PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 9 अनाज की संभाल

Punjab State Board PSEB 7th Class Agriculture Book Solutions Chapter 9 अनाज की संभाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Agriculture Chapter 9 अनाज की संभाल

PSEB 7th Class Agriculture Guide अनाज की संभाल Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
अनाज को लगने वाले दो कीड़ों के नाम बताएं।
उत्तर-
खपरा, सुसरी, दाने का छोटा बोरर।।

प्रश्न 2.
मूंग और चने को लगने वाले कीड़े का नाम बताएं।
उत्तर-
ढोरा।

प्रश्न 3.
गोदामों को शोधने के लिए प्रयोग में आने वाली एक दवाई का नाम बताएं।
उत्तर-
मैलाथियान, एल्यूमीनियम फॉस्फाइड।

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प्रश्न 4.
गोदाम बनाने के लिए ऋण-सुविधा देने वाले किसी एक संस्था का नाम लिखें।
उत्तर-
पंजाब वित्त कार्पोरेशन।

प्रश्न 5.
कौन-सी संस्था को गोदाम किराये पर दिया जा सकता है ?
उत्तर-
भारतीय फूड कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया, मार्कफैड आदि।

(ख) एक-दो वाक्यों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
सुसरी चावल को किस प्रकार नुकसान पहुंचाती है ?
उत्तर-
यह दाने के अन्दर अण्डे देती है तथा दाने को अन्दर से खा जाती है।

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प्रश्न 2.
स्टोर में जीर्ण-शीर्ण दाने स्टोर क्यों नहीं करने चाहिए ?
उत्तर-
स्टोरों में टूट-फूट वाले दाने स्टोर नहीं करने चाहिएं क्योंकि ऐसे दाने स्टोर करने से कीड़ों की आमद उस समय अधिक हो जाती है।

प्रश्न 3.
स्टोर करने वाले कमरे में बोरियां दीवारों से क्यों दूर रखनी चाहिए ?
उत्तर-
ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दीवारों से नमी बोरियों को खराब न करे।

प्रश्न 4.
सैलोज़ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
इनमें दाने स्टोर किये जाते हैं। यह लोहे तथा कंक्रीट के बने होते हैं।

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प्रश्न 5.
गोदामों या ढोलों को कीड़ों से कैसे मुक्त किया जा सकता है ?
उत्तर-
इसके लिये 100 मि.ली. साइथियन (मैलाथियान प्रीमियम ग्रेड) 50 शक्ति को 10 लिटर पानी में घोलकर छत तथा फर्श पर छिड़काव करना चाहिए।

प्रश्न 6.
स्टोर किए जाने वाले दानों को कैसे बचाया जा सकता है ?
उत्तर-
अनाज स्टोर करने के लिये केवल नई बोरियों का प्रयोग करो तथा पुरानी बोरियों को सुमीसाइडीन अथवा सिंबुश से सुधार लें। स्टोर अथवा ढोल को एल्यूमीनियम फॉस्फाइड की धूनी दें।

प्रश्न 7.
पुरानी बोरियों में अनाज़ स्टोर करने से पहले कैसे शोधा जाता है ?
उत्तर-
पुरानी बोरियों को 6 मि०ली. सुमीसाइडीन 20 ई०सी० को 5 मि०ली० सिंबुश 25 ई०सी० को 10 लिटर पानी में घोलकर बोरियों को इस घोल में 10 मिनट के लिये भिगोकर रखो। बोरियों को छांव में सुखाकर उनमें दाने भर दो।

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प्रश्न 8.
टोपी गोदाम के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
यह खुले मैदान में दाने स्टोर करने की विधि है। इसका आकार 9.5 × 6.1 मीटर होता है। इस गोदाम में 96 बोरियां 6-6 लाइनों में लकड़ी के डण्डों पर रखी जाती हैं। इस गोदाम पर 7 गुणा खर्च कम होता है।

(ग) पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
अनाज भण्डारण में हानिकारक कीड़ों की रोकथाम क्यों ज़रूरी है ?
उत्तर-
अनाज भण्डार किसी देश की खुशहाली का प्रतीक होते हैं। अनाज का सही मण्डीकरण तथा रख-रखाव किसी भी देश की प्रगति का प्रतीक है। अनाज को कई तरह के कीड़े तथा जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। भण्डार किए दानों को लगभग 20 किम के कीड़े लग सकते हैं। जैसे सुसरी, दाने का छोटा बोरर तथा चावलों की सुण्डी, पतंगा, ढोरा, खपरा आदि। कीड़ों के आक्रमण से दानों की वृद्धि की शक्ति समाप्त हो जाती है। दानों का भार भी घट जाता है तथा अनाज के खाद्य तत्त्व भी कम हो जाते हैं। इसके स्वाद में भी फर्क पड़ जाता है।

कीड़े साधारणतः स्टोर के फर्शों, दीवारों तथा छतों आदि की दरारों से आते हैं। इस तरह अनाज का बहुत नुकसान होता है तथा इसे कई ढंगों का प्रयोग करने और सम्भालने की जरूरत पड़ती है।

प्रश्न 2.
अनाज भण्डारण के लिए कोठी बनाने के समय कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-

  1. कोठरी कमरे से अलग तथा पक्की होनी चाहिए।
  2. ऐसी कोठरी भूमि की सतह से 30-40 से० मी० ऊंची रखो ताकि कोठरी में नमी न जा सके।
  3. कोठरी को नमी रहित करने के लिए पॉलीथीन की शीट लगा दो।
  4. कोठरी में दाने डालने के लिये एक छिद्र ऊपर तथा दाने निकालने के लिये एक छिद्र नीचे होना चाहिए। जब प्रयोग न किया जाये तो हवा छिद्र बन्द होने आवश्यक हैं।
  5. कोठरी में सूखे तथा साफ़ दाने ही स्टोर करने चाहिएं।
  6. दाने स्टोर करने वाली कोठरी की दीवार कमरे की दीवार से 45-60 सें० मी० दूर होनी चाहिए।

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प्रश्न 3.
कौन-कौन से कीड़े अनाज को लगते हैं ? सूची बनाओ।
उत्तर-
पतंगा, वीवल, मक्खियां, ढोरा, सुसरी, खपरा, दाने का छोटा बोरर, चावलों की भुण्डी, दानों का गडूयां। पतंगा साधारणतः मक्की, ज्वार, गेहूँ, जवी, जौ आदि को नुकसान पहुंचाता है। सुसरी, खपरा, दाने का छोटा बोरर तथा चावलों की भुण्डी साधारणतः धान, गेहूँ, मक्की, जौ आदि को लगते हैं। ढोरा मोटे तौर पर मूंगी, चना तथा अन्य दालों को हानि पहुंचाता है।

प्रश्न 4.
कीड़े लगने से अनाज को कैसे बचाया जा सकता है ? विस्तार से लिखो।
उत्तर-

  1. नये दाने साफ़-सुथरे गोदामों अथवा ढोलों में रखने चाहिएं।
  2. गोदामों की सभी दरारें, दरजें, छिद्र आदि अच्छी तरह बन्द करके रखने चाहिएं।
  3. नाज को स्टोर करने के लिये सिर्फ नई बोरियों का ही प्रयोग करना चाहिए। अगर पुरानी बोरियों का प्रयोग करना हो तो उन्हें पहले सुधार लेना चाहिए। इसके लिए सुमीसाइडीन अथवा सिंबुश का प्रयोग करो। बोरियों को छांव में सुखाओ तथा फिर दाने भरो।
  4. गोदामों अथवा ढोलों को कीड़ों से मुक्त करने के लिये निम्नलिखित किसी एक ढंग का प्रयोग करो
    • 100 मि० ली० मैलाथियान 50 ग्राम ताकत को 10 लिटर पानी में घोल कर छत तथा फर्श पर छिड़काव कर देना चाहिए।
    • गोदामों में एल्यूमीनियम फॉस्फाइड की 25 गोलियां प्रति घन मीटर के हिसाब से रखें तथा 7 दिन तक हवा बंद रखें।

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प्रश्न 5.
व्यापारिक स्तर पर अन्न भण्डार करने के लिए बनाए जाने वाले भिन्नभिन्न गोदामों का विवरण दें।
उत्तर-
1. रिवायती चौड़े गोदाम-इन गोदामों में दानों से भरी बोरियां रखी जाती हैं। इनमें 1-2 वर्ष तक अनाज स्टोर किया जा सकता है। स्टोर किये दानों में नमी की मात्रा 14-15% से अधिक नहीं होनी चाहिए। इन गोदामों की पलिंथ ऊंची, फर्श नमी रहित होनी चाहिए। इनके अन्दर चूहे तथा पक्षी न जा सकते हों। यह रोशनीदार होने चाहिएं तथा सड़क तथा रेल की पहुंच में होने चाहिएं। बोरियों की धाकें लकड़ी के फ्रेम पर लगाई जाती हैं तथा प्लास्टिक से ढक दी जाती हैं।

2. सैलोज़ गोदाम-इनमें दालों तथा मिलर चावलों के अतिरिक्त सभी तरह के दाने 5 वर्ष तक स्टोर किये जा सकते हैं। इन स्टोर किये दानों में नमी की मात्रा 20% तक हो सकती है। यह कम स्थान घेरते हैं तथा इनमें रखे दानों का नुकसान भी बहुत कम होता है। यह सैलोज़ सिलिण्डर की शक्ल के होते हैं तथा नीचे से हापर टाइप के होते हैं। यह लोहे तथा कंकरीट के बने होते हैं। दाने रखने तथा निकालने के लिए लम्बी बैल्टे अथवा अन्य कैनवेयर लगे होते हैं। भारत में मिलने वाले सैलोज़ सिलिण्डर की ऊँचाई 30 से 50 मीटर तथा घेरा 6 से 10 मीटर तक होता है। इन्हें हवादार बनाने के लिये सैंट्रीफ्यूगल पम्पों का प्रयोग किया जाता है।

3. टोपी गोदाम-खुले मैदानों में दाने रखने के लिये इस तरीके का प्रयोग किया जाता है। इसका क्षेत्र 9.5 × 6.1 मीटर होता है। इसमें 96 बोरियां 6-6 लाइनों में लकड़ी के डण्डों पर रखी जा सकती हैं। प्रत्येक बोरी मोटी प्लास्टिक की चादर से ढंकी होती है। जब बाहरी तापमान तथा नमी कम हो तो प्लास्टिक की चादर उतारकर इन बोरियों को हवा दी जाती है।

Agriculture Guide for Class 7 PSEB अनाज की संभाल Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
स्टोर की जाने वाली मूंगफली में अधिक-से-अधिक कितने प्रतिशत नमी होनी चाहिए ?
उत्तर-
10%.

प्रश्न 2.
चौड़े गोदामों में कितने समय के लिए अनाज स्टोर किया जा सकता है ?
उत्तर-
1-2 वर्ष तक।

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प्रश्न 3.
कीड़े लगे दानों का इलाज करने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली किसी एक दवाई का नाम बताओ।
उत्तर-
फोस्टोक्सीन अथवा सैलफास।

प्रश्न 4.
दस क्विटल अनाज की सुरक्षा के लिए एल्यूमीनियम फॉस्फाइट की कितनी गोलियों की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
एल्यूमीनियम फॉस्फाइड की 2 गोलियां 10 क्विटल दानों में काफ़ी हैं।

प्रश्न 5.
टोपी गोदाम का आकार क्या है ?
उत्तर-
9.5 × 6.1 मीटर।

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प्रश्न 6.
स्टोर में कीड़े कहां से आ जाते हैं ?
उत्तर-
स्टोर की दीवारों, फर्श तथा छतों आदि की दरारों से।

प्रश्न 7.
भण्डार किए दानों पर कितनी किस्म के कीड़े हमला करते हैं ?
उत्तर-
20 किस्म के।

प्रश्न 8.
दानों का पतंगा कौन-से अनाज को नुकसान पहुंचाता है ?
उत्तर-
गेहूँ, मक्की, ज्वार, जवी, जौ आदि।,

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प्रश्न 9.
खपरा, सुसरी, दाने का छोटा बोरर तथा चावलों की मक्खी कौन-से । अनाज को नुकसान करते हैं ?
उत्तर-
गेहूँ, चावल, जौ, मक्की आदि को।

प्रश्न 10.
हानिकारक कीड़ों के नाम बताओ।
उत्तर-
वीवल, मक्खियां, ढोरा, पतंगा।

प्रश्न 11.
कौन-सा पतंगा खेतों में बल्लियों पर अण्डे देता है ?
उत्तर-
एगुमस दाने का पतंगा।

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प्रश्न 12.
पतंगे के नुकसान की पहचान कैसे की जाती है ?
उत्तर-
दानों में पड़े जाले से इसके नुकसान की पहचान हो जाती है। जाले में 5-6 दाने इकट्ठे फंसे होते हैं।

प्रश्न 13.
दाने के अन्दर अण्डे कौन-सा कीड़ा देता है ?
उत्तर-
वीवल।

प्रश्न 14.
दाने की मक्खी तथा जवान कीड़ा दाने का कौन-सा हिस्सा खाती
उत्तर-
दाने का भ्रूण।

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प्रश्न 15.
दानों में कौन-सी मक्खियां गर्मी पैदा करती हैं ?
उत्तर-
तीखे दांतों वाली दाने की मक्खी, आटे की चपटी मक्खी, आटे की लाल मक्खी आदि।

प्रश्न 16.
स्टोर की गेहूँ को कौन-सी मक्खी नुकसान पहुंचाती है ?
उत्तर-
दांतों की मक्खी।

प्रश्न 17.
स्टोर किये आटे में कौन-सी भण्डी पड़ जाती है ?
उत्तर-
आटे की लाल भुण्डी।

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प्रश्न 18.
स्टोरों में नुकसान करने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण भुण्डी कौन-सी है ?
उत्तर-
खपरा भुण्डी।

प्रश्न 19.
भुण्डियां स्टोर में कहां रहती हैं ?
उत्तर-
यह स्टोर की चीथों में रहती हैं।

प्रश्न 20.
दालों को हानि पहुंचाने वाले कीड़े का नाम बताओ।
उत्तर-
ढोरा।

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प्रश्न 21.
ढोरे के आक्रमण की पहचान कैसे होती है ?
उत्तर-
स्टोर की गई दालों पर सफ़ेद धब्बे पड़ जाते हैं जो इसके अण्डे होते हैं।

प्रश्न 22.
कौन-से तापमान पर कीड़े अण्डे देना बन्द कर देते हैं तथा मर जाते
उत्तर-
दानों का तापमान 65°F से घट जाने पर कीड़े अण्डे देना बन्द कर देते हैं तथा 30°F तक तापमान घट जाने पर कीड़े मर जाते हैं।

प्रश्न 23.
दाने स्टोर करने वाली कोठरी की दीवार कमरे की दीवार से कितनी दूर होनी चाहिए ?
उत्तर-
45-60 सें० मी०।

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प्रश्न 24.
दाने स्टोर करने वाले कमरे का फर्श ज़मीन से कितना ऊँचा होना चाहिए ?
उत्तर-
75 सें. मी०।

प्रश्न 25.
बोरियां दीवारों से कितनी दूर रखनी चाहिएं ?
उत्तर-
1.5 से 2 फुट।

प्रश्न 26.
बांस के बर्तनों का प्रयोग किन इलाकों में होता है ?
उत्तर-
कण्डी तथा नीम पहाडी इलाकों में।

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प्रश्न 27.
पंजाब में स्टोरों की दाने स्टोर करने की क्षमता कितनी है ?
उत्तर-
149 लाख मीट्रिक टन।

प्रश्न 28.
स्टोर भण्डार कितनी प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
3 प्रकार के।

प्रश्न 29.
विभिन्न गोदामों के नाम बताओ।
उत्तर-
रिवायती चौड़े गोदाम, सैलोज़ गोदाम, टोपी गोदाम।

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प्रश्न 30.
सैलोज़ गोदाम में दाने कितने समय के लिये स्टोर किये जा सकते हैं ?
उत्तर-
5 वर्ष तक।

प्रश्न 31.
भारत में मिलने वाले सैलोज़ सिलिण्डर की ऊँचाई तथा घेरा कितना होता है ?
उत्तर-
ऊँचाई 30-50 मीटर तथा घेरा 6-10 मीटर होता है।

प्रश्न 32.
टोपी गोदाम में कितनी बोरियां रखी जा सकती हैं ?
उत्तर-
96 बोरियां।

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छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कीड़ों के आक्रमण से दानों को क्या हानि होती है ?
उत्तर-
कीड़ों के आक्रमण से दानों की बढ़ने की शक्ति घट जाती है। दानों का भार घट जाता है। अनाज के खाद्य तत्त्व घट जाते हैं, यह हमारे खाने लायक नहीं रहता तथा इनके स्वाद में भी फर्क पड़ जाता है।

प्रश्न 2.
वीवल के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
वीवल एक सुण्डी है। यह दानों के अन्दर अण्डे देती है तथा दानों को अन्दर से खा जाती है। बाद में यह टूटी में बदल जाती है, जोकि दाने के बीच में ही होती है। बाद में टूटियों से वीवलें बाहर आ जाती हैं।

पतंगों से अलग यह कीड़ा सुंडी तथा जवान कीड़े की अवस्था में फसल को काफ़ी नुकसान पहुंचाता है। यह सुण्डी खेतों में गेहूँ पर हमला नहीं करती, पर कभी-कभी मक्की की फसल पर ज़रूर हमला करती है। इसी तरह ग्रेलरी वीवल तथा लैसर चावल वीवल से भी दानों को काफी नुकसान होता है।

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प्रश्न 3.
चावलों, मूंगफली, सूरजमुखी तथा तोरिये में कितनी नमी होनी चाहिए ?
उत्तर-
चावलों में 12-13%, मूंगफली में 10%, सूरजमुखी तथा तोरिये में 9-10% से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
गोदाम बना कर कौन-कौन सी संस्थाओं को किराये पर दिया जा सकता
उत्तर-
गोदाम बनाकर लम्बे समय के लिये मार्कफैड, पंजाब तथा सैंट्रल वेयर हाऊसिंग कार्पोरेशन फूड कार्पोरेशन आदि संस्थाओं को किराये पर दिये जा सकते हैं।

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कुछ हानिकारक कीड़ों के बारे में जानकारी दो।
उत्तर-
कीड़ों में साधारणत: पतंगे, वीवल, कीट तथा ढोरा आदि कीड़े फसलों का काफ़ी नुकसान करते हैं।—
1. पतंगे-एगुमस दाने का पतंगा खेतों में ही बल्लियों पर अण्डे देता है। जब दाने निकाल कर स्टोर किये जाते हैं तो स्टोर में इनकी वृद्धि होने लगती है। पतंगे की सुण्डियां दाने को अन्दर से खाकर खोखला कर देती हैं । खाये हुए दाने में साधारणतः छिद्र नज़र आने लगता है। स्टोरों में इन्हें साधारणतः उड़ते देखा जा सकता है।

2. भारतीय भोजन पतंगा-यह भी खेतों से ही आता है। यह सुण्डियां दाने के भ्रूण को अन्दर से खा जाती हैं। इस कीड़े के अण्डे, सुण्डी, टूटी तथा पतंगा सभी दानों से हमेशा बाहर मिलते हैं। इसके नुकसान की पहचान दानों में पड़े जाले से होती है। जाले में 56 दाने इकट्ठे फंसे हुये देखे जा सकते हैं।

3. भुण्डियां-दाने की भुण्डियां तथा सूड़े की भुण्डियां स्टोर किये दानों का नुकसान करती हैं। दाने की मक्खी की सुण्डी तथा जवान कीड़ा साधारणत: दाने का भ्रूण खा जाते हैं। तीखे दांतों वाली दाने की मक्खी, आटे की चपटी मक्खी, आटे की लाल मक्खी आदि दानों में गर्मी पैदा करती हैं तथा अपने मल त्याग से दानों को खराब कर देती हैं। स्टोर की गेहूँ पर दांतों की मक्खी, जबकि स्टोर किये आटे में आटे की लाल मक्खी पड़ जाती है। इसके अतिरिक्त खपरा स्टोरों में काफ़ी नुकसान करती हैं। सुण्डियों पर पीले बाल काफ़ी होते हैं तथा वह साधारणत: स्टोरों की चीथों में रहती हैं।

4. ढोरा-यह स्टोर की हुई दालों को हानि पहुंचाने वाला कीड़ा है। इसके आक्रमण की पहचान स्टोर की दालों पर सफ़ेद धब्बे से होती है, जोकि वास्तव में इनके अण्डे होते हैं। मुंगी तथा चने का ढोरा महत्त्वपूर्ण है।

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प्रश्न 2.
घरेलू अनाज भण्डार की तीन विधियां बताएं।
उत्तर-
1. ढोल-घरों में अनाज भण्डारण के लिए इनका प्रयोग किया जाता है। यह विभिन्न क्षमता वाले तथा विभिन्न धातुओं के बने हो सकते हैं। यह ढोल हवा रहित होते हैं तथा इस प्रकार बनाये जाते हैं कि इनमें अनाज को हानि पहुंचाने वाले कीड़े, चूहे आदि नहीं जा सकते। जो कीट अनाज के अन्दर रह जाते हैं उन्हें फलने-फूलने के लिये उचित वातावरण नहीं मिलता।
लाभ-

  • इनकी कीमत कम होती है।।
  • इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना आसान है।
  • इनकी बनावट सादी होती है।
    ध्यान रखने योग्य बातें-ढोलों में दाने सम्भालने से पहले इन्हें अन्दर से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए ताकि इनमें पहले स्टोर किये अनाज के अवशेष न रहें। ढक्कन अच्छी तरह कस कर बन्द करना चाहिए। दाने अच्छी तरह साफ़ किये होने चाहिएं तथा
    टूटे-फूटे दाने अलग कर देने चाहिएं। नए दानों को पुराने दानों में नहीं मिलाना चाहिए। हो सकता है कि उन्हें कीड़े लगे हों। लगे हुए अथवा नम दाने स्टोर नहीं करने चाहिएं। दाने अच्छी तरह धूप में सुखाकर तथा ठण्डे करके ढोलों में डालने चाहिए।

2. दाने स्टोर करने वाला कमरा-किसान दाने स्टोर करने के लिये कमरे बना लेते हैं। स्टोर किये यह दाने मण्डी में कीमत बढ़ने पर बेचे जाते हैं। दाने स्टोर करने वाले कमरे का फर्श ज़मीन से 75 सें० मी० ऊंचा होना चाहिए। कमरे के चारों ओर बरामदा होना चाहिए। कमरे में एक दरवाजा और कम-से-कम दो रोशनदान होने चाहिएं। दीवारें आदि साफ तथा सफ़ेदी की हुई होनी चाहिए। कमरा बनाने के पश्चात् जब यह अच्छी तरह सूख जायें तो ही इनमें बोरियां रखो। बोरियों के दीवारों से दूरी 1.5-2.0 फुट होनी चाहिए।

3. बांस के बने स्टोर-कण्डी तथा नमी पहाड़ी इलाकों में किसान बांस के बने बड़े बर्तनों में दाने स्टोर करते हैं।

प्रश्न 3.
यदि अनाज को कीड़ा लग जाये तो उसकी सुरक्षा के लिए क्या काना चाहिए ?
उत्तर-
1. कीड़ों से बचाने के लिये-अगर दानों को खपरा लग जाए तो उन्हें गोदामों में एल्यूमीनियम फॉस्फाइड की दो गोलियां प्रति 10 क्विटल के हिसाब से धूनी देनी चाहिए। दाने सुखा कर रखने चाहिएं। टिन के बर्तन साफ़ होने चाहिएं तथा इन्हें 2-3 दिन धूप लगवा लेनी चाहिए। नए दानों को पुराने दानों में नहीं मिलाना चाहिए।

2. कीड़े लगे दानों का इलाज-निम्नलिखित दवाइयों में से किसी एक से हवाबन्द कमरे में धूनी दें

i) डैल्शिया अथवा फोस्टोक्सिन अथवा सैल्फास (एल्यूमीनियम फॉस्फाइड) की 3 ग्राम की एक गोली को एक टिन दानों के लिए अथवा 25 गोलियों को 100 घन मीटर स्थान के लिए प्रयोग किया जा सकता है। कमरे में धूनी देने के पश्चात् कमरे को 7 दिन तक हवाबन्द रखो।

ii) ई० डी० सी० टी० मिश्रण (क्लिोपटोरा) एक लिटर को 20 क्विटल दानों अथवा 35 लिटर को 100 घन मीटर स्थान के लिए प्रयोग करना चाहिए। इसके प्रयोग के पश्चात् गोदाम को 4 दिन हवा बन्द रखना चाहिए।

iii) ई० डी० बी० (एथलीन डाइब्रोमाइंड) 3 मि० ली० प्रति क्विटल दानों के हिसाब से प्रयोग करनी चाहिए तथा दानों को 4 दिन हवाबन्द रखना चाहिए।

सिफ़ारिश की गई दवाई का प्रयोग न किया जाये तो टिन के बर्तनों में भी दानों को कीड़े लग सकते हैं। इन कीड़ों से बचाव धूनी देने वाली दवाइयों से किया जा सकता है। धूनी देने वाले पदार्थों का प्रयोग केवल हवाबन्द गोदामों में ही करना चाहिए।

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अनाज की संभाल PSEB 7th Class Agriculture Notes

  • एक अनुमान के अनुसार फसल की कटाई से लेकर दानों की खपत तक लगभग 10% नुकसान हो जाता है। इसका कारण कीट, चूहे तथा पक्षी होते हैं।
  • अनाज खराब होने से इसके पौष्टिक तत्त्व कम हो जाते हैं तथा स्वाद में अन्तर आ जाता है।
  • कीड़ों के आक्रमण से दानों की उगने की शक्ति कम हो जाती है।
  • कीड़े साधारणतः स्टोर की दीवारों, फर्श तथा छतों आदि की दरारों में से आ जाते
  • कीड़े लगे पुराने अनाज के पास नया अनाज रखने से उसे भी कीड़े लग जाते हैं।
  • भण्डार किये अनाज पर 20 किस्म के कीड़े हमला करते हैं जैसे-सुसरी, खपरा, दाने का छोटा बोरर, चावलों की भण्डी, दानों का पतंगा, ढोरा आदि।
  • एगुमस दाने का पतंगा खेतों में ही बल्लियों पर अण्डे देता है।
  • वीवल सुण्डी दाने को अन्दर से खा जाती है।
  • मक्खियां दाने का भ्रूण खाती हैं तथा दानों में गर्मी पैदा करती हैं।
  • खपरा भुण्डी सबसे अधिक नुक्सान करता है।
  • ढोरा स्टोर की दालों को नुक्सान पहुंचाता है।
  • दालों पर सफ़ेद धब्बे ढोरे के अण्डे होते हैं।
  • दाने स्टोर करने से पहले अच्छी तरह सुखा लेने चाहिएं।
  • दानों के तापमान 65°F पर कीड़े अण्डे देना बन्द कर देते हैं तथा 35°F पर कीड़े मर जाते हैं।
  • चावल में 12-13%, मूंगफली में 10%, सूर्यमुखी तथा तोरिया में 9-10% से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।
  • किसान दाने स्टोर करने के लिये पक्की कोठरी भी बनाते हैं।
  • व्यापारिक अन्न भण्डार के लिये रिवायती चौड़े गोदाम, ब्लॉक गोदाम, टोपी गोदाम आदि बनाये जाते हैं।
  • दानों को कीड़ों से बचाने के लिये सुमीसाइडीन, सिम्बुश, साइथियॉन, एल्यूमीनियम फॉस्फाइड आदि दवाइयों का प्रयोग किया जाता है।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल

PSEB 7th Class Home Science Guide बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
रेयॉन किस प्रकार का रेशा है?
उत्तर-
सेल्यूलोज से उत्पादित कृत्रिम रेशा।

प्रश्न 2.
रेयॉन के वस्त्रों पर तेज़ाब का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
शक्तिशाली तेज़ाब तथा क्षार दोनों से ही रेयॉन के वस्त्रों को हानि होती है।

प्रश्न 3.
नायलॉन किस प्रकार का तन्तु है?
उत्तर-
तन्तुविहीन रसायनों से प्राप्त किए जाने वाला।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 8 बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
गर्मी का नाइलॉन और करेप पर क्या असर होता है?
उत्तर-
गर्मी का नाइलॉन और करेप पर बड़ी जल्दी असर होता है। ये नरम हो जाते हैं। इसके इसी गुण के कारण नाइलॉन की जुराबों की शक्ल दी जा सकती है। लेकिन ज्यादा गर्मी से यह ख़राब हो जाती है। यह पानी नहीं सोखती। इसलिए गर्मियों में अगर इनको पहना जाए तो बेचैनी होती है।

प्रश्न 2.
नाइलॉन के कपड़ों को किस तरह धोना चाहिए?
उत्तर-
अगर नाइलॉन के कपड़े अधिक मैले हों तो 10-15 मिनट के लिए गुनगुने पानी में भिगो देना चाहिए। गुनगुने पानी में साबुन की झाग बनाकर कपड़ों की धोना चाहिए। ज़्यादा मैले हिस्सों को हाथ से मलकर धोना चहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
थर्मोप्लास्टिक और नान थर्मोप्लास्टिक रेशों में क्या अन्तर है?
उत्तर-
थर्मोप्लास्टिक और नान थर्मोप्लास्टिक में अन्तर —

थर्मोप्लास्टिक नान थर्मोप्लास्टिक
(i) ये ज़्यादा गर्मी से सड़ जाते हैं। (i) ये ज़्यादा गर्मी से सड़ते तो नहीं पर खराब हो जाते हैं।
(ii) ये पानी नहीं चूसते, इसलिए सिकुड़ते नहीं और जल्दी सूख जाते (ii) ये देखने में सिल्क की तरह लगते हैं।
(iii) ये आसानी से धोए जा सकते हैं और प्रैस करने की भी अधिक ज़रूरत नहीं पड़ती। (iii) ये पानी में कमजोर हो जाते हैं। इसलिए धोने के समय मलने पर फटने का डर रहता है।

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प्रश्न 2.
रेयॉन के कपड़े धोने के लिए कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिएं?
उत्तर-
रेयॉन के कपड़े धोने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिएं —

  1. रेयॉन के वस्त्रों को भिगोना, उबालना या ब्लीच नहीं करना चाहिए।
  2. साबुन मुदु प्रकृति का प्रयोग करना चाहिए।
  3. गुनगुना पानी ही प्रयोग में लाना चाहिए, अधिक गर्म नहीं।
  4. साबुन का अधिक-से-अधिक झाग बनाना चाहिए जिससे साबुन पूरी तरह घुल जाए।
  5. गीली अवस्था में रेयॉन के कपड़े अपनी शक्ति 50% तक खो देते हैं, अतः वस्त्रों में से साबुन की झाग निकालने के लिए उन्हें सावधानीपूर्वक निचोड़ना चाहिए।
  6. साबुन की झाग निचोड़ने के बाद वस्त्र को दो बार गुनगुने पानी में से खंगालना , चाहिए।
  7. वस्त्रों में से पानी को भी कोमलता से निचोड़कर निकालना चाहिए। वस्त्र को मरोड़कर नहीं निचोड़ना चाहिए।
  8. वस्त्र को किसी भारी तौलिए में रखकर, लपेटकर हल्के-हल्के दबाकर नमी को सुखाना चाहिए।
  9. वस्त्र को धूप में नहीं सुखाना चाहिए।
  10. वस्त्र को लटकाकर नहीं सुखाना चाहिए।
  11. वस्त्र को हल्की नमी की अवस्था में वस्त्र की उल्टी तरफ इस्तिरी करना चाहिए।
  12. वस्त्रों को अलमारी में रखने अर्थात् तह करके रखने से पूर्व यह देख लेना चाहिए कि उनमें से नमी पूरी तरह से दूर हो चुकी है या नहीं।

प्रश्न 3.
तेज़ाब, क्षार, रंगकाट और अल्कोहल का रेयॉन और नाइलॉन पर क्या असर होता है ?
उत्तर-
साबुन, क्षार, अल्कोहल का इस पर कोई असर नहीं होता लेकिन तेज़ाब से यह खराब हो जाता है, रंगकाट का भी इस पर कोई असर नहीं होता। इसलिए रंग खराब हुए नाइलॉन के कपड़ों को सफ़ेद करने के लिए रंगकाट का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस पर आसानी से पक्के रंग किए जा सकते हैं।

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Home Science Guide for Class 7 PSEB बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रेयॉन के वस्त्रों की धुलाई कठिन क्यों होती है?
उत्तर-
क्योंकि रेयॉन के वस्त्र पानी के सम्पर्क से निर्बल पड़ जाते हैं।

प्रश्न 2.
रेयॉन के वस्त्रों के लिए किस प्रकार की धुलाई अच्छी रहती है?
उत्तर-
शुष्क धुलाई (ड्राइक्लीनिंग)।

प्रश्न 3.
रेयॉन के वस्त्रों को धोते समय क्या बातें वर्जित हैं?
उत्तर-
वस्त्र को पानी में फुलाना, ताप, शक्तिशाली रसायनों तथा अल्कोहल का प्रयोग।

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प्रश्न 4.
रेयॉन के वस्त्रों की धुलाई के लिए कौन-स विधि उपयुक्त होती है?
उत्तर-
गूंधने और निपीडन की विधि।

प्रश्न 5.
रेयॉन के वस्त्रों को कहाँ सुखाना चाहिए?
उत्तर-
छायादार स्थान पर तथा बिना लटकाये हुए चौरस स्थान पर।

प्रश्न 6.
रेयॉन के वस्त्रों पर इस्तिरी किस प्रकार करनी चाहिए?
उत्तर-
कम गर्म इस्तिरी वस्त्र के उल्टी तरफ से करनी चाहिए। इस्तिरी करते समय वस्त्र में हल्की सी नमी होनी चाहिए।

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प्रश्न 7.
मानव-निर्मित अथवा मानवकृत तन्तुओं के कुछ उदाहरण दो।
उत्तर-
नायलॉन, पॉलिएस्टर, टेरीलीन, डेक्रॉन, ऑरलॉन, एक्रीलिक आदि।

प्रश्न 8.
रेयॉन किस प्रकार का तन्तु है-प्राकृतिक या मानव-निर्मित?
उत्तर-
रेयॉन प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित दोनों ही प्रकार का तन्तु है।

प्रश्न 9.
सबसे पुराना मानवकृत तन्तु कौन-सा है?
उत्तर-
रेयॉन।

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प्रश्न 10.
सेल्युलोज से कौन-सा तन्तु मानव-निर्मित है?
उत्तर-
रेयॉन।

प्रश्न 11.
जानवरों के बालों से प्राप्त होने वाला प्रमुख वस्त्रीय तन्तु कौन-सा है?
उत्तर-
ऊन।

प्रश्न 12.
प्राकृतिक तन्तु वाले पदार्थों से रासायनिक विधियों से नए प्रकार का कौन-सा मुख्य तन्तु प्राप्त किया जाता है?
उत्तर-
रेयॉन।

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प्रश्न 13.
तन्तु स्रोत को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर-
दो भागों में—

  1. प्राकृतिक तथा
    मानव-निर्मित।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रेयॉन की विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
भौतिक विशेषताएं-रेयॉन का तन्तु भारी, कड़ा तथा कम लचकदार होता है। जब रेयॉन के धागे को जलाया जाता है तो सरलता से जल जाता है। सूक्ष्मदर्शी यन्त्र से देखने पर इसके तन्तु लम्बाकार, चिकने एवं गोलाकार दिखाई देते हैं। रेयॉन में प्राकृतिक तन्यता नहीं होती है। यह वस्त्र रगड़ने से कमजोर हो जाता है तथा इसकी चमक नष्ट हो जाती है। यदि धोते समय वस्त्र को रगड़ा जाये तो छेद होने का भय रहता है। पानी से रेयॉन की शक्ति नष्ट हो जाती है। जब रेयॉन सूख जाता है तो पुनः अपनी शक्ति को प्राप्त कर लेता है। रेयॉन ताप का अच्छा संचालक है। यह उष्णता को शीघ्र निकलने देता है, अतः यह ठण्डा रहता है।
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ताप के प्रभाव से रेयॉन के तन्तु पिघल जाते हैं तथा उनकी चमक नष्ट हो जाती है। धूप रेयॉन की शक्ति को नष्ट करती है।
रासायनिक विशेषताएं-रेयॉन की रासायनिक विशेषताएं कुछ-कुछ रूई के समान ही हैं। क्षार के प्रयोग से रेयॉन की चमक नष्ट हो जाती है। द्रव अम्ल व अम्लीय क्षार का रेयॉन पर प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि यह रेयॉन को कोई हानि नहीं पहुँचाता है।

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प्रश्न 2.
टेरीलीन की भौतिक तथा रासायनिक विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
भौतिक विशेषताएं-टेरीलीन के तन्तु भारी एवं मज़बूत होते हैं।
सक्ष्मदर्शी यन्त्र द्वारा देखा जाये तो ये रेयॉन एवं नायलॉन के तन्तुओं की भाँति दिखाई देते हैं। ये तन्तु सीधे, चिकने एवं चमकदार होते हैं।
टेरीलीन में नमी को शोषित करने की शक्ति नहीं होती है, इसलिए पानी से इसके रूप में कोई परिवर्तन नहीं आता है।
टेरीलीन तन्तु जलाने पर धीरे-धीरे जलते हैं व धीरे-धीरे पिघलते भी हैं। यह प्रकाश अवरोधक होते हैं।
टेरीलीन के वस्त्र को धोने पर उसमें सिकुड़ने नहीं आती हैं। रासायनिक विशेषताएं
टेरीलीन पर अम्ल का प्रभाव हानिकारक नहीं होता परन्तु, अधिक तीव्र आम्लिक क्रिया वस्त्र को नष्ट कर देती है। क्षार का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। किसी भी प्रकार के रंग में इन्हें रंगा जा सकता है।
टेरीलीन के वस्त्र अधिक मज़बूत एवं टिकाऊ होते हैं ।

प्रश्न 3.
ऑरलॉन तन्तुओं की विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
सूक्ष्मदर्शी यन्त्र से देखने पर ये हड्डी के समान दिखाई देते हैं। ऑरलॉन में ऊन तथा रूई से कम अपघर्षण प्रतिरोधन-शक्ति होती है।
ऑरलॉन में उच्च श्रेणी की स्थाई विद्युत शक्ति होती है। जलाने पर यह जलता है व साथ-साथ पिघलता भी है।
ऑरलॉन का तन्तु आसानी से नहीं रंगा जा सकता है। रंग का पक्कापन रंगाई की विधि पर तथा वस्तु की बनावट पर निर्भर करता है। इस तन्तु को रंगने के लिए ताँबा-लोहा विधि बहुत सफल हुई है। वस्त्र का सिकुड़ना उसकी बनावट पर निर्भर करता है।
ऑरलॉन के वस्त्रों को धोने के पश्चाः इस्तिरी करने की आवश्यकता नहीं रहती है। यह शीघ्रता से सूख जाते हैं। इन वस्त्रों में टिकाऊपन अधिक होता है।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
बनावटी ढंग से बनाए धागों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर-
दो भागों में।

प्रश्न 2.
रेयॉन के कपड़ों में ……. नहीं होती।
उत्तर-
अधिक लचक।

प्रश्न 3.
…… को टिड्डियां बड़ी जल्दी खा जाती हैं।
उत्तर-
रेयॉन।

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प्रश्न 4.
टेरीलीन के कपड़ों को ……. में लटका कर सुखाना चाहिए।
उत्तर-
हैंगर।

प्रश्न 5.
……………… के कपड़े को धोने के बाद प्रेस करने की आवश्यकता नहीं रहती।
उत्तर-
ऑरलॉन।

प्रश्न 6.
……………….. से रेऑन की शक्ति घटती है।
उत्तर-
धूप।

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बनावटी ढंग से बनाए गए कपड़ों की देखभाल PSEB 7th Class Home Science Notes

  • बनावटी ढंग से बनाये गए धागों को दो भागों में बाँटा जा सकता है (i) नान थर्मोप्लास्टिक रेशे, (ii) थर्मोप्लास्टिक रेशे। रेयॉन
  • पानी में बहुत कमजोर हो जाती है। इसीलिए नमी युक्त कपड़े को ज़्यादा रगड़ना नहीं चाहिए।
  • रेयॉन लचकदार नहीं होती है।
  • बढ़िया किस्म की रेयॉन जिसका रंग निकलता हो या बहुत भारी कपड़े जैसे गरारा, सूट आदि को ड्राइक्लीन ही करवाना चाहिए।
  • रेयॉन के कपड़े को मरोड़कर नहीं निचोड़ना चाहिए। – रेयॉन को धूप में या लटकाकर नहीं सुखाना चाहिए।
  • रेयॉन कपड़े को बटनों पर प्रैस नहीं करना चाहिए। इससे कपड़ों के फटने का डर रहता है।
  • अगर कपड़े अधिक मैले हों तो उनको 10-15 मिनट के लिए गुनगुने पानी में भिगो देना चाहिए।
  • सफ़ेद कपड़ों को रंगदार कपड़ों से अलग ही धोना चाहिए। नाइलॉन और टेरीलीन के कपड़ों को बहुत हल्की गर्म प्रेस से हल्का-हल्का प्रैस करना चाहिए।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 7 शीशा और धातुओं की सफ़ाई

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 7 शीशा और धातुओं की सफ़ाई Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 7 शीशा और धातुओं की सफ़ाई

PSEB 7th Class Home Science Guide शीशा और धातुओं की सफ़ाई Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
चाँदी के गहनों या बर्तनों को साफ करने के लिए किस पदार्थ का प्रयोग करोगे ?
उत्तर-
चूने तथा गर्म पानी के प्रयोग से।

प्रश्न 2.
लोहे के जंग को किस पदार्थ से उतारोगे?
उत्तर-
चूने का प्रयोग करके।

प्रश्न 3.
पीतल के बर्तनों को साधारण विधि से चमकाने के लिए क्या प्रयोग करोगे ?
उत्तर-
नींबू व नमक से रगड़ेंगे।

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प्रश्न 4.
ताँबे के बर्तनों को किस चीज़ से चमकाया जाता है ?
उत्तर-
ताँबे के बर्तनों को कपड़े साफ़ करने वाले सोडे द्वारा चमकाया जा सकता है।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
ताँबे को साफ़ करने के लिए सोडा क्यों नहीं इस्तेमाल में लाना चाहिए?
उत्तर-
सोडा या क्षारीय पदार्थों से ताँबे के बर्तन काले पड़ जाते हैं। अतः इसकी सफ़ाई के लिए सोडे का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

प्रश्न 2.
स्टील के बर्तन और चाकू को कैसे साफ़ करोगे?
उत्तर-
स्टील के बर्तन साफ़ करने के लिए गर्म पानी में अमोनिया का घोल बनाकर प्रयोग में लाना चाहिए। स्टेनलेस स्टील की वस्तुएँ रगड़कर नहीं धोनी चाहिएं। गर्म पानी में साबुन के घोल द्वारा इनको साफ़ करके, सूखे कपड़े से पोंछकर रख देना चाहिए। इनको चमकाने के लिए सिरके का प्रयोग भी किया जाता है। बर्तनों को सिरके से मलने के पश्चात् पानी से धो लेना चाहिए। तत्पश्चात् कपड़े से पोंछने पर ये चमक उठते हैं। चाकू पर जल्दी दाग़ पड़ जाते हैं। अगर साफ़ न किया जाए तो खराब हो जाता है। चाकू को कभी भी पानी में नहीं डालना चाहिए। इसे हमेशा नमी युक्त कपड़े से साफ़ करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
बर्तन साफ़ करने क्यों जरूरी है?
उत्तर-
खाना पकाने से बर्तन गन्दे हो जाते हैं। इसलिए बर्तन साफ़ करने ज़रूरी हैं। इसे सिरका, नमक और नींबू से रगड़कर साफ़ करना चाहिए।

प्रश्न 4.
एल्यूमीनियम को कैसे साफ़ करोगे?
उत्तर–
सोडा या क्षारीय पदार्थों से एल्यूमीनियम धातु के बर्तन काले पड़ जाते हैं, अत: इनकी सफ़ाई करने में क्षारीय पदार्थों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इन बर्तनों को गर्म पानी में साबुन का घोल बनाकर साफ़ करना चाहिए। यदि बर्तन बहुत गन्दा हो गया है तो इसे उबलते हुए पानी में सिरके की कुछ बूंदें अथवा नींबू डालकर उसमें भिगो दिया जाना चाहिए। गीले बर्तनों को सूखे कपड़े से अवश्य पोंछकर रखना चाहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सख्त और नरम धातएँ किसको कहते हैं?
उत्तर-
सख़्त धातुएँ—ये वे धातुएँ हैं जो जल्दी नहीं घिसती, जैसे-लोहा, पीतल आदि।
नरम धातुएँ-ये धातुएँ नरम होने के कारण जल्दी घिस जाती हैं, जैसे-सोना, ताँबा और टिन।

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प्रश्न 2.
अगर पीतल गन्दा हो तो कैसे साफ़ करोगे?
उत्तर-
पीतल की वस्तुओं पर अति शीघ्र दाग़ पड़ जाते हैं। इनको नींबू व नमक से रगड़कर साफ़ किया जाता है। तत्पश्चात् गर्म पानी से धोकर पोंछ लेना चाहिए। इमली या आम की खटाई से भी पीतल के बर्तन चमकाये जाते हैं। सजावट की वस्तुओं को चमकाने के लिए बने बनाये ब्रासो जैसे पॉलिश बहुत प्रभावशाली होते हैं।
खट्टी वस्तुओं के रखने से पीतल के बर्तनों पर हरे-हरे दाग़ बन जाते हैं। ऐसे हरे दागों को अमोनिया से छुड़ाया जाता है।

प्रश्न 3.
रोशनदान, खिड़कियाँ और अलमारियों के शीशे कैसे साफ़ करोगे ?
उत्तर-
शीशे को थोड़ा नमी युक्त कर लेना चाहिए। इसके बाद दोनों हाथों में अख़बार के कागज़ लेकर शीशे को रगड़ना चाहिए। अगर शीशा अधिक गन्दा हो तो चाक के चूरे में थोड़ा पानी मिलाकर शीशे के दोनों तरफ़ लगाकर थोड़ा सूख जाने के बाद अख़बार की कागज़ से रगड़ना चाहिए। शीशे को चमकाने के लिए साफ़ करने के बाद थोड़ा मैथिलेटिड स्पिरिट रूई के टुकड़े में डालकर शीशे पर लगा देना चाहिए। कई बार खिड़कियों या रोशनदान के शीशों पर मक्खियाँ बैठ जाती हैं और उन्हें गन्दा कर देती हैं। इसके लिए पैराफिन या मिट्टी का तेल इस्तेमाल करना चाहिए।

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प्रश्न 4.
धातुएँ साफ़ करने के लिए क्या-क्या सामान चाहिएँ ?
उत्तर-
धातुएँ साफ़ करने के लिए निम्नलिखित सामान चाहिएँ

  1. साबुन,
  2. चूना,
  3. मिट्टी या राख,
  4. नींबू,
  5. इमली,
  6. गर्म पानी का घोल,
  7. सिरका तथा नमक,
  8. ब्रासो आदि।

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अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
स्टील के बर्तनों को किस से साफ़ किया जाता है ?
उत्तर-
साबुन के घोल के साथ पानी की सहायता से।

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प्रश्न 2.
लोहे के सामान को कैसे साफ़ करते हैं ?
उत्तर-
मिट्टी या राख से रगड़कर।

प्रश्न 3.
एल्यूमीनियम के सामान को साफ़ करने के लिए किन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
नींबू के रस तथा पानी का।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पीतल की वस्तुओं को किन-किन चीज़ों से साफ़ किया जा सकता
उत्तर-

  1. राख व मिट्टी (रोज़ उपयोग किए जाने वाले बर्तनों के लिए)
  2. इमली, नींबू (अधिक गन्दे बर्तनों के लिए)
  3. गर्म पानी का घोल (सजावटी वस्तुओं के लिए)
  4. सिरका तथा नमक (दाग़ धब्बे पड़े हों तो)
  5. ब्रासो (चमकाने के लिए)।

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प्रश्न 2.
धातु से बनी वस्तुओं को साफ़ करने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-

  1. धातु की वस्तु से चिकनाई दूर करने के लिए सर्वप्रथम इसे गर्म साबुन वाले घोल से धोना चाहिए।
  2. सफ़ाई करते समय नीचे अख़बार का कागज़ बिछा लेना चाहिए जिससे फ़र्श या मेज़ गन्दा न हो।
  3. इसके पश्चात् इसे स्वच्छ गर्म पानी से अच्छी प्रकार धो लेना चाहिए।
  4. वस्तु पर पॉलिश करने से पहले इसे भली प्रकार सुखा लेना चाहिए।
  5. अन्त में इसे नर्म, सूखे कपड़े से पॉलिश लगाकर रगड़कर चमका लेना चाहिए।
  6. खाने के प्रयोग में लाये जाने वाले सभी बर्तनों को साफ़ करने के पश्चात् साफ़ पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लेना चाहिए।
  7. ध्यान रहे कि इन पर किसी भी प्रकार की पॉलिश नहीं लगाई जानी चाहिए, विशेषकर इनकी भीतरी सतहों पर जोकि खाने के सीधे सम्पर्क में आती हैं।
  8. ऐसा कोई पदार्थ जिससे धातुओं को हानि पहुँचती हो, प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।

प्रश्न 3.
तामचीनी को कैसे साफ करोगे ?
उत्तर-
तामचीनी साफ़ करने के लिए छोटा-सा बोरी का टुकड़ा लेना चाहिए। इसमें राख और साबुन मिलाकर टुकड़े की मदद से बर्तन को रगड़ना चाहिए। अगर बर्तन में भोजन सड़ गया हो तो अण्डे का छिलका रगड़ना चाहिए, इससे खूब चमक आती है और बर्तन के दाग़ साफ़ हो जाते हैं।

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बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
घर में प्रयोग किए जाने वाले धातु के सामान की सफ़ाई का वर्णन करो।
उत्तर-
हमारे दैनिक जीवन में विभिन्न धातुओं के प्रति बर्तन तथा वस्तु प्रयोग में लाई जाती हैं, अतएव इनकी सफ़ाई की जानकारी का ज्ञान होना भी आवश्यक है।
कुछ धातुओं पर शीघ्र ही खरोंच पड़ जाती है, उन्हें कोमल धातु कह सकते हैं, कुछ धातु कठोर होते हैं, उन पर शीघ्र खरोंच नहीं पड़ती।

  1. सफ़ाई से पूर्व वस्तु पर पड़ी चिकनाई व धूल को गर्म पानी व साबुन के घोल से धो लेना चाहिए।
  2. पॉलिश लगाने से पूर्व वस्तु को भली-भाँति सुखा लेना चाहिए।
  3. पॉलिश लगाने के बाद वस्तु को थोड़ी देर सूखने देना चाहिए, फिर मुलायम कपड़े से रगड़कर चमकाना चाहिए।

चाँदी-हवा के सम्पर्क से चाँदी का सामान काला हो जाता है इसीलिए इसे समय समय पर साफ़ किया जाना चाहिए। इसके लिए एक किलो पानी में एक छोटा चम्मच नमक व एक चम्मच सोडा मिलाकर एक साफ़ बर्तन में पांच मिनट तक उबालकर वस्तु को उसमें डाल दें। वस्तु निखर जायेगी, फिर वस्तु को निकालकर उसे स्वच्छ पानी व साबुन से धोकर मुलायम व सूखे कपड़े से पोंछ लेना चाहिए।

चाँदी के सामान को सूखे चूने में दो तीन घंटे रखकर फिर कूची से झाड़-पोंछकर भी चमकाया जाता है। चाँदी की वस्तु को आधे घंटे तक खट्टे दूध में भिगोकर उसके बाद उसे साबुन से धोकर पोंछ लेना चाहिए। चाँदी के बर्तन उब या बथुए के पानी से भी साफ़ किए जाते हैं।

ताँबा-तांबे की वस्तुएँ चूने की सफ़ेदी से साफ़ की जाती हैं। सफेद छने हुए चूने के पाउडर को भिगोकर एक कपड़े में लगाकर गन्दे ताँबे के बर्तन में फेरना चाहिए फिर उसे कपड़े से रगड़कर धो लेना चाहिए। चूना, सोडा व सिरका मिलाकर तो बहुत गन्दे ताँबे के बर्तन भी साफ़ किए जा सकते हैं।

लोहा-नमी के कारण लोहे पर बहुत जल्दी जंग लग जाती है। चूने से जंग को साफ़ करना चाहिए। कड़ाही, बाल्टी आदि पर लगी जंग को मिट्टी, बालू, राख या ईंट के टुकड़े से रगड़कर साफ़ किया जाता है। जंग छुड़ाने के बाद बर्तन को भली-भाँति धो-पोंछकर सरसों या मिट्टी का तेल लगाकर रख देना चाहिए। लोहे के बर्तन में पानी का अंश नहीं रहने देना चाहिए। बर्तन को खड़ा करके रखने से सतह पर पानी का अंश नहीं रहता।

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
धातुएँ कितने प्रकार की हैं?
उत्तर-
दो।

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प्रश्न 2.
किसी कठोर धातु का नाम लिखें।
उत्तर-
लोहा।

प्रश्न 3.
सोना ……………. धातु है।
उत्तर-
नर्म।

प्रश्न 4.
सोडा या क्षारीय पदार्थों से एल्यूमीनियम धातु को क्या होता है?
उत्तर-
काली पड़ जाती है।

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प्रश्न 5.
पीतल की वस्तुओं को साफ़ करने के लिए बाज़ार से क्या मिलता है?
उत्तर-
ब्रासो।

प्रश्न 6.
नमी होने से लोहे को क्या हानि होती है?
उत्तर-
जंग लग जाता है।

प्रश्न 7.
चाँदी के बर्तन उबले आलू या …………… के पानी से भी साफ़ किए जाते हैं।
उत्तर-
बथुए।

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शीशा और धातुओं की सफ़ाई PSEB 7th Class Home Science Notes

  • धातुएँ दो प्रकार की होती हैं-(1) सख़्ज़ या कठोर धातुएँ, (2) नरम या मुलायम धातुएँ।
  • कठोर धातुएँ-ये वे धातुएँ हैं जो जल्दी नहीं घिसती, जैसे-लोहा, पीतल, स्टील आदि।
  • नरम धातुएँ ये धातुएँ नरम होने के कारण जल्दी घिस जाती हैं, जैसे- सोना, चाँदी, ताँबा और टिन।
  • स्टील और शीशे के बर्तन विम या किसी अन्य साफ़ करने वाले पाउडर से साफ़ करने चाहिएं और बाद में गर्म पानी से धोकर पोंछ लेने चाहिएं।
  • शीशे को चमकाने के लिए साफ़ करने के बाद थोड़ा मैथिलेटिड स्पिरिट रूई के टुकड़े में डालकर शीशे पर लगाना चाहिए।
  • स्टोव और पीतल की सजावट वाली चीज़ों को ब्रॉसो से साफ करना चाहिए, लेकिन खाने वाले बर्तनों को ब्रासो से साफ़ नहीं करना चाहिए।
  • ताँबे वाले बर्तन को खूब गर्म पानी से धोना चाहिए। तामचीनी या अनैमल में लगे चिकनाई और चाय के दाग़ छुड़ाने के लिए नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • धातुओं को साफ़ करने के लिए साबुन, राख, विम, गर्म पानी, चाक, झाँवा, अण्डे के छिलकों की जरूरत होती है।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 8 सजावटी पौधे

Punjab State Board PSEB 7th Class Agriculture Book Solutions Chapter 8 सजावटी पौधे Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Agriculture Chapter 8 सजावटी पौधे

PSEB 7th Class Agriculture Guide सजावटी पौधे Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
बहूपयोगी वृक्ष का कोई एक उदाहरण दें।
उत्तर-
पैगोड़ा, अमलतास आदि।

प्रश्न 2.
खुशबूदार फूलों वाले किसी एक वृक्ष का नाम बताएं।
उत्तर-
पैगोड़ा, सोनचंपा, बड़ा चम्पा आदि।

प्रश्न 3.
बाड़ बनाने के लिए किसी एक उपयुक्त झाड़ी का नाम बताएं।
उत्तर-
कामिनी, केशिया, पीली कनेर।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 8 सजावटी पौधे

प्रश्न 4.
दो फूलदार झाड़ियों के नाम बताएं।
उत्तर-
रात की रानी, चांदनी, पीली कनेर।

प्रश्न 5.
खुशबूदार फूलों वाली झाड़ी का नाम लिखें।
उत्तर-
रात की रानी।

प्रश्न 6.
सजावटी पौधे लगाने के लिए उपयुक्त समय कौन-सा होता है ?
उत्तर-
बहार के मौसम में तथा वर्षा के दिनों में।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 8 सजावटी पौधे

प्रश्न 7.
परदा करने के लिए किस बेल का उपयोग करना चाहिए ?
उत्तर-
परदाबेल (वरनोनिया लता), गोल्डन शावर।

प्रश्न 8.
घरों के अंदर सजावट के लिए उपयोग में लाई जाने वाली किसी एक बेल का नाम बताएं।
उत्तर-
मनी प्लांट।

प्रश्न 9.
मर्मी की ऋतु वाले किसी एक मौसमी फूल का नाम लिखो।
उत्तर-
सूरजमुखी, दोपहर खिली, जीनीया।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 8 सजावटी पौधे

प्रश्न 10.
सर्द ऋतु वाले मौसमी फूलों का बीज कौन-से महीने बीजा जाता है ?
उत्तर-
सितम्बर के मध्य।

(ख) एक-दो वाक्य में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
छायादार वृक्ष के क्या गुण होने चाहिएं ?
उत्तर-
इन वृक्षों का फैलाव गोल, छतनुमा तथा पत्ते घने होने चाहिएं।

प्रश्न 2.
चार फूलदान झाड़ियों के नाम लिखें।
उत्तर-
चाइना रोज़, रात की रानी, पीली कनेर, बोगनविलिया, चांदनी आदि।

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प्रश्न 3.
बेलों को कहाँ लगाया जाता है ?
उत्तर-
बेलों को सहारे की आवश्यकता होती है, इनको दीवारों, वृक्षों आदि के पास लगाया जाता है ताकि इनकों सहारे से ऊपर चढ़ाया जा सके।

प्रश्न 4.
खुशबूदार फूलों वाली दो बेलों के नाम लिखें।
उत्तर-
चमेली, माधवी लता खुशबूदार फूल वाली बेलें हैं।

प्रश्न 5.
सजावटी झाड़ियों के क्या गुण होते हैं ?
उत्तर-
जिन स्थानों पर वृक्ष लगाने का स्थान न हो वहां झाड़ियां सरलता से लग जाती

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प्रश्न 6.
मौसमी फूल कौन-से होते हैं ?
उत्तर-
मौसमी फूल एक साल या एक मौसम में अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।

प्रश्न 7.
सड़कों के पास वृक्ष किस उद्देश्य के लिए लगाए जाते हैं ?
उत्तर-
यह आसपास की सुंदरता में वृद्धि करते हैं तथा मिट्टी क्षरण से बचाते हैं।

प्रश्न 8.
ऊंची बाड़ तैयार करने के लिए कैसे वृक्षों का चुनाव करना चाहिए ?
उत्तर-
ऊंची बाड़ तैयार करने के लिए सीधे तथा लम्बे जाने वाले वृक्ष पास-पास लगाए जाते हैं।

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प्रश्न 9.
श्रृंगार वृक्ष किस उद्देश्य के लिए लगाए जाते हैं ?
उत्तर-
ये वृक्ष खूबसूरत फूलों के लिए लगाए जाते हैं।

प्रश्न 10.
झाड़ियों का प्रयोग आसानी से कहां किया जा सकता है ?
उत्तर-
जहां वृक्ष लगाने के लिए आवश्यकतानुसार स्थान न हो, वहां झाड़ियों का प्रयोग सरलता से हो जाता है।

(ग) पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर दें :

प्रश्न 1.
सजावटी वृक्षों को लगाने के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-

  1. सजावटी वृक्ष आसपास की सुंदरता में वृद्धि करते हैं।
  2. सजावटी वृक्ष मिट्टी क्षरण को रोकते हैं।
  3. वृक्ष वातावरण को भी शुद्ध रखने में भूमिका निभाते हैं।
  4. वृक्ष वातावरण को ठण्डा रखने में सहायक हैं।
  5. कई वृक्षों के फूल सुंगध वाले होते हैं जिससे वातावरण महक उठता है।
  6. कई वृक्ष यात्रियों को छाया देते हैं।

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प्रश्न 2.
सजावटी झाड़ियों का चुनाव कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
सजावटी झाड़ियों के चुनाव के लिए किस्में इस प्रकार हैं—

  1. फूलदार झाड़ियां-रात की रानी, चाइना रोज़, बोगनविलिया,चांदनी, पीली कनेर आदि।
  2. सुंदर पत्तों वाली झाड़ियां-अलीयर, कामनी, क्लैरोडेंडरौन, पीली कनेर, केशिया आदि। .
  3. भू-ढपनी झाड़ियां-लैंटाना। .
  4. दीवारों के निकट लगने वाली झाड़ियां-टीकोमा, अकलिफा आदि।

प्रश्न 3.
सजावटी बेलों का चुनाव अलग-अलग स्थानों के लिए कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
बेलों का चुनाव नीचे लिखे अनुसार किया जाता है’

  1. धूप वाले स्थान के लिए-बोगनविलिया, झुमका बेल, लसन बेल, गोल्डन शावर आदि।
  2. घर के अन्दर रखने के लिए-मनी प्लांट।
  3. बाड़ बनाने के लिए-बोगनविलिया, क्लैरोडेंडरौन, एस्प्रेगस आदि।
  4. हल्की बेलें-लोनीसोरा, मिठी मटरी आदि।
  5. खुशबूदार फूलों वाली बेलें-चमेली, माधवी लता।
  6. गमलों में लगाई जाने वाली-बोगनविलिया।
  7. भारी बेल-बिग़नोनिया, बोगनविलिया, माधवी लता, झुमका बेल, गोल्डन शावर।

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प्रश्न 4.
मौसमी फूलों का मौसम के आधार पर वर्गीकरण करें।
उत्तर-
मौसम के आधार पर फूलों का वर्गीकरण—

  1. गर्मी ऋतु के फूल-इन की बोवाई फरवरी-मार्च में की जाती है तथा खेत में लगाने के लिए पनीरी चार सप्ताह में तैयार हो जाती है। इस मौसम के मुख्य फूल हैंकोचिया, जीनीया, गेलारडिया, दोपहर खिली, गौंफरीना आदि।
  2. वर्षा ऋतु के फूल-इनकी जून के पहले सप्ताह बोवाई की जाती है तथा खेत में लगाने के लिए पनीरी जुलाई के पहले सप्ताह में तैयार हो जाती है। बाल्सम, कुक्कड़ कल्गी इस मौसम के फूल हैं।
  3. सर्दी ऋतु के फूल-इनको सितम्बर के मध्य में बोया जाता है तथा पनीरी अक्तूबर के मध्य में तैयार हो जाती है। इस ऋतु के फूल हैं-कैलैंडूला, डेहलिया, पटूनिया, गेंदा आदि।

प्रश्न 5.
सजावटी वृक्षों का चुनाव किन-किन उद्देश्यों के लिए किया जाता है? उदाहरण सहित लिखें।
उत्तर-
सजावटी वृक्षों का चुनाव अग्रलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  1. छाया के लिए-इन वृक्षों का फैलाव गोल तथा पत्ते घने तथा छाया देने वाले होते हैं। इनका उदाहरण है-नीम, सत्तपत्तिया, पीपल, पिलकन आदि।
  2. श्रृंगार के लिए-ये वृक्ष सुंदर फूलों के लिए लगाए जाते हैं; जैसे-कचनार, नीली गुलमोहर, लाल गुलमोहर आदि।
  3. सड़कों के आसपास लगाने वाले वृक्ष-ये वृक्ष छाया तथा शृंगार दोनों उद्देश्यों के लिए लगाए जाते हैं; उदाहरण, अमलतास, डेक, पिलकन, सिल्वर ओक आदि।
  4. बाड़ के तौर पर लगाए जाने वाले वृक्ष-इन का उद्देश्य ऊंची बाड़ तैयार करना है। यह मुख्य फसल को तेज़ हवा से बचाते हैं। इनको पास-पास लगाया जाता है तथा यह पर्दे का रूप धारण कर लेते हैं। उदाहरण सिल्वर ओक, सफैदा, पाप्लर, अशोका आदि।
  5. वायु प्रदूषण रोकने के लिए-कारखानों में से निकलता धुआं तथा रासायनिक गैसें वातावरण को दूषित करती हैं। इसलिए इस उद्देश्य के लिए पतझड़ वृक्ष जिनके पत्ते मोटे तथा चमकदार हों, लगाए जाते हैं; जैसे-शहतूत, पाप्लर, पैगोड़ा आदि।
  6. औषधी गुणों वाले वृक्ष-ये दवाई वाले वृक्ष हैं। इनका उदाहरण है-नीम, जामुन, अर्जुन, महुया, अशोका आदि।

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Agriculture Guide for Class 7 PSEB सजावटी पौधे Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कांटों की सहायता से ऊपर चढ़ने वाली दो लताओं के नाम बताओ।
उत्तर-
गुलाब और बोगनविलिया।

प्रश्न 2.
खुशबू के लिए लगाई जाने वाली दो लताओं के नाम बताओ।
उत्तर-
जैसमीन, माधवी लता।

प्रश्न 3.
हल्के जामुनी रंग के घंटियों जैसे फूल किस लता पर लगते हैं ?
उत्तर-
एडीन्कोलाइमा।

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प्रश्न 4.
बुरे स्थानों को छिपाने के लिए कौन-सी लता लगाई जाती है ?
उत्तर-
अरिस्टोलोचिया।

प्रश्न 5.
माधवी लता पर किस रंग के फूल होते हैं ?
उत्तर-
सफेद रंग के।

प्रश्न 6.
गोल्डन शावर पर लगने वाले फूल किस रंग के होते हैं ?
उत्तर-
संतरी रंग के।

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प्रश्न 7.
पर्दै जैसा प्रभाव डालने वाली लता कौन-सी है ?
उत्तर-
वरनोनिया (पर्दा लता)।

प्रश्न 8.
छायादार स्थान पर कौन सी लता लगानी ठीक है ?
उत्तर-
फाइक्स रैप्नस।

प्रश्न 9.
पत्ते झड़ने वाली लताएं किस महीने में लगाई जाती हैं ?
उत्तर-
जनवरी-फरवरी में।

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प्रश्न 10.
धूप वाले स्थान पर लगाई जाने वाली दो लताओं के नाम बताओ ।
उत्तर-
गोल्डन शावर, झुमका बेल।

प्रश्न 11.
झुमका लता को और क्या कहते हैं ?
उत्तर-
रंगून क्रीपर।

प्रश्न 12.
बाजा लता कौन-सी है ?
उत्तर-
कैंपसिस ग्रैंडीफ्लोरा।

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प्रश्न 13.
बिना सहारे के उगाई जाने वाली किसी लता का नाम बताओ।
उत्तर-
बाजा लता।

प्रश्न 14.
ईंडरॉन लता किस काम आती है ?
उत्तर-
छायादार स्थान पर बाड़ लगाने के काम आती है।

प्रश्न 15.
गोल्डन शावर लता किस काम आती है ?
उत्तर-
धूप वाले स्थान के लिए, पर्दा लता और र ‘समी लताओं के रूप में काम आती है।

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प्रश्न 16.
भारी लताओं के नाम बताएं ।
उत्तर-
पीली चमेली, रेगमार और गुलाब।

प्रश्न 17.
पर्दा लताएं कौन-सी हैं ?
उत्तर-
गोल्डन शावर व बरनोनिया।

प्रश्न 18.
आन्तरिक सजावट के लिए प्रयोग की जाने वाली लताओं के नाम बताओ।
उत्तर-
एसपैरेगश, सिंगोनियम, मनीप्लांट।

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प्रश्न 19.
सारा वर्ष हरी रहने वाली लताएं कब लगाई जाती हैं ?
उत्तर-
फरवरी-मार्च और जुलाई-सितम्बर में।

प्रश्न 20.
पतझड़ वाली लताएं कब लगाई जाती हैं ?
उत्तर-
जनवरी-फरवरी में।

प्रश्न 21.
सारा वर्ष हरी-भरी रहने वाली लता का नाम बताओ
उत्तर-
वरनोनिया, फाइक्स रैप्नस।

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प्रश्न 22.
इसको बाजा लता क्यों कहते हैं ?
उत्तर-
इसके फूल बाजों की तरह होते हैं।

प्रश्न 23.
वरनोनिया को पर्दा लता क्यों कहते हैं ?
उत्तर-
क्योंकि उसको जब बरामदे में लगाया जाता है तो पर्दे की तरह प्रभाव पड़ता है।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
लता किसे कहते हैं ?
उत्तर-
लता ऐसे पौधे हैं जिनका तना कमज़ोर होता है।

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प्रश्न 2.
दीवारों, वृक्षों आदि पर चढ़ने के लिए लताओं द्वारा अपनाई जाने वाली विधियां बताओ।
उत्तर-
इस कार्य के लिए लताएं अपने कांटों, टेंड्रिल और जड़ों की सहायता लेती हैं।

प्रश्न 3.
लताएं किस प्रकार की मिट्टी में लगाई जाती हैं ?
उत्तर-
उपजाऊ और पानी को देर तक समा कर रखने वाली किसी भी ज़मीन में लताओं को लगाया जा सकता है।

प्रश्न 4.
लताएं लगाने के लिए किस आकार के गड्ढे खोदने चाहिएं ?
उत्तर-
लताएं लगाने के लिए 60 सें० मी० चौड़े , लम्बे और गहरे गड्डे खोदने चाहिएं।

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प्रश्न 5.
लताओं की सूखी और बीमार टहनियों को क्यों काटते रहना चाहिए ?
उत्तर-
लताएं अच्छी तरह फल-फूल सकें इसलिए इनकी सूखी और बीमार टहनियों को काट देना चाहिए।

प्रश्न 6.
ब्यूमोनसिया लता के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
इसे मार्च मास में बड़े और सफ़ेद रंग के फूल लगते हैं। इस लता को वृक्षों पर चढ़ाया जाता है। इसे बीज या कलम द्वारा उगाया जा सकता है।

प्रश्न 7.
एडीन्कोलाइमा और एंटीगोनोन लताओं को लगने वाले फूलों की तुलना करो।
उत्तर-
एडीन्कोलाइमा के फूल नवम्बर में हल्के जामुनी रंग के घंटियों जैसे होते हैं। एंटीगोनोन के फूल सितम्बर से मार्च तक सफ़ेद, गुलाबी रंग के होते हैं।

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प्रश्न 8.
अरिस्टोलोचिया लता के फूल किस प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
इसके फूल सितम्बर में बत्तख जैसे बड़े और सफ़ेद रंग के होते हैं और इसके बीच जामुनी रंग के धब्बे भी होते हैं।

प्रश्न 9.
ऊंची इमारतों की सजावट के लिए प्रायः कौन-सी लता लगाई जाती है?
उत्तर-
बिगलोनिया लता ऊंची इमारतों की सजावट के लिए प्रयोग में लाई जाती है। यह हमेशा हरी ही रहती है।

प्रश्न 10.
बोगनविलिया लता की विभिन्न किस्मों के नाम बताओ।
उत्तर-
बोगनविलिया लता की किस्में हैं-विजय, पार्था, ग्लैबरा और सुभरा।

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प्रश्न 11.
एंटीगोनोन लता के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
इसको नवम्बर में जामुनी रंग के घंटियों जैसे फूल लगते हैं। इसके पत्तों को रगड़ने पर लहसुन की सुगन्ध आती है। पत्ते साफ़ और चमकदार होते हैं। इन्हें कलमों के द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 12.
बाजा लता के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर-
इसे कैंपसिस ग्रैंडीफ्लोरा भी कहा जाता है। इसको संतरी रंग के बच्चों के बाजों की तरह फूल मई से अगस्त तक लगते हैं जो कि अक्तूबर से नवम्बर तक रहते हैं। इसके पत्ते सर्दियों में झड़ जाते हैं।
इस लता को कलमों के द्वारा लगाया जाता है। इसकी शाखा सख्त होती है और बिना सहारे चल सकती है।

प्रश्न 13.
अरिस्टोलोचिया के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
इस लता को खराब स्थानों को ढकने के लिए लगाया जाता है। इसको बत्तख की तरह बड़े और सफेद रंग के फूल लगते हैं। इनके बीच में जामुनी रंग के धब्बे जैसे भी होते हैं। इसके बीज लगाए जाते हैं।

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प्रश्न 14.
बिगलोनिया के बारे में जानकारी दो।
उत्तर-
इसको ऊँची इमारतों को सजाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह हमेशा हरी रहती है। इसे पीले फूल जनवरी-फरवरी में लगते हैं। इसकी कलमें और बीज दोनों ही लगाए जा सकते हैं।

प्रश्न 15.
पीली चमेली के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
इसे दीवारों पर चढ़ाने के लिए लगाया जाता है। इसको 15-20 दिन के लिए मार्च में पीले फूल लगते हैं। इसकी वृद्धि कलमों के द्वारा की जाती है।

प्रश्न 16.
माधवी लता के बारे में जानकारी दो ।
उत्तर-
इस लता के पत्ते चमकदार होते हैं और फूल फरवरी-मार्च में लगते हैं। फूल सफ़ेद रंग के खुशबूदार होते हैं। इसको बीजों या कलमों द्वारा दोनों विधियों से लगाया जा सकता है।

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प्रश्न 17.
फाइक्स रैजस लता के बारे में जानकारी दो।
उत्तर-
इस लता को शानदार स्थानों के लिए चुना जाता है। यह हमेशा हरी रहती है। यह जड़ों के द्वारा दीवारों पर चिपक जाती है। इसको पत्तों के लिए लगाया जाता है और काट कर कोई भी आकार दिया जा सकता है।

प्रश्न 18.
ब्यूमोनसिया लता के बारे में जानकारी दो ?
उत्तर-
यह लता वृक्षों पर चढ़ाने के लिए लगाई जाती है। इसे मार्च में बड़े सफ़ेद रंग के फूल लगते हैं। यह लता कलमों और बीजों के द्वारा भी लगाई जा सकती है।

प्रश्न 19.
एंटीगोनॉन लता के बारे में आप क्या जानते हो?
उत्तर-
इसको स्थान ढकने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसको सितम्बर से मार्च तक सफेद गुलाबी रंग के फूल लगते हैं। इसको बीज तथा कलमों के द्वारा लगाया जा सकता है।

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प्रश्न 20.
गोल्डन शावर के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
यह सबसे सुन्दर बेल है। इसको सर्दियों में संतरी रंग के फूल लगते हैं। इसको इमारतों, घरों और बरामदों की सजावट के लिए लगाया जाता है।

प्रश्न 21.
झुमका लता के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
झुमका लता का दूसरा नाम रंगून क्रीपर भी है। इसको दीवारों, परगलों या वृक्षों पर चढ़ाने के लिए लगाया जाता है। इसको सारा साल ही सफ़ेद, लाल या गुलाबी फूल लगे रहते हैं। इसको कलमों और जड़ों के हिस्सों के साथ उगाया जा सकता है।

प्रश्न 22.
पर्दा लता के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
इसको बरामदे में लगाया जाता है और पर्दा लगा होने का भ्रम देती है। यह सारा साल ही हरी भरी रहती है। इस लता को दीवारों, बालकोनी पर चढ़ाने के लिए लगाया जाता है।

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बडे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
लताओं का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
लताओं से घरों, स्कूलों, कोठियों, कार्यालयों और सड़कों की सुन्दरता बढ़ती है। फूलों वाली लताएं बच्चों का मन मोह लेती हैं और उनके कोमल मन पर अच्छा प्रभाव डालती हैं। इससे बच्चों का मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास भी बढ़िया ढंग से होता है।

प्रश्न 2.
भिन्न-भिन्न स्थानों पर लगाई जाने वाली लताओं का विवरण दो।
उत्तर-
विभिन्न स्थानों पर लगाई जाने वाली लताएं हैं—

  1. धूप वाले स्थान के लिए-गोल्डन शावर, बोगनविलिया, झुमका लता इत्यादि।
  2. छायादार स्थान के लिए-मनीप्लांट, क्लैरोडेंडरॉन, सिंगोनीयम इत्यादि।
  3. बाड़ लगाने के लिए-क्लैरोडेंडरॉन, बोगनविलिया।
  4. मौसमी लताएं-गोल्डन शावर, बोगनविलिया।
  5. सुगन्ध के लिए-माधवी लता, जैसमीन (मोतिया-चमेली) इत्यादि।
  6. पर्दा लताएं-गोल्डन शावर, बरनोनिया।
  7. गमलों के लिए–सिंगोनीयम, बोगनविलिया, मनीप्लांट इत्यादि।
  8. अंदरूनी सजावट के लिए-ऐस्प्रेगस, मनीप्लांट, सिंगोनियम।
  9. भारी लताएं-रेगमार, गुलाब, पीली चमेली इत्यादि।

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प्रश्न 3.
लताएं लगाने की विधि क्या है ? इनकी देखभाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
भूमि-कोई भी उपजाऊ और देर तक पानी समा कर रखने वाली भूमि इन लताओं के लिए ठीक रहती है।
लताएं लगाने का समय-सारा वर्ष हरी रहने वाली लताओं के लिए उचित समय जुलाई-सितम्बर का मास होता है। पत्ते झड़ने वाली लताओं को जनवरी-फरवरी में लगाते हैं।

गड्ढे तैयार करना-लताओं के लिए 60 सें० मी० चौड़े लम्बे और गहरे गड्ढे खोदे जाते हैं और एक गड्ढे में 10 ग्राम बी० एच० सी० का पाऊडर और 8-10 कि० ग्रा० गली रूड़ी गोबर खाद मिला दें।

सिंचाई-लताएं लगाने के बाद ही लगातार पानी लगाएं और इन्हें आवश्यकता अनुसार ही सहारा दें।
देखभाल-बीमार और सूखी शाखाओं को काट दें। अच्छी तरह बढ़ फूल सकें इसके लिए इनकी कांट-छांट भी करते रहें। कीड़े-मकौड़े और रोगों से बचाव के लिए दवाइयों का छिड़काव करें।

प्रश्न 4.
बोगनविलिया लता के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
किस्में-बोगनविलिया की विभिन्न किस्में हैं-ग्लैबरा, पार्था, सुभरा और विजय। लगाने की विधि-सभी किस्मों को कलम के द्वारा लगाया जाता है। लगाने का समय-कलमों को जुलाई-अगस्त या जनवरी से फरवरी तक लगाया जाता है। रंगदार फूलों के लगने का समय-सफेद, जामुनी, लाल, पीले, संतरी रंगों के फूल मार्च-अप्रैल और नवम्बर-दिसम्बर में लगते हैं।

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प्रश्न 5.
रंगून क्रीपर किस लता को कहते हैं ? इसके फूल किस तरह के होते हैं और इसे कौन-से स्थान पर और किस विधि से लगाया जाता है ?
उत्तर-
झुमका लता को रंगून क्रीपर कहा जाता है। इसके फूल सफ़ेद गुलाबी या लाल रंग के होते हैं। फूल खुशबूदार होते हैं और सारा वर्ष लगे रहते हैं। इन लताओं को दीवारों, वृक्षों या परगलों पर चढ़ाने के लिए लगाया जाता है। इसे कलमों या जड़ों के भाग से उगाया जाता है।

प्रश्न 6.
अलग-अलग लताओं के नाम और फूलों के रंग बताओ और फूल कब लगते हैं ?
उत्तर-

  1. एंडीन्कोलाइमा-हल्के जामुनी रंग के घण्टियों के आकार के, नवम्बर में।
  2. व्यूमोनसिया लता-सफ़ेद रंग के, मार्च में।
  3. माधवी लता-सफ़ेद खुशबूदार, फरवरी-मार्च में।
  4. बिगलोनिया-पीले रंग के, जनवरी-फरवरी में।
  5. एंटीगोनान-सफ़ेद, गुलाबी, सितम्बर से मार्च। .
  6. अरिस्टोलोचिया-बत्तख की तरह बड़े और सफ़ेद, इनके बीच में जामुनी रंग के धब्बे होते हैं, सितम्बर में।
  7. झुमका लता-सफ़ेद, गुलाबी या लाल, सारा वर्ष।
  8. गोल्डन शावर-सर्दियों में, संतरी रंग के।
  9. पीली चमेली-मार्च में, पीले रंग के।
  10. बोगनविलिया-सफेद, जामुनी, लाल, नाभी, संतरी, पीले। मार्च-अप्रैल और नवम्बर-दिसम्बर में।
  11. कैम्पसिस ग्रैंडीफ्लोरा-मई से अगस्त में संतरी रंग के।

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प्रश्न 7.
धूप वाली जगह के लिए भारी बेलों, अंदरूनी सजावट वाली बेलों के बारे में बताओ।
उत्तर-

  1. धूप वाली जगह के लिए-गोल्डन शावर, झुमका बेल।
  2. भारी बेल-रेगमार, पीली चमेली।
  3. अंदरूनी सजावट-ऐस्प्रेगस, मनी प्लांट।

सजावटी पौधे PSEB 7th Class Agriculture Notes

  • वृक्ष, झाड़ियां, बेलें और मौसमी फूल आसपास की सुंदरता बढ़ाने में सहायक हैं तथा मिट्टी को क्षरण से भी बचाते हैं।
  • बहुपयोगी वृक्ष हैं-पैगोड़ा, अमलतास, लाल गुलमोहर, ऐरोकेरिया आदि।
  • छायादार वृक्ष हैं-नीम, सातपत्तिया, मोलसरी, सुखचैन, जामुन, पिलकन, पीपल आदि।
  • शृंगार वृक्ष हैं-नीली गुलमोहर, सिल्वर ओक, अमलतास, पिलकन, डेक आदि।
  • बाड़ के तौर पर लगाए जाने वाले वृक्ष हैं-सफैदा, पाप्लर, अशोका आदि।
  • सड़कों के आसपास लगाए जाने वाले वृक्ष हैं-डेक, पिलकन, सिल्वर ओक, नीली गुलमोहर आदि।
  • वायु प्रदूषण रोकने के लिए वृक्ष हैं-शहतूत, पाप्लर, पैगोड़ा आदि।
  • औषधि गुण वाले वृक्ष हैं-नीम, जामुन, अशोका, महुआ, अर्जुन आदि।
  • खुशबूदार फूलों वाले वृक्ष हैं-पैगोड़ा, सोनचंपा, बड़ा चम्पा।
  • फूलदार झाड़ियां हैं-रात की रानी, चांदनी, पीली कनेर, चाइमा रोज़, बोगनविलिया आदि।
  • सुंदर पत्तों वाली झाड़ियां हैं-अलीयर, कामिनी, केशिया आदि।
  • भू-ढपनी झाड़ियां हैं-लैंटाना।
  • दीवारों के निकट लगाने वाली झाड़ियां हैं-टीकोमा, अकलिफा आदि।
  • धूप वाले स्थान के लिए सजावटी बेलें हैं-गोल्डन शावर, झुमका बेल, बोगनविलिया।
  • भारी बेलें हैं-बिगनोनिया, माधवी लता, झुमका बेल, गोल्डन शावर आदि।
  • हल्की बेलें हैं-लोनीसोरा, मीठी मटरी आदि।
  • खुशबूदार फूलों वाली बेलें-चमेली, माधवी लता आदि।
  • बोगनविलिया को गमले में भी लगाया जा सकता है।
  • बाड़ लगाने वाली बेलें हैं-बोगनविलिया, क्लैरोडैडरोन, ऐस्प्रेगस आदि।
  • घर के अन्दर रखने वाली बेलें हैं-मनी प्लांट आदि।
  • पर्दा करने के लिए-परदा बेल, गोल्डन शावर आदि।
  • गर्मी ऋतु के फूल-कोचिया, जीनीया, सूरजमुखी, गेलारडिया, गौंफरीना, दोपहर खिली आदि।
  • वर्षा ऋतु के फूल हैं-बाल्सम, कुक्कड़ कल्गी आदि।
  • सर्दी ऋतु के फूल हैं-कैलेंडुला, डेहलीया, पहूनिया, गेंदा आदि।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीव

Punjab State Board PSEB 7th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीव Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 4 महासागर

SST Guide for Class 7 PSEB प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीव Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 1-15 शब्दों में दो।

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति से क्या भाव है?
उत्तर-
प्राकृतिक वनस्पति से भाव उन जड़ी-बूटियों तथा पेड़-पौधों से है, जो अपने आप उग आते हैं। इसमें मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता। किसी प्रदेश की प्राकृतिक वनस्पति वहां के धरातल, मिट्टी के प्रकार, जलवायु आदि पर निर्भर करती है।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक वनस्पति को प्रमुख कितने भागों में बांटा गया है?
उत्तर-
प्राकृतिक वनस्पति को निम्नलिखित तीन भागों में बांटा गया है –

  1. वन
  2. घास के मैदान तथा
  3. मरुस्थलीय झाड़ियां।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीव

प्रश्न 3.
जंगलों से कौन-सी वस्तुएं प्राप्त होती हैं ?
उत्तर-
जंगलों से हमें कई प्रकार की लकड़ी, बांस, कागज़ बनाने वाले घास, गूद, गन्दा बरोज़ा, तारपीन, लाख, चमड़ा रंगने का छिलका, दवाइयों के लिए जड़ी-बूटियां आदि वस्तुएं प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 4.
जंगल अप्रत्यक्ष रूप में हमारी क्या सहायता करते हैं ?
उत्तर-
वन परोक्ष रूप से हमारी बहुत सहायता करते हैं।

  1. ये वातावरण से कार्बन-डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
  2. ये वर्षा लाने में सहायक होते हैं और तापमान को अधिक नहीं बढ़ने देते।
  3. ये बाढ़ और भू-क्षरण को रोकते हैं।
  4. ये भूमि के अन्दर पानी के रिसाव में सहायता करते हैं।
  5. वन मरुस्थलों के विस्तार को रोकते हैं और वन्य-जीवों तथा पक्षियों को आवास (Habitat) प्रदान करते हैं।

प्रश्न 5.
जंगलों के विकास का क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर-
जंगल (वन) हमारे लिए वरदान हैं। इनके विकास का निम्नलिखित प्रभाव पड़ेगा –

  1. देश की आर्थिक प्रगति होगी।
  2. पर्यावरण शुद्ध होगा।
  3. वन्य जीवन की सुरक्षा होगी।

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प्रश्न 6.
मानव परिस्थिति (पारिस्थितिक) सन्तुलन को कैसे बिगाड़ रहा है?
उत्तर-
मनुष्य आवास तथा कृषि योग्य भूमि प्राप्त करने के लिए वनों की अन्धाधुन्ध कटाई कर रहा है। इससे पारिस्थितिक सन्तुलन बिगड़ रहा है।

प्रश्न 7.
उष्ण घास के मैदानों के स्थानीय नाम बताएं।
उत्तर-
उष्ण घास के मैदानों को अफ्रीका में पार्कलैण्ड, वेंजुएला में लानोज तथा ब्राज़ील में कैंपोज़ कहते हैं।

प्रश्न 8.
ठण्डे मरुस्थलों की वनस्पति के बारे में लिखो।
उत्तर-
ठण्डे मरुस्थलों में जब थोड़े समय के लिए बर्फ पिघलती है, तो विभिन्न रंगों के फलों वाले छोटे-छोटे पौधे उग जाते हैं। उत्तरी भागों में छोटी-छोटी घास जैसे काई और लिचन (लाइकन) उग जाती है।

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(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में दें।

प्रश्न 1.
भूमध्य रेखी जंगलों के बारे में लिखो।
उत्तर-
भूमध्य रेखी जंगल भू-मध्य रेखा से 10° उत्तर और 10° दक्षिणी अक्षांशों में फैले हुए हैं। इन वनों को सदाबहार घने जंगल कहते हैं। भू-मध्य रेखा पर सारा साल उच्च तापमान रहता है और वर्षा भी अधिक होती है। इसी कारण यहां घने वन पाए जाते हैं। इन वनों की ऊपर वाली शाखाएं आपस में इस प्रकार मिली होती हैं कि वे एक छतरी के समान दिखाई देती हैं। इसलिए सूर्य का प्रकाश भी धरती पर नहीं पहुंच पाता। इन वनों में कई प्रकार के वृक्ष होते हैं; फिर भी ये वृक्ष आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होते। इसका मुख्य कारण यह है कि ये इतने सघन होते हैं कि इनमें से गुज़रना कठिन होता है। इस कारण इनकी कटाई नहीं हो सकती।

दक्षिणी अमेरिका, मध्य अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, मैडागास्कर में इन वनों के बहुत बड़े क्षेत्र हैं। ऑस्ट्रेलिया, मध्य-अमेरिका में इन वनों ने थोड़ा-थोड़ा क्षेत्र घेरा हुआ है।

प्रश्न 2.
आर्थिक पक्ष से कौन-से जंगल सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर-
आर्थिक दृष्टि से सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण तथा मूल्यवान वन नुकीले पत्तों वाले वन हैं। इन वनों को सदाबहार वन भी कहते हैं। यूरेशिया में इन्हें टैगा (Taiga) वन कहा जाता है। इन वनों में चीड़, फ़र और स्यूस के वृक्ष मिलते हैं। इन वृक्षों से नर्म लकड़ी प्राप्त होती है जिससे गूदा और कागज़ बनाया जाता है।

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प्रश्न 3.
मानसूनी जंगलों (वनों) को पतझड़ी जंगलों (वनों) के नाम से क्यों पुकारा जाता है?
उत्तर-
मानसूनी वन कम उष्ण अर्थात् उपोष्ण अक्षांशों पर पाये जाते हैं। जिन क्षेत्रों में किसी एक मौसम में वर्षा अधिक मात्रा में होती है वहां इनके पत्ते चौड़े होते हैं। ये वन उन क्षेत्रों में अधिक होते हैं जहां मानसून पवनों के कारण अधिक वर्षा होती है। इस कारण इन्हें मानसूनी वन कहते हैं। जिस मौसम में वर्षा नहीं होती; ये वन अपने पत्ते गिरा देते हैं। इसलिए इन्हें पतझड़ी वन भी कहा जाता है। ये वन आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये वन भू-मध्यरेखीय वनों से कम सघन हैं और मनुष्य की पहुंच में हैं। इनसे इमारती तथा ईंधन की लकड़ी मिलती है। परन्तु अधिकतर मानसूनी वन काट दिए गए हैं और प्राप्त भूमि पर कृषि की जाने लगी है।

प्रश्न 4.
शीत ऊष्ण घास के मैदानों के बारे में लिखो। इनके भिन्न-भिन्न महाद्वीपों में कौन-कौन से नाम हैं ?
उत्तर-
शीतोष्ण घास के मैदान कम वर्षा वाले शीतोष्ण क्षेत्रों में पाये जाते हैं। यहां घास अधिक ऊंची तो नहीं होती, परन्तु यह कोमल तथा सघन होती है। अतः यह पशुओं के चारे के लिए बहुत उपयोगी होती है। इन घास के मैदानों को विभिन्न महाद्वीपों में भिन्न-भिन्न नाम दिये गये हैं। इन्हें यूरेशिया में स्टैपीज़, उत्तरी अमेरिका में प्रेयरीज़, दक्षिणी अमेरिका में पम्पाज़, दक्षिणी अफ्रीका में वैल्ड तथा ऑस्ट्रेलिया में डाउन्ज के नाम से पुकारा जाता है।

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प्रश्न 5.
गर्म मरुस्थलीय वनस्पति के बारे में लिखो।
उत्तर-
संसार के प्रमुख गर्म मरुस्थल अफ्रीका में सहारा और कालाहारी, अरब-ईरान का मरुस्थल, भारतपाकिस्तान का थार मरुस्थल, दक्षिणी अमेरिका में ऐटोकामा, उत्तरी अमेरिका में दक्षिणी कैलेकैनिया और उत्तरी मैक्सिको तथा ऑस्ट्रेलिया में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मरुस्थल हैं। इन मरुस्थलों में अधिक गर्मी तथा कम वर्षा के कारण बहत कम वनस्पति मिलती है। यहां केवल कांटेदार झाड़ियां, थोहर, छोटी-छोटी जड़ी-बूटियां और घास आदि ही पैदा होते हैं। प्रकृति ने इस वनस्पति को इस प्रकार का बनाया है कि यह अत्यधिक गर्मी और शुष्कता को सहन कर सके। इनकी जड़ें लम्बी और मोटी होती हैं ताकि पौधे गहराई से नमी प्राप्त कर सकें। पौधों का छिलका मोटा होता है तथा पत्ते मोटे और चिकने होते हैं, ताकि वाष्पीकरण से अधिक पानी नष्ट न हो।

प्रश्न 6.
जंगलों (वनों) की सम्भाल क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
वनों का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है। ये हमारी बहुत-सी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं । वनों से प्राप्त लकड़ी का उपयोग ईंधन के रूप में, मकान बनाने में तथा कई अन्य कामों, जैसे कागज़ बनाने, रेलों के डिब्बे, स्लीपर, रेयन (कपड़ा बनाने के लिए) आदि बनाने के लिए होता है। वनों से हमें लकड़ी के अतिरिक्त अन्य कई उपयोगी पदार्थ भी प्राप्त होते हैं। सबसे बढ़कर वन वर्षा लाने में सहायता करते हैं, बाढ़ों पर नियन्त्रण करते हैं तथा भूक्षरण को रोकते हैं। परन्तु जनसंख्या की वृद्धि के साथ वनों का उपभोग बढ़ रहा है। जिससे वन-क्षेत्र कम हो रहा है। अतः वनों की सम्भाल और नये वृक्ष लगाने की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

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(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125-130 शब्दों में लिखो

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति के बारे में विसृत रूप में लिखो।
उत्तर-
प्राकृतिक वनस्पति से अभिप्राय उन जड़ी-बूटियों तथा पेड़-पौधों से है, जो मनुष्य के प्रयत्न के बिना अपने आप उग आते हैं। इसमें मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता। किसी प्रदेश की प्राकृतिक वनस्पति वहां के धरातल, मिट्टी के प्रकार, जलवायु आदि पर निर्भर करती है।
प्राकृतिक वनस्पति के भाग-प्राकृतिक वनस्पति को निम्नलिखित तीन भागों में बांटा गया है –
(1) वन
(2) घास के मैदान तथा
(3) मरुस्थलीय झाड़ियां।
I. वन-वनों को वर्षा की मात्रा, मौसमी बांट, तापमान आदि कारक प्रभावित करते हैं। इस आधार पर वनस्पति तीन प्रकार की है –
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(1) भू-मध्य रेखीय वन (2) मानसूनी अथवा पतझड़ी वन (3) नुकीली पत्ती वाले वन।
1. भू-मध्य रेखीय वन-ये वन भू-मध्य रेखा से 10° उत्तर और 10° दक्षिण अक्षांशों में फैले हुए हैं। इन वनों को सदाबहार घने वन कहते हैं। भू-मध्य रेखा पर सारा साल निरन्तर उच्च तापमान रहता है और वर्षा भी अधिक होती है। इसी कारण यहां घने वन पाए जाते हैं। इन वनों की ऊपर वाली शाखाएं आपस में इस प्रकार मिली होती हैं कि वे एक छतरी के समान दिखाई देती हैं। इसलिए सूर्य का प्रकाश भी धरती पर नहीं पहुंच पाता। इन वनों में कई प्रकार के वृक्ष होते हैं; फिर भी ये वृक्ष आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होते। इसका मुख्य कारण यह है कि ये इतने सघन होते हैं कि इनमें से गुज़रना कठिन होता है। इस कारण इनकी कटाई नहीं हो सकती।

दक्षिणी अमेरिका, मध्य अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, मैडागास्कर में इन वनों के बहुत बड़े क्षेत्र हैं। ऑस्ट्रेलिया, मध्य-अमेरिका में इन वनों ने थोड़ा-थोड़ा क्षेत्र घेरा हुआ है।

2. मानसूनी अथवा पतझड़ी वन-मानसूनी वन कम उष्ण अर्थात् उपोष्ण अक्षांशों पर पाये जाते हैं। जिन क्षेत्रों में किसी एक मौसम में अधिक वर्षा होती है, वहां इनके पत्ते चौड़े होते हैं। ये वन उन क्षेत्रों में अधिक होते हैं जहां मानसून पवनों के कारण अधिक वर्षा होती है। इस कारण इन्हें मानसूनी वन कहते हैं। जिस मौसम में वर्षा नहीं होती; ये वन अपने पत्ते गिरा देते हैं। इसलिए इन्हें पतझड़ी वन भी कहा जाता है। ये वन आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये वन भू-मध्य रेखीय वनों से कम सघन हैं और मनुष्य की पहुंच में हैं। इनसे इमारती तथा ईंधन की लकड़ी मिलती है। परन्तु अधिकतर मानसूनी वन काट दिए गए हैं और प्राप्त भूमि पर कृषि की जाने लगी है।

3. नुकीली पत्ती वाले वन-ये वन आर्थिक दृष्टि से सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण तथा मूल्यवान हैं। इन वनों को सदाबहार वन भी कहते हैं। यूरेशिया में इन्हें टेगा (Taiga) वन कहा जाता है। इन वनों में चीड़, फ़र और स्पूस के वृक्ष मिलते हैं। इन वृक्षों से नर्म लकड़ी प्राप्त होती है जिससे गूदा और कागज़ बनाया जाता है।

II. घास के मैदान-घास के मैदान मुख्य रूप से दो प्रकार के हैं-उष्ण घास के मैदान तथा शीतोष्ण घास के मैदान।
1. उष्ण घास के मैदान-घास के ये मैदान 10°-30° अक्षांशों पर उत्तरी तथा दक्षिणी गोलाद्धों में पाये जाते हैं। इन घास के मैदानों को ‘सवाना घास के मैदान’ कहा जाता है। परन्तु अलग-अलग क्षेत्रों में इन्हें अलग-अलग नाम दिये गए हैं। अफ्रीका में इन्हें पार्कलैण्ड, जुएला में लानोज़ और ब्राज़ील में कैम्पोज़ कहते हैं।

इन मैदानों की घास पांच मीटर तक ऊंची हो जाती है और सूखकर बहुत कठोर हो जाती है। यहां पर कहीं-कहीं छोटे कद के वृक्ष भी मिलते हैं। इन घास के मैदानों में घास खाने वाले और मांसाहारी पशु बहुत अधिक पाये जाते हैं।

2. शीतोष्ण घास के मैदान-शीतोष्ण घास के मैदान कम वर्षा वाले शीतोष्ण क्षेत्रों में पाये जाते हैं। यहां घास अधिक ऊंची तो नहीं होती, परन्तु यह कोमल तथा सघन होती है। अतः यह पशुओं के चारे के लिए बहुत उपयोगी होती है। इन घास के मैदानों को भी विभिन्न महाद्वीपों में भिन्न-भिन्न नाम दिये गये हैं। इन्हें यूरेशिया में स्टैपीज़, उत्तरी अमेरिका में प्रेयरीज़, दक्षिणी अमेरिका में पम्पाज़, दक्षिणी अफ्रीका में वैल्ड तथा ऑस्ट्रेलिया में डाउन्ज़ के नाम से पुकारा जाता है।

III. मरुस्थलीय झाड़ियां-संसार में दो प्रकार के मरुस्थल पाये जाते हैं-गर्म मरुस्थल तथा ठण्डे मरुस्थल।
1. गर्म मरुस्थल-संसार के प्रमुख गर्म मरुस्थल अफ्रीका में सहारा और कालाहारी, अरब-ईरान का मरुस्थल, भारत-पाकिस्तान का थार मरुस्थल, दक्षिणी अमेरिका में ऐटोकामा, उत्तरी अमेरिका में दक्षिणी कैलिफ्रेनिया और उत्तरी मैक्सिको तथा ऑस्ट्रेलिया में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का मरुस्थल हैं। इन मरुस्थलों में अधिक गर्मी तथा कम वर्षा के कारण बहुत कम वनस्पति मिलती है। यहां केवल कांटेदार झाड़ियां, थोहर, छोटी-छोटी जड़ी-बूटियां और घास आदि ही पैदा होते हैं। प्रकृति ने इस वनस्पति को इस प्रकार का बनाया है कि यह अत्यधिक गर्मी और शुष्कता को सहन कर सके। इनकी जड़ें लम्बी और मोटी होती हैं ताकि पौधे गहराई से नमी प्राप्त कर सकें। पौधों का छिलका मोटा होता है तथा पत्ते मोटे और चिकने होते हैं, ताकि वाष्पीकरण से अधिक पानी नष्ट न हो।

2. ठण्डे मरुस्थल-ठण्डे मरुस्थल कनाडा तथा यूरेशिया के सुदूर उत्तरी अक्षांशों में स्थित हैं। यहां वर्ष में अधिकतर समय बर्फ जमी रहती है। जब थोड़े समय के लिए बर्फ पिघलती है, तो विभिन्न प्रकार के रंगों के फूलों वाले छोटे-छोटे पौधे उग आते हैं। उत्तरी भागों में छोटी-छोटी घास जैसे काई और लिचन (लाइकन) उग जाती है।

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प्रश्न 2.
संसार में जंगली जीवों की सुरक्षा तथा सम्भाल के बारे में लिखो। पारिस्थिति (पारिस्थितिक) सन्तुलन को बनाये रखने के लिए जंगली जीवों की भूमिका के बारे में लिखो।
उत्तर-
जंगली जीव हमारी अमूल्य सम्पत्ति हैं। परन्तु जंगलों के विनाश के साथ-साथ जंगली जीवों की संख्या बहुत कम होती जा रही है। मनुष्य जंगल काटने के साथ-साथ जंगली जीवों का शिकार भी करता रहा है। मांस, खाल तथा अन्य अंगों के लिए मनुष्य अन्धा-धुन्ध पशुओं का शिकार करता रहा है। परिणामस्वरूप जंगली जीवों की कई जातियां लुप्त हो गई हैं और कई जातियों की संख्या इतनी कम हो गई है कि उनके लुप्त हो जाने का खतरा पैदा हो गया है। उदाहरण के लिए भारत में गेंडा, चीता, शेर आदि जीव लुप्त होने की कगार पर हैं।

पारिस्थितिक सन्तुलन को बनाए रखने में जंगली जीवों की भूमिका-पारिस्थितिक सन्तुलन को बनाये रखने में वन्य जीवों का बहुत अधिक योगदान है। प्रकृति ने जीव-मण्डल की रचना इस प्रकार की है कि एक जीव भोजन के लिए दूसरे जीव पर निर्भर है। छोटे जीव बडे जीवों का भोजन हैं। मांसाहारी जीव घास खाने वाले जीवों पर निर्भर हैं। अतः किसी एक जीव-जाति का अस्तित्व समाप्त हो जाने पर पारिस्थितिक सन्तुलन बिगड़ जाता है। उदाहरण के लिए यदि शेर, चीते आदि मांसाहारी जीवों की संख्या बढ़ जाये या घास खाने वाले जीव कम हो जायें तो शेर तथा चीते भूखे मर जाएंगे या फिर मांसाहारी जीव मनुष्य को खाना आरम्भ कर देंगे। यदि स्थिति उलट हो जाए तो शेर और चीतों की संख्या कम हो जाये तो घास खाने वाले जीवों की संख्या बढ़ जायेगी। अत: वे सारी धरती की घास खा जायेंगे, जिससे लहलहाते हरे-भरे मैदान मरुस्थलों में बदल जायेंगे। भू-क्षरण भी बढ़ जायेगा। इस प्रकार पारिस्थितिक सन्तुलन बिगड़ जायेगा। अतः पारिस्थितिक सन्तुलन को बनाए रखने के लिए उपाय किये जाने चाहिएं। इसलिए बहुत से देशों में शिकार पर पाबन्दी लगा दी गई है। भारत में भी शिकार करना अपराध है और शिकार करने वाला व्यक्ति दण्ड का भागी हो सकता है।
PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीव 2
जंगली जीवों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत तथा कई अन्य देशों में राष्ट्रीय पार्क भी स्थापित किये गये हैं। इन पार्कों में वन्य जीवों को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक वातावरण प्रदान किया गया है। भारत के विभिन्न भागों में लगभग 20 राष्ट्रीय पार्क हैं। इनमें कॉर्बेट, शिवपुरी, कनेरी, राजदेवगा, गीर आदि के नाम लिए जा सकते हैं। इनके अतिरिक्त जीवों और मछलियों के लिए अलग-अलग आरक्षित केन्द्र हैं। छत्तबीड़ पंजाब में ऐसा ही एक केन्द्र है। अफ्रीका का सवाना घास-क्षेत्र वन्य जीवों का विशाल घर है। इस क्षेत्र में जेबरा, जिरोफ, बारहसिंगा, हिरण, बाघ, शेर, चीता, हाथी, जंगली भैंसे, गैंडे और अनेक प्रकार के कीड़े-मकौड़े पाये जाते हैं। (घ) संसार के नक्शे में निम्नलिखित क्षेत्र दिखाएं –
(1) सहारा मरुस्थलीय वनस्पति।
(2) लानोज़ घास-क्षेत्र।
(3) पंपास के घास-क्षेत्र।
(4) सैलवास जंगल।
नोट-MBD मानचित्रावली की सहायता से विद्यार्थी स्वयं करें।

PSEB 7th Class Social Science Guide प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीव Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
वनों की लकड़ी पर कौन-कौन से उद्योग निर्भर हैं?
उत्तर-
वनों की लकड़ी पर कई उद्योग निर्भर करते हैं। इन उद्योगों में फर्नीचर, खेलों का सामान, समुद्री बेड़े, रेलों के डिब्बे और स्लीपर, कागज़, प्लाईवुड, सामान पैक करने के लिए पेटियां बनाना आदि उद्योग शामिल हैं। इमारती लकड़ी भवन निर्माण में काम आती है।

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प्रश्न 2.
वनों की विभिन्नता को प्रभावित करने वाले तीन कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर-

  1. वर्षा की वार्षिक मात्रा
  2. मौसमी बांट तथा
  3. तापमान।

प्रश्न 3.
यूरेशिया से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
यूरोप तथा एशिया महाद्वीपों को सामूहिक रूप से यूरेशिया कहते हैं।

प्रश्न 4.
वनों की लकड़ी का प्रयोग मुख्यतः किन-किन कार्यों के लिए होता है?
उत्तर-
वनों की लकड़ी का प्रयोग मुख्य रूप से जलाने में होता है। वनों से प्राप्त कुल लकड़ी का 50% इसी काम आता है। 33% लकड़ी भवन निर्माण में तथा शेष लकड़ी अन्य कार्यों के लिए प्रयोग में लाई जाती है।

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प्रश्न 5.
वृक्षों की सुरक्षा एवं सम्भाल के कुछ उपाय बताइए।
उत्तर-

  1. कई बार आग लग जाने से वनों की भारी हानि होती है। इस ओर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
  2. वृक्षों की कटाई नियमों की सीमा में रहते हुए करनी चाहिए। साथ ही साथ नये वृक्ष भी लगाने चाहिए।
  3. इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि कीड़े-मकोड़ों और बीमारियों से वृक्ष नष्ट न हों।
  4. नहरों, नदियों, सड़कों, रेल-पटरियों के साथ-साथ खाली पड़ी भूमि पर अधिक-से-अधिक वृक्ष उगाए जाने चाहिए।
  5. ईंधन के लिए लकड़ी का प्रयोग कम किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर गैस, सौर-शक्ति, गोबर-गैस आदि का प्रयोग करना चाहिए।
  6. भवन-निर्माण में भी लकड़ी के स्थान पर अन्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 6.
भू-मध्य रेखीय वनों को आकाश को छूने वाली एक इमारत (Sky Scraper) क्यों माना जाता है?
उत्तर-
आकाश को छूने वाली इमारत से अभिप्राय एक बहुत ऊंची अथवा अनेक मंज़िलों वाली इमारतों से है। भूमध्य रेखीय वन भी इसी प्रकार का दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इसलिए इन्हें आकाश को छूने वाली इमारत माना जाता है।
1. इस वन-इमारत में सबसे ऊपर वाली मंज़िल 70 मीटर ऊंचे वृक्षों से बनती है। यहां धूप और हवा दोनों मिलते । हैं। यहां फल भी होते हैं और फूल भी।

2. इससे नीचे की मंज़िल छतरी नुमा होती है। वृक्षों की शाखाओं के परस्पर उलझ जाने के कारण यहां छतरी जैसी छत बन जाती है। यहां सूर्य का प्रकाश कम पहुँचता है जो फलों और फूलों के लिए लाभदायक है।

3. इससे नीचे वाली मंजिल परछाईं वाली होती है। यहां लताएं वृक्षों पर चढ़ जाती हैं और आपस में लिपटी हुई होती हैं। जो लताएं सूर्य के प्रकाश के बिना नहीं रह सकतीं, वे सूर्य का प्रकाश पाने के लिए ऊपर बढ़ जाती हैं।

4. सबसे नीचे वाली मंजिल पर बहुत अन्धेरा होता है। सूर्य का प्रकाश यहां बिल्कुल भी नहीं पहुंचता। इसका फर्श गले-सड़े पत्तों और कीड़े-मकौड़ों से ढका रहता है।

(क) रिक्त स्थान भरो :

  1. संसार का लगभग ……….. प्रतिशत स्थल क्षेत्र वनों से घिरा हुआ है।
  2. …………….. जंगलों को सदाबहार घने जंगल भी कहा जाता है।
  3. शीत उष्ण घास के मैदान ……………. वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं।
  4. अफ्रीका का …………….. घास प्रदेश जंगली जीवों का विशाल घर है।

उत्तर-

  1. 30,
  2. भूमध्य-रेखी,
  3. कम,
  4. सवाना।

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(ख) सही कथनों पर (✓) तथा गलत कथनों पर (✗) का चिन्ह लगाएं :

  1. भूमध्य-रेखी जंगल आर्थिक दृष्टि से लाभदायक नहीं होते।
  2. मानसूनी वनों को सदाबहार वन भी कहा जाता है।
  3. भारत का थार मरुस्थल एक गर्म मरुस्थल है।
  4. भारत में जंगली जीवों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✗)
  3. (✓)
  4. (✗)

(ग) सही उत्तर चुनिए :

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति की सघनता तथा आकार को कई तत्त्व प्रभावित करते हैं। इनमें से एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व कौन-सा है?
(i) समुद्री धाराएँ
(ii) जलवायु
(iii) प्रचलित पवनें।
उत्तर-
(ii) जलवायु।

प्रश्न 2.
ब्राजील में उष्ण घास के मैदान किस नाम से जाने जाते हैं ?
(i) पंपास
(ii) वेल्ड
(iii) कैंपोज़।
उत्तर-
(iii) कैंपोज़।

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प्रश्न 3.
पंजाब का कौन-सा केन्द्र जीवों तथा पक्षियों से जुड़ा है?
(i) छत्तीसगड़
(ii) छत्तबीड़
(ii) राजदेवगा।
उत्तर-
(ii) छत्तबीड़।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

PSEB 7th Class Home Science Guide मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
मकान बनाने के लिए सबसे पहले किस चीज़ का अनुमान लगाना चाहिए?
उत्तर-
आर्थिक स्थिति का।

प्रश्न 2.
मकान बनाने के लिए धन के अतिरिक्त और किस चीज़ की ज़रूरत है?
उत्तर-
बुद्धि की।

प्रश्न 3.
घर कैसी जगहों के पास और कैसी जगहों से दूर होना चाहिए?
उत्तर-
स्टेशन, शमशान घाट, गंदी बस्तियां, कूड़ा-कर्कट के ढेर आदि से दूर होना चाहिए।
काम का स्थान, बैंक डाक्टर, स्कूल, बाज़ार आदि घर के पास होना चाहिए।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
सरकार, बैंक या बीमा कम्पनियाँ मकान बनाने में कैसे मदद करती है?
उत्तर-
सरकार, बैंक या बीमा कम्पनियाँ मकान बनाने में सस्ते ब्याज पर कर्ज देकर मदद करती हैं।

प्रश्न 2.
गन्दी बस्तियों का बच्चों के विकास पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर-
गन्दी बस्तियों में रहने वाले बच्चों की न केवल सेहत ही खराब होती है, बल्कि उनके आचरण पर भी खराब असर पड़ता है। उसमें अपराध की प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
बहुत अमीर पड़ोस में रहने से बच्चों की मानसिक स्थिति पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर-
जिस गली या मुहल्ले में बच्चों को रहना हो, वहाँ के निवासियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बच्चों के आर्थिक और सामाजिक स्थिति के अनुसार होनी चाहिए। अगर बाकी लोग अमीर हों तो बच्चों के मन में ईर्ष्या की भावना जाग जाती है और अपने को छोटा महसूस करने की भावना आ जाती है जिससे बच्चों की मानसिक स्थिति पर खराब असर पड़ता है।

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निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हरित क्रान्ति और जमींदारों का ज़मीनों की कीमतों और मकानों के किराये पर क्या असर पड़ा है?
उत्तर-
हरित क्रान्ति के बाद कुछ ज़मींदार परिवारों के पास बहुत पैसा आ गया है। इन्होंने घरों पर बहुत पैसे खर्च किए हैं। आलीशान बंगले बनाए हैं। इससे दूसरे लोगों में ईर्ष्या और रोष की भावना जागी है। नकल करके कुछ लोगों ने जिनके पास बहुत धन नहीं है उन्होंने भी मकानों पर बहुत धन खर्च करके अपने आर्थिक सन्तुलन को खराब किया है। अब शहरों में मकान बनाने के लिए जमीन बहुत महंगी हो गई है। बड़े शहरों में मकान बनाना केवल अमीर लोगों के बस की बात है। किराये भी बहुत बढ़ गए हैं जिससे आम आदमी पर खराब असर पड़ा है।

प्रश्न 2.
मकान बनाते समय अपनी अर्थिक स्थिति का जायज़ा लेना क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
मकान बनाने के लिए सबसे पहले अपनी आर्थिक स्थिति का जायजा लेना चाहिए। बहुत बार ऐसा होता है कि मकान बनाने की धुन में कई परिवार अपनी दूसरी ज़िम्मेदारियों को भूल जाते हैं, और वे सरकार, बैंक या बीमा कम्पनियों से कर्ज़ लेकर मकान बनाना शुरू कर देते हैं, लेकिन पैसे की कमी के कारण घर की खुराक, बच्चों की पढ़ाई और परिवार के सारे विकास पर बुरा असर पड़ता है।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

प्रश्न 3.
मकान बनाते समय या किराये पर लेते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर-
मकान बनाते समय या किराये पर लेते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान रखना चाहिए

  1. मकान परिवार की जरूरतों के अनुसार ही बनाना चाहिए।
  2. मकान ऐसी जगह बनाना चाहिए जहाँ दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुएँ शीघ्र तथा सुगमता से प्राप्त हो सकती हों।।
  3. नौकरी वाले लोगों के लिए नौकरी का स्थान तथा दकान समीप होनी चाहिए।
  4. अस्पताल तथा बाजार भी घर से बहत दूर नहीं होने चाहिएं।
  5. बच्चों के लिए स्कूल और कॉलेज नज़दीक होना चाहिए।
  6. डाकघर तथा बैंक भी नज़दीक होना चाहिए।

Home Science Guide for Class 7 PSEB मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मकान की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर-
वर्षा, धूप, ठण्ड, आँधी-तूफान, जीव-जन्तु व आकस्मिक घटनाओं आदि से बचने के लिए।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

प्रश्न 2.
आदि काल में मनुष्य कहाँ रहते थे?
उत्तर-
गुफ़ाओं में।

प्रश्न 3.
प्राणी में जन्मजात चेतना क्या होती है?
उत्तर-
प्राणी अपने विकास के लिए ऐसे ठौर का निर्माण करना चाहता है जहाँ उसे सुख-शान्ति प्राप्त हो सके। यही जन्मजात चेतना होती है।

प्रश्न 4.
समय, श्रम व धन की बचत के लिए मकान कहाँ होना चाहिए?
उत्तर-
समय, श्रम व धन की बचत के लिए मकान, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, दफ्तर, बाजार आदि के निकट होना चाहिए।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मकान में व्यक्ति को कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलती हैं?
उत्तर-
मकान में व्यक्ति को निम्न सुविधाएँ मिलती हैं

  1. सुरक्षात्मक सुविधाएँ
  2. कार्य करने की सुविधा
  3. शारीरिक सुख
  4. मानसिक शान्ति
  5. विकास एवं वृद्धि की सुविधा।

प्रश्न 2.
हमारा मकान कैसा होना चाहिए?
उत्तर-
हमारा मकान ऐसा होना चाहिए जहाँ

  1. परिवार के सभी सदस्यों के पूर्ण विकास व वृद्धि का ध्यान रखा जाए।
  2. सदा प्रत्येक सदस्य की कार्य क्षमता को प्रोत्साहन दिया जाए।
  3. एक-दूसरे के प्रति सद्भावना व प्रेम से व्यवहार किया जाए।
  4. परिवार की आर्थिक स्थिति में पूर्ण योगदान दिया जाए।

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प्रश्न 3.
मकान की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर-

  1. वर्षा, धूप, ठण्ड, आँधी, तूफ़ान आदि से बचने के लिए।
  2. जीव-जन्तुओं, चोरों तथा आकस्मिक घटनाओं से अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए।
  3. शान्तिपूर्वक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्यप्रद जीवन व्यतीत करने के लिए।
  4. अपना तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए।

प्रश्न 4.
घर की दिशा के सम्बन्ध में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
घर का मुख पूर्व की तरफ होना चाहिए। इस प्रकार सूर्य का प्रकाश तथा ताज़ा हवा सरलता से आ जा सकती है।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सुन्दर, सुरक्षाजनक व सुदृढ़ मकान बनाने के लिए कौन-कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिएं?
उत्तर-
मकान बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. स्थिति (वातावरण)-स्वास्थ्यकर मकान के चुनाव में वातावरण का विशेष महत्त्व है। वातावरण पर ही घर का स्वास्थ्य निर्भर करता है। गन्दे और दूषित वातावरण में बने अच्छे से अच्छे मकान भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। वातावरण की दृष्टि से निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

2. रेलवे स्टेशन, कारखाने, भीड़ वाले बाज़ार, शमशान घाट, कसाईखाना, तालाब, नदी, गन्दे नाले, सार्वजनिक शौचालय आदि के पास मकान नहीं बनवाना चाहिए।

  1. मकान सीलन भरी अंधेरी और तंग गलियों में नहीं बनवाना या लेना चाहिए।
  2. मकान अन्य घरों से बिल्कुल लगा हुआ नहीं होना चाहिए। मकानों में आपस में उचित दूरी होनी चाहिए।
  3. मकान ऊँचे स्थान पर होना चाहिए। पास के मकान बहुत ऊंचे नहीं होने चाहिएं।
  4. मकान खुली जगह पर होना चाहिए जिससे शुद्ध वायु एवं सूर्य का प्रकाश उचित मात्रा में मिल सकें।
  5. मकान जहाँ बनाया जाए वहाँ शुद्ध पेयजल सुगमता से प्राप्त हो सकें।
  6. घर से थोड़ी दूर पर कुछ वृक्ष हों तो वे लाभप्रद होते हैं। वे भूमि को सुखी रखते हैं तथा उनसे शुद्ध व ताजी वायु भी प्राप्त होती है।
  7. भूमि-भूमि इस प्रकार की होनी चाहिए कि वह पानी सोख सके। चिकनी मिट्टी मकान के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि उसमें पानी सोखने की क्षमता नहीं होती और उस पर बनाए गए मकान में सदैव सीलन बनी रहती है। ऐसी भूमि में कई प्रकार के रोग होने का भय रहता है। इसके अतिरिक्त मकान के चारों ओर पानी एकत्र हो जाने से उसकी नींव कमजोर पड़ जाती है। रेतीली भूमि गर्मियों में गर्म तथा सर्दियों में ठण्डी होती है। इसके साथ ही ऐसी भूमि पर बना हुआ मकान मज़बूत नहीं होता। कंकरीली भूमि मकान के लिए सबसे उत्तम रहती है क्योंकि ऐसी भूमि में नीव अधिक दृढ़ रहती है।

3. घर की दिशा-घर का मुख पूरब की ओर होना चाहिए। इससे सूर्य का प्रकाश व ताज़ी हवा आसानी से आ जा सकती है।

4. नींव-मकान को बनवाते समय यह भी अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि मकान की नींव गहरी हो। इसकी गहराई मकान की ऊँचाई पर निर्भर करती है। जितना मंजली व ऊँचा मकान होगा उतना ही अधिक भार नींव के ऊपर पड़ेगा, अत: उसी के अनुसार उसकी गहराई रखी जानी चाहिए। नींव के लिए जमीन को प्रायः तीन फुट गहरा खोदना चाहिए। इस नींव को दृढ़ बनाने के लिए इसको काफ़ी ऊँचाई तक कंकरीट और सीमेंट से भरा जाना चाहिए। मज़बूत नींव पर ही एक अच्छे मकान का निर्माण सम्भव है।

5. बनावट-मकान बनाने के लिए नक्शे व योग्य कारीगर का चयन करना चाहिए, जिससे मकान सुन्दर, सुविधाजनक व सुदृढ़ बने। मकान बनाते समय नींव के अलावा दीवारों, खिड़कियों, रोशनदानों, अलमारियों व छत आदि पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिससे उचित व टिकाऊ मकान बने। मकान के फर्श पर भी अत्यधिक ध्यान देना चाहिए ताकि समय-समय पर उसे साफ़ करने व धोने में कोई कठिनाई न हो।

6. वायु आवागमन का प्रबन्ध-दूषित वायु की हानियों से बचने तथा शुद्ध वायु प्राप्त करने के लिए कमरों में वायु के आवागमन का उचित प्रबन्ध होना अत्यन्त आवश्यक है। कमरों में वायु के आवागमन के लिए यह उचित है कि दरवाज़े और खिड़कियों की संख्या अधिक हो और वे आमने-सामने हों जिससे कमरों में दूषित वायु रुकने न पाये। छत के समीप दीवार में रोशनदान का होना ज़रूरी है।

7. प्रकाश का प्रबन्ध-हवा के साथ घर में प्रकाश का भी उचित प्रबन्ध होना चाहिए। दिन के समय सूर्य के प्रकाश का कमरों में आना अत्यन्त आवश्यक है। सूर्य का प्रकाश अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। धूप हानिकारक कीटाणुओं का नाश करके वायु को शुद्ध करती है। यदि अन्धेरे कमरों में बहुत से लोग इकट्ठे रहते हों तो छूत के रोग, जैसे-खाँसी, जुकाम, निमोनिया, तपेदिक आदि होने की सम्भावना बढ़ जाती है। अतः मकानों में वायु के आवागमन, प्रकाश और धूप का उचित प्रबन्ध होना चाहिए।
सूर्य के प्रकाश के साथ-साथ हमें रात्रि के लिए भी प्रकाश का प्रबन्ध करना चाहिए। इसके लिए उस इलाके में बिजली की उपलब्धि भी होनी चाहिए।

आवश्यकताओं के साधन केन्द्र-मकान ऐसे स्थान पर होना चाहिए कि जीवन की दैनिक आवश्यकताओं के साधन-केन्द्र उस स्थान से अधिक दूरी पर न हों। विद्यालय, भी बैंक, कॉलेज, बाजार, डाकघर, अस्पताल अथवा डॉक्टर आदि अधिक दूर होने से समय तथा धन दोनों को अधिक व्यय होता है। मकान ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहाँ एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने में सुविधा हो। मलमूत्र तथा गन्दे पानी का निकास-घरों में कमरों के धोने पर पानी के बाहर निकलने का उचित प्रबन्ध होना चाहिए, विशेषकर रसोई, स्नानागार तथा शौचालय में तो नालियों का प्रबन्ध होना अनिवार्य ही है। नालियाँ पक्की हों तथा ढलवी हो जिससे पानी आसानी से बह जाए। ये नालियाँ ढकी हुई होनी चाहिएं तथा उनमें फिनायल आदि डालते रहना चाहिए। नालियों में और दीवार पर कुछ ऊँचाई तक सीमेंट का प्रयोग अति आवश्यक है।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सरकार अपने कर्मचारियों को उनके वेतन का कितने प्रतिशत किराए के लिए भत्ते के रूप में देती है?
उत्तर-
10-15%

प्रश्न 2.
मित्र ……………. करके नहीं बनाए जा सकते।
उत्तर-
फैसला।

प्रश्न 3.
अच्छा पड़ोस जीवन में ……………….. के लिए आवश्यक है।
उत्तर-
खुशी!

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प्रश्न 4.
…………. के बाद कुछ ज़मींदार परिवारों के पास बहुत पैसा आ गया है।
उत्तर-
हरित क्रान्ति।

प्रश्न 5.
घर का मुख किस तरफ होना चाहिए?
उत्तर-
पूर्व की तरफ।

प्रश्न 6.
………….. भूमि मकान के लिए उत्तम रहती है।
उत्तर-
पथरीली।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 6 मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व

मकान सम्बन्धी सामाजिक और आर्थिक तत्त्व PSEB 7th Class Home Science Notes

  • मकान बनाने के लिए सबसे पहले अपनी आर्थिक स्थिति का जायजा लेना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आमदनी से बचत करना ज़रूरी है।
  • बड़े शहरों में आमदनी का बहुत बड़ा भाग किराये पर खर्च हो जाता है।
  • मकान अपनी सामर्थ्य और सामाजिक स्तर के अनुसार बनाना चाहिए।
  • जिस गली या मुहल्ले में रहना हो, वहाँ के निवासियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति आपकी स्थिति के अनुसार होनी चाहिए।
  • अच्छा पड़ोस न केवल आपके जीवन की खुशी के लिए ज़रूरी है बल्कि आजकल के जीवन में आपकी सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है।
  • अच्छा मकान बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मकान परिवार की जरूरतों के अनुसार ही बने।
  • अधिक भीड़ वाले इलाकों, गन्दी बस्तियों में रह रहे लोगों की न केवल सेहत . ही खराब होगी बल्कि उसके आचरण पर भी खराब असर पड़ेगा।
  • उनमें अपराध की प्रवृत्ति भी बढ़ेगी।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा

Punjab State Board PSEB 7th Class Agriculture Book Solutions Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Agriculture Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा

PSEB 7th Class Agriculture Guide पौष्टिक घरेलू बगीचा Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दें :

प्रश्न 1.
भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान के अनुसार सेहतमंद व्यक्ति को प्रतिदिन कितनी सब्जी खानी चाहिए ?
उत्तर-
280-300 ग्राम सब्जी।

प्रश्न 2.
भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन कितने फलों का सेवन करना चाहिए ?
उत्तर-
50 ग्राम फल।

प्रश्न 3.
विटामिन ए की कमी से होने वाले रोग का नाम बताएं।
उत्तर-
अन्धराता।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा

प्रश्न 4.
मानव शरीर में लोहे की कमी के कारण होने वाले रोग का नाम बताएं।
उत्तर-
अनीमिया।

प्रश्न 5.
घरेलू बगीचे का मॉडल किस कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया है ?
उत्तर-
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना।

प्रश्न 6.
कद जाति की कोई दो सब्जियों के नाम लिखो।
उत्तर-
कद्, तोरी, करेला, टिंडा।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा

प्रश्न 7.
घरेलू बगीचे में उगाए जा सकने वाले कोई दो फलदार पौधों के नाम लिखो।
उत्तर-
अमरूद, पपीता, नाशपाती, अंगूर।

प्रश्न 8.
घरेलू बगीचे में उगाए जा सकने वाले कोई दो जड़ी-बूटियों वाले पौधों के नाम लिखो।
उत्तर-
पुदीना, तुलसी, सौंफ, अजवायन।

प्रश्न 9.
संतुलित भोजन की पूर्ति के लिए आठ पारिवारिक सदस्यों को कितने क्षेत्र पर घरेलू बगीचा बनाना चाहिए ?
उत्तर-
तीन कनाल।

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प्रश्न 10.
घरेलू बगीचा कहाँ बनाना चाहिए ?
उत्तर-
घर के नज़दीक।

(ख) एक-दो वाक्यों में उत्तर दें :

प्रश्न 1.
संतुलित भोजन में कौन-कौन से पौष्टिक तत्त्व विद्यमान होते हैं ?
उत्तर-
संतुलित भोजन में सारे आवश्यक तत्त्व उचित मात्रा में होते हैं; जैसेकार्बोहाइड्रेट्स, खनिज, प्रोटीन, वसा, विटामिन, धातुएं आदि।

प्रश्न 2.
भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान की स्वस्थ मनुष्य के लिए भोजन संबंधी सिफ़ारिशें क्या हैं ?
उत्तर-
भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के द्वारा स्वस्थ मनुष्य के लिए प्रतिदिन के आहार में 280-300 ग्राम सब्जियां, 50 ग्राम फल तथा 80 ग्राम दालों की सिफ़ारिश की गई है।

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प्रश्न 3.
घरेलू बगीचा घर के निकट क्यों बनाना चाहिए ?
उत्तर-
घरेलू बगीचा घर के निकट इसलिए बनाना चाहिए ताकि खाली समय में घर का कोई भी सदस्य बगीचे में काम कर सकता है।

प्रश्न 4.
मानव के भोजन में सब्जियों और फलों की क्या महत्ता है ?
उत्तर-
मानव के भोजन में सब्जियों तथा फलों का बहुत महत्त्व है क्योंकि इनमें कुछ ऐसे पोषक तत्त्व पाए जाते हैं जो अन्य भोजन पदार्थों में नहीं मिलते।

प्रश्न 5.
घरेलू बगीचे में कीड़े-मकौड़ों की रोकथाम के लिए कौन-से तरीके अपनाने चाहिएं ?
उत्तर-
गैर-रासायनिक तरीकों का उपयोग करके कीड़े-मकौड़ों की रोकथाम की जाती है।

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प्रश्न 6.
घरेलू बगीचे में किस प्रकार की खाद का प्रयोग करना चाहिए ?
उत्तर-
घरेलू बगीचे में रूड़ी खाद तथा घर के अपशिष्ट से तैयार कम्पोस्ट खाद का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 7.
घरेलू बगीचे में उगाई जा सकने वाली दालों के नाम लिखो।
उत्तर-
चने, मसूर, मूंगी, उड़द आदि।

प्रश्न 8.
फल-सब्जियों की बहुलता होने पर उनसे कौन-कौन से पदार्थ बनाए जा सकते हैं ?
उत्तर-
फलों, सब्जियों की बहुलता होने पर शर्बत, जैम, आचार, मुरब्बे आदि बनाए जा सकते हैं।

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प्रश्न 9.
घरेलू बगीचे के लिए स्थान के चुनाव के समय कौन-सी बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-
स्थान का चुनाव, सब्जियों का चयन तथा योजना, खादों का प्रयोग, खरपतवार, कीटों तथा बीमारियों से रोकथाम, सब्जियों की तुड़ाई, जड़ी-बूटियां उगाना आदि को ध्यान में रखना चाहिए।

प्रश्न 10.
सब्जियों से मिलने वाले रेशे मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार लाभदायक हैं ?
उत्तर-
सब्जियों से मिलने वाले रेशे मनुष्य की पाचन क्रिया को ठीक रखते हैं।

(ग) पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
संतुलित भोजन से क्या अभिप्रायः है ?
उत्तर-
संतुलित भोजन में भिन्न-भिन्न आहारीय तत्त्व उचित मात्रा में होने चाहिएं, ताकि सभी पोषक तत्त्व; जैसे-कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, चर्बी, विटामिन, खनिज उचित मात्रा में मनुष्य को मिल सकें। इसलिए संतुलित आहार में अनाज, सब्जियां, दालें, दूध, फल, अण्डे, मीट, मछली आदि सारे आहारीय पदार्थ उचित मात्रा में होने चाहिएं। भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान की सिफारिशों के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन अपने भोजन में 280-300 ग्राम सब्जियां, 50 ग्राम फल तथा 80 ग्राम दालें शामिल करना आवश्यक है।

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प्रश्न 2.
घरेलू बगीचे का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
घरेलू बगीचे की महत्ता तथा लाभ इस प्रकार हैं—

  1. संतुलित आहार की पूर्ति-घरेलू बगीचे में से आवश्यकता अनुसार सब्जियां, फल तथा दालों की पूर्ति हो जाती है।
  2. रसायनों से मुक्त आहार की प्राप्ति-घरेलू बगीचे में जो भी फसल उगाई जाती है उसमें रासायनिक खादों तथा कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता। इस तरह रसायनों से मुक्त आहार की प्राप्ति होती है।
  3. समय का उचित प्रयोग-घर के सदस्य जब भी खाली समय मिले, अपने समय का उचित प्रयोग कर सकते हैं।
  4. खर्च में कमी-घरेलू बगीचे में से प्राप्त फल, सब्जियां आदि बाज़ार से सस्ती पड़ती हैं।

प्रश्न 3.
घरेलू बगीचे में कीट और बीमारियों की रोकथाम कैसे की जा सकती है ?
उत्तर-
घरेलू बगीचे में खरपतवारनाशक तथा कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग बहुत ही कम किया जाता है तथा कम ही करना चाहिए। खरपतवारों की रोकथाम गुडाई द्वारा करनी चाहिए। कीड़े-मकौड़ों को पैदा होते ही हाथ से ही पकड़ कर मार देना चाहिए। बीज प्रमाणित किस्म के होने चाहिएं। यदि कीड़ों या बीमारी का हमला हो तो कृषि विशेषज्ञों की सिफ़ारिश के अनुसार उचित मात्रा में रसायनों का प्रयोग करें। सुरक्षित रसायनों का ही प्रयोग करना चाहिए जो कोई अपशिष्ट न छोड़ें। यदि रसायनों का प्रयोग किया हो तो तुड़ाई इसका प्रभाव समाप्त होने पर ही करें।

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प्रश्न 4.
घरेलू बगीचा बनाते समय किस प्रकार की ज़रूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिएं ?
उत्तर-
घरेलू बगीचा बनाते समय आवश्यक बातें :
1. स्थान का चयन-घरेलू बगीचा घर के निकट ही होना चाहिए ताकि घर का कोई भी सदस्य जब खाली समय मिले बगीचे में काम कर सके। इस तरह घर के फालतू पानी का निकास भी बगीचे में किया जा सकता है।

2. सब्जियों का चयन तथा योजनाबंदी-घरेलू बगीचे में परिवार द्वारा पसंद की जाने वाली सब्जियों को पहल देनी चाहिए। कद्दू जाति की सब्जियों को बगीचे की बाहरी पंक्तियों में लगाया जाना चाहिए ताकि इनको वृक्षों या झाड़ियों पर चढ़ाया जा सके। ताज़ा प्रयोग होने वाली सब्जियां; जैसे—मूली, शलगम आदि को 15-15 दिनों के अंतर पर बोना चाहिए।

3. खादों का प्रयोग–रूड़ी खाद तथा घर में अपशिष्ट से बनी कम्पोस्ट खाद का प्रयोग करना चाहिए।

4. खरपतवार, कीट तथा बीमारियों की रोकथाम-घरेलू बगीचे में रसायनों का प्रयोग न के बराबर ही करना चाहिए। शुरू में कीटों को हाथ से पकड़ कर ही मार दें।
खरपतवार समाप्त करने के लिए गुडाई करें तथा प्रमाणित किस्म के बीज ही बोने चाहिएं। आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों द्वारा सिफ़ारिश किए रसायन ही उचित मात्रा में प्रयोग करें।

5. सब्जियों की तुड़ाई-सब्जियों की तुड़ाई समय पर करते रहना चाहिए। अधिक मात्रा में होने पर जैम, आचार, मुरब्बे आदि बना लेने चाहिएं।

6. जड़ी-बूटियां लगाना-घरेलू बगीचे में तुलसी, पुदीना, अजवायन, सौंफ, नीम, कड़ी पत्ता आदि भी लगाने चाहिएं।

प्रश्न 5.
संतुलित भोजन की पूर्ति के लिए तीन कनाल पर विकसित किये गये घरेलू बगीचे के मॉडल का रेखाचित्र तैयार करो।
उत्तर-
स्वयं करें।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा

Agriculture Guide for Class 7 PSEB पौष्टिक घरेलू बगीचा Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
तीन कनाल में कितने वर्ग मीटर होते हैं ?
उत्तर-
1500 वर्ग मीटर।

प्रश्न 2.
फरवरी माह में बोई जाने वाली कोई सब्जी बताओ।
उत्तर-
करेला, घीया, तोरी।

प्रश्न 3.
अगस्त में बोई जाने वाली कोई सब्जी बताओ।
उत्तर-
धनिया, छोटे बैंगन।

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प्रश्न 4.
तीन कनाल घरेलू बगीचे में एक कनाल किस काम के लिए है ?
उत्तर-
एक कनाल सब्जी बोने के लिए है।

प्रश्न 5.
घरेलू बगीचे में कौन-सी दिशा में फलदार पौधे लगाने चाहिएं।
उत्तर-
उत्तर-दिशा की तरफ।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
घरेलू बगीचे में फलदार पौधे उत्तर दिशा में क्यों लगाए जाने चाहिएं ?
उत्तर-
इस तरह करने से उनकी छाया का बुरा प्रभाव सब्जियों की पैदावार पर नहीं पड़ता।

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प्रश्न 2.
घरेलू बगीचे में कौन-सी सब्जियों को पहल देनी चाहिए ?
उत्तर-
घरेलू बगीचे में परिवार द्वारा पसंद की जाने वाली सब्जियों को पहल देनी चाहिए।

प्रश्न 3.
कम समय लेने वाली सब्जियों को घरेलू बगीचे में कहां बोना चाहिए ?
उत्तर-
कम समय लेने वाली सब्जियों को लम्बा समय लेने वाली सब्जियों के बीच खाली जगह पर बोना चाहिए।

प्रश्न 4.
कम समय लेने वाली सब्ज़ियां तथा लम्बा समय लेने वाली सब्जियां जो घरेलू बगीचे में होती हैं। कौन सी हैं ?
उत्तर-
कम समय वाली सब्जियां हैं-मूली, पालक, शलगम आदि तथा लम्बा समय लेने वाली सब्जियां हैं-टमाटर, बैंगन, भिंडी आदि।

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बड़े उत्तर वाला प्रश्न

प्रश्न-
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा तैयार घरेलू बगीचे के मॉडल की जानकारी दें।
उत्तर-
यह मॉडल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना द्वारा तीन कनाल स्थान के लिए तैयार किया गया है। इस मॉडल के अनुसार एक परिवार के आठ सदस्यों के लिए आवश्यक दालें, सब्जियां तथा फल पैदा किए जा सकते हैं। इस मॉडल के अनुसार एक कनाल क्षेत्रफल में सब्जियां तथा दो कनाल में दालों की पैदावार की जाती है। घरेलू बगीचे में बिना ज़हर वाली ताज़ी पैदावार मिल जाती है। रबी (आषाढ़ी) में चने, मसूर तथा खरीफ (सावनी) में मूंगी, उड़द आदि की कृषि की जा सकती है। बगीचे में उत्तर दिशा की तरफ दो पंक्तियों में फलदार पौधे लगा कर फलों की आवश्यकता पूरी की जा सकती है।
PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 7 पौष्टिक घरेलू बगीचा 1
चित्र-घरेलू बगीचा

पौष्टिक घरेलू बगीचा PSEB 7th Class Agriculture Notes

  • अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार बहुत आवश्यक है।
  • फलों तथा सब्जियों में ऐसे पौष्टिक तत्त्व होते हैं जो अन्य भोजन पदार्थों में नहीं होते।
  • स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 280-300 ग्राम सब्जियां, 50 ग्राम फल तथा 80 ग्राम दालों की आवश्यकता होती है।
  • वर्तमान समय में सब्जियों तथा फलों के ऊपर आवश्यकता से अधिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है।
  • घरेलू बगीचा मनोरंजन का साधन भी बन सकता है।
  • घरेलू बगीचे में पैदा सब्जियां तथा फल बाज़ार से सस्ते पड़ते हैं।
  • पी०ए०यू० लुधियाना द्वारा घरेलू बगीचे का मॉडल तैयार किया गया है जिस के अनुसार एक परिवार के आठ सदस्यों के लिए तीन कनाल क्षेत्रफल में से दालें, सब्जियां तथा फल पैदा किए जा सकते हैं।
  • घरेलू बगीचा घर के पास ही होना चाहिए।
  • कदू जाति की सब्जियां हैं-घीया कद्दू, तोरी, करेले, टिंडे, खरबूजे आदि।
  • मूली, पालक, शलगम आदि कम समय में तैयार होने वाली सब्जियां हैं।
  • घरेलू बगीचे में रूड़ी की खाद का प्रयोग किया जाता है।
  • घरेलू बगीचे में खरपतवार की रोकथाम गुडाई करके करनी चाहिए।
  • सब्जियों की तुड़ाई समय पर करते रहना चाहिए।
  • घरेलू बगीचे में जड़ी-बूटी; जैसे-पुदीना, सौंफ, अजवायन, तुलसी, कड़ी-पत्ता – आदि बोई जा सकती हैं।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 4 महासागर

Punjab State Board PSEB 7th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 4 महासागर Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 4 महासागर

SST Guide for Class 7 PSEB महासागर Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 1-15 शब्दों में दो

प्रश्न 1.
सागर का जल खारा क्यों होता है?
उत्तर-
सागर के जल में कई लवण घुले होते हैं। इसी कारण सागरीय जल खारा होता है।

प्रश्न 2.
न्यूफाऊण्डलैंड के पास हर समय घनी धुन्ध क्यों रहती है?
उत्तर-
न्यूफाऊण्डलैंड के पास खाड़ी की ऊष्ण धारा तथा लेब्राडोर की शीत धारा आपस में मिलती है। इसी कारण वहां सदा सघन धुन्ध रहती है।

प्रश्न 3.
दक्षिणी अन्ध महासागरीय चक्र की मुख्य धाराओं के नाम बताओ।
उत्तर-
दक्षिणी अन्ध महासागर की प्रमुख धाराएं हैं-फाकलैंड की धारा तथा बैंगुएला की धारा।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 4 महासागर

प्रश्न 4.
खाड़ी की धारा के मार्ग का वर्णन करो।
उत्तर-
खाड़ी की धारा मैक्सिको खाड़ी से प्रारम्भ होकर न्यूफाऊण्डलैंड के टापुओं तक पहुंचती है।

प्रश्न 5.
उत्तरी शान्त महासागरीय चक्र की मुख्य धाराओं के नाम लिखो।
उत्तर-

  1. उत्तरी भूमध्य रेखा की धारा
  2. कुरोश्विो की धारा
  3. उत्तरी प्रशान्त महासागरीय धारा
  4. कैलिफोर्निया की धारा।

प्रश्न 6.
सुनामी से क्या भाव है?
उत्तर-
सुनामी एक जापानी शब्द है जो कि दो शब्दों TSO (अर्थात् किनारा) और NAMI (अर्थात् पानी की ऊंची और लम्बी छड़ी) के मेल से बना है। इस प्रकार सुनामी का अर्थ है समुद्र के तटों पर टकराने वाली लम्बी ऊँची समुद्री लहरें।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 4 महासागर

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में दें

प्रश्न 1.
बड़े ज्वार-भाटे तथा लघु ज्वार-भाटे में क्या अन्तर है?
उत्तर-
बड़ा ज्वार-भाटा-जब सागर के जल की ऊंचाई सबसे अधिक होती है तो उसे बड़ा ज्वार-भाटा कहा जाता है। बड़ा ज्वार-भाटा केवल अमावस और पूर्णिमा को आता है। अमावस तथा पूर्णिमा को सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं और सूर्य तथा चन्द्रमा दोनों मिल कर सागर के जल को अपनी ओर खींचते हैं।
लघु (छोटा) ज्वार-भाटा-लघु (छोटा) ज्वार भाटा चन्द्रमा की सातवीं तथा इक्कीसवीं तिथि को आता है। यह नीचा होता है।

इन तिथियों को सूर्य तथा चन्द्रमा पृथ्वी के साथ 90° का कोण बनाते हैं और दोनों ही अपनी शक्ति से जल को अपनी ओर खींचते हैं। क्योंकि चन्द्रमा जल के अधिक निकट होता है, इसलिए जल चन्द्रमा की ओर ही उछलता है। सूर्य का आकर्षण दूसरी दिशा में होने के कारण जल का उछाल अधिक ऊंचा नहीं होता।

प्रश्न 2.
गर्म धारा और ठण्डी धारा में क्या अन्तर है?
उत्तर-
(1) भूमध्य रेखा की ओर से आने वाली धाराएं गर्म होती हैं और भूमध्य रेखा की ओर आने वाली धाराएं सदा ठण्डी होती हैं।

(2) ऊष्ण (गर्म) जलधारा का जल इतना अधिक गर्म नहीं होता। इसी प्रकार शीत (ठण्डी) जलधारा का जल अधिक शीत नहीं होता। यह केवल अपने समीप के जल की तुलना में अधिक गर्म या ठण्डा लगता है।

(3) गर्म जलधारा जल के ऊपरी भाग में तथा ठण्डी धारा जल के नीचे प्रवाहित होती है।
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प्रश्न 3.
हिन्द महासागर की धाराएं इतनी निश्चित तथा नियमित क्यों नहीं?
उत्तर-
इसमें कोई सन्देह नहीं कि हिन्द महासागर में बहने वाली धाराएं नियमित तथा निश्चित नहीं हैं। इसका मुख्य कारण हिन्द महासागर में चलने वाली मौसमी पवनें हैं। ये पवनें गर्मी में दक्षिणी-पश्चिमी दिशा में परन्तु सर्दी में उत्तरपूर्व दिशा में चलती हैं। इस परिवर्तन के कारण सागरीय धाराएं भी ऋतु के अनुसार अपनी दिशा बदल लेती हैं। अतः स्पष्ट है कि ये धाराएं निश्चित एवं नियमित नहीं हो सकती।

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प्रश्न 4.
“बर्तानिया की पश्चिमी बन्दरगाहें सर्दी की ऋतु में भी खुली रहती हैं, जबकि इन्हीं अक्षांशों पर स्थित उत्तरी अमेरिका की पूर्वी बन्दरगाहें इस ऋतु में बर्फ जमने के कारण बन्द पड़ी रहती हैं।” कारण बताओ।
उत्तर-
धाराओं का किसी देश की जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शीत ऋतु में बर्तानिया के उत्तर-पश्चिम में सर्दी पड़ती है परन्तु उत्तरी अन्ध महासागरीय धारा पश्चिमी पवनों के प्रभावाधीन पूर्व दिशा की ओर मुड़ जाती है। यह उष्ण धारा बर्तानिया के उत्तर-पश्चिम से होती हुई सुदूर नार्वे, स्वीडन के ठण्डे देशों तक पहुंचती हैं। अपने उष्ण प्रभाव के कारण सर्दी की ऋतु में भी बर्तानिया की पश्चिमी बन्दरगाहें खुली रहती हैं। परन्तु ऐसा वातावरण न मिलने के कारण उत्तरी अमेरिका की पूर्वी बन्दरगाहों में बर्फ जम जाती है और वे बन्द हो जाती हैं।

प्रश्न 5.
‘ज्वार-भाटा जहाजों के लिए बड़ा लाभदायक सिद्ध होता है।’ कैसे?
उत्तर-
1. ज्वार-भाटा के कारण नदियों के मुहानों में से कीचड़ तथा मिट्टी बहती रहती है। परिणामस्वरूप इन तटों पर स्थित बन्दरगाहों पर मिट्टी नहीं जमती और जहाज़ दूर अन्दर तक आ-जा सकते हैं।

2. बड़े तथा भारी जहाज़ दूर गहरे समुद्र में खड़े ज्वार-भाटों की प्रतीक्षा करते हैं। जब जल में चढ़ाव आता है तो जहाज़ भी उसके साथ बन्दरगाहों तक पहुंच जाते हैं। बन्दरगाहों पर माल उतार कर वे फिर ज्वार-भाटों की प्रतीक्षा करते हैं ताकि सागर की ओर सुगमता से वापिस जाया जा सके। कोलकाता तथा लन्दन की बन्दरगाहें इसके अच्छे उदाहरण हैं।

प्रश्न 6.
बड़ा ज्वार-भाटा पूर्णिमा तथा अमावस को क्यों आता है?
उत्तर-
बड़ा ज्वार-भाटा के समय सागरीय पानी का चढ़ाव अधिक होता है। यह सदा पूर्णिमा तथा अमावस के दिन ही होता है। इसका कारण यह है कि इन दोनों तिथियों को सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी एक ही सीध में आ जाते हैं। इस तिथि को सूर्य और चन्द्रमा मिलकर महासागरीय जल को अपनी ओर खींचते हैं। इस दोहरे आकर्षण के कारण लहरों का उछाल बढ़ जाता है जिसे बड़ा ज्वार-भाटा कहते हैं।

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प्रश्न 7.
खाड़ी की धारा यूरोप की जलवायु पर क्या प्रभाव डालती है?
उत्तर-
खाड़ी की धारा को अंग्रेज़ी में गल्फ स्ट्रीम कहते हैं। यह संसार की सबसे महत्त्वपूर्ण उष्ण जलधारा है। इसकी चौड़ाई लगभग 400 किलोमीटर तक है। इसका जल 5 किलोमीटर प्रति घण्टा के वेग से बहता है। न्यूफाऊण्डलैंड के समीप इस धारा में लैब्राडोर की शीत धारा आ मिलती है। परिणामस्वरूप यहां गहन धुन्ध छाई रहती है। यहां मछलियां भी अधिक मात्रा में मिलती हैं। इसके बाद यह यूरोप की ओर मुड़ जाती हैं। इसके कारण उत्तर-पश्चिमी यूरोप में शीत ऋतु अधिक ठण्डी नहीं होती। इसके अतिरिक्त यूरोप के तटीय भागों में वर्षा होती है।

प्रश्न 8.
सारागासो सागर क्या है तथा कैसे बनता है?
उत्तर-
उत्तरी अन्ध महासागर की धाराएं भूमध्य रेखा से आरम्भ होकर उत्तर की ओर जाती हैं। जाते हुए यह अमेरिका के तट के साथ-साथ आगे बढ़ती हैं और लौटते समय यूरोप के तट के साथ होते हुए फिर से भूमध्य रेखा की धारा के साथ मिल कर चक्र पूरा कर लेती हैं। इस प्रकार यह धारा चक्र घड़ीवत् दिशा में ही चलता है। महासागरों का जो भाग इस चक्र के बीच आ जाता है, उसे सारागासो सागर कहा जाता है।

प्रश्न 9.
सागरी लहरों तथा धाराओं में क्या अन्तर है?
उत्तर-
सागर का पानी सदा ऊंचा-नीचा होता रहता है। ऋतु की दशानुसार यह गति कभी तेज़ हो जाती है, कभी मन्द जिससे लहरें या तरंगें पैदा होती हैं। जल-कण ऊपर नीचे दौड़ते हैं जिससे सागर में सिलवटें पड़ी हुई दिखाई देती हैं।

जब सागर का जल किसी निश्चित दिशा की ओर चल पड़ता है तो उसे महासागरीय धारा कहा जाता है। महासागर में बड़े नियमित ढंग से जल एक स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान की ओर चलता रहता है। प्रायः धारा की गति 2 कि० मी० प्रति घण्टा से 10 कि० मी० प्रति घण्टा तक हो सकती है।

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प्रश्न 10.
सुनामी से सम्बन्धित किसी स्थान का वृत्तांत लिखो।
उत्तर-
26 दिसम्बर, 2004 को हिन्द महासागर में ज़बरदस्त सुनामी लहरें आईं। ये समुद्र के तल पर 9.0 के रिचर पैमाने पर आए भूकम्प के कारण उत्पन्न हुईं। इस भूकम्प का अधिकेन्द्र इण्डोनेशिया का पश्चिमी तट था। कुछ घण्टों में ही इन समुद्री लहरों ने 11 हिन्द महासागरीय देशों में भारी विनाश ला दिया। इनके कारण. कितने ही लोग बह गए और कितने ही घर डूब गए। इनके कारण समुद्री तट पर अफ्रीका से लेकर थाईलैंड तक अनेक देश बुरी तरह से प्रभावित हुए।

भारत सरकार के अनुमान के अनुसार लगभग 5322 करोड़ की जान-माल की हानि हुई। भारत में सबसे अधिक विनाश तमिलनाडु, केरल, आन्ध्र प्रदेश तथा पाण्डेचेरी में हुआ। इसमें दो लाख से भी अधिक लोग मारे गए और इससे कई गुणा लोग बेघर हो गए।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125-130 शब्दों में दें

प्रश्न 1.
महासागरीय धाराएं क्यों चलती हैं? इनका किसी देश की जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
किसी निश्चित दिशा में बहने वाले महासागरीय जल को महासागरीय धारा कहते हैं। ये वास्तव में समुद्र के अन्दर बहने वाली गर्म और ठण्डे जल की नदियां होती हैं जिनके किनारों का जल स्थिर होता है।
चलने के कारण-महासागर धाराओं के चलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

1. प्रचलित पवनें-प्रचलित पवनें सदा एक ही दिशा में चलती रहती हैं। ये समुद्र के जल को भी अपने साथ बहा कर ले जाती हैं। इस तरह धाराएं उत्पन्न होती हैं।

2. तापमान में अन्तर-भूमध्य रेखीय प्रदेशों में तापमान अधिक होता है। इस कारण वहां सागर का जल फैलता है और फैल कर ध्रुवों की ओर बढ़ता है। दूसरी ओर ध्रुवों पर तापमान कम होता है और वहां का जल भीतर-ही-भीतर भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने लगता है। इस प्रकार जल-धाराओं का जन्म होता है।

3. लवणों में अन्तर-समुद्र के जल में अनेक लवण घुले होते हैं। जिस जल में लवण अधिक होते हैं, वह जल भारी होकर नीचे बैठ जाता है। इसका स्थान लेने के लिए कम लवण वाला हल्का जल इसकी ओर बहने लगता है। इस कारण धारा उत्पन्न हो जाती है।

4. महाद्वीपीय तटों की बनावट-जल धाराएं महाद्वीपों के तटों के साथ-साथ बहती हैं। अतः महाद्वीपों के तटों की बनावट धाराओं को नई दिशा देती है। दिशा परिवर्तन के साथ ही एक नई धारा का जन्म होता है।

प्रभाव-समुद्री धाराएं अपने आस-पास के क्षेत्रों की जलवायु पर गहरा प्रभाव डालती हैं। गर्म धारा अपने पास के प्रदेशों की जलवायु को गर्म और ठण्डी धारा ठण्डा बना देती है। दूसरे, जिन देशों के पास से गर्म धाराएं गुज़रती हैं, वहां भारी वर्षा होती है, परन्तु जिन-जिन स्थानों के निकट से शीत धाराएं गुज़रती हैं, वहां कम वर्षा होती है और वे स्थान मरुस्थल बन जाते हैं। इसके अतिरिक्त जहां उष्ण और शीत धाराएं आपस में मिलती हैं, वहां गहरी धुन्ध छा जाती है।

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प्रश्न 2.
अन्ध महासागरीय धाराओं का वर्णन विश्व के मानचित्र में दर्शा कर करें।
उत्तर-
अन्ध महासागर की धाराओं के दो निश्चित चक्र हैं-(1) उत्तरी चक्र तथा (2) दक्षिणी चक्र।
I. उत्तरी चक्र
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1. उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा-भूमध्य रेखा के उत्तर में समुद्र का जल व्यापारिक पवनों के कारण पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगता है। इस धारा को उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा कहते हैं। यह गर्म पानी की धारा है।

2. गल्फ स्ट्रीम अथवा खाड़ी की धारा-उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा अफ्रीका की ओर से अमेरिका की ओर बहती है। जब यह धारा अमेरिका के पूर्वी तट के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम की ओर जाती है, तो इसका नाम खाड़ी की धारा पड़ जाता है। अंग्रेज़ी में इसे गल्फ स्ट्रीम कहते हैं। यह धारा मैक्सिको से प्रारम्भ होकर न्यूफाऊण्डलैंड के टापुओं तक पहुंचती है।

3. लैब्राडोर की धारा-यह शीत धारा है। यह उत्तर की ओर से आकर न्यूफाउण्डलैंड के टापुओं के पास खाड़ी की धारा में आ मिलती है।

4. उत्तरी महासागरीय धारा-न्यूफाऊण्डलैंड के पश्चात् खाड़ी की धारा पश्चिमी पवनों के प्रभाव में पूर्व की ओर हो जाती है। यहां इसे उत्तरी महासागरीय धारा कहते हैं।

5. कनेरी की धारा-उत्तरी महासागर की धारा यूरोप के पश्चिमी तट के साथ टकराती है जिससे इसके दो भाग हो जाते हैं। इसका एक भाग दक्षिण की ओर प्रवाहित होता है, जिसे कनेरी की धारा कहते हैं। यह शीत जल की धारा है। यह धारा अन्ततः भूमध्य रेखा की धारा में मिलकर उत्तरी चक्र को पूरा कर देती है।

II. दक्षिणी चक्र

यह चक्र घड़ी की विपरीत दिशा से चलता है।
1. दक्षिणी भूमध्य रेखीय धारा-यह गर्म पानी की धारा है। भूमध्य रेखा के दक्षिण में व्यापारिक पवनों के प्रभाव के कारण समुद्र का जल पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगता है। इसे दक्षिणी भूमध्य रेखीय धारा कहते हैं।

2. ब्राज़ील की धारा–भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा जब ब्राज़ील के तट के साथ टकराती है तो इसके दो भाग हो जाते हैं। इसका जो भाग ब्राजील के तट के साथ दक्षिण की ओर बहता है, उसे ब्राज़ील की धारा कहते हैं।

3. फाकलैंड की धारा-ब्राज़ील की धारा में दक्षिण की ओर से शीतल जल की धारा आकर मिल जाती है। इसी धारा को फाकलैंड की धारा कहते हैं। फिर यह धारा पश्चिमी पवनों के प्रभाव में आकर पूर्व की ओर मुड़ जाती है। इसे पश्चिमी पवनों का झाल कहा जाता है।
उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा तथा दक्षिणी भूमध्य रेखीय धारा के बीच विरोधी भूमध्य रेखीय धारा बहती है। यह पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है।

4. बेंगुएला की धारा-यह ठण्डे पानी की धारा है। इसकी उत्पत्ति पश्चिमी पवनों के झाल से होती है। यह दक्षिणी अफ्रीका के पश्चिमी तट के साथ-साथ उत्तर की ओर बहती है।

प्रश्न 3.
शांत (प्रशान्त ) महासागर की धाराओं का वर्णन विश्व के मानचित्र में दर्शा कर करें।
उत्तर-
प्रशान्त महासागर संसार का सबसे बड़ा और गहरा महासागर है। इसकी धाराओं को क्रमश: दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-1. उत्तरी चक्र
2. दक्षिणी चक्र।
I. उत्तरी चक्र

1. उत्तरी भूमध्य रेखा की धारा-प्रशान्त महासागर के उत्तरी भाग में व्यापारिक पवनें चलती रहती हैं। इन पवनों के प्रभाव के कारण महासागर में पूर्व से पश्चिम की ओर एक जल धारा बहने लगती है। इस धारा को उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा कहते हैं, जो गर्म पानी की धारा है।

2. कुरोशीवो की धारा-उत्तरी भूमध्य रेखा की धारा पूर्वी द्वीप के पास पहुँच कर उत्तर की ओर बहती है। यहां इसका नाम कुरोशीवो की धारा है।

3. उत्तरी प्रशान्त महासागरीय धारा-कुरोशीवो की धारा जब एशिया के पूर्वी तटों से टकराती है तो यह उत्तरपूर्व की ओर बहने लगती है। इसे उत्तरी प्रशान्त महासागरीय धारा कहते हैं।

4. कैलीफोर्निया की धारा-उत्तरी प्रशान्त महासागरीय धारा उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ टकराती है। यहां इसके दो भाग हो जाते हैं। इसका एक भाग अलास्का की धारा तथा दूसरा भाग कैलीफोर्निया की धारा कहलाता है क्योंकि कैलीफोर्निया की धारा ध्रुवों की ओर से आती है इसलिए यह शीत धारा है।

II. दक्षिणी चक्र
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1. भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा-भूमध्य रेखा के दक्षिण में समुद्र का जल व्यापारिक पवनों के प्रभाव के कारण पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगता है। इसे भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा कहते हैं जो गर्म पानी की धारा है।

2. पूर्वी आस्ट्रेलिया की धारा-यह भी गर्म पानी की धारा है। भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा पूर्वी-द्वीप समूह में पहुंच कर दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के पास से बहने लगती है। इसे पूर्वी आस्ट्रेलिया की धारा कहते हैं।

3. दक्षिणी प्रशान्त महासागरीय धारा-यह गर्म पानी की धारा है। पूर्वी आस्ट्रेलिया की धारा पश्चिमी पवनों के कारण पूर्व की ओर बहने लगती है। दक्षिणी गोलार्द्ध में होने के कारण यह धारा पश्चिम की ओर मुड़ जाती है। इसे दक्षिणी प्रशान्त महासागरीय धारा कहते हैं।

4. पीरू की धारा-यह ठण्डे पानी की धारा है। दक्षिणी प्रशान्त महासागरीय धारा का एक भाग दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट से टकराता है और दक्षिण से उत्तर की ओर बहने लगता है। इसे पीरू की धारा कहते हैं। यह धारा भूमध्य रेखा की धारा में मिल कर प्रशांत महासागर की धाराओं के चक्र को पूरा कर देती है।

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प्रश्न 4.
ज्वार भाटा कैसे उत्पन्न होता है? चित्र बनाकर स्पष्ट करें।
उत्तर-
ज्वार-भाटा-समुद्र का पानी दिन में दो बार तट की ओर चढ़ता है तथा दो बार नीचे उतरता है। समुद्र के पानी के इसी उतार-चढ़ाव को ज्वार-भाटा कहते हैं।

ज्वार-भाटा आने का कारण-ज्वार-भाटा सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण आता है। यूं तो सूर्य की आकर्षण शक्ति चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति से कई गुना अधिक है, परन्तु चन्द्रमा के पृथ्वी के अधिक निकट होने के कारण सागरीय जल पर इसकी आकर्षण शक्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति को ही ज्वार-भाटे का मुख्य कारण माना जा सकता है।
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बड़ा ज्वार-भाटा-बड़े ज्वार-भाटे से अभिप्राय लहरों के अत्यधिक ऊंचा उठने से है। ऐसा उस समय होता है जब सूर्य तथा चन्द्रमा दोनों मिल कर सगार के जल को अपनी ओर खींचते हैं। बड़ा ज्वार-भाटा केवल अमावस्या तथा पूर्णिमा को ही आता है। इन दोनों दिनों में सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीधी रेखा में स्थित होते हैं। अतः चन्द्रमा और सूर्य मिल कर सागर के जल को अपनी ओर खींचते हैं। इसलिए सागर के जल की ऊंचाई अन्य दिनों की तुलना में अधिक होती है। इसे बड़ा ज्वार-भाटा कहते हैं।

छोटा ज्वार-भाटा-चन्द्रमा की सातवीं तथा इक्कीसवीं तिथि को चन्द्रमा और सूर्य दोनों ही पृथ्वी के साथ समकोण (90°) बनाते हैं। अतः वे दोनों ही सागर के जल को अपनी-अपनी ओर खींचते हैं। क्योंकि चन्द्रमा सूर्य की अपेक्षा पृथ्वी के निकट है इसलिए सागर का जल चन्द्रमा की ओर से ही उछलता है। परन्तु जल में सूर्य के खिंचाव के कारण चन्द्रमा
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की आकर्षण शक्ति इतनी कम रह जाती है कि सागर का जल एक साधारण लहर से अधिक ऊंचा नहीं उठ पाता। इसे छोटा ज्वार-भाटा कहते हैं।

प्रश्न 5.
जलधारा (महासागरीय धारा) क्या है? इनकी उत्पत्ति के क्या कारण हैं?
उत्तर-
समुद्र के पानी का वह भाग जो निश्चित क्रम से एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर निश्चित दिशा में चलता है, उसे जलधारा अथवा महासागरीय धारा कहते हैं। ये वास्तव में समुद्र के अन्दर बहने वाली गर्म और ठण्डे जल की नदियां होती हैं जिनके किनारे स्थिर पानी के बने होते हैं।
चलने के कारण-महासागरीय धाराओं के चलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

1. प्रचलित पवनें-प्रचलित पवनें सदा एक ही दिशा में चलती रहती हैं। ये समुद्र के जल को भी अपने साथ बहा कर ले जाती हैं। इस तरह धाराएं उत्पन्न होती हैं।

2. तापमान में अन्तर-भूमध्य रेखीय प्रदेशों में तापमान अधिक होता है। इस कारण वहां सागर का जल फैलता है और ध्रुवों की ओर बढ़ता है। दूसरी ओर ध्रुवों पर तापमान कम होता है और वहां का जल भीतर-ही-भीतर भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने लगता है। इस प्रकार जल-धाराओं का जन्म होता है।

3. लवणों में अन्तर-समुद्र के जल में अनेक लवण घुले होते हैं। जिस जल में लवण अधिक होते हैं, वह जल भारी होकर नीचे बैठ जाता है। इसका स्थान लेने के लिए कम लवण वाला हल्का जल इसकी ओर बहने लगता है। इस कारण धारा उत्पन्न हो जाती है।

4. महाद्वीपीय तटों की बनावट-जल धाराएं महाद्वीपों के तटों के साथ-साथ बहती हैं। अत: महाद्वीपों के तटों की बनावट धाराओं को नई दिशा देती है। दिशा परिवर्तन के साथ ही एक नई धारा का जन्म होता है।

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PSEB 7th Class Social Science Guide महासागर Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
महासागर किसे कहते हैं? महासागर की कोई एक विशेषता बताओ।
उत्तर-
धरातल पर जल के कुछ विशाल भण्डार (खण्ड) पाए जाते हैं। इन्हीं विशाल जल खण्डों को महासागर कहते हैं। इनका जल खारा होता है।

प्रश्न 2.
ज्वार-भाटा किसे कहते हैं?
उत्तर-
समुद्र का पानी दिन में दो बार तट की ओर ऊपर चढ़ता है और नीचे उतरता है। समुद्र के पानी के इस उतार-चढ़ाव को ज्वार-भाटा कहते हैं।

प्रश्न 3.
बड़ा ज्वार-भाटा पूर्णिमा तथा अमावस्या को क्यों आता है?
उत्तर-
पूर्णिमा और अमावस्या को चन्द्रमा के साथ सूर्य का आकर्षण भी मिल जाता है। इस दोहरे आकर्षण के कारण ज्वार-भाटा की ऊंचाई बढ़ जाती है जिसे- बड़ा ज्वार-भाटा कहते हैं।

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प्रश्न 4.
महासागरीय जल की कितनी गतियां हैं और कौन-कौन सी हैं?
उत्तर-
महासागरीय जल की तीन गतियां हैं। इनके नाम हैं-लहरें, सागरीय धाराएं तथा ज्वार-भाटा।

प्रश्न 5.
लहर और सागरीय धारा में कोई एक अन्तर बताओ।
उत्तर-
लहर में जल ऊंचा-नीचा होता रहता है, परन्तु यह गति नहीं करता। इसके विपरीत सागरीय धारा में जल एक दिशा से दूसरी दिशा की ओर गति करता रहता है।

प्रश्न 6.
हमारी पृथ्वी पर कितने महासागर हैं? इनके नाम तथा मुख्य विशेषता बताओ।
उत्तर-हमारी पृथ्वी पर पांच महासागर हैं। इनके नाम हैं –

  1. प्रशान्त महासागर
  2. अन्ध महासागर
  3. हिन्द महासागर
  4. उत्तरी ध्रुव हिम (आर्कटिक) महासागर
  5. दक्षिणी ध्रुव हिम (अंटार्कटिक) महासागर। ये सभी महासागर एक-दूसरे से जुड़े हैं। इनका पानी एक-दूसरे में मिलता रहता है।

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प्रश्न 7.
किन्हीं चार महासागरों का क्षेत्रफल बताओ।
उत्तर-
महासागर – क्षेत्रफल (करोड़ वर्ग कि० मी०)

  1. प्रशान्त महासागर – 16.6
  2. अन्ध महासागर – 8.2
  3. हिन्द महासागर – 7.3
  4. उत्तरी ध्रुव (आर्कटिक) हिम महासागर – 1.3

प्रश्न 8.
ताजे पानी और नमकीन पानी में क्या अन्तर होता है?
उत्तर-
ताज़ा पानी-वर्षा, पिघलती बर्फ, नदियों, नहरों, नल-कूपों आदि द्वारा लाया गया पानी ताज़ा पानी होता है।
नमकीन पानी-झीलों, बन्द सागरों और खुले समुद्रों का पानी नमकीन होता है। सबसे अधिक नमक की मात्रा मृत सागर में है। यह सागर सभी ओर से स्थल से घिरा हुआ है।

प्रश्न 9.
संसार की सबसे महत्त्वपूर्ण उष्ण जलधारा कौन-सी है? यह कहां से कहां तक चलती है?
उत्तर-
संसार की सबसे महत्त्वपूर्ण उष्ण जलधारा खाड़ी की धारा है। यह मैक्सिको की खाड़ी से प्रारम्भ होकर न्यूफाऊण्डलैंड के टापुओं तक पहुंचती है।

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प्रश्न 10.
नार्वे के मछुआरे समुद्र में दूर तक मछलियां पकड़ने क्यों चले जाते हैं?
उत्तर-
नार्वे के समीप से होकर उत्तरी महासागरीय उष्ण धारा बहती है। इसके उष्ण प्रभाव के फलस्वरूप ही नार्वे के मछेरे दूर तक मछलियां पकड़ने चले जाते हैं।

प्रश्न 11.
पश्चिमी यूरोपीय देशों की पश्चिमी बन्दरगाहें सर्दी की ऋतु में भी क्यों खुली रहती हैं?
उत्तर-
उत्तरी महासागरीय धारा के उष्ण प्रभाव के कारण पश्चिमी यूरोपीय देशों की पश्चिमी बन्दरगाहें सर्दियों में भी खुली रहती हैं। उष्ण प्रभाव के कारण ये जमती नहीं हैं।

प्रश्न 12.
“शीत धाराओं के निकटवर्ती प्रदेशों में मरुस्थल पाए जाते हैं।” क्यों?
उत्तर-
जब कोई पवन शीत धारा के ऊपर से गुज़रती है तो यह ठण्डी और शुष्क हो जाती है। अतः शीत धाराओं के निकटवर्ती प्रदेशों में मरुस्थल बन जाते हैं।

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प्रश्न 13.
महासागरीय धाराएं जहाज़रानी पर क्या प्रभाव डालती हैं?
उत्तर-
सागरीय बेड़े प्रायः धाराओं की दिशा में चलते हैं। इससे उनकी गति बढ़ जाती है और ईंधन भी कम लगता है।

प्रश्न 14.
समुद्री धाराओं के पैदा होने के कोई दो कारण लिखो।
उत्तर-
समुद्री धाराओं के पैदा होने के दो कारण हैं –

  1. प्रचलित पवनें महासागरों के जल को अपनी दिशा में बहाकर ले जाती हैं।
  2. महासागरों के जल के तापमान में अन्तर के कारण भी जल में गति उत्पन्न होती है।

प्रश्न 15.
महासागरीय धाराओं का किसी देश की जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
(1) महासागरीय धाराओं का अपने पड़ोसी देशों की जलवायु पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। गर्म धाराएं अपने निकटवर्ती क्षेत्रों के तापमान को बढ़ा देती हैं। दूसरी ओर, ठण्डी धाराएं अपने निकट के स्थानों को ठण्डा बना देती हैं।

(2) गर्म धाराओं के ऊपर से गुजरने वाली पवनें नमी सोख लेती हैं और तटवर्ती प्रदेशों में वर्षा करती हैं। परन्तु शीत धारा के ऊपर से गुजरने वाली पवनें ठण्डी और शुष्क हो जाती हैं।

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प्रश्न 16.
महासागर तथा सागर में क्या अन्तर है?
उत्तर-
महासागर तथा सागर दोनों का सम्बन्ध पृथ्वी के जल भाग से है। जल के सबसे बड़े खण्ड महासागर कहलाते हैं। प्रत्येक महासागर फिर कई छोटे-छोटे खण्डों में बंटा हुआ है। इस छोटे खण्ड को सागर कहते हैं। प्रत्येक सागर किसी-न-किसी महासागर का ही भाग होता है। उदाहरण के लिए हिन्द महासागर में दो भाग हैं-अरब सागर तथा खाड़ी बंगाल।

प्रश्न 17.
लहर किसे कहते हैं? इसकी उत्पत्ति कैसे होती है?
उत्तर-
सागर का पानी सदा ऊंचा-नीचा होता रहता है। इसके साथ जल-कण ऊपर-नीचे होते रहते हैं। इस प्रकार सागर के जल में सिलवटें पड़ी हुई दिखाई देती हैं। इसी को लहर कहते हैं। लहरों का जन्म पवन की गति के कारण होता है। जब पवन समुद्र के ऊपर से गुज़रती है तो यह समुद्र के पानी को हिला देती है। पानी के हिलने पर लहरें उत्पन्न हो जाती हैं।

प्रश्न 18.
क्या कारण है कि उत्तर-पश्चिमी यूरोप में दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है?
उत्तर-
यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट के साथ-साथ उत्तरी अन्ध महासागर की गर्म धारा बहती है। गर्म धारा अपने निकटवर्ती प्रदेशों में वर्षा लाने में सहायक होती है। अतः इस धारा के कारण यूरोप के इस भाग में काफी वर्षा होती है। इसके विपरीत दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ पीरू की धारा बहती है। इस ठण्डी धारा के कारण अमेरिका के पश्चिमी तट के निकटवर्ती भागों में बहुत कम वर्षा होती है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 4 महासागर

प्रश्न 19.
उत्तरी हिन्द महासागर की धाराएं शीत तथा ग्रीष्म ऋतुओं में एक-दूसरे की विपरीत दिशा में क्यों बहती हैं?
उत्तर-
धाराओं की दिशा पर सबसे अधिक प्रभाव प्रचलित पवनों का होता है। पवनें जिस दिशा में लम्बे समय के लिए चलती हैं, वे समुद्र के जल को भी उसी दिशा में बहा कर ले जाती हैं। उत्तरी हिन्द महासागर में मौसमी पवनें शीत तथा ग्रीष्म ऋतुओं में विपरीत दिशा में चलती हैं। फलस्वरूप इस सागर की धाराएं भी विपरीत दिशा में बहने लगती

प्रश्न 20.
छोटा ज्वार-भाटा चन्द्रमा की सातवीं तथा इक्कीसवीं तिथि को ही क्यों आता है? कारण बताओ।
उत्तर-
चन्द्रमा की सातवीं तथा इक्कीसवीं तिथि को चन्द्रमा और सूर्य पृथ्वी के साथ समकोण (90°) बनाते हैं। परिणामस्वरूप चन्द्रमा और सूर्य सागर के जल को विपरीत दिशाओं में खींचने हैं। चूंकि चन्द्रमा पृथ्वी के अधिक निकट है, इसलिए सागर का जल चन्द्रमा की ओर ही उछलता है। परन्तु इस उछाल की ऊंचाई एक साधारण लहर से भी कम होती है। इसी को छोटा ज्वार-भाटा कहते हैं।

प्रश्न 21.
हिन्द महासागर की धाराओं का विस्तारपूर्वक वर्णन करो। इन्हें मानचित्र पर भी दिखाओ।
उत्तर-
हिन्द महासागर की धाराओं का चक्र इतना निश्चित तथा नियमित नहीं है जितना कि प्रशान्त महासागर की धाराओं का। इसका मुख्य कारण इस महासागर की मौसमी पवनें हैं। ये पवनें ऋतु परिवर्तन के साथ अपनी दिशा बदल देती हैं। इसके साथ-साथ हिन्द महासागर की धाराओं की दिशा भी बदलती रहती है। इन धाराओं को दो मुख्य भागों में बांट सकते हैं –
(1) उत्तरी चक्र
(2) दक्षिणी चक्र

1. उत्तरी चक्र

1. दक्षिणी-पश्चिमी मानसून धारा-दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पवनों के प्रभाव के कारण हिन्द महासागर का जल पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगता है। इसे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून धारा कहते हैं।

2. उत्तरी भूमध्य रेखी धारा-भूमध्य रेखा के उत्तर में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून धारा की दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर होती है। इसे उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा कहते हैं। यह गर्म पानी की धारा है।

3. उत्तरी-पूर्वी मानसून धारा-उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा का जल भूमध्य रेखा के उत्तर में पूर्व से पश्चिम की ओर बहने लगता है। इसे उत्तरी-पूर्वी मानसून धारा कहते हैं। यह गर्म पानी की धारा है।
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2. दक्षिणी चक्र

दक्षिणी गोलार्द्ध में धाराओं का चक्र अधिकतर निश्चित है जिसका वर्णन इस प्रकार है –
1. भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा-उष्ण जल की धारा पवनों के प्रभाव के कारण भूमध्य रेखा के दक्षिण में पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है।

2. मौज़म्बीक की धारा-यह धारा भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा का ही एक भाग है। भूमध्य रेखा की दक्षिणी धारा जब अफ्रीका के पूर्वी तट के साथ टकराती है तो इसका पानी दक्षिण की ओर बहने लगता है। यह पानी दक्षिण अफ्रीका के पूर्वी तट के पास से गुज़रता है। यहां इसे मौज़म्बीक की धारा कहते हैं। यह धारा गर्म पानी की धारा है।

3. अगुलहास की धारा-मैलागासी टापू के पूर्व से एक शाखा दक्षिण की ओर बहती है। इसे अगुलहास की धारा कहते हैं।

4. पश्चिमी आस्ट्रेलिया की धारा-दक्षिणी हिन्द महासागर की धारा आस्ट्रेलियां के दक्षिणी-पश्चिमी तटं के साथ टकराती है और इसका एक भाग उत्तर की ओर मुड़ जाता है। इसे पश्चिमी आस्ट्रेलिया की धारा कहते हैं। यह शीत धारा अन्त में उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा से जा मिलती है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 4 महासागर

(क) रिक्त स्थान भरो:

  1. ……………….. सबसे बड़ा तथा गहरा महासागर है।
  2. समुद्रों का पानी स्वाद में …………… होता है।
  3. भूमध्य रेखा की ओर जाने वाली जल धाराएं सदा …………… होती हैं।
  4. …………. ज्वारभाटा सदैव पूर्णिमा या अमावस के दिन ही आता है।

उत्तर-

  1. प्रशान्त महासागर,
  2. नमकीन,
  3. ठण्डी,
  4. बड़ा।

(ख) सही जोड़े बनाझर :

  1. चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति – अंध महासागर
  2. मौज़म्बीक की धारा – समुद्री धाराओं की उत्पत्ति
  3. खाड़ी की धारा – ज्वारभाटा की उत्पत्ति
  4. पवन की गति – हिन्द महासागर

उत्तर-

  1. चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति – ज्वारभाटा की उत्पत्ति
  2. मौज़म्बीक की धारा – हिन्द महासागर
  3. खाड़ी की धारा – अंध महासागर
  4. पवन की गति – समुद्री धाराओं की उत्पत्ति।

(ग) सही उत्तर चुनिए :

प्रश्न 1.
पृथ्वी पर छोटे-बड़े पांच महासागर हैं। बताइए कि निम्नलिखित में से सबसे छोटा महासागर कौन-सा है?
(i) हिम (आर्कटिक) महासागर
(ii) अन्ध महासागर
(iii) हिन्द महासागर।
उत्तर-
(i) हिम (आर्कटिक) महासागर।

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प्रश्न 2.
दिए चित्र में क्या दर्शाया गया है?
PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 4 महासागर 7
(i) महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति
(ii) ज्वरभाटा की उत्पत्ति
(iii) पृथ्वी पर जल और थल का वितरण।
उत्तर-
(iii) पृथ्वी पर जल और थल का वितरण।

प्रश्न 3.
संसार की सबसे महत्त्वपूर्ण उष्ण जल धारा कौन-सी है?
(i) ब्राजील की धारा
(ii) न्यूफाऊंडलैण्ड की धारा
(ii) खाड़ी की धारा।
उत्तर-
(iii) खाड़ी की धारा।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 5 घर की सफ़ाई

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 5 घर की सफ़ाई Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 5 घर की सफ़ाई

PSEB 7th Class Home Science Guide घर की सफ़ाई Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
घर की सफ़ाई के दो महत्त्व बताइए।
उत्तर-

  1. स्वच्छता
  2. सौंदर्य तथा स्वास्थ्य।

प्रश्न 2.
ऋतु के अनुसार सफाई किसे कहते हैं?
उत्तर-
जब ऋतु बदलती है तब घर की सफाई की जाती है इसे ऋतु के अनुसार सफाई करना कहते हैं।

प्रश्न 3.
शीशे को साफ करने के लिए क्या प्रयोग करना चाहिए?
उत्तर-
गीले अखबार या पतंग वाले कागज़ से।

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लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
शौचघर, गुसलखाने में फिनाइल क्यों छिड़की जाती है?
उत्तर-
शौचघर और गुसलखाने को प्रतिदिन फिनाइल से धोना चाहिए और इनको खुली हवा लगनी चाहिए। नहीं तो ये मक्खी, मच्छर के घर बन जाएंगे। जिससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं।

प्रश्न 2.
सफ़ाई करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
सफ़ाई करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. कमरे का फर्श और दैनिक प्रयोग में आने वाले बर्तनों की सफ़ाई रोज़ करनी चाहिए।
  2. रसोई, गुसलखाना और नालियाँ भी रोज़ाना साफ़ करनी चाहिए।
  3. साप्ताहिक सफ़ाई में दरी या फर्नीचर बाहर निकालकर झाड़ना और दीवारों से जाले उतारने ज़रूरी होते हैं। कपड़ों को धूप लगानी चाहिए।
  4. रोज़ाना प्रयोग में आने वाले बर्तन, पर्दे, चादरें आदि साफ़ करनी चाहिएं।
  5. शौचघर और नालियों में फिनाइल का पानी डालना चाहिए।
  6. ऋत अनसार सफ़ाई में दीवारों और फर्श झाड कर लीप-पोत लेने चाहिएं या फर्श और दीवारों की मुरम्मत करवा लेना चाहिए।
  7. दरवाजों और खिड़कियों को पेंट करवा लेना चाहिए।

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प्रश्न 3.
साप्ताहिक सफाई के अन्तर्गत क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर-
साप्ताहिक सफ़ाई के अन्तर्गत निम्नलिखित कार्य करना चाहिए

  1. साप्ताहिक सफ़ाई में एक बार बिस्तरों को धूप में अवश्य सुखाना चाहिए।
  2. घर का सारा सामान फर्नीचर आदि को धूप अवश्य लगानी चाहिए।
  3. कमरे, आँगन और सीढ़ियों को धोकर साफ़ कर लेना चाहिए।
  4. कमरों को धोने से पहले फर्नीचर बाहर निकालकर दीवारें साफ़ कर लेनी चाहिएं। ताकि जाले आदि अच्छी तरह साफ़ हो जाए।
  5. अलमारियों का सामान निकालकर साफ़ करके उचित जगह पर लगा देना चाहिए।
  6. अगर फर्श पर दरी बिछी हो तो बाहर निकालकर झाड़ लें और फर्श को धोकर गीले कपड़े के साथ पोचा फेर लेना चाहिए।
  7. बिजली के बल्ब और शेड की सफ़ाई भी कर लेनी चाहिए।
  8. नालियों में फिनाइल छिड़क देना चाहिए, ताकि कीटाणु रहित हो जाएं।
  9. शौचघर में फिनाइल और कभी-कभी चूने का पानी छिड़कना चाहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
दैनिक सफ़ाई क्यों जरूरी है और घर की सफ़ाई कैसे करनी चाहिए?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई से हमारा अभिप्राय उस सफ़ाई से है जो घर में प्रतिदिन की जाती है। अत: गृहिणी का यह प्रमुख कर्त्तव्य है कि वह घर के उठने-बैठने, पढ़ने-लिखने, सोने के कमरे, रसोई, आँगन, स्नानागार, बरामदा तथा शौचालय की प्रतिदिन सफ़ाई करे। दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत प्रायः इधर-उधर बिखरी हुई वस्तुओं को ठीक से लगाना, फर्नीचर को झाड़ना-पोंछना, फर्श पर झाडू करना, गीला पोंछा करना आदि आते हैं। आज के आधुनिक युग की व्यस्त गृहिणियों तथा कार्यरत गृहिणियों को यह कदापि सम्भव नहीं कि वे घर के सभी पक्षों की सफ़ाई प्रतिदिन करें।

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प्रश्न 2.
ऋतु के अनुसार खास सफ़ाई का क्या मतलब है?
उत्तर-
हमारे देश में प्राय: जब वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है, दशहरे या दीपावली के समय वार्षिक सफ़ाई की जाती है। पुताई, पॉलिश आदि करवाने से घर की सुन्दरता तो बढ़ती ही है, रोग फैलाने वाले कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। अत: स्वास्थ्य की दृष्टि से भी एक वर्ष में एक बार घर की पूर्ण स्वच्छता अनिवार्य है।

Home Science Guide for Class 7 PSEB घर की सफ़ाई Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सफ़ाई क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए तथा घर को आकर्षित बनाने के लिए सफ़ाई ज़रूरी है।

प्रश्न 2.
शारीरिक सफ़ाई से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
शरीर के विभिन्न अंगों की नियमित सफ़ाई तथा नियमित अच्छी आदतें।

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प्रश्न 3.
दैनिक सफ़ाई से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई से अभिप्राय प्रतिदिन की सफ़ाई से है।

प्रश्न 4.
दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत किन स्थानों की सफाई आवश्यक है?
उत्तर-
प्रतिदिन उठने-बैठने और सोने वाले कमरे, स्नानागार, शौचालय, रसोई, आँगन एवं बरामदा।

प्रश्न 5.
सामयिक सफाई क्या होती है?
उत्तर-
ऋतु अनुसार काम आने वाली वस्तुओं की सफ़ाई करके ठीक रख-रखाव की व्यवस्था करना। जैसे-सर्दी व गर्मी के कपड़े, अनाज संरक्षण आदि।

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प्रश्न 6.
आकस्मिक सफ़ाई किसे कहते हैं?
उत्तर-
अकस्मात् जरूरत पड़ने पर घर की सफ़ाई करना, जैसे ब्याह-शादी पर।

छोटे स्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
वातावरण की सफ़ाई को कितने भागों में बांटा जा सकता है?
उत्तर-
वातावरण की सफ़ाई को सामान्यत: छः भागों में बांटा जा सकता है

  1. दैनिक सफ़ाई
  2. साप्ताहिक सफ़ाई
  3. मासिक सफाई
  4. सामयिक सफाई
  5. वार्षिक सफ़ाई
  6. आकस्मिक सफ़ाई।

प्रश्न 2.
दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत क्या-क्या कार्य करने होते हैं?
उत्तर-
दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत निम्नलिखित कार्य आवश्यक रूप से करने होते हैं

  1. घर के सभी कमरों के फर्श, खिड़की, दरवाजे, मेज़-कुर्सी की झाड़-पोंछ करना।
  2. घर में रखे कूड़ेदान आदि को साफ़ करना।
  3. शौचालय तथा स्नानागार आदि की सफ़ाई करना।
  4. रसोई में काम आने वाले बर्तनों की सफ़ाई व रख-रखाव।

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प्रश्न 3.
घर में गन्दगी होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर-

  1. प्राकृतिक कारण-धूल के कण, वर्षा तथा बाढ़ के पानी के बहाव के साथ आने वाली गन्दगी, मकड़ी के जाले, पक्षियों तथा अन्य जीवों द्वारा गन्दगी।
  2. मानव विकार-मल-मूत्र, कफ, थूक, खखार, पसीना और बाल झड़ना।
  3. घरेलू कार्य-खाद्यान्नों की सफ़ाई से निकलने वाला कूड़ा, साग-सब्जी-फल आदि के छिलके, खाद्य वस्तुओं, बर्तन आदि के धोवन, कपड़ों की धुलाई, साबुन के फेन, मैल, नील, माँड़ रद्दी कागज़ के टुकड़े, सिलाई की कतरनें, कताई की रूई तथा छीजन आदि।

बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
घर की सफ़ाई कितने प्रकार की होती है? वर्णन कीजिए।
उत्तर-
घर की सफ़ाई को हम मुख्य रूप से चार भागों में बाँटते हैं-दैनिक सफ़ाई, साप्ताहिक सफ़ाई, मासिक सफ़ाई, वार्षिक सफ़ाई।
1. दैनिक सफ़ाई-दैनिक सफ़ाई से हमारा अभिप्राय उस सफ़ाई से है जो घर में प्रतिदिन की जाती है। अतः गृहिणी का यह प्रमुख कर्त्तव्य है कि वह घर के उठने-बैठने, पढ़ने-लिखने, सोने के कमरे, रसोईघर, आँगन, स्नानागार, बरामदा तथा शौचालय की प्रतिदिन सफ़ाई करे। दैनिक सफ़ाई के अन्तर्गत प्रायः इधर-उधर बिखरी हुई वस्तुओं को ठीक से लगाना, फर्नीचर को झाड़ना-पोंछना, फर्श पर झाडू करना, गीला पोंचा करना आदि आते है। आज के आधुनिक युग की व्यस्त गृहिणियों तथा कार्यरत गृहिणियों को यह कदापि सम्भव नहीं कि वे घर के सभी पक्षों की सफ़ाई प्रतिदिन करें।

2. साप्ताहिक सफ़ाई-एक कुशल गृहिणी को घर के दैनिक जीवन में अनेक कार्य करने पड़ते हैं अतः यह सम्भव नहीं कि वह एक ही दिन में घर की पूर्ण सफ़ाई कर सके। समय की कमी के कारण घर में जो वस्तुएँ प्रतिदिन साफ़ नहीं की जातीं उन्हें सप्ताह में या पन्द्रह दिन में एक बार अवश्य साफ़ कर लेना चाहिए। यदि ऐसा न किया गया तो दरवाजों तथा दीवारों की छतों पर जाले एकत्रित हो जायेंगे। दरवाज़ों व खिड़कियों के शीशों, फनीचर की सफ़ाई, बिस्तर झाड़ना व धूप लगाना, अलमारियों की सफ़ाई तथा दरी कालीन को झाड़ना व धूप लगाना आदि कार्य सप्ताह में एक बार अवश्य किये जाने चाहिएं।

3. मासिक सफ़ाई-जिन कमरों या वस्तुओं की सफ़ाई सप्ताह में एक बार न हो सके, उन्हें महीने में एक बार अवश्य साफ़ करना चाहिए। साधारण तौर पर महीने भर की खाद्य-सामग्री एक साथ खरीदी जाती है इसलिए उसको भण्डारगृह में रखने से पूर्व भंडार घर को भली-भाँति झाड़-पोंछकर ही उसमें खाद्य-सामग्री रखी जानी चाहिए। टीन के डिब्बों को भली-भाँति साफ़ करके धूप दिखाकर उसमें सामान भरना चाहिए। मासिक सफ़ाई के अन्तर्गत अनाज, दालों, अचार, मुरब्बे व मसाले आदि को धूप लगानी चाहिए। अलमारी के जाले, बल्बों के शेड आदि भी साफ़ करने चाहिएं।

4. वार्षिक सफ़ाई-वार्षिक सफ़ाई का तात्पर्य वर्ष में एक बार सम्पूर्ण घर की पूर्ण रूप से सफाई करना है। वार्षिक सफाई के अन्तर्गत घर की पुताई, टूटे स्थानों की मरम्मत, दरवाजों, खिड़कियों के किवाड़ों तथा चौखटों की मरम्मत तथा सफाई एवं रोगन करवाना, फर्नीचर और अन्य सामानों की मरम्मत, वार्निश, पॉलिश आदि आती है। कमरों से सभी सामानों को हटाकर चूना, पेंट या डिस्टेम्पर करवाना, पुताई के पश्चात् फर्श को रगड़कर धोना तथा दाग-धब्बे हटाना, सफ़ाई के उपरान्त सारे सामान को पुनः व्यवस्थित करना वार्षिक कार्य हैं। इस प्रकार की सफ़ाई के कमरों को नवीन रूप प्रदान होता है। रजाई, गद्दों को खोलकर रूई साफ़ करवाना, धुनवाना आदि भी वर्ष में एक बार किया जाता है।

हमारे देश में प्रायः जब वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है, दशहरे या दीपावली के समय वार्षिक सफ़ाई की जाती है। पुताई, पॉलिश आदि करवाने से घर की सुन्दरता तो बढ़ती ही है, रोग फैलाने वाले कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। अतः स्वास्थ्य की दृष्टि से भी वर्ष में एक बार घर की पूर्ण स्वच्छता अनिवार्य है।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सफ़ाई के प्रबन्ध को कितने हिस्सों में बाँट सकते हैं?
उत्तर-
तीन।

प्रश्न 2.
शौचघर तथा नालियों में ………….का पानी डालना चाहिए।
उत्तर-
फ़िनाईल।

प्रश्न 3.
साप्ताहिक सफ़ाई में ……. की भी सफ़ाई की जाती है।
उत्तर-
दीवारों पर लगे जाले।

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प्रश्न 4.
घर में गन्दगी का एक प्राकृतिक कारण बताएं।
उत्तर-
मकड़ी का जाल।

प्रश्न 5.
दीवाली के समय की जाने वाली सफ़ाई कौन-सी है?
उत्तर-
वार्षिक सफ़ाई।

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घर की सफ़ाई PSEB 7th Class Home Science Notes

  • मिट्टी और धूल से भरा मकान देखने में बहुत बेकार और खराब लगता है।
  • मक्खियां और मच्छर गन्दगी की देन हैं।। कमरों को साफ़ करते समय कोनों की सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना ज़रूरी
  • सफ़ाई करते समय हवा का रुख देखते हुए खिड़कियाँ और दरवाज़े खोलने ठीक रहते हैं।
  • शौचघर और गुसलखाने को प्रतिदिन फिनाइल से धोना चाहिए और उसमें खुली हवादार जाली लगानी चाहिए।
  • सप्ताह में एक दिन सारे घर की सफ़ाई सम्भव नहीं होती इसलिए कमरे बाँट लेना चाहिए।
  • सप्ताह में एक बार बिस्तरों को धूप अवश्य लगवानी चाहिए।
  • शौचघर में फिनाइल और कभी-कभी चूने का पानी छिड़कना चाहिए।
  • सफ़ाई रखने से जहां मकान की सुन्दरता कायम रहती है उसके साथ ही काफ़ी चीज़ों को नष्ट होने से भी बचाया जा सकता है।
  • हमारे देश में ऋतु के बदलने पर सफ़ाई करने का आम रिवाज है।
  • सफ़ेदी करने से पहले दीवारों से कलैण्डर और तस्वीरें उतारकर झाड़कर रख लेने चाहिएं ताकि टूट न जाएं।
  • खिड़कियाँ, अलमारियाँ और दरवाज़े की जालियाँ सोडे या साबुन वाले पानी के साथ साफ़ कर लेनी चाहिएं।
  • वार्षिक सफ़ाई या ऋतु के अनुसार सफ़ाई में दैनिक और साप्ताहिक सफ़ाई के भी सारे काम शामिल होते हैं।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्तन

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Home Science Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

PSEB 7th Class Home Science Guide खाना बनाने के सिद्धान्त Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन ज्यादा देर पकाने से क्या नष्ट हो जाता है?
उत्तर-
विटामिन तथा खनिज लवण।

प्रश्न 2.
फलों और सब्जियों का पतला छिलका उतारने की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर-
छिलकों के बिल्कुल नीचे ही विटामिन तथा खनिज लवण होते हैं, इसलिए मोटा छिलका उतारने से ये नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
डिब्बाबंद भोजन खरीदते समय हमें किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
डिब्बा फूला हुआ था पिचका हुआ न हो।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

प्रश्न 4.
खाने वाले सोडे का प्रयोग भोजन पकाने में क्यों वर्जित है?
उत्तर-
इससे विटामिन तथा खनिज लवण नष्ट हो जाते हैं।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन पकाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
भोजन पकाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. चोकर सहित आटे का प्रयोग करना चाहिए इसमें विटामिन पाया जाता है। रोटी सेंकने से कम-से-कम आधा घण्टा पहले ही आटा गूंध कर स्वच्छ गीले कपड़े से ढक कर रखें।
  2. चावल पकाने से पूर्व बार-बार न धोयें, इससे खनिज लवण और विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
  3. भोजन सदैव स्वच्छ बर्तन में ही पकाना चाहिए।
  4. गृहिणी को अपने हाथ और नाखून साफ़ रखने चाहिए।
  5. रसोईघर में प्रयोग आने वाले कपड़े, जैसे-तौलिया, नेपकिन, झाड़न, पोंछा आदि स्वच्छ होना चाहिए।
  6. बर्तनों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए, इससे कीड़े-मकौड़े का भोजन में गिरने का डर रहता है।
  7. दाल, सब्जी में पानी केवल उतना ही डालना चाहिए जिससे भोजन पक जाए।
    अधिक पानी डालकर फिर फेंकने से बहुत-से खनिज लवण एवं विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
  8. भोजन धीमी आँच पर पकाना चाहिए; भाप द्वारा पकाना सबसे उत्तम होता है इसके लिए प्रेशर कुकर का प्रयोग करना चाहिए।
  9. भोजन को ढक्कनदार बर्तन में पकाना चाहिए।
  10. दूध को धीमी आँच पर न उबालकर तेज़ आँच पर उबालना चाहिए।
  11. मांस व अण्डे को बहुत अधिक नहीं पकाना चाहिए।
  12. भोजन पकाते समय सोडे का प्रयोग नहीं करना चाहिए; इससे विटामिन B नष्ट हो जाते हैं।
  13. भोजन में अधिक मसालों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अधिक मिर्च, मसाले व घी के प्रयोग से व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।
  14. भोजन पकाने के पश्चात् परोसने में देर न करें। पके हुए भोजन को पुनः गर्म करना ठीक नहीं होता है।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

प्रश्न 2.
भोजन पकाते समय निजी सफ़ाई से क्या भाव है?
उत्तर-
भोजन पकाते समय निजी सफ़ाई से भाव निम्नलिखित हैं

  1. जिन लोगों को जुकाम, गला खराब, खाँसी, फ्लू, फोड़े आदि हों उन्हें खाना पकाने का काम नहीं करना चाहिए।
  2. खाना पकाते समय हाथ और नाखून हमेशा साफ़ होना चाहिए। कपड़े भी साफ़ होने चाहिएं और बालों को अच्छी तरह बाँधकर रखना चाहिए।
  3. कच्चे मीट, मछली, सब्जियों और फलों के छिलकों को हाथ लगाने से पहले हाथ अच्छी तरह धो लेने चाहिए।
  4. भोजन को चलाते समय कड़छी या चम्मच का इस्तेमाल करना चाहिए। जहाँ तक हो सके भोजन को हाथ नहीं लगाना चाहिए।
  5. खाना बनाते समय अगर छींक या खाँसी आने लगे तो मुँह को ढक लेना चाहिए।
  6. जिस चम्मच के साथ खाने का स्वाद देखना हो उसको फिर धोकर इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 3.
रसोई और बर्तनों की सफ़ाई कैसे करनी चाहिए?
उत्तर-
रसोई तथा बर्तनों की सफाई निम्नलिखित ढंग से करनी चाहिए

  1. रसोईघर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगी होनी चाहिए ताकि मक्खी, मच्छर, आदि अन्दर न आ सके।
  2. रसोईघर की सफ़ाई हर रोज़ खाना खाने के बाद जूठे बर्तनों को साफ़ करने के बाद करनी चाहिए। दिन में एक बार रसोई को अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए। सप्ताह में एक बार जाले उतार कर दीवारों को साफ़ करना चाहिए और साल में एक बार या दो बार सफेदी करनी चाहिए।
  3. खाना पकाने वाले बर्तनों को प्रत्येक बार इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए। मीट काटने के बाद चाकू को धो लेना चाहिए।
  4. बर्तनों या शैल्फ जहां कच्छा मीट, मुर्गा या मछली रखी हो वहां दूसरी खाने की वस्तु रखने से पहले उसे अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  5. जूठे बर्तनों को साफ़ बर्तनों से अलग रखना चाहिए।
  6. जूठे बर्तनों को धोने के लिए गर्म पानी और साबुन या डिटरजेन्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे बर्तन साफ़ और कीटाणुरहित हो जाते हैं। बर्तनों को धोकर अगर धूप में सुखाया जाए तो इनमें चमक आ जाती है।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
खाना पकाने के सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-
खाना पकाने के निम्नलिखित सिद्धान्त हैं

  1. खाना पकाते समय सब्जियों के छिलके उतारने चाहिएं।
  2. इनको ज्यादा नहीं धोना और न ही ज्यादा देर तक भिगोकर रखना चाहिए।
  3. भोजन को हमेशा ढककर पकाना चाहिए।
  4. जिस पानी में भोजन पकाया जाए उसे फेंकना नहीं चाहिए।
  5. भोजन को धूप में नहीं रखना चाहिए और भोजन पकाते समय सोडा नहीं डालना चाहिए।
  6. सब्जियों को बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं काटना चाहिए।

प्रश्न 2.
भोजन खरीदते समय कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
भोजन खरीदते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. भोजन ऐसे स्थानों से खरीदना चाहिए जहां सफ़ाई का पूरा ध्यान रखा जाता हो। जिस बाज़ार में मक्खियां, मच्छर या दूसरे कीड़े-मकौड़े और चूहे आदि हों, वहाँ से भोजन की कोई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।
  2. बेचने वाले दुकानदार साफ़ होने चाहिएं, उसके कपड़े साफ़ हों और सेहत अच्छी हो। अगर उनको खाँसी या जुकाम लगा हो तो उससे खाने की वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।
  3. मीट खरीदते समय यह देखना ज़रूरी है कि जानवर बीमार न हो और साथ ही उस पर डॉक्टर की मोहर भी लगी होनी चाहिए।
  4. डिब्बे में बन्द वस्तु खरीदते समय यह देख लेना चाहिए कि डिब्बा फूला हुआ या चिपका हुआ न हो। फूले हुए डिब्बे में बैक्टीरिया होते हैं। जहाँ तक सम्भव हो सके डिब्बे किसी अच्छी फ़र्म के बने ही इस्तेमाल करने चाहिए।
  5. फल और सब्जियाँ गली-सड़ी नहीं होनी चाहिए। (6) दालें, चावल, आटे आदि में कीड़े या सुसरी नहीं होनी चाहिए।
  6. दूध और दूध से बनी वस्तुएँ ताजी होनी चाहिएँ और उनसे खट्टी महक नहीं आनी चाहिए।
  7. कटे हुए फल-सब्जियाँ, जिन पर धूल पड़ी होने का सन्देह हो या उन पर मक्खियां बैठी हों, नहीं खरीदनी चाहिए।
  8. पका हुआ भोजन खरीदना हो तो उसकी सफ़ाई के बारे में पूरी जाँच-पड़ताल कर लेनी चाहिए।
  9. भोजन की चीजें लाने के बाद सूखी चीज़ों को सूखे डिब्बों में भरकर रसोई की अलमारी या स्टोर में रख देना चाहिए।

PSEB 7th Class Home Science Solutions Chapter 4 खाना बनाने के सिद्धान्त

प्रश्न 3.
रसोई की सफ़ाई से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
रसोईघर के प्रत्येक स्थान को धो-पोंछकर साफ़ करना चाहिए। भोजन समाप्त होने के बाद बची हुई खाद्य-सामग्री को दूसरे स्वच्छ बर्तनों में रखकर जालीदार अलमारी . या रेफ्रीजरेटर में रख देना चाहिए। जूठे बर्तनों को साफ़ करने के स्थान पर ही साफ़ किया जाना चाहिए। भोजन पकाने तथा परोसने के स्थान को पहले गीले तथा फिर सूखे कपड़े से पोंछकर स्वच्छ करना चाहिए। बर्तनों को साफ़ करके यथास्थान व्यवस्थित करना चाहिए। नल, फर्श, सिंक आदि को साफ़ करके सूखा रखने का प्रयत्न करना चाहिए। रसोईघर की चौकी, तख्त, मेज, कुर्सी की सफाई भी प्रतिदिन की जानी चाहिए तथा फर्श को भी पानी से प्रतिदिन सींक को झाडू या कूची से रगड़कर धोना चाहिए।

प्रश्न 4.
भोजन घर लाने के बाद ताज़ी और सूखी चीज़ों की सम्भाल आप कैसे करोगे?
उत्तर-
भोजन की चीजें घर लाने के बाद सूखी चीज़ों को सूखे डिब्बों में भरकर रसोई की अलमारी या स्टोर में रख देना चाहिए। ताजी सब्जियों और फलों को फ्रिज या किसी अन्य ठण्डी जगह पर रखना चाहिए। मीट लाने के बाद अगर फ्रिज़ हो तो उसको सबसे ठण्डे खाने में रखना चाहिए। अगर ऐसा न हो सके तो उसे जल्दी ही पका लेना चाहिए।
दूध को हमेशा उबालकर जाली के साथ ढककर रखना चाहिए। अगर फ्रिज़ हो तो उसमें रखना चाहिए नहीं तो ठण्डी जगह का पानी दूध वाले बर्तन में रखना चाहिए।

Home Science Guide for Class 7 PSEB खाना बनाने के सिद्धान्त Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भोज्य पदार्थ को पकाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
भोजन को पचने योग्य बनाना।

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प्रश्न 2.
प्रोटीन पर पकाने का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
प्रोटीन पकाने पर सुपाच्य (पचने योग्य) हो जाती है तथा तरल प्रोटीन ठोस रूप में बदल जाती है।

प्रश्न 3.
कार्बोहाइड्रेट्स पर पकाने का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
पकाने से कार्बोहाइड्रेट्स पचने योग्य तथा मीठे हो जाते हैं।

प्रश्न 4.
पकाने का वसा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
पकाने से वसा पिघलती है और सुपाच्य बन जाती है।

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प्रश्न 5.
सब्जी पकाने का मुख्य अभिप्राय क्या है?
उत्तर-
सब्जी के सैलुलोज को मुलायम करना तथा श्वेतसार कणों को फुलाकर जिलेटिन के रूप में परिवर्तित करना।

प्रश्न 6.
किन खनिज तत्त्वों पर ताप का प्रभाव बहुत कम पड़ता है?
उत्तर-
कैल्शियम तथा लोहे पर।

प्रश्न 7.
कैरोटीन पकाने पर नष्ट क्यों नहीं होता?
उत्तर-
क्योंकि यह जल में घुलनशील नहीं है।

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प्रश्न 8.
भोजन पकाने से विटामिन ‘बी’ तथा ‘सी’ प्रायः नष्ट क्यों हो जाते हैं?
उत्तर-
जल में घुलनशील होने तथा ताप द्वारा नष्ट हो जाने के कारण।

प्रश्न 9.
शक्कर को गर्म करने पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
शक्कर को गर्म करने पर वह भूरे रंग का हो जाता है। इसको अधिक गर्म करने पर काले रंग का हो जाता है।

प्रश्न 10.
कौन-से पदार्थ पेट में अधिक वायु बनाते हैं?
उत्तर-
कच्चे सलाद पेट में अधिक वायु बनाते हैं।

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छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
रसोईघर के लिए निम्नलिखित केन्द्रों की व्यवस्था आप कैसी करेंगी?
(क) तैयारी केन्द्र,
(ख) खाना पकाने व परोसने का केन्द्र।
उत्तर-
(क) तैयारी केन्द्र-खाना पकाने से पूर्व खाद्य पदार्थों की तैयारी करनी पड़ती है। इनमें दाल-चावल चुनना व धोना, साग-सब्जी धोना व काटना, आटा छानना, गूंधना आदि जैसे कार्य रहते हैं। कार्य करने के लिए शेल्फों की ऊँचाई गृहिणी की लम्बाई के अनुसार उचित होनी चाहिए जिससे गृहिणी को कार्य करने में असुविधा न हो। इन शेल्फों के नीचे तथा ऊपर अलमारियों में भोजन की तैयारी में उपयोग में आने वाले उपकरण आटा, दालें आदि संग्रहीत करके रखी जा सकती हैं।

(ख) खाना पकाने व परोसने का केन्द्र-भोजन पकाने के लिए जिन वस्तुओं की आवश्यकता होती है, उन्हें ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जिससे गृहिणी को अधिक दौड़ धूप न करनी पड़े। भोजन पकाने के केन्द्र के निकट ही एक ऐसा स्थान या अलमारी हो जिसमें सभी मसालों से भरी शीशियां, घी, तेल तथा पकाने के बर्तन हों।

भोजन पकाने के बाद भोजन परोसना सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है। भोजन दो प्रकार से परोसा जाता है-भारतीय शैली तथा विदेशी शैली।
भारतीय शैली में खाना थाली एवं कटोरियों में परोसकर प्रायः रसोईघर में चौकी पर रखा जाता है और व्यक्ति पटरे पर बैठकर खाता है। विदेशी शैली में खाना डोंगों में भरकर मेज़ पर लगाया जाता है और व्यक्ति इच्छानुसार स्वयं परोसकर खाता है।

प्रश्न 2.
रसोईघर के बर्तनों की धुलाई व सफ़ाई के उत्तम प्रबन्ध के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर-
जूठे तथा भोजन पकाए हुए बर्तनों को साफ़ करने के लिए एक निश्चित स्थान होना चाहिए। बर्तन साफ़ करने के केन्द्र के पास सिंक की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए। सिंक के पास एक ओर गंदे बर्तन तथा दूसरी ओर धुले बर्तन रखने के लिए शेल्फ होने चाहिएं। सिंक कभी कोने में नहीं होना चाहिए। इस केन्द्र में विम, छनी हुई राख, सर्फ, मिट्टी, ब्रश, स्पंज तथा झाडू आदि रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सब्ज़ियाँ तथा फलों के छिलकों के बिल्कुल नीचे ………….. तथा ……………. होते हैं।
उत्तर-
विटामिन, खनिज लवण।

प्रश्न 2.
……… सहित आटे का प्रयोग करना चाहिए इसमें विटामिन ‘बी’ होता है।
उत्तर-
चोकर।

प्रश्न 3.
श्वेतसार के कण पकाने पर फूल जाते हैं तथा किस रूप में परिवर्तित होते हैं?
उत्तर-
जिलेटिन।

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प्रश्न 4.
कैरोटीन …………. में घुलनशील नहीं है।
उत्तर-
जल।

प्रश्न 5.
अधिक गर्म करने पर शक्कर कैसी हो जाती है?
उत्तर-
काली।

प्रश्न 6.
गर्म करने से तरल प्रोटीन ……. रूप में बदल जाता है।
उत्तर-
ठोस।

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प्रश्न 7.
भोजन को …………….. सेंक पर पकाना चाहिए।
उत्तर-
मध्यम।

खाना बनाने के सिद्धान्त PSEB 7th Class Home Science Notes

  • सब्जियों और फलों के छिलकों के बिल्कुल नीचे ही विटामिन और खनिज लवण होते हैं।
  • अधिक देर तक खाना पकाने से भी विटामिन और खनिज लवण नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोजन उतनी देर तक ही पकाना
  • चाहिए जब तक वह गल कर पचने योग्य न हो जाए।
  • कुछ विटामिन और खनिज लवण पानी में घुल जाते हैं। इसलिए सब्जियों को धोने के बाद ही काटना चाहिए।
  • जिन लोगों को जुकाम, गला खराब, खांसी, फ्लू, फोड़े आदि हों उन्हें खाना पकाने का काम नहीं करना चाहिए।
  • खाना पकाते समय हाथ और नाखून हमेशा साफ़ होने चाहिए।
  • भोजन को हिलाते समय कड़छी या चम्मच का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • रसोईघर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगी होनी चाहिए ताकि मक्खी, मच्छर आदि अन्दर न आ सकें।
  • खाना पकाने वाले बर्तनों को प्रतिदिन इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  • जूठे बर्तनों को साफ़ बर्तनों से अलग रखना चाहिए।
  • जूठे बर्तनों को धोने के लिए गर्म पानी, साबुन या डिटरजेन्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।