PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 22 भारत के अमेरिका एवं रूस से सम्बन्ध

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 22 भारत के अमेरिका एवं रूस से सम्बन्ध Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 22 भारत के अमेरिका एवं रूस से सम्बन्ध

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
भारत और अमेरिका के परस्पर सम्बन्धों की चर्चा करो।
(Discuss the features of Parliamentary Government in India.)
अथवा
संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत के सम्बन्धों का विश्लेषण कीजिए। (Analyse India’s relations with U.S.A.)
अथवा
भारत व अमेरिका (U.S.A.) के सम्बन्धों का वर्णन करें। (Discuss the relation between India and America.)
उत्तर-
भारत तथा अमेरिका के सम्बन्ध शुरू से मित्रता वाले नहीं थे। अमेरिका आरम्भ से ही भारत पर अपना प्रभुत्व जमाना चाहता था। इसलिए अमेरिका ने ‘दबाव तथा सहायता’ की नीति का अनुसरण किया।

यद्यपि भारत और अमेरिका के सम्बन्ध मैत्रीपूर्ण नहीं थे तथापि दोनों देशों में सहयोग का क्षेत्र भी बढ़ा है। अमेरिका ने भारत को अपने पक्ष में करने के लिए दबाव नीति के साथ-साश्च आर्थिक सहायता तथा अनाज की कूटनीति का सहारा लिया। अमेरिका ने भारत को पर्याप्त आर्थिक सहायता दी और मुख्यत: अमेरिकन प्रेरणा से ही विश्व विकास ऋण कोष, तकनीकी सहयोग आदि की संस्थाओं ने भी ऋण तथा उपहार के रूप में भारत को काफ़ी आर्थिक तथा तकनीकी सहायता दी।

1957 में नेहरू ने अमेरिका की यात्रा की जिससे दोनों देशों के सम्बन्धों में सुधार हुआ। दिसम्बर, 1959 में अमेरिकन राष्ट्रपति आइजनहॉवर भारत आए जिससे दोनों देशों में और अच्छे सम्बन्ध स्थापित हुए। अमेरिका के राजनीतिक क्षेत्रों में कहा जाने लगा कि भारत का आर्थिक विकास अमेरिकन विदेश नीति का मुख्य लक्ष्य है। राष्ट्रपति आइजनहॉवर ने भारत को विशेष सम्मान देते हुए 4 मई, 1960 को वाशिंगटन में भारत के खाद्य मन्त्री एस० के० पाटिल के साथ स्वयं एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अनुसार अमेरिका ने भारत को आगामी 4 वर्षों में चावल तथा गेहूं से भरे हुए 15000 जलयान भेजने का निश्चय किया। मई, 1960 का यह समझौता पी० एल० 480 के नाम से प्रसिद्ध है। 4 वर्ष की अवधि के समाप्त होने पर इस अवधि को पुनः बढ़ा दिया गया।

अक्तूबर, 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया। भारत के अनुरोध पर राष्ट्रपति कैनेडी ने शीघ्र ही भारत को सैनिक सहायता दी। अमेरिका ने सैनिक सहायता देने के लिए कोई शर्त नहीं रखी। विदेश मन्त्री डीन रस्क ने भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति की प्रशंसा की। 7 दिसम्बर, 1963 को भारत और अमेरिका के बीच नई दिल्ली में एक समझौता हुआ जिसके अनुसार अमेरिका ने भारत को आठ करोड़ डॉलर तारापुर में आण्विक शक्ति संयन्त्र करने के लिए देने का वचन किया।

शास्त्री काल में भारत-अमेरिका सम्बन्ध (1964-1965)-1965 में भारत-पाक युद्ध हुआ और इस युद्ध में भारत तथा अमेरिका के सम्बन्ध पूरी तरह खराब हो गए, क्योंकि अमेरिका की सैनिक सामग्री का पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध प्रयोग किया और अमेरिका ने पाकिस्तान को इसके लिए रोकने का बिल्कुल प्रयास नहीं किया।

इंदिरा काल में भारत-अमेरिका सम्बन्ध (1966 से मार्च, 1977 तक)-28 मार्च, 1966 को श्रीमती गांधी ने अमेरिका की यात्रा की परन्तु इस यात्रा का कोई विशेष परिणाम नहीं निकला।
1969-70 का वर्ष भारत-अमेरिका के सम्बन्धों में एक प्रकार से शीत-युद्ध का वर्ष था।

1971 का वर्ष भारत और अमेरिका के सम्बन्धों के लिए बंगला देश के मामले पर बहुत ही खराब रहा। 9 अगस्त, 1971 को भारत और रूस में मैत्री सन्धि हुई जिससे अमेरिका की विदेश नीति को बड़ा धक्का लंगा। दिसम्बर, 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान सुरक्षा परिषद् में अमेरिका ने भारत विरोधी प्रस्ताव पेश किया, जिस पर सोवियत संघ ने . वीटो पावर का प्रयोग किया। अमेरिका ने बंगाल की खाड़ी में सातवें बेड़े को भेजा ताकि भारत पर दबाव डाला जा सके, परन्तु रूस के नौ-सैनिक बेड़े ने अमेरिका को सचेत कर दिया कि यदि अमेरिका ने भारत के विरुद्ध नौ-सैनिक कार्यवाही की तो रूस चुपचाप नहीं बैठा रहेगा। बंगला देश के युद्ध में भारत की विजय हुई और पाकिस्तान का विभाजन हो गया। इस विजय के बाद भारत दक्षिणी एशिया में एक बड़ी शक्ति के रूप में माना जाने लगा तो अमेरिका ने भारत की आर्थिक सहायता रोक दी।

जनता सरकार और भारत-अमेरिका सम्बन्ध-मार्च, 1977 में भारत के आम चुनाव हुए जिसमें जनता पार्टी को सफलता मिली और श्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में सरकार बनी। अमेरिका के राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई को बधाई संदेश भेजा और भारत को महान् लोकतान्त्रिक देश बताया। 1 जनवरी, 1978 में अमेरिका के राष्ट्रपति जिमी कार्टर भारत आए और भारतीय नेताओं से उन्होंने बातचीत की। जिमी कार्टर की यात्रा को भारत सरकार ने बहुत महत्त्व दिया।

जून, 1978 में प्रधानमन्त्री श्री मोरारजी देसाई तथा विदेश मन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी अमेरिका की यात्रा पर गए और राष्ट्रपति कार्टर से बातचीत करने के बाद राष्ट्रपति कार्टर से यह विश्वास प्राप्त करने में सफल हो गए कि भारत को अमेरिकन Uranium दिया जाएगा।

श्रीमती गांधी की सरकार और भारत-अमेरिका सम्बन्ध (GOVERNMENT OF SMT. GANDHI AND INDO-AMERICA RELATIONS):

जनवरी, 1980 में श्रीमती इंदिरा गांधी के पुनः प्रधानमन्त्री बनने पर अमेरिकन प्रशासन ने इच्छा व्यक्त की कि भारत और अमेरिका में अच्छे सम्बन्ध स्थापित होंगे। अफ़गानिस्तान में रूसी हस्तक्षेप से गम्भीर स्थिति उत्पन्न हो गई। प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी के इस कथन का कि किसी भी देश को दूसरे देश में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, अमेरिका ने स्वागत किया। जून, 1981 में अमेरिका ने भारत की भावनाओं की खुली उपेक्षा करते हुए पाकिस्तान को व्यापक स्तर पर अमेरिकी हथियार दिए। जुलाई, 1982 में प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर गईं। भारत और अमेरिका प्रशासन के बीच हुई सहमति के अन्तर्गत तारापुर के समझौते की व्यवस्थाओं के अनुसार स्वयं तो ईंधन की सप्लाई नहीं करेगा, लेकिन उसे भारत द्वारा फ्रांस से आवश्यक ईंधन खरीदने पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

जून, 1985 में प्रधानमन्त्री राजीव गांधी अमेरिका की यात्रा पर गए और उनका राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने ह्वाइट हाऊस में भव्य स्वागत किया। भारत और अमेरिका द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य से अमेरिका ने भारत में आतंकवादी हिंसा के प्रयासों और उसे अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप मिलने के विरुद्ध भारत सरकार को पूरा सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया।

चंद्रशेखर की सरकार और अमेरिका के साथ सम्बन्ध-जनवरी, 1991 में चंद्रशेखर की सरकार ने अमेरिका के साथ सम्बन्ध सुधारने के चक्कर में तटस्थता की नीति से दूर होते हुए अमेरिकी युद्ध विमानों को मुम्बई के सहारा अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से ईंधन भरने की सुविधा प्रदान की। चंद्रशेखर की सरकार की नीति की सभी दलों तथा विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने कड़ी आलोचना की।

नरसिम्हा राव की सरकार और अमेरिका के साथ सम्बन्ध-प्रधानमन्त्री श्री नरसिम्हा राव अमेरिका के राष्ट्रपति बुश को 31 जनवरी, 1992 को न्यूयार्क में मिले। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच सहयोग के बढ़ते दायरे पर संतोष व्यक्त किया, परन्तु परमाणु अप्रसार सन्धि पर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद बने रहे। जनवरी, 1993 में डेमोक्रेटिक पार्टी के बिल क्लिटन अमेरिका के राष्ट्रपति बने। जी०-7 देशों के टोकियो सम्मेलन में अमेरिका ने भारत को क्रायोजेनिक इंजन प्रणाली न बेचने के लिए भारत पर दबाव डाला। मई, 1994 में भारत के प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव अमेरिका की यात्रा पर गए। संयुक्त विज्ञप्ति में यह कहा जाना कि दोनों देश परमाणु आयुधों को संसार से खत्म करने या मिटाने के लिए काम करेंगे, वास्तव में भारतीय दृष्टिकोण है।
भारत के परमाणु परीक्षण तथा भारत-अमेरिका सम्बन्ध-भारत ने 11 मई, 1998 को तीन और 13 मई को दो परमाणु परीक्षण किए। 13 मई, 1998 को अमेरिका ने

भारत के परमाणु परीक्षणों की निंदा की और भारत के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबन्धों की घोषणा की। अमेरिकन राष्ट्रपति बिल क्लिटन ने भारत की वाजपेयी सरकार को व्यापक परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि (सी० टी० बी० टी०) पर तुरन्त और बिना शर्त हस्ताक्षर करने को कहा। उन्होंने कहा कि भारत के परमाणु परीक्षण अनुचित हैं और इससे एशिया में हथियारों की खतरनाक होड़ शुरू होने का खतरा है। 13 जून, 1998 को प्रधानमन्त्री वाजपेयी के विशेष दूत जसवंत सिंह ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश उपमन्त्री स्ट्रोब टालबोट के साथ वार्ता करने के बाद कहा कि परीक्षणों को लेकर अमेरिकी समझ बेहतर हुई है।

भारत-अमेरिका की आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्यकारी समूह (Joint Working Group on Counterterrorism)-19 जनवरी, 1999 को भारतीय विदेश मन्त्री जसवंत सिंह और अमेरिकी विदेश उप-सचिव स्ट्रोब टालबोट की लंदन में मुलाकात हुई। दोनों पदाधिकारियों ने आतंकवादी हिंसा को रोकने के लिए इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों को आतंकवाद विरोधी कार्यकारी समूह स्थापित करना चाहिए। इन मुलाकातों से निश्चित रूप से भारत और अमेरिकी सम्बन्धों में सहयोग की आशा की जा सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटन की भारत यात्रा-21 मार्च, 2000 को अमेरिकन राष्ट्रपति बिल क्लिटन पांच दिन के लिए भारत की सरकारी यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान अमेरिका एवं भारत ने आर्थिक क्षेत्र पर अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके अतिरिक्त भारत अमेरिकी सम्बन्धों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विज़न-2000 नामक दस्तावेज़ पर भी हस्ताक्षर किये गए। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस यात्रा से भारत-अमेरिकी सम्बन्धों में एक नए युग का सूत्रपात हुआ है।

भारतीय प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी की अमेरिका यात्रा-8 सितम्बर, 2000 को भारतीय प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी अमेरिका की यात्रा पर गए। अपने लम्बे व्यस्त कार्यक्रम में प्रधानमन्त्री वाजपेयी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटन सहित अनेक प्रमुख नेताओं और व्यापारिक संस्थाओं से बातचीत की। इस दौरान आपसी हित के विभिन्न विषयों पर व्यापक बातचीत हुई।

भारत के प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा-नवम्बर, 2001 में भारत के प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिका की यात्रा की। वाजपेयी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश के साथ शिखर वार्ता के दौरान आतंकवाद के खिलाफ लडने, नई रणनीतिक योजना बनाने, परमाणु क्षेत्र में शान्तिपूर्ण उद्देश्यों के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने, सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने एवं अफ़गानिस्तान के अच्छे भविष्य के लिए मिलकर काम करने की बात की।

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा-सितम्बर, 2004 में संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक अधिवेशन में भाग लेने के लिए भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ० मनमोहन सिंह अमेरिकी यात्रा पर गए। यात्रा के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश से भेंट करके द्विपक्षीय मुद्दों के अतिरिक्त आतंकवाद के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष, व्यापक जनसंहार के हथियारों के प्रसार पर अंकुश व भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों पर विचार-विमर्श किया।

प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की अमेरिका यात्रा-भारत के प्रधानमन्त्री डॉ० मनमोहन सिंह 17 जुलाई, 2005 को अमेरिका की यात्रा पर गए, जो भारत-अमेरिका के सम्बन्धों में मील का पत्थर सिद्ध हुई। भारत और अमेरिका के बीच सबसे महत्त्वपूर्ण समझौता परमाणु शक्ति से सम्बन्धित है। अमेरिका ने यह स्वीकार कर लिया है, कि “भारत अत्याधुनिक परमाणु शक्ति सम्पन्न ज़िम्मेदार देश है।” अमेरिका परमाणु शक्ति के असैनिक उपयोग के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करेगा तथा उस पर लगे प्रतिबन्धों को हटा लेगा।

अमेरिकन राष्ट्रपति की भारत यात्रा-मार्च, 2006 में अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश भारत की ऐतिहासिक यात्रा पर आए। इस यात्रा के अवसर पर दोनों देशों के बीच असैनिक परमाणु समझौते के अतिरिक्त कृषि, विज्ञान एवं आर्थिक क्षेत्रों में भी समझौता हुआ। अमेरिकन राष्ट्रपति ने भारत के साथ और अधिक अच्छे सम्बन्धों की वकालत की।

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा-सितम्बर, 2008 में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश से भी मुलाकात की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार, विश्व आतंकवाद तथा असैन्य परमाणु समझौते पर विचार-विमर्श किया।
भारतीय विदेश मन्त्री की अमेरिका यात्रा-अक्तूबर, 2008 में भारतीय विदेश मन्त्री प्रणव मुखर्जी ने असैन्य परमाणु समझौते (Civil Nuclear Deal) पर बातचीत करने के लिए अमेरिका की यात्रा की।

भारत-अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौता-नई दिल्ली में 11 अक्तूबर, 2008 को प्रणव मुखर्जी एवं अमेरिका की विदेश मन्त्री कोंडालीजा राइस ने असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए।

भारतीय प्रधानमन्त्री की अमेरिका यात्रा-नवम्बर, 2009 में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिका की यात्रा की तथा अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा से द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों देशों ने सांझा बयान जारी करते हुए अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में से आतंकी ठिकानों को समाप्त करने की घोषणा की ।

अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा-अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने 6-8 अक्तूबर, 2010 तक भारत की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया। इसी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय और अमेरिकी कम्पनियों के बीच 10 अरब डालर के व्यापारिक करार की घोषणा भी की।

सितम्बर, 2013 में संयुक्त राष्ट्र संघ के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिका की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ द्विपक्षीय बैठक में भाग लिया, जिसमें दोनों नेताओं ने एच-I वी वीज़ा, नागरिक परमाणु समझौते एवं सामरिक सहयोग पर बाचचीत की।

भारतीय प्रधानमंत्री की अमेरिकी यात्रा-सितम्बर 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को सम्बोधित करने के साथ ही अमेरिकन राष्ट्रपति ओबामा से भी महत्त्वपूर्ण मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों ने कहा कि आतंकवाद के महफूज ठिकानों को नष्ट करने के साथ ही दाऊद को भारत लाने की कोशिश की जायेगी।

सितम्बर 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका की यात्रा की। इन दौरान दोनों देशों ने सामारिक सांझेदारी को और बेहतर बनाने का निर्णय किया और सुरक्षा, आतंकवाद एवं कट्टरवाद से निपटने, रक्षा, आर्थिक सांझेदारी तथा जलवायु परिवर्तन पर सहयोग को और गति देने पर सहमति व्यक्त की।

अमेरिकन राष्ट्रपति की भारत यात्रा-जनवरी, 2015 में अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत की तीन दिन की यात्रा पर आए। ओबामा ऐसे पहले राष्ट्रपति थे जो 26 जनवरी की गणतंत्र परेड में मुख्य अतिथि बने। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने नागरिक परमाणु समझौते पर पूर्ण रूप से हस्ताक्षर किये। इसके अतिरिक्त रक्षा, स्वच्छ तथा अक्षय उर्जा एवं चार अर्न्तराष्ट्रीय निर्यात नियन्त्रण व्यवस्थाओं में भारत को सदस्यता दिलाने सम्बन्धी समझौता हुआ। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का भी समर्थन किया।

जून 2016 तथा 2017 में भारतीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर बातचीत की।

निष्कर्ष-भारत एवं अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में बहुत अधिक निकट आए हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सम्बन्ध हैं, आर्थिक क्षेत्र एवं रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है। भारत और अमेरिका के सम्बन्धों में काफ़ी नज़दीकी आई है। भारत के प्रति अमेरिकी सोच में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हो रहा है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 22 भारत के अमेरिका एवं रूस से सम्बन्ध

प्रश्न 2.
भारत-रूस सम्बन्धों का विस्तार सहित वर्णन करो। (Describe in detail Indo-Russia Relations.)
अथवा
भारत-रूस सम्बन्ध के स्वरूप की विवेचना कीजिए। (Discuss the nature of relationship between India and Russia.)
उत्तर-
सन् 1991 में भूतपूर्व सोवियत संघ का विघटन हो गया और उसके 15 गणराज्यों ने स्वयं को स्वतन्त्र राज्य घोषित कर दिया। रूस भी इन्हीं में से एक है। फरवरी, 1992 में भारतीय प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव ने रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन को विश्वास दिलाया कि भारत के साथ रूस के सम्बन्ध में कोई गिरावट नहीं आएगी और वे पहले की ही तरह मित्रवत् और सहयोग पूर्ण बने रहेंगे। आज भारत और रूस में घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन तीन दिन की ऐतिहासिक यात्रा पर 27 जनवरी, 1993 को दिल्ली पहुंचे। राष्ट्रपति येल्तसिन और प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव वार्ता में मुख्यत: आर्थिक एवं व्यापारिक विवादों के समाधान और द्विपक्षीय सहयोग के लिए एजंडे पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच 10 समझौते हुए जिनमें रुपया-रूबल विनिमय दर तथा कर्जे की मात्रा व भुगतान सम्बन्धी जटिल समस्याओं पर हुआ समझौता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। दोनों देशों में 20 वर्ष के लिए मैत्री एवं सहयोग की सन्धि हुई। यह सन्धि 1971 की सन्धि से उस रूप से भिन्न है कि इसमें सामरिक सुरक्षा सम्बन्धी उपबन्ध शामिल नहीं हैं। लेकिन 14 उपबन्धों वाली इस नई सन्धि में यह प्रावधान अवश्य रखा गया है कि दोनों देश ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे एक-दूसरे के हितों पर आंच आती है। वाणिज्य तथा आर्थिक सम्बन्धों के संवर्धन के लिए चार समझौते सम्पन्न हुए। इन समझौतों से व्यापार में भारी वृद्धि की आशा की गई है। भारत रूस समझौतों से रूस को निर्यात करने वाले भारतीय व्यापारियों की परेशानी भी दूर हो गई है। भारतीय सेनाओं के लिए रक्षा कलपुर्जी की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तुत त्रिसूत्रीय फार्मला दोनों देशों ने स्वीकार कर लिया। इस सहमति से भारत को रूस की रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी प्राप्त होगी और संयुक्त उद्यमों में भी उसकी भागीदारी होगी। राजनीतिक स्तर पर राष्ट्रपति येल्तसिन तथा प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव की सहमति भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता है। रूसी राष्ट्रपति ने कश्मीर के मामले पर भारत की नीति का पूर्ण समर्थन किया और यह वचन दिया कि रूस पाकिस्तान को किसी भी तरह की तकनीकी तथा सामरिक सहायता नहीं देगा। रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भी कश्मीर के मुद्दे पर भारत को समर्थन प्रदान करेगा। सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्य के लिए भी रूस भारत के दावे का समर्थन करेगा।

भारत के प्रधानमन्त्री की रूस यात्रा-29 जून, 1994 को भारत के प्रधानमन्त्री श्री पी० वी० नरसिम्हा राव रूस की यात्रा पर गए। भारत और रूस के मध्य वहां आपसी सहयोग व सैनिक सहयोग के क्षेत्र में 11 समझौते हुए। प्रधानमन्त्री राव की इस यात्रा से भारत और रूस के मध्य नवीनतम तकनीक के आदान-प्रदान के क्षेत्र पर बल दिया गया।

रूस के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-दिसम्बर, 1994 में रूस के प्रधानमन्त्री विक्टर चेरनोमिर्दिन भारत की यात्रा पर आए। भारत और रूस के बीच आठ समझौते हुए, इन समझौतों में सैनिक और तकनीकी सहयोग भी शामिल हैं। इन समझौतों का भविष्य की दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है।

प्रधानमन्त्री एच० डी० देवगौड़ा की रूस यात्रा-मार्च, 1997 में भारत के प्रधानमन्त्री एच० डी० देवगौड़ा रूस गए। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति येल्तसिन और प्रधानमन्त्री चेरनोमिर्दिन से बातचीत कर परम्परागत मित्रता बढ़ाने के लिए कई उपायों पर द्विपक्षीय सहमति हासिल की। रूस ने भारत को परमाणु रिएक्टर देने के पुराने निर्णय को पुष्ट किया।

परमाणु परीक्षण-11 मई, 1998 को भारत ने तीन और 13 मई को दो परमाणु परीक्षण किए। अमेरिका ने भारत के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए जिसकी रूस ने कटु आलोचना की। 21 जून, 1998 को रूस के परमाणु ऊर्जा मन्त्री देवगेनी अदामोव और भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ० आर० चिदम्बरम ने नई दिल्ली में तमिलनाडु के कुरनकुलम में अढ़ाई अरब डालर की लागत में बनने वाले परमाणु ऊर्जा संयन्त्र के सम्बन्ध में समझौता किया।
रूस के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-दिसम्बर, 1998 में रूस के प्रधानमन्त्री प्रिमाकोव भारत की यात्रा पर आए। 21 दिसम्बर, 1998 को दोनों देशों ने आपसी सहयोग के सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के रक्षा सहयोग की अवधि सन् 2000 से 2010 तक बढ़ाने का निर्णय किया।

रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-अक्तूबर, 2000 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की यात्रा पर आए। दोनों देशों ने अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद, विघटनवाद, संगठित मज़हबी अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ़ सहयोग करने पर भी सहमति जताई। दोनों देशों ने आपसी हित के 17 विभिन्न विषयों पर समझौते किए। इनमें सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण समझौता सामरिक भागीदारी का घोषणा-पत्र रहा।

भारत के प्रधानमन्त्री की रूस यात्रा-नवम्बर, 2001 में भारत के प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी रूस यात्रा पर गए। वाजपेयी एवं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शिखर वार्ता करके ‘मास्को घोषणा पत्र’ जारी किया जिसमें आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की बात कही गई। रूस ने सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का भरपूर समर्थन किया। इसके अतिरिक्त अन्य कई क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच समझौते हुए।

रूस के उप-प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-फरवरी, 2002 के रूस के उप-प्रधानमन्त्री भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने के लिए एक प्रोटोकोल पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही भारत ने रूस से स्मर्क मल्टी-बैरन रॉकेट लांचर खरीदने और रूस निर्मित 877 ई के० एम० पारस्परिक पनडुबियों को उन्नत बनाने के समझौते किए।

20 जनवरी, 2004 को नई दिल्ली में रूस एवं भारत के रक्षा मन्त्रियों ने बहु-प्रतीक्षित विमान वाहक पोत गोर्खकोव समझौते पर हस्ताक्षर किए।
रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-दिसम्बर, 2004 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत यात्रा पर आए। व्लादिमीर पुतिन ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् में वीटो सहित भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।

भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की रूस यात्रा- भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह दिसम्बर, 2005 में रूस की यात्रा पर गए। दोनों देशों के बीच तीन महत्त्वपूर्ण समझौते हुए

  1. रक्षा के क्षेत्र में हुए बौद्धिक सम्पदा अधिकार समझौते के तहत संयुक्त रक्षा कार्यों की निगरानी करना।
  2. दूसरा समझौता सौर भौतिकी के क्षेत्र में हुआ है।
  3. तीसरा समझौता ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम के सन्दर्भ में तकनीकी सुरक्षा से सम्बन्धित हुआ। ये समझौता अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के विकल्प के तौर पर काम करेगा।

नवम्बर, 2007 में भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह तीन दिन की रूस यात्रा पर गए। प्रधानमन्त्री ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ वार्षिक बैठक में भाग लिया। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाने के अतिरिक्त द्विपक्षीय व्यापार को 2010 तक 10 बिलियन डालर तक ले जाने की सहमति प्रकट की।

रूसी प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-फरवरी, 2008 में रूसी प्रधानमन्त्री विक्टर ए० जुबकोव (Victor A. Zubkov) दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा-दिसम्बर, 2008 में रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव भारत यात्रा पर आए। मेदवेदेव ने 26 नवम्बर, 2008 को मुम्बई में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निन्दा की। इस यात्रा के दौरन दोनों देशों ने महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

भारतीय प्रधानमन्त्री की रूस यात्रा-दिसम्बर, 2009 में भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह रूस यात्रा पर गए तथा रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के साथ वार्षिक बैठक में भाग लिया । इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहोयग बढ़ाने पर जोर दिया ।

रूसी प्रधामन्त्री की भारत-यात्रा-मार्च, 2010 में रूसी प्रधानमन्त्री श्री ब्लादिमीर पुतिन भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सुरक्षा एवं सहयोग के पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किये।

रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा-दिसम्बर, 2010 में रूसी राष्ट्रपति श्री दिमित्री मेदवेदेव भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेने के लिए भारत आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 30 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

भारतीय प्रधानमन्त्री की रूस यात्रा-दिसम्बर, 2011 में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ० मनमोहन सिंह भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेने के लिए रूस गए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने पारस्परिक सहयोग के चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा-दिसम्बर, 2012 में रूसी राष्ट्रपति श्री ब्लादिमीर पुतिन भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेने भारत आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सहयोग एवं रक्षा के 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किये।

भारतीय प्रधानमन्त्री की रूस यात्रा- अक्तूबर, 2013 में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेने के लिए रूस की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनो देशों ने रॉकेट, मिसाइल, नौसेना, प्रौद्योगिकी और हथियार प्रणाली के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा-दिसम्बर 2014 में रूसी राष्ट्रपति श्री बलादिमीर पुतिन भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में भाग लेने के लिए भारत आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण समझौते हुए।
भारतीय प्रधानमंत्री की रूस यात्रा-दिसम्बर, 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रूस की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा एवं सहयोग के 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किये। अक्तूबर 2016 में रूस के राष्ट्रपति श्री ब्लादिमीर पुतिन ‘ब्रिक्स’ (BRICS) सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आए। इस दौरान दोनों ने 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किये।

जून 2017 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी रूस यात्रा पर गए। इस दौरान दोनों देशों ने 5 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

अक्तूबर, 2018 में रूसी राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन वार्षिक शिखर वार्ता के लिए भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आठ महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
नि:संदेह भारत और रूस में मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित हो चुके हैं। कुंडकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना इस के सहयोग का ही परिणाम है। असैनिक परमाणु परियोजनाओं में रूस की भागीदारी के वायदे और बहुउद्देशीय परिवहन विमान और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के निर्माण में उसकी मदद की घोषणा को जोड़ ले तो भारत और रूस मित्रता की धारणा की ही पुष्टि होती है। रूस पुरानी मित्रता को निरन्तर निभा रहा है और यह निर्विवाद है कि भारत और रूस के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की ताकत बढ़ेगी।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 22 भारत के अमेरिका एवं रूस से सम्बन्ध

लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए सकारात्मक मोड़ के लिए जिम्मेवार चार कारण लिखिए।
उत्तर-
भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए सकारात्मक मोड़ के लिए ज़िम्मेदार तीन कारण अग्रलिखित हैं-

  1. शीत युद्ध की समाप्ति-भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए सकारात्मक मोड़ के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण कारण शीत युद्ध की समाप्ति है।
  2. आतंकवाद की समस्या-दोनों ही देश आतंकवाद से ग्रसित है, अतः इस समस्या के समाधान के लिए भी दोनों देश नज़दीक आए हैं।
  3. जार्ज बुश की भारत के प्रति विशेष रुचि-भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए सकारात्मक मोड़ के लिए अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश की भारत के प्रति विशेष रुचि रही है। उनके प्रयासों से ही भारत-अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौता हो सका।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आए परिवर्तनों के कारण भी भारत-अमेरिका के सम्बन्धों में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

प्रश्न 2.
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि पर नोट लिखिए।
अथवा
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि क्या है ?
अथवा
भारत-अमेरिका परमाणु समझौता क्या है ?
उत्तर-
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि 2005 में हुई। इस सन्धि पर भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह तथा अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने हस्ताक्षर किए। इस सन्धि का मुख्य उद्देश्य भारत द्वारा अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करना था। इस सन्धि के अन्तर्गत 2020 तक कम-से-कम 20000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने इस सन्धि के अन्तर्गत अपने 14 परमाणु रिएक्टर अन्तर्राष्ट्रीय निगरानी के लिए खोल दिए हैं। 6 सितम्बर, 2008 को इस सन्धि को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (N.S.G.) की भी स्वीकृति मिल जाने के बाद 11 अक्तूबर, 2008 को भारत के विदेश मन्त्री प्रणव मुखर्जी तथा अमेरिका की विदेश मन्त्री कोंडालीजा राइस ने इस पर हस्ताक्षर करके इसे लागू कर दिया। जनवरी, 2015 में अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के समय इस समझौते को पूर्ण रूप से व्यावहारिक रूप दे दिया गया।

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प्रश्न 3.
1971 की भारत सोवियत संघ की सन्धि की मुख्य व्यवस्थाएं क्या थी ?
उत्तर-
1971 की भारत सोवियत संघ की मुख्य व्यवस्थाएं इस प्रकार थीं-

  1. एक-दूसरे की प्रभुसत्ता तथा अखण्डता का सम्मान करना।
  2. पूर्ण नि:शस्त्रीकरण के बारे में प्रयास करना।
  3. उपनिवेशवाद तथा प्रजातीय भेदभाव की समाप्ति के लिए प्रयास करना।
  4. एक दोनों के विरुद्ध सैनिक सन्धि में शामिल न होना।
  5. यदि दोनों देशों में किसी एक देश के विरुद्ध अन्य देश युद्ध की घोषणा करता है तो दूसरा देश आक्रमणकारी देश की कोई मदद नहीं करेगा। यदि दोनों देशों में से किसी एक पर आक्रमण हो जाता है तो उस आक्रमण को टालने के लिए दोनों देश आपस में विचार-विमर्श करेंगे।

प्रश्न 4.
रूस-भारत मित्रता के लिए जिम्मेवार मुख्य कारण लिखिए।
उत्तर-
रूस-भारत मित्रता के लिए निम्नलिखित कारण ज़िम्मेदार हैं

  • रूस-भारत मित्रता के लिए दोनों देशों में पाए गए परस्पर रक्षा सम्बन्ध हैं।
  • रूस एवं भारत में मित्रता के लिए आर्थिक एवं व्यापार क्षेत्र में सहयोग प्रमुख कारण है।
  • रूस एवं भारत आतंकवाद के मुद्दे पर एक हैं।
  • अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले परिवर्तन भी रूस-भारत की मित्रता के लिए जिम्मेदार है।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
भारत-अमेरिका सम्बन्धों में सुधार के लिए जिम्मेवार दो कारण लिखिए।
उत्तर-

  1. शीत युद्ध की समाप्ति-भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए सकारात्मक मोड़ के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण कारण शीत युद्ध की समाप्ति है।
  2. आतंकवाद की समस्या-दोनों ही देश आतंकवाद से ग्रसित हैं, अतः इस समस्या के समाधान के लिए भी दोनों देश नज़दीक आए हैं।

प्रश्न 2.
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि पर नोट लिखिए।
उत्तर-
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि मार्च, 2006 में हुई। इस सन्धि पर भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह तथा अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने हस्ताक्षर किए। इस सन्धि का मुख्य उद्देश्य भारत द्वारा अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करना था। 6 सितम्बर, 2008 को इस सन्धि को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (N.S.G.) की भी स्वीकृति मिल जाने के बाद 11 अक्तूबर, 2008 को भारतीय विदेश मन्त्री प्रणव मुखर्जी तथा अमेरिका की विदेश मन्त्री कोंडालीजा राइस ने इस पर हस्ताक्षर किये। अन्ततः जनवरी, 2015 में अमेरिकन राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान इस समझौते में आने वाली बाधाओं को दूर किया गया।

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प्रश्न 3.
1971 की भारत सोवियत संघ समझौते की दो मुख्य व्यवस्थाएं क्या थीं?
उत्तर-

  1. एक-दूसरे की प्रभुसत्ता तथा अखण्डता का सम्मान करना।
  2. पूर्ण नि:शस्त्रीकरण के बारे में प्रयास करना।।

प्रश्न 4.
रूस-भारत मित्रता के लिए जिम्मेवार मुख्य कारण लिखिए।
उत्तर-

  1. रूस-भारत मित्रता के लिए दोनों देशों में पाए गए परस्पर रक्षा सम्बन्ध हैं।
  2. रूस एवं भारत में मित्रता के लिए आर्थिक एवं व्यापार क्षेत्र में सहयोग प्रमुख कारण है।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1.
सोवियत संघ के विघटन के समय सोवियत संघ का राष्ट्रपति कौन था ?
उत्तर-
सोवियत संघ के विघटन के समय सोवियत संघ का राष्ट्रपति श्री मिखाइल गोर्बाच्योव थे।

प्रश्न 2.
भारत-अमेरिका के बीच सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत-अमेरिका के बीच सम्बन्ध वर्तमान समय में मित्रतापूर्ण हैं।

प्रश्न 3.
1, 2, 3 परमाणु संधि कौन-से दो देशों की बीच हुई ?
उत्तर-
1, 2, 3 परमाणु संधि भारत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुई।

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प्रश्न 4.
1971 के भारत-पाक युद्ध में अमेरिका का क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर-
1971 के भारत-पाक युद्ध में अमेरिका ने खुल कर पाकिस्तान का साथ दिया था तथा भारत पर हर प्रकार का दबाव डाला था।

प्रश्न 5.
अमेरिका का गुटनिरपेक्षता की नीति के प्रति क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर-
अमेरिका ने गुट निरपेक्षता की नीति को कभी भी पसन्द नहीं किया। अमेरिका चाहता था कि भारत सदैव उसकी नीतियों का समर्थन करे, जोकि भारत को पसन्द नहीं था।

प्रश्न 6.
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अमेरिका का क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर-
1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से किसी का समर्थन नहीं किया, परन्तु अप्रत्यक्ष रूप से वह पाकिस्तान के साथ था, क्योंकि पाकिस्तान ने अमेरिका से प्राप्त हथियारों से ही युद्ध लड़ा था।

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प्रश्न 7.
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि कब हुई ?
अथवा
भारत-अमेरिका परमाणु समझौता कब लागू किया गया ?
उत्तर-
भारत-अमेरिका परमाणु सन्धि 11 अक्तूबर, 2008 को हुई।

प्रश्न 8.
भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते के कारण दोनों देश परमाणु क्षेत्र में परस्पर सहयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 9.
भारत और रूस सम्बन्धों में तनाव का कारण लिखिए।
उत्तर-
भारत और रूस सम्बन्धों में तनाव का महत्त्वपूर्ण कारण भारत और अमेरिका के मजबूत होते सम्बन्ध हैं।

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प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. सोवियत संघ के विघटन के समय ………… राष्ट्रपति थे।
2. भारत को हथियारों की सबसे अधिक आपूर्ति ……….. करता है।
3. भारत एवं ……….. के बीच 28 जून, 2005 को दस वर्षीय समझौता हुआ।
4. 2015 में अमेरिका के राष्ट्रपति श्री ………. भारत यात्रा पर आए।
5. रूस के वर्तमान राष्ट्रपति श्री …………….. हैं।
उत्तर-

  1. मिखाइल गोर्बाचेव
  2. रूस
  3. अमेरिका
  4. बराक हुसैन ओबामा
  5. व्लादिमीर पुतिन।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. भारत के रूस से सदैव ही अच्छे सम्बन्ध रहे हैं।
2. भारत के अमेरिका से हमेशा मित्रतापूर्ण सम्बन्ध रहे हैं।
3. वर्तमान समय में भारत-अमेरिका सम्बन्ध सुधर रहे हैं।
4. मार्च, 2006 में भारत-अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौता हुआ।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. सही
  4. सही।

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प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
भारत के किस प्रधानमन्त्री ने सर्वप्रथम अमेरिका की यात्रा की ?
(क) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(ख) श्रीमती इंदिरा गांधी
(ग) श्री लाल बहादुर शास्त्री
(घ) पं० जवाहर लाल नेहरू।
उत्तर-
(घ) पं० जवाहर लाल नेहरू।

प्रश्न 2.
निम्न में किस अमेरिकन राष्ट्रपति ने सर्वप्रथम भारत की यात्रा की
(क) बिल क्लिंटन
(ख) कैनेडी.
(ग) आइजनहावर
(घ) जिमी कार्टर।
उत्तर-
(ग) आइजनहावर

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प्रश्न 3.
अक्तूबर 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तब निम्न में से किस देश ने भारत को सहायता दी
(क) अमेरिका
(ख) पाकिस्तान
(ग) श्रीलंका
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) अमेरिका

प्रश्न 4.
अमेरिकन राष्ट्रपति जिमी कार्टर कब भारत यात्रा पर आए?
(क) 1 जनवरी, 1980
(ख) 15 अगस्त, 1978
(ग) 1 जनवरी, 1978
(घ) 26 जनवरी, 19801
उत्तर-
(ग) 1 जनवरी, 1978

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प्रश्न 5.
भारत-पाक के बीच ताशकंद समझौता करवाने में किसने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ?
(क) अमेरिकन राष्ट्रपति कैनेडी
(ख) सोवियत नेता
(ग) फ्रांस के राष्ट्रपति
(घ) ब्रिटिश नेता।
उत्तर-
(ख) सोवियत नेता

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

Punjab State Board PSEB 6th Class Home Science Book Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Home Science Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

PSEB 6th Class Home Science Guide पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
रंग कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर-
रंग दो प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 2.
नीला और जामुनी रंग किस श्रेणी के रंग हैं ?
उत्तर-
ठण्डे रंग।

प्रश्न 3.
गर्मियों के लिए कैसे रंगों का चुनाव करना चाहिए ?
उत्तर-
ठण्डे रंगों का जैसे सफेद, बादामी रंग।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

प्रश्न 4.
सर्दियों के लिए कैसे वस्त्रों का चुनाव करना चाहिए ?
उत्तर-
सर्दियों के लिए ऊनी, सिल्की या नॉयलॉन आदि के वस्त्र खरीदने चाहिएं तथा गर्म रंगों वाले वस्त्र।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
भिन्न-भिन्न प्रकार की रेखाओं का पोशाक पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
विभिन्न प्रकार की रेखाओं का पोशाक पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है –
(क) सीधी रेखाएँ-इससे पहनने वाले का आकार लम्बा तथा पतला लगता है। (ख) दाएँ-बाएँ लेटी रेखाएँ-इससे आदमी मोटा लगता है।
(ग) तिरछी रेखाएँ-यदि ये ज़्यादा लम्बाई की ओर हों तो आदमी लम्बा तथा यदि चौड़ाई की ओर हों तो छोटा तथा मोटा लगता है।
(घ) गोलाई की रेखाएँ-इससे कंधे चौड़े लगते हैं।
(ङ) टूटी हुई रेखाएँ-ये लम्बाई को छोटा दिखाती हैं।
(च)वी’ शक्ल की रेखाएँ-इस तरह की रेखाएँ शरीर को चौड़ा या लम्बा दिखा सकती हैं। जितनी गहरी ‘वी’ होगी, उतना ही आदमी पतला लगेगा।

प्रश्न 2.
मोटे और छोटे व्यक्ति को कैसी लाइनों का प्रयोग करना चाहिए ?
उत्तर-
मोटे और छोटे व्यक्ति को तिरछी लाइनों का प्रयोग करना चाहिए।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

प्रश्न 3.
गर्म और ठण्डे रंग कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
गर्म रंग-लाल, संतरी तथा पीला।
ठण्डे रंग-हरा, नीला तथा जामुनी।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कपड़ों का चुनाव करते समय रेखाओं तथा रंगों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
कपड़ों का चुनाव करते समय रेखाओं का निम्नलिखित महत्त्व है –
(क) सीधी रेखाएँ-इन्हें देखने के लिए आँख को ऊपर से नीचे की ओर देखना पड़ता है। इससे पहनने वाले का आकार लम्बा तथा पतला लगता है।

(ख) दाएँ-बाएँ लेटी रेखाएँ-इन रेखाओं को देखने के लिए एक सिरे से दूसरे सिरे तक देखना पड़ता है। इसलिए ये पहनने वाले को चौड़ा तथा छोटा दिखाती हैं। इससे आदमी मोटा लगता है।

(ग) तिरछी रेखाएँ-ये अधिक लम्बाई की ओर हों तो आदमी लम्बा तथा यदि चौडाई की ओर हों तो आदमी छोटा तथा मोटा लगता है।

(घ) गोलाई की रेखाएँ-इस तरह की रेखाएँ फ्रॉक की चोली, कालर तथा गले पर बनाई जाती हैं। इससे कंधे चौड़े लगते हैं।
(ङ) टूटी हुई रेखाएँ-ये लम्बाई को छोटा दिखाती हैं।

(च) ‘वी’शक्ल की रेखाएँ-इस प्रकार की रेखाएँ शरीर को चौड़ा या लम्बा दिखा सकती हैं। जितनी गहरी ‘वी’ होगी, उतना ही आदमी पतला लगेगा।
PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव 1
कपड़ों का चुनाव करते समय रंगों का महत्त्व-लाल, संतरी तथा पीला रंग गर्म रंग माने गए हैं। इनको पहनने से गर्मी अनुभव होती है। परन्तु भड़कीले होने के कारण इन रंगों का अधिक प्रयोग ज्यादा समय तक नहीं किया जा सकता है। हरे, नीले तथा जामुनी रंगों को ठंडे रंग कहा जाता है। ये काफ़ी सुखदायक होते हैं। परन्तु इनके ज़्यादा इस्तेमाल से व्यक्ति उदास लगता है। रंगों का चुनाव करते समय पहनने वाले का रूप, आकार, मौसम, दिन-रात तथा अवसर का ध्यान रखना ज़रूरी है। पक्के रंग वाली स्त्रियों को ज़्यादा गाढ़े तथा गर्म रंग नहीं पहनने चाहिएं। एक लम्बी स्त्री को हल्के रंग तथा छोटे छापे का कपड़ा नहीं पहनना चाहिए। एक छोटी स्त्री को गाढ़े रंग का तथा बड़े छापे वाले वस्त्र नहीं पहनने चाहिएं। एक मध्यम शरीर वाली स्त्री जो न बहुत लम्बी तथा न बहुत छोटी हो, किसी भी रंग या डिज़ाइन का कपड़ा पहन सकती है।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

प्रश्न 2.
अपने लिए वस्त्र खरीदते समय आप कौन-कौन सी बातों का ख्याल रखेंगे?
उत्तर-
वस्त्र खरीदते समय ध्यान रखने वाली बातें –

  1. रेखाओं के प्रयोग
    (क) सीधी रेखाएँ
    (ख) दाएँ-बाएँ लेटी रेखाएँ
    (ग) तिरछी रेखाएँ
    (घ) गोलाई की रेखाएँ
    (ङ) टूटी हुई रेखाएँ
    (च) ‘वी’ शक्ल की रेखाएँ।
  2. गले की रेखा का आकार
  3. लेस, झालर या बटन लगाना
  4. पोशाक की लम्बाई तथा चौड़ाई
  5. वस्त्र चुनाव के समय रंगों का चुनाव
  6. अवसर के अनुसार वस्त्रों का चुनाव
  7. ऋतु के अनुसार वस्त्रों का चुनाव।

प्रश्न 3.
अवसर तथा ऋतु के अनुसार आप कपड़ों का कैसे चुनाव करोगे ?
उत्तर-
अवसर के अनुसार कपड़ों का चुनाव-रोज़ घर में पहनने वाले वस्त्र अधिक समय तक चलने वाले, सुगमता से धोए जा सकने वाले तथा अधिक महँगे नहीं होने चाहिएं। स्कूल के बच्चों की एक जैसी वर्दी होनी चाहिए ताकि किसी को धनी या निर्धन होने का आभास न हो। बच्चों के रोज़ पहनने वाले वस्त्र ऐसे होने चाहिएं जो जल्दी गन्दे न हों। घर के बाहर काम करने वाली स्त्रियों के वस्त्र अधिक कीमती या भड़कीले नहीं होने चाहिएं। कभी-कभी ब्याह-शादी या अन्य किसी अवसर के लिए सिल्क या अन्य कीमती वस्त्र, जिनके रंग भड़कीले या गाढ़े भी हो सकते हैं, खरीदे जा सकते हैं।

ऋतु के अनुसार कपड़ों का चुनाव-हम ऋतु के अनुसार कपड़े खरीदते हैं। सर्दियों के लिए गाढ़े रंग के तथा गर्म रंगों के कपड़े तथा गर्मियों के लिए हल्के तथा ठंडे रंगों के वस्त्र खरीदने चाहिएं। ब्राउन तथा काला रंग सर्दियों में प्रयोग करना चाहिए और सफेद या बादामी रंग गर्मियों में प्रयोग करना चाहिए। सर्दियों के लिए ऊनी, सिल्की या नॉयलॉन आदि के वस्त्र खरीदने चाहिएं। गर्मियों के लिए सूती कपड़ों या टेरीकॉट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

प्रश्न 4.
आप अपने कपड़ों की कैसे देख-भाल करोगे ?
उत्तर-
कपड़ों की देख-भाल –

  1. कपड़ों को सदा साफ़-सुथरा तथा अच्छी दशा में रखना चाहिए।
  2. कालर या कफ़ से कमीज़ फट जाए तो तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए।
  3. कपड़ा कहीं से फट जाए या छिद्र हो जाए तो उसे रफू या पैबन्द लगाकर ठीक कर लेना चाहिए।
  4. बटन व हुक आदि टूट जाए तो शीघ्र ही उसे बदल देना चाहिए।
  5. कपड़ों को कभी भी किसी कील में नहीं टाँगना चाहिए।
  6. कपड़ों को अच्छी तरह तह करके अलमारी में रखकर हैंगर में लटकाना चाहिए।

Home Science Guide for Class 6 PSEB पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
गर्म रंग कौन-से माने गए हैं ?
उत्तर-
लाल, संतरी तथा पीला रंग गर्म रंग माने गए हैं।

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प्रश्न 2.
ठंडे रंग कौन-से माने गए हैं ?
उत्तर-
हरा, नीला तथा जामुनी रंग ठंडे रंग माने गए हैं।

प्रश्न 3.
स्कूल के बच्चों की यूनीफार्म कैसी होनी चाहिए ?
उत्तर-
स्कूल के सभी बच्चों की यूनीफार्म एक जैसी होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
गर्मियों में कैसे कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है ?
उत्तर-
गर्मियों में सूती या टेरीकॉट कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कपड़ों का चुनाव करते समय गले की रेखाओं का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
कपड़ों का चुनाव करते समय गले की रेखाएँ कन्धे को चौड़ा या लम्बा या छोटा दिखा सकती हैं, जैसे कि ‘वी’ या ‘यू’ आकार के गले से गर्दन तथा चेहरे का आकार लम्बा तथा गोल और चौरस गले से चेहरा तथा कन्धे चौड़े तथा गर्दन छोटी लगती है। लम्बी गर्दन वाले को दोहरी पट्टी वाली या कालर वाली कमीज़ पहननी चाहिए।
PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव 2

प्रश्न 2.
ऋतु के अनुसार कपड़ों के चुनाव के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर-
हम ऋतु के अनुसार कपड़े खरीदते हैं। सर्दियों के लिए गाढ़े रंग के तथा गर्म रंगों के कपड़े तथा गर्मियों के लिए हल्के तथा ठंडे रंगों के वस्त्र खरीदने चाहिएं। ब्राउन तथा काला रंग सर्दियों में प्रयोग करना चाहिए और सफेद या बादामी रंग गर्मियों में प्रयोग करना चाहिए। सर्दियों के लिए ऊनी, सिल्की या नॉयलॉन आदि के वस्त्र खरीदने चाहिएं। गर्मियों के लिए सूती कपड़ों या टेरीकॉट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

प्रश्न 3.
कपड़ों की देखभाल के लिए कोई दो बातें बताएं।
उत्तर-

  1. कपड़ों को कील पर न टांगें।
  2. कपड़ों को सदा साफ तथा अच्छी अवस्था में रखें।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
किसी गर्म रंग का नाम बताएँ।
उत्तर-
लाल।

प्रश्न 2.
लम्बी तथा पतली स्त्रियों को किस प्रकार की रेखाओं वाले वस्त्र पहनने चाहिए ?
उत्तर-
लेटी हुई रेखाओं के।

प्रश्न 3.
ठण्डे रंग का नाम बताएँ।
उत्तर-
जामनी।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

प्रश्न 4.
संतरी रंग गर्म है या ठण्डा ।
उत्तर-
गर्म।

प्रश्न 5.
टूटी रेखाएं क्या दर्शाती हैं ?
उत्तर-
लम्बाई को छोटा करती हैं।

प्रश्न 6.
मोटे तथा छोटे व्यक्ति को कैसी लाइनों वाले कपड़े पहनने चाहिए ?
उत्तर-
टेढ़ी लाइनों वाले।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 6 पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव

पहनने वाले वस्त्रों का चुनाव PSEB 6th Class Home Science Notes

  • प्रत्येक व्यक्ति को अपने रंग-रूप, लम्बाई-मोटाई, व्यक्तित्व, ऋतु तथा अपने काम के अनुसार ही वस्त्र खरीदने चाहिए।
  • रंगों तथा लाइनों के प्रयोग से तथा डिज़ाइन बदलने से शारीरिक दोषों को कुछ सीमा तक छुपाया जा सकता है।
  • लाइनदार कपड़ा खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें –
    (क) सीधी रेखाएँ, (ख) दाएँ-बाएँ लेटी रेखाएँ, (ग) तिरछी रेखाएँ, (घ) गोलाई की रेखाएँ, (ङ) टूटी हुई रेखाएँ, (च) ‘वी’ शक्ल की रेखाएँ।
  • लम्बी गर्दन वाले को दोहरी पट्टी वाली या कालर वाली कमीज़ पहननी चाहिए।
  • छोटी गर्दन वालों को बंद गले या ऊँचे गले वाले वस्त्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • लम्बी तथा पतली स्त्रियों को लेटवीं रेखाओं में तथा मोटी और छोटे कद वाली स्त्रियों को खडी रेखाओं के वस्त्र आदि लेने चाहिएं।
  • छोटे आकार वाली स्त्री को गाढ़े रंग तथा बड़े छापे वाले वस्त्र नहीं पहनने चाहिएं।
  • वस्त्र व्यक्ति को शोभा तभी बढ़ाते हैं जब उनकी ठीक देख-भाल की जाए।
  • कपड़ों को धोकर प्रेस कर लिया जाए तो वे और भी सुन्दर लगते हैं।

जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules – PSEB 11th Class Physical Education

Punjab State Board PSEB 11th Class Physical Education Book Solutions जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules.

जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules – PSEB 11th Class Physical Education

याद रखने योग्य बातें (TIPS TO REMEMBER)

  1. जिमनास्टिक टीम के खिलाड़ी = 8
  2. मुकाबला शुरू होने पर खिलाड़ी बदला जा सकता है। = नहीं
  3. ज्यूरी का फैसला = अंतिम
  4. चोट लगने पर या बीमार होने पर इंतज़ार किया जा सकता है = 30 मिनट
  5. विजेता टीम के कितने खिलाड़ियों के अंक गिने जाते हैं। = 6 खिलाड़ी
  6. अंक दिये जाते हैं = 0 से 10 तक
  7. बिना ज्यूरी के खिलाड़ी खेल छोड़ सकता है। = नहीं
  8. प्रतियोगिता के लिए अधिकारी = कम से कम 3 या पाँच
  9. लड़कों के लिए मुकाबले =
    • पैरेलल बार
    • वाल्टिंग होर्स
    • ग्राऊंड जिम्नास्टिक
    • हॉरिजोंटल बार
    • रोमन डिंग
    • पोमल होर्स।
  10. लड़कियों के लिए मुकाबले =
    • बीम बैलेंस (ज़रूरी)
    • ग्राऊंड जिम्नास्टिक (ज़रूरी)
    • अनइवर बार (ज़रूरी)
    • वाल्टिंग होर्स

जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules - PSEB 11th Class Physical Education

PSEB 11th Class Physical Education Guide जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
ओलम्पिक में लड़कियों के लिए जिम्नास्टिक कब आरम्भ हुई ?
उत्तर-
1928 ई० के ओलम्पिक्स में।

प्रश्न 2.
लड़कों द्वारा किये जाने वाले जिम्नास्टिक्स अप्रेटस कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-

  1. फ्लोर एक्सरसाइज़
  2. पैरलल बार
  3. हॉरीजोंटल बार
  4. पोमेल हॉर्स
  5. रोमन रिंग्स
  6. वाल्टिंग हॉर्स

प्रश्न 3.
जिम्नास्टिक के मैच में वाल्टिंग हॉर्स की ऊंचाई लिखें।
उत्तर-
1350 मि. मी.।

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प्रश्न 4.
जिम्नास्टिक के मैच में लड़कों की प्रतियोगिता में जजमैंट के लिये कितने जज होते हैं ?
उत्तर-
एक सीनियर जज और 6 अन्य जज।

प्रश्न 5.
पैरलल बार की लम्बाई लिखें।
उत्तर-
3500 मि. मी.।

जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules - PSEB 11th Class Physical Education

Physical Education Guide for Class 11 PSEB जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
जिमनास्टिक्स का इतिहास लिखें।
उत्तर-
इतिहास (History)-जिमनास्टिक्स एक प्राचीन खेल है। 2600 ईसा पूर्व चीन में जिमनास्टिक्स के व्यायाम किए जाते थे। परंतु इसका वास्तविक विकास यूनान व रोम में शुरू हुआ। ‘जिमनास्टिक्स’ शब्द यूनानी भाषा के ‘जिम्नोस’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ ‘नग्न शरीर’ है। नग्न शरीर के द्वारा जो व्यायाम किए जाते हैं उन्हें जिमनास्टिक कहा जाता है। ये व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किए जाते थे। यूनान में जिमनास्टिक पर अधिक बल दिया। स्पार्टवासी अपने युवा वर्ग को जिमनास्टिक का प्रशिक्षण प्रदान कराने में अधिक कठोर थे। उन दिनों लड़कियों और लड़कों से यह आशा की जाती थी कि वह जिमनास्टिक द्वारा अपने स्वास्थ्य को ठीक रखें। यूनान और रोम की सभ्यताओं के पतन के साथ-साथ जिमनास्टिक भी यूनान और रोम से समाप्त हो गई।

जिमनास्टिक के महान् गाड फादर जॉन गुट्स मुथूस ने जिमनास्टिक को पर्शियन स्कूलों में शुरू किया। इस प्रकार जर्मनी ने जिमनास्टिक की पुनः खोज की जिस कारण सन् 1881 में अन्तर्राष्ट्रीय जिमनास्टिक फेडरेशन (International Gymnastic Federation) अस्तित्व में आई। सन् 1894 में पहली जिमनास्टिक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था। प्रथम आधुनिक ओलम्पिक्स खेलों में पुरुषों के लिए जिमनास्टिक को शामिल किया गया जबकि महिलाओं के लिए जिमनास्टिक को सन् 1928 के ओलम्पिक्स में शामिल किया गया। सन् 1974 एशियाई खेलों में पहली बार इसको शामिल किया गया जिसका आयोजन तेहरान में हुआ था। सन् 1975 में प्रथम विश्व कप का आयोजन हुआ था। जिमनास्टिक एक मनमुग्ध, आकर्षक और अत्यन्त लोकप्रिय खेल है।

जिमनास्टिक के नये सामान्य नियम
(Latest General Rules Related to Gymnastics)
1. पुरुष छः इवेंट्स में भाग लेते हैं जिनमें फ्लोर एक्सरसाइजिज़, वाल्टिंग हार्स, पोमेल्ड हार्स, रोमन रिंग्स, हारीजोंटल बार और पैरलल बार्स होते हैं। महिलाएं चार इवेंट्स में भाग लेती हैं जिसमें वाल्टिंग हार्स, अनईवन बार्स, बैलेंसिंग बीम व फ्लोर एक्सरसाइज़िज होती हैं।

2. सभी जिमनास्ट इवेंट के शुरू होने के पहले तथा बाद में जज के सामने उपस्थित होते हैं। वह सिग्नल मिलने पर ही व्यायाम शुरू करते हैं। अगर एक्सरसाइज के समय वे गिर जाएं तो उन्हें फिर शुरू करने के लिए 30 सैकेंड का समय दिया जाता है।

3. टीम प्रतियोगिता के लिए प्रत्येक टीम के छह जिमनास्ट प्रत्येक एपरेंट्स पर एक अनिवार्य और एक ऐच्छिक, एक्सरसाइज़ करते हैं। सबसे ऊँचे पांच स्कोर को जोड़ लिया जाता है जिससे टीम के अंक जोड़े जा सकें।

4. जिमनास्ट के लिए उचित पोशाक पहनना आवश्यक है। वह पट्टियां बांध सकता है और स्लीपर्स पहन सकता है। जुराबें भी पहन सकता है। सिग्नल मिलने पर 30 सैकेंड में ही अपनी एक्सरसाइज़ शुरू करनी होती है।

होरीजोंटल बार और रोमन रिंग्ज में कोच या एक जिमनास्ट होना ज़रूरी है।

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प्रश्न 2.
जिमनास्टिक के उपकरणों के बारे लिखें।
उत्तर-
खेल के मैदान एवं खेल से सम्बन्धित उपकरणों का वर्णन (Specification of Play field & Sports Equipment)—
(A) पुरुषों के लिए उपकरण (Equipment for men)
1. फर्श 12 × 12 मी०

2. पैरलल बार (Parallel Bar)
बार्स की लम्बाई = 3500 मि०मी०
बार्स की चौड़ाई = 420-520 मि०मी०
बार्स की ऊंचाई = 1750 मि०मी०
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Parallel Bars

3. हॉरीजोंटल बार (Horizontal Bar)
बार का व्यास = 28 मि०मी०
बार की ऊंचाई = 2.550-2.700 मि०मी०
बार की लम्बाई = 2.400 मि०मी०
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Horizontal Bars

4. पोमेल हॉर्स (Pommel Horse)
पोमेल हार्स की लम्बाई = 1600 मि०मी०
पोमेल हार्स की चौड़ाई = 350 मि०मी०
फर्श की ऊँचाई = 1100 मि०मी०
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Pommel Horse

5. रोमन रिंग्स (Roman Rings)
व्यास (ग्रिप) = 28 मि०मी०
फर्श से स्टैंड की ऊँचाई = 5.500 मि०मी०
चमड़े की पट्टियों की लम्बाई = 700 मि०मी०
मोटाई = 4 मि०मी०
रिंग के अंदर का व्यास = 180 मि०मी०
फर्श से रिंग की ऊँचाई = 2.500 मि०मी०
चौड़ाई पटरियों की = 3.5 मि०मी०
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Roman Rings
वॉल्टिंग हॉर्स (Vaulting Horse)
वॉल्टिंग हॉर्स की ऊँचाई = 1350 मि०मी०
मध्य में समायोजन करने वाले स्टैप्स = 50 मि०मी०
हॉर्स की ऊँचाई = 1600 मि०मी०
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Vaulting Horse

(B) महिलाओं के लिए उपकरण (Equipment for Women)
1. फर्श = 12 मी० × 12 मी०
2. वाल्टिंग हॉर्स (Vaulting Horse)
वाल्टिंग हॉर्स की ऊंचाई = 1,250 मि०मी०
मध्य म समायोजन करने वाले स्टैप्स = 100-150 मि०मी०
हॉर्स की लम्बाई = 1,600 मि०मी०

3. बैलेसिंग बीम (Balancing Beam)
बीम की ऊंचाई = 1200 मि०मी०
बीम की लम्बाई = 1500 मि०मी०
बीम की चौड़ाई = 100 मि०मी०
ऊँचाई का समायोजन = 700-1200 मि०मी०
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Balancing Beam

4. अन-ईवन बार (Uneven Bar)
अन-ईवन बार की लम्बाई = 2400 मि०मी०
फर्श से बार की ऊंचाई = 2300 मि०मी०
बार्स के बीच की दूरी = 580-900 मि०मी०
अपराइट्स का व्यास = 50-60 मि०मी०
अपराइट्स की मोटाई = 30 मि०मी०
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Uneven Bar
जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules - PSEB 11th Class Physical Education 8
Gymnasium

महत्त्वपूर्ण टूर्नामैंट्स
(Important Tournaments)

  1. ओलम्पिक गेम्स
  2. एशियन गेम्ज
  3. वर्ल्ड कप
  4. आल इंडिया इन्टर यूनिवर्सिटी जिमनास्टिक्स चैम्पियनशिप
  5. नेशनल चैम्पियनशिप
  6. फेडरेशन कप
  7. स्कूल नेशनल गेम्स
  8. चाइना कप।

प्रसिद्ध खिलाड़ी
(Famous Sports Personalities)
(क) भारतीय खिलाड़ी

  1. शामलाल
  2. कु० कृपाली पटेल
  3. डॉ० कल्पना देवनाथ
  4. मोण्टू देवनाथ
  5. अन्जू दुआ
  6. सुनीता शर्मा।

(ख) विदेशी खिलाड़ी

  1. ओलगा कोहबुत
  2. नादिया कोमानेली
  3. नेलोकिम
  4. लुदिमिला जिस्कोवा
  5. डोवलूपी
  6. कीरनजन्ज।
  7. एलीवश सादी।

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प्रश्न 3.
जिमनास्टिक के मुख्य कौशल लिखें।
उत्तर-
जिम्नास्टिक के मुख्य कौशल
(Fundamental Skill of Gymnastics)
पुरुषों के इवेंट्स (Men’s Events)
(A) पैरलल बार (Parrallel Bar)

  1. अप स्टार्ट
  2. फ्रंट अपराइज
  3. शोल्डर स्टैंट
  4. हैंड स्टैंड
  5. हैंड स्टैंड विद 180° टर्न
  6. हैंड स्टैंड ट फ्रंट टर्न ऑन दि शोल्डर
  7. वैकवर्ड रोल
  8. हैंड स्टैंड टू कार्ट व्हील

(B) हॉरीजोंटल बार (Horizontal Bar)

  1. अप स्टार्ट विद ओवर ग्रिप
  2. अप स्टार्ट विद अंडर ग्रिप
  3. शॉर्ट सर्कल
  4. वन लैग सर्कल विद हील फुट
  5. हील फुट
  6. स्विंग विद श्रू वाल्ट।

(C) पोमेल्ड हार्स (Pommaled Horse)

  1. फ्रंट स्पोर्ट पोजीशन
  2. सिंगल लैग हॉफ सर्कल
  3. डबल लैग सर्कल्स
  4. फ्रंट सीजर्स।

(D) रोमन रिग्स (Roman Rings)

  1. अप स्टार्ट
  2. बैक सर्कल टू बैक हैंग
  3. मसल-अप
  4. बैक लीवर
  5. बैक अपराइज
  6. डिस्लोकेशन
  7. बैक अपराइज विद एल पोजीशन।

(E) वॉल्टिंग हार्स (Vaulting Horse)

  1. स्ट्रैडल वॉल्ट
  2. स्कैटवाल्ट
  3. कार्ट व्हील
  4. हैंड स्टैंड टू कार्ट व्हील
  5. हैंड स्प्रिंग।

(F) फर्श पर किए जाने वाले व्यायाम (Floor Exercises)

  1. फॉरवर्ड रोल टु हैंड स्टैंड
  2. बैकवर्ड रोल टु हैंड स्टैंड
  3. फॉरवर्ड रोल टु हैंड स्प्रिंग
  4. हैंड स्प्रिंग टु डाइव रोल
  5. राउंड ऑफ टु फ्लिक-फ्लैक
  6. वन लैग हैंड स्प्रिंग
  7. हैंड स्टैंड टु फारवर्ड रोल विद स्ट्रेट लैग्स।

महिलाओं के इवेंट्स (Women Events)
(A) बैलेसिंग बीम (Balancing Beam)

  1. गैलोप स्टैप विद बैलेंस
  2. सीर्जस जम्प
  3. फारवर्ड रोल
  4. बैकवर्ड रोल
  5. कार्ट व्हील
  6. ब्रिज
  7. बैलेंस
  8. डिस्काउंट

(B) वाल्टिंग हॉर्स (Vaulting Horse)

  1. स्पलिट वॉल्ट
  2. हैंड स्प्रिंग
  3. स्कवैट वॉल्ट।

(C) अन-ईवन बार्स (Un-even Bars)

  1. स्प्रिंग ऑन अपर बार
  2. बैक अप-राइज
  3. वन लैग फारवर्ड सर्कल
  4. वन लैग बैकवर्ड सर्कल
  5. क्रास बैलेंस
  6. हैंड स्प्रिंग।

(D) फर्श के व्यायाम (Floor Exercises)

  1. फारवर्ड रोल टु हैंड स्टैंड
  2. बैकवर्ड रोल टु हैंड स्टैंड
  3. राउंड आफ
  4. स्लोबैक हैंड स्प्रिंग
  5. स्पलिट सिटिंग
  6. स्लो हैंड स्प्रिंग
  7. हैंड स्प्रिंग
  8. हैड स्प्रिंग।

खिलाड़ी
(Players)
टीम में आठ खिलाड़ी होते हैं और सभी खिलाड़ी सभी अभ्यासों में ही भाग लेते हैं। टीम चैम्पियनशिप के लिए छः सर्वोत्तम खिलाड़ियों का प्रदर्शन गिना जाता है।

अंक या प्वाइंट
(Points)

  1. प्रत्येक अभ्यास के लिए 0 से 10 तक अंक लगाए जाते हैं। एक प्वाइंट के आगे 10 भागों में बांटा जाता है।
  2. यदि निर्णायकों का पैनल पांच का हो तो उच्चतम और न्यूनतम अंकों को जोड़ दिया जाता है और मध्य के तीन अंकों की औसत ले ली जाती है।
  3. यदि पैनल तीन निर्णायकों का हो तो तीनों के अंकों को ही औसत के लिए लिया जाता है।

निर्णय
(Decision)

  1. पांच या कम-से-कम तीन निर्णायक प्रत्येक इवेंट के लिए प्रतियोगिता की समाप्ति तक रखे जाते हैं। इसमें से एक मुख्य निर्णायक माना जाता है।
  2. निर्णायक प्रत्येक उपकरण (आप्रेटस) पर पहले खिलाड़ी के कौतुक के आधार पर अंकों बारे शेष खिलाड़ियों के कौतुकों का मूल्यांकन करते हैं। अभ्यास के लिए परामर्श भी कर सकते हैं ताकि सामान्य आधार का निर्णय कर सकें।
  3. इसके पश्चात् वे स्वतन्त्र रूप में निर्णय करते हैं और किसी विशेष बात (जैसे कि दुर्घटना) के अतिरिक्त वे परामर्श नहीं करते।
  4. तीनों निर्णायकों के अंकों की औसत से परिणाम निकाला जाएगा।
  5. यदि दो निर्णायकों के अंकों में मतभेद हो तो मुख्य निर्णायक की अंकों की संख्या भी देखी जाती है।
  6. मुख्य निर्णायक का यह कर्त्तव्य है कि वह अन्य दोनों निर्णायकों की सन्धि करवाए। यदि ऐसा न हो सके तो मुख्य निर्णायक अपना निर्णय सुना सकता है।

जिम्नास्टिक्स (Gymnastics) Game Rules - PSEB 11th Class Physical Education

प्रश्न 4.
जिमनास्टिक्स के साधारण नियम लिखें।
उत्तर-
प्रतियोगिता के सामान्य नियम
(General Rules of.Competition)
1. प्रतियोगिता के समय खिलाड़ियों को बदलने की आज्ञा नहीं होती।

2. इवेंट्स के जज तथा टीमें ठीक समय पर मैदान में पहुंच जानी चाहिएं।

3. यदि किसी खिलाड़ी की दुर्घटना हो जाए या वह बीमार पड़ जाए तो कप्तान उसी समय डॉक्टर को सूचित करें और उसकी पुष्टि प्राप्त करें।

4. उस खिलाड़ी को स्वस्थ होने के लिए और फिर खेल में सम्मिलित होने के लिए आधे घंटे के लिए खेल स्थगित की जा सकती है। यदि इस समय तक भी खिलाड़ी की दशा में सुधार नहीं होता तो उसे खेल से निकाल दिया जाता है और खेल आरम्भ करनी पड़ती है।

5. टीम प्रतियोगिताएं दो भागों में होंगी। पहले अनिवार्य अभ्यासों के लिए तथा फिर ऐच्छिक अभ्यासों के लिए।

6. केवल वही प्रतियोगी फाइनल में भाग ले सकेंगे जिन्होंने टीम प्रतियोगिता के सभी इवेंट्स में भाग लिया होगा।

7. अनिवार्य व्यायामों में खिलाड़ी को दूसरा अवसर व्यायाम करने के लिए मिल सकता है जबकि वह खिलाड़ी यह महसूस करें कि मेरा पहले प्रदर्शन (परफारमेंस) ठीक नहीं है, या वह अपने व्यायामों के कुछ व्यायाम करना भूल गया है लेकिन मैदान व्यायामों में दूसरा अवसर नहीं दिया जाता। दूसरा अवसर प्राप्त करने के लिए पहले व्यायाम समाप्त करने के उपरान्त खिलाड़ी को हाथ खड़े करके निर्णायक को दूसरा अवसर प्राप्त करने के लिए बताना होगा। परन्तु दूसरा अवसर अपनी टीम के सभी खिलाड़ियों के भाग लेने के बाद ही लेना होता है।

8. लम्बी दौड़ों के वाल्ट पर प्रत्येक खिलाड़ी को दो बार प्रयत्न करने का अधिकार है। सर्वोत्तम प्रदर्शन उचित स्वीकार किया जाता है।

9. फ्री स्टैडिंग अभ्यास को दोहराया नहीं जा सकता।

10. लम्बी दौड़ों के अतिरिक्त ऐच्छिक अभ्यास को दोहराया नहीं जाता।

11. प्रबन्धक उपकरणों की व्यवस्था करेंगे। कोई भी टीम अपने निजी उपकरण प्रयोग नहीं कर सकती।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

Punjab State Board PSEB 10th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Welcome Life Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

PSEB 10th Class Welcome Life Guide आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन Textbook Questions and Answers

अभ्यास-I

सही/ग़लत चुनें

  1. बार-बार अभ्यास करने से कौशल तेज़ होता है।
  2. गायन अभ्यास के साथ परिष्कृत किया जा सकता है।
  3. प्रतिभा जन्म से ही किस्मत वाले लोगों को मिलता है।
  4. प्रतिभा को तराशने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

उत्तर-

  1. सही,
  2. सही,
  3. ग़लत,
  4. सही।

अभ्यास-II

सोचो और बताओ

प्रश्न 1.
कौन-सी बात पर करियर का एक अच्छा विकिल्प निर्भर करता है?
उत्तर-
एक अच्छे करियर का चुनाव किसी के झुकाव पर निर्भर करता है कि वह किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा झका है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करियर चुनता है जो उसे पसंद नहीं है, तो वह करियर उसके लिए अच्छा नहीं होगा। यह व्यक्ति के घर की परिस्थितियों और उस समय की आवश्यकता पर भी निर्भर करता है जिसे वह चुनता है।

प्रश्न 2.
करियर काऊंसलर ने कितने प्रकार की काउंसलिंग के बारे में बताया है?
उत्तर-
करियर काऊंसलर ने तीन प्रकार के परामर्श का सुझाव दिया

  1. पर्सनल काऊंसलिंग-जब एक काऊंसलर किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से काऊंसलिंग करता है, तो उसे व्यक्तिगत परामर्श कहा जाता है।
  2. ग्रुप काऊंसलिंग-जब कुछ छात्र या व्यक्ति एक परामर्शदाता के साथ बातचीत करते हैं, तो उसे ग्रुप काऊंसलिंग कहते हैं।
  3. क्लास काऊंसलिंग-जब काऊंसलर पूरी कक्षा से एक साथ बात करता है और उन्हें करियर के विकल्पों के बारे में बताता है, तो इसे क्लास काऊंसलिंग कहा जाता है।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 3.
नवदीप किस चीज़ को लेकर खुश था?
उत्तर-
नवदीप खुश था कि स्कूल में अब अच्छे कार्य हो रहे हैं क्योंकि छात्रों का करियर के लिए जागरूक किया जा रहा है।

प्रश्न 4.
आजकल करियर के एक से अधिक विकल्पों के साथ चलना क्यों जरूरी है?
उत्तर-
आजकल एक से अधिक करियर विकल्पों के साथ आगे बढ़ना ज़रूरी है, क्योंकि

  1. हो सकता है कि व्यक्ति की आने वाले समय में उस व्यवसाय में रुचि ही खत्म हो जाए।
  2. यह संभव है कि भविष्य में समाज में एक करियर विशेष का महत्त्व ही खत्म हो जाए।
  3. दूसरी नौकरी में हो सकता है, एक व्यक्ति को आत्म संतुष्टि और अधिक पैसा मिले। ऐसी परिस्थितियों में करियर के लिए एक से अधिक विकल्पों को रखना आवश्यक हो जाता है।

प्रश्न 5.
आप अपने स्कूल में किन अच्छी चीजों को देखते हैं?
उत्तर-

  1. हमारा स्कूल छात्रों के बहुमुखी विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।
  2. छात्रों को भविष्य के करियर विकल्पों की एक श्रृंखला में परिचित कराया जाता है।
  3. छात्रों को कहा जाता है कि वे केवल एक करियर के बारे में नहीं बल्कि कम-से-कम तीन करियर विकल्पों के बारे में सोचें।
  4. स्कूल के शिक्षक बच्चों के साथ अच्छे संबंध रखते हैं और समय-समय पर उनको सलाह देते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 6.
मनीषा में आपको कौन-सा गुण मिलता है?
उत्तर-
मनीषा में हमने जानने का गुण देखा। वह जानना चाहती थी कि बच्चों में फॉर्म में तीन विकल्प क्यों भरने को कहा गया। यह गुण हर बच्चे में होना चाहिए कि वह कोई काम क्यों करें। इसका लाभ यह है कि बच्चा तर्कसंगत सोच की गुणवत्ता विकसित करता है।

Welcome Life Guide for Class 10 PSEB आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी व्यक्ति में कौशल …………. से आता है।
(a) अभ्यास
(b) अध्ययन
(c) भटकना
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(a) अभ्यास।

प्रश्न 2.
अभ्यास से किसी के गायन कौशल को कैसे सुधार सकते हैं?
(a) गाने सीखकर
(b) अभ्यास द्वारा
(c) गाने सुनकर
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) अभ्यास द्वारा।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 3.
किसी के कौशल को कैसे तराशा जा सकता है?
(a) मेहनत के साथ
(b) एकाग्रता के साथ
(c) अभ्यास के साथ
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
मानव स्वभाव …………. होता है।
(a) परिवर्तनशील
(b) स्थिर
(c) समान
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(a) परिवर्तनशील।

प्रश्न 5.
संकीर्ण मानसिकता वाला व्यक्ति
(a) नकारात्मकता फैलाता है
(b) कभी भी खुश नहीं होता
(c) कभी आलोचना को स्वीकार नहीं करता
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

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प्रश्न 6.
एक व्यक्ति की सोच
(a) खुली होनी चाहिए
(b) तंग होनी चाहिए
(c) समान होनी चाहिए
(d) असंतुष्ट होनी चाहिए।
उत्तर-
(a) खुली होनी चाहिए।

प्रश्न 7.
इनमें से एक अच्छे व्यक्तित्व की विशेषता क्या है?
(a) मिलनसार
(b) चुनौती स्वीकार करना
(c) सीखने के लिए तैयार रहना
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 8.
करियर के कम-से-कम…………. विकल्प सभी को रखने चाहिएं।
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पांच।
उत्तर-
(b) तीन।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 9.
इनमें से कौन-सी एक प्रकार की काऊंसलिंग है ?
(a) पर्सनल
(b) क्लास
(c) ग्रुप
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 10.
व्यक्ति को अपने ………. अनुसार करियर चुनना चाहिए।
(a) क्षमता
(b) शौक
(c) रुझान
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

(ख) खाली स्थान भरें

  1. वरिंदर कुमार एक शिक्षक के साथ-साथ एक ……………. भी थे।
  2. करियर के ……………. विकल्प सभी को रखने चाहिए।
  3. एक व्यक्ति की ………….. प्रकृति उसकी प्रगति के रास्ते में बाधा बन जाती है।
  4. ……………….. ने समाज को बहुत प्रगति दी है।
  5. ………… प्रकृति का नियम है।

उत्तर-

  1. काऊंसलर,
  2. तीन,
  3. कठोर,
  4. प्रौद्योगिकी
  5. बदलाव।

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(ग) सही/ग़लत चुनें

  1. संकीर्ण सोच वाला व्यक्ति हमेशा प्रगति करता है।
  2. प्रत्येक बच्चा कुशल नहीं है।
  3. अभ्यास किसी के कौशल को बढ़ाता है।
  4. किसी व्यक्ति को अपनी आलोचना खुल कर स्वीकार करनी चाहिए।
  5. व्यक्ति को अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनना चाहिए।

उत्तर-

  1. ग़लत,
  2. ग़लत,
  3. सही,
  4. सही,
  5. सही।

(घ) कॉलम से मेल करें

कॉलम ए  —  कॉलम बी
(a) प्रतिभा — (i) रुझान
(b) विदेशी — (ii) गुणवत्ता
(c) दृष्टिकोण — (iii) ब्रिटिश
(d) व्यक्तित्व — (iv) दृष्टिकोण
(e) रुचि — (v) व्यक्तिगत।
उत्तर-
(a) प्रतिभा — (ii) गुणवत्ता
(b) विदेशी — (iii) ब्रिटिश
(c) दृष्टिकोण — (iv) दृष्टिकोण
(d) व्यक्तित्व — (v) व्यक्तिगत
(e) रुचि — (i) रुझान ।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक व्यक्ति को क्या विशेष बनाता है?
उत्तर-
एक व्यक्ति में मौजूद कौशल उसे एक व्यक्ति को विशेष बनाते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 2.
किसी व्यक्ति का कौशल कैसे चमकता है?
उत्तर-
एक व्यक्ति का कौशल केवल अभ्यास के साथ चमकता है।

प्रश्न 3.
हम किसी के गायन कौशल में सुधार कैसे कर सकते हैं?
उत्तर-
किसी व्यक्ति के गायन कौशल में निरंतर अभ्यास से ही सुधार किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
किसी व्यक्ति की प्रतिभा को बेहतर बनाने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर-
निरंतर अभ्यास, कड़ी मेहनत और एकाग्रता किसी की प्रतिभा को बेहतर बना सकते हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 5.
मनुष्य का स्वभाव कैसा होना चाहिए?
उत्तर-
मनुष्य का स्वभाव परिवर्तनशील होना चाहिए।

प्रश्न 6.
संकीर्ण मानसिकता का एक अवगुण दीजिए।
उत्तर-
संकीर्ण मानसिकता वाला व्यक्ति हमेशा नकारात्मकता फैलाता है।

प्रश्न 7.
खुली मानसिकता का क्या फायदा है?
उत्तर-
खुली मानसिकता वाला व्यक्ति हमेशा खुश रहता है और दूसरों को खुश रखता है।

प्रश्न 8.
क्या संकीर्ण मानसिकता वाला व्यक्ति संबंध बनाए रख सकता है?
उत्तर-
नहीं, वह संबंध नहीं बना सकता।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन

प्रश्न 9.
खुलेपन का क्या अर्थ है?
उत्तर-
खुलापन किसी के स्वभाव की गुणवत्ता है जो हमें खुलकर सोचने में मदद करता है।

प्रश्न 10.
खुले दिमाग वाले व्यक्ति का एक गुण बताओ।
उत्तर-
एक खुले दिमाग वाला व्यक्ति हमेशा मिलनसार होता है।

प्रश्न 11.
संकीर्ण मानसिकता वाले व्यक्ति का एक दोष बताओ।
उत्तर-
वह हर चीज़ का आलोचक है।

प्रश्न 12.
किसी व्यक्ति का जिद्दी स्वभाव उसके लिए कितना हानिकारक है?
उत्तर-
किसी व्यक्ति का ज़िद्दी स्वभाव उसकी प्रगति के रास्ते में एक बाधा बन जाता है।

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प्रश्न 13.
व्यक्ति को किस तरह की ज़िद्दी करनी चाहिए?
उत्तर-
ईमानदारी, परिश्रम के साथ कार्य करने की जिद्द, नक्ल न करना, रिश्वत न लेना इत्यादि।

प्रश्न 14.
हम समाज के ज़िम्मेदार नागरिक कैसे बन सकते हैं?
उत्तर-
सामाजिक नियमों का पालन करके और समाज से गलत चीज़ों को हटाने से हम ज़िम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।

प्रश्न 15.
एक व्यक्ति के पास कितने करियर विकल्प होने चाहिएं?
उत्तर-
उसके पास न्यूनतम तीन करियर विकल्प होने चाहिएं।

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प्रश्न 16.
करियर का चुनाव करते समय व्यक्ति को क्या ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर-
अपनी रुचि और समय की ज़रूरत का ध्यान रखना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हम किसी कार्य में कैसे महारत हासिल कर सकते हैं? एक उदाहरण से समझाएं।
उत्तर-
प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कौशल होता है और उस कौशल को चमकाने की आवश्यकता होती है। किसी के कौशल को चमकाने के लिए अभ्यास करने की आवश्यकता है। यदि वह अभ्यास से कम है तो वह कौशल का स्वामी नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, प्रथम श्रेणी के छात्र का लेखन कभी अच्छा नहीं हो सकता, लेकिन निरंतर लिखने के बाद हो सकता है। बच्चों के रूप में, हम साइकिल चलाना नहीं जानते थे लेकिन अभ्यास के साथ हमने साइकिल चलाना सीख लिया। इस तरह, अभ्यास से एक काम में महारत हासिल कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
किसी व्यक्ति को अपने दिमाग को खुला क्यों रखना चाहिए?
उत्तर-
एक व्यक्ति को अपना दिमाग खुला रखना चाहिए। जैसा कि कहा जाता है कि बहता पानी अच्छा दिखता है लेकिन स्थिर पानी गंदा हो जाता है। उसी तरह संकीर्ण सोच वाला व्यक्ति जीवन में प्रगति नहीं कर सकता। वह न तो खुद को खुश करता है और न ही दूसरों को खुश होने देता है। वह रिश्तों को ठीक से संभाल भी नहीं सकता। वह कभी भी अपनी आलोचना को स्वीकार नहीं करता, जो वास्तव में उसे स्वीकार करनी चाहिए। अपनी सोच को खुला रखना चाहिए और आलोचना को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
खुले दिमाग के होने के क्या फायदे हैं?
उत्तर-

  1. एक खुले दिमाग वाला व्यक्ति हमेशा परिवर्तन को स्वीकार करता है।
  2. वह अपनी आलोचना को सकारात्मक रूप से स्वीकार करता है और खुद में बदलाव लाता है।
  3. वह सामाजिक प्रगति में योगदान देता है और अपनी प्रगति भी करता है।
  4. वह खुद को खुश रखता है और दूसरों को भी खुश रखता है।
  5. वह रिश्तों को बेहतर तरीके से बनाए रखता है।

प्रश्न 4.
हमारे जीवन में तकनीक की क्या भूमिका है?
उत्तर-
आजकल नई तकनीक हमारे सामने आ रही है और हम इसे सकारात्मक तरीके से अपना रहे हैं। तकनीक के साथ जीवन लगातार आगे बढ़ रहा है। पुरानी पीढ़ी उतनी तेज़ नहीं है जितनी आज के युवा आधुनिक तकनीक के साथ इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हम अपना हर काम आसानी से कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कपड़े हाथ से धोए जाते थे लेकिन अब मशीन उन्हें आसानी से धो देती है। इस तरह हम कह सकते हैं कि प्रौद्योगिकी हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है और हमारे काम को काफी आसान बनाती है।

प्रश्न 5.
व्यक्ति ज़िद्दी या लचीला होना चाहिए, अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दें।
उत्तर-
व्यक्ति को ज़िद्दी नहीं बल्कि स्वभाव से लचीला होना चाहिए। उसकी ज़िद्द उसकी प्रगति के रास्ते में एक बाधा बन जाती है जैसे कि लड़के और लड़कियों को समान नहीं मानना। लोग भेदभाव करना शुरू कर देते हैं और इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसी ज़िद्द को बदलना चाहिए। परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन करके व्यक्ति परिवार की प्रगति, समाज की प्रगति और राष्ट्रीय प्रगति में योगदान दे सकता है।

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प्रश्न 6.
ज़िम्मेदार नागरिक के कर्त्तव्य क्या हैं?
उत्तर-

  1. उसे परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को बदलना चाहिए।
  2. उसे सामाजिक बुराइयों को स्वीकार नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें समाप्त करना चाहिए।
  3. उसे सामाजिक सीमाओं के भीतर रहना चाहिए।
  4. उसे दूसरों को सामाजिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
  5. उसे सामाजिक परिवर्तन लाने और स्वयं को भी बदलने की कोशिश करनी चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के गुण और अवगुण दें।
उत्तर-
गुण-

  1. सबसे पहले उसे कुछ नया सीखने के लिए तैयार होना चाहिए ताकि परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदल सके।
  2. उसे मिलनसार होना चाहिए और दूसरों के साथ स्वस्थ संबंध बनाए रखना चाहिए।
  3. उसे हर चुनौती को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि यदि वह नहीं स्वीकारता तो वह स्थिर हो जाएगा और व्यक्तिगत प्रगति नहीं कर पाएगा।
  4. उसे सभी सामाजिक नियमों का पालन करना चाहिए और दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

अवगुण-

  1. एक ज़िद्दी व्यक्ति हमेशा अपनी ज़िम्मेदारियों से दूर भागता है जो उसके जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है।
  2. एक ज़िद्दी व्यक्ति कभी किसी की सलाह नहीं लेता है। वह हमेशा अपने मन की करता है जिसका उसे नुकसान होता है।
  3. वह अचानक क्रोधित हो जाता है जो खतरनाक हो सकता है।
  4. वह बहुत जल्दी अपना आपा खो देता है।
  5. कई बार वह नियमों का पालन नहीं करता बल्कि उन्हें तोड़ता है।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित चित्रों का अवलोकन करें और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 1 आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन 1
(क) चित्र (1) में क्या दिखाया गया है?
(ख) आप चित्र (2) में क्या देखते हैं?
(ग) दोनों तस्वीरों से हमें क्या पता चलता है?
उत्तर-
(क) चित्र (1) हमें संकीर्ण मानसिकता वाले व्यक्ति के बारे में बताता है। वह हमेशा दुखी रहता है। वह न केवल खुद को चोट पहुंचाता है बल्कि अपने आस-पास के लोगों को भी चोट पहुँचाता है। वह अपने रिश्तों को भी बनाए नहीं रख सकता।
(ख) दूसरी तस्वीर में व्यक्ति खुली सोच और स्वभाव का है जो हमेशा बदलाव को स्वीकार करता है। वह खुद भी खुश रहता है और दूसरों को भी खुश रखता है। वह अपने रिश्तों को अच्छी तरह से बनाए रखता है।
(ग) दोनों चित्रों को देखने के बाद, हम कह सकते हैं कि एक व्यक्ति को ज़िद्दी नहीं होना चाहिए। बल्कि खुले दिमाग और परिप्रेक्ष्य का होना चाहिए। यह उनके जीवन को खुशहाल बनाता है। इसके विपरीत, ज़िद्दी व्यक्ति हर बार उदास रहता है जो सही नहीं है। इसलिए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हमें चुनौती स्वीकार करनी चाहिए और खुश रहना चाहिए।

आत्म-जागरुकता तथा आत्म-अनुशासन PSEB 10th Class Welcome Life Notes

  • प्रत्येक व्यक्ति में कुछ प्रतिभाएं होती हैं और यह प्रतिभा किसी भी प्रकार की हो सकती है।
  • निश्चित रूप से प्रतिभा को चमकाने की ज़रूरत है जो एक व्यक्ति के पास है और इसे बार-बार अभ्यास के माध्यम से पॉलिश किया जा सकता है।
  • किसी भी काम के निपुन्न बनने के लिए बार-बार अभ्यास करना होगा। अभ्यास के बिना कोई भी कार्य उचित तरीके से नहीं किया जा सकता। इसलिए अभ्यास किसी भी प्रतिभा को चमकाने का एक साधन है।
  • मनुष्य और उसका स्वभाव, दोनों ही परिवर्तनशील हैं। जिस तरह से प्रकृति में परिवर्तन आता है, उसी तरह व्यक्ति का स्वभाव भी समय के साथ बदलता है।
  • व्यक्ति को अपनी सोच संकीर्ण नहीं बल्कि खुली रखनी चाहिए और प्रत्येक परिवर्तन का स्वागत करना चाहिए।
  • संकीर्ण सोच वाला व्यक्ति न तो खुद खुश रहता है न ही दूसरों को खुश रहने देता है। संकीर्ण रवैये वाला व्यक्ति अपने रिश्तों को अच्छी तरह से संभाल नहीं सकता है। वह अपनी आलोचना नहीं सुन सकता। एक व्यक्ति को अपनी आलोचना सुनने के भीतर एक गुणवत्ता विकसित करनी चाहिए और अपने जीवन के उस पहलू को बदलना होगा जिसके लिए उसकी आलोचना की जा रही है।
  • एक खुले दिमाग वाला व्यक्ति हर बदलाव को खुले दिल से स्वीकार करता है और जीवन में प्रगति करता है। खुले दिमाग वाला व्यक्ति स्वयं को परिस्थिति के अनुसार ढालता है तो प्रगति करता है। यदि हम ने आधुनिक तकनीक को अपनाया है, तो यह हमारी खुली मानसिकता के कारण है।
  • एक व्यक्ति को कठोर रवैये का नहीं होना चाहिए। इसके बजाय वह लचीली प्रकृति का होना चाहिए। इसके साथ वह अपने सामने आते प्रत्येक हालात को स्वीकार कर लेता है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को एक जिम्मेवार बनने की कोशिश करनी चाहिए। यदि हमारे आस-पास कुछ गलत हो रहा है, तो हमें इसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह समस्या न हो।
  • सबसे महत्त्वपूर्ण होता है व्यक्ति का अपना रुझान देखना । व्यक्ति का जिस क्षेत्र में रुझान होता है। उसको उसी क्षेत्र में ही काम करना चाहिए जिसमें वह इच्छुक है अन्यथा वह किसी भी कार्य को ठीक से नहीं कर पाएगा। रुझानों को देखने के बाद, उसे उस क्षेत्र में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। इस तरह वह आने वाले करियर के बारे में जागरूक हो जाएगा।

PSEB 10th Class Agriculture Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

Punjab State Board PSEB 10th Class Agriculture Book Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Agriculture Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

PSEB 10th Class Agriculture Guide प्लांट क्लीनिक Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के एक-दो शब्दों में उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
पी० ए० यू० में प्लांट क्लीनिक की स्थापना कब की गई ?
उत्तर-
1993 में।

प्रश्न 2.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में कुल कितने प्लांट क्लीनिक स्थापित हैं ?
उत्तर-
18 कृषि विज्ञान केन्द्र तथा क्षेत्रीय खोज केन्द्र अबोहर, बठिंडा, गुरदासपुर।

प्रश्न 3.
प्लांट क्लीनिक में प्रयोग किए जाने वाले किन्हीं उपकरणों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कम्प्यूटर, माइक्रोस्कोप।

प्रश्न 4.
फसलों पर छिड़काव की जाने वाली दवाइयों की उचित मात्रा पता करने के लिए किस सिद्धान्त को आधार बनाया जाता है ?
उत्तर-
आर्थिक हानि की सीमा।

PSEB 10th Class Agriculture Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

प्रश्न 5.
स्लाइडों से किस उपकरण की सहायता से चित्र देखे जा सकते हैं ?
उत्तर-
प्रोजैक्टर द्वारा।

प्रश्न 6.
छोटे आकार की निशानियों की पहचान किस उपकरण से की जाती है ?
उत्तर-
माईक्रोस्कोप द्वारा।

प्रश्न 7.
बीमार पत्तों के नमूनों को संभालकर रखे जाने वाले दो रसायनों के नाम लिखिए।
उत्तर-
फार्मालीन, एसीटिक अम्ल।

प्रश्न 8.
पी० ए० यू० प्लांट क्लीनिक का ई-मेल पता क्या है ?
उत्तर-
Plantclinic @ pau.edu

प्रश्न 9.
पी० ए० यू० प्लांट क्लीनिक से किस टैलीफोन नम्बर पर सम्पर्क किया जा सकता है ?
उत्तर-
फोन नं० 0161-240-1960 जिसकी एक्सटेंशन 417 है। मोबाइल नं० 9463048181.

प्रश्न 10.
पी० ए० यू० के प्लांट क्लीनिक के पास गांव-गांव जाकर तकनीकी जानकारी देने के लिए कौन-सी वैन है ?
उत्तर-
निरीक्षण तथा प्रदर्शनी के लिए मोबाइल बैन (Mobile diagnosis cum exhibition van)।

PSEB 10th Class Agriculture Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का एक -दो वाक्यों में उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
प्लांट क्लीनिक क्या है ?
उत्तर-
यह वह कमरा अथवा ट्रेनिंग सैंटर है जहां बीमार पौधों की विभिन्न बीमारियों के बारे में अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 2.
प्लांट क्लीनिक शिक्षा का लाभ बताएं।
उत्तर-
इस सिद्धान्त के प्रयोग से ज़मींदारों को उनकी फसलों की कमियों तथा बीमारियों का सही इलाज मिलना आरम्भ हो गया है। इस तरह शिक्षार्थी तो पौधों को देखकर सभी कुछ समझते ही हैं, किसानों को आर्थिक लाभ भी हो रहा है।

प्रश्न 3.
मनुष्यों के अस्पतालों से प्लांट क्लीनिक कैसे भिन्न हैं ?
उत्तर-
मानवीय अस्पतालों में मनुष्य को होने वाले बीमारियों का पता लगाकर उनका इलाज किया जाता है जबकि पौधों के अस्पताल में बीमार पौधों के इलाज के अतिरिक्त बीमार पौधों के बारे में जांच शिक्षा तथा ट्रेनिंग भी करवाई जाती है।

प्रश्न 4.
प्लांट क्लीनिक में कौन-कौन से विषयों का अध्ययन किया जाता है ?
उत्तर-
इनमें पौधों पर बीमारी का हमला, तत्त्वों की कमी, कीड़े का हमला तथा अन्य कारणों का भी अध्ययन किया जाता है।

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प्रश्न 5.
प्लांट क्लीनिक में आवश्यक उपकरणों की सूची बनाएं।
उत्तर-
प्लांट क्लीनिक में आवश्यक साजो-सामान इस तरह है-
माइक्रोस्कोप, मैग्नीफाइंग लैंस, रसायन, इंकुबेटर, कैंची, चाकू, सूखे-गीले सैम्पल सम्भालने का साजो-सामान, कम्प्यूटर, फोटो कैमरा तथा प्रोजैक्टर, किताबें आदि।

प्रश्न 6.
सूक्ष्मदर्शी यन्त्र का प्लांट क्लीनिक में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
पौधे की चीरफाड़ करके बीमारी के लक्षण देखने के लिए माइक्रोस्कोप का प्रयोग किया जाता है। सही रंगों, छोटी निशानियों आदि की पहचान भी इसी से की जाती है।

प्रश्न 7.
इक्नोमिक फैशहोल्ड से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
पौधों को लगी बीमारियां अथवा कीड़ों आदि से हुए बचाव के लिए दवाई की उचित मात्रा ढूंढकर छिड़काव करना चाहिए। जब फसल को हानि पहुंचा रहे कीड़ों की संख्या एक खास स्तर पर आ जाए तब ही दवाई स्प्रे करनी चाहिए ताकि फसलों को लाभ भी हो। इस विधि को धैशहोल्ड का नाम दिया गया है।

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प्रश्न 8.
प्लांट क्लीनिक में कम्प्यूटर का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
कई तरह से सैम्पल न तो गीले तथा न ही सूखे सम्भाले जा सकते हैं। ऐसे नमूनों को स्कैन करके कम्प्यूटर में सम्भाल लिया जाता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इनका प्रयोग किया जा सके।

प्रश्न 9.
उष्मामित्र किस तरह पौधों की बीमारी ढूंढ़ने में मदद करता है ?
उत्तर-
उल्ली आदि को मीडिया के ऊपर रख कर इनकुबेटर (उष्मामित्र) में उचित तापमान तथा नमी पर रख कर उल्ली को उगने का पूरा वातावरण दिया जाता है तथा इसकी पहचान करके जीवाणु की पहचान की जाती है।

प्रश्न 10.
पौधों के नमूनों को शीशे के बर्तनों में अधिक समय रखने के लिए कौन-से रसायनों का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
इस काम के लिए फार्मालीन, एल्कोहल आदि का प्रयोग किया जाता है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के पांच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1.
प्लांट क्लीनिक के महत्त्व के बारे में एक नोट लिखिए।
अथवा
प्लांट क्लीनिक के क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तर-

  • प्लांट क्लीनिक में पौधों में भूमिगत खाद्य तत्त्वों की कमी से पैदा हुए लक्षणों की जांच करके पौधों की बीमारियां तथा हानि पहुंचाने वाले कीड़ों की पहचान की जाती है।
  • खेतों से लाए बीमार पौधों आदि की बीमारी के लक्षणों की पहचान करके मौके पर ही इन बीमारियों की रोकथाम के लिए इलाज बताये जाते हैं।
  • प्लांट क्लीनिकों में व्यक्तियों को शनाख्ती चिन्हों की पहचान करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • आवश्यक खनिज तथा रसायनों आदि की आवश्यक सही मात्रा निकालने के बारे में बताया जाता है ताकि इनका सही प्रयोग करके अतिरिक्त खर्चे से बचा जा सके।
  • प्लांट क्लीनिकों में फसलों के मुख्य कीड़ों के लिए इक्नामिक के धैशहोल्ड बारे में भी जानकारी दी जाती है। इस तरह प्रयोग की जाने वाली कीड़ेमार दवाइयां तथा पौधों में तत्त्वों की कमी का सही तरह पता लग जाता है तथा इन दवाइयों का प्रयोग सही मात्रा में किया जा सकता है।
  • विभिन्न स्प्रे पम्पों तथा अन्य उपकरणों के प्रयोग बारे भी जानकारी दी जाती है।
  • विद्यार्थियों को बीमार पौधे लाकर दिखाये जाते हैं तथा इलाज की विधि बारे बताया जाता है।
  • प्लांट क्लीनिकों में पौधों का अध्ययन करने के लिए आवश्यक उपकरणों, साजो-सामान, दवाइयां, पौधों के नमूने, पम्पों, खादों, बीज तथा अन्य सम्बन्धित, चीज़ों अथवा उनके नमूने अथवा उनकी तस्वीरें रखी जाती हैं।

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प्रश्न 2.
प्लांट क्लीनिक में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं ?
उत्तर-

  • प्लांट क्लीनिक पर किसान भाइयों को तकनीकी जानकारी दी जाती है।
  • फ़सलों के रोगों की पहचान, पहचान चिन, कीड़ों द्वारा फ़सलों को पहुंची हानि आदि के बारे में पता लगाया जाता है।
  • मिट्टी तथा पानी जांच की सुविधा भी उपलब्ध है।
  • टैलीफ़ोन, व्हट्स एप तथा ई-मेल द्वारा किसान अपनी समस्या को हल करवा सकते हैं।
  • इस अस्पताल के पास पौधों के निरीक्षण तथा प्रदर्शनी के लिए चलती फिरती वैन है जिस द्वारा गांव-गांव जाकर कृषि की तकनीकी जानकारी फिल्में दिखा कर दी जाती है।
  • क्लीनिक में कृषि के ज्ञान को प्रत्येक घर तक पहुंचाने के लिए पी० ए० यू० दूत तथा केमास (KMAS) सेवा शुरू की गई है। किसान अपना ई-मेल तथा मोबाइल नम्बर रजिस्ट्र करवा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 3.
प्लांट क्लीनिक की पृष्ठभूमि बताते हुए उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
कृषि सम्बन्धी उच्च स्तरीय कोरों में पिछले कई वर्षों में शहरी विद्यार्थियों का दखल काफ़ी बढ़ा है। इन्हें कृषि के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी बडी कम होती है तथा जब यह शहरी विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करके खेतों में कार्य करने के लिए जाते हैं तो इन्हें काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पहला प्लांट क्लीनिक, पौधा रोग विभाग, पी० ए० यू० में 1978 में स्थापित किया गया था तथा बाद में पी० ए० यू० की तरफ से सैंट्रल प्लांट क्लीनिक लुधियाना में 1993 में शुरू किया गया। भिन्न-भिन्न जिलों में 18 कृषि विज्ञान केन्द्रों में यह प्लांट क्लीनिक चल रहे हैं। इन क्लीनिकों द्वारा पढ़ाई का विद्यार्थी को काफ़ी लाभ मिल रहा है। इस सिद्धान्त के परिणामस्वरूप ज़मींदारों को उनकी फसलों की कमियों तथा बीमारियों का सही इलाज मिलना आरम्भ हो गया है। रोगों तथा कीटों के हमलों की मौके पर ही पहचान करके इलाज तथा रोकथाम के बारे में बताया जाता है। कृषि विकास से जुड़े व्यक्तियों को पहचान चिन्हों की पहचान का प्रशिक्षण दिया जाता है। भिन्न-भिन्न फ़सलों के मुख्य कीड़ों के लिए आर्थिक हानि की सीमा के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।

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प्रश्न 4.
मोबाइल डाईग्नोस्टिक कम एगज़ीबिशन वैन का विस्तारपूर्वक वर्णन करें ?
उत्तर-
प्लांट क्लीनिकों को गांव-गांव पहुंचाने के लिए प्लांट क्लीनिकों के पास पौधों का निरीक्षण करने हेतु मोबाइल वैन उपलब्ध है। इसको मोबाइल डाईगनोस्टिक कम एगजीबिशन वैन कहा जाता है। इस वैन में प्लांट क्लीनिक से संबंधित साजो-सामान होता है तथा गांव में किसानों को खेती तकनीकों की जानकारी देने के लिए फिल्में भी दिखाई जाती हैं। मौके पर पौधे को आई समस्याओं का निरीक्षण करके कृषि विशेषज्ञों द्वारा इलाज भी बताया जाता है। इस प्रकार किसान को काफ़ी लाभ मिल रहा है।

प्रश्न 5.
फ़ोटो कैमरे तथा स्लाइड प्रोजैक्टर प्लांट क्लीनिक में किस तरह मददगार होते हैं ?
उत्तर-
कैमरे की सहायता से रोगी पौधे की फोटो खींच ली जाती है। इस प्रकार तैयार फ़ोटो तथा स्लाइडों को प्लांट क्लीनिक में संभाल कर रखा जाता है। फ़ोटो तथा स्लाइडों से कोई भी विद्यार्थी तथा वैज्ञानिक रोगी पौधों की पहचान सरलता से कर सकता है। इस तरह स्लाइडों को देखने के लिए प्रोजैक्टर की आवश्यकता पड़ती है। यह फ़ोटो तथा स्लाइडों को बड़े आकार में दिखा सकता है। फ़ोटो को बड़े-बड़े आकार में बनाकर क्लीनिक में लगा लिया जाता है।

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Agriculture Guide for Class 10 PSEB प्लांट क्लीनिक Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रोगी पौधों के नमूने संभाल कर रखने के लिए रसायन का नाम –
(क) फार्मालीन
(ख) ग्लूकोस
(ग) सोडियम ब्रोमाइड
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) फार्मालीन

प्रश्न 2.
पी० ए० यू० में प्लांट क्लीनिक की स्थापना कब की गई?
(क) 2010
(ख) 1993
(ग) 1980
(घ) 1955.
उत्तर-
(ख) 1993

प्रश्न 3.
उल्लियों के जीवाणु ढूंढ़ने के लिए कौन-सा उपकरण प्रयोग किया जाता है ?
(क) सूक्ष्मदर्शी
(ख) इनकुबेटर (उष्मा मित्र)
(ग) प्रोजैक्टर
(घ) सभी।
उत्तर-
(ख) इनकुबेटर (उष्मा मित्र)

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प्रश्न 4.
पंजाब के कितने कृषि विज्ञान केन्द्रों में प्लांट क्लीनिक चल रहे हैं ?
(क) 7
(ख) 27
(ग) 18
(घ) 22.
उत्तर-
(ग) 18

प्रश्न 5.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के प्लांट क्लीनिक का ई-मेल पता क्या है ?
(क) www.gadvasu.in
(ख) www.pddb.in
(ग) [email protected]
(घ) www.pau.edu
उत्तर-
(ग) [email protected]

प्रश्न 6.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के प्लांट क्लीनिक का लैंडलाइन टेलीफोन नम्बर क्या है ?
(क) 0161-2401960 एक्सटेंशन 417
(ख) 94630-48181
(ग) [email protected]
(घ) www.pau.edu.
उत्तर-
(क) 0161-2401960 एक्सटेंशन 417

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II. ठीक/गलत बताएँ

1. पी० ए० यू० के द्वारा वर्ष 1993 में सैंटरल प्लांट क्लीनिक लुधियाना में स्थापित किया गया।
2. प्लांट क्लीनिक में कई तरह के उपकरण तथा साजो-समान की आवश्यकता होती
3. प्लांट क्लीनिक में रसायनों की आवश्यकता नहीं होती।
4. पंजाब एग्रीकल्चर यूनीवर्सिटी प्लांट क्लीनिक का ई-मेल पता plantclinic@ par.edu है।
उत्तर-

  1. ठीक
  2. ठीक
  3. गलत
  4. ठीक।

III. रिक्त स्थान भरें-

1. स्लाइडों पर चित्र ………………… द्वारा देखे जाते हैं।
2. बीमार पौधों के नमूनों को संभाल कर रखने वाला रसायन ……………… है।
3. कम्प्यूटर, ……………… आदि भी प्लांट क्लीनिक का महत्त्वपूर्ण भाग है।
4. पौधे की चीर फाड़ के लिए चाकू, ………….. आदि का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर-

  1. प्रोजैक्टर
  2. फार्मलीन
  3. स्कैनर
  4. कैंची।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई एक कारण बताओ जिस कारण पौधे आवश्यक पैदावार देने से अमसर्थ हो जाते हैं ?
उत्तर-
खाद्य तत्त्वों की कमी, बीमारी का हमला, कीड़ों का हमला।

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प्रश्न 2.
पौधों की चीर फाड़ करने के बाद बीमारी के चिन्ह देखने के लिए कौनसा उपकरण प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
माइक्रोस्कोप।

प्रश्न 3.
पौधे की चीर फाड़ के लिए क्या प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
चाकू, कैंची आदि।

प्रश्न 4.
उल्लियों के जीवाणु ढूंढ़ने में कौन-सा उपकरण प्रयोग होता है ?
उत्तर-
इनकुबेटर।

PSEB 10th Class Agriculture Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

प्रश्न 5.
प्लांट क्लीनिक में प्रयोग किये जाने वाले किसी एक रसायन का नाम लिखो।
उत्तर-
फार्मालीन।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्लांट क्लीनिक में चाकू आदि की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
चाकू आदि का प्रयोग पौधे को माइक्रोस्कोप के नीचे देखने के लिए, काट कर प्रयोग करने के लिए होता है।

प्रश्न 2.
प्लांट क्लीनिक में मैग्नीफाईंग लेन्ज का प्रयोग क्यों होता है ?
उत्तर-
इसका प्रयोग पौधों के छोटे भाग तथा कीड़े तथा अन्य जन्तुओं की पहचान के लिए होता है।

PSEB 10th Class Agriculture Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

प्रश्न 3.
प्लांट क्लीनिक में कृषि के ज्ञान को प्रत्येक घर तक पहुँचाने के लिए कौन-सी सेवा शुरू की गई है ?
उत्तर-
पी० ए० यू० दूत सेवा तथा केमास (KMAS) सेवा शुरू की गई है। किसान भाई अपना ई-मेल तथा फोन रजिस्ट्रर करवा कर इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इक्नामिक बैशहोल्ड का विस्तार से वर्णन करो।
उत्तर-
पौधों की बीमारियां तथा फसलीय कीटों को समाप्त करने वाली दवाइयों की सही मात्रा ढूंढ़ कर पौधों पर इसका प्रयोग किया जाना चाहिए। इस तरह पौधों को अधिक-से-अधिक लाभ मिल सकेगा तथा साथ ही खर्च भी कम-से-कम आएगा। कीडेमार दवाइयों के अन्धाधुन्ध तथा अनावश्यक प्रयोग से कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जैसे कीड़ों का दवाई के लिए आदि हो जाना, मरने के स्थान पर इनका आदी हो जाना, मित्र कीड़ों का समाप्त होना, जो कीड़े पहले फसलों की हानि नहीं करते थे उनके द्वारा अब नुकसान करना आरम्भ कर देना तथा समूचे वातावरण का गंदा होना खासतौर पर वर्णनीय है।

किसी भी कीडे का फसल पर प्रत्येक वर्ष एक जैसा हमला नहीं होता। यह हमला किसी वर्ष अधिक तथा किसी वर्ष कम होता है। इसके लिए दवाइयों का प्रयोग सोचसमझकर करना चाहिए।

दवाई का प्रयोग तब ही करें जब फसल को नुकसान पहुंचा रहे कीड़ों की संख्या एक खास स्तर पर आ जाए। इस तरह दवाई स्प्रे करने से फसलों को फायदा होगा तथा इस तरह अनावश्यक स्प्रे से भी बचा जा सकेगा।

इस विधि को आर्थिक आधार (इक्नामिक धैशहोल्ड) का नाम दिया जाता है। कीड़ों के लिए आर्थिक आधार कीड़ों की वहीं संख्या है जिस पर हमें फसल पर दवाई का छिड़काव कर देना चाहिए। कीड़ों की संख्या इस नियत हुई संख्या से बढ़ने नहीं देनी चाहिए तथा साथ ही फसल का नुकसान भी न हो तथा किसानों को भी दवाई के अनावश्यक प्रयोग से वित्तीय घाटा न हो।

कई कीड़ों के लिए उनकी संख्या नहीं अपितु आक्रमण की निशानियों को आर्थिक आधार मान लिया जाता है। जैसे धान के गडुएं की संख्या की बजाए धान के गडुएं के हमले से सभी छिद्रों की गिनती कर ली जाती है।

प्रश्न 2.
प्लांट क्लीनिक के भविष्य के बारे में एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
आने वाला समय मुकाबले वाला है इसलिए किसानों को अपनी उपज को बीमारी तथा खाद्य कमियां नहीं होने देनी चाहिएं ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके। अब कृषि से सम्बन्धित व्यापार प्रान्त अथवा देश में ही नहीं अपितु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होने लगा है। किसानों ने उपज को विदेशों में निर्यात करना होता है।

उपज बढ़िया किस्म की हो तथा मुनाफा अधिक मिल सके इसके लिए प्लांट क्लीनिक की सहायता ली जा सकती है। इनकी मदद से फसल में खाद्य तत्त्वों की कमियों का पता लगाकर इनको दूर किया जा सकता है। बीमारी तथा कीड़ों के लिए उचित दवाई की मात्रा का पता लगाया जा सकता है जिससे अनावश्यक तथा अन्धाधुन्ध दवाई के प्रयोग से बचा जा सकता है तथा दवाई के खर्च को घटाया जा सकता है। इस तरह इक्नामिक क्लीनिकों का भविष्य में बढ़िया उपज प्रदान करने के लिए बहुत योगदान होगा।

PSEB 10th Class Agriculture Solutions Chapter 11 प्लांट क्लीनिक

प्रश्न 3.
प्लांट क्लीनिक क्या है ? प्लांट क्लीनिक में कम्प्यूटर किस काम आता है ?
उत्तर-
स्वयं करें।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें

Punjab State Board PSEB 11th Class Geography Book Solutions Chapter 2 चट्टानें Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Geography Chapter 2 चट्टानें

PSEB 11th Class Geography Guide चट्टानें Textbook Questions and Answers

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-चार शब्दों में दें-

प्रश्न (क )
चट्टानों से औज़ार कौन-से युग में बनाए जाते थे ?
उत्तर-
पाषाण युग (Stone Age) में।

प्रश्न (ख)
मुसामों के आधार पर चट्टानों की किस्मों के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. मुसामदार चट्टानें (Porous Rocks)
  2. गैर मुसामदार चट्टानें (Impervious Rocks)

प्रश्न (ग)
पृथ्वी की सबसे ऊपरीय पेपड़ी को और क्या नाम दिया जाता है ?
उत्तर-
थलमण्डल (Lithosphere) ।

प्रश्न (घ)
पैट्रोलोजी को किसका विज्ञान कहा जाता है ?
उत्तर-
चट्टानों का विज्ञान।

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प्रश्न (ङ)
रवे किस प्रकार की चट्टानों का अंश हो सकते हैं ?
उत्तर-
अग्नि चट्टानों (Igneous Rocks)।

प्रश्न (च)
माफिक (Mafic) कौन-से दो तत्त्वों का सुमेल है ?
उत्तर-
मैग्नीशियम और लोहे के सुमेल से।

प्रश्न (छ)
अवशेष (पथराट) (Fossils) सर्वाधिक किस किस्म की चट्टानों में मिलते हैं ?
उत्तर-
तहदार तलछटी चट्टानों में।

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प्रश्न (ज)
रूपांतरित चट्टानों में कौन-से खनिज पदार्थ अधिक मात्रा में मिलते हैं ?
उत्तर-
नेइस और क्वार्टज़ाइट।

प्रश्न (झ)
चूना पत्थर परिवर्तित होकर कौन-सी चट्टान बनता है ?
उत्तर-
संगमरमर।

प्रश्न (ञ)
शेल, भारत में सर्वाधिक कहाँ-से प्राप्त होता है ?
उत्तर-
स्पीति (हिमाचल प्रदेश) से।

2. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दें-

प्रश्न (क)
पंजाब में शिवालिक हिमालय को कौन-से हिस्सों में बाँटा जाता है ?
उत्तर-

  1. निम्न शिवालिक
  2. मध्य शिवालिक
  3. उच्च शिवालिक।

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प्रश्न (ख)
चट्टानों की कौन-सी मुख्य किस्में (प्रकार) हैं ?
उत्तर-

  1. अग्नि चट्टानें
  2. तलछटी चट्टानें
  3. परिवर्तित चट्टानें।

प्रश्न (ग)
पृथ्वी के चापड़ निर्माण में कौन-से मुख्य तत्त्व हैं ?
उत्तर-
ऑक्सीजन और सिलीकॉन।

प्रश्न (घ)
खनिज पदार्थ क्या होते हैं ?
उत्तर-
खनिज एक प्राकृतिक रूप में मिलने वाला अजैव तत्त्व अथवा यौगिक है, जिसकी निश्चित रासायनिक रचना होती है।

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प्रश्न (ङ)
पृथ्वी की सतह का सबसे अधिक हिस्सा कौन-सी चट्टानों का है ?
उत्तर-
धरती की सतह का 75% हिस्सा तलछटी चट्टानों से बना हुआ है।

प्रश्न (च)
थल मण्डल का सबसे अधिक भाग कौन-सी चट्टानों का है ?
उत्तर-
तलछटी चट्टानों का।

प्रश्न (छ)
परिवर्तित चट्टानों की निर्माण-क्रिया कहाँ होती है ?
उत्तर-
धरातल से 12-16 कि०मी० नीचे।

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प्रश्न (ज)
कोयला रूपांतरित होकर क्या-क्या रूप धारण करता है ?
उत्तर-
पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस और ग्रेफाइट।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 60 से 80 शब्दों में दें-

प्रश्न (क)
अग्नि चट्टानों की कोई तीन विशेषताएं लिखें।
उत्तर-

  1. 1. ये चट्टानें रवेदार और दानेदार होती हैं।
  2. ये लावे के जमने के बाद ठोस होने से बनती हैं।
  3. ये ठोस और स्थूल अवस्था में मिलती हैं।

प्रश्न (ख)
चट्टान की परिभाषा क्या है ?
उत्तर-
पृथ्वी की पेपड़ी का निर्माण करने वाले सभी प्राकृतिक और ठोस पदार्थों को चट्टान कहते हैं, जो ग्रेनाइट के समान कठोर और चिकनी मिट्टी के समान कोमल हो सकती है।

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प्रश्न (ग)
खुम्भ जैसी चट्टानें कौन-सी हैं ? एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर-
कई बार लावा धरती की निचली सतह और स्थायी अवस्था में जमकर ठोस हो जाता है, तब इसका आधार चौड़ा और शिखर खुम्भ जैसा बन जाता है, जिसे लैकोलिथ कहते हैं। उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी भाग में ये चट्टानें मिलती हैं।

प्रश्न (घ)
संगमरमर और ग्रेफाइट अधिकतर राजस्थान में क्यों मिलते हैं ?
उत्तर-
संगमरमर और ग्रेफाइट ताप परिवर्तित चट्टानें हैं। चूने का पत्थर संगमरमर में बदल जाता है और कोयला ग्रेफाइट में बदल जाता है। ये चट्टानें राजस्थान में बड़े पैमाने पर मौजूद हैं।

प्रश्न (ङ)
कोई तीन चट्टानें बताएँ, जो परिवर्तित होकर कुछ और बनती हैं ?
उत्तर-
मूल चट्टान — परिवर्तित चट्टानें
शेल (Shale) — स्लेट (Slate)
ग्रेनाइट (Granite) — नेइस (Gneiss)
चूने का पत्थर (Limestone) — संगमरमर (Marble)

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प्रश्न (च)
ऊर्जा के साधन खनिज कौन-सी चट्टानों से मिलते हैं और क्यों ?
उत्तर-
कोयला, पैट्रोलियम ऊर्जा खनिज हैं। ये तहदार चट्टानों में मिलते हैं। चट्टानों की परतों में जीव-जन्तुओं के अवशेष, दबाव के कारण कोयला और पैट्रोलियम में बदल जाते हैं।

प्रश्न (छ)
तहदार चट्टानों की परिभाषा लिखें।
उत्तर-
तहदार चट्टानें अलग-अलग प्रकार के मलबे के नीचे बैठ जाने (settle down) के कारण बनती हैं। अपरदन से प्राप्त तलछट के जमाव से बनी चट्टानों को तलछटी चट्टानें कहते हैं।

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प्रश्न (ज)
चट्टानों का विज्ञान क्या है ? एक नोट लिखें।
उत्तर-
पैट्रोलोजी (Petrology) को चट्टानों का विज्ञान कहते हैं। चट्टानों की तहों में जीव-जन्तु और वनस्पति के अवशेष चट्टानों की उत्पत्ति और समय के बारे में बताते हैं। (Rocks are the pages of the earth, history and fossils are the writing on it.)

4. प्रश्नों के उत्तर 150 से 250 शब्दों में दें-

प्रश्न (क)
चट्टानों से क्या अभिप्राय है ? इनका वर्गीकरण करें और किसी एक प्रकार की व्याख्या करें।
उत्तर-
चट्टानें (Rocks)—पृथ्वी की पेपड़ी का निर्माण करने वाले सभी प्राकृतिक और ठोस पदार्थों को चट्टान कहते हैं। (‘Any material out of which the crust is made is called a Rock.’) चट्टान ग्रेनाइट के समान कठोर अथवा चिकनी मिट्टी के समान कोमल हो सकती है। यह स्लेट की तरह गैरमुसामदार (Imporous) और चूने की पत्थर की तरह मुसामदार (Porous) भी हो सकती है।

एक अन्य परिभाषा के अनुसार, “Any non-metallic natural substance found in the crust of the earth is called a Rock, whether it is hard as granite or soft as clay.”

पृथ्वी का थलमण्डल चट्टानों का बना हुआ है। इन चट्टानों की रचना कई खनिज पदार्थों के मिलने से होती है। (Rocks are aggregate of Minerals.) इनमें क्वार्टज़ खनिज सबसे अधिक मात्रा में मिलता है। एक ही खनिज से बनी हुई चट्टानें भी मिलती हैं, जैसे चूने का पत्थर और रेत का पत्थर। इन खनिज पदार्थों की अलग-अलग मात्रा के कारण चट्टान की कोमलता या कठोरता, रंग, रूप, गुण और शक्ति अलग-अलग होती है। इस प्रकार रंग (Colour), रचना (Structure), कणों (Texture) के आधार पर अलग-अलग प्रकार की चट्टानें मिलती हैं परन्तु सबसे अच्छा वर्गीकरण चट्टानों की रचना के आधार पर ही किया जा सकता है।

चट्टानों का वर्गीकरण (Types of Rocks)-चट्टानें कई प्रकार की होती हैं। रचना के आधार पर चट्टानें निम्नलिखित तीन प्रकार की होती हैं-

  1. अग्नि चट्टानें (Igneous Rocks)
  2. तलछटी चट्टानें (Sedimentary Rocks)
  3. परिवर्तित चट्टानें (Metamorphic Rocks)।

अग्नि चट्टानें (Igneous Rocks)—अग्नि चट्टानें वे चट्टानें हैं, जो पृथ्वी के तरल लावे के ठंडा और ठोस होने के कारण बनती हैं। (Igneous Rocks have been formed by cooling of molten matter of the earth.) ये चट्टानें पृथ्वी पर सबसे पहले बनीं, इसीलिए इन्हें प्रारम्भिक चट्टानें (Primary Rocks) भी कहते हैं। इग्नियस शब्द लातीनी शब्द इग्निस (Ignis) से बना है, जिसका अर्थ अग्नि (Fire) है। पृथ्वी के भीतरी भाग में पिघला हुआ पदार्थ मैग्मा (Magma) है, जिसका औसत तापमान 595° C है। यह गर्म लावा वायुमण्डल के सम्पर्क में आकर ठंडा होकर जम जाता है। इस तरह मैग्मा और लावे के ठंडे होकर कठोर होने से अग्नि चट्टानें बनती हैं।

अग्नि चट्टानों के प्रकार (Types of Igneous Rocks)—मुख्य रूप से ये चट्टानें दो प्रकार की होती हैं-

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें 1

(i) बाहरी चट्टानें (Extrusive Rocks)-जब लावा पृथ्वी के धरातल से बाहर आकर ठंडा हो जाता है, तब बाहरी चट्टानें (Extrusive Rocks) अथवा धरातलीय चट्टानें बनती हैं।

(ii) भीतरी चट्टानें (Intrusive Rocks)—जब लावा पृथ्वी के तल के नीचे ही जम जाता है, तब भीतरी चट्टानें बनती हैं।

इस प्रकार लावे के ठोस होने की क्रिया और स्थान के आधार पर ये चट्टानें तीन प्रकार की हैं-

(i) ज्वालामुखी चट्टानें (Volcanic Rocks)—ये चट्टानें ज्वालामुखी के “ज्वाला प्रवाह” (Lava Flow) के कारण बनती हैं, इसलिए इन्हें ज्वालामुखी चट्टानें भी कहते हैं। ये पिघला हुआ पदार्थ वायुमंडल के संपर्क से ठंडा हो जाता है। धरती की सतह पर लावा जल्दी ठंडा हो जाता है और पूर्ण रूप से रवे (Crystals) नहीं बनते। ये चट्टानें शीशे (Glass) की तरह होती हैं।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें 2
उदाहरण-(i) बसालट, गैब्बरो (Gabbro) इसके अच्छे उदाहरण हैं। (ii) भारत में पश्चिमी-दक्षिणी पठार (दक्षिपी ट्रैप) और संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) में कोलंबिया का
पठार।

(ii) मध्यवर्ती चट्टानें (Intermediate Rocks)—ये भीतरी चट्टानें धरातल से नीचे कुछ गहराई पर छिद्रों और दरारों में लावा जम जाने के कारण बनती हैं। बाहरी तथा भीतरी चट्टानों के बीच में स्थित होने के कारण इन्हें मध्यवर्ती चट्टानें भी कहते हैं। धरती के समानांतर (Horizontal) बनने वाली चट्टानों को सिल और धरती के ऊपर लंब (Vertical) आकार में बनने वाली चट्टानों को डायक (Dyke) कहते हैं। ये भीतरी चट्टानें हैं। इनमें छोटे-छोटे रवे बनते हैं।

उदाहरण-

  • भारत के मध्य प्रदेश में कोरबा (Corba) और बंगाल तथा बिहार के रानीगंज और झरिया के कोयला क्षेत्रों में सिल और डायक मिलते हैं।
  • डोलेराइट (Dolerite) चट्टान इसका उदाहरण है।

(iii) गहरी अग्नि चट्टानें (Plutonic Rocks)-ये चट्टानें अधिक गहराई पर बनती हैं। जब लावा बाहर आने में असमर्थ होता है और लावा शुरू में ही जम जाता है। अधिक गहराई पर लावा धीरे-धीरे ठंडा और कठोर होता है और बड़े-बड़े मोटे रवे बनते हैं। इन चट्टानों का नाम ‘प्लूटो’ (Pluto) के नाम पर रखा गया है, जिसका अर्थ है-पाताल देवता। धरती के कटाव के बाद ये चट्टानें ऊपर नज़र आती हैं। कई प्रकार के गुंबद (Domes) और बैथोलिथ (Batholith) बनते हैं।

उदाहरण-

  • (i) ग्रेनाइट (Granite) नाम की कठोर चट्टान इसका विशेष उदाहरण है।
    (ii) भारत में कांची का पठार और सिंहभूम (बिहार) में ग्रेनाइट चट्टानें मिलती हैं।

तेज़ाबी और खारदार चट्टानें (Acid and Basic Rocks)-संरचना की दृष्टि से जिन चट्टानों में सिलिका की मात्रा 66% से अधिक होती है, उन्हें तेज़ाबी चट्टानें (Acid Rocks) और जिनमें सिलिका की मात्रा कम होती है, उन्हें खारदार चट्टानें (Basic Rocks) कहते हैं।

अग्नि चट्टानों की विशेषताएँ (Characteristics of Igneous Rocks)

  1. ये चट्टानें ढेरों में मिलती हैं।
  2. इन चट्टानों में कण और परतें नहीं होतीं, बल्कि रवे (Crystals) होते हैं। ये रवे चपटे तल वाले होते हैं।
  3. ये चट्टानें रवेदार और दानेदार (Crystalline and granular) होती हैं।
  4. ये ठोस और स्थूल (Compact and Massive) अवस्था में मिलती हैं।
  5. ये ज्वालामुखी क्षेत्रों में मिलती हैं और लावे के जमकर ठोस होने पर बनती हैं।
  6. इनमें जीव-जंतुओं के पिंजर (Fossils) नहीं होते।
  7. इन चट्टानों में बहुत-से जोड़ (Joints) और दरारें (Faults) पड़ जाती हैं।
  8. इनका अपरदन (Erosion) आसानी से नहीं होता। ये कठोर होती हैं।

अग्नि चट्टानों का आर्थिक महत्त्व (Economic Importance of Igneous Rocks)-

  1. इन चट्टानों से अनेक प्रकार के खनिज प्राप्त होते हैं।
  2. ग्रेनाइट से मूर्तियाँ, मकानों के लिए पत्थर आदि बनाए जाते हैं।
  3. बसालट, डोलेसाइट पत्थर सड़क बनाने के काम आते हैं।
  4. पीयूमिस पत्थर धार चढ़ाने के काम आता है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें

प्रश्न (ख)
अंतर बताएँ-
1. भीतरी और बाहरीय चट्टानें
2. चट्टान व खनिज
3. ताप व प्रादेशिक परिवर्तन।
उत्तर-

(i) अंदरूनी चट्टानें- (ii) बाहरीय चट्टानें
1. जब मैग्मा धरती के भीतरी भाग में ही जमकर ठोस रूप धारण कर लेता है तो उसे भीतरी अग्नि चट्टानें अग्नि चट्टानें कहते हैं। 1. जब लावा धरातल पर ठंडा होकर ठोस रूप धारण कर लेता है, तो उसे बाहरी कहते हैं।
2. धीरे-धीरे ठंडा होने के कारण बड़े-बड़े रवे (Crystals) बनते हैं। 2. लावा के जल्दी ठंडे हो जाने के कारण रवे अच्छी तरह से नहीं बनते।
3. इनकी बनावट मोटी दानेदार होती है। 3. इनकी बनावट शीशे के समान होती है।
4. इन्हें ज्वालामुखी चट्टानें भी कहते हैं। 4. इन्हें पाताली या गहरी चट्टानें भी कहते हैं।
5. बसालट इसका प्रमुख उदाहरण है। 5. ग्रेनाइट इसका प्रमुख उदाहरण है।

 

चट्टान- खनिज-
1. चट्टानों की रासायनिक बनावट निश्चित नहीं होती है। 1. इनकी रासायनिक बनावट निश्चित होती है।
2. चट्टानों की रचना कई खनिज पदार्थों के योग से होती है। 2. खनिज एक प्राकृतिक रूप से मिलने वाला अजैव तत्त्व है।
3. चट्टानों के भौतिक गुण अलग-अलग होते हैं। 3. हर एक खनिज के भौतिक गुण निश्चित होते हैं।

 

ताप परिवर्तन प्रादेशिक परिवर्तन
1. इस क्रिया में लावे के स्पर्श से चट्टानों में परिवर्तन होता है। 1. इस क्रिया में ऊपरी तहों के दबाव से चट्टानों में परिवर्तन होता है।
2. यह क्रिया स्थानीय रूप में होती है। 2. यह क्रिया बड़े पैमाने पर होती है।
3. इस क्रिया से चूने का पत्थर संगमरमर बन जाता है। 3. इस क्रिया से ग्रेनाइट, नेइस चट्टान में परिवर्तित हो जाता है।

 

प्रश्न (ग)
चट्टान चक्र क्या है ? उदाहरणों व चित्रों से स्पष्ट करें।
उत्तर-
एक प्रकार की चट्टानों का दूसरी प्रकार की चट्टानों में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को चट्टानी चक्र कहते हैं। यह पृथ्वी के भीतरी ताप और बाहरी शक्तियों के अपरदन के कारण होता है। अग्नि चट्टानों के अपरदन के कारण तलछट प्राप्त होते हैं, जिनसे तहदार चट्टानें बनती हैं। ये चट्टानें ताप, दबाव और रासायनिक प्रक्रिया के कारण रूपांतरित चट्टानें बन जाती हैं। ये पिघल कर फिर से अग्नि चट्टानें बन जाती हैं। अपरदन के कारण ये फिर तलछटी चट्टानें बन जाती हैं। इसे चट्टानी चक्र (Rock Cycle) कहते हैं। यह चक्र लगातार चलता रहता है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें 3

प्रश्न (घ)
तहदार और परिवर्तित चट्टानों के गुणों के आधार पर ब्यान कीजिए कि मनुष्य के लिए कौन-सी प्रकार अधिक लाभदायक है ?
उत्तर-
1. इन चट्टानों से कई प्रकार के प्राकृतिक साधन मिलते हैं, जैसे-कोयला, तेल, गैस आदि सभी पदार्थ वनस्पति और जीव-जंतुओं के अवशेषों से प्राप्त होते हैं। बारीक रेत, गाद, रेत पत्थर, शैल आदि भवन-निर्माण के काम आते हैं। बाढ़ के मैदान खेती के लिए लाभदायक होते हैं। झीलों से जिप्सम पत्थर मिलता है। कांगलोमरेट शिवालिक की पहाड़ियों और तलचर में मिलते हैं। चूने का पत्थर, चॉक, डोलोमाइट सीमेंट उद्योग में काम आते हैं। सटैलरानाईट, सटैलकटालीट चट्टानों से नमक प्राप्त होता है।

2. परिवर्तित चट्टानें- परिवर्तित चट्टानों से सोना, चांदी, कीमती पत्थर, जवाहरात आदि मिलते हैं। कठोर प्रकार के पत्थर ग्रेनाइट, नेइस, सिस्ट उपयोगी होते हैं। संगमरमर, स्लेट, ग्रेफाइट कीमती चट्टानें हैं। क्वार्टज़ाइट चट्टान राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश में मिलती है। नेइस को भवनों के निर्माण के लिए तथा क्वार्टज़ाइट को शीशा बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। ग्रेफाइट से पेंसिल का सिक्का बनता है। कई प्रसिद्ध इमारतें जैसे-ताजमहल, आगरे का किला, लाल किला आदि संगमरमर से बनी हैं।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें

प्रश्न (ङ)
निक्षेप विधि से बनी तहदार चट्टानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
तलछटी चट्टानें (Sedimentary Rocks)-अपरदन द्वारा प्राप्त तलछट (Sediments) के जमाव से बनी चट्टानों को तलछटी चट्टानें कहते हैं। (Sedimentary Rocks are those rocks which have been formed by deposition of Sediments.)
तलछट में छोटे और बड़े आकार के कण होते हैं। इन कणों के इकट्ठा होकर बैठ जाने से (settle down) तलछटी चट्टानों का निर्माण होता है।

तलछट के साधन (Sources of Sediments)-पृथ्वी के धरातल पर अपरदन से प्राप्त पदार्थों को जल, हवा और हिम नदी जमा करते रहते हैं।
तलछट जमा होने के स्थान (Places of Deposition)–यह तलछट समुद्रों, झीलों, नदियों, डेल्टाओं आदि क्षेत्रों में जमा होती रहती है।
रचना (Formation)इन चट्टानों की रचना कई स्तरों पर पूरी होती है।

1. तलछट का निक्षेप (Deposition) – ये पदार्थ एक निश्चित क्रम के अनुसार जमा होते रहते हैं। पहले बड़े कण और उसके बाद छोटे कण (During the deposition, the material is sorted out according to the size.)

2. परतों का निर्माण (Layers)-लगातार जमाव के कारण परतों का निर्माण होता है। पदार्थ एक परत के ऊपर दूसरी परत के रूप में जमा होते रहते हैं।

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3. ठोस होना (Solidification)–ऊपरी परतों के भार के कारण नीचे की परतें संगठित होने लगती हैं।
सिलिका, कैलसाइट, चिकनी मिट्टी आदि संयोजक (Cementing agent) चट्टानों को ठोस रूप दे देते हैं। तलछटी चटटानों की किस्में (Types of Sedimentary Rocks)-तलछटी चट्टानें तीन प्रकार से बनती हैं –

1. यांत्रिक क्रिया द्वारा (Machanically Formed Rocks)
2. जैविक पदार्थों द्वारा (Organically Formed Rocks)
3. रासायनिक तत्त्वों द्वारा (Chemically Formed Rocks)

तलछटी चट्टानों के निर्माण के साधनों और जमाव के स्थान के अनुसार नीचे लिखी किस्में हैं-

1. यांत्रिक क्रिया द्वारा बनी चट्टानें (Mechanically Formed Rocks)-इन चट्टानों का निर्माण कटाव की शक्तियों के द्वारा एक स्थान पर एकत्र होने से होता है : जैसे नदी और हिम नदी आदि। इन चट्टानों के पदार्थ यांत्रिक रूप में प्राप्त होते हैं। ये चट्टानी टुकड़े आपस में जुड़कर कठोर चट्टान का रूप धारण कर लेते हैं।

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(क) दरियाई चट्टानें (Riverine Rocks)–जब तलछट का जमाव नदी बेसिन (Basin); बाढ़ क्षेत्र और डेल्टा में होता है तब ये चट्टानें बनती हैं; जैसे शेल (Shale), चिकनी मिट्टी (Clay), रेत का पत्थर (Sand Stone)। इन चट्टानों में रेत के कणों और चिकनी मिट्टी के कणों की बहुतायत होती है। ये चट्टानें दो प्रकार की होती हैं-

  • रेत निर्मित चट्टानें (Arenaceous Rocks)–जिनमें रेत, बजरी और क्वार्टज़ अधिक मात्रा में हों। बजरी तथा गोल पत्थरों के आपसी जमाव से कांगलोमरेट चट्टान बनती है।
  • मिट्टी निर्मित चट्टानें (Argillaceous Rocks)-जिनमें चिकनी मिट्टी (clay) के कण अधिक मात्रा में हों। शेल (Shale) और सिल्ट (Silt) से मिट्टी के बर्तन और ईंटें बनती हैं।

(ख) झील परतदार चट्टानें (Laccustrine Rocks)-जब तलछट का जमाव झीलों में होता रहता है, तब झीलों में परतदार चट्टानें बनती हैं। झील के भर जाने या सूख जाने पर तल के ऊपर उठ जाने से ये चट्टानें उभर आती हैं; जैसे नमक और जिप्सम (Gypsum) आदि।

(ग) वायु निक्षेप चट्टानें (Aeolian Rocks)-हवा के द्वारा जमा की गई रेत और मिट्टी जम कर कठोर चट्टानों का रूप धारण कर लेती है। इन चट्टानों में कमज़ोर परतें होती हैं। जिस प्रकार मध्य एशिया के गोबी (Gobi) मरुस्थल से हवा द्वारा लाए गए बारीक कणों से चीन का लोइस (Loess) पठार बन गया है।

(घ) हिम निक्षेप चट्टानें (Glacial Rocks)-जब हिमनदी (Glaciar) पिघलती है तो अपने साथ लाए हुए मलबे को अपने किनारों और सिरों पर जमा कर देती है। मलबे के इन ढेरों को हिम-चट्टानें कहते हैं।

2. जैविक चट्टानें (Organically Formed Rocks)-इन चट्टानों का निर्माण जीव-जंतुओं और वनस्पति के मलबे के इकट्ठे होने से होता है। ये चट्टानें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं –

(i) कार्बन प्रधान चटटाने
(ii) चूना प्रधान चट्टानें

(i) कार्बन प्रधान चट्टानें (Carbonaceous Rocks)-भूमि की उथल-पुथल के कारण जीव-जंतु और वनस्पति पृथ्वी के नीचे दब जाते हैं। ऊपरी तलछट के दबाव और गर्मी के कारण वनस्पति कोयले के रूप में बदल जाती है, जिसमें कार्बन की प्रधानता होती है। पीट (Peat), लिग्नाइट (Lignite), एंथरेसाइट (Anthracite) कोयले का निर्माण इसी प्रकार होता है।

(ii) चूना प्रधान चट्टानें (Calcareous Rocks)–समुद्र के जीव-जंतु समुद्र के पानी से चूना प्राप्त करके अपने पिंजर (Skeleton) का निर्माण करते हैं। जब ये जीव मर जाते हैं तो ये पिंजर परतों के रूप में इकट्ठे होकर चट्टान बन जाते हैं। इन चट्टानों में चूने की मात्रा अधिक होने के कारण ये चट्टानें चूने का पत्थर (Lime Stone), चॉक (Chalk), डोलोमाइट (Dolomite) आदि में बदल जाती हैं।

3. रासायनिक चट्टानें (Chemically Formed Rocks)—पानी में कई रासायनिक तत्त्व मिले होते हैं। जब पानी भाप बनकर उड़ जाता है, तो रासायनिक पदार्थ परतों के रूप में जमते रहते हैं और कठोर चट्टानें बन जाती हैं, जैसे-पहाड़ी नमक (Rock Salt), जिप्सम (Gypsum), शोरा (Potash) । इन चट्टानों के निर्माण में काफी समय लग जाता है।

तलछटी चट्टानों की विशेषताएं (Characteristics of Sedimentary Rocks)-

  1. इन चट्टानों में अलगअलग परतें होती हैं, इसलिए इन्हें परतदार चट्टानें (Stratified Rocks) भी कहते हैं। ये परतें एक-दूसरे के समानांतर मिलती हैं।
  2. इनका निर्माण छोटे-छोटे कणों (Particles) से होता है।
  3. इनमें जीव-जंतुओं और वनस्पति के अवशेष (Fossils) मिलते हैं।
  4. पानी में निर्माण होने के कारण इनमें लहरों, धाराओं और कीचड़ के चिह्न मिलते हैं।
  5. ये चट्टानें मुलायम होती हैं और इनका अपरदन जल्दी होता है।
  6. ये पृथ्वी के धरातल के 75% भाग पर फैली होती हैं, परन्तु पृथ्वी की गहराई में इनका विस्तार केवल 5% है। (The Sedimentary rocks are important for extent, not for depth.)
  7. इनका घनत्व कम होता है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें

प्रश्न (च)
स्थान और आकृति के आधार पर मध्यवर्ती अग्नि चट्टानों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
मध्यवर्ती अग्नि चट्टानों की आकृति और स्थान के आधार पर इन्हें अनेक उपभागों में बाँटा जा सकता है-

1. लैकोलिथ (Laccoliths) जो लावा धरती की निचली सतह और स्थायी अवस्था में जमकर ठंडा हो जाता है, जैसे—दो परतदार चट्टानों के बीच जमा लावा-इन्हें लैकोलिथ कहा जाता है। इनका आधार चौड़ा, एक डबलरोटी के एक टुकड़े (Loaf) अथवा खंभ (Mushroom) की तरह शिखर गुंबद जैसा होता है। ये चट्टानें उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में बहुत आम मिलती हैं।

2. बैथोलिथ (Batholiths)-बैथोलिथ बहुत ही विशाल भीतरी अग्नि चट्टानें हैं। इनकी लम्बाई 100 किलोमीटर से भी अधिक हो सकती है। इनकी मोटाई (Thickness) अधिक होने के कारण आधार को देखना संभव नहीं। जब लावा धरती की तहों के नीचे टेढ़ा और अव्यवस्थित ढंग से जमता है तो ऐसी चट्टानों की उत्पत्ति होती है। इसका आकार बेढंगा और गुंबदनुमा हो सकता है। इस प्रकार से बनी चट्टानों को बैथोलिथ कहा जाता है। इन चट्टानों को हम तभी देख सकते हैं, अगर इस प्रकार की अग्नि चट्टानों पर खुरचने की क्रिया हुई हो। इनकी चौड़ाई 50 से 80 किलोमीटर तक हो सकती है। पर्वतों के आधार इन चट्टानों के ही होते हैं। ग्रेनाइट की विशाल चट्टानें बैथोलिथ चट्टानों का ही रूप हैं। चेन्नई में छोटी-छोटी पहाड़ियाँ बैथोलिथ का ही हिस्सा हैं, जो कि खुरचन क्रिया से ही बनी हैं और अधिकतर गुंबद जैसी (Dome shaped) हैं।

3. लैपोलिथ (Lapolith)-जब लावा तश्तरीनुमा आकार में धरती की सतह के नीचे जम जाता है, तब इसे लैपोलिथ कहते हैं। वास्तव में लैपोलिथ बैथोलिथ का ही एक अलग रूप है। अमेरिका में इसके उदाहरण देखने को मिलते हैं। कनाडा में ड्रलथ गैब्बरो (Duluth Gabbro) जो कि 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

4. फैकोलिथ (Phacoliths)-धरती की सतह के नीचे लावा कई लहरों के रूप में जम जाता है। इस प्रकार की आकृति की चट्टान को फैकोलिथ कहा जाता है।

5. स्टॉक (Stock)-जब बैथोलिधं चट्टान छोटे आकार का गुंबदनुमा या गोल आकृति की होती है तो उसे स्टॉक कहते हैं। एक स्टॉक का क्षेत्रफल (area) 100 वर्ग किलोमीटर से कम होता है।

6. सिल (Sills)-जब गर्म लावा चट्टानों की तहों में ठंडा होकर जम जाता है, तो इसे सिल कहा जाता है। इनकी लम्बाई कई सौ मीटर तक हो सकती है। पर अगर मोटाई कुछ मीटर तक ही हो या कम हो, तो इसको शीट (Sheet) कहा जाता है।

7. डायक (Dyke/Dike)-डायक. लम्बाकार रूप में (Vertical) जमा हुआ लावा होता है। इनकी लम्बाई कुछ मीटरों से किलोमीटरों तक और चौड़ाई कुछ सैंटीमीटरों से कई मीटरों तक हो सकती है। भारत में तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों में इसके उदाहरण देखने को मिलते हैं।

8. ज्वालामुखीय ग्रीवा (Volcanic Neck)-धरती का गर्म लावा एक नली से बाहर आता है। जब ज्वालामुखी __ फटता है, तो विस्फोट के बाद जो लावा रास्ते में ही जम जाता है, उसे ज्वालामुखी Neck कहा जाता है।

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Geography Guide for Class 11 PSEB चट्टानें Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-4 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
पृथ्वी की बाहरी परत को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
थलमंडल।

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प्रश्न 2.
Igneous शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
अग्नि।

प्रश्न 3.
किन चट्टानों को प्रारम्भिक चट्टानें कहते हैं ?
उत्तर-
अग्नि चट्टानों।

प्रश्न 4.
ज्वालामुखी चट्टानों का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
बसालट।

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प्रश्न 5.
गहरी अग्नि चट्टानों का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
ग्रेनाइट।

प्रश्न 6.
झील परतदार चट्टानों का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
जिप्सम।

प्रश्न 7.
कार्बन प्रधान चट्टान का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
कोयला।

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प्रश्न 8.
चूना प्रधान चट्टान का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
डोलोमाइट।

प्रश्न 9.
परिवर्तन चट्टानों के दो कारण बताएँ।
उत्तर-
ताप और दबाव।

प्रश्न 10.
संगमरमर की मूल चट्टान का नाम बताएँ।
उत्तर-
चूने का पत्थर।

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बहुविकल्पी प्रश्न

नोट-सही उत्तर चुनकर लिखें –

प्रश्न 1.
किन चट्टानों को प्रारम्भिक चट्टानें कहते हैं ?
(क) अग्नि
(ख) तलछटी
(ग) परिवर्तित
(घ) परतदार।
उत्तर-
अग्नि।

प्रश्न 2.
कार्बन प्रधान कौन-सी चट्टान है ?
(क) कोयला
(ख) चूना
(ग) संगमरमर
(घ) जिप्सम।
उत्तर-
कोयला।

प्रश्न 3.
संगमरमर किस वर्ग की चट्टान है ?
(क) अग्नि
(ख) तलछटी
(ग) परिवर्तित
(घ) अवसादी।
उत्तर-
परिवर्तित।

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प्रश्न 4.
भू-पर्पटी का निर्माण करने वाले पदार्थ को कहते हैं-
(क) चट्टान
(ख) खनिज
(ग) धातु
(घ) लावा।
उत्तर-
चट्टान।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सी परिवर्तित चट्टान है ?
(क) ग्रेनाइट
(ख) ग्रेफाइट
(ग) ग्रिट
(घ) गैब्बरो।
उत्तर-
ग्रेफाइट।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions) –

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-3 वाक्यों में दें-

प्रश्न 1.
थलमंडल से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
थलमंडल से तात्पर्य है-चट्टानी मंडल (Rock Sphere)। थलमंडल का निर्माण चट्टानों से होता है।

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प्रश्न 2.
धरती के समूचे पुंज का निर्माण करने वाले चार तत्त्व बताएँ।
उत्तर-
लोहा, ऑक्सीजन, सिलीकॉन और मैग्नेशियम।

प्रश्न 3.
Igneous शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
Igneous शब्द लातीनी भाषा के Ignis शब्द से बना है, जिसका अर्थ ज्वाला या आग होता है।

प्रश्न 4.
अग्नि चट्टानों के दो प्रमुख प्रकार बताएँ।
उत्तर-

  1. बाहरी अग्नि चट्टानें
  2. भीतरी अग्नि चट्टानें।

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प्रश्न 5.
मैग्मा से क्या भाव है ?
उत्तर-
भू-गर्भ में गर्म, चिपचिपा और तरल पदार्थ मैग्मा कहलाता है।

प्रश्न 6.
भारत में ग्रेनाइट कहाँ मिलता है ?
उत्तर-
दक्षिणी पठार, छत्तीसगढ़, छोटा नागपुर और राजस्थान में ग्रेनाइट चट्टानें मिलती हैं।

प्रश्न 7.
सिल और डायक में अन्तर बताएँ।
उत्तर-
जब गर्म लावा चट्टानों की तहों में ठंडा होकर जम जाता है, तो उसे सिल कहते हैं। जब लावा लंबाकार अथवा दीवार के रूप में जमता है, तो उसे डायक कहते हैं।

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प्रश्न 8.
दक्षिणी ट्रैप से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
भारतीय प्रायद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में विशाल क्षेत्र बसालट से बना है, इसे दक्षिणी ट्रैप कहते हैं।

प्रश्न 9.
तहदार चट्टानों का विस्तार बताएँ।
उत्तर-
धरती की 75% सतह पर तहदार चट्टानें मिलती हैं, जबकि ये चट्टानें समूची धरती के स्थलमंडल पर केवल 5% भाग ही हैं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
अग्नि चट्टानों की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
अग्नि चट्टानों की विशेषताएँ (Characteristics)-

  1. ये चट्टानें ढेरों में मिलती हैं।
  2. इन चट्टानों में कण और परतें नहीं होतीं, बल्कि रवे (Crystals) होते हैं। ये रवे चपटे तल वाले होते हैं।
  3. ये चट्टानें रवेदार और दानेदार (Crystalline and Granular) होती हैं।
  4. ये ठोस और स्थूल (Compact and Massive) अवस्था में मिलती हैं।
  5. ये ज्वालामुखी क्षेत्रों में मिलती हैं और लावा के जम कर ठोस होने से बनती हैं।
  6. इनमें जीव-जन्तुओं के पिंजर (Fossils) नहीं होते।
  7. इन चट्टानों में बहुत-से जोड़ (Joints) और दरारें (Faults) पड़ जाती हैं।
  8. इनका अपरदन (Erosion) आसानी से नहीं होता क्योंकि ये कठोर होती हैं।

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प्रश्न 2.
तलछटी चट्टानों की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
तलछटी चट्टानों की विशेषताएँ (Characteristics)-

  1. इन चट्टानों में अलग-अलग परतें मिलती हैं, इसलिए इन्हें परतदार चट्टानें (Stratified Rocks) कहते हैं। ये परतें एक-दूसरे के समानांतर होती हैं।
  2. इनका निर्माण छोटे-छोटे कणों (Particles) से होता है।
  3. इनमें जीव-जन्तुओं और वनस्पति के अवशेष (Fossils) मिलते हैं।
  4. पानी में निर्माण होने के कारण इनमें लहरों, धाराओं और कीचड़ के चिह्न मिलते हैं।
  5. ये चट्टानें मुलायम होती हैं और इनका अपरदन जल्दी होता है।
  6. ये पृथ्वी के धरातल के 75% भाग में फैली हुई हैं, परन्तु ये चट्टानें पृथ्वी के स्थलमंडल का केवल 5% भाग ही हैं।
    (The Sedimentary Rocks are important for extent, not for depth.)
  7. इनका घनत्व कम होता है।

प्रश्न 3.
अग्नि चट्टानों और तलछटी चट्टानों का महत्त्व बताएँ।
उत्तर-
अग्नि चट्टानों का आर्थिक महत्त्व (Economic Importance)

  1. इन चट्टानों से अनेक प्रकार के खनिज प्राप्त होते हैं।
  2. ग्रेनाइट से मूर्तियाँ और मकानों के लिए पत्थर बनाए जाते हैं।
  3. बसालट, डोलेराइट पत्थर सड़क बनाने के काम आते हैं।
  4. पीयूमिस पत्थर धार चढ़ाने के काम आता है।

तलछटी चट्टानों का आर्थिक महत्त्व (Economic Importance)-परतदार चट्टानें मानव जीवन के लिए बहुत कीमती होती हैं-

  • कोयला और पैट्रोलियम ऊर्जा के प्रमुख साधन हैं।
  • इन चट्टानों से सोना, चाँदी और तांबा आदि खनिज पदार्थ मिलते हैं।
  • चिकनी मिट्टी से ईंटें, चूने से सीमेंट और रेत से काँच बनता है।
  • चूने का पत्थर इमारतें बनाने में प्रयोग होता है।
  • कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ बनाए जाते हैं।
  • तलछटी चट्टानों से बने मैदान कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं।

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प्रश्न 4.
बसालट और ग्रेनाइट की रचना किस प्रकार होती है ?
उत्तर-
1. बसालट (Basalt)-यह एक बाहरी अग्नि चट्टान है। सतह के ऊपर आने वाला लावा ठंडा होकर बसालट चट्टान को जन्म देता है। इस चट्टान का रंग काला अथवा गहरा भूरा होता है। लावे के जल्दी ठंडा होने के कारण रवे (Crystals) नहीं बनते। इनकी रचना शीशे (Glass) के समान होती है। इनका प्रयोग मकान बनाने के लिए होता है। भारत में काली मिट्टी के क्षेत्र का निर्माण बसालट के टूटने-फूटने के कारण हुआ है।

2. ग्रेनाइट (Granite)-यह एक अग्नि चट्टान है। यह धरती के भीतरी भाग में गहराई पर बनती है। यह एक गहरी अग्नि चट्टान (Plutonc Rock) है। इसमें लावा धीरे-धीरे ठंडा होता है, इसलिए बड़े-बड़े रवे (Crystals) बनते हैं। इसमें सिलिका (Silica) की मात्रा अधिक होती है। इसका रंग गहरा भूरा, लाल और स्लेटी भी होता है। यह कठोर पत्थर होता है और इसका प्रयोग मकान बनाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 5.
संगमरमर की रचना कैसे होती है ?
उत्तर-
संगमरमर (Marble)-संगमरमर एक परिवर्तित चट्टान (Metamorphic Rock) है। जब गर्म लावा चूने के पत्थर को स्पर्श करता है तो इसका रूप बदल जाता है और यह एक शुद्ध सफेद रंग का बन जाता है। अशुद्धियों के कारण इसका रंग लाल, हरा और काला भी होता है। यह मुलायम होता है और मकान बनाने के काम आता है। आगरा का ताजमहल संगमरमर का बना हुआ है।

प्रश्न 6.
कोयले की रचना किस प्रकार होती है ?
उत्तर-
कोयला (Coal)-भूमि की उथल-पुथल के कारण जीव-जन्तु और वनस्पति पृथ्वी के नीचे दब जाते हैं। ऊपरी तलछट के दबाव और गर्मी के कारण वनस्पति कोयले के रूप में बदल जाती है, जिसमें कार्बन की प्रधानता होती है। इन चट्टानों को कार्बन प्रधान चट्टानें (Carbonaceous Rocks) कहते हैं, जैसे-पीट (Peat), लिग्नाइट (Lignite), एंथ्रासाइट (Anthracite) कोयले का निर्माण भी इसी प्रकार होता है।

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प्रश्न 7.
अग्नि चट्टानों को प्रारम्भिक चट्टानें क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
आरम्भ में पृथ्वी में मूल पदार्थ मैग्मा (Magma) पिघला हुआ और गर्म अवस्था में था। यह मैग्मा वायु मण्डल के सम्पर्क में आने के कारण ठंडा होकर जम कर ठोस हो गया। इस प्रकार से पहले धरती की पिघली दशा से ठोस रूप में आने पर अग्नि चट्टानों का निर्माण हुआ। सबसे पहले बनने के कारण इन्हें प्रारम्भिक चट्टानें (Primary Rocks) कहते हैं।

प्रश्न 8.
तलछटी चट्टानों में जीव-जन्तुओं के अवशेष (Fossils) सुरक्षित रहते हैं, जबकि अग्नि चट्टानों में नहीं, क्यों ?
उत्तर-
जीव-जन्तुओं और वनस्पति के बचे-खुचे भागों से अवशेष प्राप्त होते हैं। तलछटी चट्टानें परतों के रूप में मिलती हैं। इन परतों के बीच ये अवशेष सुरक्षित रहते हैं। ये अवशेष उन चट्टानों की उत्पत्ति के समय के बारे में जानकारी देते हैं।
अग्नि चट्टानों में परतें नहीं मिलती हैं। ये गर्म पिघलते हुए मैग्मा से बनती हैं। इनके स्पर्श से अवशेष झुलस जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 9.
अग्नि चट्टानों और तलछटी चट्टानों में अन्तर बताएँ।
उत्तर-
अग्नि चट्टानें (Igneous Rocks)-

  1. रूप-ये चट्टानें ढेरों (Bulks) में मिलती हैं।
  2. कण-इन चट्टानों में चपटे तल वाले रवे (Crystals) मिलते हैं।
  3. रचना-ये चट्टानें लावा (Lava) के ठंडे और ठोस होने से बनती हैं।
  4. कठोरता-ये चट्टानें कठोर होती हैं।
  5. जीव-अवशेष- इनमें जीव-अवशेष नहीं मिलते हैं।
  6. निर्माण-काल-सबसे पहले बनने के कारण इन्हें प्रारम्भिक चट्टानें (Primary Rocks) भी कहते हैं।
  7. कटाव-इन चट्टानों पर टूट-फूट का प्रभाव कम होता है।
  8. जोड़ (Joints)-इनमें जोड़ मिलते हैं।
  9. मुसाम-ये चट्टानें अप्रवेशी हैं।

तलछटी चट्टानें (Sedimentary Rocks)-

  1. ये चट्टानें परतों (Layers) में मिलती हैं।
  2. इन चट्टानों में अलग-अलग आकार के गोल कण (Particles) मिलते हैं।
  3. ये चट्टानें तलछट (Sediments) की परतों के निरन्तर जमाव के कारण बनती हैं।
  4. ये चट्टानें नर्म होती हैं।
  5. इनमें जीव-अवशेष सुरक्षित रहते हैं।
  6. अग्नि चट्टानों के नष्ट होने के बाद बनने के कारण इन्हें गौण चट्टानें (Secondary Rocks) भी कहते हैं।
  7. इन चट्टानों पर टूट-फूट का प्रभाव जल्दी होता
  8. इनमें जोड़ नहीं मिलते हैं।
  9. ये अधिकतर प्रवेशी चट्टानें हैं।

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प्रश्न 10.
धरती के चापड़ में कौन-से प्रमुख तत्त्व हैं ?
उत्तर-
धरती के चापड़ का निर्माण करने वाली चट्टानों में नीचे लिखे तत्त्व दी हुई औसत मात्रा में शामिल होते हैं –
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प्रश्न 11.
भारत में अग्नि चट्टानों के विभाजन के बारे में बताएँ।
उत्तर-
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(Essay Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 150-250 शब्दों में दें-

प्रश्न-
परिवर्तित चट्टानों से क्या तात्पर्य है ? इनकी रचना किस प्रकार होती है ? उदाहरण दें।
उत्तर-
परिवर्तित चट्टानें (Metamorphic Rocks)-Metamorphic Rocks शब्द का अर्थ है- ‘रूप में परिवर्तन’ (Change in form) । ये वे चट्टानें हैं, जो गर्मी और दबाव के प्रभाव से अपना रंग, रूप, गुण, आकार और खनिज बदल लेती हैं। अग्नि तथा तलछटी चट्टानों का मूल रूप में इतना परिवर्तन हो जाता है कि कई चट्टानों को पहचानना मुश्किल हो जाता है। यह परिवर्तन दो प्रकार से होता है-

1. भौतिक परिवर्तन (Physical Change)
2. रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)
इतना परिवर्तन होते हुए भी चट्टानों में टूट-फूट नहीं होती। यह परिवर्तन दो कारणों से होता है।

परिवर्तन के कारक (Agents of Change)-

1. ताप (Heat)
2. दबाव (Pressure)

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1. ताप से स्पर्शी रूपान्तरण (Heat Contact Metamorphism)-गर्म लावे के स्पर्श से निकट के प्रदेश की चट्टानें झुलस जाती हैं और उनके रवे पूरी तरह से बदल जाते हैं। जिस प्रकार गर्म लावे के स्पर्श से चूने का पत्थर (Lime Stone) संगमरमर (Marble) बन जाता है। दक्षिणी भारत में धारवाड़ (Dharwar) प्रदेश में ऐसी चट्टानें मिलती हैं।

2. दबाव (Pressure) से पृथ्वी की उथल-पुथल, भूचाल, पर्वतों के निर्माण आदि के कारण चट्टानों पर दबाव पड़ता है। ऊपरी परतों के दबाव से निचली चट्टानों के गुणों में परिवर्तन आ जाता है। यह परिवर्तन बड़े पैमाने पर विशाल प्रदेशों में होता है। इसके कुछ उदाहरण आगे लिखे हैं-

मुख्य चट्टानें — परिवर्तित चट्टानें

1. शेल (Shale) — 1. स्लेट (Slate)
2. अभ्रक (Mica) — 2. शिसट (Schist)
3. ग्रेनाइट (Granite) — 3. नेइस (Gneiss)
4. रेतीला पत्थर (Sand Stone). — 4. क्वार्टज़ाइट (Quartzite)
5. कोयला (Coal) — 5. ग्रेफाइट (Graphite)

इसे क्षेत्रीय रूपान्तरण (Regional Metamorphism) भी कहते हैं।

विशेषताएँ (Characteristics)-

  1. इन चट्टानों की कठोरता बढ़ जाती है।
  2. चट्टानों के खनिज पिघल कर इकट्ठे हो जाते हैं।
  3. ठोस होने के कारण अपरदन कम होता है।
  4. इनमें खनिजों से मिले हुए जल के स्रोत मिलते हैं, जिनसे चमड़ी के रोग दूर हो जाते हैं।
  5. मकान बनाने के लिए संगमरमर, स्लेट, क्वार्टज़ाइट मिलते हैं।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 2 चट्टानें 10

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

Punjab State Board PSEB 10th Class Physical Education Book Solutions Chapter 3 योग Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Physical Education Chapter 3 योग

PSEB 10th Class Physical Education Guide योग Textbook Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारतीय व्यायाम की प्राचीन विधि कौन-सी है ?
(Which is the oldest method of Indian Exercises ?)
उत्तर-
योगासन।

प्रश्न 2.
शीर्षासन प्रतिदिन कम-से-कम कितने समय के लिए करना चाहिए ?
(How much time Shirsh Asana may be performed daily ?)
उत्तर-
2 मिनट के लिए।

प्रश्न 3.
शीर्षासन के कोई दो लाभ बताओ।
(Mention any two advantage of Shirsh Asana.)
उत्तर-

  1. शीर्षासन से स्मरण शक्ति तेज़ होती है।
  2. मोटापा दूर होता है।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 4.
वज्रासन के कोई दो लाभ बताओ।
(Mention any two advantages of Vajur Asana.)
उत्तर-

  1. वज्रासन से स्वप्न दोष दूर होता है।
  2. इससे शूगर का रोग दूर हो जाता है। ..

प्रश्न 5.
पद्मासन के कोई दो लाभ बताओ।
उत्तर-

  1. कमर दर्द दूर हो जाता है।
  2. बार-बार मूत्र आना बन्द हो जाता है।

प्रश्न 6.
भुजंगासन के कोई दो लाभ बताओ।
(Describe any two advantages of Bhujang Asana.)
उत्तर-

  1. कब्ज दूर हो जाती है।
  2. धातु रोग दूर हो जाता है।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 7.
धनुरासन के कोई दो लाभ बताओ।
(Mention any two advantages of Dhanur Asana.)
उत्तर-

  1. गठिया की बीमारी दूर हो जाती है।
  2. औरतों के योनि विकार और मासिक धर्म सम्बन्धी रोग दूर हो जाते हैं।

प्रश्न 8.
हर्निया तथा नल रोगों को ठीक करने में कौन-सा आसन सहायक हो सकता है ?
(Name the Asana which prevent Hernia and urinary disease.)
उत्तर-
चक्र आसन।

प्रश्न 9.
आत्मा को परमात्मा से मिलाने का महत्त्वपूर्ण ढंग कौन-सा है ?
(Which is the means of uniting soul with God ?)
उत्तर-
योग।

प्रश्न 10.
मानसिक एकाग्रता के लिए कौन-सा योगासन सर्वोत्तम है ?
(Which is the best Asana for mental concentration ?
उत्तर-
पद्मासन।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 11.
थकावट कितने प्रकार की है ?
(Mention the types of Fatigue.)
उत्तर-
दो तरह की

  1. मनोरूक,
  2. शारीरिक

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
योग किसे कहते हैं ? इसके क्या लाभ हैं ?
(What is Yoga ? Discuss its uses.)
उत्तर-
भारत की प्राचीन कसरत या व्यायाम की विधि योग है। अतीत में साधु-सन्त, महात्मा लोग इसका अभ्यास करते थे तथा अपना शरीर स्वस्थ रखते थे। इसे हम सामान्यतः तपस्या करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। योग प्रत्येक मनुष्य के लिए आवश्यक है।
लाभ-योग के हमें निम्नलिखित लाभ हैं—

  1. योगासनों से मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहता है।
  2. इससे बहुत-सी बीमारियां दूर हो
  3. मानसिक कमजोरी दूर हो जाती है।
  4. शरीर शक्तिशाली बन जाता है।
  5. मनुष्य पर शीघ्र घबराहट का प्रभाव नहीं पड़ता।
  6. चिन्ता तथा परेशानियां दूर हो जाती हैं।
  7. मनुष्य का शरीर आकर्षक तथा सुगठित बन जाता है।

प्रश्न 2.
“योग आत्मा और परमात्मा में मिलाप करने का महत्त्वपूर्ण साधन है।” कैसे ?
(“Yoga is the means of uniting soul with God.” How ?)
उत्तर-
प्राचीन काल के साधु-महात्माओं की बातें तथा विचार हम आज तक सुनते आ रहे हैं। उनके विचारों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने आत्मा का परमात्मा से मिलाप कराना है तो उसका साधन हमारा शरीर है। वही मनुष्य आत्मा को परमात्मा से मिला सकता है या दर्शन करा सकता है जो शारीरिक रूप से स्वस्थ हो। अभिप्राय यह कि उसका मन पूर्णतः स्वच्छ और स्वस्थ हो।
हम योग साधनों के द्वारा शरीर को ठीक रख सकते हैं। इनसे बहुत-सी बीमारियां अपने-आप ही दूर हो जाती हैं। इससे सिद्ध होता है कि योग आत्मा तथा परमात्मा का मिलाप कराने का महत्त्वपूर्ण साधन है। इसलिए हमें योगासनों का अभ्यास करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
पातंजलि ऋषि ने अष्टांग योग के कौन-कौन से 8 अंग बताए हैं ? उनके बारे में लिखो।
(अभ्यास का प्रश्न 2)
(What are the eight components of Ashtang Yoga according to Patanjali Rishi ? Write briefly about)
उत्तर-
महर्षि पातंजलि ने योग द्वारा शारीरिक स्वास्थ्य एवं निरोगता प्राप्त करने का एक तरीका बताया है जिसे ‘अष्टांग योग’ का नाम दिया जाता है। इसके आठ अंग निम्नलिखित हैं—

  1. नियम (Observance)-नियम वे ढंग हैं जो मनुष्य के शारीरिक अनुशासन से सम्बन्ध रखते हैं जैसे शरीर की सफ़ाई, नेती तथा बस्ती द्वारा की जाती है।
  2. यम (Restraint) ये वे साधन हैं जिनका मनुष्य के मन के साथ सम्बन्ध होता है। इनका अभ्यास मनुष्य को अहिंसा, सच्चाई, पवित्रता, त्याग आदि सिखाता है।
  3. आसन (Posture)-आसन वह विशेष स्थिति है जिसमें मनुष्य के शरीर को अधिक-से-अधिक समय के लिए रखा जाता है। रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रख कर टांगों को किसी विशेष दिशा में रख कर बैठना पद्मासन है।
  4. प्राणायाम (Regulation of Breath and Bio-energy)—किसी विशेष विधि के अनुसार सांस अन्दर ले जाने और बाहर निकालने की क्रिया प्राणायाम कहलाती है।
  5. धारणा (Concentration)—इसका अभिप्राय है मन को किसी विशेष वांछित विषय पर लगाना। इस प्रकार एक ओर ध्यान लगाने से मनुष्य में एक महान् शक्ति का संचार होता है जिससे उसकी मन की इच्छा की पूर्ति होती है।
  6. प्रत्याहार (Abstraction)—प्रत्याहार से अभिप्राय है मन तथा इन्द्रियों को उनकी अपनी क्रियाओं से हटाकर ईश्वर के चरणों में लगाना।
  7. ध्यान (Meditation) -इस अवस्था में मनुष्य सांसारिक भटकनों से ऊपर उठकर अपने-आप में अन्तर्ध्यान हो जाता है।
  8. समाधि (Trance)—इस स्थिति में मनुष्य की आत्मा-परमात्मा में लीन हो जाती है।

प्रश्न 4.
“योग स्वास्थ्य का साधन है।” इस बारे अपने विचार प्रकट करो।
(“Yoga is means of Good Health.” Write.)
उत्तर-
योग का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक रूप से दृढ़ व सचेत तथा व्यवहार में पूर्णतया अनुशासित बनाना। इसकी विशेषताएं इस प्रकार हैं—

  1. योग से मनुष्य की शारीरिक तथा मानसिक बुनियादी शक्तियां विकसित होती हैं। प्राणायाम द्वारा फेफड़ों में बहुत-सी वायु चली जाती है जिससे फेफड़ों की कसरत होती है। इससे फेफड़ों के बहुत-से रोग दूर होते हैं।
  2. योगाभ्यास करने से शरीर पूर्णतया स्वस्थ रहता है। धोती क्रिया तथा बस्ती क्रिया क्रमशः आमाशय तथा आंतों को साफ़ करती है। शरीर सदैव नीरोग रहता है।
  3. योग करने से शरीर मज़बूत बनता है।
  4. योगाभ्यास करने से शारीरिक अंग लचकदार बनते हैं। जैसे हल आसन तथा धनुर आसन करने से रीढ़ की हड्डी की लचक बढ़ती है।
  5. योगासन करने से शरीर की सभी प्रणालियां ठीक प्रकार से काम करने लगती हैं।
  6. योगाभ्यास मनुष्य के शरीर को अच्छी स्थिति (Posture) में रखता है जिससे उसके व्यक्तित्व में निखार आता है। उदाहरणार्थ वृक्ष आसन करने से घुटने नहीं भिड़ते और पद्म आसन करने से न ही पेट आगे को निकलता है और न ही कन्धों में कुबड़ापन आता है।
  7. योगासन करने से मानसिक अनुशासन आता है। यम तथा नियम द्वारा मानवीय संवेग विकारों तथा अनुचित इच्छाओं पर नियन्त्रण स्थापित करने की शक्ति देता है।
  8. उचित आसन करने से कई प्रकार के रोग दूर भागते हैं तथा कई रोगों की रोकथाम हो जाती है। वज्र आसन तथा मत्स्येन्द्रासन मधुमेह (Diabetes) के रोगों को ठीक करता है। इसी प्रकार प्राणायाम फेफड़ों का रोग नहीं लगने देता।
  9. योग शारीरिक तथा मानसिक थकावट को दूर भगाने में सहायता प्रदान करते हैं। शव आसन मनुष्य की थकावट को कोसों दूर भगाता है।
  10. करने से बुद्धि तेज़ होती है तथा स्मरण शक्ति बढ़ती है| हस बात के लिए शीर्षासन बहुत ही उपयोगी है।
  11. योगाभ्यास करने से मनुष्य के शरीर में ताल (Rhythm) आ जाता है। इससे शरीर की शक्ति संयम से व्यय होती है।
  12. योग मानसिक सन्तुलन तथा प्रसन्नता प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है।

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बड़े उत्तरों वाले प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कोई 6 आसनों की विधि और लाभ लिखो।
(Discuss the methods of any six Asans and give their uses.)
उत्तर-
1.शव आसन की स्थिति-पीठ के बल लेट कर शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ देना चाहिए।
विधि-

  1. पीठ के बल लेट कर शरीर को ढीला छोडो।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 1
  2. धीरे-धीरे लम्बे सांस लो।
  3. लेट कर शरीर के समस्त अंगों को पूरा आराम करने दें।
  4. दोनों पैरों को डेढ़ फुट की दूरी पर रखो।।
  5. दोनों हाथों की हथेलियों को ऊपर की ओर करके शरीर से लगभग 6 इंच की दूरी पर रखो।
  6. आंखें बन्द करके अन्तर्ध्यान हो जाओ।
  7. शरीर को पूर्ण विश्राम की स्थिति में रखो।

महत्त्-

  1. शरीर की थकावट को दूर करता है।
  2. मानसिक तनाव दूर हो जाता है।
  3. उच्च रक्त चाप दूर हो जाता है।
  4. मस्तिष्क तथा हृदय में ताज़गी आ जाती है।
  5. शरीर को शक्ति मिल जाती है।

2. पश्चिमोत्तान आसन–इस आसन में सारे शरीर को फैला कर मोड़ना होता है।
विधि-

  1. पश्चिमोत्तान आसन करने के लिए टांगों को आगे फैला कर ज़मीन पर बैठो।
  2. दोनों हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ो।
  3. इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करो।
  4. धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर ऊपर उठाओ और पहली वाली स्थिति में आ जाओ।
  5. यह आसन प्रतिदिन 10-15 बार करना चाहिए।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 2
    पश्चिमोत्तान आसन

लाभ-

  1. यह आसन पेट गैस की बीमारी को दूर करता है।
  2. यह आसन नाड़ियों को साफ़ करता है।
  3. इससे पैर शक्तिशाली हो जाते हैं।
  4. इससे शरीर में बढ़ी चर्बी घट जाती है।
  5. यह आसन पेट की बीमारियों को ठीक करता है।
  6. शरीर हल्कापन अनुभव करता है।
  7. टांगें टेढ़ी नहीं होती।

3. धनुरासन-स्थिति-इस आसन में शरीर की स्थिति कमान की भान्ति होती है।
विधि-

  1. इस आसन को करने के लिए पेट के भार आराम से लेट जाओ।
  2. पैरों को पीठ की ओर करो।
  3. हाथों से टखनों को पकड़ो।
  4. लम्बा सांस लेकर सिर तथा छाती को जहां तक सम्भव हो उठाकर शरीर का आकार धनुष की भान्ति बनाओ।
  5. जितनी देर हो सके इसी स्थिति में रहो। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हए शरीर को ढीला छोड़ दो और पहले वाली स्थिति में आ जाओ।

लाभ—

  1. यह आसन आंतों को पुष्ट करता है।
  2. पाचन शक्ति बढ़ाता है।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 3
    धनुरासन स्थिति
  3. मोटापा दूर हो जाता है।
  4. गठिया आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं।

4. पद्मासन की स्थिति–इस आसन में शरीर की स्थिति कमल के समान होती है।
विधि-

  1. पद्मासन करने के लिए पहले चौकड़ी मार के बैठो।
  2. दायां पांव बायें पांव पर इस प्रकार रखो कि दायें पांव की एड़ी बाईं जांघ की हड्डी को छुए। इसके बाद बायें पांव को उठा कर दाईं जांघ के ऊपर उसी प्रकार रखो।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 4
    पद्मासन
  3. रीढ़ की हड्डी सीधी रखो।

लाभ—

  1. इस आसन से मन स्थिर रहता है।
  2. इस आसन से कमर का दर्द दूर हो जाता है।
  3. इस आसन से दिल तथा पेट की बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  4. पाचन–शक्ति बढ़ जाती है।
  5. बार-बार पेशाब आने का रोग नहीं हो सकता।
  6. बहुत-सी आन्तरिक बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  7. बाजू तथा पांव मजबूत होते हैं।
  8. रक्त संचार तेज़ हो जाता है।
  9. शरीर स्वस्थ रहता है।

5. हल आसन की स्थिति
विधि—अपने पांव फैला कर पीठ के बल ज़मीन पर लेट जाओ। हाथों की हथेलियों को नितम्बों की बगल में जमा दो। कमर के निचले भाग को (दोनों पांवों को) ज़मीन से धीरे से ऊपर उठाओ और इतना ऊपर ले जाओ कि दोनों पांव के अंगूठे सिर के पीछे ज़मीन से लग जाएं। जब तक सम्भव हो, इसी स्थिति में रहो।
पांवों को धीरे से उसी स्थान पर वापस ले जाओ जहां से आरम्भ किया था।
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हल आसन
नोट-

  1. यह आसन हर आयु की स्त्री, पुरुष के लिए लाभदायक है।
  2. यह आसन हृदय रोगियों या उच्च या निम्न रक्त चाप वालों के लिए मना है।
  3. इस आसन को झटके से नहीं करना चाहिए।

लाभ—

  1. यह आसन सारे शरीर में रक्त के संचार को नियमित करता है। फलस्वरूप चर्म रोग शीघ्र दूर हो जाते हैं।
  2. मोटापा दूर करने के लिए यह आसन सर्वश्रेष्ठ है। कमर और नितम्ब को पतला करता है।
  3. पेट की स्थूलता को आसानी से कम करता है।
  4. रीढ़ की हड्डी लचकीली होती है। शरीर सुन्दर और नीरोग हो जाता है।
  5. यह आसन शरीर की दुर्गन्ध को दूर करता है। शरीर को सुन्दर बनाता है।
  6. चेहरा प्रसन्न हो जाता है।
  7. आंखों में तेज़ आ जाता है।

6. सर्वांगासन स्थिति-इस आसन में शरीर की स्थिति अर्द्ध-हल की भान्ति हो जाती
PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 6
सर्वांगासन
विधि—

  1. इस आसन के लिए शरीर को सीधा करके पीठ के भार सीधा लेट जाओ।
  2. हाथों को पेट के बराबर सीधा रखो।।
  3. दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाकर हथेलियों से पीठ को सहारा देते हुए कुहनियों को ज़मीन पर टिकाओ।
  4. सारे शरीर को सीधा रखो।
  5. सारे शरीर का भार कन्धों तथा गर्दन पर रहे।
  6. ठोडी को छाती के साथ स्पर्श करो।
  7. कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद फिर पहली वाली स्थिति में आ जाओ।

लाभ-

  1. शरीर में स्फूर्ति आती है।
  2. शरीर शक्तिशाली बन जाता है।
  3. मोटापा दूर हो जाता है।
  4. बाजू और पैर मज़बूत हो जाते हैं।
  5. टांगें टेढ़ी नहीं होती।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 2.
भुजंगासन (Bhujangasana), अर्द्धमत्स्येन्द्रासन (Ardhmatsyandrasana), मत्स्यासन (Matsyasana) और मयूरासन (Mayurasana) की विधि तथा लाभ बताओ।
उत्तर-
1. भुजंगासन (Bhujangasana)—
स्थिति-पेट के बल लेटना।
विधि—

  1. पेट के बल ज़मीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों के साथ कन्धों को धीरे-धीरे ऊपर उठाओ।
  2. टांगों और हथेलियों को अकड़ाते हुए धीरे-धीरे सिर और छाती को इतना उठाइए कि बाजू सीधे हो जाएं।
  3. पंजों को अन्दर की ओर देखो और सिर को पीछे की ओर फेंको।
  4. धीरे-धीरे पहले की स्थिति में जाओ।
  5. इस आसन को तीन से चार बार करो।

लाभ-

  1. यह आसन पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 7
    भुजंगासन
  2. जिगर के रोगों को दूर करता है।
  3. कब्ज दूर हो जाती है।
  4. यह स्वप्न-दोष दूर करता है।
  5. हड्डियां मज़बूत होती हैं।
  6. तिलों को आराम देता है।

2. अर्द्धमत्स्येन्द्रासन (Ardhmatseyandrasana)-इसमें बैठने की स्थिति में धड़ को पार्यों की ओर धंसा जाता है।
विधि-ज़मीन पर बैठकर बायं पांव की एडी को दाईं ओर नितम्ब के पास ले जाओ जिससे एड़ी का भाग गुदा के निकट लगे। दायें पांव को ज़मीन पर बायें पांव के घुटने के निकट रखो फिर वक्ष स्थल के निकट बाईं भुजा को लाएं, दायें पांव के घुटने के नीचे अपनी
PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 8
अर्द्धमत्स्येन्द्रासन
जंघा पर रखें, पीछे की ओर से दायें हाथ द्वारा कमर को लपेट कर नाभि को स्पर्श करने का यत्न करें। फिर पांव बदल कर सारी क्रिया को दोहराएं।
लाभ-

  1. इस आसन द्वारा मांसपेशियां और जोड़ अधिक लचीले रहते हैं और शरीर में शक्ति आती है।
  2. यह आसन वायु विकार और मधुमेह दूर करता है तथा आन्त उतरने (Hemia) में लाभदायक है।
  3. यह आसन मूत्राशय, अमाशय, प्लीहादि के रोगों में लाभदायक है।
  4. इस आसन के करने से मोटापा दूर रहता है।
  5. छोटी तथा बड़ी आन्तों के रोगों के लिए बहुत उपयोगी है।

3. मत्स्यासन (Matsyasana)—इसमें पद्मासन में बैठकर (Supine) लेटे हुए और पीछे की ओर (arch) बनाते हैं।
विधि- पद्मासन लगा कर सिर को इतना पीछे ले जाओ जिससे सिर की चोटी का भाग ज़मीन पर लग जाए और पीठ का भाग ज़मीन से ऊपर उठा हो। दोनों हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे पकड़ें।
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मत्स्यासन
लाभ-

  1. यह आसन चेहरे तथा त्वचा को आकर्षक बनाता है। चर्म रोग को दूर करता है।
  2. यह आसन टांसिल, मधुमेह, घुटनों तथा कमर दर्द के लिए लाभदायक है। शुद्ध रक्त का निर्माण तथा संचार करता है।
  3. इस आसन द्वारा शरीर में लचक आती है कब्ज दूर होती है, भूख बढ़ती है, पेट की गैस को नष्ट करके भोजन पचाता है।
  4. यह आसन फेफड़ों के लिए लाभदायक है, श्वास सम्बन्धी रोग जैसे खांसी, दमा, श्वास नली की बीमारी आदि दूर करता है। नेत्र रोग दोषों को दूर करता है। यह आसन टांगों और भुजाओं की शक्ति को बढ़ाता है और मानसिक दुर्बलता को दूर करता है।

4. मयूरासन (Mayurasana)
विधि-पेट के बल ज़मीन पर लेट कर दोनों पांवों के पंजों को मिलाओ। दोनों कुहनियों को आपस में मिला कर नाभि पर ले जाओ। सम्पूर्ण शरीर का भार कुहनियों पर देकर घुटनों और पैरों को ज़मीन से उठाए रखो।
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मयूरासन
लाभ-

  1. यह आसन फेफड़ों की बीमारी दूर करता है। चेहरे को लाली प्रदान करता है।
  2. पेट की सभी बीमारियां इससे दूर होती हैं और बांहों को बलवान बनाता है।
  3. इस आसन से आंखों की नज़र पास की व दूर की ठीक रहती है। इस आसन से मधुमेह रोग नहीं होता यदि हो जाए तो दूर हो जाता है।
  4. यह आसन रक्त संचार को नियमित करता है।

प्रश्न 3.
वज्रासन (Vajurasana), शीर्षासन (Shirshasana), चक्रासन (Chakarasana) और गरुड़ आसन (Garur Asana) की विधि तथा लाभ बताओ।
उत्तर-
1. वज्रासन (Vajur Asana)—पैरों को पीछे की ओर मोड़ कर बैठना और हाथों को घुटनों पर रखना इसकी स्थिति है।
विधि-

  1. घुटने मोड कर पैरों को पीछे की ओर करके पैरों के तलओं के भार बैठो।
  2. नीचे पैर इस प्रकार हों कि पैर के अंगूठे एक-दूसरे से मिले हों।
  3. दोनों घुटने भी मिले हों और कमर तथा पीठ दोनों एकदम सीधे रहें।
  4. दोनों हाथों को तान कर घुटनों के पास रखो।।
  5. सांसें लम्बी-लम्बी और साधारण हो।
  6. यह आसन प्रतिदिन 3 मिनट से लेकर 20 मिनट तक करना चाहिए।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 11
    वज्रासन

लाभ-

  1. शरीर में स्फूर्ति आती है।
  2. शरीर का मोटापा दूर हो जाता है।
  3. शरीर स्वस्थ रहता है।
  4. मांसपेशियां मज़बूत होती हैं।
  5. इससे स्वप्न दोष दूर हो जाता है।
  6. पैरों का दर्द दूर हो जाता है।
  7. मानसिक शान्ति प्राप्त होती है।
  8. मनुष्य निश्चिन्त हो जाता है।
  9. इससे मधुमेह की बीमारी में लाभ पहुंचता है।
  10. पाचन-क्रिया ठीक रहती है।

2. शीर्षासन (Shirsh Asana)– इस आसन में सिर नीचे और पैर ऊपर की ओर होते हैं।
विधि-

  1. एक दरी या कम्बल बिछ। कर घुटनों के भार बैठो।
  2. दोनों हाथों की अंगुलियां कस कर बांध लो। दोनों हाथों को कोणदार बना कर कम्बल या दरी पर रखो।
  3. सिर का सामने वाला भाग हाथों में इस प्रकार ज़मीन पर रखो कि दोनों अंगूठे सिर के पिछले हिस्से को दबाएं।
  4. टांगों को धीरे-धीरे अन्दर की ओर मोड़ते हुए शरीर को सिर और दोनों हाथों के सहारे आसमान की ओर उठाओ।
  5. पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाओ। पहले एक टांग को सीधा करो, फिर दूसरी को।
  6. शरीर को बिल्कुल सीधा रखो।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 12
    शीर्षासन
  7. शरीर का सारा भार बांहों और सिर पर बराबर पड़े।
  8. दीवार या साथी का सहारा लो।

लाभ –

  1. यह आसन भूख बढ़ाता है।
  2. इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  3. मोटापा दूर हो जाता है।
  4. जिगर ठीक प्रकार से कार्य करता है।
  5. पेशाब की बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  6. बवासीर आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  7. इस आसन का प्रतिदिन अभ्यास करने से कई मानसिक बीमारियां दूर हो जाती हैं।

सावधानियां –

  1. जब आंखों में लाली आ जाए तो बन्द कर दो।
  2. सिर चकराने लगे तो आसन बन्द कर दें।
  3. कानों में सां-सां की ध्वनि सुनाई दे तो शीर्षासन बन्द कर दें।
  4. नाक बन्द हो जाए तो यह आसन बन्द कर दो।
  5. यदि शरीर भार सहन न कर सकें तो आसन बन्द कर दें।
  6. पैरों व बांहों में कम्पन होने लगे तो आसन बन्द कर दो।
  7. यदि दिल घबराने लगे तो भी आसन बन्द कर दो।
  8. शीर्षासन सदैव एकान्त स्थान पर करना चाहिए।
  9. आवश्यकता होने पर दीवार का सहारा लेना चाहिए।
  10. यह आसन केवल एक मिनट से पांच मिनट तक करो।

इससे अधिक शरीर के लिए हानिकारक है।
3. चक्रासन की स्थिति- इस आसन में शरीर को गोल चक्र जैसा बनाना पड़ता है।
PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 13
चक्रासन
विधि-

  1. पीठ के भार लेट कर घुटनों को मोड़ कर, पैरों के तलवों को ज़मीन से लगाओ। दोनों पैरों के बीच में एक से डेढ़ फुट का अन्तर रखो।
  2. हाथों को पीछे की ओर ज़मीन पर रखो। तलवों और अंगुलियों को दृढ़ता के साथ ज़मीन से लगाए रखो।
  3. अब हाथ-पैरों के सहारे पूरे शरीर को कमान या चक्र की शक्ल में ले जाओ।
  4. सारे शरीर की स्थिति गोलाकार होनी चाहिए।
  5. आंखें बन्द रखो ताकि श्वास की गति तेज़ हो सके।

लाभ-

  1. शरीर की सारी कमजोरियां दूर हो जाती हैं।
  2. शरीर के सारे अंगों को लचीला बनाता है।
  3. हर्नियां तथा गुर्दो के रोग दूर करने में लाभदायक होता है।
  4. पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
  5. पेट की वायु विकार आदि बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  6. रीढ़ की हड्डी मज़बूत हो जाती है।
  7. जांघ तथा बाहें शक्तिशाली बनती हैं।
  8. गुर्दो की बीमारियां घट जाती हैं।
  9. कमर दर्द दूर हो जाता है।
  10. शरीर हल्कापन अनुभव करता है।

4. गरुड़ आसन (Garur Asana)-गरुड़ आसन में शरीर की स्थिति गरुड़ पक्षी की भांति पैरों पर सीधे खडा होना होता है।
विधि-

  1. सीधे खड़े होकर बायें पैर को उठा कर दाहिनी टांग में बेल की तरह लपेट लो।
  2. बाईं जांघ दाईं जांघ पर आ जायेगी तथा बाईं जांघ पिंडली को ढांप देगी।
  3. शरीर का सारा भार एक ही टांग पर कर दो।
  4. बाएं बाजू को दायें बाजू से दोनों हथेलियों को नमस्कार की स्थिति में ले जाओ।
  5. इसके बाद बाईं टांग को थोड़ा-सा झुका कर शरीर को बैठने की स्थिति में ले जाओ। इस प्रकार शरीर की नसें खिंच जाती हैं। अब शरीर को सीधा करो और सावधान की स्थिति में हो जाओ।
  6. अब हाथों और पैरों को बदल कर पहली वाली स्थिति में पुनः दोहराओ।

लाभ-

  1. शरीर के सभी अंगों को शक्तिशाली बनाता है।
    PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग 14
    गरुड़ आसन
  2. शरीर स्वस्थ हो जाता है।
  3. यह बांहों को ताकतवर बनाता है।
  4. यह हर्निया रोग से मनुष्य को बचाता है।
  5. टांगें शक्तिशाली हो जाती हैं।
  6. शरीर हल्कापन अनुभव करता है।
  7. रक्त संचार तेज़ हो जाता है।
  8. गरुड़ आसन करने से मनुष्य बहुत-सी बीमारियों से बच जाता है।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 4.
पातंजलि ऋषि ने अष्टांग योग के कौन-कौन से आठ अंग बताए हैं? उनके बारे में लिखो।
उत्तर-
महर्षि पातंजलि ने योग द्वारा शारीरिक स्वास्थ्य एवं नीरोगता प्राप्त करने का एक तरीका बताया है, जिसे ‘अष्टांग योग’ का नाम दिया जाता है। इसके आठ अंग निम्नलिखित हैं—

  1. नियम (Observance)—नियम वे ढंग हैं जो मनुष्य के शारीरिक अनुशासन से सम्बन्ध रखते हैं, जैसे शरीर की सफ़ाई नेती तथा बस्ती द्वारा की जाती है। नियमों के पांच अंग हैं-
    • शौच
    • सन्तोष
    • तप
    • स्वाध्याय और
    • ईश्वर परिधान।
  2. यम (Restraint)-ये वे साधन हैं जिनका मनुष्य के मन के साथ सम्बन्ध होता है। इनका अभ्यास मनुष्य को अहिंसा, सच्चाई, पवित्रता, त्याग आदि सिखाता है। इसके पांच अंग हैं-
    • अहिंसा
    • असत्य
    • अस्तेय
    • अपरिग्रह
    • ब्रह्मचर्य।
  3. आसन (Posture)-आसन वह विशेष स्थिति है जिसमें मनुष्य के शरीर को अधिक-से-अधिक समय के लिए रखा जाता है। रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखकर टांगों को किसी विशेष दिशा में रखकर बैठना पद्मासन है।
  4. प्राणायाम (Regulation of Breath and Bio-energy)-किसी विशेष विधि के अनुसार सांस अन्दर ले जाने और बाहर निकालने की क्रिया प्राणायाम कहलाती है। यह उपासना का अंग है। इसके तीन भाग हैं-
    • पूरक
    • रेचक
    • कुम्भक।
  5. धारणा (Concentration)—इसका अभिप्राय है मन को किसी विशेष वांछित विषय पर लगाना। इस प्रकार एक ओर ध्यान लगाने से मनुष्य में एक महान् शक्ति का संचार होता है, जिससे उसकी मन की इच्छा की पूर्ति होती है।
  6. प्रत्याहार (Abstration)-प्रत्याहार से अभिप्राय है मन तथा इन्द्रियों को उनकी अपनी क्रियाओं से हटाकर ईश्वर के चरणों में लगानः
  7. ध्यान (Meditation)-इस अवस्था में मनुष्य सांसारिक भटकनों से ऊपर उठकर अपने आप में अन्तर्ध्यान हो जाता है।
  8. समाधि (Trance)—इस स्थिति में मनुष्य की आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है।

प्रश्न 5.
योग के मुख्य सिद्धान्त कौन-कौन से हैं ? (What are the main Principles of Yoga ?)
उत्तर-
योग के मुख्य सिद्धान्त (Main Principles of Yoga)-योग करते समय कुछ सिद्धान्तों का पालन अवश्य करना चाहिए। इन सिद्धान्तों का वर्णन इस प्रकार हैं—

  1. स्नान करके योगासन किए जाएं तो और भी अच्छा रहेगा। स्नान करने से शरीर हल्का होता है, लचक आती है और आसन अच्छे ढंग से होते हैं। वैसे सायंकाल भी जब पेट खाली हो तो आसन किए जा सकते हैं।
  2. आसन करने का स्थान शांत व स्वच्छ होना चाहिए। किसी उद्यानवाटिका में आसन किए जाएं तो बहुत अच्छा है।
  3. दरी या कम्बल बिछाकर आसन करने चाहिएं, ताकि भूमि की चुम्बकीय शक्ति आपके ध्यान को तोड़े नहीं और नीचे से कोई चीज़ आपको गड़े नहीं।
  4. जितना आप एकाग्र होकर आसन करेंगे, उतना ही अधिक शारीरिक व मानसिक लाभ मिलेगा। आसन शुरू करने से पहले श्वासन करके अपने श्वास, शरीर और मन को शांत कर लें।
  5. इसको करते समय झटके नहीं लगने चाहिएं। हर आसन को शरीर तान कर और खींच कर धीरे-धीरे करें। उसके बाद कुछ क्षण अपने शरीर को शिथिल करें। जब आपका श्वास स्वाभाविक स्थिति में आ जाये तब दूसरा आसन करें।
  6. आसन की पूर्ण स्थिति तक जाने का प्रतिदिन अभ्यास करें। धीरे-धीरे आपके बंद खुलेंगे और शरीर में लचक पैदा होगी।
  7. ऋतु के अनुसार आसनों का कम-से-कम कपड़े पहन कर अभ्यास करें।
  8. योगासनों का अभ्यास सभी वर्गों के बच्चे, बूढ़े, स्त्री-पुरुष कर सकते हैं । दस वर्ष से लेकर 80/85 वर्ष तक के व्यक्ति योगाभ्यः । कर सकते हैं। आसनों का अभ्यास विधिपूर्वक करना चाहिए।
  9. योगासन करने वाले व्यक्ति को अपना भोजन हल्का रखना चाहिए। भोजन सुपाच्य, सात्विक व प्राकृतिक होना चाहिए। जितना हल्का भोजन होगा, उतनी उसकी कार्य शक्ति बढ़ जाएगी।
  10. कठिन रोगों तथा ज्वर से पीड़ित व्यक्ति को आसन, प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  11. शुरू में एक ही दिन बहुत-से आसन न करें। प्रत्येक आसन को मनोयोग से आंख मूंद कर धीरे-धीरे करें : सर्वांगासन व शोसन धीरे-धीरे बढ़ाकर दस मिन्ट तक कर
    सकते हैं। आसन की पहली स्थिति से अन्तिम स्थिति में और अन्तिम स्थिति से वापस जल्दी न आएं।
  12. आसनों का अभ्यास-क्रम इस प्रकार रखना चाहिए कि आसन के बाद उसका उपासन (काउन्टरपोज) कर सकें। जैसे पश्चिमोत्तानासन और उसका उपासन कोणासन, सर्वांगासन का बाद मत्स्यासन आदि।
  13. योगासनों की समाप्ति के बाद कुछ समय के लिए श्वासन अवश्य करें। आसनों का लाभ तभी मिल पाएगा जब आप श्वासन करके अपने शरीर को थोड़ा विश्राम दें। श्वासन अपने-आप में पूर्ण आसन है और इससे शरीर में अद्भुत शक्ति का संचार होता है।
  14. योगासन प्राणायम का कार्यक्रम समाप्त करने के बाद कम-से-कम आधे घण्टे तक कुछ न खाएं।
  15. वायु को बाहर निकालने के पश्चात् श्वास क्रिया रोकने का अभ्यास करना चाहिए।
  16. योगाभ्यास प्रतिदिन करना चाहिए।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 6.
अन्य व्यायाम जैसे सैर, दंड-बैठक, मुग्दर, मल्ल-युद्ध पश्चिमी देशों के खेलों आदि में क्या दोष हैं और योगासनों में ऐसी क्या विशेषताएं हैं, जो उन्हें ही जीवन का अंग बनाया जाए ?
(What are the disadvantages of western exercises like, Astrolt, Dand-Bethak, Wrestling, Mugdhar etc ? Why Yoga is important for our life ?)
उत्तर-

  1. अन्य जितने भी व्यायाम हैं, वे मुख्यत: मांसपेशियों पर ही प्रभाव डालते हैं, जिससे बाहरी शरीर ही बलिष्ठ दिखाई देता है, अंदर काम करने वाले यन्त्रों पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे व्यक्ति अधिक देर तक स्वस्थ नहीं रह पाता। जबकि योगासनों से व्यक्ति की आयु लम्बी होती है। विकारों को शरीर से बाहर करने की अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है और शरीर के सैल बनते अधिक व टूटते कम हैं।
  2. अन्य व्यायाम व खेलों के लिए स्थान व साधनों की आवश्यकता पड़ती है। खेल तो साथियों के बिना खेले ही नहीं जा सकते, जबकि योगासन अकेले ही दरी व चादर पर किए जा सकते हैं।
  3. दूसरे व्यायामों का प्रभाव मन और इन्द्रियों पर बहुत कम पड़ता है, जबकि योगासनों से मानसिक शक्ति बढ़ती है और इन्द्रियों को वश में करने की शक्ति आती है।
  4. दूसरे व्यायामों में अधिक खुराक की आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए अधिक खर्च करना पड़ता है, जबकि योगासनों में बहुत कम भोजन की आवश्यकता पड़ती है।
  5. योगासनों से शरीर की रोगनाशक शक्ति का विकास होता है, जिससे शरीर किसी भी विजातीय द्रव्य को अन्दर रुकने नहीं देता, तुरन्त बाहर निकालने का प्रयत्न करता है, जिसके आप रोगमुक्त होते हैं।
  6. योगासनों से शरीर में लचक पैदा होती है, जिससे व्यक्ति फुर्तीला रहता है, शरीर के हर अंग में रक्त का संचार ठीक होता है, अधिक आयु में भी व्यक्ति युवा लगता है और काम करने की शक्ति बनी रहती है। अन्य व्यायामों से मांसपेशियों में कड़ापन आ जाता है, शरीर कठोर हो जाता है और बुढ़ापा जल्दी आता है।
  7. जिस प्रकार नाली की गंदगी को झाड़ लगाकर, पानी फेंक कर साफ़ करते हैं, उसी प्रकार अलग-अलग आसनों से रक्त की नलिकाओं व कोशिकाओं को साफ़ करते हैं, ताकि उनमें रवानगी रहे और शरीर रोगमुक्त हो। यह केवल योगासन क्रियाओं से ही हो सकता है, अन्य व्यायामों से नहीं। अन्य व्यायामों से तो हृदय की गति तेज़ हो जाती है और रक्त पूरी तरह शुद्ध नहीं हो पाता।
  8. फेफड़ों के द्वारा हमारे रक्त की शुद्धि होती है। योगासनों व प्राणायाम द्वारा हम अपने फेफड़ों के फेलने व सिकुड़ने की शक्ति को बढ़ाते हैं जिससे अधिक-से-अधिक ओषजनक वायु फेफड़ों में भर सके और रक्त की शुद्धि कर सके। दूसरे व्यायामों में फेफड़े जल्दी-जल्दी श्वास लेते हैं, जिससे प्राण वायु फेफड़ों के अन्तिम छोर तक नहीं पहुंच पाती, जिसका परिणाम होता है विकार और विकार रोग का कारण है।
  9. वर्तमान समय में गलत रहन-सहन व अप्राकृतिक भोजन के कारण पाचन संस्थान के यन्त्रों का कार्य सुचारु रूप से नहीं चल पाता। उन्हें क्रियाशील रखने में योगासन बहुत सहायक सिद्ध होते हैं, जबकि दूसरे व्यायामों से पाचन क्रिया बिगड जाती है।
  10. मेरुदण्ड पर हमारा यौवन निर्भर करता है। सारा रक्त संचार व नाड़ी संचालन, इसी से होकर शरीर में फैलता है। जितनी लचक रीढ़ की हड्डी में रहेगी, उतना ही शरीर स्वस्थ होगा, आयु लम्बी होगी, मानसिक संतुलन बना रहेगा। यह केवल योगासनों से ही सम्भव है।
  11. दूसरे व्यायामों से आपको थकावट आएगी, बहुत अधिक शक्ति खर्च करनी पडेगी, जबकि योगासनों से शक्ति प्राप्त की जाती है. क्योंकि योगासन धीरे-धीरे और आराम से किए जाते हैं। इन्हें अहिंसक और शान्तिप्रिय क्रियाएं कहा जाता है।
  12. अन्य व्यायामों से मनुष्य के चरित्र पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता। योगासन स्वास्थ्य के साथ-साथ चरित्रवान भी बनाते हैं। यौगिक क्रियाओं से मानसिक व नैतिक शक्ति का विकास होता है, मन स्थिर रहता है। मन के स्थिर रहने से बुद्धि का विकास होता है, सत्वगुण की प्रधानता होती है और सत्वगुण से मानसिक शक्ति का विकास होता है। ये सब लाभ केवल योगासन और प्राणायाम से ही प्राप्त हो सकते हैं।
  13. हमारे शरीर में अनेक ग्रन्थियां हैं, जो हमें स्वस्थ व निरोग रखने में महत्त्वपूर्ण कार्य करती हैं। इन ग्रन्थियों का रस रक्त में मिल जाता है, जिससे मनुष्य स्वस्थ व शक्तिशाली बनता है। गले की थाइराइड व पैराथाइराइड ग्रन्थियों से निकलने वाले रस पर्याप्त मात्रा में न होने से बालकों का पूर्ण विकास नहीं हो पाता और युवकों के असमय में ही बाल गिरने लगते हैं तथा शरीर में प्रसन्नता नहीं रहती। शरीर की विभिन्न ग्रन्थियों को सजग करके पर्याप्त मात्रा में रस देने के योग्य बनाने के लिए योगासन पद्धति बड़ी कारगर है। अन्य व्यायामों का प्रभाव इस दिशा में नगण्य है।
  14. शरीर के रोगों को दूर करने में, प्राणायाम और षट्कर्म राम-बाण का काम करते हैं। जब विजातीय द्रव्यों के बढ़ जाने से शरीर के अंग उन्हें बाहर निकाल पाने में समर्थ नहीं होते, तो रोग का आरम्भ होता है। इन विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालने के लिए इन क्रियाओं का सहारा लिया जा सकता है और अपने आपको स्वस्थ तथा शक्तिशाली बनाया जा सकता है।
  15. शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास के लिए योग पद्धति २.तम पद्धति है। इसका मुकाबला और कोई पद्धति नहीं कर सकती।

PSEB 10th Class Physical Education Solutions Chapter 3 योग

प्रश्न 7.
योग का महत्त्व विस्तार से लिखें।
उत्तर-
योग का महत्त्व (Importance of Yoga)—मानव जीवन में योग का अत्यधिक महत्त्व है। योग मानव में सम्पूर्ण विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग द्वारा मनुष्य में निम्नलिखित गुणों का विकास होता है—

  1. शारीरिक, मानसिक एवं गुप्त शक्तियों का विकास (Development of Physical, Mental and Hidden qualities)—प्राणायाम और अष्टांग द्वारा मनुष्य की गुप्त शक्तियों का विकास होता है। अष्टांग योग के नियम और आसन अंगों द्वारा व्यक्ति का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। विभिन्न आसनों का अभ्यास करने से शरीर के अंग क्रियाशील एवं विकसित होते हैं। इसका हमारी विभिन्न प्रणालियों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।
  2. शरीर की आन्तरिक शुद्धता (Purification and Development of Body)योग की छः अवस्थाओं द्वारा शरीर का सम्पूर्ण विकास होता है। आसनों से शरीर स्वस्थ होता है, योगाभ्यास द्वारा मन पर नियन्त्रण तथा नाड़ी संस्थान और मांसपेशी संस्थान का आपसी तालमेल बना रहता है। प्राणायाम द्वारा शरीर स्वस्थ तथा फुर्तीला बना रहता है। ध्यान और समाधि से सांसारिक चिन्ताओं से छुटकारा प्राप्त होता है। इससे आत्मा-परमात्मा में विलीन हो जाती है। इस प्रकार आसन और प्राणायाम शरीर की आन्तरिक सफ़ाई में सहायक सिद्ध होते हैं।
  3. संवेगों पर नियन्त्रण (Control over Eniutions)–आधुनिक युग में मनुष्य मानसिक और आत्मिक शान्ति का इच्छा करता है। प्रायः देखने में आता है कि साधारण सी असफलता अथवा दुःखदाई घटना हमें इतना दु:खी कर देती है कि हमें जीवन नीरस तथा बोझिल दिखाई देता है। इसके विपरीत कई बार साधारण-सी सफलता अथवा प्रसन्नता की बात हमें इतना खुश कर देती है कि हम मदमस्त हो जाते हैं। हम अपना मानसिक सन्तुलन खो बैठते हैं। इन बातों में हमारी भावात्मक अपरिपक्वता की झलक दिखाई देती है। योग हमें अपने संवेगों पर नियन्त्रण रखना एवं सन्तुलन में रहना सिखाता है। यह हमें सिखाता है कि असफलता अथवा सफलता, प्रसन्नता अथवा अप्रसन्नता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह जीवन दुःखों तथा सुखों का अद्भुत संगम है। दुःखों और खुशियों में समझौता करना ही सुखी जीवन का भेद है। हमें अपने मन के उद्देश्यों पर नियन्त्रण करना चाहिए और सफलता या असफलता को एक समान महत्त्व देना चाहिए।
  4. रोगों से प्राकतिक बचाव (Natural prevention of Diseases) योग क्रियाओं से रोगों से बचाव होता है। रोगों के कीटाणु एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य के शरीर में प्रवेश करके रोग फैलाते हैं। योग ज्ञान हमें इन रोगों का मुकाबला करने, इसे छुटकारा पाने और स्वयं को स्वस्थ रखने के ढंग बताता है। जैसे-आसान, धोती, नेचि और जौली आदि द्वारा हमारे आन्तरिक अंग शुद्ध होते हैं और हमें रोगों से मुक्ति मिलती है।
  5. त्याग एवं अनुशासन की भावना (Feeling of Sacrifice and Discipline)योग ज्ञान द्वारा व्यक्ति में त्याग एवं अनुशासन की भावना का संचार होता है। इन गुणों से भरपूर व्यक्ति ही कठिन से कठिन कार्य आसानी से कर सकते हैं। अष्टांग योग में अनुशासन को मुख्य स्थान दिया जाता है। योग के नियमों की पालना करने वाला व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं, मानवीय भावनाओं, संवेग, विचार इत्यादि पर नियन्त्रण रखता है।
    अन्ततः हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि योग मनुष्य के व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास में विशेष महत्त्व रखता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 21 भारत एवं उसके पड़ोसी देश : नेपाल, श्रीलंका, चीन, बंगलादेश एवं पाकिस्तान

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 21 भारत एवं उसके पड़ोसी देश : नेपाल, श्रीलंका, चीन, बंगलादेश एवं पाकिस्तान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 21 भारत एवं उसके पड़ोसी देश : नेपाल, श्रीलंका, चीन, बंगलादेश एवं पाकिस्तान

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
भारत तथा पाकिस्तान के सम्बन्धों का सर्वेक्षण करो। (Make a survey of Indo-Pak relations.)
अथवा
भारत-पाकिस्तान के सम्बन्धों का वर्णन कीजिए। (Explain the relationship between India and Pakistan.)
उत्तर-
15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतन्त्र हुआ, परन्तु साथ ही भारत का विभाजन भी हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ। पाकिस्तान का जन्म ब्रिटिश शासकों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति का परिणाम था। पाकिस्तान भारत का पड़ोसी देश है, जिसके कारण भारत-पाक सम्बन्धों का महत्त्व है।
विस्थापित, संपत्ति, देशी रियासतों की संवैधानिक स्थिति, नहरी पानी, सीमा-निर्धारण, वित्तीय और व्यापारिक समायोजन, जूनागढ़, हैदराबाद तथा

कश्मीर और कच्छ के विवादों के लिए भारत और पाकिस्तान में युद्ध होते रहे हैं और तनावपूर्ण स्थिति बनी रही है।
कश्मीर विवाद (Kashmir Controversy)-स्वतन्त्रता से पूर्व कश्मीर भारत के उत्तर-पश्चिमी कोने में स्थित एक देशी रियासत थी।
पाकिस्तान ने पश्चिमी सीमा प्रान्त के कबाइली लोगों (Tribesmen) को प्रेरणा और सहायता देकर कश्मीर पर आक्रमण करवा दिया। इस पर जम्मू-कश्मीर के राजा हरी सिंह ने 22 अक्तूबर, 1947 को कश्मीर को भारत में शामिल करने की प्रार्थना की। 27 अक्तूबर को भारत सरकार ने इस प्रार्थना को स्वीकार कर लिया।

भारत ने पाकिस्तान से कबाइलियों को मार्ग न देने के लिए कहा परन्तु पाकिस्तान पूरी सहायता देता रहा। इस पर लॉर्ड माऊंटबेटन के परामर्श पर भारत सरकार ने 1 जनवरी, 1948 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर की 34वीं और 38वीं धारा के अनुसार सुरक्षा परिषद् से पाकिस्तान के विरुद्ध शिकायत की और अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान को आक्रमणकारियों की सहायता बंद करने को कहें।। – कश्मीर और संयुक्त राष्ट्र-परन्तु सुरक्षा परिषद् कश्मीर विवाद का कोई समाधान करने में असफल रही। 21 अप्रैल, 1948 को सुरक्षा परिषद् ने 5 सदस्यों को भारत और पाकिस्तान के लिए संयुक्त आयोग (U.N.C.I.P.) की नियुक्ति की और 1 जनवरी, 1949 को कश्मीर में युद्ध विराम हो गया। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तथा पाकिस्तान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पी०ओ०के०) पर नाजायज कब्जा कर रखा है।

सन् 1965 का पाक आक्रमण-सन् 1965 में भारत को दो बार पाकिस्तान के आक्रमण का शिकार होना पड़ापहली बार अप्रैल में कच्छ के रणक्षेत्र में और दूसरी बार सितम्बर में कश्मीर में।
सितम्बर, 1965 में पाकिस्तानी सेनाओं ने अन्तर्राष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन करके छंब क्षेत्र पर आक्रमण कर दिया। अन्त में सुरक्षा परिषद् के 20 सितम्बर के प्रस्ताव का पालन करते हुए दोनों पक्षों ने 22-23 सितम्बर की सुबह 3-30 बजे युद्ध बंद कर दिया। इस समय तक भारतीय सेनाएँ लाहौर के दरवाज़े तक पहुंच चुकी थीं।

ताशकंद समझौता-10 जनवरी, 1966 को सोवियत संघ के प्रधानमन्त्री श्री कोसिगन के प्रयत्न से दोनों देशों में ताशकंद समझौता हो गया जिसके द्वारा भारत के प्रधानमन्त्री तथा पाकिस्तान के राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हो गए कि दोनों देशों के सभी सशस्त्र सैनिक 25 फरवरी, 1966 से पूर्व उस स्थान पर वापस बुला लिए जाएंगे जहां वे 5 अगस्त, 1965 से पूर्व थे तथा दोनों पक्ष युद्ध विराम रेखा पर युद्ध-विराम शर्तों का पालन करेंगे।

1969 में अयूब खां के हाथ से सत्ता निकल कर जनरल याहिया खां के हाथों में आ गई। याहिया खां ने भारत के साथ अमैत्रीपूर्ण नीति का अनुसरण किया।

1971 का युद्ध-1971 में पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बंगला देश) में जनता ने याहिया खां की तानाशाही के विरुद्ध स्वतन्त्रता का आन्दोलन आरम्भ कर दिया। याहिया खां ने आन्दोलन को कुचलने के लिए सैनिक शक्ति का प्रयोग किया। भारत ने बंगला देश के मुक्ति संघर्ष में उसका साथ दिया। मुक्ति संघर्ष के समय लगभग एक करोड़ शरणार्थियों को भारत में आना पड़ा। इससे भारत की आर्थिक व्यवस्था पर बड़ा बोझ पड़ा।

पाकिस्तान ने 3 दिसम्बर, 1971 को भारत पर आक्रमण कर दिया। भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने का निश्चय किया और पाकिस्तान के आक्रमण का डटकर मुकाबला किया। 5 दिसम्बर को श्रीमती इन्दिरा गान्धी ने भारतीय संसद् में बंगला देश गणराज्य के उदय की सूचना दी। 16 दिसम्बर, 1971 में ढाका में जनरल नियाज़ी ने आत्म-समर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए और लगभग 1 लाख सैनिकों ने आत्म-समर्पण कर दिया।

1972 में हुआ शिमला समझौता हुआ था। इस समझौते के बाद से भारत-पाक के मध्य सामाजिक एवं आर्थिक समबन्ध सुधरने लगे थे परन्तु 1981 से पुनः आपसी सम्बन्धों में कटुता आनी प्रारम्भ हो गई। 1987 में पाकिस्तान में सियाचीन ग्लेशियर की पहाड़ी तराइयों पर, भारतीय चौंकियों पर कब्जा जमाने की असफल कोशिश की। 1988 में भारत एवं पाकिस्तान के मध्य तीनं समझौते हुए जिनमें एक-दूसरे के परमाणु संयन्त्रों पर आक्रमण न करने का समझौता सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। हाल के कुछ वर्षों में भारत-पाक सम्बन्धों में आए उतार-चढ़ाव निम्नलिखित हैं

6 अप्रैल, 1991 को भारत एवं पाक के मध्य सीमा पर तनाव कम करने के उद्देश्य से दो समझौते हुए। ये समझौते एक-दूसरे की वायु सीमा के उल्लंघन पर रोक एवं युद्धाभ्यास की अग्रिम सूचना देने से सम्बन्धित हैं।

1998 में दोनों देशों द्वारा किए गए परमाणु परीक्षणों द्वारा इनके आपसी सम्बन्धों में भारी तनाव पैदा हो गया। .
आपसी सम्बन्धों को सुधारने के लिए भारत-पाक के मध्य बस सेवा शुरू करने के लिए 17 फरवरी, 1999 को एक समझौता किया।
भारत-पाक सम्बन्धों में नया मोड़ लाने के लिए 20 फरवरी, 1999 को भारत के प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी स्वयं बस द्वारा लाहौर गए। ___

मई, 1999 में पाकिस्तान द्वारा कारगिल क्षेत्र में भारी घुसपैठ की गई। अनन्त धैर्य के पश्चात् 26 मई, 1999 को भारत ने कारगिल एवं द्रास क्षेत्र में आक्रमण का समुचित जवाब दिया। युद्ध मोर्चों पर भारी पराजय और अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान को नियन्त्रण रेखा के पीछे हटना पड़ा।

24 दिसम्बर, 1999 को सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा भारतीय विमान का अपहरण कर लिया गया। विमान अपहरण में एक अफ़गानी और चार पाकिस्तानी उग्रवादियों का हाथ था।

भारत ने पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने हेतु वहां के शासक परवेज मुशर्रफ को बातचीत के लिए निमन्त्रण दिया और वे जुलाई, 2001 में भारत आए परन्तु मुशर्रफ के अड़ियल रवैये के कारण यह वार्ता असफल रही।

10 दिसम्बर 2001 को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने भारतीय संसद् पर हमला किया। जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान जाने वाली एवं वहां से आने वाली बसों, रेलों एवं हवाई सेवाओं पर रोक लगा दी।
सितम्बर, 2002 में पुनः पाक समर्थित उग्रवादी संगठन ने गुजरात के नारायण स्वामी मंदिर अक्षरधाम पर हमला किया जिसमें कई लोग मारे गए।
25 नवम्बर, 2002 में पुनः पाक प्रशिक्षित आतंकवादियों ने जम्मू के प्रसिद्ध रघुनाथ मन्दिर पर हमला कर कई बेगुनाह लोगों की जान ली।

लगातार आतंकवादी हमलों के चलते भारत-पाक सम्बन्धों में कड़वाहट आई है जिसके कारण भारत ने जनवरी, 2003 में पाकिस्तान में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन में भाग लेने से इन्कार कर दिया।

वर्ष 2004 में भारत-पाक सम्बन्धों में सुधार की उम्मीद जगाई । 2004 के सार्क सम्मेलन के दौरान भारत-पाक ने विवादित मुद्दों को बातचीत द्वारा हल करने के लिए सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के मध्य बंद हुई रेल सेवा, बससेवा एवं विमान सेवा पुनः आरम्भ कर दी गई।

सितम्बर, 2004 में भारत के प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की न्यूयार्क में शिखर वार्ता हुई। इस बैठक में मुनाबावो-खोखरापार रेल सेवा तथा श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा शुरू करने पर बातचीत शुरू करने की सहमति बनी। जम्मू-कश्मीर के मामले में सांझा ब्यान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने इस पर सहमति व्यक्त की कि बातचीत के द्वारा इस मुद्दे के शान्तिपूर्ण समाधान के सभी विकल्प ईमानदारी व उद्देश्यपूर्ण ढंग से तलाशे जायेंगे।

नवम्बर, 2004 में पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री शौकत अजीज भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान शौकत अजीज ने भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह से जम्मू-कश्मीर,श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा शुरू करने तथा बैंकिग क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

16 फरवरी, 2005 को दोनों देशों ने श्रीनगर-मुजफ्फराबाद के बीच 7 अप्रैल, 2005 से बस चलाने का ऐलान किया। इस बस में पासपोर्ट के बजाए एंट्री परमिट के ज़रिए दोनों देशों के नागरिक सफर कर सकेंगे। इसी तरह अमृतसर और लाहौर तथा ननकाना साहिब तक बस चलाने पर भी दोनों देश सहमत हो गए।

जनरल मुशर्रफ की भारत यात्रा-17 अप्रैल, 2005 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ नई दिल्ली आये। जनरल मुशर्रफ की इस यात्रा से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते को नया आयाम मिला। दोनों देशों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे शांति प्रक्रिया से पीछे नहीं हटेंगे। दोनों नेताओं ने अन्तिम समाधान मिलने तक जम्मू-कश्मीर पर सार्थक और दूरगामी बातचीत रखने पर सहमति जताई।

कश्मीर में भूकम्प से तबाही-8-9 अक्तूबर, 2005 को भूकम्प से कश्मीर विशेषकर पाक अधिकृत कश्मीर में तबाही हुई। भारत द्वारा भेजी गई राहत सामग्री यद्यपि पाकिस्तान ने स्वीकार कर ली, परन्तु भारत के साथ संयुक्त राहत कार्यों की पेशकश को पाकिस्तान ने ठुकरा दिया।

पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-3-4 अप्रैल, 2007 को पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री शौकत अजीज भारत यात्रा पर आए तथा भारतीय प्रधानमन्त्री के साथ कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। .

मुम्बई पर आतंकवादी हमला-26 नवम्बर, 2008 को आतंकवादियों ने मुम्बई के दो प्रसिद्ध होटलों पर हमला करके कई व्यक्तियों को मार दिया। इस आतंकवादी हमले के कारण भारत-पाकिस्तान सम्बन्ध बहुत बिगड़ गए। क्योंकि सभी आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे, तथा यह हमला पाकिस्तान की मदद से ही हुआ था। अतः भारत ने पाकिस्तान से सभी वांछित अपराधियों की मांग के साथ-साथ पाकिस्तानी सीमा में चल रहे आतंकवादी प्रशिक्षण स्थलों को बन्द करने की मांग की। परन्तु पाकिस्तान ने इन सभी मांगों को ठुकराते हुए युद्ध की तैयारी शुरू कर दी जिससे दोनों देशों के सम्बन्ध और खराब हुए।

जुलाई, 2009 में भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसूफ रजा गिलानी मिस्र में 15वें गुट निरपेक्ष आन्दोलन के दौरान मिले । संयुक्त घोषणा-पत्र जारी करते हुए दोनों देशों में आतंकवाद से मिलकर जूझने की घोषणा की।

25 फरवरी, 2010 को भारत-पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तरीय बातचीत हुई। इस वार्ता के दौरान भारत ने पाकिस्तान से वांछित आतंकवादियों को भारत को सौंपने को कहा।
नवम्बर 2011 में भारत-पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सार्क सम्मेलन के दौरान मालद्वीव मिले। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने विवादित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर सहमति प्रकट की।

8 अप्रैल, 2011 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति श्री आसिफ अली जरदारी भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सभी विवादित मुद्दों पर शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की बात की। दिसम्बर 2012 में पाकिस्तान के आन्तरिक मंत्री श्री रहमान मलिक भारत यात्रा पर आए। इस अवसर पर दोनों देशों ने वीजा नियमों को और सरल बनाने का समझौता किया।

सितम्बर, 2013 में संयुक्त राष्ट्र संघ के वार्षिक सम्मेलन में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफ ने न्यूयार्क में मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने सभी विवादित विषयों को बातचीत द्वारा हल करने पर सहमति व्यक्त की।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नबाज शरीफ मई 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए भारत आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की।

नबम्बर 2014 में नेपाल में हुए सार्क सम्मेलन में दोनों देशों के बीच तनाव होने के कारण कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं हो पाई।
दिसम्बर 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान की यात्रा करके दोनों देशों के सम्बन्धों को सुधारने का प्रयास किया। वर्तमान समय में भारत-पाकिस्तान के सम्बन्ध खराब बने हुए हैं।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 21 भारत एवं उसके पड़ोसी देश : नेपाल, श्रीलंका, चीन, बंगलादेश एवं पाकिस्तान

प्रश्न 2.
भारत-पाकिस्तान के बीच में तनाव के छः कारणों का वर्णन करें। (Describe in detail Six reasons of Tension between India and Pakistan.)
उत्तर-
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के निम्नलिखित कारण हैं
1. कश्मीर समस्या-स्वतन्त्रता से पूर्व कश्मीर भारत के उत्तर-पश्चिमी कोने में स्थित एक देशी रियासत थी। 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतन्त्र हुआ और पाकिस्तान की भी स्थापना हुई। पाकिस्तान ने पश्चिमी सीमा प्रान्त के कबाइली लोगों को प्रेरणा और सहायता देकर 22 अक्तूबर, 1947 को कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से सहायता मांगी और कश्मीर को भारत में शामिल करने की प्रार्थना की। भारत में कश्मीर का विधिवत् विलय हो गया, परन्तु पाकिस्तान का आक्रमण जारी रहा और पाकिस्तान ने कुछ क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और अब भी उस क्षेत्र पर जिसे ‘आज़ाद कश्मीर’ कहा जाता है, पाकिस्तान का कब्जा है। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया। भारत सरकार ने कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया और 1 जनवरी, 1949 को कश्मीर का युद्ध विराम हो गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कश्मीर की समस्या को हल करने का प्रयास किया पर यह समस्या अब भी है। इसका कारण यह है कि भारत सरकार कश्मीर को भारत का अंग मानती है जबकि पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह करवा कर यह निर्णय करना चाहता है कि कश्मीर भारत में मिलना चाहता है या पाकिस्तान के साथ। परन्तु पाकिस्तान की मांग गलत और अन्यायपूर्ण है, इसलिए इसे माना नहीं जा सकता।

2. सिन्धु नदी जल बंटवारा-सिन्धु नदी जल बंटवारा भी दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। भारत का मानना है, कि सिन्धु नदी जल समझौता तार्किक नहीं है। अर्थात् पाकिस्तान को आवश्यकता से अधिक पानी दिया जाता है। इसीलिए भारत सरकार सिन्धु नदी जल बंटवारे समझौते पर पुनर्समीक्षा कर रही है।

3. कारगिल युद्ध-कारगिल युद्ध भी दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना है। पाकिस्तान ने धोखे से भारतीय क्षेत्र में स्थित कारगिल पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया। भारत ने साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था।

4. भारतीय संसद् पर हमला-13 दिसम्बर, 2001 को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तोइबा एवं जैश-ए-मोहम्मद ने भारतीय संसद् पर हमला किया जिससे दोनों देशों के सम्बन्ध बहुत खराब हो गये तथा दोनों देशों ने सीमा पर फ़ौजें तैनात कर दीं, परन्तु विश्व समुदाय के हस्तक्षेप एवं पाकिस्तान द्वारा लश्कर-ए-तोइबा एवं जैशए-मोहम्मद पर पाबन्दी लगाए जाने से दोनों देशों में तनाव कुछ कम हुआ।

5. मुम्बई पर आतंकवादी हमला-26 नवम्बर, 2008 को पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादियों ने मुम्बई के होटलों पर कब्जा करके कई व्यक्तियों को मार दिया। भारत ने पाकिस्तान में चल रहे आतंकवादी शिविरों को बंद करने की मांग की, जिसे पाकिस्तान ने नहीं माना, इससे दोनों देशों के सम्बन्ध और अधिक खराब हो गए।

6. परमाणु हथियार-भारत एवं पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु हथियार हैं। जहां तक भारत के परमाणु हथियारों का सम्बन्ध है तो वे सुरक्षित हाथों में हैं। परंतु पाकिस्तान परमाणु हथियारों के आतंकवादियों के पास जाने की संभावना बनी रहती है। जिससे दोनों देशों में तनाव बना रहता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 21 भारत एवं उसके पड़ोसी देश : नेपाल, श्रीलंका, चीन, बंगलादेश एवं पाकिस्तान

प्रश्न 3.
भारत तथा बंगला देश के बीच मधुर एवं तनावपूर्ण सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए। (Explain the phases of cordial and strainded relations between India and Bangladesh.)
अथवा
भारत और बंगला देश के सम्बन्धों की विस्तार से व्याख्या कीजिए। (Explain in detail the relationship between India and Bangladesh.)
उत्तर-
बंगला देश के अस्तित्व और उसकी स्वतन्त्रता का श्रेय भारत को है। 1971 में बंगला देश स्वतन्त्र देश बना। इससे पूर्व बंगला देश पाकिस्तान का हिस्सा तथा पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था। बंगला देश की स्वतन्त्रता के लिए भारत के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी। 6 दिसम्बर, 1971 को भारत ने बंगला देश को मान्यता दे दी।

1971 की मैत्री सन्धि-शेख मुजीबुर्रहमान 12 जनवरी, 1972 को बंगला देश के प्रधानमन्त्री बने। फरवरी, 1972 में जब वे भारत आए तो उन्होंने कहा था, “भारत और बंगला देश की मित्रता चिरस्थायी है, उसे दुनिया की कोई ताकत तोड़ नहीं सकती।” 19 मार्च, 1972 को भारत और बंगला देश में 25 वर्ष की अवधि के लिए मित्रता और सहयोग की सन्धि हुई। इस सन्धि की महत्त्वपूर्ण बातें इस प्रकार थीं

(1) आर्थिक, तकनीकी, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे के साथ सहयोग करेंगे। (2) दोनों देश एक-दूसरे की अखण्डता व सीमाओं का सम्मान करेंगे। (3) दोनों देश एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। (4) दोनों देश किसी तीसरे देश को कोई ऐसी सहायता नहीं देंगे जो दोनों में किसी देश के हित के विरुद्ध हो। (5) दोनों देश उपनिवेशवाद का विरोध करेंगे।

बंगला देश को संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बनने में भारत की सहायता-बंगला देशं ने 9 अगस्त, 1972 को संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बनने के लिए प्रार्थना-पत्र भेजा, जिसका पाकिस्तान और चीन ने विरोध किया। चीन ने सुरक्षा परिषद् में वीटो का भी प्रयोग किया, परन्तु भारत के प्रयास के फलस्वरूप और रूस के सहयोग से अन्त में बंगला देश संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बन गया।

शेख मुजीबुर्रहमान की भारत यात्रा-1974 में शेख मुजीबुर्रहमान ने भारत यात्रा की तथा 1975 में गंगा जल के बंटवारे से सम्बन्धित विवाद को बातचीत द्वारा समाप्त करने की कोशिश की।

सम्बन्धों में परिवर्तन-15 अगस्त, 1975 को बंगला देश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की परिवार सहित हत्या कर दी गई। शेख की हत्या के बाद भारत-बंगला देश के सम्बन्धों में तेजी से परिवर्तन आ गया। नवम्बर, 1975 में जनरल ज़ियाउर्रहमान राष्ट्रपति बने। तब से बंगला देश में भारत-विरोधी प्रचार तेज़ हो गया।

जनता सरकार और भारत-बंगला देश सम्बन्ध-मार्च, 1977 में भारत में जनता पार्टी की सरकार बनी और दोनों देशों के सम्बन्धों में सुधार की किरण दिखाई दी। अक्तूबर, 1977 में फरक्का समझौता हुआ। अप्रैल, 1979 में प्रधानमन्त्री मोरार जी देसाई बंगला देश गए और दोनों देशों के सम्बन्धों में कुछ सुधार हुआ।

श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार और भारत-बंगला देश सम्बन्ध-नवम्बर, 1979 से भारत-बंगला देश सम्बन्ध तनावपूर्ण हो गए। भारत के साथ विवाद का मुद्दा फरक्का बांध और नवमूर द्वीप है। मई, 1981 ई० में बंगला देश की सरकार ने सरकारी और गैर-सरकारी माध्यमों से नवमूर द्वीप पर कथित भारतीय कब्जे. और अन्य गैर-कानूनी कार्यवाहियों का आरोप लगाना शुरू कर दिया और 12 मई को 3 सशस्त्र नावें नवमूर द्वीप के इर्द-गिर्द आपत्तिजनक रूप में चक्कर काटने लगीं। भारत सरकार ने नवमूर द्वीप की रक्षा के लिए तुरन्त उचित उपाय किए। नवमूर द्वीप वास्तव में

अक्तूबर, 1983 में बंगला देश के मुख्य मार्शल-ला प्रशासक जनरल इरशाद की दो दिवसीय भारतीय यात्रा से दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के एक नए अध्याय का सूत्रपात हुआ, क्योंकि दोनों पक्ष फरक्का बांध पर गंगा जल के बंटवारे तथा तीन बीघा गलियारे के उपयोग के बारे में काफी समय से चली आ रही अड़चनों को निपटाने में काफ़ी सीमा तक सफल हो गए। नवम्बर, 1985 में भारत तथा बंगला देश ने फरक्का के पानी के बंटवारे के सम्बन्ध में अगले तीन वर्षों के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह 1982 के समझौते पर आधारित था।

जुलाई, 1986 में बंगला देश के राष्ट्रपति इरशाद भारत आए और उन्होंने दोनों देशों के बीच चले आ रहे विवादों को हल करने के लिए भारतीय नेताओं से बातचीत की। अप्रैल, 1987 में भारत के विदेश सचिव बंगला देश गए और उन्होंने बंगला देश के विदेश सचिव से विभिन्न विवादों को हल करने के लिए बातचीत की।

चकमा शरणार्थियों की समस्या-बंगला देश से अप्रैल, 1990 में लगभग 60 हज़ार चकमा शरणार्थी भारत आ चुके थे। चकमा शरणार्थियों की वापसी के लिए कई बार बातचीत हुई परन्तु कोई समझौता नहीं हुआ। इसका कारण यह रहा कि बंगला देश की सरकार चकमा शरणार्थियों की सुरक्षा की विश्वसनीय गारंटी नहीं देती थी।
सितम्बर, 1991 में बंगला देश ने भारत को आश्वासन दिया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में आतंकवादी और उग्रवादी गतिविधियों को किसी तरह की सहायता नहीं देगा।

तीन बीघा गलियारे का हस्तान्तरण-तीन बीघा गलियारा पट्टा भारत और बंगला देश के बीच तनाव का कारण रहा है। 26 मई, 1992 को बैंगला देश की प्रधानमन्त्री बेग़म खालिदा जिया भारत आईं। दोनों देशों में तीन बीघा पर एक समझौता हुआ जिसके अन्तर्गत 26 जून, 1992 को भारत ने तीन बीघा गलियारा बंगला देश को पट्टे पर सौंप दिया, परन्तु इस गलियारे पर प्रशासनिक अधिसत्ता भारत की ही रहेगी।

बंगला देश की प्रधानमन्त्री खालिदा बेग़म और भारत के प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव ने अनेक महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की और दोनों देशों में पानी के बंटवारे पर सहमति हो गई। चकमा शरणार्थियों को वापसी पर भी आम सहमति हो गई।

बंगला देश की संसद् के प्रस्ताव पर भारत की आपत्ति-बंगला देश की संसद् ने 20 जनवरी, 1993 को एक प्रस्ताव पारित कर अयोध्या में 6 सितम्बर को विवादित ढांचा गिराए जाने की कड़ी आलोचना की और बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग की। भारत ने बंगला देश संसद् द्वारा पारित इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप है।

गंगा जल पर भारत व बंगला देश के बीच समझौता-बंगला देश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना वाजिद 11 दिसम्बर, 1996 को भारत की यात्रा पर आईं। 12 दिसम्बर, 1996 को भारत और बंगला देश में फरक्का गंगा जल बंटवारे पर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ जिससे पिछले दो दशकों से चले आ रहे विवाद का अन्त हो गया।

प्रधानमन्त्री शेख हसीना वाजिद की भारत यात्रा-जून, 1998 में बंगला देश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना वाजिद भारत आईं और उन्होंने प्रधानमन्त्री वाजपेयी से बातचीत की। दोनों देशों के प्रधानमन्त्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय समस्याओं का हल द्विपक्षीय वार्ता द्वारा होना चाहिए।

19 जून, 1999 को भारत व बंगला देश के सम्बन्धों में सुधार लाने के लिए दोनों देशों के बीच बस सेवा प्रारम्भ की गई। स्वयं भारतीय प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी कलकत्ता (कोलकाता) से चली इस बस की अगुवाई के लिए ढाका पहुंचे। अपनी बंगला देश की यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमन्त्री ने बंगला देश को 200 करोड़ रुपये का कर्ज देने का समझौता किया। इसके अतिरिक्त भारत ने बंगला देश से ‘प्रशुल्क रहित आयात’ के लिए भी सैद्धान्तिक रूप से स्वीकृति प्रदान की।

भारत और बंगला देश ने 9 अप्रैल, 2000 को अगरतला और ढाका के बीच एक नई बस सेवा चलाने का निर्णय किया। सन् 2000 में दोनों देशों के बीच आर्थिक सम्बन्ध और मज़बूत हुए। भारत ने कुछ चुनिंदा बंगलादेशी वस्तुओं को बिना किसी तटकर के देश में प्रवेश की इजाज़त दी।
फरवरी, 2003 में बंगला देश द्वारा भारत में घुसपैठिये भेजने से दोनों देशों के बीच असहजता की स्थिति बन गई थी। परन्तु भारत के कड़ा विरोध करने पर बंगला देश ने अपने घुसपैठियों को वापस बुला लिया।
भारत बंगलादेश सीमा पर तार (बाड़) लगाने के पक्ष में है ताकि कोई बंगलादेश का नागरिक गैर-कानूनी ढंग से भारत की सीमा के अन्दर न आ जाए। परन्तु बंगला देश इसके पक्ष में नहीं है।

भारतीय प्रधानमन्त्री की बंगला देश यात्रा-भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह 14 नवम्बर, 2005 को सार्क सम्मेलन में भाग लेने के लिए बंगला देश की यात्रा पर गए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमन्त्रियों ने द्विपक्षीय सम्बन्धों पर भी विचार विमर्श किया।

बंगलादेशी प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-बंगलादेश की प्रधानमन्त्री खालिदा ज़िया 19 मार्च, 2006 को भारत यात्रा पर आईं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार एवं आर्थिक हितों से सम्बन्धित दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय विदेश मन्त्री की बंगला देश यात्रा-भारतीय विदेश मन्त्री प्रणव मुखर्जी 10 फरवरी, 2009 को बंगला देश की यात्रा पर गए तथा बंगला देश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना वाजिद से द्विपक्षीय सम्बन्धों पर बातचीत की।

बंगलादेशी प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-जनवरी, 2010 में बंगलादेश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना भारत यात्रा पर आई। इस यात्रा के दौरान भारत ने बंगलादेश को 250 मेगावट बिजली देने की घोषणा की तथा बंगला देश के 300 छात्रों को प्रतिवर्ष छात्रवृति देने की घोषणा की। दूसरी ओर बंगला देश की प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वह अपने क्षेत्र का प्रयोग भारत विरोधी गति विधियों के लिए नहीं होने देंगी।

भारतीय प्रधानमन्त्री की बंगला देश की यात्रा-भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह 6-7 सितम्बर, 2011 को बंगला देश की यात्रा पर गए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने पारस्परिक सहयोग के चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

नवम्बर 2014 में नेपाल में हुए 18वें सार्क सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं बंगला देश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना ने बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने परस्पर द्विपक्षीय मुद्दों पर बाचचीत की।

जून 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बंगला देश की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने भूमि सीमा समझौते सहित 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
अक्तूबर 2016 में बंगला देश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना ‘बिम्सटेक’ (BIMSTEC) सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आई। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत की।

अप्रैल 2017 में बंगला देशी प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आईं। इस दौरान दोनों देशों ने 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
मई 2018 में बंगलादेशी प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आईं। इस दौरान दोनों देशों ने रोहिंग्या मुद्दे सहित द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की ।
संक्षेप में, भारत ने बंगला देश को हर परिस्थिति व समय पर सहायता दी है, लेकिन भारत को बंगला देश से वैसा सहयोग प्राप्त नहीं हुआ जिसकी भारत आशा रखता है।

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प्रश्न 4.
भारत-श्रीलंका सम्बन्धों का मूल्यांकन करो। (Evaluate Indo Sri Lanka relations.)
अथवा
भारत और श्रीलंका के पारस्परिक सम्बन्धों का वर्णन कीजिए। (Give brief account of India’s relations with Sri Lanka.)
उत्तर-
भारत और श्रीलंका के सम्बन्ध लगभग दो हज़ार वर्षों से अधिक पुराने हैं। भारत पर ब्रिटिश शासन स्थापित होने पर श्रीलंका भी इंग्लैंड के अधीन आ गया। दोनों में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय आन्दोलन चले। 1947 में भारत के स्वतन्त्र होने पर अंग्रेज़ अधिक समय तक श्रीलंका पर शासन न कर सके और 1948 में श्रीलंका स्वतन्त्र हुआ। दोनों देशों में लोकतन्त्र की स्थापना की गई और 1948 में गुट-निरपेक्षता की नीति का अनुसरण किया, परन्तु 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तब श्रीलंका ने भारत का समर्थन नहीं किया, जिससे भारतीयों की भावना को ठेस लगी।

श्रीलंका में भारतीय वंशजों की समस्या- भारत और श्रीलंका में तनाव का कारण श्रीलंका में बसे लाखों भारतीयों की समस्या रही है। श्रीलंका की स्वतन्त्रता के समय लगभग दस लाख भारतीय मूल के लोग वहां रह रहे थे। श्रीलंका ने 1949 में नागरिकता अधिनियम पास कर दिया। लगभग सभी भारतीय मूल के निवासियों (लगभग 8.2 लाख) ने इस अधिनियम के अन्तर्गत नागरिकता के लिए प्रार्थना की परन्तु अक्तूबर, 1964 तक केवल 1 लाख 34 हज़ार व्यक्तियों को ही नागरिकता प्राप्त हुई। श्रीलंका सरकार ने जिन भारतीयों को नागरिकता प्रदान नहीं की थी उन्हें तुरन्त भारत चले जाने के लिए कहा। परन्तु भारत सरकार का कहना था कि जो व्यक्ति कई पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं उनको निकालना गलत है और वे वहीं के नागरिक हैं न कि भारत के। अब भी यह समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई है। । कच्चा टीबू द्वीप-कच्चा टीबू द्वीप विवाद को हल करने के लिए जून, 1974 में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ जिसके अनुसार कच्चा टीबू द्वीप श्रीलंका को दे दिया गया।

जनवरी, 1978 में श्रीलंका को भारत ने 10 करोड़ रु० का ऋण आसान शर्तों पर दिया। फरवरी, 1979 में प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई ने श्रीलंका की यात्रा की और दोनों देशों में मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों में वृद्धि हुई।

तमिल समस्या–भारत और श्रीलंका के सम्बन्धों में तनाव का महत्त्वपूर्ण कारण तमिल समस्या है। 1984 में तमिल समस्या इतनी गम्भीर हो गई कि दोनों देशों के सम्बन्धों में काफ़ी तनाव रहा। प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बारबार घोषणा की कि भारत सरकार श्रीलंका के आन्तरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी और यदि श्रीलंका की सरकार चाहेगी तो भारत सरकार तमिल समस्या हल करने के लिए श्रीलंका की सरकार को पूरा सहयोग देगी।

दिसम्बर, 1984 में प्रधानमन्त्री राजीव गांधी ने तमिल जाति के निर्दोष लोगों की अन्धाधुन्ध हत्याओं की कड़ी निंदा की और तमिल समस्या का राजनीतिक हल निकालने की अपील की। नवम्बर, 1986 में प्रधानमन्त्री श्री राजीव गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति जयवर्धने ने जातीय समस्या के हल के लिए बातचीत की, परन्तु कोई हल नहीं निकला।

तमिल समस्या के हल के लिए दोनों देशों में समझौता-काफ़ी प्रयासों के फलस्वरूप तमिल समस्या को हल करने के लिए प्रधानमन्त्री राजीव गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति जे० आर० जयवर्धने ने 29 जुलाई, 1987 को शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अनुसार तमिल बहुल उत्तरी एवं पूर्वी प्रांतों का विलय होगा जिसमें एक ही प्रशासनिक इकाई होगी। दोनों प्रांतों के लिए एक ही प्रान्तीय परिषद्, एक मुख्यमन्त्री तथा एक मन्त्रिमण्डल होगा। समझौते को लागू करने की गारंटी भारत की है।

इस समझौते का बहुत विरोध किया गया। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) की हठधर्मी के कारण हिंसा और तनाव का वातावरण बन गया। भारत ने श्रीलंका में शान्ति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय शान्ति सेना भेजी। अक्तूबर, 1987 में भारत सरकार ने स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए सेनाध्यक्ष सुन्दरजी और रक्षा मन्त्री के० सी० पन्त को श्रीलंका भेजा। श्रीलंका की संसद् ने 12 नवम्बर, 1987 को प्रान्तीय विधेयक परिषद् पास कर दिया। भारतीय शान्ति सेना ने श्रीलंका में शान्ति स्थापना में बहुत ही सराहनीय कार्य किया।

शान्ति सेना की वापसी-जनवरी, 1989 में भारतीय शान्ति सेना की वापसी आरम्भ हुई। 23 जून, 1989 को श्रीलंका के राष्ट्रपति प्रेमदास ने घोषणा की कि 29 जुलाई, 1989 तक भारतीय शान्ति सेना वापस चली जानी चाहिए। राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनने के पश्चात् दोनों देशों की सरकारों में यह सहमति हुई कि शान्ति सेना की 31 मार्च, 1990 से पहले पूरी तरह वापसी होगी। राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने अपना वायदा पूरा किया और शान्ति सेना की आखिरी टुकड़ी ने 25 मार्च को श्रीलंका को छोड़ दिया।

तमिल शरणार्थी-मार्च, 1990 को श्रीलंका से कई हज़ार तमिल शरणार्थी भारत आए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि तमिल शरणार्थी समस्या को बढ़ने से पहले ही हल कर लिया जाए।
संयुक्त आयोग की स्थापना-दोनों देशों के विदेश मन्त्रियों ने जुलाई, 1991 में संयुक्त आयोग के गठन के समझौते पर हस्ताक्षर किए। 7 जनवरी, 1992 को संयुक्त आयोग की दो दिवसीय बैठक के बाद भारत और श्रीलंका ने व्यापार, आर्थिक और प्रौद्योगिक के क्षेत्र में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने का फ़ैसला किया।
श्रीलंका के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-1992 में श्रीलंका के प्रधानमन्त्री भारत की यात्रा पर आए और दोनों देशों के सम्बन्धों में और सुधार हुआ।
मई, 1993 में श्रीलंका के नव-निर्वाचित प्रधानमन्त्री तिलकरत्ने भारत की यात्रा पर आए।

श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-श्रीलंका की राष्ट्रपति चन्द्रिका कुमारतुंगा अप्रैल, 1995 में भारत की यात्रा पर आईं ओर दोनों देशों के सम्बन्धों में सुधार हुआ।
परमाणु परीक्षण-मई, 1998 में भारत ने पांच परमाणु परीक्षण किए, जिस पर अमेरिका तथा कई अन्य देशों ने भारत पर अनेक प्रतिबन्ध लगाए, जिनकी श्रीलंका ने कड़ी आलोचना की। 27 दिसम्बर, 1998 को श्रीलंका की राष्ट्रपति श्रीमती चन्द्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा तीन दिन की यात्रा पर भारत आईं। भारत और श्रीलंका ने मुक्त व्यापार समझौता किया। राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया। दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद आपसी सम्बन्धों का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

भारतीय विदेश मन्त्री की श्रीलंका यात्रा-जून, 2000 में भारतीय विदेश मन्त्री जसवन्त सिंह श्रीलंका की यात्रा पर गए। इस यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मन्त्री ने श्रीलंका को 100 मिलियन डॉलर तत्काल मानवीय सहायता के लिए ऋण के रूप में देने की घोषणा की।

श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-फरवरी, 2001 में श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा भारत यात्रा पर आईं। उन्होंने भारतीय प्रधानमन्त्री को नार्वे एवं लिट्टे के बीच चल रही बातचीत की जानकारी दी। भारत ने श्रीलंका को इस समस्या पर हर सम्भव सहायता देने की बात कही।

श्रीलंका के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-दिसम्बर, 2001 में श्रीलंकी के प्रधानमन्त्री श्री रानिल विक्रमसिंघे भारत यात्रा पर आए। दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद भारत ने 18 साल से चली आ रही लिट्टे समस्या पर हर सम्भव सहायता देने की बात कही। इसके अतिरिक्त भारत ने श्रीलंका को 3 लाख टन गेहूं देने की घोषणा की। दोनों देश कृषि, बिजली एवं सूचना तकनीकी उद्योग पर एक-दूसरे को सहयोग देने पर राजी हुए।

श्रीलंका की राष्ट्रपति की भारत यात्रा-नवम्बर, 2004 में श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा भारत यात्रा पर आईं। कुमारतुंगा की भारतीय प्रधानमन्त्री के साथ हुई बातचीत के पश्चात् जारी सांझे बयान में कहा गया, कि भारत श्रीलंका में ऐसे शान्ति समझौते का समर्थन करेगा, जो सभी सम्बन्धित पक्षों को स्वीकार्य हो। भारत की प्रस्तावित सेतुसमुद्रम परियोजना के विषय पर दोनों देशों में बातचीत हुई।

श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपाक्से (Mahinda Rajapakse) 28 दिसम्बर, 2005 को भारत की यात्रा पर आए। राष्ट्रपति महिंदा राजपाक्से ने भारत को श्रीलंका में शांति स्थापना की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।

श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपाक्से 3 अप्रैल, 2007 को 14वें सॉर्क सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान देशों ने द्विपक्षीय सम्बन्धों पर भी विचार-विमर्श किया।
भारतीय प्रधानमन्त्री की श्रीलंका यात्रा- भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह 2-3 अगस्त, 2008 को सॉर्क सम्मेलन में भाग लेने के लिए श्रीलंका की यात्रा पर गए तथा इस यात्रा के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपाक्से से भी बातचीत की।
भारतीय विदेश मन्त्री की श्रीलंका यात्रा- भारतीय विदेश मन्त्री प्रणव मुखर्जी ने फरवरी, 2009 में श्रीलंका की यात्रा की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य श्रीलंका एवं लिट्टे के बीच जारी घमासान लड़ाई थी। अपनी यात्रा के दौरान प्रणव

मुखर्जी ने इस विषय में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपाक्से से बातचीत की तथा लिट्टे के विरुद्ध लड़ाई में श्रीलंका का समर्थन किया, साथ ही उन्होंने श्रीलंका सरकार से यह भी अनुरोध किया कि श्रीलंका में तमिल नागरिकों के हितों की रक्षा की जाए।

श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा-श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपाक्से ने 8-11 जून 2010 को भारत की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के सात समझौतों पर हसताक्षर किए। इस अवसर पर भारतीय प्रधान मन्त्री ने श्रीलंका में लिट्टे के सफाए के बाद 70 हजार तमिल विस्थापितों के पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज़ करने की आवश्यकता जताई।

जून, 2011 में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपाक्से भारत यात्रा पर आए तथा दोनों देशों ने सुरक्षा एवं विकास से सम्बन्धित सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये।

नवम्बर 2014 में नेपाल में हुए 18वें सार्क सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे ने अलग से मुलाकात करके द्विपक्षीय सम्बन्धों पर बातचीत की।

मार्च, 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीलंका की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने श्रीलंका के लोगों को वीजा ऑन अराइवल देने की घोषणा की।
अक्तूबर 2016 में श्री लंका के राष्ट्रपति श्रीसेना ‘बिम्गटेक’ (BIMSTEC) सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आए। इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत की।

मई 2017 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीलंका की यात्रा की। इन दौगन दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की।
अक्तूबर 2018 में श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने भारत की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने बुनियादी स्तर के चलाए जाने वाले कार्यक्रमों को गति प्रदान करने पर सहमति प्रकट की । READERSARASTRIERREELATES

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 21 भारत एवं उसके पड़ोसी देश : नेपाल, श्रीलंका, चीन, बंगलादेश एवं पाकिस्तान

प्रश्न 5.
भारत-चीन सम्बन्धों का विस्तार से वर्णन करो। (Explain in detail the Indo-China relations.)
उत्तर-
भारत और चीन में पहले गहरी मित्रता थी परन्तु सन् 1962 में चीन ने भारत पर अचानक आक्रमण करके इसको शत्रुता में परिवर्तित कर दिया। आज भी चीन ने भारत की कुछ भूमि पर अपना अधिकार जमाया हुआ है। भारत चीन से सम्बन्ध सुधारने के लिए प्रयत्नशील है परन्तु चीन अभी भी शत्रुतापूर्ण रुख अपनाए हुए है।

नेहरू युग में भारत-चीन सम्बन्ध (1947-मई, 1964) (INDO-CHINA RELATIONS IN NEHRU ERA):
चीन के प्रति मैत्रीपूर्ण नीति-आरम्भ से ही भारत ने साम्यवादी चीन के प्रति मैत्रीपूर्ण और तुष्टिकरण की नीति अपनाई। पहले उसने चीन को मान्यता दी और फिर संयुक्त राष्ट्र में उसके प्रवेश का समर्थन किया।

29 अप्रैल, 1954 को चीन के साथ एक व्यापारिक समझौता करके भारत ने तिब्बत में प्राप्त बहिर्देशीय अधिकारों (Extra-territorial Rights) को चीन को दे दिया और स्वयं कुछ भी प्राप्त नहीं किया। समझौते के समय दोनों देशों ने पंचशील के सिद्धान्तों के प्रति विश्वास दिलाया। सन् 1955 में बांडुंग सम्मेलन में इन्हीं सिद्धान्तों का विस्तार किया गया। चीन के प्रधानमन्त्री चाऊ-एन-लाई, 1954 में भारत की यात्रा पर आए और पं० नेहरू ने चीन का दौरा किया। इसके पश्चात् भारत और चीन के सम्बन्धों में तनाव आना शुरू हो गया।

1962 का चीनी आक्रमण-चीन ने 20 अक्तूबर, 1962 को भारत पर बड़े पैमाने पर आक्रमण किया। भारत को इस युद्ध में अपमानजनक पराजय का मुंह देखना पड़ा और चीन ने भारत की हजारों वर्ग मील भूमि पर कब्जा कर लिया। इससे पं० नेहरू की शान्तिपूर्ण नीतियों को गहरी चोट पहुंची।

शास्त्री काल में भारत-चीन के सम्बन्ध ( मई, 1964 से जनवरी, 1966)-श्री लाल बहादुर शास्त्री, श्री नेहरू के बाद 10 जनवरी, 1966 तक भारत के प्रधानमन्त्री रहे। इस काल में भी भारत और चीन के सम्बन्धों में कोई सुधार नहीं हुआ। चीन ने 1965 में भारत-पाक युद्ध में भी अपना शत्रुतापूर्ण रवैया दिखाया। चीन ने पाकिस्तान को पूरा समर्थन दिया और भारत को आक्रमणकारी घोषित किया।

मैकमोहन रेखा विवाद-भारत और चीन में सीमा विवाद का मुख्य कारण दोनों देशों की सीमा का मैकमोहन रेखा द्वारा निर्धारण और दोनों पक्षों द्वारा उसकी व्याख्या है। सर हैनरी मैकमोहन 1914 में भारत के विदेश सचिव थे। उन्होंने तिब्बती प्रतिनिधि मण्डल के साथ विचार-विमर्श करके इस सीमा का निर्धारण किया। चीन इस सीमा निर्धारण के पक्ष में नहीं था, लेकिन सीमा निर्धारण के बाद उसे इसकी सूचना दे दी गई है। चीन की सरकार ने मैकमोहन रेखा को कभी मान्यता नहीं दी और आज भी नहीं दे रही है। इसलिए दोनों देशों में सीमा विवाद चला आ रहा है।

इंदिरा काल में भारत और चीन के सम्बन्ध (जनवरी, 1966 से फरवरी, 1977 तक)-लाल बहादुर शास्त्री के बाद 1966 में श्रीमती इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमन्त्री बनीं। उन्होंने चीन के साथ सम्बन्ध-विवाद सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयत्न किए, परन्तु 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय इन दोनों देशों के सम्बन्ध तनावपूर्ण हो गए। चूंकि भारत-पाक युद्ध के बीच हुई सुरक्षा परिषद् की बैठकों में चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया। अप्रैल, 1976 तक भारत-चीन सम्बन्ध लगभग तनावपूर्ण ही रहे।

जनता सरकार और भारत-चीन सम्बन्ध (JANATA GOVERNMENT AND INDO-CHINA RELATIONS):
मार्च, 1977 में जब भारत में जनता पार्टी की सरकार बनी और श्री मोरारजी देसाई प्रधानमन्त्री बने तो चीन की सरकार ने इस सरकार का स्वागत किया। जनता सरकार ने चीन से सम्बन्ध सुधारने का प्रयास किया।

भारतीय विदेश मन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी 12 फरवरी, 1979 को पीकिंग पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि जब तक सीमा विवाद को नहीं सुलझाया जाता, तब तक दोनों देशों के सम्बन्ध मैत्रीपूर्ण नहीं हो सकते।

कांग्रेस (इ) की सरकार और भारत-चीन सम्बन्ध . (GOVERNMENT OF CONGRESS (I) AND INDO CHINA RELATIONS)

भारत में सहयोग करने की चीनी नेताओं की इच्छा तथा सम्बन्ध सुधारने के लिए प्रयास-जनवरी, 1980 में श्रीमती गांधी के प्रधानमन्त्री बनने के बाद चीनी नेता कई बार भारत से सम्बन्ध सुधारने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। चीन के प्रधानमन्त्री झाओ जियांग ने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान 3 जून, 1981 को कहा कि एशिया के दो बड़े देश, चीन और भारत को शान्तिपूर्वक रहना चाहिए। यह क्षेत्रीय और विश्व के स्थायित्व दोनों के हित में है। 15 अगस्त, 1984 को भारत और चीन में व्यापारिक समझौता हुआ जो कि निश्चय ही महत्त्वपूर्ण घटना है।

राजीव गांधी की सरकार और भारत-चीन सम्बन्ध-19 दिसम्बर, 1988 को प्रधानमन्त्री राजीव गांधी पांच दिन की यात्रा पर चीन पहुंचे। पिछले 34 वर्षों के दौरान किसी भी भारतीय प्रधानमन्त्री की यह पहली चीन यात्रा थी। राजीव गांधी की चीन यात्रा से दोनों देशों के आपसी सम्बन्धों में एक नया अध्याय शुरू हुआ।

राष्ट्रीय मोर्चा सरकार और भारत-चीन सम्बन्ध-दिसम्बर, 1989 में श्री वी० पी० सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी और दोनों देशों के नेताओं ने स्थाई सम्बन्ध स्थापित करने की घोषणा की।

11 दिसम्बर, 1991 के चीन के प्रधानमन्त्री ली फंग भारत की यात्रा पर आने वाले पिछले 31 वर्षों में पहले प्रधानमन्त्री हैं। दोनों देशों के प्रधानमन्त्रियों ने पंचशील के सिद्धान्त में आस्था दोहराते हुए इस बात पर बल दिया कि किसी देश को दूसरे देश के आन्तरिक मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। दोनों नेताओं ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि दोनों देशों के सीमा विवाद का ‘उचित’ और ‘सम्मानजनक’ हल निकलेगा और तीन दशक पुराना यह मुद्दा द्विपक्षीय सम्बन्ध मज़बूत बनाने में आड़े नहीं आएगा।

प्रधानमन्त्री पी० वी० नरसिम्हा राव की चीन यात्रा-6 सितम्बर, 1993 को भारत के प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव चार दिन की सरकारी यात्रा पर चीन गए। वहां पर चार ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके कारण भारत व चीन के मध्य सम्बन्धों में सुधारों का एक और अध्याय जुड़ गया।

चीन के राष्ट्रपति ज्यांग ज़ेमिन की भारत की यात्रा-28 नवम्बर, 1996 को चीन के राष्ट्रपति ज्यांग ज़ेमिन भारत की यात्रा पर आए जिससे दोनों देशों के बीच सम्बन्धों का एक नया युग शुरू हुआ है। चीन के राष्ट्रपति ज्यांग ज़ेमिन की पहली भारत यात्रा के दौरान परस्पर विश्वास भावना और सीमा पर शांति कायम रखने के उपायों पर विस्तृत विचारविमर्श के पश्चात् दोनों देशों ने चार महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

परमाणु परीक्षण तथा भारत-चीन सम्बन्ध-11 मई व 13 मई, 1998 को भारत ने पांच परमाणु परीक्षण किये। चीन ने परमाणु परीक्षणों को लेकर भारत की कड़ी निंदा ही नहीं की बल्कि चीन ने अपने सरकारी न्यूज़ के ज़रिए फिर से अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोंक कर पुराने विचार को जन्म दे दिया। चीन ने यहां तक कहा कि भारत से उसके पड़ोसियों को ही नहीं बल्कि चीन को भी खतरा पैदा हो गया है।

दलाईलामा की प्रधानमन्त्री वाजपेयी से मुलाकात-अक्तूबर, 1998 में तिब्बत के धार्मिक नेता दलाईलामा ने भारत के प्रधानमन्त्री वाजपेयी से बातचीत की जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति उठाई।

भारतीय राष्ट्रपति की चीन यात्रा-मई, 2000 में भारतीय राष्ट्रपति के० आर० नारायणन चीन की यात्रा पर गए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के अनेक विषयों पर बातचीत हुई।

चीनी नेता ली फंग की भारत यात्रा-जनवरी, 2001 में चीन के वरिष्ठ नेता ली फंग भारत आए। उन्होंने भारत के प्रधानमन्त्री वाजपेयी से मुलाकात कर क्षेत्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय और द्विपक्षीय महत्त्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। चीनी नेता ने भारत की धरती में किसी भी रूप में और किसी भी स्थान में उठने वाले आतंकवाद की निंदा की।

चीन के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-चीन के प्रधानमन्त्री झू रोंग्ली (Zhu Rongli) ने जनवरी, 2002 में भारत यात्रा की। रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद का मिलकर सामना करने की बात कही। इसके अतिरिक्त दोनों देशों के बीच अन्तरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और ब्रह्मपुत्र नदी पर पानी सम्बन्धी सूचनाओं के आदान-प्रदान से सम्बन्धित छः समझौते किये गये।

भारतीय प्रधानमन्त्री वाजपेयी की चीन यात्रा-जून, 2003 में भारतीय प्रधानमन्त्री वाजपेयी की चीन यात्रा से दोनों देशों के सम्बन्धों में और सुधार हुआ। जहां भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा माना, वहीं पर चीन ने भी सिक्किम को भारत का हिस्सा माना। चीन ने भारत में 50 करोड़ डालर निवेश करने के लिए एक कोष बनाने की घोषणा की। मई, 2004 में चीन ने सिक्किम को अपने नक्शे में एक अलग राष्ट्र दिखाना बंद करके इसे भारत का अभिन्न अंग मान लिया।

नवम्बर, 2004 में ‘आसियान’ की बैठक में भाग लेने के लिए भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह लाओस गए। वहां पर डॉ० मनमोहन सिंह ने चीनी प्रधानमन्त्री बेन जियाबाओ से मुलाकात की। दोनों देशों के प्रधानमन्त्रियों ने सीमा विवाद सुलझाने पर चर्चा के अतिरिक्त द्विपक्षीय व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान व लोगों की एक-दूसरे के यहां यातायात बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रथम रणनीतिक संवाद-भारत एवं चीन के मध्य पहला रणनीतिक संवाद 24 जनवरी, 2005 को नई दिल्ली में हुआ। दोनों पक्षों ने सीमा विवाद सहित सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

चीन के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा (2005)-चीन के प्रधानमन्त्री बेन जियाबाओ अप्रैल, 2005 में भारत यात्रा पर आए और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद हल की प्रक्रिया के सम्बन्ध में एक समझौते के अतिरिक्त 11 अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देश 2008 तक द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब से बढ़ाकर 20 अरब डालर करेंगे। दोनों देश वास्तविक नियन्त्रण रेखा पर सैन्य अभ्यास नहीं करेंगे। दोनों देशों ने वर्ष 2006 को भारत-चीन मित्रता के रूप में मनाने का ऐलान किया है।

भारतीय प्रधानमन्त्री की चीन यात्रा (2008)-भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह 13 जनवरी, 2008 को चीन यात्रा पर गए। दोनों देशों ने सीमा विवाद को शान्तिपूर्ण साधनों द्वारा हल करने पर सहमति प्रकट की तथा द्विपक्षीय व्यापार को 2010 तक 40 अरब डालर से बढ़ाकर 60 अरब डालर करने की घोषणा की। भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ० मनमोहन सिंह 25 अक्तूबर, 2008 को पुनः चीन यात्रा पर गए तथा चीनी राष्ट्रपति ह० जिन्ताओ से द्विपक्षीय सम्बन्धों पर बातचीत की।

अक्तूबर, 2009 में भारत-चीन सम्बन्धों में उस समय तनाव आ गया जब चीन ने भारतीय प्रधानमंत्री एवं तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर आपत्ति उठाई, परंतु भारत ने इन आपत्तियों को नकारते हुए अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताया। इसी संदर्भ में भारत एवं चीन के प्रधानमन्त्री 15वें आसियान सम्मेलन के दौरान थाइलैण्ड में मिले तथा सभी विवादित मुद्दों को बातचीत द्वारा हल करने पर जोर दिया।

चीनी प्रधान मन्त्री की भारत यात्रा-दिसम्बर, 2010 में भारत-चीन सम्बन्धों को सुधारने के लिए चीनी प्रधानमन्त्री बेन जियाबाओ ने भारत की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए तथा सन् 2015 तक आपसी व्यापार को 100 बिलियन तक ले जाने पर सहमति प्रकट की।

भारतीय प्रधानमन्त्री की चीन यात्रा- अक्तूबर, 2013 में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ० मनमोहन सिंह ने चीन की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने परस्पर सहयोग के नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा-सितम्बर 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किये।

मई, 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चीन की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रेलवे तथा खनन
जैसे क्षेत्रों सहित 24 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

अक्तूबर, 2016 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुलाकात में व्यापार एवं स्वच्छ ऊर्जा जैसे मुद्दों पर बातचीत की।

सितम्बर 2017 एवं जून 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी चीन यात्रा पर गए। इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की।
संक्षेप में, चीन इस बात को मानता है, कि अन्तर्राष्ट्रीय विषयों में भारत की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सिक्किम भारत का भाग है, और अब सिक्किम कोई मुद्दा नहीं रहा। भारत ने भी तिब्बत को चीन का हिस्सा माना है और तिब्बतियों को भारत की धरती से चीन विरोधी गतिविधियां चलाने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

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प्रश्न 6.
भारत और नेपाल के पारस्परिक सम्बन्धों का मूल्यांकन कीजिए। (Assess relationship between India and Nepal.)
अथवा
भारत और नेपाल के आपसी सम्बन्धों में विवाद और सहयोग के मुख्य मुद्दों का विवेचन कीजिए।
(Discuss the main issues of conflicts and Co-operation in the relationship between India and Nepal.)
उत्तर-
नेपाल, भारत और चीन के बीच तिब्बत क्षेत्र में स्थित है और चारों ओर से पहाड़ों से घिरा हुआ है। भारत और नेपाल धर्म, संस्कृति और भौगोलिक दृष्टि से एक-दूसरे के जितने निकट हैं, उतने विश्व के शायद ही कोई अन्य देश हों। नेपाल की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक भारत पर निर्भर करती है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। आवागमन पर कोई रोक नहीं है। सन् 1950 से 1960 तक दोनों देशों के सम्बन्ध बहुत मित्रतापूर्ण रहे। कश्मीर के प्रश्न पर नेपाल ने भारत का समर्थन किया तथा उसे भारत का अभिन्न अंग बताया। भारत ने आर्थिक क्षेत्र से नेपाल की बहुत सहायता की। 1952 में प्रारम्भ किया गया भारतीय सहायता कार्यक्रम धीरे-धीरे आकार तथा क्षेत्र में फैलता गया। नेपाली वित्त मन्त्रालय के एक वक्तव्य के अनुसार सन् 1951 से जुलाई, 1964 के बीच नेपाल द्वारा प्राप्त की गई विदेशी सहायता में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ के बाद भारत का तीसरा स्थान है।

दोनों देशों में तनावपूर्ण काल-1960 में नेपाल के महाराजा ने संसद् को भंग कर नेताओं को जेल में डाल दिया। इस पर भारत के प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने नेपाल के महाराजा की आलोचना करते हुए कहा कि, “नेपाल से लोकतन्त्र समाप्त हो गया।” इससे दोनों देशों के सम्बन्ध मैत्रीपूर्ण नहीं रहे। नेपाल ने चीन और पाकिस्तान से व्यापारिक समझौते करने शुरू कर दिए। प्रधानमन्त्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने नेपाल की यात्रा की जिससे दोनों देशों के सम्बन्ध में थोड़ा सुधार हुआ।

सहयोग का काल-1975 में नेपाल नरेश भारत आए जिससे दोनों देशों में पुनः अच्छे सम्बन्ध स्थापित हो सके। दिसम्बर, 1977 में प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई ने नेपाल की यात्रा की और दोनों देशों में मित्रता बढ़ी। जनवरी, 1980 में श्रीमती इंदिरा गांधी के पुनः सत्ता में आने पर भारत-नेपाल सम्बन्धों में सुधार हुआ। 3 फरवरी, 1983 को नेपाल के प्रधानमन्त्री भारत आए और दोनों देशों में मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित हुए। भारत और नेपाल के बीच करनाली बहु-उद्देशीय सिंचाई परियोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही पंचेश्वर परियोजना तथा कुछ अन्य नदी परियोजनाओं पर भारत और नेपाल के बीच सहयोग की सम्भावनाओं पर विचार-विमर्श चल रहा है। भारत और नेपाल के बीच सहयोग बढ़ाने की दृष्टि से दोनों देशों के विदेश मन्त्रियों के स्तर पर संयुक्त आर्थिक आयोग की स्थापना करने का निर्णय किया गया है। दोनों देशों में दो व्यापार समझौते हुए। एक है भारत और नेपाल में व्यापार को बढ़ाने के सम्बन्ध में और दूसरा है, सीमा पर तस्करी रोकने के बारे में। 21 जुलाई, 1986 को राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह नेपाल की पांच दिवसीय राजकीय यात्रा पर गए। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने कहा कि भारत आर्थिक बुनियादी ढांचे को मज़बूत बनाने और आत्म-निर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ाने में नेपाल की पूरी मदद देगा। 1987 में दोनों देशों ने संयुक्त आयोग के गठन पर समझौता किया। नेपाल द्वारा उदासीन रुख दिखाने और वांछित शर्ते पूरी करने में आनाकानी करने के कारण भारत-नेपाल व्यापार एवं माल आवागमन सन्धि 23 मार्च, 1989 को समाप्त हो गई।

तनावपूर्ण सम्बन्ध-भारत-नेपाल व्यापार तथा पारगमन सन्धि नवीकरण न होने से दोनों देशों के सम्बन्धों में कटुता आ गई। भारत एक समन्वित सन्धि के पक्ष में था जबकि नेपाल मार्च, 1989 तक जारी व्यवस्था के तहत दो अलग सन्धियां करने के लिए ज़ोर देता रहा। फरवरी, 1990 में दोनों देशों के विदेश सचिवों की नई दिल्ली में तीन दिन बातचीत हुई। भारत और नेपाल के बीच उन सभी मसलों को निपटाने के बारे में व्यापक सहमति हो गई, जिसके कारण दोनों देशों के सम्बन्धों में एक वर्ष से ज़बरदस्त दरार पड़ी हुई थी।

5 दिसम्बर, 1991 को नेपाल के प्रधानमन्त्री गिरिजा प्रसाद कोइराला भारत की दो दिन की यात्रा पर आए। यात्रा की समाप्ति पर 6 दिसम्बर, 1991 को दोनों देशों के बीच पांच सन्धियों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने बीच व्यापार तथा पारगमन सुविधा के लिए दो अलग-अलग सन्धियां कीं। दोनों देशों ने जल-संसाधनों के बंटवारे और विकास से सम्बन्धित विवाद पर सन्धि की। चौथा समझौता कृषि क्षेत्र के सहयोग के लिए है। पांचवां समझौता स्वर्गीय विश्वेश्वर प्रसाद कोइराला की स्मृति में एक फाउंडेशन गठित करने के लिए भारत और नेपाल में शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान तथा टैक्नालॉजी के क्षेत्र में सम्बन्ध बढ़ाने की व्यवस्था की गई। नेपाल ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए भारत के साथ सहयोग पर सहमत होने के साथ ही यह साफ़ कर दिया कि भविष्य में वह अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए चीन से हथियार नहीं लेगा और उस पर निर्भर नहीं करेगा।

प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव की नेपाल यात्रा-19 अक्तूबर, 1992 को भारत के प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव तीन दिन की यात्रा पर नेपाल गए। भारत और नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने, भारत को नेपाल के उदार शर्तों पर निर्यात वृद्धि करने और विपुल जल संसाधनों का दोनों देशों के साझे हित में प्रयोग करने पर सहमति व्यक्त की।

नेपाल के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-अप्रैल, 1995 में नेपाल के प्रधानमन्त्री मनमोहन अधिकारी भारत की यात्रा पर आए और उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के सम्बन्धों में सुधार हुआ। भारत सरकार ने नेपाल की ज़रूरतों के अनुसार उसे दो अन्य बंदरगाहें बम्बई (मुम्बई) और कांधला से माल भेजने और मंगाने की सुविधा उपलब्ध करा दी है।

नेपाल के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-फरवरी, 1996 में नेपाल के प्रधानमन्त्री श्री शेर बहादुर देऊबा भारत की यात्रा पर आए और उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के सम्बन्धों में सुधार की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया। नेपाल और भारत के मध्य आपसी सहयोग में कई समझौते हुए। नेपाल के प्रधानमन्त्री श्री देऊबा ने कहा कि उनका देश शीघ्र ही नेपाल भारत के मध्य सम्पन्न 1950 की सन्धि की समीक्षा के लिए एक आयोग गठित करेगा।

महाकाली सन्धि-29 फरवरी, 1996 को भारत और नेपाल ने सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए महाकाली नदी के पानी का उपयोग करने के लिए एक सन्धि पर हस्ताक्षर किए। महाकाली समन्वित विकास सन्धि को नेपाल की संसद् ने 20 सितम्बर, 1996 को स्वीकृति दे दी। महाकाली सन्धि भारत और नेपाल दोनों देशों के सम्बन्धों को मजबूत करेगी तथा दोनों देशों के विकास में सहायक सिद्ध होगी।

भारतीय विदेश मन्त्री की नेपाल यात्रा-सितम्बर, 1999 को भारतीय विदेश मन्त्री जसवंत सिंह ने चार दिन के लिए नेपाल की यात्रा की। यहां भारतीय विदेश मंत्री ने नेपाल के प्रधानमन्त्री कृष्ण प्रसाद भट्टाराई से बातचीत की। दोनों देशों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि वे आतंकवादी गतिविधियों का मिलकर मुकाबला करेंगे। दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि एक दूसरे की सुरक्षा के लिए घातक कोई गतिविधि अपने क्षेत्रों में नहीं होने दी जाएगी। भारतीय विदेश मन्त्री ने इस यात्रा के सन्दर्भ में कहा कि भारत-नेपाल सम्बन्धों में एक नई बुनियाद डालने का निर्णय लिया है। अपनी यात्रा के अन्त में विदेश मन्त्री जसवंत सिंह ने कहा कि यह यात्रा अत्यधिक सफल और सार्थक रही।

नेपाल के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-दिसम्बर, 1999 में नेपाल की राजधानी काठमांडू से भारतीय विमान सेवा के एक विमान IC-814 का आतंकवादियों ने अपचालन (Hijacking) कर लिया और इसे अफ़गानिस्तान में कंधार नामक स्थान पर ले गए। इस घटना से भारत को यह आशंका हुई कि नेपाल में आतंकवादियों की बढ़ रही गतिविधियां भारत के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप भारत और नेपाल के बीच तनाव उत्पन्न हो गया। दोनों देशों के बीच इसी तनाव को कम करने तथा अन्य विषयों पर बातचीत करने के उद्देश्य से अगस्त, 1999 में नेपाल के प्रधानमन्त्री गिरिजा प्रसाद कोइराला भारत की यात्रा पर आए। भारत की सुरक्षा चिंता को देखते हुए नेपाली प्रधानमन्त्री ने भारत को यह आश्वासन दिया कि वह अपनी भूमि से भारत के विरुद्ध कोई भी आतंकवादी गतिविधि नहीं चलने देगा और आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में भारत का साथ देगा। इस यात्रा के दौरान दोनों देश सप्तकोसी बांध परियोजना के निर्माण कार्य को इसी दशक में पूरा करने में सहमत हुए। इस परियोजना पर पिछले 50 वर्ष से बातचीत चल रही थी जिसका कोई निष्कर्ष नहीं निकल रहा था। यह परियोजना जहां भारत के लिए लाभदायक होगी वहीं इससे नेपाल का राष्ट्रीय उत्पादन भी दुगुना हो जाएगा।

नेपाल में आपात्काल एवं भारतीय प्रधानमन्त्री द्वारा मदद का आश्वासन-24 नवम्बर, 2001 को नेपाल में माओवादियों ने 50 सुरक्षा कर्मियों की हत्या कर दी, जिस कारण नेपाल में आपात्काल लागू कर दिया गया। 30 नवम्बर, 2001 को भारतीय प्रधानमन्त्री वाजपेयी ने नेपाल को हर सम्भव सहायता देने की बात की।

नेपाली प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-सितम्बर, 2004 में नेपाल के प्रधानमन्त्री शेर बहादुर देउबा भारत यात्रा पर आए। भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह से बातचीत के दौरान नेपाली प्रधानमन्त्री ने नेपाल में जारी माओवादी हिंसा से निपटने के लिए भारत से सहायता मांगी। भारत ने हर सम्भव सहायता देने का वचन दिया।

नेपाल में आपात्काल और देऊबा सरकार बर्खास्त-1 फरवरी, 2005 को नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र ने शेर बहादुर देउबा सरकार बर्खास्त कर के सभी कार्यकारी शक्तियां अपने हाथ में ले लीं और नेपाल में आपात्काल की घोषणा कर दी। भारत ने बदले हालात को चिंताजनक बताते हुए इसे लोकतन्त्र के लिए झटका बताया है। भारत ने नेपाल को लोकतन्त्र को पुनः स्थापित करने के लिए भारत नेपाल को स्थिर, शान्तिपूर्ण और खुशहाल देश के रूप में देखना चाहता है।

आपात्काल को हटाया गया-30 अप्रैल, 2005 को नेपाल नरेश ने भारत व अन्य देशों के दबाव पर आकर आपात्काल को हटा दिया।

नेपाल में लोकतान्त्रिक आन्दोलन एवं भारत की भूमिका-नेपाल में 2006 तथा 2007 में चलाए गए लोकतान्त्रिक आन्दोलन को भारत ने पूर्ण समर्थन प्रदान किया। पिछले 240 वर्षों से चले आ रहे राजतन्त्र को मई 2008 में सदा के लिए समाप्त करवा कर लोकतान्त्रिक सरकार बनाने में भारत ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नेपाली प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-नेपाल के प्रधानमन्त्री गिरिजा प्रसाद कोइराला 3 अप्रैल, 2007 को सार्क सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आए तथा भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की।

नेपाली प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-नेपाल के प्रधानमन्त्री पुष्प कुमार दहल ‘प्रचण्ड’ 14 सितम्बर, 2008 को भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देश 50 वर्षीय मैत्री सन्धि की समीक्षा के लिए सहमत हुए थे। दोनों प्रधानमन्त्री कोसी नदी पर बांध बनाने और बाढ़ सम्बन्धी सूचना देने के लिए भी तैयार हुए।

नेपाली राष्ट्रपति को भारत यात्रा-फरवरी 2010 में नेपाल के राष्ट्रपति श्री राम बरन यादव भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
नेपाली प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा-नेपाल के प्रधानमन्त्री श्री बाबू राम भटाराई अक्तूबर, 2011 में भारत यात्रा पर आए। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने पारस्परिक सहयोग के तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किये। नेपाल के लिये 250 अरब डालर की ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ उपलब्ध कराने के लिए भी एक समझौता हुआ।

भारतीय प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा-अगस्त 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान भारत ने नेपाल को 61 अरब रुपये की मदद देने की घोषणा की।
भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नवम्बर 2014 में 18वें सार्क सम्मेलन के दौरान नेपाल की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने नेपाली प्रधानमंत्री से भी अलग बैठक करके द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की।

अक्तूबर 2016 में नेपाल के प्रधानमन्त्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचण्ड’,’ बिम्सटेक’ (BIMSTEC) सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर आए। इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत की।
अगस्त 2017 में नेपाल के प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आए। इस दौरान दोनों देशों ने 8 समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
अगस्त 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बिम्सटेक सम्मेलन में भाग लेने के लिए नेपाल की यात्रा की। इन दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत की।

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लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
कश्मीर समस्या क्या है ? वर्णन कीजिए।
अथवा
कश्मीर समस्या क्या है ?
उत्तर-
स्वतन्त्रता से पूर्व कश्मीर भारत के उत्तर-पश्चिमी कोने में स्थित एक देशी रियासत थी। 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतन्त्र हुआ और पाकिस्तान की भी स्थापना हुई। पाकिस्तान ने पश्चिमी सीमा प्रान्त के कबाइली लोगों को प्रेरणा और सहायता देकर 22 अक्तूबर, 1947 को कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से सहायता मांगी और कश्मीर को भारत में शामिल करने की प्रार्थना की। भारत में कश्मीर का विधिवत् विलय हो गया, परन्तु पाकिस्तान का आक्रमण जारी रहा और पाकिस्तान ने कुछ क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और अब भी उस क्षेत्र पर जिसे ‘आज़ाद कश्मीर’ कहा जाता है, पाकिस्तान का कब्जा है। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया। भारत सरकार ने कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया और 1 जनवरी, 1949 को कश्मीर का युद्ध विराम हो गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कश्मीर की समस्या को हल करने का प्रयास किया पर यह समस्या अब भी है। इसका कारण यह है कि भारत सरकार कश्मीर को भारत का अंग मानती है जबकि पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह करवा कर यह निर्णय करना चाहता है कि कश्मीर भारत में मिलना चाहता है या पाकिस्तान के साथ। परन्तु पाकिस्तान की मांग गलत और अन्यायपूर्ण है, इसलिए इसे माना नहीं जा सकता।

प्रश्न 2.
शिमला समझौते की मुख्य व्यवस्थाएं लिखिए।
उत्तर-
दिसम्बर, 1971 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में ऐतिहासिक मात दी। इस युद्ध में पाकिस्तान के लगभग एक लाख सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। भारत ने पाकिस्तान की इस हार का कोई अनुचित लाभ न उठाया। तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने दोनों देशों की समस्याओं पर विचार करने के लिए 1972 में एक सम्मेलन बुलाया। इस सम्मेलन में पाकिस्तान के तत्कालीन शासक प्रधानमन्त्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने भाग लिया। सम्मेलन में दोनों देशों ने एक समझौता किया जिसे शिमला समझौता कहा जाता है। इस समझौते की प्रमुख शर्ते इस प्रकार हैं

  1. दोनों राष्ट्र अपने पारस्परिक झगड़ों को द्विपक्षीय बातचीत और मान्य शान्तिपूर्ण ढंगों से हल करने के लिए दृढ़-संकल्प हैं।
  2. दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखण्डता, राजनीतिक स्वतन्त्रता और सार्वभौम समानता का सम्मान करेंगे।
  3. दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखण्डता और राजनीतिक स्वतन्त्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी का प्रयोग नहीं करेंगे।
  4. दोनों देशों द्वारा परस्पर विरोधी प्रचार नहीं किया जाएगा। (5) दोनों देश परस्पर सामान्य सम्बन्ध स्थापित करने के लिए प्रयत्न करेंगे।

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प्रश्न 3.
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों का भविष्य क्या है ?
अथवा
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों का भविष्य लिखें।
उत्तर-
भारत-पाक सम्बन्ध सदैव अस्थिर रहे हैं और अधिकांश समय से दोनों देशों के सम्बन्ध मधुर नहीं रहे हैं। यदि भविष्य में भारत-पाक अपने सम्बन्धों को सामान्य बनाना चाहते हैं, तो इन्हें द्विपक्षीय स्तर पर कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। विशेषकर पाकिस्तान को भारत से मधुर सम्बन्ध बनाने के लिई कई बड़े कदम उठाने होंगे जैसे आतंकवाद को समर्थन देना बन्द करके भारत के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने तथा कश्मीर समस्या को सुलझाने में और अधिक उदारता दिखाकर इत्यादि। यदि इस प्रकार के कदम उठाये जाएं तो भारत-पाक सम्बन्ध भविष्य में बेहतर बन सकते हैं।

प्रश्न 4.
भारत-चीन सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत और चीन एशिया के दो महत्त्वपूर्ण देश हैं। 1954 में दोनों देशों ने आपस में व्यापारिक समझौता किया तथा पंचशील के सिद्धान्तों के प्रति विश्वास दिलाया। 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया। 1965 तथा 1971 के पाकिस्तान के साथ युद्धों में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया। इसके बावजूद भी भारत ने चीन से सम्बन्ध सुधारने के प्रयास जारी रखे। 1971 में चीन भारत ने चीन की संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता का समर्थन किया। 1979 में भारतीय विदेश मन्त्री वाजपेयी की चीन यात्रा से दोनों देशों के सम्बन्धों में सुधार आया। दिसम्बर, 1988 में भारतीय प्रधानमन्त्री राजीव गांधी की चीन यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद को हल करने के लिए एक संयुक्त दल का गठन किया। दिसम्बर, 1991 में चीन के प्रधानमन्त्री ली फंग भारत यात्रा पर आए। मई, 2004 में चीन ने सिक्किम को अपने नक्शे में एक अलग राष्ट्र दिखाना बन्द करके, उसे भारत का अभिन्न अंग माना। जनवरी 2008 में भारतीय प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने चीन की यात्रा की। सितम्बर 2014 में चीनी राष्ट्रपति श्री जिनपिंग ने भारत की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। सन् 2017 में डोकलाम विवाद ने दोनों देशों के सम्बन्धों में असहजता पैदा कर दी।

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प्रश्न 5.
भारत और बांग्लादेश के सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत के बंगला देश के साथ सम्बन्धों का वर्णन करें।
उत्तर-
भारत और बांग्लादेश के सम्बन्ध अधिकांशतः अच्छे रहे हैं। सन् 1971 में बांग्लादेश के एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आने में भारत ने सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 19 मार्च, 1972 को भारत और बांग्ला देश के बीच 25 वर्षीय मित्रता व सहयोग की संधि हुई। चकमा शरणार्थियों तथा तीन बीघे गलियारे के कारण दोनों देशों में मतभेद रहे हैं। 26 जून, 1992 को भारत ने तीन बीघे गलियारे को बांग्लादेश को पट्टे पर दे दिया। 12 दिसम्बर, 1996 को भारत-बांग्लादेश में फरक्का गंगा जल बंटवारे पर समझौता हुआ। जनवरी, 2010 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री श्री शेख हसीना भारत आईं। भारत ने बांग्लादेश को 250 मेगावाट बिजली तथा 300 बांग्लादेशी छात्रों को प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति देने की घोषणा की, जबकि बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वह अपने क्षेत्र से भारत विरोधी गतिविधियां नहीं होने देगी। नवम्बर 2014 में नेपाल में हुए 18वें सार्क सम्मेलन में बंग्ला देश की प्रधानमन्त्री श्रीमती शेख हसीना एवं भारतीय प्रधानमन्त्री श्री नेरन्द्र मोदी ने द्विपक्षीय बातचीत में समान मुद्दों पर बातचीत की। अप्रैल 2017 में बांग्ला देशी प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आई तथा भारत के साथ 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किये थे।

प्रश्न 6.
भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत के पाकिस्तान के साथ सम्बन्धों का वर्णन करें।
उत्तर-
भारत और पाकिस्तान के सम्बन्ध आरम्भ से ही अच्छे नहीं रहे हैं। पाकिस्तान ने भारत पर 1947, 1965 एवं 1971 में आक्रमण किया, जिसमें उसको हार का सामना करना पड़ा। सन् 1966 में ताशकंद समझौते एवं 1972 में शिमला समझौते द्वारा दोनों देशों ने शान्ति स्थापित करने का प्रयास किया, परन्तु पाकिस्तान के अड़ियल व्यवहार के कारण सम्बन्ध सामान्य नहीं हो पाए। फरवरी, 1999 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान यात्रा पर गए तथा लाहौर घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए, परन्तु पाकिस्तान ने मई, 1999 में कारगिल में घुसपैठ करा कर यह साबित कर दिया कि वह भारत से अच्छे सम्बन्ध नहीं चाहता, नवम्बर 2014 में नेपाल में हुए में 18वें सार्क सम्मेलन में भी पाकिस्तान का रवैया मित्रतापूर्ण नहीं रहा। वर्तमान समय में भी दोनों देशों के सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
शिमला समझौते की कोई दो मुख्य व्यवस्थाएं लिखिए।
उत्तर-

  1. दोनों राष्ट्र अपने पारस्परिक झगड़ों को द्विपक्षीय बातचीत और मान्य शान्तिपूर्ण ढंगों से हल करने के लिए दृढ़-संकल्प हैं।
  2. दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखण्डता, राजनीतिक स्वतन्त्रता और सार्वभौम समानता का सम्मान करेंगे।

प्रश्न 2.
भारत-चीन सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत और चीन एशिया के दो महत्त्वपूर्ण देश हैं। दोनों देशों ने पंचशील के सिद्धान्तों के प्रति विश्वास दिलाया। 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया। दिसम्बर, 1988 में भारतीय प्रधानमन्त्री राजीव गांधी की चीन यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद को हल करने के लिए एक संयुक्त दल का गठन किया। मई, 2004 में चीन ने सिक्किम को अपने नक्शे में एक अलग राष्ट्र दिखाना बन्द करके, उसे भारत का अभिन्न अंग माना। वर्तमान समय में दोनों देशों के सम्बन्ध सुधार की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 3.
दो देशों के नाम बताएं, जिन्होंने भारत पर आक्रमण किया था ?
उत्तर-

  1. पाकिस्तान,
  2. चीन।

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प्रश्न 4.
“शिमला समझौता” (सन्धि) कब और कौन-से दो देशों के बीच हुई ?
उत्तर-
शिमला समझौता सन् 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था।

प्रश्न 5.
1999 के कारगिल युद्ध के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
पाकिस्तानी सैनिकों ने शिमला समझौते एवं लाहौर समझौते का उल्लंघन करते हुए 1999 में भारतीय क्षेत्र की कारगिल पहाड़ियों में घुसपैठ करके अपना कब्जा कर लिया था। भारत के विरोध के बावजूद उन्होंने कब्जे वाले स्थान को खाली करने से मना कर दिया। अतः भारतीय सेना ने बल प्रयोग करके सभी पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। इस घटना से पाकिस्तानी सरकार का दोहरा मापदण्ड एक बार फिर सामने आ गया।

प्रश्न 6.
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों का भविष्य लिखें।।
उत्तर-
भारत-पाक सम्बन्ध सदैव अस्थिर रहे हैं और अधिकांश समय से दोनों देशों के सम्बन्ध मधुर नहीं रहे हैं। पाकिस्तान को भारत से मधुर सम्बन्ध बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाने होंगे जैसे आतंकवाद को समर्थन देना बन्द करके भारत के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने तथा कश्मीर समस्या को सुलझाने में और अधिक उदारता दिखाकर इत्यादि। यदि इस प्रकार के कदम उठाये जाएं तो भारत-पाक सम्बन्ध भविष्य में बेहतर बन सकते हैं।

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प्रश्न 7.
बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
भारत व बांग्लादेश की सीमा लगभग 3200 किलोमीटर लम्बी है। स्थिति यह है कि दोनों देशों के बीच कोई प्राकृतिक सीमा न होने के कारण प्राय: बांग्लादेश के लोग शरणार्थियों के रूप में भारत की सीमा में आते रहते हैं। इसके कारण भारत में विविध प्रकार की आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। असम व त्रिपुरा जैसे छोटे राज्यों में यह समस्या विशेष रूप से गम्भीर बनी हुई है, जहां चकमा जाति के अनगिनत शरणार्थी वहां के जनजीवन को प्रभावित करते हुए भारत के लिए बड़ी कठिनाई पैदा करते हैं।

प्रश्न 8.
भारत की पड़ोसी देशों के प्रति क्या नीति है ?
उत्तर-
भारत सैदव ही पड़ोसी देशों से मित्रतापूर्ण सम्बन्ध चाहता है। भारत का मानना है कि बिना मित्रतापूर्ण सम्बन्ध के कोई भी देश सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विकास नहीं कर सकता। इसलिए भारत ने पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल एवं भूटान आदि पड़ोसी देशों से सम्बन्ध मधुर बनाये रखने के लिए समय-समय पर कई कदम उठाये हैं। उन्हीं महत्त्वपूर्ण कदमों में एक कदम सार्क की स्थापना है।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1.
शिमला समझौता कब हुआ ?
उत्तर-
शिमला समझौता सन् 1972 में हुआ।

प्रश्न 2.
शिमला समझौता किन दो देशों के बीच हुआ ?
उत्तर-
शिमला समझौता भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ था।

प्रश्न 3.
लाहौर घोषणा कब हुई ?
उत्तर-
लाहौर घोषणा सन् 1999 में हुई।

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प्रश्न 4.
चीन ने भारत पर कब आक्रमण किया ?
उत्तर-
चीन ने भारत पर सन् 1962 में आक्रमण किया।

प्रश्न 5.
मैक-मोहन रेखा क्या है ?
उत्तर-
मैक-मोहन रेखा भारत एवं चीन की सीमा रेखा को निर्धारित करती है। मैक-मोहन रेखा सन् 1914 में निश्चित की गई थी।

प्रश्न 6.
भारत-चीन सम्बन्धों का एक उदाहरण लिखें।
उत्तर-
श्री राजीव गांधी ने सन् 1988 में चीन की यात्रा की।

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प्रश्न 7.
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों का क्या भविष्य है ? उदाहरण लिखें।
अथवा
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों का भविष्य क्या है ?
उत्तर-
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों का भविष्य उज्ज्वल नहीं है क्योंकि पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ करवाता रहता है।

प्रश्न 8.
शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किन दो नेताओं द्वारा किए गए थे? ।
उत्तर-
शिमला समझौते पर भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री जुल्फिकार अली भुट्टो द्वारा हस्ताक्षर किये गए थे।

प्रश्न 9.
पंचशील के विषय में चीन की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
चीन ने भारत के साथ मिलकर पंचशील सिद्धान्तों का निर्माण किया।

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प्रश्न 10.
भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता (संधि) कब हुआ ?
उत्तर-
भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता सन् 1954 में हुआ था।

प्रश्न 11.
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का एक कारण लिखो।
उत्तर-
भारत-पाक सम्बन्धों में तनाव का एक महत्त्वपूर्ण कारण कश्मीर का मामला है।

प्रश्न 12.
बांग्लादेश की स्थापना कब हुई ?
उत्तर-
बांग्लादेश की स्थापना सन् 1971 में हुई।

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प्रश्न 13.
ताशकन्द समझौता क्या है ?
अथवा
ताशकंद समझौता कौन-से दो देशों के बीच हुआ ?
उत्तर-
10 जनवरी, 1966 को भारत-पाकिस्तान के बीच ताशकन्द में हुए समझौते को ताशकन्द समझौता कहा जाता है। यह समझौता दोनों देशों के बीच सन् 1965 के युद्ध के बाद किया गया था।

प्रश्न 14.
लिट्टे से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लिट्टे (L.T.T.E.) का अर्थ लिबरेशन टाइगर ऑफ तमिल ईलम (Liberation Tigers of Tamil Ealm) है।

प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. ……….. दक्षिण एशिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है।
2. भारत एवं पाकिस्तान से ब्रिटिश राज की समाप्ति सन् …….. में हुई।
3. पाकिस्तान सीटो तथा सैन्टो जैसे ……….. गठबन्धन में शामिल हुआ।
4. बंगलादेश …….. से लेकर ……….. तक पाकिस्तान का अंग रहा है।
5. बंगलादेश के नेताओं द्वारा मार्च, ……… में स्वतन्त्रता की घोषणा की गई।
उत्तर-

  1. भारत
  2. 1947
  3. सैनिक
  4. 1947, 1971
  5. 1971.

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प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. दक्षिण एशिया, एशिया में स्थित है, जिसमें भारत, पाकिस्तान एवं श्रीलंका जैसे महत्त्वपूर्ण देश शामिल हैं।
2. 1947 में भारत से अलग होकर बंगलादेश एक नये राज्य के रूप में सामने आया।
3. पाकिस्तान शीत युद्धकालीन सैनिक गठबन्धनों जैसे सीटो और सैन्टो में शामिल हुआ।
4. 1960 में भारत एवं पाकिस्तान ने सिन्धु नदी जल समझौते पर हस्ताक्षर किये।
5. भारत के प्रयासों से 1971 में जापान नामक देश अस्तित्व में आया।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. सही
  4. सही
  5. ग़लत।

प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मैकमोहन रेखा कौन-से दो देशों की सीमा क्षेत्र को निश्चित करती है :
(क) भारत-पाकिस्तान
(ख) भारत-चीन
(ग) भारत-अमेरिका
(घ) पाकिस्तान-चीन।
उत्तर-
(ख) भारत-चीन

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प्रश्न 2.
निम्न में से किसने पंचशील के सिद्धान्तों का निर्धारण किया ?
(क) सरदार पटेल
(ख) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(ग) पं० नेहरू
(घ) महात्मा गांधी।
उत्तर-
(ग) पं० नेहरू

प्रश्न 3.
1965 में किन दो देशों के बीच युद्ध हुआ?
(क) भारत-पाकिस्तान
(ख) भारत-चीन
(ग) भारत-श्रीलंका
(घ). पाकिस्तान-नेपाल।
उत्तर-
(क) भारत-पाकिस्तान

प्रश्न 4.
ताशकन्द समझौता किन दो देशों के बीच हुआ?
(क) भारत-चीन
(ख) भारत-पाकिस्तान
(ग) भारत-नेपाल
(घ) भारत-श्रीलंका।
उत्तर-
(ख) भारत-पाकिस्तान

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प्रश्न 5.
महाकाली सन्धि किन दो देशों के बीच हुई ?
(क) भारत-पाकिस्तान
(ख) भारत-नेपाल
(ग) भारत-चीन
(घ) भारत-जापान।
उत्तर-
(ख) भारत-नेपाल

प्रश्न 6.
नेपाल में नया संविधान कब लागू किया गया ?
(क) 20 सितम्बर, 2015
(ख) 2 फरवरी, 2007
(ग) 4 मार्च, 2008
(घ) 9 जुलाई, 2009।
उत्तर-
(क) 20 सितम्बर, 2015

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 5 बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल

Punjab State Board PSEB 11th Class Agriculture Book Solutions Chapter 5 बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Agriculture Chapter 5 बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल

PSEB 11th Class Agriculture Guide बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
बीजों के क्वालिटी कन्ट्रोल के लिए लागू कानून का नाम बताओ।
उत्तर-
सीड कन्ट्रोल आर्डर 1983।

प्रश्न 2.
खादों के क्वालिटी कन्ट्रोल के लिए लागू कानून का नाम बताओ।
उत्तर-
खाद कन्ट्रोल आर्डर, 1985।

प्रश्न 3.
खादों की परख के लिये प्रयोगशालाएं कहां-कहां हैं ?
उत्तर-
लुधियाना तथा फरीदकोट।

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प्रश्न 4.
कीटनाशक दवाइयों के क्वालिटी कन्ट्रोल के लिये लागू कानून का नाम बताओ।
उत्तर-
इन्सैक्टीसाइड अधिनियम-1968 ।

प्रश्न 5.
भारत सरकार को कीटनाशक एक्ट लागू करने के लिए सुझाव कौन देता है ?
उत्तर-
केन्द्रीय कीटनाशक (सेन्ट्रल इन्सैक्टीसाइड) बोर्ड।

प्रश्न 6.
कीटनाशक दवाइयों की जांच के लिए प्रयोगशालाएं कहां हैं ?
उत्तर-
लुधियाना, बठिंडा, अमृतसर।।

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प्रश्न 7.
विदेशों से कीटनाशक दवाइयों के निर्यात की आज्ञा कौन देता है ?
उत्तर-
सेन्ट्रल (केन्द्रीय) रजिस्ट्रेशन कमेटी।

प्रश्न 8.
कीटनाशक एक्ट के अन्तर्गत कीटनाशक इन्स्पेक्टर किसे घोषित किया गया है ?
उत्तर-
खेतीबाड़ी विकास अधिकारियों को इस अधिनियम के अन्तर्गत इन्सैक्टीसाइड इन्स्पैक्टर घोषित किया गया है।

प्रश्न 9.
घटिया खाद बेचने वाले के विरुद्ध किसको शिकायत की जाती है ?
उत्तर-
जिले के मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी को शिकायत की जा सकती है।

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प्रश्न 10.
टी० एल० किस वस्तु का लेबल है?
उत्तर-
प्रमाणित बीज का, विश्वासयोग्य क्वालटी।

(ख) एक-दो वाक्यों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
खादों का क्वालिटी कन्ट्रोल क्यों ज़रूरी है ?
उत्तर-
कृषि में खाद का बहुत महत्त्व है। यह पौधों को बढ़ने-फूलने के लिये आवश्यक तत्त्व देने में सहायक होती है। यदि खादों की क्वालिटी घटिया होगी तो फ़सलों को इसकी बहुत हानि पहुंचेगी। पूरी मेहनत पर पानी फिर जायेगा। इसलिये खादों का क्वालिटी कन्ट्रोल बहुत ज़रूरी है।

प्रश्न 2.
बीजों का क्वालिटी कन्ट्रोल क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
यदि बीज उच्च क्वालिटी के नहीं होंगे तो फसल घटिया किस्म की पैदा होगी, उपज कम हो जायेगी तथा पूरी मेहनत बेकार हो जायेगी। इसलिये बीज बढ़िया होना चाहिए।

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प्रश्न 3.
ज़रूरी वस्तुओं से संबंधित कानून के अन्तर्गत कृषि से सम्बन्धित कौनसी वस्तुएं शामिल की गई हैं ?
उत्तर-
भारत सरकार ने आवश्यक वस्तुओं के कानून के अन्तर्गत कृषि में काम आने वाली तीन वस्तुएं बीज, खाद तथा कीटनाशक दवाइयों को शामिल किया है।

प्रश्न 4.
बीज, खाद और कीटनाशक दवाइयों के क्वालिटी कन्ट्रोल के लिये कौन-कौन से कानून लागू किये गये हैं ?
उत्तर-
बीजों के लिये सीड कन्ट्रोल आर्डर 1983, खादों के लिये फर्टीलाइज़र कन्ट्रोल आर्डर 1985, कीटनाशक दवाइयां तथा इन्सैक्टीसाइड अधिनियम 1968 कानून लागू किये गये हैं।

प्रश्न 5.
बीजों के क्वालिटी कन्ट्रोल के लिये बीज इन्स्पेक्टर के क्या अधिकार हैं ?
उत्तर-
बीज इन्स्पेक्टर किसी भी डीलर से बीज के स्टॉक के बारे में, बिक्री के बारे में, खरीद के बारे में तथा स्टोर में पड़े बीज के बारे में कोई भी सूचना मांग सकता है। बीज वाले स्टोर या दुकान की तलाशी ले सकता है तथा उपलब्ध बीजों के नमूने भर कर उनकी जांच बीज जांच प्रयोगशाला से करवा सकता है, कोई नुक्स होने पर बिक्री पर पाबन्दी लगा सकता है। इन्सपेक्टर बीजों से सम्बन्धित दस्तावेज़ कब्जे में ले सकता है तथा चैक कर सकता है। इसके अतिरिक्त दोषी का लाइसेंस रद्द करने के लिये लाइसेंस अधिकारी को लिख सकता है।

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प्रश्न 6.
बीज कन्ट्रोल आर्डर के अन्तर्गत किसान को क्या अधिकार प्राप्त हैं ?
उत्तर-
बीज कन्ट्रोल कानून के अन्तर्गत बीज खरीदने वाले किसानों के अधिकार सुरक्षित रखे गये हैं, ताकि बीजों में कोई नुक्स होने पर उनके द्वारा बीजों पर किये गये खर्च का मुआवज़ा उसको मिल सके। यदि किसान यह समझता हो कि उसकी फ़सल के फेल होने का मुख्य कारण उसको बीज डीलर द्वारा दिया गया घटिया बीज है तो वह इस सम्बन्ध में बीज इन्सपेक्टर के पास अपनी शिकायत लिखित रूप में दर्ज करवा सकता है।

प्रश्न 7.
खराब बीज प्राप्त होने पर शिकायत दर्ज करवाने के लिये प्रमाण स्वरूप किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
शिकायत दर्ज करवाते समय किसान को निम्नलिखित वस्तुओं की आवश्यकता पड़ती है-

  • बीज की खरीद के समय दुकानदार द्वारा दिया गया पक्का बिल या रसीद।
  • बीज की थैली पर लगा हुआ लेबल।
  • बीज वाला खाली पैकेट या थैला या डिब्बा।
  • खरीदे हुए बीज में से बचा कर रखा हुआ बीज का नमूना।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 5 बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल

प्रश्न 8.
खादों के क्वालिटी कन्ट्रोल सम्बन्धी कानून का क्या नाम है ? इसको कृषि विभाग के किन अफसरों के सहयोग से लागू किया जाता है ?
उत्तर-
खादों के क्वालिटी कन्ट्रोल सम्बन्धी कानून का नाम फर्टीलाइज़र कन्ट्रोल आर्डर 1985 है।
यह कानून पंजाब राज्य में कृषि विभाग के राज्य स्तरीय अधिकारी (डायरेक्टर कृषि पंजाब चण्डीगढ) की देख-रेख में जिले के चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसरों तथा उनके सहयोगी अधिकारियों, जिनमें एग्रीकल्चर ऑफिसर (A.O.) तथा उनके अधीन काम कर रहे एग्रीकल्चर डिवैल्पमैंट ऑफिसर (A.D.O.) के सहयोग से लागू किया जाता है।

प्रश्न 9.
कीटनाशक इन्स्पेक्टर कीड़ेमार दवाइयों के क्वालिटी कन्ट्रोल के लिये क्या कार्यवाही करता है ?
उत्तर-
इन्सैक्टीसाइड इन्स्पेक्टर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन्सैक्टीसाइड बेचने वाली दुकानों, गोदामों, सेल सेंटरों तथा अन्य सम्बन्धित स्थानों पर निरीक्षण करते हैं। वह इन दुकानों से नमूने लेकर उनकी पड़ताल करने के लिये लुधियाना, भटिण्डा तथा अमृतसर की प्रयोगशालाओं में भेजता है।।

स्टॉक चैक करके पता लगाता है कि कीटनाशक दवाइयां निश्चित समय की सीमा पार तो नहीं कर गईं। इसके अतिरिक्त स्टॉक में पड़ी दवाइयों का भार तथा अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाती है तथा देखा जाता है कि कोई कानूनी उल्लंघना न हो रही हो। अधिनियम की उल्लंघना करने वाले व्यक्तियों के लाइसेंस रद्द कर दिये जाते हैं तथा उनके विरुद्ध कानूनी कारवाई भी की जाती है। दोषी व्यक्तियों को जुर्माना तथा जेल का दण्ड भी हो सकता है।

प्रश्न 10.
बीज कानून की धारा-7 क्या है ?
उत्तर-
इस धारा के अन्तर्गत केवल नोटीफाइड सूचित किस्मों के बीजों की ही बिक्री की जा सकती है।

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(ग) पांच-छ: वाक्यों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
बीज, खादों और कीटनाशक दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल क्यों ज़रूरी
उत्तर-
फ़सलों की बढ़िया उपज के लिये बीज, खाद तथा कीटनाशक दवाइयां मुख्य तीन वस्तुएं हैं। कृषि में ये तीनों वस्तुएं बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। इसलिये इनकी क्वालिटी का उचित स्तर का होना बहुत ज़रूरी है। यदि बीज उच्च स्तर के तथा सही किस्म के नहीं होंगे, तो सारी मेहनत बेकार हो जायेगी। इसी प्रकार यदि खादों की क्वालिटी सही नहीं होगी, तो फ़सलों से पूरी उपज नहीं मिलेगी। फ़सलों में खरपतवारों, हानिकारक कीटों तथा बीमारियों की रोकथाम के लिये सही किस्म की दवाइयों तथा ज़हरों का प्रयोग भी बहुत ज़रूरी है।

इन तीनों वस्तुओं पर खर्चा भी हो जाएगा तथा पैदावार भी कम मिलेगी, नदीन समाप्त नहीं होंगे, कीड़े फसल को खा जाएंगे। इसलिए तीनों वस्तुओं का क्वालिटी कण्ट्रोल बहुत जरूरी है।

प्रश्न 2.
कीटनाशक एक्ट (इन्सेक्टीसाइड एक्ट) की सहायता से कीटनाशक दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
यह अधिनियम 1968 में बनाया गया था तथा सारे देश में लागू कर दिया गया था।
यह अधिनियम कीटनाशक दवाइयों आदि में मिलावट, कमी तथा अन्य कमियां दूर करने के लिये लागू किया गया है। इस अधिनियम के अन्तर्गत पुरानी आऊटडेटड हो चुकी तथा कम माप वाली दवाइयों की बिक्री अवैध है। पंजाब सरकार द्वारा जिला स्थित चीफ कृषि अधिकारियों को यह दवाइयां बेचने सम्बन्धी लाइसेंस देने का अधिकार दिया गया है। संबंधित अधिकारी कीटनाशक बेचने वाली दुकानों की चैकिंग करते हैं तथा सैंपल लेकर लुधियाना, अमृतसर, भटिंडा की प्रयोगशाला में भेजते हैं। कानून की उल्लंघना करने वाले दुकानदार के विरुद्ध कानूनी कारवाई तथा लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

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प्रश्न 3.
बीज कन्ट्रोल आर्डर की प्रमुख धाराओं का वर्णन करो।
उत्तर-
1. लाइसेंस देने का अधिकार-बीज कन्ट्रोल आर्डर, 1983 के अन्तर्गत राज्य सरकार को यह अधिकार दिये गये हैं कि वह किसी भी अधिकारी को जिसे वह ठीक समझती हो, लाइसेंस अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है तथा इस अधिकारी का कार्यक्षेत्र भी निर्धारित कर सकती है। पंजाब राज्य में यह अधिकार डायरेक्टर कृषि संयुक्त डायरेक्टर कृषि विभाग, पंजाब को दिये गये हैं।

2. बीज इन्स्पेक्टर-इस अधिनियम के अन्तर्गत सरकार द्वारा कृषि विकास अधिकारियों को बीज इन्स्पेक्टर नियुक्त किया गया है उनका अधिकार क्षेत्र तथा उनके द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियों को भी नोटिफाई किया गया है। बीज इन्स्पैक्टर किसी भी डीलर से बीज के स्टॉक के बारे में, बिक्री के बारे में, खरीद के बारे में तथा स्टोर में पड़े बीज के बारे में कोई भी सूचना मांग सकता है। बीज वाले स्टोर या दुकान की तलाशी ले सकता है तथा उपलब्ध बीजों के नमूने भरकर उनकी जांच, बीज जांच प्रयोगशाला से करवा सकता है, कोई कमी होने पर बिक्री पर पाबन्दी लगा सकता है। इन्स्पेक्टर बीजों से सम्बन्धित दस्तावेज़ अपने कब्जे में ले सकता है तथा चैक कर सकता है। इसके अतिरिक्त दोषी का लाइसेंस रद्द करने के लिये लाइसेंस अधिकारी को लिख सकता है।

3. किसानों के अधिकार-सीड कन्ट्रोल कानून के अन्तर्गत बीज खरीदने वाले किसानों के अधिकार सुरक्षित रखे गये हैं, ताकि बीजों में कोई कमी होने पर उस द्वारा बीजों पर किये गये खर्च का मुआवज़ा उसको मिल सके। यदि किसान यह समझता हो कि उसकी फसल के फेल होने का मुख्य कारण उसको बीज डीलर द्वारा दिया गया घटिया बीज है तो वह इस सम्बन्ध में बीज इन्स्पेक्टर के पास अपनी शिकायत लिखित रूप में दर्ज करवा सकता है।

शिकायत दर्ज करवाते समय किसान को निम्नलिखित वस्तुओं की आवश्यकता पड़ती है –

  • बीज खरीदते समय दुकानदार द्वारा दिया गया बिल या रसीद।
  • बीज की थैली पर लगा हुआ लेबल।
  • बीज वाला खाली पैकेट या थैला या डिब्बा।
  • खरीदे हुए बीज में से रखा हुआ बीज का नमूना।

बीज इन्स्पेक्टर यह शिकायत प्राप्त होने पर इसकी पूरी जांच-पड़ताल करेगा तथा यदि इस नतीजे पर पहुंचता है कि फ़सल का फेल होने का कारण बीज की खराबी है तो वह बीज के डीलर/विक्रेता के विरुद्ध कानूनी कार्यवाई शुरू करेगा तथा बीज कानून के अन्तर्गत उसको दण्ड मिल सकता है।

बीज कन्ट्रोल आदेश, 1983 की उल्लंघना करने वाले दोषी को आवश्यक वस्तुओं के कानून के अन्तर्गत दिये जाते दण्ड दिये जाएंगे क्योंकि बीज को भारत सरकार द्वारा एक आवश्यक वस्तु का दर्जा दिया गया है।

प्रश्न 4.
बीज कन्ट्रोल आर्डर अधीन किसानों को क्या-क्या अधिकार प्राप्त हैं ?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

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प्रश्न 5.
कृषि विकास से संबंधित तीन प्रमुख वस्तुओं के नाम बताओ तथा उनके क्वालिटी कन्ट्रोल पर प्रकाश डालो।
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

Agriculture Guide for Class 11 PSEB बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बीज कन्ट्रोल एक्ट कब बना ?
उत्तर-
1983.

प्रश्न 2.
खाद कन्ट्रोल आर्डर बन बना ?
उत्तर-
1985.

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प्रश्न 3.
पंजाब में बीज, खाद, कीटनाशक से संबंधित कानूनों को किस द्वारा लागू किया जाता है?
उत्तर-
कृषि विभाग, पंजाब।

प्रश्न 4.
बीजों के बन्द पैकटों, डिब्बों या थैलों पर कौन-सा क्वालिटी का लेबल लगा होता है ?
उत्तर-
टी० एल०।

प्रश्न 5.
कौन-से बीजों का प्रमाणीकरण किया जा सकता है ?
उत्तर-
उन किस्मों का ही प्रमाणीकरण किया जा सकेगा जो कि निर्धारित हैं।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इन्सैक्टीसाइड अधिनियम, 1968 कब पारित किया गया है ?
उत्तर-
यह अधिनियम भारतीय पार्लियामेंट द्वारा 1968 में पारित किया गया था तथा सारे देश में लागू कर दिया गया।

प्रश्न 2.
पंजाब सरकार ने इन्सैक्टीसाइड दवाइयां बेचने सम्बन्धी लाइसेंस देने का अधिकार किस को दिया है ?
उत्तर-
जिला के मुख्य कृषि अधिकारियों को यह अधिकार मिला है।

प्रश्न 3.
कीटनाशक दवाइयां खरीदते समय कौन-सी बातों की तरफ ध्यान देना चाहिए ?
उत्तर-
किसानों को कीटनाशक दवाइयां बेचने वालों से खरीद की रसीद अवश्य लेनी चाहिए। डिब्बों तथा दवाई की बोतलों का सील बन्द होना बहुत ज़रूरी है। खरीद करते समय यह भी देखना बहुत ज़रूरी है कि दवाई आऊटडेटड न हुई हो। किसी किस्म का सन्देह होने पर कृषि विकास अधिकारी या चीफ कृषि अधिकारी को इसके बारे में तुरन्त सूचित करें।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
खाद कन्ट्रोल आर्डर 1985 से क्या अभिप्राय है ? यह खादों के क्वालिटी कन्ट्रोल में कैसे सहायक होता है ?
उत्तर-
खाद कन्ट्रोल आर्डर,1985 खादों की क्वालिटी मिलावट, पूरे वज़न, घटिया तथा अप्रमाणित खादें बेचने तथा अन्य प्रकार की उल्लंघना को रोकने के लिये बनाया गया है।

किसी भी स्थान पर खादें बेचने से पहले डीलरों को जिले के सम्बन्धित चीफ एग्रीकल्चरल अधिकारी से खादें बेचने का लाइसेंस लेना ज़रूरी है। लाइसेंस तभी मिल सकता है, जब किसी खाद बनाने वाली कम्पनी ने उस डीलर को खाद बेचने के लिये अधिकार पत्र दिया हो।

खादों की क्वालिटी चैक करने के लिये खाद कन्ट्रोल आर्डर के नियमों के अनुसार विभिन्न स्तर पर कारवाई की जाती है। कोई भी व्यक्ति निश्चित स्तर से घटिया खाद नहीं बेच सकता। किसानों को सप्लाई की जाने वाली/बेचने वाली खादों की क्वालिटी पर निगरानी रखने के लिये खाद कन्ट्रोल 1985 के अन्तर्गत सम्बन्धित अधिकारियों को योग्य अधिकार दिए गये हैं। उनके द्वारा अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में खादों के कारोबारी विभागों का निरीक्षण किया जाता है। आवश्यकता अनुसार खादों के नमूने भरे जाते हैं। इन नमूनों को कृषि विभाग की खाद जांच लैब्राटरी, लुधियाना तथा फरीदकोट में परख करने के लिये भेजा जाता है। यदि नमूने क्वालिटी में घटिया पाए जाते हैं, तो उनके कारोबारी विभागों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कानूनी कार्यवाई की जाती है। न्यायालय द्वारा दोषियों को जेल की सज़ा भी की जा सकती है।

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बीज, खाद और कीड़ेमार दवाइयों का क्वालिटी कन्ट्रोल PSEB 11th Class Agriculture Notes

  • फ़सलों की लाभदायक उत्पादन के लिए बीज, खाद तथा कीटनाशक दवाइयां मुख्य तीन वस्तुएं हैं।
  • भारत सरकार ने अनिवार्य वस्तुओं के कानून के अन्तर्गत कृषि में काम आने वाली इन तीनों वस्तुओं के लिए विभिन्न कानून बनाए हैं।
  • ये कानून हैं बीज कन्ट्रोल आर्डर, खाद कन्ट्रोल आर्डर, कीटनाशक एक्ट।
  • सीड कन्ट्रोल आर्डर के अनुसार पंजाब में लाइसेंस अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। पंजाब में यह अधिकार कृषि विभाग, पंजाब को दिए गए हैं।
  • यदि बीज डीलर द्वारा किसान को घटिया बीज देने से फ़सल खराब हो गई हो तो किसान अपनी शिकायत बीज इन्सपैक्टर से कर सकता है।
  • बीज इंस्पैक्टर को यदि बीज की खराबी के कारण फसल के फेल होने का पता चलता है तो वह बीज डीलर के विरुद्ध कानूनी कारवाई शुरू करता है।
  • बीज कानून की धारा 7 के अन्तर्गत केवल निर्धारित बीजों की ही बिक्री की जा सकती है।
  • खाद परीक्षण प्रयोगशाला लुधियाना तथा फरीदकोट में है।
  • खाद कन्ट्रोल आर्डर 1985, बनाया गया है जो कि खादों की क्वालटी तथा वजन को ठीक रखने तथा मिलावट, घटिया तथा अप्रमाणित खादें बेचने को रोकने के लिए सहायक है।
  • इन्सैक्टीसाइड अधिनियम (कीटनाशक एक्ट) 1968 में बनाया गया।
  • सेन्ट्रल इन्सैक्टीसाइड बोर्ड (केन्द्रीय कीटनाशक बोर्ड) सरकार को यह अधिनियम लागू करने की सलाह देता है।
  • सेन्ट्रल (केन्द्रीय) रजिस्ट्रेशन कमेटी कृषि रसायनों की रजिस्ट्रेशन करके इन्हें बनाने तथा आयात निर्यात के लिए आज्ञा देती है।
  • दवाइयां चैक करने के लिए प्रयोगशालाएं लुधियाना, बठिंडा तथा अमृतसर में हैं।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

Punjab State Board PSEB 7th Class Physical Education Book Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Physical Education Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

PSEB 7th Class Physical Education Guide नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
सिगरेट तथा बीड़ी ये दोनों नशे किस पदार्थ से बनते हैं ?
उत्तर-
सिगरेट और बीड़ी में तम्बाकू डाला जाता है। सिगरेट कागज़ में तम्बाकू डाल कर बनाई जाती है और बीड़ी किसी विशेष वृक्ष के पत्तों से बनती है। इस तरह तम्बाकू पीने के और भी ढंग हैं। जैसे-बीड़ी, सिगरेट पीना, हुक्का पीना और चिलम पीना आदि। इस तरह खाने के ढंग भी अलग-अलग हैं जैसे-तम्बाकू चूने में मिला कर सीधा मुँह में रख कर खाना। तम्बाकू में खतरनाक जहर निकोटीन होता है। इसके अतिरिक्त अमीनिया कार्बनडाइआक्साइड आदि भी होती है जिसका बुरा प्रभाव सिर पर पड़ता है जिससे सिर चकराने लग जाता है।

प्रश्न 2.
किस नशे के सेवन से जीभ, गले तथा मुंह का कैंसर होने का खतरा रहता है?
उत्तर-
तम्बाकू के प्रयोग से जीभ, गले और मुँह का कैंसर होने का खतरा रहता है। तम्बाकू में निकोटीन नाम का जहरीला पदार्थ होता है जिस कारण कैंसर की बीमारी लगने का डर बढ़ जाता है। खासतौर पर छाती और गले के कैंसर का डर रहता है।
तम्बाकू के नुकसान इस तरह हैं—

  1. तम्बाकू खाने या पीने से नज़र कमजोर हो जाती है।
  2. इससे दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। दिल का रोग लग जाता है जो कि मृत्यु का कारण बना सकता है।
  3. आविष्कारों से पता लगा है कि तम्बाकू पीने या खाने से रक्त की नाड़ियां सिकुड़ जाती हैं।
  4. तम्बाकू शरीर के तन्तुओं को उत्तेजित रखता है, जिससे नींद नहीं आती और नींद न आने की बीमारी लग सकती है।
  5. तम्बाकू के प्रयोग से पेट खराब रहने लग जाता है।
  6. तम्बाकू के प्रयोग से खांसी लग जाती है जिससे फेफड़ों के टी० बी० होने का खतरा बढ़ जाता है।
  7. तम्बाकू के प्रयोग से खुराक नली, मुंह के कैंसर का डर भी रहता है।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

प्रश्न 3.
शराब मनुष्य के लिए किस प्रकार हानिकारक है ?
उत्तर-
शराब का सेहत पर प्रभाव (Effect of Alcohol on Health)-शराब एक नशीला तरल पदार्थ है। शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बाज़ार में बेचने से पहले प्रत्येक शराब की बोतल पर यह लिखना ज़रूरी है। फिर भी बहुत-से लोगों को इस की लत (आदत) लगी हुई है जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। शरीर को कई तरह के रोग लग जाते हैं । फेफड़े कमज़ोर हो जाते हैं और व्यक्ति की आयु घट जाती है। ये शरीर के सभी अंगों पर बुरा प्रभाव डालती है। पहले तो व्यक्ति शराब को पीता है। कुछ समय पीने के बाद शराब आदमी को पीने लग जाती है। भाव शराब शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने लग जाती है।
शराब पीने के नुकसान निम्नलिखित हैं—

  1. शराब का असर पहले दिमाग़ पर होता है। नाड़ी प्रबन्ध बिगड़ जाता है और दिमाग़ कमजोर हो जाता है। मनुष्य के सोचने की शक्ति घट जाती है।
  2. शरीर में गुर्दे कमजोर हो जाते हैं।
  3. शराब पीने से पाचन रस कम पैदा होना शुरू हो जाता है जिससे पेट खराब रहने लग जाता है।
  4. श्वास की गति तेज़ और सांस की अन्य बीमारियां लग जाती हैं।
  5. शराब पीने से रक्त की नाड़ियां फूल जाती हैं। दिल को अधिक काम करना पड़ता है और दिल के दौरे का डर बना रहता।
  6. लगातार शराब पीने से मांसपेशियों की शक्ति घट जाती है। शरीर बीमारियों का मुकाबला करने के योग्य नहीं रहता।
  7. आविष्कारों से पता लगा है कि शराब पीने वाला मनुष्य शराब न पीने वाले व्यक्ति से काम कम करता है। शराब पीने वाले व्यक्ति को बीमारियां भी जल्दी लगती हैं।
  8. शराब से घर, स्वास्थ्य, पैसा आदि बर्बाद होता है और यह एक सामाजिक बुराई है।

प्रश्न. 4.
विद्यार्थियों को नशों से किस प्रकार बचाया जा सकता है?
उत्तर-
1. विद्यार्थियों को इन नशीली वस्तुओं से जान पहचान करवानी चाहिए जिससे वह नशीली वस्तुओं से दूर रह सकते हैं।

2. विद्यार्थी किसी भी आयु के हों उनको इन नशीली वस्तुओं की तरफ झुकाव नहीं रखना चाहिए। उनका इरादा कमजोर नहीं होना चाहिए । वह दृढ़ इरादे वाला होना चाहिए।

3. माता पिता और अध्यापक द्वारा बच्चों को नशों से बचाने के लिए अच्छी पुस्तकें पढ़ने के लिए देनी चाहिए और उनको खेलों में भाग लेने, मनोरंजन क्रियाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

Physical Education Guide for Class 7 PSEB नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
किन्हीं दो नशीली वस्तुओं के नाम लिखें।
उत्तर-

  1. शराब
  2. हशीश

प्रश्न 2.
नशीली वस्तुएं किन दो क्रियाओं पर अधिक प्रभाव डालती हैं ?
उत्तर-

  1. पाचन क्रिया पर
  2. खेलने की शक्ति पर।

प्रश्न 3.
नशीली वस्तुओं के कोई दो दोष लिखें।
उत्तर-

  1. चेहरा पीला पड़ जाता है।
  2. मानसिक सन्तुलन खराब हो जाता है।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

प्रश्न 4.
नशीली वस्तुओं के खिलाड़ियों पर कोई दो बुरे प्रभाव लिखें।
उत्तर-

  1. लापरवाई तथा बेफिक्री।
  2. खेल भावना का अन्त।

प्रश्न 5.
खेल में हार नशीली वस्तुओं के प्रयोग के कारण हो जाती है। ठीक अथवा ग़लत ।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 6.
शराब का असर पहले दिमाग़ पर होता है। ठीक अथवा ग़लत
उत्तर-
ठीक

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

प्रश्न 7.
तम्बाकू खाने से या पीने से नजर कमजोर हो जाती है। ठीक अथवा ग़लत
उत्तर-
ठीक।

प्रश्न 8.
तम्बाकू से कैंसर की बीमारी का डर बढ़ता है अथवा कम होता है ?
उत्तर-
डर बढ़ जाता है।

प्रश्न 9.
तम्बाकू के प्रयोग से खांसी नहीं लगती और टी० बी० भी नहीं हो सकती। ठीक अथवा ग़लत ।
उत्तर-
ग़लत।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 8 नशीले पदार्थों के विद्यार्थियों पर कुप्रभाव

प्रश्न 10.
नशे वाला खिलाड़ी लापरवाह हो जाता है। सही अथवा ग़लत
उत्तर-
सही।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
नशीली वस्तुओं की सूची बनाएं और यह भी बताएं कि नशीली वस्तुएं पाचन क्रिया और सोचने की शक्ति पर कैसे प्रभाव डालती हैं?
उत्तर-
मादक पदार्थ ऐसे नशीले पदार्थ हैं जिनके सेवन से किसी-न-किसी प्रकार की उत्तेजना या शिथिलता आ जाती है। मनुष्य के स्नायु संस्थान पर सभी किस्म के मादक पदार्थों का बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे कई प्रकार के विचार, कल्पनाएं तथा भावनाएं पैदा होती हैं। इससे व्यक्ति में घबराहट, गुस्सा और व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने से व्यक्ति का अपने व्यवहार और शरीर पर नियन्त्रण नहीं रहता। नशीली वस्तुएं निम्नलिखित हैं—

  1. शराब
  2. अफीम
  3. तम्बाकू
  4. भांग
  5. हशीश
  6. चरस
  7. कोकीन
  8. एलडरविन।

पाचन क्रिया पर प्रभाव (Effects on Digestion)-नशीली वस्तुओं का पाचन क्रिया पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इनमें अम्लीय अंश बहुत अधिक होते हैं। इन अंशों के कारण आमाशय की कार्य करने की शक्ति कम हो जाती है और कई प्रकार के पेट के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

सोचने की शक्ति पर प्रभाव (Effects on Thinking)-नशीली वस्तुओं के प्रयोग से व्यक्ति अच्छी तरह बोल नहीं सकता और वह बोलने के स्थान पर तुतलाने लगता है। वह अपने पर नियन्त्रण नहीं रख सकता। वह खेल में आई अच्छी स्थितियों के विषय में सोच नहीं सकता और न ही ऐसी स्थितियों से लाभ उठा सकता है।

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प्रश्न 2.
खेल में हार नशीली वस्तुएं के प्रयोग के कारण हो सकती है, कैसे ?
उत्तर-

  1. नशे में खेलते समय खिलाड़ी बहुत-से ऐसे काम कर जाता है जिससे टीम हार जाती है।
  2. नशे में खिलाड़ी विरोधी टीम की चालें नहीं समझ सकता और अपनी टीम के लिए पराजय का कारण बनता है।
  3. यदि किसी खिलाड़ी को नशे में खेलते हुए पकड़ लिया जाए तो उसे खेल में से बाहर निकाल दिया जाता है। यदि उसे इनाम मिलना है तो नहीं दिया जाता। इस प्रकार उसकी विजय पराजय में बदल जाती है।