PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

Punjab State Board PSEB 6th Class Computer Book Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग Textbook Exercise Questions and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Computer Science Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

Computer Guide for Class 6 PSEB कम्प्यूटर के भाग Textbook Questions and Answers

1. रिक्त स्थान भरो
(i) कम्प्यूटर का कौन-सा भाग यूज़र से इनपुट करता है।
(क) इनपुट यूनिट
(ख) आऊटपुट यूनिट
(ग) कंट्रोल यूनिट
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) इनपुट यूनिट

(ii) निम्न में से कौन-सा सीपीयू का भाग है ?
(क) कंट्रोल यूनिट
(ख) मेमोरी
(ग) ए०एल०यू०
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

(iii) कौन-सी मेमोरी डाटा को पक्के तौर पर स्टोर करती है ?
(क) प्राइमरी मेमोरी
(ख) रैम
(ग) सेकेंडरी मेमोरी
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(ग) सेकेंडरी मेमोरी

(iv) कौन-सा कम्प्यूटर सबसे शक्तिशाली होता है ?
(क) मेनफ्रेम कम्प्यूटर
(ख) मिनी कम्प्यूटर
(ग) माइक्रो कम्प्यूटर
(घ) सुपर कम्प्यूटर।
उत्तर-
(घ) सुपर कम्प्यूटर।

PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

(v) कम्प्यूटर का कौन-सा भाग यूज़र को नतीजा दिखाता है ?
(क) मेमोरी
(ख) इनपुट यूनिट
(ग) कंट्रोल यूनिट
(घ) आऊटपुट यूनिट।
उत्तर-
(घ) आऊटपुट यूनिट।

2. पूरे नाम लिखिए ।

I. ALU II. CPU
III. LCD IV. RAM
V. ROM VI. CU
VII. MU VIII. IPO

उत्तर-

I. ALU Arithmetic and Logical Unit
II. CPU Central Processing Unit
III. LCD Liquid Crystal Display
IV. RAM Random Access Memory
V. ROM Read Only Memory
VI. CU Control Unit
VII. MU Memory Unit
VIII. IPO Input Processing Output.

3. छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
सी०पी०यू० के विभिन्न भागों के नाम लिखो।
उत्तर-
सी०पी०यू० के नाम निम्न अनुसार हैं –

  1. मेमोरी यूनिट
  2. कंट्रोल यूनिट
  3. अर्थमैटिक लॉजिक यूनिट।

प्रश्न 2.
मेमोरी कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर-
मेमोरी दो प्रकार की होती है

  1. प्राइमरी मेमोरी
  2. सेकेंडरी मेमोरी

प्रश्न 3.
सेकेंडरी स्टोरेज यंत्र क्या होते हैं ?
उत्तर-
सेकेंडरी स्टोरेज यंत्र वह यंत्र होते हैं जिनका प्रयोग कम्प्यूटर में पक्के तौर पर डाटा संभालने के लिए किया जाता है। इनको कई बार सेकेंडरी मेमोरी भी कहा जाता है। यह यंत्र दो प्रकार के होते हैं। इन यंत्रों की उदाहरण है हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सीडी, डीवीडी आदि।

प्रश्न 4.
अर्थमैटिक तथा लॉजिक यूनिट का मुख्य काम क्या होता है ?
उत्तर-
अर्थमैटिक तथा लॉजिक यूनिट का मुख्य काम गणितीय गणना करना तथा लॉजिक संबंधी निर्णय लेना होता है। कम्प्यूटर में जितने भी इस प्रकार के काम होते हैं, उन सभी को ए.एल.यू. द्वारा ही पूरा किया जाता है।

प्रश्न 5.
माइक्रो कम्प्यूटर क्या होता है ?
उत्तर-
माइक्रो कम्प्यूटर सबसे छोटे आकार के कम्प्यूटर होते हैं, जिनमें माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग किया जाता है, यह कम्प्यूटर डेस्कटॉप लैपटॉप टेबलेट रूप में उपलब्ध होते हैं। यह सभी कम्प्यूटर आकार में छोटे, वज़न में हल्के तथा एक व्यक्ति द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले होते हैं। इनकी प्रोसेसिंग की गति भी दूसरे कम्प्यूटर से कम होती है। हम जितने भी कम्प्यूटर प्रयोग करते हैं वह सभी इस श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 6.
कम्प्यूटर की विभिन्न श्रेणियां कौन-सी हैं ?
उत्तर-
कम्प्यूटर को निम्न प्रकार की श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. माइक्रो कम्प्यूटर
  2. मिनी कम्प्यूटर
  3. मेनफ्रेम कम्प्यूटर
  4. सुपर कम्प्यू टर।

3. बड़े उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कम्प्यूटर की ब्लॉक डायग्राम से आपका क्या अभिप्राय है ? इसके भागों का वर्णन करें।
उत्तर-
ब्लाक डायाग्राम वह चित्र है जो कम्प्यूटर के कार्य करने के ढंग को दर्शाता है। इसमें तीन भाग दिखाये जाते हैं।
PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 1
1. मेमोरी यूनिट (Memory Unit)-यह यूनिट डाटा तथा निर्देश स्टोर करने का कार्य करता है। यह सी०पी०यू० से नजदीकी सम्बन्ध रखता है पर यह उससे अलग होता है। सी०पी०यू० से सम्बन्धित मेमोरी को प्राइमरी मेमोरी भी कहते हैं। हम जो भी सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में इंस्टाल करते हैं वह पहले प्राइमरी मेमोरी में स्टोर होता है। इसमें दो प्रकार की मेमोरी होती है-

  • प्राइमरी मेमोरी
  • सैकेण्डरी मेमोरी।

2. कंट्रोल यूनिट (Control Unit)-कंट्रोल यूनिट कम्प्यूटर के सारे कार्यों को कंट्रोल करता है। यह कम्प्यूटर के विभिन्न भागों को दिशा-निर्देश देता है जैसे कि इनपुट लेना, प्रोसैसिंग के लिए डाटा स्टोर करना, नतीजे पैदा करना। यह प्रोग्राम की हिदायत को एक-एक करके पढ़ता है, उसका अनुवाद करता है तथा एक क्रम में दूसरे भागों को कंट्रोल करता है। इसके कार्य निम्नलिखित अनुसार होते हैं –

  • निर्देश के लिए कोड पढ़ना
  • कोड का अनुवाद करना |
  • ए०एल०यू० को जरूरी डाटा प्रदान करना।

3. अर्थमैटिक तथा लॉजिकल यूनिट (Arithmetic and Logical Unit)-कम्प्यूटर का यह भाग गणित सम्बन्धी कार्य करता है । इसको कम्प्यूटर के सी०पी०यू० का बिल्डिंग ब्लॉक भी कहा जाता है।
यह निम्न प्रकार के कार्य करता है –

  • पूर्ण अंक अर्थमैटिक फंक्शन (जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग)।
  • बिटवाईज लॉजिक फंक्शन (से कम, से ज्यादा, बराबर)।

PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

प्रश्न 2.
कम्प्यूटर किस प्रकार कार्य करता है ? विस्तार में बताएं।
उत्तर-
कम्प्यूटर इनपुट-प्रोसैस-आऊटपुट के क्रम में कार्य करता हैं। कम्प्यूटर निम्न प्रकार के मूल. ‘कार्य करता है –
1. इनपुट लेना (Input) कम्प्यूटर का पहला कार्य इनपुट लेना है। यह इनपुट डाटा तथा निर्देशों के रूप में हो सकती है। इसके सभी कार्य इनपुट पर ही निर्भर करते हैं। इस इनपुट के बगैर कम्प्यूटर कार्य नहीं कर सकता।

2. प्रोसैस करना (Processing)-प्रोसैस करने का अर्थ है दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करना। इस क्रिया में डाय को जानकारी में बदला जाता है।

3. आऊटपुट देना (Output) आऊटपुट का मतलब है जानकारी मनुष्य को देना। प्रोसैसिंग के बाद जो भी जानकारी तैयार होती है उसे मनुष्य तक पहुंचाया जाता है। यह जानकारी दिए गए निर्देशों के अनुसार ही प्रदान की जाती है।
PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 2
कम्प्यूटर अपने सभी कार्यों पर नियन्त्रण भी करता है। यह अपने साथ लगाए यंत्रों पर भी नियन्त्रण करता है।
4. भंडारण करना (Storage) कम्प्यूटर अपने कार्य में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुएं संभाल कर रखता है। इनका प्रयोग वह प्रोसैस करने या आऊटपुट प्रदान करने में करता है। वह अपने नतीजे भविष्य के लिए भी संभाल कर रखता है।

एक्टिविटी दिए गई आइटमों को उनके मुख्य क्रम में लिखो –

  1. रैम (RAM)
  2. की-बोर्ड (Keyboard)
  3. माऊस (Mouse)
  4. रोम (ROM)
  5. हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)
  6. प्रिंटर (Printer)
  7. माइक्रोफोन (Microphone)
  8. स्पीकर (Speaker)
  9. यू०एस०बी० पैन ड्राइव (USB Pen Drive)
  10. मानीटर/ऐल०सी०डी० (Monitor/LCD)।
    PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 3
    उत्तर-
    PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 5

PSEB 6th Class Computer Guide कम्प्यूटर के भाग Important Questions and Answers

रिक्त स्थान भरो।

(i) ……. को कम्प्यूटर में डाटा तथा निर्देश दाखिल करने की प्रक्रिया कहते हैं।
(क) इनपुट
(ख) आऊटपुट डिवाइस
(ग) सी० पी० यू०
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(क) इनपुट

(ii) डाटा तथा निर्देश को पक्के तौर पर सेव करने की प्रक्रिया को ……. कहते हैं।
(क) मेमोरी
(ख) स्टोरेज
(ग) प्रोसैसिंग
(घ) आऊटपुट।
उत्तर-
(ख) स्टोरेज

(iii) डाटा को प्रोसैस करके महत्त्वपूर्ण सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को …… कहते हैं।
(क) इनपुट
(ख) आऊटपुट
(ग) प्रोसैसिंग
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) आऊटपुट

PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

(iv) प्राइमरी मेमोरी को ……. मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है।
(क) सैकेण्डरी
(ख) मुख्य
(ग) ऐगजुलरी
(घ) सारे ही।
उत्तर-
(ख) मुख्य

(v) सैकेण्डरी मेमोरी को ………… मेमोरी भी कहते हैं।
(क) सैकेण्डरी
(ख) मुख्य
(ग) ऐगजुलरी
(घ) सारे ही।
उत्तर-
(ग) ऐगजुलरी

पूरे नाम लिखिए।
I. IO
II. IPO.

उत्तर
I. I/O – Input Output
II. IPO – Input Processing Output.

छोटे उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कम्प्यूटर के मूल कार्यों का चित्र बनाएं।
उत्तर-
कम्प्यूटर के मूल कार्यों का चित्र ब्लॉक डायाग्राम कहलाता है जो आगे दिए अनुसार होता है-
PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग 6

प्रश्न 2.
मेमोरी के बारे में जानकारी दें और मेमोरी की दो किस्मों के नाम लिखो।
उत्तर-
मेमोरी की जानकारी-कम्प्यूटर की भंडारण करने की क्षमता को मेमोरी कहते हैं। किस्में-

  • प्राइमरी मेमोरी
  • सैकेण्डरी मेमोरी।

प्रश्न 3.
प्राइमरी मेमोरी तथा सैकेण्डरी मेमोरी में अन्तर बताएँ।
उत्तर-
प्राइमरी मेमोरी CPU द्वारा सीधे तौर पर एक्सैस की जाने वाली, कम समर्था वाली, तेज, महंगी और रैंडम एक्सैस टाइप की होती है जबकि सैकेण्डरी मेमोरी CPU द्वारा सीधे तौर पर एक्सैस नहीं की जा सकने वाली, अधिक समर्था वाली, धीमी, सस्ती तथा रैंडम या सिकुएंशिअल एक्सैस टाइप की होती है।

प्रश्न 4.
लैपटाप के बारे में जानकारी दें।
उत्तर-
लैपटाप एक पर्सनल कम्प्यूटर होता है। इसका भार तथा आकार कम होता है। इसकी एक बैटरी होती है जिसे चार्ज किया जा सकता है। इसका प्रयोग सफर करते वक्त भी किया जा सकता है। इसको गोद में रख कर कार्य किया जाता है।

PSEB 6th Class Computer Solutions Chapter 2 कम्प्यूटर के भाग

प्रश्न 5.
टैबलेट क्या होता है ?
उत्तर-
टैबलेट एक प्रकार का पर्सनल कम्प्यूटर होता है। यह स्लेट जैसा पतला होता है। इसमें स्क्रीन होती है। इसमें चार्ज होने वाली बैटरी होती है। इसमें कोई की-बोर्ड नहीं होता।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 10 गति तथा दूरियों का मापन

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 10 गति तथा दूरियों का मापन

→ मापन का अर्थ है कि किसी अज्ञात राशि की तुलना उसी प्रकार की ज्ञात राशि की निश्चित मात्रा से तुलना करना।

→ एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए परिवहन के विभिन्न साधनों का उपयोग किया जाता है।

→ प्राचीनकाल में लोग पैर की लंबाई, अंगुली की चौड़ाई, एक कदम की दूरी को लंबाई आदि का उपयोग मापन के मात्रक के रूप में करते थे।

→ मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (S.I. मात्रक) उपयोग करते हैं जिसे समस्त संसार में मान्यता प्राप्त है।

→ S.I. मात्रकों में लंबाई का मानक मात्रक मीटर है।

→ जब कोई वस्तु अपने चारों ओर की वस्तुओं की तुलना में समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है तो ऐसी अवस्था को गति कहते हैं।

→ यदि कोई वस्तु सीधी रेखा में गति करती है तो उस गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 10 गति तथा दूरियों का मापन

→ यदि कोई वस्तु किसी वृत्ताकार पथ पर गति करती है ताकि उस वस्तु की किसी निश्चित बिंदु से दूरी प्रत्येक समय समान रहती है तो ऐसी गति को वर्तुल गति कहते हैं।

→ ऐसी गति जो एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात् दोहराई जाती है तो उसे आवर्ती गति कहते हैं।

→ दूरी-दो बिंदुओं के बीच की लंबाई का माप दूरी कहलाता है।

→ मापन-मापन से अभिप्राय एक अज्ञात राशि की एक ज्ञात राशि के साथ तुलना करना है।

→ इकाई-एक ज्ञात निश्चित राशि जिसे मानक राशि के रूप में प्रयोग किया जाता है उसे इकाई कहते हैं।

→ ओडोमीटर-मोटरवाहनों में लगाया गया यंत्र जिसे वाहन द्वारा तय की गई दूरी को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है।

→ गति-जब कोई वस्तु समय अंतराल के पश्चात अपने आस-पास की वस्तुओं की तुलना में निरंतर स्थिति परिवर्तन करती है तो उस वस्तु को गति में कहा जाता है।

→ सरल रेखीय गति- यदि कोई वस्तु सरल रेखा में गति करती है तो उस वस्तु की गति सरल रेखीय गति कहलाती है।

→ वर्तुल गति-जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर गति करती है और उसकी किसी निश्चित बिंदु से दूरी प्रत्येक क्षण एक समान रहती है तो उस वस्तु की गति वर्तुल गति कहलाती है।

→ आवर्ती गति-यदि कोई वस्तु अपनी गति को एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात बार-बार दोहराती है तो उस वस्तु की गति आवर्ती गति कहलाती है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

→ हमारे परिवेश में मौजूद सभी वस्तुओं को हम दो भागों में बाँट सकते है भाव सजीव तथा निर्जीव ।

→ प्राणी, पौधे, सूक्ष्म जीव सजीवों के कुछ उदाहरण हैं ।

→ पृथ्वी के प्रत्येक भाग में जीवन अनेक रूपों में विद्यमान है।

→ सभी सजीव वस्तुएँ एक दूसरे से भिन्न दिखती हैं, फिर भी उनमें कुछ विशेषताएँ एक समान होती हैं, जैसे भोजन की आवश्यकता, उत्तेजनाओं के प्रति प्रतिक्रिया, साँस लेना, मल-त्याग, वृद्धि, प्रजनन और गति।

→ निर्जीव वस्तुओं में कुछ विशेषताएँ एक समान होती हैं, जैसे गतिमान न होना, वृद्धि न होना, अपने जैसी अन्य वस्तुओं को पैदा न कर पाना, संवेदनशीलता न होना, साँस न लेना, अपशिष्ट उत्पादों को बाहर न निकालना, भोजन की आवश्यकता न होना, आदि।

→ जिस स्थान पर जीव रहता है उसे उस जीव का आवास कहते हैं।

→ आवास सजीवों को भोजन, पानी, हवा, सुविधा, और सुरक्षा के साथ-साथ प्रजनन करने के लिए सुरक्षित स्थल प्रदान करता है।

→ आवास कई प्रकार के हैं।

→ कुछ जीव जल में रहते हैं। इन्हें जली जीव कहा जाता है।

→ कुछ जीव जमीन पर रहते हैं। इन्हें स्थली जीव कहा जाता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

→ कुछ जीव रेतीले इलाकों में रहते हैं। ये मरुस्थलीय जीव कहलाते हैं।

→ विभिन्न आवासों में जीवों की कई प्रकार की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

→ एक आवास में मिलने वाले पौधे, जानवर, मनुष्य और सूक्ष्मजीव, पर्यावरण के जैविक भाग हैं।

→ किसी आवास के मिलने वाली निर्जीव वस्तुएँ जैसे चट्टानें, मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश और तापमान उस आवास के निर्जीव या भौतिक भाग होते हैं।

→ जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उत्पादक कहलाते हैं।

→ वे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते हैं और अन्य जीवों द्वारा तैयार भोजन नहीं खा सकते हैं उपभोक्ता कहलाते हैं ।

→ जो जीव जीवित रहने के लिए पौधों को खाते हैं, वे शाकाहारी कहलाते हैं।

→ जो जीव जीवित रहने के लिए दूसरे जानवरों को मार कर उनका मांस खाते हैं, वे मांसाहारी कहलाते हैं।

→ जो जीव जीवित रहने के लिए पौधों को या दूसरे जानवरों को मार कर उनका माँस दोनो खाते हैं, वे सर्वाहारी कहलाते हैं।

→ जो जीव मृत पौधों और जानवरों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं, उन्हें विभाजक कहा जाता है।

→ सजीवों की अपने को अपने परिवेश के अनुकूल ढालने की क्षमता को अनुकूलन अथवा अनुकूलित होना कहते हैं ।

→ जिस अवधि तक सजीव जीवित रहते हैं, उसे सजीवों का जीवन काल कहते हैं।

→ विभिन्न जीवों का जीवन काल अलग-अलग होता है।

→ वातावरण में होने वाले परिवर्तन जिन के प्रति हम जैविक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं, उद्दीपन कहलाते हैं।

→ पौधों और जीवों दोनों को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

→ जीव ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

→ हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन को बाहर निकालते हैं।

→ प्रत्येक जीवित वस्तु एक निश्चित तापमान पर ही जीवित रह सकती है।

→ अनुकूलन जीवित चीजों की अपने परिवेश के साथ सह-अस्तित्व की क्षमता है।

→ कुछ जानवर सर्दियों में लंबी अवधि के लिए सोने जैसी स्थिति में चले जाते हैं, इस अवस्था को हाइबरनेशन कहा जाता है।

→ जीवनकाल–जीवन की वह अवधि जिसमें एक जीवित प्राणी रहता है।

→ आवास-वह स्थान जहाँ जीव रहते हैं।

→ सजीव-जिन वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता होती है, उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया करती हैं, साँस लेती हैं, अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालती हैं, बढ़ती हैं, प्रजनन करती हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान तक चल कर जा सकती हैं, उन्हें सजीव कहा जाता है।

→ निर्जीव-जिन वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता नहीं होती है, जो उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं करती हैं, साँस नहीं लेती हैं, अपशिष्ट उत्पादों को बाहर नहीं निकालती हैं, विकसित नहीं होती हैं, प्रजनन नहीं करती हैं और न ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक चल कर जा सकती हैं उन्हें निर्जीव कहा जाता है।

→ स्थलीय आवास-स्थलीय जीव पृथ्वी पर रहते हैं और उनके निवास स्थान को स्थलीय आवास कहा जाता है।

→ जलीय आवास-जलीय जीव पानी के भीतर रहते हैं और उनके आवास को जलीय आवास कहा जाता है।

→ मरुस्थलीय आवास-मरुस्थलीय जीव मरुस्थल में निवास करते हैं और उनके आवास को मरुस्थलीय आवास कहते हैं।

→ उत्पादक-वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं उत्पादक कहलाते हैं ।

→ उपभोक्ता-वे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और अन्य जीवों द्वारा तैयार भोजन खा कर जीवित रहते है उन्हें उपभोक्ता कहते हैं ।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

→ शाकाहारी – जो जीव पौधों को या उनके द्वारा पैदा वस्तुओं को खाते हैं उन्हें शाकाहारी कहते हैं ।

→ मांसाहारी-जीव जो दूसरे जानवरों को मार कर उनका मांस खाते हैं उन्हें मांसाहारी कहते हैं ।

→ सर्वाहारी -जो प्राणी सभी प्रकार का भोजन करते हैं, वे सर्वाहारी कहलाते हैं।

→ विभाजक-सूक्ष्मजीव जो मृत पौधों और जानवरों से भोजन लेते हैं और उन्हें सरल पदार्थों में तोड देते हैं।

→ प्रजनन-यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीवित प्राणी अपने जैसे अन्य जीवित प्राणियों को जन्म देते हैं।

→ अनुकूलता-जीवित चीजों की अपने परिवेश के अनुकूल होने की क्षमता।

→ उदीपन-वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को उदीपन कहते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 8 शरीर मे गति

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 8 शरीर मे गति

→ शरीर में गतियों से हमारा भाव एक जीव के शरीर के किसी भी भाग की स्थिति में परिवर्तन है।

→ गमन एक जीव के पूरे शरीर की एक स्थान से दूसरे स्थान तक की गति है।

→ जानवर गमन और अन्य प्रकार की शारीरिक गतियाँ दिखाते हैं लेकिन पौधे गमन नहीं करते हैं, हालांकि वे कुछ अन्य प्रकार की गतियाँ अवश्य दिखाते हैं।

→ मनुष्य का चलना, मछलियों का तैरना, घोड़े का दौड़ना, साँप का रेंगना, टिड्डी का कूदना और पक्षियों का उड़ना आदि गमन के विभिन्न तरीके हैं।

→ जानवरों द्वारा गमन का उद्देश्य पानी, भोजन तथा आश्रय ढूंढने के साथ-साथ दुश्मनों से अपनी रक्षा करना है।

→ हड्डियाँ अथवा अस्थियों से बना ढांचा जो शरीर को सहारा देता है, कंकाल कहलाता है।

→ हड्डियाँ अथवा अस्थियाँ सख्त और कठोर होती हैं जबकि उपास्थियाँ नर्म और लचीली होती है।

→ मानव कंकाल हड्डियों और उपास्थि से बना होता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 8 शरीर मे गति

→ मानव शरीर में जन्म के समय 300 हइडियाँ होती हैं।

→ वयस्क मानव शरीर में 206 हड्डियाँ होती हैं।

→ पसली पिंजर, पसलियों, रीढ़ की हड्डी और छाती की हड्डी से बना होता है। यह शरीर के आंतरिक अंगों की रक्षा करता है।

→ खोपड़ी मस्तिष्क को परिबद्ध कर उसकी सुरक्षा करती है।

→ जोड़ अथवा संधि वह स्थान है जहां हड्डियाँ अथवा अस्थियाँ आपस में मिलती हैं।

→ टैंडन अथवा कण्डरा एक लचीला ऊतक है जो हड्डियों अथवा अस्थियों को आपस में जोड़ता है।

→ शरीर की गति मांसपेशियों के संकुचन पर निर्भर करती है। ये मांसपेशियाँ हमेशा जोड़ी में काम करती हैं।

→ चाल जानवरों के अंगों की गति का पैटर्न है।

→ केंचुए अपने शरीर की मांसपेशियों के संकुचन और फैलाव से चलते हैं।

→ घोंघा एक बड़े चिपचिपे पेशीय पैर की सहायता से चलता है।

→ एक तिलचट्टा चल सकता है, दौड़ सकता है, चढ़ सकता है और उड़ सकता है।

→ पक्षियों के अग्रपाद पंखों में बदले हुए हैं जो उड़ान में मदद करते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 8 शरीर मे गति

→ मछली का शरीर धारा रेखीय होता है और यह अपने शरीर पर पार्श्व में पाए जाने वाले पंखों से चलती है ।

→ पक्षियों में धारा रेखीय शरीर और खोखली एवं हल्की हड्डियाँ होती हैं जो उड़ान के दौरान उनकी मदद करती हैं।।

→ साँप अपने पेट पर रेंग कर चलते हैं।

→ विभिन्न प्रकार के जोड़ अथवा संधियाँ अलग-अलग दिशाओं में गति की अनुमति देती हैं।

→ हमारे शरीर में कई प्रकार के जोड़ अथवा संधियाँ होती हैं जैसे बॉल और सॉकेट या कंदुक खल्लिका जोड़ अथवा संधि, हिंज जोड़ अथवा संधि, स्थिर या अचल जोड़ अथवा संधि और धुराग्र जोड़ अथवा संधि।

→ गेंद और सॉकेट या कंदुक खल्लिका जोड़ या संधि एक गोलाकार रूप में या सभी दिशाओं में गति की अनुमति देती है।

→ हिंज जोड़ या संधि आगे और पीछे गति की अनुमति देता है।

→ धुराग्र जोड़ या संधि आगे और पीछे की दिशा, दाएं या बाएं गति की अनुमति देता है। गर्दन और सिर का जोड या संधि इसका उदाहरण है।

→ स्थिर जोड़ अचल होते हैं।

→ एक्स-रे हड्डियों की संख्या गिनने और शरीर में हड्डियों के आकार का अध्ययन करने में मदद करता है।

→ गति-एक जीव के शरीर के किसी भी भाग की स्थिति में परिवर्तन को गति कहा जाता है।

→ गमन-एक जीव के पूरे शरीर का एक स्थान से दूसरे स्थान तक की गति को गमन कहा जाता है।

→ अस्थि-यह कंकाल का वह भाग है जो प्रकृति में कठोर होता है।

→ संधि-यह शरीर का वह स्थान है जहां दो या दो से अधिक हड्डियाँ किसी प्रकार की गति के लिए मिलती

→ उपास्थि-जोड़ों में पाए जाने वाला चिकने, मोटे और लचीले ऊतक को उपास्थि कहते हैं।

→ अचल संधि-जिन जोड़ों पर हड्डियाँ गति नहीं कर सकतीं उन्हें स्थिर अथवा अचल संधि कहा जाता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 8 शरीर मे गति

→ गतिशील जोड़ अथवा संधि-जिन जोड़ों अथवा संधियों में हड्डियों की गति संभव होती है उन्हें गतिशील जोड़ अथवा संधि कहा जाता है।

→ कंकाल-शरीर का वह ढाँचा जो शरीर को सहारा और आकार देता है, कंकाल कहलाता है।

→ धारा रेखीय वस्तु-कोई भी वस्तु जो दोनों सिरों पर नोकीली तथा मध्य में चौड़ी या चपटी होती है, धारा रेखीय वस्तु कहलाती है।

→ कण्डरा-मजबूत, रेशेदार ऊतक जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ता है, टैंडन अथवा कण्डरा कहलाता है।

→ स्नायुबंधन अथवा लिगामैंट-मजबूत, लचीला ऊतक जो दो हड्डियों को जोड़ता है उसे स्नायुबंधन अथवा लिगामैंट कहते हैं।

→ श्रोणि अस्थियाँ- इन्हें कूल्हे की अस्थियाँ भी कहते हैं। ये बॉक्स के समान एक ऐसी संरचना बनाती हैं जो आमाशय के नीचे के अंगों की रक्षा करती है।

→ धुराग्र संधि-गर्दन और सिर को जोडने वाली संधि को धुराग्र संधि कहते हैं। इसमें बेलनाकार अस्थि एक छल्ले में घूमती है।

→ पसली पिंजर-यह वक्ष की अस्थि एवं मेरुदंड से जुड़कर बना एक बक्सा होता है जो कोमल अंगों की सुरक्षा करता है।

→ कंधे की अस्थियाँ-कंधों के समीप दो उभरी हुई अस्थियाँ होती हैं जिन्हें कंधे की अस्थियाँ कहते हैं।

→ शूक-केंचुए के शरीर में बालों जैसी बारीक संरचनाएं होती हैं जिनकी सहायता से वह गति करता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 7 पौधों को जानिए

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 7 पौधों को जानिए

→ पौधों को आम तौर पर उनकी ऊंचाई, तने और शाखाओं के आधार पर जड़ी-बूटीयों, झाड़ियों, पेड़ों और लताओं में वर्गीकृत किया जाता है।

→ जड़ी-बूटीयाँ एक मीटर से कम ऊँचे पौधे होते हैं और इनके तने मुलायम और हरे रंग के होते हैं।

→ झाड़ियाँ मध्यम आकार के (1-3 मीटर लम्बे) पौधे होते हैं। उनके तने सख्त होते हैं और उनकी शाखाएँ तने के आधार पर (जमीन के बहुत करीब) होती हैं।

→ पेड लम्बे और बड़े पौधे (ऊंचाई 3 मीटर से अधिक) होते हैं। उनका तना मजबूत होता है और उनकी शाखाएँ तने के आधार (जमीन से कुछ ऊंचाई) के ऊपर निकलती हैं।

→ पौधे के प्रत्येक भाग का एक विशिष्ट कार्य होता है।

→ पौधे की संरचना को दो भागों में बाँटा गया है-जड़ प्रणाली और तना प्रणाली।

→ जड़ प्रणाली जमीन के नीचे होती है और तना प्रणाली जमीन के ऊपर होती है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 7 पौधों को जानिए

→ जड़ और तना दोनों प्रणालियाँ भोजन का भंडारण करती हैं।

→ तना प्रणाली में तना, पत्तियाँ, फूल आदि आते हैं।

→ तने को गाँठों और अंतर-गाँठों में विभाजित किया जाता है।

→ तने का वह भाग जहाँ से नई शाखाएँ और पत्तियाँ निकलती हैं, गाँठ कहलाती है।

→ दो गाँठों के बीच के स्थान को अंतर-गाँठ कहते हैं।

→ तने पर छोटे-छोटे उभारों को कलियाँ कहते हैं।

→ पौधे का तना पानी को जड़ से पत्तियों और अन्य भागों तक और भोजन को पत्तियों से पौधे के अन्य भागों तक ले जाता है।

→ कमजोर तने वाले पौधे जो सीधे खड़े नहीं हो सकते और बढ़ने के लिए आसपास की वस्तुओं की सहायता से ऊपर चढ़ते हैं उन्हें आरोही अथवा कलाईंबर बेलें कहा जाता है।

→ कुछ जड़ी-बूटीयों के तने कमजोर होते हैं जो अपने आप सीधे खड़े नहीं हो सकते और जमीन पर फैल जाते हैं। ऐसे पौधों को क्रीपर बेलें कहा जाता है।

→ पत्ता पौधे का एक पतला, चपटा और हरा भाग होता है जो तने की गाँठ से निकलता है। विभिन्न पौधों के पत्ते आकार और रंग में भिन्न होते हैं।

→ पत्तों का हरा रंग क्लोरोफिल की उपस्थिति के कारण होता है, जो एक हरा वर्णक है।

→ पत्ता तने से पतले डंडी से जुड़ा होता है।

→ पत्ते के उभरे हुए भाग को ब्लेड या फलक या लैमिना कहते हैं।

→ पत्ते में शिराओं का जाल होता है जिसे शिरा विन्यास भी कहते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 7 पौधों को जानिए

→ शिरा विन्यास दो प्रकार का होता है अर्थात जालीदार एवं समानांतर।

→ विभिन्न पौधों में अलग-अलग प्रकार के शिरा विन्यास होते हैं।

→ पत्ते वाष्पोत्सर्जन विधि द्वारा वायु में जल छोड़ते हैं।

→ हरे पत्ते सूर्य के प्रकाश में जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं।

→ पत्तों की सतह पर बहुत छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं।

→ जड़ें आमतौर पर दो प्रकार की होती हैं – पेशीय जड़ें और रेशेदार जड़ें।

→ शिराओं और पौधों की जड़ों के बीच घनिष्ठ संबंध है।

→ जिन पौधों के पत्तों में जालीदार शिराएँ होती हैं, उनमें पेशीय जड़ें होती हैं।

→ जिन पौधों की पत्तियों में समानांतर शिराएँ होती हैं उनमें रेशेदार जड़ें होती हैं।

→ फूल एक पौधे का सबसे सुंदर, आकर्षक और रंगीन हिस्सा होता है जो पौधे का प्रजनन अंग होता है।

→ जिस भाग से फूल तने से जुड़ा होता है, उसे पेडिकल केहते हैं।

→ फूलों के अलग-अलग भाग होते हैं- हरी पत्तियाँ, पंखुड़ियाँ, पुंकेसर और मादा केसर।

→ फूल की बाहरी हरी पत्ती जैसी संरचनाओं को हरी पत्तियाँ और सामूहिक रूप से उन्हें कैलेक्स कहा जाता है।

→ एक फूल की हरी पत्तियों के अंदर मौजूद रंगीन, पत्ती जैसी संरचनाओं को पंखुड़ी कहा जाता है और सामूहिक रूप से उन्हें कोरोला भी कहा जाता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 7 पौधों को जानिए

→ पंखुड़ियाँ कीड़ों को आकर्षित करती हैं और प्रजनन में मदद करती हैं।

→ पुंकेसर, नर प्रजनन अंग है और मादा केसर मादा प्रजनन अंग है।

→ प्रत्येक पुंकेसर में एक पतला तना होता है जिसे तंतु कहा जाता है और इसके शीर्ष पर दो भागों में विभाजित संरचना होती है जिसे पराग कोशिका कहा जाता है।

→ पराग कोशिकाएं पराग का निर्माण करती हैं और प्रजनन में भाग लेती हैं।

→ मादा केसर एक पतली, बोतल के आकार की संरचना होती है जो फूल के बीच में मौजूद होती है।

→ महिला केसर को आगे तीन भागों में बांटा गया है-

  1. अंडाशय
  2. वर्तिका
  3. वर्तिकाग्र।

मादा केसर का निचला भाग अंडाशय कहलाता है। इसमें बीज और अंडे होते हैं जो प्रजनन में भाग लेते हैं।

→ मादा केसर के संकीर्ण, मध्य भाग को वर्तिका कहा जाता है।

→ वर्तिका के शीर्ष पर चिपचिपा भाग वर्तिकाग्र कहलाता है।

→ जड़ी-बूटी- एक मीटर से कम ऊंचाई वाले और मुलायम एवं हरे तने वाले पौधे जड़ी-बूटी अथवा खरपतवार कहलाते हैं।

→ आरोही या कलाईंबर लताएँ-कमजोर तने वाले पौधे होते हैं जो सीधे खड़े नहीं हो सकते हैं और बढ़ने के लिए आसपास की वस्तुओं पर निर्भर रहते हैं। उन्हें आरोही या कलाईंबर लताएँ कहा जाता है।

→ क्रीपर या लता बेल-कुछ जड़ी-बूटीयों या खरपतवारों के तने कमजोर होते हैं जो अपने आप सीधे खड़े नहीं हो पाते और जमीन पर फैल जाते हैं। ऐसे पौधों को क्रीपर या लता बेलें कहा जाता है।

→ जड़ प्रणाली-जड़ वाले पौधे के भूमिगत भाग को जड़ प्रणाली कहा जाता है।

→ तना प्रणाली-जड़ वाले पौधे की जमीन के ऊपरी भाग को तना प्रणाली कहा जाता है।

→ डंडी-पत्ते की लंबी संरचना जो पत्ते को तने से जोड़ता है।

→ फलक या लैमिना-पत्ते का सपाट, हरा भाग।

→ गाँठ-तने पर वह स्थान जहाँ पत्तियाँ निकलती हैं।

→ अंतर-गाँठ-दो गांठों के बीच का तने का भाग।

→ विन्यास- एक पत्ती में शिराओं की व्यवस्था।

→ एक्सिल-पत्ते का तने से बना कोण।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 7 पौधों को जानिए

→ वाष्पोत्सर्जन-पत्तों से जलवाष्प का वाष्पीकरण।

→ रंध्र-पत्तों की सतह पर महीन छिद्र।

→ पंखुड़ियाँ-एक फूल की हरी पंखुड़ियों के अंदर रंगीन, पत्ती जैसी संरचनाओं को पंखुड़ियाँ कहा जाता है।

→ कोरोला-पंखुड़ियों के समूह जिसे कोरोला कहा जाता है।

→ हरी पत्तियाँ-फूल की बाहरी हरी पत्ती जैसी संरचनाओं को हरी पत्तियाँ कहते हैं।

→ कैलेक्स-हरी पत्तियों के समूह को कैलेक्स कहते हैं।

→ पुंकेसर-फूल का नर भाग।

→ पराग कोशिकाएँ-पुंकेसर के दो भागों वाले शीर्ष को पराग कोशिका कहते हैं।

→ मादा केसर-फूल का मादा भाग।

→ अंडाशय-मादा केसर का नीचे वाला चौड़ा भांग जिसमें बीज होते हैं, अंडाशय कहलाता है।

→ वर्तिका-मादा केसर के संकीर्ण, मध्य भाग को वर्तिका कहा जाता है।

→ वर्तिकाग्र-वर्तिका के शीर्ष पर चिपचिपा भाग वर्तिकाग्र कहलाता है।

PSEB 6th Class Science Solutions Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

Punjab State Board PSEB 6th Class Science Book Solutions Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 6 Science Chapter 9 सजीव और उनका परिवेश

PSEB 6th Class Science Guide सजीव और उनका परिवेश Textbook Questions, and Answers

1. खाली स्थान भरें

(i) एक मछली का श्वसन अंग ………………….. है ।
उत्तर-
गलफड़े

(ii) पर्यावरण के ……………….. और ……………….. भाग हैं ।
उत्तर-
सजीव, निर्जीव

(iii) सूर्य का प्रकाश आवास का ………………… भाग है।
उत्तर-
निर्जीव या भौतिक

(iv) पृथ्वी पर रहने वाले जीवों को ………………… कहा जाता है।
उत्तर-
स्थलीय जीव

(v) सभी ………………….. वृद्धि दिखाते और प्रजनन करते हैं।
उत्तर-
सजीव ।

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2. सही या ग़लत बताओ

(i) कैक्टस तनों का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण क्रिया करता है।
उत्तर-
सही

(ii) ऊँट का कूब भोजन और पानी एकत्र करता है।
उत्तर-
ग़लत

(iii) सभी हरे पौधे उत्पादक हैं।
उत्तर-
ग़लत

(iv) जैविक भाग जल, वायु और मिट्टी हैं।
उत्तर-
ग़लत

3. कॉलम ‘क’ का कॉलम ‘ख’ से उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत (i) पौधे या जानवर
(ii) वृक्षवासी (ii) शूल (कांटे)
(iii) कैक्टस (iii) बंदर
(iv) जैविक भाग (iv) सूर्य।

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत (iv) सूर्य
(ii) वृक्षवासी (iii) बंदर
(iii) कैक्टस (ii) शूल (कांटे)
(iv) जैविक भाग (i) पौधे या जानवर।

4. सही विकल्प चुनें

प्रश्न (i)
अजैविक भाग में शामिल हैं-
(क) हवा, पानी, पौधे
(ख) पौधे और जानवर
(ग) हवा, पानी, मिट्टी
(घ) मिट्टी, पौधे, पानी।
उत्तर-
(ग) हवा, पानी, मिट्टी।

प्रश्न (ii)
कैक्टस एक-
(क) मरुस्थलीय पौधा
(ख) जलीय पौधा
(ग) विभाजक
(घ) जड़ी बूटी।
उत्तर-
(क) मरुस्थलीय पौधा।

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प्रश्न (iii)
………………………… का धारा रेखीय शरीर होता है।
(क) केंचुए ।
(ख) मछलियाँ
(ग) तेंदुए
(घ) पहाड़ी भालू।
उत्तर-
(ख) मछलियाँ।

प्रश्न (iv)
पानी में रहने वाले जीवों को …………………. जीव कहा जाता है।
(क) जलीय
(ख) स्थलीय पौधे
(ग) स्थलीय
(घ) हवाई।
उत्तर-
(क) जलीय।

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
आवास को परिभाषित करें।
उत्तर-
जिस स्थान पर कोई प्राणी रहता है उसे उसका निवास स्थान कहा जाता है। अपने आवास में प्राणी भोजन, पानी, वायु, सहारा, सुविधा, और सुरक्षा प्राप्त करता है और प्रजनन करता है।

प्रश्न (ii)
स्थलीय और जलीय जीवन के दो उदाहरण दें।
उत्तर-
स्थलीय जीव – शेर, तेंदुआ
जलीय जीव – मेंढक, शार्क।

प्रश्न (iii)
अनुकूलता को परिभाषित करें।
उत्तर-
जीवों की अपने परिवेश के साथ सह-अस्तित्व की क्षमता को अनुकूलन अथवा अनुकूलता कहा जाता है।

प्रश्न (iv)
निर्माता क्या हैं?
उत्तर-
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं उत्पादक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हरे पौधे। इन्हें उत्पादक कहा जाता है क्योंकि ये प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के माध्यम से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

प्रश्न (v)
जैविक भाग क्या हैं?
उत्तर-
एक आवास में रहने वाली चीजें जैसे पौधे, जानवर, मनुष्य और सूक्ष्मजीव पर्यावरण के जैविक अंश कहलाते हैं।

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6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न (i)
मृताहारी और विभाजक को परिभाषित करें।
उत्तर-

  1. मृताहारी – कुछ जानवर मरे हुए जानवरों को भोजन के रूप में खाते हैं और हमारे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए गिद्ध, कुत्ता, चील, कौआ।
  2. विभाजक-सूक्ष्मजीव, जो मृत पौधों और जानवरों को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं और उन्हें सरल पदार्थों में तोड़ते हैं, विभाजक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए बैक्टीरिया और कवक।

प्रश्न (ii)
मछली की दो अनुकूलन संबंधी विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर-
मछली की दो अनुकूलन संबंधी विशेषताएँ हैं

  1. इसका शरीर रैखिक होता है।
  2. पानी से घुलित ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए उनमें गलफड़े होते हैं।

प्रश्न (iii)
रेगिस्तान का जहाज़ किस जानवर को कहते हैं ? कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
ऊँट को रेगिस्तान का जहाज़ कहा जाता है। ऊँट की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं जिनके कारण वह रेगिस्तान में आसानी से जीवित रह सकता है-

  1. ऊँट में पसीने की ग्रंथियां नहीं होती हैं और पानी की कमी को कम करने के लिए बहुत कम पेशाब करता है।
  2. ऊँट की पीठ पर एक या दो कूबड़ होते हैं। ऊँट इन कूबड़ों में वसा को भोजन के रूप में संचित करता है।
  3. इसकी त्वचा इतनी मोटी है कि यह रेगिस्तान की गर्मी को सहन कर सकता है ।
  4. इसके पैर चौड़े और गद्दीदार हैं जो इसे रेगिस्तान की गर्म रेत पर चलने के लिए उपयुक्त बनाता है।

प्रश्न (iv)
जलमग्न और तैरते हुए पौधों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जलमग्न पौधे पूरी तरह से जल के भीतर होते हैं और तैरते हुए पौधे पानी की सतह पर तैरते रहते हैं।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न (i)
टिप्पणी लिखें-
(1) उत्पादक
(2) उपभोक्ता
(3) विभाजक।
उत्तर-
(1) उत्पादक – वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं उत्पादक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हरे पौधे । इन्हें उत्पादक कहा जाता है क्योंकि ये प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के माध्यम से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

(2) उपभोक्ता- उपभोक्ता वे प्राणी हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते लेकिन हरे पौधों और अन्य जीवों से भोजन प्राप्त करते हैं। उपभोक्ता तीन प्रकार के होते हैं-
(a) प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता या शाकाहारी – वे जंतु जो अपना भोजन पौधों से सीधे प्राप्त करते हैं, प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता या शाकाहारी कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हाथी, हिरण, गाय और बकरी।
(b) द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता या मांसाहारी-ये प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताओं को भोजन के रूप में खाते हैं। उदाहरण के लिए – साँप, मेंढक, छिपकली।
(c) तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता-ये द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं के खाते हैं। उदाहरण के लिए-शेर, तेंदुआ।

(3) विभाजक – सूक्ष्मजीव जो मृत पौधों और जानवरों को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं और उन्हें सरल पदार्थों में तोड़ते हैं, विभाजक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए बैक्टीरिया और कवक।

प्रश्न (ii)
विभिन्न प्रकार के आवासों के बारे में संक्षेप में चर्चा करें।
उत्तर-
आवास के तीन मुख्य प्रकार हैं-
(1) स्थलीय आवास
(2) जलीय आवास
(3) हवाई आवास

(1) स्थलीय आवास – पृथ्वी पर रहने वाले जीव स्थलीय या स्थलीय जीव कहलाते हैं और उनके निवास स्थान को स्थलीय आवास कहा जाता है।
उदाहरण के लिए-रेगिस्तान, घास के मैदान, पहाड़ और जंगल।

(2) जलीय आवास – वे जीव जो जल के विभिन्न स्रोतों जैसे झीलों, तालाबों, तालाबों और महासागरों में रहते हैं जलीय जीव कहलाते हैं और उनके आवास को जलीय आवास कहा जाता है। उदाहरण के लिए – खारे पानी का आवास, महासागर, समुद्र और कुछ झीलें।

(3) हवाई आवास – यह उन जीवों का निवास स्थान है जो अपना अधिकांश जीवन हवा में जीते हैं। इन्हें वृक्षवासी भी कहा जाता है। अधिकाँश पक्षी और पँख वाले जानवर निवास स्थान में रहते हैं। ये जीव हवा में रहने के लिए अनुकूलित हैं क्योंकि कोई भी प्राणी हवा में पैदा नहीं होता है।

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प्रश्न (iii)
आवास के जैविक एवं अजैविक भागों के आपसी तालमेल पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
आवास के जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रियाएँ हमारी पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए बहुत ही आवश्यक हैं । किसी भी सजीव के लिए जीवित रहना तभी संभव है जब वह अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों के प्रति इस प्रकार की क्रिआएँ करता है जिनके कारण वह बदले हुए हालातों में स्वयँ को जीवित रख सकता है। इस प्रकार की क्षमता को अनुकूलन कहते है। इसके हमारे पास कई उदाहरण हैं-
गर्म स्थानों पर रहने वाले जीवों की चमड़ी मोटी होती है। इससे वे अधिक गर्मी में भी पानी की कमी से झूझ लेते है।
सर्द स्थानों पर रहने वाले जीवों की फर होती है । फर से हमारा मतलब है बालों की मोटी परत । यह उन्हें बहुत अधिक सर्दी से बचाती है।

जलीय आवासों में रहने वाले जीवों का शरीर धारा रेखीय होता है। इसके कारण वे पानी में आसानी से तैर लेते है।
जिन क्षेत्रों में अधिक गर्मी पड़ती है उनमें पौधों के पत्ते कांटों में बदल जाते है तथा प्रकाश-संश्लेषण का कार्य तने द्वारा किया जाता है।

इस प्रकार आवास के जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रियाओं के कारण सजीव स्वयँ को कठिन परिस्थितियों में भी बचा लेते हैं।

प्रश्न (iv)
सजीव और निर्जीव वस्तुओं के बीच अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
सजीव और निर्जीव वस्तुओं में अंतर-

सजीव वस्तुएं निर्जीव वस्तुएँ
(1) सजीव वस्तुएँ अपने शरीर के अंगों या भागों में हिलाजुला सकती हैं। (1) निर्जीव वस्तुएँ गति नहीं कर सकतीं।
(2) सजीवों में वृद्धि होती है। (2) निर्जीव वस्तुओं में कोई वृद्धि नहीं होती है।
(3) सजीव वस्तुएँ अपने समान अन्य सजीव वस्तुएँ उत्पन्न करती हैं। (3) निर्जीव प्राणी अपने समान जीव उत्पन्न नहीं करते।
(4) सजीव वस्तुएँ अपने आस-पास होने वाले परिवर्तनों को समझ सकते हैं। (4) निर्जीव महसूस नहीं कर सकता।
(5) सजीव वस्तुएँ साँस लेती हैं। (5) निर्जीव वस्तुएँ साँस नहीं लेती हैं।
(6) सजीव वस्तुएँ शरीर से अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालती हैं। (6) निर्जीव कचरे को बाहर नहीं निकालाता है।
(7) सजीव वस्तुएँ को भोजन की आवश्यकता होती है। (7) निर्जीव वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता नहीं होती।

PSEB Solutions for Class 6 Science सजीव और उनका परिवेश Important Questions and Answers

1. बहुविकल्पीय प्रश्न प्रल

प्रश्न (i)
निम्न में से कौन-सा मरुस्थलीय पौधा है ?
(क) मक्का
(ख) गेहँ
(ग) कैक्टस
(घ) धान।
उत्तर-
(ग) कैक्टस।

प्रश्न (ii)
गाय का श्वसन अंग है-
(क) गलफड़ा
(ख) त्वचा
(ग) ट्रेकिया
(घ) फेफड़ा।
उत्तर-
(घ) फेफड़ा।

प्रश्न (iii)
हाइड्रिला पौधा है-
(क) मरुस्थलीय
(ख) स्थलीय
(ग) जलीय
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ग) जलीय।

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प्रश्न (iv)
कौन-सा जीव रात्रिचर है?
(क) गाय
(ख) चमगादड़
(ग) मेंढक
(घ) घोड़ा।
उत्तर-
(ख) चमगादड़।

प्रश्न (v)
निम्न में से सजीव है-
(क) हल
(ख) मशरूम
(ग) जल
(घ) ऊन।
उत्तर-
(ख) मशरूम।

प्रश्न (vi)
वह प्रक्रिया जिससे अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बाहर फेंके जाते हैं-
(क) पाचन
(ख) उत्सर्जन
(ग) जनन
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) उत्सर्जन।

प्रश्न (vii)
गलफड़े किस जीव के श्वसन अंग हैं ?
(क) मछली
(ख) मेंढक
(ग) मच्छर
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(क) मछली।

प्रश्न (viii)
कुत्ते के पिल्ले वयस्क बन जाते हैं। सजीवों की यह विशेषता है-
(क) जनन
(ख) वृद्धि
(ग) श्वसन
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) वृद्धि।

प्रश्न (ix)
पर्वतीय प्रदेशों के पौधों के पत्ते होते हैं-
(क) चौड़े फलक वाले
(ख) सुई के आकार के
(ग) काँटेदार
(घ) कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) सुई के आकार के।

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प्रश्न (x)
बीजों के अंकुरण के लिए आवश्यक कारक हैं-
(क) वायु
(ख) जल
(ग) प्रकाश
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(घ) उपरोक्त सभी।

2. खाली स्थान भरें

(i) …………………. वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकती हैं।
उत्तर-
सजीव

(ii) पक्षियों का आवास ………………….. हैं ।
उत्तर-
पेड़

(iii) ………………… विभाजक के रूप में कार्य करते हैं।
उत्तर-
सूक्ष्मजीव

(iv) …………………. कूबड़ में भोजन जमा करता है।
उत्तर-
ऊँट

(v) पक्षी का शरीर ……………………….. होता है ।
उत्तर-
धारा रेखीय।

3. सही या ग़लत चुनें

(i) गेहूँ एक मरुस्थलीय पौधा है।
उत्तर-
ग़लत

(ii) मछलियों और पक्षियों के शरीर धारा रेखीय होते हैं।
उत्तर-
सही

(iii) सूर्य का प्रकाश आवास का जैविक घटक है।
उत्तर-
ग़लत

(iv) कैक्टस में पत्तों द्वारा प्रकाश संश्लेषण होता है।
उत्तर-
ग़लत

(v) मनुष्य में अनुकूलन करने की शक्ति नहीं है।
उत्तर-
ग़लत

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4. कॉलम ‘क’ और कॉलम ‘ख’ का उचित मिलान करें

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) जीवित (a) हाइड्रैला
(ii) निर्जीव (b) अजैविक तत्व
(iii) जलीय आवास (c) प्रजनन
(iv) मरूस्थलीय आवास (d) भोजन की आवश्यकता नहीं है
(v) मिट्टी, हवा, पानी आदि (e) कैक्टस

उत्तर-

कॉलम ‘क’ कॉलम ‘ख’
(i) जीवित (c) प्रजनन
(ii) निर्जीव (d) भोजन की आवश्यकता नहीं है
(iii) जलीय आवास (a) हाइड्रैला
(iv) मरूस्थलीय आवास (e) कैक्टस
(v) मिट्टी, हवा, पानी आदि (b) अजैविक तत्व

5. अति लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
परिवेश किसे कहते हैं ?
उत्तर-
परिवेश – किसी जीव के इर्द-गिर्द का स्थान जहाँ वह रहता है, उसे परिवेश कहते हैं।

प्रश्न 2.
दो प्रकार के परिवेश की उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
मरुस्थलीय परिवेश और समुद्री परिवेश।

प्रश्न 3.
मरुस्थल में रहने वाले जंतुओं और पौधों का एक अभिलक्षण बताएँ।
उत्तर-
मरुस्थल में रहने वाले जंतु और पौधे पानी का अल्पमात्रा में प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 4.
ऊँट मरुस्थलीय परिस्थितियों में रहने के अनुकूल है। इसका एक अभिलक्षण बताएँ।
उत्तर-
ऊँट में मूत्रोत्सर्जन की मात्रा बहुत कम होती है तथा मल शुष्क होता है।

प्रश्न 5.
मछली जल में रहने के अनुकूलन है। इसका अभिलक्षण बताएँ।
उत्तर-
मछली का शरीर धारारेखीय होता है जिससे यह आसानी से पानी में तैर सकती है।

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प्रश्न 6.
अनुकूलन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
अनुकूलन – जिन विशिष्ट संरचनाओं अथवा स्वभाव की उपस्थिति किसी पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है उसे अनुकूलन कहते हैं।

प्रश्न 7.
आवास किसे कहते हैं ?
उत्तर-
आवास – किसी सजीव का वह परिवेश जिसमें वह रहता है, उसका आवास कहलाता है।

प्रश्न 8.
स्थलीय-आवास किसे कहते हैं ?
उत्तर-
स्थलीय-आवास – स्थल अथवा ज़मीन पर पाए जाने वाले पौधों एवं जंतुओं के आवास को स्थलीय आवास कहते हैं।

प्रश्न 9.
स्थलीय-आवासों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
वन, घास के मैदान, मरुस्थल, तटीय एवं पर्वतीय क्षेत्र स्थलीय आवास के उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
जलीय-आवास किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जलीय-आवास – जल में रहने वाले जंतुओं और पौधों के आवास को जलीय आवास कहते हैं।

प्रश्न 11.
जलीय-आवास के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जलाशय, दलदल, झील, नदियाँ एवं समुद्र जलीय आवास हैं।

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प्रश्न 12.
जैव घटक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जैव घटक – किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जैव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक कहलाते हैं।

प्रश्न 13.
अजैव घटक किसे कहते हैं ?
उत्तर-
अजैव घटक – चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल और तापमान, प्रकाश किसी परिवेश के अजैव घटक कहलाते हैं।

प्रश्न 14.
कुछ मरुस्थलीय जंतु बिलों में क्यों रहते हैं ?
उत्तर-
चूहे एवं साँप जैसे जंतु तेज़ गर्मी से बचने के लिए भूमि के अंदर गहरे बिलों में रहते हैं। रात्रि के समय जब तापमान में कमी आती है तो यह बाहर निकलते हैं।

प्रश्न 15.
मरुस्थलीय पौधों की एक विशेषता लिखिए।
उत्तर-
मरुस्थलीय पौधों में पत्तियाँ या तो अनुपस्थित होती हैं अथवा बहुत छोटी शूल जैसी होती हैं।

प्रश्न 16.
नागफनी के पौधों की हरी संरचना किसका तना है अथवा पत्ती ?
उत्तर-
नागफनी में पत्ती जैसी जिस संरचना जो हम देखते हैं, वह वास्तव में इसका तना है।

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प्रश्न 17.
नागफनी के पौधे में प्रकाश-संश्लेषण किस भाग में होता है ?
उत्तर-
नागफनी में प्रकाश-संश्लेषण हरी संरचना जिसे तना कहते हैं उसमें होता है।

प्रश्न 18.
नागफनी का तना एक मोटी मोमी परत से क्यों ढका होता है ?
उत्तर-
मोटी मोमी परत पौधे को जल संरक्षण में सहायता करती है।

प्रश्न 19.
मरुस्थलीय पौंधों में जड़ें बहुत गहरी क्यों होती हैं ?
उत्तर-
मरुस्थलीय पौधों में जड़ जल अवशोषण के लिए मिट्टी में बहुत गहराई तक चली जाती है।

प्रश्न 20.
पर्वतीय क्षेत्रों के वृक्ष सामान्यतः कैसे होते हैं ?
उत्तर-
पर्वतीय क्षेत्रों के वृक्ष सामान्यत: शंक्वाकार होते हैं तथा इनकी शाखाएँ तिरछी होती हैं। इनमें से कुछ वृक्षों की पत्तियाँ सूई के आकार की होती हैं।

प्रश्न 21.
पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले जंतुओं में क्या अनुकूलित होता है ?
उत्तर-
पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतुओं की मोटी त्वचा या फर ठंड से इनका बचाव करती है। .

प्रश्न 22.
यॉक ठंड वाले क्षेत्रों में रहने के लिए कैसे अनुकूल है ?
उत्तर-
यॉक के शरीर पर लंबे बाल होते हैं जो उसे गर्म रखते हैं और ठंड से बचाते हैं।

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प्रश्न 23.
पहाड़ी बकरी ढालदार चट्टानों पर दौड़ने के लिए कैसे अनुकूलित है ?
उत्तर-
पहाड़ी बकरी के मज़बूत खुर उसे ढालदार चट्टानों पर दौड़ने के लिए अनुकूलित बनाते हैं।

प्रश्न 24.
पहाड़ी तेंदुए ठंडे पर्वतीय क्षेत्र में रहने के लिए कैसे अनुकूलित हैं ?
उत्तर-
पहाड़ी तेंदुओं के शरीर पर फर होते हैं। यह बर्फ पर चलते समय उसके पैरों को ठंड से बचाते हैं।

प्रश्न 25.
हिरण घास स्थल में रहने के लिए कैसे अनुकूलित है ?
उत्तर-
पौधों के कठोर तनों को चबाने के लिए इसके मज़बूत दाँत होते हैं।

प्रश्न 26.
हिरण में कौन-सी अनुकुलन है इसे शिकारी के खतरे को महसूस कराती है ?
उत्तर-
हिरण के लंबे कान उसे शिकारी की गतिविधि की जानकारी देते हैं। दूसरे इसके सिर के पार्श्व के दोनों ओर स्थित आँखें प्रत्येक दिशा में देखकर खतरा महसूस कराती हैं।

प्रश्न 27.
मछली जल में सुगमता से क्यों तैर सकती है ?
उत्तर-
मछली का शरीर धारारेखीय होता है, जिससे वह जल में सुगमता से तैर सकती है।

प्रश्न 28.
मछली साँस कैसे लेती है ?
उत्तर-
मछली गिल (क्लोम) की सहायता से साँस लेती है। क्योंकि मछली में फेफड़े नहीं होते।

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प्रश्न 29.
डॉलफिन एवं हवेल कैसे साँस लेती हैं ?
उत्तर-
डॉलफिन तथा वेल में गिल नहीं होते। यह सिर पर स्थित नासा द्वार अथवा वात छिद्रों द्वारा श्वास लेते हैं।

प्रश्न 30.
मेंढक जल में कैसे तैरता है ?
उत्तर-
मेंढक के पश्चपाद में जालयुक्त पादांगुलियां होती हैं जो उसे तैरने में सहायता करती हैं।

प्रश्न 31.
केंचुआ कैसे साँस लेता है ?
उत्तर-
केंचुआ नम त्वचा द्वारा साँस लेता है।

प्रश्न 32.
मछली साँस लेने के लिए ऑक्सीजन कहाँ से लेती है ?
उत्तर-
मछली जल में विलेय वायु से ऑक्सीजन अवशोषित करती है।

प्रश्न 33.
उद्दीपन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उददीपन-वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को उद्दीपन कहते हैं।

प्रश्न 34.
उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उत्सर्जन-सजीवों द्वारा अवशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।

प्रश्न 35.
प्रजनन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
प्रजनन-जंतु द्वारा अपने सदृश संतान उत्पन्न करने को प्रजनन कहते हैं।

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प्रश्न 36.
कायिक प्रजनन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
कायिक प्रजनन-पौधों में बीजों के अतिरिक्त पौधों के दूसरे भागों (तना, जड़, पत्ते) से प्रजनन करने को कायिक प्रजनन कहते हैं।

6. लघूत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
समुद्र में पाये जाने वाले पौधों और जंतुओं की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर-

  1. समुद्र में पौधे तथा जंतु लवणीय जल (खारे पानी) में रहते हैं।
  2. श्वसन के लिए यह जल में विलेय वायु का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 2.
मरुस्थल परिवेश की क्या विशेषता है?
उत्तर-

  1. मरुस्थल में जल अल्प मात्रा में उपलब्ध होता है।
  2. मरुस्थल दिन में बहुत गर्म और रात में ठंडा होता है।

प्रश्न 3.
मरुस्थल में जंतु बिल बनाकर क्यों रहते हैं ?
उत्तर-
क्योंकि मरुस्थल में दिन के समय तापमान बहुत अधिक होता है। इसलिए जंतु गर्मी से बचने के लिए बिल बनाकर रहते हैं।

प्रश्न 4.
मछली में कौन-सी विशेषताएं होती हैं जो उसे जल के अंदर विचरने में सहायता करती हैं ?
उत्तर-

  1. मछली का शरीर धारारेखीय होता है।
  2. मछलियों का शरीर चिकनी शल्कों से ढका होता है।
  3. ये शल्क मछली को सुरक्षा प्रदान करते हैं और उसे जल में सुगमता से गति करने में भी सहायता करते हैं।

प्रश्न 5.
मछली के पंख एवं पूँछ क्या कार्य करते हैं ?
उत्तर-
मछली के पंख एवं पूँछ चपटी होती है, जो उसे जल के अंदर दिशा परिवर्तन एवं संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 6.
अनुकूलन किसे कहते हैं?
उत्तर-
अनुकूलन – सभी सजीवों में कुछ विशिष्ट संरचनाएं होती हैं, जिनके कारण अथवा स्वभाव की उपस्थिति के कारण पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है। उसे अनुकूलन कहते हैं। विभिन्न जंतु भिन्न प्रकार के परिवेश के प्रति अलग-अलग रूप से अनुकूलित हो सकते हैं।

प्रश्न 7.
आवास किसे कहते हैं ?
उत्तर-
आवास – किसी सजीव का वह परिवेश जिसमें वह रहता है, उसका आवास कहलाता है। अपने भोजन, वायु, शरण-स्थल एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए जीव अपने आवास पर निर्भर रहता है।

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प्रश्न 8.
स्थलीय आवास किसे कहते हैं ? स्थलीय आवास के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
स्थलीय आवास – स्थल अथवा ज़मीन पर पाए जाने वाले पौधों एवं जंतुओं के आवास को स्थलीय आवास कहते हैं। वन, घास के मैदान, मरुस्थल, तटीय एवं पर्वतीय क्षेत्र स्थलीय आवास हैं।

प्रश्न 9.
जलीय आवास किसे कहते हैं? जलीय आवास की उदाहरणे दीजिए।
उत्तर-
जलीय आवास – जहाँ पौधे एवं जंतु जल में रहते हैं उन्हें जलीय आवास कहते हैं। जलाशय, दलदल, झील, नदियां एवं समुद्र जलीय आवास के उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
आवास के जैव घटक और अजैव घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
जैव घटक – किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जीव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक हैं।

अजैव घटक – चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल जैसी अनेक निर्जीव वस्तुएँ आवास के अजैव घटक हैं। सूर्य का प्रकाश एवं ऊष्मा भी परिवेश के अजैव घटक हैं।

प्रश्न 11.
सजीव बहुत ठंडे और बहुत ऊष्ण परिवेश में कैसे पाए जाते हैं ?
उत्तर-
बहुत से सजीव बहुत ठंडे और बहुत ऊष्ण परिवेश जैसे विषम परिवेश में जीवित रहने के लिए विशेष व्यवस्था को अपनाते हैं जिसे अनुकूलन कहते हैं। अनुकूलन अल्पकाल में नहीं होता। हजारों वर्षों की अवधि में किसी क्षेत्र के अजैव घटकों में परिवर्तन आते हैं। वे जंतु जो इन परिवर्तनों के प्रति अपने आप को नहीं ढाल पाते मर जाते हैं। केवल वे जीव ही जीवित रहते हैं जो अपने आपको बदलते परिवेश के अनुसार अनुकूलित कर लेते हैं।

प्रश्न 12.
जंतुओं के आवासों में विविधता क्यों है ?
उत्तर-
जंतु विभिन्न अजैव कारकों के लिए विभिन्न विधियों से अपने आपको अनुकूलित कर लेते हैं। इसका परिणाम भिन्न आवासों में जीवों की विविधता का होना है।

प्रश्न 13.
मरुस्थलीय पौधे अपने आपको मरुस्थलीय जलवायु के अनुसार कैसे अनुकूलित कर लेते हैं ?
उत्तर-
मरुस्थलीय पौधे वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल की बहुत कम मात्रा निष्कासित करते हैं। मरुस्थलीय पौधों में पत्तियाँ या तो अनुपस्थित होती हैं अथवा बहुत छोटी होती हैं। कुछ पौधों में पत्तियाँ काँटों (शूल ) का रूप ले लेती हैं। इससे पत्तियों से होने वाले वाष्पोत्सर्जन में होने वाले जल ह्रास में कमी आती है। नागफनी में पत्ती जैसी जिस संरचना को आप देखते हैं, वह वास्तव में इसका तना है। इन पौधों में प्रकाश-संश्लेषण सामान्यतः तने में होता है। तना एक मोटी मोमी परत से ढका होता है, जिससे पौधों को जल-संरक्षण में सहायता मिलती है। अधिकतर मरुस्थलीय पौधों की जड़ें जल अवशोषण के लिए मिट्टी में बहुत गहराई तक चली जाती हैं।
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प्रश्न 14.
मरुस्थल में रहने वाले जंतु अपने आपको गर्मी से कैसे बचाते हैं?
उत्तर-
मरुस्थल में रहने वाले चूहे एवं साँप ऊँट की भांति लंबी टाँगें नहीं होती। दिन की तेज़ गर्मी से बचने के लिए वे भूमि के अंदर गहरे बिलों में रहते हैं। रात्रि के समय जब तापमान में कमी आती है, तो ये जंतु बाहर निकलते हैं।
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प्रश्न 15.
पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वृक्षों में क्या विशेषताएँ होती हैं ?
उत्तर-
पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले वृक्ष सामान्यतः शंक्वाकार होते हैं तथा इनकी शाखाएँ तिरछी होती हैं। इनमें से कुछ वृक्षों की पत्तियाँ सुई के आकार की होती हैं। इससे वर्षा का जल एवं हिम सरलता से नीचे की ओर. खिसक जाता है। पर्वतों पर इन वृक्षों से अधिक भिन्न आकृति एवं आकार वाले वृक्ष भी मिल सकते हैं। पर्वत पर जीवित रहने के लिए इनमें कुछ अन्य प्रकार का अनुकूलन हो सकता है।
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प्रश्न 16.
पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतु वहाँ की परिस्थितियों के प्रति कैसे अनुकूलित होते हैं ?
उत्तर-
पवीय क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतु भी वहाँ की परिस्थितियों के प्रति अनुकूलित होते हैं। उनकी मोटी त्वचा या फर ठंड से उनका बचाव करती है। उदाहरणतः, शरीर को गर्म रखने के लिए याक का शरीर लंबे वालों से ढका होता है। पहाड़ी तेंदुए के शरीर पर फर होते हैं। यह बर्फ पर चलते समय उसके पैरों को ठंड से बचाता है। पहाड़ी बकरी के मजबूत खुर उसे ढलानदार चट्टानों पर दौड़ने के लिए अनुकूलित बनाते हैं।
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प्रश्न 17.
शेर वन में अथवा घास स्थल में रहने में कैसे अनुकूल है?
उत्तर-
शेर वनों अथवा घास स्थल में रहता है जो हिरण जैसे जंतुओं का शिकार करता है। यह मटमैले रंग का होता है। शेर के अगले पैर के नखर लंबे होते हैं जिन्हें वह पदांगुलियों के अंदर खींचकर छिपा सकता है। शेर की यह संरचनाएँ उसके जीवन-यापन में सहायता करती हैं। उसका हल्का भूरा (मटमैला) रंग शिकार के दौरान उसे घास के सूखे मैदानों में छिपाए रखता है और शिकार को पता भी नहीं चलता। चेहरे के सामने की आँखें उसे वन में दूर तक शिकार खोजने में सहायक होती हैं।
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प्रश्न 18.
हिरण घास स्थल में रहने के लिए कैसे अनुकूल है?
उत्तर-
हिरण वन या घास स्थल में रहता है। पौधों के कठोर तनों को चबाने के लिए इसके मजबूत दाँत होते हैं। हिरण को अपने शिकारी (शेर जैसे जंतु जो उसे अपना शिकार बनाते हैं) की उपस्थिति की जानकारी आवश्यक है, ताकि वह उसका शिकार न बन सके और वहाँ से भाग जाए। इसके लंबे कान उसे शिकारी की गतिविधि की जानकारी कराते हैं। इसके सिर के पार्श्व में दोनों ओर स्थित आँखें प्रत्येक दिशा में देखकर खतरा महसूस करा सकती हैं। हिरण की तेज़ गति उसे शिकारी से दूर भागने में सहायक होती है।
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प्रश्न 19.
समुद्री जीव अपने आपको समुद्र में रहने के अनुकूल कैसे बनाते हैं?
उत्तर-
समुद्र में रहने वाले जीव अपने आपको समुद्र में रहने के लिए अनुकूलित कर लेते हैं जैसे मछली का शरीर धारा-रेखीय होता है जिससे वह जल में सुगमता से चल सकती है। स्क्विड एवं ऑक्टोपस जैसे कुछ समुद्री जंतुओं का शरीर आमतौर पर धारा-रेखीय नहीं होता। वह समुद्र की गहराई में, तलहटी में रहते हैं तथा अपनी ओर आने वाले शिकार को पकड़ते हैं। जब वह जल में चलते हैं तो अपने शरीर को धारारेखीय बना लेते हैं। जल में श्वास लेने के लिए इनमें गिल (क्लोम) होते हैं।

प्रश्न 20.
आंशिक रूप से जल मग्न पौधे की जड़ें और तने कैसे होते हैं ?
उत्तर-
आं शिक रूप से जल-मग्न पौधों की जड़ें जलाशय की तलहटी की मिट्टी में स्थिर रहती हैं। जलीय पौधों में जडें आकार में बहुत छोटी होती हैं एवं इनका मुख्य कार्य पौधे को तलहटी में जमाए रखना होता है।

इन पौधों का तना लंबा, खोखला एवं हल्का होता है। तना जल की सतह तक वृद्धि करता है, जबकि पत्तियाँ एवं फूल जल की सतह पर प्लवन करते रहते हैं।
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प्रश्न 21.
पूर्णतः जलमग्न पौधों की क्या विशेषताएँ होती हैं ?
उत्तर-
पूर्णतः जलमग्न पौधों के सभी भाग जल में वृद्धि करते हैं। इनमें से कुछ पौधों की पत्तियाँ संकरी एवं पतले रिबन की तरह होती हैं। यह बहते जल में सरलता से मुड़ जाती हैं। कुछ अन्य जलमग्न पौधों में पत्तियाँ बहुत अधिक विभाजित होती हैं जिससे जल इनके बीच से बहता रहता है और पत्ती को कोई क्षति भी नहीं होती।

प्रश्न 22.
मेंढ़क में जल और स्थल पर रहने के लिए क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर-
मेंढ़क आमतौर पर तालाब में पाया जाने वाला एक जंतु है। यह तालाब के जल में एवं स्थल दोनों पर रह सकता है। इसे पश्चपाद लंबे एवं मजबूत होते हैं जो उसे छलांग लगाने एवं शिकार पकड़ने में सहायता करते हैं। इनके पश्चपाद में जालयुक्त पादांगुलियाँ होती हैं जो उसे तैरने में सहायता करती हैं।

प्रश्न 23.
वन में पाए जाने वाली वस्तुओं की सूची बनाओ।
उत्तर-
वृक्ष, आरोही-लता, विसी लता, छोटे-बड़े जंतु, पक्षी, साँप, कीट, चट्टान, पत्थर, मिट्टी, जलवायु, सूखी पत्तियाँ, मृत जंतु, छत्रक एवं काई (मॉस) वन में पाई जाने वाली विभिन्न वस्तुएँ हैं।

प्रश्न 24.
क्या सभी जीवों को भोजन की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-
हां, सभी जीवों को भोजन की आवश्यकता होती है। पौधे प्रकाश संश्लेषण के द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। जंतु भोजन के लिए पौधों तथा अन्य जंतुओं पर निर्भर करते हैं।

भोजन सजीवों को उनकी वृद्धि के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। सजीवों को उनके अंदर होने वाले अन्य जैव प्रक्रमों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 25.
वृद्धि से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
वृद्धि – किसी भी सजीव के आकार में अपरिवर्तनशील हुए परिवर्तन को वृद्धि कहते हैं। यह वृद्धि उसके भोजन के फलस्वरूप होती है।

प्रश्न 26.
श्वसन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
श्वसन – सजीवों द्वारा वायु अंदर लेने और बाहर निकालने को श्वसन कहते हैं। श्वसन के समय जो वायु हम अंदर लेकर जाते हैं उसमें ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा होती है और जो वायु हम बाहर निकालते हैं उसमें कार्बन डाइऑक्साइड की प्रर्याप्त मात्रा होती है। इस प्रकार हम श्वसन के समय ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। यह ऑक्सीजन हमारे भोजन के साथ मिल कर हमें ऊर्जा प्रदान करती है।

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प्रश्न 27.
पौधे कैसे श्वसन करते हैं ?
उत्तर-
पौधों में श्वसन – पौधे भी श्वसन करते हैं। पौधों की श्वसन क्रिया में गैसों का विनिमय मुख्यतः उनकी पत्तियों द्वारा होता है। पत्तियाँ सूक्ष्म रंध्रों द्वारा वायु को अंदर लेती हैं तथा ऑक्सीजन का उपयोग करती हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड वायु में निष्कासित कर देती हैं।

प्रश्न 28.
श्वसन क्रिया और प्रकाश-संश्लेषण में क्या अंतर है ?
उत्तर-
श्वसन तथा प्रकाश – संश्लेषण में अंतर-हम जानते हैं कि प्रकाश की उपस्थिति में पौधे वायु की कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग भोजन बनाने के लिए करते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं। पौधे केवल दिन के समय ही भोजन बनाते हैं, जबकि श्वसन क्रिया दिन और रात दोनों में ही निरंतर चलती रहती है। श्वसन में पौधे ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।

प्रश्न 29.
उद्दीपन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उद्दीपन – बाह्य वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अनुक्रिया को उद्दीपन कहते हैं।
उदाहरण-जब रात्रि में हम रसोई घर में बल्ब प्रदीप्त कर देते हैं तो कॉकरोच अचानक अपने छिपने के स्थान में भाग जाते हैं।

प्रश्न 30.
क्या पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनक्रिया दर्शाते हैं?
उत्तर-
पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया दर्शाते हैं। कुछ पौधों के पुष्प केवल रात्रि के समय ही खिलते हैं। कुछ पौधों के पुष्प सूर्यास्त के बाद बंद हो जाते हैं। छुई-मुई (गुलमेंहदी) के पौधे की पत्तियाँ छूने पर अचानक मुरझा (सिकुड़) जाती हैं। यह पौधों में उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया के कुछ उदाहरण हैं।

प्रश्न 31.
एक क्रिया किलाप द्वारा दर्शाओ कि पौधे सूर्य के प्रकाश के प्रति अनुक्रिया करते हैं ?
उत्तर-
क्रियाकलाप – एक कमरे की खिड़की जिससे दिन के समय धूप (सूर्य का प्रकाश) आती हो, के पास एक पौधे का गमला रखिए। कुछ दिनों तक पौधे को नियमित जल देते रहें। कुछ दिनों बाद आप पाएंगे कि पौधा की वृद्धि प्रकाश की दिशा में हुई है न कि सीधी। इससे ज्ञात होता है कि पौधे सूर्य के प्रकाश के प्रति अनुक्रिया करते हैं।
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प्रश्न 32.
उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उत्सर्जन – विभिन्न जैव-प्रक्रमों के फलस्वरूप जीव के शरीर में कुछ अपशिष्ट पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जो उसके लिए हानिकारक होते हैं। इन अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।

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प्रश्न 33.
क्या पौधों में भी उत्सर्जन होता है ?
उत्तर-
हाँ, पौधों में भी उत्सर्जन होता है। पौधे भी उत्सर्जन करते हैं। परंतु उनमें इस प्रक्रम का ढंग कुछ अलग है। पौधों में कुछ हानिकारक अथवा विषैले पदार्थ उत्पन्न होते हैं। कुछ पौधों में यह अपशिष्ट पदार्थ पौधे के कुछ विशेष भागों में संग्रहित किए जाते हैं, जिससे पौधे को कोई हानि नहीं पहुँचती। कुछ पौधों में अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन स्राव के रूप में होता है।

प्रश्न 34.
प्रजनन किसे कहते हैं ? उत्तर-प्रजनन-जीव द्वारा अपने सदृश संतान उत्पन्न करने की क्रिया को प्रजनन कहते हैं।
भिन्न – भिन्न जंतुओं में प्रजनन के ढंग अलग-अलग हैं। कुछ जंतु अंडे देते हैं जिससे शिशु निकलते हैं। कुछ जंतु शिशु को जन्म देते हैं।
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प्रश्न 35.
पौधे कैसे प्रजनन करते हैं ?
उत्तर-
पौधों में प्रजनन – पौधे भी प्रजनन करते हैं। जंतुओं की तरह पौधों में भी प्रजनन के तरीके भिन्न-भिन्न हैं। बहुत-से पौधे बीजों द्वारा प्रजनन करते हैं। पौधे बीज उत्पादित करते हैं। हम उन्हें अंकुरित करके नए पौधे उगा सकते हैं।
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कुछ पौधे बीज के अतिरिक्त अपने कायिक भागों द्वारा भी नए पौधे उत्पन्न करते हैं। उदाहरणतः, आलू के कलिका वाले भाग से नया पौधा बनता है। पौधे कलम द्वारा भी उगाए जाते हैं।

प्रश्न 36.
पौधों में भ. गति होती है। पौधों में कैसी गति होती है ?
उत्तर-
पौधों में गति-पौधे सामान्यतः भूमि में जकड़े रहते हैं। अतः वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकते हैं। परंतु विभिन्न पदार्थ जैसे कि जल, खनिज एवं संश्लेषित खाद्य पदार्थ पौधे के एक भाग से दूसरे में संवहित होते हैं। पौधों में अन्य प्रकार की गति भी देखी जा सकती है जैसे पुष्पों का खिलना एवं बंद होना। पौधे विभिन्न उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया भी करते हैं।

प्रश्न 37.
सजीवों के सामान्य लक्षण बताएं।
उत्तर-
सजीवों के सामान्य लक्षण-

  1. सजीव भोजन ग्रहण करते हैं अथवा स्वयं बनाते हैं जैसे पौधे।
  2. सजीव वृद्धि करते हैं।
  3. सजीव श्वसन करते हैं।
  4. सजीव प्रजनन करते हैं।
  5. सजीवों में उत्सर्जन क्रिया होती है।
  6. सजीव उद्दीपन के प्रति उत्तेजना प्रदर्शित करते हैं।

7. निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सजीव तथा निर्जीव वस्तुओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
सजीव तथा निर्जीव वस्तुओं में अंतर-

सजीव वस्तुएँ निर्जीव वस्तुएँ
(i) सजीवों को भोजन, जल तथा वायु की आवश्यकता होती है। (i) निर्जीवों को भोजन, जल तथा वायु की आवश्यकता नहीं होती।
(ii) सजीव वृद्धि करते हैं। (ii) निर्जीवों में वृद्धि नहीं होती।
(iii) सजीव एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्वयं गति करते हैं। (iii) निर्जीव स्वय गति नहीं करते।
(iv) सजीवों में जनन का गुण होता है। (iv) निर्जीवों में जनन का गुण नहीं होता।
(v) सजीव श्वसन करते हैं। (v) निर्जीव श्वसन नहीं करते।
(vi) सजीव उत्सर्जन द्वारा अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालते हैं। (vi) निर्जीव उत्सर्जन नहीं करते।
(vii) सजीव कोशिकाओं के बने होते हैं। (vii) निर्जीव अणुओं के बने होते हैं।

प्रश्न 2.
सजीवों के उन प्रमुख अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए जिसके द्वारा उन्हें निर्जीवों से पृथक् किया जाता है।
उत्तर-
सजीव वस्तुओं के महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण-

  1. सजीव वस्तुएं वृद्धि करती हैं।
  2. वे गति दर्शाती हैं।
  3. इन्हें अपनी जैव प्रक्रियाओं के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
  4. ये बाहरी उद्दीपन के प्रति संवेदनशील होती हैं।
  5. ये श्वसन क्रिया करती हैं।
  6. ये अपने शरीर से फालतू उत्पादों को उत्सर्जित करती हैं।
  7. ये अपने जैसे अन्य जीव उत्पन्न करती हैं।
  8. इनका एक निश्चित जीवनकाल होता है।
  9. इनके शरीर की रचना कोशिकीय होती है।

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प्रश्न 3.
पौधों तथा जंतुओं में परस्पर क्या समानताएं तथा असमानताएं हैं ?
उत्तर-
समानताएं-

  1. दोनों को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
  2. दोनों वृद्धि करते हैं।
  3. दोनों श्वसन द्वारा भोजन का अपघटन करके ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
  4. दोनों शरीर में बने फालतू उत्पादों को उत्सर्जित करते हैं।
  5. दोनों की संरचना कोशिकीय (Cellular) होती है।
  6. दोनों बाहरी उद्दीपन के प्रति संवेदनशील होते हैं।
  7. दोनों अपनी किस्म के अन्य जीव पैदा करते हैं।

असमानताएं –

पौधे जंतु
(i) पौधों में एक हरे रंग का वर्णक होता है जिसे क्लोरोफिल कहते हैं। (i) जंतुओं में कोई क्लोरोफिल नहीं होता।
(ii) पौधे स्वय पोषी हैं अर्थात् ये अपना भोजन आप बना सकते हैं। इसलिए ये अपने भोजन के लिए अपने आप पर निर्भर होते हैं। (ii) ये परपोषी हैं अर्थात् ये अपना भोजन आप तैयार नहीं कर सकते। इसलिए इनको अपने भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर करना पड़ता है।
(iii) इनमें गतिशीलता लगभग नहीं होती। (iii) इनमें गतिशीलता होती है।
(iv) पौधों में वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्रों जिन्हें वृद्धि क्षेत्र कहते हैं, पर स्थित होती है। (iv) जंतुओं में वृद्धि एक जगह पर नहीं होती। बल्कि ये सारे शरीर में होती है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 6 हमारे चारों ओर के परिवर्तन

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 6 हमारे चारों ओर के परिवर्तन

→ परिवर्तन एक ऐसी क्रिया है जिसके द्वारा कोई वस्तु किसी अन्य रूप अथवा वस्तु में परिवर्तित हो जाती है।

→ हम अपने आस-पास कई परिवर्तन देखते हैं और हर परिवर्तन सकारात्मक या नकारात्मक तरीके से महत्त्वपूर्ण होता है।

→ परिवर्तनों को उनके बीच की समानताएँ और अंतर ढूंढकर एक समान समूहों में समूहीकृत किया जा सकता है।

→ सभी परिवर्तनों को मोटे तौर पर दो प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है अर्थात प्राकृतिक और कृत्रिम या मानव निर्मित।

→ वे परिवर्तन जो प्रकृति में होते हैं और जिनमें हमारी भागीदारी की आवश्यकता नहीं होती है, प्राकृतिक परिवर्तन कहलाते हैं। ये कभी न खत्म होने वाले बदलाव हैं। प्राकृतिक परिवर्तनों के उदाहरणों में बर्फ का पिघलना, पेड़ से पत्ते गिरना आदि शामिल हैं।

→ मानव के प्रयासों से होने वाले परिवर्तन कृत्रिम या मानव निर्मित परिवर्तन कहलाते हैं। मानव निर्मित परिवर्तनों के उदाहरणों में गेहूँ के आटे से चपाती बनाना, सब्जियाँ पकाना आदि शामिल हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 6 हमारे चारों ओर के परिवर्तन

→ गति के आधार पर, हम परिवर्तनों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत कर सकते हैं। ये धीमे परिवर्तन और तेज परिवर्तन हैं।

→ धीमे परिवर्तन वे होते हैं जिन्हें होने में अधिक समय लगता है। उदाहरण के लिए, पेड़ का बढ़ना, एक बच्चे का वयस्क होना आदि।

→ तेज परिवर्तन वे होते हैं जिन्हें होने में कम समय लगता है अर्थात जो बहुत तेजी से होते हैं । उदाहरण के लिए, माचिस की तीली जलाना, पटाखे फोड़ना आदि।

→ हमारे आस-पास के सभी परिवर्तनों में से केवल कुछ ही परिवर्तनों को उत्क्रमित किया जा सकता है। इन्हें प्रतिवर्ती अथवा उत्क्रमणीय परिवर्तन कहा जाता है। वे परिवर्तन जिन्हें उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है, अपरिवर्तनीय परिवर्तन कहलाते हैं।

→ किसी पदार्थ में परिवर्तन को प्रतिवर्ती परिवर्तन तब कहा जाता है जब हम परिस्थितियों को बदलकर पदार्थ को उसके मूल रूप में प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, बर्फ पिघलने पर पानी में बदल जाती है और पानी को ठंडा करके बर्फ में बदला जा सकता है, जो एक प्रतिवर्ती परिवर्तन है।

→ किसी पदार्थ में परिवर्तन को अपरिवर्तनीय परिवर्तन तब कहा जाता है जब हम परिस्थितियों को बदलकर पदार्थ को उसके मूल रूप में प्राप्त नहीं कर सकते। उदाहरण के लिए, एक बार तवे पर पकाई गई रोटी को दोबारा आटे में नहीं बदला जा सकता है।

→ कुछ परिवर्तन आवधिक अथवा आवर्ती होते हैं जबकि अन्य गैर आवधिक अथवा अनावर्ती होते हैं।

→ जो परिवर्तन एक निश्चित समय अंतराल के बाद दोहराए जाते हैं, उन्हें आवधिक अथवा आवर्ती परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण के लिए, दिन और रात का बदलना, घड़ी के लोलक का झूलना, हृदय की धड़कन, ऋतुओं का परिवर्तन।

→ वे परिवर्तन जो नियमित अंतराल के बाद दोहराए नहीं जाते हैं, गैर आवधिक अथवा अनावर्ती परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, भूकंप आना, बारिश होना, आदि।

→ हमने परिवर्तनों को भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों में भी वर्गीकृत किया है।

→ कोई भी अस्थायी परिवर्तन जिसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है और मूल पदार्थ की रासायनिक संरचना समान रहती है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।

→ भौतिक परिवर्तनों के दौरान, भौतिक गुण जैसे रंग, आकार, आयतन, अवस्था आदि बदल सकते हैं। अत: हम कह सकते हैं कि भौतिक परिवर्तन एक प्रतिवर्ती अथवा उत्क्रमणीय परिवर्तन है।

→ कोई भी स्थायी परिवर्तन जिसमें नए पदार्थ बनते हैं। इनमें बनने वाले नए पदार्थ के भौतिक और रासायनिक गुण मूल पदार्थ से बिल्कुल अलग होते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 6 हमारे चारों ओर के परिवर्तन

→ भौतिक परिवर्तन प्रकृति में अधिकतर प्रतिवर्ती अथवा उत्क्रमणीय होते हैं जबकि रासायनिक परिवर्तन ज्यादातर अपरिवर्तनीय परिवर्तन होते हैं।

→ प्रसार और संकुचन भौतिक परिवर्तन हैं जो हमारे दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी होते हैं।

→ प्रसार में पदार्थ की विमाएँ बढ़ती हैं और संकुचन में पदार्थ की विमाएँ घटती हैं।

→ परिवर्तन-वह क्रिया जिसके द्वारा कोई वस्तु अपने पिछले वाले से भिन्न हो जाती है।

→ प्राकृतिक परिवर्तन-स्वाभाविक रूप से होने वाले और कभी न खत्म होने वाले परिवर्तन प्राकृतिक परिवर्तन कहलाते हैं।

→ मानव निर्मित अथवा कृत्रिम परिवर्तन-मानव के प्रयासों से होने वाले परिवर्तन मानव निर्मित अथवा कृत्रिम परिवर्तन कहलाते हैं।

→ आवधिक अथवा आवर्ति परिवर्तन-जो परिवर्तन एक निश्चित समय अंतराल के बाद दोहराए जाते हैं, उन्हें आवधिक अथवा आवर्ती परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण के लिए, दिन और रात का बदलना, घड़ी के लोलक का झूलना, हृदय की धड़कन, ऋतुओं का परिवर्तन।

→ गैर-आवधिक अथवा अनावर्ती परिवर्तन-वे परिवर्तन जो नियमित अंतराल के बाद दोहराए नहीं जाते हैं, गैर-आवधिक अथवा अनावर्ती परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, भूकंप आना, बारिश होना, आदि।

→ प्रतिवर्ती अथवा उत्क्रमणीय परिवर्तन-किसी पदार्थ में होने वाले वे परिवर्तन जिनमें बनने वाले नए पदार्थ को अपनी मूल अवस्था में लाया जा सकता है, प्रतिवर्ती अथवा उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।

→ अपरिवर्तनीय परिवर्तन-किसी पदार्थ में होने वाले वे परिवर्तन जिनमें बनने वाले नए पदार्थ को अपनी मूल अवस्था में लाया जा सकता है, अपरिवर्तनीय परिवर्तन कहलाते हैं।

→ भौतिक परिवर्तन- भौतिक परिवर्तन एक अस्थायी परिवर्तन है जिसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है और मूल पदार्थ की रासायनिक संरचना समान रहती है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 6 हमारे चारों ओर के परिवर्तन

→ रासायनिक परिवर्तन-रासायनिक परिवर्तन एक स्थायी परिवर्तन है जिसमें नए पदार्थ बनते हैं जिनके भौतिक और रासायनिक गुण मूल पदार्थ के गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं।

→ प्रसार-जब कोई पदार्थ गर्म करने पर अपना आकार बढ़ाता है तो उस परिवर्तन को प्रसार कहते हैं।

→ तापीय प्रसार-जो प्रसार तापमान में वृद्धि के कारण होता है तो इसे तापीय या थर्मल प्रसार कहा जाता है।

→ संकुचन-जब कोई पदार्थ ठंडा होने पर अपना आकार कम कर लेता है तो उस परिवर्तन को संकुचन कहते हैं।

→ वाष्पीकरण-जब गर्म करने पर या दबाव कम करने पर, कोई तरल गैसीय रूप में परिवर्तित हो जाता है तो इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण के रूप में जाना जाता है।

→ पिघलना या गलन-गर्म करने या दबाव बढ़ाने पर जब कोई ठोस द्रव में बदल जाता है, तो इस प्रक्रिया को पिघलने या गलन के रूप में जाना जाता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

→ हमारे आस-पास के पदार्थों को दो वर्गों अर्थात शुद्ध पदार्थ या अशुद्ध पदार्थ में बाँटा जा सकता है। अशुद्ध पदार्थों को मिश्रण भी कहते हैं।

→ एक शुद्ध पदार्थ केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं या अणुओं से बना होता है, उदाहरण पानी। इसकी संरचना और गुण निश्चित् होते हैं।

→ मिश्रणों में कुछ वांछित पदार्थ और अवांछित पदार्थ होते हैं। हमें अवांछित पदार्थों को वांछित पदार्थों से अलग करना चाहिए।

→ मिश्रण से विभिन्न पदार्थों को अलग करने की प्रक्रिया को पृथक्करण के रूप में जाना जाता है।

→ अगर मिश्रण में अवांछित पदार्थ हैं तो पृथक्करण अवश्य किया जाना चाहिए क्योंकि मिश्रण में अवांछित पदार्थ हमारे लिए हानिकारक हो सकते हैं।

→ पृथक्करण उन मामलों में भी महत्त्वपूर्ण है जहां हमें एक विशेष घटक या अवयव की शुद्ध अवस्था में आवश्यकता होती है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

→ मिश्रण के घटकों को अलग करने के लिए हमारे पास कई विधियाँ हैं। ये मिश्रण में मौजूद पदार्थों के गुणों में अंतर पर आधारित होती हैं।

→ पृथक्करण की विभिन्न विधियाँ हैं- हस्तचयन, निष्पावन, चालन, अवसादन, निस्तारण, निस्यंदन, निस्यंदन, वाष्पीकरण आदि।

→ हस्तचयन विधि का उपयोग उस मिश्रण के घटकों को अलग करने के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें हम आँखों से देख सकते हैं और ये आकार में बड़े हों।

→ कंबाइन का उपयोग कटाई और निस्यंदन दोनों प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है।

→ निस्यंदन अनाज को भूसे से अलग करना है। यह तीनों में से किसी एक विधि का उपयोग करके किया जा सकता
है अर्थात

  1. मनुष्यों द्वारा
  2. जानवरों की मदद से और
  3. मशीनों का उपयोग करके।

→ एक मिश्रण के भारी और हल्के घटकों को हवा या हवा में उड़ाने की विधि को चालन कहते हैं।

→ ठोस और तरल पदार्थों के मिश्रण को अलग करने के लिए निस्तारण, अवसादन, निस्यंदन, वाष्पीकरण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।

→ मिश्रण से भारी, अघुलनशील कणों के नीचे बैठने की प्रक्रिया अवसादन कहलाती है। वह पदार्थ जो तल पर जम जाता है तलछट कहलाता है। इस विधि का उपयोग अघुलनशील भारी कणों को तरल से अलग करने के लिए किया जाता है।

→ तलछट को विचलित किए बिना स्पष्ट तरल को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को निस्तारण के रूप में जाना जाता है।

→ एक अघुलनशील ठोस को एक फिल्टर पेपर या मलमल के कपड़े के माध्यम से तरल से अलग करने की प्रक्रिया को निस्यंदन के रूप में जाना जाता है।

→ मिश्रण के अलग-अलग आकार के कणों को छाननी से अलग करने की प्रक्रिया को छाननी कहा जाता है।

→ किसी द्रव को गर्म करके उसके वाष्प में बदलने की प्रक्रिया वाष्पीकरण कहलाती है।

→ कभी-कभी हमें मिश्रण के घटकों को अलग करने के लिए एक से अधिक विधियों की आवश्यकता हो सकती है या नहीं।

→ जब दो या दो से अधिक पदार्थों का मिश्रण एक ही पदार्थ या शुद्ध पदार्थ की तरह दिखाई देता है तो उसे विलयन कहते हैं।

→ किसी विलयन में जो पदार्थ अधिक मात्रा में उपस्थित होता है उसे विलायक कहते हैं तथा कम मात्रा में उपस्थित पदार्थ को विलेय कहते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

→ संतप्त विलयन वह विलयन है जिसमें किसी विशेष तापमान पर और अधिक विलेय नहीं घल सकता है।

→ असंतृप्त विलयन वह विलयन है जिसमें किसी विशेष तापमान पर और अधिक विलेय घोला जा सकता है।

→ जल में विभिन्न मात्रा में पदार्थ घुल जाते हैं और विलयन को गर्म करने पर अधिकांश पदार्थों की विलेयता बढ़ जाती है।

→ वाष्पीकरण और संघनन एक दूसरे के विपरीत हैं।

→ शुद्ध पदार्थ-यदि कोई पदार्थ केवल एक ही प्रकार के घटकों (परमाणुओं या अणुओं) से बना हो तो वह शुद्ध पदार्थ कहलाता है। इसकी संरचना और गुण निश्चित होने चाहिए।

→ अशुद्ध पदार्थ-अशुद्ध पदार्थ विभिन्न प्रकार के घटकों (परमाणुओं या अणुओं) का मिश्रण होता है।

→ मिश्रण-दो या दो से अधिक तत्वों या यौगिकों से बिना किसी रासायनिक अभिक्रिया के किसी भी अनुपात में मिश्रित पदार्थ को मिश्रण कहा जाता है।

→ विलयन-जब दो या दो से अधिक पदार्थों का मिश्रण एक ही पदार्थ या शुद्ध पदार्थ की तरह दिखाई देता है तो उसे विलयन कहते हैं।

→ विलायक-किसी विलयन में जो पदार्थ अधिक मात्रा में उपस्थित होता है वह विलायक कहलाता है।

→ विलेय-किसी विलयन में जो पदार्थ कम मात्रा में उपस्थित होता है वह विलेय कहलाता है।

→ संतृप्त विलयन-वह विलयन जिसमें किसी विशेष तापमान पर और अधिक विलेय नहीं घुल सकता है, संतृप्त विलयन कहलाता है।

→ असंतृप्त विलयन-वह विलयन जिसमें किसी विशेष ताप पर और अधिक विलेय घोला जा सकता है, असंतृप्त विलयन कहलाता है।

→ आसवन-वह प्रक्रिया जिसमें किसी द्रव को उबालकर वाष्प में परिवर्तित किया जाता है और इस प्रकार बने वाष्पों को ठंडा करके शुद्ध द्रव बनाने के लिए संघनित किया जाता है, आसवन कहलाता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

→ हस्तचयन-किसी पदार्थ में मिली अशुद्धियों को हाथ से चुन कर अथवा चुग कर पृथक् करने की विधि को हस्तचयन विधि कहते हैं।

→ निस्यंदन अथवा विनोइंग-जब किसी मिश्रण के अवयवों के कणों के भार में अंतर हो तो जिस विधि द्वारा हवा के झोंके के प्रभाव अधीन विभिन्न अवयवों का पृथक्करण किया जाता है उस विधि को निस्यंदन कहा जाता है ।

→ फटकन-दानों को डंठलों से अलग करने की प्रक्रिया को फटकन कहते हैं। इस विधि में, हम बीज को मुक्त करने के लिए डंठल को कठोर सतह पर पटकते हैं।

→ छानन-वह विधि है जिसमें छोटे ठोस कणों को छाननी से गुजार कर बड़े ठोस कणों से अलग किया जाता है उसे छानन कहा जाता है ।

→ अवसादन-इस प्रक्रिया में, तरल मिश्रण को कुछ समय के लिए अविचलित रखा जाता है। ठोस भारी अघुलनशील कण तल पर जमा हो जाते हैं और हल्के कण तरल में तैरते हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

Punjab State Board PSEB 11th Class Economics Book Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

PSEB Solutions for Class 11 Economics Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

PSEB 11th Class Economics 1966 से पंजाब में कृषि का विकास Textbook Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब की किसी एक व्यापारिक फसल का वर्णन करें।
उत्तर-
गन्ना (Sugarcane)-पंजाब में गन्ना फरवरी-अप्रैल में बोआ जाता है। गन्ने की फसल जनवरी-अप्रैल में काटी जाती है। पंजाब में गन्ना सभी जिलों में पैदा किया जाता है।

प्रश्न 2.
पंजाब में हरित क्रान्ति का कोई एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के कारण इस प्रकार हैं-
नई कृषि नीति-पंजाब में नई कृषि नीति में उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक, आधुनिक मशीनों तथा सिंचाई की सहूलतों में वृद्धि की गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब को भारत का अनाज भण्डार क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
2018-19 में पंजाब द्वारा केन्द्रीय भण्डार में गेहूं का योगदान 35% तथा चावले का योगदान 25% रहा।

प्रश्न 4.
पंजाब कृषि में पिछड़ा प्रान्त है।
उत्तर-
ग़लत।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

प्रश्न 5.
पंजाब में 2019-20 में कुल उपज 315 लाख मीट्रिक टन हुई।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 6.
पंजाब में कृषि विकास का कारण …………….. है।
(a) सिंचाई के साधन
(b) मेहनती लोग
(c) हरित क्रान्ति
(d) उपरोक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
हरित क्रान्ति का कोई दोष नहीं।
उत्तर-
ग़लत।

प्रश्न 8.
पंजाब को भारत के अनाज का ……………….. कहा जाता है।
उत्तर-
अन्न भण्डार।

प्रश्न 9.
पंजाब की दो खाद्य फसलों के नाम बताओ।
उत्तर-
(i) गेहूँ,
(ii) चावल।

प्रश्न 10.
पंजाब की दो व्यापारिक फसलों के नाम बताओ।
उत्तर-

  1. कपास,
  2. गन्ना।

प्रश्न 11.
पंजाब में अधिक कृषि उत्पादन के कोई दो कारण बताएं।
उत्तर-

  • सिंचाई का विस्तार,
  • आधुनिक खाद्य तथा बीजों का प्रयोग।

प्रश्न 12.
हरित क्रान्ति से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अर्थ है कृषि पैदावार में होने वाली भारी वृद्धि जो कि नई कृषि नीति के अपनाने से प्राप्त हुई है।

प्रश्न 13.
पंजाब में हरित क्रान्ति का कोई एक कारण बताएं।
उत्तर-
पंजाब में नई कृषि नीति के कारण उचित बीजों और रासायनिक खादों का प्रयोग करने के कारण हरित क्रान्ति प्राप्त होती है।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

प्रश्न 14.
पंजाब में सिंचाई के मुख्य तीन साधन बताएं।
उत्तर-

  1. नहरें,
  2. ट्यूबवैल,
  3. कुएँ।

प्रश्न 15.
हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएँ।
उत्तर-
हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप हवा और पानी के प्रदूषण के कारण, कैंसर का रोग फैल गया है।

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में सिंचाई की स्थिति तथा महत्त्व स्पष्ट करें।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए सिंचाई का महत्त्व बहुत अधिक है। पंजाब में वर्ष 1966 के पश्चात् सिंचाई सुविधाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 26.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सहूलतें प्राप्त थी जो कि कुल क्षेत्र का 56% भाग था। वर्ष 2015-16 में सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 41.37 लाख हेक्टेयर हो गया है जोकि कुल कृषि के अधीन क्षेत्र का 97.4% भाग है। पंजाब में लुधियाना, जालन्धर, पटियाला, भटिंडा, अमृतसर, फिरोज़पुर तथा फरीदकोट जिलों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। किन्तु रोपड़ तथा नवांशहर में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है। बारहवीं योजना में सिंचाई सुविधाओं पर 1052 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

प्रश्न 2.
पंजाब में कृषि विकास की चर्चा करें।
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा स्पष्ट हो जाती है-
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि-पंजाब में कृषि उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। कुल अनाज का उत्पादन 1965-66 में 33 लाख टन था। 2019-20 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अनाज के उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि को हरित क्रान्ति (Green Revolution) कहा जाता है।

2. उन्नत कृषि-पंजाब की कृषि बहुत उन्नत तथा अधिक प्रगतिशील है। पंजाब को प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भारत की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता से अधिक है। पंजाब में वर्ष 1965-66 में गेहूँ की उत्पादकता 1236 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की उत्पादकता 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादकता बढ़कर 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएं।
अथवा
पंजाब में हरित क्रान्ति के दष्प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के केवल अच्छे प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि इसके कुछ दुष्प्रभाव भी पड़े हैं जोकि इस प्रकार हैं –
1. असंतुलित विकास की समस्या–हरित क्रान्ति का मुख्य दोष यह है कि समूचे राज्य में एक समान संतुलित विकास नहीं हुआ। कुछ ज़िले उत्पादन क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं जबकि कुछ जिलों में कृषि का विकास कम हुआ है। जैसे कि फरीदकोट, भटिंडा, फिरोज़पुर में कृषि विकास अधिक हुआ है।

2. बेरोज़गारी की समस्या हरित क्रान्ति से बेरोज़गारी की समस्या उत्पन्न हुई है। गांवों में भूमिहीन श्रमिकों में बेरोज़गारी बढ़ गई है इसलिए रोज़गार की तलाश में प्रतिदिन शहरों में आते हैं।

प्रश्न 4.
पंजाब में हरित क्रान्ति का अर्थ बताएं।
उत्तर-
हरित क्रान्ति का अर्थ (Meaning of Green Revolution)-प्रो० एफ० आर० फ्रैक्ल के अनुसार, “हरित क्रान्ति एक सुन्दर नारा है जिसके द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि विज्ञान तथा तकनीकी विकास द्वारा कृषि के क्षेत्र में शान्तिपूर्वक रूपान्तर किया जा सकता है अथवा क्रान्ति लाई जा सकती है।” हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषि उत्पादन में होने वाली वृद्धि से है जो कृषि में नई नीति के अपनाने के कारण हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कृषि के क्षेत्र में जो थोड़े समय में असाधारण विकास तथा वृद्धि हुई है, उसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। पंजाब में 1965-66 में 33 लाख टन कृषि उत्पादन किया गया जो कि 2019-20 में बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
पंजाब में सिंचाई के भिन्न-भिन्न साधन कौन-से हैं ? पंजाब में सिंचाई क्षेत्र के विस्तार के कारण बताएं।
उत्तर-
कृषि के विकास के लिए सिंचाई का महत्त्व बहुत अधिक है। पंजाब में वर्ष 1966 के पश्चात् सिंचाई सुविधाओं में काफ़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में सिंचाई के अधीन क्षेत्र बढ़कर 29% हो गया है जोकि कुल कृषि के अधीन क्षेत्र का 97.96% भाग है। पंजाब में लुधियाना, जालन्धर, पटियाला, भटिंडा, अमृतसर, फिरोजपुर तथा फरीदकोट जिलों में सिंचाई की अधिक सुविधाएं हैं। किन्तु रोपड़ तथा नवांशहर में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है।

बारहवीं योजना में सिंचाई सुविधाओं पर ₹ 493564 करोड़ व्यय किए गए। सिंचाई के साधन (Means of Irrigation)-पंजाब में सिंचाई के साधन निम्नलिखित हैं-
1. नहरें (Canals)-पंजाब में कुल सिंचाई क्षेत्र के 43% भाग में नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। यह सिंचाई का मुख्य साधन है। पंजाब की मुख्य नहरें

  • भाखड़ा-नंगल नहर
  • अपर बारी दोआब नहर
  • सरहिन्द नहर
  • बिस्त दोआब नहर
  • बीकानेर नहर
  • शाह नहर इत्यादि हैं।

इन नहरों के अतिरिक्त पंजाब में सतलुज यमुना लिंक, थीन डैम, कंडी नहर, शाह नहर, फीडर, मेलवाहा डैम तथा राष्ट्रीय परियोजना पर कार्य चल रहा है।

2. ट्यूबवैल (Tubewell)-पंजाब में 50% क्षेत्र पर ट्यूबवैलों द्वारा सिंचाई की जाती है। इस समय 2019-20 में लगभग 14.76 लाख ट्यूबवैल हैं जिनमें से 13.36 लाख ट्यूबवैल विद्युत् से तथा शेष डीज़ल से चलते हैं।

3. कुएँ (Wells)-पंजाब में पहले कुओं का महत्त्व अधिक था। परन्तु अब कुओं का स्थान ट्यूबवैलों ने ले लिया है किन्तु कुछ क्षेत्रों में आज भी कुओं द्वारा सिंचाई की जाती है। इसके अतिरिक्त तालाब इत्यादि साधनों द्वारा भी सिंचाई की जाती है। फरीदकोट जिले में सिंचाई का मुख्य साधन नहरें हैं। इसके अतिरिक्त फिरोज़पुर, अमृतसर तथा लुधियाना जिलों में भी नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। ट्यूबवैल लगभग सभी जिलों में सिंचाई के साधन हैं किन्तु संगरूर ज़िले में ट्यूबवैल सबसे अधिक हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

प्रश्न 2.
पंजाब में कृषि विकास की चर्चा करें।
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति निम्नलिखित तत्त्वों द्वारा स्पष्ट हो जाती है –
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि-पंजाब में कृषि उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। कुल अनाज का उत्पादन 1965-66 में 33 लाख टन था। 2019-20 में अनाज का उत्पादन बढ़कर 315 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अनाज के उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि को हरित क्रान्ति (Green Revolution) कहा जाता है।

2. उन्नत कृषि-पंजाब की कृषि बहुत उन्नत तथा अधिक प्रगतिशील है। पंजाब को प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भारत की औसत प्रति हेक्टेयर उत्पादकता से अधिक है। पंजाब में वर्ष 1965-66 में गेहूँ की उत्पादकता 1236 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की उत्पादकता 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादकता बढ़कर 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा चावल की 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

3. कृषि की उन्नत विधि-पंजाब में कृषि करने की उन्नत विधियों का प्रयोग किया गया है। पंजाब में 2019-20 में गेहूँ तथा चावल के अधीन 100% क्षेत्रफल नए बीजों के प्रयोग से बोआ गया है। मक्की अधीन 90% तथा बाजरे अधीन 60% क्षेत्रफल नए बीजों के प्रयोग द्वारा बोआ गया था।

4. व्यापारिक कृषि-पंजाब में कृषि जीवन निर्वाह के लिए नहीं की जाती बल्कि उत्पादन को मण्डियों में बेचकर अधिक लाभ प्राप्त करने का यत्न किया जाता है। इसलिए कृषि विकास के परिणामस्वरूप व्यापारिक कृषि का प्रचलन हो गया है।

प्रश्न 3.
पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य दोष बताएं।
अथवा
पंजाब में हरित क्रान्ति के दुष्प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर-
पंजाब में हरित क्रान्ति के केवल अच्छे प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि इसके कुछ दुष्प्रभाव भी पड़े हैं जोकि इस प्रकार हैं-

  1. असंतुलित विकास की समस्या–हरित क्रान्ति का मुख्य दोष यह है कि समूचे राज्य में एक समान संतुलित विकास नहीं हुआ। कुछ ज़िले उत्पादन क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं जबकि कुछ जिलों में कृषि का विकास कम हुआ है। जैसे कि फरीदकोट, भटिंडा, फिरोज़पुर में कृषि विकास अधिक हुआ है।
  2. बेरोज़गारी की समस्या-हरित क्रान्ति से बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हुई है। गांवों में भूमिहीन श्रमिकों में बेरोज़गारी बढ़ गई है इसलिए रोज़गार की तलाश में प्रतिदिन शहरों में आते हैं।
  3. अधिक व्यय की समस्या–हरित क्रान्ति के कारण कृषि में प्रयोग होने वाले साधनों की लागत बहुत अधिक हो गई है। छोटे किसान आधुनिक मशीनों, उर्वरकों तथा नए उन्नत बीजों का प्रयोग नहीं कर सकते।
  4. अमीर किसानों को लाभ-हरित क्रान्ति का लाभ बड़े अमीर किसानों को हुआ है। इससे अमीर किसान और अमीर हो गए हैं। निर्धन किसानों की हालत और बिगड़ गई है। इस प्रकार अमीर तथा गरीब किसानों में असमानता बढ़ गई है।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
वर्ष 1966 से पंजाब की कृषि के विकास की प्रकृति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
(Explain the main features of the nature of Agricultural development in Punjab Since 1966.)
उत्तर-
पंजाब में कृषि विकास की प्रकृति (Nature of Agricultural Development in Punjab)पंजाब का पुनर्गठन 1 नवम्बर, 1966 को भाषा के आधार पर किया गया। इसके पश्चात् पंजाब की कृषि में तकनीकी क्रान्ति का आरम्भ हुआ, जिसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। डॉ० आर० एस० जौहर तथा परमिन्द्र के अनुसार, “पंजाब में विशेषतया छठे दशक के मध्य से नई कृषि तकनीक के कारण तीव्रता से रूपांतर हुआ है।” (“The Punjab Agriculture underwent a rapid transformation particularly after the mid sixties in the wake of new farm Technology.” -Dr. R.S. Johar & Parminder Singh)

पंजाब में खनिज पदार्थ प्राप्त नहीं होते। कृषि ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। पंजाब की कृषि विकास की प्रकृति का अनुमान निम्नलिखित तत्त्वों से लगाया जा सकता है-
1. उन्नत कृषि (Progressive Agriculture)-पंजाब की कृषि देश के अन्य राज्यों की तुलना में उन्नत तथा प्रगतिशील है। पंजाब में पैदा होने वाली मुख्य फसलों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन भारत की उत्पादन शक्ति से बहुत अधिक है। वर्ष 2019-20 में पंजाब में गेहूँ तथा चावल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्रमानुसार 5188 किलोग्राम तथा 4132 किलोग्राम था।

2. आर्थिक विकास का आधार (Basis of Economic Development)-पंजाब में कृषि आर्थिक विकास का मुख्य आधार बन गई है। वर्ष 1980-81 में पंजाबी कुल आय 5,025 करोड़ में कृषि का योगदान ₹ 2,422 करोड़ था। 2019-20 में पंजाब की आय ₹ 644321 करोड़ हो गई है जिसमें कृषि का योगदान 68% है। इस प्रकार पंजाब के आर्थिक विकास में कृषि आर्थिक विकास का मुख्य साधन है।

3. कृषि का मशीनीकरण (Mechanised Agriculture)-पंजाब की कृषि में मशीनों का योगदान दिन प्रतिदिन बढ़ा है। पंजाब में ट्रैक्टर, हारवैस्टर, ट्यूबवैल आम नज़र आते हैं। राज्य में 85% बोए गए शुद्ध क्षेत्रफल पर एक से अधिक बार फसलें उगाई जाती हैं परिणामस्वरूप कृषि की उत्पादन शक्ति में वृद्धि हुई है।

4. कृषि साधनों का उत्तम प्रयोग (Proper Utilisation of Agricultural Resources)-पंजाब में कृषि के साधनों का उत्तम प्रयोग किया जाता है। कृषि के लिए उचित मिट्टी तथा जलवायु की आवश्यकता होती है। पंजाब में धरती समतल है। इसमें दोमट मिट्टी प्राप्त होती है जो कि फसलों की बोआई के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। पंजाब में जल के लिए तीन नदियां सतलुज, ब्यास तथा रावी बहती हैं। इसलिए गहन कृषि की जाती है। वर्ष में एक-से-अधिक फसलें प्राप्त की जाती हैं।

PSEB 11th Class Economics Solutions Chapter 27 1966 से पंजाब में कृषि का विकास

5. कृषि का अधिक उत्पादन (More Agricultural Production)-पंजाब में कृषि का उत्पादन बहुत अधिक होता है। यह उत्पादन न केवल पंजाब राज्य की आवश्यकताएं पूर्ण करता है बल्कि देश के लिए अन्न भण्डार का साधन है। 1966 के पश्चात् हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप पंजाब में उत्पादन शक्ति में बहुत वृद्धि हुई है। 1965-66 में चावल का उत्पादन 292 हज़ार टन किया गया जो 2019-20 में बढ़ कर 315 लाख टन हो गया है।

6. मुख्य फसलें (Main Crops)-पंजाब की कृषि मुख्यतः दो फसलों गेहूँ तथा चावल पर निर्भर है। पंजाब में बोए गए कुल क्षेत्र का 70% गेहूँ तथा चावल के लिए प्रयोग किया जाता है जबकि अन्य फसलों में वृद्धि सन्तोषजनक नहीं है।

7. व्यापारिक कृषि (Commercial Agriculture)-पंजाब की कृषि अब केवल जीवन निर्वाह कृषि नहीं है बल्कि कृषि उत्पादन आवश्यकता से अधिक प्राप्त किया जाता है जिसको बाज़ार में बेच कर अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए यत्न किए जाते हैं अर्थात् पंजाब की कृषि व्यापारिक कृषि हो गई है।

8. रोज़गार का साधन (Source of Employment)-पंजाब की कृषि में प्रत्यक्ष तौर पर 65.5% जनसंख्या निर्भर करती है जिसमें कुल कार्यशील जनसंख्या का 56% भाग कृषि में कार्य करता है। इस प्रकार कृषि तथा इससे सम्बन्धित उद्योग राज्य के लोगों को रोजगार की सुविधाएं प्रदान करते हैं।

प्रश्न 2.
पंजाब में हरित क्रान्ति के क्या कारण हैं ? इसकी सफलताओं अथवा प्रभावों की व्याख्या करें।
(What are the causes of Green Revolution in Punjab ? Discuss the achievements and effects of Green Revolution.)
अथवा
नए कृषि ढांचे से क्या अभिप्राय है ? इसके कारण तथा प्राप्तियों को स्पष्ट करें। (What is new Agricultural Strategy ? Explain its causes and achievements.)
उत्तर-
पंजाब का 1 नवम्बर, 1966 को पुनर्गठन किया गया है। इस समय में नए कृषि ढांचे (New Agicultural Strategy) को अपनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप पंजाब में कृषि का उत्पादन बहुत बढ़ गया तथा हरित क्रान्ति उत्पन्न हुई।

हरित क्रान्ति का अर्थ (Meaning of Green Revolution)—प्रो० एफ० आर० फ्रैक्ल के अनुसार, “हरित क्रान्ति एक सुन्दर नारा है जिसके द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि विज्ञान तथा तकनीकी विकास द्वारा कृषि के क्षेत्र में शान्तिपूर्वक रूपान्तर किया जा सकता है अथवा क्रान्ति लाई जा सकती है।” हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषि उत्पादन में होने वाली वृद्धि से है जो कृषि में नई नीति के अपनाने के कारण हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं कि कृषि के क्षेत्र में जो थोड़े समय में असाधारण विकास तथा वृद्धि हुई है, उसको हरित क्रान्ति कहा जाता है। पंजाब में 1965-66 में 33 लाख टन कृषि उत्पादन किया गया जो कि 2019-20 में बढ़ कर 315.35 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

हरित क्रान्ति के कारण (Causes of Green Revolution)-पंजाब में हरित क्रान्ति के मुख्य कारण इस प्रकार-
1. भूमि सुधार (Land Reform)-पंजाब में कृषि क्षेत्र में कई प्रकार के सुधार किए गए हैं। जैसे कि भूमि की चकबन्दी की गई है। छोटे-छोटे टुकड़ों को एक स्थान पर एकत्रित किया गया है। सिंचाई साधनों का विस्तार तथा मशीनों के प्रयोग के कारण हरित क्रान्ति के लिए भूमिका तैयार की गई है।

2. कृषि अधीन क्षेत्रों का विस्तार (Extent in area Under Cultivation)-पंजाब में कृषि अधीन क्षेत्र में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 38 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि अधीन थी जोकि 2019-20 में बढ़ कर 80 लाख हेक्टेयर की गई है।

3. कृषि का मशीनीकरण (Mechanisation of Agriculture)-कृषि में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है जैसे कि ट्रैक्टर, कंबाइन, हारवैस्टर, डीज़ल इंजन इत्यादि यन्त्रों का प्रयोग होने के कारण उत्पादन शक्ति में बहुत वृद्धि हुई है 1966-67 में पंजाब में 10,000 ट्रैक्टर थे जिनकी संख्या 2019-20 में बढ़कर 5.15 लाख हो गई है।

4. उन्नत बीज (High yielding varieties of seeds)-पंजाब में हरित क्रान्ति का एक और कारण उन्नत बीजों का अधिक प्रयोग किया जाना है। गेहूँ, चावल, बाजरा, मक्की तथा ज्वार की फसलों के लिए बीजों की उन्नत किस्में बनाई गई हैं। गेहूं तथा चावल के लिए 100%, मक्की के लिए 90% तथा बाजरे के लिए 60% अधिक पैदावार देने वाले बीजों का प्रयोग 1999-2000 में किया गया।

5. रासायनिक उर्वरक (Fertilizers)-पंजाब में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के कारण अनाज के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। हरित क्रान्ति आने का एक कारण उर्वरकों का अधिक प्रयोग करना है। 1966-67 में 51 हजार टन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया गया था। 2019-20 में 1750 हजार टन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया गया है।

6. सिंचाई (Irrigation)-पंजाब में सिंचाई की अधिक सहूलतों के कारण हरित क्रान्ति पर बहुत प्रभाव पड़ा है। पंजाब में सारा वर्ष .चलने वाले तीन दरिया सतलुज, ब्यास तथा रावी हैं जिनसे विद्युत् पैदा की जाती है तथा सिंचाई के लिए नहरें निकाली गई है। ट्यूबवैल, कुएं तथा तालाब की सिंचाई के साधन हैं। 1965-66 में 59% क्षेत्र पर सिंचाई की जाती थी। 2019-20 में 78.3 लाख हैक्टर क्षेत्र पर सिंचाई की जाती है।

7. साख सहूलतें (Credit Facilities) हरित क्रान्ति के लिए साख सहूलतों का योगदान बहुत अधिक है। 1967-68 में सहकारी समितियों द्वारा ₹75 करोड़ की साख सहूलतें प्रदान की गई थीं जो कि 2019-20 में बढ़ कर ₹ 6515 करोड़ हो गई हैं।

8. खोज (Research)-पंजाब में कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना में खोज का कार्य किया जाता है। कृषि यूनिवर्सिटी में नए बीज, भूमि की परख, उर्वरकों का प्रयोग, कीट नाशक दवाइयों के प्रयोग सम्बन्धी अल्प अवधि के कोर्स आरम्भ किए जाते हैं। इससे किसानों को फसलों की देख रेख करने सम्बन्धी जानकारी प्राप्त होती है। परिणामस्वरूप कृषि के उत्पादन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

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हरित क्रान्ति की प्राप्तियां (Achievements of Green Revolution)
अथवा
हरित क्रान्ति के प्रभाव (Effects of Green Revolution) –
हरित क्रान्ति की मुख्य प्राप्तियां इस प्रकार हैं-
1. उत्पादन में वृद्धि (Increase in Production)-हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप कृषि के उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। 1965-66 में 33 लाख टन अनाज पैदा किया गया था। हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप वर्ष 2019-20 में कृषि का उत्पादन 315.33 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

2. रोज़गार में वृद्धि (Increase in Employment) हरित क्रान्ति के कारण मशीनों का प्रयोग बढ़ गया है। परन्तु फिर भी वर्ष में कई फसलें पैदा होने लगी हैं इसलिए रोजगार में वृद्धि हुई है।

3. उद्योगों में वृद्धि (Increase in Industries) हरित क्रान्ति का प्रभाव उद्योगों के विकास पर अच्छा पड़ा है। पंजाब में कृषि यन्त्र हारवैस्टर, थ्रेशर इत्यादि की मांग बढ़ने के कारण बहुत से उद्योग स्थापित किए गए हैं।

4. उत्पादकता में वृद्धि (Increase in Productivity) हरित क्रान्ति के पश्चात् गेहूँ तथा चावल की उत्पादन शक्ति बहुत बढ़ गई है। यद्यपि गेहूँ, मक्की, ज्वार, कपास की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में काफ़ी वृद्धि हुई है जिसका मुख्य कारण अच्छे बीजों, रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग है।

5. ग्रामीण विकास (Rural Development)-हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप ग्रामीण लोगों की आय में वृद्धि हो गई है इसलिए ग्रामीण लोगों में उच्च जीवन स्तर व्यतीत करने की इच्छा पैदा हो गई है।

प्रश्न 3.
पंजाब की प्रमुख फसलों का वर्णन करें। पंजाब में पुनर्गठन के पश्चात् फसलों के ढांचे में कौन-से परिवर्तन हुए हैं ? .
उत्तर-
पंजाब में कई प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाता है। इन फसलों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है
A. खाद्य फसलें (Food Crops)-ये वह फसलें हैं जोकि भोजन के रूप में खाने के लिए प्रयोग की जाती हैं जैसे कि गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्की, दालें तथा चने इत्यादि।
B. व्यापारिक फसलें (Commercial Crops)-व्यापारिक फसलें वे हैं जिनका प्रयोग उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। जैसे कि गन्ना, कपास, तिलहन इत्यादि।

A. खाद्य फसलें (Food Crops)-पंजाब की खाद्य फसलों की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है –
1. गेहूँ (Wheat)-पंजाब में गेहूँ भोजन के लिए मुख्य फसल है। गेहूँ की बिजाई नवम्बर-दिसम्बर के महीने में की जाती है जोकि अप्रैल-मई के महीने में काटी जाती है। पंजाब के सब ज़िलों में गेहूँ की बिजाई की जाती है परन्तु संगरूर, फिरोज़पुर तथा लुधियाना जिले में अन्य जिलों से गेहूँ अधिक होती है। 2019-20 में गेहूँ की उत्पादन शक्ति पंजाब में 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। जबकि भारत में गेहूँ की औसत उत्पादकता 3600 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। स्पष्ट है कि पंजाब में गेहूँ का उत्पादन 17613 हज़ार मीट्रिक टन है जो अन्य राज्यों से अधिक है।

2. चावल (Rice)-पंजाब में चावल की खाद्य फसलों में से प्रमुख फसल है। इसकी बिजाई मई-जून में की जाती है तथा यह अक्तूबर-नवम्बर तक तैयार हो जाती है। चावल का उत्पादन पंजाब के सब जिलों में होता है परन्तु सबसे अधिक उत्पादन अमृतसर, पटियाला, लुधियाना तथा संगरूर जिलों में होता है। 2019-20 में पंजाब में चावल की प्रति हेक्टेयर उपज 4132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जबकि समूचे भारत में औसत उत्पादकता 2708 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। पंजाब में चावल का उत्पादन 13311 हज़ार मीट्रिक टन था।

3. जौ (Barley)-पंजाब में जौ रबी की फसल है। इसको पंजाब में सितम्बर-अक्तूबर के महीने में बोआ जाता है तथा यह अप्रैल में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन भटिंडा, होशियारपुर इत्यादि जिलों में होता है। 1965-66 में जौ की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1030 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर था। 2019-20 में इसकी उत्पादन शक्ति बढ़कर 3017 किलोग्राम हो गई है। जौ का उत्पादन 117 हज़ार मीट्रिक टन हुआ था।

4. मक्की (Maize)-पंजाब में मक्की खरीफ की फसल है। मक्की जून-जुलाई के महीने में बोई जाती है तथा मक्की की फसल सितम्बर, अक्तूबर तक तैयार हो जाती है। पंजाब में अधिकतर मक्की लुधियाना, जालन्धर, होशियारपुर ज़िलों में पैदा होती है। 1970-71 में प्रति हेक्टेयर उत्पादन शक्ति 1555 किलोग्राम थी। 2019-20 में इसकी उत्पादन शक्ति बढ़कर 3515 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। मक्की का उत्पादन 396 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

5. ज्वार तथा बाजरा (Jowar and Bazra)-ज्वार तथा बाजरा खरीफ की फसलें हैं। ज्वार मुख्यतः रूपनगर तथा मुक्तसर जिलों में पैदा की जाती है। बाजरे की फसल, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट तथा संगरूर में होती है। बाजरे की उत्पादन शक्ति 1965-66 में 548 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जोकि 2019-20 में बढ़कर 987 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। ज्वार का उत्पादन 800 मीट्रिक टन तथा बाजरे का उत्पादन 800 मीट्रिक टन हुआ था।

6. चने (Gram)-यह रबी की फसल है जोकि अक्तूबर-नवम्बर में बोई जाती है। यह फसल अप्रैल-मई तक तैयार हो जाती है। यह फसल भटिंडा तथा मुक्तसर जिलों में होती है क्योंकि रेतीली भूमि इसके लिए अधिक उपयुक्त होती है। इसकी उत्पादकता 1245 kg प्रति हैक्टेयर और उत्पादन 3 हज़ार मीट्रिक टन था।

7. दालें (Pulses)-पंजाब में लोगों के भोजन का मुख्य अंग दालें हैं। पंजाब में मांह, मोठ, मूंगी, मसर इत्यादि दालों का प्रयोग किया जाता है। दालों की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। 2019-20 में दालों की पैदावार 25 हज़ार मीट्रिक टन थी।

B. व्यापारिक फसलें अथवा नकदी फसलें (Commercial Crops or Cash Crops)-पंजाब में व्यापारिक फसलें मुख्यतः निम्नलिखित हैं
1. गन्ना (Sugarcane)-पंजाब में गन्ना व्यापारिक खाद्य फसल है। इसका प्रयोग गुड़, शक्कर तथा चीनी तैयार करने के लिए किया जाता है। इसका बिजाई मार्च-अप्रैल तथा कटाई दिसम्बर-मार्च में की जाती है। गन्ना मुख्यतः जालन्धर, गुरदासपुर तथा रूपनगर जिलों में बोआ जाता है। पंजाब में चीनी बनाने के उद्योग के लिए कच्चा माल पंजाब में ही तैयार किया जाता है। 2019-20 में गन्ने का उत्पादन 7744 लाख मीट्रिक टन हुआ था।

2. कपास (Cotton)-कपास खरीफ की फसल है। यह अप्रैल से जून तक बोई जाती है जोकि सितम्बर से दिसम्बर तक तैयार हो जाती है। पंजाब में भटिंडा, फरीदकोट, फिरोज़पुर में कपास की अमेरिकन किस्म बोई जाती है जबकि अन्य जिलों में देशी कपास बोई जाती है। 2019-20 में कपास का उत्पादन 1283 हज़ार गांठें हुआ।

3. तेलों के बीज (Oil Seeds)-पंजाब में तेलों के बीज मुख्य नकदी फसल है। इसमें सरसों, तारामीरा, अलसी, तिल इत्यादि का उत्पादन होता है। इनमें से कुछ फसलें रबी की हैं तथा कुछ खरीफ की हैं। भटिंडा, फिरोज़पुर तथा पटियाला में सरसों तथा तारामीरा, संगरूर में मुख्यतः तारामीरा, लुधियाना में मूंगफली का उत्पादन किया जाता है। 2019-20 में 59.6 हज़ार मीट्रिक टन तेलों के बीज का उत्पादन हुआ।

प्रश्न 4.
पंजाब में कृषि उपज बिक्री के दोष बताएं और इन दोषों को दूर करने के लिये सुझाव दें। (Discuss the defects of Agricultural Marketing on Punjab. Suggest measures to remove the defects.)
उत्तर-
पंजाब में कृषि उपज बिक्री के मुख्य दोष इस प्रकार हैं-
1. ग्रेडिंग का अभाव (Lack of Grading)-पंजाब में किसान अपनी फसल की ग्रेडिंग नहीं करते। जो फसल बाज़ार में बिक्री के लिए भेजी जाती है उसमें मिलावट होने के कारण उपज का ठीक मूल्य प्राप्त नहीं होता।

2. उपज के भण्डार का अभाव (Lack of Storage Facilities)- किसान को अपनी उपज कटाई के बाद शीघ्र बेचनी पड़ती है क्योंकि फसलों के संग्रह करने के लिये उचित भण्डार साधन नहीं होते। इसलिए घर पर फसल रखने से उसके नष्ट होने का डर रहता है।

3. संगठन का अभाव (Lack of Organisation)-पंजाब में किसानों का कोई संगठन नहीं है जो कि उपज का उचित मूल्य दिला सके। किसान अपनी-अपनी फसल मण्डियों में बेचते हैं जिस कारण उनको उपज की कम कीमत प्राप्त होती है।

4. मण्डियों में अधिक मध्यस्थ (Many Intermediaries in Mandies)-मण्डी में मध्यस्थों की अधिकता के कारण भी किसान को उपज का ठीक मूल्य प्राप्त नहीं होता। किसान और उपभोक्ता के बीच कच्चा आढ़तिया, पक्का आढ़तिया, दलाल आदि बहुत-से मध्यस्थ होते हैं। मध्यस्थों के कारण किसान को उपज की पूरी कीमत प्राप्त नहीं होती।

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5. मण्डियों में अनुचित ढंग (Malpractices in Mandies) मण्डियों में किसान को कम कीमत देने के लिये कई प्रकार के अनुचित ढंगों का प्रयोग किया जाता है। किसान की उपज को तुरन्त खरीदा नहीं जाता और किसान को कई दिन उपज की सम्भाल करनी पड़ती है। उसको उपज की उचित कीमत का ज्ञान भी नहीं दिया जाता।

6. मण्डियों के बारे में सूचना (Knowledge about Mandies) किसानों को बाज़ार की विभिन्न मण्डियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिये किसान अपनी उपज गांव के पास ही मण्डियों में कम कीमत पर बेच देता है।

7. वित्त का अभाव (Lack of Finance)-किसानों को फसल बीजने से लेकर, इस की कटाई होने तक बहुतसे वित्त की ज़रूरत होती है। पंजाब में बहुत-से किसान वित्त के लिये महाजनों तथा आढ़तियों पर निर्भर होते हैं। इसलिए किसान को अपनी उपज महाजनों तथा आढ़तियों को ही बेचनी पढ़ती है। इसलिए उपज की ठीक कीमत प्राप्त नहीं होती।

8. यातायात सुविधाओं का अभाव (Lack of Transport Facilities)—पंजाब में गांव में यातायात की असुविधाएं होने के कारण किसान को अपनी उपज गांव में या नज़दीक मण्डियों में ही बेचनी पड़ती है। इसलिये किसान को अपने उत्पादन को बहुत ही प्रतिकूल समय, प्रतिकूल दरों पर, प्रतिकूल बाज़ार में बेचना पड़ता है।

9. स्वेच्छा बिक्री का अभाव (Lack of Freedom of Sale)-पंजाब में किसान अपनी उपज स्वेच्छा से बिक्री नहीं कर सकता। उसको बैंक का कर्ज, साहूकार और आढ़तियों का कर्ज देना होता है। इसलिए फसल काटने के तुरन्त बाद उसको अपनी उपज बेचनी पड़ती है।

कृषि उपज की बिक्री के दोषों को दूर करने के लिए सुझाव (Suggestions to Remove the Defects of Agricultural Marketing) कृषि उपज की बिक्री में बहुत से दोष हैं। इन दोषों को दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये जाते हैं-
1. वित्त की सुविधा (Facilities of Finance)-पंजाब के किसानों को वित्त की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। भारत सरकार ने इस वित्त की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किसानों पर से 2019-20 में ₹ 2000 करोड़ का कर्ज़ माफ़ कर दिया है और बैंकों में किसानों को अधिक साख देने के लिये कहा है।

2. यातायात की सुविधा (Facilities of Transport)-पंजाब में किसान की उपज को बेचने के लिये सस्ती, कुशल तथा पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिएं। इस प्रकार किसान अपनी उपज को उचित बाजार, उचित समय तथा उचित कीमत पर बेच सकता है।

3. संग्रह की सुविधा (Facilities of Storage) संग्रह की सुविधा भी कृषि उपज की बिक्री के लिए बहुत ज़रूरी है। किसान के पास गांव में फसलों को संग्रह करने के लिये गड्ढ़े या कोठियां मिट्टी के बने होते हैं। इस कारण बहुत-सी फसल नष्ट हो जाती है। इसलिए संग्रह की सुविधा सरकार द्वारा प्रदान करनी चाहिए।

4. मध्यस्थों पर नियन्त्रण (Control over Middleman) कृषि उपज की उचित बिक्री के लिये मध्यस्थों पर नियन्त्रण आवश्यक है। मध्यस्थों पर नियन्त्रण करके किसान को उसकी उपज की ठीक कीमत दिलाई जा सकती है।

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5. उचित कीमत (Suitable Price)-किसान द्वारा उपज की कीमत दूसरे खरीदार लगाते हैं जबकि उत्पादक अपनी वस्तु की कीमत स्वेच्छा से निर्धारित करते हैं। इसलिए किसान को अपनी उपज की कीमत स्वेच्छा से निर्धारित करने का अधिकार होना चाहिए।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

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PSEB 6th Class Science Notes Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

→ पदार्थ को किसी भी ऐसी चीज़ के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसका द्रव्यमान होता है और जो स्थान घेरती है।

→ हमारे आस-पास मौजूद सभी वस्तुएँ पदार्थ है क्योंकि ये स्थान घेरती है और इनका निश्चित द्रव्यमान होता है।

→ प्यार या उदासी की भावनाएं, रेडियो और टेलीविजन द्वारा प्राप्त संकेत, ऊर्जा के विभिन्न रूप पदार्थ नहीं हैं।

→ कुछ पदार्थ एक प्रकार के अवयवों से बने होते हैं जबकि अन्य एक से अधिक अवयवों से बने होते हैं।

→ परमाणु सबसे छोटा भाग है जो सभी प्रकार के पदार्थों में पाया जाता है।

→ हम भिन्न भिन्न रूपों, आकारों, रंगों और उपयोगों वाले विभिन्न पदार्थों से घिरे हुए हैं।

→ वस्तुओं की विशाल विविधता के कारण इनका वर्गीकरण करना हमारे लिए लाभदायक सिद्ध होता है। हम इन्हें विभिन्न कारकों अर्थात आकार, प्रयुक्त सामग्री, उपयोग आदि के आधारों पर वर्गीकृत कर सकते हैं।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

→ एक ही प्रकार के अवयवों से बनी वस्तुओं की संरचना सरल होती है। कई प्रकार के अवयवों से बनी वस्तुओं की संरचना जटिल होती है।

→ गुणों और वांछित उपयोगों के आधार पर अवयवों का चुनाव करके वस्तुओं का निर्माण किया जाता है ।

→ कुछ वस्तुओं के गुण समान होते हैं और कुछ वस्तुओं के गुण असमान होते हैं।

→ कुछ पदार्थ पानी में घुलने पर पूरी तरह से गायब हो जाते हैं। ये घुलनशील अथवा विलेय पदार्थ कहलाते हैं।

→ जो पदार्थ पानी में नहीं घुलते हैं या बहुत देर तक हिलाने पर भी पानी में गायब नहीं होते हैं, अघुलनशील अथवा अविलेय पदार्थ कहलाते हैं।

→ कुछ पदार्थ चमकदार होते हैं। इन्हें चमकीले अथवा द्युतिमय पदार्थ कहा जाता है। वे पदार्थ जिनमें चमक नहीं होती वे चमक-रहित अथवा अद्युतिमय पदार्थ कहलाते हैं।

→ कुछ वस्तुएँ सख्त होती हैं। ये कठोर पदार्थ कहलाती हैं।

→ हम कुछ पदार्थों के आर-पार देख सकते हैं । इन्हें पारदर्शी पदार्थ कहा जाता है।

→ हम कुछ पदार्थों के पार नहीं देख सकते हैं। ये अपारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं।

→ हम कुछ पदार्थों में से सीमित सीमा तक ही देख सकते हैं। ये पारभासी पदार्थ कहलाते हैं।

→ वे द्रव जो पूर्ण रूप से आपस में मिल जाते हैं, मिश्रणीय द्रव कहलाते हैं।

→ वे द्रव जो आपस में मिश्रित नहीं होते अमिश्रणीय द्रव कहलाते हैं।

→ वे द्रव जो आपस में आंशिक रूप से मिश्रित होते हैं, आंशिक रूप से मिश्रणीय द्रव कहलाते हैं।

→ पदार्थ के प्रति इकाई आयतन के द्रव्यमान को घनत्व के रूप में जाना जाता है।

→ यदि किसी अघुलनशील अथवा अविलेय पदार्थ का घनत्व पानी से अधिक है तो वह डूब जाएगा।

→ यदि किसी अघुलनशील अथवा अविलेय पदार्थ का घनत्व पानी से कम है तो वह तैरने लगेगा।

→ अमिश्रणीय तरलों को मिलाने पर दो परतें बनती हैं । दोनो तरलों में से, अधिक घनत्व वाला तरल निचली परत बनाएगा और कम घनत्व वाला ऊपरी परत बनाएगा।

→ मिश्रणीय द्रव-वे द्रव जो पूर्ण रूप से मिश्रित हो जाते हैं, मिश्रणीय द्रव कहलाते हैं।

→ अमिश्रणीय द्रव-वे द्रव जो आपस में मिश्रित नहीं होते हैं, अमिश्रणीय द्रव कहलाते हैं।

→ घुलनशील अथवा विलेय-वह ठोस पदार्थ जो पानी या किसी अन्य तरल में घुलने पर पूरी तरह से गायब हो जाता है, घुलनशील पदार्थ कहलाता है।

→ अघुलनशील अथवा अविलेय-वह ठोस पदार्थ जो पानी या किसी अन्य तरल में घुलने पर गायब नहीं होता है, अघुलनशील पदार्थ कहलाता है।

PSEB 6th Class Science Notes Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

→ पारदर्शी-वे पदार्थ जिनके आर पार देखा जा सकता है, पारदर्शी कहलाते हैं।

→ अपारदर्शी-वे पदार्थ जिनके आर पार देखा नहीं जा सकता, अपारदर्शी कहलाते हैं।

→ पारभासी-वे पदार्थ जिनके आर पार आंशिक रूप से देखा जा सकता है लेकिन स्पष्ट रूप से देखा नहीं जा सकता, पारभासी कहलाते हैं।

→ चमक अथवा द्युति- किसी पदार्थ पर जो चमक हम देखते हैं उसे चमक अथवा द्युति कहते हैं।

→ परमाणु-पदार्थ के सबसे छोटे भाग को परमाणु कहते हैं।

→ रुक्ष-वे पदार्थ जिन की सतह को छूने पर हम खुरदरा महसूस करते हैं।

→ मुलायम-वे पदार्थ जिन की सतह को छूने पर हम फिसलन महसूस करते हैं।

→ कठोर- इसका अर्थ है कि पदार्थ को संपीडित नहीं किया जा सकता है ।

→ नर्म- इसका अर्थ है कि पदार्थ को संपीडित किया जा सकता है ।

→ घनत्व-किसी पदार्थ के प्रति इकाई आयतन के द्रव्यमान को घनत्व के रूप में जाना जाता है।