PSEB 9th Class SST Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Economics Chapter 3 निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती

SST Guide for Class 9 PSEB निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती Textbook Questions and Answers

(क) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थान भरें :

  1. विश्व की कुल निर्धन जनसंख्या के ………… से अधिक निर्धन -(ग़रीब) भारत में रहते है।
  2. निर्धनता निर्धन लोगों में ………… की भावना उत्पन्न करती है।
  3. ………… लोगों को ………….. से अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है।
  4. पंजाब राज्य उच्च …………… दर के विकास की सहायता से निर्धनता कम करने में सफल रहा है।
  5. जिंदगी की मुख्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न्यूनतम आय को मापने के ढंग को………… कहते हैं।
  6. ………… निर्धनता के मापदंड का एक कारण है।

उत्तर-

  1. 1/5
  2. असुरक्षा
  3. ग्रामीण, शहरी
  4. कृषि
  5. निर्धनता रेखा
  6. सापेक्ष।

बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में निर्धनता में रहने वाले लोगों की संख्या कितनी है ?
(क) 20 करोड़
(ख) 26 करोड़
(ग) 26 करोड़
(घ) उपर्युक्त में कोई नहीं ।
उत्तर-
(घ) उपर्युक्त में कोई नहीं ।

प्रश्न 2.
ग़रीबी का अनुपात …………. में कम है।
(क) विकसित देशों में
(ख) विकासशील देशों में
(ग) अल्प विकसित देशों में
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर-
(क) विकसित देशों में

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प्रश्न 3.
भारत में सबसे अधिक निर्धन राज्य कौन-सा है ?
(क) पंजाब
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) बिहार
(घ) राजस्थान।
उत्तर-
(ग) बिहार

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय आय किसका सूचक है ?
(क) ग़रीबी रेखा
(ख) जनसंख्या
(ग) सापेक्ष निर्धनता
(घ) निरपेक्ष निर्धनता।
उत्तर-
(ग) सापेक्ष निर्धनता

सही/गलत :

  1. विश्वव्यापी ग़रीबी में तीव्र गति से कमी आई है।
  2. कृषि क्षेत्र में छिपी हुई बेकारी होती है।
  3. गांव में शिक्षित बेकारी अधिक होती है।
  4. राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन (NSSO) सर्वेक्षण करके जनसंख्या में हो रही वृद्धि का अनुमान लगाता हैं।
  5. सबसे अधिक ग़रीबी वाले राज्य बिहार और ओडिशा है।

उत्तर-

  1. सही
  2. सही
  3. ग़लत
  4. ग़लत
  5. सही।

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सापेक्ष ग़रीबी क्या है ?
उत्तर-
सापेक्ष ग़रीबी का अभिप्राय विभिन्न देशों की प्रति व्यक्ति आय की तुलना के आधार पर निर्धनता से है।

प्रश्न 2.
निरपेक्ष ग़रीबी क्या है ?
उत्तर-
निरपेक्ष ग़रीबी से अभिप्राय किसी देश की आर्थिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है।

प्रश्न 3.
सापेक्ष निर्धनता के दो निर्धारकों के नाम लिखें।
उत्तर-
प्रति व्यक्ति आय तथा राष्ट्रीय आय सापेक्ष निर्धनता के ही माप हैं।

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प्रश्न 4.
ग़रीबी रेखा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
ग़रीबी वह रेखा है जो उस क्रय शक्ति को प्रकट करती है जिसके द्वारा लोग अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं को संतुष्ट कर सकते हैं।

प्रश्न 5.
ग़रीबी रेखा को निर्धारित करने के लिए भारत के योजना आयोग ने क्या मापदण्ड अपनाया है ?
उत्तर-
भारत का योजना आयोग ग़रीबी रेखा का निर्धारण आय व उपभोग स्तर पर सकता है।

प्रश्न 6.
ग़रीबी के दो मापदण्डों (निर्धारकों) के नाम लिखें।
उत्तर-
आय तथा उपभोग ग़रीबी के दो निर्धारक हैं।

प्रश्न 7.
ग़रीब परिवारों में सर्वाधिक दुःख किसे सहन करना पड़ता है ?
उत्तर-
गरीब परिवारों में बच्चे सबसे अधिक पीड़ित होते हैं।

प्रश्न 8.
भारत के दो सबसे अधिक ग़रीब राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर-
ओडिशा तथा विहार दो निर्धन राज्य हैं।

प्रश्न 9.
केरल राज्य में निर्धनता को सबसे कम कैसे किया है ?
उत्तर-
केरल राज्य मानव संसाधन विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।

प्रश्न 10.
पश्चिमी बंगाल को ग़रीबी कम करने में किसने सहायता की है ?
उत्तर-
भूमि सुधार उपायों ने पश्चिम बंगाल में ग़रीबी को कम करने में सहायता की है।

प्रश्न 11.
उच्च कृषि वृद्धि दर से ग़रीबी कम करने वाले दो राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर-
पंजाब और हरियाणा।

प्रश्न 12.
चीन व दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देश निर्धनता कम करने में सफल कैसे हुए ?
उत्तर-
चीन तथा दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों ने तीव्र आर्थिक संबृद्धि तथा मानव संसाधन विकास में निवेश से निर्धनता को कम किया है।

प्रश्न 13.
निर्धनता के कोई दो कारण लिखें।
उत्तर-

  1. निम्न आर्थिक संवृद्धि
  2. उच्च जनसंख्या घनत्व।

प्रश्न 14.
निर्धनता कम करने वाले कोई दो कार्यक्रमों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम
  2. संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना।

प्रश्न 15.
राजकीय विद्यालयों में निःशुल्क भोजन प्रदान करने वाले कार्यक्रम का नाम क्या है ?
उत्तर-
न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम।

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(रव) लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्धनता से क्या अभिप्राय है ? व्याख्या करें।
उत्तर-
निर्धनता से अभिप्राय है, जीवन, स्वास्थ्य तथा कार्यकुशलता के लिए न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं की प्राप्ति की अयोग्यता। इस न्यूनतम आवश्यकताओं में भोजन, वस्त्र, मकान, शिक्षा तथा स्वास्थ्य संबंधी न्यूनतम मानवीय आवश्यकताएं शामिल होती हैं। इस न्यूनतम मानवीय आवश्यकताओं के पूरा न होने से मनुष्यों को कष्ट उत्पन्न होता है। स्वास्थ्य तथा कार्यकुशलता की हानि होती है। इसके फलस्वरूप उत्पादन में वृद्धि करना तथा भविष्य में निर्धनता से छुटकारा पाना कठिन हो जाता है।

प्रश्न 2.
सापेक्ष व निरपेक्ष निर्धनता में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
निरपेक्ष निर्धनता से अभिप्राय किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है। अर्थशास्त्रियों ने इस संबंध में निर्धनता की कई परिभाषाएं दी हैं, परंतु अधिकतर देशों में प्रति व्यक्ति उपभोग की जाने वाली कैलौरी तथा प्रति व्यक्ति न्यूनतम उपभोग व्यय स्तर द्वारा निर्धनता को मापने का प्रयत्न किया गया है जबकि दूसरी ओर, सापेक्ष निर्धनता से अभिप्राय विभिन्न देशों की प्रति व्यक्ति आय की तुलना के आकार पर निर्धनता से है। जिस देश की प्रति व्यक्ति आय-अन्य देशों की प्रति व्यक्ति आय की तुलना में काफी कम है वह देश सापेक्ष रूप से निर्धन है।

प्रश्न 3.
निर्धन लोगों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है ?
उत्तर-
निर्धन लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है; जैसे- सूखा, अपवर्जन, भूखमरी आदि। अपवर्जन से अभिप्राय उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा कुछ लोग कुछ सुविधाओं, लाभों के अपवर्जित हो जाते हैं जो कि लोग अभोग करते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में ग़रीबी रेखा का अनुमान कैसे लगाया जाता है ?
उत्तर-
भारत में ग़रीबी रेखा का अनुमान करते समय जीवन निर्वाह के लिए खाद्य आवश्यकताओं, कपड़ों, जूतों, ईंधन और प्रकाश, शैक्षिक एवं चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं आदि पर विचार किया जाता है। इस भौतिक मात्राओं को रुपयों में उनकी कीमतों से गुणा कर दिया जाता है। निर्धनता रेखा का आकलन करते समय आवश्यकता के लिए वर्तमान सूत्र वांछित कैलोरी की आवश्यकताओं पर आधारित है।

प्रश्न 5.
निर्धनता के मुख्य निर्धारकों का वर्णन करें।
उत्तर-
निर्धनता के अनेक पहलू हैं, सामाजिक वैज्ञानिक उसे अनेक सूचकों के माध्यम से देखते हैं। सामान्यत प्रयोग किए जाने वाले सूचक वे हैं, जो आय और उपयोग के स्तर से संबंधित हैं, लेकिन अब निर्धनता को निरक्षरता स्तर, कुपोषण
के कारण रोग प्रतिरोधी क्षमता की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, रोज़गार के अवसरों की कमी, सुरक्षित पेयजल एवं स्वच्छता तक पहुंच की कमी आदि जैसे अन्य सामाजिक सूचकों के माध्यम से को भी देखा जाता है।

प्रश्न 6.
1993-94 ई० से भारत में निर्धनता के रूझान का वर्णन करें।
उत्तर-
पिछले दो दशकों से निर्धनता रेखा को नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है। अतः शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्धन लोगों की संख्या में काफी कमी आई है।
1993-94 में 4037 मिलियन लोग या 44.3% जनसंख्या निर्धनता रेखा को नीचे रह रही थी। निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लेगों की संख्या जो 2004-05 में 37.2% थी वह 2011-12 में और कम होकर 21.7% रह गई।

प्रश्न 7.
भारत में निर्धनता (ग़रीबी) में अंतराज्य असमानताओं का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
भारत में राज्यों के बीच निर्धनता का असमान रूप देखने को मिलता है। भारत में वर्ष 2011-12 में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत कम होकर 21.7 हो गया है परंतु ओडिशा व बिहार दो ऐसे राज्य हैं जहां निर्धनता का प्रतिशत क्रमश: 32.6 तथा 33.7 है। इसके दूसरी ओर केरल, हिमाचल प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश तमिलनाडु, गुजरात, पंजाब, हरियाणा आदि कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर निर्धनता काफी कम हुई है। इन राज्यों ने कृषि संवृद्धि दर तथा मानव पूंजी संवृद्धि में निवेश करके निर्धनता को कम किया है।

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प्रश्न 8.
भारत में निर्धनता के तीन प्रमुख कारण कौन-से हैं ?
उत्तर-
भारत में निर्धनता के कारण निम्न हैं

1. जनसंख्या का अधिक दबाव (Heavy Pressure of Population)-भारत में जनसंख्या में तीव्रता स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् अधिक हो गई। सन् 1951 के पश्चात् के समय को जनसंख्या विस्फोट का समय भी कहा जाता है क्योंकि उस समय जनसंख्या में तीव्रता आई। 1941-51 में जनसंख्या 1.0% थी जो 1981-91 में बढ़कर 2.1 प्रतिशत हो गई। 2011 में बढ़कर 121 करोड़ हो गई। शताब्दी के अंत तक हमारी जनसंख्या 100 करोड़ पहुंच चुकी है। देश की सम्पति का मुख्य भाग इस बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की संतुष्टि में खर्च हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप देश के विकास के लिए अन्य कार्यों में धन कम पड़ जाता है। यहीं नहीं निरंतर बढ़ती जनसंख्या से निर्भर जनसंख्या अधिक तथा कार्यशील जनसंख्या में कमी आ रही है जिस कारण उत्पादन के लिए कार्यशील जनसंख्या कम तथा निर्भर जनसंख्या अधिक है जो देश को और निर्धन बना देती है।

2. बेरोज़गारी (Unemployment)-भारत में जिस तरह जनसंख्या बढ़ रही है उसी तरह बेरोज़गारी भी निरंतर बढ़ती जा रही है। यह बढ़ती बेरोज़गारी निर्धनता को जन्म देती है जो देश के लिए अभिशाप साबित हो रही है। भारत में न केवल शिक्षित बेरोज़गारी बल्कि अदृश्य बेरोज़गारी की समस्या भी पनपती जा रही है। भारत में 2011-12 में लगभग 234 करोड़ लोग बेरोज़गार थे। वर्ष 2016-17 तक 0.59 करोड़ बेरोज़गार रहने का अनुमान है।

3. विकास की धीमी गति (Slow Growth of Development) भारत का विकास जो धीमी गति से हो रहा है इस कारण से भी निर्धनता बढ़ती जा रही है। योजनाओं की अवधि में सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर लगभग 4 प्रतिशत रही है परंतु जनसंख्या की वृद्धि दर लगभग 1.76 प्रतिशत होने से प्रतिशित आय में वृद्धि केवल 2-3 प्रतिशत हो गई है। 2013-14 में विकास दर 4.7% के लगभग प्राप्त की गई। भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर 1.76 प्रतिशत रही है। जनसंख्या की इस वृद्धि के अनुरूप विकास की गति धीमी है।

प्रश्न 9.
निर्धनता बेरोज़गारी को प्रकट करती है। स्पष्ट करें।
उत्तर-
जनसंख्या में होने वाली तीव्र वृद्धि से दीर्घकालिक बेरोज़गारी तथा अल्प रोज़गार की समस्या उत्पन्न हुई है। दोनों सरकारी तथा निजी क्षेत्र रोज़गार संभावनाएं उत्पन्न करने में असफल रहे हैं। अनियमित निम्न आय, निम्न आवास सुविधाएं निर्धनता को बढ़ा रही हैं। शहरी क्षेत्रों में शैक्षिक बेरोज़गारी पाई जाती है जबकि गांवों में अदृश्य बेरोज़गारी पाई जाती है जो कृषि क्षेत्र से संबंधित है। इस तरह निर्धनता, बेरोज़गारी का मात्र एक प्रतिबंब है।

प्रश्न 10.
आर्थिक वृद्धि में प्रोत्साहन निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम में सहायक है। स्पष्ट करें।
उत्तर-
भारत में निर्धनता को दूर करने का एक महत्त्वपूर्ण उपाय आर्थिक विकास की गति को तीव्रता से बढ़ाता है। जब संवृद्धि की दर को बढ़ावा दिया जाता है, तो कृषि तथा औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ते गए हैं, आर्थिक रोज़गार का अर्थ है कम निर्धनता। अस्सी के दशक से भारत की संवृद्धि दर विश्व में एक उभरती हुई संवृद्धि दर है। आर्थिक-संवृद्धि ने मानव विकास में निवेश द्वारा रोज़गार की संभावनाओं को बढ़ाया है।

प्रश्न 11.
राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार अधिनियम-2005 की मुख्य विशेषताएं कौन-सी हैं ?
उत्तर-
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (NREGA) 2005 वर्ष में 100 दिनों के रोज़गार की गारंटी देते हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोज़गार की सुरक्षा देता है इसमें कुल रोज़गार का 1/3 भाग महिलाओं के लिए आरक्षित है। केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर रोज़गार गारंटी के लिए कोष का निर्धारण करेंगी।

प्रश्न 12.
भारत सरकार द्वारा संचालित किन्हीं तीन ग़रीबी कम करने के कार्यक्रमों को स्पष्ट करें।
उत्तर-
भारत सरकार पंचवर्षीय योजनाओ के अंतर्गत निम्नलिखित उन्मूलन कार्यक्रम लागू कर रही है-

  1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)-इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन तथा रोजगार सृजन हेतु ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक परिवार के सदस्य को वर्ष में 100 दिन का रोज़गार प्रदान किया जाता है। इस कार्यक्रम के लिए ₹ 33.000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2013-14 में 475 करोड़ परिवारों को 219.72 करोड़ रोज़गार के व्यक्ति दिवस प्रदान किये गए।
  2. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2024-25 तक ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक ग़रीब परिवार को एक महिला सदस्य की स्वयं सहायता समूह (SHGs) का सदस्य बनाना है ताकि वे गरीबी रेखा से ऊपर रह सके। इस मिशन में 97.391 गाँवों को कवर करते हुए 20 लाख स्वयं सहायता समूह बनाए हैं जिसमें से 3.8 लाख नए SHGs हैं। वर्ष 2013-14 के दौरान ₹ 22121.18 करोड़ को बैंक शाख इन SHGs को प्रदान की जा चुकी है। वर्ष 2014-15 में NREM के लिए ₹ 3560 करोड़ की राशि आबंटित की गई है।
  3. राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) सितम्बर, 2013 में स्वर्ण जयंती शहरी रोज़गार योजना (SISRY) को बदलकर इसका नाम NULM रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरी गरीब परिवारों को कौशल निर्माण तथा प्रशिक्षण द्वारा लाभदायक रोज़गार के अवसर प्रदान करता है तथा शहरी बेघर लोगों को आश्रय प्रदान करना। वर्ष 201314 में NULM के अंतर्गत ₹720.43 करोड़ प्रदान किये गए हैं। इससे 6,83,542 लोगों का कौशल प्रशिक्षण हुआ है और 1,06,205 लोगों को स्वरोजगार प्रदान किया गया है।

अन्य अभ्यास के प्रश्न

आइए चर्चा करें :

प्रश्न 1.
चर्चा करें कि आपके गांव अथवा नगर में गरीब परिवार किन दशाओं में रहते हैं ?
उत्तर-
हमारे गांव अथवा नगर में निर्धन परिवारों को अनियमित रोज़गार अवसर, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, रहने की खराब दशाएं हैं तथा अपने बच्चे को पाठशालाओं में भी नहीं भेजते हैं।

प्रश्न 2.
ग्रामीण व नगरीय निर्धनता के दिए गए उदाहरणों के अध्ययन के पश्चात् निर्धनता के निम्नलिखित कारणों पर चर्चा करके मालूम करें कि कहानी में दिए गए परिवारों की निर्धनता का कारण निम्नलिखित कारणों में है अथवा कोई अन्य कारण है।

  • भूमिहीन परिवार
  • बेरोज़गारी
  • परिवार का दीर्घ (बड़ा आकार)
  • अशिक्षा
  • कमज़ोर स्वास्थ्य और कुपोषित।

उत्तर-
भूमिहीन परिवार-दोनों ही मामलों में परिवार भूमिहीन हैं। उनके पास कृषि के लिए भूमि नहीं है जिसके कारण वे गरीब हैं।
बेरोज़गारी-ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के दोनों ही मामलों में लोग बेरोज़गार हैं । वे बहुत ही कम मज़दूरी पर कार्य कर रहे हैं जिसमें उनका पेट भी नहीं भरता।
बड़ा परिवार-उनके परिवारों का आकार भी बड़ा है जो कि उनकी गरीबी का कारण है।
अशिक्षा-परिवार अशिक्षित हैं। वे अपने बच्चों को भी पाठशाला नहीं भेज पा रहे जिससे वे गरीबी में जकड़े हुए हैं।
कमज़ोर स्वास्थ्य और कुपोषित-गरीबी के कारण उनका स्वास्थ्य कमज़ोर है क्योंकि खाने को भरपेट नहीं मिलता। बच्चे कुपोषित हैं उनके लिए जूते, साबुन एवं तेल जैसी वस्तुएं भी आरामदायक वस्तुओं की श्रेणी में आती हैं।
ग्राफ 3.1 वर्ष 2011-12 दौरान चयन
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स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2013-14 वित मंत्रालय, भारत सरकार

आइए चर्चा करें

  1. ग्राफ 3.1 को देखिए, पांच सबसे अधिक निर्धन लोगों की प्रतिशतता वाले राज्यों के नाम लिखिए।
  2. उन राज्यों के नाम बताइए जहां निर्धनता के अनुमान 22% में कम तथा 15% से अधिक है।
  3. उन राज्यों के नाम बताइए जहां सबसे अधिक तथा सबसे कम निर्धनता प्रतिशतता है।

उत्तर-

  1. पांच राज्य जिनमें सबसे अधिक निर्धनता की प्रतिशतता है
    • बिहार
    • उड़ीसा
    • आसाम
    • महाराष्ट्र
    • उत्तर प्रदेश।
  2.  ऐसे राज्य पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र तथा गुजरात हैं।
  3. सबसे अधिक निर्धनता प्रतिशतता बिहार तथा सबसे कम केरल में है।

PSEB 9th Class Social Science Guide निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
1993-94 में भारत में निर्धनों का प्रतिशत था :
(क) 44.3%
(ख) 32%
(ख) 19.3%
(ग) 38.3%.
उत्तर-
(क) 44.3%

प्रश्न 2.
इनमें कौन निर्धनता निर्धारण का मापक है ?
(क) व्यक्ति गणना अनुपात
(ख) सेन का सूचकांक
(ग) निर्धनता अंतराल सूचकांक
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(ख) सेन का सूचकांक

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प्रश्न 3.
किस देश में डॉलर में प्रति व्यक्ति आय सबसे अधिक है ?
(क) U.S.A.
(ख) स्विट्ज़रलैंड
(ग) नार्वे
(घ) जापान।
उत्तर-
(ग) नार्वे

प्रश्न 4.
किस प्रकार की निर्धनता दो देशों में तुलना को संभव बनाती है ?
(क) निरपेक्ष
(ख) सापेक्ष
(ग) दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) सापेक्ष

प्रश्न 5.
कौन-सा राज्य भारत में सबसे अधिक निर्धन राज्य है ?
(क) ओडिशा
(ख) बिहार
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) ओडिशा

रिक्त स्थान भरें:

  1. ……….. से अभिप्राय है, जीवन, स्वास्थ्य तथा कार्यकुशलता के लिए न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं की प्राप्ति की अयोग्यता।
  2. ……….. निर्धनता से अभिप्राय किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से
  3. ………….. निर्धनता से अभिप्राय विभिन्न देशों की प्रति व्यक्ति-आय की तुलना के आधार पर निर्धनता से है।
  4. निर्धनता के ………….. प्रकार है।
  5. ………… वह है जो उस क्रय शक्ति को प्रकट करती है. जिसके द्वारा लोग अपनी न्यूनतम आवश्यकता को संतुष्ट कर सकते हैं।

उत्तर-

  1. निर्धनता
  2. सापेक्ष
  3. निरपेक्ष
  4. दो
  5. निर्धनता रेखा।

सही/गलत :

  1. निर्धनता के दो प्रकार हैं-सापेक्ष व निरपेक्ष निर्धनता।
  2. निर्धनता भारत की मुख्य समस्या है।
  3. व्यक्ति गणना अनुपात निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या को दर्शाती है।
  4. बढ़ रही जनसंख्या बढ़ रही निर्धनता को प्रकट करती है।
  5. व्यक्ति गणना अनुपात तथा निर्धनता प्रमाण अनुपात समान मदें हैं।

उत्तर-

  1. सही
  2. सही
  3. सही
  4. सही
  5. सही।

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न।

प्रश्न 1.
भारत में विश्व जनसंख्या का कितना भाग निवास करता है ?
उत्तर-
भारत में विश्व का \(\frac{1}{5}\) भाग निवास करता है।

प्रश्न 2.
UNICEF के अनुसार भारत में पांच वर्ष से कम आयु के मरने वाले बच्चों की संख्या क्या है ?
उत्तर-
लगभग 2.3 मिलियन बच्चे।

प्रश्न 3.
वर्ष 2011-12 में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत क्या था ?
उत्तर-
21.7 प्रतिशत।

प्रश्न 4.
निर्धनता के प्रकार क्या हैं ?
उत्तर-

  1. निरपेक्ष निर्धनता
  2. सापेक्ष निर्धनता।

प्रश्न 5.
कैलोरी क्या होती है ?
उत्तर-
एक व्यक्ति एक दिन में जितना भोजन करता है उसमें प्राप्त शक्ति को कैलोरी करते हैं।

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लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के सामने भावी चुनौती क्या है ?
उत्तर-
भारत में निर्धनता में निश्चित रूप में कमी आई है परंतु प्रगति के बावजूद निर्धनता उन्मूलन भारत की एक सबसे बाध्यकारी चुनौती है। भावी चुनौती निर्धनता की अवधारणा का विस्तार ‘मानव निर्धनता’ के रूप में होने से है। अतः भारत के सामने सभी को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रोज़गार सुरक्षा उपलब्ध कराना, लैंगिक समता तथा निर्धनों का सम्मान जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

प्रश्न 2.
ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्र में कैलोरी में अंतर क्यों है ?
उत्तर-
यह अंतर इसलिए है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग शारीरिक काम अधिक करते हैं जिससे उन्हें अधिक थकावट होती है। नगरीय लोगों की तुलना में उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
निर्धनता दूर करने के लिए उपाय बताएं।
उत्तर-
निर्धनता को निम्नलिखित उपायों द्वारा दूर किया जा सकता है-

  1. लघु व कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन।
  2. भारी उद्योग व हरित क्रांति के लिए प्रोत्साहन
  3. जनसंख्या नियंत्रण
  4. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम क्या है ?
उत्तर-
राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम’ को 2004 में सबसे पिछड़े 150 जिलों में निर्धनता उन्मूलन के लिए लागू किया गया था। यह कार्यक्रम उन सभी ग्रामीण निर्धनों के लिए है जिन्हें मज़दूरी पर रोज़गार की आवश्यकता है और जो अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हैं। इसका कार्यान्वयन शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण कार्यक्रमों के रूप में किया गया है और राज्यों को खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

प्रश्न 5.
निर्धनताग्रस्त कौन लोग हैं ?
उत्तर-
अनुसूचित जनजातियां, अनुसूचित जातियां, ग्रामीण खेतिहर मज़दूर, नगरीय अनियमित मज़दूर, वृद्ध लोग, ढाबों में काम करने वाले बच्चे, झुग्गियों में रहने वाले लोग, भिखारी आदि निर्धनताग्रस्त लोग हैं।

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम क्या है ?
उत्तर-
यह विधेयक सितंबर, 2005 में पारित किया गया है जो प्रत्येक वर्ष देश के 200 जिलों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के सुनिश्चित रोज़गार का प्रावधान करता है। बाद में इसका विस्तार 600 जिलों में किया जाएगा। इसमें एक तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित है।

प्रश्न 7.
राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम क्या है ? ।
उत्तर-
इस कार्यक्रम को वर्ष 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू किया गया था। यह कार्यक्रम उन सभी ग्रामीण निर्धनों के लिए है, जिन्हें मज़दूरी पर रोज़गार की आवश्यकता है और जो अकुशल शारीरिक काम करने निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती के इच्छुक हैं। इसका कार्यान्वयन शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण कार्यक्रम के रूप में किया गया है और राज्यों को खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रश्न 8.
प्रधानमंत्री रोजगार योजना पर नोट लिखें।
उत्तर-
यह योजना वर्ष 1993 में आरंभ की गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्हें लघु व्यवसाय और उद्योग स्थापित करने में सहायता दी जाती है।

प्रश्न 9.
ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम पर नोट लिखें।
उत्तर-
इसे वर्ष 1995 में आरंभ किया गया है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों व छोटे शहरों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। दसवीं पंचवर्षीय योजना में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 25 लाख नए रोज़गार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रश्न 10.
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना का वर्णन करें।
उत्तर-
इसका आरंभ वर्ष 1999 में किया गया है जिसका उद्देश्य सहायता प्राप्त निर्धन परिवारों को स्वसहायता समूहों में संगठित कर बैंक ऋण और सरकारी सहायिकी के संयोजन द्वारा निर्धनता रेखा से ऊपर लाना है।

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प्रश्न 11.
प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना क्या है ?
उत्तर-
इसे वर्ष 2000 में आरंभ किया गया है। इसके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण आश्रय, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी मूल सुविधाओं के लिए राज्यों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

प्रश्न 12.
वैश्विक निर्धन परिदृश्य पर नोट लिखें।
उत्तर-
विकासशील देशों में अत्यंत आर्थिक निर्धनता (विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार प्रतिदिन 1 डॉलर से कम पर जीवन-निर्वाह करना) में रहने वाले लोगों का अनुपात 1990 के 28.प्रतिशत से गिरकर 2001 में 21 प्रतिशत हो गया है। यद्यपि वैश्विक निर्धनता में उल्लेखनीय गिरावट आई है, लेकिन, इसमें बृहत्त क्षेत्रीय भिन्नताएं पाई जाती हैं।

प्रश्न 13.
भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण कैसे होता है ?
उत्तर-
भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण आय अथवा उपभोग स्तरों के आधार पर किया जाता है। आय आकलन के आधार पर 2000 में किसी व्यक्ति के लिए निर्धनता रेखा का निर्धारण ग्रामीण क्षेत्रों में ₹ 328 प्रतिमाह और शहरी क्षेत्रों में ₹ 454 प्रतिमाह किया गया था। उपभोग आकलन के आधार पर भारत में स्वीकृत कैलोरी आवश्यकता ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन एवं नगरीय क्षेत्रों में 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन है।

प्रश्न 14.
निर्धनता के मुख्य आयाम क्या हैं ?
उत्तर-
निर्धनता के मुख्य आयाम निम्नलिखित हैं-

  1. निर्धनता का अर्थ भूख एवं आवास का अभाव है।
  2. निर्धनता का अर्थ शुद्ध जल की कमी एवं और सफाई सुविधाओं का अभाव है।
  3. निर्धनता एक ऐसी स्थिति है, जब माता-पिता अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेज पाते या कोई बीमार आदमी इलाज नहीं करवा पाता।
  4. निर्धनता का अर्थ नियमित रोज़गार की कमी भी है तथा न्यूनतम शालीनता स्तर का अभाव भी है।
  5. निर्धनता का अर्थ असहायता की भावना के साथ जीना है।

प्रश्न 15.
अगले दस या पंद्रह वर्षों में निर्धनता के उन्मूलन में प्रगति होगी। इसके लिए उत्तरदायी कुछ कारण बताएं।
उत्तर-

  1. सार्वभौमिक निःशुल्क प्रारंभिक शिक्षा वृद्धि पर ज़ोर देना।
  2. आर्थिक संवृद्धि।
  3. जनसंख्या संवृद्धि में गिरावट।
  4. महिलाओं की शक्तियों में वृद्धि।

प्रश्न 16.
निर्धनता विरोधी कार्यक्रमों का परिणाम मिश्रित रहा है। कुछ कारण बताएं।
उत्तर-

  1. अति जनसंख्या।
  2. भ्रष्टाचार।
  3. कार्यक्रमों के उचित निर्धारण की कम प्रभावशीलता।
  4. कार्यक्रमों की अधिकता।

प्रश्न 17.
राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर-

  1. राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम सन् 2004 में देश के 150 सबसे अधिक पिछड़े जिलों में शुरू किया गया।
  2. यह कार्यक्रम सभी ग्रामीण निर्धनों के लिए है, जिन्हें मज़दूरी पर रोज़गार की आवश्यकता है और जो अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हैं।
  3. इसका कार्यान्वयन शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषित कार्यक्रम के रूप में किया गया है।

प्रश्न 18.
भारत में निर्धनता के कारण बताएं।
उत्तर-
भारत में निर्धनता के कारण निम्नलिखित हैं-

  1. ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन के दौरान आर्थिक विकास का निम्न स्तर।
  2. वैकल्पिक व्यवसाय न होने के कारण ग्रामीण लोगों की मात्र कृषि पर निर्भरता होना।
  3. आय की असमानताएं।
  4. जनसंख्या वृद्धि।
  5. सामाजिक कारण जैसे-निरक्षरता, बड़ा परिवार, उत्तराधिकार कानून और जाति-प्रथा आदि।
  6. सांस्कृतिक कारण जैसे-मेलों, त्योहारों आदि पर फिजूलखर्ची।
  7. आर्थिक कारण-ऋण लेकर उसे न चुका पाना।
  8. अक्षमता एवं भ्रष्टाचार के कारण निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रमों का प्रभावी ढंग से न लागू होना।

PSEB 9th Class SST Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती

प्रश्न 19.
निर्धनता उन्मूलन के कोई चार कार्यक्रमों का उल्लेख करें।
उत्तर-
ये निम्नलिखित हैं

  1. प्रधानमंत्री रोजगार योजना-इसे 1993 में प्रारंभ किया गया जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। .
  2. ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम-यह कार्यक्रम 1995 में आरंभ किया गया जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। दसवीं पंचवर्षीय योजना में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 25 लाख नए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  3. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना-इसका आरंभ 1999 में किया गया जिसका उद्देश्य सहायता प्राप्त निर्धन परिवारों को स्व-सहायता समूहों में संगठित कर बैंक ऋण और सरकारी सहायिकी के संयोजन द्वारा निर्धनता रेखा से ऊपर लाना है।
  4. प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना-इसका आरंभ 2000 में किया गया जिसके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण, आश्रय, ग्रामीण पेयजल और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी मूल सुविधाओं के लिए राज्यों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

प्रश्न 20.
निर्धनता का सामाजिक अपवर्जन क्या है ?
उत्तर-
इस अवधारणा के अनुसार निर्धनता को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि निर्धनों को बेहतर माहौल और अधिक अच्छे वातावरण में रहने वाले संपन्न लोगों की सामाजिक समता से अपवर्जित रहकर केवल निकृष्ट वातावरण में दूसरे निर्धनों के साथ रहना पड़ता है। सामान्य अर्थ में सामाजिक अपवर्जन निर्धनता का एक कारण व परिणाम दोनों हो सकता है। मोटे तौर पर यह एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति या समूह उन सुविधाओं, लाभों और अवसरों से अपवर्जित रहते हैं, जिनका उपभोग दूसरे करते हैं। इसका एक विशिष्ट उदाहरण भारत में जाति-व्यवस्था की कार्यशैली है, जिसमें कुछ जातियों के लोगों को समान अवसरों से अपवर्जित रखा जाता है।

प्रश्न 21.
निर्धनता की असुरक्षा धारणा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
निर्धनता के प्रति असुरक्षा एक माप है जो कुछ विशेष समुदाय या व्यक्तियों के भावी वर्षों में निर्धन होने या निर्धन बने रहने की अधिक संभावना जताता है। असुरक्षा का निर्धारण परिसंपत्तियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती अवसरों के रूप में जीविका खोजने के लिए विभिन्न समुदायों के पास उपलब्ध विकल्पों से होता है। इसके अलावा, इसका विश्लेषण प्राकृतिक आपदाओं, आतंकवाद आदि मामलों में इन समूहों के समक्ष विद्यमान बड़े जोखिमों के आधार पर किया जाता है। अतिरिक्त विश्लेषण इन जोखिमों से निपटने की उनकी सामाजिक और आर्थिक क्षमता के आधार पर किया जाता है। वास्तव में, जब सभी लोगों के लिए बुरा समय आता है, चाहे कोई बाढ हो या भूकंप या फिर नौकरियों की उपलब्धता में कमी, दूसरे लोगों की तुलना में अधिक प्रभावित होने की बड़ी संभावना का निरूपण ही असुरक्षा है।

प्रश्न 22.
भारत में अंतर्राष्ट्रीय असमानताएं क्या हैं ?
उत्तर-
भारत में निर्धनता का एक और पहलू है। प्रत्येक राज्य में निर्धन लोगों का अनुपात एक समान नहीं है। यद्यपि 1970 के दशक के प्रारंभ से राज्य स्तरीय निर्धनता में सुदीर्घकालिक कमी हुई है, निर्धनता कम करने में सफलता की दर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। हाल के अनुमान दर्शाते हैं कि 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निर्धनता अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम है। दूसरी ओर, निर्धनता अब भी उड़ीसा, बिहार, असम, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश की एक गंभीर समस्या है। इसकी तुलना में केरल, जम्मू व कश्मीर, आंध्र प्रदेश, गुजरात राज्यों में निर्धनता में कमी आई है।

प्रश्न 23.
राष्ट्रीय ग्रामीण बेरोज़गारी उन्मूलन विधेयक (NREGA) की, गरीबी उन्मूलन में सहायक प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
राष्ट्रीय बेरोज़गारी उन्मूलन विधेयक की मुख्य विशेषताएं हैं-

  1. यह विधेयक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के सुनिश्चित रोज़गार का प्रावधान करता है। यह विधेयक 600 जिलों में लागू करने का प्रस्ताव है जिससे निर्धनता को हटाया जा सके।
  2. प्रस्तावित रोज़गारों का एक तिहाई रोज़गार महिलाओं के लिए आरक्षित है।
  3. कार्यक्रम के अंतर्गत अगर आवेदक को 15 दिन के अंदर रोज़गार उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह दैनिक बेरोज़गार भत्ते का हकदार होगा।

प्रश्न 24.
निर्धनता के समक्ष निरूपाय दो सामाजिक तथा दो आर्थिक समुदायों के नाम लिखिए। इस प्रकार के समुदाय के लिए और अधिक बुरा समय कब आता है ?
उत्तर-
निर्धनता के समक्ष निरूपाय दो सामाजिक समुदायों के नाम हैं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवार जबकि आर्थिक समुदाय में ग्रामीण कृषि श्रमिक परिवार और नगरीय अनियप्त मज़दूर परिवार हैं। इन समुदायों के लिए और अधिक बुरा समय तब आता है जब महिलाओं, वृद्ध लोगों और बच्चियों को भी सुव्यवस्थित ढंग से परिवार के उपलब्ध संसाधनों तक पहुंच से वंचित किया जाता है।

प्रश्न 25.
भारत में निर्धनता को कम करने के किन्हीं तीन उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
सरकार द्वारा निर्धनता को कम करने के लिए सरकार ने कई कार्यक्रम अपनाए हैं

  1. राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना, 2005 को सितंबर में पारित किया गया। यह विधेयक प्रत्येक वर्ष देश के 200 जिलों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के सुनिश्चित रोज़गार का प्रावधान करता है।
  2. दूसरा, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम है जिसे 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू किया गया था।
  3. प्रधानमंत्री रोजगार योजना एक रोजगार सृजन योजना है, जिसे 1993 में आरंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है।

प्रश्न 26.
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की किन्हीं तीन विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की मुख्य विशेषताएं हैं-

  1. सार्वजनिक वितरण – प्रणाली भारतीय खाद्य निगम द्वारा अधिप्राप्त अनाज को सरकार विनियमित राशन की दुकानों के माध्यम से समाज के गरीब वर्गों में वितरित करती है।
  2. राशन कार्ड रखने वाला कोई भी परिवार प्रतिमाह अनाज की एक अनुबंधित मात्रा निकटवर्ती राशन की दुकानों से खरीद सकता है।
  3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लक्ष्य दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में सस्ता अनाज पहुंचाना था।

प्रश्न 27.
परिवारों के सदस्यों के मध्य आय की असमानता किस प्रकार प्रतिबिंबित होती है ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
परिवार के विभिन्न सदस्यों की आय भिन्न-भिन्न होती है तो यह आय की असमानता को प्रतिबिंबित करती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में 5 सदस्य हैं। उनकी आय का विवरण निम्नलिखित है-

परिवार के सदस्य मासिक आय (₹ में)
1 40,000
2 25,000
3 20,000
4 10,000
5 3,000

उपरोक्त तालिका में स्पष्ट है कि इस परिवार के सदस्यों के बीच आय की असमानता अधिक है। पहले सदस्य की आय जहां ₹ 40,000 मासिक है वहीं पाँचवें सदस्य की आय ₹ 3,000 मासिक है।

PSEB 9th Class SST Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : भारत के सम्मुख एक चुनौती

प्रश्न 28.
भारत में निर्धनता उन्मूलन के लिए विकसित किए गए किन्हीं पांच कार्यक्रमों पर नोट लिखिए।
उत्तर-
भारत में निर्धनता विरोधी पांच कार्यक्रम निम्नलिखित हैं-

  1. प्रधानमंत्री रोजगार योजना-इसे 1993 में प्रारंभ किया गया जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है।
  2. ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम-यह कार्यक्रम 1995 में आरंभ किया गया जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है।
  3. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना-इसे 1999 में आरंभ किया गया जिसका उद्देश्य सहायता प्राप्त निर्धन परिवारों को स्वसहायता समूहों में संगठित कर बैंक ऋण और सरकारी सहायिकी के संयोजन द्वारा निर्धनता रेखा से ऊपर लाना है।
  4. प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना-इसे 2000 में आरंभ किया गया जिसके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा, ग्रामीण आश्रय, ग्रामीण पेयजल और विद्युतीकरण जैसी मूल सुविधाओं के लिए राज्यों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
  5. अंत्योदय अन्न योजना-यह योजना दिसंबर, 2000 में शुरू की गई थी जिसके अंतर्गत लक्षित वितरण प्रणाली में आने वाली निर्धनता रेखा से नीचे के परिवारों में से एक करोड़ लोगों की पहचान की गई है।

प्रश्न 29.
“दो अग्रभागों पर असफलता : आर्थिक संवृद्धि को बढ़ाना तथा जनसंख्या नियंत्रण के कारण निर्धनता का चक्र स्थिर है।” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
निम्नलिखित कारणों से निर्धनता का चक्र स्थिर है।

  1. राज्यों की असमान वृद्धि दरें।
  2. औद्योगिक की दर का जनसंख्या वृद्धि दर से कम होना।
  3. शहरों की ओर प्रयास।
  4. ऋण-ग्रस्तता के ऊंचे स्तर।
  5. सामाजिक बंधन।
  6. भूमि का असमान वितरण।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण कैसे होता है ? .
उत्तर-
योजना आयोग ने “गरीबी रेखा की भौतिक उत्तरजीविता” (Physical survival) की संघटना को छठी योजना तक अपनाया, जिसके अनुसार उसने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक दिन में एक व्यक्ति के लिए 2400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्रों के लिए एक दिन में 2100 कैलोरी की न्यूनतम पौषिक आवश्यकताओं के आधार पर परिभाषित किया। इस कैलोरी अन्तर्ग्रहण को फिर मासिक प्रति व्यक्ति व्यय में परिवर्तित किया जाता है। योजना आयोग को एक विधि एक अध्ययन समूह, जिसमें डी० आर, गाडगिल, पी० एस० लोकनाथ, बी० एन० गांगुली और अशोक मेहता थे, ने सुझाई। इस समूह ने राष्ट्रीय गरीबी रेखा का निर्धारण किया और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि 1960-61 कीमतों पर ₹ 20 प्रति व्यक्ति प्रति मास निजी उपभोग व्यय न्यूनतम निर्वाह स्तर है। यह राशि चौथी योजना के लिए निश्चित की गई। बाद की योजनाओं में कीमतों के बढ़ने से यह राशि ऊँचे स्तर पर निश्चित की गई जो उन योजनाओं में गरीबी रेखा निर्धारित की गई। छठी योजना में ₹ 77 प्रति व्यक्ति प्रति मास ग्रामीण जनसंख्या के लिए ₹ 88 प्रति व्यक्ति मास शहरी जनसंख्या के लिए गरीबी रेखा का स्तर निर्धारित किया। इस आधार पर 1977-78 में 50.82 प्रतिशत ग्रामीण तथा 38.19 शहरी जनसंख्या निर्धन थी। दोनों को इकट्ठा कर लेने पर कुल जनसंख्या 48.13 प्रतिशत निर्धन थी।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा अपने 55वें दौर के सर्वेक्षण (जुलाई 1999-जून 2000) में उपभोक्ता व्यय के सम्बन्ध में उपलब्ध कराए गए अद्यतन वृहद् नमूना सर्वेक्षण आँकड़ों के अनुसार 30 दिवसीय प्रत्यावहन के आधार पर देश में गरीबी अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 27.09 प्रतिशत अनुमानित है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के अनुपात में वर्ष 1973-74 में 54.54% से निरन्तर गिरावट आई है जो वर्ष 1991-2000 में 27.09 प्रतिशत के स्तर तक पहँच गई। इस तरह, देश में अभी भी लगभग 20 करोड़ ग्रामीण जनसंख्या गरीबी की रेखा से नीचे का जीवन व्यतीत कर रही है। यद्यपि देश में गरीबी में व्यापक स्तर पर गिरावट आई है। फिर भी ग्रामीण गरीबी अनुपात अभी भी उड़ीसा, बिहार तथा उत्तरी पूर्व राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक है।

प्रश्न 2.
निर्धनता को दूर करने के उपाय बताएं।
उत्तर-
ये उपाय निम्न हैं

1. पूँजी निर्माण की दर को बढ़ाना (High Rate of Capital Formation)-यह तो सब जानते हैं कि पूँजी निर्माण की दर जितनी ऊँची होगी, साधारणतया आर्थिक विकास भी उतनी ही तीव्र गति से सम्भव हो सकेगा। इसका कारण यह है कि विकास के प्रत्येक कार्यक्रम के लिए चाहे उसका सम्बन्ध कृषि की उत्पादकता में वृद्धि लाने से हो अथवा औद्योगीकरण या शिक्षा या स्वास्थ्य की व्यवस्था बढ़ने से हो, अधिकाधिक मात्रा में पूँजी की आवश्यकता होती है। यदि पर्याप्त मात्रा में पूँजी उपलब्ध है तो विकास का कार्य ठीक प्रकार से चल सकेगा अन्यथा नहीं। अतः देश में पूँजी निर्माण की ओर ध्यान देना अत्यन्त आवश्यक है। पूँजी निर्माण के लिए आवश्यक है कि लोग अपनी कुल आय को वर्तमान उपभोग पर व्यय न करके उसके एक भाग को बचाएँ और उसे उत्पादन कार्यों में विनियोग करें अथवा लगाएं। इस दृष्टि से हमें चाहिए कि हर ढंग से लोगों को प्रोत्साहित करें कि वे उपभोग के स्तर को सीमित करें। फिजूलखर्चों से बचें और आय के अधिकाधिक भागों को बचाकर उत्पादन क्षेत्र में लगाएँ। देश में साख मुद्रा और कर सम्बन्धी नीतियों में ठीक परिवर्तन लाकर पूँजी निर्माण की दर को ऊपर उठाया जा सकता है।

2. उत्पादन नीतियों में सुधार (Improved Methods of Production) उत्पादन की आधुनिक विधियाँ और साज समान को अपनाना चाहिए, तभी उत्पादन की मात्रा में अधिकाधिक वृद्धि लाकर लोगों का जीवन-स्तर ऊपर उठाया जा सकता है। लेकिन ऐसा करते समय हमें अपनी विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा। केवल उन्नत देशों की नकल से काम नहीं चलेगा। कारण, उनकी और हमारी परिस्थितियों में बहुत बड़ा अन्तर है। हमें चाहिए कि ऐसे नए तरीकों और साज-समान को अपनाएँ जिनमें अपेक्षाकृत बहुत अधिक मात्रा में पूँजी की आवश्यकता न पड़ती हो और श्रम की अधिक खपत हो सकती हो।

3. न्यायोचित वितरण (Better Distribution)-पूँजी-निर्माण की दर को ऊँचा करने तथा उत्पादन के नए तरीकों को अपनाने से उत्पादन को मात्रा में निश्चय ही भारी वृद्धि होगी। फलस्वरूप राष्ट्रीय आय में वृद्धि लाने से ही सर्वसाधारण की ग़रीबी दूर न होगी, उनका जीवन स्तर ऊपर न उठ सकेगा। साथ ही उसके ठीक विभाजन व वितरण के लिए भी आर्थिक व्यवस्था करना आवश्यक है जिससे आय और सम्पत्ति की विषमता घटे और देश में आर्थिक शक्ति का अधिक समान वितरण सम्भव हो सके। हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे जिन लोगों की आय बहुत कम है, उन की आय बढ़े और उन्हें अधिक लाभप्रद अवसर मिलें और साथ ही जिससे धन का संचय एक स्थान पर न होने पाए तथा समृद्धिशालियों के साधनों में अपेक्षाकृत कमी हो।

4. जनसंख्या पर नियन्त्रण (Population Control)-देश के तीव्र आर्थिक विकास के लिए हमें एक और कार्य करना होगा। वह है तेज़ी से बढ़ती हुई देश की भारी जनसंख्या पर नियन्त्रण करना। जब लोगों की आय और व्यय का स्तर नीचा होता है और जनसंख्या में वृद्धि का क्रम ऊँचा होता है तो आर्थिक विकास की गति में भारी रुकावट पैदा होती है। कारण, ऐसी परिस्थिति में श्रमिकों को बढ़ती हुई संख्या के लिए उपभोक्ता पदार्थों (Consumer’s goods) की आवश्यकताएँ और लाभप्रद रोज़गार की कमी है।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 6 जनसंख्या

SST Guide for Class 9 PSEB जनसंख्या Textbook Questions and Answers

(क) मानचित्र कार्य :

प्रश्न 1.
1. सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश।
2. सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश।
3. प्रति वर्ग किलोमीटर 1000 से अधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश।
4. प्रति वर्ग किलोमीटर 1000 से कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश।
उत्तर-
यह प्रश्न विद्यार्थी MBD Map Master की सहायता से स्वयं करें।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो शब्दों से एक वाक्य में दें:

प्रश्न 1.
पंजाब की जनसंख्या की कारोबारी बनावट का चार्ट अध्यापक की सहायता से तैयार करें और कक्षा के कमरे में लगाओ।
उत्तर-
यह प्रश्न विद्यार्थी अपने अध्यापकों की सहायता से स्वयं करें।

प्रश्न 2.
पंजाब की जनसंख्या का ज़िले अनुसार लिंग अनुपात की सूची तैयार करें और इस संबंधी अध्यापक जी से चर्चा करें।
उत्तर-
यह प्रश्न विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-से राज्य की जनसंख्या घनत्व 2011 की जनगणना अनुसार सबसे अधिक है ?
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) बिहार
(iii) बंगाल
(iv) केरल।
उत्तर-
(ii) बिहार।

प्रश्न 4.
एक स्थान से नई जगह जाकर निवास की क्रिया को क्या कहते है ?
(i) आवास
(ii) स्वतंत्रता
(iii) नगरीकरण
(iv) प्रवास।
उत्तर-
(iv) प्रवास।

प्रश्न 5.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब के कितने फीसदी लोग कृषि संबंधी कार्यों में हैं ?
(i) 35.5
(ii) 40.5
(iii) 30.5
(iv) 27.5.
उत्तर-
(i) 35.5.

प्रश्न 6.
मादा भ्रूण हत्या से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
माँ की कोख में ही मादा भ्रूण खत्म करने को मादा भ्रूण हत्या कहते हैं। इससे लिंग अनुपात कम हो जाता है।

प्रश्न 7.
देश का सामाजिक तथा आर्थिक विकास का पता लगाने के लिए जरूरी तत्त्व कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
साक्षरता, स्वास्थ्य, आय इत्यादि किसी देश के सामाजिक व आर्थिक विकास का पता करने के लिए आवश्यक तत्त्व हैं।

प्रश्न 8.
किसी स्थान की जनसंख्या बढ़ौतरी (फीसदी) कैसे पता की जाती है ?
उत्तर-
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (1) के फार्मूले से जनसंख्या बढ़ौतरी (फीसदी) का पता किया जाता है।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 9.
विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर-
विश्व जनसंख्या दिवस प्रति वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है।

(ग) इन प्रश्नों के संक्षेप उत्तर दें :

प्रश्न 1.
जनसंख्या के पक्ष से भारत की विश्व में स्थिति पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
2011 की जनसंख्या गणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,21,05,69,573 अर्थात् 121 करोड़ से कुछ अधिक थी। अगर हम 2016 के अनुमानित आँकड़ों की तरफ देखें तो यह 132 करोड़ तक पहुँच गई है। इस समय संपूर्ण संसार की जनसंख्या 742 करोड़ से अधिक है। भारत का क्षेत्रफल 32 लाख 87 हज़ार वर्ग किलोमीटर है जो क्षेत्रफल के पक्ष से संसार में सातवें स्थान पर आता है तथा यह 2.4% ही बनता है। परंतु अगर हम जनसंख्या के पक्ष से तुलना करें तो
हमारा संसार में दूसरा स्थान है तथा हमारे देश में संसार की कुल जनसंख्या का 16.7% बसता है। इस समय संसार के लगभग छः लोगों में से एक भारतीय है।

प्रश्न 2.
पंजाब का एक व्यस्क, जनसंख्या घनत्व, लिंग अनुपात और साक्षरता के पक्ष से कौन-से स्थान पर होगा ?
उत्तर-

  • जनसंख्या के पक्ष से पंजाब का भारत में 15वां स्थान है तथा इसकी जनसंख्या 2,77,43,338 है।
  • जनसंख्या घनत्व के पक्ष से पंजाब का जनसंख्या घनत्व 2011 में 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था जो 2001 में 484 व्यक्ति था।
  • लिंग अनुपात के पक्ष से पंजाब का लिंग अनुपात 2011 में 1000 : 895 था जो काफी कम है। पंजाब में 2011 में बच्चा लिंग अनुपात 1000 : 846 था।
  • पंजाब की साक्षरता दर 75.8% है जो सम्पूर्ण देश में चौदहवें स्थान पर है।

प्रश्न 3.
प्रवास के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं ?
उत्तर-

  1. रोजगार की तलाश में प्रवास करना।
  2. कृषि करने के लिए भूमि ढूँढने के लिए प्रवास करना।
  3. धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्रवास करना।
  4. अधिक आय की आशा में प्रवास करना।
  5. मजबूरी में प्रवास करना।
  6. राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए प्रवास करना।
  7. विवाह करवाने के लिए अपना क्षेत्र छोड़ देना।
  8. बढ़िया सुविधाओं के लिए गाँव से नगरों को प्रवास करना।

प्रश्न 4.
साक्षरता दर कैसे पता चलती है ? साक्षरता पक्ष से पंजाब कौन-से मुख्य राज्यों से पिछड़ा हुआ है ?
उत्तर-
भारत में जनगणना के उद्देश्य से जो व्यक्ति किसी भी भारतीय भाषा में पढ़-लिख सकता है, वह साक्षर अथवा पढ़ा लिखा है। 1991 में यह निर्णय किया गया कि 7 वर्ष से कम आयु वाले सभी बच्चों को अनपढ़ माना जाएगा। यह निर्णय 2001 तथा 2011 की जनगणना में भी लागू किया गया। साक्षरता दर पता करने का एक सूत्र है :
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (2)
अगर हम भारत में पंजाब की साक्षरता दर की स्थिति देखें तो यह चौदहवें स्थान पर आता है। पंजाब की साक्षरता दर 75.8%, है। यह केरल (94%), मिज़ोरम (91.3%), गोवा (88.7%), त्रिपुरा (87.2%) इत्यादि राज्यों से काफी पीछे है।।

प्रश्न 5.
पंजाब के गांव-शहरी जनसंख्या विभाजन पर नोट लिखें।
उत्तर-
पंजाब की कुल जनसंख्या 2,77,43,338 है तथा इसमें से 1,03,99,146 व्यक्ति नगरों में तथा 1,73,44,192 व्यक्ति गांवों में रहते हैं। इस प्रकार 37.5% लोग नगरों में तथा 62.5% लोग गाँवों में रहते हैं। नगरों की जनसंख्या 2001 की जनगणना के अनुसार 33.9% थी जो 2011 में 37.5% हो गई है। वास्तव में नगरों में अधिक सुविधाओं, पढ़ाई-लिखाई तथा रोजगार के अधिक अवसर होते हैं जिस कारण नगरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। 2001 से 2011 के बीच साहिबजादा अजीत सिंह नगर जिले में सबसे अधिक नगरीकरण हुआ है जहां 54.8% लोग नगरों में रहते हैं । तरनतारन में केवल 12.7% लोग ही नगरों में रहते हैं, बाकी 87.3% लोग गाँवों के वासी हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि धीरे-धीरे नगरों की जनसंख्या बढ़ रही है।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 से अवगत कराएं।
उत्तर-
वर्ष 2000 में भारत सरकार ने कई उद्देश्यों को सामने रख कर राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का निर्माण किया जिसके । उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

  1. 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को आवश्यक तथा निःशुल्क शिक्षा देना।
  2. प्राथमिक तथा सैकेंडरी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करना।
  3. बाल मृत्यु दर को 30 प्रति 1000 तक लेकर आना।
  4. मातृ मृत्यु दर को एक लाख के पीछे 100 से कम करना।
  5. छोटे परिवार को प्राथमिक देना।
  6. लड़कियों को 18 वर्ष से पहले विवाह न करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  7. बच्चों के जन्म को संस्थाओं तथा ट्रेंड व्यक्तियों से करवाने पर बल देना।
  8. 2045 तक स्थिर जनसंख्या का लक्ष्य प्राप्त करना।

(घ) निम्नलिखित प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दें :

प्रश्न 1.
किशोर आयु वर्ग को क्या-क्या मुख्य कठिनाइयां हो सकती हैं ?
उत्तर-
जब एक बच्चा 10 वर्ष की आयु पार कर जाता है तो वह किशोरावस्था में शामिल हो जाता है। यह अवस्था 10 वर्ष से 19 वर्ष तक चलती है। इस अवस्था में बच्चे में काफी शारीरिक तथा मानसिक परिवर्तन आते हैं जिस कारण उन्हें बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जिनका वर्णन इस प्रकार है-

  1. बाल विवाह-देश के कई भागों में आज भी बाल विवाह प्रचलित है जिस कारण इस आयु में आते ही उनका विवाह कर दिया जाता है। इस कारण उनका शारीरिक व मानसिक विकास रुक जाता है तथा उन्हें पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता।
  2. बाल मजदूरी-देश की बहुत बड़ी जनसंख्या आज भी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। इस कारण घर के बच्चों को घर का खर्चा चलाने के लिए मज़दूरी या कोई अन्य कार्य करना पड़ता है। इस प्रकार पढ़ने की आयु में उन पर घर चलाने का दबाव पड़ जाता है।
  3. नशीली दवाओं का प्रयोग-इस आयु में बच्चे काफी जल्दी गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं तथा कई बच्चे और लोगों को देखकर नशा करने लग जाते हैं। इससे उनका भविष्य खराब हो जाता है।
  4. अच्छी खुराक न मिलना-इस आयु में शारीरिक व मानसिक विकास के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है जो निर्धनता के कारण उन्हें मिल नहीं पाती। उन्हें कम आहार पर गुजारा करना पड़ता है तथा इस कारण शारीरिक विकास नहीं हो पाता।
  5. स्कूल से हटाना-इस आयु में बच्चे पढ़ते-लिखते हैं तथा अपना भविष्य बनाते हैं। परंतु यह देखा गया है कि बहुत से लोग बच्चों को स्कूल से ही निकाल लेते हैं तथा कोई कार्य करने के लिए लगा देते हैं ताकि घर में पैसे आ सकें।
  6. रक्त की कमी-पौष्टिक आहार न मिलने के कारण उनके रक्त की कमी हो जाती है जिस कारण वह अपनी प्रतिभा का ठीक ढंग से उपयोग नहीं कर पाते।

प्रश्न 2.
जनसंख्या प्रवास संबंधी भारत और पंजाब की स्थितियों पर चर्चा करें।
उत्तर-
किसी भी क्षेत्र की जनसंख्या एक समान नहीं रहती। उसके घटने बढ़ने में जन्म दर तथा मृत्यु दर का काफी बड़ा हाथ होता है। परंतु इसके साथ-साथ प्रवास की भी इसमें काफी बड़ी भूमिका होती है। परंतु प्रश्न यह उठता है कि प्रवास होता क्या है ? वास्तव में प्रवास का अर्थ है जनसंख्या अथवा लोगों का एक भौगोलिक क्षेत्र को छोड़ कर दूसरे क्षेत्र में जाकर रहने लग जाना। यह गतिशीलता अथवा प्रवास स्थायी भी हो सकता है तथा अस्थायी भी।

1. भारत की स्थिति- इसमें कोई शंका नहीं है कि भारत के बहुत से लोग प्रत्येक वर्ष विदेशों की तरफ प्रवास कर जाते हैं। उत्तर भारत के लोगों के मुख्य देश जहां वह प्रवास करना पसंद करते हैं, वह हैं अमेरिका, कैनेडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी इत्यादि इसके साथ ही दक्षिण भारत विशेषतया केरल के लोग खाड़ी देशों में जाना पसंद करते हैं। वास्तव में प्रत्येक व्यक्ति अधिक से अधिक पैसे कमाना चाहता है जिस कारण वह पश्चिमी देशों की तरफ प्रवास कर जाते हैं। उन देशों की करंसी की कीमत हमारे देश की करंसी की कीमत से काफी अधिक है जिस कारण वह पश्चिमी देशों की तरफ आकर्षित हो जाते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, आई.टी. से संबंधित व्यक्ति हमेशा इस प्रयास में रहते हैं कि कब बाहर के देश में जाकर पैसे कमा सकें। इससे भारतीय लोग अन्य देशों की तरफ आकर्षित हो जाते हैं।

2. पंजाब की स्थिति-अन्य भारतीयों की तरह बहुत से पंजाबी भी बाहर के देशों की तरफ प्रवास करना पसंद करते हैं। जालंधर दोआब के क्षेत्र के बहुत से गांवों के अधिकतर पुरुष पश्चिमी देशों की तरफ प्रवास कर गए हैं तथा धीरे-धीरे अपने परिवारों को भी वहां पर लेकर जा रहे हैं। उनके पसंदीदा देश हैं कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका तथा इंग्लैंड। पंजाबी वहां के डॉलरों के प्रति खींचे चले जाते हैं।

अगर पंजाबी बाहर के देशों की तरफ जा रहे हों तो बहुत से लोग पंजाब आ भी रहे हैं । यह वे प्रवासी मज़दूर हैं जो उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों से पंजाब आकर पैसे कमाते हैं। वे यहां के कारखानों में कार्य करते हैं, खेतों में कार्य करते हैं ताकि अधिक पैसे कमाए जा सकें। 2011 में 21,30,262 व्यक्ति पंजाब आए थे जो कि राज्य की जनसंख्या का 8.7% बनता है।

प्रश्न 3.
भारतीय जनसंख्या का घनत्व के आधार पर विभाजन करें।
उत्तर-
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है। परंतु प्रादेशिक स्तर पर जनसंख्या घनत्व में भारी अंतर है। जनसंख्या घनत्व बिहार में सबसे अधिक है तो सबसे कम अरुणाचल प्रदेश में है। केंद्र शासित प्रदेशों में यह अन्तर और भी अधिक है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक (9340 व्यक्ति) है, जबकि अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह में यह मात्र 46 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है।

1. अधिक जनसंख्या घनत्व-प्रादेशिक स्तर पर, अधिक जनसंख्या घनत्व (400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० से अधिक) वाले क्षेत्र सतलुज, गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के डेल्टे हैं। यहां पर उपजाऊ मिट्टी तथा अच्छी वर्षा के कारण कृषि का विकास अच्छा है। इसके अतिरिक्त बड़े औद्योगिक एवं प्रशासनिक नगरों जैसे लुधियाना, गुड़गांव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, कानपुर, पटना, कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई, अहमदाबाद, बंगलौर (बंगलुरू) एवं हैदराबाद के आसपास भी अधिक जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (3)
2. कम जनसंख्या घनत्व-कम जनसंख्या घनत्व (200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० से कम) वाले क्षेत्र ऐसे हैं जो भौतिक विकलांगता से ग्रस्त हैं। ऐसे क्षेत्र हैं-

  • उत्तर में हिमालय पर्वत श्रेणियों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल के पहाड़ी भाग,
  • पूर्व में अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय तथा त्रिपुरा राज्यों में,
  • पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय भाग, गुजरात के दलदलीय क्षेत्रों तथा
  • दक्षिण आंतरिक प्रायद्वीपीय पठार में मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी कर्नाटक, तेलंगाना एवं तमिलनाडु का कुछ भाग शामिल हैं।

3. औसत जनसंख्या घनत्व-अधिक जनसंख्या घनत्व के क्षेत्रों के बाह्य भाग औसत जनसंख्या घनत्व (200 से 300 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी०) के क्षेत्र कहलाते हैं। सामान्यतः ये क्षेत्र कम और अधिक जनसंख्या घनत्व के क्षेत्रों के बीच पड़ते हैं। ऐसे क्षेत्र संख्या में कम ही हैं।
इससे इस बात का आभास हो जाता है कि भारत में जनसंख्या वितरण एवं घनत्व में भारी प्रादेशिक असमानताएं हैं।

प्रश्न 4.
भारतीय जनसंख्या के स्वास्थ्य और कार्य पक्ष की चर्चा करें।
उत्तर-
1. स्वास्थ्य-स्वास्थ्य को जनसंख्या की संरचना का एक महत्त्वपूर्ण भाग माना जाता है जो विकास की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। सरकारों के लगातार प्रयासों के कारण भारत की जनसंख्या के स्वास्थ्य स्तर में महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ है। मृत्यु दर जो 1951 में 25 प्रति हज़ार थी वह 2011 में कम होकर 7.9 प्रति हज़ार रह गई है। इस प्रकार औसत आयु जो 1951 में 36.7 वर्ष थी, वह 2011 में बढ़ कर 65.2 वर्ष हो गई है। यह महत्त्वपूर्ण सुधार बहुत से कारणों की वजह से ही मुमकिन हो पाया है जैसे कि जनता का स्वास्थ्य, संक्रामक बिमारियों से बचाव तथा बिमारियों के इलाज में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग। सरकार ने हज़ारों अस्पताल, डिस्पेंसरियां तथा स्वास्थ्य केन्द्र खोले हैं ताकि जनता को बढ़िया स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सके परंतु फिर भी स्वास्थ्य का स्तर मुख्य चिंता का विषय है। प्रति व्यक्ति कैलोरी की खपत अभी भी कम है। हमारी जनसंख्या के एक बड़े भाग को अभी भी सही भोजन नहीं मिल पाता है। साफ पीने का पानी तथा मूल स्वास्थ्य सुविधाएं केवल एक तिहाई ग्रामीण जनता के लिए ही मौजूद हैं। इन मुश्किलों को दूर करने के लिए एक सही जनसंख्या नीति की आवश्यकता है।

2. पेशे-आर्थिक रूप से कार्यशील जनसंख्या का प्रतिशत विकास का एक महत्त्वपूर्ण सूचक होता है। अलग-अलग प्रकार के पेशों के अनुसार की गई जनसंख्या के विभाजन को पेशों की संरचना कहा जाता है। किसी भी देश में अलग-अलग पेशों को करने वाले लोग भी अलग-अलग होते हैं, पेशों को तीन भागों-प्राथमिक, द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी में बाँटा जाता है।

    • प्राथमिक श्रेणी-इसमें कृषि, पशुपालन, वृक्ष लगाना, मछली पालना तथा खनन इत्यादि शामिल हैं।
    • द्वितीय श्रेणी-इसमें उद्योग, घर बनाना तथा निर्माण कार्य में लगे लोग शामिल होते हैं।
    • तृतीय श्रेणी-इसमें अपनी सेवा देने वाले लोग शामिल हैं जैसे कि प्रशासन, बैंकिंग, बीमा क्षेत्र इत्यादि।

विकसित तथा विकासशील देशों में अलग-अलग कार्यों में लगे लोगों का अनुपात भी अलग होता है। विकसित देशों में द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी में अधिक लोग लगे होते हैं। विकासशील देशों में प्राथमिक क्षेत्र में अधिक लोग लगे होते हैं। भारत में 53% जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र में लगी हुई है। इस प्रकार द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी में 13% तथा 20% लोग लगे हुए हैं। वर्तमान समय में औद्योगीकरण तथा नगरीकरण के बढ़ने के कारण द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी में काफी परिवर्तन आया है।

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

PSEB 9th Class Social Science Guide जनसंख्या Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
जनसंख्या की दृष्टि भारत का विश्व में स्थान है-
(क) दूसरा
(ख) चौथा
(ग) पाँचवां
(घ) नौवां।
उत्तर-
(क) दूसरा

प्रश्न 2.
पंजाब में पूरे देश की लगभग जनसंख्या निवास करती है-
(क) 1.3%
(ख) 2.3%
(ग) 3.2%
(घ) 1.2%.
उत्तर-
(ख) 2.3%

प्रश्न 3.
देश की कितने प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है ?
(क) 70%
(ख) 75%
(ग) 78%
(घ) 71%.
उत्तर-
(घ) 71%

प्रश्न 4.
2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में जनसंख्या घनत्व है-
(क) 888
(ख) 944
(ग) 551
(घ) 933.
उत्तर-
(ग) 551

प्रश्न 5.
2011 की जनगणना के अनुसार देश में प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या थी-
(क) 943
(ख) 933
(ग) 939
(घ) 894.
उत्तर-
(क) 943

प्रश्न 6.
देश के किस राज्य का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है ?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) बिहार
(ग) राजस्थान
(घ) तमिलनाडु।
उत्तर-
(ख) बिहार

प्रश्न 7.
देश के किस राज्य का जनसंख्या घनत्व सबसे कम है ?
(क) मिज़ोरम
(ख) सिक्किम
(ग) अरुणाचल प्रदेश
(घ) नागालैंड।
उत्तर-
(ग) अरुणाचल प्रदेश

प्रश्न 8.
पंजाब में 2011 में लिंग अनुपात कितना था ?
(क) 943
(ख) 866
(ग) 872
(घ) 895.
उत्तर-
(घ) 895.

प्रश्न 9.
देश के किस जिले की जनसंख्या सबसे अधिक है ?
(क) थाने
(ख) उत्तर चौबीस
(ग) दिबांग घाटी
(घ) अनजाह।
उत्तर-
(क) थाने

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 10.
इनमें से कौन-सा प्रवास का कारण है ?
(क) रोज़गार की तलाश
(ख) कमाई की आशा
(ग) धार्मिक स्वतंत्रता
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपर्युक्त सभी।

रिक्त स्थान की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)

  1. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल शहरी जनसंख्या लगभग ……… है।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों का प्रतिशत …………… है।
  3. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या घनत्व ………… प्रति वर्ग किलोमीटर है।
  4. देश में मुख्य श्रमिकों का प्रतिशत ……………. है।
  5. देश में मुख्य श्रमिकों का सबसे अधिक प्रतिशत …………. में है।
  6. देश में 15-65 आयु वर्ग में …………. प्रतिशत जनसंख्या है।

उत्तर-

  1. 1.35 करोड़,
  2. 40%
  3. 382,
  4. 37.50,
  5. आंध्रप्रदेश,
  6. 58.4

सही/गलत (True/False)

  1. जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में भारत का पहला स्थान है। ( )
  2. देश के पर्वतीय तथा मरुस्थलीय क्षेत्रों में जनसंख्या बहुत सघन है। ( )
  3. निर्धन देशों में बाल्य आयु वर्ग (0-14 वर्ष) की जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है। ( )
  4. भारत में लिंग-अनुपात कम अर्थात् प्रतिकूल है। ( )
  5. जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि दर जन्म-दर तथा मृत्यु दर के अंतर पर निर्भर करती है। ( )

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✗)
  3. (✓)
  4. (✓)
  5. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या घनत्व का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
किसी क्षेत्र के एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले लोगों की औसत संख्या को उस क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 2.
भारत के जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक कौन-सा है और क्यों ?
उत्तर-
कृषि उत्पादकता।

प्रश्न 3.
भारत के अति सघन आबाद दो भागों के नाम बताइए।
उत्तर-
भारत में ऊपरी गंगा घाटी तथा मालाबार में अति सघन जनसंख्या है।

प्रश्न 4.
भारत के किन प्रदेशों की जनसंख्या का घनत्व कम है ?
उत्तर-
भारत के उत्तरी पर्वतीय प्रदेश, घने वर्षा वनों वाले उत्तर-पूर्वी प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान के अत्यंत शुष्क क्षेत्र और गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जन-घनत्व कम है।

प्रश्न 5.
नगरों में जनसंख्या के बहुत तेजी से बढ़ने से क्या दुष्परिणाम हुए हैं ?
उत्तर-
नगरों में जनसंख्या के बहुत तेजी से बढ़ने के कारण उपलब्ध संसाधनों और जन-सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा है।

प्रश्न 6.
स्त्री-पुरुष अथवा लिंग अनुपात से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
प्रति हज़ार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को लिंग अनुपात कहते हैं।

प्रश्न 7.
अर्जक जनसंख्या से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
अर्जक जनसंख्या से अभिप्राय उन लोगों से है जो विभिन्न व्यवसायों में काम करके धन कमाते हैं।

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प्रश्न 8.
आश्रित जनसंख्या क्या होती है ?
उत्तर-
आश्रित जनसंख्या में वे बच्चे तथा बूढ़े आते हैं जो काम नहीं कर सकते अपितु अर्जक जनसंख्या पर आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 9.
मृत्यु-दर के तेज़ी से घटने का मुख्य कारण बताएं।
उत्तर-
मृत्यु-दर के तेज़ी से घटने का मुख्य कारण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रसार है।

प्रश्न 10.
भारत में सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है ?
उत्तर-
सिक्किम।

प्रश्न 11.
भारत में जनसंख्या घनत्व कितना है ?
उत्तर-
382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 12.
पश्चिमी बंगाल में जनसंख्या घनत्व कितना है ?
उत्तर-
1082 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 13.
भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य का नाम बताइए।
उत्तर-
बिहार।

प्रश्न 14.
भारत में सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य कौन-सा है ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 15.
भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार लिंग-अनुपात है ?
उत्तर-
943 स्त्रियां प्रति एक हज़ार पुरुष।

प्रश्न 16.
भारत में सबसे अधिक साक्षरता दर वाला राज्य कौन-सा है ?
उत्तर-
केरल।

प्रश्न 17.
भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है ?
उत्तर-
अरुणाचल प्रदेश।

प्रश्न 18.
दिल्ली का जनसंख्या घनत्व क्या है ?
उत्तर-
11297 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 19.
मानव संसाधन विकास का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
मानव संसाधन विकास से तात्पर्य लोगों में इन चार बातों का विकास करने से है-

  1. शिक्षा
  2. तकनीकी कुशलता
  3. स्वास्थ्य
  4. पोषण।

प्रश्न 20.
आजादी से पहले देश की जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ने के क्या कारण थे ?
उत्तर-
महामारियों, लड़ाइयों तथा अकाल के कारण मृत्यु दर में वृद्धि।

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प्रश्न 21.
वर्ष 1901 में भारत की जनसंख्या कितनी थी ?
उत्तर-
वर्ष 1901 में भारत की जनसंख्या 23,83,96,327 (23.8 करोड़) थी।

प्रश्न 22.
वर्ष 2001 में भारत की जनसंख्या कितनी थी ?
उत्तर-
वर्ष 2001 में भारत की जनसंख्या 102.7 करोड़ थी।

प्रश्न 23.
भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर-
भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में (चीन के पश्चात्) दूसरा स्थान है।.

प्रश्न 24.
भारत के कितने राज्यों की जनसंख्या पांच करोड़ से अधिक है ?
उत्तर-
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 10 राज्यों की जनसंख्या 5 करोड़ से अधिक है।

प्रश्न 25.
देश के सबसे अधिक और सबसे कम जनसंख्या वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर-
देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश और सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य सिक्किम है।

प्रश्न 26.
पंजाब की जनसंख्या 2011 में कितनी थी और जनसंख्या की दृष्टि से पंजाब का राज्यों में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर-

  1. वर्ष 2011 में पंजाब की जनसंख्या लगभग 2.77 करोड़ थी।
  2. जनसंख्या की दृष्टि से पंजाब का भारत के राज्यों में 15वां स्थान है।

प्रश्न 27.
पंजाब में पूरे देश की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है ?
उत्तर-
पंजाब में पूरे देश की लगभग 2.3 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

प्रश्न 28.
एक लाख की आबादी से अधिक के भारत में कितने शहर हैं ?
उत्तर-
भारत में एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या 300 से अधिक है।

प्रश्न 29.
मैदानी भागों में देश की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है ?
उत्तर-
मैदानी भागों में देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

प्रश्न 30.
देश की कितने प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है ?
उत्तर-
देश की लगभग 68% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

प्रश्न 31.
देश में जनसंख्या का औसत घनत्व कितना है ?
उत्तर-
देश में जनसंख्या का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर (2011 में) है।

प्रश्न 32.
देश के सबसे अधिक व सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के नाम बताओ।
उत्तर-
2011 की जनगणना के अनुसार देश का सबसे अधिक घनत्व वाला राज्य बिहार तथा सबसे कम घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश है।

प्रश्न 33.
पंजाब में जनसंख्या का घनत्व कितना है ?
उत्तर-
पंजाब में जनसंख्या का घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर (2011 में) है।

प्रश्न 34.
किस केंद्र शासित प्रदेश का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है ?
उत्तर-
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है।

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प्रश्न 35.
आयु संरचना को निर्धारित करने वाले तत्त्वों के नाम बताइए।
उत्तर-

  1. जन्मता (fertility)
  2. मर्त्यता (mortality)
  3. प्रवास (migration)।

प्रश्न 36.
देश में 0-14 आयु वर्ग में कितने प्रतिशत जनसंख्या है ?
उत्तर-
देश में 0-14 आयु वर्ग में 37.2 प्रतिशत जनसंख्या है।

प्रश्न 37.
देश में 15-65 आयु वर्ग में कितने प्रतिशत जनसंख्या है ?
उत्तर-
देश में 15-65 आयु वर्ग में 58.4 प्रतिशत जनसंख्या है।

प्रश्न 38.
लिंग-अनुपात से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लिंग-अनुपात से अभिप्राय प्रति एक हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या से है।

प्रश्न 39.
वर्ष 2011 में देश की जनसंख्या का लिंग अनुपात क्या था ?
उत्तर-
वर्ष 2011 में देश की जनसंख्या का लिंग-अनुपात 1000 : 943 था।

प्रश्न 40.
वर्ष 2001 में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों का अलग-अलग लिंग अनुपात क्या था ?
उत्तर-
वर्ष 2001 में ग्रामीण क्षेत्रों का लिंग अनुपात 939 तथा शहरों में 894 प्रति हजार पुरुष था।

प्रश्न 41.
देश के ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में लिंग अनुपात तेजी से क्यों घट रहा है ?
उत्तर-
लिंग अनुपात के तेज़ी से घटने के कारण हैं

  1. स्त्रियों का दर्जा निम्न होना।
  2. जनगणना के समय स्त्रियों की अपेक्षाकृत कम गणना करना या पुरुषों की गणना बढ़ाकर करना।
  3. लड़कियों की जन्म दर कम होना।
  4. स्त्री भ्रूण-हत्या (Female foeticide)।

प्रश्न 42.
आर्थिक आधार पर भारत की जनसंख्या को किन दो भागों में बांट सकते हैं ?
उत्तर-
आर्थिक आधार पर जनसंख्या को दो भागों में बांट सकते हैं-

  1. श्रमिक जनसंख्या
  2. अश्रमिक जनसंख्या।

प्रश्न 43.
जन्म दर क्या होती है ?
उत्तर-
किसी विशेष क्षेत्र में 1000 व्यक्तियों के पीछे एक वर्ष में पैदा हुए बच्चों की संख्या को जन्म दर कहते हैं।

प्रश्न 44.
मृत्यु दर किसे कहते हैं ?
उत्तर-
किसी विशेष क्षेत्र में 1000 व्यक्तियों के पीछे एक वर्ष में मरे व्यक्तियों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं।

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प्रश्न 45.
प्रवास क्या होता है?
उत्तर-
व्यक्तियों के एक भौगोलिक क्षेत्र को छोड़ कर दूसरे भौगोलिक क्षेत्र में जाकर रहने की प्रक्रिया को प्रवास कहते हैं।

प्रश्न 46.
किशोरावस्था क्या होती है ?
उत्तर-
10 वर्ष से 19 वर्ष तक की अवस्था को किशोरावस्था कहते हैं।

प्रश्न 47.
किशोरावस्था की एक समस्या बताएं।
उत्तर-
इस आयु में कई शारीरिक परिवर्तन आते हैं जो किशोरों को काफी अजीब लगता है।

प्रश्न 48.
पंजाब में प्रवासी मजदूरों के आने का एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब के उद्योगों तथा खेतों में कार्य करके पैसा कमाने के लिए प्रवासी मज़दूर पंजाब आते हैं।

प्रश्न 49.
पंजाब में कौन-से राज्यों से प्रवासी मजदूर आते हैं ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल इत्यादि।

प्रश्न 50.
देश के कौन-से जिलों में सबसे अधिक व सबसे कम जनसंख्या है ?
उत्तर-
अधिक जनसंख्या-थाने (महाराष्ट्र)- 1,10,60,148 व्यक्ति कम जनसंख्या-दिबांग घाटी (अरुणाचल प्रदेश)-8004 व्यक्ति।

प्रश्न 51.
देश की साक्षरता दर कितनी है ?
उत्तर-
2011 में देश की साक्षरता दर 74.04% थी।

प्रश्न 52.
पंजाब के किस जिले में लिंग अनुपात सबसे अधिक है ?
उत्तर-
होशियारपुर 1000 : 961.

प्रश्न 53.
पंजाब के किस जिले में सबसे अधिक साक्षरता दर है ?
उत्तर-
होशियारपुर-84.16%.

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
जनगणना से आप क्या समझते हैं ? इस पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
भारत सरकार प्रत्येक दस वर्ष के पश्चात् जनसंख्या की गिनती करवाती है जिसे जनगणना (Census Survey) कहते हैं। इस गिनती के साथ-साथ लोगों की आयु, लिंग, घर, साक्षरता इत्यादि के बारे में भी जानकारी एकत्र की जाती है। देश में प्रथम बार जनगणना सन् 1872 में हुई थी तथा उसके पश्चात् प्रत्येक दशक के प्रथम वर्ष में जनगणना करवाई जाती है। 2011 की जनगणना देश की 15वीं जनगणना थी जिसमें 22 अरब रुपये खर्च हुए थे तथा 27 लाख अधिकारियों ने इसमें भाग लिया था।

प्रश्न 2.
जनसंख्या वितरण एवं जनसंख्या घनत्व के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जनसंख्या वितरण का संबंध स्थान से तथा घनत्व का संबंध अनुपात से है। जनसंख्या वितरण का अर्थ यह है कि देश के किसी एक भाग में जनसंख्या का क्षेत्रीय प्रारूप (pattern) कैसा है। हम यह भी कह सकते हैं कि जनसंख्या वितरण में इस बात की जानकारी प्राप्त की जाती है कि जनसंख्या प्रारूप फैलाव लिए है या इसका एक ही । स्थान पर अधिक जमाव है। इसके विपरीत जनसंख्या घनत्व में, जिसका संबंध जनसंख्या आकार एवं क्षेत्र से होता है, मनुष्य तथा क्षेत्र के अनुपात पर ध्यान दिया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में जनसंख्या वितरण पर किन-किन तत्त्वों का सबसे अधिक प्रभाव है ?
उत्तर-
भारत में जनसंख्या का वितरण एक समान नहीं है। इसके लिए निम्नलिखित अनेक तत्त्व उत्तरदायी हैं

  1. भूमि का उपजाऊपन-भारत के जिन राज्यों में उपजाऊ भूमि का अधिक विस्तार है, वहां जनसंख्या का घनत्व अधिक है। उत्तर प्रदेश तथा बिहार ऐसे ही राज्य हैं।
  2. वर्षा की मात्रा अधिक वर्षा वाले भागों में प्राय: जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। उत्तरी भारत में पूर्व से पश्चिम को जाते हुए वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। इसलिए जनसंख्या का घनत्व भी घटता जाता है।
  3. जलवायु-जहां जलवायु स्वास्थ्य के लिए अनुकूल है, वहां भी जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। इसके विपरीत ऐसे प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है जहां की जलवायु स्वास्थ्य के लिए अच्छी न हो। असम में वर्षा अधिक होते हुए भी जनसंख्या का घनत्व कम है क्योंकि यहां अधिक नमी के कारण मलेरिया का प्रकोप अधिक रहता है।
  4. परिवहन के उन्नत साधन-परिवहन के साधनों के अधिक विकास के कारण व्यापार की प्रगति तीव्र हो जाती है जिससे जनसंख्या का घनत्व भी अधिक हो जाता है। उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, बिहार, झारखंड इत्यादि राज्यों में अधिक जनसंख्या होने का एक कारण परिवहन के साधनों का विकास है।
  5. औद्योगिक विकास-जिन स्थानों पर उद्योग स्थापित हो जाते हैं, वहां जनसंख्या का घनत्व बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में आजीविका कमाना सरल होता है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि नगरों में औद्योगिक विकास के कारण ही जनसंख्या अधिक है।

प्रश्न 4.
भारत को गांवों का देश क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत गांवों का देश है। निम्नलिखित तथ्यों से यह बात स्पष्ट हो जाएगी-

  1. देश की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में बसी है।
  2. देश की कुल जनसंख्या का लगभग 71% भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है।
  3. देश में 5 लाख 50 हजार से अधिक ग्रामीण अधिवासी (Rural Settlements) हैं जबकि कुल शहरी जनसंख्या का दो तिहाई भाग देश के बड़े नगरों में बसा हुआ है।
  4. देश में कुल मुख्य श्रमिकों का 40.1 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में तथा 30.2 प्रतिशत नगरों में निवास करता है।

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या के क्षेत्रीय वितरण की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर-
भारत में जनसंख्या के क्षेत्रीय वितरण की कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है। नदियों की घाटियों और समुद्र तटीय मैदानों में जनसंख्या वितरण बहुत सघन है, परंतु पर्वतीय, मरुस्थलीय एवं अभाव-ग्रस्त क्षेत्रों में जनसंख्या वितरण बहुत ही विरल है।
  2. देश की कुल जनसंख्या का लगभग 71% भाग ग्रामीण क्षेत्रों में और 29% भाग शहरों में निवास करता है। शहरी जनसंख्या का भारी जमाव बड़े शहरों में है। कुल शहरी जनसंख्या का दो-तिहाई भाग एक लाख या इससे अधिक आबादी वाले प्रथम श्रेणी के शहरों में रहता है।
  3. देश के अल्पसंख्यक समुदायों का अति संवेदनशील एवं महत्त्वपूर्ण बाह्य सीमा क्षेत्रों में जमाव है। उदाहरण के लिए उत्तर-पश्चिमी भारत में भारत-पाक सीमा के पास पंजाब में सिक्खों तथा जम्मू-कश्मीर जो कि अब एक केन्द्र शासित प्रदेश है, में मुसलमानों का बाहुल्य है।

प्रश्न 6.
जनसंख्या घनत्व का क्या अर्थ है ? भारत में जनसंख्या घनत्व के बारे में बताएं।
उत्तर-
एक वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में जितने व्यक्ति रहते हैं, उसे जनसंख्या घनत्व कहते हैं। किसी क्षेत्र में कितने व्यक्ति रहते हैं यह केवल जनसंख्या घनत्व देख कर ही पता किया जा सकता है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। देश के कई राज्य हैं जहां जनसंख्या घनत्व काफी अधिक है जैसे कि बिहार (1106), पश्चिम बंगाल (1028), केरल (860), उत्तर प्रदेश (829), पंजाब (551) इत्यादि। परंतु कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां का जनसंख्या घनत्व काफी कम है जैसे कि नागालैंड (119), सिक्किम (86), मिज़ोरम (52), अरुणाचल प्रदेश (17) इत्यादि। केंन्द्र शासित प्रदेशों में दिल्ली (11297) का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है।

प्रश्न 7.
जनसंख्या बढ़ौतरी पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
किसी भी देश या स्थान की जनसंख्या एक समान नही रहती बल्कि इसमें समय के साथ-साथ परिवर्तन आते रहते हैं। इस कारण एक विशेष समय के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में जनसंख्या में आए सकारात्मक परिवर्तन को जनसंख्या बढ़ौतरी कहा जाता है। जनसंख्या बढ़ौतरी कई कारणों की वजह से हो सकती है जैसे कि जन्म दर का बढ़ना, मृत्यु दर का कम होना, देश में विदेशों से लोगों का आकर रहना। 2001 से लेकर 2011 में भारत की जनसंख्या में 17.68% तथा पंजाब में यह 13.9% थी। जनसंख्या बढ़ौतरी को एक सूत्र से पता किया जा सकता है-
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (4)

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 8.
जनसंख्या बढ़ौतरी के लिए उत्तरदायी कुछ कारकों के नाम लिखें।
उत्तर-
जनसंख्या बढ़ौतरी के लिए कई कारक उत्तरदायी हैं जैसे कि-

  1. अगर जन्म दर अधिक हो तथा मृत्यु दर कम हो तो जनसंख्या बढ़ जाती है।
  2. अगर लड़कियों का विवाह कम आयु में हो जाए तो भी जनसंख्या बढ़ने का खतरा हो जाता है।
  3. अगर देश की जलवायु जीवन जीने के अनुकूल है तो भी जनसंख्या बढ़ जाती है।
  4. विवाह की सर्वव्यापकता भी जनसंख्या बढ़ने के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 9.
आयु संरचना (Age Composition) पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
किसी क्षेत्र, राज्य अथवा देश की जनसंख्या को अलग-अलग आयु वर्गों में बाँटने की प्रक्रिया को आयु संरचना कहते हैं। सम्पूर्ण जनता को साधारणतया तीन समूहों में बाँटा जाता है। प्रथम समूह में 0-14 वर्ष की आयु के व्यक्ति आते हैं जिन्हें बच्चा समूह कहा जाता है। द्वितीय समूह में 15-64 वर्ष के व्यक्ति आते हैं जिसे बालिग या कार्यशील समूह कहा जाता है। तृतीय तथा अंतिम समूह में 65 वर्ष या इससे अधिक आयु के व्यक्ति आते हैं जिसे वृद्ध समूह कहा जाता है। प्रथम तथा तृतीय समूह अपनी आवश्यकताओं के लिए द्वितीय समूह पर निर्भर करता है। इस कारण इन्हें निर्भर समूह भी कहा जाता है। निर्भरता अनुपात को एक सूत्र के द्वारा दर्शाया जाता है।
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (5)

प्रश्न 10.
लिंग अनुपात क्या है ? भारत में लिंग अनुपात का वर्णन करें।
उत्तर-
किसी विशेष क्षेत्र में 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या को ही लिंग अनुपात कहा जाता है। भारत में 2011 में लिंग अनुपात 1000 : 943 था अर्थात् 1000 पुरुषों के पीछे 943 स्त्रियां थीं। भारत में लिंग अनुपात कम है। केवल केरल (1084) तथा पुडुचेरी (1037) में स्त्रियां अधिक हैं। बाकी सभी राज्यों में यह काफी कम है। किसी भी देश में स्त्रियों की स्थिति का पता करने के लिए लिंग अनुपात देखना बहुत ज़रूरी है। पिछले कुछ समय से सरकार की कठोरता के कारण लिंग अनुपात में काफी सुधार हो रहा है।

प्रश्न 11.
भारत में लिंग अनुपात कम होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
भारत में लिंग-अनुपात कम होने के कारणों के बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी कहना संभव नहीं है। परंतु भारतीय समाज में स्त्री का दर्जा निम्न होना इसका एक प्रमुख कारण माना जाता है। परिवार व्यवस्था में उसे निम्न दर्जा दिया गया है और पुरुष को ऊँचा। इसी कारण कम आयु में लड़कियों के स्वास्थ्य, खान-पान तथा देख-भाल की ओर कम ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप निम्न आयु वर्ग (0-6 वर्ष) में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की मृत्यु-दर अधिक है।
लिंग अनुपात कम होने के अन्य प्रमुख कारण हैं-जनगणना के समय स्त्रियों की अपेक्षाकृत कम गणना करना या पुरुषों की गणना बढ़ाकर करना, लड़कियों की जन्म दर कम होना तथा स्त्री भ्रूण-हत्या।

प्रश्न 12.
उत्तर भारत के राज्यों में लिंग अनुपात कितना है ?
उत्तर-
उत्तर भारत के राज्यों में लिंग अनुपात प्रतिकूल है। इसका अर्थ यह है कि इन राज्यों में प्रति हज़ार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या कम है। यह बात 2011 में भारत के 5 उत्तरी राज्यों में लिंग अनुपात से स्पष्ट हो जाती है, जो इस प्रकार है

  1. बिहार 912,
  2. राजस्थान 935,
  3. पंजाब 899,
  4. उत्तर प्रदेश 910 तथा
  5. हरियाणा 885.

प्रश्न 13.
जनसंख्या की आर्थिक संरचना का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
जनसंख्या की आर्थिक संरचना का विशेष महत्त्व है-

  1. इससे हमें पता चलता है कि देश की जनसंख्या का कितना भाग कार्यशील है और वह किस-किस व्यवसाय में जुटा हुआ है।
  2. यह संरचना किसी क्षेत्र की जनसांख्यिकीय तथा सांस्कृतिक लक्षणों को प्रकट करती है। इसी पर उस क्षेत्र के भविष्य का सामाजिक तथा आर्थिक विकास का प्रारूप आधारित होता है।
  3. आर्थिक संरचना से हमें पता चलता है कि देश किस आर्थिक क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। अतः हम उस क्षेत्र के विकास के लिए उचित योजना बना सकते हैं।

प्रश्न 14.
देश की जनसंख्या की संरचना का अध्ययन करना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
किसी देश की जनसंख्या की संरचना को जानना क्यों आवश्यक है, इसके कई कारण हैं-

  1. सामाजिक एवं आर्थिक नियोजन के लिए किसी भी देश की जनसंख्या के विभिन्न लक्षणों जैसे जनसंख्या की आयु-संरचना, लिंगसंरचना, व्यवसाय संरचना आदि के आंकड़ों की आवश्यकता पड़ती है।
  2. जनसंख्या की संरचना के विभिन्न घटकों का देश के आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। जहां एक ओर ये जनसंख्या संरचना घटक आर्थिक विकास से प्रभावित होते हैं, वहीं ये आर्थिक विकास की प्रगति एवं स्तर के प्रभाव से भी अछूते नहीं रह पाते। उदाहरण के लिए यदि किसी देश की जनसंख्या की आयु संरचना में बच्चों तथा बूढ़े लोगों का प्रतिशत बहत अधिक है तो देश को शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर अधिक-से-अधिक वित्तीय साधनों को खर्च करना पड़ेगा। दूसरी ओर, आयु संरचना में कामगार आयु-वर्गों (Working age-groups) का भाग अधिक होने से देश के आर्थिक विकास की दर तीव्र हो जाती है।

प्रश्न 15.
आयु संरचना के अध्ययन के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
आयु संरचना के अध्ययन के अनेक लाभ हैं

  1. बाल आयु वर्ग (0-14) की कुल जनसंख्या ज्ञात होने से सरकार को इन बातों का स्पष्ट पता लग सकता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में कितनी सुविधाओं की आवश्यकता है। इसी के अनुसार नये स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक केंद्रों आदि का निर्माण कराया जाता है।
  2. साथ ही देश में कितने लोग मताधिकार वर्ग में हैं, इस बात की जानकारी भी हो सकती है। मताधिकार वर्ग के लोगों की जानकारी होना प्रजातंत्र में अत्यंत आवश्यक है। आयु संरचना के आंकड़ों के हिसाब से लगभग 58 प्रतिशत मतदाता होने चाहिएं, परंतु देश में 60 प्रतिशत मतदाता हैं।

प्रश्न 16.
किशोरावस्था में किशोरों की आवश्यकताओं के बारे में बताएं।
उत्तर-

  1. किशोरों को बढ़िया तथा संतुलित खुराक मिलनी चाहिए।
  2. उन्हें सही वातावरण में सही शिक्षा मिलनी चाहिए।
  3. उन्हें शारीरिक परिवर्तनों की सही जानकारी होनी चाहिए।
  4. माता-पिता तथा समाज की तरफ से उन्हें प्यार से सभी बातें समझानी चाहिए।
  5. उन्हें नशों से बचाने के प्रयास करने चाहिए। 6. उन्हें अच्छा भविष्य बनाने के लिए लगातार परामर्श दिए जाने चाहिए।

प्रश्न 17.
किशोरों का भविष्य बनाने में समाज, अध्यापकों व माता-पिता की क्या भूमिका है ?
उत्तर-

  1. माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उन्हें अच्छी शिक्षा तथा अच्छा वातावरण प्रदान कर सकते हैं।
  2. माता-पिता तथा बच्चों को ठीक रास्ते पर चलाने के लिए, नशों से दूर रहने तथा समाज के उत्तरदायी नागरिक बनने की तरफ रास्ता दिखा सकते हैं।
  3. अध्यापक किशोरों को सही शिक्षा देकर उन्हें समाज के अच्छे नागरिक बनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
  4. समाज के अलग-अलग सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक नेता उन्हें सही रास्ता दिखा कर समाज के उत्तरदायी नागरिक बनने के रास्ते पर डाल सकते हैं।

प्रश्न 18.
पंजाब की लिंग आधारित संरचना पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
पंजाब की कुल जनसंख्या 2,77,43,338 है जिसमें 1,46,39,465 पुरुष तथा 1,31,03873 स्त्रियां हैं। इनका लिंग अनुपात 1000 : 895 बनता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक 1000 पुरुषों के पीछे 895 स्त्रियां हैं जो काफी कम हैं। नगरों में यह 875 है तथा गांवों में 907 है जो 2001 की तुलना में थोड़ा-सा अधिक है। होशियारपुर जिले (861) का लिंग अनुपात सबसे अधिक है जबकि शहीद भगत सिंह नगर (954), जालंधर (915) तथा रूपनगर (915) इसके पश्चात् आते हैं। सबसे कम लिंग अनुपात बठिंडा (868) हैं। फिर फतेहगढ़ साहिब (871) का जिला आता है। पिछले दशकों में इसमें सुधार हो रहा है जो सरकारी प्रयासों का परिणाम है।
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (6)

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 19.
पंजाब की कारोबारी संरचना पर रोशनी डालें।
उत्तर-
पंजाब के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है जिस कारण यहां की अधिकतर जनता कृषि या संबंधित कार्यों में लगी हुई है। पंजाब के कुल कार्यरत लोगों का 35.5% हिस्सा कृषि या संबंधित कार्यों में लगा हुआ है। 3.9% लोग घरेलू, उद्योगों में कार्य कर रहे हैं। बाकी 60.5% लोग अन्य कई प्रकार के कार्यों में लगे हुए हैं। मुक्तसर तथा मानसा जिलों में सबसे अधिक लोग कृषि में लगे हुए हैं परंतु लुधियाना तथा साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर में काफी कम लोग कृषि में तथा बाकी लोग औद्योगिक क्षेत्र, सेवाओं इत्यादि में लगे हुए हैं। पंजाब में बहुत से लोग नौकरी की तलाश में देश-विदेश में भी गए हुए हैं।

प्रश्न 20.
मादा भ्रूण हत्या का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
लोगों में कई कारणों के कारण लड़की के स्थान पर लड़के को प्राप्त करने की इच्छा होती है। वह कई ढंगों का प्रयोग करते हैं ताकि लड़की के स्थान पर लड़के को प्राप्त किया जा सके। जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो पहले तीन-चार माह तक माँ के गर्भ में बच्चा पूर्णतया विकसित नहीं हुआ होता है। इसे अभी भी भ्रूण ही कहा जाता है। आजकल ऐसी मशीनें आ गई हैं जिनसे माता के पेट में ही टैस्ट करके पता कर लिया जाता है कि होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की। अगर गर्भ में पल रहा बच्चा लड़का है तो ठीक है परंतु लड़की है तो उसका गर्भपात करवा दिया जाता है अर्थात् माता की कोख में ही लड़की को मार दिया जाता है। इसे ही मादा भ्रूण हत्या कहते हैं।

प्रश्न 21.
मादा भ्रूण हत्या के कारण बताएं।
उत्तर-

  1. लड़का प्राप्त करने की इच्छा मादा भ्रूण हत्या को जन्म देती है।
  2. तकनीकी सुविधाओं के बढ़ने के कारण अब गर्भ में ही बच्चे के लिंग का पता कर लिया जाता है जिस कारण लोग मादा भ्रूण हत्या की तरफ बढ़े हैं।
  3. लड़की के बड़े होने पर उसे दहेज देना पड़ता है तथा लड़का होने पर दहेज आता है। यह कारण भी लोगों को मादा भ्रूण हत्या करने के लिए प्रेरित करता है।
  4. यह कहा जाता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति का दाह संस्कार तथा और संस्कार बेटा ही पूर्ण करता है। इस कारण भी लोग लड़का प्राप्त करना चाहते हैं।
  5. लड़कों से यह आशा की जाती है कि वह बुढ़ापे में अपने माता-पिता की देखभाल करेंगे तथा लड़कियां विवाह के बाद अपने ससुराल चली जाएंगी। इस सामाजिक सुरक्षा की इच्छा के कारण भी लोग लड़का चाहते हैं।

प्रश्न 22.
मादा भ्रूण हत्या के परिणाम बताएं।
उत्तर-

  1. मादा भ्रूण हत्या के कारण समाज में लिंग अनुपात कम होना शुरू हो जाता है। भारत में यह 1000 : 940 है।
  2. कम होते लिंग अनुपात के कारण समाज में असंतुलन बढ़ जाता है क्योंकि पुरुषों की संख्या बढ़ जाती है तथा स्त्रियों की संख्या कम हो जाती है।
  3. इस कारण स्त्रियों के विरुद्ध हिंसा भी बढ़ जाती है। अपहरण, बलात्कार, छेड़छाड़ इत्यादि जैसी घटनाएं भी बढ़ जाती हैं।
  4. मादा भ्रूण हत्या के कारण स्त्रियों की सामाजिक स्थिति और निम्न हो जाती है क्योंकि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन हो जाती है।

प्रश्न 23.
देश के मैदानी भागों में जनसंख्या घनत्व अधिक होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
देश के मैदानी भागों में का घनत्व बहुत अधिक है। इसके मुख्य कारण अग्रलिखित हैं-

  1. भारत का उत्तरी मैदान विशाल और उपजाऊ है।
  2. यहां वर्षा भी पर्याप्त होती है। इसलिए कृषि के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध हैं।
  3. यहां उद्योग के भी बड़े-बड़े केंद्र हैं।
  4. यहां यातायात के साधन उन्नत हैं।
  5. तटीय मैदानी प्रदेशों में मछली पकड़ने तथा विदेशी व्यापार की सुविधाएं हैं। परिणामस्वरूप लोगों के लिए रोजी कमाना सरल है।

प्रश्न 24.
देश में कम जनसंख्या वाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
भारत के थार मरुस्थल, पूर्वी हिमालय प्रदेश तथा छोटा नागपुर के पठार में जनसंख्या कम आबाद है। कारण-

  1. इन प्रदेशों की भूमि उपजाऊ नहीं है। यह या तो रेतीली है या पथरीली।
  2. यहां यातायात के साधनों का विकास नहीं हो सका है।
  3. यहां की जलवायु स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है। यह या तो अत्यधिक गर्म है या अत्यधिक ठंडी। हिमालय क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक वर्षा होती है।
  4. छोटा नागपुर क्षेत्र को, छोड़कर अन्य भागों में निर्माण उद्योग विकसित नहीं है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में लिंग अनुपात के राज्य स्तरीय प्रारूप का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर-
लिंग अनुपात से अभिप्राय है-प्रति हज़ार पुरुषों पर स्त्रियों की औसत संख्या। लिंग अनुपात को आजकल समाज में स्त्री के सम्मान को आंकने का पैमाना भी माना जाता है। अधिकतर धनी देशों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों के बराबर है या उससे अधिक। विकसित देशों में 1050 स्त्रियां प्रति 1000 पुरुष हैं, जबकि विकासशील देशों में यह औसत 964 स्त्रियां प्रति 1000 पुरुष हैं। भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार लिंग अनुपात 943 स्त्रियां प्रति हज़ार पुरुष हैं यह औसत विश्व की सबसे कम औसतों में से एक है।

राज्य स्तरीय प्रारूप-देश के सभी राज्यों में लिंग अनुपात एक समान नहीं है। भारत के केवल दो ही राज्य ऐसे हैं। जहां लिंग अनुपात स्त्रियों के पक्ष में है। ये राज्य हैं-केरल तथा तमिलनाडु। केरल में प्रति हज़ार पुरुषों पर 1084 स्त्रियां (2011 में) हैं। देश के अन्य राज्यों में अनुपात पुरुषों के पक्ष में है अर्थात् इन राज्यों में प्रति हज़ार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या कम है जो निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट है-

1. पंजाब 895
2. हरियाणा 879
3. राजस्थान 928
4. बिहार 918
5. उत्तर प्रदेश 912
6. तमिलनाडु 996

 

लिंग अनुपात से राज्य प्रारूप में से एक बात और भी स्पष्ट हो जाती है कि देश के उत्तर राज्यों में दक्षिणी राज्यों की तुलना में लिंग अनुपात कम है। यह बात समाज में स्त्री के निम्न स्थान को दर्शाती है। यह निःसन्देह एक चिंता का विषय है।
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (7)

PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 2.
देश में जनसंख्या वितरण के प्रादेशिक प्रारूप की प्रमुख विशेषताओं को बताते हुए प्रारूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत में जनसंख्या वितरण का प्रादेशिक प्रारूप तथा उसकी महत्त्वपूर्ण विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है। नदियों की घाटियों और समुद्र तटीय मैदानों में जनसंख्या बहुत सघन है, परंतु पर्वतीय, मरुस्थलीय एवं अभाव-ग्रस्त क्षेत्रों में जनसंख्या बहुत ही विरल है। उत्तर के पहाड़ी प्रदेशों में देश के 16 प्रतिशत भू-भाग पर मात्र 3 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, जबकि उत्तरी मैदानों में देश के 18 प्रतिशत भूमि पर 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। राजस्थान में देश के मात्र 6 प्रतिशत भू-भाग पर 6 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
  2. अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में बसी है। देश की कुल जनसंख्या का लगभग 71% भाग ग्रामीण क्षेत्रों में और लगभग 29% भाग शहरों में निवास करता है। शहरी जनसंख्या का भारी जमाव बड़े शहरों में है। कुल शहरी जनसंख्या का दो-तिहाई भाग एक लाख या इससे अधिक आबादी वाले प्रथम श्रेणी के शहरों में रहता है।
  3. देश के अल्पसंख्यक समुदायों का जमाव अति संवेदनशील एवं महत्त्वपूर्ण बाह्य क्षेत्रों में है। उदाहरण के लिए उत्तर-पश्चिमी भारत में भारत-पाक सीमा के पास पंजाब में सिक्खों तथा जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों का बाहुल्य है। इसी तरह उत्तर-पूर्व में चीन व बर्मा (म्यनमार) की सीमाओं के साथ ईसाई धर्म के लोगों का जमाव है। इस तरह के वितरण से अनेक सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक कठिनाइयां सामने आती हैं।
  4. एक ओर तटीय मैदानों एवं नदियों की घाटियों में जनसंख्या घनी है तो दूसरी ओर पहाड़ी, पठारी एवं रेगिस्तानी भागों में जनसंख्या विरल है। यह वितरण एक जनसांख्यिकी विभाजन (Demographic divide) जैसा लगता है।

प्रश्न 3.
भारत में जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर लेख लिखिए जिसमें समस्या के समाधान के उपायों को भी बताएँ।
उत्तर-
जब किसी देश की जनसंख्या इसके प्राकृतिक साधनों की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ती है तो उसका देश के साधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
भारत में प्रत्येक 10 वर्ष के बाद जनगणना होती है। सन् 1921 तक भारत की जनसंख्या कुछ घटती-बढ़ती रही अथवा स्थिर रही, परंतु 1921 के पश्चात् जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है। जनसंख्या की इस वृद्धि के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं, जिनका वर्णन इस प्रकार है

  1. निम्न जीवन स्तर-अन्य देशों के जीवन स्तर के मुकाबले में भारतीय लोगों का जीवन स्तर बहुत निम्न है। यह समस्या वास्तव में जनसंख्या की वृद्धि के कारण ही उत्पन्न हुई है।
  2. वनों की कटाई-बढ़ती हुई जनसंख्या का पेट भरने के लिए वनों को अंधाधुध तरीके से काटा जा रहा है ताकि अतिरिक्त भूमि प्राप्त की जा सके। परंतु वनों की कटाई के कारण और कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। जैसे-भूमि का कटाव, नदियों में बाढ़ों का अधिक आना, पर्यावरण का प्रदूषित होना तथा वन्य संपदा की हानि।
  3. पशुओं के लिए चारे का अभाव-भारत में केवल चार प्रतिशत क्षेत्र पर चरागाह हैं। जनसंख्या की समस्या के कारण यदि इन्हें भी कृषि अथवा आवासों के निर्माण के लिए प्रयोग किया गया तो पशुओं के लिए चारे की समस्याएं
    और भी जटिल हो जाएंगी।
  4. भूमि पर दबाव-जनसंख्या की वृद्धि का सीधा प्रभाव भूमि पर पड़ता है। भूमि एक ऐसा साधन है जिसे बढ़ाया नहीं जा सकता। यदि भारत की जनसंख्या इस प्रकार बढ़ती रही तो भूमि पर भी दबाव पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादों का और भी अधिक अभाव हो जाएगा।
  5. खनिजों का अभाव-हम बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं को उद्योगों का विकास करके पूरा कर रहे हैं परंतु उद्योगों के विकास के लिए खनिजों की और भी अधिक आवश्यकता होगी। परिणामस्वरूप हमारे खनिजों के भंडार शीघ्र समाप्त हो जाएंगे।
  6. पर्यावरण की समस्या-जनसंख्या में वृद्धि के कारण पर्यावरण पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। अतः स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु की आपूर्ति एक समस्या बन गई है। वनस्पति की कमी के कारण ऑक्सीजन की भी कमी हो रही है।
    समस्या का समाधान-जनसंख्या की वृद्धि की समस्या से निपटने के लिए निम्नलिखित उपाए किए जाने चाहिए-

    • सीमित परिवार योजनाओं को अधिक महत्त्व देना चाहिए।
    • लोगों को फिल्मों, नाटकों तथा अन्य साधनों द्वारा सीमित परिवार का महत्त्व समझाया जाए।
    • देश में अनपढ़ता को दूर करने का प्रयास किया जाए ताकि लोग स्वयं भी बढ़ती हुई जनसंख्या की हानियों को समझ सके। स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया जाए।
    • विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि की जाए ताकि विवाह छोटी आयु में न हो सके।

प्रश्न 4.
पंजाब के जनसंख्या विभाजन पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
पंजाब की कुल जनसंख्या 2,77,43,338 है तथा यह जनसंख्या 12,581 गाँव तथा 217 छोटे बड़े नगरों में रहती है। पंजाब के कुछ भागों में जनसंख्या काफी अधिक है तथा कई भागों में काफी कम है। लुधियाना, अमृतसर जैसे नगरों की जनसंख्या काफी अधिक है जो कि क्रमशः 16 लाख तथा 11 लाख है। परंतु कई नगरों की जनसंख्या हजारों में ही है। जनसंख्या घनत्व के आधार पर पंजाब को चार भागों में बाँटा जाता है। जिसका वर्णन इस प्रकार है-
PSEB 9th Class SST Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या (8)

  1. कम जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-प्रथम श्रेणी में वह जिले आते हैं जिनका जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम है। मानसा, फिरोज़पुर तथा श्री मुक्तसर साहिब इस श्रेणी में शामिल हैं। श्री मुक्तसर साहिब का जनसंख्या घनत्व 348 है जो अन्य जिलों से काफी कम है।
  2. साधारण जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-दूसरी श्रेणी में पंजाब के वह जिले शामिल हैं जिनका जनसंख्या घनत्व 401 से 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। तरनतारन, होशियारपुर, फरीदकोट, शहीद भगत सिंह नगर, मोगा, बरनाला, बठिंडा, संगरूर इत्यादि जिले इस श्रेणी में शामिल हैं।
  3. अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-तीसरी श्रेणी में पटियाला, फतेहगढ़ साहिब तथा रूपनगर जिले शामिल हैं। इन ज़िलों का जनसंख्या घनत्व 501 से 600 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
  4. बहुत अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र-जिन क्षेत्रों का जनसंख्या घनत्व 600 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है वह इस श्रेणी में आते हैं। इस श्रेणी में अमृतसर, गुरदासपुर, लुधियाना, जालंधर, साहिबजादा अजीत सिंह नगर आते हैं। लुधियाना का जनसंख्या घनत्व 978 है जो पंजाब में सबसे अधिक है। इसके पश्चात् अमृतसर (928), साहिबजादा अजीत सिंह नगर (909) तथा जालंधर (836) के जिले आते हैं।

PSEB 8th Class Agriculture Solutions Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार

Punjab State Board PSEB 8th Class Agriculture Book Solutions Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Agriculture Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार

PSEB 8th Class Agriculture Guide भूमि एवम् भूमि सुधार Textbook Questions and Answers

(अ) एक-दो शब्दों में उत्तर दें—

प्रश्न 1.
कृषि की दृष्टि से भूमि का pH कितना होना चाहिए?
उत्तर-
6.5 से
8.7 तक pH होना चाहिए।

प्रश्न 2.
भूमि के दो मुख्य भौतिक गुण बताएँ।
उत्तर-
कणों का आकार, भूमि घनत्व, कणों के मध्य खाली जगह, पानी रोकने की ताकत और पानी विलय करने की ताकत आदि।

प्रश्न 3.
किस भूमि में पानी लगाने के फौरन बाद ही विलय हो जाता है?
उत्तर-
रेतली भूमि।

प्रश्न 4.
चिकनी मिट्टी में चिकने कणों की मात्रा बताएँ।
उत्तर-
कम-से-कम 40% चिकने कण होते हैं।

PSEB 8th Class Agriculture Solutions Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार

प्रश्न 5.
क्षारीय एवं अम्लीय को मापने का पैमाना बतलाएँ।
उत्तर-
क्षारीय और तेज़ाबीपन (अम्लीयता) को मापने का पैमाना pH है।

प्रश्न 6.
लवणी भूमि में किन लवणों की प्रचुरता (अधिकता) होती है ?
उत्तर-
इन भूमियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटाशियम के क्लोराइड और सल्फेट लवणों की अधिकता होती है।

प्रश्न 7.
जिस भूमि में सोडियम के कार्बोनेट व बाइकार्बोनेट अत्यधिक मात्रा में हो, उस भूमि को किस श्रेणी में रखा जाता है ?
उत्तर-
क्षारीय भूमि।

प्रश्न 8.
हरी खाद के लिए दो फसलों के नाम बताएँ।
उत्तर-
सन अथवा लैंचा, जंतर।

प्रश्न 9.
चिकनी धरती किस फसल के लिए श्रेष्ठ है?
उत्तर-
धान की बुवाई के लिए।

प्रश्न 10.
क्षारीय धरती के सुधार के लिए कौन-सा पदार्थ प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
जिप्सम।

(आ) एक-दो वाक्यों में उत्तर दें

प्रश्न 1.
भू-विज्ञान के अनुसार मिट्टी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार भूमि प्राकृतिक शक्तियों के प्रभाव के अधीन प्राकृतिक मादे से पैदा हुई एक प्राकृतिक वस्तु है।

प्रश्न 2.
भूमि के प्रमुख भौतिक गुण कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
कणों के आकार, भूमि घनत्व, कणों के मध्य खाली स्थान, पानी संजोए रखने की ताकत और पानी विलय करने की ताकत आदि।

प्रश्न 3.
चिकनी व रेतली मिट्टी की तुलना करें।
उत्तर-

रेतीली मिट्टी चिकनी मिट्टी
(1) उंगलियों में मिट्टी को रगड़ने से कणों का आकार खटकता है। (1) कण बहुत बारीक होते हैं।
(2) पानी बहुत जल्दी अवशोषित हो जाता है। (2) पानी बहुत देर तक खड़ा रहता है।
(3) दो कणों के मध्य खाली स्थान होता है। (3) दो कणों के मध्य खाली स्थान कम ज़्यादा होता है।

 

प्रश्न 4.
अम्लीय भूमि होने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
जिन भूमियों में तेज़ाबी (अम्लीय) मादा ज़्यादा होता है उनको अम्लीय भूमि कहते हैं। इन भूमियों में ज्यादा बारिश होने के कारण क्षारीय लवण बह जाते हैं और पौधों आदि के पत्तों के गलने-सड़ने से तेज़ाबी मादा पैदा होता है।

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प्रश्न 5.
कल्लर वाली भूमि किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जिस भूमि में लवण की मात्रा बढ़ जाती है उनको कल्लर वाली भूमि कहते हैं। यह तीन तरह की होती है–लवणीय, क्षारीय और लवणीय-क्षारीय।

प्रश्न 6.
सेम वाली भूमि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
उन भूमियों को जिन भूमियों के नीचे पानी का स्तर शून्य से लेकर 1.5 मीटर नीचे ही मिल जाए, उसको सेम वाली भूमि कहते हैं।

प्रश्न 7.
लवणीय भूमि का सुधार कैसे किया जा सकता है?
उत्तर-

  1. जिंदरा या ट्रैक्टर वाले कराहे के साथ भूमि की ऊपर वाली सतह खुरच कर किसी अन्य स्थान पर गहरे गड्ढे में दबा देनी चाहिए।
  2. भूमि को पानी के साथ भर कर इसमें हल चला दिया जाता है और फिर पानी बाहर निकाल दिया जाता है। इसके साथ लवण पानी में घुल कर बाहर निकल जाते हैं।

प्रश्न 8.
कल्लर भूमि को सुधारने के लिए अभीष्ट जानकारी दें।
उत्तर–
कल्लर भूमि को सुधारने के लिए कुछ जानकारी प्राप्त करनी ज़रूरी है, जैसे—

  1. भूमि के नीचे पानी की सतह।
  2. पानी की सिंचाई के लिए योग्यता किस तरह की है।
  3. नहर का पानी उपलब्ध है या नहीं।
  4. धरती में कंकर या अन्य सख्त परतें हैं या नहीं।
  5. ज्यादा पानी निकालने के लिए खालों का योग्य प्रबंध है कि नहीं।
  6. कल्लर की कौन-सी किस्म है।

प्रश्न 9.
मैरा भूमि के प्रमुख गुण बताएँ।
उत्तर-
मैरा भूमि के गुण रेतीले और चिकनी भूमियों के बीच में होते हैं। हाथों में डालने पर इसके कण पाउडर की तरह फिसलते हैं।

प्रश्न 10.
लवणीय क्षारीय भूमि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
इन भूमियों में क्षारत्व और लवणों की मात्रा ज्यादा होती है। इनमें चिकने कणों के साथ जुड़ा सोडियम ज्यादा मात्रा में होता है और भूमि में अच्छे लवण भी बहुत ज़्यादा मात्रा में होते हैं।

(इ) पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर दें—

प्रश्न 1.
रेतीली भूमि (धरती) के सुधार के लिए समुचित प्रबंध का वर्णन करें।
उत्तर-
रेतीली भूमियों के सुधार के लिए योग्य प्रबंध निम्नलिखित अनुसार हैं—

  1. हरी खाद को फूल पड़ने से पहले या दो महीने की फ़सल को ज़मीन में दबा दें। हरी खाद के लिए सन या ढेंचे की बुवाई की जा सकती है।
  2. अच्छी तरह गली-सड़ी रूड़ी को प्रयोग कर खेत में जुताई के द्वारा खेत में मिला देना चाहिए।
  3. मुर्गियों की खाद, सूअर की खाद, कंपोस्ट खाद आदि के प्रयोग से भी सुधारा जा सकता है।
  4. मई-जून के महीने में खेतों को खाली नहीं रखना चाहिए। कोई न कोई फसल बोकर रखें ताकि इनके जीवांश मादे को बचाया जा सके।
  5. फ़ली वाली फसलों की कृषि करनी चाहिए।
  6. सिंचाई के लिए छोटी क्यारियां बनाओ।
  7. ऊपर वाली रेतीली सतह को कराहे के साथ एक तरफ कर दो और नीचे की अच्छी मैरा मिट्टी की सतह का इस्तेमाल करें।
  8. तालाबों की चिकनी मिट्टी भी खेतों में डालकर लाभ मिलता है।

प्रश्न 2.
कणों के आकार के अनुपात भूमि के तीन प्रमुख प्रकारों का वर्णन करें।
उत्तर-
कणों के आकार के अनुपात अनुसार भूमि की तीन श्रेणियां हैं—
1. रेतीली भूमि
2. चिकनी भूमि
3. मैरा (दोमट) भूमि।।

  1. रेतीली भूमि-गीली मिट्टी का लड्डू बनाते तुरन्त ही टूट जाता है। इसके कण उंगलियों में रख कर महसूस किए जा सकते हैं। सिंचाई का पानी लगाते ही सोख लिया जाता है। इसके कणों में मध्य खाली स्थान अधिक होता है। इस मिट्टी की जुताई आसान है तथा इसको हल्की भूमि कहा जाता है। इसमें हवा तथा पानी का आवागमन सरल है।
  2. चिकनी भूमि-गीली मिट्टी का लड्डू सरलता से बन जाता है तथा टूटता नहीं है। इसके कणों का आकार रेत के कणों की तुलना में बहुत कम होता है। इसमें कम-सेकम 40% चिकने कण होते हैं। इसमें कई दिनों तक पानी रुका रहता है। जब नमी कम हो जाती है तो जुताई के समय मिट्टी ढीम बनके निकलती है। सूख जाने पर इसमें दरारें पड़ जाती हैं। भूमि जैसे फट जाती है। इनमें पानी रखने की शक्ति रेतीली भूमि से कहीं अधिक होती है।
  3. मैरा (दोमट) भूमि-यह भूमि रेतीली से चिकनी भूमि के बीच होती है। इसके कणों का आकार भी चिकनी तथा रेतीली भूमियों के कणों के मध्य होता है। इनमें रोगों की संरचना हवा तथा पानी का संचालन, पानी सम्भाल समर्था आहारीय तत्त्व की मात्रा आदि गुण अच्छी फसल की प्राप्ति के लिए उपयुक्त तथा उपजाऊ हैं। इस भूमि को कृषि के लिए उत्तम माना गया है। इसके कण हाथों में पाऊडर जैसे फिसलते हैं।

प्रश्न 3.
एक आँकड़ा आकृति के द्वारा भूमि के मुख्य भाग दर्शाएं।
उत्तर-
भूमि एक मिश्रण है जिसमें खनिज पदार्थ, जैविक पदार्थ, पानी तथा हवा होती है। इनकी मात्रा को नीचे दिए गए चित्र के अनुसार दर्शाया गया है। हवा तथा पानी की मात्रा आपस में कम अधिक हो सकती है।
PSEB 8th Class Agriculture Solutions Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार 1
चित्र-भूमि के मुख्य भाग

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प्रश्न 4.
रेतीली धरती के सुधार का उपाय विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
उत्तर-
रेतीली भूमियों के सुधार के लिए योग्य प्रबंध निम्नलिखित अनुसार हैं—

  1. हरी खाद को फूल पड़ने से पहले या दो महीने की फ़सल को ज़मीन में दबा दें। हरी खाद के लिए सन या ढेंचे की बुवाई की जा सकती है।
  2. अच्छी तरह गली-सड़ी रूड़ी को प्रयोग कर खेत में जुताई के द्वारा खेत में मिला देना चाहिए।
  3. मुर्गियों की खाद, सूअर की खाद, कंपोस्ट खाद आदि के प्रयोग से भी सुधारा जा सकता है।
  4. मई-जून के महीने में खेतों को खाली नहीं रखना चाहिए। कोई न कोई फसल बोकर रखें ताकि इनके जीवांश मादे को बचाया जा सके।
  5. फ़ली वाली फसलों की कृषि करनी चाहिए।
  6. सिंचाई के लिए छोटी क्यारियां बनाओ।
  7. ऊपर वाली रेतीली सतह को कराहे के साथ एक तरफ कर दो और नीचे अच्छी मैरा मिट्टी की सतह का इस्तेमाल करें।
  8. तालाबों की चिकनी मिट्टी भी खेतों में डालकर लाभ मिलता है।

प्रश्न 5.
सेम वाली धरती में फसलों की प्रमुख समस्याएँ एवम् सेम की धरती को सधारने की विधि बतलाएँ।
उत्तर-
ऐसी भूमियाँ जिनमें भूमि के नीचे पानी की सतह ज़ीरो से 1.5 मीटर तक की गहराई पर हो तो उनको सेम वाली भूमियाँ कहा जाता है। यह पानी इतनी नज़दीक आ जाता है कि पौधों की जड़ों वाली स्थान पर भूमि के सुराख पानी के साथ भरे रहते हैं और भूमि एवम् भूमि सुधार भूमि हमेशा ही गीली रहती है। पौधे की जड़ों को हवा नहीं मिलती और हवा का आवागमन भी कम हो जाता है। भूमि में ऑक्सीजन कम हो जाती है और कार्बनडाइऑक्साइड ज़्यादा हो जाती है।
सेम की समस्या सुलझाने के लिए कई उपाय किए जाते हैं, जैसे-रुके हुए पानी का सेम नालियों द्वारा निकास, बहुत ट्यूबवैल लगा कर पानी का ज़्यादा प्रयोग, धान और गन्ने जैसी फसलों की कृषि करनी चाहिए, जंगलों के अधीन क्षेत्रफल बढ़ाना चाहिए।

Agriculture Guide for Class 8 PSEB भूमि एवम् भूमि सुधार Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भूमि-विज्ञान के अनुसार धरती को निर्जीव वस्तु या जानदार वस्तु माना गया?
उत्तर-
जानदार वस्तु।

प्रश्न 2.
भूमि में कितने प्रतिशत खनिज तथा जैविक पदार्थ होता है?
उत्तर-
खनिज 45% और जैविक पदार्थ 0-5% है।

प्रश्न 3.
हल्की भूमि किसको कहा जाता है?
उत्तर-
रेतीली भूमि को।

प्रश्न 4.
पानी सम्भालने की शक्ति सबसे ज्यादा किस भूमि में है?
उत्तर-
चिकनी मिट्टी में।

प्रश्न 5.
खेती के लिए कौन-सी भूमि उत्तम मानी गई है?
उत्तर-
मैरा भूमि।

प्रश्न 6.
तेज़ाबी भूमियों की समस्या किस इलाके में ज्यादा है ?
उत्तर-
बारिश वाले इलाकों में।

प्रश्न 7.
कितने पी० एच० वाली भूमियाँ तेज़ाबी होती हैं ?
उत्तर-
पी० एच० 7 से कम वाली।

प्रश्न 8.
कितनी पी० एच० वाली भूमि खेती के लिए ठीक मानी जाती है?
उत्तर-
6.5 से 8.7 तक पी० एच० वाली।

प्रश्न 9.
लवणी भूमियों की पी० एच० कितनी होती है?
उत्तर-
8.7 से कम।

प्रश्न 10.
रेह, थूर या शोरे वाली भूमियाँ कौन-सी हैं ?
उत्तर-
लवणी भूमियाँ।

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प्रश्न 11.
क्षारीय भूमियों में पानी समाने की क्षमता कितनी है?
उत्तर-
बहुत कम।

प्रश्न 12.
हरी खाद की फ़सल बताओ।
उत्तर-
सन जंतर।

प्रश्न 13.
रेतीली भूमियों में सिंचाई के लिए कैसा क्यारा बनाया जाता है ?
उत्तर-
छोटे आकार का।

प्रश्न 14.
तेज़ाबी भूमि में चूना डालने का सही समय बताओ।
उत्तर-
फसल बोने से 3-6 महीने पहले।

प्रश्न 15.
पंजाब में तेज़ाबी भूमियों की कितनी गम्भीर समस्या है ?
उत्तर-
पंजाब में तेज़ाबी भूमियों की समस्या नहीं है।

प्रश्न 16.
लवणीय भूमियों में कौन-से लवण अधिक होते हैं ?
उत्तर-
कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा पोटाशियम के क्लोराइड।

प्रश्न 17.
सेम वाली भूमि में धरती के नीचे पानी का स्तर क्या है ?
उत्तर-
धरती के नीचे पानी का स्तर शून्य से डेढ़ मीटर तक होता है।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रेतीली भूमि की पहचान के लिए दो तरीके बताएँ।
उत्तर-
रेतीली भूमि में पानी सिंचाई करने के साथ ही पानी समा जाता है। उँगलियों में इसके कण महसूस किए जा सकते हैं।

प्रश्न 2.
चिकनी मिट्टी में पानी सोखने और सम्भालने की शक्ति कैसे बढ़ाई जा सकती है?
उत्तर-
प्राकृतिक खादों का प्रयोग करना, जुताई करना और गोडी करने के साथ चिकनी मिट्टी की पानी सोख और सम्भालने की शक्ति बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न 3.
भूमि में तेज़ाबीपन बढ़ने का कारण बताएँ।
उत्तर-
बहुत बारिश कारण ज़्यादा हरियाली रहती है। पौधों आदि के पत्ते भूमि पर गिर कर गलते-सड़ते रहते हैं और वर्षा के पानी के बहाव से क्षारीय लवण बह जाते हैं, जिसके कारण भूमि में तेज़ाबीपन बढ़ जाता है।

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प्रश्न 4.
लवणी भूमियों के दो गुण बताएँ।
उत्तर-

  1. इन भूमियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटाशियम के क्लोराइड और सल्फेट लवणों की मात्रा बढ़ जाती है।
  2. इनमें पानी समाने की समर्था काफ़ी होती है और जुताई के लिए नर्म होती हैं।

प्रश्न 5.
क्षारीय भूमियों के दो गुण बताएँ।
उत्तर-

  1. इन भूमियों में सोडियम के कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट वाले लवण बहुत मात्रा में होते हैं।
  2. waq पानी समाने की समर्था कम होती है। जुताई बहुत कठिन होती है।

प्रश्न 6.
तेज़ाबी भूमियों के सुधार के लिए दो तरीके बताएँ।
उत्तर-
चूने का प्रयोग करके और गन्ना मिल की मैल और लकड़ी की राख का प्रयोग किया जा सकता है। चूने के लिए कैल्शियम कार्बोनेट का प्रयोग होता है।

प्रश्न 7.
तेज़ाबी भूमि में चूना डालने के तरीके के बारे में बताएँ।
उत्तर-
चूना डालने का सही समय बुवाई से 3-6 महीने डाल कर जुताई कर देनी चाहिए।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मलहड़ किसे कहते हैं? यह कैसे बनता है ?
उत्तर-
जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के अवशेष, मल-मूत्र तथा उनके गले सड़े अंग जो कि मिट्टी में समय-समय पर मिलते रहते हैं, को मलहड़ अथवा ह्यमस कहते हैं। घास-फूस, फसलें, वृक्ष, सुंडियां केंचुए, जीवाणु, कीटाणु ढेरों की रूढ़ि तथा घर का कूड़ा-कर्कट भी मलहड़ के हिस्से हो सकते हैं। इन पदार्थों के ज़मीन में मिलने से भूमि के गुणों में बहुत सुधार होता है। इससे प्राप्त होने वाली उपज पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

जब भी जैविक पदार्थ अथवा कार्बनिक चीजें मिट्टी में मिलाई जाती हैं, सूक्ष्म जीवाणुओं तथा बैक्टीरिया की क्रियाओं से इन पदार्थों का विघटन आरम्भ हो जाता है तथा यह पदार्थ गलना-सड़ना आरम्भ कर देते हैं। इनमें से कई प्रकार की गैसें पैदा होती हैं जो हवा में मिल जाती हैं। इसलिए गल-सड़ रही चीज़ों से हमें कई बार दुर्गन्ध भी आने लग जाती है। कार्बनिक पदार्थ टूट कर अकार्बनिक तत्त्वों जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस तथा गन्धक में बदल जाते हैं। पानी, भू-ताप तथा भू-जीवों की क्रिया से यह तत्त्व पौधों के लिए प्राप्त योग्य रूप में परिवर्तित हो जाते हैं तथा यह दुबारा पौधों से शरीरों के अंग बनकर कार्बनिक पदार्थों में बदल जाते हैं तथा इस तरह यह बनने तथा टूटने का चक्र चलता रहता है इस तरह यह कहा जा सकता है कि मलहड़ जैविक पदार्थों की पौधों के लिए प्राप्ति योग्य अवस्था है।

प्रश्न 2.
भूमि-बनावट की कौन-सी किस्म कृषि के लिए सबसे अच्छी है तथा क्यों ? उदाहरण सहित बताओ।
उत्तर-
फसलें जड़ों द्वारा भूमि में से अपना भोजन प्राप्त करती हैं। फसलें आसानी से यह भोजन तभी प्राप्त कर सकती हैं यदि भूमि के टुकड़ों के आकार छोटे हों तथा यह बहुत कम शक्ति से टूट जाएं। ऐसी बनावट उसी हालत में सम्भव है अगर भूमि में मलहड़ अथवा जैविक पदार्थ की मात्रा काफ़ी अधिक हो। भूमि की ऐसी उचित तथा आवश्यक बनावट को भुरभुरी बनावट कहा जाता है। भुरभुरी बनावट वाली भूमि में ढेले नर्म तथा बहुत छोटे आकार के होते हैं। इन ढेलों को हाथों में मलकर आसानी से तोड़ा जा सकता है। ढेलों के कणों में आपस में जुड़कर रहने की शक्ति बहुत कम होती है। इसलिए वह टूट कर छोटे-छोटे कणों के रूप में भूमि का अंग बन जाती हैं। कणों के बीच जुड़ने की शक्ति का कम होना पानी तथा हवा के लिए काफ़ी स्थान उपलब्ध होने के कारण बनता है। जुड़ने की शक्ति कम होने से जीवाणुओं के लिए विघटन का कार्य करना काफ़ी आसान रहता है तथा उन्हें सांस लेने के लिए आवश्यक हवा भी मिल जाती है। भूमि नर्म होने से जड़ों को फैलने में कोई कठिनाई नहीं आती तथा वह अच्छी तरह फैलकर आवश्यक पौष्टिक तत्त्व प्राप्त कर सकती हैं।

प्रश्न 3.
भूमि के भौतिक गुणों की सूची बनाओ। इनमें से किसी एक गुण के बारे में तीन-चार लाइनें लिखो।
उत्तर-
विभिन्न भूमियों के भौतिक गुण भी अलग-अलग होते हैं। इसका कारण भूमियों में कणों के आकार, क्रम, जैविक पदार्थों की मात्रा तथा मुसामों में अन्तर होना है। भूमि में पानी का संचार तथा बहाव कैसे होता है, पौधों को खुराक देने की शक्ति तथा हवा की गति, यह बातें भूमि के भौतिक गुणों पर निर्भर करती हैं।
भूमि के भौतिक गुण निम्नलिखित हैं—

  1. कण-आकार
  2. प्रवेशता
  3. गहराई
  4. रंग
  5. घनत्व
  6. नमी सम्भालने की योग्यता
  7. तापमान।

कण-आकार- भूमि विभिन्न मोटाई के खनिज कणों की बनी होती है। भूमि का कण आकार इसमें मौजूद अलग-अलग मोटाई के कणों के आपसी अनुपात पर निर्भर करता है। भूमि की उर्वरा शक्ति कण-आकार पर निर्भर करती है। कण-आकार का प्रभाव भूमि की जल ग्रहण शक्ति तथा हवा के यातायात की मात्रा तथा गति पर भी पड़ता है।

प्रश्न 4.
पी० एच० अंक से क्या अभिप्राय है ? भूमि के पी० एच० अंक का उसकी तासीर पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
पी० एच० अंक-भूमि अम्लीय है, क्षारीय अथवा उदासीन है बताने के लिए एक अंक प्रणाली उपयोग की जाती है जिसे भूमि की पी० एच० मूल्य अथवा मात्रा कहा जाता है। वास्तव में पी० एच० मात्रा किसी घोल में हाइड्रोजन (H+) तथा हाइड्राक्सल (OH) आयनों के आपसी अनुपात को बताती है।

भूमि की पी० एच० मात्रा गुण
8.7 से अधिक क्षारीय भूमि
8.7 – 7 हल्का खारापन
7 उदासीन
7.5 – 5 तक हल्की अम्लीय
6.5 से कम अम्लीय भूमि

 

अधिकतर फसलें 6.5 से 7.5 पी० एच० तक वाली भूमियों में अच्छी तरह फलफूल सकती हैं। खाद्य तत्त्वों का पौधों को उचित रूप में प्राप्त होना भूमि को पी० एच० मात्रा पर निर्भर करता है। 6.5 से 7.5 पी० एच० मात्रा वाली भूमियों में से पौधे बहुत सारे खाद्य तत्त्वों को आसानी से उचित रूप में प्राप्त कर लेते हैं। कुछ सूक्ष्म तत्त्व जैसे मैंगनीज़, लोहा, तांबा, जिस्त आदि अधिक अम्लीय भूमियों में से अधिक मात्रा में पौधों को प्राप्त हो जाते हैं पर कई बार इनकी अधिक मात्रा पौधों के लिए जहर का कार्य भी करती है।

प्रश्न 5.
भूमि में नमी कैसे आ जाती है ? नमी का फसलों पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा कैसे ?
उत्तर-
नमी का कारण स्थाई रूप से बहने वाली नहरों का पानी भूमि छिद्रों द्वारा आस-पास की भूमि में रिस-रिस कर पहुंच जाता है। पन्द्रह-बीस साल में धरती के खुले पानी का तट धरती की सतह के निकट आ जाता है, भूमि नमी की मार तले आ जाती है। इसके अतिरिक्त बाढ़ों का पानी, अच्छे जल निकास प्रबन्ध की कमी आदि भी नमी का कारण बन सकते हैं।

नमी का प्रभाव-पौधों के बढ़ने पर नमी के कई प्रभाव पड़ते हैं। बहुत सारे काश्त किये जाने वाले पौधों की जड़ें जल-तल के ऊपर वाली भूमि-तह में ही रह जाती हैं। पौधे अधिक समय पानी में खड़े रहकर मर जाते हैं। भूमि वायु की कमी हो जाती है। पानी की उच्च ताप योग्यता के कारण भूमि में तापमान परिवर्तन भी घट जाता है।

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प्रश्न 6.
तेज़ाबी भूमियों में चूना डालने के लाभ बताओ।
उत्तर-
तेज़ाबी भूमियों में चूना डालने के लाभ—

  1. इससे भूमि का तेज़ाबीपन समाप्त हो जाता है।
  2. फॉस्फोरस पौधों को उचित रूप में प्राप्त होने वाले रूप में बदल जाती है।
  3. चूने में खाद्य तत्त्व मैग्नीशियम तथा कैल्शियम होते हैं।
  4. जैविक पदार्थों के गलने-सड़ने की क्रिया तेज़ हो जाती है तथा पौधों के लिए नाइट्रोजन योग्य रूप की मात्रा में बढ़ोत्तरी हो जाती है।
  5. सूक्ष्म जीव क्रियाएं तेज़ी से होने लगती हैं।

प्रश्न 7.
भू-आकार बांट पर विस्तारपूर्वक लिखें।
उत्तर-
मिट्टी के कणों का आकार एक-सा नहीं होता। कुछ बहुत मोटे तथा कुछ बहुत सूक्ष्म अथवा बारीक होते हैं। आकार के आधार पर मिट्टी के कणों की बांट को आकार बांट कहा जाता है। मिट्टी में साधारणतः तीन तरह के कण होते हैं—
रेत के कण, चिकनी मिट्टी के कण तथा भाल के कण।
इन कणों की मात्रा अनुसार भूमि के आकार की बांट की जाती है जिसे भू-आकार बांट कहा जाता है। भू-आकार बांट निम्नानुसार की गई है—

मात्रा बांट
40 से अधिक प्रतिशत चिकनी मिट्टी वाली भूमि भारी चिकनी
40-31 से अधिक प्रतिशत चिकनी मिट्टी वाली भूमि चिकनी
31-21 से अधिक प्रतिशत चिकनी मिट्टी वाली भूमि मैरा चिकनी
20-11 से अधिक प्रतिशत चिकनी मिट्टी वाली भूमि मैरा
10-06 से अधिक प्रतिशत चिकनी मिट्टी वाली भूमि रेतीली मैरा
05-00 से अधिक प्रतिशत चिकनी मिट्टी वाली भूमि रेतीली

 

अन्तर्राष्ट्रीय सोसाइटी अनुसार भूमि के कणों की आकार-बांट निम्नानुसार—

कण-आकार कण-आकार मिली मीटरों में देखना
चिकनी मिट्टी 0.002 से कम माइक्रोस्कोप से
भाल 0.002 तथा 0.02 के बीच माइक्रोस्कोप से
बारीक रेत 0.02 तथा 0.20 के बीच नंगी आंख से
मोटी रेत 0.20 तथा 2.00 के बीच नंगी आंख से
पत्थर, रोड़े अथवा कंकड़ 2.00 से अधिक नंगी आंख से

 

प्रश्न 8.
भूमि के मुख्य भौतिक गुणों के नाम लिखो तथा कोई दो की व्याख्या भी करो।
उत्तर-
विभिन्न भूमियों के भौतिक गुण भी अलग-अलग होते हैं। इसका कारण भमियों में कणों के आकार, क्रम, जैविक पदार्थों की मात्रा तथा मुसामों में अन्तर का होना है। भूमि में जल का संचार तथा बहाव कैसे होता है, पौधों को खुराक देने की शक्ति तथा हवा की गति यह बातें भूमि के भौतिक गुणों पर निर्भर करती हैं।
भूमि के भौतिक गुण निम्नलिखित हैं—

  1. कण-आकार
  2. प्रवेशता
  3. गहराई
  4. रंग
  5. घनत्व
  6. नमी सम्भालने की योग्यता
  7. तापमान

उपरोक्त गुणों की व्याख्या निम्नलिखित अनुसार है—

1. कण-आकार-भूमि विभिन्न मोटाई के खनिज कणों की बनी होती हैं। भूमि का कण-आकार इसमें मौजूद विभिन्न मूल कणों के आपसी अनुपात पर निर्भर करता है।
महत्त्व-भूमि की उर्वरा शक्ति कण के आकार पर निर्भर करती है। कण-आकार का प्रभाव भूमि की जल ग्रहण शक्ति तथा हवा के आवागमन की मात्रा तथा गति पर भी पड़ता है। अन्तर्राष्ट्रीय सोसाइटी अनुसार भूमि-कणों को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है—

  1. पत्थर, रोड़े अथवा कंकड़
  2. मोटी रेत
  3. बारीक रेत
  4. भाल
  5. चिकनी मिट्टी।

कणों के आकार अनुसार भूमि को 12 श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पर तीन मुख्य श्रेणियां हैं-रेतीली भूमियां, मैरा भूमियां तथा चिकनी भूमियां।
2. प्रवेशता-प्रवेशता से अभिप्राय है भूमि में पानी तथा हवा का संचार अथवा प्रवेश करना कितना आसान है। भूमि की जल अवशोषण की शक्ति, पानी सम्भालने की शक्ति तथा जड़ों की गहराई भूमि के इस गुण पर निर्भर है। प्रवेशता का गुण भूमि में मुसामों की मात्रा पर निर्भर करता है। बहुत ही बारीक छिद्रों को मुसाम कहा जाता है। मुसाम शरीर की त्वचा (चमड़ी) में भी होते हैं जिनके द्वारा हमें पसीना आता है। जिस भूमि में प्रवेशता गुण अधिक हो, वह भूमि फसलों के फलने-फूलने के लिए अच्छी रहती है। क्योंकि इस तरह की भूमि में जल तथा सम्भालने की शक्ति अधिक होती है तथा फसल की जड़ें भूमि में अधिक गहराई तक जाकर अधिक मात्रा में पौष्टिक तत्त्व तथा भोजन प्राप्त करने के समर्थ हो जाती हैं। कई बार तो भूमि के नीचे कठोर परत बन जाती है जिस कारण जड़ें नीचे नहीं जा सकतीं।

प्रश्न 9.
भूमि के कोई दो रासायनिक गुणों के नाम बारे विस्तार से लिखें।
उत्तर-
भूमि के रासायनिक गुणों का महत्त्व-भूमि के रासायनिक गुणों का पौधों के फलने-फूलने पर सीधा प्रभाव पड़ता है। खाद्य तत्त्व को पौधे प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त नहीं कर सकते।
1. पी० एच०-भूमि तेजाबी है, क्षारीय अथवा उदासीन है बताने के लिए एक अंक प्रणाली उपयोग की जाती है जिसे भूमि की पी० एच० मूल्य अथवा मात्रा कहा जाता है। वास्तव में पी० एच० मात्रा किसी घोल में हाइड्रोजन (H+) अथवा हाइड्राक्सल (OH) आयनों के आपसी अनुपात को बताती है।

भूमि की पी० एच० मात्रा गुण
8.7 से अधिक क्षारीय भूमि
8.7-7 हल्का क्षारीयपन
7 उदासीन
7-65 तक हल्की तेज़ाबी
6.5 से कम तेजाबी भूमि

 

अधिकतर फसलें 6.5 से 7.5 पी० एच० तक वाली भूमियों में ठीक तरह फल-फूल सकती है। खाद्य तत्त्वों का पौधों को उचित रूप में प्राप्त होना भी पी० एच० पर निर्भर करता है। 6.5 से 7.5 पी० एच० मात्रा वाली भूमियों में पौधे बहुत सारे खाद्य तत्त्वों को आसानी से उचित रूप में प्राप्त कर लेते हैं। कुछ सूक्ष्म तत्त्व जैसे मैगनीज़, लोहा, तांबा, जिस्त आदि अधिक तेज़ाबी भूमियों में से अधिक मात्रा में उचित रूप में पौधों को प्राप्त हो जाते हैं पर कई बार इनकी अधिक मात्रा पौधों के लिए ज़हर का कार्य भी करती है।

2. जैविक पदार्थ-ज़मीन में जैविक पदार्थ पौधों की जड़ों, पत्तों तथा घास-फूस के गलने-सड़ने से बनता है। भूमि में पाए जाते किसी भी जैविक पदार्थ पर बहत सारे सूक्ष्म जीव अपना असर करते हैं तथा जैविक पदार्थ विघटन करके उसको अच्छी तरह गला-सड़ा देते हैं। ऐसे पदार्थ को मलहड़ (ह्यूमस) का नाम दिया गया है। ह्यूमस खाद्य तत्त्वों फॉस्फोरस, गन्धक तथा नाइट्रोजन का विशेष स्रोत है। इसमें थोड़ी मात्रा में अन्य खाद्य तत्त्व भी हो सकते हैं। भूमि की जल ग्रहण योग्यता, हवा की गति तथा बनावट को ठीक रखने के लिए जैविक पदार्थ बहुत लाभदायक हैं। इससे भूमि की खाद्य तत्त्व सम्भालने की शक्ति भी बढ़ती है। पंजाब की जमीनों में जैविक पदार्थ की मात्रा साधारणत: 0.005 से 0.90 प्रतिशत है। जैविक तथा कम्पोस्ट डालने से भूमि में जैविक पदार्थों की मात्रा में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।

PSEB 8th Class Agriculture Solutions Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार

प्रश्न 10.
मलहड़ की कृषि में महत्ता पर रोशनी डालो।
उत्तर-
मलहड़ की कृषि में महत्ता—

  1. शीघ्र गलने वाला मलहड़ डालने से मिट्टी के कण आपस में इस तरह जुड़ जाते हैं कि उनके छोटे तथा नर्म (भुरभुरी) ढेले बन जाते हैं। इस तरह का मलहड़ रेतीली तथा चिकनी किस्मों की भूमियों के लिए बढ़िया रहता है। मलहड़ रेतीली मिट्टी तथा खुरदरे कणों को आपस में जोड़ने में सहायता करता है तथा चिकनी मिट्टी को नर्म कर देता है जिससे इसका आयतन बढ़ जाता है। हवा का आवागमन आसान तथा तेज़ हो जाता है। इस तरह मलहड़ रेतीली तथा चिकनी दोनों प्रकार की भूमियों को अधिक भुरभुरी तथा उपजाऊ बना देता है।
  2. मलहड़ भूमि को नर्म कर देता है जिससे भूमि की पानी सोखने की शक्ति में बढ़ौत्तरी होती है तथा भूमि पानी को अधिक देर तक लम्बे समय तक अपने अन्दर सम्भाल कर रख सकती है।
  3. भूमि में मौजूद लाभदायक तथा उपयोगी जीवाणु मलहड़ से अपना भोजन भी प्राप्त करते हैं। मलहड़ के विघटन से जो कार्बन पैदा होती है वह इन जीवाणुओं के लिए भोजन का कार्य करती है। इससे यह अधिक शक्तिशाली रूप में क्रिया करने के योग्य हो जाते हैं।
  4. पौधों की जड़ें ज़मीन में छिद्र करके धरती को नर्म कर देती हैं। जड़ों के गलनेसड़ने के पश्चात् छिद्रों द्वारा पानी धरती के नीचे चला जाता है तथा ऑक्सीजन गैस के अन्दर जाने तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बाहर निकलने के लिए भी यह छिद्र मदद अथवा सहायता करते हैं।
  5. मलहड़ तथा कई पौष्टिक तत्त्व जैसे नाइट्रोजन, गन्धक, फॉस्फोरस आदि प्राप्त होते हैं। यह तत्त्व भूमि के कणों के साथ चिपके रहते हैं। आवश्यकता पड़ने पर पौधा इन तत्त्वों को प्रयोग कर सकता है।
  6. कई भूमियों की तासीर ऐसी होती है कि पौधे भूमि में मौजूद आवश्यक तत्त्व प्राप्त नहीं कर सकते। पर मलहड़ की मौजूदगी में तत्त्व पौधों के उपयोग लायक बन जाते हैं। उदाहरणतः अम्लीय ज़मीनों में फॉस्फोरस।
  7. मलहड़ के गलने-सड़ने से कई तरह के तेज़ाब पैदा होते हैं जो कि क्षारीय भूमियों का खारापन कम करते हैं। यह तेज़ाब तथा कार्बन गैसों (जो खुद भी अम्लीय गुण रखती हैं) पोटाशियम आदि से मिलकर भूमि के खारेपन को घटा कर उसके पौधों को बढ़ने तथा फलने-फूलने के अनुकूल तथा उचित बनाते हैं।
  8. मलहड़ भू-ताप को स्थिर रखने में मदद करता है। बाह्य तापमान में कमी या बढ़ौतरी मलहड़ वाली भूमि के तापमान पर बहुत प्रभाव नहीं डालता।
  9. कई तत्त्व पौधों को बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिएं। ये तत्त्व रासायनिक खादों को प्राप्त नहीं होते। इनकी कमी से फसलों की पैदावार बहुत घट सकती है तथा किसान को काफी नुकसान हो सकता है। इनमें से काफ़ी तत्त्व मलहड़ से मिल जाते हैं।

प्रश्न 11.
मलहड़ कैसे समाप्त हो जाता है तथा भूमि में इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
प्रत्येक फसल के साथ जड़ों, पत्तों, जीवाणुओं, कूड़ा-कर्कट, गोबर तथा हरी खाद द्वारा नया मलहड़ खेतों में मिलता रहता है। परन्तु साथ ही यह समाप्त भी होता
रहता है। पौधे तथा जीवाणु इसे प्रयोग कर लेते हैं। इसके कई तत्त्व गैसों के रूप में बदल जाते हैं तथा वायुमण्डल में मिल जाते हैं। कई स्थानों पर बहुत सख्त गर्मी पड़ती है जिससे मलहड़ के लाभदायक अंशों का नाश हो जाता है। इस तरह मलहड़ का फसल को कोई भी लाभ नहीं पहुंचता। जैसे कि पता ही है कि मलहड़ फसलों के लिए बहुत ‘लाभदायक होता है। इसलिए इसकी मात्रा भूमि में कम नहीं होने देनी चाहिए। इसलिए खेत में ऐसी फसल बो देनी चाहिए जिससे मलहड़ की मात्रा में बढ़ोत्तरी हो। इस मन्तव्य के लिए चने तथा अन्य फलीदार फसलें जिनकी जड़ों में नाइट्रोजन बांधने वाले बैक्टीरिया होते हैं, बो लेनी चाहिएं। इन फसलों की हरी खाद बनाकर जो उत्तम किस्म की मलहड़ होती है भूमि को अधिक उपजाऊ बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ढेर की रूड़ी तथा कूड़ा मलहड़ की मात्रा बढ़ाने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।

प्रश्न 12.
भूमि की उर्वरा शक्ति की सम्भाल तथा प्रतिपूर्ति के लिए कौन-सी मुख्य बातों की ओर ध्यान देना आवश्यक है ?
उत्तर-
इसके लिए निम्नलिखित बातों की ओर ध्यान देना आवश्यक है—

1. धरती की भौतिक हालत-धरती की उचित भौतिक स्थिति अच्छी बुआई पर निर्भर करती है। अच्छी बुआई से अभिप्राय है इस तरह की बुआई जिससे धरती के कणों की बनावट ठीक तरह कायम रह सके अर्थात् ज़मीन में मिट्टी के ढेले भुरभुरे तथा नर्म हों। गीली बोई भूमि में वतर से पहले भूमि-कण अधिक अच्छी तरह जुड़ कर सख्त ढेलों का रूप धारण कर लेते हैं तथा यदि वतर में देरी हो जाए तो भी ज़मीन सूख जाती है तथा सख्त हो जाती है। ज़मीन के बीच वाला पानी बहुत सारी केशका नालियों द्वारा बाहर निकल जाता है तथा भूमि में नमी की कमी हो जाती है। फसल की अच्छी पैदावार के लिए हवा तथा पानी का धरती-छिद्रों में चलते रहना बहुत आवश्यक होता है। इसलिए बुआई समय पर करनी चाहिए। क्योंकि न तो इससे ढेले बनते हैं तथा न ही धरती की नमी बाहर निकलती है। अच्छी बुआई से भूमि की पानी जज़ब (अवशोषण) करने की शक्ति भी बढ़ जाती है तथा भूमि क्षरण से भी बची रहती है। भूमि की बनावट को ठीक रखने के लिए मलहड़ का अच्छा तथा उचित प्रयोग सहायक होता है। इसके अतिरिक्त अच्छे तथा उचित फसल-चक्र, जिसमें समय-समय पर गुच्छेदार जड़ों वाली तथा फलीदार फसलें आती रहें, साथ ही धरती की भौतिक हालत को ठीक रखने में सहायता मिलती है।

2. खेतों के नदीनों को साफ़ रखना-भूमि की उर्वरा शक्ति को कायम रखने के लिए खेत नदीनों से मुक्त हों, यह भी बहुत आवश्यक है। नदीन, खेत में बोई फसल के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्त्वों को खुद ही खा जाते हैं। कम पौष्टिकता मिलने के कारण फसल कमज़ोर हो जाती है तथा अच्छी तरह फल-फूल नहीं सकती। इससे पैदावार कम हो जाती है। कई बार यदि नदीन अधिक मात्रा में हों तो वह छोटी फसल भूमि एवम् भूमि सुधार को पूरी तरह दबा लेते हैं तथा सारी फसल को नष्ट कर देते हैं। यदि नदीन फसल को फूल, फल लगने से पहले, न नष्ट किए जाएं तो पक जाने पर उनके बीज भूमि में मिल जाते हैं तथा अगली फसल के समय वह फसल से पहले ही उग कर अथवा उसके साथ बढ़कर उसे छोटी आयु में ही दबा लेते हैं तथा उसकी वृद्धि रोक देते हैं। इसलिए खेत को नदीनों से साफ़ रखने के लिए गुड़ाई तथा कई बार बुआई भी करनी पड़ती है। पंजाबी की प्रसिद्ध कहावत है-‘उठता वैरी, रोग दबाइये, बढ़ जाए तां फेर पछताइये’। नदीन भी किसान, फसल तथा धरती की उर्वरा शक्ति के रोग तथा वैरी हैं। इसलिए इन्हें भी पैदा होते ही नष्ट कर देना चाहिए। नदीनों को मारने के लिए वैज्ञानिकों ने नदीननाशी दवाइयों की खोज भी की है। पर इन रासायनिक दवाइयों का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए। इन दवाइयों को बच्चों की पहुँच से बहुत दूर रखना चाहिए, क्योंकि यह ज़हरीली होती हैं। इन दवाइयों के अधिक प्रयोग से वातावरण में प्रदूषण फैलता है। इसलिए इनका प्रयोग इस पक्ष से भी सावधानी से करना चाहिए।

3. कीड़ों तथा रोगों की रोकथाम-फंगस, निमाटोड तथा अन्य हानिकारक कीड़ेमकौड़े की कटाई के बाद भी ज़मीन पर ही पलते हैं। इस समय उन्हें समाप्त कर देना आसान रहता है। उनके खात्मे से ही धरती की उर्वरा शक्ति को सम्भाल कर रखना सम्भव होता है। इसलिए फसल की कटाई के पश्चात् समय पर ज़मीन की जुआई, बदल-बदल कर फसलों की बिजाई, एक से दूसरी फसल के बीच में समय का अन्तर, पराली को जलाना तथा जमीन में कीट तथा फंगस नाशक दवाइयों का उपयोग कुछ ऐसे साधन हैं, जिनसे रोगों तथा हानिकारक फंगस तथा कीटों को नष्ट करके काबू किया जा सकता है। इन्हें काबू करके ही ज़मीन की उर्वरा शक्ति को कायम रखा जा सकता है।

4. उचित तथा योग्य फसल-चक्र-विभिन्न फसलों के लिए अलग-अलग भोजन तत्त्वों की ज़रूरत होती है। कुछ ऐसे तत्त्व होते हैं जो प्रत्येक फसल द्वारा प्रयोग किए जाते हैं। परन्तु इनकी खपत की गई मात्रा तथा दर का अन्तर तो फिर भी होता है। इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि एक खेत में एक फसल के पश्चात् दूसरी फसल वह बोई जाए जिसको पहली फसल से अलग प्रकार के तत्त्वों की ज़रूरत हो अथवा यह पहली फसल द्वारा हुए उर्वरा शक्ति के घाटे को कुछ हद तक पूरा करती हो। इस तरह भूमि की उपजाऊ शक्ति लम्बे समय तक कायम रखी जा सकती है।

प्रश्न 13.
सेम वाली भूमि पर नोट लिखें।
उत्तर-
स्वयं करें।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

ठीक/गलत

प्रश्न 1.

  1. भूमि में 45% खणिज पदार्थ हैं।
  2. लवणी भूमियों का पी.एच.मान 8.7 से कम होता है।
  3. तेज़ाबी भूमियों में चूना डाला जाता है।

उत्तर-

बहुविकल्पीय

प्रश्न 1.
तेज़ाबी भूमि का पी.एच. मान है—
(क) 7 के बराबर
(ख) 7 से कम
(ग) 7 से अधिक
(घ) 12.
उत्तर-
(ख) 7 से कम

PSEB 8th Class Agriculture Solutions Chapter 1 भूमि एवम् भूमि सुधार

प्रश्न 2.
कौन-सी भूमि में पानी देर तक खड़ा रहता है ?
(क) चिकनी
(ख) मैरा
(ग) रेतीली
(घ) सभी ठीक
उत्तर-
(क) चिकनी

रिक्त स्थान भरो

  1. ……….. भूमि की समस्या अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में होती है।
  2. कृषि के लिए ……………… पी०एच०वाली भूमि ठीक मानी जाती है ।
  3. …………. भूमि के लिए जिपस्म का प्रयोग किया जाता है।

उत्तर-

  1. तेज़ाबी,
  2. 6.5 से 8.7,
  3. क्षारीय।

भूमि एवम् भूमि सुधार PSEB 8th Class Agriculture Notes

  • भूमि धरती की ऊपर वाली मिट्टी की परत है, जिसमें फ़सल की जड़ें होती हैं और इसमें से फ़सल पानी और आहारीय तत्त्व प्राप्त करती है।
  • भूमि पौधे को खड़ा रखने में मदद करती है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार भूमि प्राकृतिक शक्तियों के प्रभाव से प्राकृतिक मादे से पैदा हुई एक प्राकृतिक वस्तु है।
  • भू वैज्ञानिकों की दृष्टि से भूमि एक सजीव वस्तु है क्योंकि इसमें बहुत सारे असंख्य सूक्ष्मजीवों, कीटाणुओं, जीवाणुओं और छोटे-बड़े पौधों के पालन-पोषण की शक्ति है।
  • भूमि में 45% खनिज, 25% हवा, 25% पानी, 0 से 5% जैविक पदार्थों का मिश्रण . है जिसमें हवा पानी कम ज्यादा हो सकते हैं।
  • भूमि के मुख्य तौर पर दो तरह के गुण हैं-रासायनिक और भौतिक गुण।
  • भूमि के मुख्य भौतिक गुण हैं-कणों का आकार, भूमि घनत्व कम होना, कणों के मध्य में खाली जगह, पानी संजोए रखने की ताकत और पानी विलय करने की , ताकत आदि।
  • रेतीली भूमि के कण हाथों में रगड़ने पर खटकते हैं।
  • चिकनी मिट्टी में 40% चीकने कण होते हैं।
  • मैरा (दोमट) भूमि के लक्षण रेतीली और चिकनी भूमियों के बीच में होते हैं।
  • बहुत बारिश होने वाले खेतों में तेज़ाबी भूमि देखने को मिलती है।
  • pH का मूल्य 7 से कम होता है तो भूमि अम्लीय या तेज़ाबी होती है।
  • लवणों की किस्म के आधार पर कल्लर वाली भूमियां तीन तरह की होती हैं।
  • कल्लरी भूमियां हैं-लवणीय, क्षारीय और लवणीय-क्षारीय भूमि।
  • अम्लीय (तेज़ाबी) भूमियों का सुधार चूना डाल कर किया जा सकता है।
  • क्षारीय भूमियों में मिट्टी जांच के आधार पर जिप्सम का प्रयोग किया जा सकता है।
  • रेतली भूमि के सुधार के लिए हरी खाद, गली-सड़ी रूडी, फलीदार फसलों आदि की सहायता ली जाती है।
  • लवण वाली भूमि को पानी के साथ धोकर या फिर मिट्टी की ऊपर वाली परत को कराहे आदि के साथ खुरच कर साफ़ कर देते हैं।
  • चिकनी भूमियों में धान की बुवाई करनी लाभदायक रहती है।
  • सेम वाली भूमियों में भूमि के नीचे वाले पानी (भूमिगत जल) का स्तर बहुत ऊपर पौधों की जड़ों तक आ जाता है।
  • आमतौर पर जब भूमि के नीचे वाला पानी शून्य से डेढ़ मीटर होता है तो उस भूमि को सेम वाली भूमि कहते हैं।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 9 लिंग समानता

Punjab State Board PSEB 8th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 9 लिंग समानता Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Welcome Life Chapter 9 लिंग समानता

Welcome Life Guide for Class 8 PSEB लिंग समानता InText Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या लड़के और लड़की में भेदभाव करना सही है?
उत्तर-
नहीं, लड़के और लड़की में भेदभाव करना सही नहीं है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी पर पुरुष और स्त्री का अनुपात क्या है?
उत्तर-
अधिकतर समान या 50 : 50.

प्रश्न 3.
अपनी कक्षा में कितने लड़के और लड़कियां हैं?
उत्तर-
हमारी कक्षा में 30 लड़कियां और 20 लड़के हैं।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 9 लिंग समानता

प्रश्न 4.
उन कार्यों के नाम लिखो जिसे समाज सोचता है कि ये कार्य केवल लड़के कर सकते हैं?
उत्तर-
वे कार्य जो प्रकृति से यान्त्रिक होते हैं और उनके लिए अधिक शारीरिक शक्ति की आवश्यकता होती है। इस के साथ ही समाज यह भी सोचता है कि लड़कों को बाहरी कार्य करने चाहिए।

प्रश्न 5.
उन कार्यों के नाम लिखो जिसे समाज सोचता है कि ये कार्य केवल लड़कियों को करना चाहिए।
उत्तर-
अधिकतर घरेलू कार्य और जिनमें कम शारीरिक शक्ति की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 6.
क्या समाज में लिंग असमानता अच्छी है या बुरी।
उत्तर-
समाज में लिंग समानता अच्छी है।

प्रश्न 7.
जो परिजन लड़की के जन्म पर खुशी व्यक्त नहीं करते वे अच्छे हैं। इस कथन के विषय में आपका क्या विचार है?
उत्तर-
नहीं, वे अच्छे परिजन नहीं हैं।

प्रश्न 8.
उन कुछेक कार्यों का नाम लिखो जो परम्परागत रूप में लड़कियों के लिए नहीं हैं परन्तु आजकल भी लड़कियां उनको कर रही हैं।
उत्तर-
लड़कियों ने गाड़ी चलाना, अभियन्ता और कुलियों आदि का कार्य शुरू कर दिया है।

प्रश्न 9.
लिंग समानता का क्या अर्थ है?
उत्तर-
साधारण शब्दों में इसका अर्थ है लड़कों और लड़कियों को उनके लिंग के आधार पर समान अवसर प्रदान करना।

प्रश्न 10.
क्या हमें कृषि करती लड़की का मजाक उड़ाना चाहिए?
उत्तर-
नहीं हमें कृषि करती लड़की का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए।

प्रश्न 11.
क्या हमें अपने विद्यालय की देखभाल नहीं करनी चाहिए?
उत्तर-
नहीं, हमें अपने विद्यालय की देखभाल करनी चाहिए जैसे कि ये विद्या के मन्दिर हैं।

प्रश्न 12.
आजकल समाज में असमानता के तीन उदाहरण कौन-से हैं?
उत्तर-
असमान भत्ते, पुरुषों के लिए कुछेक कार्य आरक्षित रखना, स्त्रियों को गृह कार्य करने के लिए बाध्य करना आदि।

प्रश्न 13.
क्या हमें लिंग असमानता या लिंग समानता का समर्थन करना चाहिए?
उत्तर-
हमें लिंग समानता को समर्थन करना चाहिए और लिंग असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठानी चाहिए।

प्रश्न 14.
क्यों स्त्रियों को रेलगाड़ी चलाने और विमान उड़ाने की आज्ञा दी जानी चाहिए?
उत्तर-
हां. स्त्रियों को रेलगाड़ी चलाने और विमान उड़ाने की आज्ञा दी जानी चाहिए।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 9 लिंग समानता

प्रश्न 15.
क्या हमें बहुत योग्य स्त्री को अपने नेता के रूप में चुनना चाहिए?
उत्तर-
हाँ, हमें बहुत योग्य स्त्री को अपने नेता के रूप में चुनना चाहिए।

प्रश्न 16.
क्या भाई होने के नाते आप अपनी बहन का समर्थन करेंगे यदि वह तैराक या पहलवान बनना चाहती है?
उत्तर-
हां, मैं उसका समर्थन करूंगा।

प्रश्न 17.
क्या स्त्रियों को देर रात तक कार्य करने की आज्ञा होनी चाहिए?
उत्तर-
हां, स्त्रियों को देर रात तक कार्य करने की आज्ञा होनी चाहिए।

प्रश्न 18.
उन तीन स्त्रियों के नाम बताओ जिनकी आप उनकी प्राप्तियों के लिए प्रशंसा करते हैं?
उत्तर-
हिमा दास, कल्पना चावला और मैरी कॉम।

प्रश्न 19.
दो प्रसिद्ध महिला वैज्ञानिकों के नाम लिखो।
उत्तर-
मैरी क्यूरी (भौतिकी और रसायन वैज्ञानिक) एवं जानकी अम्मल (वनस्पति वैज्ञानिक)।

प्रश्न 20.
उस स्त्री का नाम लिखो जो भारत की प्रधानमन्त्री थी।
उत्तर-
इन्दिरा गाँधी।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
लिंग समानता के विषय में संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
लिंग समानता शब्द का अर्थ है कि लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। स्त्रियों और पुरुषों को सब प्रकार से समान समझा जाना चाहिए। स्त्रियां पुरुषों के समान अवसर प्राप्त करें और उन्हें किसी कार्य के लिए पुरुषों के समान भत्ते दिए जाने चाहिए।

प्रश्न 2.
क्या अतीत में लिंग समानता थी?
उत्तर-
नहीं, अतीत में लिंग समानता नहीं थी। आज भी विश्व के कई भागों में लिंग समानता नहीं है। स्त्रियों को पुरुषों से कम समझा जाता है। उन्हें घर के अन्दर रहने और गृह कार्य करने के लिए विवश किया जाता है।

प्रश्न 3.
लिंग असमानता की क्या हानियां हैं?
उत्तर-
निम्नलिखित कुछेक लिंग असमानता की हानियां हैं

  1. यह उचित शारीरिक और मानसिक विकास को रोकता है।
  2. जीवन वातावरण सामंजस्यपूर्ण नहीं होगा।
  3. सभी राष्ट्र और समाज की उन्नति में योगदान देने के योग्य नहीं होंगे।
  4. राष्ट्र की G.D.P. (सकल घरेलू उत्पाद) निम्न रहेगी।
  5. सभी ज़िन्दगी का पूर्ण आनन्द नहीं ले सकते।

प्रश्न 4.
लिंग समानता के मुख्य लक्षण कौन-से हैं?
उत्तर-
लिंग समानता के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं

  1. लड़कों और लड़कियों को समान समझना।
  2. जो भी कार्य करने के योग्य है, उसे कार्य करना चाहिए।
  3. भत्ते निश्चित होने चाहिए यह विचार किए बिना कि कार्य कौन कर रहा है।
  4. स्त्रियां वे सभी कार्य करने के योग्य हैं जो केवल पुरुष कर सकते हैं।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 9 लिंग समानता

प्रश्न 5.
लिंग समानता का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
यदि समाज में लिंग समानता है तो हमारे पास निम्नलिखित होगा

  1. स्त्रियों और लड़कियों के विरुद्ध हिंसा नहीं।
  2. समाज में आर्थिक समृद्धि।
  3. उच्च सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
  4. बहुत सुखद पारिवारिक और सामाजिक वातावरण।

प्रश्न 6.
लिंग असमानता का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर-
लिंग असमानता के लिए उत्तरदायी बहुत-से तत्त्व हैं। उनमें से कुछेक हैं:

  1. समाज की छोटी सोच।
  2. स्त्रियों की योग्यता के बारे में तुच्छ सोच।
  3. पुरुषों को स्त्रियों का रखवाला समझना।
  4. पुरुषों में झूठी श्रेष्ठता समझने की भावना।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न माग

प्रश्न 1.
उन कुछेक स्त्रियों के नाम लिखो जिन पर भारत को मान है।
उत्तर-
हमारे यहाँ ऐसी बहुत-सी स्त्रियां हैं जिन्होंने भारत के लिये ख्याति अर्जित की है। उनमें से कुछेक हैं

  1. इन्दिरा गांधी-वह पहली स्त्री थी जो भारत की प्रधानमन्त्री बनी। उन्होंने जनवरी, 1966 से मार्च, 1977 तक तथा पुनः जनवरी 1980 से उनकी हत्या किए जाने तक अक्तूबर, 1984 तक प्रधानमन्त्री के रूप में सेवा की। वह आयरन लेडी के नाम से प्रसिद्ध है।
  2. मैरी कॉम-वह भारत की मुक्केबाजी की स्टार है। उन्होंने छ: बार विश्व अव्यवसायी मुक्केबाजी प्रतियोगिता जीती। भारत को उन पर मान है।
  3. हिमा दास-वह भारत की सेवानिवृत्त ऐथलीट है। उन्होंने 2019 में पांच स्वर्ण पदक जीते।
  4. कल्पना चावला-वह अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री, अभियंता और अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली स्त्री थी।
  5. मदर टेरेसा-उन्होंने अपना जीवन गरीबों और बेसहारा लोगों की सहायता करने को समर्पित किया और 1979 ई० में नोबल शान्ति पुरस्कार जीतने वाली पहली स्त्री थी।
  6. आनन्दी गोपाल जोशी-वह पहली स्त्री थी जो भारत में डॉक्टर बनी।

प्रश्न 2.
हमारा समाज बदल रहा है। इस कथन को लिंग समानता के आधार पर समायोजित करें।
उत्तर-
हमारा समाज बदल रहा है विशेषतया जब हम लड़कियों के प्रति मनोदृष्टि की बात करते हैं। कुछेक बिन्दु जो इस परिवर्तन को दर्शाते हैं, वे निम्नानुसार हैं:

  1. परिजन लड़कियों के जन्म-दिन और उनकी प्राप्तियों पर खुशी मनाते हैं।
  2. परिजन लड़कियों को वे कार्य करने से भी नहीं रोकते जो कभी केवल लड़कों के करने योग्य समझे जाते थे।
  3. लड़कियां समाज में बहुत उच्च पदों पर आसीन हैं। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वे दिखाई देती हैं।
  4. लोग अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सहायक हैं।
  5. समाज के सभी क्षेत्रों में लड़कों और लड़कियों के लिए समान अवसर हैं।
  6. लड़कियां पुलिस अफ्सर, पायलट, प्रशासन अधिकारी आदि बन रही हैं।
  7. स्त्रियां राष्ट्र की उन्नति में भी अद्भुत कार्य करके अपना योगदान दे रही हैं।
  8. बहुत-सी स्त्रियां न केवल खेलों में भाग ले रही हैं बल्कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीत रही हैं। इन सभी बिन्दुओं से कोई भी सरलता से जान सकता है कि हमारा समाज बदल रहा है और लिंग समानता की अवधारणा का समर्थन कर रहा है।

प्रश्न 3.
पुरुष और स्त्री में भेदभाव करना क्या सही है? अपने उत्तर के सन्दर्भ में विचार दें।
उत्तर-
पुरुष और स्त्री में भेदभाव करना सही नहीं है। निम्न बिन्दु इस उत्तर का समर्थन करते हैं।

  1. स्त्रियां पुरुषों की भान्ति ही महत्त्वपूर्ण हैं । वे समाज के दो स्तंभ हैं।
  2. यदि हम बेटियों को शिक्षा नहीं देंगे तो हमारे पोत्तों-नवासों को कौन शिक्षा देगा।
  3. यदि हम उन्हें चिकित्सा व्यवसाय में जाने की अनुमति नहीं देंगे तो हमारी माताओं, बहनों और बेटियों का उपचार कौन करेगा।
  4. यदि हम उन्हें खेलों में जाने की अनुमति नहीं देंगे तो हम अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक तालिका में ऊपर तक कैसे जा सकते हैं।
  5. यदि हम अपनी बेटियों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार नहीं करेंगे तो दूसरे कैसे उनके साथ सम्मान से पेश आएंगे। उपरोक्त बातों से कोई भी सरलता से लिंग समानता के समर्थन की महत्ता को समझ सकता है।

प्रश्न 4.
लड़कियों को समान अवसर और समान भत्ते देकर हम अप्रत्यक्ष रूप से केवल उनकी सहायता कर रहे हैं। क्या आप इस कथन से सहमत या असहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में बताएं।
उत्तर-
मैं उक्त कथन से सहमत हूँ कि लड़कियों को समान अवसर और समान भत्ते देकर हम अप्रत्यक्ष रूप से केवल उनकी सहायता कर रहे हैं। मेरे उत्तर के पक्ष में निम्नलिखित बिन्दु हैं,

  1. यदि मेरी माता एक कार्यरत महिला हैं और उनको कम भत्ता दिया जाता है तो यह हमारे लिए कम पैसे लाएँगी।
  2. हमें अपनी बहनों, बेटियों और माताओं के उपचार के लिए महिला डॉक्टरों की आवश्यकता है। हम उन्हें तभी पा सकते हैं यदि स्त्रियां डॉक्टरी शिक्षा ग्रहण करेंगी।
  3. हमें महिला नौं की आवश्यकता है क्योंकि केवल वे ही हैं जो हमारी स्त्रियों की देखभाल कर सकती हैं।
  4. हमें महिला अध्यापिकाओं की आवश्यकता अपनी बहनों और बेटियों की शिक्षा के लिए है।
  5. हमें महिला खिलाड़ियों की आवश्यकता है नहीं तो हम अंतर्राष्ट्रीय खेलों के दौरान तालिका में उच्च स्थान प्राप्त नहीं कर सकते।
  6. हमें और बहुत-से वैज्ञानिकों, कम्प्यूटर विशेषज्ञों और तकनीशियनों की आवश्यकता है। यह तभी सम्भव है जब हम लड़कियों को समान अवसर प्रदान करते हैं।
  7. यदि पुरुष और स्त्री दोनों मिल कर कार्य करेंगे तो हमारा देश सुपर शक्ति बन सकता है। अतः हम विकसित राष्ट्र बनने की कल्पना नहीं कर सकते यदि हम लड़कियों को समान अवसर प्रदान नहीं करेंगे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
लिंग समानता सुनिश्चित करती है
(क) स्त्रियों के प्रति हिंसा
(ख) पुरुष प्रधान समाज
(ग) सभी लोगों के लिए समान अवसर
(घ) लड़कों के लिए अधिक रोज़गार।
उत्तर-
(ग) सभी लोगों के लिए समान अवसर।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा कथन लिंग समानता के लिए उपयुक्त है?
(क) लड़कों और लड़कियों के लिए रोजगार के अधिक अवसर
(ख) गृह कार्यों में पुरुषों की भागीदारी नहीं
(ग) स्त्रियों का खेलों में भाग न लेना
(घ) यह सभी।
उत्तर-
(क) लड़कों और लड़कियों के लिए रोजगार के अधिक अवसर।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 9 लिंग समानता

प्रश्न 3.
नारीवादी आन्दोलनों का लक्ष्य है
(क) स्वतन्त्रता
(ख) समानता
(ग) सहभागिता
(घ) शक्ति।
उत्तर-
(ख) समानता।

प्रश्न 4.
भारत में स्त्रियों से ……. में भेदभाव किया जाता है।
(क) राजनीतिक जीवन
(ख) सामाजिक जीवन
(ग) आर्थिक जीवन
(घ) सभी ग़लत हैं।
उत्तर-
(घ) सभी ग़लत हैं।

प्रश्न 5.
लिंग आधारित मजदूरी का विभाजन दर्शाता है कि
(क) कार्य पुरुषों और स्त्रियों के बीच में विभाजन तय करता है
(ख) जाति पुरुषों और स्त्रियों के बीच विभाजन का आधार है
(ग) शिक्षा के आधार पर काम का विभाजन
(घ) सभी ग़लत हैं।
उत्तर-
(क) कार्य पुरुषों और स्त्रियों के बीच में विभाजन तय करता है।

प्रश्न 6.
समान मज़दूरी अधिनियम व्यक्त करता है
(क) घरेलू और परिवार सम्बन्धी मामलों को कैसे नियन्त्रित करना है।
(ख) कि स्त्रियों और पुरुषों दोनों को समान कार्य के लिए समान भत्ता दिया जाना चाहिए।
(ग) कि सभी कार्य स्त्रियों और पुरुषों द्वारा सीमा में रहते हुए किये जाते हैं।
(घ) कि लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उत्तर-
(ख) कि स्त्रियों और पुरुषों दोनों को समान कार्य के लिए समान भत्ता दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
लिंग विभाजन आमतौर पर ………… का उल्लेख करता है।
(क) पुरुषों और स्त्रियों के बीच जैविक अन्तर।
(ख) असमान साक्षरता दर ।
(ग) समाज द्वारा पुरुषों और स्त्रियों को असमान भूमिकाएं सौंपी गई हैं ,
(घ) स्त्रियों को मताधिकार न देना।
उत्तर-
(ग) समाज द्वारा पुरुषों और स्त्रियों को असमान भूमिकाएं सौंपी गई हैं।

प्रश्न 8.
स्त्रियों का उत्तरदायित्व ………… है।
(क) केवल बच्चों की देखभाल करना
(ख) केवल घरेलू कार्य करना
(ग) निर्णय लेने और अन्य गतिविधियों में भाग लेना
(घ) कोई भी सही नहीं है।
उत्तर-
(ग) निर्णय लेने और अन्य गतिविधियों में भाग लेना।

प्रश्न 9.
पुरुषों को ……………….. नहीं करना चाहिए।
(क) गृह कार्यों में योगदान
(ख) बच्चों की देखभाल
(ग) स्त्रियों का शोषण
(घ) स्त्रियों का सम्मान।
उत्तर-
(ग) स्त्रियों का शोषण।

प्रश्न 10.
कथन (क): लिंग समानता हम सब के लिए अच्छी है।
कथन (ख): स्त्रियां पुरुषों से कम हैं। निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?
(क) कथन क सही है। कथन ख गलत है।
(ख) कथन क गलत है। कथन ख सही है।
(ग) दोनों कथन सही हैं।
(घ) इन में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) कथन क सही है। कथन ख गलत है।

प्रश्न 11.
लड़कियों को …………… में अवश्य भाग लेना चाहिए।
(क) खेल गतिविधियों
(ख) कृषि और बागबानी कार्यों
(ग) यांत्रिक कार्यों
(घ) इन सभी में।
उत्तर-
(घ) इन सभी में।

प्रश्न 12.
पक्षपातीय लिंग ……….. का परिणाम है।
(क) समाज की संकीर्ण सोच
(ख) कार्यवाही की कमी
(ग) समाज की पुरुष प्रधान प्रकृति
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 9 लिंग समानता

रिक्त स्थान भरोः

  1. ……….. लिंग असमानता का कारण है जो सोचता है कि लड़कियां कमज़ोर हैं।
  2. समाज की ………… के लिए लिंग समानता बहुत ज्यादा आवश्यक है।
  3. स्त्रियां और पुरुष दोनों समाज का ………………. अंग हैं।
  4. लिंग समानता स्त्रियों के विरुद्ध ……………. को रोकता है।
  5. लिंग समानता घर पर या कार्य स्थल पर स्त्रियों और पुरुषों दोनों को समान ………… को निश्चित करती है।
  6. …………. लिंग सम्बन्धी रूढ़ प्रारूप को तोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
  7. लिंग समानता एक मानवीय ……….. है।
  8. लड़कों को ………….. गतिविधियों में शामिल होना चाहिए।
  9. स्त्रियों को शिक्षित करना उसके ………….. को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
  10. भेदभाव साधारणतः ………….. बनाया जाता है।

उत्तर-

  1. संकीर्ण विचारधारा
  2. उन्नति
  3. अपरिहार्य
  4. हिंसा
  5. अवसर
  6. शिक्षा
  7. अधिकार
  8. घरेलू
  9. आत्म-सम्मान
  10. सामाजिक रूप से।

सही/गलत:

  1. हमें लड़कों और लड़कियों में भेदभाव करना चाहिए।
  2. लड़कियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के अवसर मिलने चाहिए।
  3. यान्त्रिक और चालक कार्य लड़कियों की पहुँच से दूर हैं।
  4. लड़कियों को कृषि और बागबानी कार्य में भाग लेना चाहिए।
  5. लिंग समानता करना उचित व्यवहार नहीं है।
  6. लड़कों और लड़कियों को आगे बढ़ने के समान अवसर दिए जाने चाहिए।
  7. लड़कियों को उनके द्वारा सामना किए गए दुर्व्यवहार के बारे में किसी को नहीं बताना चाहिए।
  8. लड़कों और लड़कियों दोनों को पौष्टिक भोजन दिया जाना चाहिए।
  9. लिंग असमानता उनके लिंग पर आधारित व्यक्तिगत असमान बर्ताव को प्रस्तुत करती है।
  10. लिंग समानता का मुख्य उद्देश्य समाज की रचना करना है जिसमें पुरुष और स्त्रियां समान अधिकारों का आनन्द मानें।

उत्तर-

  1. ग़लत
  2. सही
  3. सही
  4. सही
  5. ग़लत
  6. सही
  7. ग़लत
  8. सही
  9. सही
  10. ग़लत।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

Punjab State Board PSEB 8th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Welcome Life Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

Welcome Life Guide for Class 8 PSEB स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान InText Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सार्वजनिक सम्पत्ति क्या है?
उत्तर-
ऐसी सम्पत्ति जो लोगों से एकत्र किए कर से चलती है।

प्रश्न 2.
किसी एक सार्वजनिक सम्पत्ति का नाम बताओ।
उत्तर-
सार्वजनिक पुस्तकालय।

प्रश्न 3.
किसी एक व्यक्तिगत सम्पत्ति का नाम बताओ।
उत्तर-
अपना घर।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सी सार्वजनिक सम्पत्ति नहीं है? बंगला, पार्क और संग्रहालय।
उत्तर-
बंगला।

प्रश्न 5.
इनमें से कौन-सी सार्वजनिक सम्पत्ति है? बंगला, पार्क और संग्रहलय।
उत्तर–
पार्क और संग्रहालय।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

प्रश्न 6.
सार्वजनिक सम्पत्तियों का रख-रखाव और रक्षा करना सरकार का कार्य है। क्या यह कथन सही या गलत है?
उत्तर-
नहीं, सार्वजनिक सम्पत्तियों का रख-रखाब और रक्षा करना सरकार, सहित हम सबका कर्त्तव्य है।

प्रश्न 7.
क्या हमें सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचानी चाहिए?
उत्तर-
नहीं, हमें सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति नहीं पहुंचानी चाहिए।

प्रश्न 8.
क्या हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों के निर्माण, रख-रखाव और रक्षा में योगदान देना चाहिए?
उत्तर-
हां, हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों के निर्माण, रख-रखाव और रक्षा में योगदान देना चाहिए।

प्रश्न 9.
कुछ सम्पत्तियों को सार्वजनिक सम्पत्तियां क्यों कहा जाता है?
उत्तर-
क्योंकि ये जनता से आए पैसे से बनाई, रक्षित और रख-रखाव की जाती हैं।

प्रश्न 10.
क्या हमें संग्रहालय की दीवारों पर लिखना चाहिए?
उत्तर-
नहीं, संग्रहालय की दीवारों पर नहीं लिखना चाहिए क्योंकि यह सार्वजनिक सम्पत्ति है।

प्रश्न 11.
क्या हमें अपने विद्यालय का ध्यान नहीं रखना चाहिए?
उत्तर-
हूँ, हमें अपने विद्यालय का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि ये शिक्षा के मन्दिर हैं।

प्रश्न 12.
समाज की सेवा का सबसे बढ़िया ढंग कौन-सा है?
उत्तर-
समाज की सेवा का सबसे बढ़िया ढंग सार्वजनिक सम्पत्ति को बनाने, रख-रखाव करने, रक्षा करने और बचाने में योगदान देना।

प्रश्न 13.
यदि हम हार जाएं तो क्या हमें प्रेरणाहीन अनुभव करना चाहिए?
उत्तर-
नहीं, यदि हम हार जाएं तो हमें स्वयं को प्रेरणाहीन नहीं समझना चाहिए।

प्रश्न 14.
यदि हम जीतने में असफल हों तो क्या हमें खेलना बन्द कर देना चाहिए?
उत्तर-
नहीं, हमें अपनी कमियों और असफलता से सीखना चाहिए और अगली बार जीतने के लिए कड़ा परिश्रम करने का यत्न करना चाहिए।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

प्रश्न 15.
क्या सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही होनी चाहिए?
उत्तर-
हाँ, सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए।

प्रश्न 16.
सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाना किस प्रकार का व्यवहार है?
उत्तर-
यह समाज विरोधी व्यवहार है या पूर्ण समाज के विरुद्ध अपराध है।

प्रश्न 17.
क्या हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों की साफ़-सफ़ाई का ध्यान नहीं रखना चाहिए?
उत्तर-
हमें ध्यान रखना चाहिए कि सार्वजनिक सम्पत्तियों को साफ़-सुथरा रखना चाहिए।

प्रश्न 18.
क्या रेलवे स्टेशन और बस स्टाप सार्वजनिक सम्पत्तियां हैं?
उत्तर-
हां, रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप सार्वजनिक सम्पत्तियां हैं।

प्रश्न 19.
सड़क और फार्मलैंड में से कौन-सी सार्वजनिक सम्पत्ति है?
उत्तर-
सड़क सार्वजनिक सम्पत्ति है।

प्रश्न 20.
सार्वजनिक सम्पत्ति को कौन उपयोग कर सकता है?
उत्तर-
हम सब सार्वजनिक सम्पत्ति का उपयोग कर सकते हैं।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सार्वजनिक सम्पत्ति के अर्थ की व्याख्या करें।
उत्तर-
सार्वजनिक सम्पत्तियां समाज की विशिष्ट सम्पत्तियां हैं। ये सभी बड़े यत्नों से बनाई गई हैं। इनको बनाने और इनके रख-रखाव में बहुत बड़ी मात्रा में पैसे का निवेश होता है। इन सम्पत्तियों को सार्वजनिक सम्पत्तियां कहा जाता है। क्योंकि ये लोगों से कर के रूप में एकत्र किए पैसे से चलती हैं। विद्यालय, अस्पताल, पुस्तकालय, बैंक, रेलवे, बसें, पार्क आदि सार्वजनिक सम्पत्तियां हैं।

प्रश्न 2.
निजी सम्पत्ति, सार्वजनिक सम्पत्ति से कैसे भिन्न होती है?
उत्तर-
निजी सम्पत्ति, सार्वजनिक सम्पत्ति से निम्नानुसार भिन्न है

  1. सार्वजनिक सम्पत्ति अकसर निजी सम्पत्ति से बड़ी होती है।
  2. सार्वजनिक सम्पत्ति हम सबसे करो के रूप में एकत्र किए धन से बनायी और चलायी जाती है। दूसरी ओर निजी सम्पत्ति मालिक द्वारा बनाई जाती है और रख-रखाव की जाती है।
  3. सार्वजनिक सम्पत्ति सामान्य सम्पत्ति है जो सभी द्वारा उपयोग की जाती है। निजी सम्पत्ति केवल मालिक द्वारा उपयोग की जाती है।
  4. सार्वजनिक सम्पत्ति के रख-रखाव को बनाए रखना हम सबका कर्त्तव्य है। निजी सम्पत्ति का रख-रखाव मालिक द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 3.
सार्वजनिक सम्पत्तियों की हम कैसे रक्षा कर सकते हैं?
उत्तर-
निम्न कुछेक विधियां हैं जिससे हम सार्वजनिक सम्पत्तियों की रक्षा कर सकते हैं।

  1. हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति नहीं पहुंचानी चाहिए।
  2. हमें उन लोगों की सहायता करनी चाहिए जो सार्वजनिक सम्पत्ति का रख-रखाव और रक्षा कर रहे हैं।
  3. हम सबको सार्वजनिक सम्पत्तियों के महत्त्व के बारे में जागरुकता फैलानी चाहिए।
  4. सार्वजनिक सम्पत्तियों की रक्षा के लिए कानून और नियम होने चाहिए।
  5. जो लोग सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाने का यत्न करते हैं या वास्तव में क्षति पहुंचाते हैं, उन्हें कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 4.
सार्वजनिक सम्पत्तियों के लिए धन के स्त्रोत क्या हैं?
उत्तर-
जिस सम्पत्ति पर हम सबका समान अधिकार हो उसे सार्वजनिक सम्पत्ति कहा जाता है। सार्वजनिक सम्पत्तियों के लिए धन के मुख्य साधन ये हैं

  1. प्रत्यक्ष कर जैसे कि आयकर।
  2. अप्रत्यक्ष कर जैसे कि बिक्री कर, उत्पाद और सीमा शुल्क।
  3. लोगों से दान, जो सोचते हैं कि समाज के प्रति यह उनकी नैतिक जिम्मेवारी है।

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प्रश्न 5.
विद्यालय की सम्पत्ति के बारे में कुछेक पंक्तियां लिखो।
उत्तर-
विद्यालय की सम्पत्ति में, कुर्सियां, मेज़, डैस्क, विज्ञान प्रयोगशालाएं, खेल के मैदान और पुस्तकालय शामिल होते हैं। विद्यार्थियों को विद्यालय की सम्पत्ति को नष्ट नहीं करना चाहिए। विद्यालय की सम्पत्ति का निर्माण सरकार और जनता दोनों द्वारा किया जाता है। हमें विद्यालय की सम्पत्ति की देखभाल में सहायता के लिए कक्षासमितियां बनानी चाहिएं।

प्रश्न 6.
निम्न पहेलियों को सुलझाने का यत्न करें

  1. मेरे पास बहुत-सी कुर्सियां, मेज़, समाचार-पत्र और किताबों से भरी बहुत-सी अलमारियां हैं।
  2. मेरे पास सुन्दर लॉन है और बहुत-से सुन्दर फूल और पौधे हैं।
  3. मैं बहुत-से कमरों वाली प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, खेल के मैदान, रसोई शनिका वाली बड़ी
    इमारत हूँ और औपचारिक शिक्षा देने का स्थान हूँ।

उत्तर-

  1. यह पुस्तकालय है।
  2. यह पार्क है।
  3. यह एक विद्यालय है।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कुछेक सार्वजनिक सम्पत्तियों का नाम लिखो और इनके महत्त्व बताओ।
उत्तर-
सार्वजनिक सम्पत्तियां वे सम्पत्तियां हैं जो जनता के पैसे से बनाई जाती हैं और उनका रख-रखाव किया जाता है,। कुछेक सार्वजनिक सम्पत्तियां और उनका महत्त्व निम्नलिखित है

  1. सार्वजनिक पुस्तकालय-यह सबको पढ़ने और पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करती है। अत: यह बढ़िया समाज को बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।
  2. सार्वजनिक खेल के मैदान-ये विभिन्न बाहरी खेलों को सीखने और खेलने में हमारी सहायता करते हैं। ये हमारी ऊर्जा और समय को सकारात्मक ढंग से उपयोग करने में सहायता करते हैं।
  3. पार्क और बाग-ये वे स्थान हैं जहां हम योगा, कसरत और सैर कर सकते हैं। हम अच्छा और चिन्तामुक्त अनुभव करते हैं जब हम सुन्दर फूलों को देखते हैं। अतः ये वे स्थान हैं जो हमारा तनाव कम करने में सहायता करते हैं।
  4. सार्वजनिक यातायात-बसें और रेलगाड़ियां सार्वजनिक यातायात का महत्त्वपूर्ण भाग हैं। ये ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने में सहायता करती हैं।
  5. अस्पताल-सार्वजनिक अस्पताल स्वस्थ रहने में हमारी सहायता करते हैं और बहुत कम लागत पर उपचार लेने को हमारी सहायता करते हैं।

प्रश्न 2.
निम्न प्रश्नों के उत्तर दें

  1. क्या सार्वजनिक सम्पत्तियों के बगैर बढ़िया जीवन की कल्पना कर सकते हैं?
  2. जो सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाते हैं, उनसे हमें कैसे व्यवहार करना चाहिए?
  3. सार्वजनिक सम्पत्तियों की क्षति हमारी अपनी क्षति है, सिद्ध करें।
  4. आप दूसरों की सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाने से दूर रहने के लिए किस प्रकार उत्साहित करेंगे?

उत्तर-

  1. नहीं, हम सार्वजनिक सम्पत्तियों के बगैर बढ़िया जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। उदाहरणत: हमें कम पैसे खर्चे पर दूर स्थानों तक यात्रा करने के लिए बसों और रेलगाड़ियों की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार कम लागत पर उपचार प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक अस्तपालों की आवश्यकता है।
  2. कुछेक लोग सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाते हैं। हमें किसी को भी सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाने से रोकना चाहिए और जागरूक करना चाहिए।
  3. सार्वजनिक सम्पत्तियां जनता के पैसे से बनाई और चलाई जाती हैं। हम सरकार को कर अदा करते हैं और सरकार एकत्रित धन में से कुछ सार्वजनिक सम्पत्तियों के रख-रखाव पर खर्च करती है। यदि हम सार्वजनिक सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाएंगे तो सरकार हम पर भारी कर लगाएगी। अतः हमें उनकी क्षति पूर्ति के लिए धन अदा करना है। साधारण शब्दों में यदि हम सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाते हैं तो हम स्वयं को क्षति पहुंचा रहे हैं।
  4. सार्वजनिक स्थानों का ध्यान रखना हमारा सामूहिक उत्तरदायित्व है। हमें यह हमारे इर्द-गिर्द सभी को बताना होगा। हम सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाने से रोकने के लिए लोगों के लिए नारे तैयार कर सकते हैं। हम सार्वजनिक सम्पत्तियों की रक्षा के लिए जागरुकता फैलाने के लिए पोस्टर बना सकते हैं, खेल खेलते हैं, ड्रामा आदि दिखा सकते हैं।

प्रश्न 3.
विद्यालय की सम्पत्ति का ध्यान रखना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर-
अग्रलिखित वे कारण हैं जो प्रत्येक विद्यार्थी के लिए विद्यालय की सम्पत्ति का ध्यान रखने की व्याख्या करते हैं

  1. विद्यालय एक सार्वजनिक सम्पत्ति है और इस स्थान की आवश्यकता ज्ञान प्राप्त करने और औपचारिक शिक्षा ग्रहण के लिए है।
  2. यदि हम अपने विद्यालय की सम्पत्ति को हानि पहुंचाएंगे तो आवश्यकता के समय उसका उपयोग नहीं कर सकेंगे।
  3. यदि हम पुस्तकालय से पुस्तकें चुराते हैं या फाड़ते हैं तो आवश्यकता के समय हम पुस्तकें प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
  4. यदि हम प्रयोगशाला में उपकरणों और यन्त्रों को तोड़ते हैं तो हम प्रयोग नहीं कर सकते।
  5. यदि हम विद्यालय के लॉन को खराब करते हैं तब हमें असुखद परिवेश में बैठना पड़ेगा।
  6. यदि हम खेल के मैदानों का उपयोग कूड़ा-कर्कट फैंकने के लिए करेंगे तो हमें खेलने के लिए कोई स्थान नहीं मिलेगा।
  7. यदि हम कक्षा में फर्नीचर को क्षति पहुंचाएंगे तो हमारे पास बैठने के लिए अच्छा फर्नीचर नहीं होगा। ऊपरी तथ्यों से, प्रत्येक व्यक्ति विद्यालय की सम्पत्तियों के ध्यान रखने के महत्त्व को सरलता से समझ सकता है।

प्रश्न 4.
निम्न प्रश्नों का उत्तर दें:
(i) हमें सार्वजनिक यातायात का क्यों ध्यान रखना चाहिए?
(ii) हमें पार्कों और बागों का क्यों ध्यान रखना चाहिए?
(iii) हमें सड़कों और रेल मार्गों को क्षति क्यों नहीं पहुंचानी चाहिए?
उत्तर-
(i) सार्वजनिक यातायात सस्ता, टिकाऊ और सबके लिए उपलब्ध साधन है। हम सबको, चाहे वह अमीर हो या गरीब, दूरस्थ स्थानों पर यात्रा करने के लिए सार्वजनिक यातायात की आवश्यकता होती है। यह तब और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है जब हम दुर्गम और बीहड़ स्थानों पर जाना चाहते हैं। इनका प्रयोग करके हम सभी मौसमों में यात्रा कर सकते हैं और हम बिना थकावट के यात्रा कर सकते हैं । हम खुशी अनुभव करेंगे यदि सार्वजनिक यातायात साफ और अच्छी स्थिति में होगा। यह तभी सम्भव है यदि हम अच्छी तरह ध्यान रखेंगे और इनको किसी प्रकार की क्षति न पहुंचाएं।

(ii) अच्छी तरह से साफ और रख-रखाव किए हुए पार्क लोगों को लम्बी सैर, पिकनिक मनाने, खेल गतिविधियों या केवल आराम करने के लिए सुरक्षित और आनन्ददायक स्थान उपलब्ध करवाते हैं। वे हमारे वातावरण और पानी की गुणवत्ता को सुधारते हैं। हम कई प्रकार के फूलों, पौधों और जानवरों के बारे में जानते हैं। पार्कों और बागों में जाकर सीख सकते हैं। पार्कों और बागों को साफ़ रखना प्रत्येक आने वाले का कार्य हैं। अतः हमारे अपने लाभ के लिए हमें पार्कों और बागों की अच्छी तरह देखभाल करनी चाहिए।

(iii) हमें सड़कों और रेलमार्गों को क्षति नहीं पहुंचानी चाहिए क्योंकि यदि ये क्षतिपूर्ण होंगे तो हमारी यात्रा धीमी और असुखद होगी। हमें अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचने में अधिक समय लगेगा। यदि सड़क या रेल मार्ग खराब होंगे तो दुर्घटनाओं की सम्भावनाएं अधिक होंगी। यह बहुत से लोगों के जीवन को खतरे में डाल देगी। अतः हमें अपनी सुरक्षा और उन्नति के लिए सड़कों और रेलमार्गों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
स्कूल वह स्थान है जहां हम
(क) खेलते समय सीखते हैं
(ख) अनौपचारिक विधि से सीखते हैं
(ग) औपचारिक शिक्षा ग्रहण करते हैं
(घ) ये सभी।
उत्तर-
(ग) औपचारिक शिक्षा ग्रहण करते हैं।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सी सार्वजनिक सम्पत्ति नहीं है?
(क) स्कूल
(ख) खेल का मैदान
(ग) पार्क
(घ) ये सभी सार्वजनिक सम्पत्ति हैं।
उत्तर-
(घ) ये सभी सार्वजनिक सम्पत्ति हैं।

प्रश्न 3.
सभी सार्वजनिक सम्पत्तियां जनता के पैसे से बनाई जाती हैं।
(क) सत्य
(ख) असत्य
(ग) इनमें कुछेक जनता के पैसे से बनाई जाती हैं
(घ) सभी गलत हैं।
उत्तर-
(क) सत्य।

प्रश्न 4.
हमें ………………….. चाहिए।
(क) सार्वजनिक सम्पत्ति की देखभाल नहीं करनी
(ख) सार्वजनिक सम्पत्ति की देखभाल करनी।
(ग) सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचानी
(घ) सभी गलत हैं।
उत्तर-
(ख) सार्वजनिक सम्पत्ति की देखभाल करनी।

प्रश्न 5.
सार्वजनिक सम्पत्ति के लिए पैसे ……………. से आता है।
(क) आमदन कर
(ख) बिक्री कर
(ग) सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(क) सभी सही हैं।

प्रश्न 6.
हम पढ़ने के लिए विभिन्न विषयों पर बहुत-सी पुस्तकें कहां पाते हैं?
(क) निजी पुस्तकालय में
(ख) सार्वजनिक पुस्तकालय में
(ग) अस्पताल में
(घ) पार्क में।
उत्तर-
(ख) सार्वजनिक पुस्तकालय में।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

प्रश्न 7.
सार्वजनिक सम्पत्तियां समाज की महत्त्वपूर्ण सम्पत्तियां होती हैं।
(क) महत्त्वपूर्ण
(ख) प्रतिष्ठा
(ग) बहुमूल्य
(घ) सभी सत्य हैं।
उत्तर-
(घ) सभी सत्य हैं।

प्रश्न 8.
हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों के निर्माण के लिए ……….. योगदान देना चाहिए।
(क) अधिक से अधिक जितना हो सके
(ख) कुछ भी नहीं
(ग) सब कुछ
(घ) कोई भी सही नहीं है।
उत्तर-
(क) अधिक-से-अधिक जितना हो सके।

प्रश्न 9.
यह सभी का प्रमुख कर्तव्य है कि
(क) सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करना
(ख) सार्वजनिक सम्पत्ति का रख-रखाव करना
(ग) सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाना
(घ) सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करना और रख-रखाव करना।
उत्तर-
(घ) सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करना और रख-रखाव करना।

प्रश्न 10.
कथन क : सार्वजनिक सम्पत्ति का निर्माण जनता से एकत्र किए धन से होता है।
कथन ख : सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। निम्न में से कौनसा विकल्प सही है?
(क) कथन क सही है और कथन ख गलत है
(ख) कथन क गलत है और कथन ख सही है
(ग) दोनों कथन सही हैं
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) कथन क सही है और कथन ख गलत है।

प्रश्न 11.
निम्न में से कौन-सा सबका कर्तव्य है?
(क) सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा और रख रखाव
(ख) सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति न पहंचाना
(ग) सार्वजनिक सम्पति को बढ़िया बनाने के लिए पैसा दान करना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 12.
जो सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाते हैं उनके विरुद्ध किस प्रकार की कार्यवाही की जानी चाहिए?
(क) कोई कार्यवाही नहीं
(ख) सख्त कार्यवाही
(ग) कोमल कार्यवाही
(घ) केवल थोड़ा सा जुर्माना करना चाहिए।
उत्तर-
(ख) सख्त कार्यवाही।

रिक्त स्थान भरो:

  1. खेल के मैदान और पार्क …………. सम्पत्ति हैं।
  2. हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों का रख-रखाव और …………. करने का यत्न करना चाहिए।
  3. सार्वजनिक सम्पत्तियां हम सबके ……………… लिए हैं।
  4. सार्वजनिक सम्पत्तियां ………………….. निवेश से बनती हैं।
  5. सार्वजनिक सम्पत्तियों का बढ़िया ……………. सभ्य समाज का चिन्ह है।
  6. लोगों से ……………. द्वारा एकत्र किए पैसे से चलने वाली सम्पत्तियों को सार्वजनिक सम्पत्तियां कहते हैं।
  7. सार्वजनिक सम्पत्तियों की रक्षा और रख-रखाव करना हम सबका ………………….. है।
  8. जो सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाते हैं, उनके विरुद्ध …………. कार्यवाही करनी चाहिए।
  9. हमें …………… जैसे कि रेलों में गन्दगी नहीं फैलानी चाहिए।
  10. सार्वजनिक सम्पत्तियां समाज के प्रत्येक व्यक्ति की …………. करती हैं।

उत्तर-

  1. सार्वजनिक
  2. रक्षा
  3. उपयोग
  4. विशाल
  5. रख-रखाव
  6. टैक्सों
  7. कर्त्तव्य
  8. सख्त
  9. सार्वजनिक सम्पत्ति
  10. सेवा।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 8 स्कूल और सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान

सही/ग़लत:

  1. हमें सार्वजनिक पुस्तकालय में शान्ति बनाए रखनी चाहिए।
  2. बसों और रेलों में सफाई व्यवस्था को बनाए रखना सामूहिक उत्तरदायित्व है।
  3. हमें सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति नहीं पहुंचानी चाहिए।
  4. हमें सार्वजनिक पुस्तकालय में किताबों से पन्ने फाड़ने चाहिए।
  5. हमें सार्वजनिक बागों और पार्कों में से फूल तोड़ने चाहिए।
  6. सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाने वाले के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।
  7. सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा और रख-रखाव करना हम सबका कर्त्तव्य है।
  8. हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों की दीवारों पर नहीं लिखना चाहिए।
  9. हमें सार्वजनिक सम्पत्तियों की रक्षा के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।
  10. सार्वजनिक सम्पत्तियां लोगों से एकत्र करों पर चलती हैं।

उत्तर-

  1. सही
  2. सही
  3. सही
  4. ग़लत
  5. ग़लत
  6. सही
  7. सही
  8. सही
  9. सही
  10. सही।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

Punjab State Board PSEB 8th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 6 निर्णय लेना Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Welcome Life Chapter 6 निर्णय लेना

Welcome Life Guide for Class 8 PSEB निर्णय लेना InText Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्णय लेने को परिभाषित करें।
उत्तर-
निर्णय लेना एक व्यक्ति सभी सम्भावित विकल्पों में से चुनाव करने की योग्यता है।

प्रश्न 2.
क्या निर्णय लेना केवल अव्यवस्थित विकल्प बनाना है?
उत्तर-
नहीं, यह केवल अव्यवस्थित विकल्प बनाना नहीं है।

प्रश्न 3.
निर्णय लेने का मुख्य बिन्दु कौन-सा है?
उत्तर-
यह प्रत्येक विकल्प के बारे में तर्कसंगत सोच पर आधारित है।

प्रश्न 4.
क्या हमें हमेशा शीघ्रता से निर्णय लेना चाहिए?
उत्तर-
नहीं, अधिकतर स्थितियों में हमें अति शीघ्रता से निर्णय नहीं लेना चाहिए।

प्रश्न 5.
क्या बढ़िया निर्णय लेना एक गुण है?
उत्तर-
हाँ, बढ़िया निर्णय लेना एक गुण है।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

प्रश्न 6.
क्या हमें निर्णय लेने से पहले समस्या के कारण के बारे में जानना चाहिए?
उत्तर-
हाँ, निर्णय लेने से पहले हमें समस्या के कारण के बारे में जानना चाहिए।

प्रश्न 7.
क्या कार्य करने से पहले समस्या का विश्लेषण करना बढ़िया है?
उत्तर-
हाँ, कार्य करने से पहले समस्या का विश्लेषण करना अच्छा है।

प्रश्न 8.
क्या समाधान ढूंढने का प्रत्यन करने से पहले समस्या की प्रकृति के बारे में जानना अच्छा है?
उत्तर-
हाँ, समाधान ढूंढने का प्रयत्न करने से पहले समस्या की प्रकृति के बारे में जानना अच्छा है।

प्रश्न 9.
क्या निर्णय लेने से पहले हमें सभी सम्भावित विकल्पों पर विचार करना चाहिए?
उत्तर-
हाँ, निर्णय लेने से पहले हमें सभी सम्भावित विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

प्रश्न 10.
क्या हमें अपने निर्णय पर स्थिर रहना चाहिए यदि यह समस्या को और गम्भीर बना दे?
उत्तर-
नहीं, हमें अपने निर्णय पर स्थिर नहीं रहना चाहिए यदि यह समस्या को और गम्भीर बना दे।

प्रश्न 11.
क्या प्रत्येक विकल्प/समाधान के बारे में पूर्ण जानकारी एकत्र करना बढ़िया है?
उत्तर-
हाँ, प्रत्येक विकल्प/समाधान के बारे में पूर्ण जानकारी एकत्र करना बढ़िया है।

प्रश्न 12.
निर्णय लेना सरल क्यों नहीं है?
उत्तर-
क्योंकि इसमें विश्लेषण करना, जानकारी प्राप्त करना और दूसरों से चर्चा करना शामिल है।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

प्रश्न 13.
जब हमारे पास अपनी समस्या के लिए बहुत-से विकल्प हों तो कौन-सा विकल्प चुना जाना चाहिए?
उत्तर-
हमें कम लागत के साथ बढ़िया परिणाम वाले विकल्प को चुनना चाहिए।

प्रश्न 14.
क्या निर्णय लेने से पूर्व सभी विकल्पों की तुलना करना अच्छा है?
उत्तर-
हाँ, निर्णय लेने से पूर्व सभी विकल्पों की तुलना करना अच्छा है।

प्रश्न 15.
हमें अपने निर्णय को लागू करने से पहले दूसरे के साथ चर्चा क्यों करनी चाहिए?
उत्तर-
क्योंकि यह हमें अपने निर्णय में उपयुक्त परिवर्तन करने के लिए सहायता करेगा ताकि बढ़िया परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

प्रश्न 16.
क्या पूर्व निर्णयों के नकारात्मक परिणामों के आधार पर अपने निर्णय को बदलना अच्छा है?
उत्तर-
हाँ, पूर्व निर्णयों के नकारात्मक परिणामों के आधार पर अपने निर्णय को बदलना अच्छा है।

प्रश्न 17.
क्या नया निर्णय लेने से पहले पूर्व निर्णयों के परिणामों के बारे में जानना अच्छा है?
उत्तर-
हाँ, नया निर्णय लेने से पहले पूर्व निर्णयों के परिणामों के बारे में जानना बढ़िया है।

प्रश्न 18.
हम बढ़िया निर्णय कैसे ले सकते हैं?
उत्तर-
हम बढ़िया निर्णय केवल पूर्ण विश्लेषण, उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की तुलना और दूसरों से बातचीत करने के पश्चात् ले सकते हैं।

प्रश्न 19.
क्या हमें सभी समाधानों के सभी सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं के बारे में सोचना चाहिए?
उत्तर-
हाँ, हमें सभी समाधानों के सभी सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं के बारे में सोचना चाहिए।

प्रश्न 20.
यदि हमारे पूर्व निर्णय सही नहीं थे तो हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर-
हमें उस निर्णय को दिमाग में रखना चाहिए और भविष्य में समस्या के समाधान में कभी लागू नहीं करना चाहिए।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्णय लेना क्या है ? संक्षेप में बताएँ।
उत्तर-
निर्णय लेना वह योग्यता है जो सभी सम्भावित विकल्पों में से सही को चुनने के योग्य बनाती है। यह प्रत्येक विकल्प के बारे में तर्कसंगत सोच पर आधारित है जोकि अव्यवस्थित विकल्प पर।

प्रश्न 2.
निर्णय लेने की प्रक्रिया में कौन-से पग शामिल हैं?
उत्तर-
महत्त्वपूर्ण पग ये हैं:

  1. हमें समस्या के बारे में, इसके कारणों और इसकी प्रकृति के विषय में जानना चाहिए।
  2. हमें समस्या के समाधान के लिए उपलब्ध विकल्पों के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करना चाहिए।
  3. हमें दूसरों के साथ अपने निर्णय पर बातचीत करनी चाहिए।
  4. हमें अपने पूर्व निर्णयों को इस जैसी स्थिति में याद करना चाहिए।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

प्रश्न 3.
क्या यह आवश्यक है कि हमें समस्या के लिए उत्तरदायी विभिन्न तत्त्वों का विश्लेषण करना चाहिए?
उत्तर-
समस्या के लिए उत्तरदायी विभिन्न तत्त्वों का विश्लेषण करना आवश्यक है क्योंकि कई बार विशेष तत्त्व को केवल हटाने से ही समस्या का समाधान हो सकता है। उदाहरणतया यदि किसी को किसी तत्त्व से एलर्जी है तो दवाई से उसका उपचार नहीं किया जा सकता। इस मामले में, समस्या का समाधान एलर्जी फैलाने वाले तत्त्व को हटा कर ही किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
तर्कसंगत सोच से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
तर्कसंगत सोच सोचने की एक विधि है जिसमें हम समस्या के समाधान के लिए प्रयत्न करने से पहले समस्या के प्रत्येक पहलू का विश्लेषण करते हैं। इस प्रकार की सोच में, हम समस्या के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं की तुलना करते हैं।

प्रश्न 5.
पूर्व अनुभव से सीखना निर्णय लेने में हमेशा सहायक होता है। सिद्ध करो।
उत्तर-
हम प्रतिदिन निर्णय लेते हैं। हमारे निर्णयों में से कुछ सही और लाभदायक सिद्ध होते हैं परन्तु कुछेक ग़लत या कम लाभदायक होते हैं। अतः यदि हम पूर्व निर्णयों और उनके परिणामों को दिमाग में रखते हैं तो हमारे लिए भविष्य में सही व लाभदायक निर्णय लेने में सरलता होगी। इसके कारण जब हमारा वैसी ही समस्या से सामना होगा तो हम ग़लत या कम लाभदायक निर्णय नहीं लेंगे। इसलिए पूर्व अनुभव से सीखना निर्णय लेने में हमेशा सहायक होता है।

प्रश्न 6.
स्व-विश्लेषण या आत्म-निरीक्षण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
आत्म-निरीक्षण या स्व-विश्लेषण एवं प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के विचारों और भावनाओं को भीतर से जानना शामिल है। जिसमें जब आप परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के कारणों का किसी दूसरे से मशवरा किए बगैर विश्लेषण करते हैं, यह इसकी उदाहरण है। यह आपको भविष्य में बढ़िया कर्ता बनने में सहायता करेगा। हम सबको आत्म-निरीक्षण करना चाहिए।

प्रश्न 7.
यदि आपको पता चलता है कि आपकी टेबल लैम्प कार्य नहीं कर रही तो अपने निर्णय का फ्लोचार्ट बनाओ।
उत्तर-
यदि हमारी टेबल लैम्प कार्य नहीं कर रही तो इसके बहुत-से कारण हो सकते हैं और हम निम्न फ्लोचार्ट के आधार पर अपने कार्य को निश्चित कर सकते हैं

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना 1

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
एक प्रभावशाली निर्णय लेने के लिए विभिन्न पग लिखें।
उत्तर-
एक प्रभावशाली निर्णय लेने के लिए निम्नलिखित पगों की आवश्यकता है

  1. निर्णय की पहचान-यह पहला पग है जो बहुत महत्त्वपूर्ण है। आपने जो निर्णय किया है उसके प्रति स्पष्ट रहो।
  2. सम्बन्धित जानकारी एकत्र करना-निर्णय लेने से पूर्व पूरी सम्बन्धित जानकारी एकत्र करो।
  3. विकल्पों की पहचान-आप सभी सम्भव और इच्छित विकल्पों की सूची बनाओ।
  4. विकल्पों की परख-आपको विकल्पों की परख अवश्य करनी चाहिए। इन विकल्पों को स्थिति की मांग के आधार पर प्राथमिक क्रम में रखो। इसके बाद बढ़िया विकल्प को चुनो जिसको कम लागत की आवश्यकता हो और अधिक परिणाम दें।
  5. निर्णय को लागू करना-सभी आवश्यक कार्य करने के पश्चात् आपको क्रिया करनी चाहिए।
  6. अपने निर्णय और इसके परिणामों की समीक्षा करें-अन्त में देखो कि परिणाम क्या है। यदि परिणाम अच्छा नहीं है या लक्ष्य तक नहीं है तो विभिन्न तत्वों पर विचार करें जहां आपको सुधारों की आवश्यकता है।
    इस पूरी प्रक्रिया को निम्न चित्र की सहायता से दिखा जा सकता है।
    PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना 2

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

प्रश्न 2.
रोजमर्रा की ज़िन्दगी में बढ़िया निर्णय लेने की आवश्यकता या महत्ता के बारे में लिखें।
उत्तर-
बढ़िया निर्णय लेना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि:

  1. यदि अब हम ग़लत निर्णय लेते हैं तो हमें अपने जीवन में इसे पुनः दोहराना पड़ सकता है।
  2. सही व्यवसाय के बारे में राय बनाना बहुत महत्त्वपूर्ण है नहीं तो हमारी पूरी ज़िन्दगी के लिए हमें कुछ ऐसा करना पडेगा जो हमारे स्वभाव के विरुद्ध है।
  3. बढ़िया निर्णय हमें खुश रखता है और निर्धारित क्षेत्र में उन्नति करने और विशिष्ट बनने के लिए उत्साहित करता है।
  4. अपनी योजना और लक्ष्य निर्धारित करने के पश्चात् हम दिल लगा कर और अपनी पूरी योग्यता से कार्य कर सकते हैं।
  5. हमारे अपने निर्णयों के साथ हम निरन्तर कार्य करते हैं जो हमारी सफलता को निश्चित करता है। चाहे हमें सफलता शीघ्रता से या देरी से मिलेगी परन्तु हमारी सफलता निश्चित है।

प्रश्न 3.
दिए गए पगों को पुनर्व्यवस्थित करें, जिनका बढ़िया निर्णय लेते समय पालन किया जाना चाहिए।

  1. निर्णय की समीक्षा
  2. समस्या का विश्लेषण
  3. सभी समाधानों या विकल्पों की परख
  4. सभी समाधानों या विकल्पों की पहचान
  5. क्रिया करना
  6. जानकारी एकत्र करना
  7. समाधानों या विकल्पों में से चुनना।

उत्तर-
हमें ऊपर बताए पगों के साथ निम्न क्रम में चलना चाहिए

  1. समस्या का विश्लेषण
  2. सभी समाधानों या विकल्पों की पहचान
  3. जानकारी एकत्र करना
  4. सभी समाधानों या विकल्पों की परख
  5. समाधानों या विकल्पों में से चुनना
  6. क्रिया करना
  7. निर्णय की समीक्षा।

प्रश्न 4.
उन ढंगों को सुचीबद्ध करो जिनमें आप अपनी निर्णय लेने की कुशलता को सुधार सकते हैं।
उत्तर-
यहां ऐसे बहुत-से ढंग हैं जिनसे हम अपनी निर्णय लेने की कुशलता को सुधार सकते हैं

  1. पहली और महत्त्वपूर्ण कुशलता अपने धैर्य को बनाए रखना है।
  2. हमें कठिन परिस्थितियों में कभी भी घबराहट महसूस नहीं करनी चाहिए।
  3. यदि हम एक समय पर एक से अधिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो हमें प्राथमिकता तय करनी चाहिए।
  4. हमें समस्या और इसके कारणों का विश्लेषण करना चाहिए।
  5. हमें हमारे लिए उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करना चाहिए और उनकी परख करनी चाहिए।
  6. हमें पूर्ण सम्बन्धित जानकारी एकत्र करनी चाहिए और सबसे बढ़िया सम्भव विकल्प को चुनना चाहिए।
  7. हमें अपने निर्णय के बारे में दूसरों से विचार विमर्श करना चाहिए और अपने पूर्व के निर्णय के साथ मिलाकर जांचना चाहिए।
  8. हमें अपने निर्णय को तय करने के पश्चात् कार्य करना चाहिए।
  9. हमारे निर्णय के लिए हम उत्तरदायी हैं और हमें इसकी उपयोगिता या अपयोगिता के लिए समीक्षा करनी चाहिए।

प्रश्न 5.
मान लो आपका नाम x है और आपके मित्र का है जिसे आप उसके घर में मिलते हो। Y ने अपने पिता की अलमारी में से सिगरेट चुराई और पीने लगा। उसने आपको भी सिगरेट पेश की। आप इस स्थिति में क्या करेंगे? निर्णय लेने के लिए अपने विकल्प दो। यह आपके जीवन में अच्छा निर्णय लेने में आपकी सहायता करेगा। जब कभी भी आपको कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने हैं या आप सही या गलत के बीच दुविधा में हैं। सही निर्णय तक पहुंचने के लिए आवश्यक छः पगों को बताओ।
उत्तर-
निर्णय लेने की क्रिया को निम्नलिखित ढंग से पूरा किया जा सकता है

  1. समस्या की पहचान-यहां मैंने समस्या की पहचान कर ली है जैसे सिगरेट पीने के बारे में निर्णय लेना है।
  2. विकल्पों के बारे में विचार करना-मेरे पास दो विकल्प हैं या तो सिगरेट पीऊं या न।
  3. एक विकल्प या अनुसरण करने के परिणाम-मैं जानता हूँ कि सिगरेट पीना बुरी आदत है और मेरे जीवन को बर्बाद कर सकती है। अत: यदि मैं सिगरेट पीता हूँ तो मैं अपने जीवन को बर्बाद कर लूंगा और यदि मैं सिगरेट नहीं पीता तो मैं अपने जीवन को बर्बाद होने से बचा लूंगा।
  4. सही विकल्प के बारे में तय करना-क्योंकि मैं जानता हूँ, सिगरेट पीना बहुत हानिकारक है और जीवन के लिए खतरनाक है। अत: सिगरेट पीने का निर्णय गलत निर्णय होगा। अत: सही विकल्प सिगरेट पीने की पेशकश को अस्वीकार करना होगा।
  5. अन्तिम निर्णय-मेरा अन्तिम निर्णय मेरे मित्र के प्रस्ताव को छोड़ देना है। मैं अपने मित्र को सब कुछ बताऊंगा और वह मुझ से सहमत होता है और अपनी सिगरेट पीने की आदत के विरुद्ध निर्णय लेगा।
  6. मेरे निर्णय की समीक्षा-सिगरेट न पीने का मेरा निर्णय एकदम सही है। इसने मुझे खुश किया है जैसे कि मैंने अपने मित्र को सिगरेट पीने की बुरी आदत को छोड़ने के लिए आश्वस्त किया है।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

प्रश्न 6.
मध्यांतर में, आपने देखा कि आपका परम मित्र किसी दूसरे विद्यार्थी के बैग से कुछ निकाल रहा है। आपके मित्र ने यह नहीं देखा कि आप उसे देख रहे हो। मध्यांतर के पश्चात् अध्यापक ने कक्षा में घोषणा की कि किसी ने एक विद्यार्थी के बैग से पैसे चुरा लिए हैं। आप क्या करोगे? एक निर्णय लो और निम्न प्रश्नों का उत्तर दें।

  1. समस्या क्या है?
  2. आपके पास क्या विकल्प हैं?
  3. प्रत्येक विकल्प का परिणाम क्या है?
  4. कौन-सा विकल्प अधिक बढ़िया है और क्यों?
  5. आपका क्या निर्णय है?
  6. क्या आप सोचते हो कि आपने सही निर्णय किया? क्यों?

उत्तर-
इस स्थिति में प्रश्नों के उत्तरों के आधार पर मेरा निर्णय है:

  1. यह सारी समस्या मेरे मित्र द्वारा किए कार्य के कारण है जोकि पूर्ण रूप से ग़लत कार्य है।
  2. मेरे पास विभिन्न विकल्प हैं जैसे कि मित्र के कार्य को नज़र अंदाज़ कर देना, प्रयत्न करना कि मेरा मित्र पुनः ऐसा कार्य न करे जोकि ग़लत हो।
  3. यदि मैं मित्र के कार्य को नज़र अंदाज़ कर देता हूँ तो वह बुरा व्यक्ति बन सकता है। यदि मैं प्रयत्न करता हूँ तो उसको अच्छा व्यक्ति बना सकता है।
  4. दूसरा विकल्प बढ़िया है क्योंकि यह मेरे मित्र व समाज की भलाई के लिए होगा।
  5. मेरा अन्तिम निर्णय अध्यापक को बताना है कि मेरे मित्र ने पैसे चोरी किए हैं। मुझे अध्यापक और सहपाठियों को विश्वास दिलाना चाहिए कि भविष्य में वह ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा और उसे क्षमा कर देना चाहिए।
  6. हाँ, मेरे विचार से मेरा निर्णय सही है क्योंकि इससे सबको लाभ होगा।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

बहुविकल्पीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
निर्णय लेने का सार है
(क) समस्या का समाधान
(ख) विकल्पों में से चुनना
(ग) कार्य के विकल्प का पाठ्यक्रम विकसित करना
(घ) निगरानी।
उत्तर-
(ख) विकल्पों में से चुनना।

प्रश्न 2.
निर्णय लेना एक व्यक्ति की ……………. बनाने की योग्यता है।
(क) सभी सम्भव विकल्पों में से एक को चुनना
(ख) समस्या के समाधान के लिए सभी सम्भावनों की सूची
(ग) समस्या के सभी कारणों की सूची
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(क) सभी सम्भव विकल्पों में से एक को चुनना।

प्रश्न 3.
निर्णय लेना है:
(क) अव्यवस्थित विकल्प बनाना
(ख) केवल अव्यवस्थित विकल्प न बनाना
(ग) हमारे बुजुर्गों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(ख) केवल अव्यवस्थित विकल्प न बनाना।

प्रश्न 4.
हमें तर्कसंगत बनना चाहिए जब:
(क) निर्णय लेना हो
(ख) स्नान करना हो
(ग) अध्यापकों का अभिनंदन करना
(घ) कोई भी सही नहीं है।
उत्तर-
(क) निर्णय लेना हो।

प्रश्न 5.
हमें समस्या का विश्लेषण करना चाहिए:
(क) कार्य करने से पहले
(ख) कार्य करने के बाद
(ग) कार्य करते समय
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(क) कार्य करने से पहले।

प्रश्न 6.
निर्णय तब बढ़िया होता है यदि हम ……… का विचार विमर्श करने के बाद इसे लेते हैं।
(क) इसके सकारात्मक परिणाम
(ख) इसके नकारात्मक परिणाम
(ग) इसके हानिकारक या हानिरहित परिणामों
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(घ) सभी सही हैं।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

प्रश्न 7.
निर्णय लेने से पहले यदि हम हमारे ………. से विचार विमर्श करते हैं तो यह बढ़िया है।
(क) मित्रों
(ख) परिजनों
(ग) अध्यापकों
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(घ) सभी सही हैं।

प्रश्न 8.
हमारे पूर्व निर्णयों के परिणामों से सीख हमारी निम्न में सहायता करती है:
(क) दूसरे के प्रति हमारी सोच को बदलने में
(ख) हमारी निर्णय लेने की योग्यता को बनाए रखने में
(ग) हमारी निर्णय लेने की योग्यता में सुधार में
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(ग) हमारी निर्णय लेने की योग्यता में सुधार में।

प्रश्न 9.
निर्णय लेने की बढ़िया योग्यता वाले व्यक्ति …………. हैं।
(क) दूसरों से अच्छे
(ख) दूसरों से अच्छे नहीं
(ग) दोनों सही हैं
(घ) कोई भी सही नहीं हैं।
उत्तर-
(क) दूसरों से अच्छे।

प्रश्न 10.
कथन (क) समस्या का विश्लेषण निर्णय लेने का पहला चरण है। कथन (ख) एक व्यक्ति जो बढ़िया निर्णय ले सकता है वह बढ़िया नेता है। निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?
(क) कथन क सही है और कथन ख गलत है
(ख) कथन क ग़लत है और कथन ख सही है।
(ग) दोनों कथन सही हैं
(घ) इनमें से कोई भी नहीं।
उत्तर-
(ग) दोनों कथन सही हैं।

प्रश्न 11.
निम्न में से निर्णय लेने का कौन-सा मुख्य तत्त्व है?
(क) समस्याओं का विश्लेषण करना
(ख) मित्रों, अध्यापकों, परिजनों व अनुभवी व्यक्तियों से परामर्श करना
(ग) विभिन्न परिणामों और उनके प्रभावों के प्रति सम्पूर्ण जानकारी द्वारा
(घ) सभी सही हैं।
उत्तर-
(घ) सभी सही हैं।

प्रश्न 12.
जब आज रात को बाहर जाते हैं तो आपके पास किस वस्तु का होना अति आवश्यक है?
(क) पैंसिल
(ख) चाकू
(ग) टार्च
(ख) रोटी।
उत्तर-
टार्च।

रिक्त स्थान भरो:

  1. सभी सम्भावित विकल्पों में से सही को चुनना एक व्यक्ति की ……………….. की योग्यता है।
  2. निर्णय लेना केवल ………………. विकल्प चुनना नहीं है।
  3. निर्णय लेना प्रत्येक विकल्प पर ……………… विचार करने पर आधारित है।
  4. किसी समस्या पर कार्य करने से पूर्व हमें समस्या का ……………… करना चाहिए।
  5. हमें समस्या के …………… लिए विभिन्न समाधानों की भाल करनी चाहिए।
  6. हमें सभी समाधानों के सही और गलत ……… के बारे में सोचना चाहिए।
  7. हमें विकल्पों/समाधानों के विषय में परिजनों व मित्रों से …………….. करना चाहिए।
  8. हमें प्रत्येक विकल्प/समाधान सम्बन्धी सम्पूर्ण …………… एकत्र करनी चाहिए।
  9. हमें हमारे …………….. को अन्तिम रूप देने से पहले सभी समाधानों/विकल्पों की तुलना करनी चाहिए।
  10. नए निर्णय लेने से पूर्व हमें पूर्व निर्णयों के ………….. के बारे में सोचना चाहिए।
  11. हमें हमारे निर्णय में परिवर्तन हमारे पूर्व निर्णयों के ……………. परिणामों के आधार पर करना चाहिए।

उत्तर-

  1. निर्णय लेना
  2. अव्यवस्थित
  3. तर्कसंगत
  4. विश्लेषण
  5. हल
  6. पहलुओं
  7. चर्चा
  8. जानकारी
  9. निर्णय
  10. परिणामों
  11. गलत।

PSEB 8th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 निर्णय लेना

सही/ग़लत:

  1. निर्णय लेने से पूर्व समस्या का विश्लेषण करना बढ़िया है।
  2. हमें समस्या के समाधान के लिए विभिन्न समाधानों पर विचार करना चाहिए।
  3. हमें सभी समाधानों के विभिन्न पहलुओं पर विचार नहीं करना चाहिए।
  4. पशु अधिकारों की रक्षा के लिए बहुत-से कानून हैं।
  5. हमें सभी परिस्थितियों के लिए एक ही निर्णय लागू करना चाहिए।
  6. सभी विकल्पों के बारे में पूर्ण जानकारी लेना समय की बर्बादी है।
  7. हमें हमेशा हमारे परिजनों, अध्यापकों व मित्रों के साथ चर्चा करने के पश्चात् निर्णय लेना चाहिए।
  8. हमें अति सरल समाधान चुनना चाहिए।
  9. हमें अपना निर्णय नहीं बदलना चाहिए चाहे यह स्थिति को और बिगाड़ दे।
  10. सभी सम्भावित विकल्पों में से एक को चुनना व्यक्ति की निर्णय लेने की योग्यता है।

उत्तर-

  1. सही
  2. सही
  3. ग़लत
  4. सही
  5. ग़लत
  6. ग़लत
  7. सही
  8. सही
  9. ग़लत
  10. सही।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

SST Guide for Class 9 PSEB संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार Textbook Questions and Answers

(क) रिक्त स्थान भरें :

  1. भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को ……….. मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं।
  2. नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद …………. द्वारा ……………. संशोधन के अंतर्गत दिया गया है।

उत्तर-

  1. छ:
  2. 21 A, 86वें।।

(ख) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘बालश्रम’ किस अधिकार द्वारा प्रतिबंधित है ?
(अ) स्वतंत्रता का अधिकार
(आ) समानता का अधिकार
(इ) शोषण विरुद्ध अधिकार
(ई) संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
उत्तर-
(इ) शोषण विरुद्ध अधिकार

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
धर्मनिरपेक्ष राज्य का अर्थ है
(अ) वह राज्य जहां केवल एक ही धर्म हो
(आ) वह राज्य जिसमें कोई धर्म न हो
(इ) वह राज्य जहां बहुत से धर्म हों
(ई) वह राज्य जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं। ”
उत्तर-
(ई) वह राज्य जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं।।

(ग) निम्नलिखित कथनों में सही के लिए तथा गलत के लिए चिन्ह लगाएं :

  1. अधिकार सामाजिक जीवन की वे अवस्थाएं हैं जिनके बिना मानव का पूर्ण विकास नहीं हो सकता।
  2. धर्म-निरपेक्ष का अर्थ है लोग किसी भी धर्म को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकार संविधान के किस भाग में अंकित हैं ?
उत्तर-
मौलिक अधिकार संविधान के तीसरे भाग में अंकित हैं।

प्रश्न 2.
मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारतीय न्यायपालिका को कौन-सी शक्ति प्राप्त है ?
उत्तर-
मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारतीय न्यायपालिका को संवैधानिक उपचारों के अधिकार की शक्ति प्राप्त है।

प्रश्न 3.
उस विधेयक का नाम बताएं जिसमें बाल गंगाधर तिलक ने भारतीयों के लिए अंग्रेजों से कुछ अधिकारों की माांग की थी ?
उत्तर-
बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज विधेयक की मांग की थी।

प्रश्न 4.
अंग्रेजों से पुरुषों व स्त्रियों के लिए समान अधिकारों की मांग किस रिपोर्ट में की गई थी ?
उत्तर-
नेहरू रिपोर्ट।

प्रश्न 5.
व्यक्ति द्वारा किया गया उचित दावा जिसे समाज स्वीकार करता है एवं राज्य कानून द्वारा लागू करता है, को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
मौलिक अधिकार।

प्रश्न 6.
संपत्ति का अधिकार, मौलिक अधिकारों की सूची से कब और किस संशोधन द्वारा विकसित किया गया ?
उत्तर-
1978 में 44वें संवैधानिक संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को कानूनी अधिकार बना दिया गया था।

प्रश्न 7.
कोई दो मौलिक अधिकार बताएं जो विदेशियों को भी प्राप्त हैं।
उत्तर-
स्वतंत्रता का अधिकार, कानून के सामने समानता का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।

प्रश्न 8.
बच्चों के शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकारों से संबंधित किस अनुच्छेद के अधीन दर्ज किया गया है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 21 A.

प्रश्न 9.
मौलिक अधिकार किस अनुच्छेद से किस अनुच्छेद तक दर्ज हैं ?
उत्तर-
अनुच्छेद 14-32 तक।

प्रश्न 10.
‘अस्पृश्यता के उन्मूलन’ के लिए भारत के संविधान में किस अनुच्छेद अधीन व्यवस्था की गई है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 17 से अस्पृश्यता के उन्मूलन की व्यवस्था की गई है।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
‘समानता का अधिकार’ की संक्षेप में व्याख्या करें। .
उत्तर-
समानता का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है जिसका वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है।

  1. संविधान के अनुच्छेद 14 में ‘कानून के समक्ष समता’ और ‘कानूनों के समान संरक्षण’ शब्दों का एक साथ प्रयोग किया गया है।
  2. अनुच्छेद 15 के अनुसार राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग अथवा इनमें से किसी के भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
  3. अनुच्छेद 16 राज्य में सरकारी नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में, सब नागरिकों को समान अवसर प्रदान करता है।
  4. अनुच्छेद 17 द्वारा अस्पृश्यता को समाप्त किया गया है।
  5. अनुच्छेद 18 के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि सेना या शिक्षा संबंधी उपाधि के अतिरिक्त राज्य कोई और उपाधि नहीं देगा।

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प्रश्न 2.
‘न्यायपालिका की न्याय पुनर्निरीक्षण’ की शक्ति पर नोट लिखें।
उत्तर-
न्यायिक पुनर्निरीक्षण न्यायालयों की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह विधानसभा के कानूनों तथा कार्यपालिका के आदेशों की जांच कर सकता है और यदि ये कानून और आदेश संविधान के विरुद्ध हों तो उनको असंवैधानिक एवं अवैध घोषित कर सकते हैं। न्यायालय कानून की उन्हीं धाराओं को अवैध घोषित करते हैं जो संविधान के विरुद्ध होते हैं, न कि समस्त कानून को। न्यायालय उन्हीं कानूनों को अवैध घोषित कर सकता है जो उसके सामने मुकद्दमें के रूप में आते हैं।

प्रश्न 3.
न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाने के लिए भारत के संविधान में क्या व्यवस्थाएं की गई हैं ?
उत्तर-

  1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका द्वारा होनी चाहिए।
  2. न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए न्यायाधीशों को अच्छा वेतन तथा रिटायर होने के पश्चात् पेंशन मिलनी चाहिए।
  3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए न्यायाधीशों के पद की सुरक्षा होनी चाहिए और पद की अवधि लंबी होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’ की संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी इच्छानुसार धर्म को मानने तथा अपने इष्टदेव की पूजा करने का अधिकार है। लोगों को धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने का, उनका प्रबंध करने का और धार्मिक संस्थाओं को संपत्ति इत्यादि रखने के अधिकार दिए गए हैं। किसी भी व्यक्ति को ऐसा टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसे किसी विशेष धर्म के लिए प्रयोग किया जाना हो।

प्रश्न 5.
भारत के नागरिकों को अनुच्छेद 19 के अंतर्गत कौन-कौन सी स्वतंत्रताएं प्रदान की गई हैं ?
उत्तर-
भारतीय नागरिकों को स्वतंत्रता के अधिकार के तहत अनुच्छेद 19 से 22तक कुछ स्वतंत्रताएं दी गई हैं। अनुच्छेद 19 के अनुसार नागरिकों को भाषण देने और विचार प्रकट करने, शांतिपूर्ण तथा बिना हथियारों के इकट्ठे होने, संघ या समुदाय बनाने, घूमने-फिरने, किसी भी स्थान पर बसने या कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। परंतु, इन स्वतंत्रताओं पर एक प्रतिबंध भी हैं। अनुच्छेद 20 से 22 तक नागरिकों को व्यक्तिगत स्वतंत्रताएं प्रदान की गई हैं।

प्रश्न 6.
‘शोषण-विरुद्ध अधिकार’ की व्याख्या करें।
उत्तर-
अनुच्छेद 23 तथा 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं।

  1. अनुच्छेद 23 के अनुसार व्यक्तियों को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है और न ही किसी व्यक्ति से बेगार ली जा सकती है।
  2. अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसे कारखाने या खान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता, जहां उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना हो।

प्रश्न 7.
मौलिक अधिकार-मौलिक कैसे हैं ? अपने उत्तर की पुष्टि तर्क सहित करें।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों को निम्नलिखित कारणों से मौलिक कहा जाता है.

  1. मौलिक अधिकार मूल रूप से मानवीय अधिकार हैं। मनुष्य होने के नाते इन अधिकारों का उपयोग करना ही चाहिए।
  2. मौलिक अधिकार हमें संविधान ने दिए हैं और संविधान देश का मौलिक कानून है। यदि नागरिक को सुखी तथा लोकतांत्रिक जीवन व्यतीत करना है, तो ये अधिकार प्राप्त होने ही चाहिए।
  3. संविधान ने इन अधिकारों को लागू करने के लिए प्रभावशाली विधि अपनाई है। अधिकारों का हनन होने पर कोई भी नागरिक न्यायालय की सहायता से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

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दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकारों का स्वरूप कैसा है ? संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों का स्वरूप निम्नलिखित है

  1. व्यापक और विस्तृत-भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार बड़े विस्तृत तथा व्यापक हैं। इनका वर्णन संविधान के तीसरे भाग की 24 धाराओं में किया गया है। नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं और प्रत्येक अधिकार की विस्तृत व्याख्या की गई है।
  2. मौलिक अधिकार सब नागरिकों के लिए हैं-संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की एक विशेषता यह है कि ये भारत के सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त हैं। ये अधिकार सभी को जाति, धर्म, रंग, लिंग आदि के भेदभाव के बिना दिए गए हैं।
  3. मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं-कोई भी अधिकार पूर्ण और असीमित नहीं हो सकता। भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार भी असीमित नहीं हैं। संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  4. मौलिक अधिकार न्याय योग्य हैं-यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है, तो वह नागरिक न्यायालय के पास जा सकता है। इसके पीछे कानूनी शक्ति है।
  5. सकारात्मक व नकारात्मक-मौलिक अधिकार सकारात्मक भी हैं तथा नकारात्मक भी। जहां एक तरफ यह सरकार के कुछेक कार्यों पर प्रतिबंध लगाते हैं वहीं दूसरी तरफ यह सरकार को कुछ सकारात्मक आदेश भी देते हैं।
  6. नागरिक व राजनीतिक स्वरूप-हमारे अधिकारों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-नागरिक व राजनीतिक, संघ बनाने, विचार प्रकट करने, बिना हथियार इकट्ठे होने जैसे अधिकार राजनीतिक होते हैं। इसके साथ समानता का अधिकार, सांस्कृतिक व शिक्षा संबंधी अधिकार नागरिक अधिकार हैं।
  7. इनकी उल्लंघना नहीं हो सकती–संसद् में कानून पास करवा कर अथवा कार्यपालिका द्वारा आदेश पास करके अधिकारों को न तो खत्म किया जा सकता है न ही उनमें परिवर्तन किया जा सकता है। अगर ऐसा किया जाता है तो न्यायपालिका उस आदेश को रद्द भी कर सकती है।

प्रश्न 2.
अनुच्छेद 20 से 22 तक मौलिक अधिकारों सम्बन्धी की गई व्यवस्थाओं की व्याख्या करें।
उत्तर-
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा (Right to life and Personal Liberty) Art. 2022) अनुच्छेद 20 व्यक्ति और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जैसे-

  1. किसी व्यक्ति को किसी ऐसे कानून का उल्लंघन करने पर दंड नहीं दिया जा सकता जो कानून उसके अपराध करते समय लागू नहीं था।
  2. किसी व्यक्ति को उससे अधिक सज़ा नहीं दी जा सकती जितनी अपराध करते समय प्रचलित कानून के अधीन दी जा सकती है।
  3. किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध उसी अपराध के लिए एक बार से अधिक मुकद्दमा नहीं चलाया जाएगा और दंडित नहीं किया जाएगा।
  4. किसी अभियुक्त को अपने विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 21 में लिखा है कि कानून द्वारा स्थापित पद्धति के बिना किसी व्यक्ति को उसको व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।

दिसंबर, 2007 में राष्ट्रपति ने 86वें संवैधानिक संशोधन को अपनी स्वीकृति प्रदान की। इस स्वीकृति के बाद शिक्षा का अधिकार (Right in Education) संविधान के तीसरे भाग में शामिल होने के कारण एक मौलिक अधिकार बन गया है। 1 अप्रैल, 2010 से बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के पश्चात् 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार मिल गया है।
गिरफ्तारी एवं नज़रबंदी के विरुद्ध रक्षा-अनुच्छेद 22 गिरफ्तार तथा नज़रबंद नागरिकों के अधिकारों की घोषणा करता है। अनुच्छेद 22 के अनुसार

  1. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के तुरंत पश्चात् उसको गिरफ्तारी के कारणों से परिचित कराया जाना चाहिए।
  2. उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श लेने और उनके द्वारा सफाई पेश करने का अधिकार होगा।
  3. बंदी-गृह में बंद किए गए किसी व्यक्ति को बंदी गृह से मैजिस्ट्रेट के न्यायालय तक की यात्रा के लिए आवश्यक समय निकाल कर 24 घंटों के अंदर निकट से निकट मैजिस्ट्रेट के न्यायालय में उपस्थिति किया जाए।
  4. बिना मैजिस्ट्रेट की आज्ञा के 24 घंटों से अधिक समय के लिए किसी व्यक्ति को कारावास में नहीं रखा जाएगा।

अपवाद-अनुच्छेद 22 में लिखे अधिकार उस व्यक्ति को नहीं मिलते जो शत्रु विदेशी है या जो निवारक नज़रबंद कानून के अनुसार गिरफ्तार किये गये हो।
भारतीय संसद् देश की प्रतिरक्षा, विदेशी संबंधों की सार्वजनिक सुरक्षा एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए और भारत संघ की रक्षा के लिए निवारक निषेध अधिनियम का आश्रय ले सकती ।
स्वतंत्रता के अधिकार का निलंबन (Suspension of Right to Freedom)-राष्ट्रपति संकटकाल की घोषणा करके संविधान में दिए गए स्वतंत्रता के अधिकार को निलंवित कर सकता है तथा साथ ही उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालयों में इन स्वतंत्रताओं के विरुद्ध अपील करने के अधिकार का भी निषेध कर सकता है। 44वें संशोधन के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत दिए गए निजी स्वतंत्रता के अधिकार को आपातकालीन स्थिति के दौरान भी स्थगित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 3.
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 25 से 28 तक की गई व्यवस्थाओं की व्याख्या करें।
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता का समान अधिकार प्राप्त है और बिना रोक-टोक के धर्म में विश्वास रखने धार्मिक कार्य करने तथा प्रचार करने का अधिकार है। सभी व्यक्तियों को धार्मिक मामलों का प्रबंध करने की स्वतंत्रता दी गई है। किसी भी व्यक्ति को कोई ऐसा कर देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता जिसको इकट्ठा करके किसी विशेष धर्म या धार्मिक समुदाय के विकास को बनाए रखने के लिए खर्च किया जाना हो। किसी भी सरकारी संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। गैर सरकारी शिक्षा संस्थाओं में जिन्हें राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त है अथवा जिन्हें सरकारी सहायता प्राप्त होती है किसी विद्यार्थी को उसकी इच्छा के विरुद्ध धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने या धार्मिक पूजा पाने में सम्मिलित होने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 4.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार की संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर-
भारतीय संविधान के निर्माताओं को डर था कि कहीं सरकारें निरंकुश हो कर जनता के अधिकारों का हनन ही न कर दें। इसलिए उन्होंने भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को संविधान में डालने के साथ साथ इन अधिकारों को लागू करने की व्यवस्था भी की। अगर भारत के किसी भी नागरिक के अधिकारों का किसी व्यक्ति, समूह या सरकार की तरफ से उल्लंघन होता है तो ऐसी स्थिति में नागरिक राज्य के उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय में जाकर अपने अधिकारों की मांग कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में न्यायालय उन्हें उनके अधिकार वापिस दिलाएगा। उन्हें लागू करने के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय पांच प्रकार की लेख (Writs) जारी कर सकता है। यह है

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
  2. परमादेश या फरमान लेख (Mandamus)
  3. प्रतिषेध लेख (Certiorari)
  4. अधिकार पृच्छा लेख (Prohibition)
  5. उत्प्रेषण लेख (Quo-warranto)

PSEB 9th Class Social Science Guide संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
मानव के लिए क्या आवश्यक है ?
(क) हिंसा
(ख) अज्ञानता
(ग) अधिकार
(घ) बेरोज़गारी।
उत्तर-
(ग) अधिकार

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन किस भाग में किया गया है ?
(क) तीसरे भाग में
(ख) चौथे भाग में
(ग) पांचवें भाग में
(घ) छठे भाग में।
उत्तर-
(क) तीसरे भाग में

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान में मूल अधिकार कितने हैं ?
(क) 5
(ख) 6
(ग) 7
(घ) 8
उत्तर-
(ख) 6

प्रश्न 4.
स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था किस अनुच्छेद में की गई है ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28
उत्तर-
(ख) अनुच्छेद 19-22

प्रश्न 5.
संविधान के कौन-से अनुच्छेद में समानता के अधिकार का वर्णन किया गया ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28.
उत्तर-
(क) अनुच्छेद 14-18

प्रश्न 6.
शोषण के विरुद्ध अधिकार संविधान में कौन-से अनुच्छेद में मिलते हैं ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28
उत्तर-
(ग) अनुच्छेद 23-24

प्रश्न 7.
धार्मिक अधिकारों की व्यवस्था किन अनुच्छेदों में की गई है ?
(क) अनुच्छेद 14-18
(ख) अनुच्छेद 19-22
(ग) अनुच्छेद 23-24
(घ) अनुच्छेद 25-28.
उत्तर-
(घ) अनुच्छेद 25-28.

प्रश्न 8.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार का वर्णन संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है ?
(क) अनुच्छेद 25-28
(ख) अनुच्छेद 29-30
(ग) अनुच्छेद 32
(घ) अनुच्छेद 35-40
उत्तर-
(ग) अनुच्छेद 32

प्रश्न 9.
संविधान के कौन-से.अनुच्छेद द्वारा अस्पृश्यता की समाप्ति की गई है ?
(क) अनुच्छेद 17
(ख) अनुच्छेद 18
(ग) अनुच्छेद 19
(घ) अनुच्छेद 20
उत्तर-
(क) अनुच्छेद 17

प्रश्न 10.
भारत किस प्रकार का राज्य है ?
(क) धर्म-निरपेक्ष
(ख) हिंदू राज्य
(ग) मुस्लिम राज्य
(घ) सिख राज्य।
उत्तर-
(क) धर्म-निरपेक्ष

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

रिक्त स्थान भरें :

  1. सन् ……………. में बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेज़ों को स्वराज बिल पास करने को कहा।
  2. 1946 ई० में ………. ने भारतीय लोगों के लिए मौलिक अधिकारों का समर्थन किया।
  3. संपत्ति के अधिकार को ……… संशोधन से कानूनी अधिकार बना दिया गया था।
  4. शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद ……….. में डाला गया था।
  5. …………… को अनुच्छेद 17 से समाप्त कर दिया गया था।
  6. अनुच्छेद ………….. हमें कानून के सामने समानता देता है।
  7. संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद ……….. में दिया गया है।

उत्तर-

  1. 1895
  2. कबिनेट मिशन
  3. 44 वें
  4. 21- A
  5. अस्पृश्यत
  6. 15
  7. 32

सही/गलत :

  1. अधिकारों से हमारे जीवन में रुकावटें आती हैं।
  2. मौलिक अधिकार अनुच्छेद 14 से 32 तक दर्ज हैं।
  3. अनुच्छेद 15 किसी भी प्रकार के भेदभाव की मनाही करता है।
  4. अनुच्छेद 19 में दस प्रकार की स्वतंत्रताएं दी गई हैं।
  5. हमें अपना व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता नहीं है।
  6. अनुच्छेद 24 बच्चों की सुरक्षा के लिए है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✓)
  3. (✓)
  4. (✗)
  5. (✗)
  6. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकार किसे कहते हैं ? स्पष्ट करें।
उत्तर-
मनुष्य को अपना विकास करने के लिए कुछ सुविधाओं की आवश्यकता होती है, उन्हीं सुविधाओं को हम अधिकार कहते हैं।

प्रश्न 2.
अधिकार की एक परिभाषा लिखें।
उत्तर-
बोसांके के अनुसार, “अधिकार वह मांग है जिसे समाज मान्यता देता है और राज्य लागू करता है।”

प्रश्न 3.
अधिकार के कोई एक महत्त्वपूर्ण तथ्य का वर्णन करें।
उत्तर-
अधिकार समाज द्वारा प्रदान और राज्य द्वारा लागू किया जाना ज़रूरी है।

प्रश्न 4.
अधिकारों की एक विशेषता बताएं।
उत्तर-
अधिकार व्यक्ति का किसी कार्य को करने की स्वतंत्रता का दावा है जो यह समाज से प्राप्त करता है या सुविधाओं की मांग को अधिकार कहते हैं।

प्रश्न 5.
कानूनी अधिकार किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कानूनी अधिकार वे अधिकार होते हैं जिन्हें राज्य की मान्यता प्राप्त होती है और उस व्यक्ति को दंड मिलता है जो इन अधिकारों का उल्लंघन करता है।

प्रश्न 6.
नागरिक के दो महत्त्वपूर्ण राजनीतिक अधिकार लिखें।
उत्तर-

  1. मत देने का अधिकार
  2. चुनाव लड़ने का अधिकार।

प्रश्न 7.
मौलिक अधिकार का अर्थ बताओ।
उत्तर-
जिन कानूनी अधिकारों का उल्लेख संविधान में होता है, उन्हें मौलिक अधिकारों का नाम दिया जाता है।

प्रश्न 8.
अधिकार व्यक्ति के लिए क्यों आवश्यक हैं ? कोई एक तर्क दीजिए।
उत्तर-
अधिकार व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि अधिकारों द्वारा ही व्यक्ति अपना संपूर्ण विकास कर सकता है।

प्रश्न 9.
मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के किस भाग में कितनी धाराओं में किया गया है?
उत्तर-
इनका वर्णन संविधान में तीसरे भाग की 24 धाराओं में धारा 12 से 35 तक में किया गया है।

प्रश्न 10.
भारतीय संविधान में मूल अधिकार कितने हैं?
उत्तर-
44वें संशोधन के बाद भारतीय संविधान में 6 प्रकार के मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 11.
अनुच्छेद 14 से 18 कौन-से मौलिक अधिकार से संबंधित हैं?
उत्तर-
अनुच्छेद 14 से 18 समानता के अधिकार से संबंधित हैं।

प्रश्न 12.
स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था कौन-से अनुच्छेदों में की गई है?
उत्तर-
अनुच्छेद 19 से 22 में स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 13.
धार्मिक अधिकारों की व्यवस्था किन अनुच्छेदों में की गई है?
उत्तर-
धार्मिक अधिकारों की व्यवस्था अनुच्छेद 25 से 28 में की गई है।

प्रश्न 14.
शोषण के विरुद्ध अधिकार संविधान में कौन-से अनुच्छेद में मिलते हैं ?
उत्तर-
अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार से संबंधित हैं।

प्रश्न 15.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार से आपका क्या अभिप्राय है? ।
उत्तर-
संवैधानिक उपचारों का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 32 में अंकित है। इस अधिकार के आधार पर कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकार को लागू करवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दे सकता है।

प्रश्न 16.
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की एक विशेषता बताएं।
उत्तर-
भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार बड़े व्यापक तथा विस्तृत हैं। प्रत्येक अधिकार की विस्तार से व्याख्या की गई है।

प्रश्न 17.
संविधान के कौन-से अनुच्छेद द्वारा अस्पृश्यता की समाप्ति की गई है?
उत्तर-
अनुच्छेद 17 के द्वारा अस्पृश्यता को समाप्त किया गया है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 18.
कानून के समक्ष समानता का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
कानून के समक्ष समानता का साधारण अर्थ यह है कि कानून सभी व्यक्तियों को समान समझता है तथा किसी भी आधार पर किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में कानून के द्वारा कोई भेदभाव नहीं किया जाता।

प्रश्न 19.
भारतीय नागरिकों को किस प्रकार की उपाधियां दी जा सकती हैं ?
उत्तर-
शैक्षणिक तथा सैनिक उपाधियां।

प्रश्न 20.
अनुच्छेद 19 में दी गई किन्हीं दो स्वतंत्रताओं का वर्णन करो।
उत्तर-

  1. भाषण देने तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता।
  2. समुदाय या संघ बनाने की स्वतंत्रता।

प्रश्न 21.
शोषण के विरुद्ध अधिकार की एक विशेषता लिखें।
उत्तर-
कोई भी व्यक्ति दूसरे से ज़बरदस्ती श्रम नहीं करवा सकता और न ही व्यक्तियों को बेचा या खरीदा जा सकता है।

प्रश्न 22.
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का क्या अर्थ है?
उत्तर-
लोगों को कोई भी धर्म मानने, आचरण करने, प्रचार करने तथा धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने की स्वतंत्रता धार्मिक अधिकार कहलाती है।

प्रश्न 23.
कोई ऐसे दो मौलिक अधिकार बताओ जो भारत को धर्म-निरपेक्ष राज्य सिद्ध करते हैं।
उत्तर-
अनुच्छेद 14 से 18 के अधीन दिया गया समानता का अधिकार तथा 25 से 28 के अधीन दिया गया धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय राज्य के धर्म-निरपेक्ष स्वरूप को स्पष्ट करते हैं।

प्रश्न 24.
सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधी अधिकार का क्या अर्थ है? .
उत्तर-
अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति की रक्षा करने के लिए शिक्षा संस्थान स्थापित करने का अधिकार है।

प्रश्न 25.
ऐसे दो लेखों के नाम लिखो जो मौलिक अधिकारों को लागू करवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए जा सकते हैं।
उत्तर-

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण।
  2. परमादेश लेख।

प्रश्न 26.
संपत्ति का मौलिक अधिकार किस संशोधन द्वारा कानूनी अधिकार बनाया गया है?
उत्तर-
44वें संशोधन द्वारा।

प्रश्न 27.
संविधान के कौन-से अनुच्छेद में संपत्ति के अधिकार की व्यवस्था की गई है?
उत्तर-
44वें संशोधन द्वारा संविधान में एक नया अनुच्छेद 300 A अंकित किया गया है जिसमें संपत्ति के अधिकार की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 28.
क्या मौलिक अधिकार सीमित किए जा सकते हैं?
उत्तर-
संविधान द्वारा मौलिक अधिकारों पर कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। संसद् संवैधानिक संशोधन द्वारा इन अधिकारों को और अधिक सीमित कर सकती है।

प्रश्न 29.
संविधान का कौन-सा अनुच्छेद जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है?
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 20 से 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है।

प्रश्न 30.
‘हेबियस कापर्स’ (Habeas Corpus) का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
‘हेबियस कापर्स’ (Habeas Corpus) लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है, ‘हमारे सम्मुख शरीर को प्रस्तुत करो।’ (Let us have the body.)

प्रश्न 31.
‘मैंडामस’ (Mandamus) का अर्थ स्पष्ट करो।
उत्तर-
‘मैंडामस’ (Mandamus) लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘हम आदेश देते हैं।'(We command.)

प्रश्न 32.
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकता है ?
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकता है।

प्रश्न 33.
संविधान के लिए किस अनुच्छेद द्वारा संसद् को मौलिक अधिकारों को सीमित करने की मनाही की गई है ?
उत्तर-
संविधान के अनुच्छेद 13 द्वारा संसद् को मौलिक अधिकारों को सीमित करने की मनाही की गई है।

प्रश्न 34.
किस मौलिक अधिकार को संकटकाल के समय भी स्थगित नहीं किया जा सकता है ?
उत्तर-
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को संकटकाल के समय भी स्थगित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 35.
शिक्षा के अधिकार को कौन-से संवैधानिक संशोधन द्वारा मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया ?
उत्तर-
शिक्षा के अधिकार को 86वें संवैधानिक संशोधन द्वारा मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया।

प्रश्न 36.
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन और किसकी सलाह से करता है ?
उत्तर-
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की सलाह से करता है।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मनुष्य को अपना विकास करने के लिए कुछ सुविधाओं की आवश्यकता होती है। मनुष्य को जो सुविधाएं समाज से मिली होती हैं उन्हीं सुविधाओं को हम अधिकार कहते हैं। साधारण शब्दों में अधिकार से अभिप्रायः उन सुविधाओं और अवसरों से होता है जो मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक होती हैं और उन्हें समाज ने मान्यता दी होती है।

प्रश्न 2.
अधिकारों की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  1. अधिकार समाज में ही संभव हो सकते हैं। समाज के बाहर अधिकारों का न कोई अस्तित्व है और न कोई आवश्यकता।
  2. अधिकार सीमित होते हैं। अधिकार कभी असीमित नहीं होते बल्कि ये सीमित शक्तियां होती हैं जो व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक होती हैं।

प्रश्न 3.
अधिकारों की कोई दो परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-

  1. डॉ० वेणी प्रसाद के अनुसार, “अधिकार वे सामाजिक अवस्थाएं हैं जो व्यक्ति की उन्नति के लिए आवश्यक हैं। अधिकार सामाजिक जीवन का आवश्यक पक्ष हैं।”
  2. ग्रीन के अनुसार, “अधिकार व्यक्ति के भौतिक विकास के लिए आवश्यक बाहरी अवस्थाएं हैं।”

प्रश्न 4.
अधिकारों के प्रकार बताइए।
उत्तर-
अधिकारों को प्रायः तीन भागों में बांटा जा सकता है जो इस प्रकार हैं-प्राकृतिक अधिकार, नैतिक अधिकार तथा कानूनी अधिकार।

  1. प्राकृतिक अधिकार-प्राकृतिक अधिकारों का अर्थ है वे अधिकार जो व्यक्ति को प्रकृति ने दिए हैं।
  2. नैतिक अधिकार-नैतिक अधिकार व्यक्ति की नैतिक भावनाओं पर आधारित होते हैं। इन अधिकारों को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं होती।
  3. कानूनी अधिकार-कानूनी अधिकारों को राज्य की मान्यता प्राप्त होती है। राज्य के कानून इन्हें लागू करते हैं। कानूनी अधिकार चार प्रकार के होते हैं-मौलिक अधिकार, सामाजिक अधिकार, राजनीतिक अधिकार तथा आर्थिक अधिकार।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 5.
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की कोई दो विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
संविधान में जो भी मौलिक अधिकार घोषित किए गए हैं, उनकी कुछ अपनी ही विशेषताएं हैं, जो इस प्रकार

  1. व्यापक और विस्तृत-भारतीय संविधान में लिखित मौलिक अधिकार बड़े व्यापक तथा विस्तृत हैं। नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं और प्रत्येक अधिकार की विस्तार से व्याख्या की गई है।
  2. मौलिक अधिकार सब नागरिकों के लिए हैं-संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार सभी को जाति, धर्म, रंग, लिंग आदि के भेदभाव के बिना दिए गए हैं।

प्रश्न 6.
मौलिक अधिकारों का क्या अर्थ है ?
अथवा
मौलिक अधिकारों से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जिन कानूनी अधिकारों का उल्लेख संविधान में होता है उन्हें मौलिक अधिकार का नाम दिया जाता है। ये वे अधिकार होते हैं जो व्यक्ति के विकास के लिए अनिवार्य समझे जाते हैं। भारत, अमेरिका, जापान, फ्रांस तथा अन्य लोकतंत्रात्मक देशों के नागरिकों को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं।

प्रश्न 7.
हमारे संविधान द्वारा निर्मित किन्हीं दो मौलिक अधिकारों का वर्णन कीजिए।
किन्हीं दो मौलिक अधिकारों का वर्णन करो।
उत्तर-
44वें संशोधन के बाद भारतीय नागरिकों को छः प्रकार के अधिकार प्राप्त हैं।

  1. समानता का अधिकार-समानता के अधिकार का वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है। कानन के सामने सभी बराबर हैं और कोई कानून से ऊपर नहीं है। भेदभाव की मनाही की गई है और सार्वजनिक स्थानों का प्रयोग गे नागरिक कर सकते हैं। अस्पृस्यता को समाप्त कर दिया गया है।
  2. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार-अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का या गया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार धर्म को मानने तथा अपने इष्टदेव की पूजा करने का अधिकार को धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने, उनका प्रयोग करने और धार्मिक संस्थाओं को संपत्ति आदि रखने के अधिकार हए गए हैं।

प्रश्न 8.
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के नाम लिखें।
उत्तर-
संविधान में 44वें संशोधन के बाद नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं-

  1. समानता का अधिकार
  2. स्वतंत्रता का अधिकार
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  5. सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार
  6. संवैधानिक उपायों का अधिकार।

प्रश्न 9.
कन्हीं दो परिस्थितियों का वर्णन करें जिनमें मौलिक अधिकारों को सीमित किया जा सकता है। – प्रश्न 9. दि
उत्तर-

  1. युद्ध तथा विदेशी आक्रमण के समय घोषित राष्ट्रीय संकटकाल के दौरान राष्ट्रपति अधिकारों को सीमित कर सकता है।
  2. सशस्त्र विद्र रोह तथा आंतरिक गड़बड़ी के कारण घोषित आपात्काल में मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
मौलिक अधिकारों की श्रेणी में से संपत्ति के अधिकार को क्यों निकाल दिया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान में मूल रूप से संपत्ति के अधिकार का मौलिक अधिकारों के अध्याय में वर्णन किया गया था, परंतु 44वें संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों में से निकाल दिया गया है। मौलिक अधिकारों की श्रेणी में से संपत्ति के अधिकार को निम्नलिखित कारणों से निकाला गया है-

  1. भारत में निजी संपत्ति के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों में से निकाल दिया गया है।
  2. 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में समाजवाद शब्द रखा गया है। समाजवाद और संपत्ति का अधिकार एक साथ नहीं चलते। अत: संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों से निकाल दिया गया है।

प्रश्न 11.
संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के कोई दो दोष बताइए।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों की निम्नलिखित आधारों पर कड़ी आलोचना की गई है-

  1. बहुत अधिक बंधन-मौलिक अधिकारों पर इतने अधिक प्रतिबंध लगाए गए हैं कि अधिकारों का महत्त्व बहत कम हो गया है। इन अधिकारों पर इतने अधिक प्रतिबंध हैं कि नागरिकों को यह समझने के लिए कठिनाई आती है कि इन अधिकारों द्वारा उन्हें कौन-कौन-सी सुविधाएं दी गई हैं।
  2. आर्थिक अधिकारों का अभाव-मौलिक अधिकारों की इसलिए भी कड़ी आलोचना की गई है कि इस अध्याय में आर्थिक अधिकारों का वर्णन नहीं किया गया है जबकि समाजवादी राज्यों में आर्थिक अधिकार भी दिए जाते हैं।

प्रश्न 12.
संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के कोई दो महत्त्व बताइए।
उत्तर-
मौलिक अधिकारों के अध्ययन का महत्त्व निम्नलिखित शीर्षकों के अधीन किया जाता है-

  1. मौलिक अधिकार कानून का शासन स्थापित करते हैं- मौलिक अधिकारों का महत्त्व इसमें है कि ये कानून के शासन की स्थापना करते हैं। सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं और सभी को कानून द्वारा संरक्षण प्राप्त है।
  2. मौलिक अधिकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करते हैं-अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार दिया गया है। अल्पसंख्यक अपनी पसंद की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना कर सकते हैं और उनका संचालन भी कर सकते हैं। सरकार अल्पसंख्यकों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगी।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 13.
मौलिक अधिकारों तथा नीति-निर्देशक सिद्धांतों में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर-

  1. मौलिक अधिकार न्याय योग्य हैं जबकि निर्देशक सिद्धांत न्याय योग्य नहीं हैं। मौलिक अधिकारों को न्यायालयों द्वारा लागू करवाया जा सकता है जबकि निर्देशक सिद्धांतों को न्यायालयों द्वारा लागू नहीं करवाया जा सकता है।
  2. मौलिक अधिकारों का उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र है जबकि निर्देशक सिद्धांतों का उद्देश्य आर्थिक लोकतंत्र है।
  3. मौलिक अधिकार लोगों के अधिकार हैं जबकि निर्देशक सिद्धांत राज्य के कर्त्तव्य हैं।
  4. मौलिक अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है जबकि निर्देशक सिद्धांतों को निलंबित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 14.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 तथा 24 में क्या व्यवस्था की गई है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 23 और 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं। व्यक्तियों को बेचा या खरीदा नहीं जा सकता और न ही किसी व्यक्ति से बेगार ली जा सकती है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसे कारखाने या खान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता, जहां उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना हो।

प्रश्न 15.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अंतर्गत न्यायपालिका किस प्रकार के आदेशों को जारी कर सकती है ?
उत्तर-
मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए न्यायपालिका निम्नलिखित आदेश जारी कर सकती है

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण लेख
  2. परमादेश का आज्ञा-पत्र
  3. मनाही आज्ञा-पत्र
  4. उत्प्रेषण लेख तथा
  5. अधिकार पृच्छा लेख।

प्रश्न 16.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 तथा 30 में क्या व्यवस्था की गई है ?
उत्तर-
अनुच्छेद 29 तथा 30 के अंतर्गत नागरिकों को विशेषतया अल्पसंख्यकों को सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक अधिकार प्रदान किए गए हैं जो अग्रलिखित हैं-

  1. भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार-
    • अनुच्छेद 29 के अनुसार भारत के किसी भी क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग या उसके किसी भाग को जिसकी अपनी भाषा, लिपि अथवा संस्कृति हो उसे यह अधिकार है कि यह उनकी रक्षा करे।
    • किसी भी नागरिक को राज्य द्वारा या उसकी सहायता से चलाए जाने वाली शिक्षा संस्था में प्रवेश देने से धर्म, जाति, वंश, भाषा या इसमें किसी के आधार पर इंकार नहीं किया जा सकता।
  2. अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा-
    • अनुच्छेद 30 के अनुसार सभी अल्पसंख्यकों को, चाहे वे धर्म पर आधारित हों या भाषा पर, यह अधिकार प्राप्त है कि वे अपनी इच्छानुसार शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करें तथा उनका प्रबंध करें।
    • अनुच्छेद 30 के अनुसार राज्य द्वारा शिक्षा संस्थाओं को सहायता देते समय शिक्षा संस्था के प्रति इस आधार पर भेदभाव नहीं होगा कि वह अल्पसंख्यकों के प्रबंध के अधीन हैं, चाहे वह अल्पसंख्यक भाषा के आधार पर हो या धर्म के आधार पर।

प्रश्न 17.
परमादेश लेख से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
‘परमादेश’ शब्द का अर्थ है “हम आज्ञा देते हैं।” इस निर्देश के द्वारा न्यायालय सरकार को कानूनाधीन अपने कर्त्तव्य को पूरा करने का आदेश दे सकता है। इस आदेश द्वारा अधिकार के विषय में सरकार की उन लापरवाहियों को संशोधित किया जा सकता है जो नागरिकों के अधिकारों के लिए घातक सिद्ध होती हैं।

प्रश्न 18.
मौलिक अधिकारों का उल्लेख संविधान में क्यों किया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लेख इसलिए किया गया है कि सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मूल अधिकार प्राप्त होने की गारंटी मिल सके। मौलिक अधिकारों का वर्णन उस सिद्धांत की पुष्टि के लिए किया गया है, जिसके अनुसार सरकार कानून के अनुसार कार्य करे न कि गैर-कानूनी तरीके से।

प्रश्न 19.
‘कानून के समक्ष समता’ के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
कानून के समक्ष समानता (समता) का अर्थ यह है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। कोई भी व्यक्ति देश के कानून के ऊपर नहीं है। सभी व्यक्ति भले ही उनकी कुछ भी स्थिति हो, साधारण कानून के अधीन हैं और उन पर साधारण न्यायालय में मुकद्दमा चलाया जा सकता है। कानून छोटा-बड़ा, अमीर गरीब, ऊंच-नीच और छुआछूत आदि के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करेंगा। कानून के समक्ष समता का दूसरा अर्थ यह है कि समान परिस्थितियों में सबसे समान व्यवहार किया जाए।

प्रश्न 20.
भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को समझाइए।
उत्तर-
प्रत्येक नागरिक को भाषण देने तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। कोई भी नागरिक बोलकर या लि लखकर अपने विचार प्रकट कर सकता है। प्रेस की स्वतंत्रता भाषण देने तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता का एक साधन है। परंतु भाषण देने और विचार अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। संसद् भारत की प्रभुसत्ता भार जडता, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टता अथवा नैतिकता, न्यायालय का अपमान, मान-हानि लिए उत्तेजित करना आदि के आधारों पर भाषण तथा विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है।

प्रश्न 21.
अधिकार-पच्छा लेख (Writ of Ouo-warranto) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
इसका अर्थ है ‘किसके आदेश से’ अथवा किस अधिकार से। यह आदेश उस समय जारी किया जाता है काव्यात किसी ऐसे कार्य को करने का दावा करता हो जिसको करने का उसका अधिकार न हो। इस आदेश अनुसार अप्प : न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय किसी व्यक्ति को एक पद ग्रहण करने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी
सकता है और उक्त पद के रिक्त होने की तब तक के लिए घोषणा कर सकता है जब तक न्यायालय द्वारा कोई निर्णय न हो।

प्रश्न 22.
शिक्षा के अधिकार की व्याख्या करें। उत्त
उत्तर-
दसबर, – 2002 में पास किए गए 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के अनुच्छेद 2 में 21A नाम का नया अनु छेद शामिल किया गया। इस अनुच्छेद में शिक्षा के अधिकार (Right to Education) की व्यवस्था की गई है। इस संवैधानिक संशोधन अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि 6 साल से 14 साल तक की आयु के सभी भारतीय बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त हो। साथ ही यह भी व्यवस्था की गई है कि बच्चों के माता-पिता तथा अभिभावकों का यह कर्त्तव्य होगा कि वे अपने बच्चों के लिए ऐसी सुविधाएं तथा अवसर उपलब्ध करवाएं, जिससे बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकें। सरकार भी 6 साल के बच्चों के बचपन तथा शिक्षा की देख-रेख के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगी। 1 अप्रैल, 2010 से बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू होने के पश्चात् 6वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार मिल गया है।

प्रश्न 23.
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है न्यायाधीश स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा निडर हों। न्यायाधीश निष्पक्षता से न्याय तभी कर सकते हैं, जब उन पर किसी प्रकार का दबाव न हो। न्यायपालिका विधानमंडल तथा कार्यपालिका के अधीन नहीं होनी चाहिए और विधानमंडल तथा कार्यपालिका को न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 24.
भारत में सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की कैसे रक्षा करता है ?
उत्तर-
यदि कोई व्यक्ति यह समझे कि सरकार ने उसके मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप किया है या कोई कानून मौलिक अधिकार के विरुद्ध बनाया गया है तो यह सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकता है और सर्वोच्च न्यायालय कई प्रकार के अभिलेख जारी कर सकता है और किसी कानून को अवैध भी घोषित कर सकता है।

प्रश्न 25.
भारतीय संविधान स्वतंत्र न्यायपालिका की रक्षा कैसे करता है ?
उत्तर-

  1. नीति-निर्देशक सिद्धांत न्यायपालिका को कार्यपालिका से स्वतंत्र करने का आदेश देता है।
  2. मुख्य तथा अन्य सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति निर्धारित न्यायिक अथवा कानूनी योग्यताओं के आधार पर की जाती है।
  3. न्यायाधीशों को अच्छा वेतन दिया जाता है। 4. उनका कार्यकाल निश्चित है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकारों से आप क्या समझते हैं ? इसकी विशेषताओं का वर्णन करें।।
उत्तर-
मनुष्यों को अपना विकास करने के लिए कुछ सुविधाओं की आवश्यकता होती है। मनुष्य को जो सुविधाएं समाज में मिली होती हैं, उन्हीं सुविधाओं को अधिकार कहते हैं। साधारण शब्दों में अधिकार से अभिप्राय उन स विधाओं और अवसरों से है जो मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक हैं और उन्हें समाज में मान्यता प्राप्त है। अन्य शब्दों में, अधिकार वे सुविधाएं हैं जिनके कारण हमें किसी कार्य को करने या न करने की शक्ति मिलती है। विभिन्न लेखकों ने अधिकार की विभिन्न परिभाषाएं दी हैं। कुछ मुख्य परिभाषाएं निम्नलिखित हैं :

  1. ग्रीन के अनुसार, “अधिकार व्यक्ति के मौलिक विकास के लिए आवश्यक बाहरी अवस्थाएं हैं।”
  2. बोसांके के अनुसार, “अधिकार वह मांग है जिसे समाज मान्यता देता है और राज्य लागू करता है।”
  3. लॉस्की के शब्दों में, “अधिकार सामाजिक जीवन की वे अवस्थाएं हैं जिनके बिना कोई व्यक्ति अपने जीवन का विकास नहीं कर सकता।” विशेषताएं-
  4. अधिकार समाज में ही संभव हो सकते हैं।
  5. अधिकार व्यक्ति का दावा है।
  6. अधिकार समाज द्वारा मान्य होते हैं।
  7. अधिकार तर्कसंगत एवं नैतिक होते हैं।
  8. अधिकार असीमित नहीं होते।
  9. अधिकार लोकहित में प्रयोग किये जाते हैं।
  10. अधिकारों के साथ कर्त्तव्य जुड़े होते हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 6 संविधान के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार

प्रश्न 2.
हमारे संविधान में निहित मौलिक अधिकार पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर-
भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के तीसरे भाग में धारा 12 से 35 तक की 24 धाराओं में किया गया है। 44वें संशोधन के बाद नागरिकों को 6 प्रकार के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जो इस प्रकार

  1. समानता का अधिकार-समानता के अधिकार का वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है। कानून के सामने सभी बराबर हैं और कोई कानून से ऊपर नहीं है। भेदभाव की मनाही की गई है और सार्वजनिक स्थानों का प्रयोग सभी कर सकते हैं। छुआछूत को समाप्त कर दिया गया है और सेना तथा शिक्षा संबंधी उपाधियों को छोड़कर अन्य सभी उपाधियों को समाप्त कर दिया है।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार-नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन अनुच्छेद 19 से 22 तक में किया गया है। अनुच्छेद 19 के अनुसार नागरिकों को भाषण देने और विचार प्रकट करने, शांतिपूर्ण तथा बिना हथियारों के इकट्ठे होने, संघ या समुदाय बनाने, घूमने-फिरने, किसी भी स्थान पर बसने या कोई भी व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। परंतु इन स्वतंत्रताओं पर एक प्रतिबंध भी है। अनुच्छेद 20 से 22 तक नागरिकों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार-अनुच्छेद 23 और 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिए गए हैं। व्यक्तियों को बेचा या खरीदा नहीं जा सकता और न ही किसी व्यक्ति से बेगार ली जा सकती है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी ऐसे कारखाने या खान में नौकरी पर नहीं रखा जा सकता, जहां उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना हो।
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार-अनुच्छेद 25 से 28 तक में नागरिकों के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार धर्म को मानने तथा अपने इष्ट देव की पूजा करने का अधिकार है। लोगों को धार्मिक संस्थाएं स्थापित करने, उनका प्रबंध करने का और धार्मिक संस्थाओं को संपत्ति आदि रखने के अधिकार दिए गए हैं। सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। किसी भी व्यक्ति को ऐसा टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसे किसी विशेष धर्म के लिए प्रयोग किया जाना हो।
  5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार-अनुच्छेद 29 और 30 के अंतर्गत नागरिकों को संस्कृति तथा शिक्षा संबंधी अधिकार दिए गए हैं। प्रत्येक जाति या समुदाय को अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति और साहित्य को बनाए रखने, उनका प्रसार तथा विकास करने का अधिकार है। सभी अल्पसंख्यकों को अपनी इच्छानुसार शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करने तथा उनका प्रबंध करने का अधिकार प्राप्त है। राज्य द्वारा शिक्षा संस्थाओं को अनुदान देते समय भेद-भाव नहीं किया जाएगा।
  6. संवैधानिक उपायों का अधिकार-अनुच्छेद 32 के अनुसार प्रत्येक नागरिक अपने मौलिक अधिकारों की प्राप्ति और रक्षा के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के पास जा सकते हैं। उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय को इस संबंध में कई प्रकार के लेख (Writs) जारी करने का अधिकार है।

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान में दिए गए समानता के अधिकार की व्याख्या करें।
उत्तर-
समानता का अधिकार एक महत्त्वपूर्ण मौलिक अधिकार है जिसका वर्णन अनुच्छेद 14 से 18 तक में किया गया है। समानता का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है। भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित प्रकार की समानता प्रदान की गई है-

  1. काना के समक्ष समानता-संविधान के अनुच्छेद 14 में “विधि के समक्ष समानता” और “कानूनों के समान । संरक्षण” शब्दों का एक साथ प्रयोग किया गया है और संविधान में लिखा है कि भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को कानन के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण से राज्य द्वारा वंचित नहीं किया जाएगा।
    कानून के समक्ष समानता का अर्थ यह है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है। – कानून के समान संरक्षण का यह अभिप्राय है कि समान परिस्थितियों में सबके साथ समान व्यवहार किया जाए।
  2. भेद-भाव की मनाही-अनुच्छेद 15 के अनुसार निम्नलिखित व्यवस्था की गई है-
    • राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं करेगा।
    • दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और मनोरंजन के सार्वजनिक स्थानों पर धर्म, लिंग, जाति इत्यादि किसी आधार पर किसी नागरिक को अयोग्य व प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा।
  3.  सरकारी नौकरियों के लिए अवसर की समानता-अनुच्छेद 16 राज्यों में सरकारी नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में सब नागरिकों को समान अवसर प्रदान करता है। सरकारी नौकरियों या पदों पर नियुक्ति के संबंध में धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान, निवास या इसमें से किसी एक के आधार पर किसी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
  4. अस्पृश्यता की समाप्ति-अनुच्छेद 17 द्वारा छुआछूत को समाप्त किया गया है। किसी भी व्यक्ति के साथ अस्पर्श जैसा व्यवहार करना या उसको अछूत समझ कर सार्वजनिक स्थानों, होटलों, घाटों, तालाबों, कुओं, सिनेमाघरों, पार्कों तथा मनोरंजन के स्थानों के उपयोग से रोकना कानूनी अपराध है।
  5. उपाधियों की समाप्ति-अनुच्छेद 18 के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि
    • सेना या शिक्षा संबंधी उपाधि के अतिरिक्त राज्य कोई और उपाधि नहीं देगा।
    • भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।

भारत सरकार नागरिकों को भारत रत्न (Bharat Ratna), पद्म विभूषण (Padma Vibhushan), पद्म भूषण (Padma Bhushan), पद्म श्री (Padma Shri) आदि उपाधियां देती है। जिस कारण आलोचकों का कहना था कि ये उपाधियां अनुच्छेद 18 के साथ मेल नहीं खातीं।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

SST Guide for Class 9 PSEB लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति Textbook Questions and Answers

(क) रिक्त स्थान भरें :

  1. भारत में केंद्रीय संसद् के चुने हुए प्रतिनिधि को ……….. कहा जाता है।
  2. प्रथम लोकसभा चुनाव ……. ई० में हुआ।
  3. मुख्य चुनाव आयुक्त तथा उप-चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति ……. द्वारा की जाती है।

उत्तर-

  1. एम० पी०
  2. 1952
  3. राष्ट्रपति

(ख) बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
लोगों के प्रतिनिधि
(अ) नियुक्त किए जाते हैं
(आ) लोगों द्वारा निश्चित समय के लिए चुने जाते हैं
(इ) लोगों द्वारा पक्के तौर पर चुने जाते हैं
(ई) राष्ट्रपति द्वारा चुने जाते हैं
उत्तर-
(आ) लोगों द्वारा निश्चित समय के लिए चुने जाते हैं

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में कौन-सा लोकतंत्र का स्तंभ नहीं है ?
(अ) राजनैतिक दल
(आ) निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव
(इ) गरीबी
(ई) वयस्क मताधिकार।
उत्तर-
(इ) गरीबी

(ग) निम्नलिखित कथनों में सही के लिए तथा गलत के लिए चिन्ह लगाएं :

  1. भारत में बहुदलीय प्रणाली है।
  2. चुनाव आयुक्त का मुख्य कार्य चुनाव का निर्देशन, प्रबंधन व निरीक्षण करना है।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्राम पंचायत के लिए चुने गए प्रतिनिधि को क्या कहा जाता है ?
उत्तर-
ग्राम पंचायत के लिए चुने गए प्रतिनिधि को पंच कहा जाता है।

प्रश्न 2.
विधानसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
विधानसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि को एम० एल० ए० (MLA) कहते हैं।

प्रश्न 3.
चुनाव विधियों के नाम लिखें।
उत्तर-
प्रत्यक्ष चुनाव तथा अप्रत्यक्ष चुनाव।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 4.
राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति का चुनाव किस विधि द्वारा किया जाता है ?
उत्तर-
राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष विधि द्वारा किया जाता है। उन्हें जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा चुना जाता है।

प्रश्न 5.
भारत में चुनाव कराने वाली संस्था का क्या नाम है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव कराने वाली संस्था का नाम चुनाव आयोग है।

प्रश्न 6.
भारत में चुनाव प्रणाली की कोई दो विशेषताएं बतलाएं।
उत्तर-

  1. भारत में चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर करवाए जाते हैं।
  2. एक चुनाव क्षेत्र से ही एक ही उम्मीदवार का चयन किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
चुनाव विवाद के संबंध में याचिका कहां दायर की जा सकती है ?
उत्तर-
चुनाव संबंधी विवाद के लिए याचिका उच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।

प्रश्न 8.
चुनाव आयोग के कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर-

  1. चुनाव आयोग वोटर सूची तैयार तथा संशोधित करवाता है।
  2. चुनाव आयोग अलग-अलग राजनीतिक दलों को मान्यता देता है।

प्रश्न 9.
पंजाब विधानसभा के चुनाव क्षेत्र कितने हैं ?
अथवा
पंजाब विधानसभा की कितनी सीटें हैं ?
उत्तर-
पंजाब विधानसभा के 117 चुनाव क्षेत्र या सीटें हैं।

प्रश्न 10.
भारत में चुनाव-प्रक्रिया का संचालन कौन करता है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव-प्रक्रिया का संचालन चुनाव आयोग करता है।

प्रश्न 11.
मुख्य चुनाव आयुक्त व उप-चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

प्रश्न 12.
मुख्य चुनाव आयुक्त व उप चुनाव आयुक्तों के पद का कार्यकाल कितना है ?
उत्तर-
6 वर्ष अथवा 65 वर्ष तक की आयु तक वह अपने पद पर बने रह सकते हैं।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
चुनाव का लोकतांत्रिक देशों में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
लोकतंत्र में चुनाव का बड़ा भारी महत्त्व है। चुनाव के द्वारा ही जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है और उनके माध्यम से शासन में भाग लेती है तथा शासन पर अपना नियंत्रण रखती है। चुनाव के कारण ही जनता अर्थात् मतदाताओं का महत्त्व क्या रहता है और यदि कोई मंत्री या प्रतिनिधि अपना कार्य ठीक प्रकार से न करें तो मतदाता उसे अगले चुनाव में वोट न देकर असफल कर सकते हैं। चुनाव के समय जनता को सरकार की आलोचना का भी अवसर मिलता है और वह अपनी इच्छानुसार सरकार को बदल सकती है। चुनाव ही एक ऐसा साधन है जिसके कारण जनता अपने को देश का शासक समझ और कह सकती है। चुनावों से जनता को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है, क्योंकि चुनावों के दिनों में सभी और सरकार अपने-अपने कार्यों का प्रचार करती तथा एक-दूसरे की आलोचना करती है। इससे नागरिकों को पता चल जाता है कि देश की समस्याएं क्या हैं और उन्हें कैसे हल किया जाए।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 2.
चुनाव प्रक्रिया के पड़ावों की तालिका बताएँ।
उत्तर-

  1. चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन
  2. चुनाव तिथियों की घोषणा
  3. नामांकण पत्र भरना
  4. नामांकन पत्र वापिस लेना
  5. चुनाव अभियान चलाना
  6. चुनाव प्रचार बंद करना
  7. मतदान करना
  8. मतगणना
  9. परिणाम घोषित करना।

प्रश्न 3.
चुनाव अभियान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जब नामांकन पत्र वापिस लेने की तारीख समाप्त हो जाती है तो इसके पश्चात् सभी उम्मीदवारों को कम से कम 20 दिन चुनाव प्रचार के लिए दिए जाते हैं। इस चुनाव प्रचार को ही चुनाव अभियान का नाम दिया जाता है।

इस समय के दौरान चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवार अपने पक्ष में प्रचार करते हैं ताकि अधिक-से-अधिक वोट उन्हें डाल सकें। राजनीतिक दल व उम्मीदवार जनता को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए घोषणा-पत्र सामने लाते हैं तथा जनता के साथ बहुत से वायदे भी किए जाते हैं। चुनाव से 48 घंटे पहले चुनाव अभियान बंद कर दिया जाता है।

प्रश्न 4.
मतदान केंद्र पर बलात् अधिकार करने से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मतगणना वाले स्थान या केंद्र को एक या एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा घेरना, वोट की गणना करने वाले कर्मचारियों से मतपेटी या मशीनें छीन लेना या कोई ऐसी गतिविधि जिससे चुनाव में विघ्न उत्पन्न हो बूथ केपचरिंग या मतदान केंद्र पर बलात् अधिकार कहलाता है। काबूले के अनुसार यदि कोई ऐसा करेगा तो उसे कम से कम 6 महीने की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है तथा इस कारावास की अवधि को दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। परंतु अगर कोई सरकारी कर्मचारी ऐसा करता है तो उसे 1 वर्ष की सज़ा व जुर्माना होगा तथा सजा को तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 5.
राजनीतिक दलों की चुनाव में क्या भूमिका है ?
उत्तर-
लोकतंत्र रूपी गाड़ी में राजनीतिक दल पहिए के समान होते हैं जिनके बिना चुनाव करवाना मुमकिन ही नहीं है। हम राजनीतिक दलों के बिना लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं कर सकते। संपूर्ण विश्व में सरकार चाहे कोई हो, राजनीतिक दल तो होते ही हैं। चाहे उत्तरी कोरिया जैसी तानाशाही हो या भारत जैसा लोकतंत्र, राजनीतिक दल तो होते ही हैं। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है। भारत में 8 राष्ट्रीय दल हैं 59 क्षेत्रीय दल हैं तथा अगर उन सभी दलों को मिला दिया जाए जो चुनाव आयोग के पास पंजीकृत हैं तो यह संख्या 1700 के करीब है।

प्रश्न 6.
भारत के कोई चार राष्ट्रीय दलों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  2. भारतीय जनता पार्टी
  3. बहुजन समाज पार्टी
  4. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया।

प्रश्न 7.
भारत के कोई चार क्षेत्रीय दलों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. शिरोमणि अकाली दल (पंजाब)
  2. शिवसेना (महाराष्ट्र)
  3. आम आदमी पार्टी (दिल्ली व पंजाब)
  4. तेलगुदेशम् पार्टी (आंध्र प्रदेश)

प्रश्न 8.
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से कैसे निष्कासित किया जा सकता है.?
उत्तर-
वैसे तो मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो पहले हो जाए, होता है परंतु उसे उसका कार्यकाल पूर्ण होने से पहले भी उसे हटाया जा सकता है। यदि संसद् के दोनों सदन उसके विरुद्ध दो तिहाई बहुमत से दोष प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति के पास भेज दें तो उसे राष्ट्रपति उसके पद से हटा सकते हैं।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय चुनाव प्रणाली की मुख्य विशेषताओं का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर-
भारतीय चुनाव प्रणाली की निम्नलिखित विशेषताएं हैं

  1. वयस्क मताधिकार-भारतीय चुनाव प्रणाली की प्रथम विशेषता वयस्क मताधिकार है। भारत के प्रत्येक नागरिक को जिसकी आयु 18 वर्ष या इससे अधिक हो मताधिकार प्राप्त है।
  2. संयुक्त चुनाव पद्धति-भारतीय चुनाव प्रणाली की मुख्य विशेषता संयुक्त चुनाव पद्धति है। इसमें प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक ही निर्वाचक सूची होती है जिसमें उस क्षेत्र के सभी मतदाताओं के नाम होते हैं और वे सभी मिलकर एक प्रतिनिधि को चुनते हैं।
  3. अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिए सुरक्षित स्थान-संयुक्त चुनाव प्रणाली के बावजूद भी हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित तथा पिछड़े वर्गों के लिए स्थान सुरक्षित कर दिए हैं। संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्गों के लिए लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं के स्थान सुरक्षित कर दिए हैं।
  4. गुप्त मतदान-भारत में मतदान गुप्त रूप से होता है।
  5. प्रत्यक्ष चुनाव-भारत में लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं, नगरपालिकाओं, पंचायतों आदि के चुनाव जनता के द्वारा प्रत्यक्ष रूप से होते हैं और ये संस्थाएं ही शक्ति का वास्तविक प्रयोग करती हैं।

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प्रश्न 2.
चुनाव आयुक्त के कार्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
चुनाव आयुक्त के कार्यों का वर्णन इस प्रकार है-

  1. चुनाव आयुक्त का सबसे प्रथम कार्य सभी प्रकार के चुनावों के लिए मतदाता सूचियां तैयार करवाना तथा उनमें संशोधन करवाना है।
  2. चुनाव का निर्देशन, नियंत्रण व निरीक्षण करवाना भी चुनाव आयुक्त का कार्य है।
  3. चुनाव के लिए समय सूची तैयार करना तथा चुनाव करवाने के लिए चुनाव की तिथियों का चुनाव आयुक्त ही करता है।
  4. चुनाव से संबंधित साधारण नियम बनाना तथा मनोनीत पत्रों की सुरक्षा भी उसका ही कार्य है।
  5. राजनीतिक दलों के लिए आचार संहिता भी वह ही लागू करवाते हैं।
  6. चुनाव चिह्न देना तथा राजनीतिक दलों को मान्यता देना भी उनका ही कार्य है।
  7. चुनाव रद्द करना, किसी स्थान पर दोबारा चुनाव करवाना तथा बूथ गड़बड़ी जैसी घटनाओं को रोकना भी उनका कार्य है।
  8. न्यायपालिका द्वारा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित व्यक्तियों के लिए कुछ छूट देना भी चुनाव आयुक्त का ही कार्य है।

प्रश्न 3.
चुनाव प्रक्रिया के मुख्य पड़ावों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रक्रिया के निम्नलिखित चरण हैं

  1. चुनाव क्षेत्र निश्चित करना-चुनाव प्रबंध में सर्वप्रथम कार्य चुनाव क्षेत्र को निश्चित करना है। लोकसभा में जितने सदस्य चुने जाते हैं, लंगभग समान जनसंख्या वाले उतने ही क्षेत्रों में सारे भारत को बांट दिया जाता है। इसी प्रकार विधानसभाओं के चुनाव में राज्य को समान जनसंख्या वाले चुनाव क्षेत्र में बांट दिया जाता है और प्रत्येक क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है।
  2. मतदाताओं की सूची-मतदाता सूचियां तैयार करना चुनाव प्रक्रिया की दूसरी अवस्था है। सबसे पहले मतदाताओं की अस्थायी सूची तैयार की जाती है। इन सूचियों को कुछ एक विशेष स्थानों पर जनता को देखने के लिए रख दिया जाता है। यदि उस सूची में किसी का नाम लिखने से रह गया हो या किसी का नाम गलत लिख दिया गया हो तो उसको एक निश्चित तिथि तक संशोधन करवाने के लिए प्रार्थना-पत्र देना होता है। फिर संशोधित सूचियां तैयार की जाती हैं।
  3. चुनाव तिथि की घोषणा–चुनाव आयोग चुनाव की तिथि की घोषणा करता है। चुनाव आयोग नामांकन-पत्र भरने की तिथि, नाम वापस लेने की तिथि, नामांकन-पत्रों की जांच-पड़ताल की तिथि निश्चित करता है।
  4. उम्मीदवारों का नामांकन-चुनाव कमिशन द्वारा की गई चुनाव घोषणा के पश्चात् विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार अपने नामांकन-पत्र दाखिल करते हैं। राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के अतिरिक्त स्वतंत्र उम्मीदवार भी अपने नामांकन-पत्र प्रस्तुत करते हैं।
  5. मतदान-निश्चित तिथि पर मतदान होता है। मतदान के लिए प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में मतदान केंद्र बनाए जाते हैं। प्रत्येक चुनाव केंद्र का एक मुख्य अधिकारी तथा कई सहायक अधिकारी होते हैं। प्रत्येक मतदाता को एक मत-पत्र दिया जाता है जिस पर मतदाता मर्जी से किसी उम्मीदवार पर क्रास का निशान लगा देता है।
  6. परिणामों की घोषणा-चुनावों के पश्चात् मतों की गिनती होती है। गिनती के समय उम्मीदवार तथा उनके प्रतिनिधि अंदर बैठे रहते हैं। जो उम्मीदवार सबसे अधिक वोटें प्राप्त करता है, उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है।

प्रश्न 4.
चुनाव के महत्त्व पर संक्षेप में नोट लिखें।
उत्तर-
लोकतंत्र में चुनाव का बड़ा भारी महत्त्व है। चुनाव के द्वारा ही जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है और उनके माध्यम से शासन में भाग लेती है तथा शासन पर अपना नियंत्रण रखती है। चुनाव के कारण ही जनता अर्थात् मतदाताओं का महत्त्व क्या रहता है और यदि कोई मंत्री या प्रतिनिधि अपना कार्य ठीक प्रकार से न करें तो मतदाता उसे अगले चुनाव में वोट न देकर असफल कर सकते हैं। चुनाव के समय जनता को सरकार की आलोचना का भी अवसर मिलता है और वह अपनी इच्छानुसार सरकार को बदल सकती है। चुनाव ही एक ऐसा साधन है जिसके कारण जनता अपने को देश लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति का शासक समझ और कह सकती है। चुनावों से जनता को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है, क्योंकि चुनावों के दिनों में सभी और सरकार अपने-अपने कार्यों का प्रचार करती तथा एक-दूसरे की आलोचना करती है। इससे नागरिकों को पता चल जाता है कि देश की समस्याएं क्या हैं और उन्हें कैसे हल किया जाए।

PSEB 9th Class Social Science Guide लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत में किस प्रकार का लोकतंत्र पाया जाता है ?
(क) प्रतिनिधि लोकतंत्र
(ख) प्रत्यक्ष लोकतंत्र
(ग) राजतांत्रिक लोकतंत्र
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) प्रतिनिधि लोकतंत्र

प्रश्न 2.
भारत में लोकसभा एवं राज्य विधानसभा के चुनाव कितने वर्षों बाद होते हैं ?
(क) 2 वर्ष
(ख) 4 वर्ष
(ग) 5 वर्ष
(घ) 7 वर्ष।
उत्तर-
(ग) 5 वर्ष

प्रश्न 3.
भारत में मतदान के लिए न्यूनतम कितनी आयु होनी चाहिए ?
(क) 15 वर्ष
(ख) 18 वर्ष
(ग) 20 वर्ष
(घ) 25 वर्ष।
उत्तर-
(ख) 18 वर्ष

प्रश्न 4.
निर्वाचन आयोग के कितने सदस्य हैं ?
(क) 1 सदस्य
(ख) 2 सदस्य
(ग) 3 सदस्य
(घ) 4 सदस्य।
उत्तर-
(ग) 3 सदस्य

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 5.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है ?
(क) राष्ट्रपति
(ख) प्रधानमंत्री
(ग) स्पीकर
(घ) गृहमंत्री।
उत्तर-
(क) राष्ट्रपति

प्रश्न 6.
भारत में लोकसभा के अब तक कितने चुनाव हो चुके हैं ?
(क) 12
(ख) 13
(ग) 14
(घ) 16
उत्तर-
(घ) 16

प्रश्न 7.
भारत में लोकसभा का पहला आम चुनाव कब हुआ ?
(क) 1950
(ख) 1951
(ग) 1952
(घ) 1955
उत्तर-
(ग) 1952

प्रश्न 8.
भारत में लोकसभा का 16वां चुनाव कब हुआ ?
(क) 2006
(ख) 2008
(ग) 2007
(घ) 2014
उत्तर-
(घ) 2014

प्रश्न 9.
किस पहले राज्य में मतदाता पहचान पत्र का प्रयोग किया गया था ?
(क) हरियाणा
(ख) पंजाब
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) तमिलनाडु।
उत्तर-
(क) हरियाणा

रिक्त स्थान भरें :

  1. लोकतांत्रिक देश में ……… का बहुत महत्त्व होता है।
  2. मुख्य चुनाव आयुक्त ……….. वर्षों के लिए नियुक्त किए जाते हैं।
  3. लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव ………… वर्षों के पश्चात् होते हैं।
  4. देश में …………. राष्ट्रीय दल हैं।
  5. नगरपालिका के चुने हुए प्रत्याशी को ……. कहते हैं।
  6. चुनाव आयुक्त को ………… नियुक्त करता है।

उत्तर-

  1. चुनाव
  2. छ:
  3. पांच
  4. सात
  5. पार्षद
  6. राष्ट्रपति

सही/गलत :

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त को प्रधानमंत्री हटा सकते हैं।
  2. चुनाव करवाने का कार्य सरकार करती है।
  3. लोकसभा के चुने हुए सदस्य को एम० एल० ए० कहते हैं।
  4. मतदाता सूची में संशोधन का कार्य चुनाव आयोग का होता है।
  5. चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को मान्यता देता है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✗)
  3. (✗)
  4. (✓)
  5. (✓)

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में कौन-सी शासन प्रणाली 1950 में अपनाई गई ?
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली।

प्रश्न 2.
भारत में कौन-सी प्रतिनिधित्व प्रणाली पाई जाती है ?
उत्तर-
प्रादेशिक प्रतिनिधित्व प्रणाली।

प्रश्न 3.
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव कितने वर्षों के बाद होते हैं ?
उत्तर-
पांच वर्ष।

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प्रश्न 4.
लोकसभा की निर्वाचित सीटें (सदस्य संख्या) कितनी हैं ?
उत्तर-
543.

प्रश्न 5.
लोकतांत्रिक चुनाव की शर्ते लिखें।
उत्तर–
प्रत्येक नागरिक को एक वोट का अधिकार प्राप्त हो और प्रत्येक वोट का मूल्य समान हो।

प्रश्न 6.
चुनावी प्रतियोगिता का एक महत्त्वपूर्ण दोष लिखें।
उत्तर-
निर्वाचन क्षेत्र में लोगों में गुटबंदी की भावना पैदा हो जाती है।

प्रश्न 7.
आम चुनाव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लोकसभा के निर्धारित समय के पश्चात् (5 वर्ष के पश्चात्) होने वाले चुनावों को आम चुनाव कहते हैं।

प्रश्न 8.
मध्यावधि चुनाव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मध्यावधि चुनाव उस चुनाव को कहते हैं जो चुनाव विधानमंडल के निश्चित कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व कराए जाते हैं।

प्रश्न 9.
भारतीय चुनाव प्रणाली की एक विशेषता लिखें।
उत्तर-
भारत में संयुक्त चुनाव प्रणाली को अपनाया गया है।

प्रश्न 10.
भारत में मतदाता कौन है?
उत्तर-
जिस नागरिक की आयु 18 वर्ष या इससे अधिक हो, उसे मताधिकार प्राप्त है। चुनाव में उसी नागरिक को मत डालने दिया जाता है जिसका नाम मतदाता सूची में हो।

प्रश्न 11.
मतदाता सूची से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जिस सूची में मतदाताओं के नाम लिखे होते हैं, उसे मतदाता सूची कहते हैं।

प्रश्न 12.
क्या चुनाव आयोग किसी राजनीतिक दल की मान्यता समाप्त कर सकता है ?
उत्तर-
चुनाव आयोग को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि कोई राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर का दल निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता तो चुनाव आयोग उसकी मान्यता समाप्त कर सकता है।

प्रश्न 13.
भारतीय संविधान के किस अध्याय व किन अनुच्छेदों में चुनाव व्यवस्था का वर्णन किया गया है ?
उत्तर-
भारतीय संविधान के 15वें अध्याय के अनुच्छेद 324 से 329 तक चुनाव व्यवस्था का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 14.
निर्वाचन आयोग के कितने सदस्य हैं ?
उत्तर-
आजकल चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त व दो अन्य चुनाव आयुक्त हैं।

प्रश्न 15.
चुनाव आयोग की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
चुनाव आयोग की नियुक्ति संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।

प्रश्न 16.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है ?
उत्तर-
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

प्रश्न 17.
चुनाव आयोग के सदस्यों का कार्यकाल बताइए।
उत्तर-
चुनाव आयोग के सदस्यों का कार्यकाल राष्ट्रपति नियम बनाकर निश्चित करता है। प्रायः यह अवधि 6 वर्ष होती है।

प्रश्न 18.
भारतीय चुनाव आयोग का कोई एक कार्य लिखें।
उत्तर-
चुनाव आयोग का मुख्य कार्य संसद् तथा राज्य विधान सभाओं के चुनाव करवाना तथा उनकी मतदाता सूची तैयार करवाना है।

प्रश्न 19.
चुनाव चिह्न का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
भारत के अधिकांश मतदाता अनपढ़ हैं जिस कारण मतदाता चुनाव चिह्न को पहचान कर ही अपनी पसंद के राजनीतिक दल तथा उम्मीदवार को मत देते हैं।

प्रश्न 20.
चुनाव याचिका का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
चुनाव में यदि कोई उम्मीदवार चुनाव के नियमों का उल्लंघन करता है या भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल करता है तब संबंधित व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में दी गई याचिका को चुनाव याचिका कहते हैं।

प्रश्न 21.
भारत में चुनाव याचिका की सुनवाई कौन करता है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव याचिका की सुनवाई सीधे उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में की जा सकती है।

प्रश्न 22.
भारतीय चुनाव प्रणाली का कोई एक दोष बताएं।
उत्तर-
भारत में सांप्रदायिकता का बड़ा प्रभाव है और इसने हमारी प्रगति में सदैव बाधा उत्पन्न की है।

प्रश्न. 23.
चुनाव प्रणाली में सुधार करने का एक उपाय बताएं।
उत्तर-
बूथों पर कब्जा करने वालों को कड़ी सज़ा देनी चाहिए।

प्रश्न 24.
भारत में अब तक लोकसभा के कितने चुनाव हो चुके हैं ?
उत्तर-
अब तक लोकसभा के 17 चुनाव हो चुके हैं।

प्रश्न 25.
भारत में पहली लोकसभा का चुनाव किस वर्ष में हुआ था ?
उत्तर-
भारत में पहली लोकसभा का चुनाव 1952 में हुआ था।

प्रश्न 26.
भारत सरकार द्वारा किया गया एक चुनाव सुधार बताइए।
उत्तर-
61वें संशोधन द्वारा मताधिकारी की आयु 21 वर्ष से हटाकर 18 वर्ष कर दी गई।

प्रश्न 27.
सन् 1989 में पारित संविधान द्वारा मताधिकार की आयु सीमा में क्या परिवर्तन किया गया है ?
उत्तर-
मताधिकार की आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।

प्रश्न 28.
चुनाव प्रचार के लिए क्या-क्या तरीके अपनाए जाते हैं ?
उत्तर-
चुनाव घोषणा-पत्र, चुनाव सभा एवं जुलूस, घर-घर जाकर मत याचना इत्यादि।

प्रश्न 29.
निर्धारित मतदान के समय से कितने घंटे पहले चुनाव प्रचार कानूनतः बंद कर दिया जाता है ?
उत्तर-
निर्धारित मतदान के समय से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार कानूनतः बंद कर दिया जाता है।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 30.
भारत में मताधिकार का आधार क्या है ?
उत्तर-
भारत में मताधिकार का आधार आयु है।

प्रश्न 31.
भारत में चुनाव करवाने का उत्तरदायित्व किसका है ?
उत्तर-
भारत में चुनाव करवाने का उत्तरदायित्व चुनाव आयोग का है।

प्रश्न 32.
राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह कौन निश्चित करता है ?
उत्तर-
राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग निश्चित करता है।

प्रश्न 33.
‘एक नागरिक एक मत’ का सिद्धांत किसका प्रतीक है ?
उत्तर-
‘एक नागरिक एक मत’ का सिद्धांत राजनीतिक एकता का प्रतीक है।

प्रश्न 34.
उप चुनाव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो चुनाव रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए करवाया जाता है, उसे उप चुनाव कहते हैं।

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय मतदाता की कौन-सी तीन योग्यताएं होनी चाहिए?
उत्तर-

  1. वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. आयु कम-से-कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  3. मतदाता सूची में नाम होना चाहिए।

प्रश्न 2.
भारत में निर्वाचकीय प्रवृत्तियों पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
भारत में निर्वाचकीय प्रवृत्तियों को संक्षेप में निम्नलिखित रूप में बताया जा सकता है-

  1. भारत में सोलह आम चुनावों के फलस्वरूप नागरिकों में निर्वाचक चेतना का विकास हुआ।
  2. चुनाव में मतदाताओं की अभिरुचि बढ़ी है।
  3. मतदाताओं को राजनीतिक दलों की नीतियों तथा कार्यक्रम का ज्ञान हुआ है।

प्रश्न 3.
चुनाव चिह्न पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
ज़ो राजनीतिक दल चुनाव में हिस्सा लेते हैं उन्हें चुनाव आयोग चुनाव चिह्न प्रदान करता है। चुनाव चिह्न राजनीतिक दल की पहचान होता है। भारत में अधिकांश मतदाता अनपढ़ हैं। अनपढ़ मतदाता चुनाव चिह्न को पहचान कर ही अपनी पसंद के राजनीतिक दल अथवा उम्मीदवार को मत देते हैं।

प्रश्न 4.
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता भारतीय प्रजातंत्र की कार्यशीलता को किस तरह प्रभावित करती है?
उत्तर-
भारतीय संविधान के अंतर्गत चुनाव कराने के लिए एक स्वतंत्र चुनाव आयोग की व्यवस्था की गई है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता ने भारतीय प्रजातंत्र की कार्यशीलता को काफ़ी प्रभावित किया है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता ने भारतीय प्रजातंत्र को सुदृढ़ तथा सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। बिना स्वतंत्रता के चुनाव आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में सफल नहीं हो सकता था। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के कारण ही लोकसभा के पंद्रह आम चुनाव स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता से हो चुके हैं। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के कारण ही जनता की प्रजातंत्र के प्रति आस्था बढ़ी है।

प्रश्न 5.
भारत में चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए किन्हीं दो सुधारों का वर्णन करो।
उत्तर-
भारत की चुनाव प्रक्रिया में निम्नलिखित दो सुधार किए जाने अति आवश्यक हैं

  1. निष्पक्षता-चुनाव निष्पक्ष ढंग से होने चाहिए। सत्तारूढ़ दल को चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और न ही अपने दल के हित में सरकारी मशीनरी का प्रयोग करना चाहिए।
  2. चुनाव व्यय-एक चुनाव क्षेत्र में एक उम्मीदवार द्वारा धन व्यय करने के लिए निश्चित की गई धन की सीमा में वह धन भी सम्मिलित किया जाना चाहिए जो धन उम्मीदवार के मित्रों और उसके राजनीतिक दल द्वारा खर्च किया जाता है।

प्रश्न 6.
चुनाव के रद्दीकरण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
चुनाव के रद्दीकरण से अभिप्राय है कि यदि चुनाव प्रचार के दौरान किसी प्रत्याशी की मृत्यु हो जाए तो उस चुनाव क्षेत्र का चुनाव कुछ समय के लिए चुनाव आयोग द्वारा निरस्त किया जाता था। फरवरी, 1992 में जनप्रतिनिधि कानून में एक संशोधन करके यह व्यवस्था की गई है कि यदि किसी निर्दलीय प्रत्याशी की मृत्यु हो गई हो तो उस चुनाव क्षेत्र के चुनाव रद्द नहीं किए जाएंगे।

प्रश्न 7.
भारत में निर्वाचन प्रक्रिया की किन्हीं दो अवस्थाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रक्रिया की निम्नलिखित अवस्थाएं हैं

  1. चुनाव क्षेत्र निश्चित करना-चुनाव प्रबंध में सर्वप्रथम कार्य चुनाव क्षेत्र को निश्चित करना है। लोकसभा में जितने सदस्य चुने जाने हों, लगभग समान जनसंख्या वाले उतने ही क्षेत्रों में सारे भारत को बांट दिया जाता है। इसी प्रकार विधानसभाओं के चुनाव में राज्य को समान जनसंख्या वाले चुनाव क्षेत्र में बांट दिया जाता है और प्रत्येक क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है।
  2. चुनाव तिथि की घोषणा-चुनाव आयोग चुनाव की तिथि की घोषणा करता है। चुनाव आयोग नामांकन-पत्र भरने की तिथि, नाम वापस लेने की तिथि, नामांकन-पत्रों की जांच-पड़ताल की तिथि निश्चित करता है।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में वयस्क मताधिकार के सिद्धान्त को अपनाने के पक्ष में कोई पांच तर्क दीजिए।
उत्तर-

  1. लोकतंत्र में प्रभुसत्ता जनता के पास होती है, इसीलिए समानता के आधार पर सभी को मत का अधिकार मिलना चाहिए।
  2. कानूनों का प्रभाव सभी पर पड़ता है, इसलिए मताधिकार सभी को.मिलना चाहिए।
  3. व्यक्ति के विकास के लिए मताधिकार आवश्यक है।
  4. वयस्क मताधिकार द्वारा चुनी गई सरकार अधिक शक्तिशाली रहती है।
  5. वयस्क मताधिकार से लोगों में राजनीतिक जागृति उत्पन्न होती है और उन्हें राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है।

प्रश्न 2.
चुनाव अभियान (Election Campaign) के तरीकों की संक्षिप्त व्याख्या करो।
उत्तर-
चुनाव से पूर्व राजनीतिक दल, उम्मीदवार, सदस्य चुनाव अभियान के अंतर्गत अनेक तरीके अपनाते हैं जिनमें महत्त्वपूर्ण निम्नलिखित हैं-

  1. चुनाव घोषणा-पत्र-प्रत्येक प्रमुख दल और कभी-कभी निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में अपना-अपना घोषणा-पत्र जारी करते हैं।
  2. चुनाव सभाएं व जुलूस-पार्टी के सदस्य व उम्मीदवार चुनाव अभियान के अंतर्गत सभाओं व जुलूस का आयोजन करके जनसाधारण से संपर्क स्थापित करके अपने उद्देश्यों व नीतियों को स्पष्ट करते
  3. भित्ति चित्र, पोस्टर व पर्चे-चुनाव अभियान के अंतर्गत अपनाए जाने वाले अन्य तरीके भित्ति चित्र, पोस्टर व पर्चे हैं, जिनके द्वारा उम्मीदवार व पार्टी के चिह्न का प्रचार मतदाताओं में किया जाता है।
  4. झंडे एवं ध्वजाएं-भिन्न-भिन्न पार्टियों के झंडों एवं ध्वजाओं को घरों, गैर-सरकारी कार्यालयों, दुकानों, रिक्शा, स्कूटरों, ट्रकों व कारों पर लटका कर चुनाव प्रचार किया जाता है।
  5. लाउड स्पीकर व ग्रामोफोन-अनेक तरह के वाहनों के ऊपर लाउड स्पीकर एवं ग्रामोफोन को लगाकर सड़कों व मुहल्लों में चुनाव अभियान के प्रचार का महत्त्वपूर्ण साधन अपनाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में चुनाव में निम्न स्तर की जन-सहभागिता के लिए उत्तरदायी पांच तत्त्वों की व्याख्या करें।
उत्तर-
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। 2019 की 17वीं लोकसभा के चुनाव के अवसर पर
मतदाताओं की संख्या 89 करोड़ से अधिक थी। भारत में चुनाव में अधिकांश मतदाता वोट डालने नहीं जाते हैं। भारत में निम्न स्तर की जन-सहभागिता के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  1. अनपढ़ता-भारत की अधिकांश जनता अनपढ़ है। अशिक्षित व्यक्ति मताधिकार का महत्त्व नहीं समझता न ही अधिकांश अशिक्षित व्यक्तियों को मताधिकार का प्रयोग करना आता है।
  2. गरीबी-गरीब व्यक्ति चुनाव लड़ना तो दूर की बात वह चुनाव लड़ने की बात सोच भी नहीं सकता। गरीब व्यक्ति मताधिकार का महत्त्व नहीं समझता और अपनी वोट को बेचने के लिए तैयार हो जाता है।
  3. बेकारी-भारत में जन-सहभागिता के निम्न स्तर के होने का एक कारण बेकारी है। भारत में करोड़ों लोग बेकार हैं। बेकार व्यक्ति मताधिकार को कोई महत्त्व नहीं देता और अपना वोट बेचने के लिए तैयार हो जाता है।
  4. शिक्षित लोगों में राजनीतिक उदासीनता-चुनाव में अधिकांश शिक्षित लोग वोट डालने नहीं जाते।
  5. मतदान केंद्रों का दूर होना-मतदान केंद्र दूर होने के कारण कई मतदाता वोट डालने नहीं जाते।

PSEB 9th Class SST Solutions Civics Chapter 5 लोकतंत्र एवं चुनाव राजनीति

प्रश्न 4.
भारतीय चुनाव आयोग की रचना का वर्णन करें।
उत्तर-
चुनाव आयोग में मुख्य आयुक्त तथा कुछ अन्य सदस्य हो सकते हैं। इनकी संख्या राष्ट्रपति द्वारा निश्चित की जाती है। 1989 से पूर्व चुनाव आयोग एक सदस्यीय था। 1989 में कांग्रेस सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त नियुक्त किए , परंतु राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने इस फैसले को बदल दिया था। 1 अक्तूबर, 1993 को केंद्र सरकार ने दो नए चुनाव आयुक्तों कृषि सचिव एस० एस० गिल और विधि आयोग के सदस्य जी० वी० जी० कृष्णामूर्ति की नियुक्ति कर चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय बनाने का महत्त्वपूर्ण कदम उठाया। दिसंबर, 1993 को संसद् ने चुनाव आयोग को बहु-सदस्यीय बनाने संबंधी विधेयक पारित कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

प्रश्न 5.
भारत की निर्वाचन प्रणाली की कोई पांच कमजोरियां लिखिए।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रणाली तथा चुनावों में कई दोष हैं जो मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं-

  1. एक सदस्यीय चुनाव क्षेत्र-भारत में एक सदस्यीय चुनाव क्षेत्र है और एक स्थान के लिए बहुत-से उम्मीदवार खड़े हो जाते हैं। कई बार थोड़े-से मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार भी चुनाव जीत सकता है।
  2. जाति और धर्म के नाम पर वोट-जाति और धर्म के नाम पर खुले रूप से मत मांगे और डाले जाते हैं।
  3. धन का अधिक खर्च- भारत में चुनाव में धन का बहुत अधिक खर्च होता है, जिसे देखकर साधारण व्यक्ति तो चुनाव लड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकता है।
  4. सरकारी मशीनों का दुरुपयोग-सत्तारूढ़ दल चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करता है। इससे चुनाव निष्पक्ष रूप में नहीं होते हैं।
  5. जाली वोटें भुगताना-चुनाव जीतने के लिए जाली वोटें बड़े पैमाने पर भुगताई जाती हैं।

प्रश्न 6.
भारतीय चुनाव प्रणाली में कोई पांच महत्त्वपूर्ण सुधार समझाइए।
उत्तर-
चुनाव प्रणाली के दोषों को निम्नलिखित ढंगों से दूर किया जा सकता है-

  1. निष्पक्षता-चुनाव निष्पक्ष ढंग से होने चाहिए। सत्तारूढ़ दल को चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए न ही अपने दल के हित में सरकारी मशीनरी का प्रयोग करना चाहिए।
  2. धन के प्रभाव को कम करना-इसके लिए पब्लिक फंड बनाना चाहिए और उम्मीदवारों की धन से सहायता करनी चाहिए। चुनाव का खर्च शासन को ही देना चाहिए।
  3. आनुपातिक चुनाव प्रणाली-प्रायः सभी विपक्षी दल वर्तमान में एक सदस्यीय चुनाव क्षेत्र की प्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। कांग्रेस को अल्पसंख्यक मत मिलते हैं पर संसद् में सीटें बहुत अधिक मिलती हैं। आम तौर पर सभी विरोधी दल आनुपातिक चुनाव प्रणाली के पक्षधर हैं।
  4. परिचय-पत्र-जाली मतदान को रोकने के लिए मतदाताओं को परिचय-पत्र दिए जाने चाहिए।
  5. कड़ी सज़ा-बूथों पर कब्जा करने वालों को कड़ी सज़ा देनी चाहिए।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

Punjab State Board PSEB 9th Class Social Science Book Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Social Science History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

SST Guide for Class 9 PSEB श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज Textbook Questions and Answers

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
ऋग्वेद के अनुसार पंजाब का नाम क्या था ?
(क) हड़प्पा
(ख) सप्त सिंधु
(ग) पंचनद
(घ) पेंटापोटामिया।
उत्तर-
(ख) सप्त सिंधु

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में चीनी यात्री कौन था ?
(क) चाणक्य
(ख) लॉर्ड कर्जन
(ग) हयनसांग
(घ) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(ग) हयनसांग

प्रश्न 3.
पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में कब मिलाया गया ?
(क) 1849 ई०
(ख) 1887 ई०
(ग) 1889 ई०
(घ) 1901 ई०
उत्तर-
(क) 1849 ई०

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

प्रश्न 4.
यह दोआब कम उपजाऊ है-
(क) चज्ज दोआब
(ख) सिंधु सागर दोआब
(ग) रचना दोआब
(घ) बारी दोआब।
उत्तर-
(ख) सिंधु सागर दोआब

प्रश्न 5.
घग्गर और यमुना के बीच का क्षेत्र
(क) मालवा
(ख) बांगर
(ग) माझा
(घ) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(ख) बांगर

प्रश्न 6.
मालवा क्षेत्र किन नदियों के मध्य स्थित है ?
(क) सतलुज और यमुना
(ख) सतलुज और घग्गर
(ग) घग्गर और यमुना
(घ) सतलुज और ब्यास।
उत्तर-
(ख) सतलुज और घग्गर

(ख) रिक्त स्थान भरें:

  1. ……. सभ्यता का जन्म पंजाब में हुआ था।
  2. ‘पेंटा’ का अर्थ ……………. है और ‘पोटामिया’ का अर्थ …….. है।
  3. भौगोलिक दृष्टिकोण से पंजाब को …………. भागों में बांटा गया है।
  4. …………… चिनाब और जेहलम नदियों के बीच का इलाका है।
  5. सिक्ख धर्म के संस्थापक ………. थे।
  6. भाषा के आधार पर ……………. को पंजाब का पुनर्गठन किया गया।
  7. माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई ………….. मीटर है।

उत्तर-

  1. हड़प्पा
  2. पांच, नदी
  3. तीन
  4. चज दोआब
  5. श्री गुरु नानक देव जी
  6. 1 नवंबर, 1966
  7. 8848

(ग) सही मिलान करो :

(क) – (ख)
1. ऋग्वेद – (i) उत्तर-पश्चिमी पर्वत
2. सुलेमान – (i-) सेकिया
3. बांगर – (iii) उप-पर्वतीय क्षेत्र
4. शिवालिक – (iv) सप्त सिंधु
5. यूनसांग – (v) घग्गर और यमुना।
उत्तर-

  1. सप्त सिंधु
  2. पश्चिमी पर्वत
  3. घग्गर और यमुना
  4. पर्वतीय क्षेत्र
  5. सेकिया।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

(घ) निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट करें :

1. ‘मालवा’ तथा ‘बांगर’
2. ‘पश्चिमी पंजाब’ तथा ‘पूर्वी पंजाब’
3. ‘दर्रे’ तथा ‘दोआब’
4. हिमालय तथा उप पर्वतीय क्षेत्र
5. ‘चज’ दोआब तथा ‘बिस्त जालंधर दोआब’
उत्तर-

  1. ‘मालवा’ तथा ‘बांगर’ :
    • मालवा-सतलुज तथा घग्गर नदियों के मध्य में फैले प्रदेश को ‘मालवा’ कहते हैं । लुधियाना, पटियाला, नाभा, संगरूर, फरीदकोट, भटिंडा आदि प्रसिद्ध नगर इस भाग में स्थित हैं।
    • बांगर अथवा हरियाणा-यह प्रदेश घग्गर तथा यमुना नदियों के मध्य में स्थित है। इसके मुख्य नगर अंबाला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, रोहतक, करनाल, गुड़गांव तथा हिसार हैं। यह भाग एक ऐतिहासिक मैदान भी है जहाँ अनेक निर्णायक युद्ध लड़े गए।
  2. ‘पश्चिमी पंजाब’ तथा ‘पूर्वी पंजाब’-1947 ई० में स्वतंत्रता के समय पंजाब को दो भागों में बांटा गया : पश्चिमी पंजाब तथा पूर्वी पंजाब। पंजाब का पश्चिमी भाग मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र था। वह अलग होकर पाकिस्तान के रूप में नया देश बना। पूर्वी पंजाब भारत का हिस्सा बना। उस समय पंजाब के 13 ज़िले पाकिस्तान में चले गए तथा शेष 16 ज़िले भारतीय पंजाब में रह गए।
  3. ‘रे’ तथा ‘दोआब’ :
    • दर्रे-ये ऊंचे पहाड़ों के बीच में से गुजरने के लिए प्रकृति द्वारा बनाए गए मार्ग होते हैं। इन दुर्गम मार्गों में से होकर पर्वतों को पार किया जा सकता है।
    • दोआब-दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहते हैं। पंजाब का मैदान पांच दोआबों से बना हैं।
  4. हिमालय तथा उप पर्वतीय क्षेत्र : हिमालय-हिमालय अर्थात् हिम + आलय का अर्थ है बर्फ का घर। हिमालय की पहाड़ियां पंजाब में श्रृंखलाबद्ध हैं। इन पहाड़ियों को ऊंचाई के अनुसार तीन भागों में बांटा जाता है-महान् हिमालय, मध्य हिमालय तथा बाहरी हिमालय।
    उप-पर्वतीय क्षेत्र (तराई क्षेत्र)-यह क्षेत्र हिमालय की पीर-पंजाल पहाड़ियों के दक्षिण में स्थित है। इसमें शिवालिक और कसौली की पहाड़ियों के ढलान वाले प्रदेश शामिल हैं। इस क्षेत्र की पहाड़ियों की औसत ऊंचाई 10003000 फुट है।
  5. ‘चज’ दोआब तथा ‘बिस्त-जालंधर’ दोआब :
    • चज दोआब-चिनाब तथा जेहलम नदियों के मध्य क्षेत्र को चज दोआब के नाम से पुकारा जाता है। इस दोआब के प्रसिद्ध नगर गुजरात, भेरा तथा शाहपुर हैं।
    •  बिस्त-जालंधर दोआब-इस दोआब में सतलुज तथा ब्यास नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है। यह प्रदेश बड़ा उपजाऊ है। जालंधर और होशियारपुर इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब शब्द से क्या भाव है ?
उत्तर-
पंजाब से भाव पांच नदियों के प्रदेश से है। पंजाब’ फारसी के दो शब्दों-पंज तथा आब के मेल से बना है। पंच का अर्थ है पांच और आब का अर्थ है पानी अर्थात् नदी।

प्रश्न 2.
यूनानियों ने पंजाब का क्या नाम रखा ?
उत्तर-
यूनानियों ने पंजाब का नाम पेंटापोटामिया अर्थात् पांच नदियों की धरती रखा था। पेंटा का अर्थ है पांच और पोटामिया का अर्थ है नदी।

प्रश्न 3.
‘सप्त सिंधु’ से क्या भाव है ?
उत्तर-
वैदिक काल में पंजाब को सप्त सिंधु कहा जाता था क्योंकि उस समय यह सात नदियों का प्रदेश था।

प्रश्न 4.
1947 ई० में पंजाब को किन दो भागों में बांटा गया था ?
उत्तर-
1947 ई० में पंजाब को पश्चिमी पंजाब तथा पूर्वी पंजाब दो भागों में बांटा गया था। पश्चिमी हिस्सा पाकिस्तान बना तथा पूर्वी हिस्सा भारत को मिला।

प्रश्न 5.
पंजाब की उत्तर-पश्चिमी सीमा में स्थित किन्हीं दो दरों के नाम लिखो।
उत्तर-पंजाब की उत्तर-पश्चिमी सीमा में स्थित रे हैं-खैबर, कुर्रम, टोची आदि।

प्रश्न 6.
पंजाब को भाषा के आधार पर कब और कितने राज्यों में बांटा गया ?
उत्तर-
पंजाब को भाषा के आधार पर 1 नवंबर, 1966 को दो राज्यों-पंजाब तथा हरियाणा में बांटा गया।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब के भिन्न-भिन्न ऐतिहासिक नामों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
पंजाब के नाम समय-समय पर बदलते रहे हैं-

  1. वैदिक काल में पंजाब को सप्त सिंधु (सात नदियों की धरती) कहा जाता था।
  2. प्राचीन महाकाव्य रामायण, महाभारत तथा पुराणों में पंजाब को पंचनद बताया गया है।
  3. यूनानियों ने पंजाब को पेंटापोटामिया (Pentapotamia) नाम रखा था-पेय का अर्थ है पांच और पोटामिया का अर्थ है नदी अर्थात् पांच (दरियाओं) नदियों की धरती।
  4. टक कबीले ने पंजाब को टक प्रदेश अथवा टकी का नाम दिया।
  5. चीनी यात्री हयूनसांग ने पंजाब को सेकिया कहकर पुकारा।
  6. महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब लाहौर सूबा के नाम से जाना जाने लगा।
  7. मुग़ल सम्राट अकबर ने पंजाब को पंजाब का नाम दिया। पंजाब फारसी भाषा में पंज और आब से मिलकर बना है। पंज का अर्थ है पांच और आब का अर्थ है पानी।
  8. 1849 ई० में अंग्रेजों ने इसे अपने राज्य में मिला लिया और उसे पंजाब प्रांत नाम दिया।
  9. 1947 ई० में भारत-पाकिस्तान बंटवारे में पंजाब को पूर्वी पंजाब तथा पश्चिमी पंजाब नामक दो भागों में बांटा गया। परंतु दोनों ही देशों में आज भी इसे पंजाब के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब के इतिहास का अध्ययन करने के लिए पंजाब की भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
किसी भी प्रदेश का इतिहास वहां के भूगोल की देन होता है। इसलिए किसी प्रदेश के इतिहास के अध्ययन के लिए उस प्रदेश की भौगोलिक अवस्थाओं का अध्ययन ज़रूरी है। पंजाब के रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा, लोगों के स्वभाव तथा विचार शक्ति काफी सीमा तक भौगोलिक तथ्यों द्वारा प्रभावित हुई है। यहां की प्रत्येक घटना यहां के किसी-न-किसी भौगोलिक तथ्य से जुड़ी हुई है। यहां का उपजाऊ मैदान सभ्यता का पलना बना। समय पड़ने पर यही मैदान रणभूमि बना और यहां के लाखों वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। यहां की नदियों ने अनेक बार आक्रमणकारियों का मार्ग दर्शन किया। यहां के वनों का महत्त्व भी कुछ कम नहीं है। मुग़ल अत्याचारी से पीड़ित पंजाब के लोगों को इन्हीं वनों ने अनेक बार आश्रय दिया। यहां के समृद्ध मैदानों ने आक्रमणकारियों को आक्रमण करने की प्रेरणा दी। इस प्रकार पंजाब के भूगोल ने पंजाब को रंगभूमि और रणभूमि दोनों का स्तर प्रदान किया।

प्रश्न 3.
पंजाब को भारत का प्रवेश द्वार क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के कारण पंजाब वर्षों तक भारत के प्रवेश द्वार का काम करता रहा है। इन पर्वत श्रेणियों में स्थित दरों से गुज़रना कठिन नहीं है। अतः आर्यों से लेकर मंगोलों तक सभी आक्रमणकारी इन्हीं मार्गों द्वारा भारत पर आक्रमण करते रहे क्योंकि ये दरें उन्हें सीधा, पंजाब की धरती पर पहुंचा देते थे। सर्वप्रथम उन्हें पंजाब के लोगों से संघर्ष करना पड़ा। उन्हें पराजित करने पर ही वे पूर्व की ओर आगे बढ़ सके। इस प्रकार पंजाब भारत के लिए प्रवेश द्वार की भूमिका निभाता रहा है।

प्रश्न 4.
पंजाब में इस्लाम धर्म का प्रसार तेजी से क्यों हुआ ?
उत्तर-
पंजाब में इस्लाम धर्म का प्रसार तेज़ी से हुआ क्योंकि सभी मुस्लिम आक्रमणकारी पहले पंजाब में आकर बसे। उन्होंने यहां के लोगों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए विवश किया। मुस्लिम धर्म प्रचारक, सूफी संतों तथा व्यापारियों ने भी इस कार्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिन्दू धर्म के कठोर रीति-रिवाज़ों से तंग आ चुके लोगों ने आसानी से इस्लाम धर्म को अपना लिया। परिणामस्वरूप पंजाब में इस्लाम धर्म काफ़ी तेजी से फैला।

प्रश्न 5.
पंजाब की भौगोलिक स्थिति का लोगों के आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने यहां के लोगों के जीवन को आर्थिक रूप से दृढ़ता प्रदान की। हिमालय की नदियां प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी लाकर पंजाब के मैदानों में बिछाती रहीं। परिणामस्वरूप पंजाब का मैदान उपजाऊ मैदानों में गिना जाने लगा। उपजाऊ भूमि के कारण यहां अच्छी फसल होती रही और यहां के लोग समृद्ध होते गए। इन नदियों से पंजाब की भूमि सींची भी जाती थी। बर्फ से ढके रहने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियां सारा साल बहती रहती हैं और कृषि के लिए वरदान सिद्ध हुई हैं। हिमालय से प्राप्त लकड़ी के कारण पंजाब में फर्नीचर तथा खेल का सामान बनने लगा। इन्हीं पर्वतों से पंजाब के लोगों को गंदा बिरोजा, जड़ी-बूटियां तथा अन्य अनेक उपयोगी वस्तुएं प्राप्त होती रहीं जिससे पंजाब में उद्योगों का विकास हुआ।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब की भौगोलिक विशेषताओं का वर्णन करो।
अथवा
पंजाब के उप-पर्वतीय (तराई) प्रदेश के बारे में लिखो।
अथवा
पंजाब के मैदानी क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं पर एक नोट लिखो।
उत्तर- भौगोलिक रूप से पंजाब का अध्ययन बहुत ही रोचक है। इस दृष्टि से पंजाब को तीन भागों में बांटा जा सकता है

  1. हिमालय तथा उसकी उत्तर पश्चिमी पर्वतीय श्रेणियां
  2. उप-पर्वतीय क्षेत्र अथवा तराई प्रदेश
  3. मैदानी क्षेत्र।

1. हिमालय तथा उसकी उत्तर-पश्चिमी पर्वतीय श्रेणियां-हिमालय अर्थात् हिम+आलय का अर्थ है-बर्फ का घर। भारत के उत्तर में स्थित यह ऊंचा पर्वत वर्ष में अधिकतर समय बर्फ से ढका रहता है। पश्चिम से पूर्व की ओर इसकी लम्बाई लगभग 2400 कि०मी० तथा उत्तर से दक्षिण की ओर औसत चौड़ाई लगभग 250 कि०मी० है। संसार की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माऊंट एवरेस्ट (8848 मी०) हिमालय में ही स्थित है परन्तु हिमालय की सभी पहाड़ियों की ऊंचाई एक समान नहीं है।

पंजाब के उत्तर-पश्चिम में हिमालय की पश्चिमी शाखाएं स्थित हैं। इन शाखाओं में किरथार तथा सुलेमान की पर्वतश्रेणियां सम्मिलित हैं। इन पर्वतों की ऊंचाई अधिक नहीं है। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें अनेक दर्रे हैं इन दरों में खैबर का दर्रा महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। अधिकतर आक्रमणकारियों के लिए यही दर्रा प्रवेश-द्वार बना रहा। .

2. उप-पर्वतीय क्षेत्र अथवा तराई प्रदेश-हिमालय प्रदेश के उच्च प्रदेशों और पंजाब के मैदानी प्रदेशों के मध्य तराई का प्रदेश स्थित है। इसे उप-पर्वतीय प्रदेश भी कहा जाता है। यह 160 कि० मीटर से 320 कि० मीटर तक चौड़ा है और इसकी ऊंचाई 300 से 900 मीटर तक है। यह भाग अनेक घाटियों के कारण हिमालय पर्वत श्रेणियों से अलगसा दिखाई देता है। इस भाग में सियालकोट, कांगड़ा, होशियारपुर, गुरदासपुर, अंबाला का कुछ क्षेत्र सम्मिलित है। सामान्य रूप से यह एक पर्वतीय प्रदेश है। अतः यहां उपज बहुत कम होती है। वर्षा के कारण यहां अनेक रोग फैलते हैं। जहां कहीं भूमि को कृषि योग्य बनाया गया है वहां आलू, चावल-गेहूँ तथा मक्का की कृषि की जाने लगी है। यहां आने-जाने के साधनों का भी पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है। यहां की जनसंख्या कम है। यहां के लोगों को अपना जीवन-निर्वाह करने के लिए कड़ा परिश्रम करना पड़ता है। प्रकृति की सुंदर छटा के कारण यह प्रदेश बहुत की आकर्षक है और वनों से आच्छादित इसकी घाटियां मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

3. मैदानी क्षेत्र-पंजाब के मैदानी क्षेत्र को दो भागों में बांटा गया है-पूर्वी मैदान तथा पश्चिमी मैदान। यमुना तथा रावी के मध्य स्थित भाग को ‘पूर्वी मैदान’ कहते हैं। यह प्रदेश अधिक उपजाऊ है। यहां की जनसंख्या भी घनी है। रावी तथा सिंध के मध्य वाले भाग को ‘पश्चिमी मैदान’ कहते हैं। यह प्रदेश पूर्वी मैदान की तुलना में कम समृद्ध है।
(क) पाँच दोआब-दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहते हैं। पंजाब का मैदानी भाग निम्नलिखित पाँच दोआबों से घिरा हुआ है।

  1. सिंध सागर दोआब-जेहलम तथा सिंध नदियों के बीच के प्रदेश को सिंध सागर दोआब कहा जाता है। यह प्रदेश अधिक उपजाऊ नहीं है। जेहलम तथा रावलपिंडी यहां के प्रसिद्ध नगर हैं।
  2. रचना दोआब-इस भाग में रावी तथा चिनाब नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है जो काफ़ी उपजाऊ है। गुजरांवाला तथा शेखूपुरा इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।
  3. बिस्त-जालंधर दोआब-इस दोआब में सतलुज तथा ब्यास नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है। यह प्रदेश बड़ा उपजाऊ है। जालंधर और होशियारपुर इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।
  4. बारी दोआब-ब्यास तथा रावी नदियों के बीच के प्रदेश को बारी दोआब कहा जाता है। यह अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है। पंजाब के मध्य में स्थित होने के कारण इसे ‘माझा’ भी कहा जाता है। पंजाब के दो सुविख्यात नगर लाहौर तथा अमृतसर इसी दोआब में स्थित हैं।
  5. चज दोआब-चिनाब तथा जेहलम नदियों के मध्य क्षेत्र को चज दोआब के नाम से पुकारा जाता है। इस दोआब के प्रसिद्ध नगर गुजरात, भेरा तथा शाहपुर हैं।

(ख) मालवा तथा बांगर-पांच दोआबों के अतिरिक्त पंजाब के मैदानी भाग में सतलुज तथा यमुना के मध्य का विस्तृत मैदानी क्षेत्र भी सम्मिलित है। इसको दो भागों में बांटा जा सकता है-मालवा तथा बांगर।

  1. मालवा-सतलुज तथा घग्घर नदियों के मध्य में फैले प्रदेश को ‘मालवा’ कहते हैं। लुधियाना, पटियाला, नाभा, संगरूर, फरीदकोट, भटिंडा आदि प्रसिद्ध नगर इस भाग में स्थित हैं।
  2. बांगर अथवा हरियाणा-यह प्रदेश घग्घर तथा यमुना नदियों के मध्य में स्थित है। इसके मुख्य नगर अंबाला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, जींद, रोहतक, करनाल, गुड़गांव तथा हिसार हैं। यह भाग एक ऐतिहासिक मैदान भी है जहां अनेक निर्णायक युद्ध लड़े गए।

प्रश्न 2.
पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने पंजाब के राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र के इतिहास पर क्या प्रभाव डाला ? विस्तार सहित बताओ।
उत्तर-
पंजाब भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित एक अति उपजाऊ प्रदेश है। इसकी आदर्श स्थिति ने यहां के इतिहास को एक-एक विशिष्ट रूप प्रदान किया है। वैसे भी किसी प्रदेश का इतिहास वहां के भूगोल की कोख से ही जन्म लेता है। पंजाब का इतिहास भी कोई अपवाद नहीं है। यहां के लोगों ने राजनीतिक, सामाजिक तथा धार्मिक क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण सफलताएं प्राप्त की हैं। संक्षेप में पंजाब की स्थिति ने पंजाब के इतिहास को निम्नलिखित रंगों में रंगा है-

1. राजनीतिक क्षेत्र पर प्रभाव-

  • पंजाब के उत्तर-पश्चिम में स्थित दरों ने आक्रमणकारियों के लिए प्रवेश द्वार का काम किया। सभी आरंभिक आक्रमणकारी उत्तर-पश्चिम की दिशा से भारत में प्रवेश करते रहे। उनका सामना करने के लिए पंजाब के वीर सपूत आगे बढ़े।
  • सभी महत्त्वपूर्ण तथा निर्णायक युद्ध इसी धरती पर ही लड़े गए। चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत में प्रथम विशाल साम्राज्य स्थापित किया था, परंतु उसके साम्राज्य की नींव पंजाब से ही पड़ी। हर्ष के साम्राज्य की पहली राजधानी थानेश्वर (कुरुक्षेत्र के समीप) भी पंजाब में ही थी।
  • पंजाब के वनों तथा पर्वतों ने सिक्खों को संकट के समय शरण दी। यहीं रह कर सिक्खों ने गुरिल्ला युद्ध प्रणाली द्वारा मुग़लों तथा अहमदशाह अब्दाली के दांत खट्टे किए।
  • अंग्रेज़ पंजाब पर सबसे अन्त में अधिकार कर सके। इसका कारण यह था कि उन्होंने देश के पूर्वी तट से भारत में प्रवेश किया था। यह प्रदेश पंजाब से बहुत दूर था।

2. धार्मिक क्षेत्र पर प्रभाव-धार्मिक क्षेत्र में पंजाब की भौगोलिक स्थिति ने यहां के इतिहास पर निम्नलिखित प्रभाव डाले :

वैदिक धर्म का जन्म तथा विकास-वैदिक धर्म का आरम्भ वेदों से माना जाता है। वेद चार हैं ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद। इनमें से ऋग्वेद सबसे प्राचीन और सर्वोच्च है। इसकी रचना पंजाब की धरती पर ही हुई है। इस प्रकार यह पंजाब वैदिक धर्म के प्रचार का केन्द्र रहा है।

इस्लाम धर्म का प्रसार-इस्लाम धर्म का जन्म मक्का-मदीना में हुआ और तेज़ी से मध्य एशिया के देशों में फैल गया। इन देशों से मुस्लिम आक्रमणकारी धर्म-प्रचारक, व्यापारी, सूफी संत आदि उत्तर-पश्चिमी दरों के रास्ते भारत आए। मुस्लिम आक्रमणकारियों ने पंजाब पर अपना अधिकार कर लिया और यहाँ के लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने पर विवश किया। इसके अतिरिक्त हिन्दू समाज में प्रचलित कठोर रीति-रिवाजों और जाति भेदभाव के कारण निम्न जाति के बहुत से लोगों ने इस्लाम धर्म अपना लिया। इस तरह पंजाब में इस्लाम धर्म का काफ़ी तेजी से प्रसार हुआ।

सिक्ख धर्म का उदय तथा विकास-विदेशी हमलावरों के कारण पंजाब के लोगों पर कई प्रकार के अत्याचार हुए। उस समय हिन्दू समाज जाति भेद, कर्मकाण्डों और पाखण्डों में फंस चुका था। इस प्रकार लोगों का जीवन अत्यन्त दयनीय हो गया था। ऐसे वातावरण में पंजाब की धरती पर एक महान् क्रांतिकारी महापुरुष श्री गुरु नानक देव जी ने जन्म लिया। उन्होंने प्रचलित जाति भेद, कर्मकाण्डों, पाखण्डों और राजनैतिक अत्याचारों का विरोध किया। उन्होंने संसार को सबके कल्याण (सरबत दा भला) का संदेश दिया जिसने सिक्ख धर्म की नींव डाली। श्री गुरु नानक देव जी के बाद नौ . गुरुओं ने सिक्ख धर्म के प्रचार व प्रसार में अपना योगदान दिया। अत्याचारों के विरुद्ध और धर्म की रक्षा के लिए दो सिक्ख गुरुओं ने अपने बलिदान भी दिए। परिणामस्वरूप पंजाब में सिक्ख धर्म तेज़ी से विकसित हुआ।

प्रश्न 3.
विदेशी हमलों का पंजाब के लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
विदेशी हमलों का पंजाब के लोगों के जीवन पर बुरे तथा अच्छे दोनों प्रकार के प्रभाव पड़े। इनका अलगअलग वर्णन इस प्रकार है-
बुरे प्रभाव

  1. अत्याचार-विदेशी आक्रमणकारियों ने पंजाब के लोगों पर अनेक अत्याचार किए। मुस्लिम हमलावरों ने उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए विवश किया। उन्होंने यह कार्य तलवार के बल पर करने का प्रयास किया।
  2. जन-धन की हानि-विदेशी हमलों से पंजाब के लोगों को जन-धन की भारी हानि उठानी पड़ी। इन हमलों में कई लोग मारे गए और कृषि उजड़ गई।
  3. कला और साहित्य के विकास में बाधा-पंजाब प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति का पलना था। यहां की कला और साहित्य काफ़ी विकसित थे। विदेशी हमलों से इनके विकास में बाधा पड़ी। कई ग्रंथ तथा कलाकृत्तियां नष्ट हो गईं।

अच्छे प्रभाव

  1. पंजाबियों के विशेष गुण-लगातार युद्धों में उलझे रहने के कारण पंजाब के लोगों में वीरता, साहस, परिश्रम जैसे अच्छे गुण उत्पन्न हुए। आज भी पंजाब के लोगों में ये गुण विद्यमान हैं।
  2. समृद्ध मिश्रित संस्कृति का विकास-विदेशियों के सम्पर्क में रहने से पंजाब में एक मिश्रित संस्कृति का विकास हुआ। पंजाबियों के खान-पान, पहनावे तथा रहन-सहन में कई नए मूल्य जुड़ गए। इस प्रकार पंजाब की विशेष संस्कृति काफ़ी समृद्ध हो गई।
    सत्य तो यह है कि विदेशी हमलों ने पंजाब तथा पंजाबियों के चरित्र को एक नया रूप प्रदान किया।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

PSEB 9th Class Social Science Guide श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
पंजाब में पहले सिख राज्य की स्थापना की___
(क) श्री गुरु नानक देव जी
(ख) महाराजा रणजीत सिंह
(ग) बंदा सिंह बहादुर
(घ) गुरु गोबिंद सिंह जी।
उत्तर-
(ग) बंदा सिंह बहादुर

प्रश्न 2.
पंजाब को भाषा के आधार पर दो भागों में बांटा गया
(क) 1947 ई० में
(ख) 1966 ई० में
(ग) 1950 ई० में
(घ) 1971 ई० में
उत्तर-
(ख) 1966 ई० में

प्रश्न 3.
अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह के बीच सीमा का काम करता था
(क) सतलुज दरिया
(ख) चिनाब दरिया
(ग) रावी दरिया
(घ) ब्यास दरिया।
उत्तर-
(क) सतलुज दरिया

प्रश्न 4.
आज हिंद-पाक सीमा का काम कौन-सा दरिया करता है ?
(क) रावी दरिया
(ख) चिनाब दरिया
(ग) ब्यास दरिया
(घ) सतलुज दरिया।
उत्तर-
(क) रावी दरिया

प्रश्न 5.
शाह ज़मान ने भारत (पंजाब) पर आक्रमण किया
(क) 1811 ई० में
(ख) 1798 ई० में
(ग) 1757 ई० में
(घ) 1794 ई० में।
उत्तर-
(ख) 1798 ई० में

प्रश्न 6.
दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया
(क) लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने
(ख) लॉर्ड माऊंटबेटन ने
(ग) लॉर्ड हार्डिंग ने
(घ) लॉर्ड कर्जन ने।
उत्तर-
(ग) लॉर्ड हार्डिंग ने

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

रिक्त स्थान भरें:

  1. पंजाब को ………… काल में सप्त सिंधु कहा जाता था।
  2. दो दरियाओं के बीच के भाग को ………… कहते हैं।
  3. मुग़ल शासक अकबर ने पंजाब को ………. प्रांतों में बांटा।
  4. महाराजा रणजीत सिंह के अधीन पंजाब को ……….. राज्य के नाम से पुकारा जाने लगा।
  5. रामायण तथा महाभारत काल में पंजाब को …….. कहा जाता था।
  6. सिकंदर ने भारत पर …………. ई० पू० में आक्रमण किया।

उत्तर-

  1. वैदिक
  2. दोआबा
  3. दो
  4. लाहौर
  5. सेकिया
  6. 326

सही मिलान करो:

(क) – (ख)
1. महाराजा रणजीत सिंह – (i) सतलुज तथा ब्यास
2. पंजाब का अंग्रेजी राज्य में विलय – (ii) लार्ड हार्डिंग
3. रामायण तथा महाभारत – (iii) लाहौर राज्य
4. दिल्ली भारत की राजधानी – (iv) 1849 ई०
5. बिस्त-जालन्धर दोआब – (v) सेकिया
उत्तर-

  1. लाहौर राज्य
  2. 1849 ई०
  3. सेकिया
  4. लार्ड हार्डिंग
  5. सतलुज तथा ब्यास

अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

उत्तर एक लाइन अथवा एक शब्द में :

प्रश्न 1.
भारत के बंटवारे के बाद ‘पंजाब’ शब्द उचित क्यों नहीं रह गया ?
उत्तर-
बंटवारे से पहले पंजाब पांच दरियाओं की धरती था, परंतु बंटवारे के कारण इसके तीन दरिया पाकिस्तान में चले और वर्तमान पंजाब में केवल दो दरिया (ब्यास तथा सतलुज) ही शेष रह गए।

प्रश्न 2.
भारत के बंटवारे का पंजाब पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
भारत के बंटवारे से पंजाब भी दो भागों में बंट गया।

प्रश्न 3.
भौगोलिक दृष्टिकोण से पंजाब को कितने भागों में बांटा जाता है ? उनके नाम लिखिए।
उत्तर-
भौगोलिक दृष्टिकोण से पंजाब को तीन भागों में बांटा जाता है-

  1. हिमालय तथा उसकी उत्तर-पश्चिमी पहाड़ियां
  2. उप पहाड़ी क्षेत्र (पहाड़ की तलहटी के क्षेत्र)
  3. मैदानी क्षेत्र।

प्रश्न 4.
अगर पंजाब के उत्तर में हिमालय न होता तो यह कैसा इलाका होता ?
उत्तर-
अगर पंजाब के उत्तर में हिमालय न होता तो यह इलाका शुष्क तथा ठंडा बन कर रह जाता।

प्रश्न 5.
‘दोआबा’ शब्द से क्या भाव है ?
उत्तर-
दो दरियाओं के बीच के भाग को दोआंबा कहते हैं।

प्रश्न 6.
दरिया सतलुज तथा दरिया घग्गर के बीच के इलाके को क्या कहा जाता है तथा यहां के निवासियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
दरिया सतलुज तथा दरिया घग्गर के बीच के इलाके को ‘मालेवा’ कहा जाता है। यहां के निवासियों को मलवई कहते हैं।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

प्रश्न 7.
1. दोआबा बिस्त का यह नाम क्यों पड़ा ?
2. इसके किन्हीं दो प्रसिद्ध शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. दोआबा बिस्त ब्यास तथा सतलुज नदियों के बीच का प्रदेश है जिनके नाम के पहले अक्षरों के जोड़ से ही इस दोआब का नाम बिस्त पड़ा है।
  2. जालंधर तथा होशियारपुर इस दोआबे के दो प्रसिद्ध शहर हैं।

प्रश्न 8.
1. दोआबा बारी को ‘माझा’ क्यों कहा जाता है तथा
2. यहां के निवासियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर-

  1. दोआबा बारी पंजाब के मध्य में स्थित होने के कारण माझा कहलाता है।
  2. इसके निवासियों को ‘मझेल’ कहते हैं।

प्रश्न 9.
मुग़ल बादशाह अकबर ने पंजाब को कौन-कौन से दो प्रांतों में विभाजित किया ?
उत्तर-
लाहौर तथा मुलतान।

प्रश्न 10.
महाराजा रणजीत सिंह के अधीन पंजाब को किस नाम से पुकारा जाने लगा था ?
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह के अधीन पंजाब को ‘लाहौर राज्य’ के नाम से पुकारा जाने लगा था।

प्रश्न 11.
पंजाब को अंग्रेजी राज्य में कब मिलाया गया ?
उत्तर-
पंजाब को अंग्रेज़ी राज्य में 1849 ई० में मिलाया गया।

प्रश्न 12.
पंजाब को भाषा के आधार पर कब बांटा गया ?
उत्तर-
पंजाब को भाषा के आधार पर 1966 ई० में बांटा गया।

प्रश्न 13.
हिमालय के पश्चिमी दरों के मार्ग से पंजाब पर आक्रमण करने वाली किन्हीं चार जातियों के नाम बताओ।
उत्तर-
इन दरों के मार्ग से पंजाब पर आक्रमण करने वाली चार जातियां थीं-आर्य, शक, यूनानी तथा कुषाण।

प्रश्न 14.
पंजाब के मैदानी क्षेत्र को कौन-कौन से दो भागों में विभक्त किया जाता है ?
उत्तर-
पंजाब के मैदानी क्षेत्र को पूर्वी मैदान तथा पश्चिमी मैदान में विभक्त किया जाता है।

प्रश्न 15.
भारतीय पंजाब में अब कौन-से दो दरिया रह गये हैं ?
उत्तर-
सतलुज तथा ब्यास।

प्रश्न 16.
रामायण तथा महाभारत काल में पंजाब को क्या कहा जाता था ?
उत्तर-
सेकिया।

प्रश्न 17.
दिल्ली को भारत की राजधानी किस गवर्नर-जनरल ने बनाया ?
उत्तर-
लार्ड हार्डिंग ने।

प्रश्न 18.
हिमालय की पश्चिमी श्रृंखलाओं में स्थित किन्हीं दो दरों के नाम बताओ।
उत्तर-
खैबर तथा टोची।

प्रश्न 19.
दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी ?
उत्तर-
1911 में।

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प्रश्न 20.
सिकंदर ने भारत पर कब आक्रमण किया ?
उत्तर-
326 ई० पू० में।

प्रश्न 21.
शाह ज़मान ने भारत (पंजाब) पर आक्रमण कब किया ?
उत्तर-
1798 ई० में।

प्रश्न 22.
अंग्रेज़ों तथा महाराजा रणजीत सिंह के बीच कौन-सा दरिया सीमा का काम करता था ?
उत्तर-
सतलुज।

प्रश्न 23.
आज किस दरिया का कुछ भाग हिंद-पाक सीमा का काम करता है ?
उत्तर-
रावी।

प्रश्न 24.
महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब की राजधानी कौन-सी थी ?
उत्तर-
लाहौर।

प्रश्न 25.
पंजाब के मैदानी क्षेत्र को वास्तविक पंजाब’ क्यों कहा गया है ? कोई एक कारण बताओ।
उत्तर-
यह क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है और समस्त पंजाब की समृद्धि का आधार है।

प्रश्न 26.
पंजाब के किस मैदानी क्षेत्र में महाभारत का युद्ध, पानीपत के तीन युद्ध तथा तराइन के दो युद्ध लड़े गए ?
उत्तर-
बांगर।

प्रश्न 27.
मालवा प्रदेश किन नदियों के बीच स्थित है ?
उत्तर-
मालवा प्रदेश सतलुज और घग्घर नदियों के बीच में स्थित है।

प्रश्न 28.
पंजाब के मालवा प्रदेश का नाम किसके नाम पर पड़ा ?
उत्तर-
पंजाब के मालवा प्रदेश का नाम यहां बसने वाले मालव कबीले के नाम पर पड़ा।

प्रश्न 29.
पंजाब के किन्हीं चार नगरों के नाम बताओ जहां निर्णायक ऐतिहासिक युद्ध हुए।
उत्तर-
तराइन, पानीपत, पेशावर तथा थानेसर में निर्णायक युद्ध हुए।

प्रश्न 30.
पाकिस्तानी पंजाब को किस नाम से पुकारा जाता है ?
उत्तर-
पश्चिमी पंजाब।

प्रश्न 31.
हिंदी-बाखत्री तथा हिंदी-पारथी राजाओं के अधीन पंजाब की राजधानी कौन-सी थी ?
उत्तर-
साकला (सियालकोट)।

प्रश्न 32.
दो दरियाओं के मध्य भाग के लिए ‘दोआबा’ शब्द का प्रचलन किस मुगल शासक के समय में हुआ ?
उत्तर-
अकबर।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हिमालय की पहाड़ियों के कोई चार लाभ लिखिए।
उत्तर-
हिमालय की पहाड़ियों के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं-

  1. हिमालय से निकलने वाली नदियां सारा साल बहती हैं। ये नदियां पंजाब की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं।
  2. हिमालय की पहाड़ियों पर घने वन पाये जाते हैं। इन वनों से जड़ी-बूटियां तथा लकड़ी प्राप्त होती है।
  3. इस पर्वत की ऊंची बर्फीली चोटियां शत्रु को भारत पर आक्रमण करने से रोकती हैं।
  4. हिमालय पर्वत मानसून पवनों को रोक कर वर्षा लाने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 2.
किन्हीं तीन दोआबों का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर-

  1. दोआबा सिंध सागर-इस दोआबे में दरिया सिंध तथा दरिया जेहलम के मध्य का प्रदेश आता है। यह भाग अधिक उपजाऊ नहीं है।
  2. दोआब चज-चिनाब तथा जेहलम नदियों के मध्य क्षेत्र को चज दोआबा के नाम से पुकारते हैं। इस दोआब के प्रसिद्ध नगर गुजरात, भेरा तथा शाहपुर हैं।
  3. दोआबा रचना-इस भाग में रावी तथा चिनाब नदियों के बीच का प्रदेश सम्मिलित है जो काफी उपजाऊ है। गुजरांवाला तथा शेखूपुरा इस दोआब के प्रसिद्ध नगर हैं।

प्रश्न 3.
पंजाब के दरियाओं ने इसके इतिहास पर क्या प्रभाव डाला है ?
उत्तर-
पंजाब के दरियाओं (नदियों) ने सदा शत्रु के बढ़ते कदमों को रोका। बाढ़ के दिनों में तो यहां के दरिया (नदियां) समुद्र का रूप धारण कर लेते हैं और उन्हें पार करना असंभव हो जाता है। यहां के दरिया (नदियां) जहां आक्रमणकारियों के मार्ग में बाधा बने, वहां ये उनके लिए मार्ग-दर्शक भी बने। लगभग सभी आक्रमणकारी अपने विस्तार क्षेत्र का अनुमान इन्हीं नदियों की दूरी के आधार पर ही लगाते थे। पंजाब के दरियाओं (नदियों) ने प्राकृतिक सीमाओं का काम भी किया। मुग़ल शासकों ने अपनी सरकारों, परगनों तथा सूबों की सीमाओं का काम इन्हीं दरियाओं (नदियों) से ही लिया। यहां के दरियाओं (नदियों) ने पंजाब के मैदानों को उपजाऊ बनाया और लोगों को समृद्धि प्रदान की।

प्रश्न 4.
विभिन्न कालों में पंजाब की सीमाओं की जानकारी दीजिए।
उत्तर-
पंजाब की सीमाएं समय-समय पर बदलती रही हैं-

  1. ऋग्वेद में बताए गए पंजाब में सिंध, जेहलम, रावी, चिनाब, ब्यास, सतलुज तथा सरस्वती नदियों का प्रदेश सम्मिलित था।
  2. मौर्य तथा कुषाण काल में पंजाब की पश्चिमी सीमा हिंदुकुश के पर्वतों तक चली गई थी तथा तक्षशिला इसका एक भाग बन गया था।
  3. सल्तनत काल में पंजाब की सीमाएं लाहौर तथा पेशावर तक थीं जबिक मुग़ल काल में पंजाब दो प्रांतों में बंट गया था-लाहौर तथा मुल्तान।
  4. महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब (लाहौर) राज्य का विस्तार सतलुज नदी से पेशावर तक था।
  5. लाहौर राज्य के अंग्रेजी साम्राज्य में विलय के पश्चात् इसका नाम पंजाब रखा गया।
  6. भारत विभाजन के समय पंजाब के मध्यवर्ती प्रदेश पाकिस्तान में चले गए।
  7. पंजाब भाषा के आधार पर तीन राज्यों में बंट गया-पंजाब, हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 5.
पंजाब के इतिहास को हिमालय पर्वत ने किस तरह से प्रभावित किया ?
उत्तर-
हिमालय पर्वत ने पंजाब के इतिहास पर निम्नलिखित प्रभाव डाले हैं-

  1. पंजाब भारत का द्वार पथ-हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के कारण पंजाब अनेक युगों से भारत का द्वार पथ रहा। इन पर्वतीय श्रेणियों में स्थित दरों को पार करके अनेक आक्रमणकारी भारत पर आक्रमण करते रहे।
  2. उत्तर-पश्चिमी सीमा की समस्या-पंजाब का उत्तर-पश्चिमी भाग भारतीय शासकों के लिए सदा एक समस्या बना रहा। जो शासक इस भाग में स्थित दरौं की उचित रक्षा नहीं कर सके, उन्हें पतन का मुंह देखना पड़ा।
  3. विदेशी आक्रमणों से रक्षा-हिमालय पर्वत ऊंचा है तथा हमेशा बर्फ से ढका रहता है। इस लिये इसे पार करना बड़ा कठिन था। परिणामस्वरूप पंजाब उत्तर की ओर से एक लंबे समय तक आक्रमणकारियों से सदा सुरक्षित रहा।
  4. आर्थिक समृद्धि-हिमालय के कारण पंजाब एक समृद्ध प्रदेश बना। हिमालय की नदियां प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी ला-लाकर पंजाब के मैदानों में बिछाती रहीं। परिणामस्वरूप पंजाब का मैदान संसार के उपजाऊ मैदानों में गिना जाने लगा।

प्रश्न 6.
पंजाब ने भारतीय इतिहास में क्या भूमिका निभाई है ?
उत्तर-
पंजाब ने अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के कारण भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रदेश भारत में सभ्यता का पालना बना। भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता (सिंधु घाटी की सभ्यता) इसी क्षेत्र में फलीफूली। आर्यों ने भी अपनी सत्ता का केंद्र इसी प्रदेश को बनाया। उन्होंने वेद, पुराण, महाभारत, रामायण आदि महत्त्वपूर्ण कृतियों की रचना की। पंजाब ने भारत के प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य किया। मध्यकाल तक भारत में आने वाले सभी आक्रमणकारी पंजाब के मार्ग से ही भारत आये। अतः पंजाब वासियों ने बार-बार आक्रमणकारियों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए बार-बार उनसे युद्ध किए। इसके अतिरिक्त पंजाब हिंदू तथा सिक्ख धर्म की जन्म-भूमि भी रहा है। गुरु नानक देव जी ने अपना पावन संदेश इसी धरती पर दिया। यहीं रहकर गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की और मुग़लों के धार्मिक अत्याचारों का विरोध किया। बंदा बहादुर तथा महाराजा रणजीत सिंह के कार्य भी भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। नि:संदेह पंजाब ने भारत के इतिहास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

प्रश्न 7.
पंजाब के इतिहास को दृष्टि में रखते हुए पंजाब के भौतिक भागों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब के इतिहास को दृष्टि में रखते हुए पंजाब को मुख्य रूप से तीन भौतिक भागों में बांटा जा सकता है-

  1. हिमालय तथा उत्तरी-पश्चिमी पर्वतीय श्रेणियां
  2. तराई प्रदेश तथा
  3. मैदानी क्षेत्र।

पंजाब के उत्तर में विशाल हिमालय पर्वत फैला है। इसकी ऊंची-ऊंची चोटियां सदैव बर्फ से ढकी रहती हैं। हिमालय की तीन श्रेणियां हैं जो एक-दूसरे के समानांतर फैली हैं। हिमालय की उत्तर-पश्चिमी शाखाओं में अनेक महत्त्वपूर्ण दर्रे हैं जो प्राचीन काल में आक्रमणकारियों, व्यापारियों तथा धर्म प्रचारकों को मार्ग जुटाते रहे। पंजाब का दूसरा भौतिक भाग तराई (तलहटी) प्रदेश है। यह पंजाब के पर्वतीय तथा उपजाऊ मैदानी भाग के मध्य में विस्तृत है। इस भाग में जनसंख्या बहुत कम है। पंजाब का सबसे महत्त्वपूर्ण भौतिक भाग इसका उपजाऊ मैदानी प्रदेश है। यह उत्तर-पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर दक्षिण-पूर्व में यमुना नदी तक फैला हुआ है। यह हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी से बना है और आरंभ से ही पंजाब की समृद्धि का आधार रहा है।

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प्रश्न 8.
पंजाब की भौतिक विशेषताओं ने पंजाब के इतिहास को किस प्रकार प्रभावित किया है ?
उत्तर-
पंजाब की भौतिक विशेषताओं ने पंजाब के इतिहास को अपने-अपने ढंग से प्रभावित किया है।

  1. हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के दरों ने अनेक आक्रमणकारियों को मार्ग दिया। अत: पंजाब के शासकों के लिए उत्तरी-पश्चिमी सीमा की सुरक्षा सदा एक समस्या बनी रही। इसके साथ-साथ हिमालय की बर्फ से ढकी ऊंचीऊंची चोटियां पंजाब की आक्रमणकारियों (उत्तर की ओर से) से रक्षा भी करती रहीं।
  2. हिमालय के कारण पंजाब में अपनी एक विशेष संस्कृति का भी विकास हुआ।
  3. पंजाब का उपजाऊ एवं धनी प्रदेश आक्रमणकारियों के लिए सदा आकर्षण का कारण बना रहा। फलस्वरूप इस धरती पर बार-बार युद्ध हुए।
  4. तराई प्रदेश ने संकट के समय सिक्खों को शरण दी। यहां रहकर सिक्खों ने अत्याचारी शासकों का विरोध किया और अपने अस्तित्व को बनाए रखा। अतः स्पष्ट है कि पंजाब का इतिहास वास्तव में इस प्रदेश के भौतिक तत्त्वों की ही देन है।

प्रश्न 9.
पंजाब को अंग्रेजी राज्य में कब और किसने मिलाया ? स्वतंत्रता आंदोलन में पंजाब के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब को 1849 में लॉर्ड डल्हौज़ी ने अंग्रेज़ी राज्य में मिलाया। स्वतंत्रता आंदोलन में पंजाब का योगदान अद्वितीय था। पंजाब में ही भाई राम सिंह ने कूका आंदोलन की नींव रखी। 20वीं शताब्दी में सिंह सभा लहर, गदर पार्टी, गुरुद्वारा सुधार आंदोलन, बब्बर अकाली आंदोलन, नौजवान सभा तथा अकाली दल के माध्यम से यहां के वीरों ने स्वतंत्रता आंदोलन को सक्रिय बनाया। भगत सिंह ने मातृभूमि की जंजीरें तोड़ने के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया।
पंजाब : भौगोलिक विशेषताएं तथा प्रभाव करतार सिंह सराभा तथा सरदार ऊधम सिंह जैसे पंजाबी वीरों ने भी हंसते-हंसते भारत माता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। अंतत: 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ पंजाब भी अंग्रेजों की दासता से मुक्त हो गया।

प्रश्न 10.
पंजाब की पर्वतीय तलहटी अथवा तराई प्रदेश की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
तराई प्रदेश हिमाचल प्रदेश के उच्च प्रदेशों और पंजाब के मैदानी प्रदेशों के मध्य स्थित हैं। इसकी ऊंचाई 308 में 923 मीटर तक है। यह भाग अनेक घाटियों के कारण हिमालय पर्वत श्रेणियों से अलग-सा दिखाई देता है। इस भाग में सियालकोट, कांगड़ा, होशियारपुर, गुरदासपुर तथा अंबाला का कुछ क्षेत्र सम्मिलित है। सामान्य रूप से यह एक पर्वतीय प्रदेश है। अतः यहां उपज बहुत कम होती है। वर्षा के कारण यहां अनेक रोग फैलते हैं। यहां आने जाने के साधनों का भी पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है। इसलिए यहां की जनसंख्या कम है। यहां के लोगों को अपना जीवन-निर्वाह करने के लिए कड़ा परिश्रम करना पड़ता है। इस परिश्रम ने उन्हें बलवान् तथा हृष्ट-पुष्ट बना दिया है।

प्रश्न 11.
पंजाब के मैदानी प्रदेश ने पंजाब के इतिहास को कहां तक प्रभावित किया है ?
उत्तर-
पंजाब के इतिहास पर पंजाब के मैदानी प्रदेश की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।-

  1. इस प्रदेश की भूमि अत्यंत उपजाऊ है जिसके कारण यह प्रदेश सदा समृद्ध रहा। पंजाब के मैदानों की यह संपन्नता बाह्य शत्रुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई।
  2. पंजाब निर्णायक युद्धों का केंद्र बना रहा। पेशावर, कुरुक्षेत्र, करी, थानेश्वर, तराइन, पानीपत आदि नगरों में घमासान युद्ध हुए। केवल पार्नीपत के मैदान में तीन बार निर्णायक युद्ध हुए।
  3. अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण जहां पंजाबियों ने अनेक युद्धों का सामना किया, वहां निर्मम अत्याचारों का सामना भी किया। उदाहरण के लिए तैमूर ने पंजाब के लोगों पर अनगिनत अत्याचार किए थे।
  4. निरंतर युद्धों में उलझे रहने के कारण पंजाब के लोगों में वीरता एवं निर्भीकता के विशेष गुण उत्पन्न हुए। 5. पंजाब के मैदानी प्रदेश में आर्यों ने हिंदू धर्म का विकास किया। इसी प्रदेश ने मध्यकाल में गुरु नानक साहिब जैसे महान् संत को जन्म दिया जिनकी सरल शिक्षाएं सिक्ख धर्म के रूप में प्रचलित हुईं। इन सब तथ्यों से स्पष्ट है कि पंजाब के मैदानी प्रदेश ने पंजाब के इतिहास में अनेक अध्यायों का समावेश किया।

दीर्घ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
ऋग्वैदिक काल से 1966 तक पंजाब के बदलते राजनीतिक स्वरूप (सीमा संबंधी परिवर्तनों) की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
ऋग्वैदिक काल से लेकर भारत की स्वतंत्रता के कई वर्ष बाद तक पंजाब की सीमाओं में लगातार बदलाव होते रहे हैं। इसके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं :
ऋग्वैदिक काल से मुगल काल तक

  1. ऋग्वेद के समय सिंधु नदी से सरस्वती नदी के बीच का क्षेत्र (सप्तसिंधु) पंजाब में शामिल था।
  2. चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने राज्य का विस्तार पश्चिम की ओर अफगानिस्तान और बलोचिस्तान के क्षेत्रों तक कर लिया। इस प्रकार उसने पंजाब की सीमाओं को हिंदुकुश पर्वतों तक पहुँचा दिया और तक्षशिला भी पंजाब का हिस्सा बन गया।
  3. हिंद-बाखतरी और हिंद-पारथी राजाओं के समय में पंजाब की सीमा अफगानिस्तान को छूती थी और इसकी राजधानी साकला (सियालकोट पाकिस्तान) थी।
  4. दिल्ली सल्तनत के समय में पंजाब (लाहौर प्रांत) की सीमा सतलुज नदी से पेशावर तक थी।
  5. मुगल बादशाह अकबर ने पंजाब को दो प्रांतों में बांट दिया-लाहौर प्रांत व मुल्तान प्रांत
  6. अंग्रेज़ी काल में महाराजा रणजीत सिंह के समय पंजाब पूर्व में सतलुज नदी से लेकर पश्चिम में खैबर दर्रे तक फैल
  7. 1849 ई० में पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया। 1857 ई० के विद्रोह के बाद दिल्ली (सतलुज नदी से यमुना नदी तक के क्षेत्र) को भी पंजाब का हिस्सा बना दिया गया।
  8. 1901 ई० में लार्ड कर्जन ने एक और परिवर्तन किया। उसने पश्चिम में सिंधु नदी के पार के क्षेत्र को पंजाब से अलग करके उत्तर-पश्चिमी सीमान्त प्रदेश बना दिया।
  9. 1911 ई० में लार्ड हार्डिंग ने पूर्व में सतलुज नदी से यमुना नदी तक के प्रदेश को एक बार फिर पंजाब से अलग कर दिया और दिल्ली को भारत की राजधानी बना दिया। इस प्रकार इतिहास में पंजाब पहली बार सही अर्थों में पाँच नदियों की धरती के रूप में सामने आया।
  10. स्वतन्त्रा प्राप्ति के बाद 1947 ई० में भारत विभाजन के समय पंजाब का भी विभाजन कर दिया गया। पंजाब का पश्चिमी भाग नए बने देश पाकिस्तान में चला गया और पूर्वी भाग भारत में ही रह गया। पाकिस्तान में पंजाब के 29 जिलों में से 13 ज़िले और भारतीय पंजाब में 16 शामिल किए गए।
  11. 1956 में देश के राज्यों का पुनगर्छन किया गया। इसमें मालवा की रियासतों को समाप्त करके पंजाब में मिला दिया गया।
  12. 1 नवंबर 1966 को भाषा के आधार पर पंजाब का फिर से विभाजन किया गया। इसमें से हरियाणा नामक नया राज्य अस्तित्व में आया। पंजाब के कुछ पहाड़ी प्रदेश हिमाचल प्रदेश में मिला दिए गए।

प्रश्न 2.
“हिमालय पर्वत ने पंजाब के इतिहास पर गहरा प्रभाव डाला है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
हिमालय पर्वत पंजाब के उत्तर में एक विशाल दीवार की भांति स्थित है। इस पर्वत ने पंजाब के इतिहास को पूरी तरह प्रभावित किया है-

  1. पंजाब भारत का द्वार पथ-हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के कारण पंजाब अनेक युगों में भारत का द्वार पथ रहा। आर्यों से लेकर ईरानियों तक सभी आक्रमणकारी इन्हीं मार्गों द्वारा भारत पर आक्रमण करते रहे। परंतु सर्वप्रथम उन्हें पंजाब के लोगों से संघर्ष करना पड़ा। इस प्रकार पंजाब भारत के लिए द्वार की भूमिका निभाता रहा है।
  2. उत्तर-पश्चिमी सीमा की समस्या-पंजाब का उत्तर-पश्चिमी भाग भारतीय शासकों के लिए सदा एक समस्या बना रहा। भारतीय शासकों को इनकी रक्षा के लिए काफ़ी धन व्यय करना पड़ा। डॉ० बुध प्रकाश ने ठीक ही कहा है, “जब कभी शासकों का इस प्रदेश (उत्तर-पश्चिमी सीमा) पर नियंत्रण ढीला पड़ गया, तभी उनका साम्राज्य छिन्न-भिन्न होकर अदृश्य हो गया।”
  3. विदेशी आक्रमणों से रक्षा-हिमालय पर्वत बहुत ऊंचा है और सदा बर्फ से ढका रहता है। परिणामस्वरूप यह प्रदेश उत्तर की ओर से एक लंबे समय तक आक्रमणकारियों से सुरक्षित रहा।
  4. आर्थिक समृद्धि-हिमालय के कारण पंजाब एक समृद्ध प्रदेश बना। इसकी नदियां प्रत्येक वर्ष नई मिट्टी लाकर पंजाब के मैदानों में बिछाती रहीं। परिणामस्वरूप पंजाब का मैदान संसार के उपजाऊ मैदानों में गिना जाने लगा। उपजाऊ भूमि के कारण यहां अच्छी फसल होती रही और यहां के लोग समृद्ध होते चले गए।
  5. विदेशों से व्यापारिक संबंध-उत्तर-पश्चिमी पर्वत श्रेणियों में स्थित दरों के कारण पंजाब के विदेशों से व्यापारिक संबंध स्थापित हुए। एशिया के देशों के व्यापारी इन्हीं दरों के मार्ग से यहां आया करते थे और पंजाब के व्यापारी उन देशों में जाया करते थे।
  6. पंजाब की विशेष संस्कृति-हिमालय की पश्चिमी शाखाओं के दरों द्वारा यहां ईरानी, अरब, तुर्क, मुग़ल, अफ़गान आदि जातियां आईं और यहां अनेक भाषाओं जैसे संस्कृत, अरबी, फारसी, तुर्की आदि का संगम हुआ। इस मेल-मिलाप से पंजाब में एक विशिष्ट संस्कृति का जन्म हुआ जिसमें देशी तथा विदेशी तत्त्वों का संगम था।

PSEB 9th Class SST Solutions History Chapter 2 श्री गुरु नानक देव जी तथा समकालीन समाज

प्रश्न 3.
पंजाब के भूगोल अथवा भौगोलिक स्थिति के पंजाब के इतिहास पर जो सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक प्रभाव पड़े, उनका विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पंजाब के भूगोल ने पंजाब के समाज, संस्कृति तथा आर्थिक जीवन के लगभग हर पक्ष पर गहरा प्रभाव डाला। इसका विस्तृत विवरण इस प्रकार है :
I. सांस्कृतिक व सामाजिक क्षेत्र में प्रभाव

  1. पंजाबियों की विशेष संस्कृति-मध्य एशिया की ओर से आने वाले सभी विदेशी आक्रमणकारी सबसे पहले पंजाब में ही आए। इनमें से कुछ पंजाब में ही बस गए और उन्होंने यहाँ की स्त्रियों से विवाह भी कर लिए। हिन्दुओं ने इनके वंशजों को अपनी जाति में शामिल करने से इन्कार कर दिया। जिससे कई नई जातियों का जन्म हुआ। इस प्रकार पंजाब में एक मिली-जुली नई सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ। इसके अतिरिक्त जब ये हमलावर यहाँ से वापिस गए वे यहाँ की संस्कृति भी अपने साथ ले गए। फलस्वरूप विदेशों में पंजाबी संस्कृति का प्रसार और प्रचार हुआ।
  2. पंजाबियों के विशेष गुण तथा जीवन-शैली में परिवर्तन-पंजाब के लोगों को बार-बार विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा। अतः वे प्रायः युद्ध में ही व्यस्त रहते थे। युद्धों ने पंजाबियों में साहस, हिम्मत और मेहनत के गुण उत्पन्न किये। लगातार विदेशी लोगों के सम्पर्क में आने के कारण पंजाबियों के खान-पान, रीति-रिवाज़ों, भाषा, रहन-सहन और पहनावे में भी परिवर्तन आए।
  3. कला और साहित्य पर प्रभाव-पंजाब ने प्राचीनकाल से ही कला और साहित्य में बहुत उन्नति की थी। परन्तु सदियों तक विदेशी आक्रमणों के कारण पंजाब की कला और साहित्य को बहुत अधिक क्षति उठानी पड़ी। इस समय के दौरान विदेशी संस्कृति के प्रभाव से पंजाब की भवन निर्माण कला में गुम्बद और मेहराब आदि का प्रयोग होने लगा।

II. आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव

  1. पंजाबियों का मुख्य व्यवसाय कृषि-पंजाब का अधिकांश प्रदेश मैदानी है। यहाँ सारा वर्ष बहती नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बने मैदान बहुत ही उपजाऊ हैं। अतः यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहाँ गेहूँ, चावल, कपास, दालें, मक्की, ज्वार, चने, गन्ना, तिल्हन व सरसों आदि अनेक फसलें हैं। यहाँ के पहाड़ी लोग भेड़-बकरियाँ पालते हैं।
  2. विदेशी व्यापार-पंजाब की समृद्धि ने विदेशी लोगों को हमेशा ही अपनी ओर आकर्षित किया है। उत्तरपश्चिमी पर्वतों में स्थित दर्रे पंजाब को मध्य एशिया से जोड़ते थे। इन दरों ने व्यापारिक मार्ग का काम किया। भारतीय और विदेशी व्यापारी इन दरों के मार्ग से आते जाते रहे। इसी लिए प्राचीन काल से ही पंजाब के मध्य एशिया से अच्छे व्यापारिक सम्बन्ध रहे हैं।
  3. व्यापारिक नगरों का उदय-अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पंजाब व्यापार का बहुत बड़ा केन्द्र बन गया। पंजाब के इस घरेलू और विदेशी व्यापार के कारण यहाँ कई बड़े व्यापारिक नगरों का उदय हुआ। इनमें लाहौर, मुल्तान, पेशावर, गुजरांवाला अमृतसर, जालन्धर, हिसार और फिरोज़पुर जैसे व्यापारिक नगर प्रमुख हैं।
    सच तो यह है कि पंजाब की समृद्ध भूमि ने विदेशियों को अपनी ओर आकर्षित किया। जिसने इसके पूरे इतिहास को नये रूप में रंग दिया।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 1 संसाधन-प्रकार और संभाल

Punjab State Board PSEB 8th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 1 संसाधन-प्रकार और संभाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Social Science Geography Chapter 1 संसाधन-प्रकार और संभाल

SST Guide for Class 8 PSEB संसाधन-प्रकार और संभाल Textbook Questions and Answers

I. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 20-25 शब्दों में लिखो :

प्रश्न 1.
संसाधनों से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
संसाधन प्रकृति या मनुष्य द्वारा बनाये गए वे उपयोगी पदार्थ हैं जो मनुष्य की ज़रूरतों को पूरा करते हैं। दूसरे शब्दों में संसाधन वे प्राकृतिक उपहार हैं जो मनुष्य के लिए किसी-न-किसी रूप में अपना विशेष महत्त्व रखते हैं।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक संसाधन कौन-कौन से हैं ? ये हमें कौन प्रदान करता है ?
उत्तर-
वन, खनिज पदार्थ, मिट्टी, समुद्र, सौर ऊर्जा आदि साधन प्राकृतिक संसाधन हैं। ये हमें प्रकृति से मिले हैं।

प्रश्न 3.
संसाधन कितने प्रकार के हैं ?
उत्तर-
संसाधन प्राकृतिक तथा अप्राकृतिक दो प्रकार के हैं। इन्हें आगे भी कई भागों में बांटा जा सकता है; जैसे-

  • सजीव तथा निर्जीव संसाधन।
  • समाप्त होने वाले तथा न समाप्त होने वाले संसाधन।
  • विकसित व सम्भावित संसाधन।
  • मिट्टी व भूमि संसाधन।
  • समुद्री तथा खनिज संसाधन।
  • मानवीय संसाधन।

प्रश्न 4.
मिट्टी की परिभाषा लिखो।
उत्तर-
मिट्टी (मृदा) पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत है। जो शैलों से बनी है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 1 संसाधन-प्रकार और संभाल

प्रश्न 5.
समुद्रों से हमें क्या-क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर-
समुद्र हमें खनिज तथा शक्ति संसाधन प्रदान करते हैं। इनके अतिरिक्त समुद्रों से हमें मछलियां, मोती, सीपियां, हीरे-जवाहरात आदि प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 6.
संसाधनों की सही सम्भाल कैसे हो सकती है ?
उत्तर-
संसाधनों की सही सम्भाल इनका उचित तथा ज़रूरत के अनुसार प्रयोग करने से हो सकती है। इसके लिए संसाधनों के दुरुपयोग तथा विनाश से बचना चाहिए।

II. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 70-75 शब्दों में लिखो :

प्रश्न 1.
सजीव और निर्जीव संसाधनों में अन्तर लिखो।
उत्तर-
सजीव संसाधन-सजीव संसाधन हमें सजीव पदार्थों से प्राप्त होते हैं। जीव-जन्तु तथा पेड़-पौधे इनके उदाहरण हैं। कोयला तथा खनिज तेल भी सजीव संसाधन कहलाते हैं, क्योंकि ये पेड़-पौधों तथा मृत जीवों के गलनेसड़ने से बनते हैं।
निर्जीव संसाधन-निर्जीव संसाधन प्रकृति से प्राप्त निर्जीव वस्तुएं हैं। खनिज पदार्थ तथा जल इनके उदाहरण हैं। खनिज पदार्थ हमारे उद्योगों का आधार हैं। इनकी सम्भाल बहुत ज़रूरी है क्योंकि ये जल्दी समाप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
भूमि और मिट्टी संसाधनों के महत्त्व पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
भूमि तथा मिट्टी संसाधनों का मनुष्य के लिए निम्नलिखित महत्त्व है-

  1. भूमि-भूमि पर मनुष्य अपनी आर्थिक क्रियाएं तथा गतिविधियां करता है। इन क्रियाओं तथा गतिविधियों में कृषि करना, उद्योग लगाना, यातायात के संसाधनों का विकास करना, खेल-खेलना, सैर-सपाटा करना आदि शामिल हैं। मनुष्य अपने घर भी भूमि पर बनाता है।
  2. मिट्टी-मिट्टी में मनुष्य पौधे तथा फ़सलें उगाता है। ये मानव जीवन के महत्त्वपूर्ण अंग हैं, क्योंकि इनसे मनुष्य को भोजन मिलता है। इनसे मनुष्य को कई प्रकार के अन्य पदार्थ भी प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 3.
खनिज पदार्थ हमें कहां से प्राप्त होते हैं और इनका प्रयोग कहां किया जाता है ?
उत्तर-
खनिज पदार्थ हमें धरती के भीतरी भाग से प्राप्त होते हैं। ये भिन्न-भिन्न प्रकार की चट्टानों में मिलते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-धातु खनिज तथा अधातु खनिज । धातु खनिजों में लोहा, तांबा, सोना, चांदी, एल्यूमीनियम आदि शामिल हैं। अधातु खनिजों में कोयला, अभ्रक, मैंगनीज़ तथा खनिज तेल प्रमुख हैं। खनिज पदार्थों का प्रयोग उद्योगों में किया जाता है। इन्हें हम प्रत्यक्ष रूप से प्रयोग नहीं कर सकते। प्रयोग करने से पहले इन्हें उद्योगों में साफ़ करना पड़ता

प्रश्न 4.
विकसित और संभावित संसाधनों को उदाहरण सहित समझाओ।
उत्तर-
जब संसाधन किसी लाभदायक उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रयोग में लाये जाते हैं, तो वे विकसित संसाधन कहलाते हैं। परन्तु जब तक उन्हें प्रयोग में नहीं लाया जाता है तब तक उन्हें सम्भावित संसाधन कहा जाता है। इन्हें निम्नलिखित उदाहरणों से समझा जा सकता है-

  1. पर्वतों से नीचे बहती नदियां बिजली पैदा करने के लिए एक सम्भावित संसाधन हैं। परन्तु इन नदियों के जल से जब बिजली पैदा की जाने लगती है, तो ये विकसित संसाधन बन जाती हैं।
  2. पृथ्वी के नीचे दबा हुआ कोयला एक सम्भावित संसाधन है। इसके विपरीत प्रयोग में लाया जा रहा कोयला एक विकसित संसाधन है।

प्रश्न 5.
समाप्त होने वाले संसाधनों का प्रयोग हमें समझदारी व संकोच के साथ क्यों करना चाहिए ?
उत्तर-
समाप्त होने वाले संसाधन वे संसाधन हैं जो लगातार तथा अधिक मात्रा में प्रयोग के कारण समाप्त होते जा रहे हैं। उदाहरण के लिये कोयले तथा पेट्रोलियम का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। इसलिए ये कम होते जा रहे हैं। एक समय आयेगा जब ये बिलकुल समाप्त हो जायेंगे। क्योंकि इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं, इसलिए हम इनसे सदा के लिए वंचित हो जायेंगे। यदि हमें ऐसी स्थिति से बचना है, तो हमें इनका प्रयोग समझदारी व संकोच के साथ करना होगा।

प्रश्न 6.
मानवीय संसाधनों का दूसरे संसाधनों के विकास में क्या योगदान है ?
उत्तर-
मनुष्य को पृथ्वी के सभी जीवों में सर्वोत्तम प्राणी माना जाता है। वह अपनी बुद्धिमत्ता, कार्य शक्ति तथा कौशल के कारण अपने आप में एक बहुत बड़ा संसाधन है। पृथ्वी पर उपलब्ध अन्य सभी संसाधनों को वही प्रयोग में लाता है और उन्हें विकसित करता है। किसी भी क्षेत्र के विकास के पीछे मनुष्य की ही महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। जापान इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। वहां अन्य संसाधनों की कमी होते हुए भी देश ने बहुत अधिक उन्नति की है। वास्तव में मनुष्य को पहले उसके गुण, शिक्षा, तकनीकी योग्यता विकसित संसाधन बनाते हैं, तब वह अन्य संसाधनों को विकसित बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

PSEB 8th Class Social Science Solutions Chapter 1 संसाधन-प्रकार और संभाल

III. नीचे लिखे प्रश्न का उत्तर लगभग 250 शब्दों में लिखो :

प्रश्न-
संसाधनों से आपका क्या अभिप्राय है ? इनके प्रकार बताते हुए संसाधनों के महत्त्व और इनकी सम्भाल के लिए अपनाए गए ढंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
संसाधन-संसाधन प्रकृति या मनुष्य द्वारा बनाये गए वे उपयोगी पदार्थ हैं जो मनुष्य की ज़रूरतों को पूरा करते हैं।
संसाधनों के प्रकार-संसाधन प्राकृतिक तथा अप्राकृतिक दो प्रकार के होते हैं। इन्हें आगे भी कई भागों में बांटा जा सकता है। जैसे –

1. सजीव और निर्जीव संसाधन-सजीव संसाधन सजीव वस्तुओं से प्राप्त होते हैं, जैसे जीव-जन्तु तथा पौधे। इसके विपरीत निर्जीव संसाधन प्रकृति से प्राप्त निर्जीव वस्तुएं हैं, जैसे खनिज पदार्थ, जल आदि।
2. विकसित तथा सम्भावित संसाधन-सभी उपलब्ध संसाधन संभावित संसाधन कहलाते हैं। परन्तु जब इनका प्रयोग होने लगता है तो इन्हें विकसित संसाधन कहा जाता है।
3. समाप्त होने वाले तथा न समाप्त होने वाले संसाधन-कोयला, पेट्रोलियम आदि समाप्त होने वाले संसाधन हैं। लगातार प्रयोग से ये किसी भी समय समाप्त हो सकते हैं। दूसरी ओर जल न समाप्त होने वाला संसाधन है। लगातार प्रयोग से भी यह समाप्त नहीं होता।
4. मिट्टी तथा भूमि संसाधन-मिट्टी में मनुष्य भोजन तथा अन्य उपयोगी पदार्थ प्राप्त करने के लिए पौधे तथा फ़सलें उगाता है। भूमि पर वह उद्योग लगाता है, यातायात के संसाधनों का विकास करता है तथा अन्य गतिविधियां करता है।
5. समुद्री व खनिज संसाधन-समुद्रों से हमें मछलियां, मोती, सीपियां तथा हीरे-जवाहरात प्राप्त होते हैं। खनिज संसाधनों से हमें धातुएं, अधातुएं, ऊर्जा आदि मिलती हैं। ये संसाधन हमारे उद्योगों का आधार हैं।
6. मानवीय संसाधन-मनुष्य अपने आप में सबसे बड़ा संसाधन है। अन्य सभी संसाधनों का विकास मनुष्य ही करता है।
संसाधनों का महत्त्व-संसाधनों का मनुष्य के लिए बहत अधिक महत्त्व है-

  • ये मनुष्य की मूल तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
  • ये मनुष्य के जीवन को सुखी तथा समृद्ध बनाते हैं और उसके जीवन स्तर को ऊंचा करते हैं।
  • संसाधन देश के विकास के लिए ज़रूरी हैं।

सम्भाल के तरीके-संसाधनों के महत्त्व को देखते हुए इनकी सम्भाल करना आवश्यक हो जाता है। खनिज पदार्थों जैसे संसाधन तो दुर्लभ होते हैं। इनके लगातार तथा बड़ी मात्रा में उपयोग से ये शीघ्र ही समाप्त हो जायेंगे। अतः इनकी सम्भाल और भी आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे लाभ उठा सकें। संसाधनों की सम्भाल निम्नलिखित तरीकों से की जा सकती है-

  • इनका उपयोग सूझ-बूझ के साथ लम्बे समय तक किया जाये।
  • इनके दुरुपयोग को रोका जाये ताकि इनके विनाश से बचा जा सके।
  • फिर से प्रयोग में लाये जा सकने वाले संसाधनों को दोबारा प्रयोग में लाया जाए।
  • मनुष्यों की योग्यता और कौशल में वृद्धि की जाए, ताकि वे संसाधनों की उपयोगिता को बढ़ा सकें।

PSEB 8th Class Social Science Guide संसाधन-प्रकार और संभाल Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

(क) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

1. पृथ्वी का …………. प्रतिशत भाग पानी है।
2. संसाधन ………… उपहार हैं जो मनुष्य के लिए विशेष महत्त्व रखते हैं।
3. जिन संसाधनों का प्रयोग नहीं होता उन्हें ………… संसाधन कहते हैं।
उत्तर-

  1. 71,
  2. प्राकृतिक,
  3. संभावित।

(ख) सही कथनों पर (✓) तथा गलत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं :

1. पृथ्वी पर जीवन सबसे पहले समुद्रों में शुरू हुआ।
2. खनिज संसाधन पृथ्वी के भीतरी भाग से प्राप्त होने वाले पदार्थ हैं।
3. प्रकृति के जीवों में से पशु-पक्षियों को सर्वोत्तम प्राणी माना जाता है।
उत्तर-

  1. ✗.

(ग) सही उत्तर चुनिए:

प्रश्न 1.
समाप्त होने वाला संसाधन कौन-सा है ?
(i) पानी
(i) कोयला
(iii) वायु
(iv) सूर्य की ऊर्जा । ।
उत्तर-
(i) कोयला

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प्रश्न 2.
न समाप्त होने वाला संसाधन कौन-सा है ?
(i) सूर्य की ऊर्जा
(ii) पैट्रोलियम
(iii) कोयला
(iv) एल्यूमीनिय ।।
उत्तर-
(i) सूर्य की ऊर्जा

प्रश्न 3.
पृथ्वी की कौन-सी सतह मिट्टी कहलाती है ?
(i) सबसे अंदर की सतह
(ii) बीच की सतह
(iii) सबसे ऊपरी सतह
(iv) ये तीनों सतहें।
उत्तर-
(iii) सबसे ऊपरी सतह

(घ) सही जोड़े बनाइए :

1. धातु खनिज – जल
2. सजीव संसाधन – मैंगनीज़
3. निर्जीव संसाधन – पौधे
4. अभातु खनिज – तांबा।
उत्तर-

  1. तांबा,
  2. पौधे,
  3. जल,
  4. मैंगनीज़।

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आज के मनुष्य को बहुत से संसाधनों पर निर्भर क्यों होना पड़ता है ?
उत्तर-
पहले मनुष्य की आवश्यकताएं बहुत कम थीं। परन्तु आज उसकी आवश्यकताएं असीमित हो गई हैं। इसलिए उसे आज बहुत से संसाधनों पर निर्भर होना पड़ता है।

प्रश्न 2.
उदाहरण देकर समझाइए कि संसाधनों का उचित प्रयोग ही संसाधनों का उचित विकास है।
उत्तर-
कोयला या खनिज तेल आदि मानव के लिए तथा वायुयान के आविष्कार से पहले एल्यूमीनियम आधुनिक मानव के लिए कोई महत्त्व नहीं रखता था। परन्तु इनकी उपयोगिता बढ़ने पर इनका महत्त्व बढ़ गया। अत: हम कह सकते हैं कि संसाधनों का उचित प्रयोग ही इनका उचित विकास है।

प्रश्न 3.
संसाधनों को विभिन्न वर्गों में बांटने के चार मुख्य आधार कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-

  1. जीवन
  2. उपलब्धियां
  3. विकास स्तर
  4. प्रयोग।

प्रश्न 4.
खाद्य पदार्थों की प्राप्ति के लिए कौन-से संसाधन सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं और क्यों ?
उत्तर-
खाद्य पदार्थों की प्राप्ति के लिए जैव संसाधन सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि संसार में लगभग 85% खाद्य पदार्थ इन्हीं साधनों से प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 5.
कोयले तथा खनिज तेल को सजीव संसाधनों की श्रेणी में क्यों रखा जाता है ?
उत्तर-
कोयला तथा खनिज तेल पौधों तथा जीवों जैसे सजीव संसाधनों के अवशेषों से बनते हैं।

प्रश्न 6.
किसी देश के धनी होने का अनुमान किस बात से लगाया जाता है ?
उत्तर-
किसी देश के धनी होने का अनुमान देश में प्राप्त होने वाले संसाधनों से लगाया जाता है।

प्रश्न 7.
मृदा या मिट्टी कितने प्रकार की होती है ? नाम लिखें।
उत्तर-
मृदा कई प्रकार की होती हैं; जैसे- (1) रेतीली, (2) चिकनी (3) दोमट (4) जलोढ़ (5) पर्वतीय (6) लाल तथा (7) काली मृदा।

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प्रश्न 8.
उपजाऊ मृदा वाले क्षेत्र घनी जनसंख्या वाले तथा आर्थिक क्रियाओं से भरपूर होते हैं। क्यों ?
उत्तर-
उपजाऊ मृदा (मिट्टी) फ़सलें उगाने के लिए सर्वोत्तम होती है। अत: उपजाऊ मृदा वाले क्षेत्रों में कृषि उन्नत होती है जिसके कारण ये क्षेत्र घनी जनसंख्या वाले तथा आर्थिक क्रियाओं से भरपूर होते हैं।

प्रश्न 9.
भूमि का प्रयोग किन बातों को ध्यान में रख कर होता है ?
उत्तर-
भूमि का प्रयोग धरातल, ढलान, मिट्टी के प्रकार, जल-निकास तथा मनुष्य की ज़रूरतों आदि बातों को ध्यान में रख कर होता है।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक तथा मानवीय संसाधनों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
संसाधन प्राकृतिक तथा मानवीय दो प्रकार के होते हैं। प्राकृतिक संसाधन मनुष्य को प्रकृति द्वारा प्राप्त होते हैं। इनमें वन, खनिज पदार्थ, नदियां, सौर ऊर्जा तथा समुद्र आदि शामिल हैं।
मानवीय संसाधन स्वयं मनुष्य द्वारा बनाये जाते हैं; जैसे-सड़कें, मशीनरी, यातायात के साधन, कृत्रिम खादें आदि। ये संसाधन मानव की प्रगति के प्रतीक हैं। ये भौतिक भी हो सकते हैं तथा अभौतिक भी। मनुष्य की बुद्धि, ज्ञान एवं कार्यकुशलता को भी मानव साधन कहा जाता है।

प्रश्न 2.
समाप्त होने वाले तथा न समाप्त होने वाले संसाधनों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
समाप्त होने वाले संसाधन वे संसाधन हैं जो अधिक मात्रा में तथा लगातार प्रयोग के कारण समाप्त होते जा रहे हैं। यदि ये समाप्त हो गए तो हम इन्हें फिर से नहीं पा सकेंगे क्योंकि इनके बनने में लाखों-करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। कोयला तथा पेट्रोलियम इसी प्रकार के संसाधन हैं।
वे संसाधन जो बार-बार प्रयोग करने पर भी समाप्त नहीं होते, न समाप्त होने वाले संसाधन कहलाते हैं। ये इसलिए समाप्त नहीं होते क्योंकि इनकी पूर्ति होती रहती है। इन साधनों में सूर्य की ऊर्जा, वायु, पानी, वन आदि शामिल हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समुद्री तथा खनिज संसाधनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
समुद्री संसाधन-पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल है। जल के बड़े-बड़े भण्डारों को समुद्र कहा जाता है। माना जाता है कि पृथ्वी पर जीवन का आरम्भ सबसे पहले समुद्रों में ही हुआ था। इसलिए समुद्र हमें बड़ी मात्रा में जैविक संसाधन प्रदान करते हैं जिनमें शक्ति के संसाधन (पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस) भी शामिल हैं। समुद्रों से हमें मछलियां, सीपियां, मोती, नमक तथा हीरे-जवाहरात भी प्राप्त होते हैं। मछलियां संसार में बड़ी संख्या में लोगों को भोजन प्रदान करती हैं।

खनिज संसाधन-खनिज संसाधन हमें पृथ्वी के भीतरी भाग से प्राप्त होते हैं। ये मूल रूप से दो प्रकार के होते हैं-धातु (Metallic) खनिज तथा अधातु (Non Metallic) खनिज। धातु खनिजों में लोहा, तांबा, सोना, चांदी, एल्यूमीनियम आदि खनिज शामिल हैं। अधातु खनिज पदार्थों में कोयला, अभ्रक, मैंगनीज़ तथा पेट्रोलियम आदि मुख्य हैं। खनिज संसाधन भिन्न-भिन्न प्रकार की चट्टानों में पाये जाते हैं। चट्टानों से मिलने वाले खनिज पदार्थ प्रत्यक्ष रूप से प्रयोग नहीं किये जा सकते। प्रयोग करने से पहले इन्हें साफ़ किया जाता है और इनकी अशुद्धियां दूर की जाती हैं। खनिज हमारे उद्योगों का आधार माने जाते हैं। इसलिए इन्हें बहुत अधिक महत्त्व दिया जाता है।

प्रश्न 2.
संसाधनों की सम्भाल पर एक नोट लिखिए।
उत्तर-
संसाधन मनुष्य को प्रकृति की बहुत बड़ी देन हैं। मनुष्य इन्हें अपने और अपने देश के विकास के लिए प्रयोग करता है। परन्तु विकास के मार्ग पर चलते हुए मनुष्य दूसरे देशों के साथ मुकाबला भी कर रहा है। इसलिए वह बिना सोचे-समझे इन संसाधनों को समाप्त कर रहा है। वह यह नहीं जानता कि बहुत-से साधनों के भण्डार सीमित हैं। यदि ये भण्डार एक बार समाप्त हो गए तो हम इन्हें फिर से प्राप्त नहीं कर सकेंगे। उदाहरण के लिए कोयला और पेट्रोलियम जिन्हें पूर्ण संसाधन बनने में लाखों करोड़ों वर्ष लगते हैं, यदि एक बार समाप्त हो गये तो इन्हें दोबारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए इनकी सम्भाल ज़रूरी है।

  • संसाधनों तथा इनकी सम्भाल का आपस में बहुत गहरा सम्बन्ध है। संसाधनों की सम्भाल से अभिप्राय इनका सही प्रयोग है ताकि इनका दुरुपयोग या विनाश न हो। दूसरे शब्दों में इनका प्रयोग विकास के लिए हो और लम्बे समय के लिए हो ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियां भी इनका लाभ उठा सकें। उचित और ज़रूरत के अनुसार इनका प्रयोग ही इन साधनों की सही सम्भाल होगी।
  • यूं तो सम्भाल प्रत्येक संसाधन के लिए आवश्यक है, परन्तु जो संसाधन दुर्लभ हैं उनकी विशेष सम्भाल की आवश्यकता है। एक अनुमान के अनुसार यदि कोयला और पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग इसी गति से होता रहा, तो लगभग 80% जीवांश ईंधन इसी शताब्दी में समाप्त हो जायेंगे।
  • हमें मृदा, जल और वन आदि संसाधनों की सम्भाल भी करनी चाहिए। इनका प्रयोग करते समय इन्हें व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
  • इसके अतिरिक्त दोबारा प्रयोग होने वाले साधनों को बार-बार प्रयोग में लाया जाये।
  • यह भी आवश्यक है कि ज्ञान, शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाया जाये और लोगों को इन संसाधनों की संभाल के बारे में जागृत किया जाये।