PSEB 6th Class Home Science Solutions Chapter 1 मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ

Punjab State Board PSEB 6th Class Home Science Book Solutions Chapter 1 मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Home Science Chapter 1 मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ

PSEB 6th Class Home Science Guide मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताओं के नाम लिखो।
उत्तर-
मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकता हवा, पानी, भोजन, घर और कपड़ा है।

प्रश्न 2.
पका हुआ भोजन कैसा होता है ?
उत्तर-
पका हुआ भोजन स्वादिष्ट, सुगन्धित तथा शीघ्र पाचनशील होता है।

प्रश्न 3.
हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं ?
उत्तर-
हम नियमित रूप से संतुलित भोजन खाकर स्वस्थ रह सकते हैं।

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प्रश्न 4.
घर हमें शारीरिक सुरक्षा कैसे प्रदान करता है?
उत्तर-
घर हमें गर्मी, सर्दी, जंगली जानवरों, प्राकृतिक आपदाओं से बचाता है।

लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन को जीवित जीव की प्राथमिक आवश्यकता क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
भोजन को जीवित जीव की प्राथमिक आवश्यकता इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आवश्यकता जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे साथ जुड़ी रहती है।

प्रश्न 2.
पुराने तथा आज के मनुष्य के खाने में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
प्राचीन मानव कंद-मूल और फल-फूल खाकर अपने पेट की भूख को शान्त करता था। तब उसके लिए यही वस्तुएँ भोजन थीं। आज का मनुष्य भूख मिटाने के लिए कंद-मूल या कच्चा भोजन नहीं खाता, बल्कि उसे कई ढंगों से पकाकर. स्वादिष्ट तथा आकर्षक बनाकर खाता है।

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प्रश्न 3.
हम घर क्यों बनाते हैं ?
उत्तर-
घर एक ऐसा स्थान है जहाँ हमें आराम मिलता है, जहाँ हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाते हैं और जहाँ हमें शारीरिक व भौतिक सुरक्षा मिलती है।

प्रश्न 4.
क्या पशु-पक्षियों को भी घर की आवश्यकता है ?
उत्तर-
हाँ, हमारे समान ही पशु-पक्षियों को घर की आवश्यकता होती है। पशु-पक्षी भी भोजन की तलाश में बाहर जाते हैं और शाम होते ही घर वापिस आ जाते हैं। जैसेखरगोश बिल बनाकर रहते हैं, पक्षी घोंसले बनाकर रहते हैं।

प्रश्न 5.
प्राचीन समय के घरों के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
प्राचीन मनुष्य गुफाओं में रहता था। धीरे-धीरे वह लकड़ी और पत्थरों के घरों में रहने लगा।

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प्रश्न 6.
घर को ‘स्वर्ग’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
घर को स्वर्ग इसलिए कहा गया है कि घर हमें आराम व सुख प्रदान करता है। यह एक ऐसा सुखदायी स्थान है कि हम चाहे जहाँ भी घूमें और बाहर हमें कितने ही सुख क्यों न मिलें, घर वापस लौटने की लालसा स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।

प्रश्न 7.
वस्त्र मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकता कैसे है ?
उत्तर-
वस्त्र को मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकता इसलिए कहा गया है क्योंकि भोजन के समान ही यह आवश्यकता जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के साथ जुड़ी रहती है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताओं से आप क्या समझते हो ?
उत्तर-
वह आवश्यकता जो जन्म से लेकर अन्त तक हमारे साथ रहती है तथा जिसकी पूर्ति को प्राथमिकता दी जाती है, उसे प्राथमिक आवश्यकता कहते हैं। प्राथमिक आवश्यकताओं के अन्तर्गत भोजन, वस्त्र तथा घर या आश्रम मुख्य हैं। जन्म से लेकर मरने तक सभी मनुष्य, जीव-जन्तु अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्ष करते रहते हैं। यह भी ध्यान योग्य है कि सभी प्राणियों का अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने का ढंग तथा कोशिशें भिन्न होती हैं।

ऐसी कोई भी वस्तु जिस के बिना जीवन में कुछ कमी लगती है, जिस के बिना रहना मुश्किल लगता है, वह आवश्यकता बन जाती है। आज के आधुनिक जीवन में तो अत्यधिक प्रकार की आवश्यकताएं पैदा हो गई हैं, अथवा पैदा कर ली गई हैं। गाड़ी, कार, वायुयान, मोबाइल फोन, इंटरनेट, कम्प्यूटर आदि ऐसा कई कुछ हैं जिन के बिना जीवन जीना कठिन प्रतीत होता है। आवश्यकताएं अधिक होने के बावजूद भी तीन मुख्य आवश्यकताएं जिन को यदि पूरा न किया जाए तो ऊपरलिखित सभी आवश्यकताएं गौन हो जाती हैं। यह तीन आवश्यकताएं हैं जो कि प्राथमिक हैं-रोटी, कपड़ा और मकान तथा इन सब में भी अत्यधिक आवश्यक भोजन है।

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प्रश्न 2.
मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताओं के अन्तर्गत कौन-कौन सी आवश्यकताएँ आती हैं ?
उत्तर-
मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताओं के अन्तर्गत भोजन, वस्त्र तथा घर या आश्रम की आवश्यकताएँ आती हैं। जब से सृष्टि की रचना हुई है तथा इसमें प्राणी का आगमन हुआ है, वह अपने पेट की भूख को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न तरीकों का प्रयोग कर रहा है। जब मनुष्य अभी सभ्य नहीं हुआ था तब वह कंदमूल, फल-फूल खा कर पेट भरता था। अब सभ्य समाज में रह रहा इंसान भोजन को कई प्रकार से पका कर सुंदर, स्वादिष्ट तथा सुंगधित भोजन खाता है। भोजन की आवश्यकता के अग्रलिखित कारण हैं –

1. शरीर का विकास- भोजन हमारे शरीर के विकास के लिए अति आवश्यक है। प्रोटीन हमारे शरीर के तंतुओं का निर्माण करता है। कार्बोहाइड्रेट से हमें ऊर्जा मिलती है। यह तत्व हमें भोजन से प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार अन्य आवश्यक तत्व जैसे वसा, विटामिन, खनिज आदि भी भोजन से मिलते हैं। यदि एक भी दिन हम भोजन न लें तो हम कमज़ोर महसूस करने लगते हैं। भोजन शरीर की क्रियाओं को भी नियन्त्रित करता है।

2. सामाजिक तथा धार्मिक महत्त्व-मिलजुल कर भोजन करने से तथा बनाने से एकता का भावना पैदा होती है। शादी, जन्मदिन आदि के अवसर पर हम संबंधियों तथा दोस्तों को प्रीती भोज तथा चाय पार्टी आदि के लिए बुलाते हैं। इस प्रकार भोजन का सामाजिक महत्त्व पता चलता है। धार्मिक अवसरों पर लंगर, प्रसाद आदि को मिल बांट कर ग्रहण करने से भाईचारे की भावना पैदा होती है।

3. मन की शांति-भोजन खाने से मन को तस्सली, शांति तथा आनंद का अनुभव होता है। यदि भोजन अच्छे ढंग से पका हुआ अच्छी प्रकार खुशनुमा वातावरण में परोसा जाए तो अत्यन्त हर्ष की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 3.
घर की आवश्यकता किन कारणों से है ?
उत्तर-
घर की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है –

1. गर्मी-सर्दी से बचाव-गर्मी-सर्दी से बचने के लिए घर ही ऐसा स्थान है जहाँ मनुष्य अपना सिर छिपा सकता है। घर गर्मियों में लू या धूप से बचाता है तथा सर्दियों में बर्फीली हवा से हमारी रक्षा करता है। इसके अतिरिक्त घर कई बार प्राकृतिक आपदाओं, जैसे-तूफान, ओले, आँधी आदि से भी बचाता है।

2. जंगली-पशुओं तथा चोरों से बचाव-घर में रहकर हम अपनी जान और माल को सुरक्षित करते हैं। जंगली पशुओं एवं चोरों का दीवार पार करके आना इतना सुगम नहीं जितना कि खुले स्थान पर। आजकल की दीवारों पर लोहे की तारें या शीशे आदि भी इसीलिए लगाएँ जाते हैं।

3. पारिवारिक भावना-जब हम एक चार-दीवारी में मिल-जुलकर बैठते हैं, तो मेल-जोल की भावना उत्पन्न होती है। घर केवल ईंटों की इमारत ही नहीं होता, घर तो वस्तुतः ऐसा स्थान है जहाँ मिल-जुलकर एक-दूसरे का दुःख-सुख बाँटते हैं तथा ज़िम्मेदारी को बाँटकर चलते हैं। इस तरह घर में हमारी प्रवृत्तियों को संतुष्टि मिलती है जैसे कि माँबाप का प्यार, बहन-भाई का प्यार, इकट्ठे रहने की प्रवृत्ति आदि।

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प्रश्न 4.
वस्त्रों की आवश्यकता किन कारणों से है?
उत्तर-
कपड़ों की आवश्यकता निम्न कारणों से है –

1. गर्मी-सर्दी से बचाव-वस्त्र हमें गर्मियों में गर्मी और सर्दियों में ठण्ड से बचाते हैं। यही कारण है कि गर्मियों में वही वस्त्र पहने जाते हैं जो शरीर की गर्मी को बाहर निकालते हैं, जैसे-मलमल और रूबिया आदि। परन्तु सर्दियों में ऊनी वस्त्र पहने जाते हैं, क्योंकि ये ताप के कुचालक होते हैं तथा शरीर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते। इसी कारण वस्त्र पहनते और खरीदते समय ऋतु का ध्यान रखा जाता है।

2. सौन्दर्य में वृद्धि-कपड़े मनुष्य के सौन्दर्य में वृद्धि करते हैं। प्राचीन समय में मनुष्य पशुओं की खालों से अपने शरीर को सजाता था। तब खाले ही वस्त्र थे। सुन्दरता की होड़ के कारण ही वस्त्रों के नए-नए डिज़ाइन बनते हैं। इनके सीने-पिरोने में ही परिवर्तन होता रहता है। सुन्दरता बढ़ाने के लिए वस्त्रों को रंगों तथा छापे से या कई बार फूल-बूटों की कढ़ाई करके सुन्दर तथा आकर्षक बनाया जाता है।

3. सभ्यता की प्रतीक-अच्छी तरह वस्त्र पहनकर तैयार होना सभ्य मनुष्य होने का प्रतीक है। वस्त्र पहनने की बात हमें पशु-पक्षियों से अलग करती है। आज यदि कभी यह सोच भी ले कि प्राचीन मनुष्य नंगा रहता था, तो बहुत ही अजीब लगता है। आज यदि कोई ठीक तरह वस्त्र न पहने तो उसको मूर्ख या असभ्य कहा जाता है। इसी कारण खेलने, तैरने, खाना बनाने के लिए अलग-अलग पहनावे प्रयुक्त किये जाते हैं। आज के ज़माने में कपड़े द्वारा सभ्य तथा असभ्य मनुष्य का अनुमान लगाया जाता है।

4. चोट लगने से बचाव-वस्त्र हमें चोट लगने से बचाकर हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। कई बार गिरते समय वस्त्र फट जाता है तथा व्यक्ति चोट से बच जाता है।

5. कीड़े-मकौड़ों से बचाव-वातावरण में कई तरह के कीड़े-मकौड़े होते हैं, जैसे-बिच्छ्, भिंड, मच्छर आदि। अगर कपड़े के ऊपर से काटें तो कई बार चमड़ी तक डंक नहीं जाता। अगर ये नंगे शरीर पर काटें तो अधिक नुकसान हो सकता है।

Home Science Guide for Class 6 PSEB मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ Important Questions and Answers

अति छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
संसार का हर जीवित प्राणी अपने पेट की आग को कैसे शान्त करता है?
उत्तर-
संसार का हर जीवित प्राणी अपने पेट की आग भोज्य वस्तु को खाकर शान्त करता है।

प्रश्न 2.
भोजन खाने से हमारे मन को कैसा लगता है ?
उत्तर-
भोजन खाने से मन को संतोष मिलता है।

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प्रश्न 3.
पशु-पक्षी भोजन की तलाश में कहाँ जाते हैं ?
उत्तर-
पशु-पक्षी भोजन की तलाश में घर से बाहर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं।

प्रश्न 4.
घर किसका नाम है ?
उत्तर-
घर निजी स्वर्ग का नाम है।

प्रश्न 5.
प्राचीन काल में मनुष्य स्वयं को ढाँपने के लिए किस वस्तु का प्रयोग करता था ?
उत्तर-
प्राचीन काल में मनुष्य स्वयं को ढाँपने के लिए वृक्ष की छालों, पत्तों और खालों का प्रयोग करता था।

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प्रश्न 6.
वस्त्रों के नए-नए डिज़ाइन क्यों बनते हैं ?
उत्तर-
सुन्दर दिखने की होड़ के कारण ही वस्त्रों के नए-नए डिज़ाइन बनते हैं।

प्रश्न 7.
कपड़े चोट लगने से कैसे बचाते हैं ?
उत्तर-
वस्त्र हमें चोट लगने से बचाकर हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। कई बार गिरते समय वस्त्र फट जाता है तथा व्यक्ति चोट से बच जाता है।

छोटे उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
घर मनुष्य का गर्मी-सर्दी से कैसे बचाव करता है ?
उत्तर-
गर्मी-सर्दी से बचने के लिए घर ही प्रमुख स्थान है, घर गर्मियों में लू तथा धूप से बचाता है और सर्दियों में बर्फीली हवाओं से हमारी रक्षा करता है। इसके अतिरिक्त मकान कई बार प्राकृतिक आपदाओं, जैसे-तूफान, ओले, आँधी आदि से भी हमें बचाता है।

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प्रश्न 2.
वस्त्र हमें कीड़े-मकौड़े से कैसे बचाते हैं ?
उत्तर-
वातावरण में कई प्रकार के कीड़े-मकौड़े होते हैं, जैसे-बिच्छू, भिंड, मच्छर आदि। अगर ये कपड़े के ऊपर से काटें तो कई बार चमड़ी तक डंक नहीं जाता है। अगर ये वस्त्रहीन शरीर पर काटें तो काफी नुकसान हो सकता है।

प्रश्न 3.
कपड़े हमारे सौंदर्य में कैसे वृद्धि करते हैं ?
उत्तर-
कपड़े मनुष्य के सौन्दर्य में वृद्धि करते हैं। प्राचीन समय में मनुष्य पशुओं की खालों से अपने शरीर को सजाता था। तब खाले ही वस्त्र थे। सुन्दरता की होड़ के कारण ही वस्त्रों के नए-नए डिज़ाइन बनते हैं। इनके सीने-पिरोने में ही परिवर्तन होता रहता है। सुन्दरता बढ़ाने के लिए वस्त्रों को रंगों तथा छापे से या कई बार फूल-बूटों की कढ़ाई करके सुन्दर तथा आकर्षक बनाया जाता है।

प्रश्न 4.
भोजन प्राप्ति का मन की शांति से क्या संबंध है ?
उत्तर-
भोजन खाने से मन को तस्सली, शांति तथा आनंद का अनुभव होता है। यदि भोजन अच्छे ढंग से पका हुआ अच्छी प्रकार खुशनुमा वातावरण में परोसा जाए तो अत्यंत हर्ष की प्राप्ति होती है।

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बड़े उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन की आवश्यकता किन कारणों से है ?
उत्तर-
जब से सृष्टि की रचना हुई है तथा इसमें प्राणी का आगमन हुआ है, वह अपने पेट की भूख को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न तरीकों का प्रयोग कर रहा है। जब मनुष्य अभी सभ्य नहीं हुआ था तब वह कंदमूल, फल-फूल खा कर पेट भरता था। अब सभ्य समाज में रह रहा इंसान भोजन पका कर कई प्रकार से इसे सुंदर, स्वादिष्ट तथा सुंगधित बनाकर खाता है। भोजन की आवश्यकता के अग्रलिखित कारण हैं –

1. शरीर का विकास-भोजन हमारे शरीर के विकास के लिए अति आवश्यक है। प्रोटीन हमारे शरीर के तंतुओं का निर्माण करता है। कार्बोहाइड्रेट से हमें ऊर्जा मिलती है। यह तत्व हमें भोजन से प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार अन्य आवश्यक तत्व जैसे वसा, विटामिन, खनिज आदि भी भोजन से मिलते हैं। यदि एक भी दिन हम भोजन न लें तो हम कमजोर महसूस करने लगते हैं। भोजन शरीर की क्रियाओं को भी नियन्त्रित करता है।

2. सामाजिक तथा धार्मिक महत्त्व-मिलजुल कर भोजन करने से तथा बनाने से एकता की भावना पैदा होती है। शादी, जन्मदिन आदि के अवसर पर हम संबंधियों तथा दोस्तों को प्रीती भोज तथा चाय पार्टी आदि के लिए बुलाते हैं। इस प्रकार भोजन का सामाजिक महत्त्व पता चलता है। धार्मिक अवसरों पर लंगर, प्रसाद आदि को मिल बांट कर ग्रहण करने से भाईचारे की भावना पैदा होती है।

3. मन की शांति-भोजन खाने से मन को तस्सली, शांति तथा आनंद का अनुभव होता है। यदि भोजन अच्छे ढंग से पका हुआ अच्छी प्रकार खुशनुमा वातावरण में परोसा जाए तो अत्यन्त हर्ष की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 2.
कपड़ों की आवश्यकता के कोई दो कारण लिखें।
उत्तर-
कपड़ों की आवश्यकता के दो कारण निम्नलिखित हैं –
1. सभ्यता का प्रतीक-अच्छी तरह वस्त्र पहनकर तैयार होना सभ्य मनुष्य होने का प्रतीक है। वस्त्र पहनने की बात हमें पशु-पक्षियों से अलग करती है। आज यदि कभी यह सोच भी ले कि प्राचीन मनुष्य नंगा रहता था, तो बहुत ही अजीब लगता है। आज यदि कोई ठीक तरह वस्त्र न पहने तो उसको मूर्ख या असभ्य कहा जाता है। इसी कारण खेलने, तैरने, खाना बनाने के लिए अलग-अलग पहनावे प्रयुक्त किये जाते हैं। आज के ज़माने में कपड़े द्वारा सभ्य तथा असभ्य मनुष्य का अनुमान लगाया जाता है।

2. चोट लगने से बचाव-वस्त्र हमें चोट लगने से बचाकर हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। कई बार गिरते समय वस्त्र फट जाता है तथा व्यक्ति चोट से बच जाता है।

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एक शब्द में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सबसे पहली प्राथमिक आवश्यकता क्या है ?
उत्तर-
भोजन।

प्रश्न 2.
कपड़े द्वारा कौन-सी प्राकृतिक आवश्यकता पूर्ण होती है ?
उत्तर-
तन ढकने की।

प्रश्न 3.
घर का खिंचाव …… ही रहता है।
उत्तर-
सदा।

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प्रश्न 4.
पका भोजन ………. तथा सुगन्धित होता है।
उत्तर-
सुस्वाद।

प्रश्न 5.
सौंदर्य में वृद्धि के लिए हम …… पहनते हैं।
उत्तर-
कपड़े।

प्रश्न 6.
घर निजी ………. का नाम है।
उत्तर-
स्वर्ग।

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प्रश्न 7.
प्राचीन मनुष्य कहां रहता था ?
उत्तर-
गुफा में।

प्रश्न 8.
कपड़े हमें ……. से बचाते हैं।
उत्तर-
कीड़े-मकौड़ों।

मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ PSEB 6th Class Home Science Notes

  • कोई भी वस्तु, जिसके बिना जीवन अधूरा लगता है, जिसके बिना हम रह नहीं सकते उसे आवश्यकता का नाम दिया जाता है।
  • वह आवश्यकता, जो जन्म से लेकर अन्त तक हमारे साथ रहती है तथा जिसकी पूर्ति को प्राथमिकता दी जाती है, उसे हम प्राथमिक आवश्यकता कहते हैं। भोजन, वस्त्र तथा घर मुख्य प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं।
  • संसार का हर जीवित प्राणी जिस वस्तु को खाकर अपने पेट की आग को शान्त | | करता है, वह उसका भोजन है।
  • भोजन की आवश्यकता के प्रमुख कारण हैं-1. शरीर का विकास, 2. सामाजिक तथा धार्मिक महत्त्व, 3. मानसिक सन्तोष।
  • घर या आश्रय केवल मनुष्य की ही नहीं, बल्कि सभी जीवित प्राणियों की आवश्यकता है।
  • पुरातन मनुष्य गुफाओं में रहकर अपने शरीर की रक्षा करता था।
  • घर की आवश्यकता के प्रमुख कारण हैं-1. गर्मी, सर्दी व वर्षा से बचाव, 2. जंगली पशुओं तथा चोरों से बचाव, 3. पारिवारिक भावना।
  • घर के प्यार से ही देश प्यार की नींव बनती है।
  • घर निजी स्वर्ग का नाम है।
  • समय का अर्थ है युग बदलने के अनुसार बदलाव।
  • आजकल कई प्रकार से प्राकृतिक तथा बनावटी रेशों की सहायता से वस्त्र बनाये | | जाते हैं, जैसे–सूती, रेशमी, नायलॉन, रेयॉन, ज़री आदि।
  • वस्त्रों की आवश्यकता के प्रमुख कारण हैं-1. गर्मी, सर्दी व वर्षा से बचाव, 2. सौन्दर्य में वृद्धि, 3. सभ्यता का प्रतीक, 4. चोट लगने से बचाव, 5. कीड़े – मकौड़ों से बचाव।
  • आग बुझाने वाले ऐस्बेसटॉस के वस्त्र पहनते हैं, क्योंकि उनमें आग नहीं लगती।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 6 संसार में भारत

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions Geography Chapter 6 संसार में भारत Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science Geography Chapter 6 संसार में भारत

SST Guide for Class 6 PSEB संसार में भारत Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
कौन-सी अक्षांश रेखा भारत को दो भागों में बांटती है? उनके नाम । लिखो।
उत्तर-
भारत को कर्क रेखा दो बराबर भागों में बांटती है। उत्तरी भाग को उपउष्णखण्डीय भारत तथा दक्षिणी भाग को उष्णखण्डीय भारत कहा जाता है।

प्रश्न 2.
भारत के पड़ोसी देशों के नाम लिखो।
उत्तर-
भारत की सीमाएं 7 देशों को छूती हैं। उत्तर-पश्चिम तथा उत्तर में पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, चीन तथा नेपाल हमारे पड़ोसी देश हैं। भूटान, म्यांमार तथा बंगलादेश हमारे देश के उत्तर-पूर्व में स्थित हैं। दक्षिण में हमारे पड़ोसी श्रीलंका तथा मालदीव हैं।

प्रश्न 3.
ग्लोब पर भारत की अक्षांश तथा देशान्तर स्थिति लिखो।
उत्तर-
भारत 8°4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर अक्षांशों तथा 68°7′ पू० से 97°25′ पू० देशान्तरों के बीच स्थित है।

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प्रश्न 4.
भारत को उपमहाद्वीप क्यों कहते हैं?
उत्तर-
भारत एशिया महाद्वीप का एक भाग है। परंतु उत्तर के पर्वत तथा शेष तीन ओर से जल-भण्डार (सागर) इसे एशिया से अलग करते हैं। इसका विस्तार भी बहुत अधिक है। इसी कारण इसे उपमहाद्वीप कहा जाता है।

प्रश्न 5.
भारत को राजनीतिक दृष्टि से कितने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है?
उत्तर-
राजनीतिक दृष्टि से भारत को 28 राज्यों तथा 9 केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है।

प्रश्न 6.
उन तीन सागरों के नाम लिखो जिनसे भारतीय प्रायद्वीप घिरा हुआ है।
उत्तर-
हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी।

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II. निम्नलिखित वाक्यों में खाली स्थान भरो

  1. आकार के अनुसार भारत का सबसे बड़ा राज्य …………… है।
  2. …………… भारत का सबसे छोटा राज्य है।
  3. इंदिरा पुवाइंट भारत के बिल्कुल ……………… सिरे पर है।
  4. कश्मीर से …………. तक भारत एक है।
  5. अरुणाचल प्रदेश भारत के ………….. भाग में है।

उत्तर-

  1. राजस्थान
  2. गोआ
  3. दक्षिणी
  4. कन्याकुमारी
  5. पूर्वी।

III. मिलान करो

स्तम्भ क – स्तम्भ ख

  1. अंडमान और निकोबार – हमारा पूर्वी पड़ोसी
  2. मालदीव – दक्षिण में हमारा पड़ोसी
  3. म्यांमार – भारत का द्वीप-समूह
  4. श्रीलंका – समुद्री सीमा से जुड़ा देश।

उत्तर-

  1. अंडमान और निकोबार-भारत का द्वीप-समूह।
  2. मालदीव-दक्षिण में हमारा पड़ोसी।
  3. म्यांमार-हमारा पूर्वी पड़ोसी।
  4. श्रीलंका-समुद्री सीमा से जुड़ा देश।

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PSEB 6th Class Social Science Guide संसार में भारत Important Questions and Answers

कम से कम शब्दों में उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कौन-सा केंद्र शासित राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा है?
उत्तर-
लक्षद्वीप।

प्रश्न 2.
गंगा तथा यमुना क्रमशः किस-किस हिमखंड से निकलती है?
उत्तर-
गंगोत्री, यमुनोत्री।

प्रश्न 3.
भारत की तटरेखा कितनी लंबी है?
उत्तर-
6100 किलोमीटर।

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बहु-विकल्पीयप्रश्न

प्रश्न 1.
पंजाब-हरियाणा के मैदान में निम्नलिखित शामिल नहीं –
क) बारी दोआब
(ख) बिस्त दोआब
(ग) थार मरुस्थल।
उत्तर-
(ग) थार मरुस्थल

प्रश्न 2.
भारत का एक भू-भाग निरंतर लावा बहने से बना है? क्या आप उसका नाम बता सकते हैं?
(क) महान हिमालय
(ख) दक्षिणी पठार
(ग) तटीय मैदान
उत्तर-
(ख) दक्षिणी पठार।

सही (✓) या गलत (✗) कथन

  1. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का दूसरा बड़ा देश है।
  2. ब्यास तथा सतलुज नदी के मध्य क्षेत्र को बारी दोआब कहते हैं।
  3. भारत के पश्चिमी तटीय मैदान पूर्व के तटीय मैदानों से कम चौड़े हैं।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✗)
  3.  (✓)

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत का क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर-
लगभग 32.8 लाख वर्ग कि०मी०।

प्रश्न 2.
भारत को पूर्वी देश क्यों माना जाता है?
उत्तर-
भारत पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है। इसलिए इसे पूर्वी देश माना जाता है।

प्रश्न 3.
देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित भारत के दो पड़ोसी देशों के नाम बताओ।
उत्तर-
पाकिस्तान तथा अफ़गानिस्तान।
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प्रश्न 4.
क्षेत्रफल तथा जनसंख्या की दृष्टि से भारत का संसार में कौन-सा स्थान है?
उत्तर-
क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवां तथा जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा।

प्रश्न 5.
हमारे देश के दक्षिण में स्थित कौन-से दो द्वीपीय देश भारत के पड़ोसी हैं?
उत्तर-
श्रीलंका तथा मालद्वीव।

प्रश्न 6.
श्रीलंका को कौन-सी जल-सन्धि तथा खाड़ी भारत से अलग करती है?
उत्तर-
पाक जल-सन्धि तथा मन्नार की खाड़ी।

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प्रश्न 7.
भारत में हिमालय की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?
उत्तर-
सिक्किम में कंचनजंगा।

प्रश्न 8.
लद्दाख के पठार को ठण्डा मरुस्थल क्यों कहा जाता है?
उत्तर-
क्योंकि इसकी जलवायु अत्यन्त ठण्डी तथा शुष्क है।

प्रश्न 9.
भारत के उत्तरी मैदानों के पश्चिम में स्थित मरुस्थल का नाम बताओ।
उत्तर-
थार मरुस्थल।

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प्रश्न 10.
संसार का सबसे बड़ा डेल्टा कौन-सा है?
उत्तर-
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा संसार का सबसे बड़ा डेल्टा है।

प्रश्न 11.
भारत का कौन-सा भू-भाग प्राचीनतम है?
उत्तर-
भारत का प्राचीनतम भू-भाग दक्षिण का प्रायद्वीपीय पठार है। यह कठोर आग्नेय तथा रूपान्तरित शैलों से बना है।

प्रश्न 12.
तीन ओर से सागर (जल) से घिरा भू-भाग क्या कहलाता है?
उत्तर-
प्रायद्वीप।

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प्रश्न 13.
डेल्टा क्या होता है?
उत्तर-
नदी के मुहाने पर बनी त्रिभुजाकार भू-आकृति।

प्रश्न 14.
भारत के उत्तरी मैदानों में जनसंख्या क्यों घनी है?
उत्तर-
उत्तरी मैदानों की मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है और कृषि उन्नत है। इसलिए यहां जनसंख्या घनी है।

प्रश्न 15.
प्रायद्वीपीय भारत की कौन-सी दो नदियां डेल्टा नहीं बनाती?
उत्तर-
नर्मदा तथा ताप्ती।

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प्रश्न 16.
उत्तर भारत के मैदान का निर्माण करने वाली तीन प्रमुख नदियों के नाम बताओ।
उत्तर-
उत्तर भारत के मैदान का निर्माण करने वाली तीन प्रमुख नदियां हैं –

  1. सिन्धु
  2. गंगा तथा
  3. ब्रह्मपुत्र।

प्रश्न 17.
कौन-सा केंद्र शासित राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा है?
उत्तर-
लक्षद्वीप।

प्रश्न 18.
गंगा तथा यमुना क्रमशः किस-किस हिमखंड से निकलती हैं?
उत्तर-
गंगोत्री, यमुनोत्री।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 6 संसार में भारत

प्रश्न 19.
भारत की तटरेखा कितनी लंबी है?
उत्तर-
6100 किलोमीटर।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के पाँच भौतिक विभाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
भारत के पाँच भौतिक विभाग हैं –

  1. उत्तर के महान् पर्वत
  2. उत्तरी भारत के विशाल मैदान
  3. प्रायद्वीपीय पठार
  4. तटीय मैदान
  5. द्वीप समूह।

प्रश्न 2.
सुन्दरवन डेल्टा पर एक टिप्पणी लिखो।
उत्तर-
सुन्दरवन डेल्टा संसार का सबसे बड़ा डेल्टा है। इसका निर्माण गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों ने अपने मुहाने पर किया है। संसार के अन्य डेल्टों की तरह यह डेल्टा भी बहुत उपजाऊ है।

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प्रश्न 3.
भारत के प्रायद्वीपीय पठार की कोई चार भौगोलिक विशेषताएं बताओ।
उत्तर-

  1. भारत के प्रायद्वीपीय पठार की आकृति एक त्रिभुज जैसी है।
  2. यह तीन ओर से क्रमशः अरब सागर (पश्चिम में), बंगाल की खाड़ी (पूर्व में) तथा हिन्द महासागर (दक्षिण में) से घिरा हुआ है।
  3. पश्चिम में पश्चिमी घाट तथा पूर्व में पूर्वी घाट इसकी सीमाएं बनाते हैं।
  4. यह पठार खनिज पदार्थों में बहुत अधिक धनी है।

प्रश्न 4.
थार (भारत के महान्) मरुस्थल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
थार मरुस्थल उत्तरी मैदान के पश्चिम में स्थित है। यह पथरीला प्रदेश रेत से ढका हुआ है। इसकी जलवायु अति गर्म तथा शुष्क है। इस प्रदेश में पेड़-पौधे नाममात्र ही हैं।

प्रश्न 5.
भारत के पश्चिमी तट तथा पूर्वी तट की तुलना कीजिए।
उत्तर-
पश्चिमी तट

  1. यह तट अपेक्षाकृत कम चौड़ा है।
  2. इस भाग में नदियां डेल्टा नहीं बनातीं।
  3. यह तट पूर्वी तट की अपेक्षा कम उपजाऊ है।

पूर्वी तट

  1. यह तट अधिक चौड़ा है।
  2. इसमें कावेरी, कृष्णा और महानदी के उपजाऊ डेल्टे हैं।
  3. यह तट डेल्टा प्रदेशों के कारण अधिक उपजाऊ है।

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प्रश्न 6.
हिमालय पर्वतों की तीन समान्तर श्रृंखलाओं के नाम लिखो और प्रत्येक की एक-एक विशेषता बताओ।
उत्तर-
1. सर्वोच्च हिमालय या हिमाद्रि-यह हिमाचल की सबसे उत्तरी तथा सबसे ऊंची श्रेणी है। हिमालय के सर्वोच्च शिखर इस श्रेणी में हैं। इनमें माउंट एवरेस्ट (नेपाल में 8848 मी० ऊंची) तथा कंचनजुंगा (सिक्किम-भारत) प्रमुख हैं।

2. मध्य या लघु हिमालय (अथवा हिमालय श्रेणी)-यह पर्वत श्रेणी हिमालय के दक्षिण में फैली है। इसमें डल्हौज़ी, धर्मशाला, शिमला, मसूरी, नैनीताल आदि प्रमुख पर्वतीय नगर स्थित हैं।

3. बाह्य हिमालय या शिवालिक श्रेणी-यह हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है। यह जलोढ़ अवसादों से बनी है।

प्रश्न 7.
भारत के उत्तरी मैदान को विभाजित करने वाले दो नदी-तन्त्रों के नाम बताइए। प्रत्येक नदी-तन्त्र की दो महत्त्वपूर्ण विशेषताएं लिखिए।
उत्तर-
उत्तरी मैदान को विभाजित करने वाले दो नदी-तन्त्र हैं-पश्चिम में सिन्धु नदी-तन्त्र तथा पूर्व में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी-तन्त्र।

सिन्धु नदी तन्त्र-

  1. इसका विस्तार जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब राज्यों में है।
  2. इसकी लम्बाई 2900 किलोमीटर से भी अधिक है।

गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तन्त्र-

  1. गंगा नदी उत्तर प्रदेश के हिमालय क्षेत्र में गंगोत्री से निकलती है, जबकि ब्रह्मपुत्र का उद्गम स्थल तिब्बत में सिन्धु तथा सतलुज के उद्गम के निकट है।
  2. दक्षिण में पहुंचकर ब्रह्मपुत्र नदी गंगा में मिल जाती है।

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प्रश्न 8.
उत्तर भारत के पर्वतों (हिमालय) तथा प्रायद्वीपीय भारत (दक्षिण पठार) के पर्वतों में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर-
उत्तर भारत के पर्वत-उत्तर भारत के पर्वत नवीन वलित पर्वत हैं। ये बहुत ऊंचे हैं तथा बर्फ से ढके हुए हैं। इन पर्वतों पर वन भी हैं।
प्रायद्वीपीय भारत के पर्वत-प्रायद्वीपीय भारत के पर्वत प्राचीन पर्वतों के शेष भाग हैं। ये न तो अधिक ऊंचे हैं और न ही उन पर हिमानियां होती हैं। इन पर्वतों की ढाल तिरछी है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तरी भारत के विशाल मैदान पर एक नोट लिखो। इनकी रचना किस प्रकार हुई?
उत्तर-
उत्तरी भारत के विशाल मैदानों को सतलुज गंगा का मैदान भी कहा जाता है। यह मैदान हिमालय तथा दक्षिण पठार के बीच स्थित है। यह राजस्थान से असम तक फैला हुआ है। इस मैदान की रचना नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से हुई है। इसलिए यह अत्यन्त उपजाऊ है।

मैदान के भाग-इस मैदान को चार भागों में बांटा जा सकता है –
(i) पंजाब-हरियाणा का मैदान,
(ii) थार मरुस्थल का मैदान,
(iii) गंगा का मैदान तथा
(iv) ब्रह्मपुत्र का मैदान।

(i) पंजाब-हरियाणा का मैदान-यह मैदान मुख्य रूप से पंजाब तथा हरियाणा में फैला हुआ है। यह सतलुज तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बना है। इसलिए यह काफ़ी उपजाऊ है।

(ii) थार मरुस्थल का मैदान-यह मैदान पंजाब और हरियाणा के दक्षिणी क्षेत्र का शुष्क भाग है। यह गुजरात की कच्छ की खाड़ी तक फैला हुआ है। अरावली पर्वत इसकी पूर्वी सीमा बनाते हैं। यहां स्थान-स्थान पर रेत के टीले दिखाई देते हैं। इसके कुछ भाग उपजाऊ भी हैं। यहां की खारे पानी की सांभर झील बहुत ही प्रसिद्ध है। थार मरुस्थल का मैदान यमुना, राम गंगा, चम्बल, बेतवा आदि नदियों द्वारा बना है।

(iii) गंगा का मैदान-गंगा का मैदान एक महत्त्वपूर्ण मैदान है। यह उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल राज्यों में फैला हुआ है। यह मैदान गंगा, यमुना तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी के जमा होने से बना है।।

(iv) ब्रह्मपुत्र का मैदान-ब्रह्मपुत्र का मैदान असम राज्य के मध्य में स्थित है। इस मैदान की रचना ब्रह्मपुत्र तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से हुई है।

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प्रश्न 2.
भारत को कितनी भौतिक इकाइयों में बांटा जा सकता है? प्रत्येक भौतिक इकाई का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर-
भारत एक विशाल देश है। इस देश में कहीं ऊंचे पर्वत हैं तो कहीं गहरी घाटियां हैं। कहीं समतल विस्तृत मैदान हैं, तो कहीं ऊंची-नीची पथरीली भूमि है। हम अपने देश को भौतिक रचना के आधार पर निम्नलिखित छ: इकाइयों में बांट सकते हैं –

  1. उत्तर के महान् पर्वत
  2. उत्तर के विशाल मैदान
  3. प्रायद्वीपीय पठार
  4. तटीय मैदान
  5. भारत का महान् मरुस्थल
  6. द्वीप-समूह।

भारत का महान् मरुस्थल वास्तव में उत्तर के विशाल मैदानों का ही एक भाग है। इसलिए यहां पांच इकाइयों का वर्णन किया जा रहा है।
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1. उत्तर के महान् पर्वत-हमारे देश की उत्तरी सीमा पर हिमालय पर्वत फैला हुआ है। हिमालय पर्वत में तीन श्रेणियां हैं। ये एक-दूसरे के समानान्तर फैली हुई हैं। इन समानान्तर श्रेणियों के मध्य में पूर्व-पश्चिम में फैली हुई कई लम्बी घाटियां हैं, जिन्हें ‘दून’ कहते हैं।

हिमालय का सबसे ऊंचा शिखर ‘माऊंट एवरेस्ट’ है। यह 8848 मीटर ऊंचा है। भारत में हिमालय का सबसे ऊंचा शिखर कंचनजंगा है। इस पर्वत की सभी ऊंची-ऊंची चोटियां बर्फ से ढकी रहती हैं। इस क्षेत्र की जलवायु अत्यन्त ठण्डी है।

2. उत्तर के विशाल मैदान-उत्तरी भारत के विशाल मैदान हिमालय पर्वतों के दक्षिण में फैले हैं। पश्चिम में रावी नदी से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी तक इनकी लम्बाई 2500 किलोमीटर से भी अधिक है। ये मैदान रावी, ब्यास, सतलुज, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी से बने हैं। इसलिए इनकी गणना संसार के सबसे अधिक उपजाऊ मैदानों में की जाती है।

3. प्रायद्वीपीय पठार-भारत का प्रायद्वीपीय पठार उत्तरी मैदानों के दक्षिण में विस्तृत है। यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन भाग है। इस पठार को दो भागों में विभाजित किया जाता है। मालवा का पठार तथा दक्कन का पठार। दक्कन का पठार लावे से बना है। इस त्रिकोणे पठार के दो मुख्य भाग हैं-मालवे का पठार तथा दक्षिणी पठार।
पश्चिम में पश्चिमी घाट तथा पूर्वी घाट इसकी सीमा बनाते हैं। यह पठार खनिज पदार्थों में बहुत ही धनी है।

4. तटीय मैदान-दक्कन के पठार के पश्चिम तथा पूर्व में तटीय मैदान फैले हैं। अरब सागर के तटीय मैदानों को पश्चिमी तटीय मैदान तथा बंगाल की खाड़ी की तटीय पट्टी को पूर्वी तटीय मैदान कहते हैं। पूर्वी तटीय मैदान पश्चिमी मैदानों की अपेक्षा अधिक चौड़े तथा समतल हैं। यहां नदियों द्वारा बनाये गये उपजाऊ डेल्टा भी हैं।

5. द्वीप-समूह-भारत में मुख्य रूप से दो द्वीप समूह हैं –
(1) लक्षद्वीप,
(2) अण्डमान-निकोबार।

(1) लक्षद्वीप समूह केरल के पश्चिम में अरब सागर में स्थित है। यह मूंगे की चट्टानों से बने छोटे-छोटे द्वीपों का एक समूह है। इनकी कुल संख्या 25 है।

(2) अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यह ज्वालामुखी चट्टानों से बना है। इन द्वीपों की कुल संख्या 120 है। समुद्र तट से दूर स्थित इन द्वीपों के अतिरिक्त ‘कुछ द्वीप तट के निकट भी स्थित हैं। इनमें व्हीलर, न्यूमर, दियु आदि द्वीप शामिल हैं।

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प्रश्न 3.
भारत के राजनीतिक विभाजन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
भारत में 28 राज्य तथा 8 केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य तथा केन्द्र शासित प्रदेश जिलों में बंटे हुए हैं। भारत के राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों की सूची नीचे दी गई है –

राज्य – राजधानी
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  1. हिमाचल प्रदेश – शिमला
  2. पंजाब – चण्डीगढ़
  3. हरियाणा – चण्डीगढ़
  4. उत्तर प्रदेश – लखनऊ
  5. मध्य प्रदेश – भोपाल
  6. राजस्थान – जयपुर
  7. गुजरात – गांधी नगर
  8. महाराष्ट्र – मुम्बई
  9. कर्नाटक – बंगलौर (बंगलुरू)
  10. गोवा – पणजी
  11. केरल – तिरुवनन्तपुरम्
  12. तमिलनाडु – चेन्नई
  13. आंध्र प्रदेश – अमरावती
  14. तेलंगाना – हैदराबाद
  15. उड़ीसा – भुवनेश्वर
  16. बिहार – पटना
  17. पश्चिमी बंगाल – कोलकाता
  18. सिक्किम – गंगटोक
  19. असम – दिसपुर
  20. अरुणाचल प्रदेश – इटानगर
  21. नागालैण्ड – कोहिमा
  22. मणिपुर – इम्फाल
  23. मिज़ोरम – आइज़ोल
  24. त्रिपुरा – अगरतला
  25. मेघालय – शिलांग
  26. छत्तीसगढ़ – रायपुर
  27. उत्तराखंड – देहरादून
  28. झारखण्ड – रांची

केन्द्र शासित क्षेत्र

नाम – मुख्यालय

  1. चण्डीगढ़ – चण्डीगढ़
  2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली – दिल्ली
  3. दमन और दीव – दमन
  4. दादरा नगर हवेली – सेलवास
  5. लक्षद्वीप – कवरत्ति
  6. पुड्डुचेरी – पुड्डचेरी
  7. अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह – पोर्ट ब्लेयर
  8. जम्मू और कश्मीर – श्रीनगर
  9. लद्दाख – लेह

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 6 खेलों का महत्त्व

Punjab State Board PSEB 7th Class Physical Education Book Solutions Chapter 6 खेलों का महत्त्व Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Physical Education Chapter 6 खेलों का महत्त्व

PSEB 7th Class Physical Education Guide खेलों का महत्त्व Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
कोई दस बड़ी और छोटी खेलों के नाम लिखो।
उत्तर-
बड़ी खेलें-

  1. फुटबाल
  2. हॉकी
  3. क्रिकेट
  4. टेबिल टेनिस
  5. खो-खो
  6. वालीबाल
  7. बास्कटबाल
  8. बैडमिन्टन
  9. कुश्ती
  10. कबड्डी।

छोटी खेलें-

  1. रूमाल उठाना
  2. कोटला छपाकी
  3. गुल्ली डण्डा
  4. लीडर ढूंढना
  5. बिल्ली -चूहा
  6. तीन-तीन या चार-चार
  7. जंग पलंगा
  8. राजे रानियां
  9. मथौला घोड़ी
  10. चक्कर वाली खो-खो।

प्रश्न 2.
मनुष्य की मूल कुशलताएं कौन-सी हैं ? इन मूल कुशलताओं से आजकल की खेलें कैसे प्रकाश में आईं ?
उत्तर-
चलना, भागना, कूदना, वृक्षों पर चढ़ना आदि मनुष्य की मूल कुशलताएं हैं। जैसे-जैसे मनुष्य के काम-धन्धों में उन्नति हुई, उसके साथ-साथ ही इन कुशलताओं के समन्वय में भी उन्नति हुई। मनुष्य ने इन क्रियाओं को जोड़कर खेलों में बदल दिया। धीरे-धीरे खेलों के वे रूप सम्पूर्ण विश्व में फैल गए।

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प्रश्न 3.
एक व्यक्ति के लिए खेलों से क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
एक व्यक्ति के लिए खेलों से निम्नलिखित लाभ हैं—
1. शरीर की वृद्धि और विकास (Development and growth of Body खेलें व्यक्ति के शरीर को सुदृढ़ बनाती हैं। वे उसके शरीर में चुस्ती एवं फुर्ती लाती हैं। खेलों से मनुष्य का शारीरिक विकास होता है।

2. खाली समय का उचित प्रयोग (Proper use of leisure time) खेलों के द्वारा व्यक्ति अपने खाली समय का उचित प्रयोग कर सकता है। खेलों के कारण व्यक्ति बहुत-से बुरे कामों से बच जाता है। खेलें मन को शैतान का घर नहीं बनने देती।

3. भावनाओं पर नियन्त्रण (Full control over Emotion)-खेलों से व्यक्ति भय, क्रोध, चिन्ता, उदासी आदि भावनाओं पर नियन्त्रण करना सीखता है।

4. आज्ञा का पालन (Obedience) खेलों से व्यक्ति में आज्ञा पालन का गुण विकसित होता है।
5. सहयोग की भावना (Spirit of co-operation)-खेलों से खिलाड़ियों में आपसी सहयोग की भावना आती है।
6. समय का पालन (Punctuality)-खेलें व्यक्ति को समय का पालन करना सिखाती हैं।
7. सहनशीलता (Tolerance) खेलें सहनशीलता के गुण का विकास करती हैं।
8. आत्म-विश्वास (Self Confidence)-खेलों से व्यक्ति में आत्म-विश्वास पैदा होता है।
9. दृढ़ निश्चय (Firm Determination) खेलें व्यक्ति में दृढ़ निश्चय का विकास करती हैं।
9. प्रतियोगिता की भावना (Spirit of Competition) खेलों से खिलाड़ियों में प्रतियोगिता की भावना विकसित होती है।
10. ज़िम्मेदारी की भावना (Spirit of Responsibility) खेलों द्वारा व्यक्ति में ज़िम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

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प्रश्न 4.
खेलों के खेलने से एक व्यक्ति में कौन-कौन से गुण विकसित होते हैं ?
उत्तर-
खेलों के गुण (Quality of Sports)-खेलें मनुष्य में निम्नलिखित गुण विकसित करती हैं—
1. अच्छा स्वास्थ्य (Gopd Health) खेलें स्वास्थ्य प्रदान करती हैं। खिलाड़ियों के भागने, कूदने और उछलने से शरीर के सभी अंग ठीक प्रकार से काम करना आरम्भ कर देते हैं। दिल, फेफड़े और पाचन आदि सभी अंग ठीक प्रकार से काम करना आरम्भ कर देते हैं। मांसपेशियों में शक्ति और लचक बढ़ जाती है। जोड़ लचकदार हो जाते हैं और शरीर में चुस्ती आ जाती है। इस प्रकार खेलों से स्वास्थ्य में सुधार होता है।

2. सुडौल शरीर (Conditioned Body) खेलों में खिलाड़ी को भागना पड़ता है, जिससे उसका शरीर सुडौल हो जाता है। इससे उसके व्यक्तित्व में निखार आ जाता है।

3. संवेगों का सन्तुलन (Full Control over Emotion) संवेगों का सन्तुलन सफल जीवन के लिए आवश्यक है। यदि इस पर नियन्त्रण न रखा जाए तो क्रोध, उदासी, अहंकार मनुष्य को चक्कर में डाल कर उसके व्यक्तित्व को नष्ट करते हैं। खेलें मनुष्य का मन जीवन की उलझनों से दूर हटाती हैं, उसका मन प्रसन्न करती हैं और उसे संवेगों पर नियन्त्रण करने में सफल बनाती हैं।

4. तीव्र बुद्धि का विकास (Development of Intelligence) खेलते समय खिलाडी को हर क्षण किसी-न-किसी समस्या का सामना करना पड़ता है। अड़चन या समस्या को उसी समय अपनी शक्ति के अनुसार हल करना पड़ता है। समाधान ढूंढने में तनिक भी विलम्ब हो जाने से सारे खेल का पासा पलट सकता है। इस प्रकार के वातावरण में प्रत्येक खिलाड़ी हर समय किसी-न-किसी समस्या के हल में लगा रहता है। उसे अपनी समस्याओं का स्वयं समाधान करने का अवसर मिलता है। अतः खेलों द्वारा मनुष्य में तीव्र बुद्धि का विकास होता है।

5. चरित्र का विकास (Development of Character) खेल के समय विजयपराजय के लिए खिलाड़ियों को कई प्रकार के प्रलोभन दिए जाते हैं। अच्छे खिलाड़ी भूल कर भी इस जाल में नहीं फंसते और अपने विरोधी पक्ष के हाथों नहीं बिकते। अच्छा खिलाड़ी किसी भी छल-कपट का आश्रय नहीं लेता। इस प्रकार खेलें मनुष्य में कई चारित्रिक गुणों का विकास करती हैं।

6. इच्छा शक्ति प्रबल करती हैं (Development of Will Power) खेलों में खिलाड़ी एकाग्रचित होकर खेलता है। वह उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अपनी सारी शक्ति लगा देता है और साधारणतः सफल भी हो जाता है। यही आदत उसके जीवन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बन जाती है। इस प्रकार खेलें इच्छा शक्ति को प्रबल करती हैं।

7. भ्रातृ-भाव की भावना का विकास (Spirit of Brotherhood) खेलों के द्वारा भ्रातृ-भाव की भावना का विकास होता है। इसका कारण यह है कि खिलाड़ी सदा ग्रुपों में खेलता है और ग्रुप के नियमानुसार व्यवहार करता है। इससे वे एक-दूसरे के प्रति प्रेमपूर्ण और भाइयों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। इस प्रकार उनका जीवन भ्रातृ प्रेम के आदर्श के अनुसार ढल जाता है।

8. नेतृत्व (Leadership)-खेलों से मनुष्य में नेतृत्व के गुणों का विकास होता है। खेलों के मैदान से ही हमें अनुशासन, आत्म संयम, आत्म त्याग और मिल-जुल कर देश के लिए सर्वस्व बलिदान करने वाले सैनिक अधिकारी प्राप्त होते हैं। इसलिए तो ड्यूक ऑफ वेलिंग्टन ने नेपोलियन को वाटरलू (Waterloo) के युद्ध में पराजित करने के पश्चात् कहा था, “वाटरलू का युद्ध हैरो के खेलों के मैदान में जीता गया।”

9. अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना (International Co-operation) खेलें जातीय भेद-भाव को समाप्त करती हैं। प्रत्येक टीम में विभिन्न जातियों के खिलाड़ी होते हैं। उनके इकट्ठे मिलने-जुलने और टीम के लिए एक जुट होकर संघर्ष करने की भावना के कारण जाति-पाति की दीवारें ढह जाती हैं और सादा जीवन में विशाल दृष्टिकोण हो जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक देश के खिलाड़ी दूसरे देश के खिलाड़ियों से खेलते हैं और उनसे मिलते-जुलते हैं। इस प्रकार उनमें मित्रता की भावना बढ़ जाती है। अत: खेलें अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना का विकास करती हैं।

10. प्रतियोगिता और सहयोग (Competition and Co-operation)-प्रतियोगिता ही उन्नति का आधार है और सहयोग महान् प्राप्तियों का साधन। विजय प्राप्त करने के लिए टीमें एड़ी-चोटी का जोर लगा देती हैं, परन्तु मैच जीतने के लिए सभी खिलाड़ियों के सहयोग की आवश्यकता होती है। किसी भी एक खिलाड़ी के प्रयत्नों से मैच नहीं जीता जा सकता। अतः प्रतियोगिता और सहयोग की भावनाओं का विकास करने के लिए खेलें बहुत उपयोगी हैं।

इनके अतिरिक्त खेलों से मनुष्य में आत्म-विश्वास एवं उत्तरदायित्व निभाने के गुणों का भी विकास होता है।

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प्रश्न 5.
एक राष्ट्र को खेलों से क्या लाभ होते हैं ?
उत्तर-
एक राष्ट्र को खेलों से निम्नलिखित लाभ होते हैं—
1. राष्ट्रीय एकता (National Unity) खेलों द्वारा राष्ट्रीय एकता का विकास होता है। एक राज्य के खिलाड़ी दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों से खेलने के लिए आते-जाते रहते हैं। उनके परस्पर समन्वय से राष्ट्रीय भावना उत्पन्न होती है।

2. सीमाओं की रक्षा (Full Protection of the Border of the Country)खेलों में भाग लेने से प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ रहता है। इस प्रकार स्वस्थ जाति का निर्माण होता है। एक स्वस्थ जाति ही अपनी सीमाओं की अच्छी तरह रक्षा कर सकती है।

3. अच्छे और अनुभवी नेता (Good and Experienced Leader) खेलों के द्वारा अच्छे नेता पैदा होते हैं क्योंकि खेल के मैदान में बालकों को नेतृत्व के बहुत-से अवसर मिलते हैं। खेलों के ये नेता बाद में अच्छी तरह से अपने देश की बागडोर सम्भालते हैं।

4. अच्छे नागरिक (Good Citizen)-खेलें बालकों में आज्ञा पालन, नियम पालन, ज़िम्मेदारी निभाना, आत्म-विश्वास, सहयोग आदि के गुणों का विकास करती हैं। इन गुणों से युक्त व्यक्ति श्रेष्ठ नागरिक बन जाता है। श्रेष्ठ और अच्छे नागरिक ही देश की बहुमूल्य सम्पत्ति होते हैं।

5. अन्तर्राष्ट्रीय भावना (International Brotherhood)-एक देश की टीमें दूसरे देशों में मैच खेलने जाती हैं। इससे दोनों देशों के खिलाड़ियों में मित्रता और सूझबूझ बढ़ती है जिससे परस्पर भेद-भाव मिट जाते हैं। इस प्रकार उनमें अन्तर्राष्ट्रीय भावना विकसित होती है। अन्तर्राष्ट्रीय भावना के विकास से शान्ति स्थापित होती है।

Physical Education Guide for Class 7 PSEB खेलों का महत्त्व Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
पहले-पहल मनुष्य किस प्रकार का जीवन व्यतीत करता था ?
उत्तर-
जंगली जीवन।

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प्रश्न 2.
खेलों को कितने भागों में बांटा जा सकता है ?
उत्तर-
दो।

प्रश्न 3.
भारतीय (या देशीय) खेलें कौन-सी हैं ?
उत्तर-
कुश्ती, कबड्डी तथा खो-खो।

प्रश्न 4.
बच्चे की प्राकृतिक और मन-पसंद क्रिया क्या है ?
उत्तर-
खेल।

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प्रश्न 5.
हम में जिम्मेवारी की भावना, सहनशीलता, दृढ़ निश्चय, आत्म-विश्वास और प्रतियोगिता की भावना कैसे पैदा हो सकती है ?
उत्तर-
खेलों के द्वारा।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
शारीरिक क्रियाओं का मनुष्य के जीवन में क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
प्रत्येक मनुष्य बचपन से ही कोई-न-कोई शारीरिक क्रिया शुरू कर लेता है। शारीरिक क्रिया मनुष्य की एक प्राथमिक आवश्यकता है। जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाता है वैसे-वैसे उस की शारीरिक क्रियाओं की संख्या भी बढ़ती जाती है। शारीरिक क्रियाओं को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है-प्राकृतिक क्रियाएं और औपचारिक क्रियाएं।
खेलें औपचारिक क्रियाओं में आती हैं। खेलों से मनुष्य शारीरिक तथा मानसिक पक्ष से स्वस्थ रहता है।

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प्रश्न 2.
खेलों की अन्तर्राष्ट्रीय विशेषता क्या है ?
उत्तर-
एक राष्ट्र की टीम दूसरे राष्ट्र में खेलने के लिए जाती है। इस प्रकार देशों में मित्रता बढ़ती है और अन्तर्राष्ट्रीय भावना उत्पन्न होती है। इस अन्तर्राष्ट्रीय भावना के द्वारा देशों के परस्पर वैर-विरोध मिट कर विश्व में शान्ति स्थापित होती जा रही है। इस प्रकार खेलें एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से, एक प्रान्त को दूसरे प्रान्त से और एक देश को दूसरे देश से मिलाती हैं।

प्रश्न 3.
खेलों की राष्ट्रीय विशेषता का वर्णन करो।
उत्तर-
खेलों में भाग लेने से बच्चों में समय का पालन करने, नियमपूर्वक काम करने, अपनी ज़िम्मेदारी निभाने, दूसरों की सहायता करने और स्वयं की रक्षा करने आदि अच्छे कामों की सिखलाई मिलती है। इससे बच्चे स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट और प्रसन्न चित्त रहेंगे। इससे. समूचे राष्ट्र को बल मिलेगा। कोई भी राष्ट्र निजी व्यक्तियों के समूह से ही बनता है। बच्चे राष्ट्र के भावी नागरिक होते हैं। खेलें किसी देश को स्वस्थ एवं अच्छे नागरिक प्रदान करती हैं। अत: यदि किसी राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक अच्छा हो, तो, राष्ट्र अपने आप ही अच्छा बन जाएगा। इस प्रकार खेलों का किसी राष्ट्र के लिए विशेष महत्त्व है। खेलों से राष्ट्रीय एकता की भावना मज़बूत होती है।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध : कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय

Punjab State Board PSEB 12th Class History Book Solutions Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध : कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 12 History Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध : कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

द्वितीय एंग्लो-सिरव युद्ध के कारण (Causes of the Second Anglo-Sikh War)

प्रश्न 1.
उन परिस्थितियों का वर्णन करो जिनके कारण द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध हुआ। इस युद्ध के लिए अंग्रेज़ कहाँ तक उत्तरदायी थे ?
(Discuss the circumstances leading to the Second Anglo-Sikh War. How far were the British responsible for it ?)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के मुख्य कारण क्या थे ? ।
(What were the main causes of Second Anglo-Sikh War ?)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के महत्त्वपूर्ण कारणों की व्याख्या करें। (Explain the important causes of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध के कारण लिखें।
(Write the reasons of Second Anglo-Sikh War.)
उत्तर-
प्रथम ऐंग्लो-सिख युद्ध में अंग्रेजों की विजय हई और सिखों को पराजय का सामना करना पड़ा। अंग्रेज़ों द्वारा सिखों के साथ किया गया अपमानजनक व्यवहार और थोपी गई संधियों से सिखों में रोष भड़क उठा। इसका परिणाम द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध के रूप में सामने आया। इस युद्ध के मुख्य कारण निम्नलिखित थे—

1. सिखों की अपनी पराजय का प्रतिशोध लेने की इच्छा (Sikh desire to avenge their defeat in the First Anglo-Sikh War)—यह सही है कि अंग्रेजों के साथ प्रथम युद्ध में सिख पराजित हो गए थे, परंतु इससे उनका साहस किसी प्रकार कम नहीं हुआ था। इस पराजय का मुख्य कारण सिख नेताओं लाल सिंह तथा तेजा सिंह द्वारा की गई गद्दारी थी। सिख सैनिकों को अपनी योग्यता पर पूर्ण विश्वास था। वे अपनी पराजय का प्रतिशोध लेना चाहते थे। उनकी यह प्रबल इच्छा द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध का एक मुख्य कारण बनी।

2. लाहौर तथा भैरोवाल की संधियों से पंजाबी असंतुष्ट (Punjabis were dissatisfied with the Treaties of Lahore and Bhairowal)-अंग्रेज़ों तथा सिखों के बीच हुए प्रथम युद्ध के पश्चात् अंग्रेज़ों ने लाहौर दरबार के साथ लाहौर तथा भैरोवाल नामक दो संधियाँ कीं। इन संधियों द्वारा जालंधर दोआब जैसे प्रसिद्ध उपजाऊ प्रदेश को अंग्रेजों ने अपने अधिकार में ले लिया था। कश्मीर के क्षेत्र को अंग्रेजों ने अपने मित्र गुलाब सिंह के सुपुर्द कर दिया था। पंजाब के लोग महाराजा रणजीत सिंह के अथक प्रयासों से निर्मित साम्राज्य का विघटन होता देख सहन नहीं कर सकते थे। इसलिए सिखों को अंग्रेजों से एक और युद्ध लड़ना पड़ा।

3. सिख सैनिकों में असंतोष (Resentment among the Sikh Soldiers) लाहौर की संधि के अनुसार अंग्रेजों ने खालसा सेना की संख्या 20,000 पैदल तथा 12,000 घुड़सवार निश्चित कर दी थी। इस कारण हजारों की संख्या में सिख सैनिकों को नौकरी से हटा दिया गया था। इससे इन सैनिकों के मन में अंग्रेजों के प्रति रोष उत्पन्न हो गया तथा वे अंग्रेजों के साथ युद्ध की तैयारियाँ करने लगे।

4. महारानी जिंदां से दुर्व्यवहार (Harsh Treatment with Maharani Jindan)-अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह की विधवा महारानी जिंदां से जो अपमानजनक व्यवहार किया, उसने सिखों में अंग्रेजों के प्रति व्याप्त रोष को और भड़का दिया। महारानी जिंदां को अंग्रेज़ों ने लाहौर की संधि द्वारा अवयस्क महाराजा दलीप सिंह की संरक्षक माना था। परंतु अंग्रेजों ने भैरोवाल की संधि के द्वारा महारानी के समस्त अधिकार छीन लिए। 1847 ई० में अंग्रेजों ने महारानी को शेखूपुरा के दुर्ग में नज़रबंद कर दिया। 1848 ई० में महारानी जिंदां को देश निकाला देकर बनारस भेज दिया। महारानी जिंदां के साथ किए गए दुर्व्यवहार के कारण समूचे पंजाब में अंग्रेजों के प्रति रोष की लहर दौड़ गई।

5. दीवान मूलराज का विद्रोह (Revolt of Diwan Moolraj)-द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध को आरंभ करने में मुलतान के दीवान मूलराज के विद्रोह को विशेष स्थान प्राप्त है। 1844 ई० में मूलराज को मुलतान का नया नाज़िम बनाया गया। परंतु अंग्रेजों की गलत नीतियों के कारण दिसंबर, 1847 ई० को दीवान मूलराज ने अपना त्याग-पत्र दे दिया। 1848 ई० में सरदार काहन सिंह को मुलतान का नया नाज़िम नियुक्त किया गया। मूलराज से चार्ज लेने के लिए काहन सिंह के साथ दो अंग्रेज़ अधिकारियों वैनस एग्नयू तथा एंड्रसन को भेजा गया। मूलराज ने उनका स्वागत किया किन्तु मूलराज के कुछ सिपाहियों ने 20 अप्रैल, 1848 ई० को आक्रमण करके उनकी हत्या कर दी तथा काहन सिंह को बंदी बना लिया। उनकी हत्या के लिए मूलराज को दोषी ठहराया गया। इस कारण उसने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का ध्वज उठा लिया। भारत का गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ऐसे ही अवसर की प्रतीक्षा में था। वह चाहता था कि यह विद्रोह अधिक भड़क उठे तथा उसे पंजाब पर अधिकार करने का अवसर मिल जाए। डॉक्टर कृपाल सिंह के अनुसार,
“वह चिंगारी जिसने अग्नि प्रज्वलित की तथा जिसमें पंजाब का स्वतंत्र राज्य जलकर भस्म हो गया, मुलतान से उठी थी।”1

6. चतर सिंह का विद्रोह (Revolt of Chattar Singh)-सरदार चतर सिंह अटारीवाला हज़ारा का नाज़िम था। उसके एक सिपाही ने एक अंग्रेज़ अधिकारी कर्नल कैनोरा की उसके द्वारा चतर सिंह को अपमानित करने के कारण हत्या कर दी। इस पर अंग्रेजों ने सरदार चतर सिंह को पदच्युत कर दिया तथा उसकी जागीर ज़ब्त कर ली। इस कारण चतर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की घोषणा कर दी। परिणामस्वरूप चारों ओर विद्रोह की अग्नि फैल गई।

7. शेर सिंह का विद्रोह (Revolt of Sher Singh)—शेर सिंह सरदार चतर सिंह का पुत्र था। जब शेर सिंह को अपने पिता के विरुद्ध किए गए अंग्रेज़ों के दुर्व्यवहार का पता चला तो उसने भी 14 सितंबर, 1848 ई० को अंग्रेज़ों के विरुद्ध विद्रोह करने की घोषणा कर दी। उसकी अपील पर कई सिख सिपाही उसके ध्वज तले एकत्रित हो गए।

8. लॉर्ड डल्हौज़ी की नीति (Policy of Lord Dalhousie)-जनवरी, 1848 ई० में लॉर्ड डलहौज़ी भारत का नया गवर्नर-जनरल बना था। उसने लैप्स की नीति द्वारा भारत की बहुत-सी रियासतों को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया था। केवल पंजाब ही एक ऐसा राज्य था, जिसे अभी तक अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित नहीं किया जा सका था। वह किसी स्वर्ण अवसर की तलाश में था। यह अवसर उसे दीवान मूलराज, चतर सिंह तथा शेर सिंह द्वारा किए गए विद्रोहों से मिला।

जब पंजाब में विद्रोह की आग भड़कती दिखाई दी तो लॉर्ड डलहौज़ी ने विद्रोहियों के विरुद्ध कार्यवाई करने का आदेश दिया। अंग्रेज़ कमांडर-इन-चीफ लॉर्ड ह्यूग गफ 16 नवंबर को सेना लेकर शेर सिंह का सामना करने के लिए चनाब नदी की ओर चल पड़ा।

1. “The spark which arose from Multan kindled the conflagration and reduced the sovereign state of the Punjab to ashes” Dr. Kirpal Singh, History and Culture of the Punjab (Patiala : 1978) Vol. 3, p. 80..

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युद्ध की घटनाएं (Events of the War)

प्रश्न 2.
अंग्रेज़ों तथा सिखों के मध्य हुए दूसरे युद्ध की घटनाओं का संक्षिप्त वर्णन करें। . (Discuss in brief the events of the Second Anglo-Sikh War.)
उत्तर-
अंग्रेज़ों की कुटिल नीतियों ने अंग्रेज़-सिख संबंधों को एक और युद्ध के कगार पर ला के खड़ा कर दिया। मूलराज, चतर सिंह तथा शेर सिंह के विद्रोह को देखते हुए लॉर्ड डलहौज़ी ने लॉर्ड ह्यूग गफ को सिखों का दमन करने के लिए भेजा। परिणामस्वरूप, दूसरा ऐंग्लो-सिख युद्ध आरंभ हो गया। इस युद्ध की मुख्य घटनाएँ निम्नलिखित थीं—

1. रामनगर की लड़ाई (Battle of Ramnagar)-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की पहली लड़ाई 22 नवंबर, 1848 ई० को रामनगर के स्थान पर हुई। अंग्रेजी सेना का नेतृत्व लॉर्ड ह्यूग गफ़ कर रहा था। उसके अधीन 20,000 सैनिक थे। सिख सेनाओं का नेतृत्व शेर सिंह कर रहा था। उसके साथ 15,000 सैनिक थे। सिंखों के आक्रमण ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। इस लड़ाई से लॉर्ड गफ को पता चला कि सिखों का सामना करना कोई सहज काम नहीं है।

2. चिल्लियाँवाला की लड़ाई (Battle of Chillianwala)—चिल्लियाँवाला की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की महत्त्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक थी। यह 13 जनवरी, 1849 ई० को लड़ी गई थी। जब लॉर्ड ह्यूग गफ़ को यह सूचना मिली कि चतर सिंह अपने सैनिकों सहित शेर सिंह की सहायता को पहुँच रहा है तो उसने 13 जनवरी को शेर सिंह के सैनिकों पर आक्रमण कर दिया। यह लड़ाई बहुत भयानक थी। इस लड़ाई में अंग्रेज़ी सेना के 695
PSEB 12th Class History Solutions Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय 1
MAHARAJA DALIP SINGH
सैनिक, जिनमें 132 अफ़सर भी मारे गए। अंग्रेजों की चार तोपें भी सिखों के हाथ लगीं। सीताराम कोहली के अनुसार,
“जब से भारत पर अंग्रेज़ों ने अधिकार किया था, चिल्लियाँवाला की लड़ाई में यह उनकी सबसे कड़ी पराजय थी।”2

3. मुलतान की लड़ाई (Battle of Multan)—मुलतान में दीवान मूलराज के विद्रोह करने के बाद शेर सिंह । उसके साथ जा मिला था। अंग्रेजों ने एक चाल चली। उन्होंने नकली पत्र लिखकर शेर सिंह तथा मूलराज में भाँति उत्पन्न कर दी। परिणामस्वरूप, शेर सिंह ने मूलराज का साथ छोड़ दिया। दिसंबर, 1848 ई० में जनरल विश ने मुलतान के किले को घेरा डाल दिया। अंग्रेज़ों की ओर से फेंका गया एक गोला भीतर रखे बारूद पर जा गिरा। इस कारण बहुत-सा बारूद नष्ट हो गया तथा मूलराज के 500 सैनिक भी मारे गए। इस भारी क्षति के कारण मूलराज के लिए युद्ध जारी रखना बहुत कठिन हो गया। अंततः विवश होकर 22 जनवरी, 1849 ई० को मूलराज ने अंग्रेजों के समक्ष आत्म-समर्पण कर दिया। मुलतान की इस विजय से चिल्लियाँवाला में अंग्रेजों का जो अपमान हुआ था, उसकी काफ़ी सीमा तक पूर्ति हो गई।

4. गुजरात की लड़ाई (Battle of Gujarat)—गुजरात की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो -सिख युद्ध की सबसे महत्त्वपूर्ण तथा निर्णायक लड़ाई थी। इस लड़ाई में चतर सिंह तथा भाई महाराज सिंह शेर सिंह की सहायता के लिए आ गए। अफ़गानिस्तान के बादशाह दोस्त मुहम्मद खाँ ने भी सिखों की सहायता के लिए 3,000 घुडसवार सेना भेजी। सिख सेना की संख्या 40,000 थी। दूसरी ओर अंग्रेज़ सेना का नेतृत्व लॉर्ड गफ ही कर रहा था। अंग्रेज़ों इतिहास में तोपों की लड़ाई के नाम से विख्यात है।

यह लड़ाई 21 फरवरी, 1849 ई० को हुई थी। सिखों की तोपों का बारूद शीघ्र ही समाप्त हो गया। परिणामस्वरूप अंग्रेजों ने अपनी तोपों से सिख सेनाओं पर भारी आक्रमण कर दिया। इस लड़ाई में सिख सेना को भारी क्षति पहुँची। उनके 3,000 से 5,000 तक सैनिक इस लड़ाई में मारे गए। इस लड़ाई के पश्चात् सिख सैनिकों में भगदड़ मच गई। 10 मार्च, 1849 ई० को चतर सिंह, शेर सिंह ने रावलपिंडी के निकट जनरल गिल्बर्ट के सम्मुख हथियार डाल दिए। प्रसिद्ध इतिहासकार पतवंत सिंह के अनुसार,
“इस प्रकार द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध का अंत हुआ तथा इसके साथ रणजीत सिंह के गौरवशाली साम्राज्य पर पर्दा पड़ गया।”3

2. “Chillianwala was the worst defeat the British had suffered since their occupation of India.” Sita Ram Kohli, Sunset of the Sikh Empire (Bombay : 1967) p. 175.
3. “Thus ended the Second Sikh War, and with it the curtain came down on Ranjit Singh’s proud empire.” Patwant Singh, The Sikhs (New Delhi : 1999) p. 172.

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युद्ध के परिणाम (Consequences of the War)

प्रश्न 3.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिए। (Discuss the main results of the Second Anglo-Sikh War.)
उत्तर-
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के बड़े दूरगामी परिणाम निकले। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है—
1. महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का अंत (End of the Empire of Maharaja Ranjit Singh)दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का पूर्णतः अंत हो गया। अंतिम सिख महाराजा दलीप सिंह को सिंहासन से उतार दिया गया। उसे पंजाब को छोड़कर देश के किसी भी भाग में रहने की छूट दी गई। लाहौर दरबार की समस्त संपत्ति पर अंग्रेज़ों का अधिकार हो गया। विख्यात कोहेनूर हीरा दलीप सिंह से लेकर महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया। कुछ समय के पश्चात् महाराजा दलीप सिंह को इंग्लैंड भेज दिया गया। 1893 ई० में उनकी पेरिस में मृत्यु हो गई।

2. सिख सेना भंग कर दी गई (Sikh Army was Disbanded)-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के पश्चात् सिख सेना को भी भंग कर दिया गया। अधिकाँश सिख सैनिकों को कृषि व्यवसाय में लगाने का प्रयत्न किया गया। कुछ को ब्रिटिश-भारतीय सेना में भर्ती कर लिया गया।

3. दीवान मूल राज तथा भाई महाराज सिंह को निष्कासन का दंड (Banishment of Diwan Moolraj and Bhai Maharaj Singh)-दीवान मूलराज को पहले मृत्यु दंड दिया गया था। बाद में इसे काले पानी की सज़ा में बदल दिया गया। परंतु उनकी 11 अगस्त, 1851 ई० को कलकत्ता (कोलकाता) में मृत्यु हो गई। भाई महाराज सिंह को पहले इलाहाबाद तथा बाद में कलकत्ता (कोलकाता) के बंदीगृह में रखा गया। तत्पश्चात् उसे सिंगापुर जेल भेज दिया गया जहाँ 5 जुलाई, 1856 ई० को उसकी मृत्यु हो गई।

4. चतर सिंह तथा शेर सिंह को दंड (Punishment to Chattar Singh and Sher Singh)-अंग्रेज़ों ने स० चतर सिंह तथा उसके पुत्र शेर सिंह को बंदी बना लिया था। उन्हें पहले इलाहाबाद तथा बाद में कलकत्ता (कोलकाता) की जेलों में रखा गया। 1854 ई० में सरकार ने उन दोनों को मुक्त कर दिया।

5. पंजाब के लिए नया प्रशासन (New Administration for the Punjab)-पंजाब के अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय के पश्चात् अंग्रेजों ने पंजाब का प्रशासन चलाने के लिए प्रशासनिक बोर्ड की स्थापना की। यह 1849 ई० से 1853 ई० तक बना रहा। अंग्रेज़ों ने पंजाब की प्रशासनिक संरचना में कई परिवर्तन किए। उत्तर-पश्चिमी सीमा को अधिक सुरक्षित बनाया गया। न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाया गया। पंजाब में सड़कों तथा नहरों का जाल बिछा दिया गया। कृषि को प्रोत्साहन दिया गया। जागीरदारी प्रथा समाप्त कर दी गई। व्यापार वृद्धि के प्रयत्न किए गए। पंजाब में पश्चिमी-ढंग की शिक्षा प्रणाली आरंभ की गई। इन सुधारों ने पंजाबियों के दिलों को जीत लिया। परिणामस्वरूप वे 1857 के विद्रोह के समय अंग्रेजों के प्रति वफ़ादार रहे।

6. पंजाब की रियासतों से मित्रता का व्यवहार (Friendly attitude towards Princely States of the Punjab)-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय पटियाला, नाभा, जींद, मालेरकोटला, फरीदकोट तथा कपूरथला की रियासतों ने अंग्रेज़ों का साथ दिया था। अंग्रेजों ने इनसे मित्रता बनाए रखी तथा इन रियासतों को अंग्रेज़ी राज्य में सम्मिलित न किया गया।

प्रश्न 4.
अंग्रेज़ों तथा सिखों के मध्य हुए दूसरे युद्ध के कारणों तथा परिणामों का वर्णन करें।
(Discuss the causes and results of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के कारण तथा परिणामों का वर्णन करें। (What were the causes and results of the 2nd Anglo-Sikh War ? Explain.)
उत्तर-
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के बड़े दूरगामी परिणाम निकले। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है—
1. महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का अंत (End of the Empire of Maharaja Ranjit Singh)दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का पूर्णतः अंत हो गया। अंतिम सिख महाराजा दलीप सिंह को सिंहासन से उतार दिया गया। उसे पंजाब को छोड़कर देश के किसी भी भाग में रहने की छूट दी गई। लाहौर दरबार की समस्त संपत्ति पर अंग्रेज़ों का अधिकार हो गया। विख्यात कोहेनूर हीरा दलीप सिंह से लेकर महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया। कुछ समय के पश्चात् महाराजा दलीप सिंह को इंग्लैंड भेज दिया गया। 1893 ई० में उनकी पेरिस में मृत्यु हो गई।

2. सिख सेना भंग कर दी गई (Sikh Army was Disbanded)-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के पश्चात् सिख सेना को भी भंग कर दिया गया। अधिकाँश सिख सैनिकों को कृषि व्यवसाय में लगाने का प्रयत्न किया गया। कुछ को ब्रिटिश-भारतीय सेना में भर्ती कर लिया गया।

3. दीवान मूल राज तथा भाई महाराज सिंह को निष्कासन का दंड (Banishment of Diwan Moolraj and Bhai Maharaj Singh)-दीवान मूलराज को पहले मृत्यु दंड दिया गया था। बाद में इसे काले पानी की सज़ा में बदल दिया गया। परंतु उनकी 11 अगस्त, 1851 ई० को कलकत्ता (कोलकाता) में मृत्यु हो गई। भाई महाराज सिंह को पहले इलाहाबाद तथा बाद में कलकत्ता (कोलकाता) के बंदीगृह में रखा गया। तत्पश्चात् उसे सिंगापुर जेल भेज दिया गया जहाँ 5 जुलाई, 1856 ई० को उसकी मृत्यु हो गई।

4. चतर सिंह तथा शेर सिंह को दंड (Punishment to Chattar Singh and Sher Singh)-अंग्रेज़ों ने स० चतर सिंह तथा उसके पुत्र शेर सिंह को बंदी बना लिया था। उन्हें पहले इलाहाबाद तथा बाद में कलकत्ता (कोलकाता) की जेलों में रखा गया। 1854 ई० में सरकार ने उन दोनों को मुक्त कर दिया।

5. पंजाब के लिए नया प्रशासन (New Administration for the Punjab)-पंजाब के अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय के पश्चात् अंग्रेजों ने पंजाब का प्रशासन चलाने के लिए प्रशासनिक बोर्ड की स्थापना की। यह 1849 ई० से 1853 ई० तक बना रहा। अंग्रेज़ों ने पंजाब की प्रशासनिक संरचना में कई परिवर्तन किए। उत्तर-पश्चिमी सीमा को अधिक सुरक्षित बनाया गया। न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाया गया। पंजाब में सड़कों तथा नहरों का जाल बिछा दिया गया। कृषि को प्रोत्साहन दिया गया। जागीरदारी प्रथा समाप्त कर दी गई। व्यापार वृद्धि के प्रयत्न किए गए। पंजाब में पश्चिमी-ढंग की शिक्षा प्रणाली आरंभ की गई। इन सुधारों ने पंजाबियों के दिलों को जीत लिया। परिणामस्वरूप वे 1857 के विद्रोह के समय अंग्रेजों के प्रति वफ़ादार रहे।

6. पंजाब की रियासतों से मित्रता का व्यवहार (Friendly attitude towards Princely States of the Punjab)-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय पटियाला, नाभा, जींद, मालेरकोटला, फरीदकोट तथा कपूरथला की रियासतों ने अंग्रेज़ों का साथ दिया था। अंग्रेजों ने इनसे मित्रता बनाए रखी तथा इन रियासतों को अंग्रेज़ी राज्य में सम्मिलित न किया गया।

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पंजाब का विलय (Annexation of the Punjab)

प्रश्न 5.
“पंजाब का विलय एक घोर विश्वासघात था।” संक्षिप्त व्याख्या करें।
(“Annexation of the Punjab was a violent breach of trust.” Discuss briefly.)
अथवा
लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा पंजाब विलय का आलोचनात्मक वर्णन करें।
(Explain critically Lord Dalhousie’s annexation of Punjab.)
अथवा
“लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा पंजाब का अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय सिद्धांतहीन तथा अनुचित था।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने पक्ष में तर्क दें।
(“The annexation of Punjab by Lord Dalhousie to the British Empire was unprincipled and unjustified.” Do you agree to this view ? Give arguments in your favour.)
उत्तर-
लॉर्ड डलहौज़ी भारत में 1848 ई० में गवर्नर-जनरल बनकर आया था। वह भारत के गवर्नर-जनरलों में सबसे बड़ा साम्राज्यवादी था। पंजाब को भी उसकी साम्राज्यवादी नीति का शिकार होना पड़ा। 29 मार्च, 1849 ई० को लाहौर को अंग्रेज़ी साम्राज्य में शामिल करने की घोषणा की गई। इसके पश्चात् लाहौर दुर्ग से सिखों का झंडा उतार दिया गया तथा अंग्रेज़ों का झंडा फहराया गया। इस प्रकार पंजाब के सिख राज्य का अंत हो गया।
I. डलहौज़ी की विलय की नीति के पक्ष में तर्क (Arguments in favour of Dalhousie’s Policy of Annexation)
डब्ल्यू डब्ल्यू० हंटर, मार्शमेन तथा एस० एम० लतीफ आदि इतिहासकारों ने लॉर्ड डलहौजी द्वारा पंजाब के अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए हैं—

1. सिखों ने वचन भंग किया (Sikhs had broken their Promises)-लॉर्ड डलहौज़ी ने यह आरोप लगाया कि सिखों ने भैरोवाल संधि की शर्ते भंग की। सिख सरदारों ने यह वचन दिया था कि वे अंग्रेज़ रेजीडेंट को पूर्ण सहयोग देंगे। परंतु उन्होंने राज्य में अशाँति तथा विद्रोह भड़काने का प्रयत्न किया। लॉर्ड डलहौज़ी ने दीवान मूलराज के विद्रोह को पूरी सिख जाति का विद्रोह बताया। उसके अनुसार यह विद्रोह सिख राज्य की स्थापना के लिए किया गया था। सरतार चतर सिंह तथा उसके पुत्र शेर सिंह ने विद्रोह करके मूलराज का साथ दिया। इस प्रकार बिगड़ रही परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने के लिए पंजाब का अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय आवश्यक था। इसी कारण लॉर्ड डलहौज़ी ने कहा था,
“निस्संदेह मुझे यह पक्का विश्वास है कि मेरी कार्यवाई समयानुसार, न्यायपूर्ण तथा आवश्यक थी।”4

2. पंजाब अच्छा मध्यवर्ती राज्य न रहा (Punjab remained no more a useful Buffer State)लॉर्ड हार्डिंग का विचार था कि पंजाब एक लाभप्रद मध्यवर्ती राज्य प्रमाणित होगा। इससे ब्रिटिश राज्य को अफ़गानिस्तान की ओर से किसी ख़तरे का सामना नहीं करना पड़ेगा। परंतु उनका यह विचार गलत प्रमाणित हुआ क्योंकि सिखों तथा अफ़गानों में मित्रता स्थापित हो गई। इसीलिए लॉर्ड डलहौज़ी ने पंजाब को ब्रिटिश साम्राज्य में सम्मिलित करना आवश्यक समझा।

3. ऋण न लौटाना (Non-payment of the Loans)-लॉर्ड डलहौज़ी ने यह आरोप लगाया कि भैरोवाल की संधि की शर्तों के अनुसार लाहौर दरबार ने अंग्रेज़ों को 22 लाख रुपए वार्षिक देने थे। परंतु लाहौर दरबार ने एक पाई भी अंग्रेज़ों को न दी। इसलिए पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में सम्मिलित करना उचित था।

4. पंजाब पर अधिकार करना लाभप्रद था (It was advantageous to annex Punjab)-प्रथम ऐंग्लो-सिख युद्ध में विजय के पश्चात् अंग्रेज़ों का मत था कि आर्थिक दृष्टि से पंजाब कोई लाभप्रद प्राँत नहीं है। परंतु पंजाब में दो वर्ष तक रह कर उन्हें ज्ञात हो गया कि यह राज्य तो कई दृष्टियों से भी अंग्रेजों के लिए लाभप्रद प्रमाणित हो सकता है। इन कारणों से लॉर्ड डलहौज़ी ने पंजाब को हड़प करने का दृढ़ निश्चय कर लिया।

5. पंजाब के लोगों के लिए लाभप्रद (Advantageous for the people of Punjab) लॉर्ड डलहौज़ी . का पंजाब पर अधिकार करना पंजाब के लोगों के लिए एक वरदान सिद्ध हुआ। महाराजा रणजीत सिंह के बाद लाहौर दरबार षड्यंत्रों का अखाड़ा बन चुका था। ऐसी स्थिति का लाभ उठाकर चोरों, डाकुओं तथा ठगों ने अपना धंधा जोरों से शुरू कर दिया था। अंग्रेज़ों ने पंजाब का अपने राज्य में विलय करके वहाँ फिर से शाँति स्थापित की। पुलिस तथा न्याय प्रणाली को अधिक कुशल बनाया गया। कृषि तथा व्यापार को प्रोत्साहन दिया गया। पंजाब में सड़कों तथा नहरों का जाल बिछाया गया। लोगों को पश्चिमी शिक्षा देने की व्यवस्था की गई।

6. पंजाब का अधिकार आवश्यक था (Annexation of the Punjab was Inevitable)-यह कहा जाता है कि यदि पंजाब का विलय न किया जाता तो सिखों ने अंग्रेज़ी साम्राज्य के विरुद्ध सदैव षड्यंत्र रचते रहना था। इसका प्रभाव भारत के अन्य भागों में भी पड़ सकता था। इसलिए लॉर्ड डलहौज़ी ने पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित करना आवश्यक समझा।

4. “I have an undoubting conviction of the expediency, the justice and necessity of my act.”. Lord Dalhousie.

II. डलहौज़ी की विलय की नीति के विरुद्ध तर्क (Arguments against Dalhousie’s Policy of Annexation)
ईवांज बैल, जगमोहन महाजन, गंडा सिंह और खुशवंत सिंह आदि इतिहासकारों द्वारा लॉर्ड डलहौजी द्वारा पंजाब के विलय के विरुद्ध निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं—

1. सिखों को विद्रोह के लिए भड़काया (Sikhs were Provoked to Revolt)—प्रथम ऐंग्लो-सिख युद्ध के बाद बहुत-सी ऐसी घटनाएँ घटीं जिन्होंने सिखों को विद्रोह के लिए भड़काया। लाहौर की संधि के अनुसार पंजाब के कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्र अंग्रेज़ों ने छीन लिए थे। परिणामस्वरूप उसके कोष पर कुप्रभाव पड़ा। लाहौर दरबार की अधिकाँश सेना को भंग कर दिया गया। अंग्रेज़ों ने महारानी जिंदां से बहुत बुरा व्यवहार किया। उन्होंने दीवान मूलराज तथा सरदार चतर सिंह को विद्रोह के लिए भड़काया। परिणामस्वरूप सिखों को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह के लिए विवश किया गया।

2. विद्रोह समय पर न दबाया गया (Revolt was not suppressed in Time)-जब मुलतान में विद्रोह की आग भड़की तो उस पर तुरंत नियंत्रण न किया गया। आठ माह तक विद्रोह फैलने देना, एक गहरी राजनीतिक चाल थी। इसी मध्य चतर सिंह, शेर सिंह तथा महाराज सिंह ने विद्रोह कर दिया था। इस तरह अंग्रेज़ों को पंजाब में सैनिक कार्यवाही करने का बहाना मिल गया तथा पंजाब को हड़प लिया गया।

3. अंग्रेजों ने संधि की शर्ते पूरी न की (British had not fulfilled the terms of the Treaty)अंग्रेज़ों का कहना था कि उन्होंने संधि की शर्ते पूरी की हैं। परंतु अंग्रेज़ों ने संधि की केवल वही शर्ते पूरी की जो उनके लिए लाभप्रद थीं। उदाहरणतया लाहौर की संधि के अनुसार अंग्रेजों ने यह शर्त मानी थी कि वे दिसंबर, 1846 ई० के पश्चात् लाहौर से अपनी सेनाएँ हटा लेंगे। जब यह समय आया तो उन्होंने भैरोवाल की संधि अनुसार इस अवधि में वृद्धि कर दी। इस प्रकार हम देखते हैं कि अंग्रेज़ों का यह कहना कि उन्होंने संधि की शर्तों को पूरा किया, नितांत झूठ है।

4. लाहौर दरबार ने संधि की शर्ते पूरी करने में पूर्ण सहयोग दिया (Lahore Darbar gave full Cooperation in fulfilling the terms of the Treaty)-लाहौर दरबार ने तो पंजाब पर अंग्रेज़ों का अधिकार होने तक संधि की शर्ते पूरी निष्ठा से पूरी की। लाहौर सरकार पंजाब में रखी गई अंग्रेजी सेना का पूरा खर्च दे रही थी। उसने दीवान मूलराज, चतर सिंह और शेर सिंह द्वारा की गई बगावतों की निंदा की और इनके दमन में अंग्रेज़ी सेना को पूर्ण सहयोग दिया।

5. ऋण के संबंध में वास्तविकता (Facts about Loans) लॉर्ड डलहौज़ी का यह आरोप कि लाहौर दरबार ने ऋण की एक पाई भी वापिस नहीं की, तथ्यों के बिल्कुल विपरीत है। लाहौर में अंग्रेज़ रेजीडेंट फ्रेडरिक करी ने लॉर्ड डलहौजी को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि लाहौर दरबार ने 13,56,837 रुपए मूल्य का सोना जमा करवा दिया है। यदि लाहौर दरबार ने अपना सारा ऋण नहीं लौटाया तो इसका उत्तरदायित्व अंग्रेज़ रेजीडेंट पर था।

6. पूरी सिख सेना तथा लोगों ने विद्रोह नहीं किया था (The whole Sikh Army and the People did not Revolt)-लॉर्ड डलहौज़ी ने यह आरोप लगाया था कि पंजाब की सारी सिख सेना तथा लोगों ने मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। परंतु यह कथन भी सत्य नहीं है। पंजाब के केवल मुलतान तथा हज़ारा प्रांतों में ही अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हआ था। अधिकाँश सिख सेना तथा लोग अंग्रेजों के प्रति निष्ठावान् रहे।

7. पंजाब पर अधिकार एक विश्वासघात था (Annexation of Punjab was a breach of Trust)दिसंबर 1846 ई० में हुई भैरोवाल की संधि के अनुसार अंग्रेजों ने पंजाब का सारा शासन अपने हाथों में ले लिया था। इस प्रकार पंजाब की सत्ता का वास्तविक स्वामी अंग्रेज़ रेजीडेंट फ्रेडरिक करी था। अंग्रेजों ने पंजाब में शाँति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लाहौर में अंग्रेज सेना भी रख ली थी। ऐसी स्थिति में मुलतान तथा हज़ारा में हुए विद्रोह के दमन का समस्त दायित्व अंग्रेज़ रेजीडेंट का था। यदि इन विद्रोहों में कोई विफल रहा था तो वह अंग्रेज़ रेजीडेंट था। अपने अपराध के लिए दलीप सिंह को सज़ा देना अन्यायपूर्ण बात थी। यह एक घोर विश्वासघात नहीं तो और क्या था ?

उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि पंजाब का अंग्रेजी साम्राज्य में विलय राजनीतिक तथा नैतिक दृष्टि से बिल्कुल गलत था। अंत में हम मेजर ईवांज़ बैल के इन शब्दों से सहमत हैं,
“यह वास्तव में कोई विजय नहीं, अपितु नितांत विश्वासघात था।”5

5. “It was in fact, no conquest, but a violent breach of trust.”Major Evans Bell, The Annexation of the Punjab and the Maharaja Daleep Singh (Patiala : 1970) p. 6.

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संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के कारणों का संक्षिप्त वर्णन करें। (Explain in brief the causes of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के प्रमुख कारणों का संक्षिप्त ब्योरा दें। (Give a brief description of the main causes of the Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के तीन मुख्य कारण क्या थे ?
(What were the three main causes for the Second Anglo-Sikh War ?)
उत्तर-

  1. सिख प्रथम ऐंग्लो-सिख युद्ध में हुई अपनी पराजय का प्रतिशोध लेना चाहते थे।
  2. अंग्रेज़ों ने महारानी जिंदां से जो अपमानजनक व्यवहार किया, उससे सिख भड़क उठे।
  3. मुलतान के दीवान मूलराज ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था।
  4. लॉर्ड डलहौज़ी पंजाब को जल्द-से-जल्द अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित करना चाहता था।
  5. चतर सिंह एवं शेर सिंह के विद्रोह ने अग्नि में घी डालने का काम किया।

प्रश्न 2.
दीवान मूलराज के विद्रोह पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए। (Write a note on the revolt of Diwan Moolraj.)
अथवा
मुलतान के दीवान मूलराज के विद्रोह के संबंध में संक्षिप्त जानकारी दें। (Give a brief account of the revolt of Diwan Moolraj of Multan.)
उत्तर-
दीवान मूलराज 1844 ई० में मुलतान का नया गवर्नर बना था। उससे लिया जाने वाला वार्षिक लगान बढ़ा दिया गया। इस कारण दीवान मूलराज ने गवर्नर के पद से त्याग-पत्र दे दिया। काहन सिंह को मुलतान का नया गवर्नर नियुक्त किया गया। दो अंग्रेज़ अधिकारियों एगन्यू और एंडरसन को उसकी सहायता के लिए भेजा गया। अंग्रेज़ों ने इनके कत्ल का झूठा आरोप मूलराज पर लगाया। परिणामस्वरूप वह विद्रोह करने के लिए मजबूर हो गया।

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प्रश्न 3.
हज़ारा के चतर सिंह के विद्रोह के बारे में आप क्या जानते हैं ? (What do you know about the revolt of Chattar Singh of Hazara ?)
उत्तर-
सरदार चतर सिंह अटारीवाला हजारा का नाज़िम था। उसके द्वारा भड़काए गए हज़ारा के मुसलमानों ने 6 अगस्त, 1848 ई० को सरदार चतर सिंह के निवास स्थान पर आक्रमण कर दिया। यह देख कर सरदार चतर सिंह ने कर्नल कैनोरा को विद्रोहियों के विरुद्ध कार्रवाही करने का आदेश दिया। कर्नल कैनोरा ने चतर सिंह के आदेश को मानने से इंकार कर दिया। कैप्टन ऐबट ने सरदार चतर सिंह को. पदच्युत कर दिया। इस कारण चतर सिंह का खून खौल उठा तथा उसने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की घोषणा कर दी।

प्रश्न 4.
चिलियाँवाला की लड़ाई पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। (Write a note on the battle of Chillianwala.)
अथवा
चिलियाँवाला की लड़ाई के बारे में आप क्या जानते हैं ?
(What do you know about the battle of Chillianwala ?)
उत्तर-
चिलियाँवाला की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की एक महत्त्वपूर्ण लड़ाई थी। लॉर्ड ह्यग गफ़, जो अंग्रेजी सेनापति था को यह सूचना मिली कि चतर सिंह उसके प्रतिद्वंद्वी शेर सिंह की सहायता के लिए आ रहा है। इसलिए ह्यग गफ़ ने चतर सिंह के पहुंचने से पहले ही 13 जनवरी, 1849 ई० को चिलियाँवाला में शेर सिंह की सेना पर आक्रमण कर दिया। इस घमासान लड़ाई में सिखों ने अंग्रेजों के खूब छक्के छुड़ाए।

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प्रश्न 5.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के दौरान हुई गुजरात की लड़ाई का क्या महत्त्व था ? (What was the importance of the battle of Gujarat in the Second Anglo-Sikh War ?)
उत्तर-
गुजरात की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की अंतिम तथा निर्णायक लड़ाई थी। यह लड़ाई 21 फरवरी, 1849 ई० को लड़ी गई थी। इस लड़ाई में सिख सैनिकों की संख्या 40,000 थी तथा उनका नेतृत्व चतर सिंह, शेर सिंह तथा महाराज सिंह कर रहे थे। दूसरी ओर अंग्रेज़ सैनिकों की संख्या 68,000 थी और लॉर्ड ह्यूग गफ़ उनका सेनापति था। इस युद्ध में सिखों की हार हुई। परिणामस्वरूप पंजाब को 29 मार्च, 1849 ई० को अंग्रेज़ी साम्राज्य में शामिल कर लिया गया।

प्रश्न 6.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के क्या प्रभाव पड़े ?(What were the results of the Second Anglo-Sikh War ?)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के कोई तीन प्रभाव लिखें। (Explain any three effects of Social Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के प्रभावों का अध्ययन संक्षेप में करें। (Study in brief the results of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के तीन प्रभाव लिखें।
(Explain the three effects of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के क्या परिणाम निकले? (What were the results of the Second Anglo-Sikh War ?)
उत्तर-

  1. दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि 29 मार्च, 1849 ई० को पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल कर लिया गया।
  2. पंजाब के अंतिम शासक महाराजा दलीप सिंह को 50,000 पौंड वार्षिक पेंशन देकर सिंहासन से उतार दिया गया।
  3. उससे प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा लेकर महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया।
  4. दीवान मूलराज तथा महाराजा दलीप सिंह को देश निष्कासन का दंड दिया गया
  5. पंजाब का शासन प्रबंध चलाने के लिए प्रशासनिक बोर्ड की स्थापना की गई।

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प्रश्न 7.
क्या लॉर्ड डलहौजी द्वारा पंजाब का अंग्रेजी राज्य में विलय उचित था ? अपने पक्ष में तर्क दें।
(Was it justified for Lord Dalhousie to annex Punjab to the British empire ? Give arguments in support of your answer.)
अथवा
“पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित करना एक घोर विश्वासघात था।” व्याख्या करें।
(“Annexation of Punjab was a violent breach of trust.” Explain.)
अथवा
क्या पंजाब का विलय उचित था ? कारण लिखो।
(Was the annexation of Punjab justified ? Give reasons.)
अथवा
क्या पंजाब का संयोजन न्याय संगत था ? कारण बताओ।
(Was the annexation of Punjab justified ? Give reasons.)
उत्तर-
लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल करना किसी प्रकार भी उचित नहीं था। अंग्रेजों ने सर्वप्रथम लाहौर संधि के अंतर्गत पंजाब के कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्र छीन लिए। लाहौर दरबार की अधिकाँश सेना भंग कर दी गई, जिससे सैनिकों में रोष उत्पन्न हो गया। अंग्रेजों ने महारानी जिंदां को राज्य के प्रशासन से अलग कर दिया। मुलतान के गवर्नर दीवान मूलराज तथा हज़ारा के गवर्नर चतर सिंह को पहले विद्रोह के लिए उकसाया गया तथा फिर उनके विद्रोह को फैलने दिया गया ताकि बहाना बनाकर पंजाब को अधिकार में ले सकें।

प्रश्न 8.
डलहौज़ी के इस पक्ष में तर्क दें कि उसके द्वारा पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में सम्मिलित करना उचित था।
(Give arguments in favour of Dalhousie’s annexation of the Punjab to the British Empire.)
अथवा
डलहौज़ी की पंजाब विलय की नीति के पक्ष में तर्क दीजिए। (Give arguments in favour of Dalhousie’s policy of the annexation of the Punjab.)
अथवा
क्या पंजाब का विलय उचित था ? कारण लिखो। (Was the annexation of Punjab justified ? Give reasons.)
उत्तर-

  1. सिखों ने भैरोवाल की संधि की शर्तों को भंग किया था।
  2. दीवान मूलराज ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया था।
  3. पंजाब में शांति स्थापित करने के लिए उसको अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाना अनिवार्य था।
  4. पंजाब अंग्रेज़ी साम्राज्य के लिए ख़तरा बन सकता था।
  5. पंजाब पर अधिकार अंग्रेजी साम्राज्य के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता था।

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प्रश्न 9.
महाराजा दलीप सिंह पर नोट लिखें। (Write a note on Maharaja Dalip Singh.)
उत्तर-
महाराजा दलीप सिंह रणजीत सिंह का सबसे छोटा पुत्र था। वह 15 सितंबर, 1843 ई० को पंजाब का नया महाराजा बना था। महाराजा दलीप सिंह ने लाल सिंह को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया जो गद्दार निकला। परिणामस्वरूप पहले तथा दूसरे एंग्लो-सिख युद्धों में सिखों को पराजय का मुख देखना पड़ा। अंग्रेजों ने महाराजा दलीप सिंह को गद्दी से उतार दिया। 22 अक्तूबर, 1893 ई० को महाराजा दलीप सिंह की पेरिस में मृत्यु हो गई।

प्रश्न 10.
महारानी जींद कौर (जिंदां) पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।
[Write a brief note on Maharani Jind Kaur (Jindan).] .
अथवा
महारानी जिंदां के बारे में आप क्या जानते हैं ?
(What do you know about Maharani Jindan ?)
उत्तर-
महारानी जिंदां, महाराजा रणजीत सिंह की रानी थी। उसे 15 सितंबर, 1843 ई० को पंजाब के नवनियुक्त महाराजा दलीप सिंह की संरक्षिका बनाया गया था । इसीलिए अंग्रेजों ने दिसंबर, 1846 ई० में भैरोवाल की संधि के अंतर्गत महारानी जिंदां के सभी अधिकार छीन लिए तथा उसकी डेढ़ लाख रुपए वार्षिक पेंशन निश्चित कर दी गई। महारानी भेष बदल कर नेपाल पहुँचने में सफल हो गई। यहाँ अंग्रेजों ने दोनों को एक साथ न रहने दिया। 1 अगस्त, 1863 ई० को महारानी जिंदां इंग्लैंड में इस संसार से चल बसीं।

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प्रश्न 11.
भाई महाराज सिंह पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। (Write a brief note on Bhai Maharaj Singh.)
उत्तर-
भाई महाराज सिंह नौरंगाबाद के प्रसिद्ध संत भाई बीर सिंह के शिष्य थे। वह पंजाब की स्वतंत्रता के पक्ष में थे। अतः उन्होंने मुलतान के दीवान मूलराज, हज़ारा के सरदार. चतर सिंह अटारीवाला तथा उसके पुत्र शेर सिंह को अंग्रेज़ों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की सभी लड़ाइयों में भाग लिया। उनको पहले कलकत्ता (कोलकाता) तथा बाद में सिंगापुर की जेल में रखा गया। वहीं पर उनकी 5 जुलाई, 1856 ई० को मृत्यु हो गई।

बहु-विकल्पीय प्रश्न (Objective Type Questions)

(i) एक शब्द से एक पंक्ति तक के उत्तर (Answer in One Word to One Sentence)

प्रश्न 1.
दूसरा ऐंग्लो-सिख युद्ध कब लड़ा गया ?
उत्तर-
1848-49 ई०।

प्रश्न 2.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय भारत का गवर्नर-जनरल कौन था ?
उत्तर-
लॉर्ड डलहौज़ी।

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प्रश्न 3.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध का कोई एक कारण लिखिए।
उत्तर-
सिख प्रथम युद्ध में हुई अपनी पराजय का प्रतिशोध लेना चाहते थे।

प्रश्न 4.
महारानी जिंदां कौन थी ?
अथवा
महारानी जिंदां (जिंद कौर) कौन थी ?
उत्तर-
वह महाराजा दलीप सिंह की माँ।

प्रश्न 5.
दीवान मूलराज कौन था ?
उत्तर-
मुलतान का नाज़िम (गवर्नर)।

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प्रश्न 6.
दीवान मूलराज द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने का कोई एक कारण बताएँ।
उत्तर-
अंग्रेजों ने दीवान मूलराज से वसूल किए जाने वाले वार्षिक लगान की राशि में भारी वृद्धि कर दी थी।

प्रश्न 7.
सावन मल कौन था ?
उत्तर-
दीवान मूलराज का पिता व मुलतान का नाज़िम

प्रश्न 8.
चतर सिंह अटारीवाला कौन था ?
उत्तर-
हज़ारा का नाज़िम।

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प्रश्न 9.
शेर सिंह कौन था ?
उत्तर-
चतर सिंह अटारीवाला का पुत्र।

प्रश्न 10.
शेर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का झंडा क्यों खड़ा किया था ?
उत्तर-
वह अंग्रेजों द्वारा उसके पिता के साथ किए गए दुर्व्यवहार के कारण।

प्रश्न 11.
भाई महाराज सिंह कौन था ?
उत्तर-
वह नौरंगाबाद के प्रसिद्ध संत थे।

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प्रश्न 12.
दूसरा ऐंग्लो-सिख युद्ध किसके विद्रोह से शुरू हुआ ?
अथवा
किसके विद्रोह ने द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध को आरंभ किया ?
उत्तर-
दीवान मूलराज।

प्रश्न 13.
रामनगर की लड़ाई कब हुई ?
उत्तर-
22 नवंबर, 1848 ई०

प्रश्न 14.
चिल्लियाँवाला की लड़ाई कब हुई ?
उत्तर-
13 जनवरी, 1849 ई०

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प्रश्न 15.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की अंतिम लड़ाई कौन-सी थी ?
उत्तर-
गुजरात की लड़ाई।

प्रश्न 16.
गुजरात की लड़ाई कब लड़ी गई थी ?
उत्तर-
21 फरवरी, 1849 ई०।

प्रश्न 17.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के दौरान लड़ी गई उस लड़ाई का नाम बताएँ जो तोपों की लड़ाई के नाम से विख्यात है ?
उत्तर-
गुजरात की लड़ाई।।

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प्रश्न 18.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध का कोई एक महत्त्वपूर्ण परिणाम बताएँ।
उत्तर-
पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में शामिल कर लिया गया।

प्रश्न 19.
पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में कब शामिल किया गया ?
अथवा
पंजाब को अंग्रेजी सामाज्य में कब मिलाया गया?
उत्तर-
29 मार्च, 1849 ई०।

प्रश्न 20.
लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में शामिल करने के पक्ष में दिए जाने वाला कोई एक तर्क बताएँ।
उत्तर-
पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में शामिल करना पंजाब के लोगों के लिए लाभप्रद था।

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प्रश्न 21.
लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल करने के विरुद्ध दिए जाने वाला एक तर्क बताएँ।
उत्तर-
अंग्रेजों ने सिखों को विद्रोह के लिए भड़काया।

प्रश्न 22.
भाई महाराज सिंह कौन था ?
उत्तर-
वह नौरंगाबाद के प्रसिद्ध संत भाई बीर सिंह का शिष्य था।

प्रश्न 23.
भाई महाराज सिंह की मौत कब हुई थी ?
उत्तर-
1856 ई०।

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प्रश्न 24.
भाई महाराज सिंह की मौत कहाँ हुई थी ?
उत्तर-
सिंगापुर।

प्रश्न 25.
पंजाब का अंतिम सिख महाराजा कौन था ?
अथवा
पंजाब का आखिरी सिख शासक कौन था ?
अथवा
सिखों का अंतिम सिख महाराजा कौन था?
उत्तर-
महाराजा दलीप सिंह।

प्रश्न 26.
महाराजा दलीप सिंह की मृत्य कहाँ हुई थी ?
उत्तर-
पेरिस में।

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प्रश्न 27.
महाराजा दलीप सिंह की मौत कब हुई थी ?
उत्तर-
1893 ई०

प्रश्न 28.
महारानी जिंदां की मृत्य कब हुई थी ?
उत्तर-
1863 ई०।

प्रश्न 29.
सिख साम्राज्य के पतन का कोई एक मुख्य कारण बताएँ ।
उत्तर-
महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी अयोग्य निकले।

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(ii) रिक्त स्थान भरें (Fill in the Blanks)

प्रश्न 1.
अंग्रेज़ों एवं सिखों के बीच दूसरी लड़ाई ………….. ई० में हुई।
उत्तर-
(1848-49)

प्रश्न 2.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय भारत का गवर्नर जनरल……….था।
उत्तर-
(लॉर्ड डलहौज़ी)

प्रश्न 3.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय पंजाब का महाराजा…………….था।
उत्तर-
(दलीप सिंह)

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प्रश्न 4.
महाराजा दलीप सिंह की माँ का नाम…………..था।
उत्तर-
(महारानी जिंदां)

प्रश्न 5.
1844 ई० में……………मुलतान का नाजिम नियुक्त हुआ।
उत्तर-
(दीवान मूलराज)

प्रश्न 6.
सरदार चतर सिंह अटारीवाला………का नाज़िम था।
उत्तर-
(हज़ारा)

प्रश्न 7.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की पहली लड़ाई का नाम……..था। .
उत्तर-
(रामनगर)

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प्रश्न 8.
रामनगर की लड़ाई………….को हुई।
उत्तर-
(22 नवंबर, 1848 ई०)

प्रश्न 9.
चिल्लियाँवाला की लड़ाई……….को हुई।
उत्तर-
(13 जनवरी, 1849 ई०)

प्रश्न 10.
गुजरात की लड़ाई इतिहास में…………..की लड़ाई के नाम से प्रसिद्ध है।
उत्तर-
(तोपों)

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प्रश्न 11.
अंग्रेजों ने पंजाब को अपने साम्राज्य में………….को सम्मिलित किया था।
उत्तर-
(29 मार्च, 1849 ई०)

(ii) ठीक अथवा गलत (True or False)

नोट-निम्नलिखित में से ठीक अथवा गलत चुनें—

प्रश्न 1.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध 1848-49 ई० में लड़ा गया।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 2.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय लॉर्ड डलहौज़ी भारत का गवर्नर जनरल था।
उत्तर-
ठीक

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प्रश्न 3.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय पंजाब का महाराजा दलीप सिंह था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 4.
महारानी जिंदां महाराजा दलीप सिंह की माँ थी।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 5.
दीवान मूलराज 1846 ई० में मुलतान का नाज़िम बना।
उत्तर-
गलत

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प्रश्न 6.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध रामनगर की लड़ाई से आरंभ हुआ था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 7.
राम नगर की लड़ाई 12 नवंबर, 1846 ई० को हुई।
उत्तर-
गलत

प्रश्न 8.
चिल्लियाँवाला की लड़ाई 13 जनवरी, 1849 ई० को हुई।
उत्तर-
ठीक

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प्रश्न 9.
चिल्लियाँवाला की लड़ाई में अंग्रेज़ी सेना को एक कड़ी पराजय का सामना करना पड़ा।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 10.
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध गुजरात की लड़ाई के साथ समाप्त हुआ।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 11.
गुजरात की लड़ाई 21 फरवरी, 1849 ई० को हुई।
उत्तर-
ठीक

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प्रश्न 12.
पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में 29 मार्च, 1849 ई० में शामिल किया गया।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 13.
महाराजा दलीप सिंह पंजाब का अंतिम सिख महाराजा था।
उत्तर-
ठीक

प्रश्न 14.
सिखों का अंतिम महाराजा रणजीत सिंह था।
उत्तर-
गलत

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(iv) बहु-विकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नोट-निम्नलिखित में से ठीक उत्तर का चयन कीजिए—

प्रश्न 1.
द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध कब लड़ा गया ?
(i) 1844-45 ई० में
(ii) 1845-46 ई० में
(iii) 1847-48 ई० में
(iv) 1848-49 ई० में।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 2.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय भारत का गवर्नर-जनरल कौन था ?
(i) लॉर्ड लिटन
(ii) लॉर्ड रिपन
(iii) लॉर्ड डलहौज़ी
(iv) लॉर्ड हार्डिंग।
उत्तर-
(iii)

प्रश्न 3.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय पंजाब का महाराजा कौन था?
(i) महाराजा शेर सिंह
(ii) महाराजा रणजीत सिंह
(iii) महाराजा दलीप सिंह
(iv) महाराजा खड़क सिंह।
उत्तर-
(iii)

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध : कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय

प्रश्न 4.
महारानी जिंदां कौन थी ?
(i) महाराजा दलीप सिंह की माता
(ii) महाराजा खड़क सिंह की बहन
(iii) महाराजा शेर सिंह की पत्नी
(iv) राजा गुलाब सिंह की पुत्री।
उत्तर-
(i)

प्रश्न 5.
दीवान मूलराज कौन था ?
(i) गुजरात का नाज़िम
(ii) मुलतान का नाज़िम
(iii) कश्मीर का नाज़िम
(iv) पेशावर का नाज़िम।
उत्तर-
(ii)

प्रश्न 6.
दीवान मूलराज ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कब किया था ?
(i) 1844 ई० में
(ii) 1845 ई० में
(iii) 1846 ई० में
(iv) 1848 ई० में।
उत्तर-
(iv)

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प्रश्न 7.
सरदार चतर सिंह अटारीवाला कहाँ का नाज़िम था ?
(i) हज़ारा
(ii) मुलतान
(iii) कश्मीर
(iv) पेशावर।
उत्तर-
(i)

प्रश्न 8.
दूसरा ऐंग्लो-सिख युद्ध किस लड़ाई के साथ आरंभ हुआ ?
(i) मुलतान की लड़ाई
(ii) चिल्लियाँवाला की लड़ाई
(iii) गुजरात की लड़ाई
(iv) रामनगर की लड़ाई।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 9.
रामनगर की लड़ाई कब हुई थी ?
(i) 12 नवंबर, 1846 ई०
(ii) 15 नवंबर, 1847 ई०
(iii) 17 नवंबर, 1848 ई०
(iv) 22 नवबर, 1848 ई०
उत्तर-
(iv)

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प्रश्न 10.
चिल्लियाँवाला की लड़ाई कब हुई ?
(i) 22 नवंबर, 1848 ई०
(ii) 3 जनवरी, 1848 ई०
(iii) 10 जनवरी, 1849 ई०
(iv) 13 जनवरी, 1849 ई०।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 11.
मुलतान का युद्ध कब समाप्त हुआ ?
(i) 22 जनवरी, 1849 ई०
(ii) 23 जनवरी, 1849 ई०
(iii) 24 जनवरी, 1849 ई०
(iv) 25 जनवरी, 1849 ई०
उत्तर-
(i)

प्रश्न 12.
दूसरा ऐंग्लो-सिख युद्ध किस लड़ाई के साथ समाप्त हुआ ?
अथवा
उस लड़ाई का नाम लिखें जो इतिहास में ‘तोपों की लड़ाई’ के नाम से प्रसिद्ध है।
(i) मुलतान की लड़ाई
(ii) रामनगर की लड़ाई
(iii) गुजरात की लड़ाई
(iv) चिल्लियाँवाला की लड़ाई।
उत्तर-
(iii)

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प्रश्न 13.
गुजरात की लड़ाई कब लड़ी गई थी ?
(i) 22 नवंबर, 1848 ई०
(ii) 13 जनवरी, 1849 ई०
(iii) 22 जनवरी, 1849 ई०
(iv) 21 फरवरी, 1849 ई०।
उत्तर-
(iv)

प्रश्न 14.
पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में कब सम्मिलित किया गया ?
(i) 1849 ई०
(ii) 1850 ई०
(iii) 1848 ई०
(iv) 1947 ई०
उत्तर-
(i)

प्रश्न 15.
पंजाब का अंतिम सिख महाराजा कौन था ?
(i) महाराजा दलीप सिंह
(i) महाराजा रणजीत सिंह
(iii) महाराजा खड़क सिंह
(iv) महाराजा शेर सिंह।
उत्तर-
(i)

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प्रश्न 16.
महाराजा दलीप सिंह की मृत्यु कब हुई थी ?
(i) 1857 ई० में
(ii) 1893 ई० में
(iii) 1849 ई० में
(iv) 1892 ई० में।
उत्तर-
(ii)

प्रश्न 17.
महाराजा दलीप सिंह की मृत्यु कहाँ हुई थी ?
(i) पंजाब
(ii) पेरिस
(iii) नेपाल
(iv) लंदन।
उत्तर-
(ii)

Long Answer Type Question

प्रश्न 1.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के छः कारणों का संक्षिप्त वर्णन करें। (Explain in brief the six causes of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के क्या कारण थे ?
(What were the causes of the Second Anglo-Sikh War ?)
अथवा
दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के छः मुख्य कारण क्या थे ?
(What were the six main causes for the Second Anglo-Sikh War ?)
उत्तर-
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के मुख्य कारण निम्नलिखित थे—
1. सिखों की अपनी पराजय का प्रतिशोध लेने की इच्छा—यह सही है कि अंग्रेज़ों के साथ प्रथम युद्ध में सिख पराजित हो गए थे, परंतु इससे उनका साहस किसी प्रकार कम नहीं हुआ था। इस पराजय का मुख्य कारण सिख नेताओं द्वारा की गई गद्दारी थी। सिख सैनिकों को अपनी योग्यता पर पूर्ण विश्वास था। वे अपनी पराजय का प्रतिशोध लेना चाहते थे। उनकी यह इच्छा द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध का एक मुख्य कारण बनी।

2. लाहौर तथा भैरोवाल की संधियों से पंजाबी असंतुष्ट-अंग्रेजों तथा सिखों के बीच हुए प्रथम युद्ध के पश्चात् अंग्रेजों ने लाहौर दरबार के साथ लाहौर तथा भैरोवाल नामक दो संधियाँ कीं। पंजाब के लोग महाराजा रणजीत सिंह के अथक प्रयासों से निर्मित साम्राज्य का इन संधियों द्वारा किया जा रहा विघटन होता देख सहन नहीं कर सकते थे। इसलिए सिखों को अंग्रेजों से एक और युद्ध लड़ना पड़ा।

3. सिख सैनिकों में असंतोष-लाहौर की संधि के अनुसार अंग्रेजों ने खालसा सेना की संख्या 20,000 पैदल तथा 12,000 घुड़सवार निश्चित कर दी थी। इस कारण हज़ारों की संख्या में सिख सैनिकों को नौकरी से हटा दिया गया था। इससे इन सैनिकों के मन में अंग्रेजों के प्रति रोष उत्पन्न हो गया तथा वे अंग्रेजों के साथ युद्ध की तैयारियाँ करने लगे।

4. महारानी जिंदां से दुर्व्यवहार अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह की विधवा महारानी जिंदां से जो अपमानजनक व्यवहार किया, उसने सिखों में अंग्रेजों के प्रति व्याप्त रोष को और भड़का दिया। वह इस अपमान का बदला लेने चाहते थे।

5. दीवान मूलराज का विद्रोह-द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध को आरंभ करने में मुलतान के दीवान मूलराज के विद्रोह को विशेष स्थान प्राप्त है। 20 अप्रैल, 1848 ई० को मुलतान में दो अंग्रेज़ अधिकारियों वैनस एग्नय तथा एंडरसन के किए गए कत्लों के लिए मूलराज को दोषी ठहराया गया। इस कारण उसने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का ध्वज उठा लिया।

6. लॉर्ड डलहौज़ी की नीति-1848 ई० में लॉर्ड डलहौज़ी भारत का नया गवर्नर-जनरल बना था। वह बहुत बड़ा साम्राज्यवादी था। वह पंजाब को अपने अधीन करने के लिए किसी स्वर्ण अवसर की तलाश में था। यह अवसर उसे दीवान मूलराज, चतर सिंह तथा शेर सिंह द्वारा किए गए विद्रोहों से मिला।

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प्रश्न 2.
दीवान मूलराज के विद्रोह पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए। (Write a note on the revolt of Diwan Mulraj.)
अथवा
मुलतान के दीवान मूलराज के विद्रोह के संबंध में संक्षिप्त जानकारी दें। (Give a brief account of the revolt of Diwan Mulraj of Multan.)
उत्तर-
दीवान मूलराज 1844 ई० में मुलतान का नया गवर्नर बना था। वह लगभग 1372 लाख रुपए वार्षिक लगान लाहौर दरबार को देता था। बाद में यह राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपए वार्षिक कर दी गई थी, परंतु इसके साथ ही उसके प्राँत का तीसरा भाग भी उससे ले लिया गया। इस कारण दीवान मूलराज ने गवर्नर के पद से त्यागपत्र दे दिया। मार्च, 1848 ई० में रेजीडेंट फ्रेडरिक करी ने मूलराज का त्याग-पत्र स्वीकार कर लिया। उसने काहन सिंह को मुलतान का नया गवर्नर नियुक्त करने का निर्णय किया। उसकी सहायता के लिए दो अंग्रेज अधिकारियों एग्नयू और एंडरसन को उसके साथ भेजा गया। मूलराज ने बिना किसी विरोध के 19 अप्रैल, 1848 ई० को किले की चाबियाँ काहन सिंह को सौंप दी, परंतु 20 अप्रैल को मूलराज के सिपाहियों ने दोनों अंग्रेज़ अधिकारियों की हत्या कर दी। अंग्रेजों ने इसके लिए मूलराज को दोषी ठहराया। इसलिए मूलराज ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। अंग्रेज़ों ने इस विद्रोह का दमन करने की अपेक्षा इसे फैलने दिया ताकि उन्हें लाहौर दरबार पर आक्रमण करने का अवसर मिल सके।

प्रश्न 3.
हज़ारा के चतर सिंह के विद्रोह के बारे में आप क्या जानते हैं ? (What do you know about the revolt of Chattar Singh of Hazara ?)
उत्तर-
सरदार चतर सिंह अटारीवाला हज़ारा का नाज़िम था। उसकी लड़की की सगाई महाराजा दलीप सिंह के साथ हुई थी, परंतु अंग्रेज़ इस रिश्ते के विरुद्ध थे, क्योंकि इससे सिखों की राजनीतिक शक्ति बढ़ जानी थी। यह शक्ति अंग्रेजों की पंजाब को हड़पने की नीति के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकती थी। कैप्टन ऐबट जिसे सरदार चतर सिंह का परामर्शदाता नियुक्त किया गया था, सिख राज्य को नष्ट करने की योजना तैयार कर रहा था। उस द्वारा भड़काए गए हज़ारा के मुसलमानों ने 6 अगस्त, 1848 ई० को सरदार चतर सिंह के निवास स्थान पर आक्रमण कर दिया। यह देख कर सरदार चतर सिंह ने कर्नल कैनोरा को विद्रोहियों के विरुद्ध कार्यवाही करने का आदेश दिया। कर्नल कैनोरा जो कैप्टन ऐबट के साथ मिला हुआ था, ने चतर सिंह के आदेश को मानने से इन्कार कर दिया। उसने अपनी पिस्तौल से गोलियाँ चलाकर दो सिख सिपाहियों को मार डाला। उसी समय एक सिख सिपाही ने आगे बढ़कर अपनी तलवार से कैनोरा की जान ले ली। जब इस घटना का समाचार ऐबट ने पाया तो वह क्रोध से आग बबूला हो उठा। उसने सरदार चतर सिंह को पदच्युत कर दिया तथा उसकी जागीर ज़ब्त कर ली। इस कारण चतर सिंह का खून खौल उठा तथा उसने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की घोषणा कर दी।

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प्रश्न 4.
चिलियाँवाला की लड़ाई पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। (Write a note on the battle of Chillianwala.)
उत्तर-
चिलियाँवाला की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की महत्त्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक थी। लॉर्ड ह्यग गफ, जो अंग्रेजी सेनापति था, शेर सिंह की सेना का मुकाबला करने के लिए और सैनिक सहायता पहुँचने की प्रतीक्षा कर रहा था। इसी बीच ह्यग गफ को यह सूचना मिली कि चतर सिंह ने अटक के किले पर अधिकार कर लिया है और वह शेर सिंह की सहायता के लिए आ रहा है। ऐसा होने पर अंग्रेजों के लिए घोर संकट पैदा हो सकता था। इसलिए ह्यग गफ ने चतर सिंह के पहुंचने से पहले ही 13 जनवरी, 1849 ई० को चिलियाँवाला में शेर सिंह की सेना पर आक्रमण कर दिया। इस घमासान लड़ाई में शेर सिंह के सैनिकों ने अंग्रेजों के खूब छक्के छुड़ाए। इस लड़ाई में अंग्रेजों की इतनी अधिक क्षति हुई कि इंग्लैंड में भी हाहाकार मच गई। इस अपमानजनक पराजय के कारण सेनापति लॉर्ड ह्यग गफ के सम्मान को भारी आघात पहुँचा। उसके स्थान पर चार्ल्स नेपियर को अंग्रेज़ी सेना का नया सेनापति नियुक्त करके भारत भेजा गया।

प्रश्न 5.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के दौरान हुई गुजरात की लड़ाई का क्या महत्त्व था ? (What was the importance of the battle of Gujarat in the Second Anglo-Sikh War ?)
उत्तर-
गुजरात की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो सिख युद्ध की अंतिम तथा निर्णायक लड़ाई थी। यह लड़ाई 21 फरवरी, 1849 ई० को लड़ी गई थी। इस लड़ाई में सिख सैनिकों की संख्या 40,000 थी तथा उनका नेतृत्व चतर सिंह, शेर सिंह तथा महाराज सिंह कर रहे थे। दूसरी ओर अंग्रेज़ सैनिकों की संख्या 68,000 थी और लॉर्ड ह्यग गफ उनका सेनापति था। क्योंकि इस लड़ाई में दोनों पक्षों की ओर से तोपों का खूब प्रयोग किया गया इसलिए गुजरात की लड़ाई को तोपों की लड़ाई भी कहा जाता है। सिखों ने अंग्रेजों का बड़ी वीरता से सामना किया, परंतु उनका गोला-बारूद समाप्त हो जाने पर अंततः उन्हें पराजित होना पड़ा। इस लड़ाई में सिखों की भारी क्षति हुई और उनमें भगदड़ मच गई। चतर सिंह, शेर सिंह तथा महाराज सिंह रावलपिंडी की ओर भाग गए। अंग्रेज़ सैनिकों ने उनका पीछा किया। उन्होंने 10 मार्च को शस्त्र डाल दिए जबकि शेष सैनिकों ने 14 मार्च को अंग्रेजों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया। इस लड़ाई में विजय के पश्चात् 29 मार्च, 1849 ई० को पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में : सम्मिलित कर लिया गया। इस प्रकार महाराजा रणजीत सिंह के राज्य का अंत हो गया।

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प्रश्न 6.
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के क्या प्रभाव पड़े ? (What were the results of the Second Anglo-Sikh War ?)
अथवा
दसरे ऐंग्लो-सिख यद्ध के प्रभावों का अध्ययन संक्षेप में करें। (Study in brief the results of Second Anglo-Sikh War.)
अथवा
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के कोई छः प्रभाव बताएँ। (Write six effects of Second Anglo-Sikh War.)
उत्तर-
दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के बड़े दूरगामी परिणाम निकले। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार—
1. महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का अंत-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का पूर्णतः अंत हो गया। अंतिम सिख महाराजा दलीप सिंह को सिंहासन से उतार दिया गया।

2. सिख सेना भंग कर दी गई—दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के पश्चात् सिख सेना को भी भंग कर दिया गया। अधिकाँश सिख सैनिकों को कृषि व्यवसाय में लगाने का प्रयत्न किया गया। कुछ को ब्रिटिश-भारतीय सेना में भर्ती कर लिया गया।

3. दीवान मूल राज तथा भाई महाराज सिंह को निष्कासन का दंड दीवान मूलराज के मृत्यु दंड को काले पानी की सज़ा में बदल दिया गया। परंतु उनकी 11 अगस्त, 1851 ई० को कलकत्ता (कोलकाता) में मृत्यु हो गई। भाई महाराज सिंह को सिंगापुर जेल भेज दिया गया जहाँ 5 जुलाई, 1856 ई० को उसकी मृत्यु हो गई।

4. चतर सिंह तथा शेर सिंह को दंड-अंग्रेजों ने स० चतर सिंह तथा उसके पुत्र शेर सिंह को बंदी बना लिया था। उन्हें पहले इलाहाबाद तथा बाद में कलकत्ता (कोलकाता) की जेलों में रखा गया। 1854 ई० में सरकार ने उन दोनों को मुक्त कर दिया।

5. पंजाब के लिए नया प्रशासन —पंजाब के अंग्रेजी साम्राज्य में विलय के पश्चात् अंग्रेज़ों ने पंजाब का प्रशासन चलाने के लिए प्रशासनिक बोर्ड की स्थापना की। यह 1849 ई० से 1853 ई० तक बना रहा। इन सुधारों ने पंजाबियों के दिलों को जीत लिया। परिणामस्वरूप वे 1857 के विद्रोह के समय अंग्रेजों के प्रति वफ़ादार रहे।

6. पंजाब की रियासतों में मित्रता का व्यवहार-दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध के समय पटियाला, नाभा, जींद, मालेरकोटला, फरीदकोट तथा कपूरथला की रियासतों ने अंग्रेज़ों का साथ दिया था। इससे अंग्रेज़ों ने इनसे मित्रता बनाए रखीं और इन रियासतों को अंग्रेज़ी राज्य में सम्मिलित न किया गया।

प्रश्न 7.
क्या लॉर्ड डलहौजी द्वारा पंजाब का संयोजन न्याय संगत था ? अपने पक्ष में तर्क दें।
(Was the annexation of Punjab by Lord Dalhousie Justified ? Give reasons in your favour.)
अथवा
“पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित करना एक घोर विश्वासघात था।” व्याख्या करें। (“Annexation of Punjab was a violent breach of trust.” Explain.)
अथवा
क्या पंजाब का विलय उचित था ? कारण लिखो। (Was the annexation of Punjab justified ? Give reasons.)
अथवा
क्या पंजाब का संयोजन न्याय संगत था ? इसके पक्ष में छः तर्क दें। (P.S.E.B. July 2019) (Was the annexation of Punjab justified ? Give six reasons for it.)
उत्तर-
1. सिखों को विद्रोह के लिए भड़काया-प्रथम ऐंग्लो-सिख युद्ध के बाद बहुत-सी ऐसी घटनाएँ घटीं जिन्होंने सिखों को विद्रोह के लिए भड़काया। लाहौर की संधि के अनुसार पंजाब के कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्र अंग्रेज़ों ने छीन लिए थे। अंग्रेज़ों ने महारानी जिंदां से बहुत बुरा व्यवहार किया। उन्होंने दीवान मूलराज तथा सरदार चतर सिंह को विद्रोह के लिए भड़काया। परिणामस्वरूप सिखों को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह के लिए विवश किया गया।

2. विद्रोह समय पर न दबाया गया-जब मुलतान में विद्रोह की आग भड़की तो उस पर तुरंत नियंत्रण न किया गया। आठ माह तक विद्रोह फैलने देना, एक गहरी राजनीतिक चाल थी। इस तरह अंग्रेज़ों को पंजाब में सैनिक कार्यवाही करने का बहाना मिल गया तथा पंजाब को हड़प लिया गया।

3. अंग्रेजों ने संधि की शर्ते पूरी न की-अंग्रेजों का कहना था कि उन्होंने संधि की शर्ते पूरी की हैं। परंतु अंग्रेज़ों ने संधि की केवल वही शर्ते पूरी की जो उनके लिए लाभप्रद थीं। इस प्रकार हम देखते हैं कि अंग्रेज़ों का यह कहना कि उन्होंने संधि की शर्तों को पूरा किया, नितांत झूठ है।

4. लाहौर दरबार ने संधि की शर्ते पूरी करने में पूर्ण सहयोग दिया-लाहौर दरबार ने तो पंजाब पर अंग्रेज़ों का अधिकार होने तक संधि की शर्ते पूरी निष्ठा से पूरी की। लाहौर सरकार पंजाब में रखी गई अंग्रेज़ी सेना का पूरा खर्च दे रही थी। उसने दीवान मूलराज, चतर सिंह और शेर सिंह द्वारा की गई बगावतों की निंदा की और इनके दमन में अंग्रेजी सेना को पूर्ण सहयोग दिया।

5. पूरी सिख सेना तथा लोगों ने विद्रोह नहीं किया था-लॉर्ड डलहौज़ी ने यह आरोप लगाया था कि पंजाब की सारी सिख सेना तथा लोगों ने मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। परंतु यह कथन भी सत्य नहीं है। पंजाब के केवल मुलतान तथा हज़ारा प्रांतों में ही अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हुआ था। अधिकाँश सिख सेना तथा लोग अंग्रेजों के प्रति निष्ठावान् रहे।

6. पंजाब पर अधिकार एक विश्वासघात था-पंजाब पर अंग्रेजों द्वारा अधिकार एक घोर विश्वासघात था। 1846 ई० में हुई भैरोवाल की संधि अनुसार पंजाब में शांति व्यवस्था बनाए रखने की सारी ज़िम्मेदारी अंग्रेज़ों की थी। परन्तु अंग्रेजों ने पंजाब में बिगड़ती हुई परिस्थितियों के लिए महाराजा दलीप सिंह को दोषी माना।

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प्रश्न 8.
डलहौज़ी के इस पक्ष में कोई छः तर्क दें कि उसके द्वारा पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित करना उचित था।
(Give any six arguments in favour of Dalhousie’s annexation of the Punjab to the British Empire.)
अथवा
डलहौज़ी की पंजाब विलय की नीति के पक्ष में तर्क दीजिएवं (Give arguments in favour of Dalhousie’s policy of the annexation of Punjab.)
उत्तर-
1. सिखों ने वचन भंग किया-लॉर्ड डलहौजी ने यह आरोप लगाया कि सिखों ने भैरोवाल संधि की शर्ते भंग की। सिख सरदारों ने यह वचन दिया था कि वे अंग्रेज़ रेजीडेंट को पूर्ण सहयोग देंगे। परंतु उन्होंने राज्य में अशांति तथा विद्रोह भड़काने का प्रयत्न किया। लॉर्ड डलहौज़ी ने दीवान मूलराज के विद्रोह को पूरी सिख जाति का विद्रोह बताया। सरतार चतर सिंह तथा उसके पुत्र शेर सिंह ने विद्रोह करके मूलराज का साथ दिया। इस प्रकार बिगड़ रही परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने के लिए पंजाब का अंग्रेजी साम्राज्य में विलय आवश्यक था।

2. पंजाब अच्छा मध्यवर्ती राज्य न रहा-लॉर्ड हार्डिंग का विचार था कि पंजाब एक लाभप्रद मध्यवर्ती राज्य प्रमाणित होगा। इससे ब्रिटिश राज्य को अफ़गानिस्तान की ओर से किसी ख़तरे का सामना नहीं करना पड़ेगा। परंतु उनका यह विचार गलत प्रमाणित हुआ क्योंकि सिखों तथा अफ़गानों में मित्रता स्थापित हो गई। इसीलिए लॉर्ड डलहौज़ी ने पंजाब को ब्रिटिश साम्राज्य में सम्मिलित करना आवश्यक समझा।

3. ऋण न लौटाना-लॉर्ड डलहौज़ी ने यह आरोप लगाया कि भैरोवाल की संधि की शर्तों के अनुसार लाहौर दरबार ने अंग्रेजों को 22 लाख रुपए वार्षिक देने थे। परंतु लाहौर दरबार ने एक पाई भी अंग्रेजों को न दी। इसलिए पंजाब को अंग्रेज़ी साम्राज्य में सम्मिलित करना उचित था।

4. पंजाब पर अधिकार करना लाभप्रद था-प्रथम ऐंग्लो-सिख युद्ध में विजय के पश्चात् अंग्रेजों का मत था कि आर्थिक दृष्टि से पंजाब कोई लाभप्रद प्राँत नहीं है। परंतु पंजाब में दो वर्ष तक रह कर उन्हें ज्ञात हो गया कि यह राज्य तो कई दृष्टियों से भी अंग्रेजों के लिए लाभप्रद प्रमाणित हो सकता है। इन कारणों से लॉर्ड डलहौज़ी ने पंजाब को हड़प करने का दृढ़ निश्चय कर लिया।

5. पंजाब पर अधिकार आवश्यक था-यह कहा जाता है कि यदि पंजाब का विलय न किया जाता तो सिखों ने अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध सदैव षड्यंत्र रचते रहना था। इसका प्रभाव भारत के अन्य भागों में भी पड़ सकता था। इसलिए लॉर्ड डलहौज़ी ने पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित करना आवश्यक समझा।

6. पंजाब के लोगों के लिए लाभप्रद-लॉर्ड डलहौज़ी के पंजाब पर अधिकार करने के पक्ष में एक तर्क यह दिया जाता है कि ऐसा करके उसने पंजाब के लोगों के लिए एक अच्छा कार्य किया। ऐसा करके उन्होंने पंजाब में फैली अराजकता को दूर किया। प्रशासन में महत्त्वपूर्ण सुधारों को लागू किया। इस तरह पंजाब का अंग्रेज़ी साम्राज्य में विलय पंजाब के लोगों के लिए वरदान प्रमाणित हुआ।

प्रश्न 9.
महाराजा दलीप सिंह पर एक नोट लिखें।
(Write a note on Maharaja Dalip Singh.)
उत्तर-
महाराजा दलीप सिंह रणजीत सिंह का सबसे छोटा पुत्र था। वह 15 सितंबर, 1843 ई० को पंजाब का नया महाराजा बना था। उस समय उसकी आयु 5 वर्ष की थी, इसलिए महारानी जिंदां को उसका संरक्षक बनाया गया। महाराजा दलीप सिंह ने राज्य का प्रशासन चलाने के लिए हीरा सिंह को राज्य का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। यद्यपि वह बहुत समझदार था, परंतु उसने पंडित जल्ला को मुशीर-ए-खास (विशेष परामर्शदाता) नियुक्त करके बहुत-से दरबारियों को रुष्ट कर लिया था। 1844 ई० में हीरा सिंह की हत्या के पश्चात् जवाहर सिंह को नया प्रधानमंत्री बनाया गया, परंतु वह बड़ा हठी तथा अयोग्य था। उसे सितंबर, 1845 ई० में कंवर पिशौरा सिंह की हत्या के कारण सैनिकों ने मृत्यु दंड दे दिया था। उसके पश्चात् लाल सिंह को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया गया। वह पहले से ही अंग्रेजों से मिला हुआ था। परिणामस्वरूप पहले तथा दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्धों में सिखों को पराजय का मुख देखना पड़ा। अंग्रेज़ों ने महाराजा दलीप सिंह को गद्दी से उतार दिया और 29 मार्च, 1849 ई० को पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया। 22 अक्तब्रूर, 1893 ई० को महाराजा दलीप सिंह की पेरिस में मृत्यु हो गई।

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प्रश्न 10.
महारानी जींद कौर (जिंदां) पर एक नोट लिखो। [Write a note on Maharani Jind Kaur (Jindan).]
अथवा
महारानी जिंदां के बारे में आप क्या जानते हैं ?
(What do you know about Maharani Jindan ?)
उत्तर-
महारानी जिंदां, महाराजा दलीप सिंह की माता तथा महाराजा रणजीत सिंह की रानी थी। जब 15 सितंबर, 1843 ई० को दलीप सिंह पंजाब का नया महाराजा बना तो महारानी जिंदां को उसका संरक्षक बनाया गया। क्योंकि महारानी जिंदां पंजाब को स्वतंत्र रखना चाहती थी इसलिए वह अंग्रेज़ों की आँखों में खटकती थी। इसीलिए अंग्रेज़ों ने दिसंबर, 1846 ई० में लाहौर दरबार से हुई भैरोवाल की संधि के अंतर्गत महारानी जिंदां के सभी अधिकार छीन लिए तथा उसकी डेढ़ लाख रुपए वार्षिक पेंशन निश्चित कर दी गई। अगस्त, 1847 ई० में अंग्रेज़ों ने महारानी को शेखूपुरा के किले में नज़रबंद कर दिया और मई, 1848 को देश निकाला देकर बनारस भेज दिया। जेल में महारानी से क्रूर व्यवहार किया गया। अप्रैल, 1849 ई० में महारानी भेष बदल कर नेपाल पहुँचने में सफल हो गई। 1861 ई० में जब महाराजा दलीप सिंह इंग्लैंड से भारत आया तो महारानी जिंदां उससे मिलने नेपाल से भारत आई। महाराजा दलीप सिंह अपनी माता को इंग्लैंड ले गया। यहाँ अंग्रेजों ने दोनों को एक साथ न रहने दिया। अंततः 1 अगस्त, 1863 ई० को महारानी इस संसार से चल बसीं।

प्रश्न 11.
भाई महाराज सिंह पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। (Write a brief note on Bhai Maharaj Singh.)
उत्तर-
भाई महाराज सिंह नौरंगाबाद के प्रसिद्ध संत भाई बीर सिंह के शिष्य थे। 1845 ई० में वह भाई बीर सिंह की मृत्यु के पश्चात् गद्दी पर बैठे। वह पंजाब की स्वतंत्रता को बनाए रखने के पक्ष में थे। इस उद्देश्य के साथ उन्होंने गाँव-गाँव जाकर प्रचार करना आरंभ किया। अत: सरकार ने उनकी संपत्ति जब्त कर ली तथा उनको बंदी करवाने वाले को 10,000 रुपए ईनाम देने की घोषणा की। इसके बावजूद भाई महाराज सिंह बिना किसी भय के अपना प्रचार करते रहे। उन्होंने मुलतान के दीवान मूलराज, हज़ारा के सरदार चतर सिंह अटारीवाला तथा उसके पुत्र शेर सिंह को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की सभी लड़ाइयों में भाग लिया। वह गुजरात की लड़ाई के पश्चात् सिख सैनिकों द्वारा अंग्रेजों के समक्ष हथियार डालने के विरुद्ध थे। ऐसा किया जाने पर वह जम्मू चले गए। उन्होंने काबुल के शासक के साथ मिलकर 3 जनवरी, 1850 ई० को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की योजना बनाई। इस योजना के बारे में अंग्रेजों को पूर्व ही सूचना मिल गई। परिणामस्वरूप भाई महाराज सिंह को 28 दिसंबर, 1849 ई० को बंदी बना लिया गया। उनको पहले कलकत्ता तथा बाद में सिंगापुर की जेल में रखा गया। यहाँ उनकी 5 जुलाई, 1856 ई० को मृत्यु हो गई।

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध : कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय

Source Based Questions

नोट-निम्नलिखित अनुच्छेदों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनके अंत में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
1
द्वितीय ऐंग्लो-सिख युद्ध को आरंभ करने में मुलतान के दीवान मूलराज के विद्रोह को विशेष स्थान प्राप्त है। मुलतान सिख राज्य का एक प्राँत था। 1844 ई० में यहाँ के नाज़िम (गवर्नर) सावन मंल की मृत्यु के पश्चात् उसके पुत्र मूलराज को नया नाज़िम बनाया गया। इस अवसर पर अंग्रेज़ रेज़िडेंट ने मुलतान प्राँत द्वारा लाहौर दरबार को दिया जाने वाला वार्षिक लगान 13,47,000 रुपए से बढ़ाकर 19,71,500 रुपए कर दिया। 1846 ई० में इसमें वृद्धि करके इसे 30 लाख रुपए कर दिया गया। दूसरी ओर अंग्रेजों ने मुलतान में बिकने वाली कुछ आवश्यक वस्तुओं पर से कर हटा लिया और मुलतान का 1/3 भाग भी वापस ले लिया। इन कारणों से दीवान मूलराज सरकार को बढ़ा हुआ लगान नहीं दे सकता था। अतः उसने इस संबंध में ब्रिटिश सरकार के पास अनेक बार प्रार्थना की परंतु इन्हें रद्द कर दिया गया। अतः विवश होकर दिसंबर, 1847 ई० को दीवान मूलराज ने अपना त्यागपत्र दे दिया। मार्च 1848 ई० में नए रेज़िडेंट फ्रेड्रिक करी ने सरदार काहन सिंह को मुलतान का नया नाज़िम नियुक्त करने का निर्णय किया। मूलराज से चार्ज लेने के लिए काहन सिंह के साथ दो अंग्रेज़ अधिकारियों वैनस एग्नयू तथा एंड्रसन को भेजा गया। मूलराज ने उनका अच्छा स्वागत किया। 19 अप्रैल को मूलराज ने दुर्ग की चाबियाँ काहन सिंह को सौंप दी, परंतु अगले दिन 20 अप्रैल को मूलराज के कुछ सिपाहियों ने आक्रमण करके दोनों अंग्रेज़ अधिकारियों की हत्या कर दी तथा काहन सिंह को बंदी बना लिया। प्रैड्रिक करी ने मुलतान के विद्रोह के लिए मूलराज को दोषी ठहराया।

  1. दीवान मूलराज को कब मुलतान का नया नाज़िम नियुक्त किया गया था ?
  2. दीवान मूलराज ने किस कारण अपना अस्तीफ़ा दिया था ?
  3. 1848 ई० में रेजिडेंट फ्रेड्रिक करी ने किसे मुलतान का नया नाजिम नियुक्त किया था ?
  4. अंग्रेज़ों ने किन दो अफ़सरों के कत्ल की जिम्मेवारी दीवान मूलराज पर डाली ?
  5. प्रैड्रिक करी ने मुलतान के विद्रोह के लिए …………. को दोषी ठहराया।

उत्तर-

  1. दीवान मूलराज को 1844 ई० में मुलतान का नया नाज़िम नियुक्त किया गया था।
  2. उसके द्वारा दिए जाने वाले वार्षिक लगान में बहुत अधिक बढ़ौत्तरी कर दी गई थी।
  3. सरदार काहन सिंह को।
  4. वैनस एग्नयू तथा एंड्रसन।
  5. मूलराज।

2
चिल्लियाँवाला की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की महत्त्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक थी। यह लड़ाई 13 जनवरी, 1849 ई० को लड़ी गई थी। लॉर्ड ह्यूग गफ़ का कहना था कि उसके पास शेर सिंह का सामना करने के लिए शक्तिशाली सेना नहीं है। इसलिए वह और सैन्य शक्ति के पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहा है परंतु जब लॉर्ड ह्यूग गफ़ को यह सूचना मिली कि चतर सिंह ने अटक के किले पर अधिकार कर लिया है और वह अपने सैनिकों सहित शेर सिंह की सहायता को पहुँच रहा है तो उसने 13 जनवरी को शेर सिंह के सैनिकों पर आक्रमण कर दिया। यह लड़ाई बहुत भयानक थी। इस लड़ाई में शेर सिंह के सैनिकों ने अंग्रेज़ी सेना में खलबली मचा दी। उनके 695 सैनिक, जिनमें 132 अफसर थे, इस लड़ाई में मारे गए तथा अन्य 1651 घायल हो गए। अंग्रेजों की चार तोपें भी सिखों के हाथ लगीं।

  1. दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की सबसे महत्त्वपूर्ण लड़ाई कौन-सी थी ?
  2. चिल्लियाँवाला की लड़ाई कब हुई ?
  3. शेर सिंह कौन था ?
  4. चिल्लियाँवाला की लड़ाई में किसकी हार हुई ?
  5. चिल्लियाँवाला की लड़ाई में कितने अंग्रेज़ अफसर मारे गए थे ?
    • 132
    • 142
    • 695
    • 165

उत्तर-

  1. दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की सबसे महत्त्वपूर्ण लड़ाई चिल्लियाँवाला की लड़ाई थी।
  2. यह लड़ाई 13 जनवरी, 1849 ई० को हुई।
  3. शेर सिंह हज़ारा के नाज़िम सरदार चतर सिंह का पुत्र था।
  4. चिल्लियाँवाला की लड़ाई में अंग्रेजों की पराजय हुई।
  5. 132

PSEB 12th Class History Solutions Chapter 23 द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध : कारण, परिणाम तथा पंजाब का विलय

3
गुजरात की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की सब से महत्त्वपूर्ण तथा निर्णायक लड़ाई प्रमाणित हुई। इस लड़ाई में चतर सिंह के सैनिक शेर सिंह के सैनिकों से आ मिले थे। उनकी सहायता के लिए भाई महाराज सिंह भी गुजरात पहुँच गया था। इसके अतिरिक्त अफ़गानिस्तान के बादशाह दोस्त मुहम्मद खाँ ने सिखों की सहायता के लिए अपने पुत्र अकरम खाँ के नेतृत्व में 3000 घुड़सवार सेना भेजी। इस लड़ाई में सिख सेना की संख्या 40,000 थी। दूसरी ओर अंग्रेज़ सेना का नेतृत्व अभी भी लॉर्ड ह्यग गफ़ ही कर रहा था क्योंकि सर चार्ल्स नेपियर अभी भारत नहीं पहुंचा था। अंग्रेजों के पास 68,000 सैनिक थे। इस लड़ाई में दोनों ओर से तोपों का भारी प्रयोग किया गया था जिससे यह लड़ाई इतिहास में तोपों की लड़ाई नाम से विख्यात है। यह लड़ाई 21 फरवरी, 1849 ई० को प्रातः 7.30 बजे आरंभ हुई थी। सिखों की तोपों का बारूद शीघ्र ही समाप्त हो गया। जब अंग्रेजों को इस संबंध में ज्ञात हुआ तो उन्होंने अपनी तोपों से सिख सेनाओं पर भारी आक्रमण कर दिया। सिख सैनिकों ने अपनी तलवारें निकाल ली परंतु तोपों का मुकाबला वे कब तक कर सकते थे। इस लड़ाई में सिख सेना को भारी क्षति पहुँची।

  1. गुजरात की लड़ाई दूसरे ऐंग्लो-सिख युद्ध की सबसे महत्त्वपूर्ण तथा ……… लड़ाई प्रमाणित हुई।
  2. गुजरात की लड़ाई कब लड़ी गई थी ?
  3. गुजरात की लड़ाई में अंग्रेज़ी सेना का नेतृत्व कौन कर रहा था ?
  4. गुजरात की लड़ाई को तोपों की लड़ाई क्यों कहा जाता था ?
  5. गुजरात की लड़ाई में कौन विजयी रहे ?

उत्तर-

  1. निर्णायक।
  2. गुजरात की लड़ाई 21 फरवरी, 1849 ई० में लड़ी गई थी।
  3. गुजरात की लड़ाई में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व लॉर्ड ह्यूग गफ़ कर रहा था।
  4. गुजरात की लड़ाई को तोपों की लड़ाई इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें दोनों ओर से भारी तोपों का प्रयोग किया गया था।
  5. गुजरात की लड़ाई में अंग्रेज़ विजयी रहे।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics उद्धरण संबंधी प्रश्न

Punjab State Board PSEB 10th Class Social Science Book Solutions Civics उद्धरण संबंधी प्रश्न.

PSEB 10th Class Social Science Solutions Civics उद्धरण संबंधी प्रश्न

Class 10th Civics उद्धरण संबंधी प्रश्न

(1)

प्रत्येक देश की सरकार समाज में कानून की व्यवस्था और शांति स्थापित करती है। इस कार्य को सरकार कानूनों के निर्माण और व्यवस्था की स्थापना करके करती है। परन्तु सरकार अपनी इच्छा के अनुसार कानून बनाकर मनमानी नहीं कर सकती। देश की सरकार को संविधान मौलिक कानून के अनुसार ही कार्य करने होते हैं। इस प्रकार संविधान देश के प्रशासन और राज्य प्रबन्ध को निर्धारित करने वाले नियमों का मूल स्रोत होता है और यह शक्ति के दुरुपयोग पर प्रतिबन्ध लगाता है। जहाँ यह सरकार के अंगों के परस्पर और नागरिक के साथ सम्बन्धों को निर्धारित करता है, वहाँ यह सरकार द्वारा शक्ति के दुरुपयोग पर रोक भी लगाता है।

(a) संविधान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
संविधान एक मौलिक कानूनी दस्तावेज़ या लेख होता है जिसके अनुसार देश की सरकार अपना कार्य करती

(b) प्रस्तावना में वर्णित कोई तीन उद्देश्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-
संविधान की प्रस्तावना में भारतीय शासन प्रणाली के स्वरूप तथा इसके बुनियादी उद्देश्यों को निर्धारित किया गया है। ये उद्देश्य निम्नलिखित हैं —
(1) भारत एक प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्म-निरपेक्ष, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य होगा।
(2) सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय मिले।
(3) नागरिकों को विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता प्राप्त होगी।
(4) कानून के सामने सभी नागरिक समान समझे जाएंगे।
(5) लोगों में बन्धुत्व की भावना को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति की गरिमा बढ़े और राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को बल मिले।

(2)

अधिकार और कर्त्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। ये दोनों साथ-साथ चलते हैं। अन्य शब्दों में कर्तव्यों के बिना अधिकारों का कोई अस्तित्व नहीं। अतः सारे देशों ने संविधान में अपने नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ उनके मौलिक कर्त्तव्य भी अंकित किये हैं। भारतीय संस्कृति में सदा ही अधिकारों के स्थान पर कर्तव्यों पर अधिक बल दिया गया है। मूल संविधान में नागरिकों के कर्तव्यों की व्यवस्था नहीं की गई थी। 1976 में संविधान के बयालीसवें संशोधन द्वारा नया अध्याय IV A में नागरिकों के दस कर्तव्य निर्धारित किये गए हैं। सन् 2002 में संविधान के 86वें संशोधन द्वारा एक नया कर्तव्य जोड़ा गया है।

(a) भारतीय संविधान में नागरिकों के कर्त्तव्यों को कब और क्यों जोड़ा गया?
उत्तर-
मूल संविधान में नागरिकों के कर्तव्यों की व्यवस्था नहीं की गई थी। इन्हें 1976 में (संविधान के 42वें संशोधन द्वारा) संविधान में सम्मिलित किया गया।

(b) भारतीय नागरिकों के तीन कर्त्तव्य बताएं।
उत्तर-
भारतीय नागरिकों के कर्त्तव्य निम्नलिखित हैं —

  1. संविधान का पालन करना तथा इसके आदर्शों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना।
  2. भारत के स्वतन्त्रता संघर्ष को प्रोत्साहित करने वाले आदर्शों का सम्मान तथा पालन करना।
  3. भारत की प्रभुसत्ता, एकता एवं अखण्डता की रक्षा करना।
  4. भारत की रक्षा के आह्वान पर राष्ट्र की सेवा करना।
  5. धार्मिक, भाषायी, क्षेत्रीय अथवा वर्गीय विभिन्नताओं से ऊपर उठ कर भारत के सभी लोगों में परस्पर मेलजोल और बन्धुत्व की भावना का विकास करना।
  6. सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना और इसे बनाए रखना।
  7. वनों, झीलों, नदियों, वन्य जीवन तथा प्राकृतिक वातावरण की रक्षा करना।
  8. वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद, अन्वेषण और सुधार की भावना का विकास करना।
  9. सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करना और हिंसा का त्याग करना।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics उद्धरण संबंधी प्रश्न

(3)

लोकतांत्रिक शासन प्रणाली सबसे उत्तम समझी जाती है। वर्तमान समय में संसार के बहुत से देशों ने लोकतांत्रिक शासन को अपनाया हुआ है और यह बहुत लोकप्रिय हो चुकी है। इसके बावजूद लोकतांत्रिक शासन प्रणाली प्रत्येक देश में पूर्ण रूप से सफल नहीं हुई।
लोकतन्त्र की सफलता के लिए प्रत्येक नागरिक अच्छे आचरण वाला, चेतन तथा बुद्धिमान सुशिक्षित, विवेकशील तथा समझदार, उत्तरदायी तथा सार्वजनिक मामलों में रुचि लेने वाला होना चाहिए। समाज में अच्छे तथा योग्य नेता, सामाजिक और आर्थिक समानता तथा निष्पक्ष प्रैस तथा न्यायपालिका, अच्छे राजनैतिक संगठित दल और नागरिकों में सहनशक्ति तथा सहयोग का होना लोकतन्त्र की सफलता के लिए आवश्यक शर्ते हैं। जे.एस. मिल के अनुसार लोकतन्त्र को सफल बनाने के लिए लोगों में लोकतांत्रिक शासन को नियमित करने की इच्छा और उसे चलाने की योग्यता, लोकतन्त्र की रक्षा के लिए सदा प्रयत्नशील रहना और नागरिकों में अधिकारों की रक्षा और कर्तव्यों के पालन की इच्छा बेहद आवश्यक है।

(a) लोकतन्त्र से आप क्या समझते हो?
उत्तर-
लिंकन के अनुसार, लोकतन्त्र लोगों का, लोगों के लिए, लोगों द्वारा शासन होता है।

(b) लोकतन्त्र को सफल बनाने की तीन शर्ते लिखिए।
उत्तर-
हमारे देश में लोकतन्त्र को सफल बनाने के लिए हमें निम्नलिखित उपाय करने चाहिएं

  1. शिक्षा का प्रसार-सरकार को शिक्षा के प्रसार के लिए उचित कदम उठाने चाहिएं। गांव-गांव में स्कूल खोलने चाहिए, स्त्री शिक्षा का उचित प्रबन्ध किया जाना चाहिए तथा प्रौढ़ शिक्षा को प्रोत्साहन देना चाहिए।
  2. पाठ्यक्रमों में परिवर्तन-देश के स्कूलों तथा कॉलजों के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन लाना चाहिए। बच्चों को राजनीति शास्त्र से अवगत कराना चाहिए। शिक्षा केन्द्रों में प्रजातान्त्रिक सभाओं का निर्माण करना चाहिए। जिनमें बच्चों को चुनाव तथा शासन चलाने का प्रशिक्षण मिल सके।
  3. चुनाव-प्रणाली में सुधार-देश में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि चुनाव एक ही दिन में सम्पन्न हो जाएं और उनके परिणाम भी उसी दिन घोषित हो जाएं।
  4. न्याय-प्रणाली में सुधार-देश में न्यायधीशों की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए ताकि मुकद्दमों का निपटारा जल्दी हो सके। निर्धन व्यक्तियों के लिए सरकार की ओर से वकीलों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  5. समाचार-पत्रों की स्वतन्त्रता-देश में समाचार-पत्रों को निष्पक्ष विचार प्रकट करने की पूर्ण स्वतन्त्रता होनी चाहिए।
  6. आर्थिक विकास-सरकार को नये-नये उद्योगों की स्थापना करनी चाहिए। उसे लोगों के लिए अधिक-सेअधिक रोज़गार जुटाने चाहिएं। ग्रामों में कृषि के उत्थान के लिए उचित पग उठाने चाहिएं।

(4)

लोकतन्त्र और लोकमत के गहरे सम्बन्ध को समझने के लिये यह जान लेना आवश्यक है कि लोकमत, लोकतन्त्र का आधार होता है। आज का युग लोकतन्त्र का युग है और लोकतन्त्र सदैव लोगों के कल्याण हेतु चलाया जाता है। इसके अतिरिक्त सही अर्थों में लोकमत, लोकतांत्रिक सरकार की आत्मा होता है क्योंकि लोकतांत्रिक सरकार अपनी सारी शक्ति जनमत से ही प्राप्त करती है और इसी के आधार पर कायम रहती है। ऐसी सरकार का हमेशा यह प्रयत्न रहता है कि लोकमत उनके पक्ष में रहे भाव उसके विरुद्ध न जाये। इस प्रकार हम लोकमत को कल्याणकारी सरकार की आत्मा भी कह सकते हैं। इसके अतिरिक्त लोकतांत्रिक सरकार में सरकार को राह पर चलाने के लिए जाग्रत जनमत की बहुत आवश्यकता है।

(a) लोकमत से आपका क्या भाव है?
उत्तर-
लोकमत से हमारा अभिप्राय जनता की राय अथवा मन से है।

(b) (लोकतंत्र में) लोकमत की भूमिका बताओ।
उत्तर-
लोकमत अथवा जनमत लोकतान्त्रिक सरकार की आत्मा होता है, क्योंकि लोकतान्त्रिक सरकार अपनी शक्ति लोकमत से ही प्राप्त करती है। ऐसी सरकार का सदा यह प्रयत्न रहता है कि लोकमत उनके पक्ष में रहे। इसके अतिरिक्त लोकतन्त्र लोगों का राज्य होता है। ऐसी सरकार जनता की इच्छाओं और आदेशों के अनुसार कार्य करती है। प्रायः यह देखा गया है कि आम चुनाव काफ़ी लम्बे समय के पश्चात् होते हैं जिसके फलस्वरूप जनता का सरकार से सम्पर्क टूट जाता है और सरकार के निरंकुश बन जाने की सम्भावना उत्पन्न हो जाती है। इससे लोकतन्त्र का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। ऐसी अवस्था में जनमत लोकतान्त्रिक सरकार की सफलता का मूल आधार बन जाता है।

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(5)

प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिमण्डल में एक कड़ी की भूमिका निभाता है। मंत्रिमण्डल के निर्णयों को राष्ट्रपति को अवगत कराना उसका संवैधानिक कर्तव्य है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से किसी भी विभाग सम्बन्धी सूचना प्राप्त कर सकता है। यदि कोई मंत्री राष्ट्रपति से मिलना चाहता है या परामर्श लेना चाहता है तो वह ऐसा प्रधानमंत्री के द्वारा ही कर सकता है। संक्षेप में वह राष्ट्रपति और मंत्रिमण्डल के सदस्यों में मध्यस्थ का कार्य करता है।
प्रधानमंत्री लोकसभा का नेता माना जाता है। प्रत्येक विपरीत परिस्थिति में लोकसभा इसके नेतृत्व की इच्छा करती है। प्रधानमंत्री की इच्छा के विपरीत लोकसभा कुछ भी नहीं कर सकती क्योंकि उसे लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है। वह लोकसभा में सरकार की नीतियों और निर्णयों की घोषण करता है। अक्ष्यक्ष प्रधानमंत्री के परामर्श से सदन का कार्यक्रम निश्चित करता है।

(a) प्रधानमन्त्री की नियुक्ति कैसे होती है?
उत्तर-
राष्ट्रपति संसद् में बहुमत प्राप्त करने वाले दल के नेता को प्रधानमन्त्री नियुक्त करता है।

(b) प्रधानमंत्री के किन्हीं तीन महत्त्वपूर्ण कार्यों (शक्तियों) का वर्णन करो।
उत्तर-
इसमें कोई सन्देह नहीं कि प्रधानमन्त्री मन्त्रिमण्डल का धुरा होता है।

  1. वह मन्त्रियों की नियुक्ति करता है और वही उनमें विभागों का बंटवारा करता है।
  2. वह जब चाहे प्रशासन की कार्यकुशलता के लिए मन्त्रिमण्डल का पुनर्गठन कर सकता है। इसका अभिप्राय यह है कि वह पुराने मन्त्रियों को हटा कर नए मन्त्री नियुक्त कर सकता है। वह मन्त्रियों के विभागों में परिवर्तन कर सकता है। यदि प्रधानमन्त्री त्याग-पत्र दे दे तो पूरा मन्त्रिमण्डल भंग हो जाता है।
  3. यदि कोई मन्त्री त्याग-पत्र देने से इन्कार करे तो वह त्याग-पत्र देकर पूरे मन्त्रिमण्डल को भंग कर सकता है। पुनर्गठन करते समय वह उस मन्त्री को मन्त्रिमण्डल से बाहर रख सकता है। इसके अतिरिक्त वह मन्त्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता करता है और उनकी तिथि, समय तथा स्थान निश्चित करता है।

(6)

संविधान के अनुसार यदि राज्यपाल राष्ट्रपति को यह रिपोर्ट दे या राष्ट्रपति को किसी भरोसेमन्द सूत्रों से यह सूचना मिले कि राज्य सरकार संवैधानिक ढंग से नहीं चल रही तो वह राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकता है। ऐसी घोषणा के उपरान्त राष्ट्रपति राज्य की मंत्रि परिषद् को बर्खास्त कर देता है और विधान सभा को भंग कर सकता है या स्थगित कर सकता है राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यपाल राज्य का वास्तविक कार्याध्यक्ष बन जाता है भाव वह केन्द्रीय सरकार के एजेन्ट के रूप में कार्य करता है। संवैधानिक ढाँचा फेल होने पर राज्य की समस्त कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति के पास होती हैं और वैधानिक शक्तियाँ संसद को प्राप्त हो जाती हैं।

(a) राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है?
उत्तर-
राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा पांच वर्ष के लिए की जाती है।

(b) संवैधानिक संकट की घोषणा का राज्य प्रशासन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति में राज्यपाल की सलाह पर राष्ट्रपति राज्य में संवैधानिक आपात्काल की घोषणा कर सकता है। इसका परिणाम यह होता है कि सम्बद्ध राज्य की विधानसभा को भंग अथवा निलम्बित कर दिया जाता है। राज्य की मन्त्रिपरिषद् को भी भंग कर दिया जाता है। राज्य का शासन राष्ट्रपति अपने हाथ में ले लेता है। इसका अर्थ यह है कि कुछ समय के लिए राज्य का शासन केन्द्र चलाता है। व्यवहार में राष्ट्रपति राज्यपाल को राज्य का प्रशासन चलाने की वास्तविक शक्तियां सौंप देता है। विधानमण्डल की समस्त शक्तियां अस्थाई रूप से केन्द्रीय संसद् को प्राप्त हो जाती हैं।

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(7)

भारत ने गुट निरपेक्षता को अपनी विदेश नीति का मूल सिद्धान्त बनाया है। जब भारत आजाद हुआ तब सारा विश्व दो गुटों में बँटा हुआ था-रूस और एंग्लो-अमरीकन गुट। भारत की विदेश नीति के निर्माता पंडित नेहरू ने अनुभव किया कि राष्ट्र के निर्माण हेतु भारत को शक्ति-गुटों के संघर्ष से दूर रहना चाहिए। इसलिए पंडित नेहरू ने गुट निरपेक्ष नीति को अपनाया-गुट निरपेक्षता का अर्थ है कि प्रतियोगी शक्ति-गुटों से जानबूझ कर अलग रहना, किसी देश के प्रति वैर-विरोध का भाव न रखना और अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का गुण के आधार पर निर्णय करना तथा स्वतन्त्र नीति अपनाना। भारत के प्रयत्नों के फलस्वरूप गुट-निरपेक्ष आन्दोलन समूचे विश्व में एक शक्तिशाली तथा प्रभावशाली आन्दोलन बन गया है।

(a) भारत की परमाणु नीति क्या है?
उत्तर-
भारत एक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है। परंतु हमारी विदेश नीति शांतिप्रियता पर आधारित है। इसलिए भारत की परमाणु नीति का आधार शांतिप्रिय लक्ष्यों की प्राप्ति करना और देश का विकास करना है। वह किसी पड़ोसी देश को अपनी परमाणु शक्ति के बल पर दबाने के पक्ष में नहीं है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध की स्थिति में भी हम परमाणु शक्ति का प्रयोग करने की पहल नहीं करेंगे।

(b) गुट-निरपेक्ष नीति का अर्थ और भारत का इसे अपनाने का क्या कारण है?
उत्तर-
गुट-निरपेक्ष नीति भारतीय विदेश नीति के मूल सिद्धान्तों में से एक है।
गुट-निरपेक्षता का अर्थ-गुट-निरपेक्षता का अर्थ है सैनिक गुटों से अलग रहना। इसका यह भाव नहीं है कि हम अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के प्रति दर्शक बने रहेंगे बल्कि गुण के आधार पर निर्णय लेने का प्रयास करेंगे। हम अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहेंगे। भारत द्वारा गुट-निरपेक्ष नीति अपनाने का कारण-भारत की स्वतन्त्रता के समय विश्व दो मुख्य शक्ति गुटोंऐंग्लो-अमरीकन शक्ति गुट और रूसी शक्ति गुट में बंटा हुआ था। विश्व की सारी राजनीति इन्हीं गुटों के गिर्द घूम रही थी और दोनों में शीत युद्ध चल रहा था। नव स्वतन्त्र भारत इन शक्ति गुटों के संघर्ष से दूर रह कर ही उन्नति कर सकता था। इसीलिए पं० नेहरू ने गुट-निरपेक्षता को विदेश नीति का आधार स्तम्भ बनाया।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 5 योग

Punjab State Board PSEB 7th Class Physical Education Book Solutions Chapter 5 योग Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Physical Education Chapter 5 योग

PSEB 7th Class Physical Education Guide योग Textbook Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1.
‘योग’ शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
योग शब्द संस्कृत के ‘युज’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है मिलाना। साधारण शब्दों में योग का अर्थ मनुष्य को परमात्मा से मिलाना है अर्थात् वह विज्ञान जो हमें परमात्मा से मिलने का मार्ग दिखाता है उसे योग कहते हैं।

प्रश्न 2.
ऋषि पतंजली के अनुसार योग क्या है ?
उत्तर-
योग का उद्देश्य एकता, मिलाप और प्रेम है। मनुष्य का मन चंचल होने के कारण हर समय भटकता रहता है जो कभी रुक नहीं सकता। योग की मदद से मन को नियंत्रित कर सकते हैं। महर्षि पतंजली के अनुसार मन की वृत्तियों को रोकना ही योग है।
विभिन्न विद्वानों ने ‘योग’ को इस प्रकार परिभाषित किया है—
डॉ० राधाकृष्ण के अनुसार, “योग वह मार्ग है जो व्यक्ति को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।”
श्री रामचरण के अनुसार, “योग व्यक्ति के तन को स्वास्थ्य, मन को शान्ति व आत्मा को चैन प्रदान करता है।”

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प्रश्न 3.
योग की कोई एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
डॉ० राधाकृष्ण के अनुसार, “योग वह मार्ग है जो व्यक्ति को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।”

प्रश्न 4.
‘आसन’ शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
आसन प्राचीन यौगिक अभ्यास है जिससे प्राणायाम, ध्यान और समाधि का आधार तैयार होता है। आसन’ शब्द संस्कृत भाषा के शब्द ‘अस’ से लिया गया है जिसका मतलब है बैठने की कला। ऋषि पतंजली द्वारा “योग सूत्र में आसन का अर्थ व्यक्ति की उस स्थिति से है जिसमें वह अधिक-से-अधिक समय आसानी से बैठ सके।”

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प्रश्न 5.
आसन कितने प्रकार के होते हैं। विस्तारपूर्वक लिखिए।
उत्तर-

  1. उपचार के लिए आसन-इन आसनों में मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है और अनेक कुरूपताओं का उपचार किया जा सकता है।
  2. साधना के लिए आसन-इन आसनों में शरीर को एक स्थिति में रख कर लम्बे समय तक बैठकर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
  3. आराम के लिए आसन-इन आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर को आराम देना होता है और लेटकर किए जाते हैं। इन आसनों से शारीरिक व मानसिक थकावट दूर होती है।

प्रश्न 6.
योग सिर्फ एक ईलाज की विधि है-इस धारणा के बारे में अपने विचार लिखिए।
उत्तर-
1. क्या योग एक विशेष धर्म से सम्बन्धित है-भारत में योग प्राचीन समय में ऋषि-मुनियों द्वारा आरम्भ किया गया है। इसलिए आम लोग इसे हिन्दू धर्म सम्बन्धित मानते हैं और योग केवल हिन्दुओं के लिए है। यह धारणा बिल्कुल गलत है। योग को किसी भी धर्म को मानने वाला अपना सकता है क्योंकि योग तो एक किस्म का शारीरिक व्यायाम है जिसका किसी धर्म से लेना-देना नहीं।

2. क्या योग केवल पुरुषों के लिए है-कुछ लोग मानते हैं कि योग करने वाले व्यक्ति को कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है और योग केवल पुरुष ही कर सकते हैं। योग स्त्रियों के लिए नहीं है। सच्चाई यह है कि योग के लिए कोई कठोर नियम नहीं है और योग स्त्रियों के लिए भी उतना लाभदायक है जितना पुरुषों के लिए लाभदायक है।

3. क्या योग केवल रोगियों के लिए है-योग से कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इसलिए कई लोग यह सोचते हैं कि योग केवल इलाज के लिए है और रोगियों के लिए है। यह धारणा गलत है क्योंकि कोई भी स्वस्थ मनुष्य योग कर सकता है और शरीर को बीमारियों से बचा सकता है।

4. क्या योग सिर्फ संन्यासियों के लिए है-ऋषि मुनि प्राचीन काल में योग का अभ्यास जंगलों में रह कर किया करते थे। आज भी कुछ लोग सोचते हैं योग करने के लिए मनुष्य को घर छोड़ना पड़ता है। एक गृहस्थी के लिए योग करना ठीक नहीं जोकि बिल्कुल गलत है। सच्चाई तो यह है कि योग घर में रहकर भी कर सकते हैं।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 5 योग

Physical Education Guide for Class 7 PSEB योग Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
योग के बारे में अपने शब्दों में लिखें ।
उत्तर-
योग शब्द संस्कृत के ‘युज’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है मिलाना, मिलाप और प्रेम। योग के द्वारा व्यक्ति का परमात्मा से मेल।

प्रश्न 2.
महर्षि पतंजली के अनुसार योग के बारे में लिखें।
उत्तर-
महर्षि पतंजली के अनुसार मन की वृत्तियों को रोकना अथवा उनको नियंत्रित करना ही योग है।

प्रश्न 3.
योग सम्बन्धी कोई एक भ्रामक धारणा लिखें।
उत्तर-
योग किसी विशेष धर्म से सम्बन्धित नहीं है।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 5 योग

प्रश्न 4.
आसन क्या है ?
उत्तर-
ऋषि पतंजली के अनुसार आसन का अर्थ व्यक्ति की उस स्थिति से है जिसमें वह अधिक-से-अधिक समय आसानी से बैठ सके।

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न-
आसनों के कोई तीन सिद्धान्त लिखें।
उत्तर-

  1. आसन करने के लिए आयु व लिंग का ध्यान रखना ज़रूरी है। बच्चों को अधिक कठोर आसन नहीं करने चाहिए, जिनसे उनकी शारीरिक वृद्धि प्रभावित हो।
  2. आसन करते समय अधिक ज़ोर नहीं लगाना चाहिए। आसन करते समय शरीर सहज, स्थिर व आरामदायक स्थिति में रहना चाहिए।
  3. आसन का अभ्यास करते समय शरीर को धीरे-धीरे मोड़ना चाहिए। आसन करते समय एक दम झटका नहीं देना चाहिए।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 5 योग

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न-
आसन के सिद्धान्त विस्तार से लिखें।
उत्तर-
आसन करने वाले व्यक्ति को कुछ सिद्धान्तों का पालन करना पड़ता है। इन सिद्धान्तों का पालन करने से हम आसनों से पूरा लाभ ले सकते हैं। ये सिद्धान्त इस प्रकार हैं

  1. आसन करते समय मांसपेशियों में तनाव पैदा होना ज़रूरी है। तनाव से लचक पैदा होती है।
  2. आसन करते समय आयु और लिंग का ध्यान रखना आवश्यक है। बच्चों को कठोर आसन नहीं करने चाहिए जिससे उनके शरीर की वृद्धि में रुकावट न आ जाए। लड़कियों को मयूरासन अधिक नहीं करना चाहिए।
  3. आसन करते समय अधिक ज़ोर नहीं लगाना चाहिए। आसन करते समय शरीर सहज, स्थिर व आरामदायक स्थिति में रहना चाहिए।
  4. आसन का अभ्यास करते समय शरीर को धीरे-धीरे मोड़ना चाहिए। आसन करते समय जरक अथवा झटका नहीं लगाना चाहिए।
  5. आसन हमेशा प्रगति के सिद्धान्त के अनुसार करने चाहिए। पहले आसान आसन करने चाहिए। उसके पश्चात् कठिन आसनों का अभ्यास करना चाहिए।
  6. गर्भवती महिलाओं को और हृदय रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को कठिन आसन नहीं करने चाहिए।
  7. आसन करने वाला स्थान साफ और शांत होना चाहिए। सुबह का समय आसन करने के लिए सबसे उच्च माना जाता है।
  8. आसन खाना खाने के चार घण्टे बाद या निराहार रह कर करने चाहिए।

प्रश्न 4.
आसन क्या है ?
उत्तर-
ऋषि पतंजली के अनुसार आसन का अर्थ व्यक्ति की उस स्थिति से है जिसमें वह अधिक-से-अधिक समय आसानी से बैठ सके।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 5 योग

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न-
आसनों के कोई तीन सिद्धान्त लिखें।
उत्तर-

  1. आसन करने के लिए आयु व लिंग का ध्यान रखना ज़रूरी है। बच्चों को अधिक कठोर आसन नहीं करने चाहिए, जिनसे उनकी शारीरिक वृद्धि प्रभावित हो।
  2. आसन करते समय अधिक ज़ोर नहीं लगाना चाहिए। आसन करते समय शरीर सहज, स्थिर व आरामदायक स्थिति में रहना चाहिए।
  3. आसन का अभ्यास करते समय शरीर को धीरे-धीरे मोड़ना चाहिए। आसन करते समय एक दम झटका नहीं देना चाहिए।

PSEB 7th Class Physical Education Solutions Chapter 5 योग

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न-
आसन के सिद्धान्त विस्तार से लिखें।
उत्तर-
आसन करने वाले व्यक्ति को कुछ सिद्धान्तों का पालन करना पड़ता है। इन सिद्धान्तों का पालन करने से हम आसनों से पूरा लाभ ले सकते हैं। ये सिद्धान्त इस प्रकार

  1. आसन करते समय मांसपेशियों में तनाव पैदा होना ज़रूरी है। तनाव से लचक पैदा होती है।
  2. आसन करते समय आयु और लिंग का ध्यान रखना आवश्यक है। बच्चों को कठोर आसन नहीं करने चाहिए जिससे उनके शरीर की वृद्धि में रुकावट न आ जाए। लड़कियों को मयूरासन अधिक नहीं करना चाहिए।
  3. आसन करते समय अधिक ज़ोर नहीं लगाना चाहिए। आसन करते समय शरीर सहज, स्थिर व आरामदायक स्थिति में रहना चाहिए।
  4. आसन का अभ्यास करते समय शरीर को धीरे-धीरे मोड़ना चाहिए। आसन करते समय जरक अथवा झटका नहीं लगाना चाहिए।
  5. आसन हमेशा प्रगति के सिद्धान्त के अनुसार करने चाहिए। पहले आसान आसन करने चाहिए। उसके पश्चात् कठिन आसनों का अभ्यास करना चाहिए।
  6. गर्भवती महिलाओं को और हृदय रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को कठिन आसन नहीं करने चाहिए।
  7. आसन करने वाला स्थान साफ और शांत होना चाहिए। सुबह का समय आसन करने के लिए सबसे उच्च माना जाता है।
  8. आसन खाना खाने के चार घण्टे बाद या निराहार रह कर करने चाहिए।

PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना

Punjab State Board PSEB 8th Class Home Science Book Solutions Practical बटन लगाना और काज बनाना Notes.

PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बटन हमेशा किस कपड़े पर लगाना चाहिए ?
उत्तर-
बटन हमेशा दोहरे कपड़े पर लगाना चाहिए।

प्रश्न 2.
कमीज़ वाले बटनों में कितने छिद्र होते हैं ?
उत्तर-
कमीज़ वाले बटनों में दो या चार छिद्र होते हैं।

प्रश्न 3.
काज किस प्रकार के कपड़ों पर बनाना चाहिए ?
उत्तर-
काज हमेशा दोहरे कपड़ों पर बनाना चाहिए।

PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना

प्रश्न 4.
धागा कहाँ लपेटना चाहिए ?
उत्तर-
धागा डंडी के आस-पास लपेटना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बटन लगाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-
बटन लगाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  1. सभी बटनों की डंडी बनानी ज़रूरी है। डंडी के साथ बटन कपड़े के नीचे से ऊँचा रहता है। इससे बटन बंद करना आसान होता है और बटन के नीचे का कपड़ा नहीं घिसता।
  2. डंडी के आस-पास भी धागा लपेटना चाहिए ताकि काज के साथ रगड़ खाकर जल्दी टूट न जाए।
  3. जहाँ तक संभव हो टाँके बटन के छिद्र की सीध में ही होना चाहिए।
  4. बटन सफ़ाई और मज़बूती से लगाए जाने चाहिए।
  5. बटन हमेशा दोहरे कपड़े पर लगाना चाहिए।

PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना

प्रश्न 2.
कमीज़ में दो छिद्रों वाले बटन कैसे लगाते हैं ?
उत्तर-
कमीज़ में दो छिद्रों वाले बटन लगाने के लिए बटन को अपनी जगह पर ही रखते हैं और छिद्र में से सूई कपड़े के नीचे से निकालते हैं और दूसरे छिद्र में डालकर कपड़े के नीचे ले जाते हैं। इस तरह तीन, चार, पाँच टाँके लगाने के बाद डंडी बनाते हैं।

प्रश्न 3.
कमीज़ में चार छिद्रों वाले बटन कैसे लगाते हैं ?
उत्तर-
कमीज़ में चार छिद्रों वाले बटनों को क्रॉस (×) बनाकर सीधी लाइनों में या चौरस शक्ल के टाँके लगाकर बनाते हैं। धागे को छेदों से इतनी बार निकालते हैं कि छिद्र भर जाए। बाद में डंडी बनाकर धागे को नीचे ले जाते हैं और एक बखिए का टाँका लगाकर कपड़े की दो तहों में से सूई निकालकर धागा तोड़ देते हैं।

PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
काज बनाने की विधि का सचित्र वर्णन करो।
उत्तर-
1. काज हमेशा दोहरे कपड़े पर बनाना चाहिए। जिस जगह पर काज बनाना हो वहाँ बटन के आकार के अनुसार पेंसिल का निशान लगाना चाहिए, फिर ब्लेड से या छोटी कैंची से वहाँ काट देना चाहिए। उतना ही काटना चाहिए जिसमें बटन जरा मुश्किल से निकल सके। अधिक खुले काज में से बटन अपने आप निकल जाते हैं।
PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना 1
चित्र 5.1 काज बनाना

2. पतली लम्बी सूई में धागा डालते हैं। धागे को गाँठ नहीं लगाते हैं।

3. सूई को काज के बाएँ किनारे से ले जाते हैं और कपड़े की ऊपर वाली तह के बीच से दो-तीन धागे को लेकर सूई निकालते हैं। धागे का 14″ किनारा छोड़कर धागा खींच लेते हैं। इसे ” धागे के पहले कुछ टाँकों में दबा देते हैं।

4. काटे हुए किनारे का काज टाँका बनाते हैं।
PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना 2
चित्र 5.2 काज बनाना
चित्र 5.3 काज बनाना

5. काज का गोल किनारा बनाने के लिए किनारे के साथ-साथ 9 या 7 सीधे टाँके लगाते हैं। बीच वाला टाँका कटाव के बिल्कुल मध्य में होना चाहिए। टाँकों की लम्बाई बराबर होनी चाहिए और किनारा गोल बनाना चाहिए।
PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना 3
चित्र 5.4 काज बनाना

6. काटे गए दूसरे किनारे पर काज टाँका बनाते हैं।

7. किनारे पर पहुँच कर सूई पहले टाँके की गाँठ में डालते हैं और आखिरी टाँके के सिरे से निकालते हैं। पहले और आखिरी टाँके एक सिरे से दूसरे सिरे तक 9 या 7 टाँके काज टाँके की सीध में बनाते हैं। इन टाँकों की गिनती गोलाई वाले टाँकों के बराबर होनी चाहिए।
PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना 4
चित्र 5.5 काज बनाना
चित्र 5.6 काज बनना
PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना 5
चित्र 5.7 काज बनाना
चित्र 5.8 काज बनना

8. सूई को उल्टी तरफ़ ले जाते हैं और पिछली तरफ़ के टाँकों में से धागा निकालते हैं और तोड़ देते हैं। पिछली तरफ़ से टाँके भी सामने के भाग की तरफ़ एक समान और एक सीध में रखते हैं।

PSEB 8th Class Home Science Practical बटन लगाना और काज बनाना

बटन लगाना और काज बनाना PSEB 8th Class Home Science Notes

  • बटन हमेशा दोहरा कपड़ों पर लगाना चाहिए।
  • कमीज़ वाले बटनों में दो या चार छिद्र होते हैं।
  • काज हमेशा दोहरे कपड़े पर बनाना चाहिए।
  • कपड़े में कटाव उतना ही होना चाहिए जिसमें से बटन ज़रा मुश्किल से निकल सके।
  • काज का गोल किनारा बनाने के लिए किनारे के साथ-साथ 9 से 7 सीधे टाँके लगाते हैं।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

Punjab State Board PSEB 10th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

SST Guide for Class 10 PSEB भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द/एक पंक्ति (1-15 शब्दों) में लिखो

प्रश्न 1.
भारत की विदेश नीति का एक मूल सिद्धान्त लिखो।
उत्तर-

  1. गुट-निरपेक्षता की नीति में विश्वास।
  2. पंचशील के सिद्धान्तों में विश्वास।
  3. संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण विश्वास।
  4. साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध। (कोई एक लिखें)

प्रश्न 2.
पंचशील से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
अप्रैल, 1954 को भारत के प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू और चीन के प्रधानमन्त्री चाऊ-एन-लाई ने जो पांच सिद्धान्त स्वीकार किए। उन्हें सामूहिक रूप से पंचशील कहते हैं।

प्रश्न 3.
गुट-निरपेक्षता की नीति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
गुट-निरपेक्षता की नीति से अभिप्राय सैनिक गुटों से अलग रहने की नीति से है।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

प्रश्न 4.
भारत और संयुक्त राज्य में सम्बन्ध बिगड़ने का एक मुख्य कारण लिखो।
उत्तर-
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में सम्बन्ध बिगड़ने का एक मुख्य कारण यह है कि अमेरिका पाकिस्तान को सैनिक सहायता देता रहता है।

प्रश्न 5.
भारत की परमाणु नीति क्या है?
उत्तर-
भारत एक परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है। परंतु हमारी विदेश नीति शांतिप्रियता पर आधारित है। इसलिए भारत की परमाणु नीति का आधार शांतिप्रिय लक्ष्यों की प्राप्ति करना और देश का विकास करना है। वह किसी पड़ोसी देश को अपनी परमाणु शक्ति के बल पर दबाने के पक्ष में नहीं है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध की स्थिति में भी हम परमाणु शक्ति का प्रयोग करने की पहल नहीं करेंगे।

प्रश्न 6.
सुरक्षा परिषद् में स्थायी और अस्थायी सदस्य कितने हैं?
उत्तर-
सुरक्षा परिषद् 5 सदस्य स्थायी तथा 10 सदस्य अस्थायी हैं।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

प्रश्न 7.
संयुक्त राष्ट्र का जन्म कब हुआ और कितने देश इसके मूल सदस्य थे?
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र का जन्म 24 अक्तूबर, 1945 ई० को हुआ। इसके मूल सदस्य 51 देश थे।

(ख) निम्नलिखित की व्याख्या करो

  1. विश्व शान्ति में भारत की भूमिका
  2. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)
  3. निःशस्त्रीकरण (Disarmament)
  4. महासभा (General Assembly)
  5. भारत-चीन सम्बन्धों में तनाव का मूल कारण।

उत्तर-

  1. भारत ने विश्व-शान्ति को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित कार्य किए
    (क) गुट-निरपेक्षता की नीति पर चलते हुए भारत ने सदा आक्रामक शक्तियों की निन्दा की।
    (ख) भारत ने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से शान्ति सेनाओं के लिए सैनिक भेजे तथा निःशस्त्रीकरण का समर्थन किया।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में कुल 15 न्यायाधीश होते हैं। इसका मुख्य कार्यालय हेग [Hague, हालैण्ड में है। इसका मुख्य कार्य राष्ट्रों के आपसी झगड़ों का निर्णय करना है।
  3. निःशस्त्रीकरण से अभिप्राय शस्त्रों की होड़ को कम करना है। हमने आरम्भ से ही घातक शस्त्रों का विरोध किया है क्योंकि ये विश्व-शान्ति के लिए सदा खतरा रहे हैं।
  4. महासभा-यह एक तरह से संयुक्त राष्ट्र की संसद् है। इसमें प्रत्येक सदस्य राष्ट्र के पांच प्रतिनिधि होते हैं।
  5. भारत-चीन सम्बन्धों में तनाव का मूल कारण-भारत-चीन सम्बन्धों में तनाव का मूल कारण दोनों देशों में सीमा विवाद है। 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण करके इस विवाद को और गहन बना दिया।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखो

प्रश्न 1.
पंचशील के सिद्धान्तों का वर्णन करें।
उत्तर-
29 अप्रैल, 1954 को भारत के प्रधानमन्त्री पण्डित नेहरू और चीन के प्रधानमन्त्री चाऊ-एन-लाई की दिल्ली में संयुक्त वार्ता हुई। इस वार्ता में उन्होंने आपसी सम्बन्धों को पांच सिद्धान्तों के अनुसार ढालने का निर्णय लिया। इन्हीं पांच सिद्धान्तों को ‘पंचशील’ कहा जाता है। ये पांच सिद्धान्त निम्नलिखित हैं

  1. परस्पर प्रभुसत्ता और एकता का आदर।
  2. एक-दूसरे पर आक्रमण न करना।
  3. एक-दूसरे के आन्तरिक विषयों में हस्तक्षेप न करना।
  4. समानता और परस्पर सहयोग।
  5. शान्तिमय सह-अस्तित्व। पंचशील का मुख्य उद्देश्य विश्व शान्ति को बनाये रखना और मानव जाति को युद्धों के विनाश से बचाना है। चीन के पश्चात् संसार के अन्य देशों ने पंचशील को मान्यता प्रदान की। आज पंचशील भारतीय विदेश नीति का आधार स्तम्भ है।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

प्रश्न 2.
गुट-निरपेक्ष नीति का अर्थ और भारत का इसे अपनाने का क्या कारण है?
उत्तर-
गुट-निरपेक्ष नीति भारतीय विदेश नीति के मूल सिद्धान्तों में से एक है।
गुट-निरपेक्षता का अर्थ-गुट-निरपेक्षता का अर्थ है सैनिक गुटों से अलग रहना। इसका यह भाव नहीं है कि हम अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के प्रति दर्शक बने रहेंगे बल्कि गुण के आधार पर निर्णय लेने का प्रयास करेंगे। हम अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहेंगे।

भारत द्वारा गुट-निरपेक्ष नीति अपनाने का कारण-भारत की स्वतन्त्रता के समय विश्व दो मुख्य शक्ति गुटोंऐंग्लो-अमरीकन शक्ति गुट और रूसी शक्ति गुट में बंटा हुआ था। विश्व की सारी राजनीति इन्हीं गुटों के गिर्द घूम रही थी और दोनों में शीत युद्ध चल रहा था। नव स्वतन्त्र भारत इन शक्ति गुटों के संघर्ष से दूर रह कर ही उन्नति कर सकता था। इसीलिए पं० नेहरू ने गुट-निरपेक्षता को विदेश नीति का आधार स्तम्भ बनाया।

प्रश्न 3.
संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् पर संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्र के छ: अंगों में से एक है। यह संयुक्त राष्ट्र की कार्यपालिका के समान है। इसके कुल 15 सदस्य हैं। इनमें से पांच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैण्ड, रूस, चीन और फ्रांस इसके स्थायी सदस्य हैं। इन्हें वीटो का अधिकार है। वीटो से अभिप्राय यह है कि यदि इनमें से कोई भी एक सदस्य किसी प्रस्ताव का विरोध करता है तो वह प्रस्ताव रद्द हो जाता है। सुरक्षा परिषद् के मुख्य कार्य हैं

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति को बनाए रखना।
  2. राष्ट्रों के परस्पर झगड़ों को शान्तिपूर्वक सुलझाना।
  3. महासचिव के पद के लिए सिफ़ारिश करना।
  4. संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता के लिए नए राष्ट्रों की सिफ़ारिश करना।

प्रश्न 4.
संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका संक्षेप में लिखो।
उत्तर-
भारत संयुक्त राष्ट्र के 51 मूल सदस्यों में से एक है। आरम्भ से ही भारतीय नेताओं ने इस महान् संस्था में अपनी आस्था रखी है और इस देश ने निम्नलिखित ढंग से संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में क्रियाशील भूमिका निभाई है

  1. भारत ने अन्य देशों के साथ मिलकर 1950 में उप-निवेशवाद और साम्राज्यवाद के विरुद्ध महासभा में प्रस्ताव पास करवाया।
  2. भारत ने मिस्र, कांगो, कोरिया तथा हिन्द-चीन के देशों में हुए युद्धों में संयुक्त राष्ट्र के शान्ति प्रयासों में सहयोग दिया।
  3. नस्ली भेदभाव और रंगभेद के सन्दर्भ में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध आवाज़ उठाई और उसके विरुद्ध आर्थिक प्रतिबन्ध में भाग लिया।
  4. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से प्रत्येक उस देश के विरुद्ध आवाज़ उठाई जिसने मानव अधिकारों का उल्लंघन करने का प्रयास किया।
  5. विश्व में आतंकवाद की समाप्ति की प्रक्रिया में भारत संयुक्त राष्ट्र के साथ है।

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प्रश्न 5.
भारत और संयुक्त राष्ट्र अमरीका के परस्पर सम्बन्धों का संक्षेप में नोट लिखो।
उत्तर-
भारत का संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धान्तों में पूर्ण विश्वास है। हमने संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक अंग और विशेष एजेंसियों के कार्यों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत संयुक्त राष्ट्र को विश्व-शान्ति का रक्षक मानता है। इसलिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सैनिक सहायता प्रत्येक सम्भव ढंग से की है। भारत ने सदा संयुक्त राष्ट्र में इस बात पर जोर दिया है कि वह राजनीतिक मामलों तक ही अपने को सीमित न करे, बल्कि मानव की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समस्याओं को सुलझाने का भी प्रयास करे। ऐसी समस्याओं को सुलझाने में भारत ने संयुक्त राष्ट्र को आर्थिक सहायता और पूरा सहयोग दिया है। 22 दिसम्बर, 1994 को भारतीय संसद् के दोनों सदनों ने एक प्रस्ताव पास कर संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत की वचनबद्धता को दोहराया है।

प्रश्न 7.
भारत पाकिस्तान सम्बन्ध तथा इनके बीच तनाव के मुख्य तीन कारणों पर संक्षिप्त नोट लिखो।
उत्तर-
भारत-पाक सम्बन्ध आरम्भ से ही तनावपूर्ण तथा शत्रुतापूर्ण रहे हैं। इनके बीच तनाव का मुख्य कारण
कश्मीर समस्या है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। परन्तु पाकिस्तान इस प्रदेश पर अपना दावा जताता रहता है। 1999 में पाकिस्तान तथा भारत के बीच कारगिल युद्ध के कारण तनाव और अधिक बढ़ गया। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान, सीमा पार से भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। ये एक अच्छे पड़ोसी के लक्षण नहीं हैं। भारत आज भी पाकिस्तान से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना चाहता है और इसके लिए प्रयास कर रहा है। परन्तु यह तभी सम्भव हो सकता है, जब पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को समाप्त करे और युद्ध-विराम की शर्तों का पालन करें।

PSEB 10th Class Social Science Guide भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

1. उत्तर एक शब्द अथवा एक लाइन में

प्रश्न 1.
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का एक कारण बताइए।
उत्तर-
पाकिस्तान कश्मीर पर अपना दावा जताता रहता है, जबकि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
अथवा
पाकिस्तान द्वारा विदेशी सहायता से शस्त्रों का भण्डार भी दोनों देशों के मध्य तनाव का एक कारण है।

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प्रश्न 2.
भारत की वर्तमान विदेश नीति के संस्थापक कौन थे?
उत्तर-
पं० जवाहर लाल नेहरू।

प्रश्न 3.
भारत की विदेश नीति का एक मूल सिद्धान्त बताओ।
उत्तर-
गुट निरपेक्षता।

प्रश्न 4.
पंचशील के सिद्धान्तों को कब अपनाया गया?
उत्तर-
29 अप्रैल, 1954 को।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

प्रश्न 5.
पंचशील का समझौता किन दो नेताओं के बीच हुआ?
उत्तर-
पंचशील का समझौता भारत के प्रधानमन्त्री पं० जवाहर लाल नेहरू तथा चीन के प्रधानमन्त्री चाउ-एन-लाई के बीच हुआ।

प्रश्न 6.
पंचशील के सिद्धान्तों को संयुक्त राष्ट्र की महासभा में मान्यता कब दी गई?
उत्तर-
14 दिसम्बर, 1959 को।

प्रश्न 7.
संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पंचशील के सिद्धान्तों को मान्यता देने वाले देशों की संख्या कितनी थी?
उत्तर-
82.

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प्रश्न 8.
सार्क (दक्षेस) की स्थापना कब हुई?
उत्तर-
7 दिसम्बर, 1985 को।

प्रश्न 9.
‘दक्षेस’ का पूरा नाम क्या है?
उत्तर-
दक्षेस का पूरा नाम है दक्षिण-एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन।

प्रश्न 10.
भारत ने पोखरन (राजस्थान) में परमाणु धमाका (प्रयोग) कब किया?
उत्तर-
1974 में।

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प्रश्न 11.
भारत ने राष्ट्रमण्डल की सदस्यता कब ग्रहण की थी?
उत्तर-
17 मई, 1945 को।

प्रश्न 12.
आजकल राष्ट्रमण्डल के सदस्यों की संख्या कितनी है?
उत्तर-
49.

प्रश्न 13.
भारत के दो पड़ोसी देशों के नाम बताओ जो परमाणु शक्ति सम्पन्न हैं।
उत्तर-
चीन तथा पाकिस्तान।

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प्रश्न 14.
भारत की स्वतन्त्रता के समय विश्व कौन-कौन से दो शक्ति गुटों में बंटा हुआ था?
उत्तर-
भारत की स्वतन्त्रता के समय विश्व ऐंग्लो-अमेरिकन शक्ति गुट तथा रूसी शक्ति गुट में बंटा हुआ था।

प्रश्न 15.
द्वितीय विश्वयुद्ध कब-से-कब तक चला?
उत्तर-
द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 से 1945 तक चला।

प्रश्न 16.
संयुक्त राष्ट्र का चार्टर कब और कहां स्वीकार किया गया?
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र का चार्टर सानफ्रांसिसको में 26 जून, 1945 को स्वीकार किया गया।

PSEB 10th Class SST Solutions Civics Chapter 5 भारत की विदेश नीति तथा संयुक्त राष्ट्र

प्रश्न 17.
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई?
उत्तर-
24 अक्तूबर, 1945 को।

प्रश्न 18.
संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को कितने देशों के प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया?
अथवा
स्थापना के समय संयुक्त राष्ट्र के कितने सदस्य थे?
उत्तर-
51.

प्रश्न 19.
आज (2017) संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की लगभग संख्या कितनी है?
उत्तर-
195.

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प्रश्न 20.
संयुक्त राष्ट्र के स्थायी सदस्यों ( 5) को क्या विशेषाधिकार प्राप्त हैं?
उत्तर-
वीटो।

प्रश्न 21.
अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में कुल कितने न्यायाधीश होते हैं?
उत्तर-
15.

प्रश्न 22.
संयुक्त राष्ट्र के सचिवालय के अध्यक्ष को क्या कहा जाता है?
उत्तर-
महासचिव।

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प्रश्न 23.
भारत ने महासभा में दक्षिणी अफ्रीका द्वारा नस्ली भेदभाव का त्याग करने संबंधी प्रस्ताव कब पेश किया?
उत्तर-
1962 में।

प्रश्न 24.
संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने मानव अधिकारों की सर्वव्यापी घोषणा कब की?
उत्तर-
10 दिसम्बर, 1948 को।

प्रश्न 25.
भारत की श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र की सभा में प्रथम महिला प्रधान कब चुनी गई?
उत्तर-
1954 में।

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प्रश्न 26.
बांग्लादेश कब और किस युद्ध के परिणामस्वरूप बना?
उत्तर-
बांग्लादेश 1971 में भारत-पाक युद्ध के परिणामस्वरूप बना।

प्रश्न 27.
भारत ने किस परमाणु सन्धि पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया है?
उत्तर-
परमाणु अप्रसार संधि ।

प्रश्न 28.
चीन में साम्यवादी शासन की स्थापना कब हुई?
उत्तर-
1949 में।

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प्रश्न 29.
भारत-चीन युद्ध कब हुआ?
उत्तर-
1962 में।

प्रश्न 30.
नेहरू-लियाकत अली समझौता कब हुआ?
उत्तर-
1960 में।

प्रश्न 31.
गुट-निरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक देशों के नाम बताइए।
उत्तर-
गुट-निरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक राष्ट्र हैं-भारत, युगोस्लाविया तथा मिस्री

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प्रश्न 32.
सुरक्षा परिषद् का एक महत्त्वपूर्ण कार्य बताओ।
उत्तर-
विश्व शान्ति और सुरक्षा में योगदान देना।

प्रश्न 33.
मानव अधिकारों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
मनुष्य की सामाजिक प्रकृति में निहित अधिकारों को मानव अधिकार कहते हैं।

प्रश्न 34.
निःशस्त्रीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
मानव जाति को सर्वनाश से बचाने के लिए।

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II. रिक्त स्थानों की पर्ति

  1. सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों की संख्या ………..
  2. सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों की संख्या ………… है।
  3. संयुक्त राष्ट्र संघ का जन्म …………… को हुआ।
  4. संयुक्त राष्ट्र के मूला सदस्यों की संस्था :……….. थी।
  5. भारत की वर्तमान विदेश नीति के संस्थापक …………… थे।
  6. आज संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों की संख्या ……….. है।
  7. संयुक्त राष्ट्र में निषेधाधिकार अथवा वीटो का अधिकार संस्था के ………….. सदस्यों को प्राप्त है।
  8. भारत-चीन युद्ध………… में हुआ।

उत्तर-

  1. 5,
  2. 10;
  3. 24 अक्टूबर, 1945,
  4. 51,
  5. पं० जवाहरलाल नेहरू,
  6. 195,
  7. स्थायी,
  8. 1962।

III. बहुविकल्पीय

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में कौन-सा सिद्धान्त भारत की विदेश नीति का नहीं है?
(A) परमाणु शस्त्रों में वृद्धि
(B) संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण विश्वास
(C) पंचशील के सिद्धांतों में विश्वास
(D) साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद का विरोध ।
उत्तर-
(A) परमाणु शस्त्रों में वृद्धि

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य नहीं है?
(A) रूस
(B) चीन
(C) भारत
(D) संयुक्त राज्य अमेरिका।
उत्तर-
(C) भारत

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प्रश्न 3.
बंगलादेश की स्थापना कब हुई?
(A) 1969
(B) 1971
(C) 1973
(D) 1975
उत्तर-
(B) 1971

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन-सा देश परमाणु शक्ति है?
(A) भारत
(B) चीन
(C) पाकिस्तान
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(D) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 5.
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में कुल न्यायाधीश हैं
(A) 15
(C) 11
(B) 10
(D) 25
उत्तर-
(A) 15

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IV. सत्य-असत्य कथन

प्रश्न-सत्य/सही कथनों पर (✓) तथा असत्य/गलत कथनों पर (✗) का निशान लगाएं

  1. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में छः स्थायी सदस्य देश हैं।
  2. भारत सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य है।
  3. 26 जनवरी, 1950 को पंचशील के सिद्धान्तों को अपनाया गया।
  4. भारत ने राष्ट्रमण्डल की सदस्यता 17 मई, 1945 को ग्रहण की।
  5. भारत पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाने में विश्वास रखता है।

उत्तर-

  1. (✗),
  2. (✗),
  3. (✗),
  4. (✓),
  5. (✓).

V. उचित मिलान

  1. गुट-निरपेक्षता — भारत, यूगोस्लाविया तथा मित्र
  2. महासचिव — चीन, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान
  3. गुट-निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक राष्ट्र — भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धान्त
  4. भारत के पड़ोसी राष्ट्र — संयुक्त राष्ट्र के सचिवालय का अध्यक्ष

उत्तर-

  1. गुट-निरपेक्षता — भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धान्त,
  2. महासचिव — संयुक्त राष्ट्र के सचिवालय का अध्यक्ष,
  3. गुट-निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक राष्ट्र — भारत, यूगोस्लाविया तथा मिस्र,
  4. भारत के पड़ोसी राष्ट्र — चीन, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान।

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छोटे उत्तर वाले प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अब भारत को सुरक्षा की अधिक आवश्यकता क्यों है? दो तर्क दें।
उत्तर-
प्राचीन काल में भारत की सीमाओं की रक्षा करना अपेक्षाकृत सरल था। उत्तर में स्थित हिमालय एक दीवार का कार्य करता था। दक्षिण में समुद्र भारत की रक्षा करता था। परन्तु अब न तो ऊंचे पर्वत और न ही विशाल समुद्र देश की रक्षा में कोई योगदान दे सकते हैं। आज विज्ञान की उन्नति के कारण पहाड़ और समुद्र बाधा नहीं रहे। इसलिए भारत की सीमाओं की रक्षा करना आवश्यक हो गया है। दूसरे, कुछ पड़ोसी देशों से हमारे अच्छे सम्बन्ध नहीं हैं। हमें उनसे अपनी रक्षा करनी है। इसलिए भारत को सुरक्षा की अधिक आवश्यकता है।

प्रश्न 2.
संयुक्त राष्ट्र के किन्हीं चार महत्त्वपूर्ण अंगों के नाम लिखें। प्रत्येक अंग का एक महत्त्वपूर्ण कार्य बताइए।
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र के चार महत्त्वपूर्ण अंग हैं-साधारण सभा, सुरक्षा परिषद्, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् तथा अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय।
कार्य —

  1. साधारण सभा सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों का चुनाव करती है।
  2. सुरक्षा परिषद् अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा सुरक्षा की व्यवस्था करती है।
  3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् मानव जाति की आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास करती है।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय सदस्य राष्ट्रों के बीच झगड़ों पर विचार करता है।

प्रश्न 3.
भारत-पाक सम्बन्धों में सुधार के कुछ उपाय बताओ।
उत्तर-
भारत-पाक सम्बन्धों में दोनों देशों के सामान्य हितों को बढ़ावा देकर निश्चित रूप से सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित पग उठाने होंगे —

  1. दोनों देशों में व्यापार सम्बन्धों को मजबूत बनाया जाए।
  2. दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक आदान-प्रदान किया जाए।
  3. दोनों देशों में खेल–सम्बन्धों को सुदृढ़ किया जाए। यहां एक बात ध्यान देने योग्य है कि ये उपाय तभी सफल हो सकते हैं, जब पाकिस्तान आतंकवाद का दामन छोड़ें।

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प्रश्न 4.
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई थी? इसके उद्देश्य बताइए।
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्तूबर, 1945 को हुई। इसके आरम्भिक सदस्यों की संख्या 51 थी। परन्तु आज इनकी संख्या 195 हो गई है। भारत इसके आरम्भिक सदस्यों में से एक है।
उद्देश्य-संयुक्त राष्ट्र का अपना संविधान है, जिसे चार्टर कहते हैं। चार्टर में संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इन उद्देश्यों की पूर्ति किस प्रकार की जाएगी। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं —

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा की स्थापना करना।
  2. राष्ट्रों के बीच अच्छे सम्बन्धों को बढ़ावा देना। ये सम्बन्ध समानता तथा आपसी सहयोग पर आधारित होंगे।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझाना।

प्रश्न 5.
I.L.O., UNESCO, F.A.O. तथा W.H.0. के पूरे नाम लिखो। इनमें से किन्हीं दो संगठनों के कार्य लिखो।
उत्तर-
I.L.O., UNESCO, F.A.O. तथा W.H.O. संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट समितियां हैं।

  1. I.L.O. — इसका पूरा नाम अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organisation) है। इसका कार्य श्रमिकों के काम की दशाओं में सुधार लाना है। यह संगठन इस बात का भी प्रयास करता है कि श्रमिकों को कुछ न्यूनतम अधिकार प्राप्त हों।
  2. UNESCO — इसका पूरा नाम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (The U.N. Educational, Scientific and Cultural Organisation) है। यह संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
  3. F.A.O. — इसका पूरा नाम खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agricultural Organisation) है। विश्वभर में यह कृषि के विकास तथा खाद्यान्न पूर्ति के कार्य करता है।
  4. W.H.O. — इसका पूरा नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) है। विश्व भर में स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्य इसका विशेष उत्तरदायित्व है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त नोट लिखो
(क) सार्क
(ख) निषेधाधिकार।
उत्तर-
(क) सार्क-सार्क का पूरा नाम है-दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन। हिन्दी में इसका संक्षिप्त नाम है-दक्षेस। यह दक्षिण एशिया के विकासशील देशों का संगठन है। इसके प्रमुख सदस्य भारत, पाकिस्तान, बांग्ला देश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका तथा मालदीव हैं। इन देशों की संस्कृति तथा आर्थिक समस्याओं में कई समानताएं पाई जाती हैं। इन्हीं समानताओं के कारण ही ये राष्ट्र आपस में संगठित हुए हैं। ये आपसी सहयोग से अपना विकास करना चाहते हैं।
(ख) निषेधाधिकार-निषेधाधिकार (वीटो) सुरक्षा परिषद् के 5 स्थायी सदस्यों (संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस तथा चीन) को प्राप्त है। सुरक्षा परिषद् के सभी महत्त्वपूर्ण निर्णयों पर इन पांचों सदस्यों की सहमति होना अनिवार्य है। यदि इनमें से एक भी सदस्य किसी निर्णय का विरोध करता है, तो उस निर्णय को रद्द माना जाता है।

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प्रश्न 7.
भारत की विदेश नीति की छः विशेषताएं बताइए।
उत्तर-
भारत की विदेश नीति की निम्नलिखित छ: विशेषताएं हैं —

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा सुरक्षा के लिए प्रयास करना।
  2. उपनिवेशों की जनता के लिए आत्म-निर्णय के अधिकार का समर्थन करना।
  3. जातिवाद का विरोध करना।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय विवादों का शान्तिपूर्ण ढंग से निपटारा करना।
  5. संयुक्त राष्ट्र तथा अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग करना।
  6. गुट-निरपेक्षता की नीति का अनुसरण करना तथा विश्व के सैनिक गुटों से दूर रहना।

प्रश्न 8.
भारत-चीन सम्बन्धों के सकारात्मक पहलू बताओ।
उत्तर-

  1. सीमा विवाद को आपसी बातचीत द्वारा हल करने का प्रयास किया जा रहा है।
  2. एक समझौते के अनुसार दोनों देश आपस में आर्थिक सहयोग तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर वचन बद्ध हैं।
  3. विश्व शांति सम्मेलनों में दोनों देशों के प्रतिनिधि एक-दूसरे का भरोसा जीतने का प्रयास करते रहते हैं।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 1 हरित क्रांति

Punjab State Board PSEB 7th Class Agriculture Book Solutions Chapter 1 हरित क्रांति Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 7 Agriculture Chapter 1 हरित क्रांति

PSEB 7th Class Agriculture Guide हरित क्रांति Textbook Questions and Answers

(क) एक-दो शब्दों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
हरित क्रांति किस दशक में आई ?
उत्तर-
1960 के दशक दौरान।

प्रश्न 2.
हरित क्रांति के समय गेहूँ की फसल के कद में क्या परिवर्तन आया ?
उत्तर-
कद बौना हो गया।

प्रश्न 3.
किसानों को उन्नत बीज प्रदान करने के लिए स्थापित की गई संस्थाओं के नाम बताओ।
उत्तर-
पंजाब राज बीज निगम, राष्ट्रीय बीज निगम।।

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प्रश्न 4.
हरित क्रांति के दौरान किस प्रकार के उर्वरकों का प्रयोग होने लगा ?
उत्तर-
रासायनिक उर्वरकों का।

प्रश्न 5.
हरित क्रांति के दौरान कौन-कौन सी फसलों की पैदावार में वृद्धि हुई ?
उत्तर-
गेहूँ तथा धान की पैदावार में।

प्रश्न 6.
हरित क्रांति में किस कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रमुख योगदान दिया ?
उत्तर-
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय।

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प्रश्न 7.
क्या धान पंजाब की परंपरागत फसल है ?
उत्तर-
जी नहीं।

प्रश्न 8.
हरित क्रांति कौन-कौन सी फसलों तक मुख्य रूप से सीमित रही ?
उत्तर-
गेहूँ, धान।

प्रश्न 9.
हरित क्रांति के प्रभावस्वरूप खेती विविधता घटी है या बढ़ी है ?
उत्तर-
कम हुई है।

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प्रश्न 10.
केंद्रीय अन्न भंडार में कौन-सा राज्य सबसे अधिक योगदान देता है ?
उत्तर-
पंजाब।

(ख) एक-दो वाक्यों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
हरित क्रांति किन कारणों से संभव हो सकी ?’
उत्तर-
समुचित मंडीकरण, उन्नत किस्मों के बीज, सिंचाई सुविधाएं, रासायनिक उर्वरक, मेहनती किसान तथा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सुविधाओं में हुई वृद्धि के कारण हरित क्रांति संभव हो सकी।

प्रश्न 2.
हरित क्रांति के दौरान वैज्ञानिकों ने किस तरह के बीज विकसित किए ?
उत्तर-
वैज्ञानिकों ने विश्व स्तरीय शोधकर्ताओं के साथ मिलकर नए उन्नत बीज विकसित किए।

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प्रश्न 3.
हरित क्रांति के समय पंजाब की खेती के लिए सिंचाई सुविधाओं में क्या परिवर्तन आए ?
उत्तर-
हरित क्रांति के समय पंजाब में नहरी एवं ट्यूबवैल सिंचाई की सुविधाओं में वृद्धि हुई।

प्रश्न 4.
सरकार द्वारा अनाज के मंडीकरण के लिए क्या उपाय किए गए ?
उत्तर-
सरकार द्वारा बिक्री केंद्र तथा नियमित मंडियों का प्रबंध किया गया। केंद्रीय तथा राज्य गोदाम निगमों की स्थापना तथा अनाज के कम-से-कम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 5.
किसान को कैसे ऋण अदा करने मुश्किल होते हैं ?
उत्तर-
कृषि लागत बढ़ने के कारण, किसान कई बार गैर-सरकारी स्रोतों से महंगे ब्याज पर ऋण को वापिस अदा नहीं कर पाते हैं। इसलिए ऐसे ऋण किसानों को अदा करने मुश्किल लगते हैं।

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प्रश्न 6.
छोटे किसानों द्वारा कम पूंजी से शरू होने वाले व्यवसाय कौन-से हैं ?
उत्तर-
कम पूंजी से शुरू होने वाले व्यवसाय हैं-मशरूम की कृषि, मधुमक्खी पालन, बीज उत्पादन, फलों, सब्जियों की कृषि आदि।

प्रश्न 7.
वर्तमान समय में किसानों को कौन-कौन सी फसलों के लिए खेती अधीन क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता है ?
उत्तर-
किसानों को गैर-अनाजी फसलों; जैसे-कपास, मक्की, दालें, तेल बीज, फल, सब्जियों आदि के अधीन क्षेत्रफल बढ़ाने की आवश्यकता है।

प्रश्न 8.
पंजाब के अनाज की केंद्रीय भंडार में निरंतर जरूरत क्यों कम हो रही
उत्तर-
अनाज की अधिक पैदावार के कारण केंद्रीय अनाज भंडार में पहले ही बहुत अनाज के भंडार लगे हुए हैं। इसलिए और अनाज की आवश्यकता कम हो रही है।

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प्रश्न 9.
गेहूँ और धान के मंडीकरण के लिए कौन-सी नीतियाँ बनाई गईं ?
उत्तर-
इसके लिए बिक्री केंद्र तथा नियमित मंडियां बनाई गई हैं। केंद्रीय तथा राज्य गोदाम निगम बनाए गए तथा-फसलों के कम-से-कम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की गई है। गेहूं तथा धान के मंडीकरण को यकीनी बनाया गया।

प्रश्न 10.
पंजाब में खेती की मानसून पर निर्भरता कैसे कम हुई ?
उत्तर-
हरित क्रांति के समय पंजाब में नहरी तथा ट्यूबवैल सिंचाई की सुविधाओं में वृद्धि हुई जिससे खेती की मानसून पर निर्भरता कम हो गई।

(ग) पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर दें:

प्रश्न 1.
हरित क्रांति से आप क्या समझते हो ?
उत्तर-
देश आज़ाद होने के बाद लगभग 1960 के दशक तक देश में अनाज की कमी रहती थी तथा अनाज को अन्य देशों से आयात करना पड़ता था परंतु 1960 के दशक में गेहूँ तथा धान की पैदावार इतनी बढ़ गई कि अनाज को संभालना मुश्किल हो गया। खेती अनाज उत्पादन में हुई वृद्धि को हरित क्रांति का नाम दिया गया। हरित क्रांति के समय पंजाब देश का अग्रणी राज्य रहा। हरित क्रांति का पंजाब की खुशहाली में बहुत योगदान रहा।

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प्रश्न 2.
हरित क्रांति के दौरान हुए नए बीजे की खोज के बारे में बताएं।
उत्तर-
हरित क्रांति के दौरान पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के वैज्ञानिकों ने विश्वस्तरीय शोधकर्ताओं से मिल कर नई प्रकार के उन्नत बीज विकसित किए। इन बीजों में गेहूँ, मक्की, बाजरा, धान आदि मुख्य हैं। इन उन्नत किस्मों के कारण प्रति एकड़ पैदावार में वृद्धि हुई। गेहूँ की नई उन्नत किस्मों का कद बौना तथा उत्पादन बढ़ गया। धान पंजाब की पारंपरिक फसल नहीं थी परंतु इसकी उन्नत किस्में होने के कारण इसकी कृषि अधिक क्षेत्रफल पर होने लगी।

प्रश्न 3.
हरित क्रांति के कारण पंजाब में किस प्रकार के परिवर्तन आए ?
उत्तर-
हरित क्रांति के कारण पंजाब में अनाज उत्पादन एकाएक बढ़ गया जिससे पंजाब में आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक स्तर पर परिवर्तन आए। ये परिवर्तन अच्छे तथा बुरे दोनों प्रकार के थे।

  1. किसानों में आर्थिक पक्ष से खुशहाली आई तथा उनका जीवन स्तर भी ऊंचा हुआ।
  2. अधिक भूमि वाले किसानों को छोटे किसानों से अधिक आर्थिक लाभ हुआ जिस कारण सामाजिक तथा आर्थिक भेद बढ़ गए।
  3. कृषि आधारित उद्योगों में उन्नति हुई तथा कृषि मज़दूरों पर बुरा प्रभाव पड़ा।
  4. पश्चिमी सभ्याचार के अच्छे-बुरे प्रभाव पंजाब में महसूस किए जाने लगे।
  5. कृषि विभिन्नता में कमी आई।
  6. कृषि पैदावार में कमी हुई है तथा लागत बढ़ी है। इससे किसानों की शुद्ध आय में कमी हुई है।

प्रश्न 4.
कृषि आधारित व्यवसाय क्या होते हैं तथा यह किसानों के लिए अपनाने क्यों आवश्यक हैं ?
उत्तर-
आज के समय में कृषि पैदावार की दर में कमी आ गई है तथा कृषि लागत बढ़ गई है जिससे किसानों की शुद्ध आय में कमी आई है। कई बार किसान गैर-सरकारी स्रोतों से ऋण ले लेते हैं जोकि महंगे ब्याज पर होते हैं तथा ऐसे ऋण किसान को अदा करने मुश्किल लगते हैं।

छोटे तथा मध्यम किसान की कम हो रही आय को रोकने के लिए कृषि आधारित व्यवसाय अपनाने चाहिएं। ये व्यवसाय कम पूंजी से शुरू किए जा सकते हैं; जैसे-मशरूम की कृषि, मधुमक्खी पालन, बीज उत्पादन, सब्जियों की काश्त आदि को आसानी से अपनाया जा सकता है परंतु इन व्यवसायों से अच्छी आय हो जाती है।

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प्रश्न 5.
पंजाब में सदाबहार क्रांति लाने के लिए क्या कुछ करना चाहिए ? .
उत्तर-
पंजाब ने हरित क्रांति के दौरान देश में अनाज भंडार में भरपूर योगदान डाला। किसानों ने गेहूँ तथा धान के फ़सली चक्र में पड़ कर अनाज उत्पादन तो बहुत बढ़ा दिया परंतु इससे पंजाब की भूमि का स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है तथा भूमिगत जल का स्तर भी और नीचे चला गया है। अब समय की मांग है कि गैर-अनाजी फसलों की काश्त की तरफ ध्यान दिया जाए। जैसे कि दालें, तेल बीज, मक्की, कपास, फल, सब्जियां आदि फसलों की कृषि के अधीन क्षेत्रफल बढ़ाना चाहिए। कई अन्य कृषि आधारित व्यवसाय अपनाने की भी आवश्यकता है। इसलिए राज्य को खुशहाल करने के लिए सदाबहार क्रांति लाने की आवश्यकता है। कृषि विभिन्नता लाने की आवश्यकता है। कम पूंजी वाले कृषि आधारित व्यवसाय अपनाने की भी आवश्यकता है।

Agriculture Guide for Class 7 PSEB हरित क्रांति Important Questions and Answers

बहुत छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
1960 दशक के दौरान कृषि क्षेत्र में अन्न उत्पादन में हुई वृद्धि को क्या नाम दिया गया ?
उत्तर-
हरित क्रांति।

प्रश्न 2.
वर्ष 1965-66 में पंजाब का कृषि उत्पादन कितना था ?
उत्तर-
34 लाख टन।

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प्रश्न 3.
वर्ष 1971-72 में पंजाब का कृषि उत्पादन कितना हो गया ?
उत्तर-
119 लाख टन।।

प्रश्न 4.
पंजाब में अनाज उत्पादन बढ़ने का क्या कारण था ?
उत्तर-
गेहूँ, धान के उत्पादन में वृद्धि।

प्रश्न 5.
पंजाब में हरित क्रांति के कोई दो कारण बताओ।
उत्तर-
उपयुक्त मंडीकरण, सुधरी किस्मों के बीज।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 1 हरित क्रांति

प्रश्न 6.
वर्ष 1967-68 में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कितना था ?
उत्तर-
10 लाख टन।

प्रश्न 7.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना की स्थापना कब हुई ?
उत्तर-
वर्ष 1962 में।

प्रश्न 8.
गैर-अनाजी फसलों का उदाहरण दें।
उत्तर-
कपास, दालें, तेल बीज फसलें आदि।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 1 हरित क्रांति

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हरित क्रांति के दौरान अनाज उत्पादन कितना बढ़ गया ?
उत्तर-
वर्ष 1965-66 में 34 लाख टन से 1971-72 में 119 लाख टन हो गया जो कि पांच वर्षों में तीन गुणा बढ़ गया।

प्रश्न 2.
वर्ष 1967-68 में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कितना था तथा बढ़ कर कितना हो गया ?
उत्तर-
वर्ष 1967-68 में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग 10 लाख टन था जोकि 20वीं शताब्दी के अंत तक 13 गुणा बढ़ गया।

प्रश्न 3.
हरित क्रांति के कारण सामाजिक तथा आर्थिक भेद क्यों बढ़ गया ?
उत्तर-
बड़े किसानों को हरित क्रांति के कारण अधिक लाभ हुआ तथा छोटे तथा मध्यम किसानों को कम लाभ हुआ जिससे सामाजिक तथा आर्थिक भेद बढ़ गया।

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 1 हरित क्रांति

बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
हरित क्रांति के संबंध में सिंचाई सुविधाओं तथा उर्वरकों के बारे में बताओ।
उत्तर-
सिंचाई सुविधाएं-हरित क्रांति के दौरान कृषि पैदावार में सिंचाई की एक मुख्य भूमिका रही। इस समय पंजाब में नहरों तथा ट्यूबवैल सिंचाई की सुविधा में वृद्धि हुई। इस तरह कृषि की मानसून पर निर्भरता कम हो गई तथा कृषि के अधीन क्षेत्रफल में वृद्धि हुई।

उर्वरक-सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि के कारण, कृषि के अधीन क्षेत्रफल बढ़ गया तथा अधिक पैदावार वाले बीज विकसित होने के कारण रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बढ़ गया। जहां 1967-68 में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग 10 लाख टन था वो 20वीं शताब्दी के अन्त तक 13 गुणा हो गया। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से भूमि में नाइट्रोजन तथा फास्फोरस की कमी को पूरा किया गया। इस प्रकार गेहूँ तथा अन्य फसलों की पैदावार में वृद्धि हुई।

प्रश्न 2.
हरित क्रांति के कारणों की चित्र द्वारा दर्शाएँ ।
उत्तर-
PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 1 हरित क्रांति 1

PSEB 7th Class Agriculture Solutions Chapter 1 हरित क्रांति

हरित क्रांति PSEB 7th Class Agriculture Notes

  • पंजाब की आर्थिक समृद्धि में हरित क्रांति का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।
  • हरित क्रांति के समय पंजाब में नहरों द्वारा तथा ट्यूबवैल द्वारा सिंचाई की सुविधा में वृद्धि हुई।
  • 1960 के दशक में कृषि क्षेत्र में अनाज उत्पादन की वृद्धि को हरित क्रांति का नाम दिया गया है।
  • पंजाब में वर्ष 1965-66 में अनाज उत्पादन 34 लाख टन था जो बढ़कर वर्ष 1971-72 में 119 लाख टन हो गया।
  • उत्पादन बढ़ने का मुख्य कारण गेहूं तथा धान के उत्पादन का अधिक होना था।
  • पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के वैज्ञानिकों ने विश्व स्तरीय शोधकर्ताओं के साथ मिल कर कई उन्नत किस्म के बीज विकसित किए हैं।
  • उन्नत बीजों के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वृद्धि हुई है।
  • धान की उन्नत किस्मों के कारण धान की कृषि के अधीन क्षेत्रफल बढ़ा है।
  • कृषि पैदावार में सिंचाई का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
  • वर्ष 1967-68 में रासायनिक खादों का प्रयोग 10 लाख टन था जोकि बढ़ कर बीसवीं शताब्दी के अन्त तक 13 गुणा हो गया था।
  • रासायनिक उर्वरकों (खादों) ने पंजाब की भूमि में नाइट्रोजन तथा फास्फोरस की कमी को पूरा करने में बहुत योगदान दिया।
  • हरित क्रांति में पंजाब के किसानों का तथा वैज्ञानिकों का भरपूर योगदान रहा।
  • फसलों को कीटों तथा खरपतवार से बचाव के लिए रासायनिक विधियों को विकसित किया गया।
  • पंजाब में आवश्यकता से अधिक अनाज पैदा होने के कारण, केन्द्रीय तथा राज्य गोदाम निगम स्थापित किए गए।
  • सरकार द्वारा गेहूँ तथा धान की उपज के मण्डीकरण को यकीनी बनाया गया।
  • पंजाब कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि विभाग द्वारा किसानों को कृषि की विकसित तकनीकों का प्रशिक्षण देने का प्रबंध किया जाता है।
  • पंजाब राज बीज निगम, राष्ट्रीय बीज निगम तथा अन्य बीज संस्थानों की स्थापना की गई ताकि किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध करवाया जा सके।
  • पंजाब में धान तथा गेहूँ की अधिक कृषि के कारण भूमि का स्वास्थ्य तथा भूमि के नीचे पानी का स्तर नीचे जा रहा है।
  • पंजाब में गैर-अनाजी फसलों; जैसे-दालें, तेल बीज, फल, सब्जियां, कपास आदि की कृषि को बढ़ाने के प्रयत्न किए जा रहे हैं।
  • नई तकनीकों, जैसे- बायोटैक्नॉलोजी, नैनोटेक्नॉलोजी, टिशु कल्चर आदि की नई किस्में विकसित करने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
  • कम पूंजी से कृषि आधारित व्यवसाय, जैसे-मशरूम की कृषि, बीज-उत्पादन, ” सब्जियों की खेती आदि को आसानी से शुरू किया जा सकता है।

PSEB 6th Class Social Science Solutions Chapter 22 सार्वजनिक सम्पति की संभाल

Punjab State Board PSEB 6th Class Social Science Book Solutions Civics Chapter 22 सार्वजनिक सम्पति की संभाल Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Social Science Civics Chapter 22 सार्वजनिक सम्पति की संभाल

SST Guide for Class 6 PSEB सार्वजनिक सम्पति की संभाल Textbook Questions and Answers

I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो :

प्रश्न 1.
आप अपनी निजी सम्पत्ति को कैसे संभालते हैं ?
उत्तर-
हमारी निजी सम्पत्ति हमारे अपने धन तथा अपने परिश्रम से बनी होती है। इसका प्रयोग हम अपनी इच्छा से कर सकते हैं। इसलिए हम इसका पूरा ध्यान रखते हैं।
(i) हम इसे तोड़-फोड़ से बचाते हैं।
(ii) हम इसे चोरी होने से बचाते हैं।
वास्तव में हम इसकी हर प्रकार से रक्षा करते हैं ताकि इसे कोई हानि न पहुंचे।

प्रश्न 2.
भारतवर्ष के तीन ऐतिहासिक स्मारकों के नाम लिखें।
उत्तर-
ताजमहल, लाल किला, कुतुबमीनार, जामा मस्जिद आदि।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय सम्पत्ति की सम्भाल क्यों ज़रूरी है ?
उत्तर-
राष्ट्रीय सम्पत्ति हम सबके धन से बनी होती है। इस पर हम सबका अधिकार होता है। यदि इसे हानि पहुंचती है तो हम सबको असुविधा होती है। उदाहरण के लिए बसों तथा रेलगाड़ियों की तोड़-फोड़ से हमारी यात्रा में बाधा पड़ती है। इसी प्रकार पुस्तकालय की पुस्तकों में से पन्ने या चित्र फाड़ लेने पर हम उनका आनन्द नहीं ले पाते। इसके अतिरिक्त उस सम्पत्ति को पुनः बनाने के लिए हमें फिर से करों के रूप में धन खर्च करना पड़ता है। इसलिए राष्ट्रीय सम्पत्ति की सम्भाल ज़रूरी है।

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प्रश्न 4.
लोग सार्वजनिक सम्पत्ति क्यों खराब करते हैं ?
उत्तर-
कुछ लोग अज्ञानता के कारण सार्वजनिक सम्पत्ति को खराब करते हैं। वे इस बात को भूल जाते हैं कि सार्वजनिक सम्पत्ति की हानि उनकी अपनी हानि भी है। ऐसे लोग विरोध-प्रदर्शन के दौरान बसों, रेलगाड़ियों, सरकारी भवनों की तोड़फोड़ करते हैं अथवा उन्हें आग लगा देते हैं। कुछ शरारती तत्व अराजकता फैलाने के लिए भी सार्वजनिक सम्पत्ति को नष्ट करते हैं।

प्रश्न 5.
सार्वजनिक सम्पत्ति कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर-
सार्वजनिक सम्पत्ति दो प्रकार की होती है –

  1. लोकोपयोगी सेवाएँ
  2. ऐतिहासिक भवन अथवा स्मारक।

प्रश्न 6.
लोक उपयोगी सेवाओं से आप क्या समझते हो ? दो उदाहरण दो।
उत्तर-
लोक उपयोगी सेवाओं से अभिप्राय सार्वजनिक संस्थाओं से है। सरकारी बसें, रेलगाड़ियां, स्कूल, बैंक आदि सेवाएं लोक उपयोगी सेवाओं के मुख्य उदाहरण हैं।

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प्रश्न 7.
ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
ऐतिहासिक स्मारकों का हमारे जीवन में बड़ा महत्त्व है –

  1. इनसे हमें जुड़े इतिहास की जानकारी होती है।
  2. ये विदेशों में भारतीय संस्कृति की महानता का बखान करते हैं। अतः कई विदेशी इन्हें देखने के लिए भारत आते हैं।
  3. इनकी कला-शैलियां आज की भवन-निर्माण शैलियों के लिए प्रेरणा की स्रोत हैं।

प्रश्न 8.
सार्वजनिक सम्पत्ति का लोग दुरुपयोग कैसे करते हैं ?
उत्तर-
लोग सार्वजनिक सम्पत्ति का दुरुपयोग निम्नलिखित ढंग से करते हैं –

  1. कुछ लोग सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाते हैं।
  2. वे सड़कों के किनारे लगे बल्बों तथा ट्यूबों को तोड़-फोड़ देते हैं।
  3. वे स्मारकों पर अपने नाम आदि लिख कर उन्हें गन्दा करते हैं।
  4. वे सार्वजनिक पार्कों से पेड़-पौधे उखाड़ कर ले जाते हैं और फूल तोड़ लेते हैं।
  5. वे विरोध प्रदर्शन के समय सार्वजनिक सम्पत्ति को जला देते हैं।
  6. वे अजायबघरों से वस्तुएं चुरा ले जाते हैं।

प्रश्न 9.
स्कूल की सम्पत्ति किसके पैसे से बनाई जाती है ?
उत्तर-
स्कूल की सम्पत्ति हम सबके पैसे से बनाई जाती है।

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प्रश्न 10.
निजी सम्पत्ति और सार्वजनिक सम्पत्ति में अन्तर बताओ।
उत्तर-
निजी सम्पत्ति किसी एक व्यक्ति या परिवार की सम्पत्ति होती है। इसकी हानि परिवार को ही उठानी पड़ती है। इसके विपरीत सार्वजनिक सम्पत्ति हम सबकी सांझी सम्पत्ति होती है। इसे हानि पहुंचाने पर हम सभी को हानि पहुंचती है।

प्रश्न 11.
स्कूल की सम्पत्ति के प्रति आपका क्या कर्त्तव्य है ?
उत्तर-
स्कूल की सम्पत्ति के प्रति आपके निम्नलिखित कर्त्तव्य हैं –

  1. हमें स्कूल को साफ़-सुथरा रखना चाहिए। हमें स्कूल की दीवारों, खिड़कियों तथा दरवाजों को खराब नहीं करना चाहिए।
  2. हमें स्कूल के डैस्कों, कुर्सियों, बिजली के पंखों आदि को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए।
  3. हमें स्कूल के पार्क को साफ़-सुथरा रखना चाहिए। वहां से फूल-पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।
  4. हमें खेल के मैदान को ठीक प्रकार से उपयोग करना चाहिए। हमें वहाँ पत्थर और फलों के छिलके नहीं फेंकने चाहिए।
  5. स्कूल से प्राप्त खेलों के सामान का प्रयोग हमें बड़ी सावधानी से करना चाहिए।
  6. लाइब्रेरी की पुस्तकों से पन्ने नहीं फाड़ने चाहिए।
  7. पीने के पानी की टूटियों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए।

प्रश्न 12.
ऐतिहासिक स्मारकों की संभाल आप कैसे करोगे ?
उत्तर-
ऐतिहासिक स्मारकों की संभाल के लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –
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  1. हमें ऐतिहासिक स्मारकों को वर्षा, बाढ़ आदि के समय नष्ट होने से बचाने का प्रयत्न करना चाहिए।
  2. हमें अजायबघरों आदि में पड़ी हुई वस्तुओं को हाथ लगा कर खराब नहीं करना चाहिए।
  3. हमें ऐतिहासिक यादगारों को तोड़ना-फोड़ना नहीं चाहिए।
  4. हमें ऐतिहासिक यादगारों में से किसी भी वस्तु को चुराना नहीं चाहिए।
  5. हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अन्य व्यक्ति भी ऐतिहासिक स्मारकों को हानि न पहुँचाए।
  6. हमें ऐतिहासिक स्मारकों पर लिखे हुए या खुदे अक्षरों को न तो मिटाना चाहिए और न ही स्वयं कुछ लिखना चाहिए।

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II. निम्नलिखित रिक्त स्थान भरो

  1. हमारी अपनी सभी निजी वस्तुएं हमारी ……….. सम्पत्ति हैं।
  2. पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को ……… कहा जाता है।
  3. सार्वजनिक सम्पत्ति को ……….. नहीं पहुंचाना चाहिए।
  4. सभी की सांझी सम्पत्ति को ………… सम्पत्ति कहा जाता है।
  5. परिवार की सभी वस्तुओं को ……………सम्पत्ति कहा जाता है।

उत्तर-

  1. निजी
  2. स्मारक
  3. नुकसान
  4. सार्वजनिक
  5. पारिवारिक।

III. निम्नलिखित वाक्यों के आगे सही (✓ ) या ग़लत (✗) का निशान लगाओ

  1. पार्क और अस्पताल हमारी निजी सम्पत्ति हैं।
  2. हमें राष्ट्रीय सम्पत्ति को हानि नहीं पहुंचानी चाहिए क्योंकि यह हमारी है।
  3. ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा 1958 में पास किए गए नियम द्वारा की जाती है।
  4. लोक हित सेवाएं सरकार द्वारा लोगों की सुविधा के लिए बनाई जाती है।

उत्तर-

  1. (✗)
  2. (✓ )
  3. (✓ )
  4. (✓ )

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IV. दी गई सूची में से प्राइवेट तथा सार्वजनिक सम्पत्ति की अलग-अलग सूची बनाएं।

पुस्तक, डाकघर, पॅन, रेलवे स्टेशन, स्कूटर, बस स्टैंड, स्मारक, अलमारी, सीवरेज, कार, सड़कें, नहरें, बस्ता, पुल, स्कूल, वाटर वर्क्स, कोठी, झीलें, पार्क, अजायब घर, टेलीविज़न।
उत्तर-प्राइवेट (निजी) सम्पत्ति – पुस्तक, पॅन, स्कूटर, अलमारी, कार, बस्ता, कोठी तथा टेलीविज़न।
सार्वजनिक सम्पत्ति-डाकघर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, स्मारक, सीवरेज, सड़कें, नहरें, पुल, वाटर वर्क्स, स्कूल, झीलें, पार्क तथा अजायब घर।

PSEB 6th Class Social Science Guide सार्वजनिक सम्पति की संभाल Important Questions and Answers

कम से कम शब्दों में उत्तर वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकारों के साथ क्या चीज़ जुड़ी है ?
उत्तर-
कर्त्तव्य।

प्रश्न 2.
लोकोपयोगी सेवाएं अथवा संस्थाएं किस प्रकार की सम्पत्ति हैं ?
उत्तर-
सार्वजनिक।

प्रश्न 3.
प्राचीन स्मारकों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने कब कानून बनाया ?
उत्तर-
1958 ई० में।

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बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सार्वजनिक सम्पत्ति से क्या भाव है ?
(क) हमारी सम्पत्ति
(ख) सांझी संपत्ति।
(ग) विदेशी सम्पत्ति
उत्तर-
(ख) सांझी सम्पत्ति।

प्रश्न 2.
सरकार के तीन अंग होते हैं। इनमें निम्न में कौन-सा अंग शामिल नहीं है ?
(क) नगरपालिका
(ख) विधानपालिका
(ग) कार्यपालिका।
उत्तर-
(क) नगरपालिका।

प्रश्न 3.
निम्न में से क्या हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है ?
(क) ऐतिहासिक स्मारक।
(ख) लोकतंत्रीय सरकार
(ग) पंचायती राज संस्थाएं।
उत्तर-
(क) ऐतिहासिक स्मारक।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमारे देश में किस प्रकार की सरकार है ? इसकी क्या विशेषता होती है ?
उत्तर-
हमारे देश में लोकतान्त्रिक सरकार है। इसमें लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो सरकार चलाते हैं। ऐसी सरकार अपने अधिकतर कार्य लोगों की भलाई के लिए करती है।

प्रश्न 2.
हमारी सरकार के कितने अंग हैं ? प्रत्येक का एक-एक कार्य बताओ।
उत्तर-
हमारी सरकार के तीन अंग हैं-विधानपालिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका। इनके कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. विधानपालिका-इसका कार्य कानून बनाना है।
  2. कार्यपालिका-इसका कार्य कानूनों को लागू करना है।
  3. न्यायपालिका-यह कानूनों का उल्लंघन करने वालों को दण्ड देती है।

प्रश्न 3.
कौन-सी तीन विधियों द्वारा हम निजी सम्पत्ति का ध्यान रखते हैं ?
उत्तर-
(1) हम ध्यान रखते हैं कि कोई हमारी निजी वस्तुओं को खराब या गन्दा न करे।
(2) हम उन्हें सम्भाल कर रखते हैं, ताकि उनकी तोड़-फोड़ न हो।
(3) हम अपनी बहुमूल्य वस्तुओं को घर में ताला लगा कर रखते हैं या फिर बैंक के लॉकर में रखते हैं।
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प्रश्न 4.
सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा के उपायों का वर्णन करो।
उत्तर-
सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा के निम्नलिखित उपाय हैं –

  1. हमें इस सम्पत्ति की तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए। हमें दूसरों को भी इस काम से रोकना चाहिए।
  2. हमें इनकी दीवारों को गन्दा नहीं करना चाहिए और इनमें गन्दगी नहीं फैलानी चाहिए।
  3. हमें बिना टिकट यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  4. हमें पुस्तकालय की पुस्तकों को खराब नहीं करना चाहिए।
  5. हमें फूल आदि तोड़ कर सार्वजनिक पार्कों की शोभा को कम नहीं करना चाहिए।
  6. हमें स्कूल के सामान को हानि नहीं पहुँचानी चाहिए।
  7. हमें प्राचीन स्मारकों, संग्रहालयों और सार्वजनिक भवनों को साफ़-सुथरा रखना चाहिए।

प्रश्न 5.
विद्यार्थी पार्कों की सुरक्षा में क्या योगदान दे सकते हैं ?
उत्तर-
विद्यार्थी पार्कों की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं –

  1. वे पार्कों में कूड़ा-कर्कट न फैलाएँ।
  2. वे घास को खराब न करें।
  3. वे फूलों को न तोड़ें।
  4. वे पार्कों में निश्चित स्थान पर ही खेलें।

प्रश्न 6.
ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों का हमारे जीवन में बड़ा महत्त्व है। इनसे हमें भारत के प्राचीन इतिहास का ज्ञान होता है। हमें यह भी पता चलता है कि हमारी प्राचीन संस्कृति कितनी महान् थी। ये भवन विदेशियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। संसद भवन, राष्ट्रपति भवन आदि कुछ इमारतें भारतीय प्रशासन की केन्द्र हैं।

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प्रश्न 7.
सार्वजनिक सम्पत्ति की हानि हमारी अपनी हानि कैसे है ?
उत्तर–
सार्वजनिक सम्पत्ति के टूटने या खराब होने पर ठीक करने के लिए फिर से धन खर्च करना पड़ता है। यह धन हमारे करों से एकत्रित राशि से ही खर्च किया जाता है। यह राशि किसी और सुधार कार्य में लगने की बजाय व्यर्थ हो जाती है। इससे यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक सम्पत्ति की हानि हमारी अपनी हानि है।

प्रश्न 8.
आप जल प्रबन्ध की देख-रेख के लिए सरकार की कैसे सहायता करेंगे ?
उत्तर-
जल प्रबन्ध से भाव उस प्रबन्ध से है जिसके द्वारा हमें नहाने और पीने के लिए जल प्राप्त होता है। इसकी सुरक्षा के लिए हमें अग्रलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  1. हमें नल को आवश्यकता से अधिक नहीं चलाना चाहिए।
  2. सार्वजनिक स्थानों पर जल का प्रयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए।
  3. सार्वजनिक नलों को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचानी चाहिए।
  4. यदि जल प्रबन्ध में कोई रुकावट उत्पन्न हो जाए तो तुरन्त इसकी सूचना सम्बन्धित दफ्तर को देनी चाहिए।

प्रश्न 9.
आप विद्यालय में खेल के मैदान की देख-रेख के लिए अपने विद्यालय के व्यवस्थापकों की कैसे सहायता कर सकते हो?
उत्तर-
(1) विद्यालय के खेल के मैदान में खेलते समय वस्तुओं को टूटने से बचाना चाहिए तथा अन्य बच्चों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
(2) हम खेल के मैदान को साफ़-सुथरा रख कर भी विद्यालय के व्यवस्थापकों की सहायता कर सकते हैं।