PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

Punjab State Board PSEB 12th Class Geography Book Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Geography Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

PSEB 12th Class Geography Guide परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दें:

प्रश्न 1.
यातायात प्रबंध को मुख्य रूप में कौन-सी किस्मों में विभाजित किया जाता है ?
उत्तर-
यातायात प्रबंध को मुख्य रूप में इन किस्मों में विभाजित किया जाता है-

  • स्थल मार्ग यातायात।
  • जल मार्ग यातायात।
  • वायु मार्ग यातायात।

प्रश्न 2.
स्थल मार्ग यातायात की कौन-सी तीन किस्में होती हैं ?
उत्तर-
स्थल मार्ग यातायात की सड़कें, रेलवे तथा पाइप लाइन तीन मुख्य किस्में होती हैं।

प्रश्न 3.
कौन-से राज्य भारत के दोनों गलियारा (सड़कों) योजनाओं में संभेद हैं ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश दोनों गलियारा योजनाओं में संभेद राज्य हैं।

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प्रश्न 4.
रेल गेज कौन-सी किस्मों की होती हैं ?
उत्तर-
भारतीय रेल गेजों की निम्नलिखित तीन किस्में होती हैं-

  • चौड़ी गेज (Broad Gauge)
  • मीटर गेज (Metre Gauge)
  • perluf 1757 (Narrow Gauge).

प्रश्न 5.
विश्व की प्रथम रेलवे लाइन कब बिछाई गई ?
उत्तर-
विश्व की प्रथम रेलवे लाइन सन 1863 से 1869 में अमेरिका में बिछाई गई।

प्रश्न 6.
ट्रांस साइबेरियाई रेलवे लाइन कहा तक हैं ?
उत्तर-
ट्रांस साइबेरियाई रेलवे लाइन मास्को से रूस के पर्व में ब्लादिवोस्तोक तक हैं।

प्रश्न 7.
भारत में कितने रेलवे गलियारे हैं ?
उत्तर-
भारत में 2014 के बजट के अनुसार 9 रेलवे गलियारे हैं।

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प्रश्न 8.
IRCTC का पूरा नाम क्या है ?
उनर-
IRCTC का पूरा नाम इण्डियन कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटेड है।

प्रश्न 9.
भारत में कितने जल मार्गों को राष्ट्रीय स्तर के माना जाता है ?
उत्तर-
भारत में 10 जल मार्गों को राष्ट्रीय स्तर के माना जाता है।

प्रश्न 10.
उत्तरी अमेरिका की कोई दो बड़ी झीलों के नाम लिखो।
उत्तर-
उत्तरी अमेरिका की बड़ी झीलें हैं-सुपीरियर, मिशिगन, हायरन, एरी, ओटारियो तथा सेंट लॉरेस।

प्रश्न 11.
भारत की पहली वायु सेवा कब शुरू हुई तथा कहां तक थी ?
उत्तर-
भारत की पहली वायु सेवा 1911 में शुरू हुई तथा इसका इलाहाबाद से नैनी तक, 10 कि०मी० की दूरी के लिए वायु डाक का प्रयोग किया गया।

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प्रश्न 12.
पंजाब के कौन-से दो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं ?
उत्तर-
पंजाब में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे अमृतसर तथा मोहाली में हैं।

प्रश्न 13.
TAPI पाइप लाइन का पूरा नाम लिखो।
उत्तर-
तुर्कमेनिस्तान-अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान-भारत पाइप लाइन।

प्रश्न 14.
संचार की कौन सी प्रमुख किस्में हैं ?
उत्तर-
संचार की मुख्य किस्में हैं-

  • व्यक्तिगत संचार
  • जन संचार।

प्रश्न 15.
GATT का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर-
जनरल ऐग्रीमैंट ओन टैरिफज एंड ट्रेड। (शुल्क तथा व्यापार पर समझौते)।

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प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार पंक्तियों में दें: .

प्रश्न 1.
भारत की ग्रामीण सड़क योजना से पहचान करवाओ।
उत्तर-
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का विकास करना है तथा ऐसा करके कम से कम 1500 व्यक्तियों की तथा इससे अधिक जनसंख्या वाले गांवों को आपस में सड़क मार्ग के साथ जोड़ा जाता है। यह सड़कें इस प्रकार बनाई जाती हैं कि हर प्रकार की मौसमी मुसीबतों को सहन कर सकें।

प्रश्न 2.
सूबाई सड़क मार्ग क्या होते हैं ?
उत्तर-
जब किसी राज्य में व्यापारिक तथा भारी यात्री यातायात के लिए सड़कें बनाई जाए, वह राज्य सड़क मार्ग होते हैं। यह सड़कें जो कि आर्थिक कारवाई की नब्ज़ मानी जाती हैं, जिला मुख्य केंद्रों को राज्यों की राजधानियों के राष्ट्रीय शाहमार्ग के साथ मिलाती हैं।

प्रश्न 3.
‘सुनहरी चतुर्भुज’ कौन से शहरों को आपस में जोड़ती हैं ?
उत्तर-
‘सुनहरी चतुर्भुज’ भारत के अहमदाबाद, भुवनेश्वर, जयपुर, कानपुर, पुणे, सूरत, नैलूर विजयवाड़ा, गंटूर तथा बंगलुरु इत्यादि शहरों को आपस में जोड़ती हैं।

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प्रश्न 4.
19वीं सदी के अंत तक भारत में कौन-से तीन रेलवे-मार्ग बने हैं ?
उत्तर-
19वीं सदी के अंत तक भारत में कोलकाता, मुंबई तथा चेन्नई तीन प्रमुख नये रेलवे-मार्ग बने हैं।

प्रश्न 5.
कोलकाता कौन-कौन से रेलवे जोनों का मुख्यालय है ?
उत्तर-
कोलकाता पूर्वी रेलवे तथा मैट्रो रेलवे जोनों का मुख्यालय है।

प्रश्न 6.
कैनेडियन पैसेफ़िक रेलवे क्या है ?
उत्तर-
कैनेडियन पैसेफिक रेलवे, पार महाद्वीप रेल मार्ग की एक उदाहरण है जो कि उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में कैनेडा के नागरिकों की सेवा कर रहा है इसका कुछ हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका में भी निकलता है। इस मार्ग का निर्माण 1881 में शुरू हुआ था तथा अभी तक विस्तार चल रहा है।

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प्रश्न 7.
डाइमंड चतुर्भुज कौन-से राज्यों को छू पाएगी?
उत्तर-
डाइमंड चतुर्भुज उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, उड़ीसा, झारखण्ड तथा पश्चिमी बंगाल राज्यों को छू पाएगी।

प्रश्न 8.
दिल्ली आगरा रेल गलियारा से पहचान करवाओ।
उत्तर-
दिल्ली आगरा रेल गलियारा का उद्घाटन 5 अप्रैल, 2016 में हुआ है। दिल्ली से आगरा तक 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार के साथ आगरा गतिमान ऐक्सप्रैस चलाई गई।

प्रश्न 9.
भारत में आंतरिक जल यातायात कौन-से दरियाओं में होती है ?
उत्तर-
भारत में आंतरिक जल यातायात के अनुकूल दरिया हैं-गंगा, भगीरथी, हुगली, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा, जुयारी, काली, शरावति, नेर्तावति इत्यादि।

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प्रश्न 10.
व्यक्तिगत संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-
व्यक्तिगत संचार के प्रमुख साधन हैं-

  • डाक सेवाएं
  • ई-मेल सेवा
  • फैक्स संदेश
  • टैलीफोन
  • कोरियर सेवा
  • कम्प्यूटर या सैलफोन सेवाएं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 10-12 पंक्तियों में दें:

प्रश्न 1.
भारत के उत्तर दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा प्रोजैक्टों से पहचान करवाओ।
उत्तर-
भारत के उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा प्रोजैक्टों का मुख्य उद्देश्य देश के हर कोने तक बढ़िया सड़क-मार्गों का जाल बिछाने का है। इस योजना की देख-रेख की पूरी ज़िम्मेदारी नैशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत की गई जो कि केंद्रीय सड़क यातायात तथा शाहमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत काम कर रही है। इस प्रकल्प का मुख्य उद्देश्य चार से छः मार्गी, कुल 7300 कि०मी० लंबी सड़क का निर्माण करने से है जो उत्तर से दक्षिण की तरफ श्रीनगर से कन्या कुमारी, पूर्व से पश्चिम की तरफ पोरबंदर से सिलचर तक बनाना था। उत्तर-दक्षिण गलियारा जो कि श्रीनगर से कन्या-कुमारी तक है, इसकी लंबाई 4000 कि०मी० है तथा यह कोची के साथ जुड़ता है। पूर्व-पश्चिम गलियारा जो कि पोरबंदर से सिलचर तक है इसकी लंबाई 3300 किलोमीटर है। यह दोनों सड़क मार्ग गलियारे 17 राज्यों को छूते हैं। जो हैं-जम्मू तथा कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, राजस्थान, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा असम। यहां यह भी है कि उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारे बनाने के लिए सिर्फ राष्ट्रीय शाहमार्ग ही प्रयोग किये जाते हैं। उत्तर प्रदेश का झाँसी प्रदेश वह रेलवे जंक्शन है जहाँ सड़क गलियारे आपस में काटते हैं।

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प्रश्न 2.
सुनहरी चतुर्भुज सड़क मार्ग योजना पर नोट लिखो।
उत्तर-
सुनहरी चतुर्भुज, राष्ट्रीय शाहमार्ग विकास प्रकल्प के अधीन भारत में सम्पूर्ण होने वाली सबसे बड़ी सड़क निर्माण योजना है। इसका प्रबंध भी राष्ट्रीय शाहमार्ग अथॉरिटी के अंतर्गत ही था। यह दुनिया की पांचवीं बड़ी सड़क निर्माण योजना है। यह योजना साल 2001 में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रारंभ की गई जो 2012 में सम्पूर्ण होनी थी। इस प्रकल्प में भारत के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को आपस में मिसाली सड़क-मार्ग के साथ जोड़े जाने की एक योजना है जो कि रेखा-गणितिक आकृति होने के कारण तथा चतुर्भुज का आकार होने के कारण सुनहरी चतुर्भुज कहलाती है। इस योजना से जुड़े सड़क-मार्ग के साथ कुछ बड़े शहर लगते हैं जैसे बंगलूरु, अहमदाबाद, जयपुर, भुवनेश्वर, कानपुर, पुणे, सूरत, नैलूर, विजयवाड़ा तथा गंटूर। इस सुनहरी चतुर्भुज की लंबाई 5846 कि०मी० है तथा इसके अंतर्गत चार तथा छः मार्गी ऐक्सप्रेस हाईवे बनाए गए हैं। इस चतुर्भुज का शाहमार्ग देश के 13 राज्यों में से निकलता है तथा सबसे अधिक हिस्सा आंध्र प्रदेश में है तथा सबसे कम हिस्सा दिल्ली में पड़ता है।

प्रश्न 3.
भारतीय रेलवे नीति के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ? लिखो ?
उत्तर-
भारतीय रेलवे नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. रेलवे मार्गों की लंबाई बढ़ाना।
  2. गेज का परिवर्तन भाव सौड़ी मीटर गेज को चौड़ी लाइन में बदलता।
  3. रेल मार्ग का बिजलीकरण करना।
  4. रेल प्रबंध की कार्य कुशलता में सुधार करना।
  5. पुराने भाप के इंजनों तथा डीज़ल इंजनों को बदल कर बिजली इंजन प्रयोग में लाने।
  6. सिगनल संचार तकनीक को सुधारना।
  7. मुसाफ़िरों के लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करवाना।
  8. यात्री किराया में स्थिरता लाना।
  9. ऊंची रफ़्तार की गाड़ियों को चलाना।
  10. रेलवे कार्य के लिए कंप्यूटर प्रयोग में लाना।

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प्रश्न 4.
भारतीय रेलवे जोनों पर नोट लिखो।
उत्तर-
स्वतन्त्रता के पश्चात् भारतीय रेल प्रबंध को भारतीय रेलवे बोर्ड ने 6 जोनों में विभाजित किया था जो थेउत्तरी खंड, पश्चिमी खंड, पूर्वी खंड, मध्यम खंड, दक्षिणी खंड तथा उत्तर-पूर्वी खंड परंतु बाद में सन् 1958 से 1960 तक तीन अन्य खंड बना दिए गए जिस के साथ रेलवे के कुल 9 जोन बन गए तथा लगभग तीन दहाकों के पश्चात् रेलवे में अब 18 जोन हैं, जो ये हैंक्रम संख्या

रेलवे जोन — मुख्यालय

  1. उत्तरी रेलवे — नई दिल्ली
  2. उत्तर-पूर्वी रेलवे — गोरखपुर
  3. उत्तर-पूर्वी फ्रंटीयर — मालीगाऊ (गुवाहाटी)
  4. पूर्वी रेलवे — कोलकाता
  5. दक्षिणी-पूर्वी रेलवे — बिलासपुर
  6. दक्षिणी-मध्यम रेलवे — सिकंद्राबाद
  7. दक्षिणी रेलवे — चेन्नई
  8. मध्य रेलवे — मुंबई
  9. पश्चिमी रेलवे — मुंबई
  10. दक्षिणी-पश्चिमी रेलवे — हुँबली
  11. उत्तर-पश्चिमी रेलवे — जयपुर
  12. पश्चिमी-मध्यम रेलवे — जबलपुर
  13. उत्तरी-मध्यम रेलवे  – इलाहाबाद
  14. दक्षिणी-पूर्वी मध्यम रेलवे — बिलासपुर
  15. पूर्वी तटवर्ती — भुवनेश्वर
  16. पूर्वी रेलवे मध्यम रेलवे — हाजीपुर  मध्यम रेलवे
  17. कोंकण रेलवे — नई दिल्ली
  18. मैट्रो रेलवे — कोलकाताइलाहाबाद

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार क्या हो सकते हैं ? भारत की दरामद तथा बरामद पर नोट लिखो।
उत्तर-
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार-

  • प्राकृतिक साधनों के अस्तित्व में फर्क।
  • मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  • तकनीकी विकास में अंतर।
  • जलवायु तथा आर्थिक विकास में अंतर।
  • व्यापारिक देशों की जंग तथा अमन के हालात।
  • व्यापारिक नीतियां तथा देशों के बीच आपसी राजनीतिक संबंध

भारत की दरामद तथा बरामद-भारत में उत्पादन किया गया फालतू सामान बेच दिया जाता है तथा जिसकी आवश्यकता होती है वह सामान खरीद लिया जाता है जो सामान बेचा जाता है उसको बरामद तथा जो सामान खरीदा जाता है उसे दरामद कहते हैं। भारत खनिज ईंधन, खनिज तेल, मोम, जैविक रसायन, फार्मेसी उत्पादन, गेहूं से बनी वस्तुएं, अनाज, बिजली की मशीनरी, कपास से सूती कपड़ा, प्लास्टिक/कहवा, मसाले इत्यादि का बरामद करता है तथा पैट्रोल, खनिज, मशीनरी, खाद्य, लोहा तथा इस्पात, मोती तथा कीमती पत्थर, सोना तथा चांदी, रसायन, दवाइयां फाईबर इत्यादि दरामद की जाती हैं।

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प्रश्न 6.
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों तथा प्रमुख बंदरगाहों के नाम लिखो।
उत्तर-
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे-भारत के प्रमुख हवाई अड्डे निम्नलिखित हैं-
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भारतीय बंदरगाहें-कांडला, पोरबंदर, सूरत, पणजी, मर्मागाओ, मंगलौर, कोची, तूतीकोरन, नागापट्नम, चेन्नई, ईनौर, मछलीपटनम, काकीनाड़ा, विशाखापटनम, पाराद्वीप, हलदिया प्रमुख बंदरगाहें हैं।

प्रश्न 7.
व्यक्तिगत संचार तथा जन संचार की आपसी तुलना करो।
उत्तर-
व्यक्तिगत संचार –

  1. जब दो व्यक्ति या दो से अधिक व्यक्ति आमने सामने होकर किसी साधन की सहायता के साथ अपनी भावनाओं, विचारों तथा संदेशों को बांटना व्यक्तिगत संचार कहलाता है।
  2. ऐसे संचार में दोनों पक्ष एक दूसरे से परिचित होते हैं।
  3. इसमें कुछ साधनों का प्रयोग किया जाता है जैसे- डाक सेवाएं, ई-मेल, फैक्स, टैलीफोन, कोरियर, कंप्यूटर इत्यादि।

जन संचार-

  1. जब कोई संदेश एक बड़ी गिनती में लोगों के साथ बाँटा जाता है उसको जन संचार कहते हैं।
  2. संचार पक्ष में शामिल लोग एक-दूसरे से परिचित नहीं होते।
  3. जन संचार में कुछ साधन प्रयोग किए जाते हैं जैसे-जनतक ऐलान, रेडियो, टी०वी०, सिनेमा,अख़बार, सैटेलाईट, इंटरनैट संचार इत्यादि।

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प्रश्न 8.
कांडला-बठिंडा पाइप लाइन पर नोट लिखो।
उत्तर-
कांडला-बठिंडा पाइप लाइन ऑयल कार्पोरेशन (IOC) की ओर बठिंडा के तेल शोधक कारखाने को कच्चा तेल पहुँचाने के लिए 1443 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन 2392 करोड़ रुपए खर्च कर बिछाने की योजना बनाई गई थी। इस योजना का पहला चरण जो कांडला से सागानौर तक था। 1996 में पूरा हो गया तथा मई 1996 में सागानोर से पानीपत तथा जून 1996 में पानीपत से बठिंडा तक का चरण पूरा कर दिया गया था। इस प्रकल्प का अगला चरण शुरू कर दिया गया जो कि चल रहा है। यह बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर गैस पाइप लाइन बिछाने का है। इस प्रकल्प के पूरा होने से जम्मू तथा कश्मीर को हर समय रसोई गैस की सप्लाई मिल सकेगी। इसलिए यह प्रकल्प जम्मू कश्मीर सूबे के लिए विशेष महत्त्व रखता है।

प्रश्न 9.
भारतीय राष्ट्रीय जल मार्गों पर नोट लिखो।
उत्तर-
भारतीय राष्ट्रीय जल मार्ग-भारत में 10 मार्गों को राष्ट्रीय जल-मार्ग का दर्जा हासिल है। यह हैं-

  1. गंगा, हल्दिया तथा इलाहाबाद के बीच।
  2. ब्रह्मपुत्र, सेतिया तथा युबड़ी के बीच।
  3. पश्चिमी उटी नहर, कोल्लम से कोटापुर्म के बीच।
  4. केरल में चंपाकारा नहर के साथ का क्षेत्र।
  5. केरल में उद्योगमंडल नहर के साथ का क्षेत्र।
  6. ब्रह्मनी नदी तलचर से धर्मरा तक।
  7. काकीनाड़ा से पांडिचेरी तक।
  8. गोदावरी नदी में भदराचलम से राजामुंदरी तक।
  9. कृष्णा नदी में वज़ीरावाद से विजयवाड़ा तक।
  10. लखीमपुर से भंग तक।

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प्रश्न 10.
भारतीय वायु यातायात से पहचान करवाओ।
उत्तर-
भारत जैसे बड़े तथा घनी जनसंख्या वाले देश के लिए वायु यातायात का बहुत महत्त्व है। भारत में वायु यातायात का आरंभ 1911 के साल में हुआ जब इलाहाबाद से लेकर नैनी तक, 10 कि०मी० की दूरी के साथ वायु डाक सेवा का प्रयोग किया गया था। इसके बाद कई वायु अड्डे भी बनाये गए तथा फलाईंग क्लब भी बनाए गए जिसके साथ वायु यातायात को प्रोत्साहन मिला। देश की आज़ादी के बाद तथा विभाजन समय (1947) भारत में चार वायु सेवाएं हैं-टाटा सन्ज लिमिटेड, इण्डियन नैशनल एयरवेज़, एयर सर्विसज़ आफ इंडिया तथा डैकन एयरवेज तथा 1951 में चार कंपनियां भारत में वायु सेवाएं लाने के काम में जुट गई। बाद में इन कंपनियों की मलकियत सरकार ने अपने हाथों में ले ली तथा दो कार्पोरेशनें बना दीं। एयर इंडिया जो अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए थी तथा दूसरी इण्डियन एयर लाइन्ज़ घरेलु उड़ानों के लिए थी।

प्रश्न 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 20 पंक्तियों में दो :

प्रश्न 1.
भारत की अलग-अलग सड़क योजनाओं से पहचान करवाओ।
उत्तर-
किसी भी देश में सड़कों के लिए विशेष स्थान होता है। लोगों तथा समान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए सड़कों का ही प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा सड़क यातायात अन्य यातायात के साधनों से सबसे सस्ता है। सड़क मार्गों का जाल फैलाने के लिए कई सड़क योजनाओं को बनाया गया है। जैसे-

1. नागपुर योजना (Nagpur Plan)-यह योजना भारत में सड़कों के प्रसार के लिए 1943 में बनाई गई थी।
इस योजना के अधीन देश की मुख्य सड़कों तथा आम सड़कों तथा अन्य सड़कों की लंबाई भी बढ़ती गई।

2. बीस वर्षीय योजना (Twenty Year Plan)-इस योजना की शुरुआत 1961 में हुई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में सड़कों की कुल लंबाई 6 लाख 56 हजार किलोमीटर से बढ़ाकर 10 लाख 60 हज़ार किलोमीटर तक करना था तथा सड़क घनत्व भी प्रति 100 कि०मी० रकबे में 32 कि०मी० करना था। इस योजना को पूरा करने के लिए 20 सालों का समय तय किया गया।

3. ग्रामीण सड़क योजना (The Rural Road Development Plan)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सड़कों का विकास करके कम-से-कम 1500 व्यक्तियों की तथा इससे अधिक आबादी वाले गाँवों को आपस में सड़क मार्गों के साथ जोड़ना था। यह सड़कें इस तरह बनाई जाती हैं कि मौसमी कठिनाइयों को सहन कर सके।

4. बी०ओ०टी० (निर्माण, उपयोग तथा हवाले करो) (Built, Operate and Transfer Scheme)-इस योजना में प्राइवेट बिल्डरों तथा ठेकेदारों को सड़कों तथा पुलों का निर्माण करने के लिए ठेके दिए गए थे तथा यह सहमति भी दी गई कि यह अपना निर्माण सड़क से जाने वाले वाहनों के चालकों से सीमित किए समय के लिए टोल टैक्स इकट्ठा करना तथा फिर सड़कों को सरकार के हवाले कर देना। यह योजना एक सफल योजना रही तथा देश के कई हिस्सों में इस योजना को सफलता हासिल हुई।

5. केंद्रीय सड़क फंड (Central Road Fund)-इस फंड के साथ संबंधित एक्ट दिसंबर 2000 में लागू किया गया था। इस एक्ट के अनुसार सड़कों का विकास पैट्रोल तथा डीज़ल पर लगे टैक्स तथा कस्टम कर को इकट्ठा करके किया जाएगा।

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प्रश्न 2.
नए राष्ट्रीय शाहमार्ग अंकण योजना पर विस्तार सहित नोट लिखो।
उत्तर-
राष्ट्रीय शाह मार्ग अंकण योजना एक नई अंकण योजना थी। भारत में यह मार्ग प्रबंध भारत सरकार की एजेन्सियों की तरफ से चलाया तथा संभाला गया है। राष्ट्रीय शाह मार्ग की लंबाई जून 2016 तक एक लाख 87 किलोमीटर थी। इनमें लगभग 26,200 किलोमीटर शाहमार्ग 4 मार्ग तथा बाकी 2 मार्ग हैं। केंद्रीय सरकार के तय किए उद्देश्य के मुताबिक सन् 2017 से हर रोज 30 कि०मी० शाह मार्ग विकसित किए जाए तथा नए विकास के लिए लुक तथा कोयले की बजाए सीमेंट का प्रयोग किया जाए। हाल ही में कई सड़क मार्गों को राष्ट्रीय मार्ग घोषित किया गया है। अब बड़े क्षेत्रों तथा शहरों के इधर-उधर बाईपास बनाये जा रहे हैं, ताकि शाह मार्गों पर यातायात का बहाव बिना रोक-टोक के निरंतर चलता रहे। इन शाहमार्ग का विकास तेजी से हो रहा है। 2004 से 2014 के समय में शाह मार्ग में सिर्फ 18,000 कि०मी० की वृद्धि हुई है।

भारतीय सड़क यातायात तथा हाईवेज़ मंत्रालय ने 28 अप्रैल, 2010 को एक नोटीफिकेशन निकाला तथा इसमें राष्ट्रीय शाहमार्ग को नए अंकों का प्रबंध दिया। यह नया नम्बर राष्ट्रीय शाहमार्ग के भौगोलिक क्षेत्र का ज्ञान हमें करवाता है। अब पूर्व से पश्चिम दिशा की तरफ जा रहे सारे शाहमार्ग का क्रम पहचान अंक टांक अंक हैं जिन की शुरुआत उत्तर में हो रही है तथा जैसे-जैसे हम दक्षिण दिशा की ओर जाते हैं क्रम अंक में वृद्धि होनी शुरू हो जाती है तथा जैसे ही विस्तार अंक में वृद्धि होगी, शाहमार्ग पहचान अंक कम होता चला जाएगा, विस्तार अंक के कम होने के साथ पहचान अंक में वृद्धि होगी।

उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय शाहमार्ग नंबर 1 जम्मू कश्मीर में है तथा नंबर 87 तमिलनाडु में है। अब इससे पता चलता है कि उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर जाते शाहमार्ग का क्रम पहचान अंक जिस्त है तथा इसकी शुरुआत पूर्व में होकर पश्चिम की ओर जाते समय बढ़ती है। जैसे ही लंबकार अंक कम होगा तब शाहमार्ग पहचान अंक के वृद्धि होगी तथा लंबकार अंक बढ़ेगा तो शाहमार्ग पहचान अंक कम हो जाएगा। जैसे कि राष्ट्रीय शाहमार्ग नंबर-2 उत्तर-पूर्वी राज्यों में पड़ता है तथा नंबर 68 राजस्थान से गुजरात की ओर जा रहा है।

राष्ट्रीय शाहमार्ग की एक और विशेषता यह है कि प्रमुख राष्ट्रीय शाहमार्गों का पहचान अंक एकहरा, दोहरा होता है परंतु उनमें निकल रहे अगले शाहमार्ग के पहचान अंक तीहरे होते हैं, भाव सैंकड़ों में होते हैं। जहाँ यह भी वर्णन योग्य है कि नई अंकण योजना में सिर्फ पुराने शाहमार्गों के अंक ही नहीं बदले गए, बल्कि मार्गों का सारा प्रबंध दुबारा से किया गया है, जैसे कि राष्ट्रीय शाहमार्ग नंबर 27 जो पोरबंदर से सिलचर तक है तथा पूर्व से पश्चिमी गलियारा है। कितने ही पुराने राष्ट्रीय शाहमार्ग को हर मार्ग आपस में जोड़ रहा है। आज के नये प्रबंध के अनुसार अब देश में 218 राष्ट्रीय शाहमार्ग हैं तथा 78 प्रमुख शाहमार्ग तथा 140 राष्ट्रीय मार्ग है जो शाह राज्यों में ही निकल रहे हैं। इन को ऑफ सूट हाईवेज कहा जाता है। इन ऑफ सूट हाईवेज की पहचान अंक सैंकड़ों में हुआ है तथा अधिक पहचान अंक का ईकाई अंक दिशा निर्धारण करता है, जैसे कि यह इकाई अंक टांक हैं, तो शाहमार्ग में निकला मार्ग भी पूर्व-पश्चिम दिशा में है तथा यह अंक इकाई है, जिस्त हैं तब शाहमार्ग में निकला मार्ग भी उत्तर-दक्षिण दिशा में है।

प्रश्न 3.
पार-महाद्वीपीय रेलवे जालों से पहचान करवाओ।
उत्तर-
पार-महाद्वीपीय रेलवे मार्ग लंबी दूरी तय करने वाले रेल मार्ग हैं। इन रेल-मार्गों का जाल ऐसा है जो कि महाद्वीप की सारी भूमि को पार करके दूसरे महासागर के साथ लगते महाद्वीप के सिरे तक पहुंच जाता है। पार-महाद्वीप रेल-मार्गों का इतिहास आज से तकरीबन 150 साल पुराना है। संसार की सबसे पहली रेल लाईन 1863 से 1869 के बीच अमेरिका में पसारी गई जो कि यू०एस०ए० में से गुजरती हुई अंध-महासागर के तट पर होती हुई प्रशांत महासागर तक 1776 मील का रास्ता तय करती थी। संसार में और भी कई पार-महाद्वीप रेल मार्गों का निर्माण हुआ है जो कि बहुत बड़ी संख्या में मुसाफिरों तथा माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए जाने गए। ट्रांस साइबेरियाई रेल मार्ग मास्को से रूस के पूर्व के तरफ वलादिवोस्तोक तक 9,289 किलोमीटर लंबा है तथा इसका निर्माण 1891 से 1916 तक के समय हुआ था। इस की कई शाखाएं हैं जो मास्को से इस मार्ग की सहायता के साथ चीन, मंगोलिया तथा उत्तरी कोरिया से जोड़ती हैं। इस मार्ग का विस्तार अभी भी चल रहा है।

कैनेडियन पैसेफिक रेल-मार्ग-रेलवे मार्ग की यह एक बहुत अच्छी उदाहरण हैं। यह रेल मार्ग कनाडा में पूर्वी भाग में हैलीफैक्स से चलकर पश्चिमी में बैन्कूवर तक पहुंचता है। यह रेल मार्ग दुर्ग पर्वत क्षेत्रों में से गुजरता है। इस रेल मार्ग से लकड़ी, खनिज पदार्थ, गेहूँ व लोहे का परिवहन होता है। इस मार्ग का निर्माण 1881 में शुरू किया गया तथा अभी तक इसका विस्तार हो रहा है।

पार ऑस्ट्रेलिया रेलवे मार्ग-यह रेलवे मार्ग पोर्ट ओगस्ता से लेकर कालगुरली तक फैला है। इसका काम 1917 में पूरा हो गया था यह रेल-मार्ग ऑस्ट्रेलिया के पूर्व से पश्चिमी सिरो को आपस में मिलाता है। ब्रिसबेन से बारस्ता सिडनी-मैलबोरन-ऐडिलेड इस मार्ग पथ तक पहुँचता है। इसके निर्माण के समय से ही इसमें तीन गेजों का उपयोग किया गया था जिस कारण इसकी शुरुआत तक का सफर सच हो गया। बाद में 1970 के साल में इसको एक रेलवे गेज में बदला गया। आज के समय सिडनी पथ के बीच वाले रेलवे मार्ग को इण्डिन पैसेफिक रूट कहते हैं।

पनामा कैनाल रेलवे-यह रेलवे मार्ग पनामा नहर के समांतर चलता है तथा मध्य अमेरिका में अंध महासागर के तट से प्रशांत महासागर के तट तक चली जाती है जो कि 77 कि०मी० तक लंबी है। अंध महासागर के शहर कोलेन से प्रशांत महासागर के शहर बल्लबरा तक का रेलवे मार्ग ज्यादा लंबा तो नहीं परंतु यह मार्ग विश्व के बड़े महासागरों को मिलाता है जिस कारण इसका महत्त्व काफी बढ़ गया है। यह रेल मार्ग मुसाफिरों तथा माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता है।

दक्षिणी अमेरिका में पार इण्डियन तथा पार ऐमेजीयन रेलवे प्रकल्प हैं। अफ्रीकन यूनियन ऑफ रेलवेज़ भी अफ्रीका में पार-महाद्वीपी रेल प्रकल्प बनाने की योजना बना रहे हैं।

भारत का रेलवे नैटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा नैटवर्क है, जो कि हर रोज 1 करोड़ 80 लाख यात्रियों को तथा 20 लाख टन माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाया जाता है। ऐसा विस्तृत रेल प्रबंध ही भारतीय रेलवे कहलाता हैं।

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प्रश्न 4.
देश की तेज रफ़्तार शाही गाड़ियों से पहचान करवाओ।
उत्तर-
रेल के द्वारा सफर बाकी यातायात के साधनों से सस्ता तथा अधिक आरामदायक होता है। भारत में रेल मार्गों का महत्त्व बढ़ रहा है क्योंकि देश में सफर को आसान बनाने के लिए तेज़ रफ़्तार गाड़ियों को चलाया जा रहा है। ताकि समय की बचत की जा सके। सरकार इस तरफ काफी मेहनत कर रही है देश में पहले ही कुछ तेज़ रफ़्तार गाड़ियां हैं। जिनमें से मुख्य हैं

  1. नयी दिल्ली-आगरा गतिमान ऐक्सप्रैस, रफ़्तार 160 कि०मी०/घंटा।
  2. नयी दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 91 कि०मी०/घंटा है।
  3. मुंबई-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 90.46 कि०मी०/घंटा है।
  4. सियालदा-नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रैस, इसकी रफ्तार 91.0 कि०मी० प्रति घंटा है।
  5. नयी दिल्ली-कानपुर शताब्दी एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 89.63 कि०मी०/घंटा है ।
  6. नयी दिल्ली-हावड़ा, दुरांतो एक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 88.21 कि०मी०/घंटा है।
  7. नयी दिल्ली-हावड़ा, दुरांतो ऐक्सप्रैस, इसकी रफ्तार 87.06 कि०मी०/घंटा है।
  8. नयी दिल्ली-इलाहाबाद, दुरांतो ऐक्सप्रैस, इसकी रफ़्तार 86.85 कि०मी०/घंटा है।
  9. सियालदा-नयी दिल्ली राजधानी ऐकस्प्रेस, इसकी रफ़्तार 87.06 कि०मी०/घंटा है।
  10. निजामुद्दीन-बांद्रा गरीब रथ, इसकी रफ्तार 82.80 कि०मी० प्रति घंटा।

तेज़ रेल गाड़ियों के अलग देश में रेल गाड़ी की एक और सहूलियत भी है जिसमें सफर शाही सुविधाओं से लैस होता है। इनको लग्ज़री गाड़ियां कहते हैं। इनका प्रबंध इण्डियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटड (IRCTC) द्वारा किया गया। कुछ शाही गाड़ियों की सूची निम्नलिखित है-

I. महाराजा ऐक्सप्रैस-यह ऐक्सप्रैस देश के सैलानी महत्त्व रखने वाले स्थानों की शाही सैर करवाती है।
II. पैलेस ऑन वहील्ज़-यह ऐक्सप्रैस राजस्थान के सबसे बढ़िया सैलानी स्थानों की शाही सैर करवाती है।
III. द डैकन उड़ीसी-यह ऐक्सप्रैस शाही ढंग से दक्षिणी भारत की सैर करवाती है।
IV. रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स-यह हमें भारत की संस्कृति की शाही यात्रा करवाती है।
V. रॉयल ओरिएंट ट्रेन-यह रेलवे हमें मध्य भारत की शाही सैर करवाती है।
VI. गोल्डन चैरीयट- यह रेल हमें महाराष्ट्र तथा गुजरात की शाही सैर करवाती है।
VII. फैरी कुईन ऐक्सप्रैस-यह हमें राजस्थान तथा अलवर तथा सरिसका की यात्रा करवाती है।

प्रश्न 5.
संसार के प्रमुख समुद्री मार्गों पर नोट लिखो।
उत्तर-
संसार में व्यापार का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के द्वारा किया जाता है। समुद्री जहाजों की सहायता से भारी तथा आवश्यक चीज़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है। यह स्थान बदली का एक सस्ता ढंग है। संसार में व्यापार अलग-अलग समुद्री मार्गों द्वारा किया जाता है तथा व्यापार के लिए छोटे मार्ग को चुना जाता है। संसार के प्रसिद्ध समुद्री मार्ग निम्नलिखित हैं-

1. उत्तरी अंध-महासागरीय मार्ग (North Atlantic Route)- यह समुद्री मार्ग विश्व में सबसे अधिक उपयोग किया जाता है तथा इसके द्वारा ही संसार का आधे से ज्यादा समुद्री व्यापार हो रहा है। इस क्षेत्र की मुख्य व्यापारिक बंदरगाहें हैं-रॉटरडैम, एंटवर्प, लंडन, बोस्टन, न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया हैं।

2. केप ऑफ़ गुड होप (Cape of Good Hope)-यह समुद्री मार्ग अमेरिका महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से से लेकर आशा अंतरीप हिस्से के आस-पास घूमता है।

3. भू-मध्य सागरीय स्वेज़ ऐशियाई मार्ग (The Mediterranean-SuejAsiatic Route)—यह मार्ग ऐशियाई तथा यूरोपीय देश को स्वेज़ नहर की सहायता से आपस में जोड़ता है।

4. पनामा नहर मार्ग (Panama Canal Route)-यह मार्ग अंध-महासागर तथा प्रशांत महासागर को आपस में मिलाता है तथा प्रशांत महासागर द्वार कहलाता है।

5. दक्षिणी अंध महासागरीय मार्ग (South Atlantic Route)-यूरोप के पश्चिमी देशों को अंध महासागर के रास्ते की सहायता के साथ दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी उटी क्षेत्रों से मिलाकर व्यापार का मौका दिया जाता है।

6. पार प्रशांत-मार्ग (The Transpacific Route)-इस मार्ग का मुख्य केंद्र हवाई टापू में स्थित है।

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Geography Guide for Class 12 PSEB परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार Important Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Objective Type Question Answers)

A. बहु-विकल्पी प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत में सबसे लंबा राष्ट्रीय महामार्ग कौन-सा है ?
(A) NH
(B) NHS
(C) NH
(D) NHA
उत्तर-
(C) NH

प्रश्न 2.
संसार में सबसे लंबा रेलमार्ग कौन-सा है ?
(A) यूनियन पैसिफ़िक
(B) कैनेडियन नैशनल
(C) ट्रांस साइबेरियन
(D) ट्रांस इण्डियन।
उत्तर-
(C) ट्रांस साइबेरियन

प्रश्न 3.
ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग के पूर्वी छोर पर स्थित स्टेशन है ?
(A) हनोई
(B) शंघाई
(C) टोकियो
(D) ब्लाडी वास्टेक।
उत्तर-
(D) ब्लाडी वास्टेक।

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प्रश्न 4.
भारतीय रेलवे सिस्टम को कितने रेलवे जोन में विभाजित किया है ?
(A) 9
(B) 16
(C) 14
(D) 12.
उत्तर-
(B) 16

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सी स्थल मार्ग यातायात की किस्म नहीं है :
(A) सड़कें
(B) रेलें
(C) पाइप लाइनें
(D) हवाई अड्डा।
उत्तर-
(C) पाइप लाइनें

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय मार्गों का निर्माण तथा देखभाल कौन करता है ?
(A) केंद्र सरकार
(B) ज़िला सरकार
(C) बी०ओ०टी०
(D) NHAY.
उत्तर-
(A) केंद्र सरकार

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प्रश्न 7.
यमुना एक्सप्रेस हाईवे किस के हवाले है ?
(A) नोएडा तथा आगरा
(B) आगरा तथा दिल्ली
(C) दिल्ली तथा हिमाचल
(D) दिल्ली तथा पंजाब।
उत्तर-
(A) नोएडा तथा आगरा

प्रश्न 8.
सुनहरी चतुर्भुज सड़क मार्ग प्रकल्प में निम्नलिखित महानगरी में किसको शामिल नहीं किया जाता ?
(A) दिल्ली
(B) मुंबई
(C) अहमदाबाद
(D) चेन्नई।
उत्तर-
(C) अहमदाबाद

प्रश्न 9.
भारत सरकार के सड़क यातायात मंत्रालय के 28 अप्रैल, 2010 के नोटिफिकेशन में राष्ट्रीय शाहमार्ग को क्या प्रदान किया गया ?
(A) नई सड़कें
(B) नए अंक
(C) नए मार्ग
(D) सड़कों की मुरम्मत।
उत्तर-
(B) नए अंक

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प्रश्न 10.
देश में पहली रेल यात्रा मुंबई से थाने तक की गई :
(A) 1853
(B) 1854
(C) 1865
(D) 1868.
उत्तर-
(A) 1853

प्रश्न 11.
दूसरी रेलवे लाइन जो कोलकाता से रानीगंज तक थी यह कब बिछाई गई ?
(A) 1853
(B) 1854
(C) 1870
(D) 1865.
उत्तर-
(B) 1854

प्रश्न 12.
1950-51 के अंत तक रेलवे लाइनों की लंबाई कितनी थी ?
(A) 53,596 कि०मी०
(B) 53,000 कि०मी०
(C) 58,000 कि०मी०
(D) 60,000 कि०मी० ।
उत्तर-
(A) 53,596 कि०मी०

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प्रश्न 13.
उत्तर पूर्वी रेलवे जोन का मुख्यालय कहां पर है ?
(A) गोरखपुर
(B) दिल्ली
(C) आगरा
(D) कोलकाता।
उत्तर-
(A) गोरखपुर

प्रश्न 14.
संसार की पहली रेलवे अमेरिका में कब बिछाई गई ?
(A) 1863 से 1869
(B) 1865-66
(C) 1870-75
(D) 1870-71.
उत्तर-
(A) 1863 से 1869

प्रश्न 15.
मध्य अमेरिका में कौन-सी नहर अंध-महासागर के तट तक जाती है ?
(A) पिली का
(B) पनामा
(C) राईन
(D) वूलर।
उत्तर-
(B) पनामा

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प्रश्न 16.
साल 2014 के बजट अनुसार देश में कितने अर्ध तेज रेल गलियारे स्थापित किये जाते थे ?
(A) 9
(B) 10
(C) 6
(D) 5.
उत्तर-
(A) 9

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन-सी लग्ज़री गाड़ी की उदाहरण नहीं है ?
(A) महाराजा ऐक्सप्रैस
(B) हावड़ा दुरांतो ऐक्सप्रेस
(C) पैलेस ऑन वहीक्लज़
(D) गोल्डन चैरीअट।
उत्तर-
(B) हावड़ा दुरांतो ऐक्सप्रेस

प्रश्न 18.
भारत में हवाई यातायात का प्रारंभ किस साल में हुआ ?
(A) 1910
(B) 1911
(C) 1921
(D) 1922.
उत्तर-
(B) 1911

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प्रश्न 19.
संचार की प्रमुख कितनी किस्में हैं ?
(A) 2
(B) 1
(C) 3
(D) 4.
उत्तर-
(A) 2

प्रश्न 20.
भारत निम्नलिखित में कौन-सी चीज़ों की दरामद नहीं करता ?
(A) पैट्रोल
(B) खनिज
(C) लोहा तथा इस्पात
(D) गेहूँ।
उत्तर-
(D) गेहूँ।

B. खाली स्थान भरें :

1. यातायात सुविधाओं को मुख्य रूप में …………. भागों में बांटा जाता है।
2. नागपुर योजना ………………… के साल में बनाई गई।
3. देश में यातायात का बहाव संभव बनाने के लिए . ……………. नाम से शाह मार्ग का निर्माण किया गया।
4. सन् 1871 तक तीन प्रमुख शहरों कोलकाता, ………………….. तथा …………………. रेल तंत्र द्वारा आपस में जोड़े गए।
5. भारतीय रेल तीन गेज चौड़ी, सौड़ी तथा ……………… गेज में बांटी जाती हैं।
6. एशिया तथा यूरोप के देशों को .. ……………. नहर की सहायता के साथ आपस में मिलाया गया।
उत्तर-

  1. तीन,
  2. 1943,
  3. एक्सप्रेस हाईवेज,
  4. मुंबई, चेन्नई,
  5. मीटर,
  6. स्वेज।

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C. निम्नलिखित कथन सही (√) हैं या गलत (x):

1. बीस वर्षीय योजना 1961 में आरंभ की गई।
2. पूर्व पश्चिमी गलियारा राजस्थान से पोरबंदर तक है।
3. सुनहरी चतुर्भुज दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी सड़क योजना है।
4. देश में रेल-तंत्र विकसित करने का एक उद्देश्य था सिगनल संचार तकनीक में सुधार करना।
5. गोल्डन चैरीअट महाराष्ट्र और गुजरात की शाही सैर करवाती है।
उत्तर-

  1. सही
  2. गलत,
  3. सही,
  4. सही,
  5. सही।

II. एक शब्द /एक पंक्ति वाले प्रश्नोत्तर (One Word/Line Question Answers) :

प्रश्न 1.
ट्रशरी व्यवसाय क्या है ?
उत्तर-
जो सेवाएं प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2.
परिवहन साधनों के तीन प्रकार बताएं।
उत्तर-
जल-मार्ग, थल मार्ग, हवाई-मार्ग।

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प्रश्न 3.
भारतीय सड़क मार्ग की लंबाई बताओ।
उत्तर-
18 लाख कि०मी०।

प्रश्न 4.
स्वर्ण चतुर्भुज से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
राष्ट्रीय मार्गों का जाल जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता को जोड़ता है।

प्रश्न 5.
ट्रांस साईबेरियन रेलमार्ग कौन-से स्थानों को जोड़ता है ?
उत्तर-
वलादिवोस्तक और सेंट पीटरसबर्ग।

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प्रश्न 6.
संसार में सबसे लंबा रेलमार्ग कौन-सा है ?
उत्तर-
ट्रांस साईबेरियन रेलमार्ग 8800 कि०मी० लंबा है।

प्रश्न 7.
भारत में रेलमार्गों की कुल लंबाई बताओ।
उत्तर-
63000 कि०मी०।

प्रश्न 8.
संसार के दो अंदरूनी जलमार्गों के नाम बताओ।
उत्तर-
राइन नदी और महान झीलें।

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प्रश्न 9.
अंध-महासागर पर दो बंदरगाहें बताओ।
उत्तर-
लंदन और न्यूयार्क।

प्रश्न 10.
स्वेज नहर किन सागरों को जोड़ती है ?
उत्तर-
लाल सागर और रूम सागर।

प्रश्न 11.
पनामा नहर किन सागरों को जोड़ती है ?
उत्तर-
अंध महासागर और प्रशांत महासागर।

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प्रश्न 12.
भारत के पश्चिमी तट पर दो बंदरगाहों के नाम बताओ।
उत्तर-
कांडला और मुंबई।

प्रश्न 13.
थल-मार्ग के यातायात प्रबंध की तीन किस्में बताओ।
उत्तर-
सड़कें, पाइप लाइन और रेल।

प्रश्न 14.
पहली रेल यात्रा कब और कहाँ तक की गई ?
उत्तर-
1853 में मुंबई से थाने तक।

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प्रश्न 15.
लग्ज़री गाड़ियों का प्रबंध किसके अधीन है ?
उत्तर-
भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कार्पोरेशन लिमिटेड।

प्रश्न 16.
राष्ट्रीय यातायात नीति कमेटी के अनुसार कितने जल मार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग ऐलान किया गया ?
उत्तर-
10 जल मार्गों को।

प्रश्न 17.
ऐयरपोर्ट्स अथारिटी ऑफ इण्डिया की ओर से दी जाने वाली जानकारी/सूचना के अनुसार कितने अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डे हैं ?
उत्तर-
30 अंतर्राष्ट्रीय और 400 घरेलू हवाई अड्डे हैं।

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प्रश्न 18.
संसार में सबसे लंबी कच्चे तेल की पाइप लाइन कहाँ बिछाई गई ?
उत्तर-
उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 19.
TAPI पाइप लाइन किस ओर से विकसित की गई ?
उत्तर-
एशियाई विकास बैंक।

प्रश्न 20.
संचार की मुख्य किस्में बताओ।
उत्तर-
व्यक्तिगत और जन-संचार।

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प्रश्न 21.
व्यापार से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
वस्तुओं और सेवाओं की खरीदो-फरोख्त की क्रिया को व्यापार कहा जाता है।

प्रश्न 22.
भारत की ओर से बरामद की जाने वाली वस्तुओं के नाम बताओ।
उत्तर-
खनिज तेल, मोम, ईंधन, जैविक रसायन, फार्मेसी, उत्पादन, कनक/गेहूँ से बनी वस्तुएँ।

प्रश्न 23.
भारत की मुख्य चार बंदरगाहों के नाम बताओ।
उत्तर-
मैंगलोर, कोची, सूरत, पणजी।

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प्रश्न 24.
आलमी व्यापार संगठन क्या है ?
उत्तर-
यह एक अंतर-सरकारी संस्था है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को क्रमबद्ध करती है और अलग-अलग देशों के मध्य व्यापारिक नियमावली निश्चित करती है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
यातायात सविधाओं को कौन-से वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है ?
उत्तर-
यातायात सुविधाओं को निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है-

  1. स्थल मार्ग यातायात
  2. जल मार्ग यातायात
  3. वायु मार्ग यातायात।

प्रश्न 2.
यातायात के साधन कौन-से ज़रूरी तत्त्वों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
यातायात के साधन के विकास में कई तत्त्वों का योगदान रहता है। यातायात मार्ग का निर्धारण आवश्यक है। वाहन तथा ऊर्जा के साधन परिवहन मार्गों पर प्रभाव डालते हैं। स्थल आकृति, मौसम परिवहन साधनों को प्रभावित करते हैं। आर्थिक विकास में कच्चे माल की प्राप्ति परिवहन के लिए आवश्यक तत्त्व है।

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प्रश्न 3.
अंतर-महाद्वीपी रेल-मार्ग किसे कहते हैं ? उदाहरण दो।
उत्तर-
अंतर महाद्वीपीय रेल-मार्ग उन रेल मार्गों को कहते हैं जो महाद्वीप के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ते हैं। यह रेल-मार्ग महाद्वीप के उल्ट तटों पर स्थित स्थानों को जोड़ते हैं। ट्रांस साइबेरियाई रेल-मार्ग तथा ट्रांस कैनेडियन रेल मार्ग इसकी दो उदाहरण हैं।

प्रश्न 4.
रेलमार्ग किन हिस्सों में बनाये जाते हैं ?
उत्तर-

  • रेलमार्ग हमेशा मैदानी समतल हिस्सों में बनाये जाते हैं।
  • रेल मार्ग हमेशा घनी जनसंख्या वाले प्रदेशों तथा आर्थिक रूप में विकसित प्रदेशों में बनाये जाते हैं।
  • बंदरगाहों को देश के आंतरिक हिस्सों से जोड़ने के लिए रेलमार्गों का निर्माण किया जाता है।

प्रश्न 5.
भारत के सीमावर्ती सड़क मार्ग बताओ।
उत्तर-
भारत के सीमावर्ती प्रदेशों में सड़कों का निर्माण करने के लिए सीमा सड़क बोर्ड की सन् 1960 में स्थापना की गई। भारत में सीमा निकट प्रदेशों में 27,000 कि०मी० लंबी पक्की सड़कें बनाई गई हैं। जिन में मनाली से लेह तक मुख्य सड़क है। इस सड़क की औसत ऊंचाई 4270 मीटर है।

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प्रश्न 6.
संसार के मुख्य समुद्री मार्गों का महत्त्व बताओ।
उत्तर-
यातायात के साधनों में समुद्री यातायात सबसे सस्ता तथा महत्त्वपूर्ण साधन है। संसार का अधिकतर व्यापार समुद्री मार्ग के द्वारा होता है। जब बहुत सारे जहाज एक निश्चित मार्गों पर चलते हैं, तब उसे समुद्री मार्ग कहते हैं।

प्रश्न 7.
भारतीय रेल-मार्गों की अलग-अलग आकार की पटरियां बताओ।
उत्तर-
भारत में रेल मार्ग तीन तरह के हैं:

  1. चौड़ी पटरी (Broad Gauge)-1.68 मीटर चौड़ी।
  2. छोटी पटरी (Metre Gauge)-1 मीटर चौड़ाई।
  3. तंग पटरी (Narrow Gauge)-0.68 मीटर चौड़ाई।

प्रश्न 8.
पनामा नहर की महत्ता बताओ।
उत्तर-
इस नहर के निर्माण के साथ अंध-महासागर के मध्य दूरी कम हो गई है। इससे पहले जहाज़ दक्षिणी अमेरिका के केप हारन का चक्कर ला कर जाते हैं। इस नहर से सबसे अधिक लाभ संयुक्त राज्य अमेरिका को हुआ है। इसके पश्चिमी तथा पूर्वी तटों के मध्य दूरी कम हो गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वीतट से आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिणी अमेरिका, जापान की बंदरगाहों की दूरी कम हो गई है। इस नहर द्वारा यूरोप को कोई विशेष लाभ नहीं है।

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प्रश्न 9.
HBJ गैस पाइप लाइन का वर्णन करो।
उत्तर-
भारत में गैस परिवहन के लिए हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप लाइन बनाई गई है। यह पाइप लाइन 1700 किलोमीटर लंबी है। यह पाइप लाइन गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश राज्यों से गुजरती है। इस गैस के साथ विजयपुर, सवाई माधोपुर, जगदीशपुर, शाहजहांपुर, अंबाला तथा बबराला में खाद बनाने की योजना है।

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत संचार से आपका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
जब दो या दो से ज्यादा व्यक्ति आमने-सामने होकर या किसी साधन का उपयोग करके कोई जानकारी, विचार संदेश आपस में आदान-प्रदान करें उसे व्यक्तिगत संचार कहते हैं। ऐसे संचार के साधनों में व्यक्ति आपस में एक-दूसरे से पहचान करवाते हैं। मुख्य साधन हैं-डाक सेवाएं, टैलीफोन, ई-मेल इत्यादि।

प्रश्न 11.
राष्ट्रीय व्यापार के कोई चार आधार लिखो।
उत्तर-
राष्ट्रीय व्यापार के आधार निम्नलिखित हैं-

  • मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  • प्राकृतिक साधनों के अस्तित्व में अंतर।
  • माल के मूल्यों में अंतर।
  • व्यापारिक नीतियां।

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प्रश्न 12.
आलमी व्यापार संगठन (World Trade Organization) क्या हैं ?
उत्तर-
आलमी व्यापार संगठन पहली बार जनवरी, 1995 को मराकेश समझौते द्वारा अस्तित्व में आया। जिस में संसार के 123 देशों ने हस्ताक्षर किए तथा शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौता (General Agreement on Tarrifism and Trade) का अंत कर दिया। इस संगठन का मुख्य दफ्तर जनेवा में है। खासकर व्यापारिक मसलों का समाधान तथा नियमों को लागू इस द्वारा ही किया जाता है। यह संगठन आलमी व्यापार स्तर को सुधार से राष्ट्रीय व्यापार को ज्यादा महत्त्वपूर्ण बना रहा है।

प्रश्न 13.
NNB पाइप लाइन का वर्णन करो।
उत्तर-
NNB नाहरकटिया नानूमती बरोनी पाइप लाइन देश की पहली पाइप लाइन है जो कि नाहरकटिया के तेल के कुओं से नानूमती तक कच्चा तेल पहुँचाने के लिए बिछाई गई थी तथा बाद में यह पाइप लाइन बरोनी तक बढ़ा दी गई। इसकी लंबाई 1167 कि०मी० है तथा अब इसको उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर तक बढ़ा दिया गया है। इस NNB पाइप लाइन का काम 1962 तक शुरू हो गया था जब तक कि बरोनी तक का भाग 1964 में शुरू किया गया।

प्रश्न 14.
उत्तरी अंध महासागरी मार्ग पर नोट लिखो।
उत्तर-
यह संसार के प्रमुख समुद्री मार्गों में एक है। यह जल-मार्ग संसार का सबसे अधिक उपयोग में आने वाला जल मार्ग है। इस जल मार्ग के द्वारा आधे से अधिक समुद्री व्यापार किया जा रहा है। उत्तरी अंध महासागर मार्ग की प्रमुख बंदरगाहें हैं-रॉटरडैम, फिलाडेल्फिया, ऐंटवर्प, लंदन, न्यूयॉर्क, बोस्टन इत्यादि हैं।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

प्रश्न 15.
जल-मार्गी यातायात को कौन-से दो भागों में विभाजित किया जाता है ?
उत्तर-
जल मार्गी यातायात को मुख्य रूप में दो भागों में विभाजित किया जाता है :

  1. आंतरिक जल मार्ग
  2. समुद्री जल मार्ग।

प्रश्न 16.
सड़क मार्गों का जाल बिछाने के लिए कौन-सी योजनाएं देश में चल रही हैं ?
उत्तर-
सड़क मार्गों का जाल बिछाने के लिए मुख्य योजनाएं हैं :

  • नागपुर योजना
  • बीस वर्षीय योजना
  • ग्रामीण सड़क योजना
  • बी०ओ०टी०
  • केंद्रीय सड़क फंड।

प्रश्न 17.
सड़क यातायात आसान क्यों है ?
उत्तर-
स्थल यातायात का मुख्य साधन सड़कें हैं। यह एक सस्ता तथा तेज़ यातायात का साधन है। सड़कें खेतों को फैक्ट्रियों के साथ तथा वस्तुओं को विक्रेताओं तथा खरीददारों तक पहुँचाने का एक साधन है। सड़कें असमतल तथा ऊँचे-नीचे स्थानों पर भी बनाई जा सकती हैं। घनी यूरोपीय सड़कें उन देशों के विकास का एक मुख्य साधन हैं।

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प्रश्न 18.
पनामा नहर की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
पनामा नहर-

  1. यह पनामा के स्थान पर स्थित है तथा U.S.A. का इस पर अधिकार है।
  2. इस नहर से निकलने वाले जहाजों पर टैक्स कम लगाया जाता है।
  3. इसके कारण अंध महासागर तथा प्रशांत महासागर के बीच दूरी कम हो गई।
  4. यह नहर संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि इस कारण अब जहाजों को केप होरन तक नहीं जाना पड़ता।

प्रश्न 19.
सड़क मार्गों के क्या दोष हैं ?
उत्तर-

  1. सड़क मार्ग महंगे हैं।
  2. इनसे वायु प्रदूषण होता है।
  3. अधिक दूरी तक भारी वस्तुओं का परिवहन नहीं होता।
  4. दुर्घटनाएं प्रतिदिन बढ़ रही हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
परिवहन के विभिन्न साधनों के प्रकार बताओ।
उत्तर-
परिवहन के विभिन्न साधनों के प्रकार हैं-

  1. स्थल परिवहन
  2. जल परिवहन
  3. वायु परिवहन।

स्थल परिवहन में सड़कें, रेलें तथा पाइप लाइनें शामिल हैं। जल परिवहन के मुख्य रूप हैं-

  1. आंतरिक मार्ग
  2. समुद्री मार्ग।

वायु परिवहन में वायुयान सेवाएं गिनी जाती हैं।

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प्रश्न 2.
ग्रामीण सड़कें तथा ज़िला सड़कों में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर-
ग्रामीण सड़कें-

  1. यह सड़कें गाँव को जिले से जोड़ती हैं।
  2. ग्रामीण सड़कें अकसर समतल तथा स्थाई नहीं होती।
  3. इन सड़कों में काफी मोड़ आते हैं जिन पर भारी वाहन नहीं चल सकते।

जिला सड़कें-

  1. यह सड़कें कस्बे, बड़े गांवों तथा जिला केंद्रों को आपस में जोड़ती हैं।
  2. यह सड़कें अकसर स्थाई होती हैं।
  3. यहां पर मोड़ ज्यादा नहीं होते तथा अक्सर भारी वाहन चलते हैं।

प्रश्न 3.
भारतीय सड़कों की मुख्य विशेषताएं बताओ।
उत्तर-
भारतीय सड़कों की विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • भारत में पक्की सड़कों की लंबाई 8 लाख 88 हजार कि०मी० है।
  • भारत में कच्ची सड़कों की लंबाई 9 लाख 55 हजार कि०मी० है।
  • भारत में हर 100 वर्ग किलोमीटर के पीछे 48 किलोमीटर सड़कें हैं जहां पर हर एक लाख लोगों के पीछे 293 किलोमीटर सड़कें हैं।
  • देश में राष्ट्रीय राज मार्गों की लंबाई 313558 किलोमीटर है।
  • इन सड़कों पर लगभग 37 लाख मोटर गाड़ियां चलती हैं।
  • भारतीय सड़कों को हर साल ₹ 1580 करोड़ की आमदन होती है।
  • भारत का 30% सामान सड़कों के द्वारा परिवहन किया जाता है।

प्रश्न 4.
रेल मार्गों के विकास का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
स्थलीय परिवहन में रेल-मार्ग एक महत्त्वपूर्ण साधन है। आधुनिक युग में देश में आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक दृष्टि से रेलों का बड़ा महत्त्व है।
महत्त्व-

  1. रेल-मार्ग किसी क्षेत्र के खनिज पदार्थों के विकास में सहायता करते हैं।
  2. रेल मार्ग औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल तथा तैयार माल के वितरण में सहायता करते हैं।
  3. रेल मार्ग व्यापार को उन्नत करते हैं।
  4. रेल मार्ग राजनीतिक एकता व स्थिरता लाने में योगदान देते हैं।
  5. रेल मार्ग संकट काल में सहायता कार्यों में महत्त्वपूर्ण हैं।
  6. कम जनसंख्या वाले प्रदेशों में रेलमार्ग-जनसंख्या वृद्धि का आधार बनते हैं।
  7. लंबी-लंबी दूरियों को जोड़ने में रेलों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वास्तव में रेल मार्गों के विकास में मानव ने दूरी और समय पर विजय प्राप्त कर ली है।

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प्रश्न 5.
आंतरिक जल मार्गों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
जल मार्ग दो प्रकार के हैं-आंतरिक तथा महासागरी मार्ग। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री मार्गों का प्रयोग किया जाता है। किसी देश के प्रादेशिक व्यापार के लिए नदियां, नहरें, झीलों का आंतरिक जलमार्गों के रूप में प्रयोग किया जाता है। __मनुष्य प्राचीन काल से ही नदियों तथा नहरों का यातायात के लिए प्रयोग करता आया है। आजकल विकसित देशों में आंतरिक जल मार्गों को बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। कृषि तथा उद्योगों के विकास में आंतरिक जल मार्ग महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 6.
गोल्डन कुआर्डीलेटरल या सुनहरी चतुर्भुज से आपका क्या भाव है ?
उत्तर-
गोल्डन कुआर्डीलेटर भारत में बनाई गई पहली सड़क निर्माण योजना है जो कि राष्ट्रीय शाहमार्ग विकास प्रकल्प के तहत शुरू की गई। इसको संसार की पाँचवीं बड़ी सड़क निर्माण योजना का दर्जा हासिल है। इस प्रकल्प में भारत के चार प्रसिद्ध महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को आपस में मिलाये जाने की योजना है जोकि एक चतुर्भुज की आकृति लेती है जिस के कारण इसको सुनहरी चतुर्भुज भी कहते हैं। इस सड़क योजना से जुड़े बड़े शहर हैं-अहमदाबाद, बैंगलोर, भुवनेश्वर, जयपुर, कानपुर, पुणे, सूरत, नैलूर, विजयवाड़ा तथा गंटूर। इस चतुर्भुज की कुल लंबाई 5846 किलोमीटर है तथा इसके अधीन चार तथा छः मार्गी ऐक्सप्रेस हाईवे निर्मित किए गए हैं। इस योजना का शाहमार्ग देश 13 राज्यों में से गुजरता है तथा इन 13 राज्यों में आन्ध्र प्रदेश में सबसे अधिक तथा दिल्ली में सबसे कम भाग पड़ता है। इस प्रकल्प के कारण औद्योगिक व्यापार को प्रोत्साहन मिला है।

प्रश्न 7.
डाइमंड कुआर्डिलेटरल का वर्णन करो।
उत्तर-
डाइमंड कुआर्डिलेटरल भारत के प्रसिद्ध महानगरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई) को आपस में तेज रफ़्तार से चलने वाली रेल गाड़ियों के साथ जोड़ने की योजना को कहते हैं। यह सड़क योजना सुनहरी चतुर्भुज जैसी ही है। देश के रेल तंत्र को आरामदायक बनाने तथा इसमें सुधार लाने के लिए तेज रफ्तार रेल गाड़ियों तथा बुलेट ट्रेन जैसी गाड़ियों को चलाया गया जिस प्रकल्प में यह रेल गाड़ियां चलाई गई, उसको डायमंड कुआर्डीलेटरल प्रकल्प कहते हैं। इस रेल मार्ग द्वारा कई बड़े शहर आपस में जुड़ गए जैसे-उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, बिहार, उड़ीसा, झारखण्ड तथा पश्चिमी बंगाल इत्यादि राज्यों में से गुजरते हैं। यहाँ बिजली की सुविधा भी है क्योंकि यह मार्ग चौड़ी गेज वाले हैं। इन रेलों की रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटा की होगी जब कि रेल गाड़ियों 320 कि०मी० प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।

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प्रश्न 8.
समुद्री मार्गों की महत्ता बताओ।
उत्तर-
यातायात के साधनों में समुद्री यातायात सबसे सस्ता तथा महत्त्वपूर्ण साधन है। विश्व का ज्यादातर व्यापार समुद्री मार्गों द्वारा होता है। जब बहुत सारे जहाज़ एक निश्चित मार्ग से चलते हैं तब उसे समुद्री मार्ग कहते हैं।

समुद्री मार्गों की महत्ता (Importance of Ocean Routes)-

  • यह सबसे सस्ता यातायात का साधन है।
  • यह प्राकृतिक मार्ग है। समुद्र में मार्ग बनाने में कुछ खर्च नहीं होता।
  • जहाजों को चलाने के लिए कोयला या पैट्रोल कम खर्च होता है।
  • समुद्री मार्ग असल में अंतर्राष्ट्रीय मार्ग हैं, क्योंकि सारे महासागर एक-दूसरे से मिले हैं।
  • ‘इन मार्गों पर जहाजों की कम दुर्घटना होती है।
  • इन मार्गों द्वारा दूर-दूर के देशों के आपसी सम्पर्क बढ़े हैं।
  • इन मार्गों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती हैं।

प्रश्न 9.
जन संचार के साधनों का वर्णन करो।
उत्तर-
जब हम बडी गिनती में लोगों तक कोई संदेश या विचार पहुँचाना चाहते हैं या जनता के साथ बांटना चाहते हैं तो उसे जन संचार कहते हैं। ऐसा संचार कई प्रकार के साधनों द्वारा किया जाता है। जिसमें व्यक्तिगत संचार की तरह पक्ष एक-दूसरे से परिचित नहीं होता। जनसंचार के प्रमुख साधन हैं-

  1. जनतक घोषणा, रैली इत्यादि।
  2. रेडियो, टेलीविज़न।
  3. अख़बारें, रसाले, मैगज़ीन ।
  4. सिनेमा।
  5. कंप्यूटर की सहायता से ही जनतक सूचना।
  6. इंटरनैट संचार।
  7. औजू सैट।

प्रश्न 10.
व्यापार से आपका क्या अर्थ है ? इसकी किस्में बताओ।
उत्तर-
वस्तुओं को बेचने तथा खरीदने को व्यापार कहते हैं या किसी वस्तु के लेन-देन को व्यापार कहते हैं। यह खरीददार तथा विक्रेता के बीच की अदायगी की क्रिया है। व्यापार मुख्य रूप में दो प्रकार का होता है-

  1. निजी व्यापार।
  2. राष्ट्रीय व्यापार।

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प्रश्न 11.
राष्ट्रीय व्यापार तथा इसके क्या कारण हैं ?
उत्तर-
जब व्यापार/बेच-खरीद/लेन-देन राष्ट्रीय स्तर पर होता है, तब उसे राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। अगर कोई देश अपने देश की सीमाओं से बाहर कोई व्यापार लेन-देन करता है उसको अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। राष्ट्रीय व्यापार के कारण निम्नलिखित हैं-

  • किसी देश में प्राकृतिक साधनों की कमी।
  • देश में वस्तुओं की मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  • तकनीकी साधनों की कमी के कारण कई बार वस्तुओं को दूसरे देश से मंगवाना पड़ता है।
  • भौगोलिक भिन्नता।
  • आर्थिक विकास में कमी।
  • व्यापारिक देशों में जंग तथा अमन शांति के हालात।
  • व्यापारिक नीतियां।
  • देश के आपसी संबंध।

प्रश्न 12.
भारतीय आयात तथा निर्यात पर नोट लिखो।
उत्तर-
उत्पादित फालतू सामान को जब किसी और देश में बेचा जाता है तब उसे निर्यात कहते हैं तथा स्रोतों की कमी के कारण जब किसी देश से स्रोतों को खरीदा जाता है तो उसे आयात कहते हैं।

भारतीय निर्यात-भारत खनिज तेल, खनिज मोम, जैविक रसायन, फार्मेसी उत्पादन, गेहूँ से बनी वस्तुओं, अनाज, बिजली की मशीनरी, कपास के सूती कपड़े, काहवा, चाय, मसाले इत्यादि बाकी देशों को निर्यात करता है।
भारतीय आयात-भारत पैट्रोल, खनिज मशीनरी, खाद्य, लोहा तथा इस्पात, मोती, कीमती पत्थर, सोना, चांदी, खुराकी तेल, रसायन, दवाइयां, कागज़ फाईबर इत्यादि दूसरे देशों से आयात करता है।

प्रश्न 13.
आलमी व्यापार संगठन (WTO) पर नोट लिखो।
उत्तर-
सन् 1995 में गैट का रूप बदलकर विश्व व्यापार संगठन बनाया गया। यह जनेवा में एक स्थायी संगठन के रूप में कार्यरत है तथा यह व्यापारिक झगड़ों का निपटारा भी करता है। यह संगठन सेवाओं के व्यापार को भी नियंत्रित करता है। किंतु इसे अभी भी महत्त्वपूर्ण कर रहित नियंत्रणों जैसे निर्यात निषेध, निरीक्षण की आवश्यकता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा स्तरों तथा आयात लाइसेंस व्यवस्था जिनसे आयात प्रभावित होना है, को सम्मिलित करना शेष है। आलमी व्यापार संगठन में 123 देशों ने हस्ताक्षर करके जनरल एग्रीमैंट का खात्मा कर दिया है। इस प्रकार आलमी व्यापार संगठन राष्ट्रीय व्यापार को अच्छा तथा महत्त्वपूर्ण बना देता है

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निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
यातायात से आपका क्या भाव है ? देश में प्रशासकीय प्रबंध के आधार पर सड़कों का वर्गीकरण करो तथा सड़क-मार्गों का जाल बिछाने के लिए बनाई योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा करो।
या
भारतीय सड़कों के विकास का वर्णन करो।
उत्तर-
यातायात-मनुष्य, जानवरों तथा वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने को या वस्तुओं के परिवहन को यातायात कहते हैं। यातायात के मुख्य वर्ग हैं

  1. स्थल-मार्ग यातायात।
  2. जल-मार्ग यातायात।
  3. वायु-मार्ग यातायात।

सड़कों का प्रशासकीय प्रबंध के आधार पर वर्गीकरण-प्रशासकीय प्रबंध के आधार पर सड़कों का वर्गीकरण निम्नलिखित किया गया है –
1. ग्रामीण सड़कें (Rural Roads)—जो सड़कें गाँव को जिले की सड़कों से मिलाती हैं, ग्रामीण सड़कें कहलाती हैं। इन सड़कों में मोड़ काफी होते हैं यहाँ बहुत भारी वाहनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

2. जिला सड़कें (District Roads)—यह सड़कें जिले की सड़कों, कस्बे तथा बड़े गाँवों को आपस में जोड़ती हैं। इन सड़कों की देखभाल जिला परिषद् तथा आम जनता की ज़िम्मेदारी होती है।

3. राज्य मार्ग (State Highways) राज्य के व्यापार तथा भारी यात्री यातायात की किस्म राज्य मार्गों के अधीन आती है। यह सड़कें आर्थिकता की मुख्य इकाई होती हैं, सड़कों के मुख्य केंद्रों को राज्य की राजधानियों तथा राष्ट्रीय शाहमार्गों के साथ मिलाती हैं।

4. राष्ट्रीय शाह मार्ग (National Highways)-राष्ट्रीय शाहमार्गों की देख-भाल की ज़िम्मेदारी केंद्रीय सरकार की होती है। भारत में राष्ट्रीय शाहमार्ग एथॉरिटी इन मार्गों की देख-रेख करती है। यह सड़कें देश के सारे कोनों तक फैली हुई हैं।

5. सीमान्त इलाकों की सड़के (Border Roads)-इन सड़कों की देख-भाल की ज़िम्मेदारी सीमान्त सड़क संगठन के अंतर्गत आती है।

सड़क योजनाएं-सड़कें किसी देश के विकास की रीढ़ की हड्डी हैं। यह वस्तुओं, मनुष्य, जानवरों, स्रोतों इत्यादि के परिवहन में अहम् तथा महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। इसके अलावा इन सड़कों द्वारा सफर करना आसान तथा आरामदायक भी होता है। सड़कों का अच्छा तथा सड़क-मार्गों का जाल बिछाने के लिए कई योजनाएं देश अंदर चल रही हैं।

1. नागपुर योजना (Nagpur Plan)-नागपुर योजना सन् 1943 में भारत में सड़कें बिछाने के लिए बनाई गई। इस योजना में देश की प्रमुख सड़कों के अलावा और आम सड़कों की लंबाई भी बढ़ाई गई।

2. बीस वर्षीय योजना (Twenty Year Plan)-इस योजना की शुरुआत 1961 में हुई। इस योजना का उद्देश्य देश में सड़कों की लंबाई 6 लाख 56 कि०मी० से बढ़ाकर 10 लाख 60 हज़ार कि०मी० तक करना था तथा इसके लिए समय 20 साल तय किया गया।

3. ग्रामीण सड़क विकास योजना (The Rural Road Development Scheme)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सड़कों का विकास करना था।

4. बी०ओ०टी० योजना (Build, Operate and Transfer Scheme)-इस योजना में प्राईवेट बिल्डरों तथा
ठेकेदारों को सड़कें तथा पुलों का निर्माण करने के लिए ठेके दिए गए तथा इज़ाजत दी गई कि वह निर्माण की गई सड़क पर गुजरने वाले वाहनों के चालकों से टोल टैक्स ले सकेंगे तथा बाद में सड़क भारत सरकार के हवाले कर देंगे।

5. केन्द्रीय सड़क फंड (Cential Road Fund)-इस फंड को दिसम्बर 2000 में शुरू किया गया। इसके अनुसार पैट्रोल तथा डीज़ल पर टैक्स तथा कस्टम ड्यूटी लगाकर इकट्ठा किया पैसा सड़कों के विकास पर लगाया जाएगा। भारत में प्राचीन काल से ही सड़कों की महत्ता रही हैं। शेरशाह सूरी ने जी०टी०रोड के राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया। आजादी के बाद 10 वर्षीय नागपुर योजना के अधीन सड़कों के विकास की योजना बनाई गई। भारत की मुख्य सड़कें निम्न हैं।

राष्ट्रीय मार्ग (National Highways)

  • ग्रैंड ट्रंक रोड (Grand Trunk Road)-कोलकाता से अमृतसर तक है। इसको शेरशाह सूरी मार्ग भी कहा जाता है।
  • दिल्ली-मुंबई रोड।
  • कोलकाता-मुंबई रोड।
  • मुंबई-चेन्नई रोड।
  • ग्रेट दक्षिण रोड।
  • कोलकाता-चेन्नई रोड।
  • पठानकोट- श्रीनगर रोड।
  • भारत की सीमावर्ती प्रदेशों में सड़कों का निर्माण करने के लिए सीमा सड़क बोर्ड को सन् 1960 में स्थापित किया गया। भारत में सीमान्त प्रदेशों में 7000 कि०मी० लम्बी पक्की सड़कें बनायी गई हैं। जिनमें मनाली से लेकर लेह तक मुख्य सड़कें हैं। इस सड़क की औसत ऊंचाई 4270 मीटर है।

PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहनयातायात, संचार तथा व्यापार 2

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प्रश्न 2.
संसार के प्रमुख रेल मार्गों की स्थिति तथा महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर-
स्थल यातायात में रेलवे सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण साधन है। सन् 1819 में भाप के इंजन की खोज के साथ रेल के यातायात का प्रारंभ ग्रेट ब्रिटेन में हुआ। आधुनिक युग में किसी देश में आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक दृष्टि से रेलवे का बड़ा महत्त्व है।

महत्त्व-

  • रेलमार्ग किसी क्षेत्र के खनिज पदार्थों के विकास में सहायता करते हैं।
  • रेलमार्ग औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल तथा तैयार माल के वितरण में सहायता करते हैं।
  • रेलमार्ग व्यापार को उन्नत करते हैं।
  • रेलमार्ग राजनीतिक एकता व स्थिरता लाने में योगदान देते हैं।
  • रेलमार्ग संकट काल में सहायता कार्यों में महत्त्वपूर्ण हैं।
  • कम जनसंख्या वाले प्रदेशों में रेल-मार्ग जनसंख्या वृद्धि का आधार बनते हैं।
  • लम्बी-लम्बी दूरियों को जोड़ने में रेलों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। वास्तव में रेल-मार्गों के विकास से मानव ने दूरी और समय पर विजय प्राप्त कर ली है।

रेलमार्गों की स्तिति के तत्त्व (Factors of Location),

  1. अधिक जनसंख्या हो।
  2. समतल मैदानी धरातल हो।
  3. औद्योगिक तथा व्यापारिक विकास अधिक हो।
  4. खनिज पदार्थ के अधिक भंडार हो।
  5. तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो।

संसार के मुख्य रेलमार्ग (Major Railways) रेलमार्गों की सबसे अधिक लंबाई संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं। कई देशों में मोटर, सड़कें तथा जल मार्गों के अधिक विकास के कारण रेलमार्ग कम हैं।
PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहनयातायात, संचार तथा व्यापार 3
ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग-यह रेलमार्ग 9289 कि०मी० लम्बा है तथा संसार में सबसे लम्बा रेलमार्ग है। यह रेल मार्ग साइबेरिया तथा यूराल प्रदेश के आर्थिक तथा औद्योगिक विकास का आधार है। यह एक अन्तः महाद्वीपीय मार्ग है। यह रेल-मार्ग पश्चिम में बाल्टिक सागर पर स्थित सेंट पीटर्जसवर्ग बन्दरगाह के पूर्व में प्रशान्त महासागर पर स्थित ब्लाडीवोस्टक बन्दरगाह को जोड़ता है। इस रेल-मार्ग के मुख्य स्टेशन मास्को, रंयाजन, कुइबाशेव चेलिया बिन्सक, ओमस्क, नीवी सिबीरस्क, चीता इकूटस्क तथा खाबारीवस्क हैं । इस रेलमार्ग द्वारा कोयला, तेल, लकड़ी, खनिज, कृषि उत्पाद, मशीनरी तथा औद्योगिक उत्पादों का आदान-प्रदान पूर्व से पश्चिम को होता है।

2. कैनेडियन पैसेफिक रेलमार्ग-कनाडा का पूर्व-पश्चिम में अधिक विस्तार है। यह रेलमार्ग कनाडा में पूर्वी भाग में हैली फैक्स से चलकर पश्चिम में बेन्कूवर तक पहुंचता है। यह रेलमार्ग दुर्गम पर्वत क्षेत्रों में से गुजरता है। इस रेलमार्ग से लकड़ी, खनिज पदार्थ, गेहूं व लोहे का परिवहन होता है। कैनेडियन पैसेफिक रेल-मार्ग की लम्बाई 7050 किलोमीटर हैं। इस मार्ग पर सेंटजॉन मांट्रिगल, ओटावा, विनीपेग इत्यादि नगर स्थित है। यह रेल-मार्ग क्यूबेक मांट्रियल के औद्योगिक क्षेत्र को कोणधारी वनों तथा प्रेयरीज के गेहूं से जोड़ता हैं। इस प्रकार यह रेल मार्ग राजनीतिक तथा आर्थिक रूप से एकता स्थापित करता है।

3. संयुक्त राज्य अमेरिका के रेलमार्ग संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी भाग में रेलवे का अधिक विकास हुआ है। पश्चिम में जनसंख्या कम है। यहां शुष्क जलवायु तथा पर्वतीय भागों के कारण रेलमार्ग कम हैं। यह रेलमार्ग देश के पश्चिमी तथा पूर्वी क्षेत्रों को आपस में मिलाता है। देश के मध्यवर्ती क्षेत्र की कृषि तथा खनिज क्षेत्रों के लिए यह बहुत योग्य सिद्ध हुए हैं। इस देश में मुख्य महाद्वीप रेलमार्ग निम्नलिखित हैं।

  • उत्तरी पैसेफिक रेलमार्ग-यह मार्ग शिकागो से होकर सेंटपाल पोर्टलैंड तक जाता है।
  • दक्षिणी पैसेफिक रेलमार्ग-यह रेलमार्ग पश्चिम में लॉस एंजिलस तक जाता है।
  • महान् उत्तरी रेलमार्ग-यह रेलमार्ग सुपीरियर झील के तट से डिओलब में होकर सीटल तक जाता है।
  • यूनियन पैसेफिक रेलमार्ग-यह रेलमार्ग एटलांटिक तट से लेकर न्यूयॉर्क और फिर यहां से शिकागो, उमाहा, सान फ्रांसिस्को तथा प्रशांत महासागर तट तक जाता है। शिकागो संसार का सबसे बड़ा रेलकेंद्र है।

4. केप काहिरा रेलमार्ग-यह रेलमार्ग अफ्रीका के दक्षिणी किनारे को उत्तरी किनारे से जोड़ता है। यह मार्ग केपटाऊन से प्रारम्भ होकर काहिरा तक है। इस मार्ग के मध्य में कई कठिनाइयां हैं जैसे सहारा मरुस्थल, ऊंचे पर्वत, जल प्रपात इत्यादि। इन प्रतिबन्धों के कारण रेलमार्ग पूरा नहीं हो सका। यह रेल मार्ग केपटाऊन से शुरू होकर किंबरले से जाइरे देश में बोकामा तक है। इसके पीछे विक्टोरिया झील तक सड़क या रेलमार्ग की सुविधा है। इसके आगे नील नदी के किनारे खरतूम तक सड़क मार्ग है। इसके आगे काहिरा तक रेलमार्ग है। इस रेलमार्ग के विकास के साथ अफ्रीका महाद्वीप के कई क्षेत्रों में खनिज पदार्थ तथा कृषि पदार्थों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है।

5. ट्रांस एण्डियन रेलमार्ग (Trans Andean Railway)-यह रेलमार्ग दक्षिणी अमेरिका से चिली के वालप्रेसो नगर तथा अजेन्टाइना के ब्यूनस आयर्स नगर को मिलाता है। यह रेलमार्ग एण्डीज पर्वतों को 3485 मीटर की ऊंचाई से पार करके उस्पलाटा दर्रे तथा सुरंगों से गुजरता है। यह पम्पास के कृषि तथा पशुपालन क्षेत्रों को चिली के खनिज तथा फल उत्पादन क्षेत्र से जोड़ता है।

6. दिल्ली-लंदन-मार्ग (Delhi London Railway)—इस मार्ग के साथ यूरोप तथा एशिया के महाद्वीपों को मिलाने की योजना है। यह प्रकल्प आर्थिक तथा सामाजिक कमिशन के अधीन है। इस मार्ग पर कई देशों में इस योजना को पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि लंदन को इण्डोनेशिया से मिलाया जा सके। यह भारत से पश्चिम की तरफ पाकिस्तान मध्य पूर्व (इरान, इराक, तुर्की) से यूरोप तक जाएगा। कई राजनीतिक बंदिशों के कारण कई स्थानों पर जैसे बर्मा-बंगला देश में यह काम सफल नहीं हो सका है। इस मार्ग पर तुर्की के पास बासकोर्स में इंग्लैंड चैनल के रास्ते समुद्र पार करना पड़ेगा तथा नावों का प्रयोग करना पड़ेगा। इण्डोनेशिया से लंदन तक यह यात्रा 15 दिनों में पूरी की जाएगी।

7. भारतीय रेलमार्ग (Indian Railway) परिवहन के साधनों में रेलों का महत्त्व सबसे अधिक है। 1853 ई० में भारत में प्रथम रेल लाइन 32 कि०मी० लम्बी मुम्बई से थाना स्टेशन तक बनाई गई। भारतीय रेलवे की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

    1. भारतीय रेल-मार्ग एशिया का सबसे लम्बा रेलमार्ग है।
    2. भारतीय रेल-मार्ग 62211 कि०मी० लम्बा है।
    3. विश्व में भारत का चौथा स्थान है।
    4. भारतीय रेलों मे 18 लाख कर्मचारी काम करते हैं।
    5. प्रतिदिन 12670 रेलगाड़ियां लगभग 13 लाख कि०मी० दूरी पर चलती हैं तथा 7100 रेलवे स्टेशन हैं।
    6. प्रतिदिन लगभग 350 करोड़ यात्री यात्रा करते हैं तथा 22 करोड़ टन भार ढोया जाता है।
    7. भारतीय रेलों में 8000 करोड़ रुपए की पूंजी लगी हुई है तथा प्रतिवर्ष 21,000 करोड़ रुपए की आय होती है।
    8. भारतीय रेलों में 11,000 रेल इंजन, 38,000 सवारी डिब्बों तथा 4 लाख सामान ढोने वाले डिब्बे हैं।
    9. भारत में 80% सामान तथा 70% यात्री रेलों द्वारा ही ले जाए जाते हैं।

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    1. भारतीय रेलों का अधिक विस्तार उत्तरी भारत के समतल मैदान में है।
    2. भारत में जम्मू कश्मीर, पूर्वी क्षेत्र, पश्चिमी घाट, छोटा नागपुर पठार तथा थार के मरुस्थल में रेलमार्ग कम
    3. दक्षिणी भारत में पथरीली, ऊंची-नीची भूमि के कारण, छोटी-छोटी नदियों पर जगह जगह पुल बनाने की असुविधा है।
    4. अब भारतीय रेलों पर 3454 डीजल इंजन तथा 1533 बिजली के इंजन 4950 भाप इंजन हैं।

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    1. लगभग 9100 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग पर बिजली से चलने वाली गाड़ियां दौड़ती हैं। भारत में रेलमार्ग तीन प्रकार के हैं –

(i) चौड़ी पटरी (Broad Gauge)-1.68 मीटर चौड़ाई।
(ii) छोटी पटरी (Metre Gauge)-1 मीटर चौड़ाई।
(iii) तंग पटरी (Narrow Gauge)-0.68 मीटर चौड़ाई है।

रेल क्षेत्र (Railway Zones)—अच्छे प्रबंध के लिए भारतीय रेलों में अलग-अलग तरह से विभाजित किया गया है। भारत में 1958 से 1966 तक भारतीय रेलवे के कुल 9 क्षेत्र थे। लगभग तीन दहाकों के बाद यही रेल प्रबंध जारी रहा पर अब भारतीय रेलवे के कुल 18 क्षेत्र हैं, जो इस प्रकार हैं –

रेल क्षेत्र — प्रमुख कार्यालय

1. उत्तरी रेलवे — नई दिल्ली
2. उत्तरी-पूर्वी रेलवे — गोरखपुर
3. उत्तर पूर्वी सीमान्त रेलवे — मालीगाऊ (गुवाहाटी)
4. पूर्वी रेलवे — कोलकाता
5. दक्षिणी-पूर्वी रेलवे — बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
6. दक्षिण-मध्य रेलवे — सिकंदराबाद
7. दक्षिणी रेलवे — चेन्नई
8. मध्य रेलवे — मुंबई
9. पश्चिमी रेलवे — मुंबई
10. दक्षिण-पश्चिमी रेलवे — हुबली (बंगलौर)
11. उत्तर पश्चिमी रेलवे — जयपुर
12. पश्चिमी मध्य रेलवे — जबलपुर
13. उत्तर मध्य रेलवे — इलाहाबाद
14. दक्षिण-पूर्वी मध्य रेलवे — बिलासपुर
15. पूर्व तटवर्ती रेलवे — भुवनेश्वर
16. पूर्व मध्य रेलवे — हाजीपुर
17. कोंकण रेलवे — न्यू दिल्ली
18. मैट्रो रेलवे — कोलकाता।

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PSEB 12th Class Geography Solutions Chapter 7 परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार

प्रश्न 3.
जल यातायात तथा जल मार्ग यातायात की किस्में बताओ। विश्व के मुख्य समुद्री मार्गों का विस्तार सहित वर्णन करो।
उत्तर-
यातायात के साधनों में समुद्री यातायात सबसे सस्ता तथा महत्त्वपूर्ण साधन है। विश्व का अधिकतर व्यापार समुद्री मार्ग के द्वारा होता है। जब बहुत सारे जहाज़ एक निश्चित मार्ग पर चलते हैं तब उसे समुद्री मार्ग कहते हैं।
समुद्री मार्गों का महत्त्व (Importance of Ocean Routes)-

  • यह सबसे सस्ता यातायात का साधन है।
  • यह प्राकृतिक मार्ग है। समुद्र में मार्ग बनाने में कुछ खर्च नहीं होता।
  • जहाजों को चलाने के लिए कोयला तथा पैट्रोल कम खर्च होता है।
  • समुद्री मार्ग असलियत में अंतर्राष्ट्रीय मार्ग है क्योंकि सारे महामार्ग एक दूसरे से मिले हैं।
  • इन मार्गों पर जहाजों की दुर्घटनाएं कम होती हैं।
  • इन मार्गों द्वारा दूर दूर देशों के आपसी सम्पर्क बढ़ जाते हैं।
  • इन मार्गों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी वृद्धि होती है।

समुद्री मार्गों को प्रभावित करने वाले तत्व (Factors influencing the Ocean Routes) अधिकतर समुद्री मार्ग महान् चक्कर के अनुसार कम दूरी के कारण बनाये जाते हैं। जल मार्ग हिंद तोदियों से बचा कर बनाये जाते हैं। समुद्री मार्ग तूफानी क्षेत्रों तथा कोहरे से दूर होते हैं। समुद्री मार्गों में ईंधन के लिए कोयला, तेल तथा परिवहन के लिए माल ज्यादा प्राप्त हो।

जल मार्गों की किस्में-जल मार्ग मुख्य रूप में दो तरह के होते हैं-

1. आंतरिक जलमार्ग
2. समुद्री जलमार्ग

1. आंतरिक जलमार्ग-किसी देश या पृथ्वी पर स्थित जल साधनों, झीलों, नहरों इत्यादि के द्वारा यातायात को आंतरिक जलमार्गी यातायात कहते हैं। किसी देश के प्रादेशिक व्यापार के लिए नदियां, नहरें तथा झीलों का आन्तरिक जल मार्गों के रूप में प्रयोग किया जाता है। मनुष्य प्राचीन काल से ही नदियों तथा नहरों का यातायात के लिए प्रयोग करता आया है। आजकल विकसित देशों में आंतरिक जल-मार्गों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है। कृषि तथा उद्योगों के विकास में आंतरिक जल-मार्ग महत्त्वपूर्ण है। आन्तरिक जल मार्गों पर कई तत्वों का प्रभाव पड़ता है। नदियों तथा नहरों में जल अधिक मात्रा में हों, जल का प्रवाह सारा साल लगातार तथा सीधा होना चाहिए। अधिक ढाल जल प्राप्त अधिक घुमाव तथा रेत के जमाव से यातायात में बाधाएं उत्पन्न हो जाती हैं। शीतकाल में नदियां हिम से जमनी नहीं चाहिए।

प्रमुख आंतरिक जलमार्ग-

  1. फ्रांस में सीन तथा रीन नदियां यातायात के लिए प्रयोग की जाती हैं।
  2. पश्चिमी जर्मनी में राईन (Rhine) नदी सबसे महत्त्वपूर्ण जल मार्ग है। यह नदी पश्चिमी जर्मनी के व्यापार की जीवनरेखा है। इस नदी द्वारा रूहर घाटी से खनिज पदार्थों का परिवहन किया जाता है।
  3. यूरोप में कई अन्य नदियां, डैन्यूब, वेसर, ऐल्ब, ओडर, विसबूला भी महत्त्वपूर्ण जल मार्ग हैं।
  4. रूस में वोल्गा, नीपर नदियां यातायात के साधन के रूप में प्रयोग की जाती हैं।
  5. उत्तरी अमेरिका में महान झीलें तथा मिसीसिपी नदी तथा सेंट लारेंस जल-मार्ग महत्त्वपूर्ण है।
  6. भारत में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदी, चीन में यंगसी नदी तथा बर्मा में इरावती नदी महत्त्वपूर्ण भीतरी जल-मार्ग हैं।
  7. दक्षिणी अमेरिका में अमेज़न नदी से तट से 1600 कि०मी० अन्दर तक जहाज़ चलाए जा सकते हैं। परन्तु कम जनसंख्या तथा पिछड़ेपन के कारण इस घाटी में इस जल-मार्ग का महत्त्व कम है।
  8. अफ्रीका में नील, नाईजर, कांगो तथा जैम्बजी नदियां जल प्रपातों के कारण अधिक उपयोगी नहीं हैं।
  9. संसार में कई देशों में नहरें भी यातायात के साधन के रूप में प्रयोग की जाती हैं। पश्चिमी जर्मनी में कील नहर और राईन नहर, रूस में वोल्गा-वाल्टिक नहर, उत्तरी अमेरिका में हडसन-मोहाक नहर, इंग्लैण्ड में मानचेस्टर, लिवरपूल नहर, भारत में बकिंघम नहर यातायात के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

II. समद्री जलमार्ग- अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः समुद्री मार्ग द्वारा ही होता है। स्थल मार्ग की अधिकता के कारण मुख्य समुद्री मार्ग मध्य अक्षांशों में स्थित हैं। संसार के मुख्य समुद्री मार्ग निम्नलिखित हैं-

1. उत्तरी अन्ध महासागरीय मार्ग (North Atlantic Route) यह संसार का सब से अधिक उपयोग किया जाने वाला समुद्री मार्ग है। यह मार्ग 40° – 50° उत्तर अक्षांशों में यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित हैं। यह संसार का सबसे व्यस्ततम व्यापारिक मार्ग है। संसार के 75% जलयान इस मार्ग पर चलते हैं। संसार के आधे से अधिक बन्दरगाह इस मार्ग पर स्थित हैं। इस मार्ग के किनारों पर यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के उन्नत औद्योगिक प्रदेश हैं। इसलिए संसार का 25% व्यापार इसी मार्ग से होता है। यह मार्ग महान् वृत्त है। इस पर कोयला व तेल की सुविधाएं हैं। संसार के गहरे, सुरक्षित बन्दरगाह हैं। यहां बड़े-बड़े शिपयार्ड स्थित हैं। परन्तु न्यूयार्क के निकट रेतीले, तट, न्यूफाउण्डलैंड के निकट कोहरा व हिमखण्ड की कठिनाइयां हैं। यूरोप की ओर लन्दन/लिवरपूल, ग्लासगो, ओसलो, हैम्बर्ग, रोटरडम, लिस्बन प्रमुख बन्दरगाह हैं।

2. स्वेज नहर मार्ग (Suez Canal Route)—यह सागर रूम सागर तथा लाल सागर को जोड़ने वाली स्वेज नहर के कारण महत्त्वपूर्ण मार्ग है। यह संसार का दूसरा बड़ा मार्ग है। इसे सबसे अधिक लम्बा मार्ग होने के कारण ग्रांड ट्रंक मार्ग भी कहते हैं। इस मार्ग पर संसार की घनी जनसंख्या वाले प्रदेश स्थित हैं। इस मार्ग पर कोयला व तेल की सुविधाएं प्राप्त हैं। इस मार्ग के कारण यूरोप तथा एशिया के लगभग 81000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है। इस नहर द्वारा इंग्लैंड के साम्राज्य व व्यापार को बहुत सुरक्षा प्राप्त थी। इसे ब्रिटिश साम्राज्य की जीवन रेखा भी कहा जाता है। रूम सागर व लाल सागर को पार करने के पश्चात् इसकी तीन शाखाएं हो
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जाती हैं। अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा एशिया की ओर लन्दन, लिवरपूल, मोर्सेल्ज, लिस्बन, नेपल्स, सिकन्दरिया प्रमुख बन्दरगाह हैं। लंदन, कराची, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, कोलम्बो, रंगून, सिंगापुर, हांगकांग, शंघाई योकोहामा, मेलबोर्न, विलिंगटन प्रमुख बंदरगाह हैं।

3. पनामा नहर मार्ग (Panama Canal Route)-अन्ध महासागर तथा प्रशांत महासागर को मिलाने वाली
पनामा नहर के 1914 में निर्माण होने से इस मार्ग का महत्त्व बढ़ गया है। इस मार्ग का विशेष महत्त्व संयुक्त ‘राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड को है। इस मार्ग के खुल जाने के कारण दक्षिणी अमेरिका के Cape Horn का चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रही। इस प्रकार अमेरिका के पूर्वी तथा पश्चिमी तटों के बीच 10,000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई। आकलैंड, वालपरेसी, लॉस ऐंजल्स, सानफ्रांसिस्को, बैनकूवर तथा प्रिंस रूपर्ट प्रमुख बन्दरगाह हैं। किंगस्टन हवाना, रियो-डी-जैनेरो, पनामा, न्यू ओरलियनज प्रमुख बन्दरगाह हैं।

4. आशा अन्तरीप मार्ग (Cope of Good Hope Route)—यह एक प्राचीन समुद्री मार्ग है। 1498 में वास्को डी-गामा ने इस मार्ग की खोज की। स्वेज नहर के बन्द हो जाने के कारण इस मार्ग का महत्त्व बढ़ गया है। यह मार्ग दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड के लिए महत्त्वपूर्ण है। इस मार्ग पर कोयला व तेल की सुविधाएं प्राप्त हैं। यह मार्ग स्वेज़ मार्ग की अपेक्षा सस्ता व ठण्डा है तथा बड़े-बड़े जहाज इस मार्ग पर गुज़र सकते हैं। लंदन, लिवरपूल, लिस्बन, लागोस, मानचेस्टर इत्यादि यूरोप की बन्दरगाहें हैं।

5. प्रशान्त महासागरीय मार्ग (Trans-Pacific Route)—यह मार्ग एशिया तथा अमेरिका महाद्वीपों को मिलाता है। यह मार्ग कम महत्त्वपूर्ण है। इस मार्ग की लम्बाई बहुत अधिक है तथा इसके किनारों पर कम उन्नत प्रदेश हैं। इस मार्ग पर हिमशिलाओं का अभाव है। इस मार्ग की कई शाखाएं होनोलूलू नामक स्थान पर मिलती हैं। योकोहामा, हांगकांग, शंघाई, मनीला, बेंकूवर, प्रिंस, रूपर्ट, सानफ्रांसिस्को, लास ऐंजल्स प्रमुख बन्दरगाह हैं।

6. दक्षिणी अन्ध महासागरीय मार्ग (South Atlantic Route)-यह मार्ग दक्षिणी अमेरिका तथा यूरोप के देशों को मिलाता है। ब्राज़ील के केप सन रोके से आगे इस मार्ग के दो भाग हो जाते हैं। यह यूरोप की तथा दूसरा अमेरिका की ओर यहां दक्षिणी अफ्रीका से आने वाले मार्ग भी मिलते हैं। उत्तर की ओर यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के प्रसिद्ध बन्दरगाह तथा दक्षिण की ओर व्यूनस आयर्स, मोण्टी वीडियो, रियो-डी-जेनेरो, बहियां, सैन्टाज़ हैं।

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प्रश्न 4.
भारत की प्रमुख बन्दरगाहों का वर्णन करो। उनकी स्थिति, विशेषताएं तथा व्यापारिक महत्त्व बताएं।
उत्तर-
समुद्र पत्तन समुद्र के किनारे जहाजों के ठहरने के स्थान होते हैं। इनके द्वारा किसी देश का विदेशी व्यापार होता है। एक आदर्श बन्दरगाह के लिए कटी फटी तट रेखा, अधिक गहरा जल, सम्पन्न पृष्ठ-भूमि, उत्तम जलवायु तथा समुद्र मार्गों पर स्थित होना आवश्यक है। भारत की तट रेखा 61,00 किलोमीटर लम्बी है। इस तट रेखा पर अच्छी बन्दरगाहों की कमी है। केवल 10 प्रमुख बन्दरगाहें, 22 मध्यम बन्दरगाहें तथा 145 छोटी बन्दरगाहें हैं।

भारत की प्रमुख बन्दरगाहें-भारत के पश्चिमी तट पर कांडला, मुम्बई, मारमगाओ तथा कोचीन प्रमुख बन्दरगाहें हैं। पूर्वी तट पर कोलकाता पाराद्वीप, विशाखापट्टनम तथा चेन्नई प्रमुख बन्दरगाहें हैं। मंगलौर तथा तूतीकोरन का बड़े बन्दरगाहों के रूप में विस्तार किया जा रहा है। भारत की प्रमुख बन्दरगाहों का उल्लेख इस प्रकार है।

(क) पश्चिमी तट की बन्दरगाहें

1. कांडला (Kandla)-

(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह खाड़ी कच्छ (Gulf of Kutch) के शीर्ष (Head) पर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)
(a) यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि बहुत विशाल तथा सम्पन्न है, उसमें समस्त उत्तर-पश्चिमी भारत के उपजाऊ प्रदेश हैं।
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(c) समुद्र की गहराई 10 मीटर से अधिक है।
(d) यहां बड़े-बड़े जहाजों के ठहरने की सुविधाएं हैं।
(e) यह स्थान स्वेज़ (Suez) समुद्री मार्ग पर स्थित है।
(f) यह बन्दरगाह कराची की बन्दरगाह का स्थान लेगी।

(iii) व्यापार (Trade)
(a) आयात (Imports)—सूती कपड़ा, सीमेंट, मशीनें तथा दवाइयां।
(b) निर्यात (Exports)-सूती कपड़ा, सीमेंट, अभ्रक, तिलहन, नमक।

2. मुम्बई (Mumbai)

(i) स्थिति (Location)-यह बन्दरगाह पश्चिमी तट के मध्य भाग पर एक छोटे-से टापू पर स्थित है। यह टापू एक पुल द्वारा स्थल से मिला हुआ है।

(ii) विशेषताएं (Characteristics)
(a) यह भारत की सबसे बड़ी प्राकृतिक व सुरक्षित बन्दरगाह है।
(b) स्वेज़ मार्ग पर स्थित होने के कारण यूरोप (Europe) के निकट स्थित है।
(c) इसी पृष्ठ-भूमि में काली मिट्टी का कपास क्षेत्र तथा उन्नत औद्योगिक प्रदेश है।
(d) अधिक गहरा जल होने के कारण बड़े-बड़े जहाज़ ठहर सकते हैं, परन्तु यहां कोयले की कमी है।
(e) यहां पांच डॉको (Docks) में उत्तम गोदामों की व्यवस्था है।
(f) यह भारत की सबसे बड़ी बन्दरगाह है।
(g) इसे भारत का सिंहद्वार (Gateway of India) भी कहते हैं। यह महाराष्ट्र की राजधानी है। यहां ट्राम्बे में भाभा अणु शक्ति केन्द्र, मैरीन ड्राइव, इण्डिया गेट तथा ऐलीफेंटा गुफाएं दर्शनीय स्थान हैं। यह भारतीय जल-सेना का प्रमुख केन्द्र हैं।

(iii) व्यापार (Trade)-

(a) आयात (Import) मशीनरी, पैट्रोल, कोयला, कागज़ कच्ची फिल्में।
(b) निर्यात (Exports)-सूती कपड़ा, तिलहन, मैंगनीज, चमड़ा, तम्बाकू।
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3. मारमगाओ (Marmago)
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह पश्चिम तट गोआ (Goa) में स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)
(a) यह एक प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि में महाराष्ट्र तथा कर्नाटक प्रदेश के पश्चिमी भाग हैं।
(c) इसमें 50 के लगभग जहाज़ खड़े हो सकते हैं।
(iii) 214P (Trade)—
(a) आयात (Imports)-खाद्यान्न, रासायनिक खाद, मशीनें, खनिज तेल।
(b) निर्यात (Exports)–नारियल, मूंगफली, मैंगनीज़, खनिज, लोहा।

4. कोचीन (Cochin)
(i) स्थिति (Location) यह बन्दरगाह मालबार तट पर केरल प्रदेश में पाल घाट दर्रे के सामने स्थित हैं।
(ii) विशेषताएँ (Characteristics)-
(a) यह बन्दरगाह एक लैगून झील (Lagoon) के किनारे स्थित होने के कारण सुरक्षित और प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि में नीलगिरि का बागानी कृषि क्षेत्र तथा कोयम्बटूर का औद्योगिक प्रदेश स्थित है।
(c) यह जल-मार्ग द्वारा पृष्ठ-भूमि से मिला हुआ है।
(d) यह पूर्वी एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया के जलमार्गों पर स्थित है।
(e) भारत का दूसरा पोत निर्माण केन्द्र (Shipyard) यहां पर है।
(iii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)-चावल, कोयला, पैट्रोल, रसायन, मशीनरी।
(b) निर्यात (Exports)-कहवा, चाय, काजू, गर्म मसाले, नारियल, इलायची, रबड़ सूती कपड़ा।

(ख) पूर्वी तट की बन्दरगाहें
1. कोलकाता (Kolkata)(i) स्थिति (Location)—यह एक नदी पत्तन (Riverport) है। यह खाड़ी बंगाल में गंगा के डेल्टा प्रदेश पर हुगली नदी के बाएं किनारे पर तट से 120 किलोमीटर भीतर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)-
(a) इनकी पृष्ठ-भूमि बहुत विशाल तथा सम्पन्न है जिसमें गंगा घाटी का कृषि क्षेत्र, छोटा नागपुर का खनिज व उद्योग क्षेत्र तथा बंगाल, असम का चाय और पटसन क्षेत्र शामिल हैं।
(b) यह दूर पूर्व में जापान तथा अमेरिका के जल-मार्ग पर स्थित है।
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(c) परन्तु यह एक कृत्रिम बन्दरगाह है तथा गहरी नदी है।
(d) प्रति वर्ष नदियों की रेत और मिट्टी हटाने के लिए काफ़ी खर्च करना पड़ता है।
(e) जहाज़ केवल ज्वार-भाटा के समय ही आ जा सकते हैं। बड़े जहाजों को 70 किलोमीटर दूर
डायमण्ड हारबर (Diamond Harbour) में ही रुक जाना पड़ता है। () इस बन्दरगाह के विस्तार के लिए हल्दिया (Haldia) नामक स्थान पर एक विशाल पत्तन का निर्माण
किया जा रहा है। यह भारत की दूसरी बड़ी बन्दरगाह है।

(iii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)—मोटरें, पेट्रोल, रबड़, चावल, मशीनरी।
(b) निर्यात (Exports)—पटसन, चाय, खनिज लोहा, कोयला, चीनी, अभ्रक।

2. विशाखापट्टनम (Vishakhapatnam)-
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह पूर्वी तट पर कोलकाता और चेन्नई के मध्य स्थित है।
(ii) fagtuang (Characteristics)

(a) डाल्फिन नोज (Dalphin-Nose) नाम की कठोर चट्टानों से घिरे होने के कारण यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(b) इसकी पृष्ठ-भूमि में लोहा, कोयला तथा मैंगनीज़ का महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र है।
(c) यहां तेल, कोयला, ईंधन आदि सुलभ हैं।
(d) भारत का जहाज़ बनाने का सबसे बड़ा कारखाना यहां पर स्थित है।
(e) यह भारत की तीसरी प्रमुख बन्दरगाह है।

(ii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)-मशीनरी, चावल, पैट्रोल, खाद्यान्न।
(b) निर्यात (Exports)-मैंगनीज़, लोहा, तिलहन, चमड़ा, लाख, तम्बाकू।
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3. पारादीप (Paradip)
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह खाड़ी बंगाल में कटक से 160 किलोमीटर दूर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)-

(a) यह एक नवीनतम बन्दरगाह है।
(b) यह एक सुरक्षित व प्राकृतिक बन्दरगाह है।
(c) पानी की अधिक गहराई के कारण यहां बड़े-बड़े जहाज़ ठहर सकते हैं।
(d) इसकी पृष्ठभूमि में उड़ीसा का विशाल खनिज क्षेत्र है।
(e) उड़ीसा के खनिज पदार्थों के निर्यात के लिए इस बन्दरगाह का विशेष महत्त्व है।

(iii) व्यापार (Trade)-

(a) निर्यात (Exports)-जापान का लोहा, मैंगनीज़, अभ्रक आदि खनिज पदार्थ ।
(b) आयात (Imports)-मशीनरी, तेल, चावल।

4. चेन्नई (Chennai)
(i) स्थिति (Location)—यह बन्दरगाह तमिलनाडु राज्य में कोरोमण्डल तट पर स्थित है।
(ii) विशेषताएं (Characteristics)-
(a) यह एक कृत्रिम बन्दरगाह है।
(b) कंकरीट की दो मोटी जल-तोड़ दीवारें (Break waters) बनाकर यह सुरक्षित बन्दरगाह बनाई गई है।
(c) इसकी पृष्ठभूमि में एक उपजाऊ कृषि क्षेत्र तथा औद्योगिक प्रदेश है।
(d) यहां कोयले की कमी है।

(iii) व्यापार (Trade)-
(a) आयात (Imports)-चावल, कोयला, मशीनरी, पैट्रोल, लोहा, इस्पात।
(b) निर्यात (Exports)-चाय, कहवा, गर्म मसाले, तिलहन, चमड़ा, रबड़।

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प्रश्न 5.
स्वेज़ नहर के भौगोलिक, आर्थिक तथा सैनिक महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर-
स्वेज नहर (Suez Canal)
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1. स्थिति (Location)-स्वेज़ नहर संसार की सबसे बड़ी जहाज़ी नहर (Navigation Canal) है। यह नहर अरब गणराज्य (U.A.R.) में स्थित है। यह नहर स्वेज़ के स्थलडमरू मध्य (Suez Isthmus) को काट कर बनाई गई है।

2. इतिहास (History)—इस नहर का निर्माण एक फ्रांसीसी इन्जीनियर फटनेण्ड डी लैसैप्स (Ferdinand De Lesseps) की देख-रेख में सन् 1859 ई० में शुरू हुआ। इस निर्माण में लगभग 10 वर्ष लगे। इस नहर को 17 नवम्बर, 1869 को चालू किया गया। इसके निर्माण काल में 1 लाख 20 हज़ार मजदूरों की जानें गईं। इस नहर के निर्माण पर 180 लाख पौंड खर्च हुए। इस नहर का निर्माण स्वेज नहर कम्पनी (Suez Canal Company) द्वारा किया गया। इस कम्पनी के अधिकतर हिस्से (Shares) फ्रांस तथा इंग्लैंड के थे। इस प्रकार इस नहर पर इंग्लैंड तथा फ्रांस का अधिकार था। यह नहर 99 वर्षों के पट्टे पर दी गई थी। परन्तु मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल नासिर ने 26 जुलाई, 1956 को इस नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषणा कर दी। 1967 में मिस्र व इज़राइल में युद्ध हुआ तथा नहर स्वेज़ जहाजों के लिए बन्द हो गई। 1975 में स्वेज़ नहर पुनः खुल गई है।

3. सागर तथा बन्दरगाह (Sea And Ports)—यह नहर रक्त सागर (Red Sea) तथा रूम सागर (Mediterranean Sea) को मिलाती है। रूम सागर की ओर पोर्ट सईद (Port Said) तथा रक्त सागर की ओर पोट स्वेज़ (Port Suez) की बन्दरगाह है। इस नहर की कुल लम्बाई 162 किलोमीटर, चौड़ाई 60 से 65 मीटर तक तथा कमसे-कम गहराई 10 मीटर है। यह नहर पूरी लम्बाई में समुद्र तल पर बनी है।

इस नहर के मार्ग में नमकीन पानी की तीन झीलें हैं-

  1. लिटिल बिटर झील (Little Bitter Lake)
  2. ग्रेट बिटर झील (Great Bitter Lake)
  3. टिमशाह झील (Timshah Lake) ।

इस नहर को पार करने में 12 घण्टे लग जाते हैं। जहाज़ औसत रूप से 14 किलोमीटर प्रति घण्टा की गति से चलते हैं। कम चौड़ाई के कारण एक साथ दो जहाज़ गुज़र सकते हैं। इसलिए एक जहाज़ को झील में ठहरा लिया जाता है।

4. महत्त्व (Importance)-

  • यह मार्ग संसार की घनी जनसंख्या वाले मध्य क्षेत्र में से गुज़रता है।
  • इस मार्ग पर बहुत अधिक देश स्थित हैं जिनके द्वारा विभिन्न वस्तुओं का व्यापार होता है।
  • इस मार्ग पर ईंधन के लिए कोयला व तेल मिल जाते हैं।
  • इस मार्ग पर छोटे-छोटे कई मार्ग मिल जाते हैं।
  • इस मार्ग पर कई उत्तम बन्दरगाह स्थित हैं।
  • यह नहर तीन महाद्वीपों के केन्द्र पर स्थित है। (It is located at the crossroads of three continents) यहां यूरोप, अफ्रीका तथा एशिया महाद्वीप के मार्ग निकलते हैं।
  • इस नहर द्वारा इंग्लैंड के साम्राज्य तथा व्यापार की रक्षा होती है। इसलिए इसे ब्रिटिश साम्राज्य की जीवन रेखा (Life Line of British Empire) भी कहते हैं।
  • इस नहर के खुल जाने से दक्षिणी अफ्रीका का चक्कर काटकर आने-जाने की आवश्यकता नहीं रही।

5. व्यापारिक महत्त्व (Commercial Importance)-इस नहर के बन जाने से यूरोप तथा एशिया सुदूर पूर्व के बीच दूरी काफ़ी कम हो गई। कई देशों की दूरी की बचत निम्नलिखित है –

स्थान से स्थान तक दूरी की बचत
1. लन्दन खाड़ी फारस 8800 किलोमीटर
2. लन्दन मुम्बई 8000 किलोमीटर
3. लन्दन सिंगापुर 6000 किलोमीटर
4. लन्दन मम्बासा 4800 किलोमीटर
5. लन्दन जकार्ता 1500 किलोमीटर
6. लन्दन सिडनी 6000 किलोमीटर
7. न्यूयार्क मुम्बई 4000 किलोमीटर
8. न्यूयार्क हांगकांग 8800 किलोमीटर

 

6. व्यापार (Trade)-इस नहर के कारण एशिया तथा यूरोप के बीच व्यापार अधिक हो गया है। नहर को चौड़ा व गहरा करने के कारण अब औसत रूप से 87 जहाज़ प्रतिदिन गुज़र सकते हैं। 1976 में इस नहर में लगभग 20,000 जहाजों ने प्रवेश किया। इस मार्ग पर संसार का 25% व्यापार होता है। इसमें से अधिकतर जहाज़ ब्रिटेन को जाते हैं। 70% जहाज़ तेल वाहक जहाज़ (Oil Tankers) होते हैं। इस मार्ग से यूरोप को कच्चे माल (Raw Materials) जाते हैं तथा यूरोप से तैयार माल व मशीनरी एशिया को भेजी जाती है। एशिया की ओर से कपास, पटसन, चाय, चीनी, काहवा, गेहूं, तेल, ऊन, मांस, डेयरी पदार्थ, रेशम, रबड़, चावल, तांबा, तम्बाकू, चमड़ा आदि पदार्थ यूरोप को भेजे जाते हैं। इस नहर द्वारा भारत का 60% निर्यात तथा 70% आयात व्यापार होता था। परन्तु अब यह व्यापार आशा अन्तरीप मार्ग से होता है।

7. त्रुटियां (Drawbacks)-इस नहर में निम्नलिखित त्रुटियां भी हैं-

  • यह नहर कम चौड़ी व कम गहरी है। इसलिए बड़े-बड़े आधुनिक जहाज़ तथा बड़े-बड़े तेल वाहक जहाज़ (Oil Tankers) नहीं गुज़र सकते हैं।
  • एक पक्षीय यातायात होने के कारण नहर पार करने में समय अधिक लगता है।
  • यह मार्ग बहुत महंगा है। जहाज़ों से बहुत अधिक चुंगी कर (Taxes) वसूल किया जाता है।
  • दोनों ओर से मरुस्थल की रेत उड़-उड़ कर नहर में गिरती है। इसे साफ करने पर बहुत व्यय करना पड़ता है।

8. भविष्य (Future)-स्वेज़ नहर पर आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने की योजना है। कई बार म्रिस-इज़राइल
झगड़े के कारण यह नहर बन्द रही है। परन्तु अब संसार का अधिकतर व्यापार आशा अन्तरीप मार्ग पर तेज़ जहाज़ों से होने लग पड़ा है। भविष्य में स्वेज नहर इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं होगी। (It will not be the same old romantic Suez Canal.)

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प्रश्न 6.
पनामा नहर के भौगोलिक, आर्थिक व राजनीतिक महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर-
पनामा नहर (Panama Canal)-
1. स्थिति (Location)-यह नहर मध्य अमेरिका (Central America) के पनामा गणराज्य में स्थित है। यह नहर पनामा स्थल डमरू मध्य (Panama Isthmus) को काटकर बनाई गई है।

2. इतिहास (History)-स्वेज़ नहर की सफलता को देखकर पनामा नहर के निर्माण की योजना बनाई गई।
1882 ई० में फर्डिनेण्ड-डी-लैसैप्स ने इस नहर का निर्माण कार्य आरम्भ किया परन्तु पीले ज्वर तथा मलेरिया के कारण हजारों श्रमिक मर गए। अतः यह प्रयत्न असफल रहा। उसके पश्चात् सन् 1904 में संयुक्त राज्य (U.S.A.) सरकार ने इस नहर का निर्माण आरम्भ किया। यह नहर दस वर्ष में 15 अगस्त 1914 को बन कर तैयार हुई। इसके निर्माण पर 712 करोड़ पौंड खर्च हुए। यह नहर संयुक्त राज्य के अधीन है। इस नहर के निर्माण में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसलिए नहर का सफलतापूर्वक निर्माण आधुनिक विज्ञान की बहुत बड़ी सफलता है। (“The construction of Panama Canal was a great feat of Engineering.”) इस नहर का निर्माण दो खाड़ियों (Bays), एक कृत्रिम झील (Artifical Lake), एक प्राकृतिक झील (Natural Lake) तथा तीन द्वार प्रणालियों (Lock Systems) द्वारा किया गया है। इस नहर का तल समुद्र तल के समान नहीं है। इसका निर्माण कुलबेरा (Culbera) नामक पहाड़ी को काट कर किया गया है। गातुन (Gatun) नामक कृत्रिम झील बनाई गई हैं। इस नहर में तीन स्थानों पर फाटक बनाए गए हैं।

1. गातुन (Gatun) द्वार।
2. पैड्रो मिग्वल (Padromiguel) द्वार।
3. मिरा फ्लोर्स (Miraflore) द्वार।

इन द्वारों को खोलकर जल-स्तर समान किया जाता है। फिर जलयान ऊपर चढ़ाए या नीचे गाटुन बाँध उतारे जाते हैं।
यह दोहरी द्वार प्रणाली (Double Lock System) है जिससे एक ही समय में दोनों ओर यातायात सम्भव है। इस प्रकार जहाज़ों को इस नहर में 45 मीटर तक ऊपर चढ़ना या नीचे उतरना पड़ता है। इस नहर को चार्जेस (Charges) नदी द्वारा जल-विद्युत प्रदान की जाती है जिसके प्रकाश व जलयानों को खींचने की शक्ति मिलती है।
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3. सागर तथा बन्दरगाह (Seas and Ports)—यह नहर प्रशान्त महासागर (Pacific Ocean) तथा अन्ध महासागर (Atlantic Ocean) को मिलाती है। इसे प्रशान्त महासागर का द्वार (Gateway of the Pacific) भी कहते हैं। प्रशान्त तट पर पनामा (Panama) तथा अन्धमहासागर तट पर कालोन (Colon) के बन्दरगाह हैं। यह नहर 8.16 किलोमीटर लम्बी, 12 मीटर गहरी तथा 90 से 300 मीटर चौड़ी है। इस नहर को पार करने में 8 घण्टे लगते हैं। इस नहर में से बड़े-बड़े जहाज़ नहीं गुज़र सकते।

4. महत्त्व (Importance)-(1) इस नहर के निर्माण से अन्ध महासागर तथा प्रशान्त महासागर के बीच दूरी कम हो गई है। (Panama Canal has changed the element of distance in geography of transport.”) इससे पहले दक्षिणी अमेरिका के (सिरे) केप हार्न (Cape Horn) का चक्कर लगा कर जाते थे। इस नहर से सबसे अधिक लाभ संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) को हुआ है। इसके पश्चिमी व पूर्वी तट से ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिणी अमेरिका, जापान की बन्दरगाहों की दूरी कम हो गई है। इस नहर के द्वारा यूरोप को कोई विशेष लाभ नहीं है। कई देशों की दूरी की बचत इस प्रकार है –

स्थान से स्थान तक दूरी की बचत
1. न्यूयार्क सान फ्रांसिस्को 1300 किलोमीटर
2. न्यूयार्क सिडनी 6000 किलोमीटर
3. न्यूयार्क हांगकांग 7000 किलोमीटर
4. न्यूयार्क वालपरेसो 6800 किलोमीटर
5. न्यूयार्क टोकियो 6000 किलोमीटर
6. न्यूयार्क सिडनी 700 किलोमीटर
7. न्यूयार्क सान फ्रांसिस्को 9000 किलोमीटर

(2) इस नहर के कारण पश्चिमी द्वीप समूह (West Indies) का महत्त्व बढ़ गया है।
(3) इस नहर के कारण संयुक्त राज्य संकट के समय एक ही नौ-सेना (Navy) से पश्चिमी व पूर्वी तट की रक्षा कर सकता है।

5. व्यापार (Trade)-इस नहर द्वारा व्यापार में बहुत वृद्धि हुई है। औसत रूप से प्रतिदिन 50 जहाज़ गुजरते हैं।
प्रति वर्ष लगभग 15,000 जहाज़ प्रवेश करते हैं। अन्ध महासागर से प्रशान्त महासागर की ओर अधिक व्यापार होता है। पूर्व की ओर से संयुक्त राज्य व यूरोप से शिल्पी वस्तुएं, खनिज पदार्थ, तेल, मशीनें, दवाइयां, सूती व ऊनी कपड़ा भेजा जाता है। पश्चिमी की ओर से डेयरी पदार्थ, मांस, रेशम, रबड़, चाय, तम्बाकू, नारियल, शोरा, तांबा भेजा जाता है।

6. त्रुटियां (Drawbacks)-इस मार्ग में निम्नलिखित दोष –

  1. इस नहर में बड़े-बड़े जहाज़ नहीं गुज़र सकते।
  2. द्वार प्रणाली के कारण काफ़ी असुविधा रहती है।
  3. इस मार्ग पर बन्दरगाह बहुत कम हैं।
  4. इस नहर के साथ के देश उन्नत नहीं हैं।

7. भविष्य (Future)-दक्षिणी अमेरिका के देश बड़ी तेज़ी से उन्नति कर रहे हैं। इनके विकास के कारण इस मार्ग पर व्यापार बढ़ेगा।

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प्रश्न 7.
भारतीय में तेल तथा गैस पाइप लाइनों की विस्तार से व्याख्या करो।
उत्तर-
पाइप लाइन भी परिवहन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। इस साधन के द्वारा खास कर तरल पदार्थों का परिवहन किया जाता है। इन पाइप लाइनों की सहायता से तरल पदार्थ जैसे तेल तथा गैस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। इन पाइप लाइनों की सहायता से कोयले को भी तरल पदार्थ के रूप में एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है। पाइप लाइन द्वारा लेकर जाए जाने वाले स्रोत हैं-पैट्रोलियम तथा पैट्रोलियम से बने पदार्थ, प्राकृतिक गैस, जैविक ईंधन इस तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाये जाते हैं। पंप स्टेशनों को तेल पाइपों के द्वारा ही चलाया जाता है। इसी प्रकार बहुत सारे प्राकृतिक पदार्थों को तरल रूप में तबदील करके इनको पाइप लाइनों के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है।

कुछ प्रमुख राष्ट्रीय पाइप लाइनें हैं-
1. तुर्कमेनिस्तान अफगानिस्तान-पाकिस्तान भारत (TAPI पाइप लाइन)-इस पाइप लाइन का विकास एशियाई विकास बैंक द्वारा किया गया तथा यह प्राकृतिक गैस पाइप लाइन है। यह पाइप लाइन, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान में से गुजरती है। इस प्रकल्प का प्रारम्भ 13 दिसंबर, 2015 में किया गया तथा 2019 तक पूरी करने की योजना बनाई गई है। इस पाइप लाइन की दिशा उत्तर से दक्षिण तक है। इसकी कुल लंबाई 1814 कि०मी० बनती है।

2. हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर ( HBJ) पाइप लाइन-यह पाइप लाइन मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित विजयपुर या विजैपुर दोनों नामों से पहचानी जाती है। इसलिए इसको HBJ या HVJ कहते हैं। यह पाइप लाइन गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया की तरफ से बिछाई गयी। इस प्रकल्प का प्रारम्भ 1986 में किया गया तथा 1997 में पूरा हो गया। भारत में गैस परिवर्तन के लिए हजीरा-विजयपुर, जगदीशपुर पाइप लाइन बनाई गई। यह पाइप लाइन 1700 किलोमीटर लम्बी है। यह पाइप लाइन गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश राज्यों में से गुजरती है। इस गैस से विजयपुर, सवाई माधोपुर, जगदीशपुर, शाहजहांपुर, अंबाला, बथराला खाद बनाने की योजना है।

3. नाहरकटिया-नानूमती-बरौनी पाइप लाइन-NNB देश की ऐसी पहली पाइप लाइन है जो कि नाहरकटिया के तेल के कुओं से नानूमती (असम) तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए बिछाई गई थी तथा इसके बाद बरौनी (बिहार) तक इसको बढ़ा दिया गया है। इस पाइप लाइन की लम्बाई 1167 किलोमीटर है तथा अब तक इसको उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर तक बढ़ा दिया गया है। इस पाइप लाइन ने 1962 तक अपना काम आरम्भ कर लिया था तथा इसका बरौनी का भाग 1964 तक क्रियाशील हुआ।

4. जामनगर लोनी LPG पाइप लाइन-यह पाइप लाइन गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) की तरफ 1250 करोड़ की लागत से तैयार की गई है। यह पाइप लाइन 1269 किलोमीटर लम्बी है। यह भारत के गुजरात, राजस्थान, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों में से गुजरती है। यह पाइप लाइन दुनिया की सबसे लम्बी पाइप लाइन है तथा यह पाइप लाइन 3 लाख एल० पी०जी० सिलिंडरों जितनी गैस हर रोज़ 1269 कि०मी० की दूरी तक लेकर जाती है। पाइप लाइन द्वारा इस काम के लिए 500 करोड़ रुपये की बचत होती हैं।

5. कांडला-बठिंडा पाइप लाइन-कांडला-बठिंडा पाइप लाइन इण्डियन आयल कार्पोरेशन (IOC) की तरफ
से बठिंडा के तेल शोधक कारखाने को कच्चा तेल पहुंचाने के लिए 2392 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किये गए थे। इस पाइप लाइन की लम्बाई 1443 किलोमीटर है। इस योजना का पहला चरण कांडला से लेकर सांगानौर तक था। यह चरण 1996 में पूरा हो गया था। इस पाइप लाइन का अगला चरण जारी है। यह चरण बठिंडा-जम्मू-श्रीनगर तक गैस पाइप लाइन बिछाने का है।

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प्रश्न 8.
भारतीय वायुमार्ग यातायात का वर्णन करो तथा राष्ट्रीय हवाई अड्डों की जानकारी दो।
उत्तर-
आधुनिक समय में वायुमार्ग यातायात सबसे अधिक तीव्रगामी यातायात है। यह यातायात लम्बे सफर के लिए बहुत लाभदायक है। आज के समय में संसार भर में वायु यातायात उपलब्ध है। भारतीय घनी आबादी वाले देशों में वायुमार्ग मौजूद है। भारत में वायु यातायात का प्रारम्भ 1911 में हुआ। इसके बाद भारत में कई हवाई अड्डों का निर्माण हो गया। संसार में वायु मार्गों का विकास प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् हुआ। इसमें मार्गों के निर्माण पर खर्च नहीं होता केवल हवाई अड्डों का निर्माण करना पड़ता है। 1947 में देश की आजादी के समय चार मुख्य कंपनियों के द्वारा ही हवाई यातायात शुरू किया। ये कंपनियां थीं टाटा-सन्ज लिमिटेड, इण्डियन नैशनल एयरवेज़, एयर सर्विस आफ इंडिया तथा डैकन ऐयरवेज़। 1951 तक 4 और कंपनियों ने भारत में हवाई यातायात के लिए काम शुरू कर दिया। इसके बाद कंपनियों का स्वामित्व भारत सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया तथा दो कॉर्पोरेशनें बना दीं। एयर इंडिया तथा इण्डियन एयरलाइन्ज/परंतु आज ये कॉर्पोरेशनें एक ही हो चुकी हैं।

Airports Authority of India की तरफ से दी गई जानकारी से पता चलता है कि 30 राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं तथा 400 के करीब घरेलू हवाई अड्डे हैं, जबकि विदेशी कंपनियों के जहाजों को सिर्फ राष्ट्रीय हवाई अड्डों से ही उड़ानें भरने की अनुमति है।

पंजाब में इस समय दो राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं जो अमृतसर तथा मोहाली में हैं तथा पंजाब में राष्ट्रीय हवाई अड्डों के अलावा बठिंडा, साहनेवाल, पटियाला तथा पठानकोट में घरेलू हवाई अड्डे हैं।

यू०एस०ए०, यूरोप तथा आसियान की विदेशी कंपनियों को भारत में उड़ानों को भरने की मन्जूरी दिए जाने के बाद कई प्राइवेट कंपनियों ने जिनमें एयरवेज, स्पाइस जैट, गो इंडिगो, किंग फिशर, विस्तारा इत्यादि के जहाज़ भी अब भारत के देशी तथा विदेशी उड़ानें चला रहे हैं।

संसार में हवाई मार्गों का विकास विश्वयुद्ध के बाद हुआ। आजकल इसका बहुत बड़ा महत्त्व है। यह एक तेज़ गति वाला साधन है। इस में मार्गों के निर्माण में कोई खर्च नहीं होता। इससे पर्वतों, विशाल महासागरों व मरुस्थलों के पार पहुँचा जा सकता है। जहां दूसरे साधन नहीं पहुँच सकते। विभिन्न संस्कृतियों के बड़े-बड़े नगरों के वायुमार्गों द्वारा जुड़े होने से अंतर्राष्ट्रीय भावना का विकास होता है।
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वायु मार्गों के गुण तथा दोष-
संसार के वायु मार्गों का विकास पहले विश्व युद्ध के पश्चात् हुआ। आजकल इसका बहुत बड़ा महत्त्व है। यह एक तीव्रगामी साधन है। इसमें मार्गों के निर्माण पर कोई खर्च नहीं होता। केवल हवाई अड्डों का निर्माण करना पड़ता है। इससे पर्वतों, विशाल महासागरों व मरुस्थलों के पार पहुंचा जा सकता है। जहाँ दूसरे साधन नहीं पहुँच सकते। विभिन्न संस्कृतियों के बड़े-बड़े नगरों के वायु मार्गों द्वारा जुड़े होने में अंतर्राष्ट्रीय भावना का विकास होता है।
परंतु इस साधन पर व्यय बहुत होता है। इसका व्यापारिक महत्त्व भी अधिक नहीं है। वायुयानों द्वारा यात्रियों, डाक व शीघ्र खराब होने वाले पदार्थों का परिवहन होता है।

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प्रश्न 9.
व्यापार से आपका क्या भाव है ? इसकी किस्मों का विस्तार से वर्णन करो।
उत्तर-
वस्तुओं की क्रय-विक्रय/लेन-देन/खरीद-वेच को व्यापार कहते हैं। यह व्यापार की क्रिया खरीददार तथा विक्रेता के बीच का लेन-देन होता है। व्यापार मुख्य रूप में दो प्रकार का होता है।

1. निजी व्यापार-जो व्यापार निजी तौर पर या दो या अधिक लोगों के मध्य होता है वह छोटे स्तर का व्यापार होता है।
2. राष्ट्रीय स्तर का व्यापार-इस प्रकार के व्यापार में वस्तुओं को खरीदना बेचना राष्ट्रीय स्तर पर होता है। ज्यादातर राष्ट्रीय सीमाओं या इलाकों के पार किया व्यापार राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है। राष्ट्रीय व्यापार करने के कई कारण हैं-

  1. किसी देश में प्राकृतिक साधनों की कमी।
  2. देश में वस्तुओं की मांग तथा पूर्ति में अंतर।
  3. तकनीकी साधनों की कमी कारण कई बार वस्तुएं किसी अन्य देश से मंगवानी पड़ती हैं।
  4. भौगोलिक भिन्नता के कारण स्रोतों में अंतर आ जाता है।
  5. व्यापारिक नीति तथा आर्थिक विकास में अंतर।
  6. देशों के आपसी संबंध।

विश्व व्यापार संगठन (WTO)- सन् 1995 में गैट का रूप बदलकर विश्व व्यापार संगठन बनाया गया। यह जेनेवा में एक स्थायी संगठन के रूप में कार्यरत है तथा यह व्यापारिक झगड़ों का निपटारा भी करता है। यह संगठन सेवाओं के व्यापार को भी नियंत्रित करता है, किंतु इसे अभी भी महत्त्वपूर्ण कर रहित नियंत्रणों जैसे निर्यात निषेध, निरीक्षण की आवश्यकता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा स्तरों तथा आयात लाइसैंस व्यवस्था, जिनसे आयात प्रभावित होता है, को सम्मिलित करना शेष है।

भारत सरकार की तरफ से Indian Institute of Foreign Trade की स्थापना की गयी है। इन संस्था की स्थापना 1963 में की गयी। यह भारत के पहले 10 चोटी के व्यापारिक तथा कारोबारी आदारों में एक संस्था है। इस संस्था के आदारे नई दिल्ली तथा कोलकाता में मौजूद है।
मौजूदा समय में 120 से अधिक क्षेत्र व्यापार संगठन संसार का 52% व्यापार कंट्रोल कर रहे हैं।

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परिवहन/यातायात, संचार तथा व्यापार PSEB 12th Class Geography Notes

  • वस्तुओं तथा यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने को यातायात कहते हैं। किसी भी देश के ।
    विकास के लिए यातायात से संबंधित गतिविधियां एक अहम भूमिका निभाती हैं। यातायात सुविधाओं को | मुख्य रूप में तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है-

    • स्थल मार्ग यातायात
    • जल मार्ग यातायात
    • वायु मार्ग यातायात
  • स्थल मार्ग यातायात में सड़कें तथा रेलवे प्रारंभिक यातायात के साधन हैं।
  • भारतीय यातायात का तंत्र एक विशाल प्रसार है। 1950-51 में कुल स्थल मार्ग 4 लाख किलोमीटर था जो कि 2007-08 में 33.1 लाख कि०मी० तक पहुँच गया।
  • सड़कों का जाल पसारने के लिए कई योजनाएं, जैसे कि नागपुर पलान बीस वर्षीय, ग्रामीण सड़क विकास योजना, बी०ओ०टी० केंद्रीय सड़क फंड इत्यादि देश में चल रही हैं।
  • सड़कों में ग्रामीण सड़कें, जिला, राज्य, राष्ट्रीय शाह मार्ग इत्यादि वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।
  • उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा प्रोजैक्ट देश के हर कोने तक बढ़िया सड़क-मार्गों का जाल | पसारने के लिए बनाया गया। इस योजना की देख-रेख की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय हाईवे एथारिटी ऑफ इंडिया के सुपुर्द की गई।
  • भारत में राष्ट्रीय शाहमार्ग प्रबंध, भारत सरकार की एजैन्सी की ओर से चलाया तथा संभाला जाता है।
  • भारतीय रेलवे तीन गेज पर गाड़ियां चलाती हैं-चौड़ी गेज पटरी, मीटर गेज पटरी तथा संकीर्ण गेज पटरी।
  • भारतीय रेलवे के कुल 18 ज़ोन हैं।
  •  संसार की पहली रेलवे लाइन 1863 से 1869 के बीच अमेरिका में बिछाई गई।
  • ट्रांस साइबेरियाई रेल मार्ग मास्को से रूस के पूर्व में व्लादिवोस्तोक तक 9,289 किलोमीटर लंबा है। यह विश्व का सबसे लंबा रेल मार्ग है।
  • स्वेज नहर लाल सागर तथा रोम सागरों को आपस में जोड़ती है।
  • पनामा नहर अंधमहानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई को तेज़ी से चलने वाली रेल गाड़ी के तंत्र जोड़ने की योजना को डायमंड चतुर्भुज कहते हैं।
  • भारत में अर्ध तेज़ रफ़्तार रेलवे गलियारे हैं।
  • पाइप लाइन द्वारा तरल गैसीय पदार्थों की स्थान बदली की जाती है।
  • जब हम अपने विचारों, संदेश, भावनाओं को लिखकर या बोलकर दूसरों तक पहुँचाते हैं, उसे संचार कहते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं-
    • व्यक्तिगत संचार,
    •  जन-संचार।
  • यातायात-वस्तुओं तथा मनुष्य को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने को यातायात कहते हैं।
  • यातायात के साधनों की किस्में-यातायात के साधनों को मुख्य रूप में तीन किस्मों में विभाजित किया जाता ‘ है-स्थल, जल तथा वायु मार्ग।
  • राष्ट्रीय शाह मार्ग-राष्ट्रीय मार्गों का निर्माण तथा देखभाल भारत की केंद्र सरकार करती है। इस तरह की सड़कें राज्यों की राजधानियों, बंदरगाहों और नामवर तथा महत्त्वपूर्ण शहरों को आपस में मिलाती हैं।
  • सुनहरी चतुर्भुज सड़क मार्ग-इस प्रोजैक्ट में भारत के चार महानगर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को सड़क-मार्ग से जोड़ा गया है तथा इसका चतुर्भुज आकार होने के कारण इसको चतुर्भुज मार्ग कहते हैं।
  • बंदरगाह-भारत में 12 मुख्य बंदरगाहें हैं।
  • जलमार्गों की किस्में-
    • आंतरिक जल मार्ग
    • समुद्री जल मार्ग।
  • संचार-जब हम अपने संदेश, भाव, विचारों को लिखकर या बोलकर पहुँचाते हैं इस क्रिया को संचार कहते हैं।
  • संचार की किस्में-
    • व्यक्तिगत संचार
    • जन संचार।
  • व्यापार-वस्तु को बेचने तथा खरीदने की क्रिया को व्यापार कहते हैं।
  • भारत में ईंधन, खनिज तेल, खनिज मोम, जैविक रसायन फार्मेसी उत्पादन तथा चीजें निर्यात (बरामद) की जाती हैं। पैट्रोल, खनिज, मशीनरी, खादें, लोहा इस्पात, मोती के कीमती पत्थर, सोना-चांदी, खुराकी तेल, कागज़, दवाइयां, फर्नीचर इत्यादि का आयात (दरामद) किया जाता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

Punjab State Board PSEB 12th Class Political Science Book Solutions Chapter 5 उदारवाद Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 Political Science Chapter 5 उदारवाद

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
उदारवाद क्या है ? इसके मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (What is Liberalism ? Discuss its main principles.)
अथवा
उदारवाद की परिभाषा दीजिए तथा इसके मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (Define Liberalism and Explain its basic principles.)
अथवा
उदारवाद की परिभाषा बताइए और इसकी मुख्य विशेषताओं की व्याख्या कीजिए। (Define Liberalism and discuss its main characteristics.)
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। यूरोपीय देशों पर इस विचारधारा का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। परन्तु उदारवाद की एक निश्चित परिभाषा देना अति कठिन कार्य है। इसका कारण यह है कि उदारवाद एक निश्चित और क्रमबद्ध विचारधारा नहीं है। उदारवाद किसी एक विचारक की देन नहीं है और न ही इसका किसी एक युग के साथ सम्बन्ध है। यह एक ऐसी व्यापक विचारधारा है जिसमें अनेक विद्वानों के विचार और आदर्श शामिल हैं और जो समय के साथ-साथ परिवर्तित होते रहे हैं। लॉक और लॉस्की तक और आगे भी इसका क्रम चलता जा रहा है तथा इसका कोई अन्त नहीं है। अत: उदारवाद को सीमाओं में बांधना एक कठिन कार्य है। लॉस्की (Laski) ने ठीक ही कहा है, “उदारवाद की व्याख्या करना या परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है क्योंकि यह कुछ सिद्धान्तों का समूहमात्र ही नहीं है बल्कि मस्तिष्क में रहने वाला विचार भी है।”

उदारवाद से सम्बन्धित गलत धारणाएं-उदारवाद के अर्थ को समझने के लिए यह जानना अति आवश्यक है कि उदारवाद क्या नहीं है ?

1. उदारवाद अनुदारवाद का उल्टा नहीं है-कुछ लोग उदारवाद को अनुदारवाद (Conservatism) का उल्टा मानते हैं। अनुदारवाद परिवर्तनों और सुधार का विरोध करने वाली विचारधारा है। परन्तु उदारवाद ने 19वीं शताब्दी तक उन सभी संस्थाओं, कानूनों और प्रथाओं का विरोध किया जिनमें राजा, सामन्तों और वर्ग के विशेषाधिकारों की रक्षा होती थी। इस प्रकार उदारवादियों ने क्रान्तिकारी परिवर्तनों का जोरों से समर्थन किया। किन्तु आज जब साम्यवादी पूंजीवाद को समाप्त करने की बाद करते हैं तो उदारवादी उनका विरोध करते हैं। एल्बर्ट बिजबोर्ड (Albert Weisbord) ने ठीक ही कहा है, “विरोधात्मक रूप में पूरे इतिहास में उदारवादियों ने क्रान्ति को प्रारम्भ किया है और फिर इसके विरोध में संघर्ष किया है।”

2. उदारवाद व्यक्तिवाद नहीं है-कुछ व्यक्ति उदारवाद को व्यक्तिवाद का पर्यायवाची मानते हैं जोकि पूर्णतः सत्य नहीं है। निःसन्देह व्यक्तिवाद उदारवाद की आधारशिला है परन्तु दोनों एक ही चीज़ नहीं है। सेबाइन (Sabine) ने इन दोनों में भिन्नता को स्पष्ट करते हुए कहा है, “19वीं शताब्दी के तीसरे चरण के अन्त तक इन दोनों में कोई विशेष भेद नहीं था, क्योंकि उस समय तक ये दोनों विचारधाराएं व्यक्ति के जीवन में राज्य के हस्तक्षेप की विरोधी थीं, लेकिन बाद
में स्थिति बदल गई और उदारवाद में काफ़ी परिवर्तन आ गया। इसका रूप सकारात्मक हो गया है। उदारवाद व्यक्ति के स्थान पर सामाजिक हित को महत्त्व देने लगा है। यहां तक कि जन-कल्याण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए व्यक्तियों के जीवन में हस्तक्षेप करना या उस पर नियन्त्रण करना राज्य का आवश्यक कार्य बन गया है।”

3. उदारवाद और लोकतन्त्र एक नहीं है-कुछ विद्वान् लोकतन्त्र को ही उदारवाद मानते हैं जो कि ठीक नहीं है। यद्यपि उदारवाद और लोकतन्त्र में गहरा सम्बन्ध है, परन्तु दोनों एक ही नहीं है। उदारवाद व्यक्ति की स्वतन्त्रता पर जोर देता है जबकि लोकतन्त्र समानता को महत्त्व देता है। उदारवाद वास्तव में लोकतन्त्र से कुछ अधिक है।

उदारवाद का सही अर्थ-उदारवाद को अंग्रेजी में ‘लिबरलिज्म’ (Liberalism) कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबरलिस’ (Liberalis) से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है-स्वतन्त्र व्यक्ति (Free man) । इस सिद्धान्त का सार यही है कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके। इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका (Encyclopaedia Britainica) के अनुसार, “उदारवाद के सारे विचार का सार स्वतन्त्रता का सिद्धान्त है, इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता का विचार इसका समूल है।” मैकगवर्न (Macgovern) के शब्दों में, “एक राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद दो पृथक् तत्त्वों का मिश्रण है। इनमें से एक तत्त्व लोकतन्त्र है और दूसरा है व्यक्तिवाद।” (“Liberalism as a political creed is compound of two separate elements. One of these is democracy, the other is individualism.”) उदारवाद एक तरफ लोकतन्त्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है और दूसरी ओर व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए पूर्ण अवसर देना चाहता है। उदारवाद व्यक्ति को ही समस्त मानवीय व्यवस्था का केन्द्र मानता है। सारटोरी (Sartori) ने उदारवाद की सरल परिभाषा दी है। उसके शब्दों में, “साधारण शब्दों में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त व व्यवहार है।” (“In simple words liberalism is the theory. and practice of individual liberty, Judicial defence and constitutional state.”)

बट्रेण्ड रसल (Bertand Russel) के अनुसार, “उदारवादी विचारधारा व्यवहार में जियो और जीने दो, सहनशील तथा स्वतन्त्रता जिस सीमा तक सार्वजनिक व्यवस्था आज्ञा दे तथा राजनीतिक मामलों में कट्टरता का अभाव है।”
हैलोवेल (Hallowell) ने उदारवाद का अर्थ निम्नलिखित विश्वासों में अंकित किया है-

  • मनुष्य के व्यक्तित्व का सर्वोच्च मूल तथा सभी व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता।
  • व्यक्ति की इच्छा की स्वतन्त्रता।
  • व्यक्ति की भलाई व दृढ़ विवेकशीलता।
  • जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकारों का अस्तित्व।
  • व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से पारस्परिक सहमति द्वारा राज्य की रचना।
  • व्यक्ति तथा राज्य के बीच प्रसंविदापूर्ण सम्बन्ध ; आदि समझौते की शर्तों का उल्लंघन हो तो व्यक्ति को राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने का अधिकार है।
  • सामाजिक नियन्त्रण के यन्त्र के रूप में कानून का प्रशासकीय आदेश से ऊपर होना।
  • व्यक्ति को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और धार्मिक आदि सभी क्षेत्रों में स्वतन्त्रता है और उसे स्वतन्त्र होना चाहिए।
  • विवेक पर आश्रित एक सर्वोच्च यथार्थ का अस्तित्व जिसे व्यक्ति के अन्त:करण व चिन्तन द्वारा प्राप्त किया जा सके।
    उदारवाद के मुख्य सिद्धान्त या विशेषताएं-

यद्यपि उदारवाद अनेक विचारधाराओं का सम्मिश्रिण है, फिर भी इसके कुछ सर्वमान्य मौलिक सिद्धान्त हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित हैं-

1. मानवीय विवेक में आस्था (Faith in Human Reason)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त मानवीय बुद्धि और विवेक में आस्था है। मध्य युग में यूरोप के अनेक देशों में ईसाइयत ने मनुष्य की बुद्धि को कठोर बन्धनों में जकड़ रखा था और वह धर्म, ईश्वर तथा पोप को ही सब कुछ मानता था। परन्तु नवजागरण ने इन बन्धनों को तोड़ दिया और मनुष्य को विवेक द्वारा विश्व की संस्थाओं को समझने के लिए कहा। 17वीं तथा 18वीं शताब्दी में जॉन लॉक और टॉमस पेन जैसे उदारवादियों ने इस बात पर बल दिया कि मनुष्य को किसी भी ऐसे सिद्धान्त, कानून या परम्परा को नहीं मानना चाहिए जिसकी उपयोगिता बुद्धि से सिद्ध न होती हो। टॉमस पेन ने रूढ़िवादी परम्पराओं को चुनौती देते हुए कहा है, “मेरा अपना मन ही मेरा चर्च है।” इस प्रकार उदारवाद भावना के स्थान पर विवेक को महत्त्व देता है।

2. इतिहास तथा परम्परा का विरोध (Opposition of History and Tradition)—मध्य युग में अन्धविश्वास और रूढ़िवादी परम्पराओं का बोलबाला था। उदारवाद अन्धविश्वासों और रूढ़ियों के विरुद्ध विद्रोह था। उदारवादियों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हीं संस्थाओं, सिद्धान्तों तथा कानूनों इत्यादि को स्वीकार किया जाए तो विवेक के साथ संगत हों। इंग्लैण्ड के उपयोगितावादी उदारवादियों ने उँपयोगिता के आधार पर पहले से चली आ रही व्यवस्था और परम्पराओं का खण्डन किया। उदारवाद के प्रभाव के कारण ही इंग्लैण्ड, अमेरिका और फ्रांस में क्रान्तियां हुईं। परन्तु उदारवाद सदा ही विद्यमान व्यवस्था का विरोधी नहीं रहा है और आज तो वह व्यवस्था को समाप्त करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।

3. मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक (Supporter of Human Freedom)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसी स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो। लॉस्की (Laski) के अनुसार, “उदारवाद का स्वतन्त्रता से सीधा सम्बन्ध है क्योंकि इसका जन्म समाज के किसी वर्ग के द्वारा जन्म अथवा धर्म पर आधारित विशेषाधिकारों का विरोध करने के लिए हुआ है।”

4. राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है (The purpose of the State is to develop the personality of the individual)-उदारवादियों के अनुसार, व्यक्ति के विकास में ही राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।

5. व्यक्ति साध्य तथा राज्य साधन (Man is the End, State is the Mean)-उदारवादी व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानते हैं। मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं। इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है। वह सेवक है, स्वामी नहीं। व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना ही राज्य का उद्देश्य है। उदारवादी आदर्शवादियों के इस कथन में विश्वास नहीं करते कि समाज व्यक्तियों की एक उच्च नैतिक संस्था है। आधुनिक उदारवादी व्यक्ति और समाज के हित में सामंजस्य स्थापित करते हैं और दोनों को एक-दूसरे का पूरक मानते हैं न कि विरोधी।

6. राज्य कृत्रिम संस्था है (State is an Artificial institution)-उदारवादी राज्य को ईश्वरीय या प्राकृतिक संस्था नहीं मानते बल्कि वे राज्य को कृत्रिम संस्था मानते हैं। उनके मतानुसार राज्य का निर्माण व्यक्तियों ने अपने विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया है। यदि राज्य व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता तो व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य और समाज के संगठन में आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सके।

7. व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों की धारणा में विश्वास (Belief in the concept of Natural Rights of Man)-उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों में विश्वास करता है। प्राकृतिक अधिकार वह अधिकार है जो व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होते हैं। लॉक के अनुसार, जीवन, स्वतन्त्रता और सम्पत्ति के अधिकार प्रमुख प्राकृतिक अधिकार हैं। राज्य एवं समाज प्राकृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते। राज्य का परम कर्तव्य प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करना है।

8. धर्म-निरपेक्षता में विश्वास (Faith in Secularism) मध्य युग में चर्च का व्यक्ति के जीवन पर पूरा नियन्त्रण था। उदारवादियों ने धर्म के विशेषाधिकारों का विरोध किया तथा व्यक्ति की धार्मिक स्वतन्त्रता पर बल दिया। उदारवादियों ने धार्मिक संस्थाओं को राज्य से अलग रखने की बात कही और सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म की स्वतन्त्रता देने पर बल दिया। उदारवाद के अनुसार, धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है और राज्य को व्यक्तिगत धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

9. लोकतन्त्र का समर्थन (Support of Democracy)-लोकतन्त्र उदारवाद का अभिन्न अंग है। उदारवाद का जन्म ही स्वेच्छाचारी शासन के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ और लोकतन्त्र उदारवाद का मूल तत्त्व है। उदारवाद लोक प्रभुसत्ता में विश्वास रखता है। उदारवाद के अनुसार मनुष्य स्वतन्त्र पैदा हुआ है, इसलिए उस पर शासन उसकी सहमति से होना चाहिए। व्यक्ति को अधिकार तभी प्राप्त हो सकते हैं यदि ‘लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली हो और व्यक्ति को शासन के निर्माण में अधिकार प्राप्त हों। इसलिए उदारवाद का निर्वाचित संसद्, वयस्क मताधिकार, प्रेस की स्वतन्त्रता एवं निष्पक्ष न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।

10. संवैधानिक शासन (Constitutional Government)-उदारवाद का उदय निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासन की प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। इसलिए उदारवाद निरंकुश शासन का विरोधी है। उदारवाद सीमित सरकार अर्थात् सरकार की सीमित शक्तियों का समर्थन करता है। यदि शासक मनमानी करता है या अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है तो जनता को ऐसे शासक के विरुद्ध विद्रोह करने का अधिकार है। लॉक ने इंग्लैण्ड की 1688 की क्रान्ति का समर्थन किया।

11.बहसमुदाय समाज में विश्वास (Belief in Pluralistic Society)-उदारवादियों के अनुसार, मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक समुदायों की स्थापना करता है। समाज में अनेक समुदाय होते हैं और राज्य भी एक समुदाय है। राज्य विभिन्न समुदायों में सामंजस्य स्थापित करते है। व्यक्ति के जीवन के कई पहलू हैं जो राज्य के कार्य-क्षेत्र से बाहर हैं। कई समुदाय जैसे परिवार राज्य से अधिक प्राकृतिक और मौलिक है। लॉस्की और मैकाइवर ने बहु-समुदाय समाज की धारणा पर विशेष बल दिया।

12. अन्तर्राष्ट्रीय और विश्व-शान्ति में विश्वास (Faith in Internationalism and World Peace)उदारवाद ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धान्त पर आधारित है। यह विश्व-शान्ति तथा विश्व-बन्धुत्व के आदर्श में विश्वास करता है। प्रत्येक राष्ट्र को धीरे-धीरे शान्तिपूर्वक प्रगति करनी चाहिए और उसे अन्य राष्ट्रों की प्रगति में सहायता करनी चाहिए। प्रत्येक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र की अखण्डता एवं सीमा का आदर करना चाहिए और किसी राष्ट्र को दूसरे के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल अन्तर्राष्ट्रीय कानून और शान्तिपूर्वक साधनों द्वारा होना चाहिए।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 2.
उदारवाद के मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन करो। (Explain the main Principles of Liberalism.)
अथवा
उदारवाद के मूल सिद्धान्तों की विवेचना करो। (Discuss the Fundamental Principles of Liberalism.)
उत्तर-
यद्यपि उदारवाद अनेक विचारधाराओं का सम्मिश्रिण है, फिर भी इसके कुछ सर्वमान्य मौलिक सिद्धान्त हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित हैं-

1. मानवीय विवेक में आस्था (Faith in Human Reason)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त मानवीय बुद्धि और विवेक में आस्था है। मध्य युग में यूरोप के अनेक देशों में ईसाइयत ने मनुष्य की बुद्धि को कठोर बन्धनों में जकड़ रखा था और वह धर्म, ईश्वर तथा पोप को ही सब कुछ मानता था। परन्तु नवजागरण ने इन बन्धनों को तोड़ दिया और मनुष्य को विवेक द्वारा विश्व की संस्थाओं को समझने के लिए कहा। 17वीं तथा 18वीं शताब्दी में जॉन लॉक और टॉमस पेन जैसे उदारवादियों ने इस बात पर बल दिया कि मनुष्य को किसी भी ऐसे सिद्धान्त, कानून या परम्परा को नहीं मानना चाहिए जिसकी उपयोगिता बुद्धि से सिद्ध न होती हो। टॉमस पेन ने रूढ़िवादी परम्पराओं को चुनौती देते हुए कहा है, “मेरा अपना मन ही मेरा चर्च है।” इस प्रकार उदारवाद भावना के स्थान पर विवेक को महत्त्व देता है।

2. इतिहास तथा परम्परा का विरोध (Opposition of History and Tradition)—मध्य युग में अन्धविश्वास और रूढ़िवादी परम्पराओं का बोलबाला था। उदारवाद अन्धविश्वासों और रूढ़ियों के विरुद्ध विद्रोह था। उदारवादियों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हीं संस्थाओं, सिद्धान्तों तथा कानूनों इत्यादि को स्वीकार किया जाए तो विवेक के साथ संगत हों। इंग्लैण्ड के उपयोगितावादी उदारवादियों ने उँपयोगिता के आधार पर पहले से चली आ रही व्यवस्था और परम्पराओं का खण्डन किया। उदारवाद के प्रभाव के कारण ही इंग्लैण्ड, अमेरिका और फ्रांस में क्रान्तियां हुईं। परन्तु उदारवाद सदा ही विद्यमान व्यवस्था का विरोधी नहीं रहा है और आज तो वह व्यवस्था को समाप्त करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।

3. मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक (Supporter of Human Freedom)-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसी स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो। लॉस्की (Laski) के अनुसार, “उदारवाद का स्वतन्त्रता से सीधा सम्बन्ध है क्योंकि इसका जन्म समाज के किसी वर्ग के द्वारा जन्म अथवा धर्म पर आधारित विशेषाधिकारों का विरोध करने के लिए हुआ है।”

4. राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है (The purpose of the State is to develop the personality of the individual)-उदारवादियों के अनुसार, व्यक्ति के विकास में ही राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।

5. व्यक्ति साध्य तथा राज्य साधन (Man is the End, State is the Mean)-उदारवादी व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानते हैं। मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं। इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है। वह सेवक है, स्वामी नहीं। व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना ही राज्य का उद्देश्य है। उदारवादी आदर्शवादियों के इस कथन में विश्वास नहीं करते कि समाज व्यक्तियों की एक उच्च नैतिक संस्था है। आधुनिक उदारवादी व्यक्ति और समाज के हित में सामंजस्य स्थापित करते हैं और दोनों को एक-दूसरे का पूरक मानते हैं न कि विरोधी।

6. राज्य कृत्रिम संस्था है (State is an Artificial institution)-उदारवादी राज्य को ईश्वरीय या प्राकृतिक संस्था नहीं मानते बल्कि वे राज्य को कृत्रिम संस्था मानते हैं। उनके मतानुसार राज्य का निर्माण व्यक्तियों ने अपने विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया है। यदि राज्य व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता तो व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य और समाज के संगठन में आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सके।

7. व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों की धारणा में विश्वास (Belief in the concept of Natural Rights of Man)-उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों में विश्वास करता है। प्राकृतिक अधिकार वह अधिकार है जो व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होते हैं। लॉक के अनुसार, जीवन, स्वतन्त्रता और सम्पत्ति के अधिकार प्रमुख प्राकृतिक अधिकार हैं। राज्य एवं समाज प्राकृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते। राज्य का परम कर्तव्य प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करना है।

8. धर्म-निरपेक्षता में विश्वास (Faith in Secularism) मध्य युग में चर्च का व्यक्ति के जीवन पर पूरा नियन्त्रण था। उदारवादियों ने धर्म के विशेषाधिकारों का विरोध किया तथा व्यक्ति की धार्मिक स्वतन्त्रता पर बल दिया। उदारवादियों ने धार्मिक संस्थाओं को राज्य से अलग रखने की बात कही और सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म की स्वतन्त्रता देने पर बल दिया। उदारवाद के अनुसार, धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है और राज्य को व्यक्तिगत धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

9. लोकतन्त्र का समर्थन (Support of Democracy)-लोकतन्त्र उदारवाद का अभिन्न अंग है। उदारवाद का जन्म ही स्वेच्छाचारी शासन के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ और लोकतन्त्र उदारवाद का मूल तत्त्व है। उदारवाद लोक प्रभुसत्ता में विश्वास रखता है। उदारवाद के अनुसार मनुष्य स्वतन्त्र पैदा हुआ है, इसलिए उस पर शासन उसकी सहमति से होना चाहिए। व्यक्ति को अधिकार तभी प्राप्त हो सकते हैं यदि ‘लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली हो और व्यक्ति को शासन के निर्माण में अधिकार प्राप्त हों। इसलिए उदारवाद का निर्वाचित संसद्, वयस्क मताधिकार, प्रेस की स्वतन्त्रता एवं निष्पक्ष न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।

10. संवैधानिक शासन (Constitutional Government)-उदारवाद का उदय निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासन की प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। इसलिए उदारवाद निरंकुश शासन का विरोधी है। उदारवाद सीमित सरकार अर्थात् सरकार की सीमित शक्तियों का समर्थन करता है। यदि शासक मनमानी करता है या अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है तो जनता को ऐसे शासक के विरुद्ध विद्रोह करने का अधिकार है। लॉक ने इंग्लैण्ड की 1688 की क्रान्ति का समर्थन किया।

11.बहसमुदाय समाज में विश्वास (Belief in Pluralistic Society)-उदारवादियों के अनुसार, मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक समुदायों की स्थापना करता है। समाज में अनेक समुदाय होते हैं और राज्य भी एक समुदाय है। राज्य विभिन्न समुदायों में सामंजस्य स्थापित करते है। व्यक्ति के जीवन के कई पहलू हैं जो राज्य के कार्य-क्षेत्र से बाहर हैं। कई समुदाय जैसे परिवार राज्य से अधिक प्राकृतिक और मौलिक है। लॉस्की और मैकाइवर ने बहु-समुदाय समाज की धारणा पर विशेष बल दिया।

12. अन्तर्राष्ट्रीय और विश्व-शान्ति में विश्वास (Faith in Internationalism and World Peace)उदारवाद ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धान्त पर आधारित है। यह विश्व-शान्ति तथा विश्व-बन्धुत्व के आदर्श में विश्वास करता है। प्रत्येक राष्ट्र को धीरे-धीरे शान्तिपूर्वक प्रगति करनी चाहिए और उसे अन्य राष्ट्रों की प्रगति में सहायता करनी चाहिए। प्रत्येक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र की अखण्डता एवं सीमा का आदर करना चाहिए और किसी राष्ट्र को दूसरे के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल अन्तर्राष्ट्रीय कानून और शान्तिपूर्वक साधनों द्वारा होना चाहिए।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 3.
पुरातन उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में मुख्य अन्तर बताइए।
(Distinguish between Classical Liberalism and Contemporary Liberalism)
अथवा
परम्परावादी उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में अन्तर की व्याख्या कीजिए।
(Explain differences between Classical Liberalism and Modern Liberalism.)
उत्तर-
शास्त्रीय उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में भेद का निम्नलिखित प्रकार से वर्णन किया जाता है-

1. व्यक्तिवाद के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद व्यक्तिवाद का समर्थन करता है, और कई विद्वान् उदारवाद और व्यक्तिवाद को एक ही मानते हैं, परन्तु समकालीन उदारवाद व्यक्तिवाद का खण्डन करता है। शास्त्रीय उदारवाद का आरम्भ ‘व्यक्ति’ से होता है, परन्तु समकालीन उदारवाद का आरम्भ ‘समूह’ तथा ‘संस्था’ से होता है।

2. प्राकृतिक अधिकारों के सम्बन्ध में अन्तर–शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति को प्राप्त प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद के अनुसार जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के आधार प्राकृतिक अधिकार हैं। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के अधिकारों को समाज की देन मानते हैं तथा उसे वह अधिकार देने का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक हित में है।

3. स्वतन्त्रता के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्रता के नकारात्मक रूप पर बल देता है जबकि समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है। अत: जहां शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्रता और राज्य के कार्य करने की शक्ति को परस्पर विरोधी मानता है, वहीं समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता और राज्य के कार्य करने की शक्ति को परस्पर विरोधी न मानकर सहयोगी मानता है।

4. राज्य के कार्यों के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद इस बात पर बल देता है कि राज्य को कम-से-कम कार्य करने चाहिएं जबकि समकालीन उदारवाद इस बात पर बल देता है कि राज्य को सार्वजनिक कल्याण के लिए काम करने चाहिएं। शास्त्रीय उदारवाद राज्य को सीमित कार्य करने के लिए कहता है जबकि समकालीन उदारवाद राज्य को सभी तरह के कल्याणकारी कार्य करने के लिए कहता है। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के विकास के लिए सभी तरह के कार्यों को करने के लिए राज्य को कहता है।

5. राज्य के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। इसके अनुसार मनुष्य के सर्वांगीण विकास में मुख्य बाधा राज्य ही है, और राज्य के रहते व्यक्ति अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता। इसके विपरीत समकालीन उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई न मानकर प्राकृतिक और नैतिक संस्था मानता है। समकालीन उदारवादियों के अळुसार राज्य समस्त वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर ही कार्य करता है।

6. दृष्टिकोण के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद अपने दृष्टिकोण में सुधारवादी है जबकि समकालीन उदारवादी यथास्थिति को बनाए रखने के समर्थक हैं।

7. स्वतन्त्र व्यापार एवं पूंजीवाद के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्र व्यापार तथा पूंजीवाद का समर्थन करता है जबकि समकालीन उदारवाद पूंजीवाद पर अंकुश लगाए जाने का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद, राज्य को अर्थ-व्यवस्था को नियमित करने की शक्ति देने के विरुद्ध है जबकि समकालीन उदारवाद राज्य की हस्तक्षेप की नीति का समर्थन करता है। समकालीन उदारवाद श्रमिकों के हितों के लिए और सामाजिक कल्याण के लिए व्यापार और उद्योगों को नियन्त्रित करने के पक्ष में है। इसके अनुसार स्वतन्त्र व्यापार एवं अनियन्त्रित प्रतियोगिता ग़रीब को और ग़रीब एवं अमीर को और अमीर बना देती है।

8. विचारधारा के आधार पर अन्तर–शास्त्रीय उदारवाद मध्य वर्ग की एक राजनीतिक विचारधारा है जबकि समकालीन उदारवाद शक्ति-सम्पन्न पूंजीवादी वर्ग की विचारधारा है।

9. राज्य के हस्तक्षेप की नीति के सम्बन्ध में अन्तर-शास्त्रीय उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में राज्य के हस्तक्षेप के विरुद्ध है। शास्त्रीय उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में व्यक्ति को पूर्ण स्वतन्त्रता देने के पक्ष में है, परन्तु समकालीन उदारवाद । आर्थिक क्षेत्र में राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन करता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 4.
उदारवाद का शाब्दिक अर्थ बताते हुए, समकालीन (आधुनिक) उदारवाद की चार विशेषताएं बताओ।
(Give the verbal meaning of the word Liberalism and explain four features of contemporary Liberalism.).
उत्तर-
उदारवाद का अर्थ-इसके लिए प्रश्न नं. 1 देखें।
समकालीन (आधुनिक) उदारवाद की विशेषताएं-जे० एस० मिल, ग्रीन, लॉस्की आदि विद्वान् समकालीन उदारवाद के मुख्य समर्थक माने जाते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

1. प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन-समकालीन उदारवादियों ने प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन किया है और अधिकारों को समाज की देन माना है। समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों।.

2. राज्य के कल्याणकारी कार्य-समकालीन उदारवाद राज्य के कार्यों को सीमित नहीं करता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार राज्य को सार्वजनिक कल्याण के लिए सभी कार्य करने चाहिए। लॉस्की ने राज्य को अधिकतम भलाई करने वाली सामाजिक संस्था माना जाता है। जो राज्य जनता की भलाई का जितना अधिक कार्य करता है वह उतना ही अच्छा होता है।

3. स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप का समर्थन-समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है। स्वतन्त्रता का अर्थ है-बन्धनों का अभाव। राज्य लोगों के कल्याण के लिए व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगा सकता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार स्वतन्त्रता का अर्थ उन कार्यों को करने की स्वतन्त्रता है जो कार्य करने योग्य हैं।

4. मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और.स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्म सिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसे स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो।

लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
उदारवाद के शाब्दिक अर्थों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
उदारवाद से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। उदारवाद को अंग्रेज़ी में लिबरलिज्म’ (Liberalism) कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबरलिस’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है-स्वतन्त्र व्यक्ति। इस सिद्धान्त का सार यही है कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके। उदारवाद एक ऐसी व्यापक विचारधारा है जिसमें अनेक विद्वानों के विचार और आदर्श शामिल हैं और जो समय के साथ-साथ परिवर्तित होते रहते हैं। उदारवाद एक तरफ लोकतान्त्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है और दूसरी तरफ व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए पूरे अवसर देना चाहता है। उदारवाद व्यक्ति को ही समस्त मानवीय व्यवस्था का केन्द्र मानता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 2.
उदारवाद की कोई चार परिभाषाएं दें।
अथवा उदारवाद की कोई भी दो परिभाषाएं लिखें।
उत्तर-

  • इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका के अनुसार, “उदारवाद के सारे विचार का सार स्वतन्त्रता का सिद्धान्त है। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता का विचार इसका मूल है।”
  • मैकगर्वन के शब्दों में, “एक राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद दो पृथक् तत्त्वों का मिश्रण है। इनमें से एक तत्त्व लोकतन्त्र है और दूसरा व्यक्तिवाद है।”..
  • सारटोरी के अनुसार, “साधारण शब्दों में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त व व्यवहार है।”
  • बट्रेण्ड रसल के अनुसार, “उदारवादी विचारधारा व्यवहार में जियो और जीने दो, सहनशील तथा स्वतन्त्रता जिस सीमा तक सार्वजनिक व्यवस्था आज्ञा दे तथा राजनीतिक मामलों में कट्टरता का अभाव है।”

प्रश्न 3.
परम्परागत उदारवाद किसे कहते हैं ?
अथवा
परम्परावादी उदारवाद क्या है ?
उत्तर-
शास्त्रीय उदारवाद (परम्परावादी उदारवाद) अपने प्रारम्भिक रूप में व्यक्तिवाद के निकट रहा है। शास्त्रीय उदारवाद को व्यक्तिवाद का दूसरा नाम कहा जा सकता है। लॉक ने व्यक्तिगत स्वतन्त्रता तथा सीमित राज्य के सिद्धान्त पर बल दिया है। लॉक द्वारा प्रस्तुत यह सिद्धान्त शास्त्रीय उदारवाद की आधारशिला माना जाता है। शास्त्रीय उदारवाद मानव व्यक्तित्व के असीम मूल्य तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता में विश्वास रखता है। शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद ने विशेषकर जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकार पर बल दिया है। शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। इसके अनुसार वह सरकार सबसे अच्छी है जो कम-से-कम शासन करे। शास्त्रीय उदारवाद राज्य के कार्यों को सीमित करने पर बल देता है। शास्त्रीय उदारवादियों के मतानुसार राज्य का अधिक हस्तक्षेप व्यक्ति की स्वतन्त्रता को कम कर देता है। शास्त्रीय उदारवाद खुली प्रतियोगिता, स्वतन्त्र व्यापार तथा पूंजीवाद का समर्थन करता है।

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 4.
परम्परावादी उदारवाद की कोई चार विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
परम्परावादी उदारवाद की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • राज्य एक आवश्यक बुराई है-परम्परावादी उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। इसके अनुसार वह सरकार सबसे अच्छी है जो कम-से-कम शासन करे।
  • राज्य के न्यूनतम कार्य-परम्परावादी उदारवाद राज्य को कम-से-कम कार्य देने के पक्ष में है। परम्परावादी उदारवादियों के मतानुसार राज्य का कार्य केवल जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा करना और अपराधियों को दण्ड देना ही है। राज्य की शिक्षा, कृषि, व्यापार इत्यादि कार्य नहीं करने चाहिए।
  • मानव की स्वतन्त्रता-परम्परावादी उदारवाद मानव की स्वतन्त्रता का महान् समर्थक है। इसके अनुसार व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में स्वतन्त्रता प्राप्त होनी चाहिए। स्वतन्त्रता का अर्थ बन्धनों का अभाव माना गया है।
  • परम्परागत उदारवाद खुली प्रतियोगिता का समर्थन करता है।

प्रश्न 5.
समकालीन उदारवाद किसे कहते हैं ?
अथवा
समकालीन उदारवाद क्या है ?
उत्तर-
जे० एस० मिल, ग्रीन, लॉस्की आदि विद्वान् समकालीन उदारवाद के मुख्य समर्थक माने जाते हैं। समकालीन उदारवाद ने प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन किया और अधिकारों को समाज की देन माना है। समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों। समकालीन उदारवाद ने खुली प्रतियोगिता का विरोध किया है। समकालीन उदारवाद राज्य को अधिक कार्य देने के पक्ष में है ताकि समस्त जनता का कल्याण हो सके। समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता और कानून में विरोध नहीं मानता बल्कि कानून को स्वतन्त्रता का संरक्षक मानता है। समकालीन उदारवाद ने सकारात्मक स्वतन्त्रता का समर्थन किया है।

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प्रश्न 6.
समकालीन उदारवाद की कोई चार विशेषताएं लिखें।
उत्तर-
जे० एस० मिल, ग्रीन, लॉस्की आदि विद्वान् समकालीन उदारवाद के मुख्य समर्थक माने जाते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं
1. प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन-समकालीन उदारवादियों ने प्राकृतिक अधिकारों का खण्डन किया है और अधिकारों को समाज की देन माना है। समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों।

2. राज्य के कल्याणकारी कार्य-समकालीन उदारवाद राज्य के कार्यों को सीमित नहीं करता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार राज्य को सार्वजनिक कल्याण के लिए सभी कार्य करने चाहिए। लॉस्की ने राज्य को अधिकतम भलाई करने वाली सामाजिक संस्था माना है। जो राज्य जनता की भलाई का जितना अधिक कार्य करता है वह उतना ही अच्छा होता है।

3. स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप का समर्थन–समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है। स्वतन्त्रता का अर्थ है-बन्धनों का अभाव। राज्य लोगों के कल्याण के लिए व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगा सकता है। समकालीन उदारवाद के अनुसार स्वतन्त्रता का अर्थ उन कार्यों को करने की स्वतन्त्रता है जो कार्य करने योग्य है।

4. समकालीन उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन करता है।

प्रश्न 7.
पुरातन उदारवाद और समकालीन उदारवाद में चार अन्तर लिखो।
उत्तर-
शास्त्रीय उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं-

  • शास्त्रीय उदारवाद का आरम्भ ‘व्यक्ति’ से होता है, परन्तु समकालीन उदारवाद का आरम्भ ‘समूह’ तथा ‘संस्था’ से होता है।
  • शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति को प्राप्त प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के
    अधिकारों को समाज की देन मानता है तथा उसे वह अधिकार देने का समर्थन करता है है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक हित में हैं।
  • शास्त्रीय उदारवाद स्वतन्त्रता के नकारात्मक रूप पर बल देता है जबकि समकालीन उदारवाद स्वतन्त्रता के सकारात्मक रूप पर बल देता है।
  • शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है जबकि समकालीन उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई न मानकर प्राकृतिक और नैतिक संस्था मानता है।

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प्रश्न 8.
उदारवाद के चार सिद्धान्तों का वर्णन करो।
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। उदारवाद के मूल सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-

  • मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है। स्वतन्त्रता का अभिप्राय यह है कि मनुष्य के जीवन पर किसी स्वेच्छाचारी सत्ता का नियन्त्रण न हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण करने की स्वतन्त्रता हो।
  • राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है-उदारवादियों के अनुसार व्यक्ति के विकास में राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।
  • व्यक्ति साध्य तथा राज्य साधन-उदारवादी व्यक्ति को साध्य और राज्य को साधन मानते हैं। मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं। इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है। वह सेवक है, स्वामी नहीं। व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना ही राज्य का उद्देश्य है।
  • उदारवाद का निर्वाचित संसद, वयस्क मताधिकार, प्रैस की स्वतन्त्रता एवं निष्पक्ष न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।

प्रश्न 9.
उदारवाद के विरोध में चार तर्क लिखो।
उत्तर-

  • मनुष्य केवल स्वार्थी नहीं है- उदारवादी विशेषकर बैन्थम जैसे उदारवादियों ने मनुष्य को स्वार्थी माना है। परन्तु यह धारणा ग़लत है। कोई भी व्यक्ति पूरी तरह न तो स्वार्थी है और न ही परमार्थी।
  • राज्य एक आवश्यक बुराई नहीं है-अनेक उदारवादियों ने राज्य को एक आवश्यक बुराई माना है, जोकि ठीक नहीं है। राज्य बुराई नहीं है। यह मनुष्य की सामाजिक चेतना की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
  • अस्पष्ट धारणा-उदारवाद की विचारधारा स्पष्ट नहीं है। इसकी निश्चित परिभाषा नहीं की जा सकती और न ही इसके सिद्धान्तों पर सभी उदारवादी सहमत हैं।
  • राज्य की अयोग्यता का तर्क उचित नहीं है।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
उदारवाद के शाब्दिक अर्थ का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
उदारवाद आधुनिक युग की एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। उदारवाद को अंग्रेजी में ‘लिबरलिज्म’ (Liberalism) कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबरलिस’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है-स्वतन्त्र व्यक्ति। इस सिद्धान्त का सार यही है कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके।

प्रश्न 2.
उदारवाद की दो परिभाषाएं दें।
उत्तर-

  • इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका के अनुसार, उदारवाद के सारे विचार का सार स्वतन्त्रता का सिद्धान्त है। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता का विचार इसका मूल है।
  • मैकग्वन के शब्दों में, “एक राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद दो पृथक् तत्त्वों का मिश्रण है। इसमें से एक तत्त्व लोकतन्त्र है दूसरा व्यक्तिवाद है।”

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प्रश्न 3.
परम्परावादी उद्गारवाद क्या है ?
उत्तर-
परम्परागत (शास्त्रीय) उदारवाद मानव व्यक्तित्व के असीम मूल्य तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता में विश्वास रखता है। शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। शास्त्रीय उदारवाद ने विशेषकर जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकार पर बल दिया है। शास्त्रीय उदारवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है।

प्रश्न 4.
समकालीन उदारवाद क्या है ?
उत्तर-
समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हों। समकालीन उदारवाद ने खुली प्रतियोगिता का विरोध किया है। समकालीन उदारवाद राज्य को अधिक कार्य देने के पक्ष में है ताकि समस्त जनता का कल्याण हो सके।

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प्रश्न 5.
शास्त्रीय उदारवाद तथा समकालीन उदारवाद में दो अन्तर करें।
उत्तर-

  • शास्त्रीय उदारवाद का आरम्भ ‘व्यक्ति’ से होता है, परन्तु समकालीन उदारवाद का आरम्भ ‘समूह’ तथा ‘संस्था’ से होता है।
  • शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति को प्राप्त प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है। समकालीन उदारवाद व्यक्ति के अधिकारों को समाज की देन मानता है तथा उसे वह अधिकार देने का समर्थन करता है जो व्यक्तिगत तथा सामाजिक हित में हैं।

प्रश्न 6.
उदारवाद के कोई दो सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-

  • मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक-उदारवाद का मूल सिद्धान्त है कि मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र है और स्वतन्त्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है।
  • राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है-उदारवादियों के अनुसार व्यक्ति के विकास में राज्य व समाज का विकास है और व्यक्ति की भलाई में राज्य की भलाई है। इसलिए राज्य का उद्देश्य मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करना है।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

प्रश्न I. एक शब्द/वाक्य वाले प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1.
Liberalism शब्द की उत्पत्ति किस भाषा से हुई है ?
उत्तर-
Liberalism शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है।

प्रश्न 2.
किस विद्वान ने ‘स्वतन्त्रता पर निबन्ध’ पस्तक लिखी ?
उत्तर-
‘स्वतन्त्रता पर निबन्ध’ पुस्तक जे० एस० मिल ने लिखी।

प्रश्न 3.
उदारवाद का अंग्रेज़ी रूप क्या है ?
उत्तर-
उदारवाद का अंग्रेज़ी रूप Liberalism है।

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प्रश्न 4.
Liberalism शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के किस शब्द से हुई है ?
उत्तर-
Liberalism शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के लिबरलिस शब्द से हुई है।

प्रश्न 5.
उदारवाद शब्द का मूल क्या है?
उत्तर-
उदारवाद शब्द का मूल स्वतन्त्र व्यक्ति है।

प्रश्न 6.
उदारवाद के कितने रूप हैं ?
उत्तर-
उदारवाद के दो रूप हैं।

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प्रश्न 7.
उदारवाद के कोई दो रूपों के नाम लिखें।
अथवा
उदारवाद के दो रूप लिखें।
उत्तर-
(1) शास्त्रीय उदारवाद
(2) समकालीन उदारवाद।

प्रश्न 8.
उदारवाद के कोई एक व्याख्याकार का नाम लिखो।
उत्तर-
लॉस्की।

प्रश्न 9.
उदारवाद की एक परिभाषा लिखें।
उत्तर-
सारटोरी के अनुसार, “सामान्य शब्दों में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त तथा व्यवहार है।”

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प्रश्न 10.
उदारवाद के अर्थ लिखो।
उत्तर-
उदरवाद का अर्थ है, कि व्यक्ति को स्वतन्त्रता मिले, जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास तथा उसकी अभिव्यक्ति कर सके।

प्रश्न 11.
समकालीन या आधुनिक उदारवाद से आपका क्या अभिप्राय है ?
अथवा
समकालीन उदारवाद से क्या भाव है ?
उत्तर-
समकालीन उदारवाद उन अधिकारों का समर्थन करता है, जो व्यक्तिगत तथा सामूहिक हित में हो, यह सकारात्मक स्वतन्त्रता का समर्थन करता है।

प्रश्न 12.
परम्परावादी उदारवाद से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
परम्परावादी उदारवाद मानव व्यक्तित्व के असीम मूल्यों तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता में विश्वास रखता है, यह व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन करता है।

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प्रश्न II. खाली स्थान भरें-

1. उदारवाद ………… का उल्टा नहीं है।
2. उदारवाद ………… नहीं है।
3. उदारवाद व्यक्ति की स्वतन्त्रता पर जोर देता है, जबकि लोकतन्त्र ……….. को महत्त्व देता है।
4. उदारवाद को अंग्रेजी में ………… कहते हैं। ।
5. Liberalism शब्द की उत्पत्ति ………… भाषा के शब्द से हुई है।
उत्तर-

  1. अनुदारवाद
  2. व्यक्तिवाद
  3. समानता
  4. Liberalism
  5. लैटिन।

प्रश्न III. निम्नलिखित वाक्यों में से सही एवं ग़लत का चुनाव करें-

1. शास्त्रीय उदारवाद व्यक्तिवाद का दूसरा नाम कहा जा सकता है।
2. जॉन लॉक एक प्रसिद्ध अमेरिकन राजनीतिक विद्वान् थे।
3. जॉन लॉक ने लेवियाथान नामक पुस्तक लिखी।
4. लॉक के अनुसार जीवन का अधिकार, स्वतन्त्रता का अधिकार एवं सम्पत्ति का अधिकार मनुष्य के प्राकृतिक अधिकार हैं।
5. एडम स्मिथ ने आर्थिक आधार पर राज्य के कार्यों को सीमित किया और व्यक्ति के कार्यों में राज्य के हस्तक्षेप को अनुचित माना।
उत्तर-

  1. सही
  2. ग़लत
  3. ग़लत
  4. सही
  5. सही।

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प्रश्न IV. बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1.
यह कथन किसका है कि, “उदारवाद की व्याख्या करना या परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है, क्योंकि यह कुछ सिद्धान्तों का समूह नहीं है, बल्कि मस्तिष्क में रहने वाला विचार है।”
(क) लॉस्की
(ख) विलोबी
(ग) टी० एच० ग्रीन
(घ) लासवैल।
उत्तर-
(क) लॉस्की

प्रश्न 2.
हेलोवेल ने उदारवाद का अर्थ किस प्रकार प्रकट किया है ?
(क) व्यक्ति की इच्छा की स्वतन्त्रता
(ख) व्यक्ति की भलाई एवं दृढ़ विवेकशीलता
(ग) जीवन, स्वतन्त्रता तथा सम्पत्ति के अधिकारों का अस्तित्व
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

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प्रश्न 3.
निम्न में से उदारवाद का सिद्धान्त है-
(क) मानवीय विवेक में आस्था
(ख) इतिहास एवं परम्परा का विरोध
(ग) मानवीय स्वतन्त्रता का पोषक
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
जॉन लॉक किस देश का राजनीतिक विद्वान् था ?
(क) भारत
(ख) अमेरिका
(ग) इंग्लैण्ड
(घ) जर्मनी।
उत्तर-
(ग) इंग्लैण्ड

PSEB 12th Class Political Science Solutions Chapter 5 उदारवाद

प्रश्न 5.
शास्त्रीय उदारवाद की विशेषता है-
(क) व्यक्ति की सर्वोच्च महानता
(ख) व्यक्ति साध्य और राज्य साधन
(ग) राज्य एक आवश्यक बुराई है
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

Punjab State Board PSEB 10th Class Welcome Life Book Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Welcome Life Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

PSEB 10th Class Welcome Life Guide संतुलित भावुक विकास Textbook Questions and Answers

नोट-इस अध्याय के कोई पाठ्य प्रश्न नहीं हैं।

पाठ पर आधारित प्रश्न

मेरी भावनाओं की सूझ

नीचे दिए खाके में कुछ भावनाएं दी गई हैं। इस तालिका को पूरा करके आप अपनी भावनाओं की संवेदनशीलता का अंदाजा लगा सकते हो —
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 1

मुझे खुशी होती है जब …………

  1. कोई मेरे काम की तारीफ करता है।
  2. मेरे दोस्त मेरे साथ खेलते हैं।
  3. मेरा परिणाम बहुत अच्छा आता है।

मुझे दुःख होता है जब …………

  1. कोई मेरे बारे में गलत बोलता है।
  2. कोई मेरी पीठ पीछे मेरी निंदा करता है।
  3. जब मेरी मेहनत का नतीजा अच्छा नहीं आता है।

मुझे डर लगता हैं जब …………

  1. शिक्षक को कोई मेरे बारे में कुछ गलत कहता है।
  2. मेरे पेपर अच्छे नहीं होते और बुरा परिणाम आना हो।

मुझे नफरत हैं जब …………
कोई मेरी पीठ पीछे बात करके मुझे बदनाम करता है और सामने बोलने की हिम्मत नहीं करता।

मुझे गर्व महसूस होता है जब …………
मेरी मेहनत का अच्छा परिणाम आता है और हर कोई मेरा सम्मान करता है।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

मैं निराश हो जाता हूँ जब ………….
मेरी मेहनत के बावजूद, परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आता।

मुझे सहानुभूति होती है जब ……..
मेरे दोस्तों को कम अंक मिलते हैं और मैं अपने आस-पास बहुत सारे गरीब लोगों को देखता हूँ।

मुझे विश्‍वास है कि जब …………
हर कोई मुझसे कहता है कि यदि इस बार नहीं तो अगली बार परिणाम बेहतर होंगे क्योंकि मेहनत व्यर्थ नहीं जाती है।

सकारात्मक भावनाएं

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 2

नकारात्मक भावनाएं
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 3
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 4

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

सहपाठियों से विचार करने की कला

(क) अपने दोस्तों के नाम लिखो।
1. ……………….. 2. ……………… 3. ………………..
(ख) आप अपने दोस्तों से कितनी बार नाराज होते हैं?
कभी नहीं/अक्सर/कभी कभी।
(ग) आप अपने दोस्तों के साथ नाराज़गी से कितनी देर के बाद खेलना फिर से शुरू करते ैं?
(घ) अपने साथियों को खुश करने के लिए आप क्या प्रयास करते हैं?
उत्तर-
(क) क, ख, ग …….।
(ख) कभी-कभी।
(ग) थोड़ी देर बाद जब आक्रोश दूर हो जाता है।
(घ) मैं उन्हें टहलने के लिए बाहर ले जाता हूँ और साथ में बैठकर कुछ खा लेता हूँ। इसका बिल का भुगतान करता हूँ।

मान लीजिए आपका एक दोस्त एक दिन आपके साथ कैंटीन जाता है। आप चाय और समोसे का ऑर्डर करते हैं लेकिन वह केवल चाय लेता है, समोसे की कीमत पूछने के बाद। ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे? उत्तर-इस स्थिति में मैं उसे एक समोसा खरीद दूंगा और हम एक साथ समोसा खाएंगे।
आपकी कक्षा में एक छात्र बिना नाश्ता किए स्कूल में आ गया है। वह अपना टिफिन-बॉक्स भी नहीं लाया। आप उसके लिए क्या करेंगे ? उत्तर-मैं उसके साथ अपना टिफिन साझा करूँगा और कहूंगा कि वह चिंता न करे। हम उसके साथ हैं।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

Welcome Life Guide for Class 10 PSEB संतुलित भावुक विकास Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखने से किस पर बुरा प्रभाव पड़ता है?
(a) मानसिक स्वास्थ्य
(b) पारिवारिक संबंध
(c) सामाजिक संबंध
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 2.
बुरे प्रभावों से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
(a) भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना चाहिए
(b) भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए
(c) कोई भावनाएं नहीं होनी चाहिए
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा एक सकारात्मक भाव है?
(a) खुशी
(b) उदासी
(c) ईर्ष्या
(d) निराशा।
उत्तर-
(a) खुशी।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सा एक नकारात्मक भाव है?
(a) दुःख
(b) गौरव
(c) सहानुभूति
(d) प्यार!
उत्तर-
(a) दुःख।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से सकारात्मक भावना चुनें
(a) गर्व
(b) विश्वास
(c) सहानुभूति
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

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प्रश्न 6.
नकारात्मक भावना का पता करो।
(a) दुःख
(b) चिंता
(c) डर
(d) ये सभी।
उत्तर-
(d) ये सभी।

(ख) खाली स्थान भरें

  1. ………… लिखना एक अच्छी आदत है।
  2. गर्व करना एक ………………… भावना है।
  3. ईर्ष्या करना एक …………………. भावना है।
  4. हमें अपनी ………………… को काबू में रखना चाहिए।
  5. डायरी एक महत्त्वपूर्ण ………………… बन जाती है।

उत्तर-

  1. डायरी,
  2. सकारात्मक,
  3. नकारात्मक,
  4. भावनाएं,
  5. दस्तावेज़।

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(ग) सही/ग़लत चुनें

  1. हमें भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिए।
  2. खुशी व्यक्त करना नकारात्मक भावना है।
  3. बेचैनी और भय सकारात्मक भावनाएं हैं।
  4. हमें डायरी लिखने की आदत नहीं डालनी चाहिए।
  5. भावनाओं को व्यक्त करने की एक सीमा होनी चाहिए।

उत्तर-

  1. सही,
  2. ग़लत,
  3. ग़लत,
  4. ग़लत,
  5. सही।

(घ) कॉलम से मेल करे

कॉलम I — कॉलम II
(a) उत्तेजना (जोश) — (i) नकारात्मक भाव
(b) भावनाओं पर नियंत्रण — (ii) सकारात्मक भाव
(c) क्रोध — (iii) अच्छी आदतें
(d) विश्वास (iv) भावना
(e) डायरी लिखना — (v) भाव व्यक्त करना।
उत्तर-
कॉलम I — कॉलम II
(a) उत्तेजना (जोश) — (iv) भावना
(b) भावनाओं पर नियंत्रण — (v) भाव व्यक्त करना
(c) क्रोध — (i) नकारात्मक भाव
(d) विश्वास — (ii) सकारात्मक भाव
(e) डायरी लिखना — (iii) अच्छी आदतें

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भावनाओं के संतुलन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
इसका मतलब है कि हमें पता होना चाहिए कि कब और कितनी भावनाओं को व्यक्त करना है।

प्रश्न 2.
भावनाओं को नियंत्रण करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर-
यदि हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं करेंगे, तो हमें कई नुकसान हो सकते हैं।

प्रश्न 3.
हमारे पास किस प्रकार की भावनाएं होती हैं?
उत्तर-
भय, सुख, दुःख, हैरानी, पश्चाताप, विश्वास, प्रेम इत्यादि।

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 4.
भावनाओं को नियंत्रित न करने से क्या हानि है?
उत्तर-
यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संबंधों पर बुरा असर डाल सकता है।

प्रश्न 5.
भावनाओं को व्यक्त करने के लिए क्या ज़रूरी है?
उत्तर-
भावनाओं को व्यक्त करने की निश्चित सीमा होनी चाहिए।

प्रश्न 6.
डायरी लिखने से क्या फायदा है?
उत्तर-
इससे हम अपने अच्छे पलों को सहेज सकते हैं जो हमारे जीवन में आए हैं।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भावनाओं को व्यक्त करने पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
हमारे पास बहुत सारी भावनाएँ हैं जैसे कि भय, चिंता, घबराहट, खुशी, प्यार इत्यादि। भावनाओं को नियंत्रण में रखना बहुत आवश्यक है अन्यथा हमें इसके परिणाम, भुगतने होंगे। यदि भावनाएं नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी, तो इससे हमारे स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों और पारिवारिक संबंधों पर बुरा प्रभाव हो सकता है। इसलिए उन्हें नियंत्रण में रखना आवश्यक है। इसके साथ-साथ हमें यह भी सीखना चाहिए कि भावुक होकर हम कोई ऐसी गलती न कर बैठें जिससे हमें बाद में पश्चाताप हो।

प्रश्न 2.
तस्वीर की मदद से सकारात्मक भावनाएं दिखाएं।
उत्तर-
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 5

प्रश्न 3.
तस्वीर की मदद से नकारात्मक भावनाएं दिखाएं।
उत्तर-
PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास 6

PSEB 10th Class Welcome Life Solutions Chapter 6 संतुलित भावुक विकास

प्रश्न 4.
हमें डायरी लिखने की आदत क्यों होनी चाहिए?
उत्तर-
डायरी लिखना एक अच्छी आदत है क्योंकि इसमें हम अपनी जिंदगी के वह पल संभाल सकते हैं जो हमारी जिंदगी में बीते हैं। हम खुश होते हैं जब हम अपनी डायरी से अपने पुरानी यादों को याद करते हैं। डायरी हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन जाती है। इसीलिए सबको डायरी लिखने की आदत डालनी चाहिए और इसे जिंदगी का एक अहम हिस्सा बनाना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न-हम इस अध्याय से क्या सीखते हैं ? विस्तार से बताएं।
उत्तर-

  1. हर व्यक्ति की बहुत सी भावनाएँ होती हैं जिनको वे समय-समय पर व्यक्त करते हैं।
  2. सकारात्मक भावनाओं में हम गर्व, विश्वास, प्यार, खुशी इत्यादि को शामिल करते हैं। नकारात्मक भावनाओं में हम गुस्सा शर्म, ईर्ष्या, डर इत्यादि को शामिल करते हैं।
  3. हमें अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता है अन्यथा हमारे मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर उनका हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
  4. हमें अपनी भावनाओं को सोच-समझ कर व्यक्त करना चाहिए ताकि किसी और को गुस्सा न आए। इसलिए, भावनाओं का संतुलन रखना महत्त्वपूर्ण है।
  5. हमें डायरी लिखने की आदत डालनी चाहिए और अपनी भावनाओं को केवल डायरी में व्यक्त करना चाहिए।
  6. डायरी एक अनमोल दस्तावेज़ बन जाती है जिसे हम अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए कभी भी पढ़ सकते हैं।

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संतुलित भावुक विकास PSEB 10th Class Welcome Life Notes

  • हर व्यक्ति के पास बहुत सारी भावनाएं होती हैं जैसे कि खुशी, दुःख बेचैनी, घबराहट, डर इत्यादि। इन भावनाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है नहीं तो वे हानिकारक साबित हो सकती हैं।
  • यदि हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं करते, तो हम भावुक होकर ऐसी गलती कर बैठेंगे, जिससे हमें बाद में पश्चाताप होगा।
  • यदि हम स्वयं में स्वयं-मूल्यांकन की भावना विकसित करते हैं, तो हम बेहतर नागरिक बन सकते हैं। इस तरह की भावनाएँ हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • हमें अपनी भावनाओं का संतुलन रखना चाहिए और उन्हें एक निश्चित सीमा तक ही व्यक्त करना चाहिए।
  • हमारे पास कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक भावनाएँ हैं और उन्हें ठीक से समन्वित करने की आवश्यकता है।
  • नकारात्मक भावनाओं से छुटकारा पाकर सकारात्मक भावनाओं के प्रति अधिक झुकाव होना चाहिए।
  • दोस्तों के बीच घूमने की प्रवृत्ति होनी चाहिए होती भी है। यह हमें उनके करीब जाने और हमारी भावनाओं को उनके साथ साझा करने की अनुमति देता है। ऐसा करने से डिप्रेशन या तनाव जैसी समस्याओं से बेचा जा सकता है।
  • बहुत से लोग डायरी लिखना पसंद करते हैं और यह एक बहुत अच्छी आदत है। डायरी में हम अपने दैनिक जीवन के अच्छे या बुरे पल लिख सकते हैं। यह डायरी बाद में हमारे जीवन का एक वैध दस्तावेज बन जाती है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 10 हिंद महासागर की स्थिति का भू-राजनीति के पक्ष से महत्त्व

Punjab State Board PSEB 11th Class Geography Book Solutions Chapter 10 हिंद महासागर की स्थिति का भू-राजनीति के पक्ष से महत्त्व Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Geography Chapter 10 हिंद महासागर की स्थिति का भू-राजनीति के पक्ष से महत्त्व

PSEB 11th Class Geography Guide हिंद महासागर की स्थिति का भू-राजनीति के पक्ष से महत्त्व Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न तु (Objective Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-4 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
हिंद महासागर का विस्तार बताएँ।
उत्तर-
7 करोड़ 80 लाख वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 2.
हिंद महासागर विश्व के महासमुद्री क्षेत्र का कितने प्रतिशत है ?
उत्तर-
20.9%.

प्रश्न 3.
कौन-से महाद्वीप हिंद महासागर के तटों को छूते हैं ?
उत्तर-
एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया।

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प्रश्न 4.
हिंद महासागर के पश्चिम की ओर के किन्हीं दो छोटे सागरों के नाम बताएँ।
उत्तर-
लाल सागर और अरब सागर।

प्रश्न 5.
हिंद महासागर में मिलने वाली धातुओं की गाँठें बताएँ।
उत्तर-
मैंगनीज़, तांबा और कोबाल्ट।

प्रश्न 6.
हिंद महासागर के तट पर मिलने वाले तेल क्षेत्र बताएँ।
उत्तर-
खाड़ी कच्छ, खंबात की खाड़ी, मुंबई हाई।

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अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न – (Very Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-3 वाक्यों में दें-

प्रश्न 1.
भू-राजनीति से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
राष्ट्रीय संबंधों के बारे में भूगोल के योगदान और विश्लेषण के तरीके को भू-राजनीति कहते हैं।

प्रश्न 2.
कौन-से देशांतर हिंद महासागर की सीमाएँ हैं ?
उत्तर-
दक्षिणी गोलार्द्ध में कैपटाऊन का लंबकार 18°82′ पूर्व हिंद महासागर को भौगोलिक पक्ष से अंध महासागर से और तस्मानिया प्रायद्वीप का दक्षिण-पूर्वी लंबकार 147° पूर्व, प्रशांत महासागर से अलग करता है।

प्रश्न 3.
हिंद महासागर को ‘ग्रेट रेस बेस’ क्यों कहते हैं ?
उत्तर-
भू-राजनीतिक महत्ता के कारण सभी बड़ी शक्तियाँ इस क्षेत्र पर कब्जा करने में लगी हुई हैं।

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प्रश्न 4.
हिंद महासागर को ‘तृतीय विश्व का हृदय’ क्यों कहते हैं ?
उत्तर-
पूर्वी भागों को तृतीय विश्व या ‘तीसरी दुनिया’ कहा जाता है। इस क्षेत्र में हिंद महासागर एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग है, इसलिए इस महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग के कारण इसे ‘तृतीय विश्व का हृदय’ कहा जाता है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न । (Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
हिंद महासागर की उसके पड़ोसी देशों के साथ सीमाएँ बताएँ।’ .
उत्तर-
विश्व के तीन महाद्वीपों एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के तटीय किनारे इस महाद्वीप को छूते हैं, जबकि यह महासागर अपने उत्तर की ओर एशियाई धरती से बंद है, परंतु दक्षिण की ओर इसका खुला प्रसार है। अंतर्राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक ऑर्गेनाइजेशन (आई० एच० ओ०) अंटार्कटिका के तट को हिंद महासागर का दक्षिणी सिरा मानती है। विश्व की कुल तट रेखा का 40% भाग हिंद महासागर के तटों को छूता है।

प्रश्न 2.
हिंद महासागर के पास वाले कम गहरे सागरों के नाम बताएँ।
उत्तर-
हिंद महासागर में कई ऐसे कम गहरे सागर शामिल हैं, जो पास वाले तटीय क्षेत्रों को छूते हैं। इनमें मैलागासी सागर, लक्षद्वीप सागर, लाल सागर, अदन की खाड़ी, अरब की खाड़ी, ओमान की खाड़ी, अरब सागर, पाक जलडमरू, सुवा सागर, तिमौर सागर, अराफरा सागर, कारपैंटरिया की खाड़ी के टोर जलडमरू, ऐगज़माऊथ खाड़ी, ऑस्ट्रेलियाई धुंडी, स्पैंसर खाड़ी और बास जलडमरू आदि शामिल हैं।

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प्रश्न 3.
हिंद महासागर के आस-पास कितने देश हैं ?
उत्तर-
हिंद महासागर के आस-पास 38 + 15 + 15 देश पड़ते हैं, जो हिंद महासागरीय रिम ऐसोसिएशन (Indian Ocean Rim Association) की ओर से संगठित हैं। इनमें अफ्रीका के 13, मध्य पूर्व (Middle East) के 11, दक्षिणी एशिया के 5, दक्षिण-पूर्वी एशिया के 5, पूर्वी तिमोर, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस तथा बर्तानिया के कब्जे वाले क्षेत्र शामिल हैं।

प्रश्न 4.
हिंद महासागर में अलग-अलग संकरे मार्ग बताएँ।
उत्तर-
हिंद महासागर में पड़ते अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों में कम-से-कम 7 संकरे मार्ग आते हैं-

  1. मोजंबिक चैनल,
  2. बाब-अल-मेंडर,
  3. सुएज़ या स्वेज़ नदी,
  4. स्ट्रेट ऑफ होरमूज,
  5. मलाका स्ट्रेट,
  6. सूंदा स्ट्रेट,
  7. लोबोक स्ट्रेट।

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 150-250 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
हिंद महासागर के नक्शे और विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
हिंद महासागर का उत्तरी क्षेत्र ऐतिहासिक और कार्य शैली के पक्ष से बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह पूर्वी और पश्चिमी भागों से कई सँकरे जल डमरुओं (Straits) से जुड़ा हुआ है। पश्चिम में लाल सागर और अरब की खाड़ी तथा पूर्व में मलाका जल डमरू, तिमौर सागर और अराफरा सागर इसके अंग हैं।

विशेषताएं-हिंद महासागर की अपनी अलग विलक्षण विशेषताएँ हैं-

  1. सुदूर दक्षिणी भाग को छोड़कर बाकी सारे महासागर का जल न केवल गर्म और शांत है, बल्कि यहाँ बहती हवाओं का वेग भी अनुमान से बहुत अधिक भटकता नहीं।
  2. सर्दी और गर्मी की बदलती ऋतु में हवाओं की बदलती दिशा, हवाओं के वेग द्वारा गहराई वाले सागरों में जहाज़रानी को आसान कर देती है।
  3. हिंद महासागर में किसी विरोधी (विपरीत) धारा का प्रवाह भी नहीं है।
  4. ‘रोरिंग फोर्टीज़’ नामक पश्चिमी वायु, जो 40° दक्षिण की ओर चलती है, गुड होप जल डमरू से ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट तक सागरीय जहाजरानी में बहुत सहायक सिद्ध होती है।

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प्रश्न 2.
हिंद महासागरों के प्राकृतिक साधनों का वर्णन करें।
उत्तर-
हिंद महासागर विभिन्न प्राकृतिक साधनों से भरपूर है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
1. समुद्री समूह-समुद्री समूह में रेत, बजरी और शैल (खोल) के समूह मिलते हैं, जो किसी-न-किसी रूप में निर्माण कार्यों के लिए प्रयोग किए जाते हैं। ये समूह महाद्वीपीय शैल्फों पर मिलते हैं।

2. प्लेसर-प्लेसर समूहों में मिलने वाले वे खनिज हैं, जो सागरीय रेत और बजरी में मिलते हैं। ये भारी और लचकीले रासायनिक विशेषताओं वाले खनिज होते हैं, जो खनिज पदार्थों के अपरदन के कारण सागरीय जल में शामिल हो जाते हैं। इन खनिजों में सोना, टिन, प्लास्टिक, टाइटेनियम, मैग्नेटाइट (लोहा), जिरकोनियम बोरियम और रत्न आदि शामिल हैं।

3. बहु-धात्वीय गाँठे-समुद्र में ऐसी गाँठें भी मिलती हैं, जो अनेक धातुओं के मिश्रण से बनी होती हैं। हिंद महासागर में मैंगनीज़, तांबा, गिल्ट (निकल) और कोबाल्ट आदि धातुओं का मिश्रण अधिक मात्रा में पाया जाता है।

4. मैंगनीज़ गाँठे-ये धात्वीय गाँठें सबसे पहले 1872-76 के दौरान चैलेंजर की वैज्ञानिक यात्रा के दौरान खोजी गई, परंतु इनका खोज कार्य 1950 के दशक के अंत में ही आरंभ किया जा सका। संयुक्त राष्ट्र ने भारत को हिंद महासागर के डेढ़ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से ही बहु धात्वीय गाँठे निकालने की अनुमति दी है। हिंद महासागर की गोद में फास्फेट, बेरीयम सल्फेट, तांबा, कोबाल्ट, कच्चा लोहा, बॉक्साइट, सल्फर आदि भी मिलता है। मैंगनीज़ की गाँठे समुद्री फर्श पर सतह से 2 से 6100 मीटर की गहराई तक मिलती हैं।

5. तेल और गैस-हिंद महासागर की महाद्वीपीय शैल्फ खनिज तेल से भरपूर है। वर्तमान समय में, कुल तेल और गैस के उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा सागरीय भंडारों से आता है और 75 से अधिक देश समुद्रों में से तेल और गैस उत्पन्न करते हैं। भारत के नज़दीकी क्षेत्र कच्छ की शैल्फ, खंबात की खाड़ी और मुंबई हाई खनिज तेल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र हैं, जबकि आंध्र प्रदेश के तट से परे समुद्र में स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन प्राकृतिक गैस के बड़े स्रोत के रूप में प्रसिद्ध है। विश्व-भर में खनिज तेल और गैस के उत्पादन के लिए अरब की खाड़ी सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। इस खाड़ी की विशेषता यह भी है कि यह सागर से थोड़ा हटकर है। कम गहरी है और आने वाली कठिनाइयाँ भी कम हैं। सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतार, संयुक्त अरब अमीरात (यू०ए०ई०), इरान और इराक इस खाड़ी से सबसे अधिक लाभ लेने वाले देश हैं।

प्रश्न 3.
हिंद महासागर की भू-राजनीति और समस्याएँ बताएँ।
उत्तर-
भू-राजनीति (Geo-Politics)-हिंद महासागर की भू-राजनीति कुछ प्राथमिक बिंदुओं के आस-पास घूमती है, जोकि इस प्रकार हैं-

  1. ऋतु परिवर्तन
  2. ध्रुवीकरण और उत्जीविता समीकरण
  3. प्राकृतिक संसाधनों का विकास
  4. आर्थिक विकास पर बेरोक आपूर्ति तंत्र

समस्याएँ-

  1. हिंद महासागर के सभी क्षेत्रों में व्यापारिक जहाज़रानी पर डकैतियाँ।
  2. व्यापक साधनों का विकास, विशेष रूप से खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, खनिज पदार्थों और मछलियों के रूप में फैली आर्थिकता के पक्ष।
  3. हिंद महासागर के निकट के तटीय क्षेत्रों में, समुद्री जल में बंदरगाहों के निर्माण पर राजनीतिक और वित्तीय परिणाम।
  4. क्षेत्रीय और गैर-क्षेत्रीय देशों की ओर से हिंद महासागर में जल-सेना शक्ति का प्रदर्शन।

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प्रश्न 4.
चीन की ‘स्टरिंग ऑफ पर्लज’ कूटनीति का वर्णन करें।
उत्तर-
स्टरिंग ऑफ पर्लज़ (String of Pearls) वास्तव में चीन की ओर से अपने खनिज तेल के व्यापार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह एक राजनीतिक युक्ति है। चीन अपने बढ़ रहे भू-राजनीतिक प्रभाव को समर्थ बनाने के लिए कूटनीति संबंधों द्वारा सुरक्षा-शक्ति को ही ताकतवर नहीं बना रहा, बल्कि अपनी बंदरगाहों और हवाई अड्डों की सुरक्षा की ओर भी विशेष ध्यान दे रहा है। चीन की यह कोशिश दक्षिण चीन सागर से स्वेज़ नदी तक प्रसार करने की है, जिसमें मलाका स्ट्रेट, स्ट्रेट ऑफ होरमूज़, अरब की खाड़ी और लाल सागर सहित सारे हिंद महासागर में अड्डे बनाना शामिल है। चीन का ‘स्टरिंग ऑफ पर्लज़’ इन व्यापारिक समुद्री भागों में से होकर गुजरता है और भविष्य में एशियाई ऊर्जा स्रोतों तक पहुँचने का सपना देखता है।

भारत ने सन् 1971 से 1999 तक मलाका स्ट्रेट पर पाबंदी लगाकर चीन और पाकिस्तान के बीच पनपते स्वतंत्र समुद्री संबंधों पर रोक लगा दी थी। ‘स्टरिंग ऑफ पर्लज़’ की नीति वास्तव में चीन की ओर से हिंद महासागर में हर . प्रकार के व्यापारिक संबंधों को बिना मानव हस्तक्षेप के और भारत के स्वतंत्र अस्तित्व’ को प्रभाव मुक्त करने के लिए अपनाई है। यद्यपि चीन का मानना है, “हम सभी का महासागर पर समान रूप से अधिकार है, इस पर किसी एक का अधिकार नहीं है। हम किसी सैनिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं करेंगे और न ही किसी ताकत का प्रदर्शन करेंगे और न ही किसी अन्य देश के साथ ईर्ष्या को बढ़ावा देंगे।”

पर्लज़ (चीनी अड्डे)

  1. हांगकांग (विस्तृत प्रशासकीय क्षेत्र)
  2. हैनान का टापू (टांगकिंग की खाड़ी)
  3. वूडी टापू
  4. स्पार्टा टापू (छ: देश-चीन, वियतनाम, ताईवान, मलेशिया, फिलीपाइन्ज़ और बरुनी के अधीन)
  5. कैमपोंग सोम
  6. कराह ईस्थमस-थाईलैंड
  7. म्यांमार के कोको टापू
  8. म्यांमार का तटीय शहर सितवें
  9. बांग्लादेश में चिट्टागांग
  10. श्रीलंका में हंबनटोटा
  11. मालद्वीप में हाराओ अतोल
  12. पाकिस्तान (बलोचिस्तान) में गवाडर
  13. ईराक में अल-अहदाब
  14. कीनिया में लामू
  15. सूडान में उत्तरी बंदरगाह (North Port)

प्रश्न 5.
भारत की ओर से चीन की ‘स्टरिंग ऑफ पर्लज़’ नीति का क्या जवाब दिया गया ?
उत्तर-
भारतीय जल सेना और भारतीय जल सैनिक राजनीतियों/कूटनीतियों के पक्ष को सामने रखते हुए सन् 2007 में एक दस्तावेज़ ‘इंडियन मेरीटाईम डॉक्टरिन’ जारी किया, जिसमें भारतीय जल सेना ने ‘स्ट्रेट ऑफ होरमूज़’ से ‘मलाका स्ट्रेट’ तक भारतीय जल सेना की भरपूर गतिविधियों की बात की गई। इस दस्तावेज़ में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों की पुलिस की देख-रेख और तंग समुद्री मार्गों पर पूर्ण नियंत्रण की बात की गई। पिछले दो दशकों के दौरान भारत ने अपनी विदेश नीति के अंतर्गत हिंद महासागर के आस-पास के देशों में अपने हितों का विशेष ध्यान रखते हुए मारीशस, मालदीव, सिसली और मैडगास्कर के द्वीपीय देशों और दक्षिणी अफ्रीका, तंजानिया और मोजम्बिक आदि देशों के साथ अपने संबंधों में प्रसार किया है।

भारतीय जल सेना के पास अति आधुनिक हाइड्रोग्राफिक (जल सर्वेक्षण और चित्रकारी) कैडर है, जिसमें पूरे उपकरणों से युक्त सर्वेक्षणीय समुद्री जहाज़, कई सर्वेक्षणीय किश्तियाँ, देहरादून में विश्व-स्तर के इलैक्ट्रॉनिक चार्ट तैयार करने की सुविधा और गोवा में एक हाइड्रोग्राफिक प्रशिक्षण स्कूल है। चीन की तरह ही भारत अपनी ऊर्जा प्राप्त करने के लिए खनिज तेल के आयात पर निर्भर करता है। भारत का 89% के लगभग खनिज तेल समुद्री जहाज़ के मार्ग से भारत तक पहुँचता है, जो भारत की कुल ऊर्जा की ज़रूरतों की 33% पूर्ति करता है। इसलिए प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा सबसे अहम् आर्थिक ज़रूरत बन जाती है। इतिहास साक्षी है कि भारत शुरू से ही हिंद महासागर में डकैती और आतंकी कार्रवाइयों का सदा से ही तीखा विरोधी रहा है।

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प्रश्न 6.
महासागरों संबंधी बनाए गए U.N.O. के कानूनों का वर्णन करें।
उत्तर-
महासागरों संबंधी कानूनों के बारे में संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन (UNCOLS)—सन् 1972 से 1982 तक सागरों संबंधी अंतर्राष्ट्रीय नियमावली और कानून बनाने हेतु संयुक्त राष्ट्र की ओर से करवाए गए सम्मेलनों के दौरान तीसरे सम्मेलन के सम्मुख आए अंतर्राष्ट्रीय समझौते को समुद्री सम्मेलनों का कानून भी कह दिया जाता है। इस कानून के अंतर्गत विश्व-भर के महासागरों की पूर्ति करने हेतु राष्ट्रों के अधिकार और कर्तव्य तय कर दिए गए हैं, वित्तीय कार्यवाही के लिए नियमावली बना दी गई है और समुद्री प्राकृतिक साधनों के प्रबंध के लिए अनिवार्य आदेश जारी कर दिए गए हैं। यू० एन० कोल्ज़ (UNCOLS) सन् 1994 में लागू हुआ और इस सम्मेलन में अगस्त 2014 में, 165 देश और यूरोपीय संघ शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान कई नियम भी लागू किए गए, जिनमें से महत्त्वपूर्ण थे-सीमा निर्धारण, जहाजरानी नियम, द्वीप समूहों के अधिकार-क्षेत्र और यातायात नियम, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ), महाद्वीपीय शैल्फ की सीमाएँ, समुद्री फर्श पर खनन के नियम, समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा, विज्ञान अन्वेषण और झगड़ों के निपटारे संबंधी नियम। सम्मेलन के दौरान कई क्षेत्रों में सीमाएँ निर्धारित की गई हैं या परिभाषित की गईं।

1. बेस लाइन-निम्न जल रेखा या वह सीधी रेखा, जो गहरे तटीय क्षेत्रों में चट्टानी भित्तियों को जोड़ती है।

2. आंतरिक (Internal) जल-क्षेत्र-तट के निकट का वह जल-क्षेत्र जो बेस लाइन और तट के बीच हो। इस क्षेत्र के लिए संबंधित देश ही नियम तय करता है, लागू करता है और यहाँ के साधनों का प्रयोग करता है। विदेशी जहाजों और किश्तियों को किसी भी अन्य देश के आंतरिक जल-क्षेत्र में आने-जाने की आज्ञा नहीं होती।

3. क्षेत्रीय (Territorial) जल-क्षेत्र-बेस लाइन से 12 नाटीकल मील (सड़क के 22 किलोमीटर या 14 मील) तक का क्षेत्र क्षेत्रीय जल-क्षेत्र होता है जिसके बारे में तटीय देश को नियम-कानून बनाने का अधिकार होता है और वह प्राकृतिक साधनों का प्रयोग भी कर सकता है। शांतमयी ढंग से गुजरने वाले विदेशी जहाज़ों और किश्तियों को भी इस क्षेत्र में से गुज़रने की अनुमति होती है, जबकि युद्ध नीति रखने वाले महत्त्वपूर्ण स्ट्रेटों (जल-डमरुओं) में से गुजरने वाले युद्धपोतक नावों को आज्ञा लेनी पड़ती है।

4. टापू-समूह (आरकीपिलाजिक) जल-क्षेत्र-सम्मेलन के दौरान द्वीप समूही जल-क्षेत्र की परिभाषा चौथे भाग (अध्याय) में दी गई, जिसमें किसी देश को अपनी क्षेत्रीय सीमा निर्धारित करने के लिए आधार भी परिभाषित किए गए। द्वीप-समूहों में से सबसे बाहरी द्वीप के सबसे बाहरी भागों को जोड़ती एक बेस लाइन खींच ली जाती है और इस रेखा के अंदर आते जल-क्षेत्र को द्वीप-समूह जल-क्षेत्र का नाम दिया जाता है। किसी भी देश को अपने इस जल-क्षेत्र संबंधी संपूर्ण प्रभुसत्ता प्राप्त होती है।

5. निकटवर्ती (Contiguous) जल-क्षेत्र-किसी भी तट से 12 नाटीकल मील (22 किलोमीटर) की सीमा से आगे 12 नाटीकल मील की सीमा तक के जल-क्षेत्र को निकटवर्ती जल-क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में कोई भी देश चार विषयों-निर्यात शुल्क, शुल्क निर्धारण, आवास नियम और प्रदूषण संबंधी अपने नियम लागू कर
सकता है।

6. विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone)-किसी भी देश की बेस लाइन से आगे, क्षेत्रीय जल-क्षेत्र में और आगे 200 नाटीकल मील (370 किलोमीटर या 230 मील) तक का जल-क्षेत्र विशेष आर्थिक क्षेत्र होता है, जहाँ के प्राकृतिक साधनों के प्रयोग के सभी अधिकार तटीय देशों के पास सुरक्षित होते हैं।

7. महाद्वीपीय शैल्फ (Continental Shelf)—महाद्वीपीय शैल्फ को किसी भी थल-क्षेत्र का प्राकृतिक विस्तार माना जाता है, जोकि भू-क्षेत्र से महाद्वीपीय तट के बाहरी सिरे तक या फिर 200 नाटीकल मील किलोमीटर) में से जो अधिक हो, तक माना जाता है। किसी स्थान पर यदि महाद्वीपीय शैल्फ कम हो तो उसका जल-क्षेत्र 200 नाटीकल मील तक माना ही जाएगा।

8. समुद्री कानून संबंधी अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल (आई० ई० एल० ओ० एस०)-यह ट्रिब्यूनल नियम-कानूनों की व्यवस्था के अतिरिक्त मछली पकड़ने संबंधी नियमों और विशेषकर समुद्री वातावरण के झगड़ों के निपटारे संबंधी कार्य करता है।

9. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री थल अथॉरिटी (International Sea-Bed Authority – I.S.A) – missing अधिकारित जल-क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र, जोकि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री थल का क्षेत्र माना जाता है, में खनिज पदार्थों संबंधी और अन्य नियंत्रण अथवा संगठन के लिए अंतर-सरकारी टीम तैयार की गई है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री थल अथॉरिटी के नाम से जाना जाता है।

PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 8 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान

Punjab State Board PSEB 6th Class Home Science Book Solutions Chapter 8 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Home Science Chapter 8 व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान

PSEB 6th Class Home Science Guide व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य क्या है ?
उत्तर-
मनुष्य के शरीर की रोग-रहित दिशा ही स्वास्थ्य है।

प्रश्न 2.
आँखों के लिए कौन-सा विटामिन महत्त्वपूर्ण है ?
उत्तर-
विटामिन ‘ऐ’।

प्रश्न 3.
दाँतों के लिए भोजन के कौन-से तत्त्व महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर-
कैल्शियम, विटामिन डी, फास्फोरस।

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प्रश्न 4.
खाना खाने के बाद कैसे फल खाने चाहिए ?
उत्तर-
ताजे तथा तेजाबी अंश वाले रसदार फल ।

प्रश्न 5.
आँखों को नीरोग रखने के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
आँखों को धुआँ, धूल, धूप तथा तेज़ रोशनी से बचाना चाहिए।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
आँखों की सम्भाल करनी क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
आँखें हमारे शरीर में अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण अंग हैं। इनसे ही हम विभिन्न वस्तुओं को देख सकते हैं। इसलिए यह कहावत कि ‘आँखें हैं तो जहान है’ कही जाती है। इनकी संभाल के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिएं –

  1. आँखों को बाहर की गन्दगी जैसे धूल-मिट्टी, कूड़ा-करकट, कीट-पतंगे आदि से बचाना चाहिए। कुछ धूल तथा जीवाणु तो आँख के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। यदि किसी कारण से आँखों में कुछ गिर जाए तो उसको नार्मल सेलाइन या साफ़ जल से धो डालना चाहिए।
  2. मुंह तथा आँखों को कई बार धोने तथा पोंछने से सफ़ाई होती है।
  3. गन्दे हाथों से अथवा गन्दे रूमाल से आँखों को नहीं पोंछना चाहिए, न ही इन्हें रगड़ना या मलना चाहिए।
  4. तौलिया, साबुन, बाल्टी, मग तथा मुँह पोंछने का कपड़ा जिनका उपयोग दूसरे व्यक्ति करते हों, प्रयोग नहीं करना चाहिए। विशेषकर दुखती आँखों वाले व्यक्ति का।
  5. आँखों को तेज़ धूप, चकाचौंध अथवा तेज़ रोशनी से बचाना चाहिए। इसके लिए धूप के चश्मे आदि का प्रयोग किया जा सकता है।
  6. कम प्रकाश में लिखना-पढ़ना अथवा कोई महीन काम करना आँखों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
  7. आँखों की विभिन्न बीमारियों जैसे-रोहे इत्यादि से आँखों को बचाना चाहिए और यदि इनमें से कोई रोग हो तो तुरन्त ही नेत्र-विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

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प्रश्न 2.
काम करते समय रोशनी किस तरफ से आनी चाहिए ?
उत्तर-
काम करते समय रोशनी ठीक और बाएँ हाथ की ओर से आनी चाहिए, बाएँ हाथ से काम करने वालों के लिए यह रोशनी दाईं ओर से आनी चाहिए।

प्रश्न 3.
आँखों के व्यायाम के बारे में आप क्या जानते हो ? लिखो।
उत्तर-
प्रत्येक दिन सुबह उठकर ताजे पानी से आँखों को धोना चाहिए और ठण्डे पानी के हल्के-हल्के छींटे मारने चाहिएं। पुतली बाएँ से दाएँ, दाएँ से बाएँ, ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की तरफ़ बार-बार घुमाना चाहिए। इस व्यायाम में आँखें रुकनी नहीं चाहिएं।

प्रश्न 4.
यदि दाँत ठीक तरह साफ़ न किए जाएं तो क्या होता है ?
उत्तर-
यदि दाँतों को अच्छी तरह साफ़ न किया जाए तो भोजन के कण दाँतों के खोलों में इकट्ठे हो जाते हैं। इससे दाँत कमजोर होने लगते हैं। जीवाणुओं के प्रभाव से ये भोजन कण सड़ते हैं और एक अम्ल बनाते हैं जिनसे दाँतों में सड़न उत्पन्न होने लगती है और पाचन-क्रिया भी खराब हो जाती है। मसूड़ों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

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प्रश्न 5.
मिठाइयां, निशास्ते वाला भोजन और तेज़ गंध वाली चीजें और पान क्यों अधिक नहीं खाने चाहिएं ?
उत्तर–
दाँतों के लिए अधिक मिठाइयां, निशास्ते वाला भोजन जैसे मैदे की बनी चीजें दाँतों से चिपक जाती हैं। तेज़ गंध वाली चीज़ों को खाने से मुँह में गंध आ जाती है, जैसेलहसुन, प्याज, मछली आदि। अधिक पान खाने से दाँत मैले, कुचैले और काले हो जाते हैं और दाँतों पर निकोटीन की तरह जम जाती है। इससे दाँतों को नुक़सान होता है।

प्रश्न 6.
नाखून गन्दे क्यों नहीं रखने चाहिएं और इन्हें कैसे साफ़ रख सकते हों, लिखो।
उत्तर-
नाखूनों के अन्दर किसी प्रकार की गन्दगी नहीं होनी चाहिए क्योंकि भोजन के साथ इनमें उपस्थित रोगों के कीटाणु, जीवाणु आदि आहार नाल में पहुंचकर विकार उत्पन्न करेंगे। इसी कारण कई बार बच्चों की पाचन-क्रिया खराब हो जाती है और छोटी उम्र में बच्चों को दस्त लग जाते हैं और उल्टियां आने लगती हैं। सप्ताह में एक बार नाखून ज़रूर काटने चाहिएं।

प्रश्न 7.
कम रोशनी में क्यों नहीं पढ़ना चाहिए ?
उत्तर-
कम रोशनी में पढ़ने से आँखों पर दबाव पड़ता है इसलिए नहीं पढ़ना चाहिए।

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प्रश्न 8.
नहाने से पहले मालिश क्यों करनी चाहिए ?
उत्तर-
नहाने से पहले मालिश इसलिए करनी चाहिए कि शरीर स्वस्थ और सुन्दर बने।

प्रश्न 9.
सिगरेट पीने से दाँतों पर किस वस्तु की परत जम जाती है ?
उत्तर-
निकोटीन की।

प्रश्न 10.
दाँत काले हो जाने के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
नसवार रगड़ने, पान खाने और सिगरेट पीने से दाँत काले हो जाते हैं।

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प्रश्न 11.
दाँतों का रंग सफ़ेद क्यों होता है ?
उत्तर-
दाँतों का रंग सफ़ेद इनैमल के कारण होता है।

प्रश्न 12.
‘आँखें गईं जहान गया’ से क्या भाव है ?
उत्तर-
इसका भाव यह है कि आँखों के बिना सचमुच ही यह संसार अंधकारमय है। यदि आँखें काम न करें तो दुनिया के ये सभी दृश्य व्यर्थ हैं।

प्रश्न 13.
आँखों के लिए कौन-सा विटामिन महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर-
विटामिन ‘ए’।

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प्रश्न 14.
भोजन के कौन-से तत्त्व दाँतों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर-
कैल्शियम, विटामिन ‘डी’ और फॉस्फोरस।

प्रश्न 15.
प्रत्येक व्यक्ति को अपने कपड़े तथा तौलिया अलग क्यों रखने चाहिए?
उत्तर-
प्रत्येक व्यक्ति को अपने कपड़े तथा तौलिया अलग-अलग रखने चाहिए क्योंकि एक साथ रखने पर छूत की बीमारी फैलने का भय रहता है जैसे-आँखों का रोग, खाज, खुजली, दाद आदि।

निबन्धात्मक प्रश्न अब

प्रश्न 1.
दाँत कैसे साफ़ और स्वस्थ रखे जा सकते हैं ?
उत्तर-
1. प्रत्येक भोजन करने के बाद दाँतों को अच्छी प्रकार साफ़ करना चाहिए। कुल्ली करके दाँतों में फंसे भोजन कण निकाल देने चाहिएं।

2. हर सुबह व रात्रि को सोने से पूर्व दाँतों को उँगली या दन्त ब्रुश से मन्जन या पेस्ट की सहायता से साफ़ करना चाहिए। ऐसा करने से दाँतों को रोगमुक्त रखा जा सकता है। दन्त ब्रुश बहुत बड़े बालों का नहीं होना चाहिए अन्यथा मसूड़ों में घाव होने की सम्भावना रहती है।

3. बचपन से ही दाँतों की सफ़ाई की उचित विधि की शिक्षा देनी चाहिए। दाँतों को सब ओर से, दाँतों के भीतर व बाहर आदि भोजन चबाने वाले ऊपर व नीचे के भागों को नियमपूर्वक साफ़ करना आवश्यक है।

4. दाँतों को तिनकों या सुई से कुरेदना नहीं चाहिए।

5. दन्त चिकित्सक से बच्चों के दाँतों का नियमित निरीक्षण करवाना चाहिए।

6. दाँतों की स्वस्थता के लिए उपयुक्त भोजन की आवश्यकता होती है। इससे निम्नलिखित लाभ होते हैं –
(i) दाँतों की सुदृढ़ता शरीर के सामान्य स्वास्थ्य पर बहुत निर्भर करती है। शरीर के उचित स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त भोजन आवश्यक होता है। प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस तथा विटामिन ‘C’ व ‘D’ दाँतों के निर्माण व स्वास्थ्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। भोजन में इन तत्त्वों की कमी दाँतों के स्वास्थ्य को बिगाड़ती है। अतः हमें अपने आहार में इन तत्त्वों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

(ii) कच्चे फल व सब्जियाँ चबा-चबाकर खाने से मसूड़ों को व्यायाम का अवसर मिलता है जिससे वे स्वस्थ बने रहते हैं।

(iii) मिठाइयां, मीठी व चिपकने वाली चॉकलेट, टॉफी, लॉलीपॉप आदि बहुत कम खाना चाहिए। मीठी वस्तुएं खाने के पश्चात् मुँह को कुल्ला करके साफ़ करना अत्यन्त आवश्यक है।

(iv) गरम भोजन के तुरन्त बाद ठण्डा पानी या पेय नहीं लेना चाहिए।

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प्रश्न 2.
स्नान के बारे में आप जो भी जानते हो विस्तार से लिखो।
उत्तर-
निरोग जीवन और व्यक्तिगत सफ़ाई के लिए स्नान बहुत ज़रूरी है। विशेष कर कान के पिछले भाग, बगले या जाँघों की सफाई करनी ज़रूरी है नहीं तो बदबू आने लगती है। काम करने से कई कोशिकाएं मरने के बाद चमड़ी पर इकट्ठी हो जाती हैं। इसको स्नान करके दूर करना ज़रूरी है। यदि पसीना बाहर निकलना रुक जाए तो गुर्दे अपना काम ठीक तरह से नहीं कर सकते।

स्नान से शारीरिक ताप भी ठीक रहता है। गर्मियों में खुश्की, फोड़े, फुसियाँ, पित्त आदि हो जाते हैं और गर्मी शरीर को झुलसाती है। ठीक तरह से स्नान करके त्वचा साफ़ रखने से ऐसे रोग नहीं होते। गर्मी में शारीरिक तापमान बढ़ जाता है। स्नान पर खुली हवा में बैठने से शारीरिक तापमान में गर्मी के कारण वृद्धि नहीं होती। यदि हो सके तो स्नान करते समय शरीर की सखी मालिश भी करनी चाहिए। मालिश करने से रक्त का दौरा तेज़ होता है। इससे रक्त साफ़ और शुद्ध होकर बहने लगता है।

हमें सप्ताह में एक बार सिर को मालिश करके बाल अच्छी तरह धो लेने चाहिएं। सुबह का समय स्नान के लिए सबसे अच्छा होता है। यदि हम स्नान नहीं करेंगे या सिर अच्छी तरह साफ़ नहीं करेंगे तो बालों में जुएँ पड़ जाएंगी इससे सिर की खोपड़ी कमजोर हो जाती है और सारा दिन खुजलाने के लिए एक हाथ सिर में ही रहता है। कुछ लोग गर्मियों में ठीक तरह से स्नान नहीं करते। वे अपना शरीर साफ़ नहीं करते। अतः उनके कपड़ों और शरीर पर भी जुएँ पड़ जाती हैं। ऐसे व्यक्ति के पास कोई भी नहीं बैठ सकता।

सर्दियों में गर्म पानी से स्नान करना चाहिए। इससे गर्मी मिलती है और शक्ति संचार होता है। खेलने के बाद गर्म पानी से स्नान करना चाहिए नहीं तो सर्द-गर्म होने का खतरा रहता है। लेकिन स्वस्थ और बलवान मनुष्य ठण्डे पानी से ही स्नान करते हैं। इससे ताजगी और प्रसन्नता की भावना पैदा होती है।

खाना खाने और थक जाने के पश्चात् स्नान करना ठीक नहीं रहता। ठण्डे देशों में भाप स्नान भी किया जाता है।

प्रश्न 3.
आँखों की सम्भाल कैसे करनी चाहिए ?
उत्तर-
कहते हैं आँख है तो जहान है क्योंकि इनसे ही हम संसार को देख सकते हैं। इनकी सम्भाल के लिए निम्न उपाय किए जाने चाहिएं –

  1. आँखों को बाहरी गंदगी, जैसे धूल-मिट्टी, कूड़ा-करकट, कीट-पतंगों आदि से बचाना चाहिए। गन्दी आँखें दुखने लगती हैं। यदि किसी कारण से आँखों में कुछ गिर जाए, तो साफ़ जल से धोकर निकाल देना चाहिए।
  2. गन्दे हाथों से अथवा गन्दे रूमाल से आँखों को नहीं पोंछना चाहिए।
  3. आँखों को रगड़ना या मलना नहीं चाहिए।
  4. आँखों को तेज़ धूप, चकाचौंध अथवा तेज़ रोशनी से बचाना चाहिए। इसके लिए धूप के चश्मे आदि का प्रयोग किया जा सकता है।
  5. कम प्रकाश में लिखना-पढ़ना अथवा कोई महीन काम नहीं करना चाहिए।
  6. आँखों में तकलीफ होने पर नेत्र-चिकित्सक की राय लेनी चाहिए।

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Home Science Guide for Class 6 PSEB व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
शरीर-क्रिया विज्ञान में स्वास्थ्य की परिभाषा क्या होगी ?
उत्तर-
कोशिकाओं, अंगों व तन्त्रों की स्वाभाविक क्रियाशीलता को स्वास्थ्य कहते हैं।

प्रश्न 2.
WHO के विचार से स्वास्थ्य क्या है ?
उत्तर-
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के विचार से स्वास्थ्य में मनुष्य का सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक व संवेगात्मक कल्याण निहित है।

प्रश्न 3.
जीवन में सुखी रहने के लिए क्या आवश्यक है ?
उत्तर-
शरीर का स्वस्थ और शक्तिशाली होना।

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प्रश्न 4.
त्वचा को नियमित रूप से साफ़ करना आवश्यक क्यों है ?
उत्तर-
त्वचा से पसीना और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकलते हैं। यदि त्वचा को साफ़ नहीं किया जाता है तो मैल जम जाता है जिसके कारण त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं, इसलिए त्वचा को नियमित रूप से साफ़ करना आवश्यक है।

प्रश्न 5.
दाँतों को साफ़ करना आवश्यक क्यों है ?
उत्तर–
दाँतों को खोखले होने से, गिरने से, दर्द होने से बचाने के लिए दाँतों को साफ करना आवश्यक है।

प्रश्न 6.
कानों में सलाई या तिनका क्यों नहीं फेरना चाहिए ?
उत्तर-
कानों में सलाई या तिनका फेरने से कान में घाव हो जाते हैं और पर्दा भी फट सकता है। इसलिए कानों में सलाई नहीं फेरनी चाहिए।

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प्रश्न 7.
कान का संक्रमण होने पर इसका इलाज तुरन्त क्यों करवाना चाहिए ?
उत्तर-
कान का संक्रमण होने पर यदि इसका इलाज न करवाया जाए तो यह दिमाग़ तक नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसका इलाज तुरन्त करवा लेना चाहिए।

प्रश्न 8.
धूप सेंकने से क्या लाभ होता है ?
उत्तर-
धूप सेंकने से शरीर में विटामिन ‘D’ उत्पन्न होता है।

प्रश्न 9.
किस समय की धूप स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है ?
उत्तर-
प्रायः शीतकाल में प्रात:काल की धूप।

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प्रश्न 10.
घर में धूप का आना किसलिए आवश्यक है ?
उत्तर-
धूप जीवाणुओं को नष्ट करती है।

प्रश्न 11.
गूढ़ निद्रा शरीर के लिए क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
शरीर की थकावट दूर करने के लिए।

प्रश्न 12.
नियमित व्यायाम व उत्तम आसन शरीर के लिए क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
शरीर को सुन्दर, सुगठित व स्वस्थ रखने के लिए।

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प्रश्न 13.
दाँतों को केरीज रोग से बचाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिएं ?
उत्तर-

  1. भोजन के बाद कुल्ला करना चाहिए।
  2. दाँतों को अँगुली से साफ़ करना चाहिए।

प्रश्न 14.
दाँतों का केरीज रोग क्या होता है ?
उत्तर–
दाँतों में कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा मीठे पदार्थों के सड़ने से जीवाणुओं की क्रिया से एसिड बनता है जो दाँतों के एनेमल को क्षीण कर देता है।

प्रश्न 15.
पायरिया रोग के क्या लक्षण हैं ?
उत्तर-

  1. मसूड़े सूजने लगते हैं,
  2. मसूड़ों में पीड़ा होती है,
  3. मसूड़ों से दाँत अलग होने लगते हैं,
  4. मुँह से दुर्गन्ध आती है।

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प्रश्न 16.
स्वस्थ बाल कैसे होते हैं ?
उत्तर-
चमकीले और साफ़।

प्रश्न 17.
स्वस्थ आँखें कैसी होती हैं ?
उत्तर-
चौकन्नी, साफ़ और मलविहीन।

प्रश्न 18.
स्वस्थ त्वचा की क्या पहचान है ?
उत्तर-
चिकनी, ठोस और जगह पर होती है।

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प्रश्न 19.
स्वस्थ नाक की क्या पहचान है ?
उत्तर-
साफ़ और सांस लेती हुई होती है।

प्रश्न 20.
स्वस्थ मुख और होंठ कैसे होते हैं ?
उत्तर-
स्वस्थ मुख प्रसन्न और आनन्दित तथा स्वस्थ होंठ लाल और गीले होते हैं।

प्रश्न 21.
स्वस्थ गला किसे कहते हैं ?
उत्तर-
साफ़, गीला तथा बाधा विहीन गले को।

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प्रश्न 22.
स्वस्थ दाँत कैसे होते हैं ?
उत्तर-
साफ, सही और कष्टविहीन।

प्रश्न 23.
स्वस्थ मसूड़े कैसे होने चाहिएं ?
उत्तर-
ठोस तथा लाल।

प्रश्न 24.
स्वस्थ तथा अस्वस्थ हाथ में क्या अन्तर होता है ?
उत्तर-
हाथ की हथेलियाँ लाल होने पर स्वस्थ तथा पीली होने पर अस्वस्थ मानी जाती हैं।

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प्रश्न 25.
सोने से पहले कोई परिश्रम या अधिक दौड़ भाग का काम क्यों नहीं करना चाहिए ?
उत्तर-
इससे निद्रा अच्छी नहीं आती।

प्रश्न 26.
छुट्टी वाले दिन क्या कार्य करने चाहिए ?
उत्तर-
हल्के और मनोरंजक कार्य करने चाहिएं।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यायाम शरीर के लिए क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
व्यायाम हमारे स्वास्थ्य के लिए तथा शरीर को निरोग रखने के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसके विभिन्न कारण हैं –

  1. व्यायाम करने से भोजन शीघ्र पच जाता है था भूख खुलकर लगती है।
  2. व्यायाम करने से शरीर की गन्दगी शीघ्र बाहर निकल जाती है।
  3. व्यायाम करने से शरीर की मांसपेशियां मज़बूत हो जाती हैं जिससे शरीर मजबूत होता है।
  4. व्यायाम करने से शरीर के सब अंग खुल जाते हैं। फेफड़े बड़े हो जाते हैं। श्वास की क्रिया तेजी से होती है।
  5. रक्त शुद्ध हो जाता है।
  6. व्यायाम करने से अधिक शुद्ध रक्त मिलता है जिससे वह तरोताज़ा रहता है।
  7. रोग रोधन क्षमता बढ़ जाती है।

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प्रश्न 2.
व्यायाम के सामान्य नियम क्या हैं ?
उत्तर-
व्यायाम (Exercise) करते समय व्यायाम के नियमों का पालन करना चाहिए। व्यायाम के नियम निम्नलिखित हैं –

  1. व्यायाम शुद्ध वायु तथा खुले स्थान पर करना चाहिए।
  2. व्यायाम बीमारी से तुरन्त उठने, भोजन के पश्चात् अथवा चिन्ता की दिशा में नहीं करना चाहिए।
  3. व्यायाम आयु तथा स्वास्थ्य के आधार पर करना चाहिए।
  4. व्यायाम को धीरे-धीरे बढ़ाइए। एकदम अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  5. व्यायाम के तुरन्त बाद जल नहीं पीना चाहिए और न ही नहाना चाहिए।
  6. व्यायाम करते समय सर्दी से बचने के लिए शरीर पर कोई ढीला वस्त्र अवश्य रहना चाहिए।
  7. मस्तिष्क के कार्य करने वालों के लिए सैर करना, हल्की दौड़, ओस पर चलना ही उचित व्यायाम है।
  8. पेट के रोगियों को झुकने वाले व्यायाम करने चाहिएं।
  9. व्यायाम करते समय मुख से सांस नहीं लेना चाहिए।

प्रश्न 3.
नियमित स्नान के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
नियमित स्नान से शरीर को निम्न लाभ होते हैं –

  1. त्वचा की स्वच्छता होती है।
  2. रोमकूपों के मुँह खुल जाते हैं।
  3. ठण्डे पानी से नहाने से त्वचा के तापमान को सामान्य बनाने के लिए रक्त अधिक मात्रा में तथा तीव्र गति से त्वचा की ओर प्रवाहित होता है।
  4. नहाने के बाद तौलिए से शरीर रगड़ने से रक्त संचरण उत्तम होता है।
  5. स्नान से हानिकारक पदार्थों तथा रोगाणुओं से मुक्ति मिलती है।
  6. धुलकर बह जाने से पसीने की दुर्गन्ध जाती रहती है।

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बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्राम और निद्रा से स्वास्थ्य को क्या लाभ होता है ?
उत्तर-
विश्राम और निद्रा से स्वास्थ्य को लाभ-विश्राम नितान्त आवश्यक होता है। हम जो भी शारीरिक अथवा मानसिक कार्य करते हैं, उससे हमारे शरीर में थकान आ जाती है। वास्तव में, शारीरिक परिश्रम करते समय हमारे शरीर में अनेक विषैले पदार्थ एकत्र हो जाते हैं। ये पदार्थ ही हमारी माँसपेशियों को थकाते हैं। इसके अतिरिक्त कार्य करते समय हमारे शरीर के ऊतक अधिक टूटते-फूटते रहते हैं। कार्य करते समय इनकी मरम्मत नहीं हो पाती। अतः शरीर के स्वास्थ्य के लिए इन ऊतकों की मरम्मत तथा विषैले पदार्थों का बाहर निकलना अनिवार्य होता है। इन क्रियाओं के लिये विश्राम आवश्यक होता है।

विश्राम का सबसे उत्तम उपाय नींद है। नींद व्यक्ति के लिए वरदान है। निद्रा के समय हमारे शरीर में कार्य करने के परिणामस्वरूप हुई टूट-फूट ठीक हो जाती है तथा शरीर नई शक्ति अर्जित कर लेता है। पर्याप्त नींद ले लेने से व्यक्ति एकदम तरोताज़ा एवं स्वस्थ हो जाता है। नींद के समय हमारे शरीर के सभी अंगों को आराम मिलता है। इस समय हमारी नाड़ी एवं श्वास की गति भी कुछ मन्द हो जाती है तथा रक्तचाप भी घट जाता है, अतः सम्बन्धित अंगों को भी कुछ आराम मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को पर्याप्त नींद नहीं आती तो उसका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। नींद के अभाव में व्यक्ति दुर्बल हो जाता है, स्वभाव में चिड़चिड़ाहट आ जाती है तथा चेहरे पर उदासी छा जाती है।

प्रश्न 2.
स्नान करने का महत्त्व स्पष्ट करें। किन देशों में नहाने का महत्त्व है ?
उत्तर-
स्वयं करें।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
दाँतों के किसी रोग का नाम बताओ।
उत्तर-
केरीज़।

प्रश्न 2.
आँख गई ……………….. गया।
उत्तर-
जहान।

प्रश्न 3.
ठण्डे देश में …………………… स्नान भी किया जाता है।
उत्तर-
भाप।

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प्रश्न 4.
निरोगी जीवन के लिए …………………… बहुत आवश्यक है।
उत्तर-
स्नान।

प्रश्न 5.
खेलने के बाद ………………………. से नहाना चाहिए।
उत्तर-
गर्म पानी।

प्रश्न 6.
शारीरिक या मानसिक कार्य करने से क्या होता है ?
उत्तर-
थकावट।

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प्रश्न 7.
डैनटीन के अन्दर एक खोल होता है उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर-
पलम खोल।

प्रश्न 8.
हमारे नाखून सफेद क्यों हो जाते हैं ?
उत्तर-
कैल्शियम, लोहे या खनिज पदार्थों की कमी के कारण।

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व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान PSEB 6th Class Home Science Notes

  • व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान वह विज्ञान है जो हमारे शरीर को स्वस्थ एवं सुचालित रखने में हमारी सहायता करता है।
  • निरोग और बलिष्ठ मनुष्य ही देश की उन्नति में सहायता कर सकते हैं।
  • स्वस्थ और स्वच्छ रहने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने शरीर को स्वच्छ रखें और उसकी उचित देखभाल करें।
  • आँखें हमारे शरीर की बहुत ही महत्त्वपूर्ण और नाजुक अंग हैं। इनकी देखभाल बहुत ज़रूरी है। बड़ों का कहना है कि “आँखें गईं जहान गया।”
  • आँखों की स्वस्थता के लिए विटामिन ‘ए’ बहुत ज़रूरी है।
  • आँखों का दुखना एक छूत की बीमारी है।
  • आँखों के रोगी को अपना तौलिया, रूमाल और अन्य कपड़े दूसरों से अलग रखने चाहिएं।
  • मध्यम रोशनी में बारीक अक्षर पढ़ने से, सूर्यास्त के समय सिलाई-कढाई का काम करने से आँखों पर काफ़ी दबाव पड़ता है।
  • जब कभी रात के समय काम करना हो तो रोशनी ठीक और बाएँ हाथ की ओर होनी चाहिए, लेकिन बाएँ हाथ से काम करने वालों के लिए यह रोशनी दाईं ओर से आनी चाहिए।
  • प्रत्येक दिन सुबह उठकर ताजे पानी से आँखों को धोना चाहिए और ठण्डे पानी के हल्के-हल्के छींटे मारने चाहिएं।
  • यदि आँखों पर दबाव पड़ने वाला काम अधिक देर तक करना पड़े तो थोड़ी देर बाद कुछ पलों के लिए आँखों को धीरे से बन्द कर लेना चाहिए। इससे आँखों को आराम मिलता है।
  • दाँत मनुष्य की सुन्दरता को बढ़ाते हैं।
  • भोजन का सही स्वाद लेने के लिए दाँत बहुत ज़रूरी हैं।
  • यदि दाँतों को अच्छी तरह साफ़ न किया जाए तो भोजन का कुछ भाग दाँतों के खोलों में इकट्ठा हो जाता है। जिससे दाँतों में कई प्रकार की बीमारियाँ हो जाती है।
  • खाना खाने के बाद गर्म या नमक मिले पानी या लाल दवाई से घोल के साथ कुल्ली करना लाभदायक है।
  • दाँतों को दिन में कम-से-कम दो बार ब्रुश या दातुन से साफ़ करना चाहिए।
  • दाँतों से सख्त चीजें जैसे बादाम, अखरोट आदि नहीं तोड़ने चाहिएं।
  • छोटे बच्चे जब दाँत निकाल रहे हों तो उनके भोजन में विटामिन ‘डी’, कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
  • कैल्शियम, विटामिन ‘डी’ और फॉस्फोरस की कमी के कारण दंतासिन नामक रोग हो जाता है।
  • साफ़ नाखून हाथों की सुन्दरता को बढ़ा देते हैं।
  • गन्दे हाथों से तैयार किया और खाया भोजन कई बीमारियाँ पैदा करता है, जैसे बदहज़मी, जी मितलाना, दस्त लगना, उल्टी आना आदि।
  • नींबू काटकर नाखूनों पर रगड़ने से चमक आ जाती है।
  • हमारे शरीर में विटामिन या किसी खनिज पदार्थ की कमी हो जाने से नाखून सफ़ेद हो जाते हैं या उन पर सफ़ेद निशान पड़ जाते हैं।
  • पसीने की ग्रंथियों से पसीना बाहर निकलता है।
  • नहाने से शारीरिक ताप भी ठीक रहता है।
  • सुबह का समय स्नान के लिए सबसे अच्छा होता है।
  • सर्दियों में गर्म पानी से स्नान करने पर गर्मी मिलती है।
  • ठण्डे देशों में भाप स्नान भी किया जाता है।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 15 गुप्त साम्राज्य

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions History Chapter 15 गुप्त साम्राज्य Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science History Chapter 15 गुप्त साम्राज्य

SST Guide for Class 6 PSEB गुप्त साम्राज्य Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन करें।
उत्तर-
समुद्रगुप्त एक महान् विजेता था। उसकी प्रमुख विजयों का वर्णन इस प्रकार है –
1. समुद्रगुप्त ने सबसे पहले उत्तरी भारत के तीन राजाओं को हराया और उनके राज्य . को गुप्त साम्राज्य में मिला लिया।

2. समुद्रगुप्त की सबसे बड़ी विजय दक्षिणी भारत की विजय थी। उसने दक्षिण के 12 राजाओं को हराया। परन्तु उनके द्वारा अधीनता स्वीकार करने पर उसने उनके राज्य लौटा दिए।

3. कुछ जंगली जातियों ने राज्य में अशांति फैला रखी थी। ये जातियां आमतौर पर उड़ीसा के जंगलों में रहती थीं। समुद्रगुप्त ने इन जातियों को युद्ध में हरा कर शान्ति स्थापित की।

वास्तव में समुद्रगुप्त ने फ्रांस के शासक तथा सेनापति नेपोलियन की तरह अनेक प्रदेशों पर विजय प्राप्त की। इसलिए उसे भारत का नेपोलियन भी कहा जाता है।

प्रश्न 2.
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य समुद्रगुप्त का पुत्र था। उसे चन्द्रगुप्त द्वितीय भी कहा जाता है। वह गुप्त वंश का एक प्रतापी राजा था। उसने लगभग 380 ई० से 412 ई० तक राज्य किया।

  1. उसने पश्चिमी भारत के शकों को हराया। उसने अपनी सैनिक शक्ति द्वारा अपने साम्राज्य को अरब सागर तक बढ़ाया तथा सौराष्ट्र और काठियावाड़ को जीता।
  2. उसने दिल्ली में कुतुबमीनार के समीप लोहे का विशाल स्तम्भ बनवाया, जिस पर लिखे लेख में उसकी सफलताओं का वर्णन है।
  3. उसने कला तथा साहित्य को प्रोत्साहन दिया। उसके दरबार में नौ विद्वान् थे जिन्हें ‘नवरत्न’ कहा जाता था।
  4. वह धार्मिक दृष्टि से बहुत सहनशील था। वह स्वयं भगवान् विष्णु का भक्त था लेकिन वह सभी धर्मों का सम्मान करता था।
  5. उसने बड़ी मात्रा में सोने, चांदी तथा तांबे के सिक्के चलाए।
  6. उसके शासन काल में ही चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था।
  7. चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी, जिसका अर्थ है ‘वीरता का सूर्य’।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 15 गुप्त साम्राज्य

प्रश्न 3.
कालिदास के बारे में एक नोट लिखें।
उत्तर-
कालिदास संस्कृत के एक प्रसिद्ध कवि थे। वह गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के दरबार के ‘नवरत्नों’ में से एक थे। उन्होंने बहुत-से नाटकों तथा कविताओं की रचना की। शकुन्तला, रघुवंश, कुमारसम्भव तथा मेघदूत आदि उनकी अमर रचनाएं हैं। शकुन्तला नाटक संसार भर में प्रसिद्ध है।

प्रश्न 4.
गुप्तकाल में आर्थिक जीवन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
गुप्तकाल में आर्थिक जीवन बहुत समृद्ध था।

  1. कर बहुत कम थे तथा दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं बहुत सस्ती थीं। आम लोग इन्हें ख़रीदने के लिए कौड़ियों अथवा तांबे के सिक्कों का प्रयोग करते थे। लेकिन इस काल में सबसे अधिक सोने के सिक्के चलाए गए। ऐसे सिक्कों को दीनार कहते थे।
  2. लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। कई प्रकार के अनाजों के अतिरिक्त फलों, तथा तेल-बीजों की कृषि भी की जाती थी।
  3. देशी तथा विदेशी, दोनों प्रकार का व्यापार उन्नत था। भारत के दक्षिण-पूर्वी एशिया, चीन, मध्य एशिया तथा यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध थे।
  4. साहूकारों, व्यापारियों तथा उत्पादकों के अपने-अपने संगठन थे, जिन्हें श्रेणी अथवा निगम कहा जाता था।
  5. पशु-पालन तथा औद्योगिक-धन्धे अन्य प्रसिद्ध व्यवसाय थे।

प्रश्न 5.
गुप्तकाल को भारत का ‘स्वर्ण युग’ क्यों कहते हैं?
उत्तर-
गुप्तकाल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बहुत उन्नति हुई थी, जिस कारण इसे भारत का ‘स्वर्ण युग’ कहा जाता है।

  1. गुप्त साम्राज्य का शासन प्रबन्ध बहुत उत्तम था। राजा मन्त्रियों तथा अधिकारियों की सहायता से शासन चलाता था।
  2. लोग समृद्ध, सुखी तथा ईमानदार थे। कर बहुत कम थे। दैनिक प्रयोग की चीजें बहुत सस्ती थीं। इस काल में सोने के सिक्के बड़ी मात्रा में चलाए गए।
  3. कृषि तथा व्यापार का बहुत विकास हुआ था।
  4. गुप्तकाल में उच्चकोटि के साहित्य तथा कला की रचना हुई। साहित्यकारों तथा कलाकारों को राजाओं का संरक्षण प्राप्त था।
  5. सभी धर्मों का सम्मान किया जाता था। चाहे गुप्त राजा स्वयं हिन्दू धर्म को मानते थे लेकिन वे सभी धर्मों के लोगों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करते थे।सभी लोगों को पूर्ण धार्मिक स्वतन्त्रता प्राप्त थी।
  6. गुप्तकाल में विज्ञान तथा तकनीकी का बहुत विकास हुआ था। आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त तथा बाणभट्ट इस काल के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे।
  7. शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत विकास हुआ था। ब्राह्मण तथा भिक्षु अध्यापक होते थे जो आमतौर पर मन्दिरों तथा मठों में शिक्षा देते थे। तक्षशिला, सारनाथ तथा नालन्दा गुप्तकाल के विश्वविद्यालय थे।
  8. गुप्तकाल में भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता का विदेशों में प्रचार किया गया।

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II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

  1. समुद्रगुप्त एक ………….. एवं ………….. था।
  2. कालिदास द्वारा लिखित नाटक …………. तथा काव्य ……….. बहुत प्रसिद्ध हैं।
  3. चन्द्रगुप्त द्वितीय ने बड़ी संख्या में ……….. और ……… के सिक्के जारी . किए।
  4. गुप्त साम्राज्य कई प्रांतों में बंटा हुआ था जिन्हें ………. कहा जाता है।
  5. (गुप्तकाल में) जिलों को …………… कहते थे।

उत्तर-

  1. महान् योद्धा, शासक
  2. सोने, चांदी
  3. भुक्ति
  4. विषय
  5. शकुंतला, मेघदूत।

III. सही जोड़े बनायें

  1. आर्यवर्त – (क) पंजाब
  2. मुद्रक – (ख) उत्तरी भारत
  3. लौह स्तम्भ – (ग) एक अधिकारी
  4. कुमारामात्य – (घ) दिल्ली

उत्तर-सही जोड़े

  1. आर्यवर्त – उत्तरी भारत
  2. मुद्रक – पंजाब
  3. लौह स्तम्भ – दिल्ली
  4. कुमारामात्य – एक अधिकारी

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IV. सही (✓) अथवा ग़लत (✗) बताएं

  1. महाराज गुप्त प्रथम गुप्त राजा था।
  2. विक्रमादित्य ने समुद्रगुप्त की उपाधि धारण की थी।
  3. योद्येय दक्षिण भारत पर राज्य करते थे।
  4. फाह्यान यूनानी लेखक था।
  5. गुप्तों ने सोने के सिक्के जारी किए।
  6. आर्यभट्ट एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक था।

उत्तर-

  1. (✓)
  2. (✗)
  3. (✗)
  4. (✗)
  5. (✓)
  6. (✓)

PSEB 6th Class Social Science Guide गुप्त साम्राज्य Important Questions and Answers

कम से कम शब्दों में उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
गुप्तवंश के पहले महान् शासक चन्द्रगुप्त प्रथम ने एक लिच्छवी राजकुमारी से विवाह किया था। उसका क्या नाम था?
उत्तर-
कुमार देवी।

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प्रश्न 2.
समुद्रगुप्त की उपलब्धियों से जुड़े इलाहाबाद स्तंभ लेख का लेखक कौन था?
उत्तर-
हरिषेण।

प्रश्न 3.
महरौली में कुतुबमीनार के समीप लौह स्तम्भ इतिहास में किस राजवंश के काल में बना था?
उत्तर-
गुप्त वंश।

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुप्तवंश के पतन में निम्न में से किन आक्रमणकारियों की विशेष भूमिका रही?
(क) ह्यूण
(ख) मंगोल
(ग) आर्य।
उत्तर-
(क) ह्यूण

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प्रश्न 2.
अजन्ता की गुफ़ाएं अपनी किस विशेषता के लिए प्रसिद्ध हैं?
(क) सुंदर भित्ति-चित्र
(ख) हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां
(ग) विशाल तोरण द्वार।
उत्तर-
(क) सुंदर भित्ति-चित्र

प्रश्न 3.
कालिदास ने मेघदूत तथा शकुंतला जैसे प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की। वह निम्न में से किस भाषा का कवि था?
(क) ब्रज
(ख) संस्कृत
(ग) पालि।
उत्तर-
(ख) संस्कृत

अति लघ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुप्त वंश की जानकारी देने वाले चार स्रोतों के नाम लिखें।
उत्तर-
गुप्त वंश की जानकारी देने वाले चार स्रोत हैं –

  1. पुराण,
  2. कालिदास के नाटक,
  3. चीनी यात्री फाह्यान का वृत्तान्त,
  4. अभिलेख।

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प्रश्न 2.
गुप्त वंश का प्रथम स्वतन्त्र राजा कौन था?
उत्तर-
गुप्त वंश का प्रथम स्वतन्त्र राजा चन्द्रगुप्त प्रथम था।

प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त प्रथम ने कौन-से राज्यवंश के साथ वैवाहिक सम्बन्ध बनाए?
उत्तर-
चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवी वंश के साथ वैवाहिक सम्बन्ध बनाए।

प्रश्न 4.
चन्द्रगुप्त प्रथम का राज्यकाल बताएं।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त प्रथम का राज्यकाल 320 ई० से 335 ई० तक था।

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प्रश्न 5.
समुद्रगुप्त राजगद्दी पर कब बैठा?
उत्तर-
समुद्रगुप्त 335 ई० में राजगद्दी पर बैठा।

प्रश्न 6.
समुद्रगुप्त ने कौन-से नाग राजाओं को पराजित किया?
उत्तर-
समुद्रगुप्त ने जिन नाग राजाओं को पराजित किया उनके नाम थे-अच्युत नाग, नागसेन तथा गणपति नाग।

प्रश्न 7.
भारत का नेपोलियन किस राजा को कहा जाता है?
उत्तर-
समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है।

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प्रश्न 8.
समुद्रगुप्त ने कौन-से विदेशी राजा के साथ मित्रता स्थापित की?
उत्तर-
समुद्रगुप्त ने श्रीलंका के राजा मेघवर्मन के साथ मित्रता स्थापित की।

प्रश्न 9.
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का राज्यकाल बताएं।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का राज्यकाल 380 ई० से 415 ई० तक था।

प्रश्न 10.
पंचतन्त्र के लेखक का क्या नाम था?
उत्तर-
पंचतन्त्र का लेखक विष्णु शर्मा था।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चन्द्रगुप्त प्रथम की विजयों के बारे में लिखें।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवी वंश की राजकुमारी कुमार देवी से विवाह किया। लिच्छवी वंश राजनीतिक रूप से शक्तिशाली था। इस वंश की सहायता से चन्द्रगुप्त प्रथम ने मगध, बिहार तथा इलाहाबाद के समीपवर्ती प्रदेशों को जीत लिया। उसने अपने नाम पर एक संवत् भी चलाया।

प्रश्न 2.
समुद्रगुप्त की कला के क्षेत्र में क्या देन थी?
उत्तर-
समुद्रगुप्त ने कला तथा साहित्य को पूर्ण सुरक्षा दी। उसको संगीत से बड़ा लगाव था। उसके राज्य के कुछ सिक्कों पर उसको वीणा बजाते हुए दिखाया गया है। हरिषेन उसका दरबारी कवि था।

प्रश्न 3.
गुप्तकाल की वैज्ञानिक उन्नति का ब्योरा दीजिए।
उत्तर-
गुप्तकाल में विज्ञान के क्षेत्र में बहुत उन्नति हुई। आर्यभट्ट इस काल का प्रसिद्ध ज्योतिषी तथा गणित का विद्वान् था। उसने संसार को शून्य, सूर्य ग्रहण तथा चन्द्र ग्रहण की जानकारी दी। ब्रह्मगुप्त गणित तथा बीज गणित का विद्वान् था। वराहमिहिर वनस्पति विज्ञान । तथा भूगोल का विद्वान् था।

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प्रश्न 4.
समुद्रगुप्त की दक्षिण विजयों का वर्णन करें।
उत्तर-
समुद्रगुप्त की सबसे महान् विजय दक्षिणी भारत की विजय थी। उसने दक्षिण – भारत के 12 राजाओं को पराजित किया । उसने उत्तरी भारत में सभी जीते हुए प्रदेशों को अपने राज्य में मिला लिया, परन्तु दक्षिण भारत के सभी विजित प्रदेश उसने वहां के राजाओं को लौटा दिए। उनसे वह केवल कर वसूल करता रहा।

प्रश्न 5.
चन्द्रगुप्त द्वितीय के दूसरे देशों के साथ सम्बन्धों की जानकारी दें।
उत्तर-
चन्द्रगुप्त ने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना करके विक्रमादित्य की उपाधि धारण की। उसने अपने साम्राज्य को दृढ़ करने के लिए पड़ोसी राजाओं के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किए। उसने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक राज्य के राजकुमार रुद्रसेन द्वितीय के साथ किया। परन्तु दुर्भाग्य से रुद्रसेन द्वितीय की शीघ्र ही मृत्यु हो गई। अतः चन्द्रगुप्त ने प्रभावती तथा अपने अवयस्क दोहतों की वाकाटक राज्य को सम्भालने में सहायता की। चन्द्रगुप्त की इस नीति के कारण वाकाटक राज्य की जनता चन्द्रगुप्त की आभारी हो गई। गुप्त राजाओं के कुन्तल के कांदव शासक की पुत्रियों से भी विवाह हुए। इस प्रकार चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी शक्ति को और भी दृढ़ कर लिया।

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निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
फाह्यान के वृत्तांत का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
फाह्यान एक चीनी यात्री था। वह चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल में भारत आया। वह भारत में बौद्ध तीर्थ स्थानों की यात्रा करने तथा बौद्ध ग्रन्थों की खोज के लिए भारत आया था। उसने अपने वृत्तांत में निम्नलिखित बातों का वर्णन किया है –

1. चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासन के बारे में-फाह्यान ने चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के उदारवादी राज्य प्रबन्ध का वर्णन किया है। वह लिखता है कि दण्ड नर्म थे, फिर भी अपराध नहीं होते थे। सड़कें सुरक्षित थीं। राज्य प्रबन्ध को सुचारु रूप से चलाने के लिए साम्राज्य को प्रान्तों में बांटा हुआ था। प्रान्तों का प्रबन्ध गर्वनरों के हाथ में था।

2. लोगों के बारे में-फाह्यान के अनुसार गुप्त साम्राज्य में लोग समृद्ध, ईमानदार तथा अच्छे नागरिक थे। वे कानून का पालन करते थे। उनका नैतिक जीवन ऊंचा था। लोग मुख्य रूप में शाकाहारी थे। चण्डालों को घृणा की दृष्टि से देखा जाता था। इसलिए वे नगर से बाहर रहते थे।

3. धर्म के बारे में – फाह्यान के वृत्तांत से पता चलता है कि गुप्तकाल में बौद्ध धर्म बहुत विकसित था। लेकिन गुप्त शासक स्वयं हिन्दू धर्म को मानते थे। वे विष्णु के पुजारी थे। लेकिन वे दूसरे धर्मों के प्रति उदारवादी थे।

प्रश्न 2.
गुप्तकाल के साहित्य की जानकारी दीजिए।
उत्तर-
गुप्तकाल में राज दरबार की भाषा संस्कृत थी। इसलिए संस्कृत भाषा तथा साहित्य ने इस काल में विशेष उन्नति की।

  1. इस काल के प्रसिद्ध लेखक कालिदास ने संस्कृत भाषा में अनेक नाटक तथा कविताएं लिखीं। शकुन्तला, रघुवंश, मेघदूत तथा ऋतुसंहार उनके द्वारा रचित मुख्य नाटक हैं। कालिदास, चन्द्रगुप्त द्वितीय के नवरत्नों में से एक थे। उन्हें भारतीय शेक्सपीयर भी कहा जाता है।
  2. समुद्रगुप्त के समय हरिषेन एक प्रसिद्ध साहित्यकार था।
  3. विष्णु शर्मा का पंचतन्त्र, विशाखादत्त का मुद्राराक्षस तथा अमर सिंह का अमरकोष भी संस्कृत भाषा की अनमोल रचनाएं हैं।
  4. गुप्तकाल में नालन्दा, सारनाथ, तक्षशिला, पाटलिपुत्र, बनारस, मथुरा आदि शिक्षा के महत्त्वपूर्ण केन्द्र थे। इन केन्द्रों में साहित्य, धर्म, दर्शन, वेदों आदि की शिक्षा दी जाती थी।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

Punjab State Board PSEB 10th Class Home Science Book Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Home Science Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

PSEB 10th Class Home Science Guide आस-पास की सफ़ाई Textbook Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
आस-पास की सफ़ाई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
आस-पास से अभिप्राय घर का इर्द-गिर्द है जिसमें गली, पार्क और शैड शामिल किए जा सकते हैं। घर की भीतरी सफ़ाई के साथ-साथ आस-पास की सफ़ाई को इर्द-गिर्द की सफ़ाई कहा जाता है।

प्रश्न 2.
घरेलू कूड़े में कौन-कौन सी वस्तुएं होती हैं?
उत्तर-
घर में वस्तुओं का प्रयोग करते समय कूड़े-कर्कट का पैदा होना स्वाभाविक है। इस कूड़े-कर्कट में हम रसोई की जूठन, राख, फल और सब्जियों के छिलके, गत्ते के डिब्बे, पोलीथीन के लिफाफे, कागज़-पत्र आदि शामिल होते हैं।

प्रश्न 3.
आस-पास की सफ़ाई का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
घर को साफ़ रखने के लिए घर के आस-पास की सफ़ाई होना बहुत आवश्यक है। घर के आस-पास की सफ़ाई के कई लाभ हैं।
साफ़ सुथरा आस-पास हमें बदबू और गन्दगी से बचाकर रखता है। कीड़े-मकौड़े पैदा नहीं होते। पानी और भूमि के प्रदूषण का डर नहीं रहता और आए गए को भी साफ़सुथरा स्थान अच्छा लगता है।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

प्रश्न 4.
घर की नालियां साफ़ करना क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
घर की सफ़ाई तभी ठीक रह सकती है यदि घर में फालतू पानी का निकास ठीक हो। आजकल बड़े शहरों में तो भूमिगत (Underground) सीवरेज़ का प्रबन्ध हो चुका है, परन्तु गाँवों और कस्बों में फालतू पानी के निकास को ठीक रखने के लिए नालियों की रोज़ाना सफ़ाई आवश्यक है।

प्रश्न 5.
मल-मूत्र को ठिकाने लगाना सबसे जरूरी है, क्यों?
उत्तर-
मल-मूत्र को ठिकाने लगाने का कार्य सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मल-मूत्र में हानिकारक बैक्टीरिया, वाइरस और जीवाणु होते हैं यदि इसको जल्दी ठिकाने न लगाया जाए तो बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। कई बीमारियां जैसे टाइफाइड, हैज़ा और आंतों के रोग हो सकते हैं।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 6.
घर के कूड़े-कर्कट को कितने भागों में बांटा जा सकता है तथा इसका निपटारा कैसे करना चाहिए?
उत्तर-
घर के कूड़े-कर्कट को सम्भालना घर की सफ़ाई के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। घर के कूड़े-कर्कट को हम चार भागों में विभाजित कर सकते हैं-

  1. फलों सब्जियों के छिलके और रसोई का कूड़ा-कर्कट आदि को सम्भालने के लिए एक मज़बूत कूड़ेदान होना चाहिए जिस पर ढक्कन हो और दोनों ओर कुण्डे लगे हों ताकि इसको आसानी से उठाया जा सके। इस कूड़ेदान को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां से तेज़ हवा से कूड़ा न उड़े और न ही वर्षा का पानी पड़ सके। इस कूड़े को रोज़ाना निपटाना आवश्यक है।
  2. आंगन और बगीची में झाड़ लगाते समय निकला कूड़ा, टूटी हुई वस्तुओं के टुकड़े और गुसलखाने का कूड़ा-कर्कट घर के कूड़े की दूसरी किस्म है । इसको भी किसी ढोल या कूड़ेदान में इकट्ठा करना आवश्यक है।
  3. जिस घर में पशु हों उसमें गोबर, बचा हुआ चारा, घर में काफ़ी कूड़ा-कर्कट पैदा करता है, इसको रोज़ाना सम्भालना चाहिए, पशुओं के गोबर से गोबर गैस भी बनाई जा सकती है और इसके उपले बनाकर भी प्रयोग किए जा सकते हैं।
  4. घर में मानवीय मल-मूत्र को ठिकाने लगाने के कार्य मुश्किल और महत्त्वपूर्ण हैं। यदि घर में फ्लश सिस्टम न हो तो मानवीय मल-मूत्र द्वारा बीमारियां फैलने का डर बना रहता है। इसलिए मानवीय मल-मूत्र जल्दी से जल्दी ठिकाने लगाने का पक्का प्रबन्ध होना चाहिए।

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प्रश्न 7.
कूड़े को जलाया क्यों जाता है?
उत्तर-
वातावरण की सफाई के लिए कूड़े-कर्कट का निपटारा करना बहुत आवश्यक है। वैसे तो कूड़े के निपटारे के लिए कई ढंग हैं, परन्तु कूड़े को जलाना सब से अच्छा समझा जाता है। कूड़े-कर्कट को इकट्ठा करके खुले स्थान पर आग लगा कर नष्ट किया जा सकता है, परन्तु कूड़े को जलाने का सबसे बढ़िया ढंग भट्ठी बनाकर उसमें कूड़े को जलाना है, इस प्रकार कूड़ा भी नष्ट हो जाता है और धुआं भी चिमनी द्वारा ऊपर चला जाता है और वातावरण भी साफ़-सुथरा रहता है।

प्रश्न 8.
कूड़े-कर्कट से खाद कैसे बनाई जाती है? इसका क्या लाभ है?
अथवा
कूड़े से खाद किस प्रकार बनाई जाती है और इससे नीची जगह को कैसे भरा जाता है?
उत्तर-
कड़े-कर्कट को खाद में परिवर्तित कर देना सदियों पुराना लाभदायक ढंग है। इस ढंग से मल-मूत्र और कूड़ा कर्कट को विशेष प्रकार के गड्ढों में भर कर ऊपर सूखी मिट्टी डालकर ढक दिया जाता है। इस तरह कई गड्ढे भर लिए जाते हैं। गर्मियों के दिनों में कभी-कभी पानी फेंका जाता है। 4-6 महीनों के पश्चात् यह कूड़ा-कर्कट खाद में परिवर्तित हो जाता है।

कूड़े-कर्कट को खाद में परिवर्तित कर लेना बहुत लाभदायक ढंग है। बहुत कम मेहनत से कूड़ा केवल सम्भाला ही नहीं जाता बल्कि उसको खाद में परिवर्तित करके फ़सलों, सब्जियों आदि में प्रयोग किया जाता है, जिससे फ़सलें भी अच्छी होती हैं।

प्रश्न 9.
कूड़े-कर्कट से गड्ढे भरने का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर-
कूड़े-कर्कट से खुले गड्ढे भरने से मानवीय स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि कूड़े-कर्कट को गड्ढे में डाल कर ऊपर से ढका न जाए तो जब कूड़ा गल जाता है उससे चारों ओर बदबू फैलती है। कई तरह के बैक्टीरिया और अन्य कीड़े-मकौड़े भी पैदा हो जाते हैं। इससे पूरा वातावरण दूषित हो जाता है और आस-पास रहते लोग कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त वर्षा के पानी के साथ मिलकर यह कूड़ा-कर्कट धरती निचले पानी को प्रदूषित कर देता है। इसलिए खुले गड्ढों में कूड़ाकर्कट फेंकने से मानवीय स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

प्रश्न 10.
कूड़े का निपटारा करने के ढंगों के नाम लिखो।
उत्तर-
कूड़े के निपटारे की निम्नलिखित विधियां हैं

  1. भट्ठी में जलाना
  2. गड्ढों को भरना
  3. खाद बनाना
  4. छांटना।

प्रश्न 11.
गन्दगी का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
देखें अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नों में।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 12.
कूड़े-कर्कट को ठिकाने लगाने की विधियों का वर्णन करें।
उत्तर-
देखें अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नों में।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

प्रश्न 13.
आस-पास की सफ़ाई क्यों आवश्यक है? इसके लिए क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर-
घर की सफ़ाई परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिये घर के आस-पास की सफ़ाई से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। इसलिए परिवार के सदस्यों को बीमारियों से बचाने के लिए घर की सफ़ाई के साथ-साथ घर के आस-पास की सफ़ाई का भी ध्यान रखना चाहिए। घर के आस-पास की गन्दगी कई प्रकार के कीड़े-मकौड़े, बैक्टीरिया, मक्खी, मच्छर पैदा करने में सहायक होती है। इनसे मलेरिया, दस्त, टाइफाइड, फ्लू आदि बीमारियां लग सकती हैं और आस-पास की सफ़ाई करके हम काफ़ी हद तक इन बीमारियों से बच सकते हैं। इसके अतिरिक्त घर का साफ़-सुथरा आस-पास आए गए मेहमानों को सुन्दर लगता है और मेहमान भी खुश हो कर मिलने आते हैं। यदि घर के आस-पास गन्दगी होगी तो कोई सफ़ाई पसन्द मित्र और रिश्तेदार आप को मिलने आने से झिझकते हैं। इसलिए घर के आस-पास की गन्दगी परिवार का सामाजिक स्तर कम करती है।

आस-पास की सफ़ाई के लिए क्या करना चाहिए?

1. पानी के सही नियम का प्रबन्ध-गाँव और उन शहरों, कस्बों में जहां भूमिगत सीवरेज का प्रबन्ध नहीं है। घर के पानी से आस-पास प्रदूषित होता है क्योंकि खाना बनाना, बर्तन साफ़ करने, नहाना, पशुओं को साफ़ रखने के लिए, आंगन को साफ़ रखने के लिए पानी की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है और यदि इसका निकास ठीक न हो तो यह पानी घर के किसी कोने या घर के बाहर गली या किसी गड़े में इकट्ठा होता रहता है। इकट्ठा हुआ पानी केवल बदबू ही नहीं फैलाता बल्कि मच्छर, मक्खियों
और अन्य कीटाणुओं का जन्म स्थान बन जाता है जिससे कई बीमारियां फैलती हैं। इसलिए घर के पानी का सही निकास करके और बाहर नालियों की सफाई करके हम काफ़ी हद तक आस-पास को साफ़ रख सकते हैं।

2. गलियों की सफाई करके-प्रायः यह देखने में आता है कि अधिकतर लोग अपना फर्ज केवल घर के अन्दर को साफ़ करना ही समझते हैं या घर का कूड़ा-कर्कट बाहर गली में फेंक देते हैं। इससे केवल गली में ही गन्दगी नहीं फैलती बल्कि पूरा वातावरण ही दूषित हो जाता है। इसलिए घर के बाहर गली को घर का भाग समझ कर ही सफ़ाई करनी चाहिए।

3. घर के आस-पास पड़े खाली स्थान साफ़ करके-कई बार घरों के आसपास खाली स्थान पड़े होते हैं, जिसमें घास-फूस पैदा हो जाता है, गड्ढों में पानी भर जाता है, झाड़ियां पैदा हो जाती हैं, अन्धेरे में कई लोग जंगल पानी जाने लगते हैं। इस तरह गन्दगी बढ़ती जाती है और यह गन्दगी कई तरह की बीमारियों का कारण बनती है। ऐसे इलाके में बने खूबसूरत घर भी गन्दे लगते हैं। इसलिए ऐसे इलाके के निवासियों को खाली पड़े स्थान की सफ़ाई रखने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे स्थान में घास-फूस काट कर बच्चों के खेलने के लिए जगह बन सकती है या घास, फूल, पौधे लगा कर इसको खूबसूरत पार्क में परिवर्तित किया जाता है।

4. मुहल्ले के बच्चों को सफ़ाई प्रति चेतन करके-बच्चों को सफ़ाई प्रति चेतन करके बच्चों को घर के आस-पास की सफ़ाई करने के लिए लगाया जा सकता है। यह तर्जुबा कई समाज सेवी जत्थेबंदियां सफलतापूर्वक कर चुकी हैं। बच्चे आदर्शवादी और शक्ति भरपूर होते हैं। बस थोड़ी सी सीध देने और उत्साहित करने से वह घरों के आस-पास की सफ़ाई आसानी से कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मुहल्ला निवासी पैसे इकट्ठे करके भी मज़दूरों से सफ़ाई करवा सकते हैं।
इसलिए उपरोक्त ढंगों को अपना कर घर का आस-पास साफ़-सुथरा रखा जा सकता है जो केवल सुन्दर ही नहीं लगता बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक रहता है।

Home Science Guide for Class 10 PSEB आस-पास की सफ़ाई Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आसपास की सफ़ाई किसे कहते हैं?
उत्तर-
घर के आसपास की सफ़ाई को।

प्रश्न 2.
घरेलू कूड़े में क्या कुछ होता है?
उत्तर-
रसोई की जूठन, फल, सब्जियों के छिलके आदि।

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प्रश्न 3.
पाखानों की उचित सफ़ाई न की जाए तो कौन-से रोग हो सकते हैं?
उत्तर-
टाईफाईड, हैजा।

प्रश्न 4.
नालियों को साफ रखने के लिए यह कैसी होनी चाहिए?
उत्तर-
पक्की होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
कूड़े से खाद कितने दिनों में तैयार हो सकती है?
उत्तर-
4-6 महीनों में।

प्रश्न 6.
कूड़े के निपटारे के ढंग बताओ।
उत्तर-
भट्ठी में जलाना, गड्ढों को भरना, खाद बनाना, छांटना।

प्रश्न 7.
री साईकल करने वाले कूड़े में क्या कुछ आता है?
उत्तर-
टूटा कांच, चीनी का सामान, प्लास्टिक का सामान, रद्दी कागज़ आदि।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

प्रश्न 8.
खाद किस प्रकार के कूड़े से बनाई जा सकती है?
उत्तर-
वनस्पति कूड़े-कर्कट से।

प्रश्न 9.
कूड़े के निपटारे के दो ढंग बताओ।
उत्तर-
भट्ठी में जलाना, गड्डों को भरना।

प्रश्न 10.
घरेलू कूड़े में क्या कुछ होता है?
उत्तर-
देखें उपरोक्त प्रश्नों में।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कूड़े-कर्कट को ठिकाने लगाने से पहले छांटना क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
कूड़े-कर्कट को ठिकाने लगाने से पहले छांटना इसलिये ज़रूरी है कि कूड़े के बीच चीज़ों को प्रयोग में लाया जा सके। जैसे-

  1. कूड़े में से कोयले, अर्द्ध जले कोयले, पत्थर-गीटे अलग करके प्रयोग में लाये जा सकते हैं।
  2. सब्जियों के छिलकों से खाद बनाई जा सकती है। कुछ चीजें कबाड़ियों को बेचकर पैसे कमाए जा सकते हैं।

प्रश्न 2.
कूड़े का अन्तिम निपटारा खाद बनाकर कैसे किया जाता है?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 3.
कूड़े का अन्तिम निपटारा कैसे किया जाता है? विस्तार में बताएं।
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 4.
आस-पास की सफ़ाई क्यों ज़रूरी है?
उत्तर-
स्वयं उत्तर दें।

प्रश्न 5.
घर की नालियों की सफाई कैसे की जाती है?
उत्तर-
नालियों को साफ़-सुथरा रखने के लिए इनका पक्का होना आवश्यक है और इनकी ढलान इस तरह होनी चाहिए कि पानी आसानी से निकल सके। इनमें समय-समय पर कीटनाशक दवाइयां डालते रहना चाहिए ताकि मक्खी मच्छर पैदा न हों।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आस-पास की सफ़ाई का हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखने के लिए घर की सफ़ाई के साथ-साथ घर के आस-पास की सफ़ाई करना भी बहुत आवश्यक है। यदि घर का इर्द-गिर्द साफ़ नहीं होगा तो गन्दी हवा मक्खी मच्छर घर के अन्दर आएंगे। घर के निकट ईंटें, लकड़ियां, उपले या कूड़े के ढेर नहीं होने चाहिएं। इन पर मक्खी मच्छर तो पैदा होते ही हैं। इसके साथ-साथ और अन्य खतरनाक जीव भी इसमें जाकर अपना स्थान बना लेते हैं। कई बार यह जानलेवा भी साबित हो जाते हैं। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि घर के इर्द-गिर्द कूड़े कर्कट के ढेर न हों, पानी खड़ा न हो और घास-फूस न उगा हो ताकि घर का आस-पास साफ़-सुथरा रह सके।

प्रश्न 2.
आस-पास की गन्दगी का मानवीय स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अथवा
गन्दे वातावरण में रहने का क्या नुकसान है?
उत्तर-
आस-पास की गन्दगी का हमारे स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। गन्दे वातावरण में रहने के निम्नलिखित नुकसान हैं —

  1. कीटाणुओं का पैदा होना-घर के इर्द-गिर्द गन्दगी होने के कारण कई बीमारियों के कीटाणु पैदा हो जाते हैं जिनसे कई बीमारियां जैसे तपेदिक, हैजा, टाइफाइड जैसे हानिकारक कीटाणु हमारे स्वास्थ्य को खराब कर सकते हैं।
  2. बदबू-गन्दगी और कूड़े-कर्कट के ढेरों में कुछ समय के पश्चात् बदबू आनी शुरू हो जाती है जो इर्द-गिर्द की वायु को दूषित करती हुई कई बीमारियों का कारण बनती है।
  3. कीड़े-मकौड़ों की उत्पत्ति-कूड़े-कर्कट में मक्खियां और मच्छर अनेकों प्रकार के कीड़े-मकौड़े पैदा होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य पर काफ़ी प्रभाव डालते हैं। मच्छर से मलेरिया फैल सकता है और मक्खियां भी हैजा, टाइफाइड आदि रोगों को फैलाती हैं।
  4. पानी का प्रदूषण-लगातार पड़ी रहने वाली गन्दगी के ढेर वर्षा के पानी में घुलकर धरती निचले पानी को भी दूषित करती है जिसका मानवीय स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
  5. धूल और मिट्टी-यदि हम घर का इर्द-गिर्द साफ़ नहीं करते तो धूल और मिट्टी से घर भर जाता है जिससे फेफड़ों का रोग, दमा और कई प्रकार के चमड़ी के रोग भी हो सकते हैं।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

प्रश्न 3.
घर के आस-पास को साफ़ रखने के लिए कूड़े का अन्तिम निपटारा किस तरह करना चाहिए?
अथवा
कूड़े-कर्कट को ठिकाने लगाने की विधियों का वर्णन करें।
उत्तर-
आस-पास को साफ़ रखने के लिए कूड़े-कर्कट को इस तरह ठिकाने लगाना चाहिए जिससे रोज़ाना लोगों को कोई परेशानी पैदा न हो। गाँवों में रहने वाले लोग जानते हैं कि पशुओं के गोबर और कूड़े को गड्ढों में भरकर खाद बनाई जाती है जो बाद में फ़सलों के काम आती है। इस तरह कूड़े-कर्कट को सही ढंग से ठिकाने लगाया जा सकता है। कूड़े-कर्कट को निम्नलिखित ढंगों से ठिकाने लगाया जा सकता है —

  1. भट्ठी में जलाना-यह ढंग सबसे अच्छा समझा जाता है। परन्तु कूड़े-कर्कट को एक विशेष भट्ठी में ही जलाया जाता है शेष केवल राख ही बचती है। कूड़े को जलाने के लिए पक्की भट्ठी बनाई जाती है। इसके निकट एक चबूतरा होना चाहिए जहां कि शहर से लाया गया कूड़ा-कर्कट रखा जा सके। भट्ठी में एक रास्ते द्वारा थोड़ा-थोड़ा करके कूड़ा भट्ठी में फेंका जाता है। इस तरह करने से धुआं चिमनी द्वारा बाहर निकल जाता है।
  2. निम्न स्थान को भरना-प्रत्येक शहर में या गांव में नीचे इलाके होते हैं जिनमें कूड़ा-कर्कट भरकर ठिकाने लगाया जाता है। कूड़ा-कर्कट कुछ देर पड़ा रहता है। धीरे-धीरे यह कूड़ा-कर्कट गल-सड़ कर दब जाता है फिर इस पर और कूड़ा-कर्कट फेंक दिया जाता है। इस तरह धीरे-धीरे सड़क आदि के बराबर आ जाता है फिर उस पर थोड़ी मिट्टी डालकर समतल कर दिया जाता है। इस तरह करने से स्थान साफ़सुथरा हो जाता है।
  3. खाद बनानी-कूड़े-कर्कट को खाद में परिवर्तित करना सदियों पुराना ढंग है। इस ढंग से मानवीय और पशुओं का मल-मूत्र और घर का अन्य कूड़ा-कर्कट एक गहरे गड्ढे में दबाकर खाद बनाई जाती है जो फ़सलों के प्रयोग में लाई जाती है। यह कूड़ाकर्कट सम्भालने का सबसे बढ़िया ढंग है।
  4. छांटना-कूड़े-कर्कट को सम्भालने से पहले उसको तीन भागों में बांट लिया जाता है
    1. कोयले, अर्द्ध जले कोयले, पत्थर गीटे, बट्टे आदि अलग करके ईंटें बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
    2. वनस्पति कूड़ा-कर्कट जैसे फल सब्जियों के छिलके रसोई की जूठन आदि को अलग कर खाद बनाई जा सकती है।
    3. टूटे हुए कांच, चीनी, मिट्टी के बर्तन, प्लास्टिक के सामान को दोबारा प्रयोग कर लिया जा सकता है।
      उपरोक्त ढंगों को प्रयोग करने से कूड़े-कर्कट को सम्भाल लिया जाता है और कूड़े-कर्कट का लाभदायक प्रयोग भी किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
कूड़े को भट्ठी में किस प्रकार जलाया जाता है?
उत्तर-
देखें उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर में।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

वस्तनिष्ठ प्रश्न

I. रिक्त स्थान भरें

  1. घर के कूड़े-कर्कट को ……………. में नहीं फेंकना चाहिए।
  2. कूड़े से खाद ………………. महीनों में बन जाती है।
  3. खाद ………………. कूड़े-कर्कट से बनती है।

उत्तर-

  1. गली,
  2. 4 से 6,
  3. वनस्पति।

II. ठीक/ग़लत बताएं

  1. वातावरण की सफ़ाई के लिए कूड़े-कर्कट का निपटारा करना आवश्यक है।
  2. कूड़े-कर्कट से खुले खड्डे भरने से मानवीय स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता
  3. घरेलू कूड़े का भाग है-रसोई की जूठन, फ़ल तथा सब्जियों के छिलके।

उत्तर-

  1. ठीक,
  2. ग़लत,
  3. ठीक।

III. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में ठीक है
(क) कूड़े-कर्कट को खाद में बदल लेना लाभदायक है।
(ख) कूड़ा-कर्कट को खुले खड्डे में न भरें।
(ग) कूड़े के निपटारे के लिए भट्ठी में जलाना भी एक ढंग है।
(घ) सभी ठीक।
उत्तर-
(घ) सभी ठीक।

PSEB 10th Class Home Science Solutions Chapter 3 आस-पास की सफ़ाई

प्रश्न 2.
गंदे वातावरण से निम्नलिखित हानियां हैं
(क) कीटाणु पैदा होते हैं
(ख) बदबू पैदा होती है
(ग) पानी प्रदूषित होता है
(घ) सभी ठीक।
उत्तर-
(घ) सभी ठीक।

आस-पास की सफ़ाई 10th Class Home Science Notes

  1. घर के इर्द-गिर्द की सफाई को आस-पास की सफ़ाई कहा जाता है।
  2. घर की नालियों की सफाई के बिना घर साफ़ नहीं रह सकता।
  3. घर के आस-पास की सफ़ाई हमें बीसों बीमारियों से बचाती है।
  4. घर के कूड़े-कर्कट को गली में नहीं फेंकना चाहिए।
  5. कूड़े-कर्कट को सही ढंग से ही निपटाना चाहिए।
  6. घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए।
  7. घर के आस-पास की सफ़ाई से परिवार का सामाजिक स्तर बढ़ता है।

परिवार के सदस्यों को खुश और तन्दुरुस्त रखने के लिए सफ़ाई रखनी आवश्यक है। घर जितना चाहे बढ़िया बना हो परन्तु यदि उसमें सफाई न हो तो अच्छा नहीं लगता। घर की गन्दगी बीमारियों को बुलावा देती है। परन्तु घर की सफ़ाई भी तभी रह सकती है यदि आस-पास भी साफ़ हो। इसलिए घर की सफ़ाई के साथ-साथ आस-पास की सफ़ाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

Punjab State Board PSEB 11th Class Agriculture Book Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Agriculture Chapter 8 मुर्गी पालन

PSEB 11th Class Agriculture Guide मुर्गी पालन Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
मुर्गी कितने दिनों बाद अण्डे देना शुरू करती है?
उत्तर-
मुर्गी 160 दिनों पश्चात् अण्डे देना शुरू करती है।

प्रश्न 2.
मीट देने वाली मुर्गियों की दो किस्मों के नाम बताओ।
उत्तर-
आई० बी० एल० 80 ब्रायलर तथा ह्वाइट प्लाईमाऊथ राक।

प्रश्न 3.
मुर्गी के एक अण्डे का भार लगभग कितना होता है?
उत्तर-
एक अण्डे का भार लगभग 55 ग्राम होता है।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 4.
सफ़ेद रंग के अण्डे कौन सी मुर्गी देती है?
उत्तर-
ह्वाइट लैगहान।

प्रश्न 5.
रैड आईलैंड रैड मुर्गी साल में कितने अण्डे देती है?
उत्तर-
यह वर्ष में लगभग 180 अण्डे देती है।

प्रश्न 6.
बीटों से कौन सी गैस बनती है ?
उत्तर-
अमोनिया।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 7.
चूजों को गर्मी देने वाले यंत्र का क्या नाम है ?
उत्तर-
बरूडर।

प्रश्न 8.
मुर्गियों के शैड की छत कितनी ऊंची होनी चाहिए ?
उत्तर-
10 फुट।

प्रश्न 9.
दो मुर्गियों के लिए पिंजरे का क्या आकार होना चाहिए ?
उत्तर-
15 इंच लम्बा तथा 12 इंच चौड़ा।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 10.
सर्दियों में मुर्गियां खुराक अधिक खाती हैं या कम।
उत्तर-
सर्दियों में मुर्गियां अधिक खुराक खाती हैं।

(ख) एक-दो वाक्यों में उत्तर दो।

प्रश्न 1.
पोल्ट्री शब्द से क्या भाव है?
उत्तर-
पोल्ट्री शब्द का अर्थ है प्रत्येक प्रकार के पक्षियों को पालना जिनसे मनुष्य की आर्थिक आवश्यकताएं पूरी हो सकें। इसमें मुर्गियां, बतखें, बटेर, टर्की, कबूतर, शुतुरमुर्ग, हंस, गिन्नी, फाऊल आदि शामिल है।

प्रश्न 2.
देसी नस्ल की मुर्गियों का वर्णन करो।
उत्तर-
इसकी किस्में हैं-पंजाब लेयर-1 तथा पंजाब लेयर-2.

  • सतलुज लेयर-यह वर्ष में 255-265 अण्डे देती हैं। एक अण्डे का औसत भार 55 ग्राम होता है।
  • आई०बी०एल० 80 ब्रायलर-इससे मीट प्राप्त किया जाता है। इसका औसत भार 1350-1450 ग्राम लगभग 6 सप्ताह में हो जाता है।

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प्रश्न 3.
वाइट लैग हार्न तथा रैड आइलैंड रेड मुर्गियों की तुलना करो।
उत्तर-
वाइट लैग हार्न मुर्गियां –

  1. इसके अण्डे सफ़ेद रंग के होते हैं।
  2. वर्ष में 220-250 के लगभग अण्डे देती हैं।
  3. थोड़ी खुराक खाती हैं।
  4. इनका मास स्वादिष्ट नहीं होता।
    यह अण्डे वाली नसल है।

रैड आइलैड रेड मुर्गियां –

  1. इसके अण्डे खाकी रंग के होते हैं।
  2. वर्ष में 180 अण्डे देती हैं।
  3. अधिक खुराक खाती हैं।
  4. इनका प्रयोग मांस के लिये होता है।

प्रश्न 4.
मुर्गियों के विकास के लिए किन भोज्य तत्त्वों की आवश्यकता होती है?
उत्तर-
मुर्गियों की वृद्धि के लिये लगभग 40 पौष्टिक तत्त्वों की आवश्यकता होती है। खुराक में पाए जाने वाले पदार्थों को 6 भागों में बांट सकते हैं। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, चर्बी, धातुएं, विटामिन तथा पानी।

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प्रश्न 5.
मुर्गियों के शैड के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
मुर्गियों की शैड ऊंचे स्थान पर बनानी चाहिए तथा सड़क से जुड़ी होनी चाहिए ताकि खुराक, अण्डों आदि की ढुलाई इत्यादि सुविधा से हो सके। वर्षा अथवा बाढ़ का पानी शैड के निकट नहीं खड़ा होने देना चाहिए।

प्रश्न 6.
गर्मियों में मुर्गियों की सम्भाल कैसे की जाती है ?
उत्तर-
पक्षियों में पसीने के लिये मुसाम (रोमछिद्र) नहीं होते तथा पंख अधिक होते हैं इसलिये इनके लिए गर्मी को सहन करना कठिन होता है। शैड के इर्द-गिर्द घास इत्यादि, शहतूत के वृक्ष आदि लगाने चाहिए। छतों के ऊपर फव्वारे लगाने चाहिएं इससे 5-6°C तापमान कम किया जा सकता है। चारों ओर की दीवारें एक-डेढ़ फुट से अधिक ऊंची नहीं होनी चाहिये तथा शेष स्थान पर जालियां लगवानी चाहिएं। छत पर सरकण्डे की परत बिछा दो तथा अधिक गर्मी में मुर्गियों पर फव्वारे से पानी छिड़का देना चाहिए। पीने वाले पानी का प्रबन्ध ठीक होना चाहिये। पानी के बर्तन दोगुने कर देने चाहिए तथा पानी शीघ्र बदलते रहना चाहिए।

प्रश्न 7.
मुर्गियों के लिटर की सम्भाल क्यों जरूरी है ? –
उत्तर-
लिटर सदैव सूखा होना चाहिये। गीले लिटर से बीमारियां लग सकती हैं। इससे शैड में अमोनिया गैस बनती है जो पक्षियों तथा मज़दूरों दोनों के लिए कठिनाई पैदा करती है।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 8.
मीट प्राप्त करने के लिये मुर्गी की कौन सी नस्लें पाली जाती हैं ?
उत्तर-
मांस प्राप्त करने के लिये आई० बी० एल० 80 ब्रायलर, रैड आइलैंड रेड तथा ह्वाइट प्लाईमाऊथ रॉक नस्लें पाली जाती हैं।

प्रश्न 9.
आई०बी०एल० 80 नस्ल की क्या विशेषताएं हैं ?
उत्तर-
यह मांस के लिए प्रयोग होने वाली नस्ल है। इसका औसत भार 1350-1450 ग्राम लगभग 6 सप्ताह में हो जाता है।

प्रश्न 10.
मुर्गियों की खुराक बनाने में कौन-कौन सी चीज़ों का उपयोग होता
उत्तर-
मुर्गियों की खुराक में मक्की, चावल का टोटा, मूंगफली की खल, चावल की पालिश, गेहूँ, मछली का चूरा, सोयाबीन की खल, पत्थर तथा साधारण नमक आदि से मुर्गी अपने खुराकी तत्व पूरा करती है। मुर्गी के खुराक में ऐंटीवायोटिक दवाइयां अवश्य शामिल करनी चाहिए।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

(ग) पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर दो-

प्रश्न 1.
मुर्गी की विदेशी नस्लों का वर्णन करो।
उत्तर-

  • वाइट लैगहान-इसके अण्डे सफ़ेद रंग के होते हैं। वर्ष में 220-250 के लगभग अण्डे देती है। इसका मांस स्वादिष्ट नहीं होता है। यह छोटे आकार की होती है तथा कम भोजन खाती है।
  • रेड आइलैण्ड रैड-इसके अण्डे लाल रंग के होते हैं। यह वर्ष में लगभग 180 अण्डे देती है। यह अधिक खुराक खाती है तथा इसे मांस के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • वाइट प्लाइमाऊथ रॉक-यह वर्ष में 140 के लगभग अण्डे देती है। अण्डे का रंग खाकी होता है तथा भार 60 ग्राम से अधिक होता है। इसका प्रयोग मांस के लिए होता है। इसके चूज़े दो मास में एक किलो से अधिक हो जाते हैं। इसके मुर्गों का भार 4 किलो तथा मुर्गियों का भार 3 किलो तक होता है।

प्रश्न 2.
मुर्गियों के लिए ज़रूरी भोज्य तत्त्वों का वर्णन करो।
उत्तर-
मुर्गियों के लिए लगभग 40 से अधिक आहारीय तत्त्वों की आवश्यकता होती है। किसी भी आहारीय तत्त्व की कमी का मुर्गियों के स्वास्थ्य तथा पैदावार पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इन आहारीय तत्त्वों को 6 भागों में बांटा जा सकता है। जैसे कार्बोहाइड्रेटस, प्रोटीन, चर्बी, धातुएं, विटामिन तथा पानी।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 3.
गर्मियों और सर्दियों में मुर्गियों की सम्भाल करने में क्या अंतर है ?
उत्तर-
गर्मियों में सम्भाल-पक्षियों में पसीने के मुसाम नहीं होते तथा पंख अधिक होते हैं। इस कारण वह सर्दी तो सहन कर सकते हैं परन्तु गर्मी सहन करना उनके लिए कठिन होता है। शैड के चारों ओर से गर्मी कम करने के लिए इर्द-गिर्द घास तथा शहतूत इत्यादि के वृक्ष भी लगाने चाहिए। छतों पर फव्वारे लगा कर गर्म तथा शुष्क ऋतु में तापमान को 5-6°C तक कम किया जा सकता है। चारों ओर की दीवारें भूमि से एक-डेढ़ फुट से अधिक ऊंची नहीं होनी चाहिएं तथा शेष स्थान पर जाली लगा देनी चाहिए। छत पर सरकण्डे आदि की मोटी परत बिछा लेनी चाहिए। अधिक गर्मी में मुर्गियों पर स्प्रे पम्प से पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए। पीने वाले पानी का प्रबन्ध ठीक होना चाहिए तथा पानी शीघ्र बदलते रहना चाहिए। खुराक में प्रोटीन, धातुएं तथा विटामिन की मात्रा 20-30% बढ़ा दो।

सर्दियों की सम्भाल-सर्दियों में कई बार तापमान 0°C से भी कम हो जाता है। इसका मुर्गियों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। यदि मुर्गीखाने का तापमान ठीक न हो तो ऐसी अवस्था में सर्दियों की ऋतु में मुर्गी 3 से 5 किलोग्राम दाना अधिक खा जाती है। सर्दी से बचाव के लिए खिड़कियों पर पर्दै लगाने चाहिए। सूख को सप्ताह में दो बार हिलाना चाहिए।

प्रश्न 4.
मुर्गी पालन के लिए प्रशिक्षण विभागों का वर्णन करो।
उत्तर-
मुर्गी पालन का धन्धा शुरू करने के लिए पहले प्रशिक्षण ले लेना चाहिए। इसके लिए जिले में डिप्टी डायरैक्टर पशु-पालन विभाग, गुरु अंगद देव वैटनरी तथा एनीमल साइंसज़ विश्वविद्यालय लुधियाना या कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क करना चाहिए।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 5.
चूजों की सम्भाल पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
चूजों को किसी विश्वसनीय तथा मान्यता प्राप्त हैचरी से खरीदना चाहिए तथा ब्रडर में रखना चाहिए। ब्रूडर चूजों को गर्मी देने वाला यंत्र है। चूजों को पहले 6-8 सप्ताह की आयु तक 24 घण्टे प्रकाश तथा अच्छी खुराक जो कि संतुलित हो, देनी पड़ती है।

Agriculture Guide for Class 11 PSEB मुर्गी पालन Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सतलुज लेअर से एक वर्ष में कितने अण्डे प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
255-265 अण्डे।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 2.
आई० बी० एल० 80 ब्रायलरों का 6 सप्ताह का औसत भार कितना होता है?
उत्तर-
1230-1450 ग्राम।

प्रश्न 3.
मुर्गी कितने दिनों बाद अण्डा देना शुरू कर देती है ?
उत्तर-
160 दिन।

प्रश्न 4.
सतलुज लेअर के अण्डे का भार होता है।
उत्तर-
55 ग्राम लगभग।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 5.
सतलुज लेयर मुर्गियों की किस्मों के नाम लिखो।
उत्तर-
पंजाब लेअर-1 तथा पंजाब लेअर-2।।

प्रश्न 6.
विश्व भर में पाई जाने वाली मुर्गियों की तीन जातियों के नाम बताओ।
उत्तर-
वाइट लैगहार्न, रेड आईलैंड रेड तथा वाइट प्लाइमाऊथ राक।

प्रश्न 7.
वाइट लैगहान कितने अण्डे देती है?
उत्तर-
एक वर्ष में 220-250 के लगभग अण्डे देती है।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 8.
रैड आईलैंड रेड के अण्डों का रंग क्या होता है?
उत्तर-
इसके अण्डे खाकी रंग के होते हैं।

प्रश्न 9.
वाइट प्लाईमाउथराक नस्ल कितने अण्डे देती है ?
उत्तर-
यह वर्ष में 140 के लगभग अण्डे देती है।

प्रश्न 10.
मुर्गियों के बढ़ने-फूलने के लिए लगभग कितने भोजन तत्त्वों की आवश्यकता होती है?
उत्तर-
मुर्गियों को लगभग 40 भोजन तत्त्वों की आवश्यकता होती है।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

प्रश्न 11.
भोजन में पाए जाने वाले पदार्थों को कौन-कौन से भागों में बांटा जा सकता है?
उत्तर-
इनको 6 भागों में बांटा जा सकता है-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, चर्बी, धातुएं, विटामिन तथा पानी।

प्रश्न 12.
मुर्गियों की गर्मियों की खुराक में प्रोटीन, धातुएं तथा विटामिन की मात्रा कितनी बढ़ानी चाहिए ?
उत्तर-
20-30% तक।

प्रश्न 13.
गीले लिटर से कौन-सी गैस बनती है?
उत्तर-
इससे अमोनिया गैस बनती है।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मनुष्य अपनी आर्थिक आवश्यकताएं पूरी कर सके इसके लिए कौनकौन से पक्षी पालता है?
उत्तर-
मुर्गियां, टर्की, बत्तखें, हंस, बटेर, गिन्नी, फाल, कबूतर आदि ऐसे पक्षी हैं जो मनुष्य की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पाले जाते हैं।

प्रश्न 2.
पक्षियों के लिए गर्मी सहन करना क्यों कठिन है ?
उत्तर-
पक्षियों में पसीने के मुसाम नहीं होते तथा पंख अधिक होते हैं इसलिए इनके लिए गर्मी सहन करना कठिन होता है।

PSEB 11th Class Agriculture Solutions Chapter 8 मुर्गी पालन

मुर्गी पालन PSEB 11th Class Agriculture Notes

  • ‘पोल्ट्री’ शब्द का अर्थ है ऐसे हर प्रकार के पक्षियों को पालना जो आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हों।
  • सतलुज लेयर, मुर्गियों की एक जाति है जो एक वर्ष में 255-265 अण्डे देती हैं तथा अण्डे का औसत भार 55 ग्राम होता है। मुर्गी 160 दिनों के पश्चात् अण्डे देना शुरू करती है।
  • आई० बी० एल० 80 ब्रायलर मीट पैदा करने वाली मुर्गियों की एक जाति है।। इसका 6 सप्ताह का औसत भार 1250-1350 ग्राम होता है।
  • ह्वाइट लैगहान विदेशी नसल है, जो वर्ष में 220-250 अण्डे देती है।
  • रैड आईलैंड रैड खाकी रंग के लगभग वार्षिक 180 अण्डे देती है।
  • ह्वाइट प्लाईमाऊथ राक वार्षिक 140 के लगभग अण्डे देती है तथा इसके चूजे दो माह में एक किलो भार के हो जाते हैं।
  • मुर्गियों को अपने भोजन में 40 से अधिक तत्त्वों की आवश्यकता होती है। इनको 6 भागों में बांटा जा सकता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, चर्बी, धातुएं, विटामिन तथा पानी।
  • चूजों को गर्मी देने वाला यंत्र बरूडर होता है।
  • एक मुर्गी को 2 वर्ग फुट स्थान चाहिए।
  • पक्षियों के शरीर में पसीने के लिए रोमछिद्र नहीं होते।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

Punjab State Board PSEB 11th Class Geography Book Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Geography Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

PSEB 11th Class Geography Guide पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य Textbook Questions and Answers

1. प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न (क)
विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल कौन-सा है ?
उत्तर-
सहारा।

प्रश्न (ख)
मरुस्थल कितने प्रकार के होते हैं ? उनके नाम लिखें।
उत्तर-
पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य Solutions

  1. रेतीला मरुस्थल-सहारा में अरग।
  2. पथरीला मरुस्थल-अल्जीरिया में रैग।
  3. चट्टानी मरुस्थल-सहारा में हमादा।

प्रश्न (ग)
अरग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
रेतीले मरुस्थल को।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

प्रश्न (घ)
क्या रेत के टीले सदा स्थिर रहते हैं ?
उत्तर-
नहीं, ये खिसकते रहते हैं।

प्रश्न (ङ)
लोइस मैदानों की मिट्टी का रंग कैसा होता है और उनमें किन फसलों की खेती की जाती है ?
उत्तर-
पीला रंग और गेहूँ की खेती।

प्रश्न (च)
हवा और पवन में क्या अंतर है ?
उत्तर-
वायुमंडल के दबाव कारण हवा चलती है, परंतु गतिशील हवा को पवन कहते हैं।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

प्रश्न (छ)
मुसामदार चट्टानों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
जिनमें पानी निचली सतह पर चला जाता है।

प्रश्न (ज)
तटवर्ती रेत के टीले कैसे बनते हैं ?
उत्तर-
जब हवा रेत को जमा करती है।

2. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट करें-

(i) बरखान — लोइस
(ii) जालीदार पत्थर — डरीकंटर
(iii) ज़िऊजन — यारडांग
(iv) नखलिस्तान — इनसलबर्ग
(v) रेतीले मरुस्थल — चट्टानी मरुस्थल।
उत्तर-
(i) बरखान (Barkhan)- बरखान अर्ध-चंद्र के आकार के टीले हैं। इनका आकार धनुष के समान होता है। इनके सिरों को हॉर्न कहा जाता है।
लोइस (Loess) – बारीक मिट्टी के निक्षेप को लोइस कहते हैं। चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में पीली मिट्टी के निक्षेप को लोइस कहते हैं।

(ii) जालीदार पत्थर (Stone Lattice)-
जब नर्म और कठोर चट्टाने मिलकर बनती हैं, तब नर्म भाग रगड़े जाने से समाप्त हो जाते हैं, परंतु कठोर भाग जालीनुमा आकार में खड़े रहते हैं, जिन्हें जालीदार पत्थर कहा जाता है।

डरीकंटर (Driekanter)-
जब चट्टानों के खुरचने की क्रिया लगातार एक ही दिशा में होती रहती है, तो चट्टानें एक त्रिकोण के समान बन जाती हैं, जिन्हें डरीकंटर कहा जाता है।

(iii) ज़िऊजन (Zeugen)-

  1. ढक्कनदार दवात के आकार के स्थल रूपों को ज़िऊजन कहते हैं।
  2. इनका ऊपरी भाग कठोर होता है परंतु निचला भाग नर्म होने के कारण अधिक चौड़ा होता है।

यारडंग (Yardang)-

  1. नुकीली चट्टानों को यारडंग कहते हैं।
  2. इसमें नर्म और कठोर चट्टानें लंब रूप में होती हैं।

(iv) नखलिस्तान (Oasis)-
अपवाहन (Deflation) की क्रिया के दौरान चट्टानों की ऊपरी परतें हटती जाती हैं और सतह के नीचे वाला पानी चट्टानों के ऊपर आ जाता है, जिसके इर्द-गिर्द के क्षेत्र को नखलिस्तान कहते हैं।

इनसलबर्ग (Insellberg)-
पवनों के अपरदन से कई क्षेत्रों में कठोर चट्टानों की छोटी-छोटी पहाड़ियाँ बन जाती हैं। ये ग्रेनाइट जैसी कठोर चट्टानों से बनती हैं। इन्हें इनसलबर्ग कहते हैं।

(v) रेतीले मरुस्थल (Sandy Deserts)-
ऐसे मरुस्थल, जिनमें अधिकतर रेत ही पाई जाती है। यहाँ से रेत के कण बड़ी आसानी से पवन अपने साथ उड़ाकर ले जाती है। जैसे-सहारा।।

चट्टानी मरुस्थल (Rocky Deserts)-
ऐसे बंजर क्षेत्र, जिनकी ऊपरी नर्म परतें घिसकर बिल्कुल समाप्त हो जाती हैं और केवल चट्टानी टीले या बंजर क्षेत्र ही रह जाते हैं। जैसे-हमादा।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

3. निम्नलिखित के उत्तर सौ शब्दों में दीजिए-

प्रश्न (क)
पवनें मरुस्थल में अनावृत्तिकरण का साधन है। व्याख्या करें।
उत्तर-
पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य (Denudation Works of Winds)-
वायु और पवन-हवा वायुमण्डल के दबाव से चलती है और इस चलती या गतिशील हवा को पवन (Wind) कहते हैं। दबाव में जब अंतर पैदा होता है, तो पवनें चलती हैं। ये अधिक दबाव (High Pressure) से कम दबाव (Low Pressure) वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं। जिस दिशा से पवन उत्पन्न होती है, उसे पवन की दिशा कहा जाता है, भाव उस दिशा को पवन का नाम दिया जाता है।

पवनों की अनावृत्तिकरण क्रिया-यह केवल कम वर्षा, कम वनस्पति, दूसरे शब्दों में शुष्क या मरुस्थलीय क्षेत्रों में ही अधिक कार्य करती है। मरुस्थलीय क्षेत्र ऐसे क्षेत्र होते हैं, जिनमें वर्षा 25 सेंटीमीटर से भी कम और वहाँ अत्यधिक तापमान होता है। इस प्रकार की जलवायु के कारण ऐसे क्षेत्रों में किसी प्रकार की वनस्पति नहीं होती और पवनों के चलने में भी किसी प्रकार की रुकावट नहीं होती और यह अनावृत्तिकरण का कार्य करती रहती हैं। विश्व के अधिकतर मरुस्थल महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में मिलते हैं। 20° से 30° उत्तरी अक्षांशों के बीच पंजाब का दक्षिण-पश्चिमी (South-West) भाग अर्द्धशुष्क (Semiarid) भाग है, जो वास्तव में थार मरुस्थल में ही मिल जाता है। पवनें निम्नलिखित कारणों के कारण ही मरुस्थल में अनावृत्तिकरण की क्रिया अधिक करती हैं-

1. भौतिक मौसमीकरण-मरुस्थल नमी-युक्त क्षेत्रों से बिल्कुल भिन्न होते हैं। नमीयुक्त क्षेत्रों में रासायनिक मौसमीकरण आम है, परंतु शुष्क क्षेत्रों में भौतिक मौसमीकरण ही हो सकता है। नमक निकालना (Salt wedging) इसका ही उदाहरण है।

2. वर्षा की कमी-मरुस्थलीय इलाकों में मिट्टी और वर्षा की कमी होने के कारण वनस्पति भी कम ही होती है, इसलिए पवनें अपना काम कर सकती हैं।

3. गैर मुसामदार चट्टानें-मरुस्थलों का अधिकतर क्षेत्र गैर मुसामदार (Impermeable) होता है, जिसके कारण धरती की निचली सतह पर कोई कमी नहीं होती है।

4. रेतीले मरुस्थल-जो मरुस्थल अधिक रेतीले होते हैं, वे हवा या वर्षा के कारण और अधिक फैलते जाते हैं। इनका आकार (Size) बढ़ता जाता है।

5. अल्पकालिक नदियाँ–अधिकतर नदियाँ मौसमी या अल्पकालिक (Ephemeral) होती हैं, जोकि केवल वर्षा के समय ही थोड़े समय के लिए चलती हैं और वर्षा के एकदम बाद समाप्त हो जाती हैं।

इसलिए हम कह सकते हैं कि मरुस्थलीय क्षेत्रों में वर्षा, वनस्पति आदि कम होने के कारण पवनें अधिकतर काम करती हैं। यहाँ केवल झाड़ीदार घास या काँटेदार पौधे ही कहीं-कहीं मिलते हैं।

प्रश्न (ख)
पवनें अपघर्षण की क्रिया के दौरान कौन-कौन-सी भू-आकृतियाँ बनाती हैं ? व्याख्या करें।
उत्तर-
पवनों (हवा) का कार्य (Work of Winds)-
मरुस्थल और शुष्क प्रदेशों में वनस्पति और नमी की कमी के कारण हवा अनावरण का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। हवा के कार्य यांत्रिक (Mechanical) होते हैं। हवा भी अन्य साधनों के समान अपरदन, ढुलाई और निक्षेप का काम करती है।

अपरदन (Erosion)-

  1. हवा का वेग (Wind Velocity) तेज़ वेग वाली पवनें अधिक मात्रा में अपरदन करती हैं। तेज़ हवा में रेत के कणों की अधिक मात्रा होती है और अधिक कटाव होता है। तेज़ हवा शक्तिशाली होती है और अपरदन अधिक करती है।
  2. रेत के कणों का आकार (Size of Sand Particles)–धरातल के नज़दीक 2 मीटर से 6 मीटर की ऊँचाई तक रेत के कणों की अधिक मात्रा के कारण अधिक कटाव होता है। अधिक ऊँचाई और रेत के कणों की कमी के कारण कम कटाव होता है।
  3. चट्टानों की रचना (Nature of Rocks)—कठोर चट्टानों पर अपरदन कम होता है।
  4. जलवायु (Climate)-शुष्क जलवायु में मौसमीकरण (Weathering) की क्रिया के कारण अधिक कटाव होता है।

कटाव या अपरदन के रूप (Types of Erosion)-

  1. नीचे का कटाव (Under cutting)
  2. नालीदार कटाव (Gully Erosion)
  3. खुरचना (Scratching)
  4. चमकाना (Polishing)

अपरदन (Erosion)-हवा द्वारा कटाव तीन प्रकार से होता है-

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य 1

1. अपवाहन (Deflation)-हवा द्वारा रेत के सूक्ष्म और शुष्क कणों को ऊपर उठाने की क्रिया को अपवाहन कहते हैं। (Deflation is the complete blowing away of fine dust.) हवा रेत और बारीक मिट्टी के कणों को हज़ारों किलोमीटर दूर तक ले जाती है। इसमें मिट्टी का कटाव होता है और खड्डे बनते हैं।

खड्डों (Depressions) का बनना-हवा जिस स्थान से रेत उड़ाकर ले जाती है, उस स्थान पर कई बड़े-बड़े खड्डे बन जाते हैं। इन खड्डों में भूमिगत पानी आकर नखलिस्तान बना देता है, जिस प्रकार मिस्र का कतारा खड्डा समुद्र तल से 140 मीटर गहरा है।

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2. टूट-फूट (Attrition)—हवा के धूल-कण एक-दूसरे से टकराकर चूरा-चूरा हो जाते हैं। इस क्रिया को टूट फूट कहते हैं।

3. अपघर्षण (Abrasion)-हवा में रेत के कण हवा के अपरदन के उपकरण (Tools) होते हैं। तेज़ चाल वाली हवा धूल-कणों को शक्ति के साथ चट्टानों से टकराती है। ये कण एक रेगमार (Sand Paper) की तरह कटाव करते हैं। इस घर्षण की क्रिया से नीचे लिखे भू-आकार बनते हैं, जिनका रूप अलग-अलग होता है-

(i) छत्रक कुकुरमुत्ता चट्टान (Mushroom Rocks)-चट्टानों के निचले भाग में चारों तरफ से नीचे का कटाव (Under Cutting) होता है। इस कटाव से एक पतले से आधार-स्तंभ (Pillar) के ऊपर एक छाते के आकार की कठोर चट्टान खड़ी रहती है। चट्टानों के नीचे एक गुफ़ा बन जाती है। इसे छत्र-आकारी (Mushroom) या गारा (Gara) कहते हैं। इन चट्टानों का आकार खंभ के समान होता है। इसलिए इन्हें खुंभ-आकारी चट्टान भी कहते हैं।

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(ii) ज़िऊजन (Zeugen)-ढक्कनदार दवात के आकार के स्थल रूपों को ज़िऊजन कहते हैं। ऊपरी भाग कठोर और कम चौड़ा होता है, पर निचला भाग नरम और अधिक कटाव के कारण अधिक चौड़ा होता है। ज़िऊजन तब बनते हैं, जब कठोर और नरम चट्टानें एक-दूसरे के समानांतर (Horizontal) बिछी होती हैं। कठोर चट्टानी भाग कोमल चट्टानों पर एक टोपी का काम करता है।

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(iii) यारडांग (Yardang) हवा के लगातार एक ही दिशा में कटाव के कारण नुकीली चट्टानों का निर्माण होता है। इन्हें यारडांग कहते हैं। ये लगभग 15 मीटर ऊँची और पसलियों (Ribs) के समान तेज़ ढलान वाली होती हैं। ये भूआकार कठोर और नरम खड़ी चट्टानों (Vertical Rocks) के कारण बनते हैं।

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(iv) पुल और खिड़की (Bridge and Window)-लंबे समय तक कटाव के कारण चट्टानों के बीच बडे-बडे छेद बन जाते हैं। चट्टानों के आर-पार एक महराब (Arch) के आकार का निर्माण होता है, जिन्हें पवन खिड़की या पुल कहते हैं, जैसे-यू०एस०ए० में Hope Window.

(v) इनसलबर्ग (Insellberg)-कठोर चट्टानों के ऊँचे टीलों को इनसलबर्ग कहते हैं। चारों तरफ से कटाव के कारण ये तिरछी और तेज़ ढलान वाले गुबंद आकार के होते हैं। ये ग्रेनाइट (Granite) और जनीस (Geniss)

जैसी कठोर चट्टानों से बने होते हैं। ये रेत के समूह में पहाड़ी द्वीप के समान दिखाई देते हैं। भारत में रायपुर के निकट कूपघाट में ऐसे टीले मिलते हैं।

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प्रश्न (ग)
पवनों की जमा करने की क्रिया का विस्तार सहित वर्णन करें।
उत्तर-
निक्षेप (Deposition)-जब हवा का वेग कम हो जाता है, तो उसे अपना भार कहीं-न-कहीं छोड़ना पड़ता है। इस निक्षेप से रेत के टीले और लोइस प्रदेश बनते हैं।

I. रेत के टीले (Sand Dunes)-जब रेत के मोटे कण टीलों के रूप में जमा हो जाते हैं, तो उन्हें रेत के टीले कहते हैं। (Sand Dunes are hills on wind blown Sand.) इनके बनने के नीचे लिखे क्षेत्र हैं-

  1. रेतीले मरुस्थलों में
  2. रेतीले समुद्री तटों पर
  3. झीलों के तट पर
  4. नदियों के तट पर।

रेत के टीलों के लिए कुछ ज़रूरी शर्ते (Essential Conditions) होती हैं-

  1. रेत की अधिक मात्रा
  2. तेज़ हवा
  3. हवा के मार्ग में रुकावट
  4. उपयुक्त स्थान।

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रेत की टीलों के प्रकार (Types of Sand Dunes)-

1. लंबाकार रेत के टीले (Longitudinal Dunes)-यह प्रचलित हवा की दिशा के समानांतर बनते हैं। ये रेत की लंबी दीवारें होती हैं। इनका आकार लंबी पहाड़ी के समान होता है। इन्हें सहारा मरुस्थल में सीफ़ (Seif) कहते हैं।

2. रेत के आड़े टीले (Transverse Dunes)-यह प्रचलित हवा की दिशा के समकोण पर आर-पार बनते हैं। यह कम गति वाली हवा के लगातार एक ही दिशा में बहने से बनते हैं। इनका आकार अर्द्ध-चंद्र जैसा होता है।

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3. बरखान (Barkhan)-ये अर्द्ध-चंद्र आकार के टीले होते हैं, जिनमें पवनमुखी ढलान उत्तल (Convex) और पवनाविमुखी ढलान अवतल (Concave) होती है। इनका आकार दरांती (Sickle) अथवा दूज के चाँद (Crescent Moon) अथवा धनुष के समान होता है। ये झुंडों या कतारों में मिलते हैं। इनके सिरों को Horns कहते हैं। इनके सिरों पर कम रुकावट होने के कारण ये आगे को बढ़ते रहते हैं। राजस्थान में शाहगढ़ के । निकट बहुत सारे बरखान मिलते हैं। ये रेत के टीले खिसकते रहते हैं और कई शहर रेत के नीचे दब जाते हैं। राजस्थान का मरुस्थल इसी कारण पंजाब की ओर बढ़ता जा रहा है। सहारा मरुस्थल में ये प्रतिवर्ष 30 मीटर आगे की ओर बढ़ जाते हैं और ऐसे प्रदेशों को अरग (Erg) कहते हैं।

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II. लोइस (Loess)-दूर-दूर के स्थानों से उठाकर लाई हुई बारीक मिट्टी के जमाव को लोइस कहते हैं। यह मिट्टी पानी चूस लेती है। पानी के साथ मिट्टी नीचे परतों में बैठ जाती है। यह बहुत उपजाऊ होती है। मरुस्थलों की सीमा पर रेत के बारीक कणों के निक्षेप से लोइस प्रदेश बनते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण प्रदेश चीन के उत्तरपश्चिमी भाग में पीली मिट्टी का लोइस का प्रदेश है, जो लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस प्रदेश में पीली नदी ‘ह्वांग हो’ गहरी घाटियों का निर्माण करती है।

Geography Guide for Class 11 PSEB पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-4 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
पवन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
गतिशील हवा को पवन कहते हैं।

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प्रश्न 2.
मरुस्थल किस प्रकार के क्षेत्र हैं ?
उत्तर-
जहाँ वार्षिक वर्षा 25 सैंटीमीटर से कम हो।

प्रश्न 3.
किन अक्षांशों में मरुस्थल स्थित हैं ?
उत्तर-
20°–30°.

प्रश्न 4.
पंजाब के किस भाग में अर्द्ध-मरुस्थल हैं ?
उत्तर-
दक्षिण-पश्चिमी भाग।

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प्रश्न 5.
विश्व के सबसे बड़े मरुस्थल का नाम बताएँ।
उत्तर-
अफ्रीका में सहारा।

प्रश्न 6.
विश्व के सबसे शुष्क मरुस्थल का नाम बताएं।
उत्तर-
दक्षिणी अमेरिका में अटाकामा।

प्रश्न 7.
खंड आकार की चट्टानों का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
सहारा में।

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प्रश्न 8.
भारत में यारडांग कहाँ मिलते हैं ?
उत्तर-
जैसलमेर (राजस्थान में)।

प्रश्न 9.
खिड़की और पुल का एक उदाहरण दें।
उत्तर-
यू०एस०ए० में रेनबो ब्रिज।

प्रश्न 10.
लोइस के मैदान कहाँ स्थित हैं ?
उत्तर-
चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में।

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अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 2-3 वाक्यों में दें-

प्रश्न 1.
पवनों का कार्य किन क्षेत्रों में अधिक होता है ?
उत्तर-
मरुस्थलों में।

प्रश्न 2.
अपवाहन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हवा द्वारा रेत के सूक्ष्म कणों को ऊपर उठाने की क्रिया को अपवाहन कहते हैं।

प्रश्न 3.
अपवाहन के दो प्रभाव बताएँ।
उत्तर-
खड्डे बनना और मिट्टी का कटाव।

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प्रश्न 4.
सहघर्षण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
रेत के कणों के आपस में टकराकर चूरा-चूरा होने की क्रिया को सहघर्षण कहते हैं।

प्रश्न 5.
घर्षण क्रिया से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
रेत के कणों द्वारा चट्टानों को रेगमार की तरह घिसाने की क्रिया को घर्षण क्रिया कहते हैं।

प्रश्न 6.
कतारा डुंघान कहाँ है ?
उत्तर-
मिस्र देश में।

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प्रश्न 7.
पवनों के द्वारा अपरदन किन तत्त्वों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-

  1. वायु वेग
  2. रेत कणों का आकार
  3. चट्टानों की रचना
  4. जलवायु।

प्रश्न 8.
छत्रक/खुंभ (कुकुरमुत्ता) चट्टानें क्या होती हैं ?
उत्तर-
चट्टानों के निचले कटाव के कारण, एक पतले स्तंभ के ऊपर छाते के आकार की कठोर चट्टानों को छत्रक/ खुंभ चट्टानें कहते हैं।

प्रश्न 9.
ज़िऊजन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
ढक्कनदार दवात के आकार के स्थल रूपों को ज़िऊजन कहते हैं।

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प्रश्न 10.
यारडांग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नर्म चट्टानों के ऊपर कठोर चट्टानों की नुकीली चट्टानों को यारडांग कहते हैं।

प्रश्न 11.
इनसलबर्ग से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
गुंबद आकार की कठोर चट्टानों के टीलों को इनसलबर्ग कहते हैं।

प्रश्न 12.
बरखान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
ये अर्द्ध-चंद्र के आकार के रेत के टीले हैं, जिनमें पवनमुखी ढलान उत्तल (Convex) होती है और पवनाविमुखी ढलान अवतल (Concave) होती है।

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प्रश्न 13.
लोइस से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
बारीक रेत के कणों के निक्षेप को लोइस प्रदेश कहते हैं, जैसे-चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
हवा का अपरदन किन कारकों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
1. हवा का वेग (Wind Velocity) तेज़ वेग वाली पवनें अधिक मात्रा में अपरदन करती हैं। तेज़ हवा में रेत के कणों की मात्रा अधिक होती है और कटाव भी अधिक होता है। तेज़ हवा अधिक शक्तिशाली होती है और अपरदन भी अधिक करती है।

2. रेत के कणों का आकार (Size of Sand Particles)–धरातल के निकट 2 मीटर से 6 मीटर की ऊँचाई तक रेत के कणों की अधिक मात्रा के कारण कटाव अधिक होता है। अधिक ऊँचाई पर रेत के कणों की कमी के कारण कटाव कम होता है।

3. चट्टानों की रचना (Nature of Rocks) कठोर चट्टानों पर अपरदन कम होता है।

4. जलवायु (Climate)-शुष्क जलवायु में मौसमीकरण (Weathering) की क्रिया के कारण कटाव अधिक होता है।

प्रश्न 2.
बरखान क्या होते हैं ?
उत्तर-
बरखान अर्द्ध-चंद्र के आकार के टीले होते हैं, जिनमें पवनामुखी ढलान उत्तल (Convex) और पवनाविमुखी ढलान अवतल (Concave) होती है। इनका आकार दरांती (Sickle) या दूज के चाँद (Crescent Moon) या धनुष के समान होता है। ये झुंडों या कतारों में मिलते हैं। इनके सिरों को Horns कहते हैं। इनके सिरों पर रुकावट होने के कारण ये आगे को बढ़ते रहते हैं। राजस्थान में शाहगढ़ के निकट बहुत से बरखान मिलते हैं।

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प्रश्न 3.
लोइस से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
लोइस (Loess)-दूर-दूर के स्थानों से उठाकर लाई हुई बारीक मिट्टी के जमाव को लोइस कहते हैं। यह मिट्टी पानी चूस लेती है। पानी के साथ मिट्टी नीचे परतों में बैठ जाती है। यह मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है। मरुस्थलों की सीमा पर रेत के बारीक कणों के निक्षेप से लोइस प्रदेश बनते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण प्रदेश चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में पीली मिट्टी का लोइस प्रदेश है, जो लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस प्रदेश में पीली नदी ‘ह्वांग हो’ गहरी घाटियों का निर्माण करती है।

प्रश्न 4.
हवा और नदी के कार्य की तुलना करें।
उत्तर
हवा का कार्य-

  1. हवा का कार्य मरुस्थल प्रदेशों में महत्त्वपूर्ण होता है।
  2. हवा अपने मलबे को दूर-दूर के प्रदेशों तक उड़ाकर ले जाती है।
  3. हवा का काम हवा की गति पर निर्भर करता है।
  4. हवा का मलबा कम होता है और काम कम गति से होता है।

नदी का कार्य-

  1. नदी का कार्य नमी वाले प्रदेशों में महत्त्वपूर्ण होता है।
  2. नदी का काम अपनी घाटी तक ही सीमित होता है।
  3. नदी का काम धरातल की ढलान पर निर्भर करता है।
  4. नदी का मलबा अधिक होता है और काम तेज़ गति से होता है।

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प्रश्न 5.
रेत के लंबाकार टीलों और आड़े टीलों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
लंबाकार टीले-

  1. ये अर्द्ध-चंद्र के आकार के होते हैं।
  2. ये बहने वाली पवनों की दिशा के समानांतर बनते हैं।
  3. ये 100 मीटर तक ऊँचे होते हैं।
  4. ये तलवार के आकार के होते हैं और इन्हें सीफ भी कहा जाता है।

आड़े टील-

  1. ये रेत की लंबी दीवारों के समान होते हैं।
  2. ये बहने वाली पवनों की दिशा के समकोण पर बनते हैं।
  3. ये 50 मीटर तक ऊँचे होते हैं।
  4. ये लहरों के आकार के समान ऊँचे-नीचे होते हैं।

निबंधात्मक प्रश्न । (Essay Type Questions)

नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर 150-250 शब्दों में दें-

प्रश्न 1.
मरुस्थलों के भिन्न-भिन्न प्रकार बताएँ।
उत्तर-
पवनों की क्रिया (खुरचना, जमा करना) से मरुस्थल के निर्माण भी तीन प्रकार के हो सकते हैं-
1. रेतीले मरुस्थल (Sandy Deserts)—ऐसे मरुस्थल, जिनमें अधिकतर रेत ही मिलती है, वहाँ रेत के कणों __ को बड़ी आसानी से पवनें, अपने साथ उड़ाकर ले जाती हैं। इन्हें सहारा में अरग (Ergs), तुरकमेनिस्तान में काउन (Koun) कहा जाता है। सऊदी अरब में सबसे बड़ा अरग, खली (Khalli) नामक स्थान पर है, जिसका आकार 5 लाख 60 हज़ार वर्ग किलोमीटर है।

2. पथरीला मरुस्थल (Stony Deserts)—ऐसे मरुस्थल, जोकि बजरी, पत्थर आदि के टुकड़े, कंकड़ आदि से बने होते हैं, पथरीले मरुस्थल कहलाते हैं। एलजीरिया का रैग (Reg) इसका उपयुक्त उदाहरण है।

3. चट्टानी मरुस्थल (Rocky Deserts)-ऐसे बंजर क्षेत्र, जिनकी ऊपरी नर्म परतें घिसकर बिल्कुल समाप्त हो गई हों और केवल चट्टानी टीले या बंजर क्षेत्र ही हों, ऐसे क्षेत्रों को चट्टानी मरुस्थल कहते हैं। जैसे-हमादा बंजर (Hammada-Barren), सहारा मरुस्थल में ऐसे क्षेत्रों को हमादा कहते हैं।

विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल सहारा मरुस्थल है। यह अफ्रीका में है। थार मरुस्थल, जो कि भारत में स्थित (राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दक्षिणी-पश्चिमी पंजाब और पाकिस्तान, पंजाब के सिंध) एक गर्म मरुस्थल है। जबकि मध्य एशिया (Central Asia) में ठंडे मरुस्थल भी हैं। ऐटाकॉमा जो कि दक्षिणी अमेरिका में संसार का सबसे शुष्क मरुस्थल है, में वार्षिक वर्षा एक मिलीमीटर से भी कम है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

प्रश्न 2.
पवनों के अपरदन कार्यों के प्रकार बताएँ। अपरदन को नियंत्रित करने वाले कारक भी बताएँ।
उत्तर-
पवनों का अपरदन कार्य (Erosional Work of Wind)-
वनस्पति से रहित शुष्क प्रदेशों में ताप-अंतर के कारण चट्टानें टूटकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाती हैं। पवन इन कणों को अपने साथ उड़ाकर ले जाती है। ये कण काट-छाँट में पवन की सहायता करते हैं, इसलिए इन्हें पवन की कटाई के उपकरण (Cutting tools of wind) कहा जाता है।
पवन अपरदन के प्रकार (Types of Wind Erosion)-पवन रेत और धूल-कणों की सहायता से अपना अपरदन कार्य करती है। यह मुख्य रूप में भौतिक अपरदन करती है। पवन द्वारा अपरदन नीचे लिखे तीन प्रकार से होता है-

  • घर्षण (Abrasion)-शुष्क प्रदेशों में पवन रेत को उड़ाकर दूर ले जाती है। इस रेत के कण पवन की अपरदन क्रिया के उपकरण के रूप में चट्टानों पर आक्रमण करते हैं जिससे चट्टानें घिसती हैं। इस क्रिया को घर्षण कहते हैं।
  • सह-घर्षण (Attrition)—जब उड़ते हुए धूलकण आपसी कटाव के कारण छोटे और मुलायम हो जाते हैं, तो उस क्रिया को सह-घर्षण कहते हैं।
  • अपवाहन (Deflation)-पवन द्वारा धूल-कणों को उड़ाकर बहुत दूर ले जाने की क्रिया को अपवाहन कहा जाता है।

पवन अपरदन को नियंत्रित करने वाले कारक (Factors Controlling Wind Erosion)-

पवन अपरदन को नियंत्रित करने वाले कारक नीचे लिखे हैं-

1. पवन वेग (Wind Velocity)-तीव्र पवनों से अधिक अपरदन होता है क्योंकि इसमें बड़े-बड़े धूल-कण भी उड़ते हैं। फलस्वरूप ये धूल-कण चट्टानों पर ज़ोर से हमला करके उन्हें घिसा देते हैं।

2. धूल कणों का आकार और ऊँचाई (Size of Sand Grains and Height)-धूल-कणों के आकार और ऊँचाई का भी अपरदन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। छोटे WIND आकार के धूल-कण वायु में अधिक ऊँचाई पर उड़ते हैं, परंतु बड़े-बड़े कण धरातल के निकट ही प्रवाहित होते हैं। इसलिए धरातल के निकट (2 मीटर से 6 मीटर तक) वायु अपरदन सबसे अधिक होता है और ऊँचाई के साथ यह क्रिया क्रमबद्ध कम होती जाती है।

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य 10

3. चट्टानों की कठोरता (Solidity of Rocks) नर्म चट्टानें कठोर चट्टानों की तुलना में जल्दी घिसती हैं।
4. जलवायु (Climate)-शुष्क जलवायु में मौसमीकरण की क्रिया से अधिक अपरदन होता है।

कटाव तथा अपरदन के रूप (Types of Erosion)-

  1. नीचे का कटाव (Under Cutting)
  2. नालीदार कटाव (Gully Erosion)
  3. खुरचना (Scratching)
  4. चमकाना (Polishing)

PSEB 11th Class Geography Solutions Chapter 3(iii) पवनों के अनावृत्तिकरण कार्य

प्रश्न 3.
पवनों की परिवहन क्रिया की प्रमुख विशेषताएँ और कार्य बताएँ।
उत्तर-
प्रमुख विशेषताएँ-

  1. पवनों के द्वारा परिवहन किसी भी दिशा में हो सकता है।
  2. यह कार्य भूतल के निकट कम ऊँचाई तक सीमित होता है।
  3. पवनों द्वारा परिवहन दूर-दूर तक होता है।
  4. पवनों के द्वारा बारीक धूल-कण दूर-दूर तक प्रवाहित होते हैं, परंतु भारी कण लटकते रहते हैं।

पवनों द्वारा सामान एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोना (Transportation by Wind)
पवनें चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े, मिट्टी, कंकड़ आदि दरिया और ग्लेशियर की तरह ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाती हैं, पर पवनों का यह कार्य नदियों की तरह इतना प्रभावशाली नहीं होता। मरुस्थलों में यह क्रिया देखी जा सकती है। पवनें कई प्रकार से यह कार्य करती हैं-
1. पवन की गति जितनी अधिक होगी, उतना ही अधिक सामान उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जा सकेगी।

2. जब पवन धीरे चलती है, तो अपने साथ कई छोटे-छोटे रेत के कण उड़ाकर ले जाती है, पर जब तेज़ चलती है, तो बिजली के खंभे, पेड़ आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है। कई बार चट्टानों के बड़े टुकड़े भी पवनों के साथ-साथ सरकते रहते हैं। भारी होने के कारण वे उड़ नहीं सकते।

3. उदाहरण के लिए, एक मिट्टी का तूफान (Dust storm) जिसका व्यास 500 कि०मी० है, 10 करोड़ (100 मिलीयन) टन तक मिट्टी उठा सकता है और 30 मीटर ऊँची और 3 किलोमीटर आधार की चौड़ी पहाड़ी बना सकता है। थार मरुस्थल में जब तेज़ आंधी चलती है, तो हमें तीन फुट की दूरी से भी नज़र नहीं आता। इससे पता चलता है कि पवन के साथ उठाया सामान देखने के मार्ग में रुकावट बनता है। पवन में मिट्टी के कण, कंकड़, पत्थर आपस में रगड़ खाने के कारण आकार में छोटे हो जाते हैं। जब पवन की गति कम हो जाती है, तो यह इस सामान को जमा करने का कार्य शुरू कर देती है।

रेत के टीलों का खिसकना (Shifting of Sand dunes)-पवन की दिशा निश्चित नहीं होती, इसलिए रेत के टीले पवनों की दिशा के परिवर्तन के अनुसार खिसकते रहते हैं। इसलिए, ये स्थिर नहीं होते। पवन जिस दिशा की ओर चलती है, बालू के टीले भी इसके साथ खिसक जाते हैं। आगे बढ़ते रेत के टीले उपजाऊ मैदानों को बहुत क्षति पहुंचाते हैं। जल्दी उगने वाले और लंबी जड़ों वाले पेड़ों को ऐसे मरुस्थलीय क्षेत्रों में लगाया जाता है, ताकि इन टीलों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। यह 5 से 30 मीटर वार्षिक दर से आगे खिसक सकते हैं।

PSEB 10th Class SST Solutions Geography Chapter 6 खनिज पदार्थ एवं ऊर्जा-साधन

Punjab State Board PSEB 10th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 6 खनिज पदार्थ एवं ऊर्जा-साधन Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 6 खनिज पदार्थ एवं ऊर्जा-साधन

SST Guide for Class 10 PSEB खनिज पदार्थ एवं ऊर्जा-साधन Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द अथवा एक वाक्य में दीजिए

प्रश्न 1.
प्रमुख खनिजों के नाम बताइए।
उत्तर-
भारत में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं-लोहा, मैंगनीज़, कोयला, चूने का पत्थर, बॉक्साइट तथा अभ्रक।

प्रश्न 2.
मैंगनीज़ खनिज का उपयोग किस कार्य के लिए होता है?
उत्तर-
मैंगनीज़ का उपयोग इस्पात बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 3.
मैंगनीज़ अयस्क उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर-
मैंगनीज़ अयस्क उत्पादन में भारत का विश्व में चौथा स्थान है।

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प्रश्न 4.
अभ्रक उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर-
अभ्रक उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है।

प्रश्न 5.
कुल अभ्रक उत्पादन का आधे से अधिक भाग उत्पादन करने वाले राज्य का नाम बताओ।
उत्तर-
बिहार तथा झारखण्ड।

प्रश्न 6.
अभ्रक का उपयोग किस उद्योग में किया जाता है?
उत्तर-
अभ्रक का उपयोग बिजली उद्योग में किया जाता है।

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प्रश्न 7.
बॉक्साइट अयस्क से किस धातु को निकाला जाता है?
उत्तर-
बॉक्साइट अयस्क से एल्यूमीनियम धातु को निकाला जाता है।

प्रश्न 8.
तांबा धातु किन-किन कामों में उपयोग किया जाता है?
उत्तर-
तांबा घरेलू बर्तन बनाने, शो पीस बनाने तथा बिजली उद्योग में प्रयोग होता है।

प्रश्न 9.
सोना उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र कहां और किस राज्य में है?
उत्तर-
सोना उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र कोलार है जो कर्नाटक राज्य में स्थित है।

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प्रश्न 10.
चूने के पत्थर का उपयोग किस उद्योग में सबसे अधिक होता है?
उत्तर-
चूने के पत्थर का सबसे अधिक उपयोग सीमेंट उद्योग में होता है।

प्रश्न 11.
कोयला उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर-
चीन और संयुक्त राज्य के बाद कोयला उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है।

प्रश्न 12.
दामोदर घाटी में देश के कल संचित भण्डार का कितना हिस्सा कोयला पाया जाता है?
उत्तर-
दामोदर घाटी में देश के कुल संचित भण्डार का तीन-चौथाई भाग कोयला पाया जाता है।

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प्रश्न 13.
कोयला उत्पादन के प्रबन्ध एवं प्रशासन का कार्य देश की किस संस्था के हाथ में है?
उत्तर-
कोल इण्डिया लिमिटेड (CIL) के हाथ में।

प्रश्न 14.
परमाणु ऊर्जा के चार प्रमुख केन्द्र कहां-कहां स्थित हैं?
उत्तर-
(i) तारापुर-महाराष्ट्र-गुजरात की सीमा पर
(ii) रावतभाटा-राजस्थान में कोटा के पास
(iii) कलपक्कम तमिलनाडु
(iv) नैरोरा-उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के पास।

प्रश्न 15.
पवन ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर-
पवन की शक्ति से प्राप्त ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं।

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प्रश्न 16.
बैलाडीला खानों से किस खनिज पदार्थ का खनन किया जाता है?
उत्तर-
बैलाडीला में लोहे का खनन किया जाता है।

प्रश्न 17.
कोलार खानों से कौन-सा खनिज निकाला जाता है?
उत्तर-
कोलार खानों से सोना निकाला जाता है।

प्रश्न 18.
लिग्नाइट को किस अन्य नाम से भी पुकारा जाता है?
उत्तर-
लिग्नाइट को ‘भृरा कोयला’ कह कर भी पुकारा जाता है।

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प्रश्न 19.
सागर सम्राट नाम के जलपोत से क्या काम लिया जाता है?
उत्तर-
जापान द्वारा निर्मित सागर सम्राट नामक जलपोत से सागरीय क्षेत्र में तेल खोजने का काम लिया जाता है।

प्रश्न 20.
यूरेनियम धातु किस प्रकार की ऊर्जा बनाने के काम आती है?
उत्तर-
यूरेनियम धातु परमाणु ऊर्जा बनाने के काम आती है।

II. निम्न प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
खनिजों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?
उत्तर-
खनिजों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बड़ा महत्त्व है। निम्नलिखित तथ्यों से यह बात स्पष्ट हो जाएगी

  1. देश का औद्योगिक विकास मुख्य रूप से खनिजों पर निर्भर करता है। लोहा और कोयला मशीनी युग का आधार हैं। हमारे यहां संसार के लौह-अयस्क के एक-चौथाई भण्डार हैं। भारत में कोयले के भी विशाल भण्डार पाये जाते हैं।
  2. खनन कार्यों से राज्य सरकारों की आय में वृद्धि होती है और लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।
  3. कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि खनिज ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण साधन हैं।
  4. खनिजों से तैयार उपकरण कृषि की उन्नति में सहायक हैं।

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प्रश्न 2.
भारत में मैंगनीज़ उत्पादन के प्रमुख राज्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
भारत में उड़ीसा सबसे बड़ा मैंगनीज़ उत्पादक राज्य है। इसके पश्चात् मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान है। आन्ध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात और बिहार राज्यों में भी मैंगनीज़ का उत्पादन होता है।
उड़ीसा में मैंगनीज़ की प्रमुख खानें क्योंझर, कालाहांडी तथा मयूरभंज में हैं। मध्य प्रदेश में इस खनिज की खाने बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर आदि में हैं।

प्रश्न 3.
बॉक्साइट उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों के नाम बताओ।
उत्तर-
भारत के अनेक क्षेत्रों में बॉक्साइट के निक्षेप पाए जाते हैं। झारखण्ड, गुजरात तथा छत्तीसगढ़ बॉक्साइट के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में भी इसके उत्तम कोटि के भण्डार हैं। विगत कुछ वर्षों में उड़ीसा के बॉक्साइट निक्षेपों का विकास किया गया है। यहां अल्यूमीना तथा एल्यूमीनियम बनाने के लिए एशिया का सबसे बड़ा कारखाना लगाया गया है।

प्रश्न 4.
तांबा उत्पादक क्षेत्रों के नाम बताओ।
उत्तर-
आजकल देश का अधिकांश तांबा झारखण्ड के सिंहभूम, मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के झुंझनु एवं अलवर जिलों से निकाला जाता है। आन्ध्र प्रदेश के खम्मम, कर्नाटक के चित्रदुर्ग और हसन जिलों तथा सिक्किम में भी थोड़े बहुत तांबे का उत्पादन किया जाता है।

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प्रश्न 5.
पंजाब में खनिज पदार्थों के नहीं मिलने के क्या कारण हैं?
उत्तर-
पंजाब का अधिकांश भाग नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बना है। हम पंजाब के मैदानों को नवीनतम युग की कांप मिट्टियों के समतल मैदान भी कह सकते हैं। यह मैदान कृषि के लिए बहुत उपजाऊ हैं। खनिज सम्पदा अधिकांशतः भू-इतिहास के प्राचीन काल में निर्मित आग्नेय या कायांतरित शैलों वाले भागों में मिलती है। अतः कांप मिट्टियों से बने पंजाब का खनिज उत्पादन में प्रमुख स्थान नहीं है।

प्रश्न 6.
कोयला उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों के नाम बताओ।
उत्तर-
भारत में कोयले के तीन-चौथाई भण्डार दामोदर नदी घाटी में स्थित हैं। रानीगंज, झरिया, गिरीडीह, बोकारो तथा करनपुरा कोयले के प्रमुख क्षेत्र हैं। ये सभी पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड राज्यों में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के सिंगरोली, सोहागपुर तथा रायगढ़ में कोयला निकाला जाता है। इसके साथ-साथ उड़ीसा के तालचेर तथा महाराष्ट्र के चांदा जिले में भी कोयले के विशाल क्षेत्र हैं।

प्रश्न 7.
उड़ीसा में कोयला उत्पादन के प्रमुख केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर-
देवगढ़ तथा तालचेर।

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प्रश्न 8.
कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण करने के मुख्य उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण करने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. श्रमिकों को शोषण से बचाना।
  2. खनन कार्य को योजनाबद्ध तरीके से करना।
  3. खनन किये गये क्षेत्रों में पर्यावरण को बनाये रखना।

प्रश्न 9.
ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोतों के नाम बताइए।
उत्तर-
ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोतों के नाम निम्नलिखित हैं

  1. सौर ऊर्जा,
  2. पवन ऊर्जा,
  3. ज्वारीय ऊर्जा,
  4. भूतापीय ऊर्जा,
  5. ऊर्जा के लिए वृक्षारोपण,
  6. शहरी कचरे से प्राप्त ऊर्जा,
  7. जैव पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा।
    ऊर्जा के परम्परागत साधन अक्षय भी हैं और कम खर्चीले भी हैं।

प्रश्न 10.
पवन ऊर्जा के महत्त्व एवं भारत में उपयोग को बताइए।
उत्तर-
पवन ऊर्जा अक्षय है और इसके प्रयोग में खर्चा भी कम बैठता है। दूसरे, दूर स्थित मरुस्थलीय स्थानों पर पवन ऊर्जा के बल परं नये उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।
भारत में उपयोग

  1. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का काम लिया जा रहा है।
  2. पवन केन्द्र बना कर बिजली प्राप्त की जा रही है और यहां से उत्पन्न बिजली को ग्रिड प्रणाली में शामिल कर लिया जाता है।

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प्रश्न 11.
खनन उद्योग में भारत सरकार की भूमिका क्या है?
उत्तर-
खनन उद्योग में भारत सरकार दिशा निर्देश का काम करती है। इसके लिए केन्द्रीय सरकार खनन एवं खनिज एक्ट 1957 के अनुसार काम करती है। इस कानून के अनुसार भारत सरकार खनिजों के विकास के लिए दिशा निर्देशन कानून बनाती है। इसके लिए भारत सरकार.

  1. गौण खनिज को छोड़ सभी खनिजों के दोहन के लिए लाइसेंस और ठेके देती है।
  2. खनिजों के संरक्षण एवं विकास के लिए पग उठाती है।
  3. पुराने दिए गए ठेकों में समय-समय पर परिवर्तन करती है।

प्रश्न 12.
मध्य प्रदेश के किन-किन जिलों में लौह-अयस्क का खनन होता है?
उत्तर-
मध्य प्रदेश में जबलपुर तथा बालाघाट जिलों में लौह-अयस्क का खनन होता है।

प्रश्न 13.
देश के उन सरकारी उपक्रमों के नाम बताइए, जो आजादी के बाद तेल खोज, शोधन एवं वितरण के कार्य में संलग्न हैं।
उत्तर-
आजादी के बाद तेल की खोज में तेजी लाने तथा वितरण के लिए विशेष उपक्रमों का संगठन किया गया है। ये हैं

  1. तेल एवं प्राकृतिक गैस कमीशन (ONGC),
  2. भारतीय तेल लिमिटेड (IOL),
  3. हिन्दुस्तान पेट्रोलियम निगम (HPC) तथा
  4. भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (GAIL)

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प्रश्न 14.
सौर ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा का स्रोत क्यों कहा जाता है?
उत्तर-
कोयला और खनिज तेल समाप्त होने वाले साधन हैं। एक दिन ऐसा आएगा जब विश्व के लोगों को इनसे पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलेगी। इनके भण्डार समाप्त हो चुके होंगे। इनके विपरीत सूर्य ऊर्जा कभी न समाप्त होने वाला साधन है। इससे विपुल मात्रा में ऊर्जा मिलती है। जब कोयले और खनिज तेल के भण्डार समाप्त हो जाएंगे तब सौर बिजली घरों से शक्ति प्राप्त होगी और हम अपने घरेलू कार्य सौर संयन्त्रों से सुगमता से कर लेंगे।

प्रश्न 15.
प्राकृतिक गैस का उर्वरक उद्योग में क्या महत्त्व है?
उत्तर-
प्राकृतिक गैस पैट्रो-रसायन उद्योग के लिए कच्चा माल है। यह भारतीय कृषि का उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक है। अब प्राकृतिक गैस से उर्वरक बनाए जाने लगे हैं। प्राकृतिक गैस पाइप लाइनों द्वारा उर्वरक बनाने वाले कारखानों तक भेजी जाती है। हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर गैस पाइप लाइन 1730 किलोमीटर लम्बी है जिसके द्वारा उर्वरक बनाने वाले 6 कारखानों को गैस पहुंचाई जाती है।

प्रश्न 16.
देश में विद्युत् शक्ति के वितरण की प्रमुख समस्याएं क्या हैं ?
उत्तर-
देश में विद्युत् शक्ति के क्षेत्रीय वितरण की प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित हैं

  1. विद्युत् उत्पादन केन्द्र विद्युत् खपत केन्द्रों से बहुत दूर स्थित होते हैं। ग्रिड प्रणाली तक पहुंचने में भी तारों का जाल बिछाना पड़ता है जिसमें धन का भी अधिक व्यय होता है।
  2. दूर स्थित होने के कारण बिजली का आंशिक भाग व्यर्थ चला जाता है।
  3. कभी-कभी ग्रिड प्रणाली में दोष आ जाता है जिसके कारण सारी वितरण प्रणाली ठप्प पड़ जाती है।

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प्रश्न 17.
देश में खनिज सम्पदा की उपलब्धि एवं महत्त्व का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत खनिज संसाधनों में काफ़ी सम्पन्न है।

  1. यह लौह संसाधनों में विशेष रूप से सम्पन्न है। एक अनुमान के अनुसार भारत में संसार के लौह-अयस्क के एक-चौथाई भण्डार हैं।
  2. भारत में मैंगनीज़ के भी विशाल भण्डार हैं। यह खनिज मिश्र इस्पात बनाने में बहुत उपयोगी है।
  3. भारत में कोयले के भी बड़े भण्डार हैं। परन्तु दुर्भाग्य से हमारे कोयले के ऐसे भण्डार कम हैं, जिनसे ‘कोक’ बनाया जाता है।
  4. चूने का पत्थर भी देश में भारी मात्रा में व्यापक रूप से पाया जाता है।
  5. भारत बॉक्साइट और अभ्रक में भी सम्पन्न है।

महत्त्व-

  1. खनिज सम्पदा उद्योगों का आधार है। अतः देश का औद्योगिक विकास हमारी खनिज सम्पदा पर ही निर्भर करता है।
  2. खनिजों के खनन से देश के धन में वृद्धि होती है, लोगों को रोजगार मिलता है और उनका जीवन-स्तर उन्नत होता है।

प्रश्न 18.
लौह धातु के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
हमारे देश के कई क्षेत्रों में लौह-अयस्क के विशाल भण्डार पाये जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में 17 अरब 57 करोड़ टन लौह-अयस्क के भण्डार हैं। यह मुख्य रूप से झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग तथा बिहार के शाहाबाद जिलों में पाये जाते हैं। मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा में भी लौह-अयस्क के बड़े क्षेत्र हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पाया जाने वाला लौह-अयस्क जापान आदि देशों को निर्यात किया जाता है। कुछ लौह-अयस्क आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा कर्नाटक में भी पाया जाता है। वैसे तो गोआ में भी लौह-अयस्क के भण्डार हैं, परन्तु यह अच्छी किस्म का नहीं है।

प्रश्न 19.
आजादी के बाद खनिज तेल की खोज एवं उत्पादन के लिए किये गये प्रयासों का वर्णन करो।
उत्तर-
स्वतन्त्रता के पश्चात् देश में खनिज तेल की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए नये तेल क्षेत्रों की खोज का कार्य आरम्भ किया गया। गुजरात के मैदानों तथा खम्बात की खाड़ी के अपतट क्षेत्रों में खनिज तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की गई। मुम्बई तट से 115 किलोमीटर दूर समुद्र से भी तेल निकाला गया। इस समय यह भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है। इस तेल क्षेत्र को “बॉम्बे हाई” के नाम से जाना जाता है। खनिज तेल के नये भण्डारों की खोज समुद्र के अपतट क्षेत्रों में हुई है। ये क्षेत्र गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा महानदी के डेल्टाई तटों के पास गहरे सागर में फैले हुए हैं। असम में भी तेल के कुछ नये भण्डारों का पता लगाया गया है।

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प्रश्न 20.
आजादी के बाद ग्रामीण विद्युतीकरण में हुए विकास का वर्णन करो।
उत्तर-
आज़ादी के पश्चात् ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युतीकरण की ओर विशेष ध्यान दिया गया। ग्रामीण विद्युतीकरण की योजनाएं राज्य सरकारों और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम दोनों द्वारा मिलकर चलायी जाती हैं। वर्ष 2000 तक 5 लाख परमाणु ऊर्जा से सम्पन्न कुछ देश चाहते हैं कि भारत अपने परमाणु कार्यक्रम को न चलाए। इस कारण वे भारत के परमाणु कार्यक्रम को अन्तर्राष्ट्रीय निगरानी में लाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि भारत से इस सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय सन्धि पर हस्ताक्षर कराया आए। परन्तु भारत का सदा यह मत रहा है कि यह सन्धि भेदभावपूर्ण है। भारत परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण कार्यों के लिए करना चाहता है, न कि विनाशकारी कार्यों के लिए।

III. निम्न प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
कोयला उत्पादन का विस्तार से वर्णन करते हुए प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
कोयला औद्योगिक ऊर्जा का प्रमुख साधन है। लोहा तथा इस्पात एवम् रसायन उद्योगों के लिए कोयले का बड़ा महत्त्व है। हमारे देश में कोयले के काफ़ी बड़े भण्डार हैं। इसके तीन चौथाई भण्डार दामोदर नदी की घाटी में स्थित हैं। आन्ध्र सीमांध्र तथा महाराष्ट्र में भी कोयला क्षेत्र विद्यमान हैं। कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण-स्वतन्त्रता के पश्चात् हमारी सरकार ने सभी कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया है। राष्ट्रीयकरण का मुख्य उद्देश्य कोयले की खानों में काम करने वाले श्रमिकों को शोषण से बचाना है।
कोयले का महत्त्व-भारत में पाया जाने वाला निम्न कोटि का कोयला हमारे लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। यह कोयला विद्युत् तथा गैस के उत्पादन में बड़ा उपयोगी सिद्ध हुआ है। इससे खनिज तेल भी प्राप्त किया जा सकता है। हमारे छोटेबड़े ताप बिजली-घर इन्हीं कोयला क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं। इन बिजली-घरों से जो बिजली प्राप्त होती है, उसे विशाल प्रादेशिक ग्रिड व्यवस्था में भेज दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप समय और व्यय दोनों की बचत होती है। – कोयले का उत्पादन-सन् 1951 में हमारे देश में कोयले का उत्पादन केवल 3.5 करोड़ टन था। परन्तु 2002-03 में यह बढ़कर 34:12 करोड़ टन हो गया।
समस्याएँ-

  1. भारत में बढ़िया प्रकार का कोयला नहीं मिलता।
  2. कोयला खानों में आग की घटनाओं से अनेक श्रमिक मारे जाते हैं।
  3. कोयले की खानें काफ़ी गहरी हैं। अत: कोयले का उत्पादन काफ़ी महंगा पड़ रहा है।
  4. भारत में कोयला-उत्पादन की तकनीक के आधुनिकीकरण की गति बड़ी धीमी है।

प्रश्न 2.
ताप एवं परमाणु शक्ति के विस्तार पर भारत में हुई प्रगति का वर्णन करो।
उत्तर-
कोयले, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस द्वारा ताप-बिजली घरों में ताप-बिजली (Thermal Power) उत्पन्न की जाती है। ताप-बिजली उत्पादन करने वाले इन खनिज संसाधनों को जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) कहा जाता है। यह इनकी सबसे बड़ी कमी या दोष है कि इन्हें एक बार से अधिक उपयोग नहीं किया जा सकता। कोयले, पेट्रोलियम व गैस के अतिरिक्त परमाणु ईंधन (Atomic Fuel) या भारी जल (Heavy Water) से भी विद्युत् उत्पन्न की जाती है। जल-विद्युत् (Hydel Power) ऊर्जा का स्वच्छ साधन है। इस तरह जल शक्ति से बनने वाली विद्युत् को जल-विद्युत (Hydel Power), कोयले, पेट्रोलियम व गैस की मदद से बनने वाली विद्युत् को तापीयविद्युत् (Thermal Power) तथा परमाणु ईंधन या भारी-जल से बनने वाली विद्युत् को परमाणु-शक्ति (Atomic Power) कहते हैं। विद्युत् शक्ति का हमारी कृषि, उद्योगों, परिवहन तथा घरेलू कार्यों में बहुत अधिक उपयोग होता है। इस प्रकार से बिना विद्युत् शक्ति के आधुनिक जीवन की कल्पना ही लगभग असम्भव है।

वर्ष 2002-03 में इन तीनों प्रमुख स्रोतों से कुल विद्युत् उत्पादन 534.30 अरब यूनिट था। इसमें से लगभग तीनचौथाई भाग ताप-बिजली घरों में उत्पादन किया गया। बाकी 23.5 प्रतिशत जल-विद्युत् घरों में तथा शेष 1.60 प्रतिशत परमाणु-शक्ति से उत्पन्न किया गया। समय के साथ-साथ ताप-बिजली का भाग बड़ी तेजी से बढ़ा है। देश में विद्युत् की संस्थापित क्षमता (Installed Capacity) 1994-95 तक 81.8 हजार मेगावाट थी। परन्तु 2002-03 के अंत तक यह क्षमता बढ़ कर 10.80 लाख मेगावाट हो गई।

PSEB 10th Class SST Solutions Geography Chapter 6 खनिज पदार्थ एवं ऊर्जा-साधन

प्रश्न 3.
ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों के विकास एवं महत्त्व पर विस्तार से लिखें।
उत्तर-
ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-हाीय ऊर्जा, जैव पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा आदि सम्मिलित हैं।
विकास-ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोतों के प्रयोग को बढ़ाने पर हाल के वर्षों में अत्यधिक बल दिया जा रहा है। इस ऊर्जा का वनारोपण, पर्यावरण सुधार, ऊर्जा संरक्षण, रोजगार वृद्धि, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सुधार, सामाजिक कल्याण, खेतों में सिंचाई, जैविक खाद उत्पादन आदि क्षेत्रों में विशेष योगदान है। मार्च, 1981 में केन्द्र सरकार ने एक उच्च अधिकार प्राप्त आयोग की स्थापना की थी ताकि अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों का पता लगाया जा सके। 1982 में गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों का विभाग, ऊर्जा मन्त्रालय में स्थापित किया गया। अब गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के लिए अलग से एक मन्त्रालय स्थापित कर दिया गया है। राज्य सरकारों ने भी अपने यहां गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों के लिए अलग से एजेन्सी स्थापित की हुई है। स्थानीय लोगों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर खाना पकाने की गैस, लघु सिंचाई योजना, पीने का पानी तथा सड़कों पर रोशनी की व्यवस्था के कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पवन ऊर्जा से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था में सहायता मिली है। कई स्थानों पर पवन केन्द्र कार्य कर रहे हैं। यहां से उत्पन्न बिजली को ग्रिड प्रणाली में शामिल कर लिया गया है।
भू-तापीय ऊर्जा-भारत में भू-तापीय ऊर्जा का अभी तक पूरी तरह विकास नहीं किया जा सका। हिमाचल में मणिकरण स्थित गर्म जल स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन के प्रयास किए जा रहे हैं। – महत्त्व-ऊर्जा साधनों के रूप में इनका उपयोग बहुत ही पुराना है

  1. नौ-परिवहन में पवन तथा प्रवाहित जल का भी उपयोग होता था।
  2. आटा पीसने के लिए पनचक्कियों का प्रचलन था। पानी खींचने के लिए पवन चक्कियों का उपयोग होता था। आज के युग में भी इनकी कुछ विशेषताओं तथा परम्परागत साधनों की कुछ कमियों के कारण इनका महत्त्व दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इन साधनों की यह विशेषता है कि ये सभी साधन या तो नवीकरण योग्य हैं या अक्षय हैं। ये साधन कम खर्चीले भी हैं।

प्रश्न 4.
देश के औद्योगिकीकरण में ऊर्जा के महत्त्व को समझाओ।
उत्तर-
देश के औद्योगिकीकरण में ऊर्जा का बड़ा महत्त्व है। उद्योगों से अभिप्राय उन कारखानों से है जो छोटीबड़ी मशीनों द्वारा चलाये जाते हैं। ये मशीनें केवल ऊर्जा द्वारा ही चलाई जा सकती हैं।
ऊर्जा कोयला, जल तथा परमाणु ईंधन से प्राप्त होती है। आजकल कुछ ऊर्जा गैर-परम्परागत साधनों से भी प्राप्त की जा रही है। यदि हम देश को औद्योगिकीकरण के मार्ग पर ले जाना चाहते हैं तो यह ऊर्जा के विकास के बिना सम्भव नहीं है। औद्योगिक ऊर्जा का प्रमुख साधन होने के साथ कोयला एक कच्चा माल भी है। लोहा तथा इस्पात एवं रसायन उद्योगों के लिए कोयला आवश्यक है। देश में व्यापारिक शक्ति की 60 प्रतिशत से भी अधिक आवश्यकताएँ कोयले और लिग्नाइट से पूरी होती हैं। स्वाधीनता के समय केवल असम में ही खनिज तेल निकाला जाता था। तब कारखाने भी अधिक नहीं थे। परन्तु तेल की खोज के साथ ही भारत में औद्योगिकीकरण का भी विकास हुआ। प्राकृतिक गैस से उर्वरक बनाये जाने लगे हैं। इसी तरह जल-विद्युत का भी प्रसार हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् ऊर्जा का एक नया स्रोत सामने आया। यह परमाणु ऊर्जा थी। ऊर्जा के साधनों के विकास के साथ ही देश में लोहा-इस्पात उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग तथा कई अन्य उद्योग आरम्भ हुए। अत: यह बात सत्य है कि ऊर्जा औद्योगिकीकरण की कुंजी है।

IV. निम्नलिखित को मानचित्र में लगायें:

  1. लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्र, कोई चार।
  2. मैंगनीज़ अयस्क उत्पादक क्षेत्र, कोई तीन।
  3. कोयला उत्पादन क्षेत्र, कोई पाँच।
  4. परमाणु ऊर्जा के केंद्र, कोई तीन।
  5. दामोदर घाटी क्षेत्र में लौह उत्पादन केंद्र।
  6. बाक्साइट के चार प्रमुख भंडार क्षेत्र।
  7. कोलार सोना क्षेत्र।
  8. लिग्नाइट कोयला उत्पादन क्षेत्र।

उत्तर-
विद्यार्थी अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

PSEB 10th Class Social Science Guide खनिज पदार्थ एवं ऊर्जा-साधन Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

I. उत्तर एक शब्द अथवा एक लाइन में

प्रश्न 1.
वर्तमान युग में खनिज पदार्थों का महत्त्व क्यों बढ़ गया है?
उत्तर-
वर्तमान वैज्ञानिक युग में अनुसंधान और तकनीकी विकास के कारण खनिज पदार्थों का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ गया है।

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प्रश्न 2.
भारत के लोगों को खनिज पदार्थों के प्रयोग में कौन-सी सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर-
हमें खनिज सम्पदा का बुद्धिमानी और सतर्कता से प्रयोग करना चाहिए ताकि उसका अपव्यय कम-से-कम हो।

प्रश्न 3.
भारत में मिलने वाले किन्हीं चार खनिज पदार्थों के नाम लिखो।
उत्तर-
भारत में मिलने वाले खनिज पदार्थ हैं-मैंगनीज़, अभ्रक, तांबा तथा बॉक्साइट।

प्रश्न 4.
लौह-अयस्क भारत के किन राज्यों में पाया जाता है?
उत्तर-
लौह-अयस्क भारत के झारखण्ड और उड़ीसा राज्यों में पाया जाता है।

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प्रश्न 5.
हमारा लौह-अयस्क का सबसे बड़ा आयातक देश कौन-सा है?
उत्तर-
जापान भारत के लौह-अयस्क का सबसे बड़ा आयातक देश है।

प्रश्न 6.
मध्य प्रदेश के ऐसे दो जिलों के नाम बताओ जहां लौह-अयस्क पाया जाता है?
उत्तर-
जबलपुर तथा बालाघाट जिलों में लौह-अयस्क पाया जाता है।

प्रश्न 7.
उड़ीसा की मैंगनीज़-अयस्क की चार खानों के नाम बताओ।
उत्तर-
उड़ीसा में स्थित मैंगनीज़-अयस्क की चार खानें-क्योंझर, कालाहाण्डी, मयूरभंज तथा तालचेर हैं।

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प्रश्न 8.
भारत में सबसे अधिक अभ्रक किस राज्य में पाया जाता है?
उत्तर-
भारत में सबसे अधिक अभ्रक झारखण्ड में पाया जाता है।

प्रश्न 9.
दो बॉक्साइट उत्पादक राज्यों के नाम बताओ।
उत्तर-
दो बॉक्साइट उत्पादक राज्य हैं-गुजरात तथा महाराष्ट्र।

प्रश्न 10.
तांबा मुख्य रूप से किस राज्य में पाया जाता है?
उत्तर-
तांबा मुख्य रूप से झारखण्ड में पाया जाता है।

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प्रश्न 11.
चार शक्ति साधनों के नाम बताओ।
उत्तर-
चार शक्ति साधनों के नाम हैं-कोयला, खनिज तेल, जल विद्युत् तथा परमाणु ऊर्जा।

प्रश्न 12.
हमारे देश में औद्योगिक ईंधन का सबसे बड़ा साधन कौन-सा है?
उत्तर-
हमारे देश में औद्योगिक ईंधन का सबसे बड़ा साधन कोयला है।

प्रश्न 13.
भारत की चार प्रमुख कोयला खानों के नाम बताओ।
उत्तर-
भारत की चार प्रमुख कोयला. खानों के नाम हैं-रानीगंज, झरिया, गिरिडीह तथा बोकारो।

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प्रश्न 14.
भारत में कोयले का उत्पादन सबसे अधिक किस राज्य में होता है?
उत्तर-
भारत में कोयले का उत्पादन सबसे अधिक झारखण्ड में होता है।

प्रश्न 15.
स्वतन्त्रता से पूर्व भारत में तेल का एकमात्र उत्पादक राज्य कौन-सा था?
उत्तर-
स्वतन्त्रता से पूर्व भारत में तेल का एकमात्र उत्पादक राज्य असम था।

प्रश्न 16.
ग्रामीण इलाकों में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने कौन-सी योजना बनाई है?
उत्तर-
ऊर्जा ग्राम योजना।

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प्रश्न 17.
भारत के उत्तम किस्म के दो लौह अयस्कों के नाम बताओ।
उत्तर-
हेमाटाइट तथा मैगनेटाइट।

प्रश्न 18.
हेमाटाइट तथा मैगनेटाइट में कितने प्रतिशत लौह-अंश होता है?
उत्तर-
60 से 70 प्रतिशत।

प्रश्न 19.
इस्पात बनाने में मैंगनीज़ का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
मैंगनीज़ का मिश्रण इस्पात को मजबूती प्रदान करता है।

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प्रश्न 20.
तांबे का प्रयोग बिजली उद्योग में क्यों होता है?
उत्तर-
क्योंकि ताँबा ताप का बहुत अच्छा सुचालक है।

प्रश्न 21.
चूने के पत्थर का उपयोग किस उद्योग में होता है?
उत्तर-
सीमेंट उद्योग में।

प्रश्न 22.
दो अलौह खनिजों के नाम लिखो।
उत्तर-
कोयला तथा चूने का पत्थर।

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प्रश्न 23.
लिग्नाइट अथवा भूरा कोयला किस प्रकार का कोयला है?
उत्तर-
निम्न कोटि का।

प्रश्न 24.
लिग्नाइट पर आधारित ताप बिजली घर कहां स्थापित किया गया है?
उत्तर-
तमिलनाडु में नेवेली नामक स्थान पर।

प्रश्न 25.
पंजाब में कोयला आधारित ताप विद्युत् केंद्र किन दो स्थानों पर स्थित हैं?
उत्तर-
रोपड़ तथा भटिंडा में।

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प्रश्न 26.
‘बाम्बे हाई’ से क्या प्राप्त किया जाता है?
उत्तर-
खनिज तेल।

प्रश्न 27.
गुजरात के एक तेल क्षेत्र का नाम बताओ।
उत्तर-
‘अंकलेश्वर’।

प्रश्न 28.
असम में स्थित एक तेल शोधन केंद्र का नाम लिखो।
उत्तर-
डिगबोई।

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प्रश्न 29.
तेल तथा प्राकृतिक गैस के खोज कार्य में लगी भारत की एक कम्पनी का नाम बताइए।
उत्तर-
तेल एवं प्राकृतिक गैस कमीशन (ONGC)।

प्रश्न 30.
खाना पकाने के लिए व्यापक रूप से प्रयोग की जाने वाली गैस का नाम बताइए।
उत्तर-
एल० पी० जी०।

प्रश्न 31.
दो जीवाश्म इंधनों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कोयला तथा पेट्रोलियम।

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प्रश्न 32.
केरल के समुद्री तट पर पाये जाने वाले उस बालू का नाम बताओ जिसमें से थोरियम निकाला जाता
उत्तर-
मोनाजाइट।

प्रश्न 33.
किसी एक कभी समाप्त न होने वाले ऊर्जा स्त्रोत का नाम बताइए।
उत्तर-
सौर ऊर्जा।

प्रश्न 34.
(i) भारत में इस समय कौन-कौन से चार परमाणु केन्द्र काम कर रहे हैं ।
(ii) सबसे पुराना केन्द्र कौन-सा है?
उत्तर-
(i) भारत में इस समय महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा पर तारापुर, राजस्थान में कोटा के पास रावत भाटा, तमिलनाडु में कल्पाक्कम तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नरौरा परमाणु केन्द्र काम कर रहे हैं।
(ii) सबसे पुराना केन्द्र तारापुर में है।

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प्रश्न 35.
भारत के किन्हीं चार तापीय विपत् केन्द्रों के नाम लिखें। (राज्यों के नाम सहित)
उत्तर-
भारत के चार तापीय विद्युत् केन्द्रों के नाम हैं
बिहार में बरौनी, दिल्ली में बदरपुर, महाराष्ट्र में ट्रांबे तथा पंजाब में भटिण्डा।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. लौह अयस्क मुख्यतः भारत के उड़ीसा और ……….. राज्यों में पाया जाता है।
  2. मध्य प्रदेश के जबलपुर तथा ………… जिलों में लौह-अयस्क पाया जाता है।
  3. हेमाटाइट तथा मैगनेटाइट में …………. प्रतिशत लौह-अंश होता है।
  4. ……………. का मिश्रण इस्पात को मजबूती प्रदान करता है।
  5. ताँबा ताप का बहुत अच्छा ………. है।
  6. ……….. निम्न कोटि का कोयला है।
  7. तमिलनाडु में ………. नामक स्थान पर स्थापित ताप बिजली घर लिग्नाइट पर आधारित है।
  8. बाम्बे हाई से ………… प्राप्त किया जाता है।
  9. डिगबोई तेल शोधक केंद्र ……….. राज्य में स्थित है।
  10. ……… खाना पकाने के लिए व्यापक रूप से प्रयोग की जाने वाली गैस है।

उत्तर-

  1. झारखंड,
  2. बालाघाट.
  3. 60 से 70,
  4. मैंगनीज़,
  5. सुचालक,
  6. लिग्नाइट अथवा भूरा कोयला,
  7. नेवेली,
  8. खनिज तेल,
  9. असम,
  10. एल० पी० जी०।

III. बहुविकल्पीय प्रश

प्रश्न 1.
भारत के लौह-अयस्क का सबसे बड़ा आयातक देश है
(A) चीन
(B) जापान
(C) अमेरिका
(D) दक्षिण कोरिया।
उत्तर-
(B) जापान

प्रश्न 2.
भारत में सबसे अधिक अक किस राज्य में पाया जाता है?
(A) बिहार
(B) छत्तीसगढ़
(C) झारखंड
(D) मध्य प्रदेश।
उत्तर-
(C) झारखंड

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प्रश्न 3.
तांबा मुख्य रूप से किस राज्य में पाया जाता है?
(A) बिहार
(B) झारखण्ड
(C) गुजरात
(D) मध्य प्रदेश।
उत्तर-
(B) झारखण्ड

प्रश्न 4.
हमारे देश में औद्योगिक ईंधन का सबसे बड़ा साधन है
(A) कोयला
(B) लकड़ी
(C) डीज़ल
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(A) कोयला

प्रश्न 5.
स्वतंत्रता से पूर्व भारत में तेल का एकमात्र उत्पादक राज्य था
(A) गुजरात
(B) महाराष्ट्र
(C) बिहार
(D) असम।
उत्तर-
(D) असम।

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प्रश्न 6.
चूने के पत्थर का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्योग में होता है?
(A) कागज़
(B) पेट्रो-रसायन
(C) सीमेंट
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(C) सीमेंट

प्रश्न 7.
खनिज भण्डारों के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा खनिज संसाधन हैं
(A) कोयला
(B) तांबा
(C) मैंगनीज़
(D) पेट्रोलियम।
उत्तर-
(A) कोयला

प्रश्न 8.
भारत में सबसे पुराना परमाणु केंद्र है
(A) कल्पाक्कम
(B) नरौरा
(C) रावत भाटा
(D) तारापुर।
उत्तर-
(D) तारापुर।

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IV. सत्य-असत्य कथन प्रश्न-सत्य/सही कथनों पर (✓) तथा असत्य/गलत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं

  1. हेमाटाइट सबसे घटिया किस्म का लोहा है।
  2. एल्यूमिनियम धातु हल्की तथा ताप की सुचालक होती है।
  3. सौर ऊर्जा एक गैर-परम्परागत ऊर्जा साधन है।
  4. प्राकृतिक गैस के भण्डार आमतौर पर कोयला क्षेत्रों के साथ पाये जाते हैं।
  5. कोयला देश (भारत) का सबसे बड़ा खनिज संसाधन है।

उत्तर-

  1. (✗),
  2. (✓),
  3. (✓),
  4. (✗),
  5. (✓).

V. उचित मिलान

  1. मैंगनीज़ का उपयोग — सीमेंट उद्योग
  2. अभ्रक का उपयोग — एल्यूमीनियम
  3. चूने पत्थर का उपयोग — बिजली उद्योग
  4. बॉक्साइट — इस्पात बनाने में।

उत्तर-

  1. मैंगनीज का उपयोग — इस्पात बनाने में,
  2. अभ्रक का उपयोग — बिजली उद्योग,
  3. चूने पत्थर का उपयोग — सीमेंट उद्योग,
  4. बॉक्साइट — एल्यूमीनियम।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
आधुनिक युग में अभ्रक का महत्त्व बताओ। भारत में अभ्रक का उत्पादन करने वाले दो मुख्य राज्यों का वर्णन करो।
उत्तर-
महत्त्व-आधुनिक युग में उद्योगों के विकास के कारण अभ्रक का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। इस खनिज का अधिकतर उपयोग बिजली का सामान बनाने में किया जाता है। मोटरों तथा हवाई जहाज़ के शीशों में भी अभ्रक का प्रयोग किया जाता है।
अभ्रक उत्पादन राज्य-भारत में अभ्रक का उत्पादन करने वाले मुख्य दो राज्य निम्नलिखित हैं —

  1. झारखण्ड-भारत में सबसे अधिक अभ्रक झारखण्ड राज्य में निकाला जाता है। हमारे देश का लगभग आधा अभ्रक इसी राज्य से प्राप्त होता है।
  2. आन्ध्र प्रदेश-देश के कुल अभ्रक का 27 प्रतिशत भाग आन्ध्र प्रदेश से प्राप्त होता है।

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प्रश्न 2.
कोयले का क्या महत्त्व है? इसकी उत्पत्ति किस प्रकार हुई?
उत्तर-
महत्त्व-कोयला शक्ति प्राप्त करने अथवा औद्योगिक ईंधन का सबसे बड़ा साधन है। साथ ही यह औद्योगिक कच्चा माल भी है। घरों में भी इसका प्रयोग ईंधन के रूप में होता है।
उत्पत्ति-कोयले की उत्पत्ति वनस्पति के गल-सड़ कर कठोर हो जाने से हुई है। लाखों वर्ष पहले धरातल पर घने जंगल थे। पृथ्वी की भीतरी हलचलों के कारण धरातलं में दरारें पड़ गई और ये वन पृथ्वी के नीचे धंस गए। पृथ्वी की भीतरी गर्मी तथा ऊपरी दबाव के कारण ये वन गल-सड़ कर कोयला बन गये और धीरे-धीरे काफ़ी कठोर हो गए। इसी को पत्थरी कोयला कहते हैं।

प्रश्न 3.
पेट्रोलियम किस काम आता है? इसकी उत्पत्ति किस प्रकार हुई?
उत्तर-
पेट्रोलियम हवाई जहाज़ तथा मोटरें आदि चलाने के काम आता है। इसे साफ़ करके पेट्रोल, मोम, कैरोसीन तथा मोबिल ऑयल बनाया जाता है।
पेट्रोलियम की उत्पत्ति-पेट्रोलियम की उत्पत्ति समुद्री जीव-जन्तुओं तथा वनस्पतियों के अवशेषों से हुई है। समुद्र में अनेक छोटे-छोटे जीव तथा पौधे पानी में तैरते रहते हैं। मरने के पश्चात् इनके जीवांश समुद्र में निर्मित अवसादी शैलों में दब जाते हैं। इन जीवांशों पर करोड़ों वर्षों तक गर्मी, दबाव तथा रासायनिक क्रियाओं का प्रभाव पड़ता है। परिणामस्वरूप ये जीवांश पेट्रोलियम में बदल जाते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में पेट्रोलियम उत्पादक राज्यों, इसकी शोधशालाओं तथा इसके उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
स्वतन्त्रता के समय केवल असम में ही खनिज तेल निकाला जाता था। यह तेल क्षेत्र काफ़ी छोटा था। स्वतन्त्रता के पश्चात् गुजरात में अंकलेश्वर से भी खनिज तेल प्राप्त होने लगा। तत्पश्चात् मुम्बई हाई में खनिज तेल के भण्डार मिले। मुम्बई तट से 115 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह तेल क्षेत्र आज भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है। शोधशालाएं-पेट्रोलियम को साफ़ करने के लिए देश में अनेक शोधशालाएं स्थापित की गई हैं। इनमें से मुख्य शोधशालाएं नूनमती (असम), बरौनी (बिहार), अंकलेश्वर (गुजरात) में हैं। विशाखापट्टनम, चेन्नई तथा मुम्बई में भी तेल शोधशालाएं हैं। उत्पादन-भारत में पेट्रोलियम का उत्पादन प्रति वर्ष बढ़ रहा है। 1980-81 में भारत में पेट्रोलियम का कुल उत्पादन 10.5 मिलियन टन था। 1999-2000 में यह बढ़ कर 31.9 मिलियन टन हो गया।

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प्रश्न 5.
भारत में लोहे के उत्पादन और वितरण पर एक नोट लिखो।
उत्तर-
भारत में विश्व के कुल लोहे का एक-चौथाई भाग सुरक्षित भण्डार के रूप में विद्यमान है। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2,100 करोड़ टन लोहे का सुरक्षित भण्डार है।
उत्पादन-पिछले वर्षों में भारत में लोहे का उत्पादन काफ़ी बढ़ा है। सन् 1951 में भारत में केवल 4 मिलियन टन लोहे का उत्पादन हुआ। 1998-99 में यह उत्पादन बढ़ कर 70.7 मिलियन टन हो गया।
वितरण-भारत में सबसे अधिक लोहा झारखण्ड राज्य में निकाला जाता है। देश के कुल लोहा उत्पादन का 50 प्रतिशत से भी अधिक लोहा इसी राज्य से प्राप्त होता है। इसका दूसरा बड़ा उत्पादक राज्य उड़ीसा है। इनके अतिरिक्त लोहे के अन्य मुख्य उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा राजस्थान आदि हैं।

प्रश्न 6.
परमाणु खनिज क्या होते हैं और इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर-
वे खनिज जिनसे परमाणु ऊर्जा मिलती है, परमाणु खनिज कहलाते हैं। यूरेनियम और बेरीलियम इसी प्रकार के खनिज हैं। यूरेनियम बिहार राज्य में मिलता है तथा बेरीलियम राजस्थान में।
महत्त्व-अणु-खनिजों का महत्त्व निम्नलिखित बातों से जाना जा सकता है

  1. इनसे चालक शक्ति प्राप्त की जाती है।
  2. इनसे विनाशकारी बम बनाए जाते हैं। परन्तु आजकल अणु शक्ति का प्रयोग शान्तिपूर्ण कार्यों के लिए अधिक होने लगा है।
  3. अणु-खनिजों से कारखाने चलाने के लिए विद्युत् उत्पन्न की जाती है। (4) इस शक्ति से कैंसर आदि भयानक रोगों की चिकित्सा की जाती है।

प्रश्न 7.
भारत के चार प्रमुख खनिज क्षेत्रों के नाम बताइए और प्रत्येक क्षेत्र में पाए जाने वाले मुख्य खनिजों के नाम लिखिए।
उत्तर-
भारत के चार प्रमुख खनिज क्षेत्र अनलिखित हैं

  1. छोटा नागपुर तथा उत्तरी उड़ीसा-ये खनिज क्षेत्र बहुत ही विकसित हैं। इस क्षेत्र में कोयला, लोहा आदि प्रमुख खनिज पाये जाते हैं।
  2. मध्य राजस्थान में खनिजों के विशाल भण्डार हैं। इस क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में तांबा, जस्ता, सीसा, अभ्रक आदि खनिज पाये जाते हैं।
  3. दक्षिण भारत भी खनिजों की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में गोआ, मैसूर पठार तथा तमिलनाडु के कुछ भाग शामिल हैं। यहां पर लोहा, लिग्नाइट आदि खनिज पाये जाते हैं।
  4. मध्य भारत में दक्षिणी मध्य प्रदेश तथा पूर्वी महाराष्ट्र में भी खनिजों के भण्डार हैं। इनमें लोहा तथा मैंगनीज़ विशेष रूप से पाये जाते हैं।

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प्रश्न 8.
अन्य शक्ति साधनों की अपेक्षा जल विद्युत् के कौन-कौन से चार लाभ हैं?
उत्तर-
शक्ति के चार साधनों (कोयला, पेट्रोलियम, जल-विद्युत् तथा अणु शक्ति) में जल-विद्युत का अपना विशेष महत्त्व है। इसके अतिरिक्त लाभ हैं

  1. कोयला तथा पेट्रोलियम के भण्डार समाप्त हो सकते हैं। परन्तु जल एक स्थायी भण्डार है जिससे निरन्तर जलविद्युत् प्राप्त की जा सकती है।
  2. जल-विद्युत् को तारों द्वारा सैंकड़ों कि० मी० की दूरी तक सरलता से ले जाया जा सकता है।
  3. जल-विद्युत् कोयले तथा पेट्रोलियम की अपेक्षा सस्ती पड़ती है।
  4. कोयले और पेट्रोलियम के प्रयोग से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके विपरीत जल-विद्युत् के प्रयोग से धुआँ नहीं निकलता।

बड़े उत्तर वाले प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
आधुनिक युग में लोहे का क्या महत्त्व है? भारत के विभिन्न भागों में लोहे के उत्पादन का हाल विस्तारपूर्वक लिखो। देश में लोहे का कुल उत्पादन तथा इसके सुरक्षित भण्डार का भी वर्णन करो।
उत्तर-
लोहा एक महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थ है। इसके महत्त्व, प्रादेशिक वितरण तथा उत्पादन का वर्णन इस प्रकार है
महत्त्व-आधुनिक युग में लोहे का बहुत महत्त्व है। यह उद्योगों की आधारशिला है। इसके बिना किसी देश के आर्थिक विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उद्योगों में प्रयोग होने वाली लगभग सभी मशीनें लोहे से बनाई जाती हैं। इसका प्रयोग रेलें, वायुयान तथा जलयान बनाने में भी होता है। यह अन्य खनिजों की अपेक्षा अधिक कठोर है। इसके अतिरिक्त उत्पादन में लागत भी कम आती है। लोहे के महत्त्व को देखते हुए इसे काला सोना (Black Gold) भी कहा जाता है। प्रादेशिक वितरण-भारत में लोहे का वितरण इस प्रकार है

  1. झारखण्ड-भारत में लोहे के उत्पादन में झारखण्ड को मुख्य स्थान प्राप्त है। इस राज्य में सबसे अधिक लोहा सिंहभूम जिले में निकाला जाता है।
  2. उड़ीसा-भारत में दूसरा बड़ा लोहा उत्पादक राज्य उड़ीसा है। इस राज्य में लोहा उत्पन्न करने वाले मुख्य जिले हैं-क्योंझर, बोनाई तथा मयूरभंज। गुरुहास्नी, सुलाइयत और बादाम पहाड़ इस राज्य के लोहे की मुख्य खानें हैं।
  3. मध्य प्रदेश-भारत में लोहा उत्पन्न करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश को तीसरा स्थान प्राप्त है। इस राज्य में लोहे का उत्पादन करने वाले मुख्य जिले हैं-जबलपुर और बालाघाट।
  4. कर्नाटक-लोहा उत्पन्न करने में कर्नाटक राज्य चौथे नम्बर पर है। कर्नाटक के बिलारी, चित्रदुर्ग तथा चिकमंगलूर जिले भी प्रमुख लौह-अयस्क केन्द्र हैं। कर्नाटक की कुद्रेमुख क्षेत्र की खानों से भी लौह-अयस्क मिलता है।

इन राज्यों के अतिरिक्त आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा राजस्थान अन्य महत्त्वपूर्ण लोहा उत्पादक राज्य हैं। हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले में भी थोड़ी-बहुत मात्रा में लोहा निकाला जाता है।
उत्पादन-पिछले वर्षों में भारत में लोहे का उत्पादन काफ़ी बढ़ा है। सन् 1951 में भारत में केवल 4 मिलियन टन लोहे का उत्पादन किया गया था। परन्तु 1998-99 में भारत में 70.7 मिलियन टन लोहे का उत्पादन हुआ।
सुरक्षित भण्डार-भारत में लोहे का सुरक्षित भण्डार लगभग 13 अरब टन है। यह संसार के लोहे के कुल ज्ञात भण्डार का लगभग एक चौथाई भाग है।

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प्रश्न 2.
भारत में खनिज सम्पत्ति तथा शक्ति के साधनों का वर्णन करो।
अथवा
निम्नलिखित पदार्थ भारत में कहां पाए जाते हैं और इनका क्या महत्त्व है? कोयला, लोहा, मैंगनीज, बॉक्साइट, खनिज तेल, तांबा, अभ्रक।
उत्तर-
खनिज पदार्थों का प्रत्येक देश के लिए बड़ा महत्त्व होता है। इसके बिना किसी भी देश के उद्योग नहीं चल सकते। भारत खनिज पदार्थों में काफ़ी धनी है। यहां मुख्य रूप से निम्नलिखित खनिज पदार्थ मिलते हैं

  1. कोयला-कोयला एक महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थ है। यह शक्ति का बहुत बड़ा साधन है। इससे रेलें, जहाज़ तथा कारखाने चलते हैं। हमारा अधिकतर कोयला रेलों में प्रयोग किया जाता है। कोयले के उत्पादन में भारत का विश्व में आठवां स्थान है। कोयले की अधिकतर खानें झारखण्ड में हैं। इसके अतिरिक्त रानीगंज (बंगाल) में भी इसकी खाने हैं। 2000-01 में देश में कोयले का कुल उत्पादन 33 करोड़ 35 लाख टन था। भारत कुछ कोयला निर्यात भी करता है।
  2. लोहा-लोहा उद्योगों का आधार माना जाता है। भारत में लोहे के विस्तृत भण्डार हैं। लोहे की बड़ी खाने सिंहभूम (झारखण्ड), मयूरभंज, क्योंझर तथा बोनाई (उड़ीसा) और स्लेम (तमिलनाडु) में हैं। कुछ लोहा कर्नाटक, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ से भी निकाला जाता है। 1998 में देश में 71.5 मिलियन टन खनिज लोहे का उत्पादन हुआ था। हम कुछ लोहे का निर्यात भी करते हैं। हमारे लोहे का मुख्य ग्राहक जापान है।
  3. मैंगनीज़-मैंगनीज़ के उत्पादन में भारत को विश्व में चौथा स्थान प्राप्त है। विश्व का 20% मैंगनीज़ भारतीय खानों से निकाला जाता है। भारत में मैंगनीज़ पैदा करने वाले मुख्य राज्य मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र तथा झारखण्ड हैं। मैंगनीज़ का प्रयोग लोहे से इस्पात बनाने में किया जाता है। किन्तु अभी लोहा-इस्पात उद्योग इतना विकसित नहीं है कि सारा मैंगनीज़ उसमें खप जाए। अतः हम काफ़ी मैंगनीज़ विदेशों को बेच देते हैं। हम अधिकतर मैंगनीज़ अमेरिका तथा इंगलैंड को भेजते हैं। भारत का मैंगनीज़ उत्तम प्रकार का होता है।
  4. अभ्रक-अभ्रक एक बहुमूल्य धातु है। इसका उपयोग शीशे तथा बिजली का सामान बनाने में होता है। संसार का 75% अभ्रक भारत में ही निकाला जाता है। यह मुख्य रूप से झारखण्ड तथा आन्ध्र प्रदेश में मिलता है किन्तु कुछ । अभ्रक राजस्थान से भी प्राप्त होता है। भारत अधिकतर अभ्रक निर्यात कर देता है। इंगलैंड, फ्रांस, अमेरिका, जापान, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि भारतीय अभ्रक के मुख्य ग्राहक हैं।
  5. बॉक्साइट-बॉक्साइट से एल्यूमीनियम नामक धातु प्राप्त की जाती है। एल्यूमीनियम रेल के डिब्बे, मोटर गाड़ी, जहाज, बिजली का सामान, बर्तन और वार्निश आदि बनाने के काम आती है। बॉक्साइट का प्रयोग मिट्टी का तेल साफ़ करने, सीमेंट बनाने और अनेक रासायनिक पदार्थों का निर्माण करने में भी होता है। भारत बॉक्साइट के उत्पादन में आत्मनिर्भर है। यह झारखण्ड, गुजरात, तमिलनाडु, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों में पाया जाता है।
  6. खनिज तेल-आज के युग में खनिज तेल का बड़ा महत्त्व है। यह केवल शक्ति का ही साधन नहीं है बल्कि इससे और भी कई प्रकार की वस्तुएं बनाई जाती हैं। पेट्रोलियम हवाई जहाज़, समुद्री जहाज़ तथा मोटर आदि चलाने के काम आता है। इसे साफ़ करके पेट्रोल, मोम, कैरोसीन तथा मोबिल आयल बनाया जाता है। भारत में सबसे अधिक पेट्रोलियम सुम्बई हाई से प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त असम राज्य में भी काफ़ी पेट्रोलियम निकाला जाता है। इस राज्य में पेट्रोलियम के मुख्य केन्द्र डिगबोई, बम्पापुंज, हंसपुंग, नाहरकटिया और मोरन आदि हैं। गुजरात राज्य में कैम्बे के निकट अंकलेश्वर से भी पेट्रोलियम निकाला जाता है। भारत में खनिज तेल का उत्पादन आवश्यकता से बहुत कम होता है। यहां निकाला जाने वाला पेट्रोलियम हमारी केवल 20 प्रतिशत आवश्यकता ही पूरी कर पाता है। इसलिए हमें विदेशों से इसका आयात करना पड़ता है।