PSEB 9th Class SST Notes Geography Chapter 4 Climate

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Climate PSEB 9th Class SST Notes

Climate:

  • Climate is the sum total of weather conditions over a large area for a long period of time.
  • There are many climatic conditions in India.

Factors influencing climate:

  • Many factors affect the climate of a place such as distance from the equator, distance from the sea, altitude of a place, impact of winds, relief effect, jet streams, etc.
  • The Indian Climate is almost the same due to its physical structure.

Rainfall:

  • Rainfall is a type of precipitation when moisture falls on the earth in the form of drops of water.
  • It is of three types: Convectional rainfall, Orographic rainfall, and Cyclonic rainfall.

PSEB 9th Class SST Notes Geography Chapter 4 Climate

Meaning of Monsoon:

  • The word ‘Monsoon’ is said to be derived from the Arabic word ‘Mausim’ meaning season.
  • In this way, monsoon is a season in which wind changes its direction with the season.

Monsoon System:

  • The monsoons are experienced in the tropical area roughly between 20°N and 20°S.
  • It is created due to the opposite position of air pressure.
  • This position of air pressure changes continuously.
  • That’s why in different seasons, the situation of winds changes on either side of the Tropic of Cancer.
  • Except this, jet streams also play an important role in the mechanism of the monsoon.

Seasons in India:
In the annual season of India, there are four major seasons-winter seasons, summer season, advancing monsoon, and retreating monsoon.

Winter Season:

  • There is a winter season in almost the whole of India from December till February.
  • In this season, north-eastern trade winds blow over the whole country.
  • In this season, temperature decreases when we move from south to north.
  • It is a dry season but some amount of rainfall occurs on the Tamil Nadu coast from these winds as here they blow from sea to land.

Summer Season:

  • This season remains from March to May.
  • In March, the highest temperature is about 38° Celsius, recorded in the Deccan plateau.
  • Gradually, low-pressure area starts to move towards North India which experiences high temperatures.
  • In the north, these low-pressure winds are called loo, Kaal Baisakhi in West Bengal, and Mango shower in the coastal areas of Karnataka.

Advancing Monsoon:

  • This season remains from June to September.
  • South-West monsoon enters India through two branches-Arabian sea branch and the Bay of Bengal branch.
  • These winds give a lot of rainfall to the country.
  • North-East India experiences lots of rain but the North-West part of India remains dry.
  • The months of July and August experience almost 75% to 90% rainfall in the country.
  • Mawsynram, a place in the Garo and Khasi hills of North-East India, experiences the highest rainfall in the world.
  • The second place is Cherapunji.
  • Western Ghats of South India experience heavy rainfall due to monsoon winds coming from the Arabian Sea branch.

PSEB 9th Class SST Notes Geography Chapter 4 Climate

Retreating Monsoon:

  • During the months of October and November, the monsoon over the northern plains becomes weaker.
  • This is replaced by a high-pressure system.
  • The retreat of the monsoon is marked by clear skies and a rise in temperature.
  • Due to high temperature and humidity, the weather become rather oppressive.
  • This is commonly known as ‘October heat’.
  • On the coast of the southern plateau, cyclones create havoc and are often very destructive.

Distribution of Rain:

  • Parts of the western coast and north-eastern India receive over about 300 cm of rainfall annually.
  • But western Rajasthan and adjoining parts of Gujarat, Haryana, and Punjab receive less than 50 cm of annual rainfall.
  • Higher parts of the country (Himalayan region) receive snowfall.
  • The annual rainfall is highly variable from year to year.
  • Variability of monsoon brings flood in many parts and drought in the other parts.

Instruments for climate:

  • Many instruments are used to measure different climatic features such as Maximum and Minimum Thermometer, Android Barometer, Dry and Wet Bulb Thermometer, Rain Gauge, Anemometer, Wind wane, etc.

PSEB 9th Class SST Notes Geography Chapter 4 Climate

Natural Disasters:

  • Nature is all-powerful.
  • When any natural calamity occurs, it leads to the great loss of life and property.
  • The tsunami was one of the natural disasters which came in many countries of South Asia in December 2004.
  • It led to the death of thousands of people and the destruction of property as well.

जलवायु PSEB 9th Class SST Notes

→ जलवायु – किसी भी स्थान के लंबे समय के मौसम की औसत । निकाल कर जो परिणाम निकाला जाता है उस परिणाम को उस स्थान की जलवायु कहते हैं। भारत में जलवायु की अलग-अलग परिस्थितियां पाई जाती हैं।

→ जलवायु को प्रभावित करने वाले तत्त्व – किसी भी स्थान की जलवायु को कई कारक प्रभावित करते हैं; जैसे कि भूमध्य रेखा से दूरी, समुद्र से दूरी, समुद्री तल से ऊंचाई, धरातल का स्वरूप, जेट स्ट्रीम इत्यादि। हमारे देश की भौगोलिक संरचना ने देश की जलवायु को एक जैसा ही बना दिया है।

→ वर्षा – नमी भरी हवा ऊपर उठती है तथा ऊँचाई पर जाकर ठंडी हो जाती है। ठंडी होने के कारण यह नमी को संभालकर नहीं रख सकती तथा पानी के कण बादलों का रूप ले लेते हैं।

→ जब बादलों में से यह पानी के कण पृथ्वी पर गिरते हैं तो इसे वर्षा करते हैं। वर्षा तीन प्रकार की होती है-संवहनी वर्षा, पर्वतीय वर्षा तथा चक्रवाती वर्षा।

→ मानसून का अर्थ – ‘मानसून’ शब्द की व्युत्पत्ति अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से हुई है। इसका शाब्दिक अर्थ है-ऋतु। इस प्रकार मानसून से अभिप्राय एक ऐसी ऋतु से है जिसमें पवनों की दिशा पूरी तरह उलट जाती है।

→ मानसून प्रणाली – मानसून की रचना उत्तरी गोलार्द्ध में प्रशान्त महासागर तथा हिन्द महासागर के दक्षिणी भाग पर वायुदाब की विपरीत स्थिति के कारण होती है। वायुदाब की यह स्थिति परिवर्तित होती रहती है।

→ इस कारण विभिन्न ऋतुओं में विषुवत् वृत्त के आर-पार पवनों की स्थिति बदल जाती है। इस प्रक्रिया को दक्षिणी दोलन कहते हैं। इसके अतिरिक्त जेट वायुधाराएं भी मानसून के रचनातन्त्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

→ भारत की ऋतुएं – भारत के वार्षिक ऋतु चक्र में चार प्रमुख ऋतुएं होती हैंशीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, आगे बढ़ते मानसून की ऋतु तथा पीछे हटते मानसून की ऋतु।

→ शीत ऋतु – लगभग सारे देश में दिसम्बर से फरवरी तक शीत ऋतु होती है। इस ऋतु में देश के ऊपर उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें चलती हैं। इस ऋतु में दक्षिण से उत्तर की ओर जाने पर तापमान घटता जाता है। कुछ ऊँचे स्थानों पर पाला भी पड़ता है।

→ शीत ऋतु से चलने वाली उत्तरी पूर्वी पवनों द्वारा केवल तमिलनाडु राज्य को लाभ पहुंचता है। ये पवनें खाड़ी बंगाल से गुजरने के बाद वहां पर्याप्त वर्षा करती हैं।

→ ग्रीष्म ऋतु – यह ऋतु मार्च से मई तक रहती है। मार्च मास में सबसे अधिक तापमान (लगभग 38° सें०) दक्कन के पठार पर होता है। धीरे-धीरे ऊष्मा की यह पेटी उत्तर की ओर खिसकने लगती है और उत्तरी भाग में तापमान बढ़ता जाता है।

→ मई के अन्त तक एक लम्बा संकरा निम्न वायु दाब क्षेत्र विकसित हो जाता है, जिसे ‘मानसून का निम्न वायुदाब गर्त’ कहते हैं। देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में चलने वाली गर्म-शुष्क पवनें (लू), केरल तथा कर्नाटक के तटीय भागों में होने वाली ‘आम्रवृष्टि’ और बंगाल तथा असम की ‘काल बैसाखी’ ग्रीष्म ऋतु की अन्य मुख्य विशेषताएं हैं।

→ आगे बढ़ते मानसून की ऋतु – यह ऋतु जून से सितम्बर तक रहती है। देश में दक्षिणपश्चिमी मानसून चलती है जो दो शाखाओं में भारत में प्रवेश करती है-अरब सागर की शाखा तथा बंगाल की खाड़ी की शाखा। ये पवनें देश में पर्याप्त वर्षा करती हैं।

→ उत्तर-पूर्वी भारत में भारी वर्षा होती है, जबकि देश के उत्तरी-पश्चिमी कुछ भाग शुष्क रह जाते हैं। जुलाई तथा अगस्त के महीनों में देश की 75 से 90 प्रतिशत तक वार्षिक वर्षा हो जाती है।

→ गारो तथा खासी की पहाड़ियों की दक्षिणी श्रेणी के शीर्ष पर स्थित माउसिनराम में संसार भर में सबसे अधिक वर्षा होती है।

→ दूसरा स्थान यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित चेरापूंजी को प्राप्त है। दक्षिणी भारत में पश्चिमी घाट की पवनाभिमुख ढालों पर अरब सागर की मानसून शाखा द्वारा भारी वर्षा होती है।

→ पीछे हटते मानसून की ऋतु – अक्तूबर तथा नवम्बर के महीनों में मानसून पीछे हटने लगता है। क्षीण हो जाने के कारण इसका प्रभाव कम हो जाता है। पृष्ठीय पवनों की दिशा भी उलटने लगती है।

→ आकाश साफ़ हो जाता है और तापमान फिर से बढ़ने लगता है। उच्च तापमान तथा भूमि की आर्द्रता के कारण मौसम कष्टदायक हो जाता है।

→ इसे ‘क्वार की उमस’ कहते हैं। इस ऋतु में दक्षिणी प्रायद्वीप के तटों पर उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात भारी वर्षा करते हैं। इस प्रकार ये बहुत ही विनाशकारी सिद्ध होते हैं।

→ वर्षा का वितरण – भारत में सबसे अधिक वर्षा पश्चिमी तटों तथा उत्तरी पूर्वी भागों में होती (300 सें० मी० से भी अधिक) है। परन्तु पश्चिमी राजस्थान तथा इसके निकटवर्ती पंजाब, हरियाणा तथा गुजरात के क्षेत्रों में 50 सें० मी० से भी कम वार्षिक वर्षा होती है।

→ देश के उच्च भागों (हिमालय क्षेत्र) में हिमपात होता है। वर्षण की यह मात्रा प्रति वर्ष घटती बढ़ती रहती है। मानसून की स्वेच्छाचारिता के कारण कहीं तो भयंकर बाढ़ें आ जाती हैं और कहीं सूखा पड़ जाता है।

→ जलवायु के यन्त्र – जलवायु का अनुमान लगाने के लिए कई प्रकार में यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है। जैसे कि थर्मामीटर एनीराइड बैरोमीटर, सूखी तथा गीली गोली का थर्मामीटर, वर्षा मापक यन्त्र, वायुवेग मापक, वायु दिशा सूचक इत्यादि।

→ प्राकृतिक आपदाएं – प्रकृति के ऊपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। इस प्रकार जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं तो काफी जान-माल का नुकसान होता है।

→ सुनामी भी इन प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी जो दिसंबर 2004 में दक्षिण एशिया के देशों में आई तथा हज़ारों लोगों की मृत्यु हो गई थी।

ਜਲਵਾਯੂ PSEB 9th Class SST Notes

→ ਕਿਸੇ ਵੀ ਥਾਂ ਦੇ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਦੀ ਔਸਤ ਕੱਢ ਕੇ ਜੋ ਨਤੀਜਾ ਕੱਢਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਉਸ ਨਤੀਜੇ ਨੂੰ ਉਸ ਥਾਂ ਦੀ ਜਲਵਾਯੂ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

→ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਜਲਵਾਯੂ ਦੀਆਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਾਲਤਾਂ ਪਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।

→ ਕਿਸੇ ਵੀ ਥਾਂ ਦੀ ਜਲਵਾਯੂ ਨੂੰ ਕਈ ਕਾਰਕ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਭੂ-ਮੱਧ ਰੇਖਾ ਤੋਂ ਦੂਰੀ, ਸਮੁੰਦਰ ਤੋਂ ਦੁਰੀ, ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਲ ਤੋਂ ਉੱਚਾਈ, ਧਰਾਤਲ ਦਾ ਅਸਰ, ਪੌਣਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ, ਜੈਟ ਸਟਰੀਮ ਆਦਿ । ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਭੌਤਿਕ ਬਣਤਰ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਪੌਣ-ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਮੋਟੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹਾ ਬਣਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ।

→ ਨਮੀ ਭਰੀ ਹਵਾ ਉੱਪਰ ਉੱਠਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉੱਚਾਈ ਉੱਤੇ ਜਾ ਕੇ ਠੰਢੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਠੰਡੀ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਹ | ਨਮੀ ਨੂੰ ਸਾਂਭ ਕੇ ਨਹੀਂ ਰੱਖ ਸਕਦੀ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਕਣ ਬੱਦਲਾਂ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਲੈ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ।

→ ਜਦੋਂ ਬੱਦਲਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇਹ ਪਾਣੀ ਦੇ ਕਣ ਧਰਤੀ ਉੱਤੇ ਡਿਗਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਇਸ ਨੂੰ ਵਰਖਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਵਰਖਾ ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ-ਸੰਵਹਿਣ ਵਰਖਾ, ਪਰਬਤੀ ਵਰਖਾ ਅਤੇ ਚੱਕਰਵਾਤੀ ਵਰਖਾ
ਮਾਨਸੂਨ ਸ਼ਬਦ ਦੀ ਉਤਪੱਤੀ ਅਰਬੀ ਭਾਸ਼ਾ ਦੇ ਮੌਸਮ’ ਸ਼ਬਦ ਤੋਂ ਹੋਈ ਹੈ ।

→ ਇਸ ਦਾ ਸ਼ਬਦੀ ਅਰਥ ਹੈ ਰੁੱਤ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਾਨਸੂਨ ਤੋਂ ਭਾਵ ਇਕ ਅਜਿਹੀ ਰੁੱਤ ਤੋਂ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਪੌਣਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਲਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

→ ਮਾਨਸੂਨ ਦੀ ਰਚਨਾ ਉੱਤਰੀ ਅੱਧ ਗੋਲੇ ਵਿਚ ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਮਹਾਂਸਾਗਰ ਅਤੇ ਹਿੰਦ ਮਹਾਂਸਾਗਰ ਦੇ ਦੱਖਣੀ ਭਾਗ ਦੇ ਵਾਯੂ ਦਾਬ ਦੀ ਵਿਪਰੀਤ ਸਥਿਤੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਵਾਯੂ ਦਾਬ ਦੀ ਇਹ ਸਥਿਤੀ ਬਦਲਦੀ ਵੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਰੁੱਤਾਂ ਵਿਚ ਕਰਕ ਰੇਖਾ ਚੱਕਰ ਦੇ ਆਰ-ਪਾਰ ਪੌਣਾਂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਬਦਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

→ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਦੱਖਣੀ ਦੋਲਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸੈੱਟ ਵਾਯੂ ਧਾਰਾਵਾਂ ਵੀ ਮਾਨਸੂਨ ਦੇ ਰਚਨਾ ਤੰਤਰ ਵਿਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ।

→ ਭਾਰਤ ਦੇ ਵਾਰਸ਼ਿਕ ਰੁੱਤ ਚੱਕਰ ਵਿਚ ਚਾਰ ਮੁੱਖ ਰੁੱਤਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ-ਸਰਦ ਰੁੱਤ, ਗਰਮ ਰੁੱਤ, ਅੱਗੇ ਵਧਦੇ | ਮਾਨਸੂਨ ਦੀ ਰੁੱਤ ਅਤੇ ਪਿੱਛੇ ਹਟਦੇ ਮਾਨਸੂਨ ਦੀ ਰੁੱਤ ।

→ ਲਗਪਗ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਦਸੰਬਰ ਤੋਂ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਸਰਦ ਰੁੱਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਰੁੱਤ ਵਿਚ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਉੱਪਰ ਉੱਤਰ-ਪੂਰਬੀ ਵਪਾਰਕ ਪੌਣਾਂ ਚਲਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਰੁੱਤ ਵਿਚ ਦੱਖਣ ਤੋਂ ਉੱਤਰ ਵਲ ਜਾਣ ‘ਤੇ ਤਾਪਮਾਨ ਘੱਟਦਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕੁੱਝ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਲਾ ਵੀ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।

→ ਸਰਦ ਰੁੱਤ ਵਿਚ ਚਲਣ ਵਾਲੀਆਂ ਉੱਤਰਪੂਰਬੀ ਪੌਣਾਂ ਦੁਆਰਾ ਸਿਰਫ਼ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਰਾਜ ਨੂੰ ਲਾਭ ਪੁੱਜਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪੌਣਾਂ ਖਾੜੀ ਬੰਗਾਲ ਤੋਂ ਲੰਘਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉੱਥੇ ਕਾਫ਼ੀ ਵਰਖਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ।

→ ਗਰਮ ਰੁੱਤ ਮਾਰਚ ਤੋਂ ਮਈ ਤਕ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਮਾਰਚ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਤਾਪਮਾਨ (ਲਗਪਗ 38° ਸੈਂਟੀਗੇਡ ਦੱਖਣ ਦੇ ਪਠਾਰ ‘ਤੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਗਰਮੀ ਦੀ ਇਹ ਪੇਟੀ ਉੱਤਰ ਨੂੰ ਖਿਸਕਣ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉੱਤਰੀ ਭਾਗ ਵਿਚ ਤਾਪਮਾਨ ਵੱਧਦਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਮਾਨਸੂਨ ਦਾ ਨਿਮਨ ਵਾਯੁਦਾਬ ਖੇਤਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

→ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਉੱਤਰ-ਪੱਛਮੀ ਭਾਗ ਵਿਚ ਚੱਲਣ ਵਾਲੀਆਂ ਗਰਮ ਖੁਸ਼ਕ ਪੌਣਾਂ (ਲੁ ਕੇਰਲ ਅਤੇ ਕਰਨਾਟਕ ਦੇ ਤਟੀ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਮੈਂਗੋ ਸ਼ਾਵਰ’ ਅਤੇ ਬੰਗਾਲ ਤੇ ਅਸਾਮ ਦੀ ‘ਕਾਲ-ਵੈਸਾਖੀ ਗਰਮ ਰੁੱਤ ਦੀਆਂ ਹੋਰ ਮੁੱਖ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਹਨ ।

→ ਅੱਗੇ ਵਧਦੇ ਮਾਨਸੂਨ ਦੀ ਰੁੱਤ ਜੂਨ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਦੱਖਣ-ਪੱਛਮੀ ਮਾਨਸੂਨ ਚਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਦੋ ਸ਼ਾਖਾਵਾਂ ਵਿਚ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਦਾਖ਼ਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ-ਅਰਬ ਸਾਗਰ ਦੀ ਸ਼ਾਖਾ ਅਤੇ ਬੰਗਾਲ ਦੀ ਖਾੜੀ ਦੀ ਸ਼ਾਖਾ । ਇਹ ਪੌਣਾਂ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਕਾਫ਼ੀ ਵਰਖਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਉੱਤਰ-ਪੂਰਬੀ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਵਰਖਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਦਕਿ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਉੱਤਰ-ਪੱਛਮੀ ਕੁਝ ਭਾਗ ਖ਼ੁਸ਼ਕ ਰਹਿ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

→ ਜੁਲਾਈ ਅਤੇ ਅਗਸਤ ਦੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿਚ ਦੇਸ਼ ਦੀ 75 ਤੋਂ 90 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤਕ ਵਰਖਾ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਗਾਰੋ ਅਤੇ ਖਾਸੀ ਦੀਆਂ ਪਹਾੜੀਆਂ ਦੀ ਦੱਖਣੀ ਸ਼ੇਣੀ ਦੇ ਸਿਖਰ ‘ਤੇ ਸਥਿਤ ਮਾਉਸਿਨਰਾਮ ਵਿਚ ਸੰਸਾਰ ਭਰ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਖਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

→ ਦੂਜਾ ਸਥਾਨ ਕੁੱਝ ਹੀ ਦੂਰੀ ‘ਤੇ ਸਥਿਤ ਚਿਰਾਪੂੰਜੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੈ । ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਪੱਛਮੀ ਘਾਟ ਦੀਆਂ ਪਵਨਾਭਿਮੁਖ ਢਾਲਾਂ ‘ਤੇ ਅਰਬ ਸਾਗਰ ਦੀ ਮਾਨਸੂਨ ਸ਼ਾਖਾ ਦੁਆਰਾ ਭਾਰੀ ਵਰਖਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

→ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿਚ ਮਾਨਸੂਨ ਪਿੱਛੇ ਹਟਣ ਲਗਦਾ ਹੈ । ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਣ ਕਾਰਨ ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪੌਣਾਂ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਉਲਟਣ ਲਗਦੀ ਹੈ । ਅਸਮਾਨ ਸਾਫ਼ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਤਾਪਮਾਨ ਫਿਰ ਤੋਂ ਵੱਧਣ ਲਗਦਾ ਹੈ । ਉੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਭੂਮੀ ਦੀ ਸਿਲ਼ ਕਾਰਨ ਮੌਸਮ ਕਸ਼ਟਦਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

→ ਇਸ ਨੂੰ “ਕਵਾਰ ਦੀ ਉਮਸ’ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਰੁੱਤ ਵਿਚ ਦੱਖਣੀ ਪਾਇਦੀਪ ਦੇ ਤੱਟਾਂ ਅਤੇ ਉਸ਼ਣ ਕਟੀਬੰਧੀ ਚੱਕਰਵਾਤ ਬਹੁਤ ਵਰਖਾ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹ ਬਹੁਤ ਵਿਨਾਸ਼ਕਾਰੀ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

→ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਖਾ ਪੱਛਮੀ ਤੱਟਾਂ ਅਤੇ ਉੱਤਰ-ਪੂਰਬੀ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਹੁੰਦੀ (300 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਤੋਂ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ) ਹੈ ।

→ ਪਰ ਪੱਛਮੀ ਰਾਜਸਥਾਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਨੇੜੇ ਪੰਜਾਬ, ਹਰਿਆਣਾ ਅਤੇ ਗੁਜਰਾਤ ਦੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ 50 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਤੋਂ ਵੀ ਘੱਟ ਵਰਖਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਦੇਸ਼ ਦੇ ਉੱਚੇ ਭਾਗਾਂ (ਹਿਮਾਲਾ ਖੇਤਰ) ਵਿਚ ਬਰਫ਼ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ।

→ ਵਰਖਾ ਦੀ ਇਹ ਮਾਤਰਾ ਹਰ ਸਾਲ ਘੱਟਦੀ-ਵੱਧਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਮਾਨਸੂਨ ਦੀ ਅਸਥਿਰਤਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਕਿਤੇ ਤਾਂ ਭਿਆਨਕ ਹੜ੍ਹ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਿਤੇ ਸੋਕਾ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

→ ਜਲਵਾਯੂ ਦਾ ਅਨੁਮਾਨ ਲਾਉਣ ਲਈ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਯੰਤਰਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ : ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਥਰਮਾਮੀਟਰ, ਐਨੀਰਾਈਡ, ਬੈਰੋਮੀਟਰ, ਸੁੱਕੀ ਅਤੇ ਗਿੱਲੀ ਗੋਲੀ ਦਾ ਥਰਮਾਮੀਟਰ, ਵਰਖਾ ਮਾਪਕ ਯੰਤਰ, ਵਾਯੂ ਵੇਗ ਮਾਪਕ, ਵਾਯੁ ਦਿਸ਼ਾ ਸੂਚਕ ਆਦਿ ।

→ ਕੁਦਰਤ ਦੇ ਭਾਣੇ ਉੱਤੇ ਕਿਸੇ ਦਾ ਜ਼ੋਰ ਨਹੀਂ ਚੱਲਦਾ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜਦੋਂ ਕੁਦਰਤੀ ਆਫ਼ਤਾਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਜਾਨ-ਮਾਲ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

→ ਸੁਨਾਮੀ ਵੀ ਇਹਨਾਂ ਕੁਦਰਤੀ ਆਫ਼ਤਾਂ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਦਸੰਬਰ, 2004 ਵਿਚ ਦੱਖਣੀ ਏਸ਼ੀਆ ਦੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿਚ ਆਈ ਸੀ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਲੋਕ ਮਰ ਗਏ ਸਨ ।

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Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ Textbook Exercise Questions, and Answers.

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Science Guide for Class 6 PSEB ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ Intext Questions and Answers

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 42)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਛੱਟਣਾ ਅਤੇ ਉਡਾਉਣਾ ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਹਵਾ ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਛੱਟਣਾ ਅਤੇ ਉਡਾਉਣਾ ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਹਵਾ ਹਲਕੇ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਉਡਾ ਕੇ ਦੂਰ ਲੈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਭਾਰੇ ਕਣ ਨੇੜੇ ਹੀ ਰਹਿ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਭਾਰੇ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਕਣਾਂ ਵਾਲੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਨਿਖੇੜ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕੀ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਚਨੇ ਦੀ ਦਾਲ ਅਤੇ ਮੂੰਗ ਦੀ ਦਾਲ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਹੀਂ, ਅਸੀਂ ਇਸ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਚਨੇ ਦੀ ਦਾਲ ਅਤੇ ਮੂੰਗ ਦੀ ਦਾਲ ਨੂੰ ਵੱਖ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 43)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕੀ ਤੁਸੀਂ ਨਮਕ ਅਤੇ ਆਟੇ ਨੂੰ ਛਾਣਨੀ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ? ਕਿਉਂ ਜਾਂ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਨਮਕ ਅਤੇ ਆਟੇ ਨੂੰ ਛਾਣਨੀ ਨਾਲ ਵੱਖ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਕਿਉਂਕਿ ਨਮਕ ਅਤੇ ਆਟੇ ਦੇ ਕਣਾਂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਖਾਸ ਅੰਤਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 44)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਕ ਬੀਕਰ ਵਿੱਚ ਚਾਕ ਪਾਊਡਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਘੋਲ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ । ਬੀਕਰ ਨੂੰ ਕੁਝ ਦੇਰ ਬਿਨਾਂ ਹਿਲਾਏ ਪਏ ਰਹਿਣ ਦਿਉ । ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਵੇਖੋਗੇ ? ਇਹ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਕਿਹੜੀ ਵਿਧੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਤਲਛੱਟਣ ਅਤੇ ਨਿਤਾਰਨ ਵਿਧੀ ਹੈ ।

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ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 45)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਤੁਹਾਡੇ ਪਿਤਾ ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚੋਂ ਤਾਜ਼ਾ ਸੰਤਰੇ ਦਾ ਰਸ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਕੀ ਤੁਸੀਂ ਦੁਕਾਨਦਾਰ ਨੂੰ ਜੂਸ ਵਿੱਚੋਂ ਪਲਪ (ਫੋਕ) ਅਤੇ ਬੀਜ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ਛਾਣਨੀ ਵਰਤਦਿਆਂ ਵੇਖਿਆ ਹੈ ? ਕਿਹੜੀ ਛਾਣਨੀ ਇਸ ਕੰਮ ਲਈ ਵਧੀਆ ਹੋਵੇਗੀ ? ਚਾਹ ਚਾਣਨ ਵਾਲੀ, ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ, ਮਲਮਲ ਦਾ ਕੱਪੜਾ ਜਾਂ ਵੱਡੇ ਛੇਕਾਂ ਵਾਲੀ ਛਾਣਨੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਮਲਮਲ ਦਾ ਕੱਪੜਾ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 46)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਖੋਇਆ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹੜੀ ਵਿਧੀ ਅਪਣਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਖੋਇਆ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਾਸ਼ਪਨ ਵਿਧੀ ਅਪਣਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 48)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਭਾਫ਼ ਬਣਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਕੀ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਭਾਫ਼ ਬਣਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਭਾਫ਼ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਬਣਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਕੀ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਭਾਫ਼ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਬਣਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਸੰਘਣਨ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

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1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ ਨਾਰ

(i) ਫਿਲਟਰਨ ਵਿਧੀ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ………… ਨੂੰ ………. ਤੋਂ ਵੱਖ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਦਾਰਥਾਂ, ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥਾਂ,

(ii) ਚੌਲਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਛੋਟੇ ਪੱਥਰ ਦੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਨੂੰ ……….. ਰਾਹੀਂ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਹੈਂਡਪਿਕਿੰਗ,

(iii) ਛਾਣ-ਬੂਰਾ ਆਟੇ ਤੋਂ …………. ਦੁਆਰਾ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਛਾਣਨ,

(iv) ਝੋਨੇ ਦੇ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਡੰਡੀਆਂ ਤੋਂ ਵੱਖ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ………….. ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ,

(v) ਤਲਛੱਟ ਨੂੰ ਹਿਲਾਏ ਬਿਨਾਂ, ਤਰਲ ਦੀ ਉਪਰਲੀ ਤਹਿ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ …….. ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਨਿਤਾਰਨ ।

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗ਼ਲਤ ਲਿਖੋ-

(i) ਛਾਣਨ ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਵੱਖੋ-ਵੱਖਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(ii) ਤਰਲ ਤੋਂ ਭਾਫ਼ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਸੰਘਣਨ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(iii) ਨਮਕ ਅਤੇ ਆਟੇ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁਗਣ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(iv) ਡੰਡੀਆਂ ਤੋਂ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗਹਾਈ ਕਹਿੰਦੇ ਹਾਂ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ ।

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3. ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ :

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ “ਅ”
(ਉ) ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਲਣ ਵੱਖ ਕਰਨਾ (i) ਸੰਘਣਨ
(ਅ) ਭਾਰੇ ਕਣਾਂ ਦਾ ਹੇਠਾਂ ਬੈਠਣਾ (ii) ਉਡਾਉਣਾ
(ਈ) ਵੱਖ-ਵੱਖ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਹਵਾ ਦੁਆਰਾ ਨਿਖੇੜਨਾ (iii) ਵਾਸ਼ਪਨ
(ਸ) ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਦਾ ਬਣਨਾ (iv) ਤਲਛੱਟਣ

ਉੱਤਰ-

ਕਾਲਮ ‘ੳ’ ਕਾਲਮ ‘ਅ’
(ੳ) ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਲੂਣ ਵੱਖ ਕਰਨਾ (iii) ਵਾਸ਼ਪਨ
(ਅ) ਭਾਰੇ ਕਣਾਂ ਦਾ ਹੇਠਾਂ ਬੈਠਣਾ (iv) ਤਲਛੱਟਣ
(ਇ) ਵੱਖ-ਵੱਖ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਹਵਾ ਦੁਆਰਾ ਨਿਖੇੜਨਾ (ii) ਉਡਾਉਣਾ
(ਸ) ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਦਾ ਬਣਨਾ (i) ਸੰਘਣਨ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ `ਤੇ ਟਿੱਕ ਕਰੋ –

(i) ਹਵਾ ਦੁਆਰਾ ਮਿਸ਼ਰਨ ਦੇ ਭਾਰੀ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਕਿਹੜੀ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(ਉ) ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁਗਣਾ
(ਅ) ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ
(ਇ) ਛਾਣਨਾ ।
(ਸ) ਉਡਾਉਣਾ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਉਡਾਉਣਾ ।

(ii) ਬਰਫ ਰੱਖੇ ਗਲਾਸ ਦੇ ਬਾਹਰ ਪਾਣੀ ਦੀਆਂ ਬੂੰਦਾਂ ਦੇ ਬਣਨ ਦਾ ਕਾਰਨ ਹੈ
(ਉ) ਗਲਾਸ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਦਾ ਵਾਸ਼ਪਣ
(ਅ) ਵਾਯੂਮੰਡਲੀ ਜਲ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਦਾ ਸੰਘਣਨ
(ਏ) ਗਲਾਸ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਦਾ ਬਾਹਰ ਆਉਣਾ
(ਸ) ਵਾਯੂਮੰਡਲੀ ਜਲ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਦਾ ਵਾਸ਼ਪਣ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਵਾਯੂਮੰਡਲੀ ਜਲ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਦਾ ਸੰਘਣਨ ।

(iii) ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਮਾਤਾ ਜੀ ਨੂੰ ਚਾਵਲ ਪਕਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚੋਂ ਮਿੱਟੀ, ਪੱਥਰ ਆਦਿ ਬਾਹਰ ਕੱਢਦੇ ਵੇਖਿਆ ਹੋਵੇਗਾ । ਇਹ ਕਿਹੜੀ ਵਿਧੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
(ਉ) ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁਰਾਣਾ
(ਅ) ਨਿਤਾਰਨਾ
(ਈ) ਵਾਸ਼ਪਨ
(ਸ) ਤਲਛੱਟਣ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁਗਣਾ ।

(iv) ਸਾਨੂੰ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚੋਂ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ –
(ਉ) ਦੋ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪਰ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਲਈ
(ਅ) ਅਣਉਪਯੋਗੀ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ
(ਈ) ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਹੀ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਹੀ ।

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪਸ਼ਨ (i)
ਤਲਛੱਟਣ ਵਿਧੀ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਵਿਧੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਠੋਸ ਭਾਰੇ ਕਣ ਤਰਲ ਵਿੱਚ ਹੇਠਾਂ ਬੈਠ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਨੂੰ ਤਲਛੱਟਣ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਜਿਹੜੇ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਠੋਸ ਭਾਰੇ ਕਣ ਤਰਲ ਵਿੱਚ ਹੇਠਾਂ ਬੈਠ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਉਹਨਾਂ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਠੋਸ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਤਲਛੱਟ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਵਾਸ਼ਪਨ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰਲ ਨੂੰ ਉਸਦੇ ਵਾਸ਼ਪ ਵਿੱਚ ਬਦਲਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ ਜਾਂ ਵਾਸ਼ਪਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਕੰਬਾਈਨ ਮਸ਼ੀਨ ਕਿਸ ਕੰਮ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੰਬਾਈਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਟਾਈ ਅਤੇ ਗਹਾਈ ਦੋਹਾਂ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਵਾਸ਼ਪਨ ਅਤੇ ਸੰਘਣਨ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰਲ ਨੂੰ ਉਸਦੇ ਵਾਸ਼ਪ ਵਿੱਚ ਬਦਲਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ ਜਾਂ ਵਾਸ਼ਪਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਤੋਂ ਉਸਦੀ ਤਲ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਹੋਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਸੰਘਣਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ! ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ ਅਤੇ ਸੰਘਣਾਪਣ ਇਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਉਲਟ ਹਨ । ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵਾਸ਼ਪਨ ਦੀ ਦਰ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸੰਘਣਨ ਦੀ ਦਰ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਅਤੇ ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਘੋਲ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਹੋਰ ਪਦਾਰਥ ਨਮਕ, ਚੀਨੀ ਆਦਿ ਹੋਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਾ ਘੁਲ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਘੋਲ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਪਦਾਰਥ (ਨਮਕ, ਚੀਨੀ) ਘੁਲ ਜਾਣ, ਨੂੰ ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਨੂੰ ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਬਦਲਣ ਲਈ ਹੋਰ ਪਦਾਰਥ ਘੋਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਨੂੰ ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਬਦਲਣ ਲਈ ਹੋਰ ਪਾਣੀ ਜਾਂ ਤਰਲ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਹਾਈ ਜਾਂ ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ ਤਿੰਨ ਤਰੀਕਿਆਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

  • ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੁਆਰਾ-ਇਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਡੰਡੀਆਂ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨ ‘ਤੇ ਕਿਸੇ ਸਖਤ ਵਸਤੂ ਨਾਲ ਕੁੱਟ ਕੇ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੁਆਰਾ-ਕੁਝ ਜਾਨਵਰ ਜਿਵੇਂ ਬਲਦਾਂ ਨੂੰ ਡੰਡੀਆਂ ‘ਤੇ ਚਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਦਾਣੇ ਵੱਖ ਹੋ ਜਾਣ ।
  • ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੁਆਰਾ-ਥਰੈਸ਼ਰਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਵੀ ਗਹਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਨਿਖੇੜਨ ਦੇ ਢੰਗਾਂ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ
(i) ਥਰੈਡਿੰਗ (ਗਹਾਈ)
(ii) ਉਡਾਉਣਾ
(iii) ਛਾਣਨ ।
ਉੱਤਰ
(i) ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ (ਗਹਾਈ-ਡੰਡੀਆਂ ਤੋਂ ਅਨਾਜ ਦੇ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਗਹਾਈ ਜਾਂ ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਗਹਾਈ ਜਾਂ ਥਰੈਸ਼ਿੰਗ ਤਿੰਨ ਤਰੀਕਿਆਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ-

  • ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੁਆਰਾ-ਇਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਡੰਡੀਆਂ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨ ‘ਤੇ ਕਿਸੇ ਸਖਤ ਵਸਤੂ ਨਾਲ ਕੁੱਟ ਕੇ ਵਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੁਆਰਾ-ਕੁਝ ਜਾਨਵਰ ਜਿਵੇਂ ਬਲਦਾਂ ਨੂੰ ਡੰਡੀਆਂ ‘ਤੇ ਚਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਦਾਣੇ ਵੱਖ ਹੋ ਜਾਣ ।
  • ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੁਆਰਾ–ਥਰੈਸ਼ਰਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਵੀ ਗਹਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

(ii) ਉਡਾਉਣਾ-ਇਹ ਫੱਕ ਤੋਂ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਭੰਡਾਰਿਤ ਕੀਤੇ ਦਾਣਿਆਂ ਤੋਂ ਤੁੜੀ ਅਤੇ ਫੱਕ ਵੱਖ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਨਿਖੇੜਨ ਵਾਲੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਪਲੇਟ ਜਾਂ ਗੱਤੇ ਉੱਤੇ ਪਾਓ । ਮਿਸ਼ਰਣ ਰੱਖੇ ਪਲੇਟ ਜਾਂ ਗੱਤੇ ਨੂੰ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਵਿੱਚ ਲੈ ਜਾਓ । ਹੁਣ ਹਵਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਪਲੇਟ ਜਾਂ ਗੱਤੇ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਮੋਢੇ ਦੀ ਉਚਾਈ ਤੱਕ ਲੈ ਜਾਓ । ਇਸਨੂੰ ਹਲਕਾ ਜਿਹਾ ਝੁਕਾਓ । ਹਲਕੇ ਕਣ ਜਿਵੇਂ ਤੁੜੀ ਜਾਂ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤਿਆ ਦਾ ਪਾਊਡਰ ਹਵਾ ਨਾਲ ਉਡ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਦੋਂ ਕਿ ਭਾਰੇ ਕਣ ਜਿਵੇਂ ਕਣਕ ਦੇ ਦਾਣੇ ਤੁਹਾਡੇ ਨੇੜੇ ਹੀ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਉਡਾਉਣ ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਪੌਣ ਜਾਂ ਹਵਾ ਦੇ ਬੁੱਲਿਆਂ ਦੁਆਰਾ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਭਾਰੇ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਹਵਾ ਨਾ ਚੱਲ ਰਹੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪੱਖੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

(iii) ਛਾਣਨ-ਛਾਣਨ ਉਹ ਵਿਧੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਛੋਟੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਤੋਂ ਛਾਣਨੀ ਦੁਆਰਾ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਧੀ ਲਈ ਅਸੀਂ ਛਾਣਨੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਾਂ । ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਦੇ ਕਣਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਵੱਖ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਜਿਹੜੇ ਅੰਸ਼ ਦੇ ਕਣ ਛਾਣਨੀ ਦੇ ਛੇਕਾਂ ਨਾਲੋਂ ਛੋਟੇ ਹੋਣਗੇ, ਉਹ ਥੱਲੇ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਦੂਸਰਾ ਅੰਸ਼ ਛਾਣਨੀ ਵਿੱਚ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗਾ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਨਿਖੇੜਨ ਕੀ ਹੈ ? ਸਾਨੂੰ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਵਿਧੀ ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਨਿਖੇੜਨ ਅਖਵਾਉਂਦੀ ਹੈ । ਨਿਖੇੜਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕਾਰਨ ਕਿਸੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚੋਂ ਲਾਹੇਵੰਦ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਕਈ ਵਾਰੀ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ਵੀ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਜਾਂ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਹੇਠਾਂ ਲਿਖੇ ਕਾਰਕਾਂ ਕਰਕੇ ਨਿਖੇੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ| ਅਣਉਪਯੋਗੀ ਅਤੇ ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ-ਉਦਾਹਰਨ ਲਈ ਚਾਵਲ, ਦਾਣੇ ਅਤੇ ਦਾਲਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪੱਥਰ ਦੇ ਟੁਕੜੇ ਵੱਖ ਕਰਨਾ । ਉਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਦੀਆਂ ਅਤੇ ਝੀਲਾਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਅਤੇ ਕੀਟਾਣੂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਪਾਣੀ ਪੀਣ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਬਿਮਾਰ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਾਂ । ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਅਸ਼ੁਧੀਆਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਉਪਯੋਗੀ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ-ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਪਦਾਰਥ ਦੁਜੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨਾਲੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਉਪਯੋਗੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ ਮੱਖਣ ਅਤੇ ਲੱਸੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਦਹੀਂ ਰਿੜਕਣਾ, ਪੈਟਰੋਲੀਅਮ ਵਿੱਚੋਂ ਪੈਟਰੋਲ, ਡੀਜ਼ਲ, ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਤੇਲ, ਐਲ.ਪੀ.ਜੀ., ਪੈਰਾਫਿਨ ਮੋਮ ਆਦਿ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨਾ । ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀਆਂ ਕੁਝ ਸਾਧਾਰਨ ਵਿਧੀਆਂ ਹਨ-ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁਗਣ ਵਿਧੀ, ਗਹਾਈ, ਛੱਟਣਾ ਅਤੇ ਉਡਾਉਣਾ, ਛਾਣਨ, ਤਲਛੱਟਣ ਅਤੇ ਨਿਤਾਰਨਾ, ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ, ਸੰਘਣਨ ਆਦਿ |

PSEB Solutions for Class 6 Science ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ Important Questions and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ ਮਾਰ –

(i) ਅਸ਼ੁੱਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ………….. ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਮਿਸ਼ਰਣ,

(ii) ਡੰਡੀਆਂ ਤੋਂ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ ………….. ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਹਾਈ,

(iii) ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਦਾ ਤਰਲ ਬਣਨਾ ………….. ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੰਘਣਨ,

(iv) ਜਿਸ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਪਦਾਰਥ ਘੁਲ ਜਾਣ, ਉਸਨੂੰ ………….. ਘੋਲ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ,
(v) …………. ਅਤੇ ਸੰਘਣਨ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ………….. ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ, ਉਲਟ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗਲਤ ਲਿਖੋ-

(i) ਚੌਲਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੰਕਰ ਛਾਣਨੀ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਲਤ,

(ii) ਘੁਲਣਸ਼ੀਲਤਾ, ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iii) ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਪਦਾਰਥ ਨਹੀਂ ਘੋਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(iv) ਕੰਬਾਈਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਫੁੱਲਾਂ ਨੂੰ ਬੀਜਾਂ ਤੋਂ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(v) ਸ਼ੁੱਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਰਚਨਾ ਅਤੇ ਗੁਣ ਨਿਸ਼ਚਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ ।

3. ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ ‘ਅ’
(i) ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਭਾਫ਼ ਬਣਨਾ (ੳ) ਭਾਫ਼ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਬਣਨਾ
(ii) ਫੱਕ ਤੋਂ ਦਾਣੇ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ (ਅ) ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ
(iii) ਕਣਕ ਵਿਚੋਂ ਛੋਟੇ ਕੰਕਰ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ (ੲ) ਛੱਟਣਾ ਅਤੇ ਉਡਾਉਣਾ
(iv) ਸੰਘਣਨ (ਸ) ਛਾਣਨੀ
(v) ਆਟੇ ਵਿਚੋਂ ਛਾਣਬੁਰਾ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ (ਹ) ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ

ਉੱਤਰ-

ਕਾਲਮ ‘ਉਂ’ ਕਾਲਮ ‘ਅ’
(i) ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਭਾਫ਼ ਬਣਨਾ (ਹ) ਵਾਸ਼ਪੀਕਰਨ
(ii) ਫੱਕ ਤੋਂ ਦਾਣੇ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ (ੲ) ਛੱਟਣਾ ਅਤੇ ਉਡਾਉਣਾ
(iii) ਕਣਕ ਵਿਚੋਂ ਛੋਟੇ ਕੰਕਰ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ (ਅ) ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ
(iv) ਸੰਘਣਨ (ੳ) ਭਾਫ਼ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਬਣਨਾ
(v) ਆਟੇ ਵਿਚੋਂ ਛਾਣਬੁਰਾ ਅਲੱਗ ਕਰਨਾ। (ਸ) ਛਾਣਨੀ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਚੁਣੋ :

(i) ਅੰਬ ਅਤੇ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਢੇਰ ਵਿੱਚੋਂ ਅੰਬ ਅੱਡ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ
(ਉ) ਛਾਣਨ ਦੁਆਰਾ
(ਅ) ਛੱਟਣ ਦੁਆਰਾ
(ਇ) ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਚੁਣ ਕੇ ।
(ਸ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਚੁਣ ਕੇ ।

(ii) ਉਡਾਉਣਾ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਹਲਕੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ …….. ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
(ੳ) ਭਾਰੇ ।
(ਅ) ਸਖ਼ਤ
(ਇ) ਹਲਕੇ ਵੱਡੇ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਭਾਰੇ ।

(iii) ਡੰਡੀਆਂ ਤੋਂ ਅਨਾਜ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਹੈ
(ਉ) ਗਹਾਈ ਥੈਡਿੰਗ) .
(ਅ) ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ
(ਇ) ਉਡਾਉਣਾ
(ਸ) ਛਾਣਨਾ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਗਹਾਈ ਥੈਡਿੰਗ) ।

(iv) ………. ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਹਵਾ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਅੰਸ਼ ਅਲੱਗ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
(ਉ) ਛਾਣਨਾ
(ਅ ਉਡਾਉਣਾ
(ਇ) ਥੈਡਿੰਗ
(ਸ) ਨਿਤਾਰਨ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਉਡਾਉਣਾ ।

(v) ਆਟੇ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਧੂੜਾ (ਛਾਣ-ਬੂਰਾ) ਅਤੇ ਹੋਰ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਅੱਡ ਕਰਨ ਲਈ ਅਸੀਂ ਉਪਯੋਗ ਕਰਦੇ ਹਾਂ
(ਉ) ਹਵਾ ਦਾ
(ਅ) ਹੱਥਾਂ ਦਾ ।
(ਇ) ਛਾਣਨੀ ਦਾ
(ਸ) ਪਾਣੀ ਦਾ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਛਾਣਨੀ ਦਾ ।

(vi) ਜਦੋਂ ਮਿਸ਼ਰਣ ਸੰਘਟਕਾਂ ਦੇ ਸਾਈਜ਼ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਅਪਣਾਈ ਗਈ ਵਿਧੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
(ਉ) ਨਿਤਾਰਨ
(ਅ) ਛਾਣਨਾ
(ੲ) ਉਡਾਉਣਾ
(ਸ) ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਛਾਣਨਾ ॥

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ

(vii) ਫਿਲਟਰ ਕਰਨ ਲਈ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਉਪਯੋਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
(ਉ) ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ
(ਅ ਬਰੀਕ ਕੱਪੜਾ
(ੲ) ਛਾਣਨੀ
(ਸ) ਇਹ ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਇਹ ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।

(viii) ਦੋ ਅਜਿਹੇ ਤਰਲ ਜਿਹੜੇ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਘੁਲਦੇ ਹਨ, ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤੀ ਗਈ ਵਿਧੀ ਹੈ
(ਉ) ਤਲਛੱਟਣ
(ਅ) ਨਿਤਾਰਨ
(ੲ) ਫਿਲਟਰਨ
(ਸ) ਛਾਣਨਾ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਨਿਤਾਰਨ ।

(ix) ਜਦੋਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਨਮਕ ਨਹੀਂ ਘੋਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ
(ਉ) ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ
(ਅ ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ
(ਇ) ਅਸ਼ੁੱਧ ਘੋਲ
(ਸ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ।

(x) ਚਾਵਲ ਵਿੱਚੋਂ ਧੂੜ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ………… ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਨਿਖੇੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
(ਉ) ਛਾਣਨਾ
(ਅ) ਹੱਥਾਂ ਦੁਆਰਾ ਚੁੱਗਣਾ
(ਈ) ਉਡਾਉਣਾ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ॥
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਛਾਣਨਾ ।

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਕਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਾਣੀ ਦੇ ਕਿਸੇ ਨਮੂਨੇ ‘ ਚੋਂ ਰੇਤ ਨੂੰ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਅਲੱਗ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਤਲਛੱਟਣ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਮੱਖਣ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਰਿੜਕਣ ਵਿਧੀ ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਚਾਵਲ ਤੋਂ ਬਾਰੀਕ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਕਣਕ ਦੇ ਦਾਣੇ ਅਤੇ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਡਾਉਣਾ ਵਿਧੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਚਾਹ ਬਣਾਉਣ ਸਮੇਂ ਚਾਹ ਦੀਆਂ ਪੱਤੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਾਂ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਛਾਣਨੀ (ਚਾਹ ਪੋਣੀ) ਦੁਆਰਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਨਿਖੇੜਨ ਦੀਆਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਵਿਭਿੰਨ ਵਿਧੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ, ਲਿੰਗ, ਉਡਾਉਣਾ, ਤਲਛੱਟਣ, ਨਿਤਾਰਨ, ਫਿਲਟਰੀਕਰਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ ਵਿਧੀ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ- ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਪਰ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਵਾਲੀ ਅਸ਼ੁੱਧੀ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗ ਕੇ ਵੱਖ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ ਵਿਧੀ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਚਾਵਲ, ਕਣਕ ਅਤੇ ਦਾਲਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਵਾਲੇ ਧੂੜ ਮਿੱਟੀ, ਪੱਥਰ ਜਾਂ ਤੂੜੀ ਦੇ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਥੈਸ਼ਿੰਗ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸ਼ਿੰਗ (Threshing)-ਡੰਡੀਆਂ ਤੋਂ ਅਨਾਜ ਦੇ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਬੈਸ਼ਿੰਗ ਆਖਦੇ ਹਨ | ਅੱਜ-ਕਲ੍ਹ ਥੈਸ਼ਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 1

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਉਡਾਉਣਾ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਡਾਉਣਾ (Winnowing)-ਇਹ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਉਹ ਵਿਧੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਹਲਕੇ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਘਣਤਾ ਦੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਹਵਾ ਦੇ ਬੁੱਲਿਆਂ ਦੁਆਰਾ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕਿਸਾਨ ਇਸ ਵਿਧੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਕੇ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦੇ ਭਾਰੇ ਦਾਣਿਆਂ ਤੋਂ ਵੱਖ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 2

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਛਾਣਨਾ ਵਿਧੀ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਛਾਣਨਾ-ਇਹ ਨਿਖੇੜਨ ਦੀ ਉਹ ਵਿਧੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਦੋ ਅਜਿਹੇ ਅੰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਛਾਣਨੀ ਦੁਆਰਾ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਉਡਾਉਣਾ ਅਤੇ ਬੈਸ਼ਿੰਗ ਵਿਧੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਬਚੇ ਹੋਏ ਪੱਥਰ, ਡੰਡੀਆਂ ਅਤੇ ਤੁੜੀ ਨੂੰ ਛਾਣਨਾ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਪਕਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਚਾਵਲ ਅਤੇ ਦਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਹਲਕੀਆਂ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਹਲਕੀਆਂ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣ ਜਾਂ ਫਿਰ ਉਡਾਉਣ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਨਿਖੇੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਨਿਤਾਰਨ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਨਿਤਾਰਨ-ਤਲਛੱਟੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਹਿਲਾਏ ਵ ਨੂੰ ਬਰਤਨ ਤਿਰਛਾ ਕਰਕੇ ਹੌਲੀ ਜਿਹੀ ਡੋਲ੍ਹ ਕੇ ਵੱਖ ਕਰਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਨਿਤਾਰਨ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਘਰ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰ ਬਣਾਉਣ ਸਮੇਂ ਪਨੀਰ ਦੇ ਠੋਸ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਦ੍ਰਵ ਤੋਂ ਅੱਡ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਨੀਰ ਦੇ ਠੋਸ ਕਣਾਂ ਅਤੇ ਦ੍ਰਵ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਜਾਂ ਛਾਣਨੀ ਨਾਲ ਪੁਣ ਕੇ ਅਰਥਾਤ ਫਿਲਟਰ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਅੱਡ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਨਮਕ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸ ਵਿਧੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਾਸ਼ਪਨ ਵਿਧੀ ਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ- ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਉਸੇ ਤਾਪਮਾਨ ‘ਤੇ ਹੋਰ ਅਧਿਕ ਠੋਸ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਘੋਲ ਸਕਦੇ ਤਾਂ ਅਜਿਹੇ ਘੋਲ ਨੂੰ ਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ-ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਤਾਪਮਾਨ ‘ਤੇ ਹੋਰ ਅਧਿਕ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਘੋਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਅਜਿਹੇ ਘੋਲ ਨੂੰ ਉਸ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਅਸੰਤ੍ਰਿਪਤ ਘੋਲ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਸੋਹੀ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮੁੰਦਰੀ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਨਮਕ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮੁੰਦਰੀ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਨਮਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨਾ-ਸਮੁੰਦਰ ਦੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਵੱਡੀਆਂ-ਵੱਡੀਆਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਗੂਨ) ਵਿੱਚ ਭਰ ਕੇ ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਲਈ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੂਰਜ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਗਰਮ ਹੋ ਕੇ ਵਾਸ਼ਪਨ ਦੁਆਰਾ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਵਾਸ਼ਪ ਵਿੱਚ ਬਦਲਣ ਲਗਦਾ ਹੈ । ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਸਾਰਾ ਪਾਣੀ ਵਾਸ਼ਪਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਠੋਸ ਲੁਣ ਬਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਿਸਨੂੰ ਢੇਲਿਆਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠਾ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਲੂਣ ਦੇ ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਸੋਧ ਕੇ ਸ਼ੁੱਧ ਨਮਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 3

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕਣਕ, ਚੀਨੀ ਅਤੇ ਤੂੜੀ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਲਈ ਉਪਯੋਗ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲੀ ਵਿਧੀ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਣਕ, ਚੀਨੀ ਅਤੇ ਤੂੜੀ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨਾ-ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚੋਂ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਹਵਾ ਉਡਾਉਣ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਅਲੱਗ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹੁਣ ਬਾਕੀ ਬਚੇ ਹੋਏ ਚੀਨੀ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਛਾਣਨ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਵੱਖ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿਉਂਕਿ ਕਣਕ ਦੇ ਦਾਣਿਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਚੀਨੀ ਦੇ ਅਣੂਆਂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਨਾਲੋਂ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਚੀਨੀ ਦੇ ਅਣੂ ਛਾਣਨੀ ਦੇ ਛੇਕਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘ ਜਾਣਗੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਦਾਣੇ ਛਾਣਨੀ ਉੱਪਰ ਰਹਿ ਜਾਣਗੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਵ ਵਿੱਚ ਘੁਲੇ ਹੋਏ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੰਜ ਵਿਧੀਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ । ਹਰੇਕ ਦੀ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਣ ਵੀ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਵ ਵਿੱਚ ਘੁਲੇ ਹੋਏ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਵਿਧੀਆਂ ਹਨ –

  • ਤਲਛੱਟਣ ਵਿਧੀ-ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਰੇਤ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ‘ਚੋਂ ਰੇਤ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ।
  • ਵਾਸ਼ਪਨ-ਸਮੁੰਦਰੀ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਨਮਕ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ।
  • ਸੰਘਣਨ-ਨਮਕ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਨਮਕ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ।
  • ਰਿੜਕਣ-ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਮੱਖਣ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ
(i) ਸੰਘਣਨ
(ii) ਤਲਛੱਟਣ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਸੰਘਣਨ-ਇਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਕਿਸੇ ਵ ਨੂੰ ਉਬਾਲ ਕੇ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫਿਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਨੂੰ ਠੰਢਾ ਕਰਕੇ ਸ਼ੁੱਧ ਵ ਵਿੱਚ ਸੰਘਨਿਤ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
  2. ਤਲਛੱਟਣ- ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲਣ ‘ਤੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਦੇ ਭਾਰੀ ਅੰਸ਼ ਬਰਤਨ ਦੀ ਤਲੀ ‘ਤੇ ਬੈਠ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਦਹੀਂ ਤੋਂ ਮੱਖਣ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ਦਹੀਂ ਨੂੰ ਰਿੜਕਿਆ ਕਿਉਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਦਹੀਂ ਨੂੰ ਰਿੜਕਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਮੱਖਣ ਦੇ ਠੋਸ ਕਣ ਹਲਕੇ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਅਲੱਗ ਹੋ ਕੇ ਦਵ ਦੀ ਸਤਾ ‘ਤੇ ਤੁਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਸਨੂੰ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਅਲੱਗ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਾਰਨ ਦਹੀਂ ਤੋਂ ਮੱਖਣ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਲਈ ਦਹੀਂ ਨੂੰ ਰਿੜਕਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਮਿਸ਼ਰਣਾਂ ਨੂੰ ਨਿਖੇੜਨ ਲਈ ਅੰਸ਼ਾਂ ਦੇ ਕਿਸ ਗੁਣ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? (i) ਕਣਕ ਅਤੇ ਤੂੜੀ (ii) ਰੇਤ ਅਤੇ ਨਮਕ ।
ਉੱਤਰ-

  • ਕਣਕ ਅਤੇ ਤੂੜੀ -ਕਣਕ ਦੇ ਦਾਣੇ ਤੂੜੀ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਭਾਰੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਕਣਕ ਦੇ ਭਾਰੀ ਦਾਣੇ ਗੁਰੂਤਾ ਕਾਰਨ ਹੇਠਾਂ ਧਰਤੀ ‘ਤੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਿ ਤੁੜੀ ਦੇ ਹਲਕੇ ਕਣ ਹਵਾ ਨਾਲ ਉੱਡ ਕੇ ਦੂਰ ਅਲੱਗ ਇਕੱਠੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਰੇਤ ਅਤੇ ਨਮਕ-ਰੇਤ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਣ-ਘੁਲ ਹੈ ਜਦਕਿ ਨਮਕ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਫਿਲਟਰਿਤ ਨਮਕ ਦੇ ਘੋਲ ਤੋਂ ਨਮਕ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸਟਲ ਬਣਾ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਘਰ ਵਿੱਚ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਪਨੀਰ ਕਿਵੇਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਉਸ ਵਿੱਚ ਕਿਹੜੀ ਨਿਖੇੜਨ ਵਿਧੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਛਾਣਨ ਵਿਧੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਘਰ ਵਿੱਚ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਪਨੀਰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਤੁਸੀਂ ਦੇਖਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਪਨੀਰ ਬਣਾਉਣ ਸਮੇਂ ਦੁੱਧ ਨੂੰ ਉਬਾਲ ਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਨਿੰਬੂ ਦਾ ਰਸ ਮਿਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ‘ਤੇ ਪਨੀਰ ਦੇ ਠੋਸ ਕਣਾਂ ਅਤੇ ਦ੍ਰਵ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਣ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹੁਣ ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਜਾਂ ਛਾਣਨੀ ਦੁਆਰਾ ਛਾਣ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਨੀਰ ਦੇ ਠੋਸ ਕਣ ਕੱਪੜੇ ਜਾਂ ਛਾਣਨੀ ਉੱਪਰ ਰਹਿ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਦਕਿ ਦੂ ਉਸ ਵਿੱਚੋਂ ਨਿਕਲ ਕੇ ਅਲੱਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਤਲਛੱਣ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਕੇ ਸਮਝਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਇੱਕ ਕੱਚ ਦਾ ਬਰਤਨ ਲਓ । ਇਸਦਾ 2/3 ਭਾਗ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰ ਦਿਓ । ਹੁਣ ਇਸ ਵਿੱਚ ਥੋੜ੍ਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਰੇਤ ਪਾਓ । ਬਰਤਨ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਹਿਲਾਏ-ਡੁਲਾਏ ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਲਈ ਰੱਖਿਆ ਰਹਿਣ ਦਿਓ । ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕਿ ਰੇਤ ਦੇ ਭਾਰੀ ਕਣ ਬਰਤਨ ਦੀ ਤਲੀ ‘ਤੇ ਇਕੱਠੇ । ਹੋ ਗਏ ਹਨ । ਇਹ ਤਲਛੱਟਣ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਣ ਦੀ ਸਰਲ ਵਿਧੀ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 4

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ‘ਤੇ ਨੋਟ ਲਿਖੋ
ਚਿੱਤਰ-
ਤਲਛੱਟਣ ਵਿਧੀ (ਉ) ਵਾਸ਼ਪਨ ਅਤੇ ਸੰਘਨਣ ਕਸ਼ੀਦਨ (ਅ) ਵਾਸ਼ਪਨ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਸੰਘਨਣ (ਕਸ਼ੀਦਨ-ਇਸ ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਦਵ ਨੂੰ ਉਬਾਲ ਕੇ ਉਸਦੇ ਵਾਸ਼ਪ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਫਿਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਨੂੰ ਠੰਢਾ ਕਰਕੇ ਦੁਬਾਰਾ ਦਵ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕਸ਼ੀਦਤ ਪਾਣੀ ਸਾਰੀਆਂ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਵਿਧੀ ਅਜਿਹੇ ਦਵ ਨੂੰ ਸ਼ੁੱਧ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਅਤੇ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਸਮੁੰਦਰੀ ਜਲ ਨੂੰ ਇਸੇ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਹੀ ਸ਼ੁੱਧ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

(ਅ) ਵਾਸ਼ਪਨ-ਵ ਦਾ ਉਸਦੇ ਵਾਸ਼ਪਾਂ ਵਿੱਚ ਧੀਮੇ ਪਰਿਵਰਤਨ ਨੂੰ ਵਾਸ਼ਪਨ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਕਿਰਿਆ ਦ੍ਰਵ ਦੀ ਸੜਾ ’ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਕਿਰਿਆ ਘੋਲਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਹੀ ਸਮੁੰਦਰੀ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਨਮਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਛੱਟਣ ਅਤੇ ਉਡਾਉਣ ਨਾਲ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਿਖੇੜਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਨਾਜ ਦੇ ਭਾਰੇ ਦਾਣਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਤੁੜੀ ਦੇ ਹਲਕੇ ਕਣਾਂ ਨੂੰ ਛੱਟਣ ਜਾਂ ਉਡਾਉਣ ਦੀ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।ਉਡਾਉਣ ਦੀ ਵਿਧੀ ਵਿੱਚ ਪਲੇਟ (ਜਾਂ ਛੱਜ) ਜਾਂ ਅਖ਼ਬਾਰ ‘ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਮੋਢੇ ਦੇ ਤੱਕ ਲਿਜਾ ਕੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਟੇਢਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਮਿਸ਼ਰਣ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਨਿਵਾਣ ਵੱਲ ਖਿਸਕੇ । ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ਨਾਲ ਪੈਣ ਜਾਂ ਹਵਾ ਦੇ ਬੁੱਲਿਆਂ ਕਾਰਨ ਤੁੜੀ ਦੇ ਹਲਕੇ ਕਣ ਦੂਰ ਜਾ ਡਿੱਗਦੇ ਹਨ ਜਦਕਿ ਅਨਾਜ ਦੇ ਭਾਰੇ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਕਣ ਅੱਡ ਥਾਂ ‘ਤੇ ਜਾ ਡਿੱਗਦੇ ਹਨ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 5

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਨਮਕ ਦੇ ਘੋਲ ਤੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਪਾਣੀ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਨਮਕ ਦੇ ਘੋਲ ਤੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਵਾਸ਼ਪਨ ਅਤੇ ਸੰਘਨ ਅਰਥਾਤ ਕਸ਼ੀਦਨ ਵਿਧੀ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਦੇ ਹਾਂ । ਕਸ਼ੀਦਨ ਵਾਸ਼ਪਨ ਅਤੇ ਸੰਘਣਨ –
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 6
ਇੱਕ ਕੱਚ ਦੀ ਰਿਟਾਰਟ ਵਿੱਚ ਨਮਕ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਣ ਲਓ । ਹੁਣ ਰਿਟਾਰਟ ਨੂੰ ਚਿੱਤਰ ਅਨੁਸਾਰ ਸਟੈਂਡ ਵਿੱਚ ਫਿਟ ਕਰੋ । ਰਿਟਾਰਟ ਦਾ ਮੂੰਹ ਕਾਰਕ ਨਾਲ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਓ । ਰਿਟਾਰਟ ਦੇ ਮੁੰਹ ਵਿੱਚ ਇਕ ਫਲਾਸਕ ਫਿਟ ਕਰੋ ਜਿਹੜੀ ਕਿ ਪਾਣੀ ਦੇ ਟੱਬ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬੀ ਹੋਵੇ । ਫਲਾਸਕ ਦੀ ਸਤਾ ਨੂੰ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਪਾਣੀ ਪਾ ਕੇ ਠੰਢਾ ਕਰੋ । | ਹੁਣ ਰਿਟਾਰਟ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਸਪਿਰਿਟ ਲੈਂਪ ਰੱਖ ਕੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਗਰਮ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਪਾਣੀ ਉਬਲਣ ਲੱਗੇ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਵਾਸ਼ਪ ਭਾਫ਼ ਬਣ ਕੇ ਫਲਾਸਕ ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਣ । ਫਲਾਸਕ ਦੀ ਠੰਢੀ ਸਤਾ ‘ਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਵਾਸ਼ਪ ਸੰਘਣਿਤ ਹੋ ਕੇ ਮੁੜ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਜਾਣਗੇ । ਇਹ ਪਾਣੀ ਸ਼ੁੱਧ ਪਾਣੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਚੱਟਾਨੀ ਨਮਕ ਤੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਨਮਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚੱਟਾਨੀ ਨਮਕ ਤੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਨਮਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨਾ-ਕੁਦਰਤੀ ਚੱਟਾਨੀ ਨਮਕ ਵਿੱਚ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਚੱਟਾਨੀ ਨਮਕ ਤੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਨਮਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਨਮਕ ਤੋਂ ਅੱਡ ਕਰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ –
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 6
ਚੱਟਾਨੀ ਨਮਕ ਨੂੰ ਬਾਰੀਕ ਪੀਸ ਕੇ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਲਓ । ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਘੋਲ ਵਿੱਚੋਂ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਅਸ਼ੁੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਫਿਲਟਰ ਕਰ ਲਓ। ਹੁਣ ਫਿਲਟਰਿਤ ਨਮਕ ਦੇ ਘੋਲ ਨੂੰ ਚੀਨੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਿਆਲੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਗਰਮ ਕਰੋ । ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਵਾਸ਼ਪਿਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਸ਼ੁੱਧ ਨਮਕ ਠੋਸ ਕ੍ਰਿਸਟਲ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਗੰਧਕ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚੋਂ ਗੰਧਕ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਵੱਖ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਗੰਧਕ ਦੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਇੱਕ ਬੀਕਰ ਵਿੱਚ ਪਾਓ । ਕੀਫ਼ ਨੂੰ ਸਟੈਂਡ ਵਿੱਚ ਫਿੱਟ ਕਰੋ ਜਿਵੇਂ ਚਿੱਤਰ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ਦੀਆਂ ਚਾਰ ਤਹਿਆਂ ਲਗਾਓ। ਹੁਣ ਇਸ ਦੀਆਂ ਤਿੰਨ ਤਹਿਆਂ ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਅਤੇ ਚੌਥੀ ਤਹਿ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਮੋੜ ਦਿਓ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 5 ਪਦਾਰਥਾਂ ਦਾ ਨਿਖੇੜਨ 8
ਇਸ ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ਨੂੰ ਕੀਫ਼ ਵਿੱਚ ਰੱਖੋ । ਕੱਚ ਦੀ ਛੜ ਦਾ ਇੱਕ ਸਿਰਾ ਕੀਫ਼ ਅੰਦਰ ਰੱਖੋ ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ਦੀਆਂ ਤਿੰਨ ਤਹਿਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਟਿਕਾ ਕੇ ਰੱਖੋ । ਹੁਣ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਛੜ ਦੇ ਨਾਲ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਪਾਓ । ਪਾਣੀ ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ਵਿੱਚੋਂ ਦੀ ਲੰਘਦਾ ਹੋਇਆ ਹੇਠਾਂ ਦੂਸਰੇ ਬੀਕਰ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠਾ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ, ਜਦਕਿ ਗੰਧਕ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਣ-ਘੁਲ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ‘ਤੇ ਬਚੀ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ । ਫਿਲਟਰ ਪੇਪਰ ਨੂੰ ਕੀਫ਼ ਵਿੱਚੋਂ ਹਟਾ ਕੇ ਗੰਧਕ ਨੂੰ ਸੁਕਾ ਲਓ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

Science Guide for Class 6 PSEB ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ Intext Questions and Answers

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 33 )

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਦਾਰਥ ਕਿਸਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਦਾਰਥ ਨੂੰ ਕਿਸ ਚੀਜ਼ ਵਜੋਂ ਪਰਿਭਾਸ਼ਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦਾ ਪੁੰਜ ਹੁੰਦਾ ਅਤੇ ਜਗਾ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 36)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਇੱਕ ਵਸਤੂ ਦੀ ਘਣਤਾ ਪਾਣੀ ਦੀ ਘਣਤਾ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜ੍ਹੀ ਜਿਹੀ ਘੱਟ ਹੈ । ਕੀ ਇਹ ਵਸਤੂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬੇਗੀ ਜਾਂ ਤੈਰੇਗੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਪਾਣੀ ਉੱਪਰ ਤੈਰੇਗੀ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 37)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕੀ ਸਾਫ਼ ਪਾਣੀ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ, ਅਲਪ-ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਜਾਂ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਫ਼ ਪਾਣੀ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

PSEB 6th Class Science Guide ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ Textbook Questions, and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ

(i) ਲੱਕੜ ਤੋਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੰਜ ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ …..,…….. .
ਉੱਤਰ-
ਮੇਜ਼, ਕੁਰਸੀ, ਹਲ, ਦਰਵਾਜ਼ਾ, ਕ੍ਰਿਕਟ ਬੱਲਾ,

(ii) ਚੀਨੀ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ……………. ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ।

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗਲਤ ਲਿਖੋ –

(i) ਪੱਥਰ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(ii) ਇੱਕ ਲੱਕੜੀ ਦਾ ਟੁਕੜਾ ਪਾਣੀ ਉੱਪਰ ਤੈਰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iii) ਖਿੜਕੀਆਂ ਦਾ ਕੱਚ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(iv) ਤੇਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(v) ਸਿਰਕਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪੂਰਨ-ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ ॥

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

3. ਕਾਲਮ ‘ਉਂ ਅਤੇ ਕਾਲਮ “ਅ” ਦਾ ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ ‘ਆਂ’
(ਉ) ਕਿਤਾਬ (i) ਸ਼ੀਸ਼ਾ
(ਆ) ਗਲਾਸ (ii) ਲੱਕੜੀ
(ਇ) ਕੁਰਸੀ (iii) ਕਾਗਜ਼
(ਸ) ਖਿਡੌਣਾ (iv) ਚਮੜਾ
(ਹ) ਬੂਟ (v) ਪਲਾਸਟਿਕ

ਉੱਤਰ –

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ ‘ਅ
(ਉ) ਕਿਤਾਬ (iii) ਕਾਗਜ਼
(ਅ) ਗਲਾਸ (i) ਸ਼ੀਸ਼ਾ
(ਇ) ਕੁਰਸੀ (ii) ਲੱਕੜੀ
(ਸ) ਖਿਡੌਣਾ (v) ਪਲਾਸਟਿਕ
(ਹ) ਬੂਟ (iv) ਚਮੜਾ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਚੁਣੋ –

(i) ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਪਦਾਰਥ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
(ਉ) ਪਾਣੀ
(ੲ) ਹਵਾ
(ਅ) ਆਵਾਜ਼ ।
(ਸ) ਫ਼ਲ !
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਆਵਾਜ਼

ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ
(ii) ਕਿਹੜਾ ਗੁਣ ਸਾਰੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਂਝਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
(ਉ) ਪਦਾਰਥ ਥਾਂ ਘੇਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਪੁੰਜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ।
(ਅ) ਪਦਾਰਥ ਥਾਂ ਘੇਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਕੁੱਝ ਪੁੰਜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
(ੲ) ਪਦਾਰਥ ਥਾਂ ਘੇਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਪੁੰਜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
(ਸ) ਪਦਾਰਥ ਥਾਂ ਘੇਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਪੁੰਜ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਤੇ ਨਹੀਂ ਵੀ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਪਦਾਰਥ ਥਾਂ ਘੇਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਪੁੰਜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

(iii) ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੈ ?
(ੳ) ਲੱਕੜੀ
(ਅ ਕੱਚ
(ੲ) ਕਾਗਜ਼
(ਸ) ਪਲਾਸਟਿਕ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਕੱਚ ।

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਕੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਵਸਤੂਆਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਆਰ-ਪਾਰ ਦੇਖਿਆ ਜਾ ਸਕੇ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੁਆਂ ਕੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਵਸਤੂਆਂ ਜਿਹਨਾਂ ਦੇ ਆਰ-ਪਾਰ ਕੁੱਝ ਨਹੀਂ ਦੇਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਅਲਪ-ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਕੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਵਸਤੂਆਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਘੱਟ ਲੰਘ ਸਕਦਾ ਹੈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਲਪ-ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਅਤੇ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਦੱਸੋ ? ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ

ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ
ਉਹ ਵਸਤੂਆਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਅਸੀਂ ਆਰ-ਪਾਰ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂਆਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉਦਾਹਰਨ-ਗਲਾਸ, ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਹਵਾ ਆਦਿ ।
ਅਜਿਹੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਸਾਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਦਿਖਾਈ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦਾ ਬਲਕਿ ਧੁੰਦਲਾ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੁਆਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਉਦਾਹਰਨ-ਖਿੜਕੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵਰਤਿਆ ਜਾਣ ਵਾਲਾ
ਧੁੰਦਲਾ ਕੱਚ, ਕਾਗਜ਼ ਸ਼ੀਟ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਤੇਲ ਵਾਲ-ਪੈਚ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਚਮਕੀਲੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਚੁਣੇਕੱਚ ਦਾ ਡੂੰਗਾ, ਪਲਾਸਟਿਕ ਦਾ ਮੱਗ, ਸਟੀਲ ਦੀ ਕੁਰਸੀ, ਸੂਤੀ ਕਮੀਜ਼, ਸੋਨੇ ਦੀ ਚੇਨ, ਚਾਂਦੀ ਦੀ ਮੁੰਦਰੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੱਚ ਦਾ ਡੂੰਗਾ, ਸਟੀਲ ਦੀ ਕੁਰਸੀ, ਸੋਨੇ ਦੀ ਚੇਨ, ਚਾਂਦੀ ਦੀ ਮੁੰਦਰੀ ।

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਕੀ ਸਾਰੇ ਤਰਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਰੇ ਤਰਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ । ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਕੋਈ ਵੀ ਤਰਲ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਨ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਤਿੰਨ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦੇਖਦੇ ਹਾਂ । ਕੁੱਝ ਤਰਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਘੁਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਕੁੱਝ ਤਰਲ ਨਹੀਂ ਘੁਲਦੇ ।

  • ਜਿਹੜੇ ਤਰਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿਸੀਬਲ ਤਰਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਸਿਰਕਾ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ।
  • ਜਿਹੜੇ ਤਰਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਘੁਲਦੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿਸੀਬਲ ਤਰਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਤੇਲ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ।
  • ਜਿਹੜੇ ਤਰਲ ਅੰਸ਼ਕ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਘੁਲਦੇ ਹਨ ਭਾਵ ਕਿ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਘੁਲਦੇ ਨਹੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਹੱਦ ਤੱਕ ਘੁਲਣ ਵਾਲੇ ਇਮੀਸੀਬਲ ਤਰਲ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਫਿਨਾਇਲ ਤੇ ਪਾਣੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਪਾਣੀ ਉੱਪਰ ਤੈਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਚਾਰ ਵਸਤੂਆ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਉੱਪਰ ਨਾ ਤੈਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਪੰਜ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਸੂਚੀ ਬਣਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਪਦਾਰਥ ਜੋ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਤੈਰਦੇ ਹਨ-ਜਿਹੜੀ ਚੀਜ਼ ਦੀ ਪਾਣੀ ਦੀ ਘਣਤਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਹ ਪਾਣੀ ‘ਤੇ ਤੈਰਦੀ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤੇ, ਲੱਕੜੀ ਦਾ ਟੁੱਕੜਾ, ਕਾਗਜ਼, ਗੱਤਾ, ਕੱਪੜਾ ਆਦਿ । ਉਹ ਪਦਾਰਥ ਜੋ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਨਹੀਂ ਤੈਰਦੇ-ਉਹ ਚੀਜ਼ਾਂ ਜਿਸਦੀ ਪਾਣੀ ਨਾਲੋਂ ਘਣਤਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਉਹ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਨਹੀਂ ਤੈਰਦੀ । ਜਿਵੇਂ-ਲੋਹਾ, ਸੋਨੇ ਦੀ ਚੈਨ, ਚਾਂਦੀ ਦੀ ਮੁੰਦਰੀ, ਪੱਥਰ ਆਦਿ ।

PSEB Solutions for Class 6 Science ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ Important Questions and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ

(i) ਲੂਣ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ………….. ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਘੁਲ,

(ii) ਰਬੜ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ………….. ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਘੁਲਦਾ,

(iii) ………….. ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਲੰਘ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ,

(iv) …………………………… ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਨਹੀਂ ਲੰਘ ਸਕਦਾ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ,

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

(v) ਸੋਨਾ ਅਤੇ ਚਾਂਦੀ ………….. ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਧਾਤਾਂ ।

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗਲਤ ਲਿਖੋ –

(i) ਰਬੜ ਅਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਧਾਤਾਂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਲਤ,

(ii) ਕੱਚ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iii) ਧਾਤਾਂ ਗਰਮ ਕਰਨ ‘ਤੇ ਫੈਲ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iv) ਕਾਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਘੁਲਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(v) ਸੂਰਜ ਦੀ ਰੋਸ਼ਨੀ ਇੱਕ ਪਦਾਰਥ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ ।

3. ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ –

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ ‘ਅ’
(i) ਤਾਂਬਾ (ਉ) ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
(ii) ਕੱਚ (ਅ) ਧਾਤ
(iii) ਰਬੜ ਦੀ ਗੇਂਦ (ਏ) ਚਮੜਾ
(iv) ਪੱਥਰ (ਸ) ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(v) ਬੂਟ (ਹ) ਪਾਣੀ ‘ਤੇ ਤੈਰਦੀ ਹੈ।

ਉੱਤਰ-

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ ‘ਅ’
(i) ਤਾਂਬਾ (ਆ) ਧਾਤ
(ii) ਕੱਚ (ਸ) ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(iii) ਰਬੜ ਦੀ ਗੇਂਦ (ਹ) ਪਾਣੀ ’ਤੇ ਤੈਰਦੀ ਹੈ
(iv) ਪੱਥਰ (ਉ) ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
(v) ਬੂਟ (ਹ) ਚਮੜਾ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਚੁਣੋ

(i) ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਹੋਣ ਦਾ ਕਾਰਨ ਹੈ
(ਉ) ਸ਼ਕਲ
(ਅ) ਰੰਗ
(ੲ) ਗੁਣ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ॥

(ii) ਸੰਤਰੇ ਅਤੇ ਘੜੇ ਜਿਹੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ
(ਉ) ਗੋਲ
(ਅ) ਆਇਤਾਕਾਰ
(ੲ) ਤਿਕੋਣੀਆਂ
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਗੋਲ ।

(iii) ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਦਾ ਉਦਾਹਰਣ ਹੈ
(ਉ) ਚਾਕ
(ਅ) ਕਪਾਹ
(ੲ) ਕਣਕ .
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਕਣਕ

(iv) ਇੱਕ ਪਲੇਟ, ਸਟੀਲ, ਕੱਚ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ
(ਉ) ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ
(ਅ) ਚਮੜੇ ਦੀ
(ੲ) ਧਾਗੇ ਦੀ ।
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

(v) ਕਿਹੜਾ ਪਦਾਰਥ ਚਮਕੀਲਾ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ?
(ਉ) ਸੂਤੀ ਕੱਪੜਾ
(ਅ ਲੱਕੜੀ ਦਾ ਡੱਬਾ
(ਇ) ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਤਾਰ
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਤਾਂਬੇ ਦੀ ਤਾਰ ॥

(vi) ਧਾਤ ਨਹੀਂ ਹੈ-
(ਉ) ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ
(ਆ) ਤਾਂਬਾ
(ੲ) ਚਾਂਦੀ
(ਸ) ਰੇਤ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਰੇਤ ॥

(vii) ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਹੈ-
(ਉ) ਲੂਣ
(ਅ) ਚੀਨੀ
ਨੀਲ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।

(viii) ਪਾਣੀ ਤੇ ਤੈਰਨ ਵਾਲੀ ਵਸਤੂ ਨਹੀਂ ਹੈ
(ਉ) ਗੇਂਦ
(ਅ) ਪੱਥਰ
(ੲ) ਸਾੜੀ
(ਸ) ਪੰਖ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਪੱਥਰ ॥

(ix) ਜਿਹੜੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਲੰਘ ਸਕਦਾ ਹੈ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ
(ਉ) ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(ਅ) ਪਾਰਭਾਸ਼ੀ
(ਇ) ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ |
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ।

(x) ਕੱਚ ਹੈ
(ਉ) ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(ਅ) ਲਪ-ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(ਈ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ।

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚ ਕੀ ਭਿੰਨਤਾਵਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀਆਂ ਸ਼ਕਲਾਂ, ਰੰਗ ਅਤੇ ਗੁਣ ਭਿੰਨ-ਭਿੰਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਢੰਗ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਸਤੁਆਂ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਢੰਗ ਹਨ । ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਸ਼ਕਲਾਂ ਅਤੇ ਜਿਸ ਪਦਾਰਥ ਨਾਲ ਉਹ ਬਣੀਆਂ ਹਨ, ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਵਸਤੂਆਂ ਕਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਧਾਤਾਂ, ਪਲਾਸਟਿਕ, ਲੱਕੜੀ, ਗੂੰ, ਕਾਗ਼ਜ਼, ਚਮੜਾ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ|

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਲੱਕੜੀ ਤੋਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਲੱਕੜੀ ਤੋਂ ਮੇਜ਼, ਕੁਰਸੀ, ਹਲ, ਬੈਲਗੱਡੀ, ਖਿਡੌਣੇ, ਕਿਕੂਟ ਬੈਟ, ਹਾਕੀ, ਦਰਵਾਜ਼ੇ, ਖਿੜਕੀਆਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਕਈ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਚਮੜੇ ਤੋਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਚਮੜੇ ਤੋਂ ਬੈਗ, ਪਰਸ, ਜੁੱਤੀਆਂ, ਬੂਟ, ਬੈਲਟ, ਜੈਕਟ ਆਦਿ ਬਣਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਕਾਗ਼ਜ਼ ਤੋਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਗ਼ਜ਼ ਤੋਂ ਪੁਸਤਕਾਂ, ਨੋਟ ਬੁੱਕ, ਅਖ਼ਬਾਰ, ਖਿਡੌਣੇ, ਕੈਲੰਡਰ, ਡਾਇਰੀਆਂ ਆਦਿ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਪਲਾਸਟਿਕ ਤੋਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਲਾਸਟਿਕ ਤੋਂ ਬਾਲਟੀਆਂ, ਲੰਚ-ਬਾਕਸ, ਖਿਡੌਣੇ, ਪਾਣੀ ਦੇ ਭਾਂਡੇ, ਪਾਈਪ ਅਤੇ ਅਜਿਹੀਆਂ ਹੋਰ ਕਈ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਕੋਈ ਚਾਰ ਗੁਣ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਚਾਰ ਗੁਣ ਹਨ:

  • ਚਮਕ
  • ਕਠੋਰਤਾ
  • ਖੁਰਦਰਾਪਨ ਜਾਂ ਚੀਕਣਾਪਨ
  • ਘੁਲਣਸ਼ੀਲਤਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਧਾਤ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਧਾਤ-ਉਹ ਪਦਾਰਥ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜਿਹੜਾ ਕਠੋਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਧਾਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਧਾਤਾਂ ਦੇ ਉਦਾਹਰਣ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਲੋਹਾ, ਕਾਪਰ (ਤਾਂਬਾ), ਐਲੂਮੀਨੀਅਮ ਅਤੇ ਸੋਨਾ ਧਾਤੂਆਂ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਕੁੱਝ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ-ਚੀਨੀ, ਨਮਕ, ਨੀਲਾ-ਥੋਥਾ, ਸ਼ੋਰਾ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਕੁੱਝ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ-ਚਾਕ ਪਾਉਡਰ, ਰੇਤ, ਮਿੱਟੀ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਦ੍ਰਵਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਰਕਾ, ਨਿੰਬੂ ਦਾ ਰਸ ਆਦਿ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣ ਵਾਲੀ ਇੱਕ ਗੈਸ ਦਾ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਕਸੀਜਨ ਗੈਸ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬਣ ਵਾਲੇ ਪੰਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬਣ ਵਾਲੇ ਪਦਾਰਥ-ਪੱਥਰ, ਚਾਬੀ, ਸਿੱਕਾ, ਰਾਜਮਾਂਹ, ਇੱਟ ਦਾ ਟੁਕੜਾ ।

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਦਾਰਥ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ? ਪੰਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਦਾਰਥ-ਉਹ ਸਮੱਗਰੀ ਜਿਸ ਤੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਿਸਮ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ, ਉਸਨੂੰ ਪਦਾਰਥ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਪੰਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ-ਕੱਚ, ਪਲਾਸਟਿਕ, ਲੋਹਾ, ਚਮੜਾ ਅਤੇ ਲੱਕੜੀ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਉਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਇੱਕ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਸਤੂਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਲੱਕੜੀ, ਕਾਗ਼ਜ਼, ਚਮੜਾ, ਪਲਾਸਟਿਕ, ਡੂੰ, ਕੱਚ ਅਤੇ ਧਾਤਾਂ ਤੋਂ ਇੱਕ ਨਾਲੋਂ ਵੱਧ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਕਿਸ ਪਦਾਰਥ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਹਨ ? ਮੇਜ਼, ਕੁਰਸੀ, ਦਰਵਾਜ਼ਾ, ਪੁਸਤਕ, ਨੋਟ ਬੁੱਕ, ਗਲਾਸ, ਪਲੇਟ, ਦਰਪਣ, ਬੋਤਲ ।
ਉੱਤਰ-

ਪਦਾਰਥ ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਨਾਂ
1. ਲੱਕੜੀ ਮੇਜ਼, ਕੁਰਸੀ, ਦਰਵਾਜ਼ਾ
2. ਕਾਗਜ਼ ਪੁਸਤਕ, ਨੋਟ-ਬੁੱਕ, ਅਖ਼ਬਾਰ
3. ਕੱਚ ਗਲਾਸ, ਪਲੇਟ, ਦਰਪਣ, ਬੋਤਲ
4. ਪਲਾਸਟਿਕ ਮੇਜ਼, ਕੁਰਸੀ, ਦਰਵਾਜ਼ਾ, ਬੋਤਲ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਗੁਣ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਗੁਣ –

  • ਚਮਕ,
  • ਕਠੋਰਤਾ,
  • ਰੁੱਖਾਪਨ ਖੁਰਦਰਾਪਨ),
  • ਘੁਲਣਸ਼ੀਲਤਾ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਧਾਤਾਂ ਦੇ ਕੋਈ ਦੋ ਗੁਣ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਧਾਤਾਂ ਦੇ ਗੁਣ-

  • ਧਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਚਮਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ,
  • ਧਾਤਾਂ ਕਠੋਰ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਖੁਰਚਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਕੋਮਲ ਅਤੇ ਕਠੋਰ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੋਮਲ ਪਦਾਰਥ-ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਦਬਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਖੁਰਚਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੋਮਲ ਪਦਾਰਥ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
ਉਦਾਹਰਣ-ਰੂ, ਸਪੰਜ ॥ ਕਠੋਰ ਪਦਾਰਥ-ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਦਬਾਇਆ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ਜਾਂ ਖੁਰਚਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦਾ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਠੋਰ ਪਦਾਰਥ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਅਤੇ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ-ਜਿਹੜੇ ਪਦਾਰਥ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਾਂ ਘੁਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਆਖਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਚੀਨੀ, ਨਮਕ । ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ- ਜਿਹੜੇ ਪਦਾਰਥ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਜਾਂ ਘੁਲ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਪਦਾਰਥ ਆਖਦੇ ਹਨ , ਜਿਵੇਂ-ਚਾਕ ਪਾਉਡਰ, ਰੇਤ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਕੀ ਦ੍ਰਵ ਵਿੱਚ ਦ੍ਰਵ ਅਲੋਪ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦ੍ਰਵ ਵਿੱਚ ਕਈ ਦਵ ਅਲੋਪ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਰੰਤੂ ਸਾਰੇ ਦਵ, ਵਾਂ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੇ ਜਿਵੇਂ ਸਿਰਕਾ ਅਤੇ ਨਿੰਬੂ ਦਾ ਰਸ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਨਾਰੀਅਲ ਦਾ ਤੇਲ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਹੇਠਾਂ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜੇ ਪਦਾਰਥ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਤਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਿਹੜੇ ਡੁੱਬ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ? ਸੁੱਕੇ ਪੱਤੇ, ਕਾਰਕ ਦਾ ਟੁਕੜਾ, ਸ਼ਹਿਦ ਦੀ ਬੂੰਦ, ਰੋੜਾ, ਚਾਬੀ, ਸਿੱਕਾ, ਚਾਹ ਦੀ ਪੱਤੀ, ਅਮਰੂਦ ਦਾ ਪੱਤਾ, ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਤੁਰਨ ਵਾਲੇ ਪਦਾਰਥ-ਸੁੱਕੇ ਪੱਤੇ, ਚਾਹ ਦੀ ਪੱਤੀ, ਅਮਰੂਦ ਦਾ ਪੱਤਾ, ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ, ਕਾਰਕ ਦਾ ਟੁਕੜਾ । ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬਣ ਵਾਲੇ ਪਦਾਰਥ-ਸ਼ਹਿਦ ਦੀ ਬੂੰਦ, ਰੋੜਾ, ਸਿੱਕਾ ਅਤੇ ਚਾਬੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਕੀ ਗੈਸਾਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੁੱਝ ਗੈਸਾਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਅਲੋਪ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਰਥਾਤ ਘੁਲ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਆਕਸੀਜਨ, ਕਾਰਬਨ-ਡਾਈਆਕਸਾਈਡ ਜਿਹੀਆਂ ਗੈਸਾਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲ ਕੇ ਅਲੋਪ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਜੀਵਿਤ ਰਹਿਣ ਲਈ ਆਕਸੀਜਨ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ । ਜਲ-ਜੀਵ ਕਿਵੇਂ ਆਕਸੀਜਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਜੀਵਿਤ ਰਹਿਣ ਲਈ ਆਕਸੀਜਨ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ । ਜਲ-ਜੀਵ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲੀ ਹੋਈ ਆਕਸੀਜਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਆਕਸੀਜਨ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਜਲ-ਜੀਵ ਘੁਲੀ ਹੋਈ ਆਕਸੀਜਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਕੇ ਜੀਵਿਤ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਸਾਨੂੰ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਦੀ ਲੋੜ ਕਿਉਂ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੈਨਿਕ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਸਹੂਲਤ ਲਈ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਦੀ ਲੋੜ ਪੈਂਦੀ ਹੈ । ਅਸੀਂ ਘਰ ਵਿੱਚ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਸਤਾਂ ਦਾ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਭੰਡਾਰਨ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਗੁਣਾਂ ਵਾਲੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਇੱਕੋ ਥਾਂ ‘ਤੇ ਰੱਖੀਆਂ ਜਾਣ ਤਾਂ ਜੋ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਲੱਭਿਆ ਜਾ ਸਕੇ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਰਿਆਨਾ ਵੇਚਣ ਵਾਲੇ ਵੀ ਸਾਰੇ ਬਿਸਕੁਟ ਇੱਕ ਹੀ ਕੋਨੇ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਸਾਬਣ ਇੱਕ ਥਾਂ ‘ਤੇ ਰੱਖਦੇ ਹਨ ।

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ, ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਅਤੇ ਪਾਰਭਾਸ਼ੀ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਉਦਾਹਰਣ ਵੀ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਪਦਾਰਥ- ਜਿਹੜੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਲੰਘ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਿਸ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਪਾਸੇ ਪਈਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਵੇਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਪਦਾਰਥ ਆਖਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਕੱਚ, ਹਵਾ, ਪਾਣੀ, ਸਪਿਰਿਟ ਅਤੇ ਜਿੰਨ ਸ਼ਰਾਬ ।

ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਪਦਾਰਥ- ਜਿਸ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਨਹੀਂ ਲੰਘ ਸਕਦਾ ਅਤੇ ਜਿਸ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਪਾਸੇ ਪਈ ਵਸਤੂ ਨਹੀਂ ਦੇਖੀ ਜਾ ਸਕਦੀ, ਨੂੰ ਅਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਵਸਤੂ ਆਖਦੇ ਹਨ , ਜਿਵੇਂ-ਕੁਰਸੀ, ਦੀਵਾਰ, ਡੈਸਕ, ਬਲੈਕ ਬੋਰਡ, ਕਿਤਾਬ, ਪੱਥਰ ਦਾ ਟੁਕੜਾ ।

ਪਾਰਭਾਸ਼ੀ ਪਦਾਰਥ- ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਦੇਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਦਿਖਾਈ ਨਾ ਦੇਵੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਾਰਭਾਸ਼ੀ ਪਦਾਰਥ ਆਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ-ਤੇਲ ਲੱਗਿਆ ਕਾਗ਼ਜ਼, ਧੁੰਦਲਾ ਕੱਚ ਅਤੇ ਸੈਲਫ਼ੇਨ ਸ਼ੀਟ ॥
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ 1

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 4 ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਬਣਾਉਣਾ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਤਿੰਨ-ਤਿੰਨ ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
(i) ਕੱਚ,
(ii) ਮਿੱਟੀ,
(iii) ਲੱਕੜੀ,
(iv) ਪਲਾਸਟਿਕ,
(v) ਕਾਗ਼ਜ਼,
(vi) ਤਾਂਬਾ (ਕਾਪਰ ।
ਉੱਤਰ-
(i) ਕੱਚ-ਬੋਤਲ, ਗਲਾਸ, ਚੁੜੀਆਂ ।
(ii) ਮਿੱਟੀ-ਗਮਲਾ, ਫੁਲਦਾਨ, ਇੱਟ, ਘੜਾ ।
(iii) ਲੱਕੜੀ-ਮੇਜ਼, ਬੈਟ, ਦਰਵਾਜ਼ਾ, ਪੌੜੀ ॥
(iv) ਪਲਾਸਟਿਕ-ਬਾਲਟੀ, ਮੱਗ, ਕੰਘੀ ।
(v) ਕਾਗਜ਼-ਕਿਤਾਬ, ਅਖ਼ਬਾਰ, ਕਾਪੀ ॥
(vi) ਤਾਂਬਾ (ਕਾਪਰ)-ਸਿੱਕਾ, ਬਰਤਨ, ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਤਾਰ ।

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1

Punjab State Board PSEB 11th Class Maths Book Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Maths Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1

Question 1.
Expand the expression (1 – 2x)5.
Answer.
Here, (1 – 2x)5 = [1 + (- 2x)]5
= \({ }^{5} C_{0}\) + \({ }^{5} C_{1}\) (-2X) + \({ }^{5} C_{2}\) (-2x)2 + \({ }^{5} C_{3}\) (-2x)3 + \({ }^{5} C_{4}\) (-2x)4 + \({ }^{5} C_{5}\) (-2x)s
= 1 + 5 (- 2x) + 10 (4x2) + 10 (- 8x3) + 5(16x4) + 1 (- 32x5)
= 1 – 10x + 40x2 – 80x3 + 80x4 – 32x5
which is the required expansion.

Question 2.
Expand the expression \(\left(\frac{2}{x}-\frac{x}{2}\right)^{5}\).
Answer.
By using Binomial Theorem, the expression \(\left(\frac{2}{x}-\frac{x}{2}\right)^{5}\) can be expanded as

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1 1

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 3.
Expand the expression (2x – 3)6.
Answer.
By using Binomial Theorem, the expression (2x – 3)6 can be expanded as
(2x – 3) = \({ }^{6} C_{0}\) (2x)6 – \({ }^{6} C_{1}\) (2x)5 (3) + \({ }^{6} C_{2}\) (2x)4 (3)2 – \({ }^{6} C_{3}\) (2x)3 (3)3 + \({ }^{6} C_{4}\) (2x)2 (3)4 – \({ }^{6} C_{5}\) (2x) (3)5 + \({ }^{6} C_{6}\) (3)6
= 64x6 – 6(32x5) (3) + (15) (16x4) (9) – 20(8x3) (27) + 15(4x2) (81) – 6 (2x) (243) + 729
= 64x6 – 576x5 + 2160x4 – 4320x3 + 4860x2 – 2916x + 729

Question 4.
Expand the expression \(\left(\frac{x}{3}+\frac{1}{x}\right)^{5}\).
Answer.
Using Binomial Theorem,

\((a+b)^{n}={ }^{n} C_{0} a^{n}+{ }^{n} C_{1} a^{n-1} b+{ }^{n} C_{2} a^{n-2} b^{2}+\ldots+{ }^{n} C_{n} b^{n}\)

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1 2

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 5.
Expand: \(\left(x+\frac{1}{x}\right)^{6}\).
Answer.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1 3

Question 6.
Using Binomial Theorem, evaluate (96)3.
Answer.
96 can be expressed as the sum or difference of two numbers whose powers are easier to calculate and then, Binomial Theorem can be applied.
It can be written that, 96 = 100 – 4
∴ (96)3 = (100 – 4)3
= \({ }^{3} C_{0}\) (100)3 – \({ }^{3} C_{1}\) (100)2 (4) + \({ }^{3} C_{2}\) (100) (4)2 – 3C\({ }^{3} C_{0}\) (4)3
= (100)3 – 3(100)2 (4) + 3(100) (4)2 – (4)3
= 1000000 – 120000 + 4800 – 64 = 884736.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 7.
Using Binomial Theorem, evaluate (102)5.
Answer.
102 can be expressed as the sum or difference of two numbers whose powers are easier to calculate and then, Binomial Theorem can be applied.
It can be written that, 102 = 100 + 2
∴ (102)5 = (100 + 2)5

= \({ }^{5} C_{0}\) (100)5 + \({ }^{5} C_{1}\) (100)4 (2) + \({ }^{5} C_{2}\) (100)3 (2)2 + \({ }^{5} C_{3}\) (100)2 (2)3 + \({ }^{5} C_{4}\) (100) (2)4 + \({ }^{5} C_{5}\) (2)5

= (100)5 + 5(100)4 (2) + 10 (100)3 (2)2 + 10 (100)2 (2)3 + 5(100) (2)4 + (2)5
= 10000000000 + 1000000000 + 40000000 + 800000 + 8000 + 32 = 11040808032

Question 8.
Using Binomial Theorem, evaluate (101)4.
Answer.
101 can be expressed as the sum or difference of two numbers whose powers are easier to calculate and then,
Binomial Theorem can be applied.
If can be written that, 101 = 100 + 1
∴ (101)4 =(100 + 1)4
= \({ }^{4} C_{0}\) (100)4 + \({ }^{4} C_{1}\)(100)3 (1) + \({ }^{4} C_{2}\) (100)2 (1)2 + \({ }^{4} C_{3}\) (100)(1)3 + \({ }^{4} C_{4}\) (1)4.

= (100)4 + 4(100)3 + 6(100)2 + 4(100) + (1)4
= 100000000 + 4000000 + 60000 + 400 +1 =104060401.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 9.
Using Binomial Theorem, evaluate (99)5.
Answer.
99 can be written as the sum or difference of two numbers whose powers are easier to calculate and then, Binomial Theorem can be applied.
It can be written that, 99 = 100 – 1
(99)5 =(100 – 1)5
= \({ }^{5} C_{0}\) (1oo)5 – \({ }^{5} C_{1}\) (100)4 (1) + \({ }^{5} C_{2}\) (100)3 (1)2 – \({ }^{5} C_{3}\) (100)2 (1)3 + \({ }^{5} C_{4}\) (100) (1)4 – \({ }^{5} C_{5}\) (1)5

= (100)5 – 5(100)4 + 10(100)3 – 10 (100)2 + 5 (100) – 1
= 10000000000 – 500000000 + 10000000 – 100000 + 500 – 1
= 10010000500 – 500100001 = 9509900499.

Question 10.
Using Binomial Theorem, indicate which number is larger (1.1)10000 or 1000.
Answer.
By splitting 1.1 and then applying Binomial Theorem, the first few terms of (1.1)10000 can be obtained as (1.1)10000 = (1 + 0.1)10000
= \({ }^{10000} C_{0}\)+ \({ }^{10000} C_{1}\) (1.1) + Other positive terms
= 1 + 10000 × 1.1 + Other positive terms
= 1 + 11000 + Other positive terms > 1000
Hence, (1.1)10000 > 1000.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 11.
Find (a + b)4 – (a – b)4.
Hence, evaluate (√3 + √2)4 – (√3 – √2)4.
Answer.
Using Binomial Theorem, the expression, (a + b)4 and (a – b)4, can be expanded as
(a + b)4 = \({ }^{4} C_{0}\) a4 + \({ }^{4} C_{1}\)a3b + \({ }^{4} C_{2}\) a2b2 + \({ }^{4} C_{3}\) ab3 + \({ }^{4} C_{4}\) b4

(a – b)4 = \({ }^{4} C_{0}\) a4 – \({ }^{4} C_{1}\)a3b + \({ }^{4} C_{2}\) a2b2 – \({ }^{4} C_{3}\) ab3 + \({ }^{4} C_{4}\) b4

∴ (a + b)4 – (a + b)4 =
= \({ }^{4} C_{0}\) a4 + \({ }^{4} C_{1}\) a3b + \({ }^{4} C_{2}\) a2b2 + \({ }^{4} C_{3}\) ab3 + \({ }^{4} C_{4}\) b4 – [ \({ }^{4} C_{0}\) a4 – \({ }^{4} C_{1}\) a3b + \({ }^{4} C_{2}\) a2b2 – \({ }^{4} C_{3}\) ab3 + \({ }^{4} C_{4}\) b4]

= 2 (\({ }^{4} C_{1}\) a3b + \({ }^{4} C_{1}\) ab3)
= 2(4a3b + 4ab3)
= 8ab(a2 + b2)
By putting a = √3 and b = √2 , we obtain ,
(√3 + √2)4 – (√3 – √2)4 = 8(√3) (√2) {(√3)2 + ((√2)2)
= 8(√6) {3 + 2} = 40√6.

Question 12.
Find (x + 1)6 + (x – 1)6. Hence or otherwise evaluate (√2 + 1)6 + (√2 – 1)6.
Answer.
We have,

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1 4

(x + 1)6 = x6 – 6x5 + 15x4 + 20x3 + 15x2 + 6x + 1 ……………..(i)
Similarly, (x – 1)6 = x6 – 6x5 + 15x4 – 20x3 + 15x2 – 6x + 1 ………….(ii)
Now, adding eqs. (i) and (ii), we get
(x + 1)6 + (x – 1)6 = 2 [x6 + 15x4 + 15x2 + 1]
Now, putting x = V2, we get
(√2 + 1)6 + (√2 – 1)6 = 2[(V2)6 +15(V2)4 + 15(V2)2 + 1]
= 2 [23 + 15 × 22 + 15 × 2 + 1]
= 2(8 + 15 × 4 + 30 + 1]
= 2 [8 + 60 + 30 + 1]
= 2 [99] = 198.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 13.
Show that 9N + 1 – 8n – 9 is divisible by 64, whenever n is a positive integer.
Answer.
In order to show that 9n + 1 – 8n – 9 is divisible by 64, it has to be proved that,
9n + 1 – 8n – 9 = 64k, where k is some natural number.
By Binomial Theorem,

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 8 Binomial Theorem Ex 8.1 5

⇒ 9n + 1 – 8n – 9 = 64k, where k
= \({ }^{n+1} C_{2}+{ }^{n+1} C_{3} \times 8+\ldots+{ }^{n+1} C_{n+1}(8)^{n-1}\) is a natural number.
Thus, 9n + 1 – 8n – 9,is divisible by 64, wherever n is a positive integer.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter Binomial Theorem Ex 8.1

Question 14.
Prove that \(\sum_{r=0}^{n} \mathbf{3}^{r}{ }^{n} C_{r}\) = 4n.
Answer.
By Binomial Theorem, \(\sum_{r=0}^{n}{ }^{n} C_{r} a^{n-r} b^{r}\) = (a + b)n
By putting b = 3^and a = 1 in the above equation, we obtain
\(\sum_{r=0}^{n}{ }^{n} C_{r}(1)^{n-r}(3)^{r}\) = (1 + 3)n
⇒ \(\sum_{r=0}^{n} 3^{r}{ }^{n} C_{r}\) = 4n
Hence, proved.

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

Science Guide for Class 6 PSEB ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ Intext Questions and Answers

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 21)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕੋਈ ਵੀ ਚੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ੇ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-
(i) ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ
(ii) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਿਲਕ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਛੂਹਣ ਤੇ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਰਲ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਤੁਹਾਡਾ ਦੁਪੱਟਾ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਬਣਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੁਪੱਟਾ ਕਪਾਹ ਤੋਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 26)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਉਹਨਾਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ਜੋ ਜੂਟ ਅਤੇ ਨਾਰੀਅਲ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੂਟ ਨੂੰ ਪਰਦੇ, ਚਟਾਈਆਂ, ਗਲੀਚੇ, ਰੱਸੀਆਂ, ਸਕੂਲ ਦੇ ਬਸਤੇ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਨਾਰੀਅਲ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਵਰਤ ਕੇ ਫਰਸ਼ ਦੀਆਂ ਚਟਾਈਆਂ, ਦਰਵਾਜ਼ੇ ਦੇ ਮੈਟ, ਬੁਰਸ਼ ਅਤੇ ਰੱਸੀਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 26 )

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਧਾਗਾ ……………. ਤੋਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਧਾਗਾ ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਧਾਗਾ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੂਤ ਇੱਕ ਪਤਲਾ ਧਾਗਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਵੱਖਰੇ-ਵੱਖਰੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਤੰਦਾਂ ਦਾ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਨੂੰ ਤੋਂ ਧਾਗਾ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੇ ਸੂਤ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਾਂ ਜੋ ਕਿ ਕਤਾਈ ਅਤੇ ਕਪਾਹ ਵੇਲਣ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 28)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਉੱਨ ………… ਅਤੇ ………… ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਉੱਨ ਨਰਮ ਅਤੇ ਭਰਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Guide ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ Textbook Questions, and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ

(i) ਸਿਲਕ ਨਰਮ ਅਤੇ …………… ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਮਕਦਾਰ,

(ii) ……………. ਨਾਰੀਅਲ ਦੇ ਬਾਹਰੋਂ ਉਤਾਰ ਕੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । (
ਉੱਤਰ-
ਨਾਰੀਅਲ ਰੇਸ਼ੇ,

(iii) ……………. ਅਤੇ ……………. ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਲੀਐਸਟਰ, ਨਾਈਲੋਨ,

(iv) ਕਪਾਹ ਇੱਕ ……………. ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤੀ,

(v) ਧਾਗਾ …………… ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ੇ ।

2. ਠੀਕ/ਗਲਤ ਅਤੇ-

(i) ਪੋਲੀਐਸਟਰ ਇੱਕ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(ii) ਉਣਾਈ (Knitting) ਵਿੱਚ ਇੱਕੋ ਹੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਧਾਗੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iii) ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਗਰਮ ਅਤੇ ਨਮੀ ਵਾਲੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਪਹਿਨਣੇ ਅਰਾਮਦਾਇਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iv) ਕਪਾਹ ਵਿਚੋਂ ਬੀਜ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਰੀਟਿੰਗ (Retting) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

(v) ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਧਾਗਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵੱਟਿਆ ਅਤੇ ਖਿੱਚਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

3. ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਅਤੇ ਕਾਲਮ “ਅ’ ਦਾ ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ

ਕਾਲਮ ‘ਉ ਕਾਲਮ “ਅ”
(ਉ) ਪਟਸਨ (i) ਨਾਰੀਅਲ ਦਾ ਬਾਹਰੀ ਸੈੱਲ
(ਅ) ਅਰਿਲਿਕ (ii) ਤਣਾ
(ੲ) ਨਾਰੀਅਲ ਰੇਸ਼ੇ (iii) ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨਾ
(ਸ) ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ (iv) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ
(ਹ) ਤੱਕਲੀ (v) ਕਤਾਈ

ਉੱਤਰ

ਕਾਲਮ “ਉ” ਕਾਲਮ “ਅ”
(ਉ) ਪਟਸਨ (ii) ਤਣਾ
(ਅ) ਅਕਰਿਲਿਕ (iv) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ
(ੲ) ਨਾਰੀਅਲ ਰੇਸ਼ੇ (i) ਨਾਰੀਅਲ ਦਾ ਬਾਹਰੀ ਬੈੱਲ
(ਸ) ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ (iii) ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨਾ
(ਹ) ਤੱਕਲੀ (v) ਕਤਾਈ ।

4. ਸਹੀ ਵਿਕਲਪ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰੋ-

(i) ਕਿਹੜਾ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
(ਉ) ਉੱਨ
(ਅ ਨਾਈਲੋਨ
(ਇ) ਰੇਸ਼ਮ
(ਸ) ਪਟਸਨ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਉੱਨ ।

(ii) ਕਿਹੜਾ ਕੱਪੜਾ ਗਰਮ ਨਮੀ ਵਾਲੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣ ਲਈ ਚੁਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(ਉ) ਸੁਤੀ ।
(ਅ) ਉਨੀ
(ਈ) ਰੇਸ਼ਮੀ
(ਸ) ਨਾਈਲੋਨ ॥
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਸੁਤੀ ।

(iii) ਕਪਾਹ ਦੇ ਟੀਡਿਆਂ ਤੋਂ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਕਰਨ ਦੀ ਵਿਧੀ
(ਉ) ਕਤਾਈ .
(ਅ) ਰੀਟਿੰਗ
(ਇ) ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ ।
(ਸ) ਹੱਥ ਨਾਲ ਚੁੱਗਣਾ ਹੈ
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਰੀਟਿੰਗ ।

(iv) ਅਕਰਿਲਿਕ ਇੱਕ ……….. ਹੈ ।
(ਉ) ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਾ
(ਅ) ਜੰਤੂ ਰੇਸ਼ਾ
(ਇ) ਪੌਦਾ ਰੇਸ਼ਾ
(ਸ) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਾ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਾ ।

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਕੋਈ ਦੋ ਜੰਤੁ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ ਅਤੇ ਉੱਨ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਦੋ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਿਲਕ ਅਤੇ ਉੱਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਪਟਸਨ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਦਾ ਠੀਕ ਸਮਾਂ ਕਿਹੜਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੂਨ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤੱਕ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iv)
ਪਟਸਨ ਤੋਂ ਬਣਨ ਵਾਲੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਸੂਚੀ ਬਣਾਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੂਟ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪਰਦਿਆਂ, ਗਲੀਚੇ, ਚਟਾਈਆਂ, ਰੱਸੀਆਂ ਅਤੇ ਬਸਤੇ ਬਣਾਉਣ ਵਾਸਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ – ਉਸ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਅਤੇ ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ ਦੱਸੋ ॥
ਉੱਤਰ

ਭਦਰਤੀ ਹੋਸੇ ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ
1. ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਸਾਨੂੰ ਪੌਦੇ ਅਤੇ ਜੰਤਆਂ ਦੋਨਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉਦਾਹਰਨ-ਕਪਾਹ, ਜੁਟ, ਨਾਰੀਅਲ ਰੇਸ਼ੇ, ਉੱਨ ਅਤੇ ਸਿਲਕ ਆਦਿ । 1. ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ, ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ਮਨੁੱਖ ਦੁਆਰਾ ਰਸਾਇਣਿਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਉਦਾਹਰਨ-ਪਾਲੀਐਸਟਰ, ਨਾਈਲੋਨ ਅਤੇ ਐਕਰੈਲਿਕ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਦੇ ਪਾਲਣ ਨੂੰ ਕੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੈਰੀ ਕਲਚਰ-ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਉਤਪਾਦਨ ਲਈ ਰੇਸ਼ਮੀ ਕੀੜੀਆਂ ਦੇ ਪਾਲਣ-ਪੋਸ਼ਣ ਨੂੰ ਸੈਰੀ ਕਲਚਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਕਪਾਹ ਦੀ ਕਤਾਈ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਵੇਲਣੇ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸਨੂੰ ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਪੁਰਾਤਨ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਇਸਨੂੰ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਸੀ, ਪਰ ਅੱਜਕਲ੍ਹ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ਵੀ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਅਸੀਂ ਗਰਮੀ ਵਿੱਚ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਪਾਉਣ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਕਿਉਂ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ ?
ਉੱਤਰ-
1. ਸੂਤੀ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਨਰਮ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
2. ਸੁਤੀ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਕਾਫ਼ੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸੋਖ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ।
ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਬਹੁਤ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਪਸੀਨਾ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸੁਤੀ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਪਸੀਨੇ ਨੂੰ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਰੱਖਦੇ ਹਨ । ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਰਮੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਇਹ ਭਾਫ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਭਾਫ ਕਾਰਨ ਠੰਡਾਪਨ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਕਾਰਨ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸੂਤੀ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਗਰਮੀ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਾਲ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਨੁਕਸਾਨ ਤੋਂ ਵੀ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਕਪਾਹ ਦੀ ਕਤਾਈ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਤਾਈ-ਇਹ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਪੜਾਅ ਹੈ, ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ । ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਧਾਗੇ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਕਤਾਈ ਦੇ ਦੁਆਰਾ । ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਰੇਸ਼ੇ ਕੱਢ ਕੇ ਅਤੇ ਮਰੋੜ ਕੇ ਧਾਗੇ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ, ਤੰਤੂਆਂ ਤੋਂ ਸੁਤ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਕਤਾਈ ਵਜੋਂ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕੜਾਈ ਨੂੰ ਤੱਕਲੀ ਅਤੇ ਚਰਖੇ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ | ਅੱਜ-ਕਲ੍ਹ ਕਤਾਈ ਕਰਨ ਲਈ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਆ ਗਈਆਂ ਹਨ । ਚਰਖੇ ਅਤੇ ਤੱਕਲੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਛੋਟੇ ਪੈਮਾਨੇ ਤੇ ਸਕੇਲ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਵੱਡੇ ਪੈਮਾਨੇ ਤੇ ਧਾਗੇ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ । ਕਤਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਧਾਗੇ ਨੂੰ ਰੇਸ਼ੇ ਵਿੱਚ ਬਦਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਬੁਣਾਈ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਜੋ ਕਿ ਅੰਤਿਮ ਪੜਾਅ ਹੈ ।

PSEB Solutions for Class 6 Science ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ Important Questions and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ

(i) ਪਟਸਨ ………….. ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਤੰਤੂ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੌਦਿਆਂ,

(ii) ਨੂੰ ਕਪਾਹ ਦੇ ………….. ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਬੀਜਾਂ,

(iii) ………….. ਦੇ ਲਈ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਪਾਹ,

(iv) ਪੋਲੀਐਸਟਰ ਇੱਕ ………….. ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ,

(v) ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ………….. ਬਣਾਉਣ ਨੂੰ ਕਤਾਈ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਧਾਗਾ ।

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗਲਤ ਲਿਖੋ

(i) ਰੇਸ਼ੇ ਸਾਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਹੀ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(ii) ਨਾਇਲਾਨ ਇੱਕ ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iii) ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਧਾਗਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਕਤਾਈ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iv) ਧਾਗੇ ਦੇ ਦੋ ਸੈਟਾਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠੇ ਚਿਣ ਕੇ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਨੂੰ ਬੁਣਾਈ ਆਖਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

(v) ਪਟਸਨ ਇੱਕ ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ ।

3. ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ –

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ “ਅ”
(i) ਨਾਇਲਾਨ (ਉ) ਉਨ
(ii) ਸੂਤ (ਅ) ਕੋਕੂਨ
(iii) ਕਪਾਹ (ੲ) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਾ
(iv) ਰੇਸ਼ਮ (ਸ) ਕਪਾਹ
(v) ਭੇਡ (ਹ) ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ

ਉੱਤਰ-

ਕਾਲਮ ‘ਉ’ ਕਾਲਮ “ਅ”
(i) ਨਾਇਲਾਨ (ਈ) ਸੰਸਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਾ
(ii) ਸੂਤ (ਸ) ਕਪਾਹ
(iii) ਕਪਾਹ (ਹ) ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ
(iv) ਰੇਸ਼ਮ (ਅ) ਕੋਕੂਨ
(v) ਭੇਡ (ਉ) ਉਨ ਦੀ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਚੁਣੋ

(i) ਪ੍ਰਕਿਰਤੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਤੰਤੂ ਹੈ
(ਉ) ਨਾਇਲਾਨ
(ਅ) ਊਨੀ
(ਈ) ਰੇਸ਼ਮੀ
(ਸ) ਸਿਰਫ ਊਨੀ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ਮੀ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਿਰਫ ਊਨੀ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ਮੀ ।

(ii) ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਤੰਤੂ ਹੈ
(ਉ) ਪਟਸਨ
(ਅ) ਰੇਸ਼ਮ
(ਈ) ਉੱਨ
(ਸ) ਨਾਇਲਾਨ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਪਟਸਨ ।

(iii) ਰੇਸ਼ਮੀ ਤੰਤੂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਤੋਂ
(ਅ) ਭੇਡਾਂ ਤੋਂ
(ੲ) ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ॥
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਤੋਂ ।

(iv) ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਤੰਤੂ ਦਾ ਉਦਾਹਰਨ ਹੈ
(ਉ) ਰੇਸ਼ਮ
(ਅ) ਉੱਨ
(ੲ) ਤੂੰ
(ਸ) ਪੋਲੀਐਸਟਰ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਪੋਲੀਐਸਟਰ !

(v) ਤੰਤੂਆਂ ਤੋਂ ਧਾਗਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ
(ਉ) ਬੁਣਾਈ
(ਅ) ਉਣਾਈ
(ਈ) ਕਤਾਈ।
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ॥
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਕਤਾਈ ।

(vi) ਤੂੰ ਕਪਾਹ ਦੇ ਕਿਸ ਭਾਗ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
(ਉ) ਪੱਤਿਆਂ ਤੋਂ
(ਅ) ਤਣੇ ਤੋਂ
(ਏ) ਬੀਜ ਤੋਂ
(ਸ) ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਬੀਜ ਤੋਂ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

(vii) ਜਦੋਂ ਕਪਾਹ ਚੁਗੇ ਜਾਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਸ ਵੇਲੇ ਕਪਾਹ ਦੇ ਟਾਂਡਿਆਂ ਦਾ ਰੰਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਸਫ਼ੈਦ
(ਅ) ਪੀਲਾ ।
(ਈ) ਹਰਾ
(ਸ) ਬੈਂਗਣੀ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਸਫ਼ੈਦ ॥

(viii) ਕਪਾਹ ਦੇ ਲਈ ਗਰਮ ਜਲਵਾਯੂ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
(ਉ) ਕਾਲੀ
(ਅ) ਲਾਲ
(ਈ) ਪੀਲੀ
(ਸ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਕਾਲੀ ॥

(ix) ਅੱਜ-ਕੱਲ੍ਹ ਕਪਾਹ ਵੇਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
(ਉ) ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ
(ਅ) ਪੈਰਾਂ ਨਾਲ
(ਈ) ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ
(ਸ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ਇ) ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ।

(x) ਪਟਸਨ ਦਾ ਰੇਸ਼ਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਬੀਜ ਤੋਂ
(ਅ) ਪੱਤਿਆਂ ਤੋਂ
(ਇ) ਤਣੇ ਤੋਂ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਤਣੇ ਤੋਂ ।

(xi) ਕਪਾਹ ਤੋਂ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਅੱਡ ਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਅਖਵਾਉਂਦੀ ਹੈ
(ਉ) ਵੇਲਣਾ
(ਅ) ਕਤਾਈ
(ਬ) ਤੋੜਨਾ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
ੳ) ਵੇਲਣਾ

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕੱਪੜੇ ਕਿੰਨੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੱਪੜੇ ਸੂਤੀ, ਊਨੀ, ਰੇਸ਼ਮੀ ਅਤੇ ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਅਸੀਂ ਕੱਪੜੇ ਕਿੱਥੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਕੱਪੜੇ ਪੌਦੇ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਸੂਤੀ, ਰੇਸ਼ਮੀ ਅਤੇ ਊਨੀ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸਾਨੂੰ ਉੱਨ ਕਿਹੜੇ ਜੰਤੂਆਂ ਤੋਂ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਉੱਨ ਭੇਡ, ਬੱਕਰੀ, ਖਰਗੋਸ਼, ਯਾਕ ਅਤੇ ਉਨਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਸਾਨੂੰ ਕਿੱਥੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਸਾਨੂੰ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਦੇ ਕੋਕੂਨ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ- ਜਿਹੜੇ ਰੇਸ਼ੇ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸੰਸ਼ਲਿਸਟ ਰੇਸ਼ੇ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਲੀਏਸਟਰ, ਨਾਇਲਾਨ ਅਤੇ ਏਕਾਈਲਿਕ ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਕਪਾਹ ਨੂੰ ਉਗਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹ ਜਿਹੀ ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਜਲਵਾਯੂ ਅਨੁਕੂਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਪਾਹ ਨੂੰ ਉਗਾਉਣ ਲਈ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਗਰਮ ਜਲਵਾਯੂ ਅਨੁਕੂਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕੁੱਝ ਅਜਿਹੇ ਰਾਜਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ਜਿੱਥੇ ਕਪਾਹ ਦੀ ਖੇਤੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਮਹਾਂਰਾਸ਼ਟਰ, ਗੁਜਰਾਤ, ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਦੇ ਰਾਜਾਂ ਵਿੱਚ ਕਪਾਹ ਦੀ ਖੇਤੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਬੀਜਾਂ ਤੋਂ ਕਿਵੇਂ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਪਟਸਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਕਿਸ ਭਾਗ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਟਸਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਨੂੰ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਪਟਸਨ ਕਿੱਥੇ-ਕਿੱਥੇ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਪਟਸਨ ਆਮ ਕਰਕੇ ਪੱਛਮੀ ਬੰਗਾਲ, ਬਿਹਾਰ ਅਤੇ ਆਸਾਮ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਪਟਸਨ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪਟਸਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਵੇਂ ਵੱਖ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਤਣਿਆਂ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਦਿਨ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਭਿਉਂ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਤਣੇ ਦੇ ਗਲ-ਸੜ ਜਾਣ ਤੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਆਮ ਤੌਰ `ਤੇ ਪਟਸਨ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਦੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਪਟਸਨ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਫੁੱਲ ਆਉਣ ਤੇ ਵੱਢ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਕੱਤਾਈ ਕਿਸ ਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੱਤਾਈ- ਰੇਸ਼ੇ ਤੋਂ ਧਾਗਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਕੱਤਾਈ ਆਖਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਚਰਖਾ ਕੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿਸ ਕੰਮ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਚਰਖਾ-ਇਹ ਇੱਕ ਹੱਥ ਨਾਲ ਪ੍ਰਚਲਿਤ ਕਤਾਈ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਹੈ ।

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਕੱਪੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਭਿੰਨਤਾ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੱਪੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਭਿੰਨਤਾ-ਕੱਪੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਭਿੰਨਤਾ ਤੋਂ ਭਾਵ ਹੈ ਕਿ ਕੱਪੜੇ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਬੈਂਡ’ ਸ਼ੀਟ, ਕੰਬਲ, ਪਰਦੇ, ਤੌਲੀਏ, ਡਸਟਰ, ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ-ਸੂਤੀ, ਰੇਸ਼ਮੀ, ਉਨੀ ਅਤੇ ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਆਦਿ ਤੋਂ ਬਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਕੱਪੜਿਆਂ ਦਾ ਵਿਭਿੰਨ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਣਨਾ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਭਿੰਨਤਾ ਅਖਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਰੇਸ਼ੇ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ? ਇਹ ਕਿੰਨੇ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੇਸ਼ੇ-ਧਾਗੇ ਜਿਹੜੇ ਪਤਲੀਆਂ ਲੜੀਆਂ ਤੋਂ ਬਣਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਰੇਸ਼ੇ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਰੇਸ਼ੇ ਮੁੱਖ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-

  • ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ
  • ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੇ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ੋ-ਉਹ ਰੇਸ਼ੇ ਜੋ ਪੌਦਿਆਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੁਦਰਤੀ ਹੇਸ਼ੇ ਆਖਦੇ ਹਨ : ਜਿਵੇਂ-ਸੂਤੀ ਅਤੇ ਪਟਸਨ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਦਕਿ ਉੱਨ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ਮ ਆਦਿ ਜੰਤੂਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉੱਨ ਸਾਨੂੰ ਭੇਡ, ਬੱਕਰੀ, ਖਰਗੋਸ਼, ਉਠ ਅਤੇ ਯਾਕ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਨੂੰ ਕੱਤਣ ਮਗਰੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਰੇਸ਼ਮੀ ਰੇਸ਼ੇ ਰੇਸ਼ਮ ਦੇ ਕੀੜੇ ਤੋਂ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਤੰਤੂ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਨਾਂ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਰੇਸ਼ੇ-ਜਿਹੜੇ ਤੰਤੁ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਨਿਰਮਿਤ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਤੰਤੁ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਉਦਾਹਰਨ-ਪੋਲੀਏਸਟਰ, ਨਾਇਲਾਨ, ਏਕਰਾਇਲਿਕ ਸੰਸ਼ਲਿਸ਼ਟ ਤੰਤੁ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਕਪਾਹ ਦਾ ਪੌਦਾ ਕਿਹੋ ਜਿਹੀ ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਜਲਵਾਯੂ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਤੂੰ ਨੂੰ ਪੌਦੇ ਦੇ ਕਿਸ ਭਾਗ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਪਾਹ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲਈ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਗਰਮ ਜਲਵਾਯੂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਰੂੰ ਨੂੰ ਕਪਾਹ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਫੁੱਲ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪਸ਼ਨ 6.
ਕਪਾਹ ਦੇ ਫੁੱਲ ਤੋਂ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਪਾਹ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫੁੱਲ ਜਦੋਂ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੱਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬੀਜ ਟੁੱਟ ਕੇ ਖੁੱਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਕਪਾਹ ਦੇ ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕਿਆ ਹੋਇਆ ਕਪਾਹ ਦਾ ਬੀਜ ਵੇਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਕਪਾਹ ਦੇ ਬੀਜ ਤੋਂ ਰੂੰ ਨੂੰ ਹੱਥ ਰਾਹੀਂ ਵੱਖ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੋਂ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਕੰਘੀ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵੱਖ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ ਕਿਸ ਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ? ਇਹ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ-ਨੂੰ ਨੂੰ ਕਪਾਹ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਤੋਂ ਵੱਖ ਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਕਪਾਹ ਵੇਲਣਾ ਆਖਦੇ ਹਨ । ਰਵਾਇਤੀ ਢੰਗ ਅਨੁਸਾਰ ਕਪਾਹ ਕੰਘੀ ਦੁਆਰਾ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਵੇਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਪਰੰਤੂ ਅੱਜ-ਕਲ੍ਹ ਕਪਾਹ ਨੂੰ ਵੇਲਣ ਲਈ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪਟਸਨ ਕਿਸ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਿਸ ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਕਿਸ ਭਾਗ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਟਸਨ (ਜੂਟ ਨੂੰ ਪਟਸਨ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ | ਪਟਸਨ ਦੀ ਖੇਤੀ ਵਰਖਾ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮੁੱਖ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਪੱਛਮੀ ਬੰਗਾਲ, ਬਿਹਾਰ ਅਤੇ ਆਸਾਮ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਬੁਣਾਈ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਬੁਣਾਈ-ਧਾਗੇ ਦੇ ਦੋ ਸੈੱਟਾਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠਿਆਂ ਚਿਣ ਕੇ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਬਣਾਈ ਆਖਦੇ ਹਨ। ਇਹ ਧਾਗੇ ਤੋਂ ਕੱਪੜਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਇੱਕ ਵਿਧੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਧਾਗੇ ਦੇ ਦੋ ਸੈੱਟਾਂ ਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਉਣਾਈ ਕਿਸਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਣਾਈ-ਇਹ ਇੱਕ ਖ਼ਾਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬੁਣਾਈ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਹੀ ਧਾਗੇ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਕੇ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਇੱਕ ਟੁੱਕੜੇ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸਵੈਟਰ ਅਤੇ ਜ਼ੁਰਾਬ ਦੀ ਬੁਣਾਈ ਇਸੇ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ 1

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਹੱਥ-ਖੱਡੀ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਹੱਥ-ਖੱਡੀ-ਇਹ ਇੱਕ ਹੱਥ ਦੁਆਰਾ ਕੱਪੜੇ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਵਿਧੀ ਹੈ । ਕਈ ਥਾਂਵਾਂ ‘ਤੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਦੀ ਬੁਣਾਈ ਖੱਡੀਆਂ ‘ਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਖੱਡੀਆਂ ਜਾਂ ਤੇ ਹੱਥ ਦੁਆਰਾ ਚੱਲਣ ਵਾਲੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਬਿਜਲੀ ਦੁਆਰਾ ਚੱਲਦੀਆਂ ਹਨ । ਹੱਥ-ਖੱਡੀ ਨਾਲ ਧਾਗਿਆਂ ਦੇ ਦੋ ਸੈੱਟਾਂ ਨੂੰ ਬੁਣ ਕੇ ਕੱਪੜਾ ਬੁਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ 2

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰ ਵਾਲਾ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ-
ਕੱਪੜਾ ਸਮੱਗਰੀ ਦੇ ਇਤਿਹਾਸ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੱਪੜਾ ਸਮੱਗਰੀ ਦਾ ਇਤਿਹਾਸ-ਕੱਪੜਿਆਂ ਬਾਰੇ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਪ੍ਰਮਾਣਾਂ ਤੋਂ ਅਜਿਹਾ ਪ੍ਰਤੀਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਲੋਕ ਦਰੱਖ਼ਤਾਂ ਦੀ ਛਾਲ, ਵੱਡੇ ਪੱਤਿਆਂ ਜਾਂ ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੀ ਚਮੜੀ ਜਾਂ ਜੱਤ ਨਾਲ ਆਪਣਾ ਸਰੀਰ ਢੱਕਦੇ ਸਨ । ਖੇਤੀ ਸਮੁਦਾਇ ਵਿੱਚ ਵੱਸਣ ਤੋਂ ਪਿੱਛੋਂ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਪਤਲੀਆਂ-ਪਤਲੀਆਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਅਤੇ ਘਾਹ ਨੂੰ ਬੁਣ ਕੇ ਟੋਕਰੀਆਂ ਅਤੇ ਚਟਾਈਆਂ ਬਣਾਉਣਾ ਸਿੱਖਿਆ | ਵੇਲਾਂ ਅਤੇ ਜੰਤੂਆਂ ਦੇ ਵਾਲਾਂ ਜਾਂ ਉੱਨ ਨੂੰ ਵੱਟ ਕੇ ਲੜੀਆਂ ਬਣਾਈਆਂ ਅਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਨੂੰ ਬੁਣ ਕੇ ਕੱਪੜਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 3 ਰੇਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਕੱਪੜੇ ਤੱਕ

ਸ਼ੁਰੂ-ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਲੋਕ ਨੂੰ ਤੋਂ ਬਣੇ ਕੱਪੜੇ ਪਾਉਂਦੇ ਸੀ ਜੋ ਗੰਗਾ ਨਦੀ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਗਈ ਕਪਾਹ ਤੋਂ ਮਿਲਦੀ ਸੀ ! ਫਲੈਕਸ ਵੀ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਪੌਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਕੁਦਰਤੀ ਰੇਸ਼ਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਮਿਸਰ ਵਿੱਚ ਕੱਪੜੇ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਰੂੰ ਅਤੇ ਫਲੈਕਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨੀਲ ਨਦੀ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਸੀ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਕੱਪੜਾ ਸੀਊਣਾ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਸੀ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਉਹ ਅਣਸੀਤੇ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਉੱਡੇ ਲਪੇਟ ਲੈਂਦੇ ਸਨ । ਸਿਲਾਈ ਦੀ ਸੂਈ ਦੀ ਕਾਢ ਹੋਣ ਪਿੱਛੋਂ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਕੱਪੜਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿਉਂ ਕੇ ਪਹਿਨਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ । ਅੱਜ ਵੀ ਲੋਕ ਸਾੜੀਆਂ, ਧੋਤੀਆਂ ਅਤੇ ਲੂੰਗੀਆਂ ਦੀ ਬਿਨਾਂ ਸੀਤੇ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 6 ਸਮਾਜੀਕਰਨ

Punjab State Board PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 6 ਸਮਾਜੀਕਰਨ Important Questions and Answers.

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 6 ਸਮਾਜੀਕਰਨ

ਵਸਤੁਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ Objective Type Questions
I. ਬਹੁ-ਵਿਕਲਪੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ Multiple Choice Questions :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਭਾਵ ਕਿਸ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
(a) ਵਿਅਕਤੀ
(b) ਸਮਾਜ
(c) ਪਰਿਵਾਰ
(d) ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਪਰਿਵਾਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਤੱਤ ਕੀ ਹੈ ?
(a) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਨਾ
(b) ਭਾਸ਼ਾ
(c) ਰਹਿਣ ਦਾ ਢੰਗ
(d) ਸਮਾਜ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਨਾ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕਿਸਦੇ ਬਿਨਾਂ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
(a) ਰਹਿਣ ਦਾ ਢੰਗ
(b) ਭਾਸ਼ਾ
(c) ਸਰੀਰ
(d) ਯੋਗਤਾ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਭਾਸ਼ਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਕਦੋਂ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
(a) ਵਿਆਹ ਤੋਂ ਬਾਅਦ
(b) 50 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਵਿੱਚ
(c) ਮੌਤ ਦੇ ਨਾਲ
(d) ਰਿਟਾਇਰਮੈਂਟ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਮੌਤ ਦੇ ਨਾਲੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜੀ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਹੈ ?
(a) ਉਮਰ ਭਰ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ
(b) ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ
(c) ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਬੱਚੇ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਸੰਬੰਧ ਕਿਸ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
(a) ਪਰਿਵਾਰ
(b) ਦੇਸ਼
(c) ਸਮਾਜ
(d) ਦੁਨੀਆ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਪਰਿਵਾਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਸਾਧਨ ਕੀ ਹੈ ?
(a) ਪਰਿਵਾਰ
(b) ਪੜੋਸੀ
(c) ਸਮਾਜ
(d) ਖੇਡ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਪਰਿਵਾਰ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਕਿਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਨਾਲ ਬੱਚਾ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਨਿਯਮ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ?
(a) ਸਮਾਜੀਕਰਨ
(b) ਪਰ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਹਿਣ
(c) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਕਰਨ
(d) ਸਾਤਮੀਕਰਨ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸਮਾਜੀਕਰਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
Social Self ਦਾ ਸਮਾਜੀਕਰਣ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ ਕਿਸਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ?
(a) ਕੂਲੇ
(b) ਫਰਾਈਡ
(c) ਮਰਨ
(d) ਵੈਬਰ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਕੂਲੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
Id, Ego ਅਤੇ Super Ego ਦਾ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਿਸਨੇ ਕੀਤਾ ਸੀ ?
(a) ਕੂਲੋਂ ।
ਨੂੰ
(b) ਵੈਬਰ
(c) ਮਰਟਨ
d) ਫਰਾਈਡ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਫਰਾਈਡ ।

II. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ Fill in the blanks :

1. …………………… ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ

2. ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ………………… ਹੋਣ ਉੱਤੇ ਹੀ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੌਤ

3. ……………………… ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪਹਿਚਾਣ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਵੈ

4. ਸਕੂਲ, ਕਾਨੂੰਨ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੇ ………………………. ਸਾਧਨ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਰਸਮੀ

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5. ……………………….. ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਮੁੱਢਲੀ ਏਜੰਸੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਰਿਵਾਰ

6. …………………………. ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਵਾਨੀ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸ਼ੋਰ

III. ਸਹੀ/ਗਲਤ True/False :

1. ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਜਨਮ ਨਾਲ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

2. ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਪੰਜ ਪੱਧਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

3. ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਉਦੇਸ਼ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਅਸਮਾਜਿਕ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਲਤ

4. ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਹੀਂ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗਲਤ

5. ਸਕੂਲ ਵਿੱਚ ਬੱਚਾ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

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6. ਖੇਡ ਸਮੂਹ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਵਿੱਚ ਨੇਤਾ ਬਣਨ ਦੀਆਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਜਾਗਿਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

IV. ਇੱਕ ਸ਼ਬਦਲਾਈਨ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਉੱਤਰ One Word/line Question Answers :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਉਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੱਚਾ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਰਹਿਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਨਿਯਮ, ਪਰਿਮਾਪ, ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦਾ ਮੁੱਖ ਉਦੇਸ਼ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦਾ ਮੁੱਖ ਉਦੇਸ਼ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਅਕਤੀ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂਕਿ ਉਹ ਸਮਾਜ ਦਾ ਇਕ ਚੰਗਾ ਨਾਗਰਿਕ ਬਣ ਸਕੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਕਦੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਜਨਮ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਕਦੋਂ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਮੌਤ ਨਾਲ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਬੱਚੇ ਦੇ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਸਾਧਨ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬੱਚੇ ਦੇ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਸਾਧਨ ਪਰਿਵਾਰ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਕਿੰਨੇ ਪੱਧਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਪੰਜ ਪੱਧਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਬਾਲ ਅਵਸਥਾ ਕਦੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਅਤੇ ਕਦੋਂ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੌਖਿਕ ਅਵਸਥਾ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ 12 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਬਚਪਨ ਅਵਸਥਾ ਕਦੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਅਤੇ ਕਦੋਂ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਬਚਪਨ ਅਵਸਥਾ 14 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ 4 ਸਾਲ ਤਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕਿਸ਼ੋਰ ਅਵਸਥਾ ਕਦੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਅਤੇ ਕਦੋਂ ਖ਼ਤਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸ਼ੋਰ ਅਵਸਥਾ 14-15 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ 20-21 ਸਾਲ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਕਿਸ਼ੋਰ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਿਹੜੀ ਅਵਸਥਾ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਿਸ਼ੋਰ ਅਵਸਥਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਵਾਨੀ ਦਾ ਪੱਧਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ।

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ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਅਰਥ । ਉੱਤਰ-ਹਰੇਕ ਸਮਾਜ ਦੇ ਕੁਝ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਉਦੇਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੇ ਕੁਝ ਨਿਰਧਾਰਿਤ ਢੰਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਇਹਨਾਂ ਢੰਗਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨੂੰ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ।
ਉੱਤਰ-
ਹਰਟਨ ਅਤੇ ਹੰਟ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਉਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਰਾਹੀਂ ਵਿਅਕਤੀ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਸਮਾਜਿਕ ਪਰਿਮਾਪਾਂ ਨੂੰ ਆਤਮਸਾਤ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕਰਕੇ ਉਸ ਦੇ ਵਿਲੱਖਣ ਸਵੈ ਦਾ ਉਦੈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਇੱਕ ਤੱਤ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਵਿਅਕਤੀ, ਸਮਾਜ ਤੇ ਸਮੂਹ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਅਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਪ੍ਰਤਿਮਾਨਾਂ, ਮੁੱਲਾਂ, ਗਿਆਨ, ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਤੇ ਹਿਣ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਚਲਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਇੱਕ ਆਧਾਰ ।
ਉੱਤਰ-
ਮਨੁੱਖ ਦਾ ਬੱਚਾ ਦੂਜੇ ਮਨੁੱਖਾਂ ਉੱਤੇ ਵੱਧ ਸਮੇਂ ਲਈ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਆਪਣੀ ਹਰੇਕ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਲਈ ਹੋਰ ਮਨੁੱਖਾਂ ਉੱਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਹੀ ਨਿਰਭਰਤਾ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੇ ਲਈ ਦੂਜਿਆਂ ਉੱਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਹਰ ਇਕ ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਕੁਝ ਨਿਸਚਿਤ ਕੀਤੇ ਗਏ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ (Cultural goals) ਉਦੇਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੇ ਕੁਝ ਨਿਰਧਾਰਿਤ ਢੰਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਖੇ ਬਗੈਰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਉਦੇਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਉਸਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਭ ਕੁਝ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਤੋਂ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਸਿੱਖ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਕਿੰਗਸਲੇ ਡੇਵਿਸ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ-‘ਇਹ ਉਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਮਨੁੱਖੀ ਬੱਚਾ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਹਿਣ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਸਾਰੀ ਹੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ (Socio-cultural) ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਹੀ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀਆਂ ਵਿਭਿੰਨ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੇ ਨਾਮ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀਆਂ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੇ ਨਾਂ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਹਨ-

  1. ਪਰਿਵਾਰ (Family)
  2. ਖੇਡ ਸਮੂਹ (Play Group)
  3. ਗੁਆਂਢ (Neighbourhood).
  4. ਸਕੂਲ (School)
  5. ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਸਥਾਵਾਂ (Social Institutions) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸ਼ੈ ਦਾ ਅਰਥ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਅਕਤੀ ਜਨਮ ਤੋਂ ਇਕਦਮ ਬਾਅਦ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਅਕਤੀ ਨਹੀਂ ਬਣਦਾ । ਉਸ ਵਿਚ ਸ਼ੈ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਵੀ ਲੋਕਾਂ ਅਤੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿਚ ਆਉਣ ਨਾਲ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਥੈ ਤੋਂ ਭਾਵ ਜਦੋਂ ਵਿਅਕਤੀ ਕੰਮਾਂ ਤੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਆਦਿ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਚੇਤਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਅਸੀਂ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਸੈ ਕਹਿੰਦੇ ਹਾਂ । ਨਵਾਂ ਜੰਮਿਆ ਬੱਚਾ ਦੁਸਰੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨਾਲ ਕੋਈ ਭੇਦ-ਭਾਵ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਬਲਕਿ ਦੂਸਰੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਅੰਤਰ-ਕਿਰਿਆ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਉਹ ਉਪਰੋਕਤ ਭੇਦ ਨੂੰ ਸਮਝਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਇਸ ਯੋਗਤਾ ਨੂੰ ਹੀ ਸ਼ੈ ਦਾ ਨਾਮ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਮੁੱਖ ਜੀਵ-ਵਿਗਿਆਨਿਕ ਆਧਾਰ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੇ ਚਾਰ ਮੁੱਖ ਜੀਵ-ਵਿਗਿਆਨਿਕ ਆਧਾਰ ਹਨ-

  1. ਮਨੁੱਖੀ ਵਿਵਹਾਰ ਵਿਚ ਮੂਲ ਪ੍ਰਵਿਰਤੀ ਦੀ ਕਮੀ (Absense of Instinct)
  2. ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਬਾਲ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਨਿਰਭਰਤਾ (Chidhood Dependency of Individual)
  3. ਮਨੁੱਖ ਦੀ ਸਰੀਰਕ ਬਣਤਰ (Physical Structure of Man)
  4. ਮਨੁੱਖਾਂ ਵਿਚ ਵਧੇਰੇ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ (More Learning Capacity) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਸਾਡੇ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਯੋਗ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਬੱਚਾ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਨਹੀਂ ਪਤਾ ਹੁੰਦਾ । ਉਹ ਆਪਣੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਲਈ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਉੱਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਰਿਵਾਰ ਉਸ ਦੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਜੀਵਨ ਜੀਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਸਿਖਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਨੂੰ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ, ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿਖਾਉਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੀ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਚੰਗਾ ਨਾਗਰਿਕ ਬਣਾਉਣ ਵਿਚ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦਾ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 6 ਸਮਾਜੀਕਰਨ

ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ? ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਲਿਖੋ ।
ਜਾਂ
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਅਤੇ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦਾ ਅਰਥ (Meaning of Socialization) – ਮਨੁੱਖ ਦਾ ਬੱਚਾ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿਚ ਇਕ ਛੋਟੇ ਜਿਹੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਲਈ ਆਪਣੀਆਂ ਭੌਤਿਕ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਨੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਤੇ ਉਹ ਆਪ ਤੇ ਸਮਾਜ ਦੇ ਹੋਰ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨਾਲ ਆਪਣੀਆਂ ਭੌਤਿਕ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਸਮੇਂ ਦੇ ਨਾਲ ਉਹ ਵੱਡਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਦਮੀ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦੀਆਂ ਆਪਣੀਆਂ ਇੱਛਾਵਾਂ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ, ਵਿਚਾਰ, ਪਸੰਦ, ਪਸੰਦ, ਆਦਤਾਂ ਆਦਿ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਬਾਰੇ ਆਪਣੇ ਤੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦਾ ਵੀ ਪਤਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਜਨਮ ਤੋਂ ਹੀ ਇਹਨਾਂ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦਾ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਬਲਕਿ ਇਹ ਸਭ ਕੁੱਝ ਉਹ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਰਹਿੰਦੇ ਹੀ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨੂੰ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਕ ਬੱਚਾ ਜਨਮ ਵੇਲੇ ਪਸ਼ੂ ਪ੍ਰਤੀ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਉਹ ਸਮਾਜ ਦੇ ਤੌਰ-ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਸ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ . ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਨਾਲ ਉਹ ਇਕ ਪੂਰਨ ਮਨੁੱਖ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਸਮਾਜਿਕ ਕੀਮਤਾਂ, ਪਰਿਮਾਪਾਂ, ਨਿਯਮਾਂ, ਗੁਣਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪੜਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ | ਮਨੁੱਖ ਦਾ ਬੱਚਾ ਪਸ਼ੂ ਤੋਂ ਇਨਸਾਨ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਮਨੁੱਖ ਇਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਸਮਾਜਿਕ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸਿੱਖਦਾ ਬਲਕਿ ਸਮਾਜ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ, ਪਰਿਮਾਪਾਂ, ਭਾਸ਼ਾ ਤਕਨੀਕਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨਾ ਵੀ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਮਨੁੱਖ ਨੂੰ ਇਹ ਪਤਾ ਚਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸਨੂੰ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਕੀ ਸਿੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸਨੇ ਕੀ ਸਿੱਖਣਾ ਹੈ । ਹਰ ਇਕ ਸਮਾਜ ਦੀ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਨੂੰ ਤਾਂ ਹੀ ਅੱਗੇ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਸਮਾਜ ਦੀ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਬਾਰੇ ਦੱਸਿਆ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਦੇ ਹਰੇਕ ਪੱਖ ਬਾਰੇ ਦੱਸਿਆ ਜਾਵੇ । ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁੱਝ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੀ ਮੱਦਦ ਨਾਲ ਮਨੁੱਖ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਕਿਆ ਕਰਨ ਅਤੇ ਰਹਿਣ ਦੇ ਤੌਰ-ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਏ ਨਿਯਮਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨਾ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ।

ਇਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਨੂੰ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ਬਲਕਿ ਉਹ ਸਮਾਜ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਵੀ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਕਈ ਪੱਖਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਹੀ ਉਹ ਬੋਲਣਾ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ, ਸਮਾਜ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਹੁਨਰ ਆਦਿ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਉਹ ਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਇਹ ਪਤਾ ਚਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸ ਨੇ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਕਿਵੇਂ ਰਹਿਣਾ ਹੈ, ਕੀ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤੇ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨਾ ਹੈ । ਹਰੇਕ ਨਵੇਂ ਜੰਮੇ ਬੱਚੇ ਲਈ ਇਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਹੌਲੀਹੌਲੀ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਰਹਿਣ ਦੇ ਤੌਰ-ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖ ਲਵੇ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿਰਫ ਉਹ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸਿੱਖ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਦਾ ਇਕ ਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ, ਲੋਕਗੀਤਾਂ ਤੇ ਵਿਵਹਾਰਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀਆਂ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ (Definitions of Socialization)

  • ਕਿੰਗਸਲੇ ਡੇਵਿਸ (Kingslay Davis) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਉਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਦੁਆਰਾ ਇਕ ਮਨੁੱਖੀ ਬੱਚਾ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਹਿਣ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਦੀ ਸੰਰਚਨਾ ਵਿਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦਾ ਹੈ ।”
  • ਫਿਰਟਰ (Fichter) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਤੇ ਉਸ ਦੇ ਸਾਥੀ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਇਕ ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਨ ਦੀ ਇਕ ਅਜਿਹੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਹਾਰ ਦੇ ਢੰਗ ਸਵੀਕਾਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਅਨੁਕੂਲਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।”
  • ਹਰਟਨ ਅਤੇ ਹੰਟ (Hurton and Hunt) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਉਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਰਾਹੀਂ ਵਿਅਕਤੀ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਸਮਾਜਿਕ ਪਰਿਮਾਪਾਂ ਨੂੰ ਆਤਮਸਾਤ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕਰਕੇ ਉਸ ਦੇ ਵਿਲੱਖਣ ਸਵੈ ਦਾ ਉਦੈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।”

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹਨਾਂ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵੇਖਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਉਹ ਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੱਚਾ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਰਹਿਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਨਿਯਮ, ਪਰਿਮਾਪ, ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾਲ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਇਕ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੋਂ ਦੂਜੀ ਪੀੜੀ ਨੂੰ ਹਸ਼ਤਾਂਤਰਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਜੀਵਨ ਦੇ ਸੰਗਠਿਤ ਅਤੇ ਪ੍ਰਵਾਣਿਤ ਤਰੀਕਿਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਅਨੁਕੂਲਣ ਕਰਨਾ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਜੀਵਨ ਜੀਣ ਲਈ ਜਿਹੜੇ ਤਰੀਕੇ, ਅਨੁਸ਼ਾਸਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ, ਗੁਣਾਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ, ਇੱਛਾਵਾਂ, ਕੀਮਤਾਂ, ਰਹਿਣ ਦੇ ਢੰਗਾਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਹ ਸਜੀਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੁਆਰਾ ਹੀ ਸਿੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਜੰਮਦੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ ਬਲਕਿ ਇਹ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਵੀ ਚਲਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਕਾਰਨ ਹੀ ਬੱਚਾ ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਹੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਨਾਲ ਅਨੁਕੂਲਣ ਕਰਨਾ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਨਾਲ ਘੁਲਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 5 ਸਭਿਆਚਾਰ

Punjab State Board PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 5 ਸਭਿਆਚਾਰ Important Questions and Answers.

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 5 ਸਭਿਆਚਾਰ

ਵਸਤੁਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ Objective Type Questions
I. ਬਹੁ-ਵਿਕਲਪੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ Multiple Choice Questions :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਜਾਨਵਰਾਂ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਅੱਡ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਕਿਹੜੀ ਚੀਜ਼ ਹੈ ?
(a) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ
(b) ਸਮੂਹ
(c) a + b
(d) ਕੋਈ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕਿਹੜੀ ਚੀਜ਼ ਨੂੰ ਇੱਕ ਪੀੜੀ ਤੋਂ ਦੂਜੀ ਪੀੜੀ ਤੱਕ ਹਸਤਾਂਤਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
(a) ਸਮਾਜ
(b) ਸਕੂਟਰ
(c) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ
(d) ਕਾਰ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਦੇ ਪ੍ਰਸਾਰ ਲਈ ਕਿਹੜੀ ਚੀਜ਼ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
(a) ਦੇਸ਼ ਦਾ ਟੁੱਟਣਾ
(b ਲੜਾਈ
(c) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਿਕ ਰੁਕਾਵਟ
(d) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਿਕ ਰੁਕਾਵਟ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਕਰਣ ਦੇ ਲਈ ਕੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
(a) ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੁੱਲ
(b) ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਤਿਆਰੀ
(c) ਸਮੂਹਿਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ
(d) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਤਿਆਰੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਕਿਸ ਸਮਾਜ ਸ਼ਾਸਤਰੀ ਨੇ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਨੂੰ ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਸੀ ?
(a) ਆਗਬਰਨ
(b) ਗਿਡਿੰਗਜ਼
(c) ਮੈਕਾਈਵਰ
(d) ਪਾਰਸੰਜ਼ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਆਗਬਰਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਅਭੌਤਿਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ……………………. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(a) ਮੂਰਤ
(b) ਮੂਰਤ ਅਤੇ ਅਮੂਰਤ
(c) ਅਮੂਰਤ
(d) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਅਮੂਰਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਭੌਤਿਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ………………………. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(a) ਮੂਰਤ
(b) ਮੂਰਤ ਅਤੇ ਅਮੂਰਤ
(c) ਅਮੂਰਤ
(d) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਮੂਰਤ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਆਗਬਰਨ ਨੇ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਿਕ ਪਿਛੜਾਪਨ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਦੋਂ ਕੀਤਾ ਸੀ ?
(a) 1911
(b) 1921
(c) 1931
(d) 1941.
ਉੱਤਰ-
(b) 1921.

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਦਾ ਵਿਕਸਿਤ ਰੂਪ ਕੀ ਹੈ ?
(a) ਸੱਭਿਅਤਾ
(b) ਭੌਤਿਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ
(c) ਦੇਸ਼ ਤੇ ਸਮਾਜ
(d) ਅਭੌਤਿਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸੱਭਿਅਤਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਸਮੀਕਰਨ ਵਿੱਚ ਕੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
(a) ਸਮਾਜ
(b) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਆਂ
(c) ਦੇਸ਼
(d) ਕੋਈ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਆਂ ।

II. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ Fill in the blanks :

1. …………………… ਨੇ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਜਿਊਣ ਦਾ ਸੰਪੂਰਨ ਢੰਗ ਕਿਹਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਲਾਈਡ ਕਲਕੋਹਨ

2. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ …………………….. ਭਾਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੋ

3. ਵਿਚਾਰ, ਆਦਰਸ਼ ਕੀਮਤਾਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ……………………. ਭਾਗ ਦੇ ਉਦਾਹਰਨ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਭੌਤਿਕ

4. …………………………. ਉਹ ਨਿਯਮ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮੰਨਣ ਦੀ ਸਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਉਮੀਦ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਦਰਾਂ-ਕੀਮਤਾਂ

5. ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਪਛੜੇਵੇਂ ਦਾ ਸਿਧਾਂਤ ……………………… ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਲਿਅਮ ਐਫ਼ ਆਗਬਰਨ

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6. ……………………….. ਨੂੰ ਇੱਕ ਪੀੜੀ ਤੋਂ ਦੂਜੀ ਪੀੜੀ ਨੂੰ ਹਸਤਾਂਤਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ

7. ਕੁਰਸੀ, ਟੇਬਲ, ਕਾਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ………………………. ਭਾਗ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਭੌਤਿਕ

III. ਸਹੀ/ਗਲਤ True/False :

1. ਅਰਸਤੂ ਅਨੁਸਾਰ ਮਨੁੱਖ ਇੱਕ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਪਾਣੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ

2. ਆਦਿ ਕਾਲ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਮਨੁੱਖ ਨੇ ਅੱਜ ਤਕ ਜੋ ਕੁੱਝ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਉਹ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

3. ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਉਹ ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

4. ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਦੇਖ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ ਉਹ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

5. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਦੋ ਭਾਗ-ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

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6. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਅਵਿਕਸਿਤ ਰੂਪ ਨੂੰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ

7. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਮਨੁੱਖਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਅੰਤਰਕ੍ਰਿਆਵਾਂ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

IV. ਇੱਕ ਸ਼ਬਦ/ਲਾਈਨ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਉੱਤਰ One Word/line Question Answers :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
‘ਮਨੁੱਖ ਇੱਕ ਸਮਾਜਿਕ ਪ੍ਰਾਣੀ ਹੈ ।’ ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਕਿਸਨੇ ਕਹੇ ਸਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਅਰਸਤੂ (Aristotle) ਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਮਨੁੱਖਾਂ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਅਲੱਗ ਚੀਜ਼ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮਨੁੱਖਾਂ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਸਭ ਤੋਂ ਅਲੱਗ ਚੀਜ਼ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦਾ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਮਨੁੱਖ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮਨੁੱਖ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ-ਪ੍ਰਾਕ੍ਰਿਤਕ ਅਤੇ ਅਪ੍ਰਾਕ੍ਰਿਤਕ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਦਿ ਕਾਲ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਜੋ ਕੁਝ ਮਨੁੱਖ ਨੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਹੈ ਉਹ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕਿਸ ਚੀਜ਼ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਅੰਤਰਕ੍ਰਿਆਵਾਂ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕਿੰਨੇ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ-ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਦੇਖ ਜਾਂ ਛੂਹ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਉਹ ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਅਸੀਂ ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਕੀ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਕਿਤਾਬਾਂ, ਕੁਰਸੀ, ਮੇਜ਼, ਪੱਖਾ, ਜਹਾਜ਼, ਟੀ.ਵੀ., ਕਾਰ ਆਦਿ ਵਰਗੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਦੇਖ ਜਾਂ ਛੂਹ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ ਉਹ ਸਭ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਅਸੀਂ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਕੀ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਇਸ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਵਿਚਾਰ, ਆਦਰਸ਼, ਤਿਮਾਨ, ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਆਦਿ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਸੱਭਿਅਤਾ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਉੱਤਰ-ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਵਿਕਸਿਤ ਰੂਪ ਨੂੰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਰਹਿਣ-ਸਹਿਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ, ਫਿਲਾਸਫ਼ੀ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ, ਵਿਚਾਰ, ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਆਦਿ ਸਾਰੇ ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਵਸਤਾਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਹ ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਸਮੁਹ ਵਲੋਂ ਹੀ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀਆਂ ਅਤੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਅਜਿਹੀ ਵਸਤੂ ਹੈ ਜਿਸ ਉੱਤੇ ਅਸੀਂ ਵਿਚਾਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਕੰਮ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਕੋਲ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੀਆਂ ਦੋ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਇੱਕ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੋਂ ਦੂਜੀ ਪੀੜ੍ਹੀ ਵੱਲ ਹਸਤਾਂਤਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਬੱਚਾ ਆਪਣੇ ਮਾਤਾ-ਪਿਤਾ ਦੇ ਵਿਵਹਾਰ ਤੋਂ ਹੀ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ।
  2. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਚੀਜ਼ ਦੀ ਖੋਜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਖੋਜ ਸਾਰਿਆਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸੱਭਿਅਤਾ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਵਿਕਸਿਤ ਰੂਪ ਨੂੰ ਹੀ ਸੱਭਿਅਤਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਿਹੜੇ ਭੌਤਿਕ ਜਾਂ ਉਪਯੋਗੀ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦੇ ਸੰਗਠਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੱਦਦ ਨਾਲ ਮਨੁੱਖ ਨੇ ਪ੍ਰਾਕ੍ਰਿਤਕ ਅਤੇ ਅਪ੍ਰਾਕ੍ਰਿਤਕ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੇ ਉੱਪਰ ਜਿੱਤ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਉੱਤੇ ਨਿਯੰਤਰਣ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹਿਣ ਇੱਕ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਦੋ ਸੱਭਿਆਚਾਰਾਂ ਦੇ ਲੋਕ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿਚ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਸਾਰੇ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੇ ਨਾਲ ਦੋਹਾਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਅਧੀਨ ਕਾਫ਼ੀ ਪਰਿਵਰਤਨ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਅਚੇਤਨ ਮਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਚੇਤਨ ਮਨ ਵਿਚ ਉਹ ਇੱਛਾਵਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜੋ ਕਿ ਸਮਾਜਿਕ ਢੰਗ ਨਾਲ ਪੂਰੀਆਂ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਅਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦਮਨ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਅਰਧਚੇਤਨ ਮਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਰਧਚੇਤਨ ਮਨ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੁੱਤੀ ਹੋਈ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਕਦੇ ਵੀ ਅਰਧਚੇਤਨ ਮਨ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਨੂੰ ਚੇਤਨ ਮਨ ਵਿੱਚ ਲਿਆ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਸਭਿਆਚਾਰਕ ਪੈਟਰਨ (Cultural Pattern) ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਤੱਤ ਅਤੇ ਸਭਿਆਚਾਰ ਪਰਿਵਾਰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਸਭਿਆਚਾਰਕ ਪੈਟਰਨਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਹਰ ਸਭਿਆਚਾਰ ਪੈਟਰਨ ਦੀ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਨਾ ਕੋਈ ਭੂਮਿਕਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਉਪ ਸਭਿਆਚਾਰ (Sub Culture) ।
ਉੱਤਰ-
ਹਰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਮੂਹ ਦੇ ਕੁਝ ਸਭਿਆਚਾਰਕ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਹਿੰਦੁਆਂ ਦਾ ਆਪਣਾ ਇਕ ਸਭਿਆਚਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਹਿੰਦੂ ਸਭਿਆਚਾਰ ਭਾਰਤੀ ਸਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਇਕ ਹਿੱਸਾ, ਜੋ ਕੁਝ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਉੱਤੇ ਆਧਾਰਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਪ ਸਭਿਆਚਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਸਭਿਆਚਾਰਕ ਪ੍ਰਸਾਰ (Cultural Diffusion) ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਇਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਸਭਿਆਚਾਰ ਪੈਟਰਨ ਦੂਜੇ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਵੀ ਪ੍ਰਚਲਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਸਾਰ ਨੂੰ ਸਭਿਆਚਾਰ ਪ੍ਰਸਾਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ | ਪਹਿਲਾਂ ਅਚਾਨਕ ਅਤੇ ਸੰਯੋਗ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਦੂਜਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ਿਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਪ੍ਰਸਾਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਮਨੁੱਖੀ ਸਮਾਜ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਮਨੁੱਖੀ ਸਮਾਜ ਨੂੰ ਪਸ਼ੂ ਸਮਾਜ ਨਾਲੋਂ ਵੱਖ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਅਕਤੀ ਵੀ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਦੂਸਰੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨਾਲੋਂ, ਇਕ ਸਮੂਹ ਜਾਂ ਇਕ ਸਮੁਦਾਇ ਨੂੰ ਦੂਸਰੇ ਸਮੂਹ ਜਾਂ ਸਮੁਦਾਇਆਂ ਨਾਲੋਂ ਵੱਖ ਵੀ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਚ ਅਸੀਂ ਉਹ ਸਭ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਦੇ ਹਾਂ, ਜੋ ਕੁਝ ਵੀ ਮਨੁੱਖ ਸਮਾਜ ਵਿਚੋਂ ਹਿਣ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ; ਜਿਵੇਂ-ਰੀਤੀ-ਰਿਵਾਜ, ਕਾਨੂੰਨ, ਪਹਿਰਾਵਾ, ਸੰਗੀਤ, ਭਾਸ਼ਾ, ਸਾਹਿਤ, ਗਿਆਨ, ਆਦਰਸ਼, ਲੋਕਾਚਾਰ, ਲੋਕਰੀਤਾਂ ਆਦਿ । ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਈ ਹਰ ਚੀਜ਼ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕਹਾਉਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕੀ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਅਮੂਰਤ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਮੂਰਤ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਅਮੂਰਤ ਵੀ । ਇਸ ਵਿਚ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਭੌਤਿਕ ਤੱਤਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕੁਰਸੀ, ਮਕਾਨ, ਸਕੂਟਰ ਆਦਿ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਤੇ ਇਹ ਸਭ ਵਸਤਾਂ ਮੂਰਤ ਹਨ । ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਇਹ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਮੂਰਤ ਦੱਸਦੇ ਹਨ । ਪਰੰਤੂ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਵਿਸ਼ਵਾਸ, ਰੀਤੀ-ਰਿਵਾਜਾਂ ਆਦਿ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਇਹ ਸਭ ਵਸਤਾਂ ਅਮੂਰਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਭਾਵ ਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਵੇਖ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ । ਕਹਿਣ ਦਾ ਅਰਥ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਾ ਕੇਵਲ ਮੂਰਤ ਹੈ ਬਲਕਿ ਅਮੂਰਤ ਵੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਵਿਚ ਉਪਰੋਕਤ ਦੋਨੋਂ ਤੱਤ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੀਆਂ ਦੋ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਸੰਚਾਰ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੋਂ ਪੀੜ੍ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ-ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀਆਂ ਪਿਛਲੀ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਦੇ ਲਈ ਕੁਝ ਨਾ ਕੁਝ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਕੋਈ ਵੀ ਚੀਜ਼ ਨਵੇਂ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਆਰੰਭ ਜਾਂ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ । ਇਹ ਸੰਚਾਰ ਦੀ ਇਕ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  2. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਸਮਾਜਿਕ ਹੈ-ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਸਮਾਜਿਕ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਸਮਾਜ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਿਣਤੀ ਵਾਲੇ ਵਿਅਕਤੀ ਇਸ ਨੂੰ ਅਪਣਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਸਰਬਵਿਆਪਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਅਪਣਾਏ ਜਾਣਾ ਹੀ ਇਸ ਦਾ ਇਕ ਜ਼ਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਸਮਾਜਿਕ ਹੈ । ਕਿਵੇਂ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਨਾ ਹੋ ਕੇ ਸਮਾਜਿਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਬਹੁ-ਗਿਣਤੀ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਸਵੀਕਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਭੌਤਿਕ ਜਾਂ ਅਭੌਤਿਕ ਤੱਤ ਨੂੰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਦੋ ਜਾਂ ਚਾਰ ਵਿਅਕਤੀ ਹੀ ਅਪਣਾਉਣ ਤਾਂ ਇਹ ਤੱਤ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਹੀਂ ਕਹੇ ਜਾ ਸਕਦੇ । ਪਰੰਤੂ ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਸਾਰੇ ਹੀ ਮੈਂਬਰ ਸਵੀਕਾਰ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਇਹ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਇਸ ਨੂੰ ਸਮਾਜਿਕ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਆਗਬਰਨ ਦੇ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਸੰਬੰਧੀ ਵਿਚਾਰ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਗਬਰਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਰਾਸਤ ਹੀ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਦੋ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ ।

  1. ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ (Material Culture) – ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਚ ਉਹ ਸਭ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦੀਆਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਵੇਖ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਜਾਂ ਸਪਰਸ਼ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਜਿਵੇਂ-ਬਰਤਨ, ਕੱਪੜੇ, ਮਸ਼ੀਨਾਂ, ਬੱਸਾਂ, ਫਰਨੀਚਰ ਆਦਿ ।
  2. ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ (Non-Material Culture) – ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਚ ਅਮੂਰਤ ਵਸਤਾਂ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਆਦਰਸ਼ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ, ਰੀਤੀ-ਰਿਵਾਜ ਆਦਿ ।

ਆਗਬਰਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਵਿਸ਼ਲੇਸ਼ਣ ਦੇ ਲਈ ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿਚ ਅੰਤਰ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਧਿਆਨ ਦੇਣਾ ਵੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਇਕਾਈ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਦੇ ਪਰਸਪਰ ਸੰਬੰਧਿਤ ਭਾਗ ਹਨ ।’’

ਸ਼ਨ 6.
ਕਿਸ ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀ ਨੇ ਅਤੇ ਕਦੋਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਪਛੜੇਵਾਂ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਬਰਨ ਨੇ ਆਪਣੀ ਕਿਤਾਬ ਸਮਾਜਿਕ ਪਰਿਵਰਤਨ (Social Change) ਦੇ ਵਿਚ 1921 ਵਿਚ ਇਸ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ । ਇਸ ਦਾ ਅਰਥ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਇਕ ਭਾਗ ਤੇਜ਼ ਰਫਤਾਰ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਲੰਘ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਅੱਗੇ ਅਤੇ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿਣ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਪਛੜੇਵਾਂ (Cultural lag) ਕਹਿੰਦੇ ਹਾਂ । ਇਹ ਇੱਕੋ ਹੀ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਦੀਆਂ ਅਸਮਾਨ ਦਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਪਿੱਛੜਾਪਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਅੰਗ੍ਰੇਜ਼ੀ ਦੇ ਸ਼ਬਦ ‘lag’ ਦਾ ਸ਼ਾਬਦਿਕ ਅਰਥ ਹੈ ‘to fall behind’ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿ ਜਾਣਾ । ਇਸ ਦਾ ਅਰਥ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿ ਜਾਣਾ ਜਾਂ ਪੱਛੜ ਜਾਣ ਤੋਂ ਹੈ । ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਹਰ ਇਕ ਵਸਤੂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਭਾਗਾਂ ਤੋਂ ਮਿਲ ਕੇ ਬਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਪਾਏ ਗਏ ਸਾਰੇ ਭਾਗ ਆਪਸ ਵਿਚ ਇਕ ਦੂਸਰੇ ਨਾਲ ਅੰਤਰ-ਸੰਬੰਧਿਤ ‘Inter-related’ ਵੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਜਦੋਂ ਇਕ ਭਾਗ ਵਿਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਸਮਾਜ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਭਾਗਾਂ ਉੱਪਰ ਵੀ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਡਬਲਿਉ. ਜੀ. ਆਗਬਰਨ (W. G. Ogburn) ਨੇ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਦੋ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ-ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ । ਇਸ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇਕ ਹਿੱਸੇ ਵਿਚ ਪਾਇਆ ਗਿਆ ਪਰਿਵਰਤਨ ਦੂਸਰੇ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਭਾਵ ਕਿ ਇਕ ਹਿੱਸੇ ਵਿਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦੂਸਰੇ ਵਿਚ ਹੌਲੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ । ਹੌਲੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹਿੱਸਾ ਕੁਝ ਦੇਰ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਕੁੱਝ ਸਮਾਂ ਬੀਤਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਆਪਣੇ ਆਪ ਪਰਿਵਰਤਨ ਦੇ ਅਨੁਕੂਲ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਅੰਤਰ ਨੂੰ ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਪਿੱਛੜਾਪਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 5 ਸਭਿਆਚਾਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਸਿੱਖਿਆ ਹੋਇਆ ਵਿਵਹਾਰ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਜਦੋਂ ਵਿਅਕਤੀ ਜਨਮ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਜੈਵਿਕ ਮਨੁੱਖ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਪਰੰਤੂ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਉਹ ਸਮਾਜ ਦੇ ਦੂਸਰੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਸੰਪਰਕ ਦੇ ਨਾਲ ਉਸ ਦੀ ਬਾਕੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨਾਲ ਅੰਤਰ-ਕਿਰਿਆ (Inter Action) ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਮਨੁੱਖੀ ਜੀਵ ਤੋਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਜੀਵ ਬਣਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਸਿੱਖਿਆ ਹੋਇਆ ਵਿਵਹਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸੱਭਿਅਤਾ ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਅਤੇ ਸੱਭਿਅਤਾ ਵਿੱਚ ਕੀ ਅੰਤਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਦੋ ਭਾਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ-ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ । ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਵੇਖ ਜਾਂ ਛੂਹ ਸਕਦੇ ਹਾਂ; ਜਿਵੇਂ ਕੁਰਸੀ, ਮੇਜ਼, ਮਸ਼ੀਨ, ਕਿਤਾਬ, ਇਮਾਰਤ, ਕਾਰ-ਜਹਾਜ਼ ਆਦਿ । ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਉਹ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਵੇਖ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ ਸਿਰਫ਼ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ; ਜਿਵੇਂ ਵਿਚਾਰ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ, ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨ ਦੇ ਤਰੀਕੇ, ਧਰਮ, ਸੰਸਕਾਰ, ਆਦਰਸ਼ ਆਦਿ । ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਮੂਰਤ (Concrete) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਅਮੂਰਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਹੀ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦਾ ਅਰਥ ਵੀ ਕੱਢਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਜਿਹੜੀਆਂ ਭੌਤਿਕ ਅਤੇ ਉਪਯੋਗੀ ਵਸਤੂਆਂ ਜਾਂ ਸੰਦਾਂ ਅਤੇ ਸੰਗਠਨਾਂ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੱਦਦ ਨਾਲ ਮਨੁੱਖ ਨੇ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਤੀ ਜਾਂ ਪ੍ਰਾਕ੍ਰਿਤਕ ਵਾਤਾਵਰਨ ਉੱਪਰ ਜਿੱਤ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਉੱਤੇ ਨਿਯੰਤਰਨ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਨੂੰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸਾਡੀ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹਨ । ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਵਿਕਸਿਤ ਰੂਪ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਭ ਕੁੱਝ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਵਿਅਕਤੀ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਹੁਣ ਤਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਪਰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਉਹ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਮਨੁੱਖ ਆਧੁਨਿਕ ਬਣਿਆ ।

ਸੱਭਿਅਤਾ ਦੇ ਸਹੀ ਅਰਥ ਜਾਣਨ ਲਈ ਇਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਕੁਝ ਉੱਘੇ ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਦਿੱਤੀ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦੀਆਂ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਵੇਖ ਲਈਆਂ ਜਾਣ । ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਜਟਿਲ ਅਤੇ ਵਿਕਸਿਤ ਰੂਪ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਇੱਕ ਤੁਲਨਾਤਮਕ ਸ਼ਬਦ ਹੈ ।

  • ਵੈਬਰ (Weber) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸੱਭਿਅਤਾ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗੀ ਭੌਤਿਕ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਨ ਅਤੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਦੀਆਂ ਵਿਧੀਆਂ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।”
  • ਵਿਚਟਰ (Fichter) ਨੇ ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ Civilized ਜਾਂ ਸੱਭਿਅ ਵਿਅਕਤੀ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਹੈ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸੱਭਿਅ ਵਿਅਕਤੀ ਉਹ ਲੋਕ ਹਨ ਜੋ ਆਪਣੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਥਿਰ, ਪੜ੍ਹੇ-ਲਿਖੇ ਅਤੇ ਜਟਿਲ ਹਨ ।”
  • ਆਗਬਰਨ ਅਤੇ ਨਿਮਕੌਫ (Ogburn and Nimkoff) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਪਰਾਜੈਵ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਬਾਅਦ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ।”
    ਇਸ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਤੋਂ ਪਤਾ ਚਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਆਗਬਰਨ ਅਤੇ ਨਿਮਕੌਫ਼ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਸੁਧਾਰਿਆ ਰੁਪ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਦੀ ਅਵਸਥਾ ਹੈ ।
  • ਗਰੀਨ (Green) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, ਇੱਕ ਸਭਿਆਚਾਰ ਜਾਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਕੇਵਲ ਤਦ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਬਣਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਉਸ ਕੋਲ ਇੱਕ ਲਿਖਤ ਭਾਸ਼ਾ, ਵਿਗਿਆਨ ਦਰਸ਼ਨ, ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ੀਕਰਨ ਵਾਲੀ ਕਿਰਤ ਵੰਡ, ਇੱਕ ਜਟਿਲ ਤਕਨੀਕੀ ਅਤੇ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਪੱਧਤੀ ਹੋਵੇ ।”
  • ਮੈਕਾਈਵਰ (MacIver) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸਭਿਅਤਾ ਲੋੜਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਨ ਦਾ ਸਾਧਨ ਹੈ ।” ਮੈਕਾਈਵਰ ਕਹਿੰਦਾ ਹੈ। ਕਿ ਸਭਿਅਤਾ ਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਆ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜੋ ਉਪਯੋਗੀ ਹੋਣ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਫਿਰ ਮੈਕਾਈਵਰ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸੱਭਿਅਤਾ ਦਾ ਅਰਥ ਉਪਯੋਗੀ ਵਸਤਾਂ, ਜੀਵਨ ਦੀਆਂ ਸਥਿਤੀਆਂ ਨੂੰ ਨਿਯੰਤਰਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਮਾਨਵ ਦੁਆਰਾ ਯੋਜਿਤ ਸਾਰੇ ਸੰਗਠਨ ਅਤੇ ਯੰਤਰਕਰਤਾ ਹਨ ।”

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵੇਖਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਸੁਧਰਿਆ ਰੂਪ ਹੀ ਸੱਭਿਅਤਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜਸ਼ਾਸਤਰੀਆਂ ਨੇ ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਉਚੇਰਾ ਪੱਧਰ ਮੰਨਿਆ ਹੈ । ਪਰ ਇੱਥੇ ਆ ਕੇ ਇੱਕ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਖੜੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀ ਮੈਕਾਈਵਰ ਅਤੇ ਪੇਜ (Maclver and Page) ਇਸ ਨਾਲ ਸਹਿਮਤ ਨਹੀਂ ਹਨ ਕਿ ਸਿਰਫ਼ ਭੌਤਿਕ ਚੀਜ਼ਾਂ ਹੀ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹਨ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਬੌਧਿਕ, ਧਾਰਮਿਕ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ, ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਆਦਿ ਦੀ ਉੱਨਤੀ ਜਾਂ ਤਰੱਕੀ ਵੀ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ।

ਮੈਕਾਈਵਰ ਅਤੇ ਪੇਜ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਮਾਨਵ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਜਿਵੇਂ ਮੋਟਰ, ਕਾਰ, ਬੈਂਕ, ਪੈਸਾ, ਨੋਟ, ਇਮਾਰਤਾਂ ਆਦਿ ਸਭ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹਨ ਪਰ ਇਹ ਸਭ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦੇ ਹੋਏ, ਸਮਾਜਿਕ ਹਾਲਾਤਾਂ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਦੇ ਹੋਏ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਈਆਂ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਭੌਤਿਕ ਪੱਖ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸਮਾਜਿਕ ਪੱਖ ਨੂੰ ਵੀ ਇਸ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਲਈ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਧਰਮ, ਕਲਾ, ਦਰਸ਼ਨ, ਸਾਹਿਤ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਆਦਿ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਮਾਨਵ ਨਿਰਮਿਤ ਭੌਤਿਕ ਵਸਤਾਂ ਸੱਭਿਅਤਾ ਹਨ ਅਤੇ ਮਾਨਵ ਨਿਰਮਿਤ ਅਭੌਤਿਕ ਵਸਤਾਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹਨ ।

ਇੱਥੇ ਆ ਕੇ ਸਾਨੂੰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਅਤੇ ਸੱਭਿਅਤਾ ਵਿੱਚ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਅੰਤਰਾਂ ਦਾ ਪਤਾ ਚਲਦਾ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਹੇਠਾਂ ਲਿਖਿਆ ਹੈ-

1.ਸੱਭਿਅਤਾ ਉੱਨਤੀ ਕਰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਹੀਂ (Civilization always develops but not the culture) – ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਪੁਰਾਣੇ ਜ਼ਮਾਨੇ ਅਤੇ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮਾਜ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਇਹ ਗੱਲ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਕਿ ਸੱਭਿਅਤਾ ਤਾਂ ਉੱਨਤੀ ਕਰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਮਸ਼ੀਨਾਂ, ਕਾਰਾਂ, ਮੋਟਰਾਂ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਿ ਭੌਤਿਕ ਵਸਤੁਆਂ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਤੇ ਉੱਨਤੀ ਆਈ ਹੈ ਪਰ ਧਰਮ, ਕਲਾ, ਵਿਚਾਰਾਂ ਆਦਿ ਬਾਰੇ ਅਸੀਂ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਹੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਜੋ ਅਭੌਤਿਕ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹਨ । ਕੀ ਅੱਜ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਵਿਚਾਰ, ਧਰਮ, ਆਦਰਸ਼, ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਆਦਿ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਉੱਚੇ ਅਤੇ ਉੱਨਤ ਹਨ ? ਸ਼ਾਇਦ ਨਹੀਂ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਸੱਭਿਅਤਾ ਉੱਨਤੀ ਕਰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਹੀਂ ।

2. ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਬਦਲਾਓ ਦੇ ਹਿਣ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਨਹੀਂ (Civilization can be taken without change but not the culture) – ਇਹ ਗੱਲ ਬਿਲਕੁਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਬਦਲਾਓ ਦੇ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਨਹੀਂ । ਕਿਸੇ ਵੀ ਮਸ਼ੀਨ, ਟਰੈਕਟਰ, ਮੋਟਰ ਕਾਰ ਆਦਿ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਬਦਲਾਓ ਤੋਂ ਇਕ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨੂੰ ਦੂਜੀ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੋਂ ਸਥਾਨਾਂਤਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕੀ ਇਹੀ ਚੀਜ਼ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਸ਼ਾਇਦ ਨਹੀਂ । ਵਿਚਾਰਾਂ, ਧਰਮ, ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਬਦਲਾਓ ਦੇ ਗਹਿਣ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਵਿਚਾਰ, ਧਰਮ, ਆਦਰਸ਼ ਜਿਵੇਂ ਜਿਵੇਂ ਅਗਲੀ ਪੀੜੀ ਨੂੰ ਸੌਂਪੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਬਦਲਾਓ ਆਉਣਾ ਲਾਜ਼ਮੀ ਹੈ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਅਰਬ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਮੁਸਲਮਾਨਾਂ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਮੁਸਲਮਾਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਾਫ਼ੀ ਫ਼ਰਕ ਹੈ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਇਸਾਈਆਂ ਅਤੇ ਯੂਰਪੀ ਇਸਾਈਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਬਹੁਤ ਫ਼ਰਕ ਹੈ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 5 ਸਭਿਆਚਾਰ

3. ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਆਂਤਰਿਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਅਤਾ ਬਾਹਰੀ ਹੈ, (Culture is internal and civilization is external) – ਸੱਭਿਅਤਾ ਵਿੱਚ ਬਾਹਰ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਇਹ ਮੂਰਤ (Concrete) ਹੈ । ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਦੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ; ਜਿਵੇਂ-ਵਿਚਾਰ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ, ਧਰਮ, ਆਦਰਸ਼, ਵਿਵਹਾਰ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਆਦਿ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਬਾਹਰੀ ਹੈ ਅਤੇ ਅਮੂਰਤ (Abstract) ਹੈ । ਸੱਭਿਅਤਾ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟਾਉਂਦੀ ਹੈ ।

4. ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਮਾਪਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਨਹੀਂ (Civilization can be measured but not culture) – ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਮਾਪਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਨਹੀਂ । ਸੱਭਿਅਤਾ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਉਪਯੋਗ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਨਿਸਚਿਤ ਮਾਪਦੰਡਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਮਾਪਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ; ਜਿਵੇਂ-ਆਦਰਸ਼ਾਂ, ਧਰਮ, ਵਿਵਹਾਰ ਦੇ ਤਰੀਕੇ, ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਮਾਪਦੰਡਾਂ ਉੱਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਮਾਪਾਂਗੇ, ਇਹ ਤਾਂ ਬਣਾਏ ਹੀ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦੇ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਮਾਪਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ।

5. ਸੱਭਿਅਤਾ ਬਗੈਰ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ਾਂ ਦੇ ਸੰਚਾਰਿਤ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਹੀਂ (Civilization can be passed without efforts but not the culture) – ਸੱਭਿਅਤਾ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਵਲੋਂ ਉਪਯੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸੰਬੰਧ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਬਾਹਰੀ ਜੀਵਨ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਅਗਲੀ ਪੀੜੀ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਦੇਣ ਲਈ ਕਿਸੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਇਸ ਦੇ ਉਲਟ ਹੈ । ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਸੰਬੰਧ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨਾਲ ਹੈ ਜੋ ਸਾਡੇ ਅੰਦਰ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੋਈ ਵੇਖ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀ ਤਕ ਨਾ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਹ ਉਸ ਵਿਅਕਤੀ ਤਕ ਹੀ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ । ਇਸ ਲਈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀ ਤਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਵਾਸਤੇ ਖ਼ਾਸ ਯਤਨਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਸੱਭਿਅਤਾ ਬਗੈਰ ਕਿਸੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਦੇ ਅਪਣਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨੂੰ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਪਣਾਇਆ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ।

6. ਸੱਭਿਅਤਾ ਬਗੈਰ ਹਾਨੀ ਦੇ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਨਹੀਂ (Civilization borrowed without change but not culture) – ਸੱਭਿਅਤਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੀ ਸੰਚਾਰ ਸਾਧਨ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਏ ਹਨ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਸੱਭਿਅਤਾ ਦੇ ਸੰਦ ਸਾਰੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿੱਚ ਫੈਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਫਿਲਮ, ਟੀ.ਵੀ., ਰੇਡੀਓ ਕਿਸੇ ਇਕ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਹਨ । ਹਰ ਇਕ ਦੇਸ਼ ਤਕਨੀਕੀ ਖੋਜਾਂ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਇਹਨਾਂ ਖੋਜਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ । ਸੱਭਿਅਤਾ ਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਸਮਾਜਿਕ ਪਰਿਸਥਿਤੀਆਂ ਅਨੁਸਾਰ ਥੋੜਾ ਬਹੁਤ ਬਦਲਿਆ ਜਾਂ ਸੁਧਾਰਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦਾ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਗ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਭਿਅਤਾ ਦਾ ਵਿਸਤਾਰ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ, ਛੇਤੀ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਬੁਰੇ ਦੀ ਚਿੰਤਾ ਦੇ ਬਗ਼ੈਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਨ ਸੰਕੋਚ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise

Punjab State Board PSEB 11th Class Maths Book Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Maths Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise

Question 1.
How many words, with or without meaning, each of 2 vowels and 3 consonants can be formed from the letters of the word DAUGHTER?
Answer.
There are 8 letters in the word ‘DAUGHTER’ including 3 vowels and 5 consonants.
We have to select 2 vowels out of 3 vowels and 3 consonants out of 5 consonants.
∴ Number of ways of selection = \({ }^{3} C_{2} \times{ }^{5} C_{3}\) = 3 × 10 = 30
Now, each word contains 5 letters which can be arranged among themselves in 5! ways.
So, total number of words = 5 ! x 30 = 120 × 30 = 3600

Question 2.
How many words, with or without meaning, can be formed using all the letters of the word EQUATION at a time so that the vowels and consonants occur together?
Answer.
The word EQUATION consists of 5 vowels and 3 consonants.
∴ 5 vowels can be arranged in 5! = 120 ways.
3 consonants can be arranged in 3! = 6 ways
The two blockof vowels and consonants can be arranged in 2! = 2 ways.
∴ The no. of world which can be formed with 1 letters of the word EQUATION so that vowels and consonants occur together = 120 × 6 × 2 = 1440.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise

Question 3.
A committee of 7 has to be formed from 9 boys and 4 girls. In how many ways can this be done when the committee consists of:
(i) exactly 3 girls?
(ii) atleast 3 girls?
(iii) atmost 3 girls?
Answer.
A committee of 7 has to be formed from 9 boys and 4 girls.
(i) Since exactly 3 girls are to be there in every committee, each committee must consist of (7 – 3) = 4 boys only.
Thus, in this case, required number of ways = \({ }^{4} C_{3} \times{ }^{9} C_{4}\)
= \(\frac{4 !}{3 ! 1 !} \times \frac{9 !}{4 ! 5 !}\)
= \(4 \times \frac{9 \times 8 \times 7 \times 6 \times 5 !}{4 \times 3 \times 2 \times 1 \times 5 !}\) = 504.

(ii) Since atleast 3 girls are to be there in every committee, the committee can consist of
(a) 3 girls and 4 boys or
(b) 4 girls and 3 boys
3 girls and 4 boys can be selected in \({ }^{4} C_{3} \times{ }^{9} C_{4}\) ways.
4 girls and 3 boys can be selected in \({ }^{4} \mathrm{C}_{4} \times{ }^{9} \mathrm{C}_{3}\) ways.
Therefore, in this case, required number of ways
= \({ }^{4} C_{3} \times{ }^{9} C_{4}\) + \({ }^{4} \mathrm{C}_{4} \times{ }^{9} \mathrm{C}_{3}\)
= 504 + 84 = 588.

(iii) Since atmost 3 girls are to be there in every committee, the committee can consist of
(a) 3 girls and 4 boys
(b) 2 girls and 5 boys
(c) 1 girl and 6 boys
(d) No girl and 7 boys
3 girls and 4 boys can be selected in \({ }^{4} C_{3} \times{ }^{9} C_{4}\) ways.
2 girls and 5 boys can be selected in \({ }^{4} C_{2} \times{ }^{9} C_{5}\) ways.
1 girl and 6 boys can be selected in \({ }^{4} C_{1} \times{ }^{9} C_{6}\) ways.
No girl and 7 boys can be selected in \({ }^{4} C_{0} \times{ }^{9} C_{7}\) ways.
Therefore, in this case, required number, of ways :
= \({ }^{4} \mathrm{C}_{3} \times{ }^{9} \mathrm{C}_{4}+{ }^{4} \mathrm{C}_{2} \times{ }^{9} \mathrm{C}_{5}+{ }^{4} \mathrm{C}_{1} \times{ }^{9} \mathrm{C}_{6}+{ }^{4} \mathrm{C}_{0} \times{ }^{9} \mathrm{C}_{7}\)

= \(\frac{4 !}{3 ! 1 !} \times \frac{9 !}{4 ! 5 !}+\frac{4 !}{2 ! 2 !} \times \frac{9 !}{5 ! 4 !}+\frac{4 !}{1 ! 3 !} \times \frac{9 !}{6 ! 3 !}+\frac{4 !}{0 ! 4 !} \times \frac{9 !}{7 ! 2 !}\)

= 504 + 756 + 336 + 36 = 1632.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise

Question 4.
If the different permutations of all the letter of the word EXAMINATION are listed as in a dictionary, how many words are there in this list before the first word starting with E?
Answer.
Words starting with A are formed with the letters 2I’s, 2N’s, A, E, X, M, T, O.
Number of words formed by these letters = \(\frac{10 !}{2 ! 2 !}\)

= \(\frac{10 \times 9 \times 8 \times 7 \times 6 \times 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1}{2 \times 2}\) = 907200
Then the words starting with E, I, M, N, O, T, X will be formed.
∴ Number of words before the first word starting with E is formed = 907200.

Question 5.
How many 6-digit numbers can be formed from the digits 0, 1, 3, 5, 7 and 9 which are divisible by 10 and no digit is repeated?
Answer.
A number is divisible by 10 if its units digits is 0.
Therefore, 0 is fixed at the units place.
Therefore, there will be as many ways as there are ways of filling 5 vacant places PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise 1 in succession by the remaining 5 digits (i.e., 1, 3, 5, 7 and 9).
The 5 vacant places can be filled in 5! ways.
Hence, required number of 6-digit numbers = 5! = 120.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise width=

Question 6.
The English alphabet has 5 vowels and 21 consonants. How many words with two different vowels and 2 different consonants can be formed from the alphabet?
Answer.
2 different vowels and 2 different consonants are to be selected from the English alphabet.
Since there are 5 vowels in the English alphabet, number of ways of selecting 2 different vowels from the alphabet
= \({ }^{5} C_{2}=\frac{5 !}{2 ! 3 !}\) = 10
Since there are 21 consonants in the English alphabet, number of ways of selecting 2 different consonants from the alphabet
= \({ }^{21} \mathrm{C}_{2}=\frac{21 !}{2 ! 19 !}\)
= 210
Therefore, number of combinations of 2 different vowels and 2 different consonants = 10 × 210 = 2100.
Each of these 2100 combinations has 4 letters, which can be arranged among themselves in 4! ways.
Therefore, required number of words = 2100 × 4! = 50400.

Question 7.
In an examination, a question paper consists of 12 questions divided into two parts i.e., Part I and Part H, containing 5 and 7 questions, respectively. A student is required to attempt 8 questions in all, selecting at least 3 from each part. In how many ways can a student select the questions?
Answer.
Student may select 8 questions according to following scheme

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise 2

= 10 × 7 + 5 × 35 + 5 × 35
= 70 + 175 +175 = 420 ways.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise

Question 8.
Determine the number of 5-card combinations out of a deck of 52 cards if each selection of 5 cards has exactly one king.
Answer.
From a deck of 52 cards, 5-card combinations have to be made in such a way that in each selection of 5 cards, there is exactly one king.
In a deck of 52 cards, there are 4 kings.
1 king can be selected out of 4 kings in \({ }^{4} \mathrm{C}_{1}\) ways.
4 cards out of the remaining 48 cards can be selected in \({ }^{48} \mathrm{C}_{4}\) ways.
Thus, the required number of 5-card combinations is \({ }^{4} \mathrm{C}_{1} \times{ }^{48} \mathrm{C}_{4}\).

Question 9.
It is required to seat 5 men and 4 women in a row so that the women occupy the even places. How many such arrangements are possible?
Answer.
5 men and 4 women are to be seated in a row such that the women occupy the even places.
The 5 men can be seated in 5! ways.
For each arrangement, the 4 women can be seated only at the cross marked places (so that women occupy the even places).
M × M × M × M × M
Therefore, the women can be seated in 4! ways.
Thus, possible number of arrangements = 4! × 5!
= 24 × 120 = 2880.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise

Question 10.
From a class of 25 students, 10 are to be chosen for an excursion party. There are 3 students who decide that either all of them will join or none of them will join. In how many ways can the excursion party be chosen?
Answer.
There are two cases :
(a) If the 3 students join the excursion party then the number of combinations will be P1 = C (22, 7).
(b) If the 3 students do not join the excursion party. Then the number of combinations P2 = C (22, 10).
If P is the combination of choosing the excursion party, then
P = P1 + P2
= C(22, 7) + C(22,10)
= \(\frac{22 !}{7 ! 15 !}+\frac{22 !}{10 ! 12 !}\)

= \(\frac{22 \times 21 \times 20 \times 19 \times 18 \times 17 \times 16 \times 15 !}{7 \times 6 \times 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1 \times 15 !}\) + \(\frac{22 \times 21 \times 20 \times 19 \times 18 \times 17 \times 16 \times 15 \times 14 \times 13 \times 12 !}{10 \times 9 \times 8 \times 7 \times 6 \times 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1 \times 12 !}\)
= 170544 + 646646 = 817190.

PSEB 11th Class Maths Solutions Chapter 7 Permutations and Combinations Miscellaneous Exercise width=

Question 11.
In how many ways can the letters of the word ASSASSINATION be arranged so that all the S’s are together?
Answer.
In the given word ASSASSINATION, the letter A appears 3 times, S appears 4 times, I appears 2 times, N appears 2 times, and all the other letters appear only once.
Since all the words have to be arranged in such a way that all the Ss are together, SSSS is treated as a single object for the time being.
This single object together with the remaining 9 objects will account for 10 objects.
These 10 objects in which there are 3 As, 2 Is, and 2 Ns can be arranged in \(\frac{10 !}{3 ! 2 ! 2 !}\) ways.
Thus, required number of ways of arranging the letters of the given word = \(\frac{10 !}{3 ! 2 ! 2 !}\)
= \(\frac{10 \times 9 \times 8 \times 7 \times 6 \times 5 \times 4 \times 3 !}{3 ! \times 2 \times 2}\)
= 151200.

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

Punjab State Board PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ Important Questions and Answers.

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਵਸਤੁਨਿਸ਼ਠ ਪ੍ਰਸ਼ਨ Objective Type Questions
I. ਬਹੁ-ਵਿਕਲਪੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ Multiple Choice Questions :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
(a) ਸਥਿਰਤਾ
(b) ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ
(c) ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਸੰਬੰਧ
(d) ਛੋਟਾ ਆਕਾਰ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਸਮਾਜਿਕ ਮਹੱਤਵ ਕੀ ਹੈ ?
(a) ਇਹ ਸਮਾਜੀਕਰਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਵਿੱਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਹਨ
(b) ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿੱਚ ਰਹਿ ਕੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
(c) ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਸਮਾਜਿਕ ਨਿਯੰਤਰਣ ਦਾ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਆਧਾਰ ਹੈ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿੱਚ ਕੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ?
(a) ਪ੍ਰਥਮਿਕ ਨਿਯੰਤਰਣ
(b) ਪ੍ਰਤਿਯੋਗਿਤਾ
(c) ਰਸਮੀ ਨਿਯੰਤਰਣ
(d) ਵਿਅਕਤੀਵਾਦਿਤਾ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਨਿਯੰਤਰਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਕਿਹੋ ਜਿਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
(a) ਵੱਡੇ
(b) ਅਨਿਸ਼ਚਿਤ
(c) ਛੋਟੇ
(d) ਅਸੀਮਿਤ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਛੋਟੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜੀ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਹੈ ?
(a) ਸਮੂਹ ਦੀ ਆਪਣੀ ਸੰਰਚਨਾ
(b) ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦਾ ਸੰਗਠਨ
(c) ਸਮਾਜ ਦੀ ਕਾਰਜਾਤਮਕ ਵੰਡ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਪਰਿਵਾਰ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦਾ ਸਮੂਹ ਹੈ ?
(a) ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ
(b) ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ
(c) ਪ੍ਰਥਮਿਕ ਸਮੂਹ
(d) ਚੇਤਨ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਕਿਹੜੇ ਸਮੂਹ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
(a) ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ
(b) ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ
(c) ਚੇਤਨ ਸਮੂਹ
(d) ਅਚੇਤਨ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
(b) ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਹੈ ?
(a) ਮਿੱਤਰਾਂ ਦਾ ਸਮੂਹ
(b) ਖੇਡ ਸਮੂਹ
(c) ਪਰਿਵਾਰ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ-
(0) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਹੈ ?
(a) ਟਰੇਡ ਯੂਨੀਅਨ
(b) ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਦਲ
(c) ਵਿਗਿਆਨਿਕਾਂ ਦਾ ਸਮੂਹ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।
ਉੱਤਰ
(d) ਉਪਰੋਕਤ ਸਾਰੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਕੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
(a) ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ
(b) ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ
(c) ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਵਸਥਾ
(d) ਲੜਾਈ ।
ਉੱਤਰ-
(a) ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਕਿਹੜਾ ਸਮੂਹ ਸਮਾਜੀਕਰਨ ਵਿੱਚ ਵੱਧ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ ?
(a) ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ
(b) ਕਸ਼ੈਤਿਜ ਸਮੂਹ
(c) ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ
(d) ਲੰਬੇ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
(c) ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ।

II. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ Fill in the blanks :

1. . ……………………… ਨੇ ਅੰਤਰ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ ਕੀਤਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਨਰ

2. …………………. ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਉਦਾਹਰਣ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਰਿਵਾਰ

3.ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ……………………… ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਰਾਬਰਟ ਮਰਟਨ

4. ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ …………………….. ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਅਸੀਂ

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5. ਜਿਹੜੇ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਬਹੁਤ ਨੇੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ …………………….. ਸਮੂਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ

6. …………………… ਸਮੂਹ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਜ਼ਰੂਰਤ ਦੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੂਰੀਆ

7. ………………………. ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਰਸਮੀ ਸੰਗਠਨੂੰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੂਤੀਆ

III. ਸਹੀ/ਗਲਤ True/False :

1. ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਇਕੱਠ ਨੂੰ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਸਮੂਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

2. ਸਮੂਹ ਦੇ ਲਈ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ

3. ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਅਤੇ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ ਕੁਲੇ ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

4. ਪ੍ਰਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਸਰੀਰਿਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ

5. ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

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6. ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਗੈਰ-ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ

7. ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਡੂੰਘੇ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ

IV. ਇੱਕ ਸ਼ਬਦ/ਲਾਈਨ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਉੱਤਰ One Word/line Question Answers :

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਜੇਕਰ 10 ਲੋਕ ਇਕੱਠੇ ਖੜ੍ਹੇ ਹੋਣਗੇ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਉਸਨੂੰ ਕੀ ਕਹਾਂਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੇਕਰ 10 ਲੋਕ ਇਕੱਠੇ ਖੜੇ ਹੋਣਗੇ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਉਸਨੂੰ ਭੀੜ ਹੀ ਕਹਾਂਗੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮੂਹ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਇਕੱਠ ਨੂੰ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਸਮੁਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸਮੂਹ ਦੇ ਲਈ ਵੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮੂਹ ਦੇ ਲਈ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸੰਬੰਧ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਮੂਹ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਮਹੱਤਵ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ, 5.
ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਇਕ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਦਿਉ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੈਕਾਈਵਰ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ,”ਸਮੂਹ ਤੋਂ ਸਾਡਾ ਅਰਥ ਕਿਸੇ ਵੀ ਅਜਿਹੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਆਪਸੀ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸ਼ਬਦ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਿਸਨੇ ਕੀਤਾ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਸ਼ਬਦ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ‘ਹਾਈਮੈਨ’ ਨੇ ਕੀਤਾ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਅਤੇ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕਿਸਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਅਤੇ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਚਾਰਲਸ ਹਰਟਨ ਕੂਲੇ ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਨਜ਼ਦੀਕ ਅਤੇ ਡੂੰਘੇ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਕੋਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਆਕਾਰ ਛੋਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸਥਿਰਤਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਉਦਾਹਰਣ ਦੇਵੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਰਿਵਾਰ, ਗੁਆਂਢ, ਖੇਡ ਸਮੂਹ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਹਨ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਸਮੂਹ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਹਿਣ ਕਰਦੇ ਹਾਂ, ਉਹ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਕਿਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਮਿਲਣ ਵਾਲੇ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਬਲਕਿ ਸੰਬੰਧ ਤਾਂ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਕਿਸਨੇ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਮਰ ਨੇ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੀ ਉਦਾਹਰਣ ਦੇਵੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦਫ਼ਤਰ, ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਦਲ ਆਦਿ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਉਦਾਹਰਣਾਂ ਹਨ ।

ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Very Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨ ਲਈ ਸਮੂਹ ਉਹਨਾਂ, ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦਾ ਇਕੱਠ ਹੈ ਜੋ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਹੋਣ ਅਤੇ ਜਿਸਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਆਪਸੀ ਸਮਾਜਿਕ ਕ੍ਰਿਆ, ਪ੍ਰਤੀਕ੍ਰਿਆ, ਸੰਬੰਧ, ਸਾਂਝੇ ਹਿੱਤ, ਚੇਤਨਾ, ਉਤੇਜਨਾਵਾਂ, ਸਵਾਰਥ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹ ਸਾਰੇ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਬੰਨ੍ਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਅਸੀਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਦਾ ਅਰਥ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਅਸੀਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਉਹ ਸਾਰੇ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਦੀ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕਾਰਨ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇਪਨ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਸਾਂਝੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਸਮੂਹ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਬਰਨ ਅਤੇ ਨਿਮਕਾਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਜਦੋਂ ਕਦੀ ਵੀ ਦੋ ਜਾਂ ਦੋ ਤੋਂ ਵੱਧ ਆਦਮੀ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਉਹ ਇੱਕ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ।”

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਮੂਹ ਵਿੱਚ ਵਿਵਹਾਰਾਂ ਦੀ ਸਮਾਨਤਾ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਇਸਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਵਹਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਮਾਨਤਾ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਆਦਰਸ਼, ਕੀਮਤਾਂ, ਆਦਤਾਂ ਆਦਿ ਸਮਾਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਵਿਵਹਾਰਾਂ ਦਾ ਮਿਲਾਪ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਕੂਲੇ ਦਾ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਾਰਲਸ ਹਰਟਨ ਕੂਲੇ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਤਿੰਨ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ :-

  1. ਪਰਿਵਾਰ ਸਮੂਹ (Family)
  2. ਖੇਡ ਸਮੂਹ (Play Group)
  3. ਗਆਂਢ (Neighourhood) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੁਹ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਸਮੂਹ ਜਿਹੜੇ ਸਾਡੇ ਸਭ ਤੋਂ ਨਜ਼ਦੀਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਡਾ ਰੋਜ਼ ਦਾ ਉੱਠਣਾ ਬੈਠਣਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਿਸ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਸਾਡੀ ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਉਹ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਛੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਛੋਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਲੋਕ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਜਾਣਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਕਾਰਨ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸੰਪਰਕ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸੰਬੰਧ ਗੂੜੇ ਅਤੇ ਨਿੱਘੇ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨਾਲ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧਾਂ ‘ਤੇ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਸਮੂਹ ਜਿਹੜੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਜਿਹੜੇ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦੇ ਅਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਉਹ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੀ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰਸਮੀ ਅਤੇ ਅਵਿਕਤਕ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੁਤਾਬਿਕ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਅਪਣਾਪਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ।

ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ (Short Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਦੂਸਰੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਅਤੇ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੋਣਾ ਹੈ । ਕਿਸੇ ਵੀ ਜਗਾ ‘ਤੇ ਜੇਕਰ ਵਿਅਕਤੀ ਇਕੱਠੇ ਖਲੋ ਜਾਣ ਤਾਂ ਉਹ ਸਮੂਹ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿਉਂਕਿ ਸਮੂਹ ਇਕ ਚੇਤੰਨ ਅਵਸਥਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿਚ ਕੇਵਲ ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਹੀ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਆਪਸੀ ਭਾਵਨਾ ਤੇ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦਾ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਸਾਂਝਾਪਨ, ਪਰਸਪਰ ਉਤੇਜਨਾ, ਹਿੱਤਾਂ ਦਾ ਹੋਣਾ ਆਦਿ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮਨਰ ਦਾ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਨਰ ਨੇ ਆਪਣੀ ਕਿਤਾਬ ‘ਫੋਕਵੇਜ਼’ (Folkways) ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਦੇ ਪੱਖ ਤੋਂ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਵਰਗੀਕ੍ਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜੋ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹੈ-

  1. ਅੰਤਰ ਸਮੂਹ ਤੇ ਅਸੀਂ ਸਮੂਹ (In group and we group) ਇਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਮਝਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਮੇਰਾ ਸ਼ਹਿਰ, ਮੇਰਾ ਘਰ ਆਦਿ ।
  2. ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਉਹ ਸਮੂਹ (Out Group and they group) ਇਹ ਉਹ ਸਮੁਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਖੁਦ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਬਲਕਿ ਬਗਾਨਾ ਸਮਝਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਦੂਸਰਾ ਘਰ, ਦੂਸਰਾ ਸਮੁਦਾਇ, ਦੂਸਰਾ ਸ਼ਹਿਰ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਮੁੱਢਲੇ ਜਾਂ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਬਾਰੇ ਦਿੱਤੀ ਕੂਲੇ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕੂਲੇ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ‘ਥਮਿਕ’ ਸਮੂਹ ਤੋਂ ਭਾਵ ਉਹ ਸਮੂਹ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਆਹਮੋ-ਸਾਹਮਣੇ ਦਾ ਗੂੜ੍ਹਾ ਸੰਬੰਧ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਪਾਥਮਿਕ ਅਨੇਕ ਅਰਥਾਂ ਵਿਚ ਹਨ ਪਰੰਤੁ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਇਸ ਅਰਥ ਵਿਚ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਸੁਭਾਅ ਅਤੇ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਨ ਵਿਚ ਮੌਲਿਕ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੜੇ ਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਅਕਤੀਤਵ ਸਾਂਝੀ ਪੂਰਨਤਾ ਵਿਚ ਘੁਲ-ਮਿਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਜੋ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਕਈ ਅੰਤਰਾਂ ਲਈ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਸਵੈ ਵੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸਾਂਝਾ ਜੀਵਨ ਤੇ ਉਦੇਸ਼ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸ਼ਾਇਦ ਇਸ ਪੂਰਨਤਾ ਨੂੰ ਵਰਣਨ ਕਰਨ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਆਸਾਨ ਤਰੀਕਾ ਇਸ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਕਹਿਣ ਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿਚ ਹਮਦਰਦੀ ਤੇ ਪਰਸਪਰ ਪਛਾਣ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਲੁਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ‘ਅਸੀਂ’ ਇਸ ਦਾ ਕੁਦਰਤੀ ਪ੍ਰਗਟਾਵਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ।
ਉੱਤਰ-

  • ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਵਿਅਕਤੀ ਜਿਹੜੇ ਇਕ ਦੂਸਰੇ ਦੇ ਨਜ਼ਦੀਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦਾ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਉਹ ਇਕ ਦੂਸਰੇ ਦੀ ਮਦਦ ਵੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਛੋਟਾ ਭਾਵ ਸੀਮਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸੀ ਕਰਕੇ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਇਕ ਦੂਸਰੇ ਨੂੰ ਜਾਨਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਆਕਾਰ ਛੋਟਾ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸੰਪਰਕ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸੰਬੰਧ ਗੁੜੇ ਤੇ ਨਿੱਘੇ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਜਿਸ ਦੇ ਨਾਲ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧਾਂ ਤੇ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਸਥਿਰਤਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਨੇੜੇ-ਤੇੜੇ ਦੇ ਸੰਬੰਧਾਂ ਕਰਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਵਧੇਰੇ ਸਥਿਰਤਾ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਸਵਾਰਥ ਸੀਮਿਤ ਹੁੰਦੇ ਸਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਉਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਾਰੇ ਸਮੂਹ ਦੀ ਭਲਾਈ ਹੋਵੇ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਜਾਂ ਗੌਣ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਧੁਨਿਕ ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਇੰਨੀਆਂ ਵੱਧ ਗਈਆਂ ਹਨ ਜੋ ਕਿ ਇਕੱਲੇ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਗਰੁੱਪ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਕੇ ਪੂਰੀਆਂ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਦੂਸਰੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਵੀ ਬਣਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਉਦੇਸ਼ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਮੰਤਵ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਵੀ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਉਦੇਸ਼ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

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ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ।
ਉੱਤਰ-

  1. ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਘੇਰਾ ਵਿਸ਼ਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  2. ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਦੇ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਕਰਕੇ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣਦਾ ਹੈ ।
  3. ਗੌਣ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਅਸਿੱਧੇ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
  4. ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਸਮੀ ਸੰਗਠਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦੇ ਲਈ ਕੁਝ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਨਿਯਮ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੇ ਹਰੇਕ ਮੈਂਬਰ ਨੂੰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਲਿਖਤ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ।
  5. ਗੌਣ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰਸਮੀ ਤੇ ਅਵਿਅਕਤਕ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੁਤਾਬਿਕ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਸਾਨੂੰ ਅਪਣਾਪਣ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ।
ਉੱਤਰ-

  • ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਆਧੁਨਿਕ ਸਮਾਜਾਂ ਵਿਚ ਇਕੱਲਾ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ । ਇਸ ਲਈ ਉਸ ਨੂੰ ਹੋਰਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਉੱਤੇ ਨਿਰਭਰ ਰਹਿਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ।
  • ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਸ਼ਖ਼ਸੀਅਤ ਅਤੇ ਯੋਗਤਾ ਵਿਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਸੈਕੰਡਰੀ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਘਰ ਦੀ ਚਾਰ ਦਿਵਾਰੀ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਣ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹ ਸਮਾਜਿਕ ਪ੍ਰਗਤੀ ਵਿਚ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਤਕਨੀਕੀ, ਉਦਯੋਗਿਕ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ।
  • ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਵਧਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਮੂਹ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲ ਕੇ ਬਾਹਰ ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਸ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਅਤੇ ਦਿਸ਼ਟਕੋਣ ਵੱਧਦਾ ਹੈ ।
  • ਗੌਣ ਸਮੂਹ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਵਿਕਾਸ ਵਿਚ ਵੀ ਮੱਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
‘ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ’ ਦੇ ਲਈ ‘ਉਹ ਸਮੂਹ’ (They Group) ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਵੀ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਅਤੇ ਬਿਗਾਨਾ ਸਮਝਦਾ ਹੈ । ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਹਰ ਇਕ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਤਾਂ ਜੁੜਿਆਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ, ਜਿਸ ਸਮੁਹ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਉਸ ਦਾ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਉਸ ਲਈ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਕਹਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਬਿਗਾਨੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ, ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਨਹੀਂ ਜੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਲੜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਗਠਨ ਬਹੁਤ ਢਿੱਲਾ ਅਤੇ ਅਸੰਗਠਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਮੁੱਲਾਂ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦੀ ਕੀਮਤ ਕਾਫ਼ੀ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਵੀ ਸਰਬ ਵਿਆਪਕ ਸਮੂਹ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਥਾਂ ਉੱਤੇ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਸਮਝਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਸਮਝਣਾ ਪਵੇਗਾ ਕਿਉਂਕਿ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਦੇ ਸੰਦਰਭ ਵਿਚ ਰੱਖ ਕੇ ਹੀ ਸਮਝਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਉਹ ਆਪਣਾ ਸਮੂਹ ਸਮਝ ਕੇ ਉਸ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਵਿਚ ਹਿੱਸਾ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹਰ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਆਪਣਾ ਇਕ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਸਲੀ ਮੈਂਬਰ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਤੇ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਉਸ ਨਾਲ ਉਸਦਾ ਆਪਣਾਪਣ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਪ੍ਰਮਾਧਾਂ, ਕੀਮਤਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਵੀ ਆਪਣਾ ਮੰਨ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ।ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਭਿੰਨ ਅੰਗ ਮੰਨਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਸਦਾ ਹਰ ਇਕ ਕੰਮ ਜਾਂ ਕ੍ਰਿਆ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਆਦਰਸ਼, ਕੀਮਤਾਂ ਆਦਿ ਉਸ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿਤਵ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦਾ ਮੁਲਾਂਕਣ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਉਹ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਅਕਤੀ ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਉਸਦਾ ਸਮੂਹ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਕਈ ਵਾਰੀ ਇਹ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਵਿਵਹਾਰ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਜਾਂ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਬਲਕਿ ਉਹ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਤੇ ਕੀਮਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਇਹ ਉੱਠਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਜਿਹਾ ਕਿਉਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸੇ ਕਾਰਨ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਸਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ । ਕੁਝ ਲੇਖਕਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਹਾਰ ਪ੍ਰਤੀਮਾਨ ਤੇ ਉਸ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਵਿਵੇਚਨ ਲਈ ਸਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਣਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਕਿਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੈ ਤੇ ਉਸਦੀ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਕੀ ਸਥਿਤੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸਮੂਹ ਤੋਂ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋ ਕੇ ਉਸ ਦਾ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਕ ਤੌਰ ਤੇ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਵਿਅਕਤੀ ਉਸ ਦਾ ਅਸਲੀ ਮੈਂਬਰ ਨਾ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਇਸ ਤੋਂ ਇੰਨਾ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸ ਦੇ ਵਿਵਹਾਰ ਦਾ ਬਹੁਤ ਸਾਰਾ ਹਿੱਸਾ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀ ਉਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਆਮ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਮੰਨ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਣੀਆਂ ਆਦਤਾਂ, ਮਨੋਵਿਤੀਆਂ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਿਯਮਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਜਿਵੇਂ ਕੋਈ ਮੱਧ ਵਰਗੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਉੱਚ ਵਰਗ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਮੰਨ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਆਪਣਾ ਵਿਵਹਾਰ, ਆਦਤਾਂ, ਆਦਰਸ਼, ਕੀਮਤਾਂ ਉਸੀ ਉੱਚੇ ਵਰਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਿਯਮਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਆਪਣੇ ਰਹਿਣ-ਸਹਿਣ, ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਉਹ ਉਸੇ ਉੱਚ ਵਰਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਿਯਮਿਤ ਤੇ ਨਿਰਧਾਰਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਇਹੀ ਸਮੂਹ ਉਸ ਦਾ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ (Long Answer Type Questions)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਦਾ ਕੀ ਅਰਥ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ
ਉੱਤਰ-
ਜੇਕਰ 10 ਲੋਕ ਇਕੱਠੇ ਖੜੇ ਹੋਣਗੇ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਉਸਨੂੰ ਭੀੜ ਹੀ ਕਹਾਂਗੇ ।

ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ (Characteristics of Group)

1. ਅਸੀਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ (We feeling) – ਸਮੂਹ ਦੇ ਸਾਰੇ ਮੈਂਬਰ ਲੋੜ ਪੈਣ ਉੱਤੇ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੀ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਆਪਣੇਪਨ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੀ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਸਾਂਝੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਏਕਤਾ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

2. ਏਕਤਾ ਦੀ ਭਾਵਨਾ (Feeling of Unity) – ਸਮੁਹ ਤਾਂ ਹੀ ਕਾਇਮ ਰਹਿ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚ ਏਕਤਾ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੋਵੇ । ਇਸ ਏਕਤਾ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੀਆਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਨੂੰ ਸਮਝਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਸਹਿਯੋਗ ਕਰਨ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਏਕਤਾ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਹ ਸਮੂਹ ਨਹੀਂ ਕਹਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ ਬਲਕਿ ਉਸ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਇਕੱਠ ਕਿਹਾ ਜਾਵੇਗਾ ।

3. ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ (Membership) – ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਬਲਕਿ ਸਮੂਹ ਤਾਂ ਦੋ ਜਾਂ ਦੋ ਤੋਂ ਵੱਧ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਬਣਦਾ ਹੈ । ਕਈ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸੀਮਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਹਰ ਕੋਈ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਬਣ ਸਕਦਾ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਪਰਿਵਾਰ ਵਿਚ ਪਤੀ-ਪਤਨੀ ਅਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੋਰ ਕਿਸੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸ਼ਾਮਿਲ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ । ਇਸ ਵਜ੍ਹਾ ਕਰਕੇ ਹੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਆਕਾਰ ਵੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

4. ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧ (Social relations) – ਸਮੂਹ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਸ਼ਰਤ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧ ਹੋਣ । ਜੇਕਰ ਸੰਬੰਧ ਨਹੀਂ ਹੋਣਗੇ ਤਾਂ ਉਹ ਸਮੁਹ ਨਹੀਂ ਸਿਰਫ਼ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਇਕੱਠ ਹੋਵੇਗਾ । ਇਹ ਸੰਬੰਧ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਅਤੇ ਸਥਿਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਆਪਸੀ ਅੰਤਰਕ੍ਰਿਆਵਾਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

5. ਸਮੂਹਿਕ ਨਿਯੰਤਰਨ (Collective control) – ਸਮੂਹ ਦੇ ਲਈ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਕਾਇਮ ਰੱਖਣ ਲਈ ਉਸ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਨਿਯੰਤਰਿਤ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਸਮੂਹ ਟੁੱਟ ਜਾਵੇਗਾ । ਹਰ ਇਕ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਆਪਣੀਆਂ ਹੀ ਪ੍ਰਥਾਵਾਂ, ਨਿਯਮ, ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਆਦਿ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਹੜੇ ਕਿ ਹਰੇਕ ਮੈਂਬਰ ਲਈ ਮੰਨਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਨਿਯਮਾਂ, ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜਨ ਵਾਲੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸਮੂਹ ਦੰਡ ਜਾਂ ਸਜ਼ਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਪਣੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਉੱਤੇ ਨਿਯੰਤਰਨ ਰੱਖਦਾ
ਹੈ ।

6. ਭੂਮਿਕਾ ਤੇ ਸਥਿਤੀ ਦੀ ਵੰਡ (Division of status and role) – ਸਮੁਹ ਆਪਣੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਸਥਿਤੀਆਂ ਤੇ ਭੂਮਿਕਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵੰਡ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਹਰੇਕ ਮੈਂਬਰ ਨੂੰ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਆਪਣੀ ਹੀ ਭੁਮਿਕਾ ਅਤੇ ਸਥਿਤੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਹਰੇਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਲਈ ਕੁੱਝ ਲਿਖਤੀ ਤੇ ਕੁੱਝ ਅਲਿਖਤੀ ਨਿਯਮ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਨਿਯਮਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਆਪਸੀ ਸੰਘਰਸ਼ ਵੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਉਹ ਆਪਸ ਵਿਚ ਸਹਿਯੋਗ ਵੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕਿ ਸਮੂਹ ਦੀ ਇਕ ਬਹੁਤ ਹੀ ਖ਼ਾਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

7. ਸਮਾਨ ਵਿਚਾਰ (Similar Ideas) – ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਸਹਿਕ ਭਾਵਨਾ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਸਵਾਰਥ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਤੇ ਉਹ ਸਮੂਹ ਦੇ ਸਾਂਝੇ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਯਤਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਗਠਨ ਕਾਇਮ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਵਿਚ ਥੋੜ੍ਹੀ ਜਿਹੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਮਾਨਤਾ ਹੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਆਧਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਰਗੀਕਰਣ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ? ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸੋ ।
ਜਾਂ
ਸਮੂਹਾਂ ਦੀਆਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸਮਾਜ-ਸ਼ਾਸਤਰੀਆਂ ਨੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਆਧਾਰਾਂ ਉੱਤੇ ਵਰਗੀਕ੍ਰਿਤ ਕੀਤਾ ਹੈ । ਕਿਸੇ ਨੇ ਧਾਰਮਿਕ, ਕਿਸੇ ਨੇ ਆਰਥਿਕ, ਕਿਸੇ ਨੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਤੇ ਕਿਸੇ ਨੇ ਮਨੋਰੰਜਨ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਹੈ । ਹੁਣ ਹੇਠ ਅਸੀਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸਮਾਜ-ਸ਼ਾਸਤਰੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਵੇਖਾਂਗੇ-
(A) ਸੇਪਿਰ (Sapir) ਨੇ ਸਮੂਹਾਂ ਨੂੰ ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਤੇ ਸਾਂਝੇ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਵਰਗੀਕ੍ਰਿਤ ਕੀਤਾ ਹੈ-

  1. ਪਰਿਵਾਰ (Family)
  2. ਨਸਲੀ ਸਮੂਹ (Racial group) :
  3. ਖੇਤੀ ਸਮੂਹ (Agricultural group)
  4. ਸੰਘਰਸ਼ ਸਮੂਹ (Conflicting group) ।

(B) ਚਾਰਲਸ ਹਰਟਨ ਕੂਲੇ (Charles Hurton Cooley) ਨੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਨੂੰ ਦੋ ਭਾਗਾਂ ਵਿਚ ਵੰਡਿਆ ਹੈ ।

  1. ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ (Primary Group)
  2. ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ (Secondary Group) ।

ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਨੇੜੇ ਦੇ ਅਤੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਅਸਿੱਧੇ . ਅਤੇ ਬਨਾਉਟੀ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

(C) ਸੋਰੋਕਿਨ (Sorokin) ਨੇ ਵੀ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਦੱਸੇ ਹਨ ।

  1. ਵਿਸ਼ਾਲ ਸਮੂਹ (Horizontalgroup)
  2. ਛੋਟੇ ਸਮੂਹ (Vertical group ।

ਵਿਸ਼ਾਲ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ-ਦੇਸ਼, ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਦਲ, ਧਾਰਮਿਕ ਸੰਗਠਨ, ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਸੰਗਠਨ ਆਦਿ ।
ਛੋਟੇ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਵਿਸ਼ਾਲ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਸਥਿਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਛੋਟੇ ਸਮੂਹ ਵਿਸ਼ਾਲ ਸਮੂਹ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

(D) ਸਮਨਰ (Sumner) ਨੇ ਵੀ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ ਹੈ ।

  1. ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ (In groups)
  2. ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ (Out groups) ।

ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਅਸੀਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਅਤੇ ਸਮੂਹਿਕ ਭਲਾਈ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਮਿਲਦੀ ਹੈ । ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਵੀ ਛੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।ਵਿਅਕਤੀ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਆਪ ਹੀ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀਵਾਦੀ ਭਾਵਨਾ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਉਹ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਵੀ ਵੱਡੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

(E) ਗਿਲਿਨ ਅਤੇ ਗਿਲਿਨ (Gillin and Gillin) ਨੇ ਆਪਣੀ ਕਿਤਾਬ Cultural Sociology ਵਿਚ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਹੈ ।

  1. ਖੂਨ ਦੇ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of blood relations)
  2. ਸਰੀਰਕ ਲੱਛਣਾਂ ਉੱਤੇ ਆਧਾਰਿਤ (on the basis of physical features)
  3. ਖੇਤਰੀ ਆਧਾਰ (area basis)
  4. ਮਿਆਦ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of duration)
  5. ਸਭਿਆਚਾਰਕ ਸਮੂਹ (cultural group) ।

(F) ਮੈਕਾਈਵਰ ਅਤੇ ਪੇਜ (MacIver and Page) ਨੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਹੈ ।

  1. ਆਕਾਰ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of size)
  2. ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੀ ਨੇੜਤਾ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of intimacy)
  3. ਹਿੱਤਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of interest)
  4. ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਗਠਨ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of organization)
  5. ਮਿਆਦ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ (on the basis of duration) ।

ਮੈਕਾਈਵਰ ਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਲਘੂ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਵੱਡਾ ਸਮੂਹ ਦੱਸੇ ਹਨ । ਪਰਿਵਾਰ ਲਘੂ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਵੱਡਾ ਸਮੂਹ ।
ਮੈਕਾਈਵਰ ਨੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਦੋ ਸਮੂਹ ਦੱਸੇ ਹਨ । ਪਹਿਲੇ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਗੁੜੇ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੇ ਦੂਜੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਗੈਰ ਨਿੱਜੀ ਸੰਬੰਧ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਮੈਕਾਈਵਰ ਨੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਵੀ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਦੱਸੇ ਹਨ । ਪਹਿਲੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਮਨੁੱਖ ਆਪਣੀਆਂ ਆਮ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਦੂਜਾ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੀ ਪੁਰਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਗਠਨ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਵੀ ਦੋ ਰੂਪ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਕ ਤਾਂ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੰਗਠਿਤ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਲਚਕੀਲਾ ਸਮੂਹ ।

ਮਿਆਦ ਦੇ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਵੀ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਸਥਾਈ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਭਰ ਲਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਪਰਿਵਾਰ ਅਤੇ ਅਸਥਾਈ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਉਦੇਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ।

(G) ਡਵਾਇਟ ਸੈਂਡਰਸਨ ਨੇ ਤਿੰਨ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਦੱਸੇ ਹਨ ।

  1. ਇੱਛਤ ਸਮੂਹ (Voluntary groups)
  2. ਅਣਇੱਛਤ ਸਮੂਹ (In Voluntary groups)
  3. ਪ੍ਰਤੀਨਿਧ ਸਮੂਹ (Delegate groups) ।

ਇੱਛਤ ਸਮੂਹ ਉਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾਲ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਉਸ ਦੀ ਇੱਛਾ ਉੱਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਕਿਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣੇ । ਆਪਣੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾਲ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਛੱਡ ਵੀ ਸਕਦਾ
ਹੈ ।

ਅਣਇੱਛਤ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਲਈ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਕੋਈ ਮਰਜ਼ੀ ਨਹੀਂ ਚਲਦੀ । ਉਸ ਨੂੰ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨ ਦੀ ਆਗਿਆ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਪਰਿਵਾਰ ਜਾਂ ਜਾਤ ।
ਪ੍ਰਤੀਨਿਧ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਉਹ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧੀ ਦੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

(H) ਜਾਰਜ ਡਾਸਨ ਨੇ ਚਾਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕੀਤਾ ਹੈ ।

  1. ਅਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ (Unsocial groups)
  2. ਫਰਜ਼ੀ ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ (Pseudo-social groups)
  3. ਸਮਾਜ ਵਿਰੋਧੀ ਸਮੂਹ (Anti social groups)
  4. ਸਮਾਜ ਪੱਖੀ ਸਮੂਹ (Pro-Social groups) ।

ਅਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੈਂਬਰ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਕੰਮ ਲਈ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਸਮੂਹ ਦੇ ਬਾਕੀ ਕੰਮਾਂ ਨਾਲ ਕੋਈ ਮਤਲਬ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦਾ । ਉਸ ਵਿਚ ਸਵਾਰਥ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਫ਼ਰਜ਼ੀ ਸਮੂਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਉਹ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਸਵਾਰਥ ਲਈ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਸਮਾਜ ਕਲਿਆਣ ਵਿਚ ਕੋਈ ਵੀ ਰੁਚੀ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ।

ਸਮਾਜ ਵਿਰੋਧੀ ਸਮੂਹ ਸਮਾਜ ਦੀ ਭਲਾਈ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿਰੁੱਧ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਕਈ ਸਮੂਹ ਹੜਤਾਲਾਂ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਧਰਨਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਸਰਵਜਨਕ ਸੰਪੱਤੀ ਦੀ ਤੋੜ-ਫੋੜ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

ਸਮਾਜ ਪੱਖੀ ਸਮੂਹ ਸਮਾਜ ਜਾਂ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਭਲਾਈ ਲਈ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਦਾ ਆਪਣਾ ਕੋਈ ਸਵਾਰਥ ਇਸ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਸਮਾਜ ਕਲਿਆਣ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ।

(I) ਟੌਨਿਜ਼ (Tonnies) ਨੇ ਦੋ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਹੈ ।

  1. ਸਮੁਦਾਇਕ ਸਮੂਹ (Communities)
  2. ਸਭਾ ਸਮੂਹ (Associations) ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਅਤੇ ਉਸਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ – ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਇਕੱਠ ਨੂੰ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਸਮੁਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ (Characteristics) – ਇਹਨਾਂ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹੈ-

1. ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚ ਸਰੀਰਿਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ (Physical proximity in members) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲੀ ਸ਼ਰਤ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਨਜ਼ਦੀਕ ਹੋਣ ਤੇ ਇਕੱਠੇ ਮਿਲ ਕੇ ਬੈਠਣ । ਸਰੀਰਕ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਨਾਲ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦਾ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਸਮਝਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਰੋਜ਼ ਮਿਲਣਾ, ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਨਾ, ਉੱਠਣ-ਬੈਠਣ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵਿਚ ਸਹਿਯੋਗ ਤੇ ਪਿਆਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਨਿੱਘੇ ਸੰਬੰਧ ਸਥਾਪਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਕਈ ਵਾਰੀ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਾਰਨ ਜਿਵੇਂ ਪੇਸ਼ਾ, ਜਾਤ, ਉਮਰ ਆਦਿ ਕਰਕੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਅੰਤਰ ਹੋਣੇ ਤਾਂ ਨਿੱਜੀ ਸੰਬੰਧ ਨਹੀਂ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਸਮਾਨਤਾ ਨਾਲ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਸੰਬੰਧ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

2. ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਸੀਮਿਤ ਆਕਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ (They are limited in size) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੁਹ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚ ਗੂੜ੍ਹੇ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗੀ ਤਾਂ ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਝਣਗੇ । ਜਿਵੇਂ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਅਧਿਆਪਕ ਘੱਟ ਗਿਣਤੀ ਦੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਪੜ੍ਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਹਰ ਇਕ ਬੱਚੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣੂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ | ਪਰ ਜੇਕਰ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਹਰ ਇਕ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਨਹੀਂ ਰੱਖ ਸਕਦਾ । ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਿਣਤੀ ਕਰਕੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਸੰਬੰਧ ਵੀ ਘੱਟ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

3. ਇਹ ਸਮੁਹ ਸਥਿਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ (These groups are stable) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੁਹ ਆਮ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਸਥਿਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਸਥਿਰ ਪ੍ਰਵਿਰਤੀ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਜਿਵੇਂ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਬੱਚਾ ਕਿਸੇ ਪਰਿਵਾਰ ਵਿਚ ਜਨਮ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਲਈ ਉਸ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਅਕਤੀ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਲਈ ਆਪਣੇ ਗੁਆਂਢ ਨਾਲ ਵੀ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਸਥਿਰਤਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਸਮੁਹ ਕਿਸੇ ਉਦੇਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਨਹੀਂ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ । ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਨਵੇਂ ਮੈਂਬਰ ਆ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਸਥਾਈਪਨ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

4. ਪਿਛੋਕੜ ਦੀ ਸਮਾਨਤਾ (Similarity of Background) – ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਪਿਛੋਕੜ ਦੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਪਿਛੋਕੜ ਦੀ ਸਮਾਨਤਾ ਦੇ ਕਾਰਨ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦਾ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਹੁੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਮਝਦੇ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਅਤੇ ਆਦਰਸ਼ ਵੱਖ ਹੋਣਗੇ ਤਾਂ ਸੰਬੰਧਾਂ ਵਿਚ ਕਮੀ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜ਼ਿਆਦਾ ਅੰਤਰ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਘੱਟ ਜਾਣਗੇ ਤੇ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਅੰਤਰ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ ਤਾਂ ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਝਣ ਲੱਗ ਜਾਣਗੇ ਤੇ ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਆਵੇਗੀ । ਜਿਵੇਂ ਜੇਕਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨਵੀਂ ਥਾਂ ਉੱਤੇ ਰਹਿਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉੱਥੇ ਰਹਿਣ ਵਾਲੇ ਲੋਕ ਸਮਾਨ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਦੇ ਹੋਣਗੇ ਤਾਂ ਉਹ ਵਿਅਕਤੀ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਜ਼ਦੀਕ ਆ ਜਾਣਗੇ ਤੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਨਿੱਜੀਪਨ ਵੀ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ।

5. ਸੀਮਿਤ ਸਵਾਰਥ ਹੁੰਦੇ ਹਨ (They have limited self-interest) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਸਮੂਹ ਦੀ ਭਲਾਈ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਕਿ ਸਮੁਹਿਕ ਹਿੱਤ ਨੂੰ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚ ਨਿੱਜੀ ਸਵਾਰਥ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਪਰ ਜੇਕਰ ਇਹ ਭਾਵਨਾ ਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਪਰਿਵਾਰ ਟੁੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਹਰੇਕ ਮੈਂਬਰ ਅਜਿਹੇ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਾਰੇ ਪਰਿਵਾਰ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਲਾਭ ਹੋਵੇ | ਕਈ ਵਾਰੀ ਤਾਂ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਨਿੱਜੀ ਸਵਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸਮੂਹਿਕ ਸਵਾਰਥਾਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਤਿਆਗਣਾ ਵੀ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਮੂਹ ਕਿਸੇ ਉਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਕਰਕੇ ਨਹੀਂ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ । ਇਹ ਸਮੂਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿਚ ਹੀ ਉਦੇਸ਼ ਭਰਪੂਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਸੀਮਿਤ ਸਵਾਰਥ ਨਹੀਂ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੇ ।

6. ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਹੁੰਦੇ ਹਨ (These are for long duration) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਜਦੋਂ ਸਾਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਥਾਂ ਉੱਪਰ ਰਹਿੰਦੇ ਹੋਏ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਾਂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਉੱਥੇ ਰਹਿਣ ਵਾਲੇ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਘੁਲ-ਮਿਲ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿਚ ਕੋਈ ਵੀ ਫ਼ਰਕ ਨਜ਼ਰ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਪਰਿਵਾਰ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਵਾਸਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਕਾਰਨ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵਿਚ ਸਹਿਯੋਗ ਅਤੇ ਪਿਆਰ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਕਿਸੇ ਸੰਸਥਾ ਵਿਚ ਘੱਟ ਸਮਾਂ ਬਤੀਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਉਸਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨਾਲ ਸਾਡੇ ਸੰਬੰਧ ਨਿੱਘੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਤੇ ਅਸੀਂ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਮਝ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਿੱਜੀਪਣ ਪੈਦਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ । ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੇ ਨੇੜੇ ਰਹਿਣ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਵੀ ਪਿਆਰ ਅਤੇ ਦੋਸਤੀ ਵਾਲੇ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮਹੱਤਵ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਸਮਾਜ ਲਈ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ-ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਸਰਬਵਿਆਪਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰੇਕ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ | ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮਹੱਤਵ ਦਾ ਵਰਣਨ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹੈ-

1. ਸਮਾਜੀਕਰਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ (Important in the process of Socialization) – ਜਨਮ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵਿਅਕਤੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਮੁੱਢਲੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਬੱਚਾ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿਚ ਜੀਵਨ ਜੀਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਸਮਾਜੀਕਰਣ ਦੀ ਗੁੰਝਲਦਾਰ ਪੜਿਆ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਤੋਂ ਸਿੱਖੇ ਹੋਏ ਵਿਵਹਾਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਕੰਮ ਆਉਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ। ਕਿ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੁਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਸਮਾਜੀਕਰਣ ਵਿਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਹਨ ।

2. ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ (It develop the personality of a person) – ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਉੱਪਰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦਾ ਬਹੁਤ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਪਿਆਰ ਤੇ ਦੋਸਤੀ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਵਿਅਕਤੀ ਸਹਿਯੋਗ, ਪਿਆਰ, ਸਹਿਣਸ਼ੀਲਤਾ ਆਦਿ ਵਰਗੇ ਗੁਣਾਂ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਗੁਣਾਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਰਹਿਣ ਦੇ ਯੋਗ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਆਦਰਸ਼ਾਂ, ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ, ਪਰਿਮਾਪਾਂ, ਕੀਮਤਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

3. ਸਮਾਜਿਕ ਨਿਯੰਤਰਨ ਦਾ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਆਧਾਰ (Important base of social control) – ਹਰ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਸੁਭਾਅ ਪੱਖੋਂ ਦੂਜੇ ਤੋਂ ਵੱਖਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜੇਕਰ ਸਾਰੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਖੁੱਲ੍ਹਾ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਰਚਨਾ ਹੀ ਟੁੱਟ ਜਾਵੇਗੀ । ਇਸ ਵਜ੍ਹਾ ਕਰਕੇ ਹੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਸਾਰੇ ਮੈਂਬਰ ਨਿਯੰਤਰਨ ਵਿਚ ਰੱਖੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਨਿਯੰਤਰਨ ਵਿਚ ਰਹਿਣਾ ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਹੀ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ ।ਉਸਦੇ ਨਿਯੰਤਰਨ ਵਿਚ ਰਹਿਣ ਦਾ ਲਾਭ ਸਮਾਜ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਨਿਯਮਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਰਹਿਣਾ, ਵੱਡਿਆਂ ਦਾ ਆਦਰ ਕਰਨਾ, ਪਰਿਵਾਰ ਦੀ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਨੂੰ ਅਪਨਾਉਣਾ ਅਤੇ ਕਾਇਮ ਰੱਖਣਾ, ਹਰੇਕ ਨਾਲ ਪਿਆਰ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਕਰਨਾ ਆਦਿ ਵਰਗੇ ਗੁਣ ਵਿਅਕਤੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਅਧੀਨ ਹੀ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਕ ਵਾਰੀ ਜਦੋਂ ਇਹ ਗੁਣ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਵਿਚ ਯੋਗਦਾਨ ਦੇਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਨਿਯੰਤਰਨ ਵਿਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ।

4. ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇਣਾ (To give protection to a person) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਸਮਝਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਹੋਰ ਮੈਂਬਰ ਲੋੜ ਪੈਣ ਉੱਤੇ ਇਕਦੂਜੇ ਦੀ ਮਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ | ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੱਡਾ ਹੋਣ ਲਈ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਉਹ ਕਰਦੇ ਵੀ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਬੱਚਾ ਖੁੱਲ੍ਹ ਕੇ ਆਪਣੇ ਵਿਵਹਾਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੁਹ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

5. ਪਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ (Members of primary groups are related with each other) – ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਉੱਪਰ ਕਿਸੇ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਰਸਮੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਤੇ ਬੋਝ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਆਪੇ ਜਾਂ ਸਵੈ (self) ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਵੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਭਾਵਾਤਮਕ ਸੰਤੁਸ਼ਟੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਵਿਅਕਤੀ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ | ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਦੀ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਨਾਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇੱਥੇ ਰਹਿ ਕੇ ਵਿਅਕਤੀ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਇਹਨਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਇਕੱਲਾ ਨਹੀਂ ਹੈ ਬਲਕਿ ਹੋਰ ਵਿਅਕਤੀ ਵੀ ਹਨ ਜਿਹੜੇ ਲੋੜ ਪੈਣ ਉੱਤੇ ਉਸ ਦੀ ਮੱਦਦ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਜੁੜੇ ਰਹਿਣ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਉਸ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਕਰਨ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਸਹਿਯੋਗ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

6. ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨਾ (To fulfill the psychological needs of a person) – ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਵੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਹੀ ਪੂਰੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਪਰਿਵਾਰ, ਖੇਡ ਸਮੂਹ, ਗੁਆਂਢ ਆਦਿ ਵਰਗੇ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਹੋਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨਾਲ ਰਹਿਣਾ ਸਿੱਖਦਾ ਹੈ । ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀਆਂ ਸਮਾਜਿਕ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਸਮਾਜ ਦੀਆਂ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਤੇ ਰੁੜੀਆਂ ਵੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਹੀ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਤੁਸ਼ਟੀਆਂ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕੇਂਦਰ ਹਨ ਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਵਫ਼ਾਦਾਰੀਆਂ ਵੀ ਇੱਥੇ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦਾ ਕੀ ਅਰਥ ਹੈ ? ਇਸ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ-ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਇਕੱਠ ਨੂੰ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸਮਾਜਿਕ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਸਮੁਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਦੁਤੀਆ ਜਾਂ ਗੌਣ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ (Characteristics of Secondary Groups)

1. ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ (They are large in size) – ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਵੱਡੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਵੀ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਦੂਰ-ਦੂਰ ਤਕ ਫੈਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਕਾਂਗਰਸ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਲੱਖਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿਚ ਹਨ ਤੇ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਫੈਲੇ ਹੋਏ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੋਰ ਵੀ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਦੂਰ-ਦੂਰ ਥਾਂਵਾਂ ਉੱਤੇ ਫੈਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਜੇਕਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨੇ ਦੂਰਦੁਰ ਥਾਂਵਾਂ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵੀ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮੱਦਦ ਨਾਲ ਹੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਮਨੁੱਖ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪਹਿਲਾਂ ਨਾਲੋਂ ਬਹੁਤ ਵੱਧ ਗਈਆਂ ਹਨ ਜਿਹੜੀਆਂ ਉਹ ਇਕੱਲੇ ਹੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿ ਕੇ ਪੂਰੀਆਂ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ । ਇਸ ਕਰਕੇ ਉਹ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਣੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ।

2. ਮਨੁੱਖਾਂ ਵਿਚ ਅਸਿੱਧੇ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ (Individuals have indirect relations) – ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੇ ਆਪਸ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਅਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸਹਿਯੋਗ ਤਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਉਹ ਆਹਮੋ-ਸਾਹਮਣੇ ਦਾ ਸਹਿਯੋਗ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਬਲਕਿ ਅਸਿੱਧੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਨਿੱਜੀ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹੁੰਦੇ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕੰਮ ਆਪਣੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ ਮਾਰੂਤੀ ਕਾਰ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਫੈਕਟਰੀ ਵਿਚ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਮਜ਼ਦੂਰ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ | ਕੋਈ ਕਿਹੜਾ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਕੋਈ ਕਿਹੜਾ । ਜਿਹੜਾ ਵਿਅਕਤੀ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਉਸਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਕੰਮ ਨਾਲ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਤਨਖ਼ਾਹ ਨਾਲ ਮਤਲਬ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਨੂੰ ਤਾਂ ਇਹ ਵੀ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਕਿ ਉਸ ਫੈਕਟਰੀ ਦਾ ਮਾਲਕ ਅਤੇ ਮੈਨੇਜਰ ਕੌਣ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਉਹ ਕੰਮ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਉਹ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਅਸਿੱਧੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਜੁੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ | ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਇਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਪਰ ਉਹ ਕੰਮ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਸੰਬੰਧ ਸਿੱਧੇ ਨਾ ਹੋ ਕੇ ਅਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

3. ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ (They have formal relations) – ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਉੱਪਰ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀਂ ਪਾਉਂਦੇ । ਵਿਅਕਤੀ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਤਨਖ਼ਾਹ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਜਾਣਦੇ ਤਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ । ਜਿਵੇਂ ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਕਿਸੇ ਬੈਂਕ ਵਿਚ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ, ਉੱਥੋਂ ਪੈਸੇ ਕਢਵਾਉਂਦੇ ਹਾਂ ਜਾਂ ਜਮਾਂ ਕਰਵਾਉਂਦੇ ਹਾਂ | ਕਲਰਕ ਇਹ ਸਾਰੇ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਲਰਕਾਂ ਦੀ ਨਿੱਜੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨਾਲ ਕੋਈ ਸੰਬੰਧ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦੇ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿੱਥੋਂ ਨਿੱਘੇ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਅਤੇ ਰਸਮੀ ਸੰਬੰਧਾਂ ਦੀ ਭਰਮਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

4. ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸੰਗਠਨ ਰਸਮੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ (They have formal organization) – ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕੁਝ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਨਿਯਮਾਂ ਦੇ ਅਧੀਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਕੁਝ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਮਾਹਿਰਾਂ ਦੁਆਰਾ ਮਾਮਲੇ ਨਿਪਟਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸਾਰਾ ਕੰਮ ਕਿਸੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਤਰਤੀਬ ਵਿਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਹਰੇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਸਥਿਤੀ ਤੇ ਭੂਮਿਕਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਉਸਦੀ ਯੋਗਤਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਹਿੱਤ ਤੇ ਆਦਤਾਂ ਤਿਆਗਣੇ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ਤੇ ਉਸਨੂੰ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਰਸਮੀ ਸੰਗਠਨ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

5. ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਅਤੇ ਅਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ (They have active and inactive members) – ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਵੱਡੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਸੰਬੰਧਾਂ ਵਿਚ ਨਿੱਜੀਪਣ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਉਹ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕ੍ਰਿਆਵਾਂ ਵਿਚ ਭਾਗ ਨਹੀਂ ਲੈਂਦੇ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਕਿਸੇ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਕਿਸੇ ਫੰਕਸ਼ਨ ਵਿਚ ਸਿਰਫ਼ ਕੁਝ ਮੈਂਬਰ ਹੀ ਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਬਣ ਕੇ ਭਾਗ ਲੈਂਦੇ ਹਨ । ਬਾਕੀ ਤਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਅਭਿਆਸ਼ੀਲ ਹੀ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਤਾਂ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਨੂੰ ਕਾਇਮ ਰੱਖਣ ਲਈ ਚੰਦਾ ਆਦਿ ਹੀ ਦਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਅਤੇ ਅਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਦੋਹਾਂ ਪ੍ਰਕਾਰਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

6. ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਇੱਛਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ (Membership is optional) – ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਇੱਛਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਰਥਾਤ ਇਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਇੱਛਾ ਉੱਪਰ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ । ਇਸਦਾ ਕਾਰਨ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਕਿਸੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਉਦੇਸ਼ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਹੀ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਜਿਸ ਕਿਸੇ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਪੂਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਉਸੇ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਸਿਰਫ਼ ਇਕ ਹੀ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਬਲਕਿ ਕਈ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਾਡੇ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਕਈ ਕਲੱਬ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਜਦੋਂ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਲੱਬ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਦੋਂ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਛੱਡ ਦਿੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਹਰੇਕ ਕਲੱਬ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣੇ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਇੱਛਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਪੂਰਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਹ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਛੱਡ ਵੀ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਦਾ ਵਰਣਨ ਕਰੋ
ਉੱਤਰ-
1. ਇਹ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦੇ ਹਨ (These fulfill the needs of humans) – ਅੱਜ ਕਲ੍ਹ ਦੇ ਆਧੁਨਿਕ ਤੇ ਜਟਿਲ ਸਮਾਜਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਇਕੱਲੇ ਅਤੇ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਉੱਤੇ ਨਿਰਭਰ ਰਹਿ ਕੇ ਹੀ ਪੂਰੀਆਂ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਸ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਵੱਧ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਇਹ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਹੋਰ ਵੀ ਵੱਧ ਰਹੀਆਂ ਹਨ । ਇਹ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਸਿਰਫ਼ ਇਕ ਹੀ ਖੇਤਰ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਬਲਕਿ ਸਾਰੇ ਖੇਤਰਾਂ
ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਹੀ ਰਹਿ ਕੇ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਕਰਕੇ ਹੀ ਇਹ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ । ਹਰ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਹਰੇਕ ਖੇਤਰ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਸੰਬੰਧ ਕਾਇਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਣ ਉੱਤੇ ਉਹ ਸੰਬੰਧ ਉਸਦੇ ਕੰਮ ਆ ਸਕਣ ਅਤੇ ਇਸ ਕਰਕੇ ਹੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

2. ਸਮਾਜਿਕ ਪ੍ਰਤੀ ਵਿਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ (Important for Social Progress) – ਸਮਾਜ ਦੀ ਪ੍ਰਗਤੀ ਤਾਂ ਹੀ ਸੰਭਵ ਹੋ ਸਕੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਇਕ ਆਮ ਆਦਮੀ ਨੇ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਸੀ । ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਉਦਯੋਗਿਕ ਅਤੇ ਤਕਨੀਕੀ ਕ੍ਰਾਂਤੀਆਂ ਆਈਆਂ ਤੇ ਇਹ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਕਰਕੇ ਹੀ ਆਈਆਂ ਸਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਵੱਧ ਰਹੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਕਰਨ ਲਈ ਘਰੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਣਾ ਪਿਆ ਅਤੇ ਉਸਨੂੰ ਅਜਿਹਾ ਵਾਤਾਵਰਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਇਆ ਜਿੱਥੇ ਉਹ ਆਪਣੀ ਯੋਗਤਾ ਦਾ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰ ਸਕਦਾ ਸੀ । ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਤਰੱਕੀ ਕਰਨ ਦੇ ਮੌਕੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਏ । ਵਿਅਕਤੀ ਹੁਣ ਆਪਣੀ ਯੋਗਤਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਤਰੱਕੀ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵਿਚ ਅੱਗੇ ਵੱਧਣ ਤੇ ਤਰੱਕੀ ਕਰਨ ਦੀ ਇੱਛਾ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਮਾਜਿਕ ਪ੍ਰਗਤੀ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

3. ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਸ਼ਖ਼ਸੀਅਤ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰਨਾ (To develop the personality of an individual) – ਦੂਤੀਆ ਸਮੁਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਸ਼ਖ਼ਸੀਅਤ ਤੇ ਯੋਗਤਾ ਨੂੰ ਵਿਕਸਿਤ ਕਰਨ ਵਿਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸਮਾਜਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਦੁਨੀਆਂ ਘਰਾਂ ਦੀ ਚਾਰਦੀਵਾਰੀ ਤਕ ਹੀ ਸੀਮਿਤ ਹੁੰਦੀ ਸੀ ਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਪਿਤਾ ਜਾਂ ਖਾਨਦਾਨ ਦਾ ਕਿੱਤਾ ਹੀ ਅਪਨਾਉਣਾ ਪੈਂਦਾ ਸੀ । ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਉੱਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਪੁਰਾ ਨਿਯੰਤਰਨ ਹੁੰਦਾ ਸੀ । ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕੋਈ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ ਸੀ । ਪਰੰਤੁ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਸਮਾਜ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਈ ਤੇ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਏ । ਵਿਅਕਤੀ ਘਰਾਂ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲ ਕੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪਏ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਉਸ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਤੇ ਯੋਗਤਾ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਿਆ । ਹੁਣ ਉਹ ਆਪਣੀ ਯੋਗਤਾ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰ ਸਕਦਾ ਸੀ । ਵਿਅਕਤੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ ਸੀ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੋਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਅਤੇ ਸਾਰਿਆਂ ਨੇ ਤਰੱਕੀ ਕਰਨੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

4. ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਵਿਕਾਸ ਵਿਚ ਮੱਦਦ ਕਰਨਾ (Helpful in the cultural development) – ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਮੈਂਬਰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਆਂ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਮਿਲ-ਜੁਲ ਕੇ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ , ਜਿਵੇਂ ਕਿਸੇਂ ਕਾਰਖ਼ਾਨੇ ਵਿਚ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਵਿਅਕਤੀ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਚਾਹੇ ਉਹ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਂਵਾਂ ਉੱਤੋਂ ਅਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀਆਂ ਤੋਂ ਆਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਫਿਰ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਰਸਮੀ ਸਹਿਯੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਲੈਣ ਦੇਣ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਕ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਦੇ ਲੋਕ ਦੂਜੀ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਦੇ ਲੱਛਣਾਂ ਨੂੰ ਅਪਨਾਉਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨਾਲ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਵਿਕਾਸ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਇਕ ਸਮਾਜ ਜਾਂ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਹੋਈ ਖੋਜ ਨੂੰ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿਚ ਅਪਣਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਮਿਸ਼ਰਣ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

5. ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਵਿਚ ਵਾਧਾ (wideness of outlook) – ਕਿਉਂਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਰਕੇ ਉਹ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਥਾਨ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਪੱਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਆਕਾਰ ਵਿਚ ਛੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਹਰ ਇਕ ਦਾ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਹਿੱਤਾਂ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਿਵੇਂ ਪਰਿਵਾਰ, ਖੇਡ ਸਮੂਹ ਜਾਂ ਗੁਆਂਢ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਸਿਰਫ਼ ਆਪਣੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹ ਦਾ ਘੇਰਾ ਕਾਫ਼ੀ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਤੰਗ ਸੀ ਕਿਉਂਕਿ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਹਿੱਤ ਸੀਮਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪਰ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਦੂਤੀਆ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਕਾਫ਼ੀ ਵੱਡੇ ਖੇਤਰ ਵਿਚ ਫੈਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਧਰਮਾਂ, ਜਾਤਾਂ, ਸ਼੍ਰੇਣੀਆਂ ਆਦਿ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਂਵਾਂ ਉੱਤੇ ਫੈਲੇ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਉਹ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕ ਸਮੂਹਾਂ ਤੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਦੁਤੀਆ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਨਿਯਮਾਂ, ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ, ਰੀਤੀ-ਰਿਵਾਜਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਅਧੀਨ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਂਵਾਂ ਉੱਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਸਥਾਪਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਕਿਉਂਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹਿੱਤ ਸਾਂਝੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਰਕੇ ਉਹ ਇਕ-ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਮਿਲ-ਜੁਲ ਕੇ ਅਤੇ ਬਿਨਾਂ ਕਿਸੇ ਭੇਦਭਾਵ ਦੇ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸਹਿਣਸ਼ੀਲਤਾ ਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਅਤੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ?
ਜਾਂ
ਸਮਨਰ ਦੁਆਰਾ ਦਿੱਤੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਰਗੀਕਰਨ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆਂ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਮਨਰ ਨੇ ਆਪਣੀ ਕਿਤਾਬ ‘ਫੋਕਵੇਜ਼’ (Folkways) ਵਿਚ ਮਨੁੱਖੀ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਪਾਏ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਹੈ ਜੋ ਹੇਠਾਂ ਲਿਖੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ-

  1. ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ (In-group)
  2. ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ (Out-group)।

ਸਮਨਰ ਨੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਇਹ ਵਰਗੀਕਰਣ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਤੋਂ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿਚ ਇਕ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੈ ਉਹ ਹੈ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਤੇ ਉਹੀ ਸਮੂਹ ਦੂਸਰੇ ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਬਾਹਰੀ ਸਮੁਹ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ (In-group) – ਸਮਨਰ ਵਲੋਂ ਵਰਗੀਕ੍ਰਿਤ ਸਮੂਹ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਵਿਕਾਸ ਦੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਹੀ ਅਵਸਥਾਵਾਂ ਵਿਚ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦਾ ਵਿਵਹਾਰ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਨੂੰ ‘ਅਸੀਂ ਸਮੂਹ` (We-group) ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣਾ ਸਮਝਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਮੈਕਾਈਵਰ ਤੇ ਪੇਜ (Maclver and Page) ਨੇ ਆਪਣੀ ਕਿਤਾਬ ‘ਸਮਾਜ’ (Society) ਦੇ ਵਿਚ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦਾ ਅਰਥ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਤੋਂ ਲਿਆ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਲੈਂਦਾ ਹੈ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਜਾਤ, ਧਰਮ, ਪਰਿਵਾਰ, ਕਬੀਲਾ, ਲਿੰਗ ਆਦਿ ਕੁੱਝ ਇਹੋ ਜਿਹੇ ਸਮੂਹ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਬਾਰੇ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਗਿਆਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਤੀ ਸ਼ਾਂਤੀ ਵਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਸੀ ਸਹਿਯੋਗ, ਆਪਸੀ ਮਿਲਵਰਤਣ, ਸਦਭਾਵਨਾ ਆਦਿ ਵਰਗੇ ਗੁਣ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਬਾਹਰਲਿਆਂ ਪ੍ਰਤੀ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਦੁਸ਼ਮਣੀ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਇੱਛਾ ਅਨੁਸਾਰ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ । ਕੁੱਝ ਕੁ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਮਨਾਹੀ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਕਈ ਵਾਰੀ ਲੜਾਈ ਕਰਨ ਸਮੇਂ ਲੋਕ ਇਕ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਜੁੜ ਕੇ ਦੂਸਰੇ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ‘ਅਸੀਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ’ (We-feeling) ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜਾਤੀ ਪ੍ਰਥਾ ਦੇ ਵਿਚ ਇਕੋ ਜਾਤ ਦੇ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਜੋੜਦੇ ਹਨ ਤੇ ਦੁਸਰੀ ਜਾਤੀ ਦੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਲਈ ਬਾਹਰੀ ਜਾਤ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਵਰਗੇ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ | ਕਈ ਸਮਾਜਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਸਮਾਜ ਦੀ ਵੰਡ ਵੀ ਅੰਤਰੀ ਤੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਜੋੜਦਾ ਹੈ ਤੇ ਆਪਣਾ ਸਮਝਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਉਹ ਮੇਰੇ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਮੇਰਾ ਸਕੂਲ, ਮੇਰਾ ਘਰ, ਮੇਰੀ ਜਗਾ, ਮੇਰਾ ਪਿੰਡ ਵਗੈਰਾ-ਵਗੈਰਾ ।

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਉਹ ਸਮੂਹ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਸੰਬੰਧ ਰੱਖਦਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉਹ ਆਪਣਾ ਸਮਝਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਲਈ ਉਹ “ਮੇਰੇ ਜਾਂ ਅਸੀਂ’ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਅੰਤਰ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਮੈਕਾਈਵਰ (Maclver) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਉਹ ਸਮੂਹ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣਾ ਸਮਰੂਪ ਕਰ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਦੇ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਉਸ ਦਾ ਪਰਿਵਾਰ, ਕਬੀਲਾ, ਪਿੰਡ ਆਦਿ ।” ਆਮ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਅੰਤਰ ਸਮੂਹਾਂ ਵਿਚ ਸੰਬੰਧ ਸ਼ਾਂਤੀ ਵਾਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮੈਂਬਰ ਆਪਸੀ ਸਹਿਯੋਗ ਅਤੇ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਰਵੱਈਆ ਹਮਦਰਦੀ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਆਪਣਾਪਨ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰ, ਆਦਰਸ਼ ਕੀਮਤਾਂ ਆਦਿ ਵਧੀਆ ਲਗਦੇ ਹਨ | ਉਹ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀ ਬਾਰੇ ਵਿਚਾਰ ਬਣਾਉਂਦੇ ਸਮੇਂ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਮੁੱਲਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਹੀ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀ ਹਰ ਚੀਜ਼ ਵਧੀਆ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿਰਫ਼ ਇਸ ਕਰਕੇ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਲੱਗਦੀ ਹੈ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਗਠਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ ਅਤੇ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਅੰਤਰ ਕ੍ਰਿਆਵਾਂ ਜਾਂ ਮੈਂਬਰਾਂ ਦੇ ਆਪਸੀ ਸੰਬੰਧਾਂ ਉੱਤੇ ਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਸਰਬਵਿਆਪਕ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਹੜੇ ਸਾਰੀਆਂ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤਕ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਸਾਰੇ ਹਾਲਤਾਂ ਵਿਚ ਕ੍ਰਿਆਸ਼ੀਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ (Out-group)-ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਲਈ ‘ਉਹ ਸਮੂਹ` (They Group) ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਵੀ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਅਤੇ ਬਿਗਾਨਾ ਸਮਝਦਾ ਹੈ । ਆਮ ਤੌੜ ਉੱਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਹਰ ਇਕ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਤਾਂ ਜੁੜਿਆ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ, ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਹ ਉਸ ਦਾ ਅੰਤਰੀ-ਸਮੂਹ ਕਹਾਉਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਉਹ ਉਸ ਲਈ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਕਹਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਵਰਗੀਕਰਣ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਤੋਂ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਸਮਾਜ ਦੇ ਵਿਚ ਦੋਨਾਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਲਈ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਬਾਹਰੀ ਜਾਤ, ਬਾਹਰਲਾ ਧਰਮ, ਬਾਹਰਲਾ ਪਰਿਵਾਰ ਆਦਿ ਇਹੋ ਜਿਹੇ ਸਮਹ ਹਨ ਜਿਹੜੇ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਤਾਂ ਆਪਣੇਪਨ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਪੈਦਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਜਿਹੜਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ ਓਪਰੀ ਭਾਵਨਾ ਪੈਦਾ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ, ਕਈ ਕਬੀਲਿਆਂ ਦੇ ਵਿਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਹੀ ਰਿਸ਼ਤੇਦਾਰੀ ਦਾ ਵੀ ਵਰਗੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਤੁਸੀਂ ਕਿਤੇ ਵੀ ਜਾਂਦੇ ਹੋ, ਜਦੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉੱਥੇ ਕੋਈ ਦੂਸਰਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਨਾਲ ਗੱਲ-ਬਾਤ ਕਰਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹੋ । ਜੇਕਰ ਉਹ ਤੁਹਾਡੀ ਜਾਤ, ਧਰਮ ਆਦਿ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਰੱਖਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਵਿਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹੋ । ਜੇਕਰ ਜਾਤ, ਧਰਮ ਵੱਖਰਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਬਣਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸਮਾਨ ਪਿਛੋਕੜ ਵਾਲੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਦੋਸਤੀ ਵਾਲਾ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤੇ ਅਸਮਾਨ ਪਿਛੋਕੜ ਵਾਲੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਦੁਸ਼ਮਣਾਂ ਵਾਲਾ ਸਲੂਕ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹੋ ।

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸੀਂ ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਬਿਗਾਨੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਨਹੀਂ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਲੜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਗਠਨ ਬਹੁਤ ਢਿੱਲਾ ਅਤੇ ਅਸੰਗਠਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਮੁੱਲਾਂ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦੀ ਕੀਮਤ ਕਾਫ਼ੀ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਹ ਵੀ ਸਰਬਵਿਆਪਕ ਸਮੂਹ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਥਾਂ ਉੱਤੇ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਉਪਰੋਕਤ ਵਿਵਰਣ ਤੋਂ ਇਹ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੈ ਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਲਈ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਤੇ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਹਾਲਤ, ਸਥਾਨ ਤੇ ਸਮੇਂ ਦੇ ਮੁਤਾਬਕ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ । ਕਦੀ ਕੋਈ ਵਿਅਕਤੀ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦੀ ਸਾਂਝ ਨਾ ਹੋਣ ਦੀ ਸੂਰਤ ਦੇ ਵਿਚ ਉਹ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਉਸ ਲਈ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਵੀ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਵਿਵਹਾਰ ਸਹਿਯੋਗ, ਹਮਦਰਦੀ ਅਤੇ ਪਿਆਰ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕਦਰਾਂ-ਕੀਮਤਾਂ, ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਉੱਤਮ ਸਮਝਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਚੰਗੀਆਂ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ । ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਲਈ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਦੁਸ਼ਮਣੀ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕੰਮਾਂ ਦੀ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਮਨਾਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਬਾਹਰਲੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੰਮਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਵੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਸਮੁਹ ਸਾਰੇ ਸਮਾਜਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਹਾਲਾਤ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਆਮ ਵਿਅਕਤੀ ਅੰਤਰੀ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿਚ ਵਧੇਰੇ ਉੱਪਰ ਸਮਝਦਾ ਹੈ । ਉਦਾਹਰਨ ਦੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਮੁਸਲਮਾਨਾਂ ਦੇ ਲਈ ਗੈਰ ਮੁਸਲਮਾਨ ਬਾਹਰੀ ਸਮੂਹ ਦੇ ਗਿਣੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਵਿਵਹਾਰ ਵੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਦੋਸਤੀ-ਦੁਸ਼ਮਣੀ ਵਾਲੇ ਸੰਬੰਧ ਵੀ ਇਸ ਦਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਤੋਂ ਹੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

PSEB 11th Class Sociology Important Questions Chapter 4 ਸਮਾਜਿਕ ਸਮੂਹ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ? ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
1942 ਵਿਚ ਐੱਚ. ਐੱਚ. ਹਾਈਮਨ (H. H. Hyman) ਨੇ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸੰਕਲਪ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ` ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਆਪਣੀ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਤਾਬ ‘ਸਥਿਤੀਆਂ ਦੇ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨ (The Psychology Status) ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਸੀ । ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਸ ਸ਼ਬਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਨੇ ਮਨੁੱਖੀ ਵਿਵਹਾਰ ਦੇ ਸਮਾਜਿਕ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਪੱਖਾਂ ਦੇ ਅਧਿਐਨ ਅਤੇ ਵਿਆਖਿਆ ਲਈ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਆਪਣਾ ਧਿਆਨ ਇਸ ਗੱਲ ਉੱਤੇ ਕੇਂਦਰਿਤ ਕੀਤਾ ਕਿ ਕਿਵੇਂ ਮਨੁੱਖ ਆਪਣੇ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਚੁਣਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਸ ਦੇ ਵਿਅਕਤੀਤਵ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਖ਼ਾਸ ਕਰ ਮਰਟਨ ਨੇ ਇਸ ਦੀ ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨ ਲਈ ਮਹੱਤਤਾ ਨੂੰ ਸਮਝਿਆ ਤੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਮਾਜਿਕ ਵਾਤਾਵਰਣ ਦੇ ਕਾਰਜਾਤਮਕ ਅਤੇ ਸੰਰਚਨਾਤਮਕ ਪੱਖਾਂ ਨੂੰ ਸਮਝਣ ਲਈ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਸਿੱਧ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿਵਹਾਰ ਦੀਆਂ ਭਿੰਨਤਾਵਾਂ ਵਿਚ ਲੁਕੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਸਮਾਨਤਾਵਾਂ ਨੂੰ ਲੱਭ ਸਕਦੇ ਹਾਂ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਸ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਮਨੁੱਖੀ ਵਿਵਹਾਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਪੱਖਾਂ ਬਾਰੇ ਜਾਣਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਸਮਾਜ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਸਮਝਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ (Meaning of Reference Group) – ਜੇਕਰ ਅਸੀ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਸਮਝਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਸਮਝਣਾ ਪਵੇਗਾ ਕਿਉਂਕਿ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਦੇ ਸੰਦਰਭ ਵਿਚ ਰੱਖ ਕੇ ਹੀ ਸਮਝਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਵਿਅਕਤੀ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਉਹ ਆਪਣਾ ਸਮੁਹ ਸਮਝ ਕੇ ਉਸ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਵਿਚ ਹਿੱਸਾ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਹਰ ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਆਪਣਾ ਇਕ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਉਹ ਅਸਲੀ ਤੌਰ ਤੇ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਸਲੀ ਮੈਂਬਰ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਤੇ ਉਸ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਉਸਦਾ ਆਪਣਾਪਣ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਪ੍ਰਮਾਪਾਂ, ਕੀਮਤਾਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਵੀ ਆਪਣਾ ਮੰਨ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ।

ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਭਿੰਨ ਅੰਗ ਮੰਨਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਸ ਦਾ ਹਰ ਇਕ ਕੰਮ ਜਾਂ ਕ੍ਰਿਆ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਆਦਰਸ਼, ਕੀਮਤਾਂ ਆਦਿ ਉਸ ਦੇ ਵਿਅਕਤਿੱਤਵ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦਾ ਮੁਲਾਂਕਣ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਉਹ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਨੂੰ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਹ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪਰ ਕਈ ਵਾਰੀ ਇਹ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਕਿ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਵਿਵਹਾਰ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਜਾਂ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਬਲਕਿ ਉਹ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਤੇ ਕੀਮਤਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ | ਪਰ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਇਹ ਉੱਠਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਜਿਹਾ ਕਿਉਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ? ਇਸੇ ਕਾਰਨ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਸਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ | ਕੁਝ ਲੇਖਕਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਵਹਾਰ ਪ੍ਰਤੀਮਾਨ ਤੇ ਉਸ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਵਿਵੇਚਨ ਲਈ ਸਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਣਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਕਿਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਦੀ ਉਸ ਸਮੁਹ ਵਿਚ ਕੀ ਸਥਿਤੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸਮੁਹ ਤੋਂ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋ ਕੇ ਉਸ ਦਾ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਮੈਂਬਰ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਵਿਅਕਤੀ ਇਸ ਦਾ ਅਸਲੀ ਮੈਂਬਰ ਨਾ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਇਸ ਤੋਂ ਇੰਨਾ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸਦੇ ਵਿਵਹਾਰ ਦਾ ਬਹੁਤ ਸਾਰਾ ਹਿੱਸਾ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਸਮਾਜ ਵਿਗਿਆਨੀ ਉਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਸੰਦਰਭ ਸਮੁਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਆਮ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੂਹ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਮੰਨ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਪਣੀਆਂ ਆਦਤਾਂ, ਮਨੋਵਿਤੀਆਂ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਿਯਮਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਇਸ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਸੰਦਰਭ ਸਮੁਹ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਜਿਵੇਂ ਕੋਈ ਮੱਧ ਵਰਗੀ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਉੱਚ ਵਰਗ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਮੰਨ ਸਕਦਾ ਹੈ । ਆਪਣਾ ਵਿਵਹਾਰ, ਆਦਤਾਂ, ਆਦਰਸ਼, ਕੀਮਤਾਂ ਉਸੇ ਉੱਚ ਵਰਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਿਯਮਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਆਪਣੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ, ਖਾਣ ਪੀਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਉਸੇ ਉੱਚ ਵਰਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਿਯਮਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਉੱਚਾ ਵਰਗ ਉਸ ਮੱਧ ਵਰਗੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜਦੋਂ ਵਿਅਕਤੀ ਉੱਚ ਵਰਗ ਨਾਲ ਮਾਨਸਿਕ ਤੌਰ ਤੇ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉੱਚ ਵਰਗ ਉਸ ਲਈ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਪਣੀਆਂ ਆਦਤਾਂ, ਪ੍ਰਤਿਮਾਨ, ਵਿਤੀਆਂ ਆਦਿ ਨੂੰ ਉਸ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਢਾਲਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦਾ ਅਰਥ ਹੋਰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਅਸੀ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਦੀਆਂ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਵੇਖਾਂਗੇ ।

ਸ਼ੈਰਿਫ ਅਤੇ ਸ਼ੈਰਿਫ (Sharrif and Shariff) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਸਮੂਹ ਦੇ ਇਕ ਅੰਗ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਸੰਬੰਧਿਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਮਨੋਵਿਗਿਆਨਿਕ ਰੂਪ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੋਣ ਦੀ ਚਾਹ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਦੈਨਿਕ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿਚ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਪਛਾਣ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਦੈਨਿਕ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿਚ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਉਹ ਸਮੂਹ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਪਛਾਣ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਪਛਾਣ ਕਰਨ ਦੀ ਇੱਛਾ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ।”

ਰਾਬਰਟ ਮਰਟਨ (Robert Merton) ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, “ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਵਿਵਹਾਰ ਸਿਧਾਂਤ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਮੁਲਾਂਕਣ ਜਾਂ ਮੁਲਾਂਕਣ ਦੀਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕ੍ਰਿਆਵਾਂ ਦੇ ਕਾਰਕਾਂ ਤੇ ਪਰਿਣਾਮਾਂ ਨੂੰ ਕ੍ਰਮਬੱਧ ਕਰਨਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਵਿਅਕਤੀ ਹੋਰਾਂ ਮਨੁੱਖਾਂ ਅਤੇ ਸਮੂਹਾਂ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਤੇ ਮਾਪਦੰਡਾਂ ਨੂੰ ਤੁਲਨਾਤਮਕ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਵਿਵਸਥਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਅਪਣਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਮਰਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇਹ ਵੇਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਜਿਹੜੇ ਸਮੂਹ ਜੀਵਨ ਦੇ ਹਾਲਤਾਂ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਫਲ ਹਨ ਵਿਅਕਤੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਮੰਨਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਮਰਟਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਕੋਈ ਵਿਅਕਤੀ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੋਵੇ ਜਿਸ ਦਾ ਉਹ ਮੈਂਬਰ ਹੈ । ਉਹ ਉਸ ਸਮੂਹ ਦਾ ਮੈਂਬਰ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਉਹ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੈ । ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਅਸੀਂ ਅਸਲ ਵਿਚ ਮੈਂਬਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਕਿਸੇ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਅੰਤਰ ਕ੍ਰਿਆ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ਤਾਂ ਵੀ ਜੇਕਰ ਉਹ ਸਮੂਹ ਸਾਡੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਵਿਵਹਾਰਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਢਾਲਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਉਸ ਗ਼ੈਰ ਮੈਂਬਰਸ਼ਿਪ ਸਮੂਹ ਵੀ ਸਾਡੇ ਲਈ ਸੰਦਰਭ ਸਮੂਹ ਹੋਵੇਗਾ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

Science Guide for Class 6 PSEB ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ Intext Questions and Answers

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 12)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਕੱਚੇ ਆਲੂ ਉੱਤੇ ਆਇਓਡੀਨ ਦੇ ਘੋਲ ਦੀਆਂ ਕੁਝ ਬੂੰਦਾਂ ਪਾਉਂਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਆਲੂ ਦਾ ਰੰਗ ਆਇਓਡੀਨ ਬੂੰਦਾਂ ਦੇ ਸੰਪਰਕ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਨਾਲ ਨੀਲਾ-ਕਾਲਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਆਇਓਡੀਨ ਦੇ ਘੋਲ ਦਾ ਰੰਗ ਕਿਹੜਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜਾਮਨੀ (ਵਾਇਲਟ) ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਕੱਚੇ ਆਲੂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੋਰ ਕਿਹੜੇ ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸਟਾਰਚ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਬਲੇ ਚਾਵਲ, ਕਣਕ ਦਾ ਆਟਾ, ਸ਼ਕਰਕੰਦੀ ਅਤੇ ਨਾ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 13)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਾ ਪਤਾ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹੜੇ ਰਸਾਇਣਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਸੁਲੌਊਸ਼ਨ ਅਤੇ ਕਾਸਟਿਕ ਸੋਡਾ ਸੁਲੌਊਸ਼ਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਯੁਕਤ ਕੋਈ ਦੋ ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਉਬਲੇ ਆਂਡੇ ਅਤੇ ਮਟਰ ।

ਸੋਚੋ ਅਤੇ ਉੱਤਰ ਦਿਓ (ਪੇਜ 15)

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਕਾਜੂ ਨੂੰ ਕਾਗਜ਼ ਉੱਤੇ ਰਗੜਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਇਹ ਅਲਪ-ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਕਿਉਂ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਤੇਲ ਪੈਚ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਕਾਰਨ ਕਾਗਜ਼ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਕੋਈ ਦੋ ਚਰਬੀ ਯੁਕਤ ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਜੂ, ਮੁੰਗਫਲੀ ਤੇ ਰਾਈ ਦੇ ਬੀਜ ।

PSEB 6th Class Science Guide ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ Textbook Questions, and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ ਤੌਰ

(i) ਅਸੀਂ ਸਟਾਰਚ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਾ ਪ੍ਰੀਖਣ ਕਰਨ ਲਈ ………….. ਦੇ ਘੋਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਇਓਡੀਨ,

(ii) ਆਲੂ, ਚਾਵਲ ਅਤੇ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ………… ਭਰਪੂਰ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਂਟਸ,

(iii) ਖੱਟੇ ਫ਼ਲਾਂ ਵਿੱਚ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ………….. ਵਿਟਾਮਿਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
‘ਸੀ (C),

(iv) ਅਨੀਮੀਆ ……….. ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਲੋਹਾ,

(v) ਗਿੱਲ੍ਹੜ …………. ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਆਇਓਡੀਨ ।

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗਲਤ ਲਿਖੋ

(i) ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਸੂਰਜ ਦੀ ਰੌਸ਼ਨੀ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵਿਟਾਮਿਨ D ਬਣਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(ii) ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਬਣੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਅਸੀਂ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ,

(iii) ਦਾਲਾਂ ਚਰਬੀ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

(iv) ਚਾਵਲ ਇਕੱਲੇ ਹੀ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਸਾਰੇ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(v) ਅੰਧਰਾਤਾ ਵਿਟਾਮਿਨ A ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਹੀ ।

3. ਕਾਲਮ ‘ਉਂ ਅਤੇ ਕਾਲਮ “ਅ” ਨੂੰ ਮਿਲਾਓ

‘ਉ’ ‘ਅ’
(i) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਘਾਟ (ਉ) ਰਿਕਟਸ
(ii) ਵਿਟਾਮਿਨ A (ਅ) ਬੇਰੀ-ਬੇਰੀ
(iii) ਵਿਟਾਮਿਨ B (ਇ) ਸਕਰਵੀ
(iv) ਵਿਟਾਮਿਨ C (ਸ) ਅੰਧਰਾਤਾ
(v) ਵਿਟਾਮਿਨ D (ਹ) ਕਵਾਸ਼ੀਓਰਕਰ

ਉੱਤਰ-

(i) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਘਾਟ (ਹ) ਕਵਾਥੀਓਰਕਰ
(ii) ਵਿਟਾਮਿਨ A (ਸ) ਅੰਧਰਾਤਾ
(iii) ਵਿਟਾਮਿਨ B (ਅ) ਬੇਰੀ-ਬੇਰੀ
(iv) ਵਿਟਾਮਿਨ C (ਇ) ਸਕਰਵੀ
(v) ਵਿਟਾਮਿਨ D (ਉ) ਰਿਕਟਸ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰੋ

(i) ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਭਰਪੂਰ ਸਰੋਤ ਹੈ ?
(ਉ) ਆਲੂ
(ਅ) ਅੰਬ
(ਇ) ਚਾਵਲ
(ਸ) ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਦਾਲ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਮੁੰਗੀ ਦਾਲ ।

(ii) ਹੇਠ ਲਿਖਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਹੜਾ ਥਾਇਰਾਇਡ ਗ੍ਰੰਥੀ ਦੇ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
(ਉ) ਵਿਟਾਮਿਨ .
(ਅ) ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ
(ਇ) ਆਇਓਡੀਨ
(ਸ) ਲੋਹਾ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਇ) ਆਇਓਡੀਨ ।

(iii) ਅਨੀਮੀਆ ਕਿਸ ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
(ਉ) ਵਿਟਾਮਿਨ
(ਅ) ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ
(ਇ) ਲੋਹਾ ।
(ਸ) ਆਇਓਡੀਨ ॥
ਉੱਤਰ-
(ਇ) ਲੋਹਾ

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਸੰਤੁਲਿਤ ਭੋਜਨ ਜਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਆਹਾਰ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਉਹ ਖੁਰਾਕ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਕਾਫੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤ, ਮੋਟਾ ਆਹਾਰ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕਿ ਸਰੀਰ ਦੇ ਵਾਧੇ ਤੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਨੂੰ ਸੰਤੁਲਨ ਖੁਰਾਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਬਾਜਰਾ, ਜਵਾਰ, ਚਾਵਲ, ਕਣਕ, ਗੁੜ, ਅੰਬ, ਕੇਲਾ, ਆਲੂ ਆਦਿ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਨਿਰਮਾਣ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਸਰੀਰ ਦੇ ਵਾਧੇ ਤੇ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਟੁੱਟੇ-ਭੱਜੇ ਸੈੱਲਾਂ ਦੀ ਮੁਰੰਮਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iv)
ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਲਈ ਮੋਟੇ ਆਹਾਰ ਦੀ ਕੀ ਮਹੱਤਤਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੋਟਾ ਆਹਾਰ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਬਦਹਜ਼ਮੀ ਦੇ ਭੋਜਨ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਬਜ਼ ਨੂੰ ਰੋਕਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬਰਕਰਾਰ ਰੱਖਣ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਦੇ ਪੇਟ ਵਿੱਚ ਵਾਧੇ ਲਈ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (v)
ਕੋਈ ਦੋ ਅਜਿਹੇ ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਚਰਬੀ ਮੌਜੂਦ ਹੋਵੇ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੀਟ, ਆਂਡੇ, ਮੱਛੀ, ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਬਣੇ ਪਦਾਰਥ ਜਿਵੇਂ ਮੱਖਣ, ਘਿਓ ਆਦਿ ।

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਸ਼ਰ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਪਾਣੀ ਜੀਵਨ ਲਈ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਪਾਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਲਈ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਭੋਜਨ ਤੋਂ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਜਜ਼ਬ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ | ਪਾਣੀ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਫਾਲਤੂ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਯੂਰੀਅਨ ਅਤੇ ਪਸੀਨੇ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪੰਜ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ, ਪ੍ਰੋਟੀਨ, ਚਰਬੀ, ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਵਿਟਾਮਿਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਅਸੀਂ ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਸੀਂ (C) ਕਿੱਥੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ? ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਵਿਟਾਮਿਨ ਸੀ ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗ ਦਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਨੂੰ ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਸੀ’ ਖੱਟੇ ਫਲਾਂ ਜਿਵੇਂ ਨਿੰਬੂ, ਸੰਤਰਾ, ਆਮਲਾ, ਟਮਾਟਰ ਅਤੇ ਬਰੋਕਲੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਦਾ ਹੈ । ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਸੀ’ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਸਾਨੂੰ ਸਕਰਵੀ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਲੱਛਣ ਹੈ ਖੂਨ ਦਾ ਵਗਣਾ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iv)
ਚਰਬੀ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਂਟਸ ਨੂੰ ਊਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਕਿਉਂ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ? ਵਿਆਖਿਆ ਕਰੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਚਰਬੀ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਊਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਪਾਚਨ ਸ਼ਕਤੀ ਸਮੇਂ ਇਹ ਬਹੁਤ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਪੈਦਾ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਜੋ ਕਿ ਵੱਖਰੇ-ਵੱਖਰੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (i)
ਤਰੁਟੀ ਰੋਗ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗਾਂ ਬਾਰੇ ਸੰਖੇਪ ਵਿੱਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਘਾਟ ਰੋਗ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਦੂਜੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਂਟਸ ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨੂੰ ਵੀ ਘਾਟ ਰੋਗ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ-

  • ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਮੈਰਾਸਮਸ ਦਾ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਲੱਛਣ ਹਨ ਖੁਸ਼ਕ ਚਮੜੀ, ਸੁੱਜੀਆਂ ਅੱਖਾਂ, ਸਰੀਰ ਦਾ ਪਤਲਾ ਹੋ ਜਾਣਾ, ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਣ ਕਰਕੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਹਿੱਲਣ-ਜੁਲਣ ਵਿੱਚ ਤਕਲੀਫ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਕਵਾਥੀਓਰਕਰ ਦਾ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਲੱਛਣ ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਰੁਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ! ਮੂੰਹ ਦਾ ਸੁੱਜਣਾ, ਖੁਸ਼ਕ ਚਮੜੀ, ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਹੋਣਾ ਅਤੇ ਵਾਲਾਂ ਦਾ ਝੜਨਾ ਆਦਿ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (ii)
ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਸਰੀਰ ਲਈ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਭੋਜਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹੈ ਜੋ ਚੰਗੀ ਤੇ ਸਿਹਤਮੰਦ ਸਰੀਰ ਅਤੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ । ਇਹ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਥੋੜ੍ਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਲੋਹਾ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ, ਆਇਓਡੀਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਹਨ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਸਾਨੂੰ, ਕੁੱਝ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਹੀਮੋਗਲੋਬਿਨ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਰੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ, ਫਲ, ਗੁੜ ਆਦਿ ਹਨ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਅਨੀਮੀਆ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ-ਇਹ ਵੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਹੈ । ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੀਆਂ ਹੱਡੀਆਂ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਅਤੇ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਨ ਵਾਸਤੇ । ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਨ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਬਣੇ ਪਦਾਰਥ । ਇਸਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਹੱਡੀਆਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਅਤੇ ਦੰਦਾਂ ਦਾ ਖਰਾਬ ਹੋਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਦੁੱਧ, ਪਨੀਰ, ਬਾਜਰਾ, ਕੇਲਾ ਅਤੇ ਗਿਰੀਆਂ ਆਦਿ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੱਡੀਆਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਤੇ ਦੰਦ ਖਰਾਬ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

ਆਇਓਡੀਨ-ਇਹ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਹਨ, ਥਾਇਰਡ ਗਲੈਂਡ ਦੀ ਕੰਮਕਾਜ ਕਰਨ ਲਈ । ਇਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਨ-ਸਮੁੰਦਰੀ ਭੋਜਨ, ਹਰੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਆਇਓਡੀਨ ਲੂਣ ਆਦਿ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਗਾਇਟਰ ਦਾ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਲੱਛਣ ਗਰਦਨ ਵਿੱਚ ਗਲੈਂਡ ਦਾ ਵਾਧਾ ਹੋਣਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ (iii)
ਵਿਟਾਮਿਨ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਸਰੀਰ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਵਿਟਾਮਿਨਾਂ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਬਾਰੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਸਹੀ ਕੰਮਕਾਜ ਕਰਨ ਲਈ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ । ਉਦਾਹਰਨ ਵਜੋਂ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਵੀ ਸਾਨੂੰ ਥੋੜ੍ਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਾਨੂੰ ਊਰਜਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦੇ । ਸਾਨੂੰ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਵਿਟਾਮਿਨਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਜਿਵੇਂ-ਏ, ਬੀ, ਸੀ, ਡੀ ਅਤੇ ਈ, ਕੇ|

ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਏਂ -ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਆਂਡਾ, ਮੀਟ, ਦੁੱਧ, ਪਨੀਰ, ਹਰੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਗਾਜਰ, ਪਪੀਤਾ ਹਨ । ਇਹ ਸਾਡੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਦੀ ਰੋਸ਼ਨੀ ਅਤੇ ਚਮੜੀ ਲਈ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਅੱਖਾਂ ਦਾ ਅੰਨਾਪਨ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਬੀ -ਇਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਨ ਦੁੱਧ, ਹਰੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ, ਮਟਰ, ਅਨਾਜ, ਆਂਡੇ, ਖੁੰਭਾਂ ਆਦਿ ਹਨ । ਇਸ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪਾਚਣ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇ ਸਹੀ ਕੰਮ ਕਰਨ ਅਤੇ ਕੇਂਦਰੀ ਦਿਮਾਗ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦੇ ਸਹੀ ਕੰਮ ਕਰਨ ਨਾਲ ਹੈ । ਇਸਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਬੇਰੀ-ਬੇਰੀ ਨਾਮ ਦਾ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਸੀਂ -ਇਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਖੱਟੇ ਫਲ ਜਿਵੇਂ ਨਿੰਬੂ, ਸੰਤਰਾਂ, ਆਮਲਾ, ਬਰੋਕਲੀ, ਟਮਾਟਰ ਆਦਿ ਹਨ । ਇਹ ਸਾਨੂੰ ਵੱਖਰੀ-ਵੱਖਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨਾਲ ਲੜਨ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਇਮੀਊਨ ਨੂੰ ਵਧਾਉਂਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਸਕਰਵੀ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਡੀ ਇਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਬਣੇ ਪਦਾਰਥ, ਮੱਛੀ ਦਾ ਤੇਲ, ਧੁੱਪ ਵਿੱਚ ਬੈਠਣਾ ਆਦਿ ਹਨ । ਇਸ ਦੀ ਲੋੜ ਦੰਦਾਂ ਅਤੇ ਹੱਡੀਆਂ ਨੂੰ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰੱਖਣਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਰਿਕੇਟਸ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਈਂ -ਇਸ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਗਿਰੀਆਂ ਜਿਵੇਂ ਬਾਦਾਮ, ਅਖਰੋਟ, ਕਾਜ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦਾ ਤੇਲ ਜਿਵੇਂ ਸੂਰਜਮੁੱਖੀ ਅਤੇ ਸੋਇਆਬੀਨ ਦਾ ਤੇਲ ਆਦਿ । ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪਾਲਕ ਅਤੇ ਬਰੋਕਲੀ ਆਦਿ । ਇਹ ਸੈੱਲ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸਿਹਤ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਘਟਾਉਂਦਾ ਹੈ।

ਵਿਟਾਮਿਨ ‘ਕੇ – ਇਸਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਰੇ ਪੱਤੇਦਾਰ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇਂ ਪਾਲਕ, ਸ਼ਲਗਮ, ਬਰੋਕਲੀ, ਫੁੱਲ ਗੋਭੀ ਅਤੇ ਬੰਦਗੋਭੀ, ਮੱਛੀ, ਮੀਟ, ਆਂਡੇ ਅਤੇ ਅਨਾਜ ਆਦਿ । ਇਸ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਖੁਨ ਦੇ ਜੰਮਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

PSEB Solutions for Class 6 Science ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ Important Questions and Answers

1. ਖ਼ਾਲੀ ਥਾਂਵਾਂ ਭਰੋ ਬਣਨ

(i) ਮੱਛੀ ਦਾ ਤੇਲ ਵਿਟਾਮਿਨ ………….. ਦਾ ਸਰੋਤ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਡੀ,

(ii) ਸਰੀਰ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ………….. ਤੱਤ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਪੋਸ਼ਕ,

(iii) ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ ………….. ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਦੋ,

(iv) ………….. ਨੂੰ ਫਲਾਂ ਦੀਖੰਡ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਫਰੁਕਟੋਜ਼,

(v) ਮੱਖਣ ………….. ਦਾ ਸਰੋਤ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਸੁਕਰੋਜ਼ ।

2. ਸਹੀ ਜਾਂ ਗਲਤ ਲਿਖੋ-

(i) ਸੁਕਰੋਜ਼ ਸਾਨੂੰ ਫਲਾਂ ਤੋਂ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(ii) ਅਨਾਜ ਚਰਬੀ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(iii) ਸਾਨੂੰ ਵਿਟਾਮਿਨਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(iv) ਵਿਟਾਮਿਨ ਏ ਦੀ ਘਾਟ ਨਾਲ ਰਿਕਿਟਸ ਰੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ,

(v) ਘਿਉ ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਨ ।
ਉੱਤਰ-
ਗ਼ਲਤ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

3. ਮਿਲਾਨ ਕਰੋ

ਕਾਲਮ ਉੱ ਕਾਲਮ ‘ਆਂ
(i) ਉ ਅਤੇ ਮੱਖਣ (ਉ) ਵਿਟਾਮਿਨ ਡੀ
(ii) ਦੁੱਧ, ਆਂਡੇ ਅਤੇ ਮੀਟ (ਆ) ਚਰਬੀ
(iii) ਮੱਛੀ ਦਾ ਤੇਲ (ਇ) ਸੁਕਰੋਜ਼
(iv) ਚੀਨੀ (ਸ) ਰਿਕਿਟਸ
(v) ਵਿਟਾਮਿਨ ਡੀ (ਹ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ

ਉੱਤਰ –

ਕਾਲਮ ਕਾਲਮ ਆਂ
(i) ਘਿਉ ਅਤੇ ਮੱਖਣ (ਅ) ਚਰਬੀ
(ii) ਦੁੱਧ, ਆਂਡੇ ਅਤੇ ਮੀਟ (ਹ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ
(iii) ਮੱਛੀ ਦਾ ਤੇਲ (ਉ) ਵਿਟਾਮਿਨ ਡੀ
(iv) ਚੀਨੀ (ਇ) ਸੁਕਰੋਜ਼
(v) ਵਿਟਾਮਿਨ ਡੀ (ਸ) ਰਿਕਿਟਸ

4. ਸਹੀ ਉੱਤਰ ਚੁਣੋ

(i) ਭੋਜਨ ਦੇ ਮੁੱਖ ਪੋਸ਼ਕ ਹਨ –
(ਉ) ਦੋ .
(ਆ) ਚਾਰ
(ਇ) ਪੰਜ .
(ਸ) ਦਸ ।
ਉੱਤਰ-
(ਇ) ਪੰਜ ।

(ii) ਸਾਰੇ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੇ ਪੋਸ਼ਣ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਹੈ
(ਉ) ਚਰਬੀ
(ਵਸਾ)
(ਅ ਰੇਸ਼ੇ
(ਈ ਖਣਿਜ ਲੂਣ
(ਸ) ਕੁੱਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ।
ਉੱਤਰ-
(ਅ) ਰੇਸ਼ੇ ।

(iii) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਉਪਸਥਿਤੀ ਦਰਸਾਉਣ ਲਈ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਅਤੇ ਕਾਸਟਿਕ ਸੋਡੇ ਦਾ ਘੋਲ
(ਅ) ਨਾਈਟਿਕ ਅਮਲ
(ੲ) ਆਇਓਡੀਨ ।
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਅਤੇ ਕਾਸਟਿਕ ਸੋਡੇ ਦਾ ਘੋਲ ।

(iv) ਆਇਓਡੀਨ ਦੁਆਰਾ ਪਰੀਖਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ –
(ਉ) ਚੀਨੀ
(ਅ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ
(ਈ) ਵਿਟਾਮਿਨ
(ਸ) ਜਲ ।
ਉੱਤਰ-
(ਉ) ਚੀਨੀ ॥

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

(v) ਦੁੱਧ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਜਲ
(ਅ) ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ
(ਈ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।

(vi) ਨਿੰਬੂ ਅਤੇ ਆਵਲਾ ਸ੍ਰੋਤ ਹਨ
(ਉ) ਕਾਰਬੋਹਾਈਡੇਟਸ
(ਅ) ਖਣਿਜ
(ਸ) ਵਿਟਾਮਿਨ-C.
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਵਿਟਾਮਿਨ-C.

(vii) ਵਸਾ (ਚਰਬੀ) ਦਾ ਪਰੀਖਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਲੂਣ ਨਾਲ
(ਅ) ਸੁਆਦ ਨਾਲ
(ਇ) ਕਾਗਜ਼ ਤੇ ਰਗੜਨ ਨਾਲ
(ਸ) ਅਸੰਭਵ ਹੈ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਕਾਗਜ਼ ਤੇ ਰਗੜਨ ਨਾਲ ।

(viii) ਆਂਡੇ ਦੇ ਸਫੈਦ ਭਾਗ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ
(ਅ) ਤੇ ਵਿਟਾਮਿਨ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ।

(ix) ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਪੋਸ਼ਕ ਹੈ
(ਉ) ਵਿਟਾਮਿਨ
(ਅ) ਖਣਿਜ
(ਇ) ਚੀਨੀ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ੲ) ਚੀਨੀ ।

(x) ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
(ੳ) ਵਸਾ (ਚਰਬੀ) .
(ਅ) ਚੀਨੀ
(ਇ) ਜਲ
(ਸ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ॥

(xi) ਹੱਡੀਆਂ ਅਤੇ ਦੰਦਾਂ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਲੋਹਾ ।
(ਅ) ਮੈਂਗਨੀਜ਼
(ਫਾਸਫੋਰਸ
(ਸ) ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ।

(xii) ਵਿਟਾਮਿਨ-D ਦੀ ਕਮੀ ਤੋਂ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਰੋਗ ਹੈ
(ਉ) ਸਕਰਵੀ
(ਅ) ਬੇਰੀ-ਬੇਰੀ
(ਈ) ਰਿਕੇਟਸ
(ਸ) ਐੱਘਾ (ਗਾਇਟਰ) ।
ਉੱਤਰ-
(ਈ) ਰਿਕੇਟਸ |

(xiii) ਘੇਘਾ (ਗਾਇਟਰ) ਰੋਗ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(ਉ) ਵਿਟਾਮਿਨ-K
(ਅ) ਵਿਟਾਮਿਨ-C
(ਈ) ਲੋਹਾ
(ਸ) ਆਇਓਡੀਨ ।
ਉੱਤਰ-
(ਸ) ਆਇਓਡੀਨ :

(xiv) ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਨੂੰ ………… ਭੋਜਨ ਆਖਦੇ ਹਨ –
(ਉ) ਉਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ
(ਅ) ਰੱਖਿਆਤਮਕ
(ਈ) ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ
(ਸ) ਸਾਰੇ ਵਿਕਲਪ ।
ਉੱਤਰ-
(ੳ) ਉਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

(xv) ਸੂਰਜੀ ਉਰਜਾ ਤੋਂ ਵਿਟਾਮਿਨ …….. ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
(ਉ) B
(ਅ) C
(ੲ) D
(ਸ) A.
ਉੱਤਰ-
(ੲ) D.

5. ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਮੁੱਖ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੋਟੀ, ਰਾਜਮਾਂਹ, ਸਰੋਂ ਦਾ ਸਾਗ, ਦਹੀਂ ਅਤੇ ਘਿਓ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਆਂਧਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੇ ਮੁੱਖ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਚਾਵਲ, ਅਰਹਰ ਦੀ ਦਾਲ ਅਤੇ ਰਸਮ, ਕੁੰਦਰਨਾ, ਮੱਠਾ, ਘਿਓ, ਆਚਾਰ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਪੋਸ਼ਕ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪੋਸ਼ਕ-ਸਾਡੇ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਕੱਚੀ ਸਮੱਗਰੀ ਵਿੱਚ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਲਈ ਕੁੱਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪੋਸ਼ਕ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਸਾਡੇ ਭੋਜਨ ਦੇ ਮੁੱਖ ਪੋਸ਼ਕ ਕਿਹੜੇ-ਕਿਹੜੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ, ਪ੍ਰੋਟੀਨ, ਵਸਾ, ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸਜੀਵਾਂ ਦੇ ਲਈ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦਾ ਕੀ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਉਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਅੰਗ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸਰੀਰ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਦਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਸਰੀਰ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਮਾਨਵ ਸਰੀਰ ਲਈ ਵਿਟਾਮਿਨਾਂ ਅਤੇ ਖਣਿਜਾਂ ਦੀ ਕੀ ਭੂਮਿਕਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਮਾਨਵ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਸਰੋਤ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਸਰੋਤ-ਮੱਛੀ, ਮਾਸ, ਦੁੱਧ, ਦਾਲਾਂ, ਸੋਇਆਬੀਨ ਅਤੇ ਆਂਡੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸਰੋਤ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੇ ਸੋਮੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਕਣਕ, ਚਾਵਲ, ਮੱਕੀ, ਬਾਜਰਾ, ਚੀਨੀ, ਆਲੂ ਅਤੇ ਸ਼ਕਰਕੰਦੀ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਜਲ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਮਾਤਰਾ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਜਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 70% ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਵਸਾ ਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਸਾ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਖਾਣਾ ਪਕਾਉਣ ਵਾਲਾ ਤੇਲ, ਮੱਖਣ, ਘਿਓ, ਦੁੱਧ, ਮੁੰਗਫ਼ਲੀ, ਪਨੀਰ ਆਦਿ ਵਸਾ ਦੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਵੱਖ ਖਣਿਜਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਾਸਫੋਰਸ, ਕਲੋਰੀਨ, ਆਇਓਡੀਨ, ਸਲਫਰ, ਨਾਈਟਰੋਜਨ, ਸੋਡੀਅਮ, ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ, ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ, ਲੋਹਾ, ਜ਼ਿੰਕ ਆਦਿ ਵੱਖ ਖਣਿਜ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਲੋੜ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਵਧੇਰੇ ਖਾਣ ਤੇ ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਕੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਵਧੇਰੇ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖਾਣ ਤੇ ਮੋਟਾਪਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦਿਲ ਦਾ ਰੋਗ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਵਸਾ ਘੱਟ ਖਾਣ ਦੀ ਕੀ ਹਾਨੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਸਾ ਘੱਟ ਖਾਣ ਨਾਲ ਅੱਖਾਂ ਦੀ ਰੋਸ਼ਨੀ ਘੱਟ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਵਧੇਰੇ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਖਾਣ ਤੇ ਕੀ ਹਾਨੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਧੇਰੇ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਖਾਣ ਤੇ ਦਿਲ ਦਾ ਰੋਗ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ।ਜਿਗਰ ਦੀ ਕਿਰਿਆਸ਼ੀਲਤਾ ਘੱਟ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਫਲਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਿਉਂ ਧੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਲਾਂ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਧੋਣ ਨਾਲ ਇਨ੍ਹਾਂ ਉੱਪਰ ਛਿੜਕੇ ਗਏ ਰਸਾਇਣਿਕ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਸਾਫ਼ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਕਿਹੜੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਰੱਖਿਆਤਮਕ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਰੱਖਿਅਕ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਯੁਕਤ ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਊਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਸਾ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਉਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਵਿਟਾਮਿਨ A’ ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘A’ ਸਾਡੀ ਚਮੜੀ ਅਤੇ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਸਵਸਥ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਵਿਟਾਮਿਨ C ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘C ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਰੋਗਾਂ ਨਾਲ ਲੜਨ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਵਿਟਾਮਿਨ D’ ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘D ਸਾਡੀਆਂ ਹੱਡੀਆਂ ਅਤੇ ਦੰਦਾਂ ਲਈ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ !

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23.
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘A’ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਸਰੋਤ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘A’ ਦੇ ਸੋਮੇ ਹਨ-ਦੁੱਧ, ਮੱਛੀ ਦਾ ਤੇਲ, ਗਾਜਰ ਅਤੇ ਪਪੀਤਾ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਵਿਟਾਮਿਨ °C ਕਿਹੜੇ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੰਤਰਾ, ਅਮਰੂਦ, ਮਿਰਚ, ਨਿੰਬੂ, ਆਂਵਲਾ ਅਤੇ ਟਮਾਟਰ ਵਿਟਾਮਿਨ ‘C’ ਦੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘D’ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਦੁੱਧ, ਮੱਛੀ, ਮੱਖਣ, ਅੰਡੇ ਸੂਰਜੀ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਵਿਟਾਮਿਨ ‘D’ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸੋਮੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਮੋਟਾ-ਆਹਾਰ ਕੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੋਟਾ-ਆਹਾਰ-ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਪੋਸ਼ਕਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਰੇਸ਼ੇਦਾਰ ਭੋਜਨ, ਜਿਵੇਂ-ਹਰੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੀ ਵੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਨੂੰ ਮੋਟਾ-ਆਹਾਰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਮੋਟੇ ਆਹਾਰ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸੋਮੇ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਮੋਟੇ ਆਹਾਰ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਮੋਟੇ ਆਹਾਰ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸੋਮੇ ਹਨਸਾਬਤ ਅਨਾਜ, ਦਾਲਾਂ, ਤਾਜ਼ੇ ਫਲ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 28.
ਮੋਟੇ-ਆਹਾਰ ਦੇ ਕੀ ਕੰਮ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੋਟੇ ਆਹਾਰ ਦੇ ਕੰਮ-ਮੋਟੇ-ਆਹਾਰ ਅਣਪਚੇ ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣ ਵਿੱਚ ਸਰੀਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

6. ਛੋਟੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਬਰਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਪੋਸ਼ਟਿਕ ਭੋਜਨ ਦੀ ਕੀ ਲੋੜ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਪੋਸ਼ਟਿਕ ਭੋਜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਇਸ ਕਾਰਨ ਹੈ

  1. ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ
  2. ਸਰੀਰ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ
  3. ਸਿਹਤਮੰਦ ਰਹਿਣ ਲਈ
  4. ਰੋਗਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਭੋਜਨ ਦੇ ਵੱਖ ਸਮੂਹਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਭੋਜਨ ਦੇ ਵੱਖ ਸਮੂਹ ਹਨ –

  • ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ-ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਅਤੇ ਵਸਾ ।
  • ਸਰੀਰ ਬਨਾਉਣ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ-ਪ੍ਰੋਟੀਨ ।
  • ਰੱਖਿਆਤਮਕ ਭੋਜਨ-ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 3.
ਰੱਖਿਆਤਮਕ ਭੋਜਨ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਰੱਖਿਆਤਮਕ ਭੋਜਨ-ਅਜਿਹੇ ਭੋਜਨ ਜੋ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਰੋਗਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਰੱਖਿਆਤਮਕ ਭੋਜਨ ਕਹਾਉਂਦੇ ਹਨ । ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਸਾਧਾਰਨ ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਉੱਚਿਤ ਕਾਰਜਾਂ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੇ ਹਨ । ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਰੱਖਿਆਤਮਕ ਭੋਜਨ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 4.
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਅਤੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਤਿੰਨ-ਤਿੰਨ ਸੋਮਿਆਂ ਦੇ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ-ਚਾਵਲ, ਕਣਕ, ਚੀਨੀ ॥ ਪ੍ਰੋਟੀਨ-ਅੰਡਾ, ਦੁੱਧ, ਸੋਇਆਬੀਨ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 5.
ਸੰਤੁਲਿਤ ਆਹਾਰ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸੰਤੁਲਿਤ ਆਹਾਰ-ਅਜਿਹਾ ਆਹਾਰ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਭੋਜਨ ਦੇ ਸਾਰੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਉੱਚਿਤ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਸੰਤੁਲਿਤ ਆਹਾਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹਨ-ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ, ਪ੍ਰੋਟੀਨ, ਵਸਾ, ਵਿਟਾਮਿਨ, ਖਣਿਜ, ਪਾਣੀ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 6.
ਸਾਡੇ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਹਰੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦਾ ਹੋਣਾ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਸਾਡੇ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਹਰੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦਾ ਹੋਣਾ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ-

  • ਹਰੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਲੋਹਾ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਲੂਣ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਹਰੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਤੋਂ ਕਈ ਕਿਸਮ ਦੇ ਵਿਟਾਮਿਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਹਰੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਮੋਟੇ ਆਹਾਰ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਉਤਸਰਜਨ ਤੰਤਰ ਦੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ।
  • ਹਰੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਖਾਣ ਨਾਲ ਮਸੂੜਿਆਂ ਦੀ ਕਸਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਮਸੂੜੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਦੰਦ ਵੀ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 7.
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਇਹ ਕਿੰਨੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ-ਇਹ ਕਾਰਬਨ, ਹਾਈਡਰੋਜਨ ਅਤੇ ਆਕਸੀਜਨ ਦੇ ਯੋਗਿਕ ਹਨ । ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਊਰਜਾ ਮਿਲਦੀ ਹੈ । ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਮੁੱਖ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਨਿਸ਼ਾਸ਼ਤਾ ਅਤੇ ਸ਼ੱਕਰ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 8.
ਕਿਸੇ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚ ਨਿਸ਼ਾਸ਼ਤੇ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਾ ਪਰੀਖਣ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚ ਨਿਸ਼ਾਸ਼ਤੇ ਦਾ ਪਰੀਖਣਨਿਸ਼ਾਸ਼ਤੇ ਦੇ ਪਰੀਖਣ ਲਈ ਆਲੂ ਵਰਗੀ ਕੱਚੀ ਸਮੱਗਰੀ ਨੂੰ ਇੱਕ ਡਿਸ਼ ਵਿੱਚ ਥੋੜ੍ਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਲਓ । ਇਸ ਵਿੱਚ ਪਤਲੇ ਆਇਓਡੀਨ ਦੇ ਘੋਲ ਦੀਆਂ 2 ਜਾਂ 3 ਬੂੰਦਾਂ ਪਾਓ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਦੇ ਰੰਗ ਵਿੱਚ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਪਰਿਵਰਤਨ ਨੂੰ ਦੇਖੋ । ਇਹ ਨੀਲਾ ਕਾਲਾ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ । ਇਹ ਨੀਲਾ ਕਾਲਾ ਰੰਗ ਨਿਸ਼ਾਸ਼ਤੇ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 1

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 9.
ਕਿਸੇ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਪਰੀਖਣ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਪਰੀਖਣ-ਇੱਕ ਪਰਖਨਲੀ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਉਬਲਿਆ ਅੰਡਾ ਪਾਓ । ਹੁਣ ਇਸ ਵਿੱਚ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਪਾ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਿਲਾਓ । ਹੁਣ ਡਰਾਪਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਪਰਖਨ ਵਿੱਚ ਦੋ ਬੂੰਦਾਂ ਕਾਪਰ ਸਲਫੇਟ ਦੇ ਘੋਲ ਅਤੇ ਦਸ ਬੂੰਦਾਂ ਕਾਸਟਿਕ ਸੋਡੇ ਦੇ ਘੋਲ ਦੀਆਂ ਪਾਓ | ਪਰਖਨਲੀ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਿਲਾ ਕੇ ਰਖਨਲੀ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਲਈ ਰੱਖ ਦਿਓ | ਪਰਖਨਲੀ ਵਿੱਚ ਬੈਂਗਣੀ ਰੰਗ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ । ਬੈਂਗਣੀ ਰੰਗ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 10.
ਤੁਸੀਂ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥਾਂ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਦਾ ਪਰੀਖਣ ਕਿਵੇਂ ਕਰੋਗੇ ?
ਉੱਤਰ-
ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਦਾ ਪਰੀਖਣ-ਮੂੰਗਫਲੀ ਦੇ ਕੁੱਝ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਸਫੇਦ ਕਾਗ਼ਜ਼ ‘ਤੇ ਲਓ । ਇਸ ਨੂੰ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਦਬਾਓ । ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਗ਼ਜ਼ ‘ਤੇ ਤੇਲ ਦੇ ਧੱਬੇ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣਗੇ । ਕਾਗ਼ਜ਼ ਨੂੰ ਰੋਸ਼ਨੀ ਵਿੱਚ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਦੇਖੋ । ਤੁਹਾਨੂੰ ਤੇਲ ਦੇ ਧੱਬੇ ਸਾਫ਼ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣਗੇ। ਇਸ ਤੋਂ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਕਾਗ਼ਜ਼ ‘ਤੇ ਤੇਲ ਦਾ ਧੱਬਾ ਖਾਧ ਪਦਾਰਥ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 11.
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕੰਮ ਕੀ ਹੈ ? ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਦੇ ਨਾਮ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕੰਮ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨਾ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 2
ਚਿੱਤਰ-ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੇ ਕੁੱਝ ਸੋਮੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਆਲੂ, ਗੰਨਾ, ਪਪੀਤਾ, ਕਣਕ, ਤਰਬੂਜ, ਸ਼ਕਰਕੰਦੀ, ਚਾਵਲ, ਅੰਬ, ਮੱਕੀ, ਬਾਜਰਾ ਆਦਿ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 12.
ਵਸਾ ਦੇ ਮੁੱਖ ਸੋਮੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ? ਵਸਾ ਦੇ ਮੁੱਖ ਕੰਮ ਦੱਸੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਸਾ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਮੂੰਗਫਲੀ, ਗਿਰੀ, ਤਿਲ, ਘਿਓ, ਮੱਖਣ, ਮਾਸ, ਦੁੱਧ, ਮੱਛੀ, ਕਰੀਮ ਅਤੇ ਅੰਡੇ ਆਦਿ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 3
ਚਿੱਤਰ-ਵਸਾ ਦੇ ਸੋਮੇ ਵਸਾ ਦਾ ਕੰਮ-ਵਸਾ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕਾਰਜ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨਾ ਹੈ । ਇਹ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਤੋਂ ਵੱਧ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 13.
ਊਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਭੋਜਨ ਕਿਸ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-

  • ਵਸਾ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਨੂੰ ਊਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਭੋਜਨ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 14.
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਕੀ ਕੰਮ ਹੈ ? ਇਸਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਦਾ ਨਾਂ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਕੰਮ-ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਸਰੀਰ ਦੇ ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਮੁਰੰਮਤ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 4
ਚਿੱਤਰ-ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਜੰਤੂ ਸੋਮੇ
ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਸੋਮੇਬਨਸਪਤੀ ਸੋਮੇ-ਚਨਾ, ਮੁੰਗ, ਦਾਲ, ਰਾਜਮਾਂਹ, ਸੋਇਆਬੀਨ, ਮਟਰ ਆਦਿ । ਜੰਤੂ ਸੋਮੇ-ਮਾਸ, ਮੱਛੀ, ਦੁੱਧ, ਪਨੀਰ ਅਤੇ ਅੰਡੇ ॥

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 15.
ਵਿਟਾਮਿਨ (Vitamin) ਕੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ? ਇਹ ਕਿੰਨੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ-ਵਿਟਾਮਿਨ ਰੋਗਾਂ ਤੋਂ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਵਿਟਾਮਿਨ ਸਾਡੀਆਂ ਅੱਖਾਂ, ਹੱਡੀਆਂ, ਦੰਦਾਂ ਅਤੇ ਮਸੂੜਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿਹਤਮੰਦ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦੇ ਹਨ । ਵਿਟਾਮਿਨ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਨਾਂ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁੱਝ ਵਿਟਾਮਿਨ ‘A’, ਵਿਟਾਮਿਨ ‘B’, ਵਿਟਾਮਿਨ ‘C, ਵਿਟਾਮਿਨ ‘D’, ਵਿਟਾਮਿਨ ‘E’ ਅਤੇ ਵਿਟਾਮਿਨ ‘K’ ਦੇ ਨਾਮ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਵਿਟਾਮਿਨ ਦੇ ਇੱਕ ਸਮੂਹ ਨੂੰ ਵਿਟਾਮਿਨ B-ਕੰਪਲੈਕਸ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ । ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਸਾਰੇ ਵਿਟਾਮਿਨਾਂ ਦੀ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 16.
ਵਿਟਾਮਿਨ A, C ਅਤੇ D ਦੇ ਕੰਮ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ‘A’ ਸਾਡੀ ਚਮੜੀ ਅਤੇ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਨਿਰੋਗ ਰੱਖਦਾ ਹੈ । ਵਿਟਾਮਿਨ C ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਰੋਗਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਲੜਨ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ । ਵਿਟਾਮਿਨ D ਸਾਡੀਆਂ ਅਸਥੀਆਂ ਅਤੇ ਦੰਦਾਂ ਲਈ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 17.
ਵਿਟਾਮਿਨ A ਅਤੇ B ਦੇ ਸੋਮੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ A ਦੇ ਸੋਮੇ-ਦੁੱਧ, ਮੱਛੀ ਦਾ ਤੇਲ, ਗਾਜਰ, ਪਪੀਤਾ, ਅੰਬ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 5
ਚਿੱਤਰ-ਵਿਟਾਮਿਨ A ਦੇ ਸੋਮੇ
ਵਿਟਾਮਿਨ B ਦੇ ਸੋਮੇ-ਜਿਗਰ, ਪੁੰਗਰੀ ਮੂੰਗੀ ਸਾਬਤ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 6
ਚਿੱਤਰ-ਵਿਟਾਮਿਨ B ਦੇ ਸੋਮੇ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 18.
ਵਿਟਾਮਿਨ C ਅਤੇ D’ ਦੇ ਸੋਮੇ ਲਿਖੋ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ C ਦੇ ਸੋਮੇ-ਸੰਤਰਾ, ਟਮਾਟਰ, ਆਂਵਲਾ, ਨਿੰਬੂ, ਅਮਰੂਦ, ਮਿਰਚ ਆਦਿ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 7
ਵਿਟਾਮਿਨ D ਦੇ ਸੋਮੇ-ਦੁੱਧ, ਮੱਖਣ, ਮੱਛੀ, ਅੰਡਾ, ਕਲੇਜੀ ਆਦਿ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 8

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 19.
ਖਣਿਜ ਲੂਣਾਂ ਦਾ ਕੀ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਖਣਿਜ ਲੂਣਾਂ ਦਾ ਮਹੱਤਵ-ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਖਣਿਜ ਲੂਣਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਸਰੀਰ ਦੇ ਉੱਚਿਤ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਸਿਹਤ ਲਈ ਸਾਰੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ । ਲੋਹਾ, ਫਾਸਫੋਰਸ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਆਇਓਡੀਨ ਵਰਗੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਲਈ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹਨ ।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 20.
ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ?
ਉੱਤਰ-
ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਦੁੱਧ, ਕੇਲਾ, ਮਟਰ, ਮੂੰਗੀ ਅਤੇ ਹਰੀਆਂ ਪੱਤੇਦਾਰ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ॥
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 9

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 21.
ਲੋਹੇ ਦੇ ਕਿਹੜੇ ਸੋਮੇ ਹਨ ? ਇਸਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਕਿਹੜਾ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਲੋਹੇ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਮਾਸ, ਮੱਛੀ, ਸੇਬ, ਅੰਬ, ਪਪੀਤਾ, ਹਰੀਆਂ ਪੱਤੇਦਾਰ ਸਬਜ਼ੀਆਂ । ਲੋਹੇ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਅਨੀਮੀਆ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 10

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 22.
ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਸੋਮੇ ਦੱਸੋ । ਇਸਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਕਿਹੜਾ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਸੋਮੇ-ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਸਾਨੂੰ ਮੁੱਖ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਦੁੱਧ, ਅੰਡੇ, ਹਰੀਆਂ ਪੱਤੇਦਾਰ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਹੱਡੀਆਂ ਅਤੇ ਦੰਦਾਂ ਦੇ ਰੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 11

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 23. ਫਲਾਂ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਧੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ?
ਉੱਤਰ-
ਛਿਲਕਾ ਉਤਾਰ ਕੇ ਜੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਫਲਾਂ ਨੂੰ ਧੋਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਸੰਭਵ ਹੈ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੁੱਝ ਵਿਟਾਮਿਨ ਨਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਣ । ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਛਿਲਕੇ ਵਿੱਚ ਕਈ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਚਾਵਲ ਅਤੇ ਦਾਲਾਂ ਨੂੰ ਵਾਰ-ਵਾਰ ਧੋਣ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਖਣਿਜ ਲੂਣ ਵੱਖ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 24.
ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਕਾਉਣ ਨਾਲ ਕੀ ਹਾਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ? ਇਸ ਤੋਂ ਕਿਵੇਂ ਬਚਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਭੋਜਨ ਪਕਾਉਣ ਦੀ ਹਾਨੀ-ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਕਾਉਣ ਨਾਲ ਭੋਜਨ ਬੇਸ਼ੱਕ ਸਵਾਦ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸੌਖਿਆਂ ਹੀ ਪੱਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਭੋਜਨ ਪਕਾਉਣ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਪੋਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਹਾਨੀ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ । ਜੇ ਭੋਜਨ ਪਕਾਉਣ ਵਿੱਚ ਵਧੇਰੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਉਸ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਕਈ ਲਾਭਦਾਇਕ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ ਕਾਫ਼ੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖਣਿਜ ਲੂਣਾਂ ਦੀ ਹਾਨੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਕਾਉਣ ਨਾਲ ਵਿਟਾਮਿਨ °C ਸੌਖਿਆਂ ਗਰਮੀ ਨਾਲ ਨਸ਼ਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਸਾਨੂੰ ਆਪਣੇ ਆਹਾਰ ਵਿੱਚ ਫਲ ਅਤੇ ਕੱਚੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 25.
ਮੋਟਾਪੇ ਦਾ ਕੀ ਕਾਰਨ ਹੈ ? ਕਿਹੜਾ ਭੋਜਨ ਖਾਣ ਨਾਲ ਮੋਟਾਪਾ ਵੱਧਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਮੋਟਾਪੇ ਦਾ ਕਾਰਨ-ਵਧੇਰੇ ਵਸਾ ਯੁਕਤ ਭੋਜਨ ਖਾਣ ਨਾਲ ਮੋਟਾਪਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਲੋੜ ਤੋਂ ਵੱਧ ਭੋਜਨ ਖਾਣ ਨਾਲ ਵੀ ਮੋਟਾਪਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਤਲੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਵਸਤਾਂ, ਸਮੋਸੇ, ਪੂਰੀ, ਮਲਾਈ, ਰਬੜੀ, ਪੇੜਾ, ਆਦਿ ਵਸਾ ਯੁਕਤ ਭੋਜਨ ਖਾਣ ਨਾਲ ਵੀ ਮੋਟਾਪਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 26.
ਤਰੁੱਟੀ ਰੋਗ ਤੋਂ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਤਰੁੱਟੀ ਰੋਗ-ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਕਾਫ਼ੀ ਭੋਜਨ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਪਰ ਕਈ ਵਾਰ ਉਸਦੇ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਜੇ ਇਹ ਕਮੀ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤਕ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਵਿਅਕਤੀ ਉਸ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇੱਕ ਜਾਂ ਵਧੇਰੇ ਪੋਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਸਾਡਾ ਸਰੀਰ ਰੋਗੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਅਜਿਹੇ ਰੋਗ ਜੋ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤਕ ਕਿਸੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤਰੁੱਟੀ ਰੋਗ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 27.
ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਕਾਫ਼ੀ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਨਾ ਲੈਣ ਨਾਲ ਕਿਹੜਾ ਰੋਗ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਜੇ ਕੋਈ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਕਾਫ਼ੀ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਨਹੀਂ ਲੈ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਰੋਗ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਰੀਰ ਦਾ ਵਾਧਾ ਰੁਕ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਚਿਹਰੇ ਤੇ ਸੋਜ, ਵਾਲਾਂ ਦਾ ਰੰਗ ਉੱਡਣਾ, ਚਮੜੀ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਅਤੇ ਪੇਚਿਸ਼ ਵਰਗੇ ਰੋਗ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ।

7. ਵੱਡੇ ਉੱਤਰਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 1.
ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗਾਂ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਦਿਓ ।
ਉੱਤਰ-
ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ ਲੂਣਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗ-
PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ 12

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 2 ਭੋਜਨ ਦੇ ਤੱਤ

ਪ੍ਰਸ਼ਨ 2.
ਭੋਜਨ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਕੀ ਭੂਮਿਕਾ ਹੈ ?
ਉੱਤਰ-
ਭੋਜਨ ਦੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ-ਪ੍ਰੋਟੀਨ, ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟਸ, ਵਸਾ, ਵਿਟਾਮਿਨ ਅਤੇ ਖਣਿਜ –
I. ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੇ ਮਹੱਤਵ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਹਨ

  • ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ, ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਮੁਰੰਮਤ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ !
  • ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਸਰੀਰ ਦੀਆਂ ਕੋਸ਼ਿਕਾਵਾਂ ਅਤੇ ਉੱਤਕਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹ ਜੀਵ ਪੁੰਜ ਦਾ ਇੱਕ ਮੁੱਖ ਭਾਗ ਹੈ ।
  • ਔਰਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੁੱਧ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਦੇ ਹਨ ।
  • ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਐਂਜਾਈਮ ਅਤੇ ਹਾਰਮੋਨ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਤੋਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ।
  • ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਮਾਸਪੇਸ਼ੀਆਂ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਵੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ।

II. ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦਾ ਮਹੱਤਵ –

  • ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਉਰਜਾ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਹੈ । ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਲੋੜੀਂਦੀ ਊਰਜਾ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟਸ ਦੇ ਆਕਸੀਕਰਨ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਇੱਕ ਗਰਾਮ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਹਿਣ ਤੇ 17 ਕਿਲੋ ਜੂਲ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਖੂਨ ਵਿੱਚ ਰਕਤ ਸ਼ੂਗਰ ਅਨੁਪਾਤ ਨੂੰ ਸਥਿਰ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ।
  • ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਮਾਤਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਗੁਲੂਕੋਸ ਨੂੰ ਲੈਕਟੋਸ ਵਿੱਚ ਬਦਲਦਾ ਹੈ ।
  • ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟਸ, ਚਰਬੀ, ਵਸਾ ਵਿੱਚ ਪਰਿਵਰਤਿਤ ਹੁੰਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟਸ ਤੋਂ ਲੈਕਟਿਕ ਅਮਲ ਅਤੇ ਅਮੋਨੀਆ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਤੋਂ ਫਿਰ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ।

III. ਵਸਾ ਦਾ ਮਹੱਤਵ

  • ਵਸਾ ਊਰਜਾ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਹੈ । ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ ਦੁੱਗਣੀ ਊਰਜਾ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ।
  • ਵਸਾ ਵਿਟਾਮਿਨ A, D, E ਅਤੇ K ਦਾ ਮੁੱਖ ਸੋਮਾ ਹੈ ।
  • ਵਸਾ ਤੋਂ ਕਾਰਬੋਹਾਈਡਰੇਟਸ ਅਤੇ ਅਮੀਨੋ ਅਮਲ ਬਣਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ।
  • ਵਸਾ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਇਕੱਠਾ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ।
  • ਮਾਨਵ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਆਕਸੀਕਰਨ ਤੋਂ ਫਾਸਫੋਲਿਪਿਡ ਬਣਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਜੀਵ ਭਾਰ ਦੇ ਮੁੱਖ ਅੰਗ ਹਨ ਅਤੇ ਖੂਨ ਦੇ ਜੰਮਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ।

IV. ਵਿਟਾਮਿਨ ਦਾ ਮਹੱਤਵ

  • ਵਿਟਾਮਿਨ ਸਾਡੇ ਭੋਜਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਅੰਗ ਹੈ । ਜਦਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਫਿਰ ਵੀ ਇਹ ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ।
  • ਵਿਟਾਮਿਨ ਦੇ ਬਿਨਾਂ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰਹਿਣਾ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ।
  • ਪੌਦੇ ਸਰਲ ਪਦਾਰਥਾਂ ਤੋਂ ਵਿਟਾਮਿਨ ਬਣਾ ਲੈਂਦੇ ਹਨ, ਪਰੰਤੁ ਜੰਤੁ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸੰਸ਼ਲੇਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ।
  • ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਕਈ ਅਨਿਯਮਿਤਤਾਵਾਂ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ।

V. ਖਣਿਜ ਦਾ ਮਹੱਤਵ

  • ਇਹ ਹੱਡੀਆਂ ਤੇ ਦੰਦ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ।
  • ਇਹ ਲਾਲ ਰਕਤਾਣੂਆਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ।
  • ਇਹ ਰਕਤ ਜੰਮਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ।
  • ਉੱਤਕਾਂ, ਤੰਤਰੀਕਾਵਾਂ ਅਤੇ ਥਾਇਰਾਈਡ ਗ੍ਰੰਥੀ ਦੇ ਕਾਰਜ ਦੇ ਲਈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।
  • ਜੀਵਨ ਦੀਆਂ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਦੇ ਲਈ ਕਈ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਖਣਿਜ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ।