PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

Punjab State Board PSEB 11th Class History Book Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 History Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

अध्याय का विस्तृत अध्ययन

(विषय-सामग्री की पूर्ण जानकारी के लिए)

प्रश्न-
अंग्रेजी साम्राज्य के समय राज प्रबन्ध एवं सिविल सर्विस की व्याख्या करो।
उत्तर-
अंग्रेज़ी प्रशासन की चार मुख्य शाखाएं थीं :
(1) सिविल सर्विस
(2) सेना
(3) पुलिस
(4) न्याय एवं कानून व्यवस्था। भारत में अंग्रेज़ी सरकार ने प्रशासन की इन चार शाखाओं की ओर विशेष ध्यान दिया। इन शाखाओं के संगठन एवं कार्यों का वर्णन इस प्रकार है :

I. सिविल सर्विस-

18वीं शताब्दी तक अंग्रेज़ी कम्पनी केवल व्यापारिक कम्पनी नहीं रह गई थी। इसके राजनीति में आ जाने के कारण इसे अनेक प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते थे। कम्पनी के कर्मचारी ये दोनों काम साथ-साथ ठीक ढंग से नहीं कर सकते थे। अतः कार्नवालिस ने कम्पनी के सिविल प्रशासन को व्यापारिक कारोबार से पृथक् कर दिया। उसने प्रशासनिक कर्मचारियों की भर्ती तथा वेतन सम्बन्धी कुछ विशेष नियम भी निर्धारित किए। उसने कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत व्यापार करने और भेटे तथा रिश्वत लेने पर रोक लगा दी। उसने कर्मचारियों के वेतन बढ़ा दिए ताकि वे रिश्वत न लें। उसने कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर तरक्की देने की व्यवस्था भी की। इस क्षेत्र में अन्य भी कई कार्य किए गए। इंग्लैण्ड से भारत आने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए 1806 ई० में हेलिबरी के स्थान पर एक कॉलेज खोला गया। इसी प्रकार कम्पनी के कर्मचारियों की नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर की जाने लगी।

सिविल सर्विस में भर्ती के लिए भारतीयों को भी छूट दी गई थी। परन्तु इस सम्बन्ध में उनके मार्ग में अनेक कठिनाइयां थीं। प्रथम, यह परीक्षा इंग्लैण्ड में होती थी और वह भी अंग्रेजी में। दूसरे, उन सब विषयों की परीक्षा देनी पड़ती थी जो उस समय इंग्लैण्ड में पढ़ाए जाते थे। तीसरे, इसके लिए अधिकतम आयु केवल 19 वर्ष थी। अतः 1863 तक केवल एक ही भारतीय यह परीक्षा पास कर सका। इसी कारण पढ़े-लिखे भारतीय यह मांग करने लगे कि सिविल सर्विस की प्रतियोगी परीक्षा एक ही समय इंग्लैण्ड के साथ-साथ भारत में भी हो और परीक्षा में बैठने के लिए अधिकतम आयु 19 वर्ष के स्थान पर 21 वर्ष होनी चाहिए।

1886 में तीन प्रकार की सिविल सर्विस बनाई मई— ‘इण्डियन सिविल सर्विस’, ‘प्रोविंशीयल सिविल सर्विस’ ‘और प्रोफेशनल सर्विस ‘ इनमें से प्रोफेशनल सर्विस का सम्बन्ध, पब्लिक वर्क्स, इन्जीनियरिंग, डॉक्टरी, वन, जंगलात, चुंगी, रेलवे और डाक-तार से था। परन्तु इस बदली के साथ अब भी भारतीय अफसरों की संख्या में कोई विशेष वृद्धि न हुई। इसके विपरीत इस समय तक अंग्रेज़ कर्मचारियों की संख्या लगभग एक हज़ार थी और सभी जिलों और दफ्तरों के महत्त्वपूर्ण कार्य उन्हीं के हाथ में थे। अपनी ईमानदारी और परिश्रम के कारण यह नौकरशाही अंग्रेजी साम्राज्य के लिए वरदान सिद्ध हुई। इसी कारण इसे साम्राज्य का ‘स्टील फ्रेम’ कहा जाता था। परन्तु इसके साथ-साथ यह अंग्रेज़ वर्ग न तो भारतीयों के प्रति कोई सहानुभूति रखता था और न ही उनके विचारों को अच्छी प्रकार समझता था। अतः यह नौकरशाही धीरे-धीरे ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को खोखला करने का काम करने लगी।

II. सेना

भारत में अंग्रेजी प्रशासन का मुख्य स्तम्भ सेना थी। सेना के द्वारा ही अंग्रेज़ों ने भारतीय राजाओं को विजित किया, भारत ने अपने साम्राज्य की विदेशी शत्रुओं से रक्षा की तथा आन्तरिक विद्रोहों को दबाया। कम्पनी की सेना में अधिकांश सिपाही भारतीय थे। 1857 ई० में अंग्रेज़ी सेना में सैनिकों की कुल संख्या 311,400 थी जिनमें से 265,900 भारतीय थे। परन्तु कार्नवालिस के दिनों में कोई भी भारतीय सेना में अधिकारी के पद पर न था। 1856 ई० में केवल तीन भारतीय सैनिकों को 300 रु० प्रति मास का वेतन मिलता था। कम्पनी की सेना में भारतीयों की इतनी अधिक संख्या होने के दो कारण थे। पहला कारण था कि भारतीय कम वेतन पर ही मिल जाते थे। दूसरा कारण यह था कि इंग्लैण्ड की जनसंख्या इतनी कम थी कि भारत विजय के लिए वहां से इतने अधिक सैनिक जुटाना सम्भव न था।

III. पुलिस

पुलिस भी भारत में कम्पनी राज्य का मुख्य आधार थी। यह कार्य कार्नवालिस ने आरम्भ किया। उसने जमींदारों से पुलिस सम्बन्धी ज़िम्मेदारियां छीन ली और एक नियमित पुलिस व्यवस्था की नींव रखी। अंग्रेज़ी प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों अथवा थानों में बांट दिया गया जिसका मुखिया दारोगा कहलाता था। दारोगा किसी भारतीय को ही नियुक्त किया जाता था। बाद में प्रत्येक जिले में एक पुलिस सुपरिटेण्डेण्ट की नियुक्ति की गई। अन्य विभागों की भान्ति पुलिस विभाग में भी भारतीयों को बड़े-बड़े पदों से वंचित रखा गया। गांव में चौकीदार ने ही पुलिस की ज़िम्मेदारी निभानी जारी रखी। पुलिस ने धीरे-धीरे अपने पैर फैलाए और अपनी शक्ति का विस्तार किया। वह डकैती आदि की घटनाओं की संख्या घटाने में सफल रही। परन्तु भारतीय जनता के साथ अंग्रेज़ी पुलिस कोई सहानुभूति नहीं रखती थी और भारतीयों के प्रति उसका व्यवहार अमानवीय था।

IV. न्याय व्यवस्था एवं कानून-

वारेन हेस्टिंग्ज तथा लॉर्ड डल्हौज़ी ने भारत में नई न्याय-व्यवस्था की नींव रखी। प्रत्येक जिले में एक दीवानी अदालत होती थी। इसका न्यायाधीश सिविल सर्विस में से लिया जाता था। दीवानी अदालत के अधीन रजिस्ट्रार की अदालतें होती थीं। इन अदालतों के अतिरिक्त ‘मुन्सिफ’ ‘अमीन’ नामक भारतीय न्यायाधीशों की अदालतें भी होती थीं। ज़िलों के न्यायालयों के विरुद्ध अपील सुनने के लिए प्रांतीय अदालतें थीं। सबसे ऊपर एक सदर दीवानी अदालत थी। इस समय भी न्याय-व्यवस्था में 1833 ई० में और नया परिवर्तन आया। इस वर्ष के चार्टर एक्ट द्वारा कानून बनाने का अधिकार गवर्नर-जनरल तथा उसकी परिषद् को दे दिया गया। कानूनों का संग्रह किया गया और भारतीय दण्ड संहिता’ बनाई गई। कुछ अन्य संहिताओं का निर्माण हुआ। इस तरह सारे देश में समान कानून लागू किए गए।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

महत्त्वपूर्ण परीक्षा-शैली प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. उत्तर एक शब्द से लेकर एक वाक्य तक

प्रश्न 1.
सहायक सन्धि किसने चलाई ?
उत्तर-
लॉर्ड वैलजली ने।

प्रश्न 2.
लॉर्ड वैलजली द्वारा सहायक सन्धि चलाने का मुख्य कारण क्या था ?
उत्तर-
लॉर्ड वैलजली द्वारा सहायक सन्धि चलाने का मुख्य कारण कम्पनी का विस्तार करना था।

प्रश्न 3.
सहायक सन्धि को सबसे पहले किस शासक ने स्वीकार किया ?
उत्तर-
सहायक सन्धि को सबसे पहले हैदराबाद के निज़ाम ने स्वीकार किया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 4.
लैप्स की नीति किसने चलाई थी ?
उत्तर-
लॉर्ड डलहौजी ने।

प्रश्न 5.
दो ऐसे राज्यों के नाम बताओ, जिन्हें लैप्स की नीति के अनुसार अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल किया गया।
उत्तर-
सतारा तथा नागपुर।

प्रश्न 6.
लॉर्ड डलहौजी कब से कब तक भारत का गवर्नर जनरल रहा ?
उत्तर-
लॉर्ड डलहौजी 1848 से 1856 तक भारत का गवर्नर जनरल रहा।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 7.
अवध को अंग्रेज़ी राज्य में कब मिलाया गया ? .
उत्तर-
1856 ई० में।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति

(i) टीपू सुल्तान ने मंगलौर की सन्धि द्वारा ………… से समझौता किया।
(ii) तीसरा अंग्रेज़-मैसूर युद्ध लॉर्ड ………….. के समय में हुआ।
(iii) अवध को लॉर्ड …………… ने अंग्रेज़ी राज्य में मिलाया।
(iv) बसीन (भसीन) की सन्धि लॉर्ड ……………. के समय में हुई।
(v) इंडियन लॉ कमीशन …………. ई० में बनाया गया।
उत्तर-
(i) अंग्रेजों
(ii) कार्नवालिस
(iii) डल्हौज़ी
(iv) वैलेज़ली
(v) 1833.

3. सही/ग़लत कथन

(i) पंजाब को 1856 में अंग्रेज़ी राज्य में मिलाया गया। — (×)
(ii) नागपुर भौंसले सरदारों का केन्द्र था। — (√)
(iii) गायकवाड़ सरदारों का केन्द्र बड़ौदा था। — (√)
(iv) लॉर्ड हेस्टिंग्ज़ ने पंजाब की सिक्ख शक्ति को चोट पहुंचाई। — (×)
(v) इण्डियन पीनल कोड 1861 ई० में बनाया गया। — (√)

4. बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (i)
1888 में किस प्रकार की सिविल सर्विस बनाई गई ?
(A) इंडियन सिविल सर्विस
(B) प्रोविंशियल सिविल सर्विस
(C) प्रोफैशनल सिविल सर्विस
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(D) उपरोक्त सभी।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न (ii)
भारतीयों के लिए सिविल से संबंधित अड़चन थी
(A) परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी
(B) हिन्दी में परीक्षा
(C) आयु सीमा अधिक होना
(D) प्रवेश फीस एक लाख रुपये।
उत्तर-
(A) परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी

प्रश्न (iii)
ब्रिटिश सरकार ने सर्वप्रथम निम्न एक्ट द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी पर नियन्त्रण बढ़ाना शुरू किया-
(A) पिट्स इंडिया एक्ट
(B) रेगूलेटिंग एक्ट
(C) भारत सरकार अधिनियम, 1935
(D) इंडियन कौंसिल एक्ट, 1919 ।
उत्तर-
(B) रेगूलेटिंग एक्ट

प्रश्न (iv)
सबसे पहले किस शहर में कार्पोरेशन स्थापित की गई ?
(A) बम्बई
(B) कलकत्ता
(C) मद्रास
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(D) उपरोक्त सभी।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न (v)
सिविल सर्विस की परीक्षा में पास होने वाला पहला भारतीय था-
(A) अवींद्र नाथ टैगोर
(B) सतिन्द्र नाथ टैगोर
(C) रवींद्र नाथ टैगोर
(D) बजेंद्र नाथ टैगोर ।
उत्तर-
(B) सतिन्द्र नाथ टैगोर

II. अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के विकास और संगठन के बारे में जानकारी के स्रोतों के चार प्रकारों के नाम बताएं।
उत्तर-
भारत में अंग्रेज़ी साम्राज्य के विकास और संगठन के बारे में जानकारी के स्रोत है- (i) ईस्ट इण्डिया कम्पनी व 1858 के बाद अंग्रेज़ी सरकार के प्रशासनिक रिकार्ड, गवर्नर जनरलों तथा अंग्रेज़ अधिकारियों के द्वारा छोड़ी गई महत्त्वपूर्ण डायरियां, दस्तावेज तथा चिट्ठियां।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 2.
भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार के लिए कौन-से तीन गवर्नर जनरलों ने विशेष योगदान दिया ?
उत्तर-
भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार के लिये वैल्जली, हेस्टिंग्ज तथा डल्हौजी ने विशेष योगदान दिया।

प्रश्न 3.
हेस्टिग्ज़ व डल्हौज़ी के नाम किन दो भारतीय शक्तियों पर विजय पाने के लिए माने जाते हैं ?
उत्तर-
हेस्टिंग्ज़ व डल्हौजी के नाम मराठों तथा पंजाब पर विजय प्राप्त करने के लिए माने जाते हैं।

प्रश्न 4.
वैल्जली का कार्यकाल क्या था ?
उत्तर-
वैल्जली 1798 से 1805 तक ईस्ट इण्डिया कम्पनी का गवर्नर जनरल रहा।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 5.
वैल्जली ने कम्पनी का प्रभाव बढ़ाने के लिए जिस विशेष ढंग को अपनाया उसका नाम बताएं तथा इसके अन्तर्गत आने वाला पहला भारतीय राज्य कौन-सा था ?
उत्तर-
वैल्जली ने कम्पनी का प्रभाव बढ़ाने के लिए ‘सबसिडरी सिस्टम’ अपनाया। इसके अन्तर्गत आने वाला भारतीय राज्य हैदराबाद का राज्य था।

प्रश्न 6.
हैदरअली के अंग्रेजों से दो युद्ध कब हुए तथा टीपू सुल्तान ने किस सन्धि द्वारा अंग्रेजों से समझौता कर लिया ?
उत्तर-
हैदरअली के अंग्रेजों से दो युद्ध 1767-69 तथा 1780-84 में हुए। टीपू सुल्तान में मंगलौर की सन्धि के द्वारा अंग्रेज़ों से समझौता किया।

प्रश्न 7.
अंग्रेज़ों तथा मैसूर में तीसरी लड़ाई कब हुई तथा टीपू सुल्तान अंग्रेजों के साथ युद्ध में कब मारा गया ?
उत्तर-
अंग्रेज़ों तथा मैसूर राज्य के बीच तीसरी लड़ाई 1790-92 में हुई। टीपू सुल्तान अंग्रेजों के साथ युद्ध में 1799 में मारा गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 8.
मराठा सरदारों के चार केन्द्र कौन-से थे ?
उत्तर-
मराठा सरदारों के चार केन्द्र थे—ग्वालियर, इन्दौर, नागपुर तथा बड़ौदा।

प्रश्न 9.
बसीन की सन्धि कब और किनके बीच हुई ?
उत्तर-
बसीन की सन्धि 1802 ई० में अंग्रेज़ों तथा बड़ौदा के गायकवाड़ और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच हुई।

प्रश्न 10.
1803 के युद्ध के बाद अंग्रेज़ों की भौंसले तथा शिण्डे सरदारों के साथ कौन-सी सन्धियां हुई ?
उत्तर-
1803 के युद्ध के बाद अंग्रेजों की भौंसले के साथ देवगांव की सन्धि तथा शिण्डे के साथ सुरजी अर्जुन गांव की सन्धि हुई।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 11.
1803 की सन्धियों द्वारा कौन-से इलाकों पर अंग्रेज़ों का अधिकार स्थापित हो गया ?
उत्तर-
1803 की सन्धियों द्वारा गंगा यमुना दोआब, दिल्ली तथा आगरा पर अंग्रेज़ों का अधिकार स्थापित हो गया।

प्रश्न 12.
मराठों की शक्ति का अन्त पूरी तरह किस गवर्नर-जनरल के समय में हुआ तथा इसका कार्याकाल क्या
उत्तर-
मराठों की शक्ति का अन्त पूरी तरह हेस्टिग्ज़ के काल में हुआ। उस का कार्यकाल 1813 से 1823 ई० तक था।

प्रश्न 13.
पेशवा का राज्य किस वर्ष में समाप्त हुआ ?
उत्तर-
पेशवा का राज्य 1818 ई० में समाप्त हुआ।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 14.
पिण्डारियों को लूटमार की कार्यवाही में किसका प्रोत्साहन प्राप्त था तथा इनका खात्मा किस गवर्नरजनरल के समय में किया गया ?
उत्तर-
पिण्डारियों को लूटमार की कार्यवाही में मराठा सरदारों का प्रोत्साहन प्राप्त था। इन का खात्मा हेस्टिंग्ज़ के समय में हुआ।

प्रश्न 15.
1819 में राजस्थान की कितनी रियासतें अंग्रेजों के अधीन हो गईं तथा इन में से तीन प्रमुख रियासतों के नाम बताएं।
उत्तर-
1819 में राजस्थान की 19 रियासतें अंग्रेजों के अधीन हो गईं। इनमें से प्रमुख रियासतें जयपुर, जोधपुर और उदयपुर थीं।

प्रश्न 16.
नेपाल के साथ युद्ध कब हुआ तथा किस सन्धि के द्वारा कौन-से तीन पहाड़ी इलाके अंग्रेजों के प्रभाव अधीन आ गए ?
उत्तर-
अंग्रेज़ों का 1814-16 में नेपाल के साथ युद्ध हुआ। सुगौली की सन्धि के द्वारा तीन पहाड़ी इलाके कुमायूं, गढ़वाल तथा शिमला अंग्रेजों के अधीन आ गए। .

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 17.
बर्मा के साथ युद्ध कब हुआ तथा इसके परिणामस्वरूप भारत का कौन-सा इलाका अंग्रेजों के अधीन हो गया।
उत्तर-
बर्मा के साथ युद्ध (1823-26) में हुआ। इसके परिणामस्वरूप असम का इलाका अंग्रेजों के प्रभाव अधीन हो गया।

प्रश्न 18.
सिन्ध को अंग्रेजी साम्राज्य में कब मिलाया गया तथा इसके बाद भारत का कौन-सा राज्य स्वतन्त्र रह गया ?
उत्तर-
1843 में सिन्ध को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया। इसके बाद भारत का लाहौर राज्य स्वतन्त्र रह गया।

प्रश्न 19.
महाराजा रणजीत सिंह का सबसे छोटा पुत्र कौन था तथा वह कब गद्दी पर बैठा एवं उसकी संरक्षिका कौन बनी ?
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह का सबसे छोटा पुत्र दलीप सिंह था। वह 1844 में गद्दी पर बैठा और महारानी जिंदा उसकी संरक्षिका बनी।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 20.
हार्डिंग ने खालसा फौज के विरुद्ध एक युद्ध का एलान कब किया तथा इस युद्ध की तीन महत्त्वपूर्ण लड़ाइयां कौन-सी थीं ?
उत्तर-
हार्डिंग ने 1845 में खालसा फौज के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की थी। इस युद्ध की तीन महत्त्वपूर्ण लड़ाइयां मुदकी, फेरूशहर तथा सबरांओ की लड़ाइयां थीं।

प्रश्न 21.
अंग्रेज़ों तथा सिक्खों के बीच में दोनों युद्धों की कौन-सी दो लड़ाइयों में अंग्रेज़ों को मार खानी पड़ी।
उत्तर-
अंग्रेज़ों तथा सिक्खों के बीच दोनों युद्धों में फेरूशहर और चिल्लियांवाला की लड़ाइयों में अंग्रेजों को भारी हार खानी पड़ी थी।

प्रश्न 22.
अंग्रेजों के साथ पहला युद्ध कब हुआ तथा खालसा सेना का अंग्रेजों से हारने का मुख्य कारण कौनसा था ?
उत्तर-
अंग्रेजों के साथ पहला सिक्ख युद्ध 1846 में समाप्त हो गया। खालसा सेना का हारने का मुख्य कारण सेनापतियों द्वारा धोखा देना था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 23.
अंग्रेज़ों और सिक्खों के बीच पहले युद्ध के बाद कौन-सी सन्धि हुई ?
उत्तर-
अंग्रेज़ों और सिक्खों के बीच पहले युद्ध के बाद 1846 में लाहौर की सन्धि हुई।

प्रश्न 24.
पहले युद्ध के बाद अंग्रेजों ने कौन-से तीन इलाके लाहौर दरबार से ले लिए ?
उत्तर-
पहले युद्ध के बाद अंग्रेजों ने जालन्धर दोआब, कांगड़ा तथा कश्मीर के इलाके लाहौर दरबार से ले लिये।

प्रश्न 25.
अंग्रेजों ने कश्मीर किसको दिया तथा वह पहले कहां का राजा था ?
उत्तर-
अंग्रेजों ने कश्मीर राजा गुलाब सिंह को दिया। वह पहले जम्मू का राजा था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 26.
दिसम्बर 1846 में कौन-सी सन्धि हुई तथा इसके द्वारा किसको लाहौर में कम्पनी का रेजीडेन्ट नियुक्त किया गया ?
उत्तर-
दिसम्बर, 1846 में भैंरोवाल की सन्धि हुई। इसके द्वारा हैनरी लारेंस को लाहौर में कम्पनी का रेजीडेन्ट नियुक्त किया गया।

प्रश्न 27.
1846 के बाद अंग्रेजों के अधीन लाहौर दरबार के विरुद्ध विद्रोह करने वाले कौन-से प्रमुख व्यक्ति थे ?
उत्तर-
1846 के बाद अंग्रेज़ों के अधीन लाहौर दरबार के विरुद्ध विद्रोह करने वाले सरदार चत्तर सिंह अटारीवाला तथा मुल्तान का दीवान मूलराज थे।

प्रश्न 28.
अंग्रेज़ों तथा सिक्खों के बीच में दो प्रमुख लड़ाइयां कौन-सी थीं ?
उत्तर-
अंग्रेज़ों तथा सिक्खों के बीच दो प्रमुख लड़ाइयां चिल्लियांवाला तथा गुजरात की लड़ाइयां थीं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 29.
पंजाब को कब और किस गवर्नर-जनरल ने अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया ?
उत्तर-
पंजाब को लॉर्ड डल्हौज़ी ने 1849 में अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया।

प्रश्न 30.
‘लैप्स के सिद्धान्त’ से क्या अभिप्राय था ?
उत्तर-
लैप्स के सिद्धान्त से अभिप्राय डल्हौज़ी के उस सिद्धान्त से था जिस के अन्तर्गत सन्तानहीन शासकों के राज्य अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिए जाते थे। वे पुत्र गोद लेकर अंग्रेजों की अनुमति के बिना उसे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं कर सकते थे।

प्रश्न 31.
‘लैप्स के सिद्धान्त’ के अन्तर्गत कौन-सी चार रियासतें समाप्त कर दी गईं ?
उत्तर-
लैप्स के सिद्धान्त के अन्तर्गत सतारा, उदयपुर नागपुर तथा झांसी की रियासतें समाप्त कर दी गईं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 32.
1856 में अवध को किस दलील के आधार पर अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया तथा उस समय वहां का शासक कौन था ?
उत्तर-
1856 में अवध को कुशासन के आरोप में अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला लिया गया। उस समय वहां का शासक नवाब वाजिद अलीशाह था।

प्रश्न 33.
डल्हौज़ी के समय कौन-से चार अधीन शासकों की पेंशन बन्द कर दी गई ?
उत्तर-
डल्हौज़ी के समय नाना साहिब, कर्नाटक के नवाब तथा सूरत और तंजौर के राजाओं की पेंशन बन्द कर दी gayi

प्रश्न 34.
1857 का विद्रोह कौन-सी तारीख को तथा किस स्थान पर आरम्भ हुआ ?
उत्तर-
1857 का विद्रोह 10 मई, 1857 को मेरठ में आरम्भ हुआ।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 35.
भारतीय सैनिकों ने किसको अपना बादशाह घोषित किया तथा वह इस समय किस शहर में था ?
उत्तर-
भारतीय सैनिकों ने बहादुरशाह ज़फर को अपना बादशाह घोषित किया। वह उस समय दिल्ली शहर में था।

प्रश्न 36.
जिन स्थानों पर भारतीय सैनिकों ने विद्रोह कर दिया था उनमें से चार के नाम बताएं।
उत्तर-
भारतीय सैनिकों ने नसीराबाद, ग्वालियर, लखनऊ तथा कानपुर मे विद्रोह कर दिया था।

प्रश्न 37.
1857-58 के विद्रोह के प्रमुख नेताओं में से चार के नाम बताएं।
उत्तर-
1857-58 के विद्रोह के प्रमुख नेताओं में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहिब, तात्या टोपे तथा कुंवर सिंह थे ।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 38.
1857-58 के विद्रोह में किन चार वर्गों ने भाग नहीं लिया ?
उत्तर-
1857-58 के विद्रोह में व्यापारियों, साहूकारों, पढ़े-लिखे मध्य वर्ग तथा ज़मींदारों ने भाग नहीं लिया।

प्रश्न 39.
बर्तानिया की सरकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर कब तथा किस एक्ट द्वारा नियन्त्रण बढ़ाना शुरू किया ?
उत्तर-
बर्तानिया की सरकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर 1773 में रेग्यूलेटिंग एक्ट के द्वारा नियंत्रण बढ़ाना शुरू किया।

प्रश्न 40.
कब तथा किस एक्ट द्वारा बंगाल में गर्वनर जनरल नियुक्त किया गया ?
उत्तर-
1773 के रेग्यूलेटिंग एक्ट द्वारा बंगाल में गवर्नर-जनरल नियुक्त किया गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 41.
“बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल’ कब तथा किस एक्ट के अन्तर्गत बना एवं इसके कितने सदस्य थे ?
उत्तर-
‘बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल’ 1784 के पिट्स इण्डिया एक्ट के द्वारा बनाया गया। इसके छः सदस्य थे।

प्रश्न 42.
1858 में गवर्नर जनरल को कौन-सी उपाधि दी गई तथा इसके द्वारा उसे किसके प्रतिनिधि के रूप में देशी रियासतों से निपटने का अधिकार मिला ?
उत्तर-
1858 में गवर्नर जनरल को वायसराय की उपाधि दी गई। इसके द्वारा उसे साम्राज्ञी के निजी प्रतिनिधि के रूप में देशी रियासतों से निपटने का अधिकार मिला।

प्रश्न 43.
1858 तथा 1861 में गर्वनर जनरल की सहायता के लिए कौन-सी दो कौंसिलें बनाई गईं ?
उत्तर-
1858 तथा 1861 में गवर्नर जनरल की सहायता के लिए “एग्जेक्टिव कौंसिल’ तथा ‘लैजिस्लेटिव कौंसिलें’ बनाई गईं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 44.
कौन-सी दो प्रेजीडेंसियों अथवा मुख्य प्रान्तों में गवर्नरों की सहायता के लिए ‘लैजिस्लेटिव कौंसिल’ बनाई गई ?
उत्तर-
बम्बई (मुम्बई) तथा बंगाल की प्रेजीडेंसियों (अथवा मुख्य प्रान्तों) में गवर्नर की सहायता के लिए लैजिस्लेटिव कौंसिल बनाई गई।

प्रश्न 45.
1858 में भारत में बर्तानवी साम्राज्य की देख-रेख किस मन्त्री को सौंपी गई तथा उसकी सहायता के लिए कौन-सी कौंसिल बनाई गई ?
उत्तर-
1858 में भारत में बर्तानवी साम्राज्य की देख-रेख ‘सैक्ट्री ऑफ स्टेट’ को सौंपी गई। उसकी सहायता के लिए ‘इण्डिया कौंसिल’ बनाई गई।

प्रश्न 46.
किस वर्ष में सिविल सर्विस की परीक्षा में पहला भारतीय कामयाब हुआ तथा उसका क्या नाम था ?
उत्तर-
1863 में सिविल सर्विस की परीक्षा में पहला भारतीय कामयाब हुआ था। उसका नाम सतिन्द्र नाथ टैगोर था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 47.
सिविल सर्विस में भारतीयों के आने में दो मुख्य अड़चनें कौन-सी थीं ?
उत्तर-
पहली अड़चन यह थी कि परीक्षा इंग्लैण्ड में होती थी । दूसरी अड़चन उसका माध्यम अंग्रेज़ी था।

प्रश्न 48.
1888 में किस प्रकार की तीन सिविल सर्विस बनाई गई ?
उत्तर-
1888 में बनाई गई तीन प्राकर की सिविल सर्विस इण्डियन सिविल सर्विस, प्रोविंशियल सिविल सर्विस और प्रोफैशनल सर्विस थी।

प्रश्न 49.
प्रोफैशनल सर्विस का सम्बन्ध किन चार विभागों से था ?
उत्तर-
प्रोफैशनल सर्विस का सम्बन्ध पब्लिक वर्कस, इंजीनियरिंग, डॉक्टरी, जंगल, महसूल, रेलवे और डाक-तार विभाग से था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 50.
1856 में सेना में भारतीयों को दिया जाने वाला अधिकतम वेतन कितना था तथा उसे पाने वालों की संख्या क्या थी ?
उत्तर-
1856 में सेना में भारतीयों को दिया जाने वाला अधिकतम वेतन 300 रु० था। केवल तीन ही भारतीय सैनिक यह वेतन प्राप्त करते थे।

प्रश्न 51.
भारतीयों को कमीशन किस वर्ष के बाद मिलना शुरू हुआ तथा इस समय तक भारतीयों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सैनिक पद कौन-सा था ?
उत्तर-
1914 में भारतीयों को कमीशन मिलना शुरू हुआ। उस समय सूबेदार का पद सबसे बड़ा था जो भारतीयों को दिया जाता था।

प्रश्न 52.
1857-58 के बाद भारतीयों को सेना में नौकरी के दृष्टिगत कौन-सी दो जातियों में बांट दिया गया ?
उत्तर-
1857-58 के बाद भारतीयों को योद्धा और अयोद्धा नामक दो जातियों में बांट दिया गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 53.
1858 के बाद सेना में किन तीन इलाकों के लोगों की संख्या बढ़ गई ?
उत्तर-
1858 के बाद सेना में गोरखों,पठानों तथा पंजाबियों की संख्या बढ़ गई।

प्रश्न 54.
पुलिस का प्रबन्ध कौन-से गवर्नर जनरल ने आरम्भ किया तथा जिला स्तर पर पुलिस अधिकारी कौनसा था ?
उत्तर-
पुलिस का प्रबन्ध कार्नवालिस ने आरम्भ किया। जिला स्तर का पुलिस अधिकारी सुपरिन्टेंडेन्ट था।

प्रश्न 55.
सदर दीवानी तथा सदर निज़ामत अदालतें कौन-से गवर्नर जनरल के कार्यकाल में स्थापित की गई और बाद में इनका स्थान किन अदालतों ने ले लिया ?
उत्तर-
सदर दीवानी तथा सदर निज़ामत अदालतें कार्नवालिस के कार्यकाल में स्थापित हुईं। बाद में इनका स्थान हाई कोर्ट ने ले लिया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 56.
‘इण्डियन लॉ कमीशन’ कब बनाया गया तथा ‘इण्डियन पैनल कोड कब बनाया गया ?
उत्तर-
इण्डियन लॉ कमीशन 1833 में बनाया गया तथा इण्डियन पैनल कोड 1861 में बनाया गया।

प्रश्न 57.
कानून के शासक (रूल ऑफ लॉ) से क्या अभिप्राय था ?
उत्तर-
कानून के शासक से अभिप्राय यह था कि सभी व्यक्ति कानून के सामने समान हैं।

प्रश्न 58.
अंग्रेजी साम्राज्य के समय भारत में कौन-सी दो संस्थाएं बनाई गई तथा इससे सम्बन्धित सबसे महत्त्वपूर्ण नाम कौन-से गवर्नर जनरल का है ?
उत्तर-
अंग्रेजी साम्राज्य के समय नगरपालिका तथा ज़िला बोर्ड स्थापित किए गए। इन संस्थाओं से सम्बन्धित सबसे महत्त्वपूर्ण नाम लॉर्ड रिपन का है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 59.
सबसे पहले किन तीन शहरों में कार्पोरेशन या बड़ी नगरपालिकाएं स्थापित की गई ?
उत्तर-
सब से पहले बम्बई (मुम्बई), कलकत्ता (कोलकाता) तथा मद्रास (चेन्नई) में कार्पोरेशन या बड़ी नगरपालिकाएं स्थापित की गईं।

प्रश्न 60.
न्याय प्रबन्ध में जिला स्तर पर एक अफसर किन दो नामों में सिविल तथा फौजदारी मुकद्दमों का फैसला देता था ?
उत्तर-
न्याय प्रबन्ध में जिला स्तर पर एक अफसर जज और मैजिस्ट्रेट के रूप में सिविल और फौजदारी मुकद्दमों का फैसला देता था।

III. छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
लॉर्ड हेस्टिग्ज़ ने भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार में क्या योगदान दिया ?
उत्तर-
लॉर्ड हेस्टिंग्ज़ ने अंग्रेज़ी साम्राज्य के विस्तार में अनेक प्रकार से योगदान किया।

  • उसने कुमायूं , गढ़वाल, शिमला, अल्मोड़ा, नैनीताल, मसूरी आदि के क्षेत्र अंग्रेजी राज्य में मिलाए।
  • उसने पेशवा, भौंसले तथा होल्कर की संयुक्त सेनाओं को हराया। उसने पेशवा को पेंशन देकर उसकी पदवी समाप्त कर दी और उसके राज्य को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया।
  • उसने राजस्थान की जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, बूंदी आदि 19 राजपूती रियासतों को सहायक सन्धि द्वारा कम्पनी राज्य के अधीन कर लिया।
  • उसने भोपाल, मालवा और कछार के राज्य भी अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिये।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 2.
सिन्ध को अंग्रेज़ों ने किस प्रकार अपने अधीन किया ? क्या सिन्ध को अंग्रेज़ी राज्य में मिलाना अंग्रेज़ों का अच्छा कार्य था ?
उत्तर-
यूरोप तथा एशिया में रूस का प्रभाव बढ़ रहा था। एशिया में रूस के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने के लिए अंग्रेज़ अफ़गानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे। इसके अतिरिक्त अंग्रेज़ों को यह भी भय था कि पंजाब का शासक महाराजा रणजीत सिंह सिन्ध पर अधिकार कर लेगा। इसलिए अंग्रेजों ने 1832 ई० में सिन्ध के साथ व्यापारिक सन्धि की। 1839 ई० में उन्होंने वहां के अमीरों को सहायक सन्धि स्वीकार करने के लिए विवश किया। आखिर 1843 ई० में चार्ल्स नेपियर ने सिन्ध को अंग्रेजी में मिला लिया। सिन्ध को अंग्रेजी राज्य में मिलाना अंग्रेजों का अच्छा कार्य नहीं था, क्योंकि सिन्ध के लोग निर्दोष थे। उन्होंने कभी भी अंग्रेजों के साथ छेड़खानी नहीं की थी। चार्ल्स नेपियर ने स्वयं कहा था कि अंग्रेजों को सिन्ध पर अधिकार करने का कोई अधिकार नहीं था।

प्रश्न 3.
भारत में अंग्रेजी राज्य के विस्तार में सहायक सन्धि का क्या योगदान रहा ?
उत्तर-
भारत में अंग्रेज़ी राज्य के विस्तार में सहायक सन्धि का बड़ा सक्रिय योगदान रहा। इस नीति का मुख्य आधार अंग्रेज़ी शक्ति के प्रभाव को भारतीय राज्यों में बढ़ावा देना था। सबल भारतीय शक्तियां निर्बल राज्यों को हडपने में लगी हुई थीं। इन कमज़ोर राज्यों को संरक्षण की आवश्यकता थी। वे मिटने की बजाए अर्द्ध-स्वतन्त्रता स्वीकार करने के लिए तैयार थे। सहायक सन्धि उनके उद्देश्यों को पूरा कर सकती थी। उनकी बाहरी आक्रमण और भीतरी गड़बड़ से सुरक्षा के लिए अंग्रेज़ी सरकार वचनबद्ध होती थी। अतः इस नीति को अनेक भारतीय राजाओं ने स्वीकार कर लिया जिनमें हैदराबाद, अवध, मैसूर, अनेक राजपूत राजा तथा मराठा प्रमुख थे। परन्तु इसके अनुसार सन्धि स्वीकार करने वाले राजा को अपने व्यय पर एक अंग्रेज़ी सेना रखनी पड़ती थी। परिणामस्वरूप उनकी विदेश नीति अंग्रेजों के अधीन आ जाती थी। परिणामस्वरूप भारत में अंग्रेज़ी राज्य का खूब विस्तार हुआ।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 4.
सबसिडरी सिस्टम से क्या अभिप्राय था ?
उत्तर-
सबसिडरी सिस्टम अथवा सहायक-सन्धि एक प्रकार का प्रतिज्ञा-पत्रं था जिसे भारतीय शासकों पर ज़बरदस्ती थोपा गया। इसके अनुसार कम्पनी देशी राजा को आन्तरिक और बाहरी खतरे के समय सैनिक सहायता देने का वचन देती थी, जिस के बदले में देशी राजा को अनेक शर्ते माननी पड़ती थीं।

1. उसे अपने राज्य में एक अंग्रेजी सेना रखनी पड़ती थी और उसका खर्च भी उसे देना पड़ता था। यदि वह सेना का खर्च नहीं दे पाता था तो उसे अपने राज्य का कुछ भाग अंग्रेज़ों को देना पड़ता था।

2. उसे अंग्रेज़ों का आधिपत्य स्वीकार करना पड़ता था और वह उनकी अनुमति के बिना किसी भी शासक से सन्धि तथा युद्ध नहीं कर सकता था।

3. उसे अंग्रेजों को सर्वोच्च शक्तिं मानना पड़ता था।

4. वह अंग्रेजों के अतिरिक्त किसी भी यूरोपियन को नौकरी पर नहीं रख सकता था। इस शर्त का उद्देश्य भारत में फ्रांसीसियों के प्रभाव को कम करना था।

5. उसे अपने राज्य में एक अंग्रेज़ रैजीडैन्ट रखना पड़ता था जिसके परामर्श से ही उसे अपना सारा शासन-कार्य चलाना पड़ता था। यह एक ऐसी शर्त थी जिसके द्वारा देशी राज्यों की गतिविधियों पर सदैव अंग्रेजों की दृष्टि बनी रहती थी। परन्तु कम्पनी को संरक्षित राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वचन देना पड़ता था।

6. आपसी झगड़ों की दशा में उसे अंग्रेजों को मध्यस्थ स्वीकार करना पड़ता था और उसके निर्णय को मानना पड़ता था।

प्रश्न 5.
1803 की सन्धि का मराठों की शक्ति पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
1803 की सन्धि का मराठों की शक्ति पर कुप्रभाव पड़ा। भौंसले के साथ देवगांव की सन्धि हई और शिण्डे के साथ सुरजी अर्जुनगांव की सन्धि हुई। इन सन्धियों में गंगा-यमुना दोआब का प्रदेश अंग्रेजों के अधीन हो गया। दिल्ली और आगरा पर भी अंग्रेजों का प्रभाव स्थापित हो गया। इधर भौंसले से कटक, बलासोर आदि इलाके लेकर ‘उत्तरी सरकारों’ के दोनों ओर स्थित मद्रास (चेन्नई) और बंगाल के अंग्रेजी प्रदेश को आपस में मिला दिया गया। मराठों के हैदराबाद के निज़ाम पर भी सभी अधिकार समाप्त हो गये। इसके अतिरिक्त शिण्डे और भौंसले को अंग्रेजों की पेशवा के साथ हुई बसीन की सन्धि भी स्वीकार करनी पड़ी। उनकी राजधानियों में भी अंग्रेज़ रेजीडेन्ट’ रखे गये। अब केवल होल्कर ही शेष बचा था। इस प्रकार अंग्रेजी कम्पनी के प्रभाव और प्रदेश में बड़ी वृद्धि हुई और अंग्रेज़ अब भारत में सबसे बड़ी शक्ति बन गये।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 6.
अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना के संदर्भ में पंजाब में 1845 से 1849 के दौरान मुख्य घटनाएं क्या थी ?
उत्तर-
अंग्रेजी साम्राज्य 1845 तक लगभग सारे भारत को अपनी लपेट में ले चुका था। महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद अंग्रेज़ों ने पंजाब पर अधिकार करने के प्रयास तीव्र कर दिए। उन्होंने लाहौर दरबार की सेना द्वारा सतलुज नदी पार करने पर दिसम्बर, 1845 में युद्ध की घोषणा कर दी। मुदकी, फेरूशाह और सबराओं में खूनी लड़ाइयां हुईं। दोनों पक्षों के हज़ारों सैनिक और अधिकारी मारे गये। खालसा सेना को उसके सेनापतियों ने धोखा दिया । अतः खालसा सेना की फरवरी, 1846 तक पराजय हो गई । इस वर्ष लाहौर की सन्धि हुई। इसके अनुसार दलीप सिंह को गद्दी पर रहने दिया गया। उससे जालन्धर दोआब, कांगड़ा और कश्मीर के प्रदेश ले लिये गये। दिसम्बर, 1846 में अंग्रेजों ने भैरोवाल की सन्धि द्वारा हैनरी लारेन्स को लाहौर में “रेज़िडेन्ट” नियुक्त किया। अंग्रेज़ों के अपमानजनक व्यवहार के कारण एक बार फिर युद्ध छिड़ गया। चिल्लियांवाला और गुजरात की महत्त्वपूर्ण लड़ाइयों में दोनों पक्षों को भारी हानि उठानी पड़ी। अन्त में 1849 में पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला लिया गया।

प्रश्न 7.
लैप्स का सिद्धान्त क्या था ? इस सिद्धान्त के अनुसार अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाये गये किन्हीं चार राज्यों के नाम बताओ।
उत्तर-
लैप्स का सिद्धान्त लॉर्ड डल्हौजी ने चलाया। इस सिद्धान्त के अनुसार यदि किसी देशी रियासत का शासक बिना सन्तान के मर जाता था तो उसका राज्य अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला लिया जाता था। देशी राजाओं को पुत्र गोद लेने और उसे अपना उत्तराधिकारी बनाने का अधिकार नहीं था। लैप्स की नीति के अनुसार डल्हौजी ने निम्नलिखित राज्यों को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया-

  • सतारा-सतारा के शासक की निःसन्तान मृत्यु हो गई। लॉर्ड डल्हौजी ने उसका राज्य अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया।
  • नागपुर-नागपुर के राजा के पुत्र की मृत्यु के पश्चात् उसकी विधवा रानी ने जसवन्तराय नामक एक बालक को गोद लिया। परन्तु अंग्रेजों ने उसे मृतक राजा का उत्तराधिकारी स्वीकार न किया और नागपुर राज्य को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया।
  • सम्बलपुर-लॉर्ड डल्हौजी ने सम्बलपुर राज्य को भी लैप्स के सिद्धान्त के अनुसार अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया।
  • जोधपुर-सम्बलपुर के पश्चात् जोधपुर की बारी आई। इसे भी अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 8.
अंग्रेजी साम्राज्य के अधीन सिविल सर्विस के संगठन के बारे में बताएं।
उत्तर-
अंग्रेजी साम्राज्य के अधीन सिविल सर्विस का सूत्रपात लॉर्ड कार्नवालिस ने किया था। उसने अनुभव किया कि जब तक कम्पनी के कर्मचारियों को अच्छे वेतन नहीं दिए जाते उनमें भ्रष्टाचार बना रहेगा। सिविल सर्विस के अन्तर्गत ये पग उठाए गए-
(i) उसने कर्मचारियों के निजी व्यापार, भेटों तथा घूस का कानून द्वारा निषेध कर दिया।
(ii) उसने कम्पनी के कर्मचारियों के वेतन बढ़ा दिये ताकि वे रिश्वत आदि न लें।

(iii) उसने सिविल सर्विस में पदोन्नति का आधार वरिष्ठता (Seniority) को बनाया। इस प्रकार उन पर कोई बाह्य दबाव नहीं डाला जा सकता था। 1853 ई० तक सिविल सर्विस में नियुक्तियां ईस्ट इण्डिया कम्पनी के संचालक ही करते रहे। परन्तु 1853 ई० के चार्टर एक्ट के अनुसार यह निश्चित हुआ कि सिविल सर्विस में भर्ती प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर होगी। सिविल सर्विस की एक विशेषता यह थी कि कार्नवालिस के समय से भारतीयों को प्रतियोगिता की परीक्षा में बैठने दिया जाता था। 500 पौंड अथवा उससे अधिक वेतन वाले सभी पद अंग्रेजों के लिए आरक्षित थे। भारतीयों को केवल अधीन पदों पर नियुक्त किया जाता था क्योंकि वे कम वेतन पर काम करने को तैयार हो जाते थे।

प्रश्न 9.
1858 के बाद भारतीय सेना में कौन-से परिवर्तन हुए ?
उत्तर-
1858 के बाद भारतीय सेना में अनेक परिवर्तन किए गए-

  • सारी सेना के लिए एक ही ‘कमाण्डर-इन-चीफ’ नियुक्त किया गया । वह गवर्नर-जनरल की ‘ऐग्जेक्टिव-कौंसिल’ का विशेष सदस्य होता था।
  • अंग्रेज़ सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गई ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर काम आ सकें।
  • तोपखाने और बारूदखाने में भारतीयों की संख्या में कमी की गई।
  • प्रत्येक रैजिमैंट में अलग-अलग धर्मों और जातियों के सैनिकों की संख्या कुछ इस प्रकार निश्चित की गई कि वे अफसरों के विरुद्ध संगठित न हो सकें।
  • जिन जातियों के लोगों ने 1857-58 के विद्रोह में भाग लिया था उनको सैनिक नौकरी के अयोग्य समझा गया।
  • शेष भारतीयों को भी ‘योद्धा’ और ‘अयोद्धा’ जातियों में विभक्त कर केवल पहली जाति के लोगों को ही भारतीय सेना में भर्ती करने की नीति अपनाई गई। इस प्रकार सेना में पठानों, गोरखों और पंजाबियों की संख्या में वृद्धि की गई। सिक्खों की संख्या विशेष रूप से अधिक थी।
  • राज्य की कुल आमदनी का आधे से भी अधिक भाग सेना पर खर्च किया जाने लगा। इस प्रकार एक सशक्त सेना की व्यवस्था की गई।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 10.
अंग्रेज़ी साम्राज्य के अधीन न्याय व्यवस्था का भारतीयों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर-
अंग्रेजी साम्राज्य के अधीन वारेन हेस्टिंग्ज़ तथा लॉर्ड डल्हौजी ने भारत में नई न्याय-व्यवस्था की नींव रखी। ये संस्थाएं स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुलझाती थीं। ये स्थानीय लोगों पर हलके कर लगाती थीं और इस प्रकार एकत्रित धन को स्थानीय जनता की भलाई के लिए व्यय करती थीं। अतः लोग ये कर सहर्ष चुकाते थे। ‘कानून का शासन'(रूल ऑफ लॉ) जो पश्चिमी देशों का आदर्श था, भारत में भी प्रचलित हो गया। सिद्धान्त रूप में सभी व्यक्ति कानून के समक्ष बराबर थे। परन्तु व्यावहारिक रूप में भारतीयों और यूरोपीयों में अन्तर बना रहा। यूरोपियों के लिये अलग अदालतें तथा कानून थे। न्याय प्राप्त करने में धन का महत्त्व बढ़ गया। अतः धनी भारतीयों को गरीबों की तुलना में कहीं अधिक जल्दी न्याय मिलने लगा।

कार्नवालिस के समय से ही भारतीयों की डिप्टी मैजिस्ट्रेट और सब-जज आदि पदों पर नियुक्ति होने लगी थी। बैंटिंक ने भारतीयों को और भी अधिक संख्या में न्याय प्रबन्ध में शामिल किया। धीरे-धीरे अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों की संख्या न्याय-प्रशासन में बढ़ती गई। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि नये कानून को जानने वाले भारतीय वकीलों की संख्या में भी वृद्धि हुई, क्योंकि मुकद्दमेबाज़ी में कचहरी जाने वालों की संख्या भी बढ़ रही थी। भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में नेतृत्व करने वाले मध्य वर्ग में वकीलों का विशेष स्थान एवं योगदान था।

प्रश्न 11.
कम्पनी के अधीन केन्द्रीय शासन की संरचना का वर्णन करो।
उत्तर-
कम्पनी के केन्द्रीय शासन का आरम्भ 1773 ई० का रेग्यूलेटिंग एक्ट पास होने के बाद हुआ। इस एक्ट के अनुसार बंगाल के गर्वनर को पांच वर्ष के लिए भारत के अंग्रेजी प्रदेशों का गवर्नर जनरल बना दिया गया। उसकी सहायता के लिए चार सदस्यों की एक कौंसिल भी बनाई गई। 1784 ई० में पिट्स इण्डिया एक्ट द्वारा रेग्यूलेटिंग एक्ट के दोषों को दूर करने का प्रयास किया गया। कम्पनी के राजनीतिक कार्यों की देखभाल करने के लिए इंग्लैण्ड में एक बोर्ड ऑफ कण्ट्रोल स्थापित किया गया जिसके 6 सदस्यों की नियुक्ति ब्रिटिश पार्लियामैण्ट द्वारा की जाती थी। गवर्नर-जनरल की कौंसिल के सदस्यों की संख्या अब चार के स्थान पर तीन कर दी गई। गवर्नर -जनरल की पार्लियामैण्ट के सदस्यों की आज्ञा के बिना न कोई सन्धि कर सकता था और न कोई युद्ध । इसी प्रकार अन्य भी कई एक्ट पास किए गए। 1853 ई० के चार्टर एक्ट द्वारा भारत का केन्द्रीय शासन पूरी तरह गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया। अब वह इंग्लैण्ड की सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भारत का शासन चलाने लगा।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 12.
भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के पुलिस विभाग की रूप रेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
भारत मे अंग्रेज़ों का पुलिस विभाग भी काफ़ी सशक्त था। लॉर्ड कार्नवालिस ने ज़मींदारों को उनके पुलिस कार्यों से निवृत्त कर दिया। देश में कानून तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसने विधिवत् पुलिस की स्थापना की। उसने पुलिस क्षेत्र में अनेक कार्य किये। उसने भारत में प्राचीन थाना प्रणाली को आधुनिक रूप प्रदान किया। इस प्रकार इस क्षेत्र में भारत ब्रिटेन से भी आगे निकल गया। जहां अभी तक पुलिस व्यवस्था पनप नहीं पाई थी, वहां उसने थानों की श्रृंखलाएं स्थापित की जोकि भारतीय अधिकारी के अधीन होती थीं। इस अधिकारी को दारोगा कहते थे। कालान्तर में जिलों के पुलिस संगठन के नेतृत्व के लिए D. S. P. का पद स्थापित किया गया। इस पद पर केवल अंग्रेज़ लोग ही नियुक्त किया जाते थे। गांवों में पुलिस के कार्य गांव के चौकीदार ही करते रहे। अंग्रेजों की पुलिस मध्य भारत में ठगी का अन्त करने में सफल हुई।

IV. निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लॉर्ड वैल्ज़ली के अधीन अंग्रेज़ी साम्राज्य के विस्तार का वर्णन कीजिए।
अथवा
सहायक संधि क्या थी ? अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार में क्या योगदान रहा ?
उत्तर-
प्लासी तथा बक्सर की लड़ाइयों के पश्चात् बंगाल में अंग्रेज़ी राज्य की नींव पक्की हो गई। परन्तु भारत में अंग्रेजों के साम्राज्य विस्तार के इतिहास में लॉर्ड वैल्ज़ली को महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वह जिस समय भारत में आया था उस समय सुल्तान टीपू, निज़ाम और मराठे अंग्रेजों के विरुद्ध थे और वे अंग्रेज़ों को भारत से निकाल देना चाहते थे। वैल्ज़ली बड़ा योग्य शासक था और वह भारतीय राजनीति से भली-भान्ति परिचित था। परिस्थितियों को देखते हुए उसने हस्तक्षेप न करने की नीति त्याग दी और उसके स्थान पर ‘हस्तक्षेप’ की नीति को अपनाया। वह भारत में अंग्रेज़ी राज्य को विस्तृत करके कम्पनी को भारत की सर्वोच्च शक्ति बनाना चाहता था। उसने अंग्रेज़ी साम्राज्य का विस्तार करने के लिए अनेक साधन अपनाए। परन्तु ‘सहायक सन्धि’ उसका सबसे बड़ा शस्त्र था।

युद्धों तथा अधिवहन द्वारा राज्य का विस्तार-वैल्जली ने मराठों को दो युद्धों में हराकर दिल्ली, आगरा, कटक, बलासौर, गुजरात, भड़ौच और बुन्देलखण्ड को अंग्रेजी राज्य में सम्मिलित कर लिया। वैल्ज़ली ने सन् 1799 ई० में टीपू सुल्तान को मैसूर के चौथे युद्ध में हरा कर कनारा, कोयम्बटूर और श्रीरंगपट्टम को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया। वैल्जली को जब भी किसी राज्य को अंग्रेज़ी राज्य में मिलाने का अवसर मिला उसने उस अवसर पर पूरा-पूरा लाभ उठाया। उसने अवसर पाते ही तंजौर, सूरत तथा कर्नाटक के शासकों को पेंशन देकर इन राज्यों को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।

सहायक सन्धि द्वारा राज्य विस्तार-वैल्ज़ली ने अंग्रेजी राज्य का विस्तार करने के लिए एक नई नीति अपनाई जिसको ‘सहायक सन्धि’ के नाम से पुकारा जाता है। जो भी देशी राजा इस सहायक सन्धि को स्वीकार करता था, उसे ये शर्ते माननी पड़ती थीं :-(1) उसे अपने राज्य में अंग्रेज़ी सेना रखनी पड़ती थी और उसका खर्च भी उसे ही देना पड़ता था। यदि वह सेना का खर्च नहीं दे पाता था तो उसे अपने राज्य का कुछ भाग अंग्रेजों को देना पड़ता था। (2) वह अंग्रेजों की अनुमति के बिना किसी भी शासक से सन्धि तथा युद्ध नहीं कर सकता था। (3) उसे अंग्रेजों को सर्वोच्च शक्ति मानना पड़ता था। (4) उसे अपने राज्य में एक अंग्रेजी रैजीडेन्ट रखना होता था। (5) वह अंग्रेजों के अतिरिक्त किसी भी यूरोपियन को नौकर नहीं रख सकता था। (6) उसे आपसी झगड़ों से भी अंग्रेजों को पंच मानना पड़ता था। इन शर्तों को मानने वाले राजा को वचन दिया जाता था कि अंग्रेज़ उसकी आन्तरिक विद्रोहों तथा बाहरी आक्रमणों से रक्षा करेंगे।

सहायक सन्धि को सबसे पहले हैदराबाद के निजाम ने स्वीकार किया क्योंकि वह मराठों से डरा हुआ था। निज़ाम ने बैलारी तथा कड़प्पा के प्रदेश भी अंग्रेजों को दे दिए। 1799 ई० में वैल्ज़ली ने सूरत के राजा को पेंशन दे दी और सूरत को अंग्रेजी राज्य में सम्मिलित कर लिया। सन् 1801 ई० में कर्नाटक के नवाब की मृत्यु हो गई। अंग्रेजों ने उसके लड़के की पेंशन नियत कर दी और उसके राज्य को अपने राज्य में मिला लिया। इस प्रकार वैल्ज़ली द्वारा राज्य विस्तार के लिए अपनाए गए सभी शस्त्रों में से सहायक सन्धि का शस्त्र बड़ा महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुआ और वह अपने संकल्प में सफल रहा।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 2.
लॉर्ड डल्हौजी द्वारा अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार की व्याख्या कीजिए।
अथवा
लार्ड डल्हौजी के अधीन लैप्स की नीति द्वारा अंग्रेजी साम्राज्य का विस्तार कैसे हुआ ?
उत्तर-
लॉर्ड डल्हौज़ी 1848 ई० से 1856 ई० तक भारत के गवर्नर-जनरल के पद पर रहा। वह उन गवर्नर-जनरलों में से एक था जिन्होंने अंग्रेज़ी राज्य की सीमाओं का विस्तार किया। उसके काल में अंग्रेज़ी सत्ता का इतना विस्तार हुआ कि भारत में अंग्रेजी राज्य का मानचित्र ही बदल गया। उसने अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार के लिए प्रत्येक उचित तथा अनुचित पग उठाया।

1. युद्धों द्वारा राज्य विस्तार-लॉर्ड डल्हौजी ने सबसे पहले युद्धों की नीति अपनाई। सिक्खों के दूसरे युद्ध में अंग्रेजों ने सिक्खों को पराजित कर दिया और पंजाब को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया। बर्मा की लड़ाई के परिणामस्वरूप लोअर बर्मा पर अंग्रेज़ों का अधिकार हो गया। डल्हौज़ी ने सिक्किम के राजा को हराकर सिक्किम के राज्य को भी अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।

2. लैप्स की नीति द्वारा राज्य विस्तार-लार्ड डल्हौज़ी भारत के इतिहास में अपनी लैप्स की नीति के लिए प्रसिद्ध है। लैप्स की नीति के अनुसार देशी राजाओं को पुत्र गोद लेने का अधिकार नहीं दिया गया था और पुत्रहीन राजा की मृत्यु पर उसके राज्य को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया जाता था। यद्यपि इस नीति का कम्पनी के अधिकारियों की ओर से भी विरोध किया गया, तो भी डल्हौज़ी अपनी नीति पर डटा रहा और उसने विरोध की कोई परवाह न की। इस नीति का सहारा लेकर उसने अनेक राज्यों को अंग्रेज़ी राज्य में सम्मिलित कर लिया-

(i) 1849 ई० में अप्पा साहिब की मृत्यु हो गई। डल्हौजी ने इस अवसर का लाभ उठाया और सतारा को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।
(ii) झांसी की रानी को भी पुत्र गोद लेने की आज्ञा नहीं दी गई और उसके राज्य को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया।

(iii) 1855 ई० में नागपुर के राजा की मृत्यु हो गई। उसने मरने से पहले किसी को गोद नहीं लिया था। जब रानी ने जसवन्तराय को गोद ले लिया तो अंग्रेजों ने उसे सिंहासन का उत्तराधिकारी स्वीकार न किया और नागपुर के राज्य को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया।

(iv) इस नीति के अनुसार डल्हौजी ने जैतपुर, सम्बलपुर, उदयपुर और बघाट के राज्यों को भी अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।

3. पेंशनों तथा पदवियों की समाप्ति-लैप्स की नीति द्वारा देशी राज्यों को अंग्रेजी राज्य में सम्मिलित करके भी डल्हौज़ी की सन्तुष्टि न हुई। अब उसने देशी राजाओं की पेंशन तथा पदवियां समाप्त करनी आरम्भ कर दी। सन् 1852 में पेशवा बाजीराव की मृत्यु हो गई। डल्हौजी ने बाजीराव के दत्तक पुत्र नाना साहिब की पेंशन बन्द कर दी और पेशवा की उपाधि समाप्त कर दी। 1855 ई० में कर्नाटक के नवाब की मृत्यु हो गई और डल्हौज़ी ने उसका पद भी समाप्त कर दिया। 1855 ई० में ही तंजौर के राजा की भी मृत्यु हो गई। उसका कोई पुत्र न था। डल्हौज़ी ने इसका लाभ उठाते हुए उसकी पुत्रियों के लिए पेंशन बन्द कर दी और उसकी जागीर छीन ली।

4. कुशासन के आरोप में-लॉर्ड डल्हौजी ने सन् 1856 में कुशासन की आड़ में अवध के राज्य को अंग्रेजी राज्य में मिलाने तथा नवाब को 12 लाख रुपया वार्षिक पेंशन देने का निर्णय किया। ये सब बातें एक सन्धि-पत्र के रूप में नवाब को भेज दी गईं और नवाब को इस पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया। परन्तु नवाब ने हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। इस पर डल्हौजी ने उसे नवाबी से हटाकर कलकत्ता (कोलकाता) भेज दिया। इस प्रकार अवध को बलपूर्वक अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया। हैदराबाद के निज़ाम ने सहायक सन्धि के अनुसार अपने राज्य मे अंग्रेजी सेना रखी हुई थी। निजाम ने इस सेना के लिए बरार का प्रदेश अंग्रेज़ों को दे दिया।

प्रश्न 3.
सहायक-प्रणाली के विषय में आप क्या जानते हैं ? इसकी मुख्य शर्ते कौन-कौन सी थीं ?
उत्तर-
सहायक-सन्धि अथवा सहायक-प्रणाली लार्ड वैल्ज़ली की कूटनीति का प्रमाण थी। वह बड़ा ही साम्राज्यवादी था। उसने भारत में कम्पनी राज्य का विस्तार करने के लिए सहायक सन्धि की नीति का सहारा लिया। यह सन्धि एक प्रकार का प्रतिज्ञा-पत्र था जिसे भारतीय शासकों पर जबरदस्ती थोपा गया। भारतीय राजा भी यह प्रतिज्ञा-पत्र स्वीकार करने पर विवश थे। इसका कारण यह था कि वे बड़े अयोग्य और असंगठित थे। ..यह नीति कम्पनी के लिए बिल्कुल नई नहीं थी। क्लाइव के समय से ही कम्पनी भारतीय शासकों के साथ ऐसा व्यवहार करती आ रही थी। क्योंकि वैल्जली ने इस नीति को एक निश्चित रूप-रेखा प्रदान की थी, इसलिए इस नीति का नाम उसके नाम के साथ जुड़कर रह गया है।

सहायक-सन्धि की शर्ते-सहायक-सन्धि देशी राजाओं तथा कम्पनी के बीच होती थी। इसके अनुसार कम्पनी देशी राज्य को आन्तरिक और बाहरी खतरे के समय सैनिक सहायता देने का वचन देती थी, जिसके बदले में देशी राजा को अनेक शर्ते माननी पड़ती थीं । इन सभी शर्तों का वर्णन इस प्रकार है-

1. उसे अपने राज्य में एक अंग्रेज़ी सेना रखनी पड़ती थी और उसका खर्च भी देना पड़ता था यदि वह सेना का खर्च नहीं दे पाता था तो उसे अपने राज्य का कुछ भाग अंग्रेजों को देना पड़ता था।

2. उसे अंग्रेजों का आधिपत्य स्वीकार करना पड़ता था और वह उनकी अनुमति के बिना किसी भी शासक से युद्ध या सन्धि नहीं कर सकता था।

3. उसे अंग्रेजों को सर्वोच्च शक्ति मानना पड़ता था।

4. वह अंग्रेजों के अतिरिक्त किसी भी यूरोपियन को नौकरी पर नहीं रख सकता था। इस शर्त का उद्देश्य भारत में फ्रांसीसियों के प्रभाव को कम करना था।

5. उसे अपने राज्य में एक अंग्रेज़ रैजीडेण्ट रखना पड़ता था जिसके परामर्श से ही उसे अपना सारा शासन-कार्य चलाना पड़ता था। यह एक ऐसी शर्त थी जिसके द्वारा देशी राज्यों की गतिविधियों पर सदैव अंग्रेजों की दृष्टि बनी रहती थी।

6. आपसी झगड़ों की दशा में उसे अंग्रेजों को मध्यस्थ स्वीकार करना पड़ता था और उनके निर्णय को मानना पड़ता था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 4.
सहायक सन्धि से अंग्रेजों को जो लाभ हुए उनका वर्णन करो।
उत्तर-
सहायक सन्धि भारत में अंग्रेज़ी साम्राज्य का विस्तार करने की दिशा में अंग्रेजों का एक कूटनीतिक पग था। इस सन्धि द्वारा उन्हें अनेक लाभ पहुंचे जिनका वर्णन इस प्रकार है-

1. सहायक सन्धि द्वारा अंग्रेज़ों को सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि इससे कम्पनी के साधन काफ़ी बढ़ गए। सन्धि स्वीकार करने वाले राज्यों से प्राप्त धन तथा उससे प्राप्त किए प्रदेशों से मिलने वाले राजस्व से कम्पनी की आर्थिक स्थिति काफ़ी दृढ़ हो गई। इस धन की सहायता से अंग्रेजों ने देशी राज्यों में ऐसे सैनिक भर्ती किए जो सदैव अंग्रेजों के इशारों पर नाचते थे। मजे की बात यह थी कि इस सेना का व्यय भी देशी राज्यों को सहन करना पड़ता था। अतः इस व्यवस्था के फलस्वरूप एक तो अंग्रेजों की शक्ति काफ़ी बढ़ गई, दूसरे वे सैनिक व्यय की चिन्ता से भी मुक्त हो गए।

2. इस सन्धि के कारण कम्पनी का देशी राज्यों पर प्रत्यक्ष और कड़ा नियन्त्रण स्थापित हो गया। अब अंग्रेजों को इस बात का भय नहीं रहा कि देशी राजा कोई संघ बनाकर कम्पनी का विरोध करेंगे।

3. इस व्यवस्था के कारण कम्पनी राज्य आन्तरिक विद्रोहों तथा बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित हो गया। सैनिक शक्ति बढ़ जाने से उन्हें बाह्य आक्रमणों के भय से छुटकारा मिल गया, जबकि देशी राज्यों में रखी हुई अंग्रेजी सेना के भय से आन्तरिक विद्रोह का कोई भय न रहा।

4. इस सन्धि को स्वीकार करने वाले देशी राज्यों में आपसी झगड़े कम हो गए। इसका कारण यह था कि ऐसे झगड़ों का निर्णय अंग्रेजों ने अपने हाथ में ले लिया था। भारतीय शासक जानते थे कि अंग्रेज़ अपने स्वार्थ को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय देंगे।

5. इस सन्धि के कारण ही अंग्रेज़ भारत में फ्रांसीसियों का प्रभुत्व समाप्त करने में सफल हो सके। इस व्यवस्था के अनुसार देशी राज्यों में केवल अंग्रेज़ी सेना और अंग्रेज़ कर्मचारी ही रखे जा सकते थे। फलस्वरूप फ्रांसीसियों की सभी योजनाओं तथा आशाओं पर पानी फिर गया।

6. इस व्यवस्था द्वारा अंग्रेज़ भारत में काफ़ी शक्तिशाली हो गए, परन्तु किसी अन्य यूरोपीय शक्ति को उनसे किसी प्रकार की कोई ईर्ष्या न हुई। इसका कारण यह था कि देशी राजाओं की स्वतन्त्रता प्रकट रूप में स्थिर रखी जाती थी। अन्य यूरोपीय शक्तियां अंग्रेजों की इस कूटनीति को न समझ सकीं।

7. सहायक प्रणाली के कारण कम्पनी का राज्य-क्षेत्र युद्ध के भीषण परिणामों से सुरक्षित हो गया। अब कोई भी युद्ध कम्पनी के राज्य-क्षेत्र में नहीं बल्कि किसी-न-किसी देशी राज्य की भूमि पर लड़ा जाता था।

8. इस व्यवस्था द्वारा भारत में शान्ति स्थापना में सहयोग मिला। देशी राज्यों के आपसी झगड़े समाप्त होने तथा महत्त्वाकांक्षाओं पर अंकुश लग जाने से देश के वातावरण में शान्ति की लहर दौड़ गई।

9. इस व्यवस्था द्वारा देशी राज्यों की शक्ति बिल्कुल कम कर दी गई थी। अतः अंग्रेजों को अब बिना किसी कठिनाई के साम्राज्य विस्तार करने का अवसर मिल गया।

प्रश्न 5.
लॉर्ड हेस्टिंग्ज के शासन की प्रमुख घटनाओं का वर्णन करो।
अथवा
लार्ड हेस्टिग्ज़ की सैनिक सफलताओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा
लार्ड हेस्टिग्ज़ के प्रशासनिक सुधारों का वर्णन करें।
उत्तर-
लार्ड हेस्टिंग्ज़ 1813 ई० में भारत में कम्पनी राज्य का गवर्नर-जनरल बन कर आया। वह 1823 ई० तक इस पद पर रहा। उसने लॉर्ड वैल्ज़ली की हस्तक्षेप व अग्रगामी नीति को अपनाया और कम्पनी राज्य को सदृढ़ बनाने का निश्चय किया। उसके शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का वर्णन इस प्रकार है

1. नेपाल से युद्ध (1814-1818 ई०)-हेस्टिंग्ज़ के शासन-काल की प्रमुख घटना नेपाल से युद्ध था। नेपाल के गोरखे दक्षिण की ओर विस्तार कर रहे थे और उन्होंने कई गांवों पर अधिकार कर लिया था। अत: अंग्रेजों और गोरखों में युद्ध स्वाभाविक था। अंग्रेजी सेना को बार-बार पराजय का मुंह देखना पड़ा। अतः अंग्रेजों ने कई गोरखा सिपाहियों को धन का लोभ देकर अपनी तरफ मिला लिया। ऐसी दशा में गोरखों ने अंग्रेजों से सन्धि करने में भलाई समझी। 1816 ई० को सुगौली नामक स्थान पर दोनों पक्षों में सन्धि हुई।

2. पिण्डारों का दमन (1819-1820)-पिण्डारे लुटेरों का एक गिरोह था। इसमें सभी वर्गों तथा सम्प्रदायों के लोग सम्मिलित थे। ये लोग मध्य भारत के प्रदेशों राजपूताना, मालवा, गुजरात, दक्षिणी बिहार आदि प्रदेशों में गांवों को निर्दयतापूर्वक आग लगा देते थे और बचे हुए लोगों के साथ बड़ा बुरा व्यवहार करते थे। लॉर्ड हेस्टिग्ज़ इनका दमन करना चाहता था।

लॉर्ड हेस्टिंग्ज़ ने सबसे पहले मराठों से बातचीत की और उनसे पिण्डारों की सहायता न करने का वचन ले लिया। तत्पश्चात् उसने पिण्डारों पर आक्रमण कर दिया। उत्तर तथा दक्षिण दोनों दिशाओं से उन्हें घेर लिया गया। 4 वर्षों के भीषण संघर्ष के पश्चात् पिण्डारों की शक्ति पूरी तरह नष्ट हो गई।

3. मराठों से युद्ध (1817-18 ई०)- अंग्रेजों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय को किर्की नामक स्थान पर बुरी तरह हराया और उसे 80 हज़ार पौंड वार्षिक पेंशन देकर बिठूर में रहने की आज्ञा दी गई। इधर अप्पा साहिब ने नागपुर में सीताबाल्दी नामक स्थान पर विद्रोह कर दिया परन्तु वह भी पराजित हुआ। इन्दौर में मराठों ने जसवन्त राव होल्कर की पत्नी का वध करके अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी, परन्तु उन्हें भी मुंह की खानी पड़ी और इन्दौर पर अंग्रेज़ों का अधिकार हो गया। इन सभी झड़पों के परिणामस्वरूप पेशवा का पद छिन गया तथा सिन्धिया ने अजमेर और गायकवाड़ ने अहमदाबाद के प्रदेश अंग्रेजों को सौंप दिए। इस प्रकार सिन्ध, पंजाब तथा कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत पर अंग्रेज़ों का अधिकार हो गया।

4. मध्य भारत तथा राजपूताना में अंग्रेजी प्रभुत्व की स्थापना- लॉर्ड हेस्टिग्ज़ ने मध्य भारत तथा राजपूताना के अनेक छोटे-छोटे राज्यों को अंग्रेजी संरक्षण में ले लिया। इस प्रकार कोटा, भोपाल, उदयपुर, जोधपुर, जयपुर, बीकानेर आदि अनेक राज्यों पर अंग्रेज़ी प्रभुत्व छा गया।

5. प्रशासनिक सुधार- लार्ड हेस्टिंग्ज़ ने अनेक प्रशासनिक सुधार भी किए-

  • उसने भारतीयों की नियुक्ति उच्च पदों पर की।
  • उसने अदालतों की संख्या में वृद्धि कर दी और जजों की संख्या बढ़ा दी। इस प्रकार मुकद्दमों का निर्णय जल्दी होने लगा।
  • उसने शिक्षा के प्रसार के लिए देश के विभिन्न भागों में अनेक स्कूल खुलवाए। कलकत्ता (कोलकाता) में उसने एक कॉलेज की नींव रखी।
  • उसके शासनकाल में समाचार-पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ हुआ। यह भारतीय भाषा में छपने वाला सबसे पहला समाचार-पत्र था। लॉर्ड हेस्टिग्ज़ ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों में भी रुचि दिखाई और देश में अनेक नहरें तथा पुल बनवाए।

सच तो यह है कि लॉर्ड हेस्टिंग्ज़ ने लॉर्ड वैल्जली के अधूरे कार्य को पूरा किया। उसके प्रयत्नों से कम्पनी राज्य भारत की सर्वोच्च शक्ति बन गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 6.
(क) लैप्स का सिद्धान्त क्या था ? इसके द्वारा कौन-कौन से राज्य प्रभावित हुए ?
(ख) यह सिद्धान्त 1857 ई० की महान् क्रान्ति के लिए कहां तक उत्तरदायी था ?
अथवा
डल्हौज़ी के लैप्स के सिद्धान्त तथा उसके विभिन्न राज्यों पर क्रियात्मक रूप से निरीक्षण कीजिए।
उत्तर-
लैप्स का सिद्धान्त- लैप्स का सिद्धान्त लॉर्ड डल्हौजी ने अपनाया । इसके अनुसार यदि अंग्रेज़ी के किसी आश्रित राज्य का कोई शासक बिना सन्तान के मर जाता था तो उसके द्वारा गोद लिए हुए पुत्र को सिंहासन पर नहीं बिठाया जा सकता था और ऐसे राज्य को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया जाता था।

प्रभावित राज्य-

1. सतारा-1848 ई० में सतारा के शासक की नि:सन्तान मृत्यु हो गई। अत: डल्हौजी ने इस आधार पर कि यह अंग्रेजों द्वारा स्थापित तथा आश्रित राज्य है, सतारा को ब्रिटिश साम्राज्य में विलीन कर लिया। राजा द्वारा गोद लिए पुत्र को उसका उत्तराधिकारी स्वीकार न किया गया। कम्पनी के संचालकों ने भी सतारा राज्य के विलीनीकरण के सम्बन्ध में डल्हौजी का समर्थन किया।

2. झांसी-झांसी का शासन पेशवा बाजीराव द्वितीय के अधीन था। 1817 ई० में वह अंग्रेजों से हार गया था और उसने पराजित होने के पश्चात् यह राज्य अंग्रेजों को सौंप दिया था। परन्तु इसी वर्ष वारेन हेस्टिंग्ज़ ने यहां की राजगद्दी पर राव रामचन्द्र को बिठा दिया था। 1853 ई० में राव रामचन्द्र के वंश के अन्तिम शासक राव गंगाधर की नि:सन्तान मृत्यु हो गई। इस पर लॉर्ड डल्हौजी ने उसके दत्तक पुत्र आनन्द राव के उत्तराधिकार को स्वीकार न किया और झांसी का राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में विलीन कर लिया। मृत्यु से पूर्व गंगाधर ने अंग्रेजों से पुत्र गोद लेने की अनुमति भी माँगी थी, परन्तु अंग्रेजों ने उसे स्वीकृति नहीं दी थी।

3. नागपुर-1853 ई० में नागपुर राज्य भी लैप्स की नीति का शिकार बना। मराठों के चौथे युद्ध में इस राज्य पर वारेन हेस्टिंग्ज़ ने विजय प्राप्त की थी। परन्तु 1818 ई०में उसने यह राज्य पुनः वहां के प्राचीन वंश (भौंसले वंश) के एक सदस्य को सौंप दिया था। इस वंश का अन्तिम शासक 1853 ई० में निःसन्तान चल बसा। मृत्यु से पूर्व उसने कोई पुत्र भी गोद नहीं लिया था, परन्तु वह अपनी पत्नी को पुत्र गोद लेने के लिए अवश्य कह गया था। उसकी पत्नी ने यशवन्त राव को अपना दत्तक पुत्र बनाया। परन्तु डल्हौजी ने उसे मान्यता न दी और नागपुर को अंग्रेज़ी राज्य का अंग बना लिया। _ डल्हौज़ी ने यह राज्य इस आधार पर अंग्रेज़ी राज्य में मिलाया था कि रानी ने पुत्र को देर से गोद लिया है। परन्तु हिन्दू कानून के अनुसार इस प्रकार लेने से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। अत: नागपुर का अंग्रेजी साम्राज्य में विलय एकदम अनुचित था।

4. सम्बलपुर-सम्बलपुर के राजा की 1849 ई० में नि:सन्तान मृत्यु हो गई। अपनी मृत्यु से पूर्व उसने यह इच्छा प्रकट की कि उसकी मृत्यु के पश्चात् उसका राज्य अंग्रेज़ी संरक्षण में चला जाए। उसने कोई पुत्र भी गोद नहीं लिया था। इसी बात को आधार मानते हुए डल्हौजी ने सम्बलपुर का राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया।

5. जैतपुर, उदयपुर तथा बघाट–डल्हौजी ने लैप्स की नीति द्वारा तीन अन्य छोटे-छोटे राज्य भी अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिये। ये राज्य थे-जैतपुर, उदयपुर तथा बघाट। जैतपुर तथा बघाट 1850 में , जबकि उदयपुर 1851 ई० में डल्हौजी की नीति का शिकार हुए। इतिहासकारों का कथन है कि इन छोटे-छोटे राज्यों के अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिल जाने से अंग्रेज़ों को लाभ की अपेक्षा हानि अधिक उठानी पड़ी।

6. करौली-लॉर्ड डल्हौजी ने अपनी लैप्स नीति का प्रहार राजस्थान में स्थित करौली राज्य पर भी करना चाहा। परन्तु इंग्लैण्ड की सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। इंग्लैण्ड की सरकार का कहना था कि करौली एक आश्रित राज्य न होकर संरक्षित मित्र राज्य (Protected Ally) है।

1857 की क्रांति के लिए उत्तरदायित्व-

यह सच है कि लैप्स के सिद्धान्त द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य की सीमाओं में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई। परन्तु इसके विनाशकारी परिणाम भी निकले जिनका वर्णन इस प्रकार है-

1. यह सिद्धान्त 1857 ई० के विद्रोह का प्रमुख कारण बना। इस सिद्धान्त द्वारा जिन राजकुमारों के राज्य हड़प लिए गए थे, वे सभी अंग्रेजों के विरुद्ध हो गए। उन्होंने अंग्रेजों से बदला लेने के लिए 1857 ई० की क्रान्ति के बीज बोए।

2. भारतीय शासकों के साथ-साथ लैप्स की नीति के कारण उन राज्यों की जनता भी अंग्रेजों के विरुद्ध हो गई जिनके राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिए गए थे। वहां जनता इसे अपने राजा का तथा अपना अपमान समझती थी। फलस्वरूप लोग अंग्रेजों से घृणा करने लगे और उनसे बदला लेने की ताक में रहने लगे।

3. लैप्स के सिद्धान्त के अनुसार किसी भी राजा को पुत्र गोद लेने की आज्ञा न देना हिन्दू कानूनों का उल्लंघन था। फलस्वरूप हिन्दुओं के कानूनवेत्ता भी अंग्रेजों को सन्देह की दृष्टि से देखने लगे।

4. लैप्स की नीति से बचे हुए राज्यों के शासकों तथा लोगों के मन में भी शक और भय की भावनाएँ उत्पन्न हो गईं। वे अपने आपको सुरक्षित करने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध योजनाएं बनाने लगे ।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 18 अंग्रेजी साम्राज्य का विकास और संगठन

प्रश्न 8.
पंजाब को अंग्रेजों ने किस प्रकार अपने अधीन किया ?
उत्तर-
1839 ई० में महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई। इसके पश्चात् सिक्खों का नेतृत्व करने वाला कोई योग्य नेता न रहा। शासन की सारी शक्ति सेना के हाथ में आ गई। अंग्रेजों ने इस अवसर का लाभ उठाया और सिक्ख सेना के प्रमुख अधिकारियों को लालच देकर अपने साथ मिला लिया। इसके साथ-साथ उन्होंने पंजाब के आस-पास के इलाकों में अपनी सेनाओं की संख्या बढ़ानी आरम्भ कर दी और सिक्खों के विरुद्ध युद्ध की तैयारी करने लगे। उन्होंने सिक्खों से युद्ध किये, दोनों युद्धों में सिक्ख सैनिक बड़ी वीरता से लड़े। परन्तु अपने अधिकारियों की गद्दारी के कारण वे पराजित हुए। प्रथम युद्ध के बाद अंगज़ों ने पंजाब का केवल कुछ भाग अंग्रेज़ी राज्य में मिलाया और वहाँ सिक्ख सेना के स्थान पर अंग्रेज़ सैनिक रख दिये गये। परन्तु 1849 ई० में दूसरे सिक्ख दूसरे युद्ध की समाप्ति पर लॉर्ड डल्हौज़ी ने पूरे पंजाब को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया।
इस प्रकार अंग्रेजों द्वारा पंजाब-विजय की कहानी काफ़ी रोचक है जिसका कारण वर्णन इस प्रकार है –

1. पहला सिक्ख युद्ध-अंग्रेज़ काफ़ी समय से पंजाब को अपने राज्य में मिलाने का प्रयास कर रहे थे। रणजीत सिंह की मृत्यु के पश्चात् अंग्रेजों को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर मिल गया। उन्होंने सतलुज के किनारे अपने किलों को मजबूत करना आरम्भ कर दिया। सिक्ख नेता अंग्रेजों की सैनिक तैयारियों को देखकर भड़क उठे। अत: 1845 ई० में सिक्ख सेना सतलुज को पार करके फिरोजपुर के निकट आ डटी। कुछ ही समय पश्चात् अंग्रेज़ों और सिक्खों में लड़ाई आरम्भ हो गई। इसी समय सिक्खों के मुख्य सेनापति तेजसिंह और वजीर लालसिंह अंग्रेजों से मिल गये। उनके इस विश्वासघात के कारण मुदकी तथा फिरोजशाह के स्थान पर सिक्खों की हार हुई। सिक्खों ने साहस से काम लेते हुए 1846 ई० में सतलुज को पार करके लुधियाना के निकट अंग्रेज़ों पर धावा बोल दिया। यहाँ अंग्रेज बुरी तरह से पराजित हुए और उन्हें पीछे हटना पड़ा। परन्तु गुलाबसिंह के विश्वासघात के कारण अलीवाल और सभराओं के स्थान पर सिक्खों को एक बार फिर हार का मुँह देखना पड़ा। मार्च, 1846 ई० में गुलाबसिंह के प्रयत्नों से सिक्खों और अंग्रजों के बीच एक सन्धि हो गई। सन्धि के अनुसार सिक्खों को अपना काफ़ी सारा प्रदेश और डेढ़ करोड़ रुपया अंग्रेज़ों को देना पड़ा। दिलीपसिंह के युवा होने तक पंजाब में शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के लिए एक अंग्रेजी सेना रख दी गई।

2. दूसरा सिक्ख युद्ध और पंजाब में अंग्रेजी राज्य की स्थापना-1848 ई० में अंग्रेज़ों और सिक्खों में पुनः युद्ध छिड़ गया। अंग्रेज़ों ने मुलतान के लोकप्रिय गवर्नर दीवान मूलराज को जबरदस्ती हटा दिया था। यह बात वहाँ के नागरिक सहन न कर सके और उन्होंने अनेक अंग्रेज अफसरों को मार डाला। अतः लॉर्ड डल्हौजी ने सिक्खों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस युद्ध की महत्त्वपूर्ण लड़ाइयाँ रामनगर ( 22 नवम्बर, 1848 ई०), मुलतान (दिसम्बर, 1848 ई०), चिल्लियांवाला (13 जनवरी, 1849 ई०) और गुजरात ( फरवरी, 1849 ई०) में लड़ी गईं। रामनगर की लड़ाई में कोई निर्णय न हो सका। परन्तु मुलतान, चिल्लियांवाला और गुजरात के स्थान पर सिक्खों की हार हुई। सिक्खों ने 1849 ई० में पूरी तरह अपनी पराजय स्वीकार कर ली। इस विजय के पश्चात् अंग्रेजों ने पंजाब को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

Punjab State Board PSEB 10th Class Physical Education Book Solutions खो-खो (Kho-Kho) Game Rules.

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules – PSEB 10th Class Physical Education

याद रखने योग्य बातें

  1. खो-खो मैदान की लम्बाई और चौड़ाई = 29 × 16 मीटर
  2. केन्द्र लेन में वर्गों की गिनती = 8
  3. मैदान के अंत में आयताकार का माप = 16 मीटर × 2.75 मीटर
  4. एक वर्ग के दूसरे वर्ग की दूरी = 2.50 मीटर
  5. केन्द्रीय गली की चौड़ाई और लम्बाई = 23.50 मी०, 30 सैं० मी० चौड़ाई लम्बाई
  6. वर्ग का आकार = 30 × 30 सैं० मी०
  7. खो-खो के खिलाड़ियों की गिनती = 12 (9+3 बदलवें)
  8. बदलवें खिलाड़ी = 3
  9. मैच का समय = 9-5-9 (सात मिनट का आराम) 9-5-9
  10. मैच के इनिंग्ज = 2
  11. फ्री जोन का माप = 2.75 x 16 मी०
  12. लॉबी = 1.50 मीटर
  13. वर्गों में बैठे खिलाड़ियों को कहते हैं = चेजर
  14. वर्गों में विरोधी खिलाड़ी होते हैं = रनर 7-5-7(5)
  15. स्त्रियों के लिए समय = 7-5-7
  16. अधिकारी = एक रैफ़री, दो अम्पायर, एक टाइम कीपर, एक स्कोरर,
  17. पोल की ज़मीन से ऊंचाई = 1.20 मीटर
  18. क्रास लेन = 16 मी० × 30 सैं०मी०
  19. लास्ट लेन की रेखा की दूरी = 2.50 मी०
  20. मध्य रेखा द्वारा विभाजित प्रत्येक कोर्ट = 7.88 मी०
  21. फालोआन = 9 अथवा इसके अधिक अंक।

खो-खो खेल की संक्षेप रूप-रेखा
(Brief outline of the Kho-Kho Game)

  1. खो-खो का मैदान आयताकार होता है। यह 29 मीटर लम्बा तथा 16 मीटर चौड़ा होता है।
  2. खो-खो की खेल में एक टीम 12 खिलाड़ियों की होती है जिसमें 9 खिलाड़ी खेलते हैं तथा तीन खिलाड़ी स्थानापन्न (Substitutes) होते हैं।
  3. खेल का आरम्भ टॉस द्वारा होता है। टॉस जीतने वाली टीम का कप्तान चेज़र या रनर बनने का निर्णय करता है।
  4. एक चेज़र को छोड़कर शेष सभी चेज़र वर्ग में इस प्रकार बैठेंगे कि किसी पास पास बैठे चेज़र का मुंह एक दिशा में न हो।
  5. ‘खो’ बैठे हुए चेज़र को पीछे से देनी चाहिए। बिना खो प्राप्त किए बैठा हुआ चेज़र नहीं उठ सकता।
  6. खो-खो के मैच की दो इनिंग्ज़ होती हैं। दोनों इनिंग्ज़ में से अधिक प्वाईंट लेने वाली टीम को विजयी घोषित किया जाता है।
  7. खेल के दौरान किसी खिलाड़ी को चोट लग जाने की दशा में रैफरी की अनुमति से कोई अन्य खिलाड़ी उसके स्थान पर खेल सकता है।
  8. कार्यशील चेज़र के शरीर का कोई भी अंग केन्द्रीय पट्टी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  9. यदि कोई टीम बराबर रह जाती है तो फिर एक और इनिंग्ज़ लगाई जाती है। यदि फिर भी बराबर रह जाए तो एक इनिंग्ज़ और लगाई जाती है।
  10. यदि किसी खिलाड़ी के चोट लग जाए तो उसके स्थान पर स्थानापन्न (Substitutes) में से ले लिया जाता है।
  11. खेल का समय 9-5-9, (7) 9-5-9 का होता है।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न
खो-खो के खेल के मैदान, पारिभाषिक शब्द, खेल के आरम्भ, खेल के नियम तथा खेल के अधिकारियों का वर्णन करें।
उत्तर-
खेल का मैदान
खो-खो का क्रीडा क्षेत्र आयताकार होता है। यह 29 मीटर x 16 मीटर होता है। मैदान के अन्त में दो आयताकार होते हैं। आयताकार की एक भुजा 16 मीटर और दूसरी भुजा 2.75 मीटर होती है। इन दोनों आयताकारों के मध्य में दो लकड़ी के स्तम्भ (खम्बे/पोल) होते हैं। केन्द्रीय गली 23.50 मीटर लम्बी और 30 सैंटीमीटर चौड़ी होती है। इसमें 30 सम x 30 सम के आठ वर्ग होंगे।
KHO-KHO GROUND
खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 1
परिभाषाएं

  1. स्तम्भ का पोस्ट-मध्य लेन के अन्त में दो स्तम्भ गाड़े जाते हैं जो भूमि से 1.20 से 1.25 सैंटीमीटर के बीच ऊंचे होते हैं। इनकी परिधि 30 सम से कम या 40 सम से अधिक नहीं हो सकती।
  2. केन्द्रीय गली या लेन-दोनों स्तम्भों के मध्य में केन्द्रीय गली होती है। यह 23.50 मीटर लम्बी और 30 सम चौड़ी होती है।
  3. क्रॉस-लेन-प्रत्येक आयताकार 15 मीटर लम्बा और 30 सैंटीमीटर चौड़ा होता है। वह केन्द्रीय लेन को समकोण (90°) पर काटता है। यह स्वयं भी दो अर्द्धकों में विभाजित होता है। इसे क्रॉस-लेन कहते हैं।
    पोल से पोल की दूरी = 23.50 मीटर
    पोल की ऊंचाई = 1.20 से 1.25 मीटर।
  4. वर्ग-केन्द्रीय लेन तथा क्रॉस-लेन के परस्पर काटने से बना 30 सम – 30 सम का क्षेत्र वर्ग कहलाता है।
  5. स्तम्भ रेखा–पोल के पास केन्द्र से गुज़रती हुई क्रॉस-लेन और केन्द्रीय लेन के समानान्तर रेखा को स्तम्भ रेखा कहते हैं।
  6. आयताकार-स्तम्भ रेखा का बाहरी क्षेत्र आयताकार कहलाता है।
  7. परिधियां-केन्द्रीय लेन तथा बाहरी सीमा निश्चित करने वाली दोनों आयताकारों की रेखाओं से 7.85 मीटर दूर दोनों पार्श्व-रेखाओं को परिधियां कहते हैं।
  8. अनुधावक या चेज़र-वर्गों में बैठे खिलाड़ी अनुधावक या चेज़र कहलाते हैं। विरोधी खिलाड़ियों को पकड़ने या छूने के लिए भागने वाला अनुधावक या चेज़र सक्रिय अनुधावक या चेज़र कहलाता है।
  9. धावक-चेज़रों या धावकों के विरोधी खिलाड़ी ‘धावक’ या ‘रनर’ कहलाते हैं।
  10. ‘खो’ देना-अच्छी ‘खो’ देने के लिए सक्रिय चेज़र को बैठे हुए चेज़र को पीछे से हाथ से छूते ही ‘खो’ शब्द ऊंचा तथा स्पष्ट कहना चाहिए। छूने और ‘खो’ कहने का काम एक साथ होना चाहिए।
  11. फाऊल-यदि बैठा हुआ (निष्क्रिय) या सक्रिय चेज़र किसी नियम का उल्लंघन करता है तो वह फाऊल होता है।
  12. दिशा ग्रहण करना-एक स्तम्भ से दूसरे स्तम्भ की ओर जाना ‘दिशा ग्रहण करना’ कहलाता है।
  13. मुंह मोड़ना-जब सक्रिय चेज़र एक विशेष दिशा की ओर जाते समय अपने कंधे की रेखा 90° के कोण से अधिक दिशा को मोड़ लेता है तो इसे ‘मुंह मोड़ना’ कहते हैं। यह फाऊल होता है।
  14. निवर्तन या पलटना-किसी विशेष दिशा की ओर जाता हुआ सक्रिय चेज़र जब विपरीत दिशा में जाता है तो उसे निवर्तन या पलटना कहा जाता है। यह फाऊल होता है।
  15. स्तम्भ रेखा से हटना-जब कोई सक्रिय चेज़र स्तम्भ का अधिकार छोड़ दे या आयताकार से परे चला जाए तो इसे स्तम्भ रेखा से हटना कहते हैं।
  16. पांव बाहर-जब रनर के दोनों पांव सीमाओं से बाहर भूमि को छू लें तो उसके पांव बाहर माने जाते हैं, उसे आऊट माना जाता है।

खेल के नियम

  1. क्रीडा क्षेत्र (खेल का मैदान) को आकार में वर्णित अनुसार चिन्हित किया जाएगा।
  2. दौड़ने या चेज़र बनने का निर्णय टॉस द्वारा किया जाएगा।
  3. एक चेज़र के अतिरिक्त अन्य सभी चेज़र वर्गों में इस प्रकार बैठेंगे कि दो साथसाथ बैठे चेज़रों का मुंह एक ओर नहीं होगा। नौवां चेज़र (सक्रिय चेज़र) (Active Chaser) पीछा करने के लिए किसी एक स्तम्भ के पास खड़ा होगा।
  4. सक्रिय चेज़र के शरीर का कोई भी भाग केन्द्रीय गली से स्पर्श नहीं करेगा। वह स्तम्भों में अन्दर से केन्द्रीय रेखा पार नहीं कर सकता।
  5. ‘खो’ बैठे हुए चेज़र के पीछे से समीप जाकर ऊंची और स्पष्ट आवाज़ में देनी चाहिए। बैठा हुआ चेज़र बिना ‘खो’ प्राप्त किए नहीं उठ सकता और न ही वह अपनी टांग या भुजा फैला कर स्पर्श प्राप्त करने की कोशिश करेगा।
  6. यदि कोई सक्रिय चेज़र उस वर्ग की केन्द्रीय गली से बाहर चला जाए जिस पर कोई चेज़र बैठा है और यदि वह निष्क्रिय चेज़र की पकड़ छोड़ देता/देती है तो सक्रिय चेज़र उसे ‘खो’ नहीं देगा। कोई सक्रिय चेज़र ‘खो’ देने के लिए वापस नहीं आ सकता।
  7. नियम 4, 5 तथा 6 का उल्लंघन फाऊल होता है। इस पर सक्रिय चेज़र उस दिशा के विपरीत जाने के लिए बाध्य किया जाएगा जिस दिशा में वह जा रहा/रही थी। निर्णायक की सीटी के संकेत के साथ सक्रिय चेज़र सांकेतिक दिशा की ओर चल देगा। यदि इस तरह रनर आऊट हो जाता है तो उसे आऊट नहीं माना जाता।
  8. सक्रिय चेज़र ‘खो’ देने के पश्चात् तुरन्त खो पाने वाले चेज़र का स्थान ग्रहण कर लेगा। खो देना और साथ बैठे चेज़र से खो लेना एक साथ होना चाहिए।
  9. ठीक खो लेने के पश्चात् यदि एक्टिव चेज़र का पहला कदम सैंटर लेन को छूता हो तो वह फाऊल नहीं है। यदि सैंटर लेन को क्रॉस करे तो वह फाऊल है।
    नोट-जब तक किसी खिलाड़ी का पांव क्रॉस लेन की भूमि को स्पर्श करता है तब तक वह उस लेन से बाहर नहीं माना जाएगा।
  10. दिशा लेने के पश्चात् एक्टिव चेज़र पुनः क्रॉस लाइन में आक्रमण कर सकता है और इसको फाऊल नहीं माना जाता।
  11. सक्रिय चेज़र वह दिशा ग्रहण करेगा जिस ओर इसका मुंह मुड़ा हो अर्थात् जिस ओर उसने अपने कन्धे की रेखा को मोडा था।
  12. सक्रिय चेज़र नियम 9 तथा 10 के अनुसार किसी एक ओर दिशा ग्रहण करेगा।
  13. सक्रिय चेज़र किसी एक स्तम्भ की ओर दिशा ग्रहण करने के पश्चात् स्तम्भ रेखा की उसी दिशा में जाएगा जब तक वह ‘खो’ नहीं करता। सक्रिय चेज़र केन्द्र गली से दूसरी ओर नहीं जाएगा जब तक कि वह स्तम्भ के चारों ओर बाहर से न घूम ले।
  14. यदि कोई सक्रिय चेज़र स्तम्भ छोड़ देता है तो वह स्तम्भ छोड़ने वाले स्थान की ओर वाली केन्द्रीय लेन पर रहते हुए दूसरे स्तम्भ की दिशा में जाएगा। नोट-जब वह स्तम्भ पर है तो सक्रिय चेज़र गली को पार नहीं करेगा।
  15. सक्रिय चेज़र का मुंह सदैव उसके द्वारा ग्रहण की गई दिशा की ओर रहेगा। वह अपने मुंह को नहीं मोड़ेगा। उसे केन्द्रीय लेन के समानान्तर कंधे की रेखा मोड़ने की आज्ञा होगी।
  16. चेज़र इस प्रकार बैठेंगे कि धावकों (रनरों) के मार्ग में रुकावट न पहुंचे। यदि ऐसी रुकावट से कोई रनर आऊट हो जाता है तो उसे आऊट नहीं माना जाएगा।
  17. दिशा ग्रहण करने वाले और मुंह मोड़ने वाले नियम आयताकार क्षेत्र में लागू नहीं होंगे। (नियम 9 से 11 तथा 14)
  18. पारी (इनिंग) के दौरान सक्रिय चेज़र सीमा (परिधि) से बाहर जा सकता है परन्तु सीमा से बाहर उसे दिशा लेने और मुंह मोड़ने के नियमों का पालन करना होगा।
  19. कोई भी रनर बैठे हुए चेज़र को छू नहीं सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उसे चेतावनी दी जाती है। यदि वह फिर उस हरकत को दोहराता है तो उसे मैदान से बाहर भेज दिया जाता है। अभिप्राय यह कि आऊट दिया जाता है।
  20. यदि रनर के दोनों पैर सीमा से बाहर हों तो वह आऊट हो जाता है।
  21. यदि सक्रिय चेज़र बिना नियम का उल्लंघन किए रनर को छू लेता है तो रनर आऊट माना जाएगा।
  22. सक्रिय चेज़र नियम 4 से 14 तक के किसी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे। इन नियमों का उल्लंघन फाऊल माना जाता है। यदि ऐसे फाऊल के कारण कोई रनर आऊट हो जाता है तो उसे आऊट नहीं माना जाएगा।
  23. यदि कोई सक्रिय चेज़र नियम 8 से 14 तक के किसी नियम का उल्लंघन करते हैं तो अम्पायर तुरन्त ही उचित दिशा लेने और कार्य करने के लिए बाध्य करेगा।

मैच सम्बन्धी नियम
खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 2

  1. प्रत्येक टीम में खिलाडियों की संख्या 9 होगी और 3 खिलाड़ी स्थानापन्न (Substitutes) होते हैं।
  2. (क) प्रत्येक पारी (इनिंग) में नौ-नौ मिनट छूने तथा दौड़ने का काम बारी-बारी होगा। प्रत्येक मैच में 4 पारियां (इनिंग्ज) होंगी। दो पारियां छूने की और 2 पारियां दौड़ने की होती हैं।
    (ख) रनर खेलने के क्रमानुसार स्कोरर (फलांकनकर्ता) के पास अपने नाम दर्ज कराएंगे। पारी के आरम्भ में पहले तीन खिलाड़ी सीमा के अन्दर होंगे। इन तीनों
    के आऊट होने के पश्चात् तीन और खिलाड़ी ‘खो’ देने से पहले अन्दर आ जाएंगे। जो इस अवधि में प्रवेश न कर सकेंगे उन्हें
    आऊट घोषित किया जाएगा। अपनी बारी के बिना प्रविष्ट होने वाला खिलाड़ी भी आऊट घोषित किया जाएगा।
    यह प्रक्रिया पारी के अन्त तक जारी रहेगी। तीसरे रनर (जो तीन के समूह में प्रवेश करते हैं) को निकालने वाला सक्रिय चेज़र नए प्रविष्ट होने वाले रनर का पीछा नहीं करेगा, वह ‘खो’ देगा। प्रत्येक टीम खेल के मैदान के केवल एक पक्ष से ही अपने रनर प्रविष्ट करेगी।
  3. चेज़र तथा प्रत्येक रनर समय से पहले भी अपनी पारी समाप्त कर सकते हैं। केवल चेज़र या रनर टीम के कप्तान के अनुरोध पर ही अम्पायर खेल रोक कर पारी समाप्त की घोषणा करेगा। एक पारी के बाद 5 मिनट तथा दो पारियों के बीच 9 मिनट का अवकाश होगा।
  4. चेज़र पक्ष को प्रत्येक रनर के आऊट होने पर एक अंक मिलेगा। सभी रनरों के समय से पहले आऊट हो जाने पर उनके विरुद्ध एक ‘लोना’ दे दिया जाता है। इसके पश्चात् वह टीम उसी क्रम से अपने रनर भेजेगी। लोना प्राप्त करने के लिए कोई अतिरिक्त अंक नहीं दिया जाता है। पारी का समय समाप्त होने तक इसी ढंग से खेल जारी रहेगी। पारी के दौरान रनरों के क्रम में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  5. नॉक आऊट (Knock out) पद्धति में मैच के अन्त में अधिक अंक प्राप्त करने वाली टीम को विजयी घोषित किया जाएगा। यदि अंक बराबर हों तो एक और इनिंग (प्रत्येक टीम के लिए चेज़र तथा रनर की) खेली जाएगी। यदि फिर भी अंक बराबर रहें . तो टाईब्रेकर रूल (नियम) का प्रयोग किया जाएगा। इस स्थिति में यह जरूरी नहीं कि टीमों में वही खिलाड़ी हों। लीग प्रणाली में विजेता टीम को 2 अंक प्राप्त होंगे। पराजित टीम को शून्य (0) अंक तथा बराबर रहने की दशा में प्रत्येक टीम को एक-एक अंक दिया जाएगा। यदि लीग प्रणाली में लीग अंक बराबर हों तो टीम अथवा टीमें पर्चियों द्वारा पुनः मैच खेलेंगी। ऐसे मैच नॉक-आऊट प्रणाली के आधार पर खेले जाएंगे।
  6. यदि किसी कारणवश मैच पूरा नहीं होता है तो यह किसी अन्य समय खेला जाएगा और पिछले अंक नहीं गिने जाएंगे। मैच शुरू से ही खेला जाएगा।
  7. यदि किसी एक टीम के अंक दूसरी टीम से 12 या उससे अधिक हो जाएं तो पहली टीम दूसरी टीम को चेज़र के रूप में पीछा करने को कह सकती है। यदि दूसरी टीम इस बार अधिक अंक प्राप्त कर ले तो भी उसका चेज़र बनने का अधिकार बना रहता है।

खेल के लिए अधिकारी
मैच की व्यवस्था के लिए निम्नलिखित अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं—
(1) अम्पायर (दो)
(2) रैफरी (एक)
(3) टाइम कीपर (एक)
(4) स्कोरर (एक)

  1. अम्पायर-अम्पायर लॉबी से बाहर खड़ा होगा और केन्द्रीय गली द्वारा विभाजित अपने स्थान से खेल की देख-रेख करेगा। वह अपने अर्द्धक में सभी निर्णय देगा। वह निर्णय देने में दूसरे अर्द्धक के अम्पायर की सहायता कर सकता है।
  2. रैफरी-रैफरी के कर्त्तव्य इस प्रकार हैं
    • वह अम्पायरों की उनके कर्त्तव्य पालन में सहायता करेगा और उसमें मतभेद होने की दशा में अपना फैसला देगा।
    • वह खेल में बाधा पहुंचाने वाले, असभ्य व्यवहार करने वाले, नियमों का उल्लंघन करने वाले खिलाड़ियों को दण्ड देता है।
    • वह नियमों की व्याख्या सम्बन्धी प्रश्नों पर अपना निर्णय देता है।
    • इनिंग्ज़ के अन्त में वह टीमों के अंक और परिणामों की घोषणा करता है।
  3. टाइम-कीपर-टाइम-कीपर का काम समय का रिकार्ड रखना है। वह सीटी बजाकर पारी के आरम्भ या समाप्ति का संकेत देता है।
  4. स्कोरर–स्कोरर इस बात का ध्यान रखता है कि खिलाड़ी निश्चित क्रम से मैदान में उतरते हैं। वह आऊट हुए रनरों का रिकार्ड रखता है। प्रत्येक पारी के अन्त में वह स्कोर शीट पर अंक दर्ज करता है और चेज़रों का स्कोर तैयार करता है। मैच के अन्त में वह परिणाम तैयार करता है और रैफरी को सुनाने के लिए देता है।
    SCORE SHEET
    खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 3
    खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education 4

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

PSEB 10th Class Physical Education Practical खो-खो (Kho-Kho)

प्रश्न 1.
खो-खो में कितने खिलाड़ी होते हैं ?
उत्तर-
खो-खो में 12 खिलाड़ी होते हैं जिनमें से 9 खिलाड़ी खेलते हैं और तीन खिलाड़ी अतिरिक्त (Substitutes) होते हैं।

प्रश्न 2.
खो-खो के मैदान की लम्बाई और चौड़ाई बताओ।
उत्तर-
खो-खो के मैदान की लम्बाई 29 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर होती है।

प्रश्न 3.
खो-खो के खेल में चेज़र और रनर किसे कहते हैं ?
उत्तर-
खो-खो के खेल में चेज़र (Chaser) उसे कहते हैं जो खिलाड़ी बैठते हैं और रनर (Runner) वे होते हैं, जो दौड़ते हैं।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 4.
खो-खो के मैच में कितनी इनिंग्ज होती हैं ?
उत्तर-
खो-खो के मैच में दो इनिंग्ज़ होती हैं।

प्रश्न 5.
खो-खो के खेल का कितना समय होता है ?
उत्तर-
खो-खो के खेल का समय 9-5-9, 10 आराम, 9-5-9 की दो पारी होंगी।

प्रश्न 6.
मैच कैसे शुरू होता है ?
उत्तर-
मैच शुरू करने से पहले टॉस होता है। टॉस जीतने वाली टीम चेज़र या रनर की बारी का फ़ैसला करती है।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 7.
रनर के आऊट होने पर कितने अंक मिलते हैं ?
उत्तर-
रनर के आऊट होने पर एक अंक मिलता है।

प्रश्न 8.
जीत-हार का फैसला कैसे होता है?
उत्तर-
जो टीम अधिक प्वाइट बना ले उसे विजयी कहते हैं।

प्रश्न 9.
खो-खो के खेल में कितने वर्ग होते हैं और उनका आकार कितना होता
उत्तर-
खो-खो के खेल में 8 वर्ग या पट्टियां होती हैं जिनका आकार 30 cm × 30 cm होता है।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 10.
क्या खो-खो की खेल लॉबी होती है ? उसकी चौड़ाई बताओ।
उत्तर-
खो-खो की खेल लॉबी होती है जिसकी चौड़ाई 3 मीटर होती है।

प्रश्न 11.
खो-खो के पोल की लम्बाई और घेरा बताओ।
उत्तर-
खो-खो के पोल की लम्बाई 1.22 मीटर और घेरा 20 सैंटीमीटर होता है।

प्रश्न 12.
खो-खो की पोल से पोल की लम्बाई कितनी होती है ?
उत्तर-
खो-खो के पोल से पोल की लम्बाई 24.40 मीटर होती है।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 13.
खो-खो के खेलाने वाले अधिकारियों की कुल गिनती बताओ।
उत्तर-
दो अम्पायर, एक रैफ़री, एक टाइम कीपर, एक स्कोरर।

प्रश्न 14.
खो-खो के खेल में खिलाड़ी कैसे आऊट माना जाता है ?
उत्तर-
जब चेज़र रनर को हाथ लगा दे या रनर अपने आप मैदान से बाहर चला जाए तो आऊट माना जाता है।

प्रश्न 15.
खो-खो के मुख्य 5 फाऊल बताओ।
उत्तर-
मुख्य फाऊल निम्नलिखित हैं—

  1. खो देने से पहले उठना।
  2. सैंटर लाइन कट करनी।
  3. पोल को हाथ लगाए बिना मुड़ना।
  4. चेज़र का ग़लत भागना।
  5. भागने वाला अपने-आप बाहर चला जाए।

खो-खो (Kho-Kho) Game Rules - PSEB 10th Class Physical Education

प्रश्न 16.
खो-खो की खेल में बराबर होने की हालत क्या होती है?
उत्तर-
यदि खो-खो की खेल में टीमें बराबर रह जाएं तो फिर एक-एक इनिंग्ज़ और लगाई जाती है। यदि फिर भी बराबर रह जाए तो एक और इनिंग्ज़ लगाई जाएगी। यदि फिर भी बराबर रह जाए तो मैच दोबारा खेला जाएगा।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

Punjab State Board PSEB 7th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

SST Guide for Class 7 PSEB लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 1 से 15 शब्दों में लिखें

प्रश्न 1.
सर्वव्यापक मताधिकार से क्या भाव है?
उत्तर-
जब देश के सभी वयस्क नागरिकों को मत देने का अधिकार होता है, तो उसे सर्वव्यापक वयस्क मताधिकार कहा जाता है। मत का अधिकार देते समय लिंग, जाति, धर्म, सम्पत्ति आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।

प्रश्न 2.
चुनाव प्रक्रिया के कोई दो चरणों (स्तरों) का वर्णन करो।
उत्तर-
1. चुनाव की तिथि की घोषणा-हमारे देश के राष्ट्रपति या राज्यों में राज्यपाल लोगों के लिए चुनाव का आदेश जारी करते हैं, जिस के आधार पर चुनाव आयोग चुनाव की तिथि की घोषणा करता है।

2. उम्मीदवारों का चुनाव-विभिन्न राजनीतिक दल अपने उन उम्मीदवारों को नामजद करते हैं जो उनके विचार से किसी विशेष क्षेत्र से जीत सकते हैं। कभी-कभी स्वतन्त्र उम्मीदवार भी खड़े हो जाते हैं और राजनीतिक दल उनकी सहायता करते हैं।

प्रश्न 3.
प्रतिनिधि सरकार कौन-सी सरकार को कहा जाता है?
उत्तर-
लोकतन्त्र में नागरिक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो सरकार बनाते हैं। यही प्रतिनिधि नीतियों का निर्माण करते हैं और कानून बनाते हैं। ऐसी सरकार को ही प्रतिनिधि सरकार कहते हैं।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 4.
लोकतन्त्र में प्रतिनिधित्व का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
लोकतन्त्र जनता का शासन होता है। परन्तु आधुनिक राज्यों की जनसंख्या इतनी अधिक है कि सभी नागरिक शासन में सीधे भाग नहीं ले सकते। अतः वे अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो सरकार का निर्माण करते हैं। यह अप्रत्यक्ष रूप से जनता का अपना ही शासन होता है।

प्रश्न 5.
भारत में मत देने का अधिकार किसको होता है?
उत्तर
भारत में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के प्रत्येक स्त्री-पुरुष को मत देने का अधिकार है। इसे सर्वव्यापक मताधिकार कहते हैं।

प्रश्न 6.
सामान्य तथा मध्यकालीन चुनावों में क्या अन्तर हैं?
उत्तर-
आम चुनाव वे चुनाव हैं जो हर पांच वर्ष के बाद नियमित रूप से होते हैं।
इसके विपरीत यदि विधानपालिका अवधि पूरी होने से पहले भंग कर दी जाये और नये सिरे से चुनाव कराये जाएं, तो उन्हें मध्यकालीन चुनाव कहते हैं।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 7.
दो दलीय तथा बहुदलीय प्रणाली में क्या अन्तर है?
उत्तर-
जब किसी देश में दो मुख्य राजनीतिक दल होते हैं तो उसे दो दलीय प्रणाली कहते हैं। अमेरिका तथा इंग्लैंड में द्विदलीय प्रणाली है।
बहुदलीय प्रणाली में कई राजनीतिक दल होते हैं। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखो

प्रश्न 1.
राजनीतिक दलों का प्रतिनिधि लोकतन्त्र में क्या महत्त्व है?
उत्तर-
राजनीतिक दलों का प्रतिनिधि लोकतन्त्र में बहुत महत्त्व है। अधिकतर लोगों का विचार है कि प्रजातन्त्र राजनीतिक दलों के बिना सम्भव नहीं है। प्रजातन्त्र में प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी सरकार बनाने का प्रयत्न करता है। ये दल लोगों के सामने अपने कार्यक्रम एवं नीतियां रखते हैं। जिस दल की सरकार बनती है वह अपने कार्यक्रम और नीतियों को लागू करता है, परन्तु विरोधी दल उस के कार्यों की आलोचना करता है। इस प्रकार प्रजातन्त्र में विरोधी दल भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 2.
गुप्त मतदान क्या होता है? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर-
गुप्त मतदान प्रजातान्त्रिक चुनाव का महत्त्वपूर्ण आधार है। लोग अपने प्रतिनिधि चुनने के अधिकार में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं चाहते। इसलिए कोई भी यह नहीं चाहता कि किसी दूसरे को यह पता चले कि उस ने किस प्रतिनिधि के पक्ष में मत डाला है। इसलिए ही स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए गुप्त मतदान का प्रबन्ध किया गया है। भारत में प्रत्येक मतदाता का एक वोट होता है। जब कोई मतदाता मतदान केन्द्र पर अपनी वोट डालता है तो उसे यह बताने की आवश्यकता नहीं कि उसने किसे अपना वोट दिया है। इसे ही गुप्त मतदान कहा जाता है।
गुप्त मतदान द्वारा बिना किसी बुरे विचार तथा नकारात्मक सोच के सरकार में परिवर्तन किया जा सकता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 3.
लोकतंत्र में विरोधी दल की भूमिका संक्षेप में लिखो।
उत्तर-
विधानपालिका में जो राजनीतिक दल बहुमत में नहीं होते, वे सरकार नहीं बना पाते। वे विरोधी दल की भूमिका निभाते हैं। लोकतन्त्र में विरोधी दल की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। कहा जाता है कि यदि विरोधी दल नष्ट या कमजोर हो जाये तो प्रजातन्त्र प्रणाली ही समाप्त हो जाती है। इसके विपरीत यदि विरोधी दल को सही और प्रजातान्त्रिक ढंग से काम करने दिया जाये तो प्रजातन्त्र मज़बूत होता है। वास्तव में विरोधी दल शासक दल की कमियों और कमजोरियों को प्रकट करता है। विरोधी दल संसद् में सरकार की केवल आलोचना ही नहीं करता, अपितु लोक-मत के हित में भी काम करता है। इसकी आलोचना के बिना सरकार उत्तरदायित्वहीन तथा तानाशाह भी बन सकती है। विरोधी दल नये चुनाव होने तक सरकार को मनमानी नहीं करने देता और उस पर निरन्तर नियन्त्रण बनाये रखता है। इस प्रकार विरोधी दल सरकार द्वारा नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं होने देता।

प्रश्न 4.
विरोधी दल के कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर-
विरोधी दल लोकतन्त्र की आत्मा होता है। यह एक तरफ शासक दल की तानाशाही को रोकता है तो दूसरी ओर सरकार के कार्यों पर नियन्त्रण रखता है। संक्षेप में विरोधी दल के कार्यों की भूमिका का वर्णन इस प्रकार है –

(i) शासक दल पर नियन्त्रण-चुनाव में विजय प्राप्त करने के पश्चात् बहुमत प्राप्त दल सरकार का गठन करता है। मतदाता पांच वर्ष तक सरकार पर नियन्त्रण नहीं रख सकते। सरकार पर नियन्त्रण रखने का कार्य विरोधी दल ही करते हैं।

(ii) सरकार को तानाशाह बनने से रोकना-कभी-कभी शासक दल अपने बहुमत के कारण तानाशाही कार्य करता हैं। इससे नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। इन अवसरों पर विरोधी दल सरकार की सदन के भीतर और बाहर आलोचना करते हैं और सरकार को तानाशाह नहीं बनने देते।

(iii) कानून बनाने में सहयोग-सरकार कानून बनाने के लिए विधेयक पेश करती है। विरोधी दल विधेयकों से सम्बन्धित मामलों पर वाद-विवाद करते हैं और प्रयास करते हैं कि जो कानून बने वह देश के हित में हो।

(iv) बजट पास करना-प्रत्येक वर्ष शासक दल अपनी नीतियों को लागू करने के लिए विधानमंडल में बजट पेश करता है। यह एक ऐसा अवसर होता है जब विरोधी दल सरकार की सम्पूर्ण नीति की आलोचना कर सकता है। विरोधी दल सरकार को इस बात के लिए मजबूर कर सकते हैं कि वह करों की दर कम करे।

(v) कार्यपालिका पर नियन्त्रण-विरोधी दल अविश्वास प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा और कई प्रकार से सरकार पर अंकुश रखती है। प्रश्नकाल में प्रश्न पूछ कर विरोधी दल के सदस्य मंत्रियों को सतर्क रखते हैं।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 5.
राजनीतिक दलों के कोई दो कार्यों के बारे में लिखो।
उत्तर-
राजनीतिक दल मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य करते हैं

1. चुनाव लड़ना तथा सरकार बनाना-राजनीतिक दल का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य चुनाव लड़ना है। इसका उद्देश्य शासन शक्ति प्राप्त करना होता है। ये दल चुनाव लड़ने के लिए अपने उम्मीदवार चुनते हैं। वे चुनाव जीतने के लिए चुनाव अभियान चलाते हैं। ये दल जनता को राष्ट्रीय मामलों और अपनी सरकार की भूमिका की जानकारी देते हैं। इससे लोकमत का निर्माण होता है। जो दल चुनाव जीत जाता है वह सरकार चलाता है और अपने कार्यों के लिए लोगों के प्रति उत्तरदायी होता है। जो दल सरकार नहीं बना पाते हैं वे विरोधी दल की भूमिका निभाते हैं।

2. जनता के हितों की रक्षा करना-वे सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं और उन्हें सुधारने के सुझाव देते हैं। इसलिए कहा जाता है कि विरोधी दल प्रजातन्त्र में जनता के हितों का रक्षक होता है।

प्रश्न 6.
इंडियन नेशनल कांग्रेस की किन्हीं तीन नीतियों का वर्णन करो।
उत्तर-
इंडियन नेशनल कांग्रेस की मुख्य नीतियां निम्नलिखित हैं –

  1. इस दल की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण नीति अमीरी-गरीबी में अन्तर कम करना है। दूसरे शब्दों में यह दल लोकतान्त्रिक समाजवाद चाहता है।
  2. इस दल के अनुसार धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान किया जाना चाहिए।
  3. यह दल कृषि पर आधारित कारखानों के विकास में विश्वास रखता है। कृषि के विकास के लिए सिंचाई के साधनों में सुधार करना भी इस दल की नीति है।
  4. ग्रामीण स्तर पर रोज़गार के अवसर पैदा करना ताकि गरीबी को कम किया जा सके।
  5. विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना और विदेशों के साथ अपने मतभेद शान्तिपूर्ण ढंग से दूर करना।
  6. भारत की आर्थिक स्थिति के सुधार के लिए विदेशी व्यापार को बढ़ावा देना।

नोट-विद्यार्थी इनमें से कोई तीन लिखें।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 7.
लोकतन्त्र में चुनावों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
चुनाव लोकतन्त्र का आधार हैं। लोकतन्त्र में इनका निम्नलिखित महत्त्व है –
(i) सभी नागरिक राज्य प्रबन्ध को एक साथ चला नहीं सकते। इसलिए उन्हें प्रतिनिधि चुनने पड़ते हैं जो चुनावों द्वारा चुने जाते हैं।
(ii) चुनाव के माध्यम से ही लोग सरकार को बदल सकते हैं।
(iii) चुनाव के माध्यम से ही कार्यपालिका बनती है।
(iv) चुनाव द्वारा शासन-प्रणाली में स्थिरता आती है।
(v) सच तो यह है कि चुनाव के अभाव में प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है।

(ग) खाली स्थान भरो

  1. हमारे भारत में ……….. लोकतंत्रीय प्रणाली है।
  2. भारत में चुनाव प्रक्रिया के लिए एक स्वतंत्र संस्था ………….. बनाई गई है।
  3. भारत वर्ष में ……….. साल के नागरिकों को मत देने का अधिकार होता है।
  4. ……….. तथा ……….. में दो दलीय तथा ………………. में बहुदलीय प्रणाली है।
  5. ………. और ………. भारत के दो राष्ट्रीय दल हैं।
  6. एक नागरिक एक मत नागरिकों की ……….. पर आधारित है।

उत्तर-

  1. प्रतिनिधि
  2. चुनाव आयोग
  3. न्यूनतम 18
  4. इंग्लैंड, अमेरिका, भारत
  5. कांग्रेस दल, भारतीय जनता पार्टी
  6. समानता।

(घ) निम्नलिखित वाक्यों में ठीक (✓) या गलत (✗) का निशान लगाओ

  1. भारत देश में इस समय वयस्क नागरिक की आयु 18 वर्ष है।
  2. भारत देश में दो दलीय प्रणाली है।
  3. विरोधी दल संसद् में सरकार की आलोचना ही नहीं करते बल्कि लोक मत या लोक राय भी बनाते हैं।

संकेत-

  1. (✓)
  2. (✗)
  3. (✓)

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

(ङ) बहु-वैकल्पिक प्रश्नोत्तर-

प्रश्न 1.
भारत में बालिग (वयस्क) होने की आयु कितनी है ?
(क) 18 वर्ष
(ख) 24 वर्ष
(ग) 22 वर्ष।
उत्तर-
(क) 18 वर्ष (वोट देने का अधिकार)

प्रश्न 2.
लोक सभा के सदस्यों का चुनाव कितने वर्षों के लिए किया जाता है ?
(क) चार वर्ष
(ख) 2 वर्ष
(ग) पाँच वर्ष।
उत्तर-
(ग) पाँच वर्ष

प्रश्न 3.
इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी की स्थापना कब हुई ?
(क) 1920
(ख) 1885
(ग) 1960
उत्तर-
(ख) 1885

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

PSEB 7th Class Social Science Guide लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
चुनाव कमीशन अथवा चुनाव आयोग पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
भारत में चुनाव प्रक्रिया के लिए एक कानून स्वतन्त्र संस्था बनाई गई है। इसे चुनाव आयोग अथवा चुनाव कमीशन कहते हैं। यह संस्था स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव करवाती है। इस का प्रधान चुनाव कमिश्नर होता है, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। चुनाव कमीशन देश में हर स्तर पर अर्थात् संसद्, राज्य विधान सभाओं और स्थानीय नगरपालिकाओं एवं निगमों के चुनाव कराने के लिए उत्तरदायी होता है।

प्रश्न 2.
‘एक व्यक्ति-एक वोट’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
‘एक व्यक्ति-एक वोट’ सर्वव्यापक मताधिकार का एक महत्त्वपूर्ण नियम है। यह नागरिकों की समानता पर आधारित है। इसके अनुसार पढ़े-लिखे और अनपढ़ को समान माना जाता है। इस प्रकार समानता का सिद्धान्त हमारे सर्वव्यापक वयस्क मताधिकार में पूर्ण रूप में अपनाया गया है।

प्रश्न 3.
सर्वव्यापक वयस्क मताधिकार के सशक्त आधार क्या हैं ?
उत्तर-
सर्वव्यापक वयस्क मताधिकार के निम्नलिखित सशक्त आधार हैं –

  1. यह अधिकार राजनीतिक समानता पर आधारित है।
  2. यह सच्चे प्रजातन्त्र के लिए आवश्यक है।
  3. यह सरकार को सभी के प्रति उत्तरदायी बनाता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 4.
उप-चुनाव क्या होता है?
उत्तर-
कभी-कभी संसद् या राज्य विधानपालिका के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाने अथवा उसके द्वारा त्याग-पत्र देने से उसकी सीट खाली हो जाती है। इस सीट की पूर्ति के लिए जो चुनाव कराया जाता है, उसे उप-चुनाव कहते हैं।

प्रश्न 5.
मतदान किस प्रकार होता है?
अथव
नागरिक अपना वोट किस प्रकार डालते हैं ?
उत्तर-
चुनाव के समय प्रत्येक क्षेत्र से प्रतिनिधि चुनने के लिए चुनाव बूथ बनाए जाते हैं। यहां रिटर्निंग आफिसर के अधीन मतदान होता है। वयस्क नागरिकों के नाम मतदाता सूची में प्रविष्ट होते हैं। वे बारी-बारी से बूथ पर जा कर अपने वोट पहचान पत्र दिखाते हैं। तब अपनी उंगली पर निशान लगवा कर मतपत्र में अपने मन चाहे उम्मीदवार के नाम पर मोहर लगाते हैं और मतपत्र को वोट बाक्स में डाल देते हैं। यदि उसे कोई भी उम्मीदवार पसंद न हो तो वह ‘नोटा’ के सामने दिए गए निशान पर मोहर लगा सकता है। वोट बाक्स में वोट डालते समय किसी दूसरे को पता नहीं चलता कि वोट किसके पक्ष में डाला गया है। अब यह काम वोटिंग मशीनों द्वारा भी किया जाता है। साधारण बहुमत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 6.
चुनाव-प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित चरणों की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
1. नामांकन पत्र भरना तथा नामांकन वापिस लेना।
2. चुनाव चिन्ह प्रदान करना।
3. चुनाव पत्र (घोषणा-पत्र) जारी करना।
4. चुनाव अभियान।
5. मतों की गणना एवं परिणाम।
उत्तर-
1. नामांकन पत्र भरना तथा नामांकन वापिस लेना-राजनीतिक दलों द्वारा चुने गये सदस्य अपने नामांकन पत्र भरते हैं। इनकी रिटर्निंग आफिसर द्वारा पड़ताल की जाती है और इन्हें स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाता है। स्वीकृत उम्मीदवार एक निश्चित तिथि तक अपना नाम वापिस ले सकते हैं। उसके बाद चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अन्तिम सूची तैयार की जाती है, जिस के आधार पर वोट-पत्र (मत-पत्र) और उम्मीदवारों के चुनाव चिह्न छापे जाते हैं।

2. चुनाव चिह्न प्रदान करना-राष्ट्रीय दलों के निश्चित चुनाव चिह्न होते हैं, जिस के आधार पर वोटर उन चिह्नों पर मोहर लगा कर वोट डालते हैं। इन चुनाव चिह्नों का अस्तित्व अनपढ़ लोगों के लिए अत्यावश्यक है।

3. चुनाव-पत्र जारी करना-प्रत्येक राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए एक चुनाव-पत्र जारी करता है। इसमें उनके कार्यक्रम एवं वचन होते हैं जो मतदाता को प्रभावित करते हैं। इन्हें पढ़कर मतदाताओं को जीत के बाद अपनाई जाने वाली नीतियों के विषय में पता चलता है।

4. चुनाव अभियान-उम्मीदवारों को जिताने के लिए राजनीतिक दल अपना चुनाव अभियान चलाते हैं। वे पोस्टर आदि छपवा कर लोगों में बांटते हैं। इसके अतिरिक्त चुनाव अभियान में जलूस आदि निकालना, जलसा करना, घरघर जा कर मतदाता को प्रभावित करना, मतदाताओं की समस्याओं का समाधान करने के वचन देना और मत देने के लिए कहना आदि बातें शामिल हैं। चुनाव अभियान को मतदान के शुरू होने से 48 घंटे पहले बन्द करना अनिवार्य होता है।

5. मतों की गणना एवं परिणाम- प्रत्येक क्षेत्र में मतदान के बाद मत-पेटियों को एक केन्द्र में एकत्रित करना होता है। निश्चित किये समय पर राजनीतिक दलों के या उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के सामने मतों की गिनती होती है। सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाता है।

प्रश्न 7.
राजनीतिक दल क्या होता है?
उत्तर-
लोगों का ऐसा समूह जिस की देश के राजनीतिक उद्देश्यों के विषय में एक जैसी विचारधारा हो, राजनीतिक दल कहलात है। किसी भी व्यक्ति को किसी राजनीतिक दल विशेष में सदस्य बनने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। किसी दल का सदस्य बनना व्यक्ति की अपनी इच्छा पर निर्भर करता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

प्रश्न 8.
भारत में कौन-कौन से दो प्रकार के राजनीतिक दल हैं ?
अथवा
राष्ट्रीय दल तथा क्षेत्रीय दल में अन्तर बताओ।
उत्तर-
भारत में दल दो प्रकार के हैं-राष्ट्रीय दल तथा क्षेत्रीय दल। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय दल हैं। ये सारे भारत में काम करते हैं। यदि कोई दल चार या पांच राज्यों में विशेष प्रभाव रखता हो, तो उसे चुनाव आयोग राष्ट्रीय स्तर दे देता है। इसके विपरीत जिन दलों का प्रभाव एक या दो राज्यों तक सीमित हो उन्हें क्षेत्रीय दल कहा जाता है; जैसे पंजाब का अकाली दल।

प्रश्न 9.
भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय दल कौन-सा है ? इसकी स्थापना कब हुई थी?
उत्तर-
भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय दल इंडियन नेशनल कांग्रेस है। इसकी स्थापना 1885 ई० में हुई थी।

प्रश्न 10.
संयुक्त सरकार क्या होती है?
उत्तर-
यदि लोकसभा या विधानसभा में किसी एक दल को बहुमत प्राप्त न हो, तो प्रमुख दल दूसरे दलों की सहायता तथा सहयोग से सरकार बना लेता है। कई दलों के प्रतिनिधियों से बनाई गई ऐसी सरकार संयुक्त सरकार कहलाती है। भारत में इस प्रकार की सरकार सबसे पहले 1977 में बनाई गई थी। 1999 से 2004 तक भी 13 दलों की संयुक्त सरकार बनाई गई थी। संयुक्त सरकार में भिन्न-भिन्न दलों के व्यक्तियों को मन्त्री बनने का अवसर मिलता है, जो कि सामान्य स्थिति में संभव नहीं होता।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 19 लोकतन्त्र-प्रतिनिधित्व संस्थाएँ

सही जोड़े बनाइए:

  1. सर्वव्यापक वयस्क मताधिकार – स्वतन्त्र तथा उचित चुनाव
  2. राजनीतिक दल – कम-से-कम 18 वर्ष की आयु
  3. गुप्त मतदान – लोगों की विचारधारा की अभिव्यक्ति
  4. वयस्क नागरिक – समानता का सिद्धान्त

उत्तर-

  1. सर्वव्यापक वयस्क मताधिकार – समानता का सिद्धान्त
  2. राजनीतिक दल – लोगों की विचारधारा की अभिव्यक्ति
  3. गुप्त मतदान – स्वतन्त्र तथा उचित चुनाव
  4. वयस्क नागरिक – कम-से-कम 18 वर्ष की आयु

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

Punjab State Board PSEB 7th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 1 पर्यावरण Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Social Science Geography Chapter 1 पर्यावरण

SST Guide for Class 7 PSEB पर्यावरण Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 1-15 शब्दों में लिखें

प्रश्न 1.
पर्यावरण से क्या भाव है?
उत्तर-
पर्यावरण से भाव हमारे आस-पास अथवा इर्द-गिर्द से है। यह किसी प्रदेश के भौतिक तत्त्वों पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण कितने मण्डलों में बांटा जा सकता है?
उत्तर-
तीन।

प्रश्न 3.
तीन मण्डलों के सुमेल से बने मण्डल को किस नाम से जाना जाता है? इसके सम्बन्ध में लिखो।
उत्तर-
तीनों मण्डलों के सुमेल से बने मण्डल को जीव-मण्डल के नाम से जाना जाता है। यह वायुमण्डल, थलमण्डल तथा जल-मण्डल के आपसी मेल से बनता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 4.
पर्यावरण के मुख्य मण्डल कौन-से हैं?
उत्तर-
पर्यावरण के तीन मुख्य मण्डल हैं –

  1. वायुमण्डल
  2. थल-मण्डल
  3. जल-मण्डल

इनके अतिरिक्त एक अन्य मण्डल भी है। उसे जैव-मण्डल कहते हैं।

प्रश्न 5.
परिवर्तित पर्यावरण से क्या भाव है?
उत्तर-
धरातल पर पर्यावरण सदैव एक जैसा नहीं रहता। इसके तत्त्वों में परिवर्तन आता रहता है जिसके कारण पर्यावरण बदलता रहता है। ये परिवर्तन धीमे भी हो सकते हैं और तेज़ भी। धीमी गति वाले परिवर्तन पृथ्वी की सतह पर अपरदन के कारकों (नदियों, ग्लेशियर, वायु आदि) द्वारा होते हैं, जबकि तेज़ परिवर्तन थल के ऊंचा-नीचा होने से होते हैं।

प्रश्न 6.
मनुष्य पर्यावरण को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर-
मनुष्य पर्यावरण को कई प्रकार से प्रभावित करता है –

  1. खेती करने तथा रहने के लिए भूमि प्राप्त करने के लिए वनों को काट कर।
  2. नदियों पर बांध बना कर तथा उनके पानी को नहरों द्वारा शुष्क मरुस्थलों में ले जाकर।
  3. खनिज प्राप्त करने के लिए खानें खोद कर।
  4. औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करके।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 7.
पृथ्वी की पर्तों के नाम लिखें।
उत्तर-
पृथ्वी की तीन पर्ते हैं –

  1. सियाल
  2. सीमा
  3. नाइफ।

II. खाली स्थान भरो

  1. पर्यावरण को …………. मण्डलों में बांटा गया है।
  2. धरती की स्याल पर्त उन चट्टानों की बनी है जिनमें ………….. तथा ……..तत्त्व ज्यादा हैं।
  3. धरती की नाइफ पर्त में………… तथा…………. तत्त्व ज्यादा मात्रा में होते हैं।।
  4. जीव मण्डल के अनेक प्रकार के जीव-जन्तुओं को ………… कहते हैं।
  5. पृथ्वी की सतह का ………… भाग जल है।

उत्तर-

  1. तीन
  2. सिलीकॉन, एल्युमीनियम
  3. निक्कल, लोहा
  4. जीव जगत्।
  5. 71 प्रतिशत।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

PSEB 7th Class Social Science Guide पर्यावरण Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
भिन्न-भिन्न स्थानों का पर्यावरण भिन्न-भिन्न होता है। एक उदाहरण दें।
उत्तर-
महाद्वीपों पर रहने वाले लोग आम तौर पर कृषि, पशु-पालन और वनों से सम्बन्धित कार्यों में लगे रहते हैं, जबकि समुद्र के किनारे बसे लोग या टापुओं के निवासी प्रायः मछली पकड़ने का कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
आवास (HABITAT) क्या होता है?
उत्तर-
मनुष्य की तरह पौधे और जीव भी अपने-अपने वातावरण पर निर्भर और आश्रित होते हैं। इसे आवास कहते हैं।

प्रश्न 3.
पारिस्थितिकी (Ecology) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
किसी स्थान के जीव मण्डल तथा वहां के भौतिक वातावरण के मेल को पारिस्थितिकी कहते हैं।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 4.
पृथ्वी के विभिन्न मण्डल किस प्रकार अस्तित्व में आये?
उत्तर-
पृथ्वी आरम्भ में गैसीय अवस्था में थी। इसके बाद यह पिघले रूप में आयी। धीरे-धीरे यह ठण्डी हुई और ठोस हो गई। इसके गैसीय तत्त्वों ने वायुमण्डल, जलीय तत्त्वों ने जलमण्डल तथा ठोस तत्त्वों ने थलमण्डल का रूप धारण कर लिया।

प्रश्न 5.
वायुमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर-
पृथ्वी के इर्द-गिर्द सैंकड़ों किलोमीटर की ऊंचाई तक वायु का एक घेरा अथवा गिलाफ़ बना हुआ है। इस घेरे को वायुमण्डल कहते हैं। पृथ्वी से वायुमंडल की ऊंचाई 1600 कि०मी० तक है। परन्तु इसकी 99% वायु केवल 32 कि०मी० की ऊंचाई तक ही मिलती है। इससे अधिक ऊंचाई पर वायु विरल है।

प्रश्न 6.
वायुमण्डल के मुख्य भौतिक अंश कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
वायुमण्डल के मुख्य भौतिक अंश तापमान, नमी, वायुदाब आदि हैं।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 7.
पृथ्वी के पर्यावरण के किस अंश (मण्डल) में सबसे अधिक परिवर्तन होता है?
उत्तर-
वायुमण्डल में।

प्रश्न 8.
पृथ्वी पर जल और थल की बांट बताएं।
उत्तर-
पृथ्वी का धरातल जल और थल से बना है। इसका 71% भाग जल है और शेष 29% भाग थल है। थल का 2/3 भाग उत्तरी गोलार्द्ध में है।

प्रश्न 9.
थल मण्डल किसे कहते हैं? इसकी दो विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
धरातल के बाहरी ठोस भाग को थल मण्डल कहते हैं। विशेषताएँ-1. थल मण्डल की मोटाई 80 से 100 कि० मी० तक है। 2. यह मोटाई भूमि पर अधिक तथा समुद्री भागों में कम है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 10.
धरती की ऊपरी ठोस परत से लेकर आन्तरिक भागों में पृथ्वी को कितने भागों में बांटा जाता है? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
धरती की ऊपरी ठोस परत से लेकर आन्तरिक भागों तक पृथ्वी को तीन भागों में बांटा जाता है-भूतल, मध्य भाग तथा केंद्रीय भाग।

  1. भूतल-यह पृथ्वी का सबसे ऊपरी भाग है। इसे सियाल कहते हैं। इसके मुख्य तत्त्व सिलिकॉन (Si) तथा एल्युमीनियम (AI) हैं। इसी कारण इसका नाम सियाल (Si + Al) पड़ा है।
  2. मैंटल अथवा मध्य भाग-यह पृथ्वी के बीच का भाग है। इसे सीमा भी कहते हैं। इसके मुख्य तत्त्व सिलिकॉन (Si) तथा मैग्नीशियम (Mg) हैं।
  3. केन्द्रीय भाग-यह पृथ्वी का सबसे अन्दर का भाग है। इसे नाइफ (Nife) कहते हैं क्योंकि इसमें निक्कल (Ni) तथा लोहे (Fe) की अधिकता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण 1

प्रश्न 11.
पृथ्वी को जल-ग्रह क्यों कहते हैं?
उत्तर-
पृथ्वी के तल का अधिकतर (71%) भाग जल से घिरा है। इसी कारण पृथ्वी को जल-ग्रह कहते हैं।

प्रश्न 12.
जल-मण्डल से क्या अभिप्राय है? ।
उत्तर-
पृथ्वी के जल से ढके भाग को जलमण्डल कहते हैं। यह जल छोटे-बड़े समुद्रों, खाड़ियों, नदियों, झीलों आदि के रूप में मिलता है।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 13.
महासागरों (समुद्रों) का क्या महत्त्व है?
अथवा
मनुष्य को महासागरों की ओर विशेष ध्यान क्यों देना चाहिए?
उत्तर-
महासागरों का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्त्व है –

  1. महासागरों (समुद्रों) का सबसे अधिक प्रभाव पृथ्वी की जलवायु पर पड़ता है। ये जल का स्रोत हैं, जो गर्म होने के बाद बादलों का रूप धारण कर लेता है। बादल हवा के साथ-साथ वर्षा करते हैं।
  2. समुद्रों से चलने वाली हवाएं जलवायु को सम बना देती हैं।
  3. समुद्री धाराएं और ज्वार-भाटा साथ लगते क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ये समुद्री यातायात एवं व्यापार में बहुत अधिक सहायक हैं। इसलिए मनुष्य को समुद्रों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिये।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(क) सही कथनों पर (✓) तथा ग़लत कथनों पर (✗) का चिन्ह लगाएं :

  1. धरती की सतह पर पर्यावरण सदा परिवर्तित होता रहता है।
  2. धरती पर जल की अपेक्षा स्थल अधिक है।
  3. जीवमण्डल पर्यावरण का अंश नहीं है।
  4. पर्यावरण के अंशों में से स्थलमण्डल सबसे अधिक परिवर्तित होता है।

उत्तर-

  1. (✓),
  2. (✗),
  3. (✓),
  4. (✗)

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

(ख) सही जोड़े बनाएं :

  1. नमी तथा दबाव – अपरदन के कारक
  2. ग्लेशियर तथा दरिया – पृथ्वी का सबसे अन्दर का भाग
  3. नाइफ़ – पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह
  4. सयाल – वायुमण्डल के अंश

उत्तर-

  1. नमी तथा दबाव – वायुमण्डल के अंश
  2. ग्लेशियर तथा दरिया – अपरदन के कारक
  3. नाइफ़ – पृथ्वी का सबसे अन्दर का भाग
  4. सयाल – पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत।

(ग) सही उत्तर चुनिए

प्रश्न 1.
क्या आप बता सकते हैं कि पृथ्वी की सतह किन तत्त्वों के मेल से बनी है?
PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण 2
(i) जल और वायु
(ii) जल और धरती
(iii) धरती और वायु।
उत्तर-
(ii) जल और धरती।

PSEB 7th Class Social Science Solutions Chapter 1 पर्यावरण

प्रश्न 2.
पर्यावरण परिवर्तनशील है। आपके विचार में पर्यावरण के किस अंश में सबसे अधिक परिवर्तन होता है?
(i) वायुमण्डल
(ii) जलमण्डल
(iii) थलमण्डल
उत्तर-
(iii) थलमण्डल।

प्रश्न 3.
पृथ्वी पर एक ऐसा मण्डल है जहां प्राकृतिक तत्त्वों का प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देता है। वह मण्डल क्या कहलाता है?
(i) वायुमण्डल
(ii) जलमण्डल
(iii) जैवमण्डल।
उत्तर-
(iii) जैवमण्डल।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

Punjab State Board PSEB 11th Class History Book Solutions Chapter 5 गुप्त काल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 History Chapter 5 गुप्त काल

अध्याय का विस्तृत अध्ययन

(विषय सामग्री की पूर्ण जानकारी के लिए)

प्रश्न 1.
मौर्य साम्राज्य के पतन तथा गुप्त साम्राज्य के उत्थान के बीच भारत में महत्त्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
अशोक की मृत्यु के शीघ्र बाद ही मौर्य साम्राज्य का पतन और विघटन आरम्भ हो गया। चौथी शताब्दी ई० के आरम्भ में गुप्त साम्राज्य उभरने लगा था। अत: हम देखते हैं कि इन दोनों साम्राज्यों के बीच लगभग 500 वर्षों का अन्तर है। इन 500 वर्षों में इस देश में अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। ये परिवर्तन जहां एक ओर सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन से सम्बन्धित थे, वहां इनका सम्बन्ध राजनीतिक क्षेत्र में भी था। राजनीतिक परिवर्तनों ने गुप्त साम्राज्य के लिए पृष्ठभूमि तैयार की। इन परिवर्तनों का वर्णन इस प्रकार है-

1. मगध में मौर्य वंश के उत्तराधिकारी-अशोक की 232 ई० पू० में मृत्यु हुई। उसके उत्तराधिकारियों की दुर्बलता के कारण उप राजा अपने-अपने क्षेत्र में स्वायत्त बन गए। परिणामस्वरूप साम्राज्य का तेजी से विघटन होने लगा। मौर्य वंश का राज्य अशोक की मृत्यु के पश्चात् आधी शताब्दी तक स्थिर रहा होगा। 180 ई० पू० में अशोक के अन्तिम उत्तराधिकारी की हत्या हो गई।

अशोक के उत्तराधिकारी की हत्या करने वाले का नाम पुष्यमित्र था और वह ब्राह्मण था। कहा जाता है कि उसने बौद्धों पर अत्याचार किये और ब्राह्मणों को संरक्षण प्रदान किया। पुष्पमित्र ने शुंग नाम के एक नये राज्य वंश की नींव रखी। उसके उत्तराधिकारियों ने लगभग सौ वर्ष तक पाटलिपुत्र की गद्दी से मगध पर शासन किया। उस समय मगध राज्य केवल गंगा के मैदान के मध्य भाग तक ही सीमित था। उसके उपरान्त मगध में कण्व नाम के राज्य वंश की स्थापना हुई। 28 ई० पू० में कण्वों का भी अन्त हो गया। इसके बाद मगध राज्य का महत्त्व क्षीण हो गया। परन्तु देश के अन्य भागों में कई महत्त्वपूर्ण राज्य स्थापित हो चुके थे।

2. यूनानी राज्य-अशोक की मृत्यु के थोड़े समय पश्चात् एक मौर्य राजकुमार ने गान्धार प्रदेश में स्वयं को स्वतन्त्र घोषित कर दिया। लगभग उसी समय निकटवर्ती बैक्ट्रिया और पार्थिया सैल्यूकस के उत्तराधिकारियों से स्वतन्त्र हो गए। यहां के यूनानी शासक डिमिट्रियस ने गान्धार प्रदेश और बाद में उसके दक्षिण अफगानिस्तान और मकरान प्रदेश को भी विजय कर लिया। इन प्रदेशों को यूनानी क्रमशः ‘अराकोशिया’ और ‘जेड्रोशिया’ कहते थे। इस प्रकार हम देखते हैं कि अशोक की मृत्यु के 50 वर्षों के भीतर ही उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम प्रदेश में यूनानियों का आधिपत्य स्थापित हो गया।

इस देश का सबसे अधिक विख्यात यूनानी राज्य मिनाण्डर था। उसे बौद्ध साहित्य में मिलिन्द कहा गया है। मिलिन्द ने 155 ई० पू० से 130 ई० पू० तक अर्थात् 25 वर्ष शासन किया। उसकी राजधानी तक्षशिला थी। उसने शंग राजाओं को गंगा के मैदान से खदेड़ने का असफल प्रयास किया था। तक्षशिला के एक और यूनानी राजा हैल्यिोडोरस ने अपने एक राजदूत को आधुनिक मध्य प्रदेश में स्थित बेसनगर (विदिशा) के शासक के पास भेजा था। इस बात की जानकारी हमें बेसनगर से प्राप्त हैल्योडोरस के स्तम्भ से मिलती है। इस सम्बन्ध में अति महत्त्वपूर्ण बात यह है कि हैल्योडोरस वासुदेव अर्थात् विष्णु का उपासक था।

3. शक राज्य-पहली शताब्दी ई० पू० के आरम्भ में शक लोगों ने यूनानियों को अफगानिस्तान एवं पंजाब से खदेड़ दिया। शक मध्य एशिया के भ्रमणशील कबीलों में से थे। उन्हें वहां से यू-ची लोगों ने निकाल दिया था और अब शकों ने यूनानियों पर दबाव डाला और उन्हें पहले बैक्ट्रिया से तथा बाद में भारत के उत्तर-पश्चिम से निकाल दिया। भारत में पहला शक राजा भोज था। शकों के आरम्भिक राजाओं में सबसे विख्यात गोंडोफार्नीज था जिसका काल पहली शताब्दी के पूवार्द्ध में था।

इसी सदी के उत्तरार्द्ध में शकों को यू-ची लोगों ने फिर खदेड़ दिया। अब शक लोगों ने भारत के उत्तर-पश्चिम में गुजरात तथा मालवा की ओर अपना राज्य स्थापित किया। उनका सबसे प्रसिद्ध राजा रुद्रदमन था। उसका शासन गुजरात, मालवा और पश्चिमी राजस्थान पर था। रुद्रदमन के उत्तराधिकारी उसके समान शक्तिशाली न थे। फिर भी गुजरात में उनका राज्य लगभग 200 वर्ष तक स्थिर रहा। शक राज्य का अन्त गुप्त वंश के राजाओं द्वारा पांचवीं सदी ई० के आरम्भ में हुआ।

4. कुषाण राज्य-जिन राजाओं ने शकों को अफगानिस्तान और पंजाब में खदेड़ा था वे यू-ची की कुषाण शाखा के दो राजा थे-कजुल और विम कडफीसिज़। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में कुषाण राजवंश की स्थापना की। इस राजवंश का सबसे प्रसिद्ध राजा कनिष्क था। उसकी राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) थी। कनिष्क का राज्य पेशावर, बनारस और सांची तक फैला हुआ था। इसमें मथुरा भी शामिल था। मथुरा को कुषाण राज्य की दूसरी राजधानी समझा जाता था। कहा जाता है कि कनिष्क मध्य एशिया में लड़ता हुआ मारा गया। वह बौद्ध धर्म का महान् संरक्षक था। कनिष्क की मृत्यु के पश्चात् उसके उत्तराधिकारियों ने लगभग सौ वर्षों तक शासन किया। तीसरी शताब्दी ई. के मध्य में ईरान के सासानी राजाओं ने पेशावर और तक्षशिला को जीत कर कुषाणों को अपने अधीन कर लिया।

5. राजा खारवेल-अशोक की मृत्यु के कुछ ही समय पश्चात् मौर्य साम्राज्य का पूर्वी प्रान्त मौर्यों के हाथ से निकल गया। यहां के कलिंग प्रदेश में सत्ता खारवेल के हाथ में आ गई। हाथी-गुफा अभिलेख से पता चलता है कि वह जैन धर्म का संरक्षक था। उसने कई युद्ध किए। उसने भारत के उत्तर-पश्चिम में यूनानियों पर आक्रमण किया और दक्षिण में पाण्डेय राज्य को पराजित किया। उसका यह भी दावा है कि उसने उत्तर तथा दक्षिण में अनेक राजाओं को हराया। खारवेल को प्राचीन उड़ीसा का सबसे महान् राजा माना जाता है।

6. सातवाहन राज्य-अशोक के देहान्त के थोड़े ही समय बाद विन्ध्य पर्वत के दक्षिण के इलाके मौर्य साम्राज्य से छिन गये। पश्चिमी दक्कन में एक नये राज्य का उत्थान हुआ जिसके शासक सातवाहन के नाम से प्रसिद्ध हुए। सातवाहन राज्य के संस्थापकों को अशोक ने अपने शिलालेख में आन्ध्र कहा है। सम्भवतः वह मौर्य सम्राटों के अधीन अधिकारी रहे थे। सातवाहन राजा शातकर्णि इतना शक्तिशाली था कि खारवेल भी उसे हरा न सका। शातकर्णि के राज्य में गोदावरी नदी की सम्पूर्ण घाटी शामिल थी।

7. दक्षिण के राज्य-सातवाहन सत्ता का पतन तीसरी सदी ई० पू० तक आरम्भ हो चुका था। उनके उतार-चढ़ाव के बाद कदम्ब वंश दक्षिणी-पश्चिमी दक्कन में शक्तिशाली बन गया। इधर पल्लवों ने सातवाहनों के दक्षिणी-पूर्वी प्रदेशों पर अधिकार कर लिया। पल्लव राजाओं की राजधानी कांचीपुरम थी। यह बौद्ध, जैन, आजीविका तथा ब्राह्मणिक विद्या के केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध हुई। पल्लव वंश का शासन छठी सदी ई० तक रहा।

इस समय वाकाटक वंश भी बड़ा शक्तिशाली हुआ। यह राज्य आधुनिक बरार और मध्य प्रदेश में तीसरी सदी ई० से छठी सदी तक रहा। कृष्णा नदी के निचले भाग में तीन मुख्य राज्य थे, जिनके अधीन कई छोटी-छोटी रियासतें भी थीं। इन तीन बड़े राज्यों पर चोल, चेर और पाण्डेय वंशी राजाओं का शासन था। कृष्णा नदी के पूर्वी तट पर चोल, पश्चिमी तट पर चेर तथा प्रायद्वीप के छोर पर पाण्डेय राजा राज्य करते थे। प्रायः ये राज्य आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। किन्तु इनमें से किसी एक के पास अन्यों का राज्य हथियाने की शक्ति न थी। इनमें चेर कभी चोलों से मिल जाते थे तो कभी पाण्डेयों से।
सच तो यह है कि इस अवधि में देश अनेक छोटे-छोटे राज्यों से विभाजित था। गुप्त राजाओं ने फिर से इस देश में राजनीतिक एकता स्थापित की।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 2.
गुप्त साम्राज्य के प्रशासन के सन्दर्भ में इसके उत्थान तथा विस्तार की चर्चा करें।
उत्तर-
मौर्य साम्राज्य पतन के पश्चात् भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग सभी भागों में अनेक राजनीतिक परिवर्तन आए। इन सभी परिवर्तनों के मध्य चक्रवर्ती शासक के आदर्श की महत्ता बराबर बनी रही। यहां कई राजाओं ने भारत के उत्तर तथा दक्षिण में अश्वमेघ यज्ञ किये और चक्रवर्तिन होने का दावा किया। इनमें गुप्त वंश का स्थान सर्वोच्च है। इस वंश ने देश के सभी छोटे-बड़े राज्यों का अन्त कर दिया और यहां राजनीतिक एकता स्थापित की। समाज में गुप्त साम्राज्य के उत्थान, विस्तार तथा पतन की कहानी का वर्णन इस प्रकार है-

1. चन्द्रगुप्त प्रथम-लगभग 319 ई० पू० में गुप्त वंश के शासक चन्द्रगुप्त ने ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि धारण की। वह गुप्त वंश का तीसरा शासक था। इस राजवंश के संस्थापक आरम्भ में सम्भवतः धनी ज़मींदार थे। परन्तु चन्द्रगुप्त ने अपनी वीरता के कारण अपना स्तर उन्नत किया। उसकी 335 ई० में मृत्यु हो गई। तब चन्द्रगुप्त का राज्य बिहार के कुछ भागों में और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित था। यह लगभग वही प्रदेश था जिस पर 600 वर्ष पहले कभी अजातशत्रु शासन किया करता था।

2. चन्द्रगुप्त-मगध के गुप्त राज्य को साम्राज्य में परिणित करने वाला गुप्त शासक समुद्रगुप्त था। उसने 335 ई० से 375 ई० तक शासन किया। इलाहाबाद प्रशस्ति के अनुसार उसने उत्तर में चार राज्यों को जीता। पूर्व और दक्षिण के कई राजा उसकी प्रभुता मानते थे। राजस्थान के नौ गणराज्यों को उसे नज़राना देना पड़ा। भारत के मध्य भाग और दक्कन के कबायली राजाओं और आसाम तथा नेपाल के शासकों ने भी चन्द्रगुप्त को नज़राना दिया। समुद्रगुप्त अपने दक्षिणी अभियान से पूर्वी तट पर स्थित पल्लव राज्य की राजधानी कांचीपुरम तक गया। यह आधुनिक मद्रास (चेन्नई) के निकट है। समुद्रगुप्त ने एक शक राजा और लंका के राजा से भी नज़राना लिया। सच तो यह है कि उसने गुप्त साम्राज्य का खूब विस्तार किया। उसका गंगा के लगभग सारे मैदान पर सीधा अधिकार था तथा राजस्थान के कबीले उसको नज़राना देते थे। इस प्रकार समुद्रगुप्त को गुप्त साम्राज्य का संस्थापक समझा जा सकता है। वह कला का संरक्षक भी माना जाता है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल 1

3. चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य-समुद्रगुप्त के बाद उसका पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय गद्दी पर बैठा। उसने भी चालीस वर्ष (375415 ई०) तक राज्य किया। उसका सबसे बड़ा युद्ध शकों के विरुद्ध था। यह 388 ई० से 410 ई० तक चलता रहा। बीस वर्षों के लम्बे युद्ध के अन्त में शकों की पराजय हुई। पूरा पश्चिमी भारत अब गुप्त साम्राज्य में मिल गया। चन्द्रगुप्त ने वाकाटक राजा रुद्रसेन द्वितीय से अपनी पुत्री का विवाह कर वाकाटक राज्यवंश से राजनीतिक सन्धि की। जब रुद्रसेन की 390 ई० में मृत्यु हुई तो राज्य की देखभाल रानी के हाथ में आ गई। वह लगभग 410 ई० तक राज्य करती रही। इन वर्षों में वाकाटक राज्य एक तरह से गुप्त साम्राज्य का ही अंग बना रहा। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने ‘विक्रमादित्य’ अर्थात् ‘वीरता का सूर्य’ की उपाधि धारण की। अपने बल एवं वीरता के दृश्यों को उसने अपने सिक्कों पर भी अंकित किया।

प्रश्न 3.
गुप्तकाल के सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक जीवन पर लेख लिखें।
उत्तर-
गुप्तकालीन समाज एक निखरा हुआ रूप लिए हुआ था। भारतीय जीवन का प्रत्येक पक्ष उन्नति की चरम सीमा पर था। व्यापार काफ़ी उन्नत था। उद्योग विकसित थे। लोग समृद्ध तथा धन-धान्य से परिपूर्ण थे। अधिक धन ने वेशभूषा, खान-पान तथा अन्य सामाजिक पहलुओं को प्रभावित किया। हिन्दू धर्म का समुद्र फिर ठाठे मारने लगा। ऐसा लगता था मानो बौद्ध धर्म इसी समुद्र में डूब रहा हो। इतना होने पर भी बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म अपना स्वतन्त्र अस्तित्व बनाए हुए थे। वास्तव में यह धार्मिक सहनशीलता का युग था। यदि गुप्त समाज को एक आदर्श समाज कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गुप्तकाल के समाज की पूरी झांकी इस प्रकार है-

I. सामाजिक जीवन –

गुप्तकाल के शिलालेख तथा मुद्रायें इस काल की सामाजिक व्यवस्था पर काफ़ी प्रभाव डालते हैं। गुप्तकाल की सामाजिक अवस्था का वर्णन इस प्रकार है

i) वस्त्र और भोजन-गुप्तकालीन सिक्कों पर बने चित्रों को देख कर कहा जा सकता है कि लोग गर्मियों में धोती और उत्तरीय (चादर) तथा सर्दियों में पायजामा और कोट पहनते थे। स्त्रियां चोली और साड़ी का प्रयोग करती थीं। विशेष अवसरों पर लोग रेशमी वस्त्र पहना करते थे। बालियां, चूड़ियां, हार, अंगूठियां तथा कड़े आदि आभूषणों का बड़े चाव से प्रयोग होता था। लोगों का जीवन सादा था। मांस का अधिक प्रयोग नहीं होता था।

ii) स्त्रियों का स्थान-इस काल में स्त्रियां शिक्षा प्राप्त कर सकती थीं तथा गायन विद्या सीख सकती थीं। लड़कियों का विवाह छोटी आयु में ही कर दिया जाता था। विधवा विवाह की प्रथा भी प्रचलित थी। परन्तु सती प्रथा का प्रचलन अधिक नहीं था। बहुत कम स्त्रियां सती हुआ करती थीं।

iii) जाति-प्रथा-इस काल में जाति-प्रथा के बन्धन कठोर नहीं थे। किसी भी जाति का व्यक्ति अपनी इच्छानुसार कोई भी व्यवसाय अपना सकता था। शूद्रों से बड़ा अच्छा व्यवहार किया जाता था।

iv) आमोद-प्रमोद-इस काल में लोग शतरंज तथा चौपड़ खेलते थे। वे रथ-दौड़ों में भी भाग लिया करते थे। शिकार खेलना, नाटक, संगीत तथा तमाशे आदि आमोद-प्रमोद के अन्य साधन थे।

II. आर्थिक जीवन–

गुप्त शासकों ने प्रजा के प्रति बड़ी उदार नीति अपनाई। देश में चारों ओर शान्ति थी। शान्त वातावरण पाकर देश में कृषि, उद्योग, व्यापार आदि में असाधारण उन्नति हुई। परिणामस्वरूप देश धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया। संक्षेप में, गुप्त काल में लोगों की आर्थिक दशा का वर्णन इस प्रकार है-

1. कृषि-गुप्त काल में अधिकतर लोग कृषि का व्यवसाय अपनाये हुए थे। वे चावल, गेहूं, जौ, मटर, तेल निकालने के बीजों, विभिन्न सब्जियों, जड़ी-बूटियों आदि की कृषि करते थे। इन सभी उपजों का वर्णन हमें ‘अमरकोष’ तथा ‘वृहत् संहिता’ से उपलब्ध होता है। भूमि समस्त परिवार की सांझी सम्पत्ति मानी जाती थी। ग्राम-पंचायत की आज्ञा के बिना भूमि बेची नहीं जा सकती थी। सिंचाई के लिए कृषक वर्षा पर निर्भर रहते थे। वैसे सरकार की ओर से नहरों और झीलों आदि का समुचित प्रबन्ध किया गया था। स्कन्दगुप्त के गवर्नर पर्णदत्त के पुत्र ने सुदर्शन झील की मुरम्मत करवाई थी। गुप्त सम्राटों ने कृषि के विकास में बड़ा उत्साह दिखाया था।

2. उद्योग-धन्धे-गुप्तकालीन उद्योग-धन्धे भी काफ़ी विकसित थे। यूनसांग के अनुसार, “सातवीं शताब्दी में लोग रेशम, मलमल, लिनन और ऊन का प्रयोग करते थे। बाण ने भी लिनन से बुने हुए रेशम आदि का उल्लेख किया है। राज्यश्री के विवाह में क्षौम, दुकूल तथा ललातंतु के बने हुए वस्त्रों का प्रदर्शन किया गया था। कपड़ा उद्योग बंगाल, बनारस तथा मथुरा में केन्द्रित था। .. हाथी दांत का काम भी जोरों पर था। हाथी दांत की अनेक चीजें बनती थीं। हाथी दांत का फर्नीचर तथा मुद्राओं में भी प्रयोग किया जाता था। सोना, चांदी, सीसा, तांबा तथा कांसा आदि से सम्बन्धित व्यवसाय भी प्रचलित थे। लोहे की ढलाई की जाती थी। महरौली का स्तम्भ इस उद्योग की शान का सबसे सुन्दर नमूना है। महात्मा बुद्ध की तांबे की मूर्ति भागलपुर के पास सुल्तानगंज में मिली है। यह भारतीय कारीगरी का प्राचीन गौरव है।

3. व्यापार-गुप्त काल में व्यापार की दशा उन्नत थी। व्यापार सड़कों तथा नदियों द्वारा होता था। देश के मुख्य नगर अर्थात् भड़ौच, उज्जयिनी, पैठन, प्रयाग, विदिशा, बनारस, गया, पाटलिपुत्र, वैशाली, ताम्रलिप्ति, कौशाम्बी, मथुरा, अहिच्छत्र और पेशावर आदि सड़कों द्वारा एक-दूसरे से मिले हुए थे। गाड़ियां, पशु तथा नावें यातायात के मुख्य साधन थे। भारतीय लोगों ने ऐसे जहाज़ भी बनाए हुए थे जिसमें 500 आदमी एक-साथ यात्रा कर सकते थे। देश में अनेक बन्दरगाहें थीं जिनके द्वारा पूर्वी द्वीपसमूह तथा पश्चिमी देशों से व्यापार होता था। गुजरात और पश्चिमी तट की प्रसिद्ध बन्दरगाहें कल्याण, चोल, भड़ौच और कैम्बे थीं। भारत से विदेशों को मणियां, मोती, सुगन्धित पदार्थ, कपड़ा, गर्म मसाले, नील, नारियल, औषधियां और हाथदांत की वस्तुएं भेजी जाती थीं। विदेशों से सोना, चांदी, तांबा, टीन, जस्ता, कपूर, रेशम, मूंगा, खजूर और घोड़े आदि आयात किए जाते थे।

4. श्रेणियां-गुप्त काल की आर्थिक व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता श्रेणी अथवा ‘गिल्ड प्रणाली’ थी। प्रत्येक . . व्यवसाय के लोग अपने व्यवसाय के प्रबन्ध के लिए एक संस्था बना लेते थे। व्यापारियों और साहूकारों की श्रेणियों के अतिरिक्त जुलाहों, तेलियों और संगतराशों ने भी अपनी-अपनी श्रेणियां बना ली थीं। प्रत्येक श्रेणी की एक कार्यकारिणी होती थी। वही उसका कार्य चलाती थी। वैशाली से 274 मोहरें प्राप्त हुई हैं। इन्हें प्रत्येक श्रेणी अपने पत्रों को बन्द करने में प्रयोग करती थी। श्रेणियों के अपने अलग नियम थे। इन नियमों को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त थी। श्रेणी के सभी झगड़े श्रेणी का मुखिया निपटाया करता था। इन श्रेणियों के कारण व्यापार तथा उद्योग खूब फले-फूले।

III. धार्मिक जीवन-

गुप्त काल में हिन्दू धर्म पुनः लोकप्रिय हुआ। डॉ० कीथ (Dr. Keith) ने इस विषय में इस प्रकार लिखा है-“The Gupta empire signified revival of Brahmanism and Hinduism.” गुप्त शासक स्वयं भी हिन्दू धर्म के अनुयायी थे। उनके शासन काल में ‘विष्णु’ तथा ‘सूर्य’ की उपासना की जाने लगी। इनकी मूर्तियां बनाकर मन्दिरों में रखी जाती थीं। देश में फिर से यज्ञ आदि भी होने लगे। यद्यपि गुप्त सम्राट् हिन्दू धर्म के अनुयायी थे तो भी वे हठधर्मी नहीं कहे जा सकते। इस काल में बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म भी लोकप्रिय थे। गुप्त राजा इन धर्मों को भी आर्थिक सहायता देते थे। अफगानिस्तान, कश्मीर और पंजाब में बौद्ध धर्म अत्यन्त लोकप्रिय था। जैन धर्म की दो सभाएं इसी काल में हुईं।

सच तो यह है कि गुप्तकाल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बड़ी उन्नति हुई। गुप्तकाल का समाज एक आदर्श समाज था। व्यापार तथा अन्य उद्योग-धन्धे विकसित थे। फलस्वरूप लोगों का जीवन-स्तर ऊंचा था। धर्म के क्षेत्र में भी कुछ नवीन विचारधाराओं का उदय हुआ। गुप्त कालीन समाज निःसन्देह प्रत्येक क्षेत्र में समृद्ध था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 4.
गुप्त काल में कला, साहित्य, विज्ञान तथा तकनॉलोजी की उन्नति की चर्चा करें।
उत्तर-
गुप्तकाल का भारत के प्रचीन इतिहास में विशेष स्थान है। विद्वानों ने इसे ‘स्वर्ण काल’ का नाम दिया है। इस काल में अनेक मन्दिर तथा गुफाओं का निर्माण हुआ। उन दिनों कालिदास जैसे महान् साहित्यकार पैदा हुए। विज्ञान तथा तकनॉलोजी के क्षेत्र में भी भारत ने खूब उन्नति की। इन सब सफलताओं का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-

I. कला के क्षेत्र में विकास–

1. भवन निर्माण कला तथा मूर्तिकला-गुप्त सम्राटों को भवन निर्माण कला से विशेष लगाव था। उन्होंने अपने राज्य में अनेक आकर्षक मन्दिर बनवाए। भूमरा का शिव मन्दिर, देवगढ़ का मन्दिर तथा भितरी गांव का मन्दिर देखने योग्य हैं। मन्दिरों के अतिरिक्त गुप्त काल की गुफाएं भी उस समय की श्रेष्ठ भवन निर्माण कला की प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश में भीलसा के निकट उदयगिरी का गुफा-मन्दिर भी कला का उच्च नमूना प्रस्तुत करता है। गुप्तकालीन मठों में सांची और गया में स्थित मठ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

गुप्त काल में भवन निर्माण कला के साथ-साथ मूर्ति कला ने खूब उन्नति की। गुप्तकाल में सबसे अधिक मूर्तियां महात्मा बुद्ध तथा बौधिसत्वों की बनीं। इनमें से कुछ मूर्तियां मथुरा तथा सारनाथ से प्राप्त हुई हैं। बुद्ध की ये मूर्तियां गुप्त कालीन शिल्पकला के सौन्दर्य का प्रतीक हैं। मथुरा से प्राप्त खड़े बुद्ध की मूर्ति गुप्तकाल की शिल्प-कला का सजीव उदाहरण है। इसमें बुद्ध के धुंघराले बाल, बारीक वस्त्र तथा आकर्षक आभूषण बड़ी बारीकी से तराशे गए हैं। बुद्ध की मूर्तियों के अतिरिक्त इस काल में विष्णु, शिव, सूर्य आदि देवताओं की भी अनेक सुन्दर मूर्तियां बनाई गई हैं। देवगढ़, ग्वालियर आदि स्थानों से प्राप्त मूर्तियों से हमें गुप्त काल की अनोखी शिल्प-काल के दर्शन होते हैं।

2. चित्रकला-गुप्तकाल में चित्रकला भी उन्नति की चरम सीमा को छूने लगी। गुप्तकाल की चित्र-कला के दर्शन हमें मध्य भारत में अजन्ता की गुफाओं तथा ग्वालियर में बाघ की गुफाओं में होते हैं। अजन्ता की गुफाओं पर अनेक प्रकार के चित्र चित्रित हैं। तत्कालीन चित्रकारों ने अपने चित्रों में महात्मा बुद्ध की जीवनी को बड़ी निपुणता से चित्रित किया है। इसके अतिरिक्त अन्य देवी-देवताओं के चित्र, पशु-पक्षियों के चित्र, राजकुमारियों के रहन-सहन के चित्र तथा वृक्षों के चित्रों को बड़ी बारीकी से चित्रित किया गया है। सभी चित्रों में बड़े ही गूढ भावों को उभारा गया है। बाघ की गुफाओं के चित्र भी कला की दृष्टि से कुछ कम महत्त्वपूर्ण नहीं हैं। इनके चित्र प्रायः अजन्ता के चित्रों से मिलते-जुलते हैं।

3. संगीत-कला-विद्वानों का मत है कि गुप्त काल में संगीत-कला में भी असाधारण विकास हुआ। गुप्त सम्राटों के संगीत-प्रेम का परिचय हमें इलाहाबाद स्तम्भ लेख तथा गुप्त काल की मुद्राओं से मिलता है। इलाहाबाद स्तम्भ लेख हमें समुद्रगुप्त के महान् संगीतज्ञ होने की जानकारी देता है। इसके अतिरिक्त उनकी कुछ मुद्राएं भी प्राप्त हुई हैं। इन मुद्राओं में उसे वीणा पकड़े हुए दिखाया गया है। स्पष्ट है कि उसे संगीत-कला से अगाध प्रेम था। संगीत-कला प्रेमी सम्राट ने संगीत के विकास में अवश्य ही विशेष रूचि दिखाई होगी। इसी प्रकार स्कन्दगुप्त भी बड़ा संगीत प्रेमी था। उसके संरक्षण में संगीत उन्नति की पराकाष्ठा को छने लगा।

4. धातु-कला तथा मुद्रा-कला-गुप्त काल में धातु-कला काफ़ी विकसित थी। उस समय के उपलब्ध धातु-कला के नमूने कारीगरों की निपुणता के द्योतक हैं। नालन्दा से प्राप्त बुद्ध की तांबे की मूर्ति अत्यन्त आकर्षक है। फुट 7 1/2 ऊंची यह मूर्ति धातु-कला की दृष्टि से अपना उदाहरण आप ही है। इस प्रकार दिल्ली के निकट महरौली में स्थित गुप्त काल का लौहस्तम्भ भी इस कला का उत्कृष्ट नमूना है। इस स्तम्भ की प्रमुख विशेषता यह है कि सदियां बीतने पर भी यह स्तम्भ ज्यों का त्यों खड़ा है। इस पर आंधी, धूप, वर्षा, तूफान आदि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक शक्ति का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। गुप्त काल ने मुद्रा-कला में भी अद्भुत सफलता प्राप्त की। लगभग सभी गुप्त सम्राटों के सिक्के प्राप्त हुए हैं। सोने, चांदी तथा तांबे के बने ये सिक्के गुप्त काल की विकसित मुद्रा-कला के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। यद्यपि गुप्त काल के आरम्भिक सिक्कों पर विदेशी प्रभाव झलकता है, फिर भी चन्द्रगुप्त द्वितीय तथा कुमारगुप्त के सिक्के स्पष्ट रूप से भारतीयता के प्रतीक हैं।

II. साहित्य में उन्नति-

गुप्त काल में अनेक साहित्यकारों ने अपनी साहित्यिक कृतियों में गुप्तकाल की शान में वृद्धि की। कालिदास इस युग का अद्वितीय रत्न था। वह संस्कृत का महान् कवि तथा नाटककार था। उसने इतने उत्कृष्ट नाटक लिखे कि प्रशंसा में उसे भारतीय शेक्सपियर के नाम से याद किया जाता है। उसकी प्रमुख रचनाएं ये हैं-‘रघुवंश’, ‘मालविकाग्निमित्रम’, ‘ऋतु संहार’, ‘कुमारसम्भव’, ‘विक्रमोर्वशी’ आदि। ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ नाटक उसकी अमर कृति है। गुप्त काल की दूसरी महान् विभूति ‘विशाखदत्त’ था। उसकी अमर कृतियों में ‘मुद्राराक्षस’ तथा ‘देवीचन्द्रगुप्तम’ के नाम लिये जा सकते हैं। शूद्रक चौथी शताब्दी का सुप्रसिद्ध नाटककार था। उसने मृच्छकटिक नामक नाटक की रचना की। विष्णु शर्मा ने इस काल में भारत को पंचतन्त्र नामक एक अमूल्य अमर कृति दी। इस युग में पुराणों को नवीन रूप दिया गया। स्मृतियां भी इसी युग की देन हैं। कहते हैं, इस युग में ‘रामायण’ तथा ‘महाभारत’ के संशोधित संस्करण तैयार किए गए। ईश्वर कृष्ण, वात्स्यायन तथा प्रशस्तपाद इस युग के महान् दार्शनिक थे। ईश्वर कृष्ण ने ‘सांख्यकारिका’ की रचना की। वात्स्यायन ने न्यायसूत्र पर ‘न्याय भाष्य’ की रचना की। इसी प्रकार प्रशस्तपाद ने ‘पदार्थ धर्म’ संग्रह लिखा। इनके अतिरिक्त ‘असंग’, ‘वसुबन्धु’, ‘धर्मपाल’, ‘चन्द्रकर्ति’ आदि अन्य कई दार्शनिक हुए। इस काल में समुद्रगुप्त के दरबारी हरिषेण ने इलाहाबाद प्रशस्ति लिखी जो समुद्रगुप्त की सफलताओं पर महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालती है।

III. विज्ञान के क्षेत्र में उन्नति-

गुप्त काल में गणित, ज्योतिष तथा चिकित्सा विज्ञान में काफ़ी प्रगति हुई-
1. आर्यभट्ट गुप्त युग का महान् गणितज्ञ तथा ज्योतिषी था। उसने ‘आर्यभट्टीय’ नामक ग्रन्थ की रचना की। यह अंकगणित, रेखागणित तथा बीजगणित के विषयों पर प्रकाश डालता है। उसने गणित को स्वतन्त्र विषय के रूप में स्वीकार करवाया। संसार को ‘बिन्दु’ का सिद्धान्त भी उसी ने दिया। आर्यभट्ट पहला व्यक्ति था जिसने यह घोषणा की कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। उसने सूर्यग्रहण तथा चन्द्रग्रहण के वास्तविक कारणों पर भी प्रकाश डाला।

2. गुप्त युग का दूसरा महान् ज्योतिषी अथवा नक्षत्र-वैज्ञानिक वराहमिहिर था। उसने ‘पंच सिद्धान्तिका’, ‘बृहत् संहिता’ तथा ‘योग-यात्रा’ आदि ग्रन्थों की रचना की।

3. ब्रह्मगुप्त एक महान् ज्योतिषी तथा गणितज्ञ था। उसने न्यूटन से भी बहुत पहले गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त को स्पष्ट किया।

4. वाग्यभट्ट इस युग का महान् चिकित्सक था। उसका ‘अष्टांग संग्रह’ नामक ग्रन्थ चिकित्सा जगत् के लिए अमूल्य निधि है। इसमें चरक तथा सुश्रुत नामक महान् चिकित्सकों की संहिताओं का सार दिया गया है।

5. इस काल में पाल-काव्य ने ‘हस्त्यायुर्वेद’ की रचना की। इस ग्रन्थ का सम्बन्ध पशु चिकित्सा से है। लोगों को उस समय रसायनशास्त्र तथा धातु विज्ञान का भी ज्ञान था।

IV. तकनॉलाजी (तकनीकी) –

गुप्त काल में धातु-कला की तकनीकी में बड़ा विकास हुआ। उस समय के उपलब्ध धातुकला के नमने कारीगरों की निपुणता के द्योतक हैं। नालन्दा से प्राप्त बुद्ध की तांबे की मूर्ति अत्यन्त आकर्षक है। इसी प्रकार दिल्ली के निकट महरौली में स्थित गुप्त काल का लौह-स्तम्भ भी कला का उत्कृष्ट नमूना है। इस स्तम्भ की प्रमुख विशेषता यह है कि सदियां बीतने पर भी यह स्तम्भ ज्यों का त्यों खड़ा है। इस पर आंधी, धूप, वर्षा, तूफान आदि किसी प्राकृतिक शक्ति का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। गुप्तकाल ने मुद्रा-कला में भी अद्भुत सफलता प्राप्त की। लगभग सभी गुप्त सम्राटों के सिक्के प्राप्त हुए हैं। सोने, चांदी तथा तांबे के बने ये सिक्के गुप्त काल की विकसित मुद्रा-कला के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। भारतीय इतिहास में मुद्रा-कला में वास्तविक निखार का प्रमाण हमें गुप्तकालीन सिक्कों से ही मिलता है। गुप्तकालीन सिक्कों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पूर्णतया भारतीय रंग में रचित है। इनकी हर बात में भारतीयता झलकती है। भारतीय भाषा, भारतीय चित्र तथा भारतीय सम्वत् इन सिक्कों की मुख्य विशेषताएं हैं। यद्यपि गुप्त काल के आरम्भिक सिक्कों पर विदेशी प्रभाव झलकता है फिर भी चन्द्रगुप्त द्वितीय तथा कुमारगुप्त के सिक्के स्पष्ट रूप से भारतीयता के प्रतीक हैं।

सच तो यह है कि गुप्त काल में भवन-निर्माण कला, चित्रकला, शिल्पकला, संगीत-कला, धातु-कला, मुद्रा-कला आदि सभी कलाओं में आश्चर्यजनक विकास हुआ। सुन्दर भवनों से देश अलंकृत हुआ, मूर्तियों में चेतना का संचार हुआ और भारतीय संगीत से समस्त वातावरण गूंज उठा। साहित्य का रूप निखरा । कालिदास की रचनाओं, पुराणों तथा स्मृतियों ने धार्मिक साहित्य की शोभा बढ़ाई। आर्यभट्ट, वराहमिहिर तथा ब्रह्मगुप्त ने नक्षत्र सम्बन्धी इतने महान् ग्रन्थों की रचना की कि वे आज भी वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। इस सबका श्रेय गुप्त सम्राटों को प्राप्त है।

महत्त्वपूर्ण परीक्षा-शैली प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. उत्तर एक शब्द से एक वाक्य तक

प्रश्न 1.
गुप्त वंश का संस्थापक कौन था ?
उत्तर-
गुप्त वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 2.
भारत आने वाले पहले चीनी यात्री का नाम क्या था ?
उत्तर-
भारत आने वाले पहले चीनी यात्री का नाम फाह्यान था।

प्रश्न 3.
इलाहाबाद का स्तम्भ लेख किस गुप्त शासक के बारे में है ?
उत्तर-
समुद्रगुप्त।

प्रश्न 4.
कौन से गुप्त शासक को ‘भारतीय नैपोलियन’ कह कर पुकारा जाता है ?
उत्तर-
समुद्रगुप्त।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 5.
गुप्त वंश के किस राजा द्वारा अश्वमेध यज्ञ रचाया गया था ?
उत्तर-
गुप्त वंश के राजा समुद्रगुप्त द्वारा अश्वमेध यज्ञ रचाया गया था।

प्रश्न 6.
समुद्रगुप्त के उत्तराधिकारी का क्या नाम था ?
उत्तर-
समुद्रगुप्त के उत्तराधिकारी का नाम रामगुप्त था।

प्रश्न 7.
गुप्तकाल के दो सुन्दर मन्दिरों के नाम लिखो।
उत्तर-
भूमरा तथा देवगढ़ के मंदिर।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 8.
गुप्तकालीन चित्रकारी के श्रेष्ठ नमूनों के कोई दो स्थान बताइये।
उत्तर-
गुप्तकाल की चित्रकारी के श्रेष्ठ नमूने अजन्ता तथा एलोरा की गुफाओं में मिलते हैं।

प्रश्न 9.
गुप्तकाल का प्रसिद्ध चिकित्सक कौन था ?
उत्तर-
गुप्तकाल का प्रसिद्ध चिकित्सक चरक था।

प्रश्न 10.
गुप्तकालीन धातुकला का उत्कृष्ट नमूना कौन-सा था ?
उत्तर-
गुप्तकालीन धातुकला का उत्कृष्ट नमूना महरौली का लौह-स्तम्भ है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 11.
किस काल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है ?
उत्तर-
गुप्तकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति-

(i) शकुंतला नामक नाटक का लेखक ………….. था।
(ii) गुप्त शासक ………………. धर्म के अनुयायी थे।
(iii) गुप्त वंश का सबसे पराक्रमी राजा …………. था।
(iv) चीनी यात्री फाह्यान ……….. के दरबार में 6 वर्ष तक रहा।
(v) गुप्तकाल का सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालय …………….. था।
उत्तर-
(i) कालिदास
(ii) हिंदू
(iii) समुद्रगुप्त
(iv) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
(v) नालंदा।

3. सही/ग़लत कथन-

(i) तोरमाण तथा मिहिरकुल प्रसिद्ध हूण शासक थे। –(√)
(ii) श्वेताम्बर तथा दिग़म्बर बौद्ध धर्म के सम्प्रदाय थे। –(×)
(iii) चंद्रगुप्त द्वितीय के समय गुजरात तथा काठियावाड़ में शक वंश का शासन था। –(√)
(iv) गुप्तकाल की राजभाषा संस्कृत थी। –(√)
(v) कुमारगुप्त, स्कंदगुप्त का उत्तराधिकारी था। –(×)

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

4. बहु-विकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न (i)
‘मेघदूत’ का लेखक कौन था ?
(A) विशाखादत्त
(B) कालिदास
(C) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
(D) हरिषेण ।
उत्तर-
(B) कालिदास

प्रश्न (ii)
गुप्तकाल का एक प्रसिद्ध नाटककार था
(A) भास
(B) भारवि
(C) बाणभट्ट
(D) वराहमिहिर ।
उत्तर-
(A) भास

प्रश्न (iii)
आर्यभट्ट था-
(A) प्रसिद्ध नाटककार
(B) विख्यात सेनापति
(C) ज्योतिष तथा गणित का विद्वान्
(D) धर्म-प्रवर्तक।
उत्तर-
(C) ज्योतिष तथा गणित का विद्वान्

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न (iv)
दक्षिण के राजाओं को हराने वाला गुप्त शासक था-
(A) चन्द्रगुप्त द्वितीय
(B) समुद्रगुप्त
(C) चन्द्रगुप्त प्रथम
(D) स्कंदगुप्त ।
उत्तर-
(B) समुद्रगुप्त

प्रश्न (v)
‘शाकारि’ की उपाधि धारण करने वाला गुप्त शासक था-
(A) चन्द्रगुप्त द्वितीय
(B) समुद्रगुप्त
(C) रामगुप्त
(D) कुमार गुप्त।
उत्तर-
(A) चन्द्रगुप्त द्वितीय

II. अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कौन-सी दो विदेशी भाषाओं में मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद के काल के बारे में बताने वाले स्रोत मिलते
उत्तर-
मौर्य साम्राज्य के पतन के काल की जानकारी के स्रोत यूनानी तथा चीनी भाषाओं में मिले हैं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 2.
शंग तथा कण्व वंशों के संस्थापकों के नाम बताओ।
उत्तर-
शुंग वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग तथा कण्व वंश का संस्थापक वसुदेव था।

प्रश्न 3.
उत्तर-पश्चिम भारत में सबसे प्रसिद्ध यूनानी राजा तथा उसकी राजधानी का नाम बताएं।
उत्तर-
उत्तर-पश्चिम में सबसे प्रसिद्ध यूनानी राजा मिनाण्डर था। उसकी राजधानी स्यालकोट थी।

प्रश्न 4.
पहले पहलव (पार्थियन) शासक तथा उसकी राजधानी का नाम बताएं।
उत्तर-
पहला पहलव शासक गोंडोफर्नीज़ था। उसकी राजधानी तक्षशिला थी।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 5.
शकों का राज्य कौन-से चार प्रदेशों पर था ?
उत्तर-
शकों का राज्य गुजरात, मालवा, मथुरा तथा पश्चिमी राजस्थान में था।

प्रश्न 6.
सबसे प्रसिद्ध शक शासक तथा उससे सम्बन्धित अभिलेख का नाम बताएं।
उत्तर-
सबसे प्रसिद्ध शक शासक का तथा इससे सम्बन्धित अभिलेख का नाम है-जूनागढ़ अभिलेख।

प्रश्न 7.
कुषाण कबीले के पहले दो शासकों के नाम बताओ।
उत्तर-
कुषाण कबीले के पहले दो शासक थे-कजुल केडफीसिज़ और विम केडफीसिज़।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 8.
कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक तथा उसकी राजधानी का नाम बताएं।
उत्तर-
कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कनिष्क था जिसकी राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) थी।

प्रश्न 9.
कुषाण काल में बौद्ध धर्म की कौन-सी सभा हुई तथा यह कहां बुलाई गई थी ?
उत्तर-
कुषाण काल में बौद्ध धर्म की चौथी सभा हुई। यह महासभा कश्मीर में बुलाई गई थी।

प्रश्न 10.
कुषाण काल में कौन-सी कला-शैली का विकास हुआ तथा यह किस धर्म से सम्बन्धित थी ?
उत्तर-
कुषाण काल में गान्धार कला-शैली का विकास हुआ। यह कला-शैली बौद्ध धर्म से सम्बंधित थी।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 11.
कुषाण कला के कौन-से शासक के साथ शक सम्वत् जोड़ा जाता है और यह आज किस देश का सरकारी सम्वत् है ?
उत्तर-
शक सम्वत् कुषाण शासक कनिष्क के साथ जोड़ा जाता है। यह आज भारत का सरकारी सम्वत् है।

प्रश्न 12.
कौन-से शासक को उसके सिक्के पर धनुष, पगड़ी, कोट तथा जूतों के साथ दिखाया गया है और उसका राज्य कहां से कहां तक फैला हुआ था ?
उत्तर-
कनिष्क को उसके सिक्के पर धनुष, पगड़ी, कोट और जूतों के साथ दिखाया गया है। उसका राज्य मध्य एशिया में खुरासान से लेकर भारत में बनारस और सांची तक फैला हुआ था जिसमें पंजाब भी शामिल था।

प्रश्न 13.
कार्ली का चैत्य तथा अमरावती का स्तूप कौन-से राजवंश के समय में बनाए गए तथा इसका सबसे महत्त्वपूर्ण शासक कौन था और उसका राज्य किस प्रदेश में फैला हुआ था ?
उत्तर-
कार्ली का चैत्य तथा अमरावती का स्तूप सातवाहन राजवंश के समय में बनाए गए। इस वंश का सबसे महत्त्वपूर्ण शासक, गौतमीपुत्र शातकर्णि था जिसका राज्य पश्चिमी दक्कन में फैला हुआ था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 14.
प्राचीन दक्कन के किस राजवंश का काल रोम के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध है और उसके समय में किन दो धर्मों को संरक्षण दिया गया ?
उत्तर-
प्राचीन दक्कन के सातवाहन राजवंश का काल रोम के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। इस राजवंश के समय में वैष्णव धर्म तथा बौद्ध धर्म को प्रोत्साहन दिया गया।

प्रश्न 15.
तीसरी सदी ई० में दक्षिण में उभरने वाले चार नए राज्यों के नाम बताएं।
उत्तर-
तीसरी सदी ई० में दक्षिण में उभरने वाले चार राज्य थे-कदम्ब, पल्लव, वाकाटक, चेर।

प्रश्न 16.
तीसरी सदी में कृष्णा नदी के दक्षिण में तीन मुख्य राज्य कौन से थे ?
उत्तर-
तीसरी सदी में कृष्णा नदी के दक्षिण में तीन मुख्य राज्य थे-चोल, चेर और पाण्डेय।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 17.
गुप्त वंश के तीसरे शासक का नाम तथा उसने किस वंश की राजकुमारी के साथ विवाह किया था ?
उत्तर-
गुप्त वंश का तीसरा शासक चन्द्रगुप्त प्रथम था। उसने लिच्छवी वंश की राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया था।

प्रश्न 18.
समुद्रगुप्त की विजयों के बारे में बताने वाला अभिलेख किस शासक द्वारा बनाए गए स्तम्भ पर मिलता है और यह कहां है ?
उत्तर-
समुद्रगुप्त की विजयों के बारे में वर्णन अशोक द्वारा बनाए गए स्तम्भ पर मिलता है। यह स्तम्भ इलाहाबाद में है।

प्रश्न 19.
चीनी यात्री फाह्यान कौन-से शासक के समय में भारत आया था और उसका राज्यकाल क्या था ?
उत्तर-
फाह्यान गुप्त शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय में भारत आया था। उसका राज्य काल 375 ई० से 415 ई० तक था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 20.
कौन-सा गुप्त शासक अपने सिक्के पर वीणा बजाता हुआ दर्शाया गया है तथा उसका राज्यकाल क्या था ?
उत्तर-
गुप्त शासक समुद्रगुप्त को अपने सिक्के पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है। उसका राज्यकाल 335 ई० से 375 ई० तक था।

प्रश्न 21.
कौन-सा गुप्त शासक अपने सिक्के पर धनुषधारी के रूप में दर्शाया गया है और उसकी सबसे बड़ी विजय कौन-सी थी ?
उत्तर-
गुप्त शासक चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य को अपने सिक्के पर धनुषधारी के रूप में दर्शाया गया है। उसकी सबसे बड़ी विजय गुजरात तथा पश्चिमी मालवा के शासकों के विरुद्ध थी।

प्रश्न 22.
कौन-सी जाति के विदेशी आक्रमणकारियों ने गुप्त साम्राज्य के पतन में योगदान दिया और यह किन दो बातों में गुप्त सैनिकों से आगे थे ?
उत्तर-
गुप्त साम्राज्य के पतन में हूण जाति ने योगदान दिया। हूण घुड़सवारी और तीर-अंदाज़ी में गुप्त सैनिकों से आगे थे।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 23.
गुप्त साम्राज्य के सीधे प्रशासन के अधीन कौन-से क्षेत्र थे ?
उत्तर-
गुप्त साम्राज्य के सीधे प्रशासन के अधीन उत्तरी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र सम्मिलित थे।

प्रश्न 24.
गुप्त साम्राज्य के प्रान्तों के प्रशासकों के कौन-से दो नाम थे ?
उत्तर-
गुप्त साम्राज्य में प्रान्तों के प्रशासकों को कुमारामात्य अथवा उपारिक महाराज कहा जाता था।

प्रश्न 25.
गुप्त काल में भारत का व्यापार कौन से चार देशों से था ?
उत्तर-
गुप्त काल में भारत का व्यापार बर्मा, चीन, रोम तथा श्रीलंका से होता था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 26.
गुप्त काल में बनाये जाने वाले कपड़े की चार किस्में बतायें।
उत्तर-
गुप्त काल में बनाये जाने वाले कपड़े की चार किस्में थीं-रेशमी, सूती, मलमल तथा लिलन।

प्रश्न 27.
मनु की लिखी हुई पुस्तक का क्या नाम है और इसमें समाज के किस वर्ग की श्रेष्ठता पर बल दिया गया है।
उत्तर-
मनु द्वारा लिखी पुस्तक का नाम मानवधर्मशास्त्र है। इसमें ब्राह्मण वर्ग की श्रेष्ठता पर बल दिया गया हैं।

प्रश्न 28.
मनु के अतिरिक्त कानून के क्षेत्र में ग्रन्थ लिखने वाले चार प्रसिद्ध विद्वानों के नाम लिखो।
उत्तर-
मनु के अतिरिक्त कानून के क्षेत्र में ग्रन्थ लिखने वाले चार प्रसिद्ध विद्वान् थे-याज्ञवल्क्य, नारद, बृहस्पति तथा कात्यायन।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 29.
चिकित्सा के क्षेत्र में दो प्रसिद्ध गुप्तकालीन विद्वानों के नाम बताओ।
उत्तर-
चिकित्सा के क्षेत्र में दो प्रसिद्ध गुप्तकालीन विद्वान् थे-चरक और सुश्रुत।

प्रश्न 30.
गुप्त काल में बने लौह स्तम्भ की ऊँचाई क्या है, यह कहां है ?
उत्तर-
लौह स्तम्भ 23 फुट से भी ऊंचा है। यह दिल्ली में स्थित है।

प्रश्न 31.
‘हिन्द’ से क्या भाव है ?
उत्तर-
‘हिन्द’ से भाव है-अंक।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 32.
वराहमिहिर की लिखी पुस्तक का नाम बताओ। यह किस क्षेत्र में लिखी गई ?
उत्तर-
वराहमिहिर की पुस्तक का नाम ‘पंच सिद्धान्तिका’ है। यह खगोल विज्ञान के क्षेत्र में लिखी गई।

प्रश्न 33.
बुद्ध की कौन-सी मूर्ति से सुन्दरता, ओज तथा दया की पूर्ण एकसारता प्रकट होती है तथा यह वर्तमान भारत के कौन-से नगर के निकट पाई गई है ?
उत्तर-
बुद्ध की सारनाथ में मिली मूर्ति में सुन्दरता, ओज तथा दया की पूर्ण एकसारता प्रकट होती है। यह वर्तमान पटना के निकट पाई गई है।

प्रश्न 34.
अवलोकितेश्वर बोधिसत्व का चित्र कहां मिला है तथा यह बौद्ध धर्म के किस सम्प्रदाय से सम्बन्धित
उत्तर-
अवलोकितेश्वर बोधिसत्व का चित्र अजन्ता की एक गुफा में मिला है। यह बौद्ध के महायान सम्प्रदाय से सम्बन्धित है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 35.
उदयगिरी में विष्णु के कौन-से अवतार की मूर्ति मिली है और यह वर्तमान भारत में किस राज्य में है ?
उत्तर-
उदयगिरी में विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति मिली है। यह स्थान वर्तमान भारत के मध्य-प्रदेश राज्य में है।

प्रश्न 36.
संस्कृत व्याकरण में प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध दो विद्वानों के नाम बताओ।
उत्तर-
संस्कृत व्याकरण में प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध दो विद्वानों के नाम हैं-पाणिनी और पातंजलि।

प्रश्न 37.
गुप्त काल में संस्कृत कौन-से वर्ग की भाषा थी और नाटकों में कौन-से दो प्रकार के पात्र प्राकृत का प्रयोग करते थे ?
उत्तर-
गुप्त काल में संस्कृत कुलीन वर्ग की भाषा थी। नाटकों में स्त्रियां तथा समाज के निम्न वर्गों के पात्र प्राकृत का प्रयोग करते थे।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 38.
पुराणों का संकलन किस काल में हुआ तथा किस काल में लिखे गये ?
उत्तर-
पुराणों का संकलन गुप्त काल में हुआ। ये भविष्य काल में लिखे गए हैं।

प्रश्न 39.
महाभारत तथा रामायण का संकल्प किस काल में हुआ तथा इनसे सम्बन्धित दो अवतार कौन थे ?
उत्तर-
महाभारत तथा रामायण का संकलन गुप्त काल में हुआ। इनसे सम्बन्धित दो अवतार क्रमशः कृष्ण तथा राम थे।

प्रश्न 40.
शद्रक के नाटक का तथा संस्कृत के गद्य साहित्य के बेहतरीन नमूने का नाम बताओ।
उत्तर-
शूद्रक का नाटक ‘मृच्छकटिकम्’ था। संस्कृत के गद्य साहित्य का बेहतरीन नमूना पंचतन्त्र को माना जाता है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 41.
कालिदास से पहले के संस्कृत के दो प्रसिद्ध नाटककारों के नाम लिखो।
उत्तर-
कालिदास से पहले के संस्कृत के दो प्रसिद्ध नाटककारों के नाम थे : अश्वघोष तथा भास।

प्रश्न 42.
कालिदास की दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम लिखो।
उत्तर-
‘मेघदूत’ तथा ‘शाकुन्तलम्’ कालिदास की दो प्रसिद्ध रचनाएं हैं।

प्रश्न 43.
गुप्त काल में अधिकांश बौद्ध साहित्य किस भाषा में लिखा गया तथा बौद्ध धर्म से सम्बन्धित मूर्तियां किन दो स्थानों पर मिली हैं ?
उत्तर-
गुप्त काल में अधिकांश बौद्ध साहित्य पाली भाषा में लिखा गया। बौद्ध धर्म से सम्बन्धित मूर्तियां सारनाथ और मथुरा में मिली हैं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 44.
गुप्त काल में दक्षिण की कौन-सी भाषा में साहित्य लिखा गया तथा इस साहित्य को क्या कहा जाता
उत्तर-
गुप्तकाल में दक्षिण की तमिल भाषा में साहित्य लिखा गया और इसे संगम (शंगम) साहित्य कहा गया।

प्रश्न 45.
गुप्त वंश के शासकों में से किस शासक को भारतीय नेपोलियन कहा गया है ?
उत्तर-
समुद्रगुप्त को।

III. छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कुषाण शासकों का भारत के इतिहास में क्या महत्त्व था ?
उत्तर-
बहुत समय पहले मध्य एशिया में यू-ची नामक जाति बसी हुई थी। कुषाण इसी यू-ची जाति की एक शाखा थी। इस वंश के लोगों ने भारत में एक शक्तिशाली साम्राज्य स्थापित किया। कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कनिष्क था। वह सम्भवतः 120 ई० में सिंहासन पर बैठा। कनिष्क ने कश्मीर, पंजाब, मथुरा तथा मगध पर विजय प्राप्त की। उसने चीन पर आक्रमण करके खोतान तथा यारकन्द को अपने साम्राज्य का अंग बना लिया। इस प्रकार इसका राज्य उत्तर में बुखारा से लेकर दक्षिण में यमुना नदी तक फैल गया। पूर्व में यह बनारस से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान तक फैल गया। कुषाण शासकों ने भारत में रह कर पूरी तरह अपना भारतीयकरण कर लिया था। कनिष्क द्वारा बौद्ध धर्म को अपनाना इस बात का बहुत बड़ा प्रमाण है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 2.
सातवाहन राजाओं का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
सातवाहन राजा दक्षिण-पश्चिम में राज्य करते थे। सम्भवत: आरम्भिक सातवाहन मौर्य साम्राज्य के अधीन कार्य करते थे। अशोक की मृत्यु के बाद इन्होंने अपनी स्वतन्त्र सत्ता स्थापित कर ली। इस वंश के राजा शातकर्णि ने अपनी शक्ति का काफ़ी विस्तार किया। उसने मगध के शुंग वंश से मालवा का प्रदेश छीन लिया। ईसा की पहली शताब्दी में पश्चिम-दक्षिण पर शकों ने अधिकार कर लिया। इसलिए सातवाहन शासकों ने पूर्व के प्रदेशों को जीत कर इस हानि को पूरा किया। यह प्रदेश उनके नाम पर ही बाद में आन्ध्र प्रदेश के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दूसरी शताब्दी ई० पूर्व में सातवाहन वंश से एक अन्य पराक्रमी शासक हुआ जिसका नाम गौतमीपुत्र शातकर्णि था। उसने पश्चिमी दक्षिण में शकों को बाहर निकाल दिया। ईसा की दूसरी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सातवाहन राज्य में क़ाठियावाड़ से लेकर आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी तक फैल गया। सातवाहनों ने कुल मिला कर लगभग 450 वर्षों तक शासन किया। इसके बाद उनका पतन हो गया।

प्रश्न 3.
गुप्त साम्राज्य के सैनिक प्रशासन की मौर्य सैनिक प्रबन्ध के साथ तुलना करें।
उत्तर-
गुप्त साम्राज्य का सैनिक प्रशासन मौर्य काल के सैनिक प्रबन्ध की भान्ति ही सुव्यवस्थित था। दोनों ही कालों में प्रधान सेनापति की सहायता घुड़सवार सेना तथा हाथी सेना के मुख्य अधिकारी करते थे। इसके अतिरिक्त दोनों ही युगों में सेना को नकद वेतन दिया जाता था। परन्तु दोनों के सैनिक प्रबन्ध में कुछ भिन्नताएं भी थीं। मौर्य शासकों के पास विशाल सेना थी। परन्तु जागीरदारी प्रथा के कारण गुप्त शासकों को युद्ध के समय अपने अधीनस्थ राजाओं की सेना पर निर्भर रहना पड़ता था। सैनिक अधिकारियों के नाम भी दोनों कालों में भिन्न-भिन्न थे। इसके अतिरिक्त मौर्य काल की भान्ति गुप्त काल में सैनिक व्यवस्था के लिए विशेष समितियां नहीं थीं।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 4.
गुप्त काल में स्त्रियों की दशा कैसी थी ?
उत्तर-
गुप्त काल में स्त्रियों की दशा अच्छी थी। परन्तु मौर्य काल की तुलना में स्त्री के मान और स्वतन्त्रता में कमी आ गई थी। इस काल में बाल-विवाह तथा सती प्रथा के प्रचलन से स्त्री के व्यक्तिगत विकास में बाधा पड़ी। प्रायः स्त्री से यही आशा की जाती थी कि वह घर की चारदीवारी में रह कर घरेलू जीवन ही व्यतीत करे। परिवार में उनकी स्थिति पुरुषों के अधीन थी। रामायण तथा महाभारत में उनकी पुरुषों के अधीन रहने की दशा का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। मनुस्मृति में भी इस स्थिति की पुष्टि की गई है। फिर भी कुछ स्त्रियां घरेलू जीवन से हटकर स्वतन्त्र जीवन भी व्यतीत करती थीं। इनमें नर्तकियां, भिक्षुणियां तथा नाटकों में भाग लेने वाली स्त्रियां सम्मिलित थीं।

प्रश्न 5.
भारत के इतिहास में यूनानियों का क्या महत्त्व था ?
उत्तर-
भारत के इतिहास में यूनानियों का बहुत महत्त्व रहा है। यूनानी साम्राज्य के अधीन भारत का मध्य एशिया, पश्चिमी एशिया तथा चीन से काफ़ी व्यापार होने लगा और भारतीय संस्कृति विदेशों में फैली। भारत के व्यापारियों ने मलाया, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो आदि कई देशों में उपनिवेश स्थापित किए। ये सभी देश धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति का केन्द्र बन गए। यूनानियों का भारतीय कला पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। भारतीय तथा यूनानी मूर्तिकला के सम्मिश्रण से एक नई कला शैली का जन्म हुआ। इस कला शैली को गान्धार कला शैली के नाम से पुकारा जाता है। इस कला शैली में महात्मा बुद्ध की कई सुन्दर मूर्तियां बनाई गईं। यूनानी शासक मिनांडर ने अपने राजदूत बेसनगर (विदिशा) में भेजा था। जिससे यूनानियों तथा भारतीयों का आपसी सहयोग बढ़ा।

प्रश्न 6.
भारतीय इतिहास में शकों ने क्या भूमिका निभाई ?
उत्तर-
शक लोक मध्य एशिया के एक खानाबदोश कबीले से सम्बन्धित थे। इन्हें यू-ची जाति के लोगों ने वहां से खदेड़ दिया था। पहली शताब्दी ई० पूर्व के प्रारम्भ में शकों ने यूनानियों से बैक्ट्रिया तथा उत्तर-पश्चिमी भारत की राजसत्ता छीन ली। भारत में पहला शक शासक भोज था। परन्तु गोंडोफर्नीस नामक इनका सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक हुआ। गोंडोफर्नीस प्रथम शताब्दी पूर्व हुआ था। शक लोक उत्तर-पश्चिमी भारत में अधिक समय तक न रह सके। यहां से भी उन्हें यू-ची जाति के लोगों ने मार भगाया। यहां से वे गुजरात तथा मालवा गए तथा इन प्रदेशों को उन्होंने अपनी राजसत्ता का केन्द्र बनाया। यहां का सर्वाधिक प्रसिद्ध शक शासक रुद्रदमन था जिसने कई महत्त्वपूर्ण सफलताएं प्राप्त की। जूनागढ़ से प्राप्त एक अभिलेख में उसे एक महान् शासक बताया गया है। परन्तु रुद्रदमन के उत्तराधिकारी उसकी भान्ति योग्य तथा शक्तिशाली नहीं थे। इसलिए ईस्वी की पांचवीं शताब्दी के प्रारम्भ में गुप्त शासकों ने उनकी सत्ता का अन्त कर दिया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 7.
खारवेल को प्राचीन उड़ीसा का सबसे महान् शासक क्यों समझा जाता है ?
उत्तर-
प्राचीन उड़ीसा मौर्य साम्राज्य के पूर्वी प्रान्त का एक भाग था। अशोक की मृत्यु के बाद यह प्रान्त अधिक समय तक मौर्यों के अधीन न रह सका। लगभग पहली शताब्दी ई० पूर्व में यहां के कलिंग प्रदेश का शासन खारवेल के हाथों मेंcआ गया। उसने कई सफलताएं प्राप्त की जिनका उल्लेख हाथी-गुफा अभिलेख में मिलता है। यह अभिलेख भुवनेश्वर के निकट खण्डगिरि से प्राप्त हुआ है। इस अभिलेख से ज्ञात होता है कि खारवेल ने कई सैन्य-अभियानों का नेतृत्व किया। उसने सबसे पहले उत्तर-पश्चिम में यूनानियों पर हमला किया तथा दक्षिण भारत में पाण्डेय राज्य की शक्ति को कुचला। उसने पश्चिम-दक्षिण के राजाओं को भी हराया तथा मगध पर अपना अधिकार कर लिया। उसकी इन सफलताओं के आधार पर ही उसे प्राचीन उड़ीसा का सबसे महान् शासक समझा जाता है।

प्रश्न 8.
ईसा की आरम्भिक शताब्दियों में चोल राज्य का वर्णन करो।
उत्तर-
चोलों ने सबसे पहले पाण्डेय राज्य के उत्तर-पूर्व में पेन्नार तथा वेलूर नदियों के बीच के प्रदेश पर शासन किया। उनकी राजनीतिक सत्ता का मुख्य केन्द्र उर्युर था। चोलों का विश्वसनीय इतिहास दूसरी शताब्दी ई० में राजा कारिकाल के समय से मिलता है। उसने 100 ई० के लगभग शासन किया। उसकी सबसे बड़ी सफलता पुहार की स्थापना करना था जो बाद में कावेरीपत्तम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह कावेरी नदी पर स्थित लगभग 160 किलोमीटर लम्बा तटबन्ध था। इसे श्रीलंका से बन्दी बनाये गये 12,000 दासों के श्रम से बनाया गया। यही तटबन्ध चोल राज्य की राजधानी बना और वाणिज्य-व्यापार के केन्द्र के रूप में उभरा। चोलों के पास एक विशाल सेना भी थी। परन्तु चौथी शताब्दी ई० पू० के लगभग चेरों और पल्लवों ने उनकी शक्ति का अन्त कर दिया।

प्रश्न 9.
समुद्रगुप्त की प्रमुख सफलताओं का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर-
समुद्रगुप्त गुप्त वंश का एक महान् शासक था। वह 335 ई० में राजगद्दी पर बैठा। आर्यवर्त की पहली लड़ाई में उसने तीन राजाओं के संघ को हराया। दक्षिणी भारत की विजय उसकी बहुत बड़ी सफलता मानी जाती है। वह 346 ई० में अपनी राजधानी पाटलिपुत्र से चला। दक्षिण में अनेक राजाओं को रौंदता हुआ विशाल धन सम्पदा के साथ वापस लौट आया। वापसी पर उसने आर्यवर्त के नौ राजाओं के संघ को तोड़ा। तत्पश्चात् उसने अश्वमेघ यज्ञ रचाया और ‘चक्रवर्ती सम्राट्’ की उपाधि धारण की। उसकी इन विजयों के कारण उसे भारतीय नेपोलियन कह कर पुकारा जाता है। समुद्रगुप्त कला और साहित्य का भी प्रेमी था। वीणा बजाने में वह इतना निपुण था कि उसकी तुलना प्रायः नारद से की जाती है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 10.
फाह्यान द्वारा वर्णित भारतीय जीवन का वर्णन करो।
अथवा
फाह्यान कौन था ? भारत के सम्बन्ध में उसने क्या कहा है ?
उत्तर-
फाह्यान एक चीनी यात्री था। वह चन्द्रगुप्त विक्रमादिव्य के समय में बौद्ध तीर्थ स्थानों की यात्रा करने और बौद्ध ग्रन्थों का अध्ययन करने के लिए भारत आया था। उसने अपने लेखों में तत्कालीन भारतीय जीवन का बड़ा सुन्दर वर्णन किया है। वह लिखता है कि लोग सदाचारी, समृद्ध और दानी थे। वे मांस तथा नशीले पदार्थों से घृणा करते थे। समाज में छुआछूत की भावना बहुत अधिक थी। उस समय की सरकार श्रेष्ठ थी और प्रजा के हितों का पूरा ध्यान रखती थी। दण्ड अधिक कठोर नहीं थे, फिर भी लोगों को चोर-डाकुओं का कोई भय नहीं रहता था। सरकारी कर्मचारी योग्य और ईमानदार थे। पाटलिपुत्र नगर की शोभा निराली थी। यहां स्थित अशोक का महल विशेष दर्शनीय था। देश में हिन्दू धर्म लोकप्रिय था। परन्तु बौद्धधर्म की लोकप्रियता अभी कम नहीं हुई थी।

प्रश्न 11.
गुप्त काल की चित्रकला के नमूने कहां मिलते हैं और उनका क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
गुप्त काल की चित्रकला के नमूने अजन्ता की गुफाओं की दीवारों पर मिलते हैं। यहां के एक चित्र में एक राजकुमारी को मृत्यु शैय्या पर दिखाया गया है। इस चित्र में भावों को बड़े सुन्दर ढंग से उभारा गया है। चित्र देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि राजकुमारी के रोग का इलाज नहीं हो सका है और उसके सम्बन्धी अपनी लाचारी पर बहुत दुःखी हैं। एक अन्य चित्र में गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) को घर छोड़ते हुए दिखाया गया है। चित्र में वे पत्नी और बच्चों पर अन्तिम दृष्टि डाल रहे हैं। एक चित्र में महात्मा बुद्ध को सुजाता नामक स्त्री चावल खिला रही है। एक चित्र में माता और पुत्र दिखाए गये हैं। बच्चे के हाथ भिक्षा के लिए फैले हुए हैं। ये सभी चित्र कला की दृष्टि से बड़े ही महत्त्वपूर्ण हैं। इन्हें देखकर यह कहा जा सकता है कि भारत में चित्रकला एक लम्बे समय से विकसित हो रही थी जो गुप्त काल में अपनी उन्नति की चरम सीमा पर पहुंच गई।

प्रश्न 12.
गुप्त काल की मूर्तिकला का सर्वोत्तम नमूना कौन-सा है और उसकी क्या विशेषता है ?
उत्तर-
गुप्त काल में मूर्तिकला के क्षेत्र में अद्वितीय विकास हुआ। इस काल में अधिकतर महात्मा बुद्ध और बौधिसत्वों की मूर्तियां बनाई गईं। इनमें से सारनाथ में बुद्ध की मूर्ति इस कला का सर्वोत्तम नमूना है। इसमें महात्मा बुद्ध को रत्न जड़ित आसन पर बैठे दिखाया गया है। वह प्रचार करने की मुद्रा में हैं। उनके चेहरे पर बिखरी मुस्कान मूर्तिकारों की कारीगरी की उच्चता को प्रकट करती है। इस मूर्ति को देखकर यूं लगता है मानो बुद्ध विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित होकर अपना उपदेश दे रहे हों। भारतीय शैली में बनी यह मूर्ति गान्धार शैली की मूर्तियों से कहीं अधिक सुन्दर है। इसमें बुद्ध के धुंघराले बाल,बारीक वस्त्र तथा आकर्षक आभूषणों को बड़े ही कलात्मक ढंग से दिखाया गया है।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 13.
“चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में गुप्त साम्राज्य अपने उत्कर्ष पर पहुंच गया।” इस कथन पर प्रकाश डालो।
अथवा
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की मुख्य उपलब्धियों पर प्रकाश डालो।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त द्वितीय समुद्रगुप्त का वीर पुत्र था। वह 375 ई० में राजगद्दी पर बैठा। उसने वैवाहिक सम्बन्धों द्वारा अपनी शक्ति को बढ़ाया और अनेक विजयें प्राप्त की। सबसे पहले उसने बंगाल को जीता और फिर वहलीक जाति और अवन्ति गणराज्य पर विजय प्राप्त की। उसकी सबसे महत्त्वपूर्ण सफलता मालवा, काठियावाड़ और गुजरात की विजय थी। यहां के शक राजाओं को पराजित करके ही उसने ‘विक्रमादित्य’ अर्थात् वीरता का सूर्य की उपाधि धारण की। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के समय में कला और साहित्य का भी बड़ा विकास हुआ। संस्कृत का महान् कवि कालिदास उसी के समय में ही हुआ था। इसके अतिरिक्त चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय में शासन-प्रबन्ध बड़ी कुशलता से चलता था। जनता हर प्रकार से सुखी और समृद्ध थी। अतः हम कह सकते हैं कि उसके समय में गुप्त साम्राज्य अपने उत्कर्ष पर पहुंच गया।

प्रश्न 14.
5वीं शताब्दी में भारत पर हूणों के आक्रमण के क्या परिणाम निकले ?
उत्तर-
पांचवीं शताब्दी में भारत पर हूण आक्रमणों के ये परिणाम निकले :

  • इन आक्रमणों से गुप्त साम्राज्य का अन्त हो गया। स्कन्दगुप्त के उत्तराधिकारी बड़े अयोग्य थे, इसलिए वे हूणों का सामना न कर पाये। परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य छिन्न-भिन्न होकर रह गया।
  • भारत की राजनीतिक एकता समाप्त हो गई और देश छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया।
  • हूणों ने बहुत से ऐतिहासिक भवन नष्ट कर डाले तथा अमूल्य पुस्तकों को जलाकर राख कर दिया। इस प्रकार उन्होंने बहुत से ऐतिहासिक स्रोतों को नष्ट कर दिया।
  • अनेक हूण भारत में ही बस गये। उन्होंने भारतीय स्त्रियों से विवाह कर लिये और हिन्दू समाज में अपनी जातियाँ बना लीं। इस प्रकार भारत में नई जातियों तथा उपजातियों का जन्म हुआ।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 15.
आर्यभट्ट का खगोल विज्ञान में क्या योगदान था ?
उत्तर-
आर्यभट्ट गुप्त काल का एक महान् वैज्ञानिक एवं खगोलशास्त्री था। उसने अपनी नवीन खोजों द्वारा खगोलशास्त्र को काफ़ी समृद्ध बनाया। ‘आर्य भट्टीय’ उसका प्रसिद्ध ग्रन्थ है। उसने यह सिद्ध किया कि सूर्यग्रहण तथा चन्द्रग्रहण, राहू और केतू नामक राक्षसों के कारण नहीं लगते बल्कि जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो चन्द्रग्रहण होता है। आर्यभट्ट ने स्पष्ट रूप में यह लिख दिया था कि सूर्य नहीं घूमता बल्कि पृथ्वी ही अपनी धुरी के चारों ओर घूमती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि खगोल विज्ञान में आर्यभट्ट ने महान् योगदान दिया।

प्रश्न 16.
‘षटशास्त्र’ के बारे में बताएं।
उत्तर-
गुप्त काल में ब्राह्मणों ने उपनिषदों के गूढ़ विचारों की व्याख्या के लिए दर्शन की छः प्रणालियों का विकास किया। यही छः प्रणालियां ‘षट्शास्त्र’ अथवा षट्दर्शन के नाम से प्रसिद्ध हैं। ये प्रणालियां हैं

(क) कपिल का सांख्य दर्शन-इसके अनुसार प्रकृति और आत्मा अमर है। इसे नास्तिक दर्शन भी माना जा सकता है क्योंकि इसमें पदार्थ और आत्मा के दोहरे अस्तित्व को स्वीकार किया गया है।

(ख) पातंजलि का योग दर्शन-पातंजलि के विचार में आत्मा और प्रकृति के साथ-साथ परमात्मा भी अमर है। (ग) गौतम का न्याय दर्शन-इस दर्शन के अनुसार मनुष्य ज्ञान द्वारा परमात्मा को पा सकता है।

(घ) कणाद का वैशेषिक दर्शन-इसमें कणाद लिखता है कि संसार की रचना अदृश्य अणु शक्तियों के मेल से हुई है।
(ङ) जैमिनी का पूर्व मीसांसा दर्शन-इस दर्शन में वेद में बताई गई धार्मिक क्रियाओं को अपनाने पर अधिक बल दिया गया है।
(च) व्यास का उत्तर मीसांसा दर्शन-इस दर्शन में व्यास जी कहते हैं कि प्रकृति की प्रत्येक वस्तु में परमात्मा का हाथ है। ईश्वर के अतिरिक्त सब कुछ मिथ्या है।

प्रश्न 17.
भारत का दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के साथ किस प्रकार का सम्बन्ध था ?
उत्तर-
भारत के दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के साथ व्यापारिक एवं सांस्कृतिक सम्बन्ध थे। इन देशों में भारतीय संस्कृति का प्रभाव भारतीय व्यापारियों तथा धर्म प्रचारकों द्वारा पहुंचा। फलस्वरूप कुछ देशों में बौद्ध धर्म और कुछ में ब्राह्मण धर्म अत्यन्त लोकप्रिय हुए। भारतीय व्यापारियों की सहायता से विशेष रूप से थाईलैण्ड, कम्बोडिया और जावा में कई छोटी बस्तियों का विकास हुआ। समय पाकर इन देशों में ब्राह्मणीय संस्कार और रिवाज बौद्ध मत से भी अधिक प्रचलित हो गए। राजकाज की भाषा के रूप में संस्कृत का प्रयोग होने लगा। थाईलैंड की प्राचीन राजधानी को रामायण की अयोध्या के नाम पर ‘अयूधिया’ कहा जाता था। इन देशों में भारतीय प्रभाव हर स्थान पर एक समान नहीं था। इसके अतिरिक्त दक्षिणी-पूर्वी एशिया के लोगों ने भारतीय संस्कृति के कुछ विशेष पहलुओं को ही अपनाया और उन्हें अपने ही ढंग से विकसित किया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 18.
कालिदास पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
कालिदास संस्कृत का श्रेष्ठ कवि तथा महान् नाटककार था। उसे प्रायः ‘भारतीय शेक्सपीयर’ कह कर पुकारा जाता है। कालिदास गुप्त काल में उत्पन्न हुआ और वह चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के दराबर की शोभा था। एक जनश्रुति के अनुसार उसका जन्म एक ब्राह्मण के यहां हुआ था। बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो गई। उसका पालन-पोषण एक ग्वाले ने किया। फिर भी वह बड़ा होकर महान् कवि तथा नाटककार बना। कालिदास की प्रसिद्ध रचनाएं ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’, ‘मेघदूत’, ‘ऋतु संहार’, ‘रघुवंश’, ‘मालविकाग्निमित्र’, ‘कुमार सम्भव’ हैं। इनमें से ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ उसकी सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है। इस विषय में एक बात कही जाती है, “सभी काव्य में नाट्य कला श्रेष्ठ है, सभी नाटकों में ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ श्रेष्ठ है। ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ नाटक में चौथा अंक श्रेष्ठ है और चौथे अंक में वे पंक्तियां श्रेष्ठ हैं, जब कण्व ऋषि अपनी दत्तक पुत्री शकुन्तला को विदा कर रहे हैं।”

प्रश्न 19.
गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की मृत्यु के पश्चात् गुप्त साम्राज्य का पतन आरम्भ हो गया। इस साम्राज्य के पतन के अनेक कारण थे-

  • चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के उत्तराधिकारी निर्बल थे। फलस्वरूप वे देश का शासन ठीक ढंग से न चला सके।
  • गुप्त शासकों में उत्तराधिकार का कोई नियम नहीं था। इसलिए लगभग प्रत्येक शासक की मृत्यु के पश्चात् राजगद्दी के लिए गृह-युद्ध हुआ करते थे। इन युद्धों से गुप्त साम्राज्य की शक्ति शीण होती गई।
  • निर्बल शासकों के काल में विद्रोही शक्तियों ने ज़ोर पकड़ना आरम्भ कर दिया। फलस्वरूप गुप्त वंश के पतन की प्रक्रिया तेज़ हो गई।
  • चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के पश्चात् किसी गुप्त राजा ने राज्य की सीमाओं की सुरक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
  • बाद में गुप्त राजाओं को अनेक युद्ध लड़ने पड़े जिससे उनका राजकोष खाली हो गया। धन के अभाव में वे ठीक ढंग से शासन न कर सके।
  • इसी समय हूणों के निरन्तर आक्रमण होने लगे। गुप्त शासक उनके आक्रमणों का अधिक समय तक सामना न कर सके। फलस्वरूप गुप्त साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

IV. निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“कनिष्क बौद्ध धर्म, कला एवं साहित्य का महान् संरक्षक था।” इस कथन की विवेचना कीजिए।
अथवा
बौद्ध धर्म के संरक्षक के रूप में सम्राट् कनिष्क का मूल्यांकन कीजिए।
अथवा
कला तथा साहित्य के विकास में कनिष्क के योगदान की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध राजा था। वह लगभग 78 ई० में राजगद्दी पर बैठा और पुरुषपुर को अपनी राजधानी बनाया। उसके समय में बौद्ध धर्म की नई शाखा ‘महायान’ का उदय हुआ। उसने इस नई शाखा का खूब प्रचार किया।

कनिष्क को कला और साहित्य से बड़ा प्रेम था। उसने अनेक विहार, मठ तथा स्तूप बनाए। प्रसिद्ध विद्वान् अश्वघोष तथा नागार्जुन उसी के समय में ही हुए थे। बौद्ध धर्म, कला तथा साहित्य के संरक्षक के रूप में कनिष्क के कार्यों का वर्णन इस प्रकार है

बौद्ध धर्म को संरक्षण कनिष्क आरम्भ में पारसी-धर्म का और फिर हिन्दू धर्म का अनुयायी रहा, परन्तु अश्वघोष के प्रभाव में आने के बाद उसने बौद्ध धर्म अपना लिया। उसने अशोक की भान्ति बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए निम्नलिखित कार्य किए जिनका वर्णन इस प्रकार है-

बौद्ध धर्म को संरक्षण-

  • बौद्ध धर्म में उत्पन्न मतभेदों को दूर करने के लिए कनिष्क ने कुण्डलवन में चौथी बौद्ध सभा बुलाई। इसमें 500 भिक्षु शामिल हुए। इसके सभापति वसुमित्र तथा उप-सभापति अश्वघोष थे। इस सभा में सारे बौद्ध साहित्य क निरीक्षण किया गया। सभा में हुए निर्णयों को ताम्रपत्रों पर लिखकर पत्थर के सन्दूकों में बन्द करवा दिया गया। इस प्रकार बौद्ध धर्म की 18 शाखाओं के आपसी मतभेद दूर हो गए।
  • कनिष्क ने विदेशों में प्रचारक भेजे। फलस्वरूप चीन, जापान, मध्य एशिया के कई देशों में बौद्ध-धर्म का प्रचार हुआ।
  • कनिष्क के समय में बौद्ध धर्म हीनयान तथा महायान नामक दो शाखाओं में बंट गया। कनिष्क ने महायान शाखा के प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। .
  • उसने बौद्ध भिक्षुओं की आर्थिक रूप में सहायता की। उसने भिक्षुओं के लिए अनेक मठ तथा विहार बनवाए।

कला तथा साहित्य का विकास-

  • कलाकृतियां-कनिष्क एक महान् निर्माता भी था। उसने चार नए नगर बसाए। ये नगर हैं-पेशावर, मथुरा, कनिष्कपुर तथा तक्षशिला। इन नगरों में बने विहार तथा मूर्तियां बड़ी ही सुन्दर हैं।
  • कला शैलियां-कनिष्क के संरक्षण में मूर्तिकला की अनेक नई शैलियां विकसित हुईं। ये मथुरा, सारनाथ, अमरावती तथा गान्धार में पनपती रहीं, परन्तु इन शैलियों का मुख्य स्रोत गान्धार कला शैली थी। इस शैली के अनुसार भारतीय विचारों तथा धर्म के अंगों को यूनानी कला में उतारा गया। इस काल में मुद्रा कला का भी विकास हुआ।
  • विद्या तथा साहित्य-कनिष्क कला-प्रेमी होने के साथ-साथ विद्या तथा साहित्य का प्रेमी भी था। अनेक विद्वान उसके दरबार की शोभा थे। अश्वघोष उसके दरबार का रत्न था। उसने ‘बुद्ध चरित्’ तथा ‘सूत्रालंकार’ की रचना की थी। नागार्जुन, चरक आदि उच्चकोटि के विद्वान् भी कनिष्क के दरबार की शोभा थे।

प्रश्न 2.
समुद्रगुप्त ने किस प्रकार अपने राज्य को विशाल तथा शक्तिशाली बनाया ?
अथवा
समुद्रगुप्त की सैनिक सफलताओं का वर्णन करो। उसे भारतीय नेपोलियन क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
समुद्रगुप्त गुप्तवंश का एक प्रतापी राजा था। वह विद्वान्, संगीतज्ञ, कला प्रेमी और प्रजा हितकारी शासक था। उसने सैनिक के रूप में बहुत अधिक यश पाया। उसकी सफलताओं का महत्त्वपूर्ण विवरण हमें इलाहाबाद प्रशस्ति’ में मिलता है। उसकी प्रमुख सफलताओं का वर्णन इस प्रकार है-

1. उत्तरी भारत की विजय-समुद्रगुप्त ने सबसे पहले आर्यावर्त की पहली लड़ाई में अच्युत, नागसेन तथा गणपति नाग नामक राजाओं को परास्त किया। नागसेन और गणपति नाग ने अपनी पराजय का बदला लेने के लिए उत्तरी भारत के अन्य सात राजाओं के साथ मिलकर एक संघ बना लिया। समुद्रगुप्त उस समय दक्षिण विजय के लिए गया हुआ था। उसने लौट कर इन सभी राजाओं को बुरी तरह पराजित किया।

2. दक्षिण भारत की विजय-समुद्रगुप्त ने दक्षिणी भारत के राजाओं को पराजित किया। इनमें से सबसे पहले उसने दक्षिणी कोशल के राजा पर विजय प्राप्त की। इसी बीच दक्षिण के कई राजाओं ने मिलकर एक संघ बना लिया। कांची नरेश विष्णुगोप इस संघ का नेता था। समुद्रगुप्त ने इस संघ से टक्कर ली और इसे पराजित किया। समुद्रगुप्त ने पालघाट, महाराष्ट्र और खान देश आदि राजाओं को भी परास्त किया। यहां एक बात ध्यान देने योग्य है कि समुद्रगुप्त ने दक्षिणी भारत के किसी भी राज्य को अपने साम्राज्य में शामिल नहीं किया। वह इन राज्यों से केवल कर प्राप्त करता रहा।

3. अन्य विजयें-समुद्रगुप्त ने कई सीमावर्ती राज्यों जैसे समतट, कामरूप, कर्तृपुर और नेपाल आदि पर भी विजय प्राप्त की। इन राज्यों ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली। कई जातियों ने समुद्रगुप्त से युद्ध किए बिना ही उसकी अधीनता स्वीकार ली। ये जातियां थीं-मालव, आभीर, यौद्धेय, शूद्रक और अर्जुनायन।

समुद्रगुप्त भारतीय नेपोलियन क्यों ?- समुद्रगुप्त की महान् विजयों के कारण इतिहासकार उसे भारतीय नेपोलियन का नाम देते हैं। वह नेपोलियन की भान्ति एक पराक्रमी विजेता था। जिस प्रकार नेपोलियन ने अपनी सैनिक शक्ति से समस्त यूरोप को भयभीत कर दिया था उसी प्रकार समुद्रगुप्त ने अपने सैनिक अभियानों से लगभग सारे भारत में अपना दबदबा बैठा लिया था। अपने विजयी जीवन में उसे न कभी ‘ट्राफाल्गार’ तथा ‘वाटरलू’ जैसी पराजय का सामना करना पड़ा और न ही उसे आजीवन कारावास का दण्ड मिला। समुद्रगुप्त के महान् कार्यों को देखते हए डॉ० वी० ए० स्मिथ ने ठीक ही कहा है, “समुद्रगुप्त वास्तव में एक प्रतिभाशाली व्यक्ति था जो भारतीय नेपोलियन कहलाने का अधिकारी है।”

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 3.
समुद्रगुप्त की सांस्कृतिक (कला एवं साहित्य संबंधी) सफलताओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
(i) कला-प्रेमी-समुद्रगुप्त एक महान् कला-प्रेमी था। योद्धा होते हुए भी उसकी कोमल प्रवृत्तियां सुरक्षित रहीं। उसे संगीत से विशेष लगाव था। अपनी मुद्राओं पर वह वीणा बजाते हुए दिखाया गया है। इससे सिद्ध होता है कि वह वीणावादन में भी प्रवीण था। उसके प्रसिद्ध दरबारी कवि हरिषेण के वाक्यों में “वह संगीत-कला में नारद तथा तुम्बरु को भी लज्जित करता था।” उसकी मुद्राएं उसकी कलाप्रियता का प्रमाण हैं। ये मुद्राएं सोने की थीं। इस पर राजा के अतिरिक्त हिन्दू देवी-देवताओं के चित्र अंकित थे। इतनी आकर्षक मुद्राएं बनाने का श्रेय समुद्रगुप्त को ही जाता है।

(ii) साहित्य प्रेमी-समुद्रगुप्त विद्वानों का आश्रयदाता था। वह उच्च कोटि का कवि तथा साहित्यकार था और उसे कविराज की उपाधि प्राप्त थी। अनेक विद्वान् उसके दरबार की शोभा थे। हरिषेण उसके समय का एक महान् विद्वान् माना जाता था। ‘इलाहाबाद प्रशस्ति’ हरिषेण की एक प्रसिद्ध साहित्यिक रचना है जो काव्य का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है। असंगत तथा वसुबन्ध भी उसके दरबार की शोभा थे। उनकी रचनाएं समुद्रगुप्त के लिए गौरव का विषय थीं।

प्रश्न 4.
चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के राज्यकाल तथा सैनिक सफलताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य समुद्रगुप्त का योग्य पुत्र था। वह 380 ई० में सिंहासन पर बैठा। सबसे पहले उसने वैवाहिक सम्बन्धों द्वारा अपनी शक्ति को बढ़ाया। उसने स्वयं नाग वंश की राजकुमारी कुबेरनाग से विवाह किया। अपनी कन्या का विवाह उसने रुद्रसेन द्वितीय से कर दिया। इस सम्बन्ध के कारण ही वह गुजरात तथा सौराष्ट्र के शक राजाओं को पराजित करने में सफल हो सका।
विजयें-चन्द्रगुप्त द्वितीय की विजयों का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-

  • बंगाल विजय-चन्द्रगुप्त ने सबसे पहले बंगाल के विद्रोही राजाओं को हराया और बंगाल को अपने राज्य में मिला लिया।
  • अवन्ति की विजय-चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अवन्ति के गणराज्य पर भी विजय प्राप्त की। इसके अतिरिक्त उसने कुषाण गणतन्त्रों को भी हराया।
  • वाहलीक जाति पर विजय-महरौली के स्तम्भ-लेख से पता चलता है कि चन्द्रगुप्त ने सिन्धु नदी के मुहानों की सातों शाखाओं को पार किया और वाहलीक जाति को हराया।
  • मालवा, गुजरात तथा काठियावाड़ की विजय-चन्द्रगुप्त द्वितीय ने इन प्रदेशों पर 388 ई० से 409 ई० के बीच के समय में विजय प्राप्त की। इस विजय के पश्चात् उसने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की। – मालवा, गुजरात तथा काठियावाड़ की विजयों के कारण भारत में शकों की शक्ति समाप्त हो गई और चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का राज्य अरब सागर तक फैल गया। .

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 5.
चंद्रगुप्त विक्रमादित्य (द्वितीय) के राज्य प्रबंध की मुख्य विशेषताएं बताओ। क्या उसने कला एवं साहित्य को भी संरक्षण दिया ?
उत्तर-
चन्द्रगुप्त द्वितीय एक उच्च कोटि का शासन-प्रबन्धक था। प्रजा की भलाई करना वह अपना कर्त्तव्य समझता था। फाह्यान ने उसके शासन-प्रबन्ध की बड़ी प्रशंसा की है। शासन की सभी शक्तियां सम्राट् के हाथ में थीं। सम्राट् को शासन कार्यों में सलाह देने के लिए एक मन्त्रिपरिषद् थी। मन्त्रियों की नियुक्ति वह स्वयं करता था। चन्द्रगुप्त द्वितीय का राज्य चार प्रान्तों में बंटा हुआ था। प्रत्येक प्रान्त का प्रबन्ध गवर्नर के हाथ में था। प्रान्त विषयों (जिलों) में तथा विषय गांवों में बंटे हुए थे। विषय का प्रबन्ध ‘विषयपति’ तथा ग्राम का प्रबन्ध ‘ग्रामक’ करता था।

चन्द्रगुप्त द्वितीय बड़ा न्यायप्रिय शासक था। वह निष्पक्ष न्याय करता था। दण्ड बहुत नर्म थे। मृत्यु दण्ड किसी को नहीं दिया जाता था। फिर भी देश में शान्ति थी। सड़कें सुरक्षित थीं और चोर-डाकुओं का कोई भय नहीं था। सरकार की आय का मुख्य साधन भूमि-कर था। यह कर उपज का 1/3 भाग होता था। सरकारी कर्मचारियों को नकद वेतन दिया जाता था। वे बहुत ईमानदार थे और प्रजा के साथ अच्छा व्यवहार करते थे।

कला और साहित्य को संरक्षण-अपने पिता समुद्रगुप्त की तरह चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य भी कला और साहित्य का प्रेमी था। उसके अधीन सभी प्रकार की कलाओं और साहित्य ने बड़ी उन्नति की। उसके शासन में महात्मा बुद्ध तथा अनेक हिन्दू देवी-देवताओं की सुन्दर मूर्तियां बनीं। ये मूर्तियां कला की दृष्टि से बड़ी महत्त्वपूर्ण हैं। उसके शासन काल में अनेक शानदार मन्दिरों का निर्माण भी हुआ।

चन्द्रगुप्त द्वितीय एक उच्च कोटि का विद्वान् था और वह विद्वानों का बड़ा आदर करता था। उसके समय में संस्कृत भाषा और संस्कृत साहित्य का बड़ा विकास हुआ। संस्कृत का सबसे प्रसिद्ध कवि कालिदास उसी के समय में हुआ था। उसने मेघदूत, रघुवंश आदि उच्च कोटि के संस्कृत ग्रन्थों की रचना की थी।

प्रश्न 6.
गुप्त काल में भारत की सामाजिक, धार्मिक तथा आर्थिक दशा का वर्णन करो।
उत्तर-
गुप्त काल में भारत की सामाजिक, धार्मिक तथा आर्थिक दशा का वर्णन इस प्रकार है-

1. सामाजिक दशा-इस काल में लोग बड़ा सादा और पवित्र भोजन करते थे। मांस तथा शराब का प्रयोग नहीं किया जाता था। लोग लहसुन तक नहीं खाते थे। वे गर्मियों में धोती तथा चद्दर और सर्दियों में पायजमा तथा कोट पहनते थे। स्त्रियां चोली और साड़ी का प्रयोग करती थीं। विशेष अवसरों पर लोग रेशमी कपड़े पहना करते थे। स्त्रियों और पुरुषों दोनों को आभूषण पहनने का बड़ा शौक था। वे बालियां, चूड़ियां, हार, अंगूठियां तथा कड़े आदि पहनते थे। स्त्रियों की दशा काफ़ी अच्छी थी। उन्हें शिक्षा प्राप्त करने और संगीत सीखने की पूरी स्वतन्त्रता थी। जाति-प्रथा के बन्धन कठोर नहीं थे। किसी भी जाति का व्यक्ति अपनी इच्छानुसार कोई भी व्यवसाय अपना सकता था। लोग अपना मन बहलाने के लिए शतरंज तथा चौपड़ खेलते थे। कभी-कभी वे रथदौड़ों में भी भाग लिया करते थे। शिकार खेलने, नाटक तथा तमाशे देखना उनके मनोरंजन के अन्य साधन थे।

2. धार्मिक दशा-गुप्त काल में हिन्दू धर्म फिर से लोकप्रिय हुआ। गुप्त शासक हिन्दू धर्म के अनुयायी थे। इस काल में हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं जैसे ‘विष्ण’, ‘शिव’ तथा ‘सर्य’ की उपासना की जाने लगी। इनकी मूर्तियां बना कर मन्दिरों में रखी जाती थीं। इस काल में यज्ञों आदि पर खूब जोर दिया जाता था। यद्यपि गुप्त सम्राट् हिन्दू धर्म के अनुयायी थे तो भी वे हठधर्मी नहीं कहे जा सकते। लोगों को कोई भी धर्म अपनाने की पूरी स्वतन्त्रता थी।

3. आर्थिक दशा-इस काल में लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि था। किसान गेहूँ, जौ, चावल, कपास, बाजरा आदि की कृषि करते थे। जहाज़ बनाना, कपड़ा बुनना तथा हाथी दांत का काम करना भी लोगों के व्यवसाय थे। इस काल में व्यापार भी काफ़ी उन्नत था। विदेशी व्यापार तो विशेष रूप से चमका हुआ था। अतः भारत के धन-धान्य में काफ़ी वृद्धि हुई। उस समय वस्तुओं के भाव भी कम थे। लोगों का जीवन बहुत सुखी था।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 7.
गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का विवेचन करें।
अथवा
गुप्त साम्राज्य के पतन के किन्हीं पांच कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
गुप्त साम्राज्य का पतन बड़े आश्चर्य की बात है। गुप्त वंश ने समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, स्कन्दगुप्त जैसे प्रतापी राजाओं को जन्म दिया। उन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार भी किया और कुशल प्रबन्ध की व्यवस्था भी की। फिर भी इस वंश का पतन हो गया। वास्तव में बाद के गुप्त राजा इस महान् साम्राज्य को सम्भालने में असमर्थ रहे। एक तो शासक कमज़ोर थे, दूसरे हूणों के आक्रमण आरम्भ हो गए। ऐसी अनेक बातों के कारण गुप्त वंश का पतन हुआ। इन सभी का वर्णन इस प्रकार है-

1. निर्बल उत्तराधिकारी-गुप्त साम्राज्य के पतन का मुख्य कारण उत्तरकालीन गुप्त शासकों की निर्बलता थी। स्कन्दगुप्त के पश्चात् पुरुगुप्त, नरसिंह गुप्त, बालादित्य गुप्त, बुद्धगुप्त और भानुगुप्त आदि सभी गुप्त शासक विशाल साम्राज्य को सम्भालने में असमर्थ रहे। उनमें महान् शासकों जैसे गुण नहीं थे। वे न तो महान् सैनिक ही थे और न ही महान् शासक प्रबन्धक। अतः कमज़ोर उत्तराधिकारी राज्य को सम्भालने में असफल रहे।

2. उत्तराधिकार के नियम का अभाव-गुप्त राजाओं में उत्तराधिकार का निश्चित नियम नहीं था। लगभग प्रत्येक राजा की मृत्यु के पश्चात् गृह युद्ध छिड़ते रहे। इससे राज्य की शक्ति क्षीण होती गई और उसकी मान-मर्यादा को काफ़ी ठेस पहुंची। यही बात अन्त में गुप्त साम्राज्य को ले डूबी।

3. सीमान्त नीति-चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के पश्चात् किसी गुप्त राजा ने राज्य की सीमा सुरक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहां न तो कोई दुर्ग बनवाए गए और न ही वहां सेनाएं रखी गईं। जब देश पर हूणों ने आक्रमण किए तो वे सीधे देश के भीतरी भागों में चले आए। यदि हूणों को सीमाओं पर ही खदेड़ दिया जाता तो गुप्त वंश का पतन शायद रुक जाता, परन्तु उचित सीमा व्यवस्था न होने के कारण गुप्त वंश का पतन हो गया।

4. साम्राज्य की विशालता-गुप्त साम्राज्य काफ़ी विशाल था। इतने बड़े साम्राज्य को उन दिनों सम्भालना कोई आसान कार्य नहीं था। यातायात के साधन सुलभ न थे। शक्तिशाली गुप्त शासकों ने साम्राज्य पर पूरा नियन्त्रण रखा। इसके विपरीत दुर्बल राजाओं के काल में साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया।

5. आन्तरिक विद्रोह-समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त की असीम सैनिक शक्ति के सामने अनेक भारतीय राजाओं ने घुटने टेक दिए थे। परन्तु बाद के गुप्त राजाओं के काल में इन शक्तियों ने फिर जोर पकड़ लिया। राज्य में अनेक विद्रोह होने लगे जिसके कारण गुप्त साम्राज्य छिन्न-भिन्न होता चला गया।

6. कमजोर आर्थिक दशा-धन सुदृढ़ शासन व्यवस्था की आधारशिला माना जाता है। इतिहास साक्षी कि धन के अभाव के कारण कई साम्राज्य पतन के गड्ढे में जा गिरे। गुप्त साम्राज्य के साथ भी यही हुआ। बाद के गुप्त राजाओं को युद्धों में काफ़ी धन व्यय करना पड़ा। इससे सरकारी कोष खाली हो गया। अत: आर्थिक रूप से कमजोर राज्य एक दिन रेत की दीवार के समान गिर पड़ा।

7. हूण जातियों के आक्रमण-हूणों के आक्रमण ने भी गुप्त साम्राज्य को काफ़ी आघात पहुंचाया। इनका पहला आक्रमण स्कन्दगुप्त के काल में हुआ। उसने उन्हें बुरी तरह पराजित किया, यह आक्रमण स्कन्दगुप्त के बाद भी जारी रहे। इन आक्रमणों से साम्राज्य निर्बल हुआ और विद्रोही शक्तियों ने सिर उठाना आरम्भ कर दिया। अप्रत्यक्ष रूप से गुप्त राज्य पहले ही खोखला हो चुका था। इस पर हूणों ने बार-बार आक्रमण करने आरम्भ कर दिए। जब तक गुप्त शासकों में इसका मुकाबला करने की क्षमता थी, वे मुकाबला करते रहे। आखिर गुप्त साम्राज्य इसका प्रहार सहन न कर सका और यह पतन के गड्ढे में जा गिरा।

8. सैनिक निर्बलता-गुप्त काल समृद्धि और वैभव का युग था। सभी सैनिकों को अच्छा वेतन मिलता था। लम्बे समय तक युद्ध न होने के परिणामस्वरूप सैनिक आलसी तथा कमजोर हो गए। अतः जब देश पर आक्रमण होने आरम्भ हुए तो वे आक्रमणकारियों का सामना करने में असफल रहे। आन्तरिक विद्रोह को भी वे न कुचल सके। अत: जिस साम्राज्य की सैनिक शक्ति ही दुर्बल पड़ गई हो तो उस राज्य का पतन अवश्यम्भावी हो जाता है। सच तो यह है कि साथ-साथ अनेक बातों के घटित होने के कारण गुप्त वंश का पतन हो गया।

PSEB 11th Class History Solutions Chapter 5 गुप्त काल

प्रश्न 8.
गुप्त काल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है ? किन्हीं पांच महत्त्वपूर्ण कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
गुप्त काल में भारत उन्नति की चरम सीमा पर था। इस युग में समाज नवीन आदर्शों में ढला। देश को राजनीतिक एकता प्राप्त हुई तथा महान् ग्रन्थों की रचना हुई। सुन्दर मन्दिरों तथा मूर्तियों ने देश की शोभा को बढ़ाया। देश के धन-धान्य में वृद्धि हुई। अतः इस युग को इतिहासकारों ने ‘स्वर्ण-युग’ का नाम दिया। संक्षेप में, गुप्त काल को अग्रलिखित कारणों से प्राचीन भारत का ‘स्वर्ण-युग’ कहा जाता है-

1. राजनीतिक एकता–मौर्यवंश के बाद देश अनेक छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया था। शक, कुषाण आदि विदेशी जातियों ने भारत के अधिकांश भागों पर अपना अधिकार कर लिया। परन्तु चौथी शताब्दी में गुप्त शासकों ने भारत को इन विदेशी शक्तियों से मुक्त कराया और देश में राजनीतिक एकता की स्थापना की।

2. आदर्श शासन-समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य जैसे महान् गुप्त राजाओं ने देश में एक आदर्श शासन स्थापित किया। वे प्रजा के सुख का ध्यान रखते थे। देश में चारों ओर शान्ति, सुख और समृद्धि थी।

3. आदर्श समाज-गुप्त कालीन समाज एक आदर्श समाज था। लोगों का नैतिक जीवन बहुत ऊंचा था। चोरी का चिन्ह मात्र नहीं था। लोग दयालु थे और किसी भी प्राणी की हत्या नहीं करते थे। मांस और मदिरा का तो कहना ही क्या, वे प्याज और लहसुन भी नहीं खाते थे।

4. हिन्दू धर्म की उन्नति-गुप्त काल में हिन्दू धर्म ने विशेष उन्नति की। गुप्तवंश के शासक हिन्दू धर्म के अनुयायी थे तथा विष्णु के उपासक थे। उन्होंने देश में हिन्दू मन्दिरों की स्थापना करवाई और अपने सिक्कों पर गरुड़, कमल, यक्ष आदि के चित्र अंकित करवाये।

5. धार्मिक सहनशीलता-गुप्त काल धार्मिक सहनशीलता का युग था। इसमें कोई सन्देह नहीं कि गुप्त शासक हिन्दू धर्म में विश्वास रखते थे, परन्तु उन्होंने लोगों को पूर्ण धार्मिक स्वतन्त्रता प्रदान की हुई थी। वे हिन्दू धर्म के साथ साथ अन्य धर्मों का मान करते थे और उन्हें आर्थिक सहायता देते थे।

6. शिक्षा और साहित्य में उन्नति-गुप्त काल में नालन्दा, कन्नौज, तक्षशिला, उज्जैन तथा वल्लभी के विश्वविद्यालय शिक्षा के विख्यात केन्द्र थे। इन विश्वविद्यालयों में हजारों छात्र निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करते थे। इस काल में साहित्य की बड़ी उन्नति हुई। महाकवि कालिदास ने ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’, ‘मेघदूत’ एवं ‘रघुवंश’ आदि विश्वविख्यात ग्रन्थों की रचना इसी काल में की।

7. संस्कृत भाषा की उन्नति-गुप्त सम्राटों ने संस्कृत भाषा के उत्थान में बड़ा योगदान दिया। चन्द्रगुप्त द्वितीय स्वयं संस्कृत का एक प्रकाण्ड पण्डित था। अनेक विद्वानों ने अपनी पुस्तकें संस्कृत भाषा में लिखीं।

8. ललित कलाओं की उन्नति-गुप्त काल में बनी अजन्ता की गुफाएं चित्रकला का सुन्दर नमूना है। भगवान् बुद्ध और हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां तथा भूमरा का शिव मन्दिर उस समय की उन्नत कलाओं के अनूठे उदाहरण हैं।
इन बातों से स्पष्ट होता है कि गुप्त काल वास्तव में ही भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग था।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

Punjab State Board PSEB 8th Class Home Science Book Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Home Science Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

PSEB 8th Class Home Science Guide नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
नियमबद्ध आदतों से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
बच्चों में समय पर तथा नियमित ढंग से खाने, पीने, सोने, टट्टी, पेशाब, खेलने आदि की आदतों का होना।

प्रश्न 2.
नियमबद्ध आदतों की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
अच्छे मनुष्य तथा अच्छे नागरिक बनने के लिए।

प्रश्न 3.
अपने परिवार की भलाई के साथ-साथ गाँव, शहर और देश के हित का ध्यान रखना कौन सा शिष्टाचार कहलाता है ?
उत्तर-
नागरिक शिष्टाचार।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
खाने-पीने और सोने की अच्छी आदतें कौन-सी हैं ?
उत्तर-
खाने की आदतों का नियमबद्ध होना ज़रूरी है। सुबह से लेकर सोने तक उनका टाइम-टेबल होना चाहिए। खाना प्रत्येक दिन समय के अनुसार और एक जगह बैठकर ही खाना चाहिए। हर समय खाते रहना न तो स्वास्थ्य के लिए ठीक है और न ही इससे खाने वाले की सन्तुष्टि होती है। अधिक खाने की आदत अच्छी नहीं है। खाना खाते समय किसी और बात के बारे में सोचना नहीं चाहिए और न ही खाना जल्दी-जल्दी खाना चाहिए। खाना खाने से पहले और बाद में हाथ धोना और कुल्ला करना चाहिए। रात को खाना खाने के बाद दाँतों पर ब्रुश करना चाहिए।

बच्चों के सोने का निश्चित समय होना चाहिए। शुरू से ही बच्चे को अपनी माँ से अलग और बिना लोरी गाए या थपथपाए सोने की आदत डालनी चाहिए। बच्चे को हमेशा खुले हवादार कमरे में सोना चाहिए। भारतीय लोगों की गर्मियों में बाहर सोने की आदत अच्छी है। इससे छूत की बीमारियों का डर कम रहता है। मुँह सिर लपेटकर सोने की आदत अच्छी नहीं है। इस तरह आदमी का सिर भारी सा रहता है और सुबह उठने के बाद ताज़ा महसूस नहीं करता।

प्रश्न 2.
बुरी आदतें कैसे पड़ जाती हैं ? इनसे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर-
युवावस्था में प्रारम्भिक वर्षों में कई बुरी आदतें पड़ जाती हैं। हमारे युवा वर्ग अनुशासन की कमी या बुरी संगति के कारण तम्बाकू, शराब या नशीली गोलियों की आदतों का शिकार हो जाते हैं। ये आदतें कई बार फैशन के तौर पर शुरू होती हैं। लेकिन फिर मनुष्य विवश होकर इनका गुलाम बन जाता है। जीवन में उचित उद्देश्य न होने के कारण नवयुवक विशेषकर विद्यार्थी नशीली गोलियों के आदी हो जाते हैं। कई ज़मींदार या फैक्टरियों के मालिक श्रमिकों से अधिक काम लेने के लिए स्वयं ही नशीली गोलियाँ उनको देते हैं। इन तीनों चीज़ों का स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन सबसे बढ़कर इसका आचरण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। अगर एक बार बुरी आदतें पड़ जाएं तो उसको दूर करना बहुत कठिन होता है। इसलिए शुरू से ही यह कोशिश करनी चाहिए कि बुरी आदतें न पड़ें। माता-पिता को चाहिए कि युवावस्था में बच्चों का विशेष ध्यान रखें । उनको प्यार और सहानुभूति दें और उनके कार्यों में रुचि लें ताकि वे बुरी संगत और बुरे कार्यों से बचे रह सकें।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तम शिष्टाचार से क्या भाव है ?
उत्तर-
अच्छी और नियमबद्ध आदतों के साथ हमारे लिए उत्तम शिष्टाचार भी बहुत आवश्यक है। हम अपने जीवन को अकेले ही नहीं जीना चाहते। समाज और परिवार में रहना हमारे लिए आवश्यक है। सुखमय, खुशहाल और लाभदायक जीवन के लिए अच्छे शिष्टाचार की आवश्यकता पड़ती है। इसके साथ ही व्यक्ति की सभ्यता की पहचान होती है।

प्रश्न 2.
सामाजिक शिष्टाचार क्यों आवश्यक है ? बुरे शिष्टाचार के क्या चिह्न
उत्तर-
सामाजिक शिष्टाचार रस्मों और रिवाजों के अनुकूल शिष्टाचार है जो किसी समाज में प्रचलित होता है। इसमें किसी समूह या किसी बिरादरी में ठीक प्रकार से विचरण करना शामिल होता है। किसी भी अवसर पर अपने आपको ठीक ढंग से ढालना इसमें शामिल है। ठीक प्रकार खाना, प्लेटें, प्यालियाँ, चम्मच, छुरियाँ, काँटों का ठीक इस्तेमाल करना भी इसमें आता है। यह सब कुछ सीखना ही पड़ता है और परिवार, पार्टी, बड़ी पार्टी या रस्मी समारोह में अपने कर्तव्य को निभा सकना अपने में एक कला है। मुँह खोलकर खाना, खाते समय ऊँचा बोलना या लड़ाई-झगड़ा करना, खाते-खाते हिलना या उठ-उठ कर चीजें पकड़ना, सब बुरे शिष्टाचार के चिह्न हैं।

प्रश्न 3.
नैतिक और सामाजिक शिष्टाचार में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
नैतिक और सामाजिक शिष्टाचार में अन्तर-

नैतिक शिष्टाचार सामाजिक शिष्टाचार
(1) इसमें दूसरे लोगों की ओर व्यवहार शामिल हैं। (1) इसमें मनुष्य एक सामाजिक संस्था में रहता है।
(2) इसमें अपने से बड़ों के लिए सम्मान, स्त्रियों के लिए सम्मान, माता-पिता के लिए सम्मान भाव, अध्यापकों के प्रति सम्मान, अजनबी लोगों से मीठा बोलना इत्यादि शामिल हैं। (2) इसमें अपने परिवार और घर की ही सफ़ाई और भलाई का ध्यान रखना चाहिए बल्कि अपने गाँव, शहर और देश के हित का भी ध्यान रखना चाहिएं।
(3) ऊँचा न बोलना, प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना, किसी को बात करते समय न टोकना आदि शिष्टाचार के चिह्न हैं। (3) इसमें सरकारी संस्थाएं और सरकारी चीज़ों को अपनी चीज़ों की तरह ही इस्तेमाल करना चाहिए।

 

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 4.
जीवन को सफल बनाने के लिए अच्छे शिष्टाचार और आचरण का क्या योगदान है ?
उत्तर-
अच्छी और नियमबद्ध आदतों के साथ हमारे लिए उत्तम शिष्टाचार भी बहुत आवश्यक है। हम अपने जीवन को अकेले ही रहीं जीना चाहते समाज और परिवार में रहना हमारे लिए आवश्यक है। सुखमय, खुशहाल और लाभदायक जीवन के लिए अच्छे शिष्टाचार की आवश्यकता पड़ती है। इसके साथ ही एक व्यक्ति की सभ्यता की पहचान होती है।

प्रश्न 5.
समाज के प्रति आप का क्या कर्त्तव्य है ?
उत्तर-
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। यदि कोई पुरस्कार, प्रतिष्ठा किसी मनुष्य को मिलती है तो समाज से ही मिलती है। ऐसा तभी होता है जब व्यक्ति समाज के लाभ के लिए अपने निजी स्वार्थों से परे कछ करता है। प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि जिस समाज में वह रहता है वहाँ के रीति रिवाजों के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करे। नशीली वस्तुओं का प्रयोग न किया जाए, गंदगी न फैलायी जाए, वातावरण को शुद्ध रखा जाए। देश की, समाज की सम्पत्ति को हानि न पहुँचाई जाए। यदि हम सभी अपने-अपने हिस्से का काम उचित ढंग से करेंगे तो यह समाज स्वर्ग बन सकता है।

Home Science Guide for Class 8 PSEB नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार Important Questions and Answers

I. बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
शिष्टाचार को कितने भागों में बांटा जा सकता है ?
(क) तीन
(ख) सात
(ग) दस
(घ) एक।
उत्तर-
(क) तीन

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 2.
सोने (नींद) से संबंधित गलत तथ्य हैं
(क) खुले हवादार कमरे में सोना चाहिए
(ख) मुँह ढक कर सोना चाहिए।
(ग) बच्चे के सोने का समय निश्चित होना चाहिए।
(घ) सभी तथ्य ग़लत हैं।
उत्तर-
(ख) मुँह ढक कर सोना चाहिए।

प्रश्न 3.
कौन-से शिष्टाचार में गांव, शहर तथा देश हित का ध्यान रखते हैं ?
(क) नागरिक
(ख) रीती-रिवाज के अनुकूल
(ग) नैतिक
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) नागरिक

II. ठीक/गलत बताएं

  1. भोजन करने की आदतें नियमबद्ध होनी चाहिए।
  2. अच्छे मनुष्य तथा अच्छे नागरिक बनने के लिए नियमबद्ध आदतों की आवश्यकता है।
  3. निजी जीवन में अच्छी आदतों का आधार बचपन से बनता है।

उत्तर-

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

III. रिक्त स्थान भरें

  1. निजी जीवन में …………. आदतों का आधार बचपन से बनता है।
  2. ……………. में प्रारम्भिक वर्षों में कई बुरी आदतें पड़ जाती हैं।
  3. मनुष्य एक ………….. संस्था में रहता है।
  4. मनुष्य को अपने ……………. तथा शिष्टाचार को ऊँचा रखना चाहिए।

उत्तर-

  1. नियमबद्ध,
  2. युवावस्था,
  3. सामाजिक,
  4. आचरण।

IV. एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
हमेशा कैसे कमरे में सोना चाहिए ?
उत्तर-
खुले हवादार कमरे में।

प्रश्न 2.
शिष्टाचार को कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर-
तीन।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 3.
कौन-सा शिष्टाचार हमारे समाज के रीति रिवाज़ों के अनुकूल है ?
उत्तर-
सामाजिक शिष्टाचार

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमारे जीवन में किसका बहुत बड़ा स्थान है ?
उत्तर-
हमारे जीवन में नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार का बहुत बड़ा स्थान है।

प्रश्न 2.
निजी जीवन में नियमबद्ध आदतों का आधार कब से बनता है ?
उत्तर-
निजी जीवन में नियमबद्ध आदतों का आधार बचपन से बनता है।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 3.
सबसे पहले बच्चों की कौन-सी आदत नियमबद्ध होना ज़रूरी है ?
उत्तर-
सबसे पहले बच्चों की खाने की आदतों का नियमबद्ध होना ज़रूरी है।

प्रश्न 4.
हर समय खाना स्वास्थ्य के लिए क्यों ठीक नहीं है ?
उत्तर-
हर समय खाते रहना न तो स्वास्थ्य के लिए ठीक है और न ही इससे खाने वाले की सन्तुष्टि होती है।

प्रश्न 5.
बच्चे के सोने का समय कैसा होना चाहिए ?
उत्तर-
बच्चे के सोने का समय निश्चित होना चाहिए।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 6.
मुँह सिर लपेटकर सोने से सिर भारी हो जाता है, क्यों ?
उत्तर-
मुँह सिर लपेटकर सोने की आदत अच्छी नहीं है। इस तरह सोने से आदमी अपनी ही अन्दर की गन्दी हवा में दोबारा साँस लेता है जिससे आदमी का सिर भारी हो जाता है।

प्रश्न 7.
निजी और राष्ट्रीय जीवन के लिए क्या आवश्यक है ?
उत्तर-
बुरी आदतों से अपने आपको दूर रखना निजी और राष्ट्रीय जीवन के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 8.
नवयुवक किस कमी के कारण तम्बाकू, शराब या नशीली गोलियों की आदतों का शिकार हो जाते हैं ?
उत्तर-
नवयुवक अनुशासन की कमी या बुरी संगति के कारण तम्बाकू, शराब या नशीली गोलियों की आदतों का शिकार हो जाते हैं।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 9.
अच्छी और नियमबद्ध आदर के साथ हमारे जीवन में और क्या आवश्यक
उत्तर-
अच्छी और नियमबद्ध आदतों के साथ हमारे लिए उत्तम शिष्टाचार भी बहुत आवश्यक है।

प्रश्न 10.
सरकारी संस्थाएँ और सरकारी चीज़ों को कैसे इस्तेमाल करना चाहिए ?
उत्तर-
सरकारी संस्थाएँ और सरकारी चीज़ों को अपनी चीज़ों की तरह ही इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 11.
शराबी व्यक्ति की दुर्घटना की सम्भावना अधिक क्यों होती है ?
उत्तर-
शराबी व्यक्ति में प्रतिक्रिया की अवधि सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा कम हो जाती है, इसलिए इनकी दुर्घटना की सम्भावना अधिक हो जाती है।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 12.
शराब से मुक्ति पाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं ?
उत्तर-
शराब की आदत से मुक्ति पाने के लिए सरकार ने कई राज्यों में ‘नशा मुक्ति केन्द्र’ खोले हैं।

प्रश्न 13.
शराब पीने वाले व्यक्ति के शरीर में किसकी मात्रा बढ़ जाती है ?
उत्तर-
शराब पीने वाले व्यक्ति के शरीर में रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
शराब किस प्रकार का पदार्थ है ?
उत्तर-
शराब एक तरल पदार्थ है जो पीने में कड़वी तथा जलन पैदा करने वाली होती है। इसे एथाइल एल्कोहल के नाम से भी जाना जाता है। भिन्न-भिन्न शराब के इस एल्कोहल की मात्रा अलग-अलग होती है। शराब के निरन्तर सेवन से व्यक्ति शराबी बन जाता है और निरन्तर अस्वस्थ होता जाता है।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 2.
अधिक शराब पीना मस्तिष्क के कार्य में किस प्रकार बाधा पहुँचाती है ?
उत्तर-
शराब पीने के थोड़ी देर पश्चात् ही रक्त प्रवाह के साथ मस्तिष्क में पहुँच जाती है और केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र की क्रिया में बाधा डालती है। यह मस्तिष्क के उस भाग को भी प्रभावित करती है जो हमारे सोचने, समझने व चेतन क्रियाओं पर नियन्त्रण करता है। यह मस्तिष्क के एक भाग में पाए जाने वाले एक रसायन पदार्थ की क्रियाशीलता को कम कर देता है जिससे जबान लड़खड़ाने लगती है।

प्रश्न 3.
शराब की आदत से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है ?
उत्तर-
आरम्भ में इसका सेवन करने वाले व्यक्ति का उपचार थोड़े से प्रयत्नों से सफलतापूर्वक किया जा सकता है। परंतु शराब की लत पड़ जाने पर इससे छुटकारा पाना कठिन है। शराबी व्यक्ति के दृढ़ संकल्प तथा नियमित रूप से उपयुक्त उपचार द्वारा इस घातक द्रव से मुक्ति पाई जा सकती है। आजकल सरकार द्वारा राज्य में कई स्थानों पर नशा मुक्ति केन्द्र खोले गए हैं जहाँ शराबी व्यक्तियों को इस आदत से छुटकारा दिलाने हेतु हर संभव प्रयास किए जाते हैं।

प्रश्न 4.
मदिरा सेवन करने वाले व्यक्ति के रक्त में शर्करा की मात्रा घट जाने से उसके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति के रक्त में शर्करा की मात्रा घट जाने से उसका शरीर क्षीण हो जाता है। यह हृदय की कार्यविधि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, क्योंकि इससे रुधिर वाहिकाएँ फैल जाती हैं। निरन्तर शराब पीने से धमनियों की दीवारें सख्त और भंगुर हो जाती हैं।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 5.
अच्छे शिष्टाचार से क्या भाव है ? शिष्टाचार कितनी प्रकार का होता है ? विस्तारपूर्वक लिखें।
अथवा
शिष्टाचार को कितने भागों में बांटा जा सकता है ? विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
शिष्टाचार मुख्यत: तीन तरह का होता है-

  1. सामाजिक
  2. नैतिक
  3. नागरिक स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 6.
सामाजिक शिष्टाचार का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 7.
सामाजिक तथा नैतिक शिष्टाचार में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

प्रश्न 8.
नैतिक शिष्टाचार के बारे में आप क्या जानते हो ?
उत्तर-
नैतिक मूल्यों की पालना करना नैतिक शिष्टाचार है। इसमें अन्य लोगों से अच्छा व्यवहार करना शामिल है। अपनों से बड़ों के लिए सम्मान, स्त्रियों के लिए सम्मान, माता-पिता के लिए सम्मान, अध्यापकों के लिए सम्मान, अज़नबी लोगों के साथ मीठा बोलना शामिल है ऊँचा न बोलना, प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना, किसी को बात करते समय न टोकना आदि शिष्टाचार के चिन्ह हैं।

प्रश्न 9.
नियमबद्ध आदतों की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
निजी जीवन में नियमबद्ध आदतों का आधार बचपन से बनता है। छोटे बच्चों को ये आदतें सिखानी पड़ती हैं। आजकल के व्यस्तता भरे जीवन में यह और भी आवश्यक है कि बच्चों की आदतें बिल्कुल नियमबद्ध हो । प्राचीन समय में माताएँ अपने बच्चों को जब वे रोते या कुछ माँगते थे, तो दूध दे देती थीं या खाने को कुछ पकड़ा देती थीं। उनके खाने, सोने, टट्टी, पेशाब करने, खेलने आदि का न कोई समय था और न ही कोई ठीक तरीका होता था। यह न सिर्फ उनके अपने शारीरिक और मानसिक विकास के लिए ठीक नहीं था, बल्कि पारिवारिक जीवन की अपनी मर्यादा को भी ठीक नहीं रहने देता था। इसलिए यह आवश्यक है कि बच्चों की आदतें नियमबद्ध हों और उनको शिक्षा बराबर दी जाए।

PSEB 8th Class Home Science Solutions Chapter 2 नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार

नियमबद्ध आदतें और उत्तम शिष्टाचार PSEB 8th Class Home Science Notes

  • खाना खाने की आदतों का नियमबद्ध होना ज़रूरी है। सुबह से लेकर सोने तक खाने का एक टाइम-टेबल होना चाहिए।
  • खाना प्रतिदिन समय के अनुसार और एक जगह पर बैठकर ही खाना चाहिए।
  • हर समय खाना खाते रहना न तो स्वास्थ्य के लिए ठीक है और न ही इसे.खाने वाले की सन्तुष्टि होती है।
  • बच्चे के सोने का निश्चित समय होना चाहिए।
  • शुरू से ही बच्चे को अपनी माँ से अलग और बिना लोरी गाये या थपथपाए सोने की आदत डालनी चाहिए।
  • हमेशा खुले हवादार कमरे में सोना चाहिए।
  • मुँह और सिर लपेट कर सोने की आदत अच्छी नहीं है। इस तरह सोने से आदमी अपनी ही अन्दर की गन्दी हवा में दोबारा साँस लेता है।
  • बुरी आदतों से अपने आपको दूर रखना न केवल निजी बल्कि राष्ट्रीय जीवन के लिए भी बहुत आवश्यक है।
  • नवयुवक अनुशासन की कमी या बुरी संगति के कारण तम्बाकू, शराब या नशीली गोलियों की आदतों का शिकार हो जाते हैं।
  • अच्छी और नियमबद्ध आदतों के साथ हमारे लिए उत्तम शिष्टाचार भी बहुत आवश्यक है।
  •  शिष्टाचार को कई भागों में बांटा जा सकता है-
    • पहली प्रकार का शिष्टाचार रस्मों और रिवाजों के अनुकूल शिष्टाचार है जो किसी समाज में प्रचलित होता है।
    • दूसरी प्रकार का शिष्टाचार नैतिक है।
    • तीसरी प्रकार का शिष्टाचार नागरिक दृष्टिकोण में प्रकट होता है।
  • सरकारी संस्थाएँ और सरकारी चीज़ों को अपनी चीज़ों की तरह ही इस्तेमाल में लाना चाहिए।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

Punjab State Board PSEB 7th Class Home Science Book Solutions Practical कुछ भोजन-नुस्खे Notes.

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

चावल उबालना

सामग्री—

  1. चावल — 1 गिलास
  2. नमक — 1/2 चम्मच
  3. पानी — 2 गिलास
  4. घी — 1 चम्मच

सब्जियाँ बनाने की विधि

मटर-पनीर की रसदार सब्जी

सामग्री—

  1. मटर फली — 500 ग्राम
  2. पनीर — 250 ग्राम
  3. प्याज — 2
  4. हरी मिर्च — 3
  5. अदरक — 1 बड़ी गांठ
  6. लहसुन— 3-4 टुकड़े
  7. टमाटर — 2
  8. दही — थोड़ा-सा
  9. नमक — आवश्यकतानुसार
  10. लाल मिर्च चूर्ण — 1/2 छोटी चम्मच
  11. हल्दी — 1/2 छोटी चम्मच
  12. धनिया चूर्ण — छोटी चम्मच
  13. हरा धनिया — थोड़ा-सा
  14. घी — तलने व सब्जी छौंकने के लिए।

विधि—मटर के दाने निकाल लें। पनीर के टुकड़ों को कड़ाही में गुलाबी रंग का तल लें। प्याज, अदरक व लहसुन को पीसकर मसाले मिलाकर गीला मसाला तैयार कर लें। देगची में घी गर्म करके मसाला भून लें। उसी में दही व टमाटर डाल दें और अच्छी तरह से भून लें, भुन जाने पर थोड़े पानी की छीटें लगा दें और भूनें। ऐसा दोतीन बार करें। जब मसाला अच्छी तरह भुन जाए तो मटर व पनीर को उसमें डालकर अच्छी तरह से भून लें फिर पानी व नमक डालकर ढक दें। मटर के गल जाने पर गर्म मसाला व हरा धनिया डालकर उतार लें। अगर सब्जी पर रंग नहीं आया तो थोड़ा घी कटोरी में गर्म करें। (नीचे उतारकर) उसमें थोड़ा रतनजोत डाल दें। थोड़ी देर में उसका लाल रंग घी में आ जायेगा। घी को कपड़े में छानकर सब्जी के ऊपर डालकर हिला दें।
कुल मात्रा—4-5 व्यक्तियों के लिए।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

भरे हुए बैंगन

सामग्री—

  1. बैंगन — 2500 ग्राम
  2. ब्रैड — एक पूरी
  3. आलू — 125 ग्राम मटर
  4. मटर — 125 ग्राम
  5. टमाटर — 1 छोटा
  6. गाजर — 125 ग्राम
  7. हरी मिर्च — 1-2 प्याज़
  8. नमक — स्वादानुसार
  9. घी — 50 ग्राम

विधि—मटर निकाल लें। आलू, गाजर, प्याज़ छील लें। इनको धोकर कद्दूकस कर लें। बैंगन को उबाल कर अधपका कर लें। ऊपर से काट कर अन्दर से खोखला कर लें। इस गुद्दे को भी कदूकस कर लें। टमाटर तथा हरी मिर्च को बारीक-बारीक काट लें। थोडे से घी में सारी सब्जी को भून कर पका लें ताकि पानी सूख जाए। इस सब्जी को बैंगन में भरें तथा इस के ऊपर ब्रैड के टुकड़ों को पीस कर लगा दें। कड़ाही में घी या तेल डालकर गर्म करो तथा बैंगन को तल लें। पकने पर चपाती अथवा पूरी के साथ परोसें।

भिण्डी की सब्जी

सामग्री—

  1. भिण्डी — 1/2 किलोग्राम
  2. मिर्च — 1/2 चम्मच
  3. हल्दी — 1/2 चम्मच
  4. आमचूर — 1/2 चम्मच
  5. हरी मिर्च — 1-2 प्याज़
  6. पिसा धनिया — 1/2 चम्मच
  7. गर्म मसाला — 1/2 चम्मच
  8. नमक — स्वादानुसार
  9. घी — 50 ग्राम

विधि—भिण्डीयों को अच्छी प्रकार धो लें तथा साफ कपड़े से पोंछ कर सुखा लें। छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। हरी मिर्च को काटें। प्याज़ को छील कर धो लें तथा लम्बा तथा पतला काटें। कड़ाही में घी डाल कर गर्म करें। गर्म होने पर प्याज़ इस में डाल दें। प्याज़ लाल हो जाएं तो भिण्डी, हरी मिर्च कटी हई, नमक, मिर्च, हल्दी तथा सुखा धनिया डालकर हल्की आंच पर पकाएं। भिण्डी गलने तक पकाएं तथा लेस भी न छोड़े। उतराने से पहले आमचूर तथा गर्म मसाला डालें तथा मिला दें।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

रसमिसे आलू

सामग्री—

  1. आलू — 250 ग्राम
  2. टमाटर — 2 छोटे
  3. अदरक — 1/2 इंच का टुकड़ा
  4. हरी मिर्च — 1-2
  5. पीसा धनिया — 1/2 चम्मच
  6. जीरा — 1/2 चम्मच
  7. हल्दी — 1/2 चम्मच
  8. मिर्च — स्वादानुसार
  9. नमक — स्वादानुसार

विधि—आलू उबाल लें तथा छील लें। इनके छोटे टुकड़े कर लें। अदरक, टमाटर, हरी मिर्च के भी छोटे टुकड़ें कर लें। पतीले में घी गर्म करने के लिए रखें। गर्म होने पर जीरा डाल दें। एक मिनट के बाद टमाटर, अदरक तथा हरी मिर्च भी डाल दें। जब टमाटर गल जाएं तो कटे हुए आलू, हल्दी, नमक, मिर्च तथा पीसा हुआ धनिया डाल दें। थोड़ी देर भून कर प्याला पानी डाल दें। 10 मिनट बाद 2-3 उबाले आने पर उतार लें।

खट्टी मीठी सब्जी

सामग्री—

  1. मटर — 150 ग्राम
  2. आलू — 150 ग्राम
  3. शिमला मिर्च — 100 ग्राम
  4. टमाटर — 500 ग्राम
  5. फ्रांस बीन — 100 ग्राम
  6. प्याज़ — 100 ग्राम
  7. गाजर — 100 ग्राम
  8. टमाटर की सास — 1/2 प्याला
  9. चीनी — 1 चम्मच
  10. नमक — स्वादानुसार
  11. घी — 1 चम्मच

विधि—सब्जियां छील कर धो लें तथा काट लें, टमाटर धो कर काट लें तथा आधा प्याला पानी पतीले में डालें तथा टमाटर इस में पका लें। पक जाएं तो बारीक छलनी से अच्छी तरह छान लें तथा बीज तथा छिलके फेंक दें। मटर निकाल लें तथा धो लें। पतीले में घी गर्म करें। प्याज़ को छीलकर मोटा-मोटा काटें तथा पतीले में डाल दें। एक मिनट के बाद बाकी सब्जियों को भी पतीले में डालें, नमक भी डालें तथा हल्की आंच पर पकाएं, सब्जियां गल जाएं, टमाटर का गुद्दा तथा चीनी डाल कर उबालें। इसमें सॉस डालें तथा गाढ़ा होने पर उतारें। सॉस गाढ़ी तरी की तरह हो। चावलों के साथ परोसें।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

बन्द गोभी और मटर की सब्जी

सामग्री—

  1. बन्द गोभी — 250 ग्राम
  2. मटर — 150 ग्राम
  3. अदरक — एक छोटा टुकड़ा
  4. हरी मिर्च — 1-2
  5. नींबू — 1
  6. जीरा — 1/2 चम्मच
  7. नमक, मिर्च, हल्दी, गर्म मसाला — आवश्यकतानुसार
  8. घी — एक कड़छी

विधि—बन्द गोभी को धो लें तथा बारीक काटें। मटर फलियों से निकाल लें तथा धो लें। घी को कड़ाही में गर्म करें तथा अदरक तथा जीरा डालें। कुछ देर बाद मटर, बन्दगोभी,, हरी मिर्च, नमक, हल्दी, मिर्च डाल दें। ढक कर कुछ देर के लिए पकायो ताकि गल जाए तथा पानी सूख जाएं। जब सब्जी तैयार हो जाए तो उतारने से पहले नींबू का रस तथा गर्म मसाला डाल दें। हिलाकर उतार लें।

आलू दम

सामग्री—

  1. आलू — 500 ग्राम
  2. प्याज — 2
  3. अदरक — 1 टुकड़ा
  4. टमाटर — 1 बड़ा
  5. जीरा, हल्दी, लाला-मिर्च, धनिया चूर्ण रूप में — आवश्यकतानुसार
  6. नमक — आवश्यकतानुसार
  7. गर्म मसाला — 1/2 चम्मच
  8. घी — आलुओं को तलने के लिए
  9. तथा मसाला भूनने के लिए
  10. हरा धनिया — थोड़ा-सा

विधि—आलुओं को अच्छी प्रकार धोकर छील लें। अब प्रत्येक आलू को कांटे या गोदने से घुमा-घुमाकर गोद लें। कड़ाही में घी डालकर गर्म करें। इस घी में गोदे हुए आलुओं को सुर्ख होने तक तल लें। प्याज, अदरक तथा अन्य मसाले मिलाकर मिक्सी में या सिलबट्टे पर गीला मसाला तैयार कर लें। अब इस मसाले को घी में भुनें। भूनते समय ही टमाटर को छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में मसाले में मिला दें। टमाटर एकदम मिल जाना चाहिए। टमाटर के स्थान पर दही भी डाला जा सकता है। भूनते समय मसाले को करछुल से चलाते रहें। अब तले हुए आलुओं को भुनते हुए मसाले में डालकर अच्छी तरह चला दें। पानी न डालें। मंदी आंच पर पकाएं। आलुओं के गल जाने पर गर्म मसाला और हरा धनिया डालकर उतार लें।
कुल मात्रा—4 व्यक्तियों के लिए।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

बैंगन का भुरता

सामग्री—

  1. गोल बैंगन — 200 ग्राम
  2. प्याज — 1
  3. टमाटर — 1
  4. अदरक — 1 गांठ
  5. नमक — आवश्यकतानुसार
  6. जीरा — 1/2 चम्मच
  7. हल्दी चूर्ण — 1/2 छोटी
  8. चम्मच धनिया — 1/2 छोटी चम्मच
  9. हरी मिर्च — 2
  10. हरा धनिया — -थोड़ा-सा
  11. घी — 2 चम्मच

विधि—गोल बैंगन को थोड़ा चीरकर देख लें कि अन्दर वह खराब तो नहीं है, कोई कीड़ा आदि तो नहीं है। इसे आग (अंगारों) पर भून लें। अच्छी तरह भुन जाने के बाद उसका छिलका उतारकर उसे हाथ से कुचल दें। अच्छी तरह पका बैंगन हाथ से मसला जाता है। प्याज व अदरक छील लें। प्याज, अदरक व हरी मिर्च को बारीक काट लें। टमाटर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें । कड़ाही में घी डालकर गर्म करें। इसमें जीरे का छौंक लगाकर प्याज, अदरक, हरी मिर्च डालकर भूनें। हल्दी, मिर्च, नमक भी डाल दें। भूनते-भूनते ही टमाटर डाल दें और हिलाते जाएं। जब मसाला सुर्ख हो जाए बैंगन का कुचला डालकर खूब मिलाकर मंद आंच पर थोड़ी देर पकाएं। पूरी तरह पकने या भुनने पर हरे धनिया की पत्तियां कतरकर छिड़ककर परोसें। टमाटर के स्थान पर खटाई चूर्ण या नींबू का भी प्रयोग किया जा सकता है।

कुल मात्रा—2-3 व्यक्तियों के लिए।
यदि प्याज नहीं डालना हो तो घी या तेल में हींग या राई, जीरे और मिर्च का छौंक देकर थोड़ा दही, खटाई चूर्ण या टमाटर भून लें। इसमें बैंगन का (भुरता) तथा नमक डालकर भूनें। भुन जाने पर उसमें हरे धनिया की पत्ती कतरकर छिड़क दें।
नोट-आलू, केला, अरूई, जिमीकन्द, मटर, चना आदि के भुरते के लिए उसे उबालकर कुचल दिया जाता है। कुचली हुई सब्जी या भुरता, बैंगन के भुरते के समान ही बनाया जाता है।

फूलगोभी-आलू

सामग्री—

  1. फूलगोभी — 1 फूल
  2. आलू — 250 ग्राम
  3. प्याज — 2
  4. लहसुन — 2-3 टुकड़े
  5. खटाई चूर्ण — 1 छोटी चम्मच
  6. जीरा — 1/2 छोटी चम्मच
  7. हल्दी चूर्ण — 1/2 छोटी चम्मच
  8. हरा धनिया — थोड़ा-सा
  9. नमक — आवश्यकतानुसार
  10. गर्म मसाला — 1/212 छोटी चम्मच
  11. अदरक — 1 गांठ
  12. हरी मिर्च — 2 चम्मच

विधि—आलू धोकर, पतला छीलकर मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लें। फूलगोभी को भी मध्यम आकार के टुकड़ों में काटकर धो लें। प्याज, लहसुन, अदरक को छीलकर बारीक काट लें। हरी मिर्च भी बारीक काट लें। कड़ाही या पतीली में घी गर्म करें और जीरे का छौंक देकर प्याज, लहसुन, अदरक और हरी मिर्च को भूनें। इसी में आलू तथा गोभी के टुकड़े डालकर कुछ देर तक भूनें। हल्दी, मिर्च, धनिया, नमक आदि मसाले भी डाल दें। सब्जी को अच्छी तरह हिलाकर ढककर मंद आंच पर पकाएं। आल तथा गोभी गल जाने पर उसमें गर्म मसाला तथा खटाई चूर्ण डालकर 5-10 मिनट तक आंच पर रहने दें। फिर उतार लें।
नोट-केवल गोभी की सब्जी बनानी हो तो आलू डालने की आवश्यकता नहीं। इसी प्रकार गोभी, मटर, परवल, आलू आदि की सब्जी बनायी जा सकती है।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

पतली खिचड़ी

सामग्री—

  1. चावल — 1 कटोरी
  2. मूंग की धुली हुई दाल — 1 कटोरी
  3. जीरा — 1 चम्मच
  4. प्याज — 1/2 टुकड़ा
  5. नमक — 1/2 चम्मच
  6. पानी — 5 कटोरी।

विधि—दाल और चावलों को चुनकर अलग-अलग भिगो लें। पाँच कटोरी पानी उबालकर दाल को 10-15 मिनट तक पका लें। इसके साथ ही नमक, जीरा और कटा हुआ प्याज भी डाल दें। पतीले को ढककर पकाओ ताकि चावल और दाल गलकर आपस में मिल जाएं। यह खिचड़ी पतली होनी चाहिए। यह बीमारों को दी जाती है। अगर रोगी पचा सके तो घी भी डाला जा सकता है।
नोट-इसमें अधिक मिर्च मसाले का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

खिचड़ी

सामग्री—

  1. चावल — 2 बड़े चम्मच
  2. मूंग की दाल — 2 बड़े चम्मच
  3. हल्दी — आवश्यकतानुसार
  4. नमक — इच्छानुसार
  5. पानी — 2 गिलास या आवश्यकतानुसार

विधि—दाल और चावलों दोनों को भली प्रकार करके धो लें। उबलते हुए पानी में दाल और चावल डाल दें। साथ ही नमक और हल्दी भी डाल दें। जब दाल, चावल खूब अच्छी तरह गल जाएं तो खिचड़ी ठण्डी करके रोगी को खाने के लिए दें।
खिचड़ी विशेष रूप से मलेरिया के रोगी को दी जाती है। इसमें प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट पाये जाते हैं। मलेरिया के रोगी को यह कटी अदरक तथा नींबू के अर्क व पेचिश के रोगी को दही के साथ दी जा सकती है।
नोट-चावलों के स्थान पर दलिया और मूंग की धुली दाल का प्रयोग किया जा सकता है।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

दलिया

सागम्री—

  1. दलिया — 1 बड़ा चम्मच
  2. पानी — 1 गिलास या आवश्यकतानुसार
  3. चीनी व दूध — इच्छानुसार (यदि मीठा बनाना हो)
  4. नमक व नींबू — इच्छानुसार (यदि नमकीन बनाना हो)

विधि—दलिये को बर्तन में खूब भून लें। गुलाबी रंग का हो जाने पर उबलते हुए पानी में — पकाएं। जब दलिया भली प्रकार से पक जाये तो दूध व चीनी मिलाकर रोगी को दें। यदि रोगी नमकीन खाना चाहे तो दलिये में इच्छानुसार नमक, काली मिर्च व नींबू डालकर दिया जा सकता है।
नोट-यह शक्तिवर्धक हल्का भोजन है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व लवण पाए जाते हैं। यह रोगी के साथ-साथ बच्चों को नाश्ते में भी दिया जा सकता है।

साबूदाने की खीर

सामग्री—

  1. साबूदाना — 1 या 2 बड़े चम्मच
  2. दूध — 2 कप
  3. चीनी — 1 चम्मच अथवा इच्छानुसार

विधि—सर्वप्रथम साबूदाने को भली-भांति साफ़ कर लें। उबलते हुए पानी में इतना पका लें कि साबूदाना भली-भांति गल जाये, तब दूध व चीनी मिलाकर रोगी को खाने के लिए दें।
नोट-साबूदाना एक हल्का व शीघ्र पचने वाला स्वादिष्ट भोजन है। इसमें कार्बोहाइड्रेट व लवण पाये जाते हैं। बुखार व गले में दर्द होने पर यह रोगी को दिया जाता है।

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

सादी कॉफी

सामग्री—

  1. कॉफी पाउडर – 1/2 से 3/4 छोटी चम्मच
  2. चीनी — 1 से 1 1/2 छोटी चम्मच
  3. गर्म दूध — 2-3 बड़े चम्मच
  4. उबलता हुआ पानी — 1 कप

विधि—पानी को उबाल में तथा पहले से गर्म की हुई केतली में डालें (जैसा गर्म चाय के लिए किया गया है) कॉफी बनाते समय कॉफी पाउडर को कप में डालकर गर्म पानी डालें तथा उन्हें मिलाएं। इसमें गर्म दूध व चीनी डालकर परोसें।
कुल मात्रा—1 कप

एस्प्रेसो कॉफी

सामग्री—

  1. कॉफी पाउडर — 3/4 छोटी चम्मच
  2. चीनी — 1/2 छोटी चम्मच
  3. दूध — 1/2 कप
  4. पानी — 1⁄2 कप
  5. चॉकलेट पाउडर — थोड़ा-सा।

विधि—कप में कॉफी और चीनी डालकर थोड़े से पानी की सहायता से उसे अच्छी प्रकार फेंट लें। दूध और पानी मिलाकर उबाल लें। उबला हुआ दूध और पानी फेंटी हुई कॉफी में मिलाकर ऊपर से थोड़ा-सा चॉकलेट पाउडर छिड़ककर परोसें।
कुल मात्रा—1 कप

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

ठण्डी कॉफी

सामग्री—

  1. दूध — 1 कप
  2. कॉफी पाउडर — 1 छोटी चम्मच
  3. चीनी — 1 छोटी चम्मच

विधि—दूध को उबालकर ठण्डा कर लें। कॉफी पाउडर और चीनी को मिलाकर उनमें दूध डालें और भली प्रकार मिलाएं। अब इसमें बर्फ को चूरा करके अच्छी तरह मिला लें। यदि हो सके तो ऊपर के मिश्रण को मिक्सी में फेंट लें। परोसते समय यदि चाहें तो ऊपर क्रीम या आइसक्रीम का प्रयोग कर सकते हैं।
कुल मात्रा—1 छोटा गिलास

नींबू वाली ठण्डी चाय

सामग्री—

  1. चाय की पत्ती — छोटी चम्मच
  2. उबला हुआ पानी — 1 कप
  3. चीनी, नींबू — स्वाद के अनुसार
  4. बर्फ — कुछ टुकड़े

विधि—गर्म चाय की भांति चाय बनाकर छान लें। इसमें चीनी मिलाकर कुटी हुई बर्फ डाल दें। अब इसे नींबू के साथ परोसें।
कुल मात्रा—1 छोटा गिलास

PSEB 7th Class Home Science Practical कुछ भोजन-नुस्खे

शिकंजवी

सामग्री—

  1. नींबू — 2
  2. पानी — 500 मि० ली०
  3. चीनी — आवश्यकतानुसार
  4. काली मिर्च — स्वादानुसार
  5. बर्फ — ठण्डा करने के लिए।

विधि—पानी में चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। फिर उसमें नींबू का रस मिला दें। इस घोल को छान लें और स्वादानुसार नमक व काली मिर्च डालें। ठण्डा करने के लिए बर्फ डालें। शिकंजवी तैयार है, कांच के गिलासों में परोसें।

लस्सी

सामग्री—

  1. दही — 100 पानी
  2. पानी — 1 गिलास
  3. नमक या चीनी — आवश्यकता अनुसार

विधि—दही को गहरे बर्तन जैसे जग आदि में डाल कर मधानी से मथ लें। इसमें पानी डाले तथा फिर से फैंटे। स्वाद अनुसार नमक या चीनी डाल कर परोसे। ठण्डा करने के लिए बर्फ का टुकड़ा भी डाल सकते हैं।

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Punjab State Board PSEB 8th Class Science Book Solutions  Chapter 18 Pollution of Air and Water Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Science Chapter 18 Pollution of Air and Water

PSEB 8th Class Science Guide Pollution of Air and Water Textbook Questions and Answers

Exercises

Question 1.
What are the different ways in which water gets contaminated?
Answer:
There are many different ways in which water gets contaminated such as :

  • By washing, bathing or other household activities.
  • By sewage
  • By toxic chemicals thrown by industries.
  • By silt.
  • By garbage and dead bodies dumped in water resources.
  • By fertilizers, insecticides, pesticides etc.
  • By deposition of minerals or metals in the river bed.

Question 2.
At an individual level, how can you help reduce air pollution?
Answer:
Steps taken to reduce air pollution at an individual level.

  • Automobile use is to be reduced and is maintained properly. Unleaded petrol or diesel must be used.
  • Burning of leaves, tyres etc. must be stopped.
  • Plant trees or vegetation around the residential areas.
  • Use of public transport.

Question 3.
Clear, transparent water is always fit for drinking. Comment.
Answer:
It is not a correct statement. Clear, transparent water may appear clean, but it is not pure. It may contain dissolved impurities and many microorganisms. These microorganisms may be carriers of diseases. So, water fit for drinking is clean, clear, transparent, odourless, devoid of germs and dissolved impurities. Best way to get pure water is boiling. Boiling kills the germs and boiled water can be used for drinking purposes.

Question 4.
You are a member of the municipal body of your town. Make a list of measures that would help your town to ensure the supply of clean water to all its residents.
Answer:
List of measures to obtain clean water.

  • Industrial waste must be treated before throwing into water resources.
  • Sewage must be treated by physical and chemical methods before dumping in water resources.

Question 5.
Explain the differences between pure air and polluted air.
Answer:
Differences between Pure air and Polluted air.

Pure air Polluted air
1. The air is clear and transparent. 1. The air is dirty and translucent.
2. No smoke and dust particles can be seen. 2. Smoke and dust particles are in high amounts.
3. No odour is there. 3. It may have foul smell.
4. Microorganisms are absent. 4. Microorganisms are present.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 6.
Explain circumstances leading to acid rain. How does acid rain affect us?
Answer:
Acid Rain. When NO2, N2O, SO2 and SO3 produced from the incomplete combustion of fossil fuels and by smelting of non-ferrous metals combine with water to form HNO3, H2SO3 and H2SO4 and fall down in the form of rain, it is called acid rain. It destroys crops, wild plants, steel rail tracks and electrical equipment. It causes irritation of eyes, nose and throat.

Question 7.
Which of the following is not a greenhouse gas?
[а] Carbon dioxide
[b] Sulphur dioxide
[c] Methane
[d] Nitrogen.
Answer:
[d] Nitrogen.

Question 8.
Describe the ‘Green House Effect’ in your own words.
Answer:
Green House Effect. Carbon dioxide is present in the atmosphere in very small proportion. It helps in photosynthesis process. It is also absorbed by oceans to form carbonate rocks. It also produces greenhouse effect. The heating of the earth due to trapped radiations is called greenhouse effect. Our sun emits light consisting of ultraviolet and infrared radiations. Ultraviolet radiations are absorbed by ozone layer, but infrared radiations pass through the atmosphere and reaches the surface of the earth.

Some of the rays are reflected back. The carbon dioxide absorbs these reflected rays. Since infrared radiations have a heating effect, the atmosphere gets heated up. There are four gases which can trap the infrared radiations. These are carbon dioxide (CO2), water vapour (H2O), ozone (O3) and methane (CH4). Out of these four, carbon dioxide is uniformly distributed in the atmosphere so it contributes mainly towards the greenhouse effect. The name greenhouse is derived from glasshouse in which green plants are kept.

Question 9.
Prepare a brief speech on global warming. You have to make in your class.
Answer:
Global Warming. Global warming as the name suggests is the increase in temperature of the globe i.e. the average temperature of the atmosphere has increased. Few gases like CO2, methane, ozone are responsible for it.

The quantity of these gases is increasing day by day in the atmosphere. If this is not checked in time, the temperature will have a big rise and there will be hazards all around us. Such as, glaciers will melt, lower area will get submerged in water, rainfall will be affected, sea level will rise affecting production of crops, forests, etc and it will also affect the lifestyle of living organisms. So special and immediate measures are to be taken to stop global warming.

Question 10.
Describe the threat to the beauty of the Taj Mahal.
Answer:
Taj Mahal is one of the seven wonders of the world. It is a white building made up of white marbles. The monument is being threatened by air pollution. The area surrounding Taj is congested with many harmful gases such as Sulphur dioxide, Nitrogen oxides etc.

This is being emitted by burning of fossil fuels by industries established around the Taj. These gases dissolve in rainwater to form acid rain. This acid rain falls on marble, react with it and dissolves and tarnishes it. If no steps are taken to minimise the fall of acid rain, one day marble monument will remain no more and all the marble will get damaged.

Question 11.
Why does the increased level of nutrients in the water? effect the survival of aquatic organisms?
Answer:
With increased quantities of nutrients (nitrates, phosphates etc.) the algae flourish in the water. When this algae die, decomposers decompose it, using oxygen present in water. Thus, there is decrease in oxygen level in water, which affect the survival of aquatic organisms.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

PSEB Solutions for Class 8 Science Pollution of Air and Water Important Questions and Answers

Multiple Choice Questions

Question 1.
Ankush noticed that air pollution has increased in the market due to vehicles. Which gas is emitted by vehicles in a large quantity that causes air pollution?
(a) Carbon monoxide
(b) Carbon dioxide
(c) Both (a) and (b)
(d) None of the above.
Answer:
(c) Both (a) and (b).

Question 2.
Which of the following is greenhouse gas?
(a) Carbon dioxide
(b) Carbon monoxide
(c) Oxygen
(d) Hydrogen
Answer:
(a) Carbon dioxide.

Question 3.
The source of air pollution is:
(a) Burning forests
(b) Gas emitted by automobiles
(c) Smoke of burning wood
(d) All of these.
Answer:
(d) All of these.

Question 4.
Which of the gas present in air contains 78%?
(a) Oxygen
(b) Nitrogen
(c) Carbon dioxide
(d) Argon.
Answer:
(b) Nitrogen.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 5.
Which fuel is being used in vehicles in big cities like Delhi?
(a) L.P.G.
(b) Biogas
(c) C.N.G.
(d) Natural gas.
Answer:
(c) C.N.G.

Question 6.
Which diseases are caused due to polluted water?
(a) Cholera
(b) Typhoid
(c) Jaundice
(d) All of these
Answer:
(d) All of these.

Question 7.
The cause of diseases related to respiration in children is :
(a) Oxygen
(b) Nitrogen
(c) Water vapour
(d) Smog
Answer:
(d) Smog.

Question 8.
The ordinary chemical method to purify the water is :
(a) Boiling
(b) Filtering
(c) Chlorination
(d) All of the above
Answer:
(c) Chlorination

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 9.
When was Ganga cleanliness planning started?
(a) In 1965
(b) In 1975
(c) In 1995
(d) In 1985.
Answer:
(d) In 1985.

Question 10.
Which gas reduces the capacity of absorption of oxygen in blood?
(a) Nitrogen
(b) Carbon monoxide
(c) Carbon dioxide
(d) Oxygen.
Answer:
(b) Carbon monoxide

Question 11.
What is the percentage of population which does not get the required water?
(a) 40%
(b) 30%
(c) 25%
(d) 15%
Answer:
(c) 25%

Question 12.
Which of the following is not greenhouse gas?
(a) Carbon dioxide
(b) Sulphur dioxide
(c) Methane
(d) Nitrogen.
Answer:
(d) Nitrogen.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Who is responsible for deterioration of quality of atmosphere?
Answer:
Man and his activities.

Question 2.
What conditions of environment are lacking these days?
Answer:
Clear sky, fresh air, clean water etc.

Question 3.
What is composition of air?
Answer:
Composition of Air. Air is mixture of gases containing 78% nitrogen, 21% of oxygen and 1% of other gases such as carbon dioxide, carbon monoxide, water vapour, argon, ozone, methane etc.

Question 4.
Which is the main air pollutant?
Answer:
Smoke.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 5.
What are the main causes of smoke?
Answer:
Causes of smoke :

  • Automobiles
  • Burning of fuels

Question 6.
Name natural air pollutants.
Answer:
Smoke, dust.

Question 7.
Which disease is caused by air pollution?
Answer:
Respiratory problems.

Question 8.
Which gases are released by vehicles?
Answer:
Carbon dioxide, carbon monoxide, nitrogen oxides, smoke etc.

Question 9.
Which gas reduces the capacity of the blood to carry oxygen?
Answer:
Carbon monoxide.

Question 10.
What is smog?
Answer:
Smog. Smog is made up of smoke and fog.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 11.
Name some Breathing/Respiratory Problems.
Answer:
Respiratory problems- Asthma, Cough, Wheezing in children etc.

Question 12.
Which chemicals are used in refrigerators, air conditioners, perfumes etc?
Answer:
Chloro-fluoro carbons.

Question 13.
What is ill effect of chloro-fluoro carbons?
Answer:
Chloro-fluoro carbons (CFCs) damage the ozone layer.

Question 14.
Why is ozone layer important?
Answer:
It protects the earth from UV radiation of the sun.

Question 15.
What is the source of suspended solid particles in air?
Answer:
Sources of solid particles in air:

  • Burning of petrol, diesel in automobiles,
  • Industrial processes such as steelmaking and mining
  • Power plants.

Question 16.
What is the effect of suspended particles in air?
Answer:
They reduce the visibility.

Question 17.
Which industries are responsible for acid rain around Taj in Agra?
Answer:
Rubber processing, Automobile, Chemical, Mathura oil refinery.

Question 18.
Which are acid gases?
Answer:
Acid-gases. Sulphur dioxide, Sulphur trioxide, Nitrous oxide.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 19.
Name two clean fuels.
Answer:
LPG and CNG.

Question 20.
Which gas has tendency to trap sun radiations and warm the atmosphere?
Answer:
Carbon dioxide.

Question 21.
Name some greenhouse gases.
Answer:
Green House gases. Methane, ozone, water vapours, nitrous oxide, carbon dioxide.

Question 22.
Which protocol has been signed to minimize greenhouse effect?
Answer:
The Kyoto protocol.

Question 23.
Name few alternate fuels.
Answer:
Alternate fuels. Solar energy, Hydropower, Wind energy.

Question 24.
When is Van Mahotsav celebrated in India?
Answer:
In the month of July of every year.

Question 25.
How should dry leaves be disposed?
Answer:
Dry leaves must be put in compost pit to obtain compost.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 26.
Which characteristics of water can get changed?
Answer:
Smell, colour and acidity.

Question 27.
Name few water pollutants.
Answer:
Water pollutants. Sewage, toxic chemicals, silt; insecticides, weedicides etc.

Short Answer Type Questions

Question 1.
Give two examples of air pollutants.
Answer:
Examples of air pollutants:

  1. Oxides of Sulphur and Nitrogen.
  2. Radioactive fallout.

Question 2.
What are the major sources of air pollution?
Answer:
The major sources of air pollution are as follows :

  • Industries. Paper and pulp industries, steel plants, petroleum refineries and chemical plants.
  • Automobiles
  • Smoke.

Question 3.
What is sewage?
Answer:
Sewage. The release of huge quantities of municipal and domestic wastes is called sewage. They contain certain organic wastes, toxic substances, which damage biological activities.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 4.
Why is the sewage water called polluted water?
Answer:
Sewage water contains human urine and faeces, cloth washings and industrial wastes. This water is totally unfit for drinking, washing and for other purposes. It lacks oxygen. It gives foul smell. It can lead to spread of water-borne diseases. Hence, the sewage water is called polluted water.

Question 5.
How should air pollution be controlled?
Answer:
Steps to control air pollution :

  • Combustible solid wastes should tie burnt in incinerators.
  • Automobiles must be either made to eliminate the use of gasoline and diesel oil or complete combustion is obtained in the engine so that harmful products are not emitted.
  • Excessive and undesirable burning of vegetation should be stopped.

Question 6.
How can pollution of river water be controlled?
Answer:
Pollution of river water can be controlled by :

  • Mechanical and chemical treatment of sewage at its origin and then allowing the clean, harmless effluents (industrial waste) to flow into the river.
  • Shifting of present chemical factories and banning the construction of new factories on the river banks.

Question 7.
In what way chloro-fluoro carbons are harmful?
Answer:
Chloro-fluoro carbons deplete the ozone layer in the atmosphere which protects earthly organisms from harmful ultraviolet radiations.

Question 8.
How does carbon monoxide act on humans?
Answer:
Haemoglobin of the blood absorbs carbon monoxide. This in turn reduces oxygen-carrying capacity of blood. The non-availability of sufficient oxygen to the tissues results in death.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 9.
Which metals are harmful for health?
Answer:
Lead, Arsenic, Mercury.

Question 10.
Depict the important pollutants of air.
Answer:
Air pollutants.
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water 1

Question 11.
Write the harmful effects of greenhouse effect.
Answer:
Harmful effects of Greenhouse effect. The greenhouse effect will increase the temperature of earth’s surface. It will make the life of men and animals uncomfortable. The scientists have estimated that the sea level will rise by 100 m if the global temperature rises by 3-6°C due to greenhouse effect. If it happens, the coastal regions and many islands will be submerged causing great damage.

Question 12.
Why is Ganga river more polluted at Kanpur?
Answer:
At Kanpur, the amount of water and flow is comparatively less and slow. Near about 5000 industries of Kanpur discharge toxic chemicals into the river. People bath, wash clothes, defecate, throw garbage, flowers, worship material and polythene bags in the river.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 13.
How is ozone layer help to us?
Answer:
Ozone layer of atmosphere is very important for all living organisms. It absorbs the harmful ultraviolet rays radiated from the sun which otherwise can give rise to fatal diseases like skin cancer in humans. These rays are also harmful for crops.

Question 14.
Explain the ozone layer.
Answer:
Ozone layer. The ozone gas found in the stratosphere of atmosphere is known as ozone layer. It protects us from ultraviolet rays of the sun. A poisonous substance chlorofluorocarbon is used in refrigerators and air conditioners which attenuates the ozone layer. This is known as depletion of ozone layer.

Question 15.
Which types of problems can arise with an increase in global warming? Write about three problems.
Answer:
Global warming can create following problems.

  • Summers will become more hot and dry and winters will be damp and colder.
  • Glaciers will melt down due to increase in global warming and level of sea will rise by two feet.
  • Water supplies would become disrupted and droughts would be more common.

Question 16.
How the industries located on the bank of Ganga river contribute to pollute it?
Answer:
There ae established industries in very big number in the cities and towns located on the bank of Ganga river. Only in Kanpur, there are more than 5000 industrial units which are adding fertilizers, detergents, poisonous waste of leather and paint industries, sewage, insecticides and garbage etc. in Ganga Paper factories, sugar mills and other chemical factories are polluting the water of Ganga by discharging their wastes in huge amount.

Question 17.
What instructions are issued by government for industries to maintain the cleanliness of holy rivers like Ganga?
Answer:
Oil refineries, textile and sugar mills, paper factories and chemical factories discharging their industries wastes directly into the rivers. As a result, the water of rivers is becoming poisonous. To check it government have passed regulations. According to these regulations, industries are to treat the waste produced for discharging it into water, but quite often the rules are not followed.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 18.
How can you help to reduce air pollution. Suggest any two measures.
Answer:
Steps to control air pollution

  1. Combustible solid wastes should be burnt in incinerators.
  2. Automobiles must be either made to eliminate the use of gasoline and diesel oil or complete combustion is obtained in the engine so that harmful products are not emitted.

Question 19.
List sources of noise pollution in your surroundings. Explain how noise pollution is harmful for human beings.
Answer:
Sources of noise pollution :

  1. Sounds of vehicles.
  2. Loudspeakers.
  3. Working Machines.
  4. Bursting of crackers.
  5. Desert coolers.
  6. Radios and televisions at high volumes.
  7. Kitchen appliances.
  8. Hawkers.

Harmful effects of noise pollution :

  • Lack of sleep.
  • Hypertension.
  • Anxiety.
  • Partial deafness.

Long Answer Type Questions

Question 1.
What steps would you suggest for minimising the air pollution around you?
Answer:
The air pollution can be minimised by the following steps :

  • Using alternative sources of energy, that are non-polluting such as solar energy, wind energy etc.
  • Using lead-free fuels, such as Compressed Natural Gas (CNG) for running cars, buses, trucks etc. The vehicles must be regularly checked for pollution.
  • Setting factories away from residential areas and their chimneys must have filters.
  • Planting more and more trees, as they purify air.
  • Not using bags made of plastic, instead using cloth and jute bags.
  • Recycling materials, such as paper, metal etc.
  • Avoiding burning of dried leaves, tree branches, paper, garbage etc. as the smoke released causes pollution.
  • Saving electricity as it would amount to burning of less fossil fuels.
  • Reducing the use of aerosols (i.e. particles of solid, or liquid matter) that can remain suspended in air from a few minutes to many months depending on particle size and weights, such as perfumes, deodorants etc.
  • Avoiding smoking and encouraging others also to do the same.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 2.
Describe the role of sewage as water pollutant.
Answer:
Sewage can be classified into domestic sewage and industrial wastes. Domestic sewage is one of the most primary sources of water pollution. The industrial wastes also play major role in the pollution of water.
Sewage pollutes rivers, lakes and even oceans. Polluted waters are contaminated with infectious agents for cholera, typhoid, dysentery, jaundice and skin diseases.

In sewage water, there is depletion of oxygen, because the same is required for degradation of sewage. Reduced availability of oxygen causes suffocation and kills many aquatic animals especially fishes. Polluted water becomes unfit for drinking and cooking. The poisonous substances which get dissolved in water, make it unsuitable for aquatic life. It is unfit for agricultural operations also. Scum and sludge get collected and make the water unfit for boating and other recreational purposes.

Question 3.
Write a short note on air pollution.
Answer:
Air Pollution. Air is never found pure due to natural and man-made pollution. An undesirable change in the physical, chemical and biological characteristics of air is called air pollution. The substances which pollute the air are called air pollutants. The common air pollutants are carbon monoxide, carbon dioxide, sulphur dioxide, oxides of nitrogen and suspended particulate matter.

The air pollution is caused by natural processes and human activities. Air pollution has very adverse effects on human beings. It affects raw materials, industrial processes, living conditions and cultural assets like historical monuments. It is posing main dangers to our lives.

Question 4.
Define acidic gases. Give examples. Can you observe its effects on newly constructed buildings made of marble?
Answer:
The gases which combine with water to form acids are called acidic gases.
Example: Sulphur dioxide (SO2), nitrogen dioxide (NO2). Effects on buildings made of marble.

The acidic gases (SO2 and NO2) react with water present in the air and get converted to acids :
2SO2 + O2 + 2H2O → 2H2SO4 Sulphuric acid
4NO2 + O2 + 2H2O → 4HNO3 Nitric acid

The acids come down to earth with rainwater. The rain containing acids is called acid rain. The acid damages the marble stone (CaCO3) by dissolving it.
CaCO3 + H2SO4 → CaSO4 + CO2↑ + H2O
CaCO3 + 2HNO3 → Ca(NO3)2 + CO2 ↑+ H2O Marble stone
Therefore, acidic gases damage the buildings made of marble.

Question 5.
Explain ozone depletion.
Answer:
Ozone Depletion:
Ozone layer acts as protector of life on earth. Due to human activities, CFCs produced by man depletes the ozone layer, more ultraviolet radiations reach the surface of earth. It is termed ozone depletion.

Effects of ozone depletion.

  • UV radiation strikes the earth and these radiations cause skin cancer and damage to eye.
  • These ultraviolet radiations damage the defence (immune) system of the body.
  • It may lead to variations in global rainfall.
  • It causes ecological disturbances such as floods, shortage of food etc.

Question 6.
Describe the sources of water pollution.
Answer:
Sources of water pollution:
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water 2

Following are the sources of water pollution-
1. Domestic effluent. In this case, wastewater is discharged into public sewerage system such as-

  • Human and animal excreta
  • Plenty of organic matter in the form of food residue
  • Detergents
  • A large number of bacteria.

2. Industrial effluent. Industries usually discharge wastewater into ponds, lakes, and rivers. Industrial wastewater contains heavy metals as mercury, lead, copper, arsenic, and cadmium.

3. Pesticides and fertilizers. The surface water runoff from the field with inorganic fertilizers, pesticides, insecticides, bring heavy loads of pollutants into natural water bodies. Pesticides like DDT are non-biodegradable.

4. Waste Heat. Waste heat is a rise in the temperature of water by human activity. Thermal power plants, refineries, etc. discharge hot water into nearly lakes, sea, etc. The sudden rise in the temperature of the water has very harmful effects on aquatic organisms, such as fish and algae.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Punjab State Board PSEB 9th Class Physical Education Book Solutions Chapter 4 First Aid Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 9 Physical Education Chapter 4 First Aid

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What do you know about First Aid?
Answer:
The aid which is given to a patient before arrival to the doctor is known as first aid.

Question 2.
What is Fracture?
Answer:
Breakage in Bone is called Fracture.

Question 3.
What is Unconsciousness?
Answer:
It means to lose consciousness.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 4.
What is Electric Shock?
Answer:
One gets electric shock when touches a live electric wire.

Question 5.
Name any two types of fracture?
Answer:

  • Simple fracture
  • Multiple fracture.

Question 6.
Complicated Fracture is dangerous. (Right or Wrong)
Answer:
Right.

PSEB 9th Class Physical Education Book Chapter 4 First Aid

Question 7.
Depressed Fracture is harmful. (Right or Wrong)
Answer:
Wrong.

Question 8.
Write any two symptoms of unconciousness.
Answer:

  • Pulse becomes very slow
  • skin becomes cold.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 9.
What is dislocation?
Answer:
Displacement of bone from the joint is known as Dislocation.

Question 10.
Is there any difference between strain and sprain?
Answer:
Yes, there is a difference.

Short Answer Type Questions

Question 1.
What do you know about First Aid?
Answer:
In our daily life many accidents occur. No wonder we may get injured or wounded on bicycle or in the playfield. Accidents can occur anywhere and anytime at home and outside. It is not possible that doctor may be present at the place of accident. The aid given to the wounded or the patient till the doctor arrives or is approached is called FIRST AID.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 2.
What is strain?
Answer:
Often we hear players say that their muscles are under strain, and so they cannot carry on their game any more. Over work makes the muscles crack, sometimes more and sometimes less. As a result of cracked muscles players feel much pain. Many times that part that has been greatly strained swells.

Question 3.
What is sprain?
Answer:
The player may get sprain:
The feet and the wrists are prone to receive sprains. The ligaments and tissues quickly crack by chance around it. The player feels pain and is unable to take part in the game.

Question 4.
What will you do if you got dislocation of your knee joint while playing Hockey?
Answer:
If I got my knee joint dislocated while playing Hockey, I will get treatment as under:
I will get dressed dislocated joint with plaster. I will try my level best the joint which was dislocated may not have external pressure. I shall use splint to check die movement of the joint.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 5.
What First Aid will you render to a patient of drowning?
Answer:
Treatment of Drowning:
Some people get drowned while crossing, or bathing in rivers, canals or streams. If First Aid is given to a drowned person after taking him out of water, his life may be saved. Such a person should be given First Aid in the following ways:

1. Removing Water from the Belly:
The drowned person should be taken out of water, and lied down with his belly on a pitcher to get water removed from his belly. If the pitcher is not available, he should be lied on belly-side, and toss him upward by holding his waist. This action will remove water from his belly.

2. Making the Patient Wear Dry clothes: Give the patient dry clothes to wear.

3. Keeping the Patient’s Body Warm: Wrap a blanket or sheet round the patient’s body so that his body may remain warm.

4. Administering Artificial Respiration: If the breathing of the drowned man stops, he should be administered artificial respiration.

5. Giving Hot Tea or Coffee: When the patient comes to his senses, he should be given hot tea or coffee to drink.

6. Taking the Patient to the Doctor: If necessary, the patient should be taken to a doctor.

Question 6.
What First Aid will you render to a patient in case of burning?
Answer:
Sometimes a person gets burnt in fire, by hot vessels, chemicals, acid or electric shock. The result is that skin, muscles and tissues are destroyed. Sometimes scalds are caused by very hot tea, milk, coffee or acid. The skin turns red or clothes get stuck up to the body. One feels intolerable pain. Sometimes a person dies as a result of excessive burns.

Treatment:

  • The burnt up part should be carefully treated.
  • One should not run in case one catches fire. In such case, one should lie down.
  • The person whose clothes catch fire should be wrapped with a blanket.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 7.
What do you mean by Electric Shock? How will you treat it?
Answer:
Electric Shock:
One gets electric shock when one touches a live electric wire, or when such a wire accidentally touches any part of his body. Even one’s body may get burnt in the process. One may go unconscious, or may even die of electric shock. If a person gets touch to a live electric wire, the main supply of electricity should be switched off to release him from the wire. If one fails to locate main switch, the following steps may be taken:

1. Using Rubber Gloves and Dry Wood:
The life of a person may be saved by the use of rubber gloves and dry wood in case the power of electricity is up to 500 watts. Electric current does not pass through these things. A moist or metallic thing should not be used.

2. Removing the Plug: If electric wire is coming from a distant place, it should be broken or the plug should be removed.

3. Giving Artificial Respiration: If the electrocuted person is not breathing, he should be administered artificial respiration.

4. Treatment of Scald or Burnt Part: If some part of the patient is scalded or burnt, its treatment should be done.

5. Encouraging the Patient: The patient should be encouraged.

6. Wrapping in a Blanket: The patient should be kept warm in a blanket.

7. Giving Hot Milk or Tea: The patient should be given hot tea or milk to drink.

Question 8.
Describe the various rules of First Aid.
Answer:
Rules of First Aid:
1. Immediate Aid:
First Aid should be given to the injured at the earliest possible. There should be no hesitation or fear in providing First Aid because there is no time in thinking. Immediate decisions have to be taken to save the life of the injured.

2. Artificial Respiration:
If a person is unconscious, and is not breathing, he should be given artificial respiration. A person suffering from heart attack can also be saved by artificial respiration.

3. Sympathetic Attitude:
The injured person gets extremely frightened. So a sympathetic attitude and goodwill prove to be very important. These are beneficial in removing the fear in the mind of the injured.

4. Prevention of Bleeding:
The flow of blood from the injury should be stopped at the earliest as the excessive loss of blood may endanger the life of the injured.

5. Keeping the injured away from the Crowd:
When a person gets involved in an accident, many people come and surround him from all sides. It prevents the flow of fresh air to the injured and the injured also gets frightened and upset. So the steps should be taken to keep the injured away from the crowd, and to provide First Aid at the earliest.

6. Immediate Medical Aid:
The Medical aid should be arranged for the injured immediately. No untrained person should be allowed to use hit and trial methods of treatment.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 9.
Write down the causes, symptoms and treatment of dislocation of joints.
Answer:
Generally, there is a joint dislocation in the field of sports. The displacement of bones is known as dislocation. The displacement generally occurs in the case of bones of shoulders, hips and wrists.

Causes:

  • When heavy thing hit fastly to any joints of a person.
  • The weight of sports material is too much heavy.
  • Hard surface or uneven ground.
  • Insufficient warming up of a player.
  • Suddenly falling of an athlete.

Symptoms:

  • The movement in the joint stops. The joint pains with the slightest of movement.
  • The joint pains as well as swelling.
  • The bone can be seen protruding at the place of dislocation.
  • The shape of the joint also changed.
  • There is a feeling of strain in the joint.

Treatment:

  • The dislocated joint should not be moved much.
  • The bone should be got reset from a competent doctor.
  • Icy cold water should be poured on the dislocated joint.

Question 10.
Mention the causes of Fracture, its symptoms and treatment.
Answer:
Causes:

  • When a player plays the game with over courage, over joy or under pressure.
  • To fall on hard or slippery ground.
  • To play on uneven playfields and fall down.
  • To play the game without the supervision of an expert.

Symptoms:

  • The place of fracture develops swelling.
  • The fracture part of the body becomes strengthless.
  • The player feels much pain.
  • The shape of fracture part also changes.
  • The part of the body becomes shapeless.
  • A cracking sound is produced when the fractured part is made to move.

Treatment:

  • In case of fracture, the fractured part should not be allowed to move.
  • The treatment of the fracture should be immediately done as far as possible.
  • In case of injury in the fracture, first of all bleeding should be controlled.
  • The broken bone should be set with splints and bandage.
  • The fractured part should be plastered with the help of a doctor.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 11.
What is unconsciousness? Mention its symptoms and treatment.
Answer:
Unconsciousness means losing of sense
Symptoms:
These are as under-

  • Rate of pulse becomes very slow.
  • Skin becomes cold.
  • The colour of face turns pale.
  • Blood pressure becomes low.

Treatment:

  • Check up the heart beat and pulse rate of the patient properly.
  • The tongue of the patient should not touch the upper part of the wind pipe.
  • Peal off the clothes or loosen the clothes of a patient.
  • Let the fresh air should come.
  • Massage the chest continuously.
  • Try to give artificial respiration if needed.
  • Patient should not be given anything orally till he gets conscious.
  • He may be given hot drink.
  • You may make him smell ammonia, spirit or onion.
  • The cause of unconsciousness may be removed as early as possible.

Long Answer Type Questions

Question 1.
What are the qualities and duties of First Aider?
Answer:

  • A First Aider should be a person who seeks comfort and joy in serving others, and who looks upon his job as his religious duty.
  • He should have the maximum knowledge of medical sciences particularly, he should be quite well versed in
  • Anatomy and Physiology.
  • He should be capable of understanding the nature of injury, and should be properly trained in First Aid.
  • He should be a man of genial nature and self-confidence.
  • He should be capable of understanding the mental state of the injured.
  • He should have patience, devotion and dedication.
  • He should be capable of giving First Aid in a very natural, affectionate manner.
  • He should be capable of encouraging the injured.
  • He should be familiar with all those points which are relevant to providing First Aid.
  • All necessary medicines should always be ready for use in his First Aid Box.
  • A high academic qualification is not sufficient for a First Aider. He should have developed in him qualities of a man of high moral character.

In order to make the job of First Aid interesting, a First Aider should be a jovial person. His jovial nature will help in establishing a good rapport between him and the person who needs First Aid, but his humour should not be of cheap variety. His personality should be balanced. He should be perfectly capable, healthy and strong from physical, mental, social and psychological point of view.

Duties of First Aider:

  • First aider should give First Aid immediately to the patient.
  • He should encourage the patient.
  • Try to arrange the doctor as early as possible.
  • The dress of the patient should be removed or loosened.
  • He should help the patient to save his life.
  • He should keep the patient in a comfortable position.
  • There should not be crowd or noise around the patient.
  • In case of continuous bleeding, the main vessels should be pressed.
  • The patient must be kept in open air.
  • If the accident occurs due to electronic current or gas, he should first switch off electric current or gas.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 2.
Describe the types of Fracture which is the most dangerous fracture.
Answer:
When a bone is broken into two or more parts is known as fracture. Fractures are of seven types which are as under:
1. Simple Fracture: In this type of fracture, there is neither any visible injury on the body nor is there any harm to the muscles. This is known as simple or closed fracture.
PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid 1
2. Compound Fracture or Open Fracture: In case of Com-pound Fracture, the part of the bone comes out of the skin.
PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid 2
3. Complicated Fracture: In this type of fracture, the internal organs are hurt and affected such as heart, spinal cord, lungs, kidney etc.
4. Commuted Fracture: In commuted fracture, the bones gets broken at many places, and sometimes it is broken Sito pieces.
PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid 3
5. Impacted Fracture: In this type of fracture, the broken bones come inside another bone.
PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid 4
6. Green Stick Fracture: This type of fracture occurs mostly in the young boys of tender age because their bones are very soft and they bend easily. A piece of bones, getting out of the bone, cracks up in this type of fracture.
PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid 5
7. Depressed Fracture: This type of fracture occurs in the skull bones. The skull bones gets depressed downward. It is known as depressed fracture.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 3.
What is strain? Describe its causes, symptoms and treatment?
Answer:
Strain:
Often we hear players say that their muscles are under strain, and so they cannot carry on their game any more. Over work makes the muscles crack, sometimes more and sometimes less. As a result of cracked muscles players feel much pain. Many times that part that has been greatly strained swells.

Causes:

  • Excess loss of water from the body through sweating.
  • More Physical Fatigue.
  • Less co-ordination in the parts of the body.
  • The hard playground also causes straining of muscles.
  • The main cause of strain is insufficient working of a player.
  • Bring the weak muscles in action quickly.
  • Use of bad types of sports equipments.
  • Body is insufficient in strength to bear the load of the activities.

Symptoms:

  • Too much tension in muscles.
  • Strain parts become unable to do the work.
  • Feeling too much pain after getting strain.
  • The part of the body seems to be depressed.
  • The player may turn blue internally.
  • Joint becomes very soft.

Safety Measures:

  • The playground should be properly watered, neat and clean. The surface should not be uneven.
  • The pitch of High Jump and Long Jump must be kept very soft.
  • The students must get safety education.
  • The players should be properly warmed up before entering the field.
  • Players should not play on wet or slipery place.
  • The equipment should be of high standard.
  • The players should be cool. They should not take part in games while they are excited.

Treatment:

  • The main cause of strain is insufficient warming of a player entering the field.
  • The hard playground, too, causes straining of muscles. As such, the playground should be watered off and on.
  • The weak muscles crack soon. So one should do exercises to make muscles strong.
  • In case muscles are under strain, the player should take rest.
  • At first, the strained spot should be cooled down with ice. After 24 hours, it should be fomented by salty hot water.

PSEB 9th Class Physical Education Solutions Chapter 4 First Aid

Question 4.
What is sprain? Discuss its causes, symptoms and treatment.
Answer:
Sprain:
The player may get sprain. The feet and the wrists are prone to receive sprains. The ligaments and tissues quickly crack by chance around it. The player feels pain and is unable to take part in the game.

Type of Sprain:
Broadly speaking, there are two types of sprain-

1. Ordinary Sprain: In such a case the player gets slight in-jury on the tissue groups that crack, and he does not feel much pain.

2. Heavy Sprain: The player gets hard injury on his tissue group, and feels much pain, and is unable to take part in the game.

Causes:
There may be causes of sprain, some of which are as follows:

  • The feet of the player land on uneven place.
  • Sometimes the jumping pit is not well dug out.
  • Sprain is caused sometimes when the player is not properly warmed up before actual play.
  • The weakness of joints.
  • The lack of proper coaching.
  • A sudden fall while running.
  • Sprain may be caused because of inadequate or rough sports equipment such as stud loose boots used in football.

Symptoms:
Whenever a player gets sprain on his joints, he feels pain on the very joint. He is unable to carry on with his game. He feels as if his joint has lost strength and is inflamed.

Treatment:

  • When a player gets sprain, he should be called out of the play ground.
  • By pouring cold water on the sprained joint or putting some ice on it, the bleeding slows down internally and the swelling also decreases.
  • Dressing on the sprained joint also reduces the pain and swelling. Dressing should be done in shape of number 8.
  • The sprained joint should be fomented after 48 hours.
  • The player should not be allowed to move much.
  • Index should be applied after 48 hours on the upper part of the joint. The patient may get some relief and the swelling decreases.
  • The sprained joint should be fomented by warm lemon.

Question 5.
Describe the various rules of First Aid.
Answer:
Rules of First Aid:
1. Immediate Aid:
First Aid should be given to the injured at the earliest possible. There should be no hesitation or fear in providing First Aid because there is no time in thinking. Immediate decisions have to be taken to save the life of the injured.

2. Artificial Respiration:
If a person is unconscious, and is not breathing, he should be given artificial respiration. A person suffering from heart attack can also be saved by artificial respiration.

3. Sympathetic Attitude:
The injured person gets extremely frightened. So a sympathetic attitude and goodwill prove to be very important. These are beneficial in removing the fear in the mind of the injured.

4. Prevention of Bleeding:
The flow of blood from the injury should be stopped at the earliest as the excessive loss of blood may endanger the life of the injured.

5. Keeping the injured away from the Crowd:
When a person gets involved in an accident, many people come and surround him from all sides. It prevents the flow of fresh air to the injured and the injured also gets frightened and upset. So the steps should be taken to keep the injured away from the crowd, and to provide First Aid at the earliest.

6. Immediate Medical Aid:
The Medical aid should be arranged for the injured immediately. No untrained is should be allowed to use hit and trial methods of treatment.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Punjab State Board PSEB 8th Class Science Book Solutions Chapter 12 Friction Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Science Chapter 12 Friction

PSEB 8th Class Science Guide Friction Textbook Questions and Answers

Exercises

Question 1.
Fill in the blanks.
[a] Friction opposes the ………………… between the surfaces in contact with each other.
[b] Friction depends on ……………….. of surfaces.
[c] Friction produces ……………….
[d] Sprinkling of powder on the carrom board ……………….. friction.
[e] Sliding friction is ………………. than the static friction.
Answer:
(a) relative motion
(b) nature
(c) heat
(d) decreases
(e) less.

Question 2.
Four children were asked to arrange forces due to rolling, static and sliding frictions in decreasing order. Their arrangements are given below. Choose the correct arrangement.
[а] rolling, static, sliding
[b] rolling, sliding, static
[c] static, sliding, rolling
[d] sliding, static, rolling.
Answer:
(c) Static, sliding, rolling.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 3.
Alida runs her car on the dry marble floor, wet marble floor, newspaper and towel spread on the floor. The force of friction acting on the car on different surfaces in increasing order will be
(i) wet marble floor, dry marble floor, newspaper and towel.
(ii) newspaper, towel, dry marble floor, wet marble floor.
(iii) towel, newspaper, dry marble floor, wet marble floor.
(iv) wet marble floor, dry marble floor, towel, newspaper.
Answer:
(ii) Newspaper, towel, dry marble floor, wet-marble floor.

Question 4.
Supose your writing desk is tilted a little. A book kept on it starts sliding down. Show the direction of frictional force acting on it.
Answer:
Upward direction.

Question 5.
You spill a bucket of soapy water on a marble floor accidently. Would it make it easier or more difficult for you to walk on the floor ? Why ?
Answer:
Soapy water will make the walking more difficult.
Soapy floor acts as a smooth surface as it has no irregularities in it and soap is also very slippery in nature. So, when we walk on soapy floor, we do not have opposing force with the result we slip.

Question 6.
Explain why sportsmen use shoes with spikes.
Answer:
Sportsmen use shoes with spikes to get a better grip on the floor.

Question 7.
Iqbal has to push a lighter box and Seema has to push a similar heavier box on the same floor. Who will have to apply a larger force and why ?
Answer:
Seema will experience a more frictional force since heavier box applies greater pressure on the floor as compared to lighter box due to its weight.

Question 8.
Explain why sliding friction is less than static friction.
Answer:
When a body is at rest, then the force active between the two surfaces in contact is more due to irregularities on two surfaces locked into one another.

But when a body is moving or sliding, the contact points do not get enough time to lock into one another. So sliding friction is always less than’ static friction.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 9.
Give examples to show that friction is both a friend and a foe.
Answer:
Friction as a friend.

  1. We can write with a pen or pencil.
  2. Teacher is able to write with chalk on the blackboard.
  3. We walk on the floor.
  4. Fix a nail on the wall.

Friction as a foe.

  1. It weakens the materials.
  2. It produces heat in machines which damages the various parts.
  3. Stones on rubbing, produces fire.

Question 10.
Explain why objects moving in fluids must have special shapes.
Answer:
When objects move through fluids, they have to overcome friction acting on them. In this process, they lose energy. Efforts are made to minimize friction by giving special shapes to the moving objects.

PSEB Solutions for Class 8 Science Friction Important Questions and Answers

Multiple Choice Questions

Question 1.
While pushing a heavy box from one place to another in his house, Naresh noticed that it was difficult to take a stationary box from its resting position to moving position but it was easy to move that box with that speed. Why was it so ?
(a) Sliding friction is less than static friction
(b) Static friction is less than sliding friction
(c) The weight of the box decreases
(d) None of the above.
Answer:
(a) Sliding friction is less than static friction.

Question 2.
The moving ball on the floor stops after some time because ……………….. acts on it.
(a) magnetic force
(b) electrostatic force
(c) frictional force
(d) both electrostatic force and frictional force.
Answer:
(c) frictional force.

Question 3.
It is difficult to walk on wet floor because:
(a) frictional force increases
(b) frictional force decreases
(c) sometimes frictional force increases
(d) it is impossible to apply more muscular force
Answer:
(b) frictional force decreases.

Question 4.
You move a stone of glass on the cemented floor, marble floor, water, towel and on ice. The force of friction acting on the different surfaces in increasing order will be:
(a) cemented floor, water, towel, marble floor, ice
(b) marble floor, cemented floor, water, ice, towel
(c) ice, water, marble, towel, cemented floor
(d) water, ice, marble, cemented floor, towel
Answer:
(d) water, ice, marble, cemented floor, towel

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 5.
Static friction works when:
(a) an attempt is made to bring an object from motion to rest form
(b) an attempt is made to bring an object from rest form to motion
(c) we do not want to bring any change in the situation of an object
(d) none of the above.
Answer:
(b) an attempt is made to bring an object from rest form to motion .

Question 6.
Rolling friction is:
(a) more than static friction
(b) equal to static friction
(c) less than static friction
(d) sometimes more than static friction and sometimes less than static friction.
Answer:
(c) less than static friction.

Question 7.
Four children were asked to arrange rolling, static and sliding frictions in decreasing order. Their arrangements are given below. Choose the correct arrangement.
(a) rolling, static, sliding
(b) rolling, sliding, static
(c) static, sliding, rolling
(d) sliding, static, rolling.
Answer:
(c) static, sliding, rolling

Question 8.
Alya runs her car on the dry marble floor, wet marble floor, newspaper and towel spread on the floor. The force of friction acting on the car on different surfaces in increasing order will be:
(a) wet marble floor, dry marble floor, newspaper and towel
(b) newspaper, towel, dry marble floor, wet marble floor
(c) towel, newspaper, dry marble floor, wet marble floor
(d) wet marble floor, dry marble floor, towel, newspaper.
Answer:
(a) wet marble floor, dry marble floor, newspaper and towel

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
In which direction the force of friction acts ?
Answer:
It acts in a direction opposite to the direction in which the force is applied.

Question 2.
It is difficult to move a cycle along a road with its brakes on. Why ?
Answer:
Sliding friction is more than rolling friction.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 3.
Why a rolling ball stops after some time ?
Answer:
Due to opposing force of air and friction between the ball and the ground.

Question 4.
What is friction ?
Answer:
Friction.
It is the resistance offered to the movement of one material object against another when the two are in contact with each other.

Question 5.
Why are tyres made circular ?
Answer:
Rolling friction is less than sliding friction.

Question 6.
Friction is a self-adjusting force. Is it correct ?
Answer:
Till the body moves, forces of friction adjusts itself in such a way that it is equal and opposite to the applied force.

Question 7.
Which is more smooth : wet muddy or cemented floor ?
Answer:
Wet muddy floor.

Question 8.
What is a spring balance ?
Answer:
Spring balance. It is a device used to measure force dcting on an object.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Short Answer Type Questions

Question 1.
Why a horse has to apply more force to start a tonga than to keep it moving ?
Answer:
In the first few steps the horse has to do work against the force of friction as well as has to give acceleration (has to increase kinetic energy) to the tonga. After when it begins to move it has to work only against friction.

Question 2.
Give some examples of force of friction.
Answer:
The following are the examples of force of friction in our daily life.:

  1. A ball rolled inside a hall with smooth floor moves a longer distance than one on a rough ground, when both are rolled with the same initial velocity.
  2. A person walking inside a room, with polished tiles is afraid of slipping, especially when the tiles are wet.
  3. If talcum powder is spread on a carrom board the coins move easily and cover a longer distance.
  4. If a driver applies brakes, the moving vehicle stops.

Question 3.
Friction produces heat. How ?
Answer:
Friction produces heat. It can be shown by following examples-

  1. Rubbing hands together for few minutes makes our hand hot.
  2. Striking match stick produces fire by friction.
  3. Jar of a mixer becomes hot after when it is run for few minutes.

Question 4.
Out of the given two situations, which one will be easy to push the object and why ?
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction 1
Answer:
In situation 1 it is easy to push the object because rolling friction is less than sliding friction.

Long Answer Type Questions

Question 1.
Define friction. What is the cause of friction ? Give factors affecting friction. Explain that friction is necessary evil.
Answer:
Friction.
It is the opposing force or retarding force; which is called into play when a body actually moves or tends to move over the surface of another body.

When an object is pushed with a small amount of force, it does not move at all. It means that the other surface on which object is lying exerts some force on the object which is in a direction opposite to our push. The opposing force is called friction.

Cause of friction.
Every surface, howsoever, consists of irregularities in the form of mounds and grooves. When one surface tends to move over the other surface, these irregularities get interlocked with one another and hence motion is opposed. This gives rise to frictional force. Thus, force of friction is due to roughness of the surface.

Factors affecting friction.

  1. Nature of two surfaces in contact.
  2. Area of contact.
  3. The normal force with which the two surfaces are pressed.
    Friction is a necessary evil because it has both advantages and disadvantages.

Advantages of friction.
Friction plays a very important role in our daily life.
1. We can walk, run, climb up the mountains and the trees only due to friction. Steps of the stairs are made rough to increase friction and hence avoid slipping.

2. The moving vehicles can only be stopped by applying brakes. Due to lack of friction, it is very difficult to drive a vehicle out of mud. Tyres of the vehicles have special projections and depressions, so as to avoid slipping.

3. Belts and pulleys are capable of driving machine only because of friction.

4. If friction were absent, a knot could not be tied; a nail could not be fixed in the wood, the buildings would have tumbled down, the eatables could not be held in fingers and not chewed by the teeth. The clothes could not be stitched and the writing with pen was not possible.

Disadvantages of friction:

  1. It causes wear and tear.
  2. Efficiency of machines decreases due to loss of energy due to friction.
  3. Heat produced due to friction damages the machines.
    This shows that friction is a necessary evil.

PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 2.
What is force of limiting friction and sliding friction?
Answer:
When no force is applied on a body, there is no force of friction acting on it and the body remains at rest. As you go on increasing applied force, force of friction increases by an equal amount upto a certain limit L. From O to L, the body remains at rest and force of friction is called force of static friction. If the force is slightly increased beyond L, the body starts sliding over the other body. This maximum force of friction which comes in to play is called force of limiting friction. Beyond L, the force of friction decreases a bit and the body starts sliding. This force of friction is called sliding, kinetic or dynamic friction.
PSEB 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction 2