PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 12 चन्द्रशेखर आज़ाद

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Chapter 12 चन्द्रशेखर आज़ाद Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Hindi Chapter 12 चन्द्रशेखर आज़ाद

Hindi Guide for Class 7 PSEB चन्द्रशेखर आज़ाद Textbook Questions and Answers

(क) भाषा-बोध

1. शब्दार्थ:

खून खौलना = क्रोधित होना
कर्मी = कर्मचारी
संगठनकर्ता – संगठन करने वाला
महासंग्राम = बड़ा युद्ध
अभियोग = मुकद्दमा
नफ़रत – घृणा
विश्वासघात = धोखा
अध्ययन = पढ़ाई
स्वाधीनता = आज़ादी
दहशत = भय, डर
यकीन = विश्वास
प्रण = प्रतिज्ञा
सदैव = सदा
नमन = नमस्कार, प्रणाम
अधीक्षक = सुपरिंटेंडेंट

2. इन शब्दों में से उपसर्ग छाँटकर लिखें:

अनाथ = _____________
अत्याचार = _____________
अभियोग = _____________
निर्ममता = _____________
प्रहार = _____________
निराशा = _____________
परिवार = _____________
उत्तर:
अ, अति, अभि, निर्, प्र, निर्, परि।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 12 चन्द्रशेखर आज़ाद

3. इन मुहावरों को इस तरह वाक्यों में प्रयोग करें ताकि उनके अर्थ स्पष्ट हो जाएं:

खून खौल उठना ______________ ___________________
जान हथेली पर रखना____________ __________________
थर-थर काँपना ____________ __________________
ठान लेना ______________ ____________________
सिरदर्द बनना _______________ ___________________
वीरगति को प्राप्त होना ______________ ___________________
उत्तर:
किसी पर अत्याचार होते देखकर आज़ाद का खून खौल उठता था।
क्रांतिकारी जान हथेली पर रखकर आजादी की लड़ाई लड़ते थे।
श्रीनगर में इतनी ठंड पड़ रही थी कि लोग थर-थर काँपने लगे।
अनीश ने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने की ठान ली है।
पड़ोसन की रोज़-रोज़ की किचकिच सुनीता का सिरदर्द बन गई है।
शत्रु पक्ष से युद्ध करते हुए मेजर जसवंत सिंह वीर गति को प्राप्त हुए

4. निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय अलग करके लिखें:

गुलामी = ___________
आज़ादी = ___________
क्रांतिकारी = ___________
स्वतंत्रता = ___________
भारतीय = ___________
धोखेबाज = ___________
देखकर = ___________
खोया = ___________
उत्तर:
ई, ई, कारी, ता, ईय, बाज, कर, या।।

5. निर्देशानुसार शब्द भरकर वाक्य पूरे करें :

  1. चन्द्रशेखर आज़ाद ………….. (विशेषण) और ……….. (विशेषण) थे।
  2. …………. (व्यक्तिवाचक संज्ञा) 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेज़ों की (भाववाचक संज्ञा) से आज़ाद हुआ।
  3. ………… (सर्वनाम) अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की ………………. (जातिवाचक संज्ञा) से प्राप्त की।
  4. मजिस्ट्रेट बहुत ही …………. (विशेषण) स्वभाव वाला था।
  5. चन्द्रशेखर अपने ……………. (अधिकरण कारक) चंदन का ……….. (कर्म कारक) लगाते थे।

उत्तर:

  1. चन्द्रशेखर आज़ाद वीर और साहसी थे।
  2. भारत 15 अगस्त, सन् 1947 को अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद हुआ।
  3. उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला से प्राप्त की।
  4. मजिस्ट्रेट बहुत ही कठोर स्वभाव वाला था।
  5. चन्द्रशेखर अपने माथे पर चंदन का टीका लगाते थे।

6. विपरीत शब्द लिखें:

स्वतंत्रता = ……………………
नफरत = …………………
कठोर = …………………
निडरता = …………………..
सज़ा = …………………
बचाना = …………………
जीवित = ………………..
सपूत = …………………
विश्वासघात = …………………..
उत्तर:
शब्द विपरीत शब्द
स्वतंत्रता = परतंत्रता
नफरत = प्यार
कठोर = कोमल
निडरता = कायरता
सज़ा = इनाम/पुरस्कार
बचाना = मारना
जीवित = मृत
सपूत = कपूत
विश्वासघात = विश्वासपात्र

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 12 चन्द्रशेखर आज़ाद

(ख) विचार बोध

इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
चन्द्रशेखर आज़ाद का जन्म कहाँ हुआ ?
उत्तर:
चन्द्रशेखर आजाद का जन्म मध्यप्रदेश के जिला झाबुआ के गाँव भाँवरा में हुआ था।

प्रश्न 2.
चन्द्रशेखर के माता-पिता का क्या नाम था ?
उत्तर:
चन्द्रशेखर की माता का नाम जगरानी देवी तथा पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी था।

प्रश्न 3.
मजिस्ट्रेट द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने अपना और अपने पिता का नाम तथा घर का पता क्या बताया ?
उत्तर:
मजिस्ट्रेट द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने अपना नाम आज़ाद, पिता का नाम स्वतंत्र तथा घर का पता जेलखाना बताया था।

प्रश्न 4.
मजिस्ट्रेट ने चन्द्रशेखर को क्या दंड दिया ?
उत्तर:
मजिस्ट्रेट ने चन्द्रशेखर को पन्द्रह बेंतें लगाने का दंड दिया।

प्रश्न 5.
रामप्रसाद बिस्मिल को जब फाँसी हुई तो उनके मुँह से क्या निकला ?
उत्तर:
रामप्रसाद बिस्मिल को जब फाँसी हुई तो उन्होंने कहा
‘शहीदों की चित्ताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।

प्रश्न 6.
सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केन्द्रीय विधानसभा में बम कब फेंका ?
उत्तर:
सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केन्द्रीय विधान सभा में बम 8 अप्रैल, 1929 ई० को फेंका था।

प्रश्न 7.
चन्द्रशेखर आजाद कब शहीद हुए ?
उत्तर:
चन्द्रशेखर आज़ाद 27 जनवरी, सन् 1931 ई० को शहीद हुए थे।

2. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

प्रश्न 1.
चन्द्रशेखर ने पुलिस कर्मी के माथे पर पत्थर क्यों मारा था?
उत्तर:
चन्द्रशेखर ने एक दिन देखा कि अंग्रेज़ी शासन के पुलिस वाले स्वतंत्रता के लिए आन्दोलन करने वालों पर बेरहमी से डंडे बरसा रहे हैं और उन्हें घसीट रहे हैं। उन्हें पुलिस का आंदोलनकारियों पर यह अत्याचार बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी के माथे पर पत्थर मार कर उसे लहूलुहान कर दिया था।

प्रश्न 2.
चन्द्रशेखर को चन्द्रशेखर आज़ाद क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
पुलिस अधिकारी को पत्थर मारकर लहूलुहान करने के अपराध में चन्द्रशेखर को पकड़ कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था। जब उसने इनसे इनका नाम आदि पूछा तो इन्होंने उत्तर दिया कि मेरा नाम आज़ाद, पिता का नाम स्वतंत्र तथा घर का पता जेलखाना है। इस से मजिस्ट्रेट ने इन्हें पन्द्रह बेंतें मारने की सजा सुनाई, जिसे इन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ तथा ‘भारत माता की जय’ कहते हुए स्वीकार कर लिया। जब ये जेल से बाहर आए तो लोगों ने इन्हें चन्द्रशेखर आज़ाद कहना शुरू कर दिया।

प्रश्न 3.
चन्द्रशेखर एक कुशल संगठनकर्ता थे। कैसे ?
उत्तर:
चन्द्रशेखर आज़ाद एक कुशल संगठनकर्ता भी थे। इसके लिए उन्होंने अंग्रेज़ी अत्याचारों के विरुद्ध गुप्त तरीके से परचे छपवाकर मंदिरों, मस्जिदों, स्कूलों, कार्यालयों आदि में बाँटे, जिससे प्रभावित होकर लोग इनसे जुड़ने लगे और इनका एक बहुत बड़ा क्रांतिकारियों का दल तैयार हो गया, जो जान हथेली पर रख कर स्वतंत्रता-संग्राम में जूझने के लिए तैयार रहते थे।

प्रश्न 4.
भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त ने विधानसभा में बम क्यों फेंका?
उत्तर:
अंग्रेज़ सरकार की गलत नीतियों के विरोध में सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 ई० को केन्द्रीय विधानसभा में बम फेंका और ‘इन्कलाब जिन्दाबाद’ का नारा लगाते हुए अपनी गिरफ्तारी भी दी जिस कारण सरकार ने भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी थी तथा बटुकेश्वर दत्त को काले पानी की सज़ा।

प्रश्न 5.
चन्द्रशेखर के जीवन से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर:
चन्द्रशेखर आज़ाद के जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने देश की रक्षा के लिए बलिदान देने के लिए सदा तैयार रहना चाहिए। हमें किसी भी स्थिति से घबराना नहीं चाहिए तथा वीरता और साहस के साथ हर संकट का सामना करना चाहिए। मित्रों की पहचान सोच-समझ कर करनी चाहिए तथा विश्वासघाती मित्रों से सावधान रहना चाहिए।

(ग) रचना बोध

चन्द्रशेखर आजाद की जीवनी पुस्तकालय से लेकर पढ़ें।
मातृभूमि के लिए शहीद होने वाले अन्य देश भक्तों के बारे में पता करें ।
नोट:
अपने-अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं कीजिए।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 12 चन्द्रशेखर आज़ाद

PSEB 7th Class Hindi Guide चन्द्रशेखर आज़ाद Important Questions and Answers

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
भारत कब आज़ाद हुआ था ?
(क) 15 अगस्त, 1947
(ख) 26 जनवरी, 1950
(ग) 14 अगस्त, 1950
(घ) 2 अक्तूबर, 1947
उत्तर:
(क) 15 अगस्त, 1947

प्रश्न 2.
आजाद का पूरा नाम क्या था?
(क) राम सिंह आज़ाद
(ख) चंद्रशेखर आज़ाद
(ग) महात्मा आज़ाद
(घ) सावारकर
उत्तर:
(ख) चंद्रशेखर आजाद

प्रश्न 3.
चंद्रशेखर आजाद का जन्म मध्यप्रदेश के किस जिले में हुआ था ?
(क) बबुआ
(ख) तेबुआ
(ग) झाबुआ
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) झाबुआ

प्रश्न 4.
महिर्ष वेदव्यास ने ……….को सबसे बड़ा पुण्य माना है।
(क) परपीड़ा
(ख) स्वार्थ
(ग) झूठ
(घ) परोपकार
उत्तर:
(घ) परोपकार

प्रश्न 5.
………. ने असुरों का नाश करने के लिए अपना शरीर दान दे दिया था।
(क) महर्षि दधीचि
(ख) कर्ण
(ग) अर्जुन
(घ) रावण
उत्तर:
(क) महिर्ष दधीचि

प्रश्न 6.
दूसरों को ………….सबसे बड़ा पाप है।
(क) सुख देना
(ख) कष्ट देना
(ग) किताब
(घ) कलम
उत्तर:
(ख) कष्ट देना

प्रश्न 7.
परोपकारी व्यक्ति सदा ………… से सबका भला करता है।
(क) उदारता
(ख) अज्ञानता
(ग) स्वार्थ
(घ) कलम
उत्तर:
(क) उदारता

3. दिए गए शब्द का सही अर्थ से मिलान कीजिए

प्रश्न 1.
परोपकार:
दया
ईष्या
संघर्ष
उत्तर:
दया।

प्रश्न 2.
बेंत:
डण्डा
बातें
बकवास
उत्तर:
डण्डा

प्रश्न 3.
चाह:
चमन
इच्छा
चाचा
उत्तर:
इच्छा।

प्रश्न 4.
प्रण:
प्रतिज्ञा
प्राण
प्रणिता
उत्तर:
प्रतिज्ञा।

चन्द्रशेरवर आज़ाद Summary

चन्द्रशेरवर आज़ाद पाठ का सार

‘चन्द्रशेखर आज़ाद’ पाठ में लेखक ने भारत माता के वीर सपूत क्रांतिकारी स्वतन्त्रता सेनानी चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की कुछ घटनाएँ प्रस्तुत करते हुए, उनके चरित्र से देशभक्ति की प्रेरणा लेने का संदेश दिया है। भारत 15 अगस्त, सन् 1947 ई० को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुआ था, जिसे पाने के लिए अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दिया था। इनमें चन्द्रशेखर आजाद का नाम प्रमुख है। इनका जन्म मध्यप्रदेश के झबुआ जिले के भाँवरा गाँव में हुआ था। इनके पिता पंडित सीता राम तिवारी तथा माता का नाम जगरानी देवी था। इन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में प्राप्त की तथा संस्कृत का अध्ययन बनारस में किया। चौदह वर्ष की आयु में ही अंग्रेज़ों के अत्याचारों के समाचार पढ़ कर इनका खून खौल उठता था। वे देश प्रेम की भावना से भरकर देश को आज़ाद कराने के लिए तड़पने लगे।

एक दिन अंग्रेजों के पुलिसकर्मियों द्वारा स्वतंत्रता के लिए आन्दोलन करने वालों को बेरहमी से पीटा और घसीटा देखकर इन्होंने एक पुलिस अधिकारी के माथे पर पत्थर दे मारा। वह लहूलुहान हो गया। ये वहाँ से भाग गए परन्तु एक पुलिस कर्मी ने इनके मस्तक पर चंदन का टीका लगा होने से पहचान कर इनके घर से इन्हें पकड़वा दिया। इन पर मुकद्दमा चला तो इन्होंने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्र तथा घर का पता जेलखाना बताया। इस पर क्रोधित होकर मैजिस्ट्रेट ने इन्हें पन्द्रह बेंतें मारने का दंड दिया, जिसे इन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ तथा ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए स्वीकार किया।

इन्होंने अंग्रेज़ी सरकार के विरुद्ध गुप्त रूप से परचे बांटे। इनका एक क्रांतिकारी दल बन गया था, जिसने 9 अगस्त, सन् 1945 ई० को लखनऊ के नज़दीक काकोरी में ट्रेन रोक कर एक सरकारी खज़ाना लूट लिया था। इन के साथी अशफाकउल्ला, राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को इस काम में शामिल होने के कारण फांसी दे दी गई थी। ये झांसी के पास ढिकनपुरा गाँव के जंगलों में ब्रह्मचारी के वेश में हरिशंकर नाम से रहने लगे। देश को स्वतंत्र कराने की चाह लिए वे वीर सावरकर और सरदार भगतसिंह से भी मिले थे। जब साइमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपतराय शहीद हुए तो इनका बदला लेने के लिए उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु तथा जयगोपाल के साथ पुलिस अधीक्षक स्कॉट को मारने की योजना बनाई परन्तु मारा सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स गया। इसके पुलिस ने क्रांतिकारों की धरपकड़ शुरू कर दी। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, सन् 1929 ई० को केन्द्रीय विधानसभा में बम फेंका और ‘इन्कलाब जिंदाबाद’ कहते हुए अपनी गिरफ्तारी दी। बाद में भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव पर आरोप लगा पुस्तकीय भाग कर फाँसी दे दी गई तथा बटुकेश्वर दत्त को कालेपानी की सज़ा, चन्द्रशेखर आजाद अभी पकड़े नहीं गए थे।

पुलिस आज़ाद को पकड़ने के लिए उनके एक साथी तिवारी को लालच देकर अपने साथ मिला लेती है और तिवारी आज़ाद के साथ धोखा करते हुए उन्हें इलाहाबाद के अलफ्रेड फार्म ले जाता है, जहां पुलिस 27 जनवरी, सन् 1931 को आज़ाद को पकड़ना चाहती है परन्तु वे तिवारी को वहाँ से भगा कर स्वयं पुलिस का मुकाबला करते हुए शहीद हो जाते हैं। वे अपने इस प्रण को पूरा करते हैं कि उनके जीवित होते हुए उन्हें कोई छू भी नहीं सकता। देश सदा उन को स्मरण करते हुए नमस्कार करता है।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

Punjab State Board PSEB 12th Class Hindi Book Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Hindi Chapter 15 सच्ची वीरता

Hindi Guide for Class 12 PSEB सच्ची वीरता Textbook Questions and Answers

(क) लगभग 60 शब्दों में उत्तर दो:

प्रश्न 1.
सच्चे वीर पुरुष का स्वभाव कैसा होता है ?
उत्तर:
सच्चा वीर पुरुष धीर, गम्भीर और आज़ाद होता है। उसके मन की गम्भीरता और शान्ति समुद्र की तरह विशाल और आकाश की तरह स्थिर और अचल होती है। वे कभी चंचल नहीं होते। वे सत्वगुण के क्षीरसागर में ऐसे डूबे रहते हैं जिसकी दुनिया को खबर ही नहीं होती।

प्रश्न 2.
‘वीर पुरुष का दिल सबका दिल हो जाता है’ लेखक पूर्ण सिंह की इस उक्ति का क्या भाव है ?
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्ति का अर्थ यह है कि वीर पुरुष भले ही सामने न आए, किन्तु अपने प्रेम से लोगों के दिलों पर राज करता है, जिससे वीर पुरुष का दिल सबका दिल हो जाता है। उसका मन सबका मन हो जाता है अर्थात् जैसे वह सोचता है या करता है सब वैसा ही सोचते या करते हैं।

(ख) लगभग 150 शब्दों में उत्तर दो:

प्रश्न 3.
‘सच्ची वीरता’ निबन्ध का सार अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर:
देखिए पाठ के आरम्भ में दिया गया सार।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

प्रश्न 4.
जापान के ओशियो की वीरता का उदाहरण प्रस्तुत निबन्ध के आधार पर लिखो।
उत्तर:
ओशियो जापान के एक छोटे से गाँव की एक झोंपड़ी में रहता था। वह बड़ा अनुभवी और ज्ञानी था। वह कडे स्वभाव का स्थिर, धीर और अपने ही विचारों में डूबा रहने वाला पुरुष था। लोग उसे मामूली आदमी समझते थे। एक बार संयोग से दो तीन साल फसलें न होने के कारण देश में अकाल पड़ गया। लोग लाचार होकर उसके पास मदद माँगने गए। वह उनकी मदद करने को तैयार हो गया। पहले वह अमीर और भद्र पुरुषों के पास गया और उससे मदद माँगी। उन्होंने मदद का वादा किया पर निभाया नहीं। ओशो ने अपने कपड़े और किताबें बेच कर प्राप्त धन को किसानों में बाँट दिया। पर उससे भी कुछ न हुआ। इस पर ओशियो ने लोगों को विद्रोह करने के लिए तैयार किया और बादशाह के महल की ओर कूच किया।

सिपाहियों ने गोली चलानी चाही लेकिन बादशाह ने ऐसा करने से रोक दिया। ओशियो किले में दाखिल हुआ। उसे सरदार पकड़ कर बादशाह के पास ले गया। ओशियो ने बादशाह से कहा कि वह अन्न से भरे राज भण्डार ग़रीबों की मदद के लिए खोल दे। उसकी आवाज़ में दैवी शक्ति थी। बादशाह ने अन्न भण्डार खोलने की आज्ञा दी और सारा अन्न ग़रीबों में बाँटने का आदेश दिया। ओशियो ने जिस काम के लिए कमर बाँधी थी उसे पूरा कर दिया था।

प्रश्न 5.
‘सच्चे वीर पुरुष मुसीबत को मखौल समझते हैं।’ ईसा मसीह, मीराबाई और गुरु नानक देव जी के जीवन से उदाहरण देते हुए प्रस्तुत निबन्ध के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर:
संसार जिस बात को मुसीबत समझता है सच्चे वीर उसे मखौल समझते हैं। अमर ईसा को जब सूली पर चढ़ाया गया, उससे भारी सलीब उठवाई गई जिस कारण वह कभी गिरता, ज़ख्मी भी होता और कभी बेहोश हो जाता है। कोई पत्थर मारता है, कोई ढेला मारता है, कोई थूकता है, मगर उस मर्द का दिल नहीं हिलता, वह उस मुसीबत को मज़ाक समझता है। इसी प्रकार राणा जी ने मीराबाई को ज़हर के प्याले से डराना चाहा। मीरा उस ज़हर को अमृत समझ कर पी गई। उसे शेर और हाथी के सामने डाला गया, लेकिन वह डरी नहीं।

प्रेम में मस्त हाथी और शेर ने उस देवी के चरणों की धूल को माथे से लगाया और अपनी राह ली। वीर पुरुष आगे नहीं पीछे जाते हैं, भीतर ध्यान करते हैं, मारते नहीं मरते हैं। इसी प्रकार बाबर के सिपाहियों ने जब लोगों के साथ गुरु नानक देव जी को बेगार में पकड़ लिया और उनके सिर पर बोझ रखकर कहा कि चलो। आप चल पड़े। डरे नहीं, घबराए नहीं, बल्कि मर्दाना से कहा कि सारंगी बजाओं हम गाते हैं। उस भीड़ में सारंगी बज रही थी और गुरु जी गा रहे थे। वे उस मुसीबत को मुसीबत न समझ कर मज़ाक समझते हैं।

(ग) सप्रसंग व्याख्या करें:

प्रश्न 6.
सच है, सच्चे वीरों की नींद आसानी से नहीं खुलती। वे सत्व गुण के क्षीर समुद्र में ऐसे डूबे रहते हैं कि उनको दुनिया की खबर ही नहीं होती।
उत्तर:

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा लिखित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने कुम्भकरण की गाढ़ी नींद को वीरता का चिह्न बताया है।

व्याख्या:
लेखक कुम्भकरण की गाढ़ी नींद को वीरता का चिह्न बताते हुए कहते हैं कि यह सच है कि वीरों की नींद आसानी से नहीं खुलती क्योंकि वे सात्विक प्रवृत्तियों के दूध के सागर में ऐसे डूबे रहते हैं कि उन्हें दीन-दुनिया की खबर ही नहीं रहती अर्थात् वे अपने में ही सदा मस्त रहते हैं।

प्रश्न 7.
कायर पुरुष कहते हैं-‘आगे बढ़े चलो।’ वीर कहते हैं ‘पीछे हट चलो।’ कायर कहते हैं”उठाओ तलवार।’ वीर कहते हैं-‘सिर आगे करो।’

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा लिखित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक वीर और कायर पुरुष की तुलना करता हुआ कहता है कि कायर पुरुष दिखावे के लिए आगे बढ़ने की बात करता है।

व्याख्या:
लेखक कहते हैं कि कायर पुरुष कहते हैं कि आगे बढ़े चलो। उनका ऐसा कहना दिखावे और नाम के लिए होता है जबकि वीर कहते हैं कि पीछे हट चलो। उनका ऐसा कहना जीवन की तुच्छता या नश्वरता की ओर संकेत करता है। कायर कहते हैं कि ‘उठाओ तलवार’ अर्थात् उसका ऐसा कहना दिखावे और नाम के लिए होता है। वीर कहते हैं-‘सिर आगे करो’ उनका ऐसा कहना उनके आत्म त्याग की भावना के कारण है।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

प्रश्न 8.
मगर वाह रे प्रेम। मस्त हाथी और शेर ने देवी के चरणों की धूल को अपने मस्तक पर मला और अपना रास्ता लिया। इसके वास्ते वीर पुरुष आगे नहीं पीछे जाते हैं, भीतर ध्यान करते हैं, मारते नहीं, मरते हैं।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा लिखित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक श्रीकृष्ण भक्त मीरा बाई की प्रेम भावना का उदाहरण देते हुए सच्चे वीर की विशेषताओं पर प्रकाश डाल रहे हैं।

व्याख्या:
लेखक वीर लोगों द्वारा मुसीबत को मखौल समझने की व्याख्या करते हुए कृष्ण भक्त मीराबाई का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि मीरा को डराने के लिए राणा जी ने विष का प्याला भेजा, जिसे वह अमृत समझकर पी गई। मीरा शेर और हाथी के सामने की गई, मगर वाह रे उनका सच्चा प्रेम। मस्त हाथी और शेर ने मीरा के चरणों की धूल को अपने मस्तक पर मला और अपना रास्ता लिया अर्थात् वहाँ से चल दिए। यही कारण है कि वीर पुरुष आगे नहीं पीछे जाते हैं। अपने हृदय के भीतर ही ध्यान करते हैं। वह किसी को मारते नहीं, स्वयं मरते हैं।

प्रश्न 9.
पेड़ तो ज़मीन से रस ग्रहण करने में लगा रहता है। उसे ख्याल ही नहीं होता कि मुझ में कितने फल या फूल लगेंगे और कब लगेंगे।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा लिखित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ में से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक वीरता के कारनामों का वीर लोग अपनी दिनचर्या में शामिल न करने की बात को पेड़ का उदाहरण देकर स्पष्ट कर रहे हैं।

व्याख्या:
लेखक वीर लोगों के अन्दर ही अन्दर बढ़ने और सत्य के भाव पर स्थिर रहने की बात को एक पेड़ के उदाहरण से स्पष्ट करते हुए कहता है कि पेड़ तो धरती से रस ग्रहण करने में लगा रहता है। उसे इस बात की सोच नहीं होती कि उसमें कितने फल या फूल लगेंगे और कब खिलेंगे। उसका काम तो अपने आपको सत्य में रखना है।

PSEB 12th Class Hindi Guide सच्ची वीरता Additional Questions and Answers

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘सच्ची वीरता’ शीर्षक निबंध किसके द्वारा रचित है?
उत्तर:
सरदार पूर्ण सिंह।

प्रश्न 2. सरदार पूर्ण सिंह के जन्म और मृत्यु के वर्ष लिखिए।
उत्तर:
जन्म-सन् 1881 ई०, मृत्यु-सन् 1931 ई०।

प्रश्न 3.
सरदार पूर्ण सिंह के द्वारा रचित चार अन्य निबंधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
आचरण की सभ्यता, मज़दूरी और प्रेम, सच्ची वीरता, नयनों की गंगा।

प्रश्न 4.
सच्चे वीरों की दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
धीर, वीर, गंभीर और स्वतंत्र।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

प्रश्न 5.
सच्चे वीरों का व्यक्तित्व कैसा होता है?
उत्तर:
दिव्य।

प्रश्न 6.
शासकों/सम्राटों को सच्चा वीर क्यों नहीं मान सकते?
उत्तर:
वे शोषण से महान् बनते हैं और सदा अपने पापों से कांपते रहते हैं।

प्रश्न 7.
सच्चा वीर क्या त्यागने में एक पल भी नहीं व्यतीत करते?
उत्तर:
अपने जीवन का बलिदान।

प्रश्न 8.
सच्चे वीरों का जीवन किस भाव से सदा भरा रहता है?
उत्तर:
परोपकार का भाव।

प्रश्न 9.
महात्मा बुद्ध सच्चे वीर क्यों माने जाते हैं?
उत्तर:
उन्होंने गूढ़ तत्व और सत्य की खोज के लिए ऐश्वर्य त्याग दिया था।

प्रश्न 10.
वीर पुरुष किस का प्रतिनिधि होता है?
उत्तर:
वीर पुरुष समाज का प्रतिनिधि होता है।

प्रश्न 11.
कोई व्यक्ति वास्तव में वीर किस प्रकार बनता है?
उत्तर:
वह अपनी अंतः प्रेरणा से ही अपना निर्माण स्वयं करता है।

प्रश्न 12.
स्वभाव से वीर पुरुष कैसे होते हैं?
उत्तर:
स्वभाव से वीर पुरुष धीर-गंभीर होते हैं वे आडंबर रहित होते हैं।

प्रश्न 13.
सच्चे वीर अपने वीरत्व को कब प्रकट करते हैं?
उत्तर:
सच्चे वीर उचित समय आने पर ही अपने वीरत्व को प्रकट करते हैं।

प्रश्न 14.
सच्चा वीर बनने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
सच्चा वीर बनने के लिए हमें अपने भीतर के गुणों का विकास करना चाहिए।

वाक्य पूरे कीजिए

प्रश्न 15.
सच्चे वीर पुरुष धीर, गंभीर और………..होते हैं।
उत्तर:
आजाद।

प्रश्न 16.
वीरता एक प्रकार का…………….या….. ……..प्रेरणा है।
उत्तर:
इहलाम, दैवी।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

प्रश्न 17.
वे………के वृक्षों की तरह जीवन के अरण्य में खुदबखूद पैदा होते हैं।
उत्तर:
देवदार।

हाँ-नहीं में उत्तर दीजिए

प्रश्न 18.
वीरों का स्वभाव सदा छिपे रहने का नहीं होता।
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 19.
आकाश उनके ऊपर बादल के छाते नहीं लगाता।
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 20.
सच्चे वीरों की नींद आसानी से नहीं खुलती।
उत्तर:
हाँ।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. ‘सच्ची वीरता’ किस विद्या की रचना है ?
(क) निबंध
(ख) कहानी
(ग) उपन्यास
(घ) कविता
उत्तर:
(क) निबंध

2. अध्यापक पूर्ण सिंह के निबंधों का आधार क्या है ?
(क) मानवीय दृष्टि
(ख) आध्यात्मिक चेतना
(ग) ये दोनों
(घ) कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) ये दोनों

3. अध्यापक पूर्ण सिंह किसकी पवित्रता को अधिक महत्त्व देते थे ?
(क) मानव के आचरण
(ख) मानवता
(ग) बुद्धि कौशल
(घ) मेहनत।
उत्तर:
(क) मानव के आचरण

4. ‘सच्ची वीरता’ कैसा निबंध है ?
(क) संवेदनशील
(ख) विचारात्मक
(ग) विवेचनात्मक
(घ) संवादात्मक।
उत्तर:
(ख) विचारात्मक

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

5. लेखक के अनुसार मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है
(क) वीरता
(ख) न्याय
(ग) कर्म
(घ) सत्य।
उत्तर:
(क) वीरता

सच्ची वीरता गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. सच्चे वीर पुरुष धीर, गम्भीर और आज़ाद होते हैं। उनके मन की गम्भीरता और शान्ति समुद्र की तरह विशाल और गहरी, या आकाश की तरह स्थिर और अचल होती है। वे कभी चंचल नहीं होते।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं। प्रस्तुत निबन्ध में उन्होंने वीरता के व्यापक क्षेत्र का उल्लेख करते हुए वीरों की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डाला है। यहाँ वे सच्चे वीर के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं।

व्याख्या:
सच्चे वीर पुरुष स्वभाव से धीर, गम्भीर एवं स्वतन्त्र होते हैं। उनके मन की गम्भीरता एवं शान्ति की तुलना समुद्र की विशालता एवं गहराई से तथा आकाश की स्थिरता एवं अचलता से की जाती है। सच्चे वीर कभी चंचल नहीं होते। भाव यह है कि वीर पुरुष स्वभाव से दृढ़ होते हैं।

विशेष:

  1. सच्चे वीरों के गुणों का उल्लेख है।
  2. भाषा सरल, भावपूर्ण तथा शैली व्याख्यात्मक है।

2. सत्वगुण के समुद्र में जिनका अन्तःकरण निमग्न हो गया, वे ही महात्मा, साधु और वीर हैं। वे लोग अपने क्षुद्र जीवन को परित्याग कर ऐसा ईश्वरीय जीवन पाते हैं कि उनके लिए संसार के सब अगम्य मार्ग साफ़ हो जाते

प्रसंग:
प्रस्तुत अवतरण अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से अवतरित है। इसमें लेखक ने वीरता के व्यापक क्षेत्र का वर्णन किया है।

व्याख्या:
लेखक सच्चे वीरों की परिभाषा देते हुए कहते हैं कि सात्विक गुणों के सागर में जिनका हृदय डूब जाता है, वे ही महात्मा, साधु और वीर हैं अर्थात् सच्चे वीर स्वाभाव से सात्विक होते हैं। सच्चे वीर अपने सांसारिक तुच्छ जीवन का परित्याग कर ऐसा दिव्य अथवा अलौकिक जीवन प्राप्त करते हैं कि उनके लिए संसार के सभी अगम्य मार्ग सुगम बन जाते हैं। भाव यह है कि सच्चा वीर अपने साधनामय जीवन के द्वारा ईश्वरीय रूप प्राप्त कर लेते हैं। उनके लिए संसार के सभी कार्य सरल बन जाते हैं।

विशेष:

  1. सच्चे वीर दिव्यगणों से सम्पन्न होते हैं।
  2. भाषा तत्सम प्रधान, भावपूर्ण तथा शैली विचार प्रधान है।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

3. आकाश उनके ऊपर बादलों के छाते लगाता है। प्रकृति उनके मनोहर माथे पर राज-तिलक लगाती है। हमारे असली और सच्चे राजा वे ही साधु पुरुष हैं। हीरे और लाल से जड़े हुए, सोने और चांदी के जर्क-बर्क सिंहासन पर बैठने वाले दुनिया के राजाओं की तो, जो गरीब किसानों की कमाई हुई दौलत पर पिंडोपजीवी होते हैं, लोगों ने अपनी मूर्खता से वीर बना रखा है। ये ज़री, मखमल और जेवरों से लदे हुए मांस के पुतले तो हर दम कांपते रहते हैं। क्यों न हो, उनकी हुकूमत लोगों के दिलों पर नहीं होती। दुनिया के राजाओं के बल की दौड़ लोगों के शरीर तक है। .

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं। इस निबन्ध में लेखक ने सच्ची वीरता की विशेषताओं का वर्णन किया है।

व्याख्या:
लेखक का कथन है कि सात्विक जीवन व्यतीत करने वाले पुरुष ही सच्चे वीर होते हैं। प्रकृति भी सच्चे वीरों की पूजा करती है। आकाश उनके सिर पर बादलों के छाते तानता है। प्रकृति उनके सुन्दर मस्तक पर राज तिलक लगाती है। हमारे लिए असली एवं सच्चे राजा ऐसे ही वीर पुरुष हैं जिनका आचरण पवित्र है। जो लोग हीरे और लाल से जड़े हुए तथा सोने एवं चाँदी के निर्मित सिंहासनों पर बैठते हैं जो गरीब किसानों की मेहनत से कमाई दौलत छीनकर अपने शरीर को पुष्ट करते हैं तथा ऐश्वर्यमय जीवन व्यतीत करते हैं ऐसे शासकों को लोगों ने अपनी मूर्खता से वीर बना रखा है लेखक ने यहां ऐसे लोगों को वीरों की कोटि में नहीं रखा जो दूसरों के बल पर ऐश कर जीवन जीते हैं।

ये ज़री, मखमल एवं गहनों से लदे हुए मांस के पुतले हैं जो अपने कुकर्मों के कारण हमेशा डर से कांपते रहते हैं। ये लोग जनता के हृदयों पर शासन नहीं करते। संसार के राजाओं के बल की पहुँच लोगों के शरीर तक है। सच्चे वीरों के चरित्र में एक अद्भुत आकर्षण होता है जो दूसरों को अपने सद्गुणों के बल पर मोहित कर लेते हैं।

विशेष:

  1. सच्चे वीर अपनी वीरता से सब का सम्मान प्राप्त करते हैं तथा सबके आकर्षण का केन्द्र बने रहते हैं।
  2. भाषा तत्सम, तद्भव शब्दों से युक्त तथा शैली भावपूर्ण है।

4. वीरता का विकास नाना प्रकार से होता है। कभी तो उसका विकास लड़ने मरने में, खून बहाने में, तलवारतोप के सामने जान गंवाने में होता है, कभी प्रेम के मैदान में उसका झण्डा खड़ा होता है। कभी साहित्य और संगीत में वीरता खिलती है। कभी जीवन के गूढ़ तत्व और सत्य की तलाश में बुद्ध जैसे राजा विरक्त होकर वीर हो जाते हैं। कभी किसी आदर्श पर और कभी किसी वीरता पर अपना फरहरा लहराती है। परन्तु वीरता एक प्रकार का इलहाम या दैवी प्रेरणा है।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं। इस निबन्ध में लेखक ने वीरता के व्यापक क्षेत्र का परिचय दिया है।

व्याख्या:
लेखक वीरता के व्यापक क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए कहता है-वीरता का विकास अनेक रूपों में होता है। कभी तो इस वीरता का विकास युद्धभूमि में बलिदान के रूप में, खून बहाने में तथा तलवार-तोप के सामने निडरता से जान की बाज़ी लगा देने में होता है। कभी यह वीरता प्रेम के मैदान में अपना कमाल दिखाती है और इसकी विजय का झण्डा लहराती है।

कभी साहित्य और संगीत के क्षेत्र में इसका चमत्कार देखने को मिलता है। कभी आध्यात्मिक क्षेत्र में विजय प्राप्त करने के लिए बुद्ध जैसे राजा सब कुछ त्यागकर वैरागी बनकर जीवन के गूढ़ रहस्य को सुलझाने तथा सत्य की खोज में अपना जीवन झण्डा लहराती है। आगे लेखक कहता है कि वीरता का गुण सहज नहीं। वास्तव में यह एक दैवी प्रेरणा है।

विशेष:

  1. इन पंक्तियों में लेखक ने वीरता के विविध क्षेत्रों पर प्रकाश डाला है। वीरता का सम्बन्ध केवल युद्ध से ही नहीं जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है।
  2. भाषा सहज, सरल, भावपूर्ण तथा शैली विचारात्मक है।

5. वीरता देशकाल के अनुसार संसार में जब कभी प्रकट हुई तभी एक नया स्वरूप लेकर आई, जिसके दर्शन करते ही सब लोग चकित हो गए-कुछ न बन पड़ा और वीरता के आगे सिर झुका दिया।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं। इस निबन्ध में लेखक ने वीरता के व्यापक क्षेत्र का परिचय दिया है।

व्याख्या:
लेखक वीरता के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहता है-वीरता परिस्थितियों की आवश्यकता के अनुसार जब कभी प्रकट हुई है तभी एक नया रूप लेकर आई है, जिसे देखकर सब लोग आश्चर्यचकित हो गए। यदि लोगों से उन वीरों की स्तुति में ओर कुछ न बन पड़ा तो श्रद्धा से भरकर उनके आगे सिर झुका दिया।

विशेष:

  1. इस कथन के माध्यम से लेखक ने स्पष्ट किया है कि वीरता का उदय देश की आवश्यकता के अनुसार होता है। सच्चे वीरों के आगे लोग श्रद्धा से नतमस्तक हो जाते हैं।
  2. भाषा सहज, सरल, भावपूर्ण तथा शैली विचारात्मक है।

6. वीरों के बनाने के कारखाने कायम नहीं हो सकते। वे देवदार के वृक्षों की तरह जीवन के अरण्य में खुदबखुद पैदा होते हैं और बिना किसी के पानी दिए, बिना किसी के दूध पिलाए, बिना किसी के हाथ लगाए तैयार होते हैं। दुनिया के मैदान में अचानक आकर खड़े हो जाते हैं। उनका सारा जीवन अन्दर ही अन्दर होता है। बाहर तो जवाहरात की खानों की ऊपरी जमीन की तरह कुछ भी दृष्टि में नहीं आता। वीर की ज़िन्दगी मुश्किल से कभी-कभी बाहर नज़र आती है। उसका स्वभाव छिपे रहने का नहीं है।

प्रसंग:
यह गद्यावतरण अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से अवतरित है। इसमें लेखक ने वीरता की विशेषताओं का वर्णन किया है।

व्याख्या:
इन पंक्तियों में अध्यापक पूर्ण सिंह जी ने यह स्पष्ट किया है कि वीरों का उदय बड़े स्वाभाविक रूप से होता है। वीरों के बनाने के कारखाने स्थापित नहीं किए जा सकते। सच्चे वीरों की तुलना देवदार के वृक्षों से की जा सकती है। देवदार के वृक्ष जंगल में स्वयं पैदा होते हैं और बिना किसी के पानी दिए, बिना किसी के हाथ लगाए स्वयं फलते-फूलते हैं। उसी प्रकार वीर पुरुष भी बिना किसी के दूध पिलाए तथा रक्षा किए अपना पथ आप बनाते हैं। वीर का जीवन भीतर ही भीतर पनपता है। वह आडम्बर की भावना से मुक्त होता है।

आवश्यकता पड़ने पर ऐसे वीर अचानक इस दुनिया के मैदान में आकर खड़े हो जाते हैं और अपना चमत्कार दिखाने लगते हैं। उनका सारा जीवन भीतरी गुणों के विकास में तल्लीन रहता है। जैसे खानों की ऊपर की सतह पर कुछ नहीं होता। उनके भीतर ही बहुमूल्य हीरे-जवाहरात छिपे रहते हैं। इसी प्रकार वीर का जीवन भी बाहर कठिनाई से ही दिखाई देता है। उसका स्वभाव तो छिपकर अपने गुणों का विकास करता है।

विशेष:

  1. सच्चे वीर आत्म-निर्भर होते हैं। वे आडम्बर से दूर रहते हैं। वे आन्तरिक गुणों के विकास पर बल देते हैं।
  2. भाषा सहज, सरल, प्रवाहपूर्ण तथा शैली विश्लेषणात्मक है।

7. इस वास्ते वीर पुरुष आगे नहीं, पीछे जाते हैं। अन्दर ध्यान करते हैं। मारते नहीं मरते हैं। वीर क्या टीन के बर्तन की तरह झट गरम और झट ठण्डा हो जाता है ? सदियों नीचे आग जलती रहे तो भी शायद ही वीर गरम हो और हज़ारों वर्ष बर्फ उस पर जमती रहे तो भी क्या मजाल जो उसकी वाणी तक ठण्डी हो। उसे खुद गरम और सर्द होने से क्या मतलब ?

प्रसंग:
यह गद्यावतरण द्विवेदीयुगीन प्रसिद्ध लेखक श्री पूर्ण सिंह द्वारा रचित ‘सच्ची वीरता’ शीर्षक निबन्ध से अवतरित हैं। इसमें लेखक ने सच्चे वीर के स्वभाव पर प्रकाश डाला है।

व्याख्या:
धीरे, गम्भीर और स्वतन्त्र प्रकृति के वीरों का स्वभाव संसार के सामान्य पुरुषों से भिन्न होता है। ईश्वरीय प्रेम में निमग्न सच्चे वीर पुरुष बढ़ने की अपेक्षा पीछे हटते हैं अर्थात् वे त्याग और बलिदान के पथ पर बढ़ते हैं। वे अपनी आत्मा को विशाल बनाते हैं। वे योगी की भान्ति आत्मलीन रहते हैं। त्याग की भावना को अपना आदर्श मानने वाले वीर पुरुष किसी को मारते नहीं, बल्कि स्वयं मरते हैं। वीर का स्वभाव टीन के बर्तन की भान्ति नहीं होता, जो शीघ्र ही गर्म अथवा ठण्डा हो जाता है। वह सदा अडिग और गम्भीर रहता है।

उसके नीचे सदियों तक आग जलती रहे तो भी गरम नहीं होता तथा सदियों उसके ऊपर जमा देने वाली बर्फ पड़ती रहे तो भी वह ठण्डा नहीं होता। उसकी वाणी सदियों तक संसार के कानों में गूंजती रहती है अर्थात् उनकी वाणी का प्रभाव सरलता से समाप्त नहीं होता।

विशेष:

  1. यहां वीर पुरुष के आन्तरिक गुणों का उल्लेख है।
  2. भाषा सहज, सरल, प्रवाहपूर्ण तथा शैली विश्लेषणात्मक है।

8. प्यारे, अन्दर के केन्द्र की ओर अपनी चाल उल्टो और इस दिखावटी और बनावटी जीवन की चंचलता में अपने आपको न खो दो। वीर नहीं तो वीरों के अनुगामी हो और वीरता के काम नहीं तो धीरे-धीरे अपने अन्दर वीरता के परमाणुओं को जमा करो।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियां अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा लिखित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं। इस निबन्ध में लेखक ने सच्चे वीरों का गुणगान किया है। यहां स्पष्ट किया गया है कि सच्चे वीर वही हैं जो आडम्बरपूर्ण जीवन को छोड़ कर मानसिक तथा आत्मिक विकास की ओर ध्यान देते हैं।

व्याख्या:
लेखक वीरता के पथ पर बढ़ने वालों को लक्ष्य कर कहता है कि यदि तुम वीर बनना चाहते हो तो भीतरी गुणों के विकास पर बल दो अर्थात् वीरता का सम्बन्ध मन की दृढ़ता तथा इच्छा शक्ति की प्रबलता से है। आडम्बर पूर्ण एवं बनावटी जीवन की चंचलता में अपना बहुमूल्य जीवन नष्ट न करो। यदि तुम वीर नहीं बन सकते तो वीरों के अनुयायी बन जाओ।

अगर वीरस को प्रकट करने वाले असाधारण काम नहीं कर सकते तो धीरे-धीरे अपने भीतर वीरता के परमाणु इकट्ठे करो। अभिप्राय यह है कि अगर हम वीरता जैसे देवी गुण से वंचित हैं तो दूसरे वीरों के अनुगामी बनकर अपने भीतर वीरता के .गुण जमा कर सकते हैं और इस प्रकार हम भी असाधारण काम करने में असमर्थ हो सकते हैं।

विशेष:

  1. मन की दृढ़ता से वीरता के गुणों का विकास होता है।
  2. भाषा तत्सम प्रधान, सरल तथा शैली उद्बोधनात्मक है।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

9. टीन के बर्तन का स्वभाव छोड़कर अपने जीवन के केन्द्र में निवास करो और सच्चाई की चट्टानों पर दृढ़ता से खड़े हो जाओ। अपनी ज़िन्दगी किसी और के हवाले करो ताकि ज़िन्दगी को बचाने की कोशिशों में कुछ भी समय व्यर्थ न करो। इसलिए बाहर की सत्ता को छोड़कर जीवन के अन्दर की तहों में घुस जाओ, तब नए रंग खुलेंगे।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं जिसमें लेखक ने वीरता के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला है।

व्याख्या:
लेखक पाठकों को सम्बोधित करते हुए कहता है कि टीन के बर्तन का स्वभाव छोड़कर अपने जीवन के केन्द्र में निवास करो अर्थात् टीन के बर्तन के खोखले एवं आडम्बरपूर्ण स्वभाव को छोड़कर सच्चाई की ठोस चट्टानों पर दृढ़ता के साथ खड़े हो जाओ। अपने जीवन को किसी दूसरे के हित के लिए अर्पित कर देना चाहिए ताकि हम इसे बचाने की कोशिश में अपना थोड़ा-सा समय भी नष्ट न करें।

अत: आवश्यकता इस बात की है कि तुम लोग जीवन के बाहरी अस्तित्व को त्याग कर अन्दर की तहों में वास करो तभी नए रंग खुलेंगे। भाव यह है कि जीवन विकास के लिए मनुष्य को चरित्र बल की आवश्यकता है। चरित्र बल को अर्जित करने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य अपने भीतर के गुणों का विकास करे।

विशेष:

  1. यहां वीरों के स्वभावानुसार धीरता, गम्भीरता और दृढ़ता को अपनाने की प्रेरणा दी गई है।
  2. भाषा सहज, सरल तथा शैली उद्बोधनात्मक है।

10. पेड़ तो ज़मीन से इसे ग्रहण करने में लगा रहता है, उसे ख्याल ही नहीं होता कि मुझमें कितने फल या फूल लगेंगे और कब लगेंगे ?

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबंध ‘सच्ची वीरता’ में से ली गई हैं जिसमें सच्ची वीरता की विशेषताएं बताई गई हैं।

व्याख्या:
लेखक का कथन है कि किस प्रकार वीर अपनी वीरता का बखान नहीं करते हैं। लेखक पेड़ का उदाहरण देकर समझाता है कि पेड़ सदा धरती से जल रूपी रस ग्रहण कर हरा-भरा बना रहता है। उसे यह कभी विचार नहीं आता कि उस पर कितने फल या फूल लगेंगे तथा कब लगेंगे। उसी प्रकार से वीर भी अपने वीरतापूर्ण कार्य करता रहता है परन्तु उनके विषय में सोचता नहीं है।

विशेष:
सच्चे वीर प्रचार-प्रसार से दूर रहते हुए नि:स्वार्थ भाव से अपना कार्य करते रहते हैं।

11. सच है, सच्चे वीरों की नींद आसानी से नहीं खुलती। वे सत्वगुण के क्षीर समुद्र में ऐसे डूबे रहते हैं कि उनको दुनिया की खबर नहीं रहती।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ अध्यापक पूर्ण सिंह द्वारा रचित निबन्ध ‘सच्ची वीरता’ से ली गई हैं जिसमें लेखक ने सच्चे वीरों के गुणों का वर्णन किया है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि सच्चे वीर निश्चित भाव से सोते हैं। यह सत्य है कि सच्चे वीरों की नींद भी आसानी से नहीं खुलती क्योंकि उनका अंत: करण सदा निर्मल होता है। वे सोते समय अपने सत्वगुण रूपी क्षीर-सागर में ऐसे डूब जाते हैं कि उन्हें दीन-दुनिया की कोई खबर नहीं रहती। उनकी नींद भी उन्हीं की तरह मस्ती से भरी होती है, जो आसानी से नहीं टूटती है।

विशेष:
सच्चे वीर गहरी नींद में चिंतामुक्त होकर सोते हैं।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 15 सच्ची वीरता

कठिन शब्दों के अर्थ

स्थिर = एक जगह ठहरा हुआ। अचल = न हिलने वाला। अन्तः करण = हृदय। निमग्न = लीन। अगम्य = जहाँ न पहुँचा जा सके, कठिन। हुकूमत = शासन। तिरस्कार = अपमान। सत्कार = आवभगत, आदर। विरक्त = उदास। फरहरा = झण्डा। दैवी = ईश्वरीय। संकल्प = दृढ़ निश्चय। अरण्य = जंगल, वन। कंदरा = गुफ़ा, गार। स्तुति = प्रशंसा। बुज़दिली = कायरता। फिजूल = व्यर्थ । मरकज = केन्द्र। शांहशाह-ए-हकीकी = वास्तविक राजा, ईश्वर । सल्तनत = राज्य। मिज़ाज = स्वभाव। खयालात = विचार। निखट्ट = जो कोई काम न करे। दुर्भिक्ष = अकाल। एक दफा = एक बार। इत्तिफाक = संयोग। धनाढ्य = अमीर। बग़ावत = विद्रोह। सब्ज = हरे। वर्कों = पृष्ठों। दरिद्र = गरीब। अनुगामी = पीछे चलने वाला। चिरस्थायी = देर तक रहने वाला। जाया = नष्ट।

सच्ची वीरता Summary

सच्ची वीरता जीवन परिचय

अध्यापक पूर्ण सिंह का संक्षिप्त जीवन-परिचय लिखें।

अध्यापक पूर्ण सिंह का जन्म सन् 1881 ई० में तथा मृत्यु सन् 1931 में हुई। अध्यापक होने के नाते इनके नाम के साथ अध्यापक शब्द जुड़ गया है। ‘आचरण की सभ्यता’, ‘मज़दूरी और प्रेम’, ‘सच्ची वीरता’ और ‘नयनों की गंगा’ इनके प्रसिद्ध निबन्ध हैं। इनके निबन्धों का आधार मानवीय दृष्टि एवं आध्यात्मिक चेतना है। पूर्ण सिंह ऐसे संवेदनशील व्यक्ति थे जो औद्योगिक क्रान्ति की अपेक्षा मानव के आचरण की पवित्रता को अधिक महत्त्व देते थे। इन्होंने अपने निबन्धों को दृष्टान्तों के माध्यम से सरल और रोचक बनाने का प्रयास किया। इनकी भाषा प्रवाहमयी तथा लाक्षणिक शब्दावली से युक्त है।

सच्ची वीरता निबन्ध का सार

‘सच्ची वीरता’ निबन्ध के रचयिता अध्यापक पूर्ण सिंह जी हैं। यह उनका एक विचारात्मक निबन्ध है जिसमें लेखक ने यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि वीरता मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है। इसका क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। रणक्षेत्र में अपना बलिदान देने वाले योद्धा ही वीरों की कोटि में नहीं आते वरन् किसी पवित्र ध्येय, आदर्श और कार्य के लिए अपना जीवन होम कर देने वाले व्यक्ति भी सच्चे वीर हैं, वीरों के कार्यों की गूंज शताब्दियों तक गूंजती रहती है। वीरों का निर्माण किसी बाहरी प्रेरणा से नहीं होता, वे तो अपनी आन्तरिक प्रेरणा से ही सत्कार्यों में लीन होते हैं। मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देने वाले सब से बड़े वीर हैं।।

सच्चे वीर पुरुष स्वभाव से धीर, वीर, गंभीर एवं स्वतंत्र होते हैं। उनके मन की गम्भीरता सागर के समान विशाल एवं गहरी अथवा आकाश के सामान स्थिर होती है। उनके कार्य दूसरों को प्रेरणा देते हैं। जिनका मन सात्विक वृत्तियों के सागर में डूब जाता है वे ही सच्चे वीर, महात्मा एवं साधु कहलाते हैं। उनका व्यक्तित्व दिव्य होता है। प्रकृति भी सच्चे वीरों की पूजा करती है। सच्चे वीर ही असली राजा हैं, सोने के सिंहासनों पर बैठने वाले लोग असली शासक नहीं क्योंकि वे तो निर्धनों का शोषण कर महान् बने हैं। वे अपने पापों के कारण हमेशा कांपते रहते हैं। लेखक के कहने का भाव यह है कि सरलता तथा साधुता के पथ पर चलने वाले लोग ही सच्चे वीर कहलाने के अधिकारी हैं।

सच्चे वीरों को कोई पराजित नहीं कर सकता। वे बड़े-बड़े बादशाहों को भी ताकत की हद दिखला देते हैं। बादशाह शरीर पर शासन करता है जबकि वीर व्यक्ति अपने कारनामों से लोगों के दिलों पर शासन करते हैं। सच्चा वीर अपने जीवन का उत्सर्ग करने में विलम्ब नहीं करता।

वीर पुरुष हर समय अपने आपको महान् बनाने में लीन रहता है। वह न तो अपने कारनामों का गुणगान करता है और न ही उन्हें याद रखता है। वह तो उस वृक्ष के समान होता है.जो पृथ्वी से रस लेकर अपने आपको पुष्ट करता है। वह इस बात की चिन्ता नहीं करता कि उस पर फल कब लगेंगे और कौन उनको खाएगा। उसका लक्ष्य तो अपने अन्दर सत्य को कूट-कूट-कूट कर भरना है। सच्चे वीरों का जीवन परोपकार के लिए होता है। वीरता का विकास विभिन्न क्षेत्रों में होता है। कभी युद्ध के मैदान में, कभी प्रेम के क्षेत्र में वीरता अपना कमाल दिखाती है और कभी जीवन के किसी गूढ़ तत्व एवं सत्य की खोज में बुद्ध जैसे राजा ऐश्वर्य का परित्याग कर आगे बढ़ते हैं।

वीरता एक प्रकार का दैवी गुण है, वीरता की नकल सम्भव नहीं। जापानी वीरता की मूर्ति की पूजा करते हैं। वीर पुरुष अपने समाज का प्रतिनिधि होता है। उसका मन सब का मम तथा उसके विचार सबके विचार बन जाते हैं। लेखक ने स्पष्ट किया है कि वीर बनाने से नहीं बनते। ये तो अपनी अन्तः प्रेरणा से अपना निर्माण आप करते हैं। “वे तो देवदार के वृक्षों की तरह जीवन के अरण्य में अपने-आप पैदा होते हैं और बिना किसी के पानी दिए, बिना किसी के दूध पिलाए, बिना किसी के हाथ लगाए तैयार होते हैं।”

सच्चे वीर आत्मोत्सर्ग में विश्वास करते हैं। वे अपने अन्दर की शक्ति के विकास में लीन रहते हैं। वीर पुरुष स्वभाव से धीरे एवं गम्भीर होते हैं। वे न तो जल्दी चंचल बनते हैं और न ही उनके साहस एवं ओज को शीघ्र दबाया जा सकता है। आगे लेखक कहता है कि वीरों को आडम्बर अथवा दिखावे का आश्रय नहीं लेना चाहिए। अपने भीतर ही भीतर वीरत्व को संजोना चाहिए और समय आने पर उसे प्रकट करना चाहिए।

अन्त में लेखक कहता है कि जब कभी हम वीरों की कहानियां सुनते हैं तो हमारे अन्दर भी वीरता की लहरें उठती हैं लेकिन वे चिरस्थायी नहीं होतीं। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि जिस धैर्य एवं साहस की आवश्यकता होती है उसका प्रायः हमारे हृदय में अभाव होता है। इसलिए हम वीरता की कल्पना करके रह जाते हैं। टीन जैसे बर्तन का स्वभाव छोड़कर हमें अपने भीतर निवास करना चाहिए। अपने जीवन को दूसरे के लिए अर्पित कर देना चाहिए ताकि इसकी रक्षा की चिन्ता से मुक्त हो जाए। सच्चा वीर बनने के लिए यह आवश्यक है कि अपने भीतर के गुणों का विकास किया जाए।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 11 मातृ-दिवस

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Chapter 11 मातृ-दिवस Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Hindi Chapter 11 मातृ-दिवस

Hindi Guide for Class 7 PSEB मातृ-दिवस Textbook Questions and Answers

(क) भाषा-बोध

1. शब्दार्थ:

मातृ = माँ, माता
दिवस = दिन
कष्ट = पीड़ा
मातृ देवो भव = माता को देवता समझ कर उनकी उपासना करो
सुविधा = आसानी, सहूलियत
नियत = निश्चित, तय
उपवास = व्रत
प्रथा = रिवाज
पारित = पास
ध्वज = झंडा
प्रतीक = चिह्न
सम्मान = आदर
स्वर्गवास = मृत्यु
पुष्पादि = फूल आदि
प्रसून = फूल
स्मरण = याद
विज्ञापन = इश्तहार
आशीर्वाद = आशीष
पूता = पुत्र
निमख = एक पल, क्षण
बिसरो = भूलो। जगदीश = परमात्मा

2. निम्नलिखित शब्दों/मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग करें:

खिल उठना _______________ _________________________
मातृ देवो भव _________________ ____________________
उपवास ______________ ______________________
जानलेवा ________________ ____________________
महिमा ____________ _______________________
ध्वज _____________ ____________________
उत्तर:
खिल उठना (प्रसन्न होना) – शिशु की किलकारियों से माँ का दिल खिल उठता है।
मातृ देवो भव (माता की देवताओं के समान पूजा करें) – माँ के प्यार को देखकर हमें मातृ देवो भव उक्ति का पालन करना चाहिए।
उपवास (व्रत) – नवरात्रों में उपवास किया जाता है।
जानलेवा (खतरनाक) – लाल सिंह कैंसर की जानलेवा बीमारी से पीड़ित है।
महिमा (महत्त्व) – ईश्वर की महिमा अनन्त है।
ध्वज (झंडा) – हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 11 मातृ-दिवस

3. रेखांकित

माँ बचपन से लेकर बुढ़ापे तक अपने बच्चों का ध्यान रखती है।
रेखांकित शब्द भाववाचक संज्ञाएँ हैं, जो क्रमश: बच्चा और बूढ़ा (जाति वाचक संज्ञा) से बनी हैं। भाववाचक संज्ञाएँ जातिवाचक संज्ञा की तरह सर्वनाम, विशेषण और क्रियाओं से भी बनती हैं।

4. निम्नलिखित शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाओ।

शब्द मूलरूप भाववाचक संज्ञा
लड़का जातिवाचक संज्ञा …………………..
अपना सर्वनाम …………………..
भारी विशेषण …………………..
पराया सर्वनाम …………………..
मोटा विशेषण …………………..
युवा विशेषण …………………..
गिरना क्रिया …………………..
थकना क्रिया …………………..
मिलना क्रिया …………………..
सजना क्रिया …………………..

उत्तर:

शब्द मूलरूप भाववाचक संज्ञा
लड़का जातिवाचक संज्ञा लड़कपन
अपना सर्वनाम अपनापन
भारी विशेषण भारीपन
पराया सर्वनाम परायापन
मोटा विशेषण मुटापा
युवा विशेषण यौवन
गिरना क्रिया गिरावट
थकना क्रिया थकान
मिलना क्रिया मिलावट
सजना क्रिया सजावट

उसने अपनी माँ को कमल का फूल सच्चे हृदय से भेंट किया।

5. रेखांकित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखें

माँ = ………………. ……………………..
कमल = ……………….. …………………
फूल = ……………… …………………..
हृदय = …………… ……………………
उत्तर:
माँ = माता, जननी, धात्री, अम्मा।
कमल = जलज, पंकज, सरोज, नीरज।
फूल = पुष्प, सुमन, प्रसून, कुसुम।
हृदय = कलेजा, मन, चित।

6. निम्नलिखित विग्रहों को समस्त पद में बदलें तथा समास का नाम लिखें:

विग्रह समास समास का नाम
देवताओं की माता देव माता तत्पुरुष समास
स्वर्ग में वास ………………………. ……………………….
दादी और नानी ………………………. ……………………….
राष्ट्रपति ………………………. ……………………….
आदर और सत्कार ………………………. ……………………….
बेटा और बेटी ………………………. ……………………….
भाई और बहन ………………………. ……………………….
रोम का वासी ………………………. ……………………….
माता की उपासना ………………………. ……………………….
माता का दिवस ………………………. ……………………….

उत्तर:

विग्रह समास समास का नाम
देवताओं की माता देव माता तत्पुरुष समास
स्वर्ग में वास स्वर्गवास तत्पुरुष समास
दादी और नानी दादी-नानी द्वंद्व समास
राष्ट्रपति राष्ट्र का पति तत्पुरुष समास
आदर और सत्कार आदर-सत्कार द्वंद्व समास
बेटा और बेटी बेटा-बेटी द्वंद्व समास
भाई और बहन भाई-बहन द्वंद्व समास
रोम का वासी रोमवासी तत्पुरुष समास
माता की उपासना मार्तोपासना तत्पुरुष समास
माता का दिवस मातृदिवस तत्पुरुष समास

7. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग अलग करें:

उपवास = ………………….
अनुवाद = …………………
विज्ञापन = …………………..
अनुसार = …………………
विचार = ………………….
प्रयत्न = …………………..
उत्तर:
उप, अनु, वि, अनु, वि, में।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 11 मातृ-दिवस

8. निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय अलग-अलग कर के लिखें:

गुलाबी = ……………………
यूनानी = …………………..
महानता = …………………
मुस्कराहट = …………………
पवित्रता = ………………
उत्तर:
ई, ई, ता, आहट, ता।

9. प्रयोगात्मक व्याकरण

(1) सम् + मान = सम्मान उपर्युक्त उदाहरण में ‘म्’ के बाद ‘म’ होने के कारण उसे द्वित्व हो गया है।
अतएव व्यंजन संधि के नियमानुसार म् के बाद ‘म’ हो तो द्वित्व हो जाता है। अन्य उदाहरण – सम् + मति = सम्मति

(2) सम् + सार = संसार
उपर्युक्त उदाहरण में म् के बाद स होने के कारण म् को अनुस्वार हो गया है। अन्य उदाहरण
सम् + पूर्ण = संपूर्ण
सम् + योग = संयोग
सम् + लाप = संलाप
सम् + वाद = संवाद
सम् + कल्प = संकल्प
सम् + रचना = संरचना
सम् + शय = संशय
सम् + हार = संहार

(ख) विचार-बोध

1. उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरें:

  1. मदर्स डे का आरम्भ …………. में हुआ था। (यूनान, अमेरिका, स्वीडन)
  2. अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विलसन ने ……….. को प्रस्ताव पास करवा कर मातृ दिवस मनाने की घोषणा की थी। (सन 1908, 1915, 1914)
  3. सफेद फूल प्यारी माँ के ……….. को प्रकट करता है। (मधुर व्यवहार, हृदय की पवित्रता, कष्ट सहने की क्षमता)
  4. अमेरिका में सभी बच्चे मई महीने के ………… को मातृ-दिवस मना लेते हैं। (इतवार को, 8 तारीख, दूसरे शुक्रवार)
  5. कई लोग …………. भेजकर माता को स्मरण करते हैं। (समाचार पत्र में विज्ञापन, सन्देश, बधाई पत्र)

उत्तर:

  1. यूनान
  2. 1914
  3. हृदय की पवित्रता
  4. दूसरे शुक्रवार
  5. समाचार पत्र में विज्ञापन

2. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
‘माँवां ठंडीयां छावाँ’ कहावत किस भाषा की है ?
उत्तर:
‘माँवां ठंडीयां छावाँ’ कहावत पंजाबी भाषा की है।

प्रश्न 2.
हमारे ऋषि-मुनियों ने माता की महिमा कैसे व्यक्त की है ?
उत्तर:
हमारे ऋषि-मुनियों ने माता की महिमा ‘मातृ देवो भव’ कह कर देवी के रूप में कही है।

प्रश्न 3.
‘मातृ-दिवस’ का आरम्भ किस देश में हुआ?
उत्तर:
‘मातृ-दिवस’ का आरम्भ यूनान देश में हुआ था।

प्रश्न 4.
मदर्स-डे’ के बधाई पत्रों में किस का चित्र बनाया होता है ?
उत्तर:
‘मदर्स-डे’ के बधाई पत्रों में माता मेरी की गोद में बैठे ईसा मसीह का चित्र बनाया होता है।

3. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
यूनान में मातृ-दिवस मनाने की प्रथा कब, क्यों और कैसे आरम्भ हुई ?
उत्तर:
यूनान में मातृ-दिवस मनाने की प्रथा देवताओं की माता ‘रेहया’ की मार्च महीने में की जाने वाली उपासना से आरम्भ हुई थी।

प्रश्न 2.
ईसाई धर्म का प्रचार होने पर इसे कब, कहाँ और कैसे मनाया जाने लगा ?
उत्तर:
ईसाई धर्म का प्रचार होने पर इसे ईसा मसीह के चालीस दिन के उपवास में पड़ने वाले किसी भी रविवार को मनाया जाने लगा, जो ईस्टर से महीना-सवा महीने पहले अप्रैल में आता है।

प्रश्न 3.
अमेरिका में मातृ-दिवस का श्रीगणेश किस महिला ने कहाँ और कब किया ?
उत्तर:
अमेरिका में मातृ दिवस मनाने का आरम्भ सुश्री अन्ना जारबिस ने फिलाडेलफिया के एक गिरिजाघर में 10 मई, 1908 ई० को किया था।

प्रश्न 4.
माताओं को किन रंगों के फूल भेंट किये जाते हैं? वे अलग-अलग रंग क्या प्रकट करते हैं ?
उत्तर:
माताओं को सफेद, गुलाबी और लाल फूल भेंट किए जाते हैं। सफेद फूल माँ के हृदय की पवित्रता, गुलाबी फूल माँ के मधुर व्यवहार और लाल रंग के फूल माँ के कष्ट सहने के प्रतीक होते हैं।

प्रश्न 5.
माता के जीवित न होने अथवा माँ के दूर होने पर लोग मातृ-दिवस कैसे मनाते हैं।
उत्तर
माता के जीवित नहीं होने पर दादी-नानी, मौसी-मामी, ताई-चाची, भाभी को पुष्पादि भेंट कर तथा माँ के दूर होने पर उन्हें बधाई-पत्र भेजकर मातृ-दिवस मनाते हैं।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 11 मातृ-दिवस

(ग) रचना-बोध

‘मातृ देवो भव’– मातृ हृदय मक्खन से भी कोमल होता है, वह स्वयं कष्ट झेल कर शिशु का लालन-पालन करती है। वह वात्सल्य और करुणा की मूर्ति है। मात-महत्त्व पर अपने विचार लिखो तथा मंच पर भाषण दें।
उत्तर-विद्यार्थी स्वयं करें।

(घ) मनन और आचरण

प्रश्न 1.
मातृ दिवस पर आप अपनी माँ को क्या सहयोग देंगे। अपने विचार लिखें।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2.
आज आधुनिकता की दौड़ में युवा वर्ग अपने बुजुर्गों से दूर होता जा रहा है। दूरी बढ़ने से माता-पिता घर में एकाकी जीवन जीने पर मजबूर है। आप अपने मातापिता के लिए क्या कर सकते हैं ताकि उन्हें वृद्धाश्रम का रास्ता न देखना पड़े।
उत्तर:
अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से विद्यार्थी स्वयं करें।

PSEB 7th Class Hindi Guide मातृ-दिवस Important Questions and Answers

दिए गए शब्द का सही अर्थ से मिलान कीजिए

प्रश्न 1.
मदर्स डे:
मातृदिवस
मदरसा डे
माता डे
उत्तर:
मातृदिवस

प्रश्न 2.
रोमवासी:
रोमकूप
रोम के रहने वाले
रोम
उत्तर:
रोम के रहने वाले

प्रश्न 3.
चिह्न:
निशान
चिनगारी
चिनही
उत्तर:
निशान

प्रश्न 4.
निमख:
सर्प
गम
क्षण
उत्तर:
क्षण

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 11 मातृ-दिवस

मातृ-दिवस Summary

मातृ-दिवस पाठ का सार

‘मात-दिवस’ नामक पाठ में लेखक ने माता के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए ‘मातृदिवस’ मनाने की परम्परा का वर्णन किया है। लेखक के अनुसार माता अनेक कष्ट सहकर बच्चे को जन्म देती है और उसका बचपन से बुढ़ापे तक ध्यान रखती है। शिशु की मुस्कान माँ के हृदय-कमल को खिला देती है। इसलिए कहते हैं ‘माँवाँ ठंडियाँ छावाँ’ तथा ‘मातृ देवो भव।’ माँ के इसी महत्त्व को स्वीकार करते हुए ईसाई धर्म में वर्ष का एक दिन ‘मदर्स डे’ या ‘मातृ-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसका आरम्भ यूनान में हुआ था। यूनानी और रोमवासी देवताओं की माता ‘रेहया’ की उपासना मार्च में करते थे और उन्हें ‘ग्रेट मदर’ मानते थे। बाद में यह उत्सव गिरिजा घरों में भी मनाया जाने लगा। प्रारंभ में इसे ‘ईस्टर’ से एक-सवा महीने पहले अप्रैल में मनाते थे तथा बच्चे भी अपने विद्यालयों या कार्यस्थलों से लौट आते थे और माता के लिए विशेष भेंट लाते थे।

‘मदर्स डे’ अमेरिका में सुश्री अन्ना जारबिस के प्रयत्नों से फिलाडेलफिया के गिरिजाघर में 10 मई, सन् 1908 ई० को पहली बार मनाया गया था। यूनान में फूल मार्च में और अमेरिका में मई में खिलते हैं, इसलिए ‘मदर्स डे’ अमेरिका में मई में मनाया गया। अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विलसन ने सन् 1914 ई० में अमेरिकी कांग्रेस में मई महीने के दूसरे रविवार अथवा मई महीने के दूसरे रविवार को ‘मदर्स डे’ मनाने का प्रस्ताव पारित कराया था। अब वहाँ 8 मई को यह दिन सार्वजनिक रूप से मनाया जाता है। बच्चे माँ को सफेद, गुलाबी और लाल रंग के फूल भेंट करते हैं। सफेद फूल माँ के हृदय की पवित्रता, गुलाबी फूल माँ का सब के प्रति सद्व्यवहार तथा लाल फूल माँ के कष्ट सहन करने का प्रतीक माना जाता है।

आजकल मदर्स डे इंग्लैंड, डेनमार्क, स्वीडन, मैक्सिको, चीन और भारत में भी मनाया जाता है। इसे ये देश मई की 8 तारीख, मई के पहले रविवार, मई के दूसरे रविवार अथवा 12 मई को अपनी सुविधानुसार मनाते हैं। अमेरिकी स्कूलों में बच्चे मई के दूसरे शुक्रवार को ‘मात दिवस’ मनाकर शनि, रविवार अपने घर पर मनाते हैं। जिन की माँ नहीं होती वे अपनी दादी, नानी, मौसी, मामी, ताई,चाची, भाभी को पुष्प भेंट कर उन्हें माँ का सम्मान देते हैं। घर न जा सकने पर बधाई पत्रों से माँ को संदेश भेजा जाता है। एक-दूसरे को भी ‘मदर्स डे’ पर बधाई-पत्र भेजे जाते हैं । समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर भी इस दिन को मनाया जाता है। ‘मदर्स डे’ के बधाई पत्रों पर माता मेरी की गोद में बैठे बालक ईसा मसीह का चित्र बना होता है। समाचार पत्र में एक विज्ञापन था- ‘माँ की गोद है बड़ी प्यारी, संसार के सब सुखों से न्यारी’ एक अन्य विज्ञापन था- ‘भाभी जी! आपने हमारे महान् पिता श्री रामलाल ग्रोवर जी को खो देने पर भी अत्यंत साहस दिखाकर हमारा पालन-पोषण किया। हम आपके तथा पूज्य पिता जी के चरण चिह्नों पर चलने के लिए आशीर्वाद माँगते हैं। पवित्र गुरुवाणी भी कहती है

“पूता माता की आशीस
निमख न विसरो तुमको
हर हर, सद भजो जगदीश”

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing

Punjab State Board PSEB 9th Class English Book Solutions English E-mail Message Writing Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing

Inviting friend to Watch a Play

Suppose you are Surjit Singh. Write an e-mail to your friend, Vipin Goyal, inviting him to watch a play.

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 1
Hi Vipin.
I am going to Government College for Women, Amritsar, to watch a play on 6 July, 20 – -.
Would you like to come? Let me know by Tuesday so that I can buy your ticket too.
Love
Surjit Singh.

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing

House for Rent

Suppose you are Ramneek. Write an e-mail to your cousin, Darshan Pal, to put up a notice on his college notice-board to rent out your house.
PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 2

Dear Pal
My father wants to rent our the Second floor of our house. There are two rooms, a kitchen and two attached bathrooms. He should like to have ₹ 2000 as rent. He will rake two months’ rent in advance. He warns to rent out the house to students. Please put up a notice on your college notice-board.
Regards
Ramneek.

Congratulation on Engagement

Suppose you are Shvinder Gill. Write an e-mail to your friend, Alok Wasn, congratulating him on his engagement.
PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 3
Hi Alok
I have learnt that you are engaged. Congratulating! who is the lucky girl? who does she live and what does she do? Let me know when are you getting married? Is the dare fixed.
Love
Shivinder Gill.

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing

Trip to the South

Suppose you are Varsha Gill. Write an e-mail to your friend, Asha Lakhpal, describing your visit to the south.
PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 4
Hello Asha
Sorry, I couldn’t write to you earlier. I visited the south with my friend last month. We spent eight days there. We liked the Meenakshi Temple ar Madurai very much. The sunset at Kanyakumari was fascinating. We also went to Aurbindo Ashratn at Puducherry. It was very powerful there.
Love
Varsha.

E-mail (electronic mail) is the medium of communication that sends and receives messages through a specially designed computer network. With the revolution in information technology along with the rapid growth of the Internet, e-mail has become the most popular medium of communication. More and more people are using e-mail to send their messages. Due to its high speed, efficiency and low cost, e-mail has become one of the most important channels of communication. As e-mails are faster than letters, they are used for a quick transmission of all sorts of information.

Specimen of an Informal E-mail

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 5
Hi Paul
Sorry to say I’ll he a bit late for tonight’s rehearsal as something’s come up at home and I won’t be able to get away on time. I hope to make it by 7.15.
D. Paul.

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing

Specimen of an Formal E-mail

PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 6
Dear Ms. Maya
The books you ordered last week are now in stock and awaiting collection. I attach a list of the course books currently in stock at the bookshop.
Julie
Assistant Manage!
PSEB 9th Class English E-mail Message Writing 7
HFI Bookshop
Tel : 01123318301
Fax : 01123317931

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 10 परोपकार

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Chapter 10 परोपकार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Hindi Chapter 10 परोपकार

Hindi Guide for Class 7 PSEB परोपकार Textbook Questions and Answers

(क) भाषा-बोध

1. शब्दार्थ

सराहना = प्रशंसा करना
दयावान = दयालु
द्रवित = पिघलना
नि:स्वार्थ = स्वार्थ से रहित
वेदना = पीड़ा, कष्ट, दुःख
उदार = दाता, दयालु
ऊर्जा = शक्ति
वरुण = जल का देवता
स्तुति = पूजा
सम्पदा = दौलत, सम्पत्ति
परहित = दूसरों का भला
तरुवर = श्रेष्ठवृक्ष
सरवर = सरोवर
सहर्ष = खुशी-खुशी
तृप्ति = सन्तोष, तसल्ली
भूस्खलन = भूकंप
मूसलाधार = लगातार ज़ोर की वर्षा
विपत्ति = मुसीबत
कर्म = कार्य
शोकग्रस्त = दुःख से पीड़ित
नेक = अच्छे

2. इन मुहावरों और शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करें :

फूले न समाना ______________ ______________________
हक्के-बक्के होना ________________ ______________________
मूसलाधार ______________ _____________________
प्राचीन ________________ ______________________
ऊर्जा __________________ __________________
सहानुभूति _________________ ______________________
महर्षि ____________ _________________
बलिदान ________________ ___________________
उत्तर:
फूले न समाना (बहुत प्रसन्न होना) – परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर सुजाता फूली नहीं समा रही थी।
हक्के-बक्के होना (हैरान होना) – दीदी ने जब बच्चों की शरारत पकड़ ली, तो वे हक्के-बक्के रह गए।
मूसलाधार (बहुत तेज़) – बाहर मूसलाधार वर्षा हो रही है।
प्राचीन (पुराना) – दिल्ली में पांडवों के ज़माने का एक प्राचीन किला है।
ऊर्जा (गर्मी, शक्ति) – सूर्य हमें ऊर्जा प्रदान करता है।
सहानुभूति (हमदर्दी) – हमें दीन-दुखियों से सहानुभूति होनी चाहिए।
महर्षि (महान् ऋषि) – महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की थी।
बलिदान (कुर्बानी) – वीर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे देते हैं।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 10 परोपकार

3. विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखें:

उपकार = ………………..
परहित = ………………..
दयालु = ………………..
उदार = ……………….
देवता = ……………….
सुर = ………………….
उत्साह = ……………..
उत्तर-शब्द विपरीत शब्द
उपकार अपकार
परहित = स्वहित
दयालु = क्रूर
उदार = अनुदार
देवता = दानव
सुर = असुर
उत्साह = निरुत्साह

4. मन, वाणी और कर्म से परोपकार के कोई दो-दो उदाहरण लिखें:
मन = _____________ , _______________
वाणी = ____________ , _______________
कर्म = ____________ , ________________
उत्तर:
मन से बीमार की सेवा करना, दुखी को दिलासा देना।
वाणी से अच्छे बोल बोलना, निराश को उत्साहित करना।
कर्म से अपंगों-अंधों को सहारा देना, पढ़ाई में पिछड़े साथियों की सहायता करना।

5. प्रयोगात्मक व्याकरण

(1) पर + उपकार = परोपकार
अ + उ = ओ
सुर + ईश = सुरेश
अ + ई = ए
महा + ऋषि = महर्षि
आ + ऋ = अर्
अतः ‘अ’ और ‘आ’ स्वरों के बाद यदि ह्रस्व या दीर्घ ‘उ’, ‘इ’ या ‘ऋ’ स्वर आते हैं तो दोनों के स्थान पर क्रमशः ‘ओ’, ‘ए’ तथा ‘अर्’ हो जाता है। इसे गुण संधि कहते हैं।
नीचे लिखे शब्दों की संधि करें।
सर्व + उत्तम = …………………….
महा + ईश = …………………….
नर + ईश = ………………….
शुभ + इच्छा = …………………
परम + ईश्वर = …………………..
सप्त + ऋषि
उत्तर: संधि
सर्व + उत्तम = सर्वोत्तम
महा + ईश = महेश
नर + ईश = नरेश
शुभ + इच्छा = शुभेच्छा
परम + ईश्वर = परमेश्वर
सप्त + ऋषि = सप्तर्षि

(2) नि:स्वार्थ = निस्स्वार्थ

विसर्ग के बाद ‘स’ होने से विसर्ग को ‘स्’ हो गया तथा शब्द बन गया। निस्स्वार्थ। यह विसर्ग संधि का उदाहरण है।

6. निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह करें

समस्त पद विग्रह समास का नाम
राष्ट्रपति …………. ………………
पशुपक्षी …………. ……………….
रोगपीड़ित ……………. ………………….
शोकग्रस्त …………….. ……………….
पाप-पुण्य ………….. …………………..
उत्तर:
समस्त पद विग्रह समास का नाम
राष्ट्रपति राष्ट्र का पति तत्पुरुष
पशुपक्षी पशु और पक्षी द्वंद्व
रोगपीड़ित रोग से पीड़ित तत्पुरुष
शोकग्रस्त शोक से ग्रस्त तत्पुरुष
शरीरत्याग शरीर का त्याग तत्पुरुष
पाप-पुण्य पाप और पुण्य द्वंद्व

(ख) विचार-बोध

1. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
अब्राहम लिंकन ने सुअर को कीचड़ में फंसा हुआ देखकर क्या किया ?
उत्तर:
अब्राहम लिंकन सुअर को कीचड़ में फंसा हुआ देखकर उसे कीचड़ से बाहर निकालने के लिए पहने हुए कपड़ों सहित कीचड़ में कूद गया।

प्रश्न 2.
सीनेट के सदस्यों ने लिंकन की सराहना क्यों की ?
उत्तर:
सीनेट के सदस्यों ने लिंकन की सराहना इसलिए की क्योंकि उसने अपनी परवाह न करते हुए कीचड़ में फंसे हुए सुअर को बाहर निकाल दिया था।

प्रश्न 3.
राष्ट्रपति ने अपनी प्रशंसा सुनकर क्या उत्तर दिया ?
उत्तर:
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने सुअर पर दया नहीं की बल्कि उसे कीचड़ में फंसा देखकर उन्हें बहुत कष्ट हुआ था, इसलिए उसे बाहर निकाला।

प्रश्न 4.
महर्षि वेद व्यास ने परोपकार का महत्त्व कैसे बताया है ?
उत्तर:
महर्षि वेद व्यास ने परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य और परपीड़ा को सब से बड़ा पाप माना है।

प्रश्न 5.
प्राचीन काल में सूर्य, अग्नि आदि को देवता क्यों मानते थे ?
उत्तर:
प्राचीन काल में सूर्य, अग्नि आदि को देवता इसलिए मानते थे क्योंकि वे प्राकृतिक पदार्थों को नि:स्वार्थ भाव से दान में देते थे।

प्रश्न 6.
परोपकारी मनुष्य का लक्ष्य क्या होता है ?
उत्तर:
परोपकारी मनुष्य का लक्ष्य सदा बिना किसी स्वार्थ और भेदभाव के दूसरों का उपकार करना होता है।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 10 परोपकार

प्रश्न 7.
प्राचीन काल के तीन महान् दानियों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्राचीनकाल के तीन महादानी महर्षि दधीचि, महाराज शिवि और दानवीर कर्ण है।

प्रश्न 8.
धन की कौन-सी तीन गतियाँ होती हैं ?
उत्तर:
धन की तीन गतियाँ-दान, भोग और नाश हैं।

2. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
प्रकृति का स्वभाव दूसरों का उपकार करना है।
उत्तर:
प्रकृति बिना किसी स्वार्थ के सबका सदा उपकार करती है। सूर्य ऊर्जा देता है, नदियाँ जल देती हैं, शीतल हवा बहती है। वृक्ष अपने फल और छाया देते हैं। धरती अन्न पैदा करके हमारा पोषण करती है। इस प्रकार प्रकृति का स्वभाव ही दूसरों का उपकार करना है।

प्रश्न 2.
परोपकार में सबसे बड़ी बाधा लालच है |
उत्तर:
परोपकार करने में लालच बाधक बनता है। मनुष्य धन कमाने की लालसा में सदा लगा रहता है। सौ वाला हज़ार, हज़ार वाला लाख और लाखों वाला करोड़ चाहता है। इसी लालच में फंस कर वह परोपकार नहीं करता क्योंकि परोपकार करने में उसका धन खर्च हो जाएगा। वह अपनों को भी पराया कर देता है और उसका जीवन नरक बन जाता
है।

प्रश्न 3.
धन से ही नहीं, प्रत्येक व्यक्ति अपने ढंग से परोपकार कर सकता है। इस पंक्ति की अपने शब्दों में उदाहरण देकर व्याख्या करें।
उत्तर:
परोपकार केवल धन से ही नहीं, मन, वचन और कर्म से भी किया जा सकता है। दुःखियों के प्रति सहानुभूति दिखा कर तथा अपंगों को सहारा दे कर परोपकार किया जा सकता है। पढ़ाई में पिछड़े साथियों को सहयोग देकर तथा निराश व्यक्ति को उत्साहित करना भी परोपकार है। बीमार की सेवा करना भी परोपकार है।

(ग) भाव-बोध

प्रश्न 1.
तब ही लग जीवो भले, दीबो परै न धीम।
महान् कवि रहीम के इस कथन से उनके जीवन (दान-महिमा/दयनीय दशा) पर प्रकाश पड़ता है-अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
उत्तर:
इस कथन से कवि यह कहना चाहता है कि मनुष्य का जीना तब तक सफल है तब तक वह दान देता रहता है क्योंकि दान देने से धन कभी कम नहीं होता, इसलिए धन दान देना चाहिए।

प्रश्न 2.
परहित सरिस धरम नहि भाई।
इस कथन को स्पष्ट करें।
उत्तर:
इस कथन का अर्थ है कि हे भाई! इस संसार में दूसरे का कल्याण करने से बढ़ कर कोई धर्म नहीं है, इसलिए परोपकार करते रहो।

PSEB 7th Class Hindi Guide परोपकार Important Questions and Answers

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
सबसे बड़ा धर्म किसे माना जाता है ?
(क) लड़ाई
(ख) ईर्ष्या
(ग) परोपकार
(घ) संघर्ष
उत्तर:
(ग) परोपकार

प्रश्न 2.
राष्ट्रपति लिंकन कहाँ जा रहे थे ?
(क) सीनेट
(ख) संसद
(ग) विधानसभा
(घ) विधान परिषद्
उत्तर:
(क) सीनेट

प्रश्न 3.
कर्ण किस प्रकार के व्यक्ति थे ?
(क) महादानी
(ख) कंजूस
(ग) तलवार बाज
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) महादानी

प्रश्न 4.
लेखक ने किसके समान व्यक्ति को परोपकारी बनने को कहा है ?
(क) असुरों के समान
(ख) सुरों के समान
(ग) प्रकृति के समान
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) प्रकृति के समान

प्रश्न 5.
कबूतरों के प्राणों की रक्षा करने के लिए किसने अपने शरीर का माँस दे दिया था ?
(क) महाराजा शिवि
(ख) महाराजा दशरथ
(ग) महाराजा लव
(घ) महाराजा कुश
उत्तर:
(क) महाराजा शिवि

2. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित विकल्पों से कीजिए

प्रश्न 1.
परोपकार करने में ………… बाधा डालता है।
(क) धन का लालच
(ख) शरीर का कष्ट
(ग) मनोविकार
(घ) झूठ
उत्तर
(क) धन का लालच

प्रश्न 2.
महिर्ष वेदव्यास ने ……….को सबसे बड़ा पुण्य माना है।
(क) परपीड़ा
(ख) स्वार्थ
(ग) झूठ
(घ) परोपकार
उत्तर:
(घ) परोपकार

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 10 परोपकार

प्रश्न 3.
………. ने असुरों का नाश करने के लिए अपना शरीर दान दे दिया था।
(क) महर्षि दधीचि
(ख) कर्ण
(ग) अर्जुन
(ग) रावण
उत्तर:
(क) महिर्ष दधीचि

प्रश्न 4.
दूसरों को ………….सबसे बड़ा पाप है।
(क) सुख देना
(ख) कष्ट देना
(ग) किताब
(घ) कलम
उत्तर:
(ख) कष्ट देना

प्रश्न 5.
परोपकारी व्यक्ति सदा ………… से सबका भला करता है।
(क) उदारता
(ख) अज्ञानता
(ग) स्वार्थ
(घ) कलम
उत्तर:
(क) उदारता

3. दिए गए शब्द का सही अर्थ से मिलान कीजिए

प्रश्न 1.
परोपकार:
दया
ईष्या
संघर्ष
उत्तर:
दया

प्रश्न 2.
परपीड़ा:
परि की पीड़ा
दूसरे का दर्द
परी का पेड़
उत्तर:
दूसरे का दर्द

प्रश्न 3.
सरोवर:
सिर को वारना
सिर पर वार
तालाब
उत्तर:
तालाब

प्रश्न 4.
दीन:
गरीब
अमीर
उत्तर:
गरीब

परोपकार Summary

परोपकार पाठ का सार

‘परोपकार’ नामक पाठ में लेखक ने परोपकार की महिमा का गुणगान किया है। लेखक अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राह्म लिंकन के जीवन की एक घटना का वर्णन करता है कि एक दिन वे सीनेट जा रहे थे कि रास्ते में उन्हें एक सुअर कीचड़ में फंसा हुआ दिखाई दिया, जो कोशिश करने पर भी कीचड़ से निकल नहीं पा रहा था। वे पहने हुए कपड़ों समेत कीचड़ में कूद कर सुअर को कीचड़ से बाहर निकाल लाए और कीचड़ से सने हुए सीनेट में जा पहुँचे। वहाँ सभी सदस्य उन्हें इस दशा में देखकर हैरान रह गए परन्तु उनसे सारी घटना सुनकर उनकी दयालुता की प्रशंसा करने लगे।

इस घटना से पता चलता है कि मन परोपकार से कोमल होकर दूसरों की हीन दशा देख कर पिघलता है तथा बिना किसी स्वार्थ के उसकी सहायता करता है। इस प्रकार मन की सरलता, कोमलता, करुणा, सहानुभूति, त्याग और बलिदान की भावना से परोपकार होता है। इसलिए परोपकार सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य और दूसरों को कष्ट पहुँचाने अथवा परपीड़ा को सबसे बड़ा पाप माना प्रकृति भी सदा परोपकार करती है। सूर्य का प्रकाश, वर्षा का जल, शीतल वायु, वृक्ष पथिकों छाया देने के साथ पत्थर मारने वाले को फल देते हैं। सूर्य, अग्नि, वायु, वरुण आदि इसी परोपकार की भावना के कारण पूज्य माने जाते हैं। धरती माता के समान हमारा पोषण करती है। कवि रहीम ने भी कहा है कि जैसे पेड़ फल नहीं खाते, सरोवर जल नहीं पीते, वैसे ही परोपकार के लिए अच्छे लोग धन जोड़ते हैं। परोपकारी व्यक्ति सदा उदारता पूर्वक सबका भला करता है। महर्षि दधीचि ने देवताओं को असुरों का नाश करने के लिए अपना शरीर दे दिया था और महाराजा शिवि ने कबूतरों की प्राण रक्षा के लिए अपने शरीर का माँस दे दिया था ! कर्ण महादानी थे जिन्होंने अपने कवच-कुण्डल तक दान में दे दिए थे।

परोपकार करने में धन का लालच बाधा डालता है। इसलिए धन का लालच नहीं करना चाहिए तथा दीनों, अनाथों, अपंगों, रोगियों की सदा सहायता करनी चाहिए। परोपकार केवल धन से ही नहीं मन, वाणी और कर्म द्वारा भी किया जा सकता है। दुखी को दिलासा देना, अपंगों को सहारा देना, अनपढ़ों को पढ़ाना आदि भी परोपकार है। इसलिए तुलसीदास जी कहते हैं कि संसार में परोपकार से बढ़ कर कोई धर्म नहीं है और परपीड़ा अथवा दूसरों को कष्ट देने के समान कोई पाप नहीं है।

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Picture/Poster Based

Punjab State Board PSEB 9th Class English Book Solutions English Reading Comprehension  Picture/Poster Based Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Picture/Poster Based

Answers have been given at the end of this set.

Look at these pictures and answer the questions given below :
PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 1

Choose the correct option to answer each question.

Question 1.
Who did the fox invite to dinner ?
(a) The duck.
(b) The crane.
(c) The vixen.
(d) The deer.
Answer:
(b) The crane.

Question 2.
What did he serve his guest in the dinner ?
(a) Fruits.
(b) Meat.
(c) Soup.
(d) Eggs.
Answer:
(c) Soup.

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 3.
The fox was very cunning. He placed a …….. before his guest.
(a) deep bowl
(b) flat dish
(c) narrow jar
(d) sound pitcher.
Answer:
(b) flat dish

Question 4.
What did the crane serve the fox when he invited the fox to dinner ?
(a) Cake.
(b) Milk.
(c) Rice.
(d) Chicken Curry
Answer:
(c) Rice.

Question 5.
The fox had to go hungry. Why ?
(a) Because the crane served the rice in a narrrow jar.
(b) Because the fox could not put his mouth in the narrow jar.
(c) Both (a) and (b).
(d) Neither (a) nor (b).
Answer:
(c) Both (a) and (b).

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Look at these pictures and answer the questions given below :

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 2

Choose the correct option to answer each question.

Question 1.
An elephant and a ………. were very good friends.
(a) barber
(b) carpenter
(c) tailor
(d) cobbler
Answer:
(c) tailor

Question 2.
While going to the pond for water, the elephant would daily ………….
(a) stop at the tailor’s shop
(b) have a banana from the tailor
(c) both (a) and (b)
(d) neither (a) nor (b).
Answer:
(c) both (a) and (b)

Question 3.
One day when the elephant put his trunk into the shop,
(a) the tailor gave him a banana
(b) the tailor’s son gave him a banana
(c) the tailor pricked a needle into it
(d) the tailor’s son pricked a needle into it.
Answer:
(d) the tailor’s son pricked a needle into it.

Question 4.
The elephant had his revenge by ……….
(a) filling his trunk with muddy water
(b) throwing muddy water in the tailor’s shop
(c) both (a) and (b)
(d) neither (a) nor (b).
Answer:
(b) throwing muddy water in the tailor’s shop

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 5.
The moral conveyed through these picture is ……….
(a) Might is right.
(b) Tit for tat.
(c) Do good have good.
(d) No pains no gains.
Answer:
(b) Tit for tat.

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PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 3

Choose the correct option to answer each question :

Question 1.
The man is this picture is the famous cricketer
(a) Virat Kohli
(b) Irfan Pathan
(c) Sachin Tendulkar
(d) Mahendra Singh Dhoni.
Answer:
(c) Sachin Tendulkar

Question 2.
He is popularly known as ……. of cricket.
(a) Master Bowler
(b) Master Blaster
(c) Master Batsman
(d) Master Crickter.
Answer:
(b) Master Blaster

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 3.
At the age of sixteen, he made his international debut against
(a) England
(b) Australia
(c) Sri Lanka
(d) Pakistan.
Answer:
(d) Pakistan.

Question 4.
Sachin took retirement from cricket in
(a) 2005
(b) 2018
(c) 2020
(d) 2013.
Answer:
(d) 2013.

Question 5.
Sachin Tendulkar was honoured with many prestigious awards like
(a) Arjuna Award and Rajiv Khel Ratna
(b) Padma Shri and Bharat Ratna
(c) Both (a) and (b)
(d) Neither (a) nor (b)
Answer:
(c) Both (a) and (b)

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PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 4
Choose the correct option to answer each question :

Question 1.
For what purpose is this poster designed ?
(a) To promote education for boys.
(b) To promote education for girls.
(c) To provide employment for boys.
(d) To provide employment for girls.
Answer:
(b) To promote education for girls.

Question 2.
Girls and boys have ……….. to education.
(a) no right
(b) equal right
(c) no interest
(d) equal interest.
Answer:
(b) equal right

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 3.
How can the nation’s progress be accelerated ?
(a) By educating the boys.
(b) By educating the girls
(c) Both (a) and (b).
(d) Neither (a) nor (b).
Answer:
(c) Both (a) and (b).

Question 4.
We should not …….. the girls their rights.
(a) excuse
(b) give
(c) accept
(d) deny.
Answer:
(d) deny.

Question 5.
This poster teaches us to stop ……….
(a) the evil of dowry
(b) the evil of female foeticide
(c) the evil of bride burning
(d) the evil of gender discrimation.
Answer:
(b) the evil of female foeticide

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PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 5

Choose the correct option to answer each question :

Question 1.
Why did the fox jump into the well to drink water ?
(a) Because the water was very low.
(b) Because he wanted to eat the goat.
(c) Because he wanted to have a bath.
(d) None of these three.
Answer:
(a) Because the water was very low.

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 2.
The fox drank water and ……….
(a) drenched his thirst
(b) quenched his thirst
(c) satisfied his thirst
(d) toasted his thirst.
Answer:
(b) quenched his thirst

Question 3.
How did the fox succeed in be fooling the goat who was passing that way ?
(a) He told the goat that it was very hot outside.
(b) He told the goat that it was very cold inside the well.
(c) He told that the water was very sweet.
(d) All of these three.
Answer:
(d) All of these three.

Question 4.
What happened when the foolished goat jumped into the well ?
(a) The fox at once climbed over her back.
(b) The fox jumped out of the well.
(c) Both (a) and (b).
(d) Neither (a) nor (b).
Answer:
(c) Both (a) and (b).

Question 5.
The moral of this story is
(a) As you sow so shall you reap
(b) Think before you speak.
(c) Look before you leap.
(d) All that glitters is not gold.
Answer:
(c) Look before you leap.

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PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 6

Choose the correct option to answer each question :

Question 1.
Once upon a time a shepherd-boy ……… the sheep of the villagers.
(a) looked into
(b) looked after
(c) looked at
(d) looked for.
Answer:
(b) looked after

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 2.
What mischief did he make one day ?
(a) He climbed up a tree.
(b) He started crying, “Wolf! Wolf!’’
(c) He shouted for help.
(d) All of these three.
Answer
(d) All of these three.

Question 3.
Why did the villagers who came to help the boy become cross with him ?
(a) Because they found no wolf there.
(b) Because the boy told them that he had shouted in fun only.
(c) Both (a) and (b).
(d) Neithor (a) nor (b).
Answer:
(c) Both (a) and (b).

Question 4.
What happened when a wolf really came there.
(a) The boy shouted for help but nobody came.
(b) The villagers didn’t believe the boy’s cries as he had be fooled them once.
(c) The wolf sprang upon the boy and. tore him to pieces.
(d) All of these three.
Answer:
(d) All of these three.

Question 5.
The moral of the story is —
(a) No pain no gain.
(b) Never give up hope in the hour of difficulty.
(c) Once a liar, always a liar
(d) Think before you speak.
Answer:
(c) Once a liar, always a liar

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PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 7
Choose die correct option to answer each question:

Question 1.
An old farmer had three sons who were ………..
(a) very active
(b) very idle
(c) very naughty
(d) very hardworking.
Answer:
(b) very idle

Question 2.
What did the farmer said to sons before his death?
(a) He asked them to work hard in their uk.
(b) He asked them not to fight with each other after his death.
(c) He told them that there was a big treasure in his field.
(d) He asked them to live together happily.
Answer:
(c) He told them that there was a big treasure in his field.

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 3.
What happened when the sons dig their field ?
(a) They found there a big treasure.
(b) They found there no treasure.
(c) They found there tools of farming.
(d) None of these three.
Answer:
(b) They found there no treasure.

Question 4.
What did the old man ask them to do?
(a) He asked them to sell that field to him.
(b) He asked them to sow seeds in their field.
(c) He asked them to dig their field more deeply.
(d) Any of these three.
Answer:
(b) He asked them to sow seeds in their field.

Question 5.
What happened when the Sons sow seeds in their field?
(a) There was a good crop that year.
(b) They got a lot of money for it.
(c) Both (a) and (b).
(d) Neither (a) nor (b).
Answer:
(c) Both (a) and (b).

Question 6.
The moral of this story is ……
(a) Do good find good.
(b) As you sow, so shall you reap.
(c) Hard work is the key to success.
(d) Hard work is man’s greatest treasure.
Answer:
(d) Hard work is man’s greatest treasure.

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PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture Poster Based 8

Choose the correct option to answer each question :

Question 1.
What was the capseller doing in a forest ?
(a) He was passing through the forest to reach a village.
(b) He lay down under a tree to take some rest.
(c) He went there to sell his caps.
(d) Both (a) and (b).
Answer:
(d) Both (a) and (b).

PSEB 9th Class English Reading Comprehension Unseen Picture/Poster Based

Question 2.
What happened when the capseller fell asleep ?
(a) Some monkeys came there.
(b) The monkeys untied the bundle of caps.
(c) The monkeys took away all the caps.
(d) All of these three.
Answer:
(d) All of these three.

Question 3.
What did the capseller see when he woke up ?
(a) He found all his caps missing.
(b) He found the monkeys wearing his caps.
(c) Both (a) and (b).
(d) Neither (a) nor (b).
Answer:
(c) Both (a) and (b).

Question 4.
What did he do to recover his caps ?
(a) He took off his caps and threw it down.
(b) The monkeys imitated him.
(c) The monkey threw down their caps.
(d) All of these three.
Answer:
(d) All of these three.

Question 5.
The moral of the story is ………
(a) Tit for tat.
(b) A stitch in time saves nine.
(c) God helps those who help themselves.
(d) Never give up hope in the hour of difficulty.
Answer:
(d) Never give up hope in the hour of difficulty.

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 9 पुष्प की अभिलाषा

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Chapter 9 पुष्प की अभिलाषा Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Hindi Chapter 9 पुष्प की अभिलाषा

Hindi Guide for Class 7 PSEB पुष्प की अभिलाषा Textbook Questions and Answers

(क) भाषा बोध

1. शब्दार्थ
शब्दों के अर्थ कविता के सरलार्थों के साथ दे दिए हैं।

चाह = इच्छा
सुरबाला = देवता की लड़की, देवागना
शव = मृत शरीर
वनमाली = माली
शीश = सर
पाथ = मार्ग

2. दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें:

अभिलाषा = …………………..
बाला = …………………..
पुष्प = …………………….
सुर = ………………….
सम्राट = …………………..
पथ = ……………………
वीर = ……………………..
हरि = …………………
उत्तर:
शब्द पर्यायवाची शब्द
अभिलाषा = इच्छा, कामना, आकांक्षा
बाला = कन्या, बालिका, लड़की
पुष्प = कुसुम, सुमन, फूल
सुर = अमर, देवता, देव
सम्राट = नरेश, महाराजा, राजन
पथ = रास्ता, मार्ग, राह
वीर = बलवान, बहादुर, बलवीर
हरि = प्रभु, ईश्वर, विष्णु

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 9 पुष्प की अभिलाषा

3. इन शब्दों के अलग-अलग अर्थ लिखते हुए वाक्य बनाएँ:

(1) सुर = ………………..
सूर = ………………..
(2) हरि = ………………….
हरी = …………………
(3) बाला = ……………….
वाला = ……………
(4) वन = ………………..
बन = ………………
(5) पथ = …………………
पंथ = ………………..
(6) सिर = ……………..
सिरा = ………………….
उत्तर:
शब्द अर्थ वाक्य
सुर = देवता – सुरों के सिर पर चढ़कर पुष्प गर्व नहीं करना चाहता।
सूर = अंधा- वह सूरदास बहुत अच्छा गाता है।
हरि = ईश्वर- हे हरि! सब पर कृपा करना।
हरी = हरे रंग की – सुधा को हरी साड़ी पसंद है।
बाला = कन्या – वह बाला बहुत समझदार है।
वाला = किसी का – गोपाल रुचि का घरवाला है।
वन = जंगल – पठानकोट के पास घने वन हैं।
बन = समूह – भेड़ों के बन चरने जा रहे हैं।
पथ = रास्ता – यह पथ टूटा-फूटा है
पंथ = धर्म संप्रदाय/मत – हमें सभी पंथों का आदर करना चाहिए।
सिर = शीश – वीर सिर कटा सकते हैं परन्तु झुका नहीं सकते।
सिरा = कोना – इस दीवार को सिरे से नापो।

4. इन शब्दों के लिंग परिवर्तन करें :

सुरबाला = ………………..
प्रेमी = …………………
सम्राट = ………………
देव = ……………………
माली = ……………….
वीर = …………………
उत्तर:
मूल शब्द परिवर्तित लिंग
सुरबाला = सुरबाल
प्रेमी = प्रेमिका
सम्राट = साम्राज्ञी
देव = देवी
माली = मालिन
वीर = वीरांगना

(ख) विचार-बोध

1. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
पुष्प की क्या-क्या इच्छा नहीं है ?
उत्तर:
पुष्प देवकन्या के गहनों में नहीं गूंथा जाना चाहता। वह प्रेमी की माला में नहीं बींधना चाहता। वह सम्राटों के शवों और देवताओं के सिरों पर भी नहीं रखा जाना चाहता।

प्रश्न 2.
उसकी इच्छा क्या है ?
उत्तर:
पुष्प उस मार्ग पर बिखरना चाहता है जहाँ से बलिदानी वीर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने के लिए निकलते हैं।

प्रश्न 3.
इस कविता के कवि का नाम लिखें।
उत्तर:
इस कविता के कवि श्री माखन लाल चतुर्वेदी हैं।

2. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें:

प्रश्न 1.
इस कविता में व्यक्ति के हित की अपेक्षा देश के हित की बात कही गई है। कैसे? स्पष्ट करें।
उत्तर:
‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता में कवि ने पुष्प के माध्यम से स्पष्ट किया है कि व्यक्ति के अपने निजी स्वार्थों की अपेक्षा देश का हित सब से ऊपर है। फूल देवकन्या के गहनों में, प्रेमी की माला में गुँथने को अच्छा नहीं समझता। वह सम्राटों के शवों अथवा देवताओं के सिरों पर भी नहीं चढ़ना चाहता। वह तो उस रास्ते पर फेंका जाना पसंद करता है, जहाँ से मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने वीर जाते हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि फूल अपना कल्याण करने के स्थान पर देश पर बलिदान देने वालों पर न्योछावर हो पुस्तकीय भाग कर हमें यह संदेश देता है कि अपना हित साधने की अपेक्षा देश का हित करना चाहिए।

प्रश्न 2.
इन काव्य पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें:
मुझे तोड़ …………. वीर अनेक
उत्तर:
सप्रसंग व्याख्या के लिए क्रमांक तीन सप्रसंग सरलार्थ देखिए।

प्रश्न 3.
यह छोटी सी कविता देशप्रेमियों के लिए प्रेरणास्त्रोत रही है। राष्ट्र हित व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर है। यदि आपके समक्ष कोई ऐसी परिस्थिति बन जाए तो आप किसे चुनना पसन्द करेंगे ? व्यक्तिगत स्वार्थ या राष्ट्र हित और क्यों ?
उत्तर:
ऐसी स्थिति में मैं व्यक्तिगत स्वार्थ के स्थान पर राष्ट्रहित चुनना पसंद करूँगा क्योंकि राष्ट्र के हित में ही हम सब का कल्याण है। राष्ट्र यदि खुशहाल होगा तो हमारा जीवन भी सुखी होगा। राष्ट्र की सुरक्षा में ही हमारी सुरक्षा है। राष्ट्र है तो हम है, राष्ट्र नहीं होगा तो हम भी नहीं होंगे। इसलिए व्यक्तिगत स्वार्थ से राष्ट्रहित ही सब से ऊपर होना चाहिए।

प्रश्न 4.
हमें अपने देश की उन्नति के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर:
हमें अपने देश की उन्नति के लिए अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए गलत कार्य नहीं करने चाहिए। हमें देश की उन्नति के लिए ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए। हमें भ्रष्टाचार, काला बाज़ारी, जमाखोरी आदि का विरोध करते हुए सादा, सच्चा तथा ईमानदार जीवन व्यतीत करना चाहिए। अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करते हुए देश के विकास में योगदान देना चाहिए। अनुशासित राष्ट्र उन्नत होता है, इसलिए हमें स्वयं अनुशासन का पालन करते हुए दूसरों को भी अनुशासित करना चाहिए।

PSEB 7th Class Hindi Guide पुष्प की अभिलाषा Important Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता के रचनाकार कौन हैं ?
(क) माखन लाल चतुर्वेदी
(ख) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(क) माखन लाल चतुर्वेदी।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 9 पुष्प की अभिलाषा

प्रश्न 2.
पुष्प किससे प्रार्थना करता है ?
(क) वृक्षों से
(ख) परमात्मा से
(ग) नदियों से
(घ) मनुष्यों से
उत्तर:
(ख) परमात्मा से

प्रश्न 3.
पुष्प किसके गहनों में पिरोया जाना चाहता है ?
(क) मनुष्य
(ख) देवताओं की कन्याओं
(ग) राक्षस
(घ) सैनिकों
उत्तर:
(ख) देवताओं की कन्याओं

प्रश्न 4.
पुष्प किसके शवों पर नहीं गिरना चाहता ?
(क) मनुष्य
(ख) सैनिक
(ग) सम्राटों
(घ) विद्यार्थियों
उत्तर:
(ग) सम्राटों

प्रश्न 5.
पुष्प देवताओं के मस्तक पर बैठकर क्या नहीं बनना चाहता ?
(क) अहंकारी
(ख) दयालु
(ग) झगड़ालू
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) अहंकारी

2. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित विकल्पों से कीजिए

प्रश्न 1.
फूल अपना जीवन …… को प्रसन्न करने के लिए नष्ट नहीं करना चाहता।
(क) देव कन्याओं
(ख) नेताओं
(ग) मालिक
(घ) खिलाड़ियों
उत्तर:
(क) देव कन्याओं

प्रश्न 2.
पुष्प माली से उसे ……… पर बलिदान देने वाले वीरों के चरणों के नीचे फैंक देने को कहता है।
(क) नेताओं
(ख) परिवार
(ग) मातृभूमि
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) मातृभूमि

प्रश्न 3.
‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता में व्यक्ति के हित की अपेक्षा …………. की बात कही गयी है।
(क) देशहित
(ख) परहित
(ग) परिवारहित
(ग) पत्नीहित
उत्तर:
(क) देशहित

प्रश्न 4.
फूल देवताओं के सिर पर नहीं ………… चाहता।
(क) गाना
(ख) नाचना
(ग) उतरना
(घ) चढ़ना
उत्तर:
(घ) चढ़ना

प्रश्न 5.
मातृभूमि की रक्षा करने के लिए बलिदान देने ………… जाते हैं।
(क) वीर
(ख) कायर
(ग) बच्चे
(घ) बड़े
उत्तर:
(क) वीर

3. दिए गए शब्द का सही अर्थ से मिलान कीजिए

प्रश्न 1.
मस्तक:
माथा
मस्त
मस्ताना
उत्तर:
माथा।

प्रश्न 2.
देवकन्या:
देवता
कन्या
देवताओं की लड़की
उत्तर:
देवताओं की लड़की

प्रश्न 3.
अभिलाषा:
अभियंता
इच्छा
अबलाशा
उत्तर:
इच्छा

प्रश्न 4.
शव:
मृत शरीर
सेब
शवना
उत्तर:
मृत शरीर

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 9 पुष्प की अभिलाषा

सप्रसंग सरलार्थ

1. चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गँथा जाऊँ।
चाह नहीं, प्रेमी माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ।

शब्दार्थ:
चाह = इच्छा, कामना। सुरबाला = देवकन्या, देवताओं की लड़की गूंथा = पिरोया। बिंध = बींधा जाना। ललचाऊँ = मोहित करना।

प्रसंग:
यह पद्यांश ‘माखन लाल चतुर्वेदी’ द्वारा रचित कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ से लिया गया है, जिसमें कवि ने बलिदानी वीरों के प्रति पुष्प की इच्छा व्यक्त की है।

सरलार्थ:
कवि लिखता है कि पुष्प अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहता है कि उसकी यह इच्छा नहीं है कि उसे किसी देवकन्या के गहनों में गूंथा जाए। उसकी यह भी कामना नहीं है कि वह किसी प्रेमी की माला में बींधा जा कर उसकी प्रेमिका को मोहित करे।

भाव:
फूल अपना जीवन देव कन्याओं अथवा किसी प्रेमी की प्रेमिका को प्रसन्न करने के लिए नष्ट नहीं करना चाहता।

2. चाह नहीं, सम्राटों के शव पर,
हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के सर पर
चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ॥

शब्दार्थ:
चाह = इच्छा, कामना। सम्राट = महाराजा। शव = मरा हुआ शरीर। इठलाऊँ = अक, अहंकार करूँ, गर्व करूँ।

प्रसंग:
यह पद्यांश माखन लाल चतुर्वेदी’ द्वारा रचित कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ से लिया गया है, जिस में पुष्प चाहता है कि उसे बलिदानी वीरों पर न्योछावर किया जाए।

सरलार्थ:
कवि पुष्प की कामना लिखता है कि हे प्रभु! वह यह नहीं चाहता कि उसे मरे हुए सम्राटों के ऊपर डाला जाए। वह यह भी नहीं चाहता कि वह देवताओं के सिर पर चढ़ाया जाए और वह इसे अपना भाग्य समझ कर अपने ऊपर गर्व करने लगे।

भाव:
फूल न तो सम्राटों के शवों पर गिरना चाहता है और न ही देवताओं के सिरों पर चढ़ कर अपने पर गर्व करना चाहता है।

3. मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ पर तुम देना फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जाएँ वीर अनेक॥

शब्दार्थ:
वनमाली = जंगल का माली। पथ = रास्ता, मार्ग। मातृभूमि = अपनी जन्म भूमि, अपना देश। शीश चढ़ाने = बलिदान देने, सिर चढ़ाने।

प्रसंग:
यह पद्यांश ‘माखन लाल चतुर्वेदी’ द्वारा रचित कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ से लिया गया है, जिस में कवि ने पुष्प की यह इच्छा व्यक्त की है कि उसे वीरों के बलिदानी पथ पर बिखेर दिया जाए।

सरलार्थ:
कवि पुष्प की अभिलाषा बताते हुए लिखता है कि फूल वन के माली को कहता है कि उसे तोड़ कर तुम उस रास्ते पर फेंक देना जिस पर अपनी मातृभूमि पर अपना बलिदान देने के लिए अनेक वीर जा रहे हों।

भाव:
फूल चाहता है कि वह उन वीरों के चरणों पर न्योछावर हो जाए जो अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने जा रहे हों।

पुष्प की अभिलाषा Summary

पुष्प की अभिलाषा कविता का सार

‘पुष्प की अभिलाषा’ देश प्रेम की कविता है, जिसमें पुष्प परमात्मा से प्रार्थना करता है कि उसे बलिदानी वीरों के कदमों पर न्योछावर किया जाए। कवि पुष्प की इच्छा बताते हुए लिखता है कि वह यह नहीं चाहता कि उसे देवताओं की कन्याओं के गहनों में पिरोया जाए अथवा प्रेमी की माला में पिरोया जा कर प्रेमिका को मुग्ध करे। वह सम्राटों के शवों पर भी नहीं गिरना चाहता और न ही देवताओं के मस्तक पर बैठकर अहंकारी बनना चाहता है। वह चाहता है कि उसे तोड़ कर उस रास्ते पर फेंक दिया जाए जिस रास्ते से मातृभूमि पर अपना बलिदान देने अनेक वीर जा रहे हों।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 7 चन्दन का पेड़

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Chapter 7 चन्दन का पेड़ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Hindi Chapter 7 चन्दन का पेड़

Hindi Guide for Class 7 PSEB चन्दन का पेड़ Textbook Questions and Answers

(क) भाषा-बोध

1. शब्दार्थ

भूस्खलन = मिट्टी और पत्थर के ढेर का पहाड़ से खिसककर नीचे गिरना
ग्रास = निवाला, कौर
अनिच्छा = न चाहते हुए भी, बिना इच्छा के
अतिक्रमण = मर्यादा का उल्लंघन, सीमा को तोड़ना
श्रवण शक्ति = सुनने की ताकत
स्पर्श = छूना
देह-शरीर
सांत्वना = तसल्ली, ढांढस बंधना
गिरफ्तार-कैद करना
प्रधानाचार्य = प्रिंसीपल, स्कूल का मुखिया
मुदालियर = गाँव की पुलिस चौकी का हैड कांस्टेबल
अधीरता = बेसब्री
सतर्क = होशियार
नेतृत्व = सरदारी, अगुवाई
एकाग्र = एकाचित होकर
किर्र-किर्र का स्वर = लकड़ी चीरने का स्वर
पुष्टि = तसल्ली
प्रमाण = सबूत
अवैध = न्याय के विरुद्ध, अनुचित

2. इन शब्दों और मुहावरों के अर्थ लिखते हुए वाक्य बनाएँ:

अतिक्रमण ________________ _________________________
गिरफ्तार ________________ _________________________
अवैध ________________ ________________________
चैन की साँस लेना _______________ ____________________
भंडाफोड़ करना ______________  _______________
प्रधानाचार्य _______________ ______________________
उत्तर:
अतिक्रमण (सीमा का उल्लंघन) – कुछ लोगों ने नगर-निगम की ज़मीन पर अतिक्रमण करके अपने घर बना लिए हैं।
गिरफ़्तार (कैद करना) – पुलिस ने डकैतों को जंगल से गिरफ्तार कर लिया।
अवैध (अनुचित, कानून के विरुद्ध) – दुकानदारों ने सड़कों पर अवैध रूप से कब्जा करके अपने सामान सजा लिए हैं।
चैन की साँस लेना (आराम से रहना) – परीक्षाओं के समाप्त होने पर विद्यार्थियों ने चैन की साँस ली।
भंडाफोड़ करना (राज खोलना) – सुनन्दा ने चन्दन की लकड़ी की चोरी में मुदालियर का भंडाफोड़ कर उसे सजा दिलाई।
प्रधानाचार्य (मुख्य अध्यापक) – डॉक्टर रत्न चन्द्र शर्मा हमारे विद्यालय के श्रेष्ठ प्रधानाचार्य थे।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 7 चन्दन का पेड़

(ख) विचार-बोध

1. इन प्रश्नों के उत्तर: एक या दो वाक्यों में लिखें:

(क) सुनन्दा कहाँ रहती थी ?
उत्तर:
सुनन्दा पूर्वीघाट में करीमुनाई गाँव के नज़दीक रहती थी।

(ख) उसका साथी कौन था ?
उत्तर:
सुनन्दा का साथी गुगु नाम का कुत्ता था।

(ग) सुनन्दा के माता-पिता किस प्राकृतिक आपदा का ग्रास बन गए थे ?
उत्तर:
सुनन्दा के माता-पिता भूस्खलन आपदा के ग्रास बन गए थे।

(घ) रावगुरु कौन थे ?
उत्तर:
रावगुरु गाँव के स्कूल के प्रधानाचार्य थे।

(ङ) भू-स्खलन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भूस्खलन चट्टानों और मिट्टी के धरती के नीचे हलचल होने से पहाड़ से नीचे गिरने को कहते हैं।

(च) मुदालियर कौन था ?
उत्तर:
मुदालियर गाँव की पुलिस चौकी का हैडकांस्टेबल था।

(छ) उसने रमेश को क्या कहा ?
उत्तर:
मुदालियर ने रमेश को ज्यादा चन्दन के पेड़ काटने से रोका क्योंकि रात के दो बज गए थे और चन्दन की लकड़ी की बिक्री से दस प्रतिशत देने के लिए कहा।

(ज) सुनन्दा को इनाम क्यों दिया गया ?
उत्तर:
सुनन्दा को इनाम इसलिए दिया गया क्योंकि उसने चन्दन की लकड़ी के चोरों का भंडाफोड़ किया था।

(झ) रावगुरु ने सुनन्दा को राष्ट्रीय अन्धमहाविद्यालय में भर्ती करवाने का निश्चय क्यों किया ?
उत्तर:
रावगुरु ने सुनन्दा को राष्ट्रीय अन्धविद्यालय में इसलिए भर्ती करवाना चाहा, जिससे वह कुछ अपने फायदे के काम सीख सके।

2. इन प्रश्नों के उत्तर: चार या पाँच वाक्यों में लिखें:

(क) पेड़ों की अवैध कटाई से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
पेड़ों की अवैध कटाई का संबंध उन पेड़ों की कटाई से है जिन्हें सरकार ने काटने से मना किया हुआ है। उन्हें काटना अपराध माना जाता है। उन्हें काटने वालों को अपराधी सिद्ध कर जेल में बंद कर दिया जाता है। चंदन जैसे बहुमूल्य पेड़ सभी जगहों पर पुस्तकीय भाग नहीं उगाए जा सकते। उन्हें उगाने के लिए विशेष परिस्थितियों और मौसम की आवश्यकता होती है। कुछ लालची लोग धन कमाने के लिए उन्हें चोरी-छिपे काट कर बेच देते हैं जिसे अवैध कटाई कहते हैं।

(ख) सुनन्दा को कैसे पता चला कि ये पेड़ चन्दन के हैं ?
उत्तर:
सुनन्दा अपनी नेत्र ज्योति खोने के बाद अपने कुत्ते के साथ अकेली ही आसपास की पहाड़ियों में चली जाया करती थी। एक दोपहर उसे जंगल में चंदन की सुगंध से युक्त हवा का झोंका अनुभव हुआ। उस दिन जंगल में कोयल की कूक भी उसे सुनाई नहीं दी थी। जिस पेड़ का सहारा ले कर प्रायः बैठा करती थी वह कटा हुआ था। उसके आसपास के पेड़ भी कटे हुए थे। कटे हुए तने के ठूठ को सूंघने और उस स्थान पर पत्थर को रगड़ कर सूंघने से सुनन्दा को पता चल गया था कि पेड़ चन्दन के थे।

(ग) सुनन्दा ने चन्दन की लकड़ी के तस्करों को कैसे पकड़वाया ?
उत्तर:
सुनन्दा को जब चन्दन के पेड़ों की चोरी का शक हुआ तो उसने इस विषय में रावगुरु से बात की। उन्होंने गाँव की पुलिस चौकी के हैड-कांस्टेबल मुदालियर से शिकायत की पर वह इस विषय में कुछ नहीं बोला। सुनन्दा अपने गुगु के साथ सुबह-सवेरे चन्दन क्षेत्र में चली गई। वहाँ एक झाड़ी के पीछे छिपकर बैठ गई। कुछ देर बाद उसे मुदालियर की आवाज़ सुनाई दी पर इस से अधिक वहाँ कुछ नहीं हुआ। अगली रात ग्यारह बजे सुनन्दा और गुगु दोनों फिर वहीं गए। उन्हें वहाँ किर्र-किर्र की आवाज़ सुनाई दी। वहाँ वाहनों की आवाज़ भी थी। उसने रमेश नामक तस्कर और मुदालियर की बातचीत को सुना। अगले दिन रावगुरु ने उटकमंड के पुलिस मुख्यालय में इसकी शिकायत की। सुनन्दा की गवाही और जाँच के बाद तस्करों को पकड़ लिया गया।

(घ) यदि आप को किसी अवैध घटना का पता चले तो आप क्या करोगे ?
उत्तर:
यदि मुझे किसी अवैध घटना का पता चला तो मैं भी सुनन्दा की तरह उस विषय के बारे में अपने मम्मी-पापा को बताऊँगा। उनके साथ जा कर पुलिस अधिकारी को शिकायत करूँगा। अपराधियों को पकड़वाऊँगा। ऐसा कर के मैं अपने समाज और देश की सेवा करूँगा।

3. बहुवचन रूप लिखें:

बकरी = ………………..
सिसकी = ………………..
पहाड़ी = ………………..
लड़की = ………………..
लकड़ी = ………………..
झपकी = ………………..
उत्तर:
बकरी = बकरियाँ
सिसकी = सिसकियाँ
पहाड़ी = पहाड़ियाँ
लड़की = लड़कियाँ
लकड़ी = लकड़ियाँ
झपकी = झपकियाँ

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 7 चन्दन का पेड़

4. विलोम शब्द लिखें:

अनिच्छा, निम्न, पहाड़ी, अन्धकार
उत्तर:
शब्द = विलोम
1. अनिच्छा = इच्छा
2. निम्न = उच्च
3. पहाड़ी = मैदानी
4. अन्धकार = उजाला

5. ‘ता’ लगाकर भाववाचक संज्ञा बनायें:

अधीर + ता = ……………………..
सतर्क + ता = …………………….
एकाग्र + ता = ……………………
उत्तर::
अधीर + ता = अधीरता
सतर्क + ता = सतर्कता
एकाग्र + ता = एकाग्रता

6. प्रयोगात्मक व्याकरण

संधि संधि विच्छेद
दुर्घटना = दु+घटना उपर्युक्त

उदाहरण में ‘उ’ के बाद विसर्ग है तथा बाद में ‘क’ वर्ग का चौथा वर्ग है, इसलिए विसर्ग को र् हो गया।

अन्य उदाहरण

निः + मल = निर्मल
निः + धन = निर्धन
दु: + जन = दुर्जन
आशी: + वाद = आशीर्वाद

अतएव विसर्ग से पूर्व अ, आ को छोड़कर यदि कोई दूसरा स्वर हो तो परे वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण हो या य, र, ल, व, ह में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग को र् हो जाता है।
समस्त पद विग्रह
माता-पिता = माता और पिता

उपुर्यक्त समस्त पद बनाते समय और योजक का लोप हो गया है तथा उसकी जगह योजक चिह्न (-) लग गया है, इसे दोनों प्रधान होते हैं।

अतएव जिस समास में दोनों पद प्रधान हों, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

अन्य उदाहरण

समस्त पद विग्रह
देवी-देवता = देवी और देवता
मामा-मामी = मामा और मामी
अंधेरा-उजाला = अंधेरा और उजाला
ऊपर-नीचे = ऊपर और नीचे

पुस्तकीय भाग निम्नलिखित की संधि करें:

  1. प्रधान+आचार्य = …………………..
  2. वि+अवहार = …………………..
  3. प्रति+ईक्षा = …………………..
  4. पद+अधिकारी = …………………..
  5. मुख्य+आलय = …………………..
  6. सु+आगत = …………………..

उत्तर:-संधि

  1. प्रधान+आचार्य = प्रधानाचार्य
  2. वि+अवहार = व्यवहार
  3. प्रति ईक्षा = प्रतीक्षा
  4. पद+अधिकारी = पदाधिकारी
  5. मुख्य+आलय = मुख्यालय
  6. सु+आगत = स्वागत

(2) शब्दांश+मूल शब्द (अर्थ) = नवीन शब्द (अर्थ)
अ+वैध (विधि के अनुकूल) = अवैध (विधि के प्रतिकूल)
अनु+मान (परिमाण) = अनुमान (अंदाजा)

उपर्युक्त मूल शब्द वैध में अ शब्दांश लगाने से अवैध तथा मान में ‘अनु’ शब्दांश लगाने से ‘अनुमान’ नवीन शब्द बने हैं तथा उनके अर्थ में भी परिवर्तन आ गया है। ये ‘अ’ तथा ‘अनु’ उपसर्ग हैं। अतएव जो शब्दांश किसी शब्द के शुरू में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं।

(3) मूल शब्द (अर्थ) + शब्दांश = नवीन शब्द (अर्थ)
पहाड़ (पर्वत) + ई = पहाड़ी (पहाड़ी सम्बन्धी) पहाड़ पर मिलने वाला
छाया (वातावरण जहाँ प्रकाश = छायादार (जो छाया करने वाला हो) की किरण आवरण के कारण
न पहुँच सके) + दार

उपर्युक्त मूल शब्द पहाड़ में ‘ई’ लगाने से पहाड़ी तथा छाया शब्द में ‘दार’ लगाने से ‘छायादार’ नवीन शब्द बने हैं तथा उनके अर्थ में भी परिवर्तन आ गया है। ये ‘ई’ तथा ‘दार’ प्रत्यय है।

अतएव जो शब्दांश किसी के शब्द के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं।

PSEB 7th Class Hindi Guide चन्दन का पेड़ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प चुनकर लिखिए

(1) रावगुरु कौन थे ?
(क) अध्यापक
(ख) प्रधानाचार्य
(ग) मुख्याध्यापक
(घ) चपड़ासी
उत्तर:
(ख) प्रधानाचार्य

(2) कुत्ते का क्या नाम था ?
(क) गुगु
(ख) रिंकी
(ग) टामी
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) गुगु।

PSEB 7th Class Hindi Solutions Chapter 7 चन्दन का पेड़

‌(3)‌ ‌सुनन्दा‌ ‌को‌ ‌जब‌ ‌होश‌ ‌आया‌ ‌था,‌ ‌तब‌ ‌वह‌ ‌किसके‌ ‌घर‌ ‌थी‌ ‌?‌
‌(क)‌ राहुल‌ ‌के‌ ‌
(ख)‌ ‌चंदन‌ ‌के‌ ‌
(ग)‌ ‌इंद्रजीत‌ ‌के‌ ‌
(घ)‌ ‌रावगुरु‌ ‌के
‌उत्तर:
(घ)‌ ‌रावगुरु‌ ‌के

‌(4)‌ ‌नुकीली‌ ‌चीज़‌ ‌लगने‌ ‌से‌ ‌सुनन्दा‌ ‌को‌ ‌क्या‌ ‌हुआ‌ ‌था‌ ‌?‌ ‌
(क)‌ बहरी‌ ‌
(ख)‌ ‌अन्धी‌
‌(ग)‌ ‌गूंगी‌ ‌
(घ)‌ ‌लंगड़ी
‌उत्तर:
(ख)‌ ‌अन्धी

‌(5)‌ ‌सुनन्दा‌ ‌के‌ ‌तेरह‌ ‌वर्ष‌ ‌के‌ ‌होने‌ ‌पर‌ ‌कौन-सी‌ ‌आपदा‌ ‌आई‌ ‌थी‌ ‌?‌
‌(क)‌ ‌भूस्खलन‌ ‌
(ख)‌ ‌बाढ़‌
‌(ग)‌ ‌सूखा‌ ‌
(घ)‌ ‌बिजली‌ ‌गिरी
‌उत्तर:
(क)‌ ‌भूस्खलन

‌प्रश्न‌ ‌2.
‌निम्नलिखित‌ ‌रिक्त‌ ‌स्थानों‌ ‌की‌ ‌पूर्ति‌ ‌उचित‌ ‌विकल्पों‌ से‌ ‌कीजिए

(1)‌ ‌सुनंदा‌ ‌ने‌ ‌……….‌ ‌को‌ ‌रात‌ ‌की‌ ‌सारी‌ ‌घटना‌ ‌बता‌ ‌दी।‌
‌(क)‌ ‌रावगुरु‌ ‌को‌ ‌
(ख)‌ ‌वेदांत‌ ‌को‌
‌(ग)‌ ‌अनिल‌ ‌को‌ ‌
(घ)‌ ‌मनोज‌ ‌को
‌उत्तर:
(क)‌ ‌रावगुरु‌ ‌को।‌

‌(2)‌ ‌सुनन्दा‌ ‌……….‌ ‌वर्षीय‌ ‌लड़की‌ ‌थी।‌
‌(क)‌ ‌पंद्रह‌ ‌
(ख)‌ ‌तेरह‌
‌(ग)‌ ‌चौदह‌ ‌
(घ)‌ ‌बीस
‌उत्तर:
(ख)‌ ‌तेरह

‌(3)‌ ‌’यहाँ‌ ‌क्या‌ ‌मेरी‌ ‌तरह‌ ‌गश्त‌ ‌कर‌ ‌रहे‌ ‌हो’‌ ‌वाक्य‌ ‌…….‌ ‌का‌ ‌है।‌ ‌
(क)‌ ‌मुदालियर‌ ‌
(ख)‌ ‌रावगुरु‌
‌(ग)‌ ‌सुनन्दा‌ ‌
(घ)‌ ‌चंदन।‌ ‌
उत्तर:
(क)‌ ‌मुदालियर

‌(4)‌ ‌सुनन्दा‌ ‌पेड़ों‌ ‌के‌ ‌पास‌ ‌………..‌ ‌बजे‌ ‌गई‌ ‌थी।‌
‌(क)‌ ‌बारह‌ ‌बजे‌ ‌
(ख)‌ ‌दो‌ ‌बजे‌
‌(ग)‌ ‌ग्यारह‌ ‌बजे‌ ‌
(घ)‌ ‌दस‌ ‌बजे
‌उत्तर:
(ग)‌ ‌ग्यारह‌ ‌बजे

‌(5)‌ ‌सुनन्दा‌ ‌गुगु‌ ‌को‌ ‌…………से‌ ‌खींच‌ ‌कर‌ ‌लाई।‌
‌(क)‌ ‌पैर‌ ‌से‌ ‌
(ख)‌ ‌पूँछ‌ ‌से‌
‌(ग)‌ ‌पट्टे‌ ‌से‌ ‌
(घ)‌ ‌गर्दन‌ ‌से
‌उत्तर:
(ग)‌ ‌पट्टे‌ ‌से

प्रश्न 3.
दिए गए शब्द का सही अर्थ से मिलान कीजिए

(1) अगुवाई:
पितृत्व
मातृत्व
नेतृत्व
उत्तर:
नेतृत्व।

(2) दूंठ:
बिना फूल पत्तों वाला पेड़
ठठेरा
ठिगना
उत्तर:
बिना फूल पत्तों वाला पेड़।

(3) स्पर्श:
संघर्ष
छूना
स्कंद
उत्तर:
छूना।

(4) कौर:
करना
करवाना
निवाला
उत्तर:
निवाला।

चन्दन का पेड़ Summary

चन्दन का पेड़ पाठ का सार

‘चन्दन का पेड़’ एक तेरह वर्षीय अन्धी लड़की सुनन्दा की कहानी है, जो अपनी सूझबूझ से चन्दन के पेड़ों की अवैध कटाई करने वालों को पकड़वा देती है। वह अपने माता-पिता के साथ पूर्वी घाट में करीमुनाई गाँव में रहती थी। उसके पिता पहाडी की ढलान पर सीढ़ीनुमा ज़मीन पर खेती करते थे तथा माँ बकरियों की देखभाल करती थी। वह उन दोनों की सहायता करने के साथ-साथ स्कूल पढ़ने भी जाती थी। उसका साथी गुगु नाम का कुत्ता था, जिस दिन वह तेरह वर्ष की हुई, उसी दिन भूस्खलन हुआ, जिसमें उसके माता-पिता और बकरियाँ मर गईं और वह पहाड़ी से फिसल कर ऐसे गिरी कि उसकी आँखों में कोई नुकीली चीज़ लगी तथा वह बेहोश हो गई। नुकीली चीज़ से लगी चोट के कारण वह अन्धी हो गई। जब उसे होश आया तो वह गाँव के स्कूल के प्रधानाचार्य रावगुरु के घर में थी। गुगु कुत्ता भी वहीं था। वह उनके घर में रहने लगी तथा रावगुरु की पत्नी को मामी कहने लगी। वे उसका बहुत ध्यान रखते थे। उसे स्कूल भी भेजना चाहते थे परन्तु उसने घर पर ही रहना स्वीकार किया।

सुनन्दा धीरे-धीरे अपनी अन्धेरी दुनिया की आदी हो गई। गुगु उसके साथ रहता था। वह मामी की पूजा के लिए फूलों की माला पिरोने लगी। शाम को रावगुरु उससे अनेक विषयों पर बातें करते थे। एक दिन उसने उनसे भूस्खलन के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मनुष्य अंधाधुंध पेड़ों को काटता जाता है। पेड़ पहाड़ की मिट्टी को बाँध कर रखते हैं। उनके कट जाने से धरती के भीतर की हलचल से चट्टानें और मिट्टी नीचे फिसलने लगती है और भूस्खलन हो जाता है। सुनन्दा को लगा कि इस प्रकार से पेड़ों की कटाई ने ही उसे अपने परिवार से अलग कर दिया।

अब सुनन्दा स्पर्श, गन्ध और श्रवण शक्ति के माध्यम से बहुत कुछ जानने-समझने लगी थी। उसमें आत्मविश्वास आ गया था। वह गुगु के साथ आसपास की पहाड़ियों और पेड़ों के झुरमुट में घूमने निकल जाती थी और एक पेड़ में तने का सहारा लेकर बैठ जाती थी। गुगु उसके पास बैठता था और कोयल उससे बातें करती थीं। एक दिन जब वह अपने निश्चित स्थान पर पहुँची तो उसे कोयल की आवाज़ सुनाई नहीं दी और जहाँ टेक लगा कर बैठती थी, वहाँ पेड़ के स्थान पर दूंठ था। आस-पास भी ढूँठ थे और जब उसने ठूठ को पत्थर से रगड़ कर देखा तो उसे चन्दन की सुगंध आई। वह सोचने लगी कौन इन चन्दन के वृक्षों को काट गया। घर आकर उसने रावगुरु को बताया। रावगुरु ने मुदालियर से पता किया तो उसने कहा कि चन्दन के पेड़ सुरक्षित हैं। अगले दिन सुनन्दा ने फिर कुछ पेड़ों को कटा पाया और रावगुरु को बताया। उन्होंने मुदालियर से कहा तो उसने अन्धी लड़की पुस्तकीय भाग का बातों पर विश्वास नहीं करने और उसे अफवाहें फैलाने से रोकने के लिए रावगुरु को कहा। सुनन्दा को विश्वास था कि चन्दन की लकड़ी की चोरी हो रही है।

अगले दिन सुबह ही सुनन्दा गुगु को लेकर चन्दन क्षेत्र की ओर गई और झाड़ी के पीछे छिप कर बैठ गई। किसी के आने की आहट सुन कर गुगु भौंकने लगा तो सुनन्दा झाड़ियों में छिप गई। तभी उधर से मुदालियर गुजग और गुगु को ‘यहाँ क्या मेरी तरह गश्त कर रहे हो’ कह कर चला गया। सुनन्दा ने उसको आवाज़ पहचान ली थी। वह अगली रात, रावगुरु और उनकी पत्नी के सोने के बाद, ग्यारह बजे गुगु के साथ चन्दन के पेड़ों के पास गई तो गुगु किर्रकिर्र की आवाज़ सुन कर गुर्राने लगा तो उसने उसे चुप करा दिया। उसे किरै-किर्र और वाहनों के आने-जाने के स्वरों के साथ मुदालियर की आवाज़ भी सुनाई दी जो किसी रमेश से कह रहा था ‘इतना ही काफी है। रात के दो बज गए हैं। इस की बिक्री का दस प्रतिशत मेरा होगा।’ उसने उत्तर: दिया था कि ज़रूर दूंगा। इस के बाद शान्ति छा गई थी। सुनन्दा गुगु को पट्टे से खींचती हुई घर आ गई, परन्तु सो न सकी।

सुबह हुई तो सुनन्दा ने रावगुरु को रात की सारी घटना बता दी। वे उटकमंड में पुलिस मुख्यालय गए, जहाँ रावगुरु के साथ सुनन्दा को भी बुलाया गया और उससे पूछताछ की गई। रावगुरु ने सुनन्दा को बताया कि यदि मुदालियर के विरुद्ध प्रमाण मिले तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। एक महीने बाद रावगुरु ने सुनन्दा को बताया कि चन्दन की लकड़ी की चोरी का भंडाफोड़ करने के लिए उसे पुलिस विभाग ने इनाम दिया है। मामी भी बहुत प्रसन्न होकर देवी लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने की बात कहने लगी। सुनन्दा को राष्ट्रीय अन्धविद्यालय में दाखिल कराने का निश्चय किया गया और उसके इनाम की राशि बैंक में जमा करा दी गई, जिससे वह अपना जीवन ठीक से चला सके। सुनन्दा के पास रावगुरु को धन्यवाद करने के लिए शब्द नहीं थे।

PSEB 7th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar viram chinh विराम-चिह्न Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 7th Class Hindi Grammar विराम-चिह्न

PSEB 7th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

प्रश्न 1.
विराम चिह्न से क्या अभिप्राय है ? हिन्दी में प्रचलित चिह्न को स्पष्ट करें।
उत्तर:
वाक्य का उच्चारण करते समय भाव को प्रकट करने के लिए जहाँ-जहाँ जिह्वा रुकती है, उसे विराम कहते हैं। इसी विराम को प्रकट करने के लिए हम जिन चिह्न का प्रयोग करते हैं, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं। विराम चिहन निम्नलिखित हैं :

विराम चिह्न
1. अल्प विराम (,)
2. अर्द्ध-विराम (;)
3. अपूर्ण विराम (:)
4. विराम या पूर्ण विराम (।)
5. प्रश्न चिह्न (?)
6. विस्मयादि बोधक (!)
7. निर्देशक (-)
8. योजक या विभाजक (.)
9. उद्धरण चिह्न (“)
10. कोष्ठक () [ ] {}
11. लाघव चिह्न (० या)
12. त्रुटि पूरक (^)

PSEB 7th Class Hindi Vyakaran वाक्य

Punjab State Board PSEB 7th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar Vakya वाक्य Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 7th Class Hindi Grammar वाक्य

PSEB 7th Class Hindi Vyakaran वाक्य

प्रश्न 1.
वाक्य किसे कहते हैं ? रचना के विचार से वाक्य के प्रकार भी लिखो।
उत्तर:
दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल को वाक्य कहते हैं; जैसे- वह कक्षा में प्रथम आया है।

रचना के विचार से वाक्य के प्रकार-
1. सरल वाक्य – जिस वाक्य में एक उद्देश्य और एक विधेय हो उसे सरल वाक्य कहते हैं जैसे राम जी वन को गए।

2. संयुक्त वाक्य – जिस वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्य और तथा आदि योजक शब्दों के द्वारा जुड़कर बने हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं जैसे- राम और लक्ष्मण वन को गए।

3. मिश्र या मिश्रित वाक्य – जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा अन्य उस पर आश्रित उप-वाक्य हों उसे मिश्र वाक्य कहते हैं जैसे- यदि राम वन न जाते तो राजा दशरथ बच जाते।