PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 13 नर हो, न निराश करो मन को

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 13 नर हो, न निराश करो मन को Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 13 नर हो, न निराश करो मन को

Hindi Guide for Class 6 नर हो, न निराश करो मन को Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध

1. शब्दों के अर्थ व्याख्या के साथ दिए जा चुके हैं।

मास = महीना
खगोल शास्त्र = सौर-मण्डल सम्बन्धी अध्ययन
सून = खाली, रिक्त
गणितज्ञ = गणित को जानने वाला
आविष्कार = खोज
गणना = गिनना, गिनती
कौड़ी = घोंघे, शंख आदि
परिक्रमा = फेरी, प्रदक्षिणा
शिलालेख = किसी सम्राट द्वारा पत्थर पर खुदवाया आदेश
अक्ष = धरनी की धूरी
शताब्दी = सौ वर्ष का समय
अनमोल = अमूल्य
वैदिक काल = वेदों की रचना का युग
दरमिक प्रणाली = दस गुना तथा अपने से ठीक ऊंचे मान का दसवाँ भाग ।

2. निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करो-

सुयोग = ………………………
अवलम्बन = ………………………
दान = …………………….
धन = ……………………
सुख = ……………………..
उत्तर:
सुयोग (अच्छा अवसर) – मनुष्य को जीवन में सुयोग कभी-कभी ही मिलता है।
अवलम्बन (सहारा) – ईश्वर के अवलम्बन से ही कल्याण सम्भव है।
दान (उपकार के लिए कोई वस्तु देना) – दान देने से मनुष्य का कल्याण होता है।
धन (दौलत, पैसा) – अधिक धन का लालच नहीं करना चाहिए।
सुख (आराम) – दुःख उठाकर ही सुख प्राप्त होता है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 13 नर हो, न निराश करो मन को

3. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थक शब्द लिखो

नर = ………………….
जग = ……………….
तन = …………………
पथ = ………………….
प्रभु = ………………..
कर = ………………..
धन = ………………..
उत्तर:
नर = मनुष्य
जग = जगत्, संसार
तन = शरीर
पथ = मार्ग
प्रभु = परमात्मा
कर = हाथ
धन = वित्त, दौलत।

4. ‘सुयोग’ शब्द सु + योग से बना है। इसी प्रकार ‘अलभ्य’ शब्द अ + लभ्य से बना है। ‘सु’ और ‘अ’ का प्रयोग करते हुए पाँच-पाँच नए शब्द बनाओ।
उत्तर:
सु-सुविचार, सुनिश्चित, सुकृत, सुशोभित, सुकोमल।
अ-अप्राप्य, अलख, असाधारण, असंख्य, असाध्य।

5. काव्य-पंक्तियाँ पूरी करो

निज गौरव का………… ।
हम भी कुछ हैं यह ……….।
प्रभु ने तुमको………. ।
सब वांछित ………..।
उत्तर:
निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी हैं कुछ है यह ध्यान रहे
प्रभु ने तुमको कर दान किए
सब वांछित बस्तु विधान दिये

विचार-बोध(प्रश्न)

(क)
प्रश्न 1.
कवि ने क्या करने की प्रेरणा दी है ?
उत्तर:
कवि ने समय व्यर्थ न गँवाने और काम करते रहने की प्रेरणा दी है। मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 2.
मनुष्य को किस प्रकार कर्म करने को कहा है ?
उत्तर:
कविने मनुष्य को हमेशा आलस्य छोड़ कर निरन्तर कार्य करने को कहा है। समय बीत जाने पर व्यक्ति को पछताना पड़ता है। काम न करने से जीवन व्यर्थ चला जाएगा।

प्रश्न 3.
प्रभु ने मनुष्य को क्या दिया है ?
उत्तर:
प्रभु ने मनुष्य को हाथ दिये हैं। इसके अतिरिक्त काम करने के अन्य साधन भी उपलब्ध किए गए हैं।

प्रश्न 4.
कवि ने मनुष्य को किस प्रकार प्रोत्साहित किया है?
उत्तर:
कवि ने मनुष्य को कर्म करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

(ख) सप्रसंग व्याख्या लिखो

निज गौरव……………मन को।
नोट-सरलार्थ के लिए विद्यार्थी व्याख्या भाग देखें।

आत्म-बोध (प्रश्न)

1. इस कविता को कंठस्थ करो। नित्य प्रति इसका गुणगान करते हुए इससे प्रेरणा लो।
2. मैथिलीशरण गुप्त हिन्दी के राष्ट्रकवि थे। अपने अध्यापक से पता करो कि अन्य कौन-कौन से राष्ट्रकवि हुए हैं। गुप्त जी की रचनाओं के बारे में पढ़ो।
3. कविता में निरन्तर कर्म करने की प्रेरणा दी है। ‘श्रीमद्भगवत गीता’ से उन पंक्तियों को ढूँढ़ो जिनमें कर्मरत रहने को कहा गया है।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

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बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
इस कविता में कवि ने क्या बनने की प्रेरणा दी है ?
(क) आशावादी
(ख) निराशावादी
(ग) भाववादी
(घ) सिपाही
उत्तर:
(क) आशावादी

प्रश्न 2.
इस कविता में कवि ने मनुष्य को क्या करने की प्रेरणा दी है ?
(क) खेलने की
(ख) जागने की
(ग) कर्म करने की
(घ) चलने की
उत्तर:
(ग) कर्म करने की

प्रश्न 3.
प्रभु ने मनुष्य को क्या दिया ?
(क) धन
(ख) हाथ
(ग) तन
(घ) मन
उत्तर:
(ख) हाथ

प्रश्न 4.
कवि ने मन को क्या न होने की प्रेरणा दी है ?
(क) निराश
(ख) उदास
(ग) हताश
(घ) विश्वास
उत्तर:
(क) निराश

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार मनुष्य का क्या रहना चाहिए ?
(क) धन
(ख) तन
(ग) मन
(घ) मान
उत्तर:
(घ) मान

पद्यांशों के सरलार्थ

1. नर हो, न निराश करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो।
जग में रहकर कुछ नाम करो,
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो।
समझो, जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को,
नर हो, न निराश करो मन को।।

शब्दार्थ:
नर = मनुष्य। जग = संसार। व्यर्थ = फ़िजूल।

प्रसंग:
यह पद्यांश श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘नर हो, न निराश करो मन को’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने मनुष्य को निराशा को छोड़कर परिश्रमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सरलार्थ:
कवि कहता है-तुम मनुष्य हो, अपने मन को निराश मत करो। कुछ-नकुछ काम अवश्य करो। संसार में रहकर अपना कुछ नाम पैदा करो। प्रसिद्धि प्राप्त करो। यह तुम्हारा जन्म किस लिए हुआ है। तुम समझो या सम्भल जाओ, जिससे तुम्हारा यह मनुष्य जन्म बेकार न चला जाए। तुम अपने शरीर को कुछ तो काम करने के योग्य बनाओ। तुम मनुष्य हो, अतः अपने मन को निराश न होने दो।

भावार्थ:
कवि ने मनुष्य को जीवन में काम करने की प्रेरणा दी है।

2. समझो, कि सुयोग न जाए चला,
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला।
समझो, जग को न निरा सपना,
पथ आप करो प्रशस्त अपना।
अखिलेश्वर है अवलम्बन को,
नर हो, न निराश करो मन को।

शब्दार्थ:
सुयोग = अच्छा अवसर। सदुपाय = अच्छा उपाय। प्रशस्त = पक्का करना, बनाना। अखिलेश्वर = ईश्वर। अवलम्बन = सहारा ।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक में संकलित ‘नर हो, न निराश करो मन को’ कविता में से लिया गया है। इसके रचयिता श्री मैथिलीशरण गुप्त हैं। इसमें कवि ने मनुष्य को निराशा को छोड़कर परिश्रमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सरलार्थ:
कवि मनुष्य को प्रोत्साहित करते हुए कहता है-तुम संभल जाओ ताकि तुम्हारे हाथ से अच्छा अवसर न निकल जाए। तुम यह बताओ कि अच्छी तरह से किया हुआ उपाय भला कब व्यर्थ जाता है ? संसार को तुम निरा स्वप्न ही मत समझो बल्कि अपने जीवन के मार्ग को स्वयं बनाओ! क्योंकि तुम्हारा सहारा ईश्वर है। तुम मनुष्य हो, इसलिए मन को निराश मत होने दो।

भावार्थ:
कवि ने ईश्वर पर विश्वास रखते हुए किसी भी प्रकार की निराशा से बचने का पाठ पढ़ाया है।

3. निज गौरव का नित ज्ञान रहे,
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे।
सब जाये अभी, पर मान रहे,
मरने पर गुंजित गान रहे।
कुछ हो, न तजो निज साधन को,
नर हो, न निराश करो मन को।

शब्दार्थ:
निज = अपना। गौरव = बड़प्पन, स्वाभिमान। तजो = छोड़ो। प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक में संकलित ‘नर हो, न निराश करो मन को’ कविता में से लिया गया है। इसके रचयिता श्री मैथिलीशरण गुप्त हैं। इसमें कवि ने मनुष्य को निराशा को छोड़कर परिश्रमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सरलार्थ:
कवि काम करते समय मनुषण को सावधान रहने की शिक्षा देते हुए कहता है-तुम्हें अपने स्वाभिमान का हमेशा ज्ञान होना चाहिए। संसार में हम भी कुछ हैं, इस बात का अवश्य ध्यान होना चाहिए। संसार की सब योग्य वस्तुएँ अथवा सुख साधन सभी नष्ट हो जाएँ किन्तु सम्मान बना रहे, जिससे यश के गीत, मरने के बाद भी संसार में गूंजते रहें। कुछ भी हो, तुम अपने साधन को मत छोड़ो। तुम मनुष्य हो, इसलिए अपने मन को निराश मत होने दो।

भावार्थ:
कवि ने निराशा के भावों को मन में कभी न आने की प्रेरणा दी है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 13 नर हो, न निराश करो मन को

4. प्रभु ने तुम को कर दान किए,
सब वांछित वस्तु-विधान किए।
तुम प्राप्त करो उनको न अहो,
फिर है किसका यह दोष कहो।
समझो न अलभ्य किसी धन को,
नर हो, न निराश करो मन को।।

शब्दार्थ:
कर = हाथ। वांछित = मनचाही। अलभ्य = अप्रयाप्य, न मिलने योग्य।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक में संकलित ‘नर हो, न निराश करो मन को’ कविता में से लिया गया है। इसके रचयिता श्री मैथिलीशरण गुप्त हैं। इसमें कवि ने मनुष्य को निराशा को छोड़कर परिश्रमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सरलार्थ:
कवि मनुष्य को प्रेरणा देते हुए कहता है-परमात्मा ने तुम्हें दो हाथ प्रदान किए हैं और सब मन चाही वस्तुएँ भी प्रदान की हैं। फिर यदि तुम उनको प्राप्त न करो तो बताओ फिर यह उसका दोष है? किसी भी पदार्थ को तुम यह मत समझो कि यह प्राप्त नहीं हो सकता, सब कुछ सम्भव है बस अपने मन को निराश मत होने दो। तुम मनुष्य हो इसलिए अपने मन को निराश मत करो।

भावार्थ:
मनुष्य अपने तन-मन से किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति कर सकने के योग्य है।

5. किस गौरव के तुम योग्य नहीं,
कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं।
जन हो तुम भी जगदीश्वर के,
सब हैं जिसके अपने घर के॥
फिर दुर्लभ क्या उसके जन को?
नर हो, न निराश करो मन को।

शब्दार्थ:
भोग्य = भोगने योग्य। जगदीश्वर = परमात्मा। दुर्लभ = जो कठिनाई से प्राप्त हो।

प्रसंग:
यह पद्यांश श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘नर हो, न निराश करो मन को’ कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने मनुष्य को निराशा को छोड़कर परिश्रमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सरलार्थ:
कवि कहता है-कौन-सा ऐसा मान है जिसके लिए तुम योग्य नहीं हो अर्थात् तुम सब प्रकार का सम्मान प्राप्त करने की योग्यता रखते हो। ऐसा कौन-सा सुख है जिसको भोगने के तुम योग्य नहीं हो। तुम उस ईश्वर की सन्तान हो जिन्हें वो अपने घर का सदस्य मानते हैं। सभी प्राणी ईश्वर को समान रूप से प्यारे हैं। भला फिर उस ईश्वर के व्यक्ति के लिए कौन-सी वस्तु ऐसी है कि जिसे प्राप्त नहीं किया जा सकता। तुम मनुष्य हो, इसलिए अपने मन को निराश न करो।

भावार्थ:
मनुष्य को ईश्वर ने हर कार्य करने और उसमें सफलता प्राप्त करने के गुण प्रदान किए हैं।

नर हो, न निराश करो मन को Summary

नर हो, न निराश करो मन को कविता का सार

कवि मनुष्य को शिक्षा देते हुए कहता है कि तुम अपने में निराशा के भाव कभी मत लाओ। तुम नर हो और तुम्हारा कार्य परिश्रम करना है। व्यर्थ में अपना जीवन मत गंवाओ। यह संसार सपना नहीं। तुम ईश्वर का नाम लेकर इसमें अपना रास्ता स्वयं चुनो। अपने लक्ष्य को निश्चित कर तुम अपनी मंजिल की ओर बढ़ो। ईश्वर ने तुम्हें दो हाथ दिए हैं। उनसे परिश्रम करो और किसी भी धन को अप्राप्य न समझो। तुम ईश्वर के गुणों को प्राप्त कर धरती पर उत्पन्न हुए हो। इसलिए तुम्हारे लिए कोई भी कार्य करना कठिन नहीं है। तुम तन-मन से परिश्रम करो।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

Punjab State Board PSEB 11th Class Hindi Book Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Hindi Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

Hindi Guide for Class 11 PSEB वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
वारिसनामा किसे कहते हैं ? युवा पीढ़ी की विरासत क्या है ?
उत्तर:
‘वारिसनामा’ एक कार्यालयी शब्द है। जब कोई बुजुर्ग अपनी सम्पत्ति का उत्तराधिकारी बनाने की बात सोचता है तो कचहरी में जाकर तहसीलदार के सामने जो कागज़ प्रस्तुत करता है उसे ‘वारिसनामा’ कहा जाता है। दूसरे शब्दों में इसे वसीयत करना भी कहते हैं। कविता में वारिसनामा से तात्पर्य आने वाली पीढ़ी के लिए शहीदों का संदेश है कि वे स्वराज की रक्षा के लिए अपने प्राण भी न्यौछावर कर दें।
युवा पीढ़ी की विरासत शहीदों की समाधियां हैं।

प्रश्न 2.
स्वराज के लिए बहे लहू का स्वरूप क्या है ?
उत्तर:
स्वराज के लिए बहे लहू में पंच तत्व शामिल होते हैं और वह हर सुख-सुविधा देने वाला होता है। छोटाबड़ा, अमीर-गरीब, शिक्षित-अशिक्षित, पुरुष-स्त्री, बच्चा-बूढ़ा हर व्यक्ति देश की रक्षा के लिए जागरूक हो। वह विदेशियों की चालों को समझे और एकजुट होकर देश के विरुद्ध चली जाने वाली चालों को समझे और उन चालों को असफल बनाने के लिए प्रयास करे। कोई भी व्यक्ति चाहे कोई भी काम करता है वह उसी को ईमानदारी से करता रहे। “स्वराज के लिए लहू बहाने’ से तात्पर्य मर जाना नहीं है बल्कि अपना-अपना कार्य पूरी क्षमता से करना है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

प्रश्न 3.
स्पष्ट कीजिए कि यह कविता भारत छाप विश्व मानव की छवि है ?
उत्तर:
कवि जो भारत छाप विश्व मानव के रूप में जो लड़ाई लड़ते आए हैं, उसकी एक ज्योति है कालजयी स्वराज चेतना। यह चेतना अपने आप उजागर होने और उजाला फैलाने की भावना है।

प्रश्न 4.
हुसैनी वाला के समीप भारत-पाक सीमा पर खड़ा स्मारक आज की पीढ़ी को क्या कहता है ?
उत्तर:
यह स्मारक आज की पीढ़ी को शहीदों की कुर्बानी को याद दिलाते हुए उसे यह कहता है कि उठो और देश के नव-निर्माण में जुट जाओ क्योंकि तुम्हीं उस शहीदों के वारिस हो। जिस आज़ादी को लाखों वीरों ने अपना जीवन दे कर प्राप्त किया उसकी रक्षा करने में जुट जाओ। देश के भीतर और बाहर के खतरों को समझो और देश के दुश्मनों को मिटा दो। देश का दुश्मन कोई बहुत अपना भी दुश्मन के समान ही है।

प्रश्न 5.
निराला की ‘जागो फिर एक बार’ कविता से वारिसनामा कविता की तुलना करें।
उत्तर:
निराला जी की कविता में भारतवासियों को उनके अतीत के गौरव की याद दिलाते हुए स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने के लिए जाने के लिए कहा गया है जबकि वात्स्यायन जी की कविता में भारतवासियों को शहीदों की याद दिला कर देश के नव-निर्माण में योग देने के लिए कहा है। दोनों कविताओं में कोई समता नहीं है। एक स्वतन्त्रता पूर्व लिखी गई थी दूसरी स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

PSEB 11th Class Hindi Guide वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू Important Questions and Answers

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि सुरेश चन्द्र वात्स्यायन का जन्म कब हुआ था ?
उत्तर:
7 फरवरी, सन् 1934 को।

प्रश्न 2.
‘वारिसनामा’ किस प्रकार का शब्द है ?
उत्तर:
‘वारिसनामा’ एक कचहरी तथा कानूनी शब्द है।

प्रश्न 3.
कवि के अनुसार हम सभी में किसका अंश है ?
उत्तर:
हम सभी में त्रिशक्ति का अंश है।

प्रश्न 4.
कविता में कवि ने किन्हें याद करने को कहा है ?
उत्तर:
शहीदों को।

प्रश्न 5.
हमें अपने अंदर क्या पहचानना चाहिए ?
उत्तर:
नेतृत्व की भावना को।

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प्रश्न 6.
समाधियाँ किसे प्रेरित करेंगी ?
उत्तर:
नई पीढ़ी को नव निर्माण के लिए।

प्रश्न 7.
वीरों के इतिहास हमारे लिए क्या हैं ?
उत्तर:
वसीयत।

प्रश्न 8.
चाणक्य ने किसका निर्माण किया है ?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त।

प्रश्न 9.
हमें अपने अंदर छिपे ………. को बाहर निकालना होगा।
उत्तर:
चन्द्रगुप्त।

प्रश्न 10.
हम लोगों में किसका अंश है ?
उत्तर:
त्रिशक्ति।

प्रश्न 11.
हमें किसकी रक्षा करनी है ?
उत्तर:
भारत माता की।

प्रश्न 12.
इतिहास से परिचय कराने वाले …………. नहीं हैं।
उत्तर:
वीर पुरुष।

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प्रश्न 13.
कवि ने भारतवासियों को किसका उत्तराधिकारी माना है ?
उत्तर:
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव।

प्रश्न 14.
देश भक्तों की समाधि किस नदी के किनारे बनी है ?
उत्तर:
सतलुज नदी।

प्रश्न 15.
हमें स्वतंत्रता सेनानियों के ……… को नहीं भूलना चाहिए।
उत्तर:
बलिदान।

प्रश्न 16.
भारतवासी किस की संतान हैं ?
उत्तर:
आर्य की।

प्रश्न 17.
चाणक्य ने किसके अंदर की छिपी प्रतिभा को देखकर उसे सत्ता दिलाई थी ?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त।

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प्रश्न 18.
कवि ने मानव को स्वयं ………… की पहचान बनने को कहा है।
उत्तर:
नेतृत्व।

प्रश्न 19.
हमें ………… नहीं बनना चाहिए।
उत्तर:
कल्पनाशील।

प्रश्न 20.
देश हित के लिए हमें अपनी आत्मा को ………… करना होगा।
उत्तर:
जगाना।

बहुविकल्पी प्रस्नोत्तर

प्रश्न 1.
सुरेश चन्द्र वात्स्यायन किस चिंतन के प्रवर्तक कवि माने जाते हैं ?
(क) प्रगतिशील भारतीय
(ख) प्रगतिवादी भारतीय
(ग) प्रयोगवादी
(घ) नीतिवादी।
उत्तर:
(क) प्रगतिशील भारतीय

प्रश्न 2.
सुरेश चन्द्र वात्स्यायन को 1922 ई० में किस साहित्यकार के रूप में अलंकृत किया ?
(क) प्रगतिशील
(ख) प्रतिनिधि
(ग) शिरोमणि
(घ) शिरोधार्य।
उत्तर:
(ग) शिरोमणि

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

प्रश्न 3.
हमें किसकी रक्षा करनी चाहिए ?
(क) भारतमाता की
(ख) देश की
(ग) वीरों की
(घ) अपनी।
उत्तर:
(क) भारतमाता की

प्रश्न 4.
कवि के अनुसार हम लोगों में किसका अंश है ?
(क) देव का
(ख) त्रिशक्ति का
(ग) भगवान का
(घ) गुरु जी का।
उत्तर:
(ख) त्रिशक्ति का।

वारिसनामा स्वराज के लिए बड़े लहू सपसंग व्याख्या

1. भगतसिंह-राजगुरु-सुखदेव के वारिसो,
फांसी के जिस फंदे ने,
गले घोंट दिए उनके,
क्यों भूल गए आज तुम उसको,
याद दिलाती आज भी इक समाधि को जुहारती
सतलुज के फिरोजपुरी पुल की हुसैनी हवा,
स्वराज के संकल्प पर
प्रशासन के विदेशी उस प्रहार को !

कठिन शब्दों के अर्थ :
वारिसनामा = उत्तराधिकार संबंधी प्रपत्र । स्वराज = अपना राज्य। वारिसो = उत्तराधिकारियों। जुहारती = निहारती, देखती। प्रहार = चोट।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सुरेश चंद्र वात्स्यायन द्वारा लिखित कविता वारिसनामा-‘स्वराज के लिए बहे लहू’ में से लिया गया है। इसमें कवि ने भारतवासियों को उनके पूर्वजों के संकल्प स्वतंत्रता की रक्षा करने की याद दिलाते हुए नवनिर्माण करने का संदेश दिया है।

व्याख्या :
कवि कहता है कि हे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के उत्तराधिकारियो ! तुम फांसी के उस फंदे को क्यों भूल गए हो जिस फंदे ने इन देशभक्तों के गले घोंट दिए थे। इन देशभक्तों की समाधि आज भी तुम्हारी ओर देख रही है जो सतलुज के किनारे हुसैनी वाला नामक स्थान पर बनी हुई है तथा यह समाधि हमें याद दिलाती है देशभक्तों की और स्वराज्य के दृढ़ निश्चय या प्रतिज्ञा की तथा विदेशी शासन की उस चोट को जो हमारे देश भक्तों पर ही नहीं देश पर भी पड़ी थी। उनकी समाधि हमें उनके दशक के लिए किए गए बलिदान की याद दिलाती है, और हमें उनका बलिदान भूलना नहीं है।

विशेष :

  1. कवि का भाव यह है कि हमें स्वतन्त्रता सेनानियों के बलिदान को भूलना नहीं चाहिए।
  2. शहीदों की समाधियाँ हमें यह याद दिलाती है कि हमने देश को आजाद करवाने में बहुत संघर्ष किया है। भाषा सरल है।
  3. अनुप्रास अलंकार है।
  4. वीर रस विद्यमान है।
  5. ओज गुण है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

2. नेशन के विरुद्ध
राष्ट्र के युद्ध की पहचान के बिना,
पुरखों की आर्य संतान तुम कैसे बनोगे,
जिंदगी की किताब में
विदेशियों की लिपि में दरज
आर्य-द्रविड़-रंग-जाति-क्षेत्रगत भेदभाव के
पश्चिमी पाखंड को
जड़ से उखाड़ फेंकने वाले शोध बोध की ज्योति
इतिहास का यथार्थ ज्ञान तुम कैसे बनोगे,
राम-राज्य के जिस आदर्श के लिए
वे हो गए बलिदान
धारण किए बिना धड़कनों में उसको
कुश के वंशज सतगुरु नानक के सबद
लव के वंशज दशमेश पिता के विचित्र नाटक का देश पावन
मानस की जात का सच्चा सुच्चा हिंदुस्तान तुम कैसे बनोगे?

कठिन शब्दों के अर्थ :
नेशन = कौम-अंग्रेज़ी कौम। राष्ट्र = भारत। पुरखों = पूर्वजों। बोध = ज्ञान। यथार्थ = वास्तविकता। दशमेश = दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी। विचित्र नाटक = गुरु गोबिंद सिंह जी की एक रचना।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ सुरेश चन्द्र वात्स्यायन द्वारा लिखित कविता ‘वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू’ में से ली गई हैं। इसमें कवि ने देश के लिए शहीद हुए वीरों का वर्णन करके हमें सच्चा हिन्दुस्तानी बनने की प्रेरणा दी है

व्याख्या :
कवि कहता है कि अंग्रेजी कौम के विरुद्ध भारत राष्ट्र के युद्ध की पहचान के बिना तुम पूर्वजों की आर्य संतान कैसे कहलाओगे। जीवन की पुस्तक में विदेशियों द्वारा अपनी भाषा में लिखे आर्य-द्रविड़ के भेद, रंग-जाति के भेद को, जो पश्चिम का एक पाखंड है, जड़ से उखाड़ फेंकने वाले शोध के ज्ञान की ज्योति और इतिहास की वास्तविकता का ज्ञान तम्हें कब होगा।।

हमारे पूर्वज, हमारे स्वतंत्रता सेनानी, हमारे देशभक्त जो राम राज्य के आदर्श को लेकर अपने जीवन को अर्पित कर गए उनकी धड़कनों को धारण किए बिना तुम सच्चा हिन्दुस्तान किस प्रकार बनोगे। इसके लिए श्रीराम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सतगुरु नानक के सबद और श्रीराम के बड़े बेटे लव के वंशज दशम गुरु-गुरु गोबिंद सिंह जी के विचित्र नाटक में लिखित संदेश ‘मानुष की जात एक’ संदेश को याद करना होगा तभी तुम सच्चे हिन्दुस्तान का रूप बन सकोगे। सच्चा हिन्दुस्तानी बनने के लिए देश की रक्षा के लिए की गई कुरबानियों को याद रखना होगा।

विशेष :

  1. कवि का भाव यह है कि पश्चिमी विद्वानों ने भारतीय इतिहास का शोध अपने ढंग से किया जिससे हिन्दुस्तान को इतिहास की जानकारी नहीं मिल पाई है।
  2. कवि ने भारतीयों को सच्चा हिन्दुस्तानी बनने के लिए शहीदों की कुरबानियों को याद रखने के लिए कहा है अर्थात् उनके बताए मार्ग
  3. पर चलने के लिए कहा है।
  4. भाषा सरल है
  5. देशी, विदेशी शब्दावली का प्रयोग है।
  6. अनुप्रास अलंकार है।
  7. वीर रस है।
  8. ओज गुण है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

3. दुर्भाग्य है तुम्हारा
कि तुममें छिपा खोया जो चंद्रगुप्त
कोई चाणक्य उसके लिए प्रकाश में कहीं नहीं,
ऐसे में नेताओं की ओर देखो मत
नेतृत्व की पहचान खुद बनो!
जागो
नींद ने तुमको ले जाना है कहीं नहीं,
समझो नींद में जो आते हैं
सपने वे राह भूली अकल की भटकन हैं,
नशे की गोलियों जैसे वे
भूल भुलैयों में भरमाते हैं!!

कठिन शब्दों के अर्थ :
अकल = बुद्धि। भरमाते हैं = भ्रम में डालते हैं।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सुरेश चन्द्र वात्स्यायन द्वारा लिखित कविता ‘वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू’ में से लिया गया है। इसमें कवि ने हिन्दुस्तानियों को अपने अन्दर छिपी नेतृत्व की शक्ति को पहचानने के लिए कहता है

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को संबोधित करते हुए कहता है कि यह तुम्हारा दुर्भाग्य है कि आज चाणक्य जैसे नेता नहीं है जो तुम्हारे में छिपे चन्द्रगुप्त की खोज कर सके। तुम्हें आज के नेता की ओर नहीं देखना चाहिए। वे अपनी राह भटक गए हैं तुम्हे क्या राह दिखाएंगे। चाणक्य ने चंद्रगुप्त में छिपी प्रतिभा देख कर उसे राज्य सत्ता का अधिकारी बनाया था। लेकिन अब कोई ऐसा दिखाई नहीं देता जो स्वार्थी भावों से रहित होकर देश के लिए स्वयं को अर्पित करना चाहता है और देश का शासन किसी चन्द्रगुप्त जैसे वीर को सौंपने का साहस कर सकता है।

इसलिए तुम स्वयं नेतृत्व की पहचान बनो क्योंकि तुम्हीं कल के नेता हो इसलिए जागो यह नींद तुम्हें कहीं नहीं ले जाएगी। अपनी आत्मा को जगाओ। इतनी बात समझ लो कि नींद में जो सपने आते हैं वे बुद्धि की भटकन होते हैं। नशे की गोलियों की तरह वे भूल भुलैयों के भ्रम में डालते हैं। कल्पनाशील मत बनो जीवन की सच्चाई का सामना करो।

विशेष :

  1. कवि का भाव यह है कि हमें अपने अन्दर नेतृत्व की प्रतिभा को पहचानना चाहिए और देश को नई राह पर ले जाना चाहिए।
  2. अपने को भटकने से बचाना चाहिए।
  3. भाषा सरल है।
  4. अनुप्रास अलंकार है।
  5. ओज गुण एवं वीर रस है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

4. हर सुबह सांझ की लाली के संग
करो प्रणाम उन माताओं को
भगतसिंह राजगुरु हरसुखदेव की नसों नाड़ियों में
गति कर रही बन कर लहू जो,
लहू यह माटी पानी आग हवा आकाश है जिनकी
जो हर सुख-सुविधा की दाता है
वह और कोई नहीं
बेटी धरती की अपनी भारत माता है।

कठिन शब्दों के अर्थ :
गति कर रही = बह रही है। दाता = देने वाली।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्य पंक्तियां सुरेश चन्द्र वात्स्यायन द्वारा लिखित ‘वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने शहीदों की माँ को धरती की बेटी भारत माता कहा है

व्याख्या :
कवि कहता है कि हे भारतवासियो ! तुम हर सुबह शाम उन माताओं को प्रणाम करो जिन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे महान् शहीदों को, देशभक्तों को जन्म दिया और जिनका लहू उन शहीदों की नसों में बह रहा है। यह लहू पंच तत्वों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है जो प्रत्येक सुख-सुविधा को देने वाला है। यह लह और किसी का नहीं धरती की बेटी भारत माता का लहू है अर्थात् शहीदों की माताएं भारत माता होती हैं। उन्हें प्रणाम करना चाहिए।

विशेष :

  1. कवि का भाव यह है कि शहीदों की माताएं पूजनीय होती हैं।
  2. शहीदों की नसों में बहने वाला खून पांच तत्व मिट्टी, पानी, आग, हवा और आकाश से मिलकर बना है। यह पांच तत्व हमें हर प्रकार की
  3. सुविधा देते हैं अर्थात् वीरों के बलिदान हमें सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  4. भाषा सरल है।
  5. अनुप्रास अलंकार है।
  6. वीर रस है।
  7. ओज गुण है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

5. संकट है घर में
संकट है बाहिर,
पहचानो
घर में लगी घर की ही आग को,
पहचानो
घर की आग को भड़का रही
बाहिर की धूर्त पाजी सफ़ेदपोश हवा को,
यदि प्रबुद्ध तुम तपः पूत संकल्प के प्रकल्प
तब क्या है किसी अजनबी आग हवा की बिसात
कि अपनी लपेट में तुम्हें लपक वह ले ।

कठिन शब्दों के अर्थ :
धूर्त = मक्कार। पाजी = पाखंडी। प्रबुद्ध = जागृत, ज्ञानी। तपः पूत = तप से पवित्र हुए। संकल्प = दृढ़ निश्चित, प्रतिज्ञा। प्रकल्प = निश्चित । अजनबी = अपरिचित। लपक ले = पकड़ ले।।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्य पंक्तियां सुरेश चन्द्र वात्स्यायन द्वारा लिखित कविता ‘वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने भारतवासियों को देश के अन्दर और बाहर दोनों ओर से आ रहे संकट के प्रति सचेत किया है।

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हमें घर और बाहर संकट को पहचानना चाहिए। घर में घर की ही आग लगी हुई है इसे पहचानो अर्थात् देश के अंदर साम्प्रदायिकता, भेदभाव, जातिवाद, आतंकवाद आदि की आग को समझो। बाहर की आग को जो मक्कार, पाखंडी, सफ़ेदपोश, सभ्य कहलाने वाले लोग हवा दे रहे हैं उसे भी पहचानो। यदि तुम जागृत हो, ज्ञानवान हो और तप से पवित्र हुए संकल्प के प्रति स्थिर हो, निश्चित हो तो क्या मजाल है कि कोई अपरिचित आग को हवा दे सके और वह आग तुम्हें अपनी लपेट में ले ले या पकड़ सके, हमें अपने कर्तव्यों तथा देश की रक्षा के प्रति जागरुक रहना चाहिए।

विशेष :

  1. कवि का भाव यह है कि सभ्य कहलाने वाले लोग दिखावे की मित्रता करके देश के अन्दर और बाहर दोनों जगह आतंकी स्थिति उत्पन्न कर रहा है। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए।
  2. हमें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर एक जुट हो कर बाहरी दुश्मन का सामना करना चाहिए।
  3. भाषा सरल है।
  4. तत्सम और देशी-विदेशी शब्दावली का प्रयोग है।
  5. अनुप्रास अलंकार है।
  6. वीर रस है।
  7. औज गुण है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

6. तुम इंद्र, व्रजपाणि, मृत्युंजय, प्रलयंकर जन्मजात,
भूलो मत बैसाखियों के भरम में
अचूक दुर्दम दम है तुममें
अपने पैरों चल सकते तुम अपनी चाल हो
अंधेरा हो घना
तो उसको चीर जो सकती
तुम वह मशाल हो,
सुनो शहीदों की हर समाधि को जुहारती
हर फ़िरोजपुरी पुल पार की हुसैनी हर हवा में गूंजती
वैदिक ऋषि के अभय सक्त जैसी
स्वराज के संकल्प की बँगार को गुहार को,
लो थामो, उतारो अपनी धड़कनों में
स्वराज का वारिसनामा यह
भगत सिंह राजगुरु सुखदेव के वारिसो!!!

कठिन शब्दों के अर्थ :
इंद्र = देवताओं के स्वामी, स्वर्ग के राजा। वज्रपाणि = भगवान् विष्णु। मृत्युंजय = मृत्यु पर विजय पा ली है जिन्होंने-भगवान् शिव। प्रलयंकर = सर्वनाशकारी-भगवान् शंकर। बैसाखियों = सहारा। दुर्दम = जिसे दबाना कठिन हो। जुहारती = निहारती। अभय = निडर, भयमुक्त। सूक्त = वेद मंत्र। अभयसूक्त = कुछ वेद मंत्र हर डर में निडर रहने वाले ऋषियों की प्रार्थना है। इन मंत्रों के एक समूह को ‘अभय सूक्त’ कहा जाता है। बगार = ललकार।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सुरेश चंद्र वात्स्यायन द्वारा लिखित कविता ‘वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू’ में से लिया गया है। इसमें कवि ने भारतवासियों में देश भक्ति का संचार करने के लिए उन्हें उनके अंदर विद्यमान गुणों को पहचानने के लिए कहता है

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को सम्बोधित करते हुए कहता है कि तुम्हारे अन्दर जन्म से ही देवराज इंद्र, भगवान विष्णु और भगवान शिव के गुण विद्यमान हैं क्योंकि तुम उनकी सन्तान हो। तुम्हें सभी गुण विरासत में मिले हैं। तुम्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि तुम्हें किसी भी वैशाखी के सहारे की आवश्यकता नहीं है क्योंकि तुम्हारे भीतर वह शक्ति है जिसे दबाया नहीं जा सकता। इसलिए तुम अपने पैरों पर चल सकते हो। तुम्हें किसी भी संकट का सामना करने के लिए किसी सहारे की ज़रूरत नहीं है, तुम अपनी शक्ति के बल पर आगे बढ़ सकते हो। तुम वह मशाल हो जो अन्धेरे को दूर कर सकती है अर्थात् तुम्हारे अंदर नेतृत्व की वह रोशनी है जो लोगों के अंदर छाए अंधेरे को दूर कर सकती है।

कवि भारतवासियों को संबोधित करते हुए कह रहा है कि शहीदों की प्रत्येक समाधि तुम्हारी ओर बड़े विश्वास के साथ देख रही है। फिरोज़पुर में हुसैनी वाला नामक स्थान पर बहने वाली हवा में वैदिक ऋषियों के मन्त्र गूंज रहे हैं। यह मन्त्र मनुष्य के प्रत्येक डर को दूर करके उसे निडर बनाते हैं तथा वह हवा यह कहती है कि तुम स्वराज के दृढ़ निश्चय की पुकार को तथा चुनौती को थाम लो और अपनी धड़कनों में शहीदों के स्वराज के वारिसनामें को उतार लो। अपनी रग-रग में देशभक्ति की उस भावना का संचार करो जो हमारे शहीदों में बहा करती थी। तुम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के उत्तराधिकारी हो इसलिए स्वराज के वारिसनामा के तुम्ही हकदार हो।

विशेष :

  1. कविता का भाव यह है कि भारतवासियों में त्रि-शक्ति का समावेश है इसलिए उन्हें किसी अन्य सहारे की आवश्यकता नहीं है।
  2. भारत के स्वराज के लिए शहीद हुए वीर आने वाली पीढ़ी के लिए वसीयत में स्वराज की रक्षा के लिए मर-मिटने का संदेश छोड़ गए हैं।
  3. भाषा प्रभावशाली है।
  4. तत्सम, देशी-विदेशी शब्दावली है।
  5. अनुप्रास अलंकार है।
  6. वीर रस एवं ओज गुण है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 12 वारिसनामा-स्वराज के लिए बहे लहू

वारिसनामा स्वराज के लिए बड़े लहू Summary

वारिसनामा स्वराज के लिए बड़े लहू जीवन-परिचय

सुरेश चन्द्र वात्स्यायन का जन्म 7 फरवरी, सन् 1934 को पसरूर (पाकिस्तान) में हुआ था। इनके पिता पं० अमरनाथ शास्त्री अविभाजित पंजाब के सुप्रसिद्ध संस्कृत, हिन्दी सेवी शिक्षा विद शास्त्री थे। इनका पैतृक धाम हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में सुंकाली नामक गांव में है। इन्होंने लुधियाना से शिक्षा प्राप्त की। इन्हें हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी, जर्मन के अतिरिक्त वेद उपनिषद-पुराण-गुरुवाणी के साथ-साथ पंजाबी, उर्दू-बंगाली, तमिल भाषाओं का निजी अध्ययन किया।

सुरेश जी की काव्य प्रतिभा का परिचय छात्र-जीवन से ही मिलने लगा था।’अंकुर’, ‘प्रवाल’, और ‘मुकुल शैलानी’ इनके तीन काव्य संग्रह हैं। ये पंजाब और भारत सरकार द्वारा अपने लेखन कार्य के लिए कई बार पुरस्कृत हुए हैं। लोक धुन, नवगीत, अंग्रेज़ी सॉनेट के सामान्तर चतुर्दशी, उर्दू रुबाई के समानान्तर षटपदी और यति क्रम पर आधारित अतुकांत लेकिन लयपूर्ण कविताओं में सुरेश की सृजनशीलता अंकुरित और प्रवाहमयी है। सुरेश का कवि रूप बहु आयामी है। कवि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सही पहचान इनकी एक रूपता में है। इन्हें प्रगतिशील भारतीय चिन्तन के प्रतिनिधि मंत्र कविता के प्रवर्तक कवि रूप में मिल चुकी है। इन्हें अखिल भारतीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। भाषा विभाग, पंजाब ने इन्हें सन् 1992 में शिरोमणि साहित्यकार के रूप में अलंकृत किया है।

वारिसनामा स्वराज के लिए बड़े लहू कविता का सार

‘वारिसनामा’-स्वराज के लिए बहेलह के कवि सुरेश चन्द्र वात्स्यायन हैं। ‘वारिसनामा’ एक कचहरी तथा कानुनी शब्द है जिसका अर्थ घर के बुजुर्ग अपने जमीन जायदाद आदि का वारिस नामांकित करते हैं। इस कविता में कवि ने भगत सिंह, सुखदेव, तथा राजगुरु आदि शहीदों की समाधियों को आज की पीढ़ी के लिए धरोहर बताया है। ये समाधियाँ ही इस नई पीढ़ी को नवनिर्माण के लिए प्रेरित करेंगी। आज वे वीर पुरुष नहीं हैं जो हमें हमारे इतिहास से परिचित करा सकें परन्तु उनके संदेश ही हमारे लिए वसीयत है कि हमें उनके बताए मार्ग पर चलना है तथा आगे बढ़ना है। आज कोई चाणक्य जैसा राजनीतिज्ञ नहीं जो चन्द्रगुप्त का निर्माण कर सके। इसीलिए हमें अपने अन्दर छिपे चन्द्रगुप्त को बाहर निकालना है। हमें अपने समाज में छिपे उन लोगों को पहचान कर बाहर फेंकना है जो सभ्य पुरुष का मुखौटा पहने बैठे है। हम लोगों में त्रिशक्ति का अंश है इसलिए किसी सहारे की उम्मीद छोड़कर उठ खड़े होना है और हमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की तरह बनकर भारत माता के सम्मान की रक्षा करनी है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था

Punjab State Board PSEB 11th Class Hindi Book Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Hindi Chapter 11 कहाँ तो तय था

Hindi Guide for Class 11 PSEB कहाँ तो तय था Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
हिन्दी ग़ज़ल को नई अभिव्यक्ति देना दुष्यन्त कुमार के काव्य की विशेषता है । ‘कहाँ तो तय था’ ग़ज़ल के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर:
दुष्यन्त कुमार को सर्वाधिक ख्याति अपनी ग़ज़लों के कारण ही मिली। गज़लों के माध्यम से उन्होंने काव्य रूप की क्षमता का विकास किया और आज की खुरदरी और जटिल ज़िन्दगी की पूर्ण अभिव्यक्ति के लिए गजल सम्पूर्ण माध्यम नहीं हो सकती। किन्तु दुष्यन्त कुमार ने उसे नया मोड़ दिया और उसकी रोमानी सीमाओं के बावजूद आधुनिक मनुष्य की जटिल से जटिल संवेदनाओं की अभिव्यक्ति के योग्य बनाया।

प्रश्न 2.
‘कहाँ तो तय था’ गज़ल में कवि ने मानवीय पीड़ा को यथार्थ धरातल पर प्रस्तुत किया है, स्पष्ट करें।
उत्तर:
कवि ने यह लिखकर कि कहीं तो यह निश्चित था कि प्रत्येक घर को एक दीपक अवश्य मिलेगा जबकि आज हालत यह है कि पूरे शहर भर के लिए भी एक दीपक उपलब्ध नहीं है। मनुष्य भूखे पेट, वस्त्र विहीन, पाँव मोड़ कर सो रहा है। यह सब मानवीय पीड़ा को यथार्थ धरातल पर प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 3.
‘कहाँ तो तय था, कविता का सार 150 शब्दों में लिखें।
उत्तर:
कहाँ तो तय था’ कविता का सार देखें ।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था

प्रश्न 4.
‘कहाँ तो तय था’ गज़ल में कहीं निराशा दिखाई देती है तो कहीं आशा की किरण, स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता की इन पंक्तियों में कि कहाँ तो यह निश्चित था कि प्रत्येक घर को एक दीपक उपलब्ध होगा और कहां हालत यह है कि पूरे शहर भर के लिए भी एक दीपक उपलब्ध नहीं है, कवि की निराशा झलकती है किन्तु कविता की अन्तिम पंक्तियों में-जियें तो अपने बगीचों में गुलमोहर के तले-कवि को आशा की एक किरण दिखाई पड़ती है। गुलमोहर मानवीय प्रेम का प्रतीक है, जिसके लिए कवि सर्वस्व समर्पण करना चाहता है।

प्रश्न 5.
‘कहाँ तो तय था’ गज़ल से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
प्रस्तुत गज़ल से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आस-पास अत्याचार, अभाव, ग़रीबी आदि को देख कर छटपटाहट तो अवश्य होती है, किन्तु हमें आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। मानवीय प्रेम के लिए, मानवता के लिए हमें अपना सर्वस्व अर्पित कर देना चाहिए।

प्रश्न 6.
‘तेरा निज़ाम’ में किसे सम्बोधित किया गया है ?
उत्तर:
‘तेरा निज़ाम’ शब्द कवि ने सत्ता पक्ष के लिए प्रयोग किया है। कुछ विद्वान् इसे ईश्वर को सम्बोधित किया जाना मानते हैं जो उचित प्रतीत नहीं होता क्योंकि ईश्वर कभी किसी की आवाज़ को दबाने का प्रयत्न नहीं करता। सत्ता पक्ष अपने विरोध में उठने वाली आवाजों को कुचलने का प्रयास करते हैं।

इसलिए ‘तेरा निज़ाम’ शब्द सत्ता पक्ष के लिए उपयुक्त है क्योंकि सत्ता सम्भालने वाले ही अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए अपने विरुद्ध आवाज़ उठाने वालों को कुचल डालने का प्रयास करते हैं। उनके पास शक्ति और दुस्साहस दोनों होते हैं इसलिए वे ही अपने निज़ाम के लिए सामान्य आदमी की विरोधी जुबान बन्द करने की चेष्टा करते हैं।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था

PSEB 11th Class Hindi Guide कहाँ तो तय था Important Questions and Answers

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि दुष्यंत कुमार का जन्म कब हुआ था ?
उत्तर:
01 सितम्बर, सन् 1933 में।

प्रश्न 2.
कवि दुष्यंत कुमार दिल्ली रेडियो में क्या काम करते थे ?
उत्तर:
स्क्रिप्ट लेखक का काम करते थे।

प्रश्न 3.
कवि दुष्यंत कुमार का निधन कितने वर्ष की आयु में हुआ था ?
उत्तर:
42 वर्ष।

प्रश्न 4.
‘कहाँ तो तय था’ रचना के रचनाकार कौन है ?
उत्तर:
दुष्यंत कुमार।

प्रश्न 5.
‘कहाँ तो तय था’ किस प्रकार की विधा है ?
उत्तर:
गज़ल।

प्रश्न 6.
‘कहाँ तो तय था’ कविता में किस चीज़ की अभिव्यक्ति हुई है ?
उत्तर:
मानवीय पीड़ा की।

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प्रश्न 7.
आज़ादी के बाद आम जनता किस प्रकार का जीवन जी रही है ?
उत्तर:
बदहाली का।

प्रश्न 8.
कवि ने कविता में किस विचारधारा का वर्णन किया है ?
उत्तर:
निराशा और आशावादी विचारधारा का।

प्रश्न 9.
जीवन की तीन मूल आवश्यकताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
रोटी, कपड़ा और मकान।

प्रश्न 10.
शासकवर्ग ने कौन-से नारे दिए हैं ?
उत्तर:
गरीब हटाओ जैसे।

प्रश्न 11.
कवि के अनुसार कहाँ से सदा के लिए चले जाना चाहिए ?
उत्तर:
जहाँ वृक्षों की छाया में धूप लगती हो।

प्रश्न 12.
कवि ने किस पर व्यंग्य किया है ?
उत्तर:
सत्ता पक्ष के नेताओं पर।

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प्रश्न 13.
अपने देश के लोगों पर कब विश्वास नहीं करना चाहिए ?
उत्तर:
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएँ।

प्रश्न 14.
……………. के लिए हमें अपना सर्वस्व अर्पित कर देना चाहिए।
उत्तर:
मानवता।

प्रश्न 15.
‘तेरा निज़ाम’ शब्द कवि ने किसके लिए प्रयोग किया है ?
उत्तर:
सत्ता पक्ष के लोगों के लिए।

प्रश्न 16.
ईश्वर कभी किसी की ………… को दबाने का प्रयत्न नहीं करता।
उत्तर:
आवाज़।

प्रश्न 17.
कवि दुष्यंत कुमार को ख्याति कहाँ से मिली है ?
उत्तर:
अपनी गजलों से।

प्रश्न 18.
आम जनता क्या सोचकर संतुष्ट है ?
उत्तर:
‘पत्थर पिघलेगा नहीं’ यह सोचकर।।

प्रश्न 19.
कवि किसके प्रति आशावान है ?
उत्तर:
क्रांति के आने के प्रति।

प्रश्न 20.
कवि ने मानवीय प्रेम का प्रतीक किसे माना है ?
उत्तर:
गुलमोहर को।

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बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दुष्यन्त कुमार को किसमें प्रसिद्धि प्राप्त हुई ?
(क) गज़ल में
(ख) कविता में
(ग) रुबाई में
(घ) दोहों में।
उत्तर:
(क) गज़ल में

प्रश्न 2.
‘कहाँ तो तय था’ गज़ल में किस विचारधारा का वर्णन है ?
(क) निराशावादी
(ख) आशावादी
(ग) आशा
(घ) आशावादी एवं निराशावादी।
उत्तर:
(घ) आशावादी एवं निराशावादी

प्रश्न 3.
प्रस्तुत गज़ल में कवि ने किन पर व्यंग्य किया है ?
(क) सत्ताधारी नेताओं पर
(ख) नेताओं पर
(ग) चोरों पर
(घ) सिरमोरों पर।
उत्तर:
(क) सत्ताधारी नेताओं पर

प्रश्न 4.
जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं क्या हैं ?
(क) रोटी
(ख) कपड़ा
(ग) मकान
(घ) तीनों।
उत्तर:
(घ) तीनों।

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कहाँ तो तय था सप्रसंग व्याख्या

1. कहाँ तो तय था चिरागां हरेक घर के लिए
कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए।
यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है,
चलो जहाँ से चलें और उम्र भर के लिए।

कठिन शब्दों के अर्थ :
तय था = निश्चित था। चिरागां = रौशनी, दीपक जलाना, दीवाली होना। चिराग = दीपक। मयस्सर = प्राप्त। साये में = छाया में। उम्र भर के लिए = सदा के लिए।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश श्री दुष्यन्त कुमार द्वारा लिखित गज़ल-‘कहाँ तो तय था’ में से लिया गया है। प्रस्तुत गज़ल में कवि ने स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भी देश के लोगों में गरीबी और बेरोज़गारी पूर्ववत ही बनी रहने की बात की है हालाँकि शासकवर्ग ने ‘ग़रीबी हटाओ’ जैसे अनेक नारे दिए और अनेक वादे किए।

व्याख्या :
कवि सत्ता पक्ष के नेताओं पर व्यंग्य करता हुए कहता है कि आपने तो जनता से यह वादा किया था कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् निश्चित रूप से हर घर में रोशनी होगी, दीपक जलेगा किन्तु स्वतन्त्रता प्राप्ति के इतने वर्षों बाद भी एक भी दीपक पूरे शहर के लिए प्राप्त नहीं है। आज भी लोग बदहाली का जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

कवि कहता है कि जहाँ वृक्षों की छाया में भी धूप लगती हो वहाँ से सदा के लिए चले जाना चाहिए। जब अपने देश की रक्षा करने वाले ही लोगों के दुःख का कारण बन जाएं तो उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए और उनका साथ छोड़ देना चाहिए। राजनेताओं का कार्य जनता को सुख देना है पर वे तो केवल अपना घर भरते हैं। अपने लिए सुख बटोरते हैं और जनता की कोई परवाह नहीं करते।

विशेष :

  1. यदि देश से ग़रीबी, भुखमरी और बेरोज़गारी नहीं मिट सकती तो यहाँ जी कर क्या करना है।
  2. भाषा सरल है।
  3. उर्दू शब्दावली का प्रयोग है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था

2. न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढक लेंगे,
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफर के लिए।
खुदा नहीं न सही आदमी का ख्वाब सही,
कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए।

कठिन शब्दों के अर्थ :
मुनासिब = उपयुक्त। सफर = यात्रा। खुदा = ईश्वर । ख्वाब = सपना। हसीन = सुन्दर। नज़ारा = दृश्य। नज़र = दृष्टि।

प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियां श्री दुष्यंत कुमार द्वारा लिखित गज़ल ‘कहाँ तो तय था’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने देश में फैली बदहाली का वर्णन किया है।

व्याख्या :
कवि स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् ज्यों-की-त्यों बनी ग़रीबी और बेरोज़गारी का उल्लेख करते हुए कहता है कि देश की जनता की आम हालत में कोई अन्तर नहीं पड़ा है। उनकी स्थिति वैसी की वैसी बनी हुई है लोगों के पास पहनने को कपड़ा नहीं है वे पाँवों से ही पेट ढक कर भूखे सोते हैं। भूख के कारण उन्हें अपना शरीर सिकोड़ कर सोना पड़ता है। इस प्रकार उनका नंगा तन भी ढका हुआ लगता है। ऐसे लोग इस जीवन यात्रा के लिए कितने उपयुक्त हैं। उनके लिए जीवन जीना कोई अर्थ नहीं रखता।

कवि कहता है ऐसे लोगों की प्रार्थना यदि ईश्वर भी नहीं सुनता है तो न सुने उनके अपने पास सुन्दर सपने देखने की दृष्टि तो है अर्थात् उन्हें हिम्मत नहीं छोड़नी चाहिए। अपने सपने स्वयं ही पूरे करने होंगे।

विशेष :

  1. वर्तमान युग की निराशामय परिस्थितियों पर काबू पाकर, अपने दुःखों को पीकर सुखों को बाँटा तो जा सकता है जिससे दुःख कुछ कम हो जाएं।
  2. भाषा सरल है।
  3. उर्दू शब्दावली का प्रयोग है।
  4. अनुप्रास अलंकार है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था

3. वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता,
मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए।
तेरा निज़ाम है सिल दे जुबान शायर की,
ऐ एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।
जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,
मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।

कठिन शब्दों के अर्थ :
मुतमइन = सन्तुष्ट । बेकरार = बेचैन । असर = प्रभाव। निजाम = प्रबन्ध। शायर = कवि। एहतियात = सावधानी । गुलमोहर = ग्रीष्म ऋतु में फूलों से लदा विशेष वृक्ष, मानवीय प्रेम का प्रतीक।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश श्री दुष्यंत कुमार द्वारा रचित ग़ज़ल ‘कहाँ तो तय था’ से लिया गया है। इन पंक्तियों में-कवि वर्तमान स्थिति-भूख, ग़रीबी और बेरोज़गारी को बदल न सकने पर आशा व्यक्त करते हुए कहता है कि कभी न कभी तो यह हालत सुधरेगी।

व्याख्या :
कवि कहता है कि आम जनता यही सोच कर सन्तुष्ट है कि यह पत्थर कभी पिघलेगा नहीं अर्थात् हमारा भाग्य कभी बदलेगा नहीं किन्तु कवि आशावान है कि भले ही सत्ता पक्ष ने ऐसा प्रबन्ध कर रखा है कि कवि की वाणी बंधी रहे, उसकी आवाज़ सिली रहे, मनुष्य के लिए यह सावधानी रखनी ज़रूरी है। जनता में क्रान्ति की आवाज़ को भले ही आज दबाया गया है किन्तु एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब वह आवाज़ सब के बीच अवश्य उभरेगी।

कवि कहता है कि मनुष्य को अपने देश रूपी बगीचे में जीना चाहिए। यदि मरना भी पड़े तो हमें परोपकार करते हुए जीवन त्याग देना चाहिए।

विशेष :

  1. मनुष्य को आशावादी होना चाहिए। कभी तो उसके जीवन में भी सुख का सूरज चमकेगा तथा सभी मिलजुल कर प्रेम से रहेंगे।
  2. भाषा सरल है।
  3. उर्दू शब्दावली का अधिकता से प्रयोग है।
  4. अनुप्रास अलंकार है।
  5. प्रतीकात्मकता का गुण विद्यमान है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 11 कहाँ तो तय था

कहाँ तो तय था Summary

कहाँ तो तय था जीवन-परिचय

दुष्यन्त कुमार त्यागी का जन्म 1 सितम्बर, सन् 1933 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के राजपुर-नवादा में एक अच्छे खाते-पीते घराने में हुआ। इनकी शिक्षा मुजफ्फरनगर, नहरौर तथा इलाहाबाद से हुई। छात्र जीवन से ही लिखना आरम्भ कर दिया था परन्तु इलाहाबाद इनकी वास्तविक साहित्यिक जन्मभूमि इनके पिता जी इन्हें वकील बनाने या पुलिस की नौकरी करने के लिए कहते रहे परन्तु ये रचनाधर्मी थे तो इन्होंने अपना आजीविका साधन साहित्य को बना लिया। इन्होंने कई जगह नौकरियां की परन्तु रेडियो की नौकरी पसंद आई थी। दिल्ली रेडियो में स्क्रिप्ट लेखक का काम करते रहे। सन् 1966 में पदोन्नति प्राप्त कर भोपाल चले गए। वे प्रायः कहते थे कि वे किसी की नौकरी नहीं करते, वे तो कलम की नौकरी करते हैं। वे भोपाल के साहित्यिक-जंगल के शेर कहलाते थे। इसी शहर में रहते हुए इन्हें उनकी गज़ल के कारण विशेष पहचान मिली। 30 दिसम्बर, सन् 1975 को मात्र बयालीस वर्ष की अल्पायु में इनका देहांत हो गया। दुष्यन्त कुमार बारह वर्ष की अवस्था में लिखने लगे थे। सूर्य का स्वागत’ (1957) काव्य संग्रह से उन्हें पहचान मिली। फिर सन् 1975 तक उनके तीन संग्रह प्रकाश में आए ‘आवाजों के घेरे,’ ‘जलते हुए बन का बसन्त’ तथा ‘साये में धूप’ नाटक के क्षेत्र में उनका योग अविस्मरणीय है। ‘एक कण्ठ विषदायी बहुचर्चित नाट्य काव्य है। इनकी प्रतिभा एकाधिक विधाओं में प्रस्फुटित हुई है और सभी में इन्होंने ज़मीन तोड़ी है। इनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा उसकी विवशता है। गजल लेखन में इन्हें विशेष ख्याति मिली है।

कहाँ तो तय था का सार

‘कहाँ तो तय था’ गज़ल के कवि दुष्यन्त कुमार हैं। इसमें कवि ने मानवीय पीड़ा को अभिव्यक्ति दी है। कवि ने निराशा और आशावादी दोनों विचारधारा का वर्णन किया है। आजादी के बाद भी आम जनता बदहाली का जीवन व्यतीत कर रही है। जीवन की मूल आवश्यकताः रोटी, कपड़ा और मकान तीनों आम आदमी को ठीक ढंग से नहीं मिल रहे हैं। आज भी आदमी भूखे पेट, नंगे तन सो रहा है परन्तु कवि को आशा है कि एक दिन अवश्य ही आम आदमी में जागरूकता आएगी और वह अपनी आवश्यकताओं के लिए आवाज उठाएगा। मानव, मानव से प्रेम करना सीख जाएगा। इसके लिए उसे इकट्ठे होकर प्रयत्नशील रहना चाहिए।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 17 एक बूँद

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 17 एक बूँद Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 17 एक बूँद

Hindi Guide for Class 6 एक बूँद Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध

1. शब्दार्थ
उत्तर:
शब्दों के अर्थ पद्यांशों के साथ-साथ दिए गए हैं।

धूल = मिट्टी
कढ़ी = निकलना
अनमनी = बिना मन के
अंगारे = आग के शोले

इन मुहावरों का अर्थ लिखते हुए वाक्यों में प्रयोग करो

1. भाग्य में बदा =…………… ……………………………….
2. धूल में मिलना = …………… ………………………………..
3. हवा बहना = ……………… ………………………………………
उत्तर:
1. भाग्य में बदा = भाग्य में लिखा – जो मेरे भाग्य में बदा है वह तो मुझे मिल कर ही रहेगा।
2. धूल में मिलना = नष्ट होना – तुमने मेरी सारी इज्जत धूल में मिला दी।
3. हवा बहना = परिस्थितियाँ परिश्रमी व्यक्ति अपनी क्षमता अनुकूल होना से हवा को भी अपनी ओर बहा लेते हैं।

इन शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखो

1. बादल = ……………….., …………………..
2. घर = ………………… , ……………………
3. कमल = ……………… , …………………
4. फूल = ……………… , ………………..
5. हवा = ………………….. , ……………………
6. समुद्र = ……………………. , ………………………
उत्तर:
1. बादल = मेघ , जलधर
2. घर = गेह , सदन
3. कमल = जलज , पंकज
4. फूल = सुमन , कुसुम
5. हवा = समीर , वायु
6. समुद्र = उदधि , रत्नाकर

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 17 एक बूँद

अन्तर समझो

1. कढ़ी = बेसन और लस्सी से बनी खाने की वस्तु = ……………..
कड़ी = पैर में पहनी जाने वाली लोहे से बनी गोल वस्तु = ……………..
2. बढ़ी = बढ़ना = ………………………
बड़ी = लम्बी = …………………..
3. काल = समय = ………………………
काल = मृत्यु = ……………………..
4. कर = करना = …………………
कर = हाथ = …………………………..
उत्तर:
1. कढ़ी = बेसन और लस्सी से बनी खाने की वस्तु – मेरी माता जी कढ़ी बहुत स्वादिष्ट बनाती है।
कड़ी = पैर में पहनी जाने वाली लोहे से बनी गोल वस्तु – कैदी को कड़ियों से जकड़ा गया था।
2. बढ़ी = बढ़ना – हमारी फौज सीमा पर आगे बढ़ी।
बड़ी = लम्बी – मेरी पैंसिल तुम्हारी पैंसिल से बड़ी है।
3. काल =समय = – वर्तमान काल मशीनी युग है।
काल = मृत्यु – कई लोग काल का ग्रास बन गए।
4. कर = करना – मैंने अपना काम कर लिया है।
कर = हाथ – मेरे कर से कलम गिर गई।

इन शब्दों के मूल क्रिया-शब्द लिखो

बढ़ी, निकल, सोच, लगी, बदा, बह, आई, खुला, , मिलूँगी, जलूँगी, गिरूँगी, पड़ेंगी, बनी, छोड़, देता।
उत्तर:
बढ़ी = बढ़ना बनूंगी
निकल = निकलना
सोच = सोचना
लगी = लगना
बह = बहना
आई = आना
खुला = खुलना
बचूँगी = बचना
मिलूँगी = मिलना
जलँगी = जलना
गिरूँगी गिरना बदना
पड़ेंगी = पड़ना
बनी = बनना
छोड़ = छोड़ना
देता = देना

कविता की उन पंक्तियों को लिखो जिनमें विस्मयादि बोधक चिह्न लगा है।
उत्तर:
(i) आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी।
(ii) देव! मेरे भाग्य में है क्या बदा।

विचार-बोधाय

प्रश्न 1.
बादलों से निकलने पर बूंद क्या सोचने लगी ?
उत्तर:
बादलों से निकल कर बूंद अपने भविष्य के बारे में सोचने लगी।

प्रश्न 2.
बूंद मोती कैसे बनी ?
उत्तर:
बूँद बादलों से निकल कर एक सीप के मुँह में जा पड़ी और मोती बन गई।

प्रश्न 3.
मनुष्य घर छोड़ते समय क्या सोचता है ?
उत्तर:
मनुष्य घर छोड़ते समय प्रायः शंका में रहता है। उसके मन में यह भाव होता है कि पता नहीं दूसरे स्थान पर परिस्थितियाँ उसके अनुकूल होंगी या नहीं।

प्रश्न 4.
‘एक बूंद’ कविता से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर:
इस कविता से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि घर छोड़ते समय घबराना नहीं चाहिए। निर्भयता एवं साहस के साथ नये स्थान पर कार्यरत हो जाना चाहिए।

5. घर से बाहर निकलने पर व्यक्ति को लाभ और हानि दोनों होते हैं। लाभ नीचे दिए गए हैं आप हानियाँ लिखें।

लाभ हानियाँ
1. व्यक्ति आत्म-निर्भर बनता है। ……………………………..
2. कठिनाइयों से लड़ना सीखता है। …………………………..
3. घर से प्रेम-भाव बढ़ता है। ……………………………
4. व्यक्तित्व में निखार आता है। ………………………..
5. आगे बढ़ने के नए-नए रास्ते ढूँढ़ता है। ……………………………

उत्तर:

लाभ हानियाँ
1. व्यक्ति आत्म-निर्भर बनता है। व्यक्ति बुरे रास्तों की ओर जा सकता है।
2. कठिनाइयों से लड़ना सीखता है। कठिनाइयों से डर कर घबरा जाता है।
3. घर से प्रेम-भाव बढ़ता है। बाहर रह कर घर के प्रति प्रेम-भाव कम हो जाता है।
4. व्यक्तित्व में निखार आता है। व्यक्ति अक्खड़ बन जाता है।
5. आगे बढ़ने के नए-नए रास्ते ढूँढ़ता है। व्यक्ति स्वार्थी बन जाता है।

इन काव्य पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें

6. देव! मेरे भाग्य में है क्या बदा,
मैं बनूंगी या मिलूँगी धूल में।
या जलँगी गिर अंगारे पर किसी
चू पडूंगी या कमल के फूल में
उत्तर:
इसके लिए कविता का व्याख्या भाग देखें।

आत्म-बोधल्या

(1) घर छोड़ने पर ‘लाभ था हानि’ विषय पर कक्षा में चर्चा करें।
(2) घर त्यागकर जिन्होंने संसार में उन्नति की है, ऐसे व्यक्तियों का जीवन पढ़ें और इनके गुणों को जीवन में उतारने का प्रयास करें।
(3) स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, शंकराचार्य, महात्मा गाँधी, भगत सिंह, लक्ष्मीबाई की जीवनी पढ़ें। (विद्यार्थी स्वयं करें)

बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
बादलों से निकलने वाली बूंद किसके विषय में सोच रही थी ?
(क) भविष्य के
(ख) धर्म के
(ग) कर्म के
(घ) मरण के
उत्तर:
(क) भविष्य के

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 17 एक बूँद

प्रश्न 2.
बूंद किसके मुंह में गिरकर मोती बनी ?
(क) समुद्र के
(ख) सीप के
(ग) नदी के
(घ) कछुए के
उत्तर:
(ख) सीप के

प्रश्न 3.
इस कविता से क्या शिक्षा मिलती है ?
(क) साहस एवं निडरता से आगे बढ़ने की
(ख) पीछे हटने की
(ग) रोने की
(घ) सोने की
उत्तर:
(क) साहस एवं निडरता से आगे बढ़ने की

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से ‘बादल’ का पर्याय है :
(क) मेघ
(ख) मीन
(ग) जलचर
(घ) जलधि
उत्तर:
(क) मेघ

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से ‘कमल’ का पर्याय है :
(क) सदन
(ख) पंकज
(ग) धीरज
(घ) धैर्य
उत्तर:
(ख) पंकज

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से क्रिया चुनें :
(क) देना
(ख) धान
(ग) दाद
(घ) सुन्दर
उत्तर:
(क) देना

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द क्रिया का उदाहरण नहीं है ?
(क) बहना
(ख) गिरना
(ग) बहन
(घ) आना
उत्तर:
(ग) बहन

पद्यांशों के सरलार्थ

1. ज्यों निकल कर बादलों की गोद से,
थी अभी इक बूंद कुछ आगे बढ़ी।
सोचने फिर फिर यही जी में लगी,
आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी॥

शब्दार्थ:
इक = एक। जी = हृदय। कढ़ी = निकल चली।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक में संकलित श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘एक बूंद’ कविता में से लिया गया है। इसमें कवि ने एक बूंद के माध्यम से मनुष्य को सन्देश दिया है कि जब तक मनुष्य घर से बाहर नहीं निकलता तब तक वह उन्नति नहीं कर सकता।।

व्याख्या:
कवि कहता है कि जैसे ही एक बूंद बरसने के लिए बादलों की गोद से बाहर निकलकर अभी कुछ आगे ही बढ़ी थी, तभी वह अपने मन में सोचने लगी कि वह इस प्रकार अपना घर छोड़कर क्यों निकल पड़ी थी। भावार्थ-एक बूंद अपना घर (बादल) छोड़ते हुए मन में अनेक आशंकाएँ करती हैं।

2. देव! मेरे भाग्य में है क्या बदा,
मैं बनूंगी या मिलूँगी धूल में,
या जागी गिर अंगारे पर किसी,
चू पडेंगी य कमल के फूल में।

शब्दार्थ:
भाग्य में बदा है = किस्मत में लिखा है।

प्रसंग:
यह पद्यांश श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय द्वारा रचित ‘एक बूंद’ कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने बूंद के रूप में मानव के मन में उत्पन्न भय को प्रकट किया है।

व्याख्या:
बादल की गोद से निकली हुई एक बूंद सोचती है कि हे देव! मेरे भाग्य में क्या बदा है अर्थात् क्या लिखा है ? मैं बनूंगी या धूल में मिल कर नष्ट हो जाऊँगी या किसी अंगारे पर गिर कर भस्म हो जाऊँगी या किसी कमल के फूल में टपक पड़ेंगी।

भावार्थ:
भाव यह है कि एक बूंद के मन में अपना घर (बादल) छोड़ते हुए बहुतसी आशंकाएँ होती हैं, वैसे ही प्रत्येक मनुष्य के मन में आशंकाएँ उठती हैं।

3. बह गई उस काल एक ऐसी हवा,
वह समुन्दर ओर आई अनमनी,
एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला,
वह उसी में जा पड़ी, मोती बनी।

शब्दार्थ:
काल = समय। अनमनी = बे-मन से। प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘एक बूंद’ नामक कविता से ली गई हैं जिसके रचयिता श्री अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं। बादलों की गोद से निकली एक बूंद अपने भविष्य के बारे चिंता करती हुई धरती पर गिरती है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि बूंद अभी अपने भाग्य पर विचार कर रही थी कि उसी समय एक ऐसी हवा चली जिसके कारण वह बे-मन-सी समुद्र की ओर आ गई। उस समय एक सुन्दर सीपी का मुँह खुला हुआ था। वह बूंद उसी में जा गिरी और कीमती मोती बन गई। भावार्थ-घर छोड़ कर मनुष्य भी कुछ का कुछ बन जाता है।

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4. लोग यों ही हैं झिझकते, सोचते,
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर,
किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें
बूंद लौं कुछ और ही देता है कर।

शब्दार्थ:
लौं = की भाँति। अक्सर = प्रायः।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री अयोध्या सिंह उपाध्याय द्वारा रचित ‘एक बूंद’ नामक कविता से ली गई हैं। इसमें कवि ने बताया है कि हिम्मत कर के घर से बाहर निकलने वाले प्रायः जीवन में सफलता प्राप्त कर ही जाते हैं।

व्याख्या:
कवि कहता है कि लोग अपना घर छोड़ते समय व्यर्थ में ही परेशान होते हैं।. वे अपने मन में अनेक प्रकार की चिन्ताएँ करते हैं, परन्तु अक्सर उन्हें घर छोड़ना बूँद के समान ही बड़ा लाभकारी सिद्ध होता है। उनके जीवन को बूँद की भाँति मूल्यवान् बना देता है। भावार्थ-घर छोड़ना मनुष्य के लिए वरदान भी बन जाता है।

एक बूंद Summary

एक बूँद कविता का सार

बादलों की गोद से निकलकर एक बूंद धरती की ओर चली तो वह मन ही मन घबरा रही थी कि पता नहीं उसके साथ अब अच्छा होगा या बुरा। वह धूल में गिर कर नष्ट हो जाएगी या किसी दहकते अंगारे पर गिर कर समाप्त हो जाएगी। क्या पता कि वह किसी कमल के फूल पर ही गिर पड़े। उसी समय हवा का एक झोंका आया और उसे समुद्र की ओर से ले उड़ा। समुद्र में एक सीपी का मुंह खुला था। बूंद उसमें गिरी और मोती बन गई। लोग घर से निकलते हुए भयभीत होते हैं पर घर छोड़ना उनके लिए प्राय: लाभकारी सिद्ध होता है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 16 मदर टेरेसा

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 16 मदर टेरेसा Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 16 मदर टेरेसा

Hindi Guide for Class 6 मदर टेरेसा Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध

1. शब्दार्थ
उत्तर:
कठिन शब्दों के अर्थ पाठ के आरम्भ में दिए गए हैं।

विभूति = अलौकिक शक्ति
निस्वार्थ = बिना किसी स्वार्थ के
दरिद्रता = निर्धनता
स्वीकृति = स्वीकार हुआ
औषधियाँ = दवाइयाँ
नियुक्त = लगाया हुआ
विभूषित = अलंकृत, सजाया हुआ
चिकित्सीय प्रशिक्षण = चिकित्सा के क्षेत्र विशेष योग्यता
आभास = अनुभव होना
उपेक्षित = जिसकी उपेक्षा की गई हो
हठ धर्मिता = सत्य बात पर अड़े रहना
साक्षात्कार = आँखों के सामने
सक्रिय = क्रियाशील
अल्पायु = छोटी आयु
मरणासन = मृत्यु के निकट

2. लिंग बदलो

1. माता = …………
2. अध्यापिका = ………………..
3. स्त्री = …………………..
4. नारी = …………………..
5. वृद्ध = ………………….
उत्तर:
1. माता = पिता
2. अध्यापिका = अध्यापक
3. स्त्री = पुरुष
4. नारी = नर
5. वृद्ध = वृद्धा

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 16 मदर टेरेसा

3. वचन बदलो

1. बच्चा = …………………..
2. साड़ी = …………………
3. महिला = ……………….
4. झील = …………………
5. बस्ती = …………………
6. औषधि = ………………..
7. चींटी = ………………….
8. शाखा = …………………
9. दीवार = …………………..
उत्तर:
1. बच्चा = बच्चे
2. साड़ी = साड़ियाँ
3. महिला = महिलाएँ
4. झील = झीलें
5. बस्ती = बस्तियाँ
6. औषधि = औषधियाँ
7. चींटी = चींटियाँ
8. शाखा = शाखाएँ
9. दीवार = दीवारें

4. विपरीतार्थक शब्द लिखो

1. अंतिम = …………………..
2. उपयुक्त = ………………….
3. विदेशी = ……………………
4. जीवन = …………………..
5. इच्छा = ……………………
6. सुखी = …………………..
7. उपलब्ध = …………………
8. स्वीकृत = ………………..
9. रोगी = …………………..
उत्तर:
1. अंतिम = प्रथम
2. उपयुक्त = अनुपयुक्त
3. विदेशी = स्वदेशी
4. जीवन = मृत्यु
5. इच्छा = अनिच्छा
6. सुखी = दुखी
7. उपलब्ध = अनुपलब्ध
8. स्वीकृत = अस्वीकृत
9. रोगी = निरोगी

5. पर्यायवाची शब्द लिखो

1. शिक्षा = ………………..
2. बचपन = …………………
3. पेड़ = ………………….
4. दशा = ……………..
5. सफ़ेद = ………………..
6. शरीर = ………………….
7. नमस्कार = …………..
उत्तर:
1. शिक्षा = विद्या
2. बचपन = शैशव
3. पेड़ = वृक्ष
4. दशा = अवस्था
5. सफ़ेद = श्वेत
6. शरीर = तन
7. नमस्कार = प्रणाम

6. वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखो

1. जिसका कोई घर न हो ……………………………………
2. जिसका कोई सहारा न हो ………………………………….
3. जिसके माँ-बाप न हो ………………………………………..
4. जिसकी थाह न पाई जा सके (सीमा रहित) ………………………………………
5. धर्म अथवा परमार्थ हेतु बनवाया गया भवन …………………………………………..
6. सबसे ऊँचा ……………………………………………
7. बिना किसी स्वार्थ के ………………………………………
उत्तर:
1. जिसका कोई घर न हो =  बेघर।
2. जिसका कोई सहारा न हो = बेसहारा।
3. जिसके माँ-बाप न हो = अनाथ।
4. जिसकी थाह न पाई जा सके (सीमा रहित) = अथाह/असीम।
5. धर्म अथवा परमार्थ हेतु बनवाया गया भवन = धर्मशाला/परमार्थाश्रम।
6. सबसे ऊँचा = सर्वोच्च।
7. बिना किसी स्वार्थ के = निःस्वार्थ।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 16 मदर टेरेसा

7. विशेषण बनाओ

1. वर्ष = …………………..
2. नियम = ……………….
3. परिश्रम = …………………
4. कर्म = …………………
5. धर्म = …………………
6. सेवा = ………………..
7. केन्द्र = ………………..
8. अर्पण = …………………
उत्तर:
1. वर्ष = वार्षिक
2. नियम = नियमित
3. परिश्रम = पारिश्रमिक
4. कर्म = कर्मशील
5. धर्म = धार्मिक
6. सेवा = सेवक
7. केन्द्र = केन्द्रीय
8. अर्पण = अर्पित

8. भाववाचक संज्ञा बनाओ

1. निर्मल = ………………….
2. स्वतन्त्र = …………………
3. स्वीकार = …………………
4. मानव = …………………
5. शिशु = ………………….
उत्तर:
1. निर्मल = निर्मलता
2. स्वतन्त्र = स्वतन्त्रता
3. स्वीकार = स्वीकार्य
4. मानव = मानवता
5. शिशु = शैशव

9. शुद्ध करो

1. चिकितसा = ………………………
2. प्रारथना = …………………
3. पुरसकार = …………………..
4. उपाधी = ………………….
5. गृहण = ……………………
6. परीश्रम = ………………..
7. अर्पन = …………………….
8. सथापना = ……………………
उत्तर:
1. चिकितसा= चिकित्सा
2. प्रारथना = प्रार्थना
3. पुरसकार = पुरस्कार
4. उपाधी = उपाधि
5. गृहण = ग्रहण
6. परीश्रम = परिश्रम
7. अर्पन = अर्पण
8. सथापना = स्थापना

10. वाक्यों में प्रयोग करो

1. पाबंदी = ………………………………………..
2. घोषित = ………………………………………..
3. समारोह = ……………………………………….
4. भंडार = ……………………………………………
5. करुणा = ………………………………………….
6. निराश्रित = ………………………………………….
7. दयनीय = …………………………………………….
8. विभूति = …………………………………………….
9. नियुक्ति = …………………………………………….
उत्तर:
1. पाबंदी – लोरेटो के नियमानुसार मदर टेरेसा को अस्पतालों में जाने पर पाबंदी थी।
2. घोषित – मेरा परीक्षा-परिणाम कल घोषित होगा।
3. समारोह – मुझे कल एक समारोह में जाना पड़ा। भंडार – धरती के नीचे कोयले का असीम भंडार है।
4. करुणा – मदर टेरेसा दीन-दुखियों के लिए करुणा की भंडार थी।
5. निराश्रित – हमें निराश्रितों की सहायता करनी चाहिए।
6. दयनीय – भिखारी की दशा बड़ी दयनीय थी।
7. विभूति – इस महान् विभूति मदर टेरेसा का देहावसान 5 सितम्बर, सन् 1997 को हुआ।
8. नियुक्ति – मेरी नियुक्ति बैंक अधिकारी के रूप में हुई है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 16 मदर टेरेसा

विचार-बोध

(क)
प्रश्न 1.
मदर टेरेसा का जन्म कब और कहाँ हुआ था ? इनके बचपन का वर्णन करें।
उत्तर:
मदर टेरेसा का जन्म 27 अगस्त, सन् 1910 को यूगोस्लाविया के स्कापये शहर में हुआ। इनका बचपन का नाम एग्नेस गौंझा बोजाक्यु था। साल वर्ष की आयु में इनके पिता का निधन हो गया था।

प्रश्न 2.
मदर टेरेसा के मन में किस प्रकार का सेवाभाव था ? किसी घटना द्वारा बताएँ।
उत्तर:
मदर टेरेसा के मन में बेबस, असहाय और पीड़ित लोगों के लिए बहुत सहानुभूति थी। एक बार मदर टेरेसा को बहुत ही कष्टदायक और बीमार स्थिति में एक स्त्री मिली। उसका शरीर फोड़े-फुसियों से भरा हुआ था। उसके शरीर पर मक्खियाँ भिनभिना रही थीं। उसे इस अवस्था में देखकर टेरेसा का हृदय पिघल गया। वह उसे उठाकर अस्पताल ले गई। अस्पताल में उसे कोई भी दाखिल नहीं कर रहा था लेकिन टेरेसा ने जिद्द करके उसे अस्पताल में भर्ती करवाया।

प्रश्न 3.
रेलगाड़ी से दार्जिलिंग जाते समय मदर टेरेसा को क्या आभास हुआ ?
उत्तर:
रेलगाड़ी से दर्जिलिंग जाते समय मदर टेरेसा को आभास हुआ जैसे ईसा मसीह उन्हें आदेश दे रहे हों कि अपना जीवन दीन-दुखियों की सेवा में अर्पण कर दो।

प्रश्न 4.
मदर टेरेसा ने प्रधानाध्यापिका के पद से त्यागपत्र देने के बाद क्या किया ?
उत्तर:
मदर टेरेसा ने प्रधानाध्यापिका के पद से त्यागपत्र देने के बाद पटना से चिकित्सक प्रशिक्षण लिया और कोलकाता में अपना प्रारम्भिक कार्यक्षेत्र बनाया।

प्रश्न 5.
मदर टेरेसा ने पहला आश्रम कहाँ और किनके लिए खोला ? |
उत्तर:
मदर टेरेसा ने पहला आश्रम कोलकाता के कालीघाट के पास धर्मशाला में बेसहारा और मरणासन्न रोगियों के लिए खोला।

प्रश्न 6.
चिकित्सा अधिकारी द्वारा मदर से चिकित्सा के साधन पूछने पर मदर ने क्या कहा ?
उत्तर:
चिकित्सा अधिकारी द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए मदर टेरेसा ने कहा कि चिकित्सा के लिए सेवा और प्रेम की आवश्यकता होती है। ये दोनों ही औषधियाँ मेरे पास अथाह मात्रा में हैं।

प्रश्न 7.
मदर टेरेसा विश्व तथा भारत सरकार की किन-किन उपाधियों से विभूषित हुई ?
उत्तर:
भारत सरकार ने मदर टेरेसा को सन् 1962 में ‘पद्मश्री’ सम्मान, 1980 में ‘भारत-रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया। सन् 1979 में उन्हें नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-चार वाक्यों में लिखें

प्रश्न 1.
मदर टेरेसा के जीवन के प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
मदर टेरेसा के जीवन का प्रमुख उद्देश्य दुखी, पीड़ित, असहाय, लाचार, बेबस और निराश्रितों की सेवा करना था। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने कोलकाता के स्कूल की प्रधानाध्यापिका के पद से त्यागपत्र देकर असहाय लोगों की सेवा का कार्य आरम्भ किया। वह जीवन पर्यन्त इसी उद्देश्य की पूर्ति में लगी रहीं।

प्रश्न 2.
मदर टेरेसा द्वारा खोले गए आश्रमों का वर्णन करें।
उत्तर:
मदर टेरेसा पीड़ितों तथा निराश्रितों की सेवा-सहायता के लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। इस चैरिटी के अन्तर्गत उन्होंने विभिन्न आश्रम खोले। पहला आश्रम कोलकाता में कालीघाट के पास ‘निर्मल हृदय’ आश्रम खोला। इसके कुछ समय बाद चैरिटी का दूसरा आश्रम खोला-‘निर्मल शिशु भवन’। यहाँ पर अनाथ, बेसहारा तथा अपंग बच्चों का पालन-पोषण होने लगा।

प्रश्न 3.
मदर टेरेसा की संस्था कौन-कौन से कार्य कर रही है ?
उत्तर:
मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी आज विभिन्न सेवा कार्य कर रही है। इस समय इनकी संस्था 70 विद्यालय, 250 अस्पताल, 28 कुष्ठ निवारण केन्द्र, 20 घर अनाथ बच्चों के लिए, 25 वृद्धाश्रम चला रही है। आज 131 देशों में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के 700 से ज्यादा केन्द्र हैं। जहाँ 4500 से ज़्यादा सिस्टर्स सेवा कार्यों में लगी हुई हैं।

आत्म-बोध था

1. दीन-दुखियों, बेसहारों की सेवा ही सच्ची सेवा है।
2. मदर टेरेसा के जीवन से प्रेरणा लेकर आप क्या करेंगे ?
उत्तर:
1. विद्यार्थी इस कथन का पालन करें।
2. मदर टेरेसा के जीवन से प्रेरणा लेकर हम भी दीन-दुखियों की सेवा तथा सहायता करेंगे।

बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
मदर टेरेसा का जन्म कब हुआ ?
(क) 1910
(ख) 1912
(ग) 1914
(घ) 1916
उत्तर:
(क) 1910

प्रश्न 2.
मदर टेरेसा ने पहला आश्रम कहां खोला ?
(क) मुंबई में
(ख) दिल्ली में
(ग) कोलकाता में
(घ) मद्रास में
उत्तर:
(ग) कोलकाता में

प्रश्न 3.
मदर टेरेसा ने किनकी सेवा की ?
(क) बुजुर्गों की
(ख) बच्चों की
(ग) दीन दुखियों की
(घ) लोगों की
उत्तर:
(ग) दीन दुखियों की

प्रश्न 4.
मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार कब मिला ?
(क) 1969 में
(ख) 1979 में
(ग) 1989 में
(घ) 1999 में
उत्तर:
(ख) 1979 में

प्रश्न 5.
मदर टेरेसा ने किस संस्था की स्थापना की ?
(क) मिशनरीज़ आफ चैरिटी
(ख) चैरिटी
(ग) दीन दुखी
(घ) अनाथशाला
उत्तर:
(क) मिशनरीज़ आफ चैरिटी

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 16 मदर टेरेसा

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से ‘बचपन’ शब्द का पर्याय है :
(क) शैशव
(ख) शिशु
(ग) विशु
(घ) बच्चा
उत्तर:
(क) शैशव

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में ‘धर्म’ का विशेषण है :
(क) धर्मा
(ख) धर्मशील
(ग) धार्मिक
(घ) धर्म
उत्तर:
(ग) धार्मिक

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से भाववाचक संज्ञा का उदाहरण नहीं है :
(क) निर्मलता
(ख) मान्यता
(ग) सुंदर
(घ) स्वतंत्रता
उत्तर:
(ग) सुंदर

मदर टेरेसा Summary

मदर टेरेसा पाठ का सार

मदर टेरेसा का जन्म 27 अगस्त, सन् 1910 को यूगोस्लाविया में हुआ। इनके बचपन का नाम एग्नेस गौंझा बोजाक्यु था। सात वर्ष की आयु में इनके पिता का देहान्त हो गया। 12 वर्ष की आयु में ही इन्होंने ‘नन’ बनने की इच्छा प्रकट की। तत्पश्चात् सन् 1928 में यह कोलकाता के इटाली स्थित लोरेटो कान्वेंट की शाखा सेंट मेरी स्कूल में भूगोल की अध्यापिका नियुक्त हुई। मदर टेरेसा अनाथों की नाथ, दीन-दुखियों के लिए करुणा का भण्डार थी। उसके मन में बेबस और लाचार तथा पीड़ित लोगों के लिए नि:स्वार्थ सेवा भावना विद्यमान थी। एक दिन उसने एक पीड़ित तथा दयनीय अवस्था में पड़ी महिला को उठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया।

मदर टेरेसा गरीबों के बीच जाकर उनकी देखभाल करना और उनको शिक्षित करना चाहती थी लेकिन इसके लिए लोरेटो के सख्त नियम आड़े आ रहे थे अतः उन्होंने प्रधानाध्यापक के पद से त्यागपत्र दे दिया और पटना से चिकित्सक प्रशिक्षण लेकर समाज सेवा कार्यों में लग गई। उन्होंने सन् 1950 में एक संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी का शुभारम्भ किया। इस संस्था के अन्तर्गत उन्होंने ‘निर्मल हृदय’ तथा ‘निर्मल शिशु भवन’ आश्रम खोले जहाँ पर निराश्रितों, बेसहारा का पालन-पोषण होता था। सन् 1950 में जिस चैरिटी की स्थापना मदर टेरेसा ने अकेले की थी वह उनके अथक परिश्रम से काफ़ी विस्तृत हो गया था।

इस समय इनकी संस्था 70 विद्यालय, 250 अस्पताल, 28 कुष्ठ निवारण केन्द्र, 25 घर वृद्धों और निराश व्यक्तियों के लिए चला रही है। आज इस मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के 700 से ज़्यादा केन्द्र है और 4500 से ज्यादा सिस्टर्स सेवा-कार्यों में लगी हैं। समाज सेवी मदर टेरेसा को उनकी सेवाओं के लिए अनेकों पुरस्कार और सम्मानं मिले। सन् 1962 में भारत सरकार द्वारा ‘पदमश्री’ सम्मान, सन् 1979 में नोबेल पुरस्कार तथा सन् 1980 में ‘भारत रत्न’ पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया। 5 सितम्बर, सन् 1997 को गरीबों की इस मसीहा का देहावसान हुआ।

कठिन शब्दों के अर्थ:

बेसहारों = जिसका कोई सहारा न हो। करुणा = दया। असहाय = बेसहारा । निस्वार्थ = बिना स्वार्थ भाव के। कष्टदायक = कष्ट देने वाली। हठधर्मिता = जिद्द। नियुक्त = चुना जाना। दरिद्रता = ग़रीबी। साक्षात्कार = आमने-सामने। कड़ा = सख्त। इजाजत = आज्ञा। पाबन्दी = मनाही। स्वीकृत = मंजूरी। उपयुक्त = उचित। उपलब्ध = प्राप्त। औषधियाँ = दवाइयाँ। आवश्यकता = ज़रूरत। अपंग = जिनका कोई अंग न हो, अंगहीन। मरणासन्न = मृत्यु के पास। अथक = बिना थके, निरन्तर। कुष्ठ निवारण = कुष्ठ रोग दूर करने वाले। विभूषित = अलंकृत। गौरव = बड़प्पन।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 15 पाँच प्यारे

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 15 पाँच प्यारे Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 15 पाँच प्यारे

Hindi Guide for Class 6 पाँच प्यारे Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध

1. शब्दों के अर्थ पाठ के आरम्भ में दिए जा चुके हैं।

सहस्त्रों = हजारों
नेत्र = आँखें
चुप्पी = मौन, शान्त
दृश्य = नजारा
रक्त = खून
समक्ष = सामने
जय- घोष = विजय की गर्जना
तमतमाना = धूप या क्रोध से चेहरा लाल होना
अलौकिक = दूसरे लोक का
स्तनधता = एकदम शांति, चुप्पी
आहुति = बलिदान

2. मुहावरों के अर्थ लिख कर वाक्य बनाइए

चुप्पी छा जाना ______________________ __________________________________
चेहरा तमतमाना ___________________ ____________________________________
दिल दहलना _____________________ _____________________________________
तितर-बितर होना __________________ ____________________________________
खून से रंगी तलवार ___________________ _________________________________
पत्थर की मूर्ति बन बैठना _____________________ __________________________
प्राणों की आहुति देना ________________ __________________________________
बलि चढ़ाना ____________________ _______________________________________
उत्तर:
चुप्पी छा जाना = खामोशी छाना-नेता जी के आते ही सभा में चुप्पी छा गई।
चेहरा तमतमाना = क्रोध आना-मुग़ल सैनिकों को देखते ही मराठा सरदार का चेहरा तमतमाने लगा।
दिल दहलना = डर जाना – शेर की गर्जना सुनकर शिकारी का दिल दहल गया। तितर बितर होना = इधर-उधर हो जाना – पुलिस को देखकर भीड़ तितर-बितर हो गयी।
खून से रंगी तलवार = गुरु जी के हाथ में खून से रंगी तलवार थी। पत्थर की मूर्ति बन बैठना – स्थिर हो जाना-पुत्र की मृत्यु पर वृद्ध माँ पत्थर की मूर्ति बनकर बैठ गई।
प्राणों की आहुति देना = बलिदान होना – देशभक्त हमेशा प्राणों की आहुति देने को तैयार रहते हैं।
बलि चढ़ाना = बलिदान देना – तांत्रिक ने बच्चे की बलि चढ़ा दी।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 15 पाँच प्यारे

3. समानार्थक लिखिए

1. विश्वास = …………………..
2. शूरवीर = …………………….
3. सूर्य = …………………..
4. किरण = ………………..
5. तलवार = …………………
6. सिंह = …………………..
7. उद्देश्य = ……………………
8. बलिदान = …………………..
9. घोषणा = ………………….
10. पश्चात्शा = …………………..
11. श्रद्धालु = ……………………
उत्तर:
समानार्थक शब्द
1. विश्वास = यकीन, भरोसा
2. शूरवीर = बहादुर
3. सूर्य = दिनकर
4. किरण = अंशु
5. तलवार = खड्ग
6. उद्देश्य = लक्ष्य
7. बलिदान = त्याग
8. घोषणा = ऐलान
9. पश्चात् = बाद
10. शामियाना = तम्बू
11. श्रद्धालु = श्रद्धावान्

4. निम्नलिखित शब्दों को अपने वाक्यों में प्रयुक्त करें

1. एकत्र = ………………………………………..
2. कीर्तन = ……………………………………….
3. चुप्पी = …………………………………………..
4. शामियाना = …………………………………..
5. बलिदान = ……………………………………..
6. स्तब्धता = ……………………………………..
7. अलौकिक = …………………………………….
8. दृश्य = ……………………………………………..
9. प्रार्थना = ……………………………………..
उत्तर:
1. एकत्र – जनसभा में हज़ारों की भीड़ एकत्र थी।
2. कीर्तन – देवी माँ का कीर्तन करो।
3. चुप्पी – अध्यापक के आते ही कक्षा में चुप्पी छा गई।
4. शामियाना – गुरु जी शामियाने के पीछे गए।
5. बलिदान – हम देश के लिए हर प्रकार का बलिदान देने को तैयार है।
6. स्तब्धता – भूकम्प के बाद सार क्षेत्र में स्तब्धता छा गई।
7. अलौकिक – गुरु गोबिन्द सिंह जी अलौकिक व्यक्तित्व के स्वामी थे।
8. दृश्य – प्रकृति का अद्भुत दृश्य देखकर मन खिल उठा।
9. प्रार्थना – नित्य प्रातः उठकर ईश्वर की प्रार्थना करो।

5. इन शब्दांशों में से विशेषण और विशेष्य अलग कर लिखो :

बड़ा शामियाना, सहस्र लोग, लाल नेत्र, तमतमाता चेहरा, सिंह की तरह गर्जना, शक्ति की देवी, बड़ा बलिदान, लाहौर का क्षत्रिय, अलौकिक दृश्य, रक्त से भरी तलवार, दिल्ली का जाट, भयभीत जनता, नीची गर्दन किए बैठे लोग, पत्थर की मूर्ति बने लोग, चार वीर, नए वस्त्र, पाँच प्यारे।

शब्दांश विशेषण विशेष्य
बड़ा शामियाना बड़ा शामियाना
सहस्र लोग सहस्त्र लोग
लाल नेत्र लाल नेत्र
तमतमाता चेहरा तमतमाता चेहरा
सिंह की तरह गर्जना सिंह की तरह गर्जना
शक्ति की देवी शक्ति की देवी
बड़ा बलिदान बड़ा बलिदान
लाहौर का क्षत्रिय लाहौर का क्षत्रिय
अलौकिक दृश्य अलौकिक दृश्य
रक्त से भरी तलवार रक्त से भरी तलवार
दिल्ली का जाट दिल्ली का जाट
भयभीत जनता भयभीत जनता
नीची गर्दन किए बैठे लोग नीचे गर्दन लोग
चार वीर चार वीर
नए वस्त्र नए वस्त्र
पाँच प्यारे पाँच प्यारे

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 15 पाँच प्यारे

6. वर्ण विच्छेद करो

1. सहस्र = _____ + ______ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____
2. कीर्तन = _____ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____
3. शक्ति = _____ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____
4. अलौकिक = _____ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____ +_____
5. प्यारे = _____ +_____ +_____ +_____ +_____
उत्तर:
1. सहस्त्र = स् + अ + ह् + अ + स् + त् + र् + अ।
2. कीर्तन = क् + ई + र् + त् + अ + न् + अ।
3. शक्ति = श् + अ + क् + इ + त् + अ।
4. अलौकिक = अ + ल् + औ + क् + इ + क् + अ।
5. प्यारे = प् + य् + आ + र् + ए।

विचार-बोध (प्रश्न)

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें

प्रश्न 1.
म्यान से तलवार निकालते हुए गुरु जी ने क्या कहा ?
उत्तर:
म्यान से तलवार निकालते हुए गुरु जी ने कहा-आज शक्ति देवी एक बहादुर के शीश की मांग कर रही है।

प्रश्न 2.
सबसे पहले किसने अपनी बलि देने की इच्छा प्रकट की ?
उत्तर:
सबसे पहले लाहौर के क्षत्रिय दयाराम ने अपनी बलि देने की इच्छा प्रकट की।

प्रश्न 3.
पंडाल में से लोग क्यों खिसकने लगे ?
उत्तर:
पंडाल में से लोग इसलिए खिसकने लगे क्योंकि सभी भयभीत हो गए थे। गुरु जी द्वारा एक के बाद एक सीस मांगे जाने से भय और निराशा बढ़ गई थी।

प्रश्न 4.
बलि देने वाले पाँचों वीरों के क्या-क्या नाम थे ?
उत्तर:
बलि देने वाले पाँच वीरों के नाम थे:

  • दयाराम
  • भाई धर्मदास
  • मोहकम चन्द
  • साहब चन्द
  • भाई हिम्मत राय

(ख) पाँच प्यारे कौन-कौन थे ? उनके बारे में जो कुछ जानते हो अपनी कॉपी में लिखो।
उत्तर:
दयाराम, भाई धर्मदास, भाई मोहकम चन्द, साहब चन्द और भाई हिम्मत राय से गुरु जी के पाँच प्यारे थे। इन्हें वीरों के पहरावे में गुरु जी ने जनता के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने हाथों में तलवारें पकड़ रखी थी। उन्होंने धर्म की रक्षा करने का प्रण लिया था।

(ग) अपने अध्यापक से जानकारी प्राप्त करें

प्रश्न 1.
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पाँच प्यारे क्यों चने ?
उत्तर:
गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पाँच प्यारे इसलिए चुने, ताकि धर्म की रक्षा की जा सके। सोई हुए जाति में नए रक्त का संचार किया जा सके। लोगों में बलिदान की भावना पैदा की जा सके।

प्रश्न 2.
गुरु जी ने उन पाँच प्यारों का वेश क्यों बदल दिया ?
उत्तर:
गुरु जी ने पाँच प्यारों का वेश इसलिए बदल दिया, ताकि उन्हें वीरता की भावना से ओत-प्रोत किया जा सके। जन-सामान्य में एक नई जागृति पैदा की जा सके।

(घ) कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से उचित शब्दों को लेकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. गुरु जी बोले, “आज शक्ति की देवी एक…………के शीश की माँग कर रही है।” (नवयुवक, वीर, खत्री)
2. गुरु जी खून से भरी तलवार सहित……….से बाहर आए। (कमरे, पण्डाल, तम्बू)
3. लोगों ने……….से प्रार्थना की। (गुरु, गुरु-माता, अकाल पुरुष)
4. गुरु जी का चेहरा…………..से तमतमा रहा था। (क्रोध, जोश, रक्त)
उत्तर:
1. वीर
2. तम्बू
3. अकाल पुरुष
4. जोश

आत्म-बोध (प्रश्न)

1. धर्म की रक्षा के लिए गुरु गोबिन्द सिंह जी के त्याग की सभी घटनाओं को पढ़ो अथवा उनका पता करो और उनसे प्रेरणा लो।
नोट-गुरु गोबिन्द सिंह जी का जीवन चरित्र पढ़ें और उनके आदेशों को अपने जीवन में उतारें।

रचना-बोधा

गरु गोबिन्द सिंह पर लेख लिखो।
उत्तर:
उत्तर के लिए विद्यार्थी निबन्ध भाग में देखें।

बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
सबसे पहले किसने अपनी बलि देने की इच्छा प्रकट की ?
(क) दयावान ने
(ख) दयाराम ने
(ग) धनवान ने
(घ) सीताराम ने
उत्तर:
(ख) दयाराम ने

प्रश्न 2.
पाँच प्यारे में कौन-कौन थे ?
(क) दयाराम और भाई धर्मदास
(ख) भाई मोहकमचन्द एवं साहब चन्द
(ग) भाई हिम्मत राय
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी

प्रश्न 3.
किस गुरु जी ने पांच प्यारे चुने ?
(क) गुरु गोबिन्द सिंह जी ने
(ख) गुरु नानक देव जी ने
(ग) गुरु हरगोबिन्द जी ने
(घ) गुरु वशिष्ट जी ने
उत्तर:
(क) गुरु गोबिन्द सिंह जी ने

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 15 पाँच प्यारे

प्रश्न 4.
गुरु जी ने किसकी रक्षा के लिए पांच प्यारे चुने ?
(क) धर्म
(ख) कर्म
(ग) देश
(घ) समाज
उत्तर:
(क) धर्म

पाँच प्यारे Summary

पाँच प्यारे पाठ का सार

सन् 1699 का वर्ष, बैसाखी का दिन था। भारी संख्या में बच्चे, बूढ़े तथा जवान आनन्दपुर साहब में इकट्ठे हुए। पंडाल में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। भगवान् का कीर्तन हो रहा था। गुरु गोबिन्द सिंह जी भी उस पंडाल में सुशोभित थे। कुछ समय के बाद गुरु जी खड़े हो गए। उनका चेहरा तमतमा रहा था। उन्होंने अपनी म्यान से तलवार निकाली और शेर की तरह गर्जना करते हुए बोले, “आज शक्ति-देवी एक बहादुर के शीश की मांग कर रही है। क्या यहाँ कोई ऐसा वीर है जो अपने जीवन का बलिदान कर सकता है ?” इन शब्दों को सुनते ही सभा में सन्नाटा छा गया। लोगों के हृदय कांपने लगे। कोई भी व्यक्ति बलिदान के लिए तैयार न था। गुरु जी ने अन्त में फिर कहा कि हज़ारों की इस गणना में क्या कोई भी ऐसा वीर नहीं जिसे मुझ पर विश्वास हो। इस पर पाँच वीर सामने आए। गुरु जी ने उन्हें खालसा सजाया। गुरु जी ने उन्हें पाँच प्यारों की संज्ञा दी और घोषणा की कि ये पाँच प्यारे अपने प्राणों का बलिदान देकर अपने धर्म की रक्षा करेंगे। यह सुनकर सबने सत्-श्री अकाल का जय-घोष किया।

कठिन शब्दों के अर्थ:

संख्या = गिनती। एकत्र = इकट्ठे। सहस्रों = सैंकड़ों, हज़ार। सुशोभित = शोभा देना, सजा हुआ। पश्चात् = बाद। शीश = सिर। नेत्र = आँखें। बलिदान = कुर्बानी। दहल उठना = डर जाना, भयभीत होना। बलि = कुर्बानी। शूरवीर = बहादुर। अंत = आखिर। आश्चर्य = हैरानी। अलौकिक = अद्भुत। रक्त = खून। भयभीत = डरी हुई। तितर-बितर होना = भाग जाना, चले जाना। स्तब्धता = एक दाम शांति, चुप्पी। अकारण = बिना किसी कारण के। भय = डर। समक्ष = सामने। खिसकना = धीरे से निकल जाना। तमतमाना = धूप या गुस्से से चेहरे का लाल होना। जयघोष = विजय की गर्जना। क्षमा = मुआफी। पश्चात् = बाद। अकाल पुरुष = परमात्मा। पर्याप्त = काफ़ी। असमंजस = ठीक-ठीक न पता होना। वस्त्र = कपड़े। संज्ञा = नाम। आहुति = बलिदान। रक्षा = रखवाली।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 14 तीज

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 14 ज Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 14 ज

Hindi Guide for Class 6 ज Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध (प्रश्न)

1. शब्दों के अर्थ पाठ के आरम्भ में दिए जा चुके हैं।

सावन = श्रावण ( एक महीने का नाम)
शगुन = शुभ
प्रतीक = बताने वाला चिह्न
थिरकर = नाचना
सौगात = उपहार, भेंट
बौछार = झोंका
तपिश = गर्मी
सिमटना = सीमित रह जाना
वर्जित = मनाही
पखवाड़ा = पंद्रह दिन का समय

2. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताते हुए वाक्यों में प्रयुक्त करें

1. आँख मिचौली खेलना,
2. मन-मयूर नाच उठना।
उत्तर:
आँख मिचौली खेलना = लुका-छिपी-बादलों के कारण आज सूर्य आँख मिचौली खेल रहा है।
मन-मयूर नाच उठना = बहुत प्रसन्न होना-सालों के बाद भाई के विदेश से आने पर सुनीति का मन-मयूर नाच उठा।

3. विपरीतार्थक लिखें

1. आरम्भ = ………………….
2. सूखा = …………………..
3. शुक्ल पक्ष = ………………….
4. उदय = ………………..
5. गर्मी = …………………
6. विवाहित = ………………….
7. मिलाप = ………………..
उत्तर:
1. आरम्भ = अन्त
2. सूखा = गीला
3. शुक्ल पक्ष = कृष्ण पक्ष
4. उदय = अस्त
5. गर्मी = सर्दी
6. विवाहित = अविवाहित
7. मिलाप = विछोह

4. लिंग बदलें

1. मोर = …………………
2. नौजवान = …………………..
3. पुत्रवधू = …………………..
4. बुड्डा = ………………….
5. गुड़िया = ………………….
6. बुआ = ……………….
7. स्त्री = …………………
उत्तर:
1. मोर – मोरनी
2. नौजवान – नवयुवती
3. पुत्रवधू – पुत्र
4. बुड्डा – बुढ़िया
5. गुड़िया – गुड्डा
6. बुआ – फूफा।
7. सत्री = पुरुष।

5. वचन बदलो

1. कपड़ा = …………………
2. खिलौना = ………………….
3. बुढ्ढा = …………………
4. मिठाई = …………………..
5. चोटी = …………………..
6. भतीजी = ………………….
7. डिब्बी = …………………
8. सखी = …………………
9. कहानी = ………………..
10. लड़की = …………………
उत्तर:
1. कपड़ा = कपड़े
2. खिलौना = खिलौने
3. बुढ्ढा = बुढ्ढे
4. मिठाई = मिठाइयाँ
5. चोटी = चोटियाँ
6. भतीजी = भतीजियाँ
7. डिब्बी = डिब्बियाँ
8. सखी = सखियाँ
9. कहानी = कहानियाँ
10. लड़की = लड़कियाँ

6. शुद्ध करें

अभुषण = ……………………..
त्याहार = …………………..
ढकन = ………………………
विवाहत = ……………………..
वयकति = …………………..
वरजित = …………………..
उतसव = ………………………
षिषटाचार = ………………………
सहेलीयाँ = …………………….
विचीतर = …………………
पंदरह = ………………………
उत्तर:
अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
अभुषण = आभूषण
त्याहार – त्योहार
ढकन – ढक्कन
विवाहत – विवाहित
वयकति – व्यक्ति
वरजित – वर्जित
उतसव – उत्सव
षिषटाचार – शिष्टाचार
सहेलीयाँ – सहेलियाँ
विचीतर – विचित्र
पंदरह – पंद्रह।

7. मूल शब्द अलग करो

1. हरियाली = हरा।
2. आनन्दित = …………………..
3. विवाहित = ……………………
उत्तर:
1. हरियाली = हरा
2. आनन्दित = आनन्द
3. विवाहित = विवाह

7. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाएँ

सिमटना = ………………………….
प्रतीक = ……………………………
बौछार = …………………………..
वर्जित = ……………………..
निश्चित = ……………………..
पुत्रवधू = ………………………..
उत्तर:
सिमटना (सिकुड़ना) – गाड़ी में भीड़ अधिक है, इसलिए आप सब सिमट कर बैठें।
प्रतीक (चिह्न) – रक्षा बन्धन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है।
बौझार (हल्की बरसात की – सी पानी की बूंदें)-धीमी-धीमी बौछार मन को मोह लेती है।
वर्जित (निषिद्ध) – क! लगा है, बाहर निकलना वर्जित है। निश्चित (पक्का)-रमेश का आना आज निश्चित है।
पुत्रवधू (पुत्र की बहू) – रमा महेश जी की पुत्रवधू है।

अंतिम दिन, पाँचवां महीना, सफेद दाढ़ी, विचित्र कहानी आदि शब्द-युग्मों में अंतिम, पाँचवाँ, सफेद, विचित्र शब्द क्रमशः दिन, महीना, दाढ़ी, कहानी शब्दों की विशेषता बतलाते हैं। स्पष्ट है कि किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता प्रकट करने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं। जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं। अंतिम दिन’ में ‘अंतिम’ विशेषण है, जबकि ‘दिन’ विशेष्य है। अब नीचे लिखे शब्दों में से विशेषण और विशेष्य शब्द अलग-अलग लिखिए पांचवाँ महीना, पंजाबी भाषा, तेज़ बौछार, सुहावना वातावरण, सजी-धजी महिलाएँ, मनचले नौजवान, सफेद दाढ़ी, विचित्र कहानी, दो पक्ष, पन्द्रह दिन।
उत्तर:

विशेषण विशेष्य विशेषण विशेष्य
पांचवाँ महीना पंजाबी भाषा
तेज़ बौछार सुहावना वातावरण
सजी-धजी महिलाएँ मनचले नौजवान
सफ़ेद दाढ़ी विचित्र कहानी
दो पक्ष पन्द्रह दिन

ऊपर लिखे शब्दों में अंतिम, पंजाबी, तेज़, सुहावना, सजी-धजी, मनचले, सफ़ेद, विचित्र शब्द संज्ञा शब्दों के गुण, दशा, रंग, आकार आदि का बोध कराते हैं, अतः गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं। पांचवाँ, दो, पन्द्रह आदि शब्द महीना, पक्ष, दिन की संख्या का बोध कराते हैं, अतः संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।

विचार-बोध (प्रश्न)

(क)
प्रश्न 1. “सावन’ हिन्दुस्तानी साल का कौन-सा महीना है ?
उत्तर:
‘सावन’ हिन्दुस्तानी साल (विक्रमी संवत्) के पाँचवें महीने में आता है।

प्रश्न 2.
‘तीज’ का त्योहार कब आरम्भ होता है ? यह कितने दिनों तक मनाया जाता
उत्तर:
तीज का त्योहार सावन शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन शुरू होता है और यह तेरह दिनों तक मनाया जाता है।

प्रश्न 3.
‘तीज’ शब्द कैसे बना ?
उत्तर:
तीज शब्द संस्कृत के ‘तृतीया’ शब्द से बना क्योंकि यह सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से शुरू होता है।

प्रश्न 4.
पंजाब में तीज के त्योहार को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
पंजाब में तीज के त्योहार के ‘तीआं’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 5.
बड़े शहरों में तीज का मेला किस रूप में सिमटता जा रहा है?
उत्तर:
बड़े शहरों में तीज का मेला दो दिन के झूला उत्सव के रूप में सिमटता जा रहा है।

प्रश्न 6.
तीज पर पुत्रवधु को जो सौगात भेजी जाती है, उसे क्या कहते हैं ? उस सौगात में क्या-क्या भेजा जाता है?
उत्तर:
तीज पर पुत्रक्धु को जो संगीत भेजी जाती है उसे संधारा कहते हैं। इस सौगात में ससुराल वाले बहूरानी को नए कपड़े गहने, मिठाइयाँ और श्रृंगार की, वस्तुएं भेजते हैं।

प्रश्न 7.
‘तीज’ का आखिरी दिन कब होता है ? बहनें इस दिन को कैसे मनाती हैं ?
उत्तर:
तीज का. आखिरी दिन रक्षा बन्धन (पूर्णिमा) की शाम को होता है। इस दिन को बहनें अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बाँधती हैं।

प्रश्न 8.
सहेलियों से मिलते समय स्त्रियाँ कौन-सी तक दोहराती हैं ?
उत्तर:
सहेलियों से मिलते समय स्त्रियाँ सौण वीर इक्ट्ठीयाँ करे। भादों चंदेरी विछोड़ पावे।। तुक दोहराती हैं।

(ख)
प्रश्न 1.
सावन के महीने में मौसम कैसा होता है ?
उत्तर:
सावन के महीने में मौसम बड़ा सुहावना होता है। वर्षा की बौछारें हृदय को आनन्दित करती हैं।

प्रश्न 2.
तीज का त्योहार स्त्रियाँ कैसे मनाती हैं ?
उत्तर:
तीज का त्योहार स्त्रियों का प्रमुख त्योहार है। विवाहित स्त्रियाँ झूला-झूलती है। नए कपड़े पहनती हैं। सजती संवरती है तथा अपनी सखियों से मन की बातें करती है।

प्रश्न 3.
आप रक्षा बन्धन कैसे मनाते हो ? अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर:
रक्षा बन्धन का त्योहार भाई बहनों का पवित्र त्योहार है। इस त्योहार का मुझे बहुत इंतजार रहता है। इस दिन मेरी बहिन मुझे राखी बाँधती है। माथे पर तिलक लगा कर मेरी लम्बी आयु की कामना करती है और मुझे आशीर्वाद देती है। मुझे मिठाई खिलाकर मेरा मुँह मीठा कराती है। मैं भी उसे चरण स्पर्श करता हूँ और उसको मिठाई खिलाता हूँ।

आत्म-बोध

1. ‘तीज’ के त्योहार पर गाए जाने वाले गीत को मिलकर गाएँ।
2. छात्र परस्पर भाईचारे की भावना रखें।
3. अन्य त्योहारों का महत्त्व भी जानें और उसे समझ कर प्रसन्नचित रहें।
उत्तर:
छात्र स्वयं प्रयास करें।

रचना-बोध

प्रश्न 1.
अपनी सहेली को पत्र द्वारा सूचित करें कि आपके परिवेश में तीज का त्योहार कैसे मनाया गया।
प्रश्न 2.
हमारे त्योहार या रक्षा बन्धन पर निबन्ध लिखें।
उत्तर:
प्रश्न 1 और 2 के उत्तर के लिए व्याकरण भाग में पत्र रचना तथा निबन्ध रचना भाग देखें।

प्रश्न 3.
देसी महीनों के नाम पता कर के लिखें।
उत्तर:
चैत्र, वैसाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भादों, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीष, पौष, माघ, फाल्गुन।

बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
तीज का त्योहार किस मास में मनाया जाता है ?
(क) सावन
(ख) भादो
(ग) कार्तिक
(घ) अश्विन
उत्तर:
(क) सावन

प्रश्न 2.
तीज का त्योहार किसको सम्मान देने का प्रतीक है ?
(क) मानव
(ख) माता
(ग) पिता
(घ) पुत्रवधू
उत्तर:
(घ) पुत्रवधू

प्रश्न 3.
तीज के आखिरी दिन क्या होता है ?
(क) रक्षा
(ख) बन्धन
(ग) रक्षाबन्धन
(घ) तीज।
उत्तर:
(ग) रक्षाबन्धन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से गुणवाचक विशेषण का उदाहरण कौन-सा है ?
(क) सुहावना
(ख) पन्द्रह
(ग) दसवां
(घ) पहला
उत्तर:
(क) सुहावना

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से संख्यावाचक विशेषण का उदाहरण है :
(क) अच्छा
(ख) बुरा
(ग) पाँचवां
(घ) सुंदर
उत्तर:
(ग) पाँचवां

प्रश्न 6.
निम्न में से गुणवाचक विशेषण का उदाहरण नहीं है :
(क) सफेद
(ख) तेज़
(ग) पंजाबी
(घ) दो
उत्तर:
(घ) दो

तीज Summary

तीज पाठ का सार

सावन मास के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन से तीज का त्योहार शुरू होता है। यह तेरह दिन तक चलता है। शिष्टाचार के नाते इसमें पुरुषों का प्रवेश निषिद्ध होता है। कुछ मनचले नौजवान लुक-छिप कर यह त्योहार देखने चले जाते हैं। आजकल तीज का मेला बड़े शहरों में एक-दो दिन के ‘झूला उत्सव’ तक सिमट कर रह गया है। तीज का त्योहार पुत्र वधू (बहू) को सम्मान देने का प्रतीक है। इस अवसर पर ससुराल की ओर से नये कपड़े, गहने और मिठाइयाँ भेजी जाती हैं। इसमें कुछ सजने-सँवरने का सामान भी होता है। झूलने के लिए एक बड़ी रस्सी तथा भतीजे-भतीजियों के लिए खिलौने भी भेजे जाते हैं। खिलौनों में एक गुड्डा और एक गुड़िया होती है। इस सारी सौगात को ‘संधारा’ कहा जाता है।

तीज का आखिरी दिन रक्षा बन्धन की शाम होती है। बहन भाई के राखी बाँधकर ‘सलूनों’ का शगुन मनाती है। राखी के अगले दिन भादों का महीना आरम्भ हो जाता है। विवाहित स्त्रियाँ ससुराल लौटती हैं। यह ‘तीआँ’ का त्योहार बनकर हर साल दिल को छू लेता है।

कठिन शब्दों के अर्थ:

प्रत्येक = हर एक। पक्ष = पखवाड़ा। उदय = निकलना। लोक पर्व = लोगों का त्योहार। सावन = श्रावण महीना। शिष्टाचार = अच्छा आचरण। वर्जित = निषिद्ध । प्रभाव = असर। पुत्र वधू = बहू। सम्मान = आदर। प्रतीक = चिह्न। अवसर = मौका। आभूषण = गहने। सौगात = उपहार, भेंट। बौछार = झोंका। शगुन = शुभ। तपस = गर्मी। मधुर = मीठे। विचित्र = अनोखी। विछोह = वियोग।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 12 शून्य…. नहीं अनन्त

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 12 शून्य…. नहीं अनन्त Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 12 शून्य…. नहीं अनन्त

Hindi Guide for Class 6 शून्य…. नहीं अनन्त Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध

1. शब्दार्थ-कठिन शब्दों के अर्थ पाठ के आरम्भ में दिए गए हैं।

वन- मानुष = एक तरह का बंदर
पिंजरानुमा = पिंजरे के आकार का
प्रजाति = पशु पक्षियों आदि का वह समूह, जिसमे सभी सदस्यों के नाक, कान, कपाल, केश आदि के आकार- प्रकार, रूपरंग आदि में समानता हो।
आश्रय- स्थल = शरण/ ठिकाने का स्थान
आदमखोर = नर मांस भक्षी
सुरक्षा कर्मी = सुरक्षा करने वाली कर्मचारी
खूंखार = जालिम, खूनी, डरावना

2. अर्थ लिखकर वाक्य बनाओ

अंक-अंग, हंस-हँस, मास-मांस, शून्य-सुन्न, बालू-भालू।
उत्तर:
1. अंक : गोद माँ ने अपने बेटे को अपने अंक में छुपा लिया।
अंग : हिस्सा हाथ हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग है।
2. हंस : एक पक्षी नदी में हंस तैर रहे हैं।
हँस : हँसना लड़के भिखारी पर हँस रहे थे।
3. मास : महीना जनवरी मास में ठंड बहुत पड़ती है।
मांस : मांस बाघ का प्रिय खाद्य मांस है।
4. शून्य : जीरो, खाली महान गणितज्ञ ब्रह्म गुप्त ने शून्य का उपयोग
करते हुए नियम बना दिया। सुन्न : – संज्ञाहीन मेरा पैर सुन्न हो गया।
5. बालू : रेत मोहन बालू में खेल रहा था।
भालू : एक जानवर/ रीछ । भालू नाच रहा है।

3. रिक्त स्थान भरो

1. बेबीलोन निवासियों की गणना का आधार अंक…………जिसका चिह्न………..था।
2. भारत में ज्ञान की खोज में………………विदेशी यात्री आए।
3. ब्रह्मगुप्त…………..भारतीय………..थे, जिन्होंने अनेक गणित के नियम बनाए।
4. …………….की खोज आर्यभट्ट ने की, उनका प्रसिद्ध…………था।
5. कम्प्यू टर के आधार अंक………..और…………हैं।
उत्तर:
(1) 60, वाई
(2) अनेक
(3) पहले, गणितज्ञ
(4) शून्य, ग्रंथ आर्यभट्टीय
(5) शून्य, जीरो।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 12 शून्य.... नहीं अनन्त

विचार-बोध

प्रश्न 1.
प्राचीन काल में मनुष्य कैसे गणना करता था?
उत्तर:
प्राचीन काल में मनुष्य तिनकों, कौड़ियों और कंकड़ आदि से गणना करता था।

प्रश्न 2.
अशोक के शिलालेखों के अंक चिह्न का संबंध किस सभ्यता से है?
उत्तर:
अशोक के शिलालेखों के अंक चिहन का सम्बन्ध सिन्धु सभ्यता से है।

प्रश्न 3.
मिस्त्र में दस, बीस चालीस अंक चिह्न लिखो।
उत्तर:
मिस्र में दस के लिए ‘o’ चिह्न, बीस के लिए ‘oo’ और चालीस के लिए ‘0000’ अंक चिह्न थे।

प्रश्न 4.
बेबीलोन निवासियों का गणना अंक कितना था?
उत्तर:
बेबीलोन निवासियों का गणना अंक 60 था।

प्रश्न 5.
भारत में बिन्दु चिह्न कब से मिलता है?
उत्तर:
भारत में बिन्दु-चिह्न वैदिक काल से मिलता है।

प्रश्न 6.
आर्यभट्ट कौन थे, उनके प्रसिद्ध ग्रन्थ का नाम लिखो।
उत्तर:
आर्यभट्ट एक महान् गणितज्ञ थे। उनके प्रसिद्ध ग्रंथ का नाम हैं-‘आर्यभट्टीय’

प्रश्न 7.
आर्यभट्ट ने कौन-सी महत्वपूर्ण खोज की ?
उत्तर:
आर्यभट्ट ने ‘शून्य’ की महत्त्वपूर्ण खोज की।

प्रश्न 8.
ब्रह्मगुप्त कौन थे?
उत्तर:
ब्रह्मगुप्त एक महान गणितज्ञ थे।

प्रश्न 9.
आचार्य महावीर के ग्रंथ का नाम लिखो।
उत्तर:
आचार्य महावीर के प्रसिद्ध ग्रंथ का नाम है-‘गणित सार संग्रह।

प्रश्न 10.
कम्प्यूटर के आधार अंक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
कम्प्यूटर के आधार अंक शून्य 0 जीरो है।

आत्म-बोध

माम ला कल्पना करो कि आपके पास एक रुपया है यदि उसके साथ एक-एक करके शून्य लगाते जाएँ तो यही रुपया करोड़ों, अरबों रुपयों में बदल जाएगा। इसलिए शून्य का भी बहुत महत्त्व है। इसी तरह जीवन में हरेक इन्सान महत्त्वपूर्ण है अतः कभी भी अपने आपको कम मत आँकों। अपनी शक्तियों को पहचानो और जीवन में आगे बढ़ते जाओ।

रचना-बोध

1. अपनी कापी पर एक

(1) लिखो। उसके आगे शून्य (0) लगाओ। अब इस संख्या को शब्दों में लिखो जैसे 10-दस। इसी प्रकार शून्य लगाकर बनी संख्या शब्दों में लिखते जाओ।

2. पुराने सिक्कों का संग्रह करो।
(विद्यार्थी स्वयं करें)

बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
इस पाठ में लेखक ने किसकी महत्ता का वर्णन किया है ?
(क) शून्य की खोज
(ख) धन की
(ग) बल की
(घ) तन की
उत्तर:
(क) शून्य की खोज

प्रश्न 2.
वैदिक काल में जीरो का प्रचलन किस रूप में था ?
(क) जीरो
(ख) शून्य
(ग) बिन्दु
(घ) हिंदु
उत्तर:
(ग) बिन्दु

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 12 शून्य.... नहीं अनन्त

प्रश्न 3.
शून्य की खोज किसने की ?
(क) आर्यभट्ट ने
(ख) महाभट्ट ने
(ग) कालिदास ने
(घ) तुलसीदास ने
उत्तर:
(क) आर्यभट्ट ने

प्रश्न 4.
ब्रह्मगुप्त कौन थे ?
(क) ऋषि
(ख) देव
(ग) गणितज्ञ
(घ) दानव
उत्तर:
(ग) गणितज्ञ

प्रश्न 5.
कंप्यूटर का आधार अंक कौन सा है ?
(क) शून्य
(ख) एक
(ग) दस
(घ) बीस
उत्तर:
(क) शून्य

प्रश्न 6.
‘आर्यभट्टीय’ ग्रंथ के लेखक का नाम क्या है ?
(क) महावीर
(ख) आर्यभट्ट
(ग) आचार्यवीर
(घ) वीरवट
उत्तर:
(ख) आर्यभट्ट

प्रश्न 7.
गणित सार संग्रह के लेखक कौन हैं ?
(क) आचार्य महावीर
(ख) आचार्य परमवीर
(ग) आचार्य नरेन्द्रनाथ
(घ) आचार्य स्वामी
उत्तर:
(क) आचार्य महावीर

शून्य……., नहीं अनन्त Summary

शून्य…. नहीं अनन्त पाठ का सार

पाठ शून्य……..नहीं अनन्त! में लेखक शिवशंकर ने शून्य, जीरो की खोज और महत्ता के बारे में बताया है। ‘जीरो’ के आविष्कार से पहले वस्तुओं और अंकों की गणना (गिनती) करने में बड़ी समस्या आती थी। वैदिक काल में जीरो का प्रचलन बिन्दु (.) के रूप में हुआ। आरम्भ में इसके ( • १ आदि रूप मिलते हैं। तीसरी शताब्दी में बेबीलोन निवासियों ने गणना के लिए ‘Y’ को 60 का आधार चिह्न मान कर गिनती की। ‘जीरो’ का जन्म हुआ चौथी शताब्दी में। भारत के महान् गणितज्ञ आर्यभट्ट इसके जन्मदाता हैं। इनका जन्म 476 ई० पू० बिहार के पाटलीपुत्र (पटना) के कुसुमपुर नामक स्थान में हुआ। आर्यभट्ट गणित, खगोल शास्त्र और ज्योतिष में प्रकांड पंडित थे। इन्होंने अपनी पुस्तक ‘आर्यभट्टीय’ में गणित, ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनेक नियम देकर अनेक अन्धविश्वासों को दूर करने का कार्य किया।

उन्होंने ही जीरो को ‘0’ का रूप दिया जिसे सारी दुनिया ने स्वीकार किया। आर्यभट्ट ने पृथ्वी, ग्रह, नक्षत्रों पर अनेक खोजें की जैसे धरती का अपने अक्ष पर घूमना, जिस कारण दिन और रात का बनना, सूर्य और चन्द्र ग्रहण सूर्य की परिक्रमा के दौरान एक रेखा होने से लगना आदि। भारत में जीरो की खोज होने के पश्चात् विश्व के अन्य देशों चीन और अरब ने भी इसको स्वीकार किया। आज संपूर्ण विश्व जीरो के आधार पर ही बड़ी-बड़ी गणनाएं (गिनती) करता है।
सचमुच जीरो (0) का आविष्कार करके न केवल आर्यभट्ट स्वयं अमर हो गए बल्कि सम्पूर्ण विश्व को गणना का एक आधार भी प्रदान कर गए। अतः जीरो (0) शून्य नहीं, यह तो है अनन्त अनमोल।

कठिन शब्दों के अर्थ:

आविष्कार = खोज । तपस्या = साधना। गणना = गिनती। प्रारम्भ = शुरू। समस्या = मुश्किल, मुसीबत। प्राचीन = पुराना। शिलालेख = पत्थर पर लिखे हुए लेख। नदारद = गायब। जटिल = मुश्किल, कठिन। मनीषियों = चिन्तकों। विश्व = संसार। नतमस्तक = माथा झुकाना। वैदिक काल = वेदों के समय का युग। प्रचलन = चलन। समाहित = समाया हुआ। प्रारम्भ = शुरू। शताब्दी = सदी। प्रकाण्ड = बहुत बड़ा। अन्ध-विश्वास = बिना किसी तर्क के किया गया विश्वास । अक्ष = धुरी। परिक्रमा = चक्कर। निसार = न्यौछावर । अध्ययन = पढ़ाई। सिर आँखों पर बिठाना = सम्मान देना। सबका प्यारा = दुलारा। इतराना = घमंड करना। गणना = गिनती। मान बढ़ाना = इज्जत देना, सम्मान दिलाना।। रहस्य = भेद। उमंग = खुशी। अनन्त = अन्त से परे, असीम।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

Punjab State Board PSEB 11th Class Hindi Book Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Hindi Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

Hindi Guide for Class 11 PSEB वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कविता के आधार पर पत्थर तोड़ने वाली युवती का चित्रांकन करो।
उत्तर:
पत्थर तोड़ने वाली साँवले रंग की युवती पूर्ण रूप से जवान थी किन्तु निर्धनता के कारण उसके कपड़े तारतार हो रहे थे। इलाहाबाद के एक रास्ते पर आँखें नीची किए पत्थर तोड़ रही थी। वहाँ कोई छायादार वृक्ष भी नहीं था। धूप तेज़ हो रही थी। लू चल रही थी किन्तु वह काम में मस्त थी। उसने कवि की ओर ऐसी नज़रों से देखा जैसे कोई मार खाकर रोया न हो।

प्रश्न 2.
‘तोड़ती पत्थर’ कविता में कवि ने ग्रीष्म ऋतु का वर्णन किस प्रकार किया है ?
उत्तर:
जिन दिनों वह युवती पत्थर तोड़ रही थी वे गर्मियों के दिन थे। धूप बढ़ रही थी और शरीर को झुलसाने वाली लू चल रही थी। उस लू में धरती रुई की भांति जल रही थी। उस समय धूल रूपी चिनगारियाँ चारों ओर छायी हुई थीं। वह दोपहर का समय था और दहकती हुई लू सब कुछ जला देने के लिए चारों तरफ फैल रही थी।

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प्रश्न 3.
कर्म में लीन होते हुए पत्थर तोड़ने वाली युवती के मन में क्या-क्या विचार आये ?
उत्तर:
कर्म में लीन होते हुए पत्थर तोड़ने वाली युवती के मन में यही विचार आया कि वह एक पत्थर तोड़ने वाली है। इससे पूर्व उसने कवि की ओर देखने से पहले उस भवन की ओर भी डरते हुए देखा था कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा। वह अपने मन में अपनी गरीबी, पीड़ा और असहायता के कारण दुखी थी। उसने सोचा होगा कि ईश्वर ने उसे गरीबी क्यों दी।

प्रश्न 4.
‘सवा सवा लाख पर एक को चढ़ाऊँगा’ यह पंक्ति किसने कही और कवि इसके माध्यम से क्या कहना चाहता है ?
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति गुरु गोबिन्द सिंह जी ने कही है। कवि इसके माध्यम से भारतीय वीरों को जागृत करना चाहता है। वह भारतवासियों को गुरु गोबिन्द सिंह जी की वीरता के माध्यम से यह याद दिलाना चाहता है कि हम भारतीय दुश्मनों के लिए लाख के बराबर हैं। हमें अपनी शक्ति पहचानकर उसे सबल बनाना चाहिए।

प्रश्न 5.
‘सिंहनी’ और ‘मेषमाता’ के उदाहरण के द्वारा कवि ने क्या संदेश दिया है ?
उत्तर:
सिंहनी और मेष माता के उदाहरण के द्वारा कवि हमें यह संदेश देना चाहता है कि जब कोई बाहरी शक्ति हम पर आक्रमण करती है तो उसका मुकाबला करना चाहिए। हमें किसी भेड़ के समान चुपचाप नहीं खड़े रहना चाहिए। शक्तिशाली मनुष्य के सामने कोई आँख नहीं उठा सकता है। कमज़ोर और कायर ही सदा अत्याचारियों के शिकार बनते हैं। उनका सामना अवश्य किया जाना चाहिए।

प्रश्न 6.
‘जागो फिर एक बार’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखें।
उत्तर:
‘जागो फिर एक बार’ कविता में सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी ने गुरु गोबिन्द सिंह जी की वीरता का उदाहरण देकर भारतवासियों की शक्ति को जागृत करने का प्रयास किया है। मनुष्य की बौद्धिक शक्ति को जागृत करके सरल बनाने को कहा है। किसी बाहरी दुश्मन का डटकर सामने करने का विश्वास जगाया है। हमें इतना शक्तिशाली बनना है कि निडर होकर विचरण करना था।

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PSEB 11th Class Hindi Guide वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार Important Questions and Answers

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म कब और कहाँ हआ था ?
उत्तर:
निराला जी का जन्म सन् 1896 ई० में बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक स्थान पर हुआ था।

प्रश्न 2.
निराला जी के पिता का नाम और व्यवसाय क्या था ?
उत्तर:
इनके पिता का नाम पंडित राम सहाय त्रिपाठी था, जो उन्नाव के गड़कोला गांव के निवासी थे तथा महिषादल रियासत में कोषाध्यक्ष की नौकरी करते थे।

प्रश्न 3.
निराला जी की पत्नी का नाम क्या था ?
उत्तर:
मनोहरा देवी।

प्रश्न 4.
निराला जी की संतानें कितनी थीं और उनके नाम क्या थे ?
उत्तर:
दो, एक पुत्र राम कृष्ण तथा पुत्री सरोज।

प्रश्न 5.
निराला जी की पुत्री का निधन कब हुआ था ?
उत्तर:
सन् 1935 ई० में।

प्रश्न 6.
‘सरोज-स्मृति’ कैसा गीत है ?
उत्तर:
शोक-गीत।

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प्रश्न 7.
निराला जी का निधन कब हुआ ?
उत्तर:
15 अक्तूबर, सन् 1961 ई० ।

प्रश्न 8.
निराला जी की प्रमुख काव्य-रचनाएँ कौन-सी हैं ?
उत्तर:
अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता, अणिमा, अपरा, अर्चना, सरोजस्मृति, राम की शक्ति पूजा, नए पत्ते, आराधना, तुलसीदास आदि।

प्रश्न 9.
कवि निराला ने इलाहाबाद के रास्ते पर किसे देखा था ?
उत्तर:
एक पत्थर तोड़ती हुई साँवली जवान युवती को।

प्रश्न 10.
कवि निराला ने भारतवासियों को किसकी याद दिलाई है ?
उत्तर:
गुरु गोबिंद सिंह जी की।

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प्रश्न 11.
‘जागो फिर एक बार’ कविता के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर:
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’।

प्रश्न 12.
मज़दूर महिला भीषण गर्मी में सड़क किनारे क्या कर रही थी ?
उत्तर:
पत्थर तोड़ रही थी।

प्रश्न 13.
मज़दूर महिला पत्थर क्यों तोड़ रही थी ?
उत्तर:
अपना पेट भरने के लिए।

प्रश्न 14.
मज़दूर महिला के हाथ में क्या था ?
उत्तर:
एक भारी हथौड़ा।

प्रश्न 15.
कवि निराला के हृदय को किसने छू लिया था ?
उत्तर:
मज़दूर महिला की दुःखभरी नज़र ने।

प्रश्न 16.
‘जागो फिर एक बार’ किसकी रचना है ?
उत्तर:
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला।

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प्रश्न 17.
गुरु गोबिंद सिंह जी अपने शत्रुओं के लिए कितनों के बराबर थे ?
उत्तर:
सवा लाख।

प्रश्न 18.
आजकल के युवकों में …………. का समावेश होना आवश्यक है ।
उत्तर:
संयम।

प्रश्न 19.
निराला भारतवासियों को किसके पराक्रम की याद दिलाते हैं ?
उत्तर:
गुरु गोबिंद सिंह।

प्रश्न 20.
अतीत में हमारे देश में …………….. हुए थे ।
उत्तर:
गौरवशाली वीर।

प्रश्न 21.
‘जागो फिर एक बार’ कविता में किस नदी के नाम का उल्लेख हुआ है ?
उत्तर:
सिन्धु नदी।

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प्रश्न 22.
वीरों के लिए मुक्ति क्या है ?
उत्तर:
देश की रक्षा के लिए वीरगति।

प्रश्न 23.
युद्ध क्षेत्र में उतरते हुए गुरु गोबिंद सिंह के मस्तक से क्या निकलती है ?
उत्तर:
धू-धू करती अग्नि।।

प्रश्न 24.
उस अग्नि में मृत्यु …………. हो गई थी ।
उत्तर:
जलकर भस्म।

प्रश्न 25.
मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला देवता कौन है ?
उत्तर:
भगवान् शंकर।

बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निराला किस छन्द के प्रवर्तक माने जाते हैं ?
(क) मुक्त छद
(ख) दोहा
(ग) चौपाई
(घ) सवैया।
उत्तर:
(क) मुक्त छन्द

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प्रश्न 2.
‘वह तोड़ती पत्थर’ कविता किस भाव से ओत-प्रोत है ?
(क) प्रगतिवादी
(ख) प्रयोगवादी
(ग) छायावादी
(घ) हालावादी।
उत्तर:
(क) प्रगतिवादी

प्रश्न 3.
निराला किस अन्य नाम से प्रसिद्ध थे ?
(क) अज्ञेय
(ख) महाप्राण
(ग) देवप्राण
(घ) सुरप्राण।
उत्तर:
(ख) महाप्राण

प्रश्न 4.
कवि ने महिला की किस दशा का चित्रण किया है ?
(क) विरह
(ख) प्रेम
(ग) ग़रीबी
(घ) मिलन।
उत्तर:
(ग) ग़रीबी।

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वह तोड़ती पत्थर सप्रसंग व्याख्या

1. वह तोड़ती पत्थर
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर
वह तोड़ती पत्थर
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार,
श्याम तन, भर बंधा यौवन,
नत नयन, प्रिय कर्मरत मन।
गुरु हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।

कठिन शब्दों के अर्थ :
तले = नीचे। स्वीकार = मर्जी से। श्याम तन = साँवला शरीर। भर-बंधा यौवन = भरपूर जवान । नत = झुके हुए। प्रिय-कर्म-रत-मन = अपने प्रिय काम में लगा हुआ मन । गुरु = भारी, बड़ा। प्रहार = चोट। तरु-मालिका = वृक्षों का समूह। अट्टालिका = कोठी । प्राकार = चार दीवारी।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी द्वारा लिखित कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ में से लिया गया है। यह कविता प्रगतिवादी रचना है। इसमें कवि ने एक पत्थर तोड़ने वाली स्त्री का करुणा-पूर्ण चित्र अंकित किया है।

व्याख्या :
कवि कहता है कि इलाहाबाद के रास्ते पर मैंने एक पत्थर तोड़ती हुई स्त्री देखी। जहाँ वह पत्थर तोड़ रही थी वहाँ कोई छायादार वृक्ष नहीं था जिसके नीचे बैठी विवश होकर अपनी मर्जी से वह अपना काम कर रही थी। साँवले रंग की वह स्त्री पूरी जवान थी। वह आँखें झुका कर अपने प्रिय काम-पत्थर तोड़ने में मग्न थी। उसके हाथ में एक भारी हथौड़ा था जिससे वह पत्थरों पर बार-बार चोट करती थी। उसके सामने ही वृक्षों की पंक्ति और कोठी की चारदीवारी थी।

विशेष :

  1. मज़दूर वर्ग के लोग अपनी जीविका चलाने के लिए भीषण गर्मी में काम करने के लिए मजबूर हैं।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है।
  3. पुनरुक्ति प्रकाश तथा अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।
  4. मुक्तक छंद की प्रस्तुति अत्यन्त मनोहारी है।

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2. चढ़ रही थी धूप
गर्मियों के दिन
दिवा का तमतमाता रूप।
उठी झुलसाती हुई लू
रुई ज्यों जलती हुई भू
गर्द चिनगी छा गई
प्रायः हुई दोपहर
वह तोड़ती पत्थर।

कठिन शब्दों के अर्थ :
दिवा = दिन, सूर्य। भू = पृथ्वी। गर्द = धूलि। चिनगी = चिंगारियों के समान, गर्म।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी द्वारा लिखित कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ से लिया गया है। इसमें कवि ने मज़दूर महिला का चित्रण किया है। वह भीषण गर्मी में भी अपने पेट के लिए सड़क पर काम कर रही है।

व्याख्या :
कवि इलाहाबाद के रास्ते पर एक पत्थर तोड़ती हुई साँवली जवान युवती को देखते हैं तो उस समय धूप चढ़ रही थी। गर्मियों के दिन थे। सूर्य अपनी पूरी गर्मी के साथ चमक रहा था और झुलसाने वाली लू चल रही थी और धरती रुई की भांति जल रही थी और गर्म धूलि चारों ओर फैल रही थी। प्रायः उस समय दोपहर हो गई थी और वह युवती पत्थर तोड़ती ही जा रही थी।

विशेष ;

  1. मज़दूर महिला भीषण गर्मी में सड़क पर अपने परिवार का पेट भरने के लिए पत्थर तोड़ रही है।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है।
  3. उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  4. मुक्तक छंद की रचना है।

3. देखते देखा मुझे तो एक बार
उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार।
देख कर कोई नहीं, देखा मुझे उस दृष्टि से
जो मार खा रोयी नहीं।

कठिन शब्दों के अर्थ :
छिन्नतार = फटे हुए कपड़े, तार-तार हुए कपड़े पहने।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी द्वारा लिखित कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ से लिया गया है। इसमें कवि ने आर्थिक विषमता का वर्णन किया है। मज़दूर महिला भीषण गर्मी में अमीरों के महल के लिए पत्थर तोड़ रही है

व्याख्या :
कवि ने इलाहाबाद के रास्ते पर घोर गर्मी में पत्थर तोड़ती हुई युवती को देखा तो कवि को अपनी ओर देखते हुए उस युवती ने पहले कवि को फिर उस कोठी की ओर देखा, जिसके लिए वह पत्थर तोड़ रही थी। फिर उसकी नज़र अपने तार-तार हुए कपड़ों पर गई। जब उसने यह देखा कि उस समय कोई दूसरा वहाँ नहीं है। कोई उसे नहीं देख रहा है तो उसने कवि की ओर ऐसे देखा जैसे कोई मार खाकर रोया न हो। उसने अपनी सारी व्यथा अपनी नज़रों द्वारा ही व्यक्त कर दी।

विशेष :

  1. मज़दूर महिला ने जब कवि को अपनी ओर देखते हुए देखा तो उसे अपने फटे कपड़ों का ध्यान आया। उसकी आँखें उसकी पीड़ा व्यक्त कर रही थीं।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है।
  3. अनुप्रास तथा उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  4. मुक्तक छंद की रचना है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

4. सजा सहज सितार
सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार।
एक क्षण के बाद वह काँपी सुघर
ढुलक माथे से गिरे सीकर,
लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा
‘मैं तोड़ती पत्थर’

कठिन शब्दों के अर्थ :
सहज = स्वाभाविक रूप से। सुघर = सुन्दर । सीकर = पसीने की बूंदें। लीन होते = मग्न होते हुए।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी द्वारा लिखित कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ से लिया गया है। इसमें कवि ने मज़दूर महिला की भावना व्यक्त की है, उसका कर्म पत्थर तोड़ना है। इसलिए वह पत्थर तोड़ रही है।

व्याख्या :
कवि कहता है कि उस पत्थर तोड़ने वाली मज़दूर महिला ने मुझे जिस नज़र से देखा उसमें उसने अपनी सारी दुःख भरी कहानी कह दी जैसे कोई सितार पर स्वाभाविक रूप से उंगलियाँ चलाकर एक अद्भुत झंकार-सी उत्पन्न कर देता हो। वह सयानी सुन्दर युवती एक क्षण के बाद काँप उठी। उसके माथे पर पसीने की बूंदें झलक आईं उसने फिर से अपने काम में मग्न होते हुए मानो यह कहा कि हाँ मैं पत्थर तोड़ती हूँ।

विशेष :

  1. मज़दूर महिला की दुःखभरी नज़र ने कवि के हृदय को छू लिया। वह महिला क्षण भर रुकी, फिर अपने काम में लग गई।
  2. मुक्तक छन्द की रचना है।
  3. अनुप्रास तथा उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  4. भाषा तत्सम प्रधान है।

जागो फिर एक बार सप्रसंग व्याख्या

1. जागो फिर एक बार
समर में अमर कर प्राण,
गान गाये महासिन्धु-से
सिन्धु-नद-तीरवासी !
सैन्धव तुरंगों पर
चतुरङ्ग चमू सङ्ग;
“सवा-सवा लाख पर
एक को चढ़ाऊंगा,”
गोबिन्द सिंह निज
नाम जब कहाऊंगा।” ।

कठिन शब्दों के अर्थ :
समर = युद्ध। अमर = जो कभी न मरे। महा सिन्धु = महासागर। सिन्धु-नद-तीरवासी = सिंध नदी के किनारे रहने वाले। सैन्धव = सिन्ध देश का। तुरंग = घोड़ा। चतुरङ्ग = हाथी, घोड़ा, रथ, पैदलसेना के चार अंग। चम् = सेना।।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्यांश छायावाद एवं प्रगतिवाद के प्रमुख कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित काव्य ग्रन्थ ‘परिमल’ में संकलित कविता ‘जागो फिर एक बार’ से लिया गया है। यह कविता निराला जी की आरम्भिक कविताओं में से एक है। इसमें कवि की राष्ट्रीय भावना का भरपूर परिचय मिलता है। स्वभावतः इसमें युवाओं के हृदय में भरे आवेश और क्रान्ति का प्रखर स्वर सुनाई पड़ता है। इस कविता द्वारा निराला जी ने सम्पूर्ण भारतीय समाज को नई प्रेरणा और नई दिशा देने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को गुरु गोबिन्द सिंह जी के पराक्रम की याद दिलाता हुआ कहता है कि भारतवासियो तुम एक बार फिर जागो जैसे अतीत में हमारे देश में गौरवशाली वीर हुए थे जो युद्ध भूमि में वीरगति पाकर अमर हो गए और जिन्होंने महासागर के समान महान् वीरता के गीत गाए थे।

हे सिन्धु नदी के किनारे रहने वालो ! सिन्ध देश के घोड़ों पर सवार होकर चारों प्रकार की सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) से युद्ध करते हुए तुमने यह ललकार किसकी सुनी थी कि सवा-सवा लाख पर एक सिंह को चढ़ाऊंगा तब मैं अपने को गोबिन्द सिंह नाम से कहलाऊंगा। सवा लाख से एक भारतीय योद्धा को लड़वा कर ही मैं अपना नाम सार्थक करूंगा।

विशेष :

  1. प्रस्तुत काव्यांश में कवि का भाव है कि भारत के वीर पुरुषों में देश भक्ति की भावना जागृत करता है। इसके लिए वह गुरु गोबिन्द सिंह जी का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
  2. भाषा सरल एवं सरस है।
  3. पुनरुक्ति प्रकाश तथा अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।
  4. छन्द मुक्त की रचना है।
  5. वीर रस विद्यमान है। देश-प्रेम की भावना व्यक्त की गई।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

2. किसने सुनाया यह
वीर-जन-मोहन अति
दुर्जन संग्राम-राग,
फाग का खेला रण
बारहों महीनों में ?
शेरों की मांद में
आया है आज स्यार-
जागो फिर एक बार !

कठिन शब्दों के अर्थ :
वीर-जन-मोहित = वीर पुरुषों को मोह लेने वाला। अति दुर्जय = जो शीघ्रता से जीता जा सके। संग्राम-राग = युद्ध गीत। फाग = होली। रण = युद्ध (यहां रंग)। मांद = गुफा, खोह, रहने का स्थान। स्यार = गीदड़।

प्रसंग :
यह काव्यांश छायावाद तथा प्रगतिवाद के प्रमुख कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित काव्य ग्रन्थ ‘परिमल’ में संकलित कविता ‘जागो फिर एक बार’ से लिया गया है। इसमें कवि ने भारतीय नौजवानों में देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए गुरु गोबिन्द सिंह जी की वीरता का वर्णन कर रहा है।

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को फिर से जगाने के लिए गुरु गोबिन्द सिंह जी की उस उक्ति की याद दिलाता है, जिसमें इन्होंने कहा था कि ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं तभी गोबिन्द सिंह नाम कहाऊं’। कवि इसी उक्ति की याद दिलाता हुआ कहता है कि वीर लोगों को मोहित कर लेने वाला यह अति दुर्जय, जो शीघ्रता से न जीता जा सके युद्ध गीत किसने सुनाया था ? तनिक उसकी तो याद करो। उन गुरु गोबिन्द सिंह जी ने बारह महीने युद्ध भूमि में शत्रुओं के खून से होली खेली थी।

हे भारतवासियो ! तुम सिंह हो, आज तुम्हारी मांद में, तुम्हारे घर में एक गीदड़ आ गया है क्या उसको मार भगाने के लिए तुम जागोगे नहीं, ऐसे ही सोये रहोगे। जरा गुरु गोबिन्द सिंह जी जैसे शूरवीरों को याद तो करो।।

विशेष :

  1. प्रस्तुत काव्यांश से कवि का भाव है कि भारतवासियो तुम्हें अपने देश में घुस आए दुश्मनों का सामना वीरता से करना चाहिए। इसलिए वह उन्हें गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा लड़े गए युद्धों में वीरता का वर्णन करता है।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है। छंद मुक्त की रचना है।
  3. वीर रस विद्यमान है। इसमें देश-प्रेम की भावना व्यक्त की गई है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

3. सत् श्री अकाल,
भाल-अनल धक-धक कर जला,
भस्म हो गया था काल-
तीनों गुण-ताप त्रय,
अभय हो गये थे तुम
मृत्युञ्जय व्योमकेश के समान,
अमृत सन्तान ! तीव्र
भेदकर सप्तावरण-मरण-लोक,
शोकहारी ! पहुंचे थे वहां
जहां आसन है सहस्रार-
जागो फिर एक बार !

कठिन शब्दों के अर्थ :
भाल-अनल = आग का मस्तक। तीनों गुण = सतोगुण, रजोगुण तथा तमोगुण। तापत्रय = दैहिक, दैविक, भौतिक ताप। अभय = निर्भय, भय रहित। मृत्युञ्जय = मृत्यु को जीतने वाला। व्योमकेश = शिव। अमृत संतान = वह संतान जिसने अमृत छका है। सप्तावरण = सात पर्दे। सहस्रार = हठयोग के अनुसार छ: चक्रों में से एक जो मस्तिष्क में होता है।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ छायावाद तथा प्रगतिवाद के प्रमुख कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित काव्य ग्रन्थ ‘परिमल’ में संकलित कविता ‘जागो फिर एक बार’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि भारतीय नौजवानों को वीरता का पाठ पढ़ाना चाहता है। वीरों के लिए देश की रक्षा के लिए वीरगति प्राप्त करना संसार से मुक्ति है।

व्याख्या :
कवि पुन: गुरु गोबिन्द सिंह जी के पराक्रम का वर्णन करके सोये हुए भारतवासियों को जागृत कर रहा है। हे भारतवासियो ! जब गुरु गोबिन्द सिंह ‘सत् श्री अकाल’ का जयकारा बुलाते हुए युद्ध के क्षेत्र में उतरते थे तो उनके मस्तक से धू-धू करती हुई अग्नि प्रकट होती थी। (यहां कवि का संकेत गुरु गोबिन्द सिंह जी के तेजोमय मस्तक की ओर है) उस अग्नि में मृत्यु भी जल कर भस्म हो गयी थी। उस अग्नि से संसार के तीनों गुण (सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण) तथा तीनों ताप (दैहिक, दैविक भौतिक, दुःख-कष्ट) नष्ट हो गए थे। गुरु गोबिन्द सिंह के संरक्षण के कारण तुम (भारतवासी) भय रहित हो गए थे।

हे भारतवासियो ! उस समय तुम (गुरु गोबिन्द सिंह जी से प्रेरणा पाकर) मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले भगवान् शंकर की अमृत संतान जैसे बन गए थे। भाव यह कि गुरु गोबिन्द सिंह के रहते मृत्यु तुम पर विजय नहीं पा सकती थी अथवा तुम्हें मृत्यु का भय नहीं रहा था। हे भारतवासियो! तुम अपने भौतिक संसार (मृत्यु लोक) के सातों पर्दे (योगसाधना में सात प्रकार के आवरण माने जाते हैं) भेद कर (पार कर) हे शोक को दूर करने वाले ! तुम वहां पहुँच गए थे जहां हज़ार पंखुड़ियों वाला कमल खिला हुआ था (सहस्रार तक पहुंचने के पश्चात् मनुष्य पूर्णतः मुक्त हो जाता है।) इसलिए हे भारतवासियो ! तुम एक बार वैसे ही जाग पड़ो, सचेत हो जाओ।

विशेष :

  1. प्रस्तुत पद्यांश से निराला जी के योग साधना सम्बन्धी ज्ञान का परिचय मिलता है। भारतवासियों को योग-साधना से परिचित होना चाहिए। योग साधना से मनुष्य अपने पर संयम रखकर सामने वाले को पराजित कर सकता है।
  2. पुनरुक्ति प्रकाश तथा अनुप्रास अलंकार है।
  3. भाषा तत्सम प्रधान है। छंद मुक्त की रचना है।
  4. देश प्रेम की भावना व्यक्त की गई है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

4. सिंहनी की गोद से
छीनता रे शिशु कौन ?
मौन भी क्या रहती वह
रहते प्राण ? रे अजान !
एक मेषमाता ही
रहती है निर्निमेष-
दुर्बल वह-
छिनती सन्तान जब
जन्म पर अपने अभिशप्त
तप्त आंसू बहाती है-
किन्तु क्या,
योग्य जन जीता है,
पश्चिम की उक्ति नहीं
गीता है, गीता है-
स्मरण करो बार बार-
जागो फिर एक बार !

कठिन शब्दों के अर्थ :
मेषमाता = भेड़ की माँ। निर्निमेष = अपलक। अभिशप्त = शापित। तप्त = गर्म। उक्ति = कथन।

प्रसंग :
यह काव्यांश छायावाद तथा प्रगतिवाद के प्रमुख कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ द्वारा लिखित काव्य ग्रन्थ ‘परिमल’ में संकलित कविता ‘जागो फिर एक बार’ से लिया गया है। इसमें कवि भारतीयों में शेरनी जैसी हिम्मत देखना चाहता है। अपने तथा उसकी संतान पर जब संकट आता है तब वह अपना सर्वस्व दुश्मन से मुकाबला करने के लिए लगा देती है।

व्याख्या :
कवि भारतवासियों में चेतना लाने के लिए उन्हें उनके पूर्व गौरव की याद दिलाता हुआ कहता है कि तुम तो शूरवीरों की संतान हो, शूरवीर कभी डरा नहीं करते। उदाहरण देते हुए कवि कहता है कि क्या कोई शेरनी की गोद से भी उसका बच्चा छीनता है, कोई नहीं छीनता अथवा छीनने की हिम्मत नहीं करता और यदि कहीं कोई उसके बच्चे को छीनने का प्रयास भी करता है तो क्या वह अपने प्राण रहते चुप रहती है, नहीं।

किन्तु जब कोई किसी भेड़ से उसका बच्चा छीनता है तो भेड़ की माता विवश होकर अपलक देखती रह जाती है। वह अपने शापित जन्म पर, जो अपनी सन्तान के छीने जाने पर उसकी रक्षा नहीं कर सकती, गर्म-गर्म आंसू बहाती है अथवा दुःख भरे आँसू बहाती है किन्तु क्या योग्य व्यक्ति, वीर व्यक्ति उस भेड़ की तरह जी सकता है ? यह कथन पश्चिमी देशों का नहीं हमारी गीता का ज्ञान है जिसे तुम बार-बार स्मरण करो और शत्रु का नाश करने के लिए एक बार फिर से जाग जाओ, सचेत हो जाओ।

विशेष :

  1. प्रस्तुत पंक्तियों से कवि का यह भाव है कि भारतवासियो तुम्हें अपने देश के मान-सम्मान की रक्षा के लिए एक शेर की तरह तैयार हो जाना चाहिए।
  2. भाषा तत्सम प्रधान, प्रवाहमयी है।
  3. पुनरुक्ति प्रकाश तथा अनुप्रास अलंकार है।
  4. छन्द मुक्त की रचना है।
  5. वीर रस विद्यमान है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

5. पशु नहीं, वीर तुम,
समर-शूर, क्रूर नहीं,
काल-चक्र में हो दबे
आज तुम राजकुंवर ! समर-सरताज !
पर, क्या है,
सब माया है-माया है,
मुक्त हो सदा ही तुम,
बाधा विहीन बन्ध छन्द ज्यों,
डूबे आनन्द में सच्चिदानन्द रूप।

कठिन शब्दों के अर्थ :
समर सूर = युद्ध में शूरवीरता दिखाने वाले। क्रूर = निर्दय । काल-चक्र = समय के चक्र। समर-सरताज = युद्ध भूमि के अगुआ, नेता। माया = भ्रम, छल। बाधा विहीन = रुकावटों से रहित । बन्ध छन्द = बन्धनहीन छन्द। सच्चिदानन्द रूप = ब्रह्म रूप।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्यांश छायावाद तथा प्रगतिवाद के प्रमुख कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित काव्य ग्रन्थ ‘परिमल’ में संकलित कविता ‘जागो फिर एक बार’ से अवतरित है। इसमें कवि ने भारतवासियों को उनके पूर्वजों के शौर्य की याद दिलाता है तथा उनसे कहता है कि तुम्हारी शक्ति दबी हुई है। उसे जागृत करने का समय आ गया है।

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को उनके पूर्व अद्भुत शौर्य और पराक्रम की याद दिलाता हुआ कहता है कि हे भारतवासियो ! तुम अपने आपको पशु समान क्यों समझते हो, तुम तो महावीर और पराक्रमी हो। युद्ध भूमि में सदा तुम ने अपनी शूरवीरता का परिचय दिया है। तुम निर्दय नहीं हो ; निष्ठुर नहीं हो।

यह भिन्न बात है कि इस समय तुम समय के चक्र में दब गए हो किन्तु तुम्हारी अपार शक्ति किसी से छिपी नहीं है। आज भी तुम राजकुंवर हो, युद्ध क्षेत्र में सब के अगुआ हो, नेता हो, तुम आज भी युद्ध करने में कुशल हो, किंतु इस सबसे क्या होता है ? यह तो केवल भ्रम है, माया है कि तुम परतंत्र हो। वास्तविकता तो यह है कि तुम सदा-सदा से उसी तरह से मुक्त रहे हो जैसे कि बंधन-हीन छंद होते हैं। तुम तो सदैव सच्चिदानंद ब्रह्म में लीन रहे हो।

विशेष :

  1. प्रस्तुत पंक्तियों से कवि का भाव यह है कि वह भारतीयों में देशभक्ति की भावना जागृत करना चाहता है। इसलिए उन्हें शूरवीर पूर्वजों के पराक्रम की याद दिलाता है।
  2. अनुप्रास तथा उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग है।
  3. भाषा तत्सम प्रधान है। छंद मुक्त रचना है।
  4. वीर रस विद्यमान है। देशभक्ति की भावना जागृत की गई है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

6. महामन्त्र ऋषियों का
अणुओं-परमाणुओं में फूंका हुआ-
तुम हो महान्, तुम सदा हो महान्,
है नश्वर यह दीन भाव,
कायरता, कामपरता
ब्रह्म हो तुम,
पद-रज-भर भी है नहीं पूरा यह विश्व-भार-
जागो फिर एक बार।

कठिन शब्दों के अर्थ :
कामपरता = इच्छाओं के अधीन। पद-रज-भर = पैरों की धूलि के बराबर।

प्रसंग :
प्रस्तुत काव्य पंक्तियां छायावाद तथा प्रगतिवाद के प्रमुख कवि श्री सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा लिखित काव्यग्रन्थ ‘परिमल’ में संकलित कविता ‘जागो फिर एक बार’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि भारतवासियों को प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा उत्पन्न शक्ति की याद दिलाता है। उस शक्ति से पूरा संसार प्रभावित था। उस शक्ति को जागृत करने का समय आ गया है।

व्याख्या :
कवि भारतवासियों को उनके पूर्व अद्भुत शौर्य और पराक्रम की याद दिलाता हुआ कहता है कि हे भारतवासियो ! हमारे ऋषियों का यह महामन्त्र जिसे उन्होंने देश के अणुओं परमाणुओं में फूंक दिया है, देश के कोने-कोने में वह स्वर गूंज रहा है कि हे भारतवासियो ! तुम महान् हो, तुम सदा महान् रहोगे, इस दीनता के भाव को नष्ट कर दो क्योंकि ये भाव कायरता और इच्छाओं के अधीन होने के चिह्न हैं। तुम तो स्वयं ब्रह्म रूप हो और तुम्हारे समक्ष यह समूचे संसार का भार पैरों की धूलि के भार बराबर भी नहीं है। इसलिए हे भारतवासियो ! एक बार फिर जाग जाओ और संसार को अपनी वीरता और पराक्रम का परिचय दो।

विशेष :

  1. प्रस्तुत पद्यांश में निराला जी वेदान्त से प्रभावित प्रतीत होते हैं। कवि ने भारतवासियों को उनके अंदर छिपी राष्ट्र भक्ति की याद दिलाई है। भारतवासी अपने सभी दुश्मनों का सामना करने में सक्षम हैं।
  2. भाषा तत्सम प्रधान है।
  3. अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है। छंद मुक्त की रचना है।
  4. वीर रस विद्यमान है। देश भक्ति की भावना जागृत की गई है।

PSEB 11th Class Hindi Solutions Chapter 7 वह तोड़ती पत्थर, जागो फिर एक बार

वह तोड़ती पत्थर Summary

जीवन परिचय

आधुनिक हिन्दी काव्य-विकास की चर्चा में ‘निराला’ को महाप्राण, काव्य-पुरुष, महाकवि इत्यादि विशेषणों से सम्बोधित किया जाता है। इनका जन्म सन् 1896 में बंगाल प्रान्त के मेदिनीपुर जिले में महिषादल नामक स्थान पर हुआ था। इसी स्थान पर इन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने अनेक भाषाओं का अध्ययन भी किया। वे स्वामी रामकृष्ण परमहंस एवं विवेकानन्द की विचारधारा से विशेष प्रभावित थे। उन्मुक्तता अक्खड़ता के साथ निर्बल, असहाय एवं दीन दुःखियों की सहायता इनके व्यक्तित्व की विलक्षणता है। सन् 1961 में इनका निधन हो गया था।
निराला जी की काव्य-चेतना को अनेक रूपों में देखा जा सकता है। इनकी रचनाओं को काव्य-विकास की दृष्टि से क्रमशः तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम चरण 1921-36, द्वितीय चरण 1937-46, तृतीय चरण 1950-61। परिमल, अनामिका, गीतिका, अपरा, नए पत्ते, तुलसीदास इत्यादि इनकी उल्लेखनीय काव्य रचनाएँ हैं। निराला ही एक ऐसे कवि हैं जिन्होंने कठोर एवं कोमल भावों को आत्मसात् कर काव्य में रुपायित किया है। इनकी कविताओं में छायावादी कोमलता, सुन्दरता एवं कल्पना की बहुलता है। रहस्यवादी दार्शनिकता के साथ प्रगतिवादी आक्रोश तथा अवसाद भी है।

वह तोड़ती पत्थर का सार

‘तोड़ती पत्थर’ कविता के कवि ‘सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला जी’ हैं’। इस कविता के माध्यम से कवि ने मजदूर वर्ग को आर्थिक विषमता का वर्णन किया है। एक मज़दूर महिला भीष्ण गर्मी में सड़क किनारे पत्थर तोड़ रही है। उसके कपड़े भी फटे हुए हैं, जिस सड़क पर बैठी वह पत्थर तोड़ रही है, वहाँ उसके सामने बहुत बड़ा महल है, यह कैसी विडंबना है ? बड़े-बड़े महल खड़े करने वाले हाथ अपनी आजीविका के लिए भीषण गर्मी में पत्थर तोड़ रहे हैं। यह आर्थिक विषमता के कारण है। शोषित वर्ग को जीवन के न्यूनतम साधन जुटाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है।’

जागो फिर एक बार Summary

जागो फिर एक बार कविता का सार

‘जागो फिर एक बार’ कविता के कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी हैं। कवि ने कविता में गुरु गोबिन्द सिंह की वीरता का उदाहरण देकर मनुष्य की सोई हुई पौरुष शक्ति को जागृत करने का प्रयास किया है। गुरु गोबिन्द सिंह जी अपने शत्रुओं के लिए अकेले ही सवा लाख के बराबर थे। कवि ऐसी ही शक्ति आज के युवक में जागृत करना चाहता है जिससे वह आततायियों से लड़ सके। अपने देश की रक्षा कर सके। युवकों को गुरु गोबिन्द सिंह की तरह सभी प्रकार क्रियाओं में निपुण होना चाहिए। उनमें संयम का समावेश होना चाहिए। हममें शेरनी की तरह हिम्मत होनी चाहिए। जब हमारे देश की प्रभुसत्ता पर खतरा हो तो हम उसकी रक्षा के लिए डटकर सामना करना चाहिए। हमारे पूर्वजों का यश चारों दिशाओं में फैला हुआ है। हमें सदैव याद रखना है कि हम किन लोगों की सन्तान हैं और पूरे संसार को अपनी शक्ति का परिचय देना है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 11 कराहती दहाड़

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 11 कराहती दहाड़ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 11 कराहती दहाड़

Hindi Guide for Class 6 कराहती दहाड़ Textbook Questions and Answers

भाषा-बोध

1. शब्दार्थ नोट : पाठ के आरम्भ में शब्दार्थ दिए गए हैं।

वन- मानुष = एक तरह का बंदर
पिंजरानुमा = पिंजरे के आकर का
प्रजाति = पशु पक्षियों आदि का वह समूह, जिसमें सभी सदस्यों के नाक, कान, कपाल, केश आदि के आकार- प्रकार, रूपरंग आदि में समानता हो।
आश्रय- स्थल = शरण/ ठिकाने का स्थान
आदमखोर = नर मांस भक्षी
सुरक्षा कमी = सुरक्षा करने वाली कर्मचारी
खूंखार = जालिम, खुनी, डरावना

2. मुहावरों के अर्थ दे दिए हैं। अर्थ समझते हुए वाक्य बनाओ।

1. जख्म कुरेदना = बीते हुए कष्ट की याद दिलाना = …………………………..
2. नामोनिशान मिटाना = कुछ भी निशान शेष न रहना = ……………………………..
3. चल बसना = मर जाना = ……………………………
4. प्राणों के लाले पड़ना = जान खतरे में पड़ना = …………………………….
5. मगरमच्छ के आंसू बहाना = झूठा रोना = …………………………
उत्तर:
1. जख्म कुरेदना = बीते हुए कष्ट की याद दिलाना – तुम पुरानी बातों को छेड़कर हमारे जख्म मत कुरेदो।
2.  नामोनिशान मिटाना = कुछ भी निशान शेष न रहना – कुछ वन्य जीवों का तो नामोनिशान तक मिट गया है।
3. चल बसना = मर जाना – लम्बी बीमारी के पश्चात् कल रामू के पिता जी चल बसे।
4. प्राणों के लाले पड़ना = जान खतरे में पड़ना-शेर ने कहा कि हमें तो अपने प्राणों के लाले पड़े हुए हैं। मनुष्यों के डर से हम खुलकर घूम – फिर भी नहीं सकते।
5. मगरमच्छ के आंसू बहाना = झूठा रोना – सेठ की हत्या कर नौकर पुलिस से बचने के लिए मगरमच्छ के आँसू बहाने लगा।

3. लिंग परिवर्तित करो

1. बिल्ली = …………,.
2. देवी = …………..
3. युवक = …………….
4. ब्राह्मण = ……………….
5. बाघ = ………………….
6. माली = ……………
उत्तर:
1. बिल्ली = बिलाव
2.  ब्राह्मण = ब्राह्मणी
3. देवी – देव
4. बाघ = बाघिन
5. युवक = युवती
6. माली = मालिन

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 11 कराहती दहाड़

4. वचन बदलो

1. बिल्ली = ………………….
2. कहानी = ………………
3. हड्डी = ……………….
4. देवी = …………………
5. धारी = ………………..
6. नदी = ………………….
उत्तर:
एकवचन बहुवचन
1. बिल्ली = बिल्लियाँ
2. कहानी = कहानियाँ
3. हड्डी = हड्डियाँ
4. देवी = देवियाँ
5. धारी = धारियाँ
6. नदी = नदियाँ

5. पर्यायवाची शब्द लिखो

1. नदी = ………………….
2. धरा = ………………….
3. वन = ………………….
4. प्राणी = …………………..
5. मानव = ……………………
उत्तर:
1. नदी = सरिता, तटिनी
2. प्राणी = जीव, चेतन
3. वन = कानन, विपिन
4. पुष्प = फूल, कुसुम
5. धरा = धरती, भूमि
6. मानव = मनुष्य, आदमी

6. कोष्ठक में दिए शब्द का सही रूप प्रयोग कर वाक्य बनाओ

1. आज मानव कितना ………………. बन गया है। (स्वार्थ)
2. मानव …………….. सम्पदा के विनाश पर तुला है। (प्रकृति)
3. बाघ हमारा ……………….. प्राणी है। (राष्ट्र)
4. साँप ……………….. होता है (विष)
5. जादूगर का खेल देखकर बच्चे ……… हो रहे थे। (आनन्द)
उत्तर:
1. स्वार्थी
2. प्राकृतिक
3. राष्ट्रीय
4. विषैला
5. आनन्दित

विचार-बोध

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखें

प्रश्न 1.
बाघ किस प्रजाति का प्राणी है ?
उत्तर:
बाघ बिल्ली प्रजाति का प्राणी है।

प्रश्न 2.
पेड़ों पर कौन-से जानवर उछलते-कूदते हैं ?
उत्तर:
पेड़ों पर बन्दर उछलते-कूदते हैं।

प्रश्न 3.
भारत का राष्ट्रीय प्राणी कौन-सा है ?
उत्तर:
भारत का राष्ट्रीण प्राणी बाघ है।

प्रश्न 4.
वन्य जीवों का वास्तविक आवास कहाँ हैं?
उत्तर:
वन्य जीवों का वास्तविक आवास वन हैं।

प्रश्न 5.
बाघ का प्रिय आहार क्या है ?
उत्तर:
बाघ का प्रिय आहार मांस है।

प्रश्न 6.
बाघ कितने वर्ष में युवा हो जाता है ?
उत्तर:
बाघ 4 वर्ष की आयु में युवा हो जाता है।

प्रश्न 7.
एशिया में लगभग कितने बाघ पाए जाते हैं ? और कहाँ-कहाँ ?
उत्तर:
एशिया में लगभग 2100 बाघ पाए जाते हैं। ये बाघ भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में पाए जाते हैं।

प्रश्न 8.
बाघ आदमखोर कब बन जाता है ?
उत्तर:
अपनी रक्षा करते हुए, बीमारी के कारण या बुढ़ापे में आकर बाघ आदमखोर बन जाता है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 11 कराहती दहाड़

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखें

प्रश्न 1.
बाघ की प्रमुख विशेषताएं लिखो।
उत्तर:
बाघ की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं

  1. बाघ बिल्ली की प्रजाति का एक जीव है।
  2. इसकी चमड़ी पीली और संतरी रंग की होती है जिस पर काली धारियाँ पड़ी होती हैं।
  3. यह बहुत फुर्तीला होता है।
  4. यह जंगल का राजा कहलाता है।
  5. इसका शरीर 11 फुट तक लम्बा होता है और भार 300 किलो तक का होता है।
  6. यह अकेले रहना पसन्द करता है।
  7. मांस इसका प्रिय खाद्य है।

प्रश्न 2.
बचपन से युवा होने तक बाघ किसके संरक्षण में रहता है और क्या करता है ?
उत्तर:
बचपन से युवा होने तक बाघ अपनी मां के संरक्षण में रहता है और शिकार के दांव-पेच सीखता है।

प्रश्न 3.
बाघ हमारे गौरव का प्रतीक है, कैसे ?
उत्तर:
बाघ हमारे गौरव का प्रतीक है। इसे हमारे देश का राष्ट्रीय पशु होने का गौरव प्राप्त है।

प्रश्न 4.
बाघ को बचाने के लिए भारत सरकार ने क्या कदम उठाए हैं ?
उत्तर:
भारत क्या संपूर्ण विश्व में बाघों का अस्तित्व खतरे में है। इनकी संख्या दिनप्रतिदिन कम होती जा रही है। शिकारी अपने स्वार्थ के लिए इनका शिकार कर रहे हैं। भारत सरकार ने इसके अस्तित्व को बचाने के लिए अनेक उपाय आरम्भ किये हैं। बाघों का शिकार निषेध है। इनके लिए अभ्यारण्य बनाए गए हैं तथा टाइगर परियोजना भी चल रही है। इस प्रकार से बाघों को बचाया जा रहा है।

प्रश्न 5.
मानव बाघों का शिकार क्यों करता है ?
उत्तर:
मानव अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए बाघों का शिकार करता है। वह शेर का । शिकार करके उसकी खाल, हड्डियों और नाखून आदि को अधिक दामों में बेचकर पैसा . कमाता है। इसीलिए वह उनका शिकार करता है।

आत्म-बोध

1. चिड़ियाघर की सैर पर जाओ और अपने प्रिय जानवर के बारे में जानकारी एकत्र करो।
2. वन्य-जीवों के चित्रों का संग्रह करो।
3. लुप्त हो रहे प्राणियों की सूची बनाओ। उत्तर-विद्यार्थी इनके लिए स्वयं प्रयास करें।

रचनात्मक-अभिव्यक्ति

प्रश्न 1.
आपने चिड़ियाघर की सैर की है वहाँ आपने जो-जो देखा, अपना अनुभव दस पंक्तियों में लिखो।
उत्तर:
पिछले वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में हमने जयपुर के चिड़ियाघर की सैर की। हमने वहाँ पर कई प्रकार के जीवों को देखा। जंगल का राजा बाघ को पिंजरे में आराम करते देखा। सफ़ेद मोर हमारे लिए विशेष उत्साह का कारण था। वह पंख फैलाकर नाच रहा था। राष्ट्रीय पंक्षी मोर भी एक अन्य पिंजरे में मस्त घूम रहा था। एक पिंजरे में गोरिल्ला को देखा। पानी के किनारे मगरमच्छ को आराम से सुस्ताते हुए देखा। पिंजरे में भालू भी गुर्राता हुआ मिला। सफ़ेद भालू भी आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। रंगबिरंगा तोता देखकर हम मोहित हो उठे।

बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1.
बच्चे क्या देखने गए थे ?
(क) चिड़िया
(ख) चिड़ियाघर
(ग) पिंजरे
(घ) शेर
उत्तर:
(ख) चिड़ियाघर

प्रश्न 2.
बाघ किस प्रजाति का प्राणी है ?
(क) बिल्ली
(ख) कुत्ता
(ग) शेर
(घ) बाघ
उत्तर:
(क) बिल्ली

प्रश्न 3.
भारत का राष्ट्रीय पशु कौन-सा है ?
(क) शेर
(ख) बाघ
(ग) चीता
(घ) हाथी
उत्तर:
(ख) बाघ

प्रश्न 4.
बड़ा होने पर बाघ का वज़न लगभग कितने किलो हो जाता है ?
(क) 350
(ख) 375
(ग) 300
(घ) 450
उत्तर:
(ग) 300

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प्रश्न 5.
बाघ कितने वर्ष में युवा हो जाता है ?
(क) 4
(ख) 5
(ग) 6
(घ) 7
उत्तर:
(क) 4

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से ‘प्राणी’ का पर्याय है :
(क) जीव
(ख) जगत
(ग) भगत
(घ) जानवर
उत्तर:
(क) जीव

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से ‘मानव’ का पर्याय है :
(क) सुर
(ख) देव
(ग) दानव
(घ) मनुष्य
उत्तर:
(घ) मनुष्य

कराहती दहाड़ Summary

कराहती दहाड़ पाठ का सार

बच्चे चिड़ियाघर देखने गए थे। वे पेड़ों पर उछलते-कूदते प्राणियों को देख कर खुश थे। अचानक बाघ की दहाड़ सुन कर वे सहम गए। एक पिंजरे जैसे आवास में बहुत बड़ा बाघ बंद था। कुछ साहसी बच्चे उसके निकट चले गए। बाघ ने उनसे कहा कि डरो मत। धरती का सब भयानक जानवर वह नहीं था। धरती का सबसे भयानक जानवर तो मनुष्य है, वह तो जंगल में अपनी माँ के साथ रहता था। वह बहुत ही छोटा था। उसका वजन केवल एक किलो था और आँखें बंद। पर अब तो वह पिंजरे में बंद है। बड़ा होने पर बाघ का शरीर 11 फुट तक लंबा और वजन लगभग 300 किलो हो जाता है। चार वर्ष के वे युवा हो जाते हैं। जन्म के बाद छः से आठ सप्ताह तक वे अपनी माँ का दूध पीते हैं और बाद में मांस खाने लगते हैं। बाघ प्रायः अकेले रहना पसंद करते हैं। एक विशेष गंध से वे अपनी सीमा निश्चित कर लेते हैं। जंगल में वे तरह-तरह के पशुओं का शिकार करते हैं पर चिड़ियाघर में तो उन्हें जीने के लिए जैसा भी हो वैसा मांस खाना ही पड़ता है। वे मनुष्य को आत्मरक्षा, बीमारी, कमज़ोरी की अवस्था में ही मारते है। मनुष्य तो अपने स्वार्थ के कारण उन्हें मारता है। एशिया में तो अब केवल 2100 बाघ शेष बचे हैं जिन में से भारत में इनकी संख्या 1400 है। अब इनकी सुरक्षा के लिए टाइगर-परियोजना चलाई गई है।

कठिन शब्दों के अर्थ:

वन मानुष = जंगलों में रहने वाला मनुष्य प्रजाति का बन्दर। चिड़ियाघर = वह स्थान जहां अनेक प्रकार के वन्य पशु-पक्षी रहते हैं। करतब = काम। आनन्दित = खुश। दहाड़ = गर्जना। सहम = डर। विशाल = बड़ा। पिंजरानुमा = पिंजरे । के आकार का। आवास = घर। ओर = तरफ। खूखार = भयानक, डरावना। कुरेदना = खोदना, छेड़ना। आश्रय-स्थल = रहने का स्थान। आदमखोर = आदमियों (मनुष्यों) को खाने वाले।आत्मरक्षा = अपनी रक्षा, बचाव। बर्ताव = व्यवहार। शावक = किसी भी पशु का छोटा बच्चा। सृष्टि = संसार। आश्चर्यचकित = हैरान।