PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 8 प्राचीन इतिहास का अध्ययन – स्त्रोत

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions History Chapter 8 प्राचीन इतिहास का अध्ययन – स्त्रोत Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 8 प्राचीन इतिहास का अध्ययन – स्त्रोत

SST Guide for Class 6 PSEB प्राचीन इतिहास का अध्ययन – स्त्रोत Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो

प्रश्न 1.
पूर्व-इतिहास तथा इतिहास में क्या अन्तर है?
उत्तर-

  1. पूर्व इतिहास-मानव जीवन के जिस काल का कोई लिखित विवरण प्राप्त नहीं है, उसे पूर्व-इतिहास कहते हैं।
  2. इतिहास- इतिहास से भाव मानव जीवन के उस काल से है जिसका लिखित विवरण मिलता है।

प्रश्न 2.
वैदिक साहित्य के कौन-कौन से ग्रन्थ मिलते हैं?
उत्तर-
वैदिक साहित्य के निम्नलिखित ग्रन्थ मिलते हैं –

  1. वेद,
  2. ब्राह्मण ग्रन्थ,
  3. आरण्यक,
  4. उपनिषद्,
  5. सूत्र,
  6. महाकाव्य, (रामायण तथा महाभारत),
  7. पुराण।

प्रश्न 3.
अभिलेख (शिलालेख) हमें इतिहास जानने में किस प्रकार सहायता करते हैं?
उत्तर-
अभिलेख उन लेखों को कहते हैं जो पत्थर के स्तम्भों, चट्टानों, तांबे की प्लेटों, मिट्टी की तख्तियों तथा मन्दिर की दीवारों पर प्रचलित संकेतों अथवा अक्षरों में खुदे हुए होते हैं। ये इतिहास जानने में हमारी बहुत सहायता करते हैं। इनमें उस समय की महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया गया है, जिस समय में ये लिखे गए थे। सम्राट अशोक के अभिलेख उसके धर्म तथा राज्य के विस्तार के बारे में बताते हैं। समुद्रगुप्त तथा स्कन्दगुप्त के.अभिलेखों से उनकी उपलब्धियों के बारे में पता चलता है। ताम्र-पत्रों से प्राचीन काल में भूमि को ख़रीदने-बेचने तथा भूमि दान करने की व्यवस्था का पता चलता है।

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प्रश्न 4.
इतिहास के पुरातात्विक स्रोतों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
पुरातन इमारतों, बर्तनों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, सिक्कों तथा प्राचीन अभिलेखों को इतिहास के पुरातात्विक स्रोत कहा जाता है।

प्रश्न 5.
महाकाव्य स्रोत के रूप में हमारी सहायता कैसे करते हैं?
उत्तर-
रामायण तथा महाभारत नामक दो महाकाव्य वैदिक काल में लिखे गए थे। इन महाकाव्यों से हमें प्राचीन भारतीय इतिहास विशेष तौर पर आर्यों के आगमन के पश्चात् प्राचीन भारत की सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थिति के बारे में पता चलता है।

प्रश्न 6.
इतिहास के साहित्यिक स्रोतों पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर-
इतिहास के साहित्यिक स्रोतों में वेद, ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यक, उपनिषद्, सूत्र, महाकाव्य, पुराण, बौद्ध तथा जैन ग्रन्थ आदि शामिल हैं। ये ग्रन्थ हमें धर्म के अलावा उस समय की घटनाओं तथा समाज के बारे में जानकारी देते हैं जिस समय ये लिखे गए थे। प्राचीन काल के नियमों तथा कानूनों से सम्बन्धित पुस्तकों, जिन्हें ‘धार्मिक शास्त्र’ कहा जाता है, की भी रचना हुई। मनुस्मृति ऐसी पुस्तकों में से मुख्य है। कौटिल्य ने शासन प्रबन्ध के बारे में ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रन्थ लिखा। भास तथा कालिदास आदि विद्वानों द्वारा बहुतसे नाटक लिखे गए। बहुत-सी कहानियां भी लिखी गईं। इनके अतिरिक्त आर्यभट्ट तथा वराहमिहिर आदि वैज्ञानिकों ने अपनी खोजों के बारे में पुस्तकें लिखीं।

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प्रश्न 7.
स्मारकों के अध्ययन से हमें क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर-
सैंकड़ों वर्ष पहले बने स्तम्भों, किलों तथा महलों आदि को स्मारक कहते हैं। स्मारकों के अध्ययन से हमें महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी मिलती है। इनसे हमें पता चलता है कि प्राचीन भारत में लोगों का सांस्कृतिक जीवन कैसा था।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

  1. इतिहास ………… का अध्ययन है।
  2. इतिहास ……….. के लिए अतीत का अध्ययन है।
  3. कौटिल्य द्वारा ………….. नाम की पुस्तक लिखी गई।
  4. पुस्तकें, साहित्यिक स्रोत, प्राचीन खण्डहर तथा वस्तुएं ……. स्रोत कहलाती हैं।

उत्तर-

  1. अतीत
  2. भविष्य
  3. अर्थशास्त्र
  4. इतिहास के।

III. निम्नलिखित के सही जोड़े बनायें

(1) आर्यभट्ट – (क) महाकाव्य
(2) रामायण – (ख) वेद
(3) सामवेद – (ग) कौटिल्य
(4) अर्थशास्त्र – (घ) वैज्ञानिक।
उत्तर-
सही जोड़े
(1) आर्यभट्ट – (घ) वैज्ञानिक
(2) रामायण – (क) महाकाव्य
(3) सामवेद – (ख) वेद
(4) अर्थशास्त्र – (ग) कौटिल्य।

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IV. सही (✓) अथवा ग़लत (✗) का निशान लगायें

  1. मनुस्मृति धर्मशास्त्र ग्रन्थ है।
  2. आरण्यक वैदिक साहित्य का भाग नहीं हैं।
  3. सिक्के इतिहास का स्रोत नहीं हैं।
  4. अशोक ने अपना सन्देश पाषाण-स्तम्भों (पत्थरों के स्तम्भों) पर खुदवाया।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✗)
  3. (✗)
  4. (✓)

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कम से कम शब्दों में उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
किन्हीं दो प्राचीन भारतीय स्मारकों के नाम बताइए जिनके अवशेष ऐतिहासिक जानकारी जुटाते हैं।
उत्तर-
अशोक के स्तम्भ, नालंदा विश्वविद्यालय।

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प्रश्न 2.
‘इपिग्राफी’ क्या होती है?
उत्तर-
अभिलेखों के अध्ययन को ‘इपिग्राफी’ कहते हैं।

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इतिहास के पुरातात्विक स्रोतों में निम्न में से क्या शामिल नहीं है?
(क) सिक्के
(ख) धार्मिक पुस्तकें
(ग) प्राचीन इमारतें।
उत्तर-
(ख) धार्मिक पुस्तकें

प्रश्न 2.
नीचे दर्शाया चित्र ‘सांची का स्तूप’ किस प्रकार का ऐतिहासिक स्त्रोत है?
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(क) साहित्यिक
(ख) सामाजिक
(ग) पुरातात्विक
उत्तर-
(ग) पुरातात्विक

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प्रश्न 3.
निम्न में कौन से वैज्ञानिकों ने अपने आविष्कारों के बारे में पुस्तकें लिखी जो इतिहास लेखन में सहायता करती हैं?
(क) आर्यभट्ट तथा वराहमिहिर
(ख) कौटिल्य तथा कालिदास
(ग) समुद्रगुप्त तथा स्कंदगुप्त।
उत्तर-
(क) आर्यभट्ट तथा वराहमिहिर

प्रश्न 4.
निम्न में से किस प्राचीन राजा का उसके कार्यों के बारे में अभिलेख मिलता है?
(क) समुद्रगुप्त
(ख) अशोक
(ग) उपरोक्त दोनों।
उत्तर-
(ग) उपरोक्त दोनों।

अति लघ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इतिहास के चार साहित्यिक स्रोतों के नाम लिखें।
उत्तर-
(1) वेद,
(2) ब्राह्मण ग्रंथ,
(3) उपनिषद्,
(4) महाकाव्य।

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प्रश्न 2.
किसी एक प्राचीन धर्मशास्त्र ग्रंथ का नाम लिखें।
उत्तर-
मनुस्मृति।

प्रश्न 3.
धर्मशास्त्र क्या है?
उत्तर-
प्राचीन काल के नियमों तथा कानूनों से सम्बन्धित पुस्तकों को धर्मशास्त्र कहा जाता है।

प्रश्न 4.
कहानी लेखन का आरम्भ कहां हुआ?
उत्तर-
भारत में।

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प्रश्न 5.
आर्यभट्ट तथा वराहमिहिर आदि वैज्ञानिकों की पुस्तकों से क्या पता चलता है?
उत्तर-
आर्यभट्ट तथा वराहमिहिर आदि वैज्ञानिकों की पुस्तकों से पता चलता है कि प्राचीन काल में विज्ञान तथा गणित के क्षेत्र में भारत अन्य देशों की तुलना में बहुत आगे था।

प्रश्न 6.
रामायण तथा महाभारत के लेखकों के नाम लिखें।
उत्तर-
रामायण के लेखक महाऋषि वाल्मीकि तथा महाभारत के लेखक महाऋषि वेद व्यास हैं।

प्रश्न 7.
चार पुरातत्त्व स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर-

  1. प्राचीन भवन,
  2. प्राचीन अभिलेख,
  3. प्राचीन सिक्के,
  4. प्राचीन वस्तुएं।

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प्रश्न 8.
प्राचीन काल में ताम्रपत्रों का प्रयोग किस लिए किया जाता था? .
उत्तर-
प्राचीन काल में ताम्रपत्रों का प्रयोग भूमि को ख़रीदने व बेचने तथा भूमि-दान के दस्तावेज बनाने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 9.
सम्राट अशोक कौन था?
उत्तर-
सम्राट अशोक मौर्य वंश का सबसे महान् शासक था।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इतिहास के अध्ययन से हमें क्या पता चलता है?
उत्तर-
इतिहास के अध्ययन से हमें पता चलता है कि आरम्भ में मनुष्य कैसे रहता था तथा किस प्रकार समय के साथ-साथ सभ्यताओं का विकास हुआ।

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प्रश्न 2.
इतिहास के अध्ययन का हमारे भविष्य से क्या संबंध है?
उत्तर-
इतिहास को अच्छे भविष्य के लिए अतीत का अध्ययन कहा जाता है। यदि हम भविष्य में एक मज़बूत तथा आदर्श समाज की स्थापना करना चाहते हैं तो हमारे लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हम वर्तमान स्थिति तक किस प्रकार पहुंचे हैं। इस सब का ज्ञान इतिहास के अध्ययन से ही प्राप्त हो सकता है।

प्रश्न 3.
रामायण तथा महाभारत के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
रामायण तथा महाभारत दो महत्त्वपूर्ण महाकाव्य हैं जो प्रारम्भिक वैदिक काल में लिखे गए थे। रामायण के लेखक महाऋषि वाल्मीकि हैं तथा इसमें 24000 श्लोक हैं। महाभारत कई शताब्दियों में भिन्न-भिन्न लेखकों द्वारा विस्तार में लिखी गई रचनाओं का समूह है। परन्तु आम विचार है कि इसके लेखक महाऋषि वेद व्यास हैं।

प्रश्न 4.
इतिहास के अध्ययन में प्राचीन सिक्कों का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
प्राचीन काल के सिक्के कली, तांबे, कांसे, चांदी तथा सोने आदि के बने हुए हैं। इन पर राजाओं के चित्र, जानवरों के चित्र, धार्मिक चिन्ह, सिक्के जारी करने वालों के नाम तथा तिथियां आदि लिखी हुई हैं। इनसे हमें प्राचीन राजाओं, उनके वंशों, प्राचीन काल के धार्मिक विश्वासों तथा लोगों के आर्थिक जीवन आदि के बारे में जानकारी महत्त्वपूर्ण होती है।

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प्रश्न 5.
सम्राट अशोक ने अपना सन्देश साधारण लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या । किया?
उत्तर-
सम्राट अशोक ने अपना सन्देश साधारण लोगों तक पहुंचाने के लिए उसे चट्टानों तथा पत्थर के विशाल स्तम्भों पर खुदवाया ताकि लोग उसे पढ़ सकें। अनपढ़ लोगों को इसे समय-समय पढ़ कर सुनाया भी जाता था।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न-
इतिहास के अध्ययन के स्रोत के रूप में अभिलेखों का महत्त्व बताएं।
उत्तर-
इतिहास के अध्ययन के स्रोत के रूप में अभिलेखों का बहुत महत्त्व है। प्राचीन काल में पत्थरों के स्तम्भों, मिट्टी की तख़्तियों, तांबे की प्लेटों तथा मन्दिरों की दीवारों पर अभिलेख लिखे जाते थे। इन अभिलेखों से उस काल की महत्त्वपूर्ण घटनाओं का पता चलता है, जिस काल में ये लिखे गए थे।

1. अशोक ने मानवता के कल्याण के लिए अपना सन्देश चट्टानों तथा पत्थर के बड़ेबड़े स्तम्भों पर खुदवाकर सम्पूर्ण देश में फैला दिया ताकि लोग उसके विचारों को पढ़कर उन पर चल सकें। इन अभिलेखों से अशोक के धर्म तथा राज्य-विस्तार का पता चलता है।

2. अन्य कई राजाओं ने भी अपनी उपलब्धियों तथा विजयों को पत्थर के स्तम्भों पर खुदवाया। समुद्रगुप्त की उपलब्धियों का वर्णन उसके राज्य कवि हरिषेन ने इलाहाबाद में स्थित स्तम्भ-लेख में किया है।

3. दिल्ली में कुतुबमीनार के समीप स्थित लौह-स्तम्भ पर लिखित अभिलेख में चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की उपलब्धियों का वर्णन है।

4. प्राचीन काल में भूमि को ख़रीदने-बेचने तथा भूमि को दान करने के लिए तांबे की प्लेटों का प्रयोग किया जाता था, जिन्हें ताम्र-पत्र कहते हैं। ताम्र-पत्र महत्त्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज़ हैं।

5. मिट्टी की तख़्तियों तथा मन्दिरों की दीवारों पर लिखित अभिलेखों से महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त होती है।

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