PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र क्या है?

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र क्या है? Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र क्या है?

PSEB 11th Class Economics अर्थशास्त्र क्या है? Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
एडम स्मिथ द्वारा दी गई अर्थशास्त्र की परिभाषा दो।
अथवा
अर्थशास्त्र की धन सम्बन्धी परिभाषा लिखो।
उत्तर-
एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का पितामह कहा जाता है। एडम स्मिथ के अनुसार, “अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है।” (“Economics is a Science of wealth.’Adam Smith)

प्रश्न 2.
मार्शल द्वारा दी गई अर्थशास्त्र की परिभाषा दें।
अथवा
अर्थशास्त्र की भौतिक कल्याण सम्बन्धी परिभाषा दें।
उत्तर-
डॉक्टर मार्शल के अनुसार, “अर्थशास्त्र जीवन के साधारण कारोबार में मानवीय जाति की क्रियाओं का अध्ययन है। यह इस बात की पूछताछ करता है कि वह अपनी आय कैसे प्राप्त करता है तथा कैसे खर्च करता है। ऐसे एक ओर तो यह धन का विज्ञान है तथा दूसरी ओर जो अधिक महत्त्वपूर्ण है यह मनुष्य के अध्ययन का विषय है।”

प्रश्न 3.
अर्थशास्त्र के पिता कौन है ?
(a) एडम स्मिथ
(b) मार्शल
(c) रोबिन्स
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) एडम स्मिथ।

प्रश्न 4.
अर्थशास्त्र शब्द किस भाषा में से लिया गया है ?
(a) फ्रैंच
(b) लैटिन
(c) ग्रीक
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) ग्रीक।

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प्रश्न 5.
एडम स्मिथ की परिभाषा को ………… से सम्बन्धित परिभाषा कहा जाता है।
उत्तर-
धन।

प्रश्न 6.
मार्शल की परिभाषा धन से सम्बन्धित परिभाषा है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 7.
रॉबिन्स की परिभाषा दुर्लभता सम्बन्धी परिभाषा है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 8.
अर्थशास्त्र के अध्ययन की वह विधि जिसका सम्बन्ध परिवार तथा फ़र्म की समस्याओं के साथ होता है को …………… अर्थशास्त्र कहा जाता है।
उत्तर-
व्यष्टि।

प्रश्न 9.
अर्थशास्त्र के अध्ययन की वह विधि जिसका सम्बन्ध सामूहिक समस्याओं से होता है को …. अर्थशास्त्र कहा जाता है।
उत्तर-
समष्टि।

प्रश्न 10.
अर्थशास्त्र ……………….
(a) विज्ञान
(b) कला
(c) विज्ञान और कला
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) विज्ञान और कला।

प्रश्न 11.
अर्थशास्त्र में उपभोग, उत्पादन, विनिमय और वितरण के अध्ययन को अर्थशास्त्र की ….. कहा जाता है।
उत्तर-
विषय सामग्री।

प्रश्न 12.
आर्थिक क्रिया वह क्रिया है जिसका सम्बन्ध सभी प्रकार की वस्तुओं के उत्पादन, उपभोग तथा निवेश से होता है जो सीमित साधनों द्वारा असीमित आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए की जाती है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 13.
व्यष्टि अर्थशास्त्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत अध्ययन से सम्बन्धित है।

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प्रश्न 14.
समष्टि अर्थशास्त्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
राष्ट्र की समूची आर्थिक समस्याओं के अध्ययन को समष्टि अर्थशास्त्र कहते हैं।

प्रश्न 15.
अर्थशास्त्र का सम्बन्ध केवल धन से सम्बन्धित समस्याओं से होता है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 16.
अर्थशास्त्र का सम्बन्ध असीमित आवश्यकताओं और वैकलिप्क प्रयोग वाले सीमित साधनों से होता है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 17.
अर्थशास्त्र विज्ञान भी है और कला भी है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 18.
शुद्ध विज्ञान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
शुद्ध विज्ञान में कारण तथा परिणाम का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 19.
आदर्शमयी विज्ञान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
आदर्शमयी विज्ञान यह बताता है कि क्या होना चाहिए।

प्रश्न 20.
कला से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
कला से अभिप्राय सैद्धान्तिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप देना होता है।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
व्यष्टिगत अर्थशास्त्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
व्यष्टिगत अर्थशास्त्र (Micro Economics)-व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जैसे व्यक्तिगत उपभोगी की मांग, उपभोगी का सन्तुलन, एक फ़र्म तथा उद्योग का सन्तुलन, एक वस्तु तथा साधन का मूल्य निर्धारण आदि समस्याओं का अध्ययन व्यक्तिगत अर्थशास्त्र में किया जाता है। “Micro Economics deals with the parts of the problems.”

प्रश्न 2.
समष्टि अर्थशास्त्र से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
समष्टिगत अर्थशास्त्र (Macro Economics)-समष्टिगत अर्थशास्त्र में समूची अर्थ-व्यवस्था से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं का सामूहिक रूप से अध्ययन किया जाता है। राष्ट्रीय आय, कुल रोज़गार, कुल उत्पादन को निर्धारित करने वाले तत्त्वों, कुल मांग, कुल पूर्ति, उपभोग, कुल बचत, कुल निवेश आदि का अध्ययन समष्टिगत अर्थशास्त्र में किया जाता है। “Macro Economics deals with the averages and aggregates of the problems.”

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प्रश्न 3.
अर्थशास्त्र की धन सम्बन्धी परिभाषा लिखें।
उत्तर-
अठारहवीं शताब्दी से पहले अर्थशास्त्र का अध्ययन राजनीतिक अर्थव्यवस्था नामक विषय में होता था। एडम स्मिथ ने सर्वप्रथम ‘वैल्थ ऑफ नेशन्स’ नाम की पुस्तक में कहा कि अर्थशास्त्र धन का अध्ययन करता है। एडम स्मिथ ने कहा कि अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है। (Economics is a science of wealth.) इसलिए एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का पिता कहा जाता है।

प्रश्न 4.
मार्शल द्वारा दी गई अर्थशास्त्र की परिभाषा दें।
उत्तर-
अर्थशास्त्र को कटु आलोचनाओं से बचाने के लिए, मार्शल ने कहा कि अर्थशास्त्र के अध्ययन का विषय मनुष्य है न कि धन। मनुष्य प्रधान है तथा धन गौण । मार्शल ने अर्थशास्त्र की परिभाषा इस प्रकार दी, “अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय के सम्बन्ध में मानव जाति का अध्ययन है। यह व्यक्तिगत तथा सामाजिक कार्यों के उस भाग का अध्ययन करता है जिसका घनिष्ठ सम्बन्ध कल्याण प्रदान करने वाले भौतिक पदार्थों की प्राप्ति तथा उनका उपयोग करने से है।”

प्रश्न 5.
रॉबिन्स द्वारा दी गई अर्थशास्त्र की परिभाषा दें।
उत्तर-
मार्शल की परिभाषा काफ़ी देर तक चलती रही परन्तु 1932 में प्रो० रॉबिन्स ने अपनी पुस्तक ‘Principles of Economics’ में मार्शल की परिभाषा की आलोचना करते हुए एक नई परिभाषा को जन्म दिया जो अग्रलिखित प्रकार से है – “अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है जिसका सम्बन्ध असीम आवश्यकताओं तथा वैकल्पिक प्रयोग वाले सीमित साधनों से है।”

प्रश्न 6.
क्या अर्थशास्त्र विज्ञान है अथवा कला है ?
उत्तर-
1. अर्थशास्त्र विज्ञान है-विज्ञान किसी भी विषय के सिलसिलेवार अध्ययन को कहा जाता है। अर्थशास्त्र में हम उपभोग, उत्पादन, विनिमय तथा विभाजन का अध्ययन करते हैं जोकि एक सिलसिलेवार अध्ययन है इसलिए अर्थशास्त्र एक विज्ञान है। विज्ञान दो प्रकार का होता है
2. क्या अर्थशास्त्र कला है-कला का अर्थ है हम विज्ञान के नियमों को व्यावहारिक रूप दे सकें। अर्थशास्त्र के नियमों का प्रयोग जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए अर्थशास्त्र कला है।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अर्थशास्त्र की विकास सम्बन्धी परिभाषा दो।
उत्तर-
प्रो० रॉबिन्स द्वारा दी गई परिभाषा को विज्ञान की उपाधि मिल गई थी इसलिए अर्थशास्त्र को विज्ञान कहा जाता है। किन्तु यह परिभाषा अर्थशास्त्र का स्वरूप प्रकट नहीं करती। इसलिए अर्थशास्त्र की परिभाषा में विकास सिद्धान्त, राष्ट्रीय आय और रोज़गार को प्रभावित करने वाले तत्त्वों की व्याख्या नहीं की गई। इसलिए बेनहम, जे० एम० केन्ज़ ने विकास से सम्बन्धित परिभाषा दी है। प्रो० जे० एम० केन्ज़ के अनुसार, “अर्थशास्त्र में दुर्लभ साधनों के प्रबन्ध के बारे में और रोज़गार व आय के निर्धारक तत्त्वों के सम्बन्ध में अध्ययन करते हैं।”
(“’In Economics we study.the administration of scarce resources and the determinants of employment and income.”—J.M. Keynes)

प्रश्न 2.
व्यष्टिगत अर्थशास्त्र तथा समष्टिगत अर्थशास्त्र पर नोट लिखें।
उत्तर-
आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने अर्थशास्त्र के विषय-वस्तु से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं को दो भागों में बांटा है-

  1. व्यष्टिगत अर्थशास्त्र (Micro Economics)-व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जैसे व्यक्तिगत उपभोगी की मांग, उपभोगी का सन्तुलन, एक फ़र्म तथा उद्योग का सन्तुलन, एक वस्तु तथा साधन का मूल्य निर्धारण आदि समस्याओं का अध्ययन व्यक्तिगत अर्थशास्त्र में किया जाता है।
  2. समष्टिगत अर्थशास्त्र (Macro Economics)-समष्टिगत अर्थशास्त्र में समूची अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं का सामूहिक रूप से अध्ययन किया जाता है। राष्ट्रीय आय, कुल रोज़गार, कुल उत्पादन को निर्धारित करने वाले तत्त्वों, कुल मांग, कुल पूर्ति, उपभोग, कुल बचत, कुल निवेश आदि का अध्ययन समष्टिगत अर्थशास्त्र में किया जाता है।

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IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अर्थशास्त्र की धन सम्बन्धी परिभाषा की आलोचना सहित व्याख्या करें। (Critically examine wealth definition of Economics.)
उत्तर-
अठारहवीं शताब्दी से पहले अर्थशास्त्र का अध्ययन राजनीतिक अर्थव्यवस्था नामक विषय में होता था। एडम स्मिथ ने सर्वप्रथम वैल्थ ऑफ नेशन्स’ नाम की पुस्तक में कहा कि अर्थशास्त्र धन का अध्ययन करता है। एडम स्मिथ ने कहा कि अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है। (Economics is a science of wealth.) इसलिए एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का पिता कहा जाता है।

मुख्य तत्त्व (Main Features)-

  1. धन अर्थशास्त्र का केन्द्र बिन्दु है।
  2. आर्थिक मनुष्य की कल्पना।
  3. धन की क्रियाओं से सम्बन्धित मनुष्य का अध्ययन।
  4. धन को प्रथम स्थान दिया गया।

आलोचना (Criticism)-इस परिभाषा की कटु आलोचना की गई। लोगों ने धन प्राप्ति को अपना उद्देश्य मान लिया और धन ही उसका माध्य हो गया। धन की प्रधानता के कारण मनुष्य का स्थान गौण हो गया। धन प्राप्त करना ही एकमात्र लक्ष्य हो गया तथा इसके परिणामस्वरूप सारे समाज में निराशा तथा असन्तोष फैलने लगा। कार्लाइल तथा रस्किन आदि विद्वानों ने अर्थशास्त्र की कटु आलोचना की और इसे निकृष्ट व दुखदायी विज्ञान, कुबेर विज्ञान और सामाजिक अहित का विज्ञान कहा।

प्रश्न 2.
मार्शल की परिभाषा की समीक्षा कीजिए। (Evaluate Marshalls definition of Economics.)
उत्तर-
अर्थशास्त्र को कटु आलोचनाओं से बचाने के लिए, मार्शल ने कहा कि अर्थशास्त्र के अध्ययन का विषय मनुष्य है न कि धन। मनुष्य प्रधान है तथा धन गौण। मार्शल ने अर्थशास्त्र की परिभाषा इस प्रकार दी, “अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय के सम्बन्ध में मानव जाति का अध्ययन है। यह व्यक्तिगत तथा सामाजिक कार्यों के उस भाग का अध्ययन करता है जिसका घनिष्ठ सम्बन्ध कल्याण प्रदान करने वाले भौतिक पदार्थों की प्राप्ति तथा उनका उपयोग करने से है।” (“‘Economics is a study of making in the ordinary business of life, it examines that part of the individual and social action which is most closely connected with the attainment and with the use of material requisites of well being.”-Marshall)

मुख्य विशेषताएं (Main Features)

  1. मनुष्य के अध्ययन को महत्त्व।
  2. सामाजिक मनुष्य का अध्ययन।
  3. जीवन के साधारण व्यवसाय का सम्बन्ध मनुष्य के आर्थिक कार्यों से है।
  4. अर्थशास्त्र में केवल उन्हीं साधनों का अध्ययन किया जाता है जिनसे मनुष्य के कल्याण में वृद्धि होती है।
  5. अर्थशास्त्र में मनुष्य के भौतिक वस्तुओं से सम्बन्धित कार्यों का अध्ययन किया जाता है।
  6. अर्थशास्त्र विज्ञान तथा कला दोनों है।
  7. इस शास्त्र में सिर्फ वास्तविक मनुष्य का अध्ययन किया जाता है।

आलोचना (Criticism)-प्रो० रॉबिन्स ने भौतिक कल्याण सम्बन्धी परिभाषा की कड़ी आलोचना की, जैसे –

  • अर्थशास्त्र एक शुद्ध विज्ञान है तथा कल्याण से कोई सम्बन्ध नहीं।
  • अर्थशास्त्र मानव विज्ञान है केवल समाज में रहने वाले मनुष्यों का अध्ययन नहीं।
  • कल्याण की धारणा अनिश्चित है।
  • यह परिभाषा वर्गकारिणी तथा दोषपूर्ण है।
  • इस परिभाषा ने अर्थशास्त्र का क्षेत्र सीमित कर दिया है।

प्रश्न 3.
रॉबिन्स की परिभाषा की आलोचनात्मक व्याख्या करें। (Critically discuss Robbins definition of Economics.)
उत्तर-
मार्शल की परिभाषा काफ़ी देर तक चलती रही परन्तु 1932 में प्रो० रॉबिन्स ने अपनी पुस्तक ‘Principles of Economics, में मार्शल की परिभाषा की आलोचना करते हुए एक नई परिभाषा को जन्म दिया जो निम्नलिखित प्रकार से है :
“अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है जिसका सम्बन्ध असीम आवश्यकताओं तथा वैकल्पिक प्रयोग वाले सीमित साधनों से है।” (“Economics is a science which studies human behaviour as a relationship between ends and scarce means which have alternative uses.”-Robbins)

मुख्य विशेषताएं (Main Features)-

  1. असीमित आवश्यकताएं
  2. सीमित साधन
  3. साधनों के वैकल्पिक उपयोग
  4. निर्णय की समस्या।

यह परिभाषा वैज्ञानिक है। इससे अर्थशास्त्र का क्षेत्र व्यापक बन गया है। यह परिभाषा विश्लेषणात्मक मानी गई है। इस प्रकार रॉबिन्स की परिभाषा में बहुत गुण हैं।

आलोचना (Criticism)-

  • अर्थशास्त्र साधनों के साथ-साथ उद्देश्य से भी सम्बन्धित है।
  • अर्थशास्त्र केवल विज्ञान ही नहीं कला भी है।
  • यह परिभाषा जटिल है।
  • यह परिभाषा बेकारी, विकास, निर्धनता जैसी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देती।
  • इस परिभाषा से अर्थशास्त्र का क्षेत्र अनिश्चित बन गया है।
  • इसमें कल्याण तथा मानवीय तत्त्वों की कमी है।

प्रश्न 4.
अर्थशास्त्र के क्षेत्र को स्पष्ट करो। (Explain the scope of Economics.)
उत्तर-
अर्थशास्त्र के क्षेत्र को दो हिस्सों में बांट कर स्पष्ट किया जा सकता है:
(A) अर्थशास्त्र का विषय-वस्तु (Subject-Matter of Economics) – अर्थशास्त्र के विषय-वस्तु के बारे में अर्थशास्त्रियों के अलग-अलग विचार हैं। विचारधारा के मतभेद के आधार पर श्रीमती वूटन ने कहा है, “जहां छ: अर्थशास्त्री इकट्ठे होते हैं वहां सात विचारधाराएं होती हैं।” (“Whenever Six Economist gather, there are Seven opinion.”)
अर्थशास्त्र के विषय का अर्थ यह है कि इसके अध्ययन की सामग्री (Matter) क्या है? अर्थात् किन बातों का अध्ययन किया जाता है।
अर्थशास्त्र के पिता एडम स्मिथ (Adam Smith) के अनुसार, “अर्थशास्त्र का विषय-वस्तु धन से सम्बन्धित क्रियाओं से है।” अर्थात् धन की प्रकृति और कारणों की जांच से है।

डॉ० मार्शल (Dr. Marshall) और उनके समर्थकों के अनुसार अर्थशास्त्र में हम मनुष्य के भौतिक कल्याण (Material Welfare) का अध्ययन करते हैं। प्रो० रॉबिन्स (Prof. Robbins) के अनुसार, “हम अर्थशास्त्र में इस बात का अध्ययन करते हैं कि मनुष्य अपने सीमित साधनों से अपनी असीमित आवश्यकताओं को कैसे पूरा करता है।”

प्रो०-“बिन्स के अनुसार अर्थशास्त्र के विषय-वस्तु का सम्बन्ध मनुष्यों के उन यत्नों से है जो अपनी असीमित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए साधनों की प्राप्ति के लिए यत्न करते हैं। प्रो० चैपमैन के अनुसार, “अर्थशास्त्र का विषय वस्तु धन के उपभोग, उत्पादन, विनिमय और विभाजन का अध्ययन है।”
(“’Economics is that branch of knowledge which studies the consumption, production, exchange and distribution of wealth.”)
1. उपभोग (Consumption)-उपभोग का अर्थ आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रयोग से होता है। अर्थशास्त्र का वह भाग जिसमें आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने का यत्न किया जाता है, उपभोग कहलाता है। इसमें उपभोग और उससे सम्बन्धित नियमों का अध्ययन किया जाता है।

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2. उत्पादन (Production)-उत्पादन का अर्थ वस्तु या सेवा में तुष्टिगुण या मूल्य को पैदा करना है। इस भाग में उत्पादन के साधनों, भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यमी तथा उत्पादन के नियमों का अध्ययन किया जाता है।

3. विनिमय (Exchange)-विनिमय का अर्थ वस्तुओं तथा सेवाओं द्वारा विनिमय (Barter Exchange) या इसका मुद्रा द्वारा विनिमय (Money Exchange) से है। इस भाग में बाज़ार की किस्में, अलग-अलग बाजार स्थितियों में कीमत निर्धारण, मुद्रा, बैंकिंग, साख, व्यापार आदि विषयों का अध्ययन किया जाता है।

4. विभाजन (Distribution)-उत्पादन, विभिन्न उत्पादन के साधनों के सुमेल का परिणाम है। इस प्रकार विभाजन है राष्ट्रीय आय का उत्पादन के साधनों में सेवाओं के बदले में दिया गया इनाम। इस भाग में भूमि के किराए, मज़दूरों की मज़दूरी, पूंजी का ब्याज, उद्यमी के लाभ के निर्धारण से सम्बन्धित नियमों का अध्ययन किया जाता है।

(B) अर्थशास्त्र की प्रकृति (Nature of Economics) –
अर्थशास्त्र की प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए इस बात का अध्ययन किया जाता है कि अर्थशास्त्र विज्ञान है अथवा कला?
1. अर्थशास्त्र विज्ञान है-विज्ञान किसी भी विषय के सिलसिलेवार अध्ययन को कहा जाता है। अर्थशास्त्र में हम उपभोग, उत्पादन, विनिमय तथा विभाजन का अध्ययन करते हैं जोकि एक सिलसिलेवार अध्ययन है इसलिए अर्थशास्त्र एक विज्ञान है। विज्ञान दो प्रकार का होता है

  • वास्तविक विज्ञान (Positive Science)-अर्थशास्त्र के नियम शुद्ध विज्ञानों की तरह हैं जिनमें कारण तथा परिणाम का सम्बन्ध स्पष्ट किया जाता है जैसे किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तो उसकी माँग कम हो जाती है, यह एक वैज्ञानिक नियम है। प्रो० रॉबिन्स के अनुसार, “अर्थशास्त्र का काम खोज करना और व्यवस्था करना है, समर्थन करना या आलोचना करना नहीं।”
  • अर्थशास्त्र आदर्शमयी विज्ञान है-आदर्शमयी विज्ञान के अधीन इस बात का अध्ययन किया जाता है कि क्या होना चाहिए ? (What ought to be ?) अर्थशास्त्र में हम केवल बेरोज़गारी, ग़रीबी, कीमतों आदि समस्याओं का अध्ययन ही नहीं करते। इस बात का अध्ययन भी करते हैं कि इन समस्याओं को कैसे हल किया जाना चाहिए। 2. क्या अर्थशास्त्र कला है-कला का अर्थ है हम विज्ञान के नियमों को व्यावहारिक रूप दे सकें। अर्थशास्त्र के नियमों का प्रयोग जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए अर्थशास्त्र कला है।

प्रश्न 5.
अर्थशास्त्र का महत्त्व स्पष्ट करें। (Explain the importance of Economics.)
उत्तर-
प्रत्येक व्यक्ति को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ता है। सीमित साधनों द्वारा अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त करने के लिए अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों का पालन न केवल व्यक्ति कर के लिए एवं समाज के लिए भी लाभकारी होता है। अर्थशास्त्र से प्राप्त होने वाले लाभ इस प्रकार हैं –
1. उपभोगियों के लिए महत्त्व (Importance for Consumers)-प्रत्येक व्यक्ति वस्तुओं तथा सेवाओं की खरीद करते समय अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों का पालन करके अपनी सीमित आय द्वारा अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त कर सकता है। इसलिए अर्थशास्त्र का अध्ययन हर व्यक्ति तथा गृहस्थ के लिए ज़रूरी है।

2. उत्पादकों के लिए महत्त्व (Importance for Producers)-प्रत्येक उत्पादक अपने लाभ को अधिकतम करने की चेष्टा करता है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अर्थशास्त्र का ज्ञान आवश्यक है। अर्थशास्त्र के सिद्धान्त स्पष्ट करते हैं कि आय को अधिकतम करके तथा लागत को कैसे कम करके अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

3. व्यापार में महत्त्व (Importance in Trade)- अर्थशास्त्र का अध्ययन व्यापार के लिए भी महत्त्वपूर्ण होता है। अर्थशास्त्र के सिद्धान्त स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्दर तथा विदेशों के साथ व्यापार करना किन हालतों में लाभदायक होता है। इस प्रकार अर्थशास्त्र विश्व के सारे देशों के लिए तुलनात्मक लागत लाभ के सिद्धान्त अनुसार उत्पादन करने के लिए प्रेरित करता है।

4. सरकार के लिए महत्त्व (Importance for the Government)-अर्थशास्त्र में ऐसे सिद्धान्त हैं जिन के द्वारा प्रत्येक देश की सरकार अपनी आय तथा व्यय को निर्धारण करती है। कर कैसे लगाए जाएं, करों से प्राप्त और किस प्रकार खर्च किया जाए जिस द्वारा सामाजिक कल्याण में वृद्धि हो। इस प्रकार अर्थशास्त्र देश की सरकार के लिए भी महत्त्वपूर्ण होता है।

5. कीमत निर्धारण में महत्त्व (Importance in Price Determination) – अर्थशास्त्र द्वारा प्रत्येक वस्तु की कीमत निर्धारण करने के लिए सिद्धान्त दिए गए हैं। वस्तु की माँग तथा पूर्ति द्वारा कीमत निर्धारण होती है। जब कभी वस्तु की माँग में वृद्धि होती है तो उस वस्तु की कीमत बढ़ जाती है। इस प्रकार वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमत निर्धारण में भी अर्थशास्त्र लाभकारी होता है।

6. अधिकतम कल्याण (Maximum Welfare) – अर्थशास्त्र का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति तथा समाज के कल्याण को अधिकतम करना होता है। प्रत्येक व्यक्ति तथा समाज सीमित साधनों का प्रयोग इस प्रकार करना चाहता है जिसके द्वारा अधिकतम सामाजिक कल्याण प्राप्त किया जा सके। इस प्रकार अर्थशास्त्र असीमित आवश्यकताओं को पूरा करने वाले, सीमित साधनों जिनके विभिन्न उपयोग होते हैं, के चुनाव का अध्ययन है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र क्या है?

7. विद्यार्थियों के लिए महत्त्व (Importance for Students)-अर्थशास्त्र विद्यार्थियों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। एक अर्थव्यवस्था में बहुत-सी आर्थिक समस्याएँ होती हैं जैसा कि बेरोज़गारी, निर्धनता तथा ग्रामीण क्षेत्र की समस्याएँ होती हैं। इन समस्याओं को समझ कर अर्थशास्त्र के विद्यार्थी उनका उचित हल देने में सफल हो जाते हैं। अर्थशास्त्र का अध्ययन व्यावहारिक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्त्वपूर्ण है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 35 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

Punjab State Board PSEB 12th Class Economics Book Solutions Chapter 35 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Economics Chapter 35 पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति

PSEB 12th Class Economics पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के मुख्य कर साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
पंजाब सरकार की आय के मुख्य साधनों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है कर साधन-इन साधनों में बिक्री कर, उत्पादन कर, भूमि लगान, स्टैम्प ड्यूटी तथा रजिस्ट्री, मोटर गाड़ियों पर कर, विद्यत कर, यात्रा कर इत्यादि शामिल किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार के विकासवादी व्यय की दो मुख्य मदों का वर्णन करें।
उत्तर-
कृषि (Agriculture)-कृषि, सहकारिता तथा पशुपालन की उन्नति के लिए सरकार व्यय करती है। वर्ष 2020-21 में इस मद पर ₹ 13267 करोड़ व्यय होने का अनुमान लगाया गया।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार के गैर-विकासवादी व्यय की मदों का वर्णन करें।
उत्तर-
राज्य प्रबन्ध (Administration)-पंजाब सरकार को राज्य प्रबन्ध, पुलिस तथा शान्ति स्थापित करने के लिए व्यय करना पड़ता है। वर्ष 2020-21 में इस मद पर व्यय करने के लिए ₹ 6954 करोड़ रखे गए।

प्रश्न 4.
पंजाब में सरकार की आय के मुख्य साधन बिक्री कर, उत्पादन कर, भूमि लगान स्टैम्प ड्यूटी आदि
उत्तर-
सही।

प्रश्न 5.
पंजाब सरकार की आय व्यय से अधिक है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 6.
पंजाब सरकार द्वारा विकासवादी व्यय ……………….. पर किया जाता है।
(a) शिक्षा
(b) कृषि
(c) स्वास्थ्य
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार की कुल आय ………. करोड़ रुपए होने का अनुमान था।
(a) 151048
(b) 152048
(c) 153048
(d) 164048
उत्तर-
(c) 153048

प्रश्न 8.
सन् 2020-21 में पंजाब सरकार का कुल व्यय ₹ …………. करोड़ होने का अनुमान था।
(a) 152805
(b) 162805
(c) 172805
(d) 1828808
उत्तर-
(a) 152805

प्रश्न 9.
पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति सन्तोषजनक है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 10.
पंजाब सरकार को सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर कम व्यय करना चाहिए।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 11.
पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सुझाव दें।
उत्तर-
पंजाब को विकासवादी व्यय अधिक करना चाहिए और ग्रांटें देनी बन्द करनी चाहिए।

प्रश्न 12.
पंजाब सरकार पर 2020-21 का कुल ऋण ₹ 20 लाख करोड़ था।
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के दो कर साधनों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को करों द्वारा तथा गैर-कर साधनों द्वारा आय प्राप्त होती है। वर्ष 2020-21 में लगभग ₹ 153048 करोड़ की कुल आय प्राप्त होने का अनुमान था। पंजाब सरकार के कर साधन निम्नलिखित हैं-

  1. बिक्री कर (Sale Tax)-बिक्री कर पंजाब सरकार की आय का मुख्य साधन है। यह कर वस्तुओं तथा सेवाओं की बिक्री के समय लगाया जाता है। वर्ष 2020-21 में बिक्री द्वारा ₹ 5575 करोड़ की आय होने की सम्भावना थी।
  2. राज्य उत्पादन कर (State Excise Duty)-यह कर नशीले पदार्थों पर लगाया जाता है और 2020-21 में इस कर से ₹ 6550 करोड़ प्राप्त होने की संभावना थी।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार की आय के दो गैर-कर साधनों की व्याख्या करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को गैर-कर साधनों द्वारा भी आय प्राप्त होती है। इसके मुख्य साधन निम्नलिखित हैं-

  • साधारण सेवाएं (General Services)-पंजाब द्वारा साधारण सेवाओं जैसे कि पुलिस, जेल, लोक सेवा से प्राप्त होती है। इस प्रकार ₹ 6754 करोड़ की आय पंजाब सरकार को प्राप्त होने की सम्भावना थी।
  • आर्थिक विकास (Economics Services)-आर्थिक सेवाओं का अर्थ सिंचाई, भूमि सुधार, पशु पालन, मछली पालन, यातायात इत्यादि सेवाओं से प्राप्त होने वाली आय से होता है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार को आर्थिक सेवाओं द्वारा ₹ 898 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार के दो विकास व्यय बताएं।
उत्तर-
विकास व्यय (Development Expenditure)-विकास व्यय में मुख्यतः शिक्षा, स्वास्थ्य उद्योग, सड़कें, विद्युत् इत्यादि पर व्यय को शामिल किया जाता है।
1. शिक्षा (Education)-पंजाब सरकार द्वारा स्कूलों, कॉलेजों तथा तकनीकी संस्थाओं के संचालन पर व्यय किय जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ₹ 13037 करोड़ व्यय किए जाने का अनुमान था।

2. स्वास्थ्य सुविधाएं (Medical Facilities)-पंजाब सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसके लिए गांवों में प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र, शहरों तथा कस्बों में अस्पताल स्थापित किए गए हैं। 2020-21 में स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय करने के लिए ₹ 4532 करोड़ रखे गए थे।

प्रश्न 4.
पंजाब सरकार के दो गैर विकास व्यय बताएं।
उत्तर-
गैर-विकास व्यय (Non-Development Expenditure)-पंजाब सरकार को गैर-विकास व्यय जैसे कि राज्य प्रशासन, पुलिस, कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन देने पर काफ़ी धन व्यय करना पड़ता है। इसको गैर-विकास व्यय कहा जाता है।

  1. राज्य प्रशासन (Civil Administration)-पंजाब सरकार प्रशासन पर व्यय करती है जैसे कि पुलिस, सरकारी कर्मचारी तथा मन्त्रियों के लिए रखे गए कर्मचारियों पर काफ़ी व्यय करना पड़ता है। 2020-21 में राज्य प्रशासन पर पंजाब सरकार ने ₹ 27629 करोड़ व्यय किए।
  2. ऋण सेवाएं (Debts Services)-पंजाब सरकार द्वारा प्राप्त किए गए ऋण पर ब्याज दिया जाता है। यह ऋण केन्द्र सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक से प्राप्त किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ब्याज के रूप में ₹ 19075 करोड़ व्यय करने का अनुमान था।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के कर साधनों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को करों द्वारा तथा गैर-कर साधनों द्वारा आय प्राप्त होती है। वर्ष 2017-18 में लगभग ₹ 60080 करोड़ की कल आय प्राप्त होने का अनमान था। पंजाब सरकार के कर साधन निम्नलिखित हैं –
1. जी० एस० टी० (G.S.T.)-बिक्री कर पंजाब सरकार की आय का मुख्य साधन है। यह कर वस्तुओं तथा सेवाओं की बिक्री के समय लगाया जाता है। वर्ष 2020-21 में बिक्री द्वारा ₹ 5578 करोड़ की आय होने की सम्भावना थी जोकि कुल आय का 39.56% भाग थी।

2. राज्य उत्पादन कर (Excise Duty)-इस कर को आबकारी कर भी कहा जाता है। यह कर नशीली वस्तुओं जैसे कि अफीम, शराब, भांग इत्यादि पर लगाया जाता है। आबकारी कर द्वारा 2020-21 में ₹ 6250 करोड़ की आय होने की सम्भावना थी जोकि कुल आय का 9.17% भाग थी।

3. केन्द्रीय करों में भाग (Share from Central Taxes)-कुछ कर केन्द्र सरकार द्वारा लगाए जाते हैं जैसे कि आय कर, उत्पादन कर, मृत्यु कर इत्यादि। इन करों में से राज्य सरकार को भाग दिया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार को केन्द्रीय करों से ₹ 14021 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

4. भूमि लगान (Land Revenue)-भूमि के मालिए द्वारा भी सरकार को आय प्राप्त होती है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार को इस कर द्वारा ₹ 78 करोड़ की आय होने का अनुमान था।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार के विकासवादी व्यय की संक्षेप व्याख्या करो।
उत्तर-
पंजाब सरकार द्वारा किए जाने वाले व्यय को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है –
(A) विकासवादी व्यय
(B) गैर-विकासवादी व्यय।

विकासवादी व्यय की मुख्य मदें इस प्रकार हैं-
1. शिक्षा (Education)-पंजाब सरकार को शिक्षा अर्थात् स्कूल, कॉलेज तथा तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए व्यय करना पड़ता है। प्राइवेट स्कूलों तथा कॉलेजों को आर्थिक सहायता दी जाती है। वर्ष 2020-21 में शिक्षा पर ₹ 13037 करोड़ व्यय होने का अनुमान था।

2. स्वास्थ्य सुविधाएं (Medical Facilities)-लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पंजाब सरकार को व्यय करना पड़ता है। गांवों तथा शहरों में बीमार लोगों को इलाज की सुविधाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2021 में स्वास्थ्य सुविधाओं पर पंजाब सरकार ने ₹ 4532 करोड़ व्यय करने के लिए रखे थे।

3. कृषि, सहकारिता तथा पशु-पालन (Agriculture, co-operation and Animal Husbandary) – पंजाब सरकार द्वारा कृषि के विकास के लिए बहुत व्यय किया जाता है। किसानों को आधुनिक औजार, बढ़िया बीज तथा रासायनिक उर्वरक प्रदान की जाती है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार ने ₹ 13067 करोड़ कृषि के विकास पर व्यय करने के लिए रखे थे।

4.सिंचाई तथा बहुमुखी योजनाएं (Irrigation and Multipurpose Projects)-पंजाब में सिंचाई की तरफ अधिक ध्यान दिया जाता है। इसलिए पंजाब सरकार सिंचाई तथा बहुमुखी योजनाओं पर बहुत व्यय करती है। इसलिए नहरें, ट्यूबवैल, विद्युत् घरों के विकास पर काफ़ी व्यय किया जाता है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार ने ₹ 2510 करोड व्यय करने के लिए रखे थे।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार की आय के गैर-कर साधनों की व्याख्या करें।
उत्तर-
पंजाब सरकार को गैर-कर साधनों द्वारा भी आय प्राप्त होती है। इसके मुख्य साधन निम्नलिखित हैं –
1. साधारण सेवाएं (General Services)-पंजाब द्वारा साधारण सेवाओं जैसे कि पुलिस, जेल, लोक सेवा कमीशन इत्यादि से प्राप्त होती है। वर्ष 2020-21 में कुल आय का ₹ 6754 करोड़ साधारण सेवाओं से प्राप्त होने का अनुमान था।

2. आर्थिक विकास (Economics Services)-आर्थिक सेवाओं का अर्थ सिंचाई, भूमि सुधार, पशु पालन, मछली पालन, यातायात इत्यादि सेवाओं से प्राप्त होने वाली आय से होता है। वर्ष 2020-21 में पंजाब सरकार को आर्थिक सेवाओं द्वारा ₹ 898 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

3. ऋण सेवाएं, लाभांश तथा लाभ (Debt Services, Dividends and Profits)-पंजाब सरकार को ऋण देने के बदले में ब्याज प्राप्त होता है। यह ऋण नगर पालिकाओं अथवा व्यक्तियों को दिया जाता है। इससे सरकार को ब्याज प्राप्त होता है। पंजाब सरकार को 2020-21 में इस मद द्वारा ₹ 5.2 करोड़ की आय प्राप्त होने की सम्भावना थी।

4. केन्द्रीय सरकार से प्राप्त सहायता (Aid from central Government)-राज्य सरकार को केन्द्रीय सरकार से सहायता प्राप्त होती है जोकि योजनाओं को लागू करने पर व्यय की जाती है। पंजाब सरकार को वर्ष 2020-21 में केन्द्र सरकार से ₹ 30113 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

IV. दीर्य उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब सरकार की आय के मुख्य साधन तथा व्यय की मदों का वर्णन करें।
(Explain the main sources of Revenue and Heads of Expenditure of the Punjab Government.)
उत्तर-
पंजाब सरकार की आय के मुख्य साधन तथा व्यय की मदों का विवरण इस प्रकार है-
आय के मुख्य साधन (Main Sources of Revenue) –
पंजाब सरकार ने बजट 2020-21 के अनुसार पंजाब की कुल आय ₹ 153048 करोड़ होने का अनुमान था तथा कुल व्यय का अनुमान ₹ 154805 करोड़ था। पंजाब सरकार की आय के ढांचे (Pattern) को हम अग्रलिखित अनुसार स्पष्ट कर सकते हैं-
अनुसार स्पष्ट कर सकते हैं-
1. बिक्री कर (Sales Tax)- यह कर पंजाब सरकार की आय का मुख्य साधन है। इसको वस्तुओं की खरीदबेच के समय लगाया जाता है। इसको अप्रत्यक्ष कर कहते हैं। इसका अधिभार निर्भर लोगों पर अधिक पड़ता है। 2020-21 के बजट में इस कर से आय का अनुमान ₹ 5575 करोड़ था।

2. राज्य उत्पादन कर (State Excise Tax)-इसको आबकारी कर भी कहा जाता है। राज्य सरकारों की आय का यह एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। यह कर नशीले पदार्थों जैसे कि शराब, अफीम, भांग, चरस इत्यादि पर लगाया जाता है। इस कर से 2020-21 में पंजाब सरकार को ₹ 6250 करोड़ की आय होने का अनुमान था।

3. भूमि मालिया (Land Revenue)-भूमि मालिए को मालगुजारी भी कहा जाता है। यह कर किसानों पर लगाया जाता है। प्रत्येक भूमि के स्वामी को अपनी भूमि के अनुसार मालिया देना पड़ता है। मालिए की दर समय-समय पर परिवर्तित की जाती है। 2020-21 में इससे ₹ 78 करोड़ की आय होने का अनुमान था।

4. स्टैंप ड्यूटी तथा रजिस्ट्रेशन (Stamp Duty and Registration) यह कर मुकद्दमेबाजी द्वारा एकत्रित किया जाता है। जब कोई मनुष्य कोई निवेदन देता है तो इस पर स्टैम्प लगाई जाती है, इसको कोर्ट फीस कहते हैं तथा रजिस्ट्री करवाते समय सरकार को फीस देनी पड़ती है। यह भी सरकार की आय का एक महत्त्वपूर्ण साधन होता है। 2020-21 में पंजाब सरकार को इससे ₹ 2625 करोड़ की आय होने का अनुमान था।

5. मोटर गाड़ियों पर कर (Tax on Vehicles)- राज्य में चलने वाली कारों, ट्रकों, ट्रैक्टरों, स्कूटरों इत्यादि पद कर लगाया जाता है। इसके द्वारा भी सरकार को आय प्राप्त होती है। 2020-21 में इससे ₹ 2376 करोड़ की आय होने का अनुमान है।

6. विद्युत् कर (Electricity Duty)-पंजाब सरकार विद्युत् करने वालों पर कर लगाती है। इस कर द्वारा 2020-21 में पंजाब सरकार को ₹ 2915 करोड़ आय होने का अनुमान है।

7. केन्द्रीय करों में भाग (Share in Central Taxes)-केन्द्रीय सरकार बहुत से कर लगाती है जैसे कि आय कर, उत्पादन कर, मृत्यु कर इत्यादि। इन करों के द्वारा जो आय प्राप्त होती है इसका कुछ भाग राज्य सरकारों को विभाजित किया जाता है। पंजाब सरकार को 2020-21 में केन्द्रीय करों से ₹ 14021 करोड़ की आय प्राप्त होने का अनुमान था।

8. केन्द्र सरकार से सहायता (Aid from Central Government) – केन्द्र सरकार समय-समय पर राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करती है। 2020-21 में पंजाब सरकार को ₹ 30133 करोड़ की सहायता प्राप्त होने का अनुमान था।

9. अन्य साधन (Other Sources)-आय के कर साधनों के अतिरिक्त गैर-कर साधन भी हैं जिनके द्वारा पंजाब सरकार को आय प्राप्त होती है जैसे कि ऋण सुविधाएं, साधारण सेवाएं, आर्थिक सेवाएं, लाभांश तथा लाभ इत्यादि द्वारा भी पंजाब सरकार को आय प्राप्त होती है। सामाजिक सेवाओं द्वारा ₹ 1466 करोड़, ब्याज प्राप्ति, लाभ तथा लाभांश द्वारा ₹ 398 करोड़ आय होने का अनुमान था। G.S.T. द्वारा ₹ 15659 करोड़ की आय प्राप्त होने की संभावना थी।

व्यय की मुख्य मदें (Main Heads of Expenditure)
पंजाब सरकार के व्यय के ढांचे को दो भागों में विभाजित करके स्पष्ट किया जा सकता है –
A. विकास 274 (Development Expenditure)
B. गैर-विकास व्यय (Non-Development Expenditure)

A. विकास व्यय (Development Expenditure)-विकास व्यय में मुख्यतः शिक्षा, स्वास्थ्य उद्योग, सड़कें, विद्युत् इत्यादि पर व्यय को शामिल किया जाता है।
1. शिक्षा (Education)-पंजाब सरकार द्वारा स्कूलों, कॉलेजों तथा तकनीकी संस्थाओं के संचालन पर व्यय किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ₹ 13267 करोड़ व्यय किए जाने का अनुमान था।

2. स्वास्थ्य सुविधाएं (Medical Facilities)-पंजाब सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसके लिए गांवों में प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र, शहरों तथा कस्बों में अस्पताल स्थापित किए गए हैं। 2020-21 में स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय करने के लिए ₹ 4532 करोड़ रखे गए थे।

3. कृषि तथा ग्रामीण विकास (Agriculture & Rural Development)-पंजाब का मुख्य व्यवसाय कृषि है। सरकार द्वारा कृषि के विकास के लिए व्यय किया जाता है। किसानों को आधुनिक औज़ार, बीज तथा रासायनिक उर्वरक प्रदान किए जाते हैं। इसके लिए 2020-21 में ₹ 6547 करोड़ व्यय का अनुमान लगाया गया तथा ग्रामीण विकास पर ₹ 678 करोड़ व्यय होने का अनुमान था।

4. सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण (Social Security and Welfare)- पंजाब सरकार सामाजिक सुरक्षा तथा लोगों के कल्याण के लिए भी व्यय करती है। अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों तथा निर्धन लोगों को बुढ़ापा पेंशन दी जाती है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण पर व्यय करने के लिए ₹ 4728 करोड़ रखे गए थे।

5. उद्योग तथा खनिज (Industries and Minerals) पंजाब सरकार छोटे तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को सुविधाएं प्रदान करती है। इन उद्योगों को कम कीमत पर प्लाट, मशीनें, कच्चा माल तथा विद्युत् आपूर्ति की जाती है। सरकार उद्योगों के माल की बिक्री का प्रबन्ध भी करती है। 2020-21 में उद्योगों तथा खनिज पर ₹ 2473 करोड़ व्यय करने का अनुमान था।

B. गैर-विकास व्यय (Non-Development Expenditure)-
पंजाब सरकार को गैर-विकास व्यय जैसे कि राज्य प्रशासन, पुलिस, कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन देने पर काफ़ी धन व्यय करना पड़ता है। इसको गैर-विकास व्यय कहा जाता है।
1. राज्य प्रशासन (Civil Administration)-पंजाब सरकार प्रशासन पर व्यय करती है जैसे कि पुलिस, सरकारी कर्मचारी तथा मन्त्रियों के लिए रखे गए कर्मचारियों पर काफ़ी व्यय करना पड़ता है। 2020-21 में राज्य प्रशासन पर पंजाब सरकार ने ₹ 24639 करोड़ व्यय किए गए।

2. ऋण सेवाएं (Debts Services)-पंजाब सरकार द्वारा प्राप्त किए गए ऋण पर ब्याज दिया जाता है। यह ऋण केन्द्र सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक से प्राप्त किया जाता है। 2020-21 में पंजाब सरकार द्वारा ब्याज के रूप ₹ 19075 करोड़ व्यय करने का अनुमान था।

3. कर वसूली पर व्यय (Direct Demand on Revenue) – पंजाब सरकार द्वारा बहुत से कर लगाए जाते हैं जैसे कि बिक्री कर, राज्य उत्पादन कर, मनोरंजन कर इत्यादि। इन करों को एकत्रित करने के लिए सरकार को व्यय करना पड़ता है। 2020-21 में करों को एकत्रित करने के लिए ₹ 1800 करोड़ व्यय होने का अनुमान था। .

4. पेंशन तथा अन्य सेवाएं (Pension and other services)-पंजाब सरकार द्वारा पेंशन तथा अन्य सेवाएं प्रदान करने पर व्यय किया जाता है। 2020-21 में ₹ 122067 करोड़ पेंशन तथा अन्य सेवाओं पर व्यय होने का अनुमान था।

PSEB 11th Class Economics Book Solutions Guide in Punjabi English Medium

Punjab State Board Syllabus PSEB 11th Class Economics Book Solutions Guide Pdf in English Medium and Punjabi Medium are part of PSEB Solutions for Class 11.

PSEB 11th Class Economics Guide | Economics Guide for Class 11 PSEB

Economics Guide for Class 11 PSEB | PSEB 11th Class Economics Book Solutions

PSEB 11th Class Economics Book Solutions in Hindi Medium

PSEB 11th Class Economics Book Solutions in English Medium

  • Chapter 1 What is Economics?
  • Chapter 2 Micro and Macro Economics
  • Chapter 3 Central Problems of an Economy
  • Chapter 4 Consumer’s Equilibrium
  • Chapter 5 Demand
  • Chapter 6 Price Elasticity of Demand
  • Chapter 7 Meaning of Production
  • Chapter 8 Concepts of Costs
  • Chapter 9 Concepts of Revenue
  • Chapter 10 Producer’s Equilibrium
  • Chapter 11 Supply & Price Elasticity of Supply
  • Chapter 12 Forms of Market
  • Chapter 13 Price Determination Under Perfect Competition: Equilibrium Price
  • Chapter 14 Meaning, Scope and Importance of Statistics in Economics
  • Chapter 15 Primary and Secondary Data
  • Chapter 16 Census and Sample Methods
  • Chapter 17 Organisaiton of Data
  • Chapter 18 Presentation of Data With Tables – Tabulation
  • Chapter 19 Diagrammatic Presentation
  • Chapter 20 Graphic Presentation
  • Chapter 21 Arithmetic Line Graphs : Time Series
  • Chapter 22 Measures of Central Tendency – Arithmetic Mean
  • Chapter 23 Measures of Central Tendency – Median
  • Chapter 24 Measures of Central Tendency – Mode
  • Chapter 25 Measures of Dispersion
  • Chapter 26 Man Power and Physical Resources of Punjab
  • Chapter 27 Agriculture Development of Punjab Since 1966
  • Chapter 28 Industrial Development of Punjab Since 1966
  • Chapter 29 Financial Position of Punjab Government

PSEB 11th Class Economics Syllabus

Class – XI (Pb.)
Economics
Time Allowed: 3 Hours

Theory: 80 Marks
Internal Assessment: 20 Marks
Marks Total: 100 Marks

Part – A
Introductory Micro Economics

Unit 1 Introduction
What is Economics? Definitions of Economics (Wealth, Material Welfare, Scarcity, and Growth Definitions). Economic Activities. Nature of Economics, Economic Policies, Economic Systems. Positive and Normative economics. Meaning of Microeconomics and Macroeconomics, Difference and interdependence between Micro and Macro Economics. Scope, Importance, subject matter, and limitations of Micro Economics.

What is an economy? Central problems of an economy: what, how, and for whom to produce. Production Possibility Curve, the slope of production possibility curve, the concept of opportunity cost, and marginal opportunity cost. Shifts and rotations of production possibility curve. Solution of various central problems with production possibility curve.

Unit 2 Consumer’s Equilibrium and Theory of Demand
Consumer’s equilibrium – meaning of consumer’s equilibrium, the meaning of utility, and various types of utility and their inter relationship. Law of diminishing marginal utility and Law of Equi-Marginal utility. Conditions of consumer’s equilibrium using marginal utility analysis in case of one and two commodities.

Theory of Demand: Meaning, types of demand, Demand schedule, Demand Curve and its slope, Law of Demand-its assumptions and exceptions. Determinants of demand. Movement along and shifts in the demand curve.

Price elasticity of demand – Meaning, degrees of price elasticity of demand, factors affecting price elasticity of demand; measurement of price elasticity of demand with percentage method and numerical.

Unit 3 Producer Behaviour and Supply
Theory of Production: Meaning of Production and production function. concepts of total product, Average Product, and Marginal Product. Concept of short Run and long run in production and laws of return to a variable factor and return to scale. Economies and Diseconomies of scale.

Theory of Cost: Meaning and types of cost. Short-run costs-total cost, total fixed cost, total variable cost; Average cost; Average fixed cost, average variable cost, and marginal cost. Relationship between various types of cost. Long-run cost curves.

Theory of Supply: Meaning and types. Supply schedule and Supply Curve and its slope. Determinants of supply. Movements along and shifts in the supply curve. Price elasticity of supply; measurement of price elasticity of supply with percentage method. Factors affecting price elasticity of supply.

Concepts of Revenue – Meaning and types of revenue. Total, average and marginal revenue – meaning and their relationship. Revenue curves under different market situations.

Producer’s equilibrium meaning and its conditions in terms of marginal revenue and the marginal cost approach. Concept of Gross profits and Net profits.

Unit 4 Forms of Market and Price Determination under Perfect Competition
Forms of Market: Meaning and features of a Market. Forms of Market: Perfect Competition, Monopoly and Monopolistic Competition and their features. Price Determination under Perfect competition-Determination of equilibrium through market forces and effect of shifts in demand and supply curves on equilibrium price and equilibrium quantity.

Part – B
Statistics for Economics

In this course, the learners are expected to acquire skills in the collection, organization, and presentation of quantitative and qualitative information pertaining to various simple economic aspects systematically. It also intends to provide some basic statistical tools to analyze, and interpret any economic information and draw appropriate inferences. In this process, the learners are also expected to understand the behaviour of various economic data.

Unit 5 Introduction
Statistics in Economics: Meaning, scope, functions, nature, limitations, and importance of statistics in Economics. Concept of statistics in singular and plural sense with their characteristics.

Unit 6 Collection, Organisation, and Presentation of Data
Collection of data sources of data primary and secondary data: their meaning, difference between primary and secondary data, methods for collection of primary and secondary data along with their suitability, advantages, and limitations. Some important sources of secondary data: are the Census of India and the National Sample Survey Organisation.

Theory of Census and Sampling: Meaning of census and sample method along with their suitability, merits, and demerits. Method of sampling: Random sampling, Stratified sampling, Systematic sampling, Quota sampling, Convenient sampling, and Purposive sampling. Sampling and Non-Sampling errors.

Organization of Data: Meaning and types of variables; Meaning and types of series: Individual, Discrete and Continuous series (various types of continuous series). Various concepts are related to the formation of series.

Presentation of Data: Tabular Presentation and Diagrammatic Presentation of Data:
(i) Geometric forms (bar diagrams and pie diagrams), (ii) Frequency diagrams (histogram, polygon, and ogive), and (iii) Arithmetic line graphs (time series graph).

Unit 7 Measures of Central Tendency and Dispersion
Measures of Central Tendency: Meaning of Central Tendency, Features, Arithmetic Mean (simple), Median and other positional averages (Quartile, Decile, and Percentile) and Mode (by inspection method only). Relationship between various measures of central tendency and choice of the best measure of central tendency.

Measures of Dispersion: Meaning, Absolute measures of Dispersion (Range, Quartile’s Range, Quartile Deviation, Mean Deviation, Standard Deviation). Relative measures of Dispersion (Co-efficient of range, co-efficient of quartile deviation, Coefficient of Mean deviation, Coefficient of Standard Deviation, and Coefficient of variation). Lorenz Curve.

Part – C
Punjab Economy

Unit 8 An Overview of Punjab Economy
Physical Resources of Punjab, Manpower Resources of Punjab, Agriculture Development of Punjab since 1966, Industrial Development of Punjab, and Financial System of Punjab.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

Punjab State Board PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ Important Questions and Answers.

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਵੱਡੇ ਉੱਚਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਵਿਭਿੰਨ ਸਥਿਤੀਆਂ ‘ਤੇ ਰੱਖੀ ਵਸਤੂ ਦੇ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬਾਂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਨਾ – ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਵਸਤੂ ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

(1) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਅਨੰਤ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਹੋਵੇ – ਅਨੰਤ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਰੱਖੀ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਚਲਣ ਵਾਲੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਇੱਕ ਕਿਰਨ ਜਿਹੜੀ ਫੋਕਸ F ਤੋਂ ਹੋ ਕੇ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 1
ਦੂਜੀ ਕਿਰਨ ਜਿਹੜੀ ਵਕ੍ਰਤਾ ਕੇਂਦਰ ਵਿਚੋਂ ਹੋ ਕੇ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸੇ ਪੱਥ ਤੋਂ ਵਾਪਸ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਪਰਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਦਰਪਣ ਦੇ ਫੋਕਸ ਤਲ ਤੇ ਬਿੰਦੂ B’ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ B’, ਬਿੰਦੂ B ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ ਅਤੇ B’ ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਖਿੱਚਿਆ ਗਿਆ ਲੰਬ ਧੁਰੇ ਨੂੰ A’ ਤੇ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜਿਹੜਾ A ਦਾ, ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ A’B’ ਵਸਤੂ AB ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਫੋਕਸ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਛੋਟਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

(2) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਅਨੰਤ ਅਤੇ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰੱਖੀ ਹੋਵੇ – ਮੰਨ ਲਓ ਵਸਤੂ AB ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਉਸ ਦੇ ਵਕੁਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਦੁਰੀ ਤੇ ਰੱਖੀ ਗਈ ਹੈ । ਬਿੰਦੂ A ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਕਿਰਨ AD ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫੋਕਸ ‘F ਵਿੱਚੋਂ ਹੋ ਕੇ ਲੰਘਦੀ ਹੈ । ਦੂਜੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ AG ਜਿਹੜੀ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚੋਂ ਹੋ ਕੇ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸੇ ਪੱਥ ਤੇ ਮੁੜ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ A’ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ ਜੋ ਬਿੰਦੁ A ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਬਿੰਦੁ B’ ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਖਿੱਚਿਆ ਗਿਆ ਲੰਬ A’ ਧੁਰੇ B’ ਨੂੰ A’ ਤੇ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਜੋ B ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਸਤੂ AB ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ A’B’ ਹੈ ।

ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕ੍ਰਤਾ ਕੇਂਦਰ C ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ F ਦੇ ਵਿੱਚ ਬਣਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਤੋਂ ਛੋਟਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 2

(3) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਰੱਖੀ ਹੋਵੇ – ਮੰਨ ਲਓ ਵਸਤੂ AB ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ cਤੇ ਰੱਖੀ ਹੋਈ ਹੈ । ਬਿੰਦੁ ਨ ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ AD ਪਰਾਵਰਤਨ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫੋਕਸ Fਵਿੱਚੋਂ ਹੋ ਕੇ ਲੰਘਦੀ ਹੈ । ਦੂਜੀ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ AD’ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਹੋ ਕੇ ਲੰਘਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਪਰਾਵਰਤਨ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਬਿੰਦੂ ‘ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ ਜੋ ਬਿੰਦੂ B ਦਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਬਿੰਦੂ A’ ਤੋਂ ਖਿੱਚਿਆ ਗਿਆ ਲੰਬ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਨੂੰ B’ ਤੇ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜੋ B ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ A’B’ ਵਸਤੂ AB ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕ੍ਰਤਾ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਬਰਾਬਰ, ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 3

(4) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਵਕ੍ਰਤਾ ਕੇਂਦਰ Cਅਤੇ ਫੋਕਸ F ਦੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ ਹੋਵੇ – ਮੰਨ ਲਓ ਵਸਤੂ AB ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਅਤੇ ਵੜਤਾ ਕੇਂਦਰ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਹੈ । ਬਿੰਦੁ A ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਕਿਰਨ AD ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਗੁਜਰਦੀ ਹੈ । ਦੂਜੀ ਅਯਾਤੀ ਕਿਰਨ AD’ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ F ਵਿਚੋਂ ਹੋ ਕੇ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ । A’ ਤੇ ਕੱਟਦੀਆਂ ਹਨ । ਜੋ ਬਿੰਦੂ A’ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । A’ ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਖਿੱਚਿਆ ਗਿਆ ਲੰਬ A’B’ ਧੁਰੇ ਨੂੰ B’ ਤੇ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜੋ A ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਸਤੂ AB ਦਾ ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ A’B’ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਤਾ ਕੇਂਦਰ ਅਤੇ ਅਨੰਤ ਦੇ ਵਿੱਚ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 4

(5) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ‘ਤੇ ਰੱਖੀ ਹੋਵੇ – ਮੰਨ ਲਓ ਵਸਤੂ AB ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ Fਤੇ ਸਥਿਤ ਹੈ । ਇਸਦੇ ਬਿੰਦੂ A ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ AD ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀ ਹੈ । ਬਿੰਦੂ A ਤੋਂ ਨਿਕਲਣ ਵਾਲੀ ਇੱਕ ਹੋਰ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ AE ਪਿੱਛੇ ਵਧਾਉਣ ਤੇ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਲੰਘਦੀ ਹੋਈ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਜਿਹੜੀ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ ਉਸੇ ਪੱਥ ‘ਤੇ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਇੱਕਦੂਜੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਅਨੰਤ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿੱਥੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਅਨੰਤ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 5

(6) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਧਰੁਵ P ਅਤੇ ਫੋਕਸ F ਦੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ ਹੈ-ਮੰਨ ਲਓ ਵਸਤੂ AB ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਅਤੇ ਧਰੁਵ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਹੈ । ਬਿੰਦੂ A ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਕਿਰਨ AD ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀ ਹੈ । ਇੱਕ-ਦੂਜੀ ਕਿਰਨ AE ਦਰਪਣ ਤੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਟਕਰਾਉਂਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸੇ ਪੱਥ ‘ਤੇ ਮੁੜ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ A’ ਤੋਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਪਤੀਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ A’ ਬਿੰਦੂ A ਦਾ ਆਭਾਸੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਹੁਣ A’ ਤੋਂ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਖਿੱਚਿਆ ਗਿਆ ਲੰਬ ਧੁਰੇ ਨੂੰ B’ ਤੇ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜੋ ਬਿੰਦੂ B ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਸਤੂ AB ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ A’B’ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
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ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਕਿਸਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ? ਕੱਚ ਦੀ ਆਇਤਾਕਾਰ ਸਲੈਬ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਨੂੰ ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਸਮਝਾਓ ਅਤੇ ਇਹ ਦਰਸਾਓ ਕਿ ਨਿਰਗਤ ਕਿਰਨ, ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ – ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਇੱਕ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਦਾਖ਼ਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਦੋ ਮਾਧਿਅਮਾਂ ਦੇ ਮਿਲਣ ਤਲ ਤੇ ਆਪਣਾ ਪੱਥ ਬਦਲ ਲੈਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
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ਇਕ ਆਇਤਾਕਾਰ ਕੱਚ ਦੀ ਸਲੈਬ ਤੋਂ ਅਪਵਰਤਨ – ਇੱਕ ਆਇਤਾਕਾਰ ਕੱਚ ਦੀ ਸਲੈਬ PQRS ਨੂੰ ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । AO ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ OO’ ਅਪਵਰਤਿਤ ਕਰਨ ਅਤੇ O’B ਨਿਰਗਤ ਕਿਰਨ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਹਵਾ ਤੋਂ ਕੱਚ ਵਿੱਚ ਦਾਖ਼ਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਬਿੰਦੂ ) ਤੇ ਸੁਨੇਲ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਤੇ
\(\frac{\sin i_{1}}{\sin r_{1}}\) = aμb …… (1)
ਹੁਣ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਕੱਚ (ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ) ਤੋਂ ਹਵਾ (ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ) ਵਿੱਚ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ । ਬਿੰਦੂ O’ ਤੇ ਸਨੇਲ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਤੇ
bμa = \(\frac{\sin i_{2}}{\sin r_{2}}=\frac{\sin r_{1}}{\sin r_{2}}\) ………….. (2)
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਉਲਟਕ੍ਰਮਣਤਾ ਨਿਯਮ (Principle of reversibility of light) ਅਨੁਸਾਰ
(∵ ∠i2 = ∠r1)
bμa = \(\frac{1}{a_{\mu_{b}}}\) ……….(3)
ਸਮੀਕਰਨ (2) ਅਤੇ (3) ਤੋਂ
aμb = \(\frac{\sin r_{2}}{\sin r_{1}}\) …………. (4)
ਸਮੀਕਰਨ (1) ਅਤੇ (4) ਤੋਂ
\(\frac{\sin i_{1}}{\sin r_{2}}=\frac{\sin r_{2}}{\sin r_{1}}\)
∴ ∠i1 = ∠r2,

ਇਸਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਕਿ ਆਪਨ ਕੋਣ ਨਿਰਗਤ ਕੋਣ, ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਇੱਕ ਆਇਤਾਕਾਰ ਕੱਚ ਦੀ ਸਲੈਬ ਤੋਂ ਅਪਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਨਿਰਗਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ (i) F ਅਤੇ 27 ਵਿਚਕਾਰ (i) 27 ਤੋਂ ਪਰੇ (ii) Fਉੱਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇੱਕ ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਇਸ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਰਚਨਾ ਦਰਸਾਓ ।
ਜਾਂ
ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਕਿਸੇ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ F ਤੇ ਪਈ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਵਿਚ ਬਣੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਸਰੂਪ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ F ਅਤੇ F ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਹੈ – ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ F ਅਤੇ 2F ਦੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ 2F ਤੋਂ ਪਰੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਅਸਲੀ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵੱਡੇ ਸਾਇਜ਼ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
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(ii) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ 27 ਤੋਂ ਪਰੇ ਰੱਖੀ ਹੈ – ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 2F ਤੋਂ ਪਰੇ ਰੱਖੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ Fਅਤੇ 2F ਦੇ ਵਿੱਚ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਛੋਟੇ ਸਾਇਜ਼ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
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(iii) ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ F ਤੇ ਰੱਖੀ ਹੈ – ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ F ਤੇ ਰੱਖੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਤਿਬਿੰਬ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਅਨੰਤ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਸਾਇਜ਼ ਵਿੱਚ ਵੱਡਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਕਿਹੜੀ ਕਿਰਿਆ ਦਰਸਾਈ ਗਈ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਨਿਯਮ ਵੀ ਲਿਖੋ ।
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ਉੱਤਰ-
ਚਿੱਤਰ ਵਿਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਦਰਸਾਈ ਗਈ ਹੈ ।
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ (Refraction of Light) – ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਇੱਕ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਆਪਣੇ ਪਹਿਲੇ ਪੱਥ ਤੋਂ ਮੁੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਪੱਥ ਵਿੱਚ ਹੋਈ ਇਸ ਤਬਦੀਲੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਜੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਆਪਨ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਬਣੇ ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਅਭਿਲੰਬ ਤੋਂ ਪਰੇ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਦੇ ਨਿਯਮ – ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਦੇ ਦੋ ਨਿਯਮ ਹਨ-
(1) ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ, ਅਪਵਰਤਿਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਇੱਕ ਹੀ ਤਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

(2) ਜਦੋਂ ਇੱਕ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਕਿਸੇ ਦੋ ਮਾਧਿਅਮਾਂ ਦੀ ਸੀਮਾ ਤਲ ਤੇ ਤਿਰਛੀ ਆਪਤਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਤਨ ਕੋਣ (∠i) ਦਾ ਸਾਈਨ (sin i) ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ (∠r) ਦਾ ਸਾਈਨ (sin r) ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਇੱਕ ਨਿਯਤ ਅੰਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨਿਯਤ ਅੰਕ ਨੂੰ ਦੂਜੇ ਮਾਧਿਅਮ ਦਾ ਪਹਿਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਦੇ ਸਾਪੇਖ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸਨੂੰ , ਨਾਲ ਪ੍ਰਗਟਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਨਿਯਮ ਨੂੰ ਸਨੌਲ ਦਾ ਨਿਯਮ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

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ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕੀ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ (Light) – ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਉਹ ਭੌਤਿਕ ਸਾਧਨ ਹੈ ਜੋ ਸਾਨੂੰ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਵੇਖਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿਖਾਈ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦਾ । ਇਹ ਇੱਕ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਊਰਜਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਬਿਜਲੀ ਚੁੰਬਕੀ ਤਰੰਗਾਂ ਹਨ ਜੋ ਹਵਾ ਜਾਂ ਨਿਰਵਾਯੂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਥਾਂ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਥਾਂ ਤਕ ਸਿੱਧੀ ਰੇਖਾ ਵਿੱਚ ਚਲਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਈਆਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸੰਚਰਣ ਲਈ ਮਾਧਿਅਮ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  2. ਇਹ ਬਿਜਲਈ ਤਰੰਗਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  3. ਇਸ ਦੀ ਚਾਲ ਮਾਧਿਅਮ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਬਣਾਵਟੀ ਸਰੋਤ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਜਾਂ
ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਗਏ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਸੋਮੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਉਦਾਹਰਨ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਬਣਾਵਟੀ ਸੋਮੇ (Artificial Sources of light) – ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਬਣਾਵਟੀ ਸਰੋਤ ਹਨ- ਅੱਗ, ਬਿਜਲੀ, ਗੈਸ, ਦੀਪ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪਰਾਵਰਤਕ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰਾਵਰਤਕ (Reflector) – ਅਜਿਹੀ ਚੀਨੀ ਅਤੇ ਚਮਕੀਲੀ (ਪਾਲਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ਸਤਹਿ ਜੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਉਸੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਵਾਪਸ ਮੋੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚੋਂ ਇਹ ਕਿਰਨਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਨੂੰ ਪਰਾਵਰਤਕ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੇ ਨਿਯਮ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪਰਾਵਰਤਨ (Reflection of light) – ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਕਿਸੇ ਸਮਤਲ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਸਤਹਿ ਤੇ ਟਕਰਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਤਾਂ ਇੱਕ ਖ਼ਾਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਵਾਪਸ ਪਹਿਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ) ਮੁੜ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੇ ਨਿਯਮ (Laws of reflection) – (i) ਆਪਨ ਕੋਣ (∠i) ਅਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ (∠x) ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਅਰਥਾਤ ∠i = ∠r
(ii) ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ, ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਆਪਨ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ (normal) ਸਾਰੇ ਇੱਕ ਤਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
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ਇਸ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ AB ਇੱਕ ਸਮਤਲ ਪਰਾਵਰਤਕ ਸਤਹਿ (ਦਰਪਣ ਹੈ, PQ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ, QR ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨ ਅਤੇ QN ਆਪਨ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਅਤਿਲੰਬ ਹੈ ।
ਚਿੱਤਰ ਤੋਂ ਪਤਾ ਚਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ, ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਸਾਰੇ ਹੀ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਦੇ ਤਲ ਵਿੱਚ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕੋਈ ਕਿਰਨ ਦਰਪਣ ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਤਨ-ਕੋਣ ਕਿੰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕੋਈ ਕਿਰਨ ਦਰਪਣ ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਆਪਤਨ ਕੋਣ (∠i = 0°) ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਜਦੋਂ ਇੱਕ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਕਿਸੇ ਦਰਪਣ ਤੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਕਿਸ ਕੋਣ ਤੇ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕੋਈ ਕਿਰਨ ਕਿਸੇ ਦਰਪਣ ਤੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੈਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ ਅਭਿਲੰਬ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਵਾਪਸ ਮੁੜ ਆਉਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ (∠r = 0°) ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਕਿਸੇ ਦਰਪਣ ਤੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੈ ਰਹੀ ਕਿਰਨ ਮੁੜ ਉਸੇ ਰਸਤੇ ਵਾਪਸ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਕਿਉਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸੇ ਦਰਪਣ ਤੇ ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੈ ਰਹੀ ਕਿਰਨ ਉਸੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਵਾਪਸ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਆਪਨ ਕੋਣ (∠i = 0°) ਹੈ । ਕਿਉਂਕਿ ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਆਪਨ ਕੋਣ ∠i = 0 ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ ∠i ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ ∠r = 0° ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪਸ਼ਨ 9.
ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਂ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ-ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ, ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ, ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ, ਦੁਆਰਕ, ਵ -ਕੇਂਦਰ, ਸ਼ੀਰਸ਼ (ਧਰੁਵ, ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਅਤੇ ਫੋਕਸ-ਦੂਰੀ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ (Spherical Mirror) – ਜੇਕਰ ਦਰਪਣ ਕਿਸੇ ਖੋਖਲੇ ਗੋਲੇ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦੀ ਇੱਕ ਸਤਹਿ ਪਾਲਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਸਤਹਿ ਪਰਾਵਰਤਕ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਅਜਿਹਾ ਦਰਪਣ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੋ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-(1) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ (2) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

(ii) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ (Concave Mirror) – ਅਜਿਹਾ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਜਿਸਦੀ ਪਰਾਵਰਤਕ ਸਤਹਿ ਉਸ ਗੋਲੇ ਦੇ ਕੇਂਦਰ ਵੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਇਹ ਦਰਪਣ ਇੱਕ ਹਿੱਸਾ ਹੈ, ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਬਾਹਰੀ ਸਤਹਿ ਪਾਲਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਅੰਦਰਲੀ ਸਤਹਿ ਤੋਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
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(iii) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ (Convex Mirror) – ਅਜਿਹਾ ਦਰਪਣ ਜਿਸ ਦੀ ਪਰਾਵਰਤਕ ਸਤਹਿ ਉਸ ਗੋਲੇ ਦੇ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਪਰ੍ਹਾਂ ਵੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਗੋਲੇ ਦਾ ਦਰਪਣ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਅੰਦਰਲੀ ਸੜਾ ਪਾਲਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਬਾਹਰੀ ਸਤਹਿ ਤੋਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
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(iv) ਦੁਆਰਕ (Aperture) – ਦਰਪਣ ਦੇ ਉਸ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ, ਜਿਸ ਤੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਪਰਾਵਰਤਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਦਰਪਣ ਦਾ ਦੁਆਰਕ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ (a) ਅਤੇ (b) ਵਿੱਚ ਦੂਰੀ M1M2ਦਰਪਣ ਦਾ ਦੁਆਰਕ ਹੈ ।
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(v) ਵਾ ਕੇਂਦਰ (Centre of Curvature) – ਦਰਪਣ ਦਾ ਵਾ ਕੇਂਦਰ ਉਸ ਖੋਖਲੇ ਗੋਲੇ ਦਾ ਕੇਂਦਰ ਹੈ। ਜਿਸਦਾ ਦਰਪਣ ਇੱਕ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ (a) ਵਿੱਚ C ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵਕਤਾ ਕੇਂਦਰ ਹੈ ਅਤੇ ਚਿੱਤਰ (b) ਵਿੱਚ c ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਕੇਂਦਰ ਹੈ ।

(vi) ਸ਼ੀਰਸ਼ ਜਾਂ ਧਰੁਵ) (Pole) – ਕਿਸੇ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੱਧ ਬਿੰਦੂ ਜਾਂ ਕੇਂਦਰ ਨੂੰ ਇਸਦਾ ਧਰੁਵ ਜਾਂ ਸ਼ੀਰਸ਼ (Vertex) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ (a) ਅਤੇ (b) ਵਿੱਚ ਇਸ ਨੂੰ P ਨਾਲ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।

(vii) ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ (Principal Focus) – ਦਰਪਣ ਦਾ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ, ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਉਹ ਬਿੰਦੂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਸਿੱਖ ਧਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਆ ਰਹੀਆਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਬਿੰਦੁ ’ਤੇ ਆ ਕੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ। (ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ) ਜਾਂ ਇਸ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਅਭਿਸਾਰਿਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਾਂ ਇੱਕ ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਅਪਸਰਿਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਜਾਪਦੀਆਂ ਹਨ (ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ) ।
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(viii) ਫੋਕਸ-ਦੁਰੀ (Focak length) – ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਧਰੁਵ (pole) ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਦੀ ਵਿਚਲੀ ਦੂਰੀ ਨੂੰ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਨਾਲ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ PF ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਹੈ । S.I ਪੱਧਤੀ ਵਿੱਚ, ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਮੀਟਰ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਅਤੇ ਵਕੁਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਵਿਚਕਾਰ ਕੀ ਸੰਬੰਧ ਹੈ ? ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ-ਦੂਰੀ ਕਿੰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕੁਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਤੋਂ ਅੱਧੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜੇ ਅਵਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀf ਅਤੇ ਵਕ੍ਰਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ R ਹੋਵੇ, ਤਾਂ
f = \(\frac {1}{2}\) × R
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਅਨੰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਇੱਕ ਵਾਸਤਵਿਕ ਫੋਕਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇੱਕ ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਇਸ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਫੋਕਸ – ਕਿਉਂਕਿ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਆ ਰਹੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ
ਮੁੱਖ ਧੁਰਾ ਹੋ ਕੇ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀਆਂ ਹਨ, ਇਸ ਲਈ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਫੋਕਸ ਵਾਸਤਵਿਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਅਨੰਤ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਵਸਤੂ ਕਿੱਥੇ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਫੋਕਸ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਅਨੰਤ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਸਾਇਜ਼ ਦਾ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਵਸਤੁ ਤੋਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਕਿੱਥੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਜੋ ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਸਾਇਜ਼ ਦਾ ਬਣੇ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਿਆ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਸਾਇਜ਼ ਦਾ ਬਣੇ, ਇਸ ਲਈ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਵਤਾ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਵਤਾ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਹੀ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਸਾਇਜ਼ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਦੇ ਸਾਇਜ਼ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਦਾ ਵੱਡਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਦੋਂ ਬਣਦਾ ਹੈ ? ਇੱਕ ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਵਸਤੁ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਧਰੁਵ (Pole) ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਿੱਧਾ, ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵੱਡਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਸ਼ੇਵ ਕਰਨ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿਉਂ ? ਇਸ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਇੱਕ ਰੇਖਾਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਦਰਸਾਓ । |
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਸ਼ੇਵ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਆਪਣਾ ਚਿਹਰਾ ਕਿਸੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਨੇੜੇ (ਧਰੁਵ ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ) ਰੱਖਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਚਿਹਰੇ ਦਾ ਵੱਡਾ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਬਾਰੀਕ ਵਾਲ ਵੀ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਮਤਲਬ ਕਿ ਉਹ ਚਿਹਰੇ ਦੀ ਠੀਕ ਸ਼ੇਵ (Shave) ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਹਾਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਸ਼ੇਵ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਕਿਹੜਾ ਦਰਪਣ ਹਮੇਸ਼ਾ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਨਾਲੋਂ ਛੋਟੇ ਸਾਇਜ਼ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਲਈ ਵਸਤੂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਭਾਵੇਂ ਕੋਈ ਵੀ ਹੋਵੇ, ਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ, ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ-ਖੇਤਰ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਨਾਲੋਂ ਛੋਟੇ ਆਕਾਰ ਦਾ ਅਤੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਵਸਤ ਤੋਂ ਦੂਰ ਲੈ ਜਾਣ ਤੇ, ਸਾਡੇ ਪਿੱਛੇ ਵੱਡੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਪਈਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਵੇਖੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਪਿਛਾਂਹ ਆ ਰਹੀ ਆਵਾਜਾਈ ਦਾ ਵੱਡਾ ਖੇਤਰ ਦਿਸਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਖੇਤਰ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਡਰਾਈਵਰ ਦੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿਉਂ ? ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਦਰਸਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਡਰਾਂਈਵਰ ਦੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਬਣ ਰਿਹਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਪਿੱਛੇ ਆ ਰਹੀ ਟਰੈਫ਼ਿਕ ਦਾ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਖੇਤਰ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਡਰਾਈਵਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਪਿੱਛੇ ਦੀ ਆਵਾਜਾਈ ਦੇਖਣ ਵਾਸਤੇ ਵਾਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਿਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਦਰਪਣ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਉਂਕਿ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਪਿੱਛੇ ਆ ਰਹੀ ਟਰੈਫ਼ਿਕ ਦਾ ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਛੋਟਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਵੱਡੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਆ ਰਹੇ ਵਾਹਨਾਂ ਨੂੰ ਦੇਖਣ ਲਈ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵਾਹਨ ਦਰਪਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ, ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਅਤੇ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਛੋਹੇ ਬਿਨਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਫ਼ਰਕ ਕਿਵੇਂ ਪਤਾ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਰੇ ਦਰਪਣਾਂ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਚਿਹਰਾ ਦੇਖੋ 1 ਹੁਣ ਆਪਣਾ ਚਿਹਰਾ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਦੂਰ ਲਿਜਾਓ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਇਜ਼ ਨੋਟ ਕਰੋ । ਤੁਸੀਂ ਵੇਖੋਗੇ ਕਿ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਬਣ ਰਹੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਈਜ਼ ਚਿਹਰੇ ਦੇ ਸਾਈਜ਼ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਅਤੇ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਵੱਡਾ ਹੋਵੇਗਾ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਬਿਨਾਂ ਛੋਹੇ ਸਮਤਲ, ਉੱਤਲ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰ ਲਵਾਂਗੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਇੱਕ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਕਿੰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (Magnification) – ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਗਏ ਤਿਬਿੰਬ ਦੇ ਆਕਾਰ ਜਾਂ ਸਾਈਜ਼ (size) ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਜਾਂ ਸਾਈਜ਼ (size) ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਅ ਨਾਲ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ – ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਇੱਕ ਅਜਿਹੇ ਗੋਲੇ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਮੰਨਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਅਨੰਤ ਹੈ ।
∴ ਦਰਪਣ ਫਾਰਮੂਲਾ ਲਗਾਉਣ ‘ਤੇ
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\)
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{\infty}\)
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}\) = 0
ਜਾਂ u + υ = 0
u = -υ
ਹੁਣ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (m) = \(\frac{-v}{u}=\frac{u}{u}\) = 1
ਅਰਥਾਤ ਵਸਤੂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਆਕਾਰ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਇਕ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਗਏ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਬਣੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੇ ਲੱਛਣ (ਗੁਣ)-

  1. ਇਹ ਆਭਾਸੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਭਾਵ ਕਿ ਇਸ ਨੂੰ ਪਰਦੇ ਤੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  2. ਇਹ ਸਿੱਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  3. ਇਹ ਪਾਸੇ-ਦਾਅ ਉਲਟਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਸੱਜਾ ਹੱਥ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਖੱਬਾ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਖੱਬਾ ਹੱਥ, ਸੱਜਾ ਜਾਪਦਾ ਹੈ !
  4. ਇਸ ਦਾ ਆਕਾਰ (ਸਾਇਜ਼) ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ (ਸਾਇਜ਼) ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  5. ਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਓਨੀ ਦੂਰ ਹੀ ਬਣਦਾ ਹੈ ਜਿੰਨੀ ਦੂਰ ਵਸਤੂ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਿੱਚ ਕੀ ਅੰਤਰ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਥ – ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖੀ ਵਸਤੂ ਦੀ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਜਿਹੜੀ ਆਕਿਰਤੀ (ਸ਼ਕਲ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਉਸ ਆਕਿਰਤੀ ਨੂੰ ਵਸਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ – ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ (ਬਿੰਦੂ) ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਨ (ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ) ਜਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਲੈਨਜ਼ ਵਿੱਚ) ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਿਸੇ ਬਿੰਦੁ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਜਾਂ ਫਿਰ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਜਾਪਦੀਆਂ ਹਨ ਤਾਂ ਇਸ ਦੂਜੇ ਬਿੰਦੂ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਬਿੰਦੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਤਿਬਿੰਬ ਵਿਚ ਅੰਤਰ-

ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ ਤਿਬਿੰਬ
(1) ਪਰਾਵਰਤਨ ਜਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਬਣਦਾ ਹੈ । (1) ਪਰਾਵਰਤਨ ਜਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀਆਂ (ਪਿੱਛੇ ਵਧਾ ਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾਉਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ) ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
(2) ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਪਰਦੇ ਤੇ ਲਿਆਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । (2) ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਪਰਦੇ ਤੇ ਨਹੀਂ ਲਿਆਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ।
(3) ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਉਲਟਾ ਬਣਦਾ ਹੈ । (3) ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਿੱਧਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਰਚਨਾ ਚਿੱਤਰ ਸਹਿਤ ਸਮਝਾਓ ।
ਜਾਂ
ਕਿਵੇਂ ਦਰਸਾਓਗੇ ਕਿ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਬਣੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਦੂਰੀ ਉਸ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਪਈ ਵਸਤੂ ਦੀ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਦੂਰੀ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਰਚਨਾ-
ਮੰਨ ਲਓ MM’ ਇੱਕ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਵਸਤੂ O ਪਈ ਹੈ । OA ਅਤੇ OB ਦੋ-ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨਾਂ ਹਨ ਅਤੇ AC ਅਤੇ BD ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਹਨ I ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਅਸਲ ਵਿੱਚ I ਤੋਂ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀਆਂ ਪਰੰਤੂ I ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ 1 ਵਸਤੂ ) ਦਾ ਆਭਾਸੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ ।

ਮਾਪਣ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ ਕਿ NO = NI, ਅਰਥਾਤ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਓਨੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਜਿੰਨੀ ਦੁਰੀ ਤੇ ਵਸਤੁ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਉਪਯੋਗ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੁੱਖ ਉਪਯੋਗਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੋ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-
(1) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਅਤੇ
(2) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

1. ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਉਪਯੋਗ-

  • ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ, ਪਰਾਵਰਤਕ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਵਿੱਚ ਲਿਆਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਵੱਡੇ ਵਿਆਸ ਵਾਲੇ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਪਰਾਵਰਤਕ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਵਿੱਚ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਜਿਸਦੇ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚ ਛੇਕ ਹੋਵੇ, ਡਾਕਟਰ ਦੇ ਸਿਰ ਦੇ ਦਰਪਣ (Head Mirror) ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਅੱਖ, ਨੱਕ, ਗਲੇ ਅਤੇ ਕੰਨ ਦੇ ਨਿਰੀਖਣ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਵਿੱਚ ਲਿਆਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸ਼ੀਰਸ਼ ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਸਿੱਧਾ, ਵੱਡਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਸ਼ੇਵ ਦਰਪਣ ਦੇ ਰੂਪ ਵਜੋਂ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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(2) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਉਪਯੋਗ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ, ਡਰਾਈਵਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪਿੱਛੇ ਆ ਰਹੇ ਟਰੈਫ਼ਿਕ ਦਾ ਵਧੇਰੇ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਖੇਤਰ ਵੇਖਣ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਛੋਟਾ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਗਏ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਰਚਨਾ ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਸਮਝਾਓ । ,
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਰਚਨਾ (Formation of Image by Convex Mirror) – ਮੰਨ ਲਓ ਇੱਕ ਵਸਤੂ AB ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਪਈ ਹੈ । ਇੱਕ ਕਿਰਨ AD, A ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਚਲ ਕੇ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਨ ਦੇ ਬਾਅਦ DE ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ Fਵਿੱਚੋਂ ਆਉਂਦੀ ਵਿਖਾਈ ਦਿੰਦੀ ਹੈ । ਇੱਕ ਹੋਰ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ AGC, ਵਜ੍ਹਾ ਕੇਂਦਰ c ਤੋਂ ਲੰਘਦੀ ਹੋਈ ਜਾਪਦੀ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਹੋ ਕੇ, ਵਾਪਸ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
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ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ A’ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਵਿਖਾਈ ਦਿੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜੋ A ਦਾ ਆਭਾਸੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ । A’ ਤੇ ਬਣਿਆ ਲੰਬ A’B’, ਵਸਤੂ AB ਦਾ ਆਭਾਸੀ ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਸਾਇਜ਼ ਵਿੱਚ ਛੋਟਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣਾਂ ਦੇ ਲਈ ਨਵੀਆਂ ਕਾਰਟੀਸ਼ੀਅਨ ਚਿੰਨ੍ਹ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਦੀ ਰਚਨਾ ਕਰੋ । .
ਜਾਂ
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪਰਾਵਰਤਨ ਲਈ ਕਿਹੜੀਆਂ ਚਿੰਨ੍ਹ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਵੀਆਂ ਕਾਰਟੀਜ਼ੀਅਨੀ ਚਿੰਨ੍ਹ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ (New Cartesian Sign Conversions)-

  1. ਵਸਤੂ ਜਾਂ ਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਖੱਬੇ ਪਾਸੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਚਲਣ ਵਾਲੀਆਂ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨਾਂ ਖੱਬਿਓ ਸੱਜੇ ਪਾਸੇ ਵੱਲ ਨੂੰ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।
  2. ਸਾਰੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸੀਰਸ਼ (ਜਾਂ ਧਰੁਵ (Pole) ਤੋਂ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।
  3. ਆਪਾਤੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਨੂੰ ਧਨਾਤਮਕ ਅਤੇ ਆਪਾਤੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦੇ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਨੂੰ ਰਿਣਾਤਮਕ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
  4. ਦਰਪਣਾਂ ਦੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਕੋਣੀ ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਉੱਚਾਈਆਂ ਨੂੰ ਧਨਾਤਮਕ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਉਲਟ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਉੱਚਾਈਆਂ ਨੂੰ ਰਿਣਾਤਮਕ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਆਕਾਰ (ਸਾਇਜ਼) ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਲਈ ਸਾਰਨੀ ਬਣਾਓ ।
ਉੱਤਰ-

ਵਸਤੂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਆਕਾਰ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ
(i) ਅਨੰਤ ਤੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਫੋਕਸ F ਤੇ ਬਿੰਦੂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ
(ii) ਅਨੰਤ ਅਤੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਧਰੁੱਵ P ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ P ਅਤੇ F ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਬਹੁਤ ਛੋਟਾ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
ਦੋ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣਾਂ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਵਿਵਸਥਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਕਿ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨ ਹਮੇਸ਼ਾ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋਵੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨ ਹਮੇਸ਼ਾ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋਵੇਗੀ ਜੇਕਰ ਦੋ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣਾਂ ਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਲੰਬਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਿਵਸਥਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਭਿੰਡਰਾਓ ਪਰਾਵਰਤਨ (Diffused Reflection) ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖਿੰਡਰਾਓ ਪਰਾਵਰਤਨ-ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਸਮਾਨੰਤਰ ਕਿਰਨਾਂ ਕਿਸੇ ਅਜਿਹੇ ਤਲ ਤੇ ਟਕਰਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਹੜਾ ਅਸਮਤਲ (ਖੁਰਦਰਾ) ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਭਾਗ ਅਨਿਯਮਿਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਖਿੰਡਰ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅਜਿਹੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਨੂੰ ਭਿੰਡਰਾਓ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਨ – ਕਿਤਾਬ ਦੇ ਅੱਖਰਾਂ ਦਾ ਜਾਂ ਬਲੈਕ ਬੋਰਡ ਦੇ ਅੱਖਰਾਂ ਦਾ ਪੜਿਆ ਜਾਣਾ ਭਿੰਡਰਾਓ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕਾਰਨ ਹੀ ਸੰਭਵ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 31.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ? ਇਹ ਕਿੰਨੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ – ਜਿਸ ਭੌਤਿਕ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਲੰਘ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਜਿਵੇਂ-ਹਵਾ, ਪਾਣੀ, ਕੱਚ ਆਦਿ ।

ਮਾਧਿਅਮ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਿੰਨ ਕਿਸਮ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ-

  1. ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ – ਉਹ ਮਾਧਿਅਮ ਜਿਸ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਲੰਘ ਸਕਣ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਪਈਆਂ ਹੋਈਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ, ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਆਖਦੇ ਹਨ , ਜਿਵੇਂ-ਸਾਫ਼ ਪਾਣੀ, ਕੱਚ ਆਦਿ ।
  2. ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ – ਉਹ ਮਾਧਿਅਮ ਜਿਸ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਨਾ ਲੰਘ ਸਕਣ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਪਈਆਂ ਹੋਈਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦਿਖਾਈ ਨਾ ਦੇਣ, ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ-ਇੱਟ, ਗੱਤਾ, ਲੋਹੇ ਦੀ ਚਾਦਰ ਆਦਿ ।
  3. ਪਾਰਭਾਸੀ (ਅਲਪ-ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ) ਮਾਧਿਅਮ – ਜਿਸ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਲੰਘ ਸਕਣ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਪਈਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਧੁੰਦਲੀਆਂ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ, ਪਾਰਭਾਸੀ ਮਾਧਿਅਮ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਧੁੰਦਲਾ ਕੱਚ, ਤੇਲ ਲੱਗਿਆ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 32.
ਘਣਤਾ ਦੇ ਪੱਖੋਂ ਮਾਧਿਅਮ ਕਿੰਨੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਘਣਤਾ ਦੇ ਪੱਖੋਂ ਮਾਧਿਅਮ ਦੋ ਕਿਸਮ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-

  1. ਵਿਰਲ ਮਾਧਿਅਮ – ਘੱਟ ਘਣਤਾ ਵਾਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਨੂੰ ਵਿਰਲ ਮਾਧਿਅਮ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
    ਉਦਾਹਰਨ – ਹਵਾ ।
  2. ਸੰਘਣਾ ਮਾਧਿਅਮ – ਵੱਧ ਘਣਤਾ ਵਾਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਨੂੰ ਸੰਘਣਾ ਮਾਧਿਅਮ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
    ਉਦਾਹਰਨ – ਕੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 33.
ਵਿਰਲ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਦਾਖ਼ਲ ਹੁੰਦੇ ਸਮੇਂ ਮਾਧਿਅਮ ਦੀ ਵੱਧ ਸੰਘਣਤਾ ਦਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਤੇ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਸਮਝਾਓ ।
ਜਾਂ
ਅਪਵਰਤਨ ਵਿੱਚ ਸੰਘਣਤਾ ਦਾ ਅਪਵਰਤਿਤ ਕਰਨ ਦੇ ਝੁਕਾਓ ਤੇ ਕੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਸਮਝਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਵਿਰਲ ਤੋਂ ਸੰਘਣ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਮਾਧਿਅਮ ਜਿੰਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੰਘਣਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਉਨੀ ਹੀ ਅਧਿਕ ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ਮੁੜੇਗੀ । ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਹਵਾ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਹਵਾ ਤੋਂ ਕੱਚ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦੀ ਹੋਈ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੀ ਹੈ । ਕਿਰਨ ਦਾ ਝੁਕਾਓ ਪਾਣੀ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਕੱਚ ਵਿੱਚ ਅਧਿਕ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਕੱਚ, ਪਾਣੀ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਅਧਿਕ ਸੰਘਣਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 34.
ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਕੱਚ ਵਿੱਚ ਦਾਖ਼ਲ ਹੋਣ ਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਵਿੱਚ ਕੀ ਪਰਿਵਰਤਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ, ਕੱਚ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵਿਰਲ ਮਾਧਿਅਮ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪਕਾਸ਼ ਜਦੋਂ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਕੱਚ ਵਿੱਚ ਪਵੇਸ਼ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ਮੁੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਆਪਨ ਕੋਣ (i) ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ (r) ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 35.
ਜੇਕਰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਕੱਚ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰੇ ਤਾਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ਮੁੜੇਗੀ ਜਾਂ ਫਿਰ ਅਭਿਲੰਬ ਤੋਂ ਪਰੇ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸੰਘਨ ਮਾਧਿਅਮ (ਕੱਚ) ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਵਿਰਲਾ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਅਪਵਰਤਨ ਹੋਣ ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਤੋਂ ਦੂਰ ਹਟੇਗੀ । ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਆਪਨ ਕੋਣ (i) ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਅਧਿਕ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 36.
ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਗਹਿਰਾਈ ਦੇ ਸੰਦਰਭ ਵਿੱਚ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਗਿਆਤ ਕਰੋ !
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਸਾਧਾਰਨ ਗਿਆਨ ਹੈ ਕਿ ਪਾਣੀ ਦੀ ਤਾਲਾਬ ਵਿੱਚ ਗਹਿਰਾਈ ਘੱਟ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਤਾਲਾਬ ਦਾ ਤਲ ਕੁੱਝ ਉੱਪਰ ਉੱਠਿਆ ਹੋਇਆ ਜਾਪਦਾ ਹੈ । ਮੰਨ ਲਓ ਇੱਕ ਵਸਤੁ ਤਾਲਾਬ ਦੀ ਗਹਿਰਾਈ A ਤੇ ਪਈ ਹੋਈ ਹੈ । ਇੱਕ ਕਿਰਨ A ਤੋਂ AB ਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ਨੂੰ ਟਕਰਾ ਕੇ BD ਵੱਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । A ਤੋਂ ਇੱਕ ਹੋਰ ਕਿਰਨ c ਤੇ ਆਪਨ ਕੋਣ ∠i ਬਣਾ ਕੇ ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ A ਆਪਣੀ ਥਾਂ ਤੇ ਨਾ ਰਹਿ ਕੇ A’ ਤੇ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 37.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬੀ ਹੋਈ ਲੱਕੜੀ (ਪੈਨਸਿਲ) ਮੁੜੀ ਹੋਈ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਕਿਉਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੰਨ ਲਓ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਲੱਕੜੀ (ਪੈਂਨਸਿਲ) ਦਾ ਸਿੱਧਾ ਟੁਕੜਾ ਡੁਬੋਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਕਾਰਨ ਮੁੜਿਆ ਹੋਇਆ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੋਵੇਗਾ । ਜਿਵੇਂ ਹੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਬਿੰਦੁ A ਤੋਂ ਸੰਘਣ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਵਿਰਲ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਲੰਬ ਤੋਂ ਪਰੇ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਿੰਦੂ A ਬਿੰਦੂ A’ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਈ cਦੀ ਹੈ। ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਲੱਕੜੀ (ਪੈਂਨਸਿਲ) ਦਾ ਟੁਕੜਾ ਮੁੜਿਆ ਹੋਇਆ ਜਾਪਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 38.
ਕੀ ਕਾਰਨ ਹੈ ਕਿ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰੇ ਹੋਏ ਟੱਬ ਦੇ ਤਲ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਹੋਇਆ ਸਿੱਕਾ ਸਾਨੂੰ ਥੋੜ੍ਹਾ ਉੱਪਰ ਉੱਠਿਆ ਹੋਇਆ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਓ ਕਿ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਕਿਵੇਂ ਚਲਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਿੱਕੇ ਦਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਥੋੜ੍ਹਾ ਉੱਪਰ ਉੱਠਿਆ ਹੋਇਆ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੋਣਾ – ਇਸ ਦਾ ਕਾਰਨ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਚਲ ਕੇ ਵਿਰਲ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਅਭਿਲੰਬ ਤੋਂ ਦੂਰ ਹੱਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬਾਹਰੋਂ ਵੇਖਣ ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਸਿੱਕਾ ਉੱਪਰ ਉੱਠਿਆ ਹੋਇਆ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 39.
ਸਨੈੱਲ ਦੇ ਨਿਯਮ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਨੌਲ ਦਾ ਨਿਯਮ (Snell’s Law) – ਅਪਵਰਤਨ ਦੇ ਦੂਜੇ ਨਿਯਮ ਨੂੰ ਸਨੌਲ ਦਾ ਨਿਯਮ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਆਪਨ ਕੋਣ ਦੇ sine (sin i) ਅਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ ਦੇ sin e (sin r) ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਨਿਸਚਿਤ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ।
\(\frac{\sin i}{\sin r}\) = ਸਥਿਰ ਅੰਕ = aμb

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 40.
ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸਦਾ ਸੰਖਿਆਤਮਕੇ ਫਾਰਮੂਲਾ ਵੀ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ (Refractive Index) – ਨਿਰਵਾਯੂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਵੇਗ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਵੇਗ ਅਨੁਪਾਤ ਨੂੰ ਉਸ ਮਾਧਿਅਮ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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aμb ਨੂੰ ਮਾਧਿਅਮ b ਦਾ ਮਾਧਿਅਮ ਦੇ ਸਾਪੇਖ ਅਪਵਰਤਨ-ਅੰਕ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਰਥਾਤ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਮਾਧਿਅਮ a ਤੋਂ ਮਾਧਿਅਮ ਠ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਦੀ ਕੋਈ ਇਕਾਈ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਦੋ ਇੱਕ ਕਿਸਮ ਦੀ ਰਾਸ਼ੀਆਂ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 41.
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਲੈੱਨਜ਼ਾਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਲੈੱਨਜ਼ (Lens) – ਇਹ ਇੱਕ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਅਪਵਰਤਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਦਾ ਇੱਕ ਹਿੱਸਾ ਹੈ ਜੋ ਦੋ ਗੋਲਾਕਾਰ ਸੜਾਵਾਂ ਨਾਲ ਘਿਰਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-
(i) ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼
(ii) ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 42.
ਲੈੱਨਜ਼ ਲਈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਂ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
(1) ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ
(2) ਮੁੱਖ ਧੁਰਾ
(3) ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਦੀ ।
ਉੱਤਰ-
(1) ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ (Optical Centre) – ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਮੱਧ ਬਿੰਦੂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਬਿੰਦੂ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਣ ਵਾਲੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਬਿਨਾਂ ਮੁੜੇ ਸਿੱਧੀ ਲੰਘ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
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(2) ਮੁੱਖ ਧੁਰਾ (Principal Axis) – ਕਿਸੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਮੁੱਖ ਧੁਰਾ ਉਹ ਕਾਲਪਨਿਕ ਰੇਖਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਇਸਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਦੋਵੇਂ ਗੋਲਾਕਾਰ ਸੜਾਵਾਂ ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । (ਚਿੱਤਰ) (a) ਵਿੱਚ EF ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਅਤੇ ਚਿੱਤਰ (b) ਵਿੱਚ EF ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਮੁੱਖ ਧੁਰਾ ਹੈ ।
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(3) ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ (Principal Focus) – ਇਹ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਉਹ ਬਿੰਦੂ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਆ ਰਹੀਆਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ (ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼) ਜਾਂ (ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼) ਪਿੱਛੇ ਵੱਲ ਵਧਾਉਣ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 43.
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਅਪਵਰਤਨ ਦੁਆਰਾ ਤਿਬਿੰਬ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਨਿਯਮ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਅਪਵਰਤਨ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਨਿਯਮ (Rules for image Formation after Refraction through a Lens) – (1) ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਅਪਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀ ਹੈ ।
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(2) ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘ ਰਹੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਅਪਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
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(3) ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਦੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਰਨ ਵਿਚਲਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 44.
ਕਿਸੇ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿਵੇਂ ਬਣਦਾ ਹੈ ? ਕਿਰਨ ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਬਣਾਓ ( ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਕਿਹੋ ਜਿਹੀ ਹੋਵੇਗੀ ? | ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖੀ ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿਰਨ ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਵਾਲੇ ਪਾਸੇ ਹੀ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਾਇਜ਼ ਵਿੱਚ ਛੋਟਾ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 45.
ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਸਮਝਾਓ ਕਿ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਨੂੰ ਅਭਿਸਾਰੀ ਲੈੱਨਜ਼ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈਂਨਜ਼ ਨੂੰ ਪ੍ਰਮਾਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਤੋਂ ਬਣਿਆ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਹੈ : ਕਿਉਂਕਿ ਪ੍ਰਿਜ਼ਮ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਣ ਵਾਲੀ ਕਿਰਨ ਇਸਦੇ ਆਧਾਰ ਵੱਲ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਨੂੰ ਅਭਿਸਾਰਿਤ (ਇਕੱਠਾ) ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਸਨੂੰ ਅਭਿਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 46.
ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਸਮਝਾਓ ਕਿ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਨੂੰ ਅਪਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਨੂੰ ਦੋ ਪ੍ਰਮਾਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸ਼ੀਰਸ਼ ਕੱਚ ਦੀ ਸਲੈਬ ਦੀ ਆਹਮਣੇ-ਸਾਹਮਣੇ ਵਾਲੀਆਂ ਸਤਾਵਾਂ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹੋਣ ਦੇ ਸਮਾਨ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਵਿਵਸਥਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਨੂੰ ਅਪਸਾਰਿਤ ਕਰਨ ਦੇ ਯੋਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਲੈਂਨਜ਼ ਨੂੰ ਅਪਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਝੁਕਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਆਧਾਰ ਵੱਲ ਨੂੰ ਜੁੜਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਅਪਸਰਿਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 47.
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਲਈ, ਜੇ ਵਸਤੂ ਅਨੰਤ ਤੇ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿੱਥੇ ਬਣੇਗਾ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਸਰੂਪ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਦਰਸਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੇ ਵਸਤੂ ਅਨੰਤ ਤੇ ਹੋਵੇਗੀ, ਤਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨਾਂ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਹੋਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਣ (ਅਪਵਰਤਨ) ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਪਸਾਰਿਤ ਹੋ ਜਾਣਗੀਆਂ ਜਾਂ ਫੈਲ ਜਾਣਗੀਆਂ। ਇਹ ਸਾਰੀਆਂ ਅਪਵਰਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਪਿੱਛੇ ਵੱਲ ਵਧਾਉਣ ਤੇ ਇੱਕ ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਬਿੰਦੂ ਨੂੰ ਫੋਕਸ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਸਾਇਜ਼ ਵਿੱਚ ਛੋਟਾ ਹੋਵੇਗਾ । ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਸਾਰੀਆਂ ਚਿੱਤਰ-ਅਨੰਤ ਤੇ ਪਈ ਵਸਤੂ ਦਾ ਅਵਤਲ ਆਪਤਿਤ ਕਿਰਨਾਂ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨੰਤਰ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਇਆ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਸਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 48.
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਲਈ, ਵਸਤੂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਕੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਫੋਕਸ ਤੇ ਬਣੇ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਛੋਟਾ ਹੋਵੇ ? ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਦਰਸਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਫੋਕਸ ਤੇ ਬਣਨ ਅਤੇ ਆਕਾਰ (ਸਾਇਜ਼) ਵਿੱਚ ਛੋਟਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਅਨੰਤ ਤੇ ਅਰਥਾਤ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਬਹੁਤ ਦੂਰੀ (ਅਨੰਤ) ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 49.
ਲੈੱਨਜ਼ ਫਾਰਮੂਲਾ ਕੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਵਿਉਂਤਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਹੜੀਆਂ ਚਿੰਨ੍ਹ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਲੈੱਨਜ਼ ਫਾਰਮੂਲਾ (Lens Formula) – ਲੈੱਨਜ਼ ਫਾਰਮੂਲਾ ਵਸਤੂ ਦੀ ਦੂਰੀ (u), ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਦੂਰੀ (v) ਅਤੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) ਦੇ ਵਿੱਚ ਸੰਬੰਧ ਹੈ ।
\(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)

ਚਿੰਨ੍ਹ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ (Sign Conventions)-

  1. ਸਾਰੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।
  2. ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਧਨ (+) ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਦੋਂ ਕਿ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੀ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਰਿਣ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
  3. ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਧਨ ਅਤੇ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਰਿਣ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 50.
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਕਿਸ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ? ਇੱਕ ਚਿੱਤਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਆਪਣਾ ਉੱਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਵਸਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਬਣਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਉਸੇ ਪਾਸੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਪਾਸੇ ਵਸਤੂ ਹੈ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 51.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਲੈਂਨਜ਼ ਲਈ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਕੀ ਹੈ ?
ਜਾਂ
ਰੇਖੀ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (Magnification) – ਗੋਲਾਕਾਰ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਗਏ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸਨੂੰ ਅ ਨਾਲ ਪ੍ਰਗਟਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
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m ਦਾ ਕੋਈ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਦੋ ਇੱਕੋ ਜਿਹੀਆਂ ਰਾਸ਼ੀਆਂ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 52.
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-

ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
(1) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਚਮਕੀਲਾ ਤਲ ਬਾਹਰ ਵੱਲ ਉੱਠਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । (1) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਚਮਕੀਲਾ ਤਲ ਅੰਦਰ ਵੱਲ ਧੱਸਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
(2) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ ਬਣਦਾ ਹੈ । (2) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਦੋਨੋਂ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬਣਦੇ ਹਨ ।
(3) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਿੱਧਾ ਬਣਦਾ ਹੈ । (3) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਦੋਨੋਂ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
(4) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਛੋਟਾ ਬਣਦਾ ਹੈ । (4) ਇਸ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵੱਡਾ, ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਤਿੰਨੋਂ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਬਣਦੇ ਹਨ ।

ਪਸ਼ਨ 53.
ਉੱਤਲ ਲੈਂਨਜ਼ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-

ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼
(1) ਇਹ ਵਿਚਕਾਰ ਤੋਂ ਮੋਟਾ ਅਤੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਪਤਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । (1) ਇਹ ਮੱਧ ਤੋਂ ਪਤਲਾ ਅਤੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਮੋਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
(2) ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਅੱਖਰ ਵੱਡੇ ਅਤੇ ਮੋਟੇ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ । (2) ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਅੱਖਰ ਛੋਟੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ।
(3) ਇਹ ਆਪਾਤੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਕੇਂਦ੍ਰਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । (3) ਇਹ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਪੁੰਜ ਨੂੰ ਖਿੰਡਰਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
(4) ਵਸਤੂ ਦਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਦੋਨੋਂ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ । (4) ਇਹ ਵਸਤੂ ਦਾ ਆਭਾਸੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
(5) ਇਸਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਧਨਾਤਮਕ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । (5) ਇਸ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਰਿਣਾਤਮਕ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 54.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਵਿੱਚ ਕੀ ਅੰਤਰ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-

ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਪਵਰਤਨ
(1) ਕਿਸੇ ਚਮਕੀਲੀ ਸਤਹਿ ਨੂੰ ਟਕਰਾ ਕੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਦਾ ਵਾਪਸ ਮੁੜ ਆਉਣਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ । (1) ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਇੱਕ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਹੋਣ ਤੇ ਆਪਣੇ ਪੱਥ ਤੋਂ ਵਿਚਲਿਤ ਹੋਣਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
(2) ਇਸ ਵਿੱਚ ਆਪਤਨ ਕੋਣ ਤੇ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ ਹਮੇਸ਼ਾ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । (2) ਇਸ ਵਿੱਚ ਆਪਨ ਕੋਣ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ ਬਰਾਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ।
(3) ਪਰਾਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਉਸੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਵਾਪਸ ਮੁੜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ । (3) ਅਪਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਦੁਜੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਚਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 55.
ਬਿਨਾਂ ਛੂਹੇ ਤੁਸੀਂ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼, ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਅਤੇ ਚੱਕਰਾਕਾਰ ਕੱਚ ਦੀ ਸ਼ੀਟ ਦੀ ਕਿਵੇਂ ਪਛਾਣ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼, ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਅਤੇ ਕੱਚ ਦੀ ਸ਼ੀਟ ਨੂੰ ਛਪੇ ਹੋਏ ਅੱਖਰਾਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਰੱਖ ਕੇ ਅੱਖ ਵੱਲ ਲਿਆਓ । ਜੇਕਰ ਅੱਖਰਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ (ਸਾਇਜ਼ ਵੱਡਾ ਦਿਖਾਈ ਦੇਵੇ ਤਾਂ ਉਹ ਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਅੱਖਰਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਛੋਟਾ ਦਿਖਾਈ ਦੇਵੇ ਤਾਂ ਇਹ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਅੱਖਰਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਸਮਾਨ ਰਹੇ ਤਾਂ ਇਹ ਕੱਚ ਦੀ ਸ਼ੀਟ ਹੋਵੇਗੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 56.
ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਪਰਸਪਰ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਰੱਖੇ ਹੋਏ ਦੋ ਜਾਂ ਦੋ ਤੋਂ ਵੱਧ ਲੈਂਨਜ਼ਾਂ ਦੀ ਸੰਯੋਜਨ ਸਮਰੱਥਾ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੇਕਰ ਕਈ ਪਤਲੇ ਲੈੱਨਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ-ਦੂਸਰੇ ਨਾਲ ਜੋੜ ਕੇ ਰੱਖੀਏ ਤਾਂ ਇਸ ਲੈਂਨਜ਼ ਸੰਯੋਜਨ ਦੀ ਕੁੱਲ ਸਮਰੱਥਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲੈੱਨਜ਼ਾਂ ਦੀ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸਮਰੱਥਾ ਦੇ ਜੋੜ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਐਨਕ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਸੰਸ਼ੋਧਿਤ ਲੈੱਨਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਕਈ ਲੈੱਨਜ਼ਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਲੋੜੀਂਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੀ ਗਣਨਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
P = P1 + P2 + P3 +……

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 57.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜਾ ਦਰਪਣ ਦਰਸਾਇਆ ਹੈ ? ਦਰਪਣ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਕਿਸ ਥਾਂ ਤੇ ਪਈ ਹੈ ? ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ ਦਾ ਇੱਕ ਲੱਛਣ ਦੱਸੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 49
ਉੱਤਰ-
ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ AB ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਫੋਕਸ (F) ਅਤੇ ਧਰੁੱਵ (P) ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਪਈ ਹੈ ।

ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਬਣ ਰਿਹਾ ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ A’B’ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਵੱਡਾ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਹੈ । ਪ੍ਰਸ਼ਨ 58. ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣਾਂ ਦੇ ਦੋ ਉਪਯੋਗ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੋ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-

  1. ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
  2. ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣਾਂ ਦੇ ਉਪਯੋਗ-

  1. ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਪਰਾਵਰਤਕ ਦੇ ਰੂਪ ਵਜੋਂ ਪਰਾਵਰਤਕ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਵਿੱਚ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  2. ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਡਰਾਈਵਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਪਿੱਛੇ ਆ ਰਹੀ ਟ੍ਰੈਫਿਕ ਦਾ ਵਧੇਰੇ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਖੇਤਰ ਵੇਖਣ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਵਿੱਚ ਬਣ ਰਿਹਾ ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ ਛੋਟਾ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 59.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜਾ ਦਰਪਣ ਦਰਸਾਇਆ ਹੈ ? ਦਰਪਣ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਕਿੱਥੇ ਰੱਖਿਆ ਹੈ ? ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ ਦੇ ਲੱਛਣ ਲਿਖੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 50
ਉੱਤਰ-
ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਰਸਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਵਸਤੂ ਦੀ ਦੂਰੀ ਦਰਪਣ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਵਕੁਤਾ । ਕੇਂਦਰ (C) ਤੋਂ ਪਰੇ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਵਸਤੂ AB ਤੋਂ ਬਣਿਆ ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਤੋਂ ਛੋਟਾ ਹੈ ।

ਸੰਖਿਆਤਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Numerical Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
20 cm ਫੋਕਸ-ਦੂਰੀ ਦੇ ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਕਿੰਨੀ ਦੂਰ ਰੱਖੀ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਜੋ ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 40 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣੇ ?
ਹੱਲ :
f = -20 cm (ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ)
v = – 40 cm (ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦੇ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀ ਗਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਦੂਰੀ)
u = ? (ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਵਸਤੂ ਦੀ ਦੂਰੀ )
ਦਰਪਣ ਫਾਰਮੂਲੇ ਤੋਂ
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ਜਾਂ u = 40 cm.
ਇਸ ਲਈ ਵਸਤੁ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 40 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖੀ ਜਾਵੇ। ਉੱਤਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵਕਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ 15 cm ਹੈ ਅਤੇ ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਸ਼ੀਰਸ਼ ਤੋਂ 20 cm ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਰੂਪ ਅਤੇ ਸਥਿਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਵਕਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ (R) = -15 cm (ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ)
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ-ਦੂਰੀ (f) = \(\frac{-15}{2}\) cm
ਵਸਤੂ ਦੀ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (u) = -20 cm (ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੀ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪਿਆ ਗਿਆ)
ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ ਦੀ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (υ) = ?
ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (m) = ?
ਦਰਪਣ ਫਾਰਮੂਲੇ ਤੋਂ \(\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 52
∴ υ = -12
ਅਰਥਾਤ ਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 12 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਹੁਣ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (m) = \(\frac{-v}{u}\)
= \(\frac{-(-12)}{-20}\)
= \(\frac{-12}{20}\)
= \(\frac{-3}{5}\) = – 0.6
m < 1
ਕਿਉਂਕਿ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦਾ ਮੁੱਲ 1 ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੈ ਅਤੇ υ ਪਰਿਣਾਤਮਕ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਸਤੂ ਦੇ ਸਾਇਜ਼ ਤੋਂ ਛੋਟਾ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਇੱਕ 6 cm ਲੰਬੀ ਵਸਤੂ ਨੂੰ 18 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਦਰਪਣ ਤੋਂ 10 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਅਤੇ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
u = -10 cm
f = +18 cm (ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ)
h1 = + 6 cm (ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਮਾਪਣ ‘ਤੇ)
ਦਰਪਣ ਫਾਰਮੂਲੇ ਤੋਂ, \(\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
∴ \(\frac{1}{v}+\frac{1}{-10}=\frac{1}{18}\)
∴ \(\frac{1}{v}=\frac{1}{10}+\frac{1}{18}\)
\(\frac{1}{v}=\frac{18+10}{180}\)
= \(\frac{28}{180}\)
ਜਾਂ υ = + 6.4 cm
ਕਿਉਂਕਿ υ ਧਨਾਤਮਕ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ 6.4 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਹੈ ।
ਹੁਣ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ, m = \(\frac{-v}{u}\)
= \(\frac{(+6.4)}{-10}\)
= 0.64 < 1
m < 1
ਕਿਉਂਕਿ ਅ ਦਾ ਮੁੱਲ ਇੱਕ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੈ। ਇਸਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਕਿ ਪਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਈਜ਼ ਛੋਟਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵਕੁਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ 8 cm ਹੈ ਅਤੇ ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਇਸਦੇ ਧਰੁਵ ਤੋਂ 20 cm ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਅਤੇ ਸਥਿਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
u = -20 cm (ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੇ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀ ਗਈ ਦੁਰੀ)
R = -8 cm (ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਰਿਣਾਤਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ)
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ = ?
υ = ?
R = 2f,
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υ = -5 cm
ਰਿਣਾਤਮਕ ਚਿੰਨ੍ਹ ਇਹ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਪਾਸੇ 5 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
7.5 cm ਉਚਾਈ ਦੀ ਇੱਕ ਵਸਤੂ 20 cm ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਵਾਲੇ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 40 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਪਈ ਹੈ। ਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਦੂਰੀ, ਸੁਭਾਅ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਗਿਆਤ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ ਕਿ f = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
∴ = \(\frac{20}{2}\) = 10 cm
u = -40 cm
(ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਦੇ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀ ਗਈ ਦੂਰੀ)
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 54
υ = 8 cm
ਕਿਉਂਕਿ υ ਦਾ ਚਿੰਨ੍ਹ ਧਨਾਤਮਕ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਹੈ ਅਤੇ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ 8 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਹੁਣ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ m = \(\frac{-v}{u}\)
= \(\frac{-8}{-40}\)
= \(\frac{1}{5}\) = 0.2
m < 1
ਕਿਉਂਕਿ m < 1 ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਈਜ਼ ਵਸਤੂ ਦੇ ਸਾਈਜ਼ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਛੋਟਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਦਾ ਸਾਇਜ਼ 6 ਸੈਂ. ਮੀ. ਹੈ । ਇਸਨੂੰ 15 ਸੈਂ. ਮੀ. ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ 9 ਸੈਂ. ਮੀ. ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) = 15 ਸੈਂ. ਮੀ. (ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ)
ਵਸਤੂ ਦੀ ਧਰੁਵ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (u) = – 9 ਸੈਂ. ਮੀ.
ਵਸਤੂ ਦਾ ਸਾਈਜ਼ = 6 ਸੈਂ. ਮੀ.
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 55
υ = \(\frac{45}{8}\) = 5.62 ਸੈਂ. ਮੀ. ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਦੂਜੀ ਪਾਸੇ ਵੱਲ ਹੋਵੇਗਾ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਉਸ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ਜਿਸ ਦਾ ਵਰ੍ਹਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ 32 ਸਮ ਹੈ ?
ਹੱਲ :
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਵਰ੍ਹਾ ਅਰਧ ਵਿਆਸ (r) = 32 ਸਮ
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ, r = 2f
ਜਾਂ f = \(\frac{r}{2}\)
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 56
∴ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ f = 16 ਸਮ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਅਸੀਂ 20 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਕਿਸੇ ਪਤਲੇ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ਦਾ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਸਾਈਜ਼ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ । ਦੱਸੋ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਕਿੱਥੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ? ਇਸ ਪ੍ਰਕਰਣ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਣ ਲਈ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਰਨ ਦਾ ਰੇਖਾ ਚਿੱਤਰ ਖਿੱਚੋ ।
ਹੱਲ :
20 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ 2F ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ 2F ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣੇਗਾ ।
∴ ਵਸਤੂ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ = 2f
= 2 × f
= 2 × 20 cm
= 40 cm
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 57

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
4.0 cm ਉੱਚਾਈ ਵਾਲੀ ਇੱਕ ਵਸਤੂ 15.0 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ 30.0 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖੀ ਗਈ ਹੈ । ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਕਿੰਨੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਇੱਕ ਪਰਦੇ ਨੂੰ ਰੱਖਿਆ ਜਾਏ ਤਾਂ ਜੋ ਵਸਤੂ ਦਾ ਸਪੱਸ਼ਟ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਪਰਦੇ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਸਕੇ ? ਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਅਤੇ ਸਾਈਜ਼ ਵੀ ਪਤਾ ਕਰੋ। ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਵਸਤੂ ਦੀ ਉੱਚਾਈ (ਸਾਈਜ਼), h = 4.0 cm
ਵਸਤੂ ਦੀ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, u = -30 cm
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ, f = -15.0 cm
ਪਰਦੇ ਅਰਥਾਤ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, υ = ?
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਈਜ਼, h = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 58
∴ υ = -30 cm
ਅਰਥਾਤ ਪਰਦੇ ਨੂੰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 30 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਪਾਸੇ ਵਸਤੂ ਪਈ ਹੈ ।
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿਰਤੀ – ਕਿਉਂਕਿ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਪਰਦੇ ਤੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰਿਣਾਤਮਕ ਚਿੰਨ੍ਹ ਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਹੋਵੇਗਾ ।
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਆਕਾਰ (ਸਾਈਜ਼)-
ਦਰਪਣ ਦੇ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਸੂਤਰ ਤੋਂ
m = \(\frac{h^{\prime}}{h}=\frac{-v}{u}\)
ਜਾਂ ਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਆਕਾਰ, h’ = \(\frac{-v}{u}\) × h
= \(\frac{-(-30)}{-30}\) × 4
= \(\frac{30}{-30}[latex] × 4
= – 1 × 4
= -4 cm

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
3 cm ਉੱਚੇ ਪ੍ਰਤੀਬਿੰਬ ਨੂੰ 18 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 9 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਗਿਆਤ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਵਸਤੂ ਦੀ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, u = -9 cm
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ, f = -18 cm
ਵਸਤੂ ਦੀ ਉੱਚਾਈ, h = 3 cm
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ (ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਦੂਰੀ), υ = ?
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਆਕਾਰ, ਉੱਚਾਈ) h’ = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 59
∴ υ = + 18 cm
ਧਨਾਤਮਕ ਚਿੰਨ੍ਹ ਇਹ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਰਪਣ ਦੇ ਪਿੱਛੇ 18 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ ਹੋਵੇਗਾ ।
ਹੁਣ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਤੋਂ, m = [latex]\frac{h^{\prime}}{h}=\frac{v}{u}\)
ਜਾਂ h’ = \(\frac{-v}{u}\) × h
= \(\frac{-(18)}{-9}\) × 3
∴ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਉੱਚਾਈ (ਆਕਾਰ) = 6 cm

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
18 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਕਿੰਨੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ 24 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣੇ ? ਇਸ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਵੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ?
ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ, f = + 18 cm
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, υ = + 24 cm
ਵਸਤੂ ਦੀ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, u = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 60
∴ u = -72 cm
ਰਿਣਾਤਮਕ ਚਿੰਨ੍ਹ ਇਹ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 72 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।
ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ m = \(\frac{-v}{u}\)
= \(\frac{-24}{-72}\)
= \(\frac{1}{3}\)
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਦਾ \(\frac{1}{3}\) ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ 25 cm ਹੈ । ਵਸਤੂ ਦੀ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ ਗਿਆਤ ਕਰੋ, ਜਦਕਿ ਉਸਦਾ ਤਿਬਿੰਬ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ 75 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਕੀ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਹੱਲ :
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ, f = +25 cm
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, υ = + 75 cm
ਵਸਤੂ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, u = ?
ਲੈਂਨਜ਼ ਸੂਤਰ \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) ਤੋਂ
\(\frac{1}{u}=\frac{1}{v}-\frac{1}{f}\)
= \(\frac{1}{75}-\frac{1}{25}\)
= \(\frac{1-3}{75}\)
= \(\frac{-2}{75}\)
⇒ u = \(\frac{-75}{2}\)
∴ u = – 37.5 cm
ਵਸਤੂ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਖੱਬੇ ਪਾਸੇ 37.5 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਸਥਿਤ ਹੈ ।
∴ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਹਵਾ ਦੇ ਸਾਪੇਖ ਸੰਘਣਾ ਫਟ ਕੱਚ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ 1.65 ਅਤੇ ਅਲਕੋਹਲ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 1.36 ਹੈ । ਅਲਕੋਹਲ ਦੇ ਸਾਪੇਖ ਫਲਿੰਟ ਕੱਚ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਹੱਲ :
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 61
= \(\frac{1.65}{1.36}\)
= \(\frac{165}{136}\)
= 1.21

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਇੱਕ ਵਸਤੂ 20 ਸਮ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 40 ਸਮ ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਰੱਖੀ ਗਈ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਅਤੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਪਤਾ ਕਰੋ !
ਹੱਲ :
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) = -20 ਸਮ
ਵਸਤੂ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (u) = -40 ਸਮ
ਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਲੈਂਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (ਸਥਿਤੀ) (υ) = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 62
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 63
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਛੋਟਾ ਹੋਵੇਗਾ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਕਿਸੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਵੇਗ 2 × 108m/s ਹੈ । ਇੱਕ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਇਸ ਦੇ ਸੰਘਣੇ ਪਾਸੇ ਨਾਲ 30° ਦਾ ਕੋਣ ਬਣਾਉਂਦੀ ਹੈ | ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ ਪਤਾ ਕਰੋ ਨਿਰਵਾਯੂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਵੇਗ = 3 × 108 m/s |
ਹੱਲ :
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 64
sin r = \(\frac{0.5}{\frac{2}{3}}\)
sin r = 0.7500
∴ ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ, r = 48°36′

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
5 cm ਉੱਚੀ ਕੋਈ ਵਸਤੂ 10 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦੇ ਅਭਿਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ 25 cm ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨ ਰੇਖਾ-ਚਿੱਤਰ ਬਣਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਸਾਈਜ਼ ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਇੱਥੇ ਵਸਤੂ ਦੀ ਉੱਚਾਈ h1 = 5 cm
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਵਸਤੂ ਦੀ ਦੂਰੀ u = -25 cm
ਲੈੱਨਜ਼ ਫਾਰਮੂਲਾ ਤੋਂ f = + 10 cm (ਅਭਿਸਾਰੀ ਲੈੱਨਜ਼ ਜਾਂ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼)
υ = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 65
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 66

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
15 cm ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦਾ ਕੋਈ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ਦਾ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ 10 cm ਦੂਰੀ ਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ। ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਕਿੰਨੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਵਸਤੂ ਸਥਿਤ ਹੈ ? ਚਿੱਤਰ ਵੀ ਬਣਾਓ ।
ਹੱਲ :
ਇੱਥੇ f = -15 cm, υ = -10 cm, u = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 67
= \(\frac{-1}{10}+\frac{1}{15}\)
\(\frac{-3+2}{30}\)
= \(\frac{-1}{30}\)
u = -30 cm
ਵਸਤੂ ਨੂੰ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ 30 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਨੂੰ 15 cm ਫੋਕਸ-ਦੂਰੀ ਦੇ ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ 30 cm ‘ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਦੱਸੋ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਰੂਪ ਸਥਿਤੀ ਅਤੇ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਹੱਲ :
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) = -15 cm (ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ f ਰਿਣਾਤਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।
ਵਸਤੁ ਦੀ ਅਵਤ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (u) = -30 cm (ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੇ ਉਲਟ ਮਾਪੀ ਦੁਰੀ)
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਅਵਤਲ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (v) = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 68
υ ਦੇ ਰਿਣ ਚਿੰਨ੍ਹ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੇ ਉਸੇ ਪਾਸੇ 10 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣੇਗਾ ਜਿਸ ਪਾਸੇ ਵਸਤੂ ਰੱਖੀ ਗਈ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ ਹੋਵੇਗਾ ।
ਹੁਣ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (m) = \(\frac{v}{u}\)
= \(\frac{(-10)}{(-30)}\)
= \(\frac{10}{30}\)
= \(\frac{1}{3}\) = 0.33
ਕਿਉਂਕਿ ਅ ਦਾ ਮਾਨ ਧਨਾਤਮਕ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਿੱਧਾ ਹੈ ।
∴ |m| = \(\frac{1}{3}\) ਜੋ ਕਿ < 1 ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਾਈਜ਼ ਵਿੱਚ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਛੋਟਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
7 cm ਉਚਾਈ ਦੀ ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਨੂੰ 20 cm ਫੋਕਸ-ਦੂਰੀ ਦੇ ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ 40 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ, ਸਰੂਪ ਅਤੇ ਉੱਚਾਈ ਮਾਲੂਮ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਵਸਤੂ ਦੀ ਉੱਚਾਈ (h) = + 7 cm
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f)= + 20 cm
(ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਧਨਾਤਮਕ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।)
ਵਸਤੂ ਦੀ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (u) = -40 cm
(ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਦੇ ਉਲਟ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਮਾਪੀ ਗਈ ਦੂਰੀ)
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (υ) = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 69
∴ υ = + 40 cm
υ ਦੇ ਧਨ ਚਿੰਨ੍ਹ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤਿਬਿੰਬ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ 40 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਹੁਣ m = \(\frac{v}{u}\) = \(\frac{40}{-40}\) > m = -1
\(|m|=|-1|\) = 1
ਪਰ m = \(\frac{h_{2}}{h_{1}}\)
∴ h2 = h1
ਅਰਥਾਤ ਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਇਜ਼ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ (ਸਾਈਜ਼) ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
4 cm ਉੱਚਾਈ ਦੀ ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਨੂੰ -10 ਡਾਇਓਪਟਰ ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਲੇ ਇਕ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ 15 cm ਦੀ ਦੂਰੀ ਤੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ | ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਈਜ਼ ਅਤੇ ਸਰੂਪ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਵਸਤੂ ਦੀ ਉੱਚਾਈ (h1) = +4 cm
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (P) = -10 ਡਾਇਪਟਰ
ਪਰ P = PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 70
∴ f = \(\frac{1}{-10}\) × 100
= -10 cm
∴ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f)= -10 cm
ਵਸਤੂ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (u) = -15 cm
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਤੋਂ ਦੂਰੀ (υ) = ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 71
∴ υ = -6 cm
υ ਦੇ ਰਿਣ ਚਿੰਨ੍ਹ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਉਸੇ ਪਾਸੇ 6 cm ਦੀ । ਦੂਰੀ ਤੇ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਹੁਣ m = \(\frac{v}{u}\)
= \(\frac{-6}{-15}\)
= \(\frac{2}{5}\)
m = \(\frac{h_{2}}{h_{1}}=\frac{2}{5}\)
∴ h2 = \(\frac{2}{5}\) × h1
= \(\frac{2}{5}\) × 4
∴ h2 = \(\frac{8}{5}\) cm
= 1.6 cm.
ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦਾ ਸਾਈਜ਼ 1.6 cm ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
5 ਮੀਟਰ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਅਵਤ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) = -5 m
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (P) = ?
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (P) = \(\frac{1}{f}\) (ਮੀਟਰਾਂ ਵਿੱਚ)
= \(\frac{1}{-5}\)
= -0.2D

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
4 ਮੀਟਰ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਇਕ ਉੱਤਲ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ ।
ਹੱਲ :
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) = 4 ਮੀ.
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (P) = ?
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (P) = \(\frac{1}{f}\) (ਮੀਟਰਾਂ ਵਿੱਚ)
= \(\frac{1}{4}\)
p = 0.25D

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
5 ਮੀਟਰ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਇਕ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਪਤਾ ਕਰੋ । ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਇਕਾਈ ਲਿਖੋ । (ਮਾਂਡਲ ਪੇਪਰੇ)
ਹੱਲ :
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (f) = 5 ਮੀ.
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸਕਤੀ (P) = ?
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (P) = \(\frac{1}{f}\)
= \(\frac{1}{5}\)
P = 0.20 D (ਡਾਇਓਪਟਰ) ਉੱਤਰ

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (Focal length) ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (Focal length) – ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਧਰੁਵ ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਦੀ ਦੂਰੀ ਨੂੰ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । S.I. ਪੱਧਤੀ ਵਿਚ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦਾ ਮਾਤਕ ਮੀਟਰ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਦਰਪਣ ਦਾ ਧਰੁਵ ਜਾਂ ਸ਼ੀਰਸ਼ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਧਰੁਵ ਜਾਂ ਸ਼ੀਰਸ਼ (Pole) – ਦਰਪਣ ਦੇ ਮੱਧ ਬਿੰਦੂ ਜਾਂ ਕੇਂਦਰ ਨੂੰ ਇਸ ਦਾ ਧਰੁਵ ਜਾਂ ਸ਼ੀਰਸ਼ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਜੇ ਕੋਈ ਵਸਤੂ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਤੋਂ 10 ਮੀਟਰ ਦੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਹੈ, ਤਾਂ ਵਸਤੂ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਿਚ ਕਿੰਨੀ ਦੂਰੀ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਸਤੁ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਿਚਕਾਰ ਦੂਰੀ = (10 + 10) ਮੀਟਰ = 20 ਮੀਟਰ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ‘ਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪੈਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਸ ਦਾ ਆਪਾਤੀ ਕੋਣ ਅਤੇ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕੋਣ ਕਿੰਨੀ-ਕਿੰਨੀ ਡਿਗਰੀ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਪਤਨ ਕੋਣ (∠i) = 0
ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ (∠r) = 0

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਊਰਜਾ ਦੇ ਕੋਈ ਤਿੰਨ ਰੂਪਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਊਰਜਾ
  2. ਤਾਪ ਊਰਜਾ
  3. ਧੁਨੀ ਊਰਜਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਉਰਜਾ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਿਜਲ-ਚੁੰਬਕੀ ਤਰੰਗਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਹਵਾ ਵਿਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਕਿੰਨੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
3 × 108 m/s ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਇੱਕ ਮੁੱਖ ਪ੍ਰਕਿਰਤਿਕ ਸੋਮੇ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੂਰਜ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸੋਮਿਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਮੋਮਬੱਤੀ
  2. ਬਿਜਲੀ ਲੈਂਪ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੀਆਂ ਦੋ ਕਿਸਮਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਅਤੇ
  2. ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਆਪਨ ਕੋਣ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਪਤਨ ਕੋਣ – ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਅਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਬਣੇ ਕੋਣ ਨੂੰ ਆਪਤਨ ਕੋਣ (∠i) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ-ਪਰਾਵਰਤਿਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਅਭਿਲੰਬ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਆਪਨ ਬਿੰਦੂ ‘ਤੇ ਬਣੇ ਕੋਣ ਨੂੰ ਪਰਾਵਰਤਨ ਕੋਣ (∠r) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ (Spherical Mirror) – ਜੇਕਰ ਦਰਪਣ ਕਿਸੇ ਖੋਖਲੇ ਗੋਲੇ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦੀ ਇੱਕ ਸਤਹਿ ਪਾਲਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਸਤਹਿ ਪਰਾਵਰਤਕ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਅਜਿਹਾ ਦਰਪਣ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿਚ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਸਮਾਨ ਆਕਾਰ (ਸਾਇਜ਼) ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਕਿਸ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਧਨਾਤਮਕ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਦਰਪਣ ਫਾਰਮੂਲਾ ਲਿਖੋ ।
ਜਾਂ
ਕਿਸੇ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਨ ਲਈ ਫਾਰਮੂਲਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
\(\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}\)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਕਿਸ ਸਤਹਿ ਤੋਂ ਪਰਾਵਰਤਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਅੰਦਰਲੀ ਸਤਹਿ ਜੋ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕ੍ਰਤਾ ਕੇਂਦਰ ਵੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਕਿਸ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਵਿਚ ਹਮੇਸ਼ਾ ਹੀ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਛੋਟਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿੱਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕ੍ਰਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਿਚ ਕੀ ਸੰਬੰਧ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
f = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਜਿਸ ਦਰਪਣ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ-15cm ਹੋਵੇ ਉਸਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਕਿਹੋ ਜਿਹੀ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਦਰਪਣ ਅਵਤਲ ਹੋਵੇਗਾ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਇੱਕ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ 0.4 ਹੈ । ਇਹ ਦਰਪਣ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੈ ? ਇਸਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਹੋਵੇਗਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਦਰਪਣ ਉੱਤਲ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਦਾ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਧਨਾਤਮਕ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 1 ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੈ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਛੋਟਾ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਆਭਾਸੀ ਹੋਵੇਗਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ । ਇਸ ਦੀ ਇਕਾਈ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (Magnification) = ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੇ ਆਕਾਰ ਜਾਂ ਸਾਇਜ਼ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਜਾਂ ਸਾਇਜ਼ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਨੂੰ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
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ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ (m) ਦੀ ਕੋਈ ਇਕਾਈ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਦੋਨੋਂ ਇੱਕੋ ਜਿਹੀਆਂ ਰਾਸ਼ੀਆਂ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਅਭਿਸਾਰੀ ਅਤੇ ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਅਪਸਾਰੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਭਿਸਾਰੀ ਦਰਪਣ – ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
ਅਪਸਾਰੀ ਦਰਪਣ – ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਸਰਚ ਲਾਈਟ ਲਈ ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲੇ ਦਰਪਣ ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਤੋਂ ਦੂਰ ਲਿਜਾਣ ਨਾਲ ਦਰਪਣ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਖੇਤਰ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਕਿੰਨੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਨੰਤ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਕਿਸ ਦਰਪਣ ਦੀ ਵੱਡਦਰਸ਼ਨ ਸਮਰੱਥਾ 1 ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿਚ ਬਣ ਰਹੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਲਈ ਵਸਤੂ ਦੂਰੀ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੂਰੀ ਵਿਚਕਾਰ ਸੰਬੰਧ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
u = -v

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 29.
ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ – ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀਆਂ ਕਿਰਨਾਂ ਪਰਾਵਰਤਨ ਜਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਇੱਕ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ ਤਾਂ ਉਸ ਬਿੰਦੂ ਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਤਿਬਿੰਬ ਹਮੇਸ਼ਾ ਉਲਟਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਰਦੇ ਤੇ ਲਿਆਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 30.
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਲਈ ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਅਨੰਤ ਤੇ C ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਅਨੰਤ ਅਤੇ cਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਵਿਚ ਪ੍ਰਤਿਬੰਬ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਫੋਕਸ ਅਤੇ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਬਣਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 31.
ਇਕ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦਾ ਵਕਰਤਾ ਅਰਧ ਵਿਆਸ 24 cm ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਕਿੰਨੀ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਵੜਾ ਅਰਧ ਵਿਆਸ R = 24 cm
∵ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ f = \(\frac{R}{2}=\frac{24}{2}\)
= 12 cm

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 32.
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿਚ ਦਾਖ਼ਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਅਭਿਲੰਬ ਦੇ ਕਿਸ ਪਾਸੇ ਝੁਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਜਿਹੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਅਭਿਲੰਬ ਤੋਂ ਦੂਰ ਵੱਲ ਝੁਕਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 33.
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਕਿਰਨ ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿਚ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਅਭਿਲੰਬ ਦੇ ਕਿਸ ਪਾਸੇ ਝੁਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਭਿਲੰਬ ਵੱਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 34.
ਜਦੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਸੰਘਣੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਕੋਣ ਅਤੇ ਆਪਤਨ ਕੋਣ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਪਤਨ ਕੋਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 35.
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੁਆਰਾ ਦੂਰ ਸਥਿਤ ਵਸਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਛੋਟਾ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 36.
ਕਿਸੇ ਛਪੇ ਹੋਏ ਕਾਗਜ਼ ਤੇ ਅਭਿਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਅੱਖਰ ਕਿਹੋ ਜਿਹੇ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਿੱਧੇ ਅਤੇ ਵੱਡੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 37.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਰੱਖਿਆ ਸਿੱਕਾ ਉੱਠਿਆ ਹੋਇਆ ਕਿਉਂ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ਕਾਰਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 38.
ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਦੀ ਦੂਰੀ ਨੂੰ ਕੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 39.
ਕਿਸ ਸਥਿਤੀ ਵਿਚ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਵਸਤੂ ਦੇ ਸਾਇਜ਼ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ 2F ਤੇ ਹੋਵੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 40.
ਉੱਤਲ ਲੈਂਨਜ਼ ਨਾਲ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਵੱਡਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਦੋਂ ਬਣਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਵਸਤੂ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਅਤੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਹੋਵੇ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 41.
ਲੈੱਨਜ਼ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ? ਇਹ ਕਿੰਨੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਲੈਂਜ਼ – ਇਕ ਅਜਿਹਾ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਮਾਧਿਅਮ ਜੋ ਦੋ ਵੱਖਰੀਆਂ ਗੋਲ ਸੜਾਵਾਂ ਨਾਲ ਘਿਰਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-

  1. ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼
  2. ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 42.
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀਆਂ ਦੂਰੀਆਂ ਕਿਸ ਬਿੰਦੂ ਤੋਂ ਮਾਪੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 43.
ਕਿਹੜੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਨੂੰ ਵੱਡਦਰਸ਼ੀ ਲੈਂਜ਼ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈਂਨਜ਼ ਨੂੰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 44.
ਲੈੱਨਜ਼ ਫਾਰਮੂਲਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
\(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}\)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 45.
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਇਸਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦੇ ਉਲਟ ਅਨੁਪਾਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 73

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 46.
ਬਿਨਾਂ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇ ਚਸ਼ਮੇ (Plane glasses) ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਕਿੰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
P = \(\frac{1}{f}\)
f = \(\frac{1}{0}\) = ∞
ਅਨੰਤ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 47.
ਕਿਸ ਲੈਂਨਜ਼ ਨੂੰ ਅਪਸਾਰੀ ਲੈਂਨਜ਼ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਲੈਂਨਜ਼ ਨੂੰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 48.
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਵਿੱਚ ਸੰਬੰਧ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 49.
ਕਿਸ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਧਨ ਅਤੇ ਕਿਸ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਰਿਣ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (ਸਮਰੱਥਾ) ਧਨ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਰਿਣ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 50.
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ (Focal Length of Lens) – ਕਿਸੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਉਸ ਲੈਂਨਜ਼ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਕੇਂਦਰ ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਦੇ ਵਿਚਲੀ ਦੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 51.
ਅਪਵਰਤਨ-ਅੰਕ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਪਵਰਤਨ-ਅੰਕ (Refractive Index) – ਨਿਰਵਾਯੂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਵੇਗ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੇ ਵੇਗ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਨੂੰ ਉਸ ਮਾਧਿਅਮ ਦਾ ਨਿਰਪੇਖ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 52.
ਦੋ ਘੋਲਾਂ ਦੇ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ 1.36 ਅਤੇ 1.54 ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਘੋਲਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਘੋਲ ਵੱਧ ਸੰਘਨ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਧਿਕ ਅਪਵਰਤਨ-ਅੰਕ 1.54 ਵਾਲਾ ਘੋਲ ਸੰਘਣਾ ਹੋਵੇਗਾ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 53.
ਐੱਨਜ਼ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦਾ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਡਾਈਆਪਟਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 54.
ਇੱਕ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ -2.5 D ਹੈ । ਇਹ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਦਾ ਲੈਂਜ਼ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਵਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 55.
ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਰੱਖੇ ਗਏ ਦੋ ਲੈੱਨਜ਼ਾਂ ਦੀ ਕੁਮਵਾਰ ਸਮਰੱਥਾ, P1 ਅਤੇ P2 ਹੈ । ਸੰਯੁਕਤ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਕਿੰਨੀ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
P = P1 + P2

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 56.
ਘੜੀਸਾਜ਼ ਘੜੀ ਦੇ ਸੂਖ਼ਮ ਪੁਰਜ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਦੇਖਣ ਲਈ ਕਿਹੜੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 57.
ਹੀਰੇ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ 2.42 ਹੈ ਜਦਕਿ ਕੱਚ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ 1.5 ਹੈ । ਦੋਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਵੱਧ ਸੰਘਣ ਹੈ ? ਜਿਸ ਵਿਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਅਧਿਕ ਹੋਵੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਉਂਕਿ ਹੀਰੇ ਦਾ ਅਪਵਰਤਨ ਅੰਕ ਕੱਚ ਨਾਲੋਂ ਅਧਿਕ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਕੱਚ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿਚ ਹੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਸੰਘਣ ਹੈ ।
ਹੁਣ ਕਿਉਂਕਿ ਵਿਰਲੇ ਮਾਧਿਅਮ ਵਿਚ ਸੰਘਣ ਮਾਧਿਅਮ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਵੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਕੱਚ ਵਿਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ਅਧਿਕ ਹੋਵੇਗੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 58.
ਵਿਚਲਨ ਕੋਣ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਚਲਨ ਕੋਣ – ਨਿਰਗਤ ਕਿਰਨ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਆਪਾਤੀ ਕਿਰਨ ਜਿਸ ਕੋਣ ਵਿਚੋਂ ਮੁੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉਸ ਕੋਣ ਨੂੰ ਵਿਚਲਨ ਕੋਣ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 59.
ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ – ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦਾ ਮੁੱਖ ਫੋਕਸ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਤੇ ਉਹ ਬਿੰਦੂ ਹੈ ਜਿਸ ਤੇ ਮੁੱਖ ਧੁਰੇ ਦੇ ਸਮਾਨਾਂਤਰ ਆ ਰਹੀਆਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕਿਰਨਾਂ ਅਪਵਰਤਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿਲਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 60.
ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ – ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਉਸ ਗੋਲੇ ਦਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਹੈ ਜਿਸਦਾ ਦਰਪਣ ਹਿੱਸਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ R ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 61.
ਹੇਠਾਂ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ਦੇ ਰੇਖਾ ਚਿੱਤਰ (a) ਅਤੇ (b) ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਹਨ ? ਦਰਪਣ (a) ਅਤੇ ਦਰਪਣ (b) ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੱਸੋ ।
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 76
ਉੱਤਰ-
(a) ਅਵਲ ਦਰਪਣ
(b) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 62.
ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤਾ ਚਿੱਤਰ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ?
PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ 77
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਅਪਵਰਤਨ ।

ਵਸਤੁਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Objective Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਇੱਕ ਉੱਤਲ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ-2 ਡਾਈਆਪਟਰ ਹੈ । ਇਸਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਹੋਵੇਗੀ-
(a) 20 cm
(b) 40 cm
(c) 10 cm
(d) 50 cm.
ਉੱਤਰ-
(d) 50 cm.

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਵਸਤੂ ਦਾ ਆਭਾਸੀ ਅਤੇ ਬਰਾਬਰ ਆਕਾਰ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ-
(a) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
(b) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ
(c) ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ
(d) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ।

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਵਸਤੂ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਬਣਦਾ ਹੈ, ਹਮੇਸ਼ਾ
(a) ਵਾਸਤਵਿਕ, ਉਲਟਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਛੋਟਾ
(b) ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਛੋਟਾ
(c) ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਛੋਟਾ
(d) ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੂ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਆਭਾਸੀ, ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਵਸਤੁ ਤੋਂ ਛੋਟਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਮੋਟਰ ਵਾਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਿੱਛੇ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ ਦੇਖਣ ਲਈ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਾਂ-
(a) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
(b) ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ
(c) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ
(d) ਕੋਈ ਵੀ ਗੋਲਾਕਾਰ ਦਰਪਣ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
\(\frac{\sin i}{\sin r}\) ਸੰਬੰਧ ਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤਾ-
(a) ਨਿਊਟਨ ਨੇ
(b) ਰਮਨ ਨੇ
(c) ਸਨੈਲ ਨੇ ।
(d) ਫੈਰਾਡੇ ਨੇ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਸਨੈਲ ਨੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਕਿਸੇ ਲੈੱਨਜ਼ ਦੀ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸ ਸੂਤਰ ਦੁਆਰਾ ਦਰਸਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
(a) \(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}+\frac{1}{u}\)
(b) \(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}\)
(c) f = \(\frac{1}{v}=\frac{1}{u}\)
(d) \(\frac{1}{f}=\frac{1}{u}-\frac{1}{v}\)
ਉੱਤਰ-
(b) \(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}\)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੀ ਵਕੁਤਾ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ R ਅਤੇ ਫੋਕਸ ਦੂਰੀ f ਵਿਚਾਲੇ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ-
(a) f = R
(b) f = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)
(c) R = \(\frac{f}{2}\)
(d) R = \(\frac{f}{4}\)
ਉੱਤਰ-
(b) f = \(\frac{\mathrm{R}}{2}\)

PSEB 10th Class Science Important Questions Chapter 10 ਪ੍ਰਕਾਸ਼-ਪਰਾਵਰਤਨ ਅਤੇ ਅਪਵਰਤਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਇੱਕ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ਦੇ ਵਕੁਤਾ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਸਥਿਤ ਵਸਤੂ ਦਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਅਤੇ ਉਲਟਾ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਕਿੱਥੇ ਬਣੇਗਾ ?
(a) F ‘ਤੇ
(b) C ‘ਤੇ
(c) C ਅਤੇ F ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ
(d) ਅਨਤ ‘ਤੇ ।
ਉੱਤਰ-
(b) C ‘ਤੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਦੰਦਾਂ ਦੇ ਡਾਕਟਰ ਦੁਆਰਾ ਆਮਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆਉਣ ਵਾਲਾ ਦਰਪਣ-
(a) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ
(b) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
(c) ਉੱਤਲ ਅਤੇ ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
(d) ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਵੱਡਾ ਅਤੇ ਵਾਸਤਵਿਕ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਉਪਯੋਗ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਦਰਪਣ-
(a) ਉੱਤਲ ਦਰਪਣ
(b) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ
(c) ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ
(d) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਅਵਤਲ ਦਰਪਣ ।

ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰਨਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ-ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ :

(i) ਨਿਰਵਾਤ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਚਾਲ ………………….. ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
3 × 108 ms-1

(ii) ਪ੍ਰਕਾਸ਼ …………………………. ਦੇ ਕਾਰਨ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਰੱਖਿਆ ਹੋਇਆ ਸਿੱਕਾ ਵਾਸਤਵਿਕ ਸਥਿਤੀ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਉੱਠਿਆ ਹੋਇਆ ਵਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਪਵਰਤਨ

(iii) ਸਮਤਲ ਦਰਪਣ ਦੁਆਰਾ ਬਣਿਆ ਪ੍ਰਤਿਬਿੰਬ ਸਿੱਧਾ, ਅਭਾਸੀ ਅਤੇ …………………………. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਸਤੂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

Punjab State Board PSEB 12th Class Economics Book Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Economics Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

PSEB 12th Class Economics 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगिक ढांचे के विकास का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में अधिक उद्योग घरेलू तथा छोटे पैमाने के उद्योग हैं। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की कमी पाई जाती है।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों की क्या स्थिति है ?
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग अधिक विकसित हुए हैं। 2018-19 में छोटे पैमाने के उद्योगों की कार्यशील इकाइयां 1:98 लाख थीं।

प्रश्न 3.
छोटे पैमाने के उद्योगों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
छोटे उद्योग तथा सहायक उद्योग वे उद्योग हैं, जिनमें एक करोड़ रुपए की अचल पूंजी का निवेश होता है।

प्रश्न 4.
जिन उद्योगों में एक करोड़ रुपए तक की पूंजी लगी होती है उनको …………. उद्योग कहा जाता है।
(a) कुटीर
(b) छोटे पैमाने के
(c) मध्यम आकार के
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) छोटे पैमाने के।

प्रश्न 5.
पंजाब में औद्योगिक प्रगति सन्तोषजनक है।
उत्तर-
ग़लत।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

प्रश्न 6.
पंजाब में अधिक मात्रा में …………….. उद्योग लगे हुए हैं।
(a) छोटे पैमाने के
(b) मध्यम आकार के
(c) बड़े पैमाने के
(d) उपरोक्त सभी प्रकार के।
उत्तर-
(a) छोटे पैमाने के।

प्रश्न 7.
पंजाब में औद्योगिक विकास की प्रगति ………….. है।
उत्तर-
धीमी।

प्रश्न 8.
पंजाब में बड़े पैमाने के उद्योगों की कमी का कारण ……………….. है।
(a) खनिज पदार्थों की कमी
(b) बिजली की कमी
(c) सीमावर्ती राज्य
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 9.
पंजाब में वित्त की कमी के कारण औद्योगिक विकास नहीं हुआ।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 10.
पंजाब में अल्प उद्योगों का कम विकास हुआ है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 11.
पंजाब में औद्योगिक विकास की ज़रूरत नहीं।
उत्तर-
ग़लत।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखें।
अथवा
पंजाब में औद्योगीकरण के महत्त्व को स्पष्ट करें।
उत्तर-
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित तत्त्वों से स्पष्ट हो जाती है-
1. संतुलित विकास (Balanced Growth)-पंजाब की अर्थ-व्यवस्था का संतुलित विकास नहीं हुआ क्योंकि पंजाब के अधिकतम लोग कृषि में लगे हुए हैं। इसलिए उद्योगों का विकास आवश्यक है तो जो पंजाब का संतुलित विकास हो सके।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment)-पंजाब में शहरों तथा गांवों में बेरोजगारी पाई जाती है। उद्योगों के विकास से पंजाब में शहरी बेरोज़गारी तथा गांवों में छुपी बेरोज़गारी कम होगी। उद्योगों के विकास से पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास का विवरण दें।
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों का विकास-

वर्ष कार्यशील इकाइयां (लाखों में) अचल पूंजी  (करोड़ ₹) उत्पादन (करोड़ ) रोज़गार (लाखों में)
1978-79 0.42 271 751 2.50
2017-18 1.72 86324 201590 15.26

प्रश्न 3.
पंजाब के कोई दो छोटे पैमाने के उद्योगों पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
पंजाब के मुख्य छोटे पैमाने के उद्योग अग्रलिखित हैं-
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौज़री उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2015-16 इस उद्योग द्वारा ₹ 3711 करोड़ वार्षिक मूल्य का माल उत्पादित किया जाता है। इसमें 78 हज़ार लोगों को रोज़गार प्राप्त होता है।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे स्तर तथा बड़े स्तर दोनों पर ही कार्य कर रहा है। साइकिल तथा साइकिल के पुर्जे बनाने का उद्योग लुधियाना, जालन्धर, राजपुरा तथा मालेरकोटला में स्थित है। 2015-16 में ₹ 12966 करोड़ मूल्य के साइकिल तथा साइकिल के पुों का उत्पादन किया गया। इसमें 78.4 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

प्रश्न 4.
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के दो कारण लिखें।
उत्तर-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के कारण (Causes of Slow Progress of Medium & Large Scale Industries in Punjab) –
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। पंजाब में खनिज पदार्थों की कमी के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान का भारत से हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

प्रश्न 5.
पंजाब सरकार द्वारा उद्योगों के विकास के लिए उठाए गए कोई दो कदम बताएं।
उत्तर-
1. करों में छूट (Exemption From Taxes)-नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए करों में छूट देने का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्ग A के क्षेत्रों में जो नए उद्योग स्थापित किए जाते हैं उनको बिक्री कर (Sales Tax) से 10 वर्ष के लिए तथा वर्ग B के क्षेत्रों में नए स्थापित उद्योगों के लिए बिक्री कर से 7 वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।

2. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-नई औद्योगिक नीति में भूमि के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। कोई भी उद्यमी किसी फोकल प्वाइंट पर भूमि की खरीद उद्योग स्थापित करने के लिए करता है तो भूमि की कीमत का 33% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा। जालन्धर के स्पोर्टस काम्पलैक्स में भूमि के लिए आर्थिक सहायता 25% दी जाएगी।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखें।
अथवा
पंजाब में औद्योगीकरण के महत्त्व को स्पष्ट करें।
उत्तर-
पंजाब में औद्योगीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित तत्त्वों से स्पष्ट हो जाती है-
1. संतुलित विकास (Balanced Growth)-पंजाब की अर्थ-व्यवस्था का संतुलित विकास नहीं हुआ क्योंकि पंजाब के अधिकतम लोग कृषि में लगे हुए हैं। इसलिए उद्योगों का विकास आवश्यक है तो जो पंजाब का संतुलित विकास हो सके।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment)-पंजाब में शहरों तथा गांवों में बेरोज़गारी पाई जाती है। उद्योगों के विकास से पंजाब में शहरी बेरोज़गारी तथा गांवों में छुपी बेरोज़गारी कम होगी। उद्योगों के विकास से पूर्ण रोज़गार की स्थिति प्राप्त की जा सकती है।

3. सरकार की आय में वृद्धि (Increase in Income of Government)-औद्योगीकरण द्वारा भिन्न-भिन्न उद्योगों का विकास होगा। सरकार को करों द्वारा अधिक आय प्राप्त होगी इसको लोगों के कल्याण पर व्यय किया जा सकता है।

4. कृषि पर जनसंख्या के दबाव में कमी (Less Pressure of Population on Agriculture)-पंजाब में 759% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। इसलिए प्रति व्यक्ति भूमि निरंतर कम हो रही है। उद्योगों के विकास से कृषि से जनसंख्या के दबाव को कम किया जा सकता है।

5. श्रमिकों के जीवन स्तर में वृद्धि (Increase in Standard of Living of Labourers)-पंजाब में औद्योगिक विकास से श्रमिकों की मांग बढ़ेगी परिणामस्वरूप श्रमिकों के व्यय में वृद्धि होगी। इससे श्रमिक ऊँचा जीवन स्तर व्यतीत कर सकेंगे।

प्रश्न 2.
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास के कारण तथा महत्त्व का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास के कारण तथा महत्त्व को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Minerals)-पंजाब में खनिज पदार्थ नहीं पाए जाते परिणामस्वरूप बड़े पैमाने के उद्योग विकसित नहीं हो सके। इसलिए छोटे पैमाने के उद्योगों को विकसित किया गया है।
  2. बड़े उद्योगों की कमी (Lack of Large Scale Industries)-पंजाब में बड़े पैमाने के उद्योग बहुत कम हैं। उद्यमी पंजाब में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते क्योंकि यह सीमावर्ती राज्य है। इसलिए बड़े उद्योगों की कमी को छोटे उद्योगों द्वारा पूर्ण किया गया है।
  3. परिश्रमी लोग (Hardworking People)-पंजाब के श्रमिक मेहनती तथा कुशल हैं। इन्होंने छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किए हैं जिससे श्रमिकों का जीवन स्तर ऊँचा हो रहा है।
  4. वित्त की कमी (Lack of Finance)-पंजाब में व्यापारिक बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा वित्त की सहूलतें कम प्रदान की गई हैं जबकि अन्य राज्यों में अधिक सहूलतें प्रदान की जाती हैं। वित्त की कमी के कारण बड़े पैमाने के उद्योग विकसित नहीं हो सके। इसलिए छोटे उद्योगों का महत्त्व बढ़ गया है।
  5. पंजाब सरकार की नीति (Policy of the Punjab Government)-पंजाब सरकार की औद्योगिक नीति में छोटे पैमाने के उद्योगों की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है। इसलिए पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योग अधिक विकसित हो गए हैं।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

प्रश्न 3.
पंजाब के छोटे उद्योगों की समस्याओं का वर्णन करें।
अथवा
पंजाब में छोटे उद्योगों के मंद विकास के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में छोटे उद्योगों की मुख्य समस्याएं निम्नलिखित हैं-

  1. वित्त की समस्या (Problem of Finance)-पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों को उचित मात्रा में वित्त प्राप्त नहीं होता। वित्त की कमी के कारण छोटे उद्योगों की विकास की गति मंद है।
  2. उत्पादन के पुराने ढंग (Old Methods of Production)-पंजाब के उद्योगों में पुराने ढंग से उत्पादन किया जाता है। इसलिए उत्पादन कम होता है तथा लागत अधिक आती है।
  3. कच्चे माल की समस्या (Problem of Raw Material)-पंजाब में उद्योगों के लिए कच्चा माल अन्य प्रान्तों से मंगवाना पड़ता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है तथा उत्पादन कम होता है।
  4. बिक्री की समस्याएं (Problems of Marketing)-पंजाब के छोटे उद्योगों को अपना तैयार माल बेचने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इन उद्योगों को बड़े उद्योगों द्वारा तैयार माल से मुकाबला करना पड़ता है क्योंकि बड़े पैमाने पर तैयार माल सस्ता तथा बढ़िया होता है। इसलिए छोटे उद्योगों की बिक्री के समय कठिनाई होती है।
  5. शक्ति की समस्या (Problem of Power)-पंजाब सरकार उद्योगों से कृषि को प्राथमिकता देती है। इसलिए समय-समय पर बिजली बंद (Power cut) का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 4.
पंजाब में प्रमुख छोटे पैमाने के उद्योगों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब के प्रमुख छोटे पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौजरी उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2015-16 में इस उद्योग में 78 हज़ार लोग कार्य करते थे तथा ₹ 3711 करोड़ का माल बनाया जाता था।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे तथा बड़े दोनों स्तरों पर कार्य करता है। इस उद्योग में साइकिल तथा इसके पुर्जे बनाए जाते हैं। यह उद्योग लुधियाना, जालन्धर तथा मलेरकोटला में स्थित है। वर्ष 2015-16 में, इसमें 78.4 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त है। वार्षिक ₹ 12966 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

3. सिलाई मशीन उद्योग (Sewing Machine Industry)-सिलाई मशीन उद्योग पंजाब में लुधियाना, सरहिन्द, बटाला तथा जालन्धर में है। 2015-16 में सिलाई मशीनों के लगभग 57 कारखाने थे। जिनमें 13464 मजदूरों को रोज़गार प्राप्त होता था। इस उद्योग में ₹ 1254 करोड़ का वार्षिक माल तैयार होता था।

4. खेलों का सामान बनाने का उद्योग (Sports Goods Industries)-पंजाब में खेलों का सामान बनाने का उद्योग जालन्धर में है। पंजाब में बनाया गया खेलों का सामान न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है। इस उद्योग में 4561 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त है। इसमें वार्षिक ₹ 267.57 लाख करोड़ का सामान बनाया जाता है।

प्रश्न 5.
पंजाब में बड़े तथा मध्यम उद्योगों की मंद गति के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पंजाब में बड़े तथा मध्यम उद्योगों की धीमी गति के कारण निम्नलिखित हैं-
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते इसलिए मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों ने काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता पड़ती है। पंजाब में खनिज पदार्थ न होने के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान से भारत का हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

3. विद्युत् की कमी (Lack of Power)-विद्युत् औद्योगिक विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में विद्युत् का प्रयोग कृषि में अधिक होता है। किन्तु बड़े उद्योगों के लिए काफ़ी मात्रा में विद्युत् की आवश्यकता होती है। विद्युत् की कमी के कारण बड़े तथा मध्यम उद्योगों की गति मंद है।

4. केन्द्र सरकार का कम योगदान (Less Investment by Central Government)-पंजाब में केन्द्रीय सरकार द्वारा बहुत कम निवेश किया गया है। पंजाब में केन्द्र सरकार का कुल निवेश 2.5% है। परन्तु केन्द्र सरकार ने 75% बिहार में, 12% कर्नाटक में निवेश किया है। इस कारण भी उद्योगों का विकास नहीं हो सका।

IV. दीर्य उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब के छोटे, मध्य तथा बड़े स्तर के उद्योगों की प्रकृति तथा ढांचे का वर्णन करें। (Explain the nature and structure and small, medium and large scale industries of Punjab.)
अथवा
पंजाब के प्रमुख छोटे आकार के उद्योगों की व्याख्या करें। (Explain the main Small Scale Industries of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब का औद्योगिक ढांचा (Structure of Industries in Punjab)-
पंजाब में औद्योगिक ढांचे को दो भागों में विभाजित करके स्पष्ट किया जा सकता है –
A. छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)
B. मध्य तथा बड़े पैमाने के उद्योग (Medium & Large Scale Industries)

A. छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)-वर्ष 1997 के पश्चात् छोटे पैमाने के उद्योगों में उन उद्योगों को शामिल किया जाता है जिनमें ₹ 3 करोड़ तक का निवेश किया होता है। इससे पूर्व स्थिर पूंजी के निवेश की सीमा केवल ₹ 60 लाख थी। पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों का विकास कार्यशील इकाइयां अचल पूंजी उत्पादन-
PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास 1
सूची पत्र से ज्ञात होता है कि 1978-79 में छोटे पैमाने के उद्योगों की संख्या 0.42 लाख थी जिनमें ₹ 271 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई थी। इन उद्योगों ₹ 751 करोड़ का उत्पादन किया जाता था तथा लगभग 2.50 लाख श्रमिक काम पर लगे हुए थे। वर्ष 2018-19 में छोटे पैमाने के उद्योगों की इकाइयों की संख्या बढ़कर 1.72 लाख हो गई है। इन उद्योगों में ₹ 86324 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है जिनमें ₹ 201590 करोड़ का उत्पादन किया जाता है। यह उद्योग 16.21 लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करते हैं।

पंजाब के मुख्य छोटे उद्योग
(Main Small Scale Industries of Punjab)
पंजाब के मुख्य छोटे पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-
1. हौज़री उद्योग (Hosiery Industry)-पंजाब का हौज़री उद्योग लुधियाना में केन्द्रित है। यह उद्योग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। 2018-19 इस उद्योग द्वारा ₹ 3711 करोड़ वार्षिक मूल्य का माल उत्पादित किया जाता है। इसमें 82 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

2. साइकिल उद्योग (Cycle Industry)-पंजाब में साइकिल उद्योग छोटे स्तर तथा बड़े स्तर दोनों पर ही कार्य कर रहा है। साइकिल तथा साइकिल के पुर्जे बनाने का उद्योग लुधियाना, जालन्धर, राजपुरा तथा मलेरकोटला में स्थित है। 2018-19 में ₹ 13 हज़ार करोड़ मूल्य के साइकिल तथा साइकिल के पुजों का उत्पादन किया गया। इसमें 88.5 हज़ार लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

3. सिलाई मशीन उद्योग (Sewing Machine Industry)-सिलाई मशीन बनाने का उद्योग लुधियाना, सरहिन्द, बटाला तथा जालन्धर में स्थित है। 2015-16 पंजाब में सिलाई मशीनों के लगभग 57 कारखाने हैं। इस उद्योग में ₹ 1356 करोड़ का माल हर वर्ष तैयार होता है तथा लगभग 13464 मजदूरों को रोजगार प्राप्त होता है।

4. खेलों का सामान बनाने का उद्योग (Sports Goods Industry)-खेलों का सामान बनाने का उद्योग जालन्धर में केन्द्रित है। पंजाब में तैयार किया खेलों का सामान न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है। 2018-19 में इस उद्योग की 529 इकाइयां लगी हुई हैं जिनमें 9561 मजदूरों को रोजगार प्राप्त है। वार्षिक ₹ 276.57 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

5. मोटर गाड़ियों के पुर्जे बनाने का उद्योग (Automobile Industry)-पंजाब में यह उद्योग लुधियाना, जालन्धर, पटियाला तथा कपूरथला में स्थित है। इस उद्योग में मोटर गाड़ियों के पुर्जे तैयार किए जाते हैं। 2019-20 इस उद्योग में ₹ 5022 लाख का माल प्रत्येक वर्ष तैयार किया जाता है। इसमें 52857 श्रमिक कार्य करते हैं।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

पंजाब में मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योग (Medium & Large Scale Industries of Punjab)-
जिन उद्योगों में ₹ 10 करोड़ से कम पूँजी लगी होती है उसको मध्य आकार का उद्योग कहा जाता है और जिसमें ₹ 10 करोड़ से अधिक अचल पूंजी लगी होती है, उनको बड़े पैमाने के उद्योग कहा जाता है। पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग अधिक विकसित नहीं हो सके। इन उद्योगों की स्थिति का विवरण इस प्रकार है|
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग
PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास 2
सूची-पत्र से स्पष्ट होता है कि 1978-79 में पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की 188 इकाइयां थीं जिनमें ₹ 379 करोड़ स्की अचल पूंजी लगी हुई थी। उस वर्ष ₹ 711 करोड़ का उत्पादन किया गया था तथा 91 हज़ार लोग रोज़गार पर लगे हुए थे। वर्ष 2017-18 में इन उद्योगों की संख्या बढ़ कर 898 हो गई है जिनमें ₹ 69591 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है। इन उद्योगों में ₹ 104973 करोड़ का उत्पादन किया गया। इनमें 2.84 लाख श्रमिक कार्य पर लगे हुए थे।

पंजाब के मुख्य मध्यम आकार तथा बड़े पैमाने के उद्योग (Medium & Large Scale Industries of Punjab)
पंजाब के मुख्य मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग निम्नलिखित हैं-
1. चीनी के कारखाने (Sugar Industry)-पंजाब में चीनी के 17 बड़े कारखाने हैं। यह उद्योग जालन्धर, कपूरथला, संगरूर, फरीदकोट, गुरदासपुर तथा रोपड़ जिलों में स्थित हैं। इस उद्योग में 2018-19 में ₹ 19823 करोड़ चीनी का उत्पादन हुआ। इसमें 5487 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त था।

2. सूती कपड़े के कारखाने (Cotton Textile Industry)-पंजाब में 2018-19 धागा बनाने के 140 कारखाने हैं। एक कारखाने में धागे से कपड़ा भी बनाया जाता है। यह कारखाने फगवाड़ा, अमृतसर, बरनाला, मलेरकोटला तथा अबोहर में स्थित हैं। इस उद्योग में 16849 श्रमिक कार्य करते हैं। 166.27 मिलियन मीटर कपड़ा वार्षिक तैयार किया जाता है।

3. स्वराज व्हीकलज लिमिटेड (Swaraj Vehicles Limited)-यह कारखाना जनतक क्षेत्र में वर्ष 1985 में ₹ 60 करोड़ की लागत से स्थापित किया गया था। इसमें माल की ढुलाई के लिए टैंपू बनाए जाते हैं। यह कारखाना 9 हज़ार मज़दूरों को रोजगार प्रदान करता है। इसकी स्थापना मोहाली में की गई है।

4. गर्म कपड़े के कारखाने (Wollen Cloth Industry)- पंजाब में गर्म कपड़ा बनाने के कारखाने धारीवाल, और छहरटा अमृतसर में हैं। इस उद्योग में 1 लाख 8 हज़ार श्रमिकों को रोजगार प्राप्त है। इसमें वार्षिक ₹ 354 करोड़ का माल तैयार किया जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों के विकास को स्पष्ट करें। पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के क्या कारण हैं ?
(Explain the development medium and Large Scale Industries in Punjab. What are the cause of slow progress of medium and Large Scale Industries ?)
उत्तर-
पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योग अधिक विकसित नहीं हो सके। इन उद्योगों के विकास का अनुमान निम्नलिखित सूची-पत्र द्वारा लगाया जा सकता है|
पंजाब में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योग-

वर्ष कार्यशील इकाइयां(करोड़ ₹) अचल पूंजी (लाख ₹) उत्पादन रोज़गार (लाख में)
1978-79 188 379 711 0.91
2018-19 898 69591 104973 2.84

2.84 सूची-पत्र से ज्ञात होता है कि वर्ष 2018-19 में मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों की संख्या 469 है। इन उद्योगों में ₹ 69591 करोड़ की अचल पूंजी लगी हुई है। इनमें उत्पादन ₹ 104973 लाख का किया गया। यह उद्योग 2.84 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है परन्तु अन्य औद्योगिक राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, कर्नाटक इत्यादि की तरह पंजाब में इन उद्योगों की प्रगति बहुत कम रही है। मध्यम तथा बड़े उद्योगों की कम प्रगति के मुख्य कारण निम्नलिखित अनुसार हैं-

पंजाब में मध्यम तथा बडे पैमाने के उद्योगों की मंद प्रगति के कारण (Causes of Slow Progress of Medium & Large Scale Industries in Punjab)-
1. खनिज पदार्थों की कमी (Lack of Mineral Resources)-पंजाब में खनिज पदार्थ बिलकुल नहीं मिलते। मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों को काफ़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। पंजाब में खनिज पदार्थों की कमी के कारण इनको अन्य राज्यों से मंगवाना पड़ता है। इस कारण बड़े तथा मध्यम पैमाने के उद्योगों का विकास नहीं हुआ।

2. सीमावर्ती राज्य (Border State)-पंजाब में मध्यम तथा बड़े आकार के उद्योगों की मंद प्रगति का सबसे बड़ा कारण पंजाब का सीमावर्ती राज्य होना है। पंजाब की सीमाएं पाकिस्तान से मिलती हैं। पाकिस्तान का भारत से हमेशा झगड़ा रहता है। अब तक दो युद्ध हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में उद्यमी इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित नहीं करना चाहते।

3. विद्युत् की कमी (Lack of Power)-विद्युत् औद्योगिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। पंजाब में विद्युत् का प्रयोग कृषि क्षेत्र में अधिक होता है। बड़े उद्योगों के लिए अधिक मात्रा में विद्युत् की आवश्यकता होती है किन्तु विद्युत् की कमी के कारण मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योगों की प्रगति धीमी है।

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4. केन्द्रीय सरकार का कम योगदान (Less Investment by Central Government)-पंजाब में केन्द्रीय सरकार द्वारा बहुत कम निवेश किया गया है। पंजाब में केन्द्र सरकार का कुल निवेश 2.5% है। परन्तु केन्द्र सरकार ने 15% निवेश बिहार में, 12% निवेश कर्नाटक में लगाया है। इस कारण भी पंजाब में उद्योगों का विकास नहीं हो सका।

5. कृषि प्रधान अर्थ-व्यवस्था (Agricultural Economy)-पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। राज्य सरकार ने भी पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि के विकास की तरफ विशेष ध्यान दिया है। उद्योगों के विकास को आंखों से ओझल किया गया है। कृषि का महत्त्व अधिक होने के कारण लघु पैमाने के उद्योगों को प्राथमिकता दी गई ताकि रोज़गार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।

6. पूंजी की कमी (Lack of Capital)-बड़े पैमाने के उद्योगों के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। पंजाब में पूंजी की कमी है क्योंकि सरकार की आंतरिक सुरक्षा पर बहुत व्यय करना पड़ता है। इसलिए निवेश करने के लिए पूंजी की कमी है। निजी क्षेत्र के उद्योग विकसित नहीं हुए क्योंकि ब्याज की दर बहुत अधिक है। इसलिए मध्यम तथा बड़े पैमाने के उद्योगों में निवेश कम हुआ है।

7. औद्योगिक लड़ाई-झगड़े (Industrial Disputes)-पंजाब में अगर स्वतन्त्रता के पश्चात् औद्योगिक विकास में वृद्धि हुई है तो इससे औद्योगिक लड़ाई-झगड़े भी बढ़ गए हैं। तालाबंदी, हड़ताल आम नज़र आती है। इस कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
पंजाब सरकार की आधुनिक उद्योग नीति का वर्णन करें। (Explain the new Industrial Policy of Government of Punjab.)
उत्तर-
पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति (New Industrial Policy of Government of Punjab)-
पंजाब में औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक नीति की घोषणा 16 फरवरी, 1972 को की गई। इसके पश्चात् सरकार ने 1979, 1987, 1989, 1991 में औद्योगिक नीति में परिवर्तन किए। पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीति की घोषणा 14 मार्च, 1996 में की गई। नई औद्योगिक नीति की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं –
1. मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)-

  • औद्योगिक विकास की दर में वृद्धि करके 12% की जाएगी।
  • राज्य के घरेलू उत्पादन में उद्योगों का भाग बढ़ाकर 25% किया जाएगा।
  • उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक ढांचा अर्थात् सड़कें, विद्युत्, वित्त, श्रमिक, कच्चे माल की पूर्ति के लिए सहूलतें दी जाएंगी।
  • ग्रामीण बेरोज़गारों को उद्योगों तथा सम्बन्धित उद्यमों में रोजगार की सहूलतें दी जाएंगी।
  • पंजाब में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा।
  • पंजाब के छोटे, मध्यम तथा बड़े स्तर के उद्योगों के लिए फोकल प्वाइंट्स स्थापित किए जाएंगे।
  • निर्यात को उत्साहित करने के लिए नई मण्डियाँ ढूंढ़ी जाएंगी।
  • आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाएगा।
  • नए उद्योग स्थापित किए जाएंगे तथा पुराने स्थापित उद्योगों का नवीनीकरण तथा आधुनिकीकरण किया जाएगा।
  • छोटे स्तर के उद्योगों को विकसित करके रोजगार के अधिक अवसर प्रदान किए जाएंगे।

2. विकास क्षेत्र (Growth Areas)-पंजाब के भिन्न-भिन्न जिलों को औद्योगिक विकास के पक्ष से चार वर्गों में विभाजित किया गया-

  1. वर्ग A (Category A)-इस वर्ग में शामिल किए गए क्षेत्रों को सबसे अधिक रियायतें देने की घोषणा की गई। इसमें अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट तथा मानसा के ज़िले शामिल किए गए हैं।
  2. वर्ग B (Category B)-इस वर्ग में जिन क्षेत्रों में शामिल किया गया है उनको वर्ग A के क्षेत्रों से कम रियायतें दी जाएंगी। इस वर्ग में राज्य के अन्य जिलों को शामिल किया गया है।
  3. वर्ग C (Category C)-इस वर्ग में लुधियाना तथा जालन्धर के फोकल प्वाइंट्स छोड़ कर पंजाब के सब फोकल प्वाइंट्स को शामिल किया गया है। फोकल प्वाइंट्स पर अधिक-से-अधिक उद्योग स्थापित करने के प्रयत्न किए जाएंगे।
  4. वर्ग D (Category D) इस वर्ग में शामिल उद्योगों को कोई प्रोत्साहन तथा अनुदान नहीं दिया जाएगा। इस वर्ग में जालन्धर तथा लुधियाना की निगम सीमाओं के फोकल प्वाइंट्स तथा उनके ब्लाकों को शामिल किया गया है। वर्ग A तथा वर्ग B के क्षेत्रों को बहुत-सी रियायतों की घोषणा की गई है ताकि पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों का विकास हो सके।

3. कृषि आधारित उद्योगों का विकास (Incentives to Agro Based Industries)-पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। इसलिए कृषि विकास को बनाए रखने के लिए उन उद्योगों को विकसित किया जाएगा जिनके लिए कच्चा माल कम कीमत पर राज्य में से ही प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे उद्योगों को 10 वर्ष के लिए बिक्री कर से मुक्त किया गया है। ऋण पर ब्याज का 5% भाग सरकार द्वारा दिया जाएगा तथा स्थायी पूंजी का 30% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा जो कि अधिकतम 50 लाख रुपए तक हो सकती है।

4. करों में छूट (Exemption From Taxes)-नई औद्योगिक नीति में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए करों में छूट देने का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्ग A के क्षेत्रों में जो नए उद्योग स्थापित किए जाते हैं उनको बिक्री कर (Sales Tax) से 10 वर्ष के लिए तथा वर्ग B के क्षेत्रों में नए स्थापित उद्योगों के लिए बिक्री कर से 7 वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।

5. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-नई औद्योगिक नीति में भूमि के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। कोई भी उद्यमी किसी फोकल प्वाइंट पर भूमि की खरीद उद्योग स्थापित करने के लिए करता है तो भूमि की कीमत का 33% भाग आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाएगा। जालन्धर के स्पोर्टस काम्पलैक्स में भूमि के लिए आर्थिक सहायता 25% दी जाएगी।

6. छोटे उद्योगों का आधुनिकीकरण (Modernisation of Small Scale Industries)-पंजाब में छोटे पैमाने के उद्योगों को विकसित करने के लिए एक विशेष फंड की स्थापना की गई है। जो उद्यमी पुराने स्थापित किए यूनिटों का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं उनको विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी।

7. मध्यम तथा बड़े उद्योगों को प्रोत्साहन (Incentives to medium & Large Scale Industries)-नई औद्योगिक नीति में यह घोषणा भी की गई कि वर्ग A के क्षेत्रों में जो उद्यमी निवेश करते हैं उनके द्वारा किए गए बड़े स्तर के उद्योगों पर अचल पूंजी पर आर्थिक सहायता दी जाएगी जहां तक A तथा B वर्ग में स्थापित उद्योगों का सम्बन्ध है अगर वहां पुराने उद्योगों का विस्तार करना चाहते हैं तो मध्यम तथा बड़े उद्योगों के विस्तार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी।

8. पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहन (Incentive to Tourism)-नई औद्योगिक नीति के अनुसार पंजाब में पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग का दर्जा दिया गया है। पर्यटन उद्योग को वह सब सहूलतें दी जाएंगी जो अन्य साधारण उद्योगों को दी जाती हैं।

9. इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं की इकाइयों को विशेष छूट (Special Incentive to Electronics Units)-पंजाब में जो इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाइयों को लगाया जाएगा उन उद्योगों को पूंजी निवेश के सम्बन्ध में आर्थिक सहायता तथा बिक्री कर की छूट दी जाएगी। इन उद्योगों को चुंगी करों में भी 6 वर्ष के लिए छूट देने के लिए कहा गया है।

10. ऊर्जा सुविधाएं (Power Facilities)-पंजाब में जो ओद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी उनको बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसी इकाइयों को पांच साल के लिए बिजली कर से मुक्त रखा जाएगा तथा जेनरेटिंग सैंट लगाने पर 25% की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 34 1966 से पंजाब में औद्योगिक विकास

11. भूमि के लिए आर्थिक सहायता (Land Subsidy)-पंजाब में जो नई औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी उनको भूमि की खरीद में आर्थिक सहायता दी जाएगी। यदि यह इकाइयां फोकल प्वाइंट्स पर लगाई जाती हैं तो भूमि की खरीद में 33 प्रतिशत आर्थिक सहायता दी जाएगी।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

PSEB 11th Class Economics उपभोगी का सन्तुलन Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
कुल उपयोगिता की परिभाषा लिखें।
उत्तर-
एक वस्तु की सभी इकाइयों का उपभोग करने से प्राप्त होने वाली उपयोगिता के जोड़ को कुल उपयोगिता कहते हैं।

प्रश्न 2.
सीमान्त उपयोगिता की परिभाषा लिखें।
उत्तर-
एक वस्तु की एक और इकाई का उपयोग करने से प्राप्त होने वाली अतिरिक्त उपयोगिता को सीमान्त उपयोगिता कहते हैं।
अथवा
(MU = TUn TUn -1)

प्रश्न 3.
उपभोग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उपभोग वह प्रक्रिया है जिस द्वारा वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रयोग से आवश्यकताओं की सन्तुष्टि की जाती है।

प्रश्न 4.
उपयोगिता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
वस्तु या सेवा का वह गुण जिस द्वारा आवश्यकताएँ सन्तुष्ट होती हैं, उस गुण को उपयोगिता कहा जाता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

प्रश्न 5.
सीमान्त उपयोगिता से कुल उपयोगिता का आंकलन कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
सीमान्त उपयोगिता के जोड़ से कुल उपयोगिता प्राप्त हो जाती है।

प्रश्न 6.
जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तो सीमान्त उपयोगिता कितनी होती है ?
उत्तर-
जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तो सीमान्त उपयोगिता शून्य (Zero) होती है।

प्रश्न 7.
जब सीमान्त उपयोगिता ऋणात्मक होती है तो कुल उपयोगिता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
जब सीमान्त उपयोगिता ऋणात्मक होती है तो कुल उपयोगिता गिरना शुरू हो जाती है।

प्रश्न 8.
जब सीमान्त उपयोगिता शून्य होती है तो कुल उपयोगिता की क्या स्थिति होती है ?
उत्तर-
जब सीमान्त उपयोगिता शून्य होती है तो कुल उपयोगिता अधिकतम होती है।

प्रश्न 9.
उपभोक्ता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उपभोक्ता एक व्यक्ति, परिवार या सरकार हो सकती है जिस द्वारा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं तथा सेवाओं का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 10.
उपभोक्ता सन्तुलन क्या है ?
उत्तर-
उपभोक्ता सन्तुलन वह अवस्था है जब वह अपने व्यवहार को वर्तमान परिस्थितियों में सबसे अच्छा मानता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं करना चाहता।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

प्रश्न 11.
घटती सीमान्त उपयोगिता के नियम से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
घटती सीमान्त उपयोगिता के नियम अनुसार जब किसी वस्तु की इकाइयों का लगातार अधिक उपभोग किया जाता है तो प्रत्येक इकाई से प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है।

प्रश्न 12.
उपभोक्ता सन्तुलन की शर्त क्या होती है ?
उत्तर-
उपभोक्ता सन्तुलन = MUx = Price of X. MU of Money.

प्रश्न 13.
एक वस्तु के लिए उपभोक्ता सन्तुलन कैसे प्राप्त होता है ?
उत्तर–
प्राप्त उपयोगिता (MU) = त्यागी गई उपयोगिता (Price).

प्रश्न 14.
दो वस्तुओं के लिए उपभोक्ता सन्तुलन कैसे प्राप्त होता है ?
उत्तर-
X वस्तु की सीमान्त उपयोगिता (MU.) = Y वस्तु की सीमान्त उपयोगिता (MUy).

प्रश्न 15.
सीमान्त उपयोगिता (MU) = ………
उत्तर-
सीमान्त उपयोगिता (MU) = (TUn – TUn-1) Or \(\frac{\Delta \mathrm{TU}}{\Delta \mathrm{Q}}\)

प्रश्न 16.
MU1 + MU2 + MU3 = ……………….. + MUn = ……..
उत्तर-
Total Utility (T.U.)

प्रश्न 17.
जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तो सीमान्त उपयोगिता ……. होती है।
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 0 (शून्य)
उत्तर-
(d) 0 (शून्य)।

प्रश्न 18.
एक वस्तु की स्थिति में उपभोगी का सन्तुलन तब होता है जब
(a) MUm
(b) MUr
(c) MUp
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) MUm

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प्रश्न 19.
दो वस्तुओं की खरीद में उपभोक्ता सन्तुलन उस समय होता है जब \(\frac{\mathbf{M U _ { x }}}{\mathbf{P}_{x}}=\frac{\mathbf{M U _ { y }}}{\mathbf{P}_{y}}\) ……………………… होती है।
(a) \(\frac{\mathrm{P}_{x}}{\mathrm{P}_{y}}\)
(b) \(\frac{P_{y}}{P_{x}}\)
(c) \(\frac{\mathrm{MU}_{x}}{\mathrm{MU}_{y}}\)
(d) MUm.
उत्तर-
(d) MUm.

प्रश्न 20.
किसी वस्तु की एक और इकाई का उपभोग करने से प्राप्त होने वाली अतिरिक्त उपयोगिता को …………….. कहते हैं।
उत्तर-
सीमान्त उपयोगिता।

प्रश्न 21.
जब सीमान्त उपयोगिता ऋणात्मक होती है तो कुल उपयोगिता अधिकतम होती है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 22.
एक वस्तु की स्थिति में उपभोगी को प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता वस्तु की कीमत के बराबर हो जाती है तो इस को उपभोगी का सन्तुलन कहते हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 23.
जब एक मनुष्य के वस्तु भण्डार में वृद्धि होती है तो प्रत्येक वृद्धि के साथ प्राप्त होने वाला अतिरिक्त लाभ घटता जाता है। इस को घटती सीमान्त उपयोगिता का नियम कहते हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 24.
निम्नलिखित सारणी को पूरा करें-

उपभोग की गई इकाइयाँ: 1 2 3 4 5 6 7
सीमान्त उपयोगिता : 8 10 8 6 4 2 0
कुल उपयोगिता :

उत्तर-

उपभोग की गई इकाइयाँ : 1 2 3 4 5 6 7
सीमान्त उपयोगिता : 8 10 8 6 4 2 0
कुल उपयोगिता : 8 18 26 32 36 38 38

प्रश्न 25.
घटती सीमान्त उपयोगिता का नियम ……. ने दिया।
(a) मार्शल
(b) एड्म स्मिथ
(c) गोसन
(d) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(c) गोसन।

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प्रश्न 26.
घटती सीमान्त उपयोगिता का नियम ………..से सम्बन्धित है।
(a) उपभोग
(b) विनिमय
(c) उत्पादन
(a) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(a) उपभोग।

प्रश्न 27.
घटती सीमान्त उपयोगिता के नियम को ……….. भी कहा जाता है।
(a) अधिकतम सन्तुष्टि का नियम
(b) सन्तुष्टि का नियम
(c) गोसन का पहला नियम
(d) कोई भी नहीं।
उत्तर-
(c) गोसन का पहला नियम।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
उपभोगी से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उपभोगी उस व्यक्ति को कहा जाता है जोकि अपनी आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए वस्तुओं तथा सेवाओं का प्रयोग करता है। उपभोगी परिवार, सरकार अथवा फ़र्म भी हो सकती है। सरकार लोगों के लिए वस्तुओं तथा सेवाओं की खरीद करती है ताकि सामाजिक भलाई में वृद्धि हो सके।

प्रश्न 2.
उपभोगी के सन्तुलन से क्या अभिप्राय है ? ‘
उत्तर-
उपभोगी का सन्तुलन एक ऐसी अवस्था होती है, जब वह अपने वर्तमान व्यवहार को कुछ विशेष स्थितियों में सबसे अच्छा अनुभव करता है तथा उसमें कोई परिवर्तन नहीं करता, जब तक स्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं होता।

प्रश्न 3.
उपयोगिता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उपयोगिता का अर्थ वस्तु अथवा सेवा में उस गुण से होता है जिस द्वारा मानवीय आवश्यकताएं पूरी होती हैं अथवा हम यह कह सकते हैं कि किसी वस्तु में वह शक्ति जो आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, उसको उपयोगिता कहा जाता है।(“’Utility is the want satisfying power of a good.”)

प्रश्न 4.
सीमान्त उपयोगिता को पारिभाषित करो।
उत्तर-
सीमान्त उपयोगिता किसी वस्तु की एक अन्य इकाई का उपभोग करने से जो अधिक तुष्टिगुण प्राप्त होता है उसको सीमान्त उपयोगिता कहा जाता है। उदाहरणस्वरूप एक वस्तु की पाँच इकाइयों का उपभोग करने से 100 युटिलज़ सन्तुष्टि प्राप्त होती है तथा छः इकाइयों का उपभोग करने से 110 युटिलज़ सन्तुष्टि मिलती है तो छठी इकाई का उपभोग करने से 110 – 100 = 10 युटिलज़ को सीमान्त उपयोगिता कहा जाता है।
MU = TUn – TUn-1) = 110 – 100 = 10 Utils.

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प्रश्न 5.
कुल उपयोगिता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
किसी वस्तु की सभी इकाइयों के उपभोग से प्राप्त होने वाली उपयोगिता को कुल उपयोगिता कहा जाता है। मान लो एक उपभोगी तीन सेबों का उपभोग करता है। प्रथम सेब से 10 युटिल, द्वितीय सेब से 8 युटिल तथा तीसरे सेब से 6 युटिल उपयोगिता प्राप्त होती है तो कुल उपयोगिता 10 + 8 + 6 = 24 युटिल प्राप्त होगी।

प्रश्न 6.
टेबल की सहायता से बताइए कि जब सीमान्त तुष्टिगुण शून्य होता है तो कुल तुष्टिगुण अधिकतम होता है ?
उत्तर-
जब सीमान्त तुष्टिगुण शून्य होता है तो कुल तुष्टिगुण अधिकतम होता है। जैसा कि निम्नलिखित टेबल से स्पष्ट है –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 1
चार सेबों का उपभोग करने से सीमान्त तुष्टिगुण शून्य है और कुल तुष्टिगुण 12 अधिकतम है।

प्रश्न 7.
घटते सीमान्त तुष्टिगुण के नियम से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
घटते सीमान्त तुष्टिगुण का नियम प्रोफैसर मार्शल की देन है। उनके अनुसार, “यदि अन्य बातें समान रहें जब एक निश्चित समय में एक उपभोगी किसी वस्तु का अधिक उपभोग करता है उस वस्तु की सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है।” इसको घटते सीमान्त तुष्टिगुण का नियम कहते हैं।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
घटते सीमान्त उपयोगिता के नियम का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर-
गोसन पहले अर्थशास्त्री थे जिन्होंने यह नियम दिया। इसलिए इस नियम को गोसन का पहला नियम भी कहते हैं। यह नियम लोगों की व्यावहारिक तथा मनोवैज्ञानिक स्थिति को ध्यान में रखकर बनाया गया है। प्रो० मार्शल के अनुसार, “जब किसी मनुष्य के वस्तु के भण्डार में वृद्धि होती है तो प्रत्येक वृद्धि से प्राप्त होने वाला लाभ घटता जाता है।” (“The additional benefit which a person derives from an increase of a stock of a thing diminishes with every increase in the stock that he already has.”) इस नियम को उपभोग का आधारपूर्वक नियम (Fundamental Law of Consumption) अथवा आधारपूर्वक मनोवैज्ञानिक नियम (Fundamental Psychological Law) भी कहा जाता है।

इस नियम अनुसार जब एक मनुष्य एक वस्तु की अधिक इकाइयों का उपभोग करता है तो उसको वस्तु से प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है अथवा कुल उपयोगिता में वृद्धि तो होती है परन्तु जिस अनुपात पर वृद्धि होती है, वह अनुपात घटता जाता है। उदाहरण-एक उपभोगी सेबों का उपभोग करता है, उसको प्राप्त M.U. तथा T.U. इस प्रकार है-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 2
सूची-पत्र में तथा रेखाचित्र 1 में-

  • सेबों का उपभोग करने से सीमान्त उपयोगिता 4, 3, 2, 1, 0 युटिलज़ घटता जाता है।
  • जब सीमान्त उपयोगिता शून्य है तो. कुल उपयोगिता अधिकतम है।
  • जब सीमान्त उपयोगिता ऋणात्मक है तो कुल उपयोगिता घटने लगता है, इसको घटते सीमान्त उपयोगिता का नियम कहते हैं।

प्रश्न 2.
उपयोगिता, सीमान्त उपयोगिता तथा कुल उपयोगिता के सम्बन्ध को स्पष्ट करें। कुल उपयोगिता तथा सीमान्त उपयोगिता के सम्बन्ध को स्पष्ट करें।
उत्तर-
उपयोगिता का अर्थ (Meaning of Utility)-अर्थशास्त्र में ‘उपयोगिता’ एक महत्त्वपूर्ण धारणा है। उपयोगिता का अर्थ किसी वस्तु या सेवा में उस गुण से होता है जो हमारी ज़रूरतों की पूर्ति करता है। इसीलिए किसी वस्तु में उस गुण या शक्ति को उपयोगिता कहा जाता है जिसके द्वारा मानवीय ज़रूरतों की सन्तुष्टि होती है। (Utility is the want satisfying power of a commodity.) उपयोगिता का माप संख्याओं 1, 2, 3, 4, 5 आदि द्वारा किया जाता है जिनको युटिल कहा जाता है।

सीमान्त उपयोगिता (Marginal Utility)-किसी वस्तु का एक बार और उपभोग करने से जिन कुल उपयोगिता में वृद्धि होती है उस वृद्धि को सीमान्त उपयोगिता कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर एक वस्तु की 5 इकाइयों का उपभोग करने के साथ 100 युटिल प्राप्त होती है और छठी इकाई का उपभोग करने के साथ कुल उपयोगिता में वृद्धि 110 युटिल हो जाती है। तो छठी इकाई के उपभोग के साथ 110 -100 = 10 युटिल उपयोगिता की वृद्धि हुई है। इसीलिए सीमान्त उपयोगिता 10 युटिल होगी। इसका माप निम्नलिखित अनुसार किया जाता है।
MU = TUn – TUn-1
= TU6th Unit – TU5th Unit (110 – 100 = 10 युटिलज़)
कल उपयोगिता (Total Utility) किसी वस्तु की सभी इकाइयों के उपभोग से प्राप्त होने वाले उपयोगिता को कुल उपयोगिता कहा जाता है। मान लो एक आदमी ने तीन सेबों का उपभोग किया। पहले सेब से 10 युटिल, दूसरे सेब से 8 युटिल और तीसरे सेब से 6 युटिल उपयोगिता प्राप्त हुआ तो कुल उपयोगिता 10 + 8 + 6 = 24 युटिलज़ हुआ।

कुल उपयोगिता और सीमान्त उपयोगिता का सम्बन्ध (Relationship Between T.U. & M.U.)-
कुल उपयोगिता (T.U.) और सीमान्त उपयोगिता (M.U.) के सम्बन्ध को सूची-पत्र और रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करते हैं –
कुल उपयोगिता तथा सीमान्त उपयोगिता का सम्बन्ध –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 4
सूची-पत्र तथा रेखाचित्र 2 अनुसार –

  • जब सेबों की इकाइयों का अधिक प्रयोग किया जाता है तो सीमान्त तुष्टिकरण (M.U.) घटता जाता है तथा कुल उपयोगिता में वृद्धि घटती दर पर होती है।
  • जब सीमान्त उपयोगिता शून्य (zero) हो जाती है तो कुल उपयोगिता अधिकतम होती है, जैसे चौथे सेब के उपभोग में दिखाया गया है।
  • जब पांचवें सेब का उपभोग किया जाता है तो सीमान्त उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती है तो कुल उपयोगिता घटने लगती है, जैसे Mu द्वारा दिखाया गया है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 5

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
घटती सीमान्त उपयोगिता के नियम की व्याख्या करो। इस नियम के अपवाद तथा महत्त्व को स्पष्ट करो।
(Explain the Law of Diminishing Marginals Utility. Give its Exceptions and Importance.)
उत्तर-
घटती सीमान्त उपयोगिता का नियम, उपयोगिता विश्लेषण का आधारपूर्वक नियम है। इस नियम को सबसे पहले एच० एच० गोसन (H.H. Gossen) ने 1854 में दिया था, परन्तु इस नियम की ठीक रूप में व्याख्या प्रो० मार्शल ने 1890 में अपनी पुस्तक “अर्थशास्त्र के सिद्धान्त” में की। प्रो० मार्शल के शब्दों में, “मनुष्य के पास किसी वस्तु की जितनी मात्रा होती है, उस वस्तु की मात्रा में जैसे-जैसे वृद्धि होती है, उसकी सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है।” (“The additional benefit which a person dervies from a given stock of a thing, diminishes, with every increase in the stock that he already has.”-Marshall)

प्रो० चैपमैन के अनुसार, “जितनी कोई वस्तु हमारे पास अधिक मात्रा में होती है, उतनी ही कम मात्रा में हम अन्य प्राप्त करना चाहते हैं।” (“The more we have of a thing the less we want additional increament of it.”-Chapman) -उदाहरणस्वरूप एक मनुष्य को प्यास लगी है। पानी का पहला गिलास उस मनुष्य को बहुत उपयोगिता देगा। परन्तु दूसरे तथा तीसरे गिलास से प्राप्त होने वाली उपयोगिता घटती जाएगी। अन्य पानी पीने से उसको तकलीफ भी हो सकती है, अर्थात् वस्तु की वृद्धि से उपयोगिता घटती जाती है, परन्तु एक सीमा के पश्चात् यह उपयोगिता शून्य अथवा ऋणात्मक हो जाती है। इसको घटती उपयोगिता का नियम कहा जाता है।

मान्यताएं (Assumptions) –

  1. उपयोगिता का गणनावाचक माप हो सकता है।
  2. मुद्रा की सीमान्त उपयोगिता स्थिर रहती है।
  3. वस्तुओं की इकाइयां समान आकार तथा गुण वाली हैं।
  4. वस्तु का उपभोग एक समय तथा निरन्तर किया जाता है।
  5. उपभोगी की आय दी हुई है तथा यह स्थिर रहती है।
  6. वस्तु की कीमत तथा स्थानान्तरण वस्तुओं की कीमत स्थिर रहती है।
  7. उपभोक्ता की रुचि, फैशन, आदतें, रीति-रिवाज इत्यादि में कोई परिवर्तन नहीं होता।

नियम की व्याख्या (Explanation of the Law)-
सीमान्त उपभोक्ता का नियम उपभोग का महत्त्वपूर्ण नियम है। एक मनुष्य के पास ₹ 7 हैं। इन पैसों से उपभोक्ता केले खरीदता है। जब यह पैसे केलों पर व्यय किए जाते हैं तो प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है। इसको सूचीपत्र तथा रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता है।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 7
सूचीपत्र के अनुसार जब उपभोक्ता केलों पर व्यय करता है, तो प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता 5, 4, 3, 2, 1 घटती जाती है। छठे केले से शून्य तथा सातवें केले से ऋणात्मक उपयोगिता प्राप्त होती है। रेखाचित्र 3 में दिखाया है कि उपभोक्ता को केलों से प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता कम होती जाती है। छठी इकाई से शून्य तथा. सातवीं इकाई से ऋणात्मक उपयोगिता प्राप्त होती है। जिसको MU द्वारा दिखाया गया है। इसको घटती सीमान्त उपयोगिता का नियम कहा जाता है।

नियम के अपवाद (Exceptions of the Law)-घटती सीमान्त उपयोगिता का नियम निम्नलिखित स्थितियों में लागू नहीं होता है-

  1. दुर्लभ तथा अद्भुत वस्तुएं-दुर्लभ तथा अद्भुत वस्तुओं की मात्रा के बढ़ने से उपभोक्ता की उपयोगिता घटने की जगह पर बढ़ती जाती है।
  2. कंजूस मनुष्य-कंजूस मनुष्य के पास किसी वस्तु की मात्रा बढ़ने से वह मनुष्य उस वस्तु की अन्य मात्रा प्राप्त करना चाहता है।
  3. नशीले पदार्थ-यह नियम नशीले पदार्थों शराब, अफीम, तम्बाकू इत्यादि पर लागू नहीं होता। शराबी मनुष्य अधिक शराब पीकर अधिक उपयोगिता महसूस करता है।
  4. आरम्भिक इकाइयां-किसी वस्तु की आरम्भिक इकाइयों पर भी नियम लागू नहीं होता।
  5. अच्छी पुस्तकें-यह नियम अच्छी पुस्तकों, कविताओं, पुराने गानों के भण्डार पर भी लागू नहीं होता। .

नियम का महत्त्व (Importance of the Laws)-प्रो० टॉज़िग अनुसार, “घटती सीमान्त उपभोक्ता का नियम इतना व्यापक है कि इसको सर्वव्यापक कहना गलत नहीं होगा।” इसका महत्त्व इस प्रकार है –
1. नियमों का आधार-उपभोग के बहुत से नियम जैसे कि सम-सीमान्त उपयोगिता का नियम, मांग का नियम, उपभोक्ता की बचत का नियम इत्यादि इस नियम पर आधारित हैं।

2. उपभोक्ता के लिए लाभदायक-यह नियम उपभोक्ता के लिए महत्त्वपूर्ण है। एक उपभोक्ता अपनी सारी आय एक वस्तु पर ही व्यय नहीं करता; बल्कि विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की खरीद करता है। इससे उस उपभोक्ता को अधिक उपभोक्ता प्राप्त होती है।

3. उत्पादकों के लिए लाभदायक-यह नियम उत्पादकों के लिए भी सहायक है। उत्पादक जब वस्तुओं का उत्पादन नहीं करते हैं तो एक प्रकार की वस्तुओं का ही उत्पादन नहीं किया जाता, बल्कि विभिन्न प्रकार की वस्तुएं विभिन्न वर्ग के लोगों के लिए बनाई जाती हैं। इससे उत्पादक को अधिकतम लाभ प्राप्त होता है।

4. मूल्य निर्धारण-यह नियम मूल्य निर्धारण में भी लाभदायक है। किसी वस्तु की मांग उस वस्तु से प्राप्त होने वाली सी :न्ति उपयोगिता पर निर्भर करती है, जब वस्तु की अधिक मात्रा की मांग की जाती है तो सीमान्त उपयोगिता कम होने के कारण वस्तु की कीमत कम दी जाती है। परन्तु कीमत के घटने से वस्तु की कम मात्रा बेची जाएगी। इसलिए कीमत निर्धारण उस बिन्दु पर होगा, जहां वस्तु की मांग, वस्तु की पूर्ति के समान होती है।

5. वित्त मंत्री के लिए लाभदायक-यह नियम वित्त मंत्री के लिए भी लाभदायक है। कर लगाते समय वित्त मंत्री इस नियम की सहायता लेता है। जब एक मनुष्य की आय बढ़ जाती है तो मुद्रा का सीमान्त उपयोगिता घटता जाता है, इस कारण अमीर मनुष्यों पर कर की अधिक मात्रा लगाई जाती है।

6. समाजवाद का आधार-समाजवाद वह आर्थिक प्रणाली है, जिसमें देश की सरकार आय तथा धन का समान विभाजन करना चाहती है, जबकि अमीर लोगों के पास अधिक धन होता है तो उन पर अधिक कर लगाया जाता है, जिससे समाजवाद आर्थिक प्रणाली जन्म लेती है। देश में साधनों का समान विभाजन होने के कारण प्रत्येक मनुष्य को लाभ प्राप्त होता है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

प्रश्न 2.
उपभोगी के सन्तुलन से क्या अभिप्राय है ?.एक वस्तु की स्थिति में उपभोगी सन्तुलन कैसे प्राप्त करता है ? (What is Consumer’s Equilibrium ? How does a consumer reach state of equilibrium in case of one commodity and two commodities ?)
उत्तर-
उपभोगी का सन्तुलन (Consumer’s Equilibrium)-उपभोगी का सन्तुलन उस स्थिति को कहा जाता है, जब एक उपभोगी अपनी आय तथा वस्तुओं की कीमतों अनुसार, अपना व्यय इस ढंग से करता है, जिससे उसको प्राप्त होने वाली सन्तुष्टि अधिक-से-अधिक होती है तथा इसमें वह कोई परिवर्तन नहीं करना चाहता, जब तक उपभोगी की आय, वस्तुओं की कीमतों, देश में फैशन, रीति-रिवाज इत्यादि में कोई परिवर्तन नहीं होता।

मान्यताएं (Assumptions) –

  1. विचारशील उपभोगी (Rational Consumer)-उपभोगी विचारशील है तथा अपनी आय से अधिक-सेअधिक सन्तुष्टि प्राप्त करना चाहता है।
  2. संख्यावाचक उपयोगिता (Cardinal Utility) -उपयोगिता का माप संख्यावाचक संख्याओं 1, 2, 3, 4 इत्यादि रूप में किया जा सकता है, जिनको युटिलज़ (Utils) कहा जाता है।
  3. मुद्रा का सीमान्त उपयोगिता स्थिर रहता है (Constant M.U. of money) – जब उपभोगी अपनी आय को व्यय करता है तो मुद्रा के सीमान्त उपयोगिता में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  4. उपयोगिता स्वतन्त्र होती है (Utility is Independent)-वस्तु की उपयोगिता स्वतन्त्र होती है तथा अन्य वस्तुओं की उपयोगिता का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  5. अन्य बातें समान रहती हैं (Other things being equal) – देश में फैशन, रीति-रिवाज, आदतें, दूसरी वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहती हैं।

एक वस्तु की स्थिति में उपभोगी का सन्तुलन (Consumer’s Equilibrium in case of one Commodity)-मान लो एक उपभोगी ऐसी वस्तु की खरीद करता है, जिसका इस तरह से प्रयोग किया जा सकता है जब उपभोगी ऐसी वस्तु का उपभोग करता है तो घटते सीमान्त उपयोगिता का नियम (Law of Diminishing Marginal Utility) लागू होता है। इस नियम अनुसार जब एक उपभोगी एक वस्तु का निरन्तर उपभोग करता है तो अधिक उपभोग करने से प्राप्त होने वाली सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है।

इसलिए विचारशील मनुष्य ऐसी वस्तु का उपभोग उस सीमा तक करेगा, जहां कि उस वस्तु की अन्तिम इकाई से प्राप्त सीमान्त उपयोगिता तथा उस इकाई के लिए दी जाने वाली कीमत के रूप में मुद्रा की उपयोगिता एक-दूसरे के समान हों अर्थात् उपभोगी का सन्तुलन निम्नलिखित स्थिति में होगा –
\(\frac{\mathrm{MU}_{x}}{\mathrm{MU}_{m}}=\mathrm{P}_{x}\)
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 8
इसको सूची-पत्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 9
मान लो X वस्तु की कीमत 1 रुपया प्रति वस्तु दी हुई है। मुद्रा ₹ 1 की सीमान्त उपभोक्ता 10 युटिल के समान है (मुद्रा की सीमान्त उपभोक्ता का कोई विशेष मापदण्ड नहीं होता। यह तो लोगों की वस्तु सम्बन्धी पसन्द पर निर्भर करती है, जो स्थिर रहती है।) उपभोगी चार इकाइयों की खरीद करता है तो वस्तु की सीमान्त उपयोगिता तथा मुद्रा कीमत की सीमान्त उपयोगिता एक-दूसरे के समान है। इसको उपभोगी का सन्तुलन कहा जाता है।

रेखाचित्र 4 में दिखाया है कि जब उपभोगी X वस्तु की अधिक इकाइयों का उपभोग करता है तो वस्तु से प्राप्त सीमान्त उपयोगिता (M.U.) घटती जाती है। ₹ 1 वस्तु की कीमत समान रहती है। एक रुपए की सीमान्त उपयोगिता 10 युटिल मानी गई है। सन्तुलन E बिन्दु पर स्थापित होगा, जिसको सन्तुलन का बिन्दु कहा जाता है।
उपभोगी का सन्तुलन = वस्तु से प्राप्त उपयोगिता = वस्तु की कीमत के रूप में उपयोगिता का त्याग।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 10

V. संख्यात्मक प्रश्न (Numericals)

प्रश्न 1.
एक मनुष्य A की कुल उपयोगिता अनुसूची दी गई है। सीमान्त उपयोगिता अनुसूची ज्ञात करो।
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 11
उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 12

प्रश्न 2.
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 13
उत्तर
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 14

प्रश्न 3.
निम्नलिखित सारणी पूरी कीजिए :

प्रयोग की गई इकाइयां : 1 2 3 4
कुल उपयोगिता : 7 17 25 31
सीमान्त उपयोगिता :

उत्तर –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 15

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित सारणी पूरी कीजिए :

प्रयोग की गई इकाइयां : 1 2 3 4 5 6 7
कुल उपयोगिता 10 25 38 48 55 60 63
सीमान्त उपयोगिता :

उत्तर –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 16

प्रश्न 5.
निम्नलिखित सारणी पूरी कीजिए :

प्रयोग की गई इकाइयां : 1 2 3 4 5 6 7
कुल उपयोगिता : 12 22 30 36 40 42 42
सीमान्त उपयोगिता :

उत्तर –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 17

प्रश्न 6.
निम्नलिखित सारणी को पूरा करें :

प्रयोग की गई इकाइयां : 0 1 2 3 4 5
कुल उपयोगिता : 1 15 30 42 52 61
सीमान्त उपयोगिता :

उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 18

प्रश्न 7.
निम्नलिखित सारणी को पूरा करें :

उपयोग की गई इकाइयां : 0 1 2 3 4 5
कुल उपयोगिता : 0 10 25 38 48 55
सीमान्त उपयोगिता :

उत्तर –
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 19

प्रश्न 8.
निम्नलिखित सारणी को पूरा करें :

उपयोग की गई इकाइयां : 0 1 2 3 4 5
कुल उपयोगिता : 0 20 35 47 57 65
सीमान्त उपयोगिता :

उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 20

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन

प्रश्न 9.
नीचे दिये हुए आंकड़ों से सीमान्त उपयोगिता मालूम करें :

उपभोग की गई इकाइयां: 1 2 3 4 5
कुल उपयोगिता : 10 25 38 48 55

उत्तर-
PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 4 उपभोगी का सन्तुलन 21

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

Punjab State Board PSEB 12th Class Economics Book Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Economics Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

PSEB 12th Class Economics 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब की किसी एक व्यापारिक फसल का वर्णन करें।
उत्तर-
गन्ना (Sugarcane)-पंजाब में गन्ना फरवरी-अप्रैल में बोआ जाता है। गन्ने की फसल जनवरी-अप्रैल में काटी जाती है। पंजाब में गन्ना सभी जिलों में पैदा किया जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब में हरित क्रान्ति का कोई एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के कारण इस प्रकार हैं नई कृषि नीति-पंजाब में नई कृषि नीति में उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक, आधुनिक मशीनों तथा सिंचाई की सहूलतों में वृद्धि की गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब को भारत का अनाज भण्डार क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
2018-19 में पंजाब द्वारा केन्द्रीय भण्डार में गेहूं का योगदान 35% तथा चावल का योगदान 25% रहा।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

प्रश्न 4.
पंजाब कृषि में पिछड़ा प्रान्त है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 5.
पंजाब में 2019-20 में कुल उपज 315 लाख मीट्रिक टन हुई।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 6.
पंजाब में कृषि विकास का कारण ……………..
(a) सिंचाई के साधन
(b) मेहनती लोग
(c) हरित क्रान्ति
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
हरित क्रान्ति का कोई दोष नहीं।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 8.
पंजाब को भारत के अनाज का ………………… कहा जाता है।
उत्तर-
अन्न भण्डार।

प्रश्न 9.
पंजाब की दो खाद्य फसलों के नाम बताओ।
उत्तर-
(i) गेहूँ,
(ii) चावल।

प्रश्न 10.
पंजाब की दो व्यापारिक फसलों के नाम बताओ।
उत्तर-
(i) कपास,
(ii) गन्ना।

प्रश्न 11.
पंजाब में अधिक कृषि उत्पादन के कोई दो कारण बताएं।
उत्तर-
(i) सिंचाई का विस्तार,
(ii) आधुनिक खाद्य तथा बीजों का प्रयोग।

प्रश्न 12.
हरित क्रान्ति से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अर्थ है कृषि पैदावार में होने वाली भारी वृद्धि जो कि नई कृषि नीति के अपनाने से प्राप्त है।

प्रश्न 13.
पंजाब में हरित क्रान्ति का कोई एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में नई कृषि नीति के कारण उचित बीजों और रासायनिक खादों का प्रयोग करने के कारण हरित क्रान्ति प्राप्त होती है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

प्रश्न 14.
पंजाब में सिंचाई के मुख्य तीन साधन बताएं।
उत्तर-

  • नहरें,
  • ट्यूबवैल,
  • कुएँ।

प्रश्न 15.
हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएँ।
उत्तर-
हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप हवा और पानी के प्रदूषण के कारण, कैंसर का रोग फैल गया है।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में सिंचाई की स्थिति तथा महत्त्व स्पष्ट करें।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए सिंचाई का महत्त्व बहुत अधिक है। पंजाब में वर्ष 1966 के पश्चात् सिंचाई सुविधाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 26.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सहूलतें प्राप्त थी जो कि कुल क्षेत्र का 56% भाग था। वर्ष 2015-16 में सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 41.37 लाख हेक्टेयर हो गया है जोकि कुल कृषि के अधीन क्षेत्र का 97.4% भाग है। पंजाब में लुधियाना, जालन्धर, पटियाला, भटिंडा, अमृतसर, फिरोज़पुर तथा फरीदकोट जिलों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। किन्तु रोपड़ तथा नवांशहर में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है। बारहवीं योजना में सिंचाई सुविधाओं पर 1052 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

प्रश्न 2.
पंजाब में कृषि विकास की चर्चा करें।
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा स्पष्ट हो जाती है-
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि-पंजाब में कृषि उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। कुल अनाज का उत्पादन 1965-66 में 33 लाख टन था। 2019-20 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अनाज के उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि को हरित क्रान्ति (Green Revolution) कहा जाता है।

2. उन्नत कृषि-पंजाब की कृषि बहुत उन्नत तथा अधिक प्रगतिशील है। पंजाब को प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भारत की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता से अधिक है। पंजाब में वर्ष 1965-66 में गेहूँ की उत्पादकता 1236 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की उत्पादकता 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। 2019-20 में गेहँ की उत्पादकता बढकर 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएं।
अथवा
पंजाब में हरित क्रान्ति के दुष्प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के केवल अच्छे प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि इसके कुछ दुष्प्रभाव भी पड़े हैं जोकि इस प्रकार हैं –

  1. असंतुलित विकास की समस्या-हरित क्रान्ति का मुख्य दोष यह है कि समूचे राज्य में एक समान संतुलित विकास नहीं हुआ। कुछ जिले उत्पादन क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं जबकि कुछ जिलों में कृषि का विकास कम हुआ है। जैसे कि फरीदकोट, भटिंडा, फिरोज़पुर में कृषि विकास अधिक हुआ है।
  2. बेरोज़गारी की समस्या-हरित क्रान्ति से बेरोज़गारी की समस्या उत्पन्न हुई है। गांवों में भूमिहीन श्रमिकों में बेरोज़गारी बढ़ गई है इसलिए रोज़गार की तलाश में प्रतिदिन शहरों में आते हैं।

प्रश्न 4.
पंजाब में हरित क्रान्ति का अर्थ बताएं।
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अर्थ (Meaning of Green Revolution)-प्रो० एफ० आर० फ्रैक्ल के अनुसार, “हरित क्रान्ति एक सुन्दर नारा है जिसके द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि विज्ञान तथा तकनीकी विकास द्वारा कृषि के क्षेत्र में शान्तिपूर्वक रूपान्तर किया जा सकता है अथवा क्रान्ति लाई जा सकती है।” हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषि उत्पादन में होने वाली वृद्धि से है जो कृषि में नई नीति के अपनाने के कारण हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कृषि के क्षेत्र में जो थोड़े समय में असाधारण विकास तथा वृद्धि हुई है, उसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। पंजाब में 1965-66 में 33 लाख टन कृषि उत्पादन किया गया जो कि 2019-20 में बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

III. लयु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में सिंचाई के भिन्न-भिन्न साधन कौन-से हैं ? पंजाब में सिंचाई क्षेत्र के विस्तार के कारण बताएं।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए सिंचाई का महत्त्व बहुत अधिक है। पंजाब में वर्ष 1966 के पश्चात् सिंचाई सुविधाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 29% हो गया है जोकि कुल कृषि के अधीन क्षेत्र का 97.96% भाग है। पंजाब में लुधियाना, जालन्धर, पटियाला, भटिंडा, अमृतसर, फिरोज़पुर तथा फरीदकोट जिलों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। किन्तु रोपड़ तथा नवांशहर में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है। बारहवीं योजना में सिंचाई सुविधाओं पर ₹ 493564 करोड़ व्यय किए गए।

सिंचाई के साधन (Means of Irrigation)-पंजाब में सिंचाई के साधन निम्नलिखित हैं-
1. नहरें (Canals)-पंजाब में कुल सिंचाई क्षेत्र के 43% भाग में नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। यह सिंचाई का मुख्य साधन है। पंजाब की मुख्य नहरें-

  • भाखड़ा-नंगल नहर
  • अपर बारी दोआब नहर
  • सरहिन्द नहर
  • बिस्त दोआब नहर
  • बीकानेर नहर
  •  शाह नहर इत्यादि हैं।

इन नहरों के अतिरिक्त पंजाब में सतलुज यमुना लिंक, थीन डैम, कंडी नहर, शाह नहर, फीडर, मेलवाहा डैम तथा राष्ट्रीय परियोजना पर कार्य चल रहा है।

2. ट्यूबवैल (Tubewell) पंजाब में 50% क्षेत्र पर ट्यूबवैलों द्वारा सिंचाई की जाती है। इस समय 2019-20 में लगभग 14.76 लाख ट्यूबवैल हैं जिनमें से 13.36 लाख ट्यूबवैल विद्युत् से तथा शेष डीज़ल से चलते हैं।

3. कुएँ (Wells)-पंजाब में पहले कुओं का महत्त्व अधिक था। परन्तु अब कुओं का स्थान ट्यूबवैलों ने ले लिया है किन्तु कुछ क्षेत्रों में आज भी कुओं द्वारा सिंचाई की जाती है।

इसके अतिरिक्त तालाब इत्यादि साधनों द्वारा भी सिंचाई की जाती है। फरीदकोट जिले में सिंचाई का मुख्य साधन नहरें हैं। इसके अतिरिक्त फिरोज़पुर, अमृतसर तथा लुधियाना ज़िलों में भी नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। ट्यूबवैल लगभग सभी जिलों में सिंचाई के साधन हैं किन्तु संगरूर जिले में ट्यूबवैल सबसे अधिक हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब में कृषि विकास की चर्चा करें।
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा स्पष्ट हो जाती है-
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि-पंजाब में कृषि उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। कुल अनाज का उत्पादन 1965-66 में 33 लाख टन था। 2019-20 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अनाज के उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि को हरित क्रान्ति (Green Revolution) कहा जाता है।

2. उन्नत कृषि-पंजाब की कृषि बहुत उन्नत तथा अधिक प्रगतिशील है। पंजाब को प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भारत की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता से अधिक है। पंजाब में वर्ष 1965-66 में गेहूँ की उत्पादकता 1236 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की उत्पादकता 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादकता बढ़कर 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

3. कृषि की उन्नत विधि-पंजाब में कृषि करने की उन्नत विधियों का प्रयोग किया गया है। पंजाब में 2019-20 में गेहूँ तथा चावल के अधीन 100% क्षेत्रफल नए बीजों के प्रयोग से बोआ गया है। मक्की अधीन 90% तथा बाजरे अधीन 60% क्षेत्रफल नए बीजों के प्रयोग द्वारा बोआ गया था।

4. व्यापारिक कृषि-पंजाब में कृषि जीवन निर्वाह के लिए नहीं की जाती बल्कि उत्पादन को मण्डियों में बेचकर अधिक लाभ प्राप्त करने का यत्न किया जाता है। इसलिए कृषि विकास के परिणामस्वरूप व्यापारिक कृषि का प्रचलन हो गया है।

प्रश्न 3.
पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएं।
अथवा
पंजाब में हरित क्रान्ति के दुष्प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के केवल अच्छे प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि इसके कुछ दुष्प्रभाव भी पड़े हैं जोकि इस प्रकार हैं-

  1. असंतुलित विकास की समस्या–हरित क्रान्ति का मुख्य दोष यह है कि समूचे राज्य में एक समान संतुलित विकास नहीं हुआ। कुछ ज़िले उत्पादन क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं जबकि कुछ जिलों में कृषि का विकास कम हुआ है। जैसे कि फरीदकोट, भटिंडा, फिरोजपुर में कृषि विकास अधिक हुआ है।
  2. बेरोज़गारी की समस्या–हरित क्रान्ति से बेरोज़गारी की समस्या उत्पन्न हुई है। गांवों में भूमिहीन श्रमिकों में बेरोज़गारी बढ़ गई है इसलिए रोज़गार की तलाश में प्रतिदिन शहरों में आते हैं।
  3. अधिक व्यय की समस्या-हरित क्रान्ति के कारण कृषि में प्रयोग होने वाले साधनों की लागत बहुत अधिक हो गई है। छोटे किसान आधुनिक मशीनों, उर्वरकों तथा नए उन्नत बीजों का प्रयोग नहीं कर सकते।
  4. अमीर किसानों को लाभ-हरित क्रान्ति का लाभ बड़े अमीर किसानों को हुआ है। इससे अमीर किसान और अमीर हो गए हैं। निर्धन किसानों की हालत और बिगड़ गई है। इस प्रकार अमीर तथा गरीब किसानों में असमानता बढ़ गई है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

IV. दीर्य उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वर्ष 1966 से पंजाब की कृषि के विकास की प्रकृति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
(Explain the main features of the nature of Agricultural development in Punjab Since 1966.)
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति (Nature of Agricultural Development in Punjab)पंजाब का पुनर्गठन 1 नवम्बर, 1966 को भाषा के आधार पर किया गया। इसके पश्चात् पंजाब की कृषि में तकनीकी क्रान्ति का आरम्भ हुआ, जिसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। डॉ० आर० एस० जौहर तथा परमिन्द्र के अनुसार, “पंजाब में विशेषतया छठे दशक के मध्य से नई कृषि तकनीक के कारण तीव्रता से रूपांतर हुआ है।” (“The Punjab Agriculture underwent a rapid transformation particularly after the mid sixties in the wake of new farm Technology.” -Dr. R.S. Johar & Parminder Singh)
पंजाब में खनिज पदार्थ प्राप्त नहीं होते। कृषि ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। पंजाब की कृषि विकास की प्रकृति का अनुमान निम्नलिखित तत्त्वों से लगाया जा सकता है –
1. उन्नत कृषि (Progressive Agriculture)-पंजाब की कृषि देश के अन्य राज्यों की तुलना में उन्नत तथा प्रगतिशील है। पंजाब में पैदा होने वाली मुख्य फसलों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन भारत की उत्पादन शक्ति से बहुत अधिक है। वर्ष 2019-20 में पंजाब में गेहूँ तथा चावल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्रमानुसार 5188 किलोग्राम तथा 4132 किलोग्राम था।

2. आर्थिक विकास का आधार (Basis of Economic Development) पंजाब में कृषि आर्थिक विकास का मुख्य आधार बन गई है। वर्ष 1980-81 में पंजाबी कुल आय 5,025 करोड़ में कृषि का योगदान ₹ 2,422 करोड़ था। 2019-20 में पंजाब की आय ₹ 644321 करोड़ हो गई है जिसमें कृषि का योगदान 68% है। इस प्रकार पंजाब के आर्थिक विकास में कृषि आर्थिक विकास का मुख्य साधन है।

3. कृषि का मशीनीकरण (Mechanised Agriculture)-पंजाब की कृषि में मशीनों का योगदान दिन प्रतिदिन बढ़ा है। पंजाब में ट्रैक्टर, हारवैस्टर, ट्यूबवैल आम नज़र आते हैं। राज्य में 85% बोए गए शुद्ध क्षेत्रफल पर एक से अधिक बार फसलें उगाई जाती हैं परिणामस्वरूप कृषि की उत्पादन शक्ति में वृद्धि हुई है।

4. कृषि साधनों का उत्तम प्रयोग (Proper Utilisation of Agricultural Resources)-पंजाब में कृषि के साधनों का उत्तम प्रयोग किया जाता है। कृषि के लिए उचित मिट्टी तथा जलवायु की आवश्यकता होती है। पंजाब में धरती समतल है। इसमें दोमट मिट्टी प्राप्त होती है जो कि फसलों की बोआई के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। पंजाब में जल के लिए तीन नदियां सतलुज, ब्यास तथा रावी बहती हैं। इसलिए गहन कृषि की जाती है। वर्ष में एक-से-अधिक फसलें प्राप्त की जाती हैं।

5. कृषि का अधिक उत्पादन (More Agricultural Production)-पंजाब में कृषि का उत्पादन बहुत अधिक होता है। यह उत्पादन न केवल पंजाब राज्य की आवश्यकताएं पूर्ण करता है बल्कि देश के लिए अन्न भण्डार का साधन है। 1966 के पश्चात् हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप पंजाब में उत्पादन शक्ति में बहुत वृद्धि हुई है। 1965-66 में चावल का उत्पादन 292 हज़ार टन किया गया जो 2019-20 में बढ़ कर 315 लाख टन हो गया है।

6. मुख्य फसलें (Main Crops)-पंजाब की कृषि मुख्यतः दो फसलों गेहूँ तथा चावल पर निर्भर है। पंजाब में बोए गए कुल क्षेत्र का 70% गेहूँ तथा चावल के लिए प्रयोग किया जाता है जबकि अन्य फसलों में वृद्धि सन्तोषजनक नहीं है।

7. व्यापारिक कृषि (Commercial Agriculture)-पंजाब की कृषि अब केवल जीवन निर्वाह कृषि नहीं है बल्कि कृषि उत्पादन आवश्यकता से अधिक प्राप्त किया जाता है जिसको बाज़ार में बेच कर अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए यत्न किए जाते हैं अर्थात् पंजाब की कृषि व्यापारिक कृषि हो गई है।

8. रोज़गार का साधन (Source of Employment)-पंजाब की कृषि में प्रत्यक्ष तौर पर 65.5% जनसंख्या निर्भर करती है जिसमें कुल कार्यशील जनसंख्या का 56% भाग कृषि में कार्य करता है। इस प्रकार कृषि तथा इससे सम्बन्धित उद्योग राज्य के लोगों को रोज़गार की सुविधाएं प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब में हरित क्रान्ति के क्या कारण हैं ? इसकी सफलताओं अथवा प्रभावों की व्याख्या करें।
(What are the causes of Green Revolution in Punjab ? Discuss the achievements and effects of Green Revolution.)
अथवा
नए कृषि ढांचे से क्या अभिप्राय है ? इसके कारण तथा प्राप्तियों को स्पष्ट करें। (What is new Agricultural Strategy ? Explain its causes and achievements.)
उत्तर-
पंजाब का 1 नवम्बर, 1966 को पुनर्गठन किया गया है। इस समय में नए कृषि ढांचे (New Agicultural Strategy) को अपनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप पंजाब में कृषि का उत्पादन बहुत बढ़ गया तथा हरित क्रान्ति उत्पन्न हुई।

हरित क्रान्ति का अर्थ (Meaning of Green Revolution)-प्रो० एफ० आर० फ्रैक्ल के अनुसार, “हरित क्रान्ति एक सुन्दर नारा है जिसके द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि विज्ञान तथा तकनीकी विकास द्वारा कृषि के क्षेत्र में शान्तिपूर्वक रूपान्तर किया जा सकता है अथवा क्रान्ति लाई जा सकती है।” हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषि उत्पादन में होने वाली वृद्धि से है जो कृषि में नई नीति के अपनाने के कारण हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कृषि के क्षेत्र में जो थोड़े समय में असाधारण विकास तथा वृद्धि हुई है, उसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। पंजाब में 1965-66 में 33 लाख टन कृषि उत्पादन किया गया जो कि 2019-20 में बढ़ कर 315.35 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

हरित क्रान्ति के कारण (Causes of Green Revolution)-पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य कारण इस प्रकार हैं
1. भमि सधार (Land Reform)-पंजाब में कृषि क्षेत्र में कई प्रकार के सुधार किए गए हैं। जैसे कि भूमि की चकबन्दी की गई है। छोटे-छोटे टुकड़ों को एक स्थान पर एकत्रित किया गया है। सिंचाई साधनों का विस्तार तथा मशीनों के प्रयोग के कारण हरित क्रान्ति के लिए भूमिका तैयार की गई है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

2. कृषि अधीन क्षेत्रों का विस्तार (Extent in area Under Cultivation)-पंजाब में कृषि अधीन क्षेत्र में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 38 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि अधीन थी जोकि 2019-20 में बढ़ कर 80 लाख हेक्टेयर की गई है।

3. कृषि का मशीनीकरण (Mechanisation of Agriculture)-कृषि में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है जैसे कि ट्रैक्टर, कंबाइन, हारवैस्टर, डीज़ल इंजन इत्यादि यन्त्रों का प्रयोग होने के कारण उत्पादन शक्ति में बहुत वृद्धि हुई है 1966-67 में पंजाब में 10,000 ट्रैक्टर थे जिनकी संख्या 2019-20 में बढ़कर 5.15 लाख हो गई है।

4. उन्नत बीज (High yielding varieties of seeds)-पंजाब में हरित क्रान्ति का एक और कारण उन्नत बीजों का अधिक प्रयोग किया जाना है। गेहूँ, चावल, बाजरा, मक्की तथा ज्वार की फसलों के लिए बीजों की उन्नत किस्में बनाई गई हैं। गेहूं तथा चावल के लिए 100%, मक्की के लिए 90% तथा बाजरे के लिए 60% अधिक पैदावार देने वाले बीजों का प्रयोग 1999-2000 में किया गया।

5. रासायनिक उर्वरक (Fertilizers)-पंजाब में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के कारण अनाज के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। हरित क्रान्ति आने का एक कारण उर्वरकों का अधिक प्रयोग करना है। 1966-67 में 51 हज़ार टन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया गया था। 2019-20 में 1750 हजार टन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया गया है।

6. सिंचाई (Irrigation)-पंजाब में सिंचाई की अधिक सहूलतों के कारण हरित क्रान्ति पर बहुत प्रभाव पड़ा है। पंजाब में सारा वर्ष चलने वाले तीन दरिया सतलुज, ब्यास तथा रावी हैं जिनसे विद्युत् पैदा की जाती है तथा सिंचाई के लिए नहरें निकाली गई है। ट्यूबवैल, कुएं तथा तालाब की सिंचाई के साधन हैं। 1965-66 में 59% क्षेत्र पर सिंचाई की जाती थी। 2019-20 में 78.3 लाख हैक्टर क्षेत्र पर सिंचाई की जाती है।

7. साख सहूलतें (Credit Facilities) हरित क्रान्ति के लिए साख सहूलतों का योगदान बहुत अधिक है। 1967-68 में सहकारी समितियों द्वारा ₹ 75 करोड़ की साख सहूलतें प्रदान की गई थीं जो कि 2019-20 में बढ़ कर ₹ 6515 करोड़ हो गई हैं।

8. खोज (Research)-पंजाब में कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना में खोज का कार्य किया जाता है। कृषि यूनिवर्सिटी में नए बीज, भूमि की परख, उर्वरकों का प्रयोग, कीट नाशक दवाइयों के प्रयोग सम्बन्धी अल्प अवधि के कोर्स आरम्भ किए जाते हैं। इससे किसानों को फसलों की देख रेख करने सम्बन्धी जानकारी प्राप्त होती है। परिणामस्वरूप कृषि के उत्पापर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

हरित क्रान्ति की प्राप्तियां (Achievements of Green Revolution)
अथवा
हरित क्रान्ति के प्रभाव (Effects of Green Revolution)
हरित क्रान्ति की मुख्य प्राप्तियां इस प्रकार हैं –
1. उत्पादन में वृद्धि (Increase in Production) हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप कृषि के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 33 लाख टन अनाज पैदा किया गया था। हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप वर्ष 2019-20 में कृषि का उत्पादन 315.33 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment) हरित क्रान्ति के कारण मशीनों का प्रयोग बढ़ गया है। परन्तु फिर भी वर्ष में कई फसलें पैदा होने लगी हैं इसलिए रोज़गार में वृद्धि हुई है।

3. उद्योगों में वृद्धि (Increase in Industries) हरित क्रान्ति का प्रभाव उद्योगों के विकास पर अच्छा पड़ा है। पंजाब में कृषि यन्त्र हारवैस्टर, थ्रेशर इत्यादि की मांग बढ़ने के कारण बहुत से उद्योग स्थापित किए गए हैं।

4. उत्पादकता में वृद्धि (Increase in Productivity) हरित क्रान्ति के पश्चात् गेहूँ तथा चावल की उत्पादन शक्ति बहुत बढ़ गई है। यद्यपि गेहूँ, मक्की, ज्वार, कपास की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में काफ़ी वृद्धि हुई है जिसका मुख्य कारण अच्छे बीजों, रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग है।

5. ग्रामीण विकास (Rural Development) हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप ग्रामीण लोगों की आय में वृद्धि हो गई है इसलिए ग्रामीण लोगों में उच्च जीवन स्तर व्यतीत करने की इच्छा पैदा हो गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब की प्रमुख फसलों का वर्णन करें। पंजाब में पुनर्गठन के पश्चात् फसलों के ढांचे में कौन-से परिवर्तन हुए हैं ?
उत्तर-
पंजाब में कई प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाता है। इन फसलों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-
A. खाद्य फसलें (Food Crops)-ये वह फसलें हैं जोकि भोजन के रूप में खाने के लिए प्रयोग की जाती हैं जैसे कि गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्की, दालें तथा चने इत्यादि।
B. व्यापारिक फसलें (Commercial Crops)-व्यापारिक फसलें वे हैं जिनका प्रयोग उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। जैसे कि गन्ना, कपास, तिलहन इत्यादि।

A. खाहा फसलें (Food Crops)-पंजाब की खाद्य फसलों की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है –
1. गेहूँ (Wheat)-पंजाब में गेहूँ भोजन के लिए मुख्य फसल है। गेहूँ की बिजाई नवम्बर-दिसम्बर के महीने में की जाती है जोकि अप्रैल-मई के महीने में काटी जाती है। पंजाब के सब ज़िलों में गेहूँ की बिजाई की जाती है परन्तु संगरूर, फिरोज़पुर तथा लुधियाना जिले में अन्य जिलों से गेहूँ अधिक होती है। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादन शक्ति पंजाब में 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। जबकि भारत में गेहूँ की औसत उत्पादकता 3600 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। स्पष्ट है कि पंजाब में गेहूँ का उत्पादन 17613 हज़ार मीट्रिक टन है जो अन्य राज्यों से अधिक है।

2. चावल (Rice)- पंजाब में चावल की खाद्य फसलों में से प्रमुख फसल है। इसकी बिजाई मई-जून में की जाती है तथा यह अक्तूबर-नवम्बर तक तैयार हो जाती है। चावल का उत्पादन पंजाब के सब जिलों में होता है परन्तु सबसे अधिक उत्पादन अमृतसर, पटियाला, लुधियाना तथा संगरूर ज़िलों में होता है। 2019-20 में पंजाब में चावल की प्रति हेक्टेयर उपज 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जबकि समूचे भारत में औसत उत्पादकता 2708 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। पंजाब में चावल का उत्पादन 13311 हज़ार मीट्रिक टन था।

3. जौ (Barley)-पंजाब में जौ रबी की फसल है। इसको पंजाब में सितम्बर-अक्तूबर के महीने में बोआ जाता है तथा यह अप्रैल में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन भटिंडा, होशियारपुर इत्यादि जिलों में होता है। 1965-66 में जौ की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1030 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर था। 2019-20 में इसकी उत्पादन शक्ति बढ़कर 3017 किलोग्राम हो गई है। जौ का उत्पादन 117 हजार मीट्रिक टन हुआ था।

4. मक्की (Maize)-पंजाब में मक्की खरीफ की फसल है। मक्की जून-जुलाई के महीने में बोई जाती है तथा मक्की की फसल सितम्बर, अक्तूबर तक तैयार हो जाती है। पंजाब में अधिकतर मक्की लुधियाना, जालन्धर, होशियारपुर जिलों में पैदा होती है। 1970-71 में प्रति हेक्टेयर उत्पादन शक्ति 1555 किलोग्राम थी। 2019-20 में इसकी उत्पादन शक्ति बढ़कर 3515 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। मक्की का उत्पादन 396 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

5. ज्वार तथा बाजरा (Jowar and Bazra)-ज्वार तथा बाजरा खरीफ की फसलें हैं। ज्वार मुख्यतः रूपनगर तथा मुक्तसर जिलों में पैदा की जाती है। बाजरे की फसल, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट तथा संगरूर में होती है। बाजरे की उत्पादन शक्ति 1965-66 में 548 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जोकि 2019-20 में बढ़कर 987 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। ज्वार का उत्पादन 800 मीट्रिक टन तथा बाजरे का उत्पादन 800 मीट्रिक टन हुआ था।

6. चने (Gram)-यह रबी की फसल है जोकि अक्तूबर-नवम्बर में बोई जाती है। यह फसल अप्रैल-मई तक तैयार हो जाती है। यह फसल भटिंडा तथा मुक्तसर जिलों में होती है क्योंकि रेतीली भूमि इसके लिए अधिक उपयुक्त होती है। इसकी उत्पादकता 1245 kg प्रति हैक्टेयर और उत्पादन 3 हज़ार मीट्रिक टन था।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 33 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

7. दालें (Pulses) पंजाब में लोगों के भोजन का मुख्य अंग दालें हैं। पंजाब में मांह, मोठ, मूंगी, मसर इत्यादि दालों का प्रयोग किया जाता है। दालों की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। 2019-20 में दालों की पैदावार 25 हज़ार मीट्रिक टन थी।

B. व्यापारिक फसलें अथवा नकदी फसलें (Commercial Crops or Cash Crops)-पंजाब में व्यापारिक फसलें मुख्यतः निम्नलिखित है –
1. गन्ना (Sugarcane) पंजाब में गन्ना व्यापारिक खाद्य फसल है। इसका प्रयोग गुड़, शक्कर तथा चीनी तैयार करने के लिए किया जाता है। इसका बिजाई मार्च-अप्रैल तथा कटाई दिसम्बर-मार्च में की जाती है। गन्ना मुख्यतः जालन्धर, गुरदासपुर तथा रूपनगर जिलों में बोआ जाता है। पंजाब में चीनी बनाने के उद्योग के लिए कच्चा माल पंजाब में ही तैयार किया जाता है। 2019-20 में गन्ने का उत्पादन 7744 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

2. कपास (Cotton) कपास खरीफ की फसल है। यह अप्रैल से जून तक बोई जाती है जोकि सितम्बर से दिसम्बर तक तैयार हो जाती है। पंजाब में भटिंडा, फरीदकोट, फिरोजपुर में कपास की अमेरिकन किस्म बोई जाती है जबकि अन्य जिलों में देशी कपास बोई जाती है। 2019-20 में कपास का उत्पादन 1283 हज़ार गांठें हुआ।

3. तेलों के बीज (Oil Seeds)-पंजाब में तेलों के बीज मुख्य नकदी फसल है। इसमें सरसों, तारामीरा, अलसी, तिल इत्यादि का उत्पादन होता है। इनमें से कुछ फसलें रबी की हैं तथा कुछ खरीफ की हैं। भटिंडा, फिरोजपुर तथा पटियाला में सरसों तथा तारामीरा, संगरूर में मुख्यतः तारामीरा, लुधियाना में मूंगफली का उत्पादन किया जाता है। 2019-20 में 59.6 हज़ार मीट्रिक टन तेलों के बीज का उत्पादन हुआ।

प्रश्न 4.
पंजाब में कृषि उपज बिक्री के दोष बताएं और इन दोषों को दूर करने के लिये सुझाव दें।
(Discuss the defects of Agricultural Marketing on Punjab. Suggest measures to remove the defects.)
उत्तर-
पंजाब में कृषि उपज बिक्री के मुख्य दोष इस प्रकार हैं –
1. ग्रेडिंग का अभाव (Lack of Grading)-पंजाब में किसान अपनी फसल की ग्रेडिंग नहीं करते। जो फसल बाज़ार में बिक्री के लिए भेजी जाती है उसमें मिलावट होने के कारण उपज का ठीक मूल्य प्राप्त नहीं होता।

2. उपज के भण्डार का अभाव (Lack of Storage Facilities)-किसान को अपनी उपज कटाई के बाद शीघ्र बेचनी पड़ती है क्योंकि फसलों के संग्रह करने के लिये उचित भण्डार साधन नहीं होते। इसलिए घर पर फसल रखने से उसके नष्ट होने का डर रहता है।

3. संगठन का अभाव (Lack of Organisation) पंजाब में किसानों का कोई संगठन नहीं है जो कि उपज का उचित मूल्य दिला सके। किसान अपनी-अपनी फसल मण्डियों में बेचते हैं जिस कारण उनको उपज की कम कीमत प्राप्त होती है।

4. मण्डियों में अधिक मध्यस्थ (Many Intermediaries in Mandies)-मण्डी में मध्यस्थों की अधिकता के कारण भी किसान को उपज का ठीक मूल्य प्राप्त नहीं होता। किसान और उपभोक्ता के बीच कच्चा आढ़तिया, पक्का आढ़तिया, दलाल आदि बहुत-से मध्यस्थ होते हैं। मध्यस्थों के कारण किसान को उपज की पूरी कीमत प्राप्त नहीं होती।

5. मण्डियों में अनुचित ढंग (Malpractices in Mandies) मण्डियों में किसान को कम कीमत देने के लिये कई प्रकार के अनुचित ढंगों का प्रयोग किया जाता है। किसान की उपज को तुरन्त खरीदा नहीं जाता और किसान को कई दिन उपज की सम्भाल करनी पड़ती है। उसको उपज की उचित कीमत का ज्ञान भी नहीं दिया जाता।

6. मण्डियों के बारे में सूचना (Knowledge about Mandies) किसानों को बाज़ार की विभिन्न मण्डियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिये किसान अपनी उपज गांव के पास ही मण्डियों में कम कीमत पर बेच देता है।

7. वित्त का अभाव (Lack of Finance)-किसानों को फसल बीजने से लेकर, इस की कटाई होने तक बहुतसे वित्त की ज़रूरत होती है। पंजाब में बहुत-से किसान वित्त के लिये महाजनों तथा आढ़तियों पर निर्भर होते हैं। इसलिए किसान को अपनी उपज महाजनों तथा आढ़तियों को ही बेचनी पढ़ती है। इसलिए उपज की ठीक कीमत प्राप्त नहीं होती।

8. यातायात सुविधाओं का अभाव (Lack of Transport Facilities)-पंजाब में गांव में यातायात की असुविधाएं होने के कारण किसान को अपनी उपज गांव में या नज़दीक मण्डियों में ही बेचनी पड़ती है। इसलिये किसान को अपने उत्पादन को बहुत ही प्रतिकूल समय, प्रतिकूल दरों पर, प्रतिकूल बाज़ार में बेचना पड़ता है।

9. स्वेच्छा बिक्री का अभाव (Lack of Freedom of Sale)-पंजाब में किसान अपनी उपज स्वेच्छा से बिक्री नहीं कर सकता। उसको बैंक का कर्ज, साहूकार और आढ़तियों का कर्ज देना होता है। इसलिए फसल काटने के तुरन्त बाद उसको अपनी उपज बेचनी पड़ती है।

कृषि उपज की बिक्री के दोषों को दूर करने के लिए सुझाव (Suggestions to Remove the Defects of Agricultural Marketing) कृषि उपज की बिक्री में बहुत से दोष हैं। इन दोषों को दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये जाते हैं –
1. वित्त की सुविधा (Facilities of Finance)-पंजाब के किसानों को वित्त की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। भारत सरकार ने इस वित्त की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किसानों पर से 2019-20 में ₹ 2000 करोड़ का कर्ज माफ़ कर दिया है और बैंकों में किसानों को अधिक साख देने के लिये कहा है।

2. यातायात की सुविधा (Facilities of Transport)-पंजाब में किसान की उपज को बेचने के लिये सस्ती, कुशल तथा पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिएं। इस प्रकार किसान अपनी उपज को उचित बाज़ार, उचित समय तथा उचित कीमत पर बेच सकता है।

3. संग्रह की सुविधा (Facilities of Storage)-संग्रह की सुविधा भी कृषि उपज की बिक्री के लिए बहुत • ज़रूरी है। किसान के पास गांव में फसलों को संग्रह करने के लिये गड्ढ़े या कोठियां मिट्टी के बने होते हैं। इस कारण बहुत-सी फसल नष्ट हो जाती है। इसलिए संग्रह की सुविधा सरकार द्वारा प्रदान करनी चाहिए।

4. मध्यस्थों पर नियन्त्रण (Control over Middleman)-कृषि उपज की उचित बिक्री के लिये मध्यस्थों पर नियन्त्रण आवश्यक है। मध्यस्थों पर नियन्त्रण करके किसान को उसकी उपज की ठीक कीमत दिलाई जा सकती है।

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5. उचित कीमत (Suitable Price)-किसान द्वारा उपज की कीमत दूसरे खरीदार लगाते हैं जबकि उत्पादक अपनी वस्तु की कीमत स्वेच्छा से निर्धारित करते हैं। इसलिए किसान को अपनी उपज की कीमत स्वेच्छा से निर्धारित करने का अधिकार होना चाहिए।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी

Punjab State Board PSEB 12th Class Economics Book Solutions Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Economics Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी

PSEB 12th Class Economics भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत में साक्षरता की क्या स्थिति है ?
उत्तर-
भारत में 1951 में साक्षरता दर 18.3% थी। 2019 में साक्षरता दर बढ़कर 75% प्रतिशत हो गई है।

प्रश्न 2.
भारत में शिक्षा संस्थाओं की संख्या पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
भारत में 2019-20 में 828 यूनिवर्सिटियां, 25938 प्रोफैशनल कॉलेज, 40,000 कॉलेज, 92275 सैकेण्डरी स्कूल, 139539 हाई स्कूल, 2 लाख 74 हज़ार से अधिक मिडिल स्कूल तथा 7 लाख 48 हज़ार से अधिक प्राइमरी स्कूल थे।

प्रश्न 3.
शिक्षा के व्यवसायीकरण से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
शिक्षा के व्यवसायीकरण से अभिप्राय है शिक्षा के साथ किसी व्यवसाय की शिक्षा देना।

प्रश्न 4.
1986 की नई शिक्षा नीति के उद्देश्य बताओ।
उत्तर-
शत-प्रतिशत प्राइमरी शिक्षा प्रदान करना। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का प्रसार करना।

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प्रश्न 5.
भारत में स्वतन्त्रता के पश्चात् जन्म दर तथा मृत्यु दर में क्या परिवर्तन हुआ है ?
उत्तर-
भारत में स्वतन्त्रता के पश्चात् जन्म दर तथा मृत्यु दर में बहुत कमी हुई है। 1951 में मृत्यु दर 18 प्रति हज़ार थी जोकि कम होकर 7.3 प्रति हज़ार रह गई है।

प्रश्न 6.
भारत में जीवन प्रत्याशा को स्पष्ट करो।
उत्तर-
भारत में स्वतन्त्रता के पश्चात् जीवन प्रत्याशा में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1951 में भारत में लोगों की औसत आयु 41 वर्ष थी। 2019 में लोगों की औसत आयु बढ़कर 70.4 वर्ष हो गई है।

प्रश्न 7.
रोज़गार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
वे सभी व्यक्ति (पुरुष तथा स्त्रियां) जो पारिश्रमिक के लिए किसी प्रकार की नौकरी अथवा अपना कार्य करते हैं, उनको रोज़गार पर लगे गिना जाता है।

प्रश्न 8.
श्रम शक्ति (Labour Force) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जो व्यक्ति असल में काम करते हैं अथवा काम करने के इच्छुक हैं, उनको श्रम शक्ति कहा जाता है। श्रम शक्ति में 15 वर्ष से अधिक तथा 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को गिना जाता है।

प्रश्न 9.
सामाजिक संरचना के तीन महत्त्वपूर्ण घटक बताएं।
उत्तर-

  1. शिक्षा
  2. स्वास्थ्य
  3. आवास।

प्रश्न 10.
लोगों के पढ़ने-लिखने तथा समझने की योग्यता को शिक्षा कहते हैं।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 11.
भारत में शिक्षित बेरोज़गारी का मुख्य कारण शिक्षा को व्यवसाय से नहीं जोड़ा जाना है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 12.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर ………… प्रतिशत हो गई है।
(a) 64%
(b) 74.04%
(c) 84%
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) 74.04%.

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प्रश्न 13.
भारत में औसत जीवन अवधि …………….. वर्ष है।
(a) 53.5 वर्ष
(b) 63.5 वर्ष
(c) 73.5 वर्ष
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) 63.5 वर्ष।

प्रश्न 14.
सम्भोग द्वारा जो बीमारियां एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाती हैं उनको कहा जाता है।
उत्तर-
रजित रोग (Sexually Transmitted Diseases)

प्रश्न 15.
HIV से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
ह्यूमन इमयुनो डैफीशेन्सी वायरस (HIV) का अर्थ शरीर में सफेद सैलज की कमी हो जाना जिनसे बीमारियों की रोकथाम होती है।

प्रश्न 16.
भारत में प्रारंभिक शिक्षा का कुल दाखिलों के अनुपात का अनुमान कैसे लगाया जाता है ?
उत्तर-
प्रारंभिक शिक्षा का कुल शिक्षा अनुपात-
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प्रश्न 17.
सैकेण्डरी शिक्षा में शिक्षा के व्यवसायीकरण के लिए विशेष सफलता प्राप्त नहीं हुई है ?
उत्तर-
सही।

प्रश्न 18.
भारत में उच्च शिक्षा पर नियंत्रण तथा मार्गदर्शन कौन करता है ?
(a) केंद्र सरकार
(b) राज्य सरकार
(c) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(c) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग।

प्रश्न 19.
भारत में बेरोज़गारी का एक कारण शिक्षा का व्यवसायीकरण न होना है।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 20.
भारत में शिक्षा पर सरकार द्वारा किया जाने वाला व्यय संतोषजनक है।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 21.
भारत में शिक्षा पर अधिक व्यय कौन करता है ?
(a) केंद्र सरकार
(b) राज्य सरकार
(c) निजी संस्था
(d) माता-पिता।
उत्तर-
(b) राज्य सरकार।

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प्रश्न 22.
एड्ज़ (AIDS) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
एड्ज़ से अभिप्राय (एकुआयर्ड इमीनियो डैफीसेन्सी सिंड्रोम) रोगों से लड़ने की शक्ति की घाट।

प्रश्न 23.
औद्योगीकरण सेहत के लिए कैसे हानिकारक होता है ?
उत्तर-
औद्योगीकरण द्वारा वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण फैलता है जो कि सेहत के लिए हानिकारक होता है।

प्रश्न 24.
भारत में बेरोज़गारी कितनी है ?
उत्तर-
भारत में 6.1% बेरोज़गार हैं।

प्रश्न 25.
भारत में शिक्षत बेरोज़गार कितने है ?
उत्तर-
भारत में 11.4% शिक्षत बेरोज़गार हैं।

II. अति लयु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत में शिक्षा की स्थिति पर संक्षेप नोट लिखो।
उत्तर-
इस समय भारत में 74.04 प्रतिशत लोग साक्षर हैं। स्वतन्त्रता के पश्चात् शिक्षा के प्रसार की ओर अधिक ध्यान दिया गया है।

  1. साधारण शिक्षा का प्रसार-शिक्षित लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। भारत में 82.14% पुरुष तथा 65.46% स्त्रियां साक्षर हैं।
  2. शिक्षा संस्थाएं-भारत में स्कूल, कॉलेज तथा यूनिवर्सिटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है।

प्रश्न 2.
श्रम शक्ति तथा मानवीय शक्ति में अन्तर बताओ।
उत्तर-

  • श्रम शक्ति उन व्यक्तियों की संख्या होती है जो वास्तव में काम पर लगे होते हैं अथवा काम करने के लिए तैयार होते हैं। कार्य शक्ति उन व्यक्तियों की संख्या होती है, जोकि वास्तव में कार्य पर लगे हुए होते हैं। उनमें उन व्यक्तियों को शामिल नहीं किया जाता, जो कार्य करने के लिए तैयार होते हैं।
  • श्रम शक्ति में उन व्यक्तियों को शामिल करते हैं, जो देश में कार्य करने के लिए उपलब्ध होते हैं। कार्य शक्ति में उन व्यक्तियों को शामिल किया जाता है, जो वास्तव में काम पर लगे होते हैं।

प्रश्न 3.
रोज़गार से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
रोज़गार का अर्थ है आर्थिक क्रिया में लगे होना। वह सभी व्यक्ति (पुरुष तथा स्त्रियां) जो किसी प्रकार के पारिश्रमिक के लिए किसी प्रकार की नौकरी अथवा अपना कार्य करते हैं को रोज़गार पर लगे हुए गिना जाता है। जब हम रोज़गार पर लगे व्यक्तियों की बात करते हैं तो उन व्यक्तियों को शामिल किया जाता है जो 15-60 वर्ष की आयु के हैं। 15 वर्ष से कम तथा 60 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों को कार्य शक्ति (Work Force) में शामिल नहीं किया जाता।

प्रश्न 4.
शहरी बेरोज़गारी पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
शहरी बेरोज़गारी-भारत में 2017-18 में 991 लाख रजिस्टर्ड बेरोज़गार थे। इनमें औद्योगिक क्षेत्र के बेरोज़गार, शिक्षित बेरोज़गार जिनमें लड़के तथा लड़कियां शामिल हैं, उनमें बेरोज़गारी पाई जाती है। ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र में निम्नलिखित किस्म की बेरोज़गारी पाई जाती है –

  1. खुली बेरोज़गारी-जब काम करने योग्य श्रम शक्ति काम करना चाहती है परन्तु उनको काम नहीं मिलता तो उसको खुली बेरोज़गारी कहा जाता है।
  2. अल्प बेरोज़गारी-नैशनल सैम्पल सर्वे अनुसार यदि किसी व्यक्ति को साप्ताहिक 28 घण्टे काम प्राप्त होता है तो उसको अति अल्प बेरोजगार कहा जाता है। 29 से 42 घण्टे साप्ताहिक काम करने वाले श्रमिक को सीमित अल्प बेरोज़गार कहते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी अन्य कार्य में अधिक उत्पादन कर सकता है तो वह वर्तमान कार्य में अल्प बेरोज़गार है।
  3. संरचनात्मक बेरोज़गारी-किसी देश में संरचनात्मक ढांचे में परिवर्तन हो जाए अर्थात् तकनीक तथा मांग में परिवर्तन के कारण बेरोज़गारी उत्पन्न हो जाए तो इसको संरचनात्मक बेरोज़गारी कहते हैं।

प्रश्न 5.
बेरोज़गारी के आर्थिक प्रभाव बताएँ।
उत्तर-
बेरोज़गारी के आर्थिक प्रभाव-

  • जब बेरोज़गारी होती है तो मानवीय शक्ति का पूर्ण प्रयोग नहीं होता।
  • देश में उत्पादन कम हो जाता है।
  • देश में प्रति व्यक्ति पैदावार कम हो जाती है।
  • पूंजी निर्माण के कम होने से निवेश पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Question)

प्रश्न 1.
भारत में शिक्षा की स्थिति पर संक्षेप नोट लिखो।
उत्तर-
सन् 2011 में भारत में 74.04 प्रतिशत लोग साक्षर थे। स्वतन्त्रता के पश्चात शिक्षा प्रणा की ओर अधिक ध्यान दिया गया है।

  1. साधारण शिक्षा का प्रसार-शिक्षित लोगों की संख्या 74.04% हो गई है। भारत में 82.14%, पुरुष तथा 65.46% स्त्रियां साक्षर हैं।
  2. शिक्षा संस्थाएं-भारत में स्कूल, कॉलेज तथा यूनिवर्सिटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है।
  3. विद्यार्थियों की संख्या-विद्यार्थियों की संख्या 2011 में बढ़कर 2 करोड़ हो गई है।
  4. शिक्षा का व्यवसायीकरण-शिक्षा को व्यवसाय आधारित बनाया जा रहा है।

प्रश्न 2.
भारत में स्वास्थ्य स्थिति का संक्षेप वर्णन करो।
उत्तर-
भारत की स्वास्थ्य स्थिति के सूचक इस प्रकार हैं –

  • जन्म दर-भारत में 1951 में जन्म दर 40 प्रति हज़ार से घट कर 2019-20 में 17 प्रति हज़ार रह गई है।
  • मृत्यु दर-मृत्यु दर 1951 में 18 प्रति हज़ार थी जोकि 2019-20 में घटकर 7.3 प्रति हज़ार रह गई है।
  • जीवन स्तर-भारत में औसत आयु 1951 में 41 वर्ष प्रति हज़ार थी जोकि 2019-20 में 70.4 वर्ष हो गई है।
  • अस्पताल तथा डॉक्टरों की संख्या-भारत में 70000 अस्पताल हैं, जिनमें कुल 8 लाख 890130 डॉक्टर तथा 19 लाख 4 हज़ार नर्से हैं।

प्रश्न 3.
श्रम पूर्ति तथा श्रम शक्ति में अन्तर बताओ।
उत्तर-

  1. श्रम पूर्ति का अर्थ मज़दूरी की दर के विभिन्न स्तर पर काम करने के लिए तैयार होते हैं। श्रम शक्ति का अर्थ वह मजदूरों की संख्या है जोकि काम कर रही है अथवा काम करने को तैयार है, परन्तु श्रम शक्ति का सम्बन्ध मज़दूरी की दर से नहीं होता।
  2. श्रम पूर्ति अधिक अथवा कम हो सकती है, जब मज़दूरी में परिवर्तन होता है, इसका माप मानवीय दिन (8 घण्टे) के अनुसार किया जाता है। श्रम शक्ति का अर्थ मज़दूरों की संख्या से होता है। इसको मानवीय दिन (8 घण्टे) द्वारा मापा नहीं जाता।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में शिक्षा के विकास की व्याख्या करो। (Explain the status of Education in India after Independence.)
अथवा
भारत में वर्तमान शिक्षा स्थिति का वर्णन करो। शिक्षा सम्बन्धी सरकार की नीति को स्पष्ट करो।
(Explain the present education condition of India. Discuss the Policy of the Government regarding Educations.)
उत्तर-
स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में शिक्षा के विकास को बहुत महत्त्व दिया गया है। 1950-51 में शिक्षा पर 114 करोड़ रुपए व्यय किए गए थे। 2019-20 में शिक्षा के क्षेत्र के लिए 1.78 लाख करोड़ रुपए व्यय करने का लक्ष्य है। भारत में शिक्षा प्रणाली की वर्तमान स्थिति अग्रलिखित अनुसार है –

  1. साधारण शिक्षा का प्रसार-भारत में 1951 में कुल जनसंख्या का 16% भाग शिक्षित था। 2019-20 में शिक्षित लोगों की संख्या बढ़कर 74.4% हो गई है। इस प्रकार शिक्षा का प्रसार अधिक हुआ है। पुरुषों में शिक्षित लोग 82.14% तथा स्त्रियों में 65.46% प्रतिशत हैं।
  2. शिक्षा संस्थाएं तथा विश्वविद्यालय-भारत में इस समय (2019-20) 900 विश्वविद्यालय (Universities) तथा अनुसन्धान केन्द्र हैं। 25938 प्रोफेशनल शिक्षा संस्थाएं तथा 40000 कॉलेज हैं। सीनियर सैकेण्डरी स्कूलों की संख्या 233517, मिडिल स्कूल 18 लाख 10 हज़ार तथा प्राइमरी स्कूलों की संख्या 18 लाख 12 हज़ार से अधिक है। भारत में प्राइमरी शिक्षा निःशुल्क तथा अनिवार्य है।
  3. विद्यार्थियों की संख्या-1951 में 6 वर्ष से 11 वर्ष की आयु के 42 प्रतिशत विद्यार्थी स्कूल जाते थे। अब 80 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी स्कूल जाते हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्याथिर्यों की संख्या 1951 में 3.5 लाख थी जोकि 2019 में बढ़कर 2.9 करोड़ हो गई है।
  4. शिक्षा का व्यवसायीकरण-भारत में केन्द्र सरकार ने 1986 की नई शिक्षा नीति अनुसार सैकेण्डरी स्तर पर शिक्षा के व्यवसायीकरण की योजना आरम्भ की है। व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों के लिए निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र तथा उनके स्व-रोज़गार के लिए योजनाबद्ध नीतियां बनाई गई हैं।
  5. प्रौढ़ तथा स्त्रियों की शिक्षा-भारत में बड़ी आयु के अनपढ़ पुरुषों तथा स्त्रियों के लिए शिक्षा को प्रौढ़ शिक्षा कहा जाता है। भारत में 15 वर्ष से 35 वर्ष के 11 करोड़ अनपढ़ हैं। सन् 2019-20 में 5.2 लाख लोगों के लिए शिक्षा का प्रबन्ध किया है। भारत में स्त्रियों की संख्या की ओर विशेष ध्यान दिया गया है।
  6. स्कूलों में विज्ञान का विषय-1988 के पश्चात् स्कूलों में विज्ञान की शिक्षा आरम्भ की गई है। इसका उद्देश्य शिक्षा के स्तर का सुधार करना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना है।

सरकार की शिक्षा नीति-भारत में नई शिक्षा नीति की घोषणा 1986 में की गई। इस नीति अनुसार केन्द्र तथा राज्य सरकारें शिक्षा पर व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत करेंगी। दसवीं योजना में शिक्षा पर 24908 करोड़ रु० व्यय किए गए। 2020-21 में शिक्षा पर 360000 करोड़ रु० व्यय होने का अनुमान है। नई नीति में निम्नलिखित बातों पर जोर दिया गया है-

  1. देश में सभी लोगों के लिए प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना। इस उद्देश्य के लिए सर्वशिक्षा अभियान नवम्बर 2000 में आरम्भ किया गया। इस उद्देश्य के लिए 2020 में GDP का 3.9% भाग व्यय किया गया।
  2. जुलाई 2019 में लड़कियों की शिक्षा के लिए सर्व शिक्षा अभियान के स्थान पर “प्राथमिक स्तर पर लड़कियों की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रोग्राम” की घोषणा की है । इस योजना के अधीन पिछड़े क्षेत्रों में जहां स्त्री संख्या कम है, उन क्षेत्रों में स्त्री शिक्षा का विस्तार किया जाएगा।
  3. पिछड़ी जातियों तथा जनजाति की लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रिहायशी स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस उद्देश्य के लिए 2014-15 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय स्थापित करने के लिए बाहरवीं के वर्ष 2019-20 में 27 हज़ार करोड़ रु० व्यय करने का लक्ष्य है जिससे 750 रिहायशी स्कूल स्थापित किए जाएंगे।
  4. सरकार ने प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त कर (Cess) लगाया है, जिसको प्राथमिक शिक्षा कोष का नाम दिया गया है। इस कर द्वारा 2019-20 में 2500 करोड़ रु० व्यय किए गए।
  5. तकनीकी शिक्षा के प्रसार पर भी जोर दिया गया है। बारहवीं योजना (2012-17) में स्कूल शिक्षा पर 360000 करोड़ अथवा उच्च शिक्षा पर 99300 लाख करोड़ रु० व्यय किये गए।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी

प्रश्न 2.
भारत में वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का वर्णन करो। इस सम्बन्धी सरकार की नीति स्पष्ट करो।
(Explain the present status of Health in India. Explain the Policy of Government in this regard.)
उत्तर-
किसी देश के साधनों में मानवीय साधनों को सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है। किसी देश का आर्थिक विकास इस बात पर निर्भर करता है कि उस देश के मानवीय साधनों का शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन स्तर इत्यादि के रूप में कितना विकास हुआ है। प्रो० ड्रकर के अनुसार, “मनुष्यों के बिना पूंजी व्यर्थ होती है। पूंजी के बिना भी लोग पहाड़ों को हिलाने की शक्ति रखते हैं।” स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में मानवीय स्वास्थ्य पर बहुत बल दिया गया है। इसका अनुमान निम्नलिखित सूची पत्र द्वारा लगाया जा सकता है
PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी 2
भारत में स्वास्थ्य स्थिति का अनुमान ऊपर दी सूची से लगाया जा सकता है।

  1. जन्म दर-भारत में 1951 में जन्म दर 40 प्रति हज़ार थी जोकि 2019-20 में घटकर 17.6 प्रति हज़ार रह गई है। जन्म दर में कमी आई है जोकि जनसंख्या की वृद्धि पर रोक लगाने के लिए अच्छी है।
  2. मृत्यु दर-भारत में मृत्यु दर भी काफ़ी घट गई है। 1951 में मृत्यु दर 18 प्रति हज़ार थी। यह घटकर 2019-20 में 7.3 प्रति हज़ार रह गई है। इसका कारण स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास है।
  3. शिशु मृत्यु दर-भारत में बच्चों के जन्म समय शिशुओं की मृत्यु हो जाती थी। 1951 में शिशु मृत्यु दर 129 प्रति हजार से घटकर 2019-20 में 26.6 प्रति हज़ार रह गई है। यह भी स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि का प्रतीक है।
  4. जीवन प्रत्याशा-भारत में औसत जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई है। 1951 में औसत जीवन प्रत्याशा 41 वर्ष थी। 2019-20 में औसत जीवन प्रत्याशा 70.4 वर्ष हो गई है। पुरुषों की जीवन प्रत्याशा 67 वर्ष तथा स्त्रियों की जीवन प्रत्याशा 74.4 वर्ष है।
  5. अस्पतालों की संख्या-भारत में 1951 में अस्पतालों की संख्या 70000 थी। यह संख्या 2019-20 में बढ़कर 593320 हो गई है। इससे लोगों को विभिन्न बीमारियों का इलाज करवाना आसान हो गया है।
  6. डॉक्टरों तथा नौं की संख्या- भारत में डॉक्टरों की संख्या में भी निरन्तर वृद्धि हुई है। 1951 में 61810 डॉक्टर थे। 2019-20 में डॉक्टरों की संख्या बढ़कर 890130 हो गई है। देश के प्रत्येक प्रान्त में मेडिकल कलेज स्थापित हो गए हैं। मरीजों की देखभाल तथा इलाज में नौं का योगदान भी महत्त्वपूर्ण होता है। 1951 में भारत में नों की संख्या 18054 थी जोकि बढ़कर 2019-20 में 1940000 हो गई।

स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं- भारत में स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाओं की कुछ समस्याएं है जैसे कि –

  • गांवों तथा शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं एक समान नहीं है। गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है।
  • एड्ज, शूगर, ब्ल्ड प्रैशर बीमारियों में वृद्धि हो रही है।
  • निजीकरण के कारण स्वास्थ्य सम्भाल की लागत बढ़ रही है।
  • साफ-सुथरे वातावरण तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पाई जाती है।

स्वास्थ्य सम्बन्धी नीति-दसवीं पंचवर्षीय योजना में स्वास्थ्य सुविधाओं पर सकल घरेलू उत्पाद का 2-3 प्रतिशत हिस्सा व्यय करने की सिफ़ारिश की गई है। इस नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. 2019-20 में एड्ज़ पर नियन्त्रण करने के लिए 2100 करोड़ रुपए व्यय किए गए।
  2. प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र गांवों में स्थापित किए गए हैं, जिनकी संख्या 2019-20 में 192166 हो गई है।
  3. 2019-20 के बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं पर 2998 करोड़ रु० व्यय किए गए।
  4. देश के 19 राज्यों में कुष्ठ की बीमारी को समाप्त किया गया है। बारहवीं योजना के अन्त तक इस बीमारी को समाप्त कर दिया जाएगा।
  5. देश में 2019-20 में 14 से 16 मिलियन पुरुष, स्त्रियां तथा बच्चे एड्ज़/एच० आई० वी० के शिकार हो चुके थे। यह देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सूचक है।
  6. भारत में आयुर्वेद, योगा, यूनानी तथा होमियोपैथी को विकसित किया जा रहा है। इन इलाजों के विकास के लिए बारहवीं योजना में 13999 करोड़ रु० व्यय किए जाएंगे।
  7. बारहवीं योजना में स्वास्थ्य पर 842481 करोड़ रु० व्यय किये जाएंगे।

प्रश्न 3.
भारत में बेरोज़गारी की किस्में बताओ। बेरोज़गारी के आर्थिक तथा सामाजिक प्रभाव बताओ।
(Explain the types of unemployment in India. Discuss the Economic and Social Effects and Education.)
उत्तर-
भारत में बेरोजगारी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। जब एक मनुष्य काम पर नहीं होता परन्तु वह मनुष्य वर्तमान मज़दूरी की दर पर काम करना चाहता है तो उनको बेरोज़गार कहा जाता है। भारत में 2000 में 26.6 मिलियन, 2004 में 34.3 मिलियन तथा 2009 में 28 मिलियन तथा 2019-20 में 20.9 मिलियन श्रम शक्ति बेरोज़गार थी। भारत में बेरोज़गारी का वर्गीकरण निम्नलिखित अनुसार किया जा सकता है –
1. ग्रामीण बेरोज़गारी-गांवों में दो-तिहाई श्रम शक्ति स्व:रोज़गार पर कृषि उत्पादन में लगी हुई है। भारत में 2016 में 8.52% लोग बेरोज़गार थे। परन्तु गांवों में छिपी बेरोज़गारी भी पाई जाती है। छिपी बेरोज़गारी का अर्थ है कि कृषि उत्पादन में एक खेत पर पांच व्यक्तियों की आवश्यकता है परन्तु आठ व्यक्ति काम पर लगे हुए हैं, यदि 3 व्यक्तियों को अन्य काम पर लगाया जाए परन्तु कृषि के उत्पादन में कोई कमी न आए तो तीन श्रमिकों को छिपे बेरोज़गार कहा जाता है। इसी तरह गांवों में कृषि उत्पादन मौसमी कार्य है। इस कारण मौसमी बेरोज़गारी भी पाई जाती है।

2. शहरी बेरोज़गारी- भारत में 2019-20 में 11.4% बेरोज़गार थे। इनमें औद्योगिक क्षेत्र के बेरोज़गार, शिक्षित बेरोज़गार जिनमें लड़के तथा लड़कियां शामिल हैं, उनमें बेरोज़गारी पाई जाती है। ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र में निम्नलिखित किस्म की बेरोज़गारी पाई जाती है –

  • खुली बेरोज़गारी-जब काम करने योग्य श्रम शक्ति काम करना चाहती है परन्तु उनको काम नहीं मिलता तो उसको खुली बेरोज़गारी कहा जाता है।
  • अल्प बेरोज़गारी-नैशनल सैम्पल सर्वे अनुसार यदि किसी व्यक्ति को साप्ताहिक 28 घण्टे काम प्राप्त होता है तो उसको आत अल्प बेरोज़गार कहा जाता है। 29 से 42 घण्टे साप्ताहिक काम करने वाले श्रमिक को सीमित अल्प गेज़गार कहते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी अन्य कार्य में अधिक उत्पादन कर सकता है तो वह नमान कार्य में अल्प बेरोज़गार है।
  • संरचनात्मक बेरोज़गारी-किसी देश में संरचनात्मक ढांचे में परिवर्तन हो जाए अर्थात् तकनीक तथा मांग में परिवर्तन के कारण बेरोज़गारी उत्पन्न हो जाए तो इसको संरचनात्मक बेरोज़गारी कहते हैं।
  • अस्थिर बेरोज़गारी-अस्थिर बेरोज़गारी देश में श्रम की गतिहीनता तथा श्रम बाज़ार की अपूर्णता के कारण उत्पन्न होती है, जब मजदूरों को बाज़ार का ज्ञान नहीं होता तो इस प्रकार की बेरोज़गारी उत्पन्न हो जाती है।
  • चक्रीय बेरोज़गारी-किसी देश में मन्दीकाल के कारण उत्पन्न हुई बेरोज़गारी को चक्रीय बेरोज़गारी कहा जाता है।
  • मौसमी बेरोज़गारी-मौसम में परिवर्तन होने से कुछ उद्योग बन्द हो जाते हैं तो इस प्रकार की बेरोज़गारी को मौसमी बेरोज़गारी कहा जाता है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी

बेरोजगारी के आर्थिक प्रभाव-

  1. जब बेरोज़गारी होती है तो मानवीय शक्ति का पूर्ण प्रयोग नहीं होता।
  2. देश में उत्पादन कम हो जाता है।
  3. देश में प्रति व्यक्ति पैदावार कम हो जाती है।
  4. पूंजी निर्माण के कम होने से निवेश पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

बेरोज़गारी पर सामाजिक प्रभाव-

  • जीवन की गुणवत्ता कम हो जाती है।
  • समाज में अमीर तथा गरीब वर्ग उत्पन्न हो जाते हैं।
  • आर्थिक तथा सामाजिक असमानता में वृद्धि होती है।
  • सामाजिक अशान्ति फैल जाती है जैसे कि नक्सलवादी तथा आतंकवादी समाज में अशान्ति उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में शहरी तथा ग्रामीण रोजगार के लिए सरकार द्वारा कौन-सी योजनाएं बनाई गई हैं ? इनका उल्लेख करें।
(Explain the programs of the Government of India regarding rural and urban employment.)
उत्तर-
भारत में रोजगार की वृद्धि के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित पग उठाए गए हैंशहरी रोज़गार में वृद्धि के लिए उठाए गए पग-

  1. संगठित क्षेत्रों का विकास-भारत में निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक क्षेत्र में अर्थात् उद्योग, खनिज, यातायात निर्माण इत्यादि में बहुत-से लोगों को रोजगार प्रदान करवाया जा रहा है।
  2. रोज़गार के दफ़्तर-सरकार ने रोज़गार की सुविधाएं बढ़ाने के लिए 915 रोज़गार दफ़्तर स्थापित किए हैं। सरकार बेरोज़गारी भत्ता देने के बारे भी विचार कर रही है।
  3. शिक्षित लोगों को स्व:रोज़गार-भारत में शिक्षित लोगों को स्व:रोज़गार दिलवाने के लिए सरकार बहुत-सी योजनाएं लागू कर रही है। शिक्षित लोगों को ऋण की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
  4. रोज़गार गारण्टी योजना-कुछ राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, केरल तथा राजस्थान इत्यादि में रोज़गार गारण्टी योजना आरम्भ की है। महाराष्ट्र में 2019 में 326 करोड़ रु० व्यय किए गए।

ग्रामीण रोज़गार में वृद्धि के लिए उठाए गए पग-
1. रोजगार के लिए धमाकेदार प्रोग्राम-1971 में बेरोज़गारी तथा अल्प बेरोज़गारी को दूर करने के लिए प्रत्येक जिले में श्रम सघन योजना आरम्भ की गई। इससे प्रत्येक परिवार के कम-से-कम एक व्यक्ति को रोज़गार प्रदान किया जाता है। इस योजना पर प्रत्येक वर्ष 100 करोड़ रु० व्यय किए गए हैं।

2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार प्रोग्राम-1980-81 में पहले काम के बदले अनाज योजना बनाई गई थी जिसका नाम बदलकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार प्रोग्राम रखा गया। इस योजना के तीन उद्देश्य थे

  • गांवों में अधिक रोज़गार के अवसर पैदा करना।
  • ग्रामीण लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठाना
  • लोगों की आय में वृद्धि करना।

3. स्व:रोज़गार के लिए प्रशिक्षण-ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण योजना (TRYSEM) 1979 में आरम्भ की गई। इस योजना के अन्तर्गत 12 लाख युवकों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक युवक को 3000 अथवा 5000 रु० तक की आर्थिक सहायता भी दी गई ताकि वह अपना कार्य आरम्भ कर सकें।

4. जवाहर रोज़गार योजना-28 अप्रैल, 1989 में स्वर्गीय प्रधानमन्त्री श्री राजीव गांधी ने जवाहर रोज़गार योजना (JRY) आरम्भ की। इस योजना अधीन प्रत्येक गरीब ग्रामीण परिवार के एक सदस्य को 50 से 100 दिनों तक का रोज़गार देना है। इस योजना में स्त्रियों के लिए 30 प्रतिशत हिस्सा सुरिक्षत किया गया। इस योजना पर 2019-20 में 7200 करोड़ रु० व्यय किए गए।

5. जवाहर ग्राम समृद्धि योजना-यह योजना अप्रैल 1999 में आरम्भ की गई। इसमें केन्द्र तथा राज्य सरकारों का योगदान 75:25 की अनुपात में रखा गया। इस योजना का उद्देश्य गांवों में पक्की नालियां, गलियां, धर्मशालाएं इत्यादि चिरकालीन चलने वाले भण्डारों का विकास करना है। 2018-19 में केन्द्र सरकार ने 61500 करोड़ की राशि का योगदान इस योजना में पाया।

6. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्व:रोज़गार-यह योजना एकीकृत ग्रामीण विकास प्रोग्राम तथा स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण योजना को शामिल करके तैयार की गई। इसमें पहले चलाई जा रही योजनाओं को चालू रखना इसका उद्देश्य रखा गया।

7. सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना-यह योजना 1 सितम्बर, 2001 में आरम्भ की गई। जवाहर ग्राम समृद्धि योजना तथा रोज़गार आश्वासन योजना को मिला दिया गया। इस योजना का उद्देश्य मज़दूरों को रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करना, क्षेत्रीय आर्थिक तथा सामाजिक दशाओं का विकास करना है। इस योजना अधीन 2018-19 में 82 लाख टन चावल तथा 44 लाख टन गेहूं का वितरण किया गया।

8. प्रधानमन्त्री रोज़गार योजना-यह योजना शिक्षित बेरोजगार युवकों के लिए बनाई गई है। 2017-18 में इस योजना द्वारा 88 लाख युवकों को रोजगार दिया जा चुका है।

9. रोज़गार गारण्टी एक्ट 2005-यह योजना सितम्बर 2004 में लागू की गई है। इस योजना अनुसार प्रत्येक ग्रामीण, शहरी तथा निर्धन परिवार में से एक सदस्य को 100 दिनों का काम प्रदान किया जाएगा। 2018-19 में इस योजना पर व्यय करने के लिए 30 हज़ार करोड़ रुपये रखे गए हैं जोकि सकल घरेलू उत्पाद का 1.3% हिस्सा है।

10. प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना-NDA सरकार ने 2015 में कौशल विकास योजना का निर्माण किया। इसमे बेरोजगार युवकों को कौशल प्रदान करके रोजगार दिया जाएगा। इसमें अब तक 4.30 लाख बेरोजगारों को शिक्षा प्रदान की जा चुकी है।

11. दीन दयाल उपाध्याय ग्राम कौशल योजना-यह योजना 2019-20 में आरम्भ की गई इस योजना द्वारा 2.78 लाख ग्रामीण बेरोजगार युवकों को सिखलाई दी गई है।

12. बारहवीं योजना और रोज़गार-भारत की बारहवीं योजना (2012-17) के अन्त तक श्रम शक्ति में वृद्धि 65 करोड़ होगी तथा 42 करोड़ श्रम शक्ति के लिये रोज़गार प्रदान किया जाएगा। योजना के अन्त तक 5% बेरोज़गारी रह जाने की सम्भावना है। इस योजना में बेरोजगारों को शिल्प (Skill) सिखलाई देकर देश का विकास किया जाएगा।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 27 भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगारी

13. बजट 2020-21-बजट 2020-21 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की वृद्धि के लिए 69000 करोड़ की राशि व्यय करने का लक्ष्य रखा है।

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Punjab State Board PSEB 3rd Class Maths Book Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 3 Maths Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 37:

Do you remember?

Question 1.
Add:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 1

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 2

PAGE 38:

Question 2.
Addition by forward counting method :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 3

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 4

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 5

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 3.
Write the number in tens/ones :
a. 42 = _______ Tens + ________ Ones
Solution.
42 = 4 tens + 2 Ones

b. 63 = _______ Tens + ________ Ones
Solution.
3 = 6 Tens + 3 Ones

Question 4.
Make the number:
a. 7 Tens + 4 Ones = _______
Solution.
74

b. 3 Tens + 0 Ones
Solution.
30

Question 5.
Addition by splitting one number:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 6

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 7

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 6.
Addition by splitting both numbers:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 8

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 9

PAGE 39:

Question 7.
Add 35 + 23 by putting beads in the abacus: (From Board M.Q.P.)

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 10

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 11

Question 8.
Subtract by omitting:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 12

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 13

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 9.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 14

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 15

Question 10.
Subtracting by splitting one number:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 16

Solution.
75 – 32 = 75 – (30 + 2)
= 75 – 30 – 2
= (75 – 30) – 2
= 45 – 2
= 43

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 40:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 17

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 18

PAGE 41:
Lets us learn:

Different methods of Addition:

By splitting one number:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 19

By splitting both numbers:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 20

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 42:
Let’s do:

Question 1.
Add by splitting one number :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 21

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 22

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 23

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 43:

Question 2.
Add by splitting both numbers :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 24

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 25

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Add by counting making a pairs of 10’s:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 26

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 27

PAGE 44:

Find the difference of the given numbers:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 28

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 29

PAGE 46:
Let’s do:

Subtract by making pairs of 10’s.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 30

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 31

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 2.
Subtract by making one of the given numbers as multiple of 10 :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 32

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 33

Question 3.
Subtract by making one of the given numbers as the multiple of 100 :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 34

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 35

PAGE 48:
Let’s do:

Add by putting beads in abacus:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 36

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 37

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 38

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 50:
Let’s do:

Subtraction on abacus (without borrowing):

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 39

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 40

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 52:
Let’s do:

Question 1.
Addition of 2 digit numbers (without carrying):

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 41

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 42

Question 2.
Addition of two numbers (with carrying):

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 43

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 44

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 54:

Question 1.
Subtraction of 2-digit numbers (without borrowing):

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 45

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 46

Question 2.
Subtraction of 2-digit numbers (with borrowing):

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 47

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 48

PAGE 56:

Find the sum :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 49

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 50

PAGE 57:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 51

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 53

Question 2.
Find the sum:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 53

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 54

PAGE 59:
Let’s do:

Find the sum:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 55

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 56

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 57

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 61:
Let’s do:

Question 1.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 58

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 59

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 60

Question 2.
Find the difference:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 61

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 62

Question 3.
Subtract by splitting number in 100’s:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 63

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 64

PAGE 62:

Subtract using place value:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 65

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 66

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 67

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Find the difference:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 68

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 64

PAGE 63, 64:
Let’s do:

Question 1.
Fill in the blanks

(i) 310 + 25 = ___ + 310
Solution.
25

(ii) 0 + ___ = 475
Solution.
475

(iii) ___ + 1 = 918
Solution.
917

(iv) 347 – ___ = 346
Solution.
1

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 2.
Tick (✓) the correct answer:
(i) 425 + 25 = _______
Solution.

(ii) 310 + 0 = _______
Solution.

(iii) 743 + 1 = 744
Solution.

(iv) 540 – 1 = 541
Solution.

Let’s do:

Find the sum:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 70

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 71

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 72

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

PAGE 64:
Statement Sum:

Question 1.
Sukhdev bought a toy car for ? 120 and a flower pot for ? 135 from a fare. How much money did Sukhdev spend in all ?
Solution.
Cost of toy car = ₹ 120
Cost of flower pot = ₹ 135
Sukhdev spent in all = ₹ 255

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 73

Question 2.
There are 140 pages in Pooja’s Punjabi book and 156 in her Mathematics book. How many total pages are there in both books ?
Solution.
Pages in pooja’s Punjabi book = 140
Pages in Pooja’s Math book = 156
Total pages in both the books = 296

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 74

Question 3.
Tarleen bought a bag for ₹ 255 for herself and a watch for ₹ 368 for her brother. How much money did she spend?
Solution.
Tarleen bought a bag for herself for = ₹ 255
Tarleen bought a watch for her brother for = ₹ 368
Money spent by Tarleen = ₹ 623

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 75

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 4.
There are 164 guavas in one basket and 128 guavas in another basket. How many guavas are there in the two baskets?
Solution.
Number of Guavas in first basket = 164
Number of Guavas in second basket = 128
Total number of Gauvas in two baskets = 292

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 76

Question 5.
One box contains 350 marbles. If 268 marbles are taken out. How many marbles are left in the box ?
Solution.
Number of Marbles in the box = 350
Number of Marbles taken out = 268
Number of Marbles left in the basket = 82

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 77

Question 6.
A farmer has 763 cows and second farmer has 459 cows. How many cows do they have in total ?
Solution.
Number of cows with first farmer = 763
Number of cows with second farmer = 459
Total number of cows with both = 1122

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 78

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 7.
In a garden, there were 215 mango trees. If 169 more mango trees were planted in the garden, then how many mango trees are there in the garden ?
Solution.
Number of mango trees planted = 215
More number of mango trees planted = 16 9
Total number of mango trees in the garden now = 384

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 79

Question 8.
There are 368 boys and 327 girls in a school. How many total number of students are there in the school ?
Solution.
Number of boys in the school = 368
Number of girls in the school = 327
Total number of students in the school = 695

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 80

Question 9.
Tejas had ₹ 563 in his piggy bank. His father gave him ₹ 278 more. How many rupees Tejas has now ?
Solution.
Money in Tejas Piggy Bank = ₹ 563
Money given by his father = ₹ 278
Total money Tejas has = ₹ 841

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 81

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 10.
There were 375 toffees in a toffee box. If 167 more toffees were put in that box. How many toffees were there in the box now?
Solution.
Number of toffees in the box = 375
Number of toffees put more = 167
Total number of toffees in the box = 542

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 82

Question 11.
Parneet has ₹ 680. He bought a bag for ₹ 575. How many rupees is he left with?
Solution.
Parneet has Rupees = ₹ 680
He bought a bag for = ₹ 575
Number of rupees left with him = ₹ 105

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 83

Question 12.
Sukhdev’s school is 824 walking steps far irons his house. If he has covered 379 steps. How many steps he has to walk to reach the school ?
Solution.
Number of walking steps is Sukhdev’s school from his house = 824
Number of steps he travelled = 379
Number of more steps he has to walk to reach the school = 445

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 84

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Worksheet:

PAGE 65:

Question 1.
Fill in the blanks:
(i) 62 + 0 = ____
Solution.
62

(ii) 115 + 1 = ____
Solution.
116

(iii) ____ + 0 = 348
Solution.
348

(iv) 518 + ____ = 519
Solution.
1

(v) 410 + 35 = ____ + 410
Solution.
35

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 2.
Tick (✓) the correct answer:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 85

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 86

Question 3.
Add :

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 87

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 88

Question 4.
Add by splitting the number:

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 89

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 90

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 5.
Subtract by splitting the number

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 91

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 92

Question 6.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 93

Solution.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 94

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 7.
295 passengers boarded a train from Sahibzada Ajit Singh Nagar. 190 more passengers hoarded the train at the Morinda station. How many total passengers are there in train now ?
Solution.
Number of passengers boarded from Sahibzada Ajit Singh = 295
Number of passengers boarded from Morinda = 190
Total number of passengers in the train = 485

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 95

Question 8.
At Fatehgarh Sahib railway station, out of 485 pasngers, 210 got down from the train. How many passengers are now left in the train ?
Solution.
Number of passengers in the train = 485
Number of passengers got down at Fatehgarh Sahib = -210
Number of passenger left, now in the train = 275

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction 96

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Multiple Choice Questions:

Question 1.
In cricket game Parneet is playing at 96 and only one ball is left to play. How many runs he has to score in one ball to complete one century ?
(a) 6
(b) 4
(c) 7
(d) 5
Answer.
(b) 4.

Question 2.
42 + 26 = ________ (Fill in the blank)
(a) 66
(b) 68
(c) 62
(d) 64
Answer.
(b) 68.

PSEB 3rd Class Maths Solutions Chapter 2 Addition and Subtraction

Question 3.
35 + 23 = ________ (Fill in the blank)
(a) 48
(b) 38
(c) 28
(d) 58
Answer.
(d) 58.

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 26 आर्थिक विकास में मानव पूँजी का योगदान

Punjab State Board PSEB 12th Class Economics Book Solutions Chapter 26 आर्थिक विकास में मानव पूँजी का योगदान Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Economics Chapter 26 आर्थिक विकास में मानव पूँजी का योगदान

PSEB 12th Class Economics आर्थिक विकास में मानव पूँजी का योगदान Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
मानव पूंजी से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मनुष्यों की कार्य कुशलता, ज्ञान और कौशल में वृद्धि को मानव पूँजी कहा जाता है।

प्रश्न 2.
मशीन, औज़ार और फैक्ट्रियां ही पूँजी निर्माण होते हैं ?
उत्तर-
गलत।

प्रश्न 3.
मनुष्य भी पूँजी निर्माण का महत्त्वपूर्ण स्रोत है ?
उत्तर-
सही।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
क्या जनसंख्या पूँजी निर्माण का स्रोत हो सकती है ?
उत्तर-
जनसंख्या का अधिक होना भी पूँजी निर्माण का स्रोत हो सकती है। इस बारे में प्रो० लुईस ने एक सिद्धान्त पेश किया है जिसमें वह कहते है कि बढ़ती जनसंख्या भी पूंजी निर्माण का साधन होती है ? चीन ने यह सिद्ध किया है कि अधिक जनसंख्या का अच्छी तरह प्रयोग करके उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। आज चीन दुनिया की एक महत्त्वपूर्ण शक्ति बन चुका है। इसलिए जनसंख्या पूँजी निर्माण का स्रोत बन सकती है।

प्रश्न 2.
मानव पूँजी द्वारा आर्थिक विकास के दो स्रोत बताएं।
उत्तर-

  1. आर्थिक विकास के लिए मानव पूँजी योगदान पा सकती है। मानव पूँजी द्वारा उच्च शिक्षा, अच्छी सेहत और विज्ञान के प्रयोग से उत्पादन में वृद्धि करके आर्थिक विकास संभव हो सकता है।
  2. मानव पूँजी आर्थिक विकास के औज़ार के रूप में भी प्रयोग की जा सकती है। मानव पूँजी उत्पादन के नए ढंगों का प्रयोग करके आर्थिक विकास में तेजी ला सकती है।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 26 आर्थिक विकास में मानव पूँजी का योगदान

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Question)

प्रश्न-
मानव पूँजी द्वारा आर्थिक विकास के औज़ार के रूप में कोई चार बिन्दु स्पष्ट करें।
उत्तर-
मानव पूँजी का अर्थ उच्च शिक्षा, अच्छी सेहत और खोज के नए ढंगों का प्रयोग करना होता है। इसलिए मानव पूँजी द्वारा आर्थिक विकास तेज़ी से किया जा सकता है –

  1. उत्पादन में वृद्धि-यदि अधिक जनसंख्या होती है तो ऋण की लागत कम होती है। विकसित देश उस देश में पूँजी निवेश करके ऋण का प्रयोग करते है तो उत्पादन में तेज़ी से वृद्धि होती है।
  2. उत्पादन शक्ति में वृद्धि-मानव पूँजी से न केवल उत्पादन में वृद्धि होती है और इसके साथ ही प्रति व्यक्ति उत्पादन बढ़ जाता है। इस प्रकार वस्तु की उत्पादन लागत कम हो जाती है और वस्तु कम कीमत पर आसानी से बेची जा सकती है। जिससे आर्थिक विकास में वृद्धि होती है।
  3. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि-मानव पूँजी द्वारा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है जो कि आर्थिक विकास का महत्त्वपूर्ण माप कहा जाता है। लोग अपने जीवन स्तर को ऊँचा करने का प्रत्यन करते हैं और बच्चे कम लिए जाते हैं।
  4. उच्च शिक्षा का प्रसार-लोग आपने बच्चों को अच्छी उच्च शिक्षा प्रदान करते हैं जिससे उनको जीवन में कभी भी मुश्किल का सामना न करना पड़े। इस प्रकार बच्चों की उत्पादन शक्ति बढ़ जाती है और आर्थिक विकास में वृद्धि होती है।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मानव पूँजी का आर्थिक विकास में योगदान स्पष्ट करें। (Explain the Role of Human Capital in Economic Development.)
उत्तर–
पुरातन समय में पूंजी का अर्थ केवल, मशीन, औज़ार, फैक्ट्रियाँ आदि भौतिक रूप में लिया जाता था। परन्तु रैंगवर वर्कस ने कहा कि भौतिक पूँजी के बिना मानव पूँजी भी आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान पा सकती है। जब मानव उच्च शिक्षा, अच्छी सेहत, ज्ञान में वृद्धि करके अपने कौशल का विकास करते हैं तो इसको मानव पूंजी कहा जाता है। प्रो० एफ० एच० हारबीसन के अनुसार, “मानव पूँजी निर्माण का अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसमें उन मनुष्यों की संख्या में वृद्धि की जाती है जो अधिक शिक्षित, कुशलता और तजुर्बे वाले होते हैं और देश के विकास प्रति आर्थिक तथा राजनीतिक विकास को आलोचनात्मक दृष्टि से देखते हैं। मानव पूँजी का सम्बन्ध मनुष्य के निवेश बढ़ाने से है जिससे वह उत्पादन में नए ढंगों का निर्माण कर सकें।” (“The term Human Capital Formation refers to the process of acquiring and increasing the number of persons who have the skill, education and experience which are critical for economic and political development of the country.” F.H. Harbison) प्रो० शुल्ज़ (Schultz) ने मानव पूंजी विकास के पाँच माप दण्ड बताए हैं जिनके द्वारा मानव पूँजी का विकास किया जा सकता है –

  • सेहत सहूलतों में वृद्धि जिससे जीवन काल में वृद्धि हो। लोगों की काम करने की क्षमता बढ़ जाए और लोग हृष्ट-पुष्ट हों।
  • काम करने की ट्रेनिंग जो कि फैक्ट्रियों द्वारा दी जाती है।
  • शिक्षा प्रदान करना जो स्कूलों कालेजों और विश्वविद्यालयों में दी जाती है उसमें वृद्धि है।
  • कृषि के क्षेत्र में लोगों को आधुनिक ढंगों का ज्ञान प्रदान करना।
  • लोगों में गतिशीलता पैदा करना जिससे नए काम की खोज आसानी से की जा सके। इसमें विदेशी पूँजी और तकनीक को भी शामिल किया जा सकता है।

अधिक जनसंख्या होती है यह देश जनसंख्या को संसाधन का स्रोत बना सकते हैं जैसे कि चीन और भारत में विश्व की जनसंख्या का बहुत अधिक भाग है। चीन ने अपनी मानव शक्ति की सहायता से इतनी उन्नति की है कि अब विश्व की एक शक्ति बन गया है। अधिक जनसंख्या के कारण यूरोप और अमेरिका जैसे देशों ने पूंजी लगाकर सस्ते श्रम का लाभ उठाने का यत्न किया। फलस्वरूप जनसंख्या चीन के लिए पूंजी निर्माण का स्रोत बन गया। भारत भी अपनी जनसंख्या को पूंजी निर्माण का स्रोत बना सकता है।

इससे पता चता है कि कम विकसित देश इस कारण पिछड़े हुए नहीं हैं कि उनके पास साधनों की कमी है। बल्कि इस कारण पिछड़े हुए हैं कि उन देशों ने अपने साधनों का उचित प्रयोग नहीं किया। भारत के सम्बन्ध में ठीक कहा जाता है कि “भारत एक अमीर देश है इसमें रहने वाले लोग गरीब हैं।” “India is a rich country in habited by poor people.” भारत में प्राकृतिक साधन कोयला, लोहा, अच्छी उपजाऊ भूमि, दरिया आदि बहुत मात्रा में पाए जाते हैं। परन्तु इनका ठीक उपयोग न होने के कारण भारत पिछड़ा देश रह गया है। प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग लोगों की कुशलता से बढ़ाया जा सकता है इसलिए मानव संसाधनों का अधिक योगदान हो सकता है।

मानव शक्ति के विकास के लिए तत्त्व (Factors to Improve quality of Human Power) – मानव शक्ति के विकास के लिए निम्नलिखित तत्त्व महत्त्वपूर्ण होते हैं-
1. शिक्षा (Education)-कम विकसित देशों के पिछड़ेपन का एक कारण वहां के लोगों का अशिक्षित होना है। शिक्षा से लोगों की विचारधारा विशाल होती है। वह उत्पादन के नए-नए स्रोत ढूंढ़ने लगते हैं। इस द्वारा राष्ट्रीय भावना उत्पन्न होती है। लोगों में मेहनत करने की भावना उत्पन्न होती है। देश का उत्पादन बढ़ जाता है। इस प्रकार लोगों की आय में भी वृद्धि होती है। देश के तीनों क्षेत्र प्राथमिक, गौण तथा टरशरी, सभी में विकास होना प्रारंभ हो जाता है। इस प्रकार शिक्षा द्वारा देश में आर्थिक विकास होने लगता है।

2. सेहत (Health)-ठीक कहा जाता है सेहतमंद शरीर में सेहतमंद दिमाग होता है। (A healthy body keeps a healthy mind) यदि देश के लोग स्वस्थ हैं तो उनमें काम करने की भावना उत्पन्न होती है। वर्ष 2021 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सबसे अधिक राशि स्वास्थ्य के लिए व्यय करने का प्रस्ताव रखा है। जब लोग सेहतमंद होते हैं तो काम करने की इच्छा अधिक होती है। इससे उनकी आय में वृद्धि होती है और जीवन स्तर उच्चा हो जाता है। अच्छा खाना पीना सेहत के लिए अच्छा होता है इससे उनकी आय में वृद्धि होती है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।

3. कौशल विकास (Skill Development) भगवान प्रत्येक मनुष्य को कोई ना कोई कौशल देकर भेजता है। यदि लोगों के कौशल को विकसित किया जाए तो उनकी उत्पादन शक्ति में वृद्धि होती है। कौशल विकास से नई-नई वस्तुएं बनाने की रुचि उत्पन्न होती है। इस प्रकार लोगों को अलग-अलग प्रकार के कौशल की शिक्षा देकर उनकी उत्पादन शक्ति में वृद्धि की जा सकती है। स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ काम धन्धे के कौशल की सिखलाई दी जाए तो पढ़ाई समाप्त होते ही लोग नौकरी की तलाश की बजाय अपने काम चालू कर सकते हैं। इस प्रकार के लोग संसाधन का स्रोत बन सकते हैं।

PSEB 12th Class Economics Solutions Chapter 26 आर्थिक विकास में मानव पूँजी का योगदान

4. तकनीक (Technology)-तकनीक का ज्ञान भी लोगों को संसाधन का स्रोत बना देता है। प्रकृति ने भूमि के नीचे लोहा, कोयला, हीरे, मोती, पैट्रोल आदि खनिज पदार्थ दिए हैं। तकनीक का ज्ञान न हो तो उनकी खोज नहीं की जा सकती। इसलिए लोगों को संसाधन का स्रोत बनाने के लिए तकनीक का विकास भी आवश्यक है। तकनीक के विकास के कारण यूरोप के लोग अधिक विकसित हो सके हैं। इस प्रकार नई-नई तकनीकों का आविष्कार करके आर्थिक विकास किया जा सकता है। इस प्रकार शिक्षा, सेहत, कौशल और तकनीक के विकास से लोगों को संसाधन का स्रोत बनाया जा सकता है।