PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 3 एच०टी०एम०एल०-I

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PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 3 एच०टी०एम०एल०-I

जान पहचान
HTML में बाहरी पेज, मीडिया आदि से जुड़ने के लिए कई प्रकार के विकल्प उपलब्ध होते हैं।

हाईपरलिंकिंग लिंक करना HTML की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। इस विशेषता के साथ हम किसी और दस्तावेज़ के साथ टैक्सट या चित्र को जोड़ सकते हैं। लिंक को हाईपर टैक्सट लिंक या हाईपरलिंक भी कहा जाता है। ब्राऊज़र नीले रंग में हाईपरलिंक को दर्शाता है और इसके नीचे रेखा खींचता है। लिंकिंग का मतलब है कि एक-दूसरे पन्ने के साथ मल्टीपल वैब पेज़ों को जोड़ना।

हर एक वैबसाइट के पास अलग-अलग जानकारी से जुड़े कई वैब पेज़ होते हैं। HTML लिंकिंग को HYPERLINK से परिभाषित किया गया है। यह वैब पेज़ों के बीच लिंकिंग करता है। असल में लिंक को दो हिस्सों में परिभाषित किया गया है, जैसे कि

  • अंदरूनी (Intermal) लिंक (जो उसे वैबसाइट के साथ परिभाषित किए जाते हैं) और
  • बाहरी (External) लिंक (वो लिंक जो वैबसाइट से बाहर परिभाषित किए जाते हैं।) टैक्सट या इमेज को किसी वैब पेज़ में हाईपरलिंक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

एंकर टैग <a>
ऐंकर टैग <a> किसी वैब पेज़ पर एक लिंक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह <a> टैग से शुरू होता है और </a> से बंद होता है। ऐंकर टैग की सबसे महत्त्वपूर्ण ऐट्रीब्यूट href है, जो लिंक के डैस्टीनेशन के बारे में संकेत करती है|

Href यूज़र को उसकी ज़रूरत के अनुसार लिंक के संबंध को परिभाषित करता है। यह विजिट किए जाने वाले वैब पेज़ का यू० आर० एल० प्रदान करता है। यह विज़िट किये जाने वाले HTML पेज़ का एडरैस परिभाषित करता है।

एक अनविज़टिड लिंक (जिसके ऊपर क्लिक न किया हो) अंडरलाइन और नीले रंग का होता है। एक विज़िट (जिस ऊपर क्लिक किया हो) किए हुए लिंक के नीचे रेखा खींची जाती है और इसका रंग जामुनी होता है। एक ऐक्टिव लिंक अंडरलाइन होता है और उसका रंग लाल होता है।

लिंक की किस्में
1. एक वैब पेज़ में परिभाषित किए गए लिंक जब एक लिंक को वैब पेज़ में परिभाषित किया जाता है, तो हमें ऐंकर टैग के साथ परिभाषित करने के लिए दो भागों की ज़रूरत होती है-

  • “HREF” वैब पेज़ के दिए गए हिस्से के लिए लिंक को परिभाषित करता है।
  • “NAME” उस लिंक का हवाला देता है जिसका अर्थ है कि यह लिंक करने वाले भाग को परिभाषित करता है।

यहाँ name ऐट्रीब्यूट यूज़र को उसी पेज पर एक लिंक बनाने की आज्ञा देता है। यह लिंक name को परिभाषित करता है जिसके द्वारा एक ही पेज़ पर लिंक की पहचान की जाती है और हाईपरलिंक की जाती है।

2. एक्सटर्नल (External) लिंक-वैबसाइट के बाहर परिभाषित लिंक को बाहरी लिंक के तौर पर जाना जाता है। यह लिंक वैब साइट के संपूर्ण और सही एडरैस के साथ परिभाषित किए जाते हैं। जब यूज़र इन लिंकों पर क्लिक करता है तो उसको वैब ब्राऊज़र की सहायता से लिंक में दिये ऋपर भेजा जाता है।

एक हाईपरलिंक के रूप में इमेज़ को लिंक करना :
हम इमेज़ पर हाईपरलिंक को भी परिभाषित कर सकते हैं। इसके लिए <img> टैग को <a> </a> टैग के बीच रखना होता है। जैसे
<a> Href = ‘google.com’
<img src = “google.jpg”>
</a>

ई-मेल के साथ लिंक करना :
ई-मेल के साथ लिंक करना :
हम ऐंकर टैग के साथ किसी ई-मेल पते को लिंक कर सकते हैं। इसके साथ एक यूज़र लिंक पर क्लिक करने के बाद डिज़ाइनर को ई-मेल भेजा जा सकता है।
एक ई-मेल के साथ लिंक करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कोड इस प्रकार है
<A HREF = mail to : [email protected]>emailme</A>

फार्म
फार्म एच० टी० एम० एल० पेज का एक हिस्सा है जिसमें वे क्षेत्र शामिल होते हैं जहाँ रीडर WEBSITE या वैब पेज़ के प्रकाशकों को वापिस भेजी जाने वाली जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह एक कंटेनर है जिसमें अन्य फार्म ऐलीमैंट्स जैसे कि टैक्सट बॉक्स, रेडियो बटन, लिस्ट बॉक्स आदि होते हैं। एक फार्म में जानकारी को फीड करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए हर एक फार्म में action और method ऐट्रीब्यूट को शामिल करना पड़ता है।

Action-ऐट्रीब्यूट यह बताती है कि जब फार्म को सबमिट किया जाता है तो फार्म को कहाँ भेजना है। सबमिट बटन प्रेस करने के बाद किसी किस्म की प्रोसैसिंग न होने पर फार्म बेकार हो जाता है। Action ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल एक बार सबमिट बटन प्रेस करने के बाद ब्राऊज़र को यह सचित करने के लिए किया जाता है कि कौन से पेश (या सक्रिप्ट) को काल करना है। यह सबमिट होने के बाद फार्म डाटा को URL निश्चित करता है।

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Method-Method ऐट्रीब्यूट उस तरीके को परिभाषित करती है जिसके द्वारा यूज़र की सूचना फार्म में ऐंटर की जाती है और जिसको वैबसाइट सर्वर पर भेजा और स्टोर किया जाता है। अग्र तरीकों के द्वारा यह जानकारी भेजी जा सकती है –

Get Method-यह ढंग यूज़र के द्वारा URL पाथ को इस्तेमाल करके फीड डाटा को एनकोड करने और सर्वर को भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लिमिटिड डाटा सर्वर पर भेजा जा सकता है। इसके पैरामीटर ब्राऊज़र की हिस्ट्री में रहते हैं।

Post Method-इस ढंग का इस्तेमाल यू० आर० एल० को बिना दखल दिए सर्वर पर डाटा स्टोर करने के लिए किया जाता है और वैबसाइट Form को GET विधि के द्वारा सर्वर को भेजने के लिए अधिक सुरक्षित है। डाटा भेजने पर कोई पाबंदी नहीं होती। इसके मापदंड ब्राऊज़र की हिस्ट्री में नहीं हैं।

फार्म तैयार करना
हर एक फार्म <Form> टैग से शुरू होना चाहिए, जो html डाक्यूमैंट में कहीं भी स्थित होता है और </Form> से समाप्त होता है।

टैक्सट इनपुट
यह एक किस्म की फार्म कंट्रोल है और इसको यूज़र के द्वारा एक फार्म के अंदर एक खास जानकारी पूछने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह <input> element type के इस्तेमाल करता है। Type एक ऐट्रीब्यूट है जो कि इनपुट ऐलीमैंट में नियंत्रण की किस्म को निर्धारित करने के लिए प्रयोग किया जाता है जोकि यूज़र फार्म में इस्तेमाल करना चाहता है।

टैक्सट एरिया
यह एक कंटेनर टैग है और एक सिंगल इनपुट आइटम में टैक्सट की बहुत सारी लाइनों को दाखिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके दो ऐट्रीब्यूट्स हैं जो कि ROWS और COLS हैं। ROWS टैक्सट एरिया में परिभाषित की रोअज़ की संख्या को परिभाषित करती है और COLS टैक्सट एरिया में इस्तेमाल किये गए कॉलमों की संख्या को परिभाषित करती है। अगर यूज़र कुछ डिफॉल्ट टैक्सट को परिभाषित करना चाहता है तो वह टैक्सट एरिया के ओपनिंग और क्लोजिंग टैगस के अंदर परिभाषित कर सकता है।

उदाहरण-<text area name = “Comment’ rows = “3” Cols = “10”> This is Text Area </text area>
Rows, Cols ऐट्रीब्यूट्स, इनपुट बॉक्स में फिट होने वाली रोअज़ और रोयज़ की संख्या को कंट्रोल करती है।
टैक्सट एरिया बॉक्स में एक स्क्रोल बार होता है। जबकि, यूजर डिस्पले क्षेत्र में फिट होने से ज्यादा टैक्सट दर्ज कर सकता है।

चैक बाक्सिज़
सबसे आसान इनपुट टाइप एक चैक बॉक्स है, जो कि एक छोटे से वर्ग के रूप में दिखाई देता है जिसको यूज़र इस पर क्लिक करने के बाद सिलैक्ट या डी-सिलैक्ट कर सकता है। यह साधारण रूप में एक समूह में जानकारी को चुनने और उसे साझा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह HTML के <INPUT> ऐलीमैंट में इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण <input type = “checkbox” name = “baby”> baby grand piano
<input type = “checkbox” name = “mini’> mini piano stool

हम ऐस पर क्लिक करने के बाद किसी भी आप्शन या दोनों को देख सकते हैं। आप किसी एक ऑप्शन या दोनों को ही क्लिक करने के बाद चैक भी कर सकते हो। यह कुछ अतिरिक्त ऐट्रीब्यूट्स को स्पोर्ट भी करता है।

रेडियो बटन
रेडियो बटन, वे बटन हैं जहाँ एक समय सिर्फ एक ही चुनाव किया जा सकता है और चैक बॉक्स की तरह लागू करने में लगभग सरल है। यह html के <input> ऐलीमैंट में इस्तेमाल किया जाता है। यूज़र को हर एक रेडियो बटन को यहाँ <name> ऐट्रीब्यूट देना चाहिए और <type> ऐट्रीब्यूट में परिभाषित की गई कीमत radio होती है। type = “radio” टाइप करें और हर एक ऑप्शन के लिए उसका अपना इनपुट टैग दें पर ग्रुप के सभी रेडियो बटन के लिए एक ही नाम का प्रयोग करें।

सिलैक्शन लिस्ट
इस आप्शन में यूज़र एक लिस्ट में से सिंगल या बहुत सारी ऑप्शनों को चुन सकता है। इस ऑप्शन में मल्टीपल इनपुट उपलब्ध होते हैं पर कुछ ऑप्शन एक समय पर प्रदर्शित किए जा सकते हैं। स्कोलिंग लिस्ट और पुल-डाउन पिक सूचियाँ <select> tag बनाई जाती हैं। आप इस टैग को <option> टैग के साथ इस्तेमाल कर सकते हो।

टैग के ऐट्रीब्यूट्स-साइज यहाँ Size ऐट्रीब्यूट यह निर्धारित करता है कि सिलैक्शन लिस्टों पर एक बार कितनी चीजों को दिखाया जाता है। अगर Size = “2” पीछे के कोड में प्रयोग किया गया था, तो सिर्फ पहले दो विकल्प नज़र आयेंगे और एक स्करोल बार सूची के आगे दिखाई देगा ताकि यूज़र तीसरे चुनाव को देखने के लिए नीचे स्करोल कर सके।

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Value-यह वह वैल्यू है जिसको वापिस वैबसाइट को देना पड़ेगा और ऑप्शन टैग में परिभाषित किया जाना चाहिए।
Selected-जब यह विकल्प प्रयोग किया जाता है तो दिए गए विकल्प को पहले ही चुन लिया जायेगा।

बटन्ज़
बटनों को दिए गए वैब पेज़ पर कुछ कार्यवाही करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
1. सबमिट-हर फार्म में एक ऐसा बटन शामिल होना चाहिए जो डाटा फार्म सर्वर को भेजता है। आप इस बटन पर कोई भी लेवल लगा सकते हो। इसके दो ऐट्रीब्यूट्स यह हैं। Type जिसकी सबमिट किए जाने वाली कीमत होती है और value ऐट्रीब्यूट जो कि सबमिट बटन का नाम परिभाषित करता है। इसको बटन पर प्रदर्शित किया जा सकता है।

2. RESET बटन-आप एक और बटन भी शामिल कर सकते हो जो फार्म की सभी ऐंट्री clear कर देता है ताकि यूज़र गलती होने पर या अपना विचार बदलने पर दोबारा शुरू कर सके। इसके दो ऐट्रीब्यूट हैं, यह हैं <type>, जिसमें reset वैल्यू और value ऐट्रीब्यूट है, जोकि रीसैट बटन का नाम, परिभाषित करता है और जो बटन पर दिखाया जा सकता है।

फ्रेम्ज़
फ्रेम टेबल के जैसे होते हैं जो यूज़र को टैक्सट और ग्राफिक्स को रोअज़ और कॉलम में व्यवस्थित करने की आज्ञा देते हैं। किसी भी फ्रेम में वे लिंक शामिल हो सकते हैं जो दूसरे फ्रेमों के कन्टेंट को बदल सकते हैं।
फ्रेम सैट (Frame Set)-एक फ्रेम ब्राऊज़र विंडो के अंदर एक आयताकार क्षेत्र होता है जो एक वैब पेज़ को दूसरे फ्रेम के दूसरे पन्नों के साथ प्रदर्शित करते हैं।

HTML में मल्टीमीडिया
<Marquee> इस टैग को टैक्सट को वैब पेज़ पर मूव (गतिमान) करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक कंटेनर टैग है। इस टैग में कुछ ऐट्रीब्यूट हैं जो साधारण रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। इनको टेबल में परिभाषित किया गया है।

ऐट्रीब्यूट का नाम काम
BGCOLOR यह ऐट्रीब्यूट टैक्सट के लिए बैक ग्राउंड रंग परिभाषित करता है।
DIRECTION यह ऐट्रीब्यूट टैक्सट की दिशा जैसे कि right, left, up, down परिभाषित करता है।
HEIGHT यह ऐट्रीब्यूट टैक्सट की ऊँचाई को पिक्सल (Pixel) में परिभाषित करता है।
WIDTH यह ऐट्रीब्यूट टैक्सट की चौड़ाई को पिक्सल में परिभाषित करता है।
BEHAVIOUR यह ऐट्रीब्यूट टैक्सट की स्क्रोलिंग को परिभाषित करता है अगर टैक्सट की तीन वैल्यू हो तो –

  • उसको इनफाइनेटली स्क्रोल करता है।
  • अलटरनेट होने पर टैक्सट को बायें फिर दायें की तरफ मूव करता है।
  • स्लाइड होने पर टैक्सट को वैब पेज़ पर बायें या दायें की तरफ लेकर जाता है।

HTML में ऑडियो/वीडियो फाइलों को जोड़ना
यूज़र ऐंकर टैग के द्वारा ऑडियो/वीडियो फाइल को एच० टी० एम० एल० प्रोग्राम में जोड़ सकते हैं जैसे कि हमने html टैग के साथ फाइल को लिंक करने के लिए इस टैग का उपयोग किया है। हमें HREF ऐट्रीब्यूट में ऑडियो/वीडियो के पाथ को परिभाषित करना होगा। जब भी यूज़र दिए गए लिंक पर क्लिक करेगा तो फाइल यूज़र के सिस्टम पर डाउनलोड हो जायेगी और संबंधित सॉफ्टवेयर, पर प्ले की जा सकेगी।

कैसकाडिंग स्टाइल शीट्स
स्टाइल शीट्स, कैसकाडिंग स्टाइल शीट्स और CSS का मतलब एक ही चीज़ है और यह हमारे वैब पेज़ के डिजाइन और ले-आऊट को परिभाषित करने का आधुनिक तरीका है। यह प्रोग्रामर को बहुत सारे वैब पेज़ों की एक ही ढंग से भौतिक दिखावट को सैट करने की इजाजत देता है जिसमें उसका रंग, फौंट, फौंट साइज़ आदि शामिल हैं। यूज़र को हर एक वैब पेज़ के लिए स्टाइल सैट करने की ज़रूरत नहीं है।
स्टाइल-एक Style दो हिस्सों से परिभाषित किया जाता है। एक या एक से ज़्यादा सिलैक्टर और एक या एक से ज्यादा डिकलेयरेशन्ज़ जिसको (कर्ली ब्रैक्टों) में बंद किया जाता है।

हर एक declaration की एक प्रापर्टी (Property) होती है जैसे कि value; pair सिनटैक्स : Selector {property : value;}
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1. इनलाइन स्टाइल्ज-इनलाइन स्टाइल वह स्टाइल है जो सीधा HTML दस्तावेज़ में टैग लिखे जाते हैं। इनलाइन स्टाइल शीट उस हालत में इस्तेमाल की जानी चाहिए जहाँ पेज़/साइट पर किसी विशेष स्टाइल को दोहराया नहीं जाता। इनलाइन स्टाइल केवल खास टैग को प्रभावित करते हैं, जिन पर इनको लागू किया जा सकता है।

2. इनटर्नल या एमबैडेड स्टाइल्ज़-इसकी परिभाषा को एक पेज़ के मुख्य भाग में एक बार लिखा जाता है। इसको हर एक पन्ने पर लिखा होना चाहिए जिस पर इस स्टाइल को लगाना हो। नीचे इनटर्नल स्टाइल शीट को <Head> और </Head> सैक्शन के अंदर परिभाषित किया गया है।
‘<head>
<style type = “text/css”>
Your style definitions go here
</style>
</head>
एमबैडेड स्टाइल वो स्टाइल है जो कि डाक्यूमैंट के हैड में शामिल किए जाते हैं। एमबैडेड स्टाइल उन पेज़ों के टैराज़ को प्रभावित करते है जिसमें वे एमबैडेड होते हैं। एमबैडेड स्टाइल शीटों का फायदा यह है कि यह और बाहरी फाइलों को लोड करने के अलावा यह पेज़ पर तुरंत लोड होता है।

3. एक्सटर्नल स्टाइल शीट-स्टाइल परिभाषा केवल एक बार लिखी जाती है और एक फाइल में सेव की जाती है। हर वैब पेज़, जो कि फाइल को इस्तेमाल करना चाहता है, फाइल के HEAD भाग में फाइल का लिंक रख सकता है। सिनटैक्स
<Head>
<link rel = “STYLE SHEET”’ href = “your Style File Name. CSS” type = “text/CSS”>
<Head>

CSS एक्सटर्नल फाइल
CSS फाइलें साधारण टैक्सट फाइलें होती हैं और नोटपैड जैसे साधारण टैक्सट ऐडीटर में लिखी जा सकती है। फाइल की एक्सटैंशन CSS होती है। अधिकतर वैबसाइटें एक्सटर्नल स्टाइल शीटों का इस्तेमाल करती है। एक्सटर्नल स्टाइल वे स्टाइल हैं जो एक अलग दस्तावेज़ में लिखे गए हैं और फिर कई वैब डाक्यूमैंट से जुड़े होते हैं। एक्सटर्नल स्टाइल शीट्स उन दस्तावेजों को प्रभावित कर सकते हैं जिसके साथ वे जुड़े हुए होते हैं।

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CSS की मुख्य प्रॉपर्टीज
CSS की कुछ प्रॉपर्टीज का वर्णन निम्नलिखित है –
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PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 2 एच०टी०एम०एल० फंडामैंटल्ज

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PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 2 एच०टी०एम०एल० फंडामैंटल्ज

जान पहचान
HTML एक विलक्षण भाषा है। यह एक साधारण और टैक्सट बेस्ड भाषा है। इसका इस्तेमाल वैब पेज़ तैयार करने के लिए किया जाता है। HTML डॉक्यूमैंट एक साधारण टैक्सट एडीटर. (जैसे कि Notepad) में तैयार किया जा सकता है।
वैब पेजों के मेल से वैबसाइट बनती है। वैबसाइट ऑन-लाइन सूचना का एक विलक्षण संसार है। यह इंटरनैट पर उपलब्ध होती है। हाइपर टैक्सट (Hyper Text) वैबसाइट पर नज़र आने वाली हर एक सूचना का मूल केंद्र होता है।

एच० टी० एम० एल०
HTML का पूरा नाम है-हाइपर टैक्सट मार्कअप लैंगवेज़ (Hyper Text Markup Language)। यह एक साधारण भाषा है। यह टैक्सट बेस होती है। इसका इस्तेमाल वैब पेज़ तैयार करने के लिए किया जाता है। वैब पेजों को वैब डॉक्यूमैंट कहा जाता है। वैब डॉक्यूमैंटस के मेल से वैबसाइट (Website) का निर्माण होता है।
HTML = Hyper Text Markup Language इन चारों शब्दों के अपने आप में कुछ खास मतलब हैं। सबसे पहले हम उनका मतलब समझते हैं।
Hypter Text : Hyper Text का मतलब है कि वह टैक्सट या शब्द जो एक लिंक के रूप में काम करता है। इस लिंक पर क्लिक करने से हम किसी और वैब पेज़ को देख सकते हैं।

Markup Markup का अर्थ है कि चिन्हों और अक्षरों के विशेष क्रम का इस्तेमाल करने से किसी विशेष तरह का टैक्सट फारमेट तैयार करना। इसमें अन्य दस्तावेज़ों से जुड़े लिंक भी शामिल होते हैं। इसके लिए हम जिन चिन्हों का इस्तेमाल करते हैं वो वैब ब्राऊजर को बताते हैं कि इन शब्दों को किस तरह दिखाना है।

Language-Language का अर्थ एक सामान्य भाषा के अर्थ के समान है। इसका अर्थ है चिन्हों और नियमों का समूह जिसके साथ हम किसी प्रकार का संचार कर सकते हैं। वैब पेज़ के कई भाग होते हैं; जैसे कि पेज़ टाइल, पैराग्राफ, लिस्ट, टेबल और पिक्चर आदि। हर एक भाग को टैग (Tag) में लिखा जाता है। टैग बताते हैं कि वैब पेज़ का भाग हैडिंग, लिस्ट, पैराग्राफ आदि में से कौन-सा है। वैब पेज़ में टैक्सट के साथ-साथ पिक्चर, आवाज़ और मूवी भी दाखिल की जा सकती है।

डॉक्यूमैंट की संरचना
HTML डॉक्यूमैंट की संरचना को समझना बहुत आसान है। पूरा डॉक्यूमैंट <HTML> और </HTML> टैगज़ के बीच लिखा जाता है। इसमें <Head>, <Body>, <Title> आदि टैगज़ लिखे जाते हैं। नीचे HTML डॉक्यूमैंट की संरचना को विस्तार से समझाया गया है।
<HTML>
<Head>
…………..
………….
</Head>
<Body>
……………
…………..
</Body>
</HTML>
उपरोक्त ढांचे में परिभाषित टैग मूल रूप में वैब ब्राउज़र को दिए गए टैगों में परिभाषित किए गए टैक्सट पर किए गए भिन्न कार्यों के बारे में परिभाषित करते हैं या हिदायत देते हैं।
(HTML) टैग-(HTML) Tag में दस्तावेज शुरू किया गया है और </HTML> टैग के साथ बंद किया जाएगा। यह वैब ब्राऊज़र को सूचित करता है कि कहां वैब पेज़ शुरू होगा और यह कहां समाप्त होगा। अगर कमांड को टैग में परिभाषित नहीं किया जाता तो टैग ब्राऊज़र में टैक्सट के रूप में लेता है।
<HTML> टैग-HEAD टैग, हैडिंग (शीर्षक) के बारे में जानकारी प्रदान करती है। डाक्यूमैंट का हैडिंग <HEAD> टैग में लिखा गया है। यह हमेशा जोड़ों (Pair) के रूप में होता है। हैड टैग को एक वैब पेज़ के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह एक कंटेनर टैग है। यह HTML डाक्यूमैंट का शीर्षक परिभाषित करता है।

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यह<HEAD> Tag से शुरू होता है और </HEAD> से समाप्त होता है। यह टैग हमेशा </HTML> टैग से नीचे और <Body> टैग से पहले दर्शाया जाता है। इसमें वैब पेज़ का शीर्षक, सर्च इंजन के द्वारा प्रयोग किए गए शब्द आदि से संबंधित जानकारी शामिल है, इसमें अपने आपसे संबंधित कोई टैक्सट नहीं होता।
उदाहरण <HEAD><Title>This is a Title</Title></HEAD>

<Title> टाइटल टैग वैब पेज़ का शीर्षक परिभाषित करता है, जो वैब ब्राउज़र के टाइटल बार पर प्रदर्शित होता है जब वैब पेज़ को वैब ब्राऊज़र में लोड किया जाता है। यह <Title> और </Title> टैगस के बीच में होता है, यह छोटा और अर्थपूर्ण होना चाहिए।

<Body> टैग वैब ब्राऊज़र में वैब पेज़ में लोड होने पर वैब ब्राऊज़र पर प्रदर्शित करने वाली असल जानकारी रखता है। इसमें टैक्सट, चित्र, ऑडियो, वीडियो आदि के तत्त्व या कंटैंट शामिल हो सकते हैं। यह कंटेंट <Body> और </Body> टैगस के बीच परिभाषित होता है। यह एक कंटेनर टैग है।

HTML दस्तावेज बनाना
एक HTML दस्तावेज़ किसी भी साधारण टैक्सट एडीटर में बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे अधिक Notepad तथा Notepad ++ का प्रयोग होता है।
होम पेज़ (Home Page)-होम पेज़ वैबसाइट का पहला पेज़ होता है। यह वैबसाइट के बारे में परिचय करवाता है। इस पर कई प्रकार के लिंक होते हैं जो बाकी वैब पेजों से संबंध स्थापित करते हैं।

वैब पेज़ देखना
वैब पेज़ देखने के लिए किसी वैब ब्राऊज़र का इस्तेमाल किया जाता है। इंटरनैट एक्सप्लोरर एक साधारण काम में आने वाला वैब ब्राऊज़र है।

वैब ब्राउजर
वैब ब्राऊज़र वह सॉफ्टवेयर होता है जिस का प्रयोग वैब पेज देखने के लिए किया जाता है। ये कई प्रकार के होते हैं। जैसे कि;

  • इंटरनैट एक्सपलोरर : यह माईक्रोसॉफ्ट का उत्पाद है।
  • गूगल क्रोम : यह Google कम्पनी का उत्पाद है।
  • मोजीला फायरफाक्स : यह मोजीला कम्पनी का उत्पाद है।
  • ओपेरा : यह ओपेरा साफ्टवेयर कम्पनी का उत्पाद है।

टैग की किस्में
टैग कुछ खास निर्देश होते हैं। इनका इस्तेमाल HTML डॉक्यूमैंट में किया जाता है। टैग ब्राऊज़र (Browser) को किसी विशेष कार्य को करने के बारे में निर्देश देते हैं। टैग दो प्रकार के होते हैं जो कि निम्नलिखित हैं
1. कंटेनर टैग (Container Tag)
2. ऐंपटी टैग (Empty Tag)
1. कंटेनर टैग (Container Tag)-यह डॉक्यूमैंट में दो बार इस्तेमाल किये जाते हैं। टैक्सट के टैगज़ को जोड़े के बीज में लिखा जाता है। इनको पेअर (Pair) टैग या (Companion) कोंपैनीअन टैग भी कहा जाता है।

2. ऐंपटी टैग (Empty Tag)-ऐपटी टैग अकेला टैग होता है। इसको सिंगुलर (Singular) टैग भी कहा जाता है। इसका कोई साथी टैग नहीं होता। क्लोजिंग या समाप्ति टैग का इस्तेमाल इसमें बिल्कुल ही नहीं होता।

कंटेनर और ऐंपटी टैग। कंटेनर और ऐंपटी टैग में निम्नलिखित अंतर हैं –

कंटेनर टैग ऐंपटी टैग
1. कंटेनर टैग जोड़ों में होते हैं। 1. ऐंपटी टैग अकेले होते हैं।
2. यह कैसे टैक्सट पर अपना काम करते हैं। 2. एक टैक्सट के लिए स्थान की व्यवस्था करते
3. इनमें समाप्त होने वाला टैग देना ज़रूरी है। 3. इनमें इस प्रकार का कोई टैग नहीं होता।
4. अपने जोड़ीदार के बिना यह अधूरे हैं। 4. यह अपने आप में पूरे होते हैं।

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एट्रीब्यूट्स Attributes वह गुण होते हैं जो किसी टैग की विशेषता परिभाषित करते हैं। यह टैग के शुरू में दिये जाते टैग और ऐट्रीब्यूट में अंतर –

टैग ऐट्रीब्यूटस
1. टैगस में ऐसे ऐलीमैंटस होते हैं जो जानकारी प्रदान करते हैं कि सूचना को किस तरह प्रौसेस या प्रदर्शित किया जा सकता है। इसमें दो टैग शुरुआती टैग <TAG> और अंतिम टैग </TAGS> होते हैं जो कि एक ऐलीमैंट की शुरुआत और अंत को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 1. एक ऐट्रीब्यूटस ऐलीमैंट की ऐसी प्रापर्टी को दर्शाता है जिसमें उस टैग से संबंधित विशेषता बताई जाती है और यह टैग के शुरु आती टैग  में बताई जाती है।
2. टैगज़ में टैग के साथ उसकी विशेषताएं भी हो सकती हैं। 2. ऐट्रीब्यूटस ऐलीमैंट के शुरुआती टैग का भाग होता है।
3. यह दो तरह के होते हैं-ऐंपटी टैग और कंटेनर टैग। 3. ऐट्रीब्यूटस की किस्में इस्तेमाल किये जा रहे टैग पर निर्भर करती हैं भाव कि हर एक टैग के ऐट्रीब्यूट की संख्या भिन्न-भिन्न होती है।
4. उदाहरण <Table> यहाँ टेबल एक टैग है। 4. उदाहरण <Table Border = “3”> यहाँ टेबल एक टैग है और बार्डर एक ऐट्रीब्यूट है।

Body टैग तथा ऐट्रीब्यूट्स –
Body टैग में सारे HTML दस्तावेज़ की परिभाषा होती है। सारा दस्तावेज़ इसी टैग में लिखा जाता है। इसके निम्न ऐट्रीब्यूटस होते हैं;
1. Background : इसका प्रयोग दस्तावेज़ की बैकग्राऊंड में तस्वीर दिखाने के लिए किया जाता है।
जैसे-Background = “abc.jpg”

2. Bgcolor : दस्तावेज़ की बैकग्राऊंड का रंग बदलने के लिए इसका प्रयोग होता है। जैसे Bgcolor = “Red”

3. Text : दस्तावेज़ के टैक्सट का रंग इस टैग द्वारा बदला जाता है। जैसे Text = “Yellow” BGCOLOR और BACKGROUND में अंतर निम्नलिखित हैं-

BGCOLOR BACKGROUND
1. BGCOLOR ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल बैकग्राउंड को कलर देने के लिए किया जाता है। 1. BACKGROUND ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल बैकग्राउंड इमेज लगाने के लिए किया
जाता है।
2. बैकग्राउंड कलर के रूप में कई रंग-जैसे- काला, पीला, सफेद, लाल, हरा, नीला आदि इस्तेमाल किये जा सकते हैं। 2. यह वैब पेज की दिखावट को बदल देता है और इसमें इमेज को दाखिल करने के बाद सुंदर और आकर्षक बनाता है।
3. रंगों के नाम के स्थान पर, की कीमत हैक्सा डैसीमल में (जैसे कि “#FFA3C”) भी दी जा सकती है। 3. इमेज के नाम के स्थान पर, BACK GROUND में कीमत हैक्सा डैसीमल में नहीं दी जा सकती है।
4. इसमें ग्राफिक्स फाइल फारमैट का इस्तेमाल नहीं किया जाता। 4. इसमें ग्राफिक्स फाइल फारमैट जैसे-JPG, GIF आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
5. Syntax : BGCOLOR ऐट्रीब्यूट का BODY टैग में सिनटैक्स है- <Body BGCOLOR = “Red”> 5. Syntax : BACKGROUND ऐट्रीब्यूट का BODY टैग में सिनटैक्स है- <Body BACKGROUND
“ABC.jpg”>

HTML दस्तावेज़ में फारमैटिंग
Heading टैग
ये <Hn> </Hn> द्वारा परिभाषित किये जाते हैं। ये गिनती में 6 होते हैं। जैसे;
<H1> Text </H1>
<H1> टैग सबसे बड़े आकार तथा <H6> सबसे छोटे आकार का टैक्सट दिखाता है।

Font Tag
फौंट टैग का इस्तेमाल टैक्सट को सुंदर दिखाने के लिए किया जाता है। इसमें कई प्रकार के ऐट्रीब्यूट इस्तेमाल किये जाते हैं ; जैसे कि
Face – फोंट का नाम देने के लिए
Color – फोंट का रंग बदलने के लिए
Size – फौंट का आकार बदलने के लिए

<P> टैग
इस टैग का प्रयोग पैराग्राफ दर्शाने में होता है।
<P> Text </P> Align ऐट्रीब्यूट : Align ऐट्रीब्यूट का प्रयोग टैक्सट की Alignment बदलने में होता है। इसके चार मूल्य Left, Justify, Centre या Right हो सकते है।

<BR>
टैग इस टैग का प्रयोग नई लाइन की शुरुआत के लिए किया जाता है। यह सब एंपटी टैग है।
जैसे <Br> पैराग्राफ टैग और ब्रेक टैग में अंतर-

Paragraph <P> Tag Break <BR> Tag
1. टैग एक कंटेनर ऐलीमैंट (तत्त्व) होता है जो किसी वैब पेज में पैराग्राफ के रूप में टैक्सट  का ब्लॉक देता है और वैब ब्राऊज़र को दो अनुच्छेद के बीच एक लाइन छोड़ जाता है। इस टैग में एक ऐट्रीब्यूट ALIGN है, जोकि तीन मूल्य-left, right and center (बायें, दायें और केंद्र) ले सकता है, टैग एक अनुच्छेद को संकेत करता है और </P> से समाप्त होता है। यह एक कंटेनर टैग होता है। 1. टैग एक ऐपटी ऐलीमैंट है जोकि एक लाइन को तोड़ने और अगली लाइन से जारी टैक्सट को बिना दो लाइनों में कोई स्पेस दिए बिना प्रदर्शित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसका कोई ऐट्रीब्यूट नहीं है। <br> एक लाइन ब्रेक है और एक ऐपटी टैग है।
2. इस टैग को आपके टैक्सट के साथ पैराग्राफ परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
उदाहरण –
<p> hello world </p>
2. यह टैग एक साधारण लाइन ब्रेक है, यह केवल किसी भी स्पेसिंग या फारमैटिंग चुनाव  के बिना अगली लाइन पर जंप करता है।
उदाहरण-
hello <br> world !

<HR> टैग
इसका प्रयोग एक लेटवीं रेखा दिखाने में होता है। इसके निम्न Attributes हैं –
Size : रेखा की मोटाई बढ़ाने में
Width : रेखा की लंबाई सैट करना
Align : रेखा की Alignment सैट करना
Color : रेखा का रंग सैट करना।

लिस्टें
लिस्टें संबंधित भागों का संग्रह होती हैं। दूसरे शब्दों में यह एक जैसी चीज़ों की सूची होती है। यह ब्लॉक-फारमैटिड भाग होते हैं जो ब्लॉक की संरचना बताते हैं। HTML में निम्नलिखित तीन प्रकार की लिस्टें होती हैं
1. अन-आर्डरड लिस्ट (Un-ordered List)
2. आर्डरड लिस्ट (Ordered List)
3. डैफीनेशन लिस्ट (Definition List)

1. अन-आर्डरड लिस्ट (Un-ordered List)-यह लिस्टें अंकों के बिना होती हैं। इन लिस्टों के आगे बुलेट (गोली) का चिन्ह लगा होता है। ऐट्रीब्यूटस (Attributes)—Type = “Circle” यह खाली बुलेट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Type = “disc’ यह ठोस बुलेट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Type = “Square” यह ठोस वर्ग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डिफॉल्ट किस्म डिस्क (disc) होती है।

2. आर्डरड लिस्ट (Ordered List)-आर्डरड लिस्टों में अंक पाये जाते हैं जिसके कारण इसको नबंरड लिस्ट भी कहा जाता है। यह लिस्ट अन-आर्डरड लिस्ट के जैसी होती है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि इसमें बुलेट की जगह पर अंकों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐट्रीब्यूटस (Attributes)-Type = “a” अंग्रेज़ी वर्णमाला के छोटे अक्षरों का इस्तेमाल किया जाता है। Type = “A” अंग्रेज़ी वर्णमाला के बड़े अक्षरों का इस्तेमाल किया जाता है। Type = “i” छोटे रोमन अंकों का इस्तेमाल किया जाता है। Type = “I” बड़े रोमन अंकों का इस्तेमाल किया जाता है।

आर्डरड लिस्टें अनआर्डरड लिस्टें
1. आर्डरड लिस्ट <OL> ……. </OL> टैग का इस्तेमाल करती है। 1. अन-आर्डरड लिस्ट <UL> ……. </UL> टैग का इस्तेमाल करती है।
2. डिफॉल्ट Type Attribute का मूल्य है। 2. डिफॉल्ट Type Attribute का मूल्य Disci है।
3. इनमें अंकों का इस्तेमाल होता है। 3. इनमें चिन्हों का इस्तेमाल होता है।
4. इनमें अंग्रेज़ी के अक्षर भी दिखाये जा सकते हैं। 4. इनमें सिर्फ चिन्ह ही दिखाये जा सकते हैं।
5. इनके लिए टैग है-<OL> 5. इनके लिए टैग है-<UL>
6. इनमें ऐट्रीब्यूटस के लिए पाँच आप्शन हैं। 6. इनमें ऐट्रीब्यूटस के लिए तीन आप्शन

3. डैफीनेशन लिस्ट (Definition List)-यह किसी शब्द की परिभाषा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डैफीनेशन लिस्ट ‘DL’ टैग से शुरू होती है और </DL> से समाप्त होती है।

4. नैस्टिड लिस्ट (Nested List)-जब एक लिस्ट में कोई दूसरी लिस्ट लिखी जाती है तो वो नैस्टिड लिस्ट कहलाती है। नैस्टिड लिस्ट के लिए कोई अलग टैग नहीं लिखा जाता।

PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 2 एच०टी०एम०एल० फंडामैंटल्ज

इमेज दाखिल करना
इमेज दाखिल करने से वैब पेज बहुत प्रभावशाली नज़र आते हैं। वैब पेज में इमेज महत्त्वपूर्ण सूचना प्रदान करवाते हैं। वैब पेज में .jpg, .gif या .xbm एक्सटेंशन वाले इमेज भरे जा सकते हैं। इमेज और वैब डाक्यूमैंट एक ही फोल्डर में स्टोर होने चाहिए। अगर इमेज उसी फोल्डर में न हो तो उर लए उचित पाथ लिखना पड़ता है जिसमें गलती की संभावना ज़्यादा होती है। एक वैब पेज में तस्वीरें भी दिखाई जा सकती हैं। यह तस्वीर किसी भी तरह की हो सकती है। इन तस्वीरों की मदद से हम अपने वैब पेज को सुंदर और आकर्षित बना सकते हैं।

इसके लिए <img> tag का इस्तेमाल किया जाता है। इस टैग में हम तस्वीर का नाम बताते हैं। हम तस्वीर को उस स्थान पर रखते हैं जो स्थान हमने <img> टैग में लिखा होता है।

Attributes <img> टैग से हम निम्नलिखित attributes का इस्तेमाल कर सकते हैं। Width- तस्वीर की चौड़ाई बताने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। तस्वीर की चौड़ाई अंकों या प्रतिशत में दी जा सकती है।Height- चौड़ाई की तरह ही तस्वीर की लंबाई बताने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

यह भी अंकों या प्रतिशत में दी जाती है। Border- तस्वीर का बार्डर दिखाने के लिए इस attribute का इस्तेमाल किया जाता है।
Alignment- तस्वीर को दायें, बायें या मध्य आदि जगह पर दिखाने के लिए इस attribute का इस्तेमाल किया जाता है।

Alt – Alt attribute का इस्तेमाल शब्द दिखाने के लिए किया जाता है। यह शब्द तब दिखाई देते हैं जब हम माऊस तस्वीर के ऊपर लेकर जाते हैं। उदाहरण-सभी attributes के इस्तेमाल के साथ <img> टैग की उदाहरण दी गई
है।
<img scr = “cirler.gif” width = “70%” height = “200” border = “5” alt = “circle’ >

टेबल बनाना
टेबल सूचनाओं को संगठित रूप में पेश करते हैं। टेबल काल्मज़ (Columns) और रोज़ (Rows) से मिलकर बनता है। यह सूचना को पढ़ने योग्य और समझने योग्य रूप में पेश करते हैं। टेबल लंबी सूचनाओं को दिखाने का एक बढ़िया उपाय है। यह डाटा को व्यवस्थित करने का एक उचित ढंग है। टेबल में सूचनाएँ (Information) पढ़नी बहुत आसान होती हैं। सभी प्रसिद्ध ब्राऊज़र टेबल को पसंद करते हैं।

टेबल की संरचना
हम जानते हैं कि टेबल में रोअ और कॉलम होते हैं। रोअ और कॉलम के काट क्षेत्र को सैल (Cell) कहा जाता है। सैलों में डाटा (Data) होता है। HTML में टेबल बनाने के लिए निम्नलिखित चार भागों की ज़रूरत पड़ती है
1. टेबल टैग (Table Tag)-टेबल <TABLE> टैग से शुरू होता है और </TABLE> टैग से समाप्त होता है। यह टेबल के शुरू होने और समाप्त होने के बारे में सूचना देता है।
PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 2 एच०टी०एम०एल० फंडामैंटल्ज 1
2. टेबल रोअ (Table Row)-TR का पूरा नाम टेबल रोअ होता है। <TR> और </TR> टैग का इस्तेमाल टेबल में रोअज़ (Rows) बनाने के लिए किया जाता है। लेटवी दिशा (Horizontal) में सैलों (cells) के संग्रह को रोअ कहा जाता है। टेबल में एक या एक से ज्यादा रोअज़ हो सकती हैं। हर एक रोअ के शुरू में <TR> टैग और अंत में </TR> टैग लिखा जाता है।

3. टेबल डाटा (Table Data)-TD का पूरा नाम टेबल डाटा होता है। <TD> और </TD> टैग का इस्तेमाल टेबल में डाटा दिखाने के लिए किया जाता है। सैल में दिखाई जाने वाली सूचना के शुरू में <TD> टैग और अंत में </TD> टैग का इस्तेमाल किया जाता है।

4. टेबल हैडिंग (Table Heading)- TH का पूरा नाम है टेबल हैडिंग। टेबल हैडिंग के लिए <TH> और </TH> का इस्तेमाल किया जाता है। टेबल के हर एक कॉलम के शिखर पर हैडिंग लिखा जाता है जिसको टेबल हैडिंग कहा जाता है। साधारण रूप में हैडिंग सैंटर अलाइन (Center align) और बोल्ड (bold) होता है।

सैल स्पेसिंग और सैल पैडिंग (Cell Spacing and Cell Padding)-यह एट्रीब्यूट टेबल की दिखावट को कंट्रोल करते हैं।
1. सैल स्पेसिंग (Cell Spacing)-सैलों के बीच की स्पेसिंग (खाली स्थान) को बदलने के लिए सैल स्पेसिंग ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल किया जाता है। सैल स्पेसिंग बताती है कि भिन्न-भिन्न सैलों के बीच में कितना-कितना खाली स्थान छोड़ा जाए।

2. सैल पैडिंग (Cell Padding)-टैक्सट और सैल के बार्डर के बीच की दूरी को बदलने के लिए सैल पैडिंग ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए निम्नलिखित लाइन देखो <Table Border = “1” CELLSPACING = 6 CELLPADDING = 8 > सैल स्पेसिंग और सैल पैडिंग की तुलना निम्नलिखित है-

सैल स्पेसिंग सैल पैडिंग
1. सैलों के बीच की दूरी को बताने के लिए सैल स्पेसिंग ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल किया जाता है। 1. टैक्सट और सैल के बार्डर के बीच की दूरी को बताने के लिए सैल पैडिंग ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल किया जाता है।
2. यह बताता है कि सैलों के बीच कितना खाली स्थान छोड़ना है। 2. यह बताता है कि टैक्सट और सैल बार्डर के बीच कितना खाली स्थान छोड़ा जाए।
3. Syntax : सैल स्पेसिंग का सिनटैक्स निम्नलिखित है : <Table Border = 1 CELL SPACING = 8> 3. Syntax : सैल पैडिंग का सिनटैक्स निम्नलिखित है <Table Border = 1 CELL = SPACING = 4>

रोअ स्पैन और कॉल स्पैन में निम्नलिखित अंतर हैं –

रोअ स्पैन कॉल स्पैन
1. रोअ स्पैन एक सैल ऐट्रीब्यूट है जिसका इस्तेमाल एक सैल को एक से ज्यादा रोयज़ में बढ़ाने के लिए किया जाता है। 1. कॉल स्पैन एक सैल ऍट्रीब्यूट है जिसका इस्तेमाल एक सैल को एक से ज्यादा काल्मज़ में बढ़ाने के लिए किया जाता है।
2. रोअ स्पैन बताता है कि सैल में कितनी रोअज़ होंगी। 2. कॉल स्पैन बताता है कि सैल में कितने काल्मज़ होंगे।
3. रोअ स्पैन का इस्तेमाल सैल की ऊँचाई बढ़ाने के लिए किया जाता है। 3. कॉल स्पैन का इस्तेमाल सैल की चौड़ाई बढ़ाने के लिए किया जाता है।
4. यह सैलों की ऊँचाई को खड़े रुख में बढ़ाता है। 4. यह सैलों की चौड़ाई को लेटवें रुख में बढ़ाता है।
5. Syntax – रोअ स्पैन का सिनटैक्स निम्नलिखित है- <TD ROWS PAN = 4> 5. Syntax – कॉल स्पैन का सिनटै क्स निम्नलिखित है – <TD COLS PAN = 5>

बैकग्राउंड ग्राफिक्स
आप अपने टैक्सट के पीछे इमेज लगा सकते हो। इसको बैकग्राउंड ग्राफिक्स (इमेज) कहा जाता है। बैकग्राउंड इमेज के साथ वैब पेज सुंदर दिखाई देता है। बैकग्राउंड लगाते समय ध्यान रखें कि आपका टैक्सट आसानी से पढ़ा जा सके। बैकग्राउंड इमेज लगाने के लिए BACK GROUND ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल Body टैग में किया जाता है।

बैकग्राउंड कलर
आप वैब पेज की बैकग्राउंड पर कोई रंग भी भर सकते हो। इसी तरह टैक्सट का रंग भी बदला जा सकता है। आप कई तरह के रंग बैकग्राउंड पर लगा सकते हो जैसे कि Black, White, Red, Blue, Green, Yellow आदि। बैकग्राउंड कलर के लिए BGCOLOR (बी० जी० कलर) ऐट्रीब्यूट का इस्तेमाल Body टैग में किया जाता है।

बाहरी इमेज और मूवी (External Image and Movie)-आप अपने वैब पेज में कोई बाहरी इमेज खोल सकते हो। इसी प्रकार बाहरी आवाज़ और मूवी (फिल्म) आदि को भी खोला जा सकता है। इमेज या मूवी अलग डाक्यूमैंट में खुलते हैं। बाहरी इमेज या मूवी देखने के लिए ऐंकर टैग का इस्तेमाल किया जाता है।

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टैक्सट, मूवी या साउंड के लिए कुछ निम्नलिखित फाइल एक्सटेंशन्ज़ याद रखनी चाहिए-

  • वेव (Wave) साऊंड फाइल के लिए .Wav
  • कुइक टाइम मूवी के लिए .mov
  • प्लेन टैकस्ट के लिए .txt
  • HTML डाक्यूमैंट के लिए .html

PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़

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PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़

जान पहचान
प्रोग्राम कंप्यूटर में चलते हैं। यह प्रोग्राम चरण-दर-चरण हिदायतों (Instructions) का समूह होते हैं। इन प्रोग्रामों के समूह को सॉफ्टवेयर कहा जाता है। सॉफ्टवेयर दो तरह के होते हैं। पहले ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और दूसरे सिस्टम सॉफ्टवेयर। ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर विशेष कामों को करवाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं जब कि सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के सभी कामों पर कंट्रोल रखते हैं।

सॉफ्टवेयर (Software) कंप्यूटर अपने आप कोई काम नहीं कर सकता। कंप्यूटर को कोई भी काम करने के लिए क्रमवार हिदायतों की आवश्यकता होती है। ये हिदायतें कंप्यूटर को समझ आने वाली किसी भाषा में लिखी जाती हैं। इन हिदायतों के समूह को प्रोग्राम (Program) कहा जाता है। प्रोग्रामों के समूह को सॉफ्टवेयर कहते हैं।

सॉफ्टवेयर की किस्में
कंप्यूटर की उत्पादकता (Productivity) को इनके प्रोग्रामों के द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। प्रोग्रामों के संग्रह को सॉफ्टवेयर कहा जाता है। सॉफ्टवेयर को आगे दिए हुए दो भागों में बांटा जा सकता है –
1. सिस्टम सॉफ्टवेयर।
2. ऐप्लीकेशन साफ्टवेयर।
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सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर-कंप्यूटर के सभी काम सिस्टम सॉफ्टवेयर के द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं। अगर कंप्यूटर में सिस्टम सॉफ्टवेयर न हो, तो एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर नहीं चल सकता। सिस्टम सॉफ्टवेयर की कई किस्में हैं; जैसे कि-ऑप्रेटिंग सिस्टम, भाषा ट्रांसलेटर, यूटिलिटी प्रोग्राम आदि।

एप्लीकेशन साफ्टवेयर-ये साफ्टवेयर वे होते हैं जो यूजर की किसी समस्या का हल प्रदान करते हैं। इन साफ्टवेयर की उदाहरणें हैं-वर्ड प्रोसेसर, स्प्रेडशीट, कैलकुलेटर, डाटाबेस प्रोग्राम आदि।

ऑफिस टूल्ज़
ऑफिस टूल्ज़ सॉफ्टवेयर वे प्रोग्राम होते हैं जो कंप्यूटर के यूज़र्स को अपने काम के स्थान पर अधिक उत्पादक और कुशल बनाने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। ऑफिस प्रोडक्टीविटी टूल्ज़ की रेंज वर्ड प्रोसैसिंग से स्प्ररैड शीट, प्रैज़नटेशन और डाटाबेस तक है।

ऑफिस प्रोडक्टीविटी टूल्ज़
ऐप्लीकेशन प्रोग्रामों की श्रेणी है जो यूज़र को डाक्यूमैंट, डाटाबेस ग्राफ, वर्कशीटों और प्रैजनटेशन जैसी चीज़ों को तैयार करने में सहायता करते हैं। ऑफिस प्रोडक्टीविटी सॉफ्टवेयर्स की उदाहरणों में वर्ड प्रोसैसर, डाटाबेस मैनेजमैंट, सिस्टम ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर और स्प्रेडशीट एप्लीकेशन शामिल हैं।

ऑफिस टूल्ज़ की किस्में-ऑफिस टूल्ज़ की निम्नलिखित किस्में हैं –
1. वर्ड प्रोसैसिंग टूल-इस टूल का मुख्य उद्देश्य डाक्यूमैंट तैयार करना है। MS-Word, Word Pad, नोटपैड और कुछ अन्य टैक्सट ऐडीटर वर्ड प्रोसैसिंग टूल के कुछ उदाहरण हैं।

PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़

2. डाटाबेस सॉफ्टवेयर टूल-डाटाबेस संबंधित डाटा का संग्रह है, इस टूल का उद्देश्य डाटा को संगठित करना और प्रबंध करना है। इस टूल का उपयोग यह है कि आप डाटा के स्टोर करने और प्रदर्शित करने के तरीके को बदल सकते हो। एम० एस० अक्सैस, डी-बेस, फोक्सप्रो, पैराडोक्स और ओरेक्ल, डाटाबेस सॉफ्टवेयर की कुछ उदाहरणें हैं।

3. स्प्रेडशीट टूल-स्प्रेडशीट टूल का उपयोग बज़ट, फाइनेंशियल स्टेटमैंट और बेचने के रिकार्डो की संभाल रखने के लिए किया जाता है। इस टूल का उद्देश्य नंबरों को क्रमवार करना है। यह यूजर्स को नंबरों पर साधारण या जटिल गणना करने की भी आज्ञा देता है। MS-Excel स्प्रेडशीट टूल्ज़ की उदाहरणों में से एक है।

4. प्रैज़नटेशन टूल-यह टूल स्लाइड शो के रूप में जानकारी को प्रदर्शित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। प्रैजनटेशन टूल के तीन मुख्य काम हैं-टैक्सट ऑडिट करना, इनसर्ट करना और फारमेटिंग करना, टैक्सट में ग्राफिक्स शामिल करना और स्लाइड शो को चलाना है। इस किस्म के टूल का सबसे बढ़िया उदाहरण Microsoft PowerPoint है।

5. मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर-मीडिया प्लेयर और रीयल प्लेयर मल्टीमीडिया टूल के उदाहरण हैं। यह टूल यूज़र को आडियो-वीडियो बनाने में मदद करता है। मल्टीमीडिया टूल्ज के भिन्न-भिन्न रूप हैं आडियो कनवर्टर, प्लेयर, बरनर, वीडियो इंकडोर और डीकोडर।

एम० एस० वर्ड के प्रयोग का उद्देश्य
माइक्रोसॉफ्ट वर्ड निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है –

  • बिजनैस डॉक्यूमैंट, जिसमें कई तरह के ग्राफिक्स जैसे कि तस्वीरें, चार्ट और चित्र हों बनाने के लिए।
  • बनी हुई चीज़ों और फारमेट किए हुए ऐलीमैंट्स को स्टोर और फिर से प्रयोग करने के लिए कि कवर-पेज़ और साइटबार्ज।
  • बिजनैस और पर्सनल उद्देश्य के लिए लैटर और लैटरहैड बनाने के लिए।
  • भिन्न-भिन्न तरह के डॉक्यूमैंट डिज़ाइन करने के लिए जैसे कि रिज़यूम या निमंत्रण-पत्र आदि ।
  • लिखने-पढ़ने के लिए जैसे कि एक साधारण दफ्तरी मीमो से लेकर कानूनी परतें और अन्य संबंधित डॉक्यूमैंट बनाने के लिए।

एम०एस० वर्ड में टेंपलेटस-
वर्ड 2010 हमें पहले से ही परिभाषित (Built-in) टैंपलेटस जिसमें रिज़यूम्स, ऐजंडाज़, बिजनैस कार्ड और फैक्स समेत बहुत बड़ी संख्या में वर्ड टैंपलेट शमिल हैं को अपलाई करने की आज्ञा देता है। एम०एस०वर्ड में टैक्सट डॉक्यूमैंट को मनचाहा लुक देने की प्रक्रिया को फॉरमैटिंग कहते हैं।
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माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2010 हमें निजी और व्यापारिक डॉक्यूमैंट जैसे कि पत्र, रिपोर्ट, बिल, ई-मेल और पुस्तकों को बनाने और एडिट करने की आज्ञा देता है। मूल रूप में (By default) वर्ड 2010 में डॉक्यूमैंट .docx ऐक्सटेंशन से सेव होते हैं।

एम० एस० एक्सल-
Excel स्प्रेडशीट प्रोग्राम है जो Workbooks को Create और Format करने के लिए इस्तेमाल होता है। यह हमारे डाटा का विश्लेषण करने और डाटा को और अधिक जानकारी देने वाला बनाने में मदद करता हे ताकि व्यापारिक फैसले सही लिए जा सकें। विशेष रूप से हम तो Excel का इस्तेमाल डाटा को Track करने, डाटा का विश्लेषण, फार्मूला लिखने ताकि गणित की गणना उस डाटा पर की जा सके, डाटा को बहुत से रूपों से Pivot करने और मौजूद डाटा को भिन्न-भिन्न प्रोफैशनल चार्ट के रूप में दिखाने के लिए करते हैं।
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टैंपलेट द्वारा वर्क बुक तैयार करना
अपनी आवश्यकता अनुसार दस्तावेज़ तैयार करने के लिए बने बनाए टेंपलेट का भी प्रयोग किया जा सकता है। उसके लिए नई फाइल बनाते समय सही टैंपलेट का चुनाव किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर-
1. होम स्कूलिंग प्रोग्रैस रिकार्ड
2. सेल इनवॉयस

स्प्रेडशीप के साथ मेल मर्ज का प्रयोग
स्प्रेडशीट के साथ मेल मार्जन का इस्तेमाल करते हुए विद्यार्थियों की वार्षिक रिपोर्ट निम्नलिखित कदमों का इस्तेमाल करके तैयार की जा सकती है-
1. सबसे पहले एम०एस० वर्ड में हम मैनूयल रिपोर्ट फारमैट बनायेंगे। यहां हम विद्यार्थियों के विवरण जैसे कि दाखिला नंबर, रोल नंबर, नाम, पिता का नाम और हम एक विषय के नंबर और उसका रिज़ल्ट और विद्यार्थियों के अंकों का प्रतिशत आदि दर्शाएंगे।

2. दूसरी तरफ, हम एक एक्सल वर्कशीट तैयार करते हैं जिसमें विद्यार्थी का दाखिला नंबर, रोल नंबर, नाम, पिता का नाम, विषय के अनुसार प्राप्त किए अंक जैसे पंजाबी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक, EVS और कंप्यूटर के grades भरे जाते हैं।

3. अब Mailing tab पर Click करें और Start Mail Merge को क्लिक करें। उसके बाद Letter options को चुनें जो हमने पहले ही बनाई हुई है।

4. अब Select Recipients पर क्लिक करें और Using Existing List Option को Select करें। Select Table, Dialog Box का इस्तेमाल करते हुए Excel Sheet को चुनें और OK पर Click करें।

5. अपने Cursor को उस जगह पर रखें जिस जगह Excel Sheet में Value को रखना है। अब Insert Merge Field Option पर जायें जो कि Write and Insert Fields Group में है। Drop Down Menu खुल जायेगा जिसमें चुनी हुई Excel Work Sheet के Field, Names होंगे।

6. Field Names को एक-एक करके विद्यार्थी की वार्षिक रिपोर्ट में Cursor को सही जगह पर रखकर Select करें।

7. सभी क्षेत्रों को इनसर्ट करने के बाद हम प्रीविऊ रिजल्ट ऑप्शन को क्लिक करके विद्यार्थियों के नतीजों का प्रीविऊ देख सकते हैं। नेवीगेशन बटनों का प्रयोग करते हुए अगले और पहले विद्यार्थी, पहले और आखिरी विद्यार्थी के नतीजों को भी देखें।

8. अब Finish & Merge ऑप्शन पर क्लिक करें और मीनू से Edit Individual Document का चुनाव करें। एक नया Merge to New Document डायलॉग बॉक्स खुल जाएगा। एक्सल वर्कशीट में सभी विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड को दिखाने के लिए ऑप्शन All को चुनें और OK पर क्लिक करें।

9. अपने दस्तावेज़ को Save करें।

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पेज लेआऊट-
पेज लेआऊट में हम अपने डॉक्यूमैंट को एक पेज पर प्रिंट करने के हिसाब से देखते हैं और उसी के अनुसार ही अपने टैक्सट और अन्य वस्तुओं की फारमैटिंग करते हैं। इसमें निम्नलिखित चीजें शामिल होती हैं –

  1. लाइन स्पेस
  2. पेज मार्जिन
  3. पेज ओरियन्टेशन
  4. पेज ब्रेक
  5. टैब स्टॉपस ।

PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़ 4

1. लाइन स्पेस-दो लाइनों के मध्य के अंतर को लाइन स्पेस कहा जाता है। डिफालट लाइन स्पेस 1.5 होता है और पैराग्राफ के मध्य में स्पेस 10 बिंदु होता है। इसको हम अपनी आवश्यकता के अनुसार बदल भी सकते हैं।

2. पेज मार्जिन-पेज मार्जिन पेज के चारों तरफ खाली छोड़े जाने वाली जगह को कहते हैं। इस मार्जिन के बाहर कुछ भी प्रिंट नहीं किया जाता। सारे टैक्सट और ग्रॉफिक्स को इस मार्जिन से पेज के मध्य की तरफ ही प्रिंट किया जाता है।

3. पेज ओरियन्टेशन-पेज ओरियन्टेशन का अर्थ है कि पेज़ पर प्रिंटिंग किसके अनुसार होगी। यह दो प्रकार की होती है

  • पोर्टरेट-इसमें प्रिटिंग लंबी या स्थायी पेज के अनुसार होती है।
  • लैंडस्केप–इसमें प्रिंटिंग क्षैतिज पेज़ के अनुसार होती है।

4. पेज़ ब्रेक्स-पेज ब्रेक्स किसी भी पेज के अंत को दर्शाती है। हम अपनी आवश्यकता के अनुसार भी किसी पेज का अंत पेज ब्रेकस का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसको मैनुअल पेज ब्रेक कहा जाता है।

5. टैब स्टॉपस-टैब स्टॉप का प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है जहाँ पर हमें एक-से-ज्यादा स्पेस की आवश्यकता हो, जैसे कि फलाइर, सामग्री की सूची, रिज़यूम आदि। इसकी मदद से हम टैक्सट को सुंदर ढंग से दिखा सकते हैं। टैब स्टॉप पांच प्रकार के होते हैं –
1. बायां टैब स्टॉप
2. दायां टैब स्टॉप
3. मध्य टैब स्टॉप
4. डैसीमल टैब स्टॉप
5. बार टैब स्टॉप।
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टैब स्टाप क्लीयर करना
हम भिन्न-भिन्न तरीकों से टैब स्टॉप को हटा सकते हैं, सबसे आसान है रूलर पर जायें। टैब स्टॉप पर क्लिक करें और होल्ड करें और इसको डाक्यूमैंट की तरफ नीचे को खींचें। टैब स्टॉप हट जायेगा।

टैब स्टॉप तेज़ी से हटाने के लिए और नई शुरुआत करने के लिए –

  1. होम टैब पर क्लिक करें, पैराग्राफ डायलॉग बॉक्स लांचर पर क्लिक करें।
  2. एक पैराग्राफ बॉक्स दिखाई देगा, डायलॉग बॉक्स के नीचे बाईं तरफ टैब्ज के बटन पर क्लिक करें।
  3. एक टैब डायलॉग बॉक्स दिखाई देगा।
  4. टैब स्टॉप पोजीशन नीचे सूची में, टैब स्टॉप पोजीशन पर क्लिक करें जो हम हटाना चाहते हैं और फिर Clear पर क्लिक करें। मैनूयल टैब स्टॉपस से स्पेस हटाने के लिए Clear All पर क्लिक करें।

दस्तावेज को अन्तिम रूप देना दस्तावेज़ को अंतिम रूप देने के लिए वर्ड की कुछ विशेष सहूलियतें प्रयोग करते हैं।
अपने डाक्यूमैंट में गल्तियों को ठीक करने का सबसे तेज़ तरीका यह है-
1. कर्सर को गलत स्पैलिंग वाले शब्द पर ले जाकर Right क्लिक करें।
2. एक ड्राप डाउन बाक्स शब्द के सही स्पैलिंग के साथ दिखाई देगा।
3. उस शब्द को हाइलाइट करें और Left क्लिक करें जिसके साथ हम सही शब्द को बदलना चाहते हैं। ज्यादा व्यापक स्पैलिंग और व्याकरण की जांच करने के लिए, हम स्पैलिंग और ग्रामर (Spelling and Grammar) विशेषता का उपयोग कर सकते हैं।

  • Review टैब पर क्लिक करें।
  • स्पैलिंग और ग्रामर कमांड पर क्लिक करें।
  • एक Spelling & Grammar बॉक्स दिखाई देगा।
  • हम बॉक्स के अंदर कोई स्पैलिंग या ग्रामर के मुद्दे को ठीक कर सकते हैं।

स्पैल चैक-स्पैल चैक वर्ड की वो सहूलियत है जिसकी मदद से हम अपने दस्तावेज़ों में स्पैलिंग की गलतियां पता लगा सकते हैं और ठीक कर सकते हैं। जिस स्पैलिंग में गलती होती है उसके नीचे वर्ड लाल लाइन दिखाता है।

प्रिंट प्रीविऊ-
हमारा तैयार किया दस्तावेज़ प्रिंट होने के बाद किस प्रकार का दिखाई देगा। इसको प्रिंट प्रीविऊ कहा जाता है। प्रिंट प्रीविऊ में दस्तावेज़ को देखने के बाद हम उसको प्रिंट कमांड का इस्तेमाल कर प्रिंट भी कर सकते हैं।

प्रिंट कमांड का प्रयोग

  • फाइल टैब पर क्लिक करें।
  • एक डाक्यूमैंट को प्रिंट करने के लिए प्रिंट कमांड पर क्लिक करें।
  • अपना डाक्यूमैंट प्रिंट करने के लिए प्रिंट बटन पर क्लिक करें।
  • यह ड्राप डाउन चुने हुए प्रिंट को दिखाता है। ड्राप डाउन को क्लिक करने से और उपलब्ध प्रिंटर दिखाई देंगे।
  • यह ड्राप डाउन मीनू में चुनी हुई सैटिंग्ज़ हैं। हमें सिर्फ एक विशेषता का नाम दिखाने के अलावा, यह मीनू हमें हर एक विशेषता के बारे में बताता है और इसका वर्णन करता है। यह हमें समझने में मदद कर सकता है कि क्या हम अपनी सैटिंग्ज़ को बदलना चाहते हैं।

एम० एस० प्वांइट-
माइक्रोसॉफ्ट पॉवर प्वाइंट एक प्रैज़नटेशन टूल है जो कि टैक्सट, शेपस, ग्रॉफिक्स चित्रों और मल्टीमीडिया को अन्य माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस जैसे कि एक्सल टूल के साथ जोड़ता है। PowerPoint 2010 में सेव किए डॉक्यूमैंट .pptx एक्सटैंशन से सेव किये जाते हैं। जबकि पुराने पॉवर प्वाइंट वर्जन का फाइल एक्सटेंशन .ppt है। पॉवर प्वांइट हमें दफ़्तरी मीटिंगों, भाषणों और सैमीनारों में कम से कम समय में ज्यादा-से-ज्यादा प्रभाव डालने के लिए जानकारी प्रस्तुत करने के योग्य बनाता है।

PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़

पावर प्वाइंट में बैकग्राउंड हम सभी जानते हैं कि पावर प्वांइट एक डिज़ाइन से आधारित प्रोग्राम है। पावर प्वाइंट के थीम डिफाल्ट रूप में बैकग्राउंड चुनने में हमारी मदद करते हैं, इसलिए जब भी हम थीम बदलते हैं, डिफाल्ट बैकग्रांउड अपने-आप ही सैट हो जाता है। थीम में सिर्फ बैकग्राउंड के सिवाय अन्य भी बहुत कुछ होता है। थीम रंगों, फोंटस, इफैक्टस और अन्य बहुत सारी सैटिंगज़ का एक सैट है जो इसको एकसार प्रोफैशनल दिखाई देने के लिए हमारी सभी प्रैज़नटेशन पर लागू किया जा सकता है। हम ‘डिज़ाइन रिबन’ पर क्लिक कर कोई भी थीम लागू कर सकते हैं।
PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़ 6

पावर प्वांइट में ट्रांजीशन-
पावर प्वांइट स्लाइड ट्रांजीशन विशेषता को स्पोर्ट करती है जो हमें स्लाइड शो के दौरान स्लाइडों की तबदीली करने के बारे में आज्ञा देता है।
पावर प्वाइंट प्रैज़नटेशन जिसमें हर एक स्लाइड के मध्य में स्पैशल इफैक्ट हैं, वो इफैक्ट स्लाइड ट्रांजीशन है। एक ट्रांजीशन साधारण स्लाइड से शुरू होकर जटिल फ्लैशी इफैक्ट भी हो सकती है। इसका मतलब यह है कि हम प्रैज़नटेशन के स्टाइल के मुताबिक किसी भी ट्रांजीशन का चुनाव कर सकते हैं।

ट्रांजीशन का चुनाव करने के लिए तीन श्रेणियाँ हैं जो कि Transition Tab पर मौजूद होती हैं

  • Subtle (Slight Transitions)
  • Exciting (Strong Transitions)
  • Dynamic Content

एम० एस० पावर प्वांइट में ऐनीमेशन-
ऐनीमेशन पावर प्वांइट प्रैज़नटेशन को अधिक गतिशील बनाने में और जानकारी को और यादगार बनाने में हमारी मदद करती है। ऐनीमेशन के प्रभावों में सबसे आम किस्मों में शामिल हैं-entrances और exits. हम अपने ऐनीमेशन effect के प्रभावों को बढ़ाने के लिए इसमें आवाज़ भी दाखिल कर सकते हैं।

पावर प्वांइट में स्लाइड शो
स्लाइड शो स्लाइडों को शुरू से अंत तक पूरी स्क्रीन पर दिखाने की प्रक्रिया को कहा जाता है। इन स्लाइडों को पहले से निर्धारित क्रम के अनुसार ही दिखाया जाता है।

प्रैज़नटेशन सेव करना
हम अपनी बनाई प्रैज़नटेशन को अपनी आवश्यकता के अनुसार सेव कर सकते हैं।

पावर प्वांइट इसके लिए बहुत सारे विकल्प प्रदान करता है जैसे कि –

  1. प्रैज़नटेशन को PDF फाइल के रूप में सेव करना।
  2. प्रैज़नटेशन को वीडियो के रूप में सेव करना।
  3. पी०पी०टी० ब्रोडकॉस्ट के रूप में सेव करना।
  4. पी०पी०टी० पैकेजिंग।
  5. पासवर्ड लगा कर सेव करना।
  6. पी०पी०टी० ई-मेल स्लाइड शो।

प्रैज़नटेशन को PDF के रूप में सेव करना-
पी०डी०एफ० फाइल के रूप में प्रैजनटेशन को सेव करने के स्टैप हैं-

  1. फाइल टैब में बैक स्टेज PDF पर जायें।
  2. Save As डायलॉग को खोलने के लिए Save As पर क्लिक करें।
  3. फाइल को सही नाम दें।
  4. Supported File Types की लिस्ट में से PDF फाइल टाइप चुनें और Save पर क्लिक करें।
  5. PDF फाइल नियत की जगह में सेव हो जायेगी।

प्रैज़नटेशन को वीडियो के तौर पर सेव करना एक वीडियो फाइल के रूप में प्रैजनटेशन को सेव करने के स्टैप –

  • फाइल टैब में बैक स्टेज view पर जायें।
  • सेव एज़ डायलॉग को खोलने के लिए सेव एज पर क्लिक करें।
  • फाइल को सही नाम दें।
  • सहायक फाइल किस्म की सूची में से फाइल किस्म .wmv चुनें।
  • वीडियो बनाना तुरंत होने वाली प्रक्रिया नहीं है, जैसे कि अन्य फाइल टाइप्स में होता है। पावर प्वाइंट को वीडियो फाइल बनाने की ज़रूरत पड़ती है। हम अपनी प्रैजनटेशन विंडो के नीचे वीडियो बनाने की प्रक्रिया को देख सकते हैं।
  • जब प्रैजनटेशन बनाने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो वीडियो फाइल को नियत जगह पर बन जाती है।

Image फाइल-
Power point बहुत-सी Image फाइलों को स्पोर्ट करता है। जिनमें .jpg, .gif, .tiff, .bmp प्रमुख हैं।

प्रिंटिंग प्रैज़नटेशन-
Power point प्रैज़नटेशन के दर्शकों के लिए नोट्स प्रिंट भी किये जा सकते हैं।

पी.पी.टी. ब्रॉडकास्ट
पी.पी.टी. को एक लिंक की सहायता से ब्रॉडकास्ट किया जा सकता है। यह इंटरनैट द्वारा पूरी दुनिया में उपलब्ध हो जाती है। पी.पी.टी. पैकेजिंग पी.पी.टी. को CD पर सेव करके भी आबंटित किया जा सकता है।

पी. पी. टी दस्तावेज पासवर्ड सैट करना-
कई बार Presentation को सुरक्षित करने के लिए और अनअधिकारिक रीडर स्लाइड को न देख सकें, पावर प्वाइंट यूज़र को Presentation को सुरक्षित करने की योग्यता प्रदान करता है।

  1. फाइल टैब पर बैक स्टेज View पर जायें।
  2.  Info सैक्शन पर Permission ड्राप डाऊन पर क्लिक करें।
  3.  पासवर्ड सुरक्षित करने के लिए ‘Encrypt with Password’ चुनें।
  4. इनक्रिप्ट डाक्यूमैंट डायलॉग ‘Encrypt Document Dialog’ में पासवर्ड डालें।
  5. Confirm Password डायलॉग में पासवर्ड दुबारा डालें।
  6. हमारी Presentation अब पासवर्ड में सुरक्षित है यूज़र को अब फाइल खोलने के लिए पासवर्ड डायलॉग में पासवर्ड देना पड़ेगा।

पी. पी. टी ईमेल स्लाइड शो पावर प्वाइंट यूजरों को Presentation ई-मेल अटैचमैंट के रूप में भी शेयर करने की आज्ञा देता है। हालांकि हम प्रोग्राम के बाहर से Presentation को अटैच कर सकते हैं, पावर प्वाइंट से सीधे ई-मेल भेजने की योग्यता काफी सुविधाजनक है। यह इसलिए है, क्योंकि हमें ई-मेल भेजने के लिए पावर प्वाइंट को बंद करने की ज़रूरत नहीं है।

PSEB 10th Class Computer Notes Chapter 1 ऑफिस टूल्ज़

पावर प्वाइंट से एक ई-मेल भेजने के स्टैप-

  1. फाइल टैब बैक स्टेज View पर जायें।
  2. Save & Send पर क्लिक करें, Send using email आप्शन को चुनें और Send As Attachment बटन पर क्लिक करें।
  3. यह Out look sendmail विंडो को लांच करता है जिसमें Presentation एक अटैचमैंट की तरह जुड़ी होती है। ई-मेलों को जोड़ सकते हैं और ई-मेल भेज सकते हैं।
  4. हम Recipient के ई-मेल भर सकते हैं और E-mail भेज सकते हैं। Send As Attachment चुनने के अलावा अगर हम Send as pdf चुनते हैं तो हम Attachment को .pptx की जगह अटैचमैंट के रूप में भेज सकते हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1

Punjab State Board PSEB 10th Class Maths Book Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 Textbook Exercise Questions and Answers

PSEB Solutions for Class 10 Maths Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1

प्रश्न 1.
आफ़ताब अपनी पुत्री से कहता है, ‘सात वर्ष पूर्व मैं तुमसे सात गुनी आयु का था। अब से 3 वर्ष बाद मैं तुमसे केवल तीन गुनी आयु का रह जाऊँगा।’ (क्या यह मनोरंजक है ?) इस स्थिति को बीजगणितीय एवं ग्राफीय रूपों में व्यक्त कीजिए।
हल :
मान लीजिए आफ़ताब की वर्तमान आयु है = x वर्ष
और आफ़ताब की पुत्री की वर्तमान आयु = y वर्ष

बीज गणितीय स्थिति
प्रश्न की पहली शर्त के अनुसार,
x – 7 = 7 (y – 7) .
या x – 7 = 7y – 49
या x – 7y + 42 = 0

प्रश्न की दूसरी शर्त के अनुसार,
x + 3 = 3 (y + 3)
या x + 3 = 3y + 9
या x-3y – 6 = 0
∴ दो चरो में रैखिक समीकरण युग्म हैं :
x – 7y + 42 = 0
तथा x – 3y – 6 = 0.

आलेखीय स्थिति में
x – 7y + 42 = 0
x = 7y – 42 ……………(1)
y = 5. को (1) में प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है:
x = 7 × 5 – 42
= 35 – 42
= – 7
y = 6 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है:
x = 7 × 6 – 42
= 42 – 42 = 0
y = 7 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है:
x = 7 × 7 – 42
= 49 – 42 = 7

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 1

बिंदुओं A (- 7, 5), B (0, 6), C (7, 7) को आलेखित करने और उन्हें मिलाते हुए रेखा खींचने पर हमें समीकरण x – 7y + 42 = 0 का आलेख प्राप्त होता है।

x – 3y – 6 = 0
x = 3y + 6 ……………(2)
y = 0 को (2), में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है:
x = 3 × 0 + 6
= 0 + 6 = 6
y = 3 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है:
x = 3 × 3 + 6
= 9 + 6 = 15
y = – 2 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर, हमें प्राप्त होता है:
x = 3 × – 2 + 6
= – 6 + 6 = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 2

बिंदुओं D (6, 0), E (15, 3), F (0, – 2) आलेखित करने और उन्हें मिलाते हुए रेखा खींचने पर हमें समीकरण x – 3y – 6 = 0 का आलेख प्राप्त होता है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 3

आलेख से यह स्पष्ट है कि दोनों रेखाएँ G (42, 12) पर प्रतिच्छेद करती हैं।
अत: x = 42 और y = 12 समीकरण-युग्म का हल है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1

प्रश्न 2.
क्रिकट टीम के एक कोच ने ₹ 3900 में 3 बल्ले और 6 गेदें खरीदी। बाद में उसने एक और बल्ला तथा उसी प्रकार की 3 गेदें ₹ 1300 में खरीदी। इस स्थिति को बीजगणितीय तथा ज्यामितिय रूपों में व्यक्त कीजिए।
हल :
मान लीजिए एक बल्ले का मूल्य = ₹ x
एक गेंद का मूल्य = ₹ y

बीज गणितीय हल
प्रश्न की पहली शर्त अनुसार,
3x + 6y = 3900
⇒ x + 2y = 1300
प्रश्न की दूसरी शर्त अनुसार,
1x + 3y = 1300
∴ दो चरों में रैखिक समीकरण-युग्म हैं
x + 2y = 1300
और x + 3y = 1300, उत्तर

आलेखीय स्थिति में
x + 2y = 1300
x = 1300 – 2 ………………(1)
y = 0 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
x = 1300 – 2 × 0
x = 1300
y = 500 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
x = 1300 – 2 × 500
= 1300 – 1000 = 300
y = 650 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
x = 1300 – 2 × 650
= 1300 – 1300 = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 4

बिंदुओं A (1300, 0), B (300, 500) और C (0, 650) को आलेखित करने और उन्हें मिलाते हुए
रेखा खींचने पर हमें समीकरण x + 2 = 1300 का आलेख प्राप्त होता है
अब, x + 3y = 1300
x = 1300 – 3y …………..(2)
y = 0 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
x = 1300 – 3 × 0
= 1300
y = 500 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
x = 1300 – 3 × 500
= 1300 – 1500 = – 200
y = 300 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है :
x = 1300 – 3 × 300
= 1300 – 900 = 400

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 5

बिंदुओं A (1300, 0), E (- 200, 500), F (400, 300) को आलेखित करने और उन्हें मिलाते हुए रेखा खींचने पर हमें समीकरण x + 3y = 1300 का आलेख प्राप्त होता है।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 6

आलेख से यह स्पष्ट हैकि दोनों रेखाएँA (1300, 0) पर प्रतिच्छेद करती हैं।
अतः, x = 1300 और y = 0 दिए गए रैखिक समीकरण-युग्म का हल है।

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प्रश्न 3.
2 kg सेब और 1 kg अंगूर का मूल्य किसी दिन ₹ 160 था। एक महीने बाद 4 kg सेब औ दो kg अंगूर का मूल्य ₹ 300 हो जाता है। इस स्थिति को बीजगणितीय तथा ज्यामितीय रूपों में व्यक्त कीजिए।
हल :
मान लीजिए 1 कि.ग्रा. सेबों का मूल्य = ₹ x
1 कि.ग्रा. अंगूर का मूल्य = ₹y

बीज गणितीय स्थिती में,
प्रश्न की पहली शर्त अनुसार,
2x + 1y = 160
प्रश्न की दूसरी शर्त अनुसार,
4x + 2y = 300
∴ दो चरों वाली रैखिक समीकरण युग्म है
2x + y = 160
और 4x + 2y = 300

आलेखीय स्थिति में
2x + y = 160
2x = 160 – y
x = \(\frac{160-y}{2}\) ………………(1)

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1

x = \(\frac{160-0}{2}=\frac{160}{2}\) = 80

y = 60 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता

x = \(\frac{160-60}{2}=\frac{100}{2}\) = 50
y = 160 को (1) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है

x = \(\frac{160-160}{2}=\frac{0}{2}\) = 0

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1 7

बिंदुओं A (80, 0), B (50, 60), C (0, 160) को आलेखित करने और उन्हें मिलाते हुए रेखा खींचने पर हमें समीकरण
2x + y = 160 का आलेख प्राप्त होता है
4x + 2y = 300
2x + y = 150
2x = 150 – y
x = \(\frac{150-y}{2}\) ……………(2)

y = 0 को (2), में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है

x = \(\frac{150-0}{2}=\frac{150}{2}\) = 75

y = 50 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है

x = \(\frac{150-50}{2}=\frac{100}{2}\) = 50

y = 150 को (2) में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है

x = \(\frac{150-150}{2}=\frac{0}{2}\)
= 0

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बिंदुओं D (75, 0), E (50, 50), F (0, 150) को आलेखित करने और उन्हें मिलाते हुए रेखा खींचने पर हमें समीकरण 4x + 2y = 300 का आलेख प्राप्त होता है।
आलेख से स्पष्ट है कि दोनों रेखाएँ कहीं पर भी प्रतिच्छेद नहीं करती अर्थात् वे समांतर हैं।

PSEB 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.1

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PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मिश्रण तथा यौगिक में भेद लिखें। उत्तर-मिश्रण तथा यौगिक में भेद (Differences between mixture and compound)-

मिश्रण (Mechanical Mixture) यौगिक (Chemical Compound)
(i) मिश्रण के अवयव किसी भी अनुपात में हो सकते हैं। (i) यौगिक के अवयव एक निश्चित अनुपात में होते हैं।
(ii) मिश्रण के गुण उसके अवयवों के गुणों के मध्यवर्ती होते हैं। (ii) यौगिक के गुण उसके अवयवों के गुणों से भिन्न होते हैं।
(iii) मिश्रण भौतिक परिवर्तन का परिणाम है। (iii) यौगिक रासायनिक परिवर्तन का परिणाम है।
(iv) मिश्रण के अवयव पास-पास पड़े हुए दिखाई देते हैं। (iv) यौगिक के अवयव पास-पास पड़े हुए दिखाई नहीं देते हैं।
(v) मिश्रण बनाते समय आयतन में परिवर्तन नहीं है। (v) यौगिक बनाते समय आयतन में परिवर्तन होता होता है।
(vi) मिश्रण बनाते समय ऊर्जा में परिवर्तन नहीं होता है। (vi) जब यौगिक बनाया जाता है, तो ऊर्जा में परिवर्तन होता है।
(vii) यह दो या दो से अधिक पदार्थों के मिलने से बनता है जो रासायनिक रूप से संयोग नहीं करते। (vii) यह दो या दो से अधिक तत्वों के रासायनिक संयोग से बनता है।

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प्रश्न 2.
तत्व और यौगिक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
तत्व और यौगिक में अंतर-

तत्व (Element) यौगिक (Compound)
(i) तत्व को असमान गुण वाले दो या दो से अधिक सरल भागों में नहीं बांटा जा सकता है।

उदाहरण-ऑक्सीजन को भिन्न गुणों वाले सरल भागों में नहीं बांटा जा सकता है।

(i) यौगिक को असमान गुण वाले दो या दो से अधिक सरल भागों में अपघटित किया जा सकता है।

उदाहरण-पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अपघटित किया जा सकता है।

(ii) तत्व के अणु में केवल एक तरह के परमाणु होते हैं।

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(ii) यौगिक के अणु में सदा दो या दो से अधिक तरह के परमाणु होते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 2

(iii) तत्व सभी शुद्ध और अशुद्ध पदार्थों के अवयव हो सकते हैं। (iii) यौगिक केवल अशुद्ध पदार्थों के अवयव हो सकते हैं।

प्रश्न 3.
क्रिस्टलीकरण किसे कहते हैं ? आप फिटकरी के रवे (क्रिस्टल) किस प्रकार प्राप्त करोगे ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण – यह पृथक्करण की वह विधि है जिसके द्वारा किसी द्रव में विलेय अशुद्ध ठोस पदार्थ के विलयन से शुद्ध पदार्थ प्राप्त किया जाता है। शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए गर्म द्रव में जितना भी अशुद्ध पदार्थ घुल सके, घोल लिया जाता है। इसके पश्चात् घोल में से अघुलनशील अशुद्ध पदार्थों को फिल्टर द्वारा छान लिया जाता है। अब संतृप्त गर्म घोल को ठंडा करने पर शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल प्राप्त हो जाते हैं।

फिटकरी के क्रिस्टल (रवे) बनाने की विधि – एक बीकर को लगभग आधा पानी से भरो। इसमें थोड़ासा फिटकरी का पाऊडर डाल कर घोल को गर्म करो। फिटकरी का पाऊडर तब तक डालते जाओ जब तक कि वह घोल घुल सके। गर्म घोल को गिलास में छान लो जैसे कि चित्र में दिखाया गया है। अब गिलास को ठंडा होने दीजिए।
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प्रश्न 4.
एक मिश्रण में से पानी तथा गंधक को कैसे अलग करोगे ?
उत्तर-
पानी तथा गंधक के मिश्रण को बीकर में लो। कीप स्टैंड में कीप को रखो। कीप के नीचे एक साफ़ बीकर रखो। फिल्टर पेपर की इस तरह तहें बनाओ ताकि एक तरफ तीन तथा एक तरफ एक तह हो।
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इसको कीप में रखो। मिश्रण को शीशे की छड़ से धीरे-धीरे कीप में डालो। द्रव या पानी नीचे धीरे-धीरे बीकर में आ जाएगा, जो गंधक से बिल्कुल स्वतंत्र होता है। इस द्रव को फिल्ट्रेट कहते हैं। ठोस गंधक फिल्टर पर शेष रह जाएगा।
फिल्टर पेपर को कीप से आराम से अलग करके गंधक को सुखा लिया जाता है।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित का पृथक्करण कैसे करोगे ?
(i) सरसों के तेल से जल
(i) दूध से क्रीम।
उत्तर-
(i) जल तथा सरसों के तेल के मिश्रण में से अवयवों को पृथक करना – जल तथा सरसों का तेल भारी होने के कारण एकदूसरे में अघुलनशील हैं। इसलिए ये मिश्रण में अलग-अलग पर्ते बना लेते हैं। इन दोनों द्रवों का घनत्व अलग है। सरसों का तेल हल्का होने के कारण ऊपरी पर्त बनाता है परंतु जल निचली पर्त बनाता है। इस अमिश्रणीय द्रवों के मिश्रण को पृथक्कारी कीप में डाल लिया जाता है। कुछ समय के बाद कीप का स्टॉप कॉक खोल दिया जाता है जिससे जल निकल जाता है और शेष कीप में सरसों का तेल बच जाता है।
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(ii) दूध से क्रीम पृथक् करना – इसके लिए अपकेंद्रण विधि का प्रयोग किया जाता है। दूध को एक बंद मुंह वाले बर्तन में डालकर वृत्ताकार पथ पर क्षितिज तल में बड़ी तेज़ गति से घुमाया जाता है जिससे क्रीम हल्की होने के कारण दूध के ऊपर केंद्रीय अक्ष के आस-पास इकट्ठी होकर तैरती रहती है। इसे अलग कर लिया जाता है।

प्रश्न 6.
यौगिक किसे कहते हैं ? यौगिक की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
यौगिक-जब दो या अधिक तत्व परस्पर एक निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग करते हैं, तब वे यौगिक बनाते हैं । किसी यौगिक को उन तत्वों से तोड़ा जा सकता है, जिनसे मिलकर वह बनता है। उदाहरण के लिए, जल का प्रत्येक अणु हाइड्रोजन के दो परमाणुओं तथा ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर बनता है। जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1 होता है। जल एक यौगिक है। यह जल के अणुओं से बनता है। इसी प्रकार सोडियम और क्लोरीन के संयोग से सोडियम क्लोराइड बनता है, जिसे साधारण नमक के नाम से जाना जाता है। यौगिक के गुण, उसमें पाए जाने वाले तत्वों के गुणों से अलग होते हैं, जिनसे मिलकर यह बना है। एक अन्य यौगिक का उदाहरण चीनी है। चीनी का एक अणु कार्बन के 12 परमाणुओं; हाइड्रोजन के 22 परमाणुओं तथा ऑक्सीजन के 11 परमाणुओं से मिलकर बनता है। कार्बन डाइ-ऑक्साइड भी यौगिक है। कार्बन डाइऑक्साइड के प्रत्येक अणु में, कार्बन का एक परमाणु तथा ऑक्सीजन के दो परमाणु होते हैं । यौगिक के गुण उसके अवयव तत्वों से भिन्न होते हैं जैसे हाइड्रोजन जलती है, ऑक्सीजन जलने में सहायता करती है और ये दोनों गैसें हैं, परंतु इन दोनों के संयोग से बना यौगिक, पानी, एक द्रव है तथा यह आग को बुझा देता है।

यौगिक की विशेषताएँ-

  1. यौगिकों का सामांगी संगठन होता है।
  2. यौगिकों के निर्माण में भाग लेने वाले सभी तत्व एक-दूसरे से निश्चित अनुपात में संयुक्त रहते हैं।
  3. यौगिकों के गुण उनके अवयवी तत्वों के गुणों से भिन्न होते हैं।
  4. यौगिकों के अवयवी तत्वों को साधारण विधियों द्वारा अलग-अलग नहीं किया जा सकता है।
  5. यौगिकों के निर्माण या वियोजन में ऊष्मा के रूप में ऊर्जा निकलती है अथवा अवशोषित होती है।

प्रश्न 7.
उत्पत्ति के आधार पर यौगिक कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
उत्पत्ति के आधार पर यौगिकों को दो भागों में बाँटा गया है-

  • अकार्बनिक यौगिक (Inorganic Compound) – वे यौगिक जो पृथ्वी की पर्पटी से प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें अकार्बनिक यौगिक कहते हैं; जैसे-कैल्शियम कार्बोनेट (मारबल), नमक, सोडियम नाइट्रेट और सोडियम कार्बोनेट आदि।
  • कार्बनिक यौगिक (Organic Compound) – वे यौगिक जिनको पौधे और जंतुओं से प्राप्त करते हैं, उन्हें कार्बनिक यौगिक कहते हैं; जैसे-शक्कर, एसीटिक एसिड, स्टार्च, तेल, वसा तथा प्रोटीन आदि इन सभी तत्वों में कार्बन आवश्यक अवयव है।

प्रश्न 8.
मिश्रण किसे कहते हैं? इनकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
मिश्रण – मिश्रण दो या अधिक तत्वों अथवा यौगिकों को किसी भी अनुपात में मिलाने से बनते हैं। मिश्रण में अवयव किसी भी अनुपात में उपस्थित होते हैं तथा मिश्रण में अवयव अपने गुणों को बनाए रखते हैं; जैसे-वायु मिश्रण है। इसमें नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे तत्व, कार्बन डाइऑक्साइड और जल-वाष्प जैसे यौगिक होते हैं। इसके अतिरिक्त वायु में अन्य गैसें तथा धूल के कण भी उपस्थित होते हैं।

मिश्रण की विशेषताएं-

  1. मिश्रण में विभिन्न अवयव किसी भी अनुपात में उपस्थित हो सकते हैं।
  2. मिश्रण के गुण उसके विभिन्न अवयवों के गुणों का अनुपात होता है।
  3. मिश्रण के विभिन्न अवयवों को आसानी से अलग किया जा सकता है।
  4. मिश्रण के निर्माण में ऊष्मा नहीं निकलती है।

प्रश्न 9.
मिश्रण कितने प्रकार के होते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मिश्रण दो प्रकार के होते हैं-
(1) विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixtures)
(2) समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixtures)

1. विषमांगी मिश्रण – वह मिश्रण जिसमें इसके अवयव एक समान रूप से बँटे नहीं होते हैं, असमांग मिश्रण कहलाता है। प्रकृति में पाए जाने वाले मिश्रण अधिकतर असमांग होते हैं । उदाहरण-सल्फर और पोटैशियम नाइट्रेट, मृदा सैंकड़ों यौगिक तथा तत्वों का मिश्रण है। इसकी संरचना एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवर्तित होती है। असमांग मिश्रण के विभिन्न अवयवों को हम अपनी आँखों से देख सकते हैं।

2. समांगी मिश्रण – वह मिश्रण जिसमें इसके अवयव एक समान बँटे होते हैं, समांग मिश्रण कहलाते हैं। जल में शक्कर का विलयन एक समांग मिश्रण है। वायु, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल-वाष्प का समांग मिश्रण है। समुद्री जल, लवण विलयन, शरबत, दूध, फलों का रस, आइसक्रीम, विलयन के रूप में दवाइयाँ, कैरोसीन आदि समांग मिश्रण के अन्य उदाहरण हैं।

मिश्रण का प्रकार उदाहरण
1. गैस में गैस वायु
2. द्रव में गैस सोडा वाटर, जल जिसमें ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड हैं।
3. द्रव में द्रव नींबू का रस तथा जल, जल तथा एल्कोहल।
4. द्रव में ठोस समुद्री जल, चीनी का जलीय विलयन।
5. ठोस में ठोस मसालों का मिश्रण, मिट्टी, मिश्र धातु।

आयरन तथा सल्फर तत्व हैं । चूर्ण के रूप में इन दोनों तत्वों को किसी भी अनुपात में मिलाने पर इनका मिश्रण बनता है, परंतु जब इन दोनों तत्वों के एक निश्चित अनुपात से बने मिश्रण को बहुत अधिक गर्म करते हैं, तब एक नया पदार्थ आयरन सल्फाइड बन जाता है। गर्म करने पर दो तत्व आयरन तथा सल्फर रासायनिक अभिक्रिया करके आयरन सल्फाइड यौगिक बनाते हैं। आयरन सल्फाइड यौगिक में आयरन तथा सल्फर का कोई गुण नहीं पाया जाता है, जबकि आयरन और सल्फर के मिश्रण में अपने अवयव आयरन और सल्फर दोनों के ही सभी गुण पाए जाते हैं।

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प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए कि वायु मिश्रण है, यौगिक नहीं।
उत्तर-
निम्नलिखित तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि वायु एक मिश्रण है-

  • वायु बहुत-सी गैसों का मिश्रण है। इनमें से मुख्य नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल-वाष्य हैं, जो कि अपने व्यक्तिगत गुण रखती हैं।
  • वायु की संरचना स्थान-स्थान पर परिवर्तित होती है। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन मोनो-ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, धुएँ के कण आदि अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। इसी प्रकार अधिक ऊँचाइयों पर जैसे पर्वतों पर वायु में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इस प्रकार वायु की संरचना विषमांग होती है।
  • जलने के दौरान केवल ऑक्सीजन प्रयुक्त होती है, अन्य गैसें नहीं।
  • वायु को बहुत कम ताप पर ठंडा करके ऑक्सीजन या नाइट्रोजन को पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 11.
विलयन किसे कहते हैं ? इसके गुण धर्म लिखिए।
उत्तर-
विलयन-दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है। नींबू जल, सोडा जल आदि इस के उदाहरण हैं। प्रायः विलयन को ऐसे तरल पदार्थ के रूप में माना जाता है जिसमें ठोस, द्रव या गैस मिला हो पर ठोस विलयन मिश्र धातु और गैसीय विलयन वायु भी होती है। एक विलयन के कणों में समांगीकता होती है।

विलयन के गुण धर्म-

  1. यह एक समांगी मिश्रण है।
  2. इसके कण 1 nm (10-10 m) से भी छोटे होते हैं।
  3. इसके कणों को नंगी आँख से देखा नहीं जा सकता।
  4. ये टिंडल प्रभाव नहीं दिखाते।
  5. इसके कण नीचे नहीं बैठते।

प्रश्न 12.
वायु से विभिन्न गैसों को किस प्रकार प्राप्त किया जाता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
वायु समांगी मिश्रण है जिसके विभिन्न घटकों को प्रभाजी आसवन से प्राप्त किया जा सकता है। पहले वायु पर दबाव बढ़ा कर उसे संपीडित किया जाता है और तापमान कम करके ठंडा किया जाता है। द्रवित वायु को प्रभाजी आसवन स्तंभ में धीरे-धीरे गर्म कर गैसों को भिन्न-भिन्न ऊँचाई पर प्राप्त कर लिया जाता है।
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प्रश्न 13.
धातुओं और अधातुओं के गुणों में अंतर लिखिए।
उत्तर-

धातुएं (Metals) अधातुएं (Non-Metals)
(1) धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परंतु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है। (1) अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2 गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं।
(2) धातुएँ तन्य तथा आघातवर्ध्य होती हैं। (2) वे प्रायः भंगुर होती हैं।
(3) धातुएँ प्राय: चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती है। (3) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती। अपवाद-ग्रेफाइट, आयोडीन तथा हीरा।
(4) धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत् की सुचालक होती हैं। अपवाद-बिस्मथ। (4) सभी अधातुएं कुचालक हैं। अपवाद-ग्रेफाइट और गैस कार्बन।
(5) धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं। (5) अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं।
(6) धातुएँ अधिकांशतः कठोर होती हैं अपवाद-सोडियम तथा पोटाशियम चाकू से काटी जा सकती है। (6) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।
(7) धातुओं का आपेक्षित घनत्व अधिक होता है परंतु Na, K इसके अपवाद हैं। (7) अधातुओं का आपेक्षित ताप प्रायः कम होता है।
(8) धातुएँ अपारदर्शक होती हैं। (8) गैसीय अधातुएं पारदर्शक हैं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मिश्र धातुओं को मिश्रण क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
मिश्र धातुएं समांगी मिश्रण होती हैं। इन्हें भौतिक क्रिया से अवयवों में अलग-अलग नहीं किया जा सकता है। ये अपने घटकों के गुणों को प्रकट करते रहते हैं। पीतल, कांसा, स्टील आदि मिश्र धातु हैं।

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प्रश्न 2.
रंग वाले घटक (डाई) को नीले या काले रंग की स्याही से पृथक् करना।
उत्तर-
कार्य विधि – एक बीकर को जल से आधा भरो। बीकर के मुंह पर वाच-ग्लास रखकर उस पर कुछ बूंदें स्याही डालो। बीकर को गर्म करना आरंभ करो। वाच ग्लास से वाष्पीकरण होने लगेगा और वाच ग्लास पर डाई का अवशेष बच जाएगा। इससे सिद्ध होगा कि स्याही डाई का पानी में मिश्रण है।
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प्रश्न 3.
परख करना कि काली स्याही में डाई एक ही रंग की नहीं होती है।
उत्तर-
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कार्य विधि-फिल्टर पेपर की एक पतली परत लो। इसके निचले किनारे से 3 cm ऊपर पैंसिल से एक रेखा खींच लें। उस रेखा के बीच में पानी में घुलनशील
काली स्याही की एक बूंद रखें। इसे सूखने दें। फिल्टर पेपर को चित्रानुसार रखें और बिना हिलाए छोड़ दो। पानी फिल्टर पेपर पर ऊपर चढ़ने लगेगा। उस पर अलग-अलग रंग आ जाएंगे। इससे सिद्ध होता है कि काली स्याही अनेक रंगों की बनी होती है।

प्रश्न 4.
अपकेंद्रण यंत्र का प्रयोग कहाँ किया जाता है ? इस प्रक्रिया का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर-
अपकेंद्रण यंत्र का प्रयोग प्रयोगशालाओं में रक्त और मूत्र की जाँच में किया जाता है। डेयरी और घर में क्रीम से मक्खन निकालने तथा वाशिंग मशीनों में इस का प्रयोग किया जाता है। जब कभी किसी द्रव में मौजूद ठोस कण इतने छोटे होते हैं कि ये छानक पत्र से बाहर चले आते हैं । इन कणों को पृथक् करने के लिये छानन विधि का प्रयोग नहीं किया जाता है। ऐसे मिश्रणों को अपकेंद्रण के द्वारा पृथक् किया जाता है। इस सिद्धांत के आधार पर जब मिश्रण को तेजी से घुमाया जाता है, तब भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर ही रुक जाते हैं।

प्रश्न 5.
क्रोमैटोग्राफ़ी क्या है ? इसका उपयोग किन क्षेत्रों में किया जाता है ?
उत्तर-
क्रोमैटोग्राफ़ी किसी मिश्रण से घटकों को पृथक करने की विधि है। इस विधि से रंगों को पृथक किया जाता है। इसका प्रयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक् करने में होता है जो एक ही तरह के विलायक में घुले होते हैं। इस का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता है-

  1. डाई के रंगों को अलग करने में।
  2. रक्त से दवा को पृथक् करने में।
  3. प्राकृतिक रंगों से रंग को पृथक करने में।
  4. मूत्र से चीनी को पृथक् करने में।

प्रश्न 6.
किसी अशुद्ध नमूने में से शुद्ध CuSO4 प्राप्त करना।
उत्तर-
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कार्य-विधि – चीनी मिट्टी की एक प्याली । में थोड़ा अशुद्ध CuSO4 लो। इसे न्यूनतम मात्रा में लिए गए पानी में घोल लो। अशुद्धियों को छानकर प्याली को गर्म करो। प्याली में नीले रंग के क्रिस्टल दिखाई देंगे। ये सभी क्रिस्टल एक समान दिखाई देंगे। इन्हें छानकर अलग कर लो।
इस प्रकार CuSO4 के संतृप्त विलयन से शुद्ध CuSO4 को प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
भौतिक परिवर्तन – ये अस्थाई होते हैं जिनमें केवल भौतिक अवस्था में परिवर्तन होता है। इन परिवर्तनों में रासायनिक परिवर्तन नहीं होते और इन्हें मूल अवस्था में बदला जा सकता है। उदाहरण-पानी को भाप या बर्फ में बदलना, चीनी को पानी में घोलना।

रासायनिक परिवर्तन – ये स्थाई होते हैं जिनमें भौतिक परिवर्तन के साथ रासायनिक परिवर्तन भी होते हैं। इन्हें मूल अवस्था में नहीं लाया जा सकता। उदाहरण-लोहे को जंग लगना, मैग्नीशियम तार को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाना, मोमबत्ती का जलना।

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प्रश्न 8.
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में अंतर लिखिए।
उत्तर-
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में अंतर-

भौतिक परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन
(1) यह अस्थायी परिवर्तन होता है। (1) यह स्थायी परिवर्तन होता है।
(2) इनमें केवल भौतिक अवस्था, रंग, घनत्व आदि गुणों में अंतर होता है। (2) इनमें नया रासायनिक पदार्थ बन जाता है।
(3) मूल पदार्थ की प्राप्ति सरलता से हो जाती है। (3) मूल पदार्थ की प्राप्ति सरलता से नहीं होती।
(4) रासायनिक गुणों में परिवर्तन नहीं होता। (4) रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है।
(5) पदार्थों के संघटन में परिवर्तन नहीं होता। (5) पदार्थों के संघटन में परिवर्तन होता है।
(6) उदाहरण-बर्फ पिघलना, जल में नमक का घुलना। (6) उदाहरण-जंग लगना, कागज़ का जलना।

प्रश्न 9.
मोमबत्ती के जलने पर भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों होते हैं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जब मोमबत्ती जलती है तो मोम पिघलती है। मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है। जब मोमबत्ती वायु की उपस्थिति में जलती है तो जल वाष्प और CO2 गैस बनती है। जल वाष्पों और CO2 के गुण मोमबत्ती से भिन्न होते हैं, इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 10.
तत्व किसे कहते हैं ? तत्वों की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
फ्रांस के रसायनज्ञ लैवाइज़र ने पहली बार प्रमाणित किया था कि द्रव्य का सरलतम रूप तत्व है। इसे दो या दो से अधिक भागों में भौतिक या रासायनिक विधि से नहीं बांटा जा सकता। यह एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिल कर बना होता है। हर तत्व के परमाणु दूसरे तत्व से भिन्न होते हैं। तत्वों को धातु, अधातु और उपधातु में बांटा जाता है। सोना, चांदी, लोहा, तांबा आदि धातु हैं; हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, ब्रोमीन आदि अधातु हैं तथा आर्सेनिक, एंटीमनी, बिस्मथ आदि उपधातु हैं। तत्वों को इस विश्व की रचना का आधार माना जाता है। अब तक कुल 112 तत्वों की प्राप्ति हो चुकी है जिन में से 92 प्रकृति द्वारा प्रदत्त हैं तथा शेष 20 मानव-निर्मित हैं। तत्वों में धातुएं तथा अधातुएं सम्मिलित हैं-

धातुएं प्रायः दिए हुए निम्न गुणधर्मों में से सभी को या कुछ को प्रदर्शित करती हैं।

  1. ये चमकीली होती हैं।
  2. ये चाँदी जैसी सफ़ेद या सोने की तरह पीले रंग की होती हैं।
  3. ये ताप तथा विद्युत् की सुचालक होती हैं।
  4. ये तन्य होती हैं (और इनको तार के रूप में खींचा जा सकता है)।
  5. ये आघातवर्ध्य होती हैं। इनको पीटकर महीन चादरों में ढाला जा सकता है।
  6. ये प्रतिध्वनिपूर्ण होती हैं।

सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, सोडियम, पोटैशियम इत्यादि धातु के उदाहरण हैं। पारा धातु होते हुए भी कमरे के तापमान पर द्रव है।
अधातुएँ दिए गए निम्न गुणों में से प्रायः कुछ को या सभी को प्रदर्शित करती हैं :

  1. ये विभिन्न रंगों की होती हैं।
  2. ये ताप और विद्युत् की कुचालक होती हैं।
  3. ये चमकीली, प्रतिध्वनिपूर्ण और आघातवर्ध्य नहीं होती हैं।

प्रश्न 11.
द्रव की विभिन्न अवस्थाओं के आधार पर समांगी और विषमांगी मिश्रणों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-

मिश्रण समांगी (Homogeneous) विषमांगी (Heterogeneous)
1. ठोस में ठोस पीतल, कांसा, गनमैटल आदि विभिन्न मिश्रधातु रेत कण + लोह चूर्ण, रेत + अमोनियम क्लोराइड
2. ठोस में द्रव पारे में सोना ×
3. ठोस में गैस पैलेडियम में हाइड्रोजन ×
4. द्रव में ठोस पानी में चीनी पानी में मिट्टी, पानी में चॉक
5. द्रव में द्रव इथाइल एल्कोहल में पानी पानी में तेल
6. द्रव में गैस पानी में कार्बन डाइऑक्साइड ×
7. गैस में गैस वायु ×

प्रश्न 12.
वायुमंडल में कुछ धात्विक कण जैसे कैडमियम, जिंक, पारा आदि कैसे निर्मक्त होते हैं ?
उत्तर-
वायुमंडल में कुछ धात्विक कण जैसे कैडमियम, जिंक, पारा आदि जिंक, तांबे, सीसे तथा स्टील के शोधन के दौरान निर्मुक्त होते हैं। ये कण पीड़कनाशियों, फॉस्फेट उर्वरकों, फंगसनाशियों तथा श्रृंगार प्रसाधनों के उत्पादन या उपयोग के दौरान भी निर्मुक्त होते रहते हैं।

प्रश्न 13.
विलेय, विलायक तथा विलयन की परिभाषाएं बताओ।
उत्तर-
कुछ पदार्थ द्रव में घुल जाते हैं जैसे चीनी पानी में घुल जाती है। अमोनियम क्लोराइड तथा कॉपर सल्फेट भी पानी में घुल जाते हैं। ठोस पदार्थों को, जो द्रव में घुल जाते हैं, विलेय कहलाते हैं। वे द्रव जिसमें ठोस पदार्थ घुल जाते हैं, विलायक कहलाते हैं। विलेय तथा विलायक के बने समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं। नमक तथा पानी के मिश्रण को विलयन कहते हैं, नमक विलेय तथा पानी विलायक कहलाता है।

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प्रश्न 14.
जलीय और अजलीय विलयन में अंतर दीजिए।
उत्तर-
जलीय विलयन – विभिन्न पदार्थों के जल में घोल कर बनाए गए विलयनों को जलीय विलयन कहते हैं। जलीय विलयन में विलायक जल होता है।

उदाहरण – नमक का जल में विलयन, कॉपर सल्फेट का जल में विलयन।

अजलीय विलयन – कुछ पदार्थ जल में नहीं घुलते परंतु कार्बनिक द्रवों में घुलकर विलयन बनाते हैं। ऐसे विलयन को अजलीय विलयन कहते हैं। इसमें विलायक प्रायः एल्कोहल, एसीटोन, टेट्राक्लोराइड कार्बन सल्फाइड तथा बेंजीन आदि होते हैं।

उदाहरण-एल्कोहल में आयोडीन का घोल, नैफ्थलीन का बेंजीन में घोल।

प्रश्न 15.
संतृप्त विलयन तथा असंतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
संतृप्त विलयन – किसी विशेष ताप पर किसी विलयन में जब और अधिक विलेय न घुल सकें तो वह विलयन संतृप्त विलयन कहलाता है।

असंतृप्त विलयन – ऐसा घोल जिसमें किसी निश्चित ताप पर विलेय की मात्रा उस अधिकतम मात्रा से कम होती है तो उस ताप पर उसके द्वारा घोली जा सकती है, असंतृप्त विलयन कहलाता है। यदि कोई विलयन किसी निश्चित ताप पर संतृप्त हैं, ताप को बढ़ाने पर असंतृप्त हो जाता है।

प्रश्न 16.
वास्तविक विलयन (True solution) क्या होता है ? इसकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
वह विलयन जिसमें विलेय के कणों का आकार 10-8 सेमी० तक होता है। इसमें विलेय के कण विलायक के अणुओं के मध्य स्थानों में लुप्त हो जाते हैं। ऐसा विलयन समांगी मिश्रण होता है। इसमें विलेय कणों को परिक्षेपण कण तथा विलायक कणों को परिक्षेपण माध्यम कहते हैं। उदाहरण-नमक तथा चीनी के जलीय विलयन।

विशेषताएं-
(I) वास्तविक विलयन साफ़ और पारदर्शी होता है।
(II) यह समांगी मिश्रण होता है।
(III) इसके कणों का आकार 10-8 सेमी० तक होता है।
(IV) इसे स्थिर करने पर भी कण नीचे नहीं बैठते।
(V) यह प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of light) नहीं करते।
(VI) इन्हें छान कर अलग नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 17.
निलंबन (Suspension) किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
निलंबन- यह किसी विलेय और विलायक का विषमांगी मिश्रण होता है जिसमें विलेय के कणों का आकार 10-5 सेमी० से बड़ा होता है।
विशेषताएं-
(I) निलंबन विषमांगी मिश्रण होता है।
(II) इसमें मिले कणों को सरलता से सूक्ष्मदर्शी के द्वारा देखा जा सकता है।
(III) इसे फिल्टर पेण की सहायता से सरलतापूर्वक छाना जा सकता है।
(IV) निलंबन को कुछ देर स्थिर रखने पर कण द्रव से अलग हो कर नीचे बैठ जाते हैं।

प्रश्न 18.
कोलाइडी विलयन (Colloidal Solution) किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
कोलाइड – यह एक विलयन है जिसमें विलेय के पदार्थ के कणों का आकार 10-7 सेमी० और 10-5 सेमी० के बीच होता है अर्थात् पदार्थ विलयन और निलंबन के बीच होता है । कोलाइडी विलयन को सॉल (Sols) भी कहते हैं। रक्त, टूथपेस्ट, साबुन का घोल, जेम, कोहरा आदि कोलाइडी विलयन के उदाहरण हैं।
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विशेषताएं-
(I) कोलाइडी विलयन समांगी प्रतीत होते हैं पर वास्तव में वे विषमांगी होते हैं।
(II) कोलाइडी कणों को फिल्टर पेपर से छान कर अलग नहीं किया जा सकता।
(III) कोलाइडी कण स्थिर अवस्था में रखे जाने पर भी तल पर नीचे नहीं बैठते।
(IV) कोलाइडी कण ब्राऊनी गति प्रकट करते हैं।
(V) कोलाइडी विलयन टिंडल प्रभाव दिखाते हैं।
चित्र-कोलाइडी कणों की ब्राऊनी गति
(VI) कोलाइडी कणों पर ऋण या घन आवेश होता है जिस कारण वैद्युत्-कण-संचालन का गुण प्रकट करते हैं।

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प्रश्न 19.
बताओ क्या होता है जब प्रकाश किरण पुंज कोलाइडी विलयन में से गुजरता है ?
उत्तर-
कोलाइडी विलयन में से जब तेज प्रकाश किरण पुंज को (साबुन के विलयन) अंधेरे कमरे में पड़ी बीकर में रख कर गुज़ारा जाता है तो इसका पथ प्रकाशित दिखाई देता है। प्रकाश का पथ इसलिए दिखाई देता है कि इसके कणों द्वारा प्रकाश प्रकीर्णन सब दिशाओं में होता है।
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यह प्रकीर्णन प्रकाश हमारी आंखों में प्रवेश करता है जिससे प्रकाश का पथ दिखाई देता है। इसे ‘टिंडल प्रभाव’ कहते हैं।

प्रश्न 20.
कुछ कोलाइडों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
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प्रश्न 21.
कोलाइड तथा निलंबन में अंतर लिखो।
उत्तर-
कोलाइड और निलंबन में अंतर-

कोलाइड (Colloidal) निलंबन (Suspension)
(i) कोलाइड के कणों को सरलता से नहीं देखा जा सकता। (i) निलंबन के कणों को सरलता से देखा जा सकता है।
(ii) कोलाइड के कणों को छान करके अलग किया नहीं किया जा सकता है। (ii) निलंबन के कणों को छान करके अलग किया जा सकता है।
(iii) कोलाइड के कणों का माप 10-7 सें० मी० से 10-5 सें० मी० होता है। (iii) निलंबन के कणों का माप 10-5 से० मी० या इससे अधिक होता है।
(iv) कोलाइड को काफ़ी स्थान तक स्थिर रखने पर भी इनके कण नीचे नहीं बैठते। (iv) निलंबन को काफ़ी समय तक स्थिर रखने पर इसके कण नीचे बैठ जाते हैं।

प्रश्न 22.
एक विलयन के 320 g विलायक जल में 40 g साधारण नमक विलेय है। विलयन की सांद्रता का परिकलन करें।
हल :
विलेय पदार्थ (नमक) का द्रव्यमान = 40g
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 320g
हम जानते हैं,
विलयन का द्रव्यमान = विलेय पदार्थ का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान
= 40 g + 320 g
= 360g
विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत
= PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 13 × 100
= \(\frac{40}{360}\) × 100 = 11.1%

प्रश्न 23.
विलयन की सांद्रता को किस प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है ?
उत्तर-
विलायक की सांद्रता किसी विलायक में विलेय की आपेक्षिक मात्रा होती है। यदि विलेय की मात्रा विलायक की अपेक्षा कम हो तो इसे तनु विलयन कहते हैं और विलेय की मात्रा अधिक होने की अवस्था में उसे सांद्र विलयन कहते हैं। विलयन की सांद्रता को निम्नलिखित ढंग से प्रदर्शित किया जा सकता है-

(i) विलयन की शक्ति – इसके अंतर्गत एक लिटर विलयन में उपस्थित विलेय की ग्राम संख्या को जाना जाता है, इसीलिए इसे ग्राम/लिटर इकाई से प्रदर्शित किया जाता है।
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(ii) प्रतिशतता
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प्रश्न 24.
निम्नलिखित शब्दों की परिभाषा बताओ-
1. आसवन
2. ऊर्ध्वपातन
3. अपकेंद्रण।
उत्तर-
1. आसवन – वह विधि जिसमें एक द्रव को उबाल कर वाष्पों में परिवर्तित किया जाता है और उन वाष्पों को ठंडा करके शुद्ध द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।

2. ऊर्ध्वपातन – वह विधि जिसमें कोई ठोस गर्म करने पर सीधे गैसीय अवस्था में बिना द्रवीय अवस्था में बदले परिवर्तित हो जाता है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है।

3. अपकेंद्रण – इस विधि द्वारा किसी द्रव में निलंबित ठोस पदार्थ के कणों को पृथक किया जाता है। इसमें मिश्रण को वृत्ताकार पथ में क्षैतिज तल में तेज़ी से घुमाया जाता है।

प्रश्न 25.
चार ऐसी उदाहरण दीजिए जिसमें पानी में मिले अवयवों को अपकेंद्रण विधि से अलग किया जाता है।
उत्तर-
पानी से मिले अवयवों को अपकेंद्रण विधि द्वारा अलग करने के उदाहरण-

  1. रुधिर से रुधिर कोशिकाओं को अलग करना।
  2. पेशाब में मिले ठोस पदार्थों को अलग करना।
  3. चीनी की फैक्टरियों में गन्ने के रस से चीनी रवों को अलग करना।
  4. दूध से मक्खन को अलग करना।

प्रश्न 26.
जब हवा में कपूर की गोलियां रखी जाती हैं, तो वे कुछ देर बाद गायब क्यों हो जाती हैं ?
उत्तर-
कपूर ऊर्ध्वपातीय पदार्थ है। जब इनकी गोलियों को हवा में रखा जाता है, तो वे सीधे वाष्प में बदल जाती हैं। अत: कुछ समय बाद वे गायब हो जाती हैं।

प्रश्न 27.
दही से मक्खन को अलग करने के लिए, दही का मंथन क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
जब दही मथा जाता है तो मक्खन के कण अपकेंद्रीय बल द्वारा अलग हो जाते हैं। अब क्योंकि मक्खन के कण शेष कणों से हल्के होते हैं अतः वे लस्सी पर तैरते रहते हैं और आसानी से अलग किये जा सकते हैं। इसलिए दही का मक्खन दही से अलग करने के लिए मंथन किया जाता है।

प्रश्न 28.
तुम पानी से मूंगफली का तेल किस प्रकार पृथक् करोगे ?
उत्तर-
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मूंगफली के तेल तथा पानी को उनके मिश्रण से पृथक करना – मूंगफली का तेल तथा पानी अमिश्रणीय द्रव हैं। ये द्रव मिश्रण में अलग-अलग पर्ते बना लेते हैं, क्योंकि मूंगफली का तेल, पानी की अपेक्षा हल्का है। इस मिश्रण के अवयवों को पृथक्कारी कीप की सहायता से अलग किया जा सकता है। इस मिश्रण को पृथक्कारी कीप में डाला जाता है।

कुछ समय के पश्चात् मूंगफली का तेल ऊपरी पर्त तथा पानी निचली पर्त बना लेता है। अब पृथक्कारी कीप का स्टॉप कॉक खोल कर पानी अलग कर लिया जाता है जबकि मूंगफली का तेल कीप में रह जाता है।

प्रश्न 29.
दो घुलनशील पदार्थों के मिश्रण को कैसे पृथक् किया जा सकता है ? नमक के घोल में से शुद्ध पानी को कैसे अलग किया जाता है ?
उत्तर-
जिन पदार्थों के मिश्रण को विघटन हुए बिना उबाला जा सकता है और जिनके क्वथनांकों के मध्य अंतर अधिक होता है, उन्हें आसवन विधि से अलग-अलग किया जा सकता है। ऐसीटोन और जल के मिश्रण को आसवन विधि से अलग-अलग किया जा सकता है । एल्कोहल और जल के मिश्रण को भी इसी विधि से पृथक किया जा सकता है। नमक के घोल से शुद्ध पानी को प्राप्त करने के लिए हम आसवन विधि का प्रयोग करते हैं।

आसवन विधि – रिटार्ट में नमक का घोल लिया जाता है। रिटार्ट का मुंह ढक्कन से बंद कर दिया जाता है तथा इसकी गर्दन ठंडे पानी में रखी फ्लास्क में फिट की जाती है। एक गीला कपड़ा फ्लास्क के ऊपर रखा जाता है और इसका ध्यान रखा जाता है कि कपड़ा गीला रहे।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 17

रिटार्ट में पड़े घोल को अब गर्म किया जाता है। कुछ देर बाद पानी उबलना शुरू कर देता है तथा इस तरह बनी भाप फ्लास्क में से गुजरती है। फ्लास्क में भाप ठंडी होकर पानी के बुलबुलों में परिवर्तित हो जाती है जो फ्लास्क में एकत्रित हो जाती है। इस तरह एकत्रित पानी शुद्ध होता है।

प्रश्न 30.
नमक से कपूर को अलग करने की विधि का नाम बताओ।
उत्तर-
नमक तथा कपूर में से कपूर ऊर्ध्वपातीय पदार्थ है। इसलिए दिए गए मिश्रण में से दोनों अवयवों को ऊर्ध्वपातन विधि द्वारा अलग कर सकते हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

प्रश्न 31.
आयोडीन तथा रेत को उनके मिश्रण से आप किस प्रकार पृथक करेंगे ?
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 18
आयोडीन एक ऐसा पदार्थ है जो गर्म करने पर ठोस अवस्था से गैसीय अवस्था में आ जाता है जबकि रेत यह गुण नहीं दर्शाता। अत: रेत तथा आयोडीन के मिश्रण में से उनको अलग करने के लिए ऊर्ध्वपातन की विधि उपयोग में लाई जाती है।

विधि – दिए गए मिश्रण को पार्सिलेन डिश में डालकर तिकोने स्टैंड पर रखो । अब कांच की कीप को चित्र की भांति पार्सिलेन डिश पर उल्टा करके रखो। कीप का मुंह रूई से बंद कर दीजिए। डिश को तब तक गर्म करिए जब तक कि मिश्रण में से धुआं निकलना न बंद हो जाए। अब गर्म करना बंद कर दें और उसे ठंडा होने दें। आप कीप की सतह पर पीले रंग का ठोस आयोडीन जमा हुआ देखेंगे जबकि पार्सिलेन डिश में केवल रेत बच जाएगा।

प्रश्न 32.
तुम्हें रेत, पानी तथा सरसों के तेल का मिश्रण दिया गया है। तुम मिश्रण के अवयवों को किस प्रकार अलग करोगे ?
उत्तर-
दिए गए मिश्रण को किसी बर्तन में डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दें। आप देखेंगे कि रेत अघुलनशील तथा भारी होने के कारण बर्तन की तली में बैठ जाएगी। अब पानी तथा सरसों के तेल के अमिश्रणीय घोल को सावधानीपूर्वक किसी दूसरे बर्तन में उंडेल (अर्थात् निथार) लें। अब पानी तथा सरसों के तेल के अमिश्रणीय घोल को पृथक्कारी कीप में डाल लें। सरसों का तेल तथा पानी अलग-अलग परतें बना लेंगे। अब स्टॉप कॉक को खोल कर पानी तथा सरसों के तेल को पृथक् कर लें।

प्रश्न 33.
प्रभाजी आसवन विधि का प्रयोग किस अवस्था में किया जा सकता है ? चित्र बनाकर इस विधि को समझाइए।
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 19
जब दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों के क्वथनांक का अंतर 25 K से कम होता है, तो मिश्रण को प्रभाजी आसवन विधि से अलग किया जा सकता है। वायु की विभिन्न गैसों का पृथक्करण इसी विधि से किया जाता है। पेट्रोलियम उत्पादों से उनके विभिन्न उत्पादों को प्रभाजी आसवन विधि से प्राप्त किया जाता है।

प्रभाजी आसवन विधि का उपकरण साधारण आसवन विधि की तरह ही होता है। केवल आसवन फ़्लास्क और संघनक के बीच एक प्रभाजी स्तंभ का प्रयोग किया जाता है। साधारण प्रभाजी आसवन में एक नली का प्रयोग किया जाता है, जो शीशे के गुटकों से भरी होती है, जो वाष्प को ठंडा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करती है।

प्रश्न 34.
आसवन और प्रभाजी आसवन में अंतर लिखिए।
उत्तर-

आसवन प्रभाजी आसवन
1. मिश्रण को भिन्न-भिन्न ताप पर गर्म करने से अवयव प्राप्त होते हैं। 1. प्रभावी स्तंभ की अलग-अलग ऊँचाइयों से भिन्न-भिन्न प्रभाजी प्राप्त होते हैं।
2. मिश्रण को सबसे कम तापमान पर उबलने वाले अवयव के क्वथनांक पर गर्म किया जाता है। 2. मिश्रण को सबसे अधिक क्वथनांक वाले द्रव के क्वथनांक तक गर्म किया जाता है।
3. इस क्रिया से एक ही बार में शुद्ध अवयव प्राप्त नहीं होता है। 3. इस क्रिया से एक ही बार में शुद्ध अवयव प्राप्त हो जाता है।
4. मिश्रण को बार-बार भिन्न उबाल बिंदुओं तक गर्म करना पड़ता है। 4. मिश्रण को एक ही बार गर्म कर वाष्पित अवस्था में लाना पड़ता है।
5. मिश्रण में एक बार में केवल एक ही अवयव का वाष्पन होता है। 5. वाष्पित किए जाने वाले मिश्रण से एक साथ सभी अवयव वाष्पित होते हैं।
6. मिश्रण के वाष्पों को निकास नली से गुजार कर संघनित किया जाता है। 6. मिश्रण को गर्म करने के बाद वाष्पों को प्रभाजी स्तंभ तक भेजा जाता है।
7. जिन द्रवों के क्वथनांक में 25K से अधिक अंतर हो। उन्हीं के लिए आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है। 7. 25 K से कम क्वथनांक के घुलनशील पदार्थों के मिश्रण के लिए ही इस विधि का उपयोग होता है।

प्रश्न 35.
संघटन के आधार पर पदार्थ का वर्गीकरण आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
संघटन के आधार पर पदार्थ का वर्गीकरण-
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PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

प्रश्न 36.
पीने योग्य पानी को जल स्रोतों से प्राप्त करने के क्रमों का चित्र बनाइए।
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 21

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
शुद्ध पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वह पदार्थ जिसमें विद्यमान सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हों, उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं ।

प्रश्न 2.
मिश्रण किस से बनता है ?
उत्तर-
मिश्रण एक या एक से अधिक शुद्ध तत्वों या यौगिकों के मिलने से बनता है।

प्रश्न 3.
जल में घुले नमक (NaCl) के मिश्रण को किस विधि से अवयवों में पृथक् कर सकते हैं ?
उत्तर-
आसवन विधि से।

प्रश्न 4.
समांगी मिश्रण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जल में नमक, जल में चीनी।

प्रश्न 5.
विषमांगी मिश्रण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
नमक और लोहे की छीलन, नमक और गंधक।

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प्रश्न 6.
जल और तेल कैसा मिश्रण है-समांगी अथवा विषमांगी ?
उत्तर-
विषमांगी मिश्रण।

प्रश्न 7.
विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है।

प्रश्न 8.
किसी ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
मिश्रधातु-पीतल, कांसा, बैल मेटल।

प्रश्न 9.
किसी गैसीय विलयन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
वायु।

प्रश्न 10.
पीतल मिश्रधातु के कौन-कौन से अवयव हैं ?
उत्तर-
जिंक और कॉपर।

प्रश्न 11.
विलायक क्या है ?
उत्तर-
विलयन का वह घटक जिस की मात्रा दूसरे से अधिक होती है और जो दूसरे घटक को विलयन में मिलाता है उसे विलायक कहते हैं।

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प्रश्न 12.
विलयन क्या है ?
उत्तर-
विलयन का वह घटक जो कम मात्रा में होता है और विलायक में घुला होता है उसे विलय कहते हैं।

प्रश्न 13.
जल में चीनी के घोल में विलेय और विलायक के नाम लिखिए।
उत्तर-
चीनी विलेय और जल विलायक है।

प्रश्न 14.
टिंक्चर आयोडीन में विलेय और विलायक के नाम लिखिए।
उत्तर-
आयोडीन विलेय और एल्कोहल विलायक हैं।

प्रश्न 15.
वातयुक्त पेय (सोडा जल, कोक आदि) में विलेय और विलायक के नाम लिखिए।
उत्तर-
कार्बन डाइऑक्साइड गैस विलेय और जल विलायक हैं।

प्रश्न 16.
वायु किस प्रकार का विलयन है ?
उत्तर-
वायु गैस में गैस का विलयन है।

प्रश्न 17.
वायु में विलायक और विलेय का नाम लिखिए।
उत्तर-
नाइट्रोजन को वायु का विलायक और दूसरी गैसों को विलेय का नाम दिया जाता है।

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प्रश्न 18.
विलयन के क्षणों का आकार लिखिए।
उत्तर-
विलयन के कण व्यास में 1 nm (10-‘m) से भी छोटे होते हैं।

प्रश्न 19.
संतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
किसी दिए हुए निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।

प्रश्न 20.
असंतृप्त विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
यदि एक विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्त से कम है तो इसे असंतृप्त कहते हैं।

प्रश्न 21.
विलयन की सांद्रता क्या है ?
उत्तर-
विलायक की मात्रा अथवा आयतन में घुले हुए विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं।

प्रश्न 22.
निलंबन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
निलंबन वह विषमांगी घोल है जिसमें ठोस द्रव में परिक्षेपित हो जाता है। विलेय पदार्थ कण घुलते नहीं बल्कि माध्यम में समृष्टि में निलंबित रहता है।

प्रश्न 23.
निलंबन अस्थाई क्यों माना जाता है ?
उत्तर-
निलंबन में छानन विधि से कणों को पृथक् किया जा सकता है इसलिए इसे अस्थाई माना जाता है।

प्रश्न 24.
निलंबित कण आँखों से क्यों देखे जा सकते हैं ?
उत्तर-
इस का आकार 100 nm (10-7m) से बड़ा होता है।

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प्रश्न 25.
टिंडल प्रभाव क्या है ?
उत्तर-
कोलाइडल कणों के छोटे आकार से प्रकाश की किरण का फैलना टिंडल प्रभाव कहलाता है।

प्रश्न 26.
दूध की कोलाइडल प्रकृति का कैसे पता चलता है ?
उत्तर-
दूध टिंडल प्रभाव दिखाता है।

प्रश्न 27.
कोलाइड के कणों का आकार लिखिए।
उत्तर-
1 nm से 100 nm के बीच।

प्रश्न 28.
कोलाइड किस विधि से मिश्रण से पृथक् किए जा सकते हैं ?
उत्तर-
अपकेंद्रीकरण तकनीक से।

प्रश्न 29.
छानन विधि का प्रयोग कहाँ नहीं किया जाता ?
उत्तर-
जब द्रव में विद्यमान ठोस कण इतने छोटे हों कि छानक पत्र से बाहर चले जाए।

प्रश्न 30.
मिश्रणों के अपकेंद्रण का सिद्धांत क्या है ?
उत्तर-
अपकेंद्रण विधि द्वारा भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर ही रह जाते हैं।

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प्रश्न 31.
अपकेंद्रण यंत्र प्रयोग कहाँ-कहाँ किया जाता है ?
उत्तर-
जाँच प्रयोगशाला में रक्त और मूत्र की जाँच, दूध से क्रीम और मक्खन प्राप्ति तथा वाशिंग मशीन में कपड़ों से जल निकालने के लिए।

प्रश्न 32.
दो अघुलनशील द्रवों के मिश्रण को किस सिद्धांत के आधार पर पृथक् करते हैं ?
उत्तर-
परस्पर न मिलने वाले द्रव अपने पनत्व के अनुसार पृथक्-पृथक् परतों में बंट जाते हैं।

प्रश्न 33.
नमक और अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण को किस विधि से पृथक् किया जा सकता है ?
उत्तर-
ऊर्ध्वपातन विधि से।

प्रश्न 34.
चार ऐसे ठोस पदार्थों के नाम लिखिए जिन का ऊर्ध्वपातन किया जा सकता है ?
उत्तर-
अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नेपथालीन, एंथ्रासीन।

प्रश्न 35.
डाई कितने रंगों का मिश्रण होता है ?
उत्तर-
दो या दो से अधिक रंगों का मिश्रण।

प्रश्न 36.
क्रोमैटोग्राफ़ी किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मिश्रण से रंगों के पृथक्कीकरण की विधि को क्रोमैटोग्राफ़ी कहते हैं।

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प्रश्न 37.
क्रोमैटोग्राफ़ी के क्या उपयोग हैं ?
उत्तर-
डाई में रंगों को पृथक् करने, प्राकृतिक रंगों से रंग को अलग करने, मूत्र से चीनी पृथक् करने तथा रक्त से दवा पृथक् करने के लिए।

प्रश्न 38.
आसवन विधि का प्रयोग मिश्रण के किन घटकों को पृथक् करने के लिए किया जाता है ?
उत्तर-
जिन घटकों के क्वथनांकों के बीच काफ़ी अंतर होता है।

प्रश्न 39.
प्रभाजी आसवन का प्रयोग कहाँ किया जाता है ?
उत्तर-
जब दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों के क्वथनांक का अंतर 25K से कम होता है।

प्रश्न 40.
दो उदाहरण लिखिए जहाँ प्रभाजी आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
वायु से विभिन्न गैसों तथा पेट्रोलियम उत्पादों से उन के विभिन्न घटकों को पृथक करने के लिए।

प्रश्न 41.
साधारण प्रभाजी स्तंभ में शीशे के गुटके क्या कार्य करते हैं ?
उत्तर-
ये वाष्प को ठंडा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करते हैं।

प्रश्न 42.
वायु कैसा मिश्रण है ?
उत्तर-
समांगी मिश्रण।

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प्रश्न 43.
ऑक्सीजन का क्वथनांक कितना है ?
उत्तर-
183°C।

प्रश्न 44.
आर्गन का क्वथनांक क्या है ?
उत्तर-
186°C।

प्रश्न 45.
नाइट्रोजन का क्वथनांक क्या है ?
उत्तर-
196°C।

प्रश्न 46.
क्रिस्टलीकरण विधि का प्रयोग किस लिए किया जाता है ?
उत्तर-
ठोस पदार्थों को शुद्ध करने के लिए।

प्रश्न 47.
शुद्ध कॉपर सल्फेट को किस विधि से प्राप्त करेंगे ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण विधि से।

प्रश्न 48.
समुद्र से प्राप्त नमक को शुद्ध रूप में किस विधि से प्राप्त करेंगे ?
उत्तर-
वाष्पीकरण तथा क्रिस्टलीकरण विधि से।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

प्रश्न 49.
क्रिस्टलीकरण विधि साधारण वाष्पीकरण से अच्छी क्यों है ?
उत्तर-
साधारण वाष्पीकरण में कुछ ठोस विघटित हो जाते या झुलस जाते हैं या कुछ अशुद्धियां रह जाती हैं।

प्रश्न 50.
फिटकरी को किस विधि से शुद्ध किया जाता है ?
उत्तर-
क्रिस्टलीकरण से।

प्रश्न 51.
रासायनिक परिवर्तन में क्या-क्या परिवर्तित होता है ?
उत्तर-
रासायनिक संघटन और रासायनिक गुणधर्मों में परिवर्तन होता है।

प्रश्न 52.
जलना किस प्रकार का परिवर्तन है ?
उत्तर-
रासायनिक परिवर्तन।

प्रश्न 53.
रासायनिक संघटन के आधार पर पदार्थ को किन भागों में बांटा जाता है ?
उत्तर-
तत्व और यौगिक।

प्रश्न 54.
फ्रांस के किस वैज्ञानिक ने तत्व के लिए माना था कि वह पदार्थ का मूल रूप है ?
उत्तर-
एंटोनी लॉरेंट लेवाज़िर ।

प्रश्न 55.
पदार्थ का मूल रूप क्या है ?
उत्तर-
तत्व।

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प्रश्न 56.
तत्व क्या है ?
उत्तर-
तत्व-यह पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक प्रतिक्रिया से छोटे पदार्थों के टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता।

प्रश्न 57.
तत्वों को किन-किन भागों में बांटा जाता है ?
उत्तर-
धातु, अधातु और उपधातु ।

प्रश्न 58.
कौन-सी धातु कमरे के तापमान पर द्रव है ?
उत्तर-
पारा।

प्रश्न 59.
उपधातु किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जो धातु और अधातु के मध्यवर्ती गुणों को दर्शाते हैं उन्हें उपधातु कहते हैं।

प्रश्न 60.
उपधातु के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
बोरान, सिलिकन।

प्रश्न 61.
अधातुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
हाइड्रोजन, आयोडीन, कॉर्बन, कोक, ब्रोमीन, क्लोरीन आदि।

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प्रश्न 62.
धातुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
सोडियम, पोटाशियम, लोहा, तांबा, चांदी, सोना आदि।

प्रश्न 63.
ज्ञात तत्वों की संख्या कितनी हैं ?
उत्तर-
112 तत्व ।

प्रश्न 64.
प्राकृतिक तत्व कितने हैं ?
उत्तर-
92 तत्व ।

प्रश्न 65.
कितने तत्व कमरे के तापमान पर गैसें हैं ?
उत्तर-
ग्यारह (11) तत्व ।

प्रश्न 66.
मिश्रण को पृथक् करने की पांच विधियों के नाम बताओ।
उत्तर-

  1. फिल्टरन
  2. क्रिस्टलीकरण
  3. ऊर्ध्वपातन
  4. आसवन
  5. वाष्पन।

प्रश्न 67.
चीनी की फैक्टरी में चीनी के क्रिस्टलों को अलग करने के लिए कौन-सी विधि प्रयोग की जाती
उत्तर-
‘अपकेंद्रण’ विधि।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 8 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-II

Punjab State Board PSEB 10th Class Computer Book Solutions Chapter 8 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-II Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Computer Chapter 8 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-II

Computer Guide for Class 10 PSEB माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-II Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(A) बहुविकल्पीय प्रश्न

1. आजकल ब्रोशर इलैक्ट्रानिक फारमेट में भी उपलब्ध होते हैं तथा इस को ……………………….. कहते हैं।
(a) ई-ब्रोशर
(b) एम ब्रोशर
(c) टी-ब्रोशर
(d) के ब्रोशर।
उत्तर-
(a) ई-ब्रोशर

2. प्रकाशक में, चीज़ों की एक सूची क्या है ?
(a) बैनर
(b) कैटालॉग
(c) लेबल
(d) खबरों का पत्र।
उत्तर-
(b) कैटालॉग

3. किसी के नाम, काम, बिजनैस, एडरैस आदि के साथ छपे एक छोटे से कार्ड को ………………….. कहते हैं।
(a) ब्रोशर
(b) न्यूज़लेटरज
(c) बिज़नेस कार्ड
(d) मीनू।
उत्तर-
(c) बिज़नेस कार्ड

4. कागज़, पोलीमार, वस्त्र, धातु या अन्य सामग्री को एक कंटेनर या प्रोडक्ट के साथ जोड़ा जाता है ?
(a) लेबल
(b) लैटर हैड
(c) ग्रीटिंग कार्ड
(d) मीनू।
उत्तर-
(a) लेबल

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 8 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-II

5. प्रिंट किए हुए हैडिंग के साथ स्टेशनरी क्या है ? हैडिंग में साधारण रूप से एक नाम, एक लोगो और एक पता होता है ।
(a) लैटरहैड
(b)
(c) सादा
(d) कैटालॉग।
उत्तर-
(a) लैटरहैड

6. नौकरी के निवेदन पत्रों में निवेदकों की तरफ से निवेदन किया गया आम दस्तावेज़ क्या होता है ?
(a) बैनर
(b) रिज्यूम
(c) कैलेंडर
(d) फलाइर।
उत्तर-
(b) रिज्यूम

7. सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक या प्रशासकीय उद्देश्यों के लिए प्रबंधन दिन और समय के समय, साधारण रूप से दिन, सप्ताह, महीनों और सालों के नाम क्या प्रदान करते हैं ?
(a) विज्ञापन
(b) सर्टीफिकेट
(c) चिन्ह
(d) कैलेंडर।
उत्तर-
(d) कैलेंडर।

8. रिज्यूम से ज्यादा लंबा क्या होता है ? कम से कम दो या तीन पन्ने। .
(a) करिकुल्म विटे (सी०वी०)
(b) बैनर
(c) इनवीटेशन
(d) कैटालॉग।
उत्तर-
(a) करिकुल्म विटे (सी०वी०)

9. मेहमान से हुक्म देने या लेने का मुख्य तरीका क्या है ?
(a) रिज्यूम
(b) लेबल
(c) मीनू
(d) बैनर।
उत्तर-
(c) मीनू

10. बच्चे हमारे मनोरंजन के समय ……….. का आनंद ले सकते हैं और कुछ रचनात्मक बातें कर सकते हैं।
(a) लैटरहैड
(b) न्यूज़लैटर
(c) पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट
(d) रिज्यूम।
उत्तर-
(c) पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट|

(B) रिक्त स्थान भरें

1. इश्तिहारबाज़ी से भाव है कि कंपनी लोगों को अपना ….., ………….. या विचार खरीदने के लिए कैसे उत्साहित करती है।
उत्तर-
प्रोडक्ट और सर्विस,

2. एम०एस० प्रकाशक ब्रोशर, न्यूज़लैटर, ………. और ……… समेत भिन्न-भिन्न तरह के प्रकाशन बनाने में हमारी मदद के लिए टैंपलेट और अन्य साधन प्रदान करता है।
उत्तर-
बिजनैस कार्ड और मीनू,

3. कारोबारी कार्ड एक ………… या ………… बारे कारोबार संबंधी जानकारी प्रदान करने वाले कार्ड हैं।
उत्तर-
कंपनी और एक ही व्यक्ति,

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4. एक रिज्यूमे हमारे ………… पहचान के, और अन्य प्राप्तियों और हुनरों के संक्षेप पेश करता है।
उत्तर-
शिक्षा और काम का इतिहास,

5. माइक्रोसॉफ्ट प्रकाशक बच्चों के लिए टैंपलेट पेश करता है, इन टैंपलेटों में भिन्न-भिन्न पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट जैसे कि …………. कप, और कई अन्य शामिल हैं।
उत्तर-
हवाई जहाज़ और किश्ती।

(C) सही या गलत

1. एक कंप्लीमैंट कार्ड, कार्ड का एक टुकड़ा है जो दोस्ती या किसी और भावना को दर्शाता बढ़िया क्वालिटी वाला कागज़ है।
उत्तर-
सही,

2. उपलब्धियों, मैरिट और सम्मान के प्रमाण-पत्र शक्तिशाली साधन हो सकते हैं।
उत्तर-
सही,

3. एक कैटालॉग चीजों की पूरी सूची जो कि साधारण रूप से व्यवस्थित ढंग से अरेंज होती है।
उत्तर-
गलत,

4. यह कपड़े की एक लंबी पट्टी की तरह होती है। जिस पर किसी प्रदर्शनी, प्रोसैस (मुजाहरा) आदि के स्लोगन या डिज़ाइन होते हैं और जनतक स्थानों पर टंगे होते हैं।
उत्तर-
सही,

5. ब्रोशर प्रोमोशनल दस्तावेज़ हैं, मुख्य रूप से किसी भी कंपनी, संस्था, उत्पादों या सेवाओं को जनता के लिए पेश करने के लिए समाचार पत्रों में बांटा जाता है।
उत्तर-
गलत।

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कागज़, वस्त्र, लकड़ी या किसी और चीज़ का एक हिस्सा जो तस्वीरों या शब्दों के साथ चित्रित हुआ है और जो किसी खास स्थान, उत्पाद या घटना के बारे में कुछ जानकारी देता है ?
उत्तर-
लेबल (साइल)।

प्रश्न 2.
आम पेकिंग आइटम क्या होती है, साधारण रूप से पतले फ्लैट सामग्री से बनाई जाती है ?
उत्तर-
एनवैलप्ज़।

प्रश्न 3.
किसी व्यक्ति, समूह के एक समूह या किसी अदारे को एक खास क्षेत्र में अपनी उत्तमता को मानता देने के लिए क्या दिया जाता है ?
उत्तर-
अवार्ड सर्टीफिकेट।

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प्रश्न 4.
जनतक स्थान पर व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन पोस्ट या डिस्ट्रीक्ट के लिए प्रयोग किये जाने वाले कागजों के इश्तिहार का कौन-सा रूप होता है, व्यक्तियों को दिया जाता है या डाक के द्वारा भेजा जाता है ?
उत्तर-
फलाइरज़।

प्रश्न 5.
एक प्रिंट की रिपोर्ट क्या है जिसमें कोई कारोबार या किसी संस्था की गतिविधियों की खबरें या जानकारी शामिल है।
उत्तर-
न्यूज लेटर।

III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
चिन्ह (Sign) स्पष्ट करें।
उत्तर-
यह तस्वीरों या शब्दों से पेंट किया गया कागज़ का एक टुकड़ा, वस्त्र, लकड़ी या कोई अन्य सामग्री होती है जो किसी खास स्थान, उत्पाद या घटना के बारे में कुछ जानकारी देता है।

प्रश्न 2.
रिज्यूम समझाएं।
उत्तर-
एक रिज्यूम हमारी शिक्षा, काम के इतिहास, प्रमाण-पत्रों और अन्य प्राप्तियों और हुनरों को संक्षेप में पेश करता है। रिज्यूम, नौकरी के लिए निवेदन पत्र और निवेदकों के लिए निवेदन किए गए सब से आम दस्तावेज़ हैं।

प्रश्न 3.
बैनर क्या है ?
उत्तर-
किसी समारोह संबंधी जानकारी देने के लिए बनाई जाने वाली सामग्री को दिखाने का एक साधन बैनर है। इसमें काफ़ी बड़े आकार में जानकारी दी जाती है।

प्रश्न 4.
समाचार पत्र (Newsletter) के बारे में समझाएं।
उत्तर-
न्यूजलैटर किसी भी वस्तु से संबंधित जानकारी देने का एक साधन है। इसके द्वारा हम किसी भी क्रिया के बारे में जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

प्रश्न 5.
मीनू क्या है ?
उत्तर-
एक रेस्टरा में, खाने और पीने के ऑफर के लिए एक मीनू होता है।

प्रश्न 6.
फ्रेम क्या है ?
उत्तर-
पब्लिकेशन जिस हिस्से से बनी होती है उसको फ्रेम कहते हैं।

IV. बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
विज्ञापन क्या है ? विज्ञापन के लिए अलग-अलग प्रिंट मीडिया की किस्में बताएं।
उत्तर-
विज्ञापन का अर्थ है कि कंपनी किस तरह लोगों को अपने उत्पादों, सेवाओं या विचारों को खरीदने के लिए उत्तेजित करती हैं। एक विज्ञापन क्या होता है। वह वस्तुएं जो आपका ध्यान अच्छे से अपनी ओर खींचती हैं। यह आमतौर पर किसी विज्ञापन एजेंसी द्वारा डिज़ाइन किया जाता है। विज्ञापन टेलीविज़न, रेडियो, समाचार पत्र, पत्रिका आदि में दिखाई देते हैं। विज्ञापन के प्रायोजक बहुधा व्यापारी होते हैं जो अपने उत्पादों और सेवाओं को पदोन्नत करना चाहते हैं।

विज्ञापनों को अलग-अलग मीडिया द्वारा संचारित किया जाता है जैसे कि पुराना मीडिया जिसका भाव है-समाचार-पत्र, पत्रिका, टेलीविजन, रेडियो, बाहरी विज्ञापन या सीधी मेल और नई मीडिया से भाव है सर्च रिजल्ट, ब्लॉग, वैबसाइट या टैकस्ट संदेश आदि। एक मीडिया में संदेश की असली पेशकारी को विज्ञापन या “AD” द्वारा चित्रित किया जाता है। गैर-व्यावसायिक विज्ञापन में राजनीतिक पार्टियों, रुचि रखने वाले समूह, धार्मिक संगठन और सरकारी एजेंसियां आदि शामिल होती हैं।

ऐम० एस०-पब्लिशर ब्रोशर, समाचार पत्र, व्यापार कार्ड और चित्र मेन्यू सहित अलग-अलग पब्लिकेशन बनाने में हमारी मदद करने के लिए टैम्पलेट और अधिक साधन प्रदान करता है। विज्ञापन के लिए अलगअलग प्रिंट मीडिया नीचे दिए हुए हैं।

  • ब्रोशर (Brochures)
  • न्यूजलैटर (Newsletters)
  • बैनर (Banners)
  • सूची (Catalogs)
  • फ्लाइर्ज (Flyers)

प्रश्न 2.
MS-Publisher इस्तेमाल करने के बाद ब्रोशर कैसे तैयार करें ?
उत्तर-
एक ब्रोशर एक ही सूचना से भरा/कागज़ी दस्तावेज होता है, जो कभी-कभी विज्ञापन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी टैंपलेट, पैंफलेट या लीफलेट में फोल्ड किया जाता है। ब्रोशर एक प्रोत्साहनपरक दस्तावेज है। जो मुख तौर पर किसी भी कंपनी, संस्था, उत्पादों या सेवाओं को जनता के सामने लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ब्रोशर को समाचार पत्र में और व्यस्त स्थानों में ब्रोशर रैकों में रखा जाता है। उसको ग्रे-लिटरेचर भी कहा जा जाता है। आज-कल के ब्रोशर इलैक्ट्रॉनिक फार्मेट में भी उपलब्ध हैं और इनको ई-ब्रोशर भी कहा जाता है। इन रिवायती कागज़ ब्रोशर की तुलना को ई-ब्रोशर जो कि कम लागत और अनगिनत लाभ पहुंचाते हैं।

एक ब्रोशर की सबसे आम किस्म बाइ-फोल्ड (bi-fold) (एक शीट जो दोनों तरफ से छपी होती है, और ट्राई-फोल्ड (जिसे तीने पक्षों में फोल्ड) होती हैं।
MS-Publisher का इस्तेमाल करते हुए ब्रोशर तैयार करना-पब्लिशर में ब्रोशर को तैयार करना।
1. File टेब पर क्लिक करें फिर New और फिर Broucher पर क्लिक करें। ब्रोशर के साथ संबद्ध कई टैम्पलेट होते हैं। अपनी पसंद के अनुसार कोई भी चुनें। अब विर्ड की दायरा और चुने हुए ब्रोशर को कस्टमाइज करने के लिए विकल्प देख सकते हैं।

2. अब, ब्रोशर को कलर स्कीम, फौंट स्कीम, पेज आकार के विकल्प और फार्मों की मदद से कस्टमाइज़ करें। ब्रोशर की कलर, फौंट साइज और फार्म बदलने के बाद Create विकल्प पर क्लिक करें। अब हम अपने ब्रोशर के विवरण को एडिट कर सकते हैं और इसकी पब्लिकेशन के तौर पर सेव कर सकते हैं।

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प्रश्न 3.
व्यापार कार्ड क्या है ? पब्लिशर में व्यापार कार्ड बनाने के पद लिखें।
उत्तर-
व्यापार कार्ड एक छोटा-सा कार्ड है जो कि किसी के नाम, व्यवसायों, व्यापार आदि के साथ छपा होता है। उसको व्यापार कार्ड कहते हैं। पब्लिशर में व्यापार कार्ड बनाना –

1. File पर क्लिक करें, फिर New और Business Card पर क्लिक करें। व्यापार कार्ड के साथ संबद्ध ईस्टाल टैंपलेट में बहुत सारे टैंपलेट होते हैं। अपनी पसंद के साथ कोई भी चुन सकते हैं। विर्ड के दाएं ओर, हम कलर स्कीम, फौंट स्कीम, व्यापार की जानकारी, पन्ना आकार के आप्शन और लोगो की मदद से चुने हुए व्यापार कार्ड को कस्टमाइज़ कर सकते हैं।

2. अब हम व्यापार कार्ड के नीचे दिखाई गई तस्वीर में देख सकते हैं कि व्यापार कार्ड पूर्ण रूप से डिज़ाइन हो गई है। अब हम व्यापार का नाम या कोई नाम और पता आदि बदल सकते हैं।

प्रश्न 4.
लेबल क्या है ? लेबल कहां इस्तेमाल हो सकते हैं ?
उत्तर-
लेबल कागज़ का एक टुकड़ा, पॉलिमार, कपड़ा, धातु या कोई अन्य वस्तु होती है जिसको कंटेनर या प्रोडक्ट पर लगा सकते हैं। उत्पादों की उत्पत्ति, निर्माता वर्त, शेल्फ-लाईफ और डीस्पोजल आदि की जानकारी प्रदान करने के लेबल के बहुत सारे उपयोग होते हैं। लेबल इनके लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
1. प्रोडक्ट (Products)-स्थायी प्रोडक्ट लेबल में प्रोडक्ट को पूर्ण जीवन दौरान सुरक्षित रहने की ज़रूरत होती है।

2. पैकेजिंग (Packaging)-पैकेजिंग पर लेबल लगा हो सकता है या यह पैकेजिंग का हिस्सा हो सकता है। इन पर कीमत, वारकोड, यू.पी.सी. (यूनिवर्सल प्रोडक्ट कार्ड) की पहचान, उपयोग की विधि, पता, विज्ञापन रैसिपी और बहुत कुछ हो सकता है।

3. संपत्ति (Assets)-औद्योगिक या फैजी वातावरण में संपत्ति लेबलिंग का उपयोग प्रशासन और

4. वस्त्र (Texttiles)-वस्त्रों में आमतौर पर अलग देखभाल/उपचार के लेबल होते हैं जो आमतौर पर यह दर्शाता है कि आइटम की कैसे धुलाई करनी चाहिए जैसे कि मशीन वॉशेवल या ड्राईक्लीन। टैक्सटाइल लेबल को वस्त्र पर जड़ा जा सकता है और यह गर्मी रोधक, कलर फार्मेट, धोने योग्य (Washable) हो सकता है।

5. मेल-मेल लेबल प्राप्त करता, भेजने वाले और अलग जानकारी जो कि आवाजाई के लिए उपयोगी हो, उसको आईडंटफाई करते हैं।

6. सरक्षा लेबल-इसको प्रामाणिकता, चोरी कटौती और इप्लीकेट से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और आमतौर पर ID कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पैकेजिंग और सी०डी०, इलैक्ट्रॉनिक्स उत्पादों से लेकर वस्त्र तक इस्तेमाल किये जाते हैं।

प्रश्न 5.
लैटर-हैड क्या है ? पब्लिशर में लैटर हैड कैसे बनाये जाते हैं ? …
उत्तर-
लैटर-हैड एक स्टेशनरी है। हैडिंग में आमतौर पर एक नाम और एक पता, एक लोगो या कार्पोरेट डिज़ाइन और कई बार एक बैकग्राऊंड पैटर्न होता है। लैटर हैड की अपनी ज़रूरत अनुसार स्टेशनरी पर या सादे कागज़ पर छापा जा सकता है या इलैक्ट्रॉनिक तरीके के साथ भेजा जा सकता है। पब्लिशर में लैटर-हैड बनाना-यहां हम ऐम०एस० पब्लिशर का उपयोग करते हुए इस संस्था के लिए लैटर हैड बना रहे हैं। इसके लिए नीचे दिए गये पद की पालना कीजिए –
1. File टैब पर क्लिक करें, फिर New और फिर Letterhead पर क्लिक करें। अपनी पसंद के अनुसार कोई भी चुनें, विर्ड की दायरा और रंग स्कीम, फौंट स्कीम, व्यापार जानकारी और लोगो को हम कस्टमाईज़ कर सकते हैं।

2. रंग, फौंट, आकार और सूचना बदलने के बाद, Create विकल्प पर क्लिक करें। लैटर-हैड दिखाई दे सकती है।

3. अब सूचना को ऐडिट करें, जिसको हम नीचे दिए गई तस्वीर में देख सकते हैं और इन परिवर्तनों को Save कर लीजिए।

प्रश्न 6.
कैलेंडर क्या है ? MS-Publisher में कैलेंडर कैसे बनाए जाए ?
उत्तर-
एक कैलेंडर सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक या प्रशासनिक उद्देश्य के लिए दिनों को प्रदर्शित करने की प्रणाली है। कैलेंडर का उपयोग लोगों की निजी शैड्यूल, समय और गतिविधियों को प्रदर्शित करने के लिए भी किया जाता है। कैलेंडर पूर्ण टाइमकिपिंग प्रणाली में उपयोग किया जाता है- जैसे समय के किसी खास पल को दर्शाने के लिए तिथि और समय। ऐम०एस पब्लिशर में कैलेंडर बनानाFile टैब पर क्लिक करें और फिर New और फिर Calendar पर क्लिक करें।
1. उपलब्ध टैपलेट में से कैलेंडर के साथ शब्द टैंपलेट्स अपनी पसंद के अनुसार कोई भी चुनें।

2. अब, कैलेंडर स्कीम, फौंट स्कीम, व्यापार जानकारी, पेज साइज के विकल्पों और खासतौर पर टाइमफ्रेम (एक महीने प्रति पन्ना या एक साल प्रति पन्ना) की मदद से अपने कैलेंडर को कस्टमाइज़ कर सकते हैं।

3. कैलेंडर को कस्टमाइज़ करने के बाद, Create विकल्प पर क्लिक करें।

4. अब हम नीचे दिए गए चित्र में दिखाई गई कैलेंडर देख सकते हैं। जब हम चाहें तो हम तस्वीर को ऐडिट कर सकते हैं और इस कैलेंडर को पब्लिशर में Save कर सकते हैं।

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प्रश्न 7.
पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्टों के बारे में बताएं। पब्लिशर में पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट बनाने के लिए पद लिखो।
उत्तर-
पेपर फोल्डिंग प्रोजेक्ट को टुकड़े टैपलेटों में औरोपलेन और आगीगेमी (पेपरों की फोल्ड करके बनाने वाले) प्रोजैक्टों के लिए कागज़ नमूने शामिल होते हैं। इन पेजों में “फील्ड-लाइन’ के साथ और हमारी कागज़ी मास्टर पीस बनाने के लिए हिदायतें शामिल होती हैं।
माइक्रोसोफ्ट पब्लिशर बच्चे के लिए टैंपलेट पेश करता है। इन टैपलेटों में भिन्न-भिन्न पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट जैसे कि हवाई जहाज, नाव, कप तथा अन्य शामिल होते हैं।

पब्लिशर में पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट (Paper Folding Projects in Publisher)-नीचे दिए गए पद की पालना करें –

  1. File टैब में New फिर More Templates में Paper folding पर क्लिक करें। मिडल बैनर में बहुत सारे पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट हो सकते हैं।
  2. प्रोजैक्ट का चयन-एक बार जब हम प्रोजैक्टों का चयन करते हैं हम दायें पैनल की कुछ विकल्पों को ऐडिट कर सकते हैं। हम अपनी पसंद के अनुसार रंग स्कीम और प्रोजैक्ट के लिए फौंट स्कीम और टाइपिंग अनुदेश को चुन सकते हैं। उसके बाद प्रोजैक्ट को नई विंडो में खुलने के लिए Create बटन पर क्लिक करें।
  3. अब पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट को ऐडिट करें हम क्लिप आर्ट और टैक्सट को इनसर्ट कर सकते हैं।
  4. अगर हम क्लिप आर्ट इनसर्ट करना चाहते हैं तो विंडो के ऊपर तक जाना है और Insert Picture Clip Art पर क्लिक करें।
  5. पेपर फोल्डिंग प्रोजैक्ट के पूरा करने के बाद हम इसको अपने कम्प्यूटर पर सेव कर सकते हैं और इसको प्रिंट कर सकते हैं।

PSEB 10th Class Computer Guide आप्रेटिंग सिस्टम Important Questions and Answers

(A) बहुविकल्पीय प्रश्न –

1. कौन-सी चीज कपड़े की एक लंबी पट्टी के जैसी होती है ?
(a) न्यूज़लैटर
(b) बैनर
(c) लेबल
(d) व्यापार कार्ड।
उत्तर-
(b) बैनर

2. किसको चीजों की सूची कहा जाता है ?
(a) बैनर
(b) लेबल
(c) एनवैल्प
(d) कैटालॉग।
उत्तर-
(d) कैटालॉग।

3. दिनों के प्रबंध करने के लिए किसका इस्तेमाल किया जाता है ?
(a) बैनर
(b) लेबल
(c) कैलेंडर
(d) कैटालॉग।
उत्तर-
(c) कैलेंडर

4. हैडिंग के साथ छपी हुए स्टेशनरी को क्या कहते हैं ?
(a) लेबल
(b) बैनर
(c) लैटरहैड
(d) कैटालॉग।
उत्तर-
(c) लैटरहैड।

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(B) रिक्त स्थान भरें-

1. टैक्सट के फौंट कलर एवं टैक्सट बाक्स कलर को बदलने के लिए ……… मीनू प्रयोग होता है।
उत्तर-
Format,

2. न्यूज़लैटर का टाइटल ………….. में लिखा जाता है।
उत्तर-
टाइटल टैक्सट बॉक्स,

3. न्यूजलैटर की तिथि …………. में लिखी जाती है। . थ …………. म लिखा जाता है।
उत्तर-
डेट टैक्सट बॉक्स,

4. पोस्ट-कार्ड की …………. साइडें होती हैं।
उत्तर-
दो,

5. अगर आप लोगो नहीं लगाना चाहते तो ………. पर क्लिक करें।
उत्तर-
None.

(C) सही या गलत

1. आपको नोट एव मैसेज बाक्स में टाइप करना चाहिए।
उत्तर-
गलत,

2. प्रिव्यू गैलरी में विभिन्न प्रकार के डिज़ाइन नज़र आते हैं।
उत्तर-
सही,

3. एनवैल्प्स पत्र लिखने के लिए प्रयोग होते हैं।
उत्तर-
गलत,

4. न्यूज़लैटर में प्रत्येक पेज़ का एक जैसा ले-आऊट होता है।
उत्तर-
गलत,

5. न्यूज़लैटर में पहले से ही तीन कॉलम एवं तीन स्टोरीज़ होती है।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
बैनर किसको कहते हैं ?
उत्तर-
किसी समागम के विज्ञापन के लिए प्रयोग किये जाने वाले एक साधन को बैनर कहते हैं।

प्रश्न 2.
न्यूज़लैटर किसको कहते हैं ?
उत्तर-
किसी विषय पर जानकारी प्रदान करने का एक माध्यम न्यूज़लैटर होता है।

प्रश्न 3.
पोस्ट-कार्ड किसलिए प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
किसी समारोह की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए पोस्ट-कार्ड का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 4.
इनवैल्प का क्या प्रयोग है?
उत्तर-
इनवैल्प में हम अपने पत्र डालकर किसी दूसरे व्यक्ति को भेज सकते हैं।

प्रश्न 5.
पोस्ट-कार्ड की कितनी साइडें होती हैं ?
उत्तर-
पोस्ट-कार्ड की दो साइडें होती हैं।

प्रश्न 6.
पंपलैट क्या होता है?
उत्तर-
पंपलैट प्रचार के लिए प्रयोग होने वाला एक साधन है जिसको अक्सर अखबार द्वारा घरों में पहुंचाया जाता है।

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III. लघ उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
बैनर क्या है ?
उत्तर-
बैनर प्रचार करने का एक साधन है। इसका प्रयोग किसी सूचना को लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 2.
न्यूजलैटर के बारे में बतायें।
उत्तर-
न्यूजलैटर एक साधन है जिसकी मदद से हम किसी प्रकार की खबरें लोगों तक पहुंचा सकते हैं।

प्रश्न 3.
पोस्टकार्ड पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
पोस्टकार्ड एक छोटा कार्ड होता है जिसका प्रयोग किसी को कुछ सूचना भेजने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 4.
नया लैटरहैड खोलने का तरीका बतायें।
उत्तर-
नया लैटर खोलने के लिए अग्रलिखित स्टैप प्रयोग करें New Publication altas 99 H New From a Design H À Publication for Print-Letter Head पर क्लिक करें।

प्रश्न 5.
इनवैल्प कहाँ इस्तेमाल किया जाता है ?
उत्तर-
इनवैल्प चिट्ठी डालने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस पर भेजने और प्राप्त करने वाले का पता लिखा होता है। इसमें चिट्ठी डालकर पोस्ट की जाती है।

IV. बड़े उत्तर वाला प्रश्न

प्रश्न-
लैटरहैड और पोस्ट-कार्ड में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-
लैटरहैड और पोस्ट-कार्ड में निम्नलिखित अन्तर हैं –

लैटरहैड पोस्ट-कार्ड
1. लैटरहैड किसी कम्पनी का अधिकारिक पेज होता है। 1. पोस्ट-कार्ड चिट्ठी डालने का एक साधन है।
2. लैटरहैड किसी भी उद्देश्य के लिए प्रयोग जाता है। 2. पोस्ट-कार्ड न्योता देने के लिए प्रयोग किया किया जा सकता है।
3. लैटरहैड का आकार बड़ा होता है। 3. पोस्ट-कार्ड का आकार छोटा होता है।
4. लैटरहैड पर आर्डर आदि दिये जाते हैं। 4. पोस्ट-कार्ड से पत्र-व्यवहार किया जाता है।
5. साधारण तौर पर लैटरहैड आम पेपर की तरह ही होता है। 5. पोस्ट-कार्ड का पेपर मोटा होता है।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I

Punjab State Board PSEB 10th Class Computer Book Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Computer Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I

Computer Guide for Class 10 PSEB माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(A) बहुविकल्पीय प्रश्न

1. आकर्षक विज्ञापन तैयार करने तथा प्रचार संबंधी सामग्री डिजाइन करने के लिए एक एपलीकेशन चुनें।
(a) डाक्यूमैंट
(b) स्प्रेडशीट
(c) पब्लिशर
(d) प्रैजनटेशन।
उत्तर-
(d) प्रैजनटेशन।

2. पब्लिशर ……………… का प्रयोग करके जल्दी पब्लिकेशन बनाता है।
(a) मैनुअल
(b) विजार्ड
(c) कस्टमाइज़
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(b) विजार्ड

3. पब्लिकेशन का प्री डिफाइन मॉडल कौन-सा है ?
(a) टैंपलेट्स
(b) क्लिप आर्ट्स
(c) ऑब्जैक्ट्स
(d) स्टाइल्स।
उत्तर-
(a) टैंपलेट्स

4. की-बोर्ड के द्वारा माइक्रोसॉफ्ट पब्लिशर को खोलने के लिए सर्च बार में क्या टाइप करना चाहिए ?
(a) वर्डपैड
(b) नोटपैड
(c) एक्सैस
(d) पब्लिशर।
उत्तर-
(d) पब्लिशर।

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5. कौन-सा कलर हैंडल ऑब्जैक्ट को घुमाने की आज्ञा देता है ?
(a) लाल
(b) हरा
(c) नीला
(d) काला।
उत्तर-
(b) हरा

6. हर एक टैब …………………………. में बांटा होता है।
(a) ग्रुप्ज़
(b) ब्लॉक्स
(c) मीनूज़
(d) पास।
उत्तर-
(a) ग्रुप्ज़

7. हम क्लिक एक्सैस टूलबार को …………………………. के ऊपर या नीचे रख सकते हैं।
(a) रूलर
(b) स्टेटस बार
(c) रिबन
(d) कोई नहीं।
उत्तर-
(c) रिबन

8. डाक्यूमैंट के सबसे ऊपर वाले भाग के पैनल को रिबन कहा जाता है। इसके ……………………….. टैब हैं।
(a) 8
(b) 6
(c) 5
(d) 4.
उत्तर-
(b) 6

9. पब्लिकेशन बनाने के बाद ………………….. से सेव ऑप्शन को क्लिक करके पब्लिकेशन को सेव करें।
(a) फाइल
(b) होम
(c) इन्सर्ट
(d) व्यू।
उत्तर-
(a) फाइल

10. फाइल मीनू में ……….. बटन क्लिक करके पब्लिकेशन को बंद करें।
(a) ओपन
(b) न्यू
(c) प्रिंट
(d) क्लोज़।
उत्तर-
(d) क्लोज़।

(B) रिक्त स्थान भरें-

1. हम ब्लैंक ले आऊट में ………… वर्ड आर्ट, आटो शेपस आदि ऑब्जैक्ट को दाखिल कर सकते हैं।
उत्तर-
टैक्सट और तस्वीर,

2. बॉक्स की लाइनों के बीच में पड़ा हैंडल …………. और ………… कर सकते हैं।
उत्तर-
वर्टीकल और हौरीजोंटल,

3. हर एक ग्रुप की अन्य विशेषताएं देखने के लिए डॉयलाग बाक्स लांचर पर क्लिक करें जो कि हर …………. के …….. नीचे की तरफ होता है।
उत्तर-
क्लिक और ड्रैग,

4. जब हम एक …………. पर क्लिक करते हैं, तो फ्रेम के कोनों पर छोटे सर्कल नज़र आते हैं, इनको ………… कहा जाता है।
उत्तर-
दायें कार्नर, ग्रुप,

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(C) सही या गलत

1. पब्लिशर में टैंपलेट टूल की मदद से आसानी से एक पब्लिकेशन को तैयार किया जा सकता है।
उत्तर-
सही,

2. ज़्यादातर पब्लिकेशन में कई हिस्से बने होते हैं जिनको फ्रेम कहा जाता है।
उत्तर-
सही,

3. कोनों के हैंडलस से अनुपातक रूप से ऑब्जैक्ट का आकार बदला जा सकता है।
उत्तर-
सही,

4. पब्लिशर से बार आने से पहले, हमें सभी पब्लिकेशन को बंद नहीं करना चाहिए।
उत्तर-
गलत,

5. हम किसी भी आइटम पर क्लिक करके उसको क्लिक एक्सैस टूलबार में शामिल नहीं कर सकते।
उत्तर-
गलत।

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पब्लिकेशन को सेव करने के लिए कौन-सी एक्सटेंशन इस्तेमाल की जाती है ?
उत्तर-
Pub.

प्रश्न 2.
ऑब्जैक्ट को मूव करने के लिए कौन-सा कर्सर इस्तेमाल किया जाता है ?
उत्तर-
चार तरफ वाला कर्सर।

प्रश्न 3.
ऑनलाइन टैंपलेट किस में उपलब्ध होते हैं ?
उत्तर-
Office.com में।

प्रश्न 4.
हमारी तरफ से हाल ही में इस्तेमाल की गई पब्लिकेशन फाइलों की सूची किस में होती है ?
उत्तर-
Recent files में।

प्रश्न 5.
किस ऑप्शन का इस्तेमाल करके ऑब्जैक्ट के इर्द-गिर्द टैक्सट अरेंज किया जाता है ?
उत्तर-
फ्रेम का।

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III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पब्लिशर क्या है ?
उत्तर-
पब्लिशर एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है जो सुंदर और बढ़िया प्रकार के डिज़ाइन वाले दस्तावेज बनाने के लिए प्रयोग की जाती है।

प्रश्न 2.
वर्ड और पब्लिशर में तीन अंतर लिखें।
उत्तर-
निम्नलिखित बिन्दु वर्ड और पब्लिशर में अंतर को दर्शाते हैं-

वर्ड पब्लिशर
1. यह डाक्यूमैंटस को बनाने, एडिट करने और प्रिंट करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 1. यह पब्लिकेशन को बनाने, एडिट करने और प्रिंट करने के लिए प्रयोग किया जाता है। पब्लिशर, पब्लिकेशन के लिए सैंकड़ों टैंपलेटस पेश करता है।
2. वर्ड में विशेष रूप से पूरे पेज के ऊपर ध्यान दिया जाता है न कि ऑब्जैक्टस पर। इसलिए पेज ले-आऊट में ज़्यादा फेर-बदल नहीं किया जा सकता। 2. इसमें टैक्सट, तस्वीरें और टेबलों को ऑब्जैक्टस (चीजें) की तरह प्रयोग किया जाता है। पब्लिशर पेज डिज़ाइन में ज्यादा फेर-बदल करने की सहूलियत देता है क्योंकि हर ऑब्जैक्ट भिन्न-भिन्न स्थानों पर रखे होते हैं।
3. इसमें पहले से ही बने हुए डॉक्यूमैंट की लाइब्रेरी होती है। 3. इसमें पहले से ही बने हुए पब्लिकेशनों की लाइब्रेरी होती है जैसे कि टैपलेटस, विजार्ड, डिज़ाइन गैलरी जो कि जल्दी पब्लिकेशन तैयार करने में मदद करती है।
4. यह वर्ड प्रोसैसर सॉफ्टवेयर है। 4. यह डैस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर है।
5. इसकी एक्सटैंशन .doc होती है। 5. इसकी एक्सटेंशन .pub होती है।

प्रश्न 3.
पब्लिशर को की-बोर्ड का इस्तेमाल करके कैसे शुरू कर सकते हैं ?
उत्तर-

  • बटन पर क्लिक करें।
  • सर्च बार में या टाइप करें और ऐंटर को दबायें।

प्रश्न 4.
पब्लिशर में ऑब्जैक्ट को मूव करने के स्टैप लिखें।
उत्तर-
Objects को Move (मूव) करना-

  • Object क्लिक करें।
  • Solid line पर कर्सर रखें ताकि हमें Crosshairs दिखाई दें।
  • Object को क्लिक और drag करके मनपसंद जगह पर ले जायें।

प्रश्न 5.
टैंपलेट को परिभाषित करें।
उत्तर-
टैंपलेट में पहले से ही तैयार किए हुए डिज़ाइन स्टाइल होते हैं। जिनको हम उसी तरह ही या उनमें फेरबदल करके अपनी ज़रूरत के अनुसार प्रयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 6.
फ्रेम क्या है ?
उत्तर-
पब्लिकेशन में कई हिस्से बने होते हैं जिनको Frame कहा जाता है।

IV. बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पब्लिकेशन में ब्लैंक ले-आऊट का उपयोग करके पब्लिकेशन कैसे तैयार कर सकते हैं ?
उत्तर-
खाली पब्लिकेशन तैयार करने के स्टैप निम्नलिखित हैं :
1. File Menu पर क्लिक करें।
2. मौजूदा टैम्पलेट में Blank Publication Template पर क्लिक करें और बाद में Create में क्लिक करें।
3. अब हम पब्लिकेशन में अपनी ज़रूरत के हिसाब से पब्लिकेशन बना सकते हैं। हम Blank Layout में टैक्सट, तस्वीरें, शब्द, कला और अधिक स्पेस जोड़ सकते हैं। Blank Layout विंडो नीचे दिखाई गई है।
PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I 1
4. पब्लिकेशन निर्माण के बाद File मीनू में Save विकल्प पर जा कर Save as dialogue बॉक्स दिखाई देगी। अपनी पब्लिकेशन का नाम टाइप करें और फोल्डर को चुनें जिसमें हम इसको सेव कर सकते हैं और फिर सेव बटन पर क्लिक करें। यह पब्लिकेशन एक्सटेंशन पर सेव हो जाएगा।

5.अब File मीनू में Close बटन पर क्लिक करके पब्लिकेशन को बंद करें। एक डॉयलाग बॉक्स दिखेगा। अगर हम सभी परिवर्तन सेव करना चाहते हैं तो Yes बटन क्लिक करें। अगर नहीं तो No पर क्लिक करें। पब्लिशर से बाहर भेजने से पहले सभी पब्लिकेशनों को बंद करना चाहिए। इसके बाद File मीन में Exit पर क्लिक करें या फिर टाइटल बार पर क्रास (x) का बटन क्लिक करें।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I

प्रश्न 2.
पब्लिशर विंडो के कंपोनेंट लिखें।
उत्तर-
पब्लिशर विंडो के नीचे लिखे भाग हैं :
1. क्विक ऐक्सैस टूलबार (Quick Access Toolbar)-क्विक एक्सैस टूलबार कस्टमाइज करने योग्य टूलबार होता है जिसमें वह कमांड होती है जिनको हम इस्तेमाल करना चाहते हैं। हम क्विक एक्सैस टूलबार को रिबन के ऊपर या नीचे रख सकते हैं। क्विक एक्सैस टूलबार की जगह परिवर्तन करने के लिए इसके अंत में बने तीर पर क्लिक करें और Show Below the Ribbon विकल्प पर क्लिक करें।

2. रिबन (Ribbon)-दस्तावेजों के सबसे ऊपर वाले भाग के पैनल को रिबन कहा जाता है। इसके 6 टैब हैं। Home, Insert, Page, Design, Mailings, Review और View. हर टैब अलग-अलग समूहों में बांटा गया है। टैब्ज (Tabs)-पब्लिशर में कुछ बहुत उपयोगी टैब्ज हैं जिसमें कई उपलब्ध होते हैं। हर टैब के फ़ीचर देखने के लिए उस टैब के नाम पर क्लिक करें। यहाँ प्रत्येक टैब के समूहों की सूची दी गई है।

  • Home. Clipboard, Font, Paragraph, Styles, Objects, Arrange, Editing.
  • Insert. Pages, Tables, Illustrations, Buildings, Blocks, Text, Links, Headers & Footer.
  • Page Design. Template, Page Setup, Layout, Pages, Schemes, Page Background.
  • Mailing. Start, Write & Insert Fields, Preview Results, Finish.
  • View. Views, Layout, Show, Zoom, Window.

3. फ़ाइल विंडो (File Window)-जब हम File Menu पर क्लिक करते हैं हमारे सामने Info Screen खुल जाती है। इस प्रकार लगता है कि हमारे दस्तावेज़ मिट गए हैं पर ऐसा नहीं होता। जैसे कि हम File Menu में Options पर क्लिक करते हैं Screen इस प्रकार बदल जाएगी।

  • Save. फ़ाइल को 2010 फारमेट में सेव करने के लिए।
  • Save As. हमें एक अलग File Type चुनने की आज्ञा देता है।
  • Open. पब्लिशर फ़ाइल को ब्राउज़ करने के लिए।
  • Close. फ़ाइल को बंद करने के लिए, परंतु पब्लिशर चलता रहेगा।
  • Info. व्यापार सूचना को Edit करने के लिए, डिज़ाइन मेकर का उपयोग करने के लिए, या पेशेवर प्रिंट सूचना सैट करने के लिए।
  • Recent. हमारे अभी प्रयोग की गई पब्लिशर फ़ाइलों की सूची।
  • New. नई पब्लिकेशन स्क्रीन।
  • Print. प्रिंट करने के लिए विकल्प।
  • Save & Send. फाइलों को Save और email करने का विकल्प।
  • Help. माइक्रोसॉफ्ट मदद।
  • Options. डिफाल्ट विकल्प सैट करने के लिए।
  • Exit. पब्लिशर बंद करने के लिए।

प्रश्न 3.
टैक्सट बॉक्स को प्रयुक्त करते हुए टैक्सट को कैसे जोड़ा जाए और पब्लिशर में टैक्सट
उत्तर-
पब्लिकेशन में Text को Add करना।

  1. Home या Insert Tab में Draw Text Box चुनें।
  2. कर्सर को क्लिक करें और ड्रैग करके अपनी पसंद के नाम पर Text Box बनाएं। हम Text Box निर्माण के बाद भी इसका आकार  बदल सकते हैं।
  3. कर्सर के पेज पर जहां हम Text Box बनाना चाहते हैं वहां क्लिक करें।
  4. जब हम माऊस को Left क्लिक करते हैं। हमारे सामने Format Tab, जिसमें Text Box से अधिक विकल्प होते हैं, वह खुल जाते हैं।
  5. अब Text Box पर Text टाइप करें।

Text को Edit करना :
1. जिस Text को हम Edit करना चाहते हैं उसको हाइलाइट करें।
2. जब हम Text Box Tool Format Tab पर नहीं हैं। इसको चुन लें।

3. Text Group का विकल्प :

  • Text Fit यह बताता है कि Text Box में Text कैसे होगा। इसके विकल्प यह हैं: Best Fit, Shrink Text on Overflow, Grow Text Box to Fit, Do not Auto Fit.
  • Text Direction. Text की दिशा Vertical और Horizontal करने के लिए।
  • Hyphenation. Text की Hyphenation परिवर्तन करने के लिए।

4. Font Group factory: Style, Font Size, Bold, Italic, Underline, Text Spacing और Color.
5. Alignment Group Options: Text Box Alignment, Columns, Margins.
6. Effects Group foranny : Shadow, Outline, Engrave, Emboss.

प्रश्न 4.
पब्लिशर में टैम्पलेट का डिज़ाइन बदलने के स्टैप लिखें।
उत्तर-
टैम्पलेट का डिज़ाइन बदलना : टैम्पलेट का डिज़ाइन बदलने के लिए नीचे लिखे स्टैप हैं :
1. Page Design टैब पर क्लिक करें।
2. सभी टैम्पलेट को बदलने के लिए Change Template पर क्लिक करें। विंडो में टैम्पलेट का परिवर्तन चाहते हो तो भरी गई सूचना, नई टैम्पलेट मुताबिक दिखाई देगी।
3. रंग परिवर्तन के लिए समूह में Color Scheme के साथ ब्राऊज़ करें। कलर स्कीम को देखने के लिए माऊस को कलर स्कीम पर लेकर जाएं।

  • किसी एक कलर स्कीम को चुनने के लिए उस पर क्लिक करें।
  • कलर स्कीम चुनने के लिए उस पर क्लिक करें।

4. फोंट बदलने के लिए समूह में Font पर क्लिक करें।

  • मौजूद फोंट स्कीम ब्राउज करें।
  • फोंट स्कीम को देखने के लिए माऊस को फोंट स्कीम पर लेकर जाएं।
  • फोंट स्कीम चुनने के लिए उस पर क्लिक करें।
  • अगर हम अपनी नई फोंट स्कीम बनाना चाहते हैं, तो New Font Scheme पर क्लिक करें।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I

प्रश्न 5.
पब्लिकेशन प्रिंट करने के कौन-से तरीके हैं ? बताइए।
उत्तर-
पब्लिकेशन प्रिंट करना-पब्लिकेशन को प्रिंट करने के दो तरीके हैं। पहले तरीके में अपनी टूलबार में Print आइकन पर क्लिक करें। इसके साथ हमारी पब्लिकेशन की डिफाल्ट प्रिंट विकल्प की एक कापी प्रिंट हो जाएगी।
या
1. फाईल मीनू पर क्लिक करें।
2. जब Print में नंबर आए ज़रूरत से Number of Copies सिलेक्ट करें।
3. नीचे लिखे Print Setting में किसी को भी चुनें।

  • All Pages, Selection, Current Page or custom range. Manually पेज नंबर बताइए जो हम प्रिंट करना चाहते हैं।
  • प्रत्येक पेपर शीट के कितने पेपर प्रिंट होते हैं।
  • Paper Size
  • -sided या 2-Sided Printing.

4. Print पर क्लिक करें।

PSEB 10th Class Computer Guide माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I Important Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(A) बहुविकल्पीय प्रश्न

1. कौन-सा पब्लिशर विंडो का कम्पोनेंट नहीं होता ?
(a) क्विक एक्सैस टूलबार
(b) रिबन
(c) फाइल विंडो
(d) टाइम लाइन।

2. पब्लिशर कौन-सी टैब नहीं होती ?
(a) Home
(b) Insert
(c) Page Maker
(d) Mailing.

3. हैडर किसमें होते हैं ?
(a) टेबल
(b) वर्ड
(c) HTML
(d) फ्रेम।

(B) रिक्त स्थान भरें-

1. पब्लिशर, पब्लिकेशन को …………… और ……………. के लिए प्रयोग होता है।
उत्तर-
बनाने, एडिट करने, प्रिंट,

2. पब्लिशर, विंडो में खाली स्थान ………………. एरिया कहलाता है।
उत्तर-
पब्लिकेशन,

3. पब्लिशर विंडो के बाईं तरफ ………………. एक छोटी विंडो होती है।
उत्तर-
टास्कपेन,

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I

4. ……………… में Invitation codes की किस्में नज़र आती हैं।
उत्तर-
टास्कपेन,

5. प्रचार एक विज्ञापन करने वाले इश्तिहारों को ……………. कहा जाता है।
उत्तर-
पब्लिकेशन।

(C) सही या गलत

1. पब्लिशर डाक्यूमैंट प्रिंट करने के लिए प्रयोग होता है।
उत्तर-
गलत,

2. स्टेट्स बार पब्लिशर विंडो के निचली तरफ होता है।
उत्तर-
सही,

3. निजी जानकारी (Personal Information) डायलॉग बॉक्स में भरी जाती है।
उत्तर-
गलत,

4. पब्लिकेशन PP+ एक्सटेंशन के साथ सेव होती है।
उत्तर-
गलत,

5. पब्लिकेशन से बाहर आने से पहले सारी पब्लिकेशन बंद करनी ज़रूरी होती हैं।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न-पब्लिशर क्या है ?
उत्तर-
पब्लिशर एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है जो सुंदर और बढ़िया प्रकार के डिज़ाइन दस्तावेज बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।

III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पब्लिशर को खोलने के स्टैप लिखें।
उत्तर-
पब्लिशर को खोलने के निम्नलिखित स्टैप हैं :

  1. Start बटन पर क्लिक करें।
  2. All Programs को हाइलाइट करें।
  3. Microsoft Office हाइलाइट करें।
  4. Microsoft Office Publisher 2010 पर क्लिक करें। पब्लिशर विंडो खुल जाएगी।

प्रश्न 2.
पब्लिशर विंडो के भागों के नाम लिखें।
उत्तर-
पब्लिशर विंडो के निम्नलिखित भाग हैं :

  • क्विक एकसैस बार
  • रिबन
  • फाईल विंडो।

प्रश्न 3.
पब्लिकेशन बनाने के दो तरीके कौन-से हैं ?
उत्तर-
पब्लिकेशन बनाने के दो तरीके निम्नलिखित हैं :

  • विज़ार्ड के द्वारा,
  • ब्लैंक ले-आऊट के द्वारा पब्लिकेशन तैयार करना। .

प्रश्न 4.
पब्लिकेशन को सेव करने के स्टैप लिखें।
उत्तर-
पब्लिकेशन को सेव करने के निम्नलिखित स्टैप हैं :

  1. File मीनू पर क्लिक करें।
  2. Save पर क्लिक करें।
  3. फाइल का नाम लिखें।
  4. Save बटन पर क्लिक करें।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 7 माईक्रोसॉफ्ट पब्लिशर-I

प्रश्न 5.
स्टेट्स बार क्या होता है ?
उत्तर-
स्टेट्स बार प्रत्येक विंडो के नीचे एक बार होता है जिसमें विंडो से संबंधित जानकारी दिखाई जाती है; जैसे-कि कुल पृष्ठों की गिनती, कुल शब्द, अक्षर आदि।

IV. बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न-
आप विज़ार्ड का प्रयोग करके एक पब्लिकेशन कैसे तैयार करोगे ?
उत्तर-
विज़ार्ड का प्रयोग करके निम्नलिखित अनुसार पब्लिकेशन तैयार किया जा सकता है :

  1. सबसे पहले पब्लिशर खोलें।
  2. File → New पर क्लिक करें।
  3. इसमें New Form Design में ‘Publication for print पर क्लिक करें। (पब्लिकेशन फार प्रिंट की सूची खुल जाएगी।)
  4. इसमें आप आवश्यकता अनुसार पब्लिकेशन की टाइप पर उसका डिज़ाइन चुनें।
  5. फिर हमारे पास Personal Information डायलॉग बॉक्स खुल जाएगा। इसमें अपनी जानकारी दें।
  6. सभी जानकारी देने के बाद OK बटन पर क्लिक करें। (पब्लिकेशन तैयार हो जाएगी। अब आप उसमें सुधार कर सकते हैं।)

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ Important Questions and Answers.

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पदार्थ की विशेषताएं क्या हैं? पदार्थ की तीन अवस्थाओं के गुण संक्षेप में लिखिए।
उत्तर-

  1. पदार्थ स्थान घेरते हैं – वस्तु द्वारा घेरा हुआ स्थान आयतन कहलाता है। सभी वस्तुएं स्थान तो घेरती हैं, लेकिन समान रूप में नहीं घेरती हैं। कुछ वस्तुएं कम और कुछ वस्तुएं अधिक स्थान घेरती हैं; जैसे-एक पुस्तक, पैंसिल की अपेक्षा अधिक स्थान घेरती है।
  2. पदार्थ भार रखते हैं – सभी वस्तुओं में भार होता है, पर सभी में समान रूप से भार नहीं होता है। यह इस पर निर्भर करता है जो कि वस्तु में अणु कितनी दृढ़ता से व्यवस्थित हैं।

सभी पदार्थों को तीन अवस्थाओं में वर्गीकृत किया गया है-
ठोस (Solid) – ऐसे पदार्थ जिनकी आकृति और आयतन दोनों ही निश्चित होते हैं, ठोस कहलाते हैं; जैसे-पत्थर, लोहा आदि।
ठोस के गुण-

  1. ठोस का आयतन निश्चित होता है।
  2. ठोस की आकृति निश्चित होती है।
  3. से कटोर और दृढ़ होते हैं।
  4. ठोस बहते नहीं हैं। इनका ढेर लगाया जा सकता है।
  5. ठोसों को संपोड़ित नहीं किया जा सका है।
  6. ठोसों के अणुओं के मध्य अधिक आकर्षण बल पाया जाता है।
  7. ठोस में बहुत-से मुक्त पृष्ठ हो सकते हैं।

द्रव (Liquids ) – वह पदार्थ जिनका आयतन तो निश्चित होता है, परंतु आकृति निश्चित नहीं होती है तथा एक मुक्त पृष्ठ होता है, द्रव कहलाता है। उदाहरण-जल, दूध आदि।

  1. द्रव का आयतन निश्चित होता है।
  2. द्रव की आकृति निश्चित नहीं होती है। यह उसी बर्तन की आकृति ग्रहण कर लेता है जिसमें रखा जाता है।
  3. द्रव के रखने के लिए बर्तन की आवश्यकता होती है।
  4. द्रव इसका ऊपरी पृष्ठ खुला होता है।
  5. द्रव के अणुओं के मध्य लगने वाला आकर्षण बल, ठोसों की अपेक्षा कम होता है।

गैस (Gas) – वह पदार्थ जिसमें न तो आकृति और न ही आयतन निश्चित होता है, गैस कहलाता है। यह सरलता से संपीड़ित हो जाता है और इसका कोई मुक्त पृष्ठ नहीं होता है। उदाहरण-ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, भाप आदि।

गैसों के गुण-

  1. गैसों की आकृति निश्चित नहीं होती है। ये जिस बर्तन में रखी जाती हैं, उसी का आकार ग्रहण कर लेती हैं।
  2. गैसों का आयतन निश्चित नहीं होता है। ये उसी बर्तन का आयतन ग्रहण कर लेती हैं, जिसमें इनको रखा जाता
  3. गैस को संपीड़ित किया जा सकता है।
  4. गैस का मुक्त पृष्ठ नहीं होता है।
  5. गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल कम होता है।
  6. गैस सभी दिशाओं में बह सकती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 2.
(क) प्रयोग द्वारा सिद्ध करें कि वाष्पन से ठंडक पैदा होती है।
(ख) वे उदाहरण दें जहाँ वाष्पन लाभदायक होता है।
उत्तर-
(क) प्रयोग – लकड़ी के टुकड़े पर थोड़ा-सा पानी छिड़क कर ईथर से भरे बीकर को ऊपर रख देते हैं। ईथर की वाष्पन दर बढ़ाने के लिए ईथर को फूंक मारते हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । पानी से वाष्पन की गुप्त ऊष्मा अवशोषित कर ली जाती है। यह ठंडा हो जाता है और अंत में जम जाता है तथा बर्फ बन जाता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 1

(ख) वाष्पन द्वारा ठंडक पैदा करने के उदाहरण-

  1. गर्मियों में हम ज़मीन पर पानी छिड़कते हैं। सतह से पानी वाष्पित होता है और वाष्पन के लिए गुप्त ऊष्मा यह करने से अवशोषित करता है जिससे ज़मीन ठंडी हो जाती है।
  2. गर्मियों के मौसम में प्रयुक्त होने वाले वाटर कूलर (डैज़र्ट कूलर) इसी नियम पर आधारित हैं कि वाष्पन से ठंडक पैदा होती है। चटाइयों ( पंड) पर छिड़का जा रहा पानी वाष्पित होता है और ठंडक पैदा होती है।
  3. जब बाहर का ताप बहुत आंधक ने तो हमारे शरीर पर पसीना आता है। जैसे ही हमें पसीना आता है, वाष्पन क्रिया होती हैं और ठंडक महेंसूस होता है।
  4. नहाने के बाद हमारे शरीर पर स्थित पानी का वाष्पन होता है जिससे ठंडक महसूस होती है। यह ठंडक और अधिक महसूस होगी यदि हम पंखे के नीचे आ खड़े हों। पंखे की हवा वाष्पन की दर बढ़ाती है, अत: ठंडक बढ़ती है।
  5. चुसकी लेने से पहले चाय के गर्म कप में फूंक मारी जाती है जिससे वाष्पन में वृद्धि हो जाती है तथा ताप में कमी हो जाती है।
  6. गर्मियों में वृक्षों में नए पत्ते आ जाते हैं। इन पत्तों से पानी का वाष्पन काफ़ी तीव्रता से होता है। फलस्वरूप ये
  7. मिट्टी के बर्तनों या सुराहियों में पानी ठंडा रहता है। मिट्टी के बर्तनों की सतह पर बहुत बारीक लिद्र होते हैं। पानी इन छिद्रों में से बाहर रिसता रहता है और वाष्पित होता रहता है तथा सुराही के पानी से वाष्पन की गुप्त ऊष्णा अवशोषित कर लेता है।
  8. परिणामस्वरूप सुराही में पड़ा पानी ठंडा हो जाता है। (8) कई बार घड़े के गिर्द एक गोला कपड़ा रखा जाता है ताकि पानी की वाष्पन क्रिया तेज हो और यह शीघ्रता से ठंडा हो सके।
  9. गर्मियों में कुत्ते प्रायः अपनी जीभ बाहर निकाले रखते हैं ताकि उन्हें ठंडक महसूस हो। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनकी चमड़ी से पसीना नहीं आता।
  10. जब नाखूनों की पॉलिश हटाने के लिए एसीटोन नामक द्रव को प्रयोग में लाते हैं तो नाखूनों के आस-पास त्वचा पर लगने से वह वहाँ से ऊष्मा को प्राप्त कर वाष्पीकृत हो जाती है जिससे ठंडक महसूस होती है।

प्रश्न 3.
क्वथन (Boiling) की परिभाषा दीजिए। यह वाष्यन से कैसे भिन्न है ?
उत्तर-
कवथन या उबाल क्रिया – जब द्रव का सतही दबाव वायुमंडलीय दबाव के बराबर हो जाता है तब द्रव अवस्था से वाष्प अवस्था में बदलने की क्रिया को उबाल क्रिया या क्वथन क्रिया कहते हैं।

पानी का क्वथनांक (Boiling point) – 100°C है। अशुद्धियाँ प्राय. क्वथनांक को कम कर देती हैं। द्रव की सतह पर दबाव में वृद्धि से उबाल दर्जे में वृद्धि होती है। यह दाब के कारण पानी (द्रव) के क्वथनांक में वृद्धि का सिद्धांत प्रेशर कुकर के निर्माण में प्रयुक्त होता है।

वाष्पन तथा क्वथन में अंतर-

क्वथन वाष्पन
(1) इस क्रिया के दौरान ताप बदलता है। (1) इस क्रिया के दौरान ताप पूर्णतया स्थिर रहता है।
(2) यह सभी तापों पर होता रहता है। (2) यह केवल क्वथनांक पर होता है।
(3) यह सतह पर होने वाली क्रिया है। (3) यह द्रव के सभी कणों पर होता है।
(4) यह एक शांत और धीमी क्रिया है। (4) यह तेज़ और एक ध्वनि उत्पन्न करने वाली क्रिया है।
(5) यह सतह के क्षेत्रफल, वायु, वेग आदि की वृद्धि से बढ़ जाती है। (5) यह इनके परिवर्तनों के होने पर स्थिर रहता है।
(6) इस क्रिया में बुलबुले नहीं बनते। (6) इस क्रिया में बुलबुले बनते हैं।
(7) इसमें ठंड उत्पन्न होती है। (7) इसमें ठंड उत्पन्न नहीं होती।

प्रश्न 4.
वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पदार्थ के कण सदा गतिशील रहते हैं। निश्चित तापमान पर उसके कणों में गतिज ऊर्जा होती है। जिस कारण वाष्पीकरण होता रहता है पर निम्नलिखित कारकों से इसकी दर प्रभावित होती है-

  • सतह क्षेत्र बढ़ने से – वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है। जब सतह का क्षेत्र बढ़ा दिया जाता है तो वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है। इसलिए किसी गिलास में डाले गए गर्म दूध की अपेक्षा प्लेट में डाला गया गर्म दूध जल्दी ठंडा हो जाता है। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए उन्हें धूप में फैलाया जाता है।
  • तापमान में वृद्धि – द्रव का तापमान जितना अधिक होगा उसका वाष्पीकरण भी उतना ही जल्दी होगा। इस से पदार्थ के कणों को पर्याप्त गतिज ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • आर्द्रता में कमी – यदि वायु में नमी की मात्रा कम हो तो वाष्पीकरण शीघ्र होता है पर वायु में नमी होने के कारण वाष्पीकरण देर से होता है। वर्षा के दिनों में गीले कपड़ों को इसी कारण सूखने में देर लगती है।
  • हवा की गति में तीव्रता – तेज़ हवा में वाष्पीकरण शीघ्र होता है। हवा तेज़ होने के कारण जलवाष्प हवा के साथ उड़ जाते हैं जिस कारण आसपास के जल वाष्पों की मात्रा घट जाती है।
  • पदार्थ की प्रकृति – पेट्रोल, स्पिरिट आदि ऐसे द्रव हैं जिनकी प्रकृति अधिक तेजी से वाध्वीकृत होने की है।
  • दबाव में कमी – द्रवों पर दबाव कम होने से वाष्पीकरण की क्रिया अधिक तेजी से होती है।

प्रश्न 5.
ऊष्मा और तापमान में अंतर लिखिए।
उत्तर-
ऊष्मा और तापमान में अंतर-

ऊष्या नापमान
1. यह ऊर्जा का एक रूप है। 1. यह एक अवाया है। इससे ऊष्मा के बहने की दिशा का पता लता है।
2. इसमें गर्मी या सर्दी की संवेदना का अनुभव होता है। 2. वस्तु का गुणधर्म होने के कारण यह उभा के प्रवाह को निश्चित करता है।
3. इसे कैलोरी या किलो-कैलोरी में मापते हैं। इसका यांत्रिक मात्रक जूल (J) है। 3. इसे अंशो में मा५ है।
4. यह वस्तु में ऊर्जा की मात्रा है। 4. यह वस्तु का भौतिक है।
5. इसे कैलोरीमीटर से मापते हैं। 5. इसे तापमापी से मापत हैं।
6. यह वस्तु की संहति, प्रकृति और तापक्रम पर निर्भर करती है। 6. यह वस्तु की संहति, प्रकृति और तापक्रम पर निर्भर नहीं करता।
7. यह एक कारण है। 7. यह ऊष्मा का प्रभाव है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पदार्थ किसे कहते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
पदार्थ – हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग में लायी जाने वाली अनेक प्रकार की नस्तुएं हैं। इसका रूप, सा, गुण, आकार, उपयोग आदि अलग-अलग होते हैं पर फिर भी हमारे लिए उपयोगा हैं। नमक का पानी में घोल और चीनी का पानी में घोल देखने में एक से प्रतीत होते हैं पर दोनों एक-दूपरे से भिन्न हैं : मेला, कुम भ पानी, हवा, पेसिल, पत्थर, दूध, माँस, दालें, अनाज आदि सभी पदार्थ हैं। पदार्थ वे वस्तुएँ हैं जो स्थान घरती हैं और रखती हैं इसलिए हमारे आस-पास की सभी वस्तुएँ पदार्थ की श्रेणी में रखी जाती हैं।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 2.
पदार्थ का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर-
पदार्थ को अनेक प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है। आधुनिक काल में इसका वो करण प्रायः दो आधारों पर किया जाता है-
(I) भौतिक अवस्था के आधार पर : ठोस द्रव और गैस
(II) रासायनिक संरचना के आधार पर : तत्त्व, यौगिक और मिश्रण।

प्रश्न 3.
प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि पदार्थ कणों से बने होते हैं और कणों के बीच खाली स्थान होता
उत्तर-
प्रयोग – एक 100 ml का बीकर लो। इसे जल से लगभग आधा भर दो और जल के स्तर पर निशान लगा दो। अब इसमें कुछ नमक या चीनी डालो और जल के स्तर को देखो। यह कुल बह गया है। नमक या चीनी को छड़ की सहायता से अच्छी तरह हिलाओ। इसके घुल जाने के पश्चात् जल का तल फिर से कम हो जाएगा।

निष्कर्ष – इससे प्रमाणित होता है कि जल के अणुओं के बाच खाली स्थान होता है। हिलाने पर नमक या चीनी के अणु उन खाली स्थानों में चले गए और जल का स्तर कम हो गया। पदार्थ कणों से बनने के कारण ही नमक या चीनी पूरी तरह जल में घुल गई।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 2

प्रश्न 4.
प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि पदार्थ के कण अति सूक्ष्म होते हैं ।
उत्तर-
प्रयोग – पोटाशियम परमैंगनेट के दो या तीन क्रिस्टलों को 100 मि.ली० जल में घोल दें। इस घोल से परखनली में लगभग 10 मि०ली. घोल निकाल कर 90 मि०ली० साफ जल में मिला दें। फिर इस घोल से 10 मि०ली० निकाल कर उसे भी 90 मि०ली० साफ जल में मिला दें। इसी प्रकार इस घोल को 5 से 8 बार दोहराओ और घोल को तनु करते रहो । आप देखेंगे कि जल अब भी रंगीन रहेगा।

निष्कर्ष- इससे सिद्ध होता है कि पोटाशियम परमैंगनेट के केवल एक क्रिस्टल में अनेक सूक्ष्म कण होते हैं ।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 3

प्रश्न 5.
प्रयोग द्वारा ठोस, द्रव और गैसों पर दबाव का प्रभाव प्रदर्शित करना ।
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 4
प्रयोग – 100 ml की तीन सिरिंज लेकर उनके सिरों को चित्र के अनुसार बंद कर दो। सभी सिरिंजों के पिस्टन को हटा लें। पहली सिरिंज में हवा, दूसरी में जल और तीसरी में चॉक के टुकड़े भर दें। सिरिंज के पिस्टन की गतिशीलता आसान बनाने के लिए उस पर थोड़ी वैसलीन लगा दें और उसे वापस सिरिंज में लगाएं। अब पिस्टन को संपीडित करने का प्रयत्न करें।

पिस्टन वायु से भरी सिरिंज में आसानी से गति करता है पर पानी से भरी सिरिंज में पिस्टन बहुत थोड़ी गति करता है। चॉक के टुकड़ों पर संपीडन बिल्कुल नहीं होता।

निष्कर्ष – गैसें सबसे अधिक संपीड्य होती हैं। द्रवों को अधिक नहीं दबाया जा सकता पर ठोस पर दबाव का प्रभाव नहीं पड़ता। गैसें सबसे अधिक संपीड्य होती हैं।

प्रश्न 6.
पदार्थ का भौतिक अवस्था के आधार पर वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर-
विश्व की विभिन्न वस्तुओं को भौतिक आधार पर ठोस, तरल और गैस नामक तीन अवस्थाओं में वर्गीकृत किया जा सकता है।
ठोस – ठोस का निश्चित रूप और आकार होता है तथा इसका निश्चित घनफल होता है। प्रायः ये कठोर होते हैं और इन पर दबाव नहीं डाला जा सकता। उदाहरण-लकड़ी, पत्थर, चीनी, नमक।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 5

द्रव – तरल का निश्चित आकार नहीं होता पर निश्चित घनफल अवश्य होता है। ये उसी बर्तन का आकार ले लेते हैं जिसमें इन्हें डाला जाता है। इनमें बहने की प्रवृत्ति होती है। इसलिए इन्हें द्रव भी कहते हैं । उदाहरण पानी, दूध, तेल, एल्कोहल।

गैस – गैस का न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित घनफल। इस पर दबाव डाला जा सकता है। यह उस बर्तन में पूर्ण रूप से फैल कर उसी का रूप ले लेती है जिसमें इसे डाला जाता है। उदाहरण-ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, वायु, कार्बन डाइऑक्साइड।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 7.
ठोस, द्रव और गैस की स्थिति अंतरा आण्विक बल के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रत्येक पदार्थ अति छोटे कणों से बनता है। ये कण स्थिर न हो कर लगातार गतिशील रहते हैं। ऊष्मा ऊर्जा से इनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। ये एक-दूसरे पर आकर्षण बल लगाते हैं जिसे अंतरा आण्विक बल कहते हैं । इनके आधार पर ठोस, द्रव, गैस की स्थिति की व्याख्या की जा सकती है।

ठोस – इनमें कण एक-दूसरे के बहुत निकट होते हैं और कणों के बीच बहुत कम रिक्त स्थान होता है । इनके बीच आकर्षण बल बहुत अधिक होता है और वे केवल घूर्णन गति कर सकते हैं । इसलिए उनका निश्चित आकार और घनफल होता है।
PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 6

द्रव – इनमें कण एक-दूसरे से दूर-दूर होते हैं और कणों के बीच पर्याप्त रिक्त स्थान होता है जिसके परिणामस्वरूप इनमें आकर्षण बल अपेक्षाकृत कमजोर होता है पर यह इतना कमजोर नहीं होता कि कण एक-दूसरे से अलग हो जाएं। इसीलिए द्रव पदार्थों का निश्चित आकार नहीं होता पर उनका निश्चित घनफल होता है। वे उस बर्तन का आकार ग्रहण कर लेते हैं जिसमें डाले जाते हैं।

गैस – गैसों में कणों की स्थिति बहुत ढीली होती है और उन के बीच रिक्त स्थान बहुत अधिक होते हैं। उन के बीच आकर्षण बल न के बराबर ही होता है और तीव्र वेग से सभी दिशाओं में इधर-उधर गति कर सकते हैं। इसीलिए गैस का न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित घनफल। इनके कणों में बड़े रिक्त स्थानों के कारण उन्हें दबाया जा सकता है और वे बर्तन की दीवारों पर दबाव डाल सकती हैं।

प्रश्न 8.
अवस्था परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
तापमान और दबाव पर निर्भर कर कोई पदार्थ ठोस, तरल और गैस अवस्थाओं को प्राप्त कर सकता है जिसे अवस्था परिवर्तन कहते हैं। यदि किसी वस्तु का द्रवणांक सामान्य तापमान से अधिक हो तो वह ठोस कहलाती है और यदि उसका क्वथनांक सामान्य तापमान से अधिक हो तो वह द्रव कहलाती है। सामान्य दबाव पर यदि क्वथनांक कम हो तो उसे गैस कहते हैं। तापमान और दबाव में परिवर्तन से किसी पदार्थ को ठोस, तरल और गैस अवस्थाएं दी जा सकती
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हैं। बर्फ को गर्म करने से वह द्रव में और द्रव को गर्म करने से वाष्प में बदला जा सकता है। वाष्प को ठंडा करने से द्रव और द्रव को ठंडा करने से उसे ठोस में बदला जा सकता है।
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प्रश्न 9.
एक प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि तापमान के परिवर्तन से पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन होता
उत्तर-
प्रयोग – एक बीकर में लगभग 150 ग्राम बर्फ का टुकड़ा लें और उसे स्टैंड पर इस प्रकार रखें कि थर्मामीटर का बल्ब उसको स्पर्श करे। चित्रानुसार उपकरण को लगाएं। बीकर को धीमी आंच पर गर्म करें।
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जब बर्फ पिघलने लगे तो तापमान नोट करो। जब पूरी बर्फ जल में परिवर्तित हो जाए तो फिर तापमान नोट करो। जब जल उबलने लगे और भाप बनने लगे तब तापमान को नोट करो।

निष्कर्ष – बर्फ 0°C पर पिघलती है। जब सारी बर्फ पिघल कर पानी में बदल जाती है तब भी उसका तापमान 0°C होता है। जल की द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में परिवर्तन 100°C पर होता है।

प्रश्न 10.
पदार्थ की अवस्था पर ताप और दाब का क्या प्रभाव पड़ता है ? स्पष्ट करो।
उत्तर-
ताप और दाब का पदार्थ की अवस्था पर प्रभाव पड़ता है। जब किसी ठोस को गर्म किया जाता है तो उस के कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। वे तेजी से कंपन करते हैं और अधिक स्थान ग्रहण करते हैं और वे फैलने लगते हैं। एक निश्चित तापमान पर वे आकर्षण के बंधन से मुक्त हो स्वतंत्रतापूर्वक घूमने लगते हैं। तब उसके अणुओं की गति नहीं बढ़ती और उनका व्यवस्था और क्रम में परिवर्तन होने लगता है तब वे तरल अवस्था में बदल जाते हैं । तल को गर्म करने से अणुओं का वेग बढ़ जाता है। उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। तेज़ गति वाले अणुओं का सवेग जब उन पर भीतर की तरफ लग रहे बल से अधिक बढ़ जाता है तो वे वाष्प अवस्था में बदल जाते हैं और तरल की सतह से बाहर निकल आते हैं।

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प्रश्न 11.
जल और एल्कोहल के निश्चित आयतन को परस्पर मिलाने पर मिश्रण का आयतन प्रारंभ में लिए गए जल और एल्कोहल के योग से कम हो जाता है। क्यों ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
काँच की एक नली के आधे भाग में जल भरो। इस के शेष आधे भाग को एथिल एल्कोहल से भर दो। इसे अच्छी तरह से हिलाओ। नली में कुछ रिक्त स्थान दिखाई देगा। कुछ समय बाद इसे फिर देखो। मिश्रण का आयतन प्रारंभ में लिए गए जल और एल्कोहल के आयतन के योग से कुछ कम दिखाई देगा क्योंकि एल्कोहल के कण जल के अंतरा-अणुक अवकाश के मध्य समायोजित हो जाते हैं।

प्रश्न 12.
ठोस, द्रव तथा गैस में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
ठोस, द्रव तथा गैस में अंतर-
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प्रश्न 13.
शीतलन के लिए 0°C के पानी की अपेक्षा 0°C की बर्फ़ अधिक प्रभावी क्यों होती है ?
उत्तर-
0°C ताप की बर्फ °C के पानी की अपेक्षा ठंडा करने में अधिक प्रभावपूर्ण होती है क्योंकि वह 0°C के पानी में बदलने के लिए अपनी गलन की गुप्त ऊष्मा के बराबर ऊष्मा लेती है और फिर ताप वृद्धि के लिए ऊष्मा प्राप्त करती है जबकि 0°C तापमान का पानी केवल ताप में वृद्धि के लिए ही ऊष्मा को प्राप्त करता है।

प्रश्न 14.
दाँतों को आइसक्रीम बर्फ के जल की अपेक्षा अधिक ठंडी क्यों प्रतीत होती है ?
उत्तर-
आइसक्रीम को पिघलने के लिए गलन की गुप्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है जो दाँतों से अवशोषित की जाती है। इस गुप्त ऊष्मा का मान अधिक होता है जिसके परिणामस्वरूप दाँतों को आइसक्रीम बर्फ के जल की अपेक्षा अधिक ठंडी प्रतीत होती है।

प्रश्न 15.
बर्फ गलन की गुप्त ऊष्मा क्या है ? इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
बर्फ गलन की गुप्त ऊष्मा 3.34 × 105 J/kg (या 80 cal/g) है। इसका अर्थ यह है कि 0°C पर 1 kg बर्फ 3.34 × 105 जूल ऊष्मा अवशोषित करके 0°C पर 1 kg पानी में बदलती है या 1 kg पानी 0°C पर 3.34 × 105 जूल ऊष्मा विसर्जित करके 0°C पर बर्फ में बदल जाता है।

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प्रश्न 16.
भाप के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा क्या है ? इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
भाप के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 22.5 × 105 J/kg (या 540 cal/g) है। इसका अर्थ यह है कि 100° पर 1kg पानी 22.5 × 105 जूल ऊष्मा अवशोषित करके 100°C ताप वाली भाप में बदल जाता है या 100°C पर 1 kg भाप 22.5 × 105 जूल ऊष्मा विसर्जित करके 100°C ताप वाले पानी में बदल जाती है।

प्रश्न 17.
उबलते पानी और उसी ताप की भाप में से, किससे जलन अधिक कष्टकर होती है ? कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
भाप सदा ही उबलते पानी से अधिक गंभीर जलन उत्पन्न करती है। जब पानी 100°C तापमान पर उबलता है तो 100°C वाष्प में परिवर्तित होता है। उसे 536 कैलोरी / ग्राम या 2260 जूल / ग्राम ऊष्मा की आवश्यकता होती है जिसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं । इसीलिए उबलते पानी से भाप में ऊष्मा अधिक होती है क्योंकि उसमें गुप्त ऊष्मा भी सम्मिलित होती है। इसी कारण वह अधिक गंभीर जलन उत्पन्न करती है।

प्रश्न 18.
जब मोटे कांच से बने गिलास में उबलता हुआ पानी ( या बर्फ ) डाल दिया जाता है तो यह तिड़क क्यों जाता है ?
उत्तर-
जब मोटे कांच से बने गिलास में उबलता हुआ पानी डाला जाता है तो ताप वृद्धि के कारण गिलास का आंतरिक भाग फैल जाता है। क्योंकि कांच ऊष्मा का कम चालक है इसलिए बाहर बहुत कम ऊष्मा आती है। बाहरी सतह से कांच बहुत कम फैलता है। इसी कारण गिलास तिड़क जाता है।

प्रश्न 19.
ठोस प्रसार की कुछ हानियां बताओ।
उत्तर-
ठोस प्रसार की कुछ हानियां-

  1. जब कांच के गिलास में गर्म पानी डाला जाता है तो यह तिड़क जाता है ।
  2. इस प्रसार के कारण रेल की पटरियां टेढ़ी हो सकती हैं तथा गाड़ियां उलट सकती हैं।
  3. कंकरीट या अन्य सामान्य फ़र्श तिड़क सकते हैं।
  4. भाप या गर्म पानी से पानी की पाइपें मुड़ सकती हैं।
  5. गर्मियों में लंबी तारें बिछाई जाती हैं ताकि सर्दियों में सिकुड़ने की क्रिया को पूरा किया जा सके।
  6. इस्पात से बने पुल फैल कर सहारे की दीवारें तोड़ सकते हैं।
  7. घड़ियां गर्मियों में पीछे और सर्दियों में आगे जा सकती हैं।

प्रश्न 20.
जब बहुत गर्म चाय कांच के गिलास में डाली जाती है तो यह तिड़क क्यों जाता है ?
उत्तर-
गर्म पानी या चाय डालने पर मोटा कांच का गिलास तिड़क जाता है । गर्म द्रव गिलास के आंतरिक भाग को बाहरी तल से पहले प्रसारित कर देता है। इस तरह उत्पन्न तनाव कांच के लिए इतना अधिक होता है जो इसके लिए असहनीय हो जाता है और गिलास तिड़क जाता है।

प्रश्न 21.
रेल की दो पटरियों के बीच प्रसार के लिए खाली स्थान रखा जाता है, क्यों ? व्याख्या करो।
उत्तर-
गर्मियों में रेल पटरियां गर्म होकर फैलती हैं। यदि प्रसार के लिए खाली स्थान न रखा जाए तो यह मुड़ सकती हैं तथा रेल पटरी से उतर सकती है। इसलिए दो पटरियों के बीच खाली स्थान छोड़ा जाता है. ताकि इन्हें प्रसार के लिए स्थान मिल सके।

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प्रश्न 22.
जब तालाब जम जाते हैं, तो भी मछलियां कैसे जीवित रहती हैं ? ।
उत्तर-
पानी के असंगत प्रसार के कारण बहुत कड़ाके की सर्द में भी झीलों और तालाबों के पानी की ऊपरी सतह ही जमती है। ऊपर जमी बर्फ के नीचे का पानी नहीं जमता । परिणामस्वरूप मछलियां तथा अन्य जल जीव जीवित रहते हैं। यदि पानी का प्रसार एक जैसा होता है तो झीलों और तालाबों का सारे का सारा पानी जम जाता है तो जल जीवों तथा जल-वनस्पति का बचना असंभव होता।

प्रश्न 23.
किसी धात्वीय बर्तन की अपेक्षा सुराही में रखा पानी अधिक ठंडा क्यों होता है ?
उत्तर-
सुराही के छिद्रों में से पानी बाहर आ जाता है जो निरंतर इसकी सतह से वाष्पित होता रहता है। वाष्पन के लिए अभीष्ट ऊष्मा सुराही के अंदर पड़े पानी से ली जाती है। इस ऊष्मा हानि के कारण पानी ठंडा हो जाता है।

प्रश्न 24.
‘पदार्थ की गुप्त ऊष्मा’ की परिभाषा लिखो।
उत्तर-
गुप्त ऊष्मा की वह मात्रा है जो किसी पदार्थ द्वारा ठोस से द्रव या द्रव से गैस (वाष्प) अवस्था परिवर्तित करते समय बिना किसी ताप वृद्धि के अवशोषित की जाती है।

प्रश्न 25.
गलन की गुप्त ऊष्मा तथा वाष्यन की गुप्त ऊष्मा की परिभाषा दें।
उत्तर-
गलन की ऊष्मा – बिना ताप परिवर्तित किए किसी पदार्थ के इकाई पुंज द्वारा ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में बदलते समय अवशोषित ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की गलन ऊष्मा कहते हैं।

वाष्पन की गुप्त ऊष्मा-बिना ताप परिवर्तित किए किसी पदार्थ के इकाई पुंज द्वारा द्रव अवस्था से गैस अवस्था में बदलते समय अवशोषित ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।

प्रश्न 26.
गर्मियों में कभी-कभी सोडा वाटर की बोतलें फट जाती हैं क्यों?
उत्तर-
गर्मियों में वायुमंडल का ताप बढ़ने से सोडा-वाटर में भरी गैस का दाब गर्म होने से बढ़ जाता है जिसके कारण कभी-कभी सोडा वाटर की बोतलें फट जाती हैं।

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प्रश्न 27.
नहाने के तुरंत बाद हमें ठंड क्यों महसूस होती है ?
उत्तर-
नहाने के तुरंत बाद शरीर पर पानी की कुछ बूंदें रह जाती हैं। इन बूंदों का वाष्पीकरण होता है। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा हमारे शरीर से ले ली जाती है जिसके कारण हमें ठंड महसूस होती है।

प्रश्न 28.
गर्मियों में सड़कों पर छिड़काव क्यों किया जाता है?
उत्तर-
वाष्पन से ठंडक उत्पन्न होती है। सड़कों पर किए गए छिड़काव के कारण वाष्पन क्रिया तीव्र होती है। वाष्पण के लिए जो ऊष्मा की आवश्यकता होती है वह सड़क से ली जाती है जिस कारण सड़कें ठंडी हो जाती हैं।

प्रश्न 29.
किस प्रकार सिद्ध करोगे कि पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं ?
उत्तर-
जलती हुई अगरबत्ती की सुगंध पदार्थ के कणों के गतिशील होने के कारण दूर से अनुभव की जा सकती है। गर्म खाने की महक दूर से अनुभव की जा सकती है। रबड़ को लगी आग को बहुत दूर से जाना जा सकता है। इत्र की गंध पदार्थ के कणों के गतिशील होने के कारण ही दूर तक फैल जाती है।

प्रश्न 30.
ठोस का ठोस में विसरण क्या है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
दो धातु के टुकड़ों को कसकर बाँधकर कुछ वर्षों तक रख देने से कभी-कभी एक धातु के कण दूसरे में विसरित हो जाते हैं। इसे ठोस में ठोस का विसरण कहते हैं। ठोस के कण अपने स्थान से ज़्यादा गति नहीं करते। वे अपने माध्य स्थान पर ही दोलन करते हैं। इसलिए ठोस पदार्थों में दूसरे ठोस पदार्थ में विसरित होने के गुण प्रायः नहीं होते।

प्रश्न 31.
गैसों में संपीड्यता के अधिक होने के तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर-

  1. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) को सिलिंडरों में भरा जाता है ताकि ईंधन के रूप में प्रयुक्त की जा सके।
  2. अस्पतालों में रोगियों को दी जाने वाली ऑक्सीजन गैस सिलिंडरों में संपीडित की जाती है।
  3. प्राकृतिक गैस (CNG) का वाहनों में प्रयोग इसी गुण के आधार पर किया जाता है।

प्रश्न 32.
गर्म करने पर ठोसों की अवस्था में परिवर्तन लिखिए।
उत्तर-
ठोस को गर्म करने पर उसके अणुओं की कंपन गति बढ़ती है। गतिज ऊर्जा बढ़ने के साथ अंतर आण्विक बल कम होने लगता है। एक निश्चित ताप पर अणुओं के कंपन का आयाम इतना बढ़ जाता है कि वे आकर्षण के बंधन से मुक्त होकर स्वतंत्रतापूर्वक घूमने लगते हैं। एक निश्चित ताप के पहुँचने पर ठोस के अणुओं की गतिज ऊर्जा नहीं बढ़ती है, बल्कि उनकी व्यवस्था तथा क्रम में परिवर्तन होने लगता है। अत: ठोस द्रव में परिवर्तित होने लगता है।

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प्रश्न 33.
गर्म करने पर द्रव की अवस्था में परिवर्तन लिखिए।
उत्तर-
द्रव को गर्म करने पर उसके अणुओं की गतिज ऊर्जा काफ़ी बढ़ जाती है, और अणु एक-दूसरे से काफ़ी दूर होते जाते हैं। ऐसे अणु जिनकी गतिज ऊर्जा बहुत अधिक होती है, द्रव की सतह पर आने पर सतह को छोड़कर वायुमंडल में चले जाते हैं। इस प्रकार अणुओं के बीच अंतरा अणुक आकर्षण बल नहीं के बराबर हो जाता है और द्रव वाष्प में निरंतर परिवर्तित होने लगता है।

प्रश्न 34.
द्रव के ठंडा होने की अवस्था में परिवर्तन लिखिए।
उत्तर-
जब किसी द्रव को ठंडा किया जाता है तो इसके अणु ऊष्मीय ऊर्जा खो देते हैं। इससे उनकी गति धीमी हो जाती है। गति धीमी होने से अंतराअणुक बल बढ़ जाते हैं। यह तब तक चलता रहता है, जब तक कि अंतराअणुक बल, कंपन करते हुए अणुओं की ऊर्जा से अधिक नहीं हो जाते। इस प्रकार अणु एक स्थिति में रहते हैं। इस समय द्रव, ठोस अवस्था में परिवर्तित होता है।
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प्रश्न 35.
गैस के ठंडा होने पर अवस्था परिवर्तन लिखिए।
उत्तर-
जब गैस को ठंडा किया जाता है, इसके अणु ऊष्मा ऊर्जा को खो देते हैं। इससे अणुओं की गति धीमी हो जाती है। यह तब तक चलता रहता है, जब तक कि गैस के अणुओं की ऊर्जा, अंतराअणुक बलों से कम नहीं हो जाती है। इस प्रकार, अणु एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं और निर्बल अंतराअणुक बलों द्वारा बँधे रहते हैं। इसीलिए गैस, द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाती है।

प्रश्न 36.
पदार्थ की तीन अवस्थाओं में परिवर्तन को रेखाचित्र की सहायता से प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
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प्रश्न 37.
ऊर्ध्वपातन विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
ऊर्ध्वपातन विधि में ठोस को गर्म कर सीधा वाष्प में या वाष्प को सीधा ठोस में बदला जाता है। इस प्रक्रिया में द्रव नहीं बनता।
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इस विधि से अमोनियम क्लोर इड, नैप्थालीन, आयोडीन, कपूर आदि को सरलता से प्राप्त कर लिया जाता है।

चीनी की प्याली में थोड़ा कपूर या अमोनियम क्लोराइड लें। इस पर फिल्टर पेपर रख कर उस पर उल्टा कीप रखें। कीप के सिरे पर रूई का एक टुकड़ा रख दें। गर्म करने पर वाष्प बना कपूर या अमोनियम क्लोराइड प्राप्त हो जाएगा।

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प्रश्न 38.
बर्फीले पानी से भरे गिलास की बाहरी सतह पर पानी की बूंदें क्यों दिखाई देती हैं?
उत्तर-
किसी बर्तन में हम बर्फीला पानी रखते हैं। जल्दी ही बर्तन की बाहरी सतह पर हमें पानी की बूंदें नज़र आने लगेंगी। वायु में उपस्थित जल वाष्प की ऊर्जा ठंडे पानी के संपर्क में आकर कम हो जाती है और यह द्रव अवस्था में बदल जाता है, जो हमें पानी की बूंदों के रूप में नज़र आता है।
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प्रश्न 39.
दाब बढ़ाने से किसी द्रव पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
पदार्थ की विभिन्न अवस्थाएं घटक कणों के बीच की दूरी में अंतर के कारण होती हैं। दाब बढ़ाने से पदार्थों के कणों को समीप लाया जा सकता है। ताप में कमी करके इससे गैस को द्रव अवस्था में बदला जा सकता है।
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प्रश्न 40.
प्लाज्मा क्या है ? ये कहाँ-कहाँ देखा जा सकता है ?
उत्तर-
प्लाज्मा पदार्थ की एक अवस्था है जिसमें कण आयनीकृत गैस के रूप में होते हैं। ये अत्यधिक ऊर्जावान और उत्तेजित होते हैं । इसे अग्रलिखित में देखा जा सकता है-

  1. लोटसेंट ट्यूब और नियॉन बल्ब में।
  2. सूर्य और तारों की चमक में।

प्रश्न 41.
प्लाज्मा भिन्न रंगों को प्रकट क्यों करता है ?
उत्तर-
विशेष प्रकार की गैसों में विद्युत् ऊर्जा प्रवाहित करने पर गैसें आयनीकृत हो जाती हैं। गैस के स्वभाव के अनुसार विशेष रंग की चमक उत्पन्न होती है।

प्रश्न 42.
बोस आइंस्टाइन कंडनसेट से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
एक भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस ने सन् 1920 में पदार्थ की पाँचवीं अवस्था के लिए कुछ गणनाएँ की थीं। उनके आधार पर अल्बर्ट आइंस्टीन ने पदार्थ की एक नई अवस्था की भविष्यवाणी की थी। इसी को बोस आइंस्टाइन कंडनसेट (BEC) कहा जाता है। बाद में अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों एरिक ए कॉर्नेल, उल्फगैंग केटरले और कार्ल ई वेमैन ने BEC की अवस्था प्राप्त करने पर नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया था।

प्रश्न 43.
BEC किस प्रकार तैयार किया जाता है ?
उत्तर-
सामान्य वायु के घनत्व के एक लाखवें हिस्से से कम घनत्व वाली गैस को अत्यधिक कम तापमान पर ठंडा करने से BEC तैयार किया जाता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
हमारे चारों ओर की वस्तुएं किस कारण भिन्न दिखाई देती हैं ?
उत्तर-
आकार, आकृति और बनावट में भिन्नता के कारण वे भिन्न दिखाई देती हैं।

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प्रश्न 2.
पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
विश्व की हर वस्तु जिस भी सामग्री से बनती है, जो स्थान घेरती है और जिसका द्रव्यमान होता है, उसे पदार्थ कहते हैं।

प्रश्न 3.
पदार्थ के पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
हवा, भोजन, पत्थर, जल, पौधे।

प्रश्न 4.
पंचतत्व किसे कहते हैं ?
उत्तर-
हमारे देश के प्राचीन दार्शनिकों ने सभी वस्तुओं को बनाने वाले पदार्थ को पाँच मूल तत्वों में वगीकृत किया था जिन्हें पंचतत्व कहते हैं।

प्रश्न 5.
पंचतत्व कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल और आकाश।

प्रश्न 6.
यूनानी दार्शनिक कितने तत्वों का मूल मानते थे ?
उत्तर-
चार।

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प्रश्न 7.
यूनानी दार्शनिकों के द्वारा स्वीकार किए जाने वाले चार मूल तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर-
पृथ्वी, अग्नि, वायु और जल।

प्रश्न 8.
आधुनिक वैज्ञानिक पदार्थ को किस आधार पर वर्गीकृत करते हैं ?
उत्तर-
भौतिक गुणधर्म और रासायनिक प्रकृति।

प्रश्न 9.
पदार्थ किससे बनते हैं ?
उत्तर-
पदार्थ कणों से मिलकर बनते हैं।

प्रश्न 10.
पोटेशियम परमैंगनेट के बहुत थोड़े क्रिस्टलों से भी जल रंगीन क्यों हो जाता है ?
उत्तर-
पोटेशियम परमैंगनेट के केवल एक क्रिस्टल में अनेक सूक्ष्म कण होते हैं।

प्रश्न 11.
पदार्थ के कण कितने छोटे हो सकते हैं ?
उत्तर-
पदार्थ के कण इतने छोटे हो सकते हैं कि उनकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते।

प्रश्न 12.
पदार्थ के कणों के बीच में क्या होता है ?
उत्तर-
पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है।

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प्रश्न 13.
नमक, चीनी, डेटॉल आदि पानी में क्यों घुल जाते हैं ?
उत्तर-
पदार्थों के कणों के बीच पर्याप्त रिक्त स्थान होने के कारण।

प्रश्न 14.
अगरबत्ती की सुगंध दूर तक किस कारण से फैल जाती है ?
उत्तर-
पदार्थ के कणों के निरंतर गतिशील होने के कारण।

प्रश्न 15.
नमक पानी में क्यों घुल जाता है ?
उत्तर-
जब नमक को पानी में घोलते हैं तो नमक के कण पानी के कणों के बीच रिक्त स्थानों में समावेशित हो जाते हैं।

प्रश्न 16.
पानी में शहद की शुद्धता किस प्रकार परखी जा सकती है ?
उत्तर-
यदि पानी में शहद एक वर्ण रेखा के रूप में गिरता है तो वह शुद्ध माना जाता है।

प्रश्न 17.
तापमान बढ़ाने से कणों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है।

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प्रश्न 18.
पदार्थ के कण निरंतर गतिशील किस कारण रहते हैं ?
उत्तर-
गतिज ऊर्जा के कारण।

प्रश्न 19.
विसरण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वत: मिलना विसरण कहलाता है।

प्रश्न 20.
गर्म करने पर विसरण पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
गर्म करने पर विसरण तेज़ हो जाता है।

प्रश्न 21.
पदार्थ के कणों पर बल क्या प्रभाव डालता है ?
उत्तर-
यह बल कणों को एक साथ रखता है।

प्रश्न 22.
भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थ की अवस्थाएं कौन-कौन-सी हैं ?
उत्तर-
ठोस, द्रव और गैस।

प्रश्न 23.
ठोस पदार्थों के तीन गुण लिखिए।
उत्तर-
ठोस पदार्थों का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ और स्थिर आयतन होता है।

प्रश्न 24.
बल लगाने से ठोस पदार्थों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
बल लगाने से भी ठोस पदार्थ अपना आकार बनाए रखते हैं। अधिक बल लगाने से वे टूट सकते हैं पर अपना आकार नहीं बदलते।

प्रश्न 25.
रबड़ को खींच कर इसका आकार बदला जा सकता है तो फिर यह ठोस क्यों है ?
उत्तर-
रबड़ पर बल लगाने से यह अपना आकार बदलता है पर बल हटा लेने से यह पुनः अपने मूल आकार को प्राप्त कर लेता है। अत्यधिक बल लगाने पर यह टूट जाता है। इसलिए यह ठोस है।

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प्रश्न 26.
चीनी, नमक, शक्कर आदि को जिन बर्तनों में रखते हैं, ये उन्हीं बर्तनों का आकार ले लेते हैं पर फिर भी ये ठोस क्यों कहलाते हैं ?
उत्तर-
चीनी, नमक, शक्कर आदि को जिन बर्तनों में रखते हैं, ये उन्हीं का आकार ले लेते हैं। पर फिर भी ये ठोस हैं क्योंकि इनके क्रिस्टलों के आकार नहीं बदलते।

प्रश्न 27.
स्पंज का संपीडन संभव क्यों होता है ?
उत्तर-
स्पंज का संपीडन इसमें विद्यमान छिद्रों से हवा बाहर निकलने के कारण संभव होता है।

प्रश्न 28.
द्रव किसे कहते हैं ?
उत्तर-
द्रव निश्चित आयतन वाले तरल हैं जिनमें बहाव का गुण होता है और ये आकार बदलते हैं।

प्रश्न 29.
जल के किस गुण के कारण जलीय जंतु जीवित रह पाते हैं ?
उत्तर-
वातावरण में विद्यमान ऑक्सीजन गैस विसरित होकर जल में मिल जाती है जो जलीय जंतुओं के जीवन के लिए अनिवार्य होती है।

प्रश्न 30.
जल में कौन-सी गैस विसरित होकर पौधों के लिए आवश्यकताओं की पूर्ति करती है ?
उत्तर-
कार्बन डाइऑक्साइड गैस।

प्रश्न 31.
द्रव में किन-किन का विसरण संभव है ?
उत्तर-
द्रव में ठोस, द्रव और गैस तीनों का विसरण संभव है।

प्रश्न 32.
ठोस की अपेक्षा द्रव में विसरण की दर अधिक क्यों होती है ?
उत्तर-
ठोस की अपेक्षा द्रव में पदार्थ के कण स्वतंत्र रूप से गति करते हैं और उन कणों में रिक्त स्थान भी अधिक होते हैं।

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प्रश्न 33.
ठोस, द्रवों और गैसों में अपेक्षाकृत संपीड्यता किसमें सबसे अधिक होती है ?
उत्तर-
गैसों में।

प्रश्न 34.
वाहनों में कौन-सी संपीडित गैस प्रयुक्त की जाती है ?
उत्तर-
संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG)।

प्रश्न 35.
घरों में ईंधन के रूप में कौन-सी गैस प्रयुक्त की जाती है ?
उत्तर-
द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG)।

प्रश्न 36.
इत्र और अगरबत्ती की सुगंध तेज़ी से क्यों फैल जाती है ?
उत्तर-
कणों की तेज़ गति और अत्यधिक रिक्त स्थानों के कारण गैसों का विसरण बहुत तीव्रता से हो जाता है।

प्रश्न 37.
पानी द्रव्य की किन-किन अवस्थाओं में पाया जाता है ?
उत्तर-
पानी ठोस (बर्फ), द्रव, गैस (वाष्प) अवस्थाओं में पाया जाता है।

प्रश्न 38.
ठोस की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
ठोस प्रायः कठोर होते हैं जिन पर दबाव नहीं डाला जा सकता। इनका निश्चित आकार और घनफल होता है।

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प्रश्न 39.
द्रव की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
द्रव का निश्चित घनफल होता है पर कोई निश्चित आकार नहीं होता। इस पर भी अधिक दबाव नहीं डाला जा सकता। यह प्रायः बहते हैं।

प्रश्न 40.
गैस की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
गैस दबाव को सहन करने वाला द्रव्य है जिसे किसी भी आकार के बर्तन में भरा जा सकता है। इसका निश्चित आकार और घनफल नहीं होता।

प्रश्न 41.
ठोस, तरल और गैस के चार-चार उदाहरण दो।
उत्तर-
ठोस = लकड़ी, पत्थर, चीनी, नमक।
तरल = पानी, दूध, तेल, एल्कोहल।
गैस = वायु, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड।

प्रश्न 42.
CNG का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर-
Compressed Natural Gas (दबाव सहित प्राकृतिक गैस)।

प्रश्न 43.
ठोस प्रायः निश्चित आकार के क्यों होते हैं ?
उत्तर-
ठोस वस्तुओं को बनाने वाले कण एक-दूसरे के बहुत निकट होते हैं और उनके बीच आकर्षण बल बहुत अधिक होता है इसलिए ठोस प्रायः निश्चित आकार के होते हैं।

प्रश्न 44.
किसी टायर में हवा अधिक क्यों भरी जा सकती है ?
उत्तर-
गैसों के द्वारा अधिक दबाव सहने के गुण के कारण किसी टायर में अधिक हवा भरी जा सकती है। गैसों के कण गति करने में स्वतंत्र होते हैं और वे टायर में शीघ्र फैल सकते हैं।

प्रश्न 45.
गैसों की आकृति और आयतन निश्चित क्यों नहीं होता ?
उत्तर-
गैसों के अणु एक-दूसरे से काफ़ी दूरी पर होते हैं। इन्हें गति करने और अपने स्थान से चारों ओर घूमने में पर्याप्त स्वतंत्रता होती है इसलिए इनकी आकृति और आयतन निश्चित नहीं होता।

प्रश्न 46.
जल पदार्थ की कितनी अवस्थाओं में रहता है ?
उत्तर-
तीन अवस्थाओं में।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 47.
जल की तीनों अवस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
ठोस = बर्फ, द्रव = जल, गैस = जलवाष्प।

प्रश्न 48.
तापमान में वृद्धि के कारण जब ठोस पिघल कर द्रव बन जाता है तो उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर-
गलनांक।

प्रश्न 49.
तापमान की SI इकाई क्या है ?
उत्तर-
केल्विन।

प्रश्न 50.
0°C कितने केल्विन के बराबर होता है ?
उत्तर-
0°C सेल्सियस = 273.16K .

प्रश्न 51.
केल्विन से सेल्सियस में बदलने के लिए तापमान में कितना घटाना चाहिए ?
उत्तर-
273 घटाना चाहिए।

प्रश्न 52.
सेल्सियस से केल्विन में बदलने के लिए तापमान में कितना जोड़ना चाहिए ?
उत्तर-
273 जोड़ना चाहिए।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 53.
संगलन क्या है ?
उत्तर-
गलने की प्रक्रिया यानि ठोस से द्रव अवस्था में परिवर्तन को संगलन कहते हैं।

प्रश्न 54.
जल का क्वथनांक क्या है ?
उत्तर-
जल का क्वथनांक 373 K (100°C) है।

प्रश्न 55.
ऊर्ध्वपातन क्या है ?
उत्तर-
द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस और वापस ठोस में बदलने की प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं।

प्रश्न 56.
शुष्क बर्फ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ठोस कार्बन डाइऑक्साइड को शुष्क बर्फ कहते हैं।

प्रश्न 57.
दाब के मापन की इकाई क्या है ?
उत्तर-
ऐटमॉस्फीयर (atm)।

प्रश्न 58.
दाब की SI इकाई क्या है ?
उत्तर-
पास्कल (Pa)।

प्रश्न 59.
सामान्य दाब किसे कहते हैं ?
उत्तर-
समुद्र की सतह पर वायुमंडलीय दाब एक ऐटमॉसफीयर होता है और इसे सामान्य दाब कहते हैं।

प्रश्न 60.
कोई द्रव बिना क्वथनांक पर पहुँचे वाष्प अवस्था में किस प्रकार पहुँचता है ?
उत्तर-
वाष्पन क्रिया से।

प्रश्न 61.
वाष्पन क्रिया का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
धूप में गीले कपड़ों का सूखना।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 62.
क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव के वाष्पन में परिवर्तन की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
वाष्पीकरण।

प्रश्न 63.
वाष्पीकरण की दर किन-किन कारणों से बढ़ती है ?
उत्तर-
सतह क्षेत्र बढ़ने से, तापमान में वृद्धि, आर्द्रता में कमी, हवा की गति में वृद्धि।

प्रश्न 64.
तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण की क्रिया तेज़ क्यों हो जाती है ?
उत्तर-
कणों को पर्याप्त गतिज ऊर्जा मिलने के कारण।

प्रश्न 65.
हवा की गति बढ़ने से कपड़े जल्दी क्यों सूखते हैं ?
उत्तर-
जल वाष्पों के कण हवा के साथ उड़ जाते हैं जिस कारण आस-पास के जल वाष्प की मात्रा घट जाती है।

प्रश्न 66.
आर्द्रता किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वायु में विद्यमान जल वाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं।

प्रश्न 67.
आर्द्रता का वाष्पन से क्या संबंध है ?
उत्तर-
वायु में जल कणों की मात्रा बढ़ने से वाष्पीकरण की दर घट जाती है।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 68.
कपड़ों को सुखाने के लिए उन्हें फैलाया क्यों जाता है ?
उत्तर-
उनके सतही क्षेत्र को बढ़ाने के लिए ताकि वाष्पीकरण की दर बढ़ाई जा सके।

प्रश्न 69.
वाष्पीकरण का शीतलता से क्या संबंध है ?
उत्तर-
वाष्पीकरण से शीतलता बढ़ती है।

प्रश्न 70.
गर्मियों में सूती कपड़ों का प्रयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
सूती कपड़ों में जल का अवशोषण अधिक होता है जिसका वायुमंडल में सरलता से वाष्पीकरण हो जाता है जिस कारण तापमान कम हो जाता है।

प्रश्न 71.
प्लाज्मा अवस्था में कण किस रूप में होते हैं ?
उत्तर-
इस अवस्था में कणं अत्यधिक ऊर्जा वाले और अधिक उत्तेजित होते हैं। ये कण आयनीकृत गैस के रूप में होते हैं।

प्रश्न 72.
लोरसेंट ट्यूब और नियॉन बल्ब में क्या होता है ?
उत्तर-
प्लाज्मा होता है।

प्रश्न 73.
सूर्य और तारों में चमक किस कारण होती है ?
उत्तर-
प्लाज्मा के कारण।

PSEB 9th Class Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 74.
तारों में प्लाज्मा किस कारण बनता है ?
उत्तर-
उच्च तापमान के कारण।

प्रश्न 75.
BEC किस प्रकार तैयार किया जाता है ?
उत्तर-
सामान्य वायु के घनत्व के एक लाखवें भाग जितने कम घनत्व वाली गैस को बहुत ही कम तापमान पर ठंडा करने से BEC तैयार होता है।

प्रश्न 76.
‘बोस-आइंस्टीन कंडनसेशन’ की अवस्था प्राप्त करने के लिए भौतिकी में किसे नोबेल पुरस्कार दिया गया था ?
उत्तर-
सन् 2001 में अमेरिका के एरिक ए० कॉर्नेल, उलगैंग केटरले तथा कार्ल ई० वेमैन को।

प्रश्न 77.
किसे लॉग ऑन करके पदार्थ की चौथी और पाँचवीं अवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है ?
उत्तर-
WWW.Chem4kids.com

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

Punjab State Board PSEB 10th Class Computer Book Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Computer Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

Computer Guide for Class 10 PSEB आप्रेटिंग सिस्टम Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(A) बहुविकल्पीय प्रश्न

1. आप्रेटिंग सिस्टम क्या है ?
(a) टर्मीनल सिस्टम
(b) सॉफ्टवेयर
(c) स्टोरेज़ सिस्टम
(d) प्रोसैसर।
उत्तर-
(b) सॉफ्टवेयर

2. टाइम शेयरिंग एक तकनीक है जो एक समय में कंप्यूटर सिस्टम को प्रयोग करने की आज्ञा देती है।
(a) कई यूज़र
(b) एक यूज़र
(c) दो यूज़र
(d) किसी को भी नहीं।
उत्तर-
(a) कई यूज़र

3. एक ही समय में मल्टीपल ऐप्लीकेशन रन करने को कहा जाता है।
(a) मल्टी एप्लीकेशन
(b) मल्टी प्रोसैसिंग
(c) मल्टी प्रोग्रामिंग
(d) मल्टी टाइमिंग।
उत्तर-
(c) मल्टी प्रोग्रामिंग

4. एक ही समय में भिन्न-भिन्न किस्म के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के काम करने की योग्यता को कहा जाता है।
(a) ओपन सोर्स
(b) पोर्टेबलिटी
(c) शैल
(d) सुरक्षा।
उत्तर-
(b) पोर्टेबलिटी|

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

5. आप्रेटिंग सिस्टम पर काम कर रहा यूज़र कंप्यूटर पर सीधे रूप से काम नहीं करता।
(a) बैच प्रोसैसिंग सिस्टम
(b) टाइम शेयरिंग सिस्टम
(c) नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम
(d) डिस्ट्रीब्यूटिड सिस्टम।
उत्तर-
(a) बैच प्रोसैसिंग सिस्टम

6. यह हमें इंटरनैट सुरक्षित ढंग से इस्तेमाल और हमारे सिस्टम से अन-अधिकारिक एप्लीकेशन की पहंच को रोकने के योग्य बनाता है।
(a) एंटी-वायरस
(b) सुरक्षा
(c) फॉयरवॉल
(d) उपरोक्त में से कोई भी नहीं।
उत्तर-
(c) फॉयरवॉल

7. यह यूज़र से कर्नल के जटिल फंक्शन को छुपा देता है।
(a) शैल
(b) हार्डवेयर लेयर
(c) HDD
(d) कर्नल।
उत्तर-
(a) शैल,

8. यह एक स्टैंडर्ड फाइल स्ट्रक्चर अधीन सिस्टम फाइलें, यूज़र फाइलों को अरेंज करता है।
(a) टर्मीनल
(b) हरारकीकल
(c) स्टोरेज सिस्टम
(d) नैटवर्क।
उत्तर-
(b) हरारकीकल

9. एक सिस्टम के द्वारा इनपुट लेने और अपडेटिड सूचना को डिस्पले करने में जो समय लगता है, उसको कहा जाता है।
(a) रिस्पांस टाइम (Response Time)
(b) अक्सैस टाइम (Access time)
(c) आऊटपुट टाइम (Output Time)
(d) टोटल टाइम (Total Time)।
उत्तर-
(a) रिस्पांस टाइम (Response Time)

10. इस सिस्टम में सर्वर को अलग लोकेशन से रिमोट अक्सैस करना संभव है।
(a) बैच प्रोसैसिंग सिस्टम
(b) टाइम शेयरिंग सिस्टम
(c) नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम
(d) डिस्ट्रीब्यूटिड सिस्टम।
उत्तर-
(c) नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम।

(B) रिक्त स्थान भरें

1. एक …………… संबंधित …………. के इकट्ठ को प्रदर्शित करती है।
उत्तर-
फाइल, जानकारी,

2. सिस्टम मल्टीपल रीयर टाइम ………….. एप्लीकेशन और मल्टीपल यूज़र को सर्व करने के लिए मल्टीपल सैंटरल (प्रोसैसर) का इस्तेमाल करता है।
उत्तर-
डिस्ट्रीब्यूटिड, सैंटरल,

3. ………. अपने सिस्टम को अन-अधिकारिक प्रयोग की जांच …….. और रोकने की प्रक्रिया है।
उत्तर-
कंप्यूटर सुरक्षा, अन-अधिकारिक,

4. ……….. आन-लाइन खातों ……….. पर पहुंच करने और खाते से जुड़ी कई गतिविधियों जैसे कि खरीददारी, ई-मेल और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
उत्तर-
पासवर्ड, ऑनलाइन,

5. …………. सिस्टम का इस्तेमाल उस समय होता है जब डाटा के ……………..फलों या प्रोसैसर – के आप्रेशन में लगने वाला समय जटिल हो।
उत्तर-
रीयल टाइम सिस्टम, रिजिड।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

(C) सही या गलत

1. एक सिस्टम के द्वारा इनपुट लेने और अपेक्षित अपटेड सूचना को डिस्पले करने में जो समय लगता है उसको रिस्पांस टाइम कहा जाता है।
उत्तर-
सही,

2. इंटरनैट सुरक्षा धमकियों से बचने के लिए केवल एंटी वायरस सॉफ्टवेयर एक ही काफी होता है।
उत्तर-
गलत,

3. आप्रेटिंग सिस्टम यूज़र और डिवाइस ड्राइवर के बीच में संचार को मैनेज नहीं कर सकता।
उत्तर-
गलत,

4. लाइनैक्स सोर्स कोड मुफ़्त उपलब्ध है और यह संस्था आधारित डिवेल्पमैंट आधारित प्रोजैक्ट है।
उत्तर-
सही,

5. आप्रेटिंग सिस्टम शेडयूलर का प्रयोग करके हर किस्म के रिसोर्स को मैनेज करता है।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कंप्यूटर हार्डवेयर और कंप्यूटर यूज़र के बीच में इंटरफेस।
उत्तर-
आप्रेटिंग सिस्टम।

प्रश्न 2.
जो खास हार्डवेयर यंत्रों की जटिलताओं को यूज़र से छुपा लेता है।
उत्तर-
ड्राईवर।

प्रश्न 3.
एक मैकनिज़म या तरीका जो कंप्यूटर सिस्टम के द्वारा परिभाषित रिसोर्स पर प्रोग्राम, प्रोसैस या यूज़र की पहुँच को नियंत्रित करता है।
उत्तर-
प्रोटैक्शन।

प्रश्न 4.
सभी कंप्यूटर पर अन-अधिकारिक इस्तेमाल को जांचना और रोकने की प्रक्रिया।
उत्तर-
कंप्यूटर सुरक्षा।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

प्रश्न 5.
लाइनैक्स एक खास इंटरप्रेटर प्रोग्राम प्रदान करता है जिसका प्रयोग आप्रेटिंग सिस्टम की कमांडों को लागू करने में किया जा सकता है।
उत्तर-
शैल।

III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आप्रेटिंग सिस्टम क्या होता है ?
उत्तर-
आप्रेटिंग सिस्टम वह एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है जो किसी यूज़र और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक माध्यम या इंटरफेस का काम करता है।

प्रश्न 2.
आप्रेटिंग सिस्टम की किस्में लिखो।
उत्तर–
आप्रेटिंग सिस्टम की निम्नलिखित किस्में हैं-

  • बैच-प्रोसैसिंग सिस्टम।
  • टाइम शेयरिंग आप्रेटिंग सिस्टम।
  • नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम।
  • रीयल टाइम आप्रेटिंग सिस्टम।

प्रश्न 3.
रीयल टाइम आप्रेटिंग सिस्टम की व्याख्या करें।
उत्तर-
रीयल टाइम आप्रेटिंग सिस्टम वह होता है जिसमें इनपुट की प्रक्रिया और जवाब देने के लिए जो समय लगता है वो बहुत छोटा होता है। इसको डाटा आप्रेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।

प्रश्न 4.
आप्रेटिंग सिस्टम के क्या काम होते हैं ? एक सूची बनायें।
उत्तर-
आप्रेटिंग सिस्टम के निम्नलिखित काम होते हैं-

  • प्रोग्राम को लागू करना
  • इनपुट आऊटपुट आप्रेशन
  • फाइल सिस्टम को मैनूपुलेट करना।
  • संचार करना
  • गलतियां ढूंढना
  • रिसोर्स एलोकेशन
  • सुरक्षा।

प्रश्न 5.
कंप्यूटर सुरक्षा से आप क्या समझते हो ?
उत्तर-
कंप्यूटर सुरक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमारे कंप्यूटर पर अन-अधिकारिक इस्तेमाल को चैक करती और उसको रोकती है। आजकल के ज़माने में कई प्रकार के संकटों से बचने के लिए कंप्यूटर सुरक्षा बहुत ज़रूरी होती है।

प्रश्न 6.
लाइनैक्स को परिभाषित करें।
उत्तर-
लाइनैक्स एक ओपन सोर्स विंडो आधारित आप्रेटिंग सिस्टम है जिसकी उपलब्धता मुफ़्त है। यह आप्रेटिंग सिस्टम यूनिक्स से कम जटिल है।

प्रश्न 7.
सुरक्षा क्या होती है ?
उत्तर-
सुरक्षा का अर्थ है अपने आप या अपने दोस्तों को किसी अन्जान संकट से बचाने की प्रक्रिया। उदाहरण के रूप से कंप्यूटर को अन्जान खतरे जैसे कि वायरस, चोरी आदि से बचाने की प्रक्रिया को कंप्यूटर सुरक्षा कहा जाता है।

IV. बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आप्रेटिंग सिस्टम के कार्य की व्याख्या करें।
उत्तर-
यह एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है। यह हार्डवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के बीच काम करता है। यह नीचे लिखे काम करता है –
1. सी०पी०यू० का प्रबन्ध करना-प्रोसैसर का प्रयोग गणना करने के लिए किया जाता है। यह लौजिक और गणित से संबंधित हर प्रकार की गणना कर सकता है। आप्रेटिंग सिस्टम प्रोसैसर को मैनेज करता है।

2. मुख्य मैमोरी का प्रबन्ध करना-कंप्यूटर सिस्टम में मैमोरी का प्रबन्ध बहुत खास स्थान रखता है। क्योंकि प्रोसैसर इस डाटा से काम करता है। जोकि कम्प्यूटर की मेन मैमोरी में पड़ा होता है। आप्रेटिंग सिस्टम मैमोरी का प्रबन्ध करता है।

3. इनपुट और आऊटपुट का प्रबन्ध करना-आप्रेटिंग सिस्टम यह ध्यान रखता है कि कौन सा इनपुट और आऊटपुट उपकरण काम कर रहा है, कौन से कार्य के लिए कौन सा इनपुट या . आऊटपुट यंत्र का प्रयोग करना है और इसमें कौन से इनपुट और आऊटपुट यंत्र को काम देना है और कब यंत्र से काम वापिस लिए जाएं।

4. फाइलों का प्रबन्ध करना-कंप्यूटर में दी गई सूचना को फाइलों के नाम के साथ रक्षित किया जाता है। आप्रेटिंग सिस्टम का वह भाग जो फाइलों का प्रबन्ध करता है इसको फाइल सिस्टम कहते हैं।

5. कंप्यूटर को सुरक्षा उपलब्ध करना-आप्रेटिंग सिस्टम की यह जिम्मेदारी है कि वह कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करवाए।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

प्रश्न 2.
लाइनेक्स के आर्कीटेक्चर की व्याख्या करें।
उत्तर-
लाईनेक्स का आर्कीटेक्चर निम्नलिखित हैं :

  • हार्डवेयर-इस लेअर में सब प्रोफाइल यंत्र होते हैं; जैसे कि रैम, हार्ड डिस्क, ड्राईव आदि।
  • कर्नल-यह ऑप्रेटिंग सिस्टम का कोर कम्पोनेंट होता है जो कि सीधे तौर पर हार्डवेयर के साथ संपर्क करता है और अपर लेअर कम्पोनेंट को निचले स्तर की सर्विस मुहैया करवाता है।
  • शैल-कर्नल के साथ संपर्क करके यह यूज़र से जटिल फंक्शन को छुपा देता है। शैल यूज़र से कमांडज़ प्राप्त करते हैं और कर्नल से फंक्शन को लागू करती है।
  • यूटीलिटी-यूटीलिटी प्रोग्राम को यूज़र में मुख्य रूप से ऑप्रेटिंग सिस्टम फंक्शन मुहैया करती है।

प्रश्न 3.
कम्प्यूटर सुरक्षा को परिभाषित करो। अपनी सूचना और अपने आप को सुरक्षित रखने के उपाय बताएं।
उत्तर-
कम्प्यूटर सुरक्षा-कम्प्यूटर सुरक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमारे कम्प्यूटर के अन-अधिकारिक उपयोग को चैक करती है और इसको रोकती है। निवारण की माप हमारे कम्प्यूटर के किसी भी हिस्से में अन-अधिकारिक प्रयोग को रोकने के लिए हमारी मदद करती है। इंटरनेट उपयोग करने वाले हर व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि इंटरनेट सिक्योरिटी एक बहुत महत्त्वपूर्ण पहल देती है।
1. नवीनतम एंटी वायरस-एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को सबसे प्रभावशाली बनाने के लिए हमें उपलब्ध नव-अपडेट्स के साथ अपडेट करना होता है। अनेक प्रकार के एंटी वायरस प्रोग्राम हैं जो कि मुफ्त होते हैं।

2. एंटी स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर स्पाइवेयर प्रोग्राम वायरस से अलग होता है। क्योंकि वायरस के जैसे यह हमारे कम्प्यूटर में पड़े हुए डाटा या सिस्टम को क्रप्ट नहीं कर सकता जैसे कि यह हमारे सिस्टम में अपने आप इंस्टाल हो जाता है और हमारे सिस्टम में से पासवर्ड, क्रैडिट कार्ड के नंबर अपने आप सर्वर में भेज देता है। इसलिए यह अपने सिस्टम में स्पाइवेयर प्रोग्राम को खोजने और रोकने के लिए हमें नवीनतम एंटी स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर की ज़रूरत पड़ती है।

3. पासवर्ड प्रोटैक्शन-पासवर्ड अनेक प्रकार के ऑनलाइन खाते का बहुत महत्त्वपूर्ण पहलू है। अपने पासवर्ड की सुरक्षा रखना अपने पैसे की सुरक्षा रखना है। अलग-अलग प्रकार के खाते के लिए एक ही जैसा पासवर्ड न रखो। आसानी से प्राप्त होने वाला पासवर्ड जैसे की अपना मोबाइल नंबर या जन्म तारीख आदि न रखो। अपना पासवर्ड अनेक अक्षर वाला जैसे कि अक्षर और नंबर और हो सके तो कुछ खास करैक्टर से मिला के रखो।

4. अपने पासवर्ड से सम्बन्धित वैबसाइट पर पहुंच करने के लिए हमेशा नया वैब पेज खोलना चाहिए और कभी भी ई-मेल में दिए गए लिंक या अनेक तरीके के साथ न खोलें। नवीनतम अपडेट और पैच को लागू करना-हमारे सिस्टम में स्थापित किया कोई भी सॉफ्टवेयर हमेशा के लिए उत्तम नहीं होता। अपने सॉफ्टवेयर को नवीनतम अपडेट और लागू करते रहो। यह अपडेट और पैच सॉफ्टवेयर निर्माण करने वाली कम्पनियों द्वारा समय-समय से उपलब्ध किये जाते हैं।

5. फ़ायरबॉल-यदि हो सके तो अपने सिस्टम को हैकर्स के आक्रमण से बचाने के लिए फ़ायरबॉल का उपयोग करो। फायरबॉल हमारे सिस्टम के अन-अधिकारिक पहुँच करने वाले यातायात को ब्लॉक कर देता है। फायरबॉल हमें इंटरनैट सुरक्षा के साथ उपयोग और हमारे सिस्टम को अन-अधिकारिक एप्लीकेशन की पहुँच को रोकने के योग्य होता है।

प्रश्न 4.
लिनक्स की मुख्य सुविधाएं क्या हैं ?
उत्तर-
लिनक्स आप्रेटिंग सिस्टम की मुख्य सुविधाएं नीचे दी गई हैं :
1. पोर्टेबल-यह सॉफ्टवेयर विभिन्न-विभिन्न किस्म के हार्डवेयर के ही तरीके के साथ काम करता है। लिनक्स कर्नल और एप्लीकेशन प्रोग्राम किसी प्रकार के हार्डवेयर पर इस्टाल हो सकता है।

2. अन्य स्रोत-लिनक्स स्रोत कोड मुफ्त उपलब्ध है। लिनक्स आप्रेटिंग सिस्टम की पात्रता की वृद्धि के लिए विभिन्न टीमें काम करती हैं और यह लगातार विकसित हो रही हैं।

3. मल्टीयूज़र-लिनक्स एक मल्टीयूज़र सिस्टम है जिसका मतलब यह है कि वह यूज़र एक ही समय में सिस्टम संसाधन जैसे कि मैमोरी/रैम/एप्लीकेशन कार्यक्रम का उपयोग कर सकता है।

4. मल्टी प्रोग्रामिंग-लिनक्स एक मल्टी प्रोग्रामिंग सिस्टम है जिसका महत्त्व यह है कि एक समय में मल्टीपल एप्लीकेशन चल सकती हैं।

5. हररकीकल फाइल सिस्टम-लिनक्स एक मानक फाइल स्ट्रक्चर के नीचे सिस्टम फाइल/यूज़र फाइलों को रेंज करता है। इसमें फाइलों और निर्देशिका एक्टर की शक्ल होती है।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

शैल-लिनक्स एक खास ईंटरप्रेटर प्रोग्राम की सहूलियत देता है जिसका प्रयोग आप्रेटिंग सिस्टम की कमांडों को लागू करने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग विभिन्न-विभिन्न ऑप्रेशन, ऐप्लीकेशन, प्रोग्राम आदि को बुलाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा-लिनक्स इंटरप्रेटर यूज़र को खास शक्ति से सुरक्षा प्रदान करता है। जैसे कि-पासवर्ड सुरक्षा/खास किस्म की फाइलों में पहुंच से नियंत्रित डाटे की ईंक्रप्शन न करना।

प्रश्न 5.
डॉस और विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में अंतर बताइए।
उत्तर-
डॉस और विंडोज़ में अंतर नीचे दिए अनुसार हैं :

डॉस विंडोज़
1. डॉस एक यूज़र आप्रेटिंग सिस्टम है। 1. विंडोज़ बहु यूज़र इंटरनेट है।
2. डॉस एकल टास्किंग है। 2. विंडोज़ बहु टास्किंग है।
3. इसमें समय साझा नहीं होता। 3. विंडोज़ में समय साझा होता है।
4. इनपुट यंत्र की बोर्ड होता है। 4. मानक इनपुट यंत्र की-बोर्ड और माउस
होते हैं।
5. यह चरित्र यूज़र इंटरफेस है। 5. यह ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस है।
6. इसका आकार छोटा होता है। 6. इसका आकार बड़ा होता है।
7. यह मल्टीमीडिया को समर्थन नहीं करता। 7. यह मल्टीमीडिया को समर्थन करता है।
8. इसका मुख्य कार्य फाइलों को मैनेज करना है। 8. इसके कई प्रकार के मुख्य कार्य हैं।
9. यह फ्लॉपी में स्टोर हो जाती है। 9. इसको फ्लॉपी में स्टोर नहीं किया जा
सकता।
10. इसका उत्पादन बंद हो चुका है। 10. इसका उत्पादन चल रहा है।

PSEB 10th Class Computer Guide आप्रेटिंग सिस्टम Important Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(A) बहुविकल्पीय प्रश्न

1. प्रोग्राम मैनेजमैंट के साथ सम्बद्ध ऑप्रेटिंग सिस्टम की क्या कार्रवाई है ?
(a) लागू करना
(b) नियंत्रण करना
(c) लोड करना
(d) सारे ही।
उत्तर-
(d) सारे ही।

2. नेटवर्किंग आप्रेटिंग सिस्टम क्या नहीं है ?
(a) MS Windows
(b) UNIX
(c) MacOSX
(d) DOS.
उत्तर-
(d) DOS.

3. Linux की विशेषता नहीं है –
(a) पोर्टेबल
(b) खुला मोडम
(c) एक यूज़र
(d) मल्टीयूज़र।
उत्तर-
(c) एक यूज़र

4. लाइनैक्स के आर्कीटैक्चर की क्या परत नहीं है ?
(a) कर्नल
(b) शैल
(c) कमांड
(d) उपयोगिता।
उत्तर-
(c) कमांड

5. कौन-सा कम्प्यूटर सुरक्षा के साथ सम्बद्ध नहीं है ?
(a) एंटीवायरस
(b) नैटवर्क
(c) पासवर्ड सुरक्षा
(d) फायरबॉल।
उत्तर-
(b) नैटवर्क

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

(B) रिक्त स्थान भरें-

1. आप्रेटिंग सिस्टम यूज़र और …………………… बीच में संचार का काम करता है।
उत्तर-
डिवाइस,

2. ……………. आप्रेटिंग सिस्टम यूज़र के साथ नहीं जुड़ा होता।
उत्तर-
बैच,

3. …………………. आप्रेटिंग सिस्टम जल्दी प्रतिक्रिया उपयोगिता देता है।
उत्तर-
टाइम साझा,

4. ………………………………………. आप्रेटिंग सिस्टम को डाटा आप्रेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।
उत्तर-
रीयल टाइम।

(C) सही या गलत

1. विंडो एक पोर्टेबल ऑप्रेटिंग सिस्टम है।
उत्तर-
गलत,

2. डास मल्टीयूज़र ऑप्रेटिंग सिस्टम है।
उत्तर-
गलत,

3. कम्प्यूटर को किसी प्रकार की सुरक्षा की ज़रूरत नहीं होती।
उत्तर-
गलत,

4. हैकर कोई भी पहचान की परवाह करते हैं।
उत्तर-
गलत,

5. फायरबॉल कम्प्यूटर सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है।
उत्तर-
सही।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

II. अति लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
आप्रेटिंग सिस्टम किस प्रकार का सॉफ्टवेयर है ?
उत्तर-
सिस्टम सॉफ्टवेयर।

प्रश्न 2.
कोई भी खुला स्रोत ऑप्रेटिंग सिस्टम का नाम बताइए।
उत्तर-
लिनक्स।

प्रश्न 3.
लिनक्स में कौन-सा भाग यूज़र से कमांड प्राप्त करता है ?
उत्तर-
शैल।

III. लघु उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
समय साझा करने वाले आप्रेटिंग सिस्टम के लाभ बताइए।
उत्तर-
समय साझा करने वाले आप्रेटिंग सिस्टम के लाभ नीचे दिए गए हैं :

  • जल्दी प्रतिक्रिया प्राप्त करने की उपयोगिता देता है।
  • सॉफ्टवेयर की प्रतिलिपि को रोकता है।
  • सी०पी०यू० को खाली रहने का समय कम करता है।

प्रश्न 2.
समय साझा करने वाले आप्रेटिंग सिस्टम की हानियां बताइए।
उत्तर-
समय साझा करने वाले आप्रेटिंग सिस्टम की हानियां नीचे लिखी हैं :

  1. भरोसा योग्यता की समस्या।
  2. यूज़र कार्यक्रम और डाटा की सुरक्षा और ईंटीग्रिटी में कमज़ोरी।
  3. डाटा संचार की समस्या।

IV. बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
डिस्ट्रीब्यूटिड ऑप्रेटिंग सिस्टम के बारे विस्तार में लिखो।
उत्तर-
डिस्ट्रीब्यूटिड सिस्टम मल्टीपल रियल समय ऐप्लीकेशन और मल्टीपल यूज़र को सेवा देने के लिए मल्टीपल सैंट्रल प्रोसैसर का उपयोग करते हैं। डाटा प्रोसैसिंग के काम प्रोसैसर की तरतीब अनुसार विभाजित किया जाता है। यह प्रोसैसर एक-दूसरे के साथ कई कौन संचार लाइनों अनुसार संचार करते हैं। इन प्रोसैसर लज़ली कपलड सिस्टम या डिस्ट्रीब्यूटिड सिस्टम कहा जाता है। डिस्ट्रीब्यूटिड सिस्टम में प्रोसैसर का आकार और काम विभिन्न-विभिन्न हो सकते हैं। इन प्रोसैसरों को अक्सर स्टील नोडज़ या कम्प्यूटर कहा जाता है।

डिस्ट्रीब्यूटिड सिस्टम की नीचे लिखी विशेषताएं हैं :

  • संसाधन साझा सुविधा कारण यूज़र एक साइट से दूसरे स्थान पर उपलब्ध संसाधन को उपयोग करने योग्य होता है।
  • इलैक्ट्रॉनिक मेल की मदद से डाटा का एक स्थान से दूसरी स्थान पर तेज गति के साथ स्थानांतरण किया जाता है।
  • डिस्ट्रीब्यूट सिस्टम में अगर एक साइट काम करना बंद कर देती है तो दूसरी साइट अपने आप चलती रहती है।
  • ग्राहक को सबसे अच्छी सुविधा मिलती है।
  • मेज़बान कम्प्यूटर के लोड में कमी होती है।
  • डाटा प्रोसैसिंग में होने वाली दर में कमी होती है।

प्रश्न 2.
नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम के बारे में विस्तार से लिखो।
उत्तर-
एक नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम सर्वर से चलता है और सर्वर को डाटा, यूज़र, समूह, सुरक्षा, ऐप्लीकेशन और अधिक नैटवर्किंग को प्रबंध करने योग्य बनाता है। नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम का मुख्य उद्देश्य एक नैटवर्क के साथ जुड़े मल्टीपल कम्प्यूटर जैसे कि लोकल एरिया नेटवर्क, निजी नैटवर्क या अन्य प्रकार के नैटवर्क को फाईलों और प्रिंटर प्रयोग करने की आज्ञा देना है।

नैटवर्क आप्रेटिंग सिस्टम की उदाहरण हैं। Microsoft Windows, Server 2003, Microsoft Windows Server 2008, UNIX, Linux, MacOSX, NovellNet Ware, और BSD आदि।

नैटवर्क ऑप्रेटिंग सिस्टम के लाभ निम्नलिखित अनुसार हैं :

  • सैंटरलाइज़ड, सर्वर बहुत स्थिर होता है।
  • सुरक्षा सर्वर द्वारा मैनेज किया जाता है।
  • नई तकनीकों और हार्डवेयर को नये सिस्टम के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है।
  • सर्वर को अलग स्थान से पहंच करना संभव है।

नैटवर्क ऑप्रेटिंग सिस्टम की हानियाँ निम्नलिखित हैं :

  1. सर्वर को खरीदना और चलाना बहुत महंगा है।
  2. कई काम करने के लिए सैंटरल सर्वर पर निर्भर करना पड़ता है।
  3. नियमित रख-रखाव और अपडेट की ज़रूरत पड़ती है।

PSEB 10th Class Computer Solutions Chapter 6 आप्रेटिंग सिस्टम

प्रश्न 3.
रीयल टाइम आप्रेटिंग सिस्टम के बारे में विस्तारपूर्वक बताइए।
उत्तर-
रीयल टाइम आप्रेटिंग सिस्टम को डाटा आप्रेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है। इसमें इनपुट की प्रक्रिया का जवाब देने के लिए जो समय लगता है वह बहुत छोटा होता है। एक सिस्टम द्वारा इनपुट लेना और अपडेटिड सूचना को प्रदर्शन करने में जो समय लगता है इसको प्रतिक्रिया समय कहा जाता है। इसके लिए इस तरीके में प्रतिक्रिया समय ऑनलाइन प्रोसैसर के मुकाबले बहुत कम होता है। रीयल टाइम सिस्टम का उपयोग उस समय होता है जब डाटा के प्रवाह या प्रोसैसर के आप्रेशन में लगने वाला समय न बदलने योग्य होता है। उदाहरण के लिए वैज्ञानिक तुजुर्बे, मेडिकल इमेजिंग सिस्टम, औद्योगिक नियंत्रण सिस्टम, हथियार सिस्टम (Weapon System) रोबोट और हवा यातायात नियंत्रण सिस्टम आदि है।

PSEB 9th Class Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

Punjab State Board PSEB 9th Class Science Book Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Science Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

PSEB 9th Class Science Guide खाद्य संसाधनों में सुधार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
फसल उत्पादन की एक विधि का वर्णन करो जिससे अधिक पैदावार प्राप्त हो सके।
उत्तर-
PSEB 9th Class Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार 1
फसल उत्पादन की जिस विधि से अधिक पैदावार प्राप्त हो सकती है, वह अंतरा फसलीकरण है। इस विधि में दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ किसी खेत में निर्दिष्ट पैटर्न पर उगाया जाता है। कुछ पंक्तियों में एक प्रकार की फसल तथा उनके एकांतर में स्थित दूसरी पंक्तियों में दूसरी प्रकार की फसल उगाते हैं। उदाहरण-

  1. सोयाबीन + मक्का
  2. बाजरा + लोबिया।

फसलों का चुनाव उनकी पोषक तत्वों की आवश्यकता के अनुसार किया जाता है। वे आवश्यकताएं भिन्न-भिन्न होनी चाहिए ताकि पोषकों का उपयोग अधिक से अधिक हो सके। इस विधि से सभी फसल के पौधों में पीड़कों और रोगों को फैलने से रोका जा सकता है।

प्रश्न 2.
खेतों में खाद तथा उर्वरक का उपयोग क्यों करते हैं ?
उत्तर-
खेतों में खाद का उपयोग मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ा कर पोषक हेतु किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाती है और उसकी रचना में सुधार होता है। इसके कारण रेतीली मिट्टी में पानी को रखने की क्षमता बढ़ जाती है तथा चिकनी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा पानी को निकालने में सहायता करती है जिससे पानी इकट्ठा नहीं होता। उर्वरकों के प्रयोग से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम की मात्रा मिट्टी में बढ़ जाती है जिससे पौधों में कायिक वृद्धि अच्छी होती है तथा उन्हें स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

PSEB 9th Class Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 3.
अंतराफसलीकरण तथा फसल चक्र के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
अंतराफसलीकरण से एक साथ किसी खेत से दो या दो से अधिक फसलों को प्राप्त किया जा सकता है। इससे पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग हो पाता है। इससे पीड़कों और रोगों को फसल के सभी पौधों में फैलने से रोका जा सकता है और अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
किसी खेत में क्रमवार पूर्व नियोजित तरीके से तरह-तरह की फसलों को फसल चक्र के अंतर्गत उगाया जाता है। परिपक्वन काल के आधार उचित फसल चक्र को अपनाने से वर्ष में दो-तीन फसलों का अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

इससे निम्नलिखित लाभ होते हैं-

  1. मिट्टी की उर्वरकता होती है।
  2. उत्पादन में वृद्धि होती है।
  3. खेत को खाली नहीं छोड़ना पड़ता।
  4. एक ही खेत में फ़सलों की अदला-बदली हो जाती है।
  5. मृदा में पोषक तत्व नियंत्रित रहते हैं और मृदा की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
  6. नाइट्रोजन वर्ग के उर्वरकों की बचत होती है।
  7. पीड़कों के नियंत्रण में सहायता प्राप्त होती है।
  8. फ़सलें रोगों से बच जाती हैं।
  9. कीटों में वृद्धि पर रोक लगती है।

प्रश्न 4.
आनुवंशिक फेरबदल क्या है ? कृषि प्रणालियों में ये कैसे उपयोगी है? ना कर
उत्तर-
आनुवंशिक फेरबदल पौधों में ऐच्छिक गुणों को डालने की प्रक्रिया है। इसके द्वारा रोग की प्रतिरोग प्रतिरोधकता, उर्वरक के प्रति अनुरूपता, उत्पादन की गुणवत्ता तथा उच्च उत्पादन क्षमता के गुणों की प्राप्ति की जा सकती है तथा फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इस विधि से विभिन्न आनुवंशिक गुणों वाले पौधों में संकरण करवाते हैं। यह संकरण अंतराकिस्मीय (विभिन्न किस्मों में), अंतरास्पीशीज़ (एक ही जीनस की दो विभिन्न स्पीशीज में) तथा अंतरावंशीय (विभिन्न जेनरा में) हो सकता है। इसके परिणाम से आनुवंशिकीय रूपांतरित फसलें प्राप्त हो सकती हैं। कृषि प्रणालियों में इस विधि ने बीजों की नई-नई किस्में तथा जातियां प्रदान की हैं जिससे अनाज उत्पाद बढ़ा है तथा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

प्रश्न 5.
भंडार गृहों (गोदामों) में अनाज की हानि कैसे होती है ?
उत्तर-
भंडार गृहों में अनाज की हानि दो प्रकार से होती है-

  1. जैविक कारण
  2. अजैविक कारण।

जैविक आधार पर कीट, कुंतक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु फसलों की गुणवत्ता को खराब करते हैं तथा उनके वज़न को कम कर देते हैं। इससे उत्पाद बदरंग हो जाता है। उसमें अंकुरण की क्षमता कम हो जाती है।

अजैविक आधार पर नमी और ताप का अभाव फसलों को खराब कर देते हैं। फसल में फफूंदी उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 6.
किसानों के लिए पशु पालन प्रणालियाँ कैसे लाभदायक हैं ?
उत्तर-
किसानों के लिए पशु पालन प्रणालियाँ बहुत उपयोगी हैं। इससे उन्हें खेती के साथ-साथ पशुओं से भी आर्थिक लाभ होता है।

  1. खाद्य पदार्थ देने वाले – गाय, भैंस आदि पशुओं से दूध मिलता है। दूध मनुष्य का पूर्ण भोजन है और शरीर की समुचित वृद्धि के लिए इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व विद्यमान होते हैं।
  2. खाद की प्राप्ति – सभी पालतू पशु जैसे-बैल, भैंस, बकरी, ऊंट, घोड़ा, गाय आदि के अपशिष्ट से हमें खाद प्राप्त होती है।
  3. खेतों में कार्य एवं बोझा ढोना – बैल, घोड़े, खच्चर, ऊंट आदि पशु किसान के लिए खेती का काम करते हैं तथा सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ढोते हैं। फल मिति की

प्रश्न 7.
पशु पालन के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
पशु पालन के लाभ-

हाजी पालकीनीया-

  1. दुधारू पशुओं से दूध की प्राप्ति होती है।
  2. अंडों की प्राप्ति पोल्ट्री से होती है।
  3. मत्स्य पालन तथा कुक्कट पालन से मांस की प्राप्ति होती है।
  4. जंतु अवशिष्ट खाद बनाने में काम आते हैं।
  5. मधुमक्खी से मधु तथा मोम मिलती है।
  6. बैल, ऊँट, खच्चर आदि पशुओं को कृषि पद्धतियों में प्रयोग में लाया जाता है। कि
  7. बोझा ढोने वाले पशु बोझा ढोते हैं।
  8. भेड़-बकरियों से हमें ऊन प्राप्त होता है जो सर्दियों में हमें ठंड से बचाता है।

प्रश्न 8.
उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कट पालन, मत्स्य पालन तथा मधु मक्खी पालन में क्या समानताएँ
उत्तर-
उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कट पालन, मत्स्य पालन तथा मधु मक्खी पालन में उचित देख-रेख तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति अनुकूलता आवश्यकता है। उनके संवर्धन के लिए उचित परिस्थितियां बनाई जानी चाहिएं।

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प्रश्न 9.
प्रग्रहण मत्स्यन, मेरीकल्चर तथा जल संवर्धन में क्या अंतर है ?
उत्तर-

  • प्रग्रहण मत्स्यन (Fishing) – साफ लवण रहित तथा समुद्री-लवण सहित जल स्रोतों से मछली पकड़ना प्रग्रहण मत्स्यन कहलाता है। ऐसे जल स्रोत मुख्य रूप से तालाब, पोखर, नदी, नदी मुख, लैगून आदि होते हैं। इसमें उत्पादन कम होता है।
  • मेरी कल्चर (Marine Culture) – आर्थिक महत्त्व की अनेक मछलियों का संवर्धन समुद्री जल में किया जाता है। इसे मेरी कल्चर कहते हैं; जैसे-मुलेट, भेटकी, पर्लस्पाट, झींगा, मरुसल, ऑएस्टर आदि।
  • जल संवर्धन (Aquaculture) – तालाबों में तरह-तरह की मछलियों का संवर्धन किया जाता है। इस प्रकार से संवर्धित मछलियों में आपसी स्पर्धा नहीं होती। इससे तालाब में मछली उत्पादन अधिक होता है। इस प्रकार की मछली पालन विधि को जल संवर्धन कहते हैं। ये मछलियां जल स्रोत के भिन्न-भिन्न हिस्सों से अपना भोजन प्राप्त करती हैं ;

जैसे-
कटला-जल की सतह से
मार रोहू-तालाब के मध्य से
मृगल, कॉमन कार्प-तालाब की तली से।

Science Guide for Class 9 PSEB खाद्य संसाधनों में सुधार InText Questions and Answers

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
अनाज, दाल, फल तथा सब्जियों से हमें क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर-
अनाज हमें कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं ये हमें गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा तथा ज्वार से प्राप्त होते हैं। इनसे हमें ऊर्जा मिलती है। दालों से हमें प्रोटीन प्राप्त होती है। यह चना, मटर, उड़द, मूंग, अरहर और मसूर में होती है। फलों और सब्जियों से विटामिन, खनिज लवणों के अतिरिक्त कुछ मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा भी प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
जैविक तथा अजैविक कारक किस प्रकार फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-
फसलें हमारे जीवन की आधार हैं। वे जैविक और अजैविक कारकों से प्रभावित होती हैं। इनसे उनका उत्पादन और गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

(i) जैविक कारकों का प्रभाव – तरह-तरह के रोग, कीट तथा निमेटोड फसलों को प्रभावित करते हैं। सूक्ष्प जीव खाद्यान्नों को बहुत अधिक खराब करते हैं। इनके कारण अनाज के भार में कमी, अंकुरण न होना, बदरंग हो जाना, तापन तथा विषाक्त पदार्थों का उत्पन्न होना हो सकता है। फफूंद, खमीर तथा जीवाणु का इन्हें पर्याप्त हानि पहुंचाते हैं। चूहे तथा पक्षी भी खाद्य पदार्थों को बहुत हानि पहुंचाने का कार्य करते हैं।

(ii) अजैविक कारकों का प्रभाव – सूखा, क्षारता, जलाक्रांति, गर्मी, ठंड और पाला के कारण फसल उत्पादन कम हो जाता है। इनसे अनाज में संक्रमण बढ़ जाता है। एंजाइम, कीट और अन्य सूक्ष्म जीव भी इन कारकों से प्रभावित होकर अनाज को अधिक क्षति पहुंचाते हैं। सूखा पड़ने से फसलें मष्ट हो जाती हैं तो जला क्रांति से भी उनकी जड़ें गल जाती हैं। अत्यधिक गर्मी, ठंड और पाला भी उपज को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 3.
फसल सुधार के लिए ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण क्या हैं ?
उत्तर-
पशुओं के लिए चारा तभी अधिक होगा जब चारे वाली फसलों की शाखाएं सघन होंगी। अनाज के लिए पौधे बौने होने चाहिए ताकि उनके लिए कम पोषकों की आवश्यकता हो। फसलों में ऐसे सुधारों के लिए ऐच्छिक सस्य विज्ञान सहायक सिद्ध होती है।

प्रश्न 4.
वृहत् पोषक क्या हैं और इन्हें वृहत् पोषक क्यों कहते हैं ?
उत्तर-
वृहत् पोषक उन्हें कहते हैं जो पौधों को अपने पोषण के लिए अधिक मात्रा में चाहिए होते हैं। इनकी संख्या छह है और इन्हें ये मिट्टी से प्राप्त करते हैं। वृहत् पोषक हैं- नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक, कॉपर, मालिबेडेनम।

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प्रश्न 5.
पौधे अपना पोषक कैसे प्राप्त करते हैं ?
उत्तर-
पौधे अपना पोषक हवा, पानी और मिट्टी से प्राप्त करते हैं। हवा से इन्हें ऑक्सीजन तथा कार्बन प्राप्त होती है, पानी से हाइड्रोजन मिलती है तथा मिट्टी से 13 पोषक प्राप्त होते हैं जिनमें से 6 वृहत् पोषक तथा 7 सूक्ष्म पोषक होते हैं। पौधे जड़ों के माध्यम से मिट्टी से पोषक प्राप्त करते हैं, जो पानी में मिलकर जड़ों से अवशोषित होते हैं।

प्रश्न 6.
मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए खाद तथा उर्वरक के उपयोग की तुलना कीजिए।
उत्तर-
मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए खाद तथा उर्वरक की अपनी-अपनी भूमिका है।
खाद मिट्टी को पोषकों तथा कार्बनिक पदार्थों से परिपूर्ण करती है और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है। कार्बनिक पदार्थ अधिक मात्रा में होने के कारण मिट्टी की संरचना में सुधार करती है इसके कारण रेतीली मिट्टी में पानी को रखने की क्षमता बढ़ जाती है। चिकनी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की अधिकता के कारण पानी को निकालने में सहायता करती है जिससे पानी इकट्ठा नहीं होता।

उर्वरक नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटाशियम प्रदान करते हैं इनके उपयोग से अच्छी कायिक वृद्धि (पत्तियां, शाखाएं तथा फूल) होती है और स्वस्थ पौधों की प्राप्ति होती है। परंतु ये उर्वरक आर्थिक दृष्टि से महंगे पड़ते हैं। अत्यधिक उर्वरक के उपयोग से मिट्टी को संरचना में बदलाव भी कई बार आ जाता है। यह कई बार जल प्रदूषण का कारण भी बनता है। इसलिए इनका उपयोग हमें सावधानी से करना होता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सी परिस्थिति में सबसे अधिक लाभ होगा ? क्यों ?
(a) किसान उच्च कोटि के बीज का उपयोग करें, सिंचाई न करें अथवा उर्वरक का उपयोग न करें।
(b) किसान सामान्य बीजों का उपयोग करें, सिंचाई करें तथा उर्वरक का उपयोग करें।
(c) किसी अच्छी किस्म के बीज प्रयोग करें, सिंचाई करें, उर्वरक का उपयोग करें तथा फसल सुरक्षा की विधियां अपनाए।
उत्तर-
(c) किसान अच्छी किस्म के बीज प्रयोग करें, सिंचाई करें, उर्वरक का उपयोग करें तथा फसल सुरक्षा की विधियां अपनाएं । इनसे अच्छी फसल की प्राप्ति होगी। अच्छे बीजों का चयन इस आधार पर करना चाहिए कि वे अनुकूल परिस्थितियों में उग सकें। संकरण विधि से प्राप्त ऐसे बीजों का चयन किया जाना चाहिए जो रोगों के प्रति रोग प्रतिरोधिता गुणों से युक्त हों। उनमें उत्पादन की गुणवत्ता तथा उच्च उत्पादन क्षमता होनी चाहिए। अच्छे गुणों वाली जीन से युक्त बीज ही उपयुक्त होते हैं। सिंचाई आवश्यकतानुसार नियमित रूप से की जानी चाहिए। सिंचाई की कमी से फसल उत्पाद कम प्राप्त होते हैं। उर्वरकों के प्रयोग से फसल की प्रकृति के अनुसार नाइट्रोजन, पोटैशियम तथा फॉस्फोरस तत्व मिट्टी में मिलाए जा सकते हैं जिससे उर्वरकता बढ़ती है और अच्छी फसल प्राप्त करते हैं। फसल सुरक्षा की विधियां भी अपनाई जानी चाहिए। खरपतवार तथा पीड़कों का नियंत्रण करना चाहिए। खेतों में फसल खरपतवार, कीट, पीड़क तथा रोगों से प्रभावित होती है। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया जाता तो वे फसलों को बहुत हानि पहुंचाते हैं।

प्रश्न 8.
फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियां तथा जैव नियंत्रण क्यों अच्छा समझा जाता है ?
उत्तर-
फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियां तथा जैव नियंत्रण अति आवश्यक है। तरह-तरह के जैविक और अजैविक कारक फसल को खराब कर देते हैं जिस कारण उत्पादक और व्यापारी को आर्थिक हानि होने के साथसाथ मानसिक आघात भी पहुंचता है। इन निरोधक विधियों और जैव नियंत्रण को न अपनाने से निम्नलिखित क्षति होती हैं-

  1. फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
  2. फसल का वज़न कम हो जाता है।
  3. अंकुरण की क्षमता कम हो जाती है। इन सब कारणों से उत्पाद की कीमत कम हो जाती है।

प्रश्न 9.
भंडारण की प्रक्रिया में कौन-से कारक अनाज की हानि के लिए उत्तरदायी हैं ?
उत्तर-
भंडारण के दौरान जैविक और अजैविक कारक अनाज की हानि के लिए उत्तरदायी हैं। जैविक कारक हैं- कीट, कुंतक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु। अजैविक कारक हैं-भंडारण के स्थान पर उपयुक्त नमी और ताप का असंतुलन।

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प्रश्न 10.
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्रायः कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है और क्यों ?
उत्तर-
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए लंबे समय तक दुग्ध स्रावण काल वाली जर्सी, ब्राउन स्विस जैसी नस्लों तथा रोगों के प्रति प्रतिरोधिता में अच्छी देशी नस्लों रेडसिंधी तथा साहीवाल में संकरण कराया जाता है ताकि संकर पशु में दोनों अधिक दुग्ध स्रावण काल तथा रोगों की प्रतिरोधिता के गुण हों।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कथन के उपयोग की विवेचना कीजिए–
“यह रुचिकर है कि भारत में कुक्कुट, अल्प रेशे के खाद्य पदार्थों को उच्च पोषकता वाले पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तन करने के लिए सबसे अधिक सक्षम हैं। अल्प रेशे के खाद्य पदार्थ मनुष्यों के लिए उपयुक्त नहीं होते।”
उत्तर-
यह कथन पूर्ण रूप से सत्य है। कुक्कटों का गेहूं, चावल, ज्वार, जौ, बाजरा आदि के दले हुए दानों के साथ हड्डी चूरा, व्यर्थ मांस खाद्य आदि खाने के लिए दिए जाते हैं। जो प्रायः मानवों के द्वारा प्रयुक्त नहीं किए जाते। कुक्कट इन्हें खाकर इनका अंडों और मांस में संश्लेषण करते हैं तथा उच्च कोटि के पोषक पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तित कर देते हैं। उनके अंडों में 36% पीतक तथा 64% प्रोटीन होती है उनके मांस में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, खनिज लवण तथा विटामिन होते हैं।

प्रश्न 12.
पशु पालन तथा कुक्कुट पालन के प्रबंधन प्रणाली में क्या समानता है ?
उत्तर-
पशु पालन तथा कुक्कुट पालन के प्रबंधन प्रणाली में समानता है। दोनों में ही संकरण से श्रेष्ट जातियां प्राप्त की जाती हैं ताकि उनसे मानव के लिए उपयोगी खाद्य प्राप्त किए जा सकें जो मात्रा और गुणवत्ता में श्रेष्ठ हों। दोनों को ही अनेक कारणों से अनेक रोग हो जाते हैं जिनसे बचाव के लिए उचित प्रबंध किए जाने आवश्यक हैं। दोनों के पालन में आहार की ओर ध्यान देना परम आवश्यक है। इससे उनकी मृत्यु दर कम हो जाती है तथा उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहती है। उनके आवास में उचित ताप, स्वच्छता और प्रबंधन की समान रूप से आवश्यकता होती है। संक्रामक रोगों से बचाने के लिए दोनों को टीका लगवाना आवश्यक है।

प्रश्न 13.
ब्रौलर और अंडे देने वाली लेयर में क्या अंतर है ? इनके प्रबंधन के अंतर को भी स्पष्ट करें।
उत्तर-
ब्रौलर मांस प्रदान करते हैं जबकि लेयर अंडे देते हैं। लेअर को रहने के लिए पर्याप्त स्थान, प्रकाश और पौष्टिक दोनों देना चाहिए जबकि ब्रौलर को प्रोटीन, वसा तथा विटामिन A और K से युक्त कुक्कुट आहार देना चाहिए। ब्रौलर की मृत्यु दर कम है लेकिन लेयर की मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक होती है। ब्रौलर 6-7 सप्ताह में ही मांस के लिए उपयोग में लाया जा सकता है, जबकि लेयर 20 सप्ताह के बाद अंडे दे सकता है।

प्रश्न 14.
मछलियाँ कैसे प्राप्त की जाती हैं ?
उत्तर-
मछली समुद्री जल और ताजे जल दोनों से प्राप्त की जाती है। ताज़ा जल नदियों और तालाबों में होता है। मछली पकड़ना और मछली संवर्धन समुद्र तथा ताजे पानी के पारिस्थितिक तंत्र में किया जाता है। मछली पकड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के जालों का उपयोग मछली पकड़ने वाली नाव से किया जाता है। सैटेलाइट तथा प्रतिध्वनि गंभीरता मापी से खुले समुद्र में मछलियों के बड़े समूहों का पता लगाकर उन्हें जालों से पकड़ लिया जाता है।

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प्रश्न 15.
मिश्रित मछली संवर्धन के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
मिश्रित मछली संवर्धन से देशी-विदेशी मछलियां पाई जा सकती हैं। ऐसे तंत्रों से अधिक मात्रा में मछली प्राप्त होती है। एक ही तालाब में 5 या 6 मछली की जातियों को बढ़ाया जा सकता है। मछलियां एक स्थान पर रहकर पानी की अलग-अलग सतहों से भोजन प्राप्त करती हैं। ग्रास कार्य जाति की मछलियां तो खरपतवार तक खा लेती हैं। मछलियों में आहार के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं होती। तालाब के हर भाग में स्थित आहार का उपयोग हो जाता है।

प्रश्न 16.
मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधु मक्खी में कौन-से ऐच्छिक गुण होने चाहिएं ?
उत्तर-

  1. मधु मक्खी में मधु एकत्र करने की क्षमता अधिक होनी चाहिए।
  2. उसे डंक कम मारना चाहिए।
  3. प्रजनन तीव्रता से करना चाहिए।
  4. अपने छत्ते में अधिक समय तक रहें।
  5. स्वयं को दुश्मनों से बचा सके।

प्रश्न 17.
चरागाह क्या है और ये मधु उत्पादन से कैसे संबंधित हैं ?
उत्तर-
चरागाह वह विस्तृत घाम और अन्य वनस्पतियों से भरा स्थान है जहां पर मधु मक्खियां फूलों से मकरंद और पराग इकट्ठा करती हैं। जिस चरागाह में जितने अधिक और भिन्न प्रकार के फूल होंगे उतनी ही किस्में मधु के स्वाद की भी होंगी इसलिए मधु उत्पादन का चरागाह से संबंध है।