देने पर,
\(\frac{6+W}{6}=\frac{3}{1}\)
अथवा 6 + W = 18
अतः लकड़ी के टुकड़े का भार W = 18 – 6 = 12 kg

प्रश्न 28.
कोई हैलीकॉप्टर किसी स्थिर नाव में फंसे हुए लोगों के लिए भोजन के पैकेट गिराने भेजा गया। यह 20 m की ऊँचाई पर 2 m/s के एक समान क्षैतिज वेग से चल रहा है। जब नाव का सबसे निकट वाला सिरा हैलीकॉप्टर के ठीक नीचे है तभी भोजन के पैकेट गिराए जाते हैं। यदि नाव 5 m लंबी है, तो क्या नाव में उपस्थित लोगों को पैकेट मिलेंगे ?
हल :
h = 20 मीटर, u = 2 मी०/से० g = 10 ms-2
ऊर्ध्वाधर रेंज R = 4\(\sqrt{2 h / g}\)
4\(\sqrt{\frac{2 \times 20}{10}}\) = 2√4
= 4 मीटर
नाव की लंबाई = 5 मी०
इसलिए नाव में बैठे आदमी भोजन के बंडल प्राप्त कर सकेंगे।

प्रश्न 29.
कोई गेंद एक 40 मी० ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराई गई। 20 मी० गिरने के पश्चात् इसका वेग कितना होगा ? पृथ्वी तल पर टकराते समय इसका वेग क्या होगा ?
हल :
h = 40 मी०, u = 0, a = 100 मी०/सैकंड2
तय की गयी दूरी (S) = 20 मी०, υ = ?
υ2 – u2 = 2gS
या u2 – (0)2 = 2 × 10 × 20
या υ2 = 400
या υ = 20 मी०/सेकंड

(ii) υ = ?, S = 40 मी
υ2 – u2 = 2aS
υ2 – (0)2 = 2 × 10 × 40
या υ2 = 800
या υ2 = \(\sqrt{800}=\sqrt{400 \times 2}\)
= 20√2 मी/सेकंड
∵ वस्तु नीचे गिराई गई
∴ v = – 20 ms-1

प्रश्न 30.
चांदी का आपेक्षिक घनत्व 10.8 है। पानी का घनत्व 103 kg m-3 है। S.I. मात्रक में चांदी का घनत्व क्या होगा ?
हल :
चांदी का आपेक्षिक घनत्व = 10.8
पानी का घनत्व = 103 kgm-3
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण 37
∴ चांदी का घनत्व = चांदी का आपेक्षिक घनत्व × पानी का घनत्व
= 10.8 × 103 kg m-3

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
सौर मण्डल में ग्रहों की सूर्य के इर्द-गिर्द घूर्णन गति किस कारण होती है ?
उत्तर-
उनके बीच परस्पर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण।

प्रश्न 2.
चंद्रमा का पृथ्वी के इर्द-गिर्द गति के पथ का आकार कैसा होता है ?
उत्तर-
अंडाकार आकृति जैसा।

प्रश्न 3.
दो वस्तुओं के मध्य परस्पर लग रहे आकर्षण बल को गणितीय रूप में लिखो।
उत्तर-
F = G\(\frac{m_{1} \times m_{2}}{r^{2}}\)

प्रश्न 4.
G का मान कितना है ?
उत्तर-
G = 6.67 × 10-11 N-m2/kg2.

प्रश्न 5.
एक बैंच पर बैठे दो विद्यार्थियों के मध्य परस्पर गुरुत्वाकर्षण बल लगता है, परंतु दोनों विद्यार्थी इस बल को अनुभव नहीं करते। क्यों ?
उत्तर-
हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल F = G\(\frac{m_{1} \times m_{2}}{r^{2}}\) । यहां G का मान बहुत कम होता है जिस कारण यह बल बहुत कम होता है तथा अनुभव नहीं किया जाता।

प्रश्न 6.
पृथ्वी की सतह पर ‘g’ का मान कितना होता है ?
उत्तर-
पृथ्वी की सतह पर ‘g’ का मान अधिकतम होता है अर्थात् g = 9.81 m/s2

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 7.
क्या ‘g’ का मान ऋणात्मक हो सकता है ?
उत्तर-
जब वस्तु को ऊपर की ओर फेंका जाता है तो ‘g’ का मान कम होता है। इसलिए ‘g’ को ऋणात्मक लिया जाता है।

प्रश्न 8.
प्रक्षेप्य या प्रोजैक्टाइल का गति पथ कैसा होता है ?
उत्तर-
प्रक्षेप्य का गतिपथ पैराबोलिक पथ होता है।

प्रश्न 9.
किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
द्रव्यमान।

प्रश्न 10.
द्रव्यमान की SI इकाई क्या है ?
उत्तर-
किलोग्राम।

प्रश्न 11.
पृथ्वी के किस भाग में यह शून्य होता है?
उत्तर-
पृथ्वी के केंद्र पर।

प्रश्न 12.
द्रव्यमान तथा भार में से कौन-सी राशि अदिश या स्केलर है?
उत्तर-
द्रव्यमान।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 13.
भार की SI इकाई क्या है ?
उत्तर-
न्यूटन (N)।

प्रश्न 14.
भार कैसी राशि है-अदिश या सदिश ?
उत्तर-
भार एक बल है, इसलिए यह वैक्टर (सदिश राशि) है।

प्रश्न 15.
यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान पृथ्वी पर 30 kg है तो बताओ चंद्रमा की सतह पर उसका द्रव्यमान कितना होगा ?
उत्तर-
द्रव्यमान एक स्थिर राशि है इसलिए चंद्रमा की सतह पर वस्तु का द्रव्यमान 30 kg होगा।

प्रश्न 16.
किसी वस्तु का गुरुत्वीय प्रवेग का मान पृथ्वी के अर्ध-व्यास की आधी ऊंचाई पर कितना होता है ?
उत्तर-
यहां h = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
इसलिए
gh = ge × \(\frac{4}{9}\)
= 9.81 × \(\frac{4}{9}\)
= 4.36 m/s2

प्रश्न 17.
पृथ्वी के केंद्र पर ‘g’ का मान कितना होता है ?
उत्तर-
पृथ्वी के केंद्र पर g = 0।

प्रश्न 18.
बताओ किसी वस्तु का भार कहाँ अधिक होगा-ध्रुव या भूमध्य रेखा पर ?
उत्तर-
ध्रुव पर वस्तु का भार अधिक होगा।

प्रश्न 19.
दो वस्तुओं के मध्य दूरी तीन गुणा करने पर गुरुत्वीय बल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर-
पहले से \(\frac {1}{9}\) वाँ भाग रह जाएगा।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

PSEB 10th Class Science Guide आनुवंशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफ़ेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है, लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी –
(a) TTWW
(b) TTww
(c) Tt ww
(c) Tt Ww.
उत्तर-
(c) TtWW.

प्रश्न 2.
समजात अंगों के उदाहरण हैं –
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किससे अधिक समानता है
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंज़ी
(c) मकड़ी
(d) जीवाणु।
उत्तर-
(a) चीन के विद्यार्थी।

प्रश्न 4.
एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चे के जनक ( माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
सभी बच्चों में अपने माता-पिता के लक्षण प्रकट होते हैं। माता-पिता से हल्के रंग की आँखों का बच्चों में आ जाना सहज स्वाभाविक है। इस अवस्था में तो आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है पर इसे हर बच्चे की अवस्था में प्रभावी नहीं कह सकते। यह अप्रभावी भी हो सकता है।

प्रश्न 5.
जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र परस्पर किस प्रकार संबंधित है ?
उत्तर-
जीवों में वर्गीकरण का अध्ययन उन में विद्यमान समानताओं और भेदों के आधार पर किया जाता है। उनमें समानता इसलिए प्रकट होती है कि वे किसी समान पूर्वज से उत्पन्न हुए हैं और उनमें भिन्नता विभिन्न प्रकार के पर्यावरणों में की जाने वाली अनुकूलता के कारण से है। उनमें बढ़ती जटिलता को जैव विकास के उत्तरोत्तर क्रमिक आधार पर स्थापित कर अंतर्संबंधों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 6.
समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर-
समजात अंग-पौधों और प्राणियों के वे अंग जिनकी आधारभूत रचना एक समान होती है पर उनके कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें समजात अंग कहते हैं। जैसे-पक्षियों के पंख, मनुष्य की भुजाएं, कुत्ते की अगली टांगें, मेंढक के अग्रपाद, गाय, घोड़े आदि के अग्रपाद। ये सभी अंग रचना के आधार पर एक समान हैं पर इनका जीवों में कार्य अलग-अलग है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 1
चित्र-समजात अंग समरूप अंग-जीवों के वे अंग जो देखने में एक समान हों, पर उनकी रचना और कार्य भिन्न-भिन्न हों, उन्हें समरूप अंग कहते हैं; जैसे कीटों के पंख, पक्षियों के पंख, चमगादड़ के पंख। इन सभी जीवों में पंख देखने में एक-समान दिखाई देते हैं, परंतु उनकी रचना
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 2
कीट के पंख और कार्य भिन्न हैं। मटर, अंगूर आदि पौधों में प्रतान चित्र-समरूप अंग भी इसी के उदाहरण हैं।

प्रश्न 7.
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग पीढ़ी ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर-
काले रंग के नर और सफ़ेद रंग की मादा के संयोग से उत्पन्न यदि सारे पिल्ले युग्मक काले रंग के हों तो कुत्ते की खाल का प्रभावी
रंग काला ही होगा। तीन कुत्ते काले और एक  सभी काली त्वचा वाले लक्षण कुत्ता सफेद होगा। यह दर्शाता है कि काला रंग प्रभावी रंग है।
कुत्तों के अलग-अलग रंगों का कारण अविकल्पी जीनों की आपसी क्रिया के कारण होता है जिसमें F2 अनुपात 12 : 3 : 1 होता है। इसलिए शुद्ध नस्लों के बीच संकरण कराए बिना किसी सही-सटीक निर्णय तक नहीं पहुंचा जा सकता।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 3

प्रश्न 8.
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युगों पहले जो जीव ऐसे वातावरण में चले गए थे जहां उनका पूरा अपघटन नहीं हुआ था तो उनके शरीर की छाप चट्टानों पर सुरक्षित रह गई। वे परिरक्षित जीवाश्म ही जीवाश्म कहलाते हैं। जब जीवाश्मों की खुदाई से प्राप्ति की जाती है तो उनकी प्राप्ति की गहराई से पता लग जाता है कि वह लगभग कितना पुराना है। ‘फॉसिल डेटिंग’ इस काम में सहायक सिद्ध होती चित्र-जीवाश्मों से विकासीय संबंध है।

जो जीवाश्म जितनी अधिक गहराई से प्राप्त होगा वह उतना ही पुराना होगा। लगभग 10 करोड़ वर्ष पहले समुद्र तल में अकशेरुकी जीवों के जो जीवाश्म प्राप्त होते हैं वे सबसे पुराने हैं। इसके कुछ मिलियन वर्ष बाद जब डायनोसॉर मरे तो उनके जीवाश्म अकशेरुकी जीवों के जीवाश्मों से ऊपरी सतह में बने। इसके कुछ मिलियन वर्ष बाद जब घोड़े के समान जीव जीवाश्मों में बदले तो उन्हें डायनोसॉरों के जीवाश्मों से ऊपर स्थान मिला। इसी से उनका विकासीय संबंध स्थापित होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 4

प्रश्न 9.
किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है ?
उत्तर-
विभिन्न जातियों के विकासीय संबंधों का अध्ययन यही दर्शाता है कि जीवन की उत्पत्ति एक ही जाति से हुई है। एक ब्रिटिश वैज्ञानिक जे० बी० एस० हाल्डेन ने सबसे पहली बार सुझाव दिया था कि जीवों की उत्पत्ति उन अजैविक पदार्थों से हुई होगी जो पृथ्वी की उत्पत्ति के समय बने थे। सन् 1953 में स्टेनल एल० मिलर और हेराल्ड सी० डरे ने ऐसे कृत्रिम वातावरण का निर्माण किया था जो प्राचीन वातावरण के समान था। इस वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी। इसमें अमोनिया, मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड थे। उसमें एक पात्र में जल भी था जिसका तापमान 100°C से कम रखा गया था। जब गैसों के मिश्रण से चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं जो आकाशीय बिजलियों के समान थीं। मीथेन से 15% कार्बन सरल कार्बनिक यौगिक यौगिकों में बदल गए। इनमें एमीनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो प्रोटीन के अणुओं का निर्माण करते हैं। इसी आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है।

प्रश्न 10.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर-
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थाई होती हैं। अलैंगिक जनन एक ही जीव से होने के कारण केवल उसी के गण उसकी संतान में जाते हैं और वे बिना परिवर्तन हए पीढी दर पीढी समान ही रहते हैं। लैंगिक जनन नर और मादा के युग्मकों के संयोग से होता है जिनमें भिन्न-भिन्न जीन होने के कारण संकरण के समय विभिन्नता वाली संतान उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए सभी मानव युगों पहले अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे पर जब उनमें से अनेक ने अफ्रीका छोड़ दिया और धीरे-धीरे सारे संसार में फैल गए तो लैंगिक जनन से उत्पन्न विभिन्नताओं के कारण उनकी त्वचा का रंग, कद, आकार आदि में परिवर्तन आ गया।

प्रभावित करने के कारण/आधार-
I. लैंगिक जनन में DNA की प्रतिकृति में हुई त्रुटियों के कारण विभिन्नताएं उत्पन्न हो जाती हैं।
II. नर और मादा के क्रॉसिंग ओवर के समय समजात गुणसूत्रों के समान भाग आपस में बदल जाते हैं।
III. संतान को अपने माता-पिता से बराबर आनुवंशिक पदार्थ प्राप्त होता है जिसमें जीन परस्पर क्रिया कर अनेक नए विकल्पों को जन्म दे सकती है।
IV. संतान के लिंग और विभिन्नताएं सदा इस संयोग पर निर्भर करती हैं कि माता-पिता का कौन-सा मादा युग्मक नर शुक्राणु के साथ संयोजित होगा।

प्रश्न 11.
संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है ?
उत्तर-
प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्रों का एक जोड़ा होता है-एक नर से और दूसरा मादा से। जब युग्मक बनते हैं तो गुणसूत्रों के जोड़े से आधे-आधे गुणसूत्र उसे प्राप्त होते हैं। युग्मकों के संलयन से गुणसूत्र फिर से मिल जाते हैं। इसलिए संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवांशिक योगदान में बराबर की भागीदारी होती है। उदाहरणमनुष्य में 23 जोड़े अर्थात् 46 गुण सूत्र पाए जाते हैं। इनमें से 22 जोड़े अलिंगी गुण सूत्र और 23वां जोड़ा लिंगी गुण सूत्र कहलाता है। नर में XY गुण सूत्र और मादा में XX गुण सूत्र होते हैं। प्रजनन कोशिका के निरंतर विभाजन से ही जनन संभव हो पाता है। जब लैंगिक जनन की प्रक्रिया में संतति की रचना होती है तब नर और मादा उसे समान रूप से आनुवंशिक पदार्थ प्रदान करते हैं। इसी कारण संतति में नर और मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।

प्रश्न 12.
केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में । अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? क्यों एवं क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाँ, लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप जीव में अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं लेकिन वे सारी विभिन्नताएँ अपना अस्तित्व बनाकर नहीं रख पातीं। जीव के सामाजिक व्यवहार के कारण उन विभिन्नताओं में अंतर आ जाता है। यह संभव है कि सामाजिक जीव चींटी के अस्तित्व को उसकी विभिन्नता प्रभावित करे और वह जीवित न रह पाए लेकिन बाघ जैसे प्राणी के अस्तित्व को संभवतः वह प्रभावित न करे और उसका अस्तित्व बना रहे।

Science Guide for Class 10 PSEB जीव जनन कैसे करते हैं InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
यदि एक ‘लक्षण-A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण-B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न होगा?
उत्तर-
लक्षण-B’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है जो ‘लक्षण-A’ प्रजनन वाली समष्टि से 50% अधिक है इसलिए ‘लक्षण-B’ पहले उत्पन्न हुआ होगा।

प्रश्न 2.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है ?
उत्तर-
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता की संभावना बढ़ जाती है। प्राकृतिक चयन ही किसी स्पीशीज़ की उत्तरजीविता का आधार बनता है जो वातावरण में घटित होता है। समय के साथ उनमें जो प्रगति की प्रवृत्ति दिखाई देती है उसके साथ उन के शारीरिक अधिकल्प में जटिलता की वृद्धि भी हो जाती है। ऊष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं की अधिक गर्मी में बचने की संभावना अधिक होती है। पर्यावरण द्वारा उत्तम परिवर्तन का चयन जैव विकास प्रक्रम का आधार बनता है। विभिन्ताएँ प्राकृतिक वरण में सहायता देती हैं और विपरीत परिस्थितियों से जूझने में सहायक होती हैं। ये अनुकूलन को बढ़ावा देती हैं।

प्रश्न 3.
मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं ?
उत्तर-
जब मेंडल ने मटर के लंबे पौधे और बौने पौधे का संकरण कराया तो उसे प्रथम संतति पीढ़ी F, में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए थे। इसका अर्थ था कि दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया। उन दोनों का मिश्रित प्रमाण दिखाई नहीं दिया। उसने पैतृक पौधों और F2 पीढ़ी के पौधों को स्वपरागण से उगाया। इस दूसरी पीढ़ी F1 में सभी पौधे लंबे नहीं थे। इसमें एक चौथाई पौधे बौने थे। मेंडल ने लंबे पौधों के लक्षण को प्रभावी और बौने पौधों के लक्षण को अप्रभावी कहा।
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प्रश्न 4.
मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं ?
उत्तर-
मेंडल ने दो विभिन्न विकल्पों, लक्षणों वाले मटर के पौधों का चयन कर उनसे पौधे उगाए थे। लंबे पौधे तथा बौने पौधे का संकरण करा कर प्राप्त संतति में लंबे एवं बौने पौधों की गणना की। प्रथम संतति पीढ़ी (F1) में कोई पौधा बीच की ऊंचाई का नहीं था। सभी पौधे लंबे थे। दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया था लेकिन दूसरी पीढ़ी (F2) में सभी पौधे लंबे नहीं थे बल्कि उनमें से एक चौथाई बौने पौधे थे। इससे स्पष्ट हुआ कि किसी भी लक्षण के दो विकल्प लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न होने वाले जीवों में किसी भी लक्षण के दो विकल्प की स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होती है।

प्रश्न 5.
एक ‘A’- रुधिर वर्ग’ वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘0’ से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग ‘0’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आप से कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षणरुधिर वर्ग ‘A’ अथवा ‘0’ प्रभावी लक्षण है ? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर-
रुधिर समूह ‘O’ प्रभावी लक्षण है क्योंकि वह F-I पीढ़ी में रुधिर समूह ‘O’ प्रकट हुआ है। यह सूचना प्रभावी और प्रभावी लक्षण को प्रकट करने के लिए पर्याप्त है। रुधिर वर्ग-A (प्रतिजन-A) के लिए जीन प्रभावी हैं और जीन प्रारूप IA IA या IAi है। स्त्री का रुधिर वर्ग ‘O’ है इसलिए उसका जीन प्रारूप ‘ii’ समयुग्मी है। पुत्री के रुधिर वर्ग ‘O’ को क्रास से इस प्रकार दिखाया जा सकता है-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 6
रुधिर वर्ग ‘O’ उसी स्थिति में होता है जब रक्त में प्रतिजन A और प्रतिजन B नहीं होता।

प्रश्न 6.
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है ?
उत्तर-
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण-मानवों में लिंग का निर्धारण विशेष लिंग गुण सूत्रों के आधार पर होता है। नर में XY गुण सूत्र होते हैं और मादा में XX गुण सूत्र विद्यमान होते हैं। इससे स्पष्ट है कि मादा के पास Y गुण सूत्र होता ही नहीं है। जब नर-मादा के संयोग से संतान उत्पन्न होती है तो मादा किसी भी अवस्था में नर शिशु को उत्पन्न करने में समर्थ हो ही नहीं सकती क्योंकि नर शिशु में XY गुण सूत्र होने चाहिएँ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 9 आनुवंशिकता एवं जैव विकास 7
निषेचन क्रिया में यदि पुरुष का X लिंग गुण सूत्र स्त्री के X लिंग गुणसूत्र से मिलता है तो इससे XX जोड़ा बनेगा अतः संतान लड़की के रूप में होगी लेकिन जब पुरुष का Y लिंग गुण सूत्र स्त्री के X लिंग गुण सूत्र से मिलकर निषेचन करेगा तो XY बनेगा। इससे लड़के का जन्म होगा। किसी भी परिवार में लड़के या लड़की का जन्म पुरुष के गुण सूत्रों पर निर्भर करता है क्योंकि Y गुण सूत्र तो केवल उसी के पास होता है।
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प्रश्न 7.
वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है ?
उत्तर-
यदि जनसंख्या में परिवर्तन उत्पन्न होते हैं और वे परिवर्तन व्यष्टि की सुरक्षा एवं पोषण के प्रति अनुकूल प्राकृतिक अवस्थाएँ उपस्थित करते हैं तो विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है। प्राकृतिक प्रभेद चयन और आनुवंशिक अनुकूलता इस कार्य में विशेष सहयोग प्रदान करते हैं।

प्रश्न 8.
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते। क्यों ?
उत्तर-
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण उसकी जनन कोशिकाओं की जीन पर प्रभाव नहीं डालते इसलिए वे सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते।

प्रश्न 9.
बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्यों है ?
उत्तर-
बाघों में आनुवंशिक विभिन्नता लगभग नहीं के बराबर है। यदि अत्यंत तेजी से बदलती पर्यावरणीय स्थितियों में परिवर्तन नहीं आया तो वे सब नाटकीय रूप से समाप्त हो जाएंगे। उदाहरण के लिए-यदि किसी बाघ में किसी भयानक रोग का संक्रमण हो जाए तो सभी बाघ उसी से मर जाएँगे क्योंकि संक्रमण उनकी जीन की आवृत्ति को प्रभावित करेगा। बाघों की निरंतर घटती संख्या भी यही संकेत कर रही है कि पर्यावरण में आया परिवर्तन उनके लिए अनुकूल नहीं रहा है और वे शायद शीघ्र ही समाप्त हो जाएं।

प्रश्न 10.
वे कौन-से कारक हैं जो नई स्पीशीज़ के उद्भव में सहायक हैं ?
उत्तर-
नई स्पीशीज़ के उद्भव में निम्नलिखित कारक सहायक होते हैं –

  • आनुवंशिक अपवहन।
  • लिंगी प्रजनन के परिणामस्वरूप उत्पन्न उत्परिवर्तन।
  • दो उपसमष्टियों का एक-दूसरे से भौगोलिक पृथक्करण जिसके फलस्वरूप समिष्टियों के सदस्य परस्पर एकलिंगी प्रजनन नहीं कर पाते।
  • प्राकृतिक चयन।

प्रश्न 11.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है ? क्यों या क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाँ। विभिन्न भौगोलिक स्थितियों के कारण विभिन्न पौधों में भी भिन्नताएँ होंगी। लक्षण दो प्रकार के होते हैं-जननकीय लक्षण और पर्यावरणीय लक्षण। स्वपरागित प्रजाति की जीन संरचना में कोई परिवर्तन न होने के कारण विभिन्नताएँ उत्पन्न नहीं होतीं पर पर्यावरणीय लक्षणों के कारण ये स्वयं को एक जाति के रूप में स्थापित कर लेती हैं।

प्रश्न 12.
क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
नहीं। अलैंगिक जनन वाले जीवों में पीढ़ियों तक विभिन्नता उत्पन्न नहीं होती। भौगोलिक पृथक्करण से अनेक पीढ़ियों तक उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि अति न्यून विभिन्नताएँ स्पीशीज़ के लिए पर्याप्त नहीं होंगी।

प्रश्न 13.
उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज़ के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं ?
उत्तर-
पक्षी, मेंढक, छिपकली, घोड़ा और मानव में चार पाद हैं और उन सभी की आधारभूत संरचना एक समान है चाहे वे सब प्राणी इनसे अलग-अलग काम लेते हैं। ऐसे समजात अभिलक्षणों से भिन्न दिखाई देने वाली अलग-अलग स्पीशीज़ के बीच विकासीय संबंध का निर्धारण करते हैं।

प्रश्न 14.
क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर-
तितली और चमगादड़ दोनों जीवों के पंख उड़ने का काम करते हैं पर इन्हें समजात अंग नहीं कहा जा सकता क्योंकि इनके पंखों की मूल रचना और उत्पत्ति एक समान नहीं होती चाहे इनके कार्य एक समान होते हैं। ये इनके समवृत्ति अंग हैं।

प्रश्न 15.
जीवाश्म क्या हैं ? वह जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर-
जीवाश्म- जीवों के चट्टानों में दबे अवशेषों को जीवाश्म कहते हैं। युगों पहले जिन जीवों का अपघटन नहीं हो सका था वे मिट्टी में मिल गए थे। उनके शरीर की छाप गीली मिट्टी पर रह गई थी और वह मिट्टी बाद में चट्टान में बदल गई थी। जीवाश्म पौधों या जंतुओं के अवशेष हैं।
इनसे निम्नलिखित जानकारियां प्राप्त होती हैं –
I. आज पाए जाने वाले जीवजंतुओं से पुरातन काल में पाए जाने वाले जीव-जंतु बहुत भिन्न थे।
II. पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ।
III. टैरिडोफाइट और जिम्नोस्पर्म से ऐन्जियोस्पर्म विकसित हुए।
IV. सरल जीवों से ही जटिल जीवों का विकास हुआ।
V. विभिन्न पौधों और जंतुओं के वर्गों के विकास क्रम का पता चलता है।
VI. मानव विकास की प्रक्रिया का पता चलता है।

प्रश्न 16.
क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं ?
उत्तर-
विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले मानवों की आकृति, आकार, रंग-रूप में भिन्नता वास्तव में आभासी है। इनकी भिन्नता का जैविक आधार तो है पर सभी मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं। उनमें किसी प्रकार का आनुवंशिक विचलन नहीं है। आनुवंशिक विचलन ही किसी स्पीशीज़ को दूसरे से भिन्न करता है।

प्रश्न 17.
विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
जब पृथ्वी पर जीवन का विकास हुआ था तब जीवाणु सबसे पहले बनने वाले जीव थे। युगों बाद वे अभी भी अपना अस्तित्व कायम रखे हुए हैं। उन्होंने पर्यावरण में आने वाले सभी परिवर्तनों को सफलतापूर्वक झेला है और उनके अनुसार अनुकूलन किया है इसलिए वे विस्तार के आधार पर पूर्ण रूप से सफ़ल और समर्थ हैं। इसी प्रकार मकड़ी, मछली तथा चिंपैंजी ने भी अपने-अपने जीवन को विपरीत परिस्थितियों में ढालने के लिए अनुकूलन किया है। इसलिए सभी का शारीरिक अधिकल्प उत्तम है। किसी को भी शारीरिक अधिकल्प निकृष्ट नहीं कहा जा सकता।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते हैं

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते हैं Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 8 जीव जनन कैसे करते हैं

PSEB 10th Class Science Guide जीव जनन कैसे करते हैं Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है।
(a) अमीबा
(b) यीस्ट
(c) प्लैज्मोडियम
(d) लेस्मानिया।
उत्तर-
(b) यीस्ट।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?
(a) अंडाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिका
(d) डिंबवाहिनी।
उत्तर-
(c) शुक्रवाहिका।

प्रश्न 3.
परागकोश में होते हैं
(a) बाह्यदल
(b) अंडाशय
(c) अंडप
(d) परागकण।
उत्तर-
(d) परागकण।

प्रश्न 4.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन का क्या लाभ है?
उत्तर-
लैंगिक जनन निम्नलिखित कारणों से अलैंगिक जनन की अपेक्षा लाभकारी है-

  • लैंगिक जनन में नर और मादा से प्राप्त होने वाले नर युग्मक और मादा युग्मक के निषेचन से लैंगिक जनन होता है चूंकि ये दो भिन्न प्राणियों से प्राप्त होते हैं इसलिए संतान विशेषताओं की विविधता को प्रकट करते हैं।
  • लैंगिक जनन से गुणसूत्रों के नए जोड़े बनते हैं। इससे विकासवाद की दिशा को नए आयाम प्राप्त होते हैं। इससे जीवों में श्रेष्ठ गुणों के उत्पन्न होने के अवसर बढ़ते हैं।

प्रश्न 5.
मानव में वृषण के क्या कार्य हैं ?
उत्तर-
वृषण के कार्य-वृषण में नर जनन-कोशिका शुक्राणु का निर्माण होता है। टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन से उत्पादन एवं स्रावण में वृषण की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

प्रश्न 6.
ऋतुस्राव क्यों होता है?
उत्तर-
यदि नारी शरीर में निषेचन नहीं हो, तो अंड कोशिका लगभग एक दिन तक जीवित रहती है। अंडाशय हर महीने एक अंड का मोचन करता है और निषेचित अंड की प्राप्ति हेतु गर्भाशय भी हर महीने तैयारी करता है। इसलिए इसकी अंत: भित्ति मांसल एवं स्पोंजी हो जाती है। यह अंड के निषेचन होने की अवस्था में उसके पोषण के लिए आवश्यक है। लेकिन निषेचन न होने की अवस्था में इस पर्त की भी आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए यह पर्त धीरे-धीरे टूट कर योनि मार्ग से रुधिर एवं म्यूकस के रूप में बाहर निकल जाती है। इस चक्र में लगभग एक मास का समय लगता है। इसे ऋतुस्राव अथवा रजोधर्म कहते हैं। इसकी अवधि लगभग 2 से 8 दिनों की होती है।

प्रश्न 7.
पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर-
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प्रश्न 8.
गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं? (P.S.E.B. March 2018, Set-I, II, III)
उत्तर-
बच्चों के जन्म को नियमित करने के लिए आवश्यक है कि मादा का निषेचन न हो। इसके लिए मुख्य गर्भ निरोधन विधियां निम्नलिखित हैं
(i) रासायनिक विधि-अनेक प्रकार के रासायनिक पदार्थ मादा निषेचन को रोक सकते हैं। स्त्रियों के स्वरा गर्भ-निरोधक गोलियां प्रयुक्त की जाती हैं। झाग की गोली, जैली, विभिन्न प्रकार की क्रीमें आदि यह कार्य करती हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते हैं 2
(ii) शल्य-पुरुषों में नसबंदी (Vasectomy) तथा स्त्रियों में भी नलबंदी (Tubectomy) के द्वारा निषेचन रोका जाता है। पुरुषों की शल्य चिकित्सा में शुक्र वाहिनियों को काटकर बांध दिया जाता है जिससे वृषण में बनने वाले शुक्राणु बाहर नहीं आ पाते। स्त्रियों में अंडवाहिनी को काटकर बाँध देते हैं जिससे अंडाशय में बने अंडे गर्भाशय में नहीं आ पाते।
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(iii) भौतिक विधि-विभिन्न भौतिक विधियों से शुक्राणुओं को स्त्री के गर्भाशय में जाने से रोक दिया जाता है। लैंगिक संपर्क में निरोध आदि युक्तियों का प्रयोग इसी के अंतर्गत आता है। गर्भधारण को रोकने के लिए लूप या कॉपर-टी (Copper-T) को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।

प्रश्न 9.
एक-कोशिक एवं बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?
उत्तर-
एक कोशिक प्रायः विखंडन, मुकुलन, पुनरुद्भवन, बहुखंडन आदि विधियों से जनन करते हैं। उनमें केवल एक ही कोशिका होती है। वे सरलता से कोशिका विभाजन के द्वारा तेज़ी से जनन कर सकते हैं। बहुकोशिक जीवों में जनन क्रिया जटिल होती है और यह मुख्य रूप से लैंगिक जनन क्रिया ही होती है।

प्रश्न 10.
जनन किसी स्पीशीज़ की समष्टि के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर-
किसी भी स्पीशीज़ की समष्टि के स्थायित्व में जनन और मृत्यु का बराबर का महत्त्व है। यदि जनन और मृत्यु दर में लगभग बराबरी की दर हो तो स्थायित्व बना रहता है। एक समष्टि में जन्म दर और मृत्यु दर ही उसके आधार का निर्धारण करते हैं।

प्रश्न 11.
गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं ?
उत्तर-
गर्भनिरोधक युक्तियाँ मुख्य रूप से अवांछित गर्भ रोकने के लिए ही अपनाई जाती हैं। इनसे बच्चों की आयु में अंतर बढ़ाने में भी सहयोग लिया जा सकता है। कंडोम के प्रयोग से एड्स, सुजाक, हिपेटाइटिस जैसे यौन संबंधी कुछ रोगों के संक्रमण से भी बचा जा सकता है।

Science Guide for Class 10 PSEB जीव जनन कैसे करते हैं InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
डी० एन० ए० प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है?
उत्तर-
प्रजनन में डी० एन० ए० प्रतिकृति प्राणी के अस्तित्व के लिए बहुत आवश्यक है। यह स्पीशीज़ में पाई जाने वाली विभिन्न विशेषताओं के अस्तित्व को बना कर रखने में सहायक है। डी० एन० ए० का प्रतिकृति पीढ़ियों तक गुणों को आगे लेकर चलती है। इससे शारीरिक डिज़ाइन में समता बनी रहती है पर नई विभिन्नताओं के कारण इसमें परिवर्तन आते रहते हैं। इससे प्राणी का अस्तित्व बना रहता है चाहे उसमें कुछ अंतर आ जाता है।

डी० एन० ए० आनुवंशिक गुणों का संदेश है जो जन्म से संतान को प्राप्त होता है। इसके केंद्रक में प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना विद्यमान होती है। सूचना के बदल जाने पर प्रोटीन भी बदल जाएगी जिस कारण शारीरिक अधिकल्प में भी विविधता उत्पन्न हो जाती है। डी० एन० ए० प्रतिकृति बनने के साथ-साथ दूसरी कोशिकीय संरचनाओं का सृजन भी होता है। जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण डी० एन० ए० की प्रतिकृति में कुछ विभिन्नता उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 2.
जीवों में विभिन्नता स्पीशीज़ के लिए तो लाभदायक है परंतु व्यष्टि के लिए आवश्यक नहीं है, क्यों?
उत्तर-
जीवों पर परितंत्र के स्थान पर निकेत का सीधा प्रभाव पड़ता है। किसी प्रजाति की समष्टि के स्थायित्व का संबंध जनन से है। जब निकेत में ऐसे परिवर्तन आ जाते हैं जो जीवों के नियंत्रण से बाहर होते हैं जो उग्र परिवर्तन दिखाई देते हैं। इनके परिणामस्वरूप समष्टि का समूल विनाश संभव होता है। यदि समष्टि के जीवों में कुछ विभिन्नता होगी तो उनके जीवित रहने की कुछ संभावना है। वैश्विक उष्मीकरण के कारण यदि जल का ताप अधिक बढ़ जाए तो शीतोष्ण जल में पाए जाने वाले जीवाणुओं का नाश हो जाएगा पर गर्मी को सहन कर सकने वाले जीवाणु जीवित रहेंगे और वृद्धि करेंगे। इसलिए विभिन्नताएँ स्पीशीज की उत्तर जीविता बनाए रखने में उपयोगी हैं। विभिन्नता स्पीशीज़ के लिए तो लाभदायक है पर व्यष्टि के लिए यह आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 3.
द्विखंडन बहुखंडन से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर-
द्विखंडन से कोई एक कोशिका दो छोटे और लगभग समान भागों में बंट जाती है। द्विखंडन एक निर्धारित तल से होता है। लेकिन बहुखंडन में एक कोशिक जीव एक साथ अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाते हैं। द्विखंडन में सिस्ट नहीं बनता लेकिन बहुखंडन में सिस्ट बनता है। अमीबा और पैरामीशियम में द्विखंडन होता है। काला ज़ार के रोगाणु लेसमानियाँ और मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम में बहुखंडन होता है।

प्रश्न 4.
बीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है?
उत्तर-
बीजाणु वृद्धि करके राइजोपस के नए जीव उत्पन्न करते हैं। बीजाणु के चारों ओर एक मोटी भित्ति होती है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में उसकी रक्षा करती है। इनमें उत्पन्न बीजाणुओं की संख्या अधिक होती है इसलिए उनके बचने की संभावना ज्यादा होती है। वे सरलता से विपरीत परिस्थितियों में पाए जा सकते हैं। नम सतह के संपर्क में आने पर वे वृद्धि करने लगते हैं।

प्रश्न 5.
क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते?
उत्तर-
जटिल संरचना वाले जीवों में जनन भी जटिल होता है। पुनरुद्भवन एक प्रकार से परिवर्धन है जिसमें जीव के गुणों में अंतर नहीं आता। यह जनन के समान नहीं है। जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन के द्वारा किसी भी भाग को काट कर सामान्यतः वैसा जीव उत्पन्न नहीं कर सकते। क्योंकि उन का शरीर अंगों और अंग तंत्रों में विभाजित होता है।

प्रश्न 6.
कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर–
प्रायः जो पौधे बीज उत्पन्न नहीं करते उनकी जड़, तना, पत्तियों आदि को उपयुक्त परिस्थितियों में विकसित करके नया पौधा प्राप्त कर लिया जाता है। प्रायः एकल पौधे इस क्षमता का उपयोग जनन-विधि के रूप में करते हैं। उन्हीं को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन किया जाता है।

प्रश्न 5.
DNA की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?
उत्तर-
जनन की प्रक्रिया से वैसी ही समरूप संतान की प्राप्ति की जाती है जैसे जन्म देने वाले हों। DNA की प्रतिकृति के परिणामस्वरूप ही वंशानुगत गुणों से युक्त संतान प्राप्त होती है। इसीलिए DNA की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक है। यह जीवन की निरंतरता को बनाए रखता है और जीवों में जाति विशेष के गुण बने रहते हैं।

प्रश्न 6.
परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर-
परागण क्रिया तथा निषेचन में अंतर  –

परागण (Pollination) निषेचन (Fertilization)
(1) वह क्रिया जिसमें परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, परागण कहलाती है। (1) वह क्रिया जिसमें नर युग्मक और मादा युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं, निषेचन कहलाती है।
(2) यह जनन क्रिया का प्रथम चरण है। (2) यह जनन क्रिया का दूसरा चरण है।
(3) परागण क्रिया दो प्रकार की होती है-स्व- परागण और पर-परागण। |(3) निषेचन क्रिया भी दो प्रकार की होती है-बाह्य निषेचन एवं आंतरिक निषेचन।
(4) परागकणों के स्थानांतरण के लिए वाहकों की होती। (4) इस क्रिया में वाहकों की कोई आवश्यकता नहीं आवश्यकता होती है।
(5) अनेक परागकणों का नुकसान होता है। (5) इसमें परागकणों का नुकसान नहीं होता।
(6) इस क्रिया में विशेष लक्षणों की आवश्यकता होती। (6) इस क्रिया में विशेष लक्षणों की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 7.
शक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भमिका है?
उत्तर-
शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि अपना स्राव शुक्र वाहिका में डालते हैं जिससे शुक्राणु एक तरल माध्यम में आ जाते हैं। इसके कारण इनका स्थानांतरण सरलता से होता है। साथ ही यह स्त्राव उन्हें पोषण भी प्रदान करता है।
शुक्राशय से स्रावित द्रव में फ्रुक्टोज, सिटरेट और अनेक प्रोटीन होते हैं। ये दोनों वीर्य की क्रमशः प्रतिशतता 60 : 30 में बनाते हैं। शुक्राशय योनि में संकुचन को उद्दीप्त करता है और प्रोस्टेट मूत्र की अम्लीयता को उदासीन करता है।

प्रश्न 8.
यौवनारंभ के समय लड़कियों में कौन-से परिवर्तन दिखाई देते हैं ?
उत्तर-
यौवनारंभ के समय लड़कियों में दिखाई देने वाले परिवर्तन

  • शरीर के कुछ नए भागों जैसे काँख और जाँघों के मध्य जननांगी क्षेत्र में बाल गुच्छ निकल आते हैं।
  • हाथ, पैर पर महीन रोम आ जाते हैं।
  • त्वचा तैलीय हो जाती है। कभी-कभी मुहाँसे निकल आते हैं।
  • वक्ष के आकार में वृद्धि होने लगती है।
  • स्तनाग्र की त्वचा का रंग गहरा भूरा होने लगता है।
  • रजोधर्म होने लगता है।
  • अंडाशय में अंड परिपक्व होने लगते हैं।
  • ध्वनि सुरीली हो जाती है।
  • विपरीत लिंग की ओर आकर्षण होने लगता है।

प्रश्न 9.
माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?
अथवा
माँ के गर्भ में पल रहा भ्रूण अपना पोषण कैसे प्राप्त करता है ? (P.S.E.B. March 2017, Set-II)
उत्तर-
गर्भस्थ भ्रूण को माँ के रुधिर से पोषण प्राप्त होता है। इसके लिए प्लेसेंटा की संरचना प्रकृति के द्वारा की गई है। यह एक तश्तरी नुमा संरचना है जो गर्भाशय की भित्ति में धंसी होती है। इसमें भ्रूण की ओर से ऊतक के प्रवर्ध होते हैं। माँ के ऊतकों में रक्त स्थान होते हैं जो प्रवर्ध को ढांपते हैं। ये माँ से भ्रूण को ग्लूकोज़, ऑक्सीजन और अन्य पदार्थ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 10.
यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है तो क्या यह उसकी यौन-संचरित रोगों से रक्षा करेगा?
उत्तर-
नहीं, कॉपर-T किसी भी अवस्था में महिला की यौन-संचरित रोगों से रक्षा नहीं करेगा।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

PSEB 10th Class Science Guide नियंत्रण एवं समन्वय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है ? (अ)इंसुलिन
(ब) थायरॉक्सिन
(स) एस्ट्रोजन
(द) साइटोकाइनिन।
उत्तर-
(द) साइटोकाइनिन।

प्रश्न 2.
दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं
(अ) द्रुमिका
(ब) सिनेप्स
(स) एक्जान
(द) आवेग।
उत्तर-
(ब) सिनेप्स।

प्रश्न 3.
मस्तिष्क उत्तरदायी है –
(अ)सोचने के लिए
(ब) हृदय स्पंदन के लिए
(स) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(द) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है ? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है ?
उत्तर-
पर्यावरण में प्रत्येक परिवर्तन की अनुक्रिया से एक समुचित गति उत्पन्न होती है जो हमारे आसपास होने की स्थिति में हमें प्रभावित करती है। हमारे शरीर के ग्राही उन सूचनाओं को इकट्ठा करते हैं और उन्हें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक भेज देते हैं। तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और सुष्मुना उचित संदेश शरीर के विभिन्न अंगों और ग्रंथियों को प्रेषित कर देते हैं। यदि ग्राही उचित प्रकार से कार्य न कर रहे हों तो वे पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को न तो समझ पाएंगे और न ही उनके प्रति ठीक प्रकार से कोई प्रतिक्रिया कर सकेंगे।

प्रश्न 5.
एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) संदेशों का संवहन करने वाली मूल इकाई है। यह विशेष रूप से लंबी होती है। इसमें जीव द्रव्य से घिरा हुआ केंद्रक होता है। जीव द्रव्य से डेंड्राइटस नामक अनेक छोटी-छोटी शाखाएँ निकलती हैं। इन शाखाओं में से एक शाखा अधिक लंबी होती है। इसे एक्सॉन कहते हैं। यह संदेशों को कोशिका से दूर ले
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 1
जाता है। कोई भी तंत्रिका कोशिका सीधी दूसरी तंत्रिका कोशिका से जुड़ी हुई नहीं होती। इनके बीच कुछ रिक्त स्थान होता है जिसमें बहुत-ही समीप का संवहन होता है इसे अंतर्ग्रथन कहते हैं। यदि हमारे पैर में दर्द है तो इसकी सूचना पैर में स्थित संवेदी तंत्रिका कोशिका के डेंड्राइट ग्रहण करते हैं। तंत्रिका कोशिका उसे विद्युत संकेत में बदल देती है। यह विद्युत संकेत तंत्रिकाक्ष के द्वारा प्रवाहित होता है। अंतर्ग्रथन में होता हुआ यह मस्तिष्क तक पहँचता है। मस्तिष्क संदेश ग्रहण कर उस पर अनुक्रिया करता है। प्रेरक तंत्रिका इस अनुक्रिया को पैर की पेशियों तक पहँचाती है और पैर की पेशियां उचित अनुक्रिया करती हैं।

तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) तीन प्रकार की हैं-

  • संवेदी तंत्रिकोशिका-शरीर के विभिन्न भागों से यह संवेदनाओं को मस्तिष्क की ओर ले जाती है।
  • प्रेरक तंत्रिकोशिका-यह मस्तिष्क से आदेशों को पेशियों तक पहुँचाती है।
  • बहुध्रुवी तंत्रिकोशिका-यह संवेदनाओं को मस्तिष्क की तरफ और मस्तिष्क से पेशियों की ओर ले जाने का कार्य करती है।

प्रश्न 6.
पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है ?
उत्तर-
पादप के प्ररोह तंत्र के द्वारा प्रकाश स्रोत की दिशा की ओर गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। प्ररोह तंत्र का प्रकाश के प्रति धनात्मक अनुवर्तन होता है। यदि किसी पादप को गमले में लगा कर इसे किसी अंधेरे कमरे में रख दें जिसमें प्रकाश किसी खिड़की या दरवाज़े की ओर से भीतर आता हो तो कुछ दिन के बाद प्ररोह का अग्रभाग स्वयं उसी दिशा में मुड़ जाता है जिस तरफ से प्रकाश कमरे में प्रवेश करता है। ऐसा इसलिए होता है कि प्ररोह शीर्ष केवल उसी दिशा में स्रावित होने वाले अधिक ऑक्सिन (Auxin) के प्रभाव से नष्ट हो जाता है जबकि विपरीत दिशा की तरफ हॉर्मोन उपस्थित रहता है। इस कारण प्ररोह प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 2

प्रश्न 7.
मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों को आने में व्यवधान होगा ?
उत्तर-
मेरुरज्जु आघात में प्रतिवर्ती क्रियाएँ तथा अनौच्छिक क्रियाओं के लिए आने वाले संकेतों में व्यवधान होगा। पर्यावरण की कोई भी सूचना आगत-निर्गत तंत्रिकाओं के बंडल से होती हुई मस्तिष्क में पहुँच जाएगी। वह तुरंत प्रभावित अंगों में न पहुँचकर मस्तिष्क के द्वारा उस अंग तक पहुँचेगी। ऐसा होने से अधिक देर लगेगी और तब तक अंग कुप्रभावित हो जाएगा।

प्रश्न 8.
पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है ?
उत्तर-
पादप में रासायनिक समन्वय-पादपों में रासायनिक समन्वय पादप हॉर्मोनों के कारण होता है। पादप विशिष्ट हॉर्मोनों को उत्पन्न करते हैं जो उसके विशेष भागों को प्रभावित करते हैं। पादपों में प्ररोह प्रकाश के आने की दिशा की ओर ही बढ़ता है। गुरुत्वानुवर्तन जड़ों को नीचे की ओर मुड़ कर अनुक्रिया करता है। इसी प्रकार जलानुवर्तन और रासायनावर्तन होता है। पराग नलिका का बीजांड की ओर वृद्धि करना रसायनानुवर्तन का उदाहरण है। विभिन्न पादप हॉर्मोन कोशिकाओं के द्वारा संश्लेषण के पश्चात् पौधे के अन्य भागों में विसरित हो कर उसे प्रभावित करते हैं। साइटोकाइनिन हॉर्मोन पौधों की जीर्णता को रोकते हैं। ऑक्सिन हार्मोन वृद्धि, अनुवर्तन गतियों, जड़ विभेदन आदि को नियंत्रित करते हैं। ऐब्सिसिक अम्ल वृद्धिरोधक पादप हॉर्मोन है। पत्तों का मुरझाना भी इसके प्रभावों में शामिल है।

प्रश्न 9.
एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
बहकोशकीय जीवों की संरचना बहुत जटिल होती है। उनके शरीर के विभिन्न बाहरी और भीतरी अंगों की विशिष्ट कार्यप्रणालियों और गतिविधियों में तालमेल की परम आवश्यकता होती है। अंगों के नियंत्रण और समन्वय के द्वारा ही उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव हो सकती है। जीवों की जटिल प्रकृति के कारण ही वे उन तंत्रों का उपयोग करते हैं जो नियंत्रण एवं समन्वय कार्य करते हैं। विशिष्टीकरण ऊतक का उपयोग नियंत्रण और समन्वय में सहायक सिद्ध होता है।

प्रश्न 10.
अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर-
प्रतिवर्ती क्रियाएं वे क्रियाएँ हैं जो बाहरी संवेदना के उत्तर में तुरंत और अपने-आप हो जाती हैं। इन पर मस्तिष्क का कोई नियंत्रण नहीं होता। ये मेरुरज्जु के द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। प्रतिवर्ती क्रियाएँ स्वायत्त प्रेरक के प्रत्युत्तर होती हैं। उदाहरण-रक्त दाब, हृदय स्पंदन दर, श्वास दर आदि। अनैच्छिक क्रियाएँ भी प्राणियों की इच्छा से चालित नहीं होतीं लेकिन इनका संचालन मध्यमस्तिष्क और पश्चमस्तिष्क के द्वारा किया जाता है। उदाहरण-गर्म धातु पर हाथ लगने से हाथ का हटना, पलक झपकना खाँसना इत्यादि।

प्रश्न 11.
जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (Contrast) कीजिए।
उत्तर –

तंत्रिका क्रिया विधि हॉर्मोन क्रिया विधि
(1) यह एक्सॉन के अंत में विद्युत् आवेग का परिणाम जो कुछ रसायनों का विमोचन कराता है। (1) यह रक्त के द्वारा भेजा गया रासायनिक संदेश है|
(2) सूचना अति तीव्रगति से आगे बढ़ती है। (2) सूचना धीरे-धीरे गति करती है।
(3) सूचना विशिष्ट एक या अनेक तंत्रों, कोशिकाओं, न्यूरानों आदि को प्राप्त होती है। (3) सूचना सारे शरीर को रक्त के माध्यम से प्राप्त हो जाती है जिसे कोई विशेष कोशिका या तंत्र स्वयं प्राप्त कर लेता है।
(4) इसे उत्तर शीघ्र प्राप्त हो जाता है। (4) इसे उत्तर प्रायः धीरे-धीरे प्राप्त होता है।
(5) इसका प्रभाव कम समय तक रहता है। (5) इसका प्रभाव प्रायः देर तक रहता है।

प्रश्न 12.
छुई-मुई पादप की गति तथा हमारी टांग में होने वाली गति के तरीके में क्या अंतर है ?
उत्तर-
छुई-मुई पादप स्पर्श करते ही पत्तियों को झुका कर या बंद कर संवेदनशीलता का परिचय दे देती है। पादप हॉर्मोन के प्रभाव के कारण पादप कोशिकाएं यह परिवर्तित कर देती हैं जबकि हमारी टांग में होने वाली ऐच्छिक क्रिया का परिणाम है जो अनुमस्तिष्क के द्वारा संचालित होती है। इसमें तंत्रिका नियंत्रण का सहयोग प्राप्त किया जाता है।

Science Guide for Class 10 PSEB नियंत्रण एवं समन्वय InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रतिवर्ती क्रिया और टहलने के बीच क्या अंतर है ?
उत्तर-
प्रतिवर्ती क्रिया मस्तिष्क की इच्छा के बिना होने वाली अनैच्छिक क्रिया है। यह स्वायत्त प्रेरक की प्रत्युत्तर है। यह बहुत स्पष्ट और यांत्रिक प्रकार की है। ये मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित पेशियों द्वारा कराई जाती है जो प्रेरक के प्रत्युत्तर में होती है जबकि ‘टहलना’ एक ऐच्छिक क्रिया है जो मनुष्य सोच-विचार कर ही करता है और इसका नियंत्रण मस्तिष्क द्वारा होता है। प्रतिवर्ती क्रिया में शरीर के केवल एक भाग प्रतिक्रिया करता है जबकि टहलने में पूरा शरीर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है।

प्रश्न 2.
दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है ?
उत्तर-
प्राणियों के शरीर में दो तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) एक-दूसरे के साथ जुड़कर श्रृंखला बनाते हैं और सूचना आगे प्रेषित करते हैं। सूचना एक तंत्रिका कोशिका के द्रुमाकृतिक सिरे द्वारा उपार्जित की जाती है और एक रासायनिक क्रिया के द्वारा एक विद्युत् आवेग उत्पन्न करती है। यह आवेग द्रुमिका से कोशिकाओं तक पहुँचता है और तंत्रिकाक्ष में होता हुआ इसके अंतिम सिरे तक पहुँच जाता है। तंत्रिकाक्ष के अंत में विद्युत् आवेग के द्वारा कुछ रसायनों को उत्पन्न कराया जाता है जो रिक्त स्थान (सिनेप्टिक दरार) को पार कर अपने से अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी प्रकार विद्युत आवेश को आरंभ कराते हैं। यह शरीर में तंत्रिका आवेग की मात्रा की सामान्य योजना है।

प्रश्न 3.
मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है ?
उत्तर-
अनुमस्तिष्क (cerebellum) शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है। यह प्रमस्तिष्क के पिछले भाग में नीचे की ओर स्थित होता है। यही ऐच्छिक पेशियों की गति को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 4.
हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं ?
उत्तर-
हमारी नाक में गंध ग्राही होते हैं। इनके संवेदी न्यूरान अगरबत्ती की गंध को ग्रहण हैं और अनुक्रिया को प्रेरकक्षेत्र तक पहुँचाते हैं। अग्र मस्तिष्क (Cerebrum) में ग्राही से संवेदी आवेग प्राप्त करने का क्षेत्र होता है जो सूंघने के लिए विशिष्टीकृत है। वही गंध का निर्णय लेकर अगरबत्ती की सुगंध का हमें अनुभव कराता है।

प्रश्न 5.
प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है ?
उत्तर-प्रतिवर्ती क्रियाएं मस्तिष्क के द्वारा परिचालित नहीं होतीं। ये मेरुरज्जु के द्वारा नियंत्रित पेशियों की अनैच्छिक क्रियाएं होती हैं जो प्रेरक के प्रत्युत्तर में होती हैं। ये क्रियाएं चाहे मस्तिष्क की इच्छा के बिना होती हैं पर मस्तिष्क तक इसकी सूचना पहुँचती है जहाँ सोचने-विचारने की प्रक्रिया होती है।

प्रश्न 6.
पादप हॉर्मोन क्या हैं ?
उत्तर-
पादप हॉर्मोन-वे विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ जो पौधों में वृद्धि और विभेदन संबंधी क्रियाओं पर नियंत्रण करते हैं उन्हें पादप हॉर्मोन कहते हैं।
पादप हॉर्मोन अनेक प्रकार के होते हैं, जैसे-ऑक्सिन (Auxins), इथाइलीन (Ethylene), जिब्बेरेलिन (Gibberllins), साइटोकाइनिन (Cytokinins), एबसिसिक अम्ल (Abscisic Acid)।

प्रश्न 7.
छुई-मुई की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर-
छुई-मुई पौधों पर प्रकाशानुवर्तन गति का प्रभाव पड़ता है। पौधे का प्ररोह बहुत धीमी गति से प्रकाश आने की दिशा में वृद्धि करते हैं लेकिन इसके पत्ते स्पर्श की अनुक्रिया के प्रति बहत अधिक संवेदनशील हैं। स्पर्श होने की सूचना इसके विभिन्न भागों को बहुत तेजी से प्राप्त हो जाती है। पादप इस सूचना को एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक संचारित करने के लिए वैद्युत-रसायन साधन का उपयोग करते हैं। उसमें सूचनाओं के चालन के लिए कोई विशिष्टीकृत ऊतक नहीं होते इसलिए वे जल की मात्रा में परिवर्तन करके अपने पत्तों को सिकुड़ कर उनका आकार बदल लेते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 3

प्रश्न 8.
एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर-
ऑक्सिन एक पादप हॉर्मोन है जो पौधों की वृद्धि को बढ़ाता है।

प्रश्न 9.
किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
जब वृद्धि करता पादप प्रकाश को संसूचित करता है तब ऑक्सिन नामक पादप हॉर्मोन प्ररोह के अग्रभाग में संश्लेषित होता है तथा कोशिकाओं की लंबाई में वृदधि करता है। जब पादप पर एक ओर से प्रकाश आ रहा होता है तब ऑक्सिन विसरित होकर प्ररोह के छाया वाले भाग में आ जाता है। प्ररोह की प्रकाश से दूर वाली दिशा में ऑक्सिन का सांद्रण कोशिकाओं को लंबाई में बढ़ने के लिए उद्दीप्त करता है और वह प्रतान की चित्र-प्रतान की स्पर्श के लिए संवेदनशीलता सहायता से किसी दूसरे पादप या बाड़ के ऊपर चढ़ता है। ये प्रतान स्पर्श के लिए संवेदनशील है। जब ये किसी आधार के संपर्क में आते हैं तो प्रतान का वह भाग तेजी से वृद्धि करता है जो वस्तु से दूर रहता है और वह वस्तु को चारों ओर से जकड़ लेता है।
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प्रश्न 10.
जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।
उत्तर-
लकड़ी का बना एक लंबा डिब्बा लो। इसमें मिट्टी और खाद का मिश्रण भरो। इसके एक सिरे पर एक पौधा लगाओ। डिब्बे में जड़ों की वृद्धि की दिशा पौधे की विपरीत दिशा में एक कीप मिट्टी में गाड़ दो। पौधे को उसी कीप के द्वारा प्रतिदिन | पानी दो। लगभग एक सप्ताह के बाद पौधे के निकट की मिट्टी हटा कर ध्यान से देखो। पौधे की जड़ों की वृद्धि उसी दिशा में दिखाई देगी जिस दिशा से कीप के द्वारा पौधे की सिंचाई की जाती थी।
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प्रश्न 11.
जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है ?
उत्तर-
जंतुओं में अंतःस्रावी ग्रंथियाँ विशेष रसायनों को उत्पन्न करती हैं। वे रसायन या हॉर्मोन जंतुओं को सूचनाएँ संचरित करने के साधन के रूप में प्रयुक्त होते हैं। अधिवृक्क ग्रंथि से स्रावित एड्रीनलीन हॉर्मोन सीधा रुधिर में स्रावित होता है और शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँच जाता है। ऊतकों में विशिष्ट गुण होते हैं जो अपने लिए आवश्यक हॉर्मोनों को पहचान कर उनका उपयोग बाहरी या भीतरी स्तर पर करते हैं। विशिष्टीकृत कार्यों को करने वाले अंगों से समन्वय कर वे हॉर्मोन अपना विशिष्ट प्रभाव दिखा देते हैं।

प्रश्न 12.
आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है ?
उत्तर-
अवटुग्रंथि को थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक होता है। हमारे शरीर में प्रोटीन और वसा के उपापचय को थॉयरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट नियंत्रित करता है। यह वृद्धि के संतुलन के लिए आवश्यक होता है। यदि हमारे भोजन में आयोडीन की कमी रहेगी तो हम गॉयटर से ग्रसित हो सकते हैं। इस बीमारी का लक्षण फूली हुई गर्दन या बाहर की ओर उभरे हुए नेत्र-गोलक हो सकते हैं। इस रोग से बचने तथा आयोडीन की शरीर में कमी दूर करने के लिए आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह दी जाती है।

प्रश्न 13.
जब एड्रीनलीन रुधिर में स्त्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है ?
उत्तर-
एड्रीनलीन को ‘आपात्काल हॉर्मोन’ भी कहते हैं। जब कोई व्यक्ति भय या तनाव की स्थिति में होता है तब शरीर स्वयं एड्रीनलीन हॉर्मोन को बड़ी मात्रा में स्रावित कर देता है ताकि व्यक्ति आपात्काल का सामना कर सके। इससे हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ताकि हमारी पेशियों को अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सके। पाचन तंत्र तथा त्वचा में रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है। इन अंगों की चोटी धमनियों के आसपास की पेशी सिकुड़ जाती है। यह रुधिर की दिशा हमारी कंकाल पेशियों की ओर कर देती है। डायाफ्राम तथा पसलियों की पेशी के संकुचन से साँस तेज़ चलने लगती है। ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर जंतु शरीर को स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती हैं।

प्रश्न 14.
मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है ?
उत्तर-
इंसुलिन (Insulin)-इंसुलिन वह हॉर्मोन है जो अग्नाशय में उत्पन्न होता है। यह रुधिर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता देता है। यदि यह उचित मात्रा में स्रावित नहीं होता तो रुधिर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है जिस कारण शरीर पर अनेक हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। इसीलिए मधुमेह के कुछ रोगियों को चिकित्सक इंसुलिन का इंजेक्शन देते हैं। इससे उनके रुधिर में शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

प्रश्न 1.
गुणनखंड विधि से निम्न द्विघात समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए:
(i) x2 – 3x – 10 = 0
(ii) 2x2 + x – 6 = 0
(iii) √2x2 + 7x + 5√2 = 0
(iv) 2x2 – x + \(\frac{1}{8}\) = 0
(v) 100x2 – 20x + 1 = 0
हल :
(i) दी गई द्विघात समीकरण है
x2 – 3x – 10 = 0
S = – 3, P = – 10
या x2 – 5x + 2x – 10 = 0
या x (x – 5) + 2 (x – 5) = 0
या (x – 5) (x + 2) = 0
अर्थात् x – 5 = 0 या x + 2 = 0
x = 5 या x = – 2
अतः, 5 और – 2 दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

(ii) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 + x – 6 = 0
S = 1, P = – 6 × 2 = – 12
या 2x2 + 4x – 3x – 6 = 0
या 2x (x + 2) – 3 (x + 2) = 0
या (x + 2) (2x – 3) = 0
अर्थात् x + 2 = 0 या 2x – 3 = 0
x = – 2 या x = \(\frac{3}{2}\)
अर्थात् – 2 और \(\frac{3}{2}\) में दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

(iii) दी गई समीकरण है :
√2x2 + 7x + 5√2 = 0
S = 7, P = √2 × 5√2 = 10
या √2x2 + 2x + 5x + 5√2 = 0
या √2x (x + √2) + 5 (x + √2) = 0
या (x + √2) (√2x + 5) = 0
अर्थात् x + √2 = 0 या √2x+ 5 = 0
x = – √2 या x = \(\frac{-5}{\sqrt{2}}\)
अतः, – √2 और \(\frac{-5}{\sqrt{2}}\) दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

(iv) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 – x + \(\frac{1}{8}\) = 0
या \(\frac{16 x^{2}-8 x+1}{8}\) = 0
या 16x2 – 8x + 1 = 0,
S = – 8, P = 16 × 1 = 16
या 16x2 – 4x – 4x + 1 = 0
या 4x (4x – 1) – 1 (4x – 1) = 0
या (4x – 1) (4x – 1) = 0
अर्थात् 4x – 1 = 0 या 4x – 1 = 0
x = \(\frac{1}{4}\) या x = \(\frac{1}{4}\)
अतः \(\frac{1}{4}\) और \(\frac{1}{4}\) दी गई समीकरण के मूल हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

(v) दी गई समीकरण है :
100x2 – 20x + 1 = 0
S = – 20, P = 100 × 1 = 100
या 100x2 – 10x – 10x + 1 = 0
या 10x (10x – 1) (10x – 1) = 0
या (10x – 1) (10x – 1) = 0
अर्थात् 10x – 1 = 0 या 10x – 1 = 0
x = \(\frac{1}{10}\) या x = \(\frac{1}{10}\)
अतः, \(\frac{1}{10}\) और \(\frac{1}{10}\) दी गई द्विघात समीकरण के मूल हैं।

प्रश्न 2.
उदाहरण 1 में दी गई समस्याओं को हल कीजिए। इस समस्याओं का कथन नीचे दिया गया है :
(i) जॉन और जीवंती दोनों के पास कुल मिलाकर 45 कंचे हैं। दोनों पाँच-पाँच कंचे खो देते हैं और अब उनके पास कंचों की संख्या का गुणनफल 124 है। हम जानना चाहेंगे कि आरंभ में उनके पास कितने कंचे थे ?

(ii) एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ खिलौने निर्मित करता है, प्रत्येक खिलौने का मूल्य(₹ में)55 में से एक दिन में निर्माण किए गए खिलौने की संख्या को घटाने से प्राप्त संख्या के बराबर है। किसी एक दिन, कुल निर्माण लागत ₹ 750 थी। हम उस दिन निर्माण किए गए खिलौनों की संख्या ज्ञात करना चाहेंगे।
हल :
(i) मान लीजिए जॉन के पास कंचों की संख्या थी = x
तब जीवंती के कंचों की संख्या थी = 45 – x
जॉन के पास, 5 कंचे खो देने के बाद बचे कंचों की संख्या = x – 5
जीवंती के पास, 5 कंचों को खो देने के बाद बचे, कंचों की संख्या = 45 – x – 5 = 40 – x
अतः, उनका गुणनफल = (x – 5) (40 – x)
= 40x – x2 – 200 + 5x
= – x2 + 45x – 200
प्रश्न अनुसार,
– x2 + 45x – 200 = 124
या – x2 + 45x – 324 = 0
S = – 45, P = 324
या x2 – 45x + 324 = 0
या x2 – 36x – 9x + 324 = 0
या x (x – 36) – 9 (x – 36) = 0
या (x – 36) (x – 9) = 0
अर्थात् x – 36 = 0 या x – 9 = 0
x = 36 या x = 9
∴ x = 36, 9
अतः, कंचों की संख्या जो उनके पास आरंभ में थी 136 और 9 या 9 और 36 है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

(ii) मान लीजिए उस दिन निर्मित खिलौनों की संख्या = x.
इसलिए, उस दिन प्रत्येक खिलौने की निर्माण लागत (रुपयों में) = 55 -x
अतः, उस दिन कुल निर्माण लागत (रुपयों में) = x (55 -x)
प्रश्न अनुसार,
x (55 – x) = 750 या
55x – x = 750
– x2 + 55x – 750 = 0
S = – 33, P = 750
x2 – 55x + 750 = 0 |
या x2 – 30x – 25x + 750 = 0
या x (x – 30) – 25 (x – 30) = 0
या (x – 30) (x – 25) = 0
अर्थात् x- 30 = 0 या x – 25 = 0
x = 30 या x = 25
∴ x = 30, 25
अतः, उस दिन निर्मित खिलौनों की संख्या 30 और 25 या 25 और 30 है। उत्तर

प्रश्न 3.
ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए, जिनका योग 27 हो और गुणनफल 182 हो।
हल :
मान लीजिए पहली संख्या = x
दूसरी संख्या = 27 – x
अतः, उनका गुणनफल = x (27 – x)
= 27x – x2
प्रश्न अनुसार,
27x – x2 = 182
x2 + 27x – 182 = 0
S = – 27, P = 182
या x2 – 27x + 182 = 0
या x2 – 13x – 14x + 182 = 0
या x (x – 13) – 14 (x – 13) = 0
या (x – 13) (x – 14) = 0
अर्थात् x – 13 = 0 या x – 14 = 0
x = 13 या x = 14
x = 13, 14
अतः, दो संख्याएँ 13 और 14 या 14 और 13 हैं।

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प्रश्न 4.
दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांक ज्ञात कीजिए जिनके वर्गों का योग 365 हो।
हल :
मान लीजिए पहला धनात्मक पूर्णांक = x
दूसरा धनात्मक पूर्णांक = x + 1
प्रश्न अनुसार,
(x)2 + (x + 1)2 = 365
x2 + x2 + 1 + 2x = 365
2x2 + 2x + 1 – 365 = 0
या 2x2 + 2x – 364 = 0
या x2 + x – 182 = 0
या x2 + 14x – 13x – 182 = 0
या x (x + 14) – 13 (x + 14) = 0
या (x + 14) (x – 13) = 0
अर्थात् x + 14 = 0 या X – 13 = 0
x = – 14 या x = 13
∵ हमें धनात्मक पूर्णांक चाहिए।
इसलिए x = – 14 संभव नहीं है।
∴ x = 13
∴ एक धनात्मक पूर्णांक = 13.
दूसरा धनात्मक पूर्णांक है = 13 + 1 = 14
अतः, दो अभीष्ट क्रमागत पूर्णांक 13 और 14 हैं।

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प्रश्न 5.
एक समकोण त्रिभुज की ऊँचाई इसके आधार से 7 cm कम है। यदि कर्ण 13 cm का हो, तो अन्य दो भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए समकोण त्रिभुज का आधार = x cm
इसलिए समकोण त्रिभुज की ऊँचाई (लंब) = (x – 7) cm
और समकोण त्रिभुज का कर्ण = 13 cm ……(दिया है)
पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार,
(आधार)2 + (लंब)2 = (कर्ण)2
(x)2 + (x – 7)2 = (13)2.
या x2 + x2 + 49 – 14x = 169
या 2x2 – 14x + 49 – 169 = 0
या 2x2 – 14x – 120 = 0
या 2 [x2 – 7x – 60] = 0
या x2 – 7x – 60 = 0
या x2 – 12x + 5x – 60 = 0
S = – 7, P = – 60
या x (x – 12) + 5 (x – 12) = 0
या (x – 12) (x + 5) = 0
अर्थात् x – 12 = 0 या x + 5 = 0
x = 12 या x = – 5
∵ त्रिभुज की लंबाई कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती। इसलिए हम x = – 5 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 12
अतः, समकोण त्रिभुज का आधार = 12 cm
समकोण त्रिभुज की ऊँचाई (लंब) = (12 – 7) cm = 5 cm

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प्रश्न 6.
एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ बर्तनों का निर्माण करता है। एक विशेष दिन यह देखा गया कि प्रत्येक नग की निर्माण लागत (रुपयों में) उस दिन के निर्माण किए बर्तनों की संख्या के दुगुने से 3 अधिक थी। यदि उस दिन की कुल निर्माण लागत ₹ 90 थी, तो निर्मित बर्तनों की संख्या और प्रत्येक नग की लागत ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए एक दिन में उद्योग द्वारा निर्मित बिर्तनों की संख्या = x प्
रत्येक नग की निर्माण लागत = ₹ (2x + 3)
∴ एक विशेष दिन की कुल निर्माण = ₹ [x (2x + 3)]
= ₹ (2x2 + 3x)
प्रश्न अनुसार,
2x2 + 3x = 90
S = 3, P = 2 × – 90 = – 180
या 2x2 + 3x – 90 = 0
या 2x2 – 12x + 15x – 90 = 0
या 2x (x – 6) + 15 (x – 6) = 0
या (x – 6) (2x + 15) = 0
अर्थात् – 6 = 0 या 2x + 15 = 0
x = 6 या x = – \(\frac{15}{2}\)
∵ नगों की संख्या ऋणात्मक नहीं हो सकती। इसलिए हम x = – \(\frac{15}{2}\) को छोड़ देते हैं। |
∴ x = 6
∴ अतः विशेष दिन निर्मित नगों की संख्या = 6
और प्रत्येक नग की निर्माण लागत = ₹ [2 × 6 + 3] = ₹ 15

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

प्रश्न 1.
जाँच कीजिए कि क्या निम्न द्विघात समीकरण
हैं :
(i) (x + 1)2 = 2 (x – 3)
(ii) x2 – 2x = (-2) (3 – x)
(iii) (x – 2) (x + 1) = (x – 1) (x + 3)
(iv) (x – 3) (2x + 1) = x (x + 5)
(v) (2r – 1) (x – 3) = (x + 5) (x – 1)
(vi) x2 + 3x + 1 = (x – 2)2
(vii) (x + 2)2 = 2x (x2 – 1)
(viii) x3 – 4x2 – x + 1 = (x – 2)3
हल :
(i) दिया है कि
(x + 1)2 = 2 (x – 3)
या x2 + 1 + 2x = 2x – 6
या x2 + 1 + 2x – 2x + 6 = 0
या x2 + 7 = 0
या x2 + 0x + 7 = 0
जोकि ax2 + bx + c = 0;
(a ≠ 0) के प्रकार का समीकरण है।
∴ यह एक द्विघात समीकरण है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

(ii) दिया है कि
(x + 1)2 = (- 2) (x – 3)
या x2 – 2x = – 6 + 2x
या x2 – 2x + 6 – 2x = 0
या x2 – 4x + 6 = 0
जोकि ax2 + bx + c = 0; (a ≠ 0) के प्रकार का है।
∴ यह एक द्विघात समीकरण है।

(iii) दिया है कि
(x – 2) (x + 1) = (x – 1) (x + 3)
या x2 + x – 2x – 2 = x2 + 3x – x – 3
या x2 – x – 2 = x2 + 2x – 3
या x2 – x – 2 – x2 – 2x + 3 = 0
या – 3x + 1 = 0,
जिसमें x2 का कोई पद नहीं है।
∴ यह एक द्विघात समीकरण नहीं है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

(iv) दिया है कि
(x – 3) (2x + 1) = x (x + 5)
या 2x2 + x – 6x – 3 = x2 + 5x
या 2x2 – 5x – 3 – x2 – 5x = 0
या x2 – 10x – 3 = 0
जोकि ax2 + bx + c = 0; (a ≠ 0) के प्रकार का है
∴ यह एक द्विघात समीकरण है। उत्तर

(v) दिया है कि
(2x – 1) (x – 3) = (x + 5) (x – 1)
या 2x2 – 6x – x + 3 = x2 – x + 5x – 5
या 2x2 – 7x + 3 = x + 4x – 5
या 2x2 – 7x + 3 – x2 – 4x + 5 = 0
या x2 – 11x + 8 = 0
जोकि ax2 + bx + c = 0; a ≠ 0 के प्रकार का है
∴ यह एक द्विघात समीकरण है।

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(vi) दिया है कि x2 + 3x + 1 = (x – 2)2
या x2 + 3x + 1 = x2 + 4 – 4x
या x2 + 3x + 1 – x2 – 4 + 4x = 0
या 7x – 3 = 0
जिसमें x2 का पद नहीं है
∴ यह एक द्विघात समीकरण नहीं है।

(vii) दिया है कि (x + 2)3 = 2x (x2 – 1)
या x3 + (2)3 + 3 (x)22 + 3 (x) (2)2 = 2x3 – 2x
या x3 + 8 + 6x2 + 12x = 2x3 – 2x
या x3 + 8 + 6x2 + 12x – 2x3 + 2x = 0
या – x3 + 6x2 + 14x – 8 = 0
यहाँ x की उच्चतम घात 3 है।
यह एक त्रिघात समीकरण है।
∴ यह एक द्विघात समीकरण नहीं है।

(viii) दिया है कि
x3 – 4x2 – x + 1 = (x – 2)3
या x3 – 4x2 – x + 1 = x3 – (2)3 + 3 (x)2 (-2) + 3 (x) (- 2)
या x3 – 4x2 – x + 1 = x3 – 8 – 6x2 + 12x
या x3 – 4x2 – x + 1 – x3 + 8 + 6x2 – 12x = 0
या 2x2 – 13x + 9 = 0
जोकि ax2 + bx + c = 0; (a ≠ 0) के प्रकार का समीकरण है।
∴ यह एक द्विघात समीकरण है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

प्रश्न 2.
निम्न स्थितियों को द्विघात समीकरणों के रूप में निरूपित कीजिए:
(i) एक आयताकर भूखंड का क्षेत्रफल 528 m2 है। क्षेत्र की लंबाई (मीटरों में) चौड़ाई के दुगुने से एक अधिक है। हमें भूखंड की लंबाई और चौड़ाई • ज्ञात करनी है।
(ii) दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल 306 है। हमें पूर्णांकों को ज्ञात करना है।
(iii) रोहन की माँ उससे 26 वर्ष बड़ी है। उनकी आयु (वर्षों में) का गुणनफल अब से तीन वर्ष पश्चात् 360 हो जाएगी। हमें रोहन की वर्तमान आयु ज्ञात करनी है।
(iv) एक रेलगाड़ी 480 km की दूरी समान चाल से तय करती है। यदि इसकी चाल 8 km/h कम होती, तो वह उसी दूरी को तय करने में 3 घंटे अधिक लेती। हमें रेलगाड़ी की चाल ज्ञात करनी है।
हल :
(i) मान लीजिए आयताकार भूखंड की चौड़ाई = x m
आयताकार भूखंड की चौड़ाई = (2x + 1) m
∴ आयताकार भूखंड का क्षेत्रफल = [x (2x + 1)] m2
= (2x2 + x) m2
प्रश्न अनुसार,
2x2 + x = 528
या 2x2 + x – 528 = 0
S = 1, P = – 528 × 2 = – 1056
या 2x2 – 32x + 33x – 528 = 0
या 2x (x – 16) + 33 (x – 16) = 0
या (x – 16) (2x + 33) = 0
अर्थात् x – 16 = 0 या 2x + 33 = 0
x = 16 या x = – \(\frac{33}{2}\)
∴ किसी आयताकार की चौड़ाई ऋणात्मक नहीं हो सकती, इसलिए हम x = – \(\frac{33}{2}\) को छोड़ देते हैं
∴ x = 16
अत: आयताकार भूखंड की चौड़ाई = 16 m .
आयताकार भूखंड की लंबाई = (2 × 16 + 1) m = 33 m
और दी गई समस्या द्विघात समीकरण के रूप में हैं
2x2 + x – 528 = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

(ii) मान लीजिए x और x + 1 दो क्रमागत घनात्मक पूर्णांक हैं। पूर्णांकों का गुणनफल = x (x + 1)
= x2 + x
प्रश्न अनुसार,
x2 + x= 306
या x2 + x – 306 = 0
S = 1, P = – 306
या x2 + 18x – 17x – 306 = 0
या x (x + 18) – 17 (x + 18) = 0
या (x + 18) (x – 17) = 0
अर्थात् x + 18 = 0 या x – 17 = 0
x = – 18 या x = 17
∴ हमने घनात्मक पूर्णांकों का अध्ययन करना है, इसलिए हम x = — 18 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 17
अतः, दो क्रमागत घनात्मक पूर्णांक हैं :
17, 17 + 1 = 18 और दी गई समस्या द्विघात समीकरण के रूप में है : x2 + x – 306 = 0

(iii) मान लीजिए रोहन की वर्तमान आयु = x वर्ष रोहन की माँ की आयु = (x + 26) वर्ष
3 वर्ष पश्चात्,
रोहन की आयु = (x + 3) वर्ष
रोहन की माँ की आयु = (x + 26 + 3) वर्ष = (x + 29) वर्ष
∴ उनका गुणनफल = (x + 3) (x + 29)
= x2 + 29x + 3x + 87
= x2 + 32x + 87
प्रश्न अनुसार,
x2 + 32x + 87 = 360
या x2 + 32x + 87 – 360 = 0
या x2 + 32x – 273 = 0
या x2 + 39x – 7x – 273 = 0
S = 32, P = – 273
या x (x + 39) – 7 (x + 39) = 0
या (x + 39) (x – 7) = 0
अर्थात् x + 39 = 0 या x – 7 = 0
x = – 39 या x = 7
∵ किसी व्यक्ति की आयु ऋणात्मक नहीं होती है इसलिए हम x = – 39 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 7 अत: रोहन की वर्तमान आयु = 7 वर्ष
और दी गई समस्या द्विघात समीकरण के रूप में हैं : x2 + 32x – 273 = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

(iv) मान लीजिए रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = x घंटे
रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = 480 km
रेलगाड़ी की चाल = तय की गई दूरी / लिया गया समय
= 480 / x km/hr
प्रश्न अनुसार,
अब रेलगाड़ी की चाल = (480 / x – 8) km/hr
रेलगाड़ी द्वारा लिया गया नया समय = (x + 3) घंटे
दूरी = 480 km
सूत्रक का उपयोग करने पर,
चाल = तय की गई दूरी / लिया गया समय
या (चाल) (समय) = दूरी
या (\(\frac{480}{x}\) – 8)(x + 3) = 480
या (\(\frac{480-8 x}{x}\)) (x + 3) = 480

\(\frac{480 x-8 x^{2}+1440-24 x}{x}\) = 480

\(\frac{-8 x^{2}+456 x+1440}{x}\) = 480

या – 8x2 + 456x + 1440 – 480x = 0
या – 8x2 – 24x + 1440 = 0
या – 8 [x2 + 3x – 180] = 0
या x2 + 3x – 180 = 0
या x2 + 15x – 12x – 180 = 0
या x (x + 15) – 12 (x + 15) = 0
या (x + 15) (x – 12) = 0
अर्थात् x + 15 = 0 या x – 12 = 0
x = – 15 या x = 12
∴ समय ऋणात्मक नहीं हो सकता। इसलिए हम x = – 15 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 12
अब, गाड़ी द्वारा लिया गया समय = 12 घंटे
रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = 480 km
रेलगाड़ी की चाल = (\(\frac{480}{12}\)) km/hr = 40 km/hr
अतः रेलगाड़ी की चाल 40 km/hr है और दी गई समस्या का द्विघात समीकरण रूप है :
x2 + 3x – 180 = 0

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 6 जैव प्रक्रम

PSEB 10th Class Science Guide जैव प्रक्रम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है
(a) पोषण
(b) श्वसन
(c) उत्सर्जन
(d) परिवहन।
उत्तर-
(c) उत्सर्जन।

प्रश्न 2.
पादप में जाइलम उत्तरदायी है –
(a) जल का वहन
(b) भोजन का वहन
(c) अमीनो अम्ल का वहन
(d) ऑक्सीजन का वहन।
उत्तर-
(a) जल का वहन।

प्रश्न 3.
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है –
(a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल
(b) क्लोरोफिल
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
पायसवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है-
(a) कोशिकाद्रव्य
(b) माइटोकाँड्रिया
(c) हरित लवक
(d) केंद्रक।
उत्तर-
(b) माइटोकाँड्रिया।

प्रश्न 5.
हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है ? यह प्रक्रम कहाँ होता है ?
उत्तर-
उदर से प्राप्त अम्लीय और अधपची वसा का पाचन क्षुद्रांत्र में होता है। यह भाग यकृत से पित्त रस प्राप्त करता है। इसे अग्नाशयी रस से लाइपेज़ प्राप्त हो जाता है। अग्नाशयिक एंजाइमों की क्रिया के लिए पित्त रस इसे क्षारीय बनाता है। क्षुद्रांत्र में वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में होता है जिस कारण उस पर एंजाइम का कार्य कठिन हो जाता है। पित्त लवण उन्हें छोटी-छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। अग्नाशय से प्राप्त होने वाले अग्नाशयिक रस में इमल्सीकृत वसा का पाचन करने के लिए लाइपेज़ एंजाइम होता है। क्षुद्रांत्र की भित्ति में ग्रंथि होती है जो आंत रस स्रावित करती है जो वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देती है।

प्रश्न 6.
भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
उत्तर-
लार का महत्त्व-भोजन के पाचन में लार की अति महत्त्वपूर्ण भूमिका है। लार एक रस है जो तीन जोड़ी लार ग्रंथियों से मुँह में उत्पन्न होता है। लार में एमिलेस नामक एक एंजाइम होता है जो मंड जटिल अणु को लार के साथ पूरी तरह मिला देता है।
लार के प्रमुख कार्य हैं-

  • यह मुख के खोल को साफ़ रखती है।
  • यह मुख खोल में चिकनाई पैदा करती है जिससे चबाते समय रगड़ कम होती है।
  • यह भोजन को चिकना एवं मुलायम बनाती है।
  • यह भोजन को पचाने में भी मदद करती है।

प्रश्न 7.
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं और उनके उपोत्पाद क्या हैं ?
उत्तर-
स्वपोषी पोषण के लिए प्रकाश-संश्लेषण आवश्यक है। हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल नामक वर्णक से CO2 और जल के द्वारा कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं। इस क्रिया में ऑक्सीजन गैस बाहर निकलती है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 1
स्वपोषी पोषण के आवश्यक परिस्थितियाँ हैं-सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड और जल। इसके उपोत्पाद पानी तथा ऑक्सीजन हैं।

प्रश्न 8.
वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।
उत्तर-
वायवीय (Aerobic Respiration) और अवायवीय (Anaerobic Respiration) में अंतर –

वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन
(1) वायवीय क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है। (1) अवायवीय क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।
(2) यह क्रिया कोशिका के जीव द्रव्य एवं माइटोकाँड्रिया दोनों में पूर्ण होती है। (2) यह क्रिया केवल जीव द्रव्य में ही पूर्ण होती है।
(3) इस क्रिया में ग्लूकोज़ का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। (3) इस क्रिया में ग्लूकोज़ का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।
(4) इस क्रिया से CO2 एवं H2O बनता है। (4) इस क्रिया में एल्कोहल एवं CO2 बनती है।
(5) इस क्रिया में ग्लूकोज़ के एक अणु में 38 ATP अणु मुक्त होते हैं। (5) इस क्रिया में ग्लूकोज़ के एक अणु में 2 ATP अणु मुक्त होते हैं।
(6) ग्लूकोज़ के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से 673 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है। (6) ग्लूकोज़ के अणु के अपूर्ण ऑक्सीकरण से 21 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है।
(7) इस क्रिया को निम्नलिखित समीकरण द्वारा दिखा सकते हैं-
C6H9O6 + 6O2, → 6CO2 + 6H2O + 673 kcal .
(7) इस क्रिया को निम्नलिखित समीकरण द्वारा दिखा सकते हैं –
C6H9O6 → 2C2H5OH + 2 CO2 +21 kcal

कुछ जीवों में अवायवीय श्वसन होता है, जैसे यीस्ट।

प्रश्न 9.
गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कृपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?
उत्तर-
श्वसन तंत्र में फुफ्फुस के अंदर अनेक छोटी-छोटी नलियों का विभाजित रूप होता है जो अंत में गुब्बारों जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं। यह एक सतह उपलब्ध करती हैं जिससे गैसों का विनिमय हो सके। यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग 80 वर्ग मीटर क्षेत्र को ढांप सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का बहुत विस्तृत जाल होता है। जब हम साँस अंदर लेते हैं तो पसलियाँ ऊपर उठ जाती हैं और हमारा डायाफ्राम चपटा हो जाता है जिससे वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है। इस कारण वायु फुफ्फुस के भीतर चूस ली जाती है। रक्त शरीर से लाई गई CO2 कूपिकाओं को दे देता है। कूपिका रक्त वाहिका का रक्त कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचा देती हैं।

प्रश्न 10.
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं ?
उत्तर-
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से रक्ताल्पता (anaemia) हो जाता है। हमें श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की प्राप्ति नहीं होगी जिस कारण हम शीघ्र थक जाएंगे। हमारा भार कम हो जाएगा। हमारा रंग पीला पड़ जाएगा। हम कमज़ोरी अनुभव करेंगे।

प्रश्न 11.
मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
हृदय दो भागों में बंटा होता है। इस का दायाँ और बायाँ भाग ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को आपस में मिलने से रोकने में उपयोगी सिद्ध होता है। इस तरह का बंटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति कराता है। जब एक ही चक्र में रुधिर दोबारा हृदय में जाता है तो उसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं। इसे इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है : ऑक्सीजन को प्राप्त कर रुधिर फुफ्फुस में आता है। इस रुधिर को प्राप्त करते समय हृदय में बायीं ओर स्थित कोष्ठ बायाँ आलिंद शिथिल रहता है। जब बायाँ निलय फैलता है, तब यह संकुचित होता है, जिससे रुधिर इसमें चला जाता है। अपनी बारी पर जब पेशीय बाँया निलय संकुचित होता है, तब रुधिर शरीर में पंपित हो जाता है। जब दायाँ अलिंद फैलता है तो शरीर से विऑक्सीजनित रुधिर इसमें आ जाता है।

जैसे ही दायाँ आलिंद संकुचित होता है, नीचे वाला दायों निलय फैल जाता है। यह रुधिर को दाएँ निलय में भेज देता है जो रुधिर को ऑक्सीजनीकरण के लिए फुफ्फुस में पंप कर देता है। आलिंद की अपेक्षा निलय की पेशीय भित्ति मोटी होती है क्योंकि निलय को पूरे शरीर में रुधिर भेजना होता है। जब आलिंद या निलय संकुचित होते हैं तो वाल्व उल्टी दिशा में रुधिर प्रवाह को रोकना सुनिश्चित करते हैं। दोहरे परिसंचरण का संबंध रक्त परिवहन से है। परिवहन के समय रक्त दो बार हृदय से गुज़रता है। अशुद्ध रक्त दायें निलय से फेफड़ों में जाता है और शुद्ध होकर बायें आलिंद के पास आता है। दायाँ निलय अशुद्ध रक्त ।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 2
शुद्ध होने के बाद रक्त दायें आलिंद से पूरे शरीर में चला जाता है और फिर अशुद्ध होकर बायें निलय में प्रवेश कर जाता है। इसे सिस्टेमिक परिसंचरण कहते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 3
द्विगुण परिसंचरण को निम्नलिखित चित्रों से स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 5
दोहरे परिसंचरण के कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त हो जाती है। उच्च ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे शरीर का उचित तापमान बना रहता है।

आवश्यकता का कारण-हमारे हृदय में चार कोष्ठक होते हैं। इसी से सारे अंगों को ऑक्सीजन युक्त रक्त की प्राप्ति संभव हो पाती है जिससे शरीर को ऊर्जा की प्राप्ति होती है और उसका तापमान बना रहता है।

प्रश्न 12.
जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?
उत्तर-
जाइलम निर्जीव ऊतक हैं। ये जड़ों से जल और घुले हुए लवणों को पत्तियों में पहुँचाते हैं। फ्लोएम सजीव ऊतक हैं। ये पत्तियों में तैयार शर्करा को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाते हैं। जाइलम ऊपर की तरह गति करने में सहायक होते हैं और फ्लोएम नीचे की ओर गति कराते हैं।

प्रश्न 13.
फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु ( नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि की तुलना कीजिए।
उत्तर –

फुस्फुस में कूपिकाएँ वृक्क में वृक्काणु ( नेफ्रॉन)
(1) मानव शरीर में विद्यमान दोनों फेफड़ों में बहुत अधिक संख्या में कूपिकाएँ होती हैं। (1) मानव शरीर में वृक्क संख्या में दो होते हैं। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख वृक्काणु होते हैं।
(2) प्रत्येक कूपिका प्याले के आकार जैसी होती है। (2) प्रत्येक वृक्काणु महीन धागे की आकृति जैसा
होता है।
(3) कूपिका दोहरी दीवार से निर्मित होती है। (3) वृक्काणु के एक सिरे पर प्याले के आकार की
मैल्पीघियन सम्पुट विद्यमान होती है।
(4) कूपिका की दोनों दीवारों के बीच रुधिर कोशिकाओं का सघन जाल बिछा रहता है। (4) बोमैन संपुट में रुधिर कोशिकाओं का गुच्छ उपस्थित होता है जिसे कोशिका गुच्छ कहते हैं।
(5) कूपिकाएँ वायु भरने पर फैल जाती हैं। (5) वृक्काणु में ऐसी क्रिया नहीं होती।
(6) यहाँ रुधिर की लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन प्राप्त कर लेती है तथा प्लाज्मा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कूपिका में चली जाती है। (6) कोशिका गुच्छ में रुधिर में उपस्थित वर्ण्य पदार्थ छन जाते हैं।
(7) कूपिकाओं में गैसीय आदान-प्रदान के बाद फेफड़े के संकुचन से कूपिकाओं में भरी वायु शरीर के बाहर निकल जाती है। (7) मूत्र निवाहिका से मूत्र बहकर मूत्राशय में इकट्ठा हो जाता है और वहाँ से मूत्रमार्ग द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है।

Science Guide for Class 10 PSEB जैव प्रक्रम InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?
उत्तर-
बहुकोशी जीवों में उनकी केवल बाहरी त्वचा की कोशिकाएं और रंध्र ही आस-पास के वातावरण से सीधे संबंधित होते हैं। उनकी सभी कोशिकाएं तथा भीतरी अंग सीधे अपने आस-पास के वातावरण से संबंधित नहीं रह सकते। वे ऑक्सीजन की अपनी आवश्यकता पूरी करने के लिए विसरण पर आश्रित नहीं रह सकते। श्वसन, गैसों के आदान-प्रदान तथा अन्य कार्यों के लिए विसरण बहुकोशी जीवों की आवश्यकता के लिए बहुत कम और धीमा है। यदि हमारे शरीर में विसरण के द्वारा ऑक्सीजन गति करती तो हमारे फुफ्फुस से ऑक्सीजन के एक अणु को पैर के अंगूठे तक पहुँचने में लगभग 3 वर्ष का समय लगता।

प्रश्न 2.
कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?
उत्तर-
सभी जीवित वस्तुएं सजीव कहलाती हैं। वे रूप-आकार, रंग आदि की दृष्टि से समान भी होते हैं तथा भिन्न भी। पशु गति करते हैं, बोलते हैं, साँस लेते हैं, खाते हैं, वंश वृद्धि करते हैं और उत्सर्जन करते हैं। पेड़-पौधे बोलते नहीं हैं, भागते-दौड़ते नहीं हैं पर फिर भी वे सजीव हैं। अति सूक्ष्म स्केल पर होने वाली उनकी गतियाँ दिखाई नहीं देतीं। अणुओं की गतियाँ न होने की अवस्था में वस्तु को निर्जीव माना जाता है। यदि वस्तु में अणुओं में गति हो तो वस्तु सजीव मानी जाती है। इसलिए कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए सबसे अधिक मापदण्ड गति है।

प्रश्न 3.
किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है ?
उत्तर-
किसी जीव के द्वारा जिन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, वे हैं

  • ऊर्जा प्राप्ति के लिए उचित पोषण।
  • श्वसन के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन।
  • भोजन के सही पाचन तथा अन्य जैविक प्रक्रियाओं के लिए जल।

प्रश्न 4.
जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे ?
उत्तर-
जीवन के अनुरक्षण के लिए जो प्रक्रमों आवश्यक माने जाने चाहिएं, वे हैं-पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन।

प्रश्न 5.
स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर हैं ?
उत्तर-
स्वयंपोषी पोषण और विषमपोषी (परपोषी) पोषण में अंतर –

स्वयंपोषी पोषण विषमपोषी पोषण
वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सरल   अकार्बनिक से जटिल कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करके अपना स्वयं पोषण करते हैं, स्वयंपोषी जीव (Autotrophs) कहलाते हैं। उदाहरण-सभी हरे पौधे, युग्लीना। वे जीव जो कार्बनिक पदार्थ और ऊर्जा को अपने भोज्य पदार्थ के रूप में अन्य जीवित या मृत पौधों या जंतुओं से ग्रहण करते हैं, विषमपोषी जीव (Heterotrophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-युग्लीना को छोड़कर सभी जंतु। अमरबेल, जीवाणु, कवक आदि।

प्रश्न 6.
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?
उत्तर-
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री कार्बन डाइऑक्साइड ऊर्जा, खनिज लवण तथा जल है। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण से प्राप्त करते हैं और जल भूमि ले।

प्रश्न 7.
हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?
उत्तर-
अमाशय की भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न होता है। यह अम्लीय माध्यम तैयार करता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया में सहायक होता है। यह भोजन को सड़ने से रोकता है। यह भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट कर देता है। भोजन में उपस्थित Ca को कोमल बनाता है। यह पाइलोरिक छिद्र के खुलने और बंद होने पर नियंत्रण रखता है। यह निष्क्रिय एंजाइमों (enzymes) को सक्रिय अवस्था में लाता है।

प्रश्न 8.
पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?
उत्तर-
एंजाइम वे जैव उत्प्रेरक होते हैं जो जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में खंडित करने में सहायता प्रदान करते हैं। ये पाचन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में सहायक बनते हैं। उदर में लाइपेज नामक एंजाइम वसा को वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में बदलता है। रेनिन नामक एंजाइम क्रिया कर पेप्सिन की सहायता करता है और इसमें दूध-प्रोटीन पर पेप्सिन की क्रिया अवधि बढ़ जाती है। पित्त रस भोजन के माध्यम को क्षारीय बनाकर वसा को

छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है और उनका इमल्सीकरण करता है। अग्न्याशय रस इमल्शन बने वसीय को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है। एमाइलेज भोजन के कार्बोहाइड्रेट को माल्टोज़ में बदल देता है। छोटी आंत की आंतरिक दीवारों से पैप्टिडेन, आंत्र लाइपेज़, सुक्रेज, माल्टोज़ और लेक्टोज़ निकलकर भोजन को पचने में सहायक बनते हैं। ये एंजाइम प्रोटीन को अमीनो अम्ल, जटिल कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज़ में तथा वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देते हैं।

प्रश्न 9.
पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
उत्तर-
पचे हुए भोजन को आंत्र की भित्ति अवशोषित कर लेती है। क्षुद्रांत्र के आंतरिक आस्तर पर अंगुली जैसे अनेक प्रवर्ध होते हैं, जिन्हें दीर्घ रोम कहते हैं। ये अवशोषण के सतही क्षेत्रफल को बढ़ा देते हैं। इनमें रुधिर वाहिकाओं की अधिकता होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। यहाँ इसका उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने, नए ऊतकों का निर्माण करने तथा पुराने ऊतकों की मरम्मत के लिए किया जाता है।

प्रश्न 10.
श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद हैं ?
उत्तर-
जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का श्वसन के लिए उपयोग करते हैं। जल में घुली हई ऑक्सीजन की मात्रा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है। इसलिए जलीय जीवों के श्वसन की दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा अधिक तेज़ होती है। मछलियाँ अपने मुँह के द्वारा जल लेती हैं और बलपूर्वक इसे क्लोम तक पहुँचाती हैं। वहाँ जल में घुली हुई ऑक्सीजन को रुधिर प्राप्त कर लेता है।

प्रश्न 11.
ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं ?
उत्तर-
श्वसन एक जटिल पर अति आवश्यक प्रक्रिया है। इसमें ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है तथा ऊर्जा मुक्त करने के लिए खाद्य का ऑक्सीकरण होता है।
C6H12O6 + 6O2, → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा श्वसन एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है। श्वसन क्रिया दो प्रकार की होती है

(क) वायवीय श्वसन (ऑक्सी श्वसन)-इस प्रकार के श्वसन में अधिकांश प्राणी ऑक्सीजन का उपयोग करके श्वसन करते हैं। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज़ पूरी तरह से कार्बन डाइऑक्साइड और जल में विखंडित हो जाता है। यह माइटोकाँड्रिया में होती है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 8

चूंकि यह प्रक्रिया वायु की उपस्थिति में होती है इसलिए इसे वायवीय श्वसन कहते हैं।

(ख) अवायवीय श्वसन (अनाक्सी श्वसन)-यह श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है। जीवाणु और यीस्ट इस क्रिया से श्वसन करते हैं। इस प्रक्रिया में इथाइल एल्कोहल, CO2 तथा ऊर्जा उत्पन्न होती है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 9

(ग) ऑक्सीजन की कमी हो जाने पर-कभी-कभी हमारी पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। पायरूवेट के विखंडन के लिए दूसरा रास्ता अपनाया जाता है। तब पायरूवेट एक अन्य तीन कार्बन वाले अणु लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है। इस के कारण क्रैम्प हो जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 10

प्रश्न 12.
मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर-
जब हम श्वास अंदर लेते हैं तब हमारी पसलियाँ ऊपर उठती हैं और डायाफ्राम चपटा हो जाता है। इस कारण वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है और वायु फुफ्फुस के भीतर चली जाती है। वह विस्तृत कृपिकाओं को भर लेती है। रुधिर सारे शरीर से CO, को कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कूपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है। श्वास चक्र के समय जब वायु अंदर और बाहर होती है तब फुफ्फुस वायु का अवशिष्ट आयतन रखते हैं। इससे ऑक्सीजन के अवशोषण और कार्बन डाइऑक्साइड के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 11

प्रश्न 13.
गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अधिकल्पित किया है?
उत्तर-
जब हम श्वास अंदर लेते हैं तब हमारी पसलियां ऊपर उठती हैं। वे बाहर की ओर झुक जाती हैं। इसी समय डायाफ्राम की पेशियां संकुचित तथा उदर पेशियां शिथिल हो जाती हैं। इससे वक्षीय गुहा का क्षेत्रफल बढ़ता है और साथ ही फुफ्फुस का क्षेत्रफल भी बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप श्वसन पथ से वायु अंदर आकर फेफड़े में भर जाती है।

प्रश्न 14.
मानव में वहन तंत्र के घटक कौन-से हैं ? इन घटकों के क्या कार्य हैं ?
उत्तर-
मानव में वहन तंत्र के प्रमुख घटक हैं-हृदय, धमनियाँ, शिराएँ, कोशिकाएँ, रुधिर, लसीका। इनके कार्य इस प्रकार हैं-

  1. हृदय (Heart)-एक पम्प होता है जो निरंतर सम्पूर्ण शरीर को रूधिर का परिसंचरण करता है।
  2. धमनियाँ (Arteries)-मोटी भित्ति वाली रुधिर वाहिकाएँ होती हैं जो हृदय के सभी अंगों को रक्त पहुँचाती हैं।
  3. शिराएँ (Veins)-पतली भित्ति वाली रुधिर वाहिकाएँ हैं जो रुधिर को शरीर के सभी भागों से हृदय में वापिस लाती हैं।
  4. कोशिकाएँ (Cappillaries)अत्यधिक पतली और संकीर्ण वाहिकाएँ हैं जो धमनियों को शिराओं से जोड़ती हैं।
  5. रुधिर (Bloods)-एक तरल संयोजी ऊतक है जो भोजन, ऑक्सीजन, अपशिष्ट पदार्थों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड तथा यूरिया), लवणों, एन्जाइमों तथा हार्मोनों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक ले जाता है।
  6. लसीका (Lymph)-एक तरल पदार्थ है जो निम्नलिखित कार्य करता है-
  • लसीका ऊतकों तक भोज्य पदार्थों का संवहन करती है।
  • ऊतकों से उत्सर्जी पदार्थों को एकत्रित करती है।
  • हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके शरीर की रक्षा करती है।
  • शरीर के घाव भरने में सहायक होती है।
  • पचे वसा का अवशोषण करके शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती है।

प्रश्न 15.
स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
स्तनधारी तथा पक्षियों में उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को हृदय के दायें और बायें भाग से आपस में मिलने से रोकना परम आवश्यक है। इस प्रकार का बंटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति करता है।

प्रश्न 16.
उच्च संगठित पादपों में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?
उत्तर-
उच्च संगठित पादपों में वहन तंत्र के घटक निम्नलिखित हैं –

  • जाइलम (Xylem)-यह पादप घटक पौधे की जड़ों से पत्तियों तक जल एवं खनिज लवणों का संवहन करता है।
  • फ्लोएम (Phloem)-यह पादप घटक प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पत्तियों में बने कार्बनिक भोजन पदार्थों तथा पादप हार्मोन्स (Plant hormones) को पौधे के अन्य भागों तक वहन करता है।

प्रश्न 17.
पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?
उत्तर-
पादप शरीर के निर्माण के लिए आवश्यक जल और खनिज लवणों को अपने निकट विद्यमान मिट्टी से प्राप्त करते हैं।
1. जल-हर प्राणी के लिए जल जीवन का आधार है। पौधों में जल जाइलम ऊतकों के द्वारा अन्य भागों में जाता है। जड़ों में धागे जैसी बारीक रचनाओं की बहुत बड़ी संख्या होती है। इन्हें मूलरोम कहते हैं। ये मिट्टी में उपस्थित पानी से सीधे संबंधित होते हैं। मूलरोम में जीव द्रव्य की सांद्रता मिट्टी में जल के घोल की अपेक्षा अधिक होती है। परासरण के कारण पानी मूलरोमों में चला जाता है पर इससे मूलरोम के जीव द्रव्य की सांद्रता में कमी आ जाती है और वह अगली कोशिका में चला जाता है। यह क्रम निरंतर चलता रहता है जिस कारण पानी ज़ाइलम वाहिकाओं में पहुँच जाता है। कुछ पौधों में पानी 10 से 100 सेमी० प्रति मिनट की गति से ऊपर चढ़ जाता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 12
2. खनिज-पेड़-पौधों को खनिजों की प्राप्ति वाष्पोत्सर्जन अजैविक रूप में करनी होती है। नाइट्रेट, फॉस्फेट आदि पानी में घुल जाते हैं और जड़ों के माध्यम से पौधों में प्रविष्ट हो जाते हैं। वे पानी के माध्यम से सीधा जड़ों से संपर्क में रहते हैं। पानी और खनिज मिल कर जाइलम ऊतक में पहुँच जाते हैं और वहाँ से शेष भागों में चले जाते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 12
जल तथा अन्य खनिज-लवण जाइलम के दो प्रकार के अवयवों वाहिनिकाओं एवं वाहिकाओं से जडों से पत्तियों तक पहुँचाए जाते हैं। ये दोनों मृत तथा स्थूल कोशिका भित्ति से युक्त होती हैं। वाहिनिकाएं लंबी, पतली, तुर्क सम कोशिकाएं हैं, जिनमें गर्त होते हैं। जल इन्हीं में से होकर एक वाहिनिका से दूसरी वाहिनिका में जाता है। पादपों के लिए वांछित खनिज, नाइट्रेट तथा फॉस्फेट अकार्बनिक लवणों के रूप में मूलरोम द्वारा घुलित अवस्था में अवशोषित कर जड़ में पहुँचाए जाते हैं। यही जड़ें जाइलम ऊतकों से उन्हें पत्तियों तक पहुंचाते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 13

प्रश्न 18.
पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?
उत्तर-
पादपों की पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण क्रिया से अपना भोजन तैयार करती हैं और वह वहाँ से पादप के अन्य भागों में भेजा जाता है। प्रकाश संश्लेषण के विलेय उत्पादों का वहन स्थानांतरण कहलाता है। यह कार्य संवहन ऊतक के फ्लोएम नामक भाग के द्वारा किया जाता है। फ्लोएम इस कार्य के अतिरिक्त अमीनो अम्ल तथा अन्य पदार्थों का परिवहन भी करता है। ये पदार्थ विशेष रूप से जड़ के भंडारण अंगों, फलों, बीजों और वृद्धि वाले अंगों में ले जाए जाते हैं। भोजन तथा अन्य पदार्थों का स्थानांतरण संलग्न साथी कोशिका की सहायता से चालनी नलिका में उपरिमुखी तथा अधोमुखी दोनों दिशाओं में होता है।

फ्लोएम से स्थानांतरण का कार्य जाइलम के विपरीत होता है। यह ऊर्जा के उपयोग से पूरा होता है। सुक्रोज़ जैसे पदार्थ फ्लोएम ऊतक में ए टी पी से प्राप्त ऊर्जा से ही स्थानांतरित होते हैं। यह दाब पदार्थों को फ्लोएम से उस ऊतक तक ले जाता है जहां दाब कम होता है। यह पादप की आवश्यकतानुसार पदार्थों का स्थानांतरण कराता है। वसंत ऋतु में यही जड़ और तने के ऊतकों में भंडारित शर्करा का स्थानांतरण कलिकाओं में कराता है जिसे वृद्धि के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 19.
वृक्काणु ( नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
वृक्काणु (नेफ्रॉन)-वृक्क (गुर्दे) में आधारी निस्यंदन एकक बहुत बारीक भित्ति वाली रुधिर कोशिका गुच्छ (ग्लामेरूलस) कोशिकाओं का गुच्छ होता है। वृक्क में प्रत्येक कोशिका बोमन संपुट / वृक्काणु का नलिका कार भाग गुच्छ एक नलिका के कप के आकार के सिरे के अंदर धमनी की होता है। यह नलिका छने हुए मूत्र को इकट्ठा करती वृक्क शिरा CECT है। हर वृक्क में ऐसे अनेक निस्यंदक एकक होते हैं जिन्हें वृक्काणु (नेफ्रॉन) कहते हैं। ये आपस में निकटता वृक्क धमनी से पैक रहते हैं।

आरंभ में ग्लुकोस, अमीनो अम्ल, संग्राहक वाहिनी लवण, जल आदि कुछ पदार्थ निस्पंद में रह जाते हैं पर जैसे-जैसे मूल इसमें प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित छनन हो जाता है वृक्काणु को डायलिसियस का थैला भी कहते हैं क्योंकि इसकी प्याले नुमा संरचना बाऊमैन संपुर में स्थिर कोशिका गुच्छ की दीवारों से छनता है। रक्त में उपस्थित प्रोटीन के अणु बड़े होने के चित्र-एक वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना कारण छन नहीं पाते हैं। ग्लूकोज़ और लवण के अणु छोटे होने के कारण छन जाते हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 14

प्रश्न 20.
उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं ?
उत्तर-
पादपों में उत्सर्जी उत्पाद हैं-कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, जलवाष्पों की अधिकता, तरह-तरह के लवण, रेज़िन, टेनिन, लैटक्स आदि। __ पादपों में उत्सर्जन के लिए कोई विशेष अंग नहीं होते। उनमें अपशिष्ट पदार्थ रवों के रूप में इकट्ठे हो जाते हैं जो कि पादपों को कोई हानि नहीं पहुँचाते। पौधों के शरीर से छाल अलग होने पर तथा पत्तियों के गिरने से ये पदार्थ निकल जाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड श्वसन क्रिया का उत्सर्जी उत्पाद है जिसका प्रयोग प्रकाश संश्लेषण क्रिया में कर लिया जाता है। अतिरिक्त जलवाष्प वाष्पोत्सर्जन से बाहर निकाल दिया जाता है। ऑक्सीजन रंध्रों से वातावरण में छोड़ दी जाती है। अतिरिक्त लवण जल वाष्पों के माध्यम से उत्सर्जित कर दिए जाते हैं। कुछ उत्सर्जी पदार्थ फलों,फूलों और बीजों के द्वारा उत्सर्जित कर दिए जाते हैं। जलीय पादप उत्सर्जी पदार्थों को सीधा जल में ही उत्सर्जित कर देते हैं।

प्रश्न 21.
मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है ?
उत्तर-
मूत्र बनने की मात्रा इस प्रकार नियंत्रित की जाती है कि जल की मात्रा का शरीर में संतुलन बना रहे। जल की बाहर निकलने वाली मात्रा इस आधार पर निर्भर करती है कि उसे कितना विलेय वयं पदार्थ उत्सर्जित करना है। अतिरिक्त जल का वृक्क में पुनरावशोषण कर लिया जाता है और उसका पुन: उपयोग हो जाता है।

PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Book Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Science Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

PSEB 10th Class Science Guide तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ जाने पर प्रवृत्तियों के बारे में कौन-सा कथन असत्य है ?
(a) तत्वों की धात्विक प्रकृति घटती है।
(b) संयोजकता इलैक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
(c) परमाणु आसानी से इलैक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।
(d) इनके ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं।
उत्तर-
कथन (c) असत्य है क्योंकि आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आसानी से इलैक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।

प्रश्न 2.
तत्व X, XCI, सूत्र वाला एक क्लोराइड बनाता है, जो एक ठोस है और जिसका गलनांक अधिक है। आवर्त सारणी में यह तत्व संभवत : किस समूह के अंतर्गत होगा ?
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si.
उत्तर-
यदि तत्व X, XCI, सूत्र का क्लोराइड बनाता है तो X तत्व के संयोजक इलैक्ट्रॉन की संख्या 2 होगी अर्थात् उसके बाह्यतम कक्ष में संयोजकता इलैक्ट्रॉन की संख्या 2 होगी। आवर्त सारणी के अनुसार केवल वर्ग 2 के तत्व Be, Mg, Ca, Sr, Ba एवं Ra की संयोजकता इलैक्ट्रॉनों की संख्या दो है। इसलिए X तत्व Mg (मैग्नीशियम) है क्योंकि मैग्नीशियम एक धातु होते हुए भी एक आयनिक क्लोराइड बनाने की क्षमता रखता है, जिसका गलनांक उच्च है। अतः तत्व X संभवत: Mg समूह के अंतर्गत होगा।

प्रश्न 3.
किस तत्व में
(a) दो कोश है तथा दोनों इलैक्ट्रॉनों से पूरित हैं ?
(b) इलैक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है ?
(c) कुल तीन कोश हैं तथा संयोजकता कोश में चार इलैक्ट्रॉन हैं ?
(d) कुल दो कोश हैं तथा संयोजकता कोश में तीन इलैक्ट्रॉन हैं ?
(e) दूसरे कोश में पहले कोश से दुगुने इलैक्ट्रॉन हैं ?
उत्तर-
(a) उत्कृष्ट गैसों के सभी कोश इलैक्ट्रॉन से भरे होते हैं। इसलिए दिया गया तत्व एक उत्कृष्ट तत्व गैस है। क्योंकि इसके दो कोश पूर्णतः इलैक्ट्रॉनों से भरे हैं। इस प्रकार यह तत्व Ne (निऑन) (2, 8) है।

(b) इलैक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 का जोड़ 12 जो इस तत्व का परमाणु अंक है और 12 परमाणु अंक वाला तत्व (Mg) मैग्नीशियम है।

(c) कुल तीन कोशों में से बाह्यतम कोश में इलैक्ट्रॉनों की संख्या 4 है। अतः तत्व का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास है2, 8, 4 का जोड़ होगा 14 (Si) सिलिकॉन इस प्रकार 14 परमाणु अंक वाला तत्व है।

(d) कुल दो कोश हैं बाह्यतम कोश में 3 इलैक्ट्रॉन हैं। इस प्रकार तत्व का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास है-(2, 3) तथा विन्यास जोड़ 5 है। अतः इलैक्ट्रॉनिक विन्यास 5 वाला तत्व है बोरॉन (B)।

(e) दूसरे कोश में पहले की अपेक्षा दुगुने इलैक्ट्रॉन हैं। अतः तत्व का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास है-2, 4 तथा विन्यास जोड़ 6 होगा। इस प्रकार परमाणु संख्या 6 वाला तत्व है- कार्बन (C)।

प्रश्न 4.
(a) आवर्त सारणी में बोरॉन के स्तंभ के सभी तत्वों के कौन से गुणधर्म समान हैं ?
(b) आवर्त सारणी में फ्लुओरीन के स्तंभ के सभी तत्वों के कौन से गुणधर्म समान हैं ?
उत्तर-
(a) आवर्त सारणी में बोरॉन स्तंभ के सभी तत्व परमाणु संख्या 13 से संबंध रखते हैं। इसलिए इन सबके बाह्यतम संयोजकता कोश में इलैक्ट्रॉन की संख्या तीन (3) होगी। बोरॉन (B) को छोड़कर जो एक अधातु है, शेष सभी तत्व धातुएं हैं, जैसे-AI, Ga, In एवं Th

(b) फ्लुओरीन के स्तंभ में आने वाले सभी तत्व उत्कृष्ट तत्व हैं तथा परमाणु संख्या 17 से संबंध रखते हैं। इसलिए उनके बाह्यतम कोश में इलैक्ट्रॉन की संख्या 7 होगी। ये सभी तत्व F, CI, Br, I अधातुएँ हैं।

प्रश्न 5.
एक परमाणु का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है।
(a) इस तत्व की परमाणु-संख्या क्या है ?
(b) निम्न में से किस तत्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी ? (परमाणु-संख्या कोष्ठक में दी गई है) N(7), F (9), P(15), Ar(18).
उत्तर-
(a) तत्व की परमाणु संख्या = 2 + 8 + 7 = 17 है और यह तत्व क्लोरीन है।
(b) क्योंकि तत्व के बाह्यतम संयोजकता कोश में इलैक्ट्रॉनों की संख्या 7 है। इसलिए यह उत्कृष्ट तत्वों के वर्ग 17 से संबंध रखता है। इस परिवार के अन्य तत्वों की परमाणु संख्या एवं इलैक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न सारणी में दिए हैं-

तत्व परमाणु संख्या इलैक्ट्रॉनिक विन्यास
फ्लुओरिन (F) 9 2, 7
ब्रोमीन (Br) 35 2, 8, 18, 7
आयोडीन (I) 53 2, 8, 18, 18, 7

इस प्रकार तत्व F जिसकी परमाणु संख्या 9 है उत्कृष्ट तत्वों के परिवार से संबंध रखता है। अतः यह तत्व क्लोरीन तत्व के रासायनिक रूप के समान होगा।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में तीन तत्व A, B तथा C की स्थिति निम्न प्रकार है :
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 1
अब बताइए कि :
(a) A धातु है या अधातु।
(b) A की अपेक्षा C अधिक अभिक्रियाशील है या कम ?
(c) C का साइज़ B से बड़ा होगा या छोटा ?
(d) तत्व A, किस प्रकार के आयन, धनायन या ऋणायन बनाएगा ?
उत्तर-
(a) समूह 17 के तत्वों के बाह्यतम संयोजकता कोश में इलैक्ट्रॉन की संख्या 7 है और सभी तत्व एक इलैक्ट्रॉन धारण करने की उच्च क्षमता रखते हैं। अतः सभी तत्व अधातु हैं।

(b) एक वर्ग में नीचे की ओर आने पर परमाणु आकार बढ़ता है। इसलिए नाभिक की बाह्यतम इलैक्ट्रॉन को खींचने की क्षमता कम हो जाती है। इस प्रकार किसी वर्ग में नीचे आने पर अभिक्रियाशीलता कम हो जाती है। अतः तत्व C तत्व A से कम अभिक्रियाशील है।

(c) तत्व B की तुलना में तत्व से आकार छोटा होगा।

(d) तत्व A ऋणायन बनाएगा।

प्रश्न 7.
नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7) तथा फ़ॉस्फोरस (परमाणु संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15 के तत्व हैं। इन दोनों तत्वों को इलैक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन सा तत्व अधिक ऋण विद्युत् होगा और क्यों?
उत्तर-
नाइट्रोजन का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास : N (7) : (2, 5) फ़ॉस्फोरस का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : P (15) : (2, 8, 5) नाइट्रोजन की विद्युत् ऋणात्मकता अधिक होगी क्योंकि इसका बाह्यतम कोश केंद्र के अधिक समीप है। इसलिए परमाणु केंद्र इलेक्ट्रॉन को अधिक बल से आकर्षित करेगा।

प्रश्न 8.
तत्वों के इलैक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति से क्या संबंध है ?
उत्तर-
किसी परमाणु का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास आधुनिक आवर्त सारणी में इसकी स्थिति से इस प्रकार संबंधित होता है कि जिन परमाणुओं के बाह्यतम कोशों में इलैक्ट्रॉनों की समान संख्या होती है, उन्हें समान वर्ग में रखा जाता है। बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या उस तत्व की समूह संख्या को सूचित करती है तथा बाह्यतम कोश संख्या उस तत्व की आवर्त को सूचित करता है। जब किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलते हैं, तब संयोजकता कोश इलैक्ट्रॉनों की संख्या इकाई बढ़ जाती है, चूंकि परमाणु क्रमांक इकाई बढ़ जाता है।

प्रश्न 9.
आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्सियम (परमाणु-संख्या 20) के चारों ओर 12, 19, 21 तथा 38 परमाणु-संख्या वाले तत्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म कैल्सियम के समान हैं ?
उत्तर-
परमाणु संख्या 12 वाले तत्व के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म परमाणु संख्या 20 तथा 38 वाले तत्वों के समान होगा, क्योंकि इन तत्वों के बाहरी कोश में 2 इलैक्ट्रॉन हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 2

प्रश्न 10.
आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेन्डलीफ की आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।
उत्तर-
मेन्डलीफ की आवर्त सारणी की आवर्त सारणी के दीर्घ रूप से तुलना मेन्डलीफ की आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को एक समान तालिका के रूप में स्थान दिया गया है। दोनों सारणियों में एक समान गुणों वाले तत्वों को एक ही ग्रुप में रखा गया है लेकिन इन दोनों में काफ़ी समानताएँ हैं ; जैसे-

मेन्डलीफ की आवर्त सारणी आधुनिक आवर्त सारणी
(1) उस समय तक ज्ञात 63 तत्वों को बढ़ते परमाणु  द्रव्यमानों में व्यवस्थित किया गया था। (1) कुल 118 तत्वों को बढ़ते परमाणु क्रमांक में  व्यवस्थित किया गया है।
(2) इस आवर्त सारणी में 8 ऊर्ध्वाधर स्तंभ हैं, जिन्हें वर्ग 7 आवर्त हैं। (2) इसमें 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ हैं जिन्हें वर्ग कहते हैं तथा कहते हैं।
(3) तत्वों के समस्थानिकों को सारणी में स्थान नहीं मिल  सका। (3) तत्वों के समस्थानिकों को सारणी में स्थान नहीं मिल  हुआ क्योंकि उनके परमाणु क्रमांक एक-समान होते हैं।
(4) रासायनिक दृष्टि से असमान तत्वों को भी एक साथ  रखा गया था। (4) रासायनिक दृष्टि से असमान तत्वों को अलग-अलग  वर्गों में स्थान दिया गया।
(5) सभी संक्रमण तत्वों को एक ही वर्ग VIII में रखा गया। (5) संक्रमण तत्वों को वर्ग 3 से वर्ग 12 में रखा गया।
(6) उत्कृष्ट गैसों की इस सारणी के बनने तक खोज ही  नहीं हो पाई थी। (6) उत्कृष्ट गैसों को वर्ग 18 में स्थान दिया गया है।
(7) कुछ उच्च द्रव्यमान वाले तत्वों को उन तत्वों से पहले  स्थान दिया गया जिनका परमाणु द्रव्यमान कम है। (7) इस सारणी में वर्गीकरण का आधार परमाणु क्रमांक  है इसलिए इसमें प्रतिलोम क्रम का दोष नहीं है।

Science Guide for Class 10 PSEB तत्वों का आवर्त वर्गीकरण InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
क्या डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं ? तुलना करके पता कीजिए।
उत्तर-
हाँ, डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक स्तंभ में भी पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए-
लीथियम (Li), सोडियम (Na) तथा पोटाशियम (K) एक डॉबेराइनर का त्रिक बनाते हैं। यदि Li को पहला तत्व मानें तो उससे आठवें स्थान पर Na आता है और यदि Na को पहला तत्व मानें तो उसके आठवें स्थान पर K आता है। इस प्रकार डॉबेराइनर का यह त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ ‘रे’ में पाया जाता है।
डॉबेराइनर का त्रिक Ca, Sr तथा Ba न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ Br ‘गा’ में उपस्थित है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 3
डॉबेराइनर का त्रिक Cl, Br तथा I न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ ‘सा’ में उपस्थित है।

प्रश्न 2.
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ हैं ?
उत्तर-
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की सबसे बड़ी सीमा यह थी कि इस नियम के अनुसार उस समय के ज्ञात 30 तत्वों में से केवल 9 तत्वों को ही तीन त्रिकों में व्यवस्थित किया जा सका। अत: यह वर्गीकरण सर्वमान्य नहीं हो पाया।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 4
उदाहरण-
तीन तत्व; नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) तथा ऑरसेनिक (As) के रासायनिक गुणधर्म समान हैं इसलिए इन्हें एक ही त्रिक का होना चाहिए जबकि N परमाणु द्रव्यमान (14,0 u), As का (74.9 a) तथा P का (31/0 u) है जिसके अनुसार यह एक त्रिक के तत्व नहीं हैं।

प्रश्न 3.
न्यूलैंड्स के अष्टक सिद्धांत की क्या सीमाएँ हैं ?
उत्तर-
न्यूलैंड्स के अष्टक सिद्धांत की सीमाएं निम्नलिखित हैं –
(i) यह सिद्धांत केवल कैल्सियम तक ही लागू हो सका क्योंकि कैल्सियम के बाद आने वाले प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधर्म पहले तत्व के समान नहीं मिलता था।

(ii) न्यूलैंड्स ने कल्पना की थी कि प्रकृति में केवल 56 तत्व विद्यमान हैं और भविष्य में कोई नया तत्व नहीं मिलेगा। लेकिन बाद में कई तत्व खोजे गए जिनके गुणधर्म अष्टक नियम के अनुसार नहीं थे और इस कारण इसमें व्यवस्थित नहीं हो सके।

(iii) अपनी सारणी में तत्वों को समंजित करने के लिए न्यूलैंड्स ने दो तत्वों को एक साथ रख दिया था और कुछ असमान तत्वों को एक स्थान में रख दिया था। उदाहरणार्थ- कोबाल्ट तथा निकिल को एक ही स्थान पर रखा गया हैं, परंतु उन्हें फ्लुओरोन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन के साथ एक ही स्तम्भ ‘सा’ के अंतर्गत रखा गया है, जबकि कोबाल्ट तथा निकिल के गुण प्लुओरीन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन से सर्वथा भिन्न हैं। दूसरी ओर आयरन, जो कि गुणों से कोबाल्ट तथा निकिल के समान है, को इनसे दूर ‘ना’ स्तम्भ में रखा गया है। संगीत के सुर (डो)
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 5
(iv) न्यूलैंड्स अष्टक सिद्धांत केवल हल्के तत्वों के लिए ठीक से लागू हो सका।

प्रश्न 4.
मेन्डलीफ के आवर्त सारणी का उपयोग कर निम्नलिखित तत्वों के ऑक्साइड के सूत्र का अनुमान कीजिए
K, C, AI, Si, Ba
उत्तर-

  • पोटैशियम (K) वर्ग IA का तत्व है। इसकी संयोजकता 1 है। इसलिए इसके ऑक्साइड का सूत्र K2O है।
  • कार्बन (C) वर्ग: IV A का तत्व है। इसकी संयोजकता 4 है तथा इसके ऑक्साइड का सूत्र CO2 है।
  • AI, वर्ग III A का तत्व है। इसकी संयोजकता 3 है। इसलिए इसके ऑक्साइड का सूत्र Al2O3 है।
  • सिलिकॉन (Si) IV A वर्ग का तत्व है। इसकी संयोजकता 4 है। इसलिए इसके ऑक्साइड का सूत्र SiO2 है।
  • Ba वर्ग II A का तत्व है। इसकी संयोजकता 2 है। इसलिए इसकी ऑक्साइड का सूत्र Ba0 है।

प्रश्न 5.
गैलियम के अतिरिक्त, अब तक कौन-कौन से तत्वों का पता चला है जिसके लिए मेन्डलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था ? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जर्मेनियम (Ge) तथा स्कैंडियम वर्ग IV A के दो तत्व हैं। इन दोनों तत्वों के लिए भी मेन्डलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था। मेन्डलीफ ने इनके गुणधर्म पहले से ही बता दिए थे। जब बाद में इन तत्वों की खोज हुई तो इनके गुणधर्म लगभग वही थे जो मेन्डलीफ ने दिए थे।

प्रश्न 6.
मेन्डलीफ ने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए कौन-सा मापदंड अपनाया था?
उत्तर-

  • तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया।
  • समान गुण वाले तत्वों को एक समूह में रखने का प्रयास किया।
  • तत्वों के ऑक्साइडों एवं हाइड्राइड्रों के अणु-सूत्रों को एक आधारभूत गुण मानकर तत्वों का वर्गीकरण किया।

प्रश्न 7.
आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया ?
उत्तर-
अक्रिय या उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में रखा गया क्योंकि

  1. ये गैसें बहुत ही अक्रियाशील होती हैं एवं इनकी खोज बहुत बाद में हुई।
  2. इन गैसों को एक नये समूह में बिना आवर्त सारणी में छेड़-छाड़ किए हुए रखा गया।

प्रश्न 8.
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से मेन्डलीफ की आवर्त सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया ?
उत्तर-
मेन्डलीफ की आवर्त सारणी परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के सिद्धांत पर आधारित थी जबकि आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या (Atomic number) पर आधारित है। आधुनिक आवर्त नियम के द्वारा मेन्डलीफ की सारणी की विसंगतियों को निम्नलिखित प्रकार सुलझाया गया है –

  • आधुनिक आवर्त सारणी में सभी समस्थानिकों को एक ही स्थान दिया गया है क्योंकि समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या तो सदा समान होती है। इसलिए परमाणु संख्या भी एक समान ही होगी।
  • आर्गन तथा पोटैशियम की परमाणु संख्या क्रमशः 18 और 19 है। तत्वों की बढ़ती परमाणु संख्या के आधार पर व्यवस्थित करने पर आर्गन पहले आ जाता है और पोटैशियम का स्थान पीछे हो जाता है जबकि उनके परमाणु द्रव्यमान इसके विपरीत हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में इस दोष को दूर किया गया है।
  • तत्वों, उत्कृष्ट गैसों और संक्रमण तत्वों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग किया गया है।
  • आधुनिक आवर्त सारणी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि तत्वों के गुणों की पुनरावृत्ति क्यों होती है।

प्रश्न 9.
मैग्नीशियम की तरह रासायनिक अभिक्रियाशीलता दिखाने वाले दो तत्वों के नाम लिखिए। आपके चयन का क्या आधार है ?
उत्तर-
आधुनिक आवर्त सारणी के अनुसार, जिन तत्वों की बाहरी इलैक्ट्रॉनिक विन्यास समान होती है उनके गुणधर्म भी समान होते हैं। मैग्नीशियम के बाहरी कक्ष (या कोश) में दो इलैक्ट्रॉन हैं इसलिए वे सभी तत्व जिनके बाहरी कोश में 2 संयोजी इलैक्ट्रॉन होंगे वे Mg के समान ही गुणधर्म प्रदर्शित करेंगे। उदाहरण-कैल्सियम (Ca), परमाणु संख्या = 20
कक्ष में व्यवस्थित इलैक्ट्रॉन = (2, 8, 8, 2) मैग्नीशियम (Mg), परमाणु संख्या = 12
कक्ष में व्यवस्थित इलैक्ट्रॉन = (2, 8, 2)

प्रश्न 3. निम्न के नाम बताइए :
(a) तीन तत्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलैक्ट्रॉन उपस्थित हो।
(b) दो तत्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में दो इलैक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(c) तीन तत्वों जिनका बाहरी कोश पूर्ण हो।
उत्तर-
(a) तीन तत्व जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलैक्ट्रॉन उपस्थित है। Li, Na तथा k तीन ऐसे तत्व हैं जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलैक्ट्रॉन होता है।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 6
(b) दो तत्व जिनके बाहरी कोश में 2 इलैक्ट्रॉन हैं –
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 7
(c) ऐसे तीन तत्व जिनका बाहरी कोश पूर्ण हैंहीलियम, निऑन तथा आर्गन तीन ऐसे तत्व हैं जिनके बाहरी कोश पूर्ण हैं।
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 8

प्रश्न 4.
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्वों के परमाणुओं में कोई समानता है ?
(b) हीलियम एक अक्रियाशील गैस है जबकि निऑन की अभिक्रियाशीलता अत्यंत कम है। इनके परमाणुओं में कोई समानता है ?
उत्तर-
(a) लीथियम, सोडियम तथा पोटैशियम की जल के साथ अभिक्रिया –
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 9
इन तीनों धातुओं के बाहरी कोश में केवल एक ही इलैक्ट्रॉन है।
(b) हीलियम (He) तथा निआन (Ne) दोनों ही उत्कृष्ट गैसें हैं इसलिए ये अक्रियाशील हैं। इनके बाहरी कोश पूर्ण हैं। हीलियम (He) के पास केवल K कोश है और यह पूर्ण है पर दूसरी तरफ निआन (Ne) के पास K तथा L दो कोश हैं और ये दोनों भी पूर्ण हैं। K कोश के पास 2 तथा L कोश के पास 8 इलैक्ट्रॉन हैं। इसलिए निऑन की अभिक्रियाशीलता अत्यंत कम है।

प्रश्न 5.
आधुनिक आवर्त सारणी के पहले दस तत्वों में कौन-सी धातुएँ हैं ?
उत्तर-
आधुनिक आवर्त सारणी के पहले दस तत्व हैं- H, He, Li, Be, B, C, N, O, F तथा Ne इन सब तत्वों में से धातुएँ हैं- (लीथियम Li) तथा (बैरीलियम Be)

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में इनके स्थान के आधार पर इनमें से किस तत्व में सबसे अधिक धात्विक अभिलक्षण की विशेषता है ?
Ga, Ge, As, Se, Be.
उत्तर-
पहले इनका वर्गीकरण बढ़ती हुई परमाणु संख्या के अनुसार करते हैं-
PSEB 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 10
हम जानते हैं कि धात्विक अभिलक्षण स्तंभ में बाएँ से दाएँ तरफ जाने पर कम होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए Be तथा Ga का धात्विक अभिलक्षण अधिकतम है। इसलिए दाईं तरफ वाले तत्व अधातु हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
बल कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
बल के प्रकार-बल दो प्रकार के होते हैं-
(i) संतुलित बल,
(ii) असंतुलित बल।

(i) संतुलित बल – जब किसी वस्तु पर एक-साथ कई बल क्रिया कर रहे हों और उनका परिणामी बल शून्य हो तो उन बलों को संतुलित बल कहते हैं। संतुलित बलों की अवस्था में यदि कोई वस्तु स्थिर है तो स्थिर रहेगी तथा यदि एक समान गति कर रही है तो वह उसी एक समान गति से गतिशील रहेगी, जैसे कि वस्तु पर कोई बल कार्य ही न कर रहा हो। इस प्रकार संतुलित बलों के प्रभाव से वस्तु की स्थिति में परिवर्तन नहीं होता है।

संतुलित बलों से वस्तु की आकृति बदल जाती है; जैसे- यदि रबड़ की एक गेंद को हथेलियों के बीच रखकर बराबर व विपरीत बल लगाएं तो गेंद की आकृति बदल जाती है। यह गेंद गोल न रहकर चपटी-सी हो जाती है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 1

उदाहरण – रस्साकशी के खेल में जब दोनों टीमें रस्से को बराबर बल से खींचती हैं, तब परिणामी बल शून्य होता है। अतः दोनों टीमें अपने स्थान पर स्थिर बनी रहती हैं। इस दशा में दोनों टीमों द्वारा रस्से पर लगाया गया बल संतुलित है।

दो बलों के संतुलित होने की शर्त – दो समान तथा विपरीत दिशा में क्रिया कर रहे बल तभी संतुलित होते हैं, यदि वे एक रेखा में क्रिया करते हैं तथा उनका परिमाण समान होता है।

संतुलित बलों का प्रभाव – किसी वस्तु पर क्रिया कर रहे बल यदि इसकी विराम या गतिशील अवस्था में परिवर्तन नहीं कर सकते तो ये अवश्य ही वस्तु की आकृति में परिवर्तन करेंगे।

(ii) असंतुलित बल – जब किसी वस्तु पर लगे अनेक बलों का परिणामी बल शून्य न हो अर्थात् उनका कुछ नेट बल हो तो उन बलों को असंतुलित बल कहते हैं। यह बल वस्तु की गति की दिशा तथा अवस्था में परिवर्तन करता है।

उदाहरण (1) रस्साकशी का उदाहरण असंतुलित बल को दर्शाता है। यदि इनमें से एक टीम रस्से को अधिक बल लगा कर खींचती है तो उन दोनों टीमों द्वारा लगाये गए बल असंतुलित हो जाते हैं जिससे परिणामी बल उत्पन्न होता
है।

उदाहरण (2) मान लो दो बच्चे एक बक्से को खुरदरे फर्श पर धकेलने का यत्न कर रहे हैं जैसा कि चित्र (a) में दर्शाया गया है। वे कम बल के साथ बक्से को धकेलते हैं, तो बक्सा नहीं खिसकता है, क्योंकि घर्षण बल धकेलने की विपरीत दिशा में काम कर रहा है [चित्र (a)] । यह घर्षण बल बक्से के नीचे की सतह तथा फ़र्श की खुरदरी सतह के बीच उत्पन्न होता है। यह घर्षण बल, धकेलने में लगे बल को संतुलित करता है और यही कारण है कि बक्सा नहीं खिसकता है। अब बच्चे बक्से को ज़ोर से धकेलते हैं लेकिन बक्सा फिर भी नहीं खिसकता जैसा चित्र (b) में दिखाया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि घर्षण बल अभी भी धकेलने वाले बल को संतुलित कर रहा है। अब बच्चे बक्से को अधिक ज़ोर से धकेलते हैं ताकि धकेलने वाला बल घर्षण बल से अधिक हो जाता है [चित्र (c)] । यहाँ असंतुलित बल के कारण बक्सा खिसकने लगता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 2

असंतुलित बल वस्तु की गति को नष्ट कर सकते हैं। जब एक गेंद फ़र्श पर लुढ़कती है तो फ़र्श पर विपरीत दिशा में घर्षण बल क्रिया करने लगती है, जिससे बल असंतुलित हो जाते हैं। परिणामस्वरूप गेंद कुछ समय बाद रुक जाती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 2.
न्यूटन के पहले गति नियम की परिभाषा लिखो तथा इसकी व्याख्या करो।
उत्तर-
न्यूटन का पहला गति नियम- यह बताता है, “इस ब्रह्मांड में सभी वस्तुएँ तब तक विराम अवस्था में बनी रहेंगी अथवा सरल रेखीय एक समान गति में चलती रहेंगी, जब तक कोई बाहरी बल लगाकर उनकी अवस्था परिवर्तन के लिए उस पर क्रिया नहीं करता।”
इस नियम के अनुसार गति को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-

(i) पहले भाग के अनुसार जो वस्तु विराम अवस्था में है वह तब तक विराम अवस्था में ही रहेगी, जब तक इसकी अवस्था परिवर्तन के लिए बाहर से कोई बल नहीं लगाया जाता। यह स्वयं ही स्पष्ट है। हम देखते हैं कि मेज़ पर पड़ी पुस्तक तब तक वहीं पड़ी रहेगी, जब तक कोई उसे उठाता नहीं।

(ii) इस नियम के दूसरे भाग के अनुसार कोई वस्तु सरल रेखीय में एक समान गति से गतिशील तब तक रहेगी, जब तक उसे रोकने के लिए कोई बाहरी बल नहीं लगाया जाता। किंतु ऐसा हमारे दैनिक जीवन से कुछ भिन्न दिखाई देता है। उदाहरण के लिए जैसे ही हम बल लगाना बंद करते हैं तो चलती हुई साइकिल रुक जाती है। ध्यानपूर्वक अध्ययन से पता चला कि साइकिल के टायरों और भूमि के बीच घर्षण बल क्रिया करता है जो बाहरी बल है और विपरीत बल के रूप में क्रिया करता है। वायु के कारण भी गति अवरुद्ध होती है। इसलिए बाह्य बल के कारण चल रही साइकिल रुक जाती है।

प्रश्न 3.
जड़त्व किसे कहते हैं ? जड़त्व की विभिन्न किस्में बताओ। प्रत्येक के लिए उदाहरण भी दो।
उत्तर-
जड़त्व – जड़त्व वस्तु का वह गुण है जिसके फलस्वरूप वस्तु अपनी विराम अवस्था या सरल रेखीय गति की अवस्था को बदलने में अक्षम होती है।
इसी गुण के कारण न्यूटन के पहले गति नियम को जड़त्व का नियम भी कहा जाता है।

जड़त्व की किस्में-जड़त्व तीन प्रकार का होता है-
1. विराम-जड़त्व – इसका अर्थ है कि जो वस्तु विराम अवस्था में है वह विराम अवस्था में ही रहने का यत्न करती है। इसको निम्नलिखित उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है रुकी हुई बस या रेलगाड़ी में आराम से खड़ा व्यक्ति बस या रेलगाड़ी के अचानक चलने पर पीछे की ओर गिरता है। इसका कारण यह है कि व्यक्ति का निचला धड़ तो गति में आ जाता है, किंतु उसका ऊपरी धड़ विराम-जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही रहने का यत्न करता है।

2. गति-जड़त्व – इसका अर्थ यह है कि जो वस्तु गतिशील है वह उसी दर से गति में रहने का यत्न करती है।
उदाहरण-
(i) चल रही बस या गाड़ी में आराम से बैठा व्यक्ति बस या गाड़ी के एकदम रुकने पर आगे की ओर गिरता है। ऐसी अवस्था में यात्री के शरीर का निचला भाग तो गाड़ी के रुकते ही विराम अवस्था में आ जाता है, किंतु उसके शरीर का ऊपरी भाग गति की दिशा में गतिशील रहने की कोशिश करता है।

(ii) लंबी छलांग लगाने से पहले एक एथलीट कुछ दूरी तक दौड़ लगाता है, ताकि उसके शरीर का गति-जड़त्व छलांग लगाते समय उसके पेशीय बल की सहायता करता है।

3. दिशायी-जड़त्व – वस्तु का यह गुण वस्तु को अपनी दिशा स्थिर रखने में सहायता करता है।
व्याख्या के लिए उदाहरण- पहिए पर मडगार्ड दिशायी-जड़त्व के कारण स्पर्श रेखीय दिशा में आ रहे कीचड़ से बचाव के लिए पत्थर की गति की दिशा लगाए जाते हैं।

एक धागे के साथ बंधे एक पत्थर पर विचार करें, जोकि क्षैतिज वृत्त में चक्र काट रहा है। यदि ऐसा करते हुए यह धागा टूट जाए तो दिशायी-जड़त्व के कारण पत्थर वृत्त की स्पर्श रेखीय दिशा में उड़ कर सरल रेखीय दिशा में गतिशील हो जाता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 3

प्रश्न 4.
न्यूटन के दूसरे गति नियम की परिभाषा दो तथा इसकी व्याख्या करो। इस नियम की सहायता से बल का माप निकालो।
उत्तर-
न्यूटन का दूसरा गति नियम – न्यूटन का दूसरा गति नियम किसी वस्तु को गति में लाने के लिए आवश्यक बल की गणना करने में सहायक है। इस नियम के दो भाग हैं
(i) किसी वस्तु की संवेग परिवर्तन की दर उस पर क्रिया कर रहे बल के समानुपाती होती है। और
(ii) बाहरी बल के कारण हो रहा संवेग परिवर्तन लगाये गए बल की दिशा में क्रिया करता है।

अर्थात् इस नियम के अनुसार, “किसी वस्तु पर बाहर से लगाया गया बल, उस वस्तु के द्रव्यमान तथा उस वस्तु में बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।”

व्याख्या – जब कोई बल किसी वस्तु पर क्रिया करता है, तो यह वस्तु का संवेग परिवर्तन करता है। यदि बल दुगुना होता है तो संवेग में भी दुगुना परिवर्तन होता है। अतः जितना अधिक बल लगाया जाता है, संवेग परिवर्तन की दर भी उतनी ही अधिक होती है। संवेग पुंज और वेग का गुणनफल है। प्रायः पुंज परिवर्तन नहीं होता। अतः संवेग परिवर्तन की दर वास्तव में वेग परिवर्तन की दर है। अत: लगाया गया बल त्वरण के समानुपाती है।

जब विराम अवस्था में पड़ी वस्तु पर कोई बाहरी बल क्रिया करता है तो वस्तु बल की दिशा में गतिशील हो जाती है। जब बल गतिशील वस्तु की गति की दिशा में क्रिया करता है तो वस्तु का संवेग बढ़ जाता है। जब बल गतिशील वस्तु पर गति की विपरीत दिशा में क्रिया करता है तो संवेग कम हो जाता है।

बल (F) ∝ संहति (m) × त्वरण (a)
अथवा बल (F) = K × m × a (जहाँ, K एक नियतांक है।) ……………… (1)
यदि हम बल F के मात्रक इस प्रकार चुनें कि एकांक बल, एकांक द्रव्यमान की वस्तु में एकांक त्वरण उत्पन्न कर सके, तब
समीकरण (1) में F = 1, m = 1 तथा a = 1 रखने पर,
1 = K × 1 × 1
अथवा K = 1
अतः समीकरण (1) से, F = 1 × m × a
F = m × a
अर्थात् बल = द्रव्यमान × त्वरण
इसे ही न्यूटन का गति का दूसरा नियम कहते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 5.
गति के दूसरे नियम की सहायता से बल के गणितिक परिमाण के लिए सूत्र को व्युत्पन्न करें।
उत्तर-
न्यूटन के दूसरे गति नियम से बल का गणितिक परिमाण-मान लो द्रव्यमान ‘m’ की एक वस्तु का आरंभिक वेग ‘u’ है। इस पर बल F, t समय के लिए लगता है जिस कारण इसका वेग ‘v’ हो जाता है।
आरंभिक संवेग p1 = mu
अंतिम संवेग p2 = mv
अब क्योंकि अंतिम वेग आरंभिक वेग से अधिक है, इसलिए अंतिम संवेग p2 आरंभिक संवेग p1 से अधिक होता है।
∴ संवेग में परिवर्तन = P2 – P1
= mv – mu
= m (v – u)
इस नियम के अनुसार
बाहरी बल F α संवेग में परिवर्तन की दर
Fα \(\frac{\left(p_{2}-p_{1}\right)}{t}\)
Fα \(\frac{m(v-u)}{t}\)
F= K\(\frac{m(v-u)}{t}\) जहां K एक स्थिरांक है ………………. (1)

हम जानते हैं कि वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
∴ \(\frac{v-u}{t}\) = a ………………… (2)
समीकरणों (1) तथा (2) से
F = Kma.
F ; m तथा a के इकाई मूल्य के लिए K = 1
∴ F = ma ………………… (3)
समीकरण (3) न्यूटन के दूसरे गति नियम का गणितिक रूप है।
बल = द्रव्यमान × त्वरण

प्रश्न 6.
न्यूटन के तीसरे गति नियम की परिभाषा दो तथा इसकी व्याख्या करो।
उत्तर-
न्यूटन का तीसरा गति नियम- यह नियम बताता है कि, “प्रत्येक क्रिया के लिए बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।” इस नियम अनुसार, एक बल की मौजूदगी नहीं होती। बल हमेशा जोड़ों (युग्म) में रहता है। अर्थात् क्रिया और प्रतिक्रिया के बल हमेशा दो विभिन्न वस्तुओं पर काम करते हैं।

व्याख्या-(1) दो एक समान स्प्रिंग तुलाओं पर विचार करो, जो एक-दूसरे के साथ हुक में हुक डाल कर जुड़े हुए हैं। स्प्रिंग तुला A का एक सिरा स्थिर सहारे में बंधा हुआ है। तुला B के स्वतंत्र सिरे को दाईं ओर खींचो। हन दोनों तुलाओं में एक समान पठन देखते हैं। तुला A तुला B को उसी बल के साथ विपरीत दिशा में खींचती है। यह चित्र में दिखाया गया है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 4

(2) रबड़ की दो गेंदें A तथा B मेज़ पर एक-दूसरे से कुछ दूरी पर रखो। जब आप गेंद A को गेंद B की ओर धकेलते हो तो गेंद A, गेंद B पर क्रिया (बल) करता है। इस क्रिया-बल को F द्वारा दर्शाया जाता है। न्यूटन के अनुसार गेंद B भी गेंद A पर प्रतिक्रिया (बल) करती है। यह प्रतिक्रिया बल FB द्वारा दर्शाया जाता है। यदि गेंदें दोनों एक जैसी हों तो क्रिया (बल) का परिमाण प्रतिक्रिया (बल) के परिमाण के बराबर होगा।
∴ FA→B= – FB→A
क्रिया तथा प्रतिक्रिया बल हमेशा एक-दूसरे की विपरीत दिशा में कार्य करते हैं। जैसे कि नीचे चित्र में दिखाया गया है कि क्रिया (बल) दाईं तरफ तथा प्रतिक्रिया (बल) बाईं तरफ कार्य करते हैं।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 5

व्यावहारिक उदाहरण-
(i) जब लान सर्पिकलर की वक्र नोजलों से पानी बाहर निकलता है तो यह सर्पिकलर के पीछे की ओर बराबर बल लगाता है। इस तरह सर्पिकलर घूमना शुरू कर देता है तथा पानी सभी दिशाओं की ओर छिड़कना शुरू हो जाता है।
(ii) जब हम चलते हैं तो हमारे पाँव धरती को पीछे की ओर धकेलते हैं। प्रतिक्रिया स्वरूप धरती हमारे पैरों को आगे की ओर धकेलती है। धरती द्वारा हमारे पाँव पर हुई प्रतिक्रिया के फलस्वरूप ही हम चल पाते हैं।

प्रश्न 7.
इस कथन की व्याख्या करो, “न्यूटन के तृतीय गति नियम में क्रिया और प्रतिक्रिया एक ही वस्तु पर क्रिया नहीं कर सकते।”
उत्तर-
न्यूटन के तीसरे गति नियम अनुसार, “प्रत्येक क्रिया (बल) के लिए, उसके बराबर तथा उल्ट दिशा में एक प्रतिक्रिया (बल) होती है।”

इस नियम अनुसार, एक बल का अस्तित्व कभी भी नहीं होता। बल हमेशा युग्म में होते हैं। यदि किया तथा प्रतिक्रिया दोनों बल, जो कि एक-दूसरे के बराबर परंतु विपरीत दिशा में होते हैं। यदि एक ही वस्तु पर क्रिया करेंगे तो उनका परिणामी बल शून्य हो जाएगा तथा वस्तु विराम अवस्था में रहेगी। इस बात को अग्रलिखित उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है.-

जब हम रबड़ की गेंद को दीवार पर मारते हैं तो गेंद दीवार से टकराती है तो उतने बल से उछल कर वापिस आ जाती है तथा आप इसे वापिस आते समय पकड़ सकते हैं। इससे सिद्ध होता है कि गेंद का दीवार पर क्रिया बल, दीवार द्वारा गेंद पर लगाए गए प्रतिक्रिया बल के बराबर तथा उल्ट दिशा में होता है। जब आप उसी रबड़ की गेंद को लटक रहे पतले कपड़े पर मारते हो तो गेंद आपकी तरफ वापिस नहीं आती क्योंकि कपड़े पर गेंद की क्रिया कपड़े को पीछे की ओर धकेलती है। अब क्योंकि कपड़े ने क्रिया समाप्त कर दी इसलिए यह गेंद पर प्रतिक्रिया करके इसको वापिस नहीं फेंक सकता तथा इस तरह गेंद कपड़े के ऊपर से ही सीधी धरती पर गिर जाती है।

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प्रश्न 8.
संवेग संरक्षण नियम से क्या भाव है ? संवेग संरक्षण नियम को न्यूटन की गति के दूसरे तथा तीसरे नियम की सहायता से इसको गणितिक तौर पर सिद्ध करो।
उत्तर-
संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum) – इस नियम के अनुसार, “यदि कणों के किसी संकाय (system) पर कोई बाहरी बल क्रिया नहीं करता तो उस संकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।”
न्यूटन की गति के दूसरे नियमानुसार
F = K\(\frac{m(v-u)}{t}\)
F = K\(\frac{(m v-m u)}{t}\)
F = K\(\frac{\left(p_{2}-p_{1}\right)}{t}\)
जहां आरंभिक संवेग P1 = mu
अंतिम संवेग P2 = mv
यदि वस्तु पर कोई बल न लग रहा हो तो F = 0
∴ K\(\frac{\left(p_{2}-P_{1}\right)}{t}\) = 0
या P2 – P1 = 0
अर्थात् P2 = P1 ……………. (i)

संवेग संरक्षण नियम – जब दो या दो से अधिक वस्तुएँ किसी बाहरी बल की सहायता से आपस में टकराती हैं तो टकराने से पहले और बाद में उनका संवेग बराबर होता है।

गणितिक प्रमाण – मान लो द्रव्यमान m1 तथा m2 की रबड़ गेंदें A तथा B आरंभिक वेग u1 तथा u2 के साथ गति कर रही हैं। उनका आपस में टकराने के पश्चात् ‘t’ समय में उनके अंतिम वेग v1 तथा v2 हो जाते हैं।
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न्यूटन के दूसरे गति नियम से
गेंद A द्वारा गेंद B पर लगाया गया बल FAB = गेंद A के संवेग में परिवर्तन की दर
FAB = \(\frac{m_{1} v_{1}-m_{1} u_{1}}{t}\)
FAB = \(\frac{m_{1}\left(v_{1}-u_{1}\right)}{t}\) …………….. (ii)

न्यूटन के तीसरे गति नियम से
गेंद B द्वारा गेंद A पर प्रतिक्रिया बल, FBA = गेंद B के संवेग में परिवर्तन की दर
FBA = \(\frac{m_{2} v_{2}-m_{2} u_{2}}{t}[latex]
FBA = [latex]\frac{m_{2}\left(v_{2}-u_{2}\right)}{t}[latex] ………………. (iii)

न्यूटन के तीसरे गति नियम अनुसार,
FAB = -FBA
[latex]\frac{m_{1}\left(v_{1}-u_{1}\right)}{t}\) = \(\frac{m_{2}\left(v_{2}-u_{2}\right)}{t}\) [समीकरण (ii) तथा (iii) से]
m1v1 – m1u1 = – m2v2 + m2u2
– m1u1 – m2u2 – m2v2 – m2v2
या m1u1 + m2u2 = m2v2 + m1v2
अर्थात् टक्कर से पहले गेंदों A तथा B का कुल संवेग = टक्कर के बाद गेंदों A तथा B का कुल संवेग इससे यह सिद्ध होता है कि गेंदों का कुल संवेग संरक्षित रहता है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
बल किसे कहते हैं ? बल की इकाइयां बताओ।
उत्तर-
बल – बल ऐसा कारक है जो-

  1. वस्तु को गतिशील करता है या करने का प्रयत्न करता है।
  2. गतिशील वस्तु को रोकता है या रोकने का प्रयत्न करता है तथा
  3. वस्तु की गति को बढ़ाता या कम करता है। इस तरह, बल वह भौतिक कारण है जो वस्तु की गति अवस्था में परिवर्तन करता है या करने का प्रयत्न करता है।

बल एक सदिश राशि है।
बल का मात्रक (इकाई) – बल का मात्रक द्रव्यमान तथा त्वरण के मात्रक पर निर्भर करता है। बल का मानक मात्रक (S.I.) न्यूटन (N) तथा C.G.S. मात्रक डाइन (Dyne) है।
IN = 105 डाइन

प्रश्न 2.
यदि कोई दौड़ता हुआ घोड़ा अचानक रुक जाता है, तो घुड़सवार आगे की ओर क्यों गिरता है ?
उत्तर-
जब घोड़ा दौड़ रहा होता है तो घोड़ा तथा घुड़सवार दोनों गति की अवस्था में होते हैं। जब घोड़ा अचानक रुक जाता है तो घोड़ा तथा घुड़सवार का निचला धड़ विराम अवस्था में आ जाता है जबकि घुड़सवार का ऊपरी धड़ गति की अवस्था में रहता है। इस कारण वह आगे की ओर गिरता है।

प्रश्न 3.
जब घोड़ा अचानक दौड़ना शुरू कर देता है, तो घुड़सवार पीछे की ओर क्यों गिरता है ?
उत्तर-
घोड़ा और घुड़सवार एक संकाय (System) बनाते हैं। प्रारंभ में दोनों विराम अवस्था में होते हैं। जब अचानक घोड़ा दौड़ने लगता है, तो घोड़े के साथ घुड़सवार के शरीर का निचला भाग भी आगे की ओर गतिशील हो जाता है, किन्तु शरीर का ऊपरी भाग स्थिर जड़ता के कारण विराम अवस्था में रहने का यत्न करता है। इसी कारण घोड़े के अचानक दौड़ने पर घुड़सवार पीछे की ओर गिरता है।

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प्रश्न 4.
गतिशील बस में से नीचे उतरते समय सवारी आगे की तरफ गिर जाती है, क्यों ?
उत्तर-
गतिशील बस में से नीचे उतरते समय सवारी आगे की तरफ गिर पड़ती है क्योंकि जब सवारी पैर नीचे रखती है तो धरती को छूने से उसका निचला भाग (पैर) विराम अवस्था में आ जाता है परंतु ऊपर वाला भाग गति में ही रहता है। इस तरह सवारी आगे की तरफ गिर पड़ती है।

प्रश्न 5.
संवेग की परिभाषा दो। इसकी इकाई भी लिखो।
उत्तर-
संवेग (Momentum) – वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।
यदि m = वस्तु का द्रव्यमान और \(\vec{v}\) = वस्तु का वेग हो तो
वस्तु की सरल रेखीय संवेग \(\vec{p}\) = m × \(\vec{v}\)
संवेग एक सदिश राशि है। इसकी दिशा वही होती है जो वेग की होती है।
संवेग की इकाइयां-CGS प्रणाली में संवेग g cms-1 और मानक इकाइयों (SI) में kg ms-1 में मापा जाता

प्रश्न 6.
यदि गतिशील साइकिल की आगे वाली ब्रेक लगाएं तो हम आगे की ओर गिर जाते हैं। क्यों ?
उत्तर-
यदि गतिशील साइकिल की आगे वाली ब्रेक लगाते हैं तो साइकिल सवार को आगे की ओर झटका लगता है। आगे वाली ब्रेक लगाने पर साइकिल एकदम रुक जाता है तो आपके शरीर का निचला भाग विराम अवस्था में आ जाता है, परंतु आपका ऊपरी भाग गति जड़त्व के कारण गति अवस्था में ही रहने की कोशिश करता है तथा आप आगे की ओर झटका महसूस करते हैं। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि गतिशील साइकिल की आगे पहिए वाली ब्रेक नहीं लगानी चाहिए।

प्रश्न 7.
बल का किसी वस्तु पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
बल के प्रभाव-

  1. यह वस्तु की गति को कम या अधिक करके इसकी चाल में परिवर्तन लाता है।
  2. यह वस्तु की गति की दिशा को बदल देता है।
  3. यह वस्तु की आकृति में परिवर्तन कर सकता है।

प्रश्न 8.
क्रिकेट के खिलाड़ी तेज़ी से आती हुई बॉल को पकड़ते समय अपने हाथ पीछे की ओर क्यों खींचते हैं ?
उत्तर-
तेज गति से आती हुई बॉल को रोकने के लिए बहुत अधिक बल लगाना पड़ता है। बॉल को पकड़ते समय हाथों को पीछे खींचने से गेंद का त्वरण पहले से कुछ कम होता है और उसे रोकने के लिए कम बल लगाने की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 9.
नाव को आगे बढ़ाने के लिए पतवारों को विपरीत दिशा में क्यों चलाना पड़ता है ?
उत्तर-
क्रिया और प्रतिक्रिया समान और विपरीत दिशा में होती है। नाव को आगे बढ़ाने के लिए पतवार से पानी को पीछे की ओर धकेलना पड़ता है। इस बल की प्रतिक्रिया से नाव आगे की ओर बढ़ती है।

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प्रश्न 10.
एक कार तथा एक ट्रक दोनों बराबर वेग से चल रहे हैं। इनमें से किसका संवेग अधिक होगा और रोकने के लिए किस में अधिक बल की आवश्यकता पड़ेगी ?
उत्तर-

  • कार और ट्रक दोनों समान वेग से चल रहे हैं। इनमें से कार का द्रव्यमान कम होता है। अतः कार का संवेग कम होगा तथा ट्रक का संवेग अधिक होगा।
  • यदि दोनों को समान समयांतराल में रोका जाए, तो दोनों का अंतिम संवेग शून्य तो है ही जाएगा परंतु ट्रक का संवेग अधिक होने के कारण ट्रक के संवेग में परिवर्तन कार की अपेक्षा अधिक होगा। अत: ट्रक को रोकने के लिए कार की अपेक्षा अधिक बल लगाना पड़ेगा।

प्रश्न 11.
तीव्र गति से आ रही गोली खिड़की के शीशे में गोल छिद्र बना देती है, जबकि पत्थर मारने पर शीशा चटक जाता है। क्यों ?
उत्तर-
यदि खिड़की के शीशे पर पत्थर मारा जाए, तो वह टुकड़े-टुकड़े हो जाता है, जबकि तीव्र गति से आ रहो गोली इसमें गोल छिद्र बना देती है। इसका कारण यह है कि छिद्र के पास वाले काँच के कण तीव्र गति से आ रही गोली के साथ जड़ता के कारण गति नहीं कर पाते और बिखरते नहीं।

प्रश्न 12.
तीव्र वेग से गतिशील किसी पत्थर लगने से खिड़की का कांच टूट जाता है, क्यों ?
उत्तर-
जब कोई पत्थर का टुकड़ा खिड़की के शीशे से टकराता है तो वह स्थान अधिक गति में आ जाता है जबकि शीशे का शेष भाग जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही रहता है। पत्थर के टुकड़े का वेग कम होने के कारण, पत्थर के आर-पार जाने से पहले ही शीशे का शेष भाग वह वेग ले लेता है और वह टूट जाता है।

प्रश्न 13.
बोझ से लदा कोई ट्रक तथा कार बराबर परिणाम v के वेग से एक-दूसरे के विपरीत गतिशील हैं जबकि उनमें आमने-सामने की टक्कर होती है और फलस्वरूप दोनों ही विराम अवस्था में आ जाते हैं। यदि टक्कर 10 s तक रही तो,
(अ) दोनों में से किस पर प्रतिघात का अधिक बल लगेगा ?
(ब) किस वाहन के संवेग में अधिक परिवर्तन हुआ ?
(स) किस वाहन में अधिक त्वरण उत्पन्न हुआ ?
(द) कार को ट्रक की अपेक्षा अधिक क्षति होने की संभावना क्यों है ?
उत्तर-
(अ) कार पर बल का प्रभाव अधिक होगा क्योंकि उसका द्रव्यमान कम था।
(ब) ट्रक की गति में अधिक परिवर्तन होगा। (स) कार का त्वरण अधिक होगा।
(द) कार की हानि ट्रक की अपेक्षा अधिक होगी क्योंकि उस पर अधिक बल लगेगा।

प्रश्न 14.
संवेग संरक्षण का नियम लिखें।
उत्तर-
संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum) – जब दो (या दो से अधिक) वस्तुएँ एक-दूसरे पर क्रिया करती हैं, तो उनका कुल संवेग सदैव समान रहता है, जब तक कि कोई बाहरी बल उन पर क्रिया नहीं करता अर्थात् बाह्य बल शून्य होने पर संकाय (System) का कुल संवेग (Totul fomenta71) अचर (Constant) रहता है।

प्रश्न 15.
यदि क्रिया-प्रतिक्रिया के बराबर होती है तो स्पष्ट कीजिए कि घोड़े के द्वारा खींची गाड़ी आगे की ओर कैसे चलती है ?
उत्तर-
न्यूटन के गति के तीसरे नियम के आधार पर क्रिया-प्रतिक्रिया सदा समान होते हैं। जब गाडी को घोड़े के द्वारा खींचा जाता है तो वह अपने पैरों से धरती को पीछे की ओर दबाता है। धरती की प्रतिक्रिया ऊपर की ओर कार्य करती है। प्रतिक्रियात्मक बल दो भागों में बंट जाता है। बल का उर्ध्वाधर घटक घोड़े को संतुलन देता है और क्षैतिज घटक गाड़ी को आगे की दिशा में गति देता है। गाड़ी के पहियों और सड़क के बीच घर्षण बल पीछे की ओर कार्य करता है। जब बल सड़क और पहियों के घर्षण बल से अधिक हो जाता है तब गाड़ी चलने लगती है।

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प्रश्न 16.
सड़क पर चलने वाले वाहनों के टायरों को खुरदरा लहरदार क्यों बनाया जाता है ?
उत्तर-
सड़कों पर वाहनों का चलना वाहनों के टायरों तथा सड़कों के बीच घर्षण के कारण ही होता है। यदि टायर चिकने होंगे, तो सड़क और टायरों के बीच घर्षण कम होगा जिससे वाहनों की गति पर नियंत्रण करना कठिन होगा और दुर्घटना हो सकती है। इन दुर्घटनाओं से बचने के लिए वाहनों के टायरों को खुरदरा तथा लहरदार बनाया जाता है ताकि सड़क और टायरों के बीच घर्षण बढ़ सके जिससे टायरों की सड़क के साथ पकड़ अच्छी हो और उन्हें फिसलने से रोका जा सके।

प्रश्न 17.
रेत की दलदल या बालुपंक बहुत चिकने और छोटे रेत के कणों से बनता है। यदि कोई व्यक्ति या भारी जंतु रेगिस्तान में ऐसे स्थान पर चलता है तो क्या हो सकता है ?
उत्तर-
रेत के कण बहुत छोटे और चिकने होते हैं इसलिए किसी व्यक्ति या भारी जानवर के द्वारा उस पर चलने के लिए जब बल लगाया जाता है तो ये अपेक्षाकृत कम प्रभावी परिणाम दे पाते हैं क्योंकि घर्षण कम उत्पन्न होता है। जब हम चलते हैं तो पैरों से पृथ्वी को पीछे की ओर धकेलते हैं और वह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रतिक्रिया प्रदान करती है पर यह कार्य घर्षण से ही संभव हो सकता है। पर रेगिस्तान में रेत के कणों के कारण पर्याप्त घर्षण की प्राप्ति नहीं हो पाती। इसलिए रेत में चलना मुश्किल है।

प्रश्न 18.
जब कभी अचानक हमारा पैर केले के छिलके पर पड़ जाता है तो हमारे लिए अपने शरीर का पंतुलन बनाए रखना कठिन क्यों हो जाता है ?
उत्तर-
जब हमारा पैर अचानक केले के छिलके पर पड़ जाता है तो उसके चिकनेपन के कारण घर्षण कम होता है जिससे हमारे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।

प्रश्न 19.
व्याख्या करो कि धूल भरा कंबल एक या दो बार ज़ोर से झटकने पर धूल रहित कैसे हो जाता है ?
उत्तर-
जब एक धूल भरे कंबल को ज़ोर से झटका जाता है अथवा छड़ी से पीटा जाता है तो उससे धूल-कण नीचे गिर जाते हैं क्योंकि धूल-कण विराम जड़त्व के कारण विराम की अवस्था में ही रहना चाहते हैं पर छड़ी से पीटे जाने के कारण कंबल आगे-पीछे गति करने लगता है। इसके परिणामस्वरूप धूल-कण नीचे गिर जाते हैं।

प्रश्न 20.
क्या किसी वस्तु को एक समान वेग से चलते रहने के लिए बल की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
वेग की दर को त्वरण कहते हैं। जब कोई वस्तु एक समान वेग से चलती है तो उसमें कोई त्वरण उत्पन्न नहीं होता। वस्तु का त्वरण उस पर लग रहे बल के समानुपाती है अर्थात् वस्तु में उत्पन्न त्वरण उस पर लग रहे बल पर निर्भर करता है। इसलिए किसी वस्तु को एक समान वेग में चलते रहने के लिए बल की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 21.
किसी वस्तु के जड़त्व और द्रव्यमान में क्या संबंध है ?
उत्तर-
किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं। इस तरह द्रव्यमान वस्तु के जड़त्व का मापक है अर्थात् वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होगा, उतना ही जड़त्व बढ़ेगा तथा कम द्रव्यमान वाली वस्तु का जड़त्व भी कम होता है।

उदाहरण 1. यदि हम फुटबाल को किक करते हैं तो यह बहुत दूर चली जाती है परंतु यदि उसी आकार के ही एक पत्थर के टुकड़े को किक करते हैं तो वह अपनी जगह से नहीं हिलता तथा पाँव को चोट लगती है। इसका कारण यह है कि पत्थर में गति के परिवर्तन को रोकने की सामर्थ्य अधिक होती है अर्थात् पत्थर का जड़त्व अधिक होता है।

उदाहरण 2. एक ही आकार की रबड़ तथा स्टील की दो गेंदें मेज़ पर रखो। गति में लाने के लिए स्टील की गेंद की अपेक्षा रबड़ की गेंद पर कम बल लगाना पड़ता है। इसका कारण है कि रबड़ की गेंद का पुंज, स्टील की गेंद के पुंज से कम होता है।
इससे सिद्ध होता है कि कम पुंज वाली वस्तु का घनत्व और जड़त्व भी कम होता है।

प्रश्न 22.
पंखे का स्विच बंद करने के बाद भी पंखा कछ समय तक घूमता क्यों रहता है ?
उत्तर-
जब पंखा गति में होता है तो गतिज जड़त्व के कारण स्विच बंद करने के बाद भी पंखा गति की अवस्था में रहने की कोशिश करता है । वायु के घर्षण बल के विरोध कारण ही यह केवल कुछ ही समय के लिए गति में रहता है।

प्रश्न 23.
बंदूक से निकली गोली और वायु का अणु यद्यपि एक ही गति से चलते हैं, परंतु किसी व्यक्ति से टकराने पर गोली अधिक खतरनाक होती है। व्याख्या करो।
उत्तर-
किसी वस्तु का संवेग उसके द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल के बराबर होता है। इसलिए बंदूक से निकली गोली का संवेग वायु के अणु के संवेग से अधिक होता है क्योंकि गोली का द्रव्यमान अधिक है। अधिक संवेग होने के कारण, इसके संवेग को समाप्त करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता पड़ती है जिसके कारण व्यक्ति को अधिक चोट लगती है।

प्रश्न 24.
एक ऊबड़-खाबड़ सड़क पर 30 km/h के समान वेग से गति कर रही कार पर क्रिया कर रहे बल की मात्रा ज्ञात करो।
उत्तर-
क्योंकि वस्तु समान वेग से चल रही है, इसलिए वस्तु का त्वरण शून्य होगा तथा इस पर क्रिया कर रहा बल भी शून्य होगा।
क्योंकि F = m × a
F = m × 0
F = 0

प्रश्न 25.
एक क्रिकेट की गेंद की अपेक्षा रबड़ की गेंद को पकड़ना आसान होता है यद्यपि दोनों एक ही वेग से गति कर रही हों ? क्यों ?
उत्तर-
यद्यपि क्रिकेट तथा रबड़ की गेंदों का वेग एक समान है पर क्रिकेट की गेंद का द्रव्यमान अधिक होने के कारण इसका संवेग भी अधिक होता है जिसके फलस्वरूप वह हाथ पर अधिक चोट लगाता है। इसलिए क्रिकेट की गेंद की अपेक्षा रबड़ की गेंद को पकड़ना आसान है।

प्रश्न 26.
अधिक द्रव्यमान वाली वस्तुओं को गतिशील करने के लिए अधिक प्रारंभिक बल की आवश्यकता होती है। क्यों ?
उत्तर-
हम जानते हैं कि वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। इसलिए अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु का जडत्व अधिक होगा। इसलिए उसको गतिशील करने के लिए अधिक प्रारंभिक बल की आवश्यकता होगी।

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प्रश्न 27.
जब बंदूक में से गोली निकलती है तब बंदूक पीछे की ओर धक्का मारती है, क्यों ? व्याख्या करो।
उत्तर-
जब बंदूक में से गोली नहीं चलाई गई, तो बंदूक तथा गोली दोनों विराम अवस्था में होती हैं जिसके कारण दोनों का भिन्न-भिन्न तथा कुल संवेग शून्य होता है। बंदूक चलाने के बाद गोली बहुत तेज़ वेग से बंदूक में से आगे की ओर निकलती है अर्थात् इसका बहुत अधिक संवेग होता है। अब संवेग संरक्षण नियम के अनुसार अब भी कुल संवेग शून्य होना चाहिए जैसा कि गोली चलाने से पहले था। इसलिए गोली के आगे की ओर संवेग को संतुलित करने के लिए बंदूक का संवेग बराबर तथा उल्ट दिशा में होता है। इसलिए बंदूक गोली की अपेक्षा अधिक भारी होने के कारण कम वेग से पीछे की ओर गति करती है जिससे वह पीछे की ओर धक्का मारती है।

प्रश्न 28.
जब कोई व्यक्ति नाव से किनारे की ओर छलांग लगाता है तो नाव विपरीत दिशा में गति करती है, क्यों ? व्याख्या करो।
उत्तर-
नाव से छलांग लगाते समय व्यक्ति आवश्यक गति प्राप्त करने के लिए आगे की ओर बल लगाता है। उसकी प्रतिक्रिया नाव पर होती है जो न्यूटन के गति के तीसरे नियम के आधार पर विपरीत दिशा में होती है। इसके परिणामस्वरूप नाव विपरीत दिशा में गति करती हुई किनारे से दूर हटती है।

प्रश्न 29.
जब कोई चलती हुई बस अचानक रुक जाती है तो हम आगे की ओर क्यों गिरते हैं ?
उत्तर-
जब कोई गतिशील बस अचानक ब्रेक लगाने पर रुक जाती है, तो हम आगे की ओर गिरते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि हमारे पांव तथा शरीर का निचला भाग बस के रुकने के साथ ही विराम अवस्था में आ जाते हैं, परंतु शरीर का ऊपरी भाग गतिज जड़त्व के कारण गतिशील रहने की कोशिश करता है। इसलिए हम आगे की ओर गिरते हैं।

प्रश्न 30.
न्यूटन के द्वितीय गति नियम का क्या महत्त्व है ? ।
उत्तर-
न्यूटन की गति के दूसरे नियम की महत्ता-

  1. न्यूटन की गति का दूसरा नियम किसी वस्तु को गति में लाने के लिए आवश्यक बल की मात्रा निकालने में सहायता करता है।
  2. न्यूटन की गति के दूसरे नियम का कथन, “किसी वस्तु में संवेग में परिवर्तन की दर, उस पर लगाये गए बाहरी बल के समानुपाती होती है तथा संवेग में परिवर्तन की दिशा लगाए गए बल की दिशा में होती है।”

न्यूटन का दूसरा गति नियम संवेग के संकल्प की व्याख्या करता है तथा बताता है कि वस्तु पर लग रहा बल, उसमें उत्पन्न हुए त्वरण के समानुपाती होता है।

प्रश्न 31.
जब आप किसी पुस्तक के नीचे पड़े कागज़ को तेज़ी से झटका मारकर उठाते हो तो पुस्तक बिल्कुल नहीं हिलती। क्यों ?
उत्तर-
जब हम पुस्तक के नीचे पड़े कागज़ को शीघ्रता से झटका लगाकर उठाते हैं तो पुस्तक बिल्कुल नहीं हिलती। इसका कारण यह है कि बाहरी बल (झटका मारते समय लगा बल) केवल पुस्तक के नीचे पड़े कागज़ पर ही लगता है जिस कारण कागज़ बाहर निकल जाता है तथा पुस्तक विराम जड़त्व के कारण उसी ही स्थिति अर्थात् विराम अवस्था में रहती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 32.
जड़त्व क्या है ? जड़त्व का माप क्या है ?
उत्तर-
जड़त्व (Inertia) – जड़त्व वस्तु का वह गुण है जिसके फलस्वरूप वस्तु अपनी विराम या सरल रेखीय गति अवस्था या गति की दिशा में परिवर्तन की अवस्था को बदलने में अयोग्य या अक्षम है।

स्वाभाविक तौर पर एक वस्तु अपनी उसी अवस्था में रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लगे। जड़त्व तीन प्रकार का होता है-

  1. विराम जड़त्व (Inertia of Rest)
  2. गतिज जड़त्व (Inertia of Motion)
  3. दिशा जड़त्व (Inertia of Direction)

जड़त्व का माप – जड़त्व वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है अर्थात् जड़त्व की इकाई किलोग्राम (kg) है जो कि द्रव्यमान की इकाई है।

प्रश्न 33.
स्पष्ट कीजिए कि गति के द्वितीय नियम \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = m\(\vec{a}\) में न्यूटन का गति-विषयक पहला नियम निहित है।
उत्तर-
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से,
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = m\(\vec{a}\)
यदि F = 0 हो तो a = 0 अर्थात् यदि वस्तु पर बाह्य बल न लगाया जाए तो वस्तु में त्वरण भी उत्पन्न नहीं होगा। त्वरण के शून्य होने पर या तो वस्तु विरामावस्था में ही रहेगी या एकसमान वेग से गतिमान रहेगी। यही न्यूटन का गति का पहला नियम है। अत: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम में प्रथम नियम निहित है।

प्रश्न 34.
संतुलित बल तथा असंतुलित बल में अंतर लिखिए।
उत्तर-

संतुलित बल असंतुलित बल
(1) संतुलित बल जब किसी वस्तु पर एक साथ कार्य करते हैं तो उनका परिणाम शून्य नहीं होता। (1) असंतुलित बल जब वस्तु पर एक साथ कार्य करते हैं तो उनका परिणाम शन्य होता है।
(2) यदि वस्तु विरामावस्था में हो तो संतुलित बल उसे गति प्रदान नहीं कर सकता। (2) यदि कोई वस्तु विरामावस्था में हो तो असंतुलित बल उसे गति प्रदान कर सकता है।
(3) यह बल गतिमान वस्तु की चाल तथा दिशा में परिवर्तन नहीं कर सकता। (3) यह बल गतिमान वस्तु की चाल तथा दिशा में परिवर्तन कर सकता है।
(4) यह बल वस्तु के आकार में परिवर्तन ला सकता है। (4) यह बल वस्तु के आकार में परिवर्तन नहीं ला सकता है।

प्रश्न 35.
यदि एक ही आकार के फुटबाल तथा पत्थर के टुकड़े को पांव से ठोकर मारें तो कौन-सा पदार्थ अधिक दूर जाएगा और क्यों ?
उत्तर-
यादि एक ही आकार के फुटबाल और पत्थर को ठोकर मारें तो फुटबाल दूर लुढक जाएगी, परंतु पत्थर अपनी जगह से नहीं हटेगा और हमारे पाँव में भी चोट लग सकती है। फुटबाल की अपेक्षा पत्थर में अपनी गति के परिवर्तन को रोकने की क्षमता अधिक है। इसका कारण उसकी द्रव्यमान का अधिक होना है, परंतु किसी वस्तु का द्रव्यमान हो उसके जड़त्व का माप होती है। पत्थर का जड़त्व अधिक है।

प्रश्न 36.
नाव को आगे बढ़ाने के लिए पतवारों को विपरीत दिशा में क्यों चलाना पड़ता है ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 7
वह बल, जो किसी दिशा में गति प्रदान करता है, हमारे द्वारा लगाए बल की प्रतिक्रिया होती है। नाव को आगे | बढ़ाने के लिए पतवार से पानी को पीछे की ओर धकेलना पड़ता है। इस बल की प्रतिक्रिया से नाव आगे की ओर बढ़ती है क्योंकि क्रिया और प्रतिक्रिया समान और विपरीत दिशा में होती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 37.
घर्षण बल का कारण क्या है ?
उत्तर-
ठोस वस्तुओं के तल समतल नहीं होते। इनमें कुछ अनियमितताएँ होती हैं. जब एक तल A दूसरे तल B पर सरकता है, तो बल की अनियमितताएँ दूसरे की अनियमतताओं की जकड़ में आ जाती हैं। इस जकड़न को तोड़ने के लिए बहुत बल की आवश्यकता होती है। इसी विरोधी बल को ही घर्षण बल कहते हैं। घर्षण बल सदा गति से विपरीत दिशा में किया करते हैं।

प्रश्न 38.
यदि हथौडा हत्थे में ढीला हो तो हत्थे को ऊर्ध्वाधर पथ्वी पर पटकने से हथौडा हत्थे में क्यों कस
उत्तर-
हथौड़ा ऊपर से कुछ पतला और नीच से मोटा होता है। नीचे पटकने की अवस्था में हथौड़ा और हत्था दोनों नीचे की ओर गतिमान हो जाती है। पृथ्वी पर लगते ही हत्थे का वेग शून्य हो जाता है पर हथौड़ा गति के जड़त्व के कारण गतिमान रहता है और वह हत्थे में कस जाता है।

प्रश्न 39.
तेल टैंकरों को भरते समय उनके ऊपर कुछ खाली स्थान क्यों छोड़ दिया जाता है ?
उत्तर-
तेल टैंकरों में भरा तेल अति वाष्पशील प्रकृति का पदार्थ होता है। जब तेल वाष्पित होता है तो इसके वाष्प स्थान घेरते हैं और वे दाब डालते हैं। तेल के वाष्पण के लिए पर्याप्त स्थान देने के लिए टैंकर भरते समय उसके ऊपर खाली स्थान छोड़ा जाता है। यदि टैंकर में पर्याप्त खाली स्थान न छोड़ा जाए तो अधिक वाष्प-दाब के कारण टैंकर के फटने का भय उत्पन्न हो जाता है।

प्रश्न 40.
क्रिकेट के खिलाड़ी तेज़ी से आती हुई बॉल को पकड़ते समय अपने हाथ पीछे की ओर क्यों खींचते हैं ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 8
क्रिकेट की गेंद पकड़ते समय खिलाड़ी अपने हाथ पीछे की ओर खींच लेता है – इसका कारण यह है कि यदि खिलाड़ी हाथ को स्थिर रखकर गेंद पकड़ता है तो गेंद को रुकने में बहुत कम समय लगता है जिससे वेग-परिवर्तन की दर (अर्थात् मंदन) अधिक रहती है। अत: खिलाड़ी की हथेली को गेंद रोकने में अधिक बल (F = m × a) लगाना होता है जिससे खिलाड़ी की हथेली में चोट लग सकती है।। इसलिए खिलाड़ी गेंद को अधिक समय में रोकने के लिए हाथ को गेंद की गति की दिशा में पीछे खींचता है जिससे कि वेग- परिवर्तन की दर (अर्थात् मंदन) कम हो तथा उसे कम बल लगाना पड़े। इससे खिलाड़ी के हाथ में चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।

प्रश्न 41.
घर्षण बल के उपयोग लिखिए।
उत्तर-

  1. घर्षण बल के कारण हम मनुष्य सीधे खड़े रह पाते हैं।
  2. घर्षण बल वाहनों को सड़कों पर फिसलने से रोकता है।
  3. घर्षण बल न होने के कारण अनेक मशीनें नहीं चल पाएंगी।

प्रश्न 42.
कुएँ से जल खींचते समय यकायक रस्सी टूट जाने पर पानी खींचने वाला व्यक्ति पीछे की ओर क्यों गिर पड़ता है ?
उत्तर-
कुएँ से जल खींचते समय यकायक रस्सी टूट जाने पर पानी खींचने वाला व्यक्ति पीछे की ओर गिर पड़ता है–इसका कारण यह है कि जब कोई व्यक्ति रस्सी द्वारा जल से भरी बाल्टी को खींचता है तो बाल्टी भी उसी बल से व्यक्ति को अपनी ओर खींचती है। यदि रस्सी यकायक (अचानक) टूट जाए तो बाल्टी द्वारा व्यक्ति पर लगाया गया बल समाप्त हो जाता है तथा व्यक्ति अपने द्वारा लगाए गए बल के कारण पीछे की ओर गिर पड़ता है।

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प्रश्न 43.
जैवलिन थ्रो में यदि खिलाड़ी किसी निश्चित रेखा को पार लेता है तो यह फाउल माना जाता है, किंतु खिलाड़ी इस रेखा पर रुकने में प्रायः असफल रहते हैं। स्पष्ट कीजिए, क्यों ?
उत्तर-
जैवलिन थ्री में तीव्र गति से भाला फेंकने के लिए खिलाड़ी तीव्र गति से आगे की ओर भागता है, इसलिए निश्चित रेखा तक पहुँचते समय खिलाड़ी गति की अवस्था में होता है। अतः शरीर गति जड़त्व के कारण प्रायः वह निश्चित रेखा तक अपने को रोकने में असफल रहता है।

महत्त्वपूर्ण सूत्र (Important Formulae)

1. बल (F) = m × a
2. त्वरण (a) = \(\frac{\mathrm{F}}{m}\)
3. त्वरण (a) = \(\frac{v-u}{t}\)
4. संवेग (p) = m × v
5. दाब (P) =PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 9

संख्यात्मक प्रश्न (Numerical Problems)

प्रश्न 1.
किसी 10 ग्राम के द्रव्यमान में 5 मीटर/सेकंड2 का त्वरण उत्पन्न करने में अधिक बल की आवश्यकता होगी अथवा 20 ग्राम के द्रव्यमान में 2 मीटर/सेकंड2 का त्वरण उत्पन्न करने में ?
हल :
पहली अवस्था में,
दिया है, द्रव्यमान (m1) = 10 ग्राम, = 10 × 10-3 किग्रा, त्वरण (a1) = 5 मीटर/सेकंड
∴ बल (F1) = m1 × a1
= (10 × 10-3 किग्रा) × (5 मीटर/सेकंड2)
= 5 × 10-2 किग्रा-मीटर/सेकंड
= 5 × 10-2 न्यूटन
= 0.05 न्यूटन।

दूसरी अवस्था में,
दिया है : द्रव्यमान (m2) = 20 ग्राम = 20 × 10-3 किग्रा, त्वरण (a2) = 5 मीटर/सेकंड2
∴ बल (F2) = m2 × a2
= (20 × 10-3 किग्रा) × (2 मीटर/सेकंड2)
= 40 × 10-2 किग्रा-मीटर/सेकंड
= 40 × 10-2 न्यूटन
= 0.4 न्यूटन।

क्योंकि F2 का परिमाण F1 से अधिक है, अतः पहली अवस्था में अर्थात् 10 ग्राम द्रव्यमान में 5 मीटर/सेकंड2 का त्वरण उत्पन्न करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 2.
किसी 3 kg द्रव्यमान की किसी वस्तु पर 12 न्यूटन बल लगाने से उत्पन्न त्वरण क्या होगा ?
हल:
बल (F) = 12 N (न्यूटन)
द्रव्यमान (m) = 3 kg
त्वरण (a) = ?
F = m × a,
12 = 3 × a
a = \(\frac{12}{3}\) = 4 ms-2

प्रश्न 3.
किसी 6 kg द्रव्यमान की एक गेंद में 4 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करने के लिए कितने बल की आवश्यकता होगी ?
हल:
द्रव्यमान, (m) = 6 kg
त्वरण, (a) = 4 ms-2
बल, (F) = ?
F = m × a
= 6 × 4 = 24 (न्यूटन)

प्रश्न 4.
70g द्रव्यमान की क्रिकेट की कोई गेंद 0.5 m/s के वेग से गतिमान है। क्रिकेट का कोई खिलाड़ी इसे 0.5 सै० में रोक लेता है। खिलाड़ी द्वारा बॉल को रोकने के लिए लगाए गए बल की गणना कीजिए।
हल :
गेंद का द्रव्यमान (m) = 70 ग्राम
= \(\frac{70}{1000}\) = 0.07 कि०ग्रा०
u = 0.5 मी०/सै०
t = 0.5 सेकंड
υ = 0
∴ υ = u + at
∴ 0 = 0.5 + a × 0.5
a = \(\frac{0.5}{0.5}\) = -1 मी०सै०2
F = ma
F = 0.07 × 1 = 0.07 N.

प्रश्न 5.
दो पिंडों पर समान बल लगाने पर उनमें त्वरणों का अनुपात 1 : 2 है। पहले पिंड का द्रव्यमान 2 किग्रा है। दूसरे पिंड का द्रव्यमान क्या होगा?
हल :
दिया है, (\(\frac{a_{1}}{a_{2}}\)) = \(\frac{1}{2}\) m1 = 2 किग्रा. m2 = ?
सूत्र F = m × a से,
m1 × a2 = m2 × a2
अतः दूसरे पिंड का द्रव्यमान (m2) = \(\frac{m_{1} \times a_{1}}{a_{2}}\) = \(\frac{2 \times 1}{2}\) = 1 किग्रा।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 6.
किसी वस्तु पर 1.2 s समय के लिये कोई बल लगाने पर उसकी चाल 1.8 m/s से 4.2 m/s हो जाती है। बाद में उसी बल को 2s के लिये लगाया गया। 2 सेकंड में चाल में परिवर्तन कितना होगा ?
हल :
प्रारंभिक वेग, (u) = 1.8 ms-1
अंतिम वेग, (υ) = 4.2 ms-1
समय, (t) = 1.2s
बल, (F) = ?
मान लिया कि वस्तु का द्रव्यमान m है।
हम जानते हैं कि F × t = m (υ – u)
F × 1.2 = m (4.2 – 18)
F × 1.2 = m × 2.4
F = \(\frac{m \times 2.4}{1.2}\)
F = 2m
अब बल F = 2 m वस्तु पर 2 s के लिए लगाकर चाल में परिवर्तन (υ – u) करता है।
[F × t = m (υ – u)]
2m × 2 = m (υ – u)
\(\frac{2 m \times 2}{m}\) = υ – u
∴ चाल में परिवर्तन (υ – u) = 4 ms-1 है।

प्रश्न 7.
10g द्रव्यमान की कोई गोली 0.003 सेकंड में किसी राइफल की नाल से होकर 300 मी०/सै० के वेग से बाहर निकलती है। राइफल द्वारा गोली पर कितना बल लगाया गया ?
हल :
m = 10 ग्राम
= \(\frac{10}{1000}\) = .01 कि०ग्रा०
t = 0.003 सै०
u = 0
υ = 300 मी०सै०
υ = u + at
a = \(\frac{v-u}{t}\)
= \(\frac{300-0}{.003}\) = 105 मी०सै०2
F = m × a
F = 0.01 × 105 = 103 N
= 1000 न्यूटन।

प्रश्न 8.
एक 5 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु पर 2 सेकंड के लिए एक नियत बल कार्यरत होता है। यह वस्तु के वेग को 3 मीटर/सेकंड से बढ़ाकर 7 मीटर/सेकंड कर देता है। लगाए गए बल की मात्रा ज्ञात कीजिए। यदि इस बल को 5 सेकंड के लिए आरोपित किया जाए तो वस्तु का अंतिम वेग क्या होगा?
हल :
दिया है : m = 5 किग्रा, u = 3 मीटर/सेकंड, υ = 7 मीटर/सेकंड, t = 2 सेकंड,
F = ? यदि बल t = 5 सेकंड तक लगे तो υ = ?
सूत्र a = \(\frac{v-u}{t}\) से.
वस्तु का त्वरण (a) = \(\frac{7-3}{2}\)
= \(\frac{4}{2}\) = 2 मीटर/सेकंड2
सूत्र F = m × a से,
F = 5 किग्रा × 2 मीटर/सेकंड
= 10 किग्रा-मीटर/सेकंड2
= 10 न्यूटन।

प्रश्न 9.
10 kg द्रव्यमान वाली किसी वस्तु पर 10 s के लिए कोई बल क्रिया करता है इसके बाद बल हटा दिया जाता है। वस्तु अगले 5 s में 50 m दूरी तय करती है। बल ज्ञात करो।
हल :
यहां पर वस्तु का आरंभिक वेग, (u) = 0
वस्तु का द्रव्यमान, (m) = 10 kg
समय, (t) = 10s
मान लो F बल लग रहा है।
बल हटाने पर तय की गई दूरी (S) = 50 m
दूरी तय करने में लगा समय (t) = 5s
वेग का अंतिम वेग (υ) = \(\frac{S}{t}=\frac{50 \mathrm{~m}}{5 \mathrm{~s}}\)
υ = 10 m/s
हम जानते हैं कि υ = u + at
10 = 0 + a × 10
10 = 10a
∴ a = 1 m/s2
F = m × a
अब F = 10 × 1
F = 10 N

प्रश्न 10.
12 m/s के वेग से चल रही 0.25 kg द्रव्यमान वाली एक वस्तु को 0.6 N का बल लगाकर रोक लिया जाता है। वस्तु को रोकने के लिए लगाया गया समय पता करो।
हल:
वस्तु का प्रारंभिक वेग, (u) = 12 m/s
वस्तु का अंतिम वेग, (υ) = 0 [∵ वस्तु अंत में विराम अवस्था में आ जाती है।
वस्तु का द्रव्यमान, (m) = 0.25 kg
वस्तु पर लग रहा बल (F) = 0.6 N
मान लो वस्तु को रोकने पर लगा समय = t s
मान लो वस्तु के अंदर उत्पन्न हुआ त्वरण ‘a’ है।
हम जानते हैं, F = m × (- a)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 10
t = 5
∴ वस्तु को रोकने में लगा समय = 5 s

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प्रश्न 11.
एक कार 108 kg/h की गति से चल रही है और ब्रेक लगाने के बाद यह रुकने में 4s का समय लेती है। कार पर ब्रेक लगाए जाने के बाद लगने वाले बल की गणना करें। कार का कुल द्रव्यमान (यात्रियों सहित) 1000 kg है।
हल :
कार का प्रारंभिक वेग (u) = 108 km/h
= 108 × 1000 m
60 × 60 s
= 30 m s-1
तथा कार का अंतिम वेग (υ) = 0 m s-1
कार का कुल द्रव्यमान (m) = 1000 kg तथा गाड़ी को रोकने में लगा समय (t) = 4 s तथा
ब्रेक लगाने वाले बल F का परिणाम = m\(\frac{(v-u)}{t}\)
मान रखने पर,
F = 1000 kg × \(\frac{(0-30)}{4 s}\) m s-1
= – 750 kg m s-2
= -750N
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि ब्रेक के द्वारा लगाया गया बल गाड़ी की गति के विपरीत दिशा में आरोपित है।

प्रश्न 12.
1000 kg द्रव्यमान की किसी कार को तथा 10000 kg से लदे हुए किसी ट्रक को 2 सेकंड में रोकने के लिए क्रमशः कितने बल की आवश्यकता होगी, यदि दोनों 5 m/s के वेग से गतिशील हों ?
हल :
u = 5 m/s, υ = 0, t = 2 सेकंड
υ = u + at
υ = 5 + a × 2
a = \(\frac{5}{2}\) मी०/से०2
कार को रोकने के लिए F1 = m × a
= 100 × (\(\frac{-5}{2}\)) = – 250 N
ट्रक को रोकने के लिए F2 = ma2
= 10000 × (\(\frac{-5}{2}\))
= – 2500 N

प्रश्न 13.
किस में अधिक बल की आवश्यकता होगी, 2 किग्रा द्रव्यमान वाली किसी वस्तु को 5 मीटर/सेकंड2 की दर से त्वरित करने में या 4 किग्रा द्रव्यमान वाली वस्तु को 2 मीटर/सेकंड2 की दर से त्वरित करने में ?
हल :
दिया है, m1 = 2 किग्रा, a1 = 5 मीटर/सेकंड2
m2 = 1 किग्रा, a2 = 2 मीटर/सेकंड2
प्रथम वस्तु के लिए आवश्यक बल
F1 = m1a1
= 2 किग्रा × 5 मीटर/सेकंड2
= 10 न्यूटन
द्वितीय वस्तु के लिए आवश्यक बल
F2 = m2 a2
= 4 किग्रा × 2 मीटर/सेकंड
= 8 न्यूटन।
F1 > F2
उपर्युक्त से स्पष्ट है कि प्रथम वस्तु को त्वरित करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 14.
5 न्यूटन का बल किसी द्रव्यमान m1 को 10 मीटर/सेकंड2 का त्वरण देता है तथा द्रव्यमान m2 को 20 मीटर/सेकंड2 का त्वरण देता है। यदि दोनों द्रव्यमानों को एक साथ दिया जाए तो इस बल के द्वारा कितना त्वरण उत्पन्न होगा ?
हल :
दिया है, F = 5 न्यूटन, m1 का त्वरण a1 = 10 मीटर/सेकंड2
m2 का त्वरण a2 = 20 मीटर/सेकंड, दोनों को एक साथ जोड़ने पर त्वरण a = ?
सूत्र F = m a से, m = \(\frac{F}{a}\)
∴ m1 = \(\frac{F}{a_{1}}=\frac{5}{10}\) = 0.5 किग्रा
तथा m2 = \(\frac{F}{a_{2}}=\frac{5}{20}\) = 0.25
∴ दोनों को जोड़ने पर कुल द्रव्यमान = m1 + m2 = 0.5 + 0.25 = 0.75 किग्रा
∴ सूत्र F = m a से,
दोनों पिंडों का त्वरण = \(\frac{F}{m_{1}+m_{2}}\) = \(\frac{5}{0.75}\) = 0.67 मीटर/सेकंडर2

प्रश्न 15.
45 Km/n के वेग से चलती हुई 1000 kg द्रव्यमान की कोई कार एक पेड़ से टकरा कर 5 सै में रुक जाती है। कार द्वारा पेड़ पर कितना बल लगाया गया ?
हल :
m = 1000 कि० ग्रा०
u = 45 कि० मी०/घंटा
= \(\frac{45 \times 1000}{60 \times 60}\)
= \(\frac{25}{2}\) मी०/सै०
= 12.5 मी०/सै०
t = 5 सै०
υ = 0
υ = u + at
υ – u = at
a = \(\frac{v-u}{t}\)
= \(\frac{0-12.5}{5}\)
a = 2.5 मी०सै०
F = m × a
= 1000 × 2.5
= 2500 N

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प्रश्न 16.
एक 100 kg द्रव्यमान वाली बंदूक द्वारा 0.02 kg द्रव्यमान की गोली दागी जाती है। यदि गोली की चाल 80 m/s हो तो बंदूक की पीछे की ओर धक्का लगाने की चालत मालूम करो।
हल :
गोली का द्रव्यमान (m) = 0.02 kg
गोली की चाल (υ) = 80 m/s
बंदूक का द्रव्यमान (M) = 100 kg
मान लो बंदूक का वेग V है। संवेग संरक्षण नियमानुसार,
गोली चलने के पश्चात् पूरे संकाय का संवेग = गोली चलने से पहले संवेग + गोली चलने के बाद संवेग
0 = mv + MV
V = \(\frac{-m v}{\mathbf{M}}\)
= \(\frac{-0.02 \times 80}{100}\)
= \(\frac{-2 \times 80}{100 \times 100}\)
= \(\frac{-16}{1000}\)
∴ बंदूक का वेग (V) = – (0.016 m/s
ऋण चिन्ह बन्दूक का पीछे की ओर धक्के की ओर संकेत करता है परंतु उसका वेग – 0.016 m/s है।

प्रश्न 17.
एक 30 kg भारी विस्फोटक गोला 48 m/s की गति से उड़ रहा है। विस्फोट के बाद इसका 18 kg का भार वाला एक भाग रुक जाता है जबकि शेष भाग उड़ जाता है। उड़ने वाले भाग का वेग ज्ञात करो।
हल :
यहां विस्फोटक गोले का द्रव्यमान (M) = 30 kg
विस्फोटक गोले का वेग (V) = 48 m/s
विस्फोटक गोले के एक भाग का द्रव्यमान (m1) = 18 kg
विस्फोटक गोले के एक भाग का वेग = 0
विस्फोटक गोले का शेष भाग जो गतिशील नहीं है का द्रव्यमान (m2) = (30 – 18) kg
= 12 kg
शेष भाग का वेग = υ2 (मान लो)
अब संवेग संरक्षण नियमानुसार
MV = m1υ1 + m2υ2
30 × 48 = 18 × 0 + 12υ2
30 × 48 = 12υ2
υ2 = \(\frac{30 \times 48}{12}\)
υ2 = 30 × 4
υ2 = 120 m/s

प्रश्न 18.
3 कि. ग्रा० की एक राइफल से 0.03 कि. ग्रा० की एक गोली चलाई गई जो 100 मी०/सै० वेग से नली से बाहर निकली। यदि गोली को 0:003 सै० नली से बाहर निकलने में लगे हों तो राइफल पर लगे बल की गणना करो।
हल :
m1 = 3 कि० ग्रा०, m2 = 0.03 कि० ग्रा०
u1 = u2 = 0, v1 = ?, v2 = 100 मी०/सै०
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार
m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2v2
0+ 0 = 3 × v1 + 100 (0.03)
v1 = \(-\frac{10(0 \times 0.0)}{3}\)
= -1 मी०सै०
(ऋणात्मक चिन्ह राइफल के विपरीत दिशा में धक्का लगाने को दर्शाता है।)
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 11
= -1000 कि० ग्रा०/सै०2
= -1000 N

प्रश्न 19.
5000 g द्रव्यमान की बंदूक से 20 g की गोली पृथ्वी की अपेक्षा 500 ms-1 के वेग से छूटती है, बंदूक का प्रतिक्षेप वेग (Recoil velocity) बताएँ।
हल :
संवेग संरक्षण सिद्धांत के अनुसार
MV + mv = 0
V = \(-\frac{m v}{\mathrm{M}}\)
अब m = 0.020 kg, υ = 500 ms-1 तथा M = 5.00 kg रखने पर
V = \(-\frac{20 \times 500}{5000}\)
या V = -2 ms-1
ऋण चिहन बंदक के प्रक्षेपित होने की ओर संकेत करता है।

प्रश्न 20.
किसी द्रव्यमान m1 पर 5 न्यूटन का बल लगाने पर 8 m/s2 का त्वरण उत्पन्न होता है, जबकि इसी परिमाण का बल किसी द्रव्यमान m2 में 24 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करता है। यदि दोनों द्रव्यमानों को परस्पर बांधकर एक कर दिया जाये, तो इस बल द्वारा संयुक्त द्रव्यमान में कितना त्वरण उत्पन्न होगा ?
हल :
पहला द्रव्यमान (m1) = \(\frac{\mathrm{F}}{a_{1}}=\frac{5}{8}\) kg
दूसरा द्रव्यमान m2 = \(\frac{\mathrm{F}}{a_{2}}=\frac{5}{24}\) kg
संयुक्त द्रव्यमान (m) = m1 + m2
\(\frac{5}{8}+\frac{5}{24}=\frac{20}{24}\) = \(\frac{5}{6}\) kg
5 न्यूटन द्वारा \(\frac{5}{6}\)kg द्रव्यमान से उत्पन्न त्वरण
a = \(\frac{\mathrm{F}}{m}=\frac{5}{5 / 6}\) = 6 ms-2

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 21.
दो ब्लॉक आकार तथा साइज में बराबर हैं परंतु भिन्न-भिन्न धातुओं के बने हैं। बराबर परिमाण के बल लगाने पर वह क्षैतिज तल में गतिशील हो जाते हैं। यदि एक ब्लॉक में उत्पन्न त्वरण दूसरे में उत्पन्न त्वरण के पाँच गुना हो, तो दोनों के द्रव्यमान का अनुपात क्या होगा ?
हल :
हम जानते हैं, F = ma
अत: पहले ब्लॉक के लिए F1 = m1a1
तथा दूसरे ब्लॉक के लिए F2 = m2a
∵ F1 = F2 (दिया गया है।)
∴ m1a1 = m2 a2
= \(\frac{m_{1}}{m_{2}}=\frac{a_{2}}{a_{1}}\)
= \(\frac{m_{1}}{m_{2}}=\frac{5 a_{1}}{a_{2}}\) [∵ a2 = 5a1]
या \(\frac{m_{1}}{m_{2}}\) = 5
अतः पहले ब्लॉक का द्रव्यमान दूसरे से पाँच गुना है।

प्रश्न 22.
2 kg के एक पिस्टल से 20 g द्रव्यमान की एक गोली 150 ms-1 के क्षैतिज वेग से छोड़ी जाती है। पिस्टल के पीछे हटने के वेग का परिकलन करें।
हल :
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 12
गोली का द्रव्यमान, m1 = 20 g (= 0.02 kg)
पिस्टल का द्रव्यमान m2 = 2 kg
प्रशिक्षण से पहले गोली का प्रारंभिक वेग (u1) तथा पिस्टल का प्रारंभिक वेग (u2) क्रमशः शून्य है।
अर्थात् u1 = u2 = 0
गोली का अंतिम वेग υ1 = + 150 m s-1
गोली की दिशा बाएँ से दाएँ परिपाटी के अनुसार धनात्मक ली गई है। माना कि पिस्टल का प्रतिक्षेपित वेग υ है।
गोली छूटने के पहले, गोली तथा पिस्टल का कुल संवेग,
= (2 + 0.02) kg × 0 m s-1
= 0 kg m s-1
गोली छूटने के बाद कुल संवेग,
= 0.02 kg × (+ 150 m s-1) + 2 kg × υ m s-1
= (3 + 2υ) kg × m s-1
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,
गोली छूटने के बाद का कुल संवेग = गोली छूटने के पहले का कुल संवेग
3 + 2υ = 0
υ = 0 – 3
⇒ υ = – 1.5 m s-1
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि पिस्टल गोली के विपरीत दिशा में अर्थात् दाईं से बाईं ओर प्रतिक्षेपित होगी।

प्रश्न 23.
40 kg द्रव्यमान वाली एक लड़की, 5 ms-1 के क्षैतिज वेग से एक 3 kg द्रव्यमान वाली स्थिर गाड़ी पर कूदती है। गाड़ी के पहिए घर्षण रहित हैं। गाड़ी की गति प्रारंभ करने की अवस्था में लड़की का वेग क्या होगा ? मान लें कि क्षैतिज दिशा में कोई असंतुलित बल कार्य नहीं कर रहा है।
हल :
मान लो कि गाड़ी की प्रारंभिक गति के समय गाड़ी तथा लड़की का वेग υ है।
= 40 kg × 5 m s-1 + 3 kg × 0 m s-1
= 200 kg m s
लड़की तथा गाड़ी का लड़की के कूदने से पहले कुल संवेग
= (40 + 3) kg × υ m s-1
= 43 υ kg m s-1
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 13
= 43 υ kg m s-1
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार
43υ = 200
⇒ υ = 200/43
= + 4.65 m s-1
गाड़ी पर सवार लड़की 4.65 m s-1 के वेग से छलांग लगाने की दिशा में चलेगी।

प्रश्न 24.
हॉकी की प्रतिद्वंदी टीमों के दो खिलाड़ी गेंद को हिट करने के प्रयास में परस्पर टकरा जाते हैं तथा आपस में उलझ जाते हैं। एक का द्रव्यमान 60 kg है और वह 5.0 ms-1 के वेग से गति में था, जबकि दूसरा खिलाड़ी, जिसका द्रव्यमान 55 kg है 6.0 m s-1 के वेग से पहले खिलाड़ी की ओर गति कर रहा था। टकराकर उलझने के बाद वे दोनों किस दिशा में किस वेग से गति करेंगे। मान लें कि दोनों खिलाड़ियों के पैर तथा पृथ्वी के बीच कार्यरत घर्षण बल नगण्य है।
हल :
मान लो कि पहला खिलाड़ी बाएँ से दाएँ दौड़ रहा है तथा परिपाटी के अनुसार, बाएँ से दाएँ गति की दिशा धनात्मक तथा दाएँ से बाएँ गति की दिशा को ऋणात्मक लेते हैं।
दिया है,
m1 = 60 kg ; u1 = + 5 m s-1 ; तथा
m2 = 55 kg ; u2 = – 6 m s-1
टक्कर से पहले दोनों खिलाड़ियों का कुल संवेग
= 60 kg × (+ 5 m s-1) + 55 kg × (- 6 m s-1)
= – 30 kg m s-1
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 14
माना कि दोनों खिलाड़ियों के टकराने के पश्चात् उलझने पर वेग υ है,
टक्कर के पश्चात् कुल संवेग = (m1 + m2) × υ
= (60 + 55) kg × υ m s-1
= 115 × υ kg m s-1
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,
υ = – 30/115
= – 0.26 m s-1
अतः उलझने के पश्चात् दोनों खिलाड़ी दाएँ से बाएँ 0.26 m s-1 के वेग से गतिशील हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 25.
एक लंबी मेज पर सीधी रेखा में जा रही 20 ग्राम द्रव्यमान की गेंद का वेग-समय ग्राफ संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। गेंद को विरामावस्था में लाने के लिए मेज द्वारा कितना बल लगाया जाएगा?
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 15
हल :
ग्राफ से स्पष्ट है कि t = 0 पर गेंद का प्रारंभिक वेग u = 20 सेमी/सेकंड तथा t = 10 सेकंड बाद गेंद का वेग υ = 20 गेंद का द्रव्यमान m = 20 ग्राम
∴ ग्राफ एक सरल रेखा है, इससे स्पष्ट है कि गेंद एक नियत त्वरण के अधीन गति करती है।
सूत्र a = \(\frac{v-u}{t}\) से,
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 16
= -2 सेमी/सेकंडर2
= -0.02 मीटर/सेकंड2
∴ सूत्र F = m a से,
मेज द्वारा गेंद पर लगाया गया बल
F = 20 ग्राम × (- 0.02 मीटर/सेकंड2)
= \(\frac{20}{1000}\) किग्रा × (-0.02 मीटर/सेकंडर2)
= – 0.0004 न्यूटन
ऋणात्मक चिह्न यह प्रदर्शित करता है कि मेज द्वारा गेंद पर बल गति के विपरीत दिशा में लगाया जाता है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वस्तुओं की गति के बारे में पूर्णत: भिन्न संकल्पना किन वैज्ञानिकों ने दी थी ?
उत्तर-
गैलीलियो और आइजैक न्यूटन ने।

प्रश्न 2.
किसी वस्तु को गति की अवस्था में लाने के लिए क्या करना पड़ता है ?
उत्तर-
उसे खींचना, धकेलना या ठोकर लगाना पड़ता है।

प्रश्न 3.
वस्तु ऊपर से नीचे क्यों गिरती है ?
उत्तर-
असंतुलित गुरुत्वीय बल के कारण।

प्रश्न 4.
किसी वस्तु की दिशा बदलने के लिए कैसे बल की आवश्यकता होती है ? संतुलित बल या असंतुलित बल।
उत्तर-
असंतुलित बल की आवश्यकता।

प्रश्न 5.
कोई वस्तु कुछ दूर लुढ़कने के बाद क्यों रुक जाती है ?
उत्तर-
घर्षण बल के कारण।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 6.
घर्षण बल किस प्रकार घटाया जा सकता है ?
उत्तर-
समतल सतह पर लुब्रीकेंट के लेप से।

प्रश्न 7.
गति के तीन नियम किस वैज्ञानिक ने प्रस्तुत किए थे ?
उत्तर-
न्यूटन ने।

प्रश्न 8.
न्यूटन की गति का पहला नियम क्या है ?
उत्तर-
प्रत्येक वस्तु अपनी स्थिर अवस्था या सरल रेखा में एक समान गति की अवस्था में बनी रहती है जा तक कि उस पर कोई बाहरी बल कार्यरत न हो।

प्रश्न 9.
जड़त्व किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जड़त्व – किसी वस्तु के विरामावस्था में रहने या समान वेग से गतिशील रहने की प्रवृत्ति को जड़ता कहते हैं।

प्रश्न 10.
गति का पहला नियम किस अन्य नाम से जाना जाता है ?
उत्तर-
जड़त्व का नियम ।

प्रश्न 11.
एकदम ब्रेक लगाने से गाड़ी में बैठे यात्रियों को झटका क्यों लगता है ?
उत्तर-
यात्रियों का शरीर गतिज जड़त्व के कारण गति अवस्था में ही बने रहने की प्रवृत्ति रखता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 12.
गाड़ियों में सुरक्षा बेल्ट का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
इनसे हमारे आगे बढ़ने की गति धीमी हो जाती है।

प्रश्न 13.
बल की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
बल – बल वह बाहरी कारक है जो किसी वस्तु की विराम की अवस्था या गतिमान वस्तु की चाल तथा दिशा को बदलने या बदलने की प्रवृत्ति रखता है।

प्रश्न 14.
संतुलित बल किसे कहते हैं ?
उत्तर-
संतुलित बल – यदि वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो तो वस्तु पर लगने वाले सभी बल, संतुलित बल कहलाते हैं।

प्रश्न 15.
असंतुलित बल किसे कहते हैं ?
उत्तर-
असंतुलित बल – यदि किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल शून्य न हो, तो वे बल असंतुलित बल कहलाते हैं।

प्रश्न 16.
रबड़ की गेंद को हथेलियों के बीच में रखकर दबाते समय किस प्रकार का बल लगता है ?
उत्तर-
संतुलित बल।

प्रश्न 17.
घर्षण की परिभाषा लिखें।
उत्तर-
घर्षण – जब एक वस्तु किसी अन्य वस्तु के संपर्क में रहते हुए गति करती है तो उस गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य करता है जिसे घर्षण कहते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 18.
जब हम साइकिल के पैडल को चलाना बंद कर देते हैं तो साइकिल रुक जाती है, क्यों ?
उत्तर-
साइकिल के टायर और सड़क के बीच लगने वाला घर्षण बल उसकी गति को कम करके साइकिल को रोक देता है।

प्रश्न 19.
संवेग क्या होता है ?
उत्तर-
संवेग-किसी वस्तु का संवेग उसके वेग तथा द्रव्यमान का गुणनफल है।
∴ संवेग = द्रव्यमान × वेग।

प्रश्न 20.
न्यूटन का दूसरा गति-नियम क्या है ?
उत्तर-
किसी वस्तु पर क्रिया कर रहा बल उस वस्तु के पुंज और त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।

प्रश्न 21.
न्यूटन का तीसरा नियम क्या है ?
उत्तर-
क्रिया और प्रतिक्रिया समान किंतु विपरीत दिशा में क्रिया करती है।

प्रश्न 22.
संवेग सदिश राशि है या अदिश राशि ?
उत्तर-
संवेग एक सदिश राशि है।

प्रश्न 23.
एक एथलीट तब छलांग लंबी लगा सकता है, जब वह भागता हुआ आता है। जब वह अचानक ही छलांग लगा देता है तो छलांग छोटी रह जाती है। ऐसा क्यों ?
उत्तर-
जब एथलीट दूरी से दौड़ता हुआ आता है तो उसके गति-जड़त्व में वृद्धि हो जाती है। इसी कारण वह लंबी छलांग लगा पाता है। दूसरा स्थिति में छलांग छोटी होगी।

प्रश्न 24.
गोली चल चुकने के बाद बंदूक और गोली का कुल संवेग कितना होता है ?
उत्तर-
शून्य।

प्रश्न 25.
बल की मानक इकाई क्या है ?
उत्तर-
न्यूटन।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 26.
यदि वस्तु पर क्रिया कर रहा परिणामी बल शून्य हो तो बल संतुलित होंगे या असंतुलित ?
उत्तर-
बल संतुलित होंगे।

प्रश्न 27.
यदि 1 kg द्रव्यमान पर 1 न्यूटन बल लगाया जाए तो परिणामी त्वरण क्या होगा ?
उत्तर-
F = m × a
1 = 1 × a
a = 1 ms-2

प्रश्न 28.
वस्तु पर क्रिया कर रहे अनेक बल उसकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं करते। बल संतुलित हैं या असन्तुलित ?
उत्तर-
बल संतुलित है।

प्रश्न 29.
चार ऐसे उदाहरण दो जहां बल लगाने से स्थिर वस्तु गतिशील हो जाती है।
उत्तर-

  1. झाड़ से कूड़ा-कर्कट हटाना,
  2. ठोकर मार कर गेंद को लुढ़काना,
  3. घोड़े के द्वारा तांगा खींचना,
  4. हॉकी से बाल को हिट मारना।

प्रश्न 30.
जब बॉल को बैट के द्वारा हिट मारी जाती है तो क्या परिवर्तन दिखाई देता है ?
उत्तर-
बॉल की चाल शून्य से कुछ मान तक बढ़ जाती है।

प्रश्न 31.
किसका जड़त्व अधिक होगा ?
(i) एक पुस्तक या स्कूल बैग
(ii) पानी से भरा घड़ा या रेफ्रिजिरेटर।
उत्तर-
(i) स्कूल बैग
(ii) रेफ्रिजिरेटर।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 32.
हल्की और भारी वस्तुओं में से जड़त्व किसका अधिक होता है ?
उत्तर-
भारी वस्तुओं का जड़त्व अधिक होता है।

प्रश्न 33.
संवेग का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर-
संवेग का S.I. मात्रक किलोग्राम मीटर/सै० होता है।

प्रश्न 34.
न्यूटन बल की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
न्यूटन बल – वह बल जो एक किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु में 1 मी/सै2 का त्वरण उत्पन्न कर देता है। न्यूटन बल कहलाता है।

प्रश्न 35.
किसी बाहरी बल की अनुपस्थिति में जब दो वस्तुएं परस्पर टकराती हैं तो निकाय (System) के संवेग में संपूर्ण परिवर्तन क्या होगा ?
उत्तर-
कोई परिवर्तन नहीं होगा क्योंकि कुल संवेग संरक्षित रहता है।

प्रश्न 36.
बंदूक से गोली चलाने पर बंदूक पीछे क्यों हटती है ?
उत्तर-
बंदूक संवेग संरक्षण के नियम के कारण पीछे हटती है।

प्रश्न 37.
तैरने के दौरान कोई व्यक्ति पानी को अपने हाथों से पीछे क्यों दबाता है ?
उत्तर-
पानी को हाथों से पीछे दबाने पर प्रतिक्रिया का बल उसे आगे की ओर धकेलता है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 38.
कैरम बोर्ड पर खेलते समय प्रायः पाऊडर का प्रयोग क्यों करना पड़ता है ?
उत्तर-
घर्षण को कम करने के लिए।

प्रश्न 39.
क्रिया और प्रतिक्रिया एक ही पिंड पर कार्य करती हैं या अलग-अलग पिंडों पर ?
उत्तर-
अलग-अलग पिंडों पर।

प्रश्न 40.
दरी को छड़ी से पीटने पर धूल क्यों झड़ जाती है ?
उत्तर-
स्थिर जड़त्व के कारण।

प्रश्न 41.
खिलाड़ी कूदने से पहले क्यों दौड़ता है ?
उत्तर-
संवेग बढ़ाने के लिए ताकि अधिक ऊँची कूद लगाई जा सके।

प्रश्न 42.
संवेग संरक्षण का नियम क्या है ?
उत्तर-
संवेग संरक्षण नियम – दो वस्तुओं के संवेग का योग टकराने से पहले और टकराने के बाद बराबर रहता है जबकि उन पर कोई असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो।

प्रश्न 43.
बल का मात्रक लिखिए।
उत्तर-
बल का मात्रक न्यूटन है।

प्रश्न 44.
बल कैसी राशि है?
उत्तर-
बल एक सदिश राशि है।

प्रश्न 45.
एक बस और एक गेंद समान चाल से चल रहे हैं। दोनों में से किसे रोकने के लिए अधिक बल लगाना पड़ेगा ?
उत्तर-
अधिक संवेग के कारण बस को रोकने के लिए अधिक बल लगाना पड़ेगा।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 46.
कोई लड़की 20 kg द्रव्यमान के डिब्बे को 60 N बल लगाकर धकेलती है। डिब्बे का त्वरण क्या होगा?
उत्तर-
a = \(\frac{\mathrm{F}}{m}=\frac{60 \mathrm{~N}}{20 \mathrm{~kg}}\) = 3 m/s2

प्रश्न 47.
ब्रेक लगाने पर एक चलती गाड़ी रुक जाती है, इस प्रक्रिया में गाड़ी के संवेग का क्या होता है ?
उत्तर-
इस प्रक्रिया में गाड़ी के संवेग का अधिकांश भाग पृथ्वी को तथा शेष भाग वायु के अणुओं को चला जाता है।

प्रश्न 48.
यदि किसी वस्तु पर असंतुलित बल न लगा हो तो क्या वस्तु समान वेग से चलती रहेगी ?
उत्तर-
हां, वस्तु एक समान वेग से चलती रहेगी।

प्रश्न 49.
यदि किसी वस्तु पर नेट बाह्य बल शून्य है तो क्या वह वस्तु अवश्य ही विरामावस्था में होगी ?
उत्तर-
आवश्यक नहीं है कि वस्तु विरामावस्था में हों कि वस्तु एकसमान चाल से एक निश्चित दिशा में चल रही हो सकती है।

प्रश्न 50.
1 किग्रा-भार कितने न्यूटन के बराबर होता है ?
उत्तर-
1 किग्रा-भार = 9.8 न्यूटन।

प्रश्न 51.
1 न्यूटन में कितने किग्रा-भार होता है ?
उत्तर-
1 न्यूटन = 0.102 किग्रा-भार।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 52.
जड़त्व किस भौतिक पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
द्रव्यमान पर।

प्रश्न 53.
दो समान वेग वाले पिंडों के द्रव्यमान 1 : 2 के अनुपात में हैं। उनके जड़त्वों में क्या अनुपात होगा ?
उत्तर-
1 : 2 का अनुपात होगा।

प्रश्न 54.
किसी पिंड पर लगे बल (F), द्रव्यमान (m) तथा त्वरण (a) में परस्पर संबंध बताइए।
उत्तर-
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)।

प्रश्न 55.
एक कार को 300 न्यूटन के बल से सड़क पर खींचने से वह एक नियत वेग से चलती है। कार व पृथ्वी के बीच कितना घर्षण बल कार्य कर रहा है?
उत्तर-
300 न्यूटन।

प्रश्न 56.
पदार्थ का वह कौन-सा गुण है, जो पदार्थ की अवस्था परिवर्तन का विरोध करता है?
उत्तर-
जड़त्व का गुण।

प्रश्न 57.
रॉकेट का क्रिया-सिद्धांत, न्यूटन के गति के किस नियम पर आधारित है?
उत्तर-
न्यूटन के गति के तीसरे नियम पर।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 58.
किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा त्वरण के गुणनफल को क्या नाम दिया गया है ?
उत्तर-
संवेग।

प्रश्न 59.
‘m’ द्रव्यमान वाली एक वस्तु पर ‘F’ बल कार्य कर रहा है और त्वरण ‘a’ उत्पन्न होता है ? यदि बल की मात्रा आधी कर दी जाये तो त्वरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर-
क्योंकि a ∝ F, इसलिए बल की मात्रा \(\frac{F}{2}\) कर त्वरण \(\frac{a}{2}\) हो जाएगा।

प्रश्न 60.
एक ट्रक और एक कार v वेग से गतिशील हैं, दोनों एक-दूसरे से आमने-सामने संघट्ट करते हैं तथा कुछ समय बाद दोनों रुक जाते हैं। अगर संघट्ट का समयांतराल 1s है, तो
(a) कौन-सी गाड़ी पर बल का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा ?
(b) किस गाड़ी से संवेग में सबसे अधिक परिवर्तन होगा ?
(c) किस गाड़ी का त्वरण सबसे अधिक होगा ?
(d) ट्रक की अपेक्षा कार को अधिक नुकसान क्यों होगा ?
उत्तर-
(a) दोनों गाड़ियों पर बराबर बल लगेगा क्योंकि क्रिया तथा प्रतिक्रिया समान होते हैं। अब क्योंकि चार का द्रव्यमान कम है इसलिए कार पर प्रभाव अधिक होगा।
(b) क्योंकि क्रिया तथा प्रतिक्रिया समान होते हैं तथा यह संवेग का परिवर्तन होता है, इसलिए कार तथा ट्रक का संवेग परिवर्तन भी समान होगा।
(c) कार का त्वरण अधिक होगा क्योंकि इसका द्रव्यमान ट्रक के द्रव्यमान की अपेक्षा कम है।
(d) कार का कम जड़त्व होने के कारण इसे अधिक नुकसान होगा।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 1.
दो मित्रों अनी और बीजू की आयु में 3 वर्ष का अंतर है। अनी के पिता धरम की आयु अनी की आयु की दुगुनी और बीजू की आयु अपनी बहन कैथी की आयु की दुगुनी है। कैथी और धरम की आयु का अंतर 30 वर्ष है। अनी और बीजू की आयु ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए अनी की आयु = x वर्ष
और बीजू की आयु = y वर्ष
धर्म की आयु = 2x वर्ष
कैथी की आयु = \(\frac{1}{2}\) y वर्ष
पहली शर्त अनुसार,
(अनी की आयु) – (बीजू का आयु) = 3
x – y = 3
दूसरी शर्त अनुसार
(धर्म की आयु) – (कैथी की आयु) = 30
2x – \(\frac{y}{2}\) = 30

या \(\frac{4 x-y}{2}\) = 30
या 4x – y = 60
अब, (2) – (1) से प्राप्त होता है :

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 1

x के इस मान को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
19 – y = 3.
– y = 3 – 19
या – y = – 16
या y = 16
अतः, अनी की आयु = 19 वर्ष
बीजू की आयु =16 वर्ष।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 2.
एक मित्र दूसरे से कहता है कि, ‘यदि मुझे एक सौ दे दो, तो मैं आप से दो गुना धनी बन जाऊंगा।’ दूसरा उत्तर देता है यदि आप मुझे दस दे दें, तो मैं आप से छः गुना धनी बन जाऊँगा।’ बताइए कि उनकी क्रमशः क्या संपत्तियां हैं ? [भाष्कर I को बीज गणित से]
[संकेत 😡 + 100 = 2 (v-100),
y + 10 = 6 (x – 10)].
हल :
मान लीजिए एक मित्र की पूँजी = ₹ x
दूसरे मित्र की पूँजी = ₹ y
पहली शर्त अनुसार,
x + 100 = 2 (y – 100)
या x + 100 = 2y – 200
या x – 2y = – 200 – 100
या x – 2y = – 300 ………….(1)
दूसरी शर्त अनुसार
y + 10 = 6 (x – 10)
या y + 10 = 6x – 60
या 6x – y = 10 + 60
या 6x – y = 70 ………….(2)
(1) को 6 से गुणा करने पर हमें प्राप्त होता है:
6x – 12y = – 1800 ………….(3)
अब, (3) – (2) से प्राप्त होता है

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 2

y को (2) से गुणा करने पर हमें प्राप्त होता है:
6x – 170 = 70
या 6x = 70 + 170
या 6x = 240
या x = \(\frac{240}{6}\) = 40
अतः, उनकी पूंजी क्रमश: ₹40 और ₹ 170 है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 3.
एक रेलगाड़ी कुछ दूरी समान चाल से तय करती है। यदि रेलगाड़ी 10 km/h अधिक तेज चलती होती, तो उसे नियत समय से 2 घंटे कम लगते और यदि रेलगाड़ी 10 km/h धीमी चलती होती, तो उसे नियत समय से 3 घंटे अधिक लगते। रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए रेलगाड़ी की चाल = x किमी/घंटा
और रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = y घंटे
∴ गाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = (चाल) × (समय) = (xy) किमी
किमी पहली शर्त अनुसार,
(x + 10) (y – 2) = xy
या xy – 2x + 10y – 20 = xy
या – 2x + 10y – 20 = 0
या x – 5y + 10= 0
दूसरी शर्त अनुसार,
(x – 10) (y + 3) = xy
या xy + 3x – 10y – 30 = xy
या 3x – 10y – 30 = 0 ………..(2)
(1) को 3 से गुणा करने पर हमें प्राप्त होता है :
3x – 15y + 30 = 0 ………….(3)
अब, (3) – (2) से प्राप्त होता है

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 3

y के इस मान को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है:
x – 5 × 12 + 10 = 0
x – 60 + 10 = 0
x – 50 = 0
x = 50
∴ रेलगाड़ी की चाल = 50 किमी/घंटा
रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = 12 घंटे
अतः, रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = (50 × 12) किमी = 600 किमी.

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 4.
एक कक्षा के विद्यार्थियों को पंक्तियों में खड़ा होना है। यदि पंक्ति में 3 विद्यार्थी अधिक होते, तो 1 पंक्ति कम होती। यदि पंक्ति में 3 विद्यार्थी कम होते, तो 2 पैंक्तियाँ अधिक बनतीं। कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए प्रत्येक पक्ति में विद्यार्थियों की संख्या = x
और पंक्तियों की संख्या = y
कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या = xy
पहली शर्त अनुसार
(x + 3) (y – 1) = xy
या xy – x + 3y – 3 = xy
या – x + 3y – 3 = 0
या x – 3y + 3 = 0 …………(1)
दूसरी शर्त अनुसार
(x – 3) (y + 2) = xy
या xy + 2x – 3y – 6 = xy
या 2x – 3y – 6 = 0 ……………(2)
अब, (2) – (1) से प्राप्त होता है :

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 4

x = 9
x को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है।
9 – 3y + 3 = 0
या – 3y + 12 = 0
या – 3y = – 12
या y = \(\frac{12}{3}\) = 4
∴ प्रत्येक पंक्ति में विद्यार्थियों की संख्या = 9 और
पंक्तियों की संख्या = 4
अतः, कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या = 9 × 4 = 36.

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 5.
एक ∆ABC में, ∠C = 3 ∠B = 2 (∠A + ∠B) है। त्रिभुज के तीनों कोण ज्ञात कीजिए।
हल :
एक ∠ABC में,
∠C = 3∠B = 2 (∠A + ∠B)
I II III
II और III, से हमें प्राप्त होता है
3∠B = 2 (∠A + ∠B)
या 3∠B = 2∠A + 2∠B
या 3∠B – 2∠B = 2∠A
या ∠B = 2∠A ……………(1)
I और II, से हमें प्राप्त होता है
∠C = 3∠B
या ∠C = 3(2∠A)
[(1) का प्रयोग करने पर ]
या ∠C = 6∠A …………..(2)
त्रिभुज के तीनों कोणों का योगफल 180° होता है
∠A + ∠B + ∠C = 180°
या ∠A + 2∠A + 6∠A = 180°
9∠A = 180°
या ∠A = 180 = 20°
∠A = 20°; ∠B = 2 × 20° = 40°
∠C = 6 × 20° = 120°.

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 6.
समीकरणों 5x – y = 5 और 3x – y = 3 के ग्राफ खींचिए। इन रेखाओं और y-अक्ष से बने त्रिभुज के शीर्षों के निर्देशांक ज्ञात कीजिए। इस प्रकार बने त्रिभुज के क्षेत्रफल का परिकलन कीजिए।
हल :
दिया गया रैखिक समीकरण युग्म है : 5x – y = 5 और 3x – y = 3
5x – y = 5
5x = 5 + y
x = \(\frac{5+y}{5}\) ……………(1)
y = 0 को (1), रखने पर, हमें प्राप्त होता है :

x = \(\frac{5+0}{5}=\frac{5}{5}\) = 1

y = – 5 को (1) में रखने पर, हमें प्राप्त होता है :

x = \(\frac{5-5}{5}=\frac{0}{5}\) = 0

y = 5 को (1) में रखने पर, हमें प्राप्त होता है :

x = \(\frac{5+5}{5}=\frac{10}{5}\) = 2

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 5

बिंदुओं A (1, 0); B (0, – 5); C (2, 5) को ग्राफ पर आलेखित करने पर हमें समीकरण 5x – y = 5 की रेखा प्राप्त होती है।
और 3x – y = 3
या 3x = 3 +y
या x = \(\frac{3+y}{3}\) ………….(2)
y = 0 को (2) में रखने पर, हमें प्राप्त होता है :

x = \(\frac{3+0}{3}=\frac{3}{3}\) = 1

y = – 3 को (2) में रखने पर, हमें प्राप्त होता है :

x = \(\frac{3-3}{3}=\frac{0}{3}\) = 0

y = 3 को (2) में रखने पर, हमें प्राप्त होता है :

x = \(\frac{3+3}{3}=\frac{6}{3}\) = 2

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 6

बिंदुओं A (1, 0); D (0, – 3); E (2, 3) को ग्राफ पेपर आलेखित करने पर हमें समीकरण 3x – y = 3 की रेखा प्राप्त होती है :

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 7

ग्राफ से यह स्पष्ट है कि दी गई रेखाएँ A (1, 0) पर प्रतिच्छेद करती हैं। इन रेखाओं और ‘-अक्ष से बनी ∆ABD को छायांकित किया गया है। ∆ABD के शीर्षों के निर्देशांक हैं : A (1, (0); B (0, – 5) और D (0, – 3)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 7.
निम्न रैखिक समीकरणों के युग्मों को हल कीजिए :
(i) px + qy = p – q
qx – py = p + q

(ii) ax + by = c
bx + ay = 1 + c

(iii) \(\frac{x}{a}-\frac{y}{b}\) = 0
ax + by = a2 + b2

(iv) (a – b)x + (a + b) y = a2 – 2ab – b2
(a + b) (x + y) = a2 + b2

(v) 152x – 378y = – 74
– 378x + 152 y = – 604
हल :
(i) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म है :
px + qy = p – q ………….(1)
और qx – py = p + q ………..(2)

(1) को q से और (2) को p से गुणा करने पर हमें प्राप्त होता है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 8

या y = – 1

y के इस मान को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
px + q (- 1) = p – q
या px – q = p – q
या px = p – q + q
या px = p
या x = 1
अतः, x = 1 और y = – 1

(ii) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म है :
ax + by = c
और bx + ay = 1 + c
या ax + by – c = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 9

I और III से हमें प्राप्त होता है :

\(\frac{x}{-b-b c+a c}=\frac{1}{a^{2}-b^{2}}\)

या x = \(\frac{a c-b c-b}{a^{2}-b^{2}}\)

II और III से हमें प्राप्त होता है :

\(\frac{y}{-b c+a+a c}=\frac{1}{a^{2}-b^{2}}\)

या y = \(\frac{a+a c-b c}{a^{2}-b^{2}}\)

अत: x = \(\frac{a c-b c-b}{a^{2}-b^{2}}\) और y = \(\frac{a+a c-b c}{a^{2}-b^{2}}\)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

(iii) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म है :
\(\frac{x}{a}-\frac{y}{b}\) = 0

या \(\frac{b x-a y}{a b}\) = 0
या bx – ay = 0 …………..(1)
या ax + by = a2 + b2
या ax + by – (a2 + b2) = 0 …………(2)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 10

I और III से हमें प्राप्त होता है :

\(\frac{x}{a}=\frac{1}{1}\)

⇒ x = a

II और III से हमें प्राप्त होता है :

\(\frac{y}{b}=\frac{1}{1}\)

⇒ y = b

अतः, x = a और y = b.

(iv) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म है :
(a – b)x + (a + b) y = a2 – 2ab – b2
या ax – bx + ay + by = a2 – 2ab – b2 ………….(1)
और (a + b) (x + y) = a2 + b2
या ax + bx + ay + by = a2 + b2 ………….(2)
अब, (1) – (2) से प्राप्त होता है:

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 11

x के इस मान को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
(a – b) (a + b) + (a + b) y = a2 – 2ab – b2
या a2 – b2 + (a + b) y = a2 – 2ab – b2
या (a + b) y = a2 – 2ab – b2 – a2 + b2
या (a + b) y = – 2ab
या y = \(\frac{-2 a b}{a+b}\)
अतः, x = a + b और y = 4.

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

(v) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म है :
152x – 378y = – 74 और – 378x + 152y = – 604
या 76x – 189y + 37 = 0 और – 189x + 76y + 302 = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 12

या \(\frac{x}{-59890}=\frac{y}{-29945}=\frac{1}{-29945}\)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 13

I और III से हमें प्राप्त होता है
\(\frac{x}{59890}=\frac{1}{29945}\)

⇒ x = \(\frac{59890}{29945}\)

⇒ x = 2

II और III से हमें प्राप्त होता है
\(\frac{y}{29945}=\frac{1}{29945}\)

⇒ y = \(\frac{29945}{29945}\)

⇒ y = 1
अतः, x = 2 और y = 1

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 8.
ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है। (देखिए आकृति)। इस चक्रीय चतुर्भुज के कोण ज्ञात कीजिए।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 14

हल :
चक्रीय चतुर्भुज ABCD में,
∠A = (4y + 20);
∠B = 3y – 5;
∠C = 4x और
∠D = 7x + 5
∠C = 4x = 4 × 15 = 60°
∠D = 7x + 5 = 7 × 15 + 5 = 110°
अतः, ∠A = 120°, ∠B = 70°; ∠C = 60° और ∠D = 110°.
∠A + ∠C = 180°
या 4y + 20 + (4x) = 180°
या 4x + 4y = 180° – 20
या 4x + 4y = 160
या x + y = 40
या y = 40 – x …………………(1)
और ∠B + ∠D = 180°
या 3y – 5 + (7x + 5) = 180°
या 3y – 5 + 7x + 5 = 180°
या 7x + 3y = 180° …………..(2)
(1) से , के इस मान को (2) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
7x + 3 (40 – x) = 180°
7x + 120 – 3x = 180
या 4x = 180 – 120
या 4x = 60
या x = \(\frac{60}{4}\) = 15
x के इस मान को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है:
y = 40 – 15 = 25 .
∴ ∠A = 4y + 20
= 4 × 25 + 20 = 120°
∠B = 3y – 5 = 3 × 25 – 5 = 70°
∠C = 4x = 4 × 15 = 60°
∠D = 7x + 5 = 7 × 15 + 5 = 110°
अंत:- ∠A = 120°, ∠B = 70°; ∠C = 60° और ∠D = 110°.