PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे (2nd Language)

Hindi Guide for Class 8 PSEB रब्बा मीह दे-पानी दे Textbook Questions and Answers

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे

रब्बा मीह दे-पानी दे अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें:

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे 1
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे 2
उत्तर :
छात्र स्वयं पढ़ें एवं लिखने का अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे 3
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे 4
उत्तर :
छात्र स्वयं पढ़ें एवं लिखने का अभ्यास करें।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे

3. शब्दार्थ :

  • रब्बा = प्रभु, परमात्मा
  • मीह = वर्ष
  • दूना = दुगुना
  • मवेशी = पशु
  • पर दु:ख = दूसरों का दु:ख
  • सीख = शिक्षा

उत्तर :
सप्रसंग व्याख्या के साथ दे दिए गए हैं।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) इस कविता में ईश्वर से क्या प्रार्थना की गई है?
उत्तर :
इस कविता में ईश्वर से वर्षा लाने की प्रार्थना की गई है।

(ख) ‘खेतों में सोना’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
इसका अर्थ है-खेतों में अच्छी फसल पैदा होना। वर्षा होने से अच्छी फसल पैदा होती है।

(ग) पानी के बिना मवेशी और खेतों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
पानी के बिना मवेशी प्यासे मर जाते हैं। खेत सूख जाते हैं।

(घ) इस कविता में देश के प्रत्येक नागरिक को क्या सीख दी गई है ?
उत्तर :
इस कविता में देश के प्रत्येक नागरिक को पानी को नष्ट और प्रदूषित और व्यर्थ न करने की सीख दी गई है।

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(ङ) पानी का स्वभाव कैसा है ?
उत्तर :
पानी का स्वभाव मिलनसार है। वह जिसमें मिलता है उसी का ही रूप धारण कर लेता है।

5. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

(क) ‘पानी से ——— सुहानी दे।’ कविता की इन पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें?
उत्तर :
उत्तर के लिए व्याख्या भाग देखिए।

(ख) जीवन में पानी की आवश्यकता क्यों है? कविता के आधार पर उत्तर दें।
उत्तर :
पानी जीवन का आधार है। इसी से जीवन चलता है। यही गर्मी और लू से बचाता है। इसी से अनाज पैदा होता है। इसलिए जीवन में पानी की आवश्यकता है।

(ग) दूसरों के दुःख में हम उनकी क्या सहायता कर सकते हैं?
उत्तर :
दूसरों के दुःख को हम अपना समझ सकते हैं। उनके प्रति संवेदना एवं सहानुभूति प्रकट कर सकते हैं।

(घ) जहाँ पानी की अधिकता बाढ़ की स्थिति पैदा करती है वहीं पानी की कमी सूखे की स्थिति पैदा करती है। इन दोनों स्थितियों में मानव तथा प्रकृति प्रभावित होती है। इन दोनों स्थितियों में मानव तथा प्रकृति पर पड़ने वाले प्रभाव पर पाँच-पाँच वाक्य लिखें।
उत्तर :
मानव पर पड़ने वाले प्रभाव

  • मानव का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।
  • पीने योग्य पानी प्रदूषित हो जाता है।
  • जीवन रुक जाता है।
  • खेती-बाड़ी नष्ट हो जाती है।
  • हैजा, चेचक आदि रोग बढ़ जाते हैं।

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प्रकृति पर पड़ने वाले प्रभाव-

  • पेड़-पौधे नष्ट हो जाते हैं।
  • प्रदूषण फैल जाता है।
  • वायु प्रदूषित हो जाती है।
  • पेड़-पौधे सूख जाते हैं।
  • खेती नष्ट हो जाती है।
  • खेती सूख जाती है।

6. पर्यायवाची शब्द लिखें :

  1. पानी = …………………………
  2. मीह = …………………………
  3. सीख = …………………………
  4. जन = …………………………
  5. दुःख = …………………………
  6. आँख = …………………………
  7. धरती = …………………………

उत्तर :

  1. पानी = जल, नीर
  2. मीह = वर्षा, बारिश
  3. सीख = शिक्षा, ज्ञान
  4. जन = लोग, नर
  5. दुःख = पीड़ा, कष्ट
  6. आँख = नेत्र, चक्षु
  7. धरती = धरा, पृथ्वी।

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रचनात्मक अभिव्यक्ति :

(क) मौखिक अभिव्यक्ति – पानी बचाने के उपायों पर कक्षा में चर्चा करें।
(ख) लिखित अभिव्यक्ति – आँखों में पानी आना, पानी-पानी होना आदि ‘पानी’ से संबंधित मुहावरे एकत्र करें।
(ग) रचनात्मक कार्य – जल संकट की रोकथाम के लिए कुछ सुझाव स्पष्ट करने वाले पोस्टर बनायें और अपनी कक्षा में दीवार पर लगायें।
उत्तर :
छात्र अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या शिक्षा दी है?
उत्तर :
इस कविता के माध्यम से कवि ने यह शिक्षा दी है जल ही जीवन है इसलिए हमें जल को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। हमें जल को न तो नष्ट करना चाहिए और न ही उसे व्यर्थ गंवाना चाहिए।

प्रश्न 2.
पानी और खेतों का परस्पर क्या सम्बन्ध है?
उत्तर :
पानी और खेतों का परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। खेती पानी पर ही आधारित होती है। यदि पानी ही नहीं होगा तो खेत सूखकर नष्ट हो जायेंगे।

प्रश्न 3.
पानी के बिना क्या-क्या व्यर्थ है?
उत्तर :
पानी के बिना खेत, कत्था, चूना व्यर्थ है। पानी के बिना जीवन व्यर्थ है। इसके बिना मवेशी, वन और बूटे व्यर्थ हैं।

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प्रश्न 4.
पानी की क्या विशेषता है?
उत्तर :
पानी का अपना कोई रंग नहीं होता है। अपनी कोई उमंग नहीं होती। यह जिसमें मिलता है उसी में मिल जाता है। यह गम में आँखों में आ जाता है और खुशी में रुला देता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
धरती किस से झुलसी है?
(क) पाप से
(ख) लू से
(ग) संताप से
(घ) युद्ध की विभीषिका से।
उत्तर :
लू से।

प्रश्न 2.
कवि रब्बा से क्या माँगता है?
(क) दया
(ख) करुणा
(ग) धूप
(घ) वर्षा।
उत्तर :
वर्षा।

प्रश्न 3.
जीवन की कश्ती को गति कौन देता है?
(क) मांझी
(ख) पानी
(ग) लू
(घ) आंधी।
उत्तर :
पानी।

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प्रश्न 4.
कवि किसे प्रदूषित नहीं करने के लिए कहता है?
(क) पानी को
(ख) वातावरण को
(ग) अन्न को
(घ) मन को।
उत्तर :
पानी को।

प्रश्न 5.
पानी का स्वभाव कैसा है?
(क) क्रोधी
(ख) घमंडी
(ग) मिलनसार
(घ) एकांतप्रिय।
उत्तर :
मिलनसार।

रब्बा मीह दे-पानी दे Summary in Hindi

रब्बा मीह दे-पानी दे कविता का सार

‘रब्बा मीह दे-पानी दे’ कविता विनोद शर्मा द्वारा रचित है। इसमें कवि ने ईश्वर से वर्षा करने की प्रार्थना की है। कवि ईश्वर से प्रार्थना कर कह रहा है कि हे प्रभु ! वर्षा करो और गर्मी से झुलसी धरती को ठंडा कर नया जीवन दो। पानी से खेतों में सोना उगता है। पानी से सब दुगुना है बिना पानी के कत्था और चूना भी व्यर्थ है। पानी ही जीवन का आधार है। उसके बिना जीवन खत्म हो जाता है। पानी से खेतों में हरियाली और खुशहाली होती है।

मवेशी, प्राणी और पेड़-पौधे पानी बिना जी नहीं सकते। पानी को नष्ट और प्रदूषित न करने का आह्वान किया है। चाहे पानी का कोई रंग नहीं है। फिर भी यह जिसमें मिल जाता है उसी रंग में खिल जाता है। दु:ख के समय आंखों में आ जाता है और खुशी में रुला देता है।

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रब्बा मीह दे-पानी दे सप्रसंग व्याख्या

1. रब्बा मीह दे-पानी दे, पानी दे, पानी दे।
लू से झुलसी धरती को, इक नई जिन्दगानी दे॥

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प्रसंग-यह काव्य-पंक्तियाँ विनोद शर्मा द्वारा रचित ‘रब्बा मीह दे-पानी दे’ शीर्षक कविता से ली गई हैं। इसमें कवि ने ईश्वर से वर्षा लाने की प्रार्थना की है।

व्याख्या-कवि ईश्वर से प्रार्थना कर कहते हैं कि हे प्रभु ! वर्षा करो और पानी दीजिए तुम इतना पानी दो जिससे गर्मी एवं लू की लपटों से जलती हुई धरती शीतल हो जाए और लोगों को एक नया जीवन मिले। सबको नई ज़िन्दगी प्रदान करो।

भावार्थ-प्रभु से वर्षा करने की प्रार्थना की है।

2. पानी से खेतों में सोना, नाचे गेहूँ-गाए झोना।
पानी है तो सब है दूना, बिन पानी कत्था क्या चूना।
पानी है तो है ज़िन्दगानी, पानी खत्म तो खत्म कहानी।
जीवन की कश्ती को, आकर नई रवानी दे।
रब्बा मीह दे………………….

प्रसंग-यह पद्यांश विनोद शर्मा द्वारा लिखित ‘रब्बा मीह दे-पानी दे’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने ‘जल ही जीवन है’ बताते हुए प्रभु से वर्षा लाने की प्रार्थना की है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे

व्याख्या-हे प्रभु ! पानी से ही खेतों में सोना उगता है। इसी से गेहूँ नाचने लगता है और चना गाने लगता है। पानी से ही सब कुछ दुगुना होता है बिना पानी के कत्था और चूना भी बेकार है। पानी ही जीवन है। यही जीवन का आधार है। पानी के नष्ट होने से ही सब कुछ नष्ट हो जाएगा। हे प्रभु ! तुम आकर जीवन की किश्ती को नई रवानी प्रदान करो।

भावार्थ-पानी ही जीवन है। इस भाव को दर्शाया गया है।

3. पानी से हरियाली होती-खेतों में खुशहाली होती।
क्या मवेशी क्या वन या बूटे-पानी बिन जीवन से छूटे।
आओ, पानी नष्ट करें न, प्रदूषित या व्यर्थ करें न।
मेरे देश के जन-जन को, यह सीख सुहानी दे॥
रब्बा मीह दे………………..

प्रसंग-प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ कवि विनोद शर्मा द्वारा रचित कविता ‘रब्बा मीह दे पानी दे’ नामक कविता से ली गई हैं। इनमें कवि ने प्रभु से वर्षा लाने की प्रार्थना की है।

व्याख्या-कवि कहता है कि पानी से ही खेतों में हरियाली और खुशहाली होती है। मवेशी, वन और पेड़-पौधे का पानी के बिना जीवन नष्ट हो जाएगा। कवि लोगों को प्रेरणा देते हुए कहता है कि आओ हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हमें पानी को नष्ट नहीं करना चाहिए और प्रदूषित अथवा व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। हे प्रभु ! इस देश के प्रत्येक व्यक्ति को यह सुहानी शिक्षा दें कि न पानी को नष्ट करे और न ही प्रदूषित करें। हे प्रभु ! वर्षा दें।

भावार्थ-पानी को बचाने की प्रेरणा दी गई है।

4. चाहे इसका रंग नहीं है-अपनी कोई उमंग नहीं है।
फिर भी यह जिसमें मिल जाता-उसके रंग में ही खिल जाता।
ग़म में आँखों में आ जाता और खुशी में यही रुलाता,
पर-दुःख को अपना समझे-हर आँख को पानी दे।
रब्बा मीह दे……………………

प्रसंग-यह पद्यांश विनोद शर्मा द्वारा रचित ‘रब्बा मीह दे-पानी दे’ कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने प्रभु से लोगों में दूसरे के दुःख को समझने की प्रार्थना की है।

व्याख्या-कवि कहता है कि चाहे पानी का अपना कोई रंग नहीं है उसकी अपनी कोई उमंग नहीं है। फिर भी यह जिस रंग में मिल जाता है उसके रंग में ही खिल जाता है। दुःख में यह आँखों में आ जाता है और खुशी में रुला देता है। हे प्रभु ! हर कोई दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझे इसलिए हर आँख में पानी आ जाए। वर्षा प्रदान करो।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 10 रब्बा मीह दे-पानी दे

भावार्थ-दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझने की प्रेरणा दी है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

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PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 9 मन के जीते जीत (2nd Language)

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PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

मन के जीते जीत अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 2
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 3
उत्तर :
छात्र स्वयं अभ्यास करें।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 4
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 5
उत्तर :
छात्र स्वयं पढ़ें एवं लिखें।

3. शब्दार्थ :

  • विकलांग = अंग से हीन, बेकाम अंग वाला
  • अनथक = न थकने वाला
  • दूषित – गंदा, मैला
  • कर्णप्रिय = कानों को प्रिय लगने वाला
  • विभूतियाँ – ऐश्वर्यशाली व्यक्तित्व
  • अस्थि = हड्डी
  • अन्यत्र = दूसरी जगह, और कहीं
  • व्यक्तित्व = व्यक्ति की विशेषता या गुण
  • कंठहार = गले का हार
  • एकाग्रता = तल्लीन होने का भाव
  • बुलंदी = ऊँचाई, उत्कर्ष
  • जज़्बा = भाव, जोश, भावना

उत्तर :
छात्र स्वयं अभ्यास करें।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) जीवन में मुश्किलों से पार कौन लोग जा पाते हैं ?
उत्तर :
जीवन में मुश्किलों से पार वही लोग जा पाते हैं जो मुसीबतों और रुकावटों के आगे सिर नहीं झुकाते। उनका साहस एवं दृढ़ विश्वास के साथ सामना करते हैं।

(ख) राजा जनक के दरबार में अष्टावक्र को देखकर सभी क्यों हँसने लगे?
उत्तर :
राजा जनक के दरबार में अष्टावक्र को देखकर सभी हँसने लगे क्योंकि उनका शरीर टेढ़ा-मेढ़ा था। उनके शरीर में आठ वक्र थे।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

(ग) राजा जनक तथा दरबारी अष्टावक्र के सामने क्यों नतमस्तक हुए?
उत्तर :
अष्टावक्र के ज्ञान विद्वता के कारण राजा जनक तथा दरबारी नतमस्तक हो गए।

(घ) सूरदास ने किसकी आराधना में काव्य रचना की?
उत्तर :
सूरदास ने श्रीकृष्ण की आराधना में काव्य रचना की।

(ङ) जायसी के प्रसिद्ध महाकाव्य का नाम लिखें।
उत्तर :
पद्मावत।

(च) रामानन्द सागर द्वारा टेलीविज़न पर प्रसारित प्रख्यात धारावाहिक ‘रामायण’ में संगीत मुख्य रूप से किसने दिया?
उत्तर :
रवीन्द्र जैन ने रामायण में संगीत दिया।

(छ) बिजली के बल्ब का आविष्कार किसने किया?
उत्तर :
थामस अल्वा एडीसन ने बिजली के बल्ब का आविष्कार किया।

(ज) ब्रेल लिपि का आविष्कार किसने किया?
उत्तर :
ब्रेल लिपि का आविष्कार लई ब्रेल ने किया।

(झ) महाराजा रणजीत सिंह ने कितनी आयु में लाहौर पर अधिकार कर लिया था?
उत्तर :
उन्नीस वर्ष की आयु में।

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(ज) बाबा आम्टे को भारत सरकार ने समाज सेवा के लिए पद्मश्री तथा पद्मभूषण का सम्मान कब दिया?
उत्तर :
बाबा आम्टे को भारत सरकार ने समाज सेवा के लिए पद्मश्री 1971 ई० में तथा पद्मभूषण सन् 1986 ई० में दिया।

5. इन प्रश्नों के उत्तर लगभग चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

(क) राजा जनक के दरबार में अष्टावक्र को देखकर जब सभी हँसने लगे तो अष्टावक्र ने क्या कहा?
उत्तर :
अष्टावक्र ने कहा कि गन्ने के टेढ़े-मेढ़े होने से उसकी मिठास में कमी नहीं आती। फूल की पंखुड़ी के टेढ़े होने से उसकी खुशबू खत्म नहीं हो जाती और नदी की धारा के टेढ़े होने से उसका जल दूषित नहीं हो जाता।

(ख) शेरशाह क्यों लज्जित हुआ और उसने जायसी को क्यों सम्मान दिया?
उत्तर :
जायसी के मुख से मोहि का हँससि के कोहरहिं? अर्थात् तुम मुझ पर हँसे हो अथवा उस ईश्वर रूपी कुम्हार पर हँस रहे हो यह सुनकर शेरशाह लज्जित हुआ और उसने जायसी को उनकी विद्वता के कारण सम्मान दिया।

(ग) थामस एडीसन के ध्वनि संबंधी आविष्कारों से लोग क्यों आश्चर्यचकित हो जाते थे?
उत्तर :
लोग इसलिए आश्चर्यचकित हो जाते थे कि जो व्यक्ति पूरी तरह स्वयं नहीं सुन सकता। वह किस प्रकार ध्वनि के हर पहलू को अच्छी प्रकार से समझ लेता है।

(घ) लुई ब्रेल द्वारा नेत्रहीनों के पढ़ने के लिए बनाई लिपि की क्या विशेषता है?
उत्तर :
ब्रेल लिपि कागज़ पर उभरे हुए चिहन होते हैं जिन्हें स्पर्श करके लोग पढ़ते हैं।

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(ङ) बाबा आम्टे का समाज सेवा में क्या योगदान रहा?
उत्तर :
बाबा आम्टे सारी उम्र कुष्ठ रोगियों तथा समाज से परित्यक्त लोगों की सेवा में लगे रहे। इन्हीं की प्रेरणा से आनंदवन आश्रम के अनेक कुष्ठ रोगियों ने भीख मांगना छोड़कर स्वयं श्रम करना आरंभ कर दिया। इस तरह बाबा आम्टे का समाज सेवा में महान् योगदान रहा है।

(च) भारतीय स्पिनर चन्द्रशेखर का क्रिकेट में क्या योगदान रहा?
उत्तर :
चंद्रशेखर का एक हाथ पोलियोग्रस्त हो गया था किन्तु वह इसी हाथ से गेंदबाजी करते थे और बल्लेबाजों को पैविलियन पहुंचा देते थे। उन्होंने 58 टैस्ट मैच खेले तथा 7199 रन देकर 242 विकेट लिए।

(छ) राणा सांगा और महाराजा रणजीत सिंह की वीरता के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
राणा सांगा की वीरता एवं साहस से बड़े-बड़े शासक थर-थर काँपते थे। उन्होंने इब्राहिम लोदी जैसे अनेक शत्रुओं को पराजित किया। महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी वीरता से केवल उन्नीस वर्ष की आयु में लाहौर पर अधिकार कर लिया था। इसके बाद धीरे-धीरे जम्मू कश्मीर, अमृतसर, मुलतान, पेशावर आदि पर अधिकार कर लिया।

(ज) भाग्य संवरता नहीं, संवारना पड़ता है – इन पंक्तियों में लेखक क्या कहना चाहता है ?
उत्तर :
इन पंक्तियों में लेखक कहना चाहता है कि व्यक्ति का भाग्य अपने आप नहीं संवरता बल्कि वह परिश्रम, आत्मविश्वास एवं दृढ़ निश्चय से बदला जाता है। इसके लिए हमें लगातार कठिन संघर्ष करना पड़ता है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

6. इन मुहावरों के अर्थ बताते हुए उन्हें वाक्यों में प्रयोग करें :

  1. घुटने टेकना
  2. सिर न झुकाना
  3. दाँत खट्टे करना
  4. लोहा मनवाना
  5. थर-थर काँपना
  6. बुलंदियाँ छूना

उत्तर :

  1. घुटने टेकना = हारना-दुश्मनों ने भारतीय सेना के सामने घुटने टेक दिए।
  2. सिर न झुकाना = हार न मानना-साहसी लोग कभी मुसीबतों के सामने सिर नहीं झुकाते।
  3. दाँत खट्टे करना = बुरी तरह हराना-कारगिल में भारतीय सेना ने शत्रुओं के दाँत खट्टे कर दिए।
  4. लोहा मनवाना = जय-जयकार करवाना-महाराजा रणजीत सिंह ने अपने साहस एवं बल से दुनिया में लोहा मनवाया।
  5. थर-थर काँपना = डरना-शेर को देखकर रवि थर-थर काँपने लगा।
  6. बुलंदियाँ छूना = तरक्की करना-रवि अपनी मेहनत से बुलंदियाँ छू रहा है।

7. इन शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें :

  1. चुनौती = _____________
  2. सेवा = _____________
  3. अनूठा =_____________
  4. पुरस्कार = _____________
  5. दृढ़ता = _____________
  6. हाथ = _____________
  7. उपहास =_____________
  8. अधिकार = _____________
  9. शक्ति = _____________
  10. भाग्य = _____________
  11. मस्तिष्क = _____________
  12. लक्ष्य = _____________
  13. प्रयत्न = _____________
  14. पैर = _____________
  15. अध्यापक = _____________
  16. अंधकार = _____________
  17. लज्जित = _____________
  18. जल = _____________

उत्तर :

  1. चुनौती = ललकार, आह्वान
  2. सेवा = परिचर्या, खिदमत
  3. अनूठा = अनुपम, अनोखा
  4. पुरस्कार = उपहार, इनाम
  5. दृढ़ता = मज़बूती, प्रगाढ़ता
  6. हाथ = हस्त, कर
  7. उपहास = हँसी, दिल्लगी
  8. अधिकार = हक़, प्रभुत्व
  9. शक्ति = बल, पौरुष
  10. भाग्य = किस्मत, तकदीर
  11. मस्तिष्क = भेजा, दिमाग
  12. लक्ष्य = मंजिल, उद्देश्य
  13. प्रयत्न = प्रयास, कोशिश
  14. पैर = पाँव, चरण
  15. अध्यापक = शिक्षक, गुरु
  16. अंधकार = अन्धेरा, तम
  17. लज्जित = शर्मसार, शर्मिंदा
  18. जल = पानी, नीर।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

8. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखें :

  1. जिसे आँखों से दिखाई न देता हो _____________
  2. गले का हार _____________
  3. संगीत देने वाला _____________
  4. अपने पर विश्वास होना _____________
  5. जिसका कोई मोल न हो _____________
  6. कानों को प्रिय लगने वाला _____________
  7. आविष्कार करने वाला _____________

उत्तर :

  1. जिसे आँखों से दिखाई न देता हो – नेत्रहीन
  2. गले का हार – कंठहार
  3. संगीत देने वाला – संगीतकार
  4. अपने पर विश्वास होना – आत्मविश्वास
  5. जिसका कोई मोल न हो – अनमोल
  6. कानों को प्रिय लगने वाला – कर्णप्रिय
  7. आविष्कार करने वाला – आविष्कारक

रचनात्मक अभिव्यक्ति :

(क) मौखिक अभिव्यक्ति – इस पाठ में आप किस महान विभूति से प्रेरित हुए हैं ? क्यों ?
उत्तर :
इस पाठ में अनेक महान् विभूतियां हैं जिन्होंने अपनी विकलांगता पर विजय पाकर भी महानता प्राप्त की। हम महाराणा रणजीत सिंह से प्रेरित हुए क्योंकि वे अधिक साहसी, वीर बलशाली, निडर योद्धा थे। वे बहुत दयालु, दयावान एवं धैर्यशाली थे।

(ख) लिखित अभिव्यक्ति – मन के जीते जीत, मन के हारे हार है– पर पाँच-सात वाक्य लिखें।
उत्तर :

  • मन पर विजय पाने से ही उन्नति होती है।
  • मन विजयी है तो तभी मनुष्य विकास कर सकता है।
  • यदि मन हार जाए तो आदमी हार जाता है।
  • मन की जीत से ही जीवन का विकास सम्भव हो सकता है।
  • मन सभी ज्ञानेन्द्रिय से महत्त्वपूर्ण है।
  • वह मन एक सारथि के समान है जो अन्य सभी को अपने अनुसार चलाता है।

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10. इस पाठ में आए ‘र’ वर्ण के प्रयोग वाले शब्द ढूँढकर लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 1
उत्तर
[ र ] : भारत, राणा, द्वारा
[ ‘ ] : स्पर्श, अर्जुन, दुर्लभ
[ , ] : अष्टावक्र, ब्रेल, माइक्रोफोन
[ ^ ] : रवीन्द्र, महाराष्ट्र, केन्द्रित।

11. इन शब्दों के विशेषण बनाएं :

भारत _____________
सम्मान _____________
स्वर्ग _____________
साहित्य _____________
प्रभाव _____________
दया _____________

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मनुष्य कब निराश एवं हताश हो जाता है?
उत्तर :
जब मनुष्य के अपने जीवन में चारों तरफ अंधेरा दिखाई देता है। कहीं कोई रास्ता नजर नहीं आता। वह संघर्ष करने की अपेक्षा अपने भाग्य को कोसने लगता है तब निराश एवं हताश हो जाता है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

प्रश्न 2.
अपने भाग्य को कौन लोग कोसते हैं?
उत्तर :
जो लोग मुसीबतों एवं रुकावटों का डटकर सामना नहीं करते और उनके आगे हार मान लेते हैं वही भाग्य को कोसते हैं।

प्रश्न 3.
मुश्किलों से कौन लोग पार पा सकते हैं?
उत्तर :
मुश्किलों से वही लोग पार पा सकते हैं कि जो उनके आगे सिर नहीं झुकाते बल्कि उनका साहस, आत्मविश्वास एवं दृढ़ता से सामना करते हैं।

प्रश्न 4.
लेखक ने किन-किन महान् विभूतियों का चित्रण किया है?
उत्तर :
लेखक ने निम्नलिखित महान् विभूतियों का चित्रण किया है

  • अष्टावक्र
  • सूरदास
  • जायसी
  • भारतीय संगीतकार रवीन्द्र जैन
  • विश्व के महान् आविष्कारक थामस अल्वा एडीसन
  • लुई ब्रेल
  • बाबा आम्टे
  • भारतीय स्पिनर चंद्रशेखर
  • राणा सांगा
  • महाराजा रणजीत सिंह।

प्रश्न 5.
महाराजा रणजीत सिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
महाराजा रणजीत सिंह के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएं हैं

  • महान् वीर-महाराजा रणजीत सिंह एक महान् वीर सेनानी थे।
  • न्याय प्रिय-वे बहुत न्यायप्रिय शासक थे।
  • दयालुता-वे बहुत दयालु थे। उनकी दयालुता सुप्रसिद्ध है।
  • दानशीलता-वे गरीबों को बहुत दान दिया करते थे। उनकी दानशीलता चारों ओर प्रसिद्ध है।

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प्रश्न 6.
भक्तिकाल में सूरदास पर एक नोट लिखो।
उत्तर :
हिन्दी-साहित्य के भक्तिकाल में सूरदास का नाम बहुत प्रसिद्ध है। वे जन्म से ही नेत्रहीन थे। उन्होंने अपने आराध्य श्रीकृष्ण की लीलाओं का बहुत सजीव एवं प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया है। उन जैसा लीला वर्णन अन्यत्र दुलर्भ है। उनकी अमरवाणी जन-जन का कंठहार बनी हुई है।

प्रश्न 7.
रवीन्द्र जैन कौन थे? उनके चरित्र की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर :
रवीन्द्र जैन भारतीय सिनेमा के सुप्रसिद्ध संगीतकार थे। उनके चरित्र की विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  • दृढ़ इच्छा शक्ति-उनमें दृढ़ इच्छा शक्ति थी।
  • एकाग्रता-उनका मन एकाग्रता से मुक्त था। इसी के कारण वे महान् बने।
  • आत्मविश्वास-उनमें अटूट आत्मविश्वास था।

प्रश्न 8.
थामस अल्वा एडीसन ने कौन-से आविष्कार किए हैं?
उत्तर :
थामस अल्वा एडीसन ने बल्ब, माइक्रोफोन, फोनोग्राफ, कार्बन टेलिफोन, ट्रांसमीटर आदि हजारों आविष्कार किए हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित सही कथन पर सही () और गलत कथन पर गलत () का निशान लगाइए:

(क) धर्म शब्द में आधे ‘र’ (रेफ) का प्रयोग हुआ है।
उत्तर :
() सही।

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बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
जीवन में आने वाली मुश्किलों का करना चाहिए
(क) घबराना चाहिए
(ख) भागना चाहिए
(ग) सामना करना चाहिए
(घ) आँखें मूंद लेना चाहिए।
उत्तर :
(ग) सामना करना चाहिए

प्रश्न 2.
अष्टावक्र किस युग में हुए थे?
(क) सतयुग
(ख) त्रेतायुग
(ग) द्वापर युग
(घ) कलयुग।
उत्तर :
(ख) त्रेतायुग

प्रश्न 3.
अष्टावक्र किसके दरबार में गए थे?
(क) दशरथ
(ख) जनक
(ग) रावण
(घ) बालि।
उत्तर :
(ख) जनक

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प्रश्न 4.
अष्टावक्र के किस गुण से सभी नतमस्तक हुए?
(क) वीरता
(ख) दया
(ग) विद्वता
(घ) करुणा।
उत्तर :
(ग) विद्वता

प्रश्न 5.
भक्तिकाल में प्रसिद्ध कृष्णभक्त जन्मांध कवि कौन था?
(क) नंददास
(ख) सूरदास
(ग) कृष्णदास
(घ) गोपालदास।
उत्तर :
(ख) सूरदास

प्रश्न 6.
शेरशाह ने किस कवि का उपहास उड़ाया था?
(क) रसखान
(ख) जायसी
(ग) सूरदास
(घ) रामदास।
उत्तर :
(ख) जायसी

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प्रश्न 7.
रवीन्द्र जैन फिल्म जगत के क्या थे?
(क) निर्देशक
(ख) संगीतकार
(ग) नायक
(घ) खलनायक।
उत्तर :
(ख) संगीतकार

प्रश्न 8.
थामस अल्बा एडिसन किस शक्ति से रहित थे?
(क) श्रवण की
(ख) देखने की
(ग) बोलने की
(घ) चलने की।
उत्तर :
(क) श्रवण की

प्रश्न 9.
कुष्ट रोगियों की सेवा किसने की?
(क) विनोबा भावे
(ख) महात्मा गांधी
(ग) बाबा आम्टे
(घ) बाबा साहब अंबेडकर।
उत्तर :
(ग) बाबा आम्टे

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प्रश्न 10.
महाराजा रणजीत सिंह ने किस कारण एक आँख खो दी थी?
(क) चोट के
(ख) चेचक के
(ग) कैंसर के
(घ) तीर लगने से।
उत्तर :
(ख) चेचक के

मन के जीते जीत Summary in Hindi

मन के जीते जीत पाठ का सार

‘मन के जीते जीत’ लेखक डॉ० सुनील बहल द्वारा लिखित है। इसमें लेखक ने मन पर विजय पाने से ही सफलता मिलती है-इसका वर्णन किया है। जीवन में छोटी-बड़ी परेशानियां सबके जीवन में आती हैं। हम उनके आने से निराश हो जाते हैं। सभी के जीवन में मुश्किल घड़ियां आती हैं किन्तु इन पर वही विजय प्राप्त करते हैं जो मुश्किलों के सामने घुटने नहीं टेकते बल्कि उनका साहस के साथ मुकाबला करते हैं।

दुनिया में सामान्य लोगों ने ही नहीं बल्कि विकलांग लोगों ने भी ऐसा साहस दिखाया है, जिसके कारण उनकी विकलांगता उनके सामने झुक गई। त्रेतायुग में अष्टावक्र विकलांग हुए जो आठ जगह से टेढ़े थे। एक बार उन्हें राजा जनक के दरबार में देखकर सब हँसने लगे तो अष्टावक्र ने उन्हें बताया कि गन्ने के टेढ़े-मेढ़े होने से उसकी मिठास कम नहीं होती न फूल की पंखुड़ी टेढ़े होने से उसकी खुशबू खत्म होती है, न नदी की धारा टेढ़ी होने से उसका जल दूषित होता है। यह सुनकर राजा जनक तथा दरबारी बहुत लज्जित हुए और उसकी विदवता के सामने नतमस्तक भी हुए।

हिंदी-साहित्य में भक्तिकाल में सूरदास जो जन्म से ही अन्धे थे। किन्तु उन्होंने श्री कृष्ण की लीलाओं का बहुत ही सजीव वर्णन किया है जो संसार में दुर्लभ है। इसी तरह जायसी भी एक आँख और एक कान से रहित थे। शेरशाह के उपहास उड़ाने पर उन्होंने उनको कहा था कि तुम मुझ पर हँसों अथवा उस ईश्वर पर जिसने मुझे बनाया है। इससे शेरशाह बहुत लज्जित हुए थे। जायसी का महाकाव्य पद्मावत बहुत प्रसिद्ध है। नेत्रहीन एवं गरीब मिल्टन कभी जीवन से निराश नहीं हुए इसीलिए अंग्रेजी साहित्य में उनका अद्वितीय स्थान रहा।

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भारतीय सिनेमा में रवीन्द्र जैन की दृढ़ इच्छा शक्ति, एकाग्रता और आत्म विश्वास के आगे अपनी विकलांगता को भी हरा दिया। वे अद्भुत संगीतकार थे। इन्होंने रामानंद सागर द्वारा प्रसारित ‘रामायण’ में भी संगीत दिया। इसके साथ अलिफ लैला, जय हनुमान, श्री कृष्ण आदि महान् धारावाहिकों में सभी कर्णप्रिय संगीत दिया।

विश्व के महान् आविष्कारक थामस अल्वा एडीसन सुनने की श्रवण शक्ति खो चुके थे। किन्तु वे जीवन से निराश नहीं हुए। उन्होंने अपने साहस के बल पर हजारों आविष्कार किए। बिजली के बल्ब का आविष्कार उनकी बड़ी उपलब्धि है। तीन वर्ष की आयु में नेत्रहीन हो जाने वाले लुई ब्रेल भी अपनी इच्छा शक्ति के बल पर नेत्रहीन स्कूल में पढ़े और अध्यापक बने। उन्होंने अपने अनथक प्रयासों से नेत्रहीनों के किए ब्रेल नामक लिपि का आविष्कार किया जो दुनिया में आज भी प्रयुक्त हो रही है।

महान् समाज सेवी बाबा आम्टे को कौन नहीं जानता। वे भयंकर अस्थि विकलांगता से पीड़ित थे किन्तु फिर भी इन्होंने सारी उम्र कुष्ट रोगियों की सेवा की। इनको समाज सेवा के कारण ही भारत सरकार ने सन् 1971 ई० में पदम्श्री तथा सन् 1986 ई० में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया। भारतीय क्रिकेट में भी विकलांग होने के बावजूद स्पिनर चंद्रशेखर ने क्रिकेट में अपनी जगह बनाई। उनका एक हाथ पोलियोग्रस्त था किन्तु वे उसी हाथ से गेंदबाजी करते थे। उन्होंने भारतीय टीम की ओर से 58 टैस्ट मैच तथा 7199 रन देकर 242 विकट लिए। उन्हें अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया।

भारतीय इतिहास में वीर राणा सांगा, जिन्होंने बचपन में अपनी एक आँख खो दी थी, अपने वीरता बल एवं साहस से दुनिया में अपनी ताकत का लोहा मनवाया। युद्ध में एक पैर और हाथ भी खो दिया पर वे इससे बिल्कुल भी घबराये नहीं। इन्होंने इब्राहिम लोदी जैसे अनेक विरोधियों को हराया।

इसी तरह महाराजा रणजीत सिंह की चेचक के कारण एक आँख खराब थी किन्तु फिर भी उन्होंने उन्नीस वर्ष की आयु में लाहौर पर अधिकार कर लिया था और धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर, अमृतसर, मुलतान, पेशावर आदि क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। उन्हें कुशल प्रबन्ध, वीरता, न्यायप्रियता, दयालुता और दानशीलता के कारण जाना जाता है।

इस प्रकार यदि मनुष्य के दिल में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो मुसीबतें हार जाती हैं इसलिए हमें अपने आत्म-विश्वास, दृढ़ निश्चय, चित्र की एकाग्रता और अपनी शक्तियों को केंद्रित करके अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। यह सत्य है कि ईश्वर भी केवल साहसी लोगों की ही सहायता करते हैं।

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मन के जीते जीत शब्दार्थ :

  • हताश = निराश।
  • विकलांगता = विकलांग पन।
  • विभूतियों = महान् व्यक्तियों।
  • अष्टावक्र = आठ वक्र वाला।
  • दूषित = खराब।
  • विद्वता = ज्ञान, बुद्धि।
  • नतमस्तक = सुभगाय।
  • नेत्रहीन = अंधा।
  • दुर्लभ = कठिन।
  • अन्यत्र = दूसरी जगह, कठहार वाले का हार।
  • उपहास = मजाक।
  • निस्संदेह = वास्तव में।
  • अस्थि = हड्डी।
  • परितयक्त = त्यागे हुए।
  • अनथक = बिना थके।
  • तमन्ना = इच्छा।
  • ज़ज्बा = साहस।

मन के जीते जीत सप्रसंग व्याख्या

1. बच्चो ! हम जीवन में आने वाली छोटी-छोटी परेशानियों से निराश और हताश हो जाते हैं। हमें अपने चारों ओर अंधकार ही अंधकार दिखाई देता है। कहीं कोई रास्ता दिखाई नहीं देता। हम थक कर बैठ जाते हैं। कभी भाग्य को, कभी अपने आपको तो कभी किसी को कोसने लगते हैं। पर मोचो ! रुकावटें किसके रास्ते में नहीं आती? सभी के जीवन में मुश्किल भरे पल आते हैं किन्तु उन मुश्किलों से पार वे ही जा पाते हैं जो उनके आगे सिर नहीं झुकाते, उनका दृढ़ता से सामना करते हैं। सामान्य व्यक्तियों की तो बात ही छोड़ो, दुनिया में ऐसे विकलांग व्यक्ति भी हुए हैं जिन्होंने अपनी विकलांगता को चुनौती के रूप में लिया और परिणाम यह हुआ कि खुद विकलांगता ने ही उनके अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय के आगे घुटने टेक दिये।

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प्रसंग-यह गद्यांश लेखक डॉ० सुनील बहल द्वारा रचित ‘मन के जीते जीत’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने बच्चों के जीवन में आने वाली मुसीबतों का डटकर सामना करने की प्रेरणा दी है।

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व्याख्या-लेखक बच्चों को प्रेरणा देते हुए कहता है कि हे बच्चो! हम जीवन में आने वाली छोटी-छोटी परेशानियों एवं कठिनाइयों से निराश एवं हताश हो जाते हैं। हमें अपने चारों तरफ अन्धेरा ही अन्धेरा दिखाई देता है। कहीं भी कोई रास्ता नज़र नहीं आता जिससे हम थक हारकर बैठ जाते हैं। हम कुछ करने की अपेक्षा अपने भाग्य अपने आपको तथा किसी दूसरे को कोसने लगते हैं। परन्तु बच्चों तुम सोच विचार करो कि जीवन में किसके रास्ते में रुकावटें नहीं आतीं।

सभी के मार्ग में बाधाएं, मुसीबतें आती हैं। सभी के जीवन में मुश्किलों से भरे क्षण आते हैं किन्तु उन मुश्किलों पर वे ही लोग विजय प्राप्त कर पाते हैं जो उनके आगे अपना सिर नहीं झुकाते, उनसे हार नहीं मानते बल्कि उनका साहस के साथ मुकाबला करते हैं। सामान्य व्यक्तियों की बात तो छोड़िए दुनिया में ऐसे विकलांग व्यक्ति भी हुए हैं जिन्होंने अपनी विकलांगता को चुनौती के रूप में लिया अर्थात् विकलांग होते हुए भी संघर्ष और परिश्रम किया जिसके परिणाम यह हुआ कि विकलांगता स्वयं ही उनके अटूट साहस और दृढ़ निश्चय के सामने झुक गई।

भावार्थ-बच्चों को जीवन में साहस एवं दृढ़ निश्चय के साथ मुसीबतों का सामना करने की प्रेरणा दी है एवं विकलांगता पर विजय पाने वालों की ओर संकेत है।

2. त्रेता युग में एक विद्वान् हुए जिनका नाम था अष्टावक्र। जब उनका जन्म हुआ तो वे आठ जगह से टेढ़े थे। आठ प्रकार की वक्रता के कारण ही उनका नाम अष्टावक्र पड़ा। एक बार वे राजा जनक के दरबार में गये तो उसके टेढ़े-मेढ़े शरीर को देखकर सभी हँसने लगे। अष्टावक्र ने कहा, “गन्ने के टेढ़े-मेढ़े होने से उसकी मिठास में कमी नहीं आती। फूल की पंखुड़ी के टेढ़े होने से उसकी खुशबू खत्म नहीं हो जाती और नदी की धारा के टेढ़े होने से उसका जल दूषित नहीं हो जाता।” यह सुनकर राजा जनक तथा दरबारी न केवल लज्जित हुए बल्कि अष्टावक्र की विद्वता के सामने नतमस्तक हुए।

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प्रसंग-यह गद्यांश लेखक डॉ. सुनील वहल द्वारा रचित ‘मन के जीते जीत’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने त्रेतायुग में अपनी विकलांगता पर विजय पाने वाले विद्वान् अष्टावक्र का चित्रण किया है।

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व्याख्या-लेखक कहता है कि त्रेता युग में अष्टावक्र नामक एक महान् विद्वान् हुआ। वे अपने जन्म के समय से ही आठ जगह से टेढे थे। इसी आठ प्रकार के टेढेपन के कारण ही उनका नाम अष्टावक्र पड़ा था। एक बार वे राजा जनक के दरबार में गए तो उनके टेढ़े-मेढे शरीर को देखकर सभी लोग हँसने लगे।

उन्हें हँसता देखकर अष्टावक्र ने कहा कि गन्ने के टेढ़े-मेढ़े होने से उसकी मिठास में कमी नहीं आती। फूल की पंखुड़ी के टेढ़े होने से उसकी खुशबू खत्म नहीं होती तथा न ही नदी की धारा के टेढ़े होने से उसका जल दूषित हो जाता है। उनके मुख से इस बात को सुनकर राजा जनक तथा सभी दरबारी केवल लज्जित ही नहीं हुए बल्कि अष्टावक्र की विद्वता के सामने नतमस्तक भी हो गए।

भावार्थ-अष्टावक्र के गुणों और विद्वता का उल्लेख किया गया है।

3. भारतीय सिनेमा में प्रसिद्ध संगीतकार रवीन्द्र जैन का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। बचपन से ही इन्हें न के बराबर दिखाई देता था। आँखों के आप्रेशन के बाद भी इनकी आँखें ठीक नहीं हुईं किन्तु रवीन्द्र जैन की दृढ़ इच्छा शक्ति, एकाग्रता और आत्मविश्वास के आगे विकलांगता की एक न चली। उन्होंने फिल्मों में अद्भुत संगीत दिया। जो आज भी लोगों के मन-मस्तिष्क पर छाया हुआ है। रामानन्द सागर द्वारा टेलीविज़न पर प्रसारित ‘रामायण’ में भी इन्होंने ही संगीत दिया जो बहुत लोकप्रिय हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने अलिफ लैला, जय हनुमान, श्रीकृष्ण आदि धारावाहिकों में भी कर्णप्रिय संगीत दिया।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 8

प्रसंग-यह पंक्तियाँ डॉ० सुनील बहल द्वारा लिखित ‘मन के जीते जीत’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने सुप्रसिद्ध संगीतकार रवीन्द्र जैन के संघर्ष का वर्णन किया है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि भारतीय सिनेमा में प्रसिद्ध संगीतकार रवीन्द्र जैन का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। बचपन से ही इन्हें न के बराबर दिखाई देता था। इन्होंने अपनी आँखों का आप्रेशन करवाया। इसके बाद इनकी आँखें ठीक ही नहीं हुईं। किन्तु रवीन्द्र जैन की दढ इच्छा शक्ति, एकाग्रता और अपने विश्वास के आगे इनकी विकलांगता हार गई।

अर्थात् इन्होंने अपने आत्मविश्वास के बल से अपनी विकलांगता पर विजय पा ली। इन्होंने फिल्मों में अद्भुत संगीत दिया। जो आज भी लोगों के मन-मस्तिष्क पर छाया हुआ है। इन्होंने रामानंद सागर द्वारा टेलीविज़न पर प्रसारित रामायण में संगीत दिया जो बहुत लोकप्रिय हुआ। इसके अलावा इन्होंने अलिफ लैला, जय हनुमान, श्रीकृष्ण, आदि धारावाहिकों में भी बहुत मधुर संगीत दिया।

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भावार्थ-भारतीय संगीतकार रवीन्द्र जैन की दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्म विश्वास को दर्शाया गया है।

4. इस तरह मात्र तीन वर्ष की आयु में नेत्रहीन हो जाने वाले लुई ब्रेल ने भी जीवन में अनेक कष्ट सहे। वे स्वयं दृष्टिहीन लोगों के स्कूल में पढ़े व अध्यापक बने किन्तु उस समय तक नेत्रहीनों के लिए सीखने के लिए कोई बढ़िया तकनीक नहीं थी। अतएव लुई ब्रेल ने अनथक प्रयत्नों के बाद नेत्रहीनों के लिए एक ऐसी लिपि का आविष्कार किया जिससे नेत्रहीन पढ़ने में समर्थ हो सके। इस लिपि को ब्रेल लिपि कहते हैं। यह लिपि कागज़ पर उभरे चिह्न होते हैं जिन्हें स्पर्श कर वे पढ़ते हैं। बेशक यह लिपि दुनिया भर में आज प्रयुक्त हो रही है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 9

प्रसंग-यह गद्यांश खंड डॉ० सुनील बहल द्वारा रचित ‘मन के जीते जीत ही’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें नेत्रहीन लुई ब्रेल के परिश्रम, साहस एवं आविष्कार को दर्शाया है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि लुई ब्रेल केवल तीन वर्ष के आयु में नेत्रहीन हो जाने पर अनेक कष्ट सहन किए। वे अपने आप नेत्रहीन लोगों के स्कूल में पढ़े तथा अध्यापक बने। किन्तु उस समय तक नेत्रहीन लोगों को सीखने के लिए कोई अच्छी तकनीक नहीं थी। इसीलिए लई ब्रेल ने अपने अनथक प्रयासों के बाद, नेत्रहीन लोगों के लिए एक ऐसी लिपि का आविष्कार किया जिससे नेत्रहीन पढ़ने में समर्थ हो सके। इस लिपि को ब्रेल लिपि कहते हैं। यह लिपि कागज़ पर उभरे चिह्न होते हैं, जिन्हें स्पर्श कर वे पढ़ते हैं। यह लिपि सारी दुनिया में आज प्रयोग में लाई जा रही है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

भावार्थ-लई ब्रेल के प्रयासों तथा ब्रेल लिपि के आविष्कार को प्रयासों में बताया है।

5. भारतीय इतिहास में ऐसे व्यक्तित्व भी हैं जिन्होंने अपनी विकलांगता से कभी हार नहीं मानी अपितु वीरता एवं साहस के बल पर दुनिया में अपनी ताकत का लोहा मनवाया। राणा सांगा ने बचपन में अपनी एक आँख खो दी थी और बाद में युद्धों में एक हाथ और एक पैर को भी इन्होंने खो दिया किन्तु इस विकलांगता का उनकी वीरता और साहस पर कोई असर नहीं पड़ा। बड़े-बड़े शासक उनके नाम से थर-थर काँपते थे। राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी जैसे अनेक विरोधियों के दाँत खट्टे किये। इसी तरह महाराजा रणजीत सिंह की चेचक के कारण एक आँख खराब हो गयी थी। किन्तु फिर भी वे निराश नहीं हुए। उन्नीस वर्ष की आयु में उन्होंने लाहौर पर अधिकार कर लिया था। फिर धीरे-धीरे जम्मू कश्मीर, अमृतसर, मुलतान, पेशावर आदि क्षेत्रों पर इन्होंने अधिकार कर लिया। अपने कुशल प्रबन्ध, वीरता, न्यायप्रियता, दयालुता और दानशीलता के कारण महाराज रणजीत सिंह को जाना जाता है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 10

प्रसंग-यह पंक्तियाँ लेखक डॉ० सुनील बहल द्वारा लिखित है। यह ‘मन के जीते जीत है’ शीर्षिक पाठ से ली गई हैं। इनमें लेखक ने राणा सांगा की वीरता, साहस तथा महाराजा रणजीत सिंह की वीरता और दयालुता को दर्शाया है।

व्याख्या-भारत के इतिहास में ऐसे महान् लोग भी हुए हैं जिन्होंने अपनी विकलांगता से जीवन में कभी हार नहीं मानी अपितु वीरता एवं साहस के बल पर दुनिया में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया। राणा सांगा ने बचपन में अपनी एक आँख खो दी थी किन्तु इस विकलांगता का उनकी वीरता और साहस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। बड़े-बड़े शासक उनके नाम से थर-थर काँपते थे। राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी जैसे अनेक विरोधियों को बुरी तरह से हराया था।

इस तरह महाराजा रणजीत सिंह की चेचक के कारण एक आँख खराब हो गई थी किन्तु फिर भी वे निराश नहीं हुए उन्होंने केवल उन्नीस वर्ष की आयु में लाहौर पर अधिकार कर लिया था। इसके बाद धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर, अमृतसर, मुलतान, पेशावर आदि क्षेत्रों पर पुस्तकीय भाग इन्होंने अधिकार कर लिया। उसका प्रबन्ध अत्यंत कुशल था। वे अत्यन्त वीर तथा न्यायप्रिय थे, उनके दयालुता और दानशीलता सभी जलते हैं। इसी कारण उनकी वीरता, न्यायप्रियता, दयालुता एवं दानवीरता के कारण महाराजा रणजीत सिंह को जाना जाता है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

भावार्थ-राणा सांगा की वीरता एवं साहस को दर्शाया गया है और महाराजा रणजीत सिंह की वीरता, न्यायप्रियता, दानशील और दयालुता का वर्णन है।

6. अतएव बच्चो ! यदि दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना और जज्बा हो तो तमाम मुसीबतों को आखिरकार घुटने टेकने ही पड़ते हैं। अब आप ही बताइये यदि इन विभूतियों ने जीवन के संघर्ष में अपनी हार मान ली होती तो क्या वे आज दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत बन पाते? आइए, उठिये, अपने आत्मविश्वास, दृढ़निश्चय, चित्त की एकाग्रता और अपनी शक्तियों को केन्द्रित करें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें। कहा भी है, “भाग्य संवरता नहीं संवारना पड़ता है और भी कहा गया है, “ईश्वर भी उन्हीं की सहायता करते हैं जो अपनी सहायता अपने आप करते हैं।”

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत 11

प्रसंग-यह गद्यांश लेखक डॉ० सुनील बहल द्वारा लिखित है। यह ‘मन के जीते जीत है’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने बच्चों को साहस, आत्मविश्वास एवं दृढ़ निश्चय से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या-लेखक बच्चों को प्रेरणा देकर कहता है कि हे बच्चो! यदि दिल में कुछ करने की इच्छा हो और हिम्मत एवं साहस हो तो सभी मुसीबतें अवश्य खत्म हो जाती हैं। अब आप ही बताइए कि यदि सूरदास, जायसी, रवीन्द्र जैन, चन्द्रशेखर, राणा सांगा, महाराजा रणजीत सिंह, लुई ब्रेल आदि महान् विद्वानों ने जीवन के संघर्ष में अपनी हार मान ली होती तो क्या वे आज इस संसार के प्ररेणा स्रोत बन पाते अर्थात् नहीं।

वे सभी विकलांग होते हुए भी संघर्ष करते रहे और विजयी हुए इसीलिए दुनिया उनसे प्रेरणा ले रही है। इसलिए आओ फिर से अपने आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय, मन की एकाग्रता और शक्तियों को केन्द्रित करें और अपने लक्ष्य की तरफ बढ़े। यहाँ सच ही कहा गया है कि भाग्य अपने आप नहीं संवरता बल्कि उसे तो संवारना पड़ता है। ईश्वर भी संसार के केवल उन्हीं लोगों की सहायता करते हैं जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं। इसलिए हम साहस आत्मविश्वास परिश्रम से आगे बढ़ें।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 9 मन के जीते जीत

भावार्थ-सूरदास, मिल्टन, जायसी, अष्टावक्र, महाराजा रणजीत सिंह जैसी विभूतियों से प्रेरणा लेने को कहा है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर Textbook Exercise Questions and Answers.

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मैट्रो रेल का सुहाना सफर अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें:

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 1
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 2
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 3
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 4
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

3. शब्दार्थ

  • उपहार = भेंज
  • लिफ्ट = बड़ी इमारतों में ऊपर ले जाने वाला यान स्वरूप यंत्र
  • अपाहिज = अपंग
  • विस्फोटक सामग्री = विस्फोट करने वाला पदार्थ
  • स्वचालित प्रवेश द्वार = अपने आप खुलने वाला दरवाजा
  • दंडनीय अपराध = दंडित किए जाने योग्य अपराध
  • उद्घोषणा = ऊँची आवाज़ में कहना, सरकारी घोषणा
  • वातानुकूलित = हवा के तापमान के अनुकूल बनाया गया
  • इलैक्ट्रॉनिक सूचना पट्ट = बिजली से चलने वाला पटल जिस पर लगातार सूचनाएँ दी जाती हैं
  • भूमिगत प्लेटफार्म = भूमि के अंदर बना प्लेटफार्म

उत्तर :
छात्र स्वयं अभ्यास करें।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) गुरु जी ने बच्चों को क्या वचन दिया था?
उत्तर :
गुरु जी ने बच्चों को प्रथम आने पर मैट्रो रेल के सुहावने सफर का उपहार देने का वचन दिया था।

(ख) कैसे पता चलता है कि ये बच्चे पंजाब से आये हैं?
उत्तर :
वे बच्चे पंजाब राज्य के योग टीम के सदस्य थे तथा इनके गुरु सुरेन्द्र मोहन इनके साथ थे।

(ग) मैट्रो रेल की पटरी कहाँ-कहाँ बिछाई जाती है?
उत्तर :
मैट्रो रेल की पटरी ज़मीन पर, सड़क पर पुल बनाकर ज़मीन के नीचे सुरंग खोदकर बिछाई जाती है।

(घ) लिफ्ट का प्रयोग किन लोगों के लिए किया जाता है ?
उत्तर :
लिफ्ट का प्रयोग वृद्धों, बीमारों और अपाहिज लोगों के लिए किया जाता है।

(ङ) स्टेशन पहुँचने पर बच्चे क्या देखकर हैरान हुये?
उत्तर :
पर बच्चे स्टेशन की साफ़ – सफ़ाई और सजावट को देखकर हैरान हुए।

(च) स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा-जाँच कैसे की जाती है?
उत्तर :
स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा – जाँच के लिए एक यन्त्र लगा होता है जो किसी भी विस्फोटक सामग्री के पास आते ही अपने आप विशेष ध्वनि निकालने लगता है। सुरक्षा के लिए अनेक सुरक्षाकर्मी भी लगे होते हैं।

(छ) स्वचालित प्रवेश द्वार किस प्रकार कार्य करता है?
उत्तर :
एक यात्री के लिए एक टोकन यात्रा के लिए दिया जाता है। इस टोकन को मशीन के पास लाने से स्वचालित प्रवेश द्वार खुल जाता है और यात्री इसमें से निकल जाता है।

(ज) स्मार्ट कार्ड का क्या उपयोग है ?
उत्तर :
स्मार्ट – कार्ड प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए होता है। इसे यात्री द्वारा मशीन के पास लाने से उनकी यात्रा के अनुसार अपने आप ही किराया कट जाता है। इससे समय की बचत भी होती है।

(झ) पर्यटक कार्ड द्वारा कितने दिन तक यात्रा कर सकते हैं ?
उत्तर :
पर्यटक – कार्ड द्वारा एक से तीन दिन तक अनियमित यात्रा कर सकते हैं।

(ञ) गाड़ी की प्रतीक्षा करते समय कौन-से रंग की पट्टी से आगे नहीं जाना चाहिए?
उत्तर :
पीले रंग की पट्टी से आगे नहीं जाना चाहिए।

(त) प्लेटफार्म पर हमें क्या-क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर :

  • प्लेटफार्म पर पीली पट्टी को पार नहीं करना चाहिए।
  • रेल की पटरी पर कदापि नहीं जाना चाहिए।
  • प्लेटफार्म पर थूकना नहीं चाहिए।
  • गंदगी नहीं फैलानी चाहिए।
  • कोई वस्तु खानी – पीनी नहीं चाहिए।

(थ) मैट्रो गाड़ी की खिड़कियाँ क्यों नहीं खुलती?
उत्तर :
मैट्रो गाड़ी की खिड़कियाँ इसलिए नहीं खुलती क्योंकि वह वातानुकूलित होती हैं।

(द) इलैक्ट्रॉनिक सूचना पट्ट पर क्या सूचनाएँ दी जाती हैं ?
उत्तर :
इलैक्ट्रॉनिक सचना पटट पर लगातार आने वाले स्टेशनों की सचनाएं दी जाती हैं।

5. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

(क) मैट्रो स्टेशन आम स्टेशन से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर :

  1. मैट्रो स्टेशन परिस्थिति और सुविधा अनुसार बना होता है। इसकी पटरी ज़मीन, सड़क पर पुल बनाकर या ज़मीन के नीचे सुरंग खोद कर बिछाई जाती है जबकि आम स्टेशन प्रायः ज़मीन पर ही होते हैं।
  2. मैट्रो स्टेशन पर लिफ्ट लगी होती है। आम स्टेशनों पर नहीं होती।
  3. मैट्रो – स्टेशन पर ऐसी साफ़ – सफ़ाई एवं सजावट होती है जो सामान्य रूप से स्टेशन पर अन्य स्टेशनों पर कहीं भी नहीं होती है।
  4. मैट्रो – स्टेशन पर संगमरमर का फ़र्श और अत्याधुनिक बिजली के उपकरण लगे होते हैं जो आम स्टेशन पर नहीं मिलते।

(ख) टोकन, स्मार्ट कार्ड और पर्यटक कार्ड में क्या अंतर है?
उत्तर :
इनमें निम्नलिखित अन्तर हैं-
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 5

(ग) मैट्रो गाड़ी के स्वचालित द्वार द्वारा जाने और निकलने में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिये?
उत्तर :
मैट्रो – गाड़ी के स्वचालित द्वार से जाने और निकलने में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • द्वार खुलते ही तुरन्त गाड़ी में चढ़ जाना चाहिए।
  • द्वार खुलते ही तुरन्त गाड़ी से बाहर निकल जाना चाहिए।
  • द्वार के बन्द होने की स्थिति में न चढ़ना चाहिए और न ही उतरना चाहिए।

(घ) भूमिगत प्लेटफार्म से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
भूमिगत प्लेटफार्म भूमि के अन्दर सुरंगें खोदकर बनाया जाता है। भूमि के अन्दर ही पटरी बनाई जाती है।

6. बहुवचन रूप लिखें :

  1. खेल = _________________
  2. पंक्ति = _________________
  3. वृद्ध = _________________
  4. सीढ़ी = _________________
  5. स्टेशन = _________________
  6. खिड़की = _________________

उत्तर :

  1. खेल = खेलें
  2. पंक्ति = पंक्तियाँ
  3. वृद्ध = वृद्धों
  4. सीढ़ी = सीढ़ियाँ
  5. स्टेशन = स्टेशनों
  6. खिड़की = खिड़कियाँ

7. इन वाक्यों में सर्वनाम शब्द पर गोला लगायें :

(क) (हम) लाल किला देखने जायेंगे।
(ख) तुम्हें पता चल जायेगा।
(ग) मैं आपको गाड़ी में बैठाकर आता हूँ।
(घ) उसने कहा, “चलो, आपकी गाड़ी का समय होने वाला है।”
(ङ) उसे कन्हैया नगर स्टेशन से अधिकारियों ने हमारे आने की सूचना पहले ही दे दी थी।
उत्तर :
(क) (हम) लालकिला देखने जायेंगे।
(ख) (तुम्हें) पता चल जायेगा।
(ग) (मैं) आपको गाड़ी में बैठाकर आता हूँ।
(घ) (उसने) कहा, “चलो, (आपकी) गाड़ी का समय होने वाला है।”
(ङ) (उसे) कन्हैया नगर स्टेशन से अधिकारियों ने (हमारे) आने की सूचना पहले ही दे दी थी।

8. ‘असीमित’ शब्द में ‘अ’ लगाकर विपरीत शब्द बना है। इसी प्रकार अन्य विपरीत शब्द बनायें:

  1. अ + सुविधा = _________________
  2. अ+ सुर = _________________
  3. अ + सहयोग = _________________
  4. अ + भिन्न = _________________

उत्तर :

  1. अ + सुविधा = असुविधा
  2. अ + सुर = असुर
  3. अ + सहयोग = असहयोग
  4. अ + भिन्न = अभिन्न।

9. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ बताकर वाक्यों में प्रयोग करें :

  1. दिल बल्लियाँ उछलना = _________________
  2. दंग रह जाना = _________________
  3. खुशी से झूम उठना = _________________
  4. मन बहलाना = _________________

उत्तर :

  1. दिल बल्लियाँ उछलना – बहुत प्रसन्न होना – वाक्य – मैट्रो रेल में बैठकर बच्चों के दिल बल्लियों उछलने लगे।
  2. दंग रह जाना – हैरान होना – वाक्य – रवि इतने बड़े शेर को देखकर दंग रह गया।
  3. खुशी से झूम उठना – बहुत खुश होना – आठवीं कक्षा में प्रान्त में प्रथम आने पर रेशमा खुशी से झूम उठी थी।
  4. मन बहलाना – समय गुज़ारना – वाक्य – बच्चों ने यात्रा के दौरान अंत्याक्षरी खेल कर अपना मन बहलाया।

10. नीचे लिखे शब्दों में अक्षरों को उचित क्रम में रखकर सार्थक शब्द बनायें :

  1. गालरेड़ी = _________________
  2. नुशाअसन = _________________
  3. लासफा = _________________
  4. पहाउर = _________________
  5. मगसंररम = _________________
  6. फालेप्टर्म = _________________
  7. लीजबि = _________________
  8. टवसजा = _________________
  9. अरोधनु = _________________
  10. पअराध = _________________
  11. किललाला = _________________
  12. वानुकूतलिता = _________________
  13. जापंब = _________________
  14. लतारगा = _________________
  15. भूतगमि = _________________
  16. कानिस = _________________
  17. रीजाकान = _________________
  18. अबाजू = _________________

उत्तर :

  1. गालरेड़ी = रेलगाड़ी
  2. नुशाअसन = अनुशासन
  3. पहाउर = उपहार
  4. मगसंररम = संगमरमर
  5. लीजबि = बिजली
  6. टवसजा = सजावट
  7. पअराध = अपराध
  8. किललाला = लाल किला
  9. जापंब = पंजाब
  10. लतारगा = लगातार
  11. कानिस = निकास
  12. रीजाकान = जानकारी
  13. लासफा = फासला
  14. वानुकूतलिता = वातानुकूलित
  15. फालेप्टर्म = प्लेटफार्म
  16. भूतगमि = भूमिगत
  17. अरोधनु = अनुरोध
  18. अबाजू = अजूबा।

11. निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों में कारक बतायें :

(क) भास्कर रेलगाड़ी देखने के लिए प्लेटफार्म के किनारे पर जा पहुँचा।
उत्तर :
संप्रदान।

(ख) आज हम सभी मैट्रो रेल के द्वारा जायेंगे।
उत्तर :
करण।

(ग) प्रतिभा खिड़की वाली सीट पर बैठ गयी।
उत्तर :
अधिकरण।

(घ) सभी स्वचालित सीढ़ियों के द्वारा भूमिगत प्लेटफार्म पर पहुँच गये।
उत्तर :
करण।

(ङ) गुरु जी ने बच्चों को बड़े प्यार से समझाया।
उत्तर :
कर्ता।

(च) हमने राष्ट्रीय खेलों में भाग लिया।
उत्तर :
अधिकरण।

12. रचनात्मक अभिव्यक्ति :

(क) मौखिक अभिव्यक्ति
जिन शहरों में मैट्रो रेल की सुविधा हो वहाँ इस रेल की यात्रा का आनंद जरूर लें और अपने अनुभव सहपाठियों को बतायें।
उत्तर :
विद्यार्थी अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

(ख) लिखित अभिव्यक्ति

(i) अपनी सहेली/मित्र को पत्र लिखो जिसमें मैट्रो यात्रा का वर्णन किया गया हो।|
उत्तर :
91 – मॉडल टाऊन,
पटियाला।
18 सिंतबर, 20….
प्रिय सहेली,

सप्रेम नमस्ते।
पिछले सप्ताह मैं अपने परिवार के साथ दिल्ली में लगा अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला देखने गई थी। हम वहां दो दिन तक रुके। पहले दिन हमने पुस्तक मेले को देखा और दूसरे दिन नई दिल्ली से पुरानी दिल्ली तक मैट्रो तक की यात्रा करके अपने चाचा जी के घर पहुंचे। मैट्रो का स्टेशन बहुत साफ़ – सुथरा और अत्याधुनिक था। मैट्रो चलते – चलते ही आगे की सूचना देती थी। उसके द्वार स्वचालित हैं जो अपने आप खुलते और बंद होते थे। वह पूर्ण रूप से वातानुकूलित थी जिसमें यात्रा का खूब आनन्द आया। चाचा के घर से वापिस आते समय भी हम मैट्रो से नई दिल्ली स्टेशन तक आए। इस प्रकार हमारी मैट्रो रेल यात्रा बहुत अच्छी थी।

तुम्हारी सखी,
रमन कौर।

(ii) ‘मैट्रो रेल यात्रा’ का अनुभव डायरी में लिखें।
उत्तर :
छात्र अपनी यात्रा का अनुभव स्वयं लिखें।

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोतर

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें –

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय खेलों में कहाँ की योग की टीम दिल्ली आई थी?
(क) पंजाब
(ख) हरियाणा
(ग) हिमाचल प्रदेश
(घ) उत्तराखंड।
उत्तर :
(क) पंजाब

प्रश्न 2.
पंजाब की टीम कहाँ के राजकीय विद्यालय में ठहरी थी?
(क) जलविहार
(ख) स्वास्थ्य विहार
(ग) अशोक विहार
(घ) खेल विहार।
उत्तर :
(ग) अशोक विहार

प्रश्न 3.
पंजाब की टीम ने प्रतियोगिता में कौन – सा स्थान प्राप्त किया था?
(क) प्रथम
(ख) द्वितीय
(ग) तृतीय
(घ) चतुर्थ।
उत्तर :
(क) प्रथम

प्रश्न 4.
टीम के सदस्य मैट्रो – रेल द्वारा क्या देखने जा रहे थे?
(क) कुतुब मीनार
(ख) लाल किला
(ग) संसद भवन
(घ) तीन मूर्ति संग्रहालय।
उत्तर :
(ख) लाल किला

प्रश्न 5.
लाल किला देखने के लिए टीम के सदस्य मैट्रो – रेल से किस स्टेशन पर उतरे?
(क) चावड़ी बाज़ार
(ख) चाँदनी चौंक
(ग) कश्मीरी गेट
(घ) दरियागंज।
उत्तर :
(ख) चाँदनी चौंक

प्रश्न 6.
मैट्रो पर बैठने के लिए टीम के सदस्य किस स्टेशन पर गए थे?
(क) कन्हैया नगर
(ख) शास्त्री नगर
(ग) प्रताप नगर
(घ) राम नगर।
उत्तर :
(क) कन्हैया नगर

प्रश्न 7.
पंजाब की टीम के गुरु कौन थे?
(क) सुरेंद्र सिंह
(ख) सुरेंद्रमोहन
(ग) सुरेंद्र कुमार
(घ) सुरेंद्र पाल।
उत्तर :
(ख) सुरेंद्रमोहन

प्रश्न 8.
मैट्रो – रेल की प्लेटफार्म पर प्रतीक्षा करते हुए किस रंग की पट्टी से आगे नहीं जाना चाहिए?
(क) लाल
(ख) हरी
(ग) पीली
(घ) नीली।
उत्तर :
(ग) पीली

प्रश्न 9.
मैट्रो – रेल के रुकने पर द्वार कैसे खुलता/बंद होता है?
(क) दोनों हाथों से
(ख) बायें हाथ से
(ग) दाहिने हाथ से
(घ) अपने आप।
उत्तर :
(घ) अपने आप।

मैट्रो रेल का सुहाना सफर Summary in Hindi

मैट्रो रेल का सुहाना सफर पाठ का सार

मैट्रो – रेल का सुहाना सफ़र लेखक महेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित है। इसमें लेखक ने मैट्रो रेल की सुहानी यात्रा का वर्णन किया है। राष्ट्रीय खेलों में पंजाब की योग टीम में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आई जहाँ वह झलकरी बाई राजकीय उच्चतर विद्यालय अशोक विहार में ठहरी थी। पूरी टीम बहुत खुश थी क्योंकि उनके गुरु जी ने उनके प्रथम आने पर मैट्रो – रेल के सुहावने सफर का उपहार देने को कहा था। टीम ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। अगले दिन बच्चे मैट्रो – रेल से लाल किला देखने गए। वे कन्हैया नगर स्टेशन पर गए।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 6

एक बच्चे की बात सुनकर गुरु जी ने बताया कि दिल्ली में मैट्रो – रेल परिस्थिति और सुविधानुसार चलाई जाती है। उसकी पटरी ज़मीन या सड़क पर पुल बनाकर या सुरंग खोदकर बिछाई गई है। यह सुनकर प्रतिभा ने गुरु जी से अपनी गाड़ी का रास्ता पूछा। गुरु जी ने गाड़ी में बैठकर स्वयं रास्ता देखने को कहा। भास्कर ने गुरु जी से पूछा कि हम सीढ़ियों की अपेक्षा लिफ्ट से क्यों नहीं जा रहे। गुरु जी ने सभी को समझाते हुए बताया कि लिफ्ट का प्रबन्ध बूढ़ों, बीमारों और अपाहिजों के लिए किया जाता है। स्टेशन पहुँचकर बच्चे वहाँ पर साफ़ – सफ़ाई और सजावट देखकर चकित हो गए।

गुरु जी ने सभी बच्चों के समूह पास बनवाकर सुरक्षा जांच यन्त्र में से निकालने को कहा। ज्ञानीजन के पूछने पर गुरु जी ने बताया कि वे जालन्धर रेलवे स्टेशन पर भी ऐसे ही यन्त्र से निकलकर आए थे। यह यन्त्र सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी विस्फोटक सामग्री के पास आते ही अपने आप ही एक विशेष ध्वनि निकालने लगता है। बच्चों के पूछने पर एक रेलवे कर्मचारी ने बताया कि यात्रा के लिए एक टोकन प्रति यात्री दिया जाता है जिसे इस मशीन के निकट लाने से प्रवेश द्वार खुल जाता है और यात्री इसमें से निकल जाता है। प्रतिदिन यात्रा करने वालों के लिए स्मार्ट कार्ड की सुविधा उपलब्ध है।

गुरु जी ने बच्चों को बताया कि प्लेटफार्म पर गाड़ी की प्रतीक्षा करते समय कभी भी पीली पट्टी पार नहीं करनी चाहिए। कुछ देर बाद गाड़ी आने की उद्घोषणा हुई। गुरु जी ने किरण को बताया कि वे कश्मीरी गेट पहुँचकर वहाँ से चाँदनी चौंक जाने वाली मैट्रो में बैठेंगे और वहाँ से लालकिला के लिए पैदल जा सकते हैं। थोड़ी देर बाद बच्चे गाड़ी में बैठकर खुशी से वहाँ से रवाना हुए। सभी बच्चे खुशी से झूमते हुए मैट्रो के सफर का आनंद ले रहे थे।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 3 मैट्रो रेल का सुहाना सफर 7

इसमें आगे आने वाले स्टेशन की भी स्पीकरों के द्वारा उदघोषणा हो रही थी। स्टेशन आने पर गाड़ी के रुकते ही स्वचालित द्वार अपने आप खुल जाते और यात्रियों के चढ़ने पर स्वत: बंद हो जाते। गाड़ी में स्थान – स्थान पर इलैक्ट्रानिक सूचना पट्ट लगे हुए थे। गाड़ी कन्हैया नगर स्टेशन से चलकर इन्द्रलोक स्टेशन, शास्त्री नगर, प्रताप नगर, तथा तीस हज़ारी स्टेशनों पर रुकती हुई कश्मीरी गेट पहुंची जहां सभी बच्चे उतर गए।

वहाँ से वे चाँदनी चौक मैट्रों के मिलन के स्थान पर पहुँच गए। बच्चे वहाँ से मैट्रो में सफ़र कर चांदनी चौक पहुँच गए। चाँदनी चौक से वे लाल किले की तरफ बढ़ते हुए मैट्रो रेल की ही बातें कर रहे थे।

मैट्रो रेल का सुहाना सफर शब्दार्थ –

  • हर्षित = खुश।
  • अत्याधुनिक = बहुत अधिक आधुनिक।
  • स्वचालित = अपने द्वारा चालित।
  • स्वतः = अपने आप।
  • उद्घोषणा = घोषणा।
  • एकाएक = अचानक।
  • भूमिगत = भूमि के अन्दर।
  • पर्यटक – कार्ड = घूमने – फिरने के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला कार्ड।

मैट्रो रेल का सुहाना सफर सप्रसंग व्याख्या

1. आज सभी बच्चे बहुत प्रसन्न हैं क्योंकि गुरु जी ने उन्हें वचन दिया था कि यदि उनकी टीम प्रथम आती है तो उनकी तरफ से सभी बच्चों को ‘मैट्रो – रेल’ के सुहावने सफर का उपहार दिया जाएगा। गुरु जी भी बहुत हर्षित हैं क्योंकि उनकी टीम ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर पंजाब प्रदेश के नाम को चार चाँद लगा दिए हैं। बच्चों के दिल भी बल्लियों उछलने लगे जब गुरु जी ने कहा, “बच्चो ! आज हम सभी ‘मैट्रो – रेल के द्वारा लाल किला देखने जायेंगे।”

प्रसंग – यह गद्यांश महेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित ‘मैट्रो – रेल का सुहाना सफर’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने गई पंजाब राज्य की योग टीम के मैट्रो – रेल के सफर का वर्णन किया है।

व्याख्या – लेखक कहता है कि राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने गई पंजाब की योग टीम अपने गुरु सुरेन्द्र मोहन के साथ अशोक विहार में ठहरी हुई थी। उस दिन सभी बच्चे बहुत प्रसन्न थे क्योंकि उनके गुरु जी ने उन्हें यह वचन दिया था कि यदि उनकी टीम प्रथम आई तो उनकी तरफ से सभी बच्चों को मैट्रो रेल की सुहावनी यात्रा का उपहार दिया जाएगा। गुरु जी भी बहुत खुश हुए थे क्योंकि उनकी टीम ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर पंजाब प्रदेश का नाम बहुत चमका दिया था। जब गुरु जी ने बच्चों को कहा कि आज वे सब मैट्रो रेल के द्वारा लाल किला देखने जायेंगे तब बच्चों के दिल भी बहुत खुश हुए।

भावार्थ – राष्ट्रीय खेलों में पंजाब योग टीम के प्रथम स्थान आने को दर्शाया है।

2. जैसे ही सभी बच्चे स्टेशन पर पहुँचे वे स्टेशन की साफ़ – सफ़ाई और सजावट देखकर दंग रह गए। चमकता संगमरमर का फर्श, अत्याधुनिक बिजली उपकरणों और सामान्य सुविधाओं से सजे स्टेशन को देखकर बच्चे खुशी से झूम उठे। स्टेशन पर स्थान – स्थान पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बड़ी ही सुन्दर वर्दी में सुरक्षा – कर्मी तैनात थे। गुरु जी ने सभी का समूह पास बनवाकर बच्चों को सुरक्षा – जाँच के लिए बने एक यन्त्र में से निकलने के लिए पंक्ति में आने को कहा।

प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी पाठ्य – पुस्तक में संकलित मैट्रो – रेल का सुहाना सफर नामक पाठ से लिया गया है। यह महेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित है। सभी बच्चे दिल्ली मैट्रो – स्टेशन की साफ़ – सफ़ाई को देखकर चकित रह गए। इसका वर्णन किया है।

व्याख्या – लेखक कहता है कि जैसे ही सभी बच्चे स्टेशन पर पहुँचे तो वे स्टेशन की साफ़ – सफ़ाई और सजावट को देखकर हैरान हो गए। स्टेशन पर चमकते हुए संगमरमर का फर्श था आधुनिक युग के बिजली के उपकरण लगे थे। बच्चे सामान्य सुविधाओं से सजे धजे स्टेशन को देखकर खुशी से झूम उठे। स्टेशन पर जगह – जगह पर यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा के लिए बहुत सुन्दर वर्दी में सुरक्षा कर्मचारी मौजूद थे। गुरु जी ने सभी बच्चों पर एक समूह पास बनाकर उन्हें सुरक्षा जांच के लिए बने हुए एक यन्त्र में से निकलने के लिए पंक्ति में आने के लिए कहा।

भावार्थ – दिल्ली मैट्रो रेलवे स्टेशन की साफ़ – सफ़ाई एवं आधुनिकता को प्रस्तुत किया गया है।

3. प्लेटफार्म पर पहुँचकर बच्चों ने महसूस किया कि वहाँ पर इतनी साफ़ सफ़ाई है जैसे, यहाँ कभी किसी ने पैर भी न रखा हो। तभी भास्कर रेलगाड़ी देखने के लिए प्लेटफार्म के किनारे पर जा पहुँचा। गुरु जी ने और उस कर्मचारी ने उसी समय भास्कर को दौड़कर पकड़ा और बाकी बच्चों के पास लाकर प्यार से समझाया कि गाड़ी की प्रतीक्षा करते समय कभी प्लेटफार्म पर बनी पीली – पट्टी को पार नहीं करना चाहिए। गुरु जी ने कर्मचारी को अनुरोध किया कि जब तक गाड़ी नहीं आती तब तक बच्चों को वे मैट्रो – रेल के विषय में और जानकारी दें।

प्रसंग – यह गद्यांश महेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित ‘मैट्रो – रेल का सुहाना – सफ़र’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। यहाँ लेखक ने प्लेटफार्म की साफ़ – सफ़ाई का वर्णन किया है।

व्याख्या – लेखक ने कहा है कि प्लेटफार्म र सभी बच्चों ने यह महसूस किया था कि वहाँ पर इतनी साफ़ – सफ़ाई है जैसे मानो यहाँ कभी किसी ने पैर ही न रखा हो अर्थात यहाँ कोई आदमी ही न आया हो। तभी भास्कर रेलगाडी देखने के लिए प्लेटफार्म के किनारे पर चला गया। गुरु जी और उस कर्मचारी ने तुरन्त भास्कर को दौड़कर पकड़ा तथा बाकि बच्चों के पास लाकर प्यार से समझाया कि गाड़ी की प्रतीक्षा करते समय कभी भी प्लेटफार्म पर बनी पीली – पट्टी को पार नहीं करना चाहिए। गुरु जी ने कर्मचारी को यह अनुरोध किया कि जब तक गाड़ी नहीं आती तब तक बच्चों को वे मैट्रो – रेल के विषय में और अधिक जानकारी दें।

भावार्थ – मैट्रो स्टेशन के प्लेटफार्म के दृश्य का वर्णन किया गया है। इसके माध्यम से हमारे देश के निरंतर होने वाले विकास को दर्शाया गया है।

4. “डरने की कोई बात नहीं है, अगला स्टेशन चाँदनी चौंक ही है। इस बार बच्चे बड़े आराम से निश्चिन्त होकर मैट्रो में चढ़े और खुशी – खुशी चाँदनी चौंक स्टेशन पर उतरे। सभी यात्री अपना – अपना टोकन, स्मार्ट कार्ड या पर्यटक – कार्ड निकास द्वार की मशीन के पास लाते और स्वचालित द्वार खुलने पर बाहर निकल जाते। सभी बच्चों ने यह नज़ारा विशेष निकास द्वार से निकलते हुए देखा। चाँदनी चौंक से लाल किले की तरफ बढ़ते बच्चे बस मैट्रो – रेलगाड़ी की ही बातें कर रहे थे जैसे उन्होंने कोई अजूबा देख लिया हो।”

प्रसंग – यह गद्यांश लेखक महेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित है। इसे मैट्रो – रेल का सुहाना सफर नामक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने चाँदनी चौंक से लाल किले की तरफ जाने एवं बच्चों की मनःस्थिति के बारे में बताया है।

व्याख्या – गुरु जी ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि डरने की कोई बात नहीं है क्योंकि अगला स्टेशन चाँदनी चौंक है। इस बार बच्चे बड़े आराम से निश्चित होकर मैट्रो में चढ़े तथा खुशी – खुशी चाँदनी चौंक स्टेशन पर उतर गए। सभी यात्री अपना – अपना टोकन स्मार्ट कार्ड अथवा पर्यटक कार्ड निकलने वाले द्वार की मशीन के पास लाते तथा स्व:चालित दरवाजा खुलने पर बाहर निकल जाते। सभी बच्चों ने यह दृश्य विशेष निकलने वाले दरवाज़े से निकलते हुए देखा। बच्चे चांदनी चौंक से लाल किले की तरफ बढ़ रहे थे। वे केवल मैट्रो रेलगाड़ी की ही बातें कर रहे थे जैसे उन्होंने कोई अजूबा देख लिया हो।

भावार्थ – दिल्ली मेट्रो रेल के सफर के आनन्द एवं सुहावने दृश्य का वर्णन है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 8 प्रेरणा Textbook Exercise Questions and Answers.

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PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

प्रेरणा अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें:

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा 1
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा 2
उत्तर :
छात्र स्वयं पढ़ें एवं लिखने का अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा 3
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा 4
उत्तर :
छात्र स्वयं पढ़ें एवं लिखने का अभ्यास करें।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

3. शब्दार्थ :

  • संकेत = इशारा
  • पारखी = परखने वाला, वह जिसमें परखने की शक्ति हो
  • अनसुनी = ध्यान न देना
  • चेष्टा = कोशिश
  • अंतर्गत = भीतर समाया हुआ
  • अपनापन = आत्मीय
  • दयनीय अवस्था = दीन-हीन हालत

उत्तर :
छात्र पढ़ें एवं याद करें। प्रश्न 4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) लड़के और उसकी बहन का क्या नाम था?
उत्तर :
लड़के का नाम मनीष तथा उसकी बहन का नाम सीमा था।

(ख) मनीष क्या बेचकर अपना जीवन बसर कर रहा था?
उत्तर :
मनीष गुब्बारे बेचकर अपना जीवन बसर कर रहा था।

(ग) गुब्बारे बेचने के पीछे मनीष ने अपनी क्या विवशता बतायी?
उत्तर :
मनीष ने बताया कि उसके पिता मर चुके हैं, इसलिए उनके परिवार का गुजारा गुब्बारे बेचने से होता है।

(घ) ‘पढ़ोगे’ पूछने पर उसने क्या उत्तर दिया?
उत्तर :
उसने ‘न’ में सिर हिला दिया।

(ङ) बच्चों को किस संस्था के अंतर्गत पढ़ाने के लिए ले जाया गया?
उत्तर :
बच्चों को प्रेरणा संस्था के अन्तर्गत पढ़ाने के लिए ले जाया गया।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

(च) मनीष और सीमा क्या बनना चाहते थे?
उत्तर :
मनीष पुलिस इंस्पैक्टर तथा सीमा मैडम बनना चाहती थी है।

5. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

(क) लेखिका ने बच्चों को पढ़ाई का क्या महत्व समझाया?
उत्तर :
लेखिका ने बच्चों को समझाया कि अगर वे पढ़ेंगे नहीं तो उनका बचपन, जवानी और बुढ़ापा इसी तरह से व्यर्थ हो जाएगा। पढ़ाई से ही उन्हें नौकरी, एक घर, अच्छे कपड़े मिल सकते हैं।

(ख) मनीष का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :
मनीष की आयु सात-आठ वर्ष की थी। वह लाल बत्ती चौक पर गुब्बारे बेचता है। वह बहुत समझदार है। वह अपनी बहन से बहुत प्यार करता है। वह पढ़-लिख कर पुलिस इंस्पैक्टर बनना चाहता है।

(ग) ‘भीख माँगना अपराध है।’

  1. ‘सपने देखो और उन्हें सच करके दिखाओ।’
  2. ‘शिक्षा ही वह सीढ़ी है जिस पर चढ़कर मंज़िल पाई जा सकती है।’
  3. इन तीनों सूत्र वाक्यों पर अपने विचार लिखें।

उत्तर :

  1. भीख माँगना एक सामाजिक अपराध है इसलिए मनुष्य को कभी भीख नहीं माँगनी चाहिए। हमें सदा अपने हाथों से मेहनत कर अपने जीवन का गुजारा करना चाहिए।
  2. सपना देखना जीवन में आगे बढ़ने तथा उन्नति प्राप्त करने का प्रतीक है। सपनों से ही आगे बढ़कर उन्हें पूरा करने का रास्ता दिखाई देता है। इसलिए हमें सदा सपने देखकर उन्हें पूरा करने का प्रयास करना चाहिए, पूरी मेहनत करनी चाहिए।
  3. शिक्षा मनुष्य जीवन की आधारशिला है। इसके आधार पर ही मनुष्य जीवन का पूर्ण निर्माण होता है। सत्य-असत्य का ज्ञान होता है। जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है। इसी के सहारे जीवन का सपना पूरा हो सकता है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

6. इन मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग करें :

  1. पारखी आँखों वाला ………………………………….
  2. जीवन-बसर करना ………………………………….
  3. सपने दिखाना ………………………………….
  4. हरी झंडी मिलना ………………………………….

उत्तर :

  1. पारखी आँखों वाला = पहचानने वाला-रोहित सब कुछ जानता है क्योंकि उसकी पारखी आँखें हैं।
  2. जीवन की पहली ज़रूरत = भोजन-मनीष को देखकर यही लगता था कि यही उसके जीवन की पहली ज़रूरत है।
  3. जीवन-बसर करना = जीवन चलाना-वह दुकान चला कर जीवन-बसर कर रहा था।
  4. सपने दिखाना = प्रेरणा देना-मैडम ने मनीष को सपने दिखाए। हरी झंडी मिलना = आज्ञा मिलना-रवि को पढ़ने की हरी झंडी मिल गई।

7. इन शब्दों के विपरीत शब्द लिखें :

  1. नाराजगी = ………………………………….
  2. अपनापन = ………………………………….
  3. विश्वास = ………………………………….
  4. इंकार = ………………………………….
  5. सम्भव = ………………………………….
  6. साकार = ………………………………….
  7. बदकिस्मत = ………………………………….
  8. सहमति = ………………………………….
  9. सफल = ………………………………….

उत्तर :

  1. नाराजगी = खुशी
  2. अपनापन = परायापन
  3. विश्वास = अविश्वास
  4. इन्कार = स्वीकार
  5. सम्भव = असम्भव
  6. साकार = निराकार
  7. बदकिस्मत = किस्मत
  8. सहमति = असहमति
  9. सफल = असफल

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8. निम्नलिखित वाक्यों में क्रिया विशेषण शब्द छाँटकर सामने लिखें :

(क) मैं जल्दी-जल्दी काम निपटा कर उसी चौराहे पर पहुँची। जल्दी-जल्दी
(ख) वह मेरी तरफ एकटक देखने लगा। = ………………………………….
(ग) वह गाड़ी के पास आकर झट से बोला। = ………………………………….
(घ) मैं कल आऊँगी। = ………………………………….
(ङ) वह उधर बैठी है। = ………………………………….
उत्तर :
(क) जल्दी-जल्दी
(ख) एकटक
(ग) झट से
(घ) कल
(ड) उधर

9. कोष्ठक में से उचित विस्मयादि बोधक शब्द लेकर रिक्त स्थान भरें :

(क) अरे ! तुम पढ़ोगे नहीं? (वाह,अरे)
(ख) …………….! तुमने ठीक पहचाना? (उफ, हाँ)
(ग) …………….! बड़े दुःख की बात है? (अहा, उफ)
(घ) …………….! हम तुम्हारा इंतज़ार करेंगे? (हाय, अच्छा)
(ङ) …………….! बहुत अच्छा किया? (वाह ! आह)
उत्तर :
(ख) हाँ ! तुमने ठीक पहचाना?
(ग) उफ ! बड़े दुःख की बात है?
(घ) अच्छा ! हम तुम्हारा इन्तज़ार करेंगे?
(ङ) वाह ! बहुत अच्छा किया?

10. नये शब्द बनायें :

  1. आत्म + विश्वास = आत्मविश्वास
  2. आत्म + रक्षा = …………….
  3. बे + चैन = …………….
  4. बे + कसूर = …………….
  5. अनु + सरण = …………….
  6. अनु + कूल = …………….
  7. अन + सुनी = …………….
  8. अन + वरत = …………….
  9. उत्सुक + ता = …………….
  10. दीन + ता = …………….

उत्तर :

  1. आत्म + विश्वास = आत्मविश्वास
  2. आत्म + रक्षा = आत्मरक्षा
  3. बे + चैन = बेचैन
  4. बे + कसूर = बेकसूर
  5. अनु + सरण = अनुसरण
  6. अनु + कूल = अनुकूल
  7. अन + सुनी = अनसुनी
  8. अन + वरत = अनवरत
  9. उत्सुक + ता = उत्सुकता
  10. दीन + ता = दीनता

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11. उपयुक्त वाच्य की पहचान कीजिए :

(क) आपने मुझे कल बिस्कुट दिए थे। (कर्तृवाच्य या कर्मवाच्य या भाववाच्य)
(ख) मैंने दोपहर से कुछ नहीं खाया। (कर्तृवाच्य या कर्मवाच्य या भाववाच्य)
(ग) उससे रहा नहीं गया। (कर्तृवाच्य या कर्मवाच्य या भाववाच्य)
(घ) बच्चे डबल रोटी खा रहे थे। (कर्तृवाच्य या कर्मवाच्य या भाववाच्य)
(इ) लड़के के द्वारा पैसे गिने जा रहे थे। (कर्तृवाच्य या कर्मवाच्य या भाववाच्य)

12. रचनात्मक अभिव्यक्ति

(क) मौखिक अभिव्यक्ति – आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हो और क्यों ? कक्षा में मंच पर खड़े होकर बतायें।
(ख) लिखित अभिव्यक्ति – अपने मित्र/सहेली को पत्र लिखें जिसमें पढ़ाई का महत्व बताया गया हो।
(ग) रचनात्मक कार्य – इस कहानी से संबंधित अपनी कल्पना से कोई चित्र बनायें।
उत्तर :
छात्र अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोतर

प्रश्न 1.
लड़का क्या बेच रहा था?
उत्तर :
लड़का गुब्बारे बेच रहा था।

प्रश्न 2.
लड़का गुब्बारे कहाँ बेच रहा था?
उत्तर :
लड़का लाल बत्ती चौक पर गुब्बारे बेच रहा था।

प्रश्न 3.
लेखिका लड़के का गिड़गिड़ाना कैसे समझ रही थी?
उत्तर :
लेखिका लड़के के हाथों के संकेतों से उसका गिड़गिड़ाना समझ रही थी।

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प्रश्न 4.
लड़का किस बात में लेखिका से भी ज्यादा ज्ञानी लग रहा था?
उत्तर :
लड़का जीवन की पहली ज़रूरत को लेखिका से ज्यादा जानता था शायद इसी से वह ज्यादा ज्ञानी लग रहा था।

प्रश्न 5.
लड़के की माँ ज़िन्दगी से जद्दोजहद कैसे कर रही थी?
उत्तर :
लड़के की माँ दयनीय अवस्था में गोद में बच्चों के लिए गुब्बारे बना रही थी। वह इसी तरह ज़िन्दगी से जद्दोजहद कर रही थी।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
लाल बत्ती चौक पर बच्चा क्या बेच रहा था?
(क) खिलौने
(ख) गुब्बारे
(ग) अखबार
(घ) नमकीन।
उत्तर :
(ख) गुब्बारे

प्रश्न 2.
गुब्बारे बेचने वाले बच्चे की आयु कितने वर्ष थी?
(क) 6 – 7
(ख) 7 – 8
(ग) 8 – 9
(घ) 5 – 6
उत्तर :
7 – 8

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प्रश्न 3.
लेखिका ने गुब्बारे बेचने वाले लड़के को खाने के लिए क्या दिया?
(क) चाकलेट
(ख) बिस्कुट
(ग) केक
(घ) ब्रैड।
उत्तर :
(ख) बिस्कुट

प्रश्न 4.
लड़के ने किसके लिए बिस्कुट माँगे?
(क) बहन
(ख) भाई
(ग) माँ
(घ) पिता।
उत्तर :
(क) बहन

प्रश्न 5.
लेखिका ने लड़के और उसकी बहन को क्या करने के लिए कहा?
(क) पढ़ने के लिए
(ख) नौकरी करने के लिए
(ग) ठेला लगाने के लिए
(घ) अपने साथ चलने के लिए।
उत्तर :
(क) पढ़ने के लिए

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प्रश्न 6.
गुब्बारे बेचने वाले लड़के का क्या नाम है?
(क) हरीश
(ख) मनीष
(ग) रवीश
(घ) सतीश।
उत्तर :
(ख) मनीष

प्रश्न 7.
गुब्बारे बेचने वाले लड़के की बहन का क्या नाम है?
(क) नीता
(ख) रीता
(ग) गीता
(घ) सीमा।
उत्तर :
(घ) सीमा।

प्रश्न 8.
मनीष क्या बनना चाहता है?
(क) पुलिस इंस्पैक्टर
(ख) पायलट
(ग) अध्यापक
(घ) नेता।
उत्तर :
(क) पुलिस इंस्पैक्टर

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प्रश्न 9.
सीमा की क्या बनने की इच्छा है?
(क) डॉक्टर
(ख) नर्स
(ग) टीचर
(घ) पुलिस अधिकारी।
उत्तर :
(ग) टीचर

प्रश्न 10.
किस सोसायटी के स्कूल में मनीष-सीमा पढ़ने गए?
(क) प्रेरणा
(ख) भारती
(ग) बचपन
(घ) घरोंदा।
उत्तर :
(क) प्रेरणा

Summary in Hindi

प्रेरणा कविता का सार

‘प्रेरणा’ नामक पाठ लेखिका मीना शर्मा द्वारा लिखित है जिसमें उन्होंने जीवन की प्रेरणा देने का प्रयास किया है। एक बार गाड़ी में जाते हुए लाल बत्ती चौक पर गाड़ी रुकी तो मेरी नज़र सामने वाली सड़क पर सात-आठ साल के गुब्बारा बेचने वाले बच्चे पर पड़ी। वह गाड़ियों के पास जा-जाकर गुब्बारे बेच रहा था। गुब्बारे बेचने के पश्चात् पैसे लेते समय जो खुशी उसके चेहरे पर थी वह उसके भावों से महसूस हो सकती थी।

हरी बत्ती पर लेखिका की गाड़ी पहुँचने पर लड़के ने फिर उनसे गुब्बारे लेने का आग्रह किया। लेखिका ने गुब्बारे लिए बिना ही उसे खाने के बिस्कुट दिए और उसे पढ़ने के लिए कहा। लड़का उनकी बात अनसुनी कर अपनी बहन के लिए भी बिस्कुट लेने को कहने लगा। लेखिका के बार-बार पढ़ने की बात कहने पर लड़का शायद अपने जीवन की पहली ज़रूरत को अच्छी तरह समझा। वह उत्सुकता से बिस्कुट खा रहा था।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा 5

पूछने पर लड़के ने बताया कि उसके पिता नहीं थे तो फिर उसे कौन पढ़ाता क्योंकि वह और उसकी बहन दोनों परिवार चलाने के लिए कमाते थे। अगले दिन रविवार को स्कूल से छुट्टी के दिन लेखिका उस लड़के को मिलने गई। लड़का उन्हें देखकर हैरान हो गया। लड़के का नाम मनीष तथा उसकी बहन का नाम सीमा था। लेखिका ने मनीष और सीमा को अपने जीवन को बदलने के लिए पढ़ने की प्रेरणा दी क्योंकि पढ़ने से ही जीवन बदल सकता है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

उन्होंने प्रेरणा नामक सोसायटी के अंतर्गत चलने वाले स्कूल में पढ़ने के लिए कहा। तीन-चार दिन के पश्चात् लेखिका उनके पास आई तो मनीष ने उनसे नाराज़ होकर न आने का कारण पूछा। सीमा ने ही मैडम को बताया कि हमने कापी भी ले ली है।

दोनों बच्चों के भावों से उनके पढ़ने की बात झलक रही थी। लेखिका को उनकी माँ की तरफ से भी आज्ञा मिल गई। लेखिका ने मनीष एवं सीमा के सपने के बारे में पूछने पर मनीष ने पुलिस इंस्पैक्टर तथा सीमा ने स्कूल मैडम बनने की इच्छा प्रकट की।

प्रेरणा शब्दार्थ :

  • नज़र = दृष्टि।
  • कोशिश = प्रयास, प्रयत्न।
  • पारखी = परखने वाला।
  • बेझिझक = बिना झिझके।
  • इशारा = संकेत।
  • अनुसरण = पीछा।
  • जद्दोजहद = संघर्ष।
  • भाँपना = पहचानना।
  • चेष्टा = प्रयत्न, कोशिश।
  • वक्त = समय।
  • बसर करना = रहना, गुजारना।

प्रेरणा सप्रसंग व्याख्या

1. चौक में लाल बत्ती के होने पर हमारी गाड़ी रुकी और मेरी नज़र सामने वाली सड़क पर एक सात-आठ साल के लड़के पर पड़ी जो हाथ में आठ-दस गुब्बारे बेचता कभी किसी गाड़ी के पास जाता तो कभी किसी के पास। गुब्बारे बेचने की कोशिश में उसका गिड़गिड़ाना, मैं उसके हाथों के संकेतों से समझ सकती थी। हरी बत्ती होने पर सामने की गाड़ियाँ चल पड़ी। मैंने देखा, वह लड़का, एक गाड़ी के पीछे भागता, दूसरी तरफ आ गया और मैं इस डर से बेचैन हो रही थी कि कहीं वह किसी गाड़ी के नीचे न आ जाए। उसने गुब्बारे दिए और पैसे ले लिए। पैसे गिनते हुए उसकी खुशी मैं उसके चेहरे के भावों से महसूस कर सकती थी।

प्रसंग-यह गद्यांश हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘प्रेरणा’ शीर्षक से लिया गया है। यह मीना शर्मा द्वारा लिखित है। इसमें लेखिका ने लाल बत्ती चौक पर गुब्बारा बेचने वाले लड़के की क्रिया का वर्णन किया है।

व्याख्या-लेखिका कहती है कि लाल बत्ती चौक पर लाल बत्ती का संकेत होने पर वहाँ हमारी गाड़ी रुकी और मेरी दृष्टि सामने वाली सड़क पर एक सात-आठ साल के लड़के की ओर गई। वह अपने हाथ में आठ-दस गुब्बारे बेच रहा था। वह गाड़ियों के पास जाकर गुब्बारे बेच रहा था। वह गुब्बारे बेचने के प्रयास में गिड़गिड़ा रहा था। उसका इस तरह गिड़गिड़ाना उसके हाथों से समझ सकती थी। जब हरी बत्ती हुई तो सामने की गाड़ियाँ चल पड़ीं। तब मैंने देखा कि वह लड़का एक गाड़ी के पीछे भागता-भागता दूसरी तरफ़ आ गया। मैं इस डर से बेचैन हो रही थी कि वहाँ वह किसी गाड़ी के नीचे न आ जाए। उसने मुझे गुब्बारे देकर पैसे ले लिए। वह पैसे गिनने लगा। पैसे गिनते समय उसकी खुशी उसके चेहरे के भावों से महसूस कर सकती थी।

भावार्थ-गुब्बारे बेचने वाले बच्चे के हाव-भावों को दर्शाया गया है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

2. मुझे उसका जवाब सुनकर हैरानी हुई और मैंने कहा, “अरे ! तुम पढ़ोगे नहीं ? यूँ ही सारी ज़िन्दगी …… ऐसे ही …….. उसने कोई जवाब न दिया। शायद वह जीवन की पहली ज़रूरत को मुझसे ज्यादा अच्छी तरह समझता था। बिस्कुट खाने की उत्सुकता उसके हाथों से साफ झलक रही थी। जब तक उसने एक बिस्कुट खाया तब तक मुझे भी अपनी गलती का अहसास हो गया था।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश लेखिका मीना शर्मा द्वारा लिखित ‘प्रेरणा’ नामक पाठ से लिया गया है। लेखिका ने गुब्बारे बेचने वाले लड़के से पढ़ने के बारे में पूछा तो उसने अपना सिर हिला दिया जिससे लेखिका को हैरानी हुई। यहाँ इसी का वर्णन किया है।

व्याख्या-लेखिका कहती है कि मुझे उस लड़के का जवाब (उत्तर) सुनकर बहुत हैरानी हुई। उसको समझाते हुए मैंने कहा कि अरे ! क्या तुम पढ़ोगे नहीं। क्या इसी तरह पुस्तकीय भाग सारी ज़िन्दगी रहेगी ? यह सुनकर उसने कोई जवाब नहीं दिया। शायद वह जीवन की पहली ज़रूरत को मुझसे ज्यादा अच्छी तरह समझता था। बिस्कुट खाने की उत्सुकता उसके हाथों से साफ-साफ दिखाई दे रही थी। जब तक उसने एक बिस्कुट खाया तब तक मुझे भी अपनी गलती का अहसास हो गया था।

भावार्थ-जीवन की पहली ज़रूरत रोटी की ओर संकेत किया है।

3. “बच्चो ! मैं जानती हूँ कि इस वक्त आप मुश्किल से जीवन बसर कर रहे हो। इन हालातों से निकलने का केवल एक ही साधन है-विद्या ! अगर नहीं पढ़ोगे, तो बचपन, फिर जवानी, फिर बुढ़ापा इसी तरह वक्त निकल जाएगा। नौकरी, एक घर, अच्छे कपड़े, यह बस केवल पढ़-लिख कर ही सम्भव हो सकता है, “मैडम जी, क्या सपने दिखाती हो, इन बदकिस्मतों को ?” माँ ने कहा “अरे ! किस्मत बनाना तो अपने हाथ में होता है और सपने देखोगे नहीं, तो साकार कैसे होंगे ?”

प्रसंग-यह गद्यांश मीना शर्मा द्वारा रचित ‘प्रेरणा’ नामक पाठ से लिया गया है। लेखिका बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहती है।

व्याख्या-लेखिका कहती है कि हे बच्चो ! मैं जानती हूँ कि इस समय आप मुश्किल से अपना जीवन-यापन कर रहे हो। तुम्हें इस हालातों से निकलने का विद्या ही एकमात्र साधन है। तुम पढ़ाई करके ही अपना जीवन बदल सकते हो। यदि तुम नहीं पढ़ोगे तो बचपन, फिर जवानी, बुढ़ापा इसी प्रकार से समय गुजर जाएगा। नौकरी, एक अच्छा घर, अच्छे कपड़े, यह बस केवल पढ़-लिख कर ही संभव हो सकता है। लड़कों की माँ बोली कि मैडम जी, आप इन बदकिस्मतों को क्या सपना दिखा रही हो तो इसका जवाब देते हुए लेखिका उन्हें कहने लगी कि किस्मत बनाना मनुष्य के अपने हाथों में होता है। यदि तुम सपने नहीं देखोगे तो वे पूरे कैसे होंगे।

भावार्थ-जीवन में विद्या का महत्त्व बताया है और आगे पढ़ने की प्रेरणा दी है।

4. “श्रम की बस्ती से उठकर, पाठशाला में जाना है।
अपने हालातों से लड़कर जीवन सफल बनाना है।”

प्रसंग-ये पंक्तियाँ मीना शर्मा लेखिका द्वारा लिखित ‘प्रेरणा’ में से ली गयी हैं। इसमें लेखिका ने जीवन में संघर्ष करने की प्रेरणा दी है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 8 प्रेरणा

व्याख्या-लेखिका कहती है कि परिश्रम की बस्ती से ऊपर उठकर पाठशाला जाना है। हमें आगे हालातों, परिस्थितियों से संघर्ष करके अपने जीवन को सफल बनाना है अर्थात् परिस्थितियों से लड़कर ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है।

भावार्थ-विद्या ग्रहण करने एवं जीवन से संघर्ष करने की प्रेरणा दी है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 7 नवयुवकों के प्रति (2nd Language)

Hindi Guide for Class 8 PSEB नवयुवकों के प्रति Textbook Questions and Answers

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

नवयुवकों के प्रति अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें:

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति 1
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति 2
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति 3
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति 4
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

3. शब्दार्थ :

  • भक्तवर = भक्तों में श्रेष्ठ
  • देशोद्धार = देश का उद्धार करना
  • योग = सहयोग
  • कौमार = कुमार/यौवन की अवस्था
  • निम्नोक्ति = नीचे लिखी उक्ति या कथन
  • धर्माचरण = धर्म के अनुसार आचरण/व्यवहार करना
  • धरो = धारण करना

उत्तर :
सप्रसंग व्याख्या के साथ दे दिए गए हैं।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) इस कविता के कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
इस कविता के कवि का नाम मैथिलीशरण गुप्त है।

(ख) यह कविता किन्हें संबोधित की गई है?
उत्तर :
यह कविता नवयुवकों को सम्बोधित की गई है।

(ग) ‘जो कुछ पढ़ो तुम कार्य में भी साथ ही परिणत करो।’ इस काव्य-पंक्ति का अर्थ लिखें।
उत्तर :
इस काव्य पंक्ति का अर्थ है कि हे नवयुवको ! तुम अपने जीवन में जो कुछ भी शिक्षा एवं ज्ञान ग्रहण करो, उसे अपने कार्य में तथा जीवन में भी अपनाओ।।

(घ) नवयुवकों के सम्मुख कौन-से दो पथ हैं ? उन्हें किस पथ का चुनाव करना चाहिए?
उत्तर :
नवयुवकों के सम्मुख असंयम और संयम दो पथ हैं। उन्हें संयम पथ का चुनाव करना चाहिए।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

(ङ) इन काव्य-पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या करें : दो पथ असंयम ……………………. संभलोगे कभी।
उत्तर :
उत्तर के लिए सप्रसंग व्याख्या देखिए।

5. इन शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें :

  1. मनुज = ______________, ______________
  2. ज्योति = ______________, ______________
  3. संसार = ______________, ______________
  4. पथ = ______________, ______________

उत्तर :

  1. मनुज = मनुष्य, मानव
  2. ज्योति = प्रकाश, उजाला
  3. संसार = जग, दुनिया
  4. पथ = रास्ता, मार्ग

6. विपरीत शब्द बनायें :

  1. अ + संयम = असंयम
  2. अ + शुभ =
  3. अ + धर्म =
  4. अ + विश्वास =

उत्तर :

  1. अ + संयम = असंयम
  2. अ + शुभ = अशुभ
  3. अ + धर्म = अधर्म
  4. अ + विश्वास = अविश्वास

7. रचनात्मक अभिव्यक्ति :

(क) मौखिक अभिव्यक्ति – भक्त प्रहलाद की जीवन गाथा अपने दादा/दादी से सुनें व कक्षा में भक्त प्रहलाद के गुणों को सुनायें।

(क) लिखित अभिव्यक्ति
(i) असंयम और संयम किसे कहते हैं ? एक दो उदाहरण देकर समझायें।
(ii) देश के विकास में आप क्या-क्या योगदान दे सकते हो?
उत्तर :
छात्र अध्यापक की सहायता से करें।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोतर

प्रश्न 1.
कवि ने नवयुवकों को क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
कवि ने नवयुवकों को देश के उद्धार एवं विकास में योगदान देने तथा उन्हें शुभ कर्म करने की प्रेरणा दी है। उन्हें भागवत धर्म का आचरण करने को कहा है।

प्रश्न 2.
कवि ने नवयुवकों को क्या शिक्षा दी है?
उत्तर :
कवि का विचार है कि नवयुवकों को देश के उद्धार में योगदान देना चाहिए। ज्ञान और शिक्षा को कार्य में अपनाना चाहिए। भागवत धर्म का आचरण करना चाहिए। मनुष्य जन्म कठिनाई से मिलता है अत: इस जीवन में संयम पथ को अपनाना चाहिए।

प्रश्न 3.
कवि किन्हें सम्भलने को कह रहा है?
उत्तर :
कवि नवयुवकों को सम्भलने को कह रहा है।

प्रश्न 4.
नवयुवकों को किसका आचरण करना चाहिए?
उत्तर :
नवयुवकों को भागवत धर्म का आचरण करना चाहिए।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
कवि ने किसे संबोधित किया है?
(क) युवाओं को
(ख) नेताओं को
(ग) बालकों को
(घ) अधिकारियों को।
उत्तर :
(क) युवाओं को

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

प्रश्न 2.
किनसे मानव जीवन की ज्योति जगमगाती है?
(क) युवाओं से
(ख) बालकों से
(ग) प्रौढ़ों से
(घ) वृद्धों से।
उत्तर :
(क) युवाओं से

प्रश्न 3.
कवि ने किस भक्तवर का कथन प्रस्तुत किया है?
(क) ध्रुव
(ख) प्रहलाद
(ग) नारद
(घ) नरसी।
उत्तर :
(ख) प्रहलाद

प्रश्न 4.
भागवत धर्माचरण किस अवस्था में करना चाहिए?
(क) बाल
(ख) किशोर
(ग) कौमार्य
(घ) वृद्धा।
उत्तर :
(ग) कौमार्य

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

प्रश्न 5.
कौन – सा पथ अशुभ होता है?
(क) संयम का
(ख) धर्म का
(ग) असंयम का
(घ) सत्य का।
उत्तर :
(ग) असंयम का

प्रश्न 6.
मानव मन किस पथ की ओर आकर्षित होता है?
(क) धर्म के
(ख) सत्य के
(ग) संयम के
(घ) असंयम के।
उत्तर :
(घ) असंयम के।

नवयुवकों के प्रति Summary in Hindi

नवयुवकों के प्रति कविता का सार

प्रस्तुत कविता ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित है। इसमें कवि ने नवयुवकों को देश के उद्धार में योगदान देने की प्रेरणा दी है। कवि ने नवयुवकों का आह्वान करते हुए कहा है कि हे नवयुवको ! सारे देश की दृष्टि तुम्हारी तरफ लगी हुई है। तुम से ही मानव – जीवन की ज्योति प्रकाशित है। तुम्हारे अतिरिक्त कौन इस देश के उद्धार में योगदान देगा? तुम्ही देश के विकास में अपना योगदान दो।

संसार में जो हो रहा है उसे ध्यानपूर्वक देखो। अपनी पढ़ाई एवं ज्ञान को कार्य में बदलो। तुम भक्त प्रहलाद की इस उक्ति को मन में धारण करो कि संसार में युवावस्था में ही भागवत धर्म का आचरण करना चाहिए। मनुष्य – जीवन बहुत कठिन है। संयम और असंयम दो पथ हैं एक शुभ और दूसरा अशुभ है। किन्तु इस अवस्था में मन सदा अशुभ कर्म की ओर ही झुकता है। इसलिए तुम्हें अभी संभल जाना चाहिए।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

नवयुवकों के प्रति सप्रसंग व्याख्या

1. हे नवयुवाओ ! देश भर की दृष्टि तुम पर ही लगी,
है मनुज जीवन की तुम्हीं में ज्योति सब से जगमगी।
दोगे न तुम तो कौन देगा योग देशोद्धार में?
देखो, कहाँ क्या हो रहा है आजकल संसार में॥

शब्दार्थ –

  • मनुज = मनुष्य।
  • ज्योति = प्रकाश, उजाला।
  • जगमगी = जगी है।

प्रसंग – यह पद्यांश कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘नवयुवकों के प्रति’ शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने नवयुवकों को देश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे नवयुवको ! आज सारे देश की नज़रें केवल तुम्हारी ओर लगी है। सबका ध्यान तुम्हारी ओर है। तुम से ही मानव जीवन की ज्योति प्रकाशित है। यदि आज तुम भी देश के उद्धार एवं विकास में अपना योगदान नहीं दोगे तो फिर इसमें कौन योगदान देगा अर्थात् हे नवयुवको! तुम इस देश के विकास एवं उद्धार में अपना योगदान दो। तुम यह ध्यानपूर्वक देखो कि आज संसार में क्या हो रहा है।

भावार्थ – नवयुवकों का देश के विकास के लिए प्रेरित किया गया है।

2. जो कुछ पढ़ो तुम कार्य में भी साथ ही परिणत करो,
सब भक्तवर प्रह्लाद की निम्नोक्ति को मन में धरो
“कौमार में ही भागवत धर्माचरण कर लो यहाँ
नर – जन्म दुर्लभ और वह भी अधिक रहता है कहाँ।”

शब्दार्थ

  • परिणत = बदल दो।
  • भक्तवर = श्रेष्ठ भक्त।
  • निम्नोक्ति = नीचे कही गई।
  • धरो = धारण करो।
  • कौमार = कौमार्य, युवावस्था।
  • धर्माचरण = धर्म का आचरण।
  • नर जन्म = मनुष्य जीवन।
  • दुर्लभ = कठिन।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘नवयुवकों के प्रति’ शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें मैथिलीशरण गुप्त ने भक्त श्रेष्ठ प्रह्लाद के सन्देश के द्वारा नवयुवकों को जगाने का प्रयास किया है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे नवयुवको ! तुम अपने जीवन में जो भी पढ़ो, ज्ञान प्राप्त करो उसे कार्य में भी साथ – साथ बदलो। तुम सब अपने मन में श्रेष्ठ भक्त प्रहलाद की उक्ति को धारण करो और अपनी युवावस्था में ही भागवत धर्म का पालन कर लो। मनुष्य जन्म बहुत कठिन है और वह भी बहुत छोटा है।

भावार्थ – मनुष्य जन्म बहुत कठिन है। आप सभी भागवत धर्म का आचरण करो।

3. दो पथ, असंयम और संयम हैं तुम्हें अब सब कहीं।।
पहला अशुभ है, दूसरा शुभ है इसे भूलो नहीं।”
पर मन प्रथम की ओर ही तुम को झुकावेगा अभी,
यदि तुम न सम्भलोगे अभी तो फिर न संभलोगे कभी।

प्रसंग – यह पद्यांश श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित ‘नवयुवकों के प्रति’ नामक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने नवयुवकों को साहसपूर्वक शुभ कर्म करने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या – कवि कहता है कि हे नवयुवको ! जीवन में असंयम और संयम दो रास्ते हैं। यह सच है कि इसमें पहला अशुभ है और दूसरा शुभ है। परन्तु मन तुम्हें अशुभ की ओर ही झुकाएगा अर्थात् तुम्हारा मन अशुभ पथ पर चलकर अशुभ कर्म करने की ओर वहीं दौड़ेगा। यदि अभी तुम नहीं संभलोगे तो जीवन में फिर कभी भी सम्भल नहीं पाओगे। अतः तुम्हें जाग जाना चाहिए।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 7 नवयुवकों के प्रति

भावार्थ – नवयुवकों को शुभ कर्म करने की प्रेरणा दी है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 नील गगन का नीलू (2nd Language)

Hindi Guide for Class 8 PSEB नील गगन का नीलू Textbook Questions and Answers

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

नील गगन का नीलू अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू 2
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू 3
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं लिखें एवं पढ़ें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू 4
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू 5
उत्तर :
छात्र स्वयं लिखें एवं पढ़ें।।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

3. शब्दार्थ

  • लालायित = इच्छुक
  • दखल-अंदाजी = रोड़ा अटकाना, हस्तक्षेप करना
  • मूल्यवान – कीमती
  • मेधावी – तीव्र बुद्धि वाला, ज्ञानी
  • मूल्याँकन – मूल्य आँकना अल्प थोड़ा
  • सीमा-भेदन – सीमा तोड़ना
  • ध्येय = लक्ष्य
  • दुर्भाग्यवश = बदकिस्मती से
  • बाल हठ = बच्चे की जिद्द
  • परामर्श = सलाह
  • अनुमानित = अनुमान लगाया हुआ
  • एकमात्र – अकेला
  • सक्षम – समर्थ

उत्तर :
छात्र स्वयं लिखें – पढ़ें एवं याद करें।

4. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) नीलू का पूरा नाम क्या था?
उत्तर :
नीलू का पूरा नाम अनिल शर्मा था।

(ख) बचपन से ही उसकी रुचि फ्लाईंग में क्यों हो गई ?
उत्तर :
उसके पिता वायुसेना में सार्जेण्ट थे। वह घण्टों आकाश में उड़ते जहाज़ों को देखता रहता था इसलिए बचपन से ही उसकी रुचि फ्लाईंग में हो गई।

(ग) उड़ते हुए वायुयान को देखकर वह मन ही मन क्या सोचता?
उत्तर :
वह मन ही मन सोचता है कि मैं भी बड़ा होकर विमान उड़ाऊँगा और देश का नाम ऊँचा करुंगा।

(घ) उसने पायलट का प्रशिक्षण कहाँ से लिया?
उत्तर :
उसने पायलट का प्रशिक्षण बिदर से लिया।

(ङ) उसने किन-किन क्षेत्रों में देश की सेवा की?
उत्तर :
बाढ़, सीमा सुरक्षा, वायुयान प्रशिक्षण एवं पायलट के क्षेत्रों में देश की सेवा की।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

(च) उसे किस प्रकार के कार्यों में रुचि थी?
उत्तर :
उसे चनौतीपर्ण कार्यों को करने में रुचि थी।

(छ) 12 नवम्बर, 2000 को भारतीय तट रक्षा बल ने पश्चिमी सीमा पर क्या देखा?
उत्तर :
12 नवम्बर, सन् 2000 को भारतीय तट रक्षा बल ने पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तानी मछुआरों की किश्तियां देखीं।

(ज) पाकिस्तानी मछुआरों ने किसे अपना निशाना बनाया?
उत्तर :
पाकिस्तानी मछुआरों ने दखलअंदाजी को जांचने आए हैलीकाप्टर को अपना निशाना बनाया।

(झ) 26 नवम्बर, 2009 को ऐसी ही घुसपैठ किस स्थान पर हुई?
उत्तर :
26 नवम्बर, सन् 2009 को ऐसी ही घुसपैठ मुम्बई में हुई।

5. इन प्रश्नों के उत्तर चार या पाँच वाक्यों में लिखें :

(क) किन-किन घटनाओं से पता चलता है कि अनिल शर्मा असाधारण प्रतिभा के स्वामी थे?
उत्तर :

  • बाल हठ से चार वर्ष की आयु में ही पहली कक्षा में दाखिला करवा लिया।
  • केवल चौदह वर्ष की आयु में ही विशेष अनुमति द्वारा मैट्रिक की परीक्षा पास की।
  • जहाजों को उड़ते देख बचपन में ही जहाज़ उड़ाने का संकल्प कर लिया।
  • बी० एससी० नॉन मैडिकल की परीक्षा में गणित में 100 में से 91 अंक प्राप्त किए।
  • सन् 1987 में सी० डी० एस० की परीक्षा में चंडीगढ़ से अकेले सफल हुए।

(ख) किस घटना से पता चलता है कि उनमें पूरा आत्मविश्वास था?
उत्तर :
बी० एससी० की परीक्षा में उनके गणित में 100 में से 71 अंक आए किन्तु उन्होंने मां को बताया कि उसके अनुमान से तो 100 में से 91 अंक आने चाहिए थे। इससे मां ने उसका दोबारा मूल्यांकन करवाया जिससे उसके 91 अंक ही आए। इस कथन से पता चलता है कि उनका पूरा आत्मविश्वास था।

6. इन मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ समझते हुए वाक्यों में प्रयोग करें :

  1. मौत की नींद सुलाना ____________________
  2. सीना छलनी करना ____________________
  3. होनहार बिरवान के ____________________
  4. होत चीकने पात ____________________
  5. सुध लेना ____________________
  6. ताकते रह जाना ____________________
  7. मंत्र-मुग्ध होना ____________________

उत्तर :

  1. मौत की नींद सुलाना – मार देना – नीलू ने शत्रुओं को मौत की नींद सुला दिया था।
  2. सीना छलनी करना – मार देना – वीर सैनिक ने शत्रुओं का अपनी गोलियों से सीना छलनी कर दिया था।
  3. गौरवान्वित करना – गौरव महसूस करना – देशभर में प्रथम आकर प्रज्ञा ने राज्य को गौरवान्वित किया।
  4. होनहार बिरवान के होत चीकने पात – मेधावी तो बचपन से ही दिख जाता है नीलू स्वभाव से ही साहसी, दृढ़ निश्चयी एवं मेधावी था उसे देखकर लगता है कि होनहार बिरवान के होत चीकने पात।
  5. सुध लेना – ध्यान देना – अतिव्यस्त होने पर भी माँ ने बच्चे की सुध ली।
  6. ताकते रह जाना – देखते ही/हैरान रह जाना – चिडियाघर में रवि शेर को ताकता ही रहा।
  7. मंत्र – मुग्ध होना – लीन होना – प्रताप वायुयान को देखकर मंत्र मुग्ध हो गया था।

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7. अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द लिखें :

  1. देश की रक्षा के लिए कुर्बान होना ____________________
  2. कभी न थकने वाला ____________________
  3. जिसे किसी का भी डर न हो ____________________
  4. अपने आप पर भरोसा होना ____________________
  5. वायुयान चलाने वाला ____________________
  6. समय से पूर्व ____________________
  7. बचपन की जिद ____________________
  8. घुसपैठ करने वाला ____________________

उत्तर :

  1. देश की रक्षा के लिए कुर्बान होना = शहादत
  2. कभी न थकने वाला = अथक
  3. जिसे किसी का भी डर न हो = निडर
  4. अपने आप पर भरोसा होना = आत्मविश्वास
  5. वायुयान चलाने वाला = पायलट/वायुयान चालक
  6. समय से पूर्व = असमय
  7. बचपन की जिद्द = बालहठ
  8. घुसपैठ करने वाला = घुसपैठिया

8. विपरीत शब्द बनायें :

  1. अ + साधारण = असाधारण
  2. अ + टूट =
  3. अ + समय =
  4. अ + थक =
  5. अ + सफल =
  6. अ + न्याय =

उत्तर :

  1. अ + साधारण = असाधारण
  2. अ + टूट = अटूट
  3. अ + समय = असमय
  4. अ + थक = अथक
  5. अ + सफल = असफल
  6. अ + न्याय = अन्याय

9. इन वाक्यों में सर्वनाम शब्दों को रेखांकित करें एवं विशेषण शब्दों पर गोला लगायें।

(क) वे(निपुण) परीक्षक के रूप में (प्रसिद्ध) हो गये।
(ख) वे अटूट साहस वाले व्यक्ति थे।
(ग) उनका ध्येय राष्ट्रीय पुरस्कार या सम्मान पाना ही नहीं था।
(घ) पिता को उनका दाखिला चार वर्ष की आयु में ही प्रथम कक्षा में करवाना पड़ा।
(ङ) उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने का कार्य स्काड्रन लीडर अनिल शर्मा ने कर दिखाया।
उत्तर :
(क) वे (निपुण) परीक्षक के रूप में (प्रसिद्ध) हो गये।
(ख) वे (अटूट) साहस वाले व्यक्ति थे।
(ग) उनका ध्येय (राष्ट्रीय) पुरस्कार या सम्मान पाना ही नहीं था।
(घ) पिता को उनका दाखिला (चार) वर्ष की आयु में ही प्रथम)कक्षा में करवाना पड़ा।
(ङ) उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने का कार्य (स्काड्रन लीडर) अनिल शर्मा ने कर दिखाया।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

रचनात्मक अभिव्यक्ति
(क) मौखिक अभिव्यक्ति :
युद्ध एवं इसके अलावा देश पर कुर्बान होने वाले भारत माता के वीर सपूतों की जीवनियाँ पढ़ें एवं कक्षा में सुनायें।
उत्तर :
अध्यापकों की सहायता से पढ़ें एवं सुनें।

(ख) लिखित अभिव्यक्ति :
(i) 26 नवम्बर, 2009 को मुंबई स्थित ताज होटल में हुई हृदयविदारक दुर्घटना के बारे जानकारी प्राप्त करें और अपने सुझाव दें कि ऐसी विकट परिस्थिति में हमें क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर :
ऐसी विकट परिस्थिति में हमें निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए –

  • दुश्मनों का साहस से डटकर मुकाबला करना चाहिए।
  • शत्रुओं की शक्ति को पहचान लेना चाहिए।
  • धैर्य एवं विश्वास रखना चाहिए।

(ii) हमारे देश में कितनी प्रकार की सेनाएँ हैं ? तीन पंक्तियों में लिखें।
उत्तर :
हमारे देश में तीन प्रकार की सेनाएं हैं –

  • थल सेना
  • जल सेना
  • वायुसेना।

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत के वीर देश की आजादी के लिए क्या देने को तत्पर रहते हैं?
उत्तर :
भारत के वीर देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने को तत्पर रहते हैं।

प्रश्न 2.
भारत के वीर किसमें गौरव महसूस करते हैं?
उत्तर :
भारत के वीर अपने देश तथा देशवासियों की सुरक्षा के लिए शहीद होने में गौरव महसूस करते हैं।

प्रश्न 3.
नीलू के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
नीलू के स्वभाव की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

  • वह बचपन से ही दृढ़ निश्चयी था।
  • वह बहुत ज़िद्दी था।
  • वह मेधावी था।
  • वह साहसी एवं निडर था।

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प्रश्न 4.
नीलू की बहन का क्या नाम था?
उत्तर :
नीलू की बड़ी बहन का नाम शुभला था।

प्रश्न 5.
सन् 2000 में हिमाचल में बादल फटने से आई बाढ़ में नीलू द्वारा किए गए बचाव कार्य से खुश होकर वहाँ के लोगों ने क्या किया?
उत्तर :
वहाँ के लोग अपने आप को नीलू का ऋणी मानते हैं। वहाँ की लड़कियों एवं महिलाओं ने नीलू को राखियाँ बांधकर नम आँखों से विदा किया था।

प्रश्न 6.
नीलू ने दसवीं की परीक्षा किस आयु में उत्तीर्ण की?
उत्तर :
नीलू ने केवल चौदह वर्ष की आयु में विशेष अनुमति से दसवीं की परीक्षा पास की।

प्रश्न 7.
नीलू ने कौतुक का प्रथम परिचय कब और कहां दिया?
उत्तर :
नील ने अपने कौतक का परिचय 26 जनवरी, सन 2000 को राजधानी दिल्ली में गणतन्त्र दिवस की परेड में हैलीकॉप्टर द्वारा दिया था। उन्होंने बताया था कि किस प्रकार एक पायलट लोगों की जान बचाने में सक्षम होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
नीलू का पूरा नाम क्या था?
(क) सुनील शर्मा
(ख) अनिल शर्मा
(ग) नील शर्मा
(घ) नीलम शर्मा।
उत्तर :
(ख) अनिल शर्मा

प्रश्न 2.
नीलू सेना में किस पद पर थे?
(क) कैप्टन
(ख) ग्रुपलीडर
(ग) स्काड्रन लीडर
(घ) कमांडर।
उत्तर :
(ग) स्काड्रन लीडर

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

प्रश्न 3.
नीलू ने किस आयु में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी?
(क) 13 वर्ष
(ख) 14 वर्ष
(ग) 15 वर्ष
(घ) 16 वर्ष।
उत्तर :
(ख) 14 वर्ष

प्रश्न 4.
नीलू ने सी० डी० एस० की परीक्षा कब उत्तीर्ण की थी?
(क) 1986
(ख) 1987
(ग) 1988
(घ) 1989
उत्तर :
(ख) 1987

प्रश्न 5.
नीलू ने पायलट का प्रशिक्षण कहाँ से लिया था?
(क) बिठूर
(ख) बिदर
(ग) बैंगलुरु
(घ) बैरकपुर।
उत्तर :
(ख) बिदर

प्रश्न 6.
नीलू का जन्म कब हुआ था?
(क) 7 – 6 – 1966
(ख) 7 – 10 – 1966
(ग) 7 – 11 – 1966
(घ) 7 – 12 – 1966
उत्तर :
(क) 7 – 6 – 1966

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

प्रश्न 7.
नीलू का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) चंडीगढ़
(ख) होशियारपुर
(ग) करतारपुर
(घ) फिरोजपुर।
उत्तर :
(ग) करतारपुर

प्रश्न 8.
नीलू के पिता किस सेना में थे?
(क) थल सेना
(ख) वायु सेना
(ग) जल सेना
(घ) बी० एस० एफ०।
उत्तर :
(ख) वायु सेना

प्रश्न 9.
नीलू देश पर कब कुर्बान हो गए?
(क) 12 – 11 – 2000
(ख) 12 – 9 – 2000
(ग) 12 – 10 – 2000
(घ) 12 – 12 – 2000
उत्तर :
(क) 12 – 11 – 2000

प्रश्न 10.
पाकिस्तान ने भारत की ओर बिना चालक का कौन – सा विमान छोड़ा था?
(क) एलफैंटा
(ख) एटलान्टिक
(ग) पैरामाउंट
(घ) पैरागन।
उत्तर :
(ख) एटलान्टिक

नील गगन का नीलू Summary in Hindi

नील गगन का नीलू पाठ का सार

‘नील गगन का नीलू’ नामक पाठ सुधा जैन ‘सुदीप’ द्वारा रचित है। इसमें लेखिका ने शहीद नीलू के साहस, समर्पण एवं त्याग भावना का वर्णन किया है। नीलू अटूट साहसी, निडर, स्वाभिमानी, सच्चे देशभक्त स्काड्रन लीडर थे। वे बचपन से ही दृढ़ निश्चयी थे। उनकी बाल – हठ के कारण उनके पिता को चार वर्ष की आयु में ही उनका प्रथम कक्षा में दाखिला करवाना पड़ा। उसके खिलौने में केवल वायुयान ही होते थे।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

उसके पिता हरी प्रकाश शर्मा वायसेना में सार्जेण्ट थे। इसी से नील की रुचि फ्लाइंग में होना स्वाभाविक था। वह घण्टों तक उड़ते जहाजों को देखता और मन ही मन सोचता रहता था। उसने विशेष अनुमति द्वारा केवल चौदह वर्ष की आयु में ही मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी। बी०एस सी० (नॉन मैडीकल) की परीक्षा में उनके 100 में से 91 अंक आए थे। सन् 1987 ई० में सी०डी०एस० की परीक्षा में चण्डीगढ़ से सफल होने वाले वे अकेले युवक थे।

उनकी रेकिंग के हिसाब से उनके सामने जल, थल और वायु सेना में से किसी को भी चुनने का विकल्प था किन्तु इन्होंने अपनी रुचि के अनुसार वायु सेना को ही चुना और बिदर में पायलट प्रशिक्षण लिया। सन् 1993 में दीपिका शर्मा से इनका विवाह हुआ जिनसे रुशिल और वैभव पुत्री – पुत्र प्राप्त हुए। उनकी असाधारण प्रतिभा एवं समर्पण के कारण उन्हें जल्दी ही वायुयान – चालक परीक्षक नियुक्त कर दिया गया।

वे स्वभाव से ही अपना काम जल्दी निपटा लिया करते थे। वे 7 नवम्बर, सन् 1966 ई० को करतारपुर में समय से पूर्व अर्थात् असमय पैदा हुए, असमय बोलने लगे, असमय पढ़ने लगे, असमय नौकरी करने लगे तथा असमय ही मातृ भूमि के लिए न्योछावर हो गए। उन्होंने अल्पकाल में अनेक क्षेत्रों में अपने देश की सेवा की। सन् 1999 में पाकिस्तान ने यू०एम०बी०, बिना चालक चलने वाला विमान एटलान्टिक भारत की तरफ छोड़ा जिसे अनिल ने अपनी टीम के साथ मिलकर शत्रु के नापाक इरादों को असफल कर दिया।

26 जनवरी, सन् 2000 को उन्होंने राजधानी में गणतन्त्र दिवस की परेड में हैलीकाप्टर द्वारा अपने कौतुक का परिचय दिया। उन्होंने सैनिकों से भरी जीप को हैलीकाप्टर द्वारा ऊपर उठाकर सबको चकित कर दिया था। जुलाई 2000 में रामपुर बुशैर (हिमाचल) में बादल फटने से आई भीषण बाढ़ में फंसे लोगों की जान बचाई तथा उनकी सहायता की। नीलू सदा चुनौतीपूर्ण कार्य करने को तैयार रहते थे। वे कभी भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होते थे।

12 नवम्बर, सन् 2000 को भारतीय तट रक्षा हेतु नीलू अपनी टीम के साथ भारतीय सीमा में घुसे पाकिस्तानी सैनिकों को जांचने गए। पाकिस्तानी सैनिकों ने मछुआरों के भेष में हैलीकाप्टर पर मिसाइल फैंकी। नीलू का हैलीकाप्टर कच्छ की दलदल में जा गिरा जिस कारण सात अधिकारी शहीद हो गए थे। नीलू भी इसमें शहीद हो गए थे। उन्होंने भारत की सुरक्षा के लिए स्वयं को कुर्बान कर दिया।

नील गगन का नीलू सप्रसंग व्याख्या

1. भारत के वीर देश की आजादी की रक्षा की खातिर सदैव कुर्बान होने को लालायित रहते हैं। उनका ध्येय मात्र राष्ट्रीय पुरस्कार या सम्मान पाना ही नहीं होता बल्कि वे देश व देशवासियों की सुरक्षा के लिए शहीद होने में गौरवान्वित महसूस करते हैं। ऐसे ही बुलन्द हौसले वाले, अटूट साहसी, जिन्हें मौत का डर न था। वे थे स्काड्रन लीडर अनिल शर्मा उर्फ ‘नीलू’।

बाल्यकाल से ही दृढ़ निश्चयी नीलू अपनी बड़ी बहन ‘शुभला’ का दाखिला करवाने गए पिता से जिद्द पर उतर आए कि उन्हें भी स्कूल में भर्ती करवाया जाये। भला बाल – हठ व दृढ़ निश्चय के सामने कौन नहीं झुकता? पिता को उनका दाखिला चार वर्ष की आयु में ही प्रथम कक्षा में करवाना पड़ा।

प्रसंग – यह गद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘नील गगन का नीलू’ शीर्षक से लिया गया है। यह लेखिका सुधा जैन ‘सुदीप’ द्वारा लिखित है। इसमें लेखिका ने भारतीय वीर नीलू की देश भक्ति के बारे में बताया है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

व्याख्या – लेखिका कहती है कि भारत के वीर जवान अपने देश की आजादी की रक्षा के लिए सदा कुर्बान होने को इच्छुक रहते हैं। उनका लक्ष्य केवल राष्ट्रीय पुरस्कार अथवा सम्मान को प्राप्त करना नहीं होता बल्कि वे तो अपने और देशवासियों की सुरक्षा के लिए शहीद होने में गौरव का अनुभव महसूस करते हैं। ऐसे ही बुलंद हौंसले वाले अटूट साहसी जिन्हें अपनी मृत्यु का भी डर नहीं था स्काड्रन लीडर अनिल शर्मा उर्फ ‘नीलू’ थे। वे बचपन से ही दृढ निश्चयी थे। जब उसके पिता बड़ी बहन शुभला का स्कूल में दाखिला करवाने गए तो वह अपने पिता से अपना भी दाखिला करवाने के लिए जिद्द करने लगे । उनके पिता को उसकी बाल – हठ तथा दृढ़ निश्चय के सामने झुकना पड़ा और उनका दाखिला चार वर्ष की आयु में ही पहली कक्षा में करवाना पड़ा।

भावार्थ – देशभक्त नीलू के साहस, दृढ़ निश्चय, जिद्द एवं पढ़ाई के प्रति इच्छा को दर्शाया गया है।

2. नीलू के खिलौनों में केवल वायुयान ही होते थे। पिता हरी प्रकाश शर्मा वायुसेना में सार्जेण्ट थे। इसलिए नीलू की रुचि फ्लाईंग में होना स्वाभाविक ही था। वे घण्टों आकाश में उड़ते जहाजों को देखते और मन ही मन बुदबुदाते :

“दिख विमानों को उड़ते, मन ही मन हर्षाऊँ,
बड़ा होकर देश का, मैं परचम फहराऊँ।”
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू 1

प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश सुधा जैन ‘सुदीप’ द्वारा लिखित ‘नील गगन का नीलू’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखिका ने देशभक्त नीलू के बचपन तथा उसकी रुचि का वर्णन किया है।

व्याख्या – लेखिका कहती है कि बचपन में नीलू के खिलौनों में केवल वायुयान ही होते थे। वे बचपन से ही वायु सेना में वायुयान उड़ान का सपना देखते थे। उनके पिता हरी प्रकाश शर्मा वायुसेना में सार्जेण्ट के पद पर थे। इसलिए नीलू की रुचि वायुयान उड़ाने में होना स्वाभाविक ही था। वे कई – कई घंटे तक आकाश में उड़ते हुए जहाजों को देखते रहते थे और अपने मन ही मन में यह बात दोहराते रहते थे कि आकाश में उड़ते इन विमानों को देखकर मैं मन ही मन खुश होता हूँ। मैं भी इनकी तरह बड़ा होकर अपने देश का नाम ऊँचा करूँगा। मैं भी एक दिन अवश्य ही वायुयान उड़ाऊँगा।।

भावार्थ – देशभक्त नीलू के दृढ़ निश्चय एवं इच्छा के बारे में बताया गया है।

3. जुलाई 2000 में राम पुर बुशैर (हिमाचल) में बादल फटने से आई बाढ़ जैसी भीषण परिस्थितियों में बचाव कार्य द्वारा अनेक लोगों की जानें बचाने का जोखिम भरा कार्य किया जिसके लिए आज भी वहाँ के लोग अपने – आप को ऋणी मानते हैं। जहाँ तक कि वहाँ की लड़कियाँ और महिलाओं ने तो अनिल को राखियाँ बाँधकर अश्रुओं से भरी आँखों से वहाँ से विदा किया था।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

प्रसंग – यह गद्यांश लेखिका सुधा जैन ‘सुदीप’ द्वारा रचित ‘नील गगन का नीलू’ शीर्षक से लिया गया है। इसमें लेखिका ने जुलाई 2000 में हिमाचल में बादल फटने से आई भीषण बाढ़ में नीलू द्वारा की गई सेवा एवं सहयोग को प्रकट किया है।

व्याख्या – लेखिका कहती है कि जुलाई 2000 में रामपुर बुशैर हिमाचल प्रदेश में अचानक बादल फटने से भयंकर बाढ़ आ गई थी। उस समय वहाँ भयंकर परिस्थितियां थीं। इन भयकर परिस्थितियों में भी नीलू ने बचाव कार्य किए। उन्होंने अनेक लोगों की जान बचाने का जोखिमपूर्ण कार्य किया जिसके लिए आज भी वहाँ के लोग अपने आप को ऋणी मानते हैं। यहाँ तक कि वहाँ की लड़कियों एवं महिलाओं ने तो अनिल को राखियाँ बाँधकर आँसुओं से भरी आँखों से विदा किया था।

भावार्थ – नीलू के सहयोग, भाईचारे एवं देश प्रेम एवं मानव प्रेम को दर्शाया है।

4. “देश रक्षा की खातिर, मैं नील गगन उड़ जाऊँ
नीलाम्बर से नील नीर में, मैं नीलू मिल जाऊँ।”

ऐसी भावना से ओतप्रोत नीलू हमेशा चुनौती पूर्ण कार्यों को करने में तत्पर रहते थे। वे कभी भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं हुए।

प्रसंग – यह गद्यांश लेखिका सुधा जैन द्वारा लिखित पाठ ‘नील गगन का नीलू’ शीर्षक से उद्धृत है। इसमें नीलू की देशभक्ति एवं समर्पण को बारे में बताया गया है।

व्याख्या – नीलू कहता था कि मैं अपने देश के लिए नीले आकाश में उड़ें और नीले आकाश से नीले जल में मिल जाऊँ अर्थात् मैं अपने देश की सेवा करते हुए न्योछावर हो जाऊँ। ऐसी देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत नीलू सदा ही चुनौती से भरे कार्यों को करने के लिए तैयार रहते थे। वे कभी भी अपने कर्त्तव्य से मुँह नहीं मोड़ते थे। सदा अपना कर्त्तव्य साहस एवं निष्ठा से पूरा करते थे।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 6 नील गगन का नीलू

भावार्थ – नीलू की देशभक्ति, साहस एवं कर्त्तव्य भावना को दर्शाया गया है।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Hindi Chapter 20 ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र (2nd Language)

Hindi Guide for Class 6 PSEB ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र Textbook Questions and Answers

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र

ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने :

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार समाचार-पत्र 1
PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार समाचार-पत्र 2
उत्तर :
विद्यार्थी हिन्दी के शब्दों को समझें और लिखने का अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार समाचार-पत्र 3
PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार समाचार-पत्र 4
उत्तर :
विद्यार्थी हिन्दी के इन शब्दों को लिखने का अभ्यास करें।

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3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) लेखक ने ज्ञान का भंडार किसे कहा है?
उत्तर :
लेखक ने समाचार-पत्र को ज्ञान का भंडार कहा है।

(ख) बच्चों की रुचि की क्या-क्या सामग्री अख़बार में मिलती है?
उत्तर :
बच्चों के लिए कहानियाँ, बाल कविताएँ तथा चुटकुलों के साथ-साथ पहेलियाँ होती हैं।

(ग) अखबार महिलाओं के लिए कैसे उपयोगी है?
उत्तर :
इसमें महिलाओं को रसोई की बहुत सारी चीजें बनाना सिखाया जाता है।

(घ) युवा लोग इससे क्या लाभ उठा सकते हैं?
उत्तर :
युवाओं के लिए भी बहुत सी सामग्री इसमें रहती है जैसे कौन-सा विषय और कौन-सी राह जीवन में चुनें, इसका ब्योरा रहता है।

(ङ) बच्चे अपना सामान्य-ज्ञान कैसे बढ़ा सकते हैं?
उत्तर :
बच्चे प्रतिदिन समाचार-पत्र पढ़कर अपना सामान्य ज्ञान दूसरों से अधिक बढ़ा सकते हैं।

(च) समाचार-पत्र का प्रकाशन किस मशीन के आने से शुरू हुआ?
उत्तर :
कागज़ छापने की मशीन आने के साथ ही समाचार-पत्रों का प्रकाशन शुरू हुआ।

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(छ) देशभक्तों ने लोगों में देश भक्ति की भावना कैसे भरी?
उत्तर :
देशभक्तों ने समाचार-पत्रों के द्वारा ही लोगों में देशभक्ति की भावना भरी।

(ज) शहीद भगत सिंह ने किस नाम से और किस अखबार में काम किया था?
उत्तर :
शहीद भगतसिंह ने ‘बलवंत’ के नाम से ‘प्रताप’ अखबार में काम किया।

(झ) आजकल समाचार कैसे भेजे जाते हैं?
उत्तर :
आजकल समाचार इंटरनेट द्वारा भेजे जाते हैं।

(ऊ) रिपोर्टर किसे कहते हैं?
उत्तर :
समाचार भेजने वाले को रिपोर्टर कहते हैं।

(ट) घरों में अख़बार कौन लाता है?
उत्तर :
घरों में अखबार हॉकर देकर जाता है।

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4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में लिखें :

(क) अख़बार पढ़ना क्यों ज़रूरी है?
उत्तर :
अपने देश, समाज, विदेश में क्या घटना घट रही है, इसकी जानकारी के लिए अख़बार पढ़ना ज़रूरी है। इसको पढ़ने वाले का सामान्य ज्ञान दूसरों से ज़्यादा होता है।

(ख) लोगों में देशभक्ति की भावना कैसे भरी जा सकती है?
उत्तर :
लोगों में देशभक्ति की भावना समाचार-पत्रों के द्वारा भरी जा सकती है।

(ग) अख़बार हमारे घर तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर :
समाचार-पत्रों के प्रकाशन करने के बाद इन्हें बंडल बनाकर अलग-अलग शहरों में भेजा जाता है। वहाँ एजेंसी मालिक हॉकरों को बाँटने के लिए अख़बार देता है और हॉकर हमारे घर तक अख़बार पहुँचाता है।

(घ) समाचार-पत्र ज्ञान का भंडार हैं। कैसे?
उत्तर :
समाचार-पत्र से हमें अपने शहर, अपने राज्य, अपने देश और विदेश में घटित घटनाओं की जानकारी मिलती है। इसके साथ-साथ खेल, राजनीति और अन्य समाचार भी इसमें रहते हैं। इससे हमारा ज्ञान बढ़ता है। इसीलिए इसे ज्ञान का भंडार कहा गया है।

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5. बहुवचन रूप लिखें :

  1. महिला = महिलाओं
  2. अख़बार = अखबारों
  3. युवा = __________________
  4. पुस्तक = __________________
  5. कविता = __________________
  6. पत्र = __________________
  7. प्रतियोगिता = __________________
  8. हॉकर = __________________

उत्तर :

  1. महिला = महिलाओं।
  2. अखबार = अखबारों।
  3. युवा = युवाओं।
  4. पुस्तक = पुस्तकों।
  5. कविता = कविताओं।
  6. पत्र = पत्रों।
  7. प्रतियोगिता = प्रतियोगिताओं।
  8. हॉकर = हॉकरों।

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6. इन संयुक्त व्यंजनों से नये शब्द बनायें :

  1. पुरस्कार = स्क = तिरस्कार, चस्का
  2. पुस्तक = स्त = ___________________
  3. श्वेत = श्व = ___________________
  4. ध्यान = ___________________
  5. ज्ञान = ज् + अ = ज्ञ = ___________________
  6. पत्र = त् + र = त्र = ___________________

उत्तर :

  1. पुरस्कार = स्क = नमस्कार, तिरस्कार।
  2. पुस्तक = स्त = मस्तक, दस्तक।
  3. श्वेत = श्व = अश्व, श्वसन।
  4. ध्यान = मध्य, अवध्य।
  5. ज्ञान = ज् + अ = ज्ञ = विज्ञान, अज्ञान।
  6. पत्र – त् + र = त्र = अस्त्र, स्त्री।

7. निम्नलिखित में से रेखांकित शब्दों में र का कौन सा रूप है-पूरा ‘र’ अथवा आधा ‘र’: –

  1. कार्टून = ___________________
  2. टेलिग्राम = ___________________
  3. संग्राम = ___________________
  4. प्राणी = ___________________
  5. प्रेरणा = ___________________
  6. प्रताप = ___________________
  7. रिपोर्टर = ___________________

उत्तर :

  1. आधा
  2. पूरा
  3. पूरा
  4. पूरा
  5. पूरा
  6. पूरा
  7. आधा।

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8. सोचिए और लिखिए :

1. बच्चों के लिए अखबारों में कौन-कौन-सी सामग्री प्रकाशित होती है, उनकी सूची बनाओ।
उत्तर :
बच्चों के लिए अखबारों में बहुत-सी सामग्री प्रकाशित होती है। कुछ का परिचय निम्नांकित है
(क) कार्टून कोना।
(ख) पहेलियाँ।
(ग) चुटकले।
(घ) बूझो तो जानें
(ङ) क्रॉस वर्ड
(च) बच्चों की कहानियाँ
(छ) रंग भरो प्रतियोगिता।

2. बाल-पत्रिकाओं की सूची बनाओ।
उत्तर :
बाल पत्रिकाएं

  1. चाचा चौधरी।
  2. चन्दा मामा।
  3. विक्रम और बेताल।
  4. जूनियर फैंटम।
  5. स्पाइडर मैन।
  6. चंपक।
  7. पराग।
  8. गुड़िया।
  9. चार्ली।

3. यदि आपके क्षेत्र में किसी ने साहस से भरा कार्य किया हो तो पता करो तथा कक्षा में आकर सुनाओ।
उत्तर :
यह 15 नवम्बर, सन् 2010 की घटना है। शाम के बाद से ठंडी-ठंडी हवा चलने लगी थी। हम सभी घर के अन्दर ही बैठे हुए टी० वी० पर प्रोग्राम देख रहे थे। माँ गर्म-गर्म खाना बनाकर हमें खिलाती जा रही थी। पिता जी अभी अपने काम से घर से बाहर ही थे। थोड़ी देर में हमें लगा कि हमारे सामने वाले मकान से कुछ आवाजें आ रही हैं। हमारे समझते-समझते ये आवाजें भारी शोर में बदल गईं। लोगों की चीखो-पुकार सुनाई देने लगी।

हमने बाहर निकल कर देखा और पास-पड़ोस से घटना की जानकारी लेनी चाही तो पता चला कि घर में कुछ लुटेरे आ धमके हैं और घरवालों के साथ मार-कुटाई करके लूट मचा रहे हैं। लोग डरे-सहमे से खड़े देख रहे थे। कोई आगे बढ़ने का साहस नहीं कर रहा था। इतने में हमारे पड़ोसी शर्मा जी पलक झपकते ही सीढ़ियों के रास्ते उनके घर में प्रवेश कर गए और लुटेरों से उलझ पड़े। अचानक हुए वार से लुटेरे भी सकते में आ गए।

वे आनन-फानन में भागने लगे। शर्मा जी ने एक लुटेरे को दबोच लिया और ज़ोर से सहायता के लिए चिल्लाए। इलाके के लोगों को भी जोश आ गया और उन्होंने लुटेरों का मार्ग रोक कर उन्हें पकड़ लिया और जम कर धुनाई करने लगे। इतने में किसी ने पुलिस को फ़ोन कर दिया था। पुलिस वाले भी जल्दी आ गए और उन्हें पकड़ कर ले गए। सभी ने शर्मा जी की हिम्मत और बहादुरी की सराहना की।

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9. करिए और जानिए :

1. आपके स्कूल की लड़की ने आठवीं कक्षा में पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, उससे सम्पर्क कर इंटरव्यू लो।
उत्तर :
इंटरव्यू कर्ता – हैलो पूजा, आपने आठवीं कक्षा में पूरे जिले में प्रथम स्थान पाया है इसलिए बहुत, बहुत बधाई।
पूजा – शुक्रिया, श्रीमान।

इंटरव्यू कर्ता – हम लोग दैनिक समाचार – पत्र की तरफ से आपका इंटरव्यू लेने आए हैं।
पूजा – जी, धन्यवाद।

इंटरव्यू कर्ता – जिले में प्रथम आने पर कैसा लग रहा है।
पूजा – जी बहुत अच्छा। आज में बहुत खुश हूँ। मैंने अपने मम्मी – पापा और मेरे गुरुजनों का सपना पूरा कर दिया है।

इंटरव्यू कर्ता – प्रथम स्थान पर आने पर कौन सबसे अधिक खुश हुआ।
पूजा – मेरे मम्मी – पापा और गुरुजन, मेरे प्रिंसीपल और हमारे पड़ोसी भी खुश हुए है।

इंटरव्यू कर्ता – अब आगे आपका और क्या सपना है?
पूजा – मैं इसी प्रकार मेहनत करते हुए सदा प्रथम स्थान पर रहकर डॉक्टर बनना चाहती हूँ।

इंटरव्यू कर्ता – इरादे अगर नेक हो, विश्वास अटूट हो, हिम्मत फौलादी हो तो सफलता मिल कर रहेगी। ईश्वर तुम्हारे सारे सपने पूरे करे।
पूजा – धन्यवाद।

2. समाचार-पत्र के कार्यालय में जाओ, देखो वहाँ समाचार-पत्र कैसे छपते हैं? पूरा विवरण अपनी सहेली/मित्र को पत्र द्वारा लिखकर भेजो।
उत्तर :
148 अजीत नगर,
जालन्धर।
दिनांक …………………………

प्रिय सखी सुनीता,
आज मैं तुम्हें अपने जीवन की रोमांचक घटना के बारे में बताने जा रही हूँ। तुम तो जानती ही हो कि हमारे शहर से तीन समाचार – पत्र छपते हैं। कल मुझे पंजाब केसरी समाचार – पत्र के छापेखाने में जाने का सुअवसर मिला। हम लोग इतनी बड़ी – बड़ी छाया मशीनें देखकर हैरान रह गए। हमें समाचार – पत्र के मुख्य सम्पादक महोदय ने बताया कि किस प्रकार संवाददाता, शहर के प्रत्येक कोने में घटने वाली घटनाओं की, प्रांत की, अन्य प्रांतों की घटनाओं की जानकारी उनके पास टेलीफोन से तथा फैक्स से भिजवाते हैं।

सारी जानकारी को एकत्रित करके उन्हें अलग – अलग कालमों में बाँट कर समाचार का रूप दिया जाता है और फिर मशीन में छापने के लिए भेजा जाता है। मशीनें इतनी तेजी से काम करती हैं कि पलक झपकते ही कितने ही समाचार – पत्र छपकर तैयार हो जाते हैं। मशीनों की तेजी तो देखते ही बनती है।

दो – तीन घण्टों में ये लाखों अखबारों को छाप देती हैं। सच में मुझे तो बहुत ही आश्चर्य हुआ। तुम कभी मेरे शहर में आओगी तो यह समाचार पत्र कैसे छपता है, देख पाओगी।

तुम्हारी सखी,
संगीता।

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10. एक शब्द में अलग-अलग अक्षरों व मात्राओं के प्रयोग से और कई शब्द बन सकते हैं। समाचार शब्द से बनने वाले विविध शब्द कैसे बनते हैं। देखो।
PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार समाचार-पत्र 5
उत्तर :
समाचार – समचर, समरस, सरसर, सरस, समर, सर, सच, सम, चारा, चार, चराचर, चरमरा, चरमर, चरम, चमचम, चरस, चम, चर, मर, मच, मचा, मरा, मारा, मास, रस, रसा, रास, राम रमा, रामा, रामराम, रचा, रामरस, समास, समा, सरासर, सारा, सार।

रेखांकित पदों में कारक बताइये :

  1. घर के सदस्य अखबार पढ़ने के लिए छीना झपटी भी करते हैं।
  2. यदि आप अपनी कक्षा में प्रथम आ जाओ तो रिपोर्टर आपके घर फोटो लेने आते हैं।
  3. अखबार हॉकरों को रोजगार देता है।
  4. अब समाचार इंटरनेट पर भेजे जा रहे हैं।
  5. शहीद भगत सिंह ने भी कानपुर में ‘बलवंत’ नाम से ‘प्रताप’ अखबार में कुछ समय काम किया था।
  6. संपादक के सहयोगियों को उप संपादक कहा जाता है।

उत्तर :
कारक –

  1. सम्प्रदान कारक
  2. अधिकरण कारक
  3. कर्म कारक
  4. अधिकरण कारक
  5. कर्ता कारक, अधिकरण कारक
  6. कर्म को।

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जानिये

इंटरनेट (Internet) : अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे से जुड़े कंप्यूटरों की व्यवस्था जिसका उपयोग (टेलिफ़ोन के समान) कंप्यूटर पटल पर जानकारी के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक ने ज्ञान का भंडार किसे कहा है ?
(क) समाचार को
(ख) समाचार-पत्र को
(ग) डायरी को
(घ) टी.वी. को।
उत्तर :
(ख) समाचार-पत्र को

प्रश्न 2.
आजकल समाचार कैसे भेजे जाते हैं ?
(क) इंटरनेट से
(ख) समाचार पत्र से
(ग) टी.वी. से
(घ) अखबार से।
उत्तर :
(क) इंटरनेट से

प्रश्न 3.
घरों में अखबार कौन लाता है ?
(क) पिता जी
(ख) माता जी
(ग) हॉकर
(घ) पत्रकार।
उत्तर :
(ग) हॉकर

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प्रश्न 4.
लोगों में समाचार पत्र के द्वारा किसकी भावना भरी जा सकती है ?
(क) देशभक्ति
(ख) वीरभक्ति
(ग) भक्ति
(घ) शक्ति
उत्तर :
(क) देशभक्ति

प्रश्न 5.
शहीद भगतसिंह ने किस नाम से ‘प्रताप’ समाचार पत्र में कार्य किया ?
(क) बलवंत
(ख) दिलबाग
(ग) समर
(घ) अमर।
उत्तर :
(क) बलवंत

ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र Summary in Hindi

ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र पाठ का सार

सबह सवेरे हर घर में कोई न कोई समाचार-पत्र आता है। कई लोगों की नींद ही समाचार-पत्र आने पर खुलती है। समाचार-पत्र आने पर कई बार इसे पढ़ने के लिए छीना झपटी होने लगती है। यह सब इसलिए है क्योंकि इसमें सभी के लिए कुछ न कुछ ज्ञान की सामग्री रहती है। इसीलिए इसे ज्ञान का भण्डार कहा जाता है। समाचार-पत्र पढ़ने वाले बच्चे का ज्ञान दूसरों से अधिक होता है।

समाचार-पत्र ने देश की आजादी में भी अपना महत्त्वपूर्ण दायित्व निभाया। इसने लोगों में देश की भक्ति की भावना जगायी। महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, जवाहर लाल नेहरू और बाल गंगाधर तिलक सबने समाचार-पत्रों में लेख लिखे और लोगों को देश की आजादी के लिए प्रेरित किया। यहां तक कि शहीद भगत सिंह ने भी ‘बलवंत’ के नाम से ‘प्रताप’ नामक समाचार-पत्र में काम किया था।

PSEB 6th Class Hindi Solutions Chapter 20 ज्ञान का भंडार समाचार-पत्र 6

आज के समय में समाचार-पत्र का महत्त्व और भी बढ़ गया है। पहले सादे तथा श्वेत श्याम समाचार-पत्र छपते थे लेकिन अब रंगीन समाचार-पत्र छपने लगे हैं। इसी प्रकार अब इंटरनेट के माध्यम से समाचार भेजे जाते हैं। समाचार-पत्र छपने के बाद बंडलों के रूप में विभिन्न स्थानों पर भेजे जाते हैं।

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फिर एजेंसी मालिक अपने हॉकरों को समाचार-पत्र बांटने के लिए देता है। हॉकरों के माध्यम से समाचार-पत्र हमारे हाथों में आता है। समाचार-पत्र यदि हॉकरों को रोज़गार देता है तो पढ़ने वालों को सम्पूर्ण विश्व का ज्ञान देता है। इसीलिए इसे ज्ञान का भण्डार कहा जाता है।

ज्ञान का भंडार : समाचार-पत्र कठिन शब्दों के अर्थ :

  • अखबार = समाचार-पत्र।
  • राह देखना = इंतजार करना।
  • पुरस्कार = ईनाम।
  • हिस्सा लेना = भाग लेना।
  • स्वतन्त्रता-संग्राम = आजादी की लड़ाई।
  • सहयोगी = साथ काम करने वाले।
  • बंडल = गठ्ठा।
  • हॉकर = बेचने वाला।
  • टेलीग्राम = तार।

PSEB 11th Class Religion Book Solutions Guide in Punjabi English Medium

Punjab State Board Syllabus PSEB 11th Class Religion Book Solutions Guide Pdf in English Medium and Punjabi Medium are part of PSEB Solutions for Class 11.

PSEB 11th Class Religion Guide | Religion Guide for Class 11 PSEB in English Medium

Religion Guide for Class 11 PSEB | PSEB 11th Class Religion Book Solutions

  • Chapter 1 Religious Life of the Indus Valley People and Early Aryans
  • Chapter 2 Buddhist Movement upto Ashoka Period
  • Chapter 3 Rise and Development of Sikhism : 1469-1708 A.D.
  • Chapter 4 Introduction to Vedic Literature
  • Chapter 5 General Introduction to Puranas, Upanishads and Shastras
  • Chapter 6 The Adi Granth
  • Chapter 7 Ashta Marga of Buddhism
  • Chapter 8 Ethical Teachings of Jainism
  • Chapter 9 The Sikh Way of Life

PSEB 6th Class Hindi Grammar प्रयोगात्मक व्याकरण (2nd Language)

Punjab State Board PSEB 6th Class Hindi Book Solutions Hindi Grammar प्रयोगात्मक व्याकरण Exercise Questions and Answers, Notes.

PSEB 6th Class Hindi Grammar प्रयोगात्मक व्याकरण (2nd Language)

शुद्ध – अशुद्ध

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लिंग परिवर्तन

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वचन बदलन
वचन बदलने के नियम

(i) ‘अ’ को एं एकवचन
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(ii) आ (पुल्लिग) को ए कमरा
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(iii) आ (स्त्रीलिंग) के आगे एँ
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PSEB 6th Class Hindi Grammar प्रयोगात्मक व्याकरण (2nd Language)

(iv) इ या ई स्त्रीलिंग को इयाँ एकवचन
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(v) उ, ऊ, औ में एँ जोड़ देते हैं और दीर्घ ऊ के स्थान पर हस्व उ हो जाता है।
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(vi) गण, वृन्द, जन, वर्ग, दल, लोग आदि शब्द लगाकर बहुवचन बनाए जाते हैं –
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फुटकर बहुवचन
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भाववाचक संज्ञाएँ

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विशेषण रचना

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विपरीतार्थक या विलोम शब्द

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पर्यायवाची या समानार्थक शब्द

अमृत  सोम, सुधा, पीयूष।
असुर  राक्षस, दैत्य, दानव, दनुज।
अग्नि  आग, अनल, पावक, दहन।
अन्धकार  अन्धेरा, तम, तिमिर।
आँख  नेत्र, चक्षु, नयन, लोचन।
आकाश  गगन, आसमान, नभ, अम्बर।
आनन्द  मोह, हर्ष, उल्लास, प्रसन्नता।
इच्छा  अभिलाषा, कामना, चाह, लालसा।
ईश्वर  भगवान्, परमात्मा, ईश, प्रभु।
कपड़ा  वस्त्र, पट, वसन।
कमल  पंकज, सरोज, अरविन्द।
किनारा  तट, तीर, कूल।
गौ  गाय, सुरभि, धेनु।
घर  गृह, सदन, भवन, गेह।
घोड़ा  अश्व, वाजी, घोटक, तुरंग।
चन्द्रमा  चाँद, इन्दु, राकेश, शशि, चन्द्र।
जल  वारि, पानी, नीर, तोय।
तलवार  खड्ग, कृपाण, असि।
तीर  वाण, शर, सायक।
दिन  दिवस, वार, अहन।
देवता  सुर, देव, अमर।
नदी  सरिता, तरंगिणी, नद, तटिनी।
नमस्कार  प्रणाम, नमस्ते, अभिवादन।
पृथ्वी  ज़मीन, धरती, भूमि।
पुत्र  बेटा, सुत, तनय।
पर्वत  गिरि, पहाड़, अचल, शैल।
पक्षी  खग, नभचर, विहंग।
बाग  बगीचा, उपवन, वाटिका।
बादल  मेघ, घन, जलद, नीरद।
बिजली  विद्युत्, तड़ित, दामिनी।
फूल  सुमन, कुसुम, पुष्प।
माता  जननी, माँ, मैया।
मृत्यु  मौत, अन्त, निधन, देहान्त।
राजा  नरेश, नरपति, भूपति।
वायु  अनिल, पवन, हवा।
रात  रजनी, निशा, रात्रि।
संसार  दुनिया, विश्व, जगत्।
सूर्य  रवि, भानु, दिनकर।
स्त्री  महिला, अबला, नारी, औरत।
सरोवर  तालाब, सर, तड़ाग।
समुद्र  सागर, सिन्धु, जलधि।
शत्रु  दुश्मन, बैरी, अरि।

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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
(वाक्यांश बोधक)

जिसे बुढ़ापा न आए  अजर
जो कभी न मरे  अमर
जो दिखाई न दे  अदृश्य
जिसका अन्त न हो  अनन्त
अत्याचार करने वाला  अत्याचारी
जो परीक्षा में पास न हो  अनुत्तीर्ण
जिसकी तुलना न हो सके  अतुलनीय
जो परीक्षा में पास हो  उत्तीर्ण
जो ईश्वर को मानता हो  आस्तिक
जो ईश्वर को न मानता हो  नास्तिक
जो बिना वेतन काम करे  अवैतनिक
जहाँ जाया न जा सके  अगम्य
जो अपनी हत्या आप करे  आत्मघाती
जिसके पास शस्त्र न हो  निःशस्त्र
जिसमें अपनी कथा हो  आत्मकथा
जिसका पति मर चुका हो  विधवा
जो योग्य न हो  अयोग्य
जिसने अपराध न किया हो  निरपराधी
दूर की बातें सोचने वाला  दूरदर्शी
अन्याय करने वाला  अन्यायी
सुनने वाला  श्रोता
बोलने वाला  वक्ता
पीछे चलने वाला  अनुयायी
गाने वाले  गायक
जो दिन में एक बार हो  दैनिक
जो उपकार को याद रखे  कृतज्ञ
जो उपकार को याद न रखे  कृतघ्न
नीति को जानने वाला  नीतिज्ञ
जिसका आकार न हो  निराकार
जिसका आकार हो  साकार
ग्राम में रहने वाला  ग्रामीण
नगर में रहने वाला  नागरिक
जो काम वर्ष में एक बार हो  वार्षिक
जिसमें बल न हो  निर्बल
जो दूसरों पर दया करे  दयालु
जो केवल फल खाने वाला हो  फलाहारी
जो मांस खाता हो  मांसाहारी
व्यर्थ खर्च करने वाला  अपव्ययी
कम खर्च करने वाला  मितव्ययी
जिसमें बल हो  बलवान्
जो सब कुछ जानता हो  सर्वज्ञ
सच बोलने वाला  सत्यवादी
अच्छे आचरण वाला  सदाचारी
अपना मतलब निकालने वाला  स्वार्थी
जिसे जीता न जा सके  अजेय
जानने की इच्छा रखने वाला  जिज्ञासु
जो साथ पढ़ने वाला हो  सहपाठी
जो आँखों के सामने हो  प्रत्यक्ष
जो आँखों के पीछे हो  परोक्ष
जो सब को समान दृष्टि से देखे  समद्रष्टा

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर

Punjab State Board PSEB 8th Class Hindi Book Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 8 Hindi Chapter 2 पिंजरे का शेर (2nd Language)

Hindi Guide for Class 8 PSEB पिंजरे का शेर Textbook Questions and Answers

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर

पिंजरे का शेर अभ्यास

1. नीचे गुरुमुखी और देवनागरी लिपि में दिये गये शब्दों को पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखने का अभ्यास करें:

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर 1
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर 2
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

2. नीचे एक ही अर्थ के लिए पंजाबी और हिंदी भाषा में शब्द दिये गये हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और हिंदी शब्दों को लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर 3
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर 4
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

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3. शब्दार्थ

  • दूत = हरकारा, एक जगह से दूसरी जगह चिट्ठी-पत्र, संदेश आदि पहुँचाने वाला
  • निरीक्षण = गौर से देखना, मुआइना करना
  • फुसफुसाहट = बहुत धीमी आवाज़ में बोलना
  • सीसा = एक प्रसिद्ध मूल धातु जिसकी चादरें, गोलियाँ आदि बनती हैं।

उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं अभ्यास करें।

4. उपर्युक्त शब्द भरकर वाक्य पूरे करें :

(क) ……………………………… राज्य सबसे शक्तिशाली समझा जाता था।
(ख) पिंजरे को खोले या ……………………………… बगैर शेर को पिंजरे से बाहर निकालना है।
(ग) नौकरों ने पिंजरे के चारों ओर ……………………………… लगा दी।
(घ) पिंजरे का शेर ……………………………… कर धरती पर फैल गया।
उत्तर :
(क) मगध
(ख) तोड़े
(ग) आग
(घ) पिघल

5. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में लिखें :

(क) महापद्म नंद के दरबार में किस देश के दूत आये थे?
उत्तर :
महापद्म नन्द के दरबार में रोम देश के दूत आये थे।

(ख) रोम के राजदूत मगध के सम्राट के लिए क्या लाये?
उत्तर :
रोम के राजदूत मगध के सम्राट के लिए पिंजरे के शेर के रूप में बहुमूल्य उपहार लाये।

(ग) सम्राट महापद्म नंद के मंत्री का क्या नाम था?
उत्तर :
सम्राट महापद्म नन्द के मन्त्री का नाम शकटार था।

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(घ) शेर किस धातु का बना हुआ था?
उत्तर :
शेर सीसा धातु का बना हुआ था।

(ङ) शेर को पिंजरे से निकालने वाला किशोर बड़ा होकर किस नाम से प्रसिद्ध हुआ?
उत्तर :
किशोर बड़ा होकर चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

(च) पिंजरा किस धातु से बना था?
उत्तर :
पिंजरा लोहा धातु से बना था।

6. इन प्रश्नों के उत्तर चार-पाँच वाक्यों में लिखें :

(क) रोम के राजदूत ने पिंजरे के शेर को बाहर निकालने की क्या शतें बतायीं ?
उत्तर :
रोम के राजदूत ने पिंजरे के शेर को बाहर निकालने की निम्नलिखित शर्ते बताईं थी –

  • पिंजरे को न तो खोलना है और न ही उसे कहीं से भी काटना है।
  • पिंजरे को खोले या तोड़े बिना ही शेर को पिंजरे से बाहर निकालना है।

(ख) पिंजरे के शेर के चारों ओर आग लगती देख सभा में सन्नाटा क्यों छा गया?
उत्तर :
सभा के लोग किशोर द्वारा पिंजरे में से शेर को बाहर निकालने की युक्ति को बड़े ध्यान से देख रहे थे। वे शेर के बाहर आने का इंतज़ार कर रहे थे। पिंजरे के शेर के चारों तरफ आग लगती देखकर सभा में सन्नाटा छा गया।

(ग) चंद्रगुप्त ने पिंजरे के शेर को कैसे बाहर निकाला?
उत्तर :
चन्द्रगुप्त ने पिंजरे के शेर को चारों तरफ पहले तो पानी में डुबाया और फिर उसने पिंजरे के चारों तरफ आग लगवा दी। आग लगाने से सीसे से बनी शेर की मूर्ति धीरे धीरे पिघलने लगी और वह पिघल कर धरती पर फैल गया। इस तरह चन्द्रगुप्त ने शेर को पिंजरे से बाहर निकाला।

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7. इन शब्दों के लिंग बदलें :

  1. सम्राट = ________________
  2. शोर = ________________
  3. महाराज = ________________
  4. नौकर = ________________
  5. किशोर = ________________
  6. राजा = ________________

उत्तर :

  1. सम्राट = सम्राज्ञी
  2. शेर = शेरनी
  3. महाराज = महारानी
  4. नौकर = नौकरानी
  5. किशोर = किशोरी
  6. राजा = रानी

8. इन शब्दों के वचन बदलें :

  1. पिंजरा = ________________
  2. सभा = ________________
  3. मूर्ति = ________________
  4. यह = ________________
  5. बूँद = ________________
  6. मंदिर = ________________

उत्तर :

  1. पिंजरा = पिंजरे
  2. सभा = सभाएँ
  3. मूर्ति = मूर्तियाँ
  4. यह = ये
  5. बूँद = बूँदं
  6. मन्दिर = मन्दिरों

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9. विपरीतार्थक शब्द लिखें :

  1. पुराना = ________________
  2. अनेक = ________________
  3. असफल = ________________
  4. धरती = ________________

उत्तर :

  1. पुराना = नया
  2. अनेक = एक
  3. असफल = सफल
  4. धरती = आकाश

10. शुद्ध करके लिखें :

अशुद्ध = शुद्ध

  1. शकतीशाली = ________________
  2. बहूमूलय = ________________
  3. घोषना = ________________
  4. पुरसकार = ________________
  5. सूदरिढ़ = ________________
  6. मरितयु = ________________

उत्तर :
अशुद्ध = शुद्ध

  1. शकतीशाली = शक्तिशाली
  2. बहूमूलय = बहुमूल्य
  3. घोषना = घोषणा
  4. पुरसकार = पुरस्कार
  5. सूदरिढ़ = सुदृढ़
  6. मरितयु = मृत्यु

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11. उचित विराम चिह्न लगायें :

(क) किशोर ने मुस्कारते हुए कहा वह देखिए महामंत्री
उत्तर :
किशोर ने मुस्कराते हुए कहा, “वह देखिए महामंत्री।”

(ख) शेर को कौन बाहर निकाल सकता है सहसा सम्राट ने गुस्से में कहा
उत्तर :
“शेर को कौन बाहर निकाल सकता है ?” सहसा सम्राट ने गुस्से में कहा।

(ग) किशोर ने सिर झुकाकर कहा महाराज शेर पिंजरे से बाहर आ गया है
उत्तर :
किशोर ने सिर झुकाकर कहा, “महाराज! शेर पिंजरे से बाहर आ गया।”

12. प्रत्येक शब्द के आगे लिखो, यह कौन-सी संज्ञा है ?

  1. शब्द = संज्ञा
  2. शेर = जातिवाचक संज्ञा
  3. शकटार = व्यक्तिवाचक संज्ञा
  4. लज्जा = ______________
  5. पिंजरा = ______________
  6. गर्मी = ______________
  7. गुस्सा = भाववाचक संज्ञा
  8. किशोर = ______________
  9. दूत = ______________
  10. पानी = ______________
  11. मंदिर = ______________

उत्तर :

  1. शब्द = संज्ञा
  2. शेर = जातिवाचक संज्ञा
  3. शकटार = व्यक्तिवाचक संज्ञा
  4. लज्जा = भाववाचक संज्ञा
  5. पिंजरा = जातिवाचक संज्ञा
  6. गर्मी = भाववाचक संज्ञा
  7. गुस्सा = भाववाचक संज्ञा
  8. किशोर = जातिवाचक संज्ञा
  9. दूत = जातिवाचक संज्ञा
  10. पानी = द्रव्यवाचक संज्ञा
  11. मन्दिर = जातिवाचक संज्ञा

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13. नीचे दी गई जातिवाचक संज्ञा से संबंधित व्यक्तिवाचक संज्ञा लिखें :

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर 5
उत्तर :
PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर 6

14. नये शब्द बनायें : (कम से कम दो)
वातावरण – फुसफुसाहट – झुकाकर
उत्तर :
वातावरण – फुसफुसाहट – झुकाकर
वात – वर – वरण
फुस – फुसफुस – हट
झुक – कर – काक

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परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मगध राज्य का राजा कौन था?
उत्तर :
मगध राज्य का राजा महापद्म नन्द था।

प्रश्न 2.
पुराने समय में भारत कैसा था?
उत्तर :
पुराने समय में भारत अनेक छोटे – छोटे राज्यों में बंटा हुआ था।

प्रश्न 3.
शेर को पिंजरे में किसने बंदी बनाया था?
उत्तर :
रोम के सम्राट ने शेर को पिंजरे में बंदी बनाया था।

प्रश्न 4.
राजा ने दूत को क्या कहा?
उत्तर :
राजा ने दूत को कहा कि तुम अपने राजा से कहना कि हमारे प्रताप से शेर पिघलकर बाहर आ गया है। यह केवल पिंजरे का शेर था पिंजरे के बिना इसका कोई अस्तित्व नहीं।

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प्रश्न 5.
चन्द्रगुप्त मौर्य के चरित्र के दो विशेष गुण बताओ।
उत्तर :

  • बुद्धिमानी,
  • निडर।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखें :

प्रश्न 1.
‘पिंजरे का शेर’ पाठ में किस किशोर की बुद्धि – कौशल का वर्णन किया गया है?
(क) चंद्रगुप्त
(ख) रामगुप्त
(ग) समुद्रगुप्त
(घ) श्यामगुप्त।
उत्तर :
(क) चंद्रगुप्त

प्रश्न 2.
प्राचीन भारत में सबसे शक्तिशाली राज्य कौन – सा माना जाता था?
(क) कौशल
(ख) मगध
(ग) पाटन
(घ) विदर्भ।
उत्तर :
(ख) मगध

प्रश्न 3.
किसी धातु से बना कौन पिंजरे में बंद था?
(क) गाय
(ख) शेर
(ग) भालू
(घ) हाथी।
उत्तर :
(ख) शेर

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प्रश्न 4.
पिंजरा किस नगर के राजदूत ने अपने सम्राट की तरफ से भेंट किया था?
(क) न्यूयार्क
(ख) रोम
(ग) पेरिस
(घ) ओकासा।
उत्तर :
(ख) रोम

प्रश्न 5.
बिना पिंजरा खोले शेर को बाहर निकालने की आज्ञा कितने वर्ष के किशोर ने मांगी?
(क) 13 – 14
(ख) 14 – 15
(ग) 15 – 16
(घ) 16 – 17
उत्तर :
(ग) 15 – 16

प्रश्न 6.
असफल होने पर क्या दंड मिलना था?
(क) उम्रकैद
(ख) मृत्युदंड
(ग) समाज सेवा
(घ) सिर मुड़ाना।
उत्तर :
(ख) मृत्युदंड

प्रश्न 7.
शेर किस धातु का बना था?
(क) सोना
(ख) चाँदी
(ग) सीसा
(घ) ताँबा।
उत्तर :
(ग) सीसा

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प्रश्न 8.
मगध का महामंत्री कौन था?
(क) नंद
(ख) शकटार
(ग) चाणक्य
(घ) मिहिरसेन।
उत्तर :
(ख) शकटार

प्रश्न 9.
पिंजरा किस धातु का बना था?
(क) सोना
(ख) चाँदी
(ग) पीतल
(घ) लोहा।
उत्तर :
(घ) लोहा।

प्रश्न 10.
किशोर ने पिंजरे के चारों ओर क्या लगाई?
(क) तिरपाल
(ख) बर्फ
(ग) आग
(घ) घास – फूस।
उत्तर :
(ग) आग

पिंजरे का शेर Summary in Hindi

पिंजरे का शेर पाठ का सार

‘पिंजरे का शेर’ नामक पाठ में किशोर चन्द्रगुप्त मौर्य की बुद्धि एवं कौशल का वर्णन किया गया है। प्राचीन समय में भारत अनेक राज्यों में बंटा हुआ था। इनमें मगध राज्य सब से शक्तिशाली माना जाता था। महापद्म नंद मगध का राजा था। एक दिन राजा की राजसभा हुई। वहाँ किसी धातु से बना शेर पिंजरे में बंद करके रखा था, जिसे सभी लोग देख रहे थे। यह पिंजरा रोम के राजदूत ने राजा को अपने सम्राट की तरफ से भेंट किया।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर

राजदूत ने राजा को बताया कि इस पिंजरे में उन्होंने शेर को बंद कर दिया है किन्तु इस पिंजरे को बिना खोले और काटे शेर को बाहर निकालना है, जो खेल आप ही कर सकते हैं। तभी सम्राट के संकेत से महामंत्री ने सभा में बैठे सभी लोगों को बिना पिंजरा खोले और तोडे शेर को बाहर निकालने को कहा। सभा में उपस्थित सभी लोग पिंजरे की तरफ देखते रहे किसी ने भी उसमें से बिना खोले शेर को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं दिखाई।

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अचानक वहाँ एक पन्द्रह – सोलह वर्ष का किशोर आया और उसने सम्राट् से उसे बाहर निकालने की आज्ञा माँगी। असफल होने पर मृत्यु का कठोर दंड भी उसे अपनी मंज़िल से विचलित नहीं कर सका। किशोर ने पिंजरे को पानी में डालने के लिए कहा और बाद में निकलवा लिया।

उसने पिंजरे में बंदी शेर को ध्यानपूर्वक देखकर उसके चारों तरफ आग लगवा दी। इससे सभा में सन्नाटा छा गया। धीरे – धीरे सीसा धातु से बना शेर गर्मी से पिघलकर धरती पर फैल गया और पिंजरा खाली हो गया। इस कार्य के लिए उस किशोर को पुरस्कार दिया गया।

यही किशोर बड़ा होकर चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ जिसने उत्तर भारत के सभी छोटे – छोटे राज्यों को एक सूत्र में बाँधकर सुदृढ़ साम्राज्य की नींव रखी।

पिंजरे का शेर शब्दार्थ :

  • बहुमूल्य = मूल्यवान।
  • संकेत = इशारा।
  • की ओर = की तरफ।
  • बगैर – बिना।
  • प्रताप = बल।
  • निरीक्षण = जांच – पड़ताल।
  • सहसा अचानक।
  • लजा = शर्म।
  • डग = कदम।
  • एकटक = बिना पलक झपके।
  • निर्भीक = निडर।
  • अपलक = बिना पलक झपकाए।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर

पिंजरे का शेर गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. एक दिन राजसभा लगी हुई थी। वातावरण विचित्र था। एक ओर कछ व्यक्ति अलग खड़े थे। वे रोम देश के दूत थे। सभा भवन के बीचोंबीच एक पिंजरा रखा हुआ था। जिसमें किसी धातु का बना हुआ एक शेर बन्द था। राजसभा में बैठे सभी लोग पिंजरे की ओर देख रहे थे। थोड़ी देर बाद सम्राट् महापद्म नन्द राजसभा में पधारे। उनके आते ही सारी सभा में चुप्पी छा गई। महामन्त्री शकटार का संकेत पा कर विदेशी दूत ने आगे बढ़कर अपने राजा की ओर से लाए बहुमूल्य उपहार सम्राट को भेंट किये।

प्रसंग – यह गद्यांश हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘पिंजरे का शेर’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें मगध राज्य के राजा महापद्म नंद की राजसभा का वर्णन किया गया है।

व्याख्या – एक दिन राजदरबार में राजसभा लगी हुई थी। राजसभा का वातावरण बहुत अनूठा था। वहाँ कुछ लोग एक तरफ खड़े थे। वे रोम देश से आए हुए दूत थे। सभा भवन के बीच में एक पिंजरा रखा हुआ था जिसमें किसी धातु का बना हुआ एक शेर बंद था। राजसभा में बैठे हुए सभी लोग उस पिंजरे की तरफ देख रहे थे। कुछ देर के बाद सम्राट महापद्म नन्द उस राजसभा में आए। सम्राट् के सभा में आते ही सभा चुप हो गई। महामन्त्री शकटार के संकेत से रोम से आए विदेशी दूत ने आगे बढ़कर अपने राजा की तरफ से लाई गई अनमोल भेंट सम्राट को भेंट की।

भावार्थ – मगध राज्य के सम्राट महापद्म नन्द की राजसभा का चित्रांकन हुआ है। सम्राट् को रोम के दूत के द्वारा दी गई विचित्र भेंट का वर्णन है।

2. सभा में फिर कुछ हलचल हुई। सभी लोग एक दूसरे की ओर देख रहे थे। सभी की आँखें लज्जा के कारण झुकी हुई थीं। सम्राट फिर गरज उठे, “मगध की बुद्धि को क्या हो गया है? महापद्म नन्द की राजसभा में क्या ऐसा एक भी ज्ञानी नहीं था जो शेर को बाहर निकाल सके?”

प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘पिंजरे का शेर’ शीर्षक नामक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने रोम के दूत के द्वारा दिए गए पिंजरे को देखकर सभा में जो हलचल हुई उसी का वर्णन किया है।

व्याख्या – मगध के राजा ने सभा में उपस्थित लोगों को गुस्से में आकर पिंजरे में से शेर को बाहर निकालने का आदेश दिया तो सभा में दोबारा हलचल मच उठी। राजसभा में बैठे लोग फिर एक – दूसरे की तरफ देखने लगे और फिर सब लोगों की आँखें शर्म से झुक गईं। सम्राट् फिर तेज़ आवाज़ से कहने लगे कि मगध – राज्य की बुद्धि को क्या हो गया था? महापद्म नन्द की राजसभा में क्या कोई ऐसा एक भी ज्ञानी, विद्वान् नहीं है जो शेर को इस पिंजरे से बाहर निकाल सके।

भावार्थ – पिंजरे में से शेर को बाहर निकालने के विषय में सम्राट् की चिंता का वर्णन है।

PSEB 8th Class Hindi Solutions Chapter 2 पिंजरे का शेर

3. सभा में सन्नाटा छा गया। सभी की साँसें रुक गईं। हर व्यक्ति एकटक पिंजरे की ओर देख रहा था। किशोर भी अपलक दृष्टि से उस शेर को घूर रहा था। सहसा उसने देखा कि शेर की मूर्ति के माथे पर धीरे – धीरे गीली – सी चमक उभरी और देखते ही देखते पिघली हुई चाँदी की – सी बूंदें धरती पर आ गिरी।

प्रसंग – यह गद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित ‘पिंजरे का शेर’ नामक पाठे से लिया है। इसमें लेखक ने राजसभा में किशोर द्वारा पिंजरे में से शेर को बाहर निकालने की युक्ति को दर्शाया है।

व्याख्या – किशोर की आज्ञा से नौकरों ने पिंजरे के चारों तरफ जब आग लगा दी तो राजसभा में सूनापन छा गया। सभी लोगों की साँसें रुक गईं। प्रत्येक व्यक्ति टकटकी लगाकर पिंजरे की ओर देख रहा था। किशोर भी बिना पलक झपकाए उस शेर को घूर रहा था। उसने अचानक देखा कि शेर की तस्वीर के माथे पर धीरे – धीरे गीली – सी चमकती/प्रकट हुई। वह उभर कर उठी और देखते ही देखते पिघली हुई चांदी की तरह बूंदें धरती पर आकर गिरी।

भावार्थ – किशोर द्वारा पिंजरे को खोले बिना शेर को बाहर निकालने की युक्ति का वर्णन किया गया है।

4. सम्राट् ने गर्व से दूत की ओर देखते हुए कहा, “दूत अपने राजा से कहना कि हमारे प्रताप के कारण शेर पिघल कर बाहर आ गया है।” यह शेर केवल पिंजरे का शेर था। पिंजरे के बिना इसका कोई अस्तित्व नहीं। फिर महामन्त्री को आदेश दिया, “इस किशोर को पुरस्कार दिया जाए।” इतना कह कर सम्राट् उठ कर चले गए। सभा में कोलाहल – सा मच गया। यही किशोर बड़ा होकर चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने उत्तरी भारत के सभी छोटे – छोटे राज्यों को एक सूत्र में पिरो दिया और एक सुदृढ़ साम्राज्य की नींव रखी।

प्रसंग – यह गद्यांश हिन्दी की पाठय पुस्तक में संकलित ‘पिंजरे का शेर’ नामक पाठ से लिया गया है। किशोर द्वारा पिंजरे में से शेर को बाहर निकालने पर किशोर को पुरस्कार देने तथा उसकी प्रतिज्ञा का उल्लेख किया गया है।

व्याख्या – मगध के सम्राट ने गर्व से रोम के दूत की तरफ देखकर कहा कि हे दूत, तुम अपने राजा से जाकर कहना कि हमारे बल के कारण शेर पिघल कर बाहर आ गया है। यह शेर केवल पिंजरे का शेर था। पिंजरे के बिना इसका कोई अस्तित्व नहीं था। इसके बाद सम्राट ने महामन्त्री को आदेश दिया कि इस किशोर को पुरस्कार दिया जाए। इतनी बात कहकर सम्राट अंदर चले गए। राजसभा में शोर मच गया। यही किशोर बड़ा होकर चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने उत्तरी भारत के सभी छोटे – छोटे राज्यों को एक सूत्र में बाँध दिया था तथा एक मजबूत साम्राज्य की नींव रखी थी।

भावार्थ – चन्द्रगुप्त मौर्य की प्रतिभा एवं कौशल को दर्शाया गया है।